PSEB 12th Class हिन्दी साहित्य का इतिहास आधुनिक काल

Punjab State Board PSEB 12th Class Hindi Book Solutions हिन्दी साहित्य का इतिहास आधुनिक काल Questions and Answers, Notes.

PSEB 12th Class हिन्दी साहित्य का इतिहास आधुनिक काल

प्रश्न 1.
आधुनिक काल की परिस्थितियों पर संक्षेप में प्रकाश डालिए।
उत्तर:
आधुनिक काल के लगभग दो सौ वर्षों में हिन्दी-साहित्य समय के साथ-साथ बदलता रहा। इसी प्रकार परिस्थितियाँ भी बदलती रहीं। स्वतन्त्रता प्राप्ति से पूर्व की और स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद की परिस्थितियों में काफ़ी बड़ा अन्तर देखने को मिलता है। समूचे काल की परिस्थितियाँ निम्नलिखित हैं-
1. राजनीतिक परिस्थितियाँ भारत में व्यापार के लिए आई ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने धीरे-धीरे यहाँ का शासन अपने हाथों में ले लिया। सन् 1857 की जन क्रान्ति की असफलता से कम्पनी शासन, विक्टोरिया शासन में बदल गया और मुग़ल साम्राज्य का अन्त हो गया। सन् 1885 में इण्डियन नैशनल कांग्रेस की स्थापना हुई। सन् 1905 में बंगाल का विभाजन हुआ। अंग्रेजी शासन के विरुद्ध जनता का आक्रोश बढ़ने लगा। अप्रैल 1919 में जलियांवाले बाग़ के नरसंहार के बाद इस आक्रोश की आग में घी डालने का काम किया। लाला लाजपतराय की हत्या और सरदार भगत सिंह और उसके साथियों को फाँसी दिए जाने की घटनाओं ने स्वतन्त्रता प्राप्ति की भावना को और तेज़ कर दिया। अंग्रेजों ने फूट डालो और राज करो की नीति के अन्तर्गत हिन्दू-मुसलमानों को आपस में लड़वाने का काम किया। अंग्रेज़ों ने देश को जातियों में बाँटकर अपना स्वार्थ सिद्ध किया। महात्मा गाँधी के अहिंसावाद, क्रान्तिकारी सुभाष बाबू (नेता जी) और शहीदों के बलिदान के फलस्वरूप भारत को 15 अगस्त, 1947 में स्वतन्त्रता प्राप्त हुई किन्तु देश का एक बड़ा भाग पाकिस्तान के रूप में देश से काट दिया गया।

स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद सन् 1962 में चीन से तथा सन् 1965 और सन् 1971 में पाकिस्तान के साथ युद्ध लड़ने पड़े। भारत की राजनीति में पिछले बीस-पच्चीस वर्षों में अनेक बदलाव हुए। देश से एक पार्टी का राज समाप्त हो गया जिसका स्थान गठबन्धन सरकारों ने ले लिया। राजनीति के अपराधीकरण की समस्या भी खड़ी हुई जिसका दुष्परिणाम आम लोगों को भोगना पड़ रहा है। राजनीति में भ्रष्टाचार ने अपनी गहरी पैठ बना ली है। शायद कोई नेता, कोई राजनीतिक दल देश को इन समस्याओं से उबार सके।

2. सामाजिक परिस्थितियाँ- आधुनिक काल के आरम्भ में देश में अंग्रेज़ी शासन स्थापित हो जाने के कारण सामाजिक ढांचे में भारी फेर बदल हुआ। अंग्रेज़ी शासन ने गाँवों की स्वतन्त्र इकाई को समाप्त कर दिया। इसके परिणामस्वरूप देश में बेरोज़गारी बढ़ गई। भारतीय समाज में जातिवाद, धार्मिक पाखंड तथा अन्धविश्वास बढ़ने लगे। अंग्रेजी शासन के परिणामस्वरूप ईसाई धर्म का प्रचार ज़ोरों से होने लगा परिणामस्वरूप आर्य समाज, ब्रह्म समाज, महाराष्ट्र समाज आदि अनेक सुधारवादी संगठन सक्रिय हो उठे। इन सुधारवादी संगठनों ने बाल-विवाह, सती-प्रथा एवं दहेज-प्रथा का डट कर विरोध किया और विधवा-विवाह का समर्थन किया।

स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात् भारतीय समाज में अनेक परिवर्तन हुए। देश का औद्योगीकरण हुआ जिससे रोजगार के साधन बढ़े, शिक्षा का प्रसार हुआ, नारी को समान अधिकार दिए गए। किन्तु खेद का विषय है कि देश में बेरोजगारी, बाल-विवाह और दहेज प्रथा जैसी समस्याएँ आज तक भी सुलझ नहीं पाई हैं।

PSEB 12th Class हिन्दी साहित्य का इतिहास आधुनिक काल

3. धार्मिक परिस्थितियाँ- इस युग में सुधार आन्दोलनों एवं पाश्चात्य शिक्षा के प्रभाव और प्रचार से लोगों की चिन्तन पद्धति में अन्तर आने लगा। मार्क्सवाद की अवधारणा एवं रूस की क्रान्ति ने भी भारतीय जनमानस को आन्दोलित किया। पढ़े-लिखे वर्ग पर विवेकानन्द, टैगोर और श्री अरविन्द का यथेष्ट प्रभाव पड़ा।

स्वाधीनता आन्दोलन में समाज के सभी वर्गों का सहयोग अपेक्षित था इसलिए पिछड़े वर्गों के उद्धार की बात सामने आई। महात्मा गांधी ने जो हरिजन उद्धार का संकल्प लिया था उसे पूरा करने के लिए स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात् आने वाली सरकारों ने अनेक कानून बनाए। हिन्दू कोड बिल जैसे कानून बनाए गए और अक्तूबर, सन् 2007 में उच्चतम न्यायालय ने सभी धर्मों के लिए विवाह का पंजीकरण अनिवार्य बना दिया।

4. आर्थिक परिस्थितियाँ- इंग्लैण्ड के औद्योगिक विकास का प्रभाव भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ना स्वाभाविक था। इंग्लैण्ड के लिए भारत कच्चे माल का सस्ता स्रोत और तैयार माल की बड़ी मण्डी से अधिक महत्त्व नहीं रखता था। भारतीय कुटीर उद्योग इंग्लैण्ड के कारखानों में बने माल का मुकाबला न कर सके। भारत के लघु उद्योग धन्धे नष्ट हुए और कारीगर बेकार होकर काम धन्धों की तलाश में शहरों की ओर भागने लगे। शहरों में जनसंख्या बढ़ी और अशान्ति भी। अंग्रेजों ने अपने आर्थिक हितों की रक्षा के लिए रेल, डाक, तार का प्रचलन शुरू किया। इस काल में दोदो महायुद्ध हुए जिसके विनाश को झेलने के लिए अंग्रेज़ी शासन ने भारतीय जनता पर अनेक टैक्स लगा दिए। इससे मज़दूर और किसान अधिक प्रभावित हुए। अमीर और ग़रीब के बीच की खाई और अधिक बढ़ने लगी। स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात् देश का औद्योगीकरण किया गया। विकास के लिए पंचवर्षीय योजनाएँ बनाई गईं। किन्तु खेद का विषय है कि आम आदमी की आर्थिक हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है। सरकार की ओर से खर्च किया जा रहा करोड़ों अरबों रुपया आम आदमी तक भ्रष्टाचार के अजगर के मुँह में जा रहा है।

प्रश्न 2.
आधुनिक काल के साहित्य के विभाजन पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
आधुनिक काल का समय सन् 1843 से आज तक माना जाता है। इस काल में राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक स्थितियाँ इतनी तेजी से बदली कि विद्वानों ने अध्ययन की सुविधा के लिए तथा इसमें समय-समय पर होने वाले परिवर्तनों को पहचानने के लिए इस काल के साहित्य को अन्तर्युगों में विभाजित करने का प्रयास किया है। इन अन्तयुगों (उप-विभागों) के अनेक आधार हैं। कहीं प्रमुख साहित्यकार के नाम के आधार पर, कहीं इस काल की प्रवृत्ति पर इस अन्तर्युग का नामकरण किया गया। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल आधुनिक काल को तीन युगों में बाँटते हैं-
भारतेन्दु युग-सन् 1868 से 1893 तक
द्विवेदी युग-सन् 1893 से 1918 तक
छायावादी युग-सन् 1918 से आज तक

वास्तव में जब शुक्ल जी ने हिन्दी साहित्य का पहला ग्रन्थ लिखा तब प्रगतिवाद, प्रयोगवाद, नई कविता का उदय नहीं हुआ था। शायद इसी कारणं कुछ विद्वानों ने इस काल को प्रथम उत्थान, द्वितीय उत्थान, तृतीय उत्थान एवं चतुर्थ उत्थान की संज्ञा दी है। डॉ० नगेन्द्र और डॉ० बच्चन सिंह का अन्तर्युग विभाजन निम्नलिखित है-
पुनर्जागरण काल-सन् 1857 से 1900 ई० तक
पूर्व स्वच्छन्दतावाद काल-सन् 1900 से 1920 ई० तक
स्वच्छन्दतावाद काल-सन् 1920 से 1940 ई० तक
उत्तर स्वच्छन्दतावाद काल-सन् 1940 से आज तक

उपर्युक्त काल विभाजन भी सही नहीं लगता क्योंकि 1940 और आज तक हिन्दी साहित्य ने कई रूप बदले हैं। अधिकतर विद्वान् निम्नलिखित काल विभाजन से सहमत हैं-
भारतेन्दु युग – सन् 1843 से 1893 तक
द्विवेदी युग – सन् 1893 से 1918 तक
छायावाद युग – सन् 1918 से 1935 तक
प्रगतिवाद युग – सन् 1935 से 1945 तक
प्रयोगवाद युग – सन् 1945 से 1955 तक
नयी कविता – सन् 1950 से 1980 तक
साठोत्तरी कविता – सन् 1969 से आज तक

पिछले बीस वर्षों में जनवादी कविता और अकविता आदि अनेक काव्य धाराएँ प्रचलित हुई हैं।
आधुनिक काल को हिन्दी गद्य काल भी कहा जाता है। इसी काल में उपन्यास, कहानी, नाटक, एकांकी के अतिरिक्त नव्यतर विधाएँ रेखाचित्र, संस्मरण, आत्मकथा, जीवनी, यात्रा वृत्त, रिपोर्ताज आदि का भी विकास हुआ है और हो रहा है।

प्रश्न 3.
आधुनिक काल की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
(i) इंग्लैण्ड के औद्योगिक विकास का प्रभाव भारत की अर्थ-व्यवस्था पर पड़ना स्वाभाविक था। इंग्लैण्ड के लिए भारत कच्चे माल का सस्ता स्रोत और तैयार माल की बड़ी मण्डी से ज्यादा महत्त्व नहीं रखता था। भारतीय कुटीर उद्योग इंग्लैण्ड के कारखानों में बने माल का मुकाबला नहीं कर सके। भारतीय लघु उद्योग-धन्धे नष्ट हुए, कारीगर बेकार हो कर काम-धन्धों की तलाश में शहरों की ओर भागने लगे। शहरों में जनसंख्या बढ़ी और अशान्ति भी।

रेल, डाक, तार आदि का प्रचलन मूलतः अंग्रेजों के आर्थिक हितों की रक्षा के लिए हुआ था। परन्तु कालान्तर में इनसे राष्ट्रीयता की भावना तीव्र हुई। प्रथम महायुद्ध के पश्चात् अंग्रेजों द्वारा किए जा रहे आर्थिक शोषण का विरोध आरम्भ हुआ। कारखानों में व्यापक हड़तालें हुईं। सन् 1905 में बंग-भंग हुआ और इसके विरोध में स्वदेशी आन्दोलन की शुरुआत हुई। गांधी का चर्खा आन्दोलन और खादी का प्रचार इसी आर्थिक शोषण के विरोध का एक रूप था। आधुनिक कालीन साहित्य पर इसका सीधा प्रभाव पड़ा था।

इसकी दो प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं-
I. देशभक्ति-आधुनिक काल में अंग्रेजों की नीतियों की प्रतिक्रिया में स्वदेशी आन्दोलन का जन्म हुआ। अकालों तथा आर्थिक शोषण के कारण देश की अत्यन्त दुर्दशा हो गई थी-
अंग्रेज़ राज सुख साज सजे सब भारी।
पै धन विदेस चलि जात इहै अति खारी॥

विदेशी वस्तुओं के परित्याग में विदेशी भाषा, विदेशी व्यवहार, विदेशी शिष्टाचार और पहनावा आदि सम्मिलित करके देशवासियों ने स्वदेशी भाषा, शिष्टाचार, पहनावा, खान-पान और स्वदेश प्रेम को अपनाने का प्रचार किया। प्रताप नारायण मिश्र के अनुसार-
चाहहु जु साँचों निज कल्याण। तो सब मिलि भारत सन्तान।
जपो निरन्तर एक ध्यान। हिन्दी, हिन्दू, हिन्दुस्तान॥

देश के पतन से पीडित हो कर इन्होंने अतीत का गौरव गान करने की चेष्टा की। इनकी देश भक्ति में किसी प्रकार की चाटुकारिता नहीं है। देश की जागृति के लिए इन्होंने ईश्वर से बारम्बार प्रार्थना की और जन जागृति के लिए जनता को सावधान किया-
सर्वस लिए जात अंग्रेज़, हम केवल लेक्चर के तेज़।

इस समय तक राष्ट्रीयता का स्वरूप बहुत व्यापक नहीं था इसलिए इन कवियों पर कुछ आलोचकों ने साम्प्रदायिकता का दोष लगाया है पर वास्तव में इन कवियों की जातीयता और पुनरुत्थानवाद की भावना को सन्देह की दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए।

II. सुधारवादी दृष्टिकोण-आधुनिक युगीन कविता में देश प्रेम तथा समाज सुधार के लिए नवीन विषयों को ग्रहण किया गया। पश्चिमी भावों तथा विचारों ने इन कवियों को प्रभावित किया जिसके परिणामस्वरूप इनका प्रकृति की भौतिक शक्तियों पर विश्वास बढ़ा। हमारे देश में बाह्यचारों और साधनों ने धर्म और समाज को प्रभावित किया हुआ था। छुआछूत, पाखण्ड तथा रूढ़िवादी विचारों ने समाज को जकड़ रखा था। पश्चिमी सभ्यता के संपर्क में नया ज्ञान, आदर्श और नए सन्देह हमारे देश में आने लगे। यह युग भाषा, भाव और छन्द की दृष्टि से सामंजस्य का युग था। इन्होंने भक्त कवियों के समान सुधारवादी दृष्टिकोण अपनाये रखा तथा सूक्ति उपदेश पद्धति में काव्य सृष्टि की।

III. भक्ति भावना-भक्ति भारतीय समाज का अटूट हिस्सा है। आधुनिक काल में भक्ति-भावना का आधार विभिन्न समस्याओं को दूर करने के लिए ही साहित्यकारों के द्वारा स्वीकार नहीं किया गया अपितु मानसिक सबलता और आत्मिक सुख के लिए इसे आधार बनाया गया। भारतेन्दु ने स्वयं को राधा-कृष्ण का भक्त स्वीकार करते हुए कहा था-
मेरे तो साधन एक ही हैं
जय नंद लला, वृषभानु कुमारी॥

विभिन्न साहित्यकारों ने अपनी-अपनी श्रद्धा-भक्ति भावना से राम, कृष्ण, दुर्गा, शिव आदि देवी-देवताओं के प्रति अपने भावों को व्यक्त किया।

IV. प्रकृति-चित्रण-आधुनिक काल के साहित्यकारों ने प्रकृति का चित्रण चाहे अनेक पद्धतियों पर आधारित किया लेकिन उसका स्वतंत्र रूप से चित्रण किया। उन्होंने प्रकृति को निकट से देखा और उसका सुंदर लुभावना स्वरूप प्रस्तुत किया। उन्होंने प्रकृति के माध्यम से उपदेशात्मकता को भी महत्त्व दिया।-
पल-पल अंश घट घटे रजनी के, बढ़े दिवस का मान।
यथा अविद्या सकुचे ज्यों-ज्यों, त्यों त्यों विकसे ज्ञान।

V. भाषा सुधार-आधुनिक काल में भाषा संबंधी अनेक प्रकार के सुधार किए गए। द्विवेदी युग को तो कविता की भाषा से संबंधित ‘सुधार-युग’ भी कहा गया है। इस काल की कविता में ब्रज भाषा के स्थान पर खड़ी बोली को स्थापित किया गया। उसे व्याकरण के नियमों के अनुसार ढाला गया और वाक्य विन्यास में सुधार किए गए। इसका परिणाम यह हुआ कि खड़ी बोली का प्रयोग बढ़ा और उसकी शुद्धता में निखार आया।

VI. मानवतावाद और सांस्कृतिक जागरण-आधुनिक काल मानवता, उदारता और सांस्कृतिक जागरण का काल है। इस में भावनाओं को महत्त्व दिया गया और विश्व बंधुत्व की महत्ता को बल प्रदान किया गया। इससे मानव की आत्मा परिष्कृत हुई।
औरों को हँसते देखो मनु
हँसो और सुख पाओ।
अपने सुख को विस्तृत कर लो,
सबको सुखी बनाओ।

प्रगतिवादी साहित्य में दीन-हीन वर्ग का पक्ष लिया गया। उसमें अमीरों की अपेक्षा गरीबों-मजदूरों को अधिक महत्त्व दिया गया। इसमें संसार के किसी भी कोने में होने वाले अत्याचार का विरोध किया गया। साहित्यकारों ने ईश्वर पूजा की अपेक्षा असहाय मानव को अधिक महत्त्व दिया।

वास्तव में आधुनिक काल के साहित्य में मानवीय मूल्यों की अनूठे ढंग से स्थापना की गई है। पुराने मूल्यों को आधुनिक जीवन मूल्यों में स्थान प्रदान कर जीवनोपयोगी आधार को विस्तार प्रदान किया गया।

भारतेन्दु युग (सन् 1843-1893 तक)

प्रश्न 1.
भारतेन्दु युगीन काव्य की प्रमुख प्रवृत्तियों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
भारतेन्दु युग के काव्य की प्रमुख प्रवृत्तियों का विश्लेषण करते हुए हम देखते हैं कि यह युग हिन्दी-साहित्य नव-निर्माण के लिए संक्रान्ति काल है। इस काल में एक ओर पुरानी परम्पराएँ और मान्यताएँ धीरे-धीरे साहित्य क्षेत्र से विदा ले रही थी तो दूसरी ओर नवीन प्रवृत्तियाँ प्रस्फुटित हो रही थीं। इस प्रकार हम भारतेन्दु युग को नवीनता और प्राचीनता के समन्वय का काल कह सकते हैं। इस युग के काव्य की प्रमुख प्रवृत्तियाँ निम्नलिखित हैं-
1. राजभक्ति और देश भक्ति-अंग्रेज़ी राज्य स्थापित होने के कारण रीतिकालीन कवियों की तरह अपने राजाओं की प्रशंसा करने की प्रवृत्ति इस युग में भी पाई जाती है, जिसे हम राज भक्ति कह सकते हैं। भारतेन्दु और प्रेमघन ने राजभक्ति सम्बन्धी कविताएँ लिखीं, किन्तु भारतेन्दु जी ने देश भक्ति को जागृत करने वाली कविताएँ भी लिखीं और अंग्रेज़ी राज्य की आलोचना की।

2. हिन्दू-मुस्लिम एकता का प्रचार-सन् 1857 के स्वतन्त्रता आन्दोलन में हिन्दू-मुसलमानों ने कन्धे से कन्धा मिला कर भाग लिया था। अंग्रेजों ने इन दोनों में फूट डालने का प्रयास किया जिसे भारतेन्दु युग के कवि सहन न कर पाये। उन्होंने अपनी रचनाओं में इस सामयिक स्थिति का मुकाबला करने के लिए हिन्दू-मुस्लिम एकता के गीत गाए।

3. सामाजिक कुप्रथाओं का विरोध-भारतेन्दु युग में आर्य समाज, सनातन धर्म, ब्रह्म समाज और महाराष्ट्र समाज ने जो समाज सुधार का आन्दोलन चलाया था उसका प्रभाव भारतेन्दु युग के कवियों पर भी पड़ा। उन्होंने बाल-विवाह, वृद्ध विवाह जैसी कुप्रथाओं के विरुद्ध अपनी कविता द्वारा आवाज़ उठाई।

4. मातृभाषा का उद्धार-भारतेन्दु युग के कवियों ने मातृभाषा हिन्दी के गौरव को पुनः स्थापित करने का प्रयास किया। भारतेन्दु जी ने तो यहाँ तक कह दिया कि ‘निज भाषा अन्नति अहै, सब उन्नति को मूल’। इस युग के कवियों ने हिन्दी भाषा के प्रति अनुराग उत्पन्न कर मातृभाषा का उद्धार किया।

5. भक्ति-भावना-भारतेन्दु युग में भक्ति भावना का प्रवाह देखने को मिलता है। स्वयं भारतेन्दु जी पुष्टि मार्ग में दीक्षित थे। इसके काव्य में विनय तथा मधुर भावना के दर्शन होते हैं। भक्ति के क्षेत्र में इस युग के कवियों ने श्रीकृष्ण को अपनी भक्ति के लिए चुना और उन्हें देश की जनता को जगाने का आह्वान किया।

6. श्रृंगार वर्णन-भारतेन्दु युग के कवियों ने रीतिकालीन कवियों की ही तरह श्रृंगार रस की भी कविताएँ लिखीं। इन कविताओं में नायिकाओं का नख-शिख वर्णन भी किया गया। किन्तु भारतेन्दु युगीन काव्य रीतिकाल जैसी अश्लीलता से युक्त था। इस श्रृंगार वर्णन में अधिकतर अशरीरी प्रेम को ही व्यक्त किया गया।

7. हास-परिहास व्यंग्य-भारतेन्दु युगीन काव्य में हास-परिहास और व्यंग्य भी काफ़ी मात्रा में देखने को मिलता है। भारतेन्दु जी की बन्दर सभा, उर्दू का स्यापा और खिताब कविताएँ इस प्रसंग में देखी जा सकती हैं।

द्विवेदी युग (सन् 1893-1918 तक)

प्रश्न 1.
द्विवेदी युगीन काव्य की प्रमुख प्रवृत्तियों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
द्विवेदी युग में हिन्दी कविता ने एक नई करवट ली। बाल सुलभ चंचलता का स्थान अनुशासन, गाम्भीर्य और तत्व चिंतन ने ले लिया। इस युग की कविता उपदेशात्मकता अधिक होने के इतिवृत्तात्मक बन कर रह गई। इस युग की प्रमुख प्रवृत्तियाँ निम्नलिखित हैं-
1. खड़ी बोली की प्रतिष्ठा-द्विवेदी युग की कविता की सब से बड़ी विशेषता उसका खड़ी बोली में रचा जाना है। ब्रजभाषा के समर्थकों ने खड़ी बोली पर यह आरोप लगाया कि उसमें कोमल कांत पदावली और सुकुमारता का अभाव है और इसमें महाकाव्यों की रचना नहीं की जा सकती, किन्तु अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ जी ने ‘प्रिय प्रवास’ और मैथिलीशरण गुप्त जी ने ‘साकेत’ लिखकर आलोचकों का मुँह बन्द कर दिया।

2. राष्ट्रीय भावना-द्विवेदी युग राष्ट्रीय जागरण का युग था। महात्मा गाँधी जी द्वारा चलाया जा रहा स्वतन्त्रता आन्दोलन जन-साधारण को प्रभावित कर रहा था। इसका प्रभाव हिन्दी कवियों पर भी पड़ा। मैथिलीशरण गुप्त, नाथू राम शर्मा शंकर, श्रीधर पाठक, माखन लाल चतुर्वेदी आदि कवियों ने राष्ट्रीय जागरण में पूरा-पूरा योगदान दिया।

3. धार्मिकता-उदात्त नैतिकता-द्विवेदी युग का काव्य विशद् धार्मिकता तथा उदात्त नैतिकता से व्याप्त है। इस युग के कवियों ने मानवतावाद को ग्रहण किया। उदारता और व्यापक मनोदृष्टि इस समय की धार्मिक कविता के विशेष लक्षण हैं।

4. समाज सुधार की भावना-रूढ़ियों का विरोध-द्विवेदी युग में आर्य समाज का सुधारवादी आन्दोलन अत्यन्त तीव्र और प्रखर हो गया था। ईस युग का काव्य भी इससे प्रभावित हुए बिना न रह सका। इस युग के काव्य में सामाजिक अन्याय और शोषण के विरुद्ध आवाज़ उठाई गई। शोषितों, किसानों, मजदूरों की दयनीय दशा का चित्रण किया गया। नारी शिक्षा का समर्थन किया गया। निराला जी की ‘विधवा’ और ‘भिक्षुक’ कविताएँ इसी युग में लिखी गईं।

5. नीति और आदर्श-द्विवेदी युगीन काव्य आदर्शवादी और नीतिपरक है। इतिहास और पुराण से लिए गए कथा प्रसंगों के आधार पर आदर्श चरित्रों पर अनेक प्रबन्ध काव्य लिखे गए। ‘हरिऔध’ जी का ‘प्रिय प्रवास’, गुप्त जी का ‘साकेत’ तथा ‘जयद्रथ वध’ तथा राम नरेश त्रिपाठी की ‘पथिक’ ऐसी ही आदर्शवादी रचनाएँ हैं।

6. प्रकृति चित्रण-प्रकृति चित्रण की दृष्टि से द्विवेदी युगीन काव्य अत्यन्त समृद्ध है। इस युग के अमेक कवियों ने प्रकृति सुषमा का अत्यन्त चारू भाषा में चित्रण किया है। श्रीधर पाठक की कविता ‘काश्मीर सुषमा’ के अतिरिक्त ‘प्रिय प्रवास’ और ‘साकेत’ और ‘पंचवटी’ जैसी रचनाओं में अनेक प्रकृति-चित्रणं देखने को मिलते हैं।

7. हास्य व्यंग्य-द्विवेदी युगीन कविता में भी हास्य व्यंग्य देखने को मिलता है किन्तु उसमें भारतेन्दु युग जैसा चुलबुलापन नहीं है। द्विवेदी जी के व्यक्तित्व के प्रभाव के कारण इस युग की कविता में हास्य-व्यंग्य संयत और मर्यादित है।

PSEB 12th Class हिन्दी साहित्य का इतिहास आधुनिक काल

छायावाद युग (सन् 1918 से 1935 तक)

प्रश्न 1.
छायावाद युग की प्रमुख प्रवृत्तियों पर प्रकाश डालिए।
अथवा
छायावादी काव्य की विशेषताओं के बारे में लिखें।
उत्तर:
छायावाद के उदय के कई कारण हैं, इन कारणों के मूल में असंतोष की भावना ही प्रमुख थी। कुछ विद्वानों का मत है कि द्विवेदी युग की इतिवृत्तात्मकता ने ही इस काव्य चेतना को जन्म दिया। वास्तव में प्रकृति के माध्यम से अभिव्यक्त होने वाली काव्य चेतना ही छायावाद कहलाई। छायावादी कविता की निम्नलिखित प्रमुख विशेषताएँ हैं-
1. वैयक्तिता–छायावादी काव्य में वैयक्तिक सुख-दुःख की अभिव्यक्ति खुलकर हुई है। वस्तुतः छायावादी कवि विषय-वस्तु की खोज बाहर न करके अपने भीतर करता है परन्तु उसके निजीपन में भी संसार का दुःख समाया हुआ है। प्रसाद जी का ‘आँसू’ और पन्त जी के ‘अच्छवास’ और ‘आँसू’ व्यक्तिवादी अभिव्यक्ति के सुन्दर उदाहरण हैं।

2. प्रकृति-चित्रण-छायावादी कवियों ने प्रकृति को अपने काव्य में सजीव बना दिया है। डॉ० देवराज इसी कारण छायावादी काव्य को प्रकृति काव्य कहते हैं। छायावादी काव्य में प्रकृति सौन्दर्य के आलम्बन, उद्दीपन मानवीकरण, नारी रूप में अनेक चित्र मिलते हैं।

3. श्रृंगारिकता-छायावादी कवियों ने श्रृंगार भावना को प्रधानता दी है। किन्तु यह शृंगारिकता रीतिकालीन स्थूल एवं ऐन्द्रिय श्रृंगार से भिन्न है। छायावादी काव्य में शृंगारिकता दो रूपों में प्रकट हुई है-(1) नारी के सौंदर्य चित्रण द्वारा (2) प्रकृति पर नारी भावना के आरोप से। निराला जी की ‘जूही की कली’ प्रकृति के सौन्दर्य की उदात्तता का सुन्दर उदाहरण है।

4. वेदना और करुणा की भावना-छायावादी काव्य में वेदना निराशा से भरी नहीं है, उसमें सेवाभाव और मानवीयता का आभास होता है। छायावादी काव्य में वेदना का प्रवाह स्वाभाविक मनोभावों को लेकर है। इसलिए इस युग के कवियों का हृदय जनसाधारण के दुःख से दुःखी होकर चीत्कार कर उठता है।

5. जीवन के प्रति भावात्मक दृष्टिकोण-छायावादी कवियों को पलायनवादी कहा जाता है किन्तु उनके काव्य में पलायनवादी स्वर के साथ-साथ एक सुंदर समाज एवं संस्कृति की कल्पना भी निहित है। वह मानवता को नए हरेभरे परिधान में देखना चाहता है। विश्वमानवता उसका आदर्श है।

6. रहस्यानुभूति-कुछ आलोचक रहस्यवाद को छायावाद का प्राण मानते हैं किन्तु छायावादी काव्य जिज्ञासा मूलक रहस्य भावना है, उसे रहस्यवाद नहीं कहा जा सकता है। हां महादेवी का काव्य अवश्य रहस्यवादी कहा जा सकता है।

7. राष्ट्रीय भावना-छायावादी काव्य में राष्ट्रीय भावना के कुछ स्वर सुनाई पड़ते हैं। प्रसाद जी ने अपने नाटकों में कुछ ऐसे गीत लिखे हैं जिनमें राष्ट्रीय भावना की झलक देखने को मिलती है। प्रसाद जी के चन्द्रगुप्त नाटक में ‘अरुण यह मधुमय देश हमारा’ निराला जी की ‘जागो फिर एक बार’ तथा माखनलाल चतुर्वेदी जी की कविता ‘पुष्प की अभिलाषा’ इसके सुन्दर उदाहरण हैं।

प्रगतिवाद (सन् 1935-1945 तक)

प्रश्न 1.
प्रगतिवादी काव्य की प्रमुख प्रवृत्तियों पर प्रकाश डालिए। .
उत्तर:
प्रगतिवादी का आरम्भ हिन्दी-साहित्य में अप्रैल, सन् 1936 से मानना चाहिए; जब ‘अखिल भारतीय लेखक संघ’ का अधिवेशन मुंशी प्रेमचन्द की अध्यक्षता में हुआ। समाज में जागरण हुआ, जनता में चेतना आई, साम्यवाद की लहर उठी, मानव ने अपने अधिकारों को समझा और उसके लिए मांग की आवाज़ उठी। फलस्वरूप साहित्य में भी प्रगतिवाद का जन्म हुआ। प्रगतिवादी साहित्य कार्ल मार्क्स की विचारधारा से प्रभावित है। कुछ लोगों का मानना है कि मार्क्सवाद के प्रसार के लिए जो कविताएँ लिखी गईं उन्हें ही प्रगतिवाद का नाम दिया गया। प्रगतिवादी काव्य की प्रमुख प्रवृत्तियाँ निम्नलिखित हैं-

1. प्राचीन रूढ़ियों और संस्कृति का विरोध-प्रगतिवादी कवि प्राचीन रूढियों को समाज की प्रगति में बाधा मानता है, इसी कारण वह धर्म, ईश्वर अथवा परम्परागत संस्कृति का विध्वंस करना चाहता है। प्राचीन सांस्कृतिक आदर्शों में क्रान्ति लाना प्रगतिवादी काव्य का प्रधान स्वर है।

2. नास्तिकता-प्रगतिवादी कवि ईश्वर की सत्ता और धर्म में विश्वास नहीं रखते, उनका मत है कि मनुष्य अपने भाग्य का स्वयं निर्माता होता है, ईश्वर का उसमें कुछ हाथ नहीं। मार्क्स के अनुसार धर्म मनुष्य की विकासशील भावनाओं को नष्ट कर देता है। नवीन जी की ‘जूठे पत्ते’ में उनकी नास्तिकता प्रकट हुई है तथा सोहनलाल द्विवेदी स्वर्ग और नरक की धारणा को ही नकारते हैं।

3. शोषित वर्ग की दीनता का चित्रण-प्रगतिवादी कवियों ने शोषित वर्ग की दीनता के अनेक चित्र प्रस्तुत किये हैं। अधिकांश प्रगतिवादी काव्य मजदूरों और किसानों के पक्ष में लिखा गया है। भिक्षुओं से उन्हें सहानुभूति है। निराला जी की ‘भिक्षुक’ तथा ‘तोड़ती पत्थर’ कविताएँ उदाहरण स्वरूप ली जा सकती हैं।

4. शोषक वर्ग के प्रति घृणा-प्रगतिवादी कवि शोषक वर्ग से घृणा करता है। वह समझता है परिश्रम तो मज़दूर और किसान करते हैं और मज़ा लूटते हैं पूँजीपति। निराला जी ‘कुकुरमुत्ता’, नवीन जी की और भगवती चरण वर्मा की कविताएँ उदाहरणस्वरूप देखी जा सकती हैं।

5. क्रान्ति की भावना-प्रगतिवादी कवि वर्गहीन समाज की स्थापना करना चाहता है। ऐसा क्रान्ति के बिना सम्भव नहीं है। वह क्रान्ति का आह्वान करके जीर्ण-शीर्ण रूढ़ियों एवं परम्परा को जड़ से उखाड़ फेंकने में अपना गौरव समझता है। वह पूंजीपतियों के विनाश के लिए मज़दूरों को हिंसात्मक क्रान्ति के लिए उकसाता है। क्रान्ति के परिणाम का उल्लेख करता हुआ कवि कहता है-
अमीरों की है हवेली यहाँ। गरीबों की होगी पाठशाला वहाँ।

6. मार्क्सवाद में आस्था : रूस का गुणगान-प्रगतिवादी कवियों ने साम्यवाद के प्रवर्त्तक कार्ल मार्क्स तथा रूस का काफ़ी गुणगान किया है। ‘मार्क्स के प्रति’ शीर्षक कविता में पन्त जी ने कार्ल मार्क्स को प्रलयंकर शिव का तीसरा नेत्र बताया है। कवि की दृष्टि में साम्यवाद ही समाज और मनुष्यता का उद्धार करने वाला है। नरेन्द्र शर्मा सरीखे कई कवियों ने लाल रूस का गुणगान किया है।

7. नारी स्वतन्त्रता का पक्षपाती-प्रगतिवादी कवि नारी को स्वतन्त्र देखना चाहता है। वह समझता है कि मजदूर और किसान की तरह नारी भी युग-युगों से शोषण का शिकार है। इन कवियों ने नारी सौन्दर्य और कर्म को स्थापित करके उसकी मुक्ति के गीत गाए हैं।

प्रयोगवाद (सन् 1945 से 1955 तक)

प्रश्न 1.
प्रयोगवादी काव्यधारा की प्रमुख प्रवृत्तियों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर-प्रयोगवाद का आरम्भ सन् 1943 में ‘अज्ञेय’ जी द्वारा सम्पादित ‘तारसप्तक’ नामक कविता संग्रह से माना जाता है। सन् 1951 में ‘दूसरा सप्तक’ प्रकाशित हुआ। इन दोनों काव्य संग्रहों में प्रयोगवाद का स्वरूप स्पष्ट नहीं हो पाया। अज्ञेय जी द्वारा सम्पादित ‘प्रतीक’, ‘पाटिल’ तथा ‘दृष्टिकोण’ पत्रिकाओं में भी प्रयोगवादी कविताएँ छपी। प्रयोगवादी कवियों का विश्वास है कि भाव और भाषा के क्षेत्र में नए प्रयोग होते रहने चाहिए। वे साहित्य में स्थिरता के पक्षपाती नहीं हैं। प्रयोगवादी कविता की प्रमुख प्रवृत्तियाँ निम्नलिखित हैं-
1. यथार्थ चित्रण-प्रयोगवादी कवि प्रगतिवादी कवियों की तरह फ्रॉयड और मार्क्स से प्रभावित लगता है। इसी कारण वह समाज का यथार्थ चित्रण अंकित करना चाहता है। भले ही वे चित्र अश्लील ही क्यों न बन जाएँ।

2. वर्ग भेद और वर्ग संघर्ष के चित्र- प्रयोगवादी कवि वर्ग संघर्ष के चित्र भी प्रस्तुत करता है। मुक्तिबोध की ‘लकड़ी का रावण’, धूमिल का ‘खेवली’, नागार्जुन की ‘प्रेत का बयान’, केदारनाथ अग्रवाल की ‘गुल मेंहदी’ कुछ ऐसी कविताएँ हैं।

3. व्यक्ति केन्द्रित कविता-प्रयोगवादी कविता मुख्यत: व्यक्ति केन्द्रित है। इसमें व्यक्ति की विशिष्टता, उसका अहम् और इकाई के रूप में व्यक्ति का महत्त्व अंकित हुआ है। प्रयोगवादी कवि समाज से कोई संबंध नहीं रखते। यह एक प्रकार से व्यक्तिवाद की चरम विकृति है।

4. मध्यवर्गीय व्यक्ति की कुंठा-प्रयोगवादी कवि क्योंकि मध्यम वर्ग से आए थे इसलिए उनके काव्य में मध्यमवर्गीय व्यक्ति की कुंठा, अनास्था को बड़ी ईमानदारी से उद्घाटित किया गया है। उनका दृष्टिकोण यथार्थवादी था और भावुकता के स्थान पर बौद्धिकता के प्रति उनका आग्रह अधिक था।

5. निराशा की प्रवृत्ति-प्रयोगवादी कवियों में पराजय बोध के कारण निराशा की प्रवृत्ति भी देखने को मिलती है। प्रयोगवादी कवि के लिए अतीत प्रेरणाहीन तथा भविष्य उल्लास एवं आकांक्षाओं से रहित है फलतः इस युग की कविता में दुःख और दुःख से उत्पन्न निराशा का चित्रण हुआ है।

6. बौद्धिकता की प्रचुरता-प्रयोगवादी कविता में बौद्धिकता आवश्यकता से भी अधिक है। प्रयोगवादी कवि पाठक के हृदय को नहीं मस्तिष्क को प्रभावित करना चाहता है। उसमें रागात्मकता के स्थान पर अस्पष्ट विचारात्मकता है। इसलिए उसमें साधारणीकरण की मात्रा का सर्वथा अभाव है।

भाषा का स्वरूप-प्रयोगवादी कवियों ने नए-नए उपमानों, प्रतीकों की सर्जना की है। प्रयोगवादी काव्य में बिम्बों का सफल प्रयोग हुआ है। प्रयोगवादी कवियों ने अन्तर्जगत की सूक्ष्म भावनाओं तथा कुंठाओं आदि को बिम्बों के द्वारा चित्रात्मक रूप प्रदान किया है।

नयी कविता (सन् 1950 से सन् 1980 तक)

प्रश्न 1.
नयी कविता काव्यधारा की प्रमुख प्रवृत्तियों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
नयी कविता भारतीय स्वतन्त्रता के बाद लिखी गई उन कविताओं को कहा गया, जिनमें परम्परागत कविता से आगे नये मूल्यों और नये शिल्पविधान का अन्वेषण किया गया। सन् 1947 के बाद की हिन्दी कविता नवीन प्रयोगों के नाम पर असामाजिक, स्वार्थ प्रेरित, अहम्निष्ठ, घोर रुगण व्यक्तिवाद, दमित वासनाओं और कुंठाओं को बिना किसी उद्देश्य के कविता का रूप दिया जाने लगा। नयी कविता की प्रमुख प्रवृत्तियाँ निम्नलिखित हैं-
1. जीवन के प्रति आशा और विश्वास-नयी कविता के कवियों ने जीवन को जीवन के रूप में देखा है। नयी कविता में जीवन के प्रति आशा, विश्वास और आस्था के स्वर सुनाई पड़ते हैं।

2. मानवतावादी दृष्टिकोण-नयी कविता मानवतावादी आदर्श की परिकल्पनाओं पर आधारित नहीं है। वह यथार्थ की तीखी चेतना मनुष्य को उसके पूरे परिवेश को समझाने का बौद्धिक प्रयास करती है।

3. महानगरीय और ग्रामीण सभ्यता का यथार्थ चित्रण-नयी कविता में शहरी, महानगरीय तथा ग्रामीण जीवन संस्कारों के नवीन और यथार्थवादी चित्र देखने को मिलते हैं। अज्ञेय जी ‘साँप’ शीर्षक कविता तथा धूमिल की ‘खेवली’ शीर्षक कविता में क्रमश: शहरी और ग्रामीण जीवन के यथार्थ चित्र प्रस्तुत किये गए हैं।

4. जीवन मूल्यों का पुनः परीक्षण-नयी कविता जीवन मूल्यों की पुन: परीक्षा करती है। ये मूल्य जीवन की आवश्यकताओं के परिवेश में कितने खरे उतरते हैं और अपने रूढ़ रूप में कितने-कितने असंगतिपूर्ण हो गए हैं। इनका कितना स्वरूप आज के लिए ग्राह्य है आदि परीक्षण नयी कविता का कवि करता है।

5. व्यंग्य का स्वर-नयी कविता में व्यंग्य का स्वर अत्यन्त तीव्र हो उठा है। नयी कविता का कवि व्यावहारिक जीवन से अप्रस्तुत ग्रहण करता है और उसकी दृष्टि यथार्थ को विस्मरण नहीं कर पाती। अज्ञेय की कविता ‘साँप’, सक्सेना की कविता ‘गरीबी हटाओ’ में व्यंग्य का तीखा स्वर सुनाई पड़ता है।

6. प्रतीक योजना और बिंब विधान-नयी कविता के कवियों ने नूतनता के मोह में बड़े विचित्र प्रतीकों का प्रयोग किया है। जैसे बिछली घास, कलगी बाजरे की, घूरे पर उगा कुकुरमुत्ता, ज़िन्दगी मरा हुआ चूहा नहीं है, मुँह घर अजायब है आदि।

PSEB 12th Class हिन्दी साहित्य का इतिहास आधुनिक काल

प्रमुख कवि

1. भारतेन्दु हरिश्चन्द्र (सन् 1850-1885 ई०)

प्रश्न 1.
भारतेन्दु हरिश्चन्द्र का संक्षिप्त जीवन परिचय देते हुए उनकी रचनाओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
जीवन-परिचय-भारतेन्दु जी का जन्म 4 सितम्बर, सन् 1850 को काशी में एक सम्पन्न वैश्य परिवार में हुआ। इनके पिता गोपालचन्द्र ब्रज भाषा के अच्छे कवि थे। जब ये पाँच वर्ष के थे तो इनकी माता का देहान्त हो गया, दस वर्ष के थे तो पिता का साया सिर से उठ गया। भारतेन्दु की आरम्भिक शिक्षा घर पर ही हुई। तेरह वर्ष की अवस्था में इनका विवाह हो गया। इनके दो पुत्र और पुत्री हुई। पुत्रों का बचपन में ही देहान्त हो गया। इनकी पुत्री विद्यावती का पुत्र हिन्दी साहित्य का प्रतिभावान् साहित्यकार व्रज रत्नदास हुआ।

भारतेन्दु जी ने सन् 1868 में कवि वचन सुधा’ नामक पत्रिका निकाली जिसमें पहले कविताएँ बाद में गद्य रचनाएँ प्रकाशित हुईं। सन् 1873 में आप ने ‘हरिश्चन्द्र मैगज़ीन’ नामक पत्रिका निकाली। भविष्य में इस पत्रिका का नाम ‘हरिश्चन्द्र चन्द्रिका’ हो गया। भारतेन्दु जी ने साहित्यिक संस्थाओं की स्थापना के साथ-साथ शिक्षा के प्रसार के लिए ‘चौखंभा स्कूल’ स्थापित किया। वही स्कूल आज ‘हरिश्चन्द्र डिग्री कॉलेज’ के नाम से प्रसिद्ध है।

सन् 1880 में ‘सार-सुधा-निधि’ पत्रिका में साहित्यकारों द्वारा हरिश्चन्द्र जी को भारतेन्दु की उपाधि से अलंकृत किये जाने का प्रस्ताव रखा। तब से आप भारतेन्दु नाम से विख्यात हो गए। 25 जनवरी, सन् 1885 को इनका देहान्त हो गया। भारतेन्दु का युग क्रान्ति और आन्दोलनों का युग था। समय की माँग को देखते हुए भारतेन्दु जी ने जनता को क्रान्ति के लिए तैयार करने तथा अंग्रेजी सरकार के अत्याचारों और दासता से मुक्त होने की चेतना जगाने के लिए साहित्य सृजन किया।

रचनाएँ-भारतेन्दु जी ने नाटक, कहानी, निबन्ध, इतिहास और काव्य बहुत कुछ और बड़ी मात्रा में लिखा। भारतेन्दु जी की काव्य कृतियों की संख्या 70 के करीब है जिनमें प्रमुख के नाम निम्नलिखित हैं-

  1. भक्ति सम्बन्धी-दान लीला, प्रेम तरंग, प्रेम प्रलाप, कृष्ण चरित्र आदि।
  2. श्रृंगार प्रधान-सतसई शृंगार, प्रेम माधुरी, होली, मधु मुकुल आदि।
  3. राष्ट्रीय कविताएँ- भारतवीरत्व, विजय की विजय-वैजन्ती, सुमनांजली आदि।
  4. हास्य व्यंग्य प्रधान-बन्दर-सभा, बकरी का विलाप, उर्दू का स्यापा आदि।

प्रश्न 2.
भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के काव्य की प्रमुख विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
भारतेन्दु जी के काव्य का क्षेत्र बहुत विस्तृत है एवं विविधता लिए हुए है। यहाँ केवल उनके काव्य की प्रमुख विशेषताओं का ही उल्लेख किया जा रहा है-
1. भक्ति भावना-भारतेन्दु जी सूरदास जी की तरह वल्लभ सम्प्रदाय के अनुयायी थे अतः उनकी भक्ति भावना पुष्टिमार्गी है। इनकी भक्ति प्रधान रचनाओं में विनय, बाल लीला, सख्य और दाम्पत्य प्रेम से सम्बन्धित सभी प्रकार के पद मिलते हैं। इन भक्ति सम्बन्धी पदों में शुद्ध गीत शैली के सभी तत्व पाये जाते हैं।

जनता में धार्मिक सद्भावना बनाये रखने के लिए भारतेन्दु जी ने हज़रत मुहम्मद साहब और हज़रत इमाम हुसैन की जीवनियाँ भी लिखीं।

2. श्रृंगार भावना-भक्त होने के साथ-साथ भारतेन्दु जी रसिक भी थे, फलतः रीतिकाल के अनुकरण पर कवित्त और सवैया छंद में शृंगारिक रचनाएँ की जो कवि की अनुभूति से भरपूर है। भारतेन्दु जी की अधिकांश कविताओं का मुख्य आधार राधा-कृष्ण प्रेम वर्णन है किन्तु उसमें रीतिकालीन कवियों की तरह कुत्सित मनोवृत्तियों का प्रकाशन न था।

3. राष्ट्रीयता एवं समाज-सुधार की भावना-भारतेन्दु जी का जन्म एक देशभक्त घराने में हुआ था। अतः देश भक्ति उनके खून में थी। अंग्रेज़ी शासन के कुप्रभावों का उन्होंने अपनी कविता में वर्णन किया है। उन्होंने देशवासियों को प्राचीन गौरव पुनः प्राप्त करने का संदेश दिया है तथा देश के जनमानस में राष्ट्रीय भावना जगाने के लिए प्राचीन रूढ़ियों एवं बुराइयों को त्यागने की सलाह दी। भारत वीरत्सव’ में उनकी देश प्रेम की भावना अधिक उजागर हुई है।

4. प्रकृति चित्रण-भारतेन्दु जी प्रकृति चित्रण के क्षेत्र में अधिक सफल नहीं रहे। उनके काव्य में प्रकृति के बाह्य रूप का वर्णन मात्र है। किन्तु उनका प्रकृति चित्रण अपने ढंग का था जो अपनी इतिवृत्तात्मकता के कारण आगे चलकर छायावादी युग का सबसे बड़ा वैभव बन गया।

5. हास्य-व्यंग्य-भारतेन्दु जी की कविता में हास्य व्यंग्य प्रचुर मात्रा में देखने को मिलता है। उन्होंने मुकरियों के माध्यम से बड़ा तीखा व्यंग्य किया है। ‘बन्दर सभा’ में निम्न कोटि के नाटकों का उपहास उड़ाया है तो ‘उर्दू का स्यापा’ शीर्षक कविता में उर्दू के पक्षपातियों पर व्यंग्य किया है।

2. मैथिलीशरण गुप्त (सन् 1886-1964 ई०)

प्रश्न 1.
श्री मैथिलीशरण गुप्त का संक्षिप्त जीवन परिचय देते हुए उनकी रचनाओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
मैथिलीशरण गुप्त जी का जन्म 3 अगस्त, सन् 1886 ई० को झाँसी जिला के चिरगाँव नामक स्थान में एक सम्पन्न वैश्य परिवार में हुआ। गुप्त जी का विद्यारम्भ गाँव की पाठशाला से हुआ। इसके बाद झाँसी के मैकडालनड हाई स्कूल में भेजे गये किन्तु वहाँ इनका पढ़ने में मन नहीं लगा वे चिरगाँव लौट आए। घर पर ही उन्होंने हिन्दी, संस्कृत, बंगला, उर्दू, मराठी और अंग्रेज़ी का अध्ययन किया। गुप्त जी का आरम्भिक जीवन बड़ा संघर्षमय रहा। सत्रह वर्ष के होते होते इनके पिता का तथा उन्नीस वर्ष के होने पर इनकी माता का देहान्त हो गया। गुप्त जी ने तीन विवाह किये। बच्चों की असमय मृत्यु हो गई। केवल एक बेटा उर्मिला चरण जीवित रहा, जो आजकल स्वतन्त्र रूप से लेखन कार्य कर रहा है।

गुप्त जी के काव्य को प्रतिष्ठा दिलाने में आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी जी का बहुत बड़ा हाथ है। वे गुप्त जी की कविताओं में संशोधन कर ‘सरस्वती’ पत्रिका में प्रकाशित किया करते थे। साथ ही गुप्त जी को अच्छी कविता लिखने के लिए प्रेरित भी करते थे।

गुप्त जी महात्मा गाँधी और स्वतन्त्रता आंदोलन से बहुत प्रभावित हुए। स्वतन्त्रता आन्दोलन में भाग लेने पर दो बार इन्हें जेल भी जाना पड़ा। स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात् आप दो-बार राज्य सभा के सदस्य भी मनोनीत हुए (1952 से 1964 तक)। ‘साकेत’ महाकाव्य पर इन्हें मंगला प्रसाद पुरस्कार भी प्रदान किया गया। भारत सरकार ने भी इन्हें ‘पद्म भूषण’ की उपाधि से सम्मानित किया। सन् 1964 में गुप्त जी परलोक सिधार गए।

रचनाएँ-राष्ट्र कवि कहे जाने वाले मैथिलीशरण गुप्त जी ने करीब चालीस काव्य ग्रन्थों का सृजन किया। इनमें प्रमुख और लोकप्रिय काव्य ग्रन्थ निम्नलिखित हैं-

  1. जयद्रथ वध
  2. साकेत
  3. पंचवटी
  4. यशोधरा
  5. गुरुकुल
  6. रंग में भंग
  7. द्वापर
  8. भारत भारती।

प्रश्न 4.
मैथिलीशरण गुप्त के काव्य की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
गुप्त जी की रचनाओं का अवलोकन करने पर यह स्पष्ट हो जाता है कि वे मूलतः भारतीय संस्कृति के कवि हैं। गुप्त जी के काव्य की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं-
1. प्राचीनता और आधुनिकता का समन्वय-युग की बदली हुई परिस्थितियों के अनुरूप गुप्त जी ने भारतीय संस्कृति को एक नया रूप प्रदान किया। उन्होंने प्राचीनता और आधुनिकता का अपूर्व समन्वय किया। रामायण, महाभारत, पुराण, इतिहास जो भारतीय संस्कृति के अभिन्न अंग हैं, गुप्त जी ने उनको युग के अनुसार आधुनिकता प्रदान की है।

2. भक्ति भावना-गुप्त जी में वैष्णव संस्कार कूट-कूट कर भरे हुए थे। गुप्त जी ने अपने प्रत्येक ग्रन्थ के मंगलाचरण में श्री राम की वन्दना की है। गुप्त जी का विश्वास है कि श्री राम आज भी आदर्श हो सकते हैं, उनका अनुकरण किया जा सकता है।

3. भारतीय संस्कृति की झलक-गुप्त जी के काव्य में भारतीय सभ्यता, आचार-विचार, रीति-नीति, दर्शनसाहित्य का वर्णन देखने को मिलता है। ‘स्वदेश प्रेम’, ‘किसान’, ‘वैतालिक’ आदि कविताओं में गुप्त जी भारतीय संस्कृति का आह्वान करते हैं। ‘जयद्रथ वध’ में भी उन्होंने गीता के ‘कर्म करो किन्तु फल की चिन्ता न करो’ सिद्धान्त का वर्णन किया है।

4. राष्ट्रीयता-गुप्त जी की प्रत्येक रचना राष्ट्रीय उत्थान के लिए है, इसी कारण उन्हें राष्ट्रकवि कहा जाता है। गुप्त जी की राष्ट्रीय भावना का एक उद्देश्य देश को स्वतन्त्र देखना और उसमें पुनः आत्म गौरव और शक्ति जगाना है। गुप्त जी ने इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए अतीत के गौरव का गान किया, देश-भक्ति का पाठ पढ़ाया तथा अधिकारों के साथ कर्तव्यों पर भी ध्यान देने की बात कही।

5. उपेक्षित पात्रों का चरित्र-चित्रण-गुप्त जी ने इतिहास द्वारा उपेक्षित पात्रों को अपने काव्य में स्थान देकर उन पात्रों से किये गए अन्याय की ओर सब का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने ‘साकेत’ में उर्मिला, ‘यशोधरा’ में गौतम पत्नी यशोधरा, ‘विष्णुप्रिया’ में चैतन्य महाप्रभु पत्नी विष्णुप्रिया तथा ‘साकेत’ में कैकेयी के चरित्रों के प्रति समाज की सहानुभूति जागृत की।

6. प्रकृति चित्रण-गुप्त जी के काव्य में प्रकृति उनके काव्य की सहचरी बनकर आई है। प्रकृति कवि के साथ हँसी व रोयी है। गुप्त जी के काव्य ‘पंचवटी’ और ‘साकेत’ में प्रकृति की सुषमा बिखरी पड़ी है। ‘पंचवटी’ में प्रकृति के मनोरम रूप की झाँकी निम्नलिखित पंक्ति में देखी जा सकती है-
चारु चन्द्र की चंचल किरणें खेल रही हैं जल थल में।

3. जयशंकर प्रसाद (सन् 1889-1937 ई०).

