PSEB 3rd Class Hindi रचना-भाग

Punjab State Board PSEB 3rd Class Hindi Book Solutions रचना-भाग Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB 3rd Class Hindi रचना-भाग

प्रस्ताव

1. मेरी गाय

यह मेरी गाय है। मैंने इसका नाम श्यामा रखा हुआ है। यह बहुत ही सुशील है। इसके छोटे-छोटे दो सींग हैं। इसके दो बड़े-बड़े कान तथा एक लम्बी पूँछ है। यह घास और चारा खाती है। इसे खली भी डाली जाती है। मेरी गाय का बछड़ा 2577 बहुत ही सुन्दर है। मैंने उसका नाम सोनू रख दिया है। मेरी गाय दूध बहुत अधिक देती है। इसका दूध पीकर मैं बलवान् बना हूँ। इसके दूध से हमें दही, मक्खन, छाछ भी मिलता है। भगवान् ऐसी गाय सब को प्रदान करे।
PSEB 3rd Class Hindi रचना-भाग 1

2. मेरा घर

मेरा घर मुझे बहुत प्यारा है। यह मोहल्ले के बीचोंबीच स्थित है। मेरा घर पक्की ईंटों से बना है। इसमें चार कमरे हैं। एक रसोई घर है। मेरे घर का स्नानगृह भी बहुत खूबसूरत है। मेरे घर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह हवादार है और यहाँ सूर्य की पूरी रोशनी मिलती है। मैं अपने घर में अपने मातापिता के साथ रहता हूँ। मेरा घर एक आदर्श घर है। मुझे इस पर गर्व है।

3. मेरा अध्यापक

मेरे स्कूल में बहुत-से अध्यापक हैं, लेकिन उन सब में से मुझे श्री वेद प्रकाश जी बहुत अच्छे लगते हैं। वे हमें हिंदी पढ़ाते हैं। उनके पढ़ाने का ढंग बहुत अच्छा है उन्होंने एम० ए०, बी० एड० पास किया हुआ है। वे सभी विद्यार्थियों से स्नेह का व्यवहार करते हैं और पाठ को बड़ी अच्छी तरह समझाते हैं। वे नम्र स्वभाव के व्यक्ति हैं। वे सादगी को बहुत पसन्द करते हैं और बच्चों को भी सादा रहने का उपदेश देते हैं। वे सदा सच बोलते हैं । वे हमेशा समय पर स्कूल आते हैं। वे अन्य सभी अध्यापकों का तथा मुख्याध्यापक का बहुत सम्मान करते हैं। उनकी वाणी में मिठास है। वे किसी बच्चे को डांटते-पीटते नहीं हैं बल्कि उन्हें प्यार से समझाते हैं। ईश्वर उन्हें लम्बी आयु प्रदान करे।

4. मेरी साइकिल

यह मेरी साइकिल है। इसका रंग काला है। यह बहुत तेज़ चलती है। यह मुझे समय पर स्कूल पहुँचाती है। शाम के समय मैं इस पर घूमने जाता हूँ। अपनी साइकिल पर मैंने सुन्दर घंटी भी लगवा रखी है। जब भी कोई सामने आता है तो मैं घंटी बजा देता हूँ। मेरी साइकिल की ब्रेक भी ठीक है। मेरे पिता जी ने मुझे मेरे जन्मदिन पर यह साइकिल दी थी। मेरे मित्र भी इसकी खूब तारीफ करते हैं। मैं इसको खूब संभाल कर रखता हूँ। मैं इस पर ज़रा भी धूल नहीं जमने देता।
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5. मेरी कक्षा

मैं तीसरी कक्षा का छात्र हूँ। मेरी कक्षा में लगभग 50 छात्र हैं। मैं अपने सभी साथी छात्रों से बेहद प्यार करता हूँ। मेरी कक्षा में दो पंखे लगे हुए हैं। कक्षा में रोशनी का भी पूरा प्रबन्ध है। कक्षा में लगी खिड़कियों से रोशनी और हवा आती है। मेरी कक्षा में बच्चों के बैठने के लिए पूरा प्रबन्ध है। मेरी कक्षा में हमारे अध्यापक के बैठने के लिए कुर्सी तथा मेज़ भी है। हमारी कक्षा में एक काला श्याम पट्ट भी है। कक्षा में सुन्दर-सुन्दर चार्ट भी लगे हुए हैं। कक्षा की दीवारों पर रंग भी सुन्दर ढंग से किया गया है। मुझे अपनी क क्षा का कमरा बड़ा अच्छा लगता है।

6. प्रातःकाल की सैर

प्रातःकाल की सैर स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक है। इससे शरीर नीरोग व स्वस्थ बना रहता है। शरीर चुस्त रहता है और काम करने में मन लगता है। मैं हर रोज़ सुबह अपने मित्र के साथ सैर करने के लिए जाता हूँ। हम दोनों सुबह पाँच बजे सैर के लिए निकल जाते हैं। हम एक पार्क में सैर करते हैं। वहाँ बहुत से लोग सैर के लिए आते हैं। सुबह के समय हवा भी ठण्डी और शुद्ध होती है। हम हरी घास पर तेज़-तेज़ चलते हैं। हरी घास पर चलने से आँखों की रोशनी बढ़ती है। फूलों और घास पर पड़ी ओस की बूंदें बड़ी अच्छी लगती हैं । थोड़ी देर बाद सूर्य देवता के दर्शन होने लगते हैं। तब हम अपने घर को लौट आते हैं।

7. मेरी पाठशाला

( मेरा स्कूल) मैं लब्भू राम दोआबा प्राइमरी स्कूल में पढ़ता हूँ। यह शहर के बीच में स्थित है। हमारे स्कूल में 15 कमरे हैं। सभी कमरे खुले और हवादार हैं। सभी कमरों में रोशनदान भी हैं। हमारे स्कूल में दो खेल के मैदान भी हैं। हमारे स्कूल में एक बगीचा भी है। उसमें रंग-बिरंगे फूल खिले रहते हैं। हमारे स्कूल में 15 अध्यापक हैं। सभी अध्यापक बड़े योग्य और परिश्रमी हैं। सभी अध्यापक सुशिक्षित हैं । हमारे स्कूल में लगभग 600 विद्यार्थी पढ़ते हैं। हमारे स्कूल का परिणाम हर वर्ष बहुत अच्छा निकलता है। मुझे अपने स्कूल पर बड़ा गर्व है। ईश्वर करे मेरा स्कूल खूब उन्नति करे।

8. मेरा मित्र

मेरे कई मित्र हैं परंतु विशाल शर्मा मेरा प्रिय मित्र | है। उसका घर मेरे घर के पास ही है। उसके पिता जी सरकारी दफ्तर में काम करते हैं। उसकी माता जी भी स्कूल में पढ़ाती है। वे विशाल से खूब प्रेम करते हैं। विशाल अपने माता-पिता की आज्ञा मानता है। हम दोनों एक ही स्कूल तथा एक ही कक्षा में पढ़ते हैं। वह बड़ा योग्य तथा परिश्रमी है। वह अपनी श्रेणी में सदा प्रथम आता है। वह सभी अध्यापकों का सम्मान करता है। सब अध्यापक उससे प्रसन्न हैं। हम दोनों हर रोज़ प्रातः इकट्ठे सैर करने जाते हैं। हम शाम को इकट्ठे ही खेलते हैं। वह सदा बढ़िया और साफ़-सुथरे कपड़े पहनता है। वह अपने मित्रों की सहायता भी करता है। अपने इन गुणों के कारण ही वह मुझे बहुत अच्छा लगता है।

9. चिड़ियाघर की सैर

चिड़ियाघर में अनेक प्रकार के पशु-पक्षी होते हैं। चिड़ियाघर देखने की मेरी बहुत देर से चाह थी। इस बार छुट्टियों में चिड़ियाघर देखने की मेरी चाह पूरी हो गई। मैं मामा जी से मिलने दिल्ली गया था। वहाँ | सुन्दर चिड़ियाघर होने की चर्चा सुनी। मन देखने को मचल उठा मैं अपने मामा जी के साथ चिड़ियाघर के लिए रवाना हुआ। बस द्वारा थोड़ी ही देर में हम चिड़ियाघर पहुँच गए। हम दोनों टिकट लेकर अंदर दाखिल हो गए। सबसे पहले हमने शेर को दहाडते हए देखा। (फिर एक बड़े पिंजरे में बंद बाघ को देखा। उछलते| कूदते बंदर और लंगूर भी देखे। बाद में अनेक रंगों के पक्षी भी देखे। चिड़ियाघर में अनेक जीव-जन्तुओं को देखकर मैं तो आश्चर्यचकित रह गया।

10: दीपावली

दीपावली हमारा प्रसिद्ध त्योहार है। इस दिन श्री राम 14 वर्ष पश्चात् अयोध्या लौट कर आए थे। लोगों ने इस दिन खुशी से भर कर घर पर घी के दीए जलाए थे। लोग इस दिन अपने घरों और दुकानों की सफाई करते हैं और सजाते हैं। बाजारों में खूब रौनक होती है। मिठाइयों व पटाखों की दुकानें लगती हैं। बच्चे नए-नए कपड़े पहनते हैं। बच्चे बाज़ारों से पटाखे खरीदते हैं। शाम को लोग लक्ष्मी की पूजा करते हैं और मोमबत्तियाँ जलाते हैं। लोग एक दूसरे को मिठाइयाँ खिलाते हैं। बच्चे तथा जवान सभी बड़े खुश होते हैं और बच्चे रात को पटाखे चलाते हैं।

11. रंगों का त्योहार

होली होली का त्योहार हमारा प्रसिद्ध त्योहार है। यह फरवरी या मार्च महीने में आता है। यह त्योहार खुशियों का त्योहार है। बच्चे, बूढ़े तथा जवान सभी इस दिन एक दूसरे पर रंग लगाते हैं। कहीं पानी के गुब्बारे भी मारे जाते हैं। हर तरफ से ‘होली है-होली है’ का शोर आता है। सभी के कपड़े रंग-बिरंगे हो जाते हैं। लोग आपस में गले मिलते हैं। यह त्योहार प्रेम का त्योहार है। हमें यह त्योहार अच्छा लगता है। इस दिन घर में खूब पकवान बनते हैं।

12. मेरे पिता जी

मेरे पिता जी का नाम श्री मोहन राम है।
वह एक डॉक्टर हैं।
उनकी आयु तीस वर्ष है।
उनका कद 5 फुट 7 इंच है।
उनका रंग साफ है।
वह अपने मरीजों से हँसकर बोलते हैं।
उन्हें कभी गुस्सा नहीं आता।
वह अपने परिवार से भी बहुत प्यार करते हैं।
शाम को वह हमारे साथ होते हैं।
वह हमारी हर इच्छा पूरी करते हैं।
उन्हें अपने काम से बहुत प्यार हैं।
वह सदा सच बोलते हैं।
वह ग़रीबों की सहायता करते हैं।
मुझे अपने पिता जी पर गर्व है।
ईश्वर उन्हें लम्बी आयु दें।

13. महात्मा गाँधी

राष्ट्र पिता महात्मा गाँधी को सारे भारत में बापू के नाम से पुकारा जाता है। आपका जन्म 2 अक्तूबर, सन् 1869 को गुजरात प्रान्त में पोरबन्दर नामक नगर में हुआ था। आपका पूरा नाम मोहन दास कर्मचन्द गाँधी था। आपके पिता राजकोट रियासत के दीवान थे। आप बच्चों से बहुत प्यार करते थे। आप सदा सत्य बोलते थे। आप अपने देश तथा देशवासियों से बहत प्रेम करते थे। आप हर समय देश की सेवा में लगे रहते थे। देश को स्वतंत्र करवाने में आपका बहुमूल्य | योगदान रहा है। आपके प्रयासों से ही हमारा देश 15 अगस्त, सन् 1947 को स्वतंत्र हुआ। आपका जीवन सादा था। 30 जनवरी, सन् 1948 को नाथू राम गोडसे ने आपको गोली मार दी। गोली लगने पर तीन बार आपके मुँह से ‘हे राम’ शब्द निकला। उसके बाद आपने प्राण त्याग दिए।
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14. श्री गुरु नानक देव जी

श्री गुरु नानक देव जी सिक्खों के पहले गुरु कहलाते हैं। आपका जन्म सन् 1469 ई० में तलवंडी गाँव (पाकिस्तान) में हुआ। आपके पिता का नाम मेहता | कालू राय जी और माता का नाम तृप्ता देवी जी था। आप बचपन से ही प्रभु भक्ति में लीन रहते थे। आपने साधुओं को खाना खिलाकर सच्चा सौदा किया। आपके | दो पुत्र श्रीचन्द जी और लखमीदास जी थे। आप स्थान-स्थान पर घूमे और अपना सारा जीवन लोगों की भलाई में लगा दिया। आप मक्का-मदीना भी गए। आपने कहा, “ईश्वर एक है। हम सब भाई-भाई हैं। सदा सच बोलना’ चाहिए।” अन्त में आप करतारपुर (पाकिस्तान) में आ गए और वहीं ईश्वर का भजन करते हुए ज्योति-जोत समा गए।

15. श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी

श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी सिक्खों के दसवें और अन्तिम गुरु कहलाते हैं। आपका जन्म सन् 1666 ई० में पटना में हुआ। आपके पिता का नाम श्री गुरु तेग़ बहादुर जी और माता का नाम गुजरी जी था। नौ वर्ष की आयु में आपने गुरु की पदवी प्राप्त की। आपको बचपन से ही तीर चलाने और घुड़सवारी का शौक था। आपने मुग़लों का जुल्म रोकने के लिए सन् 1699 ई० में खालसा पंथ की स्थापना करते हुए सिक्खों को तैयार किया। आपके पुत्रों ने धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राण तक दे दिए। आप सारे सिक्खों को अपने पुत्रों के समान समझते थे तथा उनसे प्रेम का व्यवहार करते थे। सन् 1708 ई० में आप ज्योति-जोत समा गये।

कहानियाँ

1. प्यासा कौआ

गर्मियों के दिन थे। एक कौवे को बहुत प्यास लगी। वह पानी की तलाश में काफ़ी देर इधर-उधर घूमता रहा। अन्त में उसे एक बाग में पानी का घड़ा दिखाई दिया, परन्तु घड़े में पानी बहुत कम था। उसकी चोंच पानी तक नहीं पहुँच सकती थी।
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उसने घड़े के समीप ही कुछ कंकर पड़े हुए देखे। अब उसे एक उपाय सूझा। उसने कंकर उठाकर घड़े में डालने शुरू कर दिए। इस प्रकार पानी घड़े के ऊपर तक आ गया। कौवे ने जी भर कर पानी पीया और अपनी राह ली।
शिक्षा-जहाँ चाह वहाँ राह।
अथवा
युक्ति से मुक्ति मिलती है।

