PSEB 7th Class Home Science Solutions Chapter 8 बनावटी ढंग से बनाए गए कपड़ों की देखभाल

Punjab State Board PSEB 7th Class Home Science Book Solutions Chapter 8 बनावटी ढंग से बनाए गए कपड़ों की देखभाल Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 7 Home Science Chapter 8 बनावटी ढंग से बनाए गए कपड़ों की देखभाल

PSEB 7th Class Home Science Guide बनावटी ढंग से बनाए गए कपड़ों की देखभाल Textbook Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
रेयॉन किस प्रकार का रेशा है?
उत्तर-
सेल्यूलोज से उत्पादित कृत्रिम रेशा।

प्रश्न 2.
रेयॉन के वस्त्रों पर तेज़ाब का क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर-
शक्तिशाली तेज़ाब तथा क्षार दोनों से ही रेयॉन के वस्त्रों को हानि होती है।

प्रश्न 3.
नायलॉन किस प्रकार का तन्तु है?
उत्तर-
तन्तुविहीन रसायनों से प्राप्त किए जाने वाला।

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लघूत्तर प्रश्न

प्रश्न 1.
गर्मी का नाइलॉन और करेप पर क्या असर होता है?
उत्तर-
गर्मी का नाइलॉन और करेप पर बड़ी जल्दी असर होता है। ये नरम हो जाते हैं। इसके इसी गुण के कारण नाइलॉन की जुराबों की शक्ल दी जा सकती है। लेकिन ज्यादा गर्मी से यह ख़राब हो जाती है। यह पानी नहीं सोखती। इसलिए गर्मियों में अगर इनको पहना जाए तो बेचैनी होती है।

प्रश्न 2.
नाइलॉन के कपड़ों को किस तरह धोना चाहिए?
उत्तर-
अगर नाइलॉन के कपड़े अधिक मैले हों तो 10-15 मिनट के लिए गुनगुने पानी में भिगो देना चाहिए। गुनगुने पानी में साबुन की झाग बनाकर कपड़ों की धोना चाहिए। ज़्यादा मैले हिस्सों को हाथ से मलकर धोना चहिए।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
थर्मोप्लास्टिक और नान थर्मोप्लास्टिक रेशों में क्या अन्तर है?
उत्तर-
थर्मोप्लास्टिक और नान थर्मोप्लास्टिक में अन्तर —

थर्मोप्लास्टिक नान थर्मोप्लास्टिक
(i) ये ज़्यादा गर्मी से सड़ जाते हैं। (i) ये ज़्यादा गर्मी से सड़ते तो नहीं पर खराब हो जाते हैं।
(ii) ये पानी नहीं चूसते, इसलिए सिकुड़ते नहीं और जल्दी सूख जाते (ii) ये देखने में सिल्क की तरह लगते हैं।
(iii) ये आसानी से धोए जा सकते हैं और प्रैस करने की भी अधिक ज़रूरत नहीं पड़ती। (iii) ये पानी में कमजोर हो जाते हैं। इसलिए धोने के समय मलने पर फटने का डर रहता है।

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प्रश्न 2.
रेयॉन के कपड़े धोने के लिए कौन-कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिएं?
उत्तर-
रेयॉन के कपड़े धोने के लिए निम्नलिखित सावधानियां बरतनी चाहिएं —

  1. रेयॉन के वस्त्रों को भिगोना, उबालना या ब्लीच नहीं करना चाहिए।
  2. साबुन मुदु प्रकृति का प्रयोग करना चाहिए।
  3. गुनगुना पानी ही प्रयोग में लाना चाहिए, अधिक गर्म नहीं।
  4. साबुन का अधिक-से-अधिक झाग बनाना चाहिए जिससे साबुन पूरी तरह घुल जाए।
  5. गीली अवस्था में रेयॉन के कपड़े अपनी शक्ति 50% तक खो देते हैं, अतः वस्त्रों में से साबुन की झाग निकालने के लिए उन्हें सावधानीपूर्वक निचोड़ना चाहिए।
  6. साबुन की झाग निचोड़ने के बाद वस्त्र को दो बार गुनगुने पानी में से खंगालना , चाहिए।
  7. वस्त्रों में से पानी को भी कोमलता से निचोड़कर निकालना चाहिए। वस्त्र को मरोड़कर नहीं निचोड़ना चाहिए।
  8. वस्त्र को किसी भारी तौलिए में रखकर, लपेटकर हल्के-हल्के दबाकर नमी को सुखाना चाहिए।
  9. वस्त्र को धूप में नहीं सुखाना चाहिए।
  10. वस्त्र को लटकाकर नहीं सुखाना चाहिए।
  11. वस्त्र को हल्की नमी की अवस्था में वस्त्र की उल्टी तरफ इस्तिरी करना चाहिए।
  12. वस्त्रों को अलमारी में रखने अर्थात् तह करके रखने से पूर्व यह देख लेना चाहिए कि उनमें से नमी पूरी तरह से दूर हो चुकी है या नहीं।

प्रश्न 3.
तेज़ाब, क्षार, रंगकाट और अल्कोहल का रेयॉन और नाइलॉन पर क्या असर होता है ?
उत्तर-
साबुन, क्षार, अल्कोहल का इस पर कोई असर नहीं होता लेकिन तेज़ाब से यह खराब हो जाता है, रंगकाट का भी इस पर कोई असर नहीं होता। इसलिए रंग खराब हुए नाइलॉन के कपड़ों को सफ़ेद करने के लिए रंगकाट का प्रयोग नहीं किया जाता है। इस पर आसानी से पक्के रंग किए जा सकते हैं।

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Home Science Guide for Class 7 PSEB बनावटी ढंग से बनाए गए कपड़ों की देखभाल Important Questions and Answers

अति छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
रेयॉन के वस्त्रों की धुलाई कठिन क्यों होती है?
उत्तर-
क्योंकि रेयॉन के वस्त्र पानी के सम्पर्क से निर्बल पड़ जाते हैं।

प्रश्न 2.
रेयॉन के वस्त्रों के लिए किस प्रकार की धुलाई अच्छी रहती है?
उत्तर-
शुष्क धुलाई (ड्राइक्लीनिंग)।

प्रश्न 3.
रेयॉन के वस्त्रों को धोते समय क्या बातें वर्जित हैं?
उत्तर-
वस्त्र को पानी में फुलाना, ताप, शक्तिशाली रसायनों तथा अल्कोहल का प्रयोग।

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प्रश्न 4.
रेयॉन के वस्त्रों की धुलाई के लिए कौन-स विधि उपयुक्त होती है?
उत्तर-
गूंधने और निपीडन की विधि।

प्रश्न 5.
रेयॉन के वस्त्रों को कहाँ सुखाना चाहिए?
उत्तर-
छायादार स्थान पर तथा बिना लटकाये हुए चौरस स्थान पर।

प्रश्न 6.
रेयॉन के वस्त्रों पर इस्तिरी किस प्रकार करनी चाहिए?
उत्तर-
कम गर्म इस्तिरी वस्त्र के उल्टी तरफ से करनी चाहिए। इस्तिरी करते समय वस्त्र में हल्की सी नमी होनी चाहिए।

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प्रश्न 7.
मानव-निर्मित अथवा मानवकृत तन्तुओं के कुछ उदाहरण दो।
उत्तर-
नायलॉन, पॉलिएस्टर, टेरीलीन, डेक्रॉन, ऑरलॉन, एक्रीलिक आदि।

प्रश्न 8.
रेयॉन किस प्रकार का तन्तु है-प्राकृतिक या मानव-निर्मित?
उत्तर-
रेयॉन प्राकृतिक तथा मानव-निर्मित दोनों ही प्रकार का तन्तु है।

प्रश्न 9.
सबसे पुराना मानवकृत तन्तु कौन-सा है?
उत्तर-
रेयॉन।

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प्रश्न 10.
सेल्युलोज से कौन-सा तन्तु मानव-निर्मित है?
उत्तर-
रेयॉन।

प्रश्न 11.
जानवरों के बालों से प्राप्त होने वाला प्रमुख वस्त्रीय तन्तु कौन-सा है?
उत्तर-
ऊन।

प्रश्न 12.
प्राकृतिक तन्तु वाले पदार्थों से रासायनिक विधियों से नए प्रकार का कौन-सा मुख्य तन्तु प्राप्त किया जाता है?
उत्तर-
रेयॉन।

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प्रश्न 13.
तन्तु स्रोत को कितने भागों में बाँटा जा सकता है?
उत्तर-
दो भागों में—

  1. प्राकृतिक तथा
    मानव-निर्मित।

छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
रेयॉन की विशेषताएं बताइए।
उत्तर-
भौतिक विशेषताएं-रेयॉन का तन्तु भारी, कड़ा तथा कम लचकदार होता है। जब रेयॉन के धागे को जलाया जाता है तो सरलता से जल जाता है। सूक्ष्मदर्शी यन्त्र से देखने पर इसके तन्तु लम्बाकार, चिकने एवं गोलाकार दिखाई देते हैं। रेयॉन में प्राकृतिक तन्यता नहीं होती है। यह वस्त्र रगड़ने से कमजोर हो जाता है तथा इसकी चमक नष्ट हो जाती है। यदि धोते समय वस्त्र को रगड़ा जाये तो छेद होने का भय रहता है। पानी से रेयॉन की शक्ति नष्ट हो जाती है। जब रेयॉन सूख जाता है तो पुनः अपनी शक्ति को प्राप्त कर लेता है। रेयॉन ताप का अच्छा संचालक है। यह उष्णता को शीघ्र निकलने देता है, अतः यह ठण्डा रहता है।
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ताप के प्रभाव से रेयॉन के तन्तु पिघल जाते हैं तथा उनकी चमक नष्ट हो जाती है। धूप रेयॉन की शक्ति को नष्ट करती है।
रासायनिक विशेषताएं-रेयॉन की रासायनिक विशेषताएं कुछ-कुछ रूई के समान ही हैं। क्षार के प्रयोग से रेयॉन की चमक नष्ट हो जाती है। द्रव अम्ल व अम्लीय क्षार का रेयॉन पर प्रयोग किया जा सकता है क्योंकि यह रेयॉन को कोई हानि नहीं पहुँचाता है।

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प्रश्न 2.
टेरीलीन की भौतिक तथा रासायनिक विशेषताएं बताइए।
उत्तर-
भौतिक विशेषताएं-टेरीलीन के तन्तु भारी एवं मज़बूत होते हैं।
सक्ष्मदर्शी यन्त्र द्वारा देखा जाये तो ये रेयॉन एवं नायलॉन के तन्तुओं की भाँति दिखाई देते हैं। ये तन्तु सीधे, चिकने एवं चमकदार होते हैं।
टेरीलीन में नमी को शोषित करने की शक्ति नहीं होती है, इसलिए पानी से इसके रूप में कोई परिवर्तन नहीं आता है।
टेरीलीन तन्तु जलाने पर धीरे-धीरे जलते हैं व धीरे-धीरे पिघलते भी हैं। यह प्रकाश अवरोधक होते हैं।
टेरीलीन के वस्त्र को धोने पर उसमें सिकुड़ने नहीं आती हैं। रासायनिक विशेषताएं
टेरीलीन पर अम्ल का प्रभाव हानिकारक नहीं होता परन्तु, अधिक तीव्र आम्लिक क्रिया वस्त्र को नष्ट कर देती है। क्षार का इस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। किसी भी प्रकार के रंग में इन्हें रंगा जा सकता है।
टेरीलीन के वस्त्र अधिक मज़बूत एवं टिकाऊ होते हैं ।

प्रश्न 3.
ऑरलॉन तन्तुओं की विशेषताएं बताइए।
उत्तर-
सूक्ष्मदर्शी यन्त्र से देखने पर ये हड्डी के समान दिखाई देते हैं। ऑरलॉन में ऊन तथा रूई से कम अपघर्षण प्रतिरोधन-शक्ति होती है।
ऑरलॉन में उच्च श्रेणी की स्थाई विद्युत शक्ति होती है। जलाने पर यह जलता है व साथ-साथ पिघलता भी है।
ऑरलॉन का तन्तु आसानी से नहीं रंगा जा सकता है। रंग का पक्कापन रंगाई की विधि पर तथा वस्तु की बनावट पर निर्भर करता है। इस तन्तु को रंगने के लिए ताँबा-लोहा विधि बहुत सफल हुई है। वस्त्र का सिकुड़ना उसकी बनावट पर निर्भर करता है।
ऑरलॉन के वस्त्रों को धोने के पश्चाः इस्तिरी करने की आवश्यकता नहीं रहती है। यह शीघ्रता से सूख जाते हैं। इन वस्त्रों में टिकाऊपन अधिक होता है।

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एक शब्द में उत्तर दें

प्रश्न 1.
बनावटी ढंग से बनाए धागों को कितने भागों में बाँटा जा सकता है?
उत्तर-
दो भागों में।

प्रश्न 2.
रेयॉन के कपड़ों में ……. नहीं होती।
उत्तर-
अधिक लचक।

प्रश्न 3.
…… को टिड्डियां बड़ी जल्दी खा जाती हैं।
उत्तर-
रेयॉन।

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प्रश्न 4.
टेरीलीन के कपड़ों को ……. में लटका कर सुखाना चाहिए।
उत्तर-
हैंगर।

प्रश्न 5.
……………… के कपड़े को धोने के बाद प्रेस करने की आवश्यकता नहीं रहती।
उत्तर-
ऑरलॉन।

प्रश्न 6.
……………….. से रेऑन की शक्ति घटती है।
उत्तर-
धूप।

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बनावटी ढंग से बनाए गए कपड़ों की देखभाल PSEB 7th Class Home Science Notes

  • बनावटी ढंग से बनाये गए धागों को दो भागों में बाँटा जा सकता है (i) नान थर्मोप्लास्टिक रेशे, (ii) थर्मोप्लास्टिक रेशे। रेयॉन
  • पानी में बहुत कमजोर हो जाती है। इसीलिए नमी युक्त कपड़े को ज़्यादा रगड़ना नहीं चाहिए।
  • रेयॉन लचकदार नहीं होती है।
  • बढ़िया किस्म की रेयॉन जिसका रंग निकलता हो या बहुत भारी कपड़े जैसे गरारा, सूट आदि को ड्राइक्लीन ही करवाना चाहिए।
  • रेयॉन के कपड़े को मरोड़कर नहीं निचोड़ना चाहिए। – रेयॉन को धूप में या लटकाकर नहीं सुखाना चाहिए।
  • रेयॉन कपड़े को बटनों पर प्रैस नहीं करना चाहिए। इससे कपड़ों के फटने का डर रहता है।
  • अगर कपड़े अधिक मैले हों तो उनको 10-15 मिनट के लिए गुनगुने पानी में भिगो देना चाहिए।
  • सफ़ेद कपड़ों को रंगदार कपड़ों से अलग ही धोना चाहिए। नाइलॉन और टेरीलीन के कपड़ों को बहुत हल्की गर्म प्रेस से हल्का-हल्का प्रैस करना चाहिए।

PSEB 6th Class Physical Education Solutions Chapter 4 पंजाब की लोक खेलें

Punjab State Board PSEB 6th Class Physical Education Book Solutions Chapter 4 पंजाब की लोक खेलें Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 6 Physical Education Chapter 4 पंजाब की लोक खेलें

PSEB 6th Class Physical Education Guide पंजाब की लोक खेलें Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
बच्चों की कोई चार खेलों के नाम लिखो।
उत्तर-

  1. लुका-छिपी
  2. गुल्ली डंडा
  3. रस्सी कूदना
  4. कोटला छपाकी।

प्रश्न 2.
पुगने की कितनी विधियां होती हैं ? इनमें से किसी एक विधि का वर्णन कीजिए।
उत्तर–
पुगने के तीन तरीके होते हैं।
पहला तरीका-पहले तीन खिलाड़ी दायां हाथ एक दूसरे हाथ पर रखते हैं और एक समय हाथों को हवा में उछाल कर उल्टा देते हैं। तीन में से अगर दो खिलाड़ियों के हाथ उलेटे और तीसरे खिलाड़ी का हाथ सीधा हो तो वो पुग जाता है। इस तरह बारी-बारी एक को छोड़ कर सभी खिलाड़ी पुग जाते हैं।

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प्रश्न 3.
खेलों की महत्त्व पर नोट लिखिए।
उत्तर-

  1. खेलों की महत्ता-शारीरिक बल, फुर्ती, दिमागी चुस्ती आदि खेलों में आते हैं। उदाहरण के तौर पर जब खिलाड़ी ठीकरियों पर निशाना लगाने की खेल खेलता है तो उसको ध्यान एकाग्रता का प्रशिक्षण मिलता है। कोटला छपाकी’ खेल में चौकस रहने की शिक्षा मिलती है। कई खेलें राष्ट्रीय स्तर पर ही खेली जाती हैं। जैसे कुश्ती और कबड्डी।
  2. कुश्ती और कबड्डी के साथ शारीरिक ताकत आती है।
  3. खेलों के साथ दिमागी चुस्ती भी बढ़ती है।
  4. यह खेलें बच्चों में आपसी साथ को बढ़ाती हैं।
  5. हमारे विरासत और सभ्याचार को कायम रखने में सहायक होते हैं।

प्रश्न 4.
बन्दर किल्ला खेल की विधि के बारे में लिखिए।
उत्तर-
मुहल्ले के सभी बच्चे इकट्ठे होकर बन्दर किल्ला खेलने के लिए किल्ले के लिए जगह का चुनाव करते हैं। खेल शुरू करने से पहले बच्चे गाते हुए एक-दूसरे को कहते हैं –

जुत्तियां, चप्पलां दा,
कर लो वी हीला।
हुण असीं रल के,
खेलना बंदर किल्ला।

बन्दर किल्ला खेलने वाले बच्चे अपनी जूतियों और चप्पलों को उतार कर किल्ले के नज़दीक इकट्ठे कर लेते हैं। किल्ले की निचली तरफ 5-7 मी० की लम्बी रस्सी बांध लेते हैं। बांदर किल्ला खेलने वाले बच्चे बारी देने वाले बच्चे को पुगते हैं। चुनाव करने के बाद बारी देने वाला बच्चा बन्दर माना जाता है।
PSEB 6th Class Physical Education Solutions Chapter 4 पंजाब की लोक खेलें 1

बन्दर बना बच्चा किल्ले के साथ बंधी रस्सी को पकड़कर सभी जूतियों और चप्पलों की रखवाली करता है। बन्दर बना बच्चा रस्सी को बिना छोड़े किसी दूसरे बच्चे को जो आपनी चप्पलें लेने आता है उसको पकड़ता है। दूसरे बच्चे अपनी जूतियां और चप्पलें उठाने की कोशिश करते हैं। अगर चप्पलें उठाते समय बन्दर बना बच्चा किसी दूसरे बच्चे को हाथ लगाये तो बारी उसी बच्चे की आ जाती है। यदि सभी बच्चे बिना पकड़े अपनी चप्पलें और जूतियां उठाने में कामयाब हो जाते हैं तो बारी देने वाला बन्दर बच्चा रस्सी को छोड़ दौड़ेगा और खास जगह पर हाथ लगायेगा। निश्चित जगह पर पहुंचने से पहले-पहले बाकी बच्चे बन्दर बच्चे को चप्पलों से मारते हैं। बन्दर के निश्चित जगह पर पहुंचने पर जूतियां मारनी बंद कर देते हैं। इसके बाद किसी और बच्चे की बन्दर बनने की बारी आ जाती है।

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प्रश्न 5.
आपको कौन-सा लोक खेल अच्छा लगता है ? उसे कैसे खेला जाता है ?
उत्तर-
हमारी मनोभावी खेल कोटला छपाकी’ है। इस खेल को खेलने के लिए बच्चों की गिनती नहीं होती। इस खेल का दूसरा नाम ‘काजी कोटले की मार’ भी है। इस खेल को खेलने के लिए 10-15 बच्चे खेलते हैं और खेलने से पहले किसी कपड़े को वट चढ़ा कर दोहरा करके कोटला बना लेते हैं। फिर बच्चा ज़मीन पर किसी तीखी चीज़ से लाइन लगा कर गोला बनाता है। बाकी सभी बच्चे चक्कर की खींची लाइन पर मुंह अन्दर करके बैठ जाते हैं। अब बारी देने वाला बच्चा कोटले को पकड़ कर चक्कर के आस-पास दौड़ता है। दौड़ते हुए यह गीत गाता है –

कोटला छपाकी जुम्मे रात आई जे,
जिहड़ा अग्गे, पिच्छे देखे, ओहदी शामत आई जे।

PSEB 6th Class Physical Education Solutions Chapter 4 पंजाब की लोक खेलें 2

गोले में बैठे बच्चे गीत गाने वाले बच्चे के पीछे गीत गाते हैं। बारी देने वाला बच्चा ‘कोटला छपाकी जुम्मे रात आई जे’ और गोले का चक्कर लगाता है। इस खेल में कोई भी बच्चा पीछे नहीं देख सकता। सभी बच्चे ज़मीन की तरफ देखते हैं। यदि कोई चक्कर में बैठा बच्चा पीछे देखता है तो बारी देने वाला बच्चा उसके 4-5 कोटले मार देता है, बारी देने वाला बच्चा चक्कर पूरा करते ही किसी बच्चे के पीछे चुप करके कोटला रख देता है और चक्कर लगा कर उस बैठे बच्चे के पास आ जाता है। यदि बैठे बच्चे को कोटले का पता नहीं चलता तो बारी देने वाला बच्चा कोटला उठाकर उस बच्चे को मारना शुरू कर देता है। मार खाने वाला बच्चा मार से बचने के लिए चक्कर के आस-पास तेज़ी से दौड़ता है, जब तक वह बच्चा अपनी जगह पर दोबारा नहीं पहुंच जाता। तब तक बच्चे को कोटले की मार सहनी पड़ती है । यदि बैठे हुए खिलाड़ी को कोटला रखने के बारे में पता चल जाता है तो वह कोटला उठा कर बारी देने वाले खिलाड़ी को तब तक मारता है जब तक वह चक्कर लगाकर बैठने वाले की खाली जगह पर आकर बैठ नहीं जाता। इस तरह खेल चलती रहती है।

Physical Education Guide for Class 6 PSEB पंजाब की लोक खेलें Important Questions and Answers

बहुत छोटे उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
लोक खेलों के कोई दो नाम लिखो।
उत्तर-

  1. कीकली
  2. कोटला छपाकी।

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प्रश्न 2.
कोटला छपाकी का गीत लिखो।
उत्तर-
कोटला छपाकी जुम्मे रात आई जे, जिहड़ा अग्गे, पिच्छे देखे, ओहदी शामत आई जे।

प्रश्न 3.
बन्दर किल्ला की चार लाइनें लिखो।
उत्तर-
जुत्तियां, चप्पलां दा,
कर लो वी हीला।
हुण असीं रल के,
खेलना बांदर किल्ला।

प्रश्न 4.
पुगने के कितने तरीके हैं ?
उत्तर-
पुगने के तीन तरीके हैं।

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प्रश्न 5.
किसी मनपसंद लोक खेल का नाम लिखो।
उत्तर-
बन्दर किल्ला ।

प्रश्न 6.
स्वास्थ्य की दृष्टि से सबसे अच्छी खेल कौन-सी है ?
उत्तर-
रस्सी कूदना।

प्रश्न 7.
चुस्ती, फुर्ती और एकाग्रता किस खेल से आती है ?
उत्तर-
पिठू गर्म करने से।

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प्रश्न 8.
बड़ी और लोक खेलों का एक-एक नाम लिखो।
उत्तर-

  1. हॉकी
  2. कोटला छपाकी।

प्रश्न 9.
लोक खेलों की एक महत्ता लिखो।
उत्तर-
इस खेलों से शरीर स्वस्थ्य रहता है।

प्रश्न 10.
कीकली लोक खेल को कौन खेलता है ?
उत्तर-
यह लड़कियों का खेल है।

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छोटे उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
खेल क्या है ?
उत्तर-
खेल वह क्रिया है जिसको मन बहलाने के लिए खेला जाता है और ऐसी क्रिया करने के साथ हमें खुशी मिलती है।

प्रश्न 2.
खेल किस उम्र के लोग खेलते हैं ?
उत्तर-
खेल हर उम्र के लोग खेलते हैं, बच्चे जवान और बुजुर्ग भी खेल खेलते हैं और लड़के, लड़कियां भी खेलते हैं।

प्रश्न 3.
खेलों की बांट किस तरह की जाती है ?
उत्तर-
हमारी लोकप्रिय खेलें जैसे क्रिकेट, हॉकी, वालीबॉल, फुटबॉल आदि।

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प्रश्न 4.
लोक खेलों में क्या नियम निश्चित होते हैं ?
उत्तर-
ऐसी खेलें खेलने के लिए कोई सामान या नियम निश्चित नहीं होते हैं।

प्रश्न 5.
बड़ी खेलों में क्या नियम होते हैं ?
उत्तर-
बड़ी खेलों में सामान, खेल का मैदान और नियम निश्चित होते हैं। ये खेलें नियम के अनुसार ही खेली जाती हैं।

प्रश्न 6.
लोक खेलें खेलने के लिए पारी पुगने की विधि लिखो।
उत्तर-
पहले तीन खिलाड़ी अपना दायां हाथ दूसरे के दायें हाथ पर रखते हैं और एक समय हाथों को हवा में घुमा कर उल्टा देते हैं। तीन में से यदि दो खिलाड़ियों के हाथ उल्टे और तीसरे खिलाड़ी का हाथ सीधा हो, तो वह पुग जाता है। इस तरह बारी-बारी एक को छोड़ कर सभी खिलाड़ी पुग जाते हैं।

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प्रश्न 7.
पुगने की दूसरी विधि का गीत लिखो।
उत्तर-
ईंगण, मींगण, तली तलींगण
काला, पीला, डकरा
गुड़ खावां, बेल बधावां,
मूली पत्तरा।
पत्ता वा, घोड़े आये,
हथ्थ कुताड़ी, पैर कुताड़ी
निक्के वालियां, तेरी वारी।

प्रश्न 8.
क्या लोक खेलों में टीमों की बांट की जाती है ?
उत्तर-
हां, कई खेलों में आपस में टीमों की बांट की जाती है जैसे- कबड्डी, गुल्ली डंडा, रस्सी कूदना।

प्रश्न 9.
लोक खेलों के कोई पाँच नाम लिखो।
उत्तर-

  1. बन्दर किल्ला
  2. कोटला छपाकी
  3. कीकली
  4. पिठू गर्म करना
  5. रस्सी कूदना।

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प्रश्न 10.
लोक खेलों में से किसी दो की महत्ता लिखो।
उत्तर-

  1. खेलों को खेलते हुए फुर्ती, शारीरिक बल और दिमागी चुस्ती आदि के गुण आते हैं।
  2. जब खिलाड़ी ठीकरियों के साथ निशाना लगाने की खेल खेलते हैं तो उनको एकाग्रता करने की सिखलाई मिलती है।

बड़े उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
खेलों की किस्में लिखो।
उत्तर-
खेलों की बांट कई तरह से की जा सकती है, जैसे कि शारीरिक खेलें, दिमागी खेलें आदि। ऐसी ही एक बांट है हमारी विरासती खेलें। क्रिकेट, हॉकी, वालीबॉल, फुटबॉल आदि ऐसी खेलें हैं जिनको खेलने के लिए विशेष सामान, निश्चित खेल मैदान और विशेष खेल नियम होते हैं। लोक खेलें इसके उल्ट कही जा सकती हैं।

प्रश्न 2.
रस्सी कूदना की महत्ता लिखो।
उत्तर-
यह खेल कसरत करने की बहुत ही बढ़िया खेल है। पुगने के बाद जो दो बच्चे पीछे रह जाते हैं वह एक-दूसरे के सामने खड़े होकर एक हाथ रस्सी. को ज़मीन के साथ छुआते हुए एक तरफ घुमाते हैं। बाकी बच्चे लाइन बनाकर एक-एक, दो-दो टप्पे लेते हैं। इस तरह यह खेल खेली जाती है।

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प्रश्न 3.
पिठू गर्म करना क्या है ?
उत्तर–
पिठू गर्म करना पंजाब के बच्चों के लिए बड़ी दिलचस्प खेल है। इस खेल में खेलने वाले बच्चे दो टोलियां बना लेते हैं और 10-15 फुट की दूरी पर गिटियां रखकर उस पर निशाना लगाते हैं। इस तरह यह खेल खेली जाती है।

प्रश्न 4.
कीकली की महत्ता लिखो।
उत्तर-
कीकली पंजाब की लड़कियों की बहुत ही प्रिय खेल है । कीकली खेल और गिद्दे का सुमेल है। इस खेल को लड़कियां चाव के साथ खेलती हैं। इस खेल में लड़कियां एक जगह पर इकट्ठी होकर आपस में जोड़े बना कर एक-दूसरे के हाथों में कंघियां डालकर घूमती हैं। उन्होंने एक-दूसरे का हाथ बायें हाथ से बायां हाथ और दाएं हाथ से दायां हाथ पकड़ा होता है। इस तरह यह खेल खेली जाती है।

प्रश्न 5.
कोटला छपाकी की महत्ता लिखो।
उत्तर-
कोटला छपाकी गांवों में खेली जाने वाली छोटी उम्र के लड़के-लड़कियों की खेल है। इस खेल को ‘काजी कोटले की मार’ के नाम से जाना जाता है।
कोटला छपाकी जुम्मे रात आई जे, जिहड़ा अग्गे, पिच्छे देखे, ओहदी शामत आई जे। गोल चक्कर में बैठे हुए बच्चे बारी देने वाले के पीछे-पीछे यह गीत गाते हैं।

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प्रश्न 6.
पुगने की दूसरी कोई विधि लिखो।
उत्तर-
पुगने की दूसरी विधि-सभी खिलाड़ी गोल चक्कर में खड़े हो जाते हैं।
उनके बीच में से एक खिलाड़ी बारी-बारी सभी खिलाड़ियों के कन्धे पर हाथ लगा कर यह गीत गाता है-

ईंगण, मींगण, तली तलींगण
काला, पीला, डकरा
गुड़ खावां, बेल बधावां,
मूली पत्तरा।
पत्ता वा, घोड़े आये,
हाथ कुताड़ी, पैर कुताड़ी
निक्के वालियां, तेरी वारी।

जिस खिलाड़ी को आखिरी शब्द पर हाथ लगता है वह पुग जाता है। इस तरह बारबार करते हुए अंत में रह जाने वाले की बारी तय हो जाती है। कई खेलें आपस में दो टीमें बनाकर खेली जाती हैं। जैसे कबड्डी, गुल्ली डंडा, रस्सा कशी और खो-खो आदि।

प्रश्न 7.
रस्सी कूदना और पिठू खेल के बारे में लिखो।
उत्तर-
रस्सी कूदना-यह खेल कसरत की तरह बहुत ही बढ़िया खेल है। पुगने के बाद जो दो बच्चे पीछे रह जाते हैं वह एक-दूसरे के सामने खड़े होकर हाथ रस्सी को ज़मीन के साथ छूते हुए एक साईड घुमाते हैं। बाकी बच्चे लाइन बना कर एक-एक, दोदो टप्पे लेते हैं। जिस बच्चे के पैरों को रस्सी लग जाये वह आऊट हो जाता है और रस्सी घुमाने की बारी देता है। यह खेल लड़कियों की प्रिय खेल रही है पर आजकल बहुत कम हो गई है।

PSEB 6th Class Physical Education Solutions Chapter 4 पंजाब की लोक खेलें 3
पिठू गर्म करना-यह बच्चों की बड़ी दिलचस्प खेल है, जिसमें बच्चों की गिनती निश्चित नहीं होती। इसमें दो टोलियां होती हैं, खेलने की जगह पर सात गीटियां एक-दूसरे के ऊपर रख लेते हैं। इन चुनी गीटियों के लगभग 12 फुट की दूरी पर एक लाइन खींच दी जाती है। फिर दोनों टीमें पुगने के बाद जो टीम पुग जाती है उस टीम का एक खिलाड़ी लाइन पर खड़ा होकर रबड़ की गेंद के साथ गीटियों पर निशाना लगाता है। एक खिलाड़ी को निशाना लगाने के तीन मौके दिये जाते हैं। तीन बार निशाना लगाने के बाद यदि ठीकरियों पर निशाना नहीं लगता तो वह खिलाड़ी आऊट हो जाता है। यदि बॉल को ठप्पा डाल कर सामने वाले खिलाड़ी पकड़ लेते हैं तो भी निशाना लगाने वाला खिलाड़ी आऊट हो जाता है। यदि निशाना लगाने वाला खिलाडी ठीकरियों पर ठीक निशाना लगा देता है तो ठीकरियां ज़मीन पर बिखर जाती हैं। निशाना लगाने वाला खिलाड़ी ज़मीन पर बिखरी ठीकरियों को जल्दी-जल्दी इकट्ठी करके एक-दूसरी पर रखता है तो विरोधी टीम के खिलाड़ी उन ठीकरियों को चुनने वाले खिलाड़ी को गेंद का निशाना बनाते हैं। यदि ठीकरियां चिनने वाले खिलाड़ी को गेंद लग जाती है तो वह आऊट हो जाता है। यदि ठीकरियां चुनने वाला खिलाड़ी गेंद लगने से पहले ठीकरियां इकट्ठी कर लेता है तो उसको और बारी दी जाती है, आऊट होने पर दूसरे खिलाड़ी की बारी आ जाती है। इस तरह खेल चलती रहती है।

PSEB 6th Class Physical Education Solutions Chapter 4 पंजाब की लोक खेलें 4

PSEB 6th Class Physical Education Solutions Chapter 4 पंजाब की लोक खेलें

प्रश्न 8.
कीकली के बारे में लिखो।
उत्तर-
कीकली-पंजाब में कीकली लड़कियों की प्रिय खेल है। किलकिला का अर्थ है खुशी और चाव की आवाज़ करना। कीकली खेल और गिद्दे का जोड़ है। कीकली में लड़कियां एक-दूसरे के हाथों में कंघियां डाल कर घूमती हैं। वह एक-दूसरे का बायां हाथ बायें हाथ के साथ और दायां हाथ दायें हाथ के साथ पकड़ती हैं। दोनों लड़कियों की बाजू की शक्ल 8 अंक जैसा बन जाती है। घूमने पर लड़कियां कीकली के गीत गाती हैं-

कीकली. कलीर दी,
पग मेरे वीर दी,
दुपट्टा भरजाई दा,
फिट्टे मुंह जवाई दा।

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इस तरह आपस में जोड़ियों का मुकाबला होने लग पड़ता है। देशी खेलों में टूर्नामेंट नहीं कराया जा सकता है। कीकली डालते समय यदि जोड़ी में किसी एक लड़की का हाथ दूसरी लड़की के हाथ से छूट जाता है या किकली डालते हुए लड़की गिर जाये तो सब कुछ हंसी में भूल जाता है। इस तरह लड़कियां इस खेल का बहुत आनन्द लेती हैं।

PSEB 12th Class Political Science Solutions Chapter 10 जनमत

Punjab State Board PSEB 12th Class Political Science Book Solutions Chapter 10 जनमत Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 12 Political Science Chapter 10 जनमत

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-

प्रश्न 1.
लोकमत का क्या अर्थ है ? इसकी मुख्य विशेषताओं की चर्चा कीजिए।
(What is meant by Public Opinion ? Discuss its main characteristics.)
अथवा
जनमत की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन करो। (Explain the main characteristics of Public Opinion.)
उत्तर-
लोकतन्त्र सरकार को प्रायः लोकमत राज्य भी कहा जाता है। जो सरकार लोकमत के अनुसार काम नहीं करती, वह बहुत समय तक नहीं चल सकती। इसका कारण यह है कि लोकतन्त्रीय राज्य में सर्वोच्च शक्ति जनता के हाथों में होती है। रूसो (Rousseau) के शब्दों में, “जनता की आवाज़ वास्तव में भगवान् की आवाज़ होती है।” यदि लोगों का सरकार के प्रति विश्वास न रहे तो बड़ी-से-बड़ी शक्ति भी सरकार को अस्तित्व में नहीं रख सकती। उदाहरणस्वरूप 1971 में पूर्वी पाकिस्तान के लोकमत ने पाकिस्तान की सैनिक तानाशाही के विरुद्ध आवाज़ उठाई और बंगला देश के नाम से एक स्वतन्त्र राज्य बन गया। . नेपोलियन (Napolean) जैसे तानाशाह ने भी एक बार कहा था, “एक लाख तलवारों की अपेक्षा मुझे तीन समाचार-पत्रों से अधिक भय है।” _जनमत का अर्थ (Meaning of Public Opinion)-जनमत क्या है ? जनमत सार्वजनिक मामलों पर जनता की राय को कहते हैं। परन्तु किसी भी विषय पर समस्त नागरिक एकमत नहीं हो सकते। समाज के सामने कोई समस्या हो, उसके समाधान के बारे में लोगों के अलग-अलग मत हो सकते हैं और होते हैं। तो क्या ऐसे समाज में राज्य को बहुमत के कार्य करने चाहिएं ? परन्तु बहुमत ‘बहुमत’ है, जनमत नहीं। जनमत के लिए बहुमत का होना काफ़ी नहीं है क्योंकि बहुमत में बहुमत संख्या का अपना दृष्टिकोण रहता है, समस्त राष्ट्र का नहीं। इसलिए केवल बहुमत को जनमत का नाम नहीं दिया जा सकता। जनमत की विद्वानों ने विभिन्न परिभाषाएं दी हैं, जिनमें कुछ निम्नलिखित हैं-

1. लॉर्ड ब्राइस (Lord Bryce) का कहना है कि, “समस्त समाज से सम्बन्धित किसी समस्या पर जनता के सामूहिक विचारों को जनमत कहा जा सकता है।” (“Public opinion is commonly used to denote the aggregate of the views, which men hold regarding matters that effect or interest the community.”)