प्रश्न 1.
श्री जयशंकर प्रसाद का संक्षिप्त जीवन परिचय देते हुए उनकी काव्य कृतियों का उल्लेख करें।
उत्तर:
प्रसाद जी का जन्म सन् 1889 को काशी के गोवर्धन सराए महल्ले में एक सम्पन्न वैश्य परिवार में हुआ। इनके पिता तम्बाकू का व्यापार करने के कारण ‘सुंघनी साहू’ के नाम से प्रसिद्ध थे। प्रसाद जी कक्षा सात तक ही स्कूल में पढ़े। इसके बाद घर पर ही इनकी शिक्षा दीक्षा का कार्य हुआ। अभी यह बारह वर्ष के ही थे कि इनके पिता का देहांत हो गया। अगले पाँच वर्षों में इनकी माता और बड़े भाई का भी देहांत हो गया। परिणामस्वरूप छोटी अवस्था में ही इन्हें पिता का व्यवसाय सम्भालना पड़ा। प्रसाद जी ने इन घोर दैवी आपदाओं के बीच भी अपना धैर्य बनाए रखा। परिवार की बिगड़ती दशा को सुधारने के लिए इन्होंने जी जान से कड़ा परिश्रम किया।

प्रसाद जी दुकानदारी का काम देखते हुए बचपन से ही समस्या पूर्ति तथा मुक्तक पद्य रचना किया करते थे। इनकी रचनाएँ ‘इन्दु’, ‘हंस’ और ‘जागरण’ मासिक पत्रिकाओं में प्रकाशित होती थीं।

प्रसाद जी ने तीन विवाह किए। तीसरे विवाह से इन्हें रत्नशंकर नामक पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई किन्तु उनका हृदय सदैव सांसारिक मोह माया से विरक्त रह कर जीवन के शाश्वत मूल्यों की ओर ही उन्मुख रहा। पारिवारिक चिन्ताओं से प्रसाद जी जीवन पर्यन्त मुक्त नहीं हो पाए। जीवन के अन्तिम दिनों में आप तपेदिक से पीड़ित रहे। इसी रोग के कारण 15 नवम्बर, 1937 को इनकी मृत्यु हो गई।

रचनाएँ-प्रसाद जी ने पद्य और गद्य दोनों क्षेत्रों में अपनी कुशाग्र बुद्धि और प्रतिभा का परिचय दिया। उन्होंने कविता, नाटक, कहानी, उपन्यास और निबन्ध सभी विधाओं में साहित्य सर्जना की। उनकी प्रमुख काव्य कृतियों के नाम इस तरह हैं-

  1. चित्राधार
  2. प्रेमपथिक
  3. करुणालय
  4. महाराणा का महत्त्व
  5. कानन कुसुम
  6. झरना
  7. आँसू
  8. लहर
  9. कामायनी।

‘कामायनी’ पर इन्हें मरणोपरांत मंगलाप्रसाद पुरस्कार भी दिया गया। इनकी रचनाएँ ‘झरना’, ‘लहर’ और ‘आँसू’ . भी हिन्दी साहित्य में विशेष महत्त्व रखती हैं।

PSEB 12th Class हिन्दी साहित्य का इतिहास आधुनिक काल

प्रश्न 2.
श्री जयशंकर प्रसाद के काव्य की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
प्रसाद जी ने हिन्दी साहित्य में छायावाद का द्वार खोला। प्रसाद जी की काव्य कृतियों के आधार पर उनके काव्य की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
1. श्रृंगारिकता–प्रसाद जी मूलतः प्रेम और यौवन के कवि हैं। उनके काव्य में रागात्मकता की प्रधानता है। उनके काव्य में संयोग शृंगार की अपेक्षा वियोग शृंगार की अधिक प्रधानता है। ‘आँसू’ में वियोग शृंगार की और ‘कामायनी’ में संयोग शृंगार का वर्णन दर्शनीय है।

2. प्रेम भावना-‘प्रेम पथिक’ से लेकर वाद की रचनाओं में प्रसाद जी के काव्य में अनुभूति और विचरण का अद्भुत मिश्रण देखने को मिलता है। प्रेम की भावना अपने आप में अनन्त है और उसकी चरम परिणति त्याग वृत्ति में है। ‘प्रेम पथिक’ में प्रसाद जी तात्विक निष्कर्षों की स्थिति में पहुँच गए लगते हैं। इस प्रेम चित्रण में परम्परा के रक्षण की स्थिति कम और नवीनता का उद्योग अधिक दिखता है।

3. प्रकृति प्रेम-आरम्भ में प्रेम और यौवन के मादक कवि प्रसाद जी प्रकृति की ओर आकृष्ट हुए। प्रकृति के प्रति उनका तीव्र आकर्षण है। प्रकृति के मानवीकरण का सुन्दर उदाहरण उनकी ‘बीती विभावरी’ कविता है। प्रसाद जी के काव्य में प्रकृति के सुन्दर, ऐश्वर्यमयी और प्रेरक चित्र हैं वहाँ उसके महाविनाशकारी और भयंकर रूप भी देखने को मिलते हैं। ‘कामायनी’ में प्रकृति के इन दोनों रूपों को देखा जा सकता है।

4. रहस्योन्मुखता-प्रसाद जी के काव्य में रहस्यवाद की झलक भी देखने को मिलती है। वे उस अनन्त सत्ता के दर्शन के लिए लालायित दीखते हैं। वे तर्क और बुद्धि से नहीं अपितु ज्ञान और कल्पना के सहारे उस विश्वात्मा को पहचानना चाहते हैं प्रसाद जी की रहस्य भावना प्रकृति के माध्यम से भी मुखरित हुई है।

5. मानवीय भावनाएँ-प्रसाद जी मानवीय भावनाओं के कवि हैं। ‘कामायनी’ में मानवीय प्रकृति के मूल मनोभावों का सूक्ष्म रूप में चित्रण किया गया है। ‘कामायनी’ में श्रद्धा का तकली गीत इसका उदाहरण है। यहाँ प्रसाद जी गाँधीवाद से प्रभावित दीखते हैं। ‘कामायनी’ में प्रसाद जी ने भारत की चिर उपेक्षित नारी को-नारी तुम केवल श्रद्धा हो-कह कर आदर-सत्कार प्रदान किया है।

4. सूर्यकांत त्रिपाठी “निराला’ (सन् 1896-1961 ई०)

प्रश्न 1.
‘निराला’ जी का संक्षिप्त जीवन परिचय देते हुए उनकी काव्यकृतियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
जीवन-परिचय-सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ का जन्म सन् 1896 ई० में बंगाल की महिषादल नामक रियासत में मेदनीपुर में बसंत पंचमी वाले दिन हुआ। इनका बचपन का नाम सूर्यकुमार था। सूर्यकुमार से ये सूर्यकांत हो गए। ‘मतवाला’ पत्रिका में काम करते समय इन्होंने उससे मेलखाता अपना उपनाम ‘निराला’ रख लिया। निराला जी की आरम्भिक शिक्षा बंगाल में ही हुई। कालान्तर में इन्होंने संस्कृत, उर्दू, अंग्रेजी भाषा तथा साहित्य का अच्छा ज्ञान प्राप्त किया।

निराला जी का जीवन संकटों से भरा रहा। तीन ही वर्ष के थे कि इनकी माता का देहान्त हो गया। तेरह वर्ष की अवस्था में इनका विवाह मनोहरा देवी से हो गया। सन् 1918 में मनोहरा देवी अपने पीछे एक पुत्र और एक पुत्री को छोड़कर स्वर्ग सिधार गईं। थोड़े ही दिनों के बाद इनके चाचा, पिता और अन्य कई रिश्तेदार भी इनफलूइंजा का शिकार होकर चल बसे। सन् 1935 में उनकी पुत्री सरोज भी संसार से विदा हुई। निराला पर सरोज की मृत्यु का गहरा आघात लगा। लगा जैसे वे टूट गए हों।

सन् 1920 में निराला ने महिषादल राज्य की नौकरी छोड़ दी। सन् 1922 में आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी जी की प्रेरणा से इन्होंने कोलकाता से प्रकाशित होने वाली पत्रिका ‘समन्वय’ का संपादन भार संभाला। उसके बाद वे ‘मतवाला’ पत्रिका के संपादक मंडल में चले गए। इसी पत्रिका में इनकी प्रसिद्ध कविता ‘जूही की कली’ प्रकाशित हुई। सन् 1950 तक तो निराला जी जगह-जगह भटकते रहें। पर उन्होंने साहित्य-सृजन नहीं छोड़ा। सन् 1949 में इनकी काव्यकृति ‘अपरा’ पर उत्तर प्रदेश सरकार ने इन्हें 2100 रुपए का पुरस्कार प्रदान किया।

15 अक्तूबर, सन् 1961 में इलाहाबाद में इनका देहान्त हो गया। रचनाएँ-निराला जी ने कोई दर्जन भर काव्य-कृतियाँ हिन्दी साहित्य को दी जिनमें से प्रमुख के नाम निम्नलिखित

  1. अनामिका
  2. परिमल
  3. गीतिका
  4. तुलसीदास
  5. कुकुरमुत्ता
  6. अणिमा
  7. नए पत्ते
  8. बेला
  9. अर्चना।

प्रश्न 2.
‘निराला’ के काव्य की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए। हैं-
उत्तर:
‘निराला’ जी के काव्य में जीवन की विविधता के दर्शन होते हैं। इनके काव्य की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
1. छायावादी दृष्टिकोण-निराला जी छायावाद के प्रमुख चार स्तम्भों में एक माने जाते हैं। इनकी ‘जूही की कली’ कविता से ही छायावाद का आरम्भ माना जाता है। छायावादी काव्य में प्रकृति के माध्यम से श्रृंगार का वर्णन किया गया है। छायावादी काव्य में वैयक्तिता का चित्रण अधिक हुआ है। ‘जूही की कली’ और ‘विफल वासना’ शीर्षक कविताएँ क्रमश: इन्हीं भावों को व्यक्त करती हैं।

2. रहस्य भावना और दार्शनिकता-निराला जी की कविता में रहस्यवाद भी देखने को मिलता है। उनके अधिकांश पदों में भले ही मानव जीवन के चित्र देखने को मिलते हैं, किन्तु वे सबके सब रहस्यानुभूति से अनुरंजित हैं। आत्मा के परमात्मा के लिए अभिसार, मिलन और वियोग आदि की सजीव अभिव्यक्ति निराला जी के काव्य में देखने को मिलती है। उनकी रहस्यानुभूति में दार्शनिकता का गूढ चिन्तन भी है जैसे उनकी ‘तुम और मैं’ कविता।

3. प्रगतिवादी विचारधारा-निराला जी के हृदय में दुःखी मानव के लिए करुणा है। उनकी ‘भिक्षुक’, ‘विधवा’, ‘वह तोड़ती पत्थर’ तथा ‘दान’ इसी भाव को अभिव्यक्त करती हैं। निराला जी ने ‘कुकुरमुत्ता’ में शोषकों के प्रति व्यंग्य, आक्रोश और घृणा भी व्यक्त की है और शोषितों के प्रति सहानुभूति भी। निराला जी ने मानव-मानव में विषमता फैलाने वाली आसुरी प्रवृत्तियों और दूसरे देशों को गुलाम बना कर उनका दमन करने वाली शक्तियों के संहार के लिए शक्ति (देवी) का आह्वान करते हुए कहा है-‘एक बार बस और नाच तू श्यामा’।

4. राष्ट्रीयता की भावना-निराला जी की छायावादी कविताओं में राष्ट्रीयता की भावना भी देखने को मिलती है। उन्होंने राष्ट्रीय प्रभाती के रूप में उद्बोधन गीत भी लिखे हैं जिनमें छायावाद की पूरी कोमलता एवं चित्रमयता दृष्टिगोचर होती है। उदाहरणस्वरूप उनकी ‘जागो फिर एक बार’ कविता देखी जा सकती है। इसके अतिरिक्त ‘भारती जय विजय करें’, ‘मातृभूमि की वन्दना’, ‘महाराज शिवाजी का पत्र’, ‘राम की शक्ति पूजा’ और ‘तुलसीदास’ आदि कविताएँ भी इसी कोटि की हैं।

निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि निराला जी छायावादी काव्य प्रवृत्तियों के समर्थ कवि होने के साथ-साथ राष्ट्रीय चेतना एवं प्रगतिवादी स्वर के भी सक्षम उद्घोषक थे।

5. सुमित्रानन्दन पन्त (सन् 1900-1977 ई०)

प्रश्न 1.
पन्त जी का संक्षिप्त जीवन परिचय देते हुए उनकी काव्य कृतियों के नाम लिखिए।
उत्तर:
कविवर सुमित्रानन्दन पन्त जी का जन्म 21 मई, सन् 1900 ई० के दिन उत्तर प्रदेश के (आजकल उत्तराखण्ड) अलमोड़ा जिले के कौसानी गाँव में हुआ। पैदा होते ही इनकी माता का देहान्त हो गया। इनका पालनपोषण दादी एवं बुआ ने किया। इनकी प्रारम्भिक शिक्षा गाँव की पाठशाला में हुई। तदुपरान्त 1911 से 1919 तक अलमोड़ा के राजकीय हाई स्कूल से नवमी कक्षा पास की और काशी चले गए वहीं से इन्होंने मैट्रिक की परीक्षा पास की। कॉलेज में दाखिल हुए किन्तु महात्मा गांधी के असहयोग आन्दोलन से प्रभावित होकर पढ़ाई छोड़ दी किन्तु राजनीति में भाग नहीं लिया।

सन् 1930 में संयोगवश कालाकांकर नरेश के छोटे भाई इन्हें कालाकांकर ले गए। वहीं इन पर ग्राम्य जीवन का काफ़ी प्रभाव पड़ा। सन् 1934 में प्रसिद्ध नर्तक उदयशंकर ने अपनी फिल्म ‘कल्पना’ के गीत लिखने के लिए मद्रास आमंत्रित किया। वहीं उन्हें पांडिचेरी में महर्षि अरविन्द के सम्पर्क में आने का अवसर मिला। महर्षि के प्रभाव से इनके काव्य में आध्यात्मिकता का मोड़ आया।

सन् 1950 में इनकी इलाहाबाद आकाशवाणी केन्द्र में हिन्दी प्रोड्यूसर’ के रूप में नियुक्ति हो गई। सन् 1960 में इनकी ‘षष्ठी पूर्ति’ के अवसर पर राष्ट्रपति डॉ० राजेन्द्र प्रसाद की अध्यक्षता में इनका सम्मान किया गया। सन् 1964 में उत्तर प्रदेश की सरकार ने इन्हें दस हज़ार रुपए का पुरस्कार प्रदान किया। सन् 1961 में भारत सरकार ने इन्हें ‘पद्मभूषण’ की उपाधि से अलंकृत किया, जिसे उन्होंने भारत सरकार की हिन्दी विरोधी नीति के प्रति असंतोष तथा क्षोभ प्रकट करते हुए लौटा दिया। सन् 1969 में भारतीय ज्ञानपीठ की ओर से इनके कविता-संग्रह ‘चिदम्बरा’ पर एक लाख का सर्वोच्च पुरस्कार प्रदान किया गया।
28 दिसम्बर, 1977 को पन्त जी का देहावसान हो गया।

रचनाएँ-पन्त जी ने नाटक, उपन्यास, कहानी एवं कविता विधा में अपना योगदान दिया है। इनकी प्रमुख काव्य कृतियों के कालक्रमानुसार नाम इस प्रकार हैं-
वीणा, ग्रंथि, पल्लव, गुंजन, ग्राम्या, ज्योत्स्ना, युगान्त, युगवाणी, स्वर्ण किरण, स्वर्णधूलि, वाणी, कला और बूढ़ा चाँद, रश्मिबन्ध, चिदम्बरा तथा लोकायतन।

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प्रश्न 2.
पन्त जी के काव्य की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
छायावादी कवियों में पन्त जी का व्यक्तित्व ही सर्वाधिक गत्यात्मक रहा है। काल और युग की परिस्थितियों के अनुसार उनके विचार, उनकी मान्यताएँ एवं उनके आदर्शों में परिवर्तन होता रहा। ऐसा उनकी काव्यकृतियों से यह स्पष्ट हो जाता है। पन्त जी के काव्य की निम्नलिखित विशेषताएँ देखने को मिलती हैं-
1. प्रकृति चित्रण-पन्त जी की आरंभिक कृतियों में मुख्य विषय प्रकृति ही है। ‘वीणा’ की ‘प्रथम रश्मि का आना’, कविता इसका उदाहरण है। ‘पल्लव’ की ‘आँसू की बालिका’ तथा ‘पर्वत प्रदेश में पावस’ आदि कविताओं में प्रकृति के मनोहर चित्रण विद्यमान हैं। ‘गुंजन’ की सर्वश्रेष्ठ कविताओं-नौका विहार, एक तारा, चाँदनी, परिवर्तन आदि में जिस दार्शनिक चेतना को वाणी दी गई है उसका आधार और साधन भी प्रकृति ही है।

2. छायावादी विचारधारा-पन्त जी की ‘वीणा’ से लेकर ‘गुंजन’ तक की रचनाएँ छायावादी हैं। इन कविताओं में कवि ने प्रकृति की विविध भावों में अभिव्यक्ति की है। पन्त जी ने प्रकृति को अपने से अलग, सजीव सत्ता रखने वाली नारी के रूप में देखा है। ‘वीणा’ की ‘प्रथम रश्मि’ कविता छायावादी काव्य का सुन्दर उदाहरण है।

3. प्रगतिवादी विचारधारा-सन् 1932 में परिवर्तन कविता लिखने के बाद पन्त जी छायावादी कवि से प्रगतिवादी कवि बन गए। ‘युगान्त’, ‘ग्राम्या’ और ‘युगवाणी’ की कविताओं में पन्त जी स्पष्ट रूप में मार्क्सवाद से प्रभावित दिखाई पड़ते हैं। वे सामन्तवादी मान्यताओं और रूढ़ियों का विनाश करना चाहते हैं। ‘युगान्त’ में आकर कवि कोकिल को क्रान्ति के लिए उकसाता है। पन्त जी की ‘ताज’ शीर्षक कविता में भी उनकी प्रगतिवादी विचारधारा का परिचय मिलता है।

4. अध्यात्मवादी विचारधारा-महर्षि अरबिन्द के प्रभाव से पन्त जी के काव्य में अध्यात्मवाद के दर्शन होते हैं। उनकी कृतियों ‘स्वर्ण धूलि’, ‘स्वर्ण किरण’ और ‘उत्तरा’ आदि में चिन्तन की प्रधानता है। इस काल में कवि भौतिकता और आध्यात्मिकता तथा ज्ञान और विज्ञान के समन्वय की चेष्टा करता है।

‘कला और बूढ़ा चाँद’ शीर्षक कविता में कवि ने क्रान्तिकारी परिवर्तन कर अनुभूति को अधिक बौद्धिक बना दिया है। लोकायतन’ तो लोक संस्कृति का महाकाव्य ही है।

6. महादेवी वर्मा (सन् 1907-1987 ई०)

प्रश्न 11.
श्रीमती महादेवी वर्मा का संक्षिप्त जीवन परिचय देते हुए उनकी काव्य कृतियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर-महादेवी वर्मा का जन्म सन् 1907 में उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद नगर में हुआ। इनकी शिक्षा-दीक्षा का प्रबन्ध घर पर ही किया गया। भाषा, संगीत एवं चित्रकला में भी इनकी रुचि थी। सन् 1916 ई० में नौ वर्ष की अवस्था में इनका विवाह श्री स्वरूपनारायण वर्मा से हो गया। तब ये इन्दौर से प्रयाग आ गईं। वहीं इन्होंने नियमित रूप से उच्च शिक्षा प्राप्त की। प्रयाग विश्वविद्यालय से संस्कृत में एम० ए० करने के बाद प्रयाग महिला विद्यापीठ की प्राचार्या के पद पर इनकी नियुक्ति हो गई।

अनेक वर्षों तक सफलतापूर्वक अपने दायित्व का निर्वाह करती रहीं। इन्होंने सन् 1942 के भारत छोड़ो आन्दोलन के समय गाँव-गाँव जाकर देशभक्ति का प्रचार किया। सन् 1944 में इन्होंने प्रयाग में ‘साहित्यकार-संसद्’ की स्थापना की। सन् 1956 में भारत सरकार ने इन्हें ‘पद्म भूषण’ उपाधि से अलंकृत किया। सन् 1982 में इनके काव्य संग्रह ‘यामा’ पर हिन्दी साहित्य का सर्वोच्च पुरस्कार ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया। इनकी काव्य कृतियों ‘नीरजा’ और ‘यामा’ पर इन्हें क्रमशः सक्सेरिया पुरस्कार और मंगला प्रसाद पुरस्कार प्रदान किया गया। सन् 1960 में इनकी काव्यकृति ‘सप्तपर्णा’ प्रकाशित हुई जिसमें प्राचीन संस्कृत कवियों में से कुछ अमर रचनाओं का हिन्दी रूपान्तर प्रस्तुत किया गया है।

रचनाएँ-महादेवी वर्मा जी की काव्यकृतियों का परिचय इस प्रकार है(1) नीहार (2) रश्मि (3) नीरजा (4) सांध्यगीत (5) गीत पर्व (6) दीपशिखा।

इनमें प्रथम चार कृतियों की रचनाएँ ‘यामा’ शीर्षक काव्य संग्रह में संग्रहीत है। इसके अतिरिक्त इनकी कविताओं के संग्रह ‘सन्धिनी’, ‘आधुनिक कवि’, ‘परिक्रमा’, ‘नीलांबरा’ भी प्रकाशित हो चुके हैं।

प्रश्न 12.
महादेवी वर्मा के काव्य की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
महादेवी वर्मा हिन्दी छायावादी काव्यधारा की प्रमुख स्तम्भ मानी जाती हैं। अपनी विरह वेदना एवं रहस्यवाद के कारण समीक्षक इन्हें आधुनिक मीरा मानते हैं। इनके काव्य की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
1. छायावादी दृष्टिकोण-समीक्षकों का कहना है कि छायावाद ने महादेवी को जन्म दिया और महादेवी ने छायावाद को। छायावाद की प्रमुख प्रवृत्ति वैयक्तिता के महादेवी जी के काव्य में भी दर्शन होते हैं। इनकी व्यक्तिवादी कविताओं में उल्लास, उत्साह, स्वाभिमान एवं विरह वेदना का अनूठा समावेश भी देखने को मिलता है। इनकी छायावादी कविताओं में रहस्यवाद और रहस्यवादी कविताओं में छायावाद की अनायास समष्टि हो गई है। ‘जो तुम आ जाते एक बार’ कविता इसका उदाहरण है।

2. रहस्यवाद-महादेवी जी रहस्यवाद के सम्बन्ध में अपना मौलिक दृष्टिकोण रखती हैं। उनकी वाणी का मुख्य स्वर अलौकिक और उदात्त प्रेम है। इस प्रेम का आलम्बन या तो प्रकृति है या प्रकृति के पीछे छिपी हुई अज्ञात सत्ता। ‘नीहार’ की कविताएँ इसका उदाहरण है। ‘रश्मि’ की रचनाओं में यह अप्रत्यक्ष सत्ता निराकार प्रियतम बन गई है और कवयित्री की आत्मा ने उससे नाता जोड़ लिया है। महादेवी जी की रहस्य भावना ‘नीरजा’ में अधिक मुखरित हुई है। उनके काव्य में वियोग की वेदना अधिक देखने को मिलती है। वे विरह को मिलन से भी अधिक प्रिय मानती हैं। विरह उन्हें इतना प्रिय है कि वे स्वर्ग भी नहीं जाना चाहती।

3. दार्शनिकता-महादेवी जी की दार्शनिक भावनाओं पर उपनिषदों का भी प्रभाव पड़ा है। उपनिषदों की भान्ति वे भी प्रिय ब्रह्म का निवास स्थान हृदय ही मानती हैं और आत्मा और प्रकृति दोनों में उसी ब्रह्म की छाया देखती है। उन्हें प्रकृति में चिर सुंदर ब्रह्म का आभास भी मिलता है जो उनके विचारों को दृढ़ता प्रदान कर आस्था का स्वरूप देता है।

भारतीय दर्शनों से प्रेरणा ग्रहण करने के अतिरिक्त, वेदान्त से अद्वैत, उपनिषदों से लोक जीवन का रहस्य ज्ञान तथा लौकिक प्रेम से संवेदना और तीव्रता के तत्वों को भी ग्रहण किया है। इसी कारण महादेवी जी को वेदना से अथाह प्यार है। वे पीड़ा में ही प्रियतम को प्राप्त करना चाहती हैं।

7. सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ (सन् 1911-1987 ई०)

प्रश्न 1.
श्री अज्ञेय का संक्षिप्त जीवन परिचय देते हुए उनकी काव्य कृतियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
प्रयोगवाद के प्रवर्तक कविवर अज्ञेय जी का जन्म 7 मार्च, सन् 1911 ई० को बिहार के देवरिया जिले के कसिया नामक स्थान पर हुआ। अज्ञेय जी की शिक्षा व्यवस्थित रूप से नहीं हुई। आरम्भ में संस्कृत की शिक्षा घर पर ही दी गई। मैट्रिक इन्होंने सन् 1925 में पंजाब से, इंटर साईंस सन् 1927 में मद्रास (चेन्नई) से तथा सन् 1929 में पंजाब विश्वविद्यालय से बी० एस०-सी० की डिग्री प्राप्त की। इसी वर्ष इन्होंने लाहौर में एम० ए० अंग्रेज़ी में प्रवेश लिया। किन्तु क्रान्तिकारियों के सम्पर्क में आने पर शिक्षा बीच में ही छोड़ दी।

सन् 1930 में प्रसिद्ध क्रान्तिकारी सरदार भगत सिंह को जेल से छुड़ा लाने की योजना बनाने वालों में आप भी शामिल थे। 15 नवम्बर, सन् 1930 को इन्हें अपने कई साथियों के साथ बन्दी बना लिया गया। सन् 1936 तक इन पर कई मुकद्दमे चलाये गये। जेल में ही इन्होंने लिखना आरम्भ किया।

जेल से छूटने के बाद जीविकोपार्जन के लिए ‘सैनिक’ और ‘विशाल भारत’ नामक पत्रों का संपादन भार सम्भाला। सन् 1939 में आल इंडिया रेडियो में नौकरी की। सन् 1943 में सेना में भर्ती हो गए। सन् 1946 में सेना से त्यागपत्र दे दिया। सन् 1947 में ‘प्रतीक’ नामक पत्रिका का प्रकाशन शुरू किया। सन् 1950 में पुन: रेडियो में नौकरी कर ली। सन् 1961 में केलिफोर्निया विश्वविद्यालय में अध्यापक नियुक्त हुए। सन् 1965 में ‘दिनमान’ साप्ताहिक के सम्पादक नियुक्त हुए। दिल्ली में नव भारत टाइम्स के सम्पादक भी रहे। सन् 1980 के बाद सब पद छोड़कर स्वतन्त्र रूप से लेखन कार्य में जुट गए। सन् 1964 में इनकी काव्यकृति ‘आँगन के पार द्वार’ पर साहित्य अकादमी पुरस्कार दिया गया तथा सन् 1978 में ‘कितनी नावों में कितनी बार’ पर भारतीय ज्ञान पीठ पुरस्कार दिया गया। 4 अप्रैल, 1987 को अज्ञेय जी का निधन हो गया।

रचनाएँ-अज्ञेय जी ने कविता के अतिरिक्त उपन्यास, कहानियाँ, निबन्ध, यात्रा वृत्तान्त आदि लिखे। यहाँ हम उनकी प्रमुख काव्य कृतियों के नाम लिख रहे हैं
अज्ञेय जी ने लगभग 14 काव्य कृतियों की रचना की हैं। इनमें प्रमुख हैं-

  1. भग्नदूत
  2. चिन्ता
  3. इत्यलम
  4. हरी घास पर क्षण भर
  5. बावरा अहेरी
  6. इन्द्रधनुष रौंदे हुए
  7. आँगन के पार द्वार
  8. कितनी नावों में कितनी बार
  9. पहले मैं सन्नाटा बुनता हूँ।

प्रश्न 2.
अज्ञेय जी के काव्य की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
अज्ञेय जी ने सन् 1943 में ‘तार सप्तक’ का प्रकाशन करके उन्होंने प्रयोगधर्मी कवियों को एक सूत्र में बाँधने का प्रयत्न किया। इनके काव्य में निम्नलिखित विशेषताएँ पाई जाती हैं-
1. प्रणयानुभूति-अज्ञेय जी के साहित्य जगत में प्रवेश के समय छायावाद और प्रगतिवाद आमने-सामने थे। अज्ञेय जी ने बीच का रास्ता अपनाया। उनकी प्रणयानुभूति का जन्म इसी आधार पर हुआ। चिन्ता (1942) में उनके मन पर छायावादी संस्कारों की छाप ‘इत्यलम’ (1946) में ‘हियहारिल’ प्रणयानुभूति का प्रतीक है। ‘हरी घास पर क्षण भर’ (1949) तक पहुँचते-पहुँचते कवि की प्रणय भावना में परिष्कार आ जाता है। किन्तु उसके प्रेम में नगरीय बोध की जटिलताओं के सामने तीव्रता नहीं आ पाती।

2. वैयक्तिता और सामाजिकता-अज्ञेय की कविता में व्यक्ति की अद्वितीयता और अप्रतिमता का बार-बार बखान हुआ है। ‘नदी के द्वीप’ कविता में कवि ने स्वीकार किया है कि व्यक्तित्व की सुरक्षा द्वीप की सुरक्षा की तरह आवश्यक है। किन्तु आगे चलकर यह वैयक्तिता स्पष्ट ही समाज की पंक्ति में मिल गई है। यह दीप अकेला’ कविता ‘नदी के द्वीप’ के एकांतिक व्यक्तिवाद की क्षतिपूर्ति करती है, इस अर्थ में यह सृजक व्यक्ति की समाज के प्रति समर्पित होने की इच्छा को व्यक्त करती है। स्पष्ट है कि अज्ञेय जी की कविताओं में सामाजिकता का स्वर मुखरित है किन्तु उसमें उनकी वैयक्तिता का भी समावेश है।

3. वेदनानुभूति-अज्ञेय जी का काव्य प्रणय, सौन्दर्य और मानवावस्था का काव्य है। वे प्रणय के धरातल से वेदना की ओर आए हैं। वेदना में अज्ञेय जी बड़ी शक्ति मानते हैं। अज्ञेय जी की अनेक कविताओं में वेदना की झलक देखने को मिलती है। हरी घास पर क्षण भर’, ‘अरी ओ करुणा प्रभामय’ तथा ‘क्योंकि मैं उसे जानता हूँ’ की अनेक कविताएँ दर्द की दीप्ति को दर्शाती हैं।

4. सौन्दर्यानुभूति-अज्ञेय जी के काव्य में सौन्दर्यानुभूति सूक्ष्म और कलात्मक है। प्रेम पूरित भावों की अभिव्यंजना में कवि का सौन्दर्य बोध भी स्पष्ट होता गया है। अज्ञेय जी का सौन्दर्य बोध अधिकतर प्रकृति चित्रण में निखरा है। ‘बावरा अहेरी’ की अनेक कविताओं में कवि ने प्रकृति के सहारे अपनी भोगातुरता भी प्रकट की है।

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8. धर्मवीर भारती (सन् 1926-1997 ई०)

प्रश्न 1.
श्री धर्मवीर भारती का संक्षिप्त जीवन परिचय देते हुए उनकी काव्य-कृतियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
धर्मवीर भारती जी का जन्म 25 दिसम्बर, 1926 ई० को इलाहाबाद में हुआ। इनके पिता श्री चिरंजीव वर्मा अपने पुश्तैनी गाँव शाहपुर के निकट खुदागंज को छोड़ कर स्थायी रूप से इलाहाबाद में बस गए थे। भारती जी की आरम्भिक शिक्षा घर पर ही हुई। इलाहाबाद के डी० ए० वी० स्कूल में पहली बार चौथी कक्षा में इनका नाम लिखवाया गया। सन् 1945 में इन्होंने प्रयाग विश्वविद्यालय से बी० ए० तथा सन् 1947 में एम० ए० किया। तत्पश्चात् डॉ० धीरेन्द्र वर्मा के निर्देशन में ‘सिद्ध साहित्य’ पर शोध प्रबन्ध लिखकर पीएच० डी० की डिग्री प्राप्त की।

भारती जी को जीविकोपार्जन के लिए अनेक संकटों का सामना करना पड़ा। छात्र जीवन से ही इन्हें ट्यूशन करके आत्मनिर्भर होना पड़ा। सन् 1948 में एम० एम० करने के बाद इलाचन्द्र जोशी द्वारा संपादित पत्रिका ‘संगम’ के सहकारी संपादक पद पर नियुक्त हुए। दो वर्ष बाद इन्होंने हिन्दुस्तानी अकादमी में उपसचिव का कार्य किया। तदुपरान्त इनकी नियुक्ति प्रयाग विश्वविद्यालय में हिन्दी-विभाग में अध्यापक के रूप में हुई। सन् 1960 तक इन्होंने वहीं काम किया। सन् 1960 में भारती जी ‘धर्मयुग’ साप्ताहिक के सम्पादक के रूप में मुम्बई आ गए। 1987 में इन्होंने अवकाश ग्रहण किया। सन् 1989 में यह हृदय रोग से गम्भीर रूप से बीमार हो गए। लम्बी बीमारी के बाद 4 सितम्बर, 1997 को नींद में ही इनकी मृत्यु हो गई।

सन् 1972 में भारत सरकार ने इन्हें ‘पद्मश्री’ की उपाधि प्रदान की। इन्होंने प्रयाग में अध्यापन के दौरान ‘हिन्दी साहित्य कोश’ के सम्पादन में डॉ० धीरेन्द्र वर्मा को भरपूर योगदान दिया। सन् 1971 में ये बंगलादेश के युद्ध में भारतीय सेना के साथ एक पत्रकार के रूप में गए और वापस आकर उच्चकोटि के संस्मरण लिखे।

रचनाएँ-भारती जी ने उपन्यास, एकांकी, कहानी, निबन्ध, विधा में अनेक रचनाएँ लिखीं। उनकी प्रमुख काव्यकृतियाँ निम्नलिखित हैं-

  1. ठण्डा लोहा
  2. सात गीत वर्ष
  3. कनुप्रिया (प्रबन्ध काव्य)
  4. सपना अभी भी
  5. आद्यान्त।

इनके अतिरिक्त ‘तारसप्तक’ में भी इनकी कविताएँ प्रकाशित हो चुकी हैं।

प्रश्न 2.
धर्मवीर भारती के काव्य की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
यद्यपि भारती जी की लेखनी अनेक विधाओं पर चली है, किन्तु वे मूलत: कवि हैं। इनकी आरम्भिक कविताएँ छायावादी रंग लिए हुए हैं किन्तु इनकी ख्याति एक प्रयोगवादी कवि के रूप में हुई है। भारती जी के काव्य की निम्नलिखित प्रमुख विशेषताएँ हैं-
1. रोमानी भावबोध-भारती जी मूलतः प्रेम और सौन्दर्य के कवि हैं। उनका प्रारम्भिक काव्य रोमानी भाव बोध का काव्य है जिसमें मुख्य रूप से प्रेम और मानवीय सौन्दर्य का ही निरूपण हुआ है। दूसरा सप्तक’ की कविताएँ उन्मुक्त रूपोपासना और उद्दाम यौवन की मांसलता की भावना से युक्त है। ‘गुनाह का गीत’ और ‘गुनाह का दूसरा गीत’ नामक कविताएँ उनके प्रेम की कुण्ठित भावना की अभिव्यक्ति करती हैं। भारती जी की प्रेम सम्बन्धी कविताओं में श्रृंगार के संयोग और वियोग दोनों ही पक्ष मिलते हैं। ‘कनुप्रिया’ और ‘डोले का गीत’ में वियोगानुभूति का ईमानदारी से चित्रण हुआ है।

2. सौन्दर्यानुभूति-प्रणय के अतिरिक्त भारती जी के काव्य की दूसरी विशेषता सौन्दर्यानुभूति से सम्बन्धित है। इनकी कल्पना सौन्दर्य की उपासिका है। इनके सौन्दर्य वर्णन में कहीं तो सौन्दर्य का स्वतन्त्र वर्णन मिलता है और कहीं नारी के माध्यम से सौन्दर्य चित्रित किया गया है। प्रकृति को भी उन्होंने रोमानी दृष्टि से देखा है। घाटी के बादल’, ‘नवम्बर की दोपहर’, ‘पावस गीत’ तथा ‘सांझ का बादल’ शीर्षक कविताओं में भारती जी प्रकृति को उद्दीपन और अलंकारिक रूप में चित्रित करने में सफल रहे हैं।

3. अनास्था और निराशा के स्वर-भारती जी की कविताओं में अनास्था और निराशा के स्वर अनेक स्थलों पर देखने को मिलते हैं। ‘जाड़े की शाम’ कविता इस सन्दर्भ में देखी जा सकती है। ‘अन्धा युग’ और ‘पराजित पीढ़ी का गीत’ शीर्षक कविताओं में मानव मूल्यों के विघटन का अत्यन्त मार्मिक चित्र अंकित किया गया है। ‘घाटी का बादल’ कविता में कवि की निराशा की झलक देखने को मिलती है।

4. आस्था और सृजन का स्वर-भारती जी का मानना है कि आधुनिक यांत्रिक सभ्यता कविता का हनन कर देगी। वे इस सम्भावना के विरुद्ध तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं। उनका मानना है कि भूख और ग़रीबी की हालत में भी आम आदमी की सृजनात्मक शक्ति समाप्त नहीं होती। ‘टूटा पहिया’ शीर्षक कविता में कवि ने लघु और उपेक्षित मानव की क्षमताओं और संघर्षों से जूझने की शक्ति के प्रति आस्था प्रकट की है। ऐसी ही आस्था ‘थके हुए कलाकार’ में भी देखने को मिलती है। ‘फूल मोमबत्तियाँ और टूटे सपने’, ‘डोले का गीत’ और ‘फागुन की शाम’ शीर्षक कविताएं भी कवि की आस्था को प्रकट करती हैं।

9. गजानन माधव मुक्तिबोध (सन् 1917-1964 ई०)

प्रश्न 1.
श्री मुक्तिबोध का संक्षिप्त जीवन परिचय देते हुए उनकी कृतियों का भी उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
सामाजिक प्रतिबद्धता के कवि गजानन माधव मुक्ति बोध का जन्म 13 नवम्बर, सन् 1917 ई० को मध्य प्रदेश के एक छोटे से कस्बे श्योपुर, जिला मुरैना, ग्वालियर में हुआ। इनके पिता माधवराव ग्वालियर रियासत में एक थानेदार थे। इन्होंने सन् 1938 में होल्कर कॉलेज, इन्दौर से बी० ए० पास की और लगभग 16 वर्ष बाद सन् 1954 में नागपुर विश्वविद्यालय से एम० ए० की परीक्षा पास की। जीविका चलाने के लिए उन्होंने कई पापड़ बेले। सन् 1942 में मुक्तिबोध उज्जैन आ गए। वहाँ ये तीन वर्ष तक रहे। इसी बीच उन्होंने ‘मध्यभारत प्रगतिशील लेखक संघ’ की स्थापना की। सन् 1945 में ‘हंस’ के संपादकीय विभाग में शामिल होने के कारण बनारस आ गए। 1946-47 में जबलपुर और 1948 में नागपुर चले गए। नागपुर से प्रकाशित होने वाले पत्र ‘नया खून’ का संपादन भी किया। सन् 1958 में इन्हें दिग्विजय कॉलेज राजनंद गाँव में लैक्चरशिप मिल गई। जीवन के अन्त तक वे अध्यापन कार्य ही करते रहे।

नई कविता का यह जीवट कवि अन्ततः जीवन संघर्षों और पीड़ाओं से 11 सितम्बर, 1964 ई० को मुक्त हो गया।

रचनाएँ-मुक्तिबोध की कविताएँ अज्ञेय जी ने ‘तार सप्तक’ में शामिल कर इनकी काव्य प्रतिभा और प्रखरता को पहचाना था। किन्तु उनके जीवनकाल में उनका कोई भी काव्य संग्रह प्रकाशित न हो सका। मृत्यु के पश्चात् इनके दो काव्य संग्रह प्रकाशित हुए-
1. चाँद का मुँह टेढ़ा है तथा
2. भूरी-भूरी खाक धूल।
कहानी संग्रह-काठ का सपना, सतह से उठता आदमी।
लघु उपन्यास-विपात्र।
आलोचनात्मक कृतियाँ-कामायनी : एक पुनर्विचार, नई कविता का आत्म संघर्ष, नए साहित्य का सौन्दर्य शास्त्र, एक साहित्यिक की डायरी।
इन्होंने भारत इतिहास और संस्कृति नामक कृति की रचना भी की।

प्रश्न 18.
मुक्तिबोध के काव्य की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
नयी कविता के कवियों में सर्वाधिक प्राणवान एवं सशक्त हस्ताक्षर मुक्तिबोध हैं। एक संघर्षशील कवि के रूप में अभिव्यक्ति के खतरे उठाने वाले मुक्तिबोध निर्भीक, निष्ठावान, समर्पित एवं विचारशील कवि के रूप में उभर कर सामने आते हैं। इनके काव्य की निम्नलिखित विशेषताएँ देखने में आती हैं-
1. व्यक्तिपरकता-मुक्तिबोध की तार सप्तक की कविताओं में व्यक्तिपरकता का स्वर मुखरित हुआ है। इसी प्रवृत्ति के कारण उनकी कुछ कविताओं में नैराश्च, कुंठा, घनीभूत अवसाद आदि के चित्र देखने को मिलते हैं। उनकी ‘ब्रह्म राक्षस’ शीर्षक कविता इसका उदाहरण है।

2. सामाजिक जीवन की व्याख्या-मुक्तिबोध का काव्य हर दृष्टि से समाज से जुड़ा हुआ है। मुक्तिबोध ने अपने युग की मानव की पीड़ाओं, असमर्थताओं और विडम्बनाओं को देखा भी और भोगा भी था। इसी कारण वे जन समाज को सुखी और खुशहाल देखना चाहते थे। चम्बल की घाटियाँ, चाँद का मुँह टेढ़ा है, ब्रह्म राक्षस, स्वप्न कथा, मेरे लोग तथा चकमक की चिंगारियाँ आदि कितनी ही कविताओं में ऐसे भाव देखने को मिलते हैं।

3. वर्गहीन समाज की स्थापना की इच्छा-मुक्तिबोध ऐसे वर्गहीन समाज की स्थापना करना चाहते हैं जो शोषण रहित हो। इसके लिए कवि चाहते हैं कि स्वार्थ, संकीर्णता और भौतिक सुख-सुविधाओं के मलबे को हटाना होगा। ‘चाँद का मुँह टेढ़ा है’ कविता इसका उदाहरण है।

4. मार्क्सवाद का प्रभाव-हिन्दी साहित्य में मार्क्सवाद प्रगतिवाद के रूप में आया। मुक्तिबोध भी इससे प्रभावित हुए। अन्य प्रगतिवादी कवियों की तरह वे भी क्रान्ति का आह्वान करते हैं। यही कारण है कि वे ‘नाश देवता’ की स्तुति करते हैं। कवि का विश्वास है कि बिना संहार हुए सृजन असंभव है। ‘चकमक की चिंगारियाँ’ और ‘कल जो हम ने चर्चा की थी’ कविताएँ उदाहरण स्वरूप देखी जा सकती हैं।

5. सत्-चित वेदना-मुक्तिबोध का काव्य सत्-चित वेदना का काव्य है। मुक्तिबोध ने जीवन में अनेक प्रकार के दुःख, कष्ट तथा अभाव देखे थे, अतः उनके काव्य में इनकी छाप मिलना स्वाभाविक ही है। मुक्तिबोध के काव्य में वेदना दो रूपों में देखने को मिलती है। पहले प्रकृति में आरोपित होने के कारण दूसरे यथार्थ अथवा स्थूल रूप में।

10. सुदामा पाण्डेय ‘धूमिल’ (सन् 1936-1975 ई०)

प्रश्न 1.
सुदामा पाण्डेय धूमिल का संक्षिप्त जीवन परिचय देते हुए उनकी काव्य कृतियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
ग्रामीण संस्कार के सशक्त कवि सुदामा पाण्डेय ‘धूमिल’ का जन्म 9 नवम्बर, सन् 1936 को वाराणसी से बारह किलोमीटर दूर गाँव खेवली में हुआ। परिवार के ज्येष्ठ पुत्र होने के नाते पिता की मृत्यु के बाद संयुक्त परिवार को चलाने की सारी ज़िम्मेदारी इनके कंधों पर आ पड़ी। जैसे तैसे सन् 1953 ई० में पन्द्रह वर्ष की अवस्था में हरहुआ के कुर्मी क्षत्रिय इंटर मीडियट कॉलेज से मैट्रिक की। मैट्रिक के बाद हरिश्चन्द्र इंटर कॉलेज में प्रवेश लिया किन्तु पारिवारिक समस्याओं के कारण पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी।

तेरह वर्ष की अवस्था में ही इनका विवाह मूरता देवी से हो चुका था। पितामह, पिता और चाचा की असामयिक मृत्यु से घर का आर्थिक ढाँचा पहले ही चरमरा चुका था। नौकरी की खोज में इन्हें कलकत्ता जाना पड़ा वहाँ इन्होंने लोहा ढोने की मजदूरी का काम किया। फिर लकड़ी काटने वाली कम्पनी में काम मिला किन्तु ‘स्वाभिमानी धूमिल’ ने यह नौकरी छोड़ दी। तत्पश्चात् सन् 1957 ई० में आई० टी० आई० बनारस से प्रथम श्रेणी में विद्युत् डिप्लोमा पास करके विद्युत् विभाग में अनुदेशिक पद पर कार्य किया। अक्खड़ स्वभाव और सच्ची बात कहने की आदत के कारण इन्हें अपने अफसरों के कोप का भाजन बनना पड़ा। इनका बार-बार तबादला होता रहा। जमीन के मुकद्दमों से परेशान 1974 में धूमिल को गाँव में रहना आवश्यक था।

उन्होंने नौकरी छोड़ दी और स्वतन्त्र रूप से साहित्य सेवा करने की ठानी। अनेक अनियमताओं, अव्यवस्थाओं के कारण इन्होंने कई रोग भी पाल रखे थे। परिणामस्वरूप 10 फरवरी, 1975 को लखनऊ के एक अस्पताल में ‘ब्रेन ट्यूमर’ के कारण इनकी मृत्यु हो गई।

रचनाएँ-धूमिल के गीतों का एक संकलन ‘बाँसुरी जल गई’ शीर्षक से 1961 में प्रकाशित हुआ। (जो अब अप्राप्य है) सन् 1972 में इनका सुप्रसिद्ध काव्य संग्रह–’संसद् से सड़क तक’ प्रकाशित हुआ। उनकी मृत्यु के बाद 1977 में कल सुनना मुझे’ तथा 1984 में ‘सुदामा पाण्डेय का प्रजातन्त्र’ प्रकाशित हुए।

प्रश्न 2.
‘धूमिल’ के काव्य की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर;
सुदामा पाण्डेय ‘धूमिल’ का काव्य-संसार एक भावुक, संवेदनशील एवं विचारवान व्यक्ति की सामाजिक परिवेश के प्रति तीव्र प्रतिक्रियाओं का सूचक है। धूमिल की कविता में साठोत्तरी हिन्दी कविता का हर स्वर विद्यमान है। कहीं पर अकविता की सी जुमलेबाज़ी और निरर्थक प्रलाप है तो कहीं पर प्रगतिशील चेतना से सम्पन्न जनवादी समझ है। कहीं पर भूखी पीढ़ी का आक्रोश है तो कहीं पर शक्तिशाली सार्थक वक्तृत्वकला भी। धूमिल की कविता में निम्नलिखित विशेषताएँ देखने को मिलती हैं-
1. समसामयिक जीवन का दर्पण-धूमिल की कविता कल्पना जीवी नहीं है और वह अपना भोजन सीधे जीवन के मधुर-तिक्त अनुभवों से प्राप्त करती है। धूमिल की कविता भय, भूख, अकाल, सत्ता लोलुपता, अकर्मण्यता और अंतहीन भटकाव को रेखांकित करती है। उन्होंने ‘संसद् से सड़क तक’ की अनेक कविताओं में आजादी के बाद बढ़ रही सामाजिक विषमता, हिंसक घटनाओं का उल्लेख किया है।

2. कुरूपताएं बेनकाब-धूमिल ने शोषण की समग्र प्रक्रिया और सामाजिक विसंगतियों को बेनकाब कर दिया है। उनके काव्य में जनतंत्र के खोखलेपन को भी बेनकाब किया है। कवि कहते हैं कि क्या आजादी सिर्फ तीन रंगों का नाम है जिन्हें एक पहिया ढोता है। कवि का मानना है कि आजाद भारत में जिन्दा रहने के लिए पालतू होना बहुत ज़रूरी है तथा चरित्रहीनता मंत्रियों की कुर्सियों में तबदील हो चुकी है।

3. व्यंग्य का स्वर-धूमिल की कविता में व्यंग्य का स्वर अधिक तीव्र हो उठा है। नेता वर्ग पर, देश की शोषक परक अर्थव्यवस्था पर तथा देश की विडम्बनात्मक स्थितियों पर अनेक व्यंग्य किये हैं।

4. गाँव की पीड़ा को मुखरित करती कविता-धूमिल की कविता ग्रामीण जीवन की समस्याओं, मुकद्दमेबाज़ी, पारिवारिक असंगतियों, अंध-विश्वासों का दंश झेलते हुए लोगों की कविता है। वे कहते हैं मेरे गाँव में/वही आलस्य, वही ऊब/वही कलह, वही तटस्थता/हर जगह हर रोज। धूमिल के अनुसार गाँव की दुर्दशा का मूल कारण अशिक्षा है। उनके अनुसार गाँव का आदमी कायर नहीं है और न ही आत्म केन्द्रित है, वह दलित, निर्धन और अशिक्षित है। इसलिए वे गाँववासी को कहते हैं-संसद् जाम करने से बेहतर है, सड़क जाम करो।

वस्तुनिष्ठ/अति लघु प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
प्रथम स्वतंत्रता संग्राम कब हुआ?
उत्तर:
सन् 1857 में।

प्रश्न 2.
सन् 1857 की जनक्रान्ति के असफल होने का क्या परिणाम निकला ?
उत्तर:
सन् 1857 की जनक्रान्ति की असफलता के बाद मुग़ल साम्राज्य का अन्त हो गया तथा कम्पनी शासन विक्टोरिया शासन में बदल गया।

प्रश्न 3.
इंडियन नैशनल कांग्रेस की स्थापना कब हुई?
उत्तर:
इंडियन नैशनल कांग्रेस की स्थापना सन् 1885 में हुई।

प्रश्न 4.
जलियांवाले बाग का नरसंहार कब हुआ?
उत्तर:
जलियांवाले बाग का नरसंहार 13 अप्रैल, सन् 1919 ई० के वैसाखी वाले दिन हुआ।

प्रश्न 5.
हिन्दी साहित्य के आधुनिक काल का आरम्भ कब से हुआ?
उत्तर:
सन् 1843 ई० से।

