PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 17 नीरज के दोहे

Punjab State Board PSEB 8th Class Hindi Book Solutions Chapter 17 नीरज के दोहे Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 8 Hindi Chapter 17 नीरज के दोहे

Hindi Guide for Class 8 PSEB नीरज के दोहे Textbook Questions and Answers

(क) भाषा – बोध

I. शब्दार्थ:

उत्तर:
विषय विकार = लोभ, मोह, अहंकार आदि विषय वासनाएँ। शूल = काँटा, चुभन। प्रभु = भगवान । कृपा = दया। निर्मूल = बिना जड़ का, बिना कष्टों और दुखों का। मर्यादा = सदाचार। रम गया = लग गया। निष्काम = इच्छा से रहित। जग = संसार। अनूप = बेजोड़, अति सुंदर। दीखे = दिखाई देता है। भीतर = अंदर। लोभ = लालच। क्रोध = गुस्सा। मुक्ति = छुटकारा। धन = पैसा, दौलत, संपत्ति। मात्र = केवल। मनुज = मनुष्य। ध्येय = उद्देश्य। अगर = यदि। हेय = हीन, तुच्छ। अमरत्व = सदा बने रहना। हित = भला, कल्याण। सर्व-भूत-हित-रत = सब के कल्याण में लीन। सदा = हमेशा। डसे = डसना, डंक मारना। त्यागे = छोड़े। दुष्टता = बुराई। मसलो = कुचलो, दोनों हाथों के बीच रगड़ो। स्नेह = प्रेम। निवास = रहने का स्थान, रहना। निष्ठा = कौशल। श्रद्धा = एकाग्रता, आधार।

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(ख) विषय – बोध

I. इन प्रश्नों के उत्तर एक या दो वाक्यों में लिखें :

(क) इन दोहों के कवि का नाम लिखें।
उत्तर:
इन दोहों के कवि का नाम श्री नीरज है।

(ख) कवि ने प्रभु से क्या प्रार्थना की है ?
उत्तर:
कवि ने प्रभु से प्रार्थना की है कि वे उसके हृदय में विद्यमान सभी बुराइयों और विषय विकारों को सदा के लिए दूर कर दें।

(ग) हमें अपना मन किस में और किस भाव से रमाना चाहिए ?
उत्तर:
हमें अपना मन मर्यादा और त्याग के प्रतीक श्री राम में रमाना चाहिए।

(घ) कवि ने जग के रंग की तुलना किस रंग से की है ?
उत्तर:
कवि ने जग के रंग की तुलना इंद्रधनुष के रंगों से की है।

(ङ) हम अपने को कब पहचान सकते हैं ?
उत्तर:
जब हमारे मन में लोभ और क्रोध न हो तो हम अपने को पहचानते हैं।

(च) जीवन में महत्त्व किस बात का है ?
उत्तर:
जीवन का महत्त्व इस बात में छिपा है कि हम अपना जीवन किस प्रकार जीते हैं। जीवन का महत्त्व लंबी आयु से नहीं है।

(छ) सभी देशों में भारत की विशेष पहचान क्या है ?
उत्तर:
भारत अन्य देशों के समान स्वार्थी आधार पर कार्य नहीं करता बल्कि सभी देशों के कल्याण की दिशा में कार्य करता है।

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(ज) दृष्ट व्यक्ति की तुलना किससे की गई है ?
उत्तर:
दुष्ट व्यक्ति की तुलना साँप से की गई है।

(झ) फूल की क्या विशेषता है ?
उत्तर:
फूल की विशेषता है कि वह मसले जाने पर भी सुगंध ही देता है।

(ञ) घर की सुख-शान्ति किस में निहित है ?
उत्तर:
घर की सुख-शान्ति माता-पिता के गुणों और व्यवहार में निहित है।

II. इन दोहों की सप्रसंग व्याख्या करें :

(क) लोभ न जाने……………पहचान।
उत्तर:
देखिए, सप्रसंग व्याख्या भाग।

(ख) स्नेह, शान्ति……………..विश्वास।
उत्तर:
देखिए सप्रसंग व्याख्या भाग।

(ग) साँप’ और ‘फूल’ के उदाहरण द्वारा कवि क्या कहना चाहता है ? स्पष्ट करें।
उत्तर:
‘साँप’ और ‘फूल’ के उदाहरण देकर कवि ने मानव के स्वभाव को स्पष्ट करना चाहा है। दुष्ट और बुरे लोग साँप जैसे होते हैं जो उनका भला करना वालों का भी बुरा ही करते हैं। अच्छे स्वभाव के लोग फूल की तरह सब को सुगंध ही प्रदान करते हैं। जिस प्रकार फूल मसला जाने के बाद भी सुगंध ही प्रदान करता है उसी प्रकार अच्छे स्वभाव का व्यक्ति बुरे और दुष्ट लोगों का भी कल्याण करना चाहता है।

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(घ) जीवन की पहचान क्या है ? पठित दोहे के आधार पर उत्तर दें।
उत्तर:
जीवन की पहचान बुराइयों से दूर रहकर परिश्रम करते हुए ईमानदारी से जीना है। सभी का हित चाहते हुए लोभ और क्रोध से दूर रहकर अच्छी भावना को धारण करना ही इसकी पहचान है।

(ङ) कवि ने धर्म/अध्यात्म से सम्बन्धित दोहों में क्या-क्या कहा है ?
उत्तर:
कवि ने धर्म और अध्यात्म से संबंधित दोहों में कहा है कि इन्सान को केवल अपने स्वार्थ के लिए काम न करते हुए परोपकार की भावना को महत्त्व देना चाहिए। मर्यादा और त्याग के द्वारा समाज को एक साथ जोड़ा जा सकता है। ईश्वर सर्वत्र है और उसे कभी नहीं भुलाना चाहिए। ईश्वर ही हमारे विषय विकारों को दूर करते हैं।

(ग) व्यावहारिक व्याकरण

I. दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखें :

जग = ………………..
मुक्ति = ………………..
ध्येय = ………………..
मनुज = ………………..
हित = ………………..
हाथ = ………………..
साँप = ………………..
खुशबू = ………………..
फूल = ………………..
स्नेह = ………………..
उत्तर:
जग = संसार, जगत
मुक्ति = मोक्ष, निर्वाण
ध्येय = उद्देश्य, लक्ष्य
मनुज = मानव, मनुष्य
हित = कल्याण, भलाई
हाथ = हस्त, कर
दूध = दुग्ध, क्षीर
साँप = सर्प, नाग
खुशबू = सुगंध, महक
फूल = पुष्प, प्रसून
स्नेह = प्रेम, प्यार।

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II. ‘जीवित’ में ‘इत’, ‘महत्त्व’ में त्व’ और ‘दुष्टता’ में ‘ता’ प्रत्यय लगे हैं। इन तीनों प्रत्ययों से नये शब्द बनायें :

मर्यादा + इत = ————–
अमर + त्व = ————–
मनुज + ता = ————–
क्रोध + इत = ————–
—– + —— = ————–
—– + —— = ————–
—– + —— = ————–
—– + —— = ————–
—– + —— = ————–
—– + —— = ————–
उत्तर:
मर्यादा + इत = मर्यादित
क्रोध + इत = क्रोधित
सुगन्ध + इत = सुगन्धित
अमर + त्व = अमरत्व
कवि + त्व = कवित्व
मनुष्य + त्व = मनुष्यत्व
मनुज + ता = मनुजता
महान + ता = महानता
मानव + ता = मानवता

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PSEB 8th Class Hindi Guide नीरज के दोहे Important Questions and Answers

बहुविकल्पीय प्रश्न निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर सही विकल्प चुनकर लिखें :

प्रश्न 1.
मर्यादा और त्याग के नाम से किसे स्मरण करते हैं ?
(क) राम को
(ख) परशुराम को
(ग) अहिराम को
(घ) जगराम को।
उत्तर:
राम को।

प्रश्न 2.
संसार का रंग किसके समान अनुपम है ?
(क) इंद्रधनुष
(ख) अर्जुनधनुष
(ग) राम धनुष
(घ) शिव धनुष।
उत्तर:
इंद्रधनुष।

प्रश्न 3.
लोभ किसे नहीं जानता ?
(क) त्याग को
(ख) प्रेम को
(ग) दान को
(घ) मान को।
उत्तर:
दान को।

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प्रश्न 4.
दुष्ट क्या नहीं त्यागता ?
(क) प्रेम
(ख) संबंध
(ग) मित्रता
(घ) दुष्टता।
उत्तर:
दुष्टता।

प्रश्न 5.
फूल को मसल देने पर भी वह क्या नहीं त्यागता ?
(क) आकार
(ख) पंखुड़ियाँ
(ग) पराग
(घ) सुगंध।
उत्तर:
सुगंध।

सप्रसंग व्याख्या

1. मेरे विषय विकार जो, बने हृदय के शूल।
हे प्रभु, मुझ पर कृपा कर, करो उन्हें निर्मूल॥

शब्दार्थ:
विषय विकार = लोभ, मोह, अहंकार आदि विषय वासनाएँ। शूल = काँटा, चुभन। प्रभु = भगवान । कृपा = दया। निर्मूल = बिना जड़ का, बिना कष्टों और दुखों का।

प्रसंग:
यह दोहा कविवर ‘नीरज’ द्वारा रचित ‘नीरज के दोहे’ नामक कविता से लिया गया है। इसमें कवि ने ईश्वर से प्रार्थना की है कि वे उनके हृदय को विकारों से रहित बना

व्याख्या:
कवि कहता है हे भगवन् ! मेरे हृदय में तरह-तरह के विषय-विकार काँटा बनकर चुभे हुए हैं। लोभ, मोह, अहंकार आदि बुराइयाँ मेरे भीतर चुभ कर मुझे सदा कष्ट देते रहते हैं। आप कृपा करके मेरे इन कष्टों और दुखों को सदा के लिए दूर कर दीजिए। भाव है कि कवि अपने जीवन को विषय विकारों से मुक्त करना चाहता है जिससे हृदय में पवित्रता का भाव बना रहे।

विशेष:

  1. कवि ने ईश्वर से प्रार्थना की है कि वह उसे तरह-तरह की बुराइयों से दूर रखे।
  2. तत्सम शब्दों का प्रयोग अधिक किया गया है।

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2. मर्यादा और त्याग का, एक नाम है राम।
उसमें जो मन रम गया, रहा सदा निष्काम।।

शब्दार्थ: मर्यादा = सदाचार। रम गया = लग गया। निष्काम = इच्छा से रहित।

प्रसंग:
प्रस्तुत दोहा हमारी पाठ्य पुस्तक में संकलित कविता ‘नीरज के दोहे’ से लिया गया है। कवि ने इसमें श्री राम के महत्त्व को प्रकट किया और माना है कि उनके नाममात्र से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।

व्याख्या:
कवि ने श्री राम के गुणों को प्रकट करते हुए कहा है कि सदाचार का पालन और त्याग देने की अपार शक्ति ही श्री राम का एक नाम है। जो भी प्राणी उस नाम में एक बार लीन हो गया वह सदा-सदा के लिए किसी भी प्रकार की इच्छा से रहित हो गया। भाव है कि श्री राम की भक्ति का फल भक्त को यह मिलता है कि उसकी सभी इच्छाएँ अपने आप ही पूरी हो जाती हैं और वह किसी अतिरिक्त इच्छा को प्रकट ही नहीं करता।

विशेष:

  1. कवि ने श्री राम के प्रति आस्था और उनकी अपार शक्ति को प्रकट किया है।
  2. तत्सम शब्दों का अधिकता से प्रयोग किया गया है।

3. इन्द्रधनुष के रंग-सा जग का रंग अनूप।
बाहर से दीखे अलग, भीतर एक स्वरूप।

शब्दार्थ : जग = संसार। अनूप = बेजोड़, अति सुंदर। दीखे = दिखाई देता है। भीतर = अंदर।

प्रसंग:
यह दोहा हमारी पाठ्य पुस्तक में संकलित पाठ ‘नीरज के दोहे’ से लिया गया है। यह कवि नीरज द्वारा रचित है। कवि ने ईश्वर के द्वारा बनाई इस सृष्टि के अद्भुत रूप को प्रकट किया है।

व्याख्या :
कवि कहता है कि यह संसार इन्द्रधनुष के सात रंगों की तरह अति सुंदर और अनूठा है। इसमें पूरी तरह से सुंदरता छिपी हुई है। यह बाहर से अलग तरह का दिखाई देता है, पर इसके भीतर ईश्वर का एक स्वरूप ही विद्यमान है। भाव है कि माया से युक्त इस सतरंगी दुनिया की रचना करने वाले ईश्वर ही हैं।

विशेष:

  1. कवि ने ईश्वर के प्रति अपनी आस्था को व्यक्त किया है।
  2. भाषा सरस और भावपूर्ण है। तत्सम शब्दों की अधिकता है। |

4. लोभ न जाने दान को, क्रोध न जाने ज्ञान।
हो दोनों से मुक्ति जब, हो अपनी पहचान॥

शब्दार्थ : लोभ = लालच। क्रोध = गुस्सा। मुक्ति = छुटकारा।

प्रसंग:
प्रस्तुत दोहा हमारी पाठ्य पुस्तक में संकलित पाठ ‘नीरज के दोहे’ से लिया गया है। कवि ने स्पष्ट किया है कि इस संसार में रहने वाले अपनी वास्तविक पहचान प्रकट कर सकते हैं लेकिन इसके लिए उन्हें प्रयत्न करना पड़ेगा।

व्याख्या:
कवि कहता है कि मनुष्य के हृदय में जब लालच और जमाखोरी का भाव आ जाता है तो वह दूसरों को दान नहीं दे सकता। वह औरों की सहायता नहीं करता। गुस्सा करने पर वह अपना ज्ञान भूल जाता है, वह अज्ञानी और मूर्ख-सा व्यवहार करने लगता है। जब लालच और गुस्से से वह मुक्ति पा जाता है तो वह अपनी पहचान बना पाता है भाव है कि अवगुणों के समाप्त हो जाने के बाद ही वह समाज में अपना नाम और पहचान को बना सकता है।

विशेष:

  1. कवि ने जीवन की वास्तविकता को प्रकट किया है।
  2. भाषा सरल, सरस और भावपूर्ण है।

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5. धन तो साधन मात्र है, नहीं मनुज का ध्येय।
ध्येय बनेगा धन अगर, जीवन होगा हेय॥

शब्दार्थ : धन = पैसा, दौलत, संपत्ति। मात्र = केवल। मनुज = मनुष्य। ध्येय = उद्देश्य। अगर = यदि। हेय = हीन, तुच्छ।

प्रसंग:
प्रस्तुत दोहा हमारी पाठ्य पुस्तक में संकलित पाठ ‘नीरज के दोहे’ से लिया गया है। कवि ने इस में धन को मनुष्य की आवश्यकता तो माना है लेकिन उसे अपना सब कुछ न मानने की शिक्षा दी है।

व्याख्या:
कवि कहता है कि हम सब मनुष्यों के लिए धन केवल एक साधन है। यह किसी भी प्रकार से मनुष्य के जीवन का उद्देश्य नहीं है। यदि धन-संपत्ति को जीवन का उद्देश्य मान लिया तो हमारा जीवन हीन हो जाएगा, वह व्यर्थ हो जाएगा। कवि का भाव है कि मनुष्य के जीवन में धन का महत्त्व अवश्य है पर वह उसका उद्देश्य नहीं मान लिया जाना चाहिए।

विशेष:

  1. कवि ने मानव-जीवन में धन की स्थिति को प्रकट किया है जो किसी भी प्रकार सब कुछ नहीं माना जाना चाहिए।
  2. कवि की भाषा सरल, सरस और भावपूर्ण है। तत्सम शब्दों की अधिकता है।

6. हम कितना जीवित रहे, इसका नहीं महत्त्व।
हम कैसे जीवित रहे, यही तत्त्व अमरत्व।

शब्दार्थ : अमरत्व = सदा बने रहना।

प्रसंग:
प्रस्तुत दोहा हमारी पाठ्य पुस्तक में संकलित ‘नीरज के दोहे’ नामक कविता से लिया गया है। कवि ने जीवन के लंबे होने को महत्त्वपूर्ण नहीं माना बल्कि जीवन जीने के ढंग को महत्त्वपूर्ण माना है।

व्याख्या:
कवि कहता है मनुष्य के जीवन में इस बात का महत्त्व नहीं है कि हम कितना लंबा जीवन जीते हैं। हम किस प्रकार जीवित रहते हैं-यही महत्त्वपूर्ण है और यही किसी व्यक्ति के अमरत्व तत्व को प्रकट करता है। भाव है कि छोटी-सी अच्छे ढंग से जी हुई, मानव की जिंदगी लंबे जीवन से कई गुना अच्छी होती है जो उसे सेवा, कल्याण, भक्ति और श्रेष्ठता के कारण समाज में ऊँचा नाम प्रदान कर देती है। उसके मर जाने के लंबे समय बाद भी उस का सम्मानपूर्वक नाम लिया जाता है, उसे याद किया जाता है।

विशेष:

  1. कवि ने मनुष्य को जीवित अवस्था में श्रेष्ठ कार्य करने की प्रेरणा देते हुए लंबे जीवन को महत्त्वपूर्ण नहीं माना है।
  2. भाषा सरल, सरस और भावपूर्ण है। तत्सम शब्दावली की अधिकता है।

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7. अपना ही हित साधते, सारे देश विशेष।
सर्व-भूत-हित-रत सदा, वो है भारत देश।

शब्दार्थ : हित = भला, कल्याण। सर्व-भूत-हित-रत = सब के कल्याण में लीन। सदा = हमेशा।

प्रसंग:
प्रस्तुत दोहा हमारी पाठ्य पुस्तक में संकलित पाठ ‘नीरज के दोहे’ से लिया या है। इसके कवि श्री नीरज हैं। कवि ने भारत देश की महत्ता को प्रकट किया है और माना है कि वह अपने गुणों के कारण अन्य देशों से भिन्न है।

व्याख्या:
कवि कहता है कि संसार के अन्य देश विशेष रूप से अपने स्वार्थों को पूरा करने के लिए ही कार्य करते हैं, वे केवल अपना ही हित साधते हैं। वे दूसरे देशों के कल्याण की बात नहीं सोचते। वह केवल भारत देश ही है जो सदा सब के कल्याण के लिए कार्य करने में लगा रहता है।

विशेष:

  1. कवि ने भारतवासियों की परोपकारिता और कल्याणकारी प्रकृति को प्रकट किया है।
  2. भाषा में तत्सम शब्दावली की अधिकता है।

8. दूध पिलाये हाथ जो, डसे उसे भी साँप।
दुष्ट न त्यागे दुष्टता, कुछ भी कर लें आप॥

शब्दार्थ : डसे = डसना, डंक मारना। त्यागे = छोड़े। दुष्टता = बुराई।

प्रसंग:
प्रस्तुत दोहा हमारी पाठ्य पुस्तक में श्री नीरज के द्वारा रचित ‘नीरज के दोहे’ नामक कविता से लिया गया है। कवि ने दुष्ट स्वभाव वाले व्यक्ति के बारे में अपने भाव प्रकट किये हैं।

व्याख्या:
कवि कहता है कि साँप उस हाथ को भी डस लेता है जो उसे दूध पिलाता है। वह उसके प्रति भी अहित ही करता है जो उसे जीवन देना चाहता है। दुष्ट प्राणी कभी भी अपनी दुष्टता को नहीं छोड़ता चाहे कोई उसके हित के लिए कुछ भी कर ले। भाव है कि दुष्ट व्यक्ति किसी भी अवस्था में अपनी दुष्टता को नहीं त्यागता। वह किसी का कैसा भी एहसान नहीं मानता, चाहे कोई कुछ भी कर ले।

विशेष:

  1. कवि ने दुष्ट स्वभाव वाले प्राणियों के स्वभाव का सटीक चित्रण किया
  2. भाषा सरल, सरस और भावपूर्ण है।

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9. तोड़ो मसलो या कि तुम, उस पर डालो धूल।
बदले में लेकिन तुम्हें खुशबू ही दे फूल।

शब्दार्थ : मसलो = कुचलो, दोनों हाथों के बीच रगड़ो।

प्रसंग:
प्रस्तुत दोहा हमारी पाठ्य पुस्तक में संकलित ‘नीरज के दोहे’ नामक कविता से लिया गया है जिसमें कवि ने अच्छे स्वभाव वाले लोगों की विशेषता को प्रकट किया है।

व्याख्या:
कवि कहता है कि अच्छे स्वभाव के लोग हानि पहुँचाने वालों के प्रति भी बुरा व्यवहार नहीं करते। वे उनके लिए भी कल्याण का भाव ही अपने मन में रखते हैं। यदि किसी फूल को तोड़ो, दोनों हाथों के बीच मसलो या उस पर धूल डालो तो भी बदले में कभी नुकसान नहीं पहुंचाते। वे बदले में तुम्हें खुशबू ही देते हैं। अच्छे लोग विपरीत व्यवहार करने पर भी अहित का भाव मन में कभी नहीं लाते। भाव है कि अच्छे लोग हर स्थिति में अच्छे ही रहते हैं।

विशेष:

  1. कवि ने अच्छे स्वभाव के लोगों को हर स्थिति में अच्छा व्यवहार करने वाला ही माना है।
  2. भाषा सरल, सरस और भावपूर्ण है।

10. स्नेह, शान्ति, सुख सदा ही, करते वहाँ निवास।
निष्ठा जिस घर माँ बने, पिता बने विश्वास॥

शब्दार्थ : स्नेह = प्रेम। निवास = रहने का स्थान, रहना। निष्ठा = कौशल। श्रद्धा = एकाग्रता, आधार।

प्रसंग:
प्रस्तुत दोहा हमारी पाठ्य पुस्तक में संकलित पाठ ‘नीरज के दोहे’ से लिया गया है। इसके रचयिता श्री नीरज हैं। कवि ने किसी भी अच्छे घर के गुणों को माता-पिता के गुणों के आधार पर प्रकट किया है।

व्याख्या:
कवि कहता है कि किसी भी घर की सुख-शांति और प्रेम की नींव की मज़बूती उसके माता-पिता के गुण होते हैं। जिस भी घर में श्रद्धा, एकाग्रता और कौशल की आधार माँ होती है और पिता विश्वास के आधार बनते हैं। उस घर में सदा ही स्नेह, शांति और सुख का निवास होता है। उस घर में सब प्रकार का आनंद होता है। भाव है कि किसी भी घर की खुशियाँ उसमें रहने वाले माता-पिता के उच्च संस्कारों और गुणों पर निर्भर करती हैं। बच्चे उन्हीं अच्छे गुणों को प्राप्त करके अपने जीवन को श्रेष्ठ बनाते हैं।

विशेष:

  1. कवि ने किसी भी परिवार के संस्कारों की श्रेष्ठता को माता-पिता के कारण माना है जो परिवार की सुख-शांति के आधार बनते हैं।
  2. भाषा में सरलता, सरसता और सहजता के गुण विद्यमान है।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 17 नीरज के दोहे

नीरज के दोहे Summary

नीरज के दोहे दोहों का सार

कवि ईश्वर से प्रार्थना करते हुए कहता है कि हे भगवन् ! तरह-तरह की बुराइयाँ मेरे हृदय में काँटे की तरह चुभ रही हैं। कृपा कर के उन्हें सदा के लिए मिटा दो। मर्यादा और त्याग ही तो राम का नाम है। जिसका मन इन दोनों में लग जाता है वह सदा बुराइयों से दूर हो जाता है। यह सारा संसार इंद्रधनुष के रंग जैसा दिखाई देता है। यह बाहर से अलगअलग तरह का दिखाई देता है पर इसके अंदर तो परमात्मा का एक स्वरूप ही विद्यमान है। लालच का भाव कभी दान नहीं करने देता और गुस्सा मनुष्य को ज्ञान से दूर करता है। इन दोनों से जब मुक्ति मिल जाती है तभी अपनी पहचान बनती है। धन केवल साधन है। यह मनुष्य के जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं होता। यदि जीवन का लक्ष्य केवल धन बन जाएगा तो यह तुच्छ और व्यर्थ हो जाएगा। हम मनुष्य कितना लंबा जीवन जीते हैं इसका कोई अर्थ नहीं है। वास्तविकता तो इस बात में है कि हम किस प्रकार जीवित रहते हैं। इस संसार के सारे देश अपना-अपना स्वार्थ पूरा करते हैं। केवल भारत देश ही ऐसा है जो प्राणी मात्र के लिए प्रयत्न करता रहता है। जो हाथ दूध पिलाते हैं साँप तो उन्हें भी डसता है। आप कुछ भी कर लीजिए दुष्ट व्यक्ति कभी भी अपनी दुष्टता नहीं छोड़ सकता। अच्छा व्यक्ति हर स्थिति में अपने गुणों को ही प्रकट करता है। आप किसी फूल को तोड़ो या मसल डालो पर बदले में वह सदा सुगंध ही देता है। जिस घर में माँ निष्ठावान होती है और इसे किसी भी तरह पिता विश्वास का रूप बन जाते हैं वहाँ सदा प्रेम, शांति और सुख ही निवास करते हैं।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 16 तुम भी ऊँचे उठ सकते हो

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(क) भाषा बोध

I. शब्दार्थ:

पथिक = यात्री।
आँच = आग।
हाँडी = मिट्टी का बरतन।
तट = किनारा।
व्यर्थ = बेकार।
नभ = आकाश।
अवैध = गैर-कानूनी।
विश्राम = आराम।
कदाचित् = कभी भी।
खटास = खट्टापन।
ताड़ी = शराब।
शुष्क = सूखा।
औषिधि = दवा।

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II. निम्नलिखित शब्दों का वाक्यों में प्रयोग करें-

विश्राम – ………………………
पथिक – ………………………
विजयश्री – ………………………
मरुस्थल – ………………………
अवैध – ………………………
उत्तर:
विश्राम – बीमार व्यक्ति को दिन के समय भी विश्राम करना ही पड़ता है।
पथिक – पथिक पेड़ के नीचे विश्राम करने के लिए रुका।
विजयश्री – हमारे सैनिकों ने शत्रु सेना पर शानदार विजयश्री प्राप्त की।
मरुस्थल – खजूर की लकड़ी खुरदरी और टेढ़ी-मेढ़ी होने पर भी मरुस्थल में उपयोगी वस्तु है।
अवैध – पेड़ों की अवैध कटाई के कारण बाढ़ें आने का खतरा रहता है।

(ख) विषय – बोध

I. इन प्रश्नों के उत्तर एक या दो वाक्यों में लिखें :

(क) खजूर का पेड़ मनुष्य को क्या एहसास दिलाता है ?
उत्तर:
खजूर का पेड़ हमें ऊँचा उठने का एहसास दिलाता है।

(ख) खजूर की लकड़ी किस काम आती है ?
उत्तर:
खजूर की लकड़ी घर बनाने के काम आती है। इससे नौकाएँ भी बनाई जाती

(ग) महाराष्ट्र और बंगाल के गाँवों में खजूर का रस कैसे इकट्ठा किया जाता है ?
उत्तर:
महाराष्ट्र और बंगाल में लोग खजूर के तने को छीलकर और तेज़ चाक से इसमें कटाव लगाकर हांडी बाँध देते हैं।

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(घ) ताड़ी किसे कहते हैं और यह कैसे बनती है ?
उत्तर:
खजूर के रस को कुछ देर रख दिया जाता है। फिर उससे ताड़ी बनाई जाती

(ङ) खजूर के पत्तों का क्या उपयोग है ? .
उत्तर:
खजूर के पत्तों से चटाइयाँ, झोंपड़ियाँ और हस्तशिल्प की सुन्दर चीजें बनती हैं।

(च) खजूर के फल देखने में कैसे लगते हैं ?
उत्तर:
खजूर के फल देखने में गहरे भूरे और हल्के पीले रंग के कुछ लम्बे तथा खाने में बहुत स्वादिष्ट और पौष्टिक होते हैं।

II. इन के उत्तर चार-पाँच वाक्यों में लिखें।

(क) खजूर के क्या-क्या लाभ हैं ?
उत्तर:
खजूर के अनेक लाभ हैं। यह व्यक्ति को अपनी तरह ऊँचा उठने का सन्देश देती है। इसकी लकड़ी से घर बनाए जाते हैं। इसके फल स्वादिष्ट होते हैं। पत्तों से चट्टाइयाँ, झोंपड़ियाँ और हस्त शिल्प की सुंदर वस्तुएँ बनाई जाती हैं। इसके रस को इकट्ठा कर गुड़ तैयार किया जाता है। इसके तने से नौकाएं तैयार की जाती हैं। सूखी खजूर औषधियों में काम आती है। (ख) खजूर का पेड़ हमें क्या सीख देता है ?
उत्तर-खजूर का पेड़ हमें ऊँचा उठने, निर्भीक रहने, संकट सहने, परोपकार करने की सीख देता है। यह हमें सिखाता है कि कठोर जीवन ही सुख का आधार बनता है। कठिन जीवन ही मुसीबतों से टकराने की प्रेरणा देता है। विपरीत परिस्थितियों में भी जीने की राह खजूर ही दिखाता है।

(ग) व्यावहारिक व्याकरण

I. शुद्ध रूप लिखो

बलकि – ………………………
छतर – ………………………
सवाद – ………………………
अनन्द – ………………………
दुपहर – ………………………
उत्तर:
अशुद्ध रूप – शुद्ध रूप
बलकि – बल्कि
छतर – छत्र
सवाद – स्वाद
अनन्द – आनन्द
दुपहर – दोपहर।

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II. अन्, अनु, कु, दुर उपसर्ग लगाकर विपरीत शब्द बनाओ

शासन – ………………………
उपयोगी – ………………………
आवश्यकता – ………………………
आस्था – ………………………
रूप – ………………………
मति – ………………………
उपयोग – ………………………
दैव – ………………………
बल – ………………………
उत्तर:

अन् अनु कु दुर
अनावश्यकता कुशासन दुरुपयोग
अनास्था कुरूप दुर्दैव
कुमति दुर्बल
अनुपयोगी

III. परन्तु, कि, इसलिए, एवं योजकों का वाक्यों में प्रयोग करें।

उत्तर:
(क) परन्तु-तुम आ जाओ परन्तु मोहन को साथ मत लाना।
(ख) कि-वह जाएगा कि नहीं।
(ग) इसलिए-वहाँ जाकर तूने धोखा दिया इसलिए अब घर बैठो।
(घ) एवं-राम एवं श्याम दोनों भाई हैं।

IV. अति + अन्त = अत्यन्त। इसी प्रकार इन शब्दों के सन्धि विच्छेद करें।

अत्यधिक = ………………………
अत्याचार = ………………………
इत्यादि = ………………………
उत्तर:
अत्यधिक = अति + अधिक।
इत्यादि = इति + आदि।
अत्याचार = अति + आचार।

