PSEB 8th Class Social Science Solutions Chapter 23 स्वतन्त्रता के पश्चात् का भारत

Punjab State Board PSEB 8th Class Social Science Book Solutions History Chapter 23 स्वतन्त्रता के पश्चात् का भारत Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 8 Social Science History Chapter 23 स्वतन्त्रता के पश्चात् का भारत

SST Guide for Class 8 PSEB स्वतन्त्रता के पश्चात् का भारत Textbook Questions and Answers

I. नीचे लिखे प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लिखें:

प्रश्न 1.
संविधान सभा की स्थापना कब हुई तथा इसके कितने सदस्य थे ?
उत्तर-
संविधान सभा की स्थापना 1946 ई० में हुई। इसके 389 सदस्य थे।

प्रश्न 2.
भारतीय संविधान कब पास तथा लागू हुआ ?
उत्तर-
भारतीय संविधान 26 नवम्बर, 1949 ई० को पारित हुआ, तथा 26 जनवरी, 1950 को लागू हुआ।

प्रश्न 3.
देशी रियासतों का एकीकरण करने का श्रेय किसके सिर है ?
उत्तर-
देशी रियासतों का एकीकरण करने का श्रेय सरदार वल्लभ भाई पटेल के सिर है।

प्रश्न 4.
हैदराबाद रियासत को भारत के साथ कैसे शामिल किया गया ?.
उत्तर-
हैदराबाद रियासत को पुलिस कार्रवाही द्वारा भारत के साथ शामिल किया गया। वहां 13 सितम्बर, 1948 को भारतीय पुलिस भेजी गई तथा 17 सितम्बर, 1948 को इस रियासत को भारत संघ में शामिल कर लिया गया।

प्रश्न 5.
जूनागढ़ रियासत को कैसे भारत के साथ शामिल किया गया ?
उत्तर-
जूनागढ़ रियासत का नवाब पाकिस्तान में शामिल होना चाहता था। परन्तु 20 फरवरी, 1948 ई० को वहां जनमत संग्रह हुआ जिसमें जनता ने भारत के साथ मिलने की इच्छा व्यक्त की। इसलिये जूनागढ़ रियासत को भारतीय संघ में शामिल कर लिया गया।

प्रश्न 6.
राज्यों का पुनर्गठन करने के लिए नियुक्त किये गये कमीशन के कितने सदस्य थे ?
उत्तर-
इस कमीशन के 3 सदस्य थे।

प्रश्न 7.
पंचशील के कोई दो सिद्धान्त लिखो।
उत्तर-
(1) शान्तिमय सह-अस्तित्व (2) एक-दूसरे पर आक्रमण न करना।

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प्रश्न 8.
गुट-निरपेक्ष आन्दोलन की पहली कान्फ्रेंस कब तथा कहां हुई ?
उत्तर-
आन्दोलन की पहली कान्फ्रेंस 1961 ई० में बेलग्रेड में हुई।

प्रश्न 9.
गुट-निरपेक्ष आन्दोलन पर नोट लिखो।
उत्तर-
दूसरे विश्व युद्ध के शीघ्र पश्चात् संसार दो विरोधी गुटों में बंट गया था। एक गुट का नेता अमेरिका था। इसे पश्चिमी ब्लॉक कहा जाता था। दूसरे गुट का नेता रूस था। इसे पूर्वी ब्लॉक कहा जाता था। इनके बीच भयंकर शीत युद्ध चलने लगा। नाटो तथा वारसा पैक्ट जैसी सैनिक संधियों तथा समझौतों ने वातावरण को और भी तनावपूर्ण बना दिया। भारत अपनी स्वतन्त्रता की रक्षा के लिए किसी भी गुट में शामिल नहीं होना चाहता था। इसलिए भारत ने दूसरे देशों के साथ मिलकर नान-अलाइंड आन्दोलन शुरू किया। इस आन्दोलन के पितामह पण्डित जवाहर लाल नेहरू, यूगोस्लाविया के राष्ट्रपति टीटो तथा मिस्र के राष्ट्रपति नासिर थे।
नान-अलाइंड आन्दोलन 1961 ई० में आरम्भ हुआ। यह पंचशील के सिद्धान्तों पर आधारित था। भारत की तरह इसके सभी सदस्य किसी भी शक्ति गुट में शामिल नहीं होना चाहते थे। इसका पहला सम्मेलन 1961 ई० में बेलग्रेड में हुआ। आरम्भ में 25 देश इसके सदस्य थे। परन्तु आज 100 से अधिक देश इसके सदस्य हैं।

प्रश्न 10.
विदेश नीति (भारत की) के बारे में आपका क्या भाव है ?
उत्तर-
किसी देश द्वारा संसार के अन्य देशों के साथ संबंधों के लिए अपनाई गई नीति को उस देश की विदेश नीति कहते हैं। भारत ने स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात् शान्तिपूर्ण सह-अस्तित्व के सिद्धान्त पर आधारित विदेश नीति अपनाई है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं –

  1. भारत विश्व के सभी देशों की प्रभुसत्ता तथा स्वतन्त्रता का सम्मान करता है।
  2. भारत इस बात में विश्वास रखता है कि सभी धर्मों, राष्ट्रों तथा जातियों के लोग बराबर हैं।
  3. भारत उन देशों का विरोधी है जिसकी सरकारें रंग, जाति या श्रेणी के आधार पर लोगों के साथ भेद-भाव करती हैं। उदाहरण के लिए भारत दक्षिण अफ्रीका की सरकार का अफ्रीका के मूल निवासियों तथा एशियाई लोगों के साथ भेद-भाव पूर्ण व्यवहार का विरोध करता रहा।
  4. भारत इस बात में भी विश्वास रखता है कि सभी अन्तर्राष्ट्रीय झगड़ों का समाधान शान्तिपूर्ण तरीकों से किया जाना चाहिए।

प्रश्न 11.
साम्प्रदायिकता (भारत में) पर नोट लिखें।
उत्तर-
भारत एक धर्म-निरपेक्ष देश है। यहां संसार के लगभग सभी धर्मों के लोग रहते हैं, जिनके अलग-अलग धार्मिक विश्वास हैं। कुछ लोगों में धार्मिक संकीर्णता के कारण देश में समय-समय पर साम्प्रदायिक दंगे-फसाद होते रहते हैं। इनमें से 2002 ई० में गुजरात में घटित घटना सबसे अधिक भयंकर थी। बहुत से लोगों का विचार है कि सरकार को अल्पसंख्यकों की ओर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। इसलिये भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने १ दिसम्बर, 2006 ई० को अपने भाषण में कहा था, “हम देश के विकास के फल का एक बड़ा भाग कम संख्या वाले लोगों को देने के लिये योजनाओं में परिवर्तन करने का प्रयास करेंगे।”