प्रश्न 6.
आधुनिक काल की शुरुआत किस कवि से मानी जाती है?
उत्तर:
भारतेन्दु हरिश्चन्द्र।

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प्रश्न 7.
छायावाद के प्रवर्तक कौन माने जाते हैं ?
उत्तर:
जयशंकर प्रसाद।

प्रश्न 8.
‘निज भाषा उन्नति अहै सब उन्नति को मूल’ पंक्ति किस कवि की लिखी हुई है?
उत्तर:
भारतेन्दु हरिश्चन्द्र।

प्रश्न 9.
द्विवेदी युग में किस बोली की प्रतिष्ठा हुई?
उत्तर:
खड़ी बोली।

प्रश्न 10.
अंग्रेज़ी शासन में भारतीय समाज में किन बातों की वृद्धि हुई?
उत्तर:
अंग्रेज़ी शासन में भारतीय समाज में जातिवाद, धार्मिक पाखंड तथा अन्धविश्वास बढने लगे।

प्रश्न 11.
आधुनिक काल के आरम्भ में कौन-कौन से आन्दोलन चले?
उत्तर:
आधुनिक काल के आरम्भ में आर्य समाज, ब्रह्म समाज तथा महाराष्ट्र समाज के आन्दोलन चले।

प्रश्न 12.
आधुनिक काल के आरम्भ में चलाए गए आन्दोलनों का उद्देश्य क्या था?
उत्तर:
आधुनिक काल में चलाए गए इन आन्दोलनों का उद्देश्य मुख्यतः बाल-विवाह, सती प्रथा एवं दहेज प्रथा का डट कर विरोध करना था तथा विधवा विवाह का समर्थन करना था।

प्रश्न 13.
ब्रह्म समाज का प्रवर्तक कौन था? इस समाज का क्या उद्देश्य था?
उत्तर:
ब्रह्म समाज के प्रवर्तक राजा राममोहन राय थे। इस समाज का उद्देश्य समाज की कमियों, संकीर्णताओं और रूढ़ियों को समाप्त करना था।

प्रश्न 14.
महाराष्ट्र समाज के नेता कौन थे ? इस समाज का उद्देश्य क्या था?
उत्तर:
महाराष्ट्र समाज का गठन महादेव गोबिन्द राणा डे के नेतृत्व में हुआ। इस समाज का उद्देश्य सामाजिक सुधार एवं भारतीय संस्कृति के प्रति अनुराग पैदा करना था।

प्रश्न 15.
आर्य समाज की स्थापना कब हुई?
उत्तर:
सन् 1886 ई० में।

प्रश्न 16.
आर्य समाज के संस्थापक या प्रवर्तक कौन थे? इस समाज का उद्देश्य क्या था?
उत्तर:
स्वामी दयानन्द सरस्वती आर्य समाज के संस्थापक थे। इस समाज का मुख्य उद्देश्य शिक्षा का प्रसार करना, नारी जाति के प्रति समादर की भावना जताना, छुआछूत को दूर करना तथा प्राचीन संस्कृति के पुनरुत्थान का प्रयत्न करना था।

प्रश्न 17.
स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात् भारतीय समाज में मुख्य परिवर्तन कौन-से हुए?
उत्तर:
स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात् औद्योगिकीकरण के परिणामस्वरूप रोज़गार के साधन बढ़े, शिक्षा का प्रसार हुआ, नारी को समान अधिकार दिए गए। दलित और पिछड़े समाज के लोगों के उत्थान के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई।

प्रश्न 18.
शिक्षा के प्रसार के क्या परिणाम हुए?
उत्तर:
शिक्षा के प्रसार के कारण भारतीयों में देश-प्रेम और राष्ट्रीय चेतना का उदय हुआ।

प्रश्न 19.
अंग्रेजों ने भारत का आर्थिक शोषण कैसे किया?
उत्तर:
अंग्रेज़ों ने भारत से कच्चा और सस्ता माल ले जाकर उसे अपने कल कारखानों में तैयार करके महंगे दामों पर भारत में बेचकर भारत का आर्थिक शोषण किया।

प्रश्न 20.
अंग्रेजों ने अपने आर्थिक हितों की रक्षा के लिए कौन-से कार्य किए?
उत्तर:
अंग्रेजों ने अपने आर्थिक हितों की रक्षा के लिए रेल, डाक, तार का प्रचलन शुरू किया।

प्रश्न 21.
स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात् देश के विकास के लिए क्या उपाय किए गए?
उत्तर:
देश के विकास के लिए बड़े-बड़े उद्योग स्थापित किए गए तथा पंचवर्षीय योजनाएँ बनाई गईं।

प्रश्न 22.
प्रथम महायुद्ध कब हुआ था?
उत्तर:
सन् 1914 में।

प्रश्न 23.
बंगाल का विभाजन कब हआ?
उत्तर:
सन् 1905 ई० में।

हिन्दी कविता का विकास : भारतेन्दु युग

प्रश्न 1.
भारतेन्दु युगीन कविता की किन्हीं दो प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
भारतेन्दु युगीन कविता में राजभक्ति और देशभक्ति तथा सामाजिक कुप्रथाओं का विरोध देखने को मिलता

प्रश्न 2.
भारतेन्दु जी की उन दो रचनाओं का उल्लेख कीजिए जिनमें श्रृंगार भावना का चित्रण हुआ है?
उत्तर:
(1) प्रेम सरोवर (2) प्रेम माधुरी।

प्रश्न 3.
भारतेन्दु जी की किन्हीं दो हास्य व्यंग्यात्मक कविताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:

  1. बंदर सभा
  2. उर्दू का स्यापा।

प्रश्न 4.
भारतेन्दु युग के किन्हीं चार कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर:
भारतेन्दु जी के समकालीन कवियों में प्रेमघन, प्रताप नारायण मिश्र, राधाचरण गोस्वामी तथा श्रीनिवास दास के नाम उल्लेखनीय हैं।

प्रश्न 5.
भारतेन्दु युगीन किसी कवि का नाम लिखिए।
उत्तर:
प्रताप नारायण मिश्र।

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प्रश्न 6.
भारतेन्दु जी का पूरा नाम क्या था?
उत्तर:
भारतेन्दु हरिश्चन्द्र।

द्विवेदी युग प्रश्न

प्रश्न 1.
आधुनिक काल में जिसके नाम पर द्विवेदी युग पड़ा, उसका पूरा नाम बताइए।
उत्तर:
आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी।

प्रश्न 2.
द्विवेदी युग की प्रमुख पत्रिका ‘सरस्वती’ के सन्यादक कौन थे?
उत्तर:
महावीर प्रसाद द्विवेदी।

प्रश्न 3.
द्विवेदी युगीन कविता की सबसे बड़ी विशेषता क्या है?
उत्तर:
द्विवेदी युगीन कविता की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस युग में खड़ी बोली की प्रतिष्ठा की गई।

प्रश्न 4.
द्विवेदी युगीन कविता की कोई दो विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:

  1. राष्ट्रीय भावना
  2. समाज सुधार की भावना और रूढ़ियों का विरोध।

प्रश्न 5.
प्रिय प्रवास किसकी रचना है?
उत्तर:
अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध द्वारा रचित महाकाव्य है।

प्रश्न 6.
द्विवेदी युग में लिखे गए किन्हीं दो खंडकाव्यों के नाम लिखिए।
उत्तर:
गुप्त जी द्वारा ‘जय द्रथ वध’ तथा ‘पंचवटी’ द्विवेदी युग में लिखे गए खंडकाव्य हैं।

प्रश्न 7.
द्विवेदी युग के किन्हीं चार कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर:
द्विवेदी युग के प्रमुख कवियों में श्रीधर पाठक, महावीर प्रसाद द्विवेदी, अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ तथा मैथिलीशरण गुप्त के नाम उल्लेखनीय हैं।

प्रश्न 8.
मैथिलीशरण गुप्त की किसी एक रचना का नाम लिखिए।
उत्तर:
साकेत।

छायावाद

प्रश्न 1.
प्रमुख छायावादी कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर:
श्री जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानन्दन पन्त, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ तथा श्रीमती महादेवी वर्मा छायावाद के प्रमुख कवि हैं।

प्रश्न 2.
छायावाद के किसी एक कवि का नाम बताइए।
उत्तर:
जयशंकर प्रसाद।।

प्रश्न 3.
छायावादी काव्य की किन्हीं दो विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
प्रकृति चित्रण-शृंगारिकता तथा राष्ट्रीय भावना छायावादी कविता की प्रमुख विशेषताएँ हैं।

प्रश्न 4.
जयशंकर प्रसाद का जन्म कब और कहाँ हुआ?
उत्तर:
जन्म सन् 1889 को काशी में हुआ।

प्रश्न 5.
कवि प्रसाद का पूरा नाम बताइए।
उत्तर:
जयशंकर प्रसाद।

प्रश्न 6.
कवि निराला का पूरा नाम बताएं।
उत्तर:
सूर्यकांत त्रिपाठी निराला।

प्रश्न 7.
कवि पंत का पूरा नाम बताएँ।
उत्तर:
सुमित्रानंदन पंत।

प्रगतिवाद

प्रश्न 1.
प्रगतिवाद का उदय कब हुआ?
उत्तर:
प्रगतिवाद का उदय सन् 1936 में प्रेमचन्द की अध्यक्षता में हुए प्रगतिशील लेखक संघ के पहले अधिवेशन से माना जाता है।

प्रश्न 2.
प्रगतिवादी काव्य की प्रमुख प्रवृत्तियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
प्राचीन रूढ़ियों और शोषित वर्ग की दीनता का चित्रण।

प्रश्न 3.
प्रमुख प्रगतिवादी कवियों में से किन्हीं चार के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. सुमित्रानन्दन पंत
  2. नरेन्द्र शर्मा
  3. नागार्जुन
  4. केदार नाथ अग्रवाल।

प्रश्न 4.
प्रगतिवादी कवियों में से आपको किस कवि की रचनाएँ अच्छी लगी? उस कवि का नाम लिखिए।
उत्तर:
सुमित्रानंदन पंत।

प्रश्न 5.
पंत जी का पूरा नाम क्या है?
उत्तर:
सुमित्रानंदन पंत।

प्रश्न 6.
प्रगतिवाद काव्यधारा के किसी एक कवि का नाम लिखिए।
उत्तर:
नागार्जुन।

प्रश्न 7.
‘सुमित्रानंदन पंत’ को किस रचना के लिए भारत सरकार का सबसे बड़ा पुरस्कार ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला?
उत्तर:
चिदम्बरा।

प्रयोगवाद

प्रश्न 1.
प्रयोगवादी कविता का आविर्भाव कब से माना जाता है ?
उत्तर:
प्रयोगवादी कविता का आविर्भाव सन् 1943 ई० में अज्ञेय जी द्वारा संपादित और प्रकाशित ‘तार सप्तक’ से माना। जाता है।

प्रश्न 2.
प्रयोगवादी काव्य की किन्हीं दो विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:

  1. वर्गभेद और वर्ग संघर्ष के चित्र।
  2. मध्यवर्गीय व्यक्ति की कुंठा।

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प्रश्न 3.
किन्हीं चार प्रयोगवादी कवियों के नाम लिखिए।।
उत्तर:

  1. अज्ञेय
  2. मुक्तिबोध
  3. राम विलास शर्मा
  4. भवानी प्रसाद मिश्र।

प्रश्न 4.
प्रयोगवाद के रूढ़ रूप को क्या कहा जाता है? इस वाद के प्रवर्तक कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर:
प्रयोगवाद के रूढ़ रूप को नकेनवाद कहा जाता है। इस वाद के प्रवर्तक कवियों में नलिन विलोचन शर्मा, केसरी कुमार तथा नरेश हैं।

प्रश्न 5.
‘साँप’ किस कवि की रचना है ?
उत्तर:
अज्ञेय।

प्रश्न 6.
हरिवंश राय बच्चन का जन्म कब हुआ ?
उत्तर:
सन् 1907 ई० में।

प्रश्न 7.
कवि अज्ञेय का पूरा नाम बताइए।
उत्तर:
सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय।

प्रश्न 8.
किसी एक प्रयोगवादी कवि का नाम बताइए।
उत्तर:
अज्ञेय।

प्रश्न 9.
कवि ‘बच्चन’ का पूरा नाम लिखिए।
उत्तर:
हरिवंश राय बच्चन।

प्रश्न 10.
किसी एक प्रयोगवादी कवि का नाम लिखिए। . .
उत्तर:
अज्ञेय।

नई कविता

प्रश्न 1.
नई कविता का आरम्भ कब से माना जाता है?
उत्तर:
नई कविता का आरम्भ सन् 1954 में अज्ञेय जी की काव्यकृति ‘आँगन के पार द्वार’ से माना जाता है।

प्रश्न 2.
नई कविता की किन्हीं दो विशेषताओं का नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. जीवन के प्रति अगाध आस्था
  2. व्यंग्य का स्तर।

प्रश्न 3.
नई कविता काव्यधारा के किन्हीं चार कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. मुक्तिबोध
  2. धर्मवीर भारती
  3. रघुवीर सहाय
  4. केदार नाथ सिंह।

प्रश्न 4.
‘आदमी का अनुपात’ कविता किस कवि की रचना है ?
उत्तर:
गिरिजा कुमार माथुर।

बोर्ड परीक्षा में पूछे गए प्रश्न

प्रश्न 1.
‘क्या निराश हुआ जाए’ निबन्ध के लेखक कौन हैं ?
उत्तर:
डॉ० हजारी प्रसाद द्विवेदी।

प्रश्न 2.
डॉ० संसारचन्द्र की किसी एक रचना का नाम लिखें।
उत्तर:
शार्ट कट सब ओर।

प्रश्न 3.
‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी के रचनाकार का नाम बताएँ।
उत्तर:
जगदीश चन्द्र माथुर

प्रश्न 4.
‘अंधेरे का दीपक’ कविता के कवि का नाम लिखिए।
उत्तर:
हरिवंश राय बच्चन’।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
प्रथम स्वतंत्रता संग्राम कब हुआ?
(क) 1857 में
(ख) 1947 में
(ग) 1850 में
(घ) 1949 में।
उत्तर:
(क) 1857 में

प्रश्न 2.
ब्रह्म समाज के प्रवर्तक कौन थे?
(क) ब्रह्म देव
(ख) राजा राम मोहन राय
(ग) मंगल पांडे
(घ) देव।
उत्तर:
(ख) राजा राम मोहन राय

प्रश्न 3.
आर्य समाज के संस्थापक कौन थे?
(क) स्वामी दयानन्द सरस्वती
(ख) स्वामी रामदेव
(ग) देव
(घ) रहीम।
उत्तर:
(क) स्वामी दयानंद सरस्वती

प्रश्न 4.
छायावाद के प्रवर्तक कौन माने जाते हैं?
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) निराला
(ग) पन्त
(घ) महादेवी वर्मा।
उत्तर:
(क) जयशंकर प्रसाद

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प्रश्न 5.
द्विवेदी युग की प्रमुख पत्रिका सरस्वती के संपादक कौन हैं?
(क) महादेवी
(ख) महावीर प्रसाद द्विवेदी
(ग) राम प्रसाद
(घ) भारतेन्दु हरिशचन्द्र।
उत्तर:
(ख) महावीर प्रसाद द्विवेदी

प्रश्न 6.
मुक्त छंद के प्रवर्तक कौन माने जाते हैं?
(क) प्रसाद
(ख) पन्त
(ग) निराला
(घ) बिहारी।
उत्तर:
(ख) पन्त

प्रश्न 7.
हिंदी साहित्य का सर्वप्रथम ज्ञानपीठ पुरस्कार किसे मिला?
(क) सुमित्रानंदन पंत को
(ख) निराला को
(ग) प्रसाद को
(घ) महादेवी को।
उत्तर:
(क) सुमित्रानंदन पंत को

प्रश्न 8.
प्रयोगवाद का प्रारंभ कब से माना जाता है?
(क) सन् 1943 ई० से
(ख) सन् 1945 ई० से
(ग) सन् 1947 ई० से .
(घ) सन् 1950 ई० से।
उत्तर:
(क) सन् 1943 ई० से

प्रश्न 9.
नयी कविता का आरंभ कब से माना जाता है?
(क) सन् 1943 ई० से
(ख) सन् 1954 ई० से
(ग) सन् 1956 ई० से
(घ) सन् 1960 ई० से।
उत्तर:
(ख) सन् 1954 ई० से

प्रश्न 10.
‘तारसप्तक’ के प्रवर्तक कौन हैं?
(क) अज्ञेय
(ख) भूषण
(ग) पन्त
(घ) निराला।
उत्तर:
(क) अज्ञेय।

प्रमुख कवि

1. भारतेन्दु हरिश्चन्द्र

प्रश्न 1.
भारतेन्दु जी का जन्म कब और कहाँ हुआ?
उत्तर:
भारतेन्दु जी का जन्म सन् 1850 ई० में काशी में हुआ।

प्रश्न 2.
भारतेन्दु जी ने कब पहली पत्रिका का प्रकाशन शुरू किया? उसका क्या नाम था ?
उत्तर:
भारतेन्दु जी ने सन् 1868 में ‘कवि वचन सुधा’ नामक पत्रिका निकाली जिसका नाम बाद में ‘हरिश्चन्द्र मैगजीन’ हो गया। कालान्तर में इस पत्रिका का नाम ‘हरिश्चन्द्र चन्द्रिका’ हो गया।

प्रश्न 3.
भारतेन्दु जी को यह उपाधि कब और कैसे प्रदान की गई ?
उत्तर:
सन् 1880 में ‘सार सुधा निधि’ पत्रिका के साहित्यकारों ने हरिश्चन्द्र जी को भारतेन्दु की उपाधि से अलंकृत होने का प्रस्ताव रखा।

प्रश्न 4.
भारतेन्दु जी की मृत्यु कब हुई?
उत्तर:
25 जनवरी, सन् 1885 को भारतेन्दु जी की मृत्यु हो गई।

प्रश्न 5.
भारतेन्दु जी की किन्हीं दो भक्ति परक रचनाओं के नाम लिखें।
उत्तर:
प्रेम प्रलाप तथा कृष्ण चरित्र।

प्रश्न 6.
भारतेन्दु जी की किन्हीं दो श्रृंगार प्रधान रचनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर:
सतसई श्रृंगार तथा प्रेम माधुरी।

प्रश्न 7.
भारतेन्दु जी की किन्हीं दो राष्ट्रीय भावना से युक्त रचनाओं के नाम लिखें।
उत्तर:
भारत वीरत्व और सुमनांजली।

प्रश्न 8.
भारतेन्दु जी की किन्हीं दो हास्य-व्यंग्य प्रधान रचनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर:
बन्दर सभा और उर्दू का स्यापा।

प्रश्न 9.
भारतेन्द जी के काव्य की किन्हीं दो विशेषताओं के नाम लिखिए।
उत्तर:
राष्ट्रीयता एवं समाज सुधार की भावना तथा श्रृंगार भावना।

2. मैथिलीशरण गुप्त

प्रश्न 1.
मैथिलीशरण गुप्त का जन्म कब और कहाँ हुआ?
उत्तर:
मैथिलीशरण गुप्त जी का जन्म 3 अगस्त, 1886 में झाँसी जिला के चिरगाँव नामक स्थान पर हुआ।

प्रश्न 2.
मैथिलीशरण गुप्त ने कौन-कौन सी भाषाओं का अध्ययन किया?
उत्तर:
गुप्त जी ने हिन्दी, संस्कृत, बंगला, उर्दू-मराठी और अंग्रेज़ी भाषाओं का अध्ययन किया।

प्रश्न 3.
गुप्त जी के काव्य को प्रतिष्ठा दिलाने में किसका हाथ था ? कैसे ?
उत्तर:
गुप्त जी के काव्य को प्रतिष्ठा दिलाने में आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी जी का बड़ा हाथ था। वे इनकी रचनाएँ संशोधित कर सरस्वती में प्रकाशित करते थे।

प्रश्न 4.
गुप्त जी कब से कब तक राज्य सभा के मनोनीत सदस्य रहे?
उत्तर:
गुप्त जी सन् 1952 से 1964 तक दो बार राज्य सभा के मनोनीत सदस्य रहे।

प्रश्न 5.
गुप्त की रचना ‘साकेत’ पर उन्हें कौन-सा पुरस्कार प्रदान किया गया?
उत्तर:
गुप्त जी को ‘साकेत’ पर मंगलाप्रसाद पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

प्रश्न 6.
गुप्त जी को भारत सरकार की ओर से कौन-सी उपाधि से अलंकृत किया गया?
उत्तर:
गुप्त जी को भारत सरकार ने ‘पद्म भूषण’ उपाधि से अलंकृत किया।

प्रश्न 7.
मैथिलीशरण गुप्त कब परलोक सिधारे?
उत्तर:
सन् 1964 में गुप्त जी परलोक सिधार गए।

प्रश्न 8.
मैथिलीशरण गुप्त की किन्हीं दो खंड काव्य रचनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर:
जयद्रथ वध तथा पंचवटी।

प्रश्न 9.
मैथिलीशरण गुप्त ने कौन-कौन से इतिहास द्वारा उपेक्षित पात्रों पर काव्य रचना की?
उत्तर:
गुप्त जी ने ‘साकेत’ में उर्मिला, ‘यशोधरा’ में गौतमबुद्ध पत्नी तथा ‘विष्णुप्रिया’ में चैतन्यमहाप्रभु की पत्नी का वर्णन किया है।

प्रश्न 10.
मैथिलीशरण गुप्त के काव्य की किन्हीं दो विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
गुप्त जी के काव्य की राष्ट्रीयता तथा भारतीय संस्कृति की झलक दो मुख्य विशेषताएं हैं।

प्रश्न 11.
गुप्त जी के द्वारा रचित एक महाकाव्य का नाम लिखिए।
उत्तर:
साकेत।

3. जयशंकर प्रसाद

प्रश्न 1.
श्री जयशंकर प्रसाद का जन्म कब और कहाँ हुआ?
उत्तर:
प्रसाद जी का जन्म सन् 1889 को काशी नगर में हुआ।

प्रश्न 2.
प्रसाद जी का परिवार किस नाम से जाना जाता था?
उत्तर:
तम्बाकू का व्यापार करने के कारण प्रसाद जी का परिवार ‘सुंघनी साहू’ के नाम से जाना जाता था।

प्रश्न 3.
प्रसाद जी की स्कूली शिक्षा कहाँ तक हुई थी?
उत्तर:
प्रसाद जी की स्कूली शिक्षा कक्षा सात तक ही हुई थी।

प्रश्न 4.
प्रसाद जी ने किस-किस विधा में साहित्य रचना की?
उत्तर:
प्रसाद जी ने उपन्यास, कहानी, नाटक और निबन्ध-विधाओं में साहित्य रचना की।

प्रश्न 5.
प्रसाद जी द्वारा लिखित प्रबन्ध काव्यों के नाम लिखिए।
उत्तर:
प्रसाद जी ने ‘कामायनी’ (महाकाव्य) तथा ‘आँसू’ खण्ड काव्य की रचना की।

प्रश्न 6.
प्रसाद जी को मरणोपरान्त किस रचना पर कौन-सा पुरस्कार प्रदान किया गया?
उत्तर:
प्रसाद जी को मरणोपरान्त ‘कामायनी’ पर मंगला प्रसाद पुरस्कार प्रदान किया गया।

प्रश्न 7.
प्रसाद जी की दो प्रमुख छायावादी काव्यकृतियों के नाम लिखिए।
उत्तर:
‘झरना’ और ‘लहर’ प्रसाद जी की प्रसिद्ध छायावादी रचनाएँ हैं।

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प्रश्न 8.
प्रसाद जी की मृत्यु कब हुई?
उत्तर:
तपेदिक (TB) से पीड़ित होने के कारण 15 नवम्बर, 1937 को प्रसाद जी का निधन हो गया।

प्रश्न 9.
प्रसाद जी के काव्य की कोई दो विशेषताएं लिखिए।
उत्तर:
प्रकृति प्रेम और रहस्योन्मुखता प्रसाद जी के काव्य की प्रमुख विशेषताएँ हैं।

प्रश्न 10.
कामायनी किस छायावादी कवि की प्रसिद्ध रचना है ?
उत्तर:
जयशंकर प्रसाद।

4. सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’

प्रश्न 1.
निराला जी का जन्म कब और कहाँ हुआ?
उत्तर:
निराला जी का जन्म सन् 1896 को बंगाल की महिषादल रियासत के मेदनीपुर नामक स्थान पर हुआ।

प्रश्न 2.
निराला जी का बचपन का नाम क्या था?
उत्तर:
निराला जी का बचपन का नाम सूर्यकुमार था।

प्रश्न 3.
निराला जी ने कौन-कौन सी पत्रिकाओं का सम्पादन किया?
उत्तर:
निराला जी ने ‘समन्वय’ और ‘मतवाला’ पत्रिकाओं का सम्पादन किया।

प्रश्न 4.
निराला जी की प्रसिद्ध कविता ‘जूही की कली’ किस पत्रिका में प्रकाशित हुई थी?
उत्तर:
‘जूही की कली’ का प्रथम प्रकाशन ‘मतवाला’ पत्रिका में हुआ था।

प्रश्न 5.
निराला जी को किस रचना पर उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार ने पुरस्कार दिया था?
उत्तर:
सन् 1949 में उत्तर प्रदेश सरकार ने निराला जी की काव्यकृति अपरा पर 2100 रुपए का पुरस्कार दिया था।

प्रश्न 6.
निराला जी ने काव्य के अतिरिक्त किस-किस विधा में साहित्य रचना की?
उत्तर:
निराला जी ने उपन्यास, कहानी, निबन्ध, रेखाचित्र, आलोचना, नाटक और जीवनी विधा में साहित्य रचना की।

प्रश्न 7.
निराला जी की किन्हीं चार काव्यकृतियों के नाम लिखिए।
उत्तर:
अनामिका, परिमल, गीतिका तथा कुकुरमुत्ता।

प्रश्न 8.
निराला जी के काव्य की किन्हीं दो विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
प्रगतिवादी विचारधारा तथा राष्ट्रीयता की भावना।

प्रश्न 9.
निराला जी की मृत्यु कब और कहाँ हुई?
उत्तर:
निराला जी की मृत्यु 15 अक्तूबर, सन् 1961 को इलाहाबाद में हुई।

प्रश्न 10.
निराला जी का पूरा नाम क्या है?
उत्तर:
सूर्यकांत त्रिपाठी निराला।

5. सुमित्रानन्दन पन्त

प्रश्न 1.
सुमित्रानन्दन पन्त का जन्म कब और कहाँ हुआ?
उत्तर:
सुमित्रानन्दन पन्त का जन्म 21 मई, 1900 को अलमोड़ा जिले के कौसानी गाँव में हुआ।

प्रश्न 2.
सुमित्रानन्दन पन्त ने कॉलेज की पढ़ाई क्यों छोड़ दी?
उत्तर:
महात्मा गांधी जी के असहयोग आन्दोलन से प्रभावित होकर पन्त जी ने पढ़ाई छोड़ दी।

प्रश्न 3.
सुमित्रानन्दन पन्त किस फिल्म के गीत लिखने के लिए मद्रास गये?
उत्तर:
पन्त जी प्रसिद्ध नर्तक उदय शंकर की फिल्म ‘कल्पना’ के गीत लिखने के लिए मद्रास गए।

प्रश्न 4.
सुमित्रानन्दन पन्त को पद्म भूषण’ की उपाधि कब प्रदान की गई?
उत्तर:
भारत सरकार ने सन् 1961 में पद्म भूषण की उपाधि से अलंकृत किया।

प्रश्न 5.
सुमित्रानन्दन पन्त को किस वर्ष और किस रचना पर भारतीय ज्ञान पीठ पुरस्कार प्रदान किया गया?
उत्तर:
सन् 1969 में भारतीय ज्ञानपीठ की ओर से पन्त जी की रचना ‘चिदम्बरा’ पर एक लाख रुपए का पुरस्कार दिया गया?

प्रश्न 6.
सुमित्रानन्दन पन्त की मृत्यु कब हुई?
उत्तर:
28 दिसम्बर, सन् 1977 को पन्त जी की मृत्यु हुई।

प्रश्न 7.
सुमित्रानन्दन पन्त की उन दो रचनाओं के नाम लिखिए जिनमें प्रकृति चित्रण किया गया है?
उत्तर:
‘वीणा’ और ‘पल्लव’।

प्रश्न 8.
सुमित्रानन्दन पन्त की उन दो रचनाओं के नाम लिखिए जिनमें कवि प्रकृति के साथ-साथ मानवीय सृष्टि के सौन्दर्य का अनुभव करता है?
उत्तर:
‘गुंजन’ और ‘युगान्त’।

प्रश्न 9.
सुमित्रानन्दन पन्त की उन दो रचनाओं के नाम लिखिए जिनमें कवि पर प्रगतिवाद का प्रभाव देखा जा सकता है?
उत्तर:
‘युगवाणी’ और ‘ग्राम्या’।

प्रश्न 10.
सुमित्रानन्दन पन्त जी की दो रचनाओं के नाम लिखिए जिनमें कवि पर योगी अरविन्द की आध्यात्मिक साधना का प्रभाव देखा जा सकता है?
उत्तर:
‘स्वर्ण धूलि’ और ‘स्वर्ण किरण’।

प्रश्न 11.
वीणा किस कवि की रचना है?
उत्तर:
सुमित्रानंदन पंत।

6. महादेवी वर्मा

प्रश्न 1.
महादेवी वर्मा का जन्म कब और कहाँ हुआ?
उत्तर:
महादेवी वर्मा का जन्म सन् 1907 को उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद शहर में हुआ।

प्रश्न 2.
महादेवी वर्मा का विवाह किस अवस्था में किसके साथ हुआ?
उत्तर:
महादेवी जी का विवाह नौ वर्ष की अवस्था में सन् 1916 में श्री स्वरूप नारायण वर्मा के साथ हुआ।

प्रश्न 3.
महादेवी वर्मा ने उच्च शिक्षा कहाँ तक प्राप्त की?
उत्तर:
महादेवी जी ने प्रयाग विश्वविद्यालय से संस्कृत में एम० ए० किया।

प्रश्न 4.
सन् 1942 के जन आन्दोलन में महादेवी ने कैसे भाग लिया ?
उत्तर:
सन् 1942 के भारत छोड़ो आन्दोलन में महादेवी जी ने गाँव-गाँव जाकर लोगों को देशभक्ति का पाठ पढ़ाया।

प्रश्न 5.
महादेवी वर्मा को ‘पद्म भूषण’ से कब अलंकृत किया गया?
उत्तर:
सन् 1956 में भारत सरकार ने महादेवी जी को ‘पद्म भूषण’ उपाधि से अलंकृत किया।

प्रश्न 6.
‘तुमको पीड़ा में ढूँढ़ा, तुममें ढूँढूगी पीड़ा।’ यह पंक्ति किस कवयित्री की है?
उत्तर:
महादेवी वर्मा।

प्रश्न 7.
महादेवी जी को कौन से काव्य-संग्रह पर इन्हें मंगला प्रसाद पुरस्कार प्रदान किया गया?
उत्तर:
महादेवी जी का काव्य संग्रह ‘यामा’ पर इन्हें मंगला प्रसाद पुरस्कार प्रदान किया गया।

प्रश्न 8.
महादेवी वर्मा की किसी एक रचना का नाम लिखिए।
उत्तर:
दीपशिखा।

प्रश्न 9.
महादेवी वर्मा के काव्य संग्रहों के नाम लिखिए।
उत्तर:
संधिनी, नीहार, रश्मि, नीरजा, यामा, सांध्यगीत, गीतपर्व दीप शिखा, परिक्रमा और नीलांबरा।

प्रश्न 10.
महादेवी के कौन-से काव्य संग्रह पर इन्हें ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ प्रदान किया गया?
उत्तर:
सन् 1982 में महादेवी जी को ‘यामा’ काव्य संग्रह पर ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया।

प्रश्न 11.
महादेवी जी के काव्य की कोई दो विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
रहस्यानुभूति और छायावादी दृष्टिकोण।

7. अज्ञेय

प्रश्न 1.
अज्ञेय जी का जन्म कब और कहाँ हुआ ?
उत्तर:
अज्ञेय जी का जन्म 7 मार्च, 1911 ई० को बिहार राज्य के देवरिया जिले के कसिया नामक स्थान पर हुआ।

प्रश्न 2.
अज्ञेय जी ने शिक्षा कहाँ-कहाँ प्राप्त की?
उत्तर:
अज्ञेय जी ने मैट्रिक पंजाब से, इंटर साईंस मद्रास से तथा बी० एस० सी पंजाब विश्वविद्यालय से पास की।

प्रश्न 3.
अज्ञेय जी ने पढ़ाई बीच में ही क्यों छोड़ दी?
उत्तर:
एम० ए० में प्रवेश लेते ही ये क्रान्तिकारियों के सम्पर्क में आ गए, इसलिए पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी।

PSEB 12th Class हिन्दी साहित्य का इतिहास आधुनिक काल

प्रश्न 4.
क्रान्तिकारी गतिविधियों में भाग लेने पर कितने वर्ष तक इन्हें जेल काटनी पड़ी?
उत्तर:
सन् 1930 से 1936 तक इन पर अनेक मुकद्दमे चलाए गए और जेल में कैद कर दिया गया।

प्रश्न 5.
अज्ञेय जी को कौन-सी काव्य कृति पर साहित्य अकादमी पुरस्कार प्रदान किया गया?
उत्तर:
सन् 1969 में अज्ञेय जी की काव्यकृति ‘आँगन के पार द्वार’ पर इन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार प्रदान किया गया।

प्रश्न 6.
कौन-से वर्ष और किस कृति पर अज्ञेय जी को भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया ?
उत्तर:
सन् 1978 में अज्ञेय जी की काव्य कृति ‘कितनी नावों में कितनी बार’ पर इन्हें यह पुरस्कार प्रदान किया गया।

प्रश्न 7.
अज्ञेय जी का निधन कब हुआ?
उत्तर:
4 अप्रैल, सन् 1987 को अज्ञेय जी का निधन हो गया।

प्रश्न 8.
अज्ञेय जी ने काव्य के अतिरिक्त किस-किस विधा में साहित्य रचना की?
उत्तर:
अज्ञेय जी ने उपन्यास, कहानी, निबन्ध तथा यात्रा वृत्तान्त विधा में भी साहित्य रचना की।

प्रश्न 9.
अज्ञेय जी की पुरस्कृत कृतियों के अतिरिक्त किन्हीं दो काव्य कृतियों के नाम लिखें।
उत्तर:
हरी घास पर क्षण भर तथा बावरा अहेरी।

प्रश्न 10.
अज्ञेय जी के कौन-से काव्य संग्रह के संपादन से हिन्दी साहित्य में एक नया मोड़ आया?
उत्तर:
सन् 1943 में प्रकाशित ‘तारसप्तक’ से हिन्दी साहित्य में प्रयोगवाद का आरम्भ माना जाता है।

8. धर्मवीर भारती

प्रश्न 1.
धर्मवीर भारती का जन्म कब और कहाँ हुआ?
उत्तर:
धर्मवीर भारती का जन्म 25 दिसम्बर, सन् 1926 को इलाहाबाद में हुआ।

प्रश्न 2.
धर्मवीर भारती ने किस विषय पर शोध प्रबन्ध लिखकर पीएच० डी० की डिग्री प्राप्त की?
उत्तर:
धर्मवीर भारती ने ‘सिद्ध साहित्य’ पर शोध प्रबन्ध लिख कर प्रयाग विश्वविद्यालय से पीएच० डी० की डिग्री प्राप्त की।

प्रश्न 3.
भारती जी ने कौन-से विश्वविद्यालय में और कब तक हिन्दी के प्राध्यापक पद पर काम किया?
उत्तर:
भारती जी ने सन् 1960 तक प्रयाग विश्वविद्यालय में हिन्दी प्राध्यापक के रूप में कार्य किया।

प्रश्न 4.
भारती जी ने मुम्बई में धर्मयुग साप्ताहिक का संपादन कितने वर्षों तक किया?
उत्तर:
भारती जी सन् 1960 से 1987 तक धमर्यग साप्ताहिक के सम्पादक रहे।

प्रश्न 5.
भारती जी को भारत सरकार ने कौन-से वर्ष में कौन-सी उपाधि प्रदान की?
उत्तर:
भारत सरकार ने सन् 1972 में भारती जी को ‘पद्म श्री’ को उपाधि प्रदान की।

प्रश्न 6.
भारती जी की मृत्य कब और कैसे हई?
उत्तर:
4 सितम्बर, 1997 ई० को भारती जी की नींद में ही हृदयगति रुक जाने के कारण मृत्यु हुई।

प्रश्न 7.
भारती जी के काव्य संग्रहों के नाम लिखिए।
उत्तर:
ठण्डा लोहा और सात गीत वर्ष।

प्रश्न 8.
भारती जी द्वारा लिखित प्रबन्ध काव्य का नाम लिखिए। इसका वर्ण्य विषय क्या है ?
उत्तर:
भारती जी ने खण्ड काव्य ‘कनुप्रिया’ लिखा है। इस खण्ड काव्य में भारती जी ने दार्शनिक पृष्ठभूमि में राधा के चरित्र को नए रूप में प्रस्तुत किया है।

प्रश्न 9.
भारती जी के काव्य की किन्हीं दो विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
रोमानी भाव बोध तथा आस्था और सृजन का स्वर।

9. मुक्तिबोध

प्रश्न 1.
मुक्तिबोध का जन्म कब और कहाँ हुआ?
उत्तर:
13 नवम्बर, सन् 1917 को मुक्ति बोध का जन्म मध्य प्रदेश के एक छोटे से गाँव श्योपुर में हुआ।

प्रश्न 2.
मुक्तिबोध किस-किस पत्रिका से जुड़े रहे?
उत्तर:
मुक्तिबोध सन् 1945 में ‘हंस’ पत्रिका तथा सन् 1948 में ‘नया खून’ पत्रिका से जुड़े रहे।

प्रश्न 3.
मुक्तिबोध ने कब-से-कब तक अध्यापन कार्य किया और कहाँ किया?
उत्तर:
मुक्तिबोध दिग्विजय कॉलेज राजनन्द गांव में सन् 1958 से मृत्यु तक अर्थात् 1964 ई० तक अध्यापन कार्य करते रहे।

प्रश्न 4.
मुक्तिबोध की मृत्यु कब हुई?
उत्तर:
मुक्तिबोध जी की मृत्यु 11 सितम्बर, सन् 1964. ई० को हुई।

प्रश्न 5.
मुक्तिबोध की काव्यकृतियों के नाम लिखिए।
उत्तर:
चाँद का मुँह टेढ़ा है तथा भूरी-भूरी खाक धूल ये दोनों रचनाएँ उनकी मृत्यु के बाद प्रकाशित हुईं।

प्रश्न 6.
मुक्तिबोध के काव्य की कोई-सी दो विशेषताएं लिखिए।
उत्तर:
वर्गहीन समाज की स्थापना की इच्छा तथा मार्क्सवाद का प्रभाव।

प्रश्न 7.
मुक्तिबोध का पूरा नाम लिखिए।
उत्तर:
गजानन माधव मुक्तिबोध।

10. धूमिल

प्रश्न 1.
धूमिल का जन्म कब और कहां हुआ?
उत्तर:
धूमिल का जन्म 9 नवम्बर, सन् 1936 ई० को बनारस के निकट गाँव खेवली में हुआ।

प्रश्न 2.
धूमिल ने पढ़ाई बीच में ही क्यों छोड़ दी?
उत्तर:
धूमिल ने पारिवारिक समस्याओं के कारण कॉलेज की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी।

प्रश्न 3.
धूमिल ने जीविकोपार्जन के लिए क्या-क्या किया?
उत्तर:
धूमिल ने कलकत्ता में लोहा ढोने की मजदूरी और लकड़ी काटने वाली एक कम्पनी में नौकरी की।

PSEB 12th Class हिन्दी साहित्य का इतिहास आधुनिक काल

प्रश्न 4.
धूमिल ने विद्युत् विभाग की नौकरी कब और क्यों छोड़ दी?
उत्तर:
धूमिल ने सन् 1974 में अपने अफसरों से मतभेद होने के कारण और गाँव में जमीनी झगड़ों के कारण विद्युत् विभाग की नौकरी छोड़ दी।

प्रश्न 5.
धूमिल के जीवनकाल में प्रकाशित काव्य संग्रह का नाम लिखिए।
उत्तर:
संसद् से सड़क तक।

प्रश्न 6.
मरणोपरान्त प्रकाशित धूमिल की काव्य रचनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर:
कल सुनना मुझे तथा सुदामा पाण्डेय का प्रजातन्त्र।

प्रश्न 7.
धूमिल की मृत्यु कब और कैसे हुई?
उत्तर:
10 फरवरी, सन् 1975 को धूमिल की ब्रेन ट्यूमर के कारण मृत्यु हुई।

प्रश्न 8.
धूमिल की कविता की कोई दो विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
कल्पनाओं को बेनकाब करना तथा गांव की पीड़ा का स्वर मुखरित करना धूमिल के काव्य की प्रमुख विशेषताएँ हैं।

बोर्ड परीक्षा में पूछे गए प्रश्न

P.B. 2009 SERIES-A

प्रश्न 1.
आधुनिक काल को किस विद्वान् ने गद्यकाल की संज्ञा दी है?
उत्तर:
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल।

प्रश्न 2.
प्रेमचन्द द्वारा लिखित किसी एक कहानी का नाम लिखिए।
उत्तर:
पूस की रात।

प्रश्न 3.
प्रगतिवादी काव्य धारा की किसी एक कविता का नाम लिखिए।
उत्तर:
नागार्जुन।

प्रश्न 4.
महादेवी वर्मा की किसी एक रचना का नाम लिखिए।
उत्तर:
दीपशिखा।

प्रश्न 5.
महावीर प्रसाद द्विवेदी ने किस साहित्यिक पत्रिका का संपादन किया?
उत्तर:
सरस्वती।

प्रश्न 6.
‘नई कविता’ पत्रिका का प्रकाशन किस सन् में हुआ?
उत्तर:
सन् 1954 में जगदीश गुप्त द्वारा संपादित।

SERIES–B

प्रश्न 1.
‘कामायनी’ किस छायावादी कवि की प्रसिद्ध रचना है?
उत्तर:
जयशंकर प्रसाद।

प्रश्न 2.
मैथिलीशरण गुप्त का जन्म कब हुआ?
उत्तर:
3 अगस्त सन् 1886 में।

प्रश्न 3.
हिन्दी साहित्य किसे आधुनिक युग की मीरा कहा जाता है?
उत्तर:
महादेवी वर्मा को।

प्रश्न 4.
भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की किसी एक रचना का नाम लिखिए।
उत्तर:
प्रेम माधुरी।

प्रश्न 5.
वीणा किस कवि की रचना है?
उत्तर:
सुमित्रानन्दन पन्त।

प्रश्न 6.
आर्य समाज के प्रवर्तक कौन थे?
उत्तर:
स्वामी दयानन्द।

SERIES-C

प्रश्न 1.
भारतेन्दुयुगीन किसी अन्य कवि का नाम लिखिए।
उत्तर:
श्रीनिवासदास।

प्रश्न 2.
भारतेन्दु जी का पूरा नाम क्या था?
उत्तर:
हरिश्चन्द्र।

प्रश्न 3.
द्विवेदी काल किस कवि के नाम पर पड़ा?
उत्तर:
महावीर प्रसाद द्विवेदी।

प्रश्न 4.
‘तुम को पीड़ा में ढूंढ़ा, तुममें ढूंढूगी पीड़ा।’ यह पंक्ति किस कवयित्री की है?
उत्तर:
महादेवी वर्मा।

PSEB 12th Class हिन्दी साहित्य का इतिहास आधुनिक काल

प्रश्न 5.
निराला जी का पूरा नाम क्या है?
उत्तर:
सूर्यकान्त त्रिपाठी।

प्रश्न 6.
महादेवी वर्मा का जन्म कब हुआ?
उत्तर:
महादेवी वर्मा जी का जन्म सन् 1907 में हुआ।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कवि वचन सुधा पत्रिका के संपादक कौन थे?
(क) भारतेन्दु हरिशचन्द्र
(ख) बिहारी
(ग) भूषण
(घ) देव।
उत्तर:
(क) भारतेन्दु हरिशचन्द्र

प्रश्न 2.
किस कवि को राष्ट्रकवि माना जाता है?
(क) बिहारी
(ख) भूषण
(ग) मैथिलीशरण गुप्त
(घ) निराला।
उत्तर:
(ग) मैथिलीशरण गुप्त

प्रश्न 3.
जयशंकर प्रसाद का जन्म कब हुआ?
(क) 1889 ई० में।
(ख) 1879 ई० में।
(ग) 1890 ई० में
(घ) 1885 ई० में।
उत्तर:
(क) 1889 ई० में

प्रश्न 4.
‘कामायनी’ महाकाव्य किसकी रचना है?
(क) प्रसाद
(ख) पन्त
(ग) निराला
(घ) महादेवी वर्मा।
उत्तर:
(क) प्रसाद

प्रश्न 5.
छायावाद का ब्रह्मा किसे कहा जाता है?
(क) प्रसाद
(ख) पन्त
(ग) निराला
(घ) महादेवी वर्मा।
उत्तर:
(क) प्रसाद

प्रश्न 6.
महादेवी वर्मा को ज्ञानपीठ पुरस्कार किस कृति पर मिला?
(क) यामा
(ख) चिदंबरा
(ग) कामायनी
(घ) कनुप्रिया।
उत्तर:
(क) यामा

प्रश्न 7.
आधुनिक युग की मीरा किसे कहा जाता है?
(क) पन्त को
(ख) निराला को
(ग) महादेवी वर्मा को
(घ) मनु शर्मा को।
उत्तर:
(ग) महादेवी वर्मा

प्रश्न 8.
अज्ञेय ने ‘तारसप्तक’ का संपादन कब किया?
(क) 1943 ई० में
(ख) 1951 ई० में
(ग) 1958 ई० में
(घ) 1979 ई० में।
उत्तर:
(क) 1943 ई० में

प्रश्न 9.
कनुप्रिया खण्डकाव्य के रचनाकार कौन हैं?
(क) प्रसाद
(ख) धर्मवीर भारती
(ग) गुप्त
(घ) निराला।
उत्तर:
(ख) धर्मवीर भारती

प्रश्न 10.
‘चाँद का मुँह टेढ़ा है’ कृति के रचनाकार कौन हैं?
(क) मुक्तिबोध
(ख) धूमिल
(ग) निराला
(घ) पंत।
उत्तर:
(क) मुक्तिबोध

PSEB 12th Class हिन्दी साहित्य का इतिहास आधुनिक काल

प्रश्न 11.
‘संसद से सड़क तक’ रचना का रचनाकार कौन है?
(क) मुक्तिबोध
(ख) धूमिल
(ग) महादेवी
(घ) प्रसाद।
उत्तर:
(ख) धूमिल।

PSEB 12th Class हिन्दी साहित्य का इतिहास रीतिकाल

Punjab State Board PSEB 12th Class Hindi Book Solutions हिन्दी साहित्य का इतिहास रीतिकाल Questions and Answers, Notes.

