PSEB 7th Class Home Science Solutions Chapter 5 घर की सफ़ाई

Punjab State Board PSEB 7th Class Home Science Book Solutions Chapter 5 घर की सफ़ाई Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 7 Home Science Chapter 5 घर की सफ़ाई

PSEB 7th Class Home Science Guide घर की सफ़ाई Textbook Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
घर की सफ़ाई के दो महत्त्व बताइए।
उत्तर-

  1. स्वच्छता
  2. सौंदर्य तथा स्वास्थ्य।

प्रश्न 2.
ऋतु के अनुसार सफाई किसे कहते हैं?
उत्तर-
जब ऋतु बदलती है तब घर की सफाई की जाती है इसे ऋतु के अनुसार सफाई करना कहते हैं।

प्रश्न 3.
शीशे को साफ करने के लिए क्या प्रयोग करना चाहिए?
उत्तर-
गीले अखबार या पतंग वाले कागज़ से।

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लघूत्तर प्रश्न

प्रश्न 1.
शौचघर, गुसलखाने में फिनाइल क्यों छिड़की जाती है?
उत्तर-
शौचघर और गुसलखाने को प्रतिदिन फिनाइल से धोना चाहिए और इनको खुली हवा लगनी चाहिए। नहीं तो ये मक्खी, मच्छर के घर बन जाएंगे। जिससे अनेक प्रकार की बीमारियाँ हो सकती हैं।

प्रश्न 2.
सफ़ाई करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
उत्तर-
सफ़ाई करते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए

  1. कमरे का फर्श और दैनिक प्रयोग में आने वाले बर्तनों की सफ़ाई रोज़ करनी चाहिए।
  2. रसोई, गुसलखाना और नालियाँ भी रोज़ाना साफ़ करनी चाहिए।
  3. साप्ताहिक सफ़ाई में दरी या फर्नीचर बाहर निकालकर झाड़ना और दीवारों से जाले उतारने ज़रूरी होते हैं। कपड़ों को धूप लगानी चाहिए।
  4. रोज़ाना प्रयोग में आने वाले बर्तन, पर्दे, चादरें आदि साफ़ करनी चाहिएं।
  5. शौचघर और नालियों में फिनाइल का पानी डालना चाहिए।
  6. ऋत अनसार सफ़ाई में दीवारों और फर्श झाड कर लीप-पोत लेने चाहिएं या फर्श और दीवारों की मुरम्मत करवा लेना चाहिए।
  7. दरवाजों और खिड़कियों को पेंट करवा लेना चाहिए।

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प्रश्न 3.
साप्ताहिक सफाई के अन्तर्गत क्या-क्या करना चाहिए?
उत्तर-
साप्ताहिक सफ़ाई के अन्तर्गत निम्नलिखित कार्य करना चाहिए

  1. साप्ताहिक सफ़ाई में एक बार बिस्तरों को धूप में अवश्य सुखाना चाहिए।
  2. घर का सारा सामान फर्नीचर आदि को धूप अवश्य लगानी चाहिए।
  3. कमरे, आँगन और सीढ़ियों को धोकर साफ़ कर लेना चाहिए।
  4. कमरों को धोने से पहले फर्नीचर बाहर निकालकर दीवारें साफ़ कर लेनी चाहिएं। ताकि जाले आदि अच्छी तरह साफ़ हो जाए।
  5. अलमारियों का सामान निकालकर साफ़ करके उचित जगह पर लगा देना चाहिए।
  6. अगर फर्श पर दरी बिछी हो तो बाहर निकालकर झाड़ लें और फर्श को धोकर गीले कपड़े के साथ पोचा फेर लेना चाहिए।
  7. बिजली के बल्ब और शेड की सफ़ाई भी कर लेनी चाहिए।
  8. नालियों में फिनाइल छिड़क देना चाहिए, ताकि कीटाणु रहित हो जाएं।
  9. शौचघर में फिनाइल और कभी-कभी चूने का पानी छिड़कना चाहिए।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
दैनिक सफ़ाई क्यों जरूरी है और घर की सफ़ाई कैसे करनी चाहिए?
उत्तर-
दैनिक सफ़ाई से हमारा अभिप्राय उस सफ़ाई से है जो घर में प्रतिदिन की जाती है। अत: गृहिणी का यह प्रमुख कर्त्तव्य है कि वह घर के उठने-बैठने, पढ़ने-लिखने, सोने के कमरे, रसोई, आँगन, स्नानागार, बरामदा तथा शौचालय की प्रतिदिन सफ़ाई करे। दैनिक सफ़ाई के अन्तर्गत प्रायः इधर-उधर बिखरी हुई वस्तुओं को ठीक से लगाना, फर्नीचर को झाड़ना-पोंछना, फर्श पर झाडू करना, गीला पोंछा करना आदि आते हैं। आज के आधुनिक युग की व्यस्त गृहिणियों तथा कार्यरत गृहिणियों को यह कदापि सम्भव नहीं कि वे घर के सभी पक्षों की सफ़ाई प्रतिदिन करें।

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प्रश्न 2.
ऋतु के अनुसार खास सफ़ाई का क्या मतलब है?
उत्तर-
हमारे देश में प्राय: जब वर्षा ऋतु समाप्त हो जाती है, दशहरे या दीपावली के समय वार्षिक सफ़ाई की जाती है। पुताई, पॉलिश आदि करवाने से घर की सुन्दरता तो बढ़ती ही है, रोग फैलाने वाले कीटाणु भी नष्ट हो जाते हैं। अत: स्वास्थ्य की दृष्टि से भी एक वर्ष में एक बार घर की पूर्ण स्वच्छता अनिवार्य है।

Home Science Guide for Class 7 PSEB घर की सफ़ाई Important Questions and Answers

अति छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
सफ़ाई क्यों ज़रूरी है?
उत्तर-
अपने स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए तथा घर को आकर्षित बनाने के लिए सफ़ाई ज़रूरी है।

प्रश्न 2.
शारीरिक सफ़ाई से क्या तात्पर्य है?
उत्तर-
शरीर के विभिन्न अंगों की नियमित सफ़ाई तथा नियमित अच्छी आदतें।

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प्रश्न 3.
दैनिक सफ़ाई से क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
दैनिक सफ़ाई से अभिप्राय प्रतिदिन की सफ़ाई से है।

प्रश्न 4.
दैनिक सफ़ाई के अन्तर्गत किन स्थानों की सफाई आवश्यक है?
उत्तर-
प्रतिदिन उठने-बैठने और सोने वाले कमरे, स्नानागार, शौचालय, रसोई, आँगन एवं बरामदा।

प्रश्न 5.
सामयिक सफाई क्या होती है?
उत्तर-
ऋतु अनुसार काम आने वाली वस्तुओं की सफ़ाई करके ठीक रख-रखाव की व्यवस्था करना। जैसे-सर्दी व गर्मी के कपड़े, अनाज संरक्षण आदि।

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प्रश्न 6.
आकस्मिक सफ़ाई किसे कहते हैं?
उत्तर-
अकस्मात् जरूरत पड़ने पर घर की सफ़ाई करना, जैसे ब्याह-शादी पर।

छोटे स्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
वातावरण की सफ़ाई को कितने भागों में बांटा जा सकता है?
उत्तर-
वातावरण की सफ़ाई को सामान्यत: छः भागों में बांटा जा सकता है

  1. दैनिक सफ़ाई
  2. साप्ताहिक सफ़ाई
  3. मासिक सफाई
  4. सामयिक सफाई
  5. वार्षिक सफ़ाई
  6. आकस्मिक सफ़ाई।

प्रश्न 2.
दैनिक सफ़ाई के अन्तर्गत क्या-क्या कार्य करने होते हैं?
उत्तर-
दैनिक सफ़ाई के अन्तर्गत निम्नलिखित कार्य आवश्यक रूप से करने होते हैं

  1. घर के सभी कमरों के फर्श, खिड़की, दरवाजे, मेज़-कुर्सी की झाड़-पोंछ करना।
  2. घर में रखे कूड़ेदान आदि को साफ़ करना।
  3. शौचालय तथा स्नानागार आदि की सफ़ाई करना।
  4. रसोई में काम आने वाले बर्तनों की सफ़ाई व रख-रखाव।

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प्रश्न 3.
घर में गन्दगी होने के प्रमुख कारण क्या हैं?
उत्तर-

  1. प्राकृतिक कारण-धूल के कण, वर्षा तथा बाढ़ के पानी के बहाव के साथ आने वाली गन्दगी, मकड़ी के जाले, पक्षियों तथा अन्य जीवों द्वारा गन्दगी।
  2. मानव विकार-मल-मूत्र, कफ, थूक, खखार, पसीना और बाल झड़ना।
  3. घरेलू कार्य-खाद्यान्नों की सफ़ाई से निकलने वाला कूड़ा, साग-सब्जी-फल आदि के छिलके, खाद्य वस्तुओं, बर्तन आदि के धोवन, कपड़ों की धुलाई, साबुन के फेन, मैल, नील, माँड़ रद्दी कागज़ के टुकड़े, सिलाई की कतरनें, कताई की रूई तथा छीजन आदि।

बड़े उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
घर की सफ़ाई कितने प्रकार की होती है? वर्णन कीजिए।
उत्तर-
घर की सफ़ाई को हम मुख्य रूप से चार भागों में बाँटते हैं-दैनिक सफ़ाई, साप्ताहिक सफ़ाई, मासिक सफ़ाई, वार्षिक सफ़ाई।
1. दैनिक सफ़ाई-दैनिक सफ़ाई से हमारा अभिप्राय उस सफ़ाई से है जो घर में प्रतिदिन की जाती है। अतः गृहिणी का यह प्रमुख कर्त्तव्य है कि वह घर के उठने-बैठने, पढ़ने-लिखने, सोने के कमरे, रसोईघर, आँगन, स्नानागार, बरामदा तथा शौचालय की प्रतिदिन सफ़ाई करे। दैनिक सफ़ाई के अन्तर्गत प्रायः इधर-उधर बिखरी हुई वस्तुओं को ठीक से लगाना, फर्नीचर को झाड़ना-पोंछना, फर्श पर झाडू करना, गीला पोंचा करना आदि आते है। आज के आधुनिक युग की व्यस्त गृहिणियों तथा कार्यरत गृहिणियों को यह कदापि सम्भव नहीं कि वे घर के सभी पक्षों की सफ़ाई प्रतिदिन करें।

2. साप्ताहिक सफ़ाई-एक कुशल गृहिणी को घर के दैनिक जीवन में अनेक कार्य करने पड़ते हैं अतः यह सम्भव नहीं कि वह एक ही दिन में घर की पूर्ण सफ़ाई कर सके। समय की कमी के कारण घर में जो वस्तुएँ प्रतिदिन साफ़ नहीं की जातीं उन्हें सप्ताह में या पन्द्रह दिन में एक बार अवश्य साफ़ कर लेना चाहिए। यदि ऐसा न किया गया तो दरवाजों तथा दीवारों की छतों पर जाले एकत्रित हो जायेंगे। दरवाज़ों व खिड़कियों के शीशों, फनीचर की सफ़ाई, बिस्तर झाड़ना व धूप लगाना, अलमारियों की सफ़ाई तथा दरी कालीन को झाड़ना व धूप लगाना आदि कार्य सप्ताह में एक बार अवश्य किये जाने चाहिएं।

3. मासिक सफ़ाई-जिन कमरों या वस्तुओं की सफ़ाई सप्ताह में एक बार न हो सके, उन्हें महीने में एक बार अवश्य साफ़ करना चाहिए। साधारण तौर पर महीने भर की खाद्य-सामग्री एक साथ खरीदी जाती है इसलिए उसको भण्डारगृह में रखने से पूर्व भंडार घर को भली-भाँति झाड़-पोंछकर ही उसमें खाद्य-सामग्री रखी जानी चाहिए। टीन के डिब्बों को भली-भाँति साफ़ करके धूप दिखाकर उसमें सामान भरना चाहिए। मासिक सफ़ाई के अन्तर्गत अनाज, दालों, अचार, मुरब्बे व मसाले आदि को धूप लगानी चाहिए। अलमारी के जाले, बल्बों के शेड आदि भी साफ़ करने चाहिएं।

4. वार्षिक सफ़ाई-वार्षिक सफ़ाई का तात्पर्य वर्ष में एक बार सम्पूर्ण घर की पूर्ण रूप से सफाई करना है। वार्षिक सफाई के अन्तर्गत घर की पुताई, टूटे स्थानों की मरम्मत, दरवाजों, खिड़कियों के किवाड़ों तथा चौखटों की मरम्मत तथा सफाई एवं रोगन करवाना, फर्नीचर और अन्य सामानों की मरम्मत, वार्निश, पॉलिश आदि आती है। कमरों से सभी सामानों को हटाकर चूना, पेंट या डिस्टेम्पर करवाना, पुताई के पश्चात् फर्श को रगड़कर धोना तथा दाग-धब्बे हटाना, सफ़ाई के उपरान्त सारे सामान को पुनः व्यवस्थित करना वार्षिक कार्य हैं। इस प्रकार की सफ़ाई के कमरों को नवीन रूप प्रदान होता है। रजाई, गद्दों को खोलकर रूई साफ़ करवाना, धुनवाना आदि भी वर्ष में एक बार किया जाता है।

हमारे देश में प्रायः जब वर्षा ऋतु समाप्त हो जाती है, दशहरे या दीपावली के समय वार्षिक सफ़ाई की जाती है। पुताई, पॉलिश आदि करवाने से घर की सुन्दरता तो बढ़ती ही है, रोग फैलाने वाले कीटाणु भी नष्ट हो जाते हैं। अतः स्वास्थ्य की दृष्टि से भी वर्ष में एक बार घर की पूर्ण स्वच्छता अनिवार्य है।

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एक शब्द में उत्तर दें

प्रश्न 1.
सफ़ाई के प्रबन्ध को कितने हिस्सों में बाँट सकते हैं?
उत्तर-
तीन।

प्रश्न 2.
शौचघर तथा नालियों में ………….का पानी डालना चाहिए।
उत्तर-
फ़िनाईल।

प्रश्न 3.
साप्ताहिक सफ़ाई में ……. की भी सफ़ाई की जाती है।
उत्तर-
दीवारों पर लगे जाले।

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प्रश्न 4.
घर में गन्दगी का एक प्राकृतिक कारण बताएं।
उत्तर-
मकड़ी का जाल।

प्रश्न 5.
दीवाली के समय की जाने वाली सफ़ाई कौन-सी है?
उत्तर-
वार्षिक सफ़ाई।

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घर की सफ़ाई PSEB 7th Class Home Science Notes

  • मिट्टी और धूल से भरा मकान देखने में बहुत बेकार और खराब लगता है।
  • मक्खियां और मच्छर गन्दगी की देन हैं।। कमरों को साफ़ करते समय कोनों की सफ़ाई का विशेष ध्यान रखना ज़रूरी
  • सफ़ाई करते समय हवा का रुख देखते हुए खिड़कियाँ और दरवाज़े खोलने ठीक रहते हैं।
  • शौचघर और गुसलखाने को प्रतिदिन फिनाइल से धोना चाहिए और उसमें खुली हवादार जाली लगानी चाहिए।
  • सप्ताह में एक दिन सारे घर की सफ़ाई सम्भव नहीं होती इसलिए कमरे बाँट लेना चाहिए।
  • सप्ताह में एक बार बिस्तरों को धूप अवश्य लगवानी चाहिए।
  • शौचघर में फिनाइल और कभी-कभी चूने का पानी छिड़कना चाहिए।
  • सफ़ाई रखने से जहां मकान की सुन्दरता कायम रहती है उसके साथ ही काफ़ी चीज़ों को नष्ट होने से भी बचाया जा सकता है।
  • हमारे देश में ऋतु के बदलने पर सफ़ाई करने का आम रिवाज है।
  • सफ़ेदी करने से पहले दीवारों से कलैण्डर और तस्वीरें उतारकर झाड़कर रख लेने चाहिएं ताकि टूट न जाएं।
  • खिड़कियाँ, अलमारियाँ और दरवाज़े की जालियाँ सोडे या साबुन वाले पानी के साथ साफ़ कर लेनी चाहिएं।
  • वार्षिक सफ़ाई या ऋतु के अनुसार सफ़ाई में दैनिक और साप्ताहिक सफ़ाई के भी सारे काम शामिल होते हैं।

PSEB 6th Class Home Science Practical अण्डा उबालना

Punjab State Board PSEB 6th Class Home Science Book Solutions Practical अण्डा उबालना Notes.

PSEB 6th Class Home Science Practical अण्डा उबालना

पूरा अण्डा उबालना—

सामग्री—

  1. पानी — 2 कप
  2. अण्डा —एक

विधि—पानी को साफ़ बर्तन में उबाले। जब पानी उबलने लग जाए तो पानी में अण्डा रख दें और तीन से चार मिनट तक उबालें।
उबालने के पश्चात् 15 सेकिण्ड के लिए ठण्डे पानी में रख दें। ठण्डे पानी से अण्डा निकालकर इसे छील लें। लम्बाई की तरफ़ से काटकर नमक तथा काली मिर्च लगाकर परोसें।

PSEB 6th Class Home Science Practical अण्डा उबालना

2. आधा उबला अण्डा—

उपरोक्त विधि में सिर्फ उबालने का समय एक से डेढ मिन्ट तक का रखा जाता है। उबले अण्डे को पूरा न छील कर कम छीला जाता है तथा इसमें नमक, काली मिर्च डाल कर चम्मच से खाया जाता है।
नोट-

  1.  बहुत हल्का उबालने के लिए एक मिनट उबालना ठीक रहता है।
  2. बर्तन में इतना पानी लें कि अण्डा डूब जाए।

PSEB 8th Class Home Science Solutions Chapter 6 घरेलू कीड़ों और जीव-जन्तुओं की रोकथाम

Punjab State Board PSEB 8th Class Home Science Book Solutions Chapter 6 घरेलू कीड़ों और जीव-जन्तुओं की रोकथाम Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 8 Home Science Chapter 6 घरेलू कीड़ों और जीव-जन्तुओं की रोकथाम

PSEB 8th Class Home Science Guide घरेलू कीड़ों और जीव-जन्तुओं की रोकथाम Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
मक्खी से कौन-से रोग फैलते हैं ?
उत्तर-
मक्खी से हैजा रोग फैलता है।

प्रश्न 2.
चूहे के पिस्सू से कौन-सी बीमारी फैलती है?
उत्तर-
चूहे के पिस्सू से प्लेग की बीमारी फैलती है।

प्रश्न 3.
मलेरिया किस मच्छर के काटने से होता है?
उत्तर-
मादा एनोफिलीज़ मच्छर के काटने से।

PSEB 8th Class Home Science Solutions Chapter 6 घरेलू कीड़ों और जीव-जन्तुओं की रोकथाम

प्रश्न 4.
मच्छरों को कैसे नष्ट किया सकता है?
उत्तर-
मच्छरों को डी० डी० टी० से नष्ट किया जाता है।

लघूत्तर प्रश्न

प्रश्न 1.
कीड़े-मकौड़े कितने प्रकार के होते हैं ?
उत्तर-
कीड़े-मकौड़े तीन प्रकार के होते हैंउत्तर-

  1. खून चूसने वाले-मच्छर, खटमल।
  2. भोजन को जहरीला बनाने वाले-मक्खी , चींटी।
  3. घर के सामान को हानि पहुंचाने वाले–काक्रोच, दीमक।

PSEB 8th Class Home Science Solutions Chapter 6 घरेलू कीड़ों और जीव-जन्तुओं की रोकथाम

प्रश्न 2.
मक्खी, मच्छर से बचने के लिए क्या करोगे ? इनसे क्या नुकसान हैं ?
अथवा
मक्खियों से कौन-से रोग फैलते हैं ? इनकी रोकथाम के ढंग लिखें।
उत्तर-
मक्खियों से बचने के उपाय

  1. घर के आस-पास मक्खियों के अण्डे देने और मक्खी पैदा होने के स्थान नष्ट कर देने चाहिए।
  2. गन्दगी वाले स्थान पर डी० डी० टी० के घोल का छिडकाव करना चाहिए। (3) कड़ेदान ढके होने चाहिए और उसके कूड़े का नियमित विसर्जन होना चाहिए।
  3. खाने की वस्तुओं को खुला नहीं छोड़ना चाहिए। उन्हें तार की जाली या मलमल के कपड़े से ढककर रखना चाहिए।
  4. दरवाज़े एवं खिड़कियों पर जाली लगवानी चाहिए।
  5. जब मक्खियाँ बहुतायत में हों तो मक्खीमार कागज़ तथा मक्खीमार दवा का इस्तेमाल करना चाहिए।
  6. मक्खियों के अण्डे, लारवा तथा प्यूपा को नष्ट करने के लिए क्रिसोल, तूतिया या सुहागे के घोल का छिड़काव कूड़ा-करकट वाले तथा अन्य ग़न्दे स्थानों पर करना चाहिए।
  7. नालियों में फिनायल का छिड़काव करना चाहिए।
  8. घर में स्वच्छता की ओर ध्यान देना चाहिए।

मक्खियों से नुकसान-मक्खी मनुष्य की सबसे बड़ी शत्रु है । यह अनेक रोगों, जैसे– हैंजा, पेचिस, तपेदिक, अतिसार आदि रोगों को फैलाने का कार्य करती है।

मक्खी उन गन्दे पदार्थों की ओर आकर्षित होती हैं जिनमें रोगों के रोगाणु या जीवाणु उपस्थित रहते हैं। जब यह गन्दगी पर बैठती है तो इसके रोंयेदार शरीर तथा चिपचिपे पैरों में गन्दगी व रोगों के जीवाणु लग जाते हैं। भोजन तथा कटे फलों आदि पर बैठकर यह रोगों के जीवाणुओं को वहाँ छोड़ देती है। इन रोगाणुयुक्त पदार्थों का सेवन करने से स्वस्थ व्यक्ति भी रोगों का शिकार हो जाता है।
PSEB 8th Class Home Science Solutions Chapter 6 घरेलू कीड़ों और जीव-जन्तुओं की रोकथाम 1
चित्र 6.1

मक्खी मच्छरों से बचने के उपाय

  1. घर के आँगन में या आस-पास पानी रुकने नहीं देना चाहिए।
  2. मच्छर शाम को काफी चुस्त होता है अतः शाम होते ही दरवाज़े व खिड़कियाँ बन्द कर देनी चाहिए।
  3. रात को सोने के लिए मच्छरदानी का प्रयोग करना चाहिए।
  4. मच्छर मारने के लिए फ्लिट का छिड़काव खासतौर पर मोटे पर्दो व अलमारियों के पीछे तथा अन्धेरे कोनों में करना चाहिए।
  5. कमरे में रात को तम्बाकू, धूप, नीम की पत्ती, अगरबत्ती व गन्धक की धूनी देनी चाहिए।
    PSEB 8th Class Home Science Solutions Chapter 6 घरेलू कीड़ों और जीव-जन्तुओं की रोकथाम 2
    चित्र 6.2 मच्छर
  6. सोने से पूर्व शरीर पर सरसों का तेल या ओडोमास क्रीम लगानी चाहिए।
  7. घर के आस-पास कूड़ा-करकट इकट्ठा नहीं होने देना चाहिए। घर और आसपास की जगह साफ़ रखनी चाहिए।

मच्छरों से नुकसान

  1. मलेरिया-मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से।
  2. डेंगू बुखार-एडिस एजेप्टी मच्छर के काटने से।
  3. फाइलेरिया-मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से।
  4. मस्तिष्क ज्वर-क्यूलेक्स की जाति के कारण।
  5. पीत ज्वर-एडिस मच्छर के काटने से।

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प्रश्न 3.
कॉकरोच को कैसे ख़त्म करोगे? यह क्या खराब करता है?
उत्तर-
कॉकरोच एक हानिकारक घरेलू कीट है। यह नमी वाले स्थानों पर होता है। इसलिए यह प्रायः शौचालय, रसोईघर व भण्डारगृह में अधिक मिलता है। यह भोजन और घरेलू कीड़ों और जीव-जन्तुओं की रोकथाम अन्य सामान को खराब करता है। यह लगभग हर चीज़ को खा जाता है, जैसे-कूड़ा, पुराने कागज़, किताबें, चमड़ा, सब्जियों और फलों के छिलके और खाने की अन्य वस्तुएँ।
PSEB 8th Class Home Science Solutions Chapter 6 घरेलू कीड़ों और जीव-जन्तुओं की रोकथाम 3
चित्र 6.3 कॉकरोच
सेकथाम व नष्ट करने के उपाय

  1. सीलन वाले स्थानों की सफ़ाई जल्दीजल्दी करनी चाहिए।
  2. रसोई का फर्श बिल्कुल साफ़ रहना चाहिए।
  3. रसोईघर की तथा मकान की अन्य नालियों में सप्ताह में कम-से-कम एक बार मिट्टी का तेल या अन्य कीटनाशक दवा डालनी चाहिए। इसके बाद उबलता हुआ पानी नालियों में डालना चाहिए। इससे अण्डे देने के स्थान भी साफ़ हो जाते हैं।
  4. तिलचट्टों को मारने के विशेष अभियान में 10% डी०डी०टी० और 40% गैमेक्सीन या पाइरेथ्रम का छिड़काव करना चाहिए।
  5. पाइरेथ्रम पाउडर जलाने से ये बेहोश हो जाते हैं और फिर इन्हें झाड़ के साथ मारकर फेंक देना चाहिए।

प्रश्न 4.
किताबों के और कपड़ों के कीड़े से क्या नुकसान हैं ?
उत्तर–
किताबों के और कपड़ों के कीड़े से निम्नलिखित नुकसान हैं-

  1. ये पुस्तकों, तस्वीरों और गलीचे जो काफी दिनों तक बॉक्स में बंद रहते हैं उनको नुकसान पहुंचाते हैं।
  2. ये कीड़े रेशम के कपड़े और ऊनी कपड़ों को खाते हैं।
  3. ये कीड़े जो ऊनी कपड़ों में अण्डे होते हैं उनसे लारवा निकलते हैं। ये कपड़ों को खाते हैं जिनमें छेद हो जाते हैं।

प्रश्न 5.
कुछ ऐसे प्रतिकारक बताओ जिनको सब कीड़ों-मकौड़ों से बचाव के लिए इस्तेमाल किया जा सके।
उत्तर-
कुछ मिले-जुले प्रतिकारक निम्नलिखित हैं-

  1. नींबू, तम्बाकू व तुलसी के पौधे।
  2. नीम, तम्बाकू आदि के पत्ते।
  3. चील काफूर की लकड़ी।
  4. यूक्लिप्टस की लकड़ी, पत्तियाँ व तेल।
  5. नैष्थलीन की गोलियाँ।।
  6. गन्धक, पाइरेथ्रम, बोरिक एसिड।
  7. साबुन का चूरा, फिटकरी या काली मिर्च का पाउडर।

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प्रश्न 6.
खून चूसने वाले चार कीड़ों के नाम बताओ।
उत्तर-
मच्छर, खटमल, पिस्स, सैंड-फ्लाई।

प्रश्न 7.
पुस्तकों को नुकसान पहुँचाने वाले कीड़ों का नाम बताओ।
उत्तर-
पुस्तकों को हानि पहुँचाने वाले कीड़े कॉकरोच, दीमक और झींगुर हैं।

प्रश्न 8.
भोजन वाली डोली के पाए पानी में क्यों रखने चाहिए?
उत्तर-
चींटियों से बचने के लिए भोजन वाली डोली के पाए पानी में रखने चाहिए।

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प्रश्न 9.
सैंडफ्लाई कैसा कीड़ा है और यह क्या नुकसान पहुँचाता है ?
उत्तर-
यह बहुत छोटा कीट है जो मच्छरदानी में भी पहुँच जाता है। विशेषकर रात को टखने और गुट पर काटता है। इससे बुखार भी हो जाता है।

प्रश्न 10.
खटमल कहाँ रहते हैं ? इनकी रोकथाम के ढंग लिखो।
उत्तर-
खटमल गन्दे फर्श, दरी या टूटे फर्श की दरार और खाट के सिरों में रहते हैं।
रोकथाम के ढंग-

  1. खटमल को नष्ट करने के लिए मिट्टी और तारपीन का तेल छिड़कना चाहिए।
  2. फर्श पर उबलता पानी डालना चाहिए इससे खटमल मर जाता है।
  3. खिड़की की चुगाठ को मिट्टी के तेल से साफ करना चाहिए।
  4. जहाँ खटमल हों वहाँ गंधक की धूनी करनी चाहिए।

प्रश्न 11.
मक्खीमार कागज़ कैसे तैयार किया जा सकता है?
उत्तर-
मक्खीमार कागज़ तैयार करने के लिए पाँच भाग अरंडी का तेल और आठ भाग रेजिन पाउडर लेकर गर्म करते हैं और उसे सूखने से पहले गर्म ही किसी कागज़ पर लगाते हैं। इस प्रकार मक्खी मार कागज़ तैयार हो जाता है।

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प्रश्न 12.
दीमक और झींगुर किस वस्तु की हानि करते हैं ?
उत्तर-
दीमक और झींगुर कागज़, लकड़ी और कपड़ों को नुकसान करते हैं।

प्रश्न 13.
घरेलू जीव-जन्तु कौन-कौन से हैं ? यह क्या नुकसान पहुंचाते हैं और इनसे कैसे बचा जा सकता है ?
उत्तर-
स्वयं उत्तर दें।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
कुछ ऐसे प्रतिकारक बताओ जिनको सब कीड़ों-मकौड़ों से बचाव के लिए इस्तेमाल किया जा सके।
उत्तर-
कुछ मिले-जुले प्रतिकारक अग्रलिखित हैं-

  1. नींबू, तम्बाकू व तुलसी के पौधे।
  2. नीम, तम्बाकू आदि के पत्ते।
  3. चील काफूर की लकड़ी।
  4. यूक्लिप्टस की लकड़ी, पत्तियाँ व तेल।
  5. नैथलीन की गोलियाँ।
  6. गन्धक, पाइरेथ्रम, बोरिक एसिड।
  7. साबुन का चूरा, फिटकरी या काली मिर्च का पाउडर।

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प्रश्न 2.
सैंडफ्लाई, पिस्सू, खटमल को मारने के लिए क्या प्रयोग करोगे?
उत्तर-
1. सैंडफ्लाई-
यह बहुत छोटा कीड़ा है। यह मच्छरदानी में भी दाखिल हो जाता है। यह विशेषकर रात को टखने और मुँह पर काटता है। इससे बचने के लिए निम्न उपाय करने चाहिए
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चित्र 6.4 सैंड फ्लाई

  1. कुर्सियों, मेज़ और चारपाई के नीचे मच्छरमार तेल छिड़कना चाहिए।
  2. रात को मच्छरमार धूप जलानी चाहिए।
  3. बहुत बारीक मच्छरदानी का प्रयोग करना चाहिए।
  4. घर के आस-पास की गीली जगहों पर फिनाइल छिड़कना चाहिए।

2. पिस्सूप्लेग बीमारी का कारण चूहे के पिस्सू होते हैं। पिस्सू छोटे और भूरे रंग के होते हैं। इनको मारने के निम्न उपाय करने चाहिए
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चित्र 6.5 पिस्सू

  1. घर में पाले कुत्ते को कार्बोलिक साबुन से नहलाना चाहिए और नहलाने के पानी में कार्बोलिक अम्ल डालना चाहिए।
  2. जहाँ भी पिस्सू की सम्भावना हो, मिट्टी का तेल या तारपीन का तेल छिड़कना चाहिए।
  3. चूहों के द्वारा भी पिस्सू फैलते हैं अतः पिस्सू को नष्ट करने से पहले चूहों को नष्ट करना चाहिए।
  4. दीवार तथा फर्श की दरारों को सीमेंट से भर देना चाहिए।
  5. भूमि पर नमक अथवा चूना छिड़क देना चाहिए।
  6. सूर्य की तेज़ किरणों के प्रभाव से पिस्सुओं के लारवा मर जाते हैं।
  7. जीवाणुनाशक पाऊडर का प्रयोग करना चाहिए जिससे पिस्सुओं द्वारा प्लेग न फैले।

3. खटमल-खटमल गन्दे फर्श, दरी या टूटे फर्श की दरार और खाट के सिरों में रहते हैं। खटमल लाल भूरे रंग का कीड़ा होता है। यह 1/6 इंच से 1/7 इंच तक लम्बा होता है।
खटमल मारने के उपाय
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चित्र 6.6 खटमल

  1. खटमल को नष्ट करने के लिए मिट्टी और तारपीन का तेल मिलाकर छिड़कना चाहिए।
  2. फर्श पर उबलता पानी डालना चाहिए इससे भी खटमल मर जाता है।
  3. जहाँ खटमल हो वहाँ गंधक की धूनी करनी चाहिए। इससे खटमल मर जाता है।

प्रश्न 3.
चूहे के घर में होने से क्या हानि होती है ? बचाव के उपाय बताओ।
उत्तर-
चूहे घर की खाद्य सामग्री तथा कपड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं। ये भण्डार घर में अधिक पलते हैं।
चूहों पर प्लेग के कीट पिस्सू रहते हैं और चूहों के द्वारा ही वे मनुष्य तक पहुँचते हैं। ऐसे चूहे जिन व्यक्तियों को काटते हैं वे प्लेग के रोगी हो जाते हैं। इस प्रकार चूहे पिस्सुओं को आश्रय देकर बीमारियाँ फैलाते हैं। ‘
चूहों से बचाव के उपाय-

  1. चूहों के बिलों को काँच से या सीमेंट से भरकर अच्छी तरह बन्द कर देना चाहिए।
  2. चूहे मारने की दवा आटे में मिलाकर उनके बिल के पास डाल देने से चूहे उसे खाकर मर जाते हैं।
  3. भण्डारघर व रसोईघर में सभी खाद्य सामग्री को बन्द पीपों या डिब्बों में रखना चाहिए।
  4. भण्डारघर में से कुछ भी खाद्य सामग्री निकालते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि कुछ भी ज़मीन पर न बिखरे।
  5. सब्जियाँ तथा फलों को तारों वाली टोकरी में ऊँची जगह पर टाँगना चाहिए।
  6. घर साफ-सुथरा रखना चाहिए। कोई भी खाने की चीज़ इधर-उधर नहीं बिखरनी चाहिए।
  7. इनको पकड़ने के लिए पिंजड़े (चूहेदानी) का प्रयोग करना चाहिए।
  8. चूहों को पकड़ने पर उन्हें अपने स्थान से बहुत दूर छोड़कर आना चाहिए।

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प्रश्न 4.
छिपकली और मकड़ी से छुटकारा पाने के ढंग बताओ।
उत्तर-
छिपकली से छुटकारा पाने के ढंग

  1. घर की दीवारों एवं छिद्रों में तथा फर्नीचरों में फ्लिट या डी० डी० टी० छिड़कते रहना चाहिए क्योंकि ऐसी जगहों पर ये अपना बिल बना लेती हैं।
  2. घर के भोज्य पदार्थों को ढककर रखना चाहिए।
  3. घर को साफ़ एवं कीटरहित रखना चाहिए क्योंकि कीट ही छिपकली का भोजन है। घरेलू कीड़ों और जीव-जन्तुओं की रोकथाम

मकड़ी से छुटकारा पाने के ढंग-

  1. घर को सदा साफ़ रखना चाहिए।
  2. फ्लिट तथा डी० डी० टी० पाउडर घर की दीवारों पर छिड़कना चाहिए।
  3. मकड़ी के जालों को साफ करते रहना चाहिए।

प्रश्न 5.
कीड़े और जीव-जन्तु मारने के लिए कौन-कौन सी कीटाणुनाशक दवाइयों का प्रयोग किया जा सकता है?
उत्तर-
कीड़े और जीव-जन्तु मारने के लिए निम्नलिखित कीटनाशक दवाइयों का प्रयोग किया जा सकता है

  1. चूना-कच्चा तथा बुझा हुआ।
  2. पोटेशियम परमैंगनेट (लाल दवाई)।
  3. साबुन।
  4. डी० डी० टी०
  5. नीला तूतिया (कॉपर सल्फेट)
  6. कार्बोलिक अम्ल-कार्बोलिक साबुन तथा घोल के रूप में।
  7. डेटोल।
  8. फ़ार्मेलिन।
  9. लाईसोल।
  10. फिनाइल।
  11. क्रिसोल।
  12. क्लोरीन गैस।
  13. गन्धक का धुआँ।
  14. फार्मेल्डिहाइड गैस के रूप में।

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प्रश्न 6.
जुएँ कहाँ तथा क्यों पड़ जाती हैं ? इसकी रोकथाम के उपाय बताओ।
उत्तर-
जुएँ मनुष्य के सिर में तथा शरीर पर हो जाती हैं। सिर की जुएँ सिर के बालों में रहती हैं। यहाँ वे अण्डे देती हैं जिन्हें लीख कहते हैं। दूसरे प्रकार की जुएँ गन्दे कपड़ों व शरीर की त्वचा पर रहती हैं जुएँ बड़ी आसानी से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुँच जाती हैं।
जुएँ गन्दी होती हैं। इनसे टाइफस बुखार तथा त्वचा के रोग हो जाते
जुओं की रोकथाम के ढंग-
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चित्र 6.7 जूं

  1. जूं के मिलते ही उसे मार देना चाहिए।
  2. सिर में जुएँ होने पर बाज़ार में उपलब्ध जूं मार रसायन को। लगाकर कुछ घण्टों के बाद सिर धो लेना चाहिए।
  3. सिर में यदि जुएँ अधिक संख्या में हों तो बाल कटवा देने चाहिए।
  4. नारियल के तेल में मुश्क-कपूर डालकर सिर में मलने से भी जुएँ मर जाती हैं।
  5. शरीर में जुएँ होने पर बुने हुए कपड़ों को फर्श पर रखकर ऊपर खूब गर्म पानी डालना चाहिए। व्यक्ति को गर्म पानी व साबुन से मल-मलकर नहाना चाहिए।
  6. मैले कपड़ों को उबलते पानी में डालकर धोना चाहिए।
  7. बिस्तर की चादरों आदि की सफ़ाई रखनी भी आवश्यक है।

Home Science Guide for Class 8 PSEB घरेलू कीड़ों और जीव-जन्तुओं की रोकथाम Important Questions and Answers

I. बहुविकल्पी प्रश्न

प्रश्न 1.
रक्त चूसने वाला कीट है
(क) मच्छर
(ख) मक्खी
(ग) काकरोच
(घ) दीमक।
उत्तर-
(क) मच्छर

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प्रश्न 2.
प्लेग की बिमारी किस से फैलती है ?
(क) मच्छर
(ख) चूहा
(ग) चींटी
(घ) सभी।
उत्तर-
(ख) चूहा

प्रश्न 3.
घर के सामान को हानि पहुँचाने वाला कीट है
(क) चींटी
(ख) खटमल
(ग) दीमक
(घ) मच्छर
उत्तर-
(ग) दीमक

प्रश्न 4.
………… कपड़ों तथा पुस्तकों को नष्ट करता है।
(क) झींगुर
(ख) मच्छर
(ग) खटमल
(घ) काकरोच।
उत्तर-
(क) झींगुर

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प्रश्न 5.
मक्खी से रोग फैलते हैं
(क) हैजा
(ख) पेचिश
(ग) तपैदिक
(घ) सभी ठीक
उत्तर-
(घ) सभी ठीक

प्रश्न 6.
मलेरिया के इलाज के लिए कौन-सी दवाई का प्रयोग होता है ?
(क) दाल चीनी
(ख) कुनीन
(ग) सौंफ
(घ) अजवाइन।
उत्तर-
(ख) कुनीन

प्रश्न 7.
ठीक तथ्य है
(क) मलेरिया एनाफलीज़ मच्छर के कारण होता है।
(ख) फाइलेरिया, मादा क्यूलैक्स की जाती के कारण होता है।
(ग) चूहे के पिस्सू से प्लेग की बिमारी फैलती है।
(घ) सभी ठीक।
उत्तर-
(घ) सभी ठीक

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II. ठीक/गलत बताएं

  1. मच्छर भोजन को ज़हरीला बना देता है।
  2. सैंड फलाई छोटा कीट है जो मच्छरदानी में भी दाखिल हो जाता है।
  3. नेवला तथा बिल्ली पालने से सांप से बचाव होता है।
  4. दीमक लाभदायक कीट है।
  5. मादा एनाफलीज़ मच्छर के काटने से मलेरिया होता है।
  6. डेंगू बुखार ऐडीज एजेपटी मच्छर के कारण होता है।

उत्तर-

III. रिक्त स्थान भरें

  1. एनाफलीज मच्छर से ………… हो जाता है। (From Board M.O.P.)
  2. कीड़े-मकौड़ों को ………….. श्रेणियों में बांटा गया है।
  3. ……………… कपड़ों तथा पुस्तकों को नष्ट करती हैं।
  4. चूहे ……………….. के पिस्सू पैदा करते हैं।
  5. खटमल से ……………. ज्वर हो जाता है।

उत्तर-

  1. मलेरिया,
  2. तीन
  3. झींगुर,
  4. प्लेग,
  5. काला।

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IV. एक शब्द में उत्तर दें

प्रश्न 1.
बाल-पक्षाघात रोग किस अवस्था में होता है ?
उत्तर-
बच्चों में 5-7 वर्ष की अवस्था में।

प्रश्न 2.
मलेरिया के उपचार के लिए किस औषधि का प्रयोग करना चाहिए?
उत्तर-
कुनीन।

प्रश्न 3.
मच्छरों से कौन-सा बुखार फैलता है?
उत्तर-
मलेरिया।

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प्रश्न 4.
प्लेग की बीमारी किससे फैलती है ?
उत्तर-
चूहे के पिस्सू से ।

प्रश्न 5.
मक्खी से कौन-से रोग फैलते हैं ?
उत्तर-
हैजा रोग।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
चूहे हानिकारक हैं, कैसे?
उत्तर-
क्योंकि इससे रोग के कीटाणु फैलते हैं।

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प्रश्न 2.
खटमल से कौन-से रोग फैलते हैं ?
उत्तर-
खटमल से काला ज्वर और चर्म रोग फैलते हैं।

प्रश्न 3.
कीड़ों द्वारा फैलने वाले रोगों के उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
मलेरिया, डेंगू, ज्वर, प्लेग, रिलेप्सिंग ज्वर

प्रश्न 4.
मलेरिया के प्रमुख लक्षण क्या हैं ?
उत्तर-
जी घबराना, सिर दर्द, ठण्ड व कंपकपी के साथ ज्वर चढ़ना।

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प्रश्न 5.
प्लेग रोग किन कीटों के काटने से होता है?
उत्तर-
पिस्सुओं के काटने से।

प्रश्न 6.
प्लेग के प्रमुख लक्षण क्या हैं?
उत्तर-
105°-107°F तक ज्वर, कभी-कभी उल्टियाँ तथा दस्त लगना, बगल तथा जाँघ में गिल्टियाँ निकलना।