प्रश्न 12.
भारत तथा पाकिस्तान के सम्बन्धों का संक्षेप वर्णन करें।
उत्तर-
भारत संसार के सभी देशों विशेषकर अपने पड़ोसी देशों के साथ मित्रतापूर्ण सम्बन्ध स्थापित करने का इच्छुक है। पाकिस्तान भारत का एक महत्त्वपूर्ण पड़ोसी देश है। उसके साथ भारत के सम्बन्धों का वर्णन इस प्रकार है

भारत तथा पाकिस्तान-पाकिस्तान के साथ भारत आरम्भ से ही मित्रतापूर्ण सम्बन्ध स्थापित करने का प्रयत्न कर रहा है। देशी रियासत कश्मीर (जम्मू एवं कश्मीर) के भारत के साथ विलय को पाकिस्तान ने मान्यता नहीं दी थी। तभी से कश्मीर भारत तथा पाकिस्तान के बीच विवाद का कारण बना हुआ है। कश्मीर समस्या के कारण भारत ने पाकिस्तान के साथ तीन प्रमुख तथा अनेक छोटे-मोटे युद्ध लड़े हैं। इनमें 1999 ई० का कारगिल युद्ध भी शामिल है।

1971 ई० के भारत-पाकिस्तान युद्ध के पश्चात् भारत की प्रधानमन्त्री श्रीमती इन्दिरा गांधी तथा पाकिस्तान के प्रधानमन्त्री जुल्फीकार अली भुट्टो के बीच 1972 ई० में शिमला में समझौता हुआ। इस समझौते का उद्देश्य भारत और पाकिस्तान के बीच सभी विवादों का शान्तिपूर्वक समाधान करना था। इसी उद्देश्य से भारत के प्रधानमन्त्री अटल बिहारी वाजपेयी तथा पाकिस्तान प्रधानमन्त्री नवाज़ शरीफ के मध्य लाहौर में समझौता हुआ। कुछ साल पहले दोनों देशों के मध्य बस तथा रेल सेवाएं आरम्भ की गई हैं। इन सेवाओं द्वारा दोनों देशों के लोग एक-दूसरस् के निकट आये हैं। हाल ही में पाकिस्तान के प्रधानमन्त्री भारत आए और भारत के प्रधानमन्त्री पाकिस्तान गए।

हमें विश्वास है कि आने वाले समय में दोनों देशों के मध्य की समस्याओं का शान्तिपूर्वक समाधान कर लिया जायेगा।

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प्रश्न 13.
देशी रियासतों के एकीकरण सम्बन्धी वर्णन करें।
उत्तर-
स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात् भारत को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ा। इनमें से एक समस्या देशी रियासतों की थी। इनकी संख्या 562 थी और इन पर भारतीय राजाओं का शासन था। 1947 ई० के एक्ट के अनुसार इन रियासतों को यह अधिकार प्राप्त था कि वे अपनी स्वतन्त्र सत्ता सुरक्षित रख सकती हैं अथवा भारत या पाकिस्तान में से किसी भी देश में शामिल हो सकती हैं। इस कारण इन देशी रियासतों के राजा स्वतन्त्र रहना ही पसन्द करते थे। परन्तु स्वतन्त्र भारत के प्रथम गृह मन्त्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने बुद्धि-कौशल से काम लेते हुए सभी देशी रियासतों के राजाओं को भारतीय संघ में सम्मिलित होने के लिए सहमत कर लिया।

इनमें से छोटी-छोटी रियासतों को प्रान्तों में मिला दिया गया। कुछ अन्य रियासतें सांस्कृतिक रूप से एक-दूसरे के साथ मेल रखती थीं तथा उनकी सीमाएँ भी आपस में मिलती थीं। इन्हें इकट्ठा करके राज्य बना दिये गये। उदाहरण के लिए काठियावाड़ की रियासतों को सौराष्ट्र के साथ मिला दिया गया, जबकि पटियाला, नाभा, फरीदकोट, जीन्द तथा मलेर-कोटला रियासतों को इकट्ठा करके पेप्सू राज्य बना दिया गया। अब केवल तीन रियासतें ऐसी रह गईं जो भारत के साथ मिलने को तैयार नहीं थीं। ये थीं-हैदराबाद, जूनागढ़ तथा कश्मीर।

हैदराबाद-हैदराबाद रियासत के निज़ाम उस्मान अली खान ने भारतीय संघ में सम्मिलित होने से इन्कार कर दिया। अतः 13 सितम्बर, 1948 ई०,को हैदराबाद में भारतीय पुलिस भेजी गई। इस प्रकार 17 सितम्बर, 1948 ई० को हैदराबाद की रियासत को भारतीय संघ में सम्मिलित कर लिया गया।

जूनागढ़-जूनागढ़ रियासत का नवाब पाकिस्तान के साथ मिलना चाहता था। परन्तु 20 फरवरी, 1948 ई० को वहां जनमत संग्रह हुआ, जिसमें जनता ने भारत में मिलने की इच्छा व्यक्त की। अत: जूनागढ़ रियासत को भारत संघ में मिला लिया गया। · कश्मीर-कश्मीर का राजा भी स्वतन्त्र रहना चाहता था। परन्तु पाकिस्तान कश्मीर पर अधिकार करना चाहता था। अत: कश्मीर के शासक ने भारत से सहायता मांगी तथा अपने राज्य को भारत में मिलाने का प्रस्ताव रखा। भारत सरकार ने कश्मीर के शासक की प्रार्थना स्वीकार कर ली और अपनी सेनाएं कश्मीर भेज दीं। भारत तथा पकिस्तान के बीच युद्ध हुआ, परन्तु पाकिस्तान ने कश्मीर के बहुत से क्षेत्र पर अपना अधिकार कर लिया।

अन्य रियासतें-इन रियासतों के अतिरिक्त कुछ अन्य छोटे-छोटे राज्य भी थे जिन्हें साथ लगते राज्यों में मिला दिया गया। बड़ौदा को बम्बई (मुम्बई) प्रान्त में मिलाया गया। अनेक छोटे-छोटे राज्यों को इकट्ठा करके एकीकृत राज्य की स्थापना की गई। उदाहरण के लिए मार्च, 1948 ई० में भरतपुर, धौलपुर, अलर तथा करौली आदि रियासतों को इकट्ठा करके एक संघ बनाया गया। इसके पश्चात् राजस्थान संघ भी बनाया गया, जिसमें बूंदी, तलवाड़ा, प्रतापगढ़, शाहपुर, बांसवाड़ा, कोटा, किशनगढ़ आदि रियासतें शामिल की गईं।