2. लावेल (Lowell) का कहना है कि, “जनमत बनाने के लिए केवल बहुमत काफ़ी नहीं और सर्वसम्मति आवश्यक नहीं, परन्तु राय ऐसी होनी चाहिए जिससे अल्पसंख्यक वर्ग बेशक सहमत न हों, लेकिन फिर भी वे भय के कारण नहीं बल्कि विश्वास से मानने को तैयार हों।” (“In order that opinion may be public, a majority is not enough and unanimity is not required, but the opinion must be such that while the minority may not share it they feel bound by conviction and not by fear to accept it.”’)

3. कैरोल (Carrol) के अनुसार, “साधारण प्रयोग में जनमत साधारण जनता की मिली-जुली प्रतिक्रिया को कहा जाता है।” (“In its common use it refers to composite reactions of the general public.”)

4. डॉ० बेनी प्रसाद (Dr. Beni Prasad) का कहना है, “केवल उसी राय को वास्तविक जनमत कहा जा सकता है जिसका उद्देश्य जनता का कल्याण हो। हम कह सकते हैं कि सार्वजनिक मामलों पर बहुसंख्यक का वह मत जिसे अल्पसंख्यक भी अपने हितों के विरुद्ध नहीं मानते, जनमत कहलाता है।” (“Opinion may be regarded as truly public, when it is motivated by a regard for the welfare of the whole of the society.”)

5. डॉ० इकबाल नारायण (Dr. Iqbal Narayan) के अनुसार, “जनमत सार्वजनिक मामलों पर जनता का वह मत है, जो किसी समुदाय अथवा वर्ग विशेष का न होकर जन-साधारण का हो। जो किसी क्षणिक आवेश का परिणाम न होकर स्थायी हो और जिसमें लोक कल्याण की भावना निहित हो।” ___ उपर्युक्त दी गई परिभाषाओं के अनुसार भिन्न-भिन्न विद्वान् आपस में एकमत नहीं हैं। परन्तु इनमें कुछ एक बातों पर सहमति होनी आवश्यक है जैसे कि लोकमत के लिए अधिक-से-अधिक लोगों में उस पर सहमति होनी चाहिए। उस प्रस्ताव में समाज के अधिक भाग की भलाई की बात होनी चाहिए। चाहे इस लोकमत की गणना कोई अलग कार्य नहीं, परन्तु फिर भी लोगों में प्रायः किसी बात की सहमति के बारे में एकत्रित होना आवश्यक है।

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प्रश्न 2.
लोकतन्त्रीय राज्य में जनमत के महत्त्व का वर्णन करें। (Discuss the importance of Public Opinion in a democratic state.)
उत्तर-
जनमत का महत्त्व मनुष्य के समाज के अस्तित्व में आने से ही माना जाता है। यह एक मानी हुई बात है
जाती है। आज के लोकतन्त्रीय युग में तो इसकी महानता को और भी अधिक माना जाता है। लोकतन्त्र में राज्य प्रबन्ध सदा लोगों की इच्छानुसार चलता है। अतः प्रत्येक राजनीतिक दल और सरकार चला रहा दल जनमत को अपने पक्ष में करने का यत्न करता है। जिस राजनीतिक दल की विचारधारा लोगों को अच्छी लगती है, लोग उसको शक्ति दे देते हैं। लोकतन्त्र में जनमत का महत्त्व निम्नलिखित तथ्यों से स्पष्ट हो जाता है-

1. लोकतन्त्र शासन-प्रणाली में सरकार का आधार जनमत होता है (Public Opinion is the basis of Government in a democratic set up)-सरकार जनता के प्रतिनिधियों द्वारा बनाई जाती है। कोई भी सरकार जनमत के विरुद्ध नहीं जा सकती। सरकार सदैव जनमत को अपने पक्ष में कायम रखने के लिए जनता में अपनी नीतियों का प्रचार करती रहती है। विरोधी दल जनमत को अपने पक्ष में करने का सदैव प्रयत्न करते रहते हैं ताकि सत्तारूढ़ दल को हटा कर अपनी सरकार बना सकें। जो सरकार जनमत के विरोध में काम करती है, वह शीघ्र ही हटा दी जाती है। यदि लोकतन्त्र सरकार जनमत के विरुद्ध कानून पास करती है तो उस कानून को सफलता प्राप्त नहीं होती। वास्तव में लोकतन्त्र में जनमत का शासन होता है। यदि हम जनमत को लोकतन्त्र सरकार की आत्मा कहें तो गलत न होगा।

2. जनमत सरकार की मार्गदर्शक है (Public Opinion is a guide to the Government)-जनमत लोकतन्त्र सरकार का आधार ही नहीं बल्कि जनमत लोकतन्त्र सरकार का मार्गदर्शक भी है। जनमत सरकार को रास्ता दिखाता है कि उसे क्या करना है और किस तरह करना है। सरकार कानूनों का निर्माण करते समय जनमत का ध्यान अवश्य रखती है। यदि सरकार को पता हो कि किसी कानून का जनमत विरोध करेगा तो सरकार ऐसे कानून को वापस ले लेती है। कई बार तो सरकार किसी विशेष समस्या को हल करने से पहले जनमत को जानना चाहती है। जनमत लोकतन्त्र सरकार में अध्यापक की तरह कार्य करता है। जिस प्रकार अध्यापक ‘अपने शिष्यों को रास्ता दिखाता है, उसी प्रकार जनमत लोकतन्त्र को रास्ता दिखाता है।’

3. जनता प्रतिनिधियों की निरंकुशता को नियन्त्रित करता है (Public Opinion checks the Despotism of the Representatives) लोकतन्त्र में जनता अपने प्रतिनिधियों को चुनकर भेजती है और जनमत जिस दल के पक्ष में होता है, उसी दल की सरकार बनती है। कोई भी प्रतिनिधि अथवा मन्त्री अपनी मनमानी नहीं कर सकता। उन्हें सदैव जनमत का डर रहता है। प्रतिनिधि को पता होता है कि यदि जनमत उसके विरुद्ध हो गया तो वह चुनाव नहीं जीत सकेगा। इसलिए प्रतिनिधि सदा जनमत के अनुसार कार्य करता है। इस प्रकार जनमत प्रतिनिधियों को तथा सरकार को मनमानी करने से रोकता है।

4. कानून निर्माण में सहायक (Helpful in Law-making)-लोकतन्त्र में कानून निर्माण में जनमत का महत्त्वपूर्ण हाथ होता है। विधानमण्डल कानूनों का निर्माण करते समय जनमत को अवश्य ही ध्यान में रखता है। कोई भी लोकतान्त्रिक सरकार ऐसा कोई कानून नहीं बना सकती जो जनमत के विरुद्ध हो। जो कानून जनमत के विरुद्ध होता है, उसकी जनता द्वारा अवहेलना की जाती है। कई बार विधानमण्डल कानून बनाने से पहले या किसी विधेयक को पास करने से पहले उस पर जनमत जानने के लिए उसे समाचार-पत्रों में प्रकाशित करता है। जनमत जानने के पश्चात् विधेयक में आवश्यक परिवर्तन किए जाते हैं।

5. नीति-निर्माण में सहायक (Helpful in Policy-making) सरकार गृह और विदेश नीति निर्माण करते समय जनमत से बहुत अधिक प्रभावित होती है। सरकार देश की आन्तरिक समस्याओं जैसे कि बेरोजगारी, ग़रीबी, महंगाई, भ्रष्टाचार आदि को हल करने के लिए नीति-निर्माण करती है और नीति-निर्माण करते समय सरकार जनमत को अवश्य ध्यान में रखती है। सरकार दूसरे देशों के साथ सम्बन्ध स्थापित करते समय, महान् शक्तियों के प्रति दृष्टिकोण अपनाते समय तथा संयुक्त राष्ट्र संघ और अन्य विश्व संस्थाओं में भूमिका निभाते समय जनमत को ध्यान में रखती है। जनमत के विरुद्ध सरकार किसी नीति का निर्माण नहीं करती।

6. जनमत सरकार का उत्साह बढ़ता है (Public Opinion encourages the Govt.)-जब प्रतिनिधि सरकार कोई अच्छा कार्य करती है तो जनता उस सरकार को प्रोत्साहन देती है। जब इन्दिरा सरकार ने बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया तो जनमत ने सरकार को उत्साहित किया कि वह ऐसे ही और कार्य करे जिससे समाज की भलाई हो।

7. जनमत अधिकारों की रक्षा करता है (Public Opinion protects the Rights)-लोकतन्त्र शासन प्रणाली में नागरिकों को सामाजिक तथा राजनीतिक अधिकार प्राप्त होते हैं। इन अधिकारों की रक्षा जनमत के द्वारा की जाती है। जनमत सरकार को ऐसा कानून नहीं बनाने देता जिससे जनता के अधिकारों में हस्तक्षेप हो। जब सरकार कोई ऐसा कार्य करती है जिससे जनता की स्वतन्त्रता समाप्त हो तो जनमत उस सरकार की आलोचना करता है और लोकतन्त्र में कोई भी सरकार जनमत की आलोचना का सामना करने को तैयार नहीं होती।

8. यह सरकार को दृढ़ बनाता है (It makes the Government Strong)-जनमत से सरकार को बल मिलता है और वह दृढ़ बन जाती है। जब सरकार को यह विश्वास हो कि जनमत उनके साथ है तो वह मज़बूती से अपनी नीतियों को लागू कर सकती है और प्रगतिशील काम भी कर सकती है।

9. सामाजिक क्षेत्र में जनमत का महत्त्व (Its importance in Social Field)—प्रत्येक समाज में कुछ बुराइयां पाई जाती हैं और सरकार केवल कानून निर्माण द्वारा उन बुराइयों को दूर नहीं कर सकती। सामाजिक बुराइयों को दूर करने के लिए जनमत की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। भारत में आज अनेक सामाजिक बुराइयां पाई जाती हैं जैसे कि दहेज प्रथा, छुआछूत, जातिवाद, सती प्रथा आदि। ये बुराइयां तब तक समाप्त नहीं हो सकती जब तक इनके लिए जनमत तैयार नहीं किया जाता। सरकार जनमत से प्रेरणा लेकर ही इन बुराइयों के विरुद्ध जंग छेड़ती है।

10. अन्तर्राष्ट्रीय क्षेत्र में जनमत का महत्त्व (Importance of Public Opinion in International Field)आधुनिक युग न केवल लोकतन्त्र का युग है बल्कि अन्तर्राष्ट्रीयवाद का युग है। कोई भी देश जनमत की अवहेलना नहीं कर सकता और जनमत अन्तर्राष्ट्रीय क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि कोई देश मानव अधिकारों का उल्लंघन करता है और अपने नागरिकों पर अत्याचार करता है तो इसमें विश्व जनमत उस देश के विरुद्ध हो जाता है और उस देश को अपनी नीति बदलने के लिए मजबूर कर देता है। आज शक्तिशाली राज्य भी विश्व जनमत की अवहेलना करने की हिम्मत नहीं करता क्योंकि कोई भी राज्य यह नहीं चाहता है कि विश्व जनमत उसके विरुद्ध हो जाए। अफ़गानिस्तान से सोवियत संघ की सेना की वापसी इस बात का सबूत है। विश्व जनमत ने सोवियत संघ को ऐसा करने के लिए मजबूर कर दिया था।

निष्कर्ष (Conclusion)-संक्षेप में, लोकतन्त्र शासन प्रणाली में जनमत का विशेष महत्त्व है। सरकार का आधार जनमत ही होता है जो सरकार को रास्ता दिखाता है। सरकार जनमत की अवहेलना नहीं कर सकती और यदि करती है तो आने वाले चुनावों में उसे हटा दिया जाता है। इसलिए कहा जाता है कि लोकतन्त्र के लिए एक सचेत जनमत पहली आवश्यकता है। (An alert and enlightened public opinion is the first essential of democracy.)

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प्रश्न 3.
जनमत से क्या अभिप्राय है ? जनमत के निर्माण में राजनीतिक दल, शिक्षा संस्थाएं व आधुनिक श्रव्य-दृश्य (बिजली) साधन क्या भूमिका निभा सकते हैं ?
(What do you understand by word-Public Opinion ? What is the role performed by Political Parties, educational institutions and modern Audio-visual (Electrical) media in forming in Public Opinion ?)
अथवा
जनमत के निर्माण और अभिव्यक्ति के साधनों का वर्णन करो। (Explain the means of the formation and expression of Public Opinion.)
उत्तर-
जनमत के निर्माण में कई साधन भाग लेते हैं और जनमत कई साधनों द्वारा प्रकट होता है। जनमत कैसे बनता है, इसके बारे में लॉर्ड ब्राइस (Lord Bryce) बताते हैं कि समाज में तीन प्रकार के लोग होते हैं जो कि जनमत के बनने और सामने आने में सहायता करते हैं जैसे कि (क) जो जनमत को उत्पन्न करते हैं, (ख) जो इसको परिवर्तित करते हैं और (ग) जो इसको उतारते हैं। प्रथम प्रकार में तो बहुत कम लोग जैसे संसद् के प्रतिनिधि और पत्रकार आदि ही आते हैं। यह अपने इर्द-गिर्द की घटनाओं का अध्ययन करते हैं और विचारानुसार लोगों के सामने रखते हैं। यह अपने विचारों को प्रेस और राज्यों द्वारा दर्शाते हैं। दूसरी प्रकार के लोगों में वे व्यक्ति आते हैं जो राजनीतिक और सामाजिक कार्यों में बहुत रुचि रखते हैं। इस प्रकार के लोग देश में हो रही घटनाओं को अख़बार और वाद-विवाद के स्रोतों से पहचानते हैं और अपने ज्ञानानुसार उनकी अभिव्यक्ति करते हैं। तीसरी प्रकार में वे लोग आते हैं जो कि ऊपरिलिखित दोनों प्रकारों में नहीं आते। इस श्रेणी में सबसे अधिक लोग आते हैं। ये लोग अखबार तथा दूसरा साहित्य आदि पढ़ने में कम रुचि रखते हैं। ये लोग जलसों और नारों आदि से बहुत प्रभावित होते हैं। ये लोग किसी भी विचारधारा की आलोचना नहीं करते बल्कि हर प्रकार की विचारधारा मानने में विश्वास रखते हैं।

एक सफल लोकतन्त्र में यह आवश्यक है कि दूसरी प्रकार के लोग अधिक होने चाहिएं। ये लोग अखबारों और नई-नई समस्याओं के साथ अधिक सम्बन्धित होते हैं। इस प्रकार ये लोग देश में हो रही भिन्न-भिन्न घटनाओं का आलोचनात्मक अध्ययन करते हैं और ठीक रूप से और उचित रूप से अपना मत बनाकर जनता के सम्मुख प्रस्तुत करते हैं और तीसरी प्रकार के लोगों को प्रभावित करते हैं।

एक अच्छा और स्वस्थ जनमत बनाने के लिए आवश्यक है कि नागरिक पढ़े-लिखे हों और राजनीतिक मामलों में अधिक-से-अधिक रुचि रखते हों। भारत में इस प्रकार के लोग बहुत कम संख्या में हैं और भारतीय जनमत के विकास में यह एक बड़ी बाधा है। लोकतन्त्रीय सरकारें चाहे सफल हैं या असफल परन्तु जनमत का इसमें महत्त्वपूर्ण स्थान है।

जनमत के उत्थान के लिए वर्तमान युग में निम्नलिखित साधन हैं –

1. प्रैस (Press)-जनमत प्रकट करने तथा जनमत निर्माण करने में प्रेस का महत्त्वपूर्ण हाथ है। प्रैस का अर्थ छापाखाना नहीं बल्कि प्रैस से अभिप्रायः वे सभी प्रकाशित साधन हैं जिनके द्वारा मत प्रकट किए जाते हैं जैसे कि समाचार-पत्र, पत्रिकाएं, पुस्तकें । समाचार-पत्र दैनिक भी होते हैं, साप्ताहिक भी और मासिक भी। लोकतन्त्र के निर्माण में समाचार-पत्र महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। गैटेल (Gettell) का कहना है, “समाचार-पत्र सम्पादकीय लेखों और समाचारों द्वारा अपने विचार प्रकट करते हैं और अनेक तथ्यों पर टिप्पणियां करते हैं। यदि लोगों के सामने तथ्य ठीक प्रकार से और निष्पक्षता के साथ रखे जाएं तो समाचार-पत्र लोगों को दैनिक समस्याओं से परिचय करने में अमूल्य सेवा करते हैं।” समाचार-पत्र निम्नलिखित तरीकों द्वारा सार्वजनिक मामलों पर जनमत तैयार करते हैं-

(1) समाचार-पत्र जनता को दैनिक घटनाओं और समाचारों से परिचित रखता है। समाचार-पत्रों में देशविदेश में कहीं भी घटी घटनाओं का वर्णन होता है। देश की आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक समस्याओं, उनके समाधान के बारे में विभिन्न नेताओं के विचारों, सरकार की नीतियों और कार्यों की जानकारी समाचार-पत्रों की सहायता से मिल जाती है।

(2) समाचार-पत्र और पत्रिकाएं सरकार के कार्यों पर टीका-टिप्पणी करते हैं और उसके कार्यों की प्रशंसा तथा आलोचना करते हैं। सम्पादकीय लेखों से शिक्षित जनता को अपना मत बनाने में सहायता मिलती है।

(3) समाचार-पत्र सरकार की गलत नीतियों की आलोचना करते हैं ताकि लोग सरकार को अपनी नीतियां बदलने के लिए मजबूर कर सकें।

(4) समाचार-पत्र प्रचार का भी मुख्य साधन है। राजनीतिक नेता प्रायः प्रैस सम्मेलन बुलाते हैं, जहां वे देश-विदेश की विभिन्न समस्याओं पर अपने विचार प्रेस प्रतिनिधियों के सामने रखते हैं।

(5) समाचार-पत्र लोगों की शिकायतें सरकार तक पहुंचाते हैं। जनता क्या चाहती है, उसकी क्या इच्छा है ? इन समस्याओं के बारे में उसकी क्या राय है ? उसे कैसा कानून चाहिए ? इन सब बातों को सरकार तक पहुंचाने का काम भी समाचार-पत्र ही सम्पादित करते हैं। सरकार की नीति और उसके कार्यों की जानकारी समाचार-पत्रों द्वारा ही जनता तक पहुंचाई जाती है।

(6) समाचार-पत्र जनमत को शिक्षित, सुचेत तथा संगठित करते हैं।

2. सार्वजनिक सभाएं (Public Meetings) सार्वजनिक सभाएं जनमत निर्माण में महत्त्वपूर्ण साधन हैं। सत्तारूढ़ दल सरकार की नीतियों का प्रचार करने के लिए सार्वजनिक सभाओं का सहारा लेते हैं। मन्त्री अपनी नीतियों की प्रशंसा करते हैं और जनमत को अपने पक्ष में कायम करने का प्रयत्न करते हैं जबकि विरोधी दल इन सभाओं में सरकार की कड़ी आलोचना करते हैं और सरकार की नीतियों के बुरे प्रभावों को जनता के सम्मुख रखते हैं। सार्वजनिक सभाएं अनपढ़ व्यक्तियों को बहुत प्रभावित करती हैं क्योंकि अनपढ़ व्यक्ति समाचार-पत्र अथवा पुस्तक इत्यादि नहीं पढ़ सकता। अनपढ़ व्यक्ति लीडरों के भाषण सुनकर अपनी राय बनाता है। सार्वजनिक सभाओं के द्वारा जनमत प्रकट होता है।

3. राजनीतिक दल (Political Parties) लोकतन्त्र सरकार में राजनीतिक दलों का बहुत महत्त्व होता है। वास्तविकता यह है कि बिना राजनीतिक दलों के लोकतन्त्र सरकार चल ही नहीं सकती। राजनीतिक दलों का उद्देश्य सरकार पर नियन्त्रण करना होता है ताकि अपने सिद्धान्तों को लागू कर सके। राजनीतिक दल सरकार की सत्ता को तभी नियन्त्रित कर सकते हैं जब जनमत उनके पक्ष में हो। इसलिए प्रत्येक राजनीतिक दल जनमत को अपने पक्ष में करने का प्रयत्न करता है। राजनीतिक दल समाचार-पत्रों द्वारा सार्वजनिक सभाओं द्वारा, रेडियो द्वारा तथा घर-घर जाकर अपने सिद्धान्तों का प्रचार करते हैं। देश की समस्याओं पर अपने विचार जनता को बताते हैं। चुनाव के दिनों में तो विशेषकर राजनीतिक दल अपने सिद्धान्तों का प्रचार करते हैं और अपने सिद्धान्तों से जनता को सहमत करवाने का यत्न करते हैं ताकि अधिक वोट प्राप्त कर सकें।

4. रेडियो और टेलीविज़न (Radio and Television)-आधुनिक युग में जनमत के निर्माण में रेडियो और टेलीविज़न महत्त्वपूर्ण साधन हैं। रेडियो और टेलीविज़न जनता का मनोरंजन ही नहीं करते बल्कि जनता को देश की समस्या से भी अवगत कराते हैं। राजनीतिक दलों के नेता तथा बड़े-बड़े विद्वान् अपने विचारों को रेडियो द्वारा जनता तक पहुंचाते हैं। अनपढ़ व्यक्ति रेडियो तथा टेलीविज़न द्वारा काफ़ी प्रभावित होते हैं।

5. विधानमण्डल (Legislature)-विधानमण्डल जनमत के निर्माण तथा प्रकट करने का महत्त्वपूर्ण साधन है। विधानमण्डल के सदस्य विभिन्न समस्याओं पर अपने विचार प्रकट करते हैं। वाद-विवाद के पश्चात् कानूनों का निर्माण किया जाता है। विरोधी दल के सदस्य और कई बार सत्तारूढ़ दल के सदस्य सरकार के कार्यों की आलोचना करते हैं, मन्त्रियों से प्रश्न पूछे जाते हैं जिनके उन्हें उत्तर देने पड़ते हैं। विधानमण्डल में जब बजट पेश होता है तब सरकार के प्रत्येक विभाग की कड़ी आलोचना की जाती है। विधानमण्डल की समस्त कार्यवाही समाचार-पत्रों में प्रकाशित होती है जिनको पढ़कर जनता अपने मत का निर्माण करती है।

6. शिक्षा संस्थाएं (Education Institutions)—आज के विद्यार्थी कल के नागरिक हैं। विद्यार्थी अपने मत का निर्माण प्रायः अपने अध्यापकों के विचारों को सुनकर करते हैं। स्कूलों और कॉलेजों में इतिहास, नागरिक शास्त्र, अर्थशास्त्र आदि अनेक विषय पढ़ाए जाते हैं, जिससे विद्यार्थियों के विचारों पर बहुत प्रभाव पड़ता है। नागरिक शास्त्र के अध्यापक विशेषकर पढ़ाते समय सरकार के कार्यों के उदाहरण देते हैं और कई अध्यापक सरकार की कड़ी आलोचना करते हैं और अपने विचारों को प्रकट करते हैं। अध्यापकों के विचारों का विद्यार्थी के मन पर बहुत प्रभाव पड़ता है।

7. चुनाव (Election)-लोकतन्त्र में चार-पांच वर्ष पश्चात् चुनाव होते रहते हैं। चुनावों के समय राजनीतिक दल देश की समस्याओं को जनता के सामने प्रस्तुत करते हैं और अपने सिद्धान्तों का प्रचार करते हैं। प्रत्येक उम्मीदवार चुनाव जीतने के लिए जनता को अधिक-से-अधिक प्रभावित करने का यत्न करता है। स्वतन्त्र उम्मीदवार तथा राजनीतिक दल सार्वजनिक सभाओं द्वारा समाचार-पत्रों द्वारा अपने विचारों का प्रचार करते हैं। आजकल तो चुनाव के समय उम्मीदवार तथा उसके समर्थक घर-घर जाकर नागरिकों को अपने विचारों को बताते हैं। इश्तिहार छपवाकर सड़कों तथा गलियों में लगवाए जाते हैं। इस प्रकार चुनाव जनमत के निर्माण में महत्त्वपूर्ण साधन है।

8. सिनेमा (Cinema) सिनेमा भी जनमत निर्माण करने में महत्त्वपूर्ण साधन है। सरकार चल-चित्रों (News Reels) द्वारा देश की विभिन्न समस्याओं के सम्बन्ध में जनता को शिक्षित करती है।

9. धार्मिक संस्थाएं (Religious Institutions) धर्म का राजनीति पर बहुत प्रभाव पड़ता है। विभिन्न धार्मिक संस्थाएं समाज की बुराइयों को जनता के सामने पेश करती हैं और उन बुराइयों को समाप्त करने के लिए जनमत को तैयार करती हैं।

10. साहित्य (Literature)-साहित्य भी लोकमत के निर्माण में महत्त्वपूर्ण योगदान देता है। महान् लेखकों एवं विद्वानों के विचारों को जनता बड़े उत्साह से पढ़ती है जिसका आम जनता पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है।

11. अन्य संस्थाएं (Other Institutions)-ऊपरिलिखित भिन्न-भिन्न साधनों के अतिरिक्त और भी बहुत-सी संस्थाएं हैं, जो जनमत के उत्थान में अपना भाग डालती हैं। कई बार विशेष समस्या के उत्पन्न होने से भी उसके समाधान के लिए कई प्रकार के गुट अस्तित्व में आ जाते हैं। ये लोगों में अपने विचारों का प्रचार करते हैं और सरकार को कई प्रकार के प्रार्थना-पत्र आदि भेजते हैं। वह सरकार का ध्यान उन समस्याओं की ओर आकर्षित करने की चेष्टा करते हैं। इसकी कार्यवाहियों को समाचार-पत्रों और सार्वजनिक सभाओं द्वारा प्रसारित किया जाता है। कई बार ये गुट बड़ी राजनीतिक पार्टियों से जनता को झंझोड़ने में अधिक सफल हो जाते हैं और जनता के विचारों को प्रभावित करते हैं। इनको आजकल हम ‘दबाव समूह’ (Pressure Groups) भी कहते हैं।
अतः ऊपरलिखित सभी संस्थाएं जनमत के प्रचार में बढ़-चढ़ कर भाग लेती हैं।

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प्रश्न 4.
लोकमत के निर्माण के रास्ते में आने वाली रुकावटों का वर्णन करो। (Explain the hindrances in the way of formation of Public Opinion.)
अथवा
जनमत के निर्माण के मार्ग में बाधाओं का वर्णन करो। (Explain the hindrances in the way of the formation of Public Opinion.)
उत्तर-
लोकतन्त्र शासन प्रणाली का आधार जनमत है। जिस दल के पक्ष में जनमत होता है, उसी दल की सरकार बनती है। पर लोकतन्त्र सरकार की सफलता और समाज की भलाई के लिए यह आवश्यक है कि जनमत शुद्ध हो । यदि जनमत शुद्ध न होगा तो लोकतन्त्र सरकार का आधार भी गलत होगा। शुद्ध जनमत के निर्माण में निम्नलिखित बाधाएं आती हैं-

1. अनपढ़ता एवं अज्ञानता (Imliteracy and Ignorance)-अनपढ़ता तथा अज्ञानता शुद्ध जनमत के निर्माण में बहुत बड़ी रुकावट है। अनपढ़ता और अज्ञानता के फलस्वरूप जनता की सोचने की शक्ति तथा मनोवृत्ति संकुचित हो जाती है। अनपढ़ नागरिक अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों को भली-भान्ति नहीं जानते। वे अपनी समस्याओं को समझ नहीं पाते तो वे सार्वजनिक समस्याओं पर क्या विचार करेंगे ? आधुनिक राज्य की समस्याएं बहुत जटिल हैं जिन्हें अनपढ़ व्यक्ति समझ नहीं सकता और न ही उनमें उन समस्याओं के बारे में सोचने की शक्ति होती है। अनपढ़ व्यक्ति शीघ्र ही अपने नेताओं के भड़कीले भाषण में आ जाता है और भावनाओं के आधार पर अपने मत का निर्माण कर लेता है। जिस देश की अधिकांश जनता अनपढ़ एवं अज्ञानी है वहां पर स्वस्थ जनमत का निर्माण नहीं हो सकता।

2. पक्षपाती प्रैस (Partial Press)-जो प्रैस पार्टियों द्वारा अथवा पूंजीपतियों द्वारा चलाए जाते हैं वे निष्पक्ष नहीं होते। ऐसे प्रैस सदा अपनी पार्टियों की प्रशंसा करते रहते हैं और दूसरी पार्टियों की निन्दा करते रहते हैं। ऐसे प्रैसों के समाचार-पत्रों में झूठी खबरें छपती रहती हैं जिससे साधारण जनता गुमराह हो जाती. है। पक्षपाती प्रैस देश का हित न सोचकर साम्प्रदायिकता की भावना को उत्साहित करते रहते हैं। भारत में ऐसे कई प्रैस हैं जो समस्त समाज का हित न सोचकर अपने सम्प्रदाय के हित के लिए उचित-अनुचित समाचार छापते हैं।

3. निर्धनता (Poverty)-निर्धनता भी शुद्ध जनमत के निर्माण में बहुत बड़ी बाधा है। निर्धन व्यक्ति को सदा रोटी की चिन्ता रहती है और इन्हीं उलझनों में फंसा रहता है। जिससे उसे समाज तथा देश की समस्याओं पर विचार करने का समय नहीं मिलता। एक भूखा व्यक्ति रोटी की खातिर अपने देश का अहित भी करने के लिए तैयार हो जाता है। वह अपने वोट को बेच देता है। निर्धन व्यक्ति का अपना कोई मत नहीं होता।