2. अंगूर खट्टे हैं

एक बार एक लोमड़ी बहुत भूखी थी। वह भोजन की तलाश में इधर-उधर भटकती रही पर कहीं से भी उसे भोजन न मिला। अन्त में वह एक बाग में पहुँची। वहां उसने अंगूरों के गुच्छे लगे देखे। अंगूर देखकर उसके मुँह में पानी भर आया। वह उन्हें खाना चाहती थी। अंगूर थोड़ी ऊँचाई पर लगे हुए थे। वह उन्हें पाने के लिए उछली। बार-बार उछलने पर भी वह अंगूर पा नहीं सकी। अन्त में थक हार कर वह निराश होकर बाग से यह कहते हुए चली गई, अंगूर खट्टे हैं। यदि मैं इन्हें खाऊँगी तो बीमार पड़ जाऊँगी।
शिक्षा-हाथ न पहुँचे थू कौड़ी।

3. लोभ का फल

किसी नगर में एक गरीब व्यक्ति रहता था। मजदूरी से उसके परिवार का गुज़ारा बड़ी ही मुश्किल से होता था। उसकी गरीबी पर दया करके एक यक्ष ने उसे मुर्गी दी और कहा कि यह मुर्गी रोज़ाना सोने का एक अंडा देगी। तुम इस अंडे को बाज़ार में बेच कर अपना गुजारा कर सकते हो। ऐसा कह कर वह चले गए। मुर्गी रोज़ाना सोने का एक अंडा देने लगी। वह इसे बाज़ार में बेच आता और अपना परिवार चलाता। धीरे-धीरे वह परिवार धनी होने लगा। एक बार उसके मन में लालच आ गया। सोचने लगा कि क्या रोज़- रोज़ एक अंडे का इंतजार करो और फिर उसे जाकर बाज़ार में बेचो । क्यों न मैं इसे मार कर एक ही बार में सारे अंडे निकाल लूँ ताकि जल्दी ही अमीर बन जाऊँ। ऐसा सोचकर उसने छुरे से मुर्गी का पेट काट डाला। लेकिन उसे कोई भी अंडा नहीं मिला बल्कि मुर्गी मारी गई। अब वह अपने किए पर पछताने लगा कि लोभ में पड़कर रोजाना मिलने वाले अंडे से भी हाथ धोना पड़ा। शिक्षा-लालच का फल बुरा होता है।

4. चालाक लोमड़ी

गर्मियों के दिन थे। एक लोमड़ी भूख के कारण भोजन की तलाश में इधर-उधर भटक रही थी। थक हार कर वह बाग में पहुँची और वृक्ष की छाया में आराम करने लगी। अचानक उसकी नज़र वृक्ष पर बैठे एक कौए पर पड़ी। उसने देखा कौए के मुँह में रोटी का टुकड़ा है। रोटी देखकर उसकी भूख जाग पड़ी। उसने कौए से रोटी का टुकड़ा लेने की सोची। उसने कौए को कहा, “कौए भैया! कौए भैया ! तुम कितने सुन्दर हो। तुम्हारा रंग भी कितना प्यारा है।

तुम्हारी आवाज़ भी बहुत मीठी है। क्या तुम मुझे अपनी मीठी आवाज़ में एक गाना सुनाओगे ?” अपनी तारीफ सुनकर कौआ बहुत खुश हुआ। जैसे ही उसने काँव-काँव करने के लिए मुँह खोला कि चोंच में पकड़ा हुआ रोटी का टुकड़ा नीचे गिर गया। लोमड़ी ने झट से टुकड़ा उठाया और खा गई। फिर जाते-जाते कहने लगी. “आज तो तुम्हारी आवाज़ ठीक नहीं है। तुम्हारा गाना फिर कभी सुनूँगी। कौआ मुँह देखता रह गया।”
शिक्षा-किसी की चिकनी-चुपड़ी बातों में नहीं आना चाहिए।

5. झूठा गडरिया

किसी गाँव में एक गडरिया रहता था। वह रोजाना सवेरे भेड़-बकरियों को चराने के लिए पास के जंगल में ले जाता था और शाम को लौट आता। एक बार उसे गाँव वालों से मज़ाक करने की सूझी। उसने शोर मचाना शुरू किया, “बचाओ। बचाओ। भेड़िया आया, भेड़िया आया।” उसका शोर सुनकर गाँव वाले इकट्ठे होकर आ गए। उन्हें देखकर वह हँसने लगा। गाँव वाले समझ गए कि वह मज़ाक कर रहा है। वे वापिस लौट गए। एक बार सचमुच में ही भेड़िया उधर आ निकला। भेड़िये को देखकर गडरिया चिल्लाया, “बचाओ। बचाओ। भेड़िया आया, भेड़िया आया।” गाँव वालों ने इस आवाज़ को सुनकर सोचा कि वह फिर मज़ाक कर रहा होगा और कोई भी उसकी सहायता को न आया। भेड़िया उसकी कुछ बकरियाँ मार कर खा गया। गडरिये ने छिप कर अपनी जान बचाई। शिक्षा-झूठे पर कोई विश्वास नहीं करता ।

6. परिश्रम का फल

किसी गाँव में एक बूढ़ा किसान रहता था। उसके चार पुत्र थे। वे चारों ही निकम्मे थे। वे खेती-बाड़ी में अपने पिता का हाथ नहीं बँटाते थे। किसान अपने पुत्रों से बहुत दुखी था। बूढ़े पिता ने अपने बेटों को बहुत समझाया, परन्तु उन पर कोई असर न पड़ा। एक दिन किसान बहुत बीमार हो गया। उसने अपने चारों बेटों को पास बुलाया। उसने उन्हें कहा कि अब मेरे बचने की कोई आशा नहीं। मैं मरने से | पहले तुम्हें एक पते की बात बताना चाहता हूँ। मेरे पिता ने अपने खेत में एक खज़ाना छिपा कर रखा था। वह स्थान जहाँ उन्होंने उस खज़ाने को दबाया था मैं भूल गया हूँ। तुम खेत खोद कर उस खज़ाने को निकाल लेना। इन शब्दों के साथ ही बूढ़ा परलोक सिधार गया।

पिता की मृत्यु के बाद बेटों ने खेत खोदना शुरू | कर दिया, परन्तु उन्हें कहीं भी छिपा हुआ खज़ाना दिखाई न दिया। एक दिन निराश होकर उन्होंने खेत को खोदना बन्द कर दिया। गाँव के सरपंच ने उन्हें बताया कि तुम खेत में अनाज बो दो। उस वर्ष उनके खेत में बहुत फसल हुई। उनका घर अनाज से भर गया। उन्होंने फसल बाज़ार में बेचकर खूब धन कमाया। अब उनकी समझ में आया कि अच्छी फसल ही भूमि में दबा हुआ खज़ाना था। इस प्रकार परिश्रम करतेकरते चारों भाई खूब अमीर हो गए।
शिक्षा-परिश्रम का फल मीठा होता है।

7. जैसे को तैसा

एक राजा के पास एक हाथी था। महावत उस हाथी को नहलाने के लिए नदी पर ले जाता था। रास्ते में एक दर्जी की दुकान पड़ती थी। दर्जी उस हाथी को हमेशा कुछ न कुछ खाने को अवश्य देता था। इससे हाथी और दर्जी में दोस्ती हो गई। एक बार दर्जी किसी कारण से गुस्से में था। उसी समय हाथी आ गया। उसने अपनी सूंड दर्जी की दुकान के अन्दर कर दी। गुस्से से भरे दर्जी ने उसकी सूंड में सुई चुभो दी। हाथी को दर्द हुआ पर वह चुपचाप वहाँ से चला गया। नदी में नहाने के बाद उसने अपनी सूंड में नदी के किनारे का कीचड़ भरा गंदा पानी भर लिया और आकर दर्जी की दुकान पर सारा गंदा पानी फेंक दिया। दर्जी के सिलाई किए हुए सारे कपड़े गंदे हो गए। वह अपनी करनी पर पछताने लगा।
शिक्षा-कर बुरा हो बुरा।

8. मूर्ख सेवक

किसी नगर में एक सेठ रहता था। उसने राजू नाम का एक सेवक रखा । वह बड़ा परिश्रमी और स्वामिभक्त था, परन्तु वह बहुत मूर्ख था। सेठ जी उसके काम से खुश नहीं थे। गर्मियों के दिन थे। एक दिन दोपहर के समय सेठ जी आराम कर रहे थे। राजू उनकी सेवा कर रहा था।इतने में सेठ जी की आँख लग गई। एक मक्खी सेठ जी के मुँह पर आ बैठी। राजू मक्खी को उड़ाता, परन्तु वह फिर सेठ जी के मुँह पर आ बैठती। अन्त में राजू मक्खी से तंग आ गया। उसे एक उपाय सूझा।

उसके पास ही एक डण्डा पड़ा था। मक्खी सेठ जी के | मुँह पर फिर आ बैठी। राजू ने मक्खी पर ज़ोर से डंडा | दे मारा। मक्खी तो उड़ गई पर डंडा सेठ जी के मुँह पर जोर से लगा। उनकी आँखें खुल गईं। सेठ जी दर्द के मारे कराहने लगे। अब उन्हें राजू की मूर्खता का पता चला। उन्होंने राजू को नौकरी से निकाल दिया।
शिक्षा-मूर्ख मित्र या सेवक से बुद्धिमान् शत्रु अच्छा होता है।

PSEB 3rd Class Hindi Grammar Vyakaran

Punjab State Board PSEB 3rd Class Hindi Book Solutions  Grammar Vyakaran Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB 3rd Class Hindi Grammar Vyakaran

चार्ट नं० 1
लिंग बदलना

पुल्लिग स्त्रीलिंग
नर नारी
मामा मामी
बेटा बेटी
दादा दादी
बकरा बकरी
नाना नानी
पिता माता
गायक गायिका
सेवक सेविका
दास दासी
भाई भाभी
नौकर नौकरानी
ऊँट ऊँटनी
लेखक लेखिका
शेर शेरनी
मोर मोरनी
पुरुष स्त्री
युवक युवती
ससुर सास
घोड़ा घोड़ी
सिंह सिंहनी
कुत्ता कुतिया
चाचा चाची
लड़की लड़का
मुर्गा मुर्गी
बालक बालिका
ताया ताई
माली मालिन
बूढ़ा बुढ़िया
अध्यापक अध्यापिका
पति पत्नी
देवर देवरानी
राजा रानी
श्रीमान श्रीमती
नायक नायिका
गायक गायिका
सेठ सेठानी
ग्वाला ग्वालिन
चूहा चुहिया
गाय बैल
हाथी हथिनी
पोता पोती
पुत्र पुत्री
देव देवी।

चार्ट नंo 2
वचन बदलना

पुस्तक पुस्तकें
दिशा दिशाएँ
बहू बहुएँ
बकरा बकरे
कपड़ा कपड़े
आँख आँखें
कन्या कन्याएँ
बेटा बेटे
बच्चा बच्चे
रात रातें
शत्रु शत्रुओं
नदी नदियाँ
लड़की लडकियाँ
चाबी चाबियाँ
गुड़िया गुड़ियाँ
बुढ़िया बुढ़ियाँ
तोता तोते
गुरु गुरुजन
डिब्बा डिब्बे
मुगल मुगलों
पुरुष पुरुषों
मिठाई मिठाइयाँ
दवाई दवाइयाँ
मक्खी मक्खियाँ
बिल्ली बिल्लियाँ
कलम कलमें
शाखा शाखाएँ
कथा कथाएँ
लेखक लेखकों
बात बातें
चिड़िया चिड़ियाँ
बकरी बकरियाँ
माला मालाएँ
लड़का लड़के
लोटा लोटे
बात बातें
राजा राजाओं
टोपी टोपियाँ
प्याली प्यालियाँ
सहेली सहेलियाँ
बेटी बेटियाँ
श्रेणी श्रेणियाँ
स्त्री स्त्रियाँ
परी परियाँ
पंखा पंखे
प्रजा प्रजाजन
वृक्ष वृक्षों
चार चारों
सब्जी सब्जियाँ
पत्ती पत्तियाँ
दीया दीए
बच्चा बच्चे

चार्ट नंo3
अशुद्ध-शुद्ध

शुद्ध अशुद्ध
आपना अपना
आगियाकारी आज्ञाकारी
आतमा आत्मा
आवशयक आवश्यक
अवशय अवश्य
अमरितसर अमृतसर
चालाक चलाक
चतुर चतूर
चश्मा चशमा
चबूतरा चबुतरा
चितर चित्र
छमा क्षमा
छात्र छातर
जनावर जानवर
अधियापक अध्यापक
असमानी आसमानी
असमान आसमान
अकाश आकाश
अर्शीवाद आशीर्वाद
ईस्टेशन स्टेशन
ईशवर ईश्वर
ईष्या ईर्ष्या
इसतरी स्त्री
इन्दू इन्दु
उन्नती उन्नति
ऊधार उधार
ऐक एक
ऐकता एकता
ओरत औरत
कूत्ता कुत्ता
कियोंकि क्योंकि
क्योंकी क्योंकि
कूल्लू कुल्लू
कबुतर कबूतर
गर्मीयाँ गर्मियाँ
गिध गीध
दांत दाँत
धनूष धनुष
धिरज धीरज
नूतन नुतन
नविन नवीन
नावक नाविक
नीकल निकल
जिवन जीवन
जनम जन्म
जोबन यौवन
झाड़ियाँ झाड़ीयाँ
झनडा झंडा
झनकार झंकार
ठाकुर ठाकूर
ठगि ठगी
तिथी तिथि
तकड़ा तगड़ा
तुमहारा तुम्हारा
तिसरा तीसरा
दोखा धोखा
दरशन दर्शन
दुसरा दूसरा
दयालू दयालु
लाटरी लॉटरी
लगन लग्न
वस्तू वस्तु
विद्यारथी विद्यार्थी
विशवास विश्वास
विग्यान विज्ञान
शिक्शा शिक्षा
शीकारी शिकारी
पथ्थर पत्थर
पृथ्वी पृथवी
सहास साहस
प्रतीक्षा प्रतीक्षा
सकूल स्कूल
पत्नि पत्नी
प्रवत पर्वत
प्राताकाल प्रातःकाल
परिक्षा परीक्षा
परीणाम परिणाम
परसन्न प्रसन्न
पयारा प्यारा
परधान प्रधान
भाईयों भाइयों
भगत भक्त
मन्दर मन्दिर
मनुशय मनुष्य
माहाराज महाराज
रितु ऋतु
रिषि ऋषि
सुन्द्र सुन्दर
सूची सुचि
हानि हानी
हिन्दु हिन्दू
हीमाचल हिमाचल
परसिद्ध प्रसिद्ध
परिक्षा परीक्षा