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PSEB 8th Class Hindi Guide तुम भी ऊँचे उठ सकते हो Important Questions and Answers

बहुविकल्पीय प्रश्न निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर सही विकल्प चुनकर लिखें

प्रश्न 1.
खजूर का पेड़ कैसा होता है ?
(क) बहुत ऊँचा
(ख) नाटा
(ग) सामान्य
(घ) मध्यम।
उत्तर:
बहुत ऊँचा।

प्रश्न 2.
खजूर के पेड़ की किस कवि ने निंदा की है ?
(क) कबीर
(ख) रहीम
(ग) रैदास
(घ) वृंद।
उत्तर:
रहीम।

प्रश्न 3.
खजूर की लकड़ी से कहाँ घर बनाए जाते हैं ?
(क) मरुस्थलों में
(ख) पहाड़ों में
(ग) समुद्र के किनारे
(घ) अधिक वर्षा के क्षेत्र में।
उत्तर:
मरुस्थल में।

प्रश्न 4.
खजूर के तनों से किन का निर्माण होता है ?
(क) नौकाओं का
(ख) छत्तों का
(ग) हथियारों का
(घ) हलों का।
उत्तर:
नौकाओं का।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 16 तुम भी ऊँचे उठ सकते हो

प्रश्न 5.
सूखी खजूर किस काम आती है ?
(क) औषधि के रूप में
(ख) जलाने के
(ग) पानी में भिगोने के
(घ) खेलने के।
उत्तर:
औषधि के रूप में।

प्रश्न 6.
खजूर की गुठलियाँ पीसकर किन्हें खुराक में मिलाकर खिलाते हैं ?
(के) ऊँटों को
(ख) घोड़ों को
(ग) गधों को
(घ) बैलों को।
उत्तर:
ऊँटों को।

तुम भी ऊँचे उठ सकते हो Summary

तुम भी ऊँचे उठ सकते हो पाठ का सार

खजूर का पेड़ बहुत ऊँचा होता है। वह न जीव-जगत् को छाया प्रदान करता है न ही उसकी लकड़ी अच्छी मानी जाती है। शायद इसी कारण रहीम ने खजूर की निन्दा की है। खजूर का एक उज्ज्वल पक्ष भी है। इसका भी अपना विशेष योगदान है। खजूर के पेड़ का लम्बा-ऊँचा आकार मनुष्य को उसके बौनेपन का आभास कराता है। इसके शिखर को देखने के लिए मनुष्य को अपनी टोपी और पगड़ी सम्भालनी पड़ती है। ये मनुष्य के लिए ऊँचा उठने का सन्देश देता है।

खजूर की जड़ और पत्ते मनुष्य की भलाई में प्रयुक्त होते हैं। अरब देशों में इसकी जड के स्वादिष्ट व्यंजन बनते हैं। मरुस्थल के लोग इसकी लकड़ी से घर बनाते हैं। इसके तनों से नौकाओं का भी निर्माण होता है। इसके वृक्ष से मीठा रस भी निकलता है। इसके रस से गुड़ भी बनाया जाता है। ताड़ी (शराब) भी बनती है।

खजूर के पत्तों से चटाइयाँ बनती हैं। पत्तों से झोंपड़ियाँ और विभिन्न प्रकार की हस्त शिल्प की सुन्दर वस्तुएँ भी तैयार होती हैं। खजूर के फल तो बहुत ही स्वादिष्ट होते हैं। इन्हें स्वास्थ्यवर्धक भी माना जाता है। खजूर की गुठलियाँ पीस कर ऊँटों की खुराक में मिलाई जाती हैं। अधिकतर खजूर के पेड़ शुष्क जलवायु, कड़ी धूप और अल्प वर्षा वाले तथा मरुस्थलीय क्षेत्रों में उगते हैं। इस दृष्टि से भी यह व्यक्ति को विपरीत परिस्थितियों में भी प्रसन्न रहने की प्रेरणा देता है। अतः खजूर एक सर्वगुण सम्पन्न पेड़ है। व्यक्ति को सन्देश देता है कि तुम भी ऊँचे उठ सकते हो।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 15 साइंस सिटी

Punjab State Board PSEB 8th Class Hindi Book Solutions Chapter 15 साइंस सिटी Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 8 Hindi Chapter 15 साइंस सिटी

Hindi Guide for Class 8 PSEB साइंस सिटी Textbook Questions and Answers

(क) भाषा – बोध

I. शब्दार्थ:

प्रयोगशाला = वह स्थान जहाँ पदार्थ विज्ञान, रसायन शास्त्र आदि विषयक तथ्यों को समझने, जानने या नयी बातों का पता लगाने के लिए प्रयोग किये जाते हैं।
प्रयत्न = कोशिश।
शिलान्यास = नींव पत्थर रखना।
अनिवार्य = आवश्यक।
बेमिसाल = अद्भुत, अतुलनीय।
रेटीना = आँख का भीतरी परदा।
अहम् = महत्त्वपूर्ण।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 15 साइंस सिटी

II. इन शब्दों के अर्थ लिखकर वाक्य प्रयोग करें

शिलान्यास – …………………..
भूमिका – …………………..
ग्लोब – …………………..
गैलरी – …………………..
प्रदर्शनी – …………………..
उत्तर:
शिलान्यास – नींव पत्थर रखना-साइंस सिटी का शिलान्यास 17 अक्तूबर, सन् 1997 को किया गया था।
भूमिका – रोल-साइंस सिटी वैज्ञानिक सोच पैदा करने में अहम भूमिका निभा रहा है।
ग्लोब – धरती का रूप-ग्लोब से किसी देश की स्थिति आसानी से पता चल जाती
गैलरी – दर्शकदीर्घा-कल हम आर्ट गैलरी देखने जाएंगे।
प्रदर्शनी – नुमाइश-प्रदर्शनी देखकर बच्चे बहुत प्रसन्न हुए।

(ख) विषय : बोध

I. इन प्रश्नों के उत्तर एक या दो वाक्यों में लिखें

(क) साइंस सिटी कहाँ पर स्थापित किया गया है ?
उत्तर:
साइंट सिटी पंजाब में जालन्धर-कपूरथला सड़क पर स्थापित किया गया है।

(ख) इसका शिलान्यास किसने, कब और किसके नाम पर किया था ? :
उत्तर:
इसका शिलान्यास 17 अक्तूबर, सन् 1997 में तत्कालीन प्रधानमन्त्री इन्द्र कुमार गुजराल के द्वारा उनकी माता श्रीमती पुष्पा गुजराल के नाम पर किया गया था।

(ग) स्पेस थियेटर और आम थियेटर में क्या अन्तर है ?
उत्तर:
स्पेस थियेटर गोलाकार है और इसमें आम थियेटर से 10 गुणा बड़ी स्क्रीन है। इसमें सूई गिरने की आवाज़ से बादल गरजने तक की आवाज़ साफ सुनाई देती है जबकि आम थियेटर में ऐसा नहीं होता।

(घ) लेज़र की खोज किसने की थी ?
उत्तर:
लेज़र की खोज इंजीनियर थोडर मेमाईन ने की थी।

(ङ) दिल का मॉडल कहाँ पर रखा हुआ है ?
उत्तर:
दिल का मॉडल साइंस एक्स पलोरियम नाम की इमारत की गैलरी अमेजिंग लिविंग मशीन में रखा हुआ है।

(च) पारदर्शी मनुष्य के थियेटर की क्या विशेषता है ?
उत्तर:
इसमें मानव शरीर की सभी क्रियाओं का पता लगता है और सी०टी० स्कैन तथा ऑपरेशन भी मॉडलों के जरिये खुद कर सकते हैं।

(छ) वरचुअल रिएलटी गैलरी में मनोरंजन कैसे होता है ?
उत्तर:
इसमें तितलियाँ सामने खड़े दर्शक की हिलजुल के साथ हिलती हैं तथा मेकअप द्वारा केवल दो मिनट में बूढे को जवान और जवान को बूढ़ा बनाया जा सकता है।

(ज) डायनासोर पार्क में डायनासोर के कितने मॉडल हैं ?
उत्तर:
डायनासोर पार्क में डायनासोर के 45 मॉडल हैं।

(झ) ऊर्जा पार्क में किन-किन शक्तियों का प्रदर्शन किया गया है ?
उत्तर:
ऊर्जा पार्क में सूर्य, जल, परमाणु शक्तियों का प्रदर्शन किया गया है।

(अ) डिफैंस गैलरी में कौन-कौन से टैंक हैं ?
उत्तर:
डिफैंस गैलरी में विजैन्ता टैंक है।

(त) टेलीस्कोप का प्रयोग किस लिए किया गया है ?
उत्तर:
टेलीस्कोप का प्रयोग दूर की वस्तु को साफ़ स्पष्ट देखने के लिए किया जाता है।

(थ) रेलवे गैलरी की क्या विशेषता है ?
उत्तर:
रेलवे गैलरी में दिल्ली की मैट्रो, जापान की बुलेट ट्रेन और कालका-शिमला रेल के मॉडल प्रदर्शित किए गए हैं।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 15 साइंस सिटी

II. इन-प्रश्नों के उत्तर चार या पाँच वाक्यों में लिखें

(क) फ्लाइट सिमुलेटर और अर्थक्यूक सिमूलेटर में क्या अन्तर है ?
उत्तर:
फ्लाइट सिमुलेटर एक ऐसी मशीन है जिस पर बैठ कर ऐसा लगता है जैसे हम आकाश में उड़ रहे हैं। यह मशीन वास्तव में उड़ती नहीं है। यह कहीं जाती भी नहीं है। यह अपनी जगह पर ही झूलती रहती है। क्यूक सिमूलेटर नामक मशीन पर बैठ कर भूकम्प के झटकों जैसा अहसास होता है। इसके सामने लगी स्क्रीन से रिक्टर स्केल पर अलगअलग प्रकार के झटके महसूस कर सकते हैं।

(ख) साइंस सिटी को देखने के बाद वैज्ञानिक सोच को ठोस आधार मिलता है ? क्या यह सही है ? अपने उत्तर की पुष्टि किसी एक उदाहरण द्वारा करें।
उत्तर:
साइंस सिटी को देखने के बाद वैज्ञानिक सोच को ठोस आधार निश्चित रूप से मिलता है। केवल कल्पना से ही किसी बात को ठीक प्रकार से नहीं समझा जा सकता। आकाश में सूर्य, चन्द्रमा, तारे आदि हम सब अपने बचपन से देखते आ रहे हैं लेकिन इनका अपने अक्ष के चारों ओर घूमते हुए सूर्य के इर्द-गिर्द घूमने के विषय में सब जानकर भी सच में वैसी कल्पना नहीं कर सकते जैसी पलैनिटेरियम के माध्यम से दिखाई दे जाती है। साइंस सिटी तो वैज्ञानिक तथ्यों को एकदम स्पष्ट कर देती है।

(ग) साइंस सिटी पंजाब का गौरव है। इसने पंजाब राज्य का मान बढ़ाया है। अपने उत्तर की पुष्टि करें।
उत्तर:
साइंस सिटी ने वास्तव में ही पंजाब का गौरव बढ़ाया है। पूरे देश में ऐसी राष्ट्रीय प्रयोगशालाएँ गिनी-चुनी ही हैं। देश के छात्र-छात्राएँ ही नहीं बल्कि सभी आयु वर्गों के लोग इससे ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं। वे प्रकृति के उन रहस्यों से इससे परिचित हो सकते हैं जिनकी कल्पना भी सरल नहीं थी। यह ज्ञान के साथ-साथ मनोरंजन का आधार भी है।

(घ) साइंस सिटी में आपको सबसे अच्छा क्या लगा ? संक्षेप में लिखें।
उत्तर:
साइंस सिटी अपने आप में अनूठी है जिसका हर हिस्सा ज्ञान से भरा हुआ है पर मुझे इसमें बनाई गई झील के बीचों बीच टापू सबसे अच्छा लगा जिस पर तरह-तरह के छोटे-बडे डायनोसोर मॉडल स्थापित किए गए हैं। वे सभी को अपनी ओर आकृष्ट करते हैं। डायनासोर के अंत को दर्शाने वाला ज्वालामुखी भी बहुत सुन्दर है। आवाज़ों के आधार पर हिलते-डुलते डायनासोर बहुत प्रभावशाली और आकर्षक हैं।

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(ग) व्यावहारिक व्याकरण

I. इन शब्दों के विपरीतार्थक शब्द लिखें

आज़ाद = …………………..
अनिवार्य = …………………..
दायें = …………………..
साफ = …………………..
असली = …………………..
मिसाल = …………………..
विस्तार = …………………..
उत्तर:
आज़ाद = गुलाम
अनिवार्य = ऐच्छिक
दायें = बायें
साफ = गंदा
असली = नकली
मिसाल = बेमिसाल
विस्तार = संकुचन।

II. इन शब्दों में बतायें कि ‘र’ रेफ है या ‘र’ पदेन

प्रदर्शनी = …………………..
ग्रह = …………………..
आकर्षण = …………………..
सिर्फ = …………………..
अनिवार्य = …………………..
स्क्रीन = …………………..
उत्तर:
प्रदर्शनी = रेफ
ग्रह = रेफ
आकर्षण = रेफ
सिर्फ = रेफ
अनिवार्य = रेफ
स्क्रीन = पदेन।

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III. निम्नलिखित समास शब्दों का विग्रह करें

समास – विग्रह
प्रयोगशाला = …………………..
समाज सेवा = …………………..
पंजाब = …………………..
बेमिसाल = …………………..
परमाणु शक्ति = …………………..
उत्तर:
प्रयोगशाला = प्रयोग के लिए शाला
समाज सेवा = समाज की सेवा
पंजाब = पाँच (पंज) आबों का समाहार
बेमिसाल = मिसाल नहीं है जिसकी
परमाणु शक्ति = परमाणु की शक्ति।

IV. निम्नलिखित शब्दों को शुद्ध करके लिखें-

विज्ञानिक, अनीवार्य, आकरषण, अधारित, अवाज़, विषेश, केन्दर, वायू, परदर्शनी, जलवायू, उदेश्य, नजदीक, सिदाँध, जाहज, आजाद, शुरूआत।

उत्तर
विज्ञानिक = वैज्ञानिक
अनीवार्य = अनिवार्य
आकरषण = आकर्षण
अधारित = आधारित
अवाज़ = आवाज़
विषेश = विशेष
केन्दर = केन्द्र
वायू = वायु
परदर्शनी = प्रदर्शनी
जलवायू = जलवायु
उदेश्य = उद्देश्य
नजदीक = नज़दीक
सिदाँध = सिद्धांत
जाहज = जहाज़
आजाद = आजाद
शुरूआत = शुरुआत।

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V. इन शब्दों में से मूल शब्द अलग करके लिखें

वैज्ञानिक = …………………..
राष्ट्रीय = …………………..
स्थापित = …………………..
स्वास्थ्य = …………………..
प्रदर्शनी = …………………..
आकाशीय = …………………..
ऊर्जा = …………………..
उत्तर:
वैज्ञानिक = ज्ञान
राष्ट्रीय = राष्ट्र
स्थापित = स्था
स्वास्थ्य = स्वस्थ
प्रदर्शनी = दर्शन
आकाशीय = आकाश
ऊर्जा = ऊर्ज