4. आलस्य और उदासीनता (Indolence and Indifference)-आलस्य और उदासीनता भी शुद्ध जनमत निर्माण में रुकावट डालते हैं। यदि किसी देश के नागरिक आलसी और सार्वजनिक समस्याओं के प्रति उदासीन हों तो शुद्ध जनमत का निर्माण नहीं हो पाता। भारत के नागरिक बहुत आलसी हैं। वे वोट डालने के लिए भी जाने के लिए तैयार नहीं होते। साधारण नागरिक यह सोचता है कि यदि वह वोट न डालेगा तो क्या अन्तर पड़ेगा, जिसने चुनाव जीतना है वह जीत ही जाएगा। अतः नागरिकों में राजनीतिक चेतना का अभाव शुद्ध जनमत के निर्माण में बाधा है।

5. रूढ़िवादिता (Conservatism)-रूढ़िवादिता से अभिप्रायः है पुरानी घिसी-पिटी परम्पराओं का पालन करते जाना। रूढ़िवादिता प्रगतिशील दृष्टिकोण के मार्ग में बहुत बड़ी बाधा है। रूढ़िवादी सामाजिक बुराइयों को दूर करने का प्रयास नहीं करते और अन्य लोगों को सुधार करने से रोकते हैं। अत: वे सामाजिक परिस्थितियों को आर्थिक दृष्टिकोण से नहीं समझते जिस कारण एक निष्पक्ष और बौद्धिक जनमत के निर्माण में बाधा उत्पन्न होती है।

6. गलत सिद्धान्तों पर आधारित राजनीतिक दल (Political Parties based on wrong Principles)जो राजनीतिक दल आर्थिक सिद्धान्तों और राजनीतिक सिद्धान्तों पर आधारित न होकर धर्म या जाति पर आधारित होते हैं, वे शुद्ध जनमत के निर्माण में बाधा डालते हैं। ऐसे राजनीतिक दल देश के हित की परवाह न करके अपनी जाति या सम्प्रदाय के लिए गलत बातों का प्रचार करते रहते हैं और एक सम्प्रदाय में दूसरे सम्प्रदाय के विरुद्ध नफरत की भावना पैदा करते रहते हैं। इन दलों से प्रभावित जनता शुद्ध जनमत का निर्माण नहीं कर सकती।

7. दोषपूर्ण शिक्षा प्रणाली (Defective Education System)—जिन देशों में दोषपूर्ण शिक्षा प्रणाली होती है वहां पर भी शुद्ध जनमत का निर्माण नहीं होता है। यदि स्कूल-कॉलेजों में धर्म पर आधारित शिक्षा दी जाए और विद्यार्थियों के दिलों में साम्प्रदायिकता की भावना को भर दिया जाए तो विद्यार्थी नागरिक बनकर प्रत्येक समस्या को धर्म अथवा सम्प्रदाय की दृष्टि से सुलझाना चाहेंगे जिससे शुद्ध जनमत का निर्माण नहीं हो सकेगा।

8. निरंकुश सरकार (Autocratic Governments)-लोकराज के उत्थान में निरंकुश सरकारें भी बाधा बनती हैं क्योंकि निरंकुश सरकारों में व्यक्तियों को विचार प्रकट करने और प्रेस की स्वतन्त्रता नहीं होती। यह केवल उन्हीं विचारों को प्रकट कर सकते हैं जो सरकार या शासकों के पक्ष में हों। शासकों के विरुद्ध मुंह खोलने की स्वतन्त्रता नहीं होती। व्यक्तियों को अपने विचारों को दबाना पड़ता है। ठीक जनमत के उत्थान के लिए लोकराज्यीय सरकारें बहुत सहायक होती हैं क्योंकि लोकराज्यीय सरकारों में वह सब वातावरण मिलता है जो शुद्ध जनमत के उत्थान के लिए आवश्यक है। निरंकुश सरकारों में प्रचार के सब साधनों पर सरकार का नियन्त्रण होता है।

9. अधिकारों और स्वतन्त्रताओं की अनुपस्थिति (Absence of Right and Liberties)-जहां लोगों को अधिकारों और स्वतन्त्रताओं की प्राप्ति नहीं है वहां भी जनमत का उत्थान करना सम्भव नहीं होता। अधिकार और स्वतन्त्रताएं एक ऐसा वातावरण उत्पन्न करते हैं जिनके अनुसार व्यक्ति अपने विचारों का ठीक प्रसार कर सकता है। यदि लोगों के विचारों को दबाया जाए और स्वतन्त्रता के साथ सोचने की स्वतन्त्रता न हो तो जनमत भी शुद्ध नहीं बन सकेगा। लोगों को ठीक विचारों का पता नहीं लग सकेगा और न ही वे ठीक रूप से सरकार की आलोचना ही कर सकेंगे। और वे गलत धारणाएं बना लेंगे। जितनी गलत धारणाएं बनेंगी उतना ही गलत जनमत तैयार होगा।

10. सामाजिक असमानता (Social Inequality)-समाज में सामाजिक असमानताएं भी जनमत के मार्ग में बाधा बनती हैं। सामाजिक असमानता वाले देशों में लोगों के मध्य जाति-पाति, धर्म, रंग, नस्ल के आधार पर भेदभाव किए जाते हैं। कुछ लोगों को नीचा समझा जाता है ओर कुछ व्यक्ति समाज में शेष लोगों से ऊंचे होते हैं। ऊंचे व्यक्ति निम्न व्यक्तियों पर अपना नियन्त्रण रखते हैं और अपने विचारों को निम्न के विचारों पर ठोंसते हैं। ऐसी दशा में तैयार किया गया जनमत कभी भी शुद्ध और निष्पक्ष नहीं हो सकता।

ऊपरिलिखित शुद्ध जनमत की बाधाओं को पढ़कर हम इस परिणाम पर पहुंचते हैं कि ठीक जनमत के उत्थान के लिए एक विशेष प्रकार के जनमत की आवश्यकता है। ऐसा वातावरण तभी तैयार हो सकता है यदि ऊपरिलिखित सब बाधाओं को दूर करने का यत्न किया जाए। शुद्ध जनमत लोकराज्यीय सरकार का प्राण है क्योंकि लोकराज्यीय सरकार जनमत पर ही आधारित होती है। यदि जनमत गलत और अशुद्ध है तो स्वाभाविक ही है कि नीतियां भी ठीक नहीं होंगी और राज्य प्रबन्ध भी ठीक नहीं होगा।

PSEB 12th Class Political Science Solutions Chapter 10 जनमत

प्रश्न 5.
स्वस्थ लोकमत के निर्माण के लिए कौन-सी शर्ते आवश्यक हैं ? (What conditions are essential for the formulation of Sound Public Opinion ?)
उत्तर-
शुद्ध जनमत के निर्माण के लिए विशेष अवस्थाओं की आवश्यकता होती है। शुद्ध जनमत के निर्माण में जो बाधाएं आती हैं, उनको दूर करके ही अवस्थाओं को उत्पन्न किया जा सकता है। शुद्ध जनमत के निर्माण के लिए अग्रलिखित अवस्थाएं आवश्यक हैं

1. शिक्षित जनता (Educated People)-शुद्ध जनमत के निर्माण के लिए जनता का होना आवश्यक है। शिक्षित नागरिक देश की समस्याओं को समझ सकता है और वह नेताओं के भड़कीले भाषणों को सुनकर अपने मत का निर्माण नहीं करता। वह सच, झूठ में अन्तर कर सकता है और वह प्रत्येक तर्क से काम लेता है। शिक्षित नागरिक देश की समस्याओं को सुलझाने के लिए अपने सुझाव भी दे सकता है अतः सरकार को चाहिए कि वह नागरिकों को शिक्षित करे।

2. निष्पक्ष प्रेस (Impartial Press)—शुद्ध जनमत के निर्माण के लिए निष्पक्ष प्रेस का होना आवश्यक है। प्रेस दलों और पूंजीपतियों से स्वतन्त्र होने चाहिएं ताकि सच्चे समाचार दे सकें और सरकार के अच्छे कार्यों की प्रशंसा कर सकें। सरकार का प्रेस पर कोई नियन्त्रण नहीं होना चाहिए ताकि प्रेस स्वतन्त्रतापूर्वक काम कर सके और सरकार बुरे कार्यों की आलोचना कर सके। पर सरकार को उन प्रेसों को बन्द कर देना चाहिए जो धर्म अथवा जाति पर आधारित होते हैं या जो पूंजीपतियों के हाथों की कठपुतली होते हैं। शुद्ध जनमत के निर्माण के लिए यह आवश्यक है कि प्रेस ईमानदार, निष्पक्ष और साम्प्रदायिक भावनाओं से ऊपर हों।

3. गरीबी का अन्त (End of Poverty)-शुद्ध जनमत के निर्माण के लिए यह आवश्यक है कि गरीबी का अन्त किया जाए। गरीब व्यक्ति, जिसे 24 घण्टे रोटी की चिन्ता रहती है, देश की समस्याओं पर नहीं सोच सकता। भूखा व्यक्ति उसी उम्मीदवार को अच्छा मानता है जो उसे रोटी-कपड़ा दे, चाहे वह उम्मीदवार देशद्रोही ही क्यों न हो। गरीब व्यक्ति अपने वोट को बेचने को सदा तैयार रहता है जिससे जनमत पूंजीपतियों के हाथों में आ जाता है। अतः शुद्ध जनमत के निर्माण के लिए यह आवश्यक है कि जनता को भर पेट भोजन मिलता हो, मज़दूरों का शोषण न होता हो और अकाल न पड़ते हों। ..

4. आदर्श शिक्षा प्रणाली (Ideal Education System)-देश की शिक्षा प्रणाली ऐसी होनी चाहिए कि विद्यार्थियों का दृष्टिकोण विशाल बन सके और वे साम्प्रदायिक भावनाओं से ऊपर उठकर देश के हित में सोच सकें अर्थात् आदर्श नागरिकों बन सकें।

5. राजनीतिक दल आर्थिक तथा राजनीतिक सिद्धान्तों पर आधारित होने चाहिएं (Political Parties should be based on Economic and Political Principles)-शुद्ध जनमत के निर्माण में राजनीतिक दलों का महत्त्वपूर्ण हाथ होता है। राजनीतिक दल धर्म अथवा जाति पर आधारित न होकर आर्थिक तथा राजनीतिक सिद्धान्तों पर आधारित होने चाहिएं। जो दल धर्म अथवा जाति पर आधारित होते हैं, वे अपने दल के हित में ही सोचते हैं न कि देश के हित में। ऐसे दल समाज में साम्प्रदायिक भावना का प्रचार करके जनता को गुमराह करते हैं।

6. धार्मिक सहिष्णुता (Religious Toleration)—शुद्ध जनमत के निर्माण के लिए यह आवश्यक है कि जनता में धार्मिक सहिष्णुता होनी चाहिए। नागरिक प्रत्येक समस्या पर उसके गुण तथा अवगुण के आधार पर अपने मत का निर्माण करे न कि धर्म की दृष्टि से प्रत्येक समस्या पर विचार करे। नागरिकों को धर्म, जाति, भाषा आदि से ऊपर उठ कर अपने मत का निर्माण करना चाहिए।

7. भाषण तथा विचार प्रकट करने की स्वतन्त्रता (Freedom of Speech and Expression)-शुद्ध जनमत के निर्माण के लिए यह आवश्यक है कि नागरिकों को भाषण देने तथा अपने विचार प्रकट करने की स्वतन्त्रता होनी चाहिए। नागरिकों को स्वतन्त्रता प्राप्त होनी चाहिए कि वे सरकार के बुरे कार्यों की आलोचना कर सकें और देश की समस्याओं को सुलझाने के लिए अपने सुझाव दे सकें। साधारण जनता विद्वानों तथा नेताओं के विचार सुनकर अपने मत का निर्माण करती है। यदि भाषण देने की स्वतन्त्रता नहीं होगी तो साधारण नागरिकों को विद्वानों और नेताओं के विचारों का ज्ञान न होगा जिससे शुद्ध जनमत का निर्माण नहीं हो सकेगा।

8. नागरिकों का उच्च चरित्र (High Character of the Citizens)-शुद्ध जनमत के निर्माण के लिए नागरिकों का चरित्र भी ऊंचा होना चाहिए। नागरिकों में सामाजिक एकता की भावना होनी चाहिए और उन्हें प्रत्येक समस्या पर राष्ट्रीय हित में सोचना चाहिए। उच्च चरित्र का नागरिक अपने वोट को नहीं बेचता और न ही झूठी बातों का प्रचार करता है। वह उन्हीं बातों तथा सिद्धान्तों का प्रचार करता है जिन्हें वह ठीक समझता है।

9. राष्ट्रीय आदर्शों की समरूपता (Uniformity over National Ideals)-स्वस्थ जनमत के निर्माण के लिए एक अनिवार्य तत्त्व यह है कि राष्ट्र के राज्य सम्बन्धी आदर्शों में जनता के मध्य अत्यधिक मतभेद नहीं होना चाहिए। जनता में राष्ट्रीय आदर्शों के विषय में एकता न होने की अवस्था में पारस्परिक कटुता और वैमनस्य इतना बढ़ जाएगा कि अराजकता फैलने की स्थिति आ जाएगी। ऐसी अवस्था में स्वस्थ जनमत का निर्माण नहीं हो सकता। इसके साथ ही राष्ट्र के तत्त्वों कम-से-कम विभिन्नता होनी चाहिए। जिस राष्ट्र में धर्म, भाषा, संस्कृति, प्राचीन इतिहास तथा राजनीतिक परम्पराओं के मध्य विभिन्नता होगी, वहां इन विषयों से सम्बद्ध सार्वजनिक नीतियों के सम्बन्ध में स्वस्थ जनमत के निर्माण में बड़ी बाधा पहुंचती है। उदाहरण के लिए भारत में भाषा की समस्या का हल अभी तक सन्तोषजनक नहीं हुआ है। स्वतन्त्रता के इतने वर्ष के पश्चात् भी अंग्रेजी की समाप्ति के प्रश्न पर स्वस्थ जनमत का निर्माण नहीं हो पाया है।

10. सहनशीलता एवं सहयोग की भावना (Spirit of toleration and co-operation)-शुद्ध जनमत के निर्माण के लिए लोगों में एक दूसरे के प्रति सहनशीलता एवं सहयोग की भावना का होना आवश्यक है। इन भावनाओं के अभाव में व्यक्ति दूसरे के विचार को नहीं सुन सकेगा जबकि उचित विचार वाद-विवाद के बाद ही सामने आते हैं। अतः सहनशीलता एवं परस्पर सहयोग की भावनाओं का विकास किया जाना चाहिए।

11. स्वस्थ दलीय प्रणाली (Healthy Party System)–लोकतान्त्रिक राज्यों में स्वस्थ दलीय प्रणाली भी जनमत बनाने में सहायक होती है। अतः राजनीतिक दलों का आधार ठीक होना चाहिए।
ऊपरलिखित अवस्थाओं के होने से ही शुद्ध जनमत का निर्माण हो सकता है।

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लघु उत्तरीय प्रश्न-

प्रश्न 1.
जनमत से आपका क्या भाव है ?
उत्तर-
जनमत सार्वजनिक मामलों पर जनता की राय को कहते हैं, परन्तु किसी भी विषय पर समस्त नागरिक एकमत नहीं हो सकते । जनमत बहुमत नहीं है क्योंकि बहुमत में बहुमत संख्या का अपना दृष्टिकोण रहता है, समस्त राष्ट्र का नहीं। बहुमत का मत जनमत बन सकता है यदि उसमें जनसाधारण की भलाई छिपी हुई हो। डॉ० बेनी प्रसाद ने ठीक ही कहा है कि, “केवल उसी मत को वास्तविक जनमत कहा जा सकता है जिसका उद्देश्य जनता का कल्याण है।” लॉर्ड ब्राइस के अनुसार, “समस्त समाज से सम्बन्धित किसी समस्या पर जनता के सामूहिक विचारों को जनमत कहा जा सकता है” लावेल के अनुसार, “जनमत बनाने के लिए केवल बहुमत काफ़ी नहीं और सर्वसम्मति आवश्यक नहीं, परन्तु राय ऐसी होनी चाहिए जिससे अल्पसंख्यक वर्ग बेशक सहमत न हो, लेकिन फिर भी वह भय के कारण नहीं बल्कि विश्वास से मानने को तैयार हो।” इस प्रकार हम कह सकते हैं कि सार्वजनिक मामलों पर बहुसंख्यक का वह मत जिसे अल्पसंख्यक भी अपने हितों के विरुद्ध नहीं मानते, जनमत कहलाता है।

प्रश्न 2.
जनमत की कोई चार विशेषताएं लिखें।
उत्तर-

  • आम सहमति-जनमत की मुख्य विशेषता यह है कि इसमें आम सहमति होनी चाहिए। इसका अर्थ यह है कि किसी मामले पर सभी लोगों की एक राय हो।
  • जनता की भलाई-जनमत की दूसरी विशेषता जनता की भलाई है। जिस मत में जनता की भलाई निहित न हो वह मत जनमत नहीं बन सकता है।
  • तथ्यों पर आधारित-जनमत तथ्यों पर आधारित और तर्कों से भरपूर होना चाहिए। आम जनता को जनमत को स्वीकार करते समय यह देखना चाहिए कि यह तर्क पर आधारित है या नहीं।
  • जनमत का रूप सकारात्मक होता है।

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प्रश्न 3.
जनमत के निर्माण में शैक्षणिक संस्थाएं क्या भूमिका निभाती हैं ?
अथवा
लोकमत के निर्माण में शिक्षा संस्थानों की क्या भूमिका है?
उत्तर-
आज के विद्यार्थी कल के नागरिक हैं। विद्यार्थी अपने मत का प्रयोग प्रायः अपने अध्यापकों के विचारों को सुन कर करते हैं। स्कूलों और कॉलेजों में इतिहास, नागरिक शास्त्र, अर्थशास्त्र आदि अनेक विषय पढ़ाए जाते हैं, जिससे विद्यार्थियों के विचारों पर बहुत प्रभाव पड़ता है। नागरिक शास्त्र के अध्यापक विशेषकर पढ़ाते समय सरकार के कार्यों के उदाहरण देते हैं और कई अध्यापक सरकार की कड़ी आलोचना करते हैं तथा अपने विचारों को प्रकट करते हैं। अध्यापकों के विचारों का विद्यार्थी के मन पर बहुत प्रभाव पड़ता है। इसके अतिरिक्त स्कूलों और कॉलेजों में विभिन्न विषयों और समस्याओं पर वाद-विवाद तथा भाषण प्रतियोगिता होती रहती है। साहित्यिक गोष्ठियां (Study Circles) भी होती रहती हैं जिनमें विद्वानों तथा नेताओं को बुलाया जाता है। इस प्रकार शिक्षण संस्थाएं विद्यार्थियों के विचारों को बहुत प्रभावित करती हैं।

प्रश्न 4.
स्वस्थ लोकमत के निर्माण के लिए चार ज़रूरी शर्ते लिखो।
अथवा
स्वस्थ जनमत के निर्माण के लिए आवश्यक चार शर्ते लिखो। ।
उत्तर-
1. शिक्षित जनता-स्वस्थ जनमत के निर्माण के लिए जनता का शिक्षित होना आवश्यक है। शिक्षित नागरिक देश की समस्याओं को समझ सकता है तथा समस्याओं को हल करने के लिए सुझाव भी दे सकता है।

2. निष्पक्ष प्रेस-स्वस्थ जनमत के निर्माण के लिए निष्पक्ष प्रेस का होना आवश्यक है। प्रेस अर्थात् समाचार-पत्र राजनीतिक दलों और पूंजीपतियों से स्वतन्त्र होने चाहिए ताकि सच्चे समाचार दे सकें और सरकार के अच्छे कार्यों की प्रशंसा कर सकें। स्वस्थ जनमत के निर्माण के लिए यह आवश्यक है कि प्रेस ईमानदार, निष्पक्ष और साम्प्रदायिक भावनाओं से ऊपर हो।

3. ग़रीबी का अन्त-शुद्ध जनमत के निर्माण के लिए आवश्यक है कि ग़रीबी का अन्त किया जाए। ग़रीब व्यक्ति जिसे 24 घण्टे रोटी की चिन्ता रहती है, देश की समस्याओं पर नहीं सोच सकता। अतः शुद्ध जनमत के निर्माण के लिए यह आवश्यक है कि जनता को भर पेट भोजन मिलता हो, मजदूरों का शोषण न होता हो और अकाल न पड़ते हों।

4. राजनीतिक दल आर्थिक तथा राजनीतिक सिद्धान्तों पर आधारित होने चाहिए।

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प्रश्न 5.
दबाव समूह कानून निर्माण में किस प्रकार सहायता करते हैं ?
उत्तर-
वर्तमान समय में दबाव समूह सरकार की कानून निर्माण में काफ़ी सहायता करते हैं । जब संसद् की विभिन्न समितियाँ किसी बिल पर विचार-विमर्श कर रही होती है, तब वे अलग-अलग दबाव समूहों को अपना पक्ष रखने के लिए कहती हैं। दबाव समूह उस बिल के कारण उन पर पड़ने वाले सकारात्मक एवं नकारात्मक प्रभाव की बात कहते हैं। इस प्रकार अपने दृढ़ पक्ष से दबाव समूह कानून निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। संसद् की विभिन्न समितियां भी इनके विचारों, तर्कों एवं आंकड़ों को महत्त्व देती हैं।

प्रश्न 6.
स्वस्थ जनमत के निर्माण के रास्ते में आने वाली चार बाधाएं लिखो।
उत्तर-
स्वस्थ जनमत के निर्माण में मुख्य बाधाएं निम्नलिखित हैं –

  • अनपढ़ता तथा अज्ञानता-अनपढ़ता तथा अज्ञानता स्वस्थ जनमत के निर्माण में बहुत बड़ी बाधा है। अनपढ़ता और अज्ञानता के फलस्वरूप जनता की सोचने की शक्ति तथा मनोवृत्ति संकुचित हो जाती है।
  • निर्धनता-निर्धनता स्वस्थ जनमत के मार्ग में एक महत्त्वपूर्ण बाधा है। निर्धन व्यक्ति आर्थिक समस्याओं में जकड़ा रहता है। जहां ग़रीबी होती है वहां जनमत का निर्माण नहीं हो पाता।
  • आलस्य और उदासीनता-आलस्य और उदासीनता स्वस्थ जनमत के निर्माण में बाधा है। यदि किसी देश के नागरिक आलसी और सार्वजनिक समस्या के प्रति उदासीन हों तो शुद्ध जनमत का निर्माण नहीं हो पाता।
  • दोषणपूर्ण शिक्षा प्रणाली भी स्वस्थ लोकमत के निर्माण में एक बाधा है।

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प्रश्न 7.
लोकतन्त्र में लोकमत की क्या भूमिका है ?
उत्तर-
लोकतन्त्रीय राज्य में जनमत का बहुत अधिक महत्त्व है। रूसो के शब्दों में, “जनता की आवाज़ वास्तव में भगवान् की आवाज़ होती है।” लोकतन्त्र में जनमत का महत्त्व निम्नलिखित तथ्यों से स्पष्ट हो जाता है-

  • लोकतन्त्र शासन प्रणाली में सरकार का आधार जनमत होता है-लोकतन्त्र में सरकार जनता के प्रतिनिधियों द्वारा बनाई जाती है। कोई भी सरकार जनमत के विरुद्ध नहीं जा सकती। सरकार सदैव जनमत को अपने पक्ष में रखने के लिए जनता में अपनी नीतियों का प्रचार करती रहती है। जो सरकार जनमत के विरुद्ध काम करती है वह शीघ्र ही हटा दी जाती है।
  • जनमत सरकार का मार्गदर्शक है-जनमत लोकतन्त्रीय सरकार का आधार ही नहीं बल्कि मार्गदर्शक भी है। जनमत सरकार को रास्ता दिखाता है कि उसे क्या करना है और किस तरह करना है। सरकार कानूनों का निर्माण करते समय जनमत का ध्यान अवश्य रखती है।
  • जनमत प्रतिनिधियों की निरंकुशता को नियन्त्रित करता है-लोकतन्त्र में जनता अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करती है और जिस दल के पक्ष में जनमत होता है, उस दल की सरकार बनती है। कोई भी प्रतिनिधि अथवा मन्त्री अपनी मनमानी नहीं कर सकता। उन्हें सदैव जनमत के विरोध का डर रहता है।
  • लोकतन्त्र में कानून निर्माण में जनमत का महत्त्वपूर्ण हाथ होता है।’

प्रश्न 8.
जनमत के निर्माण और अभिव्यक्ति के कोई चार साधन लिखें।
अथवा
जनमत के निर्माण में प्रेस, रेडियो और टेलीविज़न की क्या भूमिका है।
अथवा
जनमत के निर्माण और अभिव्यक्ति के कोई तीन साधन लिखो।
उत्तर-
लोकमत के निर्माण में प्रेस, राजनीतिक दल, टेलीविज़न इत्यादि महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

  • प्रेस-समाचार-पत्र, पत्र-पत्रिकाएं इत्यादि जनमत के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। समाचार-पत्र लाखों व्यक्ति पढ़ते हैं उनके मतों पर समाचार-पत्रों का बहुत प्रभाव पड़ता है।
  • राजनीतिक दल-राजनीतिक दल जनमत को अपने पक्ष में करने का प्रयत्न करते हैं। राजनीतिक दल समाचारपत्रों द्वारा, सार्वजनिक सभाओं द्वारा, रेडियो द्वारा तथा घर-घर जाकर अपने सिद्धान्तों का प्रचार करते हैं। देश की समस्याओं पर अपने विचार जनमत को बताते हैं। राजनीतिक दल अपने सिद्धान्तों का प्रचार करते हैं। इन सब तरीकों से जनमत के निर्माण में सहायता मिलती है।
  • रेडियो और टेलीविज़न-रेडियो और टेलीविज़न जनता का मनोरंजन ही नहीं करते बल्कि जनता को देश-विदेश की समस्याओं से भी अवगत कराते हैं। राजनीतिक दलों के नेता, प्रधानमन्त्री, राष्ट्रपति तथा बड़े-बड़े विद्वान् अपने विचारों को रेडियो तथा टेलीविज़न द्वारा जनता तक पहुंचाते हैं। अनपढ़ व्यक्ति विशेषकर रेडियो तथा टेलीविज़न से काफ़ी प्रभावित होते हैं।
  • शैक्षिक संस्थाएं-शैक्षिक संस्थाएं भी जनमत निर्माण में महत्त्वपूर्ण योगदान देती हैं । अध्यापक अध्यापन के समय कई महत्त्वपूर्ण मामलों सम्बन्धी अपने विचार भी अभिव्यक्त करते हैं जिनका विद्यार्थियों पर व्यापक प्रभाव पड़ता है।
    सहा

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अति लघु उत्तरीय प्रश्न-

प्रश्न 1.
जनमत क्या होता है?
उत्तर-
जनमत सार्वजनिक मामलों पर जनता की राय को कहते हैं, परन्तु किसी भी विषय पर समस्त नागरिक एकमत नहीं हो सकते । जनमत बहुमत नहीं है क्योंकि बहुमत में बहुमत संख्या का अपना दृष्टिकोण रहता है, समस्त राष्ट्र का नहीं। बहुमत का मत जनमत बन सकता है यदि उसमें जनसाधारण की भलाई छिपी हुई हो।

प्रश्न 2.
जनमत की दो परिभाषाएं लिखें।
उत्तर-

  1. डॉ० बेनी प्रसाद के अनुसार, “केवल उसी मत को वास्तविक जनमत कहा जा सकता है जिसका उद्देश्य जनता का कल्याण है।”
  2. लॉर्ड ब्राइस के अनुसार, “समस्त समाज से सम्बन्धित किसी समस्या पर जनता के सामूहिक विचारों को जनमत कहा जा सकता है।”

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प्रश्न 3.
जनमत की कोई दो विशेषताएं लिखें।
उत्तर-

  • आम सहमति-जनमत की मुख्य विशेषता यह है कि इसमें आम सहमति होनी चाहिए। इसका अर्थ यह कि किसी मामले पर सभी लोगों की एक राय हो।
  • जनता की भलाई-जनमत की दूसरी विशेषता जनता की भलाई है। जिस मत में जनता की भलाई निहित न हो वह मत जनमत नहीं बन सकता है।

प्रश्न 4.
अच्छे व स्वस्थ लोकमत (जनमत) के लिए दो जरूरी शर्ते बताएं।
उत्तर-

  • शिक्षित जनता-स्वस्थ जनमत के निर्माण के लिए जनता का शिक्षित होना आवश्यक है। शिक्षित नागरिक देश की समस्याओं को समझ सकता है और समस्याओं को हल करने के लिए सुझाव भी दे सकता है।
  • निष्पक्ष प्रेस-स्वस्थ जनमत के निर्माण के लिए निष्पक्ष प्रेस का होना आवश्यक है। प्रेस अर्थात् समाचार-पत्र राजनीतिक दलों और पूंजीपतियों से स्वतन्त्र होने चाहिएं ताकि सच्चे समाचार दे सकें और सरकार के अच्छे कार्यों की प्रशंसा कर सकें।

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प्रश्न 5.
स्वस्थ लोकमत के निर्माण में आने वाली किन्हीं जो रुकावटों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-

  • अनपढ़ता तथा अज्ञानता-अनपढ़ता तथा अज्ञानता स्वस्थ जनमत के निर्माण में बहुत बड़ी बाधा हैं। अनपढ़ता और अज्ञानता के फलस्वरूप जनता की सोचने की शक्ति तथा मनोवृत्ति संकुचित हो जाती है।
  • निर्धनता-निर्धनता स्वस्थ जनमत के मार्ग में एक महत्त्वपूर्ण बाधा है। निर्धन व्यक्ति आर्थिक समस्याओं में जकड़ा रहता है। जहां ग़रीबी होती है वहां जनमत का निर्माण नहीं हो पाता।

प्रश्न 6.
लोकतन्त्र में लोकमत का क्या महत्त्व है ?
उत्तर-

  • लोकतन्त्र शासन प्रणाली में सरकार का आधार जनमत होता है-लोकतन्त्र में सरकार जनता के प्रतिनिधियों द्वारा बनाई जाती है। कोई भी सरकार जनमत के विरुद्ध नहीं जा सकती है। जो सरकार जनमत के विरुद्ध काम करती है वह शीघ्र ही हटा दी जाती है।
  • जनमत सरकार का मार्गदर्शक है-जनमत लोकतन्त्रीय सरकार का आधार ही नहीं बल्कि मार्गदर्शक भी है।

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प्रश्न 7.
जनमत के निर्माण और अभिव्यक्ति के कोई दो साधन लिखो।
उत्तर-
1. प्रेस-समाचार-पत्र, पत्र-पत्रिकाएं इत्यादि जनमत के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। समाचारपत्रों में देश-विदेश की घटनाओं और समस्याओं को छापा जाता है। समाचार-पत्र जनता की शिकायतें सरकार तक पहुंचाते हैं और सरकार की गलत नीतियों की आलोचना करते हैं। समाचार-पत्र लाखों व्यक्ति पढ़ते हैं। उनके मतों पर समाचार-पत्र का बहुत प्रभाव पड़ता है।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न-

प्रश्न I. एक शब्द/वाक्य वाले प्रश्न-उत्तर

प्रश्न 1.
जनमत से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर-
जनमत से हमारा अभिप्राय सार्वजनिक मामलों पर जनता की राय से है।

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प्रश्न 2.
लोकमत की एक परिभाषा लिखो।
उत्तर-
प्रो० ब्राईस के अनुसार, “समस्त समाज से सम्बन्धित समस्या पर जनता के सामूहिक विचारों को जनमत कहा जाता है।”

प्रश्न 3.
क्या बहुमत की राय को जनमत कहा जा सकता है? ,
उत्तर-
केवल बहुमत की राय को ही जनमत नहीं कहा जा सकता।

प्रश्न 4.
प्रेस जनमत के निर्माण में क्या भूमिका निभाता है ?
उत्तर-
प्रेस जनता को दैनिक घटनाओं और समाचारों से परिचित रखता है। ये सरकार के कार्यों पर टीका-टिप्पणी करते हैं और उनके कार्यों की प्रशंसा और आलोचना करते हैं।

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प्रश्न 5.
जनमत के निर्माण में राजनीतिक दल क्या भूमिका निभाते हैं ? .
उत्तर-
राजनीतिक दल लोगों के सामने देश की विभिन्न समस्याओं पर अपने विचार रखते हैं और समस्याओं को हल करने के लिए अपना कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं।

प्रश्न 6.
स्वस्थ लोकमत के निर्माण के मार्ग में कोई दो कठिनाइयां लिखो।
अथवा
लोकमत निर्माण में एक रुकावट लिखो।
उत्तर-

  1. अनपढ़ता
  2. पक्षपाती प्रेस।

प्रश्न 7.
जनमत के निर्माण का कोई एक साधन लिखो।
उत्तर-
राजनीतिक दल।

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प्रश्न 8.
रेडियो तथा टेलीविज़न जनमत के निर्माण में कैसे सहायक होते हैं ?
उत्तर-
रेडियो तथा टेलीविज़न द्वारा नेताओं के विचार लोगों तक पहुँचते हैं, तथा लोगों को राजनीतिक शिक्षा मिलती है।

प्रश्न 9.
जनमत की कोई एक विशेषता लिखो।
उत्तर-
जनमत तर्कसंगत होता है।

प्रश्न 10.
लोकमत के निर्माण और प्रकटावे के दो साधन लिखो।
अथवा
जनमत के निर्माण के दो साधन लिखें।
उत्तर-

  1. प्रेस
  2. राजनीतिक दल।

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प्रश्न II. खाली स्थान भरें-

1. ………… की आवाज परमात्मा की ……………. होती है।
2. नेपोलियन के अनुसार एक लाख तलवारों की अपेक्षा मुझे तीन ………… से अधिक भय है।
3. ……….. सार्वजनिक मामलों पर जनता की राय को कहते हैं।
4. कैरोल के अनुसार साधारण प्रयोग में जनमत साधारण जनता की ……… को कहते हैं।
5. ………. में लोकमत को बढ़ावा मिलता है।
6. लोकतन्त्र शासन प्रणाली में …………. का आधार जनमत होता है।
उत्तर-

  1. जनता, आवाज
  2. समाचार-पत्रों
  3. जनमत
  4. मिली-जुली प्रतिक्रिया
  5. लोकतन्त्र
  6. सरकार।

प्रश्न III. निम्नलिखित वाक्यों में से सही एवं ग़लत का चुनाव करें-

1. जनमत सरकार को निरंकुश बनने से रोकता है।
2. देश की बहुसंख्यक जनता के मत को जनमत कहते हैं।
3. जनमत नागरिकों के अधिकारों और स्वतन्त्रता को सुरक्षा प्रदान करता है।
4. श्रेष्ठ जनमत के निर्माण के लिए सबसे आवश्यक शर्त जनता का अशिक्षित होना है।
5. रेडियो और सिनेमा जनमत के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उत्तर-

  1. सही
  2. ग़लत
  3. सही
  4. ग़लत
  5. सही।

PSEB 12th Class Political Science Solutions Chapter 10 जनमत

प्रश्न IV. बहुविकल्पीय प्रश्न-

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में से कौन-सा तत्त्व स्वस्थ जनमत को बढ़ावा देता है ?
(क) साम्यवाद
(ख) जातिवाद
(ग) क्षेत्रवाद
(घ) स्वतन्त्र प्रेस।
उत्तर-
(घ) स्वतन्त्र प्रेस।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित में जनमत निर्माण का साधन है-
(क) प्रेस
(ख) सार्वजनिक सभाएं
(ग) राजनीतिक
(घ) उपरोक्त।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त।

PSEB 12th Class Political Science Solutions Chapter 10 जनमत

प्रश्न 3.
लोकतान्त्रिक सरकार की सफलता किस पर निर्भर करती है ?
(क) तानाशाह पर
(ख) क्षेत्रवाद पर
(ग) जातिवाद पर
(घ) जनमत पर।
उत्तर-
(घ) जनमत पर।

प्रश्न 4.
“एक लाख तलवारों की अपेक्षा मुझे तीन समाचार-पत्रों से अधिक भय है।” यह किसका कथन है?
(क) नेपोलियन
(ख) रूसो
(ग) हिटलर
(घ) मुसोलिनी।
उत्तर-
(क) नेपोलियन

PSEB 12th Class Political Science Solutions Chapter 10 जनमत

प्रश्न 5.
जनमत बनाने के लिए केवल बहुमत काफ़ी नहीं और सर्वसम्मति आवश्यक नहीं है।” यह किसका कथन
(क) डॉ० बेनी प्रसाद
(ख) लावेल
(ग) श्रीनिवास शास्त्री
(घ) लॉस्की ।
उत्तर-
(ख) लावेल

PSEB 12th Class History Solutions Chapter 18 ऐंग्लो-सिख संबंध : 1800-1839

Punjab State Board PSEB 12th Class History Book Solutions Chapter 18 ऐंग्लो-सिख संबंध : 1800-1839 Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 12 History Chapter 18 ऐंग्लो-सिख संबंध : 1800-1839

निबंधात्मक प्रश्न (Essay Type Questions)

प्रथम चरण 1800-09 ई० (First Stage 1800-09 A.D.)