चार्ट नंo4
विपरीतार्थक शब्द
(विलोम शब्द) (उल्टे अर्थ वाले शब्द)

शब्द विपरीतार्थक
सुर असुर
अमृत विष
गरीब अमीर
प्रकाश अंधकार
आकाश पाताल
उन्नति पतन
जीवन मृत्यु
दोष निर्दोष
जीत हार
घटिया बढ़िया
पास
आशा निराशा
आरंभ अंत
अधिक कम
आय व्यय
आज्ञा अवज्ञा
उदय अस्त
उन्नति पतन
उतार चढ़ाव
जन्म मरण
डर निडर
अच्छा बुरा
अपना पराया
दुःख सुख
आना जाना
आदि अन्त
सफलता असफलता
उत्तर प्रश्न
रोगी नीरोगी.
यश अपयश
प्रश्न उत्तर
सुलभ दुर्लभ
शान्ति अशान्ति
हंसना रोना
राजा रंक
शत्रु मित्र
अन्त शुरू
पाप पुण्य
उधार नकद
कृतज्ञ कृतघ्न
कम अधिक
जय पराजय
सुगन्ध दुर्गन्ध
ऊपर नीचे
विजय पराजय
उपकार अपकार
आजाद गुलाम
गरीब अमीर
प्रशंसा निन्दा
संयम असंयम
सरस नीरस
धूप छाँव
सत्य झूठ
प्यार नफरत
सम्मान अपमान
सरल कठिन
ज्ञान अज्ञान
सुन्दर कुरूप
खुला बन्द
दिन रात
सुबह शाम
एक अनेक
सवाल जवाब
रोना हंसना
गर्मी सर्दी
गुण अवगुण
पुरानी नई
खशी गमी
दयालु निर्दयी
पीछे आगे
मुश्किल आसान
रुकना चलना
बूढ़ा जवान
प्रशंसा निंदा
पुरस्कार दंड
आशीर्वाद श्राप
एकता अनेकता
उन्नति अवनति

चार्ट नंo5
वाक्यांश के लिए एक शब्द

ईश्वर को मानने वाला – आस्तिक।
ईश्वर को न मानने वाला – नास्तिक।
जिसका कोई आकार हो – साकार।
जिसका आकार न हो – निराकार।
ग्राम में रहने वाला – ग्रामीण।
नगर में रहने वाला – नागरिक।
जिसमें कम बल हो – निर्बल।
जिसमें बहुत बल हो – बलवान।
जो डरता न हो – निडर।
जो डरता हो – कायर/डरपोक।
प्रतिदिन होने वाला – दैनिक।
सप्ताह में होने वाला – साप्ताहिक
मास में होने वाला – मासिक।
माँस खाने वाला – माँसाहारी।
माँस न खाने वाला – शाकाहारी।
पढ़ाई करने वाला – विद्यार्थी।
दूसरे देश का – विदेशी।
भारत का रहने वाला – भारतीय
जहाँ चार रास्ते मिलते हों – चौराहा।
सिक्खों के पूजा का स्थान – गुरुद्वारा।
हिन्दुओं के पूजा का स्थान – मन्दिर।
मुसलमानों के पूजा का स्थान – मस्जिद।
घोड़े पर सवार – घुड़सवार।
सच बोलने वाला – सत्यवादी।
गीत गाने वाला – गायक।
जो दूसरों पर दया करे – दयालु।
दूसरों पर दया न करने वाला – निर्दयी।
जहाँ पहुँचना कठिन हो – दुर्गम।
जहाँ पहुँचना सरल हो – सुगम।
आसानी से प्राप्त होने वाला – सुलभ।
मुश्किल से मिलने वाला – दुर्लभ।
धोखा देने वाला – धोखेबाज़।
जो दूसरों का भला करता हो। – परोपकारी।

पत्र-लेखन

1. आवश्यक काम के कारण अपने स्कूल के मुख्याध्यापक महोदय को प्रार्थना-पत्र लिखो।

सेवा में

श्रीमान् मुख्याध्यापक जी,
लब्भू राम दोआबा प्राइमरी स्कूल,
जालन्धर।

श्रीमान् जी,

प्रार्थना यह है कि मेरी माता जी बीमार हैं। उनकी देखभाल करने के लिए मेरा घर पर रहना ज़रूरी है। इसलिए मैं आज स्कूल नहीं आ सकता। कृपया मुझे एक दिन की छुट्टी देकर कृतार्थ करें।

आपका आज्ञाकारी शिष्य,
विकास
कक्षा तीसरी ‘क’

तिथि : 12 अप्रैल, 20…….

2. बीमारी के कारण छुट्टी के लिए प्रार्थना-पत्र।

सेवा में

श्रीमती मुख्याध्यापिका जी,
साईं दास प्राइमरी स्कूल,
जालन्धर।

श्रीमती जी,

नम्र निवेदन यह है कि मुझे कल रात से तेज़ बुखार है। अत: मैं स्कूल में उपस्थित नहीं हो सकती। कृपया मुझे दो दिन 13 तथा 14 मई की छुट्टी देकर कृतार्थ करें।

आपकी विनीत शिष्या,
ललिता
कक्षा तीसरी ‘ग’

तिथि : 13 मई, 20…………….

3. अपने स्कूल के मुख्याध्यापक को विवाह के कारण अवकाश के लिए प्रार्थना-पत्र लिखो।

सेवा में

श्रीमान् मुख्याध्यापक जी,
सरकारी प्राइमरी स्कूल,
अमृतसर।

श्रीमान् जी,
सविनय निवेदन है कि मेरे बड़े भाई (बड़ी बहन) का विवाह 11 दिसम्बर, 20……… को होना निश्चित हुआ है। अत: मुझे 10 दिसम्बर से 13 दिसम्बर, 20………. तक का अवकाश देकर कृतार्थ करें।

आपका आज्ञाकारी शिष्य,
अशोक कुमार
कक्षा तीसरी ‘क’

तिथि : 10 दिसम्बर, 20…………

4. अपने स्कूल के मुख्याध्यापक को फीस माफ़ी के लिए प्रार्थना-पत्र लिखो ।

सेवा में

श्रीमती मुख्याध्यापिका जी,
देवराज कन्या शाखा विद्यालय,
जालन्धर।

श्रीमती जी,

सविनय निवेदन यह है कि मैं आपके स्कूल की तीसरी ‘क’ श्रेणी में पढ़ती हूँ। मेरे पिता जी का मासिक वेतन केवल 3,000 रुपए है। महँगाई के दिनों में इतने कम वेतन में गुज़ारा करना बड़ा मुश्किल है। अतः मैं स्कूल की फीस नहीं दे सकती। कृपया आप मेरी पूरी फीस माफ़ कर दें। मैं आपकी अति धन्यवादी हूँगी।

आपकी विनीत शिष्या,
श्वेता
कक्षा तीसरी ‘क’

तिथि : 5 अप्रैल, 20…………….

5. पिता जी से रुपये मँगवाने के लिए पत्र।

297, विक्रमपुरा,
जालन्धर।
2 अप्रैल, 20…..

  पूज्य पिता जी,

              सादर प्रणाम !

आपको यह समाचार पढ़ कर बहुत खुशी होगी कि मैं दूसरी श्रेणी में पास हो गया हूँ। अब मुझे तीसरी कक्षा के लिए नई पुस्तकें व कापियाँ खरीदनी हैं। इसलिए आप जल्दी-से-जल्दी 350 रुपए मनीआर्डर द्वारा भेज दीजिए।

मुन्ना को प्यार, माता जी को प्रणाम।

आपका प्रिय पुत्र,
विश्वप्रिय

6. पिता की ओर से पुत्र को पत्र।

189, आदर्श नगर,
जालन्धर।
18 अप्रैल, 20…………….

प्रिय पुत्र परमजीत,
सदा प्रसन्न रहो ।

तुम्हारा पत्र कल मिला। पढ़ कर बड़ी खुशी हुई कि तुम दूसरी श्रेणी में पास हो गए हो। मुझे आशा है कि तुम इसी तरह मेहनत करते रहोगे। अपनी सेहत का ध्यान रखना। मैं तुम्हें 350 रुपए मनीआर्डर द्वारा भेज रहा हूँ। मिलने पर पता देना।

तुम्हारा पिता,
राम सहाय

7. अपने बड़े भाई को पत्र लिखकर अपनी दिनचर्या के बारे में बताएं।

271, मॉडल टाऊन,
फगवाड़ा।
14 अगस्त, 20…………….

आदरणीय भाई साहब,
सादर नमस्ते।

आज आपका पत्र मिला। पढ़कर हाल मालूम हुआ। आपको यह जानकर प्रसन्नता होगी कि मैं तिमाही परीक्षा में अपनी श्रेणी में प्रथम रहा हूँ। मैं हर रोज़ | सुबह सैर को जाता हूँ। सायंकाल खेलों में भी भाग लेता हूँ। मैं मन लगाकर अपनी पढ़ाई कर रहा हूँ। दशहरे की छुट्टियों में मैं आपके पास ज़रूर आऊँगा। भाभी जी को प्रणाम ।

आपका छोटा भाई,
कमल किशोर
तीसरी कक्षा

8. अपनी सखी को पत्र लिखकर बताओ कि परीक्षा कैसी हुई।

632, विकास नगर,
लुधियाना।
25 मार्च, 20………..

प्रिय सखी अर्चना,
नमस्ते।

कई दिनों से तुम्हारा कोई पत्र नहीं आया। मैं तो हर समय तुम्हें याद करती रहती हूँ। लगता है तुम शायद मुझे भूल गई हो। मैं अपनी वार्षिक परीक्षा के कारण तुम्हें कोई पत्र न लिख सकी। मेरे सभी पेपर अच्छे हो गए हैं। मैं अपनी श्रेणी में प्रथम आने की आशा रखती हूँ। तुम भी लिखना कि तुम्हारे पेपर कैसे हुए हैं। माता जी की तरफ से तुम्हें बहुत-बहुत प्यार।

तुम्हारी सहेली,
साधना

PSEB 3rd Class Hindi Solutions Chapter 24 हिम्मत

Punjab State Board PSEB 3rd Class Hindi Book Solutions Chapter 24 हिम्मत Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 3 Hindi Chapter 24 हिम्मत

Hindi Guide for Class 3 PSEB हिम्मत Textbook Questions and Answers

अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर

I. बताओ

1. महाभारत के युद्ध में कौरवों की संख्या कितनी थी ?
उत्तर-
महाभारत के युद्ध में कौरवों की संख्या एक सौ थी।

2. पाँडव कितने थे ? उनके नाम लिखो।
उत्तर–
पाँडव पाँच थे। युधिष्ठिर, अर्जुन, भीम, नकुल और सहदेव।

3. अभिमन्यु वीरगति को कैसे प्राप्त हुआ ?
उत्तर-
सोलह वर्ष के बालक अभिमन्यु ने अकेले ही कौरवों की विशाल सेना को चीरते हुए चक्रव्यूह को नष्ट किया। इस कार्य में वह घायल हो गया था। कौरवों ने उसे घेर लिया और अभिमन्यु लड़तेलड़ते वीरगति को प्राप्त हुआ।

4. किस घटना से पता चलता है कि महाराजा रणजीत सिंह एक साहसी व्यक्ति थे ?
उत्तर-
तेज गति से बहती नदी की धारा में से घोड़े को लेकर नदी पार कर जाना बताता है कि महाराजा रणजीत सिंह एक साहसी व्यक्ति थे।

5. चींटी से आप क्या प्रेरणा ले सकते हैं ?
उत्तर-
चींटी हमें जीवन में हिम्मत से आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

6. वीरता पुरस्कार किन बच्चों को दिया जाता है ?
उत्तर-
जो बच्चे अपने जीवन में साहस से भरा कोई काम करते हैं उन्हें वीरता पुरस्कार दिया जाता है।

7. यदि आपने जीवन में कोई साहस वाला | कार्य किया हो तो उसे लिखो।
उत्तर-
मैंने जीवन में साहस का परिचय देकर नदी में डूब रहे दो बच्चों को बचाया है।

II. वाक्य बनाओ

छक्के छुड़ाना = हौंसला ढह जाना = …………………………..
वीरगति को प्राप्त होना = युद्धभूमि में मारा जाना = …………………………..
धूल चटाना = हराना = …………………………..
दाँत खट्टे करना = हराना = …………………………..
उत्तर-
(i) छक्के छुड़ाना = हौंसला ढह जाना → अभिमन्यु ने अपनी वीरता से शत्रुओं के छक्के छुड़ा दिए।
(ii) वीरगति को प्राप्त होना = युद्धभूमि में मारा जाना→ युद्ध में हमारे कई सैनिक साहसपूर्वक लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए।
(iii) धूल चटाना = हराना → अकबर ने अपने साहस के बल पर अपने शत्रुओं को धूल चटा दी।
(iv) दाँत खट्टे करना = हराना → महाराजा रणजीत सिंह ने शत्रुओं के दाँत खट्टे कर दिए।

III. समान अर्थ वाले शब्द लिखो

हिम्मत = हौंसला
संकट = …………………………..
पराजित = …………………………..
युद्ध = …………………………..
शासक = …………………………..
पुरस्कार = …………………………..
नदी = …………………………..
घोड़ा = …………………………..
उत्तर-
(i) हिम्मत = हौंसला
(ii) संकट = मुसीबत।
(iii) पराजित = हराना।
(iv) युद्ध = लड़ाई।
(v) शासक = राजा।
(vi) पुरस्कार = ईनाम।
(vii) नदी = सरिता।
(viii) घोड़ा = अश्व।

IV. मिलान करो

हार – ज्यादा
फूल – अनिश्चित
कम – चलना
रुकना – जीत
निश्चित – काँटा
उत्तर-
विपरीतार्थक शब्दों का मिलान
(i) हार – जीत।
(ii) फूल – काँटा।
(iii) कम – ज्यादा।
(iv) रुकना – चलना।
(v) निश्चित – अनिश्चित।