(घ) रचना बोध

I. अपने मित्र/सहेली को साइंस सिटी देखने के लिए उत्साहित करते हुए. पत्र लिखें।

उत्तर:
18, मॉडल टाऊन,
जालन्धर।
10 अगस्त, 20….
प्रिय मनप्रीत,

आशा है कि तू ठीक होगी। मुझे पता है कि तेरी मासिक परीक्षाएँ पिछले सप्ताह समाप्त हो गई थीं। तू अपने स्वभाव के अनुसार फिर से किताबों में डूबने ही वाली होगी पर मैंने तझे एक विशेष कारण से यह पत्र लिखा है। जालन्धर-कपूरथला सड़क पर बहुत बड़े क्षेत्रफल में बने साइंस सिटी को एक बार अवश्य देख कर आ। जिस दिन भी तुझे समय मिले तु माता-पिता जी को साथ लेकर वहाँ जा। जो कुछ तुमने अब तक अपनी किताबों में पढ़ा है उसे अपनी आँखों से वहाँ देख कर जो मज़ा आएगा उसे जुबान से प्रकट नहीं किया जा सकेगा। पूरे एक सौ करोड़ रुपये की लागत से बना यह अपने आप में अनूठा है। इसका गोलाकार थियेटर इतना अद्भुत है कि दिखाई जाने वाली फिल्म में तू एक सूई गिरने की आवाज़ तक सुन सकेगी। तारामंडल, ग्रह-उपग्रह और मंदाकनियाँ अद्भुत ढंग से घूमती दिखाई देती हैं। साइंस और भूगोल की पुस्तकों में जो पढ़ा है उसे अपनी आँखों से देखना अद्भुत-सा लगता है। एक मशीन पर बैठ कर तो ऐसा लगता है जैसे हम आकाश में उड़ रहे हों जबकि मशीन कहीं नहीं उड़ती और न कहीं जाती है। भूकंप के झटके को भी एक मशीन महसूस करा देती है। रंगबिरंगी लेज़र किरणों का शो तो मन को मोह लेता है। ‘अमेजिंग लिविंग मशीन’ के द्वारा मानव शरीर की संरचना की वैसी झलक मिल जाती है जैसी हमारी किताबों में नहीं लिखी हुई। एक गैलरी में तितलियाँ ऐसे लगती हैं जैसे हमारी इच्छा से हिल रही हों। वे तो हमारे ऊपर आ कर बैठती-सी लगती हैं। डायनासोर पार्क के मॉडल तो जूरैसिक पार्क फ़िल्म को याद करा देते हैं। तरह-तरह के हवाई जहाज़ टैंक हमारे ज्ञान को बढ़ाते ही नहीं बल्कि मोह लेते हैं। मेरे कहने या लिखने से तुझे वह मज़ा नहीं आ सकता जितना तुझे इसे देखने से आएगा। तू यहाँ जरूर जाना। जब मैं इसे देख रही थी तब तू मुझे बार-बार याद आ रही थी। इसे देखने के बाद तू मुझे पत्र लिखना और बताना कि वहाँ तुझे सब से अच्छा क्या लगा। माता-पिता जी को मेरी ओर से नमस्ते कहना।

तुम्हारी सखी,
सिमरन।

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II. अपने विज्ञान के अध्यापक को साथ लेकर साइंस सिटी देखकर आयें और अपने अनुभव डायरी में लिखें।

उत्तर:
अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से स्वयं कीजिए।

PSEB 8th Class Hindi Guide साइंस सिटी Important Questions and Answers

बहुविकल्पीय प्रश्न निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर सही विकल्प चुनकर लिखें

प्रश्न 1.
‘साइंस सिटी’ का निर्माण कहाँ हुआ है ?
(क) जालंधर-कपूरथला सड़क पर
(ख) जालंधर-अमृतसर सड़क पर
(ग) जालंधर-लुधियाना सड़क पर
(घ) जालंधर-फिरोजपुर सड़क पर।
उत्तर:
जालंधर-कपूरथला सड़क पर।

प्रश्न 2.
साइंस सिटी कितने एकड़ भूमि पर बनाया गया है ?
(क) 70
(ख) 71
(ग) 72
(घ) 73.
उत्तर:
72.

प्रश्न 3.
साइंस सिटी का शिलान्यास कब हुआ था ?
(क) 17-10-1997
(ख) 17-10-1996
(ग) 17-10-1995
(घ) 17-10-1994.
उत्तर:
17-10-1997.

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 15 साइंस सिटी

प्रश्न 4.
साइंस सिटी को जनता के लिए कब खोला गया ?
(क) 19-3-2001
(ख) 19-3-2003
(ग) 19-3-2005
(घ) 19-3-2007.
उत्तर:
19-3-2005.

प्रश्न 5.
पुष्पा-गुजराल साइंस सिटी में किस थियेटर का विशेष महत्त्व है ?
(क) अर्थ
(ख) स्पेस
(ग) नाट्य
(घ) गोष्ठी।
उत्तर:
स्पेस।

प्रश्न 6.
स्पेस थियेटर किस आकार का है ?
(क) गोल
(ख) आयताकार
(ग) चोकोर
(घ) तिकोन।
उत्तर:
गोल।

प्रश्न 7.
ग्लोब कितनी लाख विभिन्न रंगों की टाइलों से बना है ?
(क) बीस
(ख) पच्चीस
(ग) तीन
(घ) पैंतीस।
उत्तर:
पच्चीस।

प्रश्न 8.
साइंस सिटी में डायनासोर के कितने मॉडल हैं ?
(क) 45
(ख) 50
(ग) 40
(घ) 55.
उत्तर:
45.

प्रश्न 9.
जापान की किस ट्रेन का मॉडल साइंस सिटी में है ?
(क) मैट्रो
(ख) बुलेट
(ग) मिनी
(घ) स्पेस।
उत्तर:
बुलेट।

प्रश्न 10.
साइंस सिटी में रात के समय टेलीस्कोप से किन पिंडों को दिखाया जाता
(क) पर्यावरणीय
(ग) आकाशीय
(ख) खगोलीय
(घ) जलीय।
उत्तर:
आकाशीय।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 15 साइंस सिटी

साइंस सिटी Summary

साइंस सिटी पाठ का सार

हमारे देश की स्वतन्त्रता के बाद देशवासियों को वैज्ञानिक सोच प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय स्तर की अनेक प्रयोगशालाएं विभिन्न नगरों में स्थापित की गई थीं। पंजाब सरकार ने जालन्धर-कपूरथला सड़क पर पंजाब और केन्द्र सरकार ने संयुक्त रूप से 72 एकड़ भूमि पर एक सौ करोड़ रुपए की लागत से साइंस सिटी का निर्माण किया था। ‘पुष्पा गुजराल साइंस सिटी’ नामक इस प्रयोगशाला का शिलान्यास 17 अक्तूबर, सन् 1997 में किया गया था और इसे साधारण जनता के लिए 19 मार्च, सन् 2005 को खोल दिया गया था। इसमें स्पेस थियेटर विशेष महत्त्व का है। यह गोल आकार का है जिसके बाहर 25 लाख विभिन्न रंगों की टाइलों से ग्लोब बनाया गया है। इसमें सामान्य से 10 गुणा बड़ी स्क्रीन और अति उच्च क्षमता के ध्वनि यंत्र लगाए गए हैं। इसी में ग्रहों, तारा मंडल और मंदाकनियों की जानकारी दी जाती है। फ्लाइट सिम्यूलेटर नामक मशीन से आकाश में उड़ने का अनुभव प्राप्त किया जा सकता है। इसमें अर्थक्यूक सिम्यूलेटर मशीन की सहायता से भूकम्प के असली झटकों का अहसास किया जा सकता है। भूकम्प आते ही किन सावधानियों का प्रयोग किया जाना चाहिए, उसे यहाँ अच्छे ढंग से सिखाया जाता है। विशेष किस्म की ऐनकों से थ्री डी फिल्म देखने का अनूठा अनुभव भी यहाँ किया जा सकता है। लेज़र किरणों से विशेष प्रकार का शो किया जाता है। सन् 1960 में थोडर मेमाईन के द्वारा खोजी गई लेज़र किरणों से आँख के उखड़े हुए रैटीना को भी वापस अपने स्थान पर जोड़ा जा सकता है। यहाँ बनाए गए ‘अमेजिंग लिविंग मशीन’ नामक गैलरी में प्रवेश करते ही 12 फुट ऊँचे दिल का मॉडल दिखाई देता है और हृदय की धड़कन सुनाई देती है। पारदर्शी मनुष्य के थियेटर में मानव शरीर के सभी अंमों की प्रक्रिया देखी और समझी जा सकती है। यहाँ सी०टी० स्कैन और ऑपरेशन भी मॉडलों की सहायता से किए जा सकते हैं। एच०आई०वी० एड्स से संबंधित एक अलग गैलरी बनाई गई है। ‘फन साइंस नाम’ की गैलरी में मूल वैज्ञानिक सिद्धान्तों को मनोरंजक ढंग से समझाया जाता है। वोर टैक्स की घूमन-धेरी से एक जगह खड़े रह कर भी घूमने का अनुभव किया जा सकता है। वरचुअल रिएलटी गैलरी और मेकअप के द्वारा अद्भुत अनुभव प्राप्त किए जा सकते हैं। यहाँ एक झील के बीचों-बीच टापू पर डायनासोर के 45 मॉडल भी हैं जो अपनी ओर खेलने के लिए बुलाते-से प्रतीत होते हैं। ज्वालामुखी का बहुत बड़ा मॉडल विशेष रूप से आकर्षक है।

‘साइंस सिटी’ के एक भाग में सौर ऊर्जा का ही प्रयोग किया जाता है। पनशक्ति केन्द्र में रणजीत सागर डैम से विद्युत् उत्पत्ति का तरीका दिखाने के साथ-साथ परमाणु शक्ति के उपयोगों को भी समझाया गया है। डिफैंस गैलरी में मिगन्टड, विजैन्ता टैंक, एल-टी स्वाति हवाई जहाज़ आदि रखे गए हैं। रात के समय आकाशीय पिंडों को टेलीस्कोप से दिखाने का प्रबन्ध किया गया है। पोलर सैटेलाइट लाँचिंग विहेकल का मॉडल उड़ान भरता हुआ दिखाई देता है। साइंस ऑफ़ स्पोर्ट्स विभिन्न खेलों के वैज्ञानिक सिद्धान्तों को प्रकट करता है। जापान की बुलेट ट्रेन, कालका-शिमला रेल, दिल्ली की मैट्रो आदि के मॉडल रेलवे गैलरी में प्रदर्शित किए गए हैं। लाइफ श्रू दी एजिज़ से मनुष्य की विकास यात्रा को दर्शाया जाता है। जलवायु परिवर्तन से संबंधित शो भी इसमें दिखाए जाते हैं। वास्तव में ही यह साइंस सिटी सभी के आकर्षण का केन्द्र बनता जा रहा है।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 10 अंगुलिमाल

Punjab State Board PSEB 8th Class Hindi Book Solutions Chapter 10 अंगुलिमाल Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 8 Hindi Chapter 10 अंगुलिमाल

Hindi Guide for Class 8 PSEB अंगुलिमाल Textbook Questions and Answers

(क) भाषा बोध

I. शब्दार्थ

निरन्तर = लगातार
चकित = हैरान
सहसा = अचानक
दृष्टि = नज़र
युक्ति = तरकीब
तत्काल = उसी क्षण
जागृति = जागरण,सचेत
विकराल = भयंकर
निहत्था = बिना हथियार के
घृणा = नफ़रत
धर्मोपदेश = (धर्म + उपदेश)धर्म के उपदेश
दैत्य = राक्षस

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 10 अंगुलिमाल

II. इन मुहावरों के अर्थ स्पष्ट करते हुए वाक्यों में प्रयोग करें :

धीरज बँधाना = ……………………..
दृष्टि डालना = ……………………..
घिग्घी बँध जाना = ……………………..
रोम-रोम से प्रेम बरसना = ……………………..
आँखों से दया टपकना = ……………………..
जादू का-सा असर होना = ……………………..
छुट्टी लेना = ……………………..
तेज से काँपना = ……………………..
उत्तर:
1. धीरज बँधाना = साहस बढ़ाना।।
वाक्य – माँ ने तब मेरा धीरज बँधाया था जब मैं अपने जीवन से लगभग हार ही चुका था।

2. दृष्टि डालना = देखना।
वाक्य – एक बार उस गरीब की ओर भी अपनी दृष्टि डालना ना भूलना।

3. घिग्घी बँध जाना = भय के कारण बोल ना पाना।
वाक्य – जंगल में भयंकर भालू को अपनी ओर देख कर राघव की घिग्घी बँध गई थी।

4. रोम-रोम से प्रेम बरसना = प्रेम भाव को व्यक्त करना।
वाक्य – श्रद्धालुओं के प्रति महात्मा जी के रोम-रोम से प्रेम बरस रहा था।

5. आँखों से दया टपकना = दया के भाव प्रकट होना।
वाक्य – भिखारी की दशा को देख मेरी दादी की आँखों से दया टपक रही थी।

6. जादू का-सा असर होना = तत्काल प्रभाव पड़ना।
वाक्य – हकीम जी की एक ही पुड़िया से मेरे पेट दर्द पर जादू का-सा असर हुआ है।

7. छुट्टी लेना = काम छोड़ना।
वाक्य – बुढ़ापे में भी अनेक लोग अपने काम धंधे से छुट्टी नहीं लेते।

8. तेज से काँपना = बल से भयभीत हो जाना।
वाक्य – बाली भगवान राम के तेज से काँप उठा था।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 10 अंगुलिमाल

(ख) विषय – बोधं

I. उपयुक्त शब्द भरकर वाक्य पूरा करें:

(क) महान् पुरुषों को धर्म का प्रचार करने के लिए …… नगर-नगर और गाँव-गाँव घूमना पड़ा।
(ख) महात्मा बुद्ध ने राजा को ……… बँधाया।
(ग) एक …….. मूर्ति सामने खड़ी थी।
(घ) मैं तो ……. गया, भला तुम कब …….।
(ङ) जीवन दु:ख रूप है और तुम उसे अपनी ……… और बढ़ा रहे हो।
(च) यह सत्य, दया और प्रेम के भावों की क्रूरता, घृणा और हिंसा पर …….. थी।
उत्तर:
(क) निरन्तर
(ख) धीरज
(घ) ठहर, ठहरोगे
(ङ) करनी से
(च) विजय।

II. इन प्रश्नों के उत्तर एक या दो वाक्यों में लिखें :

(क) प्रसेनजित कहाँ का राजा था?
उत्तर:
प्रसेनजित कौशल प्रदेश का राजा था। श्रावस्ती उसकी राजधानी थी।

(ख) प्रसेनजित किसका शिष्य था?
उत्तर:
प्रसेनजित महात्मा बुद्ध का शिष्य था।

(ग) प्रसेनजित ने महात्मा बुद्ध को अपनी व्याकुलता का क्या कारण बताया?
उत्तर:
प्रसेनजित ने महात्मा बुद्ध को अपनी व्याकुलता इसलिए बताई थी क्योंकि वह अंगुलिमाल की क्रूरता से व्याकुल हो गया था। अंगुलिमाल उसकी प्रजा को बहुत परेशान कर रहा था। उसने उन्हें बताया था किवह उस डाकू से तंग आ चुका था और उसे सहन नहीं कर सकता था।

(घ) अंगुलिमाल कौन था?
उत्तर:
अंगुलिमाल एक डाकू था। जब वह किसी की हत्या करता था तो उसकी अंगुली काट कर अपनी माला में पिरो लिया करता था।

(ङ) अंगुलिमाल ने क्या प्रतिज्ञा कर रखी थी?
उत्तर:
अंगुलिमाल ने प्रतिज्ञा कर रखी थी कि वह एक हज़ार व्यक्तियों की हत्या करेगा।