प्रश्न 1.
आलोचनात्मक दृष्टिकोण से 1800 से 1809 तक के अंग्रेज़-सिख संबंधों का अध्ययन कीजिए।
(Study the Anglo-Sikh relations from 1800 to 1809 from a critical point of view.)
अथवा
रणजीत सिंह के अंग्रेज़ों के साथ 1800 से 1809 ई० तक संबंधों का आलोचनात्मक विवरण दीजिए। (Critically examine Ranjit Singh’s relations with the British from 1800 to 1809.)
अथवा
अमृतसर की संधि जिन परिस्थितियों में हुई उनकी पड़ताल कीजिए। इसकी क्या धाराएँ.थीं तथा इससे महाराजा रणजीत सिंह और अंग्रेजों को क्या लाभ हुए ?
(Examine the circumstances leading to the Treaty of Amritsar in 1809. What were its terms and respective advantages derived from it by the Maharaja Ranjit Singh and the British from it ?)
अथवा
किन परिस्थितियों के कारण 1809 ई० में अमृतसर की संधि हुई ? इस संधि का महत्त्व बताइए।
(Discuss the circumstances leading to the Treaty of Amritsar (1809). Examine the significance of this treaty.)
अथवा
अमृतसर की संधि के बारे में आप क्या जानते हैं ? इस संधि के कारण महाराजा रणजीत सिंह तथा अंग्रेज़ों को क्या लाभ प्राप्त हुए ?
(What do you know about the Treaty of Amritsar ? What was gained by Maharaja Ranjit Singh and the English by this Treaty ?)
उत्तर-
अंग्रेज़ दीर्घकाल से पंजाब की ओर ललचाई दृष्टि से देख रहे थे। दूसरी ओर रणजीत सिंह भी समस्त पंजाब पर अपना एक-छत्र राज कायम करना चाहता था। दोनों धड़ों की साम्राज्यवादी महत्त्वाकाँक्षाओं ने परस्पर संबंधों को महत्त्वपूर्ण ढंग से प्रभावित किया। 1800-09 ई० तक महाराजा रणजीत सिंह और अंग्रेज़ों के मध्य संबंधों का संक्षिप्त वर्णन इस प्रकार है—

1. यूसुफ अली का मिशन 1800 ई० (Mission of Yusuf Ali 1800 A.D.)-महाराजा रणजीत सिंह ने अफ़गानिस्तान के शासक शाह जमान से मित्रतापूर्ण संबंध स्थापित कर लिये थे। इस कारण अंग्रेज़ी सरकार को यह ख़तरा हो गया कि कहीं शाह जमान तथा महाराजा रणजीत सिंह मिलकर अंग्रेज़ों पर आक्रमण न कर दें। अंग्रेज़ों ने 1800 ई० में यूसुफ अली को अपना प्रतिनिधि बनाकर महाराजा रणजीत सिंह के दरबार में भेजा। परंतु यह मिशन अभी मार्ग में ही था कि अफ़गानिस्तान में राजगद्दी के लिये गृह युद्ध शुरू हो गया। शाह जमान के आक्रमण की संभावना समाप्त हो जाने के कारण यूसुफ अली को वापस बुला लिया गया। इस कारण यह मिशन केवल एक सद्भावना मिशन तक ही सीमित रहा।

2. होलकर का पंजाब आना 1805 ई० (Holkar’s visit to Punjab 1805 A.D.)-1805 ई० में अंग्रेजों से पराजित होकर मराठा सरदार जसवंत राव होलकर महाराजा रणजीत सिंह से अंग्रेजों के विरुद्ध सहायता लेने के लिये पंजाब आया। ऐसी स्थिति में महाराजा ने बहुत सूझ-बूझ से काम किया। उसने होलकर को सहायता देने से इंकार कर दिया। वह एक पराजित शासक की सहायता करके अंग्रेजों से टक्कर मोल नहीं लेना चाहता था।

3. लाहौर की संधि 1806 ई० (Treaty of Lahore 1806 A.D.)-क्योंकि महाराजा रणजीत सिंह ने होलकर की कोई सहायता नहीं की थी इस कारण अंग्रेज़ महाराजा रणजीत सिंह पर बहुत प्रसन्न हुए । उन्होंने 1 जनवरी, 1806 ई० को लाहौर में महाराजा रणजीत सिंह के साथ एक संधि की। इस संधि के अनुसार महाराजा रणजीत सिंह ने यह स्वीकार किया कि वह होलकर की कोई सहायता नहीं करेगा तथा उसको अमृतसर में से शांतिपूर्वक निकल जाने की अनुमति देगा। अंग्रेज़ों ने यह माना कि वे महाराजा रणजीत सिंह के राज्य में कोई हस्तक्षेप नहीं करेंगे।

4. नेपोलियन का ख़तरा (Napoleonic Danger)-इस समय अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियों में एक महत्त्वपूर्ण परिवर्तन आया। 1807 ई० में नेपोलियन ने रूस के साथ टिलसिट की संधि पर हस्ताक्षर किये। इस संधि के अनुसार रूस ने नेपोलियन को भारत पर आक्रमण करने के समय पूरा सहयोग देने का वचन दिया। नेपोलियन के बढ़ते हुए प्रभाव के कारण भारत में अंग्रेज़ी सरकार घबरा गई। उसने स्थिति का सामना करने के लिए महाराजा रणजीत सिंह के साथ मित्रता करने का निर्णय किया।

5. मैटकॉफ का प्रथम मिशन (Matcalfe’s First Mission)-अंग्रेज़ों ने महाराजा रणजीत सिंह के साथ संधि करने के लिये चार्ल्स मैटकॉफ को भेजा। वह 11 सितंबर, 1808 ई० को महाराजा को खेमकरण में मिला। यहाँ उसने अंग्रेजी सरकार के प्रस्ताव महाराजा रणजीत सिंह के समक्ष रखे। संधि के बदले महाराजा रणजीत सिंह ने अंग्रेजों के समक्ष ये शर्त रखीं—

  • उसको सभी सिख रियासतों का शासक माना जाये।
  • काबुल के शासक के साथ युद्ध के समय अंग्रेज़ तटस्थ रहेंगे परंतु यह बातचीत स्थगित कर दी गई।

6. मैटकॉफ का द्वितीय मिशन (Metcalfe’s Second Mission)–नेपोलियन स्पेन की लड़ाई में उलझ गया था। इस कारण उसका भारत पर आक्रमण का ख़तरा टल गया। अब अंग्रेजों ने महाराजा रणजीत सिंह के बढ़ते हुए प्रभाव को रोकने का निर्णय किया। इस संबंध में चार्ल्स मैटकॉफ 10 दिसंबर, 1808 ई० को महाराजा रणजीत सिंह को अमृतसर में मिला। परंतु इस बातचीत का भी कोई परिणाम न निकला।

7. लड़ाई की तैयारियाँ (Warfare Preparations)-अंग्रेज़ों ने अपनी शर्ते मनवाने के लिए लड़ाई की तैयारियां शुरू कर दी। उन्होंने फरवरी, 1809 ई० में सर डेविड आक्टरलोनी के नेतृत्व में एक सेना लुधियाना में भेजी। महाराजा रणजीत सिंह ने भी दीवान मोहकम चंद को फिल्लौर में नियुक्त किया। किसी समय भी लड़ाई शुरू हो सकती थी परंतु अंतिम क्षणों में महाराजा रणजीत सिंह ने अंग्रेज़ों की शर्तों को स्वीकार कर लिया।

8. अमृतसर की संधि 1809 ई० (Treaty of Amritsar 1809 A.D.)-महाराजा रणजीत सिंह तथा अंग्रेजों में 25 अप्रैल, 1809 ई० को अमृतसर की संधि हुई। इस संधि के अनुसार सतलुज नदी को महाराजा रणजीत सिंह के राज्य की पूर्वी सीमा स्वीकार कर लिया गया। अब वह सतलुज पार के प्रदेशों पर कोई आक्रमण नहीं करेगा। अंग्रेजों ने महाराजा को सतलुज के इस ओर का स्वतंत्र शासक स्वीकार कर लिया। दोनों ने एक दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने का निर्णय किया। ऐसा करने की स्थिति में संधि को रद्द समझा जायेगा।

9. अमृतसर की संधि की रणजीत सिंह को हानियाँ (Disadvantages of Treaty of Amritsar to Ranjit Singh)-1809 ई० में हुई अमृतसर की संधि की रणजीत सिंह को निम्नलिखित हानियाँ हुईं–

  • इस संधि के चलते महाराजा रणजीत सिंह का संपूर्ण सिख कौम के महाराजा बनने का स्वप्न. धूल में मिल गया।
  • इस संधि के कारण महाराजा रणजीत सिंह की प्रतिष्ठा को एक गहरा आघात लगा।
  • इस संधि के कारण अंग्रेजों के लिए पंजाब को हड़पना सुगम हो गया।
  • इस संधि के कारण महाराजा रणजीत सिंह सतलुज पार के क्षेत्रों पर अधिकार न कर सका। इस कारण उसे भारी क्षेत्रीय एवं आर्थिक हानि हुई।

10. अमृतसर की संधि के रणजीत सिंह को लाभ (Advantages of Treaty of Amritsar to Ranjit Singh)-1809 ई० में हुई अमृतसर की संधि के रणजीत सिंह को निम्नलिखित लाभ हुए—

  • महाराजा ने अंग्रेज़ों के साथ संधि करके पंजाब राज्य को नष्ट होने से बचा लिया। रणजीत सिंह अगर अंग्रेजों के साथ टक्कर लेता तो उसे अपना राज्य गंवाना पड़ता।
  • अमृतसर की संधि से महाराजा रणजीत सिंह के राज्य की पूर्वी सीमा सुरक्षित हो गई। परिणामस्वरूप महाराजा उत्तर पश्चिम के महत्त्वपूर्ण प्रदेशों जैसे अटक, मुलतान, कश्मीर तथा पेशावर को पंजाब राज्य में सम्मिलित करने में सफल रहा।

11. अमृतसर की संधि से अंग्रेजों को लाभ (Advantages of Treaty of Amritsar to the British)अमृतसर की संधि से अंग्रेज़ों को निम्नलिखित लाभ हुए–

  • अंग्रेज़ों ने बिना किसी नुकसान के ही रणजीत सिंह को पूर्व की ओर बढ़ने से रोक दिया।
  • अंग्रेजों को काफ़ी प्रादेशिक लाभ हुआ। उनका साम्राज्य जमुना नदी से लेकर सतलुज नदी तक फैल गया।
  • अंग्रेज़ अपना ध्यान भारत की अन्य शक्तियों का दमन करने में लगा सके।
  • पंजाब अफ़गानिस्तान तथा अंग्रेज़ों के मध्य एक मध्यवर्ती राज्य बन गया।
  • अंग्रेज़ी ईस्ट इंडिया के सम्मान में काफ़ी वृद्धि हुई।

PSEB 12th Class History Solutions Chapter 18 ऐंग्लो-सिख संबंध : 1800-1839

दूसरा चरण 1809-39 ई० (Second Stage 1809-39 A.D.)

प्रश्न 2.
1809 से 1839 तक ऐंग्लो-सिख संबंधों का वर्णन करो।
(Describe the Anglo-Sikh relations during 1809-1839.)
अथवा
1809 से 1839 तक महाराजा रणजीत सिंह तथा अंग्रेजों के संबंधों की मुख्य विशेषताएँ बताएँ । (Give the main features of the relations between Maharaja Ranjit Singh and the British during 1809 to 1839 A.D.)
अथवा 1809 से 1839 ई० तक महाराजा रणजीत सिंह के संबंधों का आलोचनात्मक वर्णन करें। (Critically discuss the Anglo-Sikh relations from 1809 to 1839 A.D.)
उत्तर-
महाराजा रणजीत सिंह तथा अंग्रेज़ों के मध्य 25 अप्रैल, 1809 ई० को अमृतसर की संधि हुई। इससे अंग्रेज़-सिख संबंधों में नए युग का सूत्रपात हुआ। इस संधि के बाद महाराजा रणजीत सिंह और अंग्रेज़ों के मध्य रहे संबंधों का आलोचनात्मक वर्णन निम्नलिखित है—

1. कुछ संदेह तथा अविश्वास का समय (Period of some Distrust and Suspicion)-अमृतसर की संधि के बावजूद अंग्रेज़ों तथा महाराजा के बीच 1809 ई० से 1812 ई० तक परस्पर संदेह तथा अविश्वास का वातावरण बना रहा। दोनों ही पक्षों ने एक-दूसरे की सैनिक तथा कूटनीतिक योजनाओं के बारे जानकारी प्राप्त करने के लिए अपने जासूस छोड़े हुए थे। अंग्रेजों ने लुधियाना में एक शक्तिशाली सैनिक छावनी स्थापित कर ली। दूसरी ओर महाराजा रणजीत सिंह ने भी फिल्लौर में एक किले का निर्माण करवाया।

2. संबंधों में सुधार (Improvement in the Relations)-धीरे-धीरे महाराजा रणजीत सिंह तथा अंग्रेजों के बीच संदेह दूर होने शुरू हो गए। 1812 ई० में महाराजा रणजीत सिंह ने डेविड आक्टरलोनी को कुंवर खड़क सिंह के विवाह पर निमंत्रण दिया। लाहौर दरबार में पहुँचने पर उसका हार्दिक अभिनंदन किया गया। 1812 ई० से लेकर 1821 ई० तक के समय दौरान अंग्रेज़ों तथा महाराजा रणजीत सिंह ने एक दूसरे के मामलों में कोई हस्तक्षेप नहीं किया।

3. वदनी की समस्या (Problem of Wadni)-1822 ई० में वदनी गाँव के स्वामित्व के बारे अंग्रेज़ों तथा महाराजा रणजीत सिंह के परस्पर संबंधों में कुछ समय के लिये तनाव पैदा हो गया। अंग्रेजों ने वदनी में से महाराजा रणजीत सिंह की सेना को निकाल दिया। इस कारण महाराजा रणजीत सिंह को बहुत क्रोध आया परंतु उसने लड़ाई नहीं की।

4. संबंधों में सुधार (Cordiality Restored)-1823 ई० में वेड जो कि लुधियाना में अंग्रेजों का पुलीटीकल एजेंट था, के हस्तक्षेप करने पर वदनी का क्षेत्र महाराजा रणजीत सिंह को वापस सौंप दिया गया। महाराजा रणजीत सिंह ने भी 1824 ई० में जब नेपाल सरकार ने अंग्रेजों के विरुद्ध महाराजा रणजीत सिंह से सहायता माँगी तो उसने इंकार कर दिया। इसी तरह 1825 ई० में महाराजा ने भरतपुर के राजा को अंग्रेजों के विरुद्ध सहयोग न दिया। 1826 ई० में जब महाराजा रणजीत सिंह बीमार पड़ा तो अंग्रेज़ों ने इलाज के लिये डॉक्टर मरे को भेजा। इस तरह दोनों के संबंधों में पुनः सुधार होना शुरू हो गया।

5. सिंध का प्रश्न (Question of Sind)-सिंध का क्षेत्र व्यापारिक तथा भौगोलिक पक्ष से बहुत महत्त्वपूर्ण था। 1831 ई० में अंग्रेजों ने अलैग्जेंडर बर्नज को संधि के बारे जानकारी प्राप्त करने के लिये भेजा। महाराजा रणजीत सिंह को कोई संदेह न हो इसलिये उसको रोपड़ में गवर्नर-जनरल लॉर्ड बैंटिंक के साथ एक मुलाकात के लिये निमंत्रण भेजा गया। यह मुलाकात 26 अक्तूबर, 1831 ई० को हुई। अंग्रेजों ने बड़ी चतुराई से महाराजा रणजीत सिंह को बातचीत में लगाये रखा। दूसरी ओर अंग्रेज़ सिंध के साथ एक व्यापारिक संधि करने में सफल हुए। इस कारण महाराजा रणजीत सिंह तथा अंग्रेजों के बीच पुनः तनाव उत्पन्न हो गया।

6. शिकारपुर का प्रश्न (Question of Shikarpur)-शिकारपुर के प्रश्न पर महाराजा रणजीत सिंह तथा अंग्रेजों के बीच तनाव बढ़ गया। 1836 ई० में जब मजारिस नामक एक कबीले. को महाराजा रणजीत सिंह ने पराजित किया तथा शिकारपुर पर अधिकार कर लिया उस समय वेड के नेतृत्व में एक अंग्रेज़ी सेना भी वहाँ पहुँच गई। महाराजा रणजीत सिंह पीछे हट गया क्योंकि वह अंग्रेजों के साथ लड़ाई मोल नहीं लेना चाहता था।

7. फिरोजपुर का प्रश्न (Question of Ferozepur)-फिरोजपुर शहर पर महाराजा रणजीत सिंह का अधिकार था परंतु 1835 ई० में अंग्रेजों ने इस पर कब्जा कर लिया था। 1838 ई० में अंग्रेजों ने यहाँ एक शक्तिशाली सैनिक छावनी बना ली। यद्यपि महाराजा को इस बात पर क्रोध आया परंतु अंग्रेजों ने उसकी कोई परवाह न की। .

8. त्रिपक्षीय संधि (Tripartite Treaty)-1837 ई० में रूस बहुत तीव्रता के साथ एशिया की ओर बढ़ रहा था। अंग्रेजों को यह ख़तरा हो गया कि कहीं रूस अफ़गानिस्तान के मार्ग से भारत पर आक्रमण न कर दे। इस आक्रमण को रोकने के लिए तथा अफ़गानिस्तान के शासक दोस्त मुहम्मद खाँ को गद्दी से उतारने के लिए अंग्रेजों ने अफ़गानिस्तान के भूतपूर्व शासक शाह शुजा तथा महाराजा रणजीत सिंह के साथ 26 जून, 1838 ई० को एक त्रिपक्षीय समझौता किया। अंग्रेज़ों ने महाराजा रणजीत सिंह से इस समझौते पर जबरन हस्ताक्षर करवाये।
त्रिपक्षीय संधि की मुख्य शर्ते थीं-

  • शाह शुजा को अंग्रेज़ों एवं महाराजा रणजीत सिंह के सहयोग से अफ़गानिस्तान का सम्राट् बनाया जाएगा।
  • शाह शुजा ने महाराजा रणजीत सिंह द्वारा विजित किए समस्त अफ़गान क्षेत्रों पर उसका अधिकार मान लिया।
  • सिंध के संबंध में अंग्रेज़ों व महाराजा रणजीत सिंह के मध्य जो निर्णय होंगे, शाह शुज़ा ने उन्हें मानने का वचन दिया।
  • शाह शुज़ा अंग्रेज़ों एवं सिखों की आज्ञा लिए बिना विश्व की किसी अन्य शक्ति के साथ संबंध स्थापित नहीं करेगा।
  • एक देश का शत्रु दूसरे दो देशों का भी शत्रु माना जाएगा।
  • शाह शुजा को सिंहासन पर बिठाने के लिए महाराजा रणजीत सिंह 5,000 सैनिकों सहित सहायता 2करेगा तथा शाह शुजा इसके स्थान पर महाराजा को 2 लाख रुपए देगा।

त्रिपक्षीय संधि रणजीत सिंह की एक और कूटनीतिक पराजय थी। इस संधि ने रणजीत सिंह की सिंध एवं शिकारपुर पर अधिकार करने की सभी इच्छाओं पर पानी फेर दिया था। महाराजा रणजीत सिंह की 27 जून, 1839 ई० को मृत्यु हो गई।

महाराजा रणजीत सिंह की अंग्रेजों के प्रति नीति की समीक्षा (An Estimate of Maharaja Ranjit Singh’s Policy towards the British)
महाराजा रणजीत सिंह के अंग्रेजों के साथ कैसे संबंध थे इस बारे में इतिहासकारों में मतभेद पाये जाते हैं। कछ इतिहासकारों का विचार है कि महाराजा रणजीत सिंह ने अंग्रेजों के साथ लड़ाई न करके अपनी सूझ-बूझ तथा दूरदर्शिता का परिचय दिया। महाराजा रणजीत सिंह अंग्रेजों की शक्ति से अच्छी तरह अवगत था। वह अपने से कई गुना शक्तिशाली शत्रु के साथ टक्कर लेकर उभरते हुए खालसा राज्य को नष्ट होते नहीं देखना चाहता था। दूसरे, अंग्रेजों के साथ मित्रता के कारण ही महाराजा रणजीत सिंह उत्तर-पश्चिम की ओर सिख साम्राज्य का विस्तार कर सका।

दूसरी ओर कुछ अन्य इतिहासकारों ने इस नीति की कड़ी आलोचना की है। उनका विचार है कि महाराजा रणजीत सिंह ने अंग्रेजों के समक्ष सदैव झुकने की नीति अपनाई। 1809 ई० की अमृतसर की संधि द्वारा महाराजा रणजीत सिंह को सतलुज पार के प्रदेशों में से अपनी सेनाएँ निकालने के लिये विवश कर दिया गया था। सिंध, शिकारपुर तथा फिरोज़पुर के मामलों में महाराजा रणजीत सिंह का भारी अपमान किया गया था। त्रि-पक्षीय संधि भी महाराजा रणजीत सिंह पर जबरन थोपी गई थी। अत्याचारी के समक्ष सदैव झुकते रहना कभी उचित या योग्य नहीं कहा जा सकता। डॉक्टर एन०. के० सिन्हा के अनुसार,
“उसके हृदय के अंदर भी शायद वही चिंता थी जो प्रत्येक निर्माता को उत्तराधिकार में मिलती है । अपने हाथों से निर्मित साम्राज्य को वह युद्ध के ख़तरों के समक्ष नंगा करने से घबराता था तथा इसलिए उसने झुक जाने, झुक जाने तथा झुक जाने की नीति अपनाई।”1

1. “Perhaps with the solicitude inherent in all builders, he feared to expose the kingdom, he had created, to the risks of war and chose instead the policy of yielding, yielding and yielding.” Dr. N.K. Sinha, Ranjit Singh (Calcutta : 1975) p. 137.

PSEB 12th Class History Solutions Chapter 18 ऐंग्लो-सिख संबंध : 1800-1839

प्रश्न 3.
1800 से 1839 ई० तक रणजीत सिंह के अंग्रेजों के साथ संबंधों का विवरण दीजिए।
(Discuss the relations of Ranjit Singh with the British from 1800 to 1839.)
उत्तर-
महाराजा रणजीत सिंह तथा अंग्रेज़ों के मध्य 25 अप्रैल, 1809 ई० को अमृतसर की संधि हुई। इससे अंग्रेज़-सिख संबंधों में नए युग का सूत्रपात हुआ। इस संधि के बाद महाराजा रणजीत सिंह और अंग्रेज़ों के मध्य रहे संबंधों का आलोचनात्मक वर्णन निम्नलिखित है—

1. कुछ संदेह तथा अविश्वास का समय (Period of some Distrust and Suspicion)-अमृतसर की संधि के बावजूद अंग्रेज़ों तथा महाराजा के बीच 1809 ई० से 1812 ई० तक परस्पर संदेह तथा अविश्वास का वातावरण बना रहा। दोनों ही पक्षों ने एक-दूसरे की सैनिक तथा कूटनीतिक योजनाओं के बारे जानकारी प्राप्त करने के लिए अपने जासूस छोड़े हुए थे। अंग्रेजों ने लुधियाना में एक शक्तिशाली सैनिक छावनी स्थापित कर ली। दूसरी ओर महाराजा रणजीत सिंह ने भी फिल्लौर में एक किले का निर्माण करवाया।

2. संबंधों में सुधार (Improvement in the Relations)-धीरे-धीरे महाराजा रणजीत सिंह तथा अंग्रेजों के बीच संदेह दूर होने शुरू हो गए। 1812 ई० में महाराजा रणजीत सिंह ने डेविड आक्टरलोनी को कुंवर खड़क सिंह के विवाह पर निमंत्रण दिया। लाहौर दरबार में पहुँचने पर उसका हार्दिक अभिनंदन किया गया। 1812 ई० से लेकर 1821 ई० तक के समय दौरान अंग्रेज़ों तथा महाराजा रणजीत सिंह ने एक दूसरे के मामलों में कोई हस्तक्षेप नहीं किया।

3. वदनी की समस्या (Problem of Wadni)-1822 ई० में वदनी गाँव के स्वामित्व के बारे अंग्रेज़ों तथा महाराजा रणजीत सिंह के परस्पर संबंधों में कुछ समय के लिये तनाव पैदा हो गया। अंग्रेजों ने वदनी में से महाराजा रणजीत सिंह की सेना को निकाल दिया। इस कारण महाराजा रणजीत सिंह को बहुत क्रोध आया परंतु उसने लड़ाई नहीं की।

4. संबंधों में सुधार (Cordiality Restored)-1823 ई० में वेड जो कि लुधियाना में अंग्रेजों का पुलीटीकल एजेंट था, के हस्तक्षेप करने पर वदनी का क्षेत्र महाराजा रणजीत सिंह को वापस सौंप दिया गया। महाराजा रणजीत सिंह ने भी 1824 ई० में जब नेपाल सरकार ने अंग्रेजों के विरुद्ध महाराजा रणजीत सिंह से सहायता माँगी तो उसने इंकार कर दिया। इसी तरह 1825 ई० में महाराजा ने भरतपुर के राजा को अंग्रेजों के विरुद्ध सहयोग न दिया। 1826 ई० में जब महाराजा रणजीत सिंह बीमार पड़ा तो अंग्रेज़ों ने इलाज के लिये डॉक्टर मरे को भेजा। इस तरह दोनों के संबंधों में पुनः सुधार होना शुरू हो गया।

5. सिंध का प्रश्न (Question of Sind)-सिंध का क्षेत्र व्यापारिक तथा भौगोलिक पक्ष से बहुत महत्त्वपूर्ण था। 1831 ई० में अंग्रेजों ने अलैग्जेंडर बर्नज को संधि के बारे जानकारी प्राप्त करने के लिये भेजा। महाराजा रणजीत सिंह को कोई संदेह न हो इसलिये उसको रोपड़ में गवर्नर-जनरल लॉर्ड बैंटिंक के साथ एक मुलाकात के लिये निमंत्रण भेजा गया। यह मुलाकात 26 अक्तूबर, 1831 ई० को हुई। अंग्रेजों ने बड़ी चतुराई से महाराजा रणजीत सिंह को बातचीत में लगाये रखा। दूसरी ओर अंग्रेज़ सिंध के साथ एक व्यापारिक संधि करने में सफल हुए। इस कारण महाराजा रणजीत सिंह तथा अंग्रेजों के बीच पुनः तनाव उत्पन्न हो गया।

6. शिकारपुर का प्रश्न (Question of Shikarpur)-शिकारपुर के प्रश्न पर महाराजा रणजीत सिंह तथा अंग्रेजों के बीच तनाव बढ़ गया। 1836 ई० में जब मजारिस नामक एक कबीले. को महाराजा रणजीत सिंह ने पराजित किया तथा शिकारपुर पर अधिकार कर लिया उस समय वेड के नेतृत्व में एक अंग्रेज़ी सेना भी वहाँ पहुँच गई। महाराजा रणजीत सिंह पीछे हट गया क्योंकि वह अंग्रेजों के साथ लड़ाई मोल नहीं लेना चाहता था।

7. फिरोजपुर का प्रश्न (Question of Ferozepur)-फिरोजपुर शहर पर महाराजा रणजीत सिंह का अधिकार था परंतु 1835 ई० में अंग्रेजों ने इस पर कब्जा कर लिया था। 1838 ई० में अंग्रेजों ने यहाँ एक शक्तिशाली सैनिक छावनी बना ली। यद्यपि महाराजा को इस बात पर क्रोध आया परंतु अंग्रेजों ने उसकी कोई परवाह न की। .