V. नये शब्द बनाओ –

हिम्मत = म्म = चम्मच।
युद्ध = दूध = …………………………
संख्या = ख्य = …………………………
अन्त = न्त = …………………………
अवस्था = स्थ = …………………………
रास्ता = स्त = …………………………
प्रबन्ध = न्ध = …………………………
उत्तर-
शब्द
संयुक्त नया शब्द शब्द

  • हिम्मत = म्म = चम्मच।
  • युद्ध = द्ध = बुद्ध।(बुद्ध)
  • संख्या = ख्य = व्याख्या।
  • अन्त = न्त = सन्त।
  • अवस्था = स्थ = स्वस्थ।
  • रास्ता = स्त = अस्त।
  • प्रबन्ध = न्ध = अन्धा।

VI. दिए गए शब्दों को पढ़ो और बताओ कि वे किन-किन अक्षरों के मेल से बने हैं-

शत्रु, आज्ञा, दृढ़, श्री, चक्र, मार्ग।

  • शत्रु = श् + अ + त् + र् + उ।
  • आज्ञा = आ + ग् + य् + आ।
  • दृढ़ = द् + अ + अर् + टू + अ।
  • श्री = श् + र् + ई।
  • चक्र = च् + अ + क् + अ + र्।
  • मार्ग = म् + आ + र् + ग् + अ।

VII. शब्द में शब्द ढूंढकर लिखो

महाभारत, सामना, श्रीराम, सेनापतियों, महाराज।
उत्तर-

  • महाभारत = महा, भारत, भार, भात, मात।
  • सामना = साम, मना, नाम।
  • श्रीराम = श्री, राम।
  • सेनापतियों = सेना, पतियों।
  • महाराज = महा, राज, हारा,मरा, जरा।

VIII. पाठ में आए व्यक्तियों और ग्रंथों के नाम छाँट कर लिखेंउत्तर-व्यक्तियों के नाम –

  • श्रीराम।
  • अभिमन्यु।
  • अकबर।
  • महाराजा रणजीत सिंह।
  • झाँसी की रानी।
  • कल्पना चावला।
  • रावण।

ग्रंथों के नाम-

  1. रामायण।
  2. महाभारत।

हिम्मत Summary & Translation in Hindi

पाठ का सार

‘हिम्मत’ पाठ के लेखक विक्रमजीत नूर ने अपने पाठ में कुछ शूरवीरों की गाथाओं को बताते हुए कहा हमें मुश्किल के समय में हिम्मत से काम लेना चाहिए। मुसीबत के समय हिम्मत से काम लिया जाए तो कभी भी हार का मुँह नहीं देखना पड़ता। हिम्मत, हाँसला और दिलेरी ऐसे महान् गुण हैं, जिनके होते हुए हार कहीं नज़र नहीं आती। हमारे इतिहास में ऐसे अनेक शूरवीर हुए हैं जिन्होंने संकट के समय हिम्मत से काम लिया और जीत प्राप्त की।

रामायण में रावण जैसे पराक्रमी योद्धा, जिसके पास विशाल सेना थी को श्री राम ने अपने साहस व वानरों की सेना के साथ पराजित किया। महाभारत के युद्ध में पाँच पांडवों ने एक सौ कौरवों पर साहस के बल पर ही विजय पाई थी। सौलह वर्ष के वीर अभिमन्यू ने अपने साहस के बल पर ही दुश्मनों के छक्के छुड़ा दिए थे। तेरह वर्ष के अकबर ने अपने साहस के बल पर ही शत्रुओं को धूल चटा दी थी।

पंजाब के वीर महाराजा रणजीत सिंह भी न केवल एक वीर योद्धा थे बल्कि जीवन में हर मुश्किल का सामना अपने साहस के बल पर किया। बल्कि उनकी वीरता का परिचय अटक की इस घटना से भी चलता है। आपकी सेना पठानों की सेना से बहुत कम थी। महाराजा रणजीत सिंह सेना लेकर स्वयं युद्ध के मैदान की तरफ चल पड़े। मार्ग में अटक नदी बड़ी तेज़ गति से बह रही थी। शत्रुओं ने पुल तोड़ दिया था। नदी को पार करने का कोई रास्ता नहीं था। सैनिक रुक गए। रणजीत सिंह ने आज्ञा दी, “सेना को दूसरी ओर पहुँचाने का शीघ्र प्रबन्ध किया जाए।” सरदारों ने कहा, “महाराज! नदी का पानी बड़े वेग | से बह रहा है, पुल टूट चुका है, आगे जाने का कोई रास्ता ही नहीं है।”

यह सुनकर महाराजा रणजीत सिंह ने कहा, “रणजीत सिंह के लिए अटक-अटक नहीं बन सकता।” यह कहकर उन्होंने अपने घोड़े को एड़ी | लगायी। घोड़ा नदी में कूद पड़ा और देखते ही देखते | वे दूसरे किनारे पर पहुंच गए। उनका हौंसला देखकर सभी सैनिकों में भी साहस जाग उठा। वे भी अपने महाराज के पीछे नदी में कूद पड़े। सारी सेना नदी पार कर गई। इस प्रकार समय पर पहुँचकर उन्होंने अपने शत्रुओं के दाँत खट्टे किये।

बच्चो! हिम्मत के बल पर बड़े से बड़े संकट का सामना किया जा सकता है। जीवन में तुम हारोगे भी और जीतोगे भी। तुम्हें जीत का सपना लेकर चलना चाहिए। चींटी अपने हिम्मत के बल पर ही अपने भार से दस गुणा भार उठा लेती है। चलने में ही जीत निहित होती है। इसलिए जीतने के लिए चलते रहना चाहिए। रुक जाना तो मौत की निशानी है। जो बच्चे साहस से भरा कार्य करते हैं भारत सरकार उन्हें ‘वीरता पुरस्कार’ से सम्मानित करती है।

कठिन शब्दों के अर्थ ।

मुसीबत = संकट, मुश्किल, कठिन समय।
हिम्मत = संयम, धैर्य, हौंसला।
दिलेरी = बहादुरी, साहस।
शूरवीर = बहादुर।
संकट = मुश्किल।
पराक्रमी = वीर, बहादुर।
विशाल = बहुत बड़ी।
बल = ताकत, ज़ोर।
जूझना = लड़ना।
शक्ति = ताकत।
जिन्दगी = जीवन।
चक्रव्यूह = चक्र के आकार में सेना की स्थापना।
भेदन = काटना, तोड़ना, नष्ट करना।
शत्रु = दुश्मन।
लोहा लेना =, टक्कर लेना, लड़ना।
वीरगति = शहीद, मारे जाना।
अबोध = नादान, नासमझ।
धूल चटाना = हरा देना।
मार्ग = रास्ता।
शीघ्र = जल्दी।
प्रबन्ध = व्यवस्था, उपाय।
तट = किनारा ।
अद्भुत = अनोखा।
दाँत खट्टे करना = हरा देना।
दृढ़-इरादा = पक्का इरादा।
निहित = रखी हुई।
पुरस्कार = इनाम।
उद्देश्य = लक्ष्य।
निश्चित = पक्का।
शासक = राजा, शासन करने वाला।
अद्भुत = अनोखा।
साम्राज्य = विशाल राज्य।
निहित = रखा हुआ।

PSEB 3rd Class Hindi Solutions Chapter 23 सत्यं वद

Punjab State Board PSEB 3rd Class Hindi Book Solutions Chapter 23 सत्यं वद Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 3 Hindi Chapter 23 सत्यं वद

Hindi Guide for Class 3 PSEB सत्यं वद Textbook Questions and Answers

अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर

I. बताओ

1. गुरु जी ने शिष्यों को पहले दिन कौन-सा पाठ पढ़ाया ?
उत्तर-
गुरु जी ने शिष्यों को पहले दिन ‘सत्यम् वद’ अर्थात् सच बोलो का पाठ पढ़ाया।

2. गुरु जी द्वारा पढ़ाए गए पाठ को किसने नहीं सुनाया और क्यों ?
उत्तर-
गुरु जी द्वारा पढ़ाए गए पाठ को युधिष्ठिर ने नहीं सुनाया क्योंकि उसे पाठ याद नहीं हुआ था।

3. कक्षा में बैठे सभी शिष्य युधिष्ठिर का मज़ाक क्यों उड़ाते थे ?
उत्तर-
युधिष्ठिर से एक सरल सा पाठ भी याद नहीं हो रहा था। इसी कारण कक्षा में बैठे सभी शिष्य युधिष्ठिर का मज़ाक उड़ाते थे।

4. युधिष्ठिर को गुरु द्वारा पढ़ाए गए पाठ को याद करने में ज्यादा दिन क्यों लगे ? ..
उत्तर-
युधिष्ठिर जब भी गुरु जी द्वारा दिए गए पाठ को याद करके सच बोलने की कोशिश करता तो कहीं न कहीं कुछ झूठ बोला जाता, इससे उसे लगता कि अभी मुझे पाठ अच्छी तरह याद नहीं हुआ।

5. गुरु जी ने युधिष्ठिर को गले क्यों लगाया ?
उत्तर-
गुरु जी द्वारा सिखाए गए पाठ के प्रति युधिष्ठिर की सच्ची निष्ठा और लग्न देखकर गुरु जी ने प्रसन्न होकर उसे गले से लगा लिया।

II. सही शब्दों पर गोले लगाओ

कोरव/कौरव असान/आसान
गुरु/गुरू हँसने/हसने
शिष्य/शिश्य युधिष्ठर/युधिष्ठिर
हेरान/हैरान प्रन्तु/परन्तु
उत्तर-
सही शब्द
(i) कौरव।
(ii) आसान।
(iii) गुरु।
(iv) हँसने।
(v) शिष्य।
(vi) युधिष्ठिर।
(vii) हैरान।
(viii) परन्तु।

III. समान अर्थ वाले शब्द जोड़ो

PSEB 3rd Class Hindi Solutions Chapter 23 सत्यं वद 1

उत्तर-
समान अर्थ वाले शब्द
(i) सौ एक सौ/सैंकड़ा।
(ii) गुरु अध्यापक।
(iii) वद बोलना।
(iv) शिष्य
(viii) दिन दिवस।
(ix) सरल आसान।
(x) झूठ – मिथ्या।

IV. संयुक्त अक्षरों से बने शब्द पाठ में से चुनकर लिखो

क् + ष = क्ष = कक्षा
द् + व = द्व = ………………………………
क् + य = क्य = ………………………………
प् + र = प्र = ………………………………
उत्तर-
(i) क् + ष = क्ष = कक्षा
(ii) द् + व = व = विद्वान्
(iii) क् + य = क्य = क्या
(iv) प् + र = प्र = प्रबल

V. इस जाल में पाँच पाँडवों के नाम छिपे हैं। उन्हें ढूँढ़ो उन पर गोला लगाओ और उनके नाम लिखो।
PSEB 3rd Class Hindi Solutions Chapter 23 सत्यं वद 2
उत्तर-
(i) युधिष्ठिर।
(ii) अर्जुन।
(iii) भीम।
(iv) नकुल।
(v) सहदेव।

सत्यं वद Summary & Translation in Hindi

पाठ का सार

पाण्डव और कौरव शिक्षा प्राप्त करने के लिए जब अपने गुरु जी के पास गए तो गुरु जी ने उन्हें पहले दिन पाठ पढ़ाया-‘सत्यम् वद’ अर्थात् सच बोलो। गुरु जी ने अपने शिष्यों से इस पाठ को याद करने के लिए कहा। अगले दिन जब गुरु जी ने पाठ सुना तो सिवाय युधिष्ठिर के सभी ने पाठ सुना दिया। युधिष्ठिर से जब गुरु जी ने पूछा तो उन्होंने कहा मुझे पाठ याद नहीं हुआ है। गुरु जी ने उसे अगले दिन पाठ याद करने को कहा। अगले दिन भी गुरु जी के पूछने पर युधिष्ठिर ने यही कहा कि गुरु जी मुझे पाठ याद नहीं हुआ।

इस पर सारी कक्षा हँसने लगी। गुरु जी ने उन्हें कहा कि जब तुम्हें अच्छी तरह पाठ याद हो जाए तभी कक्षा में आना। इस तरह काफी दिन बीत गए। फिर एक दिन युधिष्ठिर कक्षा में आया। गुरु जी के पूछने पर युधिष्ठिर ने कहा, “गुरु जी मुझे पाठ याद हो गया है।” गुरु जी के कहने पर उन्होंने कह दिया “सत्यम् वद” अर्थात् सच बोलो।

गुरु जी ने फिर कहा कि इतना सरल पाठ याद करने में तुमने इतने दिन लगा दिए। युधिष्ठिर ने कहा कि गुरु जी रोज़ाना सत्य बोलने की बात सोच कर भी कभी-कभी रोज़ झूठ निकल जाता था। ऐसे में फिर मैं आपसे कैसे कह देता कि मुझे पाठ याद हो गया है। आज मैंने मन से सच बोलने का प्रण लिया है। मैं जीवन भर सच बोलूँगा। गुरु जी ने युधिष्ठिर को गले से लगा लिया और कहने लगे, “बेटा ! सचमुच सच बोलने का पाठ सारी कक्षा में से तुमने ही सबसे अच्छी तरह याद किया है।”

कठिन शब्दों के अर्थ

सत्यम् = सत्य, सच ।
वद = बोलना।
शिष्य = चेला, शिक्षा पाने वाला।
पाठशाला = विद्यालय, स्कूल ।
शान्त = चुप।
सरल = आसान।
प्रण = प्रतिज्ञा, संकल्प, व्रत।
मज़ाक उड़ाना = हँसी उड़ाना।

PSEB 3rd Class Hindi Solutions Chapter 22 गुरु गोबिंद सिंह को शीश झुकाएँ

Punjab State Board PSEB 3rd Class Hindi Book Solutions Chapter 22 गुरु गोबिंद सिंह को शीश झुकाएँ Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 3 Hindi Chapter 22 गुरु गोबिंद सिंह को शीश झुकाएँ

Hindi Guide for Class 3 PSEB गुरु गोबिंद सिंह को शीश झुकाएँ Textbook Questions and Answers

अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर

I. बताओ

1. कविता में इतिहास पुरुष किसे कहा गया
उत्तर-
कविता में इतिहास पुरुष गुरु गोबिन्द सिंह जी को कहा गया है।

2. गुरु गोबिन्द सिंह जी को वंश दानी क्यों कहा जाता है ?
उत्तर-
गुरु गोबिन्द सिंह जी ने अपने पिता और अपने चारों पुत्रों को देश और धर्म की रक्षा की खातिर न्योछावर कर दिया। इस प्रकार उन्होंने अपने वंश को ही देश पर लुटा दिया। इसी कारण उन्हें ‘वंशदानी’ कहा जाता है।