प्रश्न 7.
डेंगू ज्वर किस मच्छर के काटने से होता है ?
उत्तर-
एडिस ऐजेप्टी।

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प्रश्न 8.
डेंगू ज्वर के क्या लक्षण हैं ?
उत्तर-
ज्वर, पीठ तथा अन्य अंगों में पीड़ा, भूख व नींद मर जाना तथा कमज़ोरी।

प्रश्न 9.
पुनराक्रमण ज्वर (रिलेप्सिंग ज्वर) किन कीटों द्वारा होता है ?
उत्तर-
नँ और खटमल के द्वारा रक्त चूसने से।

प्रश्न 10.
पुनराक्रमण ज्वर के मुख्य लक्षण क्या हैं ?
उत्तर-
ज्वर 104° फा० तक, शरीर पर गुलाबी रंग के दाने, कभी-कभी उल्टी व चक्कर।

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प्रश्न 11.
तपेदिक या क्षय रोग के क्या कारण हैं ?
उत्तर-
बाल-विवाह, अपूर्ण खुराक, कमज़ोरी।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
चींटियों से क्या नुकसान होता है ? इनसे बचाव के उपाय लिखो।
उत्तर-
चींटियाँ मृत जीव-जन्तु और गन्दगी की सफ़ाई करती हैं परन्तु ये काटकर नुकसान भी पहुंचाती हैं। चींटियाँ अगर खाने में पड़ जाती हैं तो खाना दूषित तथा थोड़ा विषैला हो जाता है।
PSEB 8th Class Home Science Solutions Chapter 6 घरेलू कीड़ों और जीव-जन्तुओं की रोकथाम 8
चित्र 6.8 चींटी
चींटियों से बचाव के उपाय-

  1. ये मीठे पदार्थों पर शीघ्र चढ़ती हैं अत: शहद व मुरब्बे आदि की शीशियों को पानी में रखना चाहिए।
  2. भोजन वाली डोली (अलमारी) के पाए पानी में रखने चाहिए।
  3. चींटियों की खुड्डों में बोरेक्स या हल्दी डाल देनी चाहिए।

प्रश्न 2.
मकड़ी से क्या हानि है ?
उत्तर-
मकड़ी गन्दे स्थानों पर पाई जाती है। यह घरेलू कीड़ेमकोड़े खाती है। यदि इसके मुँह से निकलने वाला लसलसा पदार्थ शरीर के किसी भी स्थान पर पड़ जाए तो वहाँ फफोले पड़ जाते हैं।
PSEB 8th Class Home Science Solutions Chapter 6 घरेलू कीड़ों और जीव-जन्तुओं की रोकथाम 9
चित्र 6.9 मकड़ी

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प्रश्न 3.
झींगुरों से बचाव के उपाय लिखो।
उत्तर-
झींगुर कागज़ व सूती कपड़े खाते हैं। आमतौर पर ये दिन में अन्धेरे कोनों में छिपे रहकर रात में बाहर आते हैं। झींगुरों से बचाव के उपाय निम्न हैं-
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चित्र 6.10 झींगुर

  1. वस्त्रों में नैप्थलीन की गोलियाँ रखनी चाहिए।
  2. इनके स्थानों पर सुहागे, पाइरेथ्रम या गन्धक का प्रयोग मददगार होता है।
  3. समय-समय पर कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव इस कीट को नाश करने में सहायक होता है।
  4. इनकी संख्या बढ़ जाने पर बन्द कमरे में पाइरेथ्रम पाउडर को जलाकर उसके धुएँ से इन्हें मारा जाता है।
  5. इनकी रोकथाम का सर्वोत्तम उपाय घरों की सफ़ाई करते रहना है।

प्रश्न 4.
कपड़ों के कीड़े ( पतंगों) की रोकथाम के उपाय बताओ।
उत्तर-
कपड़ों के पतंगों के लारवा गर्म कपड़ों और बुनी पोषाकों को नष्ट करते हैं। अण्डे जो ऊनी कपड़ों में दिए जाते हैं, उनसे लारवा निकलते हैं। ये कपड़ों को खाते हैं जिनसे उनमें छेद हो जाते हैं। इनकी रोकथाम के उपाय निम्न हैं—

  1. कपड़ों को जल्दी-जल्दी धूप दिखाते रहने से इनके लारवा मर जाते हैं।
  2. ऊनी कपड़ों को अख़बार में लपेटकर टिन के हवाबन्द बक्स में रखना चाहिए। अख़बारों की मुद्रण स्याही से ये पतंगें दूर भागते हैं।
  3. कपूर और नैष्थलीन की गोलियाँ भी कपड़ों में रखने से बचाव होता है।

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प्रश्न 5.
दीमक की रोकथाम और नष्ट करने के उपाय बताओ।
उत्तर-
दीमक मनुष्य के शरीर को हानि नहीं पहुँचाती, परन्तु घर में फर्नीचरों, छतों, दरवाज़ों, अन्य लकड़ी के सामान, पुस्तकों, वस्त्रों आदि को नष्ट कर देती है। लकड़ी इनका मुख्य भोजन है। इनसे बचाव के निम्नलिखित उपाय करने चाहिए
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चित्र 6.11 दीमक

  1. लकड़ी के समान, पुस्तकें आदि को सीलन से बचाना चाहिए।।
  2. लकड़ी की वस्तुओं में जो दरारें हों, उन्हें या तो भर देना | चाहिए या उनमें मिट्टी के तेल का छिड़काव करना चाहिए।
  3. जिन वस्तुओं में दीमक जल्दी लग जाती है उन्हें सप्ताह में एक बार धूप में रखना चाहिए।
  4. दीमक की सम्भावना वाले सामान पर डी० डी० टी० छिड़कते रहना चाहिए।

प्रश्न 6.
सिल्वर फिश किन चीज़ों को नुकसान पहुँचाती है ? इसकी रोकथाम के उपाय बताओ।
उत्तर-
यह घरों में तस्वीरों के फ्रेम के पीछे के गत्ते, किताबों और कपड़ों को खाती है। यह कृत्रिम रेशम, माँडी लगे कपड़े, कागज़ और लुगदी पर निर्भर होती है। इसकी रोकथाम के उपाय निम्नलिखित हैं

  1. अलमारियों, दराज़ों और बक्सों को अच्छी तरह साफ़ रखना चाहिए।
  2. कागज़ के टुकड़ों जैसे अनावश्यक पदार्थों को घर में इकट्ठा नहीं होने देना चाहिए।
  3. किताबों की समय-समय पर देखभाल की जानी चाहिए।
  4. पाइरेथ्रम का पाउडर छिड़कना चाहिए।
  5. पाइरेथ्रम तथा गन्धक का धुआँ भी सिल्वर फिश का नाश करता है।

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प्रश्न 7.
मच्छर से बचने के उपाय बताओ।
उत्तर-
मक्खी मच्छरों से बचने के उपाय

  1. घर के आँगन में या आस-पास पानी रुकने नहीं देना चाहिए।
  2. मच्छर शाम को काफी चुस्त होता है अतः शाम होते ही दरवाज़े व खिड़कियाँ बन्द कर देनी चाहिए।
  3. रात को सोने के लिए मच्छरदानी का प्रयोग करना चाहिए।
  4. मच्छर मारने के लिए फ्लिट का छिड़काव खासतौर पर मोटे पर्दो व अलमारियों के पीछे तथा अन्धेरे कोनों में करना चाहिए।
  5. कमरे में रात को तम्बाकू, धूप, नीम की पत्ती, अगरबत्ती व गन्धक की धूनी देनी चाहिए।
    PSEB 8th Class Home Science Solutions Chapter 6 घरेलू कीड़ों और जीव-जन्तुओं की रोकथाम 2
    चित्र 6.2 मच्छर
  6. सोने से पूर्व शरीर पर सरसों का तेल या ओडोमास क्रीम लगानी चाहिए।
  7. घर के आस-पास कूड़ा-करकट इकट्ठा नहीं होने देना चाहिए। घर और आसपास की जगह साफ़ रखनी चाहिए।

प्रश्न 8.
कीड़े-मकौड़ों को हम कितनी श्रेणियों में बांट सकते हैं ? प्रत्येक का उदाहरण दें।
उत्तर-
कीड़े-मकौड़ों को हम तीन श्रेणियों में बांट सकते हैं-

  1. खून-चूसने वाले-मच्छर,
  2. भोजन को ज़हरीला बनाने वाले-कीड़े,
  3. घर के सामान के नुक्सान पहुंचाने वाले-दीमक।

प्रश्न 9.
पिस्सू और खटमल को मारने के लिए क्या करेंगे ?
उत्तर-
देखें प्रश्न 7 (अभ्यास का) का उत्तर।।

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प्रश्न 10.
मच्छरों से क्या हानि है ? इसकी रोक-थाम कैसे करोगे ?
उत्तर-
मच्छरों से नुकसान

  1. मलेरिया-मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से।
  2. डेंगू बुखार-एडिस एजेप्टी मच्छर के काटने से।
  3. फाइलेरिया-मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से।
  4. मस्तिष्क ज्वर-क्यूलेक्स की जाति के कारण।
  5. पीत ज्वर-एडिस मच्छर के काटने से।

प्रश्न 11.
मक्खियों के बचाव के लिए आप क्या करेंगे तथा इनका क्या नुक्सान है ?
उत्तर-
स्वयं उत्तर दें।

प्रश्न 12.
(क) नीम, तम्बाकू या तुलसी का पौधा घर में क्यों लगाना चाहिए?
(ख) साँप बिच्छ्र से बचने के लिए क्या करोगे?
उत्तर-
नीम, तम्बाकू व तुलसी के पौधे घरों में दुर्गन्धनाशक, कीटनाशक व कीट प्रतिकारक होते हैं।
नीम की पत्तियों को अनाजों के बीच रखकर अनाजों को कीटों से सुरक्षित रखा जाता है। नीम की पत्तियाँ ऊनी कपड़ों को सुरक्षित रखती हैं।
तम्बाकू की पत्तियों का धुआँ कीटनाशक होता है। तम्बाकू की धूल से खमीरा बनाया जाता है जिसके धुएँ से कीट मर जाते हैं। इससे एक कीटनाशक औषधि निकोटीन सल्फेट भी बनाई जाती है।
तुलसी का पौधा साँप के काटे में विषमारक के रूप में काम आता है। साँप से बचने के उपाय

  1. घर के निकट की झाड़ियाँ काट देनी चाहिए।
  2. घर के आस-पास की ज़मीन, घर की दरारों और छेदों में फिनाइल डालनी चाहिए।
  3. तम्बाकू के पत्ते उबालकर छिड़कना चाहिए।
  4. नेवला व बिल्ली पालने से भी साँप से बचाव होता है।

बिच्छू से बचने के उपाय-

  1. कीटनाशक दवाओं का इस्तेमाल कर सभी कीटों को मार देना चाहिए।
  2. घर के सभी, खासकर अन्धेरे स्थानों को नियमित रूप से साफ़ करना चाहिए।

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घरेलू कीड़ों और जीव-जन्तुओं की रोकथाम PSEB 8th Class Home Science Notes

  • कीड़े-मकौड़ों को हम तीन श्रेणियों में बाँट सकते हैं
    • खून चूसने वाले,
    • भोजन को ज़हरीला बनाने वाले,
    • घर के सामान को नुकसान पहुँचाने वाले।
  • एनोफेलीज़ जाति के मच्छर की मादाओं के काटने से मलेरिया रोग फैलता है।
  • क्यूलेक्स जाति के मच्छरों के काटने से भी यह रोग होता है।
  • मच्छर मारने के लिए फ्लिट छिड़कना चाहिए ।
  • अगर मच्छर काट ले और दर्द हो तो थोड़ा अमोनिया लगा लेना चाहिए।
  • खटमल गन्दे फर्श, दरी या टूटे फर्श की दरार और खाट के सिरों में रहते हैं।
  • खटमल लाल भूरे रंग का कीड़ा होता है।
  • चूहे के पिस्सू प्लेग की बीमारी फैलाते हैं।
  • कॉकरोच और तिलचट्टा भोजन और सामान दोनों चीज़ों को खराब करता है।
  • दीमक कागज़, लकड़ी आदि को नष्ट करती है। यह लकड़ी को अन्दर खाकर खोखला कर देती है।
  • झींगुर कपड़ों और पुस्तकों को नष्ट करती है।
  • कपड़े के कीड़े रेशम के कपड़े और ऊनी कपड़ों को खाते हैं।
  • चूहे प्लेग के पिस्सू पैदा करते हैं।
  • छिपकली छोटे-छोटे कीड़े-मकौड़े खाकर नुकसान की बजाए हमारी मदद करती है।

PSEB 12th Class Political Science Solutions Chapter 8 नौकरशाही

Punjab State Board PSEB 12th Class Political Science Book Solutions Chapter 8 नौकरशाही Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 12 Political Science Chapter 8 नौकरशाही

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-

प्रश्न 1.
नौकरशाही की परिभाषा लिखो। इसकी मुख्य विशेषताओं का वर्णन करो।
(Define Bureaucracy.-Write main characteristics of Bureaucracy.)
अथवा
नौकरशाही की विशेषताओं का वर्णन कीजिए। (Explain the characteristics of Bureaucracy.)
उत्तर-
नौकरशाही अथवा ब्यूरोक्रेसी (Bureaucracy) फ्रांसीसी भाषा के शब्द ‘ब्यूरो’ (Bureau) से बना है जिसका अर्थ है डैस्क या लिखने की मेज़। अतः इस शब्द का अर्थ हुआ ‘डैस्क सरकार।’ इस प्रकार नौकरशाही (Bureaucracy) का अर्थ है-डैस्क पर बैठ कर काम करने वाले अधिकारियों के शासन से है। दूसरे शब्दों में, नौकरशाही का अर्थ है प्रशासनिक अधिकारियों का शासन। इस शब्द का अर्थ कालान्तर में बदलता रहता है। यह शब्द काफ़ी बदनाम हो गया है तथा इस शब्द का अर्थ स्वेच्छाचारिता (Arbitrariness), अपव्यय (Wastefulness), कार्यालय की कार्यवाही (Officiousness) तथा तानाशाही (Regimentation) आदि के रूप में किया जाता है।।

नौकरशाही की बदनामी के बावजूद प्रजातन्त्र तथा लोक हितकारी राज्य में इनका महत्त्व बहुत अधिक हो गया है। नौकरशाही शब्द का अधिकाधिक प्रयोग लोक सेवा के प्रभाव को जताने के लिए किया जाता है। प्रायः सभी आधुनिक राज्यों में सरकार का कार्य उन अधिकारियों द्वारा किया जाता है जिन्हें प्रशासनिक समस्याओं की पूरी जानकारी तथा क्षमता रहती है। अधिकारियों के ऐसे निकाय को नौकरशाही के रूप में जाना जाता है। नौकरशाही सरकारी गतिविधियों के समूह द्वारा उत्पन्न गतिविधि है। नौकरशाही की विभिन्न परिभाषाएं इस प्रकार हैं-

1. विलोबी (Willoughby) के अनुसार, “नौकरशाही के दो अर्थ हैं, विस्तृत अर्थों में यह एक सेवी वर्ग प्रणाली है जिसके द्वारा कर्मचारियों को विभिन्न वर्गीय पद सोपानों जैसे सैक्शन, डिवीजन, ब्यूरो तथा डिपार्टमैण्ट में बांटा जाता (“It is to describe any personnel system of administration composed of a hierarchy of sections, divisions, bureaus and departments.”)

संकुचित अर्थ में “यह सरकारी कर्मचारियों के संगठन की पद-सोपान प्रणाली है जिस पर बाहरी प्रभावी लोक नियन्त्रण सम्भव नहीं।”
(“A body of public servants organised in a hierarchical system which stands outside the sphere of effective public control.”)

2. मार्शल ई० डीमॉक (Marshall E. Dimock) के अनुसार, “नौकरशाही का अर्थ है विशेषीकृत पद सोपान एवं संचार की लम्बी रेखाएं।”
(“Bureaucracy means specialised hierarchies and long lines of communication.”)

3. फाइनर (Finer) के अनुसार, “नौकरशाही ऐसा शासन है जिसे मुख्यतः ऐसे कार्यालयों द्वारा चलाया जाता है जिसकी अध्यक्षता अधिकारियों के प्रशिक्षित वर्ग के पास होती है। ये अधिकारीगण स्थायी, वेतन-भोगी एवं कुशल होते हैं।

4. मैक्स वैबर (Max Weber) के अनुसार, “नौकरशाही प्रशासन की ऐसी व्यवस्था है, जिसकी विशेषताविशेषज्ञता, निष्पक्षता तथा मानवता का अभाव होता है।”
(“A System of administration characterized by expertness, impartiality and the absence of humanity.”)

5. ग्लैडन (Gladden) के अनुसार, “नौकरशाही का अर्थ अन्तर्सम्बन्धित कार्यालयों का नियमित प्रशासनिक व्यवस्था में संगठन है।”
(“The term Bureaucracy means of regulated administrative system organised as a series of inter-related offices.”)

6. पाल एप्लबी (Paul Appleby) के अनुसार, “यह तकनीकी दृष्टि से कुशल व्यक्तियों का एक व्यावसायिक वर्ग है जो क्रमबद्ध संगठित होते हैं और निष्पक्ष रूप से राज्य की सेवा करते हैं।”
(“It is a professional class of technically skilled persons who are organised in an hierarchical way and serve the state in and impartial manner.”).

PSEB 12th Class Political Science Solutions Chapter 8 नौकरशाही

प्रश्न 2.
आधुनिक लोकतन्त्रीय राज्य में नौकरशाही के महत्त्व का वर्णन करें। (Explain the importance of Bureaucracy in a Modern Democratic State.)
उत्तर-
आधुनिक लोकतन्त्रात्मक राज्य में नौकरशाही का महत्त्व दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। आधुनिक राज्य में नौकरशाही का होना अनिवार्य है। प्रशासन की कार्यकुशलता और सफलता योग्य, निष्पक्ष और ईमानदारी नौकरशाही पर निर्भर करती है। किसी भी तरह की शासन प्रणाली क्यों न हो, नौकरशाही एक ऐसी धुरी है जिसके इर्द-गिर्द प्रशासन घूमता रहता है। वास्तव में शासन नौकरशाही द्वारा ही चलाया जाता है और इसीलिए कई बार कहा जाता है कि आजकल नौकरशाही की सरकार स्थापित हो चुकी है। नौकरशाही का महत्त्व अग्रलिखित है-

1. शासन व्यवस्था का आधार (Basis of Government)-आधुनिक युग में शासन के कार्य बहुत विस्तृत हो गए हैं। शासन के कार्य पहले की अपेक्षा अधिक जटिल हैं। शासन के जटिल कार्यों को राजनीतिक कार्यपालिका नहीं कर पाती क्योंकि मन्त्रियों की नियुक्ति राजनीतिक आधार पर होती है। मन्त्री के लिए यह आवश्यक नहीं होता है कि व जिस विभाग का अध्यक्ष नियुक्त किया जाता है, उसके बारे में उसे पूरी जानकारी प्राप्त हो। परन्तु असैनिक अधिकारी योग्यता के आधार पर नियुक्त किए जाते हैं और उन्हें प्रशिक्षण भी दिया जाता है। अत: शासन के जटिल कार्यों को योग्य कर्मचारी ही करते हैं। शासन की नीतियों को वास्तव में असैनिक अधिकारियों के द्वारा ही लागू किया जाता है। इसलिए नौकरशाही को शासन का आधार माना जाता है।

2. मन्त्री शासन चलाने के लिए नौकरशाही पर निर्भर करते हैं (Ministers depend upon bureaucracy for administration)—सभी लोकतन्त्रीय देशों में मन्त्री बनने के लिए कोई शैक्षिक योग्यताएं निश्चित नहीं की जातीं। मन्त्रियों की नियुक्ति राजनीतिक आधार पर होती है। किसी भी व्यक्ति को मन्त्री बनाया जा सकता है, चाहे वह अनपढ़ क्यों न हो। अतः मन्त्री प्रशासन चलाने के लिए असैनिक अधिकारियों पर निर्भर करते हैं क्योंकि वे शासन में योग्य होते हैं।
असैनिक कर्मचारी विशेषज्ञ होते हैं जिसके कारण मन्त्री उन पर निर्भर रहते हैं और विभाग का प्रशासन लोक सेवकों द्वारा ही चलाया जाता है।

3. शासन प्रबन्ध में निरन्तरता प्रदान करते हैं (Provide Continuity of Administration)-सरकारों का निर्माण राजनीतिक आधार पर किया जाता है, जिस कारण सरकारों में परिवर्तन होते रहते हैं। सरकारें बनती और टूटती रहती हैं। कभी किसी दल की सरकार होती है, तो कभी किसी दल की। मन्त्री आते और जाते रहते हैं, परन्तु असैनिक अधिकारी अपने पदों पर बने रहते हैं और सरकार में परिवर्तन होने पर प्रशासकीय अधिकारी त्याग-पत्र नहीं देते। प्रशासकीय अधिकारी स्थायी होते हैं। कई बार सरकार बनाने में कुछ समय भी लग जाता है। इन सब परिस्थितियों में असैनिक अधिकारी प्रशासन चलाते रहते हैं और इस तरह वे शासन प्रबन्ध में निरन्तरता प्रदान करते हैं।

4. मन्त्रियों के पास समय का अभाव (Lack of time with Ministers)-मन्त्री केवल अपने विभाग का अध्यक्ष नहीं होता है, बल्कि वह संसद् का सदस्य तथा अपने दल का महत्त्वपूर्ण सदस्य होता है और वह अपने निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधि होता है। अतः मन्त्री को अपने विभाग की देखभाल करने के साथ और भी बहुत से काम करने पड़ते हैं जैसे कि संसद् की बैठकों में भाग लेना, बिलों को पास करवाना, विरोधी दल की आलोचना का उत्तर देना तथा जनता के साथ सम्पर्क बनाए रखना। इसलिए किसी भी मन्त्री के पास इतना समय नहीं रहता कि वह अपने विभाग की पूरी जानकारी प्राप्त करने का प्रयत्न करे और केवल स्थायी कर्मचारियों की सलाह पर निर्भर न रहकर अपनी इच्छानुसार स्थायी कर्मचारियों से काम ले सके। अतः असैनिक अधिकारियों की सहायता के बिना मन्त्री कार्यों को पूरा नहीं कर सकते।

5. शासन प्रबन्ध को गतिशीलता प्रदान करते हैं (Provide dynamism to administration) राजनीतिक कार्यपालिका जब शासन सम्बन्धी नीतियों का निर्माण करती है तो समस्त शासन की एक ही नीति बनाई जाती है। परन्तु कई बार शासन की नीतियां सभी स्थानों और सभी परिस्थितियों के लिए अनुकूल नहीं होती। असैनिक अधिकारी इन नीतियों को लागू करते समय परिस्थितियों के अनुसार इनमें थोड़ा-बहुत परिवर्तन कर लेते हैं और इस तरह शासन प्रबन्ध को गतिशीलता प्रदान करते हैं।

6. लोगों की शिकायतों को दूर करते हैं (Redress the grievances of the peoples)-लोगों की सरकार से अनेक प्रकार की शिकायतें होती हैं, परन्तु आम जनता के लिए मन्त्रियों से मिल पाना आसान नहीं होता है। अतः जनता अपनी शिकायतें लोक सेवकों तक पहुंचाती है और कई बार लोक सेवकों को जनता के रोष का भी सामना करना पड़ता है। असैनिक अधिकारी जनता की शिकायतों को सुनते हैं और उन्हें दूर करने का प्रयास करते हैं। जो शिकायतें उनके स्तर पर दूर नहीं हो सकतीं, उनको मन्त्रियों के पास भेजते हैं।

7. संसदीय शासन में महत्त्व (Importance in Parliamentary Govt.) संसदीय शासन प्रणाली में नौकरशाही का अत्यधिक महत्त्व है। संसदीय शासन प्रणाली में राजनीतिक कार्यपालिका तथा असैनिक अधिकारियों में बहुत समीप का सम्बन्ध पाया जाता है और असैनिक अधिकारी बहुत महत्त्वपूर्ण कार्य करते हैं। देश का समस्त शासन मन्त्रिमण्डल के द्वारा चलाया जाता है और प्रत्येक मन्त्री किसी-न-किसी विभाग का अध्यक्ष होता है। मन्त्रियों को अपने विभाग के बारे में बहुत कम ज्ञान होता है। कई बार मन्त्रियों को ऐसे विभाग भी मिल जाते हैं जिनके बारे में उन्हें बिल्कुल ज्ञान नहीं होता। अनुभवहीन होने के कारण मन्त्री नौकरशाही के सदस्यों पर निर्भर करते हैं और उनकी इच्छानुसार कार्य करते हैं।

संसदीय शासन प्रणाली में मन्त्रियों को अपने समस्त कार्यों के लिए संसद् के प्रति उतरदायी रहना पड़ता है। संसद् के सदस्य मन्त्रियों से कोई भी प्रश्न पूछ सकते हैं। मन्त्रियों को इन प्रश्नों का उत्तर देने के लिए स्थायी कर्मचारियों पर ही निर्भर रहना पड़ता है। वास्तविकता तो यह है कि मन्त्रियों के प्रश्न के उत्तर स्थायी कर्मचारियों द्वारा तैयार किए जाते हैं जिनको मन्त्री संसद् में पढ़ देते हैं।

संसदीय शासन प्रणाली में जैसे कि भारत में 90 प्रतिशत से अधिक बिल मन्त्रियों द्वारा संसद् में पेश किए जाते हैं परन्तु इन बिलों को स्थायी कर्मचारी ही तैयार करते हैं। वास्तव में मन्त्री नौकरशाही पर बहुत अधिक निर्भर करते हैं। हरबर्ट मौरिसन (Herbert Morrison) के शब्दों में, “नौकरशाही संसदीय लोकतन्त्र की कीमत है।” (Bureaucracy is the price of parliamentary democracy.”) लॉस्की (Laski) ने तो यहां तक कह दिया है, “संसद्, मन्त्रियों के हाथ में तथा मन्त्री नौकरशाही के हाथ में खिलौना होते हैं।”

8. कल्याणकारी राज्य में महत्त्व (Importance in a Welfare State)-आधुनिक राज्य कल्याणकारी राज्य है, जिस कारण राज्य के कार्यों में बहुत वृद्धि हो गई है। राज्य को लोगों के कल्याण के लिए सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक तथा राजनीतिक कार्य करने पड़ते हैं। कल्याणकारी राज्य में ऐसा कोई कार्य नहीं है जो राज्य द्वारा नहीं किया जाता और कल्याणकारी राज्य में सभी कार्यों को कुशलता और ईमानदारी से लागू करना नौकरशाही पर निर्भर करता है। अतः कल्याणकारी राज्य में नौकरशाही का महत्त्व बहुत अधिक हो गया है।

9. निष्पक्षता (Neutrality)-नौकरशाही का महत्त्व इसलिए भी है क्योंकि यह निष्पक्ष होकर कार्य करती है जबकि मन्त्री अपने दलों के प्रति वफ़दार होते हैं तथा उसी के हितों के लिए अधिकतर कार्य करते हैं। इसके लिए वे प्रशासनिक नियमों-विनियमों की भी परवाह न करते हुए उसमें हस्तक्षेप करते हैं। जबकि असैनिक अधिकारी किसी दल के प्रति वफादार न होकर निष्पक्ष रहते हैं तथा मन्त्रियों को कोई ऐसा कार्य नहीं करने देते जो राजनीति से प्रेरित हो। नौकरशाही में बिना भेदभाव तथा निष्पक्ष व्यवहार के कारण ही प्रशासन को कुशलता से चलाया जा सकता है। इसीलिए प्रशासन के संचालन में नौकरशाही अधिक महत्त्वपूर्ण है।

असैनिक कर्मचारियों के महत्त्व का वर्णन करते हुए जौसेफ चैम्बरलेन (Joseph Chamberlain) ने लिखा है, “मुझे सन्देह है कि आप लोग (Civil Servants) हम लोगों (Ministers) के बिना विभाग का प्रशासन कर सकते हैं। किन्तु मुझे इस बात का पूर्ण विश्वास है कि हम लोग आप लोगों के बिना विभाग का कार्य नहीं कर सकेंगे।” निःसन्देह असैनिक अधिकारियों का महत्त्व बहुत अधिक है।

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प्रश्न 3.
लोक सेवाओं की भर्ती पर लेख लिखो। (Write an essay on the Recruitment of Civil Services.)
उत्तर-
प्रशासन की सफलता एवं कार्य-कुशलता लोक सेवाओं पर निर्भर करती है। कुशल तथा योग्य कर्मचारी के बिना अच्छे शासन की कल्पना नहीं की जा सकती। परन्तु ईमानदार, योग्य, परिश्रमी और कुशल कर्मचारी प्राप्त करना आसान नहीं है। इसीलिए प्रायः सभी देशों में उचित भर्ती एक समस्या बना चुकी है।

भर्ती का अर्थ- भर्ती का अर्थ केवल रिक्त स्थानों की पूर्ति करना नहीं है बल्कि यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा योग्य व्यक्तियों को रिक्त स्थानों के लिए आकर्षित करना होता है। डॉ० एम० पी० शर्मा के अनुसार, “भर्ती शब्द का अर्थ किसी पद के लिए योग्य तथा उपयुक्त परिवार के उम्मीदवारों को रिक्त स्थानों के लिए आकर्षित करना है।”

किंग्सले (Kingsley) के अनुसार, “सार्वजनिक भर्ती की व्याख्या यह है कि यह वह परीक्षा है जिसके द्वारा लोक सेवाओं के लिए प्रार्थियों को प्रतियोगितात्मक रूप में आकर्षित किया जा सकता है। यह व्यापक प्रक्रिया का आन्तरिक भाग है। नियुक्ति में प्रक्रिया एवं प्रमाण सम्बन्धी प्रक्रियाएं भी सम्मिलित हैं।”

नकारात्मक तथा सकारात्मक भर्ती (Negative and Positive Recruitment)-लोक सेवाओं की भर्ती को मोटे रूप में दो भागों में बांट सकते हैं-नकारात्मक तथा सकारात्मक।

नकारात्मक भर्ती का उद्देश्य सरकारी पदों से अयोग्य एवं चालाक व्यक्तियों को दूर रखना होता है। इस प्रक्रिया में भर्तीकर्ता कुछ ऐसे नियम बना देता है जिनके आधार पर केवल योग्य व्यक्तियों को ही उम्मीदवार बनने का अवसर प्राप्त हो सके और चालाक तथा बेईमान व्यक्तियों को लोक सेवाओं से बाहर रखा जा सके।

सकारात्मक भर्ती का उद्देश्य विभिन्न सरकारी पदों के लिए उचित और योग्य व्यक्तियों को आकर्षित करना है।

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प्रश्न 4.
नौकरशाही के शाब्दिक अर्थ की व्याख्या करते हुए लोकतंत्र में नौकरशाही की भूमिका/कार्यों का चार पक्षों में वर्णन करें।
(Explain the verbal meaning of word ‘Bureaucracy’ ? Explain its role/functions from four aspects in democracy.)
अथवा
नौकरशाही की परिभाषा दें, तथा इसकी भूमिका की चर्चा करें। (Define Bureaucracy and discuss its role.)
उत्तर-
नौकरशाही का अर्थ- इसके लिए प्रश्न नं० 1 देखें।
नौकरशाही की भूमिका एवं कार्य-नौकरशाही का शासन पर बहुत प्रभाव बढ़ गया है। बिना नौकरशाही के शासन चलाना और देश का विकास करना अति कठिन कार्य है। नौकरशाही का महत्त्व इसलिए बढ़ गया है कि आधुनिक राज्य एक कल्याणकारी राज्य है। कल्याणकारी राज्य होने के कारण राज्य के कार्य इतने बढ़ गए हैं कि सब कार्य मन्त्री नहीं कर सकते। मन्त्रियों को कार्य चलाने के लिए स्थायी कर्मचारियों अर्थात् नौकरशाही की आवश्यकता पड़ती है। इसके अतिरिक्त मन्त्रियों के पास वैसे भी समय कम होता है, जिसके कारण वे प्रत्येक सूचना स्वयं प्राप्त नहीं कर पाते। आधुनिक राज्य में नौकरशाही की भूमिका का वर्णन हम निम्नलिखित शीर्षकों के अन्तर्गत कर सकते हैं-

1. प्रशासकीय कार्य (Administrative Functions or Role)-प्रशासकीय कार्य नौकरशाही का महत्त्वपूर्ण कार्य है। मन्त्री का कार्य नीति बनाना है और नीति को लागू करने की जिम्मेदारी नौकरशाही की है। नौकरशाही के सदस्य चाहे किसी नीति से सहमत हो या न हों, उनका महत्त्वपूर्ण कार्य नीतियों को लागू करना है। पर एक अच्छी नीति भी बेकार साबित हो जाती है, यदि उसे प्रभावशाली ढंग से लागू न किया जाए और यह कार्य नौकरशाही का ही है।

2. नीति को प्रभावित करना (To Influence Policy)-नि:सन्देह नीति-निर्माण राजनीतिक कार्यपालिका का कार्य है। परन्तु प्रशासनिक योग्यता के कारण नीति-निर्माण में नौकरशाही का महत्त्वपूर्ण योगदान है। नीति-निर्माण के लिए मन्त्रियों को आंकड़ों की आवश्यकता होती है और ये आंकड़े स्थायी कर्मचारी मन्त्रियों को देते हैं। इसके अतिरिक्त नौकरशाही नीति को लागू करते समय नीति को एक नया मोड़ दे देती है।

3. सलाहकारी कार्य (Advisory Functions or Role)–नौकरशाही राजनीतिक कार्यपालिका को सलाह देने की महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मन्त्री नीतियों को निर्धारित करते समय काफ़ी हद तक असैनिक कर्मचारियों के परामर्श पर निर्भर करते हैं क्योंकि जनता के सम्बन्ध में कर्मचारियों को काफ़ी अनुभव होता है। मन्त्री योग्यता के आधार पर नियुक्त न होकर राजनीति के आधार पर नियुक्त किए जाते हैं। मन्त्रियों को प्रायः अपने विभाग की तकनीकी बारीकियों का कोई ज्ञान नहीं होता। अतः मन्त्रियों को विभाग का प्रशासन चलाने के लिए स्थायी कर्मचारियों पर निर्भर रहना पड़ता है। सर जोसुआ स्टेम्प ने कहा, “मैं अपने मस्तिष्क में बिल्कुल स्पष्ट हूँ कि पदाधिकारी को नवीन समाज का मूल स्रोत होना चाहिए और उसे सोपान पर सलाह, उन्नति की बात कहनी चाहिए।”

4. वैधानिक कार्य (Legislative Functions or Role)-नौकरशाही कानून निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। संसदीय शासन प्रणाली वाले देशों में जैसे कि भारत और इंग्लैण्ड में संसद् में अधिकांश बिल मन्त्रियों द्वारा ही प्रस्तुत किए जाते हैं। मन्त्रियों द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले बिलों की रूप रेखा स्थायी कर्मचारियों द्वारा ही तैयार की जाती है। सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक समस्याओं का हल करने के लिए किस प्रकार के नए कानूनों की आवश्यकता है इसका सुझाव भी स्थायी कर्मचारियों द्वारा दिया जाता है। इसके अतिरिक्त संसद् कानून का ढांचा तैयार कर देती है और कानून का विस्तार करने के लिए नौकरशाही को नियम उप-नियम बनाने की शक्ति प्रदान कर देती है। नियम व उप-नियम बनाने को प्रदत्त व्यवस्थापन (Delegated Legislation) कहा जाता है।

मन्त्रियों को संसद् के सदस्यों द्वारा पूछे गए प्रश्नों का उत्तर देना होता है, परन्तु इन प्रश्नों के उत्तर स्थायी कर्मचारियों द्वारा तैयार किए जाते हैं। स्थायी कर्मचारी संसद् में पूछे जा सकने वाले पूरक प्रश्नों (Supplementary Questions) का पूर्वानुमान करके उनके उत्तर भी तैयार करके मन्त्री को देते हैं।

5. नियोजन (Planning)-व्यापक रूप से नियोजन का कार्यक्रम तैयार करना राजनीतिक कार्यपालिका की जिम्मेवारी है, परन्तु नियोजन की सफलता काफ़ी हद तक लोक सेवकों पर निर्भर करती है। राजनीतिक कार्यपालिका को नियोजन बनाने के लिए तथ्यों एवं आंकड़ों की आवश्यकता होती है, जिनकी पूर्ति स्थायी कर्मचारियों द्वारा की जाती है। मन्त्रिमण्डल के विभिन्न लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए योजनाएं देने तथा कार्यक्रम और उचित साधनों की खोज करने की जिम्मेवारी कर्मचारियों की होती है। ए० डी० गोरवाला (A.D. Gorwala) के शब्दों में, “लोकतन्त्र में स्वच्छ, कुशल और निष्पक्ष प्रशासन के बिना कोई भी योजना सफल नहीं हो सकती।”

6. वित्तीय कार्य (Financial Functions or Role) शासन के वित्तीय क्षेत्र में भी नौकरशाही महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। संसद् प्रतिवर्ष बजट पास करती है और संसदीय शासन प्रणाली वाले देशों में बजट वित्तमन्त्री संसद् में पेश करता है। यद्यपि बजट तैयारी के सम्बन्ध में नीति मन्त्रिमण्डल द्वारा बनाई जाती है तथापि बजट की रूप-रेखा तैयार करना और सरकार की आर्थिक स्थिति का विवरण पेश करना नौकरशाही का कार्य है। करों को इकट्ठा करना, बजट के अनुसार खर्च करना, इन सबका लेखा-परीक्षण आदि करना स्थायी कर्मचारियों का कार्य है।

7. समन्वय करना (Co-ordination)-शासन की कुशलता विभिन्न विभागों के समन्वय पर निर्भर करती है। विभिन्न विभागों के बीच तथा सरकारी कर्मचारियों के बीच समन्वय स्थापित करना प्रशासनिक अधिकारियों का कार्य है।

8. न्यायिक कार्य (Judicial Functions or Role)-आधुनिक युग में न्याय सम्बन्धी कार्य न्यायपालिका के द्वारा ही नहीं किए जाते बल्कि कुछ महत्त्वपूर्ण कार्य प्रशासकीय न्यायाधिकरणों (Administrative Tribunals) के द्वारा भी किए जाते हैं। इसका कारण यह है कि वर्तमान समय में प्रशासकीय कानून तथा प्रशासकीय अधिनिर्णय (Administrative Laws and Administrative Adjudication) की संख्या काफ़ी बढ़ गई है। अतः प्रशासक न केवल शासन करते हैं बल्कि न्याय भी करते हैं।

9. जन-सम्बन्धी कार्य (Public Relation Functions)-नौकरशाही अपनी नीतियों की सफलता के लिए जनता से सहयोग प्राप्त करने हेतु वर्तमान युग में कई तरीकों से लोक सम्बन्ध बनाए रखते हैं।

10. विदेशी सम्बन्धों में स्थायित्व (Stability in Foreign Relations) विदेशी सम्बन्धों में नौकरशाही की भूमिका बहुत महत्त्वपूर्ण है। नौकरशाही के कारण विदेशी सम्बन्धों एवं नीतियों में स्थिरता आती है।

11. लोगों की शिकायतों को दूर करना (To redress the grievances of the people)-लोगों को प्रशासन से कई तरह की शिकायतें होती हैं। लोग अपनी शिकायतें असैनिक अधिकारियों के सामने प्रस्तुत करते हैं। असैनिक अधिकारी इन शिकायतों को दूर करने का प्रयास करते हैं। जनता अपनी शिकायतें मन्त्रियों को भी भेजती है और मन्त्री ऐसी शिकायतों को दूर करने के लिए असैनिक अधिकारियों को आदेश देते हैं।

12. उत्पादन सम्बन्धी कार्य (Productive Functions)-लोक सेवाओं का मुख्य कार्य सेवा करना है और उत्पादन उसी का एक महत्त्वपूर्ण भाग है। सड़क-निर्माण, भवन-निर्माण तथा अन्य इस प्रकार के कार्य उत्पादन से सम्बन्धित हैं। उत्पादन की मात्रा से स्थायी कर्मचारियों की कार्य-कुशलता का अन्दाज़ा लगाया जा सकता है। उत्पादन के आधार पर ही उसे राजनीतिक कार्यपालिका तथा जनता दोनों से प्रशंसा या घृणा प्राप्त होती है। प्रत्येक कर्मचारी किसी-न-किसी बात अथवा वस्तु के उत्पादन के लिए उत्तरदायी होता है। यदि यातायात के साधनों से जनता की सुखसुविधाओं में वृद्धि होती है तो जनता स्थायी कर्मचारियों की प्रशंसा करती है। इसी प्रकार यदि शिक्षा का स्तर गिरता है तो उसके लिए भी शिक्षकों को उत्तरदायी ठहराया जाता है। यदि प्रशासन का स्तर गिरता है, तो उसके लिए असैनिक अधिकारियों को जिम्मेवार ठहराया जाता है।

13. नौकरशाही विवेकहीन प्रयोगों को प्रोत्साहित नहीं करती (Bureaucracy does not courage rash experiments)—नौकरशाही सरकारी सेवाओं में विवेकहीन कार्यों को प्रोत्साहित नहीं करती। मन्त्रियों द्वारा कई बार लोगों को प्रसन्न करने के लिए जल्दबाज़ी में विवेकहीन कार्य किये जाते हैं, परन्तु नौकरशाही इस प्रकार के कार्यों को प्रोत्साहित नहीं करती तथा देश हित को ध्यान में रख कर ही निर्णय लेती है। नौकरशाही अधिकांशतः गम्भीर एवं रूढ़िवादी होती है, तथा जल्दबाजी में लिए गए निर्णयों को काफ़ी सोच-विचार कर ही लागू करती है।

संक्षेप में, आधुनिक कल्याणकारी राज्य में नौकरशाही का महत्त्व बहुत बढ़ गया है। सभी क्षेत्रों में नौकरशाही का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है। राज्य को लोक हित के अनेक कार्य करने पड़ते हैं और इन कार्यों का सफ़ल होना या न होना नौकरशाही की कुशलता पर निर्भर करता है।

नौकरशाही की भूमिका के सम्बन्ध में डॉ० जेनिंग्स (Dr. Jennings) ने ठीक ही लिखा है, “असैनिक कर्मचारियों का कार्य है कि सलाह दें, चेतावनी दें, स्मृति-पत्र लिखें तथा भाषण तैयार करें जिनमें सरकार की नीति निर्देशित हो फिर उस नीति के फलस्वरूप निर्णय करें। साथ ही उन कठिनाइयों की ओर ध्यान आकर्षित करें जो निर्धारित नीति पर चलने में आ सकती है। साधारणतया असैनिक कर्मचारियों का कर्त्तव्य हो जाता है कि वे शासन का कार्य उसी प्रकार चलाएं जिस प्रकार मन्त्री द्वारा नीति निर्धारित की गई है।”.