(च) महात्मा बुद्ध ने प्रसेनजित को क्या विश्वास दिलाया?
उत्तर:
महात्मा बुद्ध ने प्रसेनजित को विश्वास दिलाया था कि वे डाकू को शांति, प्रेम और अहिंसा का पाठ पढ़ायेंगे।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 10 अंगुलिमाल

II. इन प्रश्नों के उत्तर चार-पाँच वाक्यों में लिखें

(क) अंगुलिमाल का नाम ‘अंगुलिमाल’ क्यों पड़ा ?
उत्तर:
अंगुलिमाल डाकू बहुत क्रूर था। वह लोगों की लूट-पाट तो करता ही था पर उनकी हत्या भी कर देता था। वह मारे गए लोगों की एक-एक अंगुली काट कर अपने गले में डाली गई माला में पिरो लेता था। इससे उसे पता रहता था कि उसने कितने लोगों की हत्या कर दी थी। इसी कारण उसका नाम अंगुलिमाल पड़ा था।

(ख) अंगुलिमाल को जब महात्मा बुद्ध ने देखा तो वह कैसा दिखाई दे रहा था?
उत्तर:
अंगुलिमाल को जब महात्मा बुद्ध ने देखा तो वह अति विकराल था। ऊँचा कद, काला शरीर, भयंकर चेहरा और लाल आँखें थीं। उसके उठे हुए बाल थे, बड़ी-बड़ी मूंछे थीं। उसके हाथ में कटार थी। वह दैत्य के समान दिखाई देता था। उसके गले में अंगुलियों की माला पड़ी हुई थी।

(ग) मैं तो ठहर गया, भला तुम कब ठहरोगे? इस पंक्ति का आशय बतायें।
उत्तर:
महात्मा बुद्ध ने डाकू अंगुलिमाल से कहा था कि वे तो ठहर गए थे पर वह कब ठहरेगा। इसका आशय था कि महात्मा बुद्ध तो अपना राज-पाट त्याग कर समाज की सेवा में लग गए थे, सब का भला करते थे पर वह डाकू कब बुरे रास्ते से दूर होगा। वह कब लोगों की लूट-पाट और हत्या के रास्ते से दूर होगा। वह बुरे काम करने से कब परे हटेगा।

(घ) अंगुलिमाल महात्मा बुद्ध के चरणों में क्यों गिर पड़ा?
उत्तर:
अंगुलिमाल महात्मा बुद्ध से बहुत प्रभावित हुआ था। अन्य लोग तो डाकू को देखते ही काँप उठते थे पर वे निर्भयतापूर्वक उसके सामने खड़े थे। महात्मा बुद्ध के शब्दों का उस पर सीधा असर हुआ था। उसने अपने घुटने टेक दिए थे और उन्हें अपना गुरु मान कर उनके चरणों में गिर पड़ा था।

(ङ) महात्मा बुद्ध ने डाकू अंगुलिमाल का कठोर हृदय कैसे जीत लिया?
उत्तर:
महात्मा बुद्ध ने डाकू का कठोर हृदय अपने मानसिक बल, साहस और सच्चाई के मार्ग पर चलते हुए जीता था। उन्होंने सच्चाई, दया और प्रेम के भावों से क्रूरता, घृणा और अन्याय पर विजय प्राप्त की थी और कठोर हृदयी डाकू के हृदय पर विजय प्राप्त कर ली थी।

(ग) व्यावहारिक – व्याकरण

I. पर्यायवाची शब्द लिखें :

राजा = ……………………..
मनुष्य = ……………………..
विजय = ……………………..
जंगल = ……………………..
राक्षस = ……………………..
चरण = ……………………..
उत्तर:
राजा = राजन, नृप, भूप, नरेश, सम्राट्, नरपति।
विजय = जीत, जय, जीतना, पछाड़ना।
राक्षस = दैत्य, निशाचर, दनुज, असुर।
मनुष्य = मानव, मनुज, इन्सान, आदमी।
जगंल = अरण्य, वन, कानन, विपिन।
चरण = पैर, पाद, पद, पाँव।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 10 अंगुलिमाल

II. ‘अ’ और ‘अन’ लगाकर विपरीत अर्थ वाले शब्द बनायें :

‘अ’
समर्थ = असमर्थ
शुद्ध = ……………………..
शान्ति = ……………………..
आदर = ……………………..
हिंसा = ……………………..

‘अन’
इच्छा = अनिच्छा
इष्ट = ……………………..
सत्य = ……………………..
उचित = ……………………..
आस्था = ……………………..

उत्तर:
‘अ’
समर्थ = असमर्थ
शुद्ध = अशुद्ध
शान्ति = अशान्ति
सत्य = असत्य
हिंसा = अहिंसा

‘अन’
इच्छा = अनिच्छा
इष्ट = अनिष्ट
आदर = अनादर
उचित = अनुचित
आस्था – अनास्था

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III. वाक्यांशों के लिए एक शब्द लिखें :

जिसकी आत्मा महान् हो
हिंसा करने वाला
जो निरन्तर घूमता हो ————————-
जिसके हाथ में कोई अस्त्र न हो ————————-
अत्याचार करने वाला ———————–
किसी के उपकार को मानने वाला ————————–
धर्म का उपदेश देने वाला ————————
उत्तर:
जिसकी आत्मा महान् हो = महात्मा
हिंसा करने वाला = हिंसक
जो निरन्तर घूमता हो =घुमक्कड़, यायावर
जिसके हाथ में कोई अस्त्र न हो = नि:शस्त्र
अत्याचार करने वाला = अत्याचारी
किसी के उपकार को मानने वाला = कृतज्ञ
धर्म का उपदेश देने वाला = धर्मोपदेशक।

IV. इनमें से संज्ञा व विशेषण शब्दों को अलग-अलग करके लिखें

(1) ऊँचा कद, काला शरीर, विकराल-चेहरा, लाल आँखें, उठे हुए केश, बड़ी-बड़ी मूंछे और हाथ में तेज़ कटार।
संज्ञा शब्द : ……………………..
विशेषण शब्द : ……………………..

(2) महात्मा बुद्ध ने अपनी शान्त दृष्टि उस पर डाली।
संज्ञा शब्द : ……………………..
विशेषण शब्द : ……………………..

(3) महात्मा बुद्ध ने भयंकर डाकू के कठोर हृदय को जीत लिया।
संज्ञा शब्द : ……………………..
विशेषण शब्द : ……………………..

(4) मैं एक हज़ार मनुष्यों की हत्या करूँगा।
संज्ञा शब्द : ……………………..
विशेषण शब्द : ……………………..

उत्तर:
संज्ञा – विशेषण
1. कद – उँचा
शरीर – काला
चेहरा – विकराल
आँखें – लाल
केश – उठे हुए
मूंछे – बड़ी-बड़ी
हाथ/कटार – तेज़

2. बुद्ध – महात्मा
दृष्टि – शांत

3. बुद्ध – महात्मा
डाकू – भयंकर
हृदय – कठोर

4. मनुष्यों – हजार

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V. निर्देशानुसार वाक्य को बदलकर दोबारा लिखें

(1) वह प्रजा को बहुत कष्ट पहुँचाता है। (भूतकाल में बदलें)
(2) डाकू महात्मा के तेज़ से काँप रहा था। (वर्तमान में बदलें)
(3) डाकू के पास कटार थी, भाला था और महात्मा निहत्थे थे। (वर्तमान काल में बदलें)
(4) गाँव के गाँव उजड़ गये थे। (भविष्यतकाल में बदलें)
(5) इसे मैं सहन नहीं कर सकता। (भविष्यतकाल में बदलें)
(6) जंगल के बाहर एक पहरेदार नियुक्त होगा। (भूतकाल में बदलें)
(7) वह उँगलियों की माला पहनेगा। (भूतकाल में बदलें)
उत्तर:
(1) वह प्रजा को बहुत कष्ट पहुँचाता था।
(2) डाकू महात्मा के तेज़ से काँप रहा है।
(3) डाकू के पास कटार है, भाला है और महात्मा निहत्थे हैं।
(4) गाँव के गाँव उजड़ जाएंगे।
(5) इसे मैं सहन नहीं कर सकूँगा।
(6) जंगल के बाहर एक पहरेदार नियुक्त था।
(7) वह उँगलियों की माला पहने हुआ था।

PSEB 8th Class Hindi Guide अंगुलिमाल Important Questions and Answers

बहुविकल्पीय प्रश्न निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर सही विकल्प चुनकर लिखें-

प्रश्न 1.
महात्मा बुद्ध के मन में किस की भलाई की इच्छा रहती थी
(क) अपनी
(ख) परिवार की
(ग) पत्नी की
(घ) संसार भर की।
उत्तर:
संसार भर की।

प्रश्न 2.
महात्मा बुद्ध लगभग कितने वर्षों तक संसार के कल्याण के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान तक घूमते रहे
(क) 40
(ख) 42
(ग) 43
(घ) 45.
उत्तर:
45.

प्रश्न 3.
कौशल की राजधानी कौन-सी थी ?
(क) पाटन
(ख) श्रावस्ती
(ग) अमरावती
(घ) अयोध्या।
उत्तर:
श्रावस्ती।

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प्रश्न 4.
अंगुलिमाल कौन था ?
(क) राजा
(ख) मंत्री
(ग) डाकू
(घ) संत।
उत्तर:
डाकू।

प्रश्न 5.
महात्मा बुद्ध ने अंगुलिमाल को किस बंधन से छुट्टी लेने के लिए कहा ?
(क) परिवार के
(ख) हिंसा के
(ग) अहिंसा के
(घ) समाज के।
उत्तर:
हिंसा के।

प्रश्न 6.
अंगुलिमाल की काया कैसी थी ?
(क) विकराल
(ख) सामान्य
(ग) आकर्षक
उत्तर:
विकराल।

प्रश्न 7.
अंगुलिमाल ने कितने लोगों की हत्या की प्रतिज्ञा की थी ?
(क) एक सौ
(ख) पांच सौ
(ग) एक हजार
(घ) दो हज़ार।
उत्तर:
एक हज़ार।

प्रश्न 8.
अंगुलिमाल मारे गए लोगों के किस अंग की माला पहनता था ?
(क) सिर
(ख) हाथ
(ग) अंगुलि
(घ) कान।
उत्तर:
अंगुलि।

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अंगुलिमाल Summary

अंगुलिमाल कहानी का सार

महात्मा बुद्ध संसार-भर की भलाई की इच्छा अपने मन में रखते थे। इसी कारण वे लगभग पैंतालिस वर्ष तक एक स्थान से दूसरे स्थान तक घूमते रहे थे । एक बार महात्मा बुद्ध घूमते-घूमते कौशल की राजधानी श्रावस्ती गए। वहाँ का राजा प्रसेनजित उनका शिष्य था। बुद्ध धर्मोपदेश देने वहाँ जाते थे। इस बार जब वे वहाँ गए तो राजा को परेशान पाया। पूछने पर उन्हें बताया कि अंगुलिमाल नामक डाकू मेरी प्रजा को परेशान कर रहा है। महात्मा बुद्ध ने राजा को धैर्य बंधाया और उस पर विजय प्राप्त करने का विश्वास दिलाया। वह डाकू बड़ा खतरनाक था। जनता में आंतक फैला हुआ था। वह सैंकड़ों लोगों को मार चुका था। हत्याओं की गिनती के लिए उसने हर एक की अंगुली काट कर माला बनाई हुई थी। वह माला उसने गले में पहन रखी थी। इसी कारण उसका नाम भी अंगुलिमाल रखा गया था। महात्मा बुद्ध राजा से विदा लेकर उस जगंल की ओर चले जहाँ वह डाकू रहता था। महात्मा बुद्ध अभी कुछ दूरी पर ही गए थे कि उन्हें जोर की आवाज़ सुनाई दी -‘ठहरो’। बुद्ध ने मुड़ कर देखा तो झाड़ियों को चीरता हुआ वह विकराल डाकू वहाँ आ पहुँचा जिसे देखते ही महात्मा बुद्ध समझ गए कि यह वही अंगुलिमाल डाकू है।

महात्मा बुद्ध ने प्यार से अंगुलिमाल की ओर देखा और कहा,”मैं तो ठहर गया तुम कब ठहरोगे।” अंगुलिमाल हैरान था कि यह कौन आ गया जो मेरे आगे डरने की बजाए मुस्कुरा रहा है। महात्मा बुद्ध फिर बोले , “बोल कब ठहरेगा ” महात्मा बुद्ध के इन शब्दों का उस पर जादू-सा प्रभाव पड़ा और वह घुटने टेक उनके आगे बोला ,” मैं आपकी बात नहीं समझा।” महात्मा बुद्ध ने उसे समझाया कि मैं तो इस संसार के दु:खों के बन्धन से मुक्त हो गया हूँ परन्तु तुम इस मार-काट के बन्धन से कब छुट्टी लोगे? यह सुनकर डाकू बुद्ध के पैरों पर गिर पड़ा और बोला ,”महात्मन् मुझे सही मार्ग बताइए।” महात्मा बुद्ध ने उसे शान्ति, दया तथा प्रेम का पाठ पढ़ा कर उसे अपना शिष्य बनाया और अपने प्रेम, दया और निर्मल हृदय से डाकू के कठोर हृदय को जीत लिया। इसके बाद उसने कभी भी कोई मारकाट एवं लूट-पाट का काम नहीं किया।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 12 माँ का प्यार

Punjab State Board PSEB 8th Class Hindi Book Solutions Chapter 12 माँ का प्यार Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 8 Hindi Chapter 12 माँ का प्यार

Hindi Guide for Class 8 PSEB माँ का प्यार Textbook Questions and Answers

(क) भाषा – बोध

शब्दार्थ:

शयन कक्ष = सोने का कमरा।
सुसज्जित = सजाया हुआ।
वत्स = पुत्र।
साम्राज्य = अति विशाल राज्य।
चेष्टा = प्रयास, कोशिश।
आन = मर्यादा, इजत।
दूभर = कठिन, मुश्किल।
यवन = विदेशी। पेट की ज्वाला = भूख।
नरेश = राजा।
प्रस्थान = जाना।
घातक = हमला करने वाला।
आभारी = उपकार को मानने वाला।
पटाक्षेप = पर्दे का गिरना।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 12 माँ का प्यार