3. खालसा पंथ की स्थापना किसने की थी ?
उत्तर-
खालसा पंथ की स्थापना श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी ने की थी।

4. गुरु गोबिन्द सिंह जी का अन्य क्या नाम प्रसिद्ध है ?
उत्तर-
गुरु गोबिन्द सिंह जी को ‘दशम गुरु’ के नाम से भी जाना जाता है।

5. गुरु गोबिन्द सिंह जी ने अपने देश और धर्म की खातिर कितने पुत्रों का बलिदान दिया था ?
उत्तर-
गुरु गोबिन्द सिंह जी ने अपने देश और धर्म की खातिर अपने चारों पुत्रों का बलिदान दिया था।

II. कविता की पंक्तियाँ पूरी करो

देश-धर्म पर वार दिए सुत,
…………………………..
चिड़ियों से जो बाज लड़ाए,
…………………………..
वंश दान करने वाले,
…………………………..
उत्तर-
(i) देश-धर्म पर वार दिए सुत, उस दानी को शीश झुकाएँ।
(ii) चिड़ियों से जो बाज लड़ाए, उस योद्धा पर बलि-बलि जाएँ।
(iii) वंश दान करने वाले, गुरु गोबिन्द सिंह पर बलि-बलि जाएँ।

III. वाक्यों में प्रयोग करो

इतिहास पुरुष = …………………………..
वंश दानी = …………………………..
देश धर्म = …………………………..
संत सिपाही = …………………………..
उत्तर-
(i) इतिहास पुरुष = श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी एक इतिहास पुरुष हैं।
(ii) वंश दानी = अपने पूरे वंश को धर्म की वेदी पर न्योछावर करने के कारण श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी वंश दानी कहलाते हैं।
(iii) देश-धर्म = हमारे लिए देश-धर्म पहले है।
(iv) संत सिपाही = संत सिपाही गुरु गोबिन्द सिंह जी का जन्म पटना में हुआ।

IV. तुक मिलाओ

सुनायें कहलाये।
उठाता झुकायें
आना बनाता।
आये जाना।

उत्तर-
(i) सुनायें = झुकायें।
(ii) उठाता = बनाता।
(iii) आना = जाना।
(iv) आये = कहलाये।

V. दो-दो पर्यायवाची लिखो

शीश = ………………………….. …………………………..
सुत = ………………………….. …………………………..
तलवार =………………………….. …………………………..
कथा= ………………………….. …………………………..
पितागुरु = ………………………….. …………………………..
उत्तर
(i) शीश = सिर, माथा।
(ii) सुत = बेटा, तनय।
(iii) तलवार कृपाण, खड्ग।
(iv) कथा = कहानी, गाथा।
(v) पिता = तात, बाप।
(vi) गुरु = शिक्षक, अध्यापक।

VI. ‘इतिहास’ शब्द में ‘इक’ लगाकर नया शब्द ‘ऐतिहासिक बना। इसी प्रकार ‘इक’ लगाकर नए शब्द बनाओ –

धर्म + इक = …………………………..
समाज + इक = …………………………..
परिवार + इक = …………………………..
अन्तर + इक = …………………………..
उत्तर-
(i) धर्म + इक = धार्मिक।
(ii) समाज + इक = सामाजिक।
(iii) परिवार + इक = पारिवारिक।
(iv) अन्तर + इक = .. आन्तरिक।

VII. चौखाने में सिक्खों के दस गुरुओं के नाम छिपे हैं। उन पर गोला लगाओ और सामने क्रम अनुसार उनके नाम लिखो –
PSEB 3rd Class Hindi Solutions Chapter 22 गुरु गोबिंद सिंह को शीश झुकाएँ 1
उत्तर-
दस गुरुओं के नाम

  1. श्री गुरु नानक देव जी
  2. श्री गुरु अंगद देव जी
  3. श्री गुरु अमरदास जी
  4. श्री गुरु रामदास जी
  5. श्री गुरु अर्जुन देव जी
  6. श्री गुरु हर गोबिन्द जी
  7. श्री गुरु हरिराय जी
  8. श्री गुरु हरि कृष्ण जी
  9. श्री गुरु तेग़ बहादुर जी
  10. श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी।

गुरु गोबिंद सिंह को शीश झुकाएँ Summary & Translation in Hindi

पद्यांशों के सरलार्थ

1. आओ तुम्हें इतिहास पुरुष के, बलिदानों की कथा सुनाएँ। देश धर्म पर वार दिए सुत, उस दानी को शीश झुकाएँ। जीती कौमें बलिदानों पर, यह इतिहास बताता है। देश धर्म की रक्षा करने, सन्त सिपाही आता भेज पिता को धर्म की खातिर, खुद तलवार उठाता है। पंथ खालसा का सिरजन कर, इक इतिहास बनाता है। चिड़ियों से जो बाज लड़ाए, उस योद्धा पर बलि-बलि जाएँ। देश धर्म पर वार दिए सुत, उस दानी को शीश झुकाएँ। सरलार्थ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी हिन्दी पाठ्यपुस्तक से कविता “गुरु गोबिन्द सिंह को शीश झुकाएँ” से ली गई हैं। इसमें कवि ने सिक्खों के दसवें गुरु गोबिन्द सिंह जी के त्याग और बलिदान का वर्णन किया है। कवि कहता है कि आओ आज तुम्हें एक ऐसे वीर की कहानी सुनाएँ जिसने अपने त्याग, और बलिदान से इतिहास ही लिख दिया। जिस वीर ने अपने देश और अपने धर्म के लिए अपने बेटों को न्योछावर कर दिया, उस महादानी को अपना शीश नमन करें।

कवि बताता है कि बलिदान के बल पर ही राष्ट्र जीता है और इन्हीं बलिदानों से इतिहास बनता है। इतिहास तो यही बताता है कि देश और धर्म की रक्षा करने के लिए सन्त सिपाही गुरु गोबिन्द सिंह जी इस संसार में आए जिन्होंने अपने पिता को भी धर्म की खातिर बलिदान देने को भेज दिया और जुल्मों को रोकने के लिए खुद तलवार भी उठा ली। पंथ की सृजना (खालसा पंथ की स्थापना) करके जिसने एक इतिहास लिख दिया। वह योद्धा, जिसने चिड़ियों से बाज़ों को लड़वा दिया। उस वीर योद्धा पर बलिहारी जाएँ। जिस वीर ने अपने देश और धर्म की खातिर अपने बेटों को भी न्योछावर कर दिया, उस दानी, वीर को अपना शीश झुकाएँ। भाव-विशेष-कवि ने वीर सिपाही गुरु गोबिन्द सिंह जी के प्रति अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किए हैं।

2. धर्म है पहले देश है पहले, बाकी आना जाना है। कुर्बानी की अजब कहानी, को फिर से दोहराना है। दीवारों में चिने लाल दो, धर्म-युद्ध में काम दो आए। पिता दान-फिर पुत्र दान कर, वंशदानी जो कहलाए॥ वंश दान करने वाले, गुरु गोबिन्द सिंह पर बलि-बलि जाएँ। देश धर्म पर वार दिए सुत, उस दानी को शीश झुकाएँ।

सरलार्थ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी हिन्दी पाठ्यपुस्तक से कविता ‘गुरु गोबिन्द सिंह को शीश झुकाएँ’ से ली गई हैं। इसमें कवि ने सिक्खों के दसवें गुरु गोबिन्द सिंह जी के त्याग और बलिदान की गाथा का वर्णन किया है। कवि बताते हैं कि गुरु गोबिन्द सिंह जी के लिए देश और धर्म पहले था। उनके बलिदान की कहानी को आज फिर दोबारा से सुनना है। उनके दो वीर बेटे दीवारों में चिनवा दिए गए और दो बेटे धर्म की रक्षा करते काम आए। इस वीर पुरुष ने पहले अपने पिता और फिर अपने चारों पुत्रों को देश के लिए, अपने धर्म की रक्षा के लिए दान में दे दिया और ऐसा करके वे अनूठे वीर पुरुष कहलाए जिन्होंने अपने वंश का ही दान दे दिया। ऐसे वंश-दानी, गुरु गोबिन्द सिंह जी पर आओ बलिहार जाएँ। जिस वीर पुरुष ने अपने देश और धर्म की रक्षा के लिए अपने बेटों तक को न्योछावर कर दिया, आओ उस महादानवीर को सिर झुकाएं। भाव-विशेष-कवि ने सन्त सिपाही गुरु गोबिन्द सिंह जी के प्रति अपने श्रद्धा-सुमन अर्पित किए हैं।

कठिन शब्दों के अर्थ

इतिहास-पुरुष = इतिहास रच देने वाले व्यक्ति।
सुत = बेटा।
बलिदान = कुर्बानी।
वार दिए = न्यौछावर कर दिए, कुर्बान कर दिए।
दानी = दान देने वाला।
शीश झुकाना = नमन करना।
कौम = राष्ट्र।
रक्षा करना = बचाना।
खातिर = के लिए।
खुद = स्वयं।
सिरजन = निर्माण, बनाना।
बाज = पक्षी का नाम।
यौद्धा = युद्ध करने वाला।
अजब = अद्भुत।
दोहराना = दोबारा से।
चिने = चिनवाए।
लाल = बेटे।
धर्म-युद्ध = धर्म की, न्याय की लड़ाई।
काम आए = मारे गए।
वंशदानी = वंश को दान करने वाला (यहाँ गुरु गोबिन्द सिंह जी को वंशदानी कहा गया है )

PSEB 3rd Class Hindi Solutions Chapter 21 उपकार का फल

Punjab State Board PSEB 3rd Class Hindi Book Solutions Chapter 21 उपकार का फल Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 3 Hindi Chapter 21 उपकार का फल

Hindi Guide for Class 3 PSEB उपकार का फल Textbook Questions and Answers

अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर

I. बताओ

1. भेड़िये का स्वभाव कैसा था ?
उत्तर-
भेड़िया बहुत परोपकारी स्वभाव का था।

2. मित्र जानवर भोजन करने को क्यों व्याकुल थे ?
उत्तर-
बहुत दिनों के बाद जानवरों को इतनी अधिक मात्रा में भोजन खाने को मिल रहा था इसीलिए वे सभी भोजन करने को व्याकुल थे।

3. अजनबी जानवरों के संकट और भूख को देखकर भेड़िये ने क्या कहा?
उत्तर-
अजनबी जानवरों के संकट और भूख को देखकर भेड़िये ने कहा, “कोई बात नहीं, सौभाग्यवश हम भोजन कर ही रहे हैं, आप भी भोजन कर लीजिए”।

4. भेड़िये ने जब अजनबी जानवरों को भोजन करने को कहा तो मित्र जानवरों को गुस्सा क्यों आया ?
उत्तर-
वास्तव में भेड़िये व उसके मित्रों को बहुत दिनों के पश्चात् भर पेट भोजन करने को मिल रहा था। उस पर भेड़िये ने उसी भोजन में से दूसरे अजनबी जानवरों को भी खाने को कह दिया तो मित्र जानवरों को भेड़िये की इस बात पर गुस्सा आया।

5. मित्र जानवर नंदन वन छोड़कर क्यों चले गए?
उत्तर-
नंदन वन में बीमारी फैल गई थी, जिससे सभी जानवर मरने लगे थे। अपनी जान बचाने के लिए नंदन वन के जानवर वन छोड़कर चले गए।

6. हिरण ने उन्हें जंगल में जाने क्यों नहीं दिया ?
उत्तर-
हिरण को जंगल के स्वामी शेर का हुक्म था कि इस जंगल में बाहर के जंगल का कोई भी जानवर न आने पाए। इसी आज्ञा का पालन करते हुए हिरण ने उन्हें जंगल में प्रवेश करने नहीं दिया।

7. शेर ने मित्र जानवरों को जंगल में रहने की अनुमति क्यों दी?
उत्तर-
शेर को जब एक जानवर ने आकर बताया कि ये वही मित्र जानवर हैं जिन्होंने संकट के समय हमारी मदद की थी तो शेर ने खुशी-खुशी उनकी सहायता करना मान लिया और उन्हें जंगल में रहने की अनुमति दे दी।

II. उपयुक्त शब्द चुनकर वाक्य पूरे करो

संकट, इकट्ठा, परोपकारी, गुस्सा, मित्रता कर्त्तव्य, एहसान।
1. भेड़िया बहुत ही ……………………….. स्वभाव का था।
2. वे भोजन ……………………….. ही करते थे।
3. मित्र जानवरों को भेड़िये पर ……………………….. आया किन्तु ……………………….. के कारण वे कुछ न कह पाये।
4. हमें ……………………….. के समय दूसरों की मदद करनी | चाहिए।
5. मित्रो ! यह हमारा ……………………….. नहीं बल्कि ……………………….. था।
उत्तर-
1. परोपकारी
2. इकट्ठा
3. गुस्सा, मित्रता
4. संकट
5. एहसान, कर्तव्य।

III. वाक्य बनाओ

खाली हाथ लौट आना = निराश वापिस आ जाना।
मुँह पर ताला लग जाना = चुप्पी साध लेना /जवाब न सूझना।
एक टक देखना = लगातार देखना।
चेहरा खिल उठना = खुश होना।
मँह में पानी भर आना = ललचाना।
उत्तर-
(i) खाली हाथ लौट आना = निराश वापिस आ जाना-मोहन फल खरीदने बाजार गया था लेकिन बाजार बन्द होने के कारण मोहन को खाली हाथ ही लौट आना पड़ा।
(ii) मुँह पर ताला लग जाना = चुप्पी साध लेना-सेठ की खरी-खोटी बातें सुनकर नौकर के मुँह पर ताला लग गया।
(iii) एक टक देखना= लगातार देखना सभी बच्चे जादूगर को एकटक देख रहे थे।
(iv) चेहरा खिल उठना = खुश होना अध्यापक के मुँह से अपनी प्रशंसा सुनकर मोहन का चेहरा खिल उठा।
(v) मुँह में पानी भर आना = ललचाना-पके अंगूरों के गुच्छे देखकर लोमड़ी के मुँह में पानी भर आया।

IV. शब्द में से शब्द ढूँढ़ कर लिखो –
PSEB 3rd Class Hindi Solutions Chapter 21 उपकार का फल 1
चौकोर खानों में से जंगली जानवरों के नाम ढूँढ़कर सामने लिखो-
PSEB 3rd Class Hindi Solutions Chapter 21 उपकार का फल 2
उत्तर-
जंगली जानवरों के नाम –
(i) हिरण
(ii) चीता
(iii) शेर
(iv) बाघ
(v) हाथी
(vi) बंदर
(vii) भेड़िया
(viii) लोमड़ी
(ix) लंगूर
(x) भालू