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प्रश्न 5.
राजनीतिक कार्यपालिका और स्थायी कार्यपालिका का अर्थ स्पष्ट करते हुए विस्तारपूर्वक दोनों में अन्तर बताएं।
(Write down the meaning of Political Executive and Permanent Executive and explain in detail the differences between the two.)
अथवा
राजनीतिक कार्यपालिका और स्थाई कार्यपालिका में मुख्य अन्तर लिखो।
(Describe main differences between Political Executive and Permanent Executive.)
उत्तर-
राजनीतिक कार्यपालिका का अर्थ (Meaning of Political Executive)-कार्यपालिका के अनेक रूपों में से एक को राजनीतिक कार्यपालिका कहा जाता है। कार्यपालिका के साथ राजनीतिक शब्द के प्रयोग से यह स्पष्ट है कि ऐसी कार्यपालिका की नियुक्ति राजनीतिक आधार पर होती है। राजनीतिक कार्यपालिका का गठन करने में राजनीतिक दलों की विशेष भूमिका होती है। राजनीतिक कार्यपालिका की एक अन्य विशेषता यह है कि कुछ वर्षों के लिए निश्चित कार्य काल से पूर्व भी इसको हटाने की व्यवस्था की जाती है। संसदीय प्रणाली में राजनीतिक कार्यपालिका को विधानमण्डल के प्रति उत्तरदायी बनाया जाता है। इस तरह हम कह सकते हैं कि राजनीतिक कार्यपालिका की नियुक्ति राजनीतिक आधारों पर कुछ वर्षों के निश्चित कार्य-काल के लिए की जाती है तथा ऐसी कार्यपालिका राजनीतिक स्वरूप की होती है तथा इसका गठन करने में राजनीतिक दलों की विशेष भूमिका होती है।

(Meaning of Permanent Executive or Administrator)-अधिकारी वर्ग अथवा नौकरशाही का दूसरा नाम स्थायी कार्यपालिका अथवा प्रशासक है। स्थायी कार्यपालिका में नौकरशाही अथवा असैनिक अधिकारी सम्मिलित हैं। स्थायी कार्यपालिका की नियुक्ति राजनीतिक अधिकारों से मुक्त अर्थात् स्वतन्त्र होती है। स्थायी कार्यपालिका का चुनाव अथवा नियुक्ति सम्बन्धी राजनीतिक दलों की कोई भूमिका नहीं होती। स्थायी कार्यपालिका के सदस्यों की नियुक्ति योग्यता के आधार पर की जाती है। इस कार्यपालिका को इस कारण स्थायी कहा जाता है, क्योंकि इसके सदस्यों का कार्य काल सेवा निवृत्त होने की निश्चित आयु तक स्थायी होता है। राजनीतिक कार्यपालिका में परिवर्तन आने के बावजूद भी स्थायी कार्यपालिका में कोई परिवर्तन नहीं आता। स्थायी कार्यपालिका का मुख्य कार्य राजनीतिक कार्यपालिका द्वारा निर्धारित की गई नीतियों के अनुसार निष्पक्ष रूप से प्रशासन का प्रबन्ध करना है।

लघु उत्तरीय प्रश्न-

प्रश्न 1.
नौकरशाही का अर्थ लिखें।
अथवा
नौकरशाही’ शब्द के अर्थ की व्याख्या कीजिए।
उत्तर-
नौकरशाही अथवा ब्यूरोक्रेसी फ्रांसीसी भाषा के शब्द ब्यूरो से बना है जिसका अर्थ है-डेस्क या लिखने की मेज़। अब इस शब्द का अर्थ हुआ डेस्क सरकार। इस प्रकार नौकरशाही का अर्थ डेस्क पर बैठकर काम करने वाले अधिकारियों के शासन से है। दूसरे शब्दों में, नौकरशाही का अर्थ है प्रशासनिक अधिकारियों का शासन । नौकरशाही शब्द का अधिकाधिक प्रयोग लोक सेवा के प्रभाव को जताने के लिए किया जाता है। प्रायः सभी आधुनिक राज्यों में सरकार का कार्य उन अधिकारियों द्वारा किया जाता है जिन्हें प्रशासनिक समस्याओं की पूरी जानकारी तथा क्षमता रहती है। अधिकारियों के ऐसे निकाय को नौकरशाही के रूप में जाना जाता है। नौकरशाही सरकारी गतिविधियों के समूह द्वारा सम्पन्न गतिविधि है। नौकरशाही की विभिन्न परिभाषाएं अग्रलिखित हैं

  • मार्शल ई० डीमॉक के अनुसार, “नौकरशाही का अर्थ है विशेषीकृत पद सोपान एवं संचार की लम्बी रेखाएं।”
  • फाइनर के अनुसार, “नौकरशाही ऐसा शासन है जिसे मुख्यतः ऐसे कार्यालयों द्वारा चलाया जाता है जिनकी अध्यक्षता अधिकारियों के प्रशिक्षित वर्ग के पास होती है। ये अधिकारीगण स्थायी, वेतन-भोगी एवं कुशल होते हैं।”
  • मैक्स वेबर के अनुसार, “नौकरशाही प्रशासन की ऐसी व्यवस्था है जिसकी विशेषता-विशेषज्ञ, निष्पक्षता तथा मानवता का अभाव होता है।”

PSEB 12th Class Political Science Solutions Chapter 8 नौकरशाही

प्रश्न 2.
नौकरशाही की चार मुख्य विशेषताओं को लिखें।
अथवा
नौकरशाही की मुख्य विशेषताएं कौन-सी हैं ?
उत्तर-
नौकरशाही की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं-
1. निश्चित अवधि-नौकरशाही का कार्यकाल निश्चित होता है। सरकार के बदलने पर नौकरशाही पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। मन्त्री आते हैं और चले जाते हैं परन्तु नौकरशाही के सदस्य अपने पद पर बने रहते हैं। लोक सेवक निश्चित आयु तक पहुंचने पर ही रिटायर होते हैं। रिटायर होने की आयु से पूर्व भी लोक सेवकों को भ्रष्टाचार, अकुशलता आदि आरोपों के आधार पर निश्चित कानूनी विधि के अनुसार हटाया जा सकता है।

2. निर्धारित वेतन तथा भत्ते-नौकरशाही के सदस्यों को निर्धारित वेतन तथा भत्ते दिए जाते हैं। पदोन्नति के साथ उनके वेतन में भी वृद्धि होती रहती है। अवकाश की प्राप्ति के पश्चात् नौकरशाही के सदस्यों को पेंशन मिलती है।

3. राजनीतिक तटस्थता, नौकरशाही में कर्मचारी के व्यक्तिगत या राजनीतिक विचारों का कोई स्थान नहीं है। नौकरशाही को राजनीतिक दृष्टि से तटस्थ रहना पड़ता है। वे न तो किसी राजनीतिक दल के सदस्य होते हैं और न ही इनका राजनीतिक दलों से सम्बन्ध होता है। सरकार किसी भी दल की क्यों न बने, उनका कार्य अपनी योग्यतानुसार प्रशासन की सेवा करना है।

4. तकनीकी विशेषता-तकनीकी विशेषता नौकरशाही की सबसे महत्त्वपूर्ण विशेषता है।

प्रश्न 3.
अच्छी नौकरशाही के चार कार्य लिखो।
अथवा
नौकरशाही के किन्हीं चार कार्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
आधुनिक राज्य में नौकरशाही की भूमिका का वर्णन हम निम्नलिखित शीर्षकों के अन्तर्गत कर सकते हैं-
1. प्रशासकीय कार्य-प्रशासकीय कार्य नौकरशाही का महत्त्वपूर्ण कार्य है। मन्त्री का कार्य नीति बनाना है और नीति को लागू करने की ज़िम्मेदारी नौकरशाही की है। नौकरशाही के सदस्य चाहे किसी नीति से सहमत हों अथवा न हों, उनका महत्त्वपूर्ण कार्य नीतियों को लागू करना है। एक अच्छी नीति भी बेकार साबित हो जाती है यदि उसे प्रभावशाली ढंग से लागू न किया जाए।

2. नीति को प्रभावित करना-नि:सन्देह नीति निर्माण राजनीतिक कार्यपालिका का कार्य है। परन्तु प्रशासनिक योग्यता के कारण नीति निर्माण में नौकरशाही का महत्त्वपूर्ण योगदान है। नीति निर्माण के लिए मन्त्रियों को आंकड़ों की आवश्यकता होती है और ये आंकड़े स्थायी कर्मचारी मन्त्रियों को देते हैं। इसके अतिरिक्त नौकरशाही नीति को लागू करते समय नीति को एक नया मोड़ दे देते हैं।

3. सलाहकारी कार्य-नौकरशाही राजनीतिक कार्यपालिका को सलाह देने की महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मन्त्री नीतियों को निर्धारित करते समय काफ़ी हद तक असैनिक कर्मचारियों के परामर्श पर निर्भर करते हैं, क्योंकि जनता के सम्बन्ध में कर्मचारियों को काफ़ी अनुभव होता है।

4. वैधानिक कार्य-नौकरशाही कानून निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मंत्रियों द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले बिलों की रूप रेखा नौकरशाही द्वारा ही तैयार की जाती है।

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प्रश्न 4.
राजनीतिक कार्यपालिका किसे कहते हैं ?
अथवा
राजनीतिक कार्यपालिका का क्या अर्थ है ?
उत्तर-
राजनीतिक कार्यपालिका में राष्ट्रपति, प्रधानमन्त्री, मन्त्री, उपमन्त्री, संसदीय सचिव आदि सम्मिलित होते हैं और ये एक निश्चित विधि द्वारा निश्चित अवधि के लिए चुने जाते हैं। राजनीतिक कार्यपालिका का चयन राजनीति के आधार पर किया जाता है। राजनीतिक कार्यपालिका असैनिक सेवाओं अथवा नौकरशाही की सहायता से कार्य करती है। इसका प्रमुख कार्य जनता की इच्छाओं के अनुरूप नीति निर्माण करना होता है। राजनीतिक कार्यपालिका अपने समस्त कार्यों के लिए संसद् और जनता के प्रति उत्तरदायी होती है।

प्रश्न 5.
स्थायी कार्यपालिका से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
असैनिक सेवाओं अथवा नौकरशाही को ही स्थायी कार्यपालिका कहा जाता है। इनकी नियुक्ति राजनीतिक कार्यपालिका की नियुक्ति की अपेक्षा योग्यताओं के आधार पर प्रतियोगी परीक्षाओं के आधार पर की जाती है। इनका वेतन, भत्ते तथा कार्यकाल निश्चित होता है। इनका मुख्य कार्य नीति-निर्माण में मदद तथा उसे लागू करना होता है। लोक सेवक राजनीति में भाग नहीं लेते। वे दलगत राजनीति से दूर रहते हैं। राजनीतिक परिवर्तन होने से स्थायी कार्यपालिका में परिवर्तन नहीं होता।

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प्रश्न 6.
राजनीतिक कार्यपालिका और स्थायी कार्यपालिका में चार अन्तर लिखो।
अथवा
राजनीतिक और स्थायी कार्यपालिका में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
राजनीतिक कार्यपालिका तथा स्थायी कार्यपालिका में निम्नलिखित अन्तर पाए जाते हैं
1. दोनों की नियुक्ति में अन्तर-राजनीतिक कार्यपालिका की नियुक्ति का चयन जनता द्वारा होता है। स्थायी कार्यपालिका को प्रशासकीय सेवा या लोक सेवा भी कहा जाता है और इसका चयन योग्यता के आधार पर किया जाता है। योग्यता की जांच करने के लिए प्रतियोगिता परीक्षा ली जाती है।

2. राजनीति के आधार पर अन्तर-राजनीतिक कार्यपालिका का चयन ही राजनीति के आधार पर होता है। संसदीय शासन प्रणाली में मन्त्रिमण्डल बहुमत दल का होता है और मन्त्रिमण्डल में राजनीतिक एकरूपता पाई जाती है। राजनीतिक कार्यपालिका प्रायः सभी समस्याओं को राजनीतिक दृष्टि से देखती है। राजनीतिक कार्यपालिका के विपरीत लोक सेवक राजनीति में भाग नहीं लेते। वे दलगत राजनीति से दूर रहते हैं।

3. अवधि के आधार पर अन्तर-राजनीतिक कार्यपालिका में राजनीतिक परिवर्तन के साथ-साथ परिवर्तन होता रहता है। राजनीतिक कार्यपालिका के विपरीत लोक सेवक एक निश्चित आयु तक अपने पद पर बने रहते हैं। राजनीतिक कार्यपालिका में परिवर्तन होने पर प्रशासकीय कर्मचारियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

4. आकार से सम्बन्धित अन्तर-राजनीतिक कार्यपालिका का आकार छोटा होता है, जबकि स्थायी कार्यपालिका का आकार बड़ा होता है।

प्रश्न 7.
अच्छी नौकरशाही के गुण लिखिए।
अथवा
अच्छी नौकरशाही के कोई चार गुण लिखें।
उत्तर-
अच्छी नौकरशाही के मुख्य गुण निम्नलिखित होते हैं-

  • नौकरशाही की नियुक्ति योग्यता के आधार पर होनी चाहिए। अतः अच्छी नौकरशाही योग्य तथा अनुभवी होनी चाहिए।
  • अच्छी नौकरशाही का एक महत्त्वपूर्ण गुण ईमानदारी है। अत: नौकरशाही ईमानदार होनी चाहिए।
  • नौकरशाही कुशल होनी चाहिए। लोक सेवक अपने कार्यों में कुशल होने चाहिए और उन्हें शासन चलाने की आधुनिक तकनीकों की जानकारी होनी चाहिए।
  • राजनीतिक निष्पक्षता अच्छी नौकरशाही का एक महत्त्वपूर्ण गुण है।

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प्रश्न 8.
राजनीतिक कार्यपालिका से आपका क्या तात्पर्य है ? इसके चार कार्यों का विवरण कीजिए।
उत्तर-
राजनीतिक कार्यपालिका का अर्थ- इसके लिए प्रश्न नं० 4 देखें।
राजनीतिक कार्यपालिका के कार्य-आधुनिक राज्य, पुलिस राज्य न होकर कल्याणकारी राज्य है। आधुनिक राज्य में राजनीतिक कार्यपालिका के मुख्य कार्य निम्नलिखित हैं-
1. कानून लागू करना और शान्ति व्यवस्था बनाए रखना-राजनीतिक कार्यपालिका का प्रथम कार्य विधानमण्डल के बनाए कानूनों को लागू करना तथा देश में शान्ति व्यवस्था को बनाए रखना होता है। पुलिस उन व्यक्तियों को, जो कानून तोड़ते हैं गिरफ्तार करती है और उन पर मुकद्दमा चलाती है।

2. नीति निर्धारण-राजनीतिक कार्यपालिका का महत्त्वपूर्ण कार्य नीति निर्धारण करना है। राजनीतिक कार्यपालिका ही देश की आन्तरिक तथा विदेश नीति को निर्धारित करती है और उस नीति के आधार पर ही अपना शासन चलाती है। नीतियों को लागू करने के लिए शासन को कई विभागों में बांटा जाता है और प्रत्येक विभाग का एक अध्यक्ष होता है।

3. नियुक्ति करने और हटाने की शक्ति-राजनीतिक कार्यपालिका को देश का शासन चलाने के लिए अनेक कर्मचारियों की नियुक्ति करनी पड़ती है। जो अधिकारी राजनीतिक कार्यपालिका द्वारा नियुक्त किए जाते हैं, उनको राजनीतिक कार्यपालिका हटा भी सकती है।

4. विदेश सम्बन्धी कार्य-देश की विदेश नीति को कार्यपालिका निश्चित करती है। दूसरे देशों से जैसे सम्बन्ध होंगे, यह राजनीतिक कार्यपालिका ही निश्चित करती है। राजनीतिक कार्यपालिका अपने देश के राजदूतों को दूसरे देश में भेजती है और दूसरे देश के राजदूतों को अपने देश में रहने की अनुमति देती है।

प्रश्न 9.
नौकरशाही के पदों के क्रम के संगठन का क्या अर्थ है ?
अथवा
नौकरशाही के तरतीबवार संगठन से क्या भाव है ?
उत्तर-
सम्पूर्ण नौकरशाही व्यवस्था पदसोपान (Hierarchy) के आधार पर निर्मित होती है। एम०पी० शर्मा के अनुसार, “पदसोपान का अभिप्राय एक ऐसे संगठन से होता है, जो पदों के लिए उत्तरोत्तर क्रम अनुसार अथवा सीढ़ी की भान्ति संगठित किया जाए। इस उत्तरोत्तर क्रम में प्रत्येक निचला पद अथवा स्तर ऊपर के पद के तथा उस पद के माध्यम से उससे ऊपर के तथा इसी प्रकार सबसे ऊपर के पद अथवा पदों के अधीन होता है।” इसमें नौकरशाही का आधार विस्तृत होता है और शीर्ष संकुचित होता है। विभिन्न स्तरों पर सदस्यों के बीच उच्च व अधीनस्थ (Senior and Subordinate) का सम्बन्ध होता है। आदेश के सूत्र ऊपर से नीचे और उत्तरदायित्व नीचे से ऊपर जाता है। इस व्यवस्था के अन्तर्गत प्रत्येक कार्य उचित मार्ग द्वारा (Through Proper Channel) ही होता है। इस व्यवस्था में नौकरशाही के प्रत्येक स्तर पर नियुक्त सदस्य को अपने कार्यों व उत्तरदायित्व का स्पष्ट रूप से पता होता है। इस प्रकार यदि नौकरशाही व्यवस्था में श्रेणीवार या पदसोपान के सिद्धान्त को न अपनाया जाए तो संगठन बिखर जाता है।

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प्रश्न 10.
लोकतन्त्रीय राज्य में नौकरशाही की महत्ता बताइए।
अथवा
नौकरशाही को प्रशासन की रीढ़ की हड्डी कहा जाता है ? क्यों ?
उत्तर-
प्रजातन्त्रीय राज्य में प्रशासन चलाने में नौकरशाही का विशेष महत्त्व है। इस कथन में कोई अतिशयोक्ति नहीं है कि नौकरशाही के बिना राजनीतिज्ञ शासन का संचालन कर ही नहीं सकते। मन्त्रियों के लिए कोई शैक्षणिक योग्यता निश्चित नहीं होती। उन्हें अपने विभाग की बारीकियों का कम ही ज्ञान होता है। मन्त्री राजनीतिज्ञ होते हैं और राजनीति का खेल उनका पर्याप्त समय ले लेता है। अतः मन्त्रियों के पास समय का अभाव भी रहता है। असैनिक अधिकारी राजनीतिक रूप में निष्पक्ष होते हैं । राजनीतिक दलों की सरकारें बदलती रहती हैं, परन्तु ये अधिकारी अपने पदों पर स्थिर रहते हैं। इस प्रकार असैनिक अधिकारी जहां प्रशासन को राजनीतिक प्रभावों से मुक्त रखने में सहायक सिद्ध होते हैं, वहां उनका स्थायी कार्यकाल प्रशासन को निरन्तरता प्रदान करने का कार्य भी करता है। प्रदत्त विधि विधान की प्रथा ने नौकरशाही के महत्त्व में और वृद्धि कर दी है, क्योंकि असैनिक अधिकारियों के बिना प्रदत्त विधि विधान का कार्य उचित रूप में पूर्ण नहीं हो सकता।
नौकरशाही के महत्त्व को देखते हुए यह उचित ही कहा गया है कि नौकरशाही प्रशासन की रीढ़ की हड्डी है।

प्रश्न 11.
नौकरशाही की निष्पक्षता से आपका क्या भाव है ?
उत्तर-
लोक सेवक का परम्परागत गुण तटस्थता रहा है। तटस्थता का अर्थ है लोक सेवकों को भी राजनीतिक गतिविधियों से दूर करना चाहिए और उन्हें निष्पक्षता से सरकार की नीतियों को लागू करना चाहिए। लोक सेवकों को सार्वजनिक हित को ध्यान में रखकर कार्य करना चाहिए। अमेरिका में संघीय कानून के अनुसार संघीय कर्मचारी राजनीतिक अभियानों में सक्रिय भाग नहीं ले सकते हैं। भारत में लोक सेवक के आचरण नियमों के अनुसार किसी भी सरकारी कर्मचारी को किसी भी राजनीतिक संगठन का सदस्य होने अथवा किसी भी राजनीतिक आन्दोलन या कार्य में भाग लेने या उसके लिए चन्दा देने या उसे किसी भी प्रकार की सहायता देने का अधिकार प्राप्त नहीं है। सरकारी कर्मचारी संसद् और विधान मण्डलों के चुनाव नहीं लड़ सकते। उन्हें केवल वोट देने का अधिकार प्राप्त है। इंग्लैण्ड में उच्च अधिकारियों को केवल वोट डालने तथा दल का सदस्य बनने का अधिकार प्राप्त है, परन्तु उन्हें राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने का अधिकार नहीं।

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अति लघु उत्तरीय प्रश्न-

प्रश्न 1.
‘नौकरशाही, शब्द के अर्थ की व्याख्या कीजिए।
उत्तर-
नौकरशाही अथवा ब्यूरोक्रेसी फ्रांसीसी भाषा के शब्द ब्यूरो से बना है जिसका अर्थ है-डेस्क या लिखने की मेज़। अतः इस शब्द का अर्थ हुआ डेस्क सरकार। इस प्रकार नौकरशाही का अर्थ डेस्क पर बैठकर काम करने वाले अधिकारियों के शासन से है। दूसरे शब्दों में, नौकरशाही का अर्थ है प्रशासनिक अधिकारियों का शासन। नौकरशाही शब्द का अधिकाधिक प्रयोग लोक सेवा के प्रभाव को जताने के लिए किया जाता है।

प्रश्न 2.
नौकरशाही की दो परिभाषाएं दें।
उत्तर-

  1. मार्शल ई० डीमॉक (Marshall E. Dimock) के अनुसार, “नौकरशाही का अर्थ है विशेषीकृत पद सोपान एवं संचार की लम्बी रेखाएं।”
  2. मैक्स वेबर (Max Weber) के अनुसार, “नौकरशाही प्रशासन की ऐसी व्यवस्था है जिसकी विशेषताविशेषज्ञ, निष्पक्षता तथा मानवता का अभाव होता है।”

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प्रश्न 3.
नौकरशाही के कोई दो और नाम बताएं।
उत्तर-

  1. दफ्तरशाही
  2. अफसरशाही।

प्रश्न 4.
नौकरशाही की दो मुख्य विशेषताओं को लिखो।
उत्तर-

  1. निश्चित अवधि-नौकरशाही का कार्यकाल निश्चित होता है। सरकार के बदलने पर नौकरशाही पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। मन्त्री आते हैं और चले जाते हैं, परन्तु नौकरशाही के सदस्य अपने पद पर बने रहते हैं। लोक सेवक निश्चित आयु पर पहुंचने पर ही रिटायर होते हैं।
  2. निर्धारित वेतन तथा भत्ते-नौकरशाही के सदस्यों को निर्धारित वेतन तथा भत्ते दिए जाते हैं। पदोन्नति के साथ उनके वेतन में भी वृद्धि होती रहती है। अवकाश की प्राप्ति के पश्चात् नौकरशाही के सदस्यों को पेन्शन मिलती है।

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प्रश्न 5.
नौकरशाही के किन्हीं दो कार्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-

  1. प्रशासकीय कार्य (Administrative Functions)—प्रशासकीय कार्य नौकरशाही का महत्त्वपूर्ण कार्य है। मन्त्री का कार्य नीति बनाना है और नीति को लागू करने की ज़िम्मेदारी नौकरशाही की है। .
  2. नीति को प्रभावित करना (To Influence the Policy)—प्रशासनिक योग्यता के कारण नीति निर्माण में नौकरशाही का महत्त्वपूर्ण योगदान है। .

प्रश्न 6.
राजनीतिक कार्यपालिका किसे कहते हैं ?
उत्तर-
राजनीतिक कार्यपालिका में राष्ट्रपति, प्रधानमन्त्री, मन्त्री, उपमन्त्री, संसदीय सचिव आदि सम्मिलित होते हैं और ये एक निश्चित विधि द्वारा निश्चित अवधि के लिए चुने जाते हैं। राजनीतिक कार्यपालिका का चयन राजनीति के आधार पर किया जाता है। राजनीतिक कार्यपालिका अपने समस्त कार्यों के लिए संसद् और जनता के प्रति उत्तरदायी होती है।

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प्रश्न 7.
स्थायी कार्यपालिका से आपका क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
असैनिक सेवाओं अथवा नौकरशाही को ही स्थायी कार्यपालिका कहा जाता है। इनकी नियुक्ति राजनीतिक कार्यपालिका की नियुक्ति की अपेक्षा योग्यताओं के आधार पर प्रतियोगी परीक्षाओं के आधार पर की जाती है। इनका वेतन, भत्ते तथा कार्यकाल निश्चित होता है। इनका मुख्य कार्य नीति-निर्माण में मदद तथा उसे लागू करना होता है।

प्रश्न 8.
राजनीतिक कार्यपालिका और स्थाई कार्यपालिका में दो अन्तर लिखो।
उत्तर-

  1. दोनों की नियुक्ति में अन्तर-राजनीतिक कार्यपालिका की नियुक्ति या चयन जनता द्वारा होता है। स्थायी कार्यपालिका को प्रशासकीय सेवा या लोक सेवा भी कहा जाता है और इसका चयन योग्यता के आधार पर किया जाता है। योग्यता की जांच करने के लिए प्रतियोगिता परीक्षा ली जाती है।
  2. राजनीति के आधार पर अन्तर-राजनीतिक कार्यपालिका का चयन ही राजनीति के आधार पर होता है। राजनीतिक कार्यपालिका के विपरीत लोक सेवक राजनीति में भाग नहीं लेते। वे दलगत राजनीति से दूर रहते हैं।

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प्रश्न 9.
अच्छी व शिक्षित नौकरशाही की कोई दो विशेषताएं अथवा गुण लिखें।
उत्तर-

  1. अच्छी नौकरशाही का एक महत्त्वपूर्ण गुण ईमानदारी है। अत: नौकरशाही ईमानदार होनी चाहिए।
  2. राजनीतिक निष्पक्षता अच्छी नौकरशाही का एक महत्त्वपूर्ण गुण है।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न-

प्रश्न I. एक शब्द/वाक्य वाले प्रश्न-उत्तर

प्रश्न 1.
नौकरशाही का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
नौकरशाही शासन के उस रूप को कहा जाता है, जिसमें प्रशासन के कार्य-कुर्सी मेज़ पर कार्य करने वाले असैनिक अथवा प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा किए जाते हैं।

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प्रश्न 2.
नौकरशाही की कोई एक परिभाषा लिखें।
उत्तर-
ऐप्लबी के अनुसार, “नौकरशाही तकनीकी पक्ष से शिक्षित उन व्यक्तियों का पेशेवर वर्ग है, जो क्रमानुसार संगठित होते हैं और निष्पक्ष रूप में राज्य की सेवा करते हैं।”

प्रश्न 3.
नौकरशाही की एक विशेषता लिखें।
अथवा
नौकरशाही की कोई दो विशेषताएं लिखिए।
उत्तर-

  1. नौकरशाही पदसोपान के आधार पर संगठित होती है।
  2. नौकरशाही में तकनीकी विशेषता पाई जाती है।

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प्रश्न 4.
नौकरशाही के कोई दो कार्य लिखिए।
अथवा
आदर्श नौकरशाही का एक मुख्य कार्य लिखें।
उत्तर-

  1. मन्त्रियों को सहयोग देना।
  2. नीतियों को लागू करना।

प्रश्न 5.
राजनीतिक कार्यपालिका के अर्थ लिखो।
उत्तर-
राजनीतिक कार्यपालिका का चुनाव प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप में लोगों द्वारा होता है।

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प्रश्न 6.
स्थायी कार्यपालिका के अर्थ लिखें।
उत्तर-
स्थायी कार्यपालिका को राजनीतिक आधार पर निर्वाचित नहीं किया जाता, बल्कि योग्यता के आधार पर नियुक्ति की जाती है।

प्रश्न 7.
राजनीतिक कार्यपालिका एवं स्थायी कार्यपालिका में कोई एक अन्तर बताएं।
उत्तर-
राजनीतिक कार्यपालिका का मूल आधार राजनीतिक होता है, जबकि राजनीतिक निरपेक्षता स्थायी कार्यपालिका की मुख्य विशेषता होती है।

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प्रश्न 8.
नौकरशाही के दो गुणों के नाम लिखो।
उत्तर-

  1. अच्छी नौकरशाही का प्रथम गुण यह है, कि उनकी नियुक्ति योग्यता के आधार पर की जाती है।
  2. नौकरशाही प्रशासन में स्थिरता पैदा करती है।

प्रश्न 9.
वास्तविक कार्यपालिका से क्या अभिप्राय है ? ।
उत्तर-
संविधान में दी गई शक्तियों का जो वास्तव में प्रयोग करता है, उसे वास्तविक कार्यपालिका कहते हैं। उदाहरण के लिए भारत में मंत्रिमण्डल (प्रधानमंत्री) एवं अमेरिका में राष्ट्रपति वास्तविक कार्यपालिका हैं।

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प्रश्न 10.
नौकरशाही की किस प्रकार की भर्ती को खराब ढांचा (Spoil System) कहा जाता है ?
उत्तर-
राजनीतिक आधार पर की जाने वाली भर्ती को खराब ढांचा कहा जाता है।

प्रश्न 11.
लोक सेवा का क्या अर्थ है ?
उत्तर-
लोक सेवा का अर्थ असैनिक सेवा है।

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प्रश्न 12.
प्रत्यक्ष भर्ती का एक गुण लिखो।
अथवा
नौकरशाही की सीधी भर्ती का कोई एक गुण बताएं।
उत्तर-
इस पद्धति से नवयुवकों को लोक सेवाओं में प्रवेश करने का अवसर मिलता है।

प्रश्न 13.
प्रत्यक्ष भर्ती का कोई एक अवगुण लिखें।
उत्तर-
प्रत्यक्ष भर्ती से प्रशासन में अनुभवहीन व्यक्ति आ जाते हैं।

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प्रश्न 14.
प्रत्यक्ष भर्ती से क्या अभिप्राय है ? ।
उत्तर-
प्रत्यक्ष भर्ती के अन्तर्गत उम्मीदवारों का चयन खुले तौर पर किया जाता है।

प्रश्न 15.
राजनीतिक कार्यपालिका की कोई एक विशेषता लिखो।
उत्तर-
राजनीतिक कार्यपालिका की नियुक्ति निर्वाचन द्वारा होती है।

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प्रश्न 16.
भर्ती के अर्थ लिखो।
उत्तर-
भर्ती एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसके द्वारा योग्य व्यक्तियों को रिक्त स्थानों के लिए आकर्षित किया जाता है।

प्रश्न II. खाली स्थान भरें-

1. नौकरशाही शब्द को अंग्रेज़ी में ……….. कहा जाता है।
2. Bureaucracy शब्द फ्रांसीसी भाषा के शब्द ………… से बना है।
3. ब्यूरो का अर्थ है ………. या लिखने की मेज़।
4. मार्शल ई० डीमॉक के अनुसार नौकरशाही का अर्थ है विशेषीकृत ……….. एवं संचार की लम्बी रेखाएं।
5. नौकरशाही की मुख्य विशेषता कार्यों का तर्कपूर्ण . …….. है।
उत्तर-

  1. Bureaucracy
  2. ब्यूरो
  3. डेस्क
  4. पदसोपान
  5. विभाजन।

प्रश्न III. निम्नलिखित वाक्यों में सही एवं ग़लत का चुनाव करें-

1. लोक सेवाओं की भर्ती को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा जाता है-नकारात्मक एवं सकारात्मक।
2. नकारात्मक भर्ती का उद्देश्य सरकारी पदों से योग्य व्यक्तियों को दूर रखना है।
3. लोक सेवा का परम्परागत गुण तटस्थता है।
4. तटस्थता का अर्थ है, कि लोक सेवाओं को राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेना है।
5. नौकरशाही नीति-निर्माण का कार्य करती है।
उत्तर-

  1. सही
  2. ग़लत
  3. सही
  4. ग़लत
  5. ग़लत।

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प्रश्न IV. बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
नौकरशाही का दोष है-
(क) कागजों की हेरा-फेरी
(ख) लाल फीताशाही
(ग) जन साधारण की मांगों की उपेक्षा
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 2.
लूट प्रणाली (Spoils System) पाई जाती थी-
(क) भारत में
(ख) इंग्लैण्ड में
(ग) अमेरिका में
(घ) जापान में।
उत्तर-
(ग) अमेरिका में

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प्रश्न 3.
राजनीतिक तथा स्थायी कार्यपालिका में क्या अन्तर पाया जाता है ?
(क) नियुक्ति के आधार पर अन्तर
(ख) योग्यता के आधार पर अन्तर
(ग) कार्यकाल के आधार पर अन्तर
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 4.
“नौकरशाही” शब्द की उत्पत्ति निम्नलिखित में से किस वर्ष हुई ?
(क) 1888
(ख) 1940
(ग) 1745
(घ) 1668.
उत्तर-
(ग) 1745

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प्रश्न 5.
किस भाषा से ‘ब्यूरोक्रेसी’ शब्द लिया गया है ?
(क) ब्यूरो से
(ख) पोलिस से
(ग) स्टेटस से
(घ) सावरेनिटी से।
उत्तर-
(क) ब्यूरो से

PSEB 6th Class Physical Education Solutions Chapter 1 स्वास्थ्य

Punjab State Board PSEB 6th Class Physical Education Book Solutions Chapter 1 स्वास्थ्य Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 6 Physical Education Chapter 1 स्वास्थ्य

PSEB 6th Class Physical Education Guide स्वास्थ्य Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
स्वास्थ्य कितने प्रकार का होता है ?
उत्तर-
स्वास्थ्य (Health)-आमतौर पर रोगों से बचने वाले आदमी को स्वस्थ माना जाता है पर यह पूरी तरह ठीक नहीं। वर्ल्ड हैल्थ ओरगनाइस के अनुसार स्वास्थ्य मनुष्य के शरीर के साथ ही सीमित नहीं है। स्वास्थ्य का सम्बन्ध आदमी के मन, समाज और भावना के साथ जुड़ा है। स्वास्थ्य शिक्षा का वह भाग है जिसके साथ मनुष्य सारी जगह से वातावरण के साथ सुमेल कायम करके शारीरिक और मानसिक विकास कायम कर सके और उसका विकास कर सके। एक व्यक्ति के लिए स्वास्थ्य उतना ही ज़रूरी है जितनी कि फूल के लिए खुशबू। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार “स्वास्थ्य से भाव व्यक्ति का शारीरिक, मानसिक और सामाजिक की तरफ से स्वस्थ होना है। रोग या कमजोरी रहित होना ही स्वास्थ्य की निशानी नहीं है।”

According to W.H.O. “Health is a state of complete physical, mental and social well being, and not merely the absence of disease or infirmity.”
स्वस्थ व्यक्ति वह होता है जो अपने जीवन में शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, भावनात्मक आदि सारे पहलुओं में सन्तुलन रखता है।

स्वास्थ्य की किस्में
यह चार प्रकार की होती हैं –

  1. शारीरिक स्वास्थ्य (Physical Health)
  2. मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health)
  3. सामाजिक स्वास्थ्य (Social Health)
  4. भावनात्मक स्वास्थ्य (Emotional Health)

1. शारीरिक स्वास्थ्य (Physical Health) शारीरिक स्वास्थ्य से भाव व्यक्ति के सभी अंग ठीक ढंग से काम करते हैं। शरीर फुर्तीला और तंदुरुस्त और हर रोज़ क्रियाएं करने के लिए तैयार रहना चाहिए। स्वस्थ व्यक्ति का शारीरिक ढांचा सुडौल, मज़बूत और सुन्दर होना चाहिए। उसकी सभी कार्य प्रणाली जैसे-सांस प्रणाली, पाचन प्रणाली, रक्त प्रणाली, अपना-अपना काम ठीक ढंग से करते हैं।

2. मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) इसका मतलब मनुष्य दिमागी तौर से सही और समय से फैसला लेता है और हमेशा ही अपने विश्वास को कायम रखता है। मानसिक तौर पर व्यक्ति हालात के साथ अपने-आप को ढाल लेता है।

3. सामाजिक स्वास्थ्य (Social Health) इससे भाव व्यक्ति अपने समाज के साथ सम्बन्धित है। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, जिसको अपने हर रोज़ के कामों की पूर्ति के लिए परिवार और समाज के साथ चलना पड़ता है। मिलनसार व्यक्ति की समाज में इज्जत होती है।

4. भावनात्मक स्वास्थ्य (Emotional Health)-हमारे मन में अलग-अलग तरह की भावनाएँ जैसे-डर, खुशी, गुस्सा, ईर्ष्या आदि पैदा होती हैं। यह सारी भावनाओं को संतुलित करना ज़रूरी है। जिसके साथ हम अपना जीवन अच्छी तरह गुजार सकते हैं।

निजी स्वास्थ्य विज्ञान (Personal Hygiene)–शरीर की रक्षा को निजी शरीर सुरक्षा (Personal Hygiene) कहते हैं। यह दो शब्दों के मेल से बना है । Personal और Hygiene । ‘Personal’ अंग्रेजी का शब्द है जिसका अर्थ है निजी या व्यक्तिगत ‘Hygiene’ यूनानी भाषा के शब्द Hygeinous से बना है, जिसका भाव है आरोग्यता की देवी। आजकल Hygiene का अर्थ जीवन जांच से लिया जाता है। आरोग्यता कायम रखने के लिए शरीर विज्ञान प्राप्त करना ज़रूरी है।

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प्रश्न 2.
बच्चों को किस तरह का भोजन करना चाहिए ?
उत्तर-

  1. बच्चों को संतुलित एवं साफ़-सुथरा भोजन खाना चाहिए। इसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेटस, चिकनाई, खनिज लवण, विटामिन और पानी जैसे सारे तत्व होने चाहिए।
  2. खाना खाने से पहले हाथ और मुँह साबुन के साथ अच्छी तरह से धो लेना चाहिए।
  3. ज़रूरत से ज़्यादा गर्म या ठंडा भोजन नहीं करना चाहिए।
  4. कम्प्यूटर या टी०वी० देखते हुए खाना नहीं खाना चाहिए।
  5. खाना सीधे बैठकर खाना चाहिए और लेटकर नहीं खाना चाहिए।
  6. फास्टफूड जैसे पीज़ा, बर्गर, न्यूडल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। बच्चों को ज़्यादातर घर का बना खाना ही खाना चाहिए।
  7. भोजन को मिट्टी, धूल और मक्खियों से बचाव के लिए ढक कर रखना चाहिए।
  8. फल हमेशा धोकर खाने चाहिए।

प्रश्न 3.
हमें स्वस्थ रहने के लिए किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
उत्तर-
1. डाक्टरी जांच-

  • बच्चों को अपने शरीर की जांच समय पर करवानी चाहिए और समय पर टीके भी लगवाते रहना चाहिए।
  •  किसी तरह की चोट लगने पर इलाज ज़रूर करवाना चाहिए।

2. स्वभाव-

  • बच्चों को हर समय खुश रहना चाहिए।
  • चिड़चिड़ा स्वभाव स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है।
  • अच्छा स्वभाव स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी है।

3 आदतें-

  • समय पर उठना, खाना, पढ़ना और खेलना और आराम करना।
  • अपने शरीर और आस-पास की सफाई रखना।
  • पढ़ते समय रोशनी का उचित प्रबन्ध करना। कम रोशनी में पढ़ने से आँखें कमज़ोर हो जाती हैं।
  • बैठने और सोने के लिए ठीक तरह का फर्नीचर होना ज़रूरी है।

4. कसरत, खेलें और योगा-

  • अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए कसरत या योगा करना ज़रूरी है।
  • कसरत अथवा योगा हमेशा खाली पेट करना चाहिए।
  • कसरत अथवा योगा के लिए खुला वातावरण होना ज़रूरी है।
  • बच्चों को ज्यादा से ज्यादा खेलों में भाग लेना चाहिए और पहले शरीर को गर्माना उचित होता है।

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प्रश्न 4.
भोजन खाने के समय कौन-सी बातों का ध्यान रखना चाहिए ?
उत्तर-

  • भोजन खाने से पहले हाथ अच्छी तरह साबुन के साथ धोने चाहिए।
  • साफ़-सुथरा और संतुलित भोजन खाना चाहिए।
  • फास्टफूड से हमेशा बचना चाहिए और घर का बना भोजन ही खाना चाहिए।
  • बहुत गर्म या बहुत ठंडा भोजन नहीं खाना चाहिए।
  • भोजन ज़रूरत के अनुसार ही खाना चाहिए। भोजन अच्छी तरह चबा कर खाना चाहिए।
  • कम्प्यूटर या टी०वी० देखते हुए खाना नहीं खाना चाहिए।
  • खाना कभी भी लेटकर नहीं खाना चाहिए।
  • फल अच्छी तरह धोकर खाने चाहिए।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित पर नोट लिखें
(क) चमड़ी की सफ़ाई, (ख) बालों की सफ़ाई, (ग) आंखों की सफ़ाई, (घ) कानों की सफाई, (ङ) नाक की सफ़ाई, (च) दांतों की सफ़ाई, (छ) नाखूनों की सफ़ाई।
उत्तर-
(क) चमड़ी की सफ़ाई (Cleanliness of Skin)-चमड़ी की दो परतें होती हैं। बाहरी परत (EPIDERMIS) और अन्दरूनी परत (DERMIS) बाहरी परत में न तो खून की नालियां होती हैं और न ही परतें और गिल्टियां तन्तु (Glands) होते हैं। अन्दरूनी परत जुड़वां तन्तुओं की बनी होती है। इसमें रक्त की नालियां होती हैं। यह नालियां चमड़ी को खुराक पहुंचाने का काम करती हैं।

चमड़ी शरीर के अन्दरूनी अंगों को ढक कर रखती है। जहरीले पदार्थों को बाहर निकालती है और शरीर के तापमान को ठीक रखती है। त्वचा हमारे शरीर को सुन्दरता प्रदान करती है। इसलिए हमें अपनी चमड़ी की सफ़ाई खूब अच्छी तरह करनी चाहिए। त्वचा की सफ़ाई का सबसे अच्छा ढंग नहाना है। नहाते समय हमें नीचे लिखी बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए –

  • प्रतिदिन प्रातः साफ़ पानी से नहाना चाहिए।
  • नहाने से पहले पेट साफ़ और खाली होना चाहिए।
  • भोजन करने के तुरन्त बाद नहीं नहाना चाहिए।
  • व्यायाम (कसरत) करने या काम की थकावट के तुरन्त बाद भी नहीं नहाना चाहिए।
  • सर्दियों में नहाने से पहले धूप में बैठकर शरीर की अच्छी तरह मालिश करनी चाहिए।
  • साबुन के साथ नहाने की बजाए बेसन तथा संगतरे के छिलके से बने ऊबटन का प्रयोग करना चाहिए।
  • नहाने के बाद शरीर को साफ़ तथा खुरदरे तौलिए के साथ पोंछना चाहिए।
  • नहाने के बाद मौसम के अनुसार साफ़-सुथरे कपड़े पहनने चाहिएं।