PSEB 12th Class हिन्दी साहित्य का इतिहास रीतिकाल

प्रश्न 1.
रीतिकाल के नामकरण के औचित्य पर युक्ति-युक्त विचार कीजिए।
उत्तर:
रीतिकालीन साहित्य आदिकालीन और भक्तिकालीन साहित्यिक भावभूमि से नितान्त भिन्न साहित्य है। भक्तिकाल में आध्यात्मिकता और प्रभु-प्रेम प्रमुख था और आदिकालीन साहित्य में युद्ध-प्रेम जबकि रीतिकालीन साहित्य पूर्णत: लौकिक एवं भौतिक दृष्टिकोण से रचा गया है। यह साहित्य राजाओं के आश्रय में रचित साहित्य है। इस युग के राज दरबारों में विलासिता का वातावरण प्रधान था, इसीलिए राजाओं की प्रसन्नता के लिए रचा जाने वाला साहित्य शृंगार एवं विलास से पूर्णतः आवेष्ठित है तथापि भक्ति, नीति, धर्म एवं सामान्य रूपों आदि में काव्य की एक क्षीण धारा भी श्रृंगार के साथ-साथ बहती रहती है। इसलिए विद्वान् इस काल के नामकरण पर भिन्न-भिन्न मत रखते हैं।

सामान्यतः संवत् 1700 से 1900 तक के काल को हिन्दी साहित्य में रीतिकाल के नाम से जाना जाता है, परन्तु . साहित्य के इतिहास के काल विभाजन के नामकरण को आधार प्रदान करते हुए अम्बा प्रसाद ‘सुमन’ का कथन है कि “साहित्य के इतिहास का काल विभाजन कृति, कर्ता, पद्धति और विषय की दृष्टि से किया जा सकता है। कभी-कभी नामकरण के किसी दृढ़ आधार के उपलब्ध न होने पर उस काल के किसी अत्यन्त प्रभावशाली साहित्यकार के नाम पर ही उस काल का नामकरण किया जाता है।” इस आधार पर आचार्य शुक्ल के हिन्दी साहित्य के इतिहास से पहले “मिश्रबंधु विनोद” में आदि, मध्य और अन्त तीन वर्गीकरण किए पर आचार्य शुक्ल ने इस वर्गीकरण के साथ-साथ प्रवृत्ति की प्रमुखता के आधार पर विशिष्ट नाम जोड़ दिए। इस आधार पर हम देखते हैं कि आचार्य शुक्ल ने मध्यकाल में जहां भक्ति की प्रधानता देखी उसे भक्तिकाल और मध्यकाल का नाम दिया गया और जहां रीति, श्रृंगार आदि की प्रधानता देखी उसे उत्तर मध्यकाल और रीतिकाल का नाम दिया। अतः कहा जा सकता है कि आचार्य शुक्ल का उत्तर मध्यकाल या रीतिकाल नाम पद्धति विशेष के आधार पर ही हुआ है।

आचार्य शक्ल के अतिरिक्त भी कुछ विद्वानों ने इस काल को भिन्न-भिन्न संज्ञाएं प्रदान की हैं। वे रीतिकाल को अलंकरण काल, कला काल, श्रृंगार काल आदि नामों से अभिव्यक्ति करते हैं अतः विवादास्पदता से बचने के लिए इन नामों की परीक्षा करना उचित प्रतीत होता है।

(i) मिश्र बन्धुओं ने इस काल को अलंकृत काल के नाम से पुकारा है। दूसरी तरफ वे स्वयं रीतिकालीन कवियों के ग्रन्थों को रीतिग्रन्थ और उनके विवेचन को रीति कथन कहते हैं। अपने ग्रन्थ मिश्रबन्धु विनोद में उन्होंने रीति की व्याख्या करते हुए लिखा है, “इस प्रणाली के साथ रीति ग्रन्थों का भी प्रचार बढ़ा और आचार्यता की वृद्धि हुई। आचार्य लोग तो स्वयं कविता करने की रीति सिखलाते थे।” मिश्र बन्धुओं के इस दृष्टिकोण को देखकर आश्चर्य होता है कि रीति की इतनी स्पष्ट व्याख्या करने के उपरान्त भी उन्होंने कैसे इस काल को अलंकृत काल कहा है। अलंकृत काल अतिव्याप्ती या दोष से दूषित है क्योंकि अलंकार प्रधान कविता हर युग में रची जाती रही है।

(ii) डॉ० रामकुमार वर्मा ने अपने ग्रन्थ ‘हिन्दी साहित्य का ऐतिहासिक अनुशीलन’ में इस काल को कला काल के नाम से पुकारा है। किन्तु यह नाम भी उचित प्रतीत नहीं होता। क्योंकि साहित्य के भावपक्ष और कलापक्ष दोनों एकदूसरे पर टिके हुए हैं, उनका सम्बन्ध अन्योन्याश्रित है। मात्र भाव ही कविता नहीं होता और न ही केवल अकेली कला के सहारे ही कविता रची जा सकती है जबकि रीतिकाल में भाव उत्कर्ष और कला का सौन्दर्य दोनों ही प्राप्त होते हैं। इसलिए डॉ० रामकुमार वर्मा द्वारा प्रस्तावित ‘कला काल’ नाम अव्याप्ति दोष के कारण समीचीन प्रतीत नहीं होता।

(iii) आचार्य विश्वनाथ प्रसाद मिश्र ने इस काल में श्रृंगार रस की प्रमुखता को देखकर इसे श्रृंगार काल के नाम से पुकारा है। यह नाम भी अव्याप्ति दोष से ग्रस्त है क्योंकि सम्पूर्ण रीतिकालीन साहित्य का अनुशीलन करने के पश्चात् कहा जा सकता है कि वहां श्रृंगार की प्रधानता स्वतन्त्र नहीं बल्कि रीति आश्रित है और न ही केवल श्रृंगार ही तत्कालीन समय का विवेचन विषय रहा है। धर्म, भक्ति, नीति भी इस युग की कविता में वर्णित हुए हैं। दूसरे, विद्वानों ने इस काल के कवियों को रीतिबद्ध, रीति सिद्ध और रीति मुक्त, इन तीन वर्गों में विभाजित किया है। इस वर्गीकरण के आधार पर भी इसे रीतिकाल ही कहा जा सकता है।

आचार्य शुक्ल शृंगार की प्रधानता को स्वीकार करते हुए कहते हैं, “वास्तव में श्रृंगार और वीर इन दो रसों की कविता इस काल में हुई। प्रधानता श्रृंगार रस की ही रही। इससे इसे कोई शृंगार काल कहे तो कह सकता है।” शुक्ल जी के इस कथन से स्पष्ट होता है कि वे शृंगार की प्रमुखता को मानते हुए भी रीति के सुदृढ़ आधार को त्यागना नहीं चाहते क्योंकि इस काल की श्रृंगारवेष्टित कविता रीति आश्रित ही थी।

निष्कर्ष रूप में हम कह सकते हैं कि कला काल, शृंगारकाल और अलंकृत काल आदि नाम इस युग की कविता की आन्तरिक प्रवृत्ति अर्थात् कथ्य को पूर्णतः स्पष्ट करने में सहायक नहीं हो सकते। इसलिए आचार्य शुक्ल द्वारा दिया गया नाम रीतिकाल ही उपयुक्त बैठता है। इस विषय में डॉ० भागीरथ मिश्र कहते हैं, “कला काल कहने से कवियों की रसिकता की उपेक्षा होती है, शृंगार काल कहने से वीर रस और राज प्रशंसा की। रीतिकाल कहने से प्रायः कोई भी महत्त्वपूर्ण वस्तुगत विशेषता उपेक्षित नहीं होती और प्रमुख प्रवृत्ति सामने आ जाती है। यह युग रीति पद्धति का युग था।” अतः इसे रीतिकाल का नाम दिया जा सकता है।

PSEB 12th Class हिन्दी साहित्य का इतिहास रीतिकाल

प्रश्न 2.
रीतिकालीन परिस्थितियों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
किसी भी काल की साहित्यिक गतिविधियों को जानने के लिए उस काल की सामान्य परिस्थितियों को जानना बहुत ज़रूरी होता है। रीतिकाल का समय संवत् 1700 से संवत् 1900 तक माना जाता है। इस काल की परिस्थितियों का परिचय इस प्रकार है-
(क) राजनीतिक परिस्थितियाँ-राजनीतिक दृष्टि से यह काल मुग़लों के चरमोत्कर्ष तथा उत्तरोत्तर ह्रास और पतन का युग है। इस काल में मुग़ल सम्राट अकबर से लेकर औरंगज़ेब का शासनकाल रहा। औरंगज़ेब की मृत्यु के बाद विलासिता खुलकर सामने आई। उसके उत्तराधिकारी अयोग्य, असमर्थ और निकम्मे निकले। वे नाच-गानों में ही मस्त रहा करते थे। स्त्री को मनोरंजन की वस्तु माना जाने लगा। रीतिकाल में इसी प्रभाव के कारण अधिकतर शृंगारपरक रचनाएँ लिखी गईं।

सन् 1738 ई० में नादिरशाह और सन् 1761 ई० में अहमद शाह अब्दाली के आक्रमणों ने मुग़ल साम्राज्य की नींव हिला कर रख दी। अनेक प्रदेशों के शासक स्वतन्त्र हो गए। सन् 1803 ई० तक अंग्रेज़ शासन समूचे उत्तर भारत में स्थापित हो चुका था। सन् 1857 की जन क्रान्ति की विफलता के बाद मुगल शासन पूरी तरह समाप्त हो गया।

(ख) सामाजिक परिस्थितियाँ- सामाजिक दृष्टि से भी यह काल अध: पतन का युग ही रहा। राजाओं के साथ प्रजा भी विलासिता के रंग में रंगने लगी। सम्पूर्ण समाज में नारी के सौन्दर्य का सौदा होने लगा। नारी को केवल मनोरंजन की वस्तु माना जाने लगा। किसी भी सुन्दर कन्या का अपहरण किया जाने लगा। डरकर बाल विवाह की कुप्रथा चल पड़ी।

जनसाधारण की शिक्षा, चिकित्सा आदि का कोई प्रबन्ध नहीं था। रिश्वत देना और लेना आम बात थी। राजे-राजवाड़े ग़रीब किसानों का शोषण कर स्वयं ऐश कर रहे थे, अतिवृष्टि, अनावृष्टि और युद्धों से फ़सलों को होने वाली हानि ने किसानों की हालत और बिगाड़ दी थी। ऐसी अव्यवस्थित सामाजिक व्यवस्था में सुरुचिपूर्ण और गम्भीर साहित्य की रचना सम्भव ही नहीं थी।

(ग) धार्मिक परिस्थितियाँ- धार्मिक दृष्टि से यह युग सभ्यता और संस्कृति के पतन का युग था। इस युग में नैतिक बन्धन इतने ढीले हो गए थे कि धर्म किसी को याद नहीं रहा। धर्म के नाम पर बाह्याडम्बरों और भोग-विलास के साधन जुटाए जाने लगे। इस्लाम धर्मानुयायी भी रूढ़िवादिता का शिकार हुए। वे रोजा और नमाज़ को ही धर्म समझने लगे। जनसाधारण अन्धविश्वासों में जकड़े थे जिसका लाभ पण्डित और मुल्ला उठा रहे थे। धर्म स्थान भ्रष्टाचार के अड्डों में बदलते जा रहे थे। मन्दिरों में भी पायल की झंकार और तबले की थाप की ध्वनियाँ आने लगी थीं।

(घ) आर्थिक परिस्थितियाँ-आर्थिक दृष्टि से इस युग में आम लोगों की दशा अत्यन्त शोचनीय थी। जाति-पाति के बन्धन और भी कठोर हो गए थे। वर्ण व्यवस्था व्यवसाय पर आधारित होने लगी थी। लोग उत्पादक और उपभोक्ता दो वर्गों में बंट गए थे अथवा समाज अमीर और ग़रीब वर्गों में बट गया था। इस युग में कवियों, संगीतकारों एवं चित्रकारों का तीसरा वर्ग भी पैदा होता जा रहा था जो अपने आश्रयदाताओं को प्रसन्न करने के लिए अपनी रचनाओं में कामशास्त्र और शृंगारिकता का सहारा लेकर धन कमा रहा था।

(ङ) साहित्यिक परिस्थितियाँ-साहित्य और कला की दृष्टि से यह युग पर्याप्त समृद्ध कहा जा सकता है। इस युग के कवि अपने आश्रयदाताओं से प्राप्त धन के बलबूते पर समृद्ध वर्ग में गिने जाने लगे थे। इसी प्रोत्साहन के फलस्वरूप इस युग के कवियों ने गुण और परिमाण दोनों दृष्टियों से हिन्दी-साहित्य का विकास किया। इस युग के कवियों ने एक साथ कवि और आचार्य बनने का प्रयत्न किया। इन कवियों को सौन्दर्य उपकरणों की जानकारी कराने के लिए पर्याप्त ग्रन्थ लिखे। कवियों ने युगानुरूप श्रृंगारपरक रचनाएँ ही रची।

(च) कलात्मक परिस्थितियाँ- रीतिकाल के कला क्षेत्र में प्रदर्शन की प्रवृत्ति की प्रधानता रही। इसमें मौलिकता की कमी है पर सामन्ती युग की वासनात्मकता काफ़ी अधिक है। ‘स्वामिनः सुखाय’ साहित्य में नायिकाओं के परम्परागत बाज़ारू चित्र बनते रहे। चित्रकारों ने राग-रागनियों पर आधारित प्रतीक चित्र बनाये लेकिन कहीं भी इन्होंने अपने मन की अभिव्यक्ति स्वतन्त्र रूप से नहीं की। इन्होंने तो देवी-देवताओं को भी साधारण नायक-नायिका की भान्ति अंकित किया। संगीतकारों और मूर्तिकारों ने आश्रयदाताओं की इच्छा के अनुसार ही कार्य किया, जिसमें चमत्कारप्रियता को बल दिया गया।

कुल मिला कर हिन्दी-साहित्य का रीतिकाल भोग विलास का काल था जिसमें नैतिक मूल्यों का ह्रास हुआ। अन्धविश्वासों और बाह्याडम्बरों का बोलबाला हुआ। राजा और प्रजा की श्रृंगारिकता के प्रति आसक्ति बढ़ी।

प्रश्न 3.
रीतिकाल की प्रमुख प्रवृत्तियों/विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
रीतिकालीन काव्य दरबारी संस्कृति में पलने वाला साहित्य था। इस काल के कवियों ने ‘स्वान्तः सुखाय’ काव्य की रचना नहीं की अपितु धन-मान प्राप्त करने के लिए ‘स्वामिनः सुखाय’ काव्य रचा। इस युग की कविता में रसिकता और शृंगारिकता की भावना प्रमुख थी। रीतिकालीन कवि की चेतना सुरा, सुराही और सुन्दरी के इर्द-गिर्द ही चक्कर काटती रही। नारी के सुन्दर शरीर की चमक तो इन्होंने सर्वत्र ढूँढी पर नारी की अन्तरात्मा में छिपी पीड़ा को समझने का प्रयास नहीं किया। प्रेम की पवित्र भावना को भी इन्होंने रसिकता में बदल दिया। रीतिकालीन काव्य की प्रमुख प्रवृत्तियाँ निम्नलिखित हैं-

(i) श्रृंगारिकता- रीतिकालीन साहित्य में शृंगारिकता की प्रवृत्ति सब से अधिक है। रीतिकाल के वैभव-विलास युक्त उन्मादक वातावरण ने इन्हें श्रृंगारिकता काव्य लिखने के लिए प्रेरित ही नहीं किया बल्कि बढ़ावा भी दिया। रीतिकालीन काव्य में श्रृंगार की दोनों अवस्थाओं-संयोग और वियोग श्रृंगार का सुन्दर चित्रण किया गया है। संयोग श्रृंगार के कुछ चित्र अश्लीलता की सीमा को छू गए हैं। विभिन्न त्योहारों और पर्यों के माध्यम से प्रेमी-प्रेमिका का मिलन कराने में इनका मन खूब रमा है। नायिका का नुख-शिख वर्णन करने में तथा वियोग वर्णन करने में केवल परम्परा का निर्वाह किया गया है। केवल घनानन्द जैसे रीतिमुक्त कवियों ने शृंगार वर्णन को वासना मुक्त रखा है। उनका श्रृंगार वर्णन काफ़ी स्वस्थ, आकर्षक और मनोरम है।

(ii) अलंकारिकता- रीतिकालीन कवियों की रुचि प्रदर्शन और चमत्कार में अधिक थी। तत्कालीन परिस्थितियाँ ही कुछ ऐसी बन गई थीं कि इन्हें अपने काव्य को कृत्रिम भड़कीले रंग में रंगना ही पड़ा। अनेक रीतिबद्ध कवियों ने स्वतन्त्र अलंकार सम्बन्धी ग्रन्थ लिखे। कहीं-कहीं रीति कवियों ने अलंकारों का इतना अधिक और व्यर्थ प्रयोग किया है कि वे काव्य-सौन्दर्य को बढ़ाने के बजाए सौन्दर्य के घातक बन गए हैं। अति अलंकार प्रियता ने केशव को कठिन कविता का प्रेत बना दिया।

(iii) लक्षण-ग्रन्थों का निर्माण-सभी रीतिबद्ध कवियों ने संस्कृत काव्य शास्त्र पर आधारित लक्षण-ग्रन्थों का निर्माण किया। ऐसा उन्होंने राज दरबार में उचित सम्मान प्राप्त करने के लिए किया, जबकि काव्य-शास्त्र सम्बन्धी इनका ज्ञान पूर्ण नहीं था। यह लक्षण ग्रन्थ भारतीय काव्य-शास्त्र का कोई महत्त्वपूर्ण विकास न कर सके।

(iv) भक्ति और नीति-रीतिकालीन काव्य में पर्याप्त मात्रा में भक्ति और नीति सम्बन्धी सूक्तियाँ प्राप्त हो जाती हैं। पर न तो इस काल के कवि भक्त थे और न ही राजनीति विशारद। राधा-कृष्ण के नाम से भक्ति करने का इनका प्रयास तो एक मात्र आश्रयदाता को रिझाना और श्रृंगारिक चित्र खींचना ही था। डॉ० नगेन्द्र के अनुसार, “यह भक्ति भी उनकी शृंगारिकता का अंग थी।” रहीम और वृन्द कवियों ने अवश्य ही नीति परक काव्य की रचना की है।

(v) वीर काव्य- रीतिकाल की राजनीतिक परिस्थितियाँ कुछ ऐसी बन गई थीं कि हिन्दू जनता में मुसलमान शासकों की अत्याचारी नीतियों के प्रति विद्रोह की भावना उमड़ने लगी थी। औरंगजेब की कट्टर नीतियों ने पंजाब में गुरु गोबिन्द सिंह जी, दक्षिण में शिवाजी, राजस्थान में महाराज राज सिंह और दुर्गादास, मध्य प्रदेश में छत्रसाल आदि को मुस्लिम साम्राज्य से टक्कर लेने के लिए तलवार उठाने पर विवश कर दिया। भूषण, सूदन, पद्माकर आदि वीर रस के कवियों ने ओज भरी वाणी में काव्य निर्माण किया। इसमें राष्ट्रीयता का स्वर प्रधान है।

(vi) नारी चित्रण-इस युग में नारी केवल विलास की वस्तु बन कर रह गई थी। दरबारी कवियों ने नारी के केवल विलासिनी प्रेमिका के चित्र ही प्रस्तुत किए। प्रतियोगिता की भावना के कारण इस युग के कवि ने नारी के अश्लील, विलासात्मक, भड़कीले चित्र प्रस्तुत करने का प्रयास किया। नारी जीवन की अनेकरूपता को वे नहीं जान पाए।

(vii) ब्रज भाषा की प्रधानता-रीतिकाल की प्रमुख साहित्यिक भाषा ब्रज है। इस काल में भक्तिकाल से भी अधिक ब्रज भाषा का विकास हुआ। मुसलमान कवियों ने भी इसी भाषा का प्रयोग किया। भूषण, देव आदि कवियों ने अपनी इच्छा से इस भाषा के शब्दों को तोड़ा मरोड़ा है। किन्तु रसखान, घनानन्द आदि की भाषा परिनिष्ठित है। बिहारी की भाषा टकसाली कही जाती है।

वस्तुतः रीतिकाव्य कवित्व की दृष्टि से अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। इसका ऐतिहासिक और साहित्यिक महत्त्व सर्वमान्य है।

प्रश्न 4.
रीतिसिद्ध और रीतिमुक्त काव्य में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:

  1. रीतिसिद्ध काव्य काव्यशास्त्रीय है जबकि रीतिमुक्त काव्य में काव्यशास्त्रीय दृष्टिकोण नहीं मिलता। रीतिमुक्त काव्य सभी प्रकार के बन्धनों से मुक्त है। इसी कारण इसे रीतिमुक्त काव्य कहा गया है।
  2. रीतिसिद्ध काव्य दरबारी कविता है जबकि रीतिमुक्त काव्य अधिकांशतः दरबार से बाहर मुक्त वातावरण में रचा गया।
  3. रीतिसिद्ध काव्य की रचना मुख्यतः राज्याश्रय में हुई जबकि रीतिमुक्त काव्य हृदय के स्वच्छंद भाव के आधार पर रचा गया।
  4. रीतिसिद्ध काव्य का उद्देश्य ‘परान्तः सुखाय’ अर्थात् दूसरे को खुश करना है जबकि रीतिमुक्त काव्य की रचना ‘स्वांतः सुखाय’ अर्थात् अपने मन की प्रसन्नता के लिए हुई।
  5. रीतिसिद्ध काव्य का भाव पक्ष गौण है और अभिव्यक्ति पक्ष प्रधान है जबकि रीतिमुक्त काव्य आंतरिक अनुभूतियों का काव्य है। इसमें भावा वेग का प्रवाह बहता मिलता है।
  6. रीतिसिद्ध काव्य चमत्कारपूर्ण है जबकि रीतिमुक्त काव्य चमत्कार से रहित और हृदय के सच्चे भावों पर आधारित है।
  7. रीतिसिद्ध काव्य में श्रृंगार का वर्णन बढ़ा-चढ़ा कर अर्थात् अतिशयोक्तिपूर्ण है परन्तु रीतिमुक्त काव्य में प्रेम का सहज और भावपूर्ण चित्रण किया गया है।
  8. रीतिसिद्ध का श्रृंगार अधिकतर भोग मूलक है और यह अपने आश्रयदाताओं की भोग लिप्सा को जगाने वाला है जबकि
  9. रीतिमुक्त काव्य में व्यथामूलक (त्यागमूलक) श्रृंगार का चित्रण किया गया है। रीतिमुक्त काव्य में वर्णित संयोग में भी पीड़ा की अनुभूति बनी रहती है।
  10. शायद इसका कारण यह रहा हो कि अधिकांश रीतिमुक्त कवि जीवन में प्रेम से पीड़ित रहे हैं। उनका वर्णन प्रत्यक्ष अनुभूति का विषय है। यही कारण है कि रीतिमुक्त कवियों की अभिव्यक्ति अधिक मर्मस्पर्शी बन पड़ी है।
  11. रीतिसिद्ध कवियों की भाषा आडम्बरपूर्ण है जबकि रीतिमुक्त कवियों की भाषा प्रवाहपूर्ण तथा स्वाभाविक होने के कारण सहज है।
  12. रीतिसिद्ध कवि, कवि के अपेक्षा कलाकार अधिक है, जबकि रीतिमुक्त भावुक कवि है।

प्रश्न 5.
रीतिबद्ध और रीतिमुक्त काव्य में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर:
रीतिकालीन साहित्य में रीतिबद्ध कवियों में प्रमुख केशवदास, मतिराम, देंव और चिंतामणि तथा रीतिमुक्त कवियों में प्रमुख घनानंद, बोधा, आलम और ठाकुर हैं। रीतिबद्ध काव्य शास्त्रों पर आधारित है। इसमें कवियों ने संस्कृत के काव्य-शास्त्र के आधार पर काव्यांगों के लक्षण देते हुए उनके उदाहरण दिए हैं। इसके विपरीत रीति मुक्त काव्य में काव्य शास्त्रीय दृष्टिकोण नहीं मिलता। रीतिबद्ध कवियों का प्रेम चित्रण साहित्य शास्त्र द्वारा चर्चित रूढ़ियों, परम्पराओं तथा कवि समयों के अनुसार है, जबकि रीतिमुक्त कवियों की प्रेम सम्बन्धी विचारधारा अत्यन्त व्यापक और उदार है। इन्हें बंधी-बंधाई परिपाटी पर प्रेम चित्रण करना पसन्द नहीं है।

रीतिबद्ध कवियों का काव्य मुख्य रूप से तत्कालीन शासक वर्ग, रईसों तथा रसिक जनों के लिए अधिक रचा गया था। इसके विपरीत रीति मुक्त काव्य का मूल मन्त्र हृदय के स्वच्छंद भावों को मुक्त रूप से व्यक्त करना था। रीतिबद्ध काव्य में आचार्यत्व और कवित्व का अद्भुत सम्मिश्रण प्राप्त होता है, जिसके अन्तर्गत इन्होंने विशुद्ध लक्षण ग्रंथ लिखे तथा उदाहरण भी दिए परन्तु इसमें भी कलापक्ष की प्रधानता के दर्शन होते हैं। रीतिमुक्त काव्य में आन्तरिक अनुभूतियों का मार्मिक चित्रण प्राप्त होता है, जिनमें भावों का आवेग प्रवाहित होता रहता है। रीतिबद्ध काव्य में चमत्कार की प्रधानता है परन्तु रीति मुक्त काव्य चमत्कार से मुक्त होकर हृदय के सत्यभावों को अभिव्यक्त करता है।

रीतिबद्ध काव्य में श्रृंगार वर्णन आश्रयदाता की मनोभावनाओं को उद्दीप्त करता है। रीतिमुक्त काव्य का श्रृंगार वर्णन भी व्यथामूलक है। रीतिबद्ध कवि मुख्य रूप से ‘परांतः सुखाएं’ काव्य रचना करते रहे जबकि रीतिमुक्त कवियों ने अपनी तथा तत्कालीन जनजीवन की सांस्कृतिक, पारिवारिक, सामाजिक, प्राकृतिक जीवन की झांकियां भी अपने काव्य में प्रस्तुत की हैं।

रीतिबद्ध कवियों की भाषा अलंकारपूर्ण, आडम्बरी तथा बोझिल है। रीतिमुक्त कवियों ने सहज, स्वाभाविक तथा भावपूर्ण भाषा का प्रयोग किया है। इस दृष्टि से रीतिबद्ध कवि कलाकार अधिक सिद्ध होते हैं, कवि नहीं, जबकि रीति मुक्त कवि एक भावुक कवि है।

प्रमुख कवियों का जीवन एवं साहित्य परिचय

1. केशवदास (सन् 1555-1617 ई०)

प्रश्न 1.
केशवदास का संक्षिप्त जीवन परिचय देते हुए उनकी रचनाओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
केशव की गणना हिन्दी साहित्य के महान् कवियों में की जाती है। इन्हें रीतिकाल का प्रवर्तक और प्रथम आचार्य भी माना जाता है। इनके विषय में एक उक्ति प्रसिद्ध है-कविता करता तीन हैं-तुलसी, केशव, सूर। जीवन परिचय-केशवदास का जन्म विद्वान् सम्वत् 1612 (सन् 1555 ई०) के आसपास बेतवा नदी के तट पर स्थित ओरछा नगर में हुआ मानते हैं। इनके पिता पं० काशीराम मिश्र संस्कृत के प्रकाण्ड पंडित थे। उनका राजा मधुकर शाह बड़ा सम्मान करते थे। केशव दास को संस्कृत का ज्ञान अपने पूर्वजों से परम्परागत रूप में प्राप्त हुआ. था। ओरछा नरेश महाराज इन्द्रजीत सिंह इन्हें अपना गुरु मानते थे। गुरु धारण करते समय उन्होंने केशव को इक्कीस गाँव भेंट में दिए थे। केशव ने उनकी प्रशस्ति में लिखा है-
भूतल को इन्द्र इन्द्रजीत जीवै जुग-जुग,
‘जाके राज केसौदास राज सो करते हैं।

केशव का सारा जीवन राज्याश्रय में ही व्यतीत हुआ। राज दरबार में रहने के कारण यह बड़े हाज़र जवाब थे और शृंगारिक प्रकृति के थे। उनकी कविताओं में रसिकता और चमत्कार देखने को मिलता है। उनके जीवन की एक घटना बड़ी प्रसिद्ध है। केशव जब बूढ़े हो गए तो एक दिन कुएँ पर पानी भरती हुई लड़कियों ने उन्हें ‘बाबा जी’ कह दिया जब कि केशव उनकी ओर बड़ी रसिकता से देख रहे थे, तब उनके मुँह से निम्न पंक्तियाँ प्रस्फुटित हुईं-
केशव केसनि अस करि, बैरिहू जस न कराहिं,
चन्द्र वदनि मृगलोचनि, बाबा कहि-कहि जाहिं।

केशव साहित्य और संगीत, धर्म-शास्त्र और राजनीति, ज्योतिष और वैधिक सभी विषयों के गम्भीर अध्येता थे। केशवदास की रचना में उनके तीन रूप आचार्य, महाकवि और इतिहासकार दिखाई पड़ते हैं।
केशव की मृत्यु सम्वत् 1674 (सन् 1617 ई०) में हुई मानी जाती है। रचनाएँ-केशव द्वारा रचित उपलब्ध कृतियों में से निम्नलिखित कृतियाँ उल्लेखनीय हैं-

  1. रसिक प्रिया
  2. राम चन्द्रिका
  3. कवि प्रिया
  4. रतन बावनी
  5. वीर सिंह देवचरित
  6. विज्ञान गीता
  7. जहाँगीर जस चन्द्रिका।

इनके अतिरिक्त उनके, ‘नख-शिख’ और छन्द माला दो अन्य ग्रन्थ भी प्रसिद्ध हैं।

केशव की उपरोक्त कृतियों का अवलोकन करने से यह ज्ञात होता है कि केशव अपनी रचनाओं में वीरगाथा काल, भक्तिकाल और रीतिकाल के काव्यगत आदर्शों का समाहार करना चाहते थे। इन ग्रन्थों में से केशव की ख्याति का आधार प्रथम तीन ग्रन्थ हैं जिनमें ‘रसिक प्रिया’ और ‘कवि प्रिया’ काव्य शास्त्रीय ग्रन्थ हैं तथा ‘राम चन्द्रिका’ रामचरित से सम्बद्ध महाकाव्य है। शेष ग्रन्थ साधारण कोटि के हैं।

प्रश्न 2.
केशवदास के काव्य की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
केशवदास के काव्य की विशेषताओं को जानने के लिए केवल एक ही ग्रन्थ ‘रामचन्द्रिका’ काफ़ी है। प्रस्तुत रचना के कथानक का आधार प्रमुखत: वाल्मीकि रामायण है परन्तु प्रासंगिक कथाओं के विकास और रंचना शैली में संस्कृत के ‘प्रसन्न राघव’ और ‘हनुमन्नाटक’ का प्रभाव भी इस रचना पर देखा जा सकता है। राम चन्द्रिका’ के आधार पर केशव के काव्य की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं-
1. असफल प्रबन्ध काव्य-‘रामचन्द्रिका’ को प्रबन्ध काव्य का रूप देने में कवि को सफलता नहीं मिल सकी क्योंकि प्रस्तुत प्रबन्ध काव्य में न तो कथा का सुसंगत विकास हो पाया है और न ही भावपूर्ण स्थलों का चित्रण सही ढंग से हुआ है। वस्तु विन्यास की दृष्टि से यह ग्रन्थ कई मुक्तकों का संग्रह प्रतीत होता है जिन्हें जोड़कर प्रबन्धात्मक रूप देने की विफल चेष्टा की गई है।

केशव ने कुछ स्थलों पर अनावश्यक विस्तार से काम लिया है तथा भावपूर्ण स्थलों का चयन और चित्रण भी ठीक ढंग से नहीं किया गया है। उनके वर्णन उनकी दरबारी मनोवृत्ति का प्रदर्शन मात्र बन कर रह गए हैं।

2. चरित्र वर्णन-केशव पर यह दोष लगाया जाता है कि उन्होंने श्रीराम का चरित्र सही ढंग से नहीं प्रस्तुत किया है। वास्तव में लोगों के दिलों में तुलसी के ‘मानस’ में वर्णित श्रीराम का चरित्र बसा हुआ था। केशव तो राम की चन्द्रिका (ऐश्वर्य) के विषय को लेकर चले थे। इसलिए उन्होंने कुछ चुने हुए प्रसंगों का वर्णन किया है।

3. वस्तु वर्णन-रामचन्द्रिका में रागोत्प्रेरक वस्तु वर्णन उच्च कोटि का हुआ है, जो रामशयनागार वर्णन, राम के तिलकोत्सव का वर्णन तथा दिग्विजय के लिए जाती हुई श्रीराम की सेना का वर्णन देखा जा सकता है।

4. प्रकृति चित्रण-केशव के प्रकृति चित्रण नीरस और असंगत हैं। प्रकृति चित्रण में नाम परिगणन शैली को अपनाया गया है और साथ ही प्रकृति को उद्दीपन रूप में चित्रित किया गया है।

5. श्रृंगार वर्णन-‘रामचन्द्रिका’ शृंगार प्रधान ग्रन्थ है किन्तु श्रृंगार के प्रति केशव की दृष्टि भौतिकतावादी थी। उनके श्रृंगार वर्णन में रस-मर्मज्ञता तथा सरसता देखने को मिलती है। केशव के काव्य में संयोग एवं वियोग के अनेक मर्यादित, शिष्ट एवं संगत चित्र देखने को मिलते हैं।

2. देव (सन् 1673-1767 ई०)

प्रश्न 1.
देव का संक्षिप्त जीवन परिचय देते हुए उनकी प्रमुख रचनाओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
रीतिकाल के प्रतिनिधि कवियों में देव का स्थान अन्यतम है। वे एक साथ कवि और आचार्य दोनों ही थे। ऐसा लगता है कि केशव और बिहारी दोनों मिलकर देव में एकाकार हो उठे हैं।

जीवन परिचय-देव का जन्म सन् 1673 को इटावा नगर में हुआ। इनका पूरा नाम देवदत्त द्विवेदी था। इनकी शिक्षा-दीक्षा के सम्बन्ध में कोई सामग्री उपलब्ध नहीं है। अन्तः साक्ष्य के अनुसार सोलह वर्ष की अवस्था में ही इन्होंने ‘भावविलास’ जैसे सुन्दर ग्रन्थ की रचना की थी। देव जीवन भर आजीविका के अभाव में दर-दर भटकते रहे। स्वाभिमानी प्रकृति के होने के कारण ये अपने आश्रयदाता बदलते रहे। इनके आश्रयदाताओं में औरंगज़ेब के पुत्र आज़म शाह, दादरीपति राजा सीता राम के भतीजे भवानी दत्त वैश्य, फफूंद के राजा कुशल सिंह, राजा भोगीलाल, राजा मर्दन सिंह तथा महमदी राज्य के अधिपति अकबर अली खां थे। इनमें से केवल राजा भोगीलाल से ही इन्हें उचित आदरसम्मान मिला।

देव किसी समय इटावा छोड़कर मैनपुरी जिले के कुसमरा नामक गाँव में जा बसे थे। यहाँ उन्होंने अपना मकान भी बनवाया। देव के वंशज अभी तक इटावा और कुसमरा दोनों ही स्थानों में पाए जाते हैं। इनकी मृत्यु सन् 1767 ई० में हुई।

देव में काव्य की लोकोत्तर प्रतिभा ही नहीं थी, अध्ययन और अनुभव भी उनका बड़ा व्यापक था। साहित्य और काव्य शास्त्र में उनकी गहरी पैठ थी। वे संस्कृत और प्राकृत भाषाओं के पण्डित थे। वेदान्त और अन्य दर्शनों का भी उन्हें ज्ञान था। वे ज्योतिष और आयुर्वेद भी जानते थे। आकृति से वे अत्यन्त रूपवान थे। राजसी वेश-भूषा उन्हें प्रिय थी और रसिकता उनके व्यक्तित्व में कूट-कूट कर भरी हुई थी।
रचनाएँ-वर्तमान समय में देवकृत 18 ग्रन्थ ही प्राप्त हैं जिनमें से प्रमुख के नाम निम्नलिखित हैं-

  1. भाव विलास
  2. अष्टयाम
  3. भवानी विलास
  4. रस विलास
  5. प्रेम चन्द्रिका
  6. राग रत्नाकर
  7. सुखसागर
  8. प्रेम तरंग
  9. जाति विलास।

इन ग्रन्थों में भाव विलास’ श्रृंगार रस का प्रतिपादक है। ‘भवानी विलास’ में नायिका भेद का विवेचन है तथा ‘जाति विलास’ नारी के शत-शत भेदों का वर्णन है।

PSEB 12th Class हिन्दी साहित्य का इतिहास रीतिकाल

प्रश्न 2.
देव के काव्य की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
देव की रचनाओं से विदित होता है कि उनकी काव्य साधना, श्रृंगार आचार्यत्व और भक्ति और दर्शन की त्रिधाराओं में प्रवाहित हुई है। शृंगारिकता और आचार्यत्व तो रीतिकाल की प्रमुख प्रवृत्तियाँ हैं ही। देव का काव्य इनके अतिरिक्त वैराग्य भावना को भी लेकर चला है। उनकी काव्यगत विशेषताएँ अग्रलिखित हैं-
1. श्रृंगार वर्णन-शृंगार के संयोग और वियोग दोनों ही पक्षों का पूर्ण और व्यापक विवेचन देव की कविताओं में देखा जा सकता है। देव का श्रृंगार वर्णन अश्लील, वीभत्स और कुरुचिपूर्ण नहीं है क्योंकि इसका आधार दाम्पत्य प्रेम है। गृहस्थी की चार दीवारी के भीतर इस श्रृंगार की रसधारा प्रवाहित हुई है। देव की दृष्टि में स्वकीया का प्रेम ही सच्चा प्रेम है। परकीया प्रेम हेय है। नव दम्पत्ति की रस चेष्टाओं के माध्यम से कवि ने लौकिक प्रेम के बड़े सुन्दर चित्र अंकित किए हैं। कवि ने यहाँ स्पष्ट करने का प्रयास किया है कि मन के साथ शरीर का ऐसा सहज सम्बन्ध है कि दोनों की चेतना एक साथ उत्पन्न हो जाती है। देव ने श्रृंगार के अन्तर्गत नायक-नायिका के विविध हाव-भावों और चेष्टाओं के सवाक् चित्र खींचे हैं।

2. वियोग वर्णन-देव ने विरह की गम्भीर अवस्था का चित्रण बड़ी सफलता से किया है। विशेषकर खण्डिता और पूर्व राग के प्रसंगों में विरह की यह अभिव्यक्ति अलंकार के चमत्कार पर नहीं, भावना की गम्भीरता और स्वाभाविकता पर आधारित है।

3. भक्ति भावना-शृंगारी कवि होते हुए भी देव का हृदय भक्ति रस से शून्य नहीं था। उनमें भक्तिकालीन कवियों जैसी सरसता पाई जाती है। उनके काव्य में भगवान् श्री कृष्ण के प्रति भक्ति भावना अधिक मिलती है। देव ने भी सूर इत्यादि कृष्ण भक्त कवियों के समान भगवान् श्री कृष्ण की लीलाओं से प्रभावित होकर उनका यशोगान किया है। देव की यह भक्ति भावना बड़ी उदार और सहज स्वाभाविक है।

4. तत्व दर्शन-भक्त हृदय के साथ-साथ देव में सन्त कवियों का मस्तिष्क भी था। देव ने भी अद्वैतवाद के सिद्धान्तानुसार आत्मा और ब्रह्म की एकता मानते हुए माया जनित द्वैत का वर्णन किया है। माया के कारण ही उस ज्ञान की विस्मृति हो जाती है जो आत्मा की चिरन्तनता का ज्ञान होता है। वास्तव में आत्मा अजर, अमर है और सभी में उसकी सत्ता है।

अद्वैत के इस सिद्धान्त के अतिरिक्त देव के काव्य में ज्ञान मार्ग के अन्य तत्वों का भी समावेश मिलता है। वे ब्रह्म की अनन्तता और व्यापकता को स्वीकार करते हैं तथा उनके मतानुसार एक अणु मात्र में सारा विश्व व्याप्त है। इस प्रकार हम देखते हैं कि तत्व दर्शन देव के काव्य में भक्तिकालीन उच्च कोटि के कवियों के समान ही है।

3. बिहारी (सन् 1595-1663 ई०)

प्रश्न 1.
बिहारी के संक्षिप्त जीवन परिचय और रचनाओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
जीवन परिचय-रीतिकाल के सब से अधिक जन प्रिय कवि बिहारी लाल का जन्म सन् 1595 ई० को ग्वालियर में हुआ। बिहारी जब आठ वर्ष के थे तो अपने पिता के साथ ओरछा आ गए। वहीं इन्होंने महाकवि केशव के संरक्षण में काव्य ग्रन्थों का अध्ययन आरम्भ किया। पिता के वृन्दावन चले जाने पर इन्हें भी वहीं जाना पड़ा। वृन्दावन में बिहारी ने नरहरिदास से संस्कृत तथा प्राकृत सीखी। इन्हीं दिनों सन् 1618 के आस-पास शाहजहाँ वृन्दावन आए। बिहारी की प्रतिभा से प्रभावित होकर उन्होंने बिहारी को आगरा आने का निमन्त्रण दिया। आगरा में बिहारी की भेंट प्रसिद्ध कवि रहीम से हुई। आगरा में शाहजहाँ ने अपने पुत्र का जन्मोत्सव मनाया। इस अवसर पर अनेक राजा-महाराजा उपस्थित थे। बिहारी ने इस अवसर पर बड़ी सुन्दर मनमोहक कविताएँ सुनाईं जिनसे प्रसन्न और प्रभावित होकर वहाँ उपस्थित अनेक राजाओं ने इनकी वार्षिक वृत्ति बाँध दी।

एक बार बिहारी वृत्ति लेने के लिए जयपुर गए। उस समय जयपुर नरेश सवाई राजा जयसिंह अपनी षोडषी नव विवाहिता पत्नी के प्रेम जाल में उलझकर राजपाठ के सभी कार्य भुला बैठे थे। बिहारी ने उन्हें अपना कर्त्तव्य और दायित्व याद दिलाने के लिए एक मालिन के हाथों फूल की टोकरी में निम्नलिखित दोहा राजा तक पहुँचाया-
नहीं पराग नहीं मधुर मधु नहीं विकास इहि काल।
अली कलि सों ही बन्ध्यो, आगे कौन हवाल॥

राजा पर उस दोहे ने जादू-सा असर किया। वे तुरन्त अपने रंग महल से बाहर आ गए और पुनः राज कार्यों में लग गए। इस घटना ने बिहारी के सम्मान में वृद्धि की। राजा जय सिंह ने बिहारी को अपना राज कवि बना दिया। यहीं बिहारी ने अपने प्रसिद्ध ग्रन्थ ‘सतसई’ की रचना की। सतसई की पूर्ति के कुछ समय बाद बिहारी की पत्नी की मृत्यु हो गई। बिहारी इस आघात को सहन न कर सके और संसार से विरक्त हो गए। बिहारी तब वृन्दावन आ गए और अपना शेष जीवन भगवत् भजन में व्यतीत करते हुए सन् 1663 ई० के लगभग परमधाम को प्राप्त किया।

रचनाएँ-बिहारी ने जीवन में केवल एक ही ग्रन्थ की रचना की जो बिहारी सतसई के नाम से प्रसिद्ध है। इस ग्रन्थ में 713 दोहे हैं। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल जी बिहारी सतसई की प्रशंसा करते हुए लिखते हैं
“श्रृंगार रस के ग्रन्थों में जितनी ख्याति और जितना सम्मान बिहारी सतसई का हुआ है उतना और किसी का नहीं। इसका एक-एक दोहा हिन्दी साहित्य में रत्न माना जाता है।”

प्रश्न 2.
बिहारी के काव्य की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
बिहारी सतसई में समास पद्धति का प्रयोग किया गया है। दोहे जैसे छोटे छन्द में सुन्दर विचारों और कल्पनाओं का समावेश भली प्रकार हो पाया है। छोटे-छोटे दोहों में गहन भावों को व्यक्त करना ही बिहारी की विशेषता है। बिहारी के काव्य की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं-
1. शृंगार वर्णन-बिहारी के काव्य का मुख्य विषय शृंगार वर्णन है। बिहारी ने शृंगार की दोनों अवस्थाओंसंयोग और वियोग का वर्णन किया है। किन्तु उनका मन संयोग शृंगार के वर्णन में अधिक रमा है। संयोग पक्ष की सभी स्थितियों पर उनका पूरा ध्यान रहा है। बिहारी ने नायक के स्थान पर नायिका के आकर्षण का वर्णन अधिक किया है। बिहारी ने नायिका के नख-शिख का वर्णन भी खूब किया है। बिहारी का वियोग वर्णन कहीं-कहीं हास्यस्पद हों गया है।

2. भक्ति भावना-बिहारी ने कुछ भक्तिपरक दोहे भी लिखे हैं-बिहारी सतसई का पहला ही दोहा—’मेरी भव बाधा हरौ, राधा नागरि सोईं।’ इसका प्रमाण है, परन्तु बिहारी को भक्त कवि नहीं माना जा सकता। हो सकता है कि बिहारी ने ऐसे दोहे या जीवन की संध्या में शृंगारिकता से उकता कर लिखे हों या फिर ‘भरी बिहारी सतसई, भरी अनेक स्वाद’ की दृष्टि से लिखे हों। बिहारी के भक्तिपरक दोहों में श्रीराम, श्रीकृष्ण और नरसिंह अवतार की वन्दना की गई है। बिहारी के इन दोहों में भी चमत्कार प्रदर्शन देखने को मिलता है।

3. नीति सम्बन्धी दोहे-बिहारी के कुछ दोहे नीतिपरक भी हैं। बिहारी ने इन दोहों को अपनी कला के संयोग से अत्यन्त सरस और मार्मिक बना दिया है। बिहारी के कुछ दोहों को तो सूक्तियों में स्थान दिया जा सकता है।

4. विविध विषयों का समाहार-बिहारी सतसई में अध्यात्मक, पुराण, ज्योतिष गणित आदि अनेक विषयों का समाहार हुआ है जिससे यह सिद्ध होता है कि बिहारी को इन विषयों की यथेष्ट जानकारी थी।

5. छन्द अलंकार-बिहारी ने केवल दोहा जैसे छोटे छन्द में अपनी रचना की है और गागर में सागर भर दिया है। प्रत्येक दोहे में शब्द गहने में कुशलतापूर्वक जड़े हुए नगीनों की तरह प्रतीत होते हैं।
अलंकार बिहारी के काव्य में साध्य नहीं साधन रूप में व्यक्त हुए हैं। अलंकारों ने उनके काव्य के रूप को अधिक निखार दिया है। बिहारी ने अर्थालंकारों-यथा उपमा, रूपक, उत्प्रेक्षा, यमक का अधिक सहारा लिया है।

6. भाषा-बिहारी की भाषा कोमल, सरस तथा सँवरी हुई ब्रज भाषा है जिसमें माधुर्य गुण पर्याप्त मात्रा में मिलता है, जिसके कारण नाद सौन्दर्य काफ़ी प्रभावी हो गया है।

4. घनानन्द (सन् 1673-1760)

प्रश्न 1.
घनानन्द का संक्षिप्त जीवन परिचय देते हुए उनकी रचनाओं का भी उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
घनानन्द हिन्दी साहित्य में प्रेम की पीर के कवि के रूप में जाने जाते हैं। रीतिकालीन कवियों में घनानन्द ऐसे कवि हुए हैं जिन्हें सच्चा प्रेमी हृदय प्राप्त हुआ था।

जीवन परिचय-अन्य मध्यकालीन कवियों की तरह घनानन्द की जीवनी के विषय में अनेक विवाद हैं। आचार्य विश्वनाथ प्रसाद मिश्र के मतानुसार घनानन्द का जन्म सन् 1673 ई० में हुआ था। बाबू जगन्नाथ दास ‘रत्नाकर’ इनकी जन्मभूमि बुलन्द शहर मानते हैं। ये कायस्थ वंश में उत्पन्न हुए थे। इनका बचपन कैसे बीता, शिक्षा-दीक्षा कैसे हुई इस सम्बन्ध में सूचनाएँ उपलब्ध नहीं हैं।

एक जनश्रुति के अनुसार घनानन्द मुग़ल वंश के विलासी बादशाह मुहम्मदशाह रंगीला के मीर मुंशी थे। वे बहुत सुन्दर थे और गाते भी बहुत अच्छा थे। राजदरबार की एक नर्तकी सुजान से इन्हें प्रेम हो गया। एक दिन राजदरबार में गाते हुए घनानन्द से एक गुस्ताखी हो गई। गाते समय इनका मुँह सुजान की तरफ था और पीठ बादशाह की तरफ। बादशाह ने इसे अपना अपमान समझा और इन्हें दरबार और शहर छोड़ देने की आज्ञा दी। दरबार छोड़ते समय सुजान को भी अपने साथ चलने को कहा, किन्तु सुजान को तो पता ही नहीं था कि घनानन्द उससे प्रेम करते हैं, इसलिए उसने साथ चलने से इन्कार कर दिया। इस पर घनानन्द विरक्त होकर वृन्दावन चले गये और श्री राधा-कृष्ण की भक्ति में लीन हो गए, पर सुजान को भूल नहीं पाये। अपनी कविता में राधा और श्रीकृष्ण के लिए सुजान शब्द का ही प्रयोग करते रहे।

सन् 1760 में अहमदशाह अब्दाली के मथुरा के आक्रमण के समय अब्दाली के सैनिकों ने इनकी हत्या कर दी।
रचनाएँ-घनानन्द के जीवन की तरह ही इनकी रचनाओं के सम्बन्ध में पूरी जानकारी अभी तक प्राप्त नहीं हो सकी है। नागरी प्रचारिणी सभा की सन् 2000 तक की खोज के अनुसार इनके 17 ग्रन्थ हैं जिनमें से प्रमुख के नाम इस प्रकार हैं-

  1. सुजान हित
  2. वियोग वेलि
  3. इश्कलता
  4. ब्रज विलास
  5. सुजान सागर
  6. विरह लीला तथा
  7. घनानन्द कवित्त

कृष्ण भक्ति सम्बन्धी एक विशाल ग्रन्थ छत्रपुर के राजपुस्तकालय में उपलब्ध है।

इनमें ‘सुजानहित’ ही कवि की अमर कृति है। यह एक उपालम्भ काव्य है जिनमें सुजान के रूप का वर्णन तथा प्रेम सम्बन्धी छन्द हैं।

प्रश्न 2.
घनानन्द के काव्य की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
हिन्दी में प्रेमी की ओर से प्रेमिका की निष्ठुरता पर बहुत कम काव्य रचना हुई है, जबकि उर्दू कविता ऐसे विषयों से भरी पड़ी है। इस तरह घनानन्द का काव्य इस अभावं की पूर्ति करता है। घनानन्द के काव्य में मुख्यतः ‘प्रेम की पीर’ का चित्रण है, जिसे हम संयोग और वियोग दोनों रूपों में पाते हैं। घनानन्द के काव्य की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं-
1. प्रेमभाव का चित्रण-घनानन्द के काव्य का मुख्य विषय प्रेमभाव का चित्रण है। उनके प्रेम की मूल प्रेरक सुजान है। उसके रूप सौंदर्य, लज्जा आदि का सरल वर्णन उन्होंने किया है। सुजान की बेवफाई से वे तड़पे भी हैं। उनका यह लौकिक प्रेम बाद में अलौकिक प्रेम में बदल गया। घनानन्द के प्रेम की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं-
(i) एकनिष्ठ प्रेम-घनानन्द का प्रेम एकनिष्ठ है। वह तो सुजान से प्रेम करते थे, किन्तु सुजान को पता ही नहीं था कि कोई उससे इतना प्रेम करता है। घनानन्द ने उसे पत्र लिखा लेकिन उसने बिना पढ़े ही फाड़ कर फेंक दिया। मानों घनानन्द के दिल के टुकड़े-टुकड़े कर दिए। पर घनानन्द ने प्रेमिका की इस निष्ठुरता पर भी उससे प्रेम करना नहीं छोड़ा। आचार्य शुक्ल जी ने ठीक ही लिखा है कि-‘प्रेम की पीर को लेकर ही इनकी वाणी का प्रादुर्भाव हुआ।’

(ii) निष्काम-निस्वार्थ प्रेम-घनानन्द को इस बात की परवाह नहीं थी कि जिसे वह प्रेम करता है वह भी बदले में उससे प्रेम करे। सच्चे प्रेम में आदान-प्रदान की यह वाणिक-वृत्ति नहीं होती। घनानन्द तो निष्काम और निस्वार्थ प्रेम का अभिलाषी है।

(ii) आसक्ति प्रधान प्रेम-घनानन्द का प्रेम आसक्ति प्रधान है। इससे उसे प्रिय से मिलने पर हर्ष और वियोग में दुःख होता है। सुजान अवश्य ही अति सुन्दर रही होगी जो घनानन्द का दिल उस पर आया। भले उसने विश्वासघात किया, उसका दिल तोड़ा, किन्तु घनानन्द के मुख से उफ तक न निकली।

2. भक्ति भावना-सुजान के प्रति लौकिक प्रेम बाद में श्रीकृष्ण के प्रति अलौकिक प्रेम में बदल गया। किन्तु भक्ति में भी वे सुजान को न भूल पाये। सुजान अब श्रीकृष्ण का वाचक बन गया था। श्रीकृष्ण की भक्ति में लीन होकर घनानन्द ने अनेक पदों की रचना की है।

5. भूषण (सन् 1613-1715)

प्रश्न 1.
कविवर भूषण का संक्षिप्त जीवन परिचय देते हुए उनकी रचनाओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
रीतिकालीन राज्याश्रय प्राप्त कवियों में भूषण ही ऐसे कवि हुए हैं जिन्होंने अपने आश्रयदाताओं की वासनापूर्ति के लिए काव्य की स्चना नहीं की बल्कि अपने आश्रयदाताओं की वीरता का ही बखान किया है। उनकी कविता में राष्ट्रीयता के गुण विद्यमान हैं। कुछ आलोचक उन पर साम्प्रदायिकता का दोष लगाते हैं जो हमारी दृष्टि में भूषण के साथ अन्याय करना ही है।

जीवन-परिचय-भूषण का जन्म सन् 1613 में जिला कानपुर के तिकवापुर गाँव में हुआ। वे कश्यप गोत्री कान्यकुब्ज ब्राह्मण थे। भूषण यह उनका वास्तविक नाम नहीं है। यह उनकी एक पदवी है जिसे भूषण के अनुसार उन्हें चित्रकूटपति सोलंकी राजा हृदय राम ने प्रदान की थी। भूषण के तीन भाई बताये जाते हैं-चिन्तामणि, मतिराम और जटाशंकर। इनमें प्रथम दो रीतिकाल के प्रसिद्ध कवि और आचार्य हुए।

भूषण ने भी रीतिकालीन कवियों की तरह राज्याश्रय ग्रहण किया। इनकी रचनाओं से ज्ञात होता है कि इनका सम्पर्क लगभग चौदह राजाओं के साथ रहा, किन्तु अन्त में अपनी विचारधारा के समर्थक छत्रपति शिवाजी महाराज के यहाँ पहुँचे। पन्ना के महाराज छत्रसाल भी इनका बहुत सम्मान करते थे। भूषण ने छत्रपति शिवाजी महाराज और छत्रसाल की वीरता का गान किया है। उन्होंने शिवाजी के रूप में एक महान् राष्ट्र संरक्षक व्यक्तित्व के दर्शन किए और उनके भीतर श्रीराम और श्रीकृष्ण की अद्वितीय शक्ति को देखा। डॉ० रवेलचन्द आनन्द उनके व्यक्तित्व के बारे में लिखते हैं-‘वीर कवि भूषण स्वाभिमानी व्यक्ति थे। उनके व्यक्तित्व और काव्य में स्वाभिमान, ओज, दर्प और निर्भीकता आदि गुण सर्वाधिक मुखरित हैं। उनके मन में देश के प्रति प्रेम था, प्राचीन परम्पराओं एवं भारतीय संस्कृति के प्रति दृढ़ आस्था थी। कवि का काव्य प्रशस्ति मूलक अवश्य है, पर खुशामदी कवियों जैसा नहीं। वे अपने काव्य के प्रति सजग एवं ईमानदार थे।’ रचनाएँ-भूषण के नाम से निम्नलिखित छः रचनाओं का उल्लेख किया जाता है-

  1. शिवराज भूषण
  2. शिवाबावनी
  3. छत्रसालदशक
  4. भूषण उल्लास
  5. दूषण उल्लास
  6. भूषण हजारा।।

डॉ० राजमल बोहरा इनमें शिवराज भूषण को ही प्रमाणिक मानते हैं।

प्रश्न 2.
भूषण के काव्य की प्रमुख विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
भूषण हिन्दी के सच्चे वीर रस के कवि हैं। उनका सारा काव्य वीर रसात्मक है। केवल कुछ फुटकर छन्द ही शृंगार के हैं, जिन्हें अपवाद मानना चाहिए। उनके काव्य की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं-
1. चरितनायक की वीरता का वर्णन-आचार्य रामचन्द्र शुक्ल लिखते हैं-‘भूषण ने जिन नायकों को अपने वीर काव्यों का विषय बनाया है वे अन्याय दमन में तत्पर, हिन्दू धर्म के रक्षक, दो इतिहास प्रसिद्ध वीर थे। भूषण की कविता शिवाजी के चरित्र को सुशोभित करती है और शिवाजी हमारी राष्ट्रीयता को गौरव प्रदान करते हैं।’ भूषण ने अपने चरितनायकों की वीरता का वर्णन राष्ट्र रक्षक के रूप में किया है। उन्होंने अपने चरितनायकों में श्रीराम और श्रीकृष्ण की शक्ति को देखा था। भूषण शिवाजी को कलियुग का अवतार मानते हैं। भूषण ने अपने चरितनायकों की वीरता, साहस, यश, शौर्य, तेज आदि का ओजपूर्ण वर्णन किया है।

2. सजीव युद्ध वर्णन-भूषण के काव्य में युद्धों का सजीव वर्णन देखने को मिलता है। भूषण की वर्णन शैली इतनी प्रवाहपूर्ण और प्रभावशाली है कि युद्ध का एक चित्र-सा सामने खिंच जाता है।

3. ऐतिहासिकता की रक्षा- भूषण के काव्य में एक विशेषता यह भी देखने को मिलती है कि उन्होंने ऐतिहासिक तथ्यों को ईमानदारी से ग्रहण किया है। उन्होंने शत्रु पक्ष की वीरता और पराक्रम का यथास्थान वर्णन किया है। शिवाजी यदि सिंह है तो औरंगज़ेब भी हाथी है। मुग़ल सेना यदि नाग है तो शिवाजी खगराज गरुड़ हैं।

4. वीर रस के सहयोगी रसों का परिपाक-भूषण के काव्य में वीर रस के सहयोगी रसों-रौद्र, वीभत्स, भयानक आदि का वर्णन भी सुन्दर हुआ है। इनमें भयानक रस का वर्णन विस्तार से किया गया है।