V. बोलियों का मिलान करो

शेर चिंघाड़ना
चीता डकारना
बंदर रंभाना
भैंस किलकिलाना
गाय हिनहिनाना
सूअर दहाड़ना
हाथी हुरड़-हुरड़
घोडा गुर्राना।

उत्तर-

जानवर बोली
(i) शेर दहाड़ना।
(ii) चीता गुर्राना।
(iii) बंदर किलकिलाना।
(iv) भैंस डकारना।
(v) गाय रंभाना।
(vi) सूअर हुरड़-हुरड़।
(vii) हाथी चिंघाड़ना।
(viii) घोड़ा हिनहिनाना।

VI. लिंग बदलो

PSEB 3rd Class Hindi Solutions Chapter 21 उपकार का फल 3
उत्तर-
पुल्लिग शब्द – स्त्रीलिंग शब्द
(i) शेर = शेरनी।
(ii) हिरण = हिरणी।
(iii) रीछ = रीछनी।
(iv) ऊँट = ऊँटनी।
(v) साँप = साँपिन।
(vi) बाघ = बाघिन।
(vii) हाथी = हथिनी।
(viii) सियार = सियारिन।

उपकार का फल Summary & Translation in Hindi

पाठ का सार

नंदन वन में बहुत से जानवर रहते थे। उन सबमें आपस में खूब दोस्ती थी। भेड़िया भी उन्हीं में से एक था। वह बड़ा दयालु और परोपकारी स्वभाव का था। दूसरों की सहायता के लिए वह हर समय तैयार रहता था। एक और जानवरी का उनकी लिए आहार मिल नहीं रहा था। सभी जानवर भोजन की तलाश में जंगल में घूमते रहे और जिन्हें भी जो कुछ मिला वे इकट्ठा करके ले आए ताकि शाम के समय सभी मिल कर खा सकें। भेड़िया उस दिन सबसे बड़ा शिकार लाया था जिसे देखकर दूसरे जानवरों के मुँह में भी पानी आ गया।

सॅभी ने सोचा कि चलो आज तो सब पेट भर कर खाना खाएंगे। अभी उन्होंने भोजन करना शुरू किया ही था कि भेड़िये की नज़र अपनी ओर आ रहे कुछ अजनबी जानवरों की ओर पड़ी। अजनबी जानवर जब भेड़िये के पास आए तो भेड़िये ने उनसे पूछा कि आपको पहले कभी इस वन में नहीं देखा। क्या आप किसी दूसरे जंगल से आए हो। उन जानवरों ने अपनी कहानी सुनाते हुए बताया कि शिकारी कई दिनों से हमारे जंगल में जानवरों का शिकार कर रहे हैं और हम अपनी जान बचाते हुए घूम रहे हैं। भेड़िये ने उन्हें कहा कि घबराने की कोई बात नहीं। हम लोग भोजन कर रहे हैं आप भी भोजन कर लीजिए। भेड़िये के इस व्यवहार से दूसरे साथियों को बहुत गुस्सा आया लेकिन दोस्ती के कारण किसी ने कुछ न कहा। कुछ दिन रहने के बाद वे अजनबी जानवर वापिस अपने जंगल लौट गए।

कुछ समय बाद एक बार नंदन वन में बीमारी फैल गई। बीमारी के कारण जंगल के जानवर मरने लगे। जानवर जंगल छोड़कर दूसरे किसी स्थान की खोज में जाने लगे। घूमते-घूमते वे एक जंगल में पहुँचे। जंगल में आते ही हिरण ने उन्हें रोक लिया और कहा, “इस जंगल में बाहर के जानवर यहाँ नहीं आ सकते।” भेड़िये ने मदद के लिए प्रार्थना की तो हिरण ने कहा हमारे स्वामी शेर की आज्ञा है और मैं उसके हुक्म की अनदेखी नहीं कर सकता। भेड़िया और उसके साथी अभी कुछ सोच ही रहे थे कि एक जानवर ने उन्हें पहचान कर उनके आने का कारण पूछा। भेड़िये ने उसे सारी बात बताई। वह अपने स्वामी शेर के पास गया और सारी बात बताई। शेर ने उनकी सहायता के लिए हाँ कह दी तो वह उन्हें अपने साथ जंगल में ले आया।

जंगल के सभी जानवरों ने उनकी खूब सेवा की। भेड़िये के मित्र जानवर सोचने लगे कि यह भेड़िये की परोपकारिता का ही परिणाम है कि आज उनकी इतनी सेवा हो रही है। कुछ दिन रहने के बाद भेड़िया और उसके मित्रों ने वापिस अपने घर (जंगल) लौटने की इच्छा की। भेड़िये ने उनका धन्यवाद करते हुए कहा कि संकट के समय हमारी सहायता करके आपने हम पर एहसान किया है। हम आपके बहुत आभारी हैं। अब हमें विदा दो। इस पर जंगल के जानवरों ने कहा कि मित्रो यह हमारा एहसान नहीं बल्कि कर्त्तव्य था। जिस प्रकार आपने हमारी सहायता की थी उसी प्रकार हमने तुम्हारी सहायता करके अपना कर्तव्य निभाया है। भेडिया और उसके साथी वापिस जंगल लौट आए।

कठिन शब्दों के अर्थ

सौभाग्यवंश = किस्मत से; अच्छे भाग्य से।
मित्रता = दोस्ती।
परोपकारी = दूसरों का उपकार करने वाला, हितैषी।
स्वभाव = आदत।
सहायता = मदद।
मुकाबले = तुलना में।
मुताबिक = अनुसार।
भरपेट = पेट-भर कर।
तलाश = खोज।
संध्या = सांझ, शाम के बाद का समय।
परवाह = चिन्ता।
मुँह में पानी भर आया = इच्छा तेज़ होना, लार टपकना।
चेहरा खिल उठा = प्रसन्न हो गए।
ओर = तरफ।
अजनबी = अन्जान, न जान-पहचान वाले।
सौभाग्यवश = किस्मत से, अच्छे भाग्य से।
एकटक = लगातार ।
वन = जंगल।
अन्य = दूसरा ।
सेवा = सहायता।
सौभाग्य = अच्छी किस्मत।
सताए हुए = पीड़ित, दुःखी।
संकट : मुसीबत, मुश्किल।
मदद = सहायता।
मुँह को ताला लगना = चुप हो जाना।
तलाश = खोज।
प्रवेश = दाखिल।
स्वामी = मालिक।
आज्ञा = हुक्म।
उल्लंघन = आदेश न मानना।
वृत्तांत = किस्सा, कहानी।
अवश्य = ज़रूर।
आदेश = हुक्म ।
अनुमति = आज्ञा, इजाज़त।
परिणाम = नतीजा, फल।
विदा = जाना।
एहसान = उपकार, भलाई।
कर्त्तव्य = ज़िम्मेदारी, दायित्व ।
वृत्तांत = कहानी।

PSEB 3rd Class Hindi Solutions Chapter 20 होनहार बालक चंद्रगुप्त

Punjab State Board PSEB 3rd Class Hindi Book Solutions Chapter 20 होनहार बालक चंद्रगुप्त Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 3 Hindi Chapter 20 होनहार बालक चंद्रगुप्त

Hindi Guide for Class 3 PSEB होनहार बालक चंद्रगुप्त Textbook Questions and Answers

अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर

I. बताओ –

1. नंद वंश के सर्वनाश के लिए चाणक्य को कैसे बालक की तलाश थी ?
उत्तर-
नंद वंश का सर्वनाश करने के लिए चाणक्य को तेजस्वी, पराक्रमी और वीर बालक की तलाश थी।

2. बालक चन्द्रगुप्त बचपन से ही कैसा था ?
उत्तर-
बालक चन्द्रगुप्त बचपन से ही बड़ा साहसी, निडर और न्यायकर्ता था। वह बालकों की टोली का राजा बनता था।

3. दोनों मित्र जनपद पर झगड़ा क्यों कर रहे थे ?
उत्तर-
दोनों मित्र झगड़ रहे थे। एक कह रहा था यात्रा पर जाने से पहले मैंने इसे सोने की मोहरें दी थीं यह उन्हें लौटा नहीं रहा। दूसरा अपने हाथ की छड़ी अपने मित्र को थमाते हुए कहता था कि मैंने मोहरें लौटा दी हैं।

4. बालक चन्द्रगुप्त ने न्याय कैसे किया ?
उत्तर-
बालक चन्द्रगुप्त समझ गया कि सोने की मोहरें छड़ी के अन्दर हैं। उसने वह छड़ी तुरन्त मोहरों के असली मालिक को दे दी।

5. क्या यही बालक मगध का भावी सम्राट बन पाया ?
उत्तर-
हाँ, यही बालक आगे चलकर मगध का सम्राट् बना और चन्द्रगुप्त मौर्य के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

II. वाक्यों में प्रयोग करो –

सर्वनाश, उत्सुकता, जनपद, तीक्ष्ण बुद्धि, गुप्तचर, प्रस्थान, भावी।
उत्तर-
सर्वनाश-भूचाल ने कुछ ही क्षणों में सर्वनाश कर दिया था।
उत्सुकता-सभी जादूगर की ओर उत्सुकता से देख रहे थे।
जनपद-जनपद में दो व्यक्ति झगड़ रहे थे।
तीक्ष्ण बुद्धि-चन्द्रगुप्त बचपन से ही तीक्ष्ण बुद्धि बालक था।
गुप्तचर-कश्मीर में पाक गुप्तचरों का जाल फैला है।
प्रस्थान-मैं कल यहाँ से प्रस्थान कर जाऊँगा।
भावी-भावी प्रधानमंत्री कौन होगा, कहना कठिन है।

III. वाक्य पूरे करो-

(i) नंद के राज्य का …………………………. करूँगा।

(ii) आज हम खुले दरबार में ………………………….. करेंगे।

(iii) दीन दुःखियों की सहायता ………………………….. से तुरन्त की जाए।
उत्तर-
(i) नंद के राज्य का सर्वनाश करूँगा।
(ii) आज हम खुले दरबार में न्याय करेंगे।
(iii) दीन दुःखियों की सहायता राजकोष से तुरन्त की जाए।

IV. वाक्य बनाओ

1. सौगन्ध खाना (कार्य करने की प्रतिज्ञा लेना) हम सब सौगन्ध खाते हैं कि हम अपने देश की रक्षा में मर मिटेंगे।
2. नींव रखना (कार्य का आधार बनाना)-नेता जी ने हमारे गाँव में विद्यालय निर्माण की आज नींव रख दी।
3. मुट्ठी भींचना (किसी बात को लेकर मन में जोश आना)-शत्र को देखते ही हम सब मुट्ठी भींचकर आगे बढ़ गए थे।

V. पढ़ो और समझो

मान = अपमान
शान्ति = अशान्ति
न्याय = अन्याय
सुख = दु:ख।
निर्देश-ये विपरीतार्थक शब्द जोड़े हैं। विद्यार्थी इनके अर्थों को समझें।

‘क’ में बॉक्स में दिये शब्द का विपरीत शब्द ‘ख’ भाग में से ढूँढ़कर बॉक्स बनाओ

1. किसी का अपमान मत करो 1. हमें समाज में अशांति नहीं फैलानी चाहिए।
2. हमें अपना काम ईमानदारी से करना चाहिए। 2. राजा की अवज्ञा कौन कर सकता है?
3. उचित कार्य करने पर पुरस्कार मिलेगा 3. सभी का सम्मान करो।
4. यह राजा की आज्ञा है। 4. अनुचित कार्य करने पर दंड मिलेगा।
5. कक्षा में शांति से बैठो। 5. हमें किसी के साथ बेईमानी नहीं करनी चाहिए।

उत्तर-

1. किसी का अपमान मत करो। 1. सभी का सम्मान करो।
2. हमें अपना काम ईमानदारी से करना चाहिए। 2. हमें किसी के साथ बेईमानी नहीं करनी चाहिए।
3. उचित कार्य करने पर पुरस्कार मिलेगा। 3. अनुचित कार्य करने पर दंड मिलेगा।
4. यह राजा की आज्ञा है। 4. राजा की अवज्ञा कौन कर सकता है?
5. कक्षा में शांति से बैठो। 5. हमें समाज में अशांति नहीं फैलानी चाहिए।

VI. निम्नलिखित शब्दों के सामने दिए गए ब्लैक बोर्ड में समान अर्थ वाले शब्द छिपे हैं, उन्हें ढूँढ़कर सही शब्द के आगे लिखो –

साहस : शूरता शौर्य
झगड़ा: …………………………….. ……………………………..
ब्राह्मण: …………………………….. ……………………………..
सम्राट: …………………………….. ……………………………..
कोष: …………………………….. ……………………………..
क्रोध: …………………………….. ……………………………..
वृद्ध: …………………………….. ……………………………..
लड़ाई: …………………………….. ……………………………..
खजाना: …………………………….. ……………………………..
मित्र: …………………………….. ……………………………..