चमड़ी की सफ़ाई के लाभ (Advantages of Cleanliness of Skin) चमड़ी की सफ़ाई के निम्नलिखित लाभ हैं –

  • चमड़ी हमारे शरीर को सुन्दरता प्रदान करती है।
  • यह हमारे शरीर के आन्तरिक भागों को ढांप कर रखती है तथा इनकी रक्षा करती है।
  • चमड़ी के द्वारा शरीर से पसीना तथा अन्य दुर्गन्ध वाली चीज़ों का निकास होता है।
  • यह हमारे शरीर के तापमान को ठीक रखती है।
  • इसको छूने से किसी चीज़ का गुण पता चलता है।

(ख) बालों की सफाई (Cleanliness of Hair) बाल हमारे शरीर और व्यक्तित्व को प्रभावशाली बनाते हैं। बालों की सुन्दरता उनके घने, मज़बूत और चमकदार होने में छुपी होती है।
बालों की सफाई और सम्भाल-बालों की सफ़ाई और सम्भाल अग्रलिखित ढंग से करनी चाहिए-

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  • बालों को साबुन, रीठे, आंवले, अण्डे की जर्दी या किसी बढ़िया शैम्पू के साथ धोना चाहिए।
  • रात्रि को सोने से पहले बालों में कंघी या ब्रुश करना चाहिए। सारा दिन बाल जिस ओर रहे हों इसकी उलट और बालों की जड़ों से लेकर अन्त तक कंघी करनी चाहिए।
  • खाली समय में सिर में सूखे हाथों से मालिश करनी चाहिए।
  • प्रात: उठकर बालों को कंघी करके संवारना चाहिए।
  • बालों को न ही अधिक खुश्क और न ही अधिक चिकना रखना चाहिए।
  • बालों में तीखी पिनें नहीं लगानी चाहिए। नहाने के बाद बालों को तौलिए के साथ रगड़ कर साफ करना चाहिए।
  • अच्छी खुराक जिसमें मक्खन, पनीर, सलाद, हरी सब्जियां तथा फलों आदि का प्रयोग करना चाहिए।
  • बालों में खुशबूदार तेल नहीं लगाना चाहिए। सिर की कभी-कभी मालिश करनी चाहिए।

(ग) आंखों की सफ़ाई (Cleanliness of Eyes)—आंखें मानव शरीर का कोमल तथा महत्त्वपूर्ण अंग हैं। इनसे हम देखते हैं। इनके बिना संसार अन्धेरा और जीवन बोझ बन जाता है। किसी ने ठीक ही कहा है कि आंखें गईं तो जहान गया। इसलिए हमें आंखों की सफ़ाई और देखभाल की ओर विशेष ध्यान देना चाहिए। यदि आंखों की सफ़ाई न रखी जाए तो आंखों के कई प्रकार के रोग हो सकते हैं। जैसे आंखों का फ्लू, कुकरे, आंखों में जलन आदि।
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आंखों की सफाई और सम्भाल के लिए हमें निम्नलिखित बातों की ओर विशेष ध्यान देना चाहिए।

  • बहुत तेज़ या बहुत कम रोशनी में आंखों से काम नहीं लेना चाहिए, नंगी आंखों से सूर्य ग्रहण नहीं देखना चाहिए।
  • लेट कर या बहुत नीचे झुक कर पुस्तक नहीं पढ़नी चाहिए।
  • पढ़ते समय पुस्तक को आंखों से कम-से-कम 30 सेंटीमीटर दूर रखना चाहिए।
  • आंखों को गन्दे रूमाल या कपड़े से साफ नहीं करना चाहिए।
  • किसी एक स्थान पर नज़र टिका कर नहीं रखनी चाहिए।
  • आंख में मच्छर आदि पड़ जाने पर आंख को मलना नहीं चाहिए। इसे साफ़ रूमाल से आंखों में से निकालना चाहिए या आंखों में ताजे पानी के छींटे मारने चाहिएं।
  • आंखों में पसीना नहीं गिरने देना चाहिए।
  • पढ़ते समय अपने कद के अनुसार कुर्सी और मेज़ का प्रयोग करना चाहिए।
  • खट्टी चीज़, तेल, शराब, तम्बाकू, चाय, लाल मिर्च, अफीम आदि चीज़ों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  • आंखों की बीमारी होने पर किसी योग्य आंखों के चिकित्सक को दिखाना चाहिए।
  • एक ही अंगुली या सलाई के साथ आंखों में दवाई या काजल नहीं डालना चाहिए।
  • चलती हुई गाड़ी या बस में या पैदल चलते हुए पुस्तक नहीं पढ़नी चाहिए।
  • सिनेमा या टेलीविज़न दूर से देखना चाहिए।
  • प्रतिदिन आंखों को साफ़ पानी के छींटे मारने चाहिए।

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(घ) कानों की सफ़ाई (Cleanliness of Ear)-कानों के द्वारा हम सुनते हैं। कान का पर्दा बहुत नाजुक होता है। यदि इसमें कोई नोकीली चीज़ लग जाए तो वह फट जाता है तथा मनुष्य की सुनने की शक्ति नष्ट हो जाती है। हमें कानों की सफ़ाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

यदि कानों की सफ़ाई करनी हो तो किसी मोटे तिनके पर सख्त रूई लपेटो। इसे हाइड्रोजन परॉक्साइड में भिगोकर कान में फेरो। इससे कान साफ़ हो जाएगा। ऐसा सप्ताह में एक या दो बार करो।

यदि कानों में से पीव बह रही हो तो एक ग्राम बोरिक एसिड को दो ग्राम ग्लिसरीन में घोलो। रात्रि को सोते समय इस घोल की दो बूंदें कानों में डालो। इसके अतिरिक्त प्रतिदिन नहाने के बाद कान के बाहर के भाग को पानी से साफ़ करके अच्छी तरह पोंछो।

  • कानों में कोई तीखी या नोकदार वस्तु नहीं घुमानी चाहिए। इस तरह करने से कान का पर्दा फट जाता है और अच्छा भला मनुष्य बहरा हो सकता है।
  • कान में फिन्सी होने से कान में पीव बहने लगती है। इस अवस्था में कानों के डॉक्टर की मदद लेनी चाहिए।
  • कानों की सफ़ाई कानों के डॉक्टर से ही करवानी चाहिए।
  • यदि कान बहने लग जाए तो छप्पर, तालाबों आदि में नहाना नहीं चाहिए।
  • अधिक शोर वाले स्थान पर काम नहीं करना चाहिए।
  • कान पर जोरदार चोट जैसे मुक्का आदि नहीं मारना चाहिए।
  • किसी बीमारी के कारण यदि कान भारी लगे तो डॉक्टर की सलाह अनुसार ही दवाई डालनी चाहिए।

(ङ) नाक की सफ़ाई (Cleanliness of Nose)-प्रतिदिन प्रात:काल और सायंकाल नाक को पानी से साफ़ करना चाहिए। एक नासिका में से जल अन्दर ले जाकर दूसरी नासिका द्वारा बाहर निकाल देना चाहिए।

(च) दांतों की सफ़ाई (Clean-liness of Teeth)-दांत भोजन के खाने में महत्त्वपूर्ण योगदान देते हैं। अच्छी तरह से चबा कर खाया भोजन शीघ्र हजम हो जाता है। जब बच्चा पैदा होता है तो कुछ महीने के बाद उसके दांत निकलने आरम्भ हो जाते हैं। ये दांत स्थायी नहीं होते। कुछ वर्षों के बाद दांत टूट जाते हैं। इनको दूध के दांत कहा जाता है। 6 से 12 वर्ष की आयु तक पक्के या स्थायी दांत निकल आते हैं। दांत भी हमारे शरीर का महत्त्वपूर्ण अंग हैं। किसी ने ठीक ही कहा है, ‘दांत गए तो स्वाद गया।’ दांतों के खराब होने से दिल का रोग भी हो सकता है और मौत भी हो सकती है। इसके अतिरिक्त मुंह से दुर्गन्ध आती रहती है और स्वभाव भी चिड़चिड़ा हो जाता है। यदि दांतों को साफ़ न रखा जाए तो पायोरिया नामक दांतों का रोग लग जाता है। इसलिए दांतों की सम्भाल की ओर विशेष ध्यान देना चाहिए।

दांतों की सफाई तथा देखभाल इस प्रकार की जानी चाहिए –

  • प्रतिदिन प्रात: उठकर और रात को सोने से पहले दांतों को ब्रुश से साफ़ करना चाहिए। भोजन करने के बाद कुल्ला करना चाहिए।
  • गर्म दूध या चाय नहीं पीनी चाहिए तथा न ही बर्फ और ठण्डी चीज़ों का प्रयोग करना चाहिए।
  • दांतों में पिन आदि कोई तीखी चीज़ नहीं मारनी चाहिए।
  • दांतों के साथ न ही किसी शीशी का ढक्कन खोलना चाहिए तथा न ही बादाम या अखरोट जैसी कठोर चीज़ तोड़नी चाहिए।
  • ब्रुश मसूड़ों के एक ओर से दूसरी ओर करना चाहिए।
  • बिल्कुल खराब दांतों को निकलवा देना चाहिए।
  • भुने हुए दाने, गाजर, मूली आदि चीजें खानी चाहिएं। गन्ना चूसना भी दांतों के लिए लाभदायक है।
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  • दूध का अधिक प्रयोग करना चाहिए।
  • दांत खराब होने पर किसी योग्य दांतों के डॉक्टर से इलाज करवाना चाहिए।
  • मिठाइयां, टॉफियां तथा चीनी नहीं खानी चाहिए।

(छ) नाखूनों की सफ़ाई (Cleanliness of Nails) शरीर के बाकी अंगों की सफ़ाई की तरह ही नाखून की सफ़ाई की भी बहुत आवश्यकता है। नाखूनों की सफ़ाई न रखने का अभिप्राय कई रोगों को निमन्त्रण देना है। नाखून की सफ़ाई के लिए निम्नलिखित बातों की ओर विशेष ध्यान देना चाहिए

(1) नाखून बढ़ाने नहीं चाहिए। (2) भोजन खाने के पहले और बाद में हाथों को अच्छी तरह धोना चाहिए। (3) नाखूनों को दांतों से नहीं काटना चाहिए। नाखूनों को नेल कटर से काटना चाहिए। (4) नाखूनों को सोडियम कार्बोनेट तथा पानी के घोल में डुबोना चाहिए। (5) हाथों के साथ-साथ पैरों के नाखून भी काटने चाहिएं।

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प्रश्न 6.
स्वास्थ्य की दृष्टि से कोई पांच अच्छी आदतों के बारे में लिखिए।
उत्तर-

  • हमेशा साफ़ सुथरा और संतुलित भोजन करना चाहिए।
  • शरीर के अंदरूनी अंग (जैसे : दिल, फेफड़े आदि) और बाहरी अंग (हाथ, पैर, आंखें आदि) के बारे जानकारी हासिल करनी और इसकी संभाल करनी चाहिये।
  • आपनी उम्र अनुसार ही संभाल करनी चाहिये।
  • समय-समय पर शरीर की डॉक्टरी जांच करवानी चाहिये।
  • शरीर की ज़रूरत और उम्र अनुसार सैर या कसरत करनी चाहिये।
  • हमेशा नाक से सांस लेनी चाहिए।
  • खुली हवा में रहना चाहिये।
  • ऋतु और मौसम के अनुसार कपड़े पहनने चाहिये।
  • हमेशा खुश रहना चाहिये।
  • हमेशा ठीक तरीके के साथ खड़े होना, बैठना और चलना चाहिये।
  • घर के कपड़ों की सफाई रखनी चाहिये।

Physical Education Guide for Class 6 PSEB स्वास्थ्य Important Questions and Answers

बहुत छोटे उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
विज्ञान की उस शाखा को क्या कहते हैं जो हमें स्वस्थ रहने की शिक्षा देती है ?
उत्तर-
व्यक्तिगत स्वास्थ्य विज्ञान।

प्रश्न 2.
स्वस्थ मन का किस स्थान पर निवास होता है ?
उत्तर-
स्वस्थ शरीर में।

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प्रश्न 3.
यदि चमड़ी (त्वचा) की सफ़ाई न रखी जाए तो कौन-से रोग लग सकते हैं ?
उत्तर-
अन्दरूनी व बाहरी रोग।

प्रश्न 4.
आंखों को शरीर का कैसा अंग माना जाता है ?
उत्तर-
कोमल और कीमती।

प्रश्न 5.
आंखों की सफाई के लिए दिन में कई बार क्या करना चाहिए ?
उत्तर-
ताज़े पानी के छींटे मारने चाहिए।

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प्रश्न 6.
दांतों की सफाई के लिए हमें प्रतिदिन क्या करना चाहिए ?
उत्तर-
दातुन अथवा मंजन।

प्रश्न 7.
पढ़ते समय हमें पुस्तक को आंखों से कितनी दूरी पर रखना चाहिए ?
उत्तर-
30 सेंटीमीटर अथवा एक फुट।

प्रश्न 8.
दांतों की सफ़ाई न करने से कौन-सा रोग लग सकता है ?
उत्तर–
पाइरिया।

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प्रश्न 9.
बालों की सफ़ाई न रखने से सिर में क्या पड़ जाता है ?
उत्तर-
जुएं और सीकरी।

प्रश्न 10.
चमड़ी की सफ़ाई के लिए हमें हर रोज़ क्या करना चाहिए?
उत्तर-
नहाना चाहिए।

प्रश्न 11.
नहाने के पश्चात् हमें कैसे कपड़े पहनने चाहिए ?
उत्तर-
साफ़-सुथरे।

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प्रश्न 12.
क्या हमें चलती गाड़ी या बस में बैठ कर पुस्तक आदि पढ़नी चाहिए ?
उत्तर-
नहीं।

प्रश्न 13.
हमें अपने कानों को कैसी वस्तु से साफ़ करने का प्रयत्न नहीं करना चाहिए ?
उत्तर-
पिन अथवा किसी नुकीली तीली से।

प्रश्न 14.
यदि आंख में कोई वस्तु पड़ जाए तो हमें क्या नहीं करना चाहिए ?
उत्तर-
आंखों को मलना नहीं चाहिए।

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प्रश्न 15.
कौन-से पोस्चर में पढ़ना हानिकारक है ?
उत्तर-
लेट कर या नीचे झुक कर।

प्रश्न 16.
कौन-से रोग होने से विशेष ध्यान रखना चाहिए ?
उत्तर-
खसरा और छोटी माता (चेचक)।

प्रश्न 17.
हमें श्वास मुख अथवा नाक द्वारा लेना चाहिए।
उत्तर-
नाकं द्वारा।

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प्रश्न 18.
दांतों के गिरने के बाद कौन-सी वस्तु चली जाती है ?
उत्तर-
स्वाद।

प्रश्न 19.
कौन-सी आयु में बच्चों के दूध के दांत गिर कर स्थायी दांत आते
उत्तर-
6 से 12 वर्ष तक।

प्रश्न 20.
यदि कानों में मैल जम जाए तो किस वस्तु का प्रयोग करना चाहिए?
उत्तर-
हाइड्रोजन परॉक्साइड।

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प्रश्न 21.
नाखूनों को कौन-सी वस्तु से नहीं काटना चाहिए ?
उत्तर-
मुख से।

प्रश्न 22.
यदि कानों में पीव बहने लगे तो कानों में कौन-से घोल की बूंदें डालनी चाहिए ?
उत्तर-
बोरिक ऐसिड और ग्लिसरीन।

प्रश्न 23.
बढ़े हुए नाखूनों को कैसे काटना चाहिए ?
उत्तर-
नेल कटर के साथ।

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प्रश्न 24.
नाक में छोटे-छोटे बाल कौन-सी वस्तु का काम धूल के लिए करते ।
उत्तर-
जाली का।

प्रश्न 25.
सुन्दर बाल मनुष्य के व्यक्तित्व को कैसा बनाते हैं ?
उत्तर-
अच्छा और प्रभावशाली।

छोटे उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
स्वस्थ रहने के लिए कोई पांच नियम लिखें।
अथवा
व्यक्तिगत स्वास्थ्य विज्ञान के कोई पांच नियम लिखें।
उत्तर-

  1. साफ़-सुथरा व सन्तुलित भोजन खाना चाहिए।
  2. श्वास हमेशा नाक द्वारा लेना चाहिए।
  3. आयु अनुसार नींद लेनी चाहिए।
  4. हमेशा खुश रहना चाहिए।
  5. समय-समय पर डॉक्टरी परीक्षण करवाते रहना चाहिए।

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प्रश्न 2.
हमें हमेशा नाक द्वारा श्वास क्यों लेना चाहिए ?
उत्तर-
हमें हमेशा नाक द्वारा श्वास लेना चाहिए। इसका कारण है कि नाक में छोटेछोटे बाल होते हैं। वायु में रोग कीटाणु और धूल कण इनमें अटक जाते हैं और शुद्ध वायु अन्दर जाती है। यदि हम नाक की बजाए मुंह द्वारा श्वास लेंगे तो रोग के कीटाणु हमारे शरीर में प्रवेश करके हमें रोगी बना देंगे। इसलिए हमें नाक द्वारा श्वास लेना चाहिए।

प्रश्न 3.
चमड़ी की सफ़ाई न करने से हमें क्या नुकसान हो सकते हैं ?
उत्तर-
चमड़ी हमारे शरीर के अन्दरूनी अंगों की रक्षा करती है। यदि चमड़ी की सफ़ाई न की जाए तो पसीना और इसकी बदबूदार वस्तुएं शरीर में जमा हो जाएंगी जिनके कारण अन्दरूनी और बाहरी रोग हो जाते हैं। इसलिए चमड़ी की सफ़ाई रखनी बहुत ज़रूरी है।

प्रश्न 4.
यदि आप के सिर में सीकरी पड़ जाए तो आप उसका क्या उपाय करेंगे ?
उत्तर-
सीकरी का इलाज-यदि सिर में सीकरी पड़ जाए तो 250 ग्राम पानी में एक चम्मच बोरिक पाऊडर डालकर सिर धोना चाहिए। नहाने से पहले बालों में नारियल का तेल लगाना चाहिए। ग्लिसरीन और नींबू लगाकर भी सीकरी से छुटकारा पाया जा सकता है। शिकाकाई और आंवलों को भिगोकर बने घोल के प्रयोग से भी सीकरी समाप्त हो जाती है।

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प्रश्न 5.
दांतों की सफ़ाई हमारे लिए क्यों आवश्यक है ?
उत्तर-
दांत हमारे शरीर का महत्त्वपूर्ण भाग हैं। दांतों के खराब होने से हृदय रोग हो सकता है और मृत्यु भी हो सकती है। इसके अलावा मुंह से बदबू आने लगती है और मनुष्य चिड़चिड़ा हो जाता है। दांतों की सफ़ाई न रखने से पाइरिया रोग नाम की बीमारी लग जाती है। इसलिए दांतों की सफ़ाई ज़रूरी है।

प्रश्न 6.
कपड़ों की सफ़ाई किस तरह की जा सकती है ? इसके क्या लाभ हैं ?
उत्तर-
कपड़ों की सफ़ाई साबुन, सोडा, सर्फ़ तथा अन्य डिटर्जेंट पाऊडरों से की जा सकती है।
लाभ-कपड़ों की सफ़ाई हो तो मैल के कीटाणु हमारे शरीर से नहीं चिपकते जिससे कि हमारे शरीर के मुसाम बन्द नहीं होते। इस तरह शरीर अपने व्यर्थ पदार्थों का कुछ भाग पसीने आदि से निकालता रहता है, जिससे शरीर निरोग रहता है।

बड़े उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
व्यक्तिगत स्वास्थ्य विज्ञान किसे कहते हैं ?
उत्तर—
Personal Hygiene शरीर की रक्षा को निजी शरीर सुरक्षा (Personal Hygiene) कहते हैं। यह दो शब्दों के मेल से बना है। Personal और Hygiene | ‘Personal’ अंग्रेज़ी का शब्द है जिसका अर्थ है निजी या व्यक्तिगत । ‘Hygiene’ यूनानी भाषा के शब्द Hygeineous से पैदा हुआ है। जिसका भाव है आरोग्यता की देवी। आजकल Hygiene का अर्थ जीवन जांच से लिया जाता है। आरोग्यता कायम रखने के लिए शरीर विज्ञान का ज्ञान प्राप्त करना ज़रूरी है।

“निजी स्वास्थ्य, स्वास्थ्य शिक्षा का वह भाग है जिससे मनुष्य सारे पक्षों से वातावरण के साथ सुमेल कायम करके शारीरिक और मानसिक विकास कायम कर सके और उनका विकास कर सके।” एक व्यक्ति के लिए स्वास्थ्य उतना ही आवश्यक है जितनी कि पुष्प (फूल) के लिए सुगन्ध । इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना चाहिए। हमें स्वस्थ रहने में व्यक्तिगत स्वास्थ्य विज्ञान बहुत सहायता देता है। व्यक्तिगत स्वास्थ्य विज्ञान, विज्ञान की वह शाखा है जो हमें नीरोग रहने के नियमों के बारे में जानकारी देती है। सत्य तो यह है कि इसमें व्यक्तिगत नीरोगता की वह अमृत धारा है जिसके नियमों का पालन करके मनुष्य स्वस्थ रह सकता है।

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प्रश्न 2.
व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए किन-किन नियमों का पालन करना चाहिए ?
उत्तर-
व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए हमें निम्नलिखित नियमों का पालन करना चाहिए –

  • सदा साफ-सुथरा और सन्तुलित भोजन करना चाहिए।
  • शरीर के आन्तरिक अंगों (जैसे दिल, फेफड़े आदि) तथा बाह्य अंगों (हाथ, पैर, आंखें आदि) के बारे में जानकारी प्राप्त करनी चाहिए तथा इनकी संभाल करनी चाहिए।
  • अपनी आयु के अनुसार पूरी नींद लेनी चाहिए।
  • समय-समय पर शरीर की डॉक्टरी परीक्षा करवानी चाहिए।
  • शरीर की आवश्यकता तथा आयु के अनुसार सैर या व्यायाम (कसरत) करनी चाहिए।
  • सदा नाक के द्वारा ही सांस लेनी चाहिए।
  • खुली हवा में रहना चाहिए।
  • ऋतु और मौसम के अनुसार वस्त्र पहनने चाहिए।
  • सदा प्रसन्न रहना चाहिए।
  • सदा ठीक प्रकार से खड़े होना, बैठना तथा चलना चाहिए।
  • घर और कपड़ों की सफ़ाई रखनी चाहिए।

प्रश्न 3.
बालों को साफ़ न रखने से क्या हानियां होती हैं ?
उत्तर-
बालों को साफ़ न रखने से हानियां-यदि बालों को अच्छी तरह साफ़ न. रखा जाए तो कई प्रकार के बालों और त्वचा के रोग लग जाते हैं। ये रोग नीचे लिखे हैं
1. सिकरी (Dandruf)-सिकरी खुश्क त्वचा के मरे हुए अंश होते हैं। इन अंशों में साबुन और मिट्टी इकट्ठे हो जाते हैं। सिकरी से सिर की त्वचा में रोगाणु पैदा हो जाते हैं।

इलाज (Treatment)-सिर में सिकरी अधिक होने की दशा में 250 ग्राम पानी में एक चम्मच बोरिक पाऊडर डालकर सिर को धोना चाहिए। नहाने से पहले बालों में नारियल का तेल लगाना चाहिए। नींबू तथा ग्लिसरीन लगाकर भी सिकरी से छुटकारा पाया जा सकता है। शिकाकाई और ओलों को भिगोकर बने घोल के प्रयोग से भी सिकरी समाप्त हो जाती है।

2. जुएं पैदा होना (Lice) बालों की सफ़ाई न रखने पर सिर में जुएं पैदा हो जाती हैं। एक जूं एक बार कोई 300 अंडे देती है। दो सप्ताहों के बाद ये जुएं और अण्डे देने के योग्य हो जाती हैं। दैनिक सफ़ाई के अतिरिक्त नीचे लिखी बातों का ध्यान रखने से सिर में जुएं नहीं पैदा होंगी –

  • किसी दूसरे व्यक्ति की कंघी, ब्रुश, सिर की जाली, रूमाल, पगड़ी, टोपी आदि का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  • बस की सीट या सिनेमा हाल की कुर्सी की पीठ के साथ अपना सिर लगा कर नहीं बैठना चाहिए।
  • बालों को कंघी करने के बाद कंघी,को किसी ऐसी जगह रखना चाहिए जहां मिट्टी न पड़े।

3. बालों का गिरना (Felling of Hair) बालों की सफ़ाई न रखने से बाल कमज़ोर होकर गिरने लगते हैं। बालों के गिरने की रोकथाम के लिए प्रतिदिन बालों की सफ़ाई रखनी चाहिए तथा साथ ही अच्छा भोजन खाना चाहिए। इसके अतिरिक्त सख्त साबुन या सुगन्धित तेल का कम प्रयोग करना चाहिए।

4. बालों का सफ़ेद होना (Change in Colour)-जुकाम या अच्छी खुराक की कमी के कारण बाल जल्दी ही सफ़ेद हो जाते हैं। इसलिए बालों को सफ़ेद होने से रोकने के लिए सन्तुलित और पौष्टिक भोजन करना चाहिए। रोज़ शारीरिक सफ़ाई रखनी चाहिए।

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प्रश्न 4.
नाक के बालों के क्या लाभ हैं और नाक की सफ़ाई कैसे की जाती है ?
उत्तर-
नाक के बालों के लाभ (Advantages of Hair in Nostril)-हम नाक द्वारा श्वास लेते हैं। नाक में छोटे-छोटे बाल होते हैं। इन बालों के अधिक लाभ होते हैं। ये बाल धूल आदि के लिए जाली का काम करते हैं। वायु में धूल कण और बीमारी के जर्म होते हैं। जब हम नाक द्वारा सांस लेते हैं तो यह धूल, कण और जर्म नाक के बालों में अटक जाते हैं और हमारे भीतर शुद्ध वायु प्रवेश करती है। यदि नाक में यह बाल न हों तो वायु में मिली धूलकण और जर्म हमारे भीतर चले जाएंगे जिस से हमें कई प्रकार के रोग लग सकते हैं। इसलिए नाक के बालों को काटना या उखाड़ना नहीं चाहिए।

नाक की सफाई (Cleanliness of Nose)-प्रतिदिन प्रातःकाल और सायंकाल नाक को पानी से साफ़ करना चाहिए। एक नासिका में से जल अन्दर ले जाकर दूसरी नासिका द्वारा बाहर निकाल देना चाहिए।

प्रश्न 5.
पैरों की सफाई कैसे की जाती है ?
उत्तर-
पैरों की सफाई (Cleanliness of Feet)

  • पैरों की सफाई की तरफ़ भी विशेष ध्यान रखना चाहिए जैसे हम अपने शरीर के दूसरे अंगों की सफाई की तरफ ध्यान देते हैं। सुबह नहाते समय पैरों को और उंगलियों के बीच स्थान को अच्छी तरह साफ़ कर लेना चाहिए।
  • रात को सोने से पहले भी पैरों को धो कर अच्छी तरह साफ़ कर लेना चाहिए।
  • पैरों के लिए बूट या चप्पल लेते समय पैरों की बनावट और माप का विशेष ध्यान रखना चाहिए। जूती या बूट आरामदायक और ठीक साइज़ के खुले होने चाहिए।
  • यदि पैरों में खारिश, दाद, चंबल आदि के रोग लगे हों तो नाइलोन की जुराबें नहीं पहननी चाहिए।
  • नंगे पांव कभी घूमना नहीं चाहिए।
  • पांवों के नाखून भी समय समय काटते रहना चाहिए।
  • पांवों के नीचे और ऊपर ग्लिसरीन अथवा सरसों के तेल का प्रयोग करना चाहिए।

प्रश्न 6.
हाथों की सफ़ाई कैसे रखी जा सकती है ?
उत्तर-
हाथों की सफ़ाई (Clealiness of Hands)

  • हाथों को साबुन और पानी के साथ दो बार धोकर भोजन खाना चाहिए।
  • हाथों को सदा नर्म और मुलायम रखने का यत्न करना चाहिए।
  • हाथों या उंगलियों में लाइनों या खुरदरेपन को ग्लेसरीन या किसी अच्छी किस्म की क्रीम से दूर करने का प्रयत्न करना चाहिए।
  • हाथों को साबुन और साफ़ पानी से धोना चाहिए जिस से छूत की बीमारियों जैसे टाइफाइड, पेचिश और हैज़ा आदि हाथों से न फैल सकें। अगर हाथ साफ़ न किए जाएं तो हाथों की मैल जिसमें कई तरह के कीटाणु होते हैं, पेट में चले जाते हैं।

PSEB 6th Class Physical Education Solutions Chapter 1 स्वास्थ्य

रिक्त स्थानों की पूर्ति-

प्रश्न-
निम्नलिखित वाक्यों में दिए गए खाली स्थानों की कोष्ठक (ब्रैकट) में दिए शब्दों में से उचित शब्द चुन कर भरो –

(1) आंखों की सफ़ाई के लिए हमें दिन में कई बार ……. के छींटे मारने चाहिएं। . (ठण्डे पानी, कोसे पानी)
(2) पढ़ते समय पुस्तक को आंखों से कम-से-कम …….. दूर रखना चाहिए। (45 सेंटीमीटर, 30 सेंटीमीटर)
(3) हमें सदा …….. द्वारा सांस लेनी चाहिए। (मुंह, नाक)
(4) कानों में जमी हुई मैल को निकालने के लिए …….. का प्रयोग करना चाहिए। (सोडियम क्लोराइड, हाइड्रोजन परॉक्साइड)
(5) नाखूनों को ……… काटना नहीं चाहिए। (मुंह से, नेल कटर से)
(6) ……… की आयु तक के बच्चों के दूध के दांत गिर जाते हैं। (3 साल से, 5 साल से, 6 साल से, 12 साल)
(7) हमें कभी भी ………. नहीं पढ़ना चाहिए। (बैठ कर, लेट कर)
(8) नाक के बीच वाले छोटे-छोटे बाल ………. का काम करते हैं। (नाली, जाली)
(9) दांतों की सफ़ाई न रखने पर ………. नामक रोग हो जाता है। (हिस्टीरिया, पाइरिया)
(10) नहाने के बाद हमें ………. कपड़े से पहनने चाहिएं। (गन्दे, साफ़-सुथरे)
उत्तर-

  1. ठण्डे पानी
  2. 30 सेंटीमीटर
  3. नाक
  4. हाइड्रोजन परॉक्साइड
  5. मुंह से
  6. 6 साल से 12 साल
  7. लेट कर
  8. जाली
  9. पाइरिया
  10. साफ़ सुथरे

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 21 राजनीतिक जागृति तथा अंग्रेजी साम्राज्य के विरुद्ध राजनीतिक आन्दोलन

Punjab State Board PSEB 11th Class History Book Solutions Chapter 21 राजनीतिक जागृति तथा अंग्रेजी साम्राज्य के विरुद्ध राजनीतिक आन्दोलन Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 11 History Chapter 21 राजनीतिक जागृति तथा अंग्रेजी साम्राज्य के विरुद्ध राजनीतिक आन्दोलन

अध्याय का विस्तृत अध्ययन

(विषय सामग्री की पूर्ण जानकारी के लिए)

प्रश्न 1.
1885 से 1916 ई० तक स्वतन्त्रता आन्दोलन की मुख्य घटनाओं की चर्चा करें।
उत्तर-
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 1885 ई० में हुई। इसके संस्थापक एक सेवा-मुक्त अंग्रेज अधिकारी श्री ए० ओ० ह्यूम थे। कांग्रेस का पहला अधिवेशन बम्बई (मुम्बई) में हुआ। जिसका सभापतित्व श्री वोमेश चन्द्र जी ने किया। अगले वर्ष यह सौभाग्य दादा भाई नौरोजी को प्राप्त हुआ। आरम्भ में अंग्रेजों ने इस संस्था का स्वागत किया। तत्कालीन वायसराय लॉर्ड डफरिन ने इसके सदस्यों को भोज भी दिया। उन्होंने यह विचार व्यक्त किए कि कांग्रेस की स्थापना से सरकार तथा जनता का आपसी मेल बढ़ेगा और सरकार को अपनी नीति निर्धारित करने में आसानी रहेगी। वास्तव में कांग्रेस का आरम्भिक उद्देश्य भी सरकार तथा जनता को निकट लाना था। अतः शुरू-शुरू में कांग्रेस प्रस्ताव पास करके सरकार के सामने प्रस्तुत करती थी। कांग्रेस हर वर्ष यह मांग करती कि भारत में संवैधानिक सुधार किए जाएं, भारतीयों को उच्च पदों पर नियुक्त किया जाए, कर कम किए जाएं तथा शिक्षा के लिए उचित पग उठाए जाएं। उसके प्रस्तावों की भाषा में विनम्रता होती थी और ये सदा एक प्रार्थना के रूप में सरकार के सम्मुख रखे जाते थे। अपने अधिवेशनों में भी कांग्रेसी नेता सरकार की निन्दा नहीं करते थे।

सरकार द्वारा कांग्रेस का विरोध-धीरे-धीरे ब्रिटिश सरकार और कांग्रेस एक-दूसरे से दूर होने लगे। आरम्भ में जिस संस्था को अंग्रेज़ लोग भारत में ब्रिटिश साम्राज्य के लिए रक्षा नली (Safety Valve) कहा करते थे, अब उसी संस्था को सन्देह की दृष्टि से देखा जाने लगा। अंग्रेजों को यह विश्वास होने लगा कि कांग्रेस के विकास से राष्ट्रीय भावना तेजी से फैल रही है। अत: लॉर्ड डफरिन ने एक भोज के अवसर पर कहा-“अब कांग्रेस राजद्रोह की ओर झुक रही है।” अंग्रेज़ी समाचारपत्रों ने खुलेआम कांग्रेस की निन्दा करनी शुरू कर दी। 1892 ई० में सरकार ने एक अधिनियम पास किया। इस अधिनियम से कांग्रेस सन्तुष्ट नहीं थी। अतः इसके रवैये में परिवर्तन आया और इसके नेताओं ने सरकार की गलत नीतियों की निन्दा करनी शुरू कर दी। परन्तु अभी भी उनके प्रस्तावों की भाषा में नम्रता बनी रही। 1897-98 ई० में भारत अकाल तथा प्लेग की लपेट में आ गया। हजारों लोग मरने लगे, परन्तु सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। सरकार की इस उदासीनता ने जनता के दिल में रोष पैदा कर दिया। जनता को विश्वास हो गया कि उनके कष्टों का अन्त केवल स्वतन्त्रता प्राप्ति में ही है। लोकमान्य तिलक, लाला लाजपत राय जैसे नेताओं ने कांग्रेस की नर्म नीति की निन्दा की।

बंगाल का विभाजन-1905 ई० में लॉर्ड कर्जन ने बंगाल का विभाजन कर दिया। यह कदम हिन्दू तथा मुसलमान जनता में फूट डालने के लिए उठाया गया था। सारे भारत में रोष की लहर दौड़ गई। इससे लोकमान्य तिलक के विचारों को बहुत बल मिला। कांग्रेस में भी दो विचारधाराएं बन गईं। उस समय मुख्य नेता थे-गोपाल कृष्ण गोखले, दादा भाई नौरोजी, फिरोज़शाह मेहता, लाला लाजपतराय, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक तथा विपिन चन्द्र पाल। आखिरी तीन नेता लाल, बाल तथा पाल के नाम से प्रसिद्ध थे। ये तीनों नेता सरकार की ईंट का जवाब पत्थर से देना चाहते थे। उनके विचार थे कि अंग्रेज़ी सरकार प्यार की भाषा नहीं समझती। अतः केवल उग्रवादी कदम ही उसे झुकने के लिए विवश कर सकते हैं। इसके विपरीत गोखले आदि का विचार था कि अंग्रेजों के साथ संवैधानिक साधनों से ही निपटना चाहिए। कांग्रेस में यह आपसी भेद-भाव दिन-प्रतिदिन बढ़ता गया। ऐसा लगता था कि यह दो दल शीघ्र ही अलग-अलग हो जाएंगे।

सूरत की फूट-कांग्रेस ने अपने 1906 ई० के कलकत्ता (कोलकाता) अधिवेशन में ‘स्वराज्य’ की मांग की। दोनों दलों ने स्वराज्य शब्द की व्याख्या अपने-अपने ढंग से की। तिलक स्वराज्य का अर्थ पूर्ण स्वतन्त्रता से लेते थे। उनके अनुसार आज़ादी को प्राप्त करने के लिए केवल संवैधानिक ढंग काम नहीं दे सकता। तिलक का मूलमन्त्र था-‘Militancy, not Mendicancy’ । इसके विपरीत गोखले के अनुसार स्वराज्य का अभिप्रायः ‘उत्तरदायी सरकार’ से था और वे इसे शान्तिपूर्ण तथा संवैधानिक साधनों से प्राप्त करना चाहते थे। आखिर 1907 में सूरत के कांग्रेस अधिवेशन में दोनों दलों में खूब झगड़ा हुआ। तिलक अपने विचारों पर दृढ़ रहे। इस तरह कांग्रेस में दो दल बन गए। तिलक तथा उनके साथियों को गर्म दल का नाम दिया और गोखले के अनुयायियों को नर्म दल कहा जाने लगा।

क्रान्तिकारी आन्दोलन-गर्म दल के समर्थकों में से ही बाद में कुछ क्रान्तिकारी बन गए। उन्होंने देश में आतंक का वातावरण उत्पन्न कर दिया। पूना के कलैक्टर तथा प्लेग कमिश्नर मि० रैण्ड का चापेकर बन्धुओं ने वध कर दिया। इसके अतिरिक्त बंगाल के लेफ्टिनेंट गवर्नर मि० कैनेडी पर खुदी राम बोस और उसके एक साथी ने बम फेंका किन्तु उसकी जगह उनकी पत्नी मारी गई। सरकार ने क्रान्तिकारियों को दबाने के लिए सख्ती से काम लिया। कई क्रान्तिकारी फांसी के तख्ते पर चढ़ा दिए गए। खुदीराम बोस को भी फांसी दी गई। कुछ लोगों को काले पानी का दण्ड मिला। तिलक को 15 मास के लिए जेल में डाल दिया गया। लाला लाजपत राय तथा सरदार अजीत सिंह को देश से निर्वासित कर दिया गया। सरकार ने क्रान्तिकारियों का प्रभुत्व समाप्त करने के लिए नर्म दल वालों का समर्थन भी प्राप्त किया।

मुस्लिम लीग की स्थापना-मुस्लिम लीग की स्थापना ने स्वतन्त्रता आन्दोलन को तीव्र किया। इस संस्था की स्थापना 1906 में हुई। मुस्लिम नेता कांग्रेस को हिन्दुओं की संस्था समझते थे। उनका विश्वास था कि मुसलमानों के हितों की रक्षा कांग्रेस नहीं बल्कि मुस्लिम लीग ही कर सकती है। अंग्रेज़ी सरकार ने भी मुस्लिम लीग को खूब प्रोत्साहन दिया क्योंकि वे इस संस्था की सहायता करके हिन्दुओं तथा मुसलमानों में फूट डाल सकते थे। मुस्लिम लीग के नेता कई बार वायसराय से मिले और उन्होंने मुसलमानों के हितों की रक्षा की मांग की। अंग्रेज़ी सरकार तो पहले ही उन्हें खुश करना चाहती थी। अतः 1909 ई० के सुधार कानून में उन्होंने मुसलमानों के लिए ‘पृथक् प्रतिनिधित्व’ की मांग को स्वीकार कर लिया।

मिण्टो-मार्ले सुधार-मिण्टो-मार्ले सुधार अथवा 1909 ई० के अधिनियम के अनुसार कार्यकारिणी तथा विधानमण्डलों के सदस्यों की संख्या बढ़ा दी गई। इसके अतिरिक्त मुसलमानों को पृथक् प्रतिनिधित्व दिया गया। पृथक् प्रतिनिधित्व के सिद्धान्त ने दो राष्ट्रों के सिद्धान्त को जन्म दिया जिसके कारण आगे चलकर पाकिस्तान का निर्माण हुआ। 1909 के एक्ट के अनुसार अप्रत्यक्ष रूप से चुनाव होने लगे। परन्तु इन सब सुधारों से भारतीय सन्तुष्ट न हुए। वे समझ गए कि अंग्रेज़ लोग हिन्दुओं तथा मुसलमानों में फूट डालना चाहते हैं। कांग्रेस के गर्म दल तथा नर्म दल दोनों ने सरकार का विरोध किया। सरकार ने नर्म दल वालों को प्रसन्न करने के लिए 1911 ई० में बंगाल विभाजन रद्द कर दिया।

लखनऊ पैक्ट-लोकमान्य तिलक माण्डले जेल से छूट कर आ चुके थे। 1915 ई० में उन्होंने स्वराज्य की मांग को पुनः सरकार के सामने रखा। उन्होंने कहा, “स्वराज्य हमारा जन्म-सिद्ध अधिकार है और हम इसे लेकर ही रहेंगे।” इधर नर्म दल के प्रमुख नेता मर चुके थे। अतः दोनों दलों के पुनः एक हो जाने की सम्भावनाएं बढ़ गईं। आखिर 1915 ई० में दोनों दल मिल गए। उसी समय यूरोप में युद्ध चल रहा था। टर्की पर आक्रमण करने के कारण मुसलमान भी अंग्रेजों के विरुद्ध हो गए थे। अतः 1916 ई० के लखनऊ पैक्ट के अनुसार कांग्रेस तथा मुस्लिम लीग ने मिलकर सरकार का विरोध करने का निर्णय किया।

होमरूल आन्दोलन-लखनऊ पैक्ट के बाद कांग्रेस के दोनों दलों तथा मुस्लिम लीग ने मिलकर भारत के लिए ‘होमरूल’ की मांग की। लोकमान्य तिलक तथा श्रीमती ऐनी बेसेन्ट ने ‘होमरूल लीग’ की स्थापना की। सारे देश में लोगों ने सरकार के विरुद्ध सभाएं कीं और होमरूल को प्राप्त करने के लिए प्रतिज्ञा की। श्रीमती ऐनी बेसेन्ट को मद्रास सरकार ने बन्दी बना लिया जिससे सारे देश में हाहाकार मच गया। सरकार को उन्हें छोड़ना पड़ा। इसी बीच प्रथम महायुद्ध में सरकार को भारतीयों के सहयोग की आवश्यकता पड़ी। अतः भारत सचिव माण्टेग्यू ने घोषणा की कि सरकार भारत में उत्तरदायी शासन स्थापित करने के लिए उचित पग उठाएगी। फलस्वरूप होमरूल आन्दोलन समाप्त हो गया। इस प्रकार 1885 में डाले गए बीज (कांग्रेस) ने 1919 तक एक महान् वृक्ष का रूप धारण कर लिया। कांग्रेस को शक्तिशाली रूप देने का श्रेय श्री गोपालकृष्ण गोखले, लोकमान्य तिलक, लाला लाजपत राय आदि अनेक नेताओं को प्राप्त है।