8. त्रिपक्षीय संधि (Tripartite Treaty)-1837 ई० में रूस बहुत तीव्रता के साथ एशिया की ओर बढ़ रहा था। अंग्रेजों को यह ख़तरा हो गया कि कहीं रूस अफ़गानिस्तान के मार्ग से भारत पर आक्रमण न कर दे। इस आक्रमण को रोकने के लिए तथा अफ़गानिस्तान के शासक दोस्त मुहम्मद खाँ को गद्दी से उतारने के लिए अंग्रेजों ने अफ़गानिस्तान के भूतपूर्व शासक शाह शुजा तथा महाराजा रणजीत सिंह के साथ 26 जून, 1838 ई० को एक त्रिपक्षीय समझौता किया। अंग्रेज़ों ने महाराजा रणजीत सिंह से इस समझौते पर जबरन हस्ताक्षर करवाये।
त्रिपक्षीय संधि की मुख्य शर्ते थीं-

  • शाह शुजा को अंग्रेज़ों एवं महाराजा रणजीत सिंह के सहयोग से अफ़गानिस्तान का सम्राट् बनाया जाएगा।
  • शाह शुजा ने महाराजा रणजीत सिंह द्वारा विजित किए समस्त अफ़गान क्षेत्रों पर उसका अधिकार मान लिया।
  • सिंध के संबंध में अंग्रेज़ों व महाराजा रणजीत सिंह के मध्य जो निर्णय होंगे, शाह शुज़ा ने उन्हें मानने का वचन दिया।
  • शाह शुज़ा अंग्रेज़ों एवं सिखों की आज्ञा लिए बिना विश्व की किसी अन्य शक्ति के साथ संबंध स्थापित नहीं करेगा।
  • एक देश का शत्रु दूसरे दो देशों का भी शत्रु माना जाएगा।
  • शाह शुजा को सिंहासन पर बिठाने के लिए महाराजा रणजीत सिंह 5,000 सैनिकों सहित सहायता 2करेगा तथा शाह शुजा इसके स्थान पर महाराजा को 2 लाख रुपए देगा।

त्रिपक्षीय संधि रणजीत सिंह की एक और कूटनीतिक पराजय थी। इस संधि ने रणजीत सिंह की सिंध एवं शिकारपुर पर अधिकार करने की सभी इच्छाओं पर पानी फेर दिया था। महाराजा रणजीत सिंह की 27 जून, 1839 ई० को मृत्यु हो गई।

PSEB 12th Class History Solutions Chapter 18 ऐंग्लो-सिख संबंध : 1800-1839

संक्षिप्त उत्तरों वाले प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
जसवंत राव होल्कर कौन था ? महाराजा रणजीत सिंह ने उसकी सहायता क्यों न की ? (Who was Jaswant Rao Holkar ? Why Maharaja Ranjit Singh did not help him ?)
उत्तर-
जसवंत राव होल्कर मराठा सरदार था। वह 1805 ई० में महाराजा रणजीत सिंह से अंग्रेजों के विरुद्ध सहायता लेने के लिए अमृतसर पहुँचा। महाराजा रणजीत सिंह ने होल्कर की निम्नलिखित कारणों से कोई सहायतान की-प्रथम, महाराजा रणजीत सिंह अंग्रेज़ी सेना के अनुशासन को देखकर चकित रह गया था। द्वितीय, अमृतसर में हुए गुरमत्ता में निर्णय लिया गया कि जसवंत राव होल्कर की सहायता लाहौर राज्य के लिए विनाशकारी सिद्ध हो सकती है। तृतीय, महाराजा रणजीत सिंह पंजाब को युद्ध का क्षेत्र नहीं बनाना चाहता था। उसका राज्य अभी बहुत छोटा था तथा यह युद्ध नए उदय हो रहे सिख साम्राज्य के लिए हानिप्रद प्रमाणित हो सकता था।

प्रश्न 2.
अमृतसर की संधि की परिस्थितियों का वर्णन करें।
(Describe the circumstances leading to the Treaty of Amritsar.)
अथवा
अमृतसर की संधि की परिस्थितियों का अध्ययन करें।
(Study the circumstances leading to the Treaty of Amritsar.)
अथवा
1800 से 1809 ई० तक के अंग्रेज़-सिख संबंधों का विवरण दीजिए।
(Give an account of Anglo-Sikh relations from 1800 to 1809.)
उत्तर-
महाराजा रणजीत सिंह पंजाब की सभी सिख रियासतों पर अपना अधिकार करना चाहता था। इस उद्देश्य से उसने 1806 ई० और 1807 ई० में मालवा प्रदेश पर आक्रमण किए। उसने कई क्षेत्रों पर अधिकार कर लिया। सितंबर, 1808 ई० में रणजीत सिंह तथा चार्ल्स मैटकॉफ के मध्य वार्ता असफल रही। रणजीत सिंह ने दिसंबर, 1808 ई० में मालवा पर तीसरी बार आक्रमण किया। अब अंग्रेजों ने रणजीत सिंह से अपनी शर्ते मनवाने के लिए युद्ध की तैयारियाँ आरंभ कर दी। परिणामस्वरूप 25 अप्रैल, 1809 ई० को रणजीत सिंह तथा अंग्रेजों के मध्य अमृतसर की संधि पर हस्ताक्षर हो गए।

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प्रश्न 3.
महाराजा रणजीत सिंह तथा अंग्रेजों के बीच हुई अमृतसर की संधि की महत्ता बताएँ।
(Describe the significance of the Treaty of Amritsar signed between Maharaja Ranjit Singh and the English.) .
अथवा
अमृतसर की संधि (1809) का ऐतिहासिक महत्त्व क्या था ? (What was the historical significance of the Treaty of Amritsar (1809)?]
अथवा
अमृतसर संधि की शर्ते एवं महत्त्व लिखें। (Write the main clauses and importance of the Treaty of Amritsar.)
अथवा
अमृतसर की संधि का क्या महत्त्व था?
(What was the significance of the Treaty of Amritsar ?)
उत्तर-
महाराजा रणजीत सिंह तथा अंग्रेज़ों के मध्य हुई 25 अप्रैल, 1809 ई० को अमृतसर की संधि का पंजाब के इतिहास में महत्त्वपूर्ण स्थान है। इस संधि द्वारा रणजीत सिंह ने सतलुज नदी को राज्य की पूर्वी सीमा मान लिया। परिणामस्वरूप महाराजा रणजीत सिंह का सभी सिख रियासतों का महाराजा बनने का स्वप्न सदा के लिए टूट गया। रणजीत सिंह को न केवल राजनीतिक अपितु आर्थिक क्षति भी हुई। परंतु इस संधि द्वारा महाराजा अपने नव-निर्मित राज्य को अंग्रेजों से बचाने में सफल हो गया। यह संधि अंग्रेजों की एक बड़ी कूटनीतिक विजय थी।

प्रश्न 4.
अमृतसर की संधि की तीन शर्ते लिखें।
(What were the three conditions of the Treaty of Amritsar ?)
उत्तर-

  1. अंग्रेजी सरकार और लाहौर दरबार के मध्य मित्रता रहेगी।
  2. अंग्रेज़ी सरकार का सतलुज दरिया के उत्तर और महाराजा के प्रदेशों और प्रजा के साथ कोई संबंध नहीं रखेगी।
  3. महाराजा सतलुज दरिया के बाएँ तरफ के क्षेत्र जोकि उसके अधिकार में है उतनी ही सेना रखेगा जोकि उसके आंतरिक प्रबंध के लिए अनिवार्य है।

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प्रश्न 5.
सिंध के प्रश्न पर महाराजा रणजीत सिंह तथा अंग्रेजों के मध्य तनाव क्यों उत्पन्न हो गया ?
(Why was tension created between Maharaja Ranjit Singh and the English over Sind tangle ?)
उत्तर-
सिंध का क्षेत्र व्यापारिक तथा भौगोलिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण था। इसलिए महाराजा रणजीत सिंह तथा अंग्रेज़ दोनों इस क्षेत्र पर अधिकार करना चाहते थे। अंग्रेजों ने सिंध के साथ संधि करने के लिए कर्नल पोटिंगर को भेजा। वह 1832 ई० में सिंध के साथ एक व्यापारिक संधि करने में सफल रहा। इस कारण यह संधि अंग्रेज़ों के लिए बड़ी लाभदायक सिद्ध हुई। इस कारण अंग्रेजों तथा रणजीत सिंह के मध्य पुनः तनाव उत्पन्न हो गया। 1838 ई० में अंग्रेजों ने सिंध के अमीरों के साथ एक अन्य संधि कर ली। महाराजा रणजीत सिंह यह सहन करने को तैयार न था किंतु उसने अंग्रेजों के विरुद्ध कोई कदम उठाने का साहस न किया।

प्रश्न 6.
फिरोजपुर के प्रश्न पर महाराजा रणजीत सिंह तथा अंग्रेजों के मध्य तनाव क्यों उत्पन्न हो गया ?
(Why was tension created between Maharaja Ranjit Singh and the English over Ferozepur tangle ?)
उत्तर-
अंग्रेज़ फिरोज़पुर जैसे महत्त्वपूर्ण नगर को अपने अधिकार में लेना चाहते थे। यहाँ से अंग्रेज़ रणजीत सिंह के राज्य की गतिविधियों के संबंध में काफ़ी जानकारी प्राप्त कर सकते थे। इसके अतिरिक्त पंजाब में घेराव डालने के लिए फिरोज़पुर पर अधिकार करना आवश्यक था। इसलिए 1835 ई० में अंग्रेजों ने बलपूर्वक फिरोजपुर पर अधिकार कर लिया। रणजीत सिंह ने अंग्रेजों द्वारा फिरोजपुर पर अधिकार करने तथा यहाँ छावनी बनाए जाने के कारण चाहे बहुत क्रोध किया, किंतु अंग्रेजों ने इसकी कोई परवाह न की।

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प्रश्न 7.
त्रिपक्षीय संधि पर अपने विचार व्यक्त करो।
(Give your own opinion on Tri-partite Treaty.)
अथवा
त्रिपक्षीय संधि तथा इसके महत्त्व पर एक टिप्पणी लिखें।
(Write a brief note on Tri-partite Treaty and its significance.)
उत्तर-
1837 ई० में रूस बड़ी तेजी से भारत की ओर बढ़ रहा था। अफ़गानिस्तान का शासक दोस्त मुहम्मद खाँ यह चाहता था कि अंग्रेज़ पेशावर का क्षेत्र रणजीत सिंह से लेकर उसे दे दें। अंग्रेज़ ऐसा नहीं कर सकते थे। परिणामस्वरूप उन्होंने अफ़गानिस्तान के भूतपूर्व शासक शाह शुजा से वार्ता आरंभ कर दी। 26 जून, 1838 ई० को अंग्रेजों, शाह शुजा तथा महाराजा रणजीत सिंह के मध्य एक त्रिपक्षीय संधि पर हस्ताक्षर किए। इस संधि के अनुसार शाह शुजा को अफ़गानिस्तान का शासक बनाने का निर्णय किया गया। महाराजा रणजीत सिंह इस संधि में शामिल नहीं होना चाहता था, किंतु अंग्रेजों ने उसे ऐसा करने पर बाध्य किया।

प्रश्न 8.
1809 से 1839 ई० तक के अंग्रेज़-सिख संबंधों का विवरण दीजिए।
(Give an account of Agnlo-Sikh relations from 1809 to 1839.)
उत्तर-
1809 से 1839 ई० तक का काल अंग्रेज़-सिख संबंधों में विशेष स्थान रखता है। 1809 ई० में महाराजा रणजीत सिंह एवं अंग्रेजों के मध्य अमृतसर की संधि हुई। यह महाराजा रणजीत सिंह की अपेक्षा अंग्रेजों के लिए अधिक लाभकारी सिद्ध हुई। इस संधि के कारण महाराजा रणजीत सिंह का सभी सिख रियासतों का महाराजा बनने का स्वप्न चकनाचूर हो गया, किंतु उसने खालसा राज्य को नष्ट होने से बचा लिया। 1809 से 1830 ई० तक दोनों शक्तियों के मध्य कभी मित्रता तथा कभी तनाव स्थापित हो जाता। 1830 से 1839 ई० में दोनों शक्तियों के संबंधों में पुनः तनाव उत्पन्न हो गया।

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प्रश्न 9.
महाराजा रणजीत सिंह के अंग्रेजों के साथ संबंधों के स्वरूप का वर्णन करें। (Discuss the nature of Maharaja Ranjit Singh’s relation with the British.)
अथवा
महाराजा रणजीत सिंह की अंग्रेजों के सामने झुकने की नीति के बारे में अपने विचार लिखो। (Comment on Maharaja Ranjit Singh’s policy of yielding towards the British.)
उत्तर-
महाराजा रणजीत सिंह ने सदैव अंग्रेजों के सामने झुकने की नीति अपनाई। अंग्रेजों ने उसे 1809 ई० में अमृतसर की संधि के लिए बाध्य किया। इस संधि के साथ महाराजा रणजीत सिंह के सभी सिखों का महाराजा बनने की आशा मिट्टी में मिल गई। 1822 ई० अंग्रेजों ने सदा कौर के कहने पर वदनी से रणजीत सिंह की सेनाओं को वहाँ से निकाल दिया। 1832 ई० में अंग्रेजों ने रणजीत सिंह को धोखे में रख कर संधि से व्यापारिक संधि कर ली। 1838 ई० में अंग्रेजों ने फिरोजपुर में एक छावनी स्थापित करके महाराजा रणजीत सिंह की शक्ति को एक बार फिर ललकारा।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न – (Objective Type Questions)

(i) एक शब्द से एक पंक्ति तक के उत्तर (Answer in One Word to One Sentence)

प्रश्न 1.
अंग्रेज़ों तथा रणजीत सिंह का पहला संपर्क कब हुआ ?
उत्तर-
1800 ई०।

प्रश्न 2.
यूसफ अली कौन था ?
उत्तर-
अंग्रेजों ने यूसफ अली को 1800 ई० में लाहौर दरबार में अपना दूत बनाकर भेजा था।

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प्रश्न 3.
मराठों का नेता जसवंत राव होल्कर कब पंजाब आया था ?
उत्तर-
1805 ई०।

प्रश्न 4.
महाराजा रणजीत सिंह तथा अंग्रेजों के मध्य प्रथम मित्रतापूर्वक सन्धि कब हुई ?
उत्तर-
1806 ई०।

प्रश्न 5.
1806 ई० की लाहौर की संधि की कोई एक मुख्य शर्त बताओ।
उत्तर-
महाराजा रणजीत सिंह होल्कर की कोई सहायता नहीं करेगा।

प्रश्न 6.
चार्ल्स मैटकॉफ कौन था ?
उत्तर-
वह एक अंग्रेज अधिकारी था।

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प्रश्न 7.
चार्ल्स मैटकॉफ तथा महाराजा रणजीत सिंह के मध्य कितनी बार भेंट हुई ?
उत्तर-
दो।

प्रश्न 8.
महाराजा रणजीत सिंह ने मालवा प्रदेश पर कितनी बार आक्रमण किए ?
उत्तर-
तीन बार।

प्रश्न 9.
महाराजा रणजीत सिंह ने मालवा प्रदेश पर कब प्रथम आक्रमण किया ?
उत्तर-
1806 ई०।

प्रश्न 10.
कोई एक कारण बताएँ जिस कारण महाराजा रणजीत सिंह अंग्रेजों से संधि करने के लिए बाध्य हुआ।
उत्तर-
महाराजा रणजीत सिंह के दरबारियों ने उसे अंग्रेजों के साथ संघर्ष न करने की सलाह दी।

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प्रश्न 11.
अमृतसर की संधि कब हुई ?
अथवा
अमृतसर की संधि पर कब हस्ताक्षर हुए ?
उत्तर-
25 अप्रैल, 1809 ई०।

प्रश्न 12.
अमृतसर की संधि (1809) की कोई एक मुख्य धारा लिखें।
उत्तर-
अंग्रेजी सरकार और लाहौर दरबार के मध्य स्थायी मित्रता रहेगी।

प्रश्न 13.
1809 ई० की अमृतसर की संधि के अनुसार कौन-सी नदी महाराजा रणजीत सिंह और अंग्रेजों के मध्य सीमा बनी ?
उत्तर-
सतलुज नदी।

प्रश्न 14.
अमृतसर की संधि से महाराजा रणजीत सिंह को क्या हानि हुई ?
उत्तर-
इसने महाराजा रणजीत सिंह के सब सिख शासकों के महाराजा बनने के स्वप्न को भंग कर दिया।

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प्रश्न 15.
अमृतसर की संधि से महाराजा रणजीत सिंह को क्या लाभ हुआ ?
उत्तर-
इस संधि के कारण महाराजा रणजीत सिंह का राज्य समय से पूर्व नष्ट होने से बच गया।

प्रश्न 16.
अमृतसर की संधि से अंग्रेज़ों को हुआ कोई एक मुख्य लाभ बताएँ।
उत्तर-
इस संधि से अंग्रेजों की प्रतिष्ठा में काफ़ी वृद्धि हुई।

प्रश्न 17.
महाराजा रणजीत सिंह तथा अंग्रेजों के मध्य वदनी का तनाव कब हुआ ?
उत्तर-
1822. ई० में।

प्रश्न 18.
1823 ई० में कौन लुधियाना का पुलिटिकल ऐंजट नियुक्त हुआ ?
उत्तर-
कैप्टन वेड।

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प्रश्न 19.
1826 ई० में किस अंग्रेज़ डॉक्टर ने महाराजा रणजीत सिंह का इलाज किया ?
उत्तर-
डॉक्टर मरे ने

प्रश्न 20.
महाराजा रणजीत सिंह तथा लॉर्ड विलियम बैंटिंक के मध्य मुलाकात कब हुई ?
उत्तर-
26 अक्तूबर, 1831 ई०।।

प्रश्न 21.
महाराजा रणजीत सिंह तथा लॉर्ड विलियम बैंटिंक के मध्य मुलाकात कहाँ हुई थी ?
उत्तर-
रोपड़।

प्रश्न 22.
अंग्रेजों ने सिंध के अमीरों से संधि कब की ?
उत्तर-
1832 ई०।

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प्रश्न 23.
अंग्रेजों ने फिरोज़पुर पर कब अधिकार कर लिया था ?
उत्तर-
1835 ई०।

प्रश्न 24.
त्रिपक्षीय संधि कब हुई ?
उत्तर-
26 जून, 1838 ई०।

(ii) रिक्त स्थान भरें (Fill in the Blanks)

प्रश्न 1.
यूसुफ अली मिशन ……… में पंजाब आया।
उत्तर-
(1800 ई०)

प्रश्न 2.
जसवंत राव होल्कर ………… में पंजाब आया।
उत्तर-
(1805 ई०)

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प्रश्न 3.
महाराजा रणजीत सिंह व अंग्रेजों के मध्य लाहौर की संधि………में हुई।
उत्तर-
(1806 ई०)

प्रश्न 4.
महाराजा रणजीत सिंह ने मालवा पर पहली बार ……में आक्रमण किया था।
उत्तर-
(1806 ई०)

प्रश्न 5.
महाराजा रणजीत सिंह ने मालवा पर तीसरी बार ………..में आक्रमण किया था।
उत्तर-
(1808 ई०)

प्रश्न 6.
चार्ल्स मैटकॉफ महाराजा रणजीत को दूसरी बार …….में मिला।।
उत्तर-
(अमृतसर)

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प्रश्न 7.
महाराजा रणजीत सिंह व अंग्रेज़ों के मध्य अमृतसर की संधि ……………..को हुई।
उत्तर-
(25 अप्रैल, 1809 ई०)

प्रश्न 8.
अमृतसर की संधि के अनुसार………दरिया को महाराजा रणजीत सिंह व अंग्रेजों के मध्य साम्राज्य की – सीमा माना गया था।
उत्तर-
(सतलुज)

प्रश्न 9.
1831 ई० में………में महाराजा रणजीत सिंह और लॉर्ड विलियम बैंटिंक की बैठक हुई।
उत्तर-
(रोपड़)

प्रश्न 10.
महाराजा रणजीत सिंह, शाह शुज़ा और अंग्रेजों के मध्य त्रिपक्षीय संधि……………..में हुई।
उत्तर-
(1838. ई०)

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(ii) ठीक अथवा गलत (True or False)

नोट-निम्नलिखित में से ठीक अथवा गलत चुनें—

प्रश्न 1.
यूसुफ अली मिशन 1800 ई० में पंजाब आया।
उत्तर-
ठीक

प्रश्न 2.
1805 ई० में मराठा नेता जसवंत राव होल्कर पंजाब आया।
उत्तर-
ठीक

प्रश्न 3.
जसवंत राव होल्कर 1805 ई० में पंजाब आया था।
उत्तर-
ठीक

प्रश्न 4.
महाराजा रणजीत सिंह और अंग्रेजों के मध्य लाहौर की संधि 1805 ई० में हुई।
उत्तर-
गलत

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प्रश्न 5.
महाराजा रणजीत सिंह ने मालवा पर प्रथम बार 1806 ई० में आक्रमण किया।
उत्तर-
ठीक

प्रश्न 6.
चार्ल्स मैटकॉफ 1808 ई० में महाराजा रणजीत सिंह को पहली बार खेमकरण में मिला था।
उत्तर-
ठीक

प्रश्न 7.
महाराजा रणजीत सिंह और अंग्रेजों के मध्य अमृतसर की संधि 25 अप्रैल, 1809 ई० को हुई।
उत्तर-
ठीक

प्रश्न 8.
अमृतसर की संधि के कारण महाराजा रणजीत सिंह के गौरव को भारी धक्का लगा था।
उत्तर-
ठीक

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प्रश्न 9.
1826 ई० में अंग्रेजों ने डॉक्टर मर्रे को महाराजा रणजीत के इलाज के लिए भेजा था।
उत्तर-
ठीक

प्रश्न 10.
लार्ड विलियम बैंटिंक महाराजा रणजीत सिंह को 1831 ई० में रोपड़ में मिला था।
उत्तर-
ठीक

प्रश्न 11.
अंग्रेज़ों ने 1835 ई० में फिरोजपुर पर कब्जा कर लिया था।
उत्तर-
ठीक

प्रश्न 12.
महाराजा रणजीत सिंह, शाह शुज़ा और अंग्रेजों के मध्य त्रि-पक्षीय संधि 26 जून, 1838 ई० को हुई थी।
उत्तर-
ठीक

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(iv) बहु-विकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions)

नोट-निम्नलिखित में से ठीक उत्तर का चयन कीजिए—

प्रश्न 1.
मराठों का नेता जसवंत राव होल्कर पंजाब कब आया था ?
(i) 1801 ई० में
(ii) 1802 ई० में
(iii) 1805 ई० में
(iv) 1809 ई० में।
उत्तर-
(iii)

प्रश्न 2.
महाराजा रणजीत सिंह और अंग्रेजों के मध्य पहली संधि कब हुई ?
(i) 1805 ई० में
(ii) 1806 ई० में
(iii) 1807 ई० में
(iv) 1809 ई० में।
उत्तर-
(ii)

प्रश्न 3.
महाराजा रणजीत सिंह ने मालवा पर कितनी बार आक्रमण किये ?
(i) दो बार
(ii) तीन बार
(iii) चार बार
(iv) पाँच बार।
उत्तर-
(ii)

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प्रश्न 4.
महाराजा रणजीत सिंह ने मालवा पर प्रथम आक्रमण कब किया ?
(i) 1805 ई० में
(ii) 1806 ई० में
(iii) 1807 ई० में
(iv) 1809 ई० में।
उत्तर-
(ii)

प्रश्न 5.
चार्ल्स मैटकॉफ महाराजा रणजीत सिंह को पहली बार कहाँ मिला था ?
(i) लुधियाना में
(ii) अमृतसर में
(iii) लाहौर में
(iv) खेमकरण में।
उत्तर-
(iv)

प्रश्न 6.
महाराजा रणजीत सिंह और अंग्रेजों में अमृतसर की संधि कब हुई ?
(i) 1805 ई० में
(ii) 1809 ई० में
(iii) 1812 ई० में
(iv) 1821 ई० में।
उत्तर-
(i)

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प्रश्न 7.
1809 ई० की अमृतसर की संधि के अनुसार कौन-सी नदी महाराजा रणजीत सिंह और अंग्रेज़ों के मध्य सीमा बनी ?
(i) ब्यास नदी
(ii) सतलुज नदी
(iii) रावी नदी
(iv) जेहलम नदी।
उत्तर-
(ii)

प्रश्न 8.
महाराजा रणजीत सिंह और लॉर्ड विलियम बैंटिंक में मुलाकात कब हुई थी ?
(i) 1809 ई० में
(ii) 1811 ई० में
(ii) 1821 ई० में
(iv) 1831 ई० में।
उत्तर-
(iv)

प्रश्न 9.
महाराजा रणजीत सिंह और लॉर्ड विलियम बैंटिंक में मुलाकात कहाँ हुई थी ?
(i) अमृतसर में
(ii) लुधियाना में
(iii) रोपड़ में
(iv) लाहौर में।
उत्तर-
(iii)

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प्रश्न 10.
अंग्रेजों ने सिंध के अमीरों से व्यापारिक संधि कब की थी ?
(i) 1829 ई० में
(ii) 1830 ई० में
(iii) 1831 ई० में
(iv) 1832 ई० में।
उत्तर-
(iv)

प्रश्न 11.
त्रिपक्षीय संधि कब हुई ?
(i) 1839 ई०
(ii) 1845 ई०
(iii) 1838 ई०
(iv) 1809 ई०।
उत्तर-
(iii)

Long Answer Type Question

प्रश्न 1.
जसवंत राव होल्कर कौन था ? महाराजा रणजीत सिंह ने उसकी सहायता क्यों न की ? (Who was Jaswant Rao Holkar ? Why Ranjit Singh did not help him ?)
उत्तर-
जसवंत राव होल्कर मराठा सरदार था। वह 1805 ई० में अंग्रेजों से पराजित हो गया था। परिणामस्वरूप वह महाराजा रणजीत सिंह से अंग्रेजों के विरुद्ध सहायता लेने के लिए अमृतसर पहुँचा। महाराजा रणजीत सिंह ने होल्कर का यद्यपि गर्मजोशी से स्वागत किया, परंतु निम्नलिखित कारणों से कोई सहायता न की-प्रथम, महाराजा रणजीत सिंह अंग्रेज़ी सेना के अनुशासन को देखकर चकित रह गया था। दूसरा, अंग्रेजों की थोड़ी-सी सेना ने मराठों की विशाल सेना को युद्ध-भूमि से भागने के लिए विवश कर दिया था। इस कारण महाराजा रणजीत सिंह द्वारा यह परिणाम निकालना स्वाभाविक था कि थोड़ी-सी सिख सेना के शामिल होने से स्थिति में कोई विशेष अंतर नहीं पड़ना था। तीसरा, होल्कर के संबंध में कोई निर्णय लेने के लिए महाराजा रणजीत सिंह ने अमृतसर में सिख सरदारों का एक सम्मेलन बुलाया। इसमें काफ़ी सोचने-विचारने के पश्चात् यह निर्णय लिया गया कि जसवंत राव होल्कर की सहायता लाहौर राज्य के लिए विनाशकारी सिद्ध हो सकती है। चौथा, महाराजा रणजीत सिंह पंजाब को युद्ध का क्षेत्र नहीं बनाना चाहता था। उसका राज्य अभी बहुत छोटा था तथा यह युद्ध नए उदय हो रहे सिख साम्राज्य के लिए हानिप्रद प्रमाणित हो सकता था।

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प्रश्न 2.
महाराजा रणजीत सिंह और अंग्रेजों के पहले पड़ाव के संबंधों का विश्लेषण कीजिए।
(Analyse the relationship of Ranjit Singh and Britishers in the first phase.)
अथवा
अमृतसर की संधि की परिस्थितियों का अध्ययन करें। (Study the circumstances leading to the Treaty of Amritsar.)
अथवा
1800 से 1809 ई० तक के अंग्रेज़-सिख संबंधों का विवरण दीजिए। (Give an account of Anglo-Sikh relations from 1800 to 1809.)
उत्तर-
महाराजा रणजीत सिंह सभी सिख रियासतों को अपने अधिकार में लेना चाहता था। इस उद्देश्य से उसने 1806 ई० और 1807 ई० में दो बार मालवा प्रदेश पर आक्रमण किए। उसने कई क्षेत्रों पर अधिकार कर लिया और कई शासकों से नज़राना प्राप्त किया। इन आक्रमणों से घबरा कर मालवा रियासतों के सरदारों ने अंग्रेजों से सहायता की याचना की। क्योंकि इस समय नेपोलियन के भारत पर आक्रमण का खतरा बढ़ गया था इसलिए अंग्रेज़ मालवा के सरदारों को सहयोग देने की अपेक्षा महाराजा रणजीत सिंह से संधि करना चाहते थे। परंतु सितंबर, 1808 ई० में रणजीत सिंह तथा चार्ल्स मैटकाफ के मध्य वार्ता असफल रही। रणजीत सिंह ने दिसंबर, 1808 ई० में मालवा पर तीसरी बार आक्रमण करके कुछ क्षेत्रों पर अधिकार कर लिया। इसी मध्य नेपोलियन का भारत पर हमले का ख़तरा टल गया। अब अंग्रेजों ने रणजीत सिंह से अपनी शर्ते मनवाने के लिए युद्ध की तैयारियाँ आरंभ कर दी। परिणामस्वरूप 25 अप्रैल, 1809 ई० को रणजीत सिंह तथा अंग्रेजों के मध्य अमृतसर की संधि पर हस्ताक्षर हो गए।

प्रश्न 3.
महाराजा रणजीत सिंह तथा अंग्रेजों के बीच हुई अमृतसर की संधि की महत्ता बताएँ।
(Describe the significance of the Treaty of Amritsar signed between Ranjit Singh and the English.)
अथवा
अमृतसर की संधि ( 1809) का ऐतिहासिक महत्त्व क्या था ? (P.S.E.B. Mar. 2017, Sept. 17) (Describe the historical significance of the Treaty of Amritsar.)
अथवा
अमृतसर संधि की शर्ते एवं महत्त्व लिखें। (Write the main clauses and importance of Amritsar Treaty.)
अथवा
महाराजा रणजीत सिंह एवं अंग्रेजों के बीच हुई अमृतसर की संधि की मुख्य शर्तों एवं महत्त्व के बारे में बताएँ।
(Describe the main clauses and importance of Treaty of Amritsar between Maharaja Ranjit Singh and the English.)
उत्तर-
25 अप्रैल, 1809.ई० को महाराजा रणजीत सिंह तथा अंग्रेज़ों के मध्य अमृतसर में संधि हई थी। ऐतिहासिक दृष्टि से यह संधि बहुत महत्त्वपूर्ण थी। इस संधि द्वारा रणजीत सिंह ने सतलुज दरिया को राज्य की पूर्वी सीमा मान लिया। इस कारण महाराजा रणजीत सिंह का सभी सिख रियासतों का महाराजा बनने का स्वप्न सदा के लिए टूट गया। इस कारण रणजीत सिंह को न केवल राजनीतिक, अपितु आर्थिक क्षति भी हुई, परंतु यह संधि कुछ पक्षों से रणजीत सिंह के लिए लाभप्रद भी सिद्ध हुई। वह अपने नव-निर्मित राज्य को अंग्रेजों की सुदृढ़ शक्ति से बचाने में सफल हो सका। उसे उत्तर-पश्चिम की ओर अपने राज्य की सीमा बढ़ाने का अवसर मिला। दूसरी ओर. यह संधि अंग्रेजों के लिए बड़ी लाभदायक सिद्ध हुई। इस कारण अंग्रेज़ों का सतलुज नदी तक प्रभाव बढ़ गया। पंजाब की ओर से निश्चित हो जाने से अंग्रेज़ भारत के अन्य राज्यों में अपनी स्थिति सुदृढ़ कर सके। इस संधि ने अंग्रेज़ों की प्रतिष्ठा में पर्याप्त वृद्धि की।

PSEB 12th Class History Solutions Chapter 18 ऐंग्लो-सिख संबंध : 1800-1839

प्रश्न 4.
सिंध के प्रश्न पर महाराजा रणजीत सिंह तथा अंग्रेजों के मध्य तनाव क्यों उत्पन्न हो गया ?
(Why was tension created between Maharaja Ranjit Singh and the English over Sind tangle ?)
उत्तर-
सिंध का क्षेत्र व्यापारिक तथा भौगोलिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण था। इसलिए महाराजा रणजीत सिंह तथा अंग्रेज़ दोनों इस क्षेत्र पर अधिकार करना चाहते थे। 1831 ई० में अंग्रेजों ने अलैग्जेंडर बर्नज को सिंध के संबंध में जानकारी प्राप्त करने के लिए भेजा। महाराजा रणजीत सिंह को कोई संदेह न हो, इसलिए उसे रोपड़ में गवर्नरजनरल लार्ड विलियम बैंटिंक से भेंट के लिए निमंत्रण भेजा। यह भेंट 26 अक्तूबर, 1831 ई० को हुई। अंग्रेजों ने बड़ी चालाकी से रणजीत सिंह को बातों में लगाए रखा। दूसरी ओर अंग्रेजों ने सिंध के साथ संधि करने के लिए कर्नल पोटिंगर को भेजा। वह 1832 ई० में सिंध के साथ एक व्यापारिक संधि करने में सफल रहा। इस कारण यह संधि अंग्रेजों के लिए बड़ी लाभदायक सिद्ध हुई। इस कारण अंग्रेजों तथा रणजीत सिंह के मध्य पुनः तनाव उत्पन्न हो गया। 1838 ई० में अंग्रेजों ने सिंध के अमीरों के साथ एक अन्य संधि कर ली। इस कारण सिंध पूर्णतया अंग्रेज़ों के प्रभाव में आ गया। महाराजा रणजीत सिंह यह सहन करने को तैयार न था किंतु उसने अंग्रेजों के विरुद्ध कोई कदम उठाने का साहस न किया।

प्रश्न 5.
फिरोजपुर के प्रश्न पर महाराजा रणजीत सिंह तथा अंग्रेज़ों के मध्य तनाव क्यों उत्पन्न हो गया?
(Why was tension created between Maharaja Ranjit Singh and the English over Ferozepur tangle ?)
उत्तर-
अंग्रेज़ फिरोज़पुर जैसे महत्त्वपूर्ण नगर को अपने अधिकार में लेना चाहते थे। यह नगर लाहौर से केवल 40 मील की दूरी पर स्थित था। यहाँ से अंग्रेज़ रणजीत सिंह के राज्य की गतिविधियों के संबंध में काफ़ी जानकारी प्राप्त कर सकते थे। इसके अतिरिक्त पंजाब में घेराव डालने के लिए फिरोज़पुर पर अधिकार करना आवश्यक था। यद्यपि अंग्रेज़ फिरोज़पुर की ओर काफ़ी समय से ललचाई दृष्टि से देख रहे थे, किंतु वे इस पर अपने अधिकार को स्थगित करते हुए आ रहे थे ताकि रणजीत सिंह उनसे नाराज़ न हो जाए। इसी कारण अंग्रेज़ 1835 ई० तक फिरोजपुर पर रणजीत सिंह का अधिकार मानते आए थे, किंतु अब स्थिति परिवर्तित हो चुकी थी। अंग्रेज़ों को रणजीत सिंह की मैत्री की कोई विशेष आवश्यकता नहीं थी। इसलिए 1835 ई० में अंग्रेजों ने बलपूर्वक फिरोजपुर पर अधिकार कर लिया। 1838 ई० में अंग्रेजों ने यहाँ एक शक्तिशाली सैनिक छावनी बना ली। रणजीत सिंह ने अंग्रेज़ों द्वारा फिरोज़पुर पर अधिकार करने तथा यहाँ छावनी बनाए जाने के कारण चाहे बहुत क्रोध किया, किंतु अंग्रेजों ने इसकी कोई परवाह न की। महाराजा को मात्र क्रोध का चूंट पीकर रह जाना पड़ा।