5. राष्ट्रीयता-स्वदेश प्रेम भूषण की नस-नस में भरा है। जब औरंगज़ेब ने मन्दिरों को तोड़कर मस्जिदें बनानी शुरू की तो भूषण का खून खौल उठा और उन्होंने औरंगजेब का विरोध करने वाले शिवाजी का साथ दिया। शिवाजी के रूप में भूषण को एक लोकनायक मिल गया था। भूषण पर साम्प्रदायिकता का दोष लगाने वालों ने शायद भूषण की कविता का वह अंश नहीं पढ़ा है, जिसमें उन्होंने बाबर, हुमायूँ और अकबर की प्रशंसा की हैं।

कुछ आलोचक तो छत्रपति शिवाजी को भी साम्प्रदायिक कहते हैं, किन्तु वे यह भूल जाते हैं कि शिवाजी ने हिन्दुओं की रक्षा करने का बीड़ा उठाया था न कि मुसलमानों का विरोध करने का। भूषण ने भी बहुभाषी होने पर भी भारत को हिन्दी के माध्यम से एक सूत्रता में बाँधने का प्रयत्न किया।

वस्तुनिष्ठ/अति लघु प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
रीतिकाल का समय कब से कब तक माना जाता है?
उत्तर:
रीतिकाल का समय सन् 1643 ई० (संवत् 1700) से सन् 1843 ई० (संवत् 1900) तक माना जाता है।

प्रश्न 2.
रीतिकाल से पूर्व कौन-सी प्रवृत्तियों ने सिर उठाना शुरू कर दिया था?
उत्तर:
रीतिकाल से पूर्व निरंकुश राजतन्त्रीय प्रवृत्तियों ने सिर उठाना शुरू कर दिया था।

प्रश्न 3.
रीतिकाल में किस-किस मुग़ल बादशाह ने शासन किया?
उत्तर:
रीतिकाल में जहाँगीर, शाहजहाँ, औरंगज़ेब, शाह आलम और मुहम्मद शाह रंगीला आदि राजाओं ने भारत पर शासन किया।

प्रश्न 4.
मुग़ल साम्राज्य की नींव हिलाने में किस-किस का योगदान रहा?
उत्तर:
सन् 1738 ई० में नादिर शाह और सन् 1761 ई० में अहमदशाह अब्दाली के आक्रमणों ने मुग़ल साम्राज्य की नींव हिलाकर रख दी।

PSEB 12th Class हिन्दी साहित्य का इतिहास रीतिकाल

प्रश्न 5.
सन् 1857 की जनक्रान्ति के विफल होने का क्या परिणाम निकला?
उत्तर:
सन् 1857 की जनक्रान्ति के विफल होने के फलस्वरूप मुग़ल शासन पूरी तरह समाप्त हो गया और भारत सन् 1903 ई० तक पूरी तरह अंग्रेज़ी शासन के अधीन हो गया।

प्रश्न 6.
औरंगजेब के उत्तराधिकारी कैसे थे?
उत्तर:
औरंगज़ेब के उत्तराधिकारी अयोग्य, विलासी निकले, फलस्वरूप अनेक राज्य स्वतन्त्र हो गए।

प्रश्न 7.
सामाजिक दृष्टि से रीतिकाल को क्या कहा जाता है?
उत्तर:
सामाजिक दृष्टि से रीतिकाल विलास प्रधान युग कहा जा सकता है। मुग़ल बादशाहों का अनुकरण करते हुए सामन्त वर्ग और अमीर वर्ग भी विलासिता में डूबता जा रहा था।

प्रश्न 8.
रीतिकाल की विलासिता का समाज पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
रीतिकाल में विलासिता के प्रदर्शन की प्रवृत्ति के कारण पौरुष का ह्रास हुआ और मनोबल की कमी के कारण समाज का बौद्धिक स्तर भी गिरा।

प्रश्न 9.
रीतिकालीन समाज में नारी की स्थिति कैसी थी ?
उत्तर:
रीतिकाल में नारी को केवल मनोरंजन और विलास की सामग्री समझा गया।

प्रश्न 10.
रीतिकाल में किस कुप्रथा का प्रचलन हुआ और क्यों?
उत्तर:
रीतिकाल में बाल-विवाह की प्रथा का प्रचलन शुरू हुआ क्योंकि इस काल में किसी भी सुन्दर कन्या का अपहरण किया जाना मामूली बात थी।

प्रश्न 11.
रीतिकालीन समाज में जनसाधारण की दशा कैसी थी?
उत्तर:
रीतिकाल में जनसाधारण की शिक्षा, चिकित्सा आदि का कोई प्रबन्ध नहीं था। जनसाधारण में अन्धविश्वास और रूढ़ियाँ घर कर गई थीं।

प्रश्न 12.
रीतिकालीन समाज में मजदूर, किसान और कलाविदों की हालत कैसी थी?
उत्तर:
रीतिकाल में मजदूर वर्ग अत्याचारों से पीड़ित था तो किसान वर्ग जीविका निर्वाह के साधनों से रहित था। कलाविदों को शासक वर्ग उपेक्षा की दृष्टि से देखता था।

प्रश्न 13.
रीतिकालीन काव्य में तत्कालीन समाज का चित्रण क्यों नहीं मिलता?
उत्तर:
रीतिकालीन कवि अपने आश्रयदाताओं की विलासिता को भड़काने वाली कविता ही लिखा करते थे। इसी कारण जन-जीवन की पीड़ाओं का उनके काव्य में चित्रण नहीं मिलता।

प्रश्न 14.
रीतिकालीन धार्मिक परिस्थितियाँ कैसी थीं?
उत्तर:
धार्मिक दृष्टि से रीतिकाल सभ्यता और संस्कृति के पतन का युग था। धर्म के नाम पर भोग-विलास के साधन जुटाए जाने लगे थे।

प्रश्न 15.
रीतिकालीन आर्थिक परिस्थितियों में सबसे बड़ा बदलाव क्या आया?
उत्तर:
रीतिकाल में वर्ण व्यवस्था व्यवसाय पर आधारित होने लगी थी। लोग उत्पादक और उपभोक्ता दो वर्गों में बँट गए थे।

प्रश्न 16.
रीतिकाल में प्रचलित विभिन्न काव्यधाराओं के नाम बताएं।
उत्तर:
रीतिकाल में तीन प्रकार की काव्य धाराएँ प्रचलित थीं(1) रीतिबद्ध काव्य (2) रीतिसिद्ध काव्य (3) रीतिमुक्त काव्य।

प्रश्न 17.
किन्हीं चार रीतिबद्ध कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर:
केशव, देव, मतिराम, चिन्तामणि।

प्रश्न 18.
किन्हीं दो रीतिसिद्ध कवियों और उनकी रचनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर:
बिहारी (बिहारी सतसई), वृन्द (पवन पच्चीसी)।।

प्रश्न 19.
किन्हीं चार रीतिमुक्त कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर;
घनानंद, बोधा, आलम, ठाकुर।

प्रश्न 20.
किन्हीं दो रीनिबद्ध काव्यों के नाम उनके रचनाकारों सहित लिखें।
उत्तर:
रसिकप्रिया (केशव), भवानी विलास (देव)।

प्रश्न 21.
रीतिकाल के प्रवर्तक आचार्य कवि किसे माना जाता है?
उत्तर:
केशवदास को।

प्रश्न 22.
किन्हीं दो रीतिमुक्त काव्य कृतियों के नाम उनके रचनाकारों के नाम सहित लिखें।
उत्तर:
सुजान सागर (घनानन्द), विरह बारीश (बोधा)।

प्रश्न 23.
रीतिकाल में वीर काव्य लिखने वाले किन्हीं दो कवियों के नाम लिखें।
उत्तर:
भूषण और पद्माकर।

प्रश्न 24.
रीतिकाल में नीतिपरक काव्य लिखने वाले किन्हीं दो कवियों के नाम लिखें।
उत्तर:
रहीम और वृंद।

प्रश्न 25.
मिश्रबन्धओं ने रीतिकाल को किस नाम से पुकारा है?
उत्तर:
अलंकृत काल।

प्रश्न 26.
रीतिकाल को ‘कलाकाल’ की संज्ञा किस विद्वान् ने दी?
उत्तर:
डॉ० राम कुमार वर्मा ने।

प्रश्न 27.
रीतिबद्ध काव्य से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
रीतिबद्ध काव्य वह है जिसमें काव्यशास्त्र के आधार पर काव्यांगों के लक्षण तथा उदाहरण दिए जाते हैं।

प्रश्न 28.
रीतिमुक्त कवि किसे कहते हैं?
उत्तर:
जिन्होंने कोई लक्षण ग्रन्थ अथवा रीतिबद्ध रचना नहीं लिखी हो।

प्रश्न 29.
रीतिकालीन काव्य की कोई चार विशेषताएँ लिखें।
उत्तर:
शृंगारिकता, आलंकारिकता, भक्ति और नीति, लक्षण ग्रन्थों का निर्माण।

प्रश्न 30.
केशव की प्रमुख रचनाओं का उल्लेख करें।
उत्तर:
रामचन्द्रिका, रसिकप्रिया, कविप्रिया, रतन बावनी।

प्रश्न 31.
बिहारी का कोई एक नीतिपरक दोहा लिखें।
उत्तर:
बड़े न हूजै गुनन बिन, विरद बड़ाई पाय। कहत धतूरे सौ कनक, गहनो गढ़यो न जाय।

प्रश्न 32.
रीतिकाल के किस कवि को ‘कठिन काव्य का प्रेत’ कहा जाता है?
उत्तर:
केशवदास को।

प्रश्न 33.
रीतिकाल में राष्ट्रीय आदर्श लेकर चलने वाले कवि और उसकी दो रचनाओं के नाम लिखें।
उत्तर:
भूषण-शिवाबावनी, छत्रसालंदशक, शिवराज भूषण, भूषण उल्लास।

PSEB 12th Class हिन्दी साहित्य का इतिहास रीतिकाल

प्रश्न 34.
रीतिकाल को श्रृंगार काल नाम किसने दिया?
उत्तर:
डॉ० विश्वनाथ प्रसाद मिश्र ने।

प्रश्न 35.
डॉ० नगेंद्र ने रीतिकाल का प्रवर्तक कवि किसे माना है?
उत्तर:
केशवदास को।

प्रश्न 36.
‘हिन्द की चादर’ किसे कहा जाता है?
उत्तर:
गुरु तेग बहादुर जी को हिन्द की चादर कहा जाता है।

प्रश्न 37.
“देह शिवा वर मोहि इहै, शुभ कर्मन ते कबहुँ न टरौं।” ये पंक्तियाँ किस रीतिकालीन कवि की
उत्तर:
गुरु गोबिन्द सिंह जी द्वारा रचित हैं।

प्रश्न 38.
हिन्दी साहित्य में काल विभाजन की दृष्टि से रीतिकाल दूसरा काल है अथवा तीसरा काल है।
उत्तर:
तीसरा काल है।

प्रश्न 39.
आचार्य राम चद्र शुक्ल ने रीतिकाल का आरंभ किस कवि से माना है?
उत्तर:
चिंतामणि त्रिपाठी से।

प्रश्न 40.
ईस्वी सन् में कितने वर्ष जोड़ने पर विक्रमी संवत् बनता है?
उत्तर:
57 वर्ष।

प्रश्न 41.
रीतिकाल को श्रृंगारकाल नाम किसने दिया? .
उत्तर:
आचार्य विश्वनाथ प्रसाद मिश्र ने।

प्रश्न 42.
रीतिकाल को ‘रीतिकाल’ नाम किस ने दिया था?
उत्तर:
आचार्य रामचंद्र शुक्ल।

प्रश्न 43.
रीतिकाल के किसी एक मुग़ल शासक का नाम बताएं।
उत्तर;
शाहजहां।

प्रश्न 44.
रीतिकालीन किसी एक विश्व प्रसिद्ध संगीतज्ञ का नाम लिखें।
उत्तर:
तानसेन।

प्रश्न 45.
“बिहारी सतसई’ किस कवि की रचना है?
उत्तर:
बिहारी।

प्रश्न 46.
अकबर के बाद कौन राजा बना?
उत्तर:
जहाँगीर।

प्रश्न 47:
“बिहारी सतसई’ किस कवि की रचना है?
उत्तर:
बिहारी लाल।

प्रश्न 48.
‘भाव विलास’ किस की रचना है?
उत्तर:
महाकवि देव।

बोर्ड परीक्षा में पूछे गए प्रश्न

प्रश्न 1.
रीतिकालीन किसी एक मुग़ल शासक का नाम लिखें।
उत्तर:
शाहजहाँ।

प्रश्न 2.
रीतिकालीन कवि बिहारी की एक मात्र रचना का नाम लिखिए।
उत्तर:
बिहारी सतसई।

प्रश्न 3.
रीतिकाल को ‘रीतिकाल’ नाम किसने दिया?
उत्तर:
आचार्य रामचंद्र शुक्ल।

प्रश्न 4.
एक रीतिसिद्ध कवि का नाम लिखें।
उत्तर:
बिहारी।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
रीतिकाल का प्रवर्तक कवि किसे माना जाता है?
(क) केशव
(ख) बिहारी
(ग) भूषण
(घ) सेनापति।
उत्तर:
(क) केशव

प्रश्न 2.
रीतिकाल को प्रवृत्ति के आधार पर किन भागों में बांटा जा सकता है?
(क) रीतिबद्ध
(ख) रीतिसिद्ध
(ग) रीतिमुक्त
(घ) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(घ) उपर्युक्त सभी

प्रश्न 3.
मिश्र बंधुओं ने रीतिकाल को किस नाम से अभिहित किया है?
(क) अलंकृत काल
(ख) श्रृंगार काल
(ग) रीतिकाल
(घ) कला काल।
उत्तर:
(क) अलंकृत काल

प्रश्न 4.
रीतिकाल को कला काल की संज्ञा किसने दी?
(क) रामचन्द्र शुक्ल
(ख) रामकुमार वर्मा
(ग) मिश्रबन्धु
(घ) बिहारी।
उत्तर:
(ख) रामकुमार वर्मा

PSEB 12th Class हिन्दी साहित्य का इतिहास रीतिकाल

प्रश्न 5.
रीतिकाल का कवि होते हुए भी किस कवि को भक्तिकाल का माना जाता है?
(क) बिहारी
(ख) भूषण
(ग) चन्द्र
(घ) केशव।
उत्तर:
(क) बिहारी

प्रश्न 6.
रीतिकाल में नीतिपरक काव्य लिखने वाले प्रतिनिधि कवि कौन हैं?
(क) रहीम
(ख) वृन्द
(ग) रहीम और वृन्द
(घ) केशव।
उत्तर:
(ग) रहीम और वृन्द।

प्रमुख कवि

केशव

प्रश्न 1.
केशव का जन्म कब और कहाँ हुआ?
उत्तर:
केशव का जन्म सन् 1555 के आसपास बुंदेलखंड के ओरछा नगर में हुआ।

प्रश्न 2.
केशव कौन-से राजा के दरबारी कवि थे?
उत्तर:
केशव ओरछा नरेश इन्द्रजीत सिंह के दरबारी कवि, मन्त्री और गुरु थे।

प्रश्न 3.
केशव की किन्हीं दो प्रसिद्ध रचनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर:
रामचन्द्रिका और रसिक प्रिया।

प्रश्न 4.
केशव की रचना रसिक प्रिया का कथ्य क्या है?
उत्तर:
रसिक प्रिया में श्रृंगार को रसराज मानकर अन्य रसों को उसी में अन्तर्भूत करने का प्रयास किया गया है।

प्रश्न 5.
कवि प्रिया कैसा ग्रन्थ है?
उत्तर:
कवि प्रिया में काव्य दोषों और अलंकारों का विवेचन किया गया है।

प्रश्न 6.
रामचन्द्रिका की रामकथा कौन-से संस्कृत ग्रन्थों से प्रभावित है?
उत्तर:
रामचन्द्रिका पर स्पष्ट रूप से संस्कृत ग्रन्थ ‘प्रसन्नराघव’ तथा ‘हनुमन्न नाटक’ का प्रभाव दिखाई पड़ता है।

प्रश्न 7.
रामचन्द्रिका की सबसे बड़ी विशेषता कौन-सी है?
उत्तर:
रामचन्द्रिका की सबसे बड़ी विशेषता उसकी संवाद योजना है।

देव

प्रश्न 1.
महाकवि देव का जन्म कब और कहाँ हुआ?
उत्तर:
महाकवि देव का जन्म सन् 1673 ई० में उत्तर प्रदेश के इटावा नगर में हुआ।

प्रश्न 2.
महाकवि देव के आश्रयदाताओं में से किन्हीं दो के नाम लिखिए।
उत्तर:
राजा भोगी लाल तथा राजा मर्दन सिंह।

प्रश्न 3.
देव की किन्हीं दो प्रसिद्ध रचनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर:
भाव विलास तथा भवानी विलास।

प्रश्न 4.
देव ने अपने आश्रयदाताओं में सबसे अधिक प्रशंसा किसकी की है?
उत्तर:
देव ने अपने आश्रयदाताओं में सबसे अधिक राजा भोगीलाल की प्रशंसा की है।

प्रश्न 5.
देव के काव्य में सर्वाधिक किस रस का विवेचन हुआ है ?
उत्तर:
देव के काव्य में सर्वाधिक श्रृंगार रस का विवेचन हुआ है। किन्तु इस श्रृंगार वर्णन में कहीं भी हल्कापन नहीं है।

प्रश्न 6.
देव ने श्रृंगार रस का पूर्ण परिपाक किस प्रेम में माना है ?
उत्तर:
देव ने दाम्पत्य प्रेम में ही श्रृंगार का पूर्ण परिपाक माना है। उनकी दृष्टि में स्वकीया प्रेम ही सच्चा प्रेम है।

बिहारी

प्रश्न 1.
बिहारी का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
उत्तर:
बिहारी का जन्म सन् 1595 को ग्वालियर में हुआ था।

प्रश्न 2.
बिहारी की एकमात्र रचना का नाम लिखकर बताइए कि उसमें कितने दोहे हैं ?
उत्तर:
बिहारी की एकमात्र रचना बिहारी सतसई है जिसमें 713 दोहे हैं।

प्रश्न 3.
बिहारी की मृत्यु कब और कहाँ हुई?
उत्तर:
बिहारी की मृत्यु 1663 ई० में वृंदावन में हुई।

PSEB 12th Class हिन्दी साहित्य का इतिहास रीतिकाल

प्रश्न 4.
बिहारी सतसई में किन-किन विषयों में दोहे देखने को मिलते हैं?
उत्तर:
बिहारी सतसई में शृंगार के अतिरिक्त अध्यात्मक, पुराण, ज्योतिष, गणित आदि अनेक विषयों का समाहार हुआ हैं।

घनानन्द

प्रश्न 1.
घनानन्द का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
उत्तर:
घनानन्द का जन्म सन् 1673 ई० में बुलन्द शहर में हुआ माना जाता है।

प्रश्न 2.
घनानन्द किस बादशाह के दरबार में नौकरी करते थे?
उत्तर:
घनानन्द मुग़ल वंश के विलासी बादशाह मुहम्मद शाह रंगीला के मीर मुंशी थे।

प्रश्न 3.
घनानन्द को बादशाह ने दरबार से किस कारण निकाल दिया?
उत्तर:
एक दिन दरबार में गाना गाते समय घनानन्द की पीठ बादशाह की तरफ हो गई जिसे बादशाह ने बेअदबी समझकर इन्हें शहर से निकाल दिया।

प्रश्न 4.
घनानन्द की किन्हीं दो रचनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. सुजान हित
  2. सुजान सागर।

प्रश्न 5.
घनानन्द को प्रेम की पीर का कवि क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
घनानन्द ने रीतिकालीन कवियों की लीक से हटकर प्रेम की पीर से बिंधे हृदय के अश्रु मोतियों को अपने काव्य के सूत्र में पिरोया है। इसलिए इन्हें प्रेम की पीर का कवि कहा जाता है।

प्रश्न 6.
घनानन्द को रीतिकालीन कौन-सी काव्यधारा का कवि माना जाता है?
उत्तर:
घनानन्द रीतिकाल की रीतिमुक्त काव्यधारा के प्रतिनिधि कवि हैं।

प्रश्न 7.
घनानन्द के काव्य की कोई-सी दो विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
(1) एकनिष्ठ प्रेम तथा (2) निष्काम-नि:स्वार्थ प्रेम।

प्रश्न 8.
घनानन्द का लौकिक प्रेम किस रूप में परिवर्तित हआ?
उत्तर:
घनानन्द का सुजान के प्रति अलौकिक प्रेम बाद में श्रीकृष्ण के प्रति अलौकिक प्रेम में बदल गया। सुजान शब्द तब श्रीकृष्ण का वाचक बन गया था।

प्रश्न 9.
घनानन्द की भक्ति कैसी थी?
उत्तर:
घनानन्द की भक्ति वैष्णों की भक्ति है। कृष्ण भक्त कवियों की तरह इनकी भक्ति भी लीला प्रधान और श्रृंगार व्यंजक है।

प्रश्न 10.
घनानन्द की भक्ति पर किस-किस का प्रभाव देखने को मिलता है?
उत्तर;
घनानन्द की भक्ति पर भारतीय दर्शन और सूफी दर्शन का प्रभाव देखने को मिलता है।

प्रश्न 11.
घनानन्द की भक्ति सम्बन्धी रचनाओं की प्रमुख विशेषता क्या है ?
उत्तर:
घनानन्द की भक्ति सम्बन्धी रचनाओं में भगवत् कृपा का महत्त्व और वृंदावन की महिमा का विशेष रूप से गान किया गया है।

भूषण

प्रश्न 1.
कविवर भूषण का जन्म कब और कहाँ हुआ?
उत्तर:
डॉ० नगेन्द्र के अनुसार भूषण का जन्म सन् 1613 में कानपुर के निकट तिकवापुर नामक स्थान पर हुआ।

प्रश्न 2.
भूषण कवि को ‘भूषण’ की उपाधि किसने दी?
उत्तर:
चित्रकूट के राजा रूद्रशाह सोलंकी ने कवि को ‘भूषण’ की उपाधि से सम्मानित किया।

प्रश्न 3.
भूषण के आश्रयदाताओं में किन्हीं दो के नाम लिखिए।
उत्तर:
छत्रपति शिवा जी महाराज तथा छत्रसाल।

प्रश्न 4.
भूषण की प्रसिद्ध रचनाओं में से किन्हीं दो के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. शिवराज भूषण
  2. छत्रसाल दशक।

प्रश्न 5.
भूषण ने अपने काव्य में शिवाजी को किस रूप में चित्रित किया है?
उत्तर:
भूषण ने अपने काव्य में शिवाजी को भारतीय संस्कृति के रक्षक एवं उद्धारक के रूप में चित्रित किया है।

प्रश्न 6.
भूषण के काव्य की किन्हीं दो विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:

  1. सजीव युद्ध वर्णन
  2. चरितनायक की वीरता का वर्णन।

प्रश्न 7.
भूषण के काव्य में वीररस का पूर्ण परिपाक कौन-से प्रसंगों में मिलता है?
उत्तर:

  1. युद्ध-वर्णन के प्रसंगों तथा
  2. चरित नामक अजेय शक्ति का परिचय देते समय।

प्रश्न 8.
शिवा बावनी किसकी रचना है?
उत्तर:
भूषण।

प्रश्न 9.
भूषण की किसी एक रचना का नाम लिखिए।
उत्तर:
शिवराज भूषण।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कवि प्रिया के लेखक कौन हैं?
(क) केशव
(ख) बिहारी
(ग) सेनापति
(घ) चन्द।
उत्तर:
(क) केशव

प्रश्न 2.
केशव ने किस रचना का लेखन एक रात में कर दिया था?
(क) कविप्रिया
(ख) रामचन्द्रिका
(ग) रामायण
(घ) रामकथा।
उत्तर:
(ख) रामचन्द्रिका

प्रश्न 3.
‘भाव विलास’ किसकी रचना है?
(क) केशव
(ख) बिहारी
(ग) देव
(घ) घनानन्द।
उत्तर:
(ग) देव

प्रश्न 4.
‘बिहारी सतसई’ में कितने दोहे हैं?
(क) 713
(ख) 715
(ग) 717
(घ) 718.
उत्तर:
(क) 713

PSEB 12th Class हिन्दी साहित्य का इतिहास रीतिकाल

प्रश्न 5.
घनानंद रीतिकाल की किस धारा के कवि थे?
(क) रीतिबद्ध
(ख) रीतिसिद्ध
(ग) रीतिमुक्त
(घ) रीतिकाल।
उत्तर:
(ग) रीतिमुक्त

प्रश्न 6.
‘शिवाबावनी’ किसकी रचना है?
(क) बिहारी
(ख) भूषण
(ग) केशव
(घ) रहीम।
उत्तर:
(ख) भूषण।

The School for Sympathy Question Answer Class 12 English Supplementary Chapter 1 PSEB Solutions

Punjab State Board PSEB 12th Class English Book Solutions Supplementary Chapter 1 The School for Sympathy Textbook Exercise Questions and Answers.

Class 12th English Supplementary Chapter 1 The School for Sympathy Question Answers

The School for Sympathy Class 12 Questions and Answers

Short Answer Type Questions

Question 1.
Give a brief account of Mr. Lucas’s visit to Miss Beam’s school.
Mr: Lucas के Miss Beam के स्कूल में दौरे का संक्षिप्त वर्णन करो।
Answer:
Once the author visited Miss Beam’s school. It taught normal school subjects and also made the students sympathetic, thoughtful and kind. The author saw many handicapped children. Actually they were all healthy. They were playing at being crippled. Each child was made to have one blind day, one lame day, one dumb day and one maimed day in a term.

This made the students understand the misfortunes of the handicapped. The blind day was very troublesome. At the end of the visit, the author thought that Miss Beam’s school did a very useful service in making the students sympathetic and kind.

PSEB 12th Class English Solutions Supplementary Chapter 1 The School for Sympathy

एक बार लेखक मिस बीम के स्कूल गया। इसमें आम विषय पढ़ाए जाते थे और यह विद्यार्थियों को सहानुभूतिपूर्ण, विचारशील और दयालु बनाता था। लेखक ने बहुत से अपंग बच्चे देखे। वास्तव में वे सभी स्वस्थ थे। वे अपंग होने का अभिनय कर रहे थे।

एक अवधि में हर बच्चे के लिए एक अन्धा होने का दिन, एक लंगड़ा होने का दिन, एक बहरा और गूंगा होने का दिन और एक अपाहिज होने का दिन आवश्यक था। इससे विद्यार्थियों को अपंग मानवों के दुर्भाग्य की जानकारी होती थी। अन्धा होने का दिन बहुत कष्टदायक था। दौरे के अन्त में लेखक ने सोचा कि मिस बीम का स्कूल विद्यार्थियों को सहानुभूतिपूर्ण तथा दयालु बनने में बहुत लाभदायक काम करता था।

Question 2.
“In the course of the term every child has one blind day, one lame day, one deaf day, one maimed day, one dumb day.” What were the children expected to do on these days ? ”
(पढ़ाई की) अवधि के दौरान प्रत्येक बच्चे को एक दिन अन्धा, एक दिन लंगड़ा, एक दिन बहरा, एक दिन अपंग, एक दिन गूंगा होना पड़ता है।” इन दिनों बच्चों से क्या आशा की जाती थी ?
Answer:
On the blind day, the eyes of children were bandaged. Such children needed help in everything. On the lame day, a leg of the child was tied up and he was to hop about on a crutch. On the deaf day, the ears of children were clogged. On the maimed day, an arm was tied up and the children had to get their food cut for them.

On the dumb day, they were to remain silent. As their mouths were not bandaged, they had to depend upon their will power. They were made to take part in these misfortunes in order to make them appreciate and understand the misfortune of others. The basic idea was to make the children sympathetic towards such helpless children.

PSEB 12th Class English Solutions Supplementary Chapter 1 The School for Sympathy

अन्धा होने के दिन, बच्चों की आंखों पर पट्टी बांध दी जाती थी। ऐसे बच्चों को प्रत्येक काम में सहायता की आवश्यकता थी। लंगड़ा होने के दिन बच्चे की एक टांग बांध दी जाती थी और उसे बैसाखी पर फुदकना पड़ता था। बहरा होने के दिन, बच्चों के कान अवरुद्ध कर दिये जाते थे।

अपंग होने के दिन बच्चे की एक भुजा बांध दी जाती थी और बच्चों को उनका भोजन काटना होता था। गूंगा होने के दिन उन्हें चुप रहना होता था। क्योंकि उनके मुंह पर पट्टी नहीं बांधी जाती थी उन्हें अपनी इच्छा-शक्ति पर निर्भर रहना पड़ता था। उन्हें इन दुर्भाग्यों में भाग लेने के लिये शिक्षित किया जाता था ताकि वे दूसरों के दुर्भाग्य को समझ सकें। मुख्य विचार बच्चों को ऐसे असहाय बच्चों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण बनाना था।

Long Answer Type Questions

Question 1.
What did the author see in Miss Beam’s school at first sight? How did he feel about it?
पहली नज़र में लेखक ने Miss Beam के स्कूल में क्या देखा ? इस के बारे में उसे कैसा लगा ?
Answer:
The author visited Miss Beam’s school. He looked out of the window. He told Miss Beam that he had seen some very beautiful grounds and a lot of jolly children. But it was an unpleasant and painful experience. He pointed out that all the children were not as healthy and active as they should be.

On entering the school, he saw a girl being led about by another child. It could be understood that the girl had some trouble with her eyes. After that, the writer could see two more girls in the same condition. He also saw a girl with a crutch watching the other children at play. He came to the conclusion that the girl must be a helpless cripple.

लेखक मिस बीम के स्कूल गया। उसने खिड़की से बाहर देखा। उसने मिस बीम को बताया कि उसने बहुत सुन्दर स्थल और बहुत से प्रसन्न बच्चे देखे हैं। लेकिन यह असुहावना और दुखद अनुभव था। उसने कहा कि सब बच्चे इतने स्वस्थ और चुस्त नहीं थे जितने होने चाहिये। स्कूल में प्रवेश करने पर उसने एक लड़की को दूसरे बच्चे द्वारा ले जाते हुए देखा।

यह समझा जा सकता था कि लड़की की आंखों मे कोई तकलीफ थी। इसके पश्चात् लेखक दो और लड़कियों को उसी हालत में देख सकता था। उसने एक लड़की को बैसाखी के साथ दूसरे बच्चों को खेलते हुए देखा। वह इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि लड़की असहाय विकलांग थी।

Question 2.
Give a character-sketch of Miss Beam.
Answer:
Miss Beam was kind-hearted, middle-aged, authoritative and full of understanding. She started a new school known as the School for Sympathy. Important school subjects were taught in this school. But this school was different in one aspect. Here the students were given training in good qualities. The real aim of the school was to give training in thoughtfulness, humanity and good citizenship.

Every child in her school had one blind day, one lame day, one deaf day and one dumb day etc. The children thus had a taste of misfortune. As a result, they learnt to be sympathetic towards handicapped people. Miss Beam was an asset to society. She wanted to promote noble ideas in society.

PSEB 12th Class English Solutions Supplementary Chapter 1 The School for Sympathy

मिस बीम एक दयालु-हृदय वाली, अधेड़ अवस्था की, रौबदार और समझदार स्त्री थी। उसने School for Sympathy के नाम से एक नया स्कूल चालू किया। स्कूल के महत्त्वपूर्ण विषय इस स्कूल में पढ़ाये जाते थे। लेकिन एक बात में यह स्कूल भिन्न था। यहां विद्यार्थियों को अच्छे गुणों की शिक्षा दी जाती थी। स्कूल का मुख्य उद्देश्य विचारशीलता, मानवता और नागरिकता में प्रशिक्षण देना था।

इसके स्कूल के प्रत्येक बच्चे का एक अन्धा होने का दिन, एक लंगड़ा होने का दिन, एक बहरा होने का दिन और एक गूंगा होने का दिन होता था। इस तरह बच्चे दुर्भाग्य का अनुमान लगा सकते थे। परिणामस्वरूप, उन्होंने अपंग लोगों के प्रति सहानुभूतिशील होना सीख लिया। मिस बीम समाज के लिए एक पूंजी थी। वह समाज में अच्छे विचारों का विकास करना चाहती थी।

Question 3.
Give in your own words the theme of the lesson ‘The School For Sympathy’.
Answer:
Traditional or conventional education given in schools is not ideal. It gives information of facts. It enables a person to earn his living. In addition to the normal subjects, the students of Miss Beam’s ideal school were also given lessons on humanity and citizenship.

Here students got a real understanding of misfortune. During training every child had one blind day, one deaf day and one dumb day. During the blind day their eyes were bandaged. The bandage was also put during the night. By being blind for a day the child realised what a misfortune it was to be blind. In the same way children learnt the difficulties of the deaf and the dumb people.

स्कलों में दी जाने वाली परम्परागत शिक्षा आदर्श नहीं है। यह तथ्यों की सूचना देती है। यह मनुष्य को अपनी आजीविका कमाने योग्य बनाती है। आम विषयों के अतिरिक्त मिस बीम के आदर्श स्कूल में विद्यार्थियों को मानवता और नागरिकता के पाठ पढ़ाए जाते थे। यहां विद्यार्थियों को दुर्भाग्य की वास्तविक जानकारी दी जाती थी।

प्रशिक्षण के दौरान प्रत्येक बच्चे का एक अन्धा होने का दिन, एक बहरा होने का दिन और एक गूंगा होने का दिन होता था। अन्धे होने के दिन के दौरान उनकी आंखों पर पट्टी बांध दी जाती थी। पट्टी रात को बांध दी जाती थी। एक दिन अन्धे बने रहने पर बच्चे को महसूस होता था कि अन्धे होना कितना दुर्भाग्यपूर्ण था। इसी तरह बच्चों को बहरे और गूंगे लोगों की कठिनाइयों का पता चलता था।

Objective Type Questions

This question will consist of 3 objective type questions carrying one mark each. These objective questions will include questions to be answered in one word to one sentence or fill in the blank or true/false or multiple choice type questions.

Question 1.
What does the author tell us about Miss Beam ?
Answer:
He tells us that Miss Beam was a middle-aged, kindly, understanding and impressive lady.

Question 2.
What was the real aim of Miss Beam’s school ?
Answer:
Its real aim was to make the students thoughtful, helpful and sympathetic citizens.

Question 3.
Why did the author feel sorry for some of the children ?
Answer:
He felt sorry for some children because they seemed to be handicapped.

Question 4.
Were the children playing in the ground really physically handicapped ?
Answer:
They were not really handicapped.

PSEB 12th Class English Solutions Supplementary Chapter 1 The School for Sympathy

Question 5.
Why were the children acting to be blind, deaf or lame ?
Answer:
The children were acting to be blind, lame and deaf to have experience of misfortune.

Question 6.
What is the educative value of a blind, deaf or lame day?
Answer:
Students get an idea of the discomfort of handicapped persons and then they have sympathy for the handicapped.

Question 7.
Which day is the most difficult for children ?
Answer:
The blind day is the most difficult for children.

Question 8.
Who did Miss Beam lead the author to ?
Answer:
Miss Beam led the author to the girl whose eyes were bandaged.

Question 9.
How did the girl with bandaged eyes feel on her blind day?
Answer:
All the time she feared that she was going to be hit by something.

Question 10.
What does the girl with the bandaged eyes tell the author about her guides ?
Answer:
She tells the author that the guides were very good.

Question 11.
What, according to the girl with the bandaged eyes, is almost a fun ?
Answer:
According to her, hopping about with a crutch is almost a fun.

Question 12.
Why does the girl with the bandaged eyes say that her head aches all the time on her blind day?
Answer:
She says that her head aches all the time just from dodging things that are not there.

Question 13.
What does the girl, with the bandaged eyes, tell the author about the head girl ?
Answer:
She says that she is very decent.

PSEB 12th Class English Solutions Supplementary Chapter 1 The School for Sympathy

Question 14.
What does the girl with the bandaged eyes say about the gardener ?
Answer:
She says that he is hundreds of years old.

Question 15.
What made Miss Beam think that there was something in her system?
Answer:
Miss Beam was right to think so because her school had taught the author to share the sorrows of others.

Question 16.
Choose the correct option:
(i) Miss Beam was a cruel lady.
(ii) Miss Beam was a young lady, teaching in a school.
(iii) Miss Beam was a middle aged, kindly and impressive lady.
Answer:
(iii) Miss Beam was a middle aged, kindly and impressive lady.

Question 17.
Choose the correct option :
(i) The aim of Miss Beam’s school was to make the students thoughtful, helpful and sympathetic citizens.
(ii) The object of Miss Beam’s school was to make the students bookworms.
(iii) Miss Beam’s school made the students into good sportspersons.
Answer:
(i) The aim of Miss Beam’s school was to make the students thoughtful, helpful and sympathetic citizens.

Question 18.
Choose the correct option :
The author was sorry for some children of Miss Beam’s school because they were :
(i) poor.
(ii) handicapped.
(iii) sick.
Answer:
(ii) handicapped.

Question 19.
Write True or False as appropriate :
(i) The children in Miss Beam’s school were handicapped.
(ii) They were acting to be handicapped.
(iii) They were being treated for being handicapped.
Answer:
(i) False
(ii) True
(iii) False.

Question 20.
Write True or False as appropriate :
The most difficult day for the students in Miss Beam’s school was the lame day.
Answer:
False.

Question 21.
Write True or False as appropriate :
The most difficult day for the students in Miss Beam’s school was the deaf day.
Answer:
False.

PSEB 12th Class English Solutions Supplementary Chapter 1 The School for Sympathy

Question 22.
Write True or False as appropriate :
The most difficult day for the students in Miss Beam’s school was the blind day.
Answer:
True.

Question 23.
The writer had heard of the ……….. of the system of Miss Beam’s school. (Fill up the blank)
Answer:
originality

Question 24.
The bandaged girl tells the writer that the gardener was …………. of years old. (Fill in the blank)
Answer:
hundreds

Question 25.
What was the name of the bandaged girl ?
Answer:
Millie.

The School for Sympathy Summary in English

The School for Sympathy Introduction:

In this essay the writer tells us about a new type of school. As the name indicates, its purpose is to create sympathy among its students for the lame, the blind and the handicapped. It teaches all the subjects taught by other schools. But it differs from other schools in one important aspect. It makes its students good citizens.

The School for Sympathy Summary in English:

The writer had heard a lot about Miss Beam’s School for Sympathy. One day he got the chance to visit it. He saw a twelve-year old girl. Her eyes were covered with a bandage. An eight-year old boy was leading her carefully between the flower-beds.

After that the author met Miss Beam. She was a middle-aged, kindly and understanding lady. He asked her questions about her way of teaching. She told him that the teaching methods in her school were very simple. The students were taught spelling, arithmetic and writing.

The author told Miss Beam that he had heard a lot about the originality of her teaching method. Miss Beam told him that the real aim of her school was to make the students thoughtful. She wanted to make them helpful and sympathetic citizens. She added that parents sent their children to her school gladly. She then asked the writer to look out of the window.

PSEB 12th Class English Solutions Supplementary Chapter 1 The School for Sympathy

The author looked out of the window. He saw a large garden and playground. Many children were playing there. He told Miss Beam that he felt sorry for the physically handicapped. Miss Beam laughed at it. She explained to him that they were not really handicapped. It was the blind day for a few while for some it was the deaf day. There were still others for whom it was the lame day. Then she explained the system.

To make the students understand misfortune, they were made to have experience of misfortunes. In the course of the term every child had one blind day, one lame day, one deaf day, one maimed day and one dumb day. On the blind day, their eyes were bandaged. They did everything with the help of other children. It was educative to both the blind and the helpers.

Miss Beam told the author that the blind day was very difficult for the children. But some of the children feared the dumb day. On the dumb day, the child had to exercise willpower because the mouth was not bandaged. Miss Beam introduced the author to a girl whose eyes were bandaged. The author asked her if she ever peeped. She told him that it would be cheating. She also told the author that she had no idea of the difficulties of the blind.

All the time she feared that she was going to be hit by something. The author asked her if her guides were good to her. She replied that they were very good. She also informed the author that those who had been blind already were the best guides. The author walked with the girl leading her to the playground. She told him that the blind day was the worst day.

She didn’t feel so bad on the maimed day, lame day and deaf day. The girl asked the author where they were at the moment. He told her that they were going towards the house. He also told her that Miss Beam was walking up and down the terrace with a tall girl. The blind girl asked what that tall girl was wearing.

PSEB 12th Class English Solutions Supplementary Chapter 1 The School for Sympathy

When the author told her about the tall girls dress, she at once made out that she was Millie. The author described the surroundings to her. He felt that as a guide to the blind, one had to be thoughtful. He was full of praise for Miss Beam’s system of education which made the student sympathetic and kind. The writer himself had become ten times more thoughtful.

The School for Sympathy Summary in Hindi

The School for Sympathy Introduction:

इस लेख में लेखक एक नये प्रकार के स्कूल के बारे बतलाता है। जैसा कि इसके नाम से स्पष्ट होता है, इसका उद्देश्य उसके छात्रों में लंगड़ों, अन्धों और अपंगों के लिए सहानुभूति पैदा करना है। इस स्कूल में वे तमाम विषय पढ़ाये जाते हैं जो कि अन्य स्कूलों में पढ़ाये जाते हैं। लेकिन यह स्कूल दूसरे स्कूलों से एक महत्त्वपूर्ण पक्ष में भिन्न है। यह अपने छात्रों को अच्छे नागरिक बनाता है।

The School for Sympathy Summary in Hindi:

लेखक ने Miss Beam के सहानुभूति के लिए स्कूल के बारे में बहुत कुछ सुन रखा था। एक दिन उसे यह देखने का अवसर मिला। उसने एक 12 वर्ष की लड़की देखी। उसकी आंखें पट्टी से ढकी हुई थीं। एक आठ वर्ष का लड़का बड़ी सावधानी के साथ फूलों की क्यारियों में से उसका मार्ग-दर्शन कर रहा था।

उसके बाद लेखक मिस बीम को मिला। वह अधेड़ उम्र की दयालु समझदार स्त्री थी। उसने उससे पढ़ाने के ढंग के बारे में पूछा। उसने उसे बताया कि उसके स्कूल में पढ़ाने का ढंग बहुत सादा था। विद्यार्थियों को हिज्जे करना, गणित और लिखना सिखाया जाता था।

लेखक ने मिस बीम को बताया कि वह उसके पढ़ाने के ढंग की मौलिकता के विषय में बहुत कुछ सुन चुका था। मिस बीम ने उसे बताया कि उसके स्कूल का वास्तविक ध्येय विद्यार्थियों को विचारशील बनाना था। वह अपने विद्यार्थियों को सहायक और सहानुभूतिशील नागरिक बनाना चाहती थी। उसने फिर कहा कि माता-पिता बच्चों को उसके स्कूल में खुशी से भेजते थे। उसने तब लेखक को खिड़की से बाहर देखने को कहा। .

लेखक ने खिड़की से बाहर देखा। उसने एक बड़ा बाग़ और खेल का मैदान देखा। बहुत से बच्चे वहीं खेल रहे थे। लेखक ने मिस बीम को बताया कि उसे इन अपंग बच्चों से हमदर्दी है। मिस बीम हंस पड़ी। उसने बताया कि वे अपंग बच्चे नहीं थे। कुछ बच्चों के लिए यह ‘अन्धा रहने का दिन था’ और कुछ के लिए बहरा रहने का दिन था। कुछ बच्चों के लिए यह लंगड़ा रहने का दिन था। फिर मिस बीम ने शिक्षा प्रणाली समझाई।

विपत्ति से पीड़ित मनुष्य की भावनाओं का अनुभव कराने के लिए बच्चों को विपत्ति में भागीदार बनाया जाता था। शिक्षा के दौरान हर बच्चे को एक दिन अन्धा, एक दिन बहरा, एक दिन लंगड़ा और एक दिन गूंगा रहना पड़ता था। अन्धे रहने वाले दिन उसकी आंखों पर पट्टी बांध दी जाती थी। वे हर काम दूसरे बच्चों की सहायता से करते थे।

यह अन्धे लड़के और उसके सहायक दोनों के लिए शिक्षाप्रद होता था। मिस बीम ने लेखक को कहा कि अन्धा रहने वाला दिन बच्चों के लिए कठिन होता था। किन्तु कुछ बच्चे गूंगे रहने वाले दिन से डरते थे। गूंगे रहने वाले बच्चे को इच्छा शक्ति प्रयोग करनी पड़ती थी क्योंकि मुंह पर

PSEB 12th Class English Solutions Supplementary Chapter 1 The School for Sympathy

पट्टी नहीं बांधी जाती थी। मिस बीम ने लेखक को एक अन्धी लड़की से मिलवाया। उसकी आंखों पर पट्टी बन्धी थी। लड़की और लेखक अकेले रह गए। लेखक ने पूछा क्या वह कभी पट्टी में से झांकती है। लड़की ने बताया यह धोखा होगा। उसने यह भी बताया कि अन्धे मनुष्य की कठिनाइयों का उसे कोई भी अनुमान नहीं था।

उसे हर समय यही डर लगा रहता था वह किसी चीज़ से टकराने वाली थी। लेखक ने पूछा क्या उसके सहायक उसके प्रति अच्छे थे। उसने उत्तर दिया कि वे काफ़ी अच्छे थे। उसने लेखक को यह भी बताया कि जो सहायक पहले अन्धे रह चुके थे वे सबसे बढ़िया थे।

लेखक लड़की को खेल के मैदान तक ले आया। उस अन्धी लड़की ने बताया कि ‘अन्धा दिन’ सबसे बुरा था। उसने ‘लंगड़े दिन’, ‘बहरे दिन’ ऐसा बुरा महसूस नहीं किया था। अन्धी लड़की ने पूछा कि वे इस समय कहां थे। लेखक ने बताया कि वे मकान की ओर जा रहे थे। उसने यह भी बताया कि मिस बीम एक लम्बी लड़की के साथ बरामदे में टहल रही थी। अन्धी लड़की ने पूछा कि उस लम्बी लड़की ने क्या पहना है।

जब लेखक ने लड़की को उसकी वेश-भूषा के विषय में बताया तो अन्धी लड़की एकदम भांप गई कि यह मिल्ली है। लेखक ने लड़की के आस-पड़ोस का वर्णन किया। उसने अनुभव किया कि अन्धे मनुष्य का पथ-प्रदर्शक बनने के लिए विचारवान् बनना पड़ता है। लेखक ने मिस बीम की शिक्षा प्रणाली की बहुत सराहना की। इस शिक्षा प्रणाली से विद्यार्थी हमदर्द और दूसरों के प्रति दयालु बनता था। लेखक स्वयं दस गुना अधिक विचारशील बन गया था।

Word Meanings:

PSEB 12th Class English Solutions Supplementary Chapter 1 The School for Sympathy 1

Class 12 PSEB Solutions Supplementary Reading

Robots and People Question Answer Class 12 English Book Chapter 4 PSEB Solutions

Punjab State Board PSEB 12th Class English Book Solutions Chapter 4 Robots and People Textbook Exercise Questions and Answers.

Class 12th English Book Chapter 4 Robots and People Question Answers

Robots and People Class 12 Questions and Answers

Short Answer Type Questions

Question 1.
How did the automobile industry prove a boon as well as a bane for the workers ? (V. Imp.)
कार का उद्योग वेतनभोगियों ( श्रमिकों) के लिए किस प्रकार एक वरदान और शाप सिद्ध
Answer:
The coming of the automobile industry was a loss of jobs that involved horses.There were fewer stables, fewer manufacturers of buggies and wagons, fewer whips and fewer spurs. The automobile industry was a bane for the horse-related people. It was a boon for others.

The automobiles brought so many garages, auto mechanics, tyre manufacturing, highway building, oil well drilling. Automobiles created hundreds of jobs. That is what happens when some new invention comes. Many new jobs appear. Others get destroyed. The jobs that are destroyed appear to be dull and boring. Even a robot can do them.

Automobile उद्योग के आने से घोड़ों से सम्बन्धित कामों या नौकरियों में हानि हुई अर्थात् वे कम हो गईं। अस्तबल कम हो गये, घोड़ागाड़ियां बननी कम हो गईं और छकड़े भी कम बनने लगे, चाबुक भी कम बनने लगे और मेहमेज़ (घोड़े को प्रेरित करने के लिए) बनने बंद हो गये। Automobile industry घोड़ों से सम्बन्धित काम करने वालों के लिए शाप सिद्ध हुई।

Automobile industry के आने से कई garage बन गये, Auto mechanics को भी काम मिल गये, Tyre बनने का काम शुरु हो गया, सड़कें बनने लगीं, तेल के कुओं की drilling होने लग पड़ी। Automobiles में सैकड़ों नौकरियां मिलने लग पड़ीं। जब कोई नया आविष्कार आ जाये तो ऐसे ही होता है। कई नई नौकरियां मिलनी शुरु हो जाती हैं। कुछ अन्य नौकरियां खत्म हो जाती हैं। जो नौकरियां खत्म होने लगती हैं, वे boring लगती हैं। उनको तो robot भी कर सकता है।

PSEB 12th Class English Solutions Chapter 4 Robots and People

Question 2.
Describe the two kinds of intelligence on the earth.
संसार में दो प्रकार की बुद्धि का वर्णन करो।
Answer:
There are two kinds of intelligence on the earth. There is the computer/robot intelligence and the human intelligence. Each one works in a different way and each will co-operate with the other. Together the two intelligences will be able to do much more than either could do alone. Human intelligence is creative. The human brain has imagination. It can make intelligent guesses. Computers and robots cannot think or imagine. They are far away from being intelligent as human beings are.

संसार में दो प्रकार की बुद्धि है। एक बुद्धि होती है computer/robot की बुद्धि और दूसरी प्रकार की बुद्धि है इन्सानी बुद्धि। दोनों ही भिन्न तरीकों से काम करती हैं और एक-दूसरे को सहयोग भी देती हैं। दोनों प्रकार की intelligences मिल कर अकेले-अकेले रहने से अधिक काम कर सकेंगी। इन्सानी बुद्धि रचनात्मक होती है। इन्सानी दिमाग में कल्पना शक्ति होती है। यह बुद्धिमत्ता वाले अनुमान लगा सकता है। Computers या रोबॉटस न सोच सकते हैं और न ही कल्पना कर सकते हैं। वे इन्सानों की तरह बुद्धिमान होने से बहुत दूर हैं।

Long Answer Type Questions

Question 1.
Give, in brief, the theme of the chapter ‘Robots and People’………
‘Robots and People’ chapter की संक्षेप में कथावस्तु लिखो।
Answer:
This chapter is based on the idea that machines are very useful for man. Every scientific invention is of great value. Machines have made our life comfortable. Now robots have been devised. Like machines, they are very complicated. They do jobs which were being done by human beings, before. One invention destroys old jobs and creates new ones. The car industry destroyed jobs involved with the horses. Robots have thrown out certain jobs.

Their place will be taken by better machines. Computers will get more complicated and robots will have greater abilities. Man’s brain is better than other machines. Man invents certain machines and working becomes better. Hats off to man’s brain which designs better and better machines. Man is the crown of creation and machines.

PSEB 12th Class English Solutions Chapter 4 Robots and People

कथावस्तु यह है कि रोबॉटस और मशीनें मनुष्य के लिए बहुत ही उपयोगी हैं। अब रोबॉटस उन कामों को कर लेते हैं जिन्हें पहले इन्सान किया करते थे। एक आविष्कार पुरानी नौकरियों का खात्मा कर देता है और नई नौकरियां पैदा कर देता है। कारों के उद्योग ने उन नौकरियों को समाप्त कर दिया जिनका सम्बन्ध घोड़ों के साथ था।

Robots ने भी कई नौकरियों को उखाड़ फेंका है। अब उनकी जगह बेहतर मशीनें ले लेंगी। Computers और भी पेचीदा हो जायेंगे और robots की योग्यताएं और भी बड़ी हो जायेंगीं। आदमी का दिमाग़ सब मशीनों से बेहतर है। आदमी कई मशीनों का आविष्कार करता है और उनके द्वारा काम अच्छा होता है। आदमी के दिमाग को सलामी देनी चाहिये जो बेहतर मशीनें बना लेता है। आदमी सृष्टि और मशीनों का सरताज है।

Question 2.
‘Human brains are par excellence, Robots are mere machines.’ Explain with examples. (V.V. Imp.)
‘इन्सानी दिमाग उत्कृष्ट होते हैं, रोबॉटस तो केवल मशीनें होती हैं।’ उदाहरणों के साथ स्पष्टीकरण करें।
Answer:
We are living in the machine age. Now robots have been made. They are more complicated than other machines. They can do jobs that until now only human beings could do. These jobs are too simple for the marvellous brains that human beings have.

Robots are being worked with computers. Computers are getting more and more complicated. Robots will have more and more abilities. Robots work automatically under the direction of computers which human beings have programmed.

For example, computers are very good at solving mathematical problems. They can do them faster and without making mistakes. That is because we know all the rules of arithmetic. The human brain has imagination. It can suppose and wonder.

It can make intelligent guesses. It is creative. It can think up new and startling ways of doing or understanding things. Computers and robots can’t do any of these things. They are a long way from being intelligent in the same way as human beings are. Computers and robots cannot be programmed to be imaginative and creative.