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प्रश्न 2.
महात्मा गांधी के योगदान के संदर्भ में 1919 से 1922 तक के स्वतन्त्रता आन्दोलन की मुख्य घटनाओं की चर्चा करें।
उत्तर-
भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम की वास्तविक कहानी 1919 ई० से आरम्भ होती है। यही वह वर्ष था जब भारत की राजनीति में महात्मा गांधी ने प्रवेश किया। वे 1915 में दक्षिणी अफ्रीका से भारत वापस आए। तीन वर्ष तक उन्होंने इस देश के राजनीतिक वातावरण का अध्ययन किया। उन्होंने प्रथम महायुद्ध में अंग्रेज़ी सरकार को नैतिक समर्थन भी प्रदान किया। परन्तु 1919 में सारी स्थिति बदल गई। इस संकट के समय में महात्मा गांधी स्वतन्त्रता सेनानी बनकर हमारे सामने आए और उन्होंने सत्य और अहिंसा के बल पर अंग्रेज़ी साम्राज्य की जड़ें खोखली कर दीं। 1919 से 1922 तक महात्मा गांधी जी खूब सक्रिय रहे। इस समय की प्रमुख घटनाएं इस प्रकार हैं :-

रौलेट एक्ट तथा जलियांवाला बाग की दुर्घटना-प्रथम महायुद्ध के समाप्त होने पर भारतीयों को प्रसन्न करने के लिए माण्टेग्यू चेम्सफोर्ड रिपोर्ट प्रकाशित की गई। भारतीयों ने युद्ध में अंग्रेजों की सहायता की थी। उन्हें विश्वास था कि युद्ध में विजयी होने के पश्चात् सरकार उन्हें पर्याप्त अधिकार देगी। परन्तु इस रिपोर्ट से भारतीय निराश हो गए। सरकार भी भयभीत हो गई कि अवश्य कोई नया आन्दोलन आरम्भ होने वाला है। अतः स्थिति पर नियन्त्रण पाने के लिए सरकार ने रौलेट एक्ट पास कर दिया। इस एक्ट के अनुसार वह किसी भी व्यक्ति को बिना वकील, बिना दलील, बिना अपील बन्दी बना सकती थी। इस काले कानून का विरोध करने के लिए महात्मा गांधी आगे बढ़े। उन्होंने जनता को शान्तिमय ढंग से इसका विरोध करने के लिए कहा। इस शान्तिमय विरोध को उन्होंने सत्याग्रह का नाम दिया। स्थान-स्थान पर सभाएं बुलाई गईं और जलूस निकाले गए। कांग्रेस का आन्दोलन जनता. का आन्दोलन बन गया। पहली बार भारत की जनता ने संगठित होकर अंग्रेज़ों का विरोध किया। 6 अगस्त, 1919 ई० को सारे भारत में हड़ताल की गई। महात्मा गांधी ने लोगों को शान्तिमय विरोध करने के लिए कहा था। फिर भी कहीं-कहीं अप्रिय घटनाएं हुईं।

13 अप्रैल, 1919 ई० को जलियांवाला बाग की दुःखद घटना से भारतीय राजनीति में एक नया मोड़ आया। पंजाब के लोकप्रिय नेता डॉ० सत्यपाल तथा डॉ० किचलू को सरकार ने बन्दी बना लिया था। अमृतसर की जनता विरोध प्रकट करने के लिए बैसाखी के दिन जलियांवाला बाग में एकत्रित हुई। नगर में मार्शल-ला लगा हुआ था। जनरल डायर ने लोगों को चेतावनी दिए बिना ही एकत्रित लोगों पर गोली चलाने का आदेश दिया। हज़ारों निर्दोष स्त्री-पुरुष मारे गए। इससे सारे भारत में रोष की लहर दौड़ गई।

असहयोग आन्दोलन-इन्हीं दिनों मुसलमानों ने अंग्रेजी सरकार के विरुद्ध खिलाफ़त आन्दोलन छेड़ा हुआ था। जनता पहले से ही भड़की हुई थी। गांधी जी ने इस अवसर का लाभ उठाया और असहयोग आन्दोलन आरम्भ कर दिया। इस प्रकार हिन्दुओं तथा मुसलमानों ने मिल कर अंग्रेजी सरकार का विरोध किया। छात्रों ने सरकारी स्कूलों तथा कॉलेजों का बहिष्कार कर दिया। वकीलों ने अदालतों में जाना बन्द कर दिया। कई लोगों ने अंग्रेजी सरकार द्वारा प्रदान की गई उपाधियों को त्याग दिया। लोगों ने अंग्रेज़ी कपड़े का बहिष्कार किया तथा हाथ का बुना कपड़ा पहनना आरम्भ कर दिया। गांधी जी इस आन्दोलन को शान्तिमय ढंग से चलाना चाहते थे, परन्तु 1922 में उत्तर प्रदेश के एक गांव चौरी-चौरा में एक पुलिस चौकी को सिपाहियों सहित जला दिया गया। गांधी जी को इस घटना से बड़ा दुःख हुआ और उन्होंने असहयोग आन्दोलन की समाप्ति की घोषणा कर दी। उनके इस कार्य से अनेक नेता गांधी जी से रुष्ट हो गए तथा उन्होंने ‘स्वराज्य पार्टी’ नामक एक नये दल की स्थापना की। अंग्रेज़ सरकार ने गांधी जी को बन्दी बना लिया और छः वर्ष के कारावास का दण्ड दिया।
PSEB 11th Class History Solutions Chapter 21 राजनीतिक जागृति तथा अंग्रेजी साम्राज्य के विरुद्ध राजनीतिक आन्दोलन 1
महात्मा गांधी महात्मा गांधी जी ने कुछ देर शांत रहने के बाद 1927 में एक बार फिर भारतीय राजनीति को गरिमा प्रदान की।

महत्त्वपूर्ण परीक्षा-शैली प्रश्न

1. वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. उत्तर एक शब्द से एक वाक्य तक

प्रश्न 1.
1857 की क्रांति में किस महिला शासक ने महत्त्वपूर्ण भाग लिया?
उत्तर-
रानी लक्ष्मी बाई ने।

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प्रश्न 2.
कांग्रेस की स्थापना किसने की?
उत्तर-
कांग्रेस की स्थापना मिस्टर ए० ओ० ह्यूम ने की।

प्रश्न 3.
गरम दल के प्रतिष्ठाता कौन थे?
उत्तर-
बाल गंगाधर तिलक।

प्रश्न 4.
गांधी जी ने असहयोग आन्दोलन स्थगित करने का निश्चय क्यों किया?
उत्तर-
चौरी-चौरा की हिंसात्मक घटना के कारण।

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प्रश्न 5.
आज़ाद हिन्द फौज की स्थापना किसने की ?
उत्तर-
आज़ाद हिन्द फौज की स्थापना सुभाषचन्द्र बोस ने की।

प्रश्न 6.
1947 ई० क्यों प्रसिद्ध है ?
उत्तर-
इस वर्ष (15 अगस्त, 1947 को) भारत को स्वतन्त्रता मिली थी।

2. रिक्त स्थानों की पूर्ति

(i) जलियांवाला बाग में अंग्रेज़ कमाण्डर ……………. ने गोली चलाई थी।
(ii) साईमन कमीशन …………………. में भारत आया।
(iii) सिविल अवज्ञा आन्दोलन …………… ई० में चला।
(iv) पूर्ण स्वराज्य की घोषणा 1929 ई० में कांग्रेस के ………. अधिवेशन में हुई।
(v) गांधी-इर्विन समझौता ………………. ई० में हुआ।
उत्तर-
(i) जनरल डायर
(ii) 1928
(iii) 1929
(iv) लाहौर
(v) 1931.

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3. सही/ग़लत कथन

(i) सन् 1905 ई० में बंगाल का विभाजन हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच फूट डालने के लिए किया गया। — (√)
(ii) स्वदेशी आन्दोलन की शुरुआत गांधी जी ने सन् 1905 ई० में की। — (×)
(iii) सन् 1909 ई० के एक्ट से भारतीयों की आशाएं पूरी नहीं हुई। — (√)
(iv) मुस्लिम लीग की स्थापना सन् 1906 ई० में हुई। — (√)
(v) होम रूल लीगों की स्थापना प्रथम महायुद्ध के दौरान हुई। — (√)
(vi) पहली बार सन् 1910 ई० में कांग्रेस ने स्वराज्य को अपना लक्ष्य बनाया। — (×)

4. बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न (i)
कांग्रेस और मुस्लिम लीग के मध्य लखनऊ समझौता कब हुआ?
(A) 1916 ई० में
(B) 1906 ई० में
(C) 1917 ई० में
(D) 1915 ई० में।
उत्तर-
(A) 1916 ई० में

प्रश्न (ii)
गांधी जी ने असहयोग आन्दोलन कब चलाया ?
(A) 1921 ई० में
(B) 1927 ई० में
(C) 1920 ई० में
(D) 1922 ई० में।
उत्तर-
(C) 1920 ई० में

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प्रश्न (iii)
अंग्रेजों ने दिल्ली को भारत की राजधानी कब बनाया?
(A) 1911 ई० में
(B) 1907 ई० में
(C) 1890 ई० में
(D) 1892 ई० में।
उत्तर-
(A) 1911 ई० में

प्रश्न (iv)
कानपुर में 1857 ई० के विद्रोह का नेतृत्व किया-
(A) कुंवर सिंह
(B) नाना साहिब
(C) बेग़म हज़रत महल
(D) बहादुर शाह।
उत्तर-
(B) नाना साहिब

प्रश्न (v)
बाल गंगाधर तिलक ने कौन-सा पत्र निकाला?
(A) पंजाब केसरी
(B) केसरी
(C) हिन्दू
(D) नवभारत।
उत्तर-
(B) केसरी

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II. अति छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत के स्वतन्त्रता संघर्ष के इतिहास के स्रोतों के चार प्रकारों के नाम बताएं।
उत्तर-
भारत के स्वतन्त्रता संघर्ष के इतिहास की जानकारी के चार प्रकार के स्रोत हैं : अंग्रेज़ अधिकारियों की रिपोर्ट, लैजिस्लेटिव असैम्बली बहस के रिकार्ड, ब्रिटिश संसद् के रिकार्ड तथा भारतीय समाचार-पत्र।

प्रश्न 2.
बाल गंगाधर तिलक तथा महात्मा गांधी ने कौन-से अखबार निकाले ?
उत्तर-
बाल गंगाधर तिलक ने केसरी तथा मराठा अखबार निकाले। महात्मा गांधी ने ‘हरिजन’ नामक अखबार निकाली।

प्रश्न 3.
सरदार दयाल सिंह मजीठिया तथा लाला लाजपत राय ने कौन-से अखबार निकाले ?
उत्तर-
सरदार दयाल सिंह मजीठिया ने ‘ट्रिब्यून’ तथा लाला लाजपत राय ने ‘पंजाबी’ नामक अखबार निकाले।

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प्रश्न 4.
भारतीयों के आरम्भिक राजनीतिक संगठनों में सबसे महत्त्वपूर्ण कौन-सा संगठन था तथा इसको किसने, कब और कहां स्थापित किया ?
उत्तर-
भारतीयों के आरम्भिक राजनीतिक संगठनों में सबसे महत्त्वपूर्ण संगठन ‘इण्डियन एसोसिएशन’ था। इसे 1876 में सुरेन्द्र नाथ बनर्जी ने कलकत्ता (कोलकाता) में स्थापित किया।

प्रश्न 5.
इण्डियन एसोसिएशन की दो मांगें कौन-सी थीं ?
उत्तर-
इण्डियन एसोसिएशन की दो मांगें थीं : इण्डियन सिविल सर्विस के नियमों को बदलना और प्रेस को स्वतन्त्रता देना।

प्रश्न 6.
इण्डियन नेशनल कांग्रेस की स्थापना कब हुई तथा इसमें किस अंग्रेज अफसर का काफी हाथ था ?
उत्तर-
इण्डियन नेशनल कांग्रेस की स्थापना 1885 में हुई। कांग्रेस की स्थापना में अंग्रेज़ अफसर ह्यूम का काफी हाथ था।

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प्रश्न 7.
कांग्रेस का पहला अधिवेशन कहां और किसके सभापतित्व में हुआ तथा इसमें कितने प्रतिनिधियों ने भाग लिया ?
उत्तर-
कांग्रेस का पहला अधिवेशन बम्बई (मुम्बई) में वोमेशचन्द्र बैनर्जी के सभापतित्व में हुआ। इसमें 72 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

प्रश्न 8.
कांग्रेस का दूसरा अधिवेशन किसके सभापतित्व में तथा कहां हुआ तथा इसमें कितने प्रतिनिधियों ने भाग लिया?
उत्तर-
कांग्रेस का दूसरा अधिवेशन दादा भाई नौरोजी के सभापतित्व में कलकत्ता (कोलकाता) में हुआ। इसमें 400 से भी अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

प्रश्न 9.
आरम्भ में कांग्रेस के सदस्य अधिकतर कौन-से चार व्यवसायों से सम्बन्धित थे ?
उत्तर-
आरम्भ में कांग्रेसी सदस्य मुख्यतया कारखानेदार, व्यापारी, मध्यवर्गीय शिक्षित, डॉक्टर और वकील थे।

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प्रश्न 10.
1905 तक कांग्रेस के तीन पुराने नेताओं के नाम बताएं।
उत्तर-
1905 तक कांग्रेस के तीन पुराने नेता सुरेन्द्रनाथ बैनर्जी, गोपाल कृष्ण गोखले और फिरोज़शाह मेहता थे।

प्रश्न 11.
1905 तक कांग्रेस के तीन नये नेताओं के नाम बताएं।
उत्तर-
1905 तक कांग्रेस के तीन नये नेता बाल गंगाधर तिलक, विपिनचन्द्र पाल और लाला लाजपत राय थे।

प्रश्न 12.
रूस को किस एशियाई देश ने तथा कब हराया था ?
उत्तर-
रूस को एशिया के देश जापान ने 1905 ई० में हराया था।

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प्रश्न 13.
बंगाल का विभाजन कब तथा किस वायसराय के समय हुआ तथा इस समय बंगाल प्रान्त में कौन-से तीन प्रदेश शामिल थे ?
उत्तर-
बंगाल का विभाजन 1905 में वायसराय लॉर्ड कर्जन के समय हुआ। इस समय बंगाल प्रान्त में बंगाल, बिहार तथा उड़ीसा के प्रदेश शामिल थे।

प्रश्न 14.
बंगाल के विभाजन के सिलसिले में कौन-सा आन्दोलन चलाया गया तथा इसमें किन वस्तुओं के बहिष्कार पर बल दिया गया ?
उत्तर-
बंगाल के विभाजन के सिलसिले में स्वदेशी आन्दोलन चलाया गया। इसमें इंग्लैण्ड में निर्मित कपड़े और चीनी के बहिष्कार पर बल दिया गया।

प्रश्न 15.
1906 में कांग्रेस अधिवेशन कहां हुआ तथा इसमें पास होने वाला सबसे महत्त्वपूर्ण प्रस्ताव कौन-सा था ?
उत्तर-
1906 में कांग्रेस का अधिवेशन कलकत्ता (कोलकाता) में हुआ। इसमें ‘स्वदेशी और बायकॉट’ का अति महत्त्वपूर्ण प्रस्ताव पास हुआ।

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प्रश्न 16.
1907 में कांग्रेस का अधिवेशन कहां हुआ तथा इसमें कांग्रेस किन दो दलों में बंट गई ?
उत्तर-
1907 में कांग्रेस का अधिवेशन सूरत में हुआ। इसमें कांग्रेस नर्म दल और गर्म दल नामक दो दलों में बंट गई।

प्रश्न 17.
बंगाल तथा महाराष्ट्र में कौन-कौन-से तीन आतंकवादी संगठन स्थापित किए गए ?
उत्तर-
बंगाल में अनुशीलन समितियां तथा युगान्तर ग्रुप और महाराष्ट्र में अभिनव भारत नामक आतंकवादी संगठन स्थापित किए गए।

प्रश्न 18.
आतंकवादी संगठनों पर किन तीन व्यक्तियों की विचारधारा का प्रभाव था ?
उत्तर-
आतंकवादी संगठनों पर बंकिम चन्द्र चैटर्जी, अरविंद घोष और वी० डी० सावरकर की विचारधारा का प्रभाव था।

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प्रश्न 19.
बीसवीं सदी के पहले दशक के तीन क्रान्तिकारी आतंकवादियों के नाम बताएं।
उत्तर-
बीसवीं सदी के पहले दशक के तीन क्रान्तिकारी आतंकवादी थे : खुदी राम बोस, प्रफुल्ल चाकी और मदन लाल ढींगरा।

प्रश्न 20.
मदन लाल ढींगरा कहां का रहने वाला था तथा इसने कब और कहां किस अंग्रेज़ अफसर को गोली मारी थी ?
उत्तर-
मदन लाल ढींगरा अमृतसर जिले का रहने वाला था। उसने 1909 में लंदन में कर्जन वायली नामक अंग्रेज़ अफसर को गोली मारी थी।

प्रश्न 21.
1907 में पंजाब में 1857 की पचासवीं वर्षगांठ पर विद्रोह करने का प्रचार किसने किया तथा इनको क्या सज़ा मिली थी ?
उत्तर-
1907 में पंजाब में 1857 की पचासवीं वर्षगांठ पर अजीत सिंह ने सरकार के खिलाफ विद्रोह का प्रचार किया। इन्हें देश निकाला की सज़ा मिली थी।

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प्रश्न 22.
मुस्लिम लीग की स्थापना कब हुई तथा उसका उद्देश्य क्या था ?
उत्तर-
मुस्लिम लीग की स्थापना 1906 में हुई। इसका उद्देश्य सरकार के साथ सहयोग करके मुसलमानों के लाभ के लिए काम करना था।

प्रश्न 23.
पृथक् प्रतिनिधित्व की मांग किस राजनीतिक दल ने किस गवर्नर-जनरल के समय में की तथा 1947 तक इसका सबसे महत्त्वपूर्ण नेता कौन था ?
उत्तर-
पृथक् प्रतिनिधित्व की मांग मुस्लिम लीग ने गवर्नर-जनरल मिण्टो के समय में की। 1947 तक इस दल का सबसे महत्त्वपूर्ण नेता मुहम्मद अली जिन्नाह था।

प्रश्न 24.
कौन-से दो मुस्लिम संगठन अंग्रेज़ सरकार के विरुद्ध रहे ?
उत्तर-
अहरार तथा देवबंदी उलेमा के संगठन सरकार के विरुद्ध रहे।

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प्रश्न 25.
चार मुस्लिम नेताओं के नाम बताएं।
उत्तर-
चार मुस्लिम नेताओं के नाम हैं-मौलाना अबुल कलाम आज़ाद, हकीम अजमल खां, डॉ० अंसारी और शौकत अली।

प्रश्न 26.
पंजाब के दो राष्ट्रवादी मुस्लिम कांग्रेसी नेताओं के नाम बताएं।
उत्तर-
पंजाब के दो राष्ट्रवादी मुस्लिम कांग्रेसी नेता डॉ० सैफुद्दीन किचलू तथा डॉ० मुहम्मद आलम थे।

प्रश्न 27.
1909 के एक्ट को किस नाम से जाना जाता है तथा इसमें मुसलमानों की कौन-सी मांग शामिल कर ली गई थी ?
उत्तर-
1909 के एक्ट को मिन्टो मार्ले सुधार के नाम से जाना जाता है। इसमें मुसलमानों की पृथक् प्रतिनिधित्व की मांग शामिल कर ली गई थी।

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प्रश्न 28.
1909 के एक्ट में लैजिस्लेटिव कौंसिल में कितने सदस्य बना दिए गए तथा इसमें कितने निर्वाचित सदस्य थे ?
उत्तर-
1909 के एक्ट में लैजिस्लेटिव कौंसिल में 60 सदस्य बना दिए गए। इनमें से 27 निर्वाचित सदस्य थे।

प्रश्न 29.
हिन्दुस्तान गदर पार्टी की स्थापना कब हुई तथा इसके अखबार और संस्थापक का नाम क्या था ?
उत्तर-
‘हिन्दुस्तान गदर पार्टी’ की स्थापना 1913 में हुई। इसके अखबार का नाम ‘गदर’ और संस्थापक का नाम लाला हरदयाल था।

प्रश्न 30.
गदर पार्टी की शाखाएं भारत से बाहर कौन-से चार देशों अथवा क्षेत्रों में थीं ?
उत्तर-
गदर पार्टी की शाखाएं भारत से बाहर कनाडा, अमेरिका, यूरोप तथा दक्षिणी-पूर्वी एशिया के देशों में थीं।

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प्रश्न 31.
गदर पार्टी के चार कार्यकर्ताओं तथा नेताओं के नाम बताओ।
उत्तर-
गदर पार्टी के चार कार्यकर्ता तथा नेता सोहन सिंह भकना, मुहम्मद बरकत उल्ला, करतार सिंह सराभा तथा भाई परमानन्द थे।

प्रश्न 32.
होमरूल आन्दोलन किस लिए चलाया गया तथा इसके दो नेताओं के नाम बताएं।
उत्तर-
होमरूल आन्दोलन स्वराज्य की मांग के लिए चलाया गया। इसके दो मुख्य नेता श्रीमती एनी बेसेन्ट तथा बाल गंगाधर तिलक थे।

प्रश्न 33.
कांग्रेस में नर्म दल तथा गर्म दल किसके यत्नों से तथा कब फिर से इकट्ठे हो गए ?
उत्तर-
नर्म दल तथा गर्म दल श्रीमती एनी बेसेन्ट के यत्नों से 1915 में फिर से इकट्ठे हो गए।

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प्रश्न 34.
‘लखनऊ पैक्ट’ कब और किन दो राजनीतिक दलों के बीच में हुआ ?
उत्तर-
लखनऊ पैक्ट’ 1916 में कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच में हुआ।

प्रश्न 35.
कांग्रेस ने धर्म के आधार पर पृथक् प्रतिनिधित्व का सिद्धान्त कब और किस समझौते के द्वारा स्वीकार कर लिया ?
उत्तर-
कांग्रेस ने धर्म के आधार पर पृथक् प्रतिनिधित्व का सिद्धान्त 1916 में लखनऊ समझौते के अनुसार स्वीकार किया।

प्रश्न 36.
रौलेट एक्ट कब कानून बना तथा इसको इस नाम से क्यों जाना जाता है ?
उत्तर-
रौलेट एक्ट 1919 में कानून बना। यह एक्ट जस्टिस रौलेट के सुझाव पर बना होने के कारण रौलेट एक्ट के नाम से जाना जाता है।

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प्रश्न 37.
मोती लाल नेहरू ने रौलेट एक्ट की व्याख्या किन शब्दों में की ?
उत्तर-
मोती लाल नेहरू ने रौलेट एक्ट की व्याख्या इन शब्दों में की-‘न वकीर दलील, न अपील’।

प्रश्न 38.
महात्मा गांधी किस देश से तथा कब भारत लौटे तथा विदेश में उन्होंने किस नीति के विरुद्ध सत्याग्रह किया था ?
उत्तर-
महात्मा गांधी 1915 में अफ्रीका से लौटे। विदेश (अफ्रीका) में उन्होंने रंगभेद की नीति के विरुद्ध सत्याग्रह किया था।

प्रश्न 39.
महात्मा गांधी ने भारत वापस आ कर किस इलाके के कौन-से किसानों की सहायता की ?
उत्तर-
महात्मा गांधी ने भारत वापस आ कर, बिहार में चम्पारन के इलाके में नील की खेती करने वाले किसानों की सहायता की।

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प्रश्न 40.
जलियांवाला बाग कांड कब और कहां हुआ तथा इसके लिए उत्तरदायी अंग्रेज़ अफसर का नाम बताएं।
उत्तर-
जलियांवाला बाग का कांड 13 अप्रैल, 1919 को अमृतसर में हुआ। इसके लिए जनरल डायर उत्तरदायी था।

प्रश्न 41.
जलियांवाला बाग में कितने लोग मारे गए तथा कितने घायल हुए ?
उत्तर-
जलियांवाला बाग में 500 से अधिक लोग मारे गए और 1500 से अधिक लोग घायल हुए।

प्रश्न 42.
‘मांटेग्यू चैम्सफोर्ड सुधार’ का विधान कब पास हुआ तथा कब लागू किया गया ?
उत्तर-
मांटेग्यू चैम्सफोर्ड सुधार 1918-19 में पास हुआ तथा मार्च, 1920 में लागू किया गया।

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प्रश्न 43.
1919 के विधान में केन्द्र के पास कौन-से विभाग थे ?
उत्तर-
1919 के विधान में केन्द्र के पास सेना, विदेशी मामले, संचार के साधन, व्यापार तथा चुंगी के विभाग थे।

प्रश्न 44.
1919 के विधान के अनुसार प्रान्तीय प्रशासन को किन दो भागों में बांटा गया ?
उत्तर-
इस विधान के अनुसार प्रान्तीय प्रशासन को इन दो भागों में बांटा गया :

  1. गवर्नर एवं उसकी परिषद् और
  2. निर्वाचित मंत्री।

प्रश्न 45.
1919 के विधान में प्रान्तीय गवर्नर के पास कौन-से विभाग थे ?
उत्तर-
1919 के विधान में प्रान्तीय गवर्नर के पास लगान, कानून, न्याय, पुलिस, सिंचाई और मजदूरों के मामलों से सम्बन्धित विभाग थे।

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प्रश्न 46.
1919 के विधान में निर्वाचित मन्त्रियों के पास कौन-से विभाग थे ?
उत्तर-
1919 के विधान के अनुसार निर्वाचित मन्त्रियों के पास नगरपालिकाएं, ज़िला बोर्ड, शिक्षा, पब्लिक हैल्थ, पब्लिक वर्क्स, कृषि तथा सहकारी संस्थाओं के विभाग थे।

प्रश्न 47.
‘डायारकी’ से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
‘डायारकी’ से अभिप्राय उस दोहरे शासन से है जो मांटेग्यू चैम्सफोर्ड विधान के अन्तर्गत प्रान्तों में स्थापित किया गया। इसके अनुसार शासन के दो भाग कर दिए गए जिनमें से एक भाग पर गवर्नर और उसकी परिषद् का अधिकार रहा, जबकि दूसरा भाग निर्वाचित मन्त्रियों को सौंप दिया गया।

प्रश्न 48.
1919 मे किन चार प्रदेशों को ‘प्रान्तों’ का दर्जा दे दिया गया ?
उत्तर-
1919 में यू० पी०, पंजाब, बिहार और उड़ीसा को प्रान्त का दर्जा दिया गया।

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प्रश्न 49.
1919 के विधान अनुसार आम मतदाताओं के प्रतिनिधि किस आधार पर चुने जाते थे ?
उत्तर-
इस विधान के अनुसार आम मतदाताओं के प्रतिनिधि साम्प्रदायिक विभाजन के आधार पर चुने जाते थे।

प्रश्न 50.
भारतीय नेताओं की 1919 के विधान पर कौन-सी दो मुख्य आपत्तियाँ थीं ?
उत्तर-
भारतीय नेताओं की दो मुख्य आपत्तियां थीं-धर्म के आधार पर पृथक् प्रतिनिधित्व दिया जाना और इसका ‘स्वराज्य’ के अधिकार से दूर होना।

प्रश्न 51.
खिलाफत आन्दोलन से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
खिलाफत आन्दोलन से अभिप्राय उस आन्दोलन से है जो भारतीय मुसलमानों ने अपने खलीफा अर्थात् तुर्की के सुल्तान के पक्ष में अंग्रेज़ी सरकार के विरुद्ध चलाया।

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प्रश्न 52.
खिलाफत आन्दोलन के चार नेताओं के नाम बताएं।
उत्तर-
खिलाफत आन्दोलन के चार नेता मुहम्मद अली, शौकत अली, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद तथा हकीम अजमल खां थे।

प्रश्न 53.
खिलाफत कमेटी ने असहयोग आन्दोलन शुरू करने की घोषणा कब की तथा इसमें सबसे पहले कौन शामिल हुए ?
उत्तर-
खिलाफत कमेटी ने असहयोग आन्दोलन शुरू करने की घोषणा 31 अगस्त, 1920 को की। महात्मा गांधी इसमें सबसे पहले शामिल हुए।

प्रश्न 54.
असहयोग आन्दोलन के कार्यक्रम में किन चीज़ों का बहिष्कार शामिल था ?
उत्तर-
असहयोग आन्दोलन के कार्यक्रम में छुआछूत तथा शराब का बहिष्कार शामिल था।

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प्रश्न 55.
असहयोग आन्दोलन के रचनात्मक पक्ष कौन-से थे ?
उत्तर-
असहयोग आन्दोलन के रचनात्मक पक्ष थे-पंचायतों, राष्ट्रीय स्कूलों तथा कॉलेजों की स्थापना करना और स्वदेशी वस्तुओं (विशेषकर खादी) का प्रचार करना।

प्रश्न 56.
असहयोग आन्दोलन किस पर आधारित था तथा इसके कौन-से दो प्रतीक बन गए ?
उत्तर-
यह आन्दोलन पूर्ण रूप से अहिंसा पर आधारित था। चर्खा तथा खद्दर इस आन्दोलन के प्रतीक बन गए।

प्रश्न 57.
असहयोग आन्दोलन के अन्तर्गत वकालत छोड़ने वाले तीन व्यक्तियों के नाम बताएं।
उत्तर-
असहयोग आन्दोलन के अन्तर्गत वकालत छोड़ने वालों में पंडित मोती लाल नेहरू, डॉ० राजेन्द्र प्रसाद तथा लाला लाजपत राय शामिल थे।

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प्रश्न 58.
असहयोग आन्दोलन द्वारा पहली बार समाज के कौन-से दो हिस्से राजनीतिक गतिविधियों में शामिल हुए ?
उत्तर-
असहयोग आन्दोलन द्वारा पहली बार समाज के साधारण लोग तथा स्त्रियां राजनीतिक गतिविधियों में शामिल हुईं।

प्रश्न 59.
असहयोग आन्दोलन कब वापिस लिया गया तथा इसका क्या कारण था ?
उत्तर-
असहयोग आन्दोलन 1922 में वापस लिया गया। इसका कारण था-उत्तर प्रदेश में चौरी-चौरा के स्थान पर हुई हिंसात्मक घटना।

प्रश्न 60.
भारत से बाहर कब व किस घटना के बाद खिलाफत प्रश्न समाप्त हो गया ?
उत्तर-
भारत से बाहर 1929 में खिलाफत प्रश्न समाप्त हुआ। यह प्रश्न तुर्की के सुल्तान के बहाल होने के बाद समाप्त हुआ।

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III. छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
1857 की क्रान्ति के सामाजिक कारणों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर-
प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम का मुख्य कारण सामाजिक असन्तोष था। निम्नलिखित चार बातों से यह तथ्य प्रमाणित हो जाता है:
1. अंग्रेज़ भारत में सती-प्रथा को समाप्त करना तथा कुछ अन्य सामाजिक परिवर्तन लाना चाहते थे। भारतीयों ने इन सभी परिवर्तनों को हिन्दू धर्म के विरुद्ध समझा और वे अंग्रेजों के घोर विरोधी हो गये।

2. अंग्रेज़ शिक्षा संस्थाओं में ईसाई धर्म के सिद्धान्तों का प्रचार करते थे जिसके कारण भी भारतीय अंग्रेजों से नाराज़ थे।

3. ईसाई पादरी भारतीय रीति-रिवाजों की कड़ी निन्दा करते थे। भारतीय इसे सहन न कर सके और वे अंग्रेजों को भारत से निकालने के लिये तैयार हो गये।

4. रेलों के आरम्भ होने से लोगों को विश्वास हो गया कि वे शीघ्रता से भारतीयों को अपने प्रभाव में लेना चाहते थे। इस असन्तोष के कारण भारतीय जनता ने अपने राजाओं को सहयोग दिया और वे क्रान्ति के लिये तैयार हो गये।

प्रश्न 2.
प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम के धार्मिक कारणों का वर्णन करो।
उत्तर-
प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम के धार्मिक कारण निम्नलिखित थे :
1. धर्म परिवर्तन-ईसाई पादरी भारतीयों को लालच देकर उन्हें ईसाई बना रहे थे। इस कारण भारतवासी अंग्रेज़ों के विरुद्ध हो गये।

2. विलियम बैंटिंक के सुधार-विलियम बैंटिंक ने अनेक समाज सुधार किये थे। कुछ हिन्दुओं ने इन सुधारों को अपने धर्म में हस्तक्षेप समझा।

3. अंग्रेज़ी शिक्षा-अंग्रेज़ी शिक्षा के प्रसार के कारण भी भारतवासियों में असन्तोष फैल गया।

4. हिन्दू ग्रन्थों की निन्दा-ईसाई प्रचारक अपने धर्म का प्रचार करने के साथ-साथ हिन्दू धर्म के ग्रन्थों की घोर निन्दा करते थे। इस बात से भी भारतवासी भड़क उठे।

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प्रश्न 3.
सन् 1857 की क्रान्ति के लिए भारतीयों का आर्थिक शोषण कहाँ तक उत्तरदायी था ?
अथवा
स्वतन्त्रता संग्राम के आर्थिक कारण कौन-कौन से थे ?
उत्तर-
स्वतन्त्रता संग्राम के आर्थिक कारण निम्नलिखित थे :
1. औद्योगिक क्रान्ति के कारण इंग्लैण्ड का बना मशीनी माल सस्ता हो गया। परिणाम यह हुआ कि अंग्रेजी माल अधिक बिकने लगा और भारतीय उद्योग लगभग ठप्प हो गये।

2. भारतीय माल को इंग्लैण्ड पहुँचने पर भारी शुल्क देना पड़ता था। इस तरह भारतीय माल काफी महंगा पड़ता था। परिणामस्वरूप भारतीय माल की विदेशों में मांग घटने लगी और भारतीय व्यापार लगभग ठप्प हो गया।

3. अंग्रेजों के शासनकाल में कृषि और कृषक् की दशा भी खराब हो गई थी। ज़मींदारों को भूमि का स्वामी मान लिया गया था। वे एक निश्चित कर सरकारी खज़ाने में जमा कराते थे और किसानों से मनचाहा कर वसूल करते थे। किसान इन अत्याचारों से मुक्ति पाना चाहते थे।

4. भारतीय जनता पर भारी कर लगा दिये गये थे। तंग आकर उन्होंने विद्रोह का मार्ग अपनाया।

प्रश्न 4.
सन् 1857 के विद्रोह का तात्कालिक कारण क्या था ?
उत्तर-
1857 की क्रान्ति का तात्कालिक कारण चर्बी वाले कारतूस थे। 1856 ई० में सरकार ने सैनिकों से पुरानी बन्दूकें वापस लेकर उन्हें ‘एन्फील्ड राइफलें’ दीं। इन राइफलों में गाय और सूअर की चर्बी वाले कारतूसों का प्रयोग होता था और कारतूसों को राइफलों में भरने के लिए इन्हें मुंह से छीलना पड़ता था। कारतूसों में गाय और सूअर की चर्बी की बात सुनकर भारतीय सैनिक भड़क उठे और इन कारतूसों का प्रयोग करने से इंकार करने लगे। यही क्रान्ति का तात्कालिक कारण सिद्ध हुआ। कारतूसों के प्रयोग से इंकार करते हुए, बंगाल की छावनी बैरकपुर में मंगल पाण्डे नामक एक सैनिक ने क्रान्ति का झंडा फहराया और दो बड़े अंग्रेज़ अधिकारियों को गोली से उड़ा दिया। उसे फांसी दे दी गई। इस घटना के कुछ दिन बाद मेरठ में क्रान्ति की आग भड़क उठी।

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प्रश्न 5.
प्रथम भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम क्यों असफल रहा ?
उत्तर-
प्रथम भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम (1857 ई०) अनेक बातों के कारण असफल रहा : –
1. संग्राम 31 मई को आरम्भ किया जाना था। परन्तु मेरठ के सैनिकों ने इसे समय से पहले ही आरम्भ कर दिया। . फलस्वरूप भारतीयों में एकता न रह सकी।

2. सभी क्रान्तिकारी स्वतन्त्रता प्राप्ति के उद्देश्य से नहीं लड़े।

3. अंग्रेजों के अत्याचार के भय से साधारण जनता ने क्रान्ति में भाग लेना छोड़ दिया।

4. क्रान्तिकारी प्रशिक्षित सैनिक नहीं थे। उनके पास अच्छे शस्त्रों का भी अभाव था।

5. यह संग्राम केवल उत्तरी भारत में ही फैला। दक्षिण के लोगों ने इसमें कोई भाग न लिया। अतः एकता के अभाव में यह संग्राम असफल रहा।

प्रश्न 6.
भारत में राष्ट्रीयता के उदय के चार कारण बताएं।
उत्तर-
भारत में राष्ट्रीयता के उदय के निम्नलिखित कारण थे :
1. अंग्रेज़ भारत से अधिक-से-अधिक धन कमाना चाहते थे। अत: उन्होंने भारत का खूब आर्थिक शोषण किया। इसके परिणामस्वरूप भारतीय उद्योग ठप्प पड़ गये। देश में बेरोज़गारी बढ़ने लगी और लोगों में असन्तोष फैल गया।

2. देश में डाक-तार व्यवस्था आरम्भ होने से लोगों में आपसी मेल-जोल बढ़ने लगा। इससे लोगों में एकता आई जो राष्ट्रीयता के उदय में सहायक सिद्ध हुई।

3. अंग्रेजी भाषा के माध्यम से भारतीय एक-दूसरे के निकट आ गए। पश्चिमी साहित्य के अध्ययन के कारण उनमें राष्ट्रीयता की भावना प्रबल हो गई।

4. भारतीय समाचार-पत्रों ने भी लोगों में राष्ट्रीयता की भावना को जागृत किया।

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प्रश्न 7.
1857 ई० के विद्रोह के राजनीतिक कारणों का वर्णन करें।
उत्तर-
1857 के विद्रोह के मुख्य राजनीतिक कारण निम्नलिखित थे :-

  • लॉर्ड वैलेज़ली की सहायक सन्धि और डल्हौज़ी की लैप्स की नीति से भारतीय शासकों में असन्तोष फैला हुआ था।
  • नाना साहब की पेन्शन बन्द कर दी गई थी। इसलिए वह अंग्रेजों के विरुद्ध था।
  • अवध, सतारा तथा नागपुर की रियासतें अंग्रेज़ी साम्राज्य में मिला ली गई थीं। इसलिए वहां के शासक अंग्रेजों के शत्रु बन गए।
  • ज़मींदार तथा सरदार भी अंग्रेजों के विरुद्ध थे क्योंकि उनकी भूमि छीन ली गई थी।
  • अंग्रेजों ने मुग़ल सम्राट् बहादुरशाह का निरादर किया। उन्होंने उसके राजमहल तथा उसकी पदवी छीनने की योजना बनाई। इससे जनता भड़क उठी।
  • ब्रिटिश साम्राज्य में मिलाए गए देशी राज्यों के बहुत-से सैनिक तथा कर्मचारी बेरोज़गार हो गए। अत: उनमें असन्तोष व्याप्त था।

प्रश्न 8.
1857 के विद्रोह की मुख्य घटनाओं का वर्णन करो।
उत्तर-
1857 के विद्रोह की मुख्य घटनाओं का वर्णन इस प्रकार है-
1. 1857 के विद्रोह का आरम्भ बैरकपुर (बंगाल) से 29 मार्च को हुआ। वहां भारतीय सैनिकों ने चर्बी वाले कारतूसों का प्रयोग करने से इन्कार कर दिया।

2. 9 मई, 1857 ई० को मेरठ में विद्रोह हो गया और सैनिकों को बन्दी बना लिया गया। परन्तु अगले ही दिन क्रान्तिकारी उन्हें रिहा करा कर दिल्ली की ओर चल पड़े।

3. 12 मई, 1857 को क्रान्तिकारियों ने दिल्ली पर अधिकार कर लिया और मुग़ल सम्राट् बहादुरशाह को भारत सम्राट घोषित कर दिया।

4. कानपुर में नाना साहिब ने अपने आपको पेशवा घोषित कर दिया। परन्तु वह अंग्रेजों द्वारा पराजित हुआ। तात्या टोपे ने वहाँ पुनः अपना अधिकार स्थापित करने का प्रयास किया, परन्तु वह सफल न हो सका।

5. जून 1857 में लखनऊ, बनारस तथा इलाहाबाद में विद्रोह हुआ।

6. झाँसी में रानी लक्ष्मीबाई ने क्रान्ति का नेतृत्व किया। तात्या टोपे भी उसके साथ आ मिला। परन्तु वह लड़ते-लड़ते वीरगति को प्राप्त हुई।
इस प्रकार क्रान्ति की ज्वाला शान्त हो गयी और प्रत्येक स्थान पर फिर से अंग्रेज़ी झण्डा फहराने लगा।

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प्रश्न 9.
1857 ई० के विद्रोह के क्या प्रभाव पड़े ?
उत्तर-
1857 के विद्रोह के मुख्य प्रभाव निम्नलिखित थे-
1. कम्पनी के शासन का अन्त-1857 ई० के विद्रोह के परिणामस्वरूप भारत में कम्पनी का शासन समाप्त हो गया। भारत का शासन अब सीधा इंग्लैण्ड की सरकार के अधीन हो गया।

2. देशी राज्यों के प्रति नई नीति-1857 ई० के विद्रोह के पश्चात् अंग्रेजों ने देशी रियासतों को अंग्रेजी साम्राज्य में मिलाने की नीति छोड़ दी और उन्हें पुत्र गोद लेने का अधिकार भी दे दिया।

3. सेना में यूरोपियन सैनिकों की वृद्धि-सेना में भारतीयों की संख्या घटा दी गई और युरोपियन सैनिकों की संख्या बढा दी गई। तोपखाना, गोला-बारूद आदि सारी युद्ध-सामग्री यूरोपियनों के हाथों में सौंप दी गई।

4. भारतीय सेना का पुनर्गठन-विद्रोह के पश्चात् भारतीय सेना का पुनर्गठन किया गया। अब सभी जातियों तथा धर्मों के सैनिकों को अलग-अलग रखा जाने लगा। इस प्रकार राष्ट्रीयता की भावना को पनपने से रोका गया।

प्रश्न 10.
1857 ई० की क्रान्ति के स्वरूप का वर्णन करो।
अथवा
क्या 1857 ई० की क्रान्ति एक सैनिक विद्रोह था या प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम ?
उत्तर-
1857 ई० का विद्रोह कोरा सैनिक विद्रोह नहीं था। यह निश्चित रूप से ही भारतीयों द्वारा स्वतन्त्रता के लिए लड़ा गया प्रथम संग्राम था। इन तथ्यों से यह बात स्पष्ट हो जाएगी-
1. 1857 की क्रान्ति में जनता ने भाग लिया, चाहे इन लोगों की संख्या कम ही थी।