II. इन शब्दों और मुहावरों के अर्थ लिखते हुए वाक्यों में प्रयोग करें :

मृत्यु-दंड = ……………….
सत्यवादी = ……………….
कसर न उठा रखना = ……………….
प्राण न्योछावर करना = ……………….
पेट भर अन्न = ……………….
पेट की ज्वाला = ……………….
उज्वल = ……………….
आभारी = ……………….
अगाध = ……………….
हिम्मत न पड़ना = ……………….
जीवन दान = ……………….
आँखें खुलना = ……………….
वीरता कूट-कूटकर भरी होना = ……………….
उत्तर:
मृत्यु दंड = मौत की सज़ा – देश के साथ गद्दारी करने के अपराध में राजा ने अपने ही सैनिक को मृत्यु दंड दे दिया था।
सत्यवादी = सच बोलने वाला – राजा हरिश्चन्द्र को सभी लोग अब भी सत्यवादी कहकर सम्मान देते हैं। ।
कसर न उठा रखना = कोई कमी न रखना – नौकर ने कहा कि वह सबकी सेवा करने में कोई कसर न उठा रखेगा।
प्राण न्योछावर करना = मर जाना – देश के लिए हज़ारों-लाखों युवकों ने अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे।
पेट भर अन्न = भूख मिटाने के लिए अनाज – मज़दूर और किसान दिन-रात कठोर परिश्रम करके भी पेट भर अन्न प्राप्त नहीं कर पाते।
पेट की ज्वाला = पेट की भूख-मनुष्य से पेट की आग कौन – सा अपराध नहीं कराती ?
उज्वल = प्रकाशमय – ईश्वर आपको उज्ज्वल भविष्य प्रदान करे।
आभारी = कृतार्थ – मैं आपकी इस दयालुता के लिए आभारी हूँ।
अगाध = अत्यधिक, बहुत – हे भगवान! आपने मुझ पर अपनी अगाध कृपा की है।
हिम्मत न पड़ना = साहस न होना – मुझ में कभी भी इतनी हिम्मत न पड़ती यदि मुझे तुम्हारा सहारा न मिलता।
जीवन दान = जीवन प्रदान करना – भगवान् ने मुझे इस भयंकर दुर्घटना से बचाकर जीवन दान प्रदान किया है।
आँखें खुलना = होश आना – अपने ही रिश्तेदारों के द्वारा की गई बेईमानी को देखकर अनुजा की तो आँखें खुल चुकी हैं।
वीरता कूट-कूट कर भरी होना = शक्ति सम्पन्न होना – चन्द्रगुप्त मौर्य में वीरता कूट-कूट कर भरी हुई थी।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 12 माँ का प्यार

(ख) विषय – बोध

I. इन प्रश्नों के उत्तर एक या दो वाक्यों में लिखें :

(क) मालव जी कौन था ?
उत्तर:
मालव जी शिवाजी के एक सिपाही का वीर पुत्र था जो दो वर्ष पहले मुगलों से लड़ते हुए मारा जा चुका था।

(ख) वह शिवाजी को क्यों मारना चाहता था ?
उत्तर:
पेट की आग से परेशान और एक यवन के द्वारा दिए गए लालच के कारण वह शिवाजी को मारना चाहता था।

(ग) दिखावटी रोष किसने किया और कब किया ?
उत्तर:
दिखावटी रोष शिवाजी ने किया था जब मालव जी की वीरता, विवशता और साहस को उन्होंने भली-भांति परख लिया था।

(घ) बालक ने कौन-सी प्रतिज्ञा की और क्यों की ?
उत्तर:
बालक ने माँ से मिलकर एक घंटे में वापस आने की प्रतिज्ञा की ताकि शिवाजी उसे मृत्यु दंड दे सकें।

(ङ) मालव जी के चले जाने पर शिवाजी ने तानाजी से क्या कहा ?
उत्तर:
मालव जी के चले जाने के बाद शिवाजी ने तानाजी से कहा था कि वह बहुत वीर, सत्यवादी और साहसी था।

(च) बालक ने अपनी माँ से मृत्यु दंड की बात क्यों नहीं बतायी ?
उत्तर:
बालक ने अपनी माँ को अपने मृत्यु दंड की बात नहीं बताई थी। ऐसा करने पर वह उसे मरने के लिए वापस न भेजती।

(छ) शिवाजी ने बालक को क्षमा क्यों किया ?
उत्तर:
शिवाजी ने बालक को उसकी सत्यवादिता, ईमानदारी, वीरता और भारत माता की सेवा के लिए क्षमा किया था।

(ज) जीवन दान मिलने पर बालक ने शिवाजी को कौन-सा वचन दिया ?
उत्तर:
जीवन दान मिलने पर बालक ने शिवाजी को वचन दिया था कि जब तक उसके शरीर में जान है तब तक वह मातृभूमि की सेवा से कभी पीछे नहीं हटेगा।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 12 माँ का प्यार

II. ये वाक्य किसने, किससे कहे :

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 12 माँ का प्यार 1
उत्तर:
किसने कहा – किससे कहा
(क) मालव जी – शिवाजी
(ख) तानाजी – शिवाजी
(ग) शिवाजी – तानाजी
(घ) शिवाजी – मालव जी
(ङ) तानाजी – शिवाजी
(च) शिवाजी – तानाजी
(छ) मालव जी – शिवाजी
(ज) मालव जी – शिवाजी
(झ) मालव जी – शिवाजी

(ग) व्यावहारिक व्याकरण

I. विपरीतार्थक शब्द लिखें :

अपराध = ………………
दंड = ……………….
मृत्यु = ……………….
झूठ = ……………….
मालिक = ……………….
सौभाग्य = ……………….
कर्तव्य = ……………….
सत्यवादी = ……………….
वीर = ……………….
कृतज्ञ = ……………….
सन्देह = ……………….
आदर = ……………….
उपस्थित = ………………
आशा = ………………
वैरी = ……………….
उत्तर:
अपराध = निरपराध
दंड = पुरस्कार
मृत्यु = जीवन
झूठ = सच
मालिक = सेवक
सौभाग्य = दुर्भाग्य
कर्त्तव्य = अकर्तव्य
सत्यवादी = मिथ्यावादी
वीर = कायर
कृतज्ञ = कृतघ्न
संदेह = निस्सन्देह
आदर = निरादर/अनादर
उपस्थित = अनुपस्थित
आशा = निराशा
वैरी = मित्र

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 12 माँ का प्यार

II. पर्यायवाची शब्द लिखें :-

तलवार = ……………….
वार = ……………….
मालिक = ……………….
वैरी = ……………….
ज्वाला = ……………….
लालच = ……………….
नरेश = ……………….
जेलखाना = ……………….
माँ = ……………….
माता-पिता = ……………….
संदेह = ……………….
भेद = ……………….
अपराध = ……………….
उत्तर:
तलवार = असि , कृपाण।
वार = आघात , चोट।
मालिक = स्वामी , ईश्वर।
वैरी = रिपु , दुश्मन।
ज्वाला = लपट , लौ।
लालच = तृष्णा , लोभ।
नरेश = राजा , राजन।
जेलखाना = बंदीगृह , कारागार।
माँ = माता , जननी।
माता-पिता = मात-पितु , जन्मदाता।
संदेह = शक , शंका।
भेद = रहस्य , अन्तर।
अपराध = जुर्म , गलती।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 12 माँ का प्यार

III. नीचे एक और कुछ विशेषण शब्द दिये हैं, दूसरी ओर विशेष्य। उपयुक्त विशेषण के साथ विशेष्य जोड़कर लिखें :

विशेषण – विशेष्य
अगाध साम्राज्य
बड़ा – अवस्था
भयानक – प्राण
समस्त – साहस
दिखावटी – प्रेम
स्वप्न – मराठा
छोटी – कठिन
अपने – भार
इतना – रोष
उत्तर:
विशेषण – विशेष्य
अगाध – प्रेम
भयानक – स्वप्न
दिखावटी – रोष
छोटी – अवस्था
इतना – साहस
बड़ा – कठिन
समस्त – भार
मराठा – साम्राज्य
अपने – प्राण।

IV. समासों का विग्रह करें :

मृत्युदंड = ……………….
कुलभूषण = ……………….
वीर पुत्र = ……………….
महाराज = ……………….
सेनानायक = ……………….
शयनकक्ष = ……………….
प्रेमभरी = ……………….
उत्तर:
मृत्यु दंड = मृत्यु का दंड
कुलभूषण = कुल का भूषण
वीर पुत्र = वीर का पुत्र
महाराज = महान् है जो राजा
सेनानायक = सेना का नायक
शयनकक्ष = शयन का कक्ष
प्रेमभरी = प्रेम से भरी।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 12 माँ का प्यार

V. सन्धि करें :

वि + आकुल = ……………….
वि + अवहार = ……………….
उत् + ज्वल = ……………….
परि + ईक्षा = ……………….
सम् + सार = ……………….
निः + भय = ……………….
उत्तर
संसार
वि + आकुल = व्याकुल
वि + अवहार = व्यवहार
उत् + ज्वल = उज्ज्वल
परि + ईक्षा = परीक्षा
सम् + सार = संसार
निः + भय = निर्भय।

VI. निम्नलिखित में से प्रत्यय छांटकर अलग लिखें :

वीरता = ……………….
पूजनीय = ……………….
हिन्दुत्व = ……………….
कायरता = ……………….
आभारी = ……………….
उत्तर:
वीरता = ता
पूजनीय = ईय
हिन्दुत्व = त्व
कायरता = ता
आभारी = ई

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PSEB 8th Class Hindi Guide माँ का प्यार Important Questions and Answers

बहुविकल्पीय प्रश्न निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर सही विकल्प चुनकर लिखें

प्रश्न 1.
‘माँ का प्यार’ में किस वीर बालक की गाथा प्रस्तुत की गई है ?
(क) ताना जी
(ख) नाना जी
(ग) मालव जी
(घ) मालक जी।
उत्तर:
मालव जी।

प्रश्न 2.
मालव जी हाथ में नंगी तलवार लेकर किसकी हत्या करना चाहते हैं ?
(क) नाना जी की
(ख) शिवाजी की
(ग) यवन की .
(घ) पिता की।
उत्तर:
शिवाजी की।

प्रश्न 3.
मालव जी के पिता किन से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे ?
(क) अंग्रेज़ों
(ख) मुग़लों
(ग) तुर्कों
(घ) तुगलकों।
उत्तर:
मुग़लों।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 12 माँ का प्यार

प्रश्न 4.
शिवाजी ने बालक को क्या दण्ड दिया ?
(क) अर्थदंड
(ख) मृत्युदंड
(ग) आजीवन कारावास
(घ) देश निकाला।
उत्तर:
मृत्युदंड।

प्रश्न 5.
शिवाजी ने बालक को किस कारण क्षमादान दिया ?
(क) उसकी माता के
(ख) उसके पिता की मृत्यु के
(ग) उसकी वीरता के
(घ) उसके क्षमा माँगने के।
उत्तर:
उसकी वीरता के।

प्रश्न 6.
बालक किसकी सेवा करने की प्रतिज्ञा करता है ?
(क) अपनी माता की
(ख) अपने समाज की
(ग) शिवाजी की
(घ) मातृभूमि की।
उत्तर:
मातृभूमि की।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 12 माँ का प्यार

माँ का प्यार Summary

माँ का प्यार एकांकी का सार

शिवाजी अपने कमरे में सो रहे थे। मालव जी नाम का एक बालक अपने हाथ में नंगी तलवार लिए हुए उनका वध करने के लिए आया। जैसे ही उसने शिवाजी पर वार करना चाहा वैसे ही तानाजी ने पीछे से आकर उसका हाथ पकड़ लिया। शिवाजी की नींद खुल चुकी थी। उन्होंने उस बालक से नाम पूछा तो उसने बताया कि वह मालव जी था। वध का प्रयास करने का कारण पूछने पर उसने बताया कि उसके पिता उनकी सेना में सिपाही थे। वे उनकी ओर से मुगलों से लड़ते हुए दो वर्ष पहले मारे गए थे। उनकी रोजी-रोटी का कोई भी और साधन नहीं था। उन्हें पेट-भर अन्न मिलना भी अब कठिन हो गया था। इन्सान सब कुछ सहन कर सकता है लेकिन पेट की आग नहीं। शिवाजी ने उससे पूछा कि यदि उन माँ-बेटे को इतना अधिक कष्ट था तो वे उसके पास सहायता के लिए क्यों नहीं आए थे। उसने उत्तर दिया कि जिस सिपाही ने उनकी सेना में भर्ती होकर उनका नाम उज्ज्वल किया था उसके बाल-बच्चों की देखरेख करना उनका कर्त्तव्य था।

उसने यह भी बताया कि उसे एक यवन ने उनकी हत्या के लिए कुछ इनाम देने का लालच दिया था। शिवाजी उसकी वीरता और निडरता पर मुग्ध हो गए थे। उन्होंने बनावटी क्रोध दिखाते हुए तानाजी से कहा कि उस बालक को जेलखाने में बंद कर दो और कल उसे मृत्यु-दंड दिया जाएगा। मालव जी ने शिवाजी से प्रार्थना की कि वह मरने से पहले एक बार अपनी माँ से मिलना चाहता था। यह शंका प्रकट करने पर कि वह वापस नहीं लौटेगा उसने कहा कि वह वीर पुत्र था और वह माँ के दर्शन करने के पश्चात् एक घंटे बाद अवश्य वहाँ आ जाएगा। शिवाजी ने उसे घर जाकर माँ से मिलकर लौट आने की आज्ञा दे दी। ठीक एक घंटे बाद बालक वापस आ गया। उसने बताया कि उसकी माँ उसकी प्रतीक्षा कर रही थी। उसने उसे अपनी छाती से लगाया। उसने उसे वापस लौटने और मृत्यु दंड भोगने के बारे में उसे नहीं बताया था। मालव जी ने शिवाजी से प्रार्थना की कि वे उसकी माँ की देखरेख का सारा भार अपने ऊपर ले लें। शिवाजी ने यह सुनकर कहा कि वे वीरों का आदर करते हैं। वे अब तक उसकी परीक्षा ले रहे थे। उन्होंने उसके अपराध को क्षमा कर दिया और उसे बताया कि जैसे वह अपनी माँ के लिए चिन्तित था वैसे ही वे भारत माता के लिए चिन्तित थे और उसका दुःख दूर करना चाहते थे। मालव जी ने कहा कि जब तक उसके शरीर में जान है वह मातृभूमि की सेवा से कभी भी पीछे नहीं हटेगा।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 9 पथ की पहचान

Punjab State Board PSEB 8th Class Hindi Book Solutions Chapter 9 पथ की पहचान Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 8 Hindi Chapter 9 पथ की पहचान

Hindi Guide for Class 8 PSEB पथ की पहचान Textbook Questions and Answers

(क) भाषा – बोध

I. शब्दार्थ-देखिए सप्रंसग व्याख्या में।

बटोही = मुसाफिर।
बाट = रास्ता।
अनगिनत = जिनकी गिनती न की जा सके, असंख्य।
निशानी = चिह्न।
मूक = खामोशी।
पंथी = मुसाफिर।
पंथ = मार्ग।
व्यर्थ = बेकार ।
असम्भव = नामुमकिन।
पथ = रास्ता।
पग = पैर।
अवधान = मन लगाना।
सरित् = नदी।
गिरि = पहाड़।
गह्वर = गड्ढा, खाई।
सुमन = फूल।
कंटकों = कांटों।
शर = तीर।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 9 पथ की पहचान

II. इन शब्दों/मुहावरों के अर्थ बताकर वाक्यों में प्रयोग करेंपथ, सुमन, अनगिनत, सहसा, बटोही, पैरों की निशानी छोड़ना, मन में बिठाना।

उत्तर:
पथ = मार्ग-व्यक्ति को. महापुरुषों के बताए हुए पथ का अनुसरण करना चाहिए।
सुमन = फूल-वाटिका में खिले हुए सुमन सबको अपनी ओर आकर्षित करते हैं। – अनगिनत = असंख्य, जिनकी गणना न हो सके-अनगिनत कीड़े-मकोड़े खेत पर मंडरा रहे हैं।
सहसा = अचानक-सीढ़ियों से सहसा पाँव फिसलने से मोहन को गम्भीर चोट लगी। बटोही = यात्री, मुसाफिर-थके-हारे बटोही ने वट-वृक्ष के नीचे आराम किया।
पैरों की निशानी छोड़ना = संकेत छोड़ना-श्रीकृष्ण ने गीता में पैरों की निशानी छोड़कर ही हमें कर्म का पाठ पढ़ाया है।
मन में बिठाना = याद रखना-अरे राघव, मन में बिठा लो कि तुम्हें कल तक वापस लौटना ही है।