प्रश्न 14.
आज़ादी के बाद भारत के आर्थिक तथा औद्योगिक विकास का वर्णन करें।
उत्तर-
देश के विभाजन ने भारत के लिए अनेक आर्थिक समस्याएं पैदा कर दीं। भारत का गेहूँ तथा चावल पैदा करने वाला बहुत बड़ा क्षेत्र पाकिस्तान के हिस्से में आ गया। बहुत बड़ा सिंचाई-योग्य भू-क्षेत्र भी पाकिस्तान में चला गया। अतः भारत में अनाज की कमी हो गई। इसी प्रकार पटसन तथा कपास उगाने वाला बहुत बड़ा क्षेत्र भी पाकिस्तान को मिल गया। इससे भारत में पटसन तथा कपड़ा उद्योग के लिए कच्चे माल की कमी हो गई। अतः स्वतन्त्रता के पश्चात् भारत सरकार ने देश की आर्थिक व्यवस्था को सुधारने के उपाय आरम्भ किये। इस उद्देश्य से 1950 ई० में भारत सरकार ने योजना आयोग स्थापित किया। इस प्रकार भारत के आर्थिक विकास की प्रक्रिया आरम्भ हुई जो आज भी जारी है। इसकी झलक कृषि तथा उद्योग के क्षेत्रों में हुए विकास में देखी जा सकती है।

कृषि-(1) भारत एक कृषि-प्रधान देश है। हमारी कृषि योग्य भूमि के 75% भाग पर खाद्यान्न की फसलें उगाई जाती हैं। इनमें से चावल, गेहूँ, मक्का, सरसों, मूंगफली, गन्ना आदि महत्त्वपूर्ण खाद्यान्न फसलें हैं। (2) भारत ने कृषि के विकास के लिए कई मुख्य नदियों पर बांध बनाए हैं। ये बांध शुष्क क्षेत्रों की कृषि-योग्य भूमि को पानी देते हैं तथा बाढ़ों को रोकते हैं। ये बांध बिजली पैदा करने में सहायक हैं। इन्हें नदी-घाटी परियोजना कहा जाता है। इन परियोजनाओं में नंगल परियोजना, दामोदर-घाटी परियोजना, हरिके परियोजना, तुंगभद्रा परियोजना तथा नागार्जुन सागर परियोजना प्रमुख हैं। (3) कृषि उत्पादन में वृद्धि के लिए सरकार द्वारा विशेष प्रयास किये गये हैं। कृषकों को खेती करने के नये-नये ढंग सिखाए गए हैं। सरकार किसानों को उत्तम बीज तथा खादें देती है। निर्धन किसानों को कृषि के सुधार के लिए बैंकों द्वारा ऋण दिया जाता है। इस प्रकार सरकार किसानों की दशा सुधारने का प्रयास कर रही है।

उद्योग-भारत में अंग्रेज़ी शासन काल में ही उद्योगों का विकास आरम्भ हो गया था। उस काल में कपड़ा, लोहा, चीनी, माचिस, शोरा तथा सीमेंट से सम्बन्धित उद्योगों की स्थापना हुई। परन्तु उस समय ये उद्योग अधिक उन्नति न कर सके, क्योंकि अंग्रेज़ भारत के औद्योगिक विकास में रुचि नहीं लेते थे। अतः स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात् भारत ने अपने औद्योगिक क्षेत्र का विस्तार करना आरम्भ किया। (1) इंजीनियरिंग के उपकरण बिजली का सामान, कम्प्यूटर तथा इससे सम्बन्धित सामान, दवाइयां बनाने तथा कृषि यन्त्र बनाने के नये कारखाने आरम्भ किये गये। (2) भारत में अनेक विदेशी कम्पनियों ने बड़ी-बड़ी फैक्टरियां स्थापित कर ली हैं। ये फैक्टरियां भारत के अनेक निपुण तथा अर्द्ध-निपुण कामगारों को रोज़गार दे रही हैं। (3) भारत सरकार ने वैज्ञानिक तथा औद्योगिक आविष्कारों एवं खोजों में विशेष रुचि ली है। वैज्ञानिक तथा औद्योगिक खोज कौंसिल ने विश्वविद्यालयों तथा अन्य उच्च शिक्षा केन्द्रों में वैज्ञानिक खोजों का समर्थन किया है।

प्रश्न 15.
भारत के अमेरिका के साथ सम्बन्धों का वर्णन करें।
उत्तर-
विश्व की महान् शक्तियों में से संयुक्त राज्य अमेरिका सर्वोच्च है। भारत के साथ इसके सम्बन्ध सामान्य एवं साधारण नहीं रहे हैं। इन सम्बन्धों में समय-समय पर बदलाव आता रहा। भारत की स्वतन्त्रता के पश्चात् कश्मीर तथा अन्य कई प्रश्नों पर इन दोनों देशों के बीच कटु सम्बन्धों का दौर आरम्भ हुआ। दोनों देशों के सम्बन्ध विकृत होने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं-

  • संयुक्त राज्य अमेरिका ने पाकिस्तान को आवश्यकता से अधिक सैनिक सहायता देनी आरम्भ कर दी। भारत ने इसका कड़ा विरोध किया, परन्तु अमेरिका ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।
  • अमेरिका द्वारा बनाये गये सैनिक गुटों का पाकिस्तान तो सदस्य बना, परन्तु भारत ने इन गुटों में सम्मिलित होने से इन्कार कर दिया।
  • 1971 ई० में भारत-पाकिस्तान युद्ध के परिणामस्वरूप बंगला देश अस्तित्व में आया। इस युद्ध अमेरिका ने पाकिस्तान के पक्ष में हस्तक्षेप करने का प्रयत्न किया। भारत ने इसका बहुत बुरा माना।
  • अमेरिका ने पाकिस्तान में सैनिक अड्डे स्थापित किये हैं। हिन्द महासागर में डीगो-गार्शिया (दियागो-गर्शिया) द्वीप पर अमेरिका ने सैनिक छावनियां बना रखी हैं। भारत अपनी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इन छावनियों का प्रबल विरोधी है।
  • भारत तथा अमेरिका में परमाणु शक्ति के सम्बन्ध में मौलिक मत-भेद हैं। भारत परमाणु शक्ति का विकास कर रहा है परन्तु अमेरिका इसका विरोध करता है। इसलिए अमेरिका ने भारत को परमाणु ईंधन देना बन्द कर दिया था। परंतु अब दोनों देशों के बीच एक नया परमाणु समझौता हुआ है।
  • भारत ने परमाणु-अप्रसार (परमाणु गैर-पर्सन) सन्धि पर हस्ताक्षर नहीं किये हैं क्योंकि यह सन्धि भेद-भावपूर्ण है। यह सन्धि उन देशों को परमाणु शक्ति बनने की मनाही करती है जिनके पास परमाणु-शक्ति नहीं है। इसके विपरीत परमाणु-शक्ति सम्पन्न देशों पर कोई प्रतिबन्ध नहीं है।

सच तो यह है कि ऊपर दिये कारणों से भारत तथा अमेरिका के आपसी सम्बन्धों में कटुता आई है। परन्तु फिर भी हाल ही में देवयानी मामले में भी दोनों देशों के सम्बन्धों में अधिक तनाव आया है। आर्थिक, तकनीकी, वैज्ञानिक तथा सांस्कृतिक क्षेत्रों में दोनों देशों ने एक-दूसरे को भारी सहयोग दिया है। हमें निकट भविष्य में और भी अच्छे सम्बन्धों की आशा है।

II. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें :

1. …………. को भारतीय संविधान तैयार करने वाली कमेटी का प्रधान बनाया गया।
2. डॉ० राजेन्द्र प्रसाद भारत के प्रथम …………. थे।
3. 1954 ई० में …………. ने पांडिचेरी, चन्द्रनगर तथा माही आदि क्षेत्र भारत को सौंप दिए।
उत्तर-

  1. डॉ० अम्बेदकर
  2. राष्ट्रपति
  3. फ्रांस।

III. प्रत्येक वाक्य के सामने ‘सही’ (✓) या ‘गलत’ (✗) का चिन्ह लगाएं

1. स्वतंत्रता के पश्चात् भारत के संविधान के निर्माण के लिए एक सात सदस्यों की कमेटी का गठन किया गया। – (✓)
2. 1948 ई० के अंत तक भारत ने फ्रांसीसी तथा पुर्तगाली बस्तियां जो भारत में थीं, पर अपना अधिकार स्थापित कर लिया।- (✗)
3. स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात् भारत ने अपने औद्योगिक विकास की ओर कोई ध्यान नहीं दिया। – (✗)

IV. सही जोड़े बनाएं :

  1. भारत के प्रथम गृहमंत्री –
  2. भारतीय संविधान कमेटी के सदस्य –
  3. कारगिल का युद्ध –

उत्तर-

  1. भारत के प्रथम गृहमंत्री – सात थे। ।
  2. भारतीय संविधान कमेटी के सदस्य – 1999 ई० में हुआ।
  3. कारगिल का युद्ध – सरदार वल्लभ भाई पटेल थे।

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PSEB 8th Class Social Science Guide स्वतन्त्रता के पश्चात् का भारत Important Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Multiple Choice Questions)

(क) सही विकल्प चुनिए :

प्रश्न 1.
गुट निरपेक्ष की पहली कांफ्रेंस (1961) कहां हुई ?
(i) बम्बई
(ii) गोआ
(iii) बेलग्रेड
(iv) मैड्रिड।
उत्तर-
बेलग्रेड

प्रश्न 2.
पंचशील समझौता चीन के किस प्रधानमंत्री के साथ हुआ ?
(i) किम जोंग
(ii) चिन पांग
(iii) माओ
(iv) चाउ-इन-लाई।
उत्तर-
चाउ-इन-लाई

प्रश्न 3.
स्वतंत्रता के समय भारत के किस क्षेत्र पर पुर्तगाली शासन करते थे ?
(i) गोआ
(ii) दमन
(iii) दिऊ
(iv) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
उपरोक्त सभी ।

अति छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
भारतीय संविधान का दस्तावेज तैयार करने वाली कमेटी के कितने सदस्य थे ? इस कमेटी का प्रधान कौन था ?
उत्तर-
भारतीय संविधान का दस्तावेज़ तैयार करने वाली कमेटी के सात सदस्य थे। इस कमेटी के प्रधान डॉ० अम्बेदकर थे।

प्रश्न 2.
भारत के पहले राष्ट्रपति कौन थे ?
उत्तर-
डॉ० राजेन्द्र प्रसाद।

प्रश्न 3.
भारत ने छोटे राज्यों को साथ लगते राज्यों में क्यों मिला दिया ?
उत्तर-
भारत सरकार ने अनुभव किया कि छोटे राज्यों का उचित विकास नहीं हो पायेगा। इसलिए उन्हें साथ लगते राज्यों में मिला दिया गया।

प्रश्न 4.
स्वतन्त्रता के समय भारत के कौन-कौन से प्रदेश पुर्तगालियों के अधीन थे ? इन्हें भारत संघ में कब सम्मिलित किया गया ?
उत्तर-
स्वतन्त्रता के समय गोआ, दमन तथा दिऊ के प्रदेश पुर्तगाल के अधीन थे। इन्हें 20 दिसम्बर, 1961 ई० को भारत संघ में सम्मिलित किया गया।

प्रश्न 5.
भारत में कितने राज्य तथा कितने केन्द्र शासित प्रदेश हैं ?
उत्तर-
भारत में 29 राज्य तथा 7 केन्द्र शासित प्रदेश हैं।

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प्रश्न 6.
राज्यों का पुनर्गठन कब किया गया तथा कितने राज्यों और कितने केन्द्र शासित प्रदेशों का निर्माण किया गया ?
उत्तर-
राज्यों का पुनर्गठन नवम्बर 1956 में किया गया। उस समय 14 राज्यों तथा केन्द्र शासित प्रदेशों का निर्माण किया गया।

प्रश्न 7.
भारत तथा पाकिस्तान के प्रथम गवर्नर-जनरल कौन-कौन थे ?
उत्तर-
क्रमशः लार्ड माऊंटबेटन तथा मुहम्मद अली जिन्नाह।

प्रश्न 8.
भारत विभाजन का बंगाल तथा पंजाब के लोगों पर क्या कुप्रभाव पड़ा ?
उत्तर-
भारत के विभाजन से बंगाल तथा पंजाब के लाखों लोग मारे गये तथा लाखों लोग बेघर हो गए। पूर्वी तथा पश्चिमी पंजाब में लगभग 80 लाख लोगों को अपनी भूमि, दुकानों तथा अन्य सम्पत्तियां छोड़नी पड़ी।

प्रश्न 9.
भारत की विदेश नीति का मुख्य आधार क्या है ?
उत्तर-
शान्तिपूर्ण सहयोग।

प्रश्न 10.
इंडोनेशिया में 1955 की एफ्रो-एशियाई कान्फ्रेंस कहां हुई ? इसमें भाग लेने वाले तीन एशियाई नेताओं के नाम बताओ।
उत्तर-
इंडोनेशिया में 1955 की एफ्रो-एशियाई कान्फ्रेंस बंदूग में हुई। इसमें भारत के प्रथम प्रधानमन्त्री पं० जवाहर लाल नेहरू, चीन के चाउ-एन-लाई तथा इंडोनेशिया के सुकार्नो ने भाग लिया।

प्रश्न 11.
नान-अलाइड आन्दोलन के पितामह कौन-कौन थे ?
उत्तर-
इस आन्दोलन के पितामह भारत के पं० जवाहर लाल नेहरू, यूगोस्लाविया के राष्ट्रपति टीटो तथा मिस्र के राष्ट्रपति नासिर थे।

प्रश्न 12.
नान-अलाइंड आन्दोलन कब शुरू किया गया? यह किन सिद्धान्तों पर आधारित था ?
उत्तर-
नान-अलाइंड आन्दोलन 1961 ई० में शुरू किया गया। यह पंचशील के सिद्धान्तों पर आधारित था।