2. जनता तथा शासक अंग्रेजों के विरुद्ध थे और वे उनसे छुटकारा पाना चाहते थे।

3. सैनिकों ने विद्रोह अवश्य किया, परन्तु उनका निशाना भी रियायतें लेना नहीं, बल्कि अंग्रेज़ों को भारत से बाहर निकालना था।

4. देश के कुछ भागों में क्रान्ति नहीं हुई। वे शान्त रहे। उनके शान्त रहने का अर्थ यह नहीं लिया जा सकता कि उन्हें आजादी पसन्द नहीं थी। वे किसी बात के कारण खामोश अवश्य थे, परन्तु अंग्रेजी शासन उन्हें भी पसन्द नहीं था।

5. इसमें हिन्दुओं तथा मुसलमानों ने मिल कर संघर्ष किया। अतः स्पष्ट है कि लोग अंग्रेजी सत्ता से तंग थे और उन्होंने इस सत्ता को भारत में समाप्त करने के लिए शस्त्र उठाए। ऐसा महान् कार्य स्वतन्त्रता संग्राम के लिए ही हो सकता है। अतः यह सैनिक विद्रोह नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय आन्दोलन था।

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प्रश्न 11.
पहले दो दशकों में इण्डियन नेशनल कांग्रेस की मांगें क्या थी ?
उत्तर-
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस 1885 में स्थापित की गई। 1905 ई० तक यह संस्था उदार विचारों से प्रभावित रही। अतः इसकी मांगें भी साधारण ही थीं। इसकी ये मांगें थीं-

  • विधान परिषदों के अधिकार बढ़ाये जाएं।
  • इनमें चुने हुए सदस्यों की संख्या बढ़ाई जाए।
  • प्रशासन में भारतीयों को उच्च पद दिए जाएं।
  • सेना तथा प्रशासन का खर्च कम किया जाए।
  • बोलने और लिखने की स्वतन्त्रता से प्रतिबन्ध हटाया जाए।
  • शिक्षा तथा लोक भलाई के कार्यक्रमों का विस्तार किया जाए। कांग्रेस के नेता यह समझते थे कि उनकी मांगें उचित भी हैं और बहुत बड़ी भी नहीं हैं। इसलिए उनका विचार था कि सरकार इन्हें आसानी से मान लेगी। परन्तु सरकार ने उनकी मांगों की ओर कोई ध्यान नहीं दिया। इसीलिए बाद में अनुदार विचारों के नेताओं का कांग्रेस पर प्रभुत्व बढ़ गया।

प्रश्न 12.
सरकार के प्रति कांग्रेस के रवैये में परिवर्तन किन कारणों से हुआ ?
उत्तर-
कांग्रेस की स्थापना 1885 में हुई। सरकार ने इस संस्था का स्वागत किया। परन्तु आरम्भ में सरकार का रुख दिखावे के लिए मैत्रीपूर्ण था। शीघ्र ही सरकार ने कांग्रेस के कार्यक्रमों का खुले रूप में विरोध करना आरम्भ कर दिया। सरकारी कर्मचारियों को अधिवेशनों में भाग लेने से रोक दिया गया। उच्च वर्ग के मुसलमानों को भी सुझाव देना आरम्भ कर दिया कि वे कांग्रेस के साथ सम्बन्ध न रखें। सरकार का तर्क यह था कि कांग्रेस लोगों की प्रतिनिधि संस्था नहीं थी। दूसरे, सरकार को विश्वास था कि कांग्रेस सरकार की नीतियों का समर्थन करेगी। परन्तु कांग्रेस के नर्म विचार भी सरकार को अखरने लगे। हर वर्ष कांग्रेस के द्वारा पास प्रस्ताव सरकार के पास पहुंचते। सरकार इन्हें पूरा करने में असमर्थ होती। अतः धीरे-धीरे सरकार का रवैया कांग्रेस के विरुद्ध हो गया।

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प्रश्न 13.
स्वतन्त्रता आन्दोलन पर बंगाल के विभाजन का क्या प्रभाव पड़ा ?
उत्तर-
स्वतन्त्रता आन्दोलन को उदार रूप से उग्र रूप देने में सबसे अधिक योगदान बंगाल के विभाजन का था। जुलाई, 1905 में वायसराय कर्जन ने पूर्वी बंगाल और आसाम को जोड़ कर एक नया प्रान्त बनाने की घोषणा कर दी। अक्तूबर में यह प्रान्त अस्तित्व में आ गया। इस निर्णय के विरुद्ध स्थान-स्थान पर सभायें हुईं। इनमें नर्म दल वाले भी थे और गर्म दल वाले भी थे। सब की मांग अब एक ही थी कि बंगाल का विभाजन न किया जाये। इस सम्बन्ध में उन्होंने स्वदेशी आन्दोलन आरम्भ कर दिया। इसके अन्तर्गत विदेशी वस्तुओं के ‘बॉयकाट’ अथवा बहिष्कार पर बल दिया गया। इसका उद्देश्य यह था कि विदेशी कपड़ा और चीनी आदि न खरीदने से अंग्रेजों को आर्थिक हानि होगी और सरकार नेताओं की मांग को स्वीकार कर लेगी। इस आन्दोलन का प्रभाव कांग्रेस की नीति पर भी पड़ा। नर्म दल वाले यह चाहते थे कि ‘स्वदेशी’ और ‘बॉयकाट’. का ढंग सीमित उद्देश्यों के लिए काम में लिया जाये। गर्म दल वाले इस शस्त्र का प्रयोग विस्तार से करना चाहते थे। सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों का ‘बायकाट’ भी उनके कार्यक्रम में सम्मिलित था। सच तो यह है कि बंगाल विभाजन के कारण स्वतन्त्रता आन्दोलन में गर्म दल की नीतियां आरम्भ हुईं।

प्रश्न 14.
मुस्लिम लीग की स्थापना के क्या कारण थे ?
उत्तर-
मुस्लिम लीग की स्थापना 1906 में हुई थी। इसकी स्थापना के कारण ये थे :-

  • अरब राष्ट्रों में ‘वहाबी आन्दोलन’ आरम्भ होने के कारण भारत में साम्प्रदायिकता की भावना को बढ़ावा मिला।
  • अंग्रेजों की ‘फूट डालो और शासन करो’ की नीति भी मुस्लिम लीग की स्थापना का एक कारण थी।
  • सर सैय्यद अहमद खां ने भारत में साम्प्रदायिकता का प्रचार किया।
  • प्रिंसिपल बेक ने साम्प्रदायिकता की आग को भड़काने वाले लेख लिखे।
  • प्रिंसिपल बेक ने कांग्रेस को हिन्दुओं की संस्था के नाम से पुकारा। इस से भी साम्प्रदायिकता को काफी बल मिला।
  • लॉर्ड कर्जन द्वारा बंगाल के विभाजन ने साम्प्रदायिकता की भावना को और भी अधिक भड़का दिया।
  • लॉर्ड मिण्टो ने साम्प्रदायिक प्रतिनिधित्व के लिए प्रोत्साहन दिया। वास्तव में ये सभी कारण मुस्लिम लीग की स्थापना के कारण बने।

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प्रश्न 15.
गदर आन्दोलन का क्या उद्देश्य था तथा भारत के स्वतन्त्रता आन्दोलन में इसका क्या महत्व था ?
उत्तर-
गदर आन्दोलन 1915 ई० में पंजाब में आरम्भ हुआ। इस आन्दोलन के सदस्यों का उद्देश्य 1857 ई० के गदर के ढंग पर सशस्त्र विद्रोह करना था। इस आन्दोलन ने सरकार के प्रति सिक्खों का रवैया बदल दिया। गदर पार्टी के सदस्यों में से कुछ बाद में गुरुद्वारा सुधार आन्दोलन तथा बब्बर अकालियों में शामिल हो गए। कुछ ने किसान मज़दूरों की ‘कीर्ति-किसान पार्टी’ स्थापित करने में बड़ा महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। वास्तव में गदर आन्दोलन भारतीयों का एक धर्म-निरपेक्ष क्रान्तिकारी आन्दोलन था।

प्रश्न 16.
स्वतन्त्रता आन्दोलन के इतिहास में ‘रौलेट एक्ट’ तथा ‘जलियांवाला बाग’ का क्या महत्त्व है ?
उत्तर-
स्वतन्त्रता आन्दोलन के इतिहास में रौलेट एक्ट तथा जलियांवाला बाग का विशेष महत्त्व है। रौलेट एक्ट के अनुसार किसी भी मुकद्दमे का फैसला बिना ‘ज्यूरी’ के किया जा सकता था तथा किसी भी व्यक्ति को मुकद्दमा चलाये बिना नज़रबन्द रखा जा सकता था। इस एक्ट के कारण भारतीय लोग भड़क उठे। उन्होंने इस का कड़ा विरोध किया और स्वतन्त्रता आन्दोलन में बढ़-चढ़ कर भाग लिया। गांधी जी ने इस एक्ट के विरुद्ध अहिंसात्मक हड़ताल की घोषणा कर दी। स्थान-स्थान पर दंगे-फसाद हुए। जलियांवाला बाग में शहर के लोगों ने एक सभा का प्रबन्ध किया। स्वतन्त्रता आन्दोलन को दबाने के लिए जनरल डायर ने सभा में एकत्रित लोगों पर गोली चला दी जिसके कारण बहुत-से लोग मारे गए अथवा घायल हो गए। इस घटना से भारत के लोग और भी अधिक भड़क उठे। उन्होंने अंग्रेजों से स्वतन्त्रता प्राप्त करने का दृढ़ निश्चय कर लिया। इस घटना से अंग्रेज़ शासकों तथा भारतीय नेताओं के बीच एक अमिट दरार पड़ गई।

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प्रश्न 17.
असहयोग आन्दोलन के उद्देश्य व कार्यक्रम के बारे में बताएं।
उत्तर-
असहयोग आन्दोलन गांधी जी ने 1920 ई० में अंग्रेजी सरकार के विरुद्ध चलाया। इसका उद्देश्य यह था कि हमें सरकार से किसी प्रकार का कोई सम्बन्ध नहीं रखना चाहिए। इस आन्दोलन की घोषणा कांग्रेस के नागपुर अधिवेशन में की गई। गांधी जी ने जनता से अपील की कि वह किसी भी तरह सरकार को सहयोग न दें। एक निश्चित कार्यक्रम भी तैयार किया गया जिस में कहा गया कि विदेशी माल का बहिष्कार करके स्वदेशी माल का प्रयोग किया जाए। ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रदान की गई उपाधियों तथा अवैतनिक पद छोड़ दिए जाएं । स्थानीय संस्थाओं में मनोनीत भारतीय सदस्यों द्वारा त्याग-पत्र दे दिए जाएं। सरकारी स्कूलों तथा सरकार से अनुदान प्राप्त स्कूलों में बच्चों को पढ़ने के लिए न भेजा जाए। ब्रिटिश अदालतों तथा वकीलों का धीरे-धीरे बहिष्कार किया जाए। सैनिक, क्लर्क तथा श्रमिक विदेशों में अपनी सेवाएं अर्पित करने से इन्कार कर दें।

प्रश्न 18.
तुम बाल, पाल, लाल के बारे में जो जानते हो, लिखो।
उत्तर-
बाल, पाल, लाल’ भारत के तीन महान् व्यक्तियों के नामों का छोटा रूप है। बाल से अभिप्राय बाल गंगाधर तिलक, पाल से अभिप्राय विपिन चन्द्र पाल और लाल से अभिप्राय लाला लाजपत राय से है। ये तीनों नेता कांग्रेस में ऐसी विचारधारा के समर्थक थे जो इतिहास में उग्रवाद के नाम से प्रसिद्ध है। ये तीनों स्वराज्य की प्राप्ति के पक्ष में थे और अंग्रेजों से संवैधानिक साधनों द्वारा न्याय पाने की आशा नहीं रखते थे। वे न तो अंग्रेजों से प्रार्थना करने के पक्ष में थे और न ही इस बात के पक्ष में थे कि अंग्रेजों के पास शिष्टमण्डल भेजे जाएं। ये अंग्रेजों से संघर्ष करना चाहते थे और संघर्ष द्वारा स्वराज्य प्राप्त करना चाहते थे। देश की जनता ने इनकी विचारधारा का समर्थन किया और ये तीनों नेता देश में अत्यन्त लोकप्रिय हुए।

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प्रश्न 19.
मिण्टो-मार्ले सुधार की मुख्य धाराएं बताओ।
उत्तर-
मिण्टो-मार्ले सुधार 1909 ई० में पास हुआ। इन सुधारों की मुख्य धाराएं ये थीं-
1. केन्द्रीय तथा प्रान्तीय विधान परिषदों के सदस्यों की संख्या बढ़ा दी गई। केन्द्रीय विधान परिषद् के सदस्यों की संख्या 16 से बढ़ा कर 60 कर दी गई। इसी तरह मद्रास (चेन्नई), बम्बई (मुम्बई) तथा बंगाल की विधान परिषदों के सदस्यों की संख्या 20 से बढ़ा कर 50 और उत्तर प्रदेश में 15 से बढ़ा कर 60 कर दी गई।

2. केन्द्रीय विधान परिषद् में सरकारी सदस्यों का बहुमत रहा। इसमें 69 सदस्य होते थे जिनमें से 36 सदस्य सरकारी होते थे।

3. प्रान्तीय विधान परिषदों के सदस्यों का चुनाव मुसलमानों, ज़मींदारों, व्यापार-मण्डलों, नगर पालिकाओं तथा ज़िला बोर्डों द्वारा किया जाने लगा।

4. इसके अनुसार पृथक् निर्वाचन प्रणाली की व्यवस्था की गई। हिन्दू प्रतिनिधियों का चुनाव हिन्दू तथा मुस्लिम प्रतिनिधियों का चुनाव मुसलमान ही करते थे।

प्रश्न 20.
होमरूल आन्दोलन के विषय में अपने विचार प्रकट कीजिए।
उत्तर-
होमरूल आन्दोलन 1916 ई० में आरम्भ हुआ। इसे आरम्भ करने का श्रेय श्रीमती ऐनी बेसेन्ट तथा लोकमान्य तिलक को जाता है। इस आन्दोलन का उद्देश्य भारतवासियों के लिए स्वराज्य प्राप्त करना था। लगभग सारे देश में होमरूल लीग की शाखाएं खोली गईं। यह आन्दोलन इतना लोकप्रिय हुआ कि सरकार घबरा गई। सरकार ने श्रीमती ऐनी बेसेन्ट को नजरबन्द कर दिया। परिणामस्वरूप जनता में असन्तोष फैल गया और यह आन्दोलन पहले से भी अधिक तीव्र हो गया। होमरूल आन्दोलन के मुख्य उद्देश्य ये थे-

  • शान्तिमय उपायों द्वारा भारत के लिए स्वराज्य प्राप्त करना
  • अंग्रेज़ों को सन्तुष्ट करके ऐसी परिस्थितियों को जन्म देना जिससे प्रभावित होकर वह स्वयं ही भारत को स्वराज्य प्रदान करने का तैयार हो जाएं।
  • उग्रवादियों (Extremists) तथा उदारवादियों (Moderates) का परस्पर मेल करवाकर उग्रवादियों को क्रान्तिकारियों के साथ मिल जाने से रोकना।
  • ग्राम पंचायतों, नगरपालिकाओं आदि में स्वराज्य की स्थापना करना।
  • ब्रिटिश पार्लियामैंट में अन्य ब्रिटिश स्वशासित उपनिवेशों की भान्ति भारत से भी प्रतिनिधि भेजने का अधिकार प्राप्त करना।

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प्रश्न 21.
खिलाफत आन्दोलन पर प्रकाश डालिए।
उत्तर-
प्रथम विश्व-युद्ध के समाप्त होने पर ब्रिटिश सरकार तथा कुछ अन्य शक्तियों ने तुर्की के कुछ क्षेत्र इसके सुल्तान से ले लेने का निर्णय कर लिया था। तुर्की के सुल्तान को मुसलमानों का खलीफा अथवा धार्मिक नेता माना जाता था। इसलिए भारत के मुसलमानों में भी सुल्तान के समर्थन में गतिविधियां आरम्भ हुई। इसके खिलाफत आन्दोलन’ का नाम दिया गया। इसके नेता थे मुहम्मद अली और शौकत अली, मौलाना अबुल कलाम आजाद, हसरत मोहानी तथा हकीम अजमल खां। इन्होंने इसके नेतृत्व के लिए खिलाफ़त कमेटी बनाई तथा नवम्बर 1919 में आल इंडिया कान्फ्रेंस बुलाई। महात्मा गांधी खिलाफत के प्रश्न पर भारतीय मुसलमानों को अंग्रेज़ी सरकार के विरुद्ध सक्रिय करना चाहते थे। उन्होंने इस सम्बन्ध में असहयोग आन्दोलन चलाने का प्रस्ताव रखा। 31 अगस्त, 1920 को खिलाफत कमेटी ने असहयोग आन्दोलन आरम्भ करने की घोषणा की। इसमें सम्मिलित होने वालों में महात्मा गांधी सबसे पहले व्यक्ति थे। उन्होंने अंग्रेज़-सरकार से प्राप्त ‘केसरेहिन्द’ की पदवी वापिस कर दी। इस तरह खिलाफत आन्दोलन असहयोग आन्दोलन का भाग बन कर उभरा।

प्रश्न 22.
1919 ई० के एक्ट के अनुसार कौन-कौन से महत्त्वपूर्ण परिवर्तन किए गए ?
उत्तर-
भारतीय 1909 ई० के अधिनियम से सन्तुष्ट नहीं थे। अतः ब्रिटिश पार्लियामैंट ने प्रथम महायुद्ध के पश्चात् एक एक्ट पास किया जिसे 1919 ई० का गवर्नमेंट ऑफ इण्डिया एक्ट अथवा मांटेग्यू चैम्सफोर्ड सुधार कहा जाता है। इस एक्ट के अनुसार ये परिवर्तन किए गए-

  • वायसराय की विधान परिषद् के दो सदन बना दिए गए-राज्य परिषद् तथा विधान सभा।
  • राज्य परिषद् के सदस्यों की संख्या 60 रखी गई, जिनमें 33 सदस्यों का चुनाव किया जाता था और शेष सदस्य मनोनीत किए जाते थे। विधान सभा की सदस्य संख्या 140 निश्चित की गई जिसे बाद में बढ़ा कर 145 कर दिया गया। इनमें से 105 सदस्यों का निर्वाचन होता था और 40 सदस्य मनोनीत किए जाते थे।
  • वायसराय को दोनों सदनों को बुलाने, संगठित करने, विघटित करने तथा सम्बोधित करने का अधिकार दिया गया।
  • प्रान्तीय विधान परिषदों का एक ही सदन होता था जिसे विधान सभा कहते थे। इसके सदस्यों की संख्या प्रत्येक प्रान्त में भिन्न-भिन्न थी। इसकी अवधि तीन वर्ष थी।

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IV. निबन्धात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
1857 ई० की भारतीय क्रान्ति के प्रमुख कारणों पर एक विस्तारपूर्वक प्रस्ताव लिखो। (M. Imp.)
अथवा
1857 की भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के राजनीतिक तथा सैनिक कारणों का वर्णन कीजिए।
अथवा
1857 की क्रांति के सामाजिक, धार्मिक तथा आर्थिक कारणों की चर्चा कीजिए।
उत्तर-
1857 ई० में भारतीयों ने पहली बार अंग्रेज़ों का विरोध किया। वे उन्हें अपने देश से बाहर निकालना चाहते थे। इस संघर्ष को प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम का नाम दिया जाता है।
कारण-

1. राजनीतिक कारण-

  • लॉर्ड वैल्ज़ली की सहायक सन्धि और डल्हौज़ी की लैप्स नीति से भारतीय शासकों में असन्तोष फैला हुआ था।
  • नाना साहिब की पेंशन बन्द कर दी गई थी। इसलिए वह अंग्रेजों के विरुद्ध थे।
  • झांसी की रानी को पुत्र गोद लेने की आज्ञा न मिली। अत: वह अंग्रेजों के विरुद्ध थी।
  • सतारा तथा नागपुर की रियासतें अंग्रेज़ी साम्राज्य में मिला ली गई थीं। इसलिए वहां के शासक अंग्रेजों के शत्रु बन गए।
  • ज़मींदार तथा सरदार भी अंग्रेजों के विरुद्ध थे क्योंकि उनकी जागीरें छीन ली गई थीं। इस प्रकार अनेक शासक, ज़मींदार तथा सरदार अंग्रेजों के रुष्ट थे और उनसे बदला लेने के लिए किसी अवसर की खोज में थे।

2. आर्थिक कारण-
1. औद्योगिक क्रान्ति के कारण इंग्लैण्ड का बना मशीनी माल सस्ता हो गया। परिणाम यह हुआ कि भारत में अंग्रेजी माल अधिक बिकने लगा और भारतीय उद्योग लगभग ठप्प हो गए। भारतीय कारीगरों की रोज़ी का साधन छिन गया और वे अंग्रेजों के विरुद्ध हो गए।

2. अंग्रेजों की व्यापारिक नीति के कारण भारत का व्यापार भी लगभग समाप्त हो गया। भारत के माल पर इंग्लैण्ड पहुंचने पर भारतीय शुल्क देना पड़ता था जिससे भारतीय माल काफी महंगा पड़ता था। परिणामस्वरूप विदेशों में भारतीय माल की मांग घटने लगी और भारतीय व्यापार लगभग ठप्प हो गया।

3. अंग्रेजों के शासनकाल में कृषि और कृषक की दशा भी खराब हो गई थी। ज़मींदारों को भूमि का स्वामी मान लिया गया था। वे एक निश्चित कर सरकारी खजाने में जमा कराते थे और किसानों से मन चाहा कर वसूल करते थे। परिणामस्वरूप किसान लगातार पिस रहे थे। वे भी इस अत्याचार से मुक्ति पाना चाहते थे।

4. भारतीय जनता पर भारी कर लगा दिए गए थे। कर इतने अधिक थे कि लोगों के लिए जीवन-निर्वाह करना भी कठिन हो गया था। तंग आकर लोगों ने विद्रोह का मार्ग अपनाया।

3. सामाजिक तथा धार्मिक कारण-
1. ईसाई पादरी भारतवासियों को लालच देकर इन्हें ईसाई बना रहे थे। इस कारण भारतवासी अंग्रेज़ों के विरुद्ध हो गए।

2. विलियम बैंटिंक ने अनेक सामाजिक सुधार किए थे। उसने सती-प्रथा और बालविवाह पर रोक लगा दी थी। हिन्दुओं ने इन सब बातों को अपने धर्म के विरुद्ध समझा

3. अंग्रेज़ी शिक्षा के प्रसार के कारण भी भारतवासियों में असन्तोष फैल गया। उन्हें विश्वास हो गया कि अंग्रेज़ उन्हें अवश्य ही ईसाई बनाना चाहते हैं।

4. ईसाई प्रचारक अपने धर्म का प्रचार करने के साथ हिन्दू धर्म का प्रचार करने के साथ हिन्दू धर्म के ग्रन्थों की घोर निन्दा करते थे। इस बात से भारतवासी भड़क उठे।

4. सैनिक कारण-
1. 1856 ई० में एक ऐसा सैनिक कानून पास किया गया जिसके अनुसार सैनिकों को लड़ने के लिए समुद्र पार भेजा जा सकता था, परन्तु हिन्दू सैनिक समुद्र पार जाना अपने धर्म के विरुद्ध समझते थे।

2. परेड के समय भारतीय सैनिकों के साथ अभद्र व्यवहार किया जाता था। भारतीय सैनिक इस अपमान को अधिक देर तक सहन नहीं कर सकते थे।

3. भारतीय सैनिकों को अंग्रेज़ सैनिकों की अपेक्षा बहुत कम वेतन दिया जाता था। इस कारण उनमें असन्तोष फैला हुआ था।

4. अंग्रेज़ अधिकारी भारतीय सैनिकों के सामने ही उनकी सभ्यता तथा संस्कृति का मज़ाक उड़ाया करते थे। भारतीय सैनिक अंग्रेजों से इस अपमान का बदला लेना चाहते थे।

5. सैनिकों को नए कारतूस प्रयोग करने के लिए दिए गए। इन कारतूसों पर सूअर या गाय की चर्बी लगी हुई थी। अतः बैरकपुर छावनी के कुछ सैनिकों ने इनका प्रयोग करने से इन्कार कर दिया। मंगल पाण्डे नामक एक सैनिक ने तो क्रोध में आकर तीन अंग्रेज़ अधिकारियों की हत्या कर दी। इस आरोप में उसे फांसी दे दी गई। अन्य भारतीय सैनिक इस घटना से क्रोधित हो उठे और उन्होंने अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह कर दिया।

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प्रश्न 2.
1857 ई० की क्रान्ति के राजनीतिक तथा संवैधानिक प्रभावों का वर्णन करो।
उत्तर-
1857 की क्रान्ति असफल रही। फिर भी हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि यह क्रान्ति असफल हुई, परन्तु निष्फल नहीं हुई। इसके परिणामस्वरूप लोगों में एक ऐसी राजनीतिक जागृति आई जिसने राष्ट्रीय आन्दोलन का रूप धारण कर लिया। इस क्रान्ति के प्रमुख राजनीतिक तथा संवैधानिक प्रभावों का वर्णन इस प्रकार है-

1. कम्पनी राज्य की समाप्ति-1857 ई० की क्रान्ति का सबसे बड़ा परिणाम भारत में कम्पनी राज्य की समाप्ति था। भारत का सारा प्रशासन सीधा ब्रिटिश राज्य के अधीन हो गया। 1 नवम्बर, 1858 ई० को महारानी विक्टोरिया की घोषणा अनुसार कम्पनी की सरकार समाप्त हो गई तथा बोर्ड ऑफ़ कन्ट्रोल एवं बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्ज़ तोड़ दिए गए। उनके स्थान पर एक भारतीय मन्त्री (Secretary of State for India) की नियुक्ति कर दी गई। यह बर्तानिया की संसद् का सदस्य होता था। उसकी सहायता के लिए 15 सदस्यों की एक कौंसिल बनाई गई। ब्रिटिश संसद् ने प्रशासन के काम पर नियन्त्रण रखने के लिए भारत मन्त्री को यह कहा कि वह प्रति वर्ष भारत की आय-व्यय का ब्यौरा संसद् के सामने रखे।

2. गवर्नर जनरल की उपाधि में परिवर्तन-कम्पनी राज्य की समाप्ति के साथ ही गवर्नर-जनरल की पदवी में भी परिवर्तन किया गया। अब वह ब्रिटिश ताज का प्रतिनिधि था। उसकी इस स्थिति का ध्यान रखते हुए उसे वायसराय की उपाधि दी गई।

3. भारतीय राजाओं के प्रतिनिधि-भारतीय राजाओं को प्रसन्न करने के लिए अंग्रेज़ सरकार ने उदार नीति को अपनाया। उन्हें विश्वास दिलाया गया कि उनके राज्यों को कभी भी अंग्रेज़ साम्राज्य में मिलाया नहीं जाएगा। लैप्स के सिद्धान्त के अनुसार किसी भी रियासत को अंग्रेज़ी राज्य में मिलाने की नीति को त्याग दिया गया। भारतीय राजाओं को सन्तान न होने पर, बच्चा गोद लेने तथा उसे अपना उत्तराधिकारी निश्चित करने का अधिकार भी दे दिया गया। जिन राजाओं ने विद्रोह दबाने के लिए अंग्रेजों की सहायता की, उनको पारितोषिक तथा उपाधियां दी गईं। इसके साथ-साथ राजाओं पर कुछ प्रतिबन्ध भी लगाए गए। वे अंग्रेज़ी सरकार की आज्ञा के बिना किसी देशी अथवा विदेशी शक्ति के साथ सम्बन्ध स्थापित नहीं कर सकते थे। शासन व्यवस्था खराब होने की दशा में उनके राज्य में हस्तक्षेप करने का अधिकार भी अंग्रेज़ सरकार के पास था।

4. मुगल सम्राट् तथा पेशवा की उपाधि की समाप्ति-नाना साहब ने विद्रोह में बढ़-चढ़ कर भाग लिया। जब नाना साहब को विजय की आशा न रही, तो वह नेपाल की ओर भाग गया। अब भारत में पेशवा पद के लिए कोई उत्तरदायी नहीं रहा था। इसलिए अंग्रेजों ने पेशवा की उपाधि समाप्त कर दी। मुग़ल सम्राट् बहादुरशाह ने भी विद्रोह में अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष किया था। उनको आजन्म कारावास का दण्ड तथा देश निकाला देकर रंगून भेज दिया गया। उसकी मृत्यु के पश्चात् मुग़ल सम्राट् की पदवी भी समाप्त कर दी गई।

प्रश्न 3.
राष्ट्रीय चेतना के जागृत होने के क्या कारण थे ?
अथवा
19वीं शताब्दी में भारत में राजनीतिक चेतना की उत्पत्ति के कोई पांच कारण लिखिए।
उत्तर-
भारत की राष्ट्रीय चेतना का उदय 19वीं शताब्दी में हुआ। इस चेतना के उत्पन्न होने के निम्नलिखित प्रमुख कारण थे :-

1. भारत तथा यूरोप का सम्पर्क-19वीं शताब्दी यूरोप के इतिहास में राष्ट्रवाद का युग मानी जाती है। 1789 ई० की फ्रांसीसी क्रान्ति और नेपोलियन बोनापार्ट की शक्तिशाली प्रचार लहरों के कारण राष्ट्रीयता के सिद्धान्त को बड़ा बल मिला। इस सिद्धान्त से यूरोप के लगभग सभी देश प्रभावित हुए और वहां राष्ट्रीयता का एक आन्दोलन-सा चल पड़ा। उस समय भारत अंग्रेजी साम्राज्य के अधीन था, इसलिए यूरोप के राष्ट्रवाद का भारत पर भी प्रभाव पड़ा।

2. पश्चिमी विद्वानों के प्रयत्न-कुछ पश्चिमी विद्वानों ने भारत के प्राचीन साहित्य का अध्ययन किया। इन विद्वानों में मैक्समूलर, विलियम जोन्स, विल्सन, कोलब्रुक, कीथ आदि प्रमुख थे। इनके प्रयत्नों से भारत की प्राचीन सभ्यता प्रकाश में आई और लोगों को पता चला कि उनकी पुरानी सभ्यता कितनी महान् थी। परिणामस्वरूप लोगों के मन में स्वाभिमान जागा जिससे राजनीतिक चेतना जागृत हुई।

3. अंग्रेजी भाषा-अंग्रेज़ी सरकार ने कुछ कारणों से अंग्रेजी भाषा को शिक्षा का माध्यम बना दिया था। इस भाषा के प्रचार से लोगों को एक सांझी भाषा मिल गई। फलस्वरूप यह सम्भव हो गया कि देश के अलग-अलग तथा दूर-दूर स्थित क्षेत्रों के नेता आपस में इकट्ठे हो कर आवश्यक समस्याओं पर विचार-विमर्श कर सकें।

4. अंग्रेजों तथा भारतीयों में अविश्वास-1857 ई० के आन्दोलन के कारण अंग्रेज़ों का भारत के लोगों पर विश्वास न रहा। वे प्रत्येक भारतीय को सन्देह की दृष्टि से देखने लगे। दूसरी ओर भारतीय भी अंग्रेजों को अत्याचारी और दमनकारी समझने लगे। धीरे-धीरे भारतीयों के मन में यह बात बैठ गई कि उन्हें अंग्रेज़ों से न्याय नहीं मिल सकता। इन बातों ने लोगों में राष्ट्रीयता की भावना को जागृत किया।

5. भारतीयों के साथ अन्याय-अंग्रेज़ किसी भी दशा में भारतीयों को समान अधिकार देने को तैयार नहीं थे। सभी बड़े-बड़े सरकारी पदों पर यूरोपियनों को ही नियुक्त किया जाता था। परन्तु देश में शिक्षित भारतीयों की संख्या बढ़ती जा रही थी। जब उनको किसी ओर से नौकरी की आशा न रही तो उन्होंने सरकार की आलोचना करनी आरम्भ कर दी। फलस्वरूप राष्ट्रीय चेतना का विकास हुआ।

6. समाचार-पत्रों का योगदान-भारतीयों में राष्ट्रीय भावना जागृत करने में भारतीय समाचार-पत्रों ने भी महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। अंग्रेजी समाचार-पत्र प्रायः सरकार की नीतियों के समर्थक ही थे। इसके विपरीत भारतीय भाषाओं में निकलने वाले सामचार-पत्र जनता का पक्ष लेते थे और सरकार की ग़लत नीतियों का विरोध करते थे। अंग्रेज़ी सरकार ने भारतीय समाचार-पत्रों को कुचलने के लिए कानून पास किया। भारतीयों ने इसका कड़ा विरोध किया। अतः सरकार को यह कानून रद्द करना पड़ा। इसके फलस्वरूप समाचार-पत्रों का उत्साह बढ़ गया तथा वे फिर से सरकार की ग़लत नीतियों की आलोचना करने लगे। इन समाचार-पत्रों ने बढ़ रही बेकारी की ओर भी सरकार का ध्यान दिलाने का प्रयत्न किया। इन समाचार-पत्रों को पढ़ कर भारतीयों के मन में राष्ट्रीय भाव जागृत हुए।

7. भारत की आर्थिक दशा-अंग्रेज़ी सरकार ने भारत में ऐसी नीतियां अपनाईं जिनके कारण भारत की आर्थिक दशा बिल्कुल खराब हो गई और लोग निर्धन हो गए। वे जानते थे कि उनकी निर्धनता का एकमात्र कारण अंग्रेज़ी राज्य है। फलस्वरूप वे अंग्रेज़ी राज्य को समाप्त करना चारते थे। यह बात राजनीतिक चेतना की ही प्रतीक थी।

8. देश का एकीकरण-भारतीय राष्ट्रीयता के विकास में देश के एकीकरण ने काफी योगदान दिया। सारे देश में एक ही कानून प्रणाली प्रचलित की गई जिससे सारा देश एक ही प्रबन्धकीय ढांचे के अधीन आ गया। इससे जहां देश का एकीकरण हुआ, वहां भारतीयों में भाईचारे की भावना भी बढ़ी। टेलीफोन, टेलीग्राफ, डाक-प्रबन्ध तथा रेलों के प्रसार से भारतीयों की एक अन्य बड़ी कठिनाई दूर हो गई। अब वे इकट्ठे होकर बैठ सकते थे और एक-दूसरे के दुःख दर्द समझ सकते थे। इन बातों के कारण भी देश में राष्ट्रीयता की भावना का जन्म हुआ।

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प्रश्न 4.
कांग्रेस की स्थापना, आरंभिक उद्देश्यों तथा नीतियों की विवेचना कीजिए।
उत्तर-
कांग्रेस की स्थापना 1885 ई० में एक रिटायर्ड अंग्रेज़ अधिकारी श्री ए० ओ० हयूम के प्रयत्नों से हुई थी। उन्होंने कांग्रेस की स्थापना इसलिए की थी ताकि भारतीय नेताओं का असन्तोष विचारों के रूप में बाहर निकलता रहे और वह किसी भयंकर विद्रोह का रूप धारण न करे। मि० ह्यूम काफी सीमा तक अपने उद्देश्यों में सफल भी रहे, परन्तु धीरे-धीरे यह संस्था जनता में काफी लोकप्रिय होने लगी और भारतीय नेताओं की मांगें बढ़ने लगीं। इस संस्था के आरम्भिक उद्देश्यों तथा नीतियों का वर्णन इस प्रकार है :

उद्देश्य-आरम्भ में (1905 ई० तक) कांग्रेस के सभी नेता उदारवादी विचारों के थे। इनके मुख्य उद्देश्य ये थे:

  • देश के हित के लिए काम करने वालों में मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध स्थापित करना।
  • देशवासियों में जातीयता, प्रान्तीयता तथा धार्मिक भेद-भाव की भावना समाप्त करके राष्ट्रीयता का बीज बोना।
  • सामाजिक समस्याओं सम्बन्धी सुलझे विचारों को इकट्ठा करके अंकित करना।
  • आने वाले 12 महीनों में यह कार्यक्रम तैयार करना कि देश सेवा किस प्रकार की जाए।

नीतियां-कांग्रेस की आरम्भिक नीति देश को स्वतन्त्रता दिलाना नहीं थी। इस समय तक उसकी नीतियां बड़ी साधारण थीं, जिनका वर्णन इस प्रकार है:-

  • भारतीयों को उनकी योग्यता के अनुसार ऊंचे पदों पर नौकरियां दिलवाना।
  • सरकार का ध्यान देश में जन-कल्याण के कार्यों की ओर दिलाना।
  • कृषि की उन्नति के लिए सरकार को प्रेरित करना।
  • किसानों की दशा में सुधार लाना।
  • देश में करों की कमी करवाना।
  • लोगों का आर्थिक स्तर ऊंचा करना।
  • लोगों का नैतिक उत्थान करना।
  • देश में प्राइमरी तथा तकनीकी शिक्षा का प्रसार करना।

प्रश्न 5.
गर्म पन्थ का उदय क्यों हुआ तथा उन्होंने किस प्रणाली को अपनाया ?
उत्तर-
भारतीय राजनीति में गर्म दल के उदय के निम्नलिखित कारण थे :

  • उदारवादी नेता उस गति से नहीं चल रहे थे, जिस गति से देश में राजनीतिक चेतना बढ़ रही थी।
  • अंग्रेजी सरकार राष्ट्रीय समस्याओं के प्रति संतोषजनक रुख नहीं अपना रही थी।
  • बंगाल के विभाजन ने सारे देश में राष्ट्रीय जागृति पैदा कर दी। पूरे देश में इसका विरोध हुआ, जिसके कारण उग्रवादी भावना को बढ़ावा मिला।
  • भारत से बाहर की घटनाओं ने भी लोगों का झुकाव उग्रवाद की ओर किया। 1896 में इटली को इथोपिया ने और 1905 में रूस को जापान ने हराया था। इससे भी भारतीयों का मनोबल बढ़ा। 1905 की रूसी क्रान्ति और आयरलैण्ड में चल रहे स्वतन्त्रता आन्दोलन ने भी भारतीयों को प्रेरित किया।

गर्म दल की उन्नति-गर्म दल की सही उन्नति 1905 ई० से आरम्भ हुई। लाल-बाल-पाल अर्थात् लाला लाजपतराय, बाल गंगाधर तिलक एवं विपिन चन्द्र पाल ने गर्म दल का नेतृत्व सम्भाला। तिलक ने नारा दिया “स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है।” सारा देश ‘वन्दे मातरम्’ के नारों से गूंज उठा। स्वदेशी आन्दोलन का सूत्रपात भी हुआ। लोगों ने विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार किया और उनकी होली जलाई।

1907 तक उदारवाद तथा उग्रवाद की विचारधारा में स्पष्ट अन्तर दिखाई देने लगा। इसी वर्ष कांग्रेस के सूरत अधिवेशन में दोनों गुटों में खुला झगड़ा हुआ। अधिवेशन में जूते और लाठियां तक चलीं। सरकार ने उदारवादियों को खुश करने के लिए 1909 का एक्ट पास किया परन्तु इससे उदारवादी तथा उग्रवादी दोनों ही असन्तुष्ट हुए।

गर्म दल की कार्य-प्रणाली-गर्म दल की कार्य-प्रणाली क्हणी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित थीं :

  • गरमपंथी ब्रिटिश शासन में कोई विश्वास नहीं रखते थे। इस सम्बन्ध में ये नरमपंथियों की आलोचना करते थे।
  • गरमपंथी पश्चिमी संस्कृति के आलोचक थे। उनका उद्देश्य लोगों को भारतीय संस्कृति पर गर्व करना सिखाना था।
  • गरमपंथियों का मानना था कि राजनीतिक अधिकार प्राप्त करने के लिए लड़ना पड़ता है और भारी दबाव डालकर ही इन्हें प्राप्त किया जा सकता है।
  • गरमपंथियों द्वारा पेश की गई मांगें राष्ट्रीय थीं और जनसाधारण से सम्बन्ध रखती थीं।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 21 राजनीतिक जागृति तथा अंग्रेजी साम्राज्य के विरुद्ध राजनीतिक आन्दोलन

प्रश्न 6.
(क) बंगाल को विभाजित करने के पीछे ब्रिटिश लोगों के क्या उद्देश्य थे ?
(ख) राष्ट्रीय आन्दोलन पर इसका क्या प्रभाव पड़ा ? स्वदेशी तथा बहिष्कार आन्दोलनों का बंगाल-विभाजन से क्या सम्बन्ध है ?
उत्तर-
(क) बंगाल का विभाजन 1905 ई० में लॉर्ड कर्जन ने किया था। उसने बंगाल और असम को साथ मिलाकर इस सारे प्रदेश के दो भाग कर दिये। उसका कहना था कि बंगाल एक बहुत बड़ा प्रान्त है और सरकार को इसका शासन चलाने में कठिनाई आती है, परन्तु यह अंग्रेजों का एक बहाना मात्र था। वास्तव में बंगाल के विभाजन से उनके कुछ और भी उद्देश्य थे।

उद्देश्य-अंग्रेजों ने बंगाल का विभाजन निम्नलिखित उद्देश्यों से किया :
1. राष्ट्रीयता को आघात पहुंचाना-बंगाल भारत में एक ऐसा प्रान्त था जहां के लोगों में देश के अन्य प्रान्तों की अपेक्षा राष्ट्रीयता की भावना अधिक थी। देश में उठने वाली प्रत्येक राष्ट्रीय लहर का प्रारम्भ इसी प्रान्त से होता था। इस बात से अंग्रेजों को चिन्ता हुई। उन्होंने यहां की राष्ट्रीय भावना को आघात पहुंचाने के लिए इस प्रान्त का विभाजन कर दिया।

2. बंगाल के नेताओं के बढ़ते हुए प्रभाव को रोकना-बंगाल के नेताओं का देश में प्रभाव बढ़ रहा था। वे देश की जनता को अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष करने के लिए प्रेरित कर रहे थे और उग्रवादी साधनों पर बल दे रहे थे। सरकार बंगाल का विभाजन करके उनके बढ़ते हुए प्रभाव को समाप्त कर देना चाहती थी।

3. मुसलमानों का समर्थन-अंग्रेजी सरकार मुसलमानों का समर्थन प्राप्त करना चाहती थी और उन्हें हिन्दुओं के विरुद्ध भड़काना चाहती थी। इसी उद्देश्य से उसने बंगाल का विभाजन कर दिया और पूर्वी बंगाल नामक एक प्रान्त बना दिया। उस प्रान्त में मुसलमानों का बहुमत था।

(ख) राष्ट्रीय आन्दोलन पर प्रभाव-
1. बंगाल विभाजन से भारतीयों में असन्तोष फैल गया। फलस्वरूप देश में बंगभंग के विरुद्ध एक जबरदस्त आन्दोलन छिड़ गया। 16 अक्तबूर का दिन सारे देश में शोक-दिवस के रूप में मनाया गया।