हम मशीनों के युग में रह रहे हैं। अब रोबटस को बना लिया गया है। वे दूसरी मशीनों से अधिक पेचीदा होते हैं। वे उन कामों को भी कर लेते हैं जिनको अब तक इन्सान ही किया करते थे। यह काम अद्भुत इन्सानी दिमाग़ के लिए तो बहुत सरल होते हैं। रोबॉटस को तो computers द्वारा चलाया जाता है। Computers भी अधिक-से-अधिक पेचीदा होते जा रहे हैं। Robots की योग्यताएँ भी बढ़ती. जायेंगी। Robots अपने आप computers के निर्देशन के अधीन काम करते हैं। इन computers पर मनुष्य प्रोग्राम बनाते हैं।

PSEB 12th Class English Solutions Chapter 4 Robots and People

उदाहरण के लिए, कम्पयूटर गणित की समस्याएं हल करने में काफी अच्छे होते हैं। वे उन्हें तेज़ी से और बिना गलती किए हल कर लेते हैं। यह इसलिए है क्योंकि हम गणित के सब नियम जानते हैं। इन्सानी दिमाग़ में कल्पना होती है। यह किसी बात को मान भी लेता है और आश्चर्यचकित भी हो जाता है। यह बुद्धिमत्ता वाले अनुमान भी लगा लेता है। यह रचनात्मक है। यह चीज़ों को करने और समझ लेने के अद्भुत तरीकों के बारे में भी सोच सकता है। Computers और Robots ऐसी कोई चीज़ नहीं कर सकते। वे इन्सानों की तरह बुद्धिमान भी नहीं हो सकते। Computers और Robots को प्रोग्रामिंग के द्वारा कल्पना वाले और रचनात्मक नहीं बनाया जा सकता।

Objective Type Questions

This question will consist of 3 objective type questions carrying one mark each. These objective questions will include questions to be answered in one word to one sentence of fill in the blank or true/false or multiple choice type questions.

Question 1.
Why does U.S. not want to have a speedy pace with the use of industrial robots ?
Answer:
The US does not want to have a speedy pace with the use of industrial robots for fear of unemployment.

Question 2.
List out the dangerous jobs that humans generally take up.
Answer:
Working in mines, or on building construction, or with dangerous chemicals or explosives, are some of the dangerous jobs.

Question 3.
What are the simple routine jobs that men generally remain busy with?
Answer:
These are filing cards, or typing routine letters, tightening bolts, or carrying something from here to there.

Question 4.
What is more creative; a robot or a human brain ? How?
Answer:
Human brain is more creative than a robot which works under the direction of computers run by human beings.

Question 5.
What led to the loss of jobs with the invention of automobiles ?
Answer:
With this invention, there was a steady loss of jobs involving horses.

Question 6.
How was the automobile industry a boon for employment ?
Answer:
Garages, auto-mechanics, tyre manufacturing units came up; road works progressed and oil-well drilling developed.

PSEB 12th Class English Solutions Chapter 4 Robots and People

Question 7.
How can we deal with the transition period ?
Answer:
We deal with the transition period with patience and intelligence when many old people are in old jobs and the future when everyone will be in the new jobs.

Question 8.
What is the prime difference between a ‘robot’ and a human brain ?
Answer:
Robots work automatically under computers which humans have programmed.

Question 9.
How does the narrator find robots useless in some tasks ?
Answer:
Robots cannot do tasks requiring imagination and creativeness.

Question 10.
The two types of intelligence are :
(i) computer/robot intelligence
(i) human intelligence. (True or False)
Answer:
True.

Question 11.
Both human brain and robots have imagination. (True or False)
Answer:
False.

Question 12.
Name one job that is dangerous for human beings.
Answer:
Working in mines.

Question 13.
This fear is making the U.S.A. go slow with industrial robots :
(i) fear of robots
(ii) fear of unemployment.
Answer:
(ii) fear of unemployment.

Question 14.
According to this lesson, human brain is :
(i) destructive
(ii) creative. (Choose the correct option.) :
Answer:
(ii) creative.

Question 15.
Some robots are more intelligent than human beings. (True or False)
Answer:
False.

Question 16.
Until which of the following decades only there were many jobs which only human beings could do ?
(a) 1950s
(b) 1980s
(c) 1990s
(d) 1970s
Answer:
(d) 1970s.

Question 17.
Choose one of the given factors. Why is human brain more creative than the robot
(a) It is imaginative.
(b) It is bigger than the robot.
(c) It is beautiful.
(d) It is tiny.
Answer:
(a) It is imaginative.

PSEB 12th Class English Solutions Chapter 4 Robots and People

Question 18.
The factory where cars are manufactured is called :
(a) Car pool
(b) Car home
(c) Car factory
(d) Automobile factory.
Answer:
(d) Automobile factory.

Question 19.
A robot is more creative than a human brain. (True or False)
Answer:
False.

Robots and People Summary in English

Robots and People Introduction:

A robot is a machine that can perform a complicated series of tasks automatically. In scientific stories, a robot is a machine that is made to look like a human and that can do some things that a human can do. These days more and more robots are being put into factories. Men and women who used to have the jobs are becoming unemployed.

Until the 1970s, there were many jobs that only human beings could do. Some of these jobs are dangerous. Working in mines or on building construction or with dangerous chemicals or explosives are jobs that it would be better for human beings not to have to do.

Robots are doing these dangerous jobs. More and more jobs are being done by robots. Robots are smarter than other machines. They are still capable of very simple tasks. Robots are not going to stay in the same place. Computers will get more and more complicated. Robots will have more and more abilities.

Robots and People Summary in English:

The United States is going slow with industrial robots. It is mainly due to the fear of unemployment. As more and more robots are put in factories, men and women who used to be employed would lose their jobs. Until the 1970s there were many jobs that only human beings could do.

Some of the jobs that only human beings can do are dangerous. Working in mines, or on building construction, or with dangerous chemicals or explosives or under difficult weather conditions all are jobs that it would be better for human beings not to do them.

Some routine jobs do not require human brains. But doing them again and again makes them easy.to do. Robots are more complicated than any other machines we have ever had. They are complicated enough to do jobs that until now only human beings could do, but they are too simple for the marvellous brains human beings have. The robots, even though they are smarter than other machines, are still capable of only very simple tasks.

PSEB 12th Class English Solutions Chapter 4 Robots and People

Robots should be allowed to do some simple jobs. After all, whenever there is an important new invention, some jobs are lost. When the automobiles came into use, there was a gradual loss of jobs that involved horses. The automobiles created many jobs. That is the way it will be with the robots too.

There is a little doubt. A person who has been working on automobiles will require a different type of education. People with old style of jobs will need to be trained and reeducated. It will have to be done. Some old people will not be able to take retraining. Even with the introduction of robots, some sort of jobs will have to be found that they can do.

Eventually things will be different. Children going to schools in the future will be educated in ways of using and understanding computers and robots. They will grow up and be able to take the new jobs and no one will ever consider the old jobs for want of them. Everyone will be glad to leave the dangerous jobs to robots. Still there will be a transition period. So many people will be on old jobs. Others will be in new jobs. There is another problem that is going to confront us.

Robots are not going to stay in the same place. Computers will get more and more complicated. Robots will have more and more abilities. They will be able to do better and better jobs. It may not be possible that human beings are driven out of job after job. Robots will not take all the jobs. Robots are not as intelligent as human beings.

Robots work automatically under the directions of computers. Computers have been programmed by human beings. Computers are very good at solving mathematical problems. They can solve them much faster than humans can solve them. They can do it without making any error.

Human beings can do arithmetic. They know the rules but if they do it for a long time, it becomes boring. Human brain gets tired. Human beings begin to make more and more mistakes. The human brain is very good in other directions. It has imagination. It can suppose and wonder. It can make intelligent guesses. It is creative.

It can think up new and sometimes startling ways of doing or understanding things. Computers and robots cannot do any of these things. Computers and robots are far from being intelligent in the same way we are. We cannot programme computers and robots to be imaginative and creative since we ourselves don’t know how we do it.

The writer gives his own example. He writes many books. So he does them quickly. Even when he writes quickly, he does it in the right order. But he cannot programme his computer to write his book for him. He cannot programme a computer so that it will write his book as he wants it.

It would be much better if human beings continued to make computers and robots better at what machines can do most easily. We human beings should improve ourselves at what we do best through proper education and through a deeper understanding of how our brain works. We should try to make more and more people imaginative and creative.

PSEB 12th Class English Solutions Chapter 4 Robots and People

Thus we may end up with two kinds of intelligence on earth. There will be the computer/robot intelligence and the human intelligence. Each one will work in a different way and each will co-operate with the other. Together the two intelligences will be able to do much more than either could do alone. Thus someday humans will wonder how they ever got along without robots.

Robots and People Summary in Hindi

Robots and People Introduction:

रोबॉट एक मशीन होती है जो कि पेचीदा काम अपने आप कर सकती है। विज्ञान सम्बन्धी कहानियों में एक रोबॉट एक मशीन होती है जो कि एक इन्सान की तरह होती है और यह कुछ चीजों को ऐसे कर सकता है जिस तरह इन्सान करता है। आजकल अधिक से अधिक Robots को कारखानों में लगाया जा रहा है।

पुरुषों और स्त्रियों को जिन्हें नौकरियों की आवश्यकता होती है वे बेकार होते जा रहे हैं। 1970 के दशक में बहुतसी नौकरियां थीं जिनको केवल इन्सान ही कर सकते थे। इनमें से कई काम खतरनाक होते हैं। खानों में काम करना या इमारतों को बनाना या खतरनाक रसायनों के साथ काम करना या विस्फोटों के साथ काम करना ऐसे काम हैं जिनको न करना इन्सानों के लिए बेहतर होगा। Robots इन खतरनाक कामों को करते आ रहे हैं।

अधिक से अधिक काम रोबॉट द्वारा किए जा रहे हैं। रोबॉट दूसरी मशीनों से अधिक चुस्त होते हैं। अभी तक वे (Robots) केवल सरल कामों को करते हैं। Robots एक ही स्थान पर नहीं टिके रहेंगे। Computers और अधिक पेचीदा हो जायेंगे। Robots की योग्यताएं भी बढ़ती जायेंगी।

Robots and People Summary in Hindi:

U.S.A. ने उद्योग में काम आने वाले robots को बनाने में अपनी गति धीमी कर दी है। ऐसा मुख्य तौर पर बेकारी बढ़ने के कारण किया गया है। जैसे-जैसे कारखानों में अधिक से अधिक robots लगाये जायेंगे, पुरुष और महिलाएं जो वहां काम करते हैं, अपनी नौकरियों से हाथ धो बैठेंगे। 1970 के दशक तक बहुत-सी ऐसी नौकरियां  थीं जो केवल इन्सान ही कर सकते थे। कुछ नौकरियां जो केवल इन्सान ही कर सकते हैं, खतरनाक हैं। खानों में काम करना, इमारतों को बनाना या खतरनाक रसायनों से काम करना या विस्फोटों से काम करना या कठिन मौसमी स्थिति में काम करना-ऐसे काम हैं जो इन्सान न करें।

कई नित्य (रुटीन) कार्यों को इन्सानी दिमाग़ की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन इन कार्यों को बार-बार करने से वे आसान हो जाते हैं। Robots हमारी दूसरी मशीनों से कहीं अधिक पेचीदा होते हैं। वे (robots) उन मशीनों से जिनको हम प्रयोग करते आ रहे हैं की अपेक्षा अधिक पेचीदा होते हैं लेकिन robots इन्सानी दिमागों से कम पेचीदा होते हैं। यद्यपि robots दूसरी मशीनों से अधिक चुस्त होते हैं, वे फिर भी बहुत सरल काम करने के योग्य होते हैं।

Robots से सरल काम ही करवाये जाने चाहिए। आखिर जब कभी कोई नया महत्त्वपूर्ण आविष्कार होता है, तो कई नौकरियां हाथ से निकल जाती हैं। जब automobiles का इस्तेमाल होना शुरु हुआ तो कुछ नौकरियाँ लोगों के हाथों से निकल गईं। जो नौकरियाँ घोड़ों से सम्बन्धित थीं वे लगभग खत्म हो गईं या कम हो गईं। Automobiles के आविष्कार ने कई नौकरियों को जन्म भी दिया। यही हाल robots के इस्तेमाल से होगा।

PSEB 12th Class English Solutions Chapter 4 Robots and People

इसमें एक थोड़ा-सा संदेह भी है। जो आदमी automobiles (मोटर गाड़ियों) पर काम करता है, उसको एक भिन्न प्रकार की शिक्षा की आवश्यकता होती है। पुरानी प्रकार की नौकरी वालों को पुनः प्रशिक्षण देना होगा और पुनः शिक्षा देनी होगी। यह करना ही पड़ेगा। कुछ पुराने employees पुनः प्रशिक्षण नहीं ले सकेंगे। Robots के आ जाने पर कुछ ऐसी नौकरियाँ ढूँढनी पड़ेंगी जो पुराने आदमी कर सकेंगे।

अन्त में चीजें भिन्न होंगी। भविष्य में स्कूल जाने वाले बच्चों को computers और robots का प्रयोग करने के लिए पढ़ाना होगा। वे बड़े होंगे और उन नई नौकरियों को कर सकेंगे और कोई भी पुरानी नौकरियों के बारे बात नहीं करेगा। हर कोई खतरनाक कामों को robots पर छोड़ देगा। फिर भी एक Transition Period (परिवर्तन समय) होगा। फिर भी कई लोग पुराने काम करते रहेंगे। दूसरे नये काम (नई robots पर नौकरी करेंगे) एक और समस्या है जो हमारे सामने आयेगी।

Robots उसी स्थान पर ही खड़े नहीं रहेंगे। Computers अधिक से अधिक पेचीदा होते जायेंगे। Robots की योग्यातएँ बढ़ जायेंगी। वे पहले से भी अच्छी नौकरियाँ कर सकेंगे। यह बात शायद सम्भव न हो कि इन्सानों को एक नौकरी के बाद दूसरी से निकाल दिया जायेगा। Robots सारी Jobs को नहीं ले सकेंगे। Robots आदमियों जितने बुद्धिमान नहीं होते। Robots Computers के निर्देशन पर अपने आप काम करते हैं।

Computers पर आदमी प्रोग्राम बनाते हैं। वे गणित के प्रश्न हल करने में बहुत अच्छे होते हैं। वे उन प्रश्नों को आदमियों से अधिक तेजी से हल कर सकते हैं। वे ऐसा बिना ग़लती से कर सकते हैं। इन्सान गणित के प्रश्न कर सकते हैं। वे सारे नियमों को जानते हैं। परन्तु वे यदि इन प्रश्नों को काफी समय तक करते रहें तो वे उचाट हो जाते हैं। मनुष्य थक जाते हैं। वे और अधिक गलतियां करते जाते हैं।

आदमी का दिमाग दूसरी दिशाओं में बहुत अच्छा होता है। उसके पास कल्पना शक्ति होती है। यह कल्पना कर सकता है और हैरान हो सकता है। यह बड़ी. बुद्धिमत्ता वाले अनुमान लगा सकता है। यह रचनात्मक है। यह नये और चौंकाने वाले तरीकों से चीज़ों को समझ सकता है और कर सकता है। कम्प्यूटर और रोबॉट ऐसी चीजें नहीं कर सकते। कम्प्यूटर और रोबॉट आदमियों की तरह बुद्धिमत्ता वाले नहीं होते। मनुष्य computers और robots पर कोई ऐसा प्रोग्राम नहीं बना सकते कि वे भी मनुष्यों की तरह बुद्धिमान और सृजनात्मक बन सकें। मनुष्य स्वयं नहीं जानते कि वे कैसे सृजनात्मक हो जाते हैं।

लेखक स्वयं अपना उदाहरण देता है। वह ठीक ढंग से किताबें लिख सकता है। लेकिन वह computer में कोई ऐसा प्रोग्राम नहीं बना सकता जिसके द्वारा वह किताबें लिख सके। अच्छा तो यही होगा यदि मनुष्य computers और robots को बेहतर बनाते रहें ताकि मशीनें अच्छी तरह से कार्य कर सकें। हमें अपने आपको और भी बेहतर बनाना चाहिए अपनी शिक्षा द्वारा और यह समझ कर कि. हमारा दिमाग़ किस तरह काम करता है।

PSEB 12th Class English Solutions Chapter 4 Robots and People

हमें ज़्यादा से ज्यादा लोगों को कल्पनाशील और सृजनात्मक बनाने का प्रयास करना चाहिए। इस प्रकार हम दो प्रकार की बुद्धिमत्ता से दो चार होते हैं। एक बुद्धिमत्ता है computer/robot की, दूसरी बुद्धिमत्ता है इन्सान की। हर बुद्धिमत्ता भिन्न-भिन्न तरह काम करेगी और एक दूसरे को सहयोग देगी। दोनों प्रकार की बुद्धिमत्ता इक्टठे होकर एक-एक के अकेले रहने से बहुत ज्यादा कर सकेंगी। इस तरह इन्सान इस बात पर हैरान होंगे कि वे robots के बिना कैसे दुनिया में आगे बढ़ सके।

Word Meanings

PSEB 12th Class English Solutions Chapter 4 Robots and People 1
PSEB 12th Class English Solutions Chapter 4 Robots and People 2

A Rainbow of English 12 Class Guide Prose

Ghadari Babas in Kalapani Jail Question Answer Class 12 English Book Chapter 10 PSEB Solutions

Punjab State Board PSEB 12th Class English Book Solutions Chapter 10 Ghadari Babas in Kalapani Jail Textbook Exercise Questions and Answers.

Class 12th English Book Chapter 10 Ghadari Babas in Kalapani Jail Question Answers

Ghadari Babas in Kalapani Jail Class 12 Questions and Answers

Short Answer Type Question

Question 1.
Discuss the various physical problems that the Indian freedom fighters had to face in the Cellular Jail.
उन शरीर सम्बन्धी समस्याओं का वर्णन करो जिनका भारतीय स्वतन्त्रता सेनानियों को सामना करना पड़ा।
Answer:
Indian freedom fighters had to face many physical problems. The weather there was very bad. The place was full of mosquitoes and leeches. Food given to the political prisoners was of poor quality. Many were frequently sick with dysentery, fever, tuberculosis and other ailments. Work taken from them was very hard.

They had to extract coconut oil from the kohlu. If they failed to extract the required quantity, jail officials behaved like butchers. Political prisoners and revolutionaries put up stiff resistance against the arrogant conduct of the jail officials. About ten of them died. As a result of their resistance, the jail authorities were forced to discontinue some of the practices of their bad treatment.

PSEB 12th Class English Solutions Chapter 10 Ghadari Babas in Kalapani Jail

भारतीय स्वतन्त्रता सेनानियों को कई शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ा। वहाँ (Port Blair) का मौसम बहुत खराब था। वह स्थान मच्छरों और जोंकों से भरा पड़ा था। राजनीतिक कैदियों को दिया जाने वाला भोजन घटिया दर्जे का था। उनमें से बहुत से बार-2 पेचिश, ज्वर, तपेदिक और दूसरी बीमारियों से पीड़ित होते थे।

उनसे लिया जाने वाला काम बहुत कठिन होता था। उन्हें कोल्हू से नारियल का तेल निकालना पड़ता था। यदि वे आवश्यक मात्रा निकालने में असफल रहते, तो जेल के अधिकारी बूचड़ों की तरह व्यवहार करते। राजनीतिक कैदी और क्रांतिकारी जेल अधिकारियों के दुर्व्यवहारपूर्ण आचरण का कड़ा विरोध करते। उनमें से लगभग 10 कैदी मर गये। उनके विरोध का परिणाम यह हुआ कि जेल के अधिकारियों को अपने बुरे व्यवहार को त्याग देना पड़ा।

Question 2.
What was David Barry’s address to the new group of political prisoners ?
राजनीतिक कैदियों के नये ग्रुप को David Barry का भाषण क्या होता था ?
Answer:
David Barry, the Superintendent of Jail, addressed every new group of political prisoners asking them to strictly follow the rules and orders. If they disobeyed him, only God would help them. At least he would not help them. He also told the prisoners to remember that God does not come within three miles of Port Blair (where the Cellular jail was situated). They must also obey the warders and the petty officers.

David Barry जो जेल का Superintendent था राजनीतिक कैदियों के हर नये ग्रुप को भाषण देता। वह उन्हें कहता कि उन्हें नियमों और आदेशों का सख्ती से पालन करना होगा। यदि वे उसका आदेश नहीं मानेंगे, तो केवल परमात्मा ही उनकी सहायता करेगा। कम से कम वह स्वयं तो उनकी सहायता नहीं कर सकेगा। उसने कैदियों को यह याद रखने के लिए भी कहा कि परमात्मा भी तीन मील की परिधि में Port Blair के अन्दर नहीं आता। उन्हें warders और छोटे अधिकारियों का भी अवश्य कहना मानना चाहिए।

Long Answer Type Question

Question 1.
Write, in brief, what you know about the Ghadar Party.
जो तुम Gadhar Party के बारे जानते हो उस के बारे में संक्षेप में लिखें।
Answer:
The Ghadar Party was an organisation founded by Punjabi Indians in the United States of America and Canada with the object of freeing India from the British rule. The important members were Lala Har Dayal, V.G. Pingley, Sant Baba Wasakha Singh, Sohan Singh Bhakna and Rashbehari Bose. At the outbreak of World War I, Ghadar Party members returned to Punjab to agitate for rebellion alongside Babbar Akalis.

PSEB 12th Class English Solutions Chapter 10 Ghadari Babas in Kalapani Jail

They conducted revolutionary activities in central Punjab. Their attempts were crushed by the British government. The Cellular Jail was set up in Port Blair. This jail was known as Kala Pani. The Ghadar Party was later sent to Kala Pani for torturing. There were other political prisoners. Some of the Ghadar Party prisoners were very old.

They were made to work on the kohlu to extract coconut oil. They had to live in narrow cells. Jail officials were very cruel. They put up a brave resistance. Eight Ghadarites died in the jail. There were strikes led by Sohan Singh Bhakna, Prithvi Singh, Udham Singh Kasel and Kartar Singh Sarabha. They were ready to die for Matribhumi. They were martyrs.

Ghadar Party एक ऐसा संगठन था जिसको अमेरिका और Canada में रहने वाले पंजाबी भारतीयों ने स्थापित किया और इस का उद्देश्य था भारत को अंग्रेजों के राज से आजाद कराना। इसके मुख्य सदस्य थे लाला हरदयाल, V.G.Pingley, संत बाबा बसाखा सिंह, सोहन सिंह भकना और रासबिहारी बोस।

प्रथम विश्व युद्ध के छिड़ जाने के बाद Ghadar Party के सदस्य पंजाब वापस आ गये ताकि वे Babbar Akalis के साथ मिलकर विद्रोह कर सकें। अंग्रेजी सरकार ने उनके प्रयासों को कुचल दिया। Port Blair में Cellular Jail जेल को स्थापित किया गया। इस जेल को काला पानी के नाम से जाना जाता था।

Ghadar Party को बाद में काला पानी भेजा गया ताकि उन पर अत्याचार किया जाए। वहाँ और भी राजनीतिक कैदी थे। गदर पार्टी के कुछ कैदी बहुत बूढ़े थे। उनसे कोलहू चला कर तेल निकालने का काम लिया जाता था। उन्हें तंग कोठरियों में रहना पड़ता था। जेल अधिकारी बड़े निर्दयी थे। उन्होंने कड़ा विरोध किया। आठ गदर पार्टी वाले जेल में मर गए। कुछ हड़तालों का नेतृत्व Sohan Singh Bhakna, Prithvi Singh, Udham Singh Kasel और Kartar Singh Sarabha ने किया। वे सब मातृभूमि के लिए मरने को तैयार थे। वे शहीद थे।

Question 2.
How were the Indians treated in the Cellular Jail of Andamans by the British officials ?
Cellular Jail में अंग्रेज़ अधिकारियों द्वारा भारतीय लोगों से कैसे व्यवहार किया जाता था ?
Answer:
The Cellular Jail known as Kala Pani was set up by the British government to teach the freedom fighters a lesson of their lives. Their treatment of the Indians was inhuman and cruel. The penal colony was created to isolate and torture the members of the Gadhar Party.

There were revolutionaries from Bengal and Maharashtra. They were given hard work to do and offered poor quality of food. Some suffered from fever, dysentery and other ailments.

PSEB 12th Class English Solutions Chapter 10 Ghadari Babas in Kalapani Jail

They were forced to extract coconut oil. They had to produce coconut thread by pounding. Old criminals tortured the revolutionaries and political prisoners. All the jail officials such as David Barry were very cruel. They offered resistance. Parma Nand Jhansi hit back the Jailor Barry, so he was beaten mercilessly. The brave revolutionaries were ready to die for the motherland. Eight Gadharites died. Indians opposed brute force of the English government with their soul force.

Cellular जेल जिसको काला पानी कहते हैं अग्रेजों की सरकार ने स्थापित की थी ताकि स्वतन्त्रता सेनानियों को जीवन भर के लिए सबक सिखलाया जाये। भारतीयों के प्रति उनका व्यवहार अमानवीय और क्रूर था। दण्डितों की बस्ती इसलिए बनाई गई थी कि Ghadar Party के सदस्यों को अलगथलग रखा जाये और उन पर अत्याचार किया जाये। वहाँ बंगाल और महाराष्ट्र से क्रान्तिकारी आये हुए थे। उनको करने के लिए कठिन काम दिया जाता था और खाने के लिए घटिया भोजन दिया जाता था। उनमें से कुछ ज्वर, पेचिश और दूसरी बीमारियों से पीड़ित होते थे। उनको कोल्हू से तेल निकालने के लिए विवश किया जाता था। कूट कर उन्हें नारियल के रेशे से धागा (रस्सी) भी बनाना पड़ता था।

पुराने कैदी क्रान्तिकारियों और राजनीतिक कैदियों पर अत्याचार करते थे। जेल के सब अधिकारी जैसे कि Barry बड़े क्रूर थे। क्रांतिकारी विरोध करते थे। Parma Nand Jhansi को बड़ी निर्दयता से पीटा गया था क्योंकि उसने Barry को चोट लगाई थी। बहादुर क्रांतिकारी मातृभूमि के लिए जान देने को तैयार थे। गदर पार्टी के आठ सदस्य मर गये। अंग्रेजी राज की पाश्विक शक्ति का विरोध भारतीय क्रांतिकारी अपनी आत्मा की शक्ति से करते थे।

Objective Type Questions.

This question will consist of 3 objective type questions carrying one mark each. These objective questions will include questions to be answered in one word to one sentence or fill in the blank or true/false or multiple choice type questions.

Question 1.
List a few key members of the Ghadar Party.
Answer:
Key members were Lala Har Dayal, V.G. Pingley, Sant Baba Wasakha Singh Dadehar, Sohan Singh Bhakna, Kartar Singh Sarabha and Rashbehari Bose.

Question 2.
What were the modes of torturing brave fighters ?
Answer:
They were tortured through living in dirty cells, working hard to produce 30 pounds of coconut oil from the ‘Kohlu’ and coir thread and lashing in public.

Question 3.
Write the two names of the Cellular Jail.
Answer:
Its popular name was ‘Kala Pani’ and the other name was the Devil’s Island

Question 4.
What were the physical conditions of the Cellular jail ?
Answer:
Besides bad weather, the jail had mosquitoes and leeches; prisoners were given bad food and they suffered from illness.

PSEB 12th Class English Solutions Chapter 10 Ghadari Babas in Kalapani Jail

Question 5.
Who were the chief governing officials in the Cellular jail ?
Answer:
Jailor David Barry, Superintendent Murray and the Chief Commissioner were the chief governing officials.

Question 6.
How were the convicts punished when they failed to work properly ?
Answer:
They were abused and given 30 whip lashes in public.

Question 7.
Who were addressed as demi-gods and why? (V. Imp.)
Answer:
Old criminals were called demi-gods as they believed that they had the divine right to ill-treat all prisoners and make their life miserable.

Question 8.
What did the Ghadarites do in the beginning of their conviction period ?
Answer:
They decided not to suffer disrespect without hitting back.

Question 9.
Why was Jyotish Chandra Pal moved to a mental hospital ?
Answer:
He passed blood in stool after a long hunger strike and went mad and so he was moved to a mental hospital.

Question 10.
Why did jail authorities discontinue some of their practices of bad treatment ?
Answer:
Very stiff resistance through long hunger strikes forced the jail authorities to discontinue some of their practices of bad treatment.

Question 11.
Choose the correct option :
The Ghadar Party was founded :
(i) by Punjabi Indians in U.S.A. and Canada
(ii) by. Britishers
(iii) by Pakistanis. Answer:by Punjabi Indians in U.S.A. and Canada.

Question 12.
The object of the Ghadar Party was :
(i) to free India from the yoke of the British rule.
(ii) to remove poverty from India.
Answer:
to free India from the yoke of the British rule.

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Question 13.
What is the other name of Kala Pani ?
Answer:
The Devil’s Island.

Question 14.
Where was the Cellular Jail set up ?
Answer:
In Port Blair.

Question 15.
The setting up of the Cellular Jail took place in :
(i) 1926
(ii) 1906
(iii) 1923
(iv) 1947
Answer:
(ii) 1906.

Question 16.
The first batch of revolutionaries brought here were a group of :
(i) Bengalis
(ii) Maharashtrians
(iii) Punjabis.
Answer:
(i) Bengalis.

Question 17.
Give at least four names of the rebel prisoners in the Kala Pani Jail.
Answer:
(i) Kartar Singh Sarabha
(ii) Lala Har Dayal
(iii) Rash Behari Bose
(iv) Baba Wasakha Singh

Question 18.
Name at least two founders of the Ghadhar Party.
Answer:
(i) Punjabi Indians in U.S.A.
(ii) Punjabi Indians in Canada.

Ghadari Babas in Kalapani Jail Summary in English

Ghadari Babas in Kalapani Jail Introduction:

This extract has been taken from Dr. Harish K. Puri’s book Ghadar Movement. Dr. Harish K. Puri is former professor of Guru Nanak Dev University. He has written extensively on political movements, religion and terrorism. In this extract he gives a harrowing account of the Cellular Jail (called Kala Pani) situated in Port Blair (Andaman and Nicobar Islands). This Cellular Jail (Kala Pani) was set up by the Britishers in far away Andaman Island. The main purpose of the Britishers was to isolate, punish and torture the freedom fighters of India during the early decades of the 20th century.

Ghadari Babas in Kalapani Jail Summary in English:

Ghadar Party was an organisation founded by Punjabi Indians in the United States of America and Canada. Its object was to free India from the British rule. Its important members were Lala Hardayal, V.G. Pingley, Sant Baba Wasakha Singh Dadehar, Sohan Singh Bhakna, Kartar Singh Sarabha, and Rashbehari Bose. The World War I broke out in 1914.

The Ghadar Party members returned to Punjab to agitate for rebellion alongside the Babbar Akali Movement. In 1915, they started revolutionary activities in Central Punjab. They tried to stage revolts, but their attempts were crushed by the British government. The British government in India set up a special jail to teach these brave fighters for the freedom a lesson.

PSEB 12th Class English Solutions Chapter 10 Ghadari Babas in Kalapani Jail

The Cellular Jail was set up in Port Blair. It is popularly known as Kala Pani. It is situated far away from the Indian mainland. It is also described as the British version of Devil’s Island’. In the beginning, the penal colony was created to isolate and torture for life the members of the Ghadar Party. The newly made jail was opened in 1906. Bengali revolutionaries convicted in conspiracy cases were the first group of 27 political prisoners brought there.

They were followed by others of the Nasik Conspiracy Case, such as V. D. Savarkar and his brother Ganesh Savarkar. The Ghadarites were the largest single group of political prisoners sentenced to transportation for life. Forty of these were brought there in December 1915.

More than 30 from the Lahore Supplementary and Mandlay Conspiracy cases followed later. Other groups of revolutionaries were young. Many among the Ghadar prisoners were quite old. Nidhan Singh was 60 years old; Kehar Singh 62; Kala Singh 55; Gurdit Singh 50 and a large number of them 40 years and above.

There were many difficulties for the prisoners. The weather was bad. The area had many mosquitoes. There were blood-sucking leeches. Many were frequently sick. They suffered from high fever, tuberculosis. They had to work on the oil-mill and extract a minimum of 30 pounds of coconut oil. They had to pound coconut husk to produce coir threads.

If the quantity produced was less, the prisoners were abused and whipped with lashes. Prisoners cried loudly as blood flowed out of their skins. Communication between the prisoners was not possible as each one of them was kept in a small cell.

The recorded accounts of victims and eye-witnesses of over a dozen prominent revolutionaries provided heart-rending details of torture of political prisoners. All accounts refer to the Jailor David Barry, the Superintendent Murray and the Chief Commissioner as butchers and children of Satan. Some old criminals had been appointed as jamadars, petty officers and warders who got pleasure out of torturing political prisoners.

Barin Ghosh, brother of Aurobindo Ghosh, called them smaller gods who would abuse, humiliate and ill-treat the political prisoners and made their life most miserable. Some stories were smuggled out of the jail by Savarkar. They related to young Nani Gopal’s sharp and shrill cries because of whip lashes, his hunger strike that continued for 72 days and the long strike against tortures. The suicide committed by Indu Bhushan raised a storm in the country.

On arrival there, the Ghadarites learnt about the sufferings, the hard struggle of resistance of Bengali and Marathi prisoners. In the beginning, they decided not to suffer any indignity with a determined resistance. Parma Nand Jhansi was abused and threatened by the Jailor Barry for not producing the required quantity of oil. Parma Nand hit the jailor Barry.

As the jailor fell down, Parma Nand Jhansi was mercilessly beaten by the warders. The fall of Barry and the horrible torture of Jhansi created a stir in the jail. In another case of cruelty, Chattar Singh who slapped the Superintendent of Jail, Murray hard, was put in a cage.

Bhan Singh was beaten so hard that he died in the hospital. Resistance and most cruel punishment took the life of Ram Rakha within two months of his arrival in the jail. Eight Ghadarites lost their life in jail. They continued their repeated strikes from work and hunger strikes led by Bhakna. They were joined by 25 others for their rights as political prisoners.

The number of those who joined the strike rose to 100. Jyotish Chandra Pal passed blood in stool and went mad after a month. He was removed to a mental hospital. Prithvi Singh continued his hunger strike for four months. In the history of Andaman such a long strike had never been organised.

PSEB 12th Class English Solutions Chapter 10 Ghadari Babas in Kalapani Jail

The impact of the strike was very powerful. The jail authorities were forced to discontinue some of the practices of bad treatment of political prisoners. The revolutionaries sang patriotic songs and Vande Matram, recited Gurbani and did not care for the harshest physical punishment.

They were fighting against brutal forces with soul-force. They were either released in 1921 or transferred to jails in the mainland. Bhakna explained that the crux of the songs which the revolutionaries sang in the jails was : ‘Hey Matribhoomi, this is true that we could not liberate you, but so long as even one of our comrades is alive, he will sacrifice everything to remove your chains.

Ghadari Babas in Kalapani Jail Summary in Hindi

Ghadari Babas in Kalapani Jail Introduction:

यह उद्धरण Dr. Harish K. Puri की पुस्तक Ghadar Movement से लिया गया है। Dr. Harish K. Puri, Guru Nanak Dev University के भूतपूर्व professor हैं। उन्होंने राजनीतिक आन्दोलनों, धर्म और आतंकवाद पर विस्तृत तौर पर पुस्तकें लिखी हैं। इस उद्धरण में उन्होंने cellular jail (काला पानी) का डराने वाला (भयावह) वृत्तान्त दिया है। Cellular शब्द cell से बना है। Cell का अर्थ है छोटी कोठरी। यह cellular जेल Port Blair में स्थित है और इसको अंग्रेज़ों ने स्थापित किया था। Port Blair, Andaman और Nicobar का बड़ा नगर है। अंग्रेज़ों का मुख्य उद्देश्य था भारतीय स्वतन्त्रता संग्रामियों को 20वीं शताब्दी के शुरू के दशकों में अलग रखना, सज़ा देना और अत्याचार करना।

Ghadari Babas in Kalapani Jail Summary in Hindi:

गदर पार्टी U.S.A. और Canada में रहने वाले भारतीय पंजाबियों द्वारा स्थापित किया गया एक संगठन था। इसका लक्ष्य भारत को अंग्रेजों के राज से आजाद करवाना था। इसके महत्त्वपूर्ण या मुख्य सदस्य थे – लाला हरदयाल, V.G. Pingley, सन्त बाबा वसाखा सिंह डाडेहर, सोहन सिंह भकना, करतार सिंह सराभा और रासबिहारी बोस। 1914 में पहला विश्व युद्ध छिड़ गया। ग़दर पार्टी के सदस्य पंजाब वापस आ गये ताकि वे Babbar Akali Movement के साथ मिल कर विद्रोह कर सकें।

1915 में उन्होंने Central Punjab में क्रान्तिकारी गतिविधियां आरम्भ कर दी, लेकिन अंग्रेज़ों की सरकार ने उनके प्रयासों को कुचल डाला। भारत में अंग्रेजों की सरकार ने एक विशेष जेल स्थापित कर डाली ताकि इन बहादुर योद्धाओं को एक सबक सिखाया जाये। Port Blair में Cellular जेल स्थापित कर दी गई। इसको काला पानी कहते हैं। यह भारत की मुख्य भूमि से दूर थी। इसका अंग्रेजी तर्जुमा होता है ‘शैतान का टापू’ ।

यहां मुख्य भूमि भारत से आसानी से नहीं पहुंचा जा सकता था। आरम्भ में यह दण्ड-विषयक बस्ती इस लिए स्थापित की गई थी ताकि Ghadar Party के सदस्यों को अलग रखा जाये और उन पर सारी उमर अत्याचार किया जाये।
इस नई जेल को 1906 में खोला गया। बंगाली क्रान्तिकारियों जिन्हें षड्यन्त्र का दोषी ठहराया गया था, उनका 27 राजनीतिक कैदियों का पहला समूह यहाँ लाया गया था।

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उनके बाद Nasik षड्यन्त्र Case के दूसरे दोषी जैसे V. D. Savarkar और उसका भाई Ganesh Savarkar आये। Ghadar Party वालों के राजनीतिक कैदियों का सबसे बड़ा एक जत्था था जिन्हें जीवन भर के लिए काला पानी भेजा गया। उनमें से 40 को December 1915 में लाया गया।

30 से अधिक Lahore Supplementary और Mandlay षड्यन्त्र केसों से बाद में आये। क्रान्तिकारियों के दूसरे ग्रुप नवयुवक थे। Ghadar Party के कैदियों में से काफ़ी बूढ़े थे। निधान सिंह 60 वर्ष का था, Kehar Singh 62 साल का था, Kala Singh 55 वर्ष का था, Gurdit Singh 50 का और उनमें से बहुत से 40 साल के और उससे भी अधिक वर्षों के थे।

कैदियों के लिए कई कठिनाईयां थीं। वहां मौसम खराब था। उस क्षेत्र में मच्छर भी बहुत थे। वहाँ खून चूस लेने वाली जोंकें भी थीं। उन कैदियों में से बहुत से तो प्रायः बीमार रहते थे। वे तपेदिक (T.B.) से भी पीड़ित हो जाते थे। उन्हें कोल्हू चलाना पड़ता था और कम से कम 30 पौंड प्रतिदिन नारियल का तेल निकालना पड़ता था।

उन्हें नारियल के छिलके को कूटना पड़ता था ताकि नारियल की जटा निकाली जा सके। अगर निकाली गई मात्रा कम होती, तो कैदियों को गालियाँ दी जाती और चाबुक लगाए जाते। कैदी ऊँची-ऊँची चीखें मारते जब उनकी त्वचाओं से रक्त निकलता। कैदियों के बीच वार्तालाप नहीं हो सकती थी क्योंकि उनमें से प्रत्येक को एक छोटी-सी कोठरी में रखा जाता था।

पीड़ितों के दर्ज किए वृत्तान्त और एक दर्जन से अधिक महत्त्वपूर्ण चश्मदीद गवाहों ने राजनीतिक कैदियों के अत्याचारों का हृदय-विदारक विस्तृत विवरण दिया है। सारे वृत्तान्त Jailor David Barry, Superintendent Murray और Chief Commissioner का हवाला देते हुए कहते हैं कि वे बूचड़ और शैतान के बच्चे थे। कई

पुराने अपराधियों को जमादार, छोटे अफ़सर और Warder नियुक्त किया गया था जिनको राजनीतिक कैदियों पर अत्याचार करके प्रसन्नता होती थी। Barin Ghosh जो Aurobindo Ghosh का भाई था, इनको छोटे देवता कहता था जो गालियाँ देते थे, अपमानित करते थे और राजनीतिक कैदियों और उनके जीवन को दयनीय बना देते थे। कुछ कहानियां Savarkar द्वारा जेल के बाहर भेज दी जाती थीं।

वे नवयुवक Nani Gopal को चाबुक द्वारा पीटे जाने के बाद उसकी तेज़ चीखों के बारे थी, यह उसकी भूख हड़ताल के बारे थी जो 72 दिन रही और उसकी लम्बी हड़ताल के बारे थी जो अत्याचारों के विरुद्ध थी। एक कहानी इन्दू भूषण की आत्महत्या के बारे थी जिसने सारे देश में तूफ़ान खड़ा कर दिया।

वहाँ पहुँचकर Ghadar Party के सदस्यों ने बंगाली और मराठी कैदियों के कष्टों और विरोध के कठोर संघर्ष के बारे जानकारी प्राप्त की। आरम्भ में उन्होंने निर्णय किया कि वे किसी अपमान को सहन नहीं करेंगे या उसका कड़ा विरोध करेंगे। Jailor Barry ने Parma Nand Jhansi को गालियाँ और धमकियां दी क्योंकि उसने (कोहलू से) तेल की आवश्यक मात्रा नहीं निकाली थी। Parma Nand ने जेलर Barry को चोट लगा दी और Barry नीचे गिर गया। ज्योंही जेलर नीचे गिरा, जेल के warders ने उसको बड़ी बेरहमी से पीट डाला।

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Barry के नीचे गिरने और Parma Nand Jhansi पर हुए विकराल अत्याचार ने जेल में हलचल पैदा कर दी। अत्याचार के एक और मामले में चतर सिंह ने जेल के Superintendent Murray को एक जबरदस्त चपत जड़ दी। उसको सलाखों वाले पिजरे में डाल दिया गया। भान सिंह की इतनी सख्त पिटाई की गई कि वह हस्पताल में ही मर गया। विरोध और बड़ी सख्त सज़ा ने राम रक्खा की उसके जेल में आने के दो महीनों के भीतर उसकी जान ले ली। Ghadar Party के आठ सदस्यों की जान जेल में ही चली गई। उन्होंने काम से बार-बार हड़ताल करना जारी रखी और Bhakna के नेतृत्व में भूख हड़ताल होती रही।

उनके साथ 25 सदस्य और आकर मिल गये। Jyotish Chandra Pal के stool में खून आता था और वह एक महीने के बाद पागल हो गया। उसे पागलखाने में दाखिल करा दिया गया। 4 महीने Prithvi Singh ने अपनी भूख-हड़ताल जारी रखी। अंडेमान के इतिहास में इतनी लम्बी हड़ताल कभी नहीं रखी गई थी। हड़ताल का प्रभाव बड़ा प्रबल था। जेल के अधिकारियों को विवश होकर राजनीतिक कैदियों के प्रति दुर्व्यवहार में सुधार लाना पड़ा। क्रांतिकारी देशभक्ति के गीत और वन्दे मातरम, Gurbani का पाठ करते और वे कठोर से कठोर सज़ा की परवाह नहीं करते थे।

वे अपनी आत्मा की शक्ति से पाश्विक शक्तियों से लड़ते थे। उनको या तो 1921 में जेल से रिहा कर दिया गया या उन्हें मुख्य भूमि भारत की जेलों में भेज दिया गया। भकना ने वर्णन किया कि क्रान्तिकारी जो गाने जेल में गाते थे उनका निचोड़ यह था : ‘हे मातृभूमि यह सच है कि हम तुम को आजाद नहीं करा सके लेकिन जितनी देर तक हमारा एक भी साथी ज़िन्दा है, वह तुम्हारी जंजीरों को काटने के लिए अपना सर्वस्व बलिदान कर देगा।’

Word Meanings:

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A Rainbow of English 12 Class Guide Prose

The Bull beneath the Earth Question Answer Class 12 English Supplementary Chapter 6 PSEB Solutions

Punjab State Board PSEB 12th Class English Book Solutions Supplementary Chapter 6 The Bull beneath the Earth Textbook Exercise Questions and Answers.

Class 12th English Supplementary Chapter 6 The Bull beneath the Earth Question Answers

The Bull beneath the Earth Class 12 Questions and Answers

Short Answer Type Questions

Question 1.
Discuss the appropriateness of the title of the story ‘The Bull Beneath the Earth’.
“The Bull Beneath the Earth’ कहानी के शीर्षक की उचितता पर तर्क करें
Answer:
The title of a story must be appropriate. It must capture its theme and throw light on its events. The title refers to the old man in the story. He is burdened by his personal sorrows. His eldest son Karam Singh has recently died. He has to take care of his daughter-in-law and his grandson. Mann Singh rightly compares him with the mythical bull who carries on its head the burden of the whole earth.

कहानी का शीर्षक उचित होना चाहिए। इसकी इसके विषय पर पकड़ होनी चाहिये और कहानी की घटनाओं पर प्रकाश डालना चाहिए। यह शीर्षक कहानी में बूढ़े आदमी से सम्बन्धित है। वह अपने व्यक्तिगत दुःखों के बोझ तले दबा हुआ है। उसका बड़ा बेटा कर्म सिंह हाल ही में मर गया है। उसको अपनी बहु और पोते का ध्यान रखना है। मान सिंह ठीक ही उसकी तुलना उस पौराणिक बैल से करता है जिसने अपने सिर पर सारी ज़मीन का बोझ उठाया हुआ है।

PSEB 12th Class English Solutions Supplementary Chapter 6 The Bull beneath the Earth

Question 2.
Why did Mann Singh not get a warm welcome by the father of Karam Singh ?
कर्म सिंह के बाप ने मान सिंह का हार्दिक स्वागत क्यों नहीं किया ?
Answer:
Mann Singh was a true friend of Karam Singh. During his leave he visited Karam Singh’s house. Because of the tragedy of Karam Singh, his father didn’t give him a warm welcome. Mann Singh understood that his personal loss and responsibilities had given him a great shock. He rightly compared him with the mythical bull beneath the earth.

मान सिंह कर्म सिंह का एक सच्चा मित्र था। अपनी छुट्टी के दौरान वह कर्म सिंह के घर गया। कर्म सिंह के दुखांत के कारण उसके पिता ने उसका हार्दिक स्वागत नहीं किया। मान सिंह समझ गया कि उसकी व्यक्तिगत हानि और दायित्वों ने उसे बहुत बड़ा सदमा दिया था। उसने ठीक ही उसकी तुलना धरती के नीचे वाले पौराणिक बैल से की।

Long Answer Type Questions

Question 1.
Write a character-sketch of Karam Singh.
Karam Singh का चरित्र – चित्रण करे|
Answer:
Karam Singh was a Havildar in the army. He was posted in Burma. The text does not tell us anything about his early life. He belonged to the village named Thathi Khara in Amritsar district. He was a hearty, friendly character. He had a very pleasant manner of speech.

The people of his village loved to sit by his side and listen to his tales of war and adventure. Karam Singh was very popular in his village. When he came on leave, he had many tales to tell the people. In his regiment also, he was famous as a crack shot.

PSEB 12th Class English Solutions Supplementary Chapter 6 The Bull beneath the Earth

He had killed many Japanese in the war. It was said that whenever he pressed the trigger of his rifle, a Japanese used to be killed. He used to be the best performer in rifle shooting competitions. In his regiment, he was known for his feats in the gymnasium. He was a sincere friend of Mann Singh, Naik in his regiment. During war days, Mann Singh went on leave for a few days.

He was from Chuharkana (now in Pakistan). Karam Singh told him to visit his village in Amritsar district and see his parents. Mann Singh met the members of his family. Karam Singh’s end was tragic. His loss was a permanent loss for his family. He was a brave and efficient soldier.

कर्म सिंह सेना में हवलदार था। वह Burma में अपने सैनिक काम पर नियुक्त था। मूलपाठ हमें उसके आरम्भिक जीवन के बारे कुछ नहीं बताता। वह अमृतसर जिला के ठठी खारा गांव का रहने वाला था। वह खुशदिल और मैत्री भाव वाला व्यक्ति था। उसके बोलचाल का तरीका बड़ा सुहावना था। उसके गांव के लोग उसके पास बैठकर उससे युद्ध और जोखिम वाली कहानियाँ सुनना पसंद करते थे। कर्म सिंह अपने गांव में प्रसिद्ध था।

जब वह छुट्टी पर आता था, उसके पास लोगों को सुनाने के लिए कई कहानियां होती थीं। अपनी रैजीमैंट का वह प्रसिद्ध निशानेबाज़ था। युद्ध में उसने कई जापानियों को मारा था। कहा जाता था कि जब भी वह अपनी बन्दूक के घोड़े को दबाता था तो एक जापानी मर जाता था। Rifle द्वारा गोली चलाने की प्रतियोगिताओं में वह सबसे बेहतरीन निशानेबाज़ होता था। अपनी रैजीमैन्ट में वह Gymnasium के अपने करतबों के लिए भी काफ़ी प्रसिद्ध था। वह मान सिंह का सच्चा मित्र था जो कि उसी रैजीमैन्ट में नायक था। युद्ध के दिनों में मान सिंह कुछ दिनों की छुट्टी पर गया।

वह चूड़काना (अब पाकिस्तान में) का रहने वाला था। कर्म सिंह ने उसे कहा कि वह अमृतसर जिले में उसके गांव जाकर उसके माता-पिता से मिले। मान सिंह कर्म सिंह के गांव जाकर उसके परिवार वालों को मिला। कर्म सिंह का अन्त दुःखद था। अपने परिवार वालों के लिए उसकी हानि एक स्थाई हानि थी। वह एक कुशल और वीर सैनिक था।

Question 2.
Write a character-sketch of Mann Singh.
Mann Singh का चरित्र-चित्रण करें।
Answer:
Mann Singh was a Naik in the army. He belonged to Chuharkana (now in Pakistan). He was a sincere friend of Karam Singh who was a Havildar in the same regiment in Burma.

He was a fast friend of Karam Singh. He was full of praise for his friend’s skill and efficiency as a soldier. He was a true friend of Karam Singh. During the war days. he had to go on leave. Karam Singh also wanted to have leave and he wished to spend his leave with Mann Singh. But he did not get leave. Karam Singh told Mann Singh to go to his village, Thathi Khara in district Amritsar.

PSEB 12th Class English Solutions Supplementary Chapter 6 The Bull beneath the Earth

By his visit to his village, he would be able to meet his people. He wanted his parents to feel that he had visited them through the visit of Mann Singh. Because of the tragedy of Karam Singh, his father did not give him a warm welcome.

But Mann Singh understood that his personal loss and responsibilities had given him a great shock. He rightly compared the old father of Karam Singh with the mythical bull beneath the earth.

मान सिंह सेना में नायक था। वह चूड़काना (अब पाकिस्तान में) का रहने वाला था। वह कर्मसिंह का सच्चा दोस्त था जो बर्मा की उसी रैजीमैन्ट में हवलदार था। वह कर्म सिंह का पक्का मित्र था। वह एक सैनिक के रूप में अपने मित्र की प्रवीणता और कौशल की बहुत प्रशंसा करता था। वह एक सच्चा मित्र था।

युद्ध के दिनों में उसे छुट्टी पर जाना पड़ा। कर्म सिंह भी छुट्टी लेकर जाना चाहता था ताकि वह छुट्टी मान सिंह के साथ बिता सके। लेकिन उसे छुट्टी नहीं मिली। कर्म सिंह ने मान सिंह को कहा कि वह उसके गांव ठुठी खारा जिला अमृतसर में जाये। उसके गांव जाकर वह उसके परिवार के लोगों से मिल सकेगा। कर्म सिंह चाहता था कि मान सिंह के जाने से उसके मातापिता को लगेगा कि उसके ज़रिये से वे कर्म सिंह को मिल सके थे।

कर्म सिंह के दुःखांत के कारण कर्म सिंह के पिता ने मान सिंह का अच्छी तरह स्वागत नहीं किया। लेकिन मान सिंह समझ गया था कि उसके व्यक्तिगत नुकसान और ज़िम्मेदारियों ने उसको बड़ा झटका दिया था। इस लिए उसने कर्म सिंह के बूढ़े बाप की तुलना ज़मीन के नीचे उपस्थित पौराणिक बैल से की थी।

Question 3.
Why did Mann Singh visit Karam Singh’s village during his leave ? How did Karam Singh’s family treat him ? What was the reason for such treatment?
अपनी छुट्टी के दौरान मान सिंह कर्म सिंह के गांव क्यों गया ? कर्म सिंह के परिवार ने उसके साथ कैसा व्यवहार किया ? ऐसे बर्ताव का क्या कारण था ?
Answer:
Mann Singh was going on leave to his home in Chuharkana. His friend Karam Singh told him that he must go to his village Thathi Khara and see his people before he returned from leave. He told him that his family members would be happy to see him. Then Karam Singh told him about the geography of his village.