प्रश्न 13.
सार्क की संक्षिप्त जानकारी दीजिए।
उत्तर-
सार्क की स्थापना 1985 ई० में हुई। इसका पूरा नाम है ‘प्रादेशिक (क्षेत्रीय) सहयोग के लिए दक्षिणएशियाई सभा।” इसका उद्देश्य दक्षिण-एशियाई देशों के बीच शान्ति तथा आर्थिक सहयोग उत्पन्न करना है।

प्रश्न 14.
भारत की प्रमुख सामाजिक तथा आर्थिक समस्याएं कौन-सी हैं ?
उत्तर-
साम्प्रदायिकता, जातिवाद, भाषावाद, गरीबी, बेरोजगारी, निरक्षरता, जनसंख्या वृद्धि आदि।

प्रश्न 15.
भाषावाद की समस्या क्या है ?
उत्तर-
हमारे देश में अलग-अलग भाषाएं बोलने वाले लोग रहते हैं। इस सम्बन्ध में समस्या यह है कि कुछ लोग अपनी भाषा को अन्य भाषाओं से अच्छा मानते हैं।

प्रश्न 16.
बढ़ती हुई जनसंख्या के कोई दो कुप्रभाव बताओ।
उत्तर-

  1. बढ़ती हुई जनसंख्या गरीबी तथा बेरोज़गारी का मूल कारण बनती है।
  2. इसके कारण सरकार की विकास योजनाएं असफल हो जाती हैं या फिर उनकी गति मंद पड़ जाती है।

प्रश्न 17.
भारत तथा पाकिस्तान के बीच झगड़े का मूल कारण कौन-सा प्रदेश है ?
उत्तर-
कश्मीर।

प्रश्न 18.
शिमला समझौता कब और किस-किस के मध्य हुआ ?
उत्तर-
शिमला समझौता 1972 ई० में भारत की प्रधानमन्त्री श्रीमती इंदिरा गांधी तथा पाकिस्तान के प्रधानमन्त्री जुल्फीकार अली भुट्टो के मध्य हुआ।

प्रश्न 19.
भारत तथा चीन के बीच कब तथा किस कारण युद्ध हुआ ?
उत्तर-
भारत तथा चीन के मध्य 1962 ई० में सीमान्त झगड़ों के कारण युद्ध हुआ।

प्रश्न 20.
लाहौर समझौता किस-किस के मध्य हुआ ? इसका क्या उद्देश्य था ?
उत्तर-
लाहौर समझौता भारत के प्रधानमत्री अटल बिहारी वाजपेयी तथा पाकिस्तान के प्रधानमन्त्री नवाज़ शरीफ़ के मध्य हुआ। इसका उद्देश्य भारत तथा पाकिस्तान के आपसी झगड़ों को शान्तिपूर्ण ढंग से सुलझाना था।

छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
भारतीय संविधान का निर्माण किस प्रकार हुआ ?
उत्तर-
स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात् भारत ने संविधान का निर्माण करने के लिए सात सदस्यों की एक समिति स्थापित की। इसे संविधान का प्रारूप तैयार करने का काम सौंपा गया। डॉ० अम्बेदकर को इस समिति का प्रधान बनाया गया। इस समिति ने 21 फ़रवरी, 1948 ई० को संविधान का प्रारूप तैयार करके सभा में प्रस्तुत किया। इस प्रारूप पर 4 नवंबर, 1948 ई० से तर्क-वितर्क आरम्भ हुआ। इसके लिए सभा को 11 बैठकें करनी पड़ी। इस तर्क-वितर्क काल में 2473 संशोधन प्रस्तुत किये गये जिनमें से कुछ एक स्वीकार कर लिए गए। 26 नवम्बर, 1949 ई० को संविधान पारित हो गया, जिसे 26 जनवरी, 1950 ई० को लागू किया गया।

प्रश्न 2.
भारत की विदेश नीति की मुख्य विशेषताएं बताओ।
उत्तर-
भारत ने स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात् शान्तिपूर्ण सह-अस्तित्व के सिद्धान्त पर आधारित विदेश नीति अपनाई है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं

  1. भारत विश्व के सभी देशों की प्रभुसत्ता तथा स्वतन्त्रता का सम्मान करता है।
  2. भारत इस बात में विश्वास रखता है कि सभी धर्मों, राष्ट्रों तथा जातियों के लोग बराबर हैं।
  3. भारत उन देशों का विरोधी है जिसकी सरकारें रंग, जाति या श्रेणी के आधार पर लोगों के साथ भेद-भाव करती हैं। उदाहरण के लिए भारत दक्षिण अफ्रीका की सरकार का अफ्रीका के मूल निवासियों तथा एशियाई लोगों के साथ भेद-भाव पूर्ण व्यवहार का विरोध करता रहा।
  4. भारत इस बात में भी विश्वास रखता है कि सभी अन्तर्राष्ट्रीय झगड़ों का समाधान शान्तिपूर्ण तरीकों से किया जाना चाहिए।

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प्रश्न 3.
पंचशील पर एक नोट लिखो।
उत्तर-
भारत ने 1954 ई० में चीन के प्रधानमन्त्री चाउ-इन-लाई के साथ एक समझौता किया। यह समझौता पंचशील के पांच सिद्धान्तों पर आधारित था। ये सिद्धान्त निम्नलिखित हैं

  1. शान्तिपूर्ण सह-अस्तित्व को स्वीकार करना।
  2. एक-दूसरे पर आक्रमण न करना।
  3. एक-दूसरे के मामलों में हस्तक्षेप न करना।
  4. आपसी हितों के लिए समानता तथा सहयोग के सिद्धान्त का पालना करना।
  5. एक-दूसरे की प्रभुसत्ता तथा प्रादेशिक अखण्डता का आदर करना।

प्रश्न 4.
भारत ने स्वतन्त्रता के पश्चात् फ्रांसीसियों तथा पुर्तगालियों के अधीन अपने क्षेत्रों को किस तरह मुक्त कराया ?
उत्तर-
भारत के गोआ, दमन तथा दिऊ क्षेत्रों पर पुर्तगालियों का शासन था। इसी प्रकार पांडिचेरी, चन्द्रनगर तथा माही के क्षेत्रों पर फ्रांस का शासन था। 1954 ई० में फ्रांस ने अपने भारतीय क्षेत्र भारत को सौंप दिये, परन्तु पुर्तगाल ने ऐसा नहीं किया। अत: भारत सरकार को पुर्तगालियों के विरुद्ध सैनिक कार्यवाही करनी पड़ी। परिणामस्वरूप 20 दिसम्बर, 1961 ई० को गोआ, दमन तथा दिऊ, दादरा तथा नगर हवेली की पुर्तगाली बस्तियों को भारत संघ में सम्मिलित कर लिया गया। 30 मई, 1987 ई० को गोआ को एक राज्य बना दिया गया जबकि दमन तथा दिऊ को केन्द्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया।