उत्तर-

साहस शूरता शौर्य
झगड़ा तकरार
ब्राह्मण विप्र वामन
सम्राट राजा नृप
कोष भंडार
क्रोध गुस्सा रोष
वृद्ध बूढ़ा वयोवृद्ध
मित्र सखा दोस्त

VII. शब्द के जोड़ों(शब्द-युग्म)को ‘और’ लगाकर लिखिए और उनके अर्थ समझो

दीन-दुःखियों दीन और दुःखियों
राजा-प्रजा ……………………..
माता-पिता ……………………..
लालन-पालन ……………………..
उत्तर-
(i) दीन-दुःखियों दीन और दुःखियों।
(ii) राजा-प्रजा राजा और प्रजा।
(iii) माता-पिता माता और पिता।
(iv) लालन-पालन लालन और पालन।

होनहार बालक चंद्रगुप्त Summary & Translation in Hindi

पाठ का सार
चाणक्य और उसका मित्र वररुचि मंच पर आते हैं। चाणक्य कहता है कि मैं नंद वंश का सर्वनाश कर दूंगा। मैं ऐसे वीर बालक की खोज में हूँ जो नंद वंश को खत्म करके एक मज़बूत साम्राज्य कायम कर सके। सामने से बालकों की टोली आती है। उसमें एक बालक राजा बना हुआ है। वह टीले पर ही अपना दरबार लगा देता है। वह झगड़ रहे दो व्यक्तियों का न्याय करता है। चाणक्य उस बालक से बहुत प्रभावित हुआ। ब्राह्मण वेश में चाणक्य आकर कहता है-महाराज, मैं बहुत बूढ़ा हूँ। एक गाय मिल जाए तो परिवार का पालन-पोषण कर सकता हूँ। बालक ने कहा| मैदान में बहुत सी गाएँ चर रही हैं, जितनी चाहो ले जाओ। तुम्हें किसी का डर नहीं।

बालक महामन्त्री से कहता है कि राजकोष से दीन-दुःखियों की सहायता की जाए। चाणक्य यह | सुन वररुचि से कहता है शीघ्र चलो। मैं इस बालक के माता-पिता से मिलना चाहता हूँ। मैं इसे तक्षशिला ले जाऊँगा। इसकी पढ़ाई की व्यवस्था करूँगा। यही बालक चंद्रगुप्त आगे चल कर मगध का सम्राट बना।

कठिन शब्दों के अर्थ

गुप्तचर = जासूस।
जनपद = बस्ती।
वन = जंगल।
प्रदेश = इलाका।
दृश्य = नज़ारा।
मंच = स्टेज।
क्रोध = गुस्सा।
अपमान = बेइज्जती।
शिखा = चोटी।
स्पर्श = छूना।
सर्वनाश = सब कुछ नष्ट होना।
संभव = मुमकिन।
तेजस्वी = प्रतापी।
पराक्रमी = बलशाली ।
सशक्त = ताकतवर।
साम्राज्य = सल्तनत।
अत्यंत = बहुत ।
प्रभावशाली = असर वाला।
एकत्र = इकट्ठा।
उत्सुकता = जिज्ञासा।
कल्याण = भला।
प्रस्तुत = उपस्थित ।
जनपद = शहर।
विनम्रता = विनयशीलता।
सौगंध= शपथ।
वृत्तांत = ब्यौरा ।
आश्चर्य = हैरानी।
राजकीय कोष = शाही खज़ाना।
प्रस्थान = चलना, कूच करना।
तीक्षण = तीव्र।
भावी = आगे आने वाला।
भूमिका = भेष बदलना।

PSEB 3rd Class Hindi Solutions Chapter 19 शिष्टाचार

Punjab State Board PSEB 3rd Class Hindi Book Solutions Chapter 19 शिष्टाचार Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 3 Hindi Chapter 19 शिष्टाचार

Hindi Guide for Class 3 PSEB शिष्टाचार Textbook Questions and Answers

अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर ।

I. बताओ

1. शिष्टाचार क्या होता है ?
उत्तर-
दूसरे लोगों के साथ सभ्य और अच्छा व्यवहार ही शिष्टाचार है।

2. शिष्ट व्यक्तियों से जब कोई गलती हो जाती है तो वे क्या करते हैं ?
उत्तर-
शिष्ट व्यक्तियों से जब कोई गलती हो जाती है तो वे खेद प्रकट करते हुए सहज ही अपनी गलती स्वीकार करते हैं।

3. स्कूल बस में किस तरह चढ़ना और उतरना चाहिए ?
उत्तर-
स्कूल बस में चढ़ते और उतरते समय धक्का मुक्की नहीं करनी चाहिए बल्कि लाइन बनाकर चढ़ना और उतरना चाहिए।

4. कक्षा में किस तरह बैठना चाहिए ?
उत्तर-
कक्षा में सीधा और ध्यानपूर्वक बैठना चाहिए।

5. प्रार्थना सभा में हमें कैसे खड़े होना चाहिए ?
उत्तर-
प्रार्थना सभा में हमें पंक्ति बनाकर तथा हाथ जोड़कर खड़े होना चाहिए।

II. सही शब्द चुनो और वाक्य पूरे करो

कृपया, मिलकर, झूठ, क्षमा, पंक्ति

1. अपनी गलती मान लेने वाले को ………….. कर देना चाहिए।

2. अच्छे बच्चे किसी से कोई चीज़ माँगते समय …………….. शब्द का प्रयोग करते हैं।

3. अच्छे बच्चे सबसे ………………… रहते हैं।

4. हमें …………… नहीं बोलना चाहिए।

5. हमें प्रार्थना सभा में ………………. बनाकर चलना चाहिए।
उत्तर-
(1) क्षमा
(2) कृपया
(3) मिलकर
(4) झूठ
(5) पंक्ति ।

III. सही शब्दों के जोड़े मिलाओ

माँगी वस्तु मानना
हाथ बैठना।
प्रणाम सुनना
धीरे रखना
शान्तिपूर्वक बोलना।
ध्यानपूर्वक जोड़ना
सफ़ाई लौटाना
आज्ञा करना

उत्तर-

माँगी वस्तु लौटाना।
हाथ जोड़ना।
प्रणाम करना।
धीरे बोलना।
शान्तिपूर्वक बैठना।
ध्यानपूर्वक सुनना।
सफ़ाई रखना।
आज्ञा बैठना

IV. श्रुत लेख
धन्यवाद, व्यवहार, वापिस, पेंसिल, अहसास, धक्कामुक्की, उंगलियाँ, शिकायत, शिष्टाचार, उत्तर, बिल्कुल।
उत्तर-
विद्यार्थी इन शब्दों को अपनी उत्तरपुस्तिका में लिखने का अभ्यास करें।

V. संयुक्त अक्षर से नया शब्द बनाओ –

शब्द संयुक्त अक्षरनया शब्द
अक्सर क्स बक्सा
तुम्हारी म्ह ……………………………………..
व्यवहार व्य ……………………………………..
छुट्टी दद ……………………………………..
जल्दबाजी ल्द ……………………………………..
धक्का क्क ……………………………………..

उत्तर –

 शब्द संयुक्त अक्षर नया शब्द
(i) अक्सर क्स बक्सा ।
(ii) तुम्हारी म्ह लम्हें।
(iii) व्यवहार व्य व्यापार।
(iv) छुट्टी दद भट्टी।
(v) जल्दबाजी ल्द हल्दी।
(vi) धक्का क्क पक्का ।

चौकोर खाने में दिए गए शब्दों/ शब्दांशों की सहायता से समान अर्थ वाले शब्दों को लिखो। बाएँ से दाएँ –

1. मौका
3. बिना कुछ कहे सुने अर्थात् मौन रहकर
7. अन्दर का विपरीत शब्द
4. स्कूल।

ऊपर से नीचे
1. पढ़ाने वाला
2. कृपा करके
5. बहानेबाज़ी
6. जिसे स्कूल में चपड़ासी बजाता है।
PSEB 3rd Class Hindi Solutions Chapter 19 शिष्टाचार 1
उत्तर
PSEB 3rd Class Hindi Solutions Chapter 19 शिष्टाचार 2

शिष्टाचार Summary & Translation in Hindi

पाठ का सार

सभ्य आचरण और अच्छा व्यवहार ही शिष्टाचार कहलाता है। जीवन में इसका बहुत महत्त्व है। बातचीत करते समय सभी को एक-दूसरे से शिष्टाचार से बात करनी चाहिए। छोटों को बड़ों से और बड़ों को छोटों से बात करते समय शिष्टाचार का ध्यान रखना चाहिए। यदि किसी से कोई वस्तु लेनी हो तो कृपया’ शब्द का प्रयोग करें और जब वस्तु मिल जाए तो ‘धन्यवाद’ करना चाहिए। किसी से कोई चीज़ लेकर उसे वापिस न करना, टालमटोल करना, झूठ बोलना और किसी की कोई चीज़ चुराना, बुरी बातें हैं। अपनी गलती को मान लेना शिष्टाचार की मुख्य निशानी है।

छुट्टी या आधी छुट्टी के समय कुछ बच्चे धक्का मुक्की करते हैं। स्कूल बस में चढ़ते या उतरते समय भी कुछ बच्चे एक-दूसरे को धक्का मारते हुए भागते हैं। यह शिष्टाचार नहीं है। बस में लाइन बनाकर चढ़ना व उतरना चाहिए। बस के अन्दर भी शान्तिपूर्वक बैठना चाहिए। उंगलियाँ चटकाना या नाखून चबाना अच्छी बात नहीं है। जब अध्यापक पढ़ा रहे हों तो उनकी बात ध्यान से सुननी चाहिए।

बेकार में ही इधर-उधर देखना या बातें करना ठीक नहीं। कक्षा में ध्यानपूर्वक और सीधा बैठना चाहिए। जब कभी अध्यापक आपसे कोई प्रश्न पूछे जिसका उत्तर आपको आता हो तो अपना हाथ खड़ा करना चाहिए और जब अध्यापक आपसे पूछे तभी उत्तर देना चाहिए। एक साथ ऊँची आवाज़ में बोलना भी शिष्टाचार नहीं है। बच्चो ! एक बात याद रखना कि शिष्टाचार का पालन करने वाले को ही सभी पसन्द करते हैं।

कठिन शब्दों के अर्थ

व्यवहार = बर्ताव।
सर = श्रीमान।
शिष्टाचार = शिष्ट अर्थात् अच्छा व्यवहार।
उम्र = आयु।
वस्तु = चीज़।
झूठ = मिथ्या, असत्य।
वापिस करना = लौटा देना।
कक्षा = क्लास, अध्यापन का कमरा।
टालमटोल करना = बहाने बनाना।
क्षमा = माफ।
अहसास = आभास, महसूस होना, लगना।
खेद = दुःख, अफसोस।
सहज = आसानी से।
स्वीकार = मानना।
धमा चौकड़ी = उछलकूद, खेलना-कूदना।
धक्का-मुक्की करना = धक्का मारते हुए आगे बढ़ना।
लाइन = कतार, पंक्ति।
व्यर्थ = बेकार।
अवसर = मौका।
शिकायत = उलाहना, असंतोष दूर करने के लिए किया गया आवेदन।
आज्ञा = हुक्म।
शोरगुल = हल्ला-गुल्ला।
मेधावी = बुद्धिमान, ज्ञानी, तीव्र बुद्धि वाला।

PSEB 3rd Class Hindi Solutions Chapter 18 रॉक गार्डन

Punjab State Board PSEB 3rd Class Hindi Book Solutions Chapter 18 रॉक गार्डन Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 3 Hindi Chapter 18 रॉक गार्डन

Hindi Guide for Class 3 PSEB रॉक गार्डन Textbook Questions and Answers

अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर

I. बताओ

1. चार्वी छुट्टियाँ मनाने किसके घर और कहाँ गयी थी ?
उत्तर-
चार्वी छुट्टियाँ मनाने मामा-मामी जी के पास दिल्ली गई थी।

2. चार्वी की सहेली ने दिल्ली में उसे कहाँकहाँ घुमाया ?
उत्तर-
चार्वी की सहेली ने दिल्ली में उसे लाल किला, कुतुबमीनार, चाँदनी चौक में घुमाया और मेट्रो ट्रेन का सफर भी करवाया।

3. चण्डीगढ़ में क्या-क्या देखने योग्य है ?
उत्तर-
चण्डीगढ़ में रोज गार्डन, रॉक गार्डन. सुखना झील और आर्ट गैलरी आदि देखने योग्य स्थल हैं।

4. चार्वी को चण्डीगढ़ में सबसे अच्छा स्थान कौन-सा लगा ?
उत्तर-
चार्वी को चण्डीगढ़ में सबसे अच्छा स्थान रॉक गार्डन लगा।

5. रॉक गार्डन का निर्माण किसने किया ?
उत्तर-
रॉक गार्डन का निर्माण श्री नेकचन्द सैनी ने किया।

6. रॉक गार्डन में किन चीज़ों से कलाकृतियों का निर्माण किया गया है ?
उत्तर-
श्री नेकचन्द सैनी ने बेकार की चीज़ों जैसे फ्यूज़ हुई ट्यूब-लाइटों, टूटी हुई टाइलों, टूटी चूड़ियों, वृक्षों के तनों, बोतलों के ढक्कनों, खराब प्लास्टिकों, पुराने घिसे टायरों आदि से सुन्दर कलाकृतियों का निर्माण किया है।

II. शब्दों के भीतर शब्द को ढूँढ़ो

निम्नलिखित शब्दों को ध्यान से देखो। बच्चो आपको इनके भीतर ही दो और शब्द बने मिलेंगे। उन्हें ढूँढ़ो और लिखो-

मूल शब्द शब्दों में छिपे शब्द
1. निस्सन्देह संदेह। देह।
2. सजीव ……………………….. ………………………..
3. नेकचन्द ……………………….. ………………………..
4. सुन्दरता ……………………….. ………………………..
5. आनन्द ……………………….. ………………………..