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He would write to his parents about Mann Singh’s visit. So Mann Singh made it a point to visit Thathi Khara. He took a tonga from Amritsar to reach the village. As he reached the place, he entered Karam Singh’s house. He greeted Karam Singh’s father. Karam Singh’s father welcomed him. He sat down on a charpai.

The old man did not appear to be warm in welcoming Mann Singh. He seemed to be disturbed at Mann Singh’s arrival. His eyes wandered away from Mann Singh’s face. Mann Singh thought this welcome strange. For a moment, Mann Singh thought that the old man was not Karam Singh’s father.

The old man said that this was Karam Singh’s house. He added that Karam Singh had written to him about his visit. After speaking these words, the old man walked away to the courtyard. The reason for this cold treatment was the sudden death of Karam Singh. The whole family was in grief.

मान सिंह छुट्टी पर (चूड़काना) अपने घर जा रहा था। कर्म सिंह ने उसको कहा कि उसे छुट्टी से वापस आने से पहले उसके गांव ठठ्ठी खारा में उसके घर जाकर उसके माता-पिता को ज़रूर मिलना चाहिये। उसने उसको कहा कि उसके माता-पिता उसको मिल कर बहुत प्रसन्न होंगे। फिर कर्मसिंह ने उसको अपने गांव की भौगोलिक स्थिति बता दी।

वह अपने माता-पिता को मान सिंह के दौरे के बारे लिख देगा। इसलिए मान सिंह ने इरादा कर लिया कि वह Thathi Khara ज़रूर जायेगा। गांव पहुंचने के लिए उसने Amritsar से टांगा ले लिया। वहां पहुंच कर उसने कर्म सिंह के घर प्रवेश किया। उसने कर्म सिंह के पिता को नमस्कार किया।

बूढ़े बाप ने उसको कहा कि यह कर्म सिंह का घर है। कर्म सिंह के पिता ने उसका स्वागत किया। वह एक चारपाई पर बैठ गया। बूढ़े आदमी द्वारा मान सिंह का स्वागत करने में रूखापन था। वह मान सिंह के आने पर परेशान-सा था। उसकी आँखें मान सिंह के चेहरे से परे हट गईं। मान सिंह इस स्वागत को विचित्र पा समझता था।

एक पल के लिए तो मान सिंह ने सोचा कि यह बूढ़ा कर्म सिंह का बाप नहीं था। देर कहा ।क यह कर्म सिंह का घर था। उसने कहा कि कर्म सिंह ने उसके आने के बारे लिखा था। ये शब्द बोलने के बाद बूढ़ा आदमी वहां से आंगन की ओर चला गया। इस ठंडे या रूखे स्वागत का कारण कर्म सिंह की अचानक मौत थी। सारा परिवार शोकग्रस्त था।

Question 4.
Give a brief character-sketch of Karam Singh’s father.
कर्म सिंह के बाप का संक्षेप में चरित्र-चित्रण करें।
Answer:
Karam Singh’s father is an old man. He must be past sixty. The story does not tell us about his early life. He seems to be engaged in domestic duties. He does not talk much. When Mann Singh comes to his house at the request of Karam Singh, he does not talk frankly with the visitor. He is not at all warm to his son’s dear friend. Mann Singh gets a cold treatment.

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He does not ask Mann Singh any question about the welfare of his son. So Mann Singh asks him if he is Karam Singh’s father. He is a man of sorrows. He has several sorrows of his own. After the death of Karam Singh, he has to take care of his daughter-in-law and his grandson.

He has become numb after the death of his son in the army. When Mann Singh comes to know that his friend is dead, he then understands why he is so sad and almost silent. Mann Singh compares him to a mythical bull in the mythical stories which bore upon its head the burden of the whole earth. Karam Singh’s father appeared to him a kind, generous and helpful spirit who was willing to share other people’s burden.

कर्म सिंह का बाप एक बूढ़ा व्यक्ति है। वह 60 वर्ष से ऊपर है। कहानी उसके प्रारम्भिक जीवन के बारे कुछ नहीं बताती। वह घरेलू कार्यों में व्यस्त है। वह अधिक बातें भी नहीं करता। जब मान सिंह कर्म सिंह के कहने पर उसके घर आता है तो वह आगन्तुक के साथ खुलकर बात भी नहीं करता।

वह अपने बेटे के प्यारे मित्र के साथ गर्मजोशी से नहीं मिलता। मान सिंह के साथ शुष्क व्यवहार होता है। वह अपने बेटे की भलाई के बारे मान सिंह से कोई प्रश्न भी नहीं पूछता। इसलिए मान सिंह पूछता है क्या वह कर्म सिंह का बाप है। वह दुःखों से पीड़ित व्यक्ति है।

उस पर कई दुःखों का बोझ लदा हुआ है। कर्म सिंह की मौत के बाद उस पर अपनी बहू और पोते का बोझ है। अपने बेटे की सेना में मौत हो जाने से सन्न हो गया है। जब मान सिंह को अपने मित्र की मृत्यु के बारे में पता चलता है तो उसे पता चलता है कि वह इतना उदास और बिल्कुल खामोश क्यों है।

मान सिंह उसकी तुलना पौराणिक कहानियों में दिये हुए पौराणिक बैल से करता है जिसने सारे संसार के बोझ को अपने सिर पर उठाया हुआ था। कर्म सिंह का पिता उसे एक दयालु, उदार और सहायक आत्मा लगता था जो दूसरों का बोझ बांटने को तैयार था।

Objective Type Questions

This question will consist of 3 objective type questions carrying one mark each. These objective questions will include questions to be answered in one word to one sentence or fill in the blank or true/false or multiple choice type questions.

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Question 1.
Who were Mann Singh and Karam Singh ?
Answer:
Mann Singh and Karam Singh were soldiers in the same Regimental Centre and were serving together in a battalion on the Burma Front.

Question 2.
What were the designations of Karam Singh and Mann Singh in the army?
Answer:
Mann Singh was a Naik and Karam Singh was a Havildar in the army.

Question 3.
Where did Mann Singh go when he got a few days’ leave ?
Answer:
He went to his friend Karam Singh’s village, Thathi Khara.

Question 4.
Who did Mann Singh meet first on entering Karam Singh’s house?
Answer:
He first met Karam Singh’s father.

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Question 5.
Who was Jaswant Singh ?
Answer:
He was Karam Singh’s brother.

Question 6.
What did Mann Singh tell Karam Singh’s family about the latter’s war skills ?
Answer:
Mann Singh said that Karam Singh was very famous in the Burma war and a Japanese was killed as he pressed the trigger.

Question 7.
Which words of Mann Singh pierced Karam Singh’s father’s heart ?
Answer:
Mann Singh told Karam Singh’s little son to come with him if he wanted to go to his father. There he would have plenty of water to play in.

Question 8.
How far was Taran Taran from Karam Singh’s village ?
Answer:
It was nearly four miles.

Question 9.
What news did the postman bring ?
Answer:
The postman brought papers concerning Karam Singh’s pension.

Question 10.
What was the effect of Karam Singh’s death on Mann Singh ?
Answer:
Mann Singh felt choked in his chest and throat and his body became feelingless (numb).

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Question 11.
Why did the members of Karam Singh’s family not break the news of his death …to Mann Singh ?
Answer:
They did not tell him as they did not want to spoil his days of leave and they knew that he would come to know everything on returning to his regiment.

Question 12.
Why did Mann Singh compare Karam Singh’s father to a bull who bore upon its head the burden of the whole earth ? (V.V. Imp.)
Answer:
Karam Singh’s father had extraordinary capacity for bearing his personal sorrows and shocks just like the bull in mythical stories who bore upon its head the burden
of the whole earth.

Question 13.
This story relates to rural area of district Amritsar. (True/False)
Answer:
True.

Question 14.
Name the village of Karam Singh.
Answer:
Thathi Khara.

Question 15.
Name the brother of Karam Singh.
Answer:
Jaswant Singh.

Question 16.
Name the writer of this lesson.
Answer:
Kulwant Singh Virk.

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Question 17.
Who brought Karam Singh’s pension papers ?
Answer:
The postman.

Question 18.
Where do you find the mention of the bull bearing the burden of the earth?
Answer:
In mythical or ancient stories.

The Bull beneath the Earth Summary in English

The Bull beneath the Earth Introduction:

This story is about two friends. They were Mann Singh and Karam Singh. They were serving in the same regiment in Burma. Mann Singh visits Karam Singh’s house when he comes on leave. He finds that the members of Karam Singh’s family are very cold and formal towards him.

He is bitterly disappointed at their cold behaviour. But later on he comes to know the reason of their dry behaviour. They had got the news of their son’s death. They withhold the news of the death of their son.

The Bull beneath the Earth Summary in English:

This story is about two army men. They were Havildar Karam Singh and Naik Mann Singh. Both of them were serving in the same Regimental Centre in Burma. They were now serving together in a battalion on the Burma front. Karam Singh had joined the army earlier and was now a Havildar. Mann Singh was a Naik.

Many persons from Karam Singh’s village often enquired from his father when he would come on leave. He was a healthy and friendly character. He had a very pleasant manner of speech. People loved to sit by his side and listen to his tales of war and adventure.

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There were many young men from Karam Singh’s village in the army. But when they came on leave, they did not have many topics for talk. Karam Singh used to tell several things to the people of his village. Karam Singh was often busy talking with the people of the village. He was a good shot. In the war several Japanese were killed by his bullets.

Thus he took revenge for his serveral men killed by the Japanese in the war. While on leave in his village, Karam Singh kept up an interesting course of discussion with people of the village. This went on till midnight by the fire.

During the war gymnastics and many other things had of course been stopped. One never met anyone from one’s village or town. When Mann Singh was about to go on leave, Karam Singh felt that he should also get some leave. Then they could go on leave together. They could perhaps pass the holidays together.

But it was difficult to get leave during war days. Karam Singh belonged to a village in district Amritsar. Mann Singh belonged to Chuharkana (now in Pakistan). Amritsar was not more than fifty miles away from Mann Singh’s Chuharkana.

When Mann Singh got into the military truck to come away, Karam Singh gave him the parting message. He told Mann Singh that he must go to his village and see his people before he returned from leave.

As Mann Singh had not been to areas outside Amritsar, Karam Singh told him about the geography of his village. Karam Singh told him that there were a number of gurudwaras in the countryside of Amritsar. They were Taran Taran, Khadur Sahib and Goindwal. He could visit all of them. Then he could see his parents and members of the family. He will write to them about his visit. Mann Singh had to take a tonga to reach Karam Singh’s village.

Mann Singh reached Karam Singh’s house and introduced himself to Karam Singh’s father. Mann Singh sat on the string-bed. Karam Singh’s father looked disturbed. His eyes wandered away from Mann Singh’s face. Mann Singh’s thought this welcome rather strange. He asked the old man if he was Karam Singh’s father. He told Mann Singh that Karam Singh had written about his visit to them.

PSEB 12th Class English Solutions Supplementary Chapter 6 The Bull beneath the Earth

The old man got up and walked away to the courtyard. He petted one buffalo calf and then went inside to announce Mann Singh’s arrival. He wanted tea to be sent to Mann Singh. Then he went near the mare. He put in some more gram in the chaff.

But the old man seemed lost. Mann Singh asked about Jaswant Singh. Mann Singh knew that Jaswant Singh was Karam Singh’s younger brother. He had gone outside. Then Karam Singh’s mother brought tea. Mann Singh wished ‘Sat Sri Akaľ to Karam Singh’s mother. Mann Singh said to himself that the Majhails were strange people.

Jaswant Singh came at night. The talk between the two became more informal. Mann Singh said that Karam Singh’s bullet had killed several Japanese in the war. He wanted to tell more about Karam Singh but nobody in the house was interested to listen.

Jaswant Singh then told his father that canal water will be available to them the day after tomorrow at three o’ clock in the morning. Mann Singh said that Karam Singh in the army did not have to get up early in the morning. This remark about Karam Singh failed to arouse any interest in anyone in the family.

Next, food came with several dishes for him. Jaswant Singh kept waving the fan as Mann Singh ate. He forgot the feeling that he had not been shown much attention. As he finished. food, Karam Singh’s little son walked in. He asked the child if he would like to go to his father. Mann Singh told the child that place gets a lot of rain and he would have a lot of water for playing.

Mann Singh’s words seemed to pierce the old man’s heart. He shouted that the child should be taken away. The mother came and took the child away. Mann Singh’s food stuck in his throat. Then he started making enquiries about his morning’s journey. Jaswant Singh offered to go to see off Mann Singh.

Mann Singh told Jaswant Singh that Karam Singh had won for himself a name in the army. Jaswant started talking about the sugarcane crop. Mann Singh wanted to talk about his friend. He planned his journey back to his village. He thought he would take the night train at Amritsar.

After some time the postman brought a letter containing Karam Singh’s pension papers. The postman gave the information to Mann Singh about Karam Singh’s death and the grief in the village. All shed copious tears over the news of his death. Karam Singh’s father was sorry that they had kept the news of Karam Singh’s death away from him.

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Mann Singh’s eyes ranged over the environment which formed the area. There were forts built around the villages for protection. There were tombs and monuments which had many a deathless story of heroic fights against the invaders of Bharat. That was the secret of the old man’s capacity for absorbing the shocks. He could comfortably absorb additional burdens to lighten the burden of other persons.

Mann Singh had heard that there was a bull which bore upon its head the burden of the whole earth. Karam Singh’s father was just another person who could share other people’s burdens.

The Bull beneath the Earth Summary in Hindi

The Bull beneath the Earth Introduction:

यह कहानी दो मित्रों के बारे है। उनके नाम हैं मान सिंह और कर्म सिंह । वे दोनों Burma में एक ही रैजमैन्ट में नौकरी करते थे। Mann Singh छुट्टी पर आता है और वह कर्म सिंह के गाँव में उसके घर जाता है। उसे पता चलता है कि Karam Singh के परिवार के सदस्य उसके प्रति भाव शून्य और औपचारिक हैं। वह उनके ठंडे बर्ताव को देखकर बहुत निराश हो जाता है। लेकिन बाद में उसे उनके शुष्क व्यवहार के बारे में पता चल जाता है। उन्हें अपने बेटे की मौत का समाचार मिल गया था। यह उनके बेटे कर्म सिंह का दुखान्त है। वे अपने बेटे की मौत की खबर को रोक कर रखते हैं।

The Bull beneath the Earth Summary in Hindi:

यह कहानी दो सैनिकों के बारे है। उनके नाम थे हवलदार Karam Singh और नायक Mann Singh । दोनों Burma में स्थित एक ही Regimental Centre में नियुक्त थे। अब वे दोनों एक ही Battalion में Burma front पर काम करते थे। कर्म सिंह सेना में पहले भर्ती हुआ था और अब वह हवलदार था। मान सिंह नायक था।

कर्म सिंह के गाँव के कई व्यक्ति उसके बाप से पूछा करते थे कि वह कब छुट्टी पर आयेगा । वह एक स्वस्थ आदमी और मैत्री भाव वाला पात्र था। उसके बोलचाल का ढंग बहुत ही सुहावना था। लोग उसके पास बैठना पसन्द करते थे और उसके साहसिक कार्यों और युद्ध की कहानियां सुनना पसन्द करते थे।

PSEB 12th Class English Solutions Supplementary Chapter 6 The Bull beneath the Earth

कर्म सिंह के गाँव के कई नवयुवक सेना में थे। लेकिन जब वे छुट्टी पर आते थे तो उनके पास दूसरों को बताने के लिए कोई कहानियां नहीं होती थीं। कर्म सिंह अपने गांव के लोगों को कई कहानियां बताया करता था। कर्म सिंह अपने गाँव के लोगों के साथ बातें करता हुआ दिखाई देता था। वह अच्छा निशानेबाज़ था।

युद्ध में कई जापानी मारे गये थे। वे कर्म सिंह की गोलियों से मरे थे। जब कर्म सिंह अपने गाँव में छुट्टी पर आता था, तो वह अपने गाँव के लोगों से कई विषयों पर तर्क किया करता था। यह तर्क आधी रात तक चलते रहते थे और वे आग के पास बैठे रहते थे। युद्ध के दिनों में कसरत/व्यायाम और बहुत सी कई चीजें बन्द कर दी जाती थीं।

किसी सैनिक को अपने गाँव या शहर से कोई व्यक्ति नहीं मिलता था। जब मान सिंह छुट्टी पर जाने वाला था, तो कर्म सिंह को महसूस हुआ कि उसे भी छुट्टी पर जाना चाहिए। तब वे छुट्टी पर इकट्ठे जा सकते थे। तो शायद वे छुट्टी के दिन भी इकट्ठे गुजार सकते थे।

लेकिन युद्ध के दिनों में छुट्टी मिलनी बहुत कठिन थी। कर्म सिंह Amritsar के एक गाँव ठट्ठी खारा का रहने वाला था। मान सिंह चूड़काना का रहने वाला था (अब चूड़काना पाकिस्तान में है)। अमृतसर चूड़काना से 50 मील से अधिक दूरी पर नहीं था। जब मान सिंह छुट्टी पर जाने के लिए मिलिटरी ट्रक में बैठा, कर्म सिंह ने उसे विदाई के समय संदेश दिया। उसने मान सिंह को कहा कि उसे उसके गांव जरूर जाना चाहिये, वापस आने से पहले उसके घरवालों को ज़रूर मिल कर आना चाहिये।

चूँकि मान सिंह अमृतसर के बाहर किसी ग्रामीण क्षेत्र में नहीं गया था, कर्म सिंह ने उसे गाँव की Geographical position बता दी। कर्म सिंह ने मान सिंह को बताया कि अमृतसर के देहाती इलाके में कई गुरद्वारे थे। वे थे Taran Taran, खडूरसाहिब और गोइन्दवाल। वह उन सब गुरुद्वारों के दर्शन कर सकता था। फिर वह उसके पिता और परिवार के सदस्यों से मिल सकता था। वह उन्हें पत्र लिख देगा कि मान सिंह उनके घर आयेगा।

मान सिंह को टांगा में बैठकर कर्म सिंह के घर पहुंचना था। Mann Singh कर्म सिंह के घर पहुंच गया और मान सिंह के पिता को अपना परिचय दिया। Mann Singh चारपाई पर बैठ गया। कर्म सिंह का पिता कुछ परेशान सा लगता था। उसकी आँखें मान सिंह के चेहरे से हटकर कहीं और देखती रहीं।

मान सिंह ने इस स्वागत को जरा रुखा और ठंडा समझा। उसने बूढ़े आदमी को पूछा कि क्या वह कर्म सिंह का पिता था। उसने मान सिंह को बताया कि कर्म सिंह ने उनको लिखा था कि मान सिंह उनको मिलने के लिए उनके घर आयेगा।

बूढ़ा आदमी (कर्म सिंह का बाप) वहां से उठकर सेहन की ओर चला गया। उसने भैंस के बच्चे को थपकी दी और फिर वह अन्दर चला गया ताकि वह सबको बता सके कि मान सिंह आ गया है। बूढ़े बाप ने यह भी कहा कि मान सिंह को चाय पिलाई जाये। फिर बूढ़ा घोड़ी के पास गया। उसने भूसे में कुछ चने डाले। लेकिन बूढा बाप खोया-खोया नज़र आता था। मान सिंह ने जसवन्त सिंह के बारे पूछा।

मान सिंह जानता था कि जसवन्त सिंह कर्म सिंह का छोटा भाई था। वह घर से बाहर गया हुआ था। तब Karam Singh की माता चाय लेकर आई। मान सिंह ने कर्म सिंह की माता को ‘सत श्री अकाल’ कहा। फिर मान सिंह ने अपने को कहा कि मझेल (कर्म सिंह की Caste) विचित्र प्रकार के व्यक्ति थे।

जसवन्त सिंह रात को आया। दोनों के बीच बातचीत अधिक अनौपचारिक हो गई। मान सिंह ने कहा कि कर्म . सिंह की गोली से कई जापानी मारे गये थे। मान सिंह, कर्म सिंह के बारे में और बातें भी करना चाहता था लेकिन कर्म सिंह के बारे में कोई भी बात सुनने के लिए तैयार नहीं था।

जसवन्त ने तब अपने पिता को बताया कि उनको नहर का पानी परसों तीन बजे प्रातः मिलेगा। मान सिंह कहने लगा कि सेना में कर्म सिंह को प्रातः जल्दी नहीं उठना पड़ता था। कर्म सिंह के बारे इस टिप्पणी ने भी परिवार के किसी सदस्य में कर्म सिंह के बारे कोई रुचि जागृत नहीं की।

कुछ देर के बाद Mann Singh के लिए भोजन परोसा गया। इसमें कई पकवान थे। जसवन्त सिंह मान सिंह को पंखा करता रहा। अब मान सिंह इस विचार को भूल गया कि उसकी ओर इस परिवार ने विशेष ध्यान नहीं दिया। ज्यूं ही उसने भोजन कर लिया कर्म सिंह का छोटा लड़का उधर आ गया।

उसने बच्चे को पूछा क्या वह अपने पिता के पास जाना चाहेगा । उसने बच्चे से कहा कि वहां वर्षा खूब पड़ती है और वहां उसे खेलने के लिए बहुत सा पानी मिल जायेगा। मान सिंह के शब्दों ने मानो बूढ़े बाप का दिल चीर दिया। उसने चिल्ला कर कहा कि बच्चे को वहां से ले जाओ। बच्चे की मां आई और वह बच्चे को वहाँ से ले गई। मान सिंह का खाना मानो उसके गले में रुक गया हो। फिर उसने अपनी सुबह की यात्रा के बारे में पूछताछ करनी शुरू कर दी।

जसवन्त सिंह ने मान सिंह को कहा कि वह उसको इस गांव से जाने में तरनतारन तक उसके साथ जायेगा। Mann Singh ने जसवन्त सिंह को बताया कि Karam Singh ने अपने लिए सेना में बड़ा नाम कमाया था। जसवन्त सिंह ने गन्ने की फसल के बारे बात करनी शुरू कर दी। मान सिंह अपने मित्र कर्म सिंह के बारे में बात करना चाहता था। मान सिंह ने अपने गांव जाने के लिए योजना बना ली। उसने सोचा कि वह रात को अमृतसर से गाड़ी में सवार होगा। कुछ समय के बाद डाकिया एक चिट्ठी लेकर आ गया जिसमें कर्म सिंह की पैन्शन के कागज़ थे।

PSEB 12th Class English Solutions Supplementary Chapter 6 The Bull beneath the Earth

डाकिये ने मान सिंह को कर्म सिंह की मौत और गाँव में उसकी मौत पर शोक और दुःख के बारे में बताया। फिर Mann Singh ने गाँव के इर्द-गिर्द के वातावरण पर नज़र डाली। गाँव के बाहर किले बने हुए थे जो सुरक्षा देते थे। वहां पर मकबरे और स्मारक थे जिनमें भारत पर आक्रमणकारियों के हाथों शहीद हो गये बहादुरों का विवरण दिया गया था।

यह कर्म सिंह के बूढ़े पिता की असाधारण शक्ति का पता देता था जो सब सदमों को सहन करता था। मान सिंह ने सुन रखा था कि एक ऐसा बैल भी था जिसने अपने सिर पर सारी पृथ्वी का बोझ उठाया हुआ था। कर्म सिंह का बाप भी एक ऐसा ही व्यक्ति था जो कि दूसरे लोगों के दुःखों में भागीदार बन सकता था।

Word Meaninigs :

PSEB 12th Class English Solutions Supplementary Chapter 6 The Bull beneath the Earth 1
PSEB 12th Class English Solutions Supplementary Chapter 6 The Bull beneath the Earth 2

Class 12 PSEB Solutions Supplementary Reading

Thinking Out of the Box: Lateral Thinking Question Answer Class 12 English Book Chapter 3 PSEB Solutions

Punjab State Board PSEB 12th Class English Book Solutions Chapter 3 Thinking Out of the Box: Lateral Thinking Textbook Exercise Questions and Answers.

Class 12th English Book Chapter 3 Thinking Out of the Box: Lateral Thinking Question Answers

Thinking Out of the Box: Lateral Thinking Class 12 Questions and Answers

 Short Answer Type Questions

Question 1.
How was lateral thinking fruitful in the field of cricket ?
Cricket के क्षेत्र में पार्श्व सोच कैसे सफल हुई ?
Answer:
Lateral thinking is used in several fields. In cricket, Kerry Packer introduced day/ night matches, colourful balls and clothing. This type of cricket was different from traditional cricket. It became so successful that the whole world of cricket adopted it. Australia experimented with two different captains for the Test and one day matches. Nowadays, the T20 matches have become very popular.

(Lateral Thinking) नये ढंग की सोच कई क्षेत्रों में प्रयोग की जाती है। Cricket में Kerry Packer ने दिन/रात की Cricket को स्थापित किया था, साथ ही रंगीन गेंद और कपड़ों को स्थापित किया गया। इस प्रकार की Cricket परम्परा की Cricket से भिन्न थी। यह इतनी सफल सिद्ध हुई कि Cricket की सारी दुनिया ने इसको अपना लिया। Australia ने Test Match में और एक दिन के मैच में दो भिन्न भिन्न कप्तानों के साथ तर्जुबा किया। आजकल T20 के मैच बहुत लोकप्रिय हो गये हैं।

PSEB 12th Class English Solutions Chapter 3 Thinking Out of the Box: Lateral Thinking

Question 2.
How did lateral thinking help the millionaire ?
पार्श्व सोच ने करोड़पति की कैसे सहायता की?
Answer:
A millionaire businessman named Thomas went to a New York bank. He took a loan of 5000 dollars for a few days. As security for the loan, he gave his car and all the car-related papers to the bank. The car was taken to the underground garage of the bank.

Thomas came back after two weeks. He returned the loan of 5000 dollars and fifteen dollars interest on it. He was one of the richest men of America. He made use of lateral thinking. He told the bank officials that by this way he got back his new expensive car safe in the city of New York.

Thomas नाम का एक करोड़पति New York नगर के एक Bank में गया। उसने कुछ दिनों के लिए 5000 डालर का कर्ज़ लिया। कर्ज की जमानत के तौर पर उसने अपनी कार और कार के सभी कागज़ बैंक को सौंप दिए। कार को Bank के भूमिगत गैराज में ले जाया गया। Thomas दो सप्ताहों के बाद वापस आ गया।

उसने 5000 डालर का कर्ज और उस पर 15 डालर ब्याज बैंक को दे दिए। वह अमेरिका के सबसे अमीर आदमियों में से एक था। उसने lateral thinking अर्थात् नई सोच या भिन्न सोच का प्रयोग किया। उसने बैंक अधिकारियों को बताया कि इस ढंग से वह अपनी नई मंहगी कार को New York शहर में सुरक्षित वापस पा सका।

Long Answer Type Questions

Question 1.
How did the money-lender’s attempts to win the hand of the farmer’s daughter go in vain ?
किसान की बेटी के साथ विवाह करने के साहूकार के प्रयत्न किस तरह व्यर्थ सिद्ध हुए?
Answer:
A poor village farmer had to pay a lot of money to a village money-lender. The old and ugly money-lender wanted to marry the farmer’s beautiful daughter. The moneylender told the farmer that he would write off his debt if he gave his daughter in marriage to him. He told them that he would put a black pebble and a white pebble in an empty money bag.

The girl would have to pick one pebble from the bag. If she picked the black pebble from the bag, she would become the moneylender’s wife and the farmer’s loan would be written off. If she picked up the white pebble, he would not marry her and her father’s debt would still be written off.

If she refused to pick the pebble, her father would be thrown into jail. The three stood near a pebble-strewn path. The money-lender picked up two black pebbles and put them in an empty money bag. The sharp-eyed girl saw him doing so. Asked to pick a pebble, the girl picked one of the black pebbles.

PSEB 12th Class English Solutions Chapter 3 Thinking Out of the Box: Lateral Thinking

It would be assumed that the girl picked a white pebble. The money-lender did not have the guts to say that he had put two black pebbles. So the money-lender failed to win the hand of the farmer’s beautiful daughter.

एक गांव के ग़रीब किसान ने उस गांव के साहूकार को काफ़ी पैसे देने थे। बूढ़ा और बदशक्ल साहूकार किसान की सुन्दर लड़की से विवाह करना चाहता था। साहूकार ने किसान को कहा कि वह उसका कर्ज माफ़ कर देगा यदि वह अपनी लड़की की शादी उससे कर देगा। उसने उनको कहा कि वह एक काला कंकर और एक सफेद कंकर खाली पैसों वाले एक थैले में डाल देगा। लड़की को उस थैले से एक कंकर उठाना पड़ेगा।

यदि वह थैले से एक काला कंकर उठायेगी, तो वह साहूकार की पत्नी बन जायेगी और किसान का कर्ज माफ कर दिया जाएगा। यदि उसने सफेद कंकर चुना तब वह उससे शादी नहीं करेगा और उसके बाप का कर्ज फिर भी माफ़ कर दिया जाएगा।

यदि उसने कंकर को चुनने से इन्कार कर दिया तो लड़की के बाप को जेल में डाल दिया जाएगा। तीनों कंकरों से ढके हुए एक मार्ग के पास खड़े थे। साहूकार ने दो काले कंकर उठाये और उनको पैसों से खाली एक थैले में डाल दिया। तेज़ नज़र वाली लड़की ने साहूकार को थैले में दोनों काले कंकर डालते हुए देख लिया था।

चुनने के लिए कहने पर लड़की ने एक काला कंकर उठा लिया। यह बात कही जा सकती थी कि लड़की ने सफेद कंकर उठाया था क्योंकि थैले में केवल एक काला कंकर रह गया था। साहूकार में इतनी हिम्मत न थी कि वह कह दे कि उसने थैले में दो काले कंकर रखे थे। इसलिए साहूकार किसान की सुन्दर लड़की से शादी करने में असफल रहा।

Question 2.
Write a note on the theme of the chapter ‘Lateral Thinking’. (V. V. Imp.)
‘Lateral Thinking’ वाले chapter के theme पर एक नोट लिखें।
Answer:
This chapter is based on the theme that complicated problems can be solved by lateral thinking or thinking differently. One does not have to solve them by logical methods. Lateral thinking is creative or unconventional thinking. It is thinking differently or doing something differently or doing something in a novel way. Edward de Bono propagated this notion. He was of the view that intelligence is a potential that all of us have and thinking is a skill to use that potential well.

It channels our intelligence appropriately. The chapter gives some examples. A farmer had a girl. Her father had to pay a lot of money to a money-lender. She was asked to choose the money-lender as her husband by the pebble-game. She defied the designs of the money-lender by doing something by lateral thinking. Similarly a millionaire in the USA took a loan from a bank for two weeks in New York and rented the bank’s garage for two weeks for 15 dollars. Both the persons made use of the lateral method.

PSEB 12th Class English Solutions Chapter 3 Thinking Out of the Box: Lateral Thinking

यह chapter इस theme पर आधारित है कि जटिल समस्याओं को पाश्विक तरीके से या भिन्न तरीकों से सोचने से भी हल किया जा सकता है। उनको तार्किक तरीकों से ही हल नहीं किया जा सकता। पाश्विक सोचना रचनात्मक या रुढ़ि विरोधी तरीकों से सोचने से भी हो सकता है। Edward de Bono ने इस विचार का प्रचार किया था। उसका यह दृष्टिकोण था कि बुद्धिमत्ता एक क्षमता होती है जो हम सब में होती है और उस क्षमता को अच्छी तरह से इस्तेमाल कर लेने की सोच रखना एक हुनर या कला होती है।

यह हमारी बुद्धिमत्ता का ठीक तरह से निर्देशन करती है। इस chapter में कुछ उदाहरण दिए गए हैं। एक किसान की एक लड़की थी। उसके पिता ने एक साहूकार के काफ़ी पैसे देने थे। लड़की को कहा गया कि वह कंकरों के खेल से साहूकार से शादी कर ले। उस लड़की ने lateral thinking के द्वारा साहूकार को पराजित कर दिया। इसी प्रकार अमेरिका के एक करोड़पति ने New York के एक बैंक से 2 सप्ताहों के लिए कर्ज लिया. और बैंक के गैराज को 2 सप्ताहों के लिए 15 dollar ब्याज देकर किराये पर लिया। इन दोनों व्यक्तियों ने lateral thinking का प्रयोग किया।

Objective type Questions

This question will consist of 3 objective type questions carrying one mark each. These objective questions will include questions to be answered in one word to one sentence or fill in the blank or true/false or multiple choice type questions.

Question 1.
What was the proposal given to the poor farmer by the money-lender ?
Answer:
The proposal was that he would write off the farmer’s debt if he could marry his daughter.

Question 2.
What would have happened if the girl had selected a black pebble in the pebble
Answer:
If she had selected a black pebble, she would have become the money-lender’s wife and her father’s debt would have been written off.

Question 2(a).
Who invented the art of lateral thinking ?
Answer:
Edward de Bono.

Question 3.
What trick did the money-lender cunningly play to win the game ?
Answer:
The money-lender picked up two black pebbles from the pebble-covered path and put them into the bag.

Question 4.
How did the girl intelligently win ?
Answer:
The girl left a black pebble in the bag and changed an impossible situation into an extremely advantageous one.

PSEB 12th Class English Solutions Chapter 3 Thinking Out of the Box: Lateral Thinking

Question 5.
What do you understand by the term lateral thinking after reading this chapter?
Answer:
Lateral thinking is thinking differently or doing something new.

Question 6.
What was Edward de Bono’s notion about lateral thinking?
Answer:
Lateral thinking is a skill which enables us to use our intelligence suitably.

Question 7.
Why did the millionaire not reveal the fact of his affluence to the bank officials ?
Answer:
In that case, he would have failed to get an underground bank garage at such a cheap price and so much safety for his car.

Question 8.
Why was the loan officer amazed to know that Thomas had borrowed a loan for 5000 dollars ?
Answer:
He was amazed to see a very rich man taking a petty loan of 5000 dollars.

Question 9.
What was the millionaire’s trick in borrowing the loan?’
Answer:
He got the best safety for his very expensive Ferrari car at a very small amount of interest in the bank’s underground garage.

Question 10.
What is lateral thinking ?
Answer:
It is thinking differently or thinking in a new way.

Question 11.
The farmer’s daughter was :
(i) very beautiful.
(ii) very cunning.
Answer:
very beautiful.

Question 12.
The money-lender was :
(i) very generous.
(ii) very mean.
Answer:
very mean.

Question 13.
How was the millionaire helped ?
Answer:
By lateral thinking.

PSEB 12th Class English Solutions Chapter 3 Thinking Out of the Box: Lateral Thinking

Question 14.
(i) The farmer’s daughter was beautiful and dull.
(ii) The farmer’s daughter was beautiful and intelligent.
Choose the correct option.
Answer:
(ii) beautiful and intelligent.

Question 15.
When did Thomas go to the bank to return the bank loan?
Answer:
After two weeks.

Question 16.
The millionaire Thomas needed a loan of :
(a) 560 dollars
(b) 4000 dollars
(c) 5000 dollars
(d) 50000 dollars.
Answer:
(c) 5000 dollars.

Question 17.
When did Thomas go to the bank to return the loan ?
(a) After a month
(b) After a year
(c) After two weeks
(d) After three weeks.
Answer:
(c) After two weeks.

Thinking Out of the Box: Lateral Thinking Summary in English

Thinking Out of the Box: Lateral Thinking Introduction:

Thinking out of the box or Thinking outside the box or Thinking beyond the box means to think differently, unconventionally or from a new viewpoint. This phrase often refers to novel or creative thinking. The term is thought to have come from management consultants in the 1970s and 1980s.

Lateral thinking is solving problems through an indirect and creative approach. It uses reasoning that is not immediately obvious and involving ideas that may not be obtainable by using only traditional step-by-step logic. The term was coined in 1967 by Edward de Bono. Lateral thinking is more concerned with the movement value of statements and ideas.

Thinking Out of the Box: Lateral Thinking Summary in English:

In a small village in India an unlucky farmer had to pay a large amount of money to a village money-lender. The old and ugly money-lender liked the beautiful daughter of the farmer. So he suggested a bargain. He told the farmer that he would write off the loan if he could marry the farmer’s daughter. The farmer and his daughter were shocked by the proposal. So the clever money-lender suggested that luck should decide the matter.

He told the father and the daughter that he would put a black and a white pebble into an empty money bag. Then the girl would have to pick one pebble from the bag. If she picked the black pebble, she would become his wife and her father’s debt would be written off. If she picked the white” pebble, she need not marry him and the father’s debt would still be written off. But if she refused to pick a pebble, her father would be thrown into jail.

PSEB 12th Class English Solutions Chapter 3 Thinking Out of the Box: Lateral Thinking

They were standing on a pebble-covered path in the farmer’s field. As they were talking, the money-lender bent over to pick up two pebbles. As he picked the pebbles, the sharpeyed girl noticed that he had picked up two black pebbles and put them into the bag. He then asked the girl to pick a pebble from the bag. Now imagine that you were standing in the field, what would you have done if you had been the girl ? If you had to advise the girl, what would you have told her ?

There could be three possibilities:

  • The girl should refuse to take a pebble.
  • The girl should show that there were two black pebbles in the bag and expose the money-lender as a cheat.
  • The girl should pick a black pebble and sacrifice herself in order to save her father from debt and imprisonment.

The girl put her hand into the bag and drew out a pebble. She did not look at the pebble. She let the pebble fall onto the pebble-strewn path where it immediately became lost among all the other pebbles.The girl admitted that she had done a wrong thing. But she said that if they looked into the bag, for the one that is left, they would be able to tell which pebble she had picked.

Since the remaining pebble is black, it should be assumed that she picked the white one. And since the money-lender dared not admit his dishonesty, the girl may change an impossible situation into an advantageous one. This story teaches us a lesson. The lesson is that the most complex problems do have a solution. It is only that we do not attempt to think in that direction. It teaches us to think out of the box or think laterally.

PSEB 12th Class English Solutions Chapter 3 Thinking Out of the Box: Lateral Thinking

Lateral thinking is creative or non-linear thinking. It is thinking differently. It is doing something that might be novel and unconventional. in nature. There is another story that illustrates the use of lateral thinking. :A millionaire named Thomas walked into a popular bank in the middle of New York city. He requested a loan officer for a small sum of money dollars 5000. The bank officer asked for security. He offered his brand new Ferrari car as security.

Thomas left the bank with dollars 5000 and the bank employee took Thomas’ keys and drove the brand new Ferrari down into the bank’s underground garage. He assured Thomas that it would be perfectly safe there. After two weeks, Thomas returned to New York and returned the borrowed 5000 dollars plus the interest. They had found out that he was one of the wealthiest men in America. The bank wanted to know why he had the need to borrow 5000 dollars.

I Thomas smiled, picked up the keys from the counter and said if they could tell him another way he could have parked his new Ferrari in the middle of New York for two weeks for just 15 dollars and still get it back in top condition. After saying this, Thomas walked out of the door and the loan officer smiled a bigger smile.

De Bono explains that lateral thinking is concerned not with playing with the existing pieces but with seeking to change those very pieces. It is concerned with the perception part of thinking.

Thinking Out of the Box: Lateral Thinking Summary in Hindi

Thinking Out of the Box: Lateral Thinking Introduction:

Thinking out of the box or का मतलब है भिन्न ढंग से सोचना, परम्परा के अनुकूल न सोचा, नये दृष्टिकोण से सोचना। यह Phrase (वाक्यांश) प्राय) नये और रचनात्मक ढंग का हवाला देती है। रैखिक सोचने से यह मतलब है कि हम किसी समस्या का समाधान किसी चक्करदार और रचनात्मक प्रस्ताव द्वारा कर लें। Lateral thinking या रैखिक सोच रोसे तर्क का प्रयोग करती है जो स्पष्ट नहीं होता Lateral thinking (रैखिक सोच) कथनों और विचारों के चलन या झुकाव से सम्बन्ध रखती है।

Thinking Out of the Box: Lateral Thinking Summary in Hindi:

भारत के एक छोटे से गाँव में एक दुर्भाग्यशाली किसान ने एक गाँव के साहूकार से ऋण ली हुई धन की बड़ी राशि अदा करनी थी। बूढ़ा और बदशक्ल साहूकार किसान की सुन्दर लड़की को पसन्द करता था। इसलिए उसने एक सौदेबाजी करने की सलाह कर ली। उसने किसान को कह दिया कि वह कर्ज़ को माफ कर देगा यदि उसकी शादी किसान की बेटी से हो जाये। किसान और उसकी बेटी को साहूकार की बात को सुनकर झटका लगा। इसलिए चालाक साहूकार ने सलाह दी कि भगवतकृपा या विधाता इस मामले का निर्णय करेगा। – उसने बेटी और बाप को कहा कि वह एक काले और एक सफेद कंकर को पैसों के एक खाली थैले में डालेगा। फिर लड़की को थैले से एक कंकर या रोड़ा उठाना पड़ेगा।

PSEB 12th Class English Solutions Chapter 3 Thinking Out of the Box: Lateral Thinking

यदि उसने काला कंकर उठाया, तो वह साहूकार की पत्नी बन जायेगी और उसके पिता का कर्ज माफ़ कर दिया जायेगा। यदि उसने सफेद कंकर (रोड़ा) उठाया, तो लड़की को उस से शादी नहीं करनी पड़ेगी और उसके पिता का कर्ज़ माफ़ कर दिया जायेगा। लेकिन अगर वह कंकर का चुनाव करने से इन्कार कर देगी तो उसके बाप को जेल में डाल दिया जायेगा। वे कंकरों से ढके हुए रास्ते के पास खड़े होकर बातें कर रहे थे।

जिस समय वे खड़े होकर बातें कर रहे थे, साहूकार ने झुक कर दो कंकर उठा लिये। ज्यों ही साहूकार कंकरों को उठा रहा था, तेज़ आँखों वाली लड़की ने देख लिया कि साहूकार ने दो काले कंकर उठा लिये थे और उनको थैले में डाल लिया था। फिर उसने लड़की से कहा कि वह थैले से एक कंकर (रोड़ा) उठा ले। अब तुम कल्पना करो कि तुम खेत में खड़े थे। यदि तुम लड़की के स्थान पर होते तो क्या करते? यदि तुम्हें लड़की को नसीहत देनी पड़ती, तो तुम उसे क्या बताते।

इस स्थिति में तीन सम्भावनाएं हैं :

  • लड़की कंकर न उठाती।
  • लड़की यह स्पष्ट कर देती कि थैले में दो काले कंकर थे और वह यह सिद्ध कर सकती थी कि साहूकार धोखेबाज आदमी था।
  • लड़की को एक काला कंकर उठा लेना चाहिए और अपना बलिदान कर देना चाहिए ताकि वह अपने पिता को कर्जे और जेल से बचा सके।

लड़की ने अपना हाथ थैले में डाला और एक कंकर निकाला। उसने कंकर को नहीं देखा। उसने कंकर को कंकरों से ढके रास्ते पर गिरा दिया जहां पर यह दूसरे कंकरों के साथ घुल-मिल गया। – लड़की ने मान लिया कि उसने गलत काम किया था लेकिन यदि वे थैले में देखते कि जो कंकर बाकी रह गया था तो वे यह कहने के योग्य हो जाते कि उसने कौन सा कंकर चुना था।

चूंकि बाकी बचने वाला कंकर काला है, यह मान लेना चाहिए कि उसने सफेद कंकर उठाया था और चूंकि … साहूकार अपनी बेईमानी को स्वीकार करने की हिम्मत नहीं करेगा, लड़की ने एक असम्भव स्थिति को एक लाभदायक स्थिति में बदल लिया। – यह कहानी हमें एक पाठ सिखलाती है। पाठ यह है कि बहुत सी जटिल समस्याओं का भी समाधान होता है। केवल बात यह होती है कि हम उस दिशा में सोचते नहीं। यह कहानी हमें सिखलाती है कि हमें पार्श्व रेखा से या पार्श्विकता से भी सोचना चाहिए।

पार्श्विकता से सोचना सृजनात्मक या रचनात्मक या रैखिक नहीं होता। यह भिन्न ढंग से सोचना होता है। यह कुछ ऐसा करने के समान होता है जो नया हो, परम्परा के अनुकूल न हो। एक और कहानी भी है जो रेखिक विचार करने का उदाहरण देती है।

एक करोड़पति जिसका नाम Thomas था New York नगर के मध्य में स्थित एक प्रसिद्ध बैंक में चला गया। वह Loan Officer से थोड़ी सी राशि के लिए अनुरोध करने लगा। Bank Officer ने Thomas को कोई Security देने के लिए कहा। उसने अपनी बिल्कुल नई Ferrari कार बतौर Security पेश कर दी, Bank से 5000 डालर Loan ले लिया और उसने Bank वालों को कार की चाबी और कार के Papers दे दिए।

बैंक वाले उसकी बिल्कुल नई Ferrari कार को drive करके Bank के Underground Garage में ले गये। Bank वालों ने Thomas को विश्वास दिलाया कि यह कार वहाँ बिल्कुल सुरक्षित रहेगी। दो सप्ताह के बाद Thomas Bank में वापस आया। उसने उधार लिए हुए 5000 डालर और उन पर दो सप्ताह का ब्याज दे दिया। Bank वालों ने पता लगाया था कि Thomas America के सब से अमीर आदमियों में से एक था।

Bank वाले जानना चाहते थे कि उसको 5000 डालर loan की क्या आवश्यकता थी। Thomas मुस्कराया। उसने Bank के Counter से अपनी कार की चाबी उठा ली और कहा कि क्या वे उसको कोई ऐसा तरीका बता सकते हैं जिसके द्वारा वह अपनी नई Ferrari कार New York नगर के मध्य में – दो सप्ताह के लिए केवल 15 dollar के लिए खड़ी कर सके और इस को वापस उसी हालत में देख सके। ऐसा कहने के बाद Thomas Bank के दरवाज़े से बाहर आ गया और Loan Officer बहुत मुस्कुराया। De Bono स्पष्ट तौर पर कहता है कि पार्श्व सोच केवल विद्यमान टुकड़ों के साथ सम्पर्क नहीं रखती बल्कि उन्हीं टुकड़ों को बदल कर रख देती है। इस का सम्बन्ध प्रत्यक्ष अनुभूति के साथ होता है।

PSEB 12th Class English Solutions Chapter 3 Thinking Out of the Box: Lateral Thinking

Word Meanings
PSEB 12th Class English Solutions Chapter 3 Thinking Out of the Box Lateral Thinking 3

PSEB 12th Class English Solutions Chapter 3 Thinking Out of the Box: Lateral Thinking

PSEB 12th Class English Solutions Chapter 3 Thinking Out of the Box Lateral Thinking 2

A Rainbow of English 12 Class Guide Prose

On His Blindness Question Answer Class 12 English Book Poem Chapter 8 PSEB Solutions

Punjab State Board PSEB 12th Class English Book Solutions Poem 8 On His Blindness Textbook Exercise Questions and Answers.

Class 12th English Book Poem Chapter 8 On His Blindness Question Answers

On His Blindness Class 12 Questions and Answers

1. When I consider how my light is spent
Ere half my days ; in this dark world and wide,
And that one talent which is death to hide
Lodged with me useless, though my soul more bent
To serve therewith my Maker, and present
My true account, lest He, returning chide.

PSEB 12th Class English Solutions Poem 8 On His Blindness

Word-Notes:
Consider-think. How…………. spent-how I have lost my eye-sight. Ere-before. Half my days-half of my life is spent. Dark world-for he has lost his eyesight. Wide-big. Talent-poetic gift. Milton refers to the story of the talents in the Bible. “A master on the eve of going out to some place gives talents (a sum of money) to his three servants who are expected to make proper use of them.

On his return he desires to know what they have done with their talents. The first two servants have increased their talents. The master is well pleased with them. But the master is angry when he learns that the third servant, who had received only one talent, had kept it hidden beneath the earth and had not increased it.

The master then condemns and punishes the third servant.” Here the master stands for God, the servants for men, and the talents for natural gifts. Milton compares himself to the third servant who receives only one talent and keeps it hidden. He thinks that he has not made the proper use of his gift of poetry. He fears lest he should be punished by God.

Word-Notes :
Which is death to hide–not making use of his poetic gift is like death … to the poet. Lodged-kept. Lodged useless—the poet cannot utilize his poetic gift due to his blindness. Bent-determined. Therewith—with the help of his poetic gift. MakerGod. Present-show. True account-full use of poetic gift. Lest ………….chide–that God may take the poet to task for not using His gift to serve Him.

Explanation. In these lines Milton expresses his sorrow on the loss of his eye-sight. The world becomes totally dark to him. He felt very helpless and restless. God had given him the gift of writing poetry. He felt sad because he was unable to make use of this gift. He wanted to write religious poetry in the service of God. He wanted to present a good account, of his activities lest God should scold him for remaining idle.

PSEB 12th Class English Solutions Poem 8 On His Blindness

Milton is perhaps thinking of the parable of talents (coins). Once a master went on a long voyage. Before leaving, he gave a few talents, to his servants. When he came back he found that the third servant had not made any use of his talent. So the master rebuked him. Milton also fears that God, his master, would rebuke him for not using his talent of writing poetry. But it is not his fault. He is blind. So he is not able to make use of his talent.

इन पंक्तियों में Milton अपने अफसोस को व्यक्त करता है क्योंकि उसकी देखने की शक्ति खो गई है। दुनिया उसके लिए बिल्कुल अंधकारमयी हो गई है। वह बहुत बेबस और बेचैन हो गया। परमात्मा ने उसे कविता लिखने की प्रतिभा दी थी। वह उदास हो गया क्योंकि वह कविता लिखने के योग्य नहीं रह गया। वह परमात्मा की सेवा में धार्मिक कविता लिखना चाहता था।

वह अपनी सरगरमियों का अच्छा लेखा-जोखा देना चाहता था ताकि परमात्मा उसको बेकार रहने के लिए न कोसे। Milton शायद तोड़ों या सिक्कों की नीति कथा का जिकर कर रहा है। एक बार एक स्वामी लम्बी समुद्री यात्रा पर गया। जाने से पहले उसने अपने नौकरों को कुछ सिक्के दिये। जब वह वापस आया तो उसने देखा कि तीसरे नौकर ने सिक्के का प्रयोग नहीं किया था।

इसलिए स्वामी ने उसको कौसा| Milton को डर है कि कहीं परमात्मा उसे अपनी प्रतिभा (talent) को प्रयोग न करने के लिए न कोस लेकिन उसका कोई दोष नहीं है। वह अन्धा है। इस लिए वह अपनी प्रतिभा का प्रयोग नहीं कर सकता।

2. “Doth God exact day-labour, light denied
I fondly ask ; but Patience, to prevent
That murmur, soon replies : ‘God doth not need
Either man’s work or His own gifts ; who best
Bear His mild yoke, they serve Him best.

Word-Notes:
Exact-desire, demand, expect. Day-labour-work that can be done during day. Light denied – when light has not been given. Fondly – foolishly. Patience inner voice. To prevent that murmur-to stop all those doubts. Yoke-burden.

Explanation:
In these lines, Milton foolishly questions God how He can expect him to work when He has denied him his eye-sight. He murmurs against the ways of God to man. He feels that God has no right to demand work from him because He has made him blind. The poet’s inner voice or conscience comes to his help. It tells him that God does not want any return for His gifts. Those who accept His will willingly are His best servants.

इन पंक्तियों में Milton परमात्मा से प्रश्न पूछता है कि जब उसने उसके देखने की शक्ति छीन ली है तो उससे काम करने की आशा नहीं की जा सकती। वह आदमी के प्रति परमात्मा के तौर-तरीकों के विरुद्ध बुड़बुड़ करता है। वह महसूस करता है कि परमात्मा को कोई अधिकार नहीं है कि वह कोई किया हुआ काम माँगे क्योंकि उसने उसे अन्धा बना दिया है। कवि की भीतर की आवाज़ या अन्तरात्मा उसे कहती है कि परमात्मा को अपने दिए हुए उपहारों का कोई मुआवजा नहीं चाहिये। जो लोग परमात्मा की मर्जी के अनुसार काम करते हैं वे ही उसके बेहतरीन नौकर होते हैं।

PSEB 12th Class English Solutions Poem 8 On His Blindness

3. His state is kingly ; thousands at His bidding speed,
And post o’er land and ocean without rest ;
They also serve who only stand and wait. (V.V. Important)

Word-Notes: State-kingdom. Kingly-like that of a king. Thousands–thousands of angels. At His bidding-when ordered by Him. Speed-travel. Post – do their duty.

Explanation:
In these lines the poet says that God has thousands of angels at His command. They are willing to carry out the orders of God. Some of the angels go to far off places. Other angels stand near God and wait for His orders. Those who stand near God are as faithful servants of God as those angels who do active duty.

The poet means to say that those men who cannot do active work need not grumble. They must have the humility to work for God. In that case they are as good as active workers. One should learn to submit oneself to the will of God without questioning His authority.

इन पंक्तियों में कवि कहता है कि परमात्मा के पास अपने आदेश के अनुसार काम करने वाले हज़ारों फरिश्ते हैं। वे परमात्मा के आदेशों को मानने के लिए हर समय तैयार रहते हैं। उनमें से कुछ फरिश्ते दूर के स्थानों पर नियुक्त किये गये होते हैं। जो परमात्मा के पास खड़े रहते हैं वे भी उतने ही वफ़ादार होते हैं जितने सक्रिय सेवा करने वाले होते हैं।

कवि के कहने का मतलब है कि जो व्यक्ति सक्रिय काम नहीं कर सकते उन्हें बुड़बुड़ करने की आवश्यकता नहीं। उन्हें परमात्मा के लिए नम्रता से काम करना चाहिए। उस हालत में वे सक्रिय काम करने वालों जितने अच्छे होते हैं। परमात्मा के आदेश को चुनौती दिए बिना उन्हें परमात्मा के प्रभुत्व को मानना चाहिए।

Comprehension Of Stanzas

1. When I consider how my light is spent,
Ere half my days, in this dark world and wide,
And that one talent which is death to hide
Lodged with me useless …..