(ख) विषय – बोध

प्रश्न 1.
कवि ने कविता में किस पथ की पहचान कर लेने का भाव प्रस्तुत किया
उत्तर:
कवि ने कविता में व्यक्ति को जीवन-पथ की पहचान कर लेने का भाव प्रस्तुत किया है।

प्रश्न 2.
‘अनगिनत राहियों’ से कवि ने किस ओर जाने का संकेत दिया है ?
उत्तर:
व्यक्ति के जीवन पथ में अनेक साथी मिलते हैं, परन्तु जो अपने पाँव के निशान छोड़ गए हैं, उन पर ही आगे बढ़ना चाहिए।

प्रश्न 3.
राही पथ पर अपनी निशानी कैसे छोड़ जाते हैं ?
उत्तर:
अपने अच्छे कारनामों से यात्री पथ पर अपनी निशानियाँ छोड़ जाते हैं, जो सबके लिए अनुकरणीय होती हैं।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 9 पथ की पहचान

प्रश्न 4.
सफल यात्री राह पर कैसे बढ़ता है ?
उत्तर:
सफल यात्री मार्ग की विघ्न-बाधाओं की परवाह किये बिना आगे बढ़ता है। वह अपने मार्ग को पूरी तरह पहचान कर लेता है।

प्रश्न 5.
राही को कब नहीं रुकना चाहिए ?
उत्तर:
साथियों के छोड़ जाने पर और बाधाएं आने पर भी राही को नहीं रुकना चाहिए।

प्रश्न 6.
इन पंक्तियों की व्याख्या करो-
है अनिश्चित किस जगह पर सरित, गिरि, गह्वर मिलेंगे,
है अनिश्चित किस जगह पर बाग़-वन सुन्दर मिलेंगे।
उत्तर:
हे यात्री ! यह पहले से निश्चित नहीं है कि जीवन-पथ पर कहाँ नदी, पर्वत और खाई मिलेंगे, किस समय कौन-सी कठिनाई का सामना करना पड़े, इस विषय में पहले से कोई अनुमान लगाना सम्भव नहीं। किस मार्ग पर सुन्दर बाग और वन मिलेंगे अर्थात् किस समय सुख का अनुभव होगा, इस विषय में भी पहले से कुछ नहीं कहा जा सकता। किस स्थान पर जीवन-यात्रा समाप्त हो जाएगी, यह भी पहले से नहीं जाना जा सकता। यह भी निश्चित नहीं कि कब सुख रूपी फूल और कब तीव्र चुभन पैदा करने वाले दुःख रूपी कांटे मिलेंगे। इस जीवन-पथ पर बढ़ते हुए कौन-से साथी अलग हो जाएंगे और कौन-से नए आ मिलेंगे यह भी पहले से जानना सम्भव नहीं। बस तू केवल इतना फैसला कर ले कि तुम्हारे मार्ग में भले ही कुछ आ जाए पर तू अपने पथ पर रुकेगा नहीं, अपितु निरन्तर आगे बढ़ता जाएगा। अतः हे पथिक ! तू चलने से पूर्व अपने मार्ग की पहचान कर ले। भाव है कि जीवन-पथ के यात्री के लिए यह अनिश्चित होता है कि उसे कहाँ सुख मिलेंगे और कहाँ दुःख।

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(ग) व्यावहारिक व्याकरण

I. इन शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखें

आँख – ……………….
पहाड़ – ……………….
नदी – ………………..
मुसाफिर – ………..
वन – ……………….
उत्तर:
आँख – नेत्र, नयन।
पहाड़ – पर्वत, गिरि।
नदी – सरिता, तटिनी।
मुसाफिर – यात्री, बटोही।
वन – अरण्य, कानन।

II. इन शब्दों के आगे ‘अ’ लगाकर विलोम शब्द बनाएँ

ज्ञात – ……………..
निश्चित – ……………..
सम्भव – ……………..
सफल – ……………..
सत्य – ……………..
उत्तर:
ज्ञात – अज्ञात।
निश्चित-अनिश्चित।
सम्भव – असम्भव।
सफल – असफल।
सत्य – असत्य।

III. अनेक शब्दों के लिए एक शब्द लिखें

(1) जो गिना न जा सके
(2) जो निश्चित न हो
(3) पथ पर चलने वाला।
उत्तर:
(1) अनगिनत
(2) अनिश्चित
(3) पथिक।

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IV. ‘अनगिनत’, ‘अनुमान’ शब्द में ‘अन’ और ‘अनु’ उपसर्ग हैंइसी प्रकार ‘अन’ और ‘अनु’ उपसर्ग लगाकर नये शब्द बनाएँ

अन + होनी =………….
अन + जान =…………..
अन + मोल =………….
अन + अन्य =…………..
अनु + सार =………….
अनु + शासन =………….
अनु + मति =………….
अनु + करण। = ……….
उत्तर:
अन + होनी = अनहोनी
अन + जान = अनजान
अन + मोल = अनमोल
अन + अन्य = अनन्य
अनु + सार = अनुसार
अनु + शासन = अनुशासन
अनु + मति = अनुमति
अनु + करण = अनुकरण।

(घ) रचना बोध

प्रश्न 1.
कविता के आधार पर सभी विद्यार्थी जीवन का लक्ष्य’ विषय पर निबन्ध करें।
उत्तर:
‘जीवन का लक्ष्य’ निबन्ध के लिए विद्यार्थी व्याकरण के निबन्ध भाग में देखें।

PSEB 8th Class Hindi Guide पथ की पहचान Important Questions and Answers

बहुविकल्पीय प्रश्न निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर सही विकल्प चुनकर लिखें

प्रश्न 1.
चलने से पहले बटोही को किसकी पहचान करनी चाहिए ?
(क) साथी की
(ख) बाट की
(ग) बाहर की
(घ) वातावरण की।
उत्तर:
बाट की।

प्रश्न 2.
कवि किस पथ की पहचान की बात कर रहा है ?
(क) घर के
(ख) वन के
(ग) जीवन के
(घ) समाज के।
उत्तर:
जीवन के।

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प्रश्न 3.
राही पथ पर अपने निशान कैसे छोड़ जाते हैं ?
(क) निशान लगाकर
(ख) धर्मशाला बनाकर
(ग) पक्का रास्ता बनाकर
(घ) अच्छे कार्य करने से।
उत्तर:
अच्छे कार्य करने से।

प्रश्न 4.
सफल यात्री किसकी चिंता नहीं करता ?
(क) साथी की
(ख) रास्ते की
(ग) वस्त्रों की
(घ) विघ्न बाधाओं की
उत्तर:
विघ्न बाधाओं की।

प्रश्न 5.
राही की आन क्या है ?
(क) सड़कें बनाना
(ख) साथी के साथ रहना
(ग) किसी की चिंता नहीं करना
(घ) सदा चलते रहना।
उत्तर:
सदा चलते रहना।

पथ की पहचान Summary

सप्रसंग व्याख्या

1. पूर्व चलने के बटोही, बाट की पहचान कर ले।
पुस्तकों में है नहीं, छापी गई इसकी कहानी,
हाल इसका ज्ञात होता है न औरों की जबानी,
अनगिनत राही गये इस राह से, उनका पता क्या,
पर गए कुछ लोग इस पर छोड़ पैरों की निशानी,
यह निशानी मूक होकर भी बहुत कुछ बोलती है,
खोल इसका अर्थ पंथी, पंथ का अनुमान कर ले,
पूर्व चलने के बटोही, बाट की पहचान कर ले।

शब्दार्थ:
बटोही = मुसाफिर। बाट = रास्ता। अनगिनत = जिनकी गिनती न की जा सके, असंख्य। निशानी = चिह्न। मूक = खामोशी। पंथी = मुसाफिर। पंथ = मार्ग।

प्रसंग:
प्रस्तुत पद्यांश हमारी हिन्दी की पाठ्य-पुस्तक में संकलित श्री हरिवंश राय ‘बच्चन’ द्वारा रचित ‘पथ की पहचान’ नामक कविता में से लिया गया है। इसमें कवि ने जीवन मार्ग पर निरन्तर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है। जीवन-मार्ग पर चलने वाले मनुष्य को सावधान किया गया है।

व्याख्या:
कवि कहता है कि जीवन के मार्ग पर चलने वाले हे यात्री ! तू चलने से पहले रास्ते को समझ ले। इस जीवन के रास्ते की कहानी पुस्तकों में नहीं छापी गई है। दूसरे के मुँह से सुनकर भी इसका हाल ज्ञात नहीं होता। आज तक इस रास्ते पर अनगिनत यात्री जा चुके हैं, परन्तु उन सब का आज कुछ भी पता नहीं कि कहाँ गए, परन्तु कुछ लोग इस रास्ते पर अपने पैरों की निशानी छोड़ गए हैं। यह निशानी चुप रह कर भी बहुत कुछ बताती है। हे यात्री ! तू इसका अर्थ समझ कर अपने रास्ते का अनुमान लगा ले। मुसाफिर ! तू चलने से पहले अपने मार्ग की पहचान कर ले। भाव है कि जीवन-पथ का रास्ता बड़ा विस्तृत है। इस पर सोच-समझ कर चलना चाहिए।

विशेष:

  1. कवि ने मानव को जीवन पथ पर आगे बढ़ते हुए जिन बातों को जानने की आवश्यकता होती है उसका पाठ पढ़ाया है।
  2. भाषा सरल और सरस है।

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2. यह बुरा है या कि अच्छा व्यर्थ दिन इस पर बिताना,
जब असम्भव छोड़ यह पथ दूसरे पर पग बढ़ाना,
तू इसे अच्छा समझ यात्रा सरल इससे बनेगी,
सोच मत केवल तुझे ही, यह पड़ा मन में बिठाना,
हर सफल पंथी यही विश्वास ले इस पर बढ़ा है,
तू इसी पर आज अपने चित्त का अवधान कर ले,
पूर्व चलने के बटोही बाट की पहचान कर ले।

शब्दार्थ : व्यर्थ = बेकार । असम्भव = नामुमकिन। पथ = रास्ता। पग = पैर। अवधान = मन लगाना।

प्रसंग:
यह पद्यांश ‘श्री हरिवंश राय बच्चन द्वारा लिखित ‘पथ की पहचान’ नामक कविता से लिया गया है। इसमें कवि ने मनुष्य को जीवन पथ पर निरन्तर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है। कवि जीवन-मार्ग पर चलने वाले मनुष्य को सावधान करते हुए कहते हैं

व्याख्या:
कवि कहता है कि हे पथिक! यह मार्ग बुरा है या अच्छा, इस बात के लिए सोच-सोचकर दिन बिता देना बेकार है। तू अपने पथ पर निरन्तर आगे बढ़ता जा, जबकि .इस रास्ते को छोड़कर दूसरे रास्ते पर चलना असम्भव है। जीवन का रास्ता एक ही है, उस पर चलना ही पड़ेगा, इसलिए यह सोचना व्यर्थ है कि यह बुरा है या अच्छा। तू इसी मार्ग को अच्छा जान ले, इससे तू रास्ते पर आसानी से चल सकेगा। यह मत सोच कि केवल तुझे ही मन में यह निश्चय करना पड़ा है, बल्कि हर एक सफल यात्री ने इसी विश्वास को लेकर इस रास्ते पर अपना मन लगा कर चलना शुरू किया है। तू भी आज. इसी रास्ते पर अपना मन लगा ले। हे यात्री ! चलने से पहले अपने मार्ग की पहचान कर ले। भाव है कि जब व्यक्ति कोई रास्ता अपना ले तो फिर उस पर बढ़ते रहना चाहिए।

विशेष:

  1. कवि ने मनुष्य को जीवन में स्थिरता का परिचय दिया है और माना है कि उसे बार-बार अपने लक्ष्य को बदलना नहीं चाहिए।
  2. भाषा सरल, सरस और भावपूर्ण है।

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3. है अनिश्चित किस जगह पर सरित्, गिरि, गह्वर मिलेंगे,
है अनिश्चित किस जगह पर बाग, वन सुन्दर मिलेंगे,
किस जगह यात्रा खत्म हो जाएगी, यह भी अनिश्चित,
है अनिश्चित, कब सुमन, कब कंटकों के शर मिलेंगे,
कौन सहसा छूट जाएंगे, मिलेंगे कौन सहसा,
आ पड़े कुछ भी, रुकेगा तू न, ऐसी आन कर लें,
पूर्व चलने के बटोही, बाट की पहचान कर ले।

शब्दार्थ : सरित् = नदी। गिरि = पहाड़। गह्वर = गड्ढा, खाई। सुमन = फूल। कंटकों = कांटों। शर = तीर।

प्रसंग:
यह पद्यांश ‘पथ की पहचान’ नामक कविता से लिया गया है। यह श्री हरिवंश राय बच्चन द्वारा रचित है। इसमें कवि ने मनुष्य को जीवन पथ पर निरन्तर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है। कवि जीवन-मार्ग पर चलने वाले मनुष्य को सावधान करते हुए कहते हैं

व्याख्या:
हे यात्री ! यह पहले से निश्चित नहीं है कि जीवन-पथ पर कहाँ नदी, पर्वत और खाई मिलेंगे, किस समय कौन-सी कठिनाई का सामना करना पड़े, इस विषय में पहले से कोई अनुमान लगाना सम्भव नहीं। किस मार्ग पर सुन्दर बाग और वन मिलेंगे अर्थात् किस समय सुख का अनुभव होगा, इस विषय में भी पहले से कुछ नहीं कहा जा सकता। किस स्थान पर जीवन-यात्रा समाप्त हो जाएगी, यह भी पहले से नहीं जाना जा सकता। यह भी निश्चित नहीं कि कब सुख रूपी फूल और कब तीव्र चुभन पैदा करने वाले दुःख रूपी कांटे मिलेंगे। इस जीवन-पथ पर बढ़ते हुए कौन-से साथी अलग हो जाएंगे और कौन-से नए आ मिलेंगे यह भी पहले से जानना सम्भव नहीं। बस तू केवल इतना फैसला कर ले कि तुम्हारे मार्ग में भले ही कुछ आ जाए पर तू अपने पथ पर रुकेगा नहीं, अपितु निरन्तर आगे बढ़ता जाएगा। अतः हे पथिक ! तू चलने से पूर्व अपने मार्ग की पहचान कर ले। भाव है कि जीवन-पथ के यात्री के लिए यह अनिश्चित होता है कि उसे कहाँ सुख मिलेंगे और कहाँ दुःख।

विशेष:

  1. कवि ने मनुष्य को निरन्तर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है।
  2. भाषा सरल और सरस है।।