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प्रश्न 6.
त्रिपक्षीय (तीन-पक्षीय) संधि पर नोट लिखें। (Write a brief note on Tri-partite Treaty and its significance.)
अथवा
तीन पक्षीय संधि के बारे में चर्चा करें।
(Discuss about Tri-partite Treaty.)
अथवा
त्रिपक्षीय संधि एवं उसके महत्त्व के बारे में आप क्या जानते हैं ?
(Write a note about Tri-partite Treaty and its importance.)
उत्तर-
1837 ई० में रूस बड़ी तेजी से भारत की ओर बढ़ रहा था। इस आक्रमण को रोकने के लिए अंग्रेजों ने अफ़गानिस्तान के शासक दोस्त मुहम्मद खाँ से मित्रता करनी चाही, परंतु दोस्त मुहम्मद खाँ यह चाहता था कि अंग्रेज़ पेशावर का क्षेत्र रणजीत सिंह से लेकर उसे दे दें। अंग्रेज़ ऐसे अवसर पर रणजीत सिंह से अपने संबंध बिगाड़ना नहीं चाहते थे। इसलिए उन्होंने अफ़गानिस्तान के भूतपूर्व शासक शाह शुजा से वार्ता आरंभ कर दी। 26 जून, 1838 ई० को अंग्रेजों, शाह शुजा तथा महाराजा रणजीत सिंह के मध्य एक त्रिपक्षीय संधि पर हस्ताक्षर किए गए। इस संधि के अनुसार शाह शुजा को अफ़गानिस्तान के सिंहासन पर बैठाने का निर्णय किया गया। शाह शुजा ने रणजीत सिंह द्वारा विजित किए समस्त अफ़गान क्षेत्रों पर उसका अधिकार मान लिया। महाराजा रणजीत सिंह को कहा गया कि वह शाह शुजा को 5,000 सैनिक सहायता के लिए भेजे। इसके बदले शाह शुजा रणजीत सिंह को 2 लाख रुपये देगा। महाराजा रणजीत सिंह इस संधि पर हस्ताक्षर करने को तैयार न था। किंतु अंग्रेजों ने उसे ऐसा करने पर बाध्य कर दिया। इस संधि ने महाराजा रणजीत सिंह की सिंध तथा शिकारपुर पर अधिकार करने की सभी इच्छाओं पर तुषारापात कर दिया।

प्रश्न 7.
1809 से 1839 ई० तक के अंग्रेज़-सिख संबंधों का विवरण दीजिए। (Give an account of Anglo-Sikh relations from 1809 to 1839.)
उत्तर-
1809 ई० में महाराजा रणजीत सिंह एवं अंग्रेजों के मध्य अमृतसर की प्रसिद्ध संधि हुई। यह संधि महाराजा रणजीत सिंह की अपेक्षा अंग्रेजों के लिए अधिक लाभकारी सिद्ध हुई। इस संधि के कारण यद्यपि महाराजा रणजीत सिंह का सभी सिख रियासतों का महाराजा बनने का स्वप्न पूरा न हो सका, किंतु उसने खालसा राज्य को नष्ट होने से बचा लिया। 1809 ई० से 1830 ई० तक दोनों शक्तियों के मध्य कभी मित्रता स्थापित हो जाती तथा कभी उनमें तनाव स्थापित हो जाता। 1830 से 1839 ई० में दोनों शक्तियों के संबंधों में आपसी तनाव अधिक बढ़ गया। इसका कारण यह था कि अंग्रेजों ने सिंध, शिकारपुर तथा फिरोजपुर पर अकारण ही कब्जा कर लिया था। इसके अतिरिक्त अंग्रेजों ने महाराजा रणजीत सिंह को 1838 ई० में त्रिपक्षीय संधि पर हस्ताक्षर करने के लिए बाध्य किया। इन कारणों से महाराजा रणजीत सिंह ने अपने को बहुत अपमानित महसूस किया। परिणामस्वरूप उसने इस अपमान का बदला लेने के लिए अंग्रेजों के विरुद्ध कोई पग उठाने का निर्णय किया। दुर्भाग्यवश 1839 ई० में महाराजा रणजीत सिंह की मृत्यु हो गई।

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प्रश्न 8.
रणजीत सिंह के अंग्रेजों के साथ संबंधों के स्वरूप का वर्णन करें। (Discuss the nature of Ranjit Singh’s relation with the British.)
अथवा
महाराजा रणजीत सिंह की अंग्रेजों के सामने झुकने की नीति के बारे में अपने विचार लिखो।’ (Comment on Maharaja Ranjit Singh’s policy of yielding towards the British.)
उत्तर-
महाराजा रणजीत सिंह ने सदैव अंग्रेजों के समक्ष झुकने की नीति अपनाई। 1809 ई० में अंग्रेजों ने उसे अमृतसर की संधि करने के लिए बाध्य किया। इससे महाराजा रणजीत सिंह की समस्त सिखों का महाराजा बनने की आशाएँ धूल में मिल गईं। 1822 ई० में अंग्रेजों ने सदा कौर के कहने पर रणजीत सिंह की सेनाओं से वदनी खाली करवा लिया। 1832 ई० में अंग्रेज़ों ने रणजीत सिंह को धोखे में रख कर सिंध के अमीरों से एक व्यापारिक संधि कर ली। इस संबंधी जब महाराजा रणजीत सिंह को ज्ञात हुआ तो वह केवल छटपटा कर रह गया। 1835 ई० में अंग्रेजों ने महाराजा रणजीत सिंह को शिकारपुर खाली करने के लिए विवश किया। इसी वर्ष अंग्रेजों ने फिरोजपुर पर अधिकार कर महाराजा रणजीत सिंह की शक्ति को एक और चुनौती दी। महाराजा केवल गुस्से के चूंट पी कर रह गया। अंग्रेज़ों ने रणजीत सिंह से 26 जून, 1838 ई० को त्रिपक्षीय समझौते पर बलपूर्वक हस्ताक्षर करवाए। ये घटनाएँ इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण थीं कि महाराजा रणजीत सिंह सदा अंग्रेजों के आगे झुकता रहा।

Source Based Questions

नोट-निम्नलिखित अनुच्छेदों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उनके अंत में पूछे गए प्रश्नों का उत्तर दीजिए।

1
महाराजा रणजीत सिंह सभी सिख रियासतों को अपने अधिकार में लेना चाहता था। इस उद्देश्य से उसने 1806 ई० और 1807 ई० में दो बार मालवा प्रदेश पर आक्रमण किए। उसने कई क्षेत्रों पर अधिकार कर लिया और कई शासकों से नज़राना प्राप्त किया। इन आक्रमणों से घबरा कर मालवा रियासतों के सरदारो ने अंग्रेजों से सहायता की याचना की। क्योंकि इस समय नेपोलियन के भारत पर आक्रमण का खतरा बढ़ गया था इसलिए अंग्रेज़ मालवा के सरदारों को सहयोग देने की अपेक्षा महाराजा रणजीत सिंह से संधि करना चाहते थे। परंतु सितंबर, 1808 ई० में रणजीत सिंह तथा चार्ल्स मैटकाफ के मध्य वार्ता असफल रही। रणजीत सिंह ने दिसंबर, 1808 ई० में मालवा पर तीसरी बार आक्रमण करके कुछ क्षेत्रों पर अधिकार कर लिया। इसी मध्य नेपोलियन का भारत पर हमले का खतरा टल गया। अब अंग्रेजों ने रणजीत सिंह से अपनी शर्ते मनवाने के लिए युद्ध की तैयारियाँ आरंभ कर दीं। परिणामस्वरूप 25 अप्रैल, 1809 ई० को रणजीत सिंह तथा अंग्रेजों के मध्य अमृतसर की संधि पर हस्ताक्षर हो गए।

  1. महाराजा रणजीत सिंह ने मालवा पर प्रथम बार आक्रमण कब किया ?
    • 1805 ई०
    • 1806 ई०
    • 1807 ई०
    • 1808 ई०।
  2. महाराजा रणजीत सिंह ने मालवा पर आक्रमण क्यों किया ?
  3. नज़राना से क्या भाव है ?
  4. मालवा रियासतों के सरदारों ने अंग्रेजों से सहायता की माँग क्यों की ?
  5. महाराजा रणजीत सिंह तथा अंग्रेजों के मध्य अमृतसर की संधि कब हुई ?

उत्तर-

  1. 1806 ई०।
  2. इन आक्रमणों का उद्देश्य महाराजा रणजीत सिंह सभी सिख रियासतों को अपने अधीन लाना चाहता था।
  3. नज़राना से भाव है महाराजा को दिए जाने वाले उपहार।
  4. मालवा रियासतों के सरदारों ने अंग्रेजों से सहायता इसलिए मांगी थी क्योंकि उनको खतरा था कि महाराजा रणजीत सिंह उनकी रियासतों पर अधिकार कर लेगा।
  5. महाराजा रणजीत सिंह तथा अंग्रेजों के मध्य अमृतसर की संधि 25 अप्रैल, 1809 ई० को हुई।

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2
सिंध का प्रदेश व्यापारिक एवं भौगोलिक पक्ष से बहुत महत्त्वपूर्ण था। इसलिए महाराजा रणजीत सिंह तथा अंग्रेज़ दोनों इस क्षेत्र को अपने अधिकार में लेना चाहते थे। 1831 ई० में अंग्रेजों ने अलैग्जेंडर बर्नस को सिंध के संबंध में जानकारी प्राप्त करने के लिए भेजा। महाराजा रणजीत सिंह को कोई संदेह न हो, इसलिए उसको रोपड़ में गवर्नरजनरल लॉर्ड विलियम बैंटिंक के साथ एक मुलाकात के लिए निमंत्रण भेजा। यह मुलाकात 26 अक्तूबर, 1831 ई० को हुई। अंग्रेजों ने बहुत चालाकी के साथ रणजीत सिंह को बातों में लगाए रखा। दूसरी ओर अंग्रेजों ने सिंध के साथ संधि करने के लिए कर्नल पोटिजर को भेजा। वह 1832 ई० में सिंध के साथ एक व्यापारिक संधि करने में सफल हुआ। जब रणजीत सिंह को इस संधि के विषय में ज्ञात हुआ तो वह कई रातों तक सुख की नींद न सो पाया, किंतु उसने अंग्रेज़ों के इस पग के विरुद्ध एक भी शब्द बोलने का साहस न किया।

  1. महाराजा रणजीत सिंह सिंध पर अधिकार क्यों करना चाहता था ?
  2. अलैग्जेंडर बर्नस कौन था ?
  3. महाराजा रणजीत सिंह तथा लार्ड विलियम बैंटिंक के मध्य मुलाकात कब हुई ?
  4. महाराजा रणजीत सिंह तथा लार्ड विलियम बैंटिंक के मध्य मुलाकात कहाँ हुई थी ?
    • रोपड़ में
    • अमृतसर में
    • लाहौर में
    • दिल्ली में।
  5. अंग्रेज़ों तथा सिंध के मध्य एक व्यापारिक संधि करने में कौन सफल हुआ ?

उत्तर-

  1. महाराजा रणजीत सिंह सिंध पर अधिकार इसलिए करना चाहता था क्योंकि इसका भौगोलिक तथा व्यापारिक पक्ष से बहुत महत्त्व था।
  2. अलैग्जेंडर बर्नस एक अंग्रेज़ अधिकारी था जिसे अग्रेज़ों ने सिंध के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए भेजा था।
  3. महाराजा रणजीत सिंह तथा लार्ड विलियम बैंटिक के मध्य मुलाकात 26 अक्तूबर, 1831 ई० को हुई।
  4. रोपड़ में।
  5. अंग्रेजों तथा सिंध के मध्य एक व्यापारिक संधि करने में कर्नल पोटिजर सफल हुआ।

3
अंग्रेज़ फिरोज़पुर जैसे महत्त्वपूर्ण नगर को अपने अधिकार में लेना चाहते थे। यह नगर लाहौर से केवल 40 मील की दूरी पर स्थित था। यहाँ से अंग्रेज़ रणजीत सिंह के राज्य की गतिविधियों के संबंध में काफ़ी जानकारी प्राप्त कर सकते थे। इसके अतिरिक्त पंजाब में घेराव डालने के लिए फिरोज़पुर पर अधिकार करना आवश्यक था। यद्यपि अंग्रेज़ फिरोज़पुर की ओर काफ़ी समय से ललचाई दृष्टि से देख रहे थे, किंतु वे इस पर अपने अधिकार को स्थगित करते हुए आ रहे थे ताकि रणजीत सिंह उनसे नाराज़ न हो जाए। इसी कारण अंग्रेज़ 1835 ई० तक फिरोजपुर पर रणजीत सिंह का अधिकार मानते आए थे, किंतु अब स्थिति परिवर्तित हो चुकी थी। अंग्रेजों को रणजीत सिंह की मैत्री की कोई विशेष आवश्यकता नहीं थी। इसलिए 1835 ई० में अंग्रेजों ने बलपूर्वक फिरोजपुर पर अधिकार कर लिया। 1838 ई० में अंग्रेजों ने यहाँ एक शक्तिशाली सैनिक छावनी बना ली। रणजीत सिंह ने अंग्रेजों द्वारा फिरोज़पुर पर अधिकार करने तथा यहाँ छावनी बनाए जाने के कारण चाहे बहुत क्रोध किया, किंतु अंग्रेजों ने इसकी कोई परवाह न की।

  1. अंग्रेज़ फिरोजपुर पर क्यों अधिकार करना चाहते थे ?
  2. पंजाब में घेराव डालने के लिए ……………. पर अधिकार करना आवश्यक था।
  3. अंग्रेजों ने फिरोजपुर पर कब अधिकार कर लिया था ?
  4. अंग्रेजों ने फिरोज़पुर में कब एक सैनिक छावनी स्थापित की थी ?
  5. क्या महाराजा रणजीत सिंह फिरोजपुर के प्रश्न पर अंग्रेजों के आगे झुक गया था ?

उत्तर-

  1. अंग्रेज़ फिरोजपुर पर अधिकार करके महाराजा रणजीत सिंह के राज्य की गतिविधियों को पास से देख सकते थे।
  2. फिरोजपुर।
  3. अंग्रेजों ने 1835 ई० में फिरोजपुर पर अधिकार कर लिया था।
  4. अंग्रेजों ने 1838 ई० में फिरोज़पुर में एक सैनिक छावनी स्थापित कर ली थी।
  5. महाराजा रणजीत सिंह फिरोज़पुर के प्रश्न पर निःसन्देह अंग्रेजों के आगे झुक गया था।

PSEB 12th Class History Solutions Chapter 18 ऐंग्लो-सिख संबंध : 1800-1839

ऐंग्लो-सिख संबंध : 1800-1839 PSEB 12th Class History Notes

  • प्रथम चरण (First Stage)-महाराजा रणजीत सिंह और अंग्रेजों के मध्य संबंधों का प्रथम चरण 1800 से 1809 ई० तक चला-1800 ई० में अंग्रेजों ने यूसुफ अली के अधीन एक सद्भावना मिशन रणजीत सिंह के दरबार में भेजा-1805 में मराठा सरदार जसवंत राव होल्कर ने महाराजा से अंग्रेजों के विरुद्ध सहायता माँगी परंतु महाराजा ने इंकार कर दिया–प्रसन्न होकर अंग्रेजों ने महाराजा रणजीत सिंह के साथ 1 जनवरी, 1806 ई० को लाहौर की संधि की-महाराजा रणजीत सिंह की बढ़ती हुई शक्ति को रोकने के लिए अंग्रेजों ने चार्ल्स मैटकॉफ को 1808 ई० में बातचीत के लिए भेजा-बातचीत असफल रहने पर दोनों ओर से युद्ध की तैयारियाँ आरंभ हो गईं-अंतिम क्षणों में महाराजा अंग्रेज़ों के साथ संधि करने के लिए तैयार हो गया।
  • अमतृसर की संधि (Treaty of Amritsar)-अमृतसर की संधि महाराजा रणजीत सिंह तथा अंग्रेजों के मध्य 25 अप्रैल, 1809 ई० को हुई-इस संधि के अनुसार सतलुज नदी को लाहौर दरबार और अंग्रेजों के मध्य सीमा रेखा मान लिया गया-इस संधि से महाराजा रणजीत सिंह का समस्त सिख कौम को एक झंडे तले एकत्रित करने का सपना धूल में मिल गया-परंतु इस संधि से उसने अपने राज्य को पूर्णत: नष्ट होने से बचा लिया-अमृतसर की संधि अंग्रेजों की बड़ी कूटनीतिक विजय थी।
  • द्वितीय चरण (Second Stage)-महाराजा रणजीत सिंह और अंग्रेजों के मध्य संबंधों का दूसरा चरण 1809 से 1839 ई० तक चला-1809 से 1812 ई० तक दोनों पक्षों के मध्य संदेह और अविश्वास का वातावरण बना रहा-1812 से 1821 ई० तक का काल दोनों पक्षों के मध्य शांतिपूर्ण सहअस्तित्व का काल रहा-1832 में अंग्रेज़ों तथा सिंध में हुई व्यापारिक संधि से महाराजा रणजीत सिंह को गहरा आघात लगा- अंग्रेज़ों द्वारा 1835 ई० में शिकारपुर और फ़िरोज़पुर पर अधिकार करने पर भी महाराजा रणजीत सिंह खामोश रहा-अंग्रेज़ों ने 26 जून, 1838 ई० को महाराजा को त्रिपक्षीय संधि पर हस्ताक्षर करने के लिए बाध्य किया- महाराजा रणजीत सिंह ने अंग्रेजों के प्रति जो नीति अपनाई उसकी कुछ इतिहासकारों ने निंदा की है जबकि कुछ ने प्रशंसा।

कबड्डी (Kabaddi) Game Rules – PSEB 10th Class Physical Education

Punjab State Board PSEB 10th Class Physical Education Book Solutions कबड्डी (Kabaddi) Game Rules.

कबड्डी (Kabaddi) Game Rules – PSEB 10th Class Physical Education

याद रखने योग्य बातें

  1. पुरुषों के लिए कबड्डी के मैदान की लम्बाई = 13 मीटर
  2. पुरुषों के लिए मैदान की चौड़ाई = 10 मीटर
  3. महिलाओं के लिए मैदान की लम्बाई = 12 मीटर
  4. महिलाओं के लिए मैदान की चौड़ाई = 8 मीटर
  5. जूनियर लड़के और लड़कियों के लिए मैदान = 11 × 8 मीटर “
  6. टीम के कुल खिलाड़ी = 12
  7. मैच का समय पुरुषों के लिए = 20-5-20 मिनट
  8. महिलाओं के लिए मैच का समय = 15-5-15 मिनट
  9. मैच के अधिकारी = एक रैफ़री, दो अम्पाइर,
    एक स्कोरर, एक टाइम
    कीपर, दो लाइन मैन
  10. लौन के अंक = 2
  11. लाइनों की चौड़ाई = 5 सैंटी मीटर
  12. ब्लॉक का आकार पुरुषों के लिए = 1 × 8 मीटर
  13. महिलाओं के लिए ब्लॉक का आकार = 1 × 6 मीटर
  14. कबड्डी खेल में लॉबी की चौड़ाई = 1 मी०
  15. मध्य रेखा से ब्लाक रेखा की दूरी = 2.75 मी०
  16. रेखाओं की चौड़ाई = 5 सैं०मी०
  17. मैच में खिलाड़ियों की संख्या = 7
  18. मध्यांतर = 5 मिनट

हकबड्डी (Kabaddi) Game Rules - PSEB 10th Class Physical Education

कबड्डी खेल की संक्षेप रूप-रेखा
(Brief outline of the Kabaddi Game)

  1. प्रत्येक टीम में 12 खिलाड़ी होंगे परन्तु एक समय सात खिलाड़ी ही मैदान में उतरेंगे तथा 5 खिलाड़ी स्थानापन्न (Substitutes) होते हैं।
  2. टॉस जीतने वाली टीम अपनी पसन्द का क्षेत्र चुनती है तथा आक्रमण करने का अवसर प्राप्त करती है।
  3. खेल का समय 20-5-20 मिनटों का होता है तथा स्त्रियों और जूनियरों के लिए 15-5-15 का होता है जिसमें 5 मिनट का समय आराम का होता है।
  4. यदि कोई खिलाड़ी खेल के दौरान मैदान में से बाहर चला जाता है तो वह आऊट माना जाएगा।
  5. यदि किसी खिलाड़ी का कोई अंग सीमा के बाहरी भाग को छू जाए तो वह आऊट माना जाएगा।
  6. यदि किसी कारणवश मैच पूरा नहीं खेला जाता तो मैच दोबारा खेला जाएगा।
  7. खिलाड़ी अपने शरीर पर तेल या कोई और चिकनाहट वाली चीज़ नहीं मल सकता।
  8. खेल के समय कोई खिलाड़ी दूसरे खिलाड़ी को कैंची (Scissors grip) नहीं मार सकता।
  9. खिलाड़ी को चोट लगने की दशा में दूसरा खिलाड़ी उसके स्थान पर आ सकता
  10. ग्राऊंड से बाहर खड़े होकर खिलाड़ी को पानी दिया जा सकता है, ग्राऊंड के अन्दर आकर देना फाऊल है।
  11. कैप्टन रैफरी के परामर्श से टाइम आऊट ले सकता है, परन्तु टाउम-आऊट का समय दो मिनट से अधिक नहीं होना चाहिए।
  12.  एक टीम तीन खिलाड़ी बदल सकती है।
  13. यदि कोई टीम दूसरी टीम से लोना ले जाती है तो उस टीम को दो नम्बर और दिए जाते हैं।
  14. बदले हुए खिलाड़ियों को दोबारा नहीं बदला जा सकता।

हकबड्डी (Kabaddi) Game Rules - PSEB 10th Class Physical Education

प्रश्न
कबड्डी के खेल के मैदान, खेल अधिकारी तथा खेल के प्रमुख नियमों का वर्णन करें।
उत्तर-
खेल का मैदान (Play Ground) खेल का मैदान समतल तथा नर्म होगा। यह मिट्टी, खाद तथा बुरादे का होना चाहिए। पुरुषों के लिए मैदान का आकार 121/2 मीटर × 10 मीटर होगा। केन्द्रीय रेखा इसे दो समान भागों में बांटेगी। प्रत्येक भाग 10 मीटर × 161/4 मीटर होगा। स्त्रियों तथा जूनियर्ज़ के लिए मैदान का नाप 11 मीटर × 8 मीटर होगा। मैदान के दोनों ओर एक मीटर चौड़ी पट्टी होगी जिसे लॉबी (Lobby) कहते हैं। प्रत्येक क्षेत्र में केन्द्रीय रेखा से तीन मीटर दूर उसके समानान्तर मैदान की पूरी चौड़ाई के बराबर रेखायें खींची जाएंगी। इन रेखाओं को बॉक रेखाएं (Baulk Lines) कहते हैं। केन्द्रीय रेखा स्पष्ट रूप से अंकित की जानी चाहिएं। केन्द्रीय रेखा तथा अन्य रेखाओं की अधिकतम चौड़ाई 5 सैंटीमीटर या 2 इंच होनी चाहिए।
बोनस रेखा—(Bonus Lines)

  1. यह रेखा से 10 सें० मी० के अन्तर पर होती है और सीनियर के लिए बॉक रेखा से एक मीटर के अन्तर पर होती है।
  2. जब रेडर रेखा को पार के पश्चात् यदि कोई रेडर पकड़ा जाता है तो उसे अंक दिया जाता है।
  3. बोनस रेखा को पार करने के पश्चात् यदि कोई रेडर पकड़ा जाता है तो विरोधी टीम को उसका अंक दिया जाता है।
  4. यदि कोई रेडर बोनस रेखा पार करने के पश्चात् खिलाड़ी को हाथ भी लगाकर आता है तो उसे बोनस के अतिरिक्त एक अंक अधिक मिलता है।

खेल के नियम
(Rules of Game)
(1) टॉस जीतने वाली टीम या तो अपनी पसन्द का क्षेत्र ले सकती या पहले आक्रमण करने का अवसर प्राप्त कर सकती है। मध्यान्तर के पश्चात् क्षेत्र या कोर्ट बदल लिए जाते हैं।
(2) खेल के दौरान में मैदान से बाहर जाने वाला खिलाड़ी आऊट हो जाएगा।
(3) खिलाड़ी आऊट हो जाता है।

  • यदि किसी खिलाड़ी के शरीर का कोई भी भाग मैदान की सीमा के बाहर के भाग को स्पर्श कर ले।
  • संघर्ष करते समय खिलाड़ी आऊट नहीं होगा यदि उसके शरीर का कोई अंग या तो सीधे मैदान को छुए या उस खिलाड़ी को छुए जो सीमा के अन्दर है (शरीर का कोई न कोई भाग सीमा के बीच होना चाहिए।)

(4) संघर्ष आरम्भ होने पर लॉबी का क्षेत्र भी मैदान में सम्मिलित माना जाता है। संघर्ष की समाप्ति पर वे खिलाड़ी जो संघर्ष में सम्मिलित थे, लॉबी से होते हुए अपने-अपने क्षेत्र में प्रवेश कर सकते हैं।
यदि बचाव करने वाली टीम के किसी खिलाड़ी का पैर पीछे वाली लाइन को छू जाता है तो वह आऊट नहीं है जब तक पैर लाइन से बाहर न निकले।
(5) आक्रामक खिलाड़ी ‘कबड्डी’ शब्द का लगातार उच्चारण करता रहेगा। यदि वह ऐसा नहीं करता तो अम्पायर उसे अपने क्षेत्र में वापिस जाने का और विपक्षी खिलाड़ी को आक्रमण करने का आदेश दे सकता है। इस स्थिति में उस खिलाड़ी का पीछा नहीं किया जाएगा।
KABADDI GROUND
कबड्डी (Kabaddi) Game Rules - PSEB 10th Class Physical Education 1
(6) आक्रामक खिलाड़ी को ‘कबड्डी’ शब्द बोलते हुए विपक्षी कोर्ट में प्रविष्ट होना चाहिए। यदि वह विपक्षी के कोर्ट में प्रविष्ट होने के पश्चात् ‘कबड्डी’ शब्द का उच्चारण करता है तो अम्पायर उसे वापिस भेज देगा और विपक्षी खिलाड़ी को आक्रमण का अवसर दिया जाएगा। इस स्थिति में आक्रामक खिलाड़ी का पीछा नहीं किया जाएगा।
(7) यदि सचेत किए जाने पर कोई भी आक्रामक नियम नं0 6 का उल्लंघन करता है तो निर्णायक उसकी बारी समाप्त कर देगा और विपक्षी को एक अंक देगा, परन्तु उसे आऊट नहीं किया जाएगा।
(8) खेल के अन्त तक प्रत्येक पक्ष अपने आक्रामक बारी-बारी से भेजता रहेगा।
(9) यदि विपक्षियों द्वारा पकड़ा हुआ कोई आक्रामक उनसे बच कर अपने कोर्ट में सुरक्षित पहुंच जाता है तो उसका पीछा नहीं किया जाएगा।
(10) एक बारी में केवल एक ही आक्रामक विपक्षी कोर्ट में जाएगा। यदि एक साथ एक से अधिक आक्रामक विपक्षी कोर्ट में जाते हैं तो निर्णायक या अम्पायर उन्हें वापस जाने का आदेश देगा और उनकी बारी समाप्त कर दी जाएगी। इन आक्रामकों द्वारा छुए गए विपक्षी आऊट नहीं माने जाएंगे। विपक्षी इन आक्रामकों का पीछा नहीं करेंगे।
(11) जो भी पक्ष एक समय में एक से अधिक खिलाड़ी विपक्षी कोर्ट में भेजता है उसे चेतावनी दी जाएगी। यदि चेतावनी देने के पश्चात् भी वह ऐसा करता है तो पहले आक्रामक के अतिरिक्त शेष सभी को आऊट किया जाएगा।
(12) यदि कोई आक्रामक विपक्षी कोर्ट में सांस तोड़ देता है तो उसे आऊट माना जाएगा।
(13) किसी आक्रामक के पकड़े जाने पर विपक्षी खिलाड़ी जान-बूझ कर उसका मुंह बंद करके सांस रोकने या चोट लगने वाले ढंग से पकड़ने, कैंची या अनुचित साधनों का
प्रयोग नहीं करेंगे। ऐसा किए जाने पर अम्पायर उस आक्रामक को अपने क्षेत्र में सुरक्षित लौटा हुआ घोषित करेगा।
(14) कोई भी आक्रामक या विपक्षी एक दूसरे को सीमा से बाहर धक्का नहीं मारेगा। जो पहले धक्का देगा उसे आऊट घोषित किया जाएगा। यदि धक्का मार कर आक्रामक को सीमा से बाहर निकाला जाता है तो उसे अपने कोर्ट से सुरक्षित लौटा हुआ घोषित किया जाएगा।
(15) जब तक आक्रामक विपक्षी कोर्ट में रहेगा तब तक कोई भी विपक्षी खिलाड़ी केन्द्रीय रेखा से पार आक्रामक के अंग को अपने शरीर के किसी भाग से नहीं छुएगा। यदि वह ऐसा करता है उसे आऊट घोषित किया जाएगा।
(16) यदि नियम 15 का उल्लंघन करते हुए कोई आऊट हुआ विपक्षी आक्रामक को पकड़ता है या उसे पकड़े जाने में सहायता पहुंचाते हुए या आक्रामक को पकड़े हुए नियम का उल्लंघन करता है तो आक्रामक अपने कोर्ट में सुरक्षित लौटा घोषित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त संघर्ष दल के सभी विपक्षी सदस्य आऊट हो जाएंगे। जब कोई आक्रामक विरोधी टीम की ओर नम्बर ले कर आता है तो उसका नम्बर तब माना जाएगा यदि उसके शरीर के किसी भी अंग ने मध्य रेखा को पूरा पार किया हो।
(17) यदि कोई आक्रामक बिना अपनी बारी के जाता है तो अम्पायर उसे वापिस लौटने का आदेश देगा। यदि यह बार-बार ऐसा करता है तो उसके पक्ष को एक बार चेतावनी देने के पश्चात् विपक्षियों को एक अंक दे दिया जाएगा।
(18) नये नियमों के अनुसार बाहर से पकड़ कर पानी पीना फाऊल नहीं है।
(19) जब एक दल विपक्षी दल के सभी खिलाड़ियों को निष्कासित करने में सफल हो जाए तो उन्हें ‘लोना’ मिलता है। लोने के दो अंक अतिरिक्त होते हैं। इसके पश्चात् खेल पुनः शुरू होगा।
(20) आक्रामक को यदि अपने पक्ष के खिलाड़ी द्वारा विपक्षी के प्रति चेतावनी दी जाती है तो उसके विरुद्ध 1 अंक दिया जाएगा।
(21) किसी भी आक्रामक या विपक्षी को कमर या हाथ-पांव के अतिरिक्त शरीर के किसी भाग से नहीं पकड़ सकता। उस नियम का उल्लंघन करने वाला आऊट घोषित किया जाएगा।
(22) खेल के दौरान यदि एक या दो खिलाड़ी रह जाएं तथा विरोधी दल का कप्तान अपनी टीम को खेल में लाने के लिए उन्हें आऊट घोषित कर दे तो विपक्षियों को इस घोषणा से पहले शेष खिलाड़ियों की संख्या के बराबर अंकों के अतिरिक्त ‘लोना’ के दो अंक और प्राप्त होंगे।
(23) विपक्षी के आऊट होने पर आऊट खिलाड़ी उसी क्रम में जीवित किया जाएगा जिसमें वह आऊट हुआ था।
(24) यदि किसी चोट के कारण मैच 20 मिनट रुका रहे तो हम मैच re-play करवा सकते हैं।
(25) 5 खिलाड़ियों के साथ भी मैच आरम्भ किया जा सकता है परन्तु जब 5 खिलाड़ी आऊट हो जाएं तो हम पूरा लोना अर्थात् 5 + 2 अंक (खिलाड़ियों 1, 5 अंक और 2 अंक लोने के) देते हैं। जब दो खिलाड़ी आ जाएं तो वे टीम में डाले जा सकते हैं।
(26) लोना के दो अंक होते हैं।

हकबड्डी (Kabaddi) Game Rules - PSEB 10th Class Physical Education

प्रश्न
कबड्डी मैच के नियम बताएं।
उत्तर-
मैच के नियम
(Rules of Match)

  1. प्रत्येक पक्ष में खिलाड़ियों की संख्या बारह (12) होगी। एक साथ मैदान में सात खिलाड़ी उतरेंगे।
  2. खेल की अवधि पुरुषों के लिए 20 मिनट तथा स्त्रियों व जूनियरों के लिए 15 मिनट की दो अवधियां होंगी। इन दोनों अवधियों के बीच 5 मिनट का मध्यान्तर होगा।
  3. प्रत्येक आऊट होने वाले विपक्षी के लिए दूसरे पक्ष को एक अंक मिलेगा। लोना’ प्राप्त करने वाले पक्ष को दो अंक मिलेंगे।
  4. खेल की समाप्ति पर सबसे अधिक अंक प्राप्त करने वाले पक्ष को विजयी घोषित किया जाता है।
  5. कबड्डी का खेल बराबर रहने पर प्रत्येक टीम को पांच-पांच रेड क्रमानुसार दिये जाते हैं। सभी सात खिलाड़ी रेड के समय मैदान में रहेंगे। उस समय बॉक रेखा सभी तरह के फैसलों के लिए बोनस रेखा मानी जाएगी। इस खेल में खिलाड़ी को बॉक रेखा पार कर लेने पर एक अंक मिलेगा। रेडर बोनस रेखा जो बॉक रेखा में परिवर्तित हुई है, उसे पार कर लेता है और किसी विरोधी खिलाड़ी को हाथ भी लगा देता है तो उसे बोनस रेखा पार करने का एक अंक अधिक मिलेगा। इस अवसर पर कोई भी खिलाड़ी आऊट होने पर मैदान से बाहर नहीं जा सकता।
    रेड डालने से पहले दोनों टीमें अपने खिलाड़ियों के नम्बर और नाम क्रमानुसार रेड डालने के लिए रैफरी को देंगे और रैफरी के बुलाने पर दोनों टीमों के खिलाड़ी बारी-बारी रेड डालेंगे। उस समय टास नहीं होगा। पहले टास जीतने वाली टीम ही पहले रेड डालेगी। यद्यपि पांच-पांच रेड लाने पर भी मैच बराबर रहता है तो मैच का फैसला ‘अचानक मृत्यु (Sudden Death) के आधार पर होगा।