2. आन्दोलन के कार्यक्रम के अनुसार लोगों ने स्थान-स्थान पर विदेशी माल की होली जलायी और स्वयं स्वदेशी माल का प्रयोग करना आरम्भ कर दिया। स्वदेशी के प्रचार से भारत के देशी उद्योग फिर से उन्नति करने लगे।

3. भारतीयों ने बहिष्कार की नीति अपनायी। उन्होंने सरकारी नौकरियों तथा पदवियों का त्याग कर दिया। यहां तक कि विद्यार्थियों ने भी सरकारी स्कूलों में जाना छोड़ दिया।

4. सरकार ने इस आन्दोलन के दमन के लिए लोगों पर जितने अधिक अत्याचार किये, उनके विचार उतने ही अधिक गर्म होते गये। इस प्रकार देश में गर्म दल का उदय हुआ।

5. कुछ समय के पश्चात् भारतीयों ने सरकारी अत्याचारों का सामना करने के लिए हिंसात्मक और क्रान्तिकारी साधन अपनाने आरम्भ कर दिये। परिणामस्वरूप देश में एक जबरदस्त क्रान्तिकारी आन्दोलन आरम्भ हो गया। क्रान्तिकारी युवकों ने अनेक अंग्रेजों का वध कर दिया।

6. बंगाल विभाजन का देशव्यापी प्रभाव पड़ा। लगभग पूरा भारत इस विभाजन के विरुद्ध उठ खड़ा हुआ था। फलस्वरूप राष्ट्रीय एकता को बल मिला।

स्वदेशी तथा बहिष्कार (बॉयकाट) आन्दोलन-स्वदेशी तथा बॉयकाट अथवा बहिष्कार आन्दोलन बंगाल-विभाजन के विरुद्ध रोष प्रकट करने के लिए चलाए गए। इनके अनुसार स्वदेशी वस्तुओं के प्रयोग पर बल दिया गया और अंग्रेज़ी माल का बहिष्कार कर दिया गया। अनेक नेताओं ने स्थान-स्थान पर जाकर इस आन्दोलन का प्रचार किया। अत: लोगों ने अधिक से अधिक भारतीय माल का प्रयोग करना आरम्भ कर दिया और विदेशी माल खरीदना बन्द कर दिया। परिणामस्वरूप भारतीय उद्योगों को काफी प्रोत्साहन मिला। इस आन्दोलन में विद्यार्थियों तथा महिलाओं ने भी प्रशंसनीय काम किया। कुछ मुसलमान नेता भी इसमें शामिल हुए। बम्बई, मद्रास तथा उत्तरी भारत के अनेक भागों में इस आन्दोलन का बड़े पैमाने पर प्रचार हुआ।

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प्रश्न 7.
असहयोग आन्दोलन के बारे में विस्तारपूर्वक लिखें।
अथवा
असहयोग आन्दोलन क्यों चलाया गया ? इसके कार्यक्रम एवं उद्देश्य का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर-
महात्मा गांधी आरम्भ में अंग्रेज़ी शासन के पक्ष में थे। परन्तु प्रथम महायुद्ध की समाप्ति पर वह अंग्रेजी शासन के विरोधी बन गए और उन्होंने इसके विरुद्ध असहयोग आन्दोलन आरम्भ कर दिया।

कारण-
1. भारतीयों ने प्रथम महायुद्ध में अंग्रेज़ों को पूरा सहयोग दिया था, परन्तु महायुद्ध की समाप्ति पर अंग्रेज़ों ने भारतीय जनता का खूब शोषण किया।

2. प्रथम महायुद्ध के दौरान भारत में प्लेग आदि महामारियां फूट पड़ीं। परन्तु अंग्रेज़ी सरकार ने उसकी ओर कोई ध्यान न दिया।

3. गांधी जी ने प्रथम महायुद्ध में अंग्रेजों की सहायता करने का प्रचार इस आशा से किया था कि वे भारत को स्वराज्य प्रदान करेंगे। परन्तु  युद्ध की समाप्ति पर ब्रिटिश सरकार ने गांधी जी की आशाओं पर पानी फेर दिया।

4. 1919 ई० में ब्रिटिश सरकार ने रौलेट एक्ट पास कर दिया। इस काले कानून के कारण जनता में रोष फैल गया।

5. रौलेट एक्ट के विरुद्ध प्रदर्शन के लिए अमृतसर के जलियांवाला बाग में एक विशाल जनसभा हुई। अंग्रेजों ने एकत्रित भीड़ पर गोली चलाई जिससे सैंकड़ों लोग मारे गए।

6. सितम्बर, 1920 ई० में कांग्रेस ने अपना अधिवेशन कलकत्ता (कोलकाता) में बुलाया। इस अधिवेशन में ‘असहयोग आन्दोलन’ का प्रस्ताव रखा गया, जिसे बहुमत से पास कर दिया गया।

असहयोग आन्दोलन का कार्यक्रम अथवा उद्देश्य-असहयोग आन्दोलन के कार्यक्रम की रूपरेखा इस प्रकार है-

  • विदेशी माल का बहिष्कार करके स्वदेशी माल का प्रयोग किया जाए।
  • ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रदान की गई उपाधियां तथा अवैतनिक पद छोड़ दिये जाएं।
  • स्थानीय संस्थानों में मनोनीत भारतीय सदस्यों द्वारा त्याग-पत्र दे दिए जाएं।
  • सरकारी स्कूलों तथा सरकार से अनुदान प्राप्त स्कूलों में बच्चों को पढ़ने के लिए न भेजा जाए।
  • ब्रिटिश अदालतों तथा वकीलों का धीरे-धीरे बहिष्कार किया जाए।
  • सैनिक, क्लर्क तथा श्रमिक विदेशों में अपनी सेवाएं अर्पित करने से इन्कार कर दें।

आन्दोलन की प्रगति तथा अन्त-असहयोग आन्दोलन के कार्यक्रम को जनता तक पहुंचाने के लिए महात्मा गांधी तथा मुस्लिम नेता डॉ० अंसारी, मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद तथा अली बन्धुओं ने सारे देश का भ्रमण किया। परिणामस्वरूप शीघ्र ही यह आन्दोलन बल पकड़ गया। जनता ने सरकारी विद्यालयों का बहिष्कार कर दिया। बीच चौराहों पर विदेशी वस्त्रों की होली जलाई गई। रवीन्द्रनाथ टैगोर ने ‘सर’ की उपाधि तथा गांधी जी ने ‘केसरे हिन्द’ की उपाधि का त्याग कर दिया। इसी बीच उत्तर प्रदेश के चौरी-चौरा नामक स्थान पर उत्तेजित भीड़ ने एक पुलिस थाने को आग लगा दी। इस हिंसात्मक घटना के कारण गांधी जी ने असहयोग आन्दोलन की समाप्ति की घोषणा कर दी।

महत्व-

  • असहयोग आन्दोलन के कारण कांग्रेस ने सरकार से सीधी टक्कर ली।
  • भारत के इतिहास में पहली बार जनता ने इस आन्दोलन में बढ़-चढ़कर भाग लिया।
  • असहयोग आन्दोलन में ‘स्वदेशी’ का खूब प्रचार किया गया था। फलस्वरूप देश में उद्योग-धन्धों का विकास हुआ।

सच तो यह है कि गांधी जी द्वारा चलाये गये असहयोग आन्दोलन ने भारत के स्वतन्त्रता संग्राम को एक नई दिशा प्रदान की।

जूडो (Judo) Game Rules – PSEB 10th Class Physical Education

Punjab State Board PSEB 10th Class Physical Education Book Solutions जूडो (Judo) Game Rules.

जूडो (Judo) Game Rules – PSEB 10th Class Physical Education

याद रखने योग्य बातें

  1. जूडो मैदान का आकार = वर्गाकार
  2. जूडो मैदान की एक भुजा की लम्बाई = 10 मीटर
  3. अधिकारियों की संख्या = तीन (1 रैफ़री, 2 जज, 1 स्कोरर)
  4. पोशाक का नाम = जुडोगी
  5. जूडो के भारों की गिनती = 8 पुरुषों के लिए
  6. जूडो के भारों की गिनती = 7 स्त्रियों के लिए
  7. जूडो के भारो की गिनती = 8 जूनियर के लिए
  8. जूडो खेल का समय = 10 ओर 20 मिनट
  9. जूडो के मैदान का नाम = सिआइजो
  10. प्लेटफार्म को कवर करने के लिए टुकड़ों की गिनती = 50, कम-से-कम 16 × 16 मी०
  11. मैदान का कुल क्षेत्र = अधिक-से-अधिक 14 × 14 मी० 128 मैट, कम से कम 98 मैट
  12. प्रत्येक मैट के टुकड़े का आकार = 1 × 2 मीटर
  13. जूडो खिलाड़ियों को एक-दूसरे से खड़े होने की दूरी = 4 मीटर
  14. खतरनाक ज़ोन = 1 मीटर

ऐम बी डी स्वास्थ्य एवं शारीरिक शिक्षा जूडो खेल की संक्षेप रूप-रेखा
(Brief outline of the Judo Game)

  1. जूडो प्रतियोगिता रैफरी के Hajime शब्द कहने से आरम्भ होती है।
  2. खिलाड़ी अंगूठी, कड़ा आदि नहीं पहन सकते और न ही उनके पैरों तथा हाथों के नाखून बढ़े होने चाहिएं।
  3. रैफरी के ‘ओसाई कोमी तोकेता’ कहने से पकड़ हट जाती है।
  4. यदि कभी जज रैफरी के निर्णय से सहमत न हो तो वह रैफरी को अपना सुझाव दे सकता है। रैफरी ठीक समझे तो वह जज के फैसले को मान सकता है।
  5. जूडो प्रतियोगिता की अवधि 3 मिनट से 20 मिनट हो सकती है।
  6. जूडो प्रतियोगिता में पेट का दबाना या सिर या गर्दन को सीधा टांगों से दबाना फाऊल है।
  7. जूडो प्रतियोगिता में यदि कोई खिलाड़ी भाग लेने से इन्कार कर देता है उसके विरोधी खिलाड़ी की त्रुटि के कारण (By Fusangachi) विजयी घोषित किया जाता है।
  8. यदि कोई खिलाड़ी मुकाबले में अपने विरोधी खिलाड़ी की ग़लती से घायल हो जाए तो घायल को विजयी घोषित किया जाता है।

जूडो (Judo) Game Rules - PSEB 10th Class Physical Education

प्रश्न
जूडो खेल का क्रीडा क्षेत्र, पोशाक, अधिकारी और खेल के मुख्य नियम लिखें।
उत्तर-
क्रीड़ा क्षेत्र (Play Ground) जूडो के क्रीड़ा क्षेत्र को शिआाजो कहते हैं। यह एक वर्गाकार प्लेटफार्म होता है। इसकी प्रत्येक भुजा 30 फुट होती है। यह प्लेटफार्म भूमि से कुछ ऊंचाई पर होता है। इसको टाट के 50 टुकड़ों या कैनवस से ढका जाता है। प्रत्येक टुकड़े का आकार 3 इंच × 6 इंच होता है।
जूडो (Judo) Game Rules - PSEB 10th Class Physical Education 1
अधिकारी (Officials)-जूडो में प्राय: तीन अधिकारी होते हैं। इनमें से एक रैफ़री और दो जज होते हैं। बाऊट (Bout) को रैफरी आयोजित करता है। उसका निर्णय अन्तिम होता है। इसके विरुद्ध अपील नहीं हो सकती, वह प्रतियोगिता क्षेत्र में रह कर खेल प्रगति का ध्यान रखता है।
जूडो (Judo) Game Rules - PSEB 10th Class Physical Education 2
पोशाक (Costume)खिलाड़ी की पोशाक को जूडोगी कहते हैं जूडोगी में एक जैकेट, पायजामा तथा एक पेटी होती है। जूडोगी न होने की अवस्था में खिलाड़ी ऐसी पोशाक धारण कर सकता है जिसकी पेटी इतनी लम्बी हो कि शरीर के गिर्द दो बार आ सके तथा वर्गाकार गांठ (Knot) लगाने के पश्चात् 3″ के सिरे बच जाएं। जैकेट भी इतनी लम्बी हो जिसके साथ पेटी बांधने के पश्चात् भी कूल्हे (Hip) ढके जा सकें। इसके बाजू खुले होने चाहिएं। कफ तथा बाजुओं के मध्य 11/4 का फासला होना चाहिए तथा ये आधी भुजा तक लटकनी चाहिए। पायजामा भी काफी खुला होना चाहिए। खिलाड़ी अंगूठी, हार, मालाएं आदि नहीं पहन सकते क्योंकि इससे चोट लगने का भय रहता है। खिलाड़ियों के हाथों की अंगुलियों के नाखून कटे होने चाहिएं।
प्रतियोगिता की अवधि (Duration of the Competition) मैच के लिए समय की अवधि 3 मिनट से 20 मिनट तक हो सकती है। विशेष दशाओं में इस अवधि में कमी या वृद्धि की जा सकती है।

प्रश्न
जडो प्रतियोगिता का आरम्भ कैसे किया जाता है ? जडो प्रतियोगिता के भिन्न-भिन्न नियमों का वर्णन करें।
उत्तर-
जूडो प्रतियोगिता का आरम्भ (Starting of Judo Competition)प्रतियोगी खिलाड़ी एक-दूसरे से 12 फुट की दूरी पर खड़े होने चाहिएं। उनके मुंह एकदूसरे के सामने होने चाहिएं। वे एक-दूसरे को खड़े ही खड़े झुक कर सलाम (Salute) कहते हैं। इसके पश्चात् रैफरी “हाजीमै” (Hajime) शब्द कह कर बाऊट आरम्भ करवा देता है। हाजीमै का अर्थ है, शुरू करो।
जूडो की विधियां (Judo Techniqes)—जूडो में अग्रलिखित दो विधियां अपनाई जाती हैं—

  1. नागेबाज़ा (गिराने की तकनीक)
  2. काटनेबाज़ा (ग्राऊंड वर्क की तकनीक)

निर्णय देते समय इन दोनों प्रकार की तकनीकों को ध्यान में रखा जाता है। प्रायः निर्णय एक ‘ज्ञप्पन’ अंक से अधिक नहीं दिया जाता।

  1. फेंकने की तकनीक में कुछ प्रगति करने के पश्चात् खिलाड़ी बेझिझक लेटने की स्थिति ग्रहण कर सकता है तथा इस प्रकार वह Offensive में आ जाता है।
  2. फेंकने की तकनीक अपनाते हुए जब कोई प्रतियोगी पड़ता है या प्रतियोगी Offensive ले लेता है तथा जब विरोधी खिलाड़ी गिर पड़ता है तो भी खिलाड़ी लेटने की स्थिति ले सकता है।
  3. खड़े होने की दशा में ग्राऊंड-वर्क तकनीकी अपनाने के पश्चात् जब खिलाड़ी कुछ प्रगति कर लेता है तो वह भी बिना झिझक लेटवीं स्थिति ग्रहण करके Offensive पर आ सकता है।
  4. जब एक या दोनों खिलाड़ी प्रतियोगिता क्षेत्र से बाहर हों तो कोई भी प्रयोग की गई तकनीक निष्फल एवं अवैध घोषित की जाती है।
  5. फेंकने की तकनीक उसी समय पर वैध होती है जब तक फेंकने वाले तथा उसके विरोधी का अधिक-से-अधिक शरीर प्रतियोगिता क्षेत्र में रहता है।
  6. खिलाड़ियों के प्रतियोगिता के क्षेत्र से बाहर चले जाने पर और पकड़ लिए जाने पर रैफ़री ‘सोनोमाना’ शब्द कहता है। सोनोमाना का अर्थ है ‘ठहर जाओ’। रैफरी उन्हें खींच कर प्रतियोगिता क्षेत्र में ले आता है, उनकी स्थिति लगभग वही रहती है, खेल पुनः आरम्भ करने के लिए रैफ़री योशी कहता है, सोनोमाना और योशी के बीच का समय काट लिया जाता है।
  7. किसी खिलाड़ी के फेंकने या ग्राऊंड-वर्क की तकनीक में सफल होने पर इसे ‘इप्पन’ (एक प्वांइट) दिया जाता है और मुकाबला बन्द कर दिया जाता है। रैफ़री विजेता का हाथ ऊंचा उठा कर निर्णय देता है।
  8. जब प्वाइंट बनता दिखाई देता है तो रैफ़री “वाजाअरी” शब्द का उच्चारण करता है, यदि फिर वही खिलाड़ी ‘वाजाअरी’ प्राप्त कर ले तो रैफ़री ‘वाजाअरी’ आवासेत इप्पन (अर्थात् एक प्वाइंट दो तकनीकों से) कहता है और उस खिलाड़ी को विजयी घोषित कर दिया जाता है।
  9. जब रैफ़री ‘ओसाइकोमी’ अर्थात् पकड़ की घोषणा करता है और पकड़ छूट जाती है तो वह ओसाइकोमी तोकेता’ शब्द का उच्चारण करता है। इसका अर्थ है कि पकड़ टूट गई है।
  10. यदि जज रैफरी से निर्णय के असहमत हो तो वह रैफरी को अपना सुझाव भेज सकता है। रैफ़री यदि उचित समझे तो जज के सुझाव को स्वीकार कर सकता है परन्तु रैफ़री का निर्णय अन्तिम होता है।
  11. जब कोई मुकाबला अनिर्णीत रह जाए और समय समाप्त हो जाए तो रैफ़री कहता है SOREMADE इसका अर्थ है ‘बस’।
  12. मुकाबला समाप्त होने पर दोनों जजों का निर्णय लिया जाता है। रैफ़री दोनों जजों के बहु-समर्थन से अपना निर्णय घोषित करता है, वह Yuseigachi (विजय श्रेष्ठता के कारण) या Hikiwake (बराबर) कहता है।
  13. मैच के अन्त में दोनों खिलाड़ी अपनी पहली स्थिति ग्रहण कर लेते हैं तथा रैफ़री द्वारा विहसल बजाने पर एक-दूसरे की ओर मुंह करके खड़े हो जाते हैं।

कुछ अनुचित कार्य (Some Donts)—

  1. पेट को भींचना या सिर या गर्दन को टांगों के बीच लेकर मरोड़ना ‘Do jime’ ।
  2. Kasetsue Waza तकनीक से जोड़ों के ऊपर कुहनी के अतिरिक्त उतारना।
  3. कोई निश्चित तकनीक अपनाए बिना विरोधी खिलाड़ी को लेटवीं स्थिति में धकेलना।
  4. जिस टांग पर आक्रामक खिलाड़ी खड़ा है उसे कैंची मारना।
  5. जो खिलाड़ी पीठ के बल लेटा हो उसे उठा कर मैट पर फेंकना।
  6. विरोधी खिलाड़ी की टांग को खड़े होने की स्थिति में खींचना ताकि लेटवीं स्थिति में हो सके।
  7. विरोधी खिलाड़ी की कमीज़ के बाजुओं या पायजामे में अंगुलियां डाल कर उन्हें पकड़ना।
  8. पीछे से चिपके हुए विरोधी खिलाड़ी पर जानबूझ कर पीछे की ओर गिरना।
  9. लेटे हुए खिलाड़ी द्वारा खड़े खिलाड़ी की गर्दन पर कैंची मारना, पीठ तथा बगलों को मरोड़ना या फिर जोड़ों को लॉक लगाने वाली तकनीकी Kansetsuewaza अपनाना।
  10. कोई ऐसा कार्य करना जिससे विरोधी खिलाड़ी को हानि पुहंचे या भय का कारण बने।
  11. जानबूझ कर स्पर्श या पकड़ से बचने की चेष्टा करना, यदि कोई काम सिरे न चढ़ सके।
  12. पराजित होते समय सुरक्षा का आसन (Posture) धारण करना।
  13. विरोधी के मुंह की ओर हाथ या पैर सीधे रूप से बढ़ाना।
  14. ऐसी पकड़ या लॉक लगाना जिससे विरोधी खिलाड़ी की रीढ़ की हड्डी के लिए संकट पैदा हो जाए।
  15. जानबूझ कर प्रतियोगिता क्षेत्र से बाहर निकलना या अकारण ही विरोधी को बाहर की ओर धकेलना।
  16. रैफ़री की अनुमति के बिना बैल्ट या जैकेट के बाजू पकड़ना।
  17. विरोधी खिलाड़ी की बैल्ट या जैकेट के बाजू पकड़ना।
  18. अनावश्यक इशारे करने, आवाजें करना या चीखना।
  19. ऐसे ढंग से खेलना जिससे जूडो खेल की समूची आत्मा को ठेस पहुंचे।
  20. निरन्तर काफ़ी समय तक अंगुलियां फंसा कर खड़े रहना।

विशेष निर्णय (Special Decisions)—

  1. जब कोई खिलाड़ी प्रतियोगिता में भाग लेने से इन्कार कर देता है तो विरोधी खिलाड़ी को Fusen Sho (Win by Default) अर्थात् त्रुटि के कारण विजयी माना जाता है।
  2. जब कोई खिलाड़ी रैफरी चेतावनी का बार-बार उल्लंघन करता है अथवा चेतावनी के पश्चात् भी वर्जित कार्य को बार-बार करता है उसे Honsakumake अर्थात् नियम उल्लंघन के कारण पराजित माना जाता है।
  3. घायल होने की अवस्था में यदि कोई खिलाड़ी प्रतियोगिता में भाग लेने में समर्थ नहीं रहता तो निर्णय इस प्रकार दिया जाता है
    • यदि कोई खिलाड़ी विरोधी खिलाड़ी की ग़लती के कारण घायल हुआ है तो घायल खिलाड़ी को विजयी घोषित किया जाता है।
    • यदि कोई अपनी ही ग़लती से घायल हुआ हो तो विरोधी खिलाड़ी को विजयी घोषित किया जाता है।
      JUDO WEIGHT CATEGORIES
      जूडो (Judo) Game Rules - PSEB 10th Class Physical Education 3
      Men = Total of Eight Categories
      Women = Total of Seven Categories
      Junior = Total of Eight Categories

जूडो (Judo) Game Rules - PSEB 10th Class Physical Education

PSEB 10th Class Physical Education Practical जूडो (Judo)

प्रश्न 1.
जूडो के क्रीडा क्षेत्र को क्या कहा जाता है?
उत्तर–
शियागो।

प्रश्न 2.
जूडो का खेल कैसे आरम्भ होता है?
उत्तर-
रैफ़री के Hafione शब्द कहने से खेल आरम्भ होती है।

प्रश्न 3.
जूडो प्रतियोगिता की अवधि कितनी होती है ?
उत्तर-
3 से 20 मिनट तक हो सकती है।

जूडो (Judo) Game Rules - PSEB 10th Class Physical Education

प्रश्न 4.
जूडो प्लेटफार्म का आकार कैसा होता है ?
उत्तर-
वर्गाकार।

प्रश्न 5.
जूडो प्लेटफार्म की प्रत्येक भुजा की लम्बाई कितनी होती है ?
उत्तर-
30 फुट।

प्रश्न 6.
प्लेटफार्म को ढकने वाले मैट के टुकड़ों की संख्या तथा आकार क्या होता है ?
उत्तर-
मैट के टुकड़ों की संख्या 50 तथा आकार 3′ × 6′ होता है।

जूडो (Judo) Game Rules - PSEB 10th Class Physical Education

प्रश्न 7.
जूडो प्रतियोगिता में कितने अधिकारी होते हैं ?
उत्तर-
रैफ़री-1, जज-2.

प्रश्न 8.
जूडो प्रतियोगिता में भारों का वर्णन करो।
उत्तर-
जूडो प्रतियोगिता में निम्नलिखित भार होते हैं—

Men Women
upto 50 Kg upto 44 Kg
upto 55 Kg upto 48 Kg
upto 60 Kg upto 52 Kg
upto 65 Kg upto 56 Kg
upto 71 Kg upto 61 Kg
upto 78 Kg upto 66 Kg
upto 86 Kg upto + 66 Kg
upto + 86 Kg

Men = Total of Eight Categories
Women = Total of Seven Categories

PSEB 12th Class Geography Solutions Chapter 2 मानवीय संसाधन-जनसंख्या और इसमें परिवर्तन

Punjab State Board PSEB 12th Class Geography Book Solutions Chapter 2 मानवीय संसाधन-जनसंख्या और इसमें परिवर्तन Textbook Exercise Questions and Answers.

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PSEB 12th Class Geography Guide मानवीय संसाधन-जनसंख्या और इसमें परिवर्तन Textbook Questions and Answers

प्रश्न I. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक वाक्य में दें :

प्रश्न 1.
पृथ्वी पर आर्थिक क्रियाओं का धुरा किसे कहा जा सकता है ?
उत्तर-
मानव को पृथ्वी पर आर्थिक क्रियाओं का धुरा कहा जाता है।

प्रश्न 2.
2011 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या घनत्व का कितना है ?
उत्तर-
सन् 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या घनत्व 382 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है।

प्रश्न 3.
अरुणाचल प्रदेश राज्य किस जनसंख्या घनत्व वाले क्षेत्र में आता है ?
उत्तर-
अरुणाचल प्रदेश राज्य कम जनसंख्या घनत्व वाले क्षेत्र में आता है।

PSEB 12th Class Geography Solutions Chapter 2 मानवीय संसाधन-जनसंख्या और इसमें परिवर्तन

प्रश्न 4.
विश्व जनसंख्या दिवस कब मनाया जाता है ?
उत्तर-
हर साल 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है।

प्रश्न 5.
भारत की ज्यादा जनसंख्या किस आयु समूह के साथ सम्बन्धित है ?
उत्तर-
भारत की ज्यादा जनसंख्या 0-14 साल और 60 साल के आयु समूह से सम्बन्धित है।

प्रश्न 6.
2011 की जनगणना के अनुसार पंजाब का लिंग अनुपात कितना है ?
उत्तर-
2011 की जनगणना के अनुसार पंजाब का लिंगानुपात सिर्फ 893 है।

प्रश्न 7.
भारत में पहले दर्जे के शहरों की कम से कम जनसंख्या कितनी है ?
उत्तर-
भारत में पहले दर्जे के शहरों में कम से कम जनसंख्या 1 लाख अथवा इससे अधिक वाले शहर आते हैं।

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प्रश्न 8.
जनसंख्या की स्थान परिवर्तन को प्रभावित करने वाले कोई दो कारक बताओ।
उत्तर-
जनसंख्या की स्थान परिवर्तन की प्रभावित करने वाले कारक हैं—

  1. आर्थिक कारक,
    • अच्छी कृषि योग्य भूमि का होना
    • रोजगार के अवसरों की उपलब्धता।
  2. सामाजिक कारक
    • धार्मिक स्वतन्त्रता
    • निजी स्वतन्त्रता।

प्रश्न 9.
सबसे अधिक भारतीय किन मध्य पूर्वी देशों में रहते हैं ?..
उत्तर-
सबसे अधिक भारतीय यू०एस०ए०, साऊदी अरब, इंग्लैंड, कैनेडा, आस्ट्रेलिया, अफ्रीका, यूरोप, न्यूजीलैंड इत्यादि देशों में रहते हैं।

प्रश्न 10.
2011 की जनगणना के अनुसार पुरुषों और औरतों की साक्षरता दर क्या है ?
उत्तर-
2011 की जनगणना के अनुसार पुरुषों की साक्षरता दर 80% और औरतों की साक्षरता दर 65.46% थी।

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प्रश्न 11.
नीचे दिए गए संसार के जनसंख्या के आंकड़ों को मिलाएँ—
1. पाकिस्तान — (क) 134.10 करोड़
2. बंगलादेश — (ख) 121.01 करोड़
3. चीन — (ग) 18.48 करोड़
4. भारत — (घ) 16.44 करोड़।
उत्तर-

  1. ग,
  2. घ,
  3. क,
  4. ख।

प्रश्न 12.
नीचे दिए गए किस राज्य की साक्षरता दर सबसे ज्यादा है ?
(i) मिजोरम,
(ii) मेघालय,
(iii) मणिपुर,
(iv) महाराष्ट्र।
उत्तर-
(iii) मणिपुर।

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प्रश्न II. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर चार पंक्तियों में दें :

प्रश्न 1.
अलग-अलग जनसंख्या घनत्व वाले क्षेत्रों के नाम बताओ।
उत्तर-
जनसंख्या घनत्व का विश्लेषण करने के लिए भारत को तीन श्रेणियों में बाँटा जाता है—

  1. अधिक जनसंख्या घनत्व वाले क्षेत्र- इस श्रेणी में 400 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर से अधिक जनसंख्या घनत्व वाले राज्य शामिल हैं जैसे बिहार, पश्चिमी बंगाल, उत्तर प्रदेश, केरल, तमिलनाडु, पंजाब, झारखण्ड, दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, पुडुचेरी, दमन, दीऊ और लक्षद्वीप इत्यादि केंद्र शासित प्रदेश इस वर्ग में शामिल
  2. साधारण घनत्व वाले प्रदेश-इस वर्ग में असम, गोआ, त्रिपुरा, कर्नाटक इत्यादि प्रमुख हैं। 3. कम घनत्व वाले प्रदेश-इस वर्ग में जम्मू कश्मीर, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश इत्यादि शामिल हैं।

प्रश्न 2.
जनसंख्या घनत्व को प्रभावित करने वाले चार कारक बताओ।
उत्तर-
जनसंख्या के घनत्व को प्रभावित करने वाले चार कारक हैं—

  1. धरातल-जिस जगह का धरातल समतल होता है वहाँ कृषि करनी आसान होती है। इसलिए लोग ऐसे स्थानों पर रहना अधिक पसंद करते हैं।
  2. खनिज पदार्थ और प्राकृतिक साधनों की उपलब्धि-जिस स्थान पर अच्छे खनिज पदार्थ और प्राकृतिक स्रोत मिलते हैं उन स्रोतों को प्राप्त करके मनुष्य अपनी आय बढ़ा सकते हैं। इसलिए ऐसे क्षेत्रों की जनसंख्या ज्यादा होगी।
  3. जलवायु-अधिक ठंडे या ज्यादा गर्म क्षेत्रों में लोग रहना पसंद नहीं करते। जहां पर जलवायु समान होती है इसलिए वहां जनसंख्या अधिक होगी।
  4. सामाजिक कारक-जहां लोग फिजूल के रीति रिवाजों को मानते हैं वहाँ पर लोग कम रहना पसंद करते हैं और जहां पर पढ़े-लिखे.और सकारात्मक सोच वाले लोग रहते हों वहाँ पर अधिक जनसंख्या होगी।

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प्रश्न 3.
दस साल में जनसंख्या वृद्धि निकालने का फार्मूला बताओ।
उत्तर-
भारत में हर दस सालों के बाद जनगणना होती है। दस सालों में कुल जनसंख्या में जो परिवर्तन होता है उसे जनसंख्या की वृद्धि कहते हैं। इलाके में जनसंख्या वृद्धि निकालने का फार्मूला है—
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प्रश्न 4.
अधिक जनसंख्या से होने वाली कोई चार समस्याएँ बताओ।
उत्तर-
अधिक जनसंख्या से होने वाली समस्याएँ हैं—

  1. स्थान की समस्या और मकानों की कमी
  2. पीने वाले जल की कमी
  3. अपराधों की संख्या का बढ़ना
  4. प्रदूषण की समस्या।

प्रश्न 5.
जनसंख्या परिवर्तन के निर्णायक तत्व क्या हैं ?
उत्तर-
किसी देश की जनसंख्या समान नहीं होती। समय-समय पर उसमें कुछ न कुछ परिवर्तन आते रहते हैं। जनसंख्या परिवर्तन के मुख्य निर्णायक तत्व नीचे लिखे अनुसार हैं—

  1. जन्म दर-जिस क्षेत्र और स्थान की जन्म दर अधिक होती है वहाँ जनसंख्या अधिक होगी। जहां जन्म दर कम होगी वहां जनसंख्या कम होगी।
  2. मृत्यु दर-मृत्यु दर में वृद्धि के साथ जनसंख्या में कमी हो जाती है और कमी के साथ जनसंख्या में वृद्धि हो जाती है।
  3. प्रवास-स्थान बदली स्थाई और अस्थाई दो प्रकार की होती है। जब लोग शादी और किसी रोज़गार को ढूँढ़ने के लिए किसी अन्य जगह पर चले जाते हैं तब वहाँ पर जनसंख्या बढ़ जाती है स्थायी प्रवास कहते हैं परन्तु जब लोग अस्थाई रूप अर्थात् घूमने के लिए जाते हैं और वापिस अपने शहर लौट आते हैं उसे अस्थाई प्रवास कहते हैं।

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प्रश्न 6.
साक्षरता का अर्थ क्या है ?
उत्तर-
शब्दकोष अनुसार साक्षरता का अर्थ है-पढ़ने और लिखने की क्षमता। पर भारत की जनगणना की परिभाषा के अनुसार किसी भी भाषा में पढ़-लिख और समझ लेने की क्षमता को साक्षरता कहते हैं। इसलिए एक मनुष्य जो एक भाषा लिख और पढ़ सकता है और उसे समझ सकता है और उसकी आयु सात साल की है उसे शिक्षित कहते हैं। साक्षरता किसी देश के मानव विकास का एक प्रमाण चिन्ह होता है। साक्षरता किसी व्यक्ति के समझ के घेरे को और अधिक वृद्धि देती है। सारक्षता को किसी देश के आर्थिक और सामाजिक विकास का मुख्य बिंदु माना जाता है।

प्रश्न 7.
साक्षरता दर निकालने का फार्मूला क्या है?
उत्तर-
साक्षरता दर निकालने का फार्मूला है—
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प्रश्न III. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 10-12 पंक्तियों में दें :

प्रश्न 1.
किसी क्षेत्र में जनसंख्या के वितरण को प्रभावित करने वाले राजनीतिक कारक कौन से हैं ?
उत्तर-
किसी क्षेत्र में जनसंख्या के वितरण को प्रभावित करने वाले राजनीतिक कारक हैं—

  1. अगर कोई सरकार लोगों की ज़रूरतों और उम्मीदों को पूरा करने योग्य होती है, वहाँ पर लोग रहना पसंद करते हैं पर जिस क्षेत्र की सरकार लोगों की उम्मीदों को पूरा नहीं कर सकती लोग वहाँ पर रहना पसंद नहीं करते जहां किसी विशेष धर्म की पक्षपूर्ति हो वहां लोग रहना कम पसंद करते हैं।
  2. जिस जगह पर पेंशन इत्यादि की और बालिगों के कई अच्छे कानून बनाये गए हों, वहाँ लोग रहना पसंद करते हैं।
  3. जिस स्थान पर लोगों के लिए बढ़िया रोज़गार के मौके सरकार की तरफ से दिए जाते हैं लोग वहाँ पर रहना ज्यादा पसंद करते हैं।
  4. जिस स्थान पर हर राष्ट्रीय मुद्दे को सरकारी स्तर पर सूझ-बूझ के साथ निपटाया जाता है और क्षेत्र में शांति स्थापित की जाती है, वहां पर लोग रहना अधिक पसंद करते हैं।

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प्रश्न 2.
क्या शहरी क्षेत्रों को जनसंख्या के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है, और कैसे ?
उत्तर-
शहरी क्षेत्रों को जनसंख्या के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। संयुक्त राष्ट्र के निर्देशों के अनुसार भारत के जनगणना विभाग ने शहरों को नीचे लिखी श्रेणियों में विभाजित किया है—

  1. प्रथम दर्जे के शहर-जिन शहरों में जनसंख्या 1 लाख और इससे अधिक होती हैं-वे प्रथम दर्जे के शहरों के अन्तर्गत आते हैं।
  2. द्वितीय दर्जे के शहर-जिन शहरों की जनसंख्या 50,000 से 99,999 तक होती है, उन्हें द्वितीय दर्जे के शहरों में आंका जाता है।
  3. तृतीय दर्जे के शहर-जिन शहरों की जनसंख्या 20,000 से 49,999 तक होती है, उन्हें तृतीय दर्जे के शहर कहते हैं।
  4. चतुर्थ दर्जे के शहर-जिन शहरों की जनसंख्या 10,000 से 19,999 तक होती है, उन्हें चतुर्थ दर्जे के शहर कहते हैं।
  5. पंचम दर्जे के शहर-जिन शहरों की जनसंख्या 5,000 से 9,999 तक होती है उन्हें पंचम दर्जे के शहरों में आंका जाता है।
  6. छठे दर्जे के शहर-जिन शहरों की जनंसख्या 5,000 से कम होती है उन्हें छठे दर्जे के शहर कहते हैं।

प्रश्न 3.
प्रवास (Migration) के पर्यावरणीय परिणाम कौन-से हैं ?
उत्तर-
प्रवास के पर्यावरणीय नतीजे नीचे लिखे अनुसार हैं—

  1. गाँवों के लोग बेहतर सुविधा के लिए शहरों की तरफ अधिक आकर्षित होते हैं जिसके कारण अधिक संख्या में गाँव के लोग शहरों की तरफ प्रवास कर रहे हैं। इस कारण शहर अधिक जनसंख्या वाले बनते जा रहे हैं।
  2. प्रवास के कारण अप्रवास (Immigration) वाले क्षेत्रों की मूल संरचना पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ता है।
  3. शहरी क्षेत्रों में अधिक से अधिक प्रवास के कारण शहरों में गैर आयोजन और असंतुलित विकास के निष्कर्ष निकलते हैं।
  4. जब शहरी जनसंख्या बढ़ जाती है तब रहने के लिए जगह की कमी हो जाती है जिस कारण बस्तियां गंदी हो जाती हैं।
  5. शहरों में जनसंख्या के वृद्धि के कारण, क्योंकि मनुष्यों की जनसंख्या बढ़ जाती है कई तरह की समस्याएँ, जैसे कि सफाई की, जल की कमी इत्यादि आ जाती हैं।

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प्रश्न 4.
क्या साक्षरता मानवीय विकास सूचक का मापक है ?
उत्तर-
साक्षरता किसी देश के मानवीय विकास सूचक (HDI) का मापक है। साक्षरता के कारण व्यक्ति की सूझबूझ का घेरा बढ़ जाता है। अधिक साक्षरता किसी देश के सामाजिक, आर्थिक अथवा राजनीतिक विकास में योगदान डालती है और स्पष्ट शब्दों में हम कह सकते हैं कि साक्षरता लोगों के विकास का आधार है। अनपढ़ और अशिक्षित लोग विकास का अनिवार्य स्तर हासिल नहीं कर पाते। साक्षरता के कारण लोगों के रहन-सहन और बोलचाल के ढंग में सुधार आता है। स्त्रियों की सामाजिक दशा में सुधार आता है। मनुष्य की रूढ़िवादी सोच बदल जाती है और स्त्रीपुरुष का भेद कम हो जाता है। यह देश के सामाजिक और आर्थिक विकास का कारण भी है अथवा नतीजा भी। जिन देशों की साक्षरता दर कम होती है उन देशों में अधिकतर पर आर्थिक और सामाजिक विकास की कमी भी देखने को मिलती है और जिस जगह की साक्षरता दर ज्यादा होती है उस देश का आर्थिक, सामाजिक विकास भी ज्यादा होता है। इसलिए हम कह सकते हैं कि साक्षरता मानवीय विकास सूचक का मापक है।

प्रश्न 5.
जनसंख्या की प्रवास के प्रतिकर्ष और अपकर्ष करने वाले कारकों का वर्णन करो।
उत्तर-
जनसंख्या की प्रवास के प्रतिकर्ष और अपकर्ष करने वाले कारकों का वर्णन नीचे लिखे अनुसार है—

प्रतिकर्ष कारक  (Pull Factor) अपकर्ष कारक (Push Factors)
1. जिस स्थान पर लोगों के लिए कोई काम न हो, बेरोजगारी हो, वहाँ से लोग किसी और स्थान की तरफ जाना शुरू कर देते हैं। 1. जिस स्थान पर रोजगार के अच्छे मौके मिल रहेहों लोग उस तरफ को आकर्षित होते हैं।
2. बाढ़ और सूखा जैसी प्राकृतिक आपदाओं के कारण लोग अपना क्षेत्र छोड़कर चले जाते हैं। 2. जिस स्थान पर प्राकृतिक आपदाओं का संकट न हो, लोग वहाँ चले जाते हैं। ।
3. युद्ध और लड़ाई के डर के कारण लोग अपने स्थान को छोड़ देते हैं। 3. राजनीतिक और सामाजिक सुरक्षा क्षेत्र भी मनुष्य को आकर्षित करते हैं।
4. जिस स्थान की जमीन उपजाऊ नहीं होती, फ़सल करती है। 4. उपजाऊ भूमि वाली जगह भी लोगों को आकर्षित अच्छी नहीं होती, लोग उस जगह को छोड़ देते हैं।
5. किसी स्थान पर सेवा और सुविधाएँ कम होने के कारण लोग उस स्थान को छोड़ देते हैं। 5. किसी स्थान पर अच्छी सेवा और सुविधा के कारण लोग वहाँ पर चले जाते हैं।

 

प्रश्न 6.
भारतीयों के संसार में फैलाव पर नोट लिखो।
उत्तर-
भारतीयों के संसार में फैलाव का इतिहास बहुत पुराना है। बस्तीवादी काल के दौरान गुलाम मजदूरों को अंग्रेजों ने काम करने के लिए एशिया के दूसरे देशों में भेजा। इन मजदूरों की अधिक संख्या पश्चिमी बिहार, उत्तर प्रदेश, बंगाल तथा उड़ीसा इत्यादि से थी जिनको इग्लैंड की बस्तियों, अफ्रीका, दक्षिण पूर्वी एशिया जैसे देशों में काम के लिए भेजा गया। इन मजदूरों को अधिकतर पर जहाँ चीनी मिल, कपास की खेती, चाय के बाग और रेलमार्ग निर्माण इत्यादि के कामों के लिए भेजा जाता था। अधिकतर मध्यवर्ग के लोगों ने दूसरे देशों में प्रवास किया। इनमें साक्षर और निरक्षर दोनों तरह के मज़दूर मौजूद थे। पंजाब के दोआबा क्षेत्र के इलाकों में बहुत सारे लोगों ने इंग्लैंड, कनाडा, यू०एस०ए०, आस्ट्रेलिया इत्यादि देशों की तरफ प्रवास किया। आज के समय में लगभग हर देश में भारतीयों का फैलाव देखा जा सकता है। आजकल पढ़े-लिखे लोग भी बढ़िया नौकरी की तलाश में या फिर बेहतर साक्षरता के लिए दूसरे देशों की तरफ जा रहे हैं। भारतीयों ने विकसित देशों में अपना अहम स्थान बना रखा है।

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प्रश्न III. नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर 20 वाक्यों में दें—

प्रश्न 1.
जनसंख्या के वितरण को प्रभावित करने वाले कारक कौन से हैं ?
उत्तर-
जनसंख्या के वितरण को प्रभावित करने वाले कारक नीचे दिए अनुसार हैं—
1. जलवायु-जनसंख्या के वितरण को प्रभावित करने वाले कारकों में जलवायु सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण कारक है। जिस स्थान का जलवायु अधिक गर्म तथा अधिक ठंडा होता है लोग वहाँ पर रहना पसंद नहीं करते, पर जिस स्थान का जलवायु औसत दर्जे का होता है लोग वहाँ पर अधिक रहना पसंद करते हैं।