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पथ की पहचान कविता का सार

‘पथ की पहचान’ कविता श्री हरिवंश राय ‘बच्चन’ की श्रेष्ठ रचना है। इसमें कवि मनुष्य को सम्बोधित करते हुए कहता है कि हे मनुष्य ! जीवन के मार्ग पर चलने से पहले तू उसकी पहचान कर ले, क्योंकि इसका ज्ञान लोगों के बताने या पुस्तकों से प्राप्त नहीं होगा। कुछ लोग जो जीवन-पथ पर अपने चिह्न छोड़ गए हैं, उनके आधार पर अपनी यात्रा आरम्भ करनी चाहिए। एक बार रास्ते में चलने के बाद अच्छे या बुरे का विचार नहीं करना चाहिए। दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ना चाहिए। इस रास्ते पर चलते हुए यह निश्चित नहीं कि कहाँ सुख मिलेंगे और कहाँ दुःख। कौन रास्ते में छोड़ जाएगा और कब तुम्हारी जीवनयात्रा समाप्त हो जाएगी। ये सारी बातें अनिश्चित हैं, परन्तु तू दृढ़ता के साथ आगे बढ़ता चल।
‘पथ की पहचान’ कविता श्री हरिवंश राय ‘बच्चन’ की श्रेष्ठ रचना है। इसमें कवि मनुष्य को सम्बोधित करते हुए कहता है कि हे मनुष्य ! जीवन के मार्ग पर चलने से पहले तू उसकी पहचान कर ले, क्योंकि इसका ज्ञान लोगों के बताने या पुस्तकों से प्राप्त नहीं होगा। कुछ लोग जो जीवन-पथ पर अपने चिह्न छोड़ गए हैं, उनके आधार पर अपनी यात्रा आरम्भ करनी चाहिए। एक बार रास्ते में चलने के बाद अच्छे या बुरे का विचार नहीं करना चाहिए। दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ना चाहिए। इस रास्ते पर चलते हुए यह निश्चित नहीं कि कहाँ सुख मिलेंगे और कहाँ दुःख। कौन रास्ते में छोड़ जाएगा और कब तुम्हारी जीवनयात्रा समाप्त हो जाएगी। ये सारी बातें अनिश्चित हैं, परन्तु तू दृढ़ता के साथ आगे बढ़ता चल।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 8 बस चुप भली

Punjab State Board PSEB 8th Class Hindi Book Solutions Chapter 8 बस चुप भली Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 8 Hindi Chapter 8 बस चुप भली

Hindi Guide for Class 8 PSEB बस चुप भली Textbook Questions and Answers

(क) भाषा – बोध

I. शब्दार्थ

निगाह = नज़र।
जुबानदराजी = अधिक बोलने की आदत।
दस्तक = खटखटाना।
जहर उगलना = बुरा-भला कहना।
रामबाण औषधि = अचूक दवा।
नसीहतें = उपदेश।
बयान = वर्णन करना।
चटोरी = स्वाद लेने वाली।
रसना = जीभ।

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II. इन मुहावरों को अपने वाक्यों में प्रयोग करें:

1. काला अक्षर भैंस बराबर
2. छाती पर मूंग दलना
3. फाँसी का फंदा चूमना
4. कान पकड़ना
5.मैदान में कूद पड़ना
6. राग अलापना
7. नमक खाना
8. अपना-सा मुँह लेकर चले जाना
9. जान के पीछे पड़ना
उत्तर:
1. काला अक्षर भैंस बराबर – आज के युग में काला अक्षर भैंस बराबर व्यक्ति को समाज में सम्मान प्राप्त नहीं होता।
2. छाती पर मूंग दलना – गणेशी का बदमाश पोता न पढ़ता है और न ही कोई काम करता है, बस बूढ़ी दादी की छाती पर मूंग दलता रहता है।
3. फाँसी का फंदा चूमना – भगत सिंह ने देश के लिए खुशी-खुशी फाँसी का फंदा चूम लिया था।
4. कान पकड़ना – मैं तो कान पकड़ता हूँ कि तुम्हारे घर अब कभी नहीं आऊँगा।
5. मैदान में कूद पड़ना – झांसी की रानी अंग्रेजों के व्यवहार से क्रोधित हो कर मैदान में कूद पड़ी थी।
6. राग अलापना – तेरी यहाँ कोई सुनवाई नहीं तो फिर क्यों अपना राग अलाप रहा है।
7. नमक खाना – तुम्हारा बरसों तक नमक खाया है इसलिए यह काम तो मुझे करना ही पड़ेगा।
8. अपना-सा मुँह लेकर चले जाना – अफ़सर ने जब गाँव वालों की बात सुनी ही नहीं तो वे अपना-सा मुँह लेकर चले गए।
9. जान के पीछे पड़ना – ये गुंडे तो तुम्हारी जान के पीछे पड़े हुए हैं इसलिए जल्दी पुलिस की सहायता प्राप्त करो।

(ख) विषय – बोध

I. सही पर (✓) और गलत पर (×) का चिह्न लगायें :

(क) जुबानदराजी बुरी आदत है?
(ख) मौन के बल पर कालिदास का विवाह राजकुमारी से नहीं हुआ था। ( )
(ग) निर्दय जुबान के कारण रहीम अन्तिम दिनों में परेशान हुए थे। ( )
(घ) बिहारी लाल और मुरारी लाल को साहब ने तरक्की दी थी। ( )
(ङ) चुनाव अभियान में लेखक ने खन्ना का पक्ष लिया था। ( )
उत्तर:
सही- क, ग।
गलत- ख, घ, ङ।

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II. इन प्रश्नों के उत्तर एक या दो वाक्यों में लिखें :

प्रश्न (क)
सब आफ़तों से बचने की रामबाण औषधि क्या है?
उत्तर:
सब आफ़तों से बचने की रामबाण औषधि मौन धारण कर लेना है।

प्रश्न (ख)
न चाहते हुए भी हम क्यों जुबानदराजी करते हैं?
उत्तर:
न चाहते हुए भी मन के भावों के कारण जुबान नियंत्रण में नहीं रहती है और हम जुबानदराजी करते हैं।

प्रश्न (ग)
जुबानदराजी के कारण मनसूर का क्या परिणाम हुआ?
उत्तर:
जुबानदराजी के कारण मनसूर को फांसी के फंदे पर झूलना पड़ा था।

प्रश्न (घ)
अपने ही घर में लेखक को मेहमान क्यों बनना पड़ा?
उत्तर:
लेखक को अपने किसी जान-पहचान वाले के बेटे की शादी में न चाहते हुए भी भागीदार बनने के कारण अपने ही घर में मेहमान बनना पड़ा था।

प्रश्न (ङ)
बिहारी लाल और मुरारी लाल की गवाही से लेखक ने मुक्ति किस युक्ति से ली?
उत्तर:
लेखक को झूठ-मूठ की भयंकर खाँसी का बहाना करने की युक्ति से बिहारी लाल और मुरारी लाल की गवाही से मुक्ति मिली थी।

III. चार या पाँच वाक्यों में उत्तर लिखें:

प्रश्न (क)
एक चुप सौ सुख’ इस तथ्य (सच्चाई) को अपनी युक्तियों से स्पष्ट करें।
उत्तर:
वास्तव में ही ‘एक चुप सौ सुख’ एक सच्चाई है। यदि दो मित्र आपस में किसी भी बात पर झगड़ पड़ें तो उन में से किसी एक का पक्ष नहीं लिया जा सकता। ऐसा करने से उन दो में से एक मित्र का दुश्मन बन जाना निश्चित होता है। लड़ाई-झगड़ा तो घर में भी हो जाता है। चुप रह कर किसी भी पक्ष का साथ न देना समस्या को कम ही करता है और अपने शत्रुओं और विरोधियों की संख्या को भी कम करता है।

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प्रश्न (ख)
क्या हर स्थिति में चुप रहना चाहिए’ अपने विचार लिखें।
उत्तर:
हर स्थिति में चुप नहीं रहना चाहिए। ऐसा तो केवल वही कर सकता है जो मूर्ख हो या पागल हो। जब कोई अन्याय के रास्ते पर चलता हुआ किसी पर भी अनावश्यक रूप से अत्याचार कर रहा हो तो चुप नहीं रहना चाहिए। देखकर मक्खी नहीं निगली जा सकती। जब हमारे हितों को चोट लग रही हो या किसी पर भी अनर्थ ढाया जा रहा हो तो चुप नहीं रहना चाहिए, सदा चुप रहने वाले को लोग मूर्ख ही मानते हैं और जीवन जीते हुए मूर्ख कदापि नहीं बनना चाहिए। इसके लिए व्यवहार बुद्धि का प्रयोग करना चाहिए।

प्रश्न (ग)
बिहारी लाल और मुरारी लाल के झगड़े से बचने के लिए लेखक ने क्या नाटक किया?
उत्तर:
बिहारी लाल और मुरारी लाल के झगड़े से बचने के लिए लेखक ने अपने दफ़्तर के साहब से भयंकर खांसी का नाटक किया था। वह ज़ोर-जोर से खाँसी करते हुए लुढ़क गया था। उसने अपनी सांस रोक ली थी। उसे डिस्पैंसरी ले जाना पड़ा था।

प्रश्न (घ)
लेखक ने उलझनमयी परिस्थितियों कोर्ट कचहरी, शादी-मंगनी, चुनाव उपचुनाव-आदि से दूर रहने का संकेत क्यों दिया है ?
उत्तर:
जब हम किसी विषय पर चुप हो जाते हैं और किसी भी पक्ष के पक्ष या विपक्ष का साथ नहीं देते तो लोग हमें अपना शस्त्र नहीं बना पाते। वे हम से तब किसी गवाही की उम्मीद नहीं रखते। उन्हें लगता है कि हम उनके किसी काम के नहीं हैं। ऐसी स्थिति में हम कोट-कचहरी, शादी-मंगनी, चुनाव-उपचुनाव आदि चक्करों से बच जाते हैं।

(ग) व्यावहारिक व्याकरण

I. निम्नलिखित शब्दों में से उपसर्ग पृथक् करें :

1. अधिपति, अध्यक्ष, अध्यात्म, अधिराज।
2. अभिप्राय, अभिशाप, अभिलाषा, अभिमान।
3. अपराध, अपमान, अपशब्द, अपवाद।
4. अतिशय, अतिनिर्धन, अत्याचार, अत्यावश्यक।
5. अनुवाद, अनुचर, अनुरूप, अनुकरण।
6. अवगुण, अवनति, अवस्था, अवसर।
7. उपमान, उपवन, उपकार, उपमंत्री।
8. निर्भय, निर्दोष, निर्वाह, नीरोग (निर्)
9. निस्तार, निश्चल, निष्प्राण, निष्प्रभ (निस / निश / निष् । निः)
10. परिचय, परिमाण, परिक्रमा, परिवर्तन।
उत्तर:
1. अधि
2. अभि
3. अप
4. अति
5. अनु
6. अव
7. उप
8. निर्
9. निस / निश / निष् / निः
10. परि।

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II. समस्तपदों को अलग करें (विग्रह)

जुबान दराजी = ……………….
वाणी-संयम = ……………….
योग-साधना = ……………….
तन-मन = ……………….
शरणागत = ……………….
रसोईघर = ……………….
आपबीती = ……………….
अनपढ़ = ……………….
उत्तर:
जुबान दराजी = जुबान की दराजी
वाणी-संयम = वाणी का संयम
योग-साधना = योग की साधना
तन-मन = तन और मन
शरणागत = शरण में गत
रसोई घर = रसोई के लिए घर
आप बीती = अपने पर बीती
अनपढ़ = नहीं पढ़ा है जो/ न पढ़ा

PSEB 8th Class Hindi Guide बस चुप भली Important Questions and Answers

बहुविकल्पीय प्रश्न निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर सही विकल्प चुनकर लिखें

प्रश्न 1.
किस पर लगाम लगाने से सभी काम शीघ्रता और शांति से हो जाते हैं ?
(क) हाथों पर
(ख) पैरों पर
(ग) जुबान पर
(घ) मन पर।
उत्तर:
जुबान पर।

प्रश्न 2.
जुबानदराजी के कारण किसे फाँसी पर झूलना पड़ा
(क) महमूद को
(ख) मनसूर को
(ग) मुनव्वर को
(घ) मुज़रूह को।
उत्तर:
मनसूर को।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 8 बस चुप भली

प्रश्न 3.
गवाही नहीं देने से मुक्ति कैसे मिलती है ?
(क) बेहोश होकर
(ख) बीमार होकर
(ग) खांसी के दौरे से
(घ) विदेश भाग कर।
उत्तर:
खांसी के दौरे से।

प्रश्न 4.
रहीम के अनुसार अनुचित बात कहने पर जूते किसे पड़ते हैं ?
(क) मुँह को
(ख) खोपड़ी को
(ग) पीठ को
(घ) टांगों को
उत्तर:
खोपड़ी को।

प्रश्न 5.
विधानसभा के चुनाव अभियान का काम संभालने से बचने के लिए लेखक कहाँ चले गए ?
(क) दिल्ली
(ख) शिमला
(ग) अमृतसर
(घ) पटियाला।
उत्तर:
दिल्ली

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बस चुप भली Summary

बस चुप भली पाठ का सार

युगों से समझदार लोग सभी प्रकार की मुसीबतों से बचने के लिए एक ही बात कहते आएं हैं कि ‘एक चुप सौ सुख’। जुबान पर लगाम लगाने से सभी काम शीघ्रता और शांति से पूरे हो जाते हैं लेकिन जुबान है कि मुँह में टिकती ही नहीं। जरा-सी बात पर गज भर लंबी हो कर यह बाहर निकल आती है और झगड़े का बड़ा कारण बन जाती है। बुजुर्गों की चुप रहने की नसीहत धरी-की-धरी रह जाती है। चुप रहना आसान नहीं है पर इसके फ़ायदे बहुत हैं। मूर्ख और अनपढ़ कालिदास केवल चुप रहने के कारण सुंदर राजकुमारी का पति बन गया था और वहीं अपने युग का सबसे बड़ा दार्शनिक मन्सूर जोबस हर बात को बोलने के कारण फांसी के फंदे पर लटका दिया गया था। तभी तो रहीम को कहना पड़ा था कि जुबान अच्छी-बुरी सब बातें कह कर स्वयं तो दाँतों के पीछे मुँह में जा छिपती है और जूते बेचारी खोपड़ी को खाने पड़ते हैं। पिछले विधानसभा चुनाव के समय मुहल्ले के दो लोग लेखक के घर पधारे।

वे दोनों चाहते थे कि लेखक महोदय उनके लिए चुनावअभियान का सारा कार्यभार संभाल लें। लेखक ने उन दोनों को किन्हीं विशेष एहसानों के कारण साफ-साफ मना तो करना नहीं था, इसलिए उन्होंने उन्हें एक कागज़ पर लिख कर बताया कि वे मौन व्रत पर थे और अगले दिन बताएंगे कि वे उन दोनों में से किस के लिए काम करेंगे। अगले दिन सुबह-सवेरे वे दिल्ली चले गए और विवाद से बच गए। दफ़्तर में बिहारी लाल और मुरारी लाल ने आपस में जोरदार झगड़ा किया, तोड़-फोड़ भी कर दी। बड़े साहब ने उन दोनों के कहने पर लेखक को गवाह के रूप में बुलाया। संकट से बचने के लिए लेखक ने भयंकर खाँसी के दौरे का नाटक किया। लेखक को तो डिस्पैंसरी भेज दिया गया पर बिहारी-मुरारी दोनों की तरक्की रोक दी गई थी जिसका सारा दोष दोनों ने लेखक पर डाला। एक बार मुहल्ले के कुछ बुजुर्गों ने अपने होनहार पुत्र को विवाह के लिए लड़की पक्ष को दिखाने हेतु लेखक का घर चुन लिया। लेखक चाह कर भी उन्हें ना नहीं कह सका जिसका परिणाम है कि अब उसका मेहमानखाना लड़के-लड़की वालों के आपसी झगड़ों का पंचायत घर बना हुआ है। लेखक का यही मानना है कि कोर्ट-कचहरी, शादी-मंगनी, चुनाव-उपचुनाव, सिफ़ारिश, गवाही, जमानत आदि से दूर ही रहना चाहिए। यदि ऐसा नहीं किया जा सकता तो जुबान अवश्य खोलनी पड़ेगी और जुबान का रस तो निश्चित रूप से दुःखदायी होता ही है।