अचानक मृत्यु (Sudden Death)-इस अवसर पर दोनों टीमों का एक-एक रेड डालने का अवसर मिलेगा। जो भी टीम रेड डालते समय अंक बना लेती है उसे विजयी घोषित किया जाता है। इस तरह रेड डालने का सिलसिला उस समय तक चलता रहेगा, जब तक कोई एक टीम विजयी अंक प्राप्त नहीं कर लेती।

लोना (Lona)-जब एक टीम के सारे खिलाड़ी आऊट हो जाएं तो विरोधी टीम को 2 अंक अधिक मिलते हैं। उसे हम लोना कहते हैं।
टूर्नामैंट निम्नलिखित दो प्रकार के होते हैं—

  1. नाक आऊट (Knock Out)-इस में जो टीम हार जाती है, वह प्रतियोगिता से बाहर हो जाती है।
  2. लीग (League)-इस में यदि कोई टीम हार जाती है, वह टीम बाहर नहीं होगी। उसे अपने ग्रुप के सारे मैच खेलने पड़ते हैं। जो टीम मैच जीतती है उसे दो अंक दिये जाते हैं। मैच बराबर होने पर दोनों टीमों को एक-एक अंक दिया जाएगा। हारने वाली टीम को शून्य (Zero) अंक मिलेगा।
    यदि दोनों टीमों का मैच बराबर रहता है और अतिरिक्त समय भी दिया जाता है या जिस टीम ने खेल आरम्भ होने से पहले अंक लिया होगा वह विजेता घोषित की जाएगी।
    यदि दोनों टीमों का स्कोर शून्य (Zero) है तो जिस टीम ने टॉस जीता हो वह विजेता घोषित की जाएगी।
  3. किसी कारणवश मैच न होने की दशा में मैच पुनः खेला जाएगा। दोबारा किसी और दिन खेले जाने वाले मैच में दूसरे खिलाडी बदले भी जा सकते हैं, परन्तु यदि मैच उसी दिन खेला जाए तो उसमें वही खिलाड़ी खेलेंगे जो पहले खेले थे।
  4. यदि किसी खिलाड़ी को चोट लग जाए तो उस पक्ष का कप्तान ‘समय आराम’ (Time Out) पुकारेगा, परन्तु ‘समय आराम’ की अवधि दो मिनट से अधिक नहीं होगी तथा चोट लगने वाला खिलाड़ी बदला जा सकता है। खेल की दूसरी पारी शुरू होने से पहले दो खिलाड़ी बदले जा सकते हैं। एक या दो से कम खिलाड़ियों से खेल शुरू हो सकता है। जो खिलाड़ी खेल शुरू होने के समय उपस्थित नहीं होते, खेल के दौरान किसी भी समय मिल सकते हैं। रैफरी को सूचित करना ज़रूरी है। यदि चोट गम्भीर हो तो उसकी जगह दूसरा खिलाड़ी खेल सकता है। प्रथम खेल के अन्त तक केवल दो खिलाड़ी बदले जा सकते हैं।
  5. किसी भी टीम में पांच खिलाड़ियों से कम होने की दशा में खेल शुरू किया जा सकता है, परन्तु
    • टीम के सभी खिलाड़ी आऊट होने पर अनुपस्थित खिलाड़ी भी आऊट हो जाएंगे और विपक्षी टीम को ‘लोना’ दिया जाएगा।
    • यदि अनुपस्थित खिलाड़ी आ जाएं तो वे रैफरी की आज्ञा से खेल में भाग ले सकते हैं।
    • अनुपस्थित खिलाड़ियों के स्थानापन्न कभी भी लिए जा सकते हैं परन्तु जब वे इस प्रकार लिए जाते हैं तो मैच के अन्त तक किसी भी खिलाड़ी को बदला जा सकता है।
    • मैच पुनः खेले जाने पर किसी भी खिलाड़ी को बदला जा सकता है।
  6. प्रलेपन की अनुमति नहीं। खिलाड़ियों के नाखून खूब अच्छी तरह कटे होने चाहिएं। खिलाड़ियों की पीठ तथा सामने की ओर कम-से-कम चार इंच लम्बा नम्बर लगाया जाएगा। खिलाड़ी के कम-से-कम वस्त्र बनियान, जांघिया या लंगोट सहित निक्कर होंगे। शरीर पर तेल आदि चिकने पदार्थ का मलना मना है। खिलाड़ी धातु की कोई वस्तु धारण नहीं करेंगे।
  7. खेल के दौरान कप्तान या नेता के अतिरिक्त कोई भी खिलाड़ी आदेश नहीं देगा। कप्तान अपने अर्द्धक में ही आदेश दे सकता है।
  8. यदि खिलाड़ी ‘कबड्डी’ शब्द का उच्चारण ठीक प्रकार से नहीं करता तथा रैफरी (Referee) द्वारा एक बार चेतावनी दिए जाने पर वह बार-बार ऐसा करता है तो दूसरी टीम को एक प्वाईंट दे दिया जाएगा, परन्तु वह खिलाड़ी बैठेगा नहीं।
  9. यदि कोई खिलाड़ी आक्रमण (Raid) करने जा रहा है और उसकी टीम का कोच या अन्य अधिकारी ऐसा करता है तो रैफरी दूसरी टीम को उसके विरुद्ध एक प्वाईंट (अंक) दे देगा।

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प्रश्न
कबड्डी खेल में अधिकारी व खेल में त्रुटियों का वर्णन करें।
उत्तर-
अधिकारी व उनके अधिकार

    • रैफरी (एक)
    • निर्णायक या अम्पायर (दो)
    • रेखा निरीक्षक (दो)
    • स्कोरर (एक)
  1. आमतौर पर निर्णायक का निर्णय अन्तिम होगा। विशेष दशाओं में रैफ़री इसे बदल भी सकता है भले ही दोनों अम्पायरों में मतभेद हो।
  2. निर्णेता (रैफरी) किसी भी खिलाड़ी को त्रुटि करने पर चेतावनी दे सकता है, उसके विरुद्ध अंक दे सकता है या मैच के लिए अयोग्य घोषित कर सकता है। ये त्रुटियां इस प्रकार की हो सकती हैं—
    • निर्णय के बारे में अधिकारियों को बार-बार कहना,
    • अधिकारियों को अपमानजनक शब्द कहना,
    • अधिकारियों के प्रति अभद्र व्यवहार करना या उनके निर्णय को प्रभावित करने के लिए प्रक्रिया,
    • विपक्षी को अपमानजनक बातें कहना।

त्रुटियां
(Fouls)

  1. आक्रामक का मुंह बन्द करके या गला दबा कर उसकी सांस तोड़ने की कोशिश करना।
  2. हिंसात्मक ढंग का प्रयोग।
  3. कैंची मार कर आक्रामक को पकड़ना।
  4. आक्रामक भेजने में पांच सैकिण्ड से अधिक समय लगाना।
  5. मैदान के बारे खिलाड़ी या कोच द्वारा कोचिंग देना। इस नियम के उल्लंघन पर अम्पायर अंक दे सकता है।
  6. ऐसे व्यक्तियों को निर्णायक या रैफ़री नम्बर दे कर बाहर निकाल सकता है। आक्रमण जारी रहने पर सीटी बजाई जाएगी।
  7. जानबूझ कर बालों से या कपड़े से पकड़ना फाऊल है।
  8. जानबूझ कर आक्रामक को धक्का देना फाऊल है।

फाऊल (Foul)
अधिकारी फ़ाऊल (Foul) खेलने पर खिलाड़ियों को तीन प्रकार के कार्ड दिखा सकता है, जो निम्नलिखित हैं
हरा कार्ड (Green Card)
यह कार्ड खिलाड़ी को किसी भी नियम का जानबूझ कर उल्लंघन करने पर चेतावनी के आधार पर दिखाया जा सकता है।
पीला कार्ड (Yellow Card)
यह कार्ड खिलाड़ी को दो मिनट के लिए मैदान से बाहर निकालने के लिए दिखाया जाता है।
लाल कार्ड (Red Card) यह कार्ड मैच अथवा टूर्नामैंट से बाहर निकालने के लिए दिखाया जाता है।

PSEB 10th Class Physical Education Practical कबड्डी (Kabaddi)

प्रश्न 1.
कबड्डी के मैदान की लम्बाई-चौड़ाई बताओ।
उत्तर-
कबड्डी के मैदान की लम्बाई 12.50 मीटर और चौड़ाई 10 मीटर होती है। जूनियर लड़के और लड़कियों के लिए 11 मीटर लम्बाई और 8 मीटर चौड़ाई होती है।

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प्रश्न 2.
खेलने वाले खिलाड़ियों की संख्या बताओ।
उत्तर-
कबड्डी के कुल खिलाड़ियों की संख्या 12 होती है। 7 खेलते हैं और 5 खिलाड़ी अतिरिक्त (Substitutes) होते हैं।

प्रश्न 3.
कबड्डी का समय कितना होता है?
उत्तर-
कबड्डी का समय 20-5-20 मिनट का होता है। जूनियर लड़के और लड़कियों के लिए 15-5-15 मिनट का समय होता है।

प्रश्न 4.
कबड्डी का खेल शुरू कैसे होता है ?
उत्तर-
कबड्डी का खेल टॉस से शुरू होता है। जो टीम टॉस जीत जाती है, वह अपनी पसन्द का क्षेत्र चुनती है।

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प्रश्न 5.
कबड्डी में लोना (Lona) के कितने अंक होते हैं ?
उत्तर-
कबड्डी के खेल में जब सभी खिलाड़ी मर जाते हैं तो विरोधी टीम को दो और अंक दिए जाते हैं, जिसे लोना कहा जाता है।

प्रश्न 6.
खिलाड़ी कब आऊट माना जाता है?
उत्तर-
जब हमला करने वाली टीम का खिलाड़ी विरोधी टीम के किसी खिलाड़ी को हाथ लगा दे या खिलाड़ी मैदान में से अपने-आप बाहर चला जाए तो आऊट माना जाता है।

प्रश्न 7.
कबड्डी में टाइम आऊट कितने लिए जा सकते हैं ?
उत्तर-
कबड्डी में दो टाइम आऊट लिए जाते हैं, जिसका समय 30 सैकिंड होता है।

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प्रश्न 8.
कबड्डी में हार-जीत किस प्रकार होती है ?
उत्तर-
जो टीम अधिक अंक ले जाती है, उसको विजयी माना जाता है। बराबर की हालत में 5-5 मिनट दिए जाते हैं जब तक कि फैसला नहीं हो जाता।

प्रश्न 9.
कबड्डी का खेल खिलाने वाले अधिकारियों की संख्या बताओ।
उत्तर-

  1. रैफ़री – 1
  2. अम्पायर = 2
  3. लाइनमैन = 2
  4. स्कोरर – 1

प्रश्न 10.
कबड्डी खेल के मुख्य फाऊल बताओ।
उत्तर-
कबड्डी खेल के निम्नलिखित मुख्य फाऊल हैं—

  1. दम डालने वाले खिलाड़ी को कैंची मारना।
  2. बाहर से कोचिंग देना।
  3. बालों से पकड़ना।
  4. विरोधी खिलाड़ी का गला दबाना।
  5. दूसरे खिलाड़ी पर घातक आक्रमण करना।

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प्रश्न 11.
कबड्डी खेलने के पांच मुख्य नियम लिखो।
उत्तर-
कबड्डी खेल के नियम निम्नलिखित हैं—

  1. खेल के समय यदि कोई खिलाड़ी बाहर चला जाए तो आऊट माना जाता है।
  2. यदि कोई खिलाड़ी दम डालने वाले खिलाड़ी को पकड़ते हुए बाहर चला जाए और दम डालने वाला सुरक्षित अपने क्षेत्र में चला जाए तो पकड़ने वाला आऊट माना जाएगा।
  3. कबड्डी ऊंची आवाज़ में न सुनी जा सके।
  4. किसी खिलाड़ी को जानबूझ कर धक्का मार कर बाहर नहीं निकाला जा सकता है।
  5. विरोधी कोर्ट में यदि कोई खिलाड़ी दम तोड़ देता है तो वह आऊट हो जाता है।

प्रश्न 12.
क्या कबड्डी के खेल में कोई खिलाड़ी तेल मलकर खेल सकता है ?
उत्तर-
कबड्डी के खेल में कोई भी खिलाड़ी तेल या चिकनाई वाली कोई भी चीज़ मलकर नहीं खेल सकता है।

प्रश्न 13
कबड्डी के खेल में नया परिवर्तन कौन-सा हुआ है ?
उत्तर-
कबड्डी के खेल में एक मीटर बोनस लाइन लगाई गई है।

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प्रश्न 14.
एक रेडर को बोनस का क्या लाभ है ?
उत्तर-
एक रेडर को बोनस लाइन क्रास करने पर एक नम्बर मिल जाता है।

गतका (Gattka) Game Rules – PSEB 10th Class Physical Education

Punjab State Board PSEB 10th Class Physical Education Book Solutions गतका (Gattka) Game Rules.

गतका (Gattka) Game Rules – PSEB 10th Class Physical Education

याद रखने योग्य बातें

  1. गतके के प्लेटफार्म का आकार = गोल
  2. प्लेटफार्म का व्यास = 30′, 20 सैं० मी०
  3. गतके छड़ की लम्बाई = 3’3″, 100 सैं० मी०
  4. छड़ी का भार = 500 ग्राम
  5. छड़ी बनी है = बैंत की
  6. छड़ी की मोटाई = 1/2″ से 3/4″ 2 सैं० मी० से 3. सैं० मी०
  7. बाउट का समय = 3 मिनट, 11/2,1/2 मिनट के दो हॉफ
  8. खिलाड़ियों की पोशाक = जर्सी या कमीज़, पर पटका आवश्यक
  9. अधिकारी = रैफरी कौंसल
    दो तकनीकी अधिकारी, जज 1,
    स्कोकर, 1 टाईम कीपर = 1

हथियारों की सूची

  1. तलवार
  2. ढाल
  3. वर्छा
  4. गंडासी
  5. कमंद तोड़
  6. छड़ी
  7. कटार
  8. गदा
  9. खण्डा
  10. तेग।

गतका (Gattka) Game Rules - PSEB 10th Class Physical Education

गतका खेल की संक्षेप रूपरेखा
(Brief outline of the Gattka)

  1. गतके की खेल में सात खिलाड़ी होते हैं जिनमें पांच प्रतियोगिता में भाग लेते हैं। दो खिलाड़ी बदलने होते हैं।
  2. गतके का प्लेटफार्म गोल और यह 71/2 मीटर रेडियम का होता है।
  3. गतके की लम्बाई हत्थी से तीन फुट (3”) की होती है जो बैंत की बनी होती
  4. गतके की बाऊट का समय तीन मिनट होता है।
  5. गतके की खेल में तीन जज, एक रैफरी और एक टाईम कीपर होता है।

प्रश्न
गतका के प्लेटफार्म, पोशाक और समय के बारे में लिखें।
उत्तर-
प्लेटफार्म-गतके का प्लेटफार्म गोल दायरा होता है जो 15 मीटर का होता
पोशाक-प्रतियोगी जर्सी अथवा कमीज़ पहन सकता है परन्तु सिर पर पटका होना आवश्यक है।
गतके का साइज़-गतका बैत का होता है जिसकी हत्थी होती है और उस से लगी तीन फुट की बैत की छड़ लगी होती है।
समय-प्रत्येक बाऊट का समय पांच मिनट होता है।

प्रश्न
गतका में ड्रा, बाई और वाक ओवर के बारे में बताइए।
उत्तर-
ड्रा, बाई और वाक ओवर
Draw, Byes and Walkover

  1. सभी प्रतियोगिता के लिए ड्रा निकालने से पहले बाऊट के लिए खिलाड़ियों के नाम A, B, C, D, E लिये जाते हैं।
  2. गतके की प्रतियोगिता के A नाम वाला खिलाड़ी विरोधी की टीम के A वाले खिलाड़ी से बाऊट में भाग लेगा।
  3. उन मुकाबलों में जिनमें चार से अधिक प्रतियोगी हों। पहली सीरीज़ के लिए बाई निकाली जाती है ताकि दूसरी सीरीज़ से प्रतियोगियों की संख्या कम हो जाए।
  4. पहली सीरीज़ में जिन खिलाडियों को बाई मिलती है वह दूसरी सीरीज़ के पहले गतका खेलेंगे यदि बाइयों की संख्या विषम हो तो अन्तिम बाई प्राप्त करने वाला खिलाड़ी दूसरी सीरीज़ में पहले मुकाबले के जेतू के बाऊट में भाग लेगा।
    गतका (Gattka) Game Rules - PSEB 10th Class Physical Education 1
  5. कोई भी प्रतियोगी पहली सीरीज़ में बाईं और दूसरी सीरीज़ में walkover नहीं ले सकता न ही किसी को लगातार दो वाक ओवर मिलते हैं।

गतका (Gattka) Game Rules - PSEB 10th Class Physical Education

प्रश्न
गतका खेल में 20 प्रतियोगियों की बाऊट निकालने की सारणी बनाओ।
उत्तर-
गतका (Gattka) Game Rules - PSEB 10th Class Physical Education 2
उत्तर-सारणी-बाऊट की बाइयां निकालना

प्रविष्टियों की संख्या बाऊट बाईं
5. 1 3
6. 2 2
7. 3 1
8. 4
9. 1 7
10. 2 6
11. 3 5
12. 4 4
13. 5 3
14. 6 2
15. 7 1
16. 8
17. 1 15
18. 2 14
19. 3 13
20. 4 12

 

प्रश्न
गतका खेल की प्रतियोगिता कैसे करवाई जाती है ?
उत्तर-
गतके की प्रतियोगिता
(Limitation of Competition)
प्रतियोगिताओं की सीमा–किसी भी प्रतियोगिता में पांच प्रतियोगियों को भाग लेने की आज्ञा है।
नया ड्रा (Fresh Draw)–यदि किसी एक ही स्कूल/कॉलेज/अथवा क्लब के दो सदस्यों का पहली सीरीज़ में ड्रा निकल जाए तो उनमें एक-दूसरे के पक्ष में प्रतियोगिता से निकलना चाहे तो नया ड्रा निकाला जाएगा।
वापसी (Withdraw)-ड्रा निकालने के बाद यदि प्रतियोगी बिना किसी कारण के प्रतियोगिता से हटना चाहे तो अधिकारी प्रबन्धकों को इसकी सूचना देगा।
रिटायर होना (Retirement) यदि कोई प्रतियोगी किसी कारण मुकाबले से रिटायर होना चाहता है तो उसे अधिकारी को सूचित करना होगा।
बाई (Byes)—पहली सीरीज़ के बाद उत्पन्न होने वाली बाइयों के लिए वह विरोधी छोड़ दिया जाता है जिससे अधिकारी सहमत हो।

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प्रश्न
गतका प्रतियोगिता में बाऊट को कौन नियन्त्रण करता है ?
उत्तर-
बाऊट का नियन्त्रण
(Bout’s Control)

  1. सभी प्रतियोगिताओं के मुकाबले एक रैफरी, तीन जजों, एक टाइम कीपर द्वारा करवाए जाते हैं। जब तीन से कम जज हों तो रैफरी स्कोरिंग पेपर को पूरा करेगा। प्रदर्शनी बाऊट एक रैफरी द्वारा कण्ट्रोल किया जाएगा।
  2. रैफरी एक स्कोर पैड् या जानकारी स्लिप का प्रयोग खिलाड़ियों के नाम के लिए करेगा। इन सब स्थितियों को जब कि बाऊट चोट लगने के कारण या किसी अन्य कारणवश स्थगित हो जाए तो रैफरी इस पर रिपोर्ट करके अधिकारी को देगा।
  3. टाइम कीपर प्लेटफार्म के एक ओर बैठेगा तथा जज तीन ओर बैठेंगे। सीटें इस प्रकार की होंगी कि वे खिलाड़ियों को संतोषजनक ढंग से देख सके। ये दर्शकों से अलग होंगे।

प्वाईंट देना
(Awarding of Points)

  1. सभी प्रतियोगिताओं में जज प्वाईंट देंगे।
  2. प्रत्येक राऊंड के अन्त में प्वाईंट स्कोरिंग पेपर पर लिखे जाएंगे तथा बाऊट के अन्त में जमा किए जाएंगे।
  3. प्रत्येक जज को विजेता मनोनीत करना होगा उसे अपने स्कोरिंग पेपर पर हस्ताक्षर करने होंगे।

स्कोरिंग
(Scoring)

  1. जो गतके का खिलाड़ी अपने विरोधी को सबसे अधिक बार गतके से छुएगा उसे उतने ही अंक मिलेंगे। सिर पर छू लेने के 2 अंक बाकी एक अंक मिलेगा।
  2. यदि बाऊट में दोनों खिलाड़ियों के मिले अंक बराबर हों तो सिर को जिस खिलाड़ी ने अधिक बार छूआ हो उसे विजेता घोषित किया जाएगा। यदि जज यह सोचे कि वह इन दोनों पक्षों में बराबर है तो वह अपना निर्णय उस खिलाड़ी के पक्ष में देगा जिसने अच्छी . सुरक्षा (Defence) का प्रदर्शन किया हो।

बाऊट रोकना
(Stopping the Bout)

  1. यदि रैफरी के मतानुसार एक खिलाड़ी को चोट लगने के कारण खेल जारी नहीं रख सकता या बाऊट बन्द कर देता है तो उसके विरोधी को विजेता घोषित कर दिया जाता है।
  2. रैफरी को बाऊट रोकने का अधिकार है।
  3. यदि कोई प्रतियोगी समय पर बाऊट को शुरू करने में असमर्थ होता है तो वह बाऊट हार जाएगा।

शक्ति फाऊल
(Suspected Foul)
यदि रैफरी को फाऊल का सन्देह हो जाए जिसे उसने स्वयं साफ नहीं देखा वह जजों की सलाह ले सकता है तथा उसके अनुसार अपना फैसला दे सकता है ।

गतका (Gattka) Game Rules - PSEB 10th Class Physical Education

प्रश्न
गतका खेल में त्रुटियां लिखें।
उत्तर-
त्रुटियां
(Fouls)

  1. कोहनी को मारना
  2. गर्दन या सिर के नीचे जान-बूझ कर चोट लगाना।
  3. गिरे हुए प्रतियोगी को मारना।
  4. पकड़ना।
  5. सिर या शरीर के भार लेटना।
  6. रफिंग।
  7. कन्धे मारना।
  8. कुश्ती करना।
  9. निरन्तर सिर ढक कर रखना।
  10. कानों पर दोहरी चोट मारना।

PSEB 7th Class Home Science Solutions Chapter 7 शीशा और धातुओं की सफ़ाई

Punjab State Board PSEB 7th Class Home Science Book Solutions Chapter 7 शीशा और धातुओं की सफ़ाई Textbook Exercise Questions and Answers.

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PSEB 7th Class Home Science Guide शीशा और धातुओं की सफ़ाई Textbook Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
चाँदी के गहनों या बर्तनों को साफ करने के लिए किस पदार्थ का प्रयोग करोगे ?
उत्तर-
चूने तथा गर्म पानी के प्रयोग से।

प्रश्न 2.
लोहे के जंग को किस पदार्थ से उतारोगे?
उत्तर-
चूने का प्रयोग करके।

प्रश्न 3.
पीतल के बर्तनों को साधारण विधि से चमकाने के लिए क्या प्रयोग करोगे ?
उत्तर-
नींबू व नमक से रगड़ेंगे।

PSEB 7th Class Home Science Solutions Chapter 7 शीशा और धातुओं की सफ़ाई

प्रश्न 4.
ताँबे के बर्तनों को किस चीज़ से चमकाया जाता है ?
उत्तर-
ताँबे के बर्तनों को कपड़े साफ़ करने वाले सोडे द्वारा चमकाया जा सकता है।

लघूत्तर प्रश्न

प्रश्न 1.
ताँबे को साफ़ करने के लिए सोडा क्यों नहीं इस्तेमाल में लाना चाहिए?
उत्तर-
सोडा या क्षारीय पदार्थों से ताँबे के बर्तन काले पड़ जाते हैं। अतः इसकी सफ़ाई के लिए सोडे का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

प्रश्न 2.
स्टील के बर्तन और चाकू को कैसे साफ़ करोगे?
उत्तर-
स्टील के बर्तन साफ़ करने के लिए गर्म पानी में अमोनिया का घोल बनाकर प्रयोग में लाना चाहिए। स्टेनलेस स्टील की वस्तुएँ रगड़कर नहीं धोनी चाहिएं। गर्म पानी में साबुन के घोल द्वारा इनको साफ़ करके, सूखे कपड़े से पोंछकर रख देना चाहिए। इनको चमकाने के लिए सिरके का प्रयोग भी किया जाता है। बर्तनों को सिरके से मलने के पश्चात् पानी से धो लेना चाहिए। तत्पश्चात् कपड़े से पोंछने पर ये चमक उठते हैं। चाकू पर जल्दी दाग़ पड़ जाते हैं। अगर साफ़ न किया जाए तो खराब हो जाता है। चाकू को कभी भी पानी में नहीं डालना चाहिए। इसे हमेशा नमी युक्त कपड़े से साफ़ करना चाहिए।

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प्रश्न 3.
बर्तन साफ़ करने क्यों जरूरी है?
उत्तर-
खाना पकाने से बर्तन गन्दे हो जाते हैं। इसलिए बर्तन साफ़ करने ज़रूरी हैं। इसे सिरका, नमक और नींबू से रगड़कर साफ़ करना चाहिए।

प्रश्न 4.
एल्यूमीनियम को कैसे साफ़ करोगे?
उत्तर–
सोडा या क्षारीय पदार्थों से एल्यूमीनियम धातु के बर्तन काले पड़ जाते हैं, अत: इनकी सफ़ाई करने में क्षारीय पदार्थों का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। इन बर्तनों को गर्म पानी में साबुन का घोल बनाकर साफ़ करना चाहिए। यदि बर्तन बहुत गन्दा हो गया है तो इसे उबलते हुए पानी में सिरके की कुछ बूंदें अथवा नींबू डालकर उसमें भिगो दिया जाना चाहिए। गीले बर्तनों को सूखे कपड़े से अवश्य पोंछकर रखना चाहिए।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
सख्त और नरम धातएँ किसको कहते हैं?
उत्तर-
सख़्त धातुएँ—ये वे धातुएँ हैं जो जल्दी नहीं घिसती, जैसे-लोहा, पीतल आदि।
नरम धातुएँ-ये धातुएँ नरम होने के कारण जल्दी घिस जाती हैं, जैसे-सोना, ताँबा और टिन।

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प्रश्न 2.
अगर पीतल गन्दा हो तो कैसे साफ़ करोगे?
उत्तर-
पीतल की वस्तुओं पर अति शीघ्र दाग़ पड़ जाते हैं। इनको नींबू व नमक से रगड़कर साफ़ किया जाता है। तत्पश्चात् गर्म पानी से धोकर पोंछ लेना चाहिए। इमली या आम की खटाई से भी पीतल के बर्तन चमकाये जाते हैं। सजावट की वस्तुओं को चमकाने के लिए बने बनाये ब्रासो जैसे पॉलिश बहुत प्रभावशाली होते हैं।
खट्टी वस्तुओं के रखने से पीतल के बर्तनों पर हरे-हरे दाग़ बन जाते हैं। ऐसे हरे दागों को अमोनिया से छुड़ाया जाता है।

प्रश्न 3.
रोशनदान, खिड़कियाँ और अलमारियों के शीशे कैसे साफ़ करोगे ?
उत्तर-
शीशे को थोड़ा नमी युक्त कर लेना चाहिए। इसके बाद दोनों हाथों में अख़बार के कागज़ लेकर शीशे को रगड़ना चाहिए। अगर शीशा अधिक गन्दा हो तो चाक के चूरे में थोड़ा पानी मिलाकर शीशे के दोनों तरफ़ लगाकर थोड़ा सूख जाने के बाद अख़बार की कागज़ से रगड़ना चाहिए। शीशे को चमकाने के लिए साफ़ करने के बाद थोड़ा मैथिलेटिड स्पिरिट रूई के टुकड़े में डालकर शीशे पर लगा देना चाहिए। कई बार खिड़कियों या रोशनदान के शीशों पर मक्खियाँ बैठ जाती हैं और उन्हें गन्दा कर देती हैं। इसके लिए पैराफिन या मिट्टी का तेल इस्तेमाल करना चाहिए।

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प्रश्न 4.
धातुएँ साफ़ करने के लिए क्या-क्या सामान चाहिएँ ?
उत्तर-
धातुएँ साफ़ करने के लिए निम्नलिखित सामान चाहिएँ

  1. साबुन,
  2. चूना,
  3. मिट्टी या राख,
  4. नींबू,
  5. इमली,
  6. गर्म पानी का घोल,
  7. सिरका तथा नमक,
  8. ब्रासो आदि।

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अति छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
स्टील के बर्तनों को किस से साफ़ किया जाता है ?
उत्तर-
साबुन के घोल के साथ पानी की सहायता से।

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प्रश्न 2.
लोहे के सामान को कैसे साफ़ करते हैं ?
उत्तर-
मिट्टी या राख से रगड़कर।

प्रश्न 3.
एल्यूमीनियम के सामान को साफ़ करने के लिए किन पदार्थों का प्रयोग किया जाता है ?
उत्तर-
नींबू के रस तथा पानी का।

छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
पीतल की वस्तुओं को किन-किन चीज़ों से साफ़ किया जा सकता
उत्तर-

  1. राख व मिट्टी (रोज़ उपयोग किए जाने वाले बर्तनों के लिए)
  2. इमली, नींबू (अधिक गन्दे बर्तनों के लिए)
  3. गर्म पानी का घोल (सजावटी वस्तुओं के लिए)
  4. सिरका तथा नमक (दाग़ धब्बे पड़े हों तो)
  5. ब्रासो (चमकाने के लिए)।

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प्रश्न 2.
धातु से बनी वस्तुओं को साफ़ करने के लिए किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ?
उत्तर-

  1. धातु की वस्तु से चिकनाई दूर करने के लिए सर्वप्रथम इसे गर्म साबुन वाले घोल से धोना चाहिए।
  2. सफ़ाई करते समय नीचे अख़बार का कागज़ बिछा लेना चाहिए जिससे फ़र्श या मेज़ गन्दा न हो।
  3. इसके पश्चात् इसे स्वच्छ गर्म पानी से अच्छी प्रकार धो लेना चाहिए।
  4. वस्तु पर पॉलिश करने से पहले इसे भली प्रकार सुखा लेना चाहिए।
  5. अन्त में इसे नर्म, सूखे कपड़े से पॉलिश लगाकर रगड़कर चमका लेना चाहिए।
  6. खाने के प्रयोग में लाये जाने वाले सभी बर्तनों को साफ़ करने के पश्चात् साफ़ पानी से अच्छी तरह धोकर सुखा लेना चाहिए।
  7. ध्यान रहे कि इन पर किसी भी प्रकार की पॉलिश नहीं लगाई जानी चाहिए, विशेषकर इनकी भीतरी सतहों पर जोकि खाने के सीधे सम्पर्क में आती हैं।
  8. ऐसा कोई पदार्थ जिससे धातुओं को हानि पहुँचती हो, प्रयोग में नहीं लाना चाहिए।

प्रश्न 3.
तामचीनी को कैसे साफ करोगे ?
उत्तर-
तामचीनी साफ़ करने के लिए छोटा-सा बोरी का टुकड़ा लेना चाहिए। इसमें राख और साबुन मिलाकर टुकड़े की मदद से बर्तन को रगड़ना चाहिए। अगर बर्तन में भोजन सड़ गया हो तो अण्डे का छिलका रगड़ना चाहिए, इससे खूब चमक आती है और बर्तन के दाग़ साफ़ हो जाते हैं।

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बड़े उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
घर में प्रयोग किए जाने वाले धातु के सामान की सफ़ाई का वर्णन करो।
उत्तर-
हमारे दैनिक जीवन में विभिन्न धातुओं के प्रति बर्तन तथा वस्तु प्रयोग में लाई जाती हैं, अतएव इनकी सफ़ाई की जानकारी का ज्ञान होना भी आवश्यक है।
कुछ धातुओं पर शीघ्र ही खरोंच पड़ जाती है, उन्हें कोमल धातु कह सकते हैं, कुछ धातु कठोर होते हैं, उन पर शीघ्र खरोंच नहीं पड़ती।

  1. सफ़ाई से पूर्व वस्तु पर पड़ी चिकनाई व धूल को गर्म पानी व साबुन के घोल से धो लेना चाहिए।
  2. पॉलिश लगाने से पूर्व वस्तु को भली-भाँति सुखा लेना चाहिए।
  3. पॉलिश लगाने के बाद वस्तु को थोड़ी देर सूखने देना चाहिए, फिर मुलायम कपड़े से रगड़कर चमकाना चाहिए।

चाँदी-हवा के सम्पर्क से चाँदी का सामान काला हो जाता है इसीलिए इसे समय समय पर साफ़ किया जाना चाहिए। इसके लिए एक किलो पानी में एक छोटा चम्मच नमक व एक चम्मच सोडा मिलाकर एक साफ़ बर्तन में पांच मिनट तक उबालकर वस्तु को उसमें डाल दें। वस्तु निखर जायेगी, फिर वस्तु को निकालकर उसे स्वच्छ पानी व साबुन से धोकर मुलायम व सूखे कपड़े से पोंछ लेना चाहिए।