प्रश्न 5.
स्वतन्त्रता के पश्चात् राज्यों का पुनर्गठन क्यों और कैसे किया गया ?
उत्तर-
भारतीयों ने अंग्रेज़ी शासन काल में ही भाषा तथा संस्कृति के आधार पर राज्यों के पुनर्गठन की मांग करनी आरम्भ कर दी थी। भारत के स्वतन्त्र हो जाने के पश्चात् तेलगु भाषा भाषी रामुलू नाम के एक व्यक्ति ने भाषा के आधार पर राज्यों के पुनर्गठन की मांग पूरी कराने के लिये आमरण-व्रत रखा, जिसकी भूख के कारण मृत्यु हो गई। अतः संविधान में संशोधन करके तेलगु भाषा बोलने वाले क्षेत्र को मद्रास से अलग करके उसका नाम आन्ध्र प्रदेश रख दिया गया। शेष राज्यों का पुनर्गठन करने के लिए एक कमीशन नियुक्त किया गया, जिसके तीन सदस्य थे। कमीशन की सिफ़ारिशों के आधार पर नवम्बर, 1956 ई० में राज्यों का पुनर्गठन करके 6 केन्द्र शासित प्रदेश तथा 14 राज्य बनाये गये।

प्रश्न 6.
नान-अलाइंड (गुट-निरपेक्ष) आन्दोलन पर एक टिप्पणी लिखो।
उत्तर-
दूसरे विश्व युद्ध के शीघ्र पश्चात् संसार दो विरोधी गुटों में बंट गया था। एक गुट का नेता अमेरिका था। इसे पश्चिमी ब्लॉक कहा जाता था। दूसरे गुट का नेता रूस था। इसे पूर्वी ब्लॉक कहा जाता था। इनके बीच भयंकर शीत युद्ध चलने लगा। नाटो तथा वारसा पैक्ट जैसी सैनिक संधियों तथा समझौतों ने वातावरण को और भी तनावपूर्ण बना दिया। भारत अपनी स्वतन्त्रता की रक्षा के लिए किसी भी गुट में शामिल नहीं होना चाहता था। इसलिए भारत ने दूसरे देशों के साथ मिलकर नान-अलाइंड आन्दोलन शुरू किया। इस आन्दोलन के पितामह पण्डित जवाहर लाल नेहरू, यूगोस्लाविया के राष्ट्रपति टीटो तथा मिस्र के राष्ट्रपति नासिर थे।

नान-अलाइंड आन्दोलन 1961 ई० में आरम्भ हुआ। यह पंचशील के सिद्धान्तों पर आधारित था। भारत की तरह इसके सभी सदस्य किसी भी शक्ति गुट में शामिल नहीं होना चाहते थे। इसका पहला सम्मेलन 1961 ई० में बेलग्रेड में हुआ। आरम्भ में 25 देश इसके सदस्य थे। परन्तु आज 100 से अधिक देश इसके सदस्य हैं।

प्रश्न 7.
यू० एन० ओ० में भारत की भूमिका का वर्णन कीजिए।
उत्तर-

  • भारत यू० एन० ओ० का एक सक्रिय सदस्य है। भारत सरकार ने यू० एन० ओ० के कोरिया तथा अन्य कई देशों में शान्ति स्थापित करने वाले मिशनों में अपनी सेनाएं भेजी।
  • भारत ने यू० एन० ओ० की बहुत सी विशेष संस्थाओं तथा एजेंसियों में भी अपना योगदान दिया है। उदाहरण के लिए 1963 ई० में विजय लक्ष्मी पंडित यू० एन० ओ० की जनरल एसेंबली की सदस्य थीं। शशी थारूर कम्युनिकेशन तथा पब्लिक इन्फार्मेशन के अंडर सैक्रटरी रहे। उन्होंने 2001 में पब्लिक इन्फार्मेशन विभाग का नेतृत्व किया। भारत सुरक्षा कौंसल का भी सदस्य है। भारत ने भी यू० एन० ओ० से बहुत सहायता प्राप्त की है।

प्रश्न 8.
भारत में साम्प्रदायिकता की समस्या बारे लिखो।
उत्तर-
भारत एक धर्म निरपेक्ष देश है। यहां संसार के लगभग सभी धर्मों के लोग रहते हैं, जिनके अलग-अलग धार्मिक विश्वास हैं। कुछ लोगों में धार्मिक संकीर्णता के कारण देश में समय-समय पर साम्प्रदायिक दंगे-फसाद होते रहते हैं। इनमें से 2002 ई० में गुजरात में घटित घटना सबसे अधिक भयंकर थी। बहुत से लोगों का विचार है कि सरकार को अल्पसंख्यकों की ओर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। इसलिये भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 9 दिसम्बर, 2006 ई० को अपने भाषण में कहा था, “हम देश के विकास के फल का एक बड़ा भाग कम संख्या वाले लोगों को देने के लिये योजनाओं में परिवर्तन करने का प्रयास करेंगे।”

प्रश्न 9.
भारत में जातिवाद तथा गरीबी की समस्या पर नोट लिखो।
उत्तर-
जातिवाद की समस्या-जातिवाद की समस्या हमारी राष्ट्रीय एकता के मार्ग में बाधा बनी हुई है। कुछ लोग सदैव अन्य जातियों के लोगों को घृणा की दृष्टि से देखते हैं। यहां तक कि राजनीतिज्ञ तथा राजनीतिक दल जनता का समर्थन प्राप्त करने के लिये जाति का सहारा लेते हैं। हमें चाहिए कि हम लोगों के साथ समान व्यवहार करें। संविधान की 17वीं धारा के अन्तर्गत किसी भी रूप में छूत-छात करने की मनाही की गई है। – ग़रीबी की समस्या-गरीबी की समस्या भारत की उन्नति के मार्ग में एक बहुत बड़ी बाधा है। देश में बहुत से लोग इतने गरीब हैं कि उन्हें एक दिन का भरपेट भोजन भी नहीं मिल पाता। गरीबी के मुख्य कारण बढ़ती हुई जनसंख्या, कम कृषि उत्पादन तथा बेरोज़गारी है। स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात् से सरकार गरीबी समाप्त करने के अनेक प्रयास कर रही है।

प्रश्न 10.
भारत में बेरोज़गारी की समस्या का संक्षिप्त वर्णन करें।
उत्तर-
भारत में बेरोज़गारी की समस्या गम्भीर होती जा रही है, क्योंकि देश में बेरोज़गारों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ रही है। अधिकतर बेरोज़गारी शिक्षित लोगों में पाई जाती है। इस समस्या के समाधान के लिये सरकार की ओर से कई प्रयास किये जा रहे हैं। सेवानिवृत्त सैनिकों, शिक्षित बेरोजगारों आदि को सरकार ऋण देती है, ताकि वे अपना रोज़गार खोल सकें। नौकरी में सेवानिवृत्त होने की आयु सीमा को कम किया जा रहा है, ताकि अधिक-से-अधिक लोगों को रोजगार मिल सके। गांवों में भैंसे, मुर्गियां, सूअर, शहद की मक्खियां आदि पालने के सहायक व्यवसायों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिए प्रशिक्षण तथा ऋण की सुविधायें दी जा रही हैं।

प्रश्न 11.
भारत में महंगाई की समस्या पर नोट लिखो।
उत्तर-
आज महंगाई एक विश्वव्यापी समस्या है। परन्तु भारत में इसने एक विकराल रूप धारण कर लिया है। आज प्रत्येक वस्तु बहुत महंगी बिक रही है। वस्तुओं के मूल्य प्रतिदिन बढ़ रहे हैं। परिणामस्वरूप हमारे देश में अधिकतर लोग जीवन की मूल आवश्यकताओं को पूरा करने में भी असमर्थ हैं । इसलिये महंगाई पर नियन्त्रण करने के लिये सरकार तथा लोगों को मिलकर ठोस कदम उठाने चाहिएं। सरकार को चाहिये कि वह देश में ऐसी योजनाएं लागू करे जिससे आम लोगों को महंगाई से राहत मिले।

PSEB 8th Class Social Science Solutions Chapter 23 स्वतन्त्रता के पश्चात् का भारत

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत में निरक्षरता तथा बढ़ती हुई जनसंख्या की समस्याओं का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।
उत्तर-
1. निरक्षरता- भारत के लगभग 23 करोड़ से भी अधिक लोग निरक्षर हैं। प्रति 100 महिलाओं में से 60 महिलाएं निरक्षर हैं। निरक्षरता बेरोज़गारी को जन्म देती है जोकि निर्धनता का कारण बनती है। निरक्षर व्यक्ति भारत तथा अन्य देशों में विकास तथा उन्नति के अवसरों से अनभिज्ञ रहता है। इसके अतिरिक्त लोकतन्त्र प्रणाली तभी सफल होगी यदि नागरिक पढ़े-लिखे होंगे। निरक्षर नागरिक अपने अधिकारों तथा कर्त्तव्यों के प्रति भी जागरूक नहीं हो सकता।

सरकारी प्रयास- भारत सरकार देश से निरक्षरता दूर करने के लिए कई पग उठा रही है।

  • हमारे संविधान में 14 साल तक की आयु के बच्चों को निःशुल्क तथा अनिवार्य शिक्षा देने की व्यवस्था है।
  • भारत सरकार देश के निर्धन तथा कुशल छात्रों को छात्रवृत्ति देती है।
  • भारत सरकार प्रौढ़ शिक्षा कार्यक्रम भी आयोजित करती है। 2 अक्तूबर, 1978 ई० को राष्ट्रीय प्रौढ़ शिक्षा कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया था। 1988 ई० में राष्ट्रीय साक्षरता मिशन आरम्भ किया गया था। इसके अन्तर्गत देश के अनेक क्षेत्रों में प्रौढ़ शिक्षा केन्द्र स्थापित किये गये।
  • निरक्षर प्रौढ़ों के हित के लिए ऑल इंडिया रेडियो तथा दूरदर्शन द्वारा अनेक शिक्षा-सम्बन्धी कार्यक्रम प्रसारित किये जाते हैं। इन सब का उद्देश्य प्रत्येक व्यक्ति को साक्षर तथा शिक्षित बनाना है।

2. बढ़ती हुई जनसंख्या-आज भारत को बढ़ती हुई जनसंख्या की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। भारत की जनसंख्या इतनी तीव्र गति से बढ़ रही है कि सरकार के लिए इस बढ़ोत्तरी को रोक पाना कठिन हो रहा है। 2001 ई० के आंकड़ों के अनुसार भारत की जनसंख्या 102.7 करोड़ थी। हमारी जनसंख्या में प्रति वर्ष 1 करोड़ 60 लाख से भी अधिक लोगों की वृद्धि हो रही है।
कारण-सरकारी रिपोर्टों के अनुसार जनसंख्या वृद्धि के कई कारण हैं-

  • चिकित्सा की सुविधाएँ बढ़ जाने से मृत्यु-दर कम हो गयी है। आज से 25 साल पूर्व वार्षिक मृत्यु-दर 33 प्रति हज़ार थी। परन्तु अब यह कम हो कर 14 प्रति हज़ार रह गयी है। पहले प्लेग, हैजा तथा संक्रामक रोगों को रोकने के चिकित्सा सम्बन्धी साधन बहुत कम होते थे जिस कारण इन रोगों से अनेकों मौतें हो जाती थीं। परन्तु अब इन रोगों को फैलने से रोका जा सकता है।
  • कम आयु में विवाह करना बढ़ती हुई आबादी का एक अन्य कारण है। अनेक भारतीय परिवारों के, विशेषतया ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत से बच्चे होते हैं।
  • अज्ञानता तथा धार्मिक कारणों से बहुत से लोग परिवार नियोजन को नहीं अपनाते।
  • अनेक निर्धन माता-पिता सोचते हैं कि बच्चे खेतों या कारखानों में काम करके परिवार की आय में वृद्धि कर सकते हैं। अत: ऐसे माता-पिता अधिक बच्चे पैदा करने के इच्छुक होते हैं।

हानियां तथा समाधान-जनसंख्या वृद्धि निर्धनता, बेरोज़गारी सहित अन्य अनेक समस्याओं का मूल कारण बनती है। सरकार की सभी विकास-योजनाएं जनसंख्या वृद्धि के कारण निष्फल हो जाती हैं।
जनसंख्या वृद्धि से पैदा होने वाली समस्याओं का समाधान सरकारी स्तर पर किया जा रहा है। डॉक्टरों के नेतृत्व में लोगों को जनसंख्या वृद्धि की हानियों से अवगत कराया जा रहा है तथा छोटे परिवार के पक्ष में प्रचार किया जा रहा है।

प्रश्न 2.
भारत के पाकिस्तान तथा चीन के साथ सम्बन्धों का वर्णन करो।
उत्तर-
भारत संसार के सभी देशों विशेषकर अपने पड़ोसी देशों के साथ मित्रतापूर्ण सम्बन्ध स्थापित करने का इच्छुक है। पाकिस्तान तथा चीन भारत के दो महत्त्वपूर्ण पड़ोसी देश हैं। इनके साथ भारत के सम्बन्धों का वर्णन इस प्रकार है
भारत तथा पाकिस्तान-पाकिस्तान के साथ भारत आरम्भ से ही मित्रतापूर्ण सम्बन्ध स्थापित करने का प्रयत्न कर रहा है। देशी रियासत कश्मीर (जम्मू एवं कश्मीर) के भारत के साथ विलय को पाकिस्तान ने मान्यता नहीं दी थी। तभी से कश्मीर भारत तथा पाकिस्तान के बीच विवाद का कारण बना हुआ है। कश्मीर समस्या के कारण भारत ने पाकिस्तान के साथ तीन प्रमुख तथा अनेक छोटे-मोटे युद्ध लड़े हैं। इनमें 1999 ई० का कारगिल युद्ध भी शामिल है।

1971 ई० के भारत-पाकिस्तान युद्ध के पश्चात् भारत की प्रधानमन्त्री श्रीमती इन्दिरा गांधी तथा पाकिस्तान के प्रधानमन्त्री जुल्फीकार अली भुट्टो के बीच 1972 ई० में शिमला में समझौता हुआ। इस समझौते का उद्देश्य भारत और पाकिस्तान के बीच सभी विवादों का शान्तिपूर्वक समाधान करना था। इसी उद्देश्य से भारत के तत्कालीन प्रधानमन्त्री अटल बिहारी वाजपेयी तथा पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमन्त्री नवाज़ शरीफ के मध्य लाहौर में समझौता हुआ। अभी कुछ साल पहले ही दोनों देशों के मध्य बस तथा रेल सेवाएं आरम्भ की गई हैं। इन सेवाओं द्वारा दोनों देशों के लोग एक-दूसरे के निकट आये हैं। अब तीर्थ यात्री दोनों देशों में स्थित धार्मिक स्थानों की यात्रा कर सकते हैं। भारतीय तथा पाकिस्तानी समाज-सेवक तथा लेखक एक-दूसरे देश में आ-जा सकते हैं। अत: दोनों देशों के मध्य आरम्भ की गई बस तथा रेल सेवाएं दोनों देशों के बीच मैत्रीपूर्ण सम्बन्धों को मज़बूती प्रदान कर सकती हैं।

हमें विश्वास है कि आने वाले समय में दोनों देशों के मध्य की समस्याओं का शान्तिपूर्वक समाधान कर लिया जायेगा।

भारत तथा चीन-भारत और चीन के बीच प्राचीन काल से ही मित्रतापूर्ण सम्बन्ध बने हुए हैं। व्यापार तथा बौद्धधर्म के कारण ये दोनों देश आपस में जुड़े हैं। 1949 ई० में, जब चीन में साम्यवादी क्रान्ति आई, तब नई सरकार को मान्यता देने वाले देशों में से भारत पहला देश था। भारत ने यू० एन० ओ० के सदस्य के रूप में चीन का समर्थन किया। 1954 में भारत ने चीन के साथ पंचशील के सिद्धान्तों पर आधारित एक समझौता किया परन्तु 1962 ई० में सीमा-विवाद के कारण भारत तथा चीन के बीच एक युद्ध हुआ था। इस युद्ध के पश्चात् कई वर्षों तक दोनों देशों के सम्बन्ध कटुतापूर्ण बने रहे। इसके बाद 1980 ई० में भारत तथा चीन के सम्बन्धों में सुधार आया। भारत तथा चीन के प्रधानमन्त्रियों ने निरन्तर बैठकें करके अनेक छोटी-बड़ी समस्याओं पर विचार-विमर्श किया। आज दोनों देश अपने सीमा विवादों को सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं।

PSEB 8th Class Social Science Solutions Chapter 23 स्वतन्त्रता के पश्चात् का भारत

स्वतन्त्रता के पश्चात् का भारत PSEB 8th Class Social Science Notes

  • संविधान का निर्माण – भारतीय संविधान सभा ने जुलाई 1946 ई० में नया संविधान बनाना आरम्भ किया जो कि 26 नवम्बर, 1949 ई० को पूरा हुआ।
  • देशी-रियासतों का एकीकरण – भारत 15 अगस्त, 1947 ई० को आज़ाद हुआ था परन्तु देशी रियासतों का एकीकरण भारत के लिए बहुत बड़ी समस्या थी। इस समस्या का समाधान सरदार पटेल ने बड़ी सूझबूझ से किया।
  • राज्यों का पुनर्गठन – 1956 ई० में भाषा के आधार पर भारत के राज्यों का पुनर्गठन किया गया।
  • कृषि तथा उद्योगों में विकास – स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात् भारत ने कृषि तथा उद्योगों में बहुत अधिक विकास किया है।
  • भारत की विदेश नीति के आधार – भारत की विदेश नीति का मुख्य आधार गुट-निरपेक्षता है। इसका अर्थ है कि भारत विश्व के सैनिक गुटों से दूर रहता है। हमारी विदेश नीति के अन्य आधार हैं संयुक्त राष्ट्र से सहयोग तथा पड़ोसी राष्ट्रों से मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध स्थापित करना।
  • गुट-निरपेक्ष (नान- अलाइंड) आन्दोलन – गुट-निरपेक्ष आन्दोलन के आरम्भिक सदस्य भारत, यूगोस्लाविया तथा मिस्र थे। भारत के प्रधानमन्त्री पं० जवाहर लाल नेहरू, यूगोस्लाविया के राष्ट्रपति टीटो तथा मिस्र के राष्ट्रपति नासिर ने गुट-निरपेक्षता की नीति का समर्थन किया। परन्तु आज इस नीति को अपनाने वाले देशों की संख्या बहुत अधिक हो गई है और इस नीति ने एक शक्तिशाली आन्दोलन का रूप धारण कर लिया है। इसी कारण गुट-निरपेक्ष देशों के समूह को ‘तृतीय विश्व’ या ‘तीसरी दुनिया’ कहकर पुकारा जाता है।
  • भारत तथा उसके पड़ोसी देश – हमारे मुख्य पड़ोसी देश पाकिस्तान, चीन, बांग्ला देश तथा श्रीलंका हैं। हमारे अन्य पड़ोसी भूटान, नेपाल तथा बर्मा (म्यनमार) हैं। भारत इनके साथ अच्छे सम्बन्ध स्थापित करना चाहता है, परन्तु इनके साथ हमारे सम्बन्धों के कुछ नकारात्मक पहलू भी हैं।
  • भारत तथा पाकिस्तान – भारत तथा पाकिस्तान के बीच आपसी सम्बन्ध आरम्भ से ही तनावपूर्ण रहे हैं। परन्तु भारत अपने पड़ोसी देशों से मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध चाहता है ताकि भारतीय उपमहाद्वीप में शान्ति बनी रहे। पाकिस्तान के साथ मधुर सम्बन्ध बनाने के लिए भारत ने समय समय पर अनेक प्रयास किए हैं।
  • पंचशील -1954 ई० में पण्डित जवाहर लाल नेहरू ने विश्व-शान्ति के लिए पाँच सिद्धान्त बनाए। इसे पंचशील का नाम दिया जाता है। इसका उद्देश्य पड़ोसी देशों के बीच सह-अस्तित्व की भावना को बढ़ाना है ताकि उनकी प्रभुसत्ता और अखण्डता बनी रहे।
  • भारत तथा संयुक्त राष्ट्र- भारत संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से विश्वशान्ति में महत्त्वपूर्ण योगदान दे रहा है। भारत की संयुक्त राष्ट्र के उद्देश्यों में पूरी आस्था है। इसलिए भारत की विदेश नीति का एक लक्ष्य संयुक्त राष्ट्र को विश्वशान्ति की स्थापना तथा विवादों को आपसी बातचीत द्वारा सुलझाने में सहयोग देना भी है।

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