2. धरातल और मिट्टी की किस्म-क्योंकि कृषि मनुष्य की कमाई का मुख्य स्रोत है इसलिए जिस स्थान की मिट्टी ज्यादा उपजाऊ होती है तथा समतल होती है वह स्थान कृषि के लिए उत्तम होता है। लोग वहां पर रहना पसंद करते हैं। यही कारण है कि अधिक तेज ढलान वाले क्षेत्रों में लोग कम रहते हैं।

3. जल, खनिज पदार्थ तथा प्राकृतिक साधनों की उपलब्धि-जल मनुष्य की पहली जरूरत है। खारे तथा पीने योग्य पानी की कमी वाले क्षेत्रों में जनसंख्या की कमी होती है। खनिज पदार्थ और प्राकृतिक साधनों की उपलब्धि किसी देश के आर्थिक विकास की कुंजी है। मानव का विकास सीधे रूप में आर्थिक विकास के ऊपर निर्भर करता है।

4. यातायात और संचार के साधन-यातायात के विकास के साथ मनुष्य को यातायात के साधनों द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाना आसान होता है तथा संचार के साधनों के विकास के साथ देश का आर्थिक विकास होता है। इसलिए जिस स्थान पर यातायात और संचार के साधनों की उपलब्धि होती है लोग वहाँ पर रहना पसंद करते हैं।

5. ऊर्जा की उपलब्धि-मानवीय साधनों के विकास के लिए बिजली ऊर्जा शक्ति अति आवश्यक है। इसलिए जिस स्थान पर सस्ती ऊर्जा की उपलब्धि होती है वहाँ लोग अधिक रहना पसंद करते हैं।

6. राजनैतिक तथा सामाजिक सुरक्षा-जिस स्थान पर लड़ाई तथा युद्ध का डर होता है वहाँ लोग कम रहते हैं पर जिस देश की सरकार ने सामाजिक सुरक्षा का भरोसा दिलाया होता है उस स्थान की जनसंख्या अधिक होगी।

7. रोज़गार के अवसरों की उपलब्धि- इसके कारण ही बहुत सारे लोग गाँव को छोड़ कर शहरों की तरफ आकर्षित होते हैं।

प्रश्न 2.
वह कौन-सी समस्याएँ हैं जिनका सामना पहले दर्जे के शहरों के नागरिक, छठे दर्जे के शहरों के नागरिकों से भी अधिक करते हैं ?
उत्तर-
जिन स्थानों की जनसंख्या 1 लाख अथवा इससे अधिक होती है, वे पहले दर्जे के क्षेत्र हैं तथा जिनकी जनसंख्या 5000 से कम होती है, वे छठे दर्जे के क्षेत्रों में आते हैं। कुछ समस्याएँ जिनका सामना पहले दर्जे के शहरों के नागरिक छठे दर्जे के शहरों के नागरिकों से अधिक करते हैं, इस प्रकार हैं—

  1. जनसंख्या विस्फोट असहनीय-जब लोग बेहतरीन अवसरों की खोज में अपना शहर छोड़कर दूसरे शहर में जाकर निवास करते हैं तब उन शहरों की जनसंख्या बढ़ जाती है जिसके कारण रहने के स्थान की कमी हो जाती है, जो आजकल हमारे पहले दर्जे के शहर सहन कर रहे हैं। इसके कारण लोगों को गंदगी वाली हालात में मजबूरी के कारण रहना पड़ता है।
  2. गंदी बस्तियों का जन्म-पहले दर्जे के शहरों में जनसंख्या की वृद्धि के कारण बस्तियों का प्राकृतिक पर्यावरण बिगड़ने लगता है। अधिक भीड़ के कारण गंदगी फैलती है और बस्तियाँ गंदी होनी शुरू हो जाती हैं।
  3. पीने वाले पानी की समस्या-अधिक जनसंख्या के कारण पीने वाले पानी की समस्या बढ़ जाती है।
  4. प्रदूषण की समस्या-जनसंख्या के बढ़ाव के कारण अधिक-से-अधिक उद्योग विकसित होते हैं तथा अधिक-से-अधिक वाहन आने शुरू होते हैं। इसके कारण प्रदूषण की समस्या उत्पन्न है।
  5. अपराधों की संख्या में बढ़ाव-जिन लोगों को काम के लिए अच्छे अवसर नहीं मिलते वे गलत रास्ते अपना लेते हैं जिसके कारण अपराधों की संख्या बढ़ जाती है।

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प्रश्न 3.
जनसंख्या प्रवास (Migration) के कारण कौन से हैं ?
उत्तर-
किसी क्षेत्र की जनसंख्या की तबदीली को जनसंख्या प्रवास बहुत प्रभावित करती है। प्रवास स्थाई या अस्थाई दो रूप में हो सकती है। जनसंख्या प्रवास के मुख्य कारण नीचे दिए अनुसार हैं—

  1. आर्थिक कारण-आर्थिक कारण स्थान बदली के लिए जिम्मेदार कारणों में सबसे अधिक प्रमुख हैं। जैसे कि—
    • क्षेत्र की आर्थिक दशा कैसी है और क्षेत्र के औद्योगिक विकास का परिदृश्य किस प्रकार का है।
    • क्षेत्र का धरातल तथा मिट्टी की किस्म खेती योग्य है या नहीं।
    • भूमि पर मानव के स्वामित्व का आकार।
    • रोज़गार के अवसर क्षेत्र में कैसे हैं।
    • क्षेत्र में यातायात तथा संचार के साधन किस प्रकार के हैं।
  2. सामाजिक कारण-सामाजिक कारण भी प्रवास में अहम भूमिका निभाते हैं जैसे कि
    • शादी के बाद औरतें अपने माता-पिता का घर छोड़कर पति के घर चली जाती हैं।
    • बढ़िया और उच्च शिक्षा के लिए बच्चे एक से दूसरे स्थान पर चले जाते हैं।
    • जिस स्थान पर धार्मिक आजादी होती है, लोग वहाँ अधिक जाते हैं।
    • सरकारी नीति भी एक बड़ा सामाजिक कारण है।
  3. जनांकण कारण-जनांकण एक महत्त्वपूर्ण कारक है, जैसे कि आयु कारक, स्थान बदली करने वाले लोगों की उम्र (आयु) कितनी है।
  4. राजनैतिक कारण-जिस क्षेत्र की सरकार लोगों की उम्मीदों पर खरी उतरती है, उस स्थान पर लोग अधिक रहना पसंद करेंगे।
  5. ऐतिहासिक कारण-कई प्रकार के ऐतिहासिक कारक भी लोगों की प्रवास पर प्रभाव डालते हैं। लोग अपने धर्म के साथ सम्बन्धित स्थान अथवा ऐतिहासिक महत्त्व वाले स्थानों पर रहना पसंद करते हैं।

प्रश्न 4.
जनांकण परिवर्तन सिद्धान्त के अलग-अलग चरणों की चर्चा करो।
उत्तर-
जनांकण परिवर्तन सिद्धान्त डब्ल्यू० एस० थोपसन और फ्रैंक नोटसटीन द्वारा पेश किया गया। जनांकण परिवर्तन सिद्धान्त के अलग-अलग चरणों का वर्णन नीचे दिए अनुसार है—

1. पहला चरण-इस चरण में जनसंख्या कम होती है तथा आ तौर पर जनसंख्या स्थिर रहती है। दोनों ही जन्म दर तथा मृत्यु दर अधिक होती हैं, पर कई बार देश में खुशहाली के कारण मृत्यु दर कम हो जाती है। पर इसके विपरीत कई बार मृत्यु दर लगातार प्राकृतिक आपदाओं के कारण बढ़ जाती है। लोगों का मुख्य रोज़गार कृषि है। जनसंख्या की वृद्धि कम या नकारात्मक होती है। लोगों के पास तकनीकी ज्ञान की कमी होती है, अधिकतर लोग अशिक्षित होते हैं।

2. दूसरा चरण-उद्योगों के विकास के कारण लोगों का स्वास्थ्य और रहन-सहन अच्छा हो गया है। खास तौर पर जिन शहरों में सफाई और स्वास्थ्य के विकास के तरफ अधिक ध्यान दिया जाता है, वहाँ लोगों का रहनसहन ज्यादा सुधर गया है। इस धारणा का महत्त्व यह है कि उपर्युक्त सेवाएँ, भोजन सुविधा, सफाई प्रबंध इत्यादि के कारण मृत्यु दर में कमी आती है। इस तरह जन्म दर और मृत्यु दर के बीच फासला बढ़ने के कारण जनसंख्या में तेजी के साथ वृद्धि होती है।

3. तीसरा चरण-तीसरा और आखिरी चरण वह चरण है, जहाँ जन्म दर अथवा मृत्यु दर दोनों ही कम हो जाती हैं। जनसंख्या वृद्धि या तो स्थिर होती है या फिर बहुत ज्यादा कम हो जाती है। इस चरण में साक्षरता दर काफी ऊँची हो जाती है। औद्योगिक विकास के कारण शहरीकरण में वृद्धि होती है। यू० एस० ए०, कनाडा, यूरोप इत्यादि देश इस चरण पर हैं। पर भारत के लिए इस चरण को प्राप्त करना एक अन्तिम उद्देश्य है। इस चरण में क्योंकि लोग शिक्षित और सूझवान हैं, मृत्यु दर और जन्म दर दोनों ही कम होने के कारण जनसंख्या भी । कम होनी शुरू हो जाती है।

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प्रश्न 5.
साक्षरता दर क्या है ? इस पक्ष से हमारे राज्यों की स्थिति कितनी अच्छी है ?
उत्तर-
साक्षरता-एक व्यक्ति जो लिख और पढ़ सकता है और उसकी उम्र 7 साल है, उसे साक्षर माना जाता है। शब्दकोष के अनुसार, किसी भी भाषा में पढ़, लिख तथा समझ लेने की योग्यता को साक्षरता कहते हैं। किसी देश के मानव विकास का मापक साक्षरता है। साक्षरता के कारण ही मानव की सूझ-बूझ का विकास होता है।
साक्षरता के अनुसार दुनिया के पहले दस देश निम्नलिखित हैं—

देश साक्षरता दर (प्रतिशत) युवा साक्षरता दर (आयु 15-24)
चीन 94.4% 99.7%
श्री लंका 92.6% 98.8%
म्यांमार 93.1% 96.3%
भारत 74.04% 90.2%
नेपाल 64.7% 86.9%
पाकिस्तान 60.00% 74.8%
बंगला देश 61.5% 83.2%

भारत में सबसे अधिक साक्षरता दर केरल (94%) में है। इसके बाद क्रमवार मिजोरम (91.3%), गोआ (88.70%) आदि हैं और बिहार में (61.80%) सबसे कम साक्षरता दर है। पंजाब की साक्षरता दर 75.8% है।

Geography Guide for Class 12 PSEB मानवीय संसाधन-जनसंख्या और इसमें परिवर्तन Important Questions and Answers

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर (Objective Type Question Answers)

A. बहु-विकल्पी प्रश्न :

प्रश्न 1.
21वीं सदी की शुरुआत में संसार की जनसंख्या कितनी थी ?
(A) 4 बिलियन
(B) 6 बिलियन
(C) 8 बिलियन
(D) 10 बिलियन।
उत्तर-
(B)

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प्रश्न 2.
सन् 2011 के आंकड़ों के मुताबिक भारत का जनसंख्या घनत्व कितना है ?
(A) 77 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०
(B) 322 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०
(C) 382 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०
(D) 383 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०।
उत्तर-
(C)

प्रश्न 3.
किस देश का जनसंख्या घनत्व सबसे अधिक हैं ?
(A) चीन
(B) भारत
(C) सिंगापुर
(D) इण्डोनेशिया।
उत्तर-
(C)

प्रश्न 4.
हर साल देश की जनसंख्या में कितने लोग शामिल होते हैं ?
(A) 6 करोड़
(B) 7 करोड़
(C) 8 करोड़
(D) 10 करोड़।
उत्तर-
(C)

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प्रश्न 5.
विश्व जनसंख्या दिवस कब मनाया जाता है ?
(A)7 जुलाई
(B) 11 जुलाई ,
(C) 5 मई
(D) 10 फरवरी।
उत्तर-
(B)

प्रश्न 6.
निम्नलिखित में से कौन-सा जनसंख्या तबदीली निर्धारक नहीं है ?
(A) जन्म दर
(B) मृत्यु दर
(C) स्थान बदली
(D) मध्य काल।
उत्तर-
(D)

प्रश्न 7.
निम्नलिखित महाद्वीपों में किस महाद्वीप में लिंगानुपात कम हैं ?
(A) यूरोप
(B) एशिया
(C) अमेरिका
(D) ऑस्ट्रेलिया।
उत्तर-
(C)

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प्रश्न 8.
संसार का औसत लिंगानुपात कितना है ?
(A) 970
(B) 980
(C) 990
(D) 910
उत्तर-
(B)

प्रश्न 9.
2011 की जनांकिकी के अनुसार भारत की कुल साक्षरता दर कितनी है ?
(A) 70%
(B) 73%
(C) 72%
(D) 71%
उत्तर-
(B)

प्रश्न 10.
पहले दर्जे के शहर कौन-से हैं ?
(A) जहां जनसंख्या 1 लाख से ज्यादा हो
(B) जहां जनसंख्या 50,000 तक हो
(C) जहां जनसंख्या 99,000 तक हो
(D) जहां जनसंख्या 5,000 है।
उत्तर-
(A)

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प्रश्न 11.
बुढ़ापा जनसंख्या की आयु किससे अधिक है ?
(A) 40 साल
(B) 50 साल
(C) 45 साल
(D) 60 साल।
उत्तर-
(D)

प्रश्न 12.
भारत में काम किस आयु वर्ग के साथ सम्बन्धित है ?
(A) 17-20
(B) 0-15
(C) 0-14
(D) 15-59.
उत्तर-
(D)

B. खाली स्थान भरें :

  1. ………… पृथ्वी पर सभी आर्थिक क्रियाओं का धुरा माना जाता है।
  2. केवल उत्तर प्रदेश में भारत की ………. जनसंख्या निवास करती है।
  3. 1947 में ……….. के विभाजन के कारण जनसंख्या की वृद्धि कम हो गई।
  4. संसार की साक्षरता दर ……… है।
  5. ………….. से कम जनसंख्या वाले शहर छठे दर्जे के शहर हैं।

उत्तर-

  1. मानव,
  2. 16.4%,
  3. भारत और पाकिस्तान,
  4. 86.3%
  5. 5,000.

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C. निम्नलिखित कथन सही (✓) हैं या गलत (✗):

  1. अरुणाचल प्रदेश की जनसंख्या का घनत्व 110 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है।
  2. मृत्यु दर में तबदीली किसी स्थान की जनसंख्या में तबदीली हो सकती है।
  3. ऊर्जा की उपलब्धि किसी स्थान की जनसंख्या को प्रभावित नहीं करती।
  4. शहरी क्षेत्रों में बड़े दर्जे पर स्थान बदली गैर योजनाबंदी तथा असंतुलित विकास का कारण बनती है।
  5. पंजाब का लिंग अनुपात 893 है।

उत्तर-

  1. गलत,
  2. सही,
  3. गलत,
  4. सही,
  5. सही।

II. एक शब्द/एक पंक्ति वाले प्रश्नोत्तर (One Word/Line Question Answers) :

प्रश्न 1.
किस साधन को देश का कीमती स्त्रोत माना जाता है ?
उत्तर-
मनुष्य को।

प्रश्न 2.
2011 की जनांकिकी के अनुसार भारत की औसत जनसंख्या कितनी है ?
उत्तर-
121.02 करोड़।

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प्रश्न 3.
जनसंख्या और क्षेत्र के आधार पर भारत देश का कौन-सा स्थान है ?
उत्तर-
क्षेत्र के आधार पर सातवां और जनसंख्या के आधार पर दूसरा स्थान है।

प्रश्न 4.
सबसे पहली बार भारत में (जनगणना) जनांकिकी कब शुरू हुई ?
उत्तर-
1881 में।

प्रश्न 5.
भारत की जनसंख्या का घनत्व क्या है ?
उत्तर-
382 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०

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प्रश्न 6.
भारत में गाँवों की संख्या कितनी है ?
उत्तर-
2011 की जनगणना के अनुसार 650,244 गाँव भारत में हैं।

प्रश्न 7.
भारत में किस राज्य की सबसे अधिक जनसंख्या तथा किस राज्य की जनसंख्या कम है ?
उत्तर-
उत्तर प्रदेश में अधिक तथा सिक्किम में कम जनसंख्या है।

प्रश्न 8.
जनसंख्या वृद्धि से आपका क्या अर्थ है ?
उत्तर-
कुछ कारणों के कारण जब किसी स्थान की जनसंख्या में वृद्धि हो जाती है, उसे जनसंख्या की वृद्धि कहते हैं।

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प्रश्न 9.
भारत में लिंग अनुपात का क्या अर्थ है ?
उत्तर-
एक हजार पुरुषों के पीछे औरतों की संख्या को लिंग अनुपात कहा जाता है।

प्रश्न 10.
भारत के किस राज्य में अधिक तथा किस राज्य में कम लिंग अनुपात है ?
उत्तर-
अधिक केरल में और कम हरियाणा में।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
देश में जनसंख्या का विभाजन एक समान नहीं है, इस कथन की व्याख्या करो।
उत्तर-
प्राकृतिक, आर्थिक तथा सामाजिक भेद के कारण देश की 90% जनसंख्या देश के सिर्फ 10% क्षेत्र में रहती हैं। देश की सबसे अधिक जनसंख्या वाले पहले 10 देशों में 60% तक की देश की जनसंख्या समाई हुई है। इसलिए हम कह सकते हैं कि देश की जनसंख्या का विभाजन एक समान नहीं है।

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प्रश्न 2.
जनसंख्या के घनत्व से क्या अभिप्राय है ? इसको किस तरह मापा जा सकता है ?
उत्तर-
जनसंख्या घनत्व-किसी प्रदेश की जनसंख्या और भूमि के क्षेत्रफल के अनुपात को जनसंख्या घनत्व कहते हैं। यह घनत्व प्रति वर्ग मील या प्रति वर्ग किलोमीटर द्वारा प्रकट किया जाता है।
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प्रश्न 3.
जनसंख्या घनत्व का विश्लेषण करने के लिए भारत को किन श्रेणियों में विभाजित किया जाता है ?
उत्तर-
जनसंख्या घनत्व का विश्लेषण करने के लिए भारत को तीन श्रेणियों में विभाजित किया जाता है—

  1. अधिक जनसंख्या घनत्व वाले क्षेत्र
  2. मध्यम जनसंख्या घनत्व वाले क्षेत्र
  3. कम जनसंख्या घनत्व वाले क्षेत्र।

प्रश्न 4.
जनसंख्या वृद्धि से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
जनसंख्या वृद्धि का अर्थ है किसी खास क्षेत्र में, किसी खास समय में जब जनसंख्या में वृद्धि होती है, उसे जनसंख्या की वृद्धि कहते हैं।

प्रश्न 5.
कच्ची जन्म दर क्या है ?
उत्तर-
जब किसी स्थान की जन्म दर ऊंची होती है, तब जनसंख्या में वृद्धि हो जाती है। इसे जन्म दर की कच्ची जन्म दर कहते हैं। इसको इस प्रकार मापा जाता है—
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प्रश्न 6.
कच्ची मृत्यु दर से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
जब किसी स्थान की मृत्यु दर ऊँची हो जाती है, तब जनसंख्या में कमी हो जाती है। मृत्यु दर को कच्ची मृत्यु दर भी कहते हैं। इसे इस प्रकार मापा जाता है—
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प्रश्न 7.
लिंग अनुपात से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर-
भारत में लिंग अनुपात का अर्थ है कि 1000 मर्दो के पीछे कितनी औरतों की संख्या है। इसको नीचे दिए गए अनुसार निकाला जाता है।
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प्रश्न 8.
जनसंख्या की बनावट से आपका क्या अर्थ है ?
उत्तर-
जनसंख्या की बनावट का अर्थ है जनांकन की संरचना। इसमें आयु, लिंग, साक्षरता, रोजगार, जीवनकाल इत्यादि शामिल हैं।

प्रश्न 9.
आयु संरचना का क्या महत्त्व है ?
उत्तर-
जनसंख्या में कौन-कौन से आयु वर्ग के लोग हैं, को आयु संरचना कहते हैं। यह जनसंख्या बनावट का बड़ा महत्त्वपूर्ण अंग है। इस प्रकार हम किसी स्थान में काम करने वाले लोगों की संख्या कितनी है, के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इस द्वारा हम भविष्य में होने वाली जनसंख्या का भी अंदाजा लगा सकते हैं।

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प्रश्न 10.
भारत में अधिक जनसंख्या वाले क्षेत्र कौन-से हैं ? अधिक जनसंख्या का कोई एक कारण बताओ।
उत्तर-
भारत में कुल 650,244 गाँव हैं। भारत में हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, उड़ीसा, बिहार, उत्तर प्रदेश में 80% ग्रामीण जनसंख्या रहती है। उस जनसंख्या का मुख्य कारण यह है कि इन लोगों का मुख्य रोज़गार कृषि है।

प्रश्न 11.
भारत की जनसंख्या में बहुत असमानता है ? उदाहरण देकर इस कथन को समझाओ।
उत्तर-
भारत की जनसंख्या में बहुत असमानता है, क्योंकि—

  1. भारत के लोग मुख्य रूप में कृषि पर आश्रित हैं इसलिए समतल क्षेत्रों में अधिक लोग रहते हैं। मरुस्थली तथा जंगली क्षेत्रों में जनसंख्या कम है।
  2. बड़े राज्यों में जनसंख्या अधिक है।
  3. नदियों के नज़दीक क्योंकि फसलों के लिए पानी आसानी के साथ मिल जाता है, लोग यहां पर अधिक रहते हैं।

प्रश्न 12.
भारत के उन क्षेत्रों के नाम बताओ जिनमें जनसंख्या कम है और इसके क्या कारण हैं ?
उत्तर-
जिस स्थान पर जनसंख्या घनत्व 200 व्यक्ति प्रति वर्ग कि० मी० है, वहां पर जनसंख्या कम होती है। ये स्थान हैं—

  1. राजस्थान
  2. मध्य प्रदेश
  3. आंध्र प्रदेश
  4. पूर्वी कर्नाटक
  5. पश्चिमी उड़ीसा
  6. छत्तीसगढ़।

कारण-कम जनसंख्या के कारण हैं—

  1. कम-उपजाऊ भूमि
  2. कम वर्षा वाले क्षेत्र
  3. मरुस्थली क्षेत्र
  4. पानी की कमी इत्यादि।

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प्रश्न 13.
पतिकर्ष कारक (Push Factors) कौन-से हैं ?
उत्तर-
जिन कारकों के कारण लोग अपने स्थानों को छोड़कर कहीं और चले जाते हैं उन्हें प्रतिकर्ष कारक कहते हैं। जैसे कि गरीबी, रोज़गार का न होना, जनसंख्या वृद्धि, आर्थिक संकट, शादी, सुरक्षित पर्यावरण, चिकित्सा सुविधा इत्यादि।

प्रश्न 14.
अपकर्ष कारक (Pull Factors) कौन से हैं ?
उत्तर-
जिन कारकों के कारण लोग किसी अच्छे रोज़गार की तलाश में, चिकित्सा सुविधा, उपजाऊ भूमि, सुरक्षित पर्यावरण इत्यादि से प्रभावित होकर चले जाएं, उन्हें अपकर्ष कारक कहते हैं।

प्रश्न 15.
लिंग अनुपात के कम होने के मुख्य कारण क्या हैं ?
उत्तर-
लिंग अनुपात के कम होने के मुख्य कारण नीचे दिए अनुसार हैं—

  1. लड़कियों के मुकाबले लड़कों की जन्म दर ज्यादा है।
  2. लड़कियों को पेट में ही खत्म करवा दिया जाता है।
  3. लड़के को प्राप्त करने की इच्छा।
  4. लिंग के बारे में पहले जांच करवाना।

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प्रश्न 16.
जनसंख्या की वृद्धि दर (Growth Rate) से आपका क्या अर्थ है ?
उत्तर-
जनसंख्या की वृद्धि असल संख्या में या प्रतिशत में दिखाई जाती है तथा जब जनसंख्या की वृद्धि प्रतिशत में दिखाई जाती हो तब उसे जनसंख्या की वृद्धि दर (Growth Rate) कहते हैं।

प्रश्न 17.
भारत के मिलियन कस्बों (Million Towns) के नाम बताओ।
उत्तर-
कोलकाता, मुंबई, दिल्ली, चेन्नई, बंगलौर, अहमदाबाद, हैदराबाद, पूणे, कानपुर, नागपुर, लखनऊ।

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
अधिक जनसंख्या, कम जनसंख्या तथा साधारण जनसंख्या वाले क्षेत्रों में जनसंख्या घनत्व कितना मिलता है ? हर श्रेणी की एक-एक उदाहरण दो।
उत्तर-
हमारे संसार में जनसंख्या का वितरण समान नहीं है। कई क्षेत्र ऐसे हैं यहाँ जनसंख्या बहुत अधिक है तथा दूसरे तरफ कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जहाँ पर जनसंख्या साधारण है और कुछ ऐसे भी हैं जो क्षेत्र खाली हैं।

  1. अधिक जनसंख्या घनत्व वाले क्षेत्र-इन क्षेत्रों में जनसंख्या का घनत्व 400 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० है। इन क्षेत्रों में बिहार, पश्चिमी बंगाल, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, झारखंड इत्यादि आ जाते हैं।
  2. साधारण जनसंख्या घनत्व वाले क्षेत्र-इन क्षेत्रों में जनसंख्या का घनत्व 200 से 400 व्यक्ति प्रतिवर्ग कि०मी० है। जैसे कि असम, गोआ, त्रिपुरा, कर्नाटक इत्यादि।
  3. कम जनसंख्या घनत्व वाले क्षेत्र-इन क्षेत्रों में जनसंख्या का घनत्व 200 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० है। जैसे ‘कि अरुणाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश इत्यादि।

प्रश्न 2.
जनसंख्या वृद्धि तथा जनसंख्या घनत्व में क्या फर्क है ?
उत्तर-
जनसंख्या वृद्धि-जनसंख्या वृद्धि का अर्थ है कि किसी खास समय में किसी क्षेत्र के लोगों की संख्या कितनी बढ़ गई है। यह किसी देश के विकास में योगदान डालती है। 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या 1,21,01,93,422 थी।
जनसंख्या घनत्व-यह प्रतिशत में पेश की जाती है। किसी क्षेत्र के एक वर्ग कि०मी० में कितने लोग मिलते हैं, उसको जनसंख्या घनत्व कहते हैं। 2011 के आंकड़ों के अनुसार भारत का जनसंख्या घनत्व 382 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० था। यह किसी क्षेत्र के जनांकन के गुणों को प्रभावित करता है।

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प्रश्न 3.
जनसंख्या की वृद्धि क्या है ? इसकी किस्में बताओ तथा इसको किस प्रकार संयोजित किया जा सकता है ?
उत्तर-
जनसंख्या की वृद्धि-किसी क्षेत्र में जनसंख्या की वृद्धि और जनसंख्या में हुई तबदीली को जनसंख्या की वृद्धि कहते हैं। इसको संयोजित निम्नलिखितानुसार किया जाता है—
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जनसंख्या जनसंख्या की वृद्धि को तीन प्रकार विभाजित किया जा सकता है—

  1. प्राकृतिक जनसंख्या की वृद्धि-किसी क्षेत्र में किसी खास समय पर हुए जन्म तथा मृत्यु में आपसी असमानता को जनसंख्या की प्राकृतिक वृद्धि कहते हैं।
  2. सकारात्मक जनसंख्या की वृद्धि-अगर किसी स्थान की जन्म दर उस स्थान की मृत्यु दर से अधिक है या कुछ लोग किसी और स्थान से आकर प्रवास करते हैं तो उसे सकारात्मक जनसंख्या की वृद्धि कहते हैं।
  3. नकारात्मक जनसंख्या की वृद्धि-अगर किसी स्थान की मृत्यु दर उस स्थान की जन्म दर से अधिक हो जाए तथा वहाँ पर कुछ लोग प्रवास कर गए हों उसे नकारात्मक जनसंख्या की वृद्धि कहते हैं।

प्रश्न 4.
किस प्रकार के स्थानों पर लिंग अनुपात नकारात्मक है। इसके कोई चार कारण बताओ।
उत्तर-
जिन क्षेत्रों में लिंग को लेकर भेदभाव व्यापक है, उन क्षेत्रों में लिंग अनुपात नकारात्मक है। इसके कारण निम्नलिखित अनुसार हैं—

  1. शिशु हत्या
  2. भ्रूण हत्या
  3. औरत के खिलाफ घरेलू हिंसा
  4. औरत का निम्न सामाजिक-आर्थिक स्तर।

प्रश्न 5.
संसार में भारत का जनसंख्या के आकार तथा घनत्व के तौर पर क्या स्थान है ?
उत्तर-
भारत संसार के अधिक जनसंख्या वाले देशों में एक है। इसकी जनसंख्या 175 प्रतिशत है तथा आकार के अनुसार भारत दुनिया का सातवां बड़ा देश है। यह संसार के कुल क्षेत्रफल का 2.4% हिस्सा है।
भारत की जनसंख्या उत्तरी अमेरिका, दक्षिण अमेरिका तथा ऑस्ट्रेलिया की कुल जनसंख्या से दोगुणी है। इससे पता चलता है कि भारत की जनसंख्या बहुत अधिक है।

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प्रश्न 6.
साक्षरता दर क्या है ? देश के भिन्न-भिन्न हिस्सों में साक्षरता दरों में भिन्नता क्यों पाई जाती है ?
उत्तर-
साक्षरता दर-सात साल की आयु तक के निवासी जो लिख तथा पढ़ सकते हैं की संख्या या प्रतिशत जनसंख्या को साक्षरता दर कहते हैं। देश के भिन्न-भिन्न हिस्सों में साक्षरता दरों में भिन्नता आर्थिक विकास, शहरीकरण तथा लोगों के रहने के ढंग-तरीकों के कारण होती है। अशिक्षित तथा अनपढ़ लोगों से देश के विकास का आवश्यक स्तर प्राप्त नहीं हो सकता तथा उसे साक्षरता दर भी कम होती है।

प्रश्न 7.
संसार की जनसंख्या में रहने के स्थान के आधार पर दो हिस्सों में विभाजन करके बताओ कि दोनों हिस्सों का रहन-सहन एक-दूसरे से क्यों अलग है ?
उत्तर-
संसार की जनसंख्या को निवास के आधार पर दो हिस्सों में विभाजित किया जा सकता है—

  1. ग्रामीण जनसंख्या
  2. शहरी जनसंख्या

ग्रामीण अथवा शहरी जनसंख्या में भिन्नतायें—

  1. सामाजिक हालातों में रहन-सहन ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों का अलग होता है।
  2. ग्रामीण जनसंख्या की आरंभिक गतिविधियां जैसे कि कृषि इत्यादि में लगी होती हैं तथा शहरी जनसंख्या टरशरी गतिविधियों इत्यादि में लगी होती है।
  3. ग्रामीण क्षेत्रों में जनसंख्या का घनत्व कम होता है तथा शहरी क्षेत्रों में जनसंख्या का घनत्व अधिक होता है।

प्रश्न 8.
जनसंख्या अथवा विकास के आपसी संबंध को बयान करो।
उत्तर-
जनसंख्या अथवा विकास चिंतन बहुत आवश्यक है। जब किसी स्थान पर जनसंख्या की वृद्धि होती है तो उस स्थान की भूमि और खान-पान के पदार्थों पर दबाव अधिक बढ़ जाता है। जनसंख्या वृद्धि विकास के लिए एक नकारात्मक घटक है क्योंकि यह इसकी गुणवत्ता पर आधारित है। जनसंख्या की वृद्धि अन्य स्रोतों में एक असंतुलन बना देती है तथा साधन जैसे कि तकनीक, शिल्प विज्ञान इस संतुलन को प्रभावित करते हैं। इसलिए हम कह सकते हैं कि विकास सामाजिक, आर्थिक, तकनीकी तथा राजनीतिक कारकों पर निर्भर करता है। एक नया मापक मानव विकास सूचक (HDI) इसको मापने के लिए लाया गया है।

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प्रश्न 9.
उम्र संरचना क्या है ? इसका वितरण किस प्रकार किया जाता है ?
उत्तर-
किसी देश, शहर, इलाके, क्षेत्र में हर उम्र के लोग रहते हैं। कह सकते हैं कि 0 से 100 साल तक के लोग किसी देश में रहते हैं इसको खास वर्गों में विभाजित किया गया है जिसको आयु संरचना कहते हैं। यह वितरण निम्नलिखित अनुसार है—

  1. 0-14 साल-बच्चे जो स्कूल पढ़ते है और सम्पूर्ण रूप से अपने माता-पिता पर निर्भर करते हैं।
  2. 15-59 साल-जनसंख्या में वे लोग जो कोई-न-कोई काम करते हैं और यह संख्या मज़दूरों में आती है।
  3. 60 या 60 साल से ऊपर-इस जनसंख्या में बूढ़े लोग आते हैं जो अपने बच्चों पर निर्भर करते हैं।

प्रश्न 10.
शहरीकरण क्या है ? शहरीकरण द्वारा मुख्य समस्या कौन-सी सामने आ रही है ?
उत्तर-
गाँव के अधिकतर लोग रोज़गार के अवसरों की तलाश में या अच्छी सुविधाओं की तलाश में शहरों की तरफ आकर्षित होते हैं। स्पष्ट शब्दों में जब गाँव या छोटे कस्बों के लोग बेहतरीन अवसरों की तलाश में किसी जगह रहना शुरू करते हैं तथा धीरे-धीरे उस जगह पूरा विकास हो जाता है, उसे शहरीकरण कहते हैं। शहरीकरण के कारण लोगों को शहरों में नीचे लिखी समस्याओं का सामना करना पड़ता है :

  1. स्थान तथा मकानों की कमी की समस्या, जिस कारण गंदी बस्ती का जन्म होता है।
  2. प्रदूषण की समस्या आम बन जाती है।
  3. पीने के लिए शुद्ध पानी की कमी पड़ जाती है।
  4. यातायात की समस्या।

प्रश्न 11.
शहरी योजनाबंदी से आपका क्या अर्थ है ?
उत्तर-
शहरों में रोज़गार के बढ़िया मौके, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं तथा शिक्षा के साधनों के कारण गाँव तथा छोटे कस्बों के लोगों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है जिस कारण शहरों में समस्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इस समस्या पर कंट्रोल करने के लिए सरकारी की तरफ से कुछ मुख्य योजनाओं की आवश्यकता है। इसलिए किसी नए तथा पुराने शहर के विकास के लिए शहरों को जो सुविधायें दी जा रही हैं वह शहर योजनाबंदी के लिए उठाया गया एक अच्छा कदम है। इस तरह से सही योजनाबंदी के कारण शहरों के लोगों के लिए ज़रूरी सुविधायें उपलब्ध करवाई जा सकती हैं।

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प्रश्न 12.
उन कारणों के बारे में बताओ जिनके कारण किसी इलाके का जनसंख्या घनत्व कम होता है।
या
किसी इलाके का जनसंख्या घनत्व कम होने के क्या कारण हैं ?
उत्तर-
किसी इलाके की जनसंख्या घनत्व कम होने के निम्नलिखित कारण हैं—

  1. किसी जगह पर बहुत ठंडा या बहुत गर्म मौसम।
  2. ध्रुवीय क्षेत्रों में जमा हुआ कोहरा।
  3. खनिज पदार्थों तथा कारखानों की कमी।
  4. यातायात तथा संचार के साधनों की कमी।
  5. रेतली तथा पथरीली मिट्टी।

निबंधात्मक प्रश्न (Essay Type Questions)

प्रश्न 1.
जनसंख्या घनत्व का क्या अर्थ है ? जनसंख्या घनत्व कौन-कौन से तत्त्वों पर निर्भर करता है ? उदाहरण दो।
उत्तर-
जनसंख्या घनत्व (Density of Population)-किसी स्थान की जनसंख्या तथा भूमि के क्षेत्रफल के अनुपात को जनसंख्या का घनत्व कहते हैं। इससे पता चलता है कि किसी स्थान में लोगों की संख्या कितनी घनी है। इसको प्रति वर्ग कि०मी० द्वारा प्रकट किया जाता है। किसी स्थान में एक वर्ग कि०मी० के दायरे में कितने लोग रहते हैं इसे जनसंख्या का घनत्व कहते हैं। जब हमें किन्हीं दो देशों की जनसंख्या की तुलना करनी होती है तब वह जनसंख्या के घनत्व की सहायता से ही की जाती है। इसका एक मुख्य कारण यह है कि कुछ क्षेत्रफल में पर्वतीय भाग, दलदल, जंगली प्रदेश और मरुस्थल भी शामिल कर लिए जाते हैं, चाहे इन प्रदेशों में मनुष्य निवास बिल्कुल संभव न हो।
जनसंख्या का घनत्व अक्सर बेहतर सेवाओं तथा सुविधाओं पर निर्भर है। प्रकृति की तरफ से प्राप्त सुविधा मुख्य स्थान रखती है पर इसके अतिरिक्त भौतिक, सामाजिक, राजनैतिक तथा ऐतिहासिक कारण भी जनसंख्या के घनत्व को प्रभावित करते हैं।
(A) भौतिक कारक (Natural Factors)—

1. धरातल (Land)–धरातल जनसंख्या के घनत्व पर प्रभाव डालता है। धरातल को आगे मरुस्थल, पर्वत, मैदान, पठार, समतल इत्यादि भागों में विभाजित किया जाता है। पर्वतीय, मरुथलीय भागों में जलवायु सख्त, उपजाऊ धरती की कमी तथा यातायात के साधनों की कमी होती है जिस कारण वहां पर जनसंख्या का घनत्व कम होता है। मैदानी तथो समतल क्षेत्रों में कृषि, जल सिंचाई, यातायात इत्यादि सुविधा होने के कारण जनसंख्या बढ़ जाती है। हमारे देश की आबादी मुख्य रूप में कृषि पर निर्भर है। इसलिए 50% जनसंख्या संसार के मैदानी क्षेत्रों में रहती है। भारत के गंगा के मैदान, चीन के हवांग हो मैदान विश्व में घनी जनसंख्या के घनत्व वाले क्षेत्र हैं। पर अमेजन घाटी में दलदल भूमि के कारण कम जनसंख्या है।

2. जलवायु (Climate)-तापमान तथा वर्षा जनसंख्या के घनत्व पर स्पष्ट प्रभाव डालते हैं। अधिक ठण्डे या अधिक गर्म क्षेत्रों में कम जनसंख्या होती है। इसीलिए संसार के उष्ण तथा शीत मरुस्थल व ध्रुवीय प्रदेश लगभग खाली हैं। सहारा मरुस्थल, अंटार्कटिका महाद्वीप तथा टुण्ड्रा प्रदेश में कम जनसंख्या मिलती है। सम-शीतोष्ण तथा मानसूनी जलवायु के प्रदेशों में घनी जनसंख्या मिलती है। यहां पर्याप्त वर्षा फसलों के उपयुक्त होती है। पश्चिमी यूरोप तथा दक्षिणी पूर्वी एशिया में उत्तम जलवायु के कारण जनसंख्या का भारी केन्द्रीयकरण हुआ है। मध्य अक्षांशों में शीत उष्ण जलवायु के कारण ही संसार की कुल जनसंख्या का 4/5 भाग निवास करता है।

3. मिट्टी (Soil)–भारत की आबादी कृषि पर अधिक आधारित है। कृषि के लिए उपजाऊ मिट्टी का होना अधिक ज़रूरी है। मानसूनी एशिया की नदी घाटियों की तटीय मिट्टी में चावल का अधिक उत्पादन होने के कारण अधिक जनसंख्या मिलती है।

4. खनिज पदार्थ (Minerals)—बहुत से उद्योगों को चलाने के लिए तथा उनके विकास के लिए खनिज पदार्थ को महत्त्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए जिस जगह पर कोयला, लोहा, तेल, सोना इत्यादि खनिज पदार्थ मिलते हैं वहाँ पर जनसंख्या का घनत्व अधिक होगा। भारत में दामोदर घाटी में खनिजों के विशाल भण्डार के कारण घनी जनसंख्या है।

5. शक्ति के साधन (Power Resources)-जिन क्षेत्रों में शक्ति से चलने वाले साधनों का विकास होता है उस स्थान पर घनत्व अधिक होता है।

6. नदियां अथवा जल प्राप्ति (Rivers and Water Supply)-प्राचीन काल से ही नदियों का जल सभ्यताओं के विकास की मुख्य कड़ी रहा है। इन्हें पीने का जल, सिंचाई के लिए, उद्योग आदि में प्रयोग में लाया जाता है। यही कारण है कि कोलकाता, दिल्ली, आगरा तथा इलाहाबाद नदियों के किनारे ही स्थित हैं।

7. ऐतिहासिक कारण (Historical Factors) कई बार ऐतिहासिक महत्त्व के स्थान जनसंख्या के केन्द्र बन जाते हैं। गंगा के मैदान में, सिन्धु के मैदान में तथा चीन में प्राचीन सभ्यता के कई केन्द्रों में जनसंख्या अधिक है। नील घाटी में जनसंख्या का अधिक घनत्व ऐतिहासिक कारणों से ही है।

8. राजनैतिक कारण (Political Factors)-सीमावर्ती प्रदेशों में तथा युद्ध क्षेत्रों के निकट सुरक्षा के अभाव के कारण कम जनसंख्या होती है। इसीलिए उत्तर-पूर्वी भारत, वियतमान तथा अरब देशों में जनसंख्या कम है। सरकारी नीतियां जिस क्षेत्र के लोगों की उम्मीदों पर खरी उतरती हैं और लोगों के हित अनुसार होती हैं, वहां पर जनसंख्या घनत्व अधिक होता है।

9. धार्मिक तथा सामाजिक कारण (Religious and Social Factors)-सामाजिक रीति-रिवाजों तथा धार्मिक विश्वासों का जनसंख्या के वितरण पर बड़ा प्रभाव पड़ता है। इस्लाम धर्म में चार विवाह की आज्ञा, चीन तथा भारत में बाल विवाह जनसंख्या की वृद्धि के कारण हैं। कई तीर्थ-स्थान अधिक जनसंख्या के केन्द्र बन जाते हैं। परिवार कल्याण अपनाने वाले देशों में जनसंख्या की वृद्धि दर कम होती है। यहूदी लोग भी आर्थिक अत्याचारों से तंग आकर इज़राइल देश में जा बसे हैं।

10. आर्थिक कारण (Economic Factors)—

i) कृषि (Agriculture)—क