चाँदी के सामान को सूखे चूने में दो तीन घंटे रखकर फिर कूची से झाड़-पोंछकर भी चमकाया जाता है। चाँदी की वस्तु को आधे घंटे तक खट्टे दूध में भिगोकर उसके बाद उसे साबुन से धोकर पोंछ लेना चाहिए। चाँदी के बर्तन उब या बथुए के पानी से भी साफ़ किए जाते हैं।

ताँबा-तांबे की वस्तुएँ चूने की सफ़ेदी से साफ़ की जाती हैं। सफेद छने हुए चूने के पाउडर को भिगोकर एक कपड़े में लगाकर गन्दे ताँबे के बर्तन में फेरना चाहिए फिर उसे कपड़े से रगड़कर धो लेना चाहिए। चूना, सोडा व सिरका मिलाकर तो बहुत गन्दे ताँबे के बर्तन भी साफ़ किए जा सकते हैं।

लोहा-नमी के कारण लोहे पर बहुत जल्दी जंग लग जाती है। चूने से जंग को साफ़ करना चाहिए। कड़ाही, बाल्टी आदि पर लगी जंग को मिट्टी, बालू, राख या ईंट के टुकड़े से रगड़कर साफ़ किया जाता है। जंग छुड़ाने के बाद बर्तन को भली-भाँति धो-पोंछकर सरसों या मिट्टी का तेल लगाकर रख देना चाहिए। लोहे के बर्तन में पानी का अंश नहीं रहने देना चाहिए। बर्तन को खड़ा करके रखने से सतह पर पानी का अंश नहीं रहता।

एक शब्द में उत्तर दें

प्रश्न 1.
धातुएँ कितने प्रकार की हैं?
उत्तर-
दो।

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प्रश्न 2.
किसी कठोर धातु का नाम लिखें।
उत्तर-
लोहा।

प्रश्न 3.
सोना ……………. धातु है।
उत्तर-
नर्म।

प्रश्न 4.
सोडा या क्षारीय पदार्थों से एल्यूमीनियम धातु को क्या होता है?
उत्तर-
काली पड़ जाती है।

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प्रश्न 5.
पीतल की वस्तुओं को साफ़ करने के लिए बाज़ार से क्या मिलता है?
उत्तर-
ब्रासो।

प्रश्न 6.
नमी होने से लोहे को क्या हानि होती है?
उत्तर-
जंग लग जाता है।

प्रश्न 7.
चाँदी के बर्तन उबले आलू या …………… के पानी से भी साफ़ किए जाते हैं।
उत्तर-
बथुए।

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शीशा और धातुओं की सफ़ाई PSEB 7th Class Home Science Notes

  • धातुएँ दो प्रकार की होती हैं-(1) सख़्ज़ या कठोर धातुएँ, (2) नरम या मुलायम धातुएँ।
  • कठोर धातुएँ-ये वे धातुएँ हैं जो जल्दी नहीं घिसती, जैसे-लोहा, पीतल, स्टील आदि।
  • नरम धातुएँ ये धातुएँ नरम होने के कारण जल्दी घिस जाती हैं, जैसे- सोना, चाँदी, ताँबा और टिन।
  • स्टील और शीशे के बर्तन विम या किसी अन्य साफ़ करने वाले पाउडर से साफ़ करने चाहिएं और बाद में गर्म पानी से धोकर पोंछ लेने चाहिएं।
  • शीशे को चमकाने के लिए साफ़ करने के बाद थोड़ा मैथिलेटिड स्पिरिट रूई के टुकड़े में डालकर शीशे पर लगाना चाहिए।
  • स्टोव और पीतल की सजावट वाली चीज़ों को ब्रॉसो से साफ करना चाहिए, लेकिन खाने वाले बर्तनों को ब्रासो से साफ़ नहीं करना चाहिए।
  • ताँबे वाले बर्तन को खूब गर्म पानी से धोना चाहिए। तामचीनी या अनैमल में लगे चिकनाई और चाय के दाग़ छुड़ाने के लिए नमक का इस्तेमाल करना चाहिए।
  • धातुओं को साफ़ करने के लिए साबुन, राख, विम, गर्म पानी, चाक, झाँवा, अण्डे के छिलकों की जरूरत होती है।

PSEB 11th Class Geography Solutions Chapter 3(v) समुद्र के अनावृत्तिकरण कार्य

Punjab State Board PSEB 11th Class Geography Book Solutions Chapter 3(v) समुद्र के अनावृत्तिकरण कार्य Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 11 Geography Chapter 3(v) समुद्र के अनावृत्तिकरण कार्य

PSEB 11th Class Geography Guide समुद्र के अनावृत्तिकरण कार्य Textbook Questions and Answers

1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 1 या 2 शब्दों में दें-

प्रश्न (क)
लहरों के ऊँचे भाग को क्या कहते हैं ?
उत्तर-
क्रेस्ट (Crest)।

प्रश्न (ख)
भारत के समुद्री तट की लंबाई क्या है ?
उत्तर-
7516 कि०मी०।

प्रश्न (ग)
विश्व के दूसरे नंबर पर बड़ी बीच कौन-सी है ?
उत्तर-
मरीना बीच (चेन्नई)।

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प्रश्न (घ)
जब दो स्पिट आपस में मिल जाते हैं, तो इसको क्या कहा जाता है ?
उत्तर-
लूपड बार (Looped Bar)।

2. निम्नलिखित पर नोट लिखें-

(क) स्पिट (Spit)
(ख) समुद्री बीच (Sea Beach)
(ग) समुद्री गुफा (Sea Caves)
(घ) हाईड्रोलिक एक्शन (Hydrolic Action)।
उत्तर-
(क) स्पिट-रेत की वह श्रेणी जिसका एक सिरा तट से जुड़ा होता है और दूसरा सिरा समुद्र में डूबा होता है।
(ख) समुद्री बीच-तट के साथ मलबे से बनी श्रेणी को बीच कहते हैं।
(ग) समुद्री गुफा-सागर की लहरों के अपरदन से तट पर चट्टानें टूटकर गुफा का निर्माण करती हैं।
(घ) हाईड्रोलिक एक्शन-जब जल-दबाव के कारण चट्टानें टूटती हैं, तो उन्हें जल-दबाव क्रिया कहते हैं।

3. निम्नलिखित में अंतर स्पष्ट करो-

(i) क्रेस्ट (Crest) और ट्रफ (Trough)
(ii) रेत बार (Sand Bar) और लैगून (lagoon)
उत्तर-
क्रेस्ट (Crest)-
(क) लहर के सबसे ऊँचे उठे हुए भाग को क्रेस्ट (Crest) कहते हैं।
(ख) हवा की शक्ति से लहरों का पानी ऊपर उठ जाता है।

ट्रफ (Trough)-
(क) लहर के सबसे नीचे दबे हुए भाग को ट्रफ (Trough) कहते हैं।
(ख) हवा की शक्ति कम होने से लहरों का पानी नीचे दब जाता है।

(ii) रेत बार (Sand Bar) – जब लहरें मलबे को तट के समानांतर एक श्रेणी के रूप में जमा कर देती हैं, तो इसे रेत बार कहते हैं।
लैगून (Lagoon) – कई तटों पर रेत की श्रेणियों के पीछे दलदले क्षेत्र बन जाते हैं, इनके मध्य पानी की एक झील बनती है, जिसे लैगून कहते हैं।

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4. निम्नलिखित के उत्तर विस्तार सहित दो :

प्रश्न (क)
समुद्री जल की खुर्चन (अपघर्षण) की क्रिया (Erosional work) क्या है और इससे बनने वाली धरातलीय आकृतियों की व्याख्या करें।
उत्तर-
समुद्री तरंगों के अपरदन द्वारा उत्पन्न भू-आकृतियाँ (Landforms Produced by Sea Wave Erosion)-

समुद्री तरंगें अपरदन द्वारा तटों पर नीचे लिखी भू-आकृतियों की रचना करती हैं-

1. खड़ी चट्टान/समुद्री क्लिफ (Sea Cliffs)—समुद्री लहरें सबसे अधिक प्रभाव तट पर स्थित चट्टानों के निचले भाग पर डालती हैं। नीचे से चट्टानें कट जाती हैं और एक नोच (Notch) बन जाती है। तरंगों के निरंतर हमले के कारण नोच गहरी होती जाती है जिससे ऊपर का भाग आगे को झुका हुआ लगने लगता है। कुछ समय के बाद यह झुका हुआ भाग अपने ही भार के कारण टूटकर नीचे गिर जाता है। इसके फलस्वरूप नोच के ऊपरी भाग फिर से खड़ी ढलान वाले हो जाते हैं। तट पर ऐसी खड़ी ढलान को खड़ी चट्टान/समुद्री क्लिफ कहते हैं।

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2. लहर-कटा चबूतरा (Wave-cut Platform or Bench)—कंधियों अथवा क्लिफों और नोचों (Notches) पर तरंगों के लगातार हमले के कारण वे कटकर स्थल की ओर पीछे को हटते रहते हैं। इसके परिणामस्वरूप अगले भाग में बनी एक नोच का विस्तार होता रहता है, जिसे लहर-कटा चबूतरा (Wave-cut Platform) कहते हैं।

3. समुद्री गुफाएँ (Sea Caves)-कमज़ोर चट्टानों वाली नोचों (Notches) में तरंगों के जल-दबाव (Hydraulic Pressure) के कारण उनमें दरारें उत्पन्न हो जाती हैं। तरंगें इन जोड़ों और दरारों के द्वारा प्रभाव डालकर उन्हें चौड़ा कर देती हैं। तरंगों के अपरदन के समय इन दरारों से भीतरी हवा दबाई जाती है और जब ये तरंगें समुद्र की ओर मुडती हैं तो जल के दबाव से मुक्त यह भीतरी हवा फैलती है और चट्टानों पर दबाव डालती है। इस क्रिया के निरंतर होते रहने से चट्टानें टूटती रहती हैं और कुछ समय के बाद गहरा खड्डा बन जाता है। धीरेधीरे यह खड्ड, गहरी गुफा का रूप धारण कर लेता है। दो पड़ोसी गुफाओं के बीच की दीवार टूट जाने पर
महराब (Arch) बन जाती है, जिसे प्राकृतिक पुल (Natural Bridge) कहते हैं।

4. समुद्री किनारे के सुराख (Spout Horns or Blow Holes)-तट पर हमले के समय तरंगें गुफाओं के मुँह को जल से बंद कर देती हैं, जिससे गुफाओं की अंदर की वायु अंदर ही बंद हो जाती है। यदि गुफा की छत कमज़ोर हो, तो वह वायु उसको फाड़कर ऊपर सुराख कर देती है। इसे समुद्री किनारे के सुराख कहते हैं। यदि तरंगों के हमले के समय वायु सीटी बजाती हुई इन सुराखों से निकलती है, तो गुफा में भरा जल भी वायु के साथ फव्वारे के समान बाहर निकलता है, इसीलिए इसे टोंटीदार सुराख (Spouting horn) कहकर भी पुकारते हैं।

5. खाड़ियाँ (Bays)–जब किसी तट पर कोमल और कठोर चट्टानें लंब रूप में स्थित हों, तो कोमल चट्टानें (Soft Rocks) अंदर की ओर अधिक कट जाती हैं। इस प्रकार कोमल चट्टानों में खाड़ियाँ (Bays) बन जाती हैं।

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6. हैडलैंड या केप या अंतरीप (Headland or Cape)-तट की लंबवर्ती स्थिति में फैली एक कठोर चट्टान के दोनों तरफ से नर्म चट्टानों का अपरदन हो जाता है और वहाँ खाड़ियाँ बन जाती हैं और वह सख्त चट्टान समुद्र में बढ़ी हुई रह जाती है, जिसे अंतरीप कहते हैं।

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7. स्टैक (Stack)-जब महराब की छत तरंगों द्वारा अपरदित हो जाती है अथवा किसी अन्य कारण से टूटकर नष्ट हो जाती है तो मेहराब का अगला भाग पिछले भाग से स्तंभ के रूप में अलग खड़ा रह जाता है। इस स्तंभ को स्टैक कहते हैं। स्कॉटलैंड के उत्तर में ओरकनीज़ (Orkneys) टापूओं में Old man of Hoai इसका सर्वोत्तम उदाहरण है।

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वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Type Questions)

नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर 2-4 शब्दों में दें-

प्रश्न 1.
समुद्री जल की गतियाँ बताएँ।
उत्तर-
लहरें, धाराएँ और ज्वारभाटा।

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प्रश्न 2.
तट रेखा से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
जहाँ जल-मंडल, थल-मंडल और वायु-मंडल मिलते हों।

प्रश्न 3.
ब्रेकर से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
लहरों का वह भाग, जो तट से टकराता है।

प्रश्न 4.
सागरीय जल किन चट्टानों पर घुलनशील क्रिया करता है ?
उत्तर-
चूने का पत्थर, डोलोमाइट और चॉक।

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प्रश्न 5.
क्लिफ किसे कहते हैं ?
उत्तर-
तट पर खड़ी ढलान वाली चट्टान।

प्रश्न 6.
गुफ़ा से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
क्लिफ़ के नीचे बने कटाव।

प्रश्न 7.
गुफ़ा कैसे बनती है ?
उत्तर-
Notch के बड़ा हो जाने पर।

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प्रश्न 8.
स्टैक कैसे बनते हैं ?
उत्तर-
कठोर चट्टानों के बचे-खुचे भाग।

प्रश्न 9.
भारत के पूर्वी तट पर किन्हीं दो लैगून झीलों के नाम बताएँ।
उत्तर-
चिलका झील और पुलीकट झील।

प्रश्न 10.
भारत के पश्चिमी तट पर किसी एक लैगून झील का नाम बताएँ।
उत्तर-
वेंबनाद झील।

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अति लघु उत्तरात्मक प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर 2-3 वाक्यों में दें-

प्रश्न 1.
सागरीय लहरों के तीन प्रकार बताएँ।
उत्तर-

  1. ब्रेकर
  2. स्वैश
  3. कवाश।

प्रश्न 2.
Under Tow से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
तट से टकराकर मुड़ती हुई लहर के नीचे के जल को Under Tow कहते हैं।

प्रश्न 3.
लहरों के अपरदन की क्रियाएँ बताएँ।
उत्तर-

  • जलीय दबाव क्रिया
  • घर्षण क्रिया
  • सहघर्षण क्रिया
  • घुलनशील क्रिया।

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प्रश्न 4.
समुद्री क्लिफ (Cliff) से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
समुद्र तट पर खड़े ढलान वाले खंड को Cliff कहते हैं।

प्रश्न 5.
सागरीय लहरों का अपरदन किन तत्त्वों पर निर्भर करता है ?
उत्तर-

  • तरंग की ऊँचाई
  • चट्टानों का झुकाव
  • चट्टानों की रचना
  • लहरों की दिशा।

प्रश्न 6.
समुद्री किनारे के सुराख (Blow-hole) से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
तट के निकट गुफाओं की छत पर जल सुराख कर देता है, जिसमें से वायु गुज़रती है, उसे समुद्री किनारे के सुराख कहते हैं।

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प्रश्न 7.
स्टैक से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
सागरीय तट पर कठोर चट्टानों के बचे-खुचे भाग को स्टैक कहते हैं।

प्रश्न 8.
बीच किसे कहते हैं ?
उत्तर-
तट के साथ-साथ मलबे के निक्षेप से बनी श्रेणियों को बीच कहते हैं।

प्रश्न 9.
रोधक किसे कहते हैं ?
उत्तर-
तट के समानांतर रेत की श्रेणी, जो रोकने का काम करती है, रोधक कहलाती है।

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प्रश्न 10.
लैगून से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
रोधक और तट के बीच बनी झील को लैगून कहते हैं।

प्रश्न 11.
स्पिट से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
स्पिट रेत की एक श्रेणी होती है, जिसका एक सिरा तट से जुड़ा होता है और दूसरा सिरा खुले सागर में होता है।

प्रश्न 12.
मेहराब कैसे बनती है ?
उत्तर-
दो गुफ़ाओं के मिलने से छत एक ढक्कन के समान खड़ी रहती है, जिसे मेहराब (Arch) कहते हैं।

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प्रश्न 13.
तमबोलो से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
जब कोई रेत, रोधक तट को किसी वायु के साथ जोड़ती है, उसे तमबोलो कहते हैं।

लघु उत्तरात्मक प्रश्न: (Short Answer Type Questions)

नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर 60-80 शब्दों में दें-

प्रश्न 1.
लहरों के द्वारा अपरदन के अलग-अलग रूप बताएँ।
उत्तर-
अपरदन (Erosion)-तट पर तोड़-फोड़ का काम आमतौर पर सर्फ (Surf), लहरों या तूफ़ानी लहरों द्वारा ही होता है। समुद्री लहरों द्वारा अपरदन अधिक-से-अधिक 200 मीटर की गहराई तक होता है। यह अपरदन चार प्रकार से होता है-

  1. जल-दबाव क्रिया (Water Pressure)-सुराखों में जल के दबाव से चट्टानें टूटने और बिखरने लगती हैं।
  2. अपघर्षण (Abrasion)-बड़े-बड़े पत्थर चट्टानों से टकराकर उन्हें तोड़ते रहते हैं।
  3. टूट-फूट (Attrition)-पत्थरों के टुकड़े आपस में टकराकर टूटते रहते हैं।
  4. घुलनशील क्रिया (Solution)—समुद्री जल चूने वाली चट्टानों को घोलकर अलग कर देता है।

प्रश्न 2.
लहरों द्वारा अपरदन किन तत्त्वों पर निर्भर करता है ?
उत्तर-
लहरों द्वारा अपरदन कई तत्त्वों पर निर्भर करता है- .

  1. चट्टानों की प्रकृति (Nature of Rocks)—तट पर स्थित कठोर चट्टानों की तुलना में कमज़ोर चट्टानें जल्दी ही टूट जाती हैं।
  2. लहरों का वेग और ऊँचाई (Speed and Height of Waves)-बड़ी और ऊँची लहरें अधिक कटाव करती हैं।
  3. तट के सागर की ओर ढलान (Slope) और ऊँचाई-कम ढलान वाले मैदानी तटों पर कटाव कम होता है।
  4. चट्टानों में सुराख (holes) और दरारों (Faults) का होना- यदि तटों की चट्टानों में सुराख और दरारें हों, तो तट का कटाव आसानी से होता है।
  5. जल की गहराई (Depth of water)-लहरें 30 फुट की गहराई तक ही कटाव करती हैं।

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प्रश्न 3.
समुद्री गुफाएँ कैसे बनती हैं ?
उत्तर-
समुद्री गुफाएँ (Sea Caves)-आधार की कोमल चट्टानों के टूटने या घुल जाने पर तट के पास खोखले स्थान बन जाते हैं। लहरों द्वारा हवा के बार-बार घूमने और निकलने की क्रिया से ये स्थान चौड़े हो जाते हैं और गुफाएँ बन जाती हैं। इन गुफाओं की ऊपरी छत कठोर चट्टानों से बनी होती है। दो पड़ोसी गुफ़ाओं के बीच की दीवार टूट जाने से मेहराब (Arch) बन जाती है। इसे प्राकृतिक पुल भी कहते हैं।

प्रश्न 4.
भू-जीभ (Spit) और भित्ती (Bar) में अंतर बताएँ।
उत्तर –
भू-जीभ (Spit)-

  1. मलबे के निक्षेप से बनी श्रेणी को भू-जीभ कहते हैं, जिसका एक सिरा तट से जुड़ा होता है और दूसरा सिरा खुले समुद्र में डूबा होता है।
  2. इसकी शक्ल एक जीभ के समान होती है।
  3. यह पानी में डूबी होती है और फिर से हुक (Hook) भी बन जाती है।

भित्ती (Bar)-

  1. लहरों द्वारा तट या खाड़ी के समानांतर निक्षेप से रेत की बनी ऊँची श्रेणी या रोक को भित्ती कहते हैं।
  2. यह रोक तट के समानांतर होती है।
  3. यह पानी से बाहर बनती है और इसके पीछे एक लैगून झील बन जाती है।

PSEB 11th Class Geography Solutions Chapter 3(v) समुद्र के अनावृत्तिकरण कार्य

निबंधात्मक प्रश्न (Essay Type Questions)

नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर 150-250 शब्दों में दें-

प्रश्न 1.
तरंगों के प्रकारों और उनके अपरदन कार्यों का वर्णन करें।
उत्तर-
समुद्र का अपरदन, परिवहन और निक्षेपण कार्य, इसके जल में उत्पन्न होने वाली तीन गतियों – तरंगों या लहरों, ज्वारभाटा और जल-धाराओं द्वारा होता है। इनमें से तरंगें सबसे महत्त्वपूर्ण हैं।

समुद्री तरंगें (Sea Waves)- पवनों के प्रभाव से सागरीय जल के तल के ऊँचा-नीचा होने को तरंग (Waves) कहते हैं। तरंग में जल अपने मूल स्थान से आगे नहीं बढ़ता, बल्कि अपने स्थान पर ही ऊपर-नीचे होता रहता है। महासागरों में पवनें बड़ी तेज़ी से चलती हैं। इस कारण कई बार 5 से 10 मीटर तक ऊँची तरंगें उठती हैं।

समुद्री तरंगों द्वारा अपरदन को नियंत्रित करने वाले कारक (Factors controlling the Erosion by Sea Waves)-

तरंगों द्वारा अपरदन सभी तटों पर एक समान नहीं होता, क्योंकि इनकी परिस्थितियाँ अलग-अलग स्थानों पर भिन्नभिन्न होती हैं। तरंगों द्वारा अपरदन को नीचे लिखे कारक प्रभावित करते हैं-

1. तरंगों की ऊँचाई (Height of the Waves) तरंगों की ऊँचाई के अनुसार ही तट पर जल आता है। ऊँची तरंगें तट पर ही अधिक जल फेंकती हैं। यह जल अधिक मात्रा में कंकड़, रेत आदि को प्रभावित करता है और तटों से टकराकर अधिक अपरदन करता है।

2. तटीय चट्टानों का झुकाव (Inclination of Coastal Rocks)—जिन तटों पर चट्टानों की परतों का – झुकाव समुद्र की ओर होता है, उन परतों के जोड़ तरंगों के सामने होते हैं, जिसके कारण उनका अपरदन आसान हो जाता है।

3. तटीय चट्टानों की संरचना (Structure of Coastal Rocks) चट्टानों की संरचना अपरदन को बहुत प्रभावित करती है। नर्म चट्टानें जल्दी टूटती हैं। कार्स्ट तटों पर तरंगें तेज़ गति से अपरदन करती हैं।

4. तरंगों की दिशा (Direction of Waves)-तटीय चट्टानों पर सीधी आकर टकराने वाली तरंगें अधिक अपरदन करती हैं।

5. वनस्पति फैलाव (Vegetation Cover)-तटों पर उगे पेड़-पौधों की जड़ें चट्टानों को खोखला कर देती हैं, जिस कारण तरंगों द्वारा तटों पर अपरदन आसान हो जाता है।

6. तरंगों की गहराई (Depth of Waves) तरंगों का अधिक कटाव 10 मीटर की गहराई तक ही होता है।

समुद्री लहरें (Sea Waves)-

समुद्री लहरों का काम समुद्री तटों तक ही सीमित रहता है। हवा के प्रभाव से समुद्र के पानी में लहरें पैदा होती हैं। हवा की शक्ति से समुद्र के पानी का कुछ भाग ऊपर उठ आता है और कुछ भाग नीचे दब जाता है। सबसे ऊँचे उठे हुए भाग को Crest और सबसे नीचे दबे भाग को ट्रफ (Trough) कहते हैं। महासागरों में लहरों की ऊँचाई 10 मीटर तक होती है, पर तूफान के समय लहरों की ऊँचाई 20 मीटर तक ऊँची हो जाती है।

लहरों के प्रकार (Types of Waves) –
1. ब्रेकर (Breaker)-समुद्र तट पर लहरों का उच्च भाग टूटकर तट की ओर आगे बढ़ता है। इसे ब्रेकर या सर्फ (Surf) या स्वैश (Swash) कहते हैं।

2. बैकवॉश (Backwash)-तट से टकराकर पानी वापिस जाती हुई लहर के नीचे-नीचे चलता है। इस वापिस जाते हुए जल को (Under Tow) या उतार (backwash) कहते हैं।

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समुद्री लहरों का कार्य (Work of Sea Waves)-दूसरे साधनों के समान लहरें भी अपरदन, परिवहन और निक्षेप का कार्य करती हैं।
अपरदन (Erosion)-तट पर तोड़-फोड़ का काम आमतौर पर सर्फ (Surf) लहरों या तूफानी लहरों द्वारा ही होता है। समुद्री लहरों द्वारा अपरदन अधिक-से-अधिक 200 मीटर की गहराई तक होता है। यह अपरदन चार प्रकार से होता है –

  1. जल-दबाव क्रिया (Water Pressure)-सुराखों में जल के दबाव से चट्टानें टूटने और बिखरने लगती हैं।
  2. अपघर्षण (Abrasion)-बड़े-बड़े पत्थर चट्टानों से टकराकर उन्हें तोड़ते रहते हैं।
  3. तोड़-फोड़ (Attrition)—पत्थरों के टुकड़े आपस में टकराकर टूटते रहते हैं।
  4. घुलनशील क्रिया (Solution)-समुद्री जल चूने वाली चट्टानों को घोलकर अलग कर देता है।

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प्रश्न 2.
समुद्री लहरों के निक्षेप से बनने वाली भू-आकृतियों का वर्णन करें।
उत्तर-
समुद्री तरंगों के निक्षेप द्वारा उत्पन्न भू-आकृतियां (Landforms Produced by Deposition of Sea Waves) – समुद्री तरंगों के निक्षेप द्वारा नीचे लिखी भू-आकृतियों का निर्माण होता है-

1. तरंग-निर्मित चबूतरा (Wave-built Platform)-तटों का अपरदन करके तरंगें, जिन पदार्थों को प्राप्त करती हैं, उनमें से हल्के पदार्थों को दूर ले जाकर पानी में डूबे हुए ढलान वाले तट पर निक्षेप कर देती हैं, जिससे वह भाग एक समतल चबूतरे का रूप धारण कर लेता है। यहाँ निक्षेप के कारण सागर गहरा हो जाता है। कभी-कभी यह चबूतरा पानी से बाहर भी दिखाई देने लग जाता है। इस चबूतरे को तरंग-निर्मित चबूतरा कहते हैं।

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2. बीच (Beach)—सागरीय तरंगों द्वारा अपरदन के भारी पदार्थों; जैसे-पत्थर, कंकड़ आदि को तट के पास ही अधिक मात्रा में ढेरी कर दिया जाता है, जिससे यह भाग थोड़ा ऊँचा और ढलान वाला हो जाता है। तट के इस क्षेत्र को बीच कहा जाता है। यहाँ पर ऊँची तरंगों के समय ही जल पहुँचता है। ये प्रदेश बड़े ज्वार (High Tides) और छोटे ज्वार (Low Tides) के मध्य में स्थित होते हैं। तट के पास ये ऊँचे प्रदेश खेलों के उत्तम स्थल बन जाते हैं, जैसे-मुंबई में जुहू बीच और चेन्नई में मरीना बीच।

3. अपतटीय रेत भित्तियाँ (Offshore Sand-bars) तरंगें तट से अपरदित किए पदार्थ विशेष रूप से रेत को तट के समानांतर पानी में डूबे भाग पर एक श्रेणी के रूप में ढेरी कर देती हैं। रेत की इस श्रेणी को अपतटीय रेत भित्ती कहते हैं। इसका ऊपरी भाग पानी के तल से भी ऊपर दिखाई देता है। ये रोधक का काम करती हैं।

4. भू-जीभ या स्पिट (Spits) – कभी-कभी तरंगों द्वारा बनाई किसी रेत भित्ती का एक सिरा स्थल से जुड़ा होता है और दूसरा समुद्र की ओर बढ़ा रहता है। उसे भू-जीभ या स्पिट कहते हैं। कभी-कभी इसका समुद्र की ओर का सिरा नुकीला हो जाता है, तो इसे कस्प (cusp) कहते हैं।

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5. हुक (Hook)-स्पिट का सिरा कभी-कभी समुद्री धाराओं या फिर तिरछी तरंगों के प्रभाव के कारण तट की ओर मुड़ जाता है। इसे हुक (Hook) कहते हैं।

6. संयोजक भित्ती या तमबोलो (Connecting bar or Tombolo)—कभी-कभी स्पिट द्वारा दो द्वीप या मुख्य स्थल किसी टापू के साथ जुड़ जाते हैं। ऐसी भित्ती को संयोजक भित्ती कहते हैं । इटली में इन्हें तमबोलो का नाम दिया जाता है। यदि स्पिट का बाहरी सिरा संयोजक भित्ती का रूप ग्रहण करते-करते तट की ओर मुड़कर उसके साथ आकर जुड़ जाए तो उसे Looped bar के नाम से पुकारा जाता है।

7. लैगून झीलें (Lagoons)—कई तटों पर रेत की श्रेणियों के पीछे झीलें बन जाती हैं, जिन्हें लैगून कहते हैं। भारत के पूर्वी तट पर चिल्का (Chilka) और पुलीकट (Pulikat) तथा केरल के तट पर वेबनाद झील. इसके उदाहरण हैं।

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PSEB 6th Class Computer Science Syllabus

Time: 3 Hours

Written: 50 Marks
C.C.E.: 10 Marks
Practical: 40 Marks
Total: 100 Marks

Theory Exam

Chapter 1 Typing Tutor
Touch typing, Position of the Fingers on Keyboard, Numeric Keypad, Important keys on Keyboard, Typing in Punjabi using Anmol Lipi Font, Tips to improve Typing Speed, Proper Posture, Suggestions for Repetitive Stress Injuries during Continuous Typing.

Chapter 2 Windows Explorer
Windows Explorer, Opening Windows Explorer, Parts of Windows Explorer, Windows Explorer Views, Working with Files and Folders, Personalization of Desktop.

Chapter 3 Microsoft Word (Part-I)
Introduction, What is Word Processing?, Features of Word Processing Software, Different Word Processing Software, MS Word, Creating New Document using MS Word, Saving a New/Existing Document.

Chapter 4 Microsoft Word (Part-II)
Selection of Text, Home Tab, Undo and Redo Commands, Insert Tab.

Chapter 5 Microsoft Word (Part-III)
Format Tab (Picture Tools), Page Layout Tab,. Review Tab, Printing Documents.

Chapter 6 Microsoft Word (Part-IV)
What is Table?, Creating a Table, Entering Data in the Table, Modifying a Table, Properties of a Table, Splitting Cells, Merging Cells, Splitting Table.

Chapter 7 Introduction to Multimedia
Components of Multimedia, Requirement for Multimedia, File Formats for Multimedia, Multimedia Presentation, Applications of Multimedia.

Chapter 8 Storage Devices
What is Memory?, Usage of Memory, Type of Memory.

PSEB 12th Class Political Science Book Solutions Guide in Punjabi English Medium

Punjab State Board Syllabus PSEB 12th Class Political Science Book Solutions Guide Pdf in English Medium and Punjabi Medium are part of PSEB Solutions for Class 12.

PSEB 12th Class Political Science Guide | Political Science Guide for Class 12 PSEB

Political Science Guide for Class 12 PSEB | PSEB 12th Class Political Science Book Solutions

PSEB 12th Class Political Science Book Solutions in English Medium

12th Class Political Science Guide PSEB Part A Political Theory

Political Science Guide for Class 12 PSEB Part B Indian Political System

PSEB 12th Class Political Science Book Solutions in Hindi Medium

PSEB 12th Class Political Science Syllabus

Part – A Political Theory

Unit I: Political System
(i) Meaning, Characteristics
(ii) Functions of Political System
(iii) David Easton’s input-output model
(iv) Difference between state and political system.

Unit II: Some major contemporary Political Theories
(i) Liberalism
(ii) Marxism
(iii) Political ideas of Mahatma Gandhi

Unit III: Bureaucracy (Civil Services)
(i) Meaning and importance
(ii) Recruitment
(iii) Role and functions
(iv) Distinction between Political Executive and Permanent Executive and their respective roles
Public opinion
(i) Role and importance of Public Opinion in a Democratic Polity.
(ii) Agencies for the formulation and expression of Public Opinion.

Unit IV: Party System
(i) Political parties – their functions and importance
(ii) Basis of formation of Political Parties
(iii) Types of Party System
(iv) The Role of Opposition
Interest and Pressure Groups
(i) Interest Groups and Pressure Groups – their nature, types, and functions
(ii) Ways of functioning of pressure groups

Part – B Indian Political System

Unit V: Indian Democracy
(i) Parliamentary Model
(ii) Problems and challenges to Indian Democracy & Future of Indian democracy
Democracy at Grassroot
(i) Concept of Panchayati Raj
(ii) Structure and Working of Panchayati Raj (73th Amendment)
(iii) Panchayati Raj-Some problems
(iv) Local Bodies in Urban Areas (74th Amendment)

Unit VI: Party System in India
(i) Nature of Party System in India
(ii) Study of major 4 national political parties (INC, BJP, CPI. CPI (M) their programs and policies. Regional Political Parties in Punjab (SAD, AAP)
(iii) Problems facing the Indian Party System
Electoral System
(i) Adult Franchise Direct and Indirect Elections And People’s Participation
(ii) Voting behaviour – meaning and determinants
(iii) Election Commission and Election Procedure

Unit VII: National Integration
(i) Problems of National Integration
(ii) Steps taken to promote National Integration
Foreign Policy of India
(i) Determinants of Foreign Policy
(ii) Basic principles of Foreign Policy
(iii) India and the United Nations, India, and SAARC

Unit VIII: India and the World
(i) India’s relations with her Neighbours: Nepal, Sri Lanka, China, Bangladesh and Pakistan
(ii) India’s relations with U.S.A. and Russia
(iii) India’s approach to major world issues: Human Rights, Disarmament and Globalization.