Questions :
(a) In the first line ‘light’ is a ………. for vision. (alliteration/metaphor) .
(b) The word ‘spent’ means …….. (used up, alienated)
(c) Name the poet of this poem.
(d) What is the meaning of the word ‘talent in the line “…….. and that one talent ……. ” ?
Answers :
(a) metaphor
(b) used up.
(c) John Milton.
(d) Poetic gift or poetic ability.

2. But Patience to prevent
That murmur soon replies,
‘God doth not need
Either man’s work or His own gifts.
Who best Bear
His mild yoke, they serve Him best.’ (V.V. Imp.)

Questions :
(a) Identify the figure of speech in the line ……. But Patience to prevent That murmur, soon replies ……..
(b) The speaker’s murmur is about the question whether God would be so cruel as to make impossible demand of work. But then who steps in to stop him.
(c) What does Patience say about God ?
(d) Which line in the poem says, “Those who accept God’s control over their own existence are the best servants of God.”?
Answers :
(a) The figure of speech is personification.
(b) Patience (voice of conscience) steps in to stop him.
(c) Patience says that God does not need man’s work nor any compensation for the gifts that God has given to man.
(d) Who best bear His mild yoke, they serve Him best.

PSEB 12th Class English Solutions Poem 8 On His Blindness

On His Blindness Summary in English

On His Blindness Introduction:

This poem deals with the loss of Milton’s eye-sight. He has become blind. He has hardly lived half of his life. The gift of writing poetry is lying unused with him. He is very anxious to serve God with it. He fears lest God should punish him for not making use of his gift. He becomes impatient. He asks himself if God expects work from him even after his blindness. But soon he realises that they also serve who only stand and wait. He submits himself to the will of God.

On His Blindness Summary in English:

Milton lost his eye-sight at the age of forty three. He felt grief-stricken at this loss. The world appeared dark and desolate to him. God had given him the gift of writing poetry. He felt helpless. He could not make use of this gift. He was a religious-minded man. He wanted to use the gift of writing poetry in the service of God. He felt that his gift was useless.

He feared that God would scold him for wasting His gift. He thought of the servant who did not use a talent given to him by his master. On his return the master scolded the servant for not using the talent. In the same way, Milton feared that God would scold him for not making use of the talent of writing poetry.

So Milton starts grumbling. He foolishly asks himself the question if God wants him to work after taking away his eye-sight. His inner voice however comes to his help. It tells him not to grumble about the ways of God to man.

It assures him that God’s ways to man are absolutely just. God does not want any compensation for the talents that He gives to human beings. He does not want man to work to please Him. Those who accept God’s will happily are His best servants. God has given a light responsibility to each one of us. We must accept that responsibility without grumbling.

On His Blindness Summary in Hindi

On His Blindness Introduction:

यह कविता कवि Milton की आँखों की रोशनी चले जाने से सम्बन्धित है। वह अन्धा हो गया है। उसने अभी तक अपने जीवन की आधी अवधि व्यतीत की है। कविता लिखने की प्रतिभा उसके पास बेकार पड़ी है। वह इस प्रतिभा को परमात्मा की सेवा में प्रयोग करना चाहता है। उसे डर लगाता कि कहीं इस योग्यता या प्रतिभा को प्रयोग न करने से परमात्मा उसे दंड न दे दे।

वह अधीर हो उठता है। वह अपने आप को पूछता है क्या परमात्मा उससे यह आशा करता है कि उसकी दृष्टि शक्ति चले जाने के बाद भी वह कुछ काम करे। लेकिन शीघ्र ही Milton महसूस करता है कि वे मनुष्य भी परमात्मा की सेवा करते हैं जो उसके पास खड़े रहें और उसके आदेशों की प्रतीक्षा करें। अत: Milton परमात्मा की इच्छा के आगे अपना सिर झुका देता है।

PSEB 12th Class English Solutions Poem 8 On His Blindness

On His Blindness Summary in Hindi:

“On His Blindness’ John Milton द्वारा लिखी चौदह पंक्तियों की एक प्रसिद्ध कविता है। कवि को दुःख है कि वह आधा जीवन व्यतीत करने से पहले ही अन्धा हो गया है और अन्धा होने के पश्चात् यह संसार उसके लिए अन्धेरा तथा विशाल बन गया है। मिल्टन का कहना है कि परमात्मा ने उसको कविता लिखने की कला दी है। वह इस कला का प्रयोग करने का बहुत इच्छुक है। उसकी प्रबल इच्छा है कि वह परमात्मा की पूजा करने के लिए एक महान् धार्मिक कविता लिखे। इस कला को छिपाना उसके लिए मृत्यु के समान है। परन्तु वह अपने अन्धेपन के कारण विवश हो जाता है।

मिल्टन अपनी इस विवशता के कारण चिन्तित है। उसको भय है कि परमात्मा उसको इस कला के प्रयोग न करने के कारण डांटेगा। उसको बाइबिल की एक कहानी याद आती है जिसमें एक स्वामी ने उस नौकर को बहुत डांटा था जिसने उस गुण का प्रयोग नहीं किया था जो दिया गया था। कुछ क्षण के लिये कवि बहुत परेशानी महसूस करता है। परमात्मा के प्रति उसके विश्वास में थोड़ी हलचल हो जाती है और वह पूछता है कि जब उसे आंखों की रोशनी से वंचित कर दिया गया है तो वह अपनी प्रवीणता (कविता लिखने की योग्यता) को कैसे प्रयोग कर सकता है।

परन्तु शीघ्र ही उसकी अन्तरात्मा उसकी बेचैनी को दूर कर देती है। ईश्वर के प्रति उसका विश्वास दृढ हो जाता है। उसे समझ आ जाती है कि परमात्मा को मनुष्य की किसी सेवा की आवश्यकता नहीं। परमात्मा को उन उपहारों के प्रतिदान की आवश्यकता भी नहीं जो उसने मनुष्य को दिये होते हैं। परमात्मा केवल यह चाहता है कि मनुष्य अपने को उसकी इच्छा के सामने समर्पित कर दे।

परमात्मा की आज्ञा पूरी करने के लिये उसके पास हज़ारों फरिश्ते हैं। ये फरिश्ते परमात्मा के आदेशों का पालन करने के लिए जल-थल पर शीघ्रता से पहुंच जाते हैं। परन्तु केवल वही फरिश्ते परमात्मा के सेवक नहीं जो उसका आदेश पूरा करने के लिए घूमते हैं। वे फरिश्ते जो खड़े होकर उसके आदेश की प्रतीक्षा करते हैं वे उसके सच्चे सेवक हैं। मिल्टन अपने आपको इन फरिश्तों के समान समझता है जो खड़े रहकर ईश्वर के आदेश की प्रतीक्षा करते हैं।

On His Blindness Central Idea

This poem is based on the idea that the ways of God to man are just. Man must cheerfully adjust himself to the circumstances in which God has placed him. The real service of God lies in feeling happy and contented with our lot. God does not want any return for the gifts that He has given to human beings. God does not want man to work to please Him. Those who accept God’s will cheerfully are His best servants.

PSEB 12th Class English Solutions Poem 8 On His Blindness

On His Blindness Central Idea In Hindi

यह कविता इस विचार पर आधारित है कि आदमी के प्रति परमात्मा के तरीके न्यायसंगत होते हैं। जिन परिस्थितियों में परमात्मा ने आदमी को रखा है उनके अनुसार आदमी को अपने आपको सहर्ष ढाल लेना चाहिये। परमात्मा की वास्तविक सेवा यह होती है कि हम अपने भाग्य या तकदीर से प्रसन्न और सन्तुष्ट रहें। जो उपहार परमात्मा ने आदमी को दिए हैं उनके लिए परमात्मा को कोई मुआवज़ा नहीं चाहिए। परमात्मा यह नहीं चाहता कि आदमी उसको प्रसन्न करने के लिए काम करे। जो व्यक्ति परमात्मा की मर्जी को प्रसन्नता से स्वीकार कर लेते हैं वे ही उसके बेहतरीन सेवक होते हैं।

A Rainbow of English 12 Class Solutions PSEB Poetry

In Celebration of Being Alive Question Answer Class 12 English Book Chapter 9 PSEB Solutions

Punjab State Board PSEB 12th Class English Book Solutions Chapter 9 In Celebration of Being Alive Textbook Exercise Questions and Answers.

Class 12th English Book Chapter 9 In Celebration of Being Alive Question Answers

In Celebration of Being Alive Class 12 Questions and Answers

Short Answer Type Questions

Question 1.
Write in brief about Dr. Barnard’s brother’s suffering.
(Dr. Barnard के भाई की पीड़ा के बारे में विस्तार से लिखें।)
Answer:
Dr. Barnard was introduced to suffering of children when he was a little boy. One day, his father showed him a half eaten mouldy biscuit. It had two tiny touth marks in it. His father told Barnard the suffering of his brother. He had been born with an abnormal heart. If he had been born today, probably someone could have corrected that heart problem. But in those days such a surgery was not available.

Dr. Barnard जब एक छोटा लड़का था तो उसे बच्चों के दुःख भोग से परिचित कराया गया। एक दिन उसके बाप ने उसे आधा खाया हुआ खराब सा बिसकिट दिखाया। उस पर दो छोटे दाँतों के निशान थे। उसके बाप ने उसे उसके भाई के कष्ट के बारे बताया। वह जब पैदा हुआ तो उसका दिल असाधारण था। यदि वह आज पैदा होता तो सम्भवतः उसके दिल की समस्या को कोई ठीक कर देता। लेकिन उन दिनों ऐसा इलाज उपलब्ध नहीं था।

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Question 2.
What was an eye-opener for Dr. Barnard at Cape Town’s Red Cross Children’s Hospital ? Explain. (Imp.)
(Cape Town के Red Cross Children हस्पताल में Dr. Barnard के लिए आँखें खोलने वाली कौन सी बात थी? व्याख्या कीजिए।)
Answer:
It opened his eyes to the fact that he was missing something in all his thinking about suffering. He was missing something basic that was full of consolation for him. That morning a breakfast trolley was taken away by two brave boys a driver and a mechanic. The mechanic ran along behind the trolley with his head down.

The driver seated on the lower deck of the trolley, held on with one hand and steered by scraping his foot on the floor. The mechanic was totally blind and the driver had only one arm. They put an a very good show.

इस तथ्य को देखकर उसकी आँखें खुलीं कि दुःख भोग के बारे अपनी पूरी सोच में वह किसी चीज़ से वंचित हो रहा था। वह कुछ बुनियादी चीज़ों से वंचित हो रहा था जो उसे पूर्णतया सांत्वना दे सकती थी। उस प्रातः एक नाशते वाली trolley को दो बहादुर लड़के ले गये। उनमें से एक ने mechanic का काम किया और दूसरे ने driver का।

Mechanic अपने सिर को नीचे करके Trolley के पीछे तेज़ी से भांगता गया। Trolley के निचले floor पर बैठा हुआ driver अपने एक हाथ से ट्रॉली को पकड़े हए अपने पैर से फर्श को कुरेदते हुए मार्गदर्शन करता रहा। Mechanic पूरी तरह से अन्धा था और driver की एक भुजा थी। उन दोनों ने बड़ा अच्छा प्रदर्शन किया।

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Question 3.
How did the driver and the mechanic put up an entertaining show with an unattended trolley ? (Imp.)
(Driver और mechanic ने एक ट्राली के साथ जिसकी कोई देखभाल नहीं कर रहा था, कैसे रुचिकर प्रदर्शन किया?)
Answer:
One morning a nurse had left a breakfast trolley unattended. Very soon this trolley was taken away by two brave boys–a driver and a mechanic. The mechanic was totally blind. The driver had only one arm. The mechanic provided running power to the trolley by running fast along behind the trolley with his head down. The driver got seated on the lower deck of the trolley. He held on with one hand and steered by scraping his foot on the floor.

The two put on quite a show that day. The rest of the patients laughed and shouted. It was a better entertainment than a car race. There was also a show of scattered plates and silverware. Then the nurse and ward sister caught up with them. The driver and the mechanic were scolded and put back to bed.

एक प्रातः एक नर्स ने एक नाशते की Trolley को छोड़ रखा था और उसकी कोई देखभाल नहीं कर रहा था। बड़ी जल्दी इस Trolley को दो बहादुर लड़के ले गये–एक लड़का mechanic था और दूसरा ड्राईवर। Mechanic पूर्णतया अन्धा था। Driver की केवल एक भुजा थी। Mechanic ने Trolley को दौड़ने की शक्ति उपलब्ध करवाई और वह अपना सिर नीचा करके पीछे तेज़-तेज़ दौड़ता गया।

Driver Trolley के निचले deck पर बैठकर एक हाथ से मार्गदर्शन करता रहा और फर्श पर अपने पैर से कुरेदता रहा। दोनों ने एक अच्छा शो प्रस्तुत किया। बाकी के मरीज़ हंसते रहे और साथ ही चिल्लाते रहे। यह कारों की दौड़ से भी बेहतर मनोरंजन था। वहाँ पर बिखरी हुई प्लेटों और बर्तनों का भी शो था। फिर नर्स और वार्ड की सिस्टर ने उन दोनों को पकड़ लिया। Driver और Mechanic को डांटा गया और उन्हें बिस्तर पर लिटा दिया गया।

Question 4.
What made the mechanic lose his eyes ? (Imp.)
(Mechanic की आँखें कैसे चली गईं ?)
Answer:
The mechanic was seven years old when his mother and father were drunk. His mother threw a lantern at his father. The lantern missed his father. It broke over the child’s head and shoulders. He suffered very bad burns on the upper part of his body. He lost both his eyes. At the time of the Grand Prix (car race) he was a walking horror. Despite his disability he loved to laugh.

Mechanic सात वर्ष का था जब उसके माता-पिता ने शराब पी हुई थी। उसकी माँ ने उसके बाप पर लालटेन फैंकी। यह लालटेन उसके बाप को तो नहीं लगी। यह बच्चे के सिर पर और कन्धों को लग कर टूट गई। उसके शरीर के ऊपरी भाग पर जलने से कई घाव हो गये। उसकी दोनों आँखें चली गईं। Grand Prix car race के समय यह लड़का (mechanic) बड़ा डरावना लगता था। अपनी अशक्तता या असमर्थता के बावजूद वह हंसना पसंद करता था।

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Question 5.
Write a note on the theme of the chapter ‘In Celebration of Being Alive’. (V.V. Imp.) (V.V. Imp.)
(इस Chapter के विषय पर एक नोट लिखो।)
Answer:
This lesson is based on the idea that one must not feel troubled by thoughts of suffering and pain. Pleasure and pain are parts of human life. One must try to forget suffering and try to find joy in the present state of freedom from pain and suffering. We can learn this lesson for living from the young people who like to lead cheerful lives.

Dr. Barnard was most often thinking of suffering and pain. But one must get on with the business of living. Business of living is joy in the real sense of the word without sorrow and suffering. The business of living is the celebration of living.

यह पाठ इस विचार पर आधारित है कि दुःख और व्यथा के बारे सोचकर मनुष्य को पीड़ित नहीं होना चाहिए। खुशी और दुःख आदमी के जीवन का आवश्यक अंग हैं। आदमी को दुःख को भूल जाना चाहिए और वर्तमान दु:खों से मुक्त समय में मज़ा लेना चाहिए। यह सबक हम उन किशोरों से सीख सकते हैं जो प्रसन्नतापूर्वक जीवन व्यतीत करते हैं। Dr. Barnard हमेशा दुःखों और पीड़ा के बारे सोचता रहता था। लेकिन वास्तव में आदमी को जीते रहने में ही मज़ा लेना चाहिए। दुःखों और पीड़ा से रहित होकर जीवन व्यतीत करने में ही मज़ा होता है। आदमी को जी लेने को जश्न की तरह मनाना चाहिए।

Question 6.
How did Dr. Barnard correct his notions about suffering? (V.V. Imp.).
(Dr. Barnard ने अपने दुःख भोगने के विचारों को कैसे ठीक किया?)
Answer:
Dr. Barnard had been looking at suffering from the wrong end. He had realised that one did not become a better person because one had been suffering. One becomes a better person because he has experienced suffering. We can’t appreciate light if we have not known darkness. Nor can we appreciate warmth if we have never suffered cold.

The two children, the mechanic and the driver showed to him that it was not what one has lost that is important. What is important is what you have been left with. The two children gave him a profound lesson that the business of living is the celebration of being alive.

डाक्टर Barnard दुःखों को गलत ढंग से देखता था। उसने महसूस किया था कि आदमी दुःख भोगने से ही बेहतर व्यक्ति नहीं बन जाता। कोई मनुष्य बेहतर तब बन जाता है जब उसने दुःखों को अनुभव किया हो। हम रोशनी की तब तक कदर नहीं कर सकते जब तक हमने अन्धेरे को अनुभव नहीं किया हो। हम तपन के मूल्य को नहीं जान सकते जब तक हमने सर्दी का अनुभव न किया हो।

Mechanic और driver दो बच्चों ने Dr. Barnard को दिखला दिया कि जो किसी ने खो दिया है, वह इतना महत्त्वपूर्ण नहीं होता। महत्त्वपूर्ण तो वह होता है जो हमारे पास शेष रह जाता है। दोनों बच्चों ने उसको महत्त्वपूर्ण सबक सिखाया कि जिन्दा रहने के तथ्य को जश्न की तरह मनाया जाना चाहिये। किसी ने ठीक ही कहा है : जिन्दगी जिंदादिली का नाम है मुर्दा दिल क्या खाक जिया करते हैं।

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Long Answer Type Question

Question 1.
What was the lesson Dr. Barnard learnt from two brave youngsters ? (V. Imp.)
(Dr. Barnard ने दो युवा बहादुर लड़कों से क्या सबक सीखा ?)
Answer:
The two brave youngsters were a blind mechanic and a driver with only one hand. They once took away a breakfast trolley and provided a lot of entertainment to the people by driving the trolley. The mechanic once got serious injuries by a burning lamp.

The driver had a hole in his heart. Both were very happy despite their unhealthy weak bodies. These two children gave to Dr. Barnard a lesson in getting on with the business of living. The business of living is joy in the real sense of the word. It is the celebration of being alive. Dr. Barnard had been looking at suffering from the wrong end.

One does not become a better person by suffering. One becomes a better person because one has experienced suffering. We can’t appreciate light if we have not known darkness. Nor can we appreciate warmth if we have never suffered cold. These children showed to Dr. Barnard that it is not what we have lost that’s important. What is more important is what we have been left with.

दो युवा बहादुर लड़कों में एक Mechanic था जो बिल्कुल अन्धा था और दूसरा Driver था जिसका केवल एक हाथ था। उन दोनों ने एक नाश्ते वाली Trolley को लिया और इसको चलाकर लोगों को बड़ा मनोरंजन उपलब्ध करवाया। Mechanic को एक बार जलते हुए लैम्प से गंभीर चोटें आईं थीं।

Driver के हृदय में छेद था। अपने अस्वस्थ कमज़ोर शरीरों के बावजूद दोनों प्रसन्न थे। इन दोनों बच्चों ने Dr. Barnard को जिन्दा रहने के धन्धे के बारे एक गंभीर सबक सिखाया। जिन्दा रहने का धन्धा तो एक मज़े वाला काम है। यह तो जिंदगी को जश्न समझना होता है। Dr. Barnard कष्ट भोगने को गलत सिरे से देख रहा था। आदमी कष्ट भोगने से बेहतर व्यक्ति नहीं बन जाता। आदमी इसलिए बेहतर बन जाता है क्योंकि उसने कष्टों का अनुभव किया होता है।

हम रोशनी की कदर नहीं करते जब तक हमने अन्धेरा न देखा हो। न ही हम तपने का मूल्य समझ सकते हैं जब तक हम सर्दी से पीड़ित नहीं होते। इन बच्चों ने Dr. Barnard को दिखाया कि जो हम ने खो दिया है, वह इतना महत्त्वपूर्ण नहीं होता। वह जो हमारे पास रह जाता है, अधिक महत्त्वपूर्ण होता है।

Question 2.
In the hospital, Dr. Barnard experienced not only agony and fear but also anger.Why?
(हस्पताल में Dr. Barnard को न केवल घोर व्यथा और डर का अनुभव हुआ बल्कि उसको क्रोध भी आया। क्यों?)
Answer:
Dr. Barnard and his wife met with an accident while crossing a road. They were admitted in the hospital. There he experienced not only agony and fear but also anger. He could not understand why he and his wife had to suffer. He had eleven broken ribs and a perforated lung. His wife had a badly fractured shoulder. Again and again he asked himself, why this should happen to them. He had work to do. He had patients waiting for him to operate on them. His wife had to take care of the baby.

Dr. Barnard और उसकी पत्नी सड़क पार करते समय एक दुर्घटना में ग्रस्त हो गये। उन्हें हस्पताल में दाखिल करना पड़ा। हस्पताल में उसने न केवल घोर व्यथा और भय का अनुभव किया बल्कि उसे क्रोध भी आया। उसे यह समझ नहीं आ रहा था कि उसे और उसकी पत्नी को क्यों पीड़ा झेलनी पड़ी। उसकी 11 पसलियाँ टूट गईं और उसके फेफड़े में छोटे-छोटे छेद हो गये। उसकी पत्नी का कन्धा बुरी तरह टूट गया। वह अपने आपको बार-बार पूछता कि ऐसी दुर्घटना उनके साथ क्यों हुई। उसे काम करना था। उसके मरीज़ उससे आप्रेशन करवाने के लिए उसकी प्रतीक्षा कर रहे थे। उसकी पत्नी ने बच्चे की देखभाल करनी थी।

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Objective Type Questions

This question will consist of 3 objective type questions carrying one mark each. These objective questions will include questions to be answered in one word to one sentence or fill in the blank or true/false or multiple choice type questions.

Question 1.
According to Dr. Barnard what is the business of living ?
Answer:
The business of living is joy in the real sense of the word; it is the celebration of being alive.

Question 2.
What do the people with brave and positive attitude teach us ?
Answer:
They teach us to move forward in life and not to cry and weep.

Question 3.
In which incident were Barnard’s gloomy thoughts rooted ?
Answer:
His gloomy thoughts were rooted in an incident in which he and his wife got involved and then hospitalised.

Question 4.
What was Dr. Barnard’s father’s attitude towards life?
Answer:
Barnard’s father believed that God’s will be done and God tests man through suffering and suffering ennobles man.

Question 5.
What introduced Dr. Barnard to the sufferings of the children ?
Answer:
He came to know the sufferings of children by his brother’s birth with an abnormal heart.

Question 6.
Why couldn’t Barnard’s brother survive ?
Answer:
He could not survive because proper surgical treatment was not available to him.

Question 7.
Why does Dr. Barnard consider the sufferings of the children heart-breaking ?
Answer:
He considers them heart-breaking because they have total faith in the ability of doctors to cure them.

Question 8.
What made the driver and the mechanic choose their roles ?
Answer:
They chose their roles because the mechanic was totally blind and the driver had only one arm. Both were quite suitable for their roles. Spectators enjoyed the fun. They laughed loudly and appreciated the performance of the driver and the mechanic.

Question 9.
Choose the correct option :
(i) Dr. Barnard made history in the field of Cancer.
(ii) Dr. Barnard made history on research in AIDS.
(iii) Dr. Barnard made history in the field of medicine.
Answer:
(iii) Dr. Barnard made history in the field of medicine.

Question 10.
“I see nothing noble in suffering.” (Dr. Barnard) (True/False) (In Celebration of Being Alive)
Answer:
True.

PSEB 12th Class English Solutions Chapter 9 In Celebration of Being Alive

Question 11.
Say if the following statement by Dr. Christiaan Barnard is True or False :
I do not see any nobility in the crying of a child, in a ward at night. (Dr. Barnard)
Answer:
True.

Question 12.
The mechanic in the story was ……… blind. (Fill up the blank with a suitable word)
Answer:
totally

Question 13.
The driver in the story had one disability. What was it ?
Answer:
He had only one hand.

Question 14.
Fill up the blank in the following sentence from the lesson :
The doctor had closed a …………. in the heart of the trolley’s driver.
Answer:
hole.

Question 15.
The mechanic had a tumour ……. the bone. (Fill up the blank)
Answer:
of.

Question 16.
Say if this statement is true or false :
The business of living is joy in the real sense of living.
Answer:
True.

Question 17.
Say if the business of living is the celebration of being alive. (True/False)
Answer:
True.

Question 18.
Say what was Dr. Barnard’s attitude towards life-positive or negative ?
Answer:
It was positive.

Question 19.
Name the writer of this story.
Answer:
Dr. Christiaan Barnard.

Question 20.
Dr. Barnard made history in the field of :
(a) Cancer
(b) Heart transplant
(c) Tuberculosis
(d) Plague.
Answer:
(b) Heart transplant.

Question 21.
A breakfast trolley had been left unattended by one of these:
(a) The nurse
(b) The driver
(c) The doctor
(d) The merchant.
Answer:
(a) The nurse.

Note : Our reader should note that the paper-setter combined Objective Type Questions number 8 as a short answer question. We have added two more sentences for their convenience.

In Celebration of Being Alive Summary in English

In Celebration of Being Alive Introduction:

Dr. Christiaan Barnard made history in the field of medicine. He made attempts to transplant the human heart. This lesson has actually been taken from a speech by him. Dr. Barnard talks about the lesson he took from two youngsters about the business of living. Those who have a brave and positive attitude in life move forward in spite of physical suffering. They do not cry or weep. Such people ignore all pain. They become an example for others. They teach us the real art of living. We should celebrate being alive.

In Celebration of Being Alive Summary in English:

Dr. Christiaan Barnard is about to reach the end of his career as a heart surgeon. He thinks why people suffer so much. There is a lot of suffering in the world. In the year of this lecture, 125 million children were born. 12 million might not reach the age of one and another six million would die before the age of five. Out of the rest many would end up as mental or physical cripples.

He had these thoughts from an accident which he had a few years ago. His wife and he were one day crossing a street. The next moment a car had hit him and knocked him into his wife. She was thrown into the other lane and hit by a car coming from the opposite side. During the next few days in the hospital, he exprienced pain and fear and also anger.

He could not understand why he and his wife had to suffer. His eleven ribs were broken. His lung was holed. His wife had a badly fractured shoulder. He asked himself why all this should happen to them. He had a young baby and his wife was required to take care of him.

If his father had been alive, he would have told him that it was God’s will that he was suffering. God tests human beings through making them suffer. Suffering ennobles a man. As a doctor Barnard sees nothing noble in suffering. Nor does he see any nobility in the crying of a lonely child, in a ward at night. He had his first knowledge of the suffering of children when he was a boy.

PSEB 12th Class English Solutions Chapter 9 In Celebration of Being Alive

His father told him about his brother who had died several years earlier. He had been born with an abnormal heart. If he had been born in the present age, probably his heart problem would have been corrected. But in those days good heart surgery was not available.

As a doctor, Barnard had always found the suffering of children very heart breaking. Children believe that the doctors are going to help them. If doctors cannot help them, they accept their fate. They go through painful surgery and afterwards, they don’t complain.

One morning, several years ago, he saw what he calls the Grand Prix of Cape Town’s Red Cross Children’s Hospital. It opened his eyes. He felt that he was missing something in all his thinking about suffering.

That morning a nurse had left a breakfast trolley. It was not attended by anyone. Two persons took the trolley away by force. They were a driver and a mechanic. The mechanic was totally blind and the driver had only one arm. Both of them drove the trolley away. The mechanic galloped along behind the trolley with his head down and the driver was seated on the lower deck. He held on with one hand and steered by scraping on his foot on the floor.

People saw them going. They put on a good show. The people laughed encouraged by other patients. The entertainment provided by the blind mechanic and one-handed driver was much better than fun provided by a car race. It was full of solace for Dr. Barnard. The nurse and ward sister caught up with them, scolded them and put them back into bed. The mechanic was seven years old. One night, when his mother and father were drunk, his mother threw a lantern at his father.

The latern broke over the child’s head and shoulders. He suffered some very bad injuries in burns on the upper part of his body and lost both his eyes. He looked horrible. His face was disfigured. When his wound got well, this boy could open his mouth by raising his head. The doctor stopped by to see him after the race. He was shouting that he had won and he was laughing.

The doctor had closed a hole in the heart of the trolley’s driver. He had come back to the hospital because he had a malignant tumour of the bone. A few days before the race, his shoulder and arm were amputated. There was no hope of recovering. After the Grand Prix (the car race) he proudly informed the doctor that the race was a success. The only problem was that the trolley’s wheels were not properly oiled. But he was a good driver and he had full confidence in the mechanic.

The doctor suddenly realised that the two children had given him a useful lesson about getting on the business of living. Business of living is joy in the real sense of living. The business of living is the celebration of being alive. These two children showed to Dr. Barnard that it is not what you have lost that’s important. What is important is what you have been left with.

In Celebration of Being Alive Summary in Hindi

In Celebration of Being Alive Introduction:

यह उद्धरण Dr. Harish K. Puri की पुस्तक Ghadar Movement से लिया गया है। Dr. Harish K. Puri, Guru Nanak Dev University के भूतपूर्व professor हैं। उन्होंने राजनीतिक आन्दोलनों, धर्म और आतंकवाद पर विस्तृत तौर पर पुस्तकें लिखी हैं। इस उद्धरण में उन्होंने cellular jail (काला पानी) का डराने वाला (भयावह) वृत्तान्त दिया है। Cellular शब्द cell से बना है। Cell का अर्थ है छोटी कोठरी। यह cellular जेल Port Blair में स्थित है और इसको अंग्रेजों ने स्थापित किया था। Port Blair, Andaman और Nicobar का बड़ा नगर है। अंग्रेज़ों का मुख्य उद्देश्य था भारतीय स्वतन्त्रता संग्रामियों को 20वीं शताब्दी के शुरू के दशकों में अलग रखना, सज़ा देना और अत्याचार करना।

In Celebration of Being Alive Summary in Hindi:

Dr. Christiaan Barnard अपने (पेशे) heart surgeon के तौर पर अन्तिम पड़ाव में पहुंचने वाला था। वह सोचता है कि लोग इतना दुःख क्यों पाते हैं। संसार में काफ़ी कष्ट होते हैं। इस lecture के वर्ष में 12.5 करोड़ बच्चे पैदा हुए। 120 लाख एक साल की आयु तक भी न पहुंच पायेंगे और 60 लाख 5 साल की उमर तक पहुंचने से पहले ही मर जाएंगे।

बाकी में से बहुत से मानसिक और शारीरिक तौर पर अपंग होंगे। उसको यह विचार एक दुर्घटना से आए जो कुछ साल पहले उसके साथ घटित हुई। उसकी पत्नी और डॉक्टर एक गली को पार कर रहे थे। अगले पल एक कार उसके साथ जा टकराई और वह अपनी पत्नी के साथ जा टकराया। वह दूसरी lane (गली) में जा गिरी और विपरीत दिशा से आती हुई कार ने उसे टक्कर मार दी।

अगले कुछ दिन वे हस्पताल में रहे। उसने वहां कष्ट भोगा, उसको डर भी था और क्रोध भी। वह यह नहीं समझ सका कि उसको और उसकी पत्नी को कष्ट क्यों भोगना पड़ा। उसकी 11 पसलियाँ टूट गईं। उसके एक फेफड़े में छेद हो गया। उसकी पत्नी का एक कंधा टूट गया। वह अपने आप से पूछता कि यह सब कुछ उनके साथ क्यों हुआ। उसका एक छोटा बच्चा था और उसकी पत्नी ने उस बच्चे की देखभाल भी करनी थी।

यदि उसका बाप जिन्दा होता तो वह कहता कि यह परमात्मा की इच्छा थी कि वह कष्ट भोग रहा था। मानवों को दुःख देकर परमात्मा उनको परखता है। दुःख से आदमी महानुभाव हो जाता है। बतौर डॉक्टर Barnard को कष्ट भोगने में कोई श्रेष्ठता दिखाई नहीं देती। न ही उसे हस्पताल के किसी बच्चे के रोने में कोई श्रेष्ठता दिखाई देती है।

जब Barnard एक लड़का था तो उसे बच्चों के कष्टों का तब पता चला। उसके पिता ने उसको उसके (Barnard) के भाई के बारे में बताया जो कई वर्ष पहले मर चुका था। जब उसका भाई एक छोटा बच्चा था, तो उसका भाई एक असाधारण हृदय के साथ पैदा हुआ था। यदि वह वर्तमान काल में पैदा होता तो सम्भवतः उसके दिल की समस्या ठीक कर ली गई होती। परन्तु उन दिनों अच्छी दिल की सर्जरी (शल्य चिकित्सा)उपलब्ध नहीं थी।

डॉक्टर के तौर पर Barnard को बच्चों का कष्ट भोगना बहुत दुःखद होता है। बच्चे डॉक्टरों में विश्वास करते हैं। वे विश्वास करते हैं कि डॉक्टर उनकी सहायता कर रहे हैं। यदि डॉक्टर उनकी सहायता नहीं कर सकते, तो वे अपने भाग्य को स्वीकार कर लेते हैं। वे पीड़ा देने वाली Surgery करवा लेते हैं और बाद में वे शिकायत नहीं करते।

एक प्रातः कई वर्ष पहले उसने cars की दौड़ देखी। इस दौड़ को कहते हैं The Grand Prix of Cape Town’s Red Cross Children’s Hospital । इसने उसकी आँखें खोल दीं। उसने महसूस किया कि उनके दुःख के बारे सोचने के कारण वह सब चीज़ों से वंचित हो रहा था। उस प्रातः एक नर्स नाश्ते की ट्राली को छोड़ गई थी। कोई इसकी देखभाल नहीं कर रहा था।

दो व्यक्ति यह ट्राली वहां से अपने बल के ज़ोर से ले गये। दोनों में एक driver था और एक mechanic | Mechanic तो बिल्कुल अन्धा था। Driver का केवल एक बाजू था। दोनों ट्राली को चला कर ले गये। एक Mechanic ट्राली के पीछे तेज़ दौड़ता गया और उसने सिर नीचे किया हुआ था। Driver निचले deck पर बैठा हुआ था। वह एक हाथ से ही डटा रहा और फर्श पर अपने पांव को कुरेदता हुआ trolley का परिचालन करता गया।

लोगों ने mechanic और driver को जाते हुए देखा। दोनों ने अच्छा show (प्रदर्शन) किया। लोग भी इस .. show पर हंसते थे क्योंकि हस्पताल के मरीजों से वे उत्साहित हो रहे थे। अन्धे mechanic और एक हाथ वाले driver ने अच्छा मनोरंजन जुटाया। कारों की दौड़ द्वारा जुटाये गये मनोरंजन से trolley द्वारा उपलब्ध किया गया मनोरंजन बहुत बेहतर था। Dr. Barnard के लिए यह सांत्वना का साधन था। Nurse और ward sister ने उनको पकड़ लिया, उनको डांटा और उनको फिर बिस्तर में लिटा दिया।

Mechanic सात साल का था। एक रात जब उसकी माता और पिता ने शराब पी रखी थी, उसकी मां ने उसके पिता पर लालटेन फैंक दी। लालटेन बच्चे के सिर और कंधे के ऊपर टकराकर टूट गई। बच्चे को बहुत चोटें आई। उसके शरीर का ऊपरी भाग झुलस गया और उसकी दोनों आँखें चली गईं। वह भयंकर लगता था। उसका चेहरा बिगड़ गया। जब उसका घाव ठीक हुआ तो यह लड़का अपना मुंह अपना सिर उठाने के बाद ही खोल सकता था। डॉक्टर उसको इसके बाद देखने के लिए वहां खड़ा हो गया। वह चिल्ला-चिल्ला कर कह रहा था कि वह जीत गया है और वह हंस भी रहा था।

डॉक्टर ने trolley के driver के दिल में एक छेद भरा था। वह हस्पताल वापस आया था क्योंकि उसको हड्डी का अर्बुद (रसौली) है। इससे कुछ दिन पहले उसका कंधा और बाजू काटे गये थे। उसके स्वस्थ होने की कोई आशा नहीं थी। Grand Prix (कार रेस) के बाद उसने गर्व से डॉक्टर को सूचित किया था कि रेस सफल थी। केवल समस्या यह थी कि trolley के पहियों को ठीक तरह से तेल नहीं दिया गया था।

लेकिन वह एक अच्छा driver था और उसको mechanic पर पूरा विश्वास था। – डॉक्टर ने अचानक महसूस किया कि दोनों बच्चों ने उसको जिन्दगी जीने के धन्धे के बारे एक लाभदायक पाठ सिखाया था। जीने का धन्धा या काम जीने का असली अर्थ में मज़ा लेना है। जिन्दा रहने का मतलब है जीने का जश्न मनाना। इन दो बच्चों ने डॉक्टर Barnard को सिखला दिया कि यह बात कोई महत्त्व नहीं रखती कि तुमने क्या खो दिया है। केवल वह बात महत्त्व रखती है जो तुम्हारे पास है। क्या खूब कहा गया है|

Word Meanings:
PSEB 12th Class English Solutions Chapter 9 In Celebration of Being Alive 1
PSEB 12th Class English Solutions Chapter 9 In Celebration of Being Alive 2

A Rainbow of English 12 Class Guide Prose

The Road Not Taken Question Answer Class 12 English Book Poem Chapter 7 PSEB Solutions

Punjab State Board PSEB 12th Class English Book Solutions Poem 7 The Road Not Taken Textbook Exercise Questions and Answers.

Class 12th English Book Poem Chapter 7 The Road Not Taken Question Answers

The Road Not Taken Class 12 Questions and Answers

1. Two roads diverged in a yellow wood,
And sorry I could not travel both
And be one traveller, long I stood
And looked down as far as I could
To where it bent in the undergrowth.

Word-Notes :
Diverged – branched away. Wood – jungle. Undergrowth – bushes.

PSEB 12th Class English Solutions Poem 7 The Road Not Taken

Explanation:
The poet came to a junction of two roads in the forest. The roads were branching away from each other. The poet was a single traveller. He was sorry to realize that he could not go along both the roads at one and the same time. He stood at the junction of two roads for a long time. He looked along one of the roads as far as he could to the spot where the road became hidden in the growth of trees and bushes.

कवि जंगल में दो सड़कों के जंकशन पर आया। सड़कें एक दूसरे से अलग हो रही थीं। कवि अकेला यात्री था। उसे यह सोच कर खेद हुआ कि वह एक ही समय पर दोनों सड़कों पर नहीं चल सकता था। वह दोनों सड़कों के जंकशन पर काफी समय के लिए खड़ा रहा। जहाँ तक वह देख सकता था, वह एक सड़क को उस बिन्दु तक देखता रहा जहां यह वृक्षों और झाड़ियों के नीचे जा कर छिपती थी।

2. Then took the other, as just as fair,
And having perhaps the better claim,
Because it was grassy and wanted wear;
Though as far that the passing there
Had worn them really about the same.

Word-Notes : Fair-beautiful. Grassy-covered with grass. Wanted wear-it was not much travelled or used.

Explanation:
The poet came to a junction of two roads in a forest. The roads were branching away from each other. The poet was a single traveller. He stood at the junction of the roads for a long time. He looked along one of the roads as far as he could. The poet then turned to the other road.

This one was just as good and comfortable a road for journeying along as the other one. In a way it was entitled to a preferential treatment. It was grass-covered and therefore provided the traveller with an additional attraction. So far as the use of the either road by travellers up to that point was concerned, both had been frequently used by them and were worn out and broken to the same extent.

फिर कवि ने दूसरी सड़क का रुख किया। यह सड़क भी पहली सड़क की तरह यात्रा करने के लिए अच्छी और आरामदायक थी। यह घास से ढकी हुई थी और इसलिए यह यात्री के लिए अधिक आकर्षण का कारण थी। जहाँ तक उस बिन्दु तक यात्रियों द्वारा दोनों सड़कों के प्रयोग का प्रश्न था तो यात्रियों ने दोनों का प्रयोग किया हुआ था और दोनों उसी सीमा तक घिसी-पिटी हुई थीं।

PSEB 12th Class English Solutions Poem 7 The Road Not Taken

3. And both that morning equally lay
In leaves no step had trodden black.
Oh, I kept the first for another day :
Yet knowing how way leads on to way,
I doubted if I should ever come back.

Word-Notes. Trodden black-had black sign because of travelling.

Explanation. In these lines the poet says that the two roads lay in front of him equally covered with leaves. No human being had yet used either of the roads. The poet decided to reserve the first road for use on a future occasion. He knew it, however, very clearly that from one road or path branches off another. He doubted if he would ever come back to that junction of the roads and fulfil his promise of following the first road.

इन पंक्तियों में कवि कहता है कि दोनों सड़कें पत्तों से बराबर-बराबर ढकी हुई उसके सामने थीं। दोनों सड़कों को अभी तक किसी ने भी प्रयोग नहीं किया था। कवि ने निर्णय कर लिया कि वह पहली सड़क को भविष्य में प्रयोग करने के लिए सुरक्षित रखे। लेकिन वह यह बड़ी अच्छी तरह जानता था कि एक सड़क या रास्ते में से दूसरा रास्ता निकल आता है। उसे संदेह था कि वह फिर कभी सड़कों के उस जंकशन पर वापस आयेगा और पहली सड़क पर चलने के अपने वायदे को पूरा कर पायेगा।

4. I shall be telling this with a sigh
Somewhere ages and ages hence :
Two roads diverged in a wood, and I
took the one less travelled by,
And that has made all the difference.

Word-Notes : With a sigh-with a sense of regret. Hence-afterwards.

Explanation. In these lines, the traveller says that many years later when he has time to think back, he will tell somebody about how he had made his choice. He will tell him that he had stood for a long time in a jungle at the cross-roads, thinking which road to take. He will cell him how he had chosen the road which was less travelled. This choice had made all the difference for him. It affected not only the future course of his life on this earth but also his spiritual course after death.

इन पंक्तियों में यात्री कहता है कि कई वर्ष बाद जब वह इस बात पर विचार करेगा, तो वह किसी को बतायेगा कि उसने अपना चुनाव किस तरह किया। वह कहेगा कि वह जंगल में चौराहे पर काफी देर खड़ा रहा यह सोचते हुए कि उसको किस सड़क का चुनाव करना चाहिये। वह उसे बतायेगा कि उसने किस प्रकार उस सड़क का चुनाव किया था जिस पर कम लोग ही चले थे। इस चुनाव ने उसके लिए सारा अन्तर बना दिया। इस ने न केवल धरती पर उसके जीवन के भविष्य वाले मार्ग पर प्रभाव डाला बल्कि उसकी मौत के बाद उसके आध्यात्मिक रास्ते पर भी प्रभाव डाला।

Comprehension Of Stanza

1. Read the lines given below and answer the questions that follow :

Two roads diverged in a yellow wood
And sorry I could not travel both
And be one traveller, long I stood
And looked down one as far as I could
To where it bent in the undergrowth (Imp.)

PSEB 12th Class English Solutions Poem 7 The Road Not Taken

Questions :
(a) Name the poet and the poem.
(b) What did the poet see in front of him ?
(c) What is the poet sorry about ?
(d) What is the symbolic meaning of two different paths in the woods ?
Answers
(a) The name of the poet is Robert Frost and the name of the poem is “The Road Not Taken’.
(b) He saw that two roads diverged in front of him.
(c) He is sorry that he could not travel on both the roads.
(d) The one path is for the ordinary people. The other less travelled path is for the extraordinary people.

2. Then took the other, as just as fair,
And having perhaps the better claim,
Because it was grassy and wanted wear;
Though as far that the passing there
Had worn them really about the same.

Questions :
(a) Name the poet and the poem.
(b) Where was the poet when he took the other road ?
(c) Why did the poet take the other road ?
(d) Why was the other road entitled to a better treatment ?
Answers :
(a) Robert Frost is the poet. The name of the poem is “The Road Not Taken”.
(b) He had come to a junction of two roads in a forest.
(c) He took the other road because it was just as good and comfortable a road for travelling as the other one.
(d) It was entitled to a preferential treatment because it was grass covered and provided some attraction to the traveller.

3. And both that morning equally lay
In leaves no step had trodden black.
Oh, I kept the first for another day.
Yet knowing how way leads on to way,
I doubted if I should ever come back.

Questions :
(a) Who are ‘both’ referred to in the first line of the passage/ stanza ?
(b) What did the poet decide about the first road ?
(c) What did the poet know about the roads ?
(d) What was the doubt in the poet’s mind ?
Answers :
(a) They are the two roads.
(b) The poet decided to reserve the first road for use on a future occasion.
(c) The poet knew that from one road or path branches off another.
(d) The poet doubted if he would ever come back to the junction of the two roads.

PSEB 12th Class English Solutions Poem 7 The Road Not Taken

4. I shall be telling this with a sigh
Somewhere ages and ages hence
Two roads diverged in a wood, and I
I took the one less travelled by
And that has made all the difference.

Questions :
(a) Which path did the poet choose to travel ?
(b) What does the poet mean by the word difference in the last line ?
(c) Is the poet doubtful about his decision ?
(d) Justify the title of the poem ‘The Road Not Taken’.
Answers :
(a) He chose the less travelled path.
(b) The poet hints at the difference between the ordinary and the extraordinary.
(c) The poet is not at all doubtful.
(d) Actually “The Road Taken’ should have been the title because the poet took the less travelled road.
Or
The title “The Road Not Taken’ is also correct because the poet gives his reason why he took one road and rejected the other.

The Road Not Taken Summary in English

The Road Not Taken Introduction:

This poem is based on a very common experience. A traveller was going through a forest. He reached a point where the road diverged in two directions. Both the roads looked equally attractive to the traveller. But he decided to take the one that did not show much sign of having been used. It is true that if he had chosen the beaten path (much used road) he could be sure of reaching somewhere.

He would not have faced many difficulties in life. But he took the one less travelled by’ and that has made all the difference. The poet suggests that the choices which one makes in life are for good. One cannot turn back and make a second choice regarding one’s goal in life. Therefore, one should be very careful in making the choice. He also suggests that by choosing the ordinary course in life, one cannot hope to become extraordinary.

The Road Not Taken Summary in English:

In this poem the poet brings out the importance of choice-making in one’s life. He says that choices cannot be changed. They have a very far-reaching influence. They influence the whole course of man’s life. Another idea brought out in this poem is that one can’t achieve extraordinary things by taking an ordinary course. Only very ordinary men follow the beaten paths. Great souls always prefer to tread new paths. The poet illustrates this idea with the help of a very common experience.

Once the poet was travelling through a forest. He came to a place from where the road branched off in two directions. It was not possible for the poet to travel by both the roads at the same time. He had to choose one of the two. The poet stood there and thought for a long time.

PSEB 12th Class English Solutions Poem 7 The Road Not Taken

One of the roads was visible to some distance. It meant that the road had frequently been used. The other road was overgrown with grass. It meant that this road had not been used much. The poet decided to go by the second road. He kept the first one for another day.

The poet imagines a time many ages hence. He will then be in some other world. He will then recall how he had decided to travel by the less-frequented road. This choice had made all the difference for him. It affected not only the future course of his life on this earth but also his spiritual course after death. Thus with the help of symbols the poet brings out the idea that man has to choose between the roads of materialism and spiritualism in his life. The choice once made is for good. It cannot be changed later.

The Road Not Taken Summary in Hindi

The Road Not Taken Introduction:

यह कविता एक साधारण अनुभव पर आधारित है। एक यात्री जंगल में से जा रहा था। वह एक ऐसे स्थान पर पहुंचा जहां से सड़क दो भिन्न-भिन्न दिशाओं में जाती थी। यात्री को दोनों सड़कें एक जैसी आकर्षक प्रतीत होती थीं। लेकिन उसने उस सड़क पर चलने का निर्णय लिया जिस पर बहुत अधिक लोग नहीं चले थे। यह बात सच है कि यदि वह उस सड़क पर जाने का निर्णय करता जिस पर अधिक लोग चले थे तो वह अवश्य ही किसी स्थान पर पहुंच जाता। उसने बहुत कठिनाईयों या समस्याओं का सामना न किया होता।

लेकिन उसने उस सड़क को चुना जिस पर बहुत कम लोग चले थे और इसी चीज़ ने इतना अन्तर डाल दिया। कवि के कहने का मतलब है कि आदमी अपने जीवन में जिस चीज़ का चुनाव करता है वह सदा के लिए होता है। आदमी वापस मुड़ कर अपने लक्ष्य के बारे में दूसरा चुनाव नहीं कर सकता। इसलिए मनुष्य को किसी लक्ष्य का चुनाव पूरे ध्यान से करना चाहिए। कवि यह भी कहता है कि जीवन में साधारण मार्ग चुनकर आदमी असाधारण नहीं बन सकता।

The Road Not Taken Summary in Hindi:

‘The Road Not Taken’ कवि Robert Frost की सबसे महान् कविताओं में से एक है । यह कविता बताती है कि जीवन के पतझड़ी जंगलों में आदमी ने दो मार्गों में से किस एक को चुनना होता है। कवि इस स्थिति के द्वारा जीवन में चुनाव के महत्त्व पर टिप्पणी करता है। मनुष्य के अन्दर कोई ऐसी भावना होती है जो उसे अपना लक्ष्य चुनने में सहायता करती है। व्यक्ति दोनों में से किसी एक मार्ग को इसलिए चुन लेता है कि यह अधिक उचित दिखाई पड़ता है।

कवि कहता है कि पीले पड़े जंगलों में वह एक ऐसे स्थान पर जा पहुंचा जहां पर दो मार्ग अलग-अलग दिशाओं में जाते थे। पर वह दोनों मार्गों पर नहीं जा सकता था। उसे दोनों मार्गों में से एक का चुनाव करना था। पहले उसने एक मार्ग पर इतनी दूर देखा जितनी दूर वह देख सकता था। यह मार्ग उसे झाड़ियों के नीचे मुड़ता हुआ दिखाई दिया।

फिर कवि ने दूसरा मार्ग ले लिया। उसने सोचा कि यह अधिक उचित था। यह एक घास उगा मार्ग था। कवि को ऐसा दिखाई दिया कि उससे पहले उस मार्ग पर बहुत कम लोग चले थे। जहां तक दूसरे का सम्बन्ध था उस पर बहुत से लोग चल चुके थे। दूसरे शब्दों में यह घिसा-पिटा मार्ग था।

PSEB 12th Class English Solutions Poem 7 The Road Not Taken

उस प्रातः जब कवि पतझड़ी पीले जंगल में खड़ा था तो उसने देखा कि दोनों मार्ग पत्तों से ढके थे। दोनों मार्गों पर कोई भी चला दिखाई नहीं देता था। कवि ने सोचा कि वह पहले मार्ग पर बाद में किसी ओर समय पर आएगा। अतः उसने दूसरे मार्ग पर चलना आरम्भ कर दिया परन्तु उसे यह ज्ञात हो गया कि यदि एक बार कोई चुनाव कर लेता है तो वापस लौट कर दूसरे मार्ग पर जाना नहीं हो सकता।

कवि दूर भविष्य के बारे में सोचता है जब वह अपने चुने हुए मार्ग पर चल चुका होगा। फिर शायद वह ठण्डी सांस लेकर पीछे की ओर देखेगा और सोचेगा कि शायद दूसरा मार्ग अधिक लाभदायक होता। परन्तु उस समय इतनी देर हो चुकी होगी कि वापिस आना कठिन होगा।

फिर वह महसूस करेगा कि कम लोगों द्वारा अपनाए गए मार्ग को चुनने के कारण ही उसके जीवन में सारा अन्तर पड़ा। कवि यह सुझाव देता है कि मनुष्य को जीवन में अपने चुनावों के परिणामों को भुगतना पड़ता है। वह स्थिति को ठीक नहीं कर सकता यदि उसने जीवन में गलत चुनाव किया है। वह केवल पछता ही सकता है।

The Road Not Taken Central Idea

This poem is based on the idea of choice-making in life. Choice of one’s aim is very difficult. It has a great influence. It influences the whole course of a man’s life. Another idea in the poem is that one cannot achieve extraordinary things by taking an ordinary course. Only ordinary people follow the beaten path. Great souls always prefer to take new paths. By doing so they break fresh ground.

PSEB 12th Class English Solutions Poem 7 The Road Not Taken

The Road Not Taken Central Idea In Hindi

यह कविता जीवन में.लक्ष्य का चुनाव करने पर आधारित है। अपने लक्ष्य का चुनाव करना बड़ा कठिन होता है। चुनाव करने का बहुत महत्त्व होता है। यह आदमी के पूरे जीवन को प्रभावित करता है। कविता में एक विचार यह भी है कि साधारण मार्ग पर चलकर कोई व्यक्ति आसाधारण उपलब्धियाँ प्राप्त नहीं कर सकता। केवल साधारण व्यक्ति घिसे-पिटे रास्ते पर चलते हैं। महान् आत्माएं सदा नये रास्तों पर चलना पसन्द करती हैं। ऐसा करने से वे नई राहें खोज लेते हैं।

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