उत्तर-

मूल शब्द शब्दों में छिपे शब्द
1. निस्सन्देह संदेह। देह।
2. सजीव सजी जीव।
3. नेकचन्द नेक चन्द।
4. सुन्दरतासुन्दर सुन्दर  दर।
5. आनन्द  आनन्द नन्द।

बच्चो ! हर एक का कोई न कोई नाम ज़रूर होता है। दुनिया में कुछ भी ऐसा नहीं जिसका कोई नाम न हो। नाम भी तरह-तरह के होते हैं-व्यक्तियों के नाम, पशु-पक्षियों के नाम, चीज़ों के नाम, शहर, देशों के नाम, जगहों के नाम, पेड़-पौधों के नाम, फलों, सब्जियों, फूलों के नाम आदि।

बच्चो ! इस पाठ में आए नामों को ढूँढ़कर लिखो –

(1) व्यक्तियों के नाम : मेधावी चार्वी रिदम
(2) महीनों के नाम: …………………………………… …………………………………… ……………………………………
(3) रिश्तों के नाम: …………………………………… …………………………………… ……………………………………
(4) शहरों के नाम: …………………………………… …………………………………… ……………………………………
(5) जगहों के नाम: …………………………………… …………………………………… ……………………………………
(6) चीज़ों के नाम: …………………………………… …………………………………… ……………………………………
(7) पशु-पक्षियों के नाम : …………………………………… …………………………………… ……………………………………
(8) शरीर के अंगों के नाम : …………………………………… …………………………………… ……………………………………

उत्तर –

(1) व्यक्तियों के नाम : मेधावी चार्वी रिदम
(2) महीनों के नाम: मई जून दिसम्बर।
(3) रिश्तों के नाम: मामा-मामी बहन पिता।
(4) शहरों के नाम: दिल्ली चण्डीगढ़ रोपड़।
(5) जगहों के नाम: लाल किला कुतुबमीनार रॉक गार्डन।
(6) चीज़ों के नाम: प्लास्टिक ईंट चूड़ियाँ
(7) पशु-पक्षियों के नाम : हिरण भालू मोर।
(8) शरीर के अंगों के नाम : नाक मुँह  चेहरा।

रॉक गार्डन Summary & Translation in Hindi

पाठ का सार

प्रिय सहेली मेधावी, तुमने अपने पत्र में मुझसे पूछा था कि चण्डीगढ़ में क्या-क्या देखने योग्य है ?
सचमुच! गज़ब का शहर है चण्डीगढ़। यहाँ रोज़ गार्डन, आर्ट गैलरी, सुखना झील आदि अनेक देखने योग्य स्थल हैं किन्तु यहाँ के रॉक गार्डन ने मुझे अत्यधिक प्रभावित किया। रॉक गार्डन को देखकर मुझे ऐसा लगा कि निस्संदेह यह दुनिया किसी अजूबे से कम नहीं। इस अद्भुत रॉक गार्डन का निर्माण श्री नेकचन्द सैनी ने किया। उन्होंने बेकार की चीज़ों जैसे फ्यूज़ हुई ट्यूब लाइटों, टूटी टाइलों, बोतलों के ढक्कनों, मिट्टी के बेकार फैंके घड़ों तथा पुराने घिसे टायरों से तरह-तरह की सुन्दर आकृतियों को बनाया।

इस रॉक गार्डन को तीन भागों में बाँटा गया है। पहले दो भागों में गाँवों की संस्कृति झलकती है। सिर पर घड़े उठाए स्त्रियों, पी०टी० करते बच्चों आदि की कला-कृतियां बहुत ही सुन्दर हैं। पशुपक्षियों जैसे हिरन, भालू, बिल्लियाँ, मोर आदि भी | बड़े सजीव लगते हैं। इनके साथ-साथ पानी के झरने और सुन्दर बाग़ इसकी सुन्दरता को और बढ़ा देते हैं। यहाँ बरामदे में कुछ अद्भुत से आकार दिखाने वाले शीशे भी लगे हुए हैं जिनमें व्यक्ति का कद कभी लम्बा, कभी छोटा, कभी मोटा दिखता है। लोग यहाँ पर लगे झूलों का आनन्द भी लेते हैं। सखी मैं चाहती हूँ कि इस बार की दिसम्बर की छुट्टियों में तुम चण्डीगढ़ मेरे पास चले आओ। मैं तुम्हें इस रॉक गार्डन को दिखाने ले जाऊँगी। अपनी बहन रिदम को भी साथ ले आना।

तुम्हारी प्यारी
सहेली।
चार्वी।

कठिन शब्दों के अर्थ ।

पत्र = चिट्ठी।
अति प्रसन्न = बहुत अधिक खुशी।
रोज़ाना = प्रतिदिन, हर-रोज़।
गज़ब = अद्भुत, निराला।
स्थल = जगह, स्थान।
अत्यधिक = बहुत ज्यादा।
निस्सन्देह = कोई शक नहीं।
भव्य = सुन्दर।
आकृतियों = शक्लों, आकारों।
निर्माण किया = बनाया।
कलाकृतियाँ = सुन्दर आकृतियाँ।
अद्भुत = अनोखा, निराला।
मनोहर = मन को हरने वाली, सुन्दर।
कमाल = अद्भुत, निराला।
अनूठी = निराली।
प्रतीक्षा = इंतज़ार।

PSEB 3rd Class Hindi Solutions Chapter 17 हमारे त्योहार

Punjab State Board PSEB 3rd Class Hindi Book Solutions Chapter 17 हमारे त्योहार Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 3 Hindi Chapter 17 हमारे त्योहार

Hindi Guide for Class 3 PSEB हमारे त्योहार Textbook Questions and Answers

अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर

I. बताओ

1. सर्दी में हम कैसे कपड़े पहनते हैं ?
उत्तर-
सर्दी में हम ऊनी तथा गर्म कपड़े पहनते

2. लोहड़ी का त्योहार किस मास में आता है ?
उत्तर-
लोहड़ी का त्योहार माघ महीने के आरम्भ में आता है।

3. आप होली कैसे मनाते हो ?
उत्तर-
हम एक-दूसरे पर गुलाल लगाकर होली का त्योहार मनाते हैं।

4. वैशाखी आने पर किसान खुश क्यों हो जाता है ?
उत्तर-
वैशाखी आने पर किसान इसलिए खुश हो जाता है कि अब उसे फसलों की रखवाली नहीं करनी पड़ेगी।

5. आप राखी का त्योहार कैसे मनाते हो ?
उत्तर-
हम अपनी बहनों से अपनी कलाइयों पर राखी बंधवा कर राखी का त्योहार मनाते हैं।

6. दीवाली पर आप क्या-क्या करते हो ?
उत्तर-
दीवाली पर हम नए-नए कपड़े पहनते हैं, मिठाइयाँ खाते हैं और पटाखे चलाते हैं।

II. कविता की पंक्तियाँ पूरी करो

मौसम बदले ………………. |
हर मौसम लाए ………………. |
अब देखो आई …………. |
फसलों की अब निपटी. ……….. |
छुट्टियों में फिर मौज ………………. |
नये साल की दी ………………. |
उत्तर-
(i) मौसम बदले बारम्बार।
(ii) हर मौसम लाए त्योहार।
(iii) अब देखो आई वैशाखी।
(iv) फसलों की अब निपटी राखी। ..
(v) छुट्टियों में फिर मौज उड़ाई।
(vi) नये साल की दी बधाई।

III. वाक्यों में प्रयोग करो

मास = ………………………………
परीक्षा = ………………………………
राखी = ………………………………
सजीली = ………………………………
रंग-बिरंगी = ………………………………
उत्तर –
(i) मास = जनवरी मास में बहुत सर्दी पड़ती है।
(ii) परीक्षा = मेरी वार्षिक परीक्षा आने वाली है।
(iii) राखी = सावन महीने में राखी का त्योहार आता है।
(iv) सजीली = बहन सजीली राखी लेकर आई।
(v) रंग-बिरंगी = रंग-बिरंगी होली आई लेकर खुशियाँ अपार।

IV. विलोम शब्द लिखो

दिन = ………
सर्दी = ………
सच = ………
जीत = ………
नया = ………
आगे = ………
उत्तर
(i) दिन = रात।
(ii) सर्दी = गर्मी।
(iii) सच = झूठ।
(iv) जीत = हार।
(v) नया = पुराना।
(vi) आगे = पीछे।

V. अन्तर समझो

राखी – मेरी बहन राखी लाई है। (बहन द्वारा भाई को बाँधे जाने वाला सूत्र, धागा।)
फसलों की राखी समाप्त हो गयी है (रक्षा)
सिर – मेरे सिर में दर्द है। (शरीर का एक भाग) मेरी परीक्षा सिर पर है। (निकट)
सदा – सच बोलो।
आप सचमुच आ गए।
पूरी – मैं पूरी खाऊँगा।
मैंने अपनी तैयारी पूरी कर ली है।
बदला – मैंने उससे बदला लिया।
हमने अपना मकान बदला। उपरोक्त शब्दों में एक से अधिक अर्थ पाए जाने के कारण इन्हें भिन्नार्थक शब्द कहा जाता है।

VI. समान अर्थ वाले शब्द मिलाओ

मास – वर्ष।
परीक्षा – तोहफा।
जीत – महीना।
साल – इम्तिहान।
उपहार – विजय।
उत्तर-
(i) मास – महीना।
(ii) परीक्षा – तोहफा।
(iii) जीत – विजय।
(iv) साल – इम्तिहान।
(v) उपहार – तोहफा।

VII. करो

1. अपने अध्यापक की सहायता से सभी देशी महीनों के नाम लिखो।
2. देशी महीनों के साथ-साथ चलने वाले अंग्रेज़ी महीनों के नाम लिखो।
3. दिनों के नाम लिखो।
निर्देश-विद्यार्थी उपरोक्त तीनों कार्यों के लिए अपने अध्यापक की सहायता लें।
4. त्योहारों के नाम ढूँढकर लिखो
PSEB 3rd Class Hindi Solutions Chapter 17 हमारे त्योहार 1
उत्तर-
(i) लोहड़ी
(ii) राखी
(iii) क्रिसमिस
(iv) गुरुपर्व
(v) तीज
(vi) दीवाली
(vii) होली
(viii) दशहरा
(ix) ईद
(x) हई

हमारे त्योहार Summary & Translation in Hindi

पद्यांशों के सरलार्थ

1. बदले दिन फिर बदले रात,
बदले मास और बदले वार।
मौसम बदले बारम्बार,
हर मौसम लाए त्योहार।

सरलार्थ-
प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी हिन्दी पाठ्यपुस्तक से कविता ‘हमारे त्योहार’ से ली गई हैं। इसमें कवि ने प्रत्येक मौसम में आने वाले त्योहारों के बारे में बताया है। कवि कहता है कि दिन बदलते हैं और रातें बदलती हैं। इनके बदलने से सप्ताह और महीने बदलते जाते हैं। इसी प्रकार बार-बार मौसम बदलते हैं और हर मौसम त्योहार लेकर आता है। भावार्थ-कवि के विचारानुसार प्रत्येक मौसम में कोई न कोई त्योहार आता है।

2. पौष मास में सर्दी आयी,
ऊनी कपड़े पहनो भाई।
माघ मास में आगे-आगे,
लोहड़ी रानी दौड़ी आयी।

सरलार्थ-
प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी हिन्दी पाठ्यपुस्तक से कविता ‘हमारे त्योहार’ से ली गई हैं। इसमें कवि ने प्रत्येक मौसम में आने वाले त्योहारों के बारे में बताया है। कवि कहता है कि पौष मास आने पर सर्दी का मौसम आ जाता है। इस मौसम में ऊनी कपड़े पहनने चाहिएं। पौष मास के बाद माघ महीने के आते ही ‘लोहड़ी’ का त्योहार आ जाता है।

3. फाल्गुन आया, होली आयी,
रंग-बिरंगी खूब मनायी।
अरे परीक्षा सिर पर आयी,
चुपके से फिर गर्मी आयी॥

सरलार्थ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी हिन्दी पाठ्यपुस्तक से कविता ‘हमारे त्योहार’ से ली गई हैं। इसमें कवि ने प्रत्येक मौसम में आने वाले त्योहारों के बारे में बताया है। कवि बताता है कि फाल्गुन का महीना रंगों का त्योहार होली लेकर आता है। हम सब रंगों से भरे इस त्योहार को मनाते हैं। इसके साथ ही हमारी परीक्षा भी आ जाती है और परीक्षा के चलते-चलते धीरे-धीरे गर्मी का मौसम भी चला आता है।

4. अब देखो आयी वैशाखी,
फसलों की निपटी अब राखी।
हुआ दाखिला, छुट्टी पायी,
पूरी गर्मी मौज मनायी॥

सरलार्थ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी हिन्दी पाठ्यपुस्तक से कविता ‘हमारे त्योहार’ से ली गई हैं। इसमें कवि ने प्रत्येक मौसम में आने वाले त्योहारों के बारे में बताया है। कवि बताता है कि अब देखो गर्मी के आते ही वैशाखी का त्योहार आ गया। इस त्योहार के आते ही किसानों की अब फसलों की रखवाली का काम भी पूरा हो गया। अब स्कूलों में
नई कक्षा में दाखिला भी हो गया और छुट्टियाँ पाकर पूरी गर्मियों में मौज-मस्ती की। विशेष-कवि ने वैशाखी के त्योहार और गर्मियों के आनन्द का वर्णन किया है।

5. रिमझिम-रिमझिम वर्षा आयी,
सावन का उपहार है लायी।
भादों में प्रिय बहना आयी,
संग सजीली राखी लायी॥

सरलार्थ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी हिन्दी पाठ्यपुस्तक से कविता ‘हमारे त्योहार’ से ली गई हैं। इसमें कवि ने प्रत्येक मौसम में आने वाले त्योहारों के बारे में बताया है। कवि बताता है कि गर्मियों के बाद अब बरसात का मौसम आ गया है। रिमझिमरिमझिम करती वर्षा की बूंदें पड़ रही हैं। यह वर्षा सावन के महीने का एक सुन्दर तोहफा है। सावन के बाद भादों का महीना आ गया है। इस मौसम में राखी का सुन्दर त्योहार आया है। बहन अपने साथ सुन्दर सजी हुई राखी लेकर आयी है।

6. फिर दशहरा, दीवाली आयी,
सच की जीत, हुई रे भाई।
सबने मिलकर की सफाई,
घर-घर बँटी खूब मिठाई।

सरलार्थ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी हिन्दी पाठ्यपुस्तक से कविता ‘हमारे त्योहार’ से ली गई हैं। इसमें कवि ने प्रत्येक मौसम में आने वाले त्योहारों के बारे में बताया है। कवि बताता है कि राखी के त्योहार के बाद फिर दशहरा और फिर दीपावली का त्योहार आ जाता है। ये दोनों ही त्योहार हमें बताते हैं कि सदा सत्य की ही जीत होती है। दशहरा और दीवाली आने पर सभी मिलकर अपने-अपने घरों की सफाई करते हैं और घर-घर में सब मिठाई बाँटते हैं। भाव विशेष-त्योहारों के अवसर पर लोगों की खुशियों का वर्णन इन पंक्तियों में कवि ने किया है।

7. ईद बाद फिर क्रिसमिस आयी,
केक, मिठाई सबने खायी।
छुट्टियों में फिर मौज़ उड़ायी,
नये साल की दी बधाई।

सरलार्थ-
प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी हिन्दी पाठ्य पुस्तक से कविता ‘हमारे त्योहार’ से ली गई हैं। इसमें कवि ने प्रत्येक मौसम में आने वाले त्योहारों | के बारे में बताया है। कवि बताता है कि ईद का त्योहार आता है और ईद के पश्चात् क्रिसमिस का त्योहार आता है। इन त्योहारों में सभी केक और मिठाई मिलकर खाते हैं। इसके बाद दिसम्बर महीने की सर्दियों की छुट्टियों का मज़ा लेते हैं और उसके साथ ही नया वर्ष आ जाता है। सब मिलकर एकदूसरे को नए साल की बधाई देते हैं। | विशेष-कवि ने भारत देश में प्रत्येक महीने में आने वाले त्योहारों का वर्णन किया है।

कठिन शब्दों के अर्थ

मास = महीने।
वार = दिनों के वार, जैसे सोमवार, मंगलवार।
बारम्बार = बार-बार।
परीक्षा = इम्तिहान।
निपटी = पूरी हुई।
रिमझिम = वर्षा की बूंदों का गिरना।
उपहार = तोहफा, भेंट।
संग = साथ।
सजीली = सजी हुई, सुन्दर।
राखी = रक्षा, एक त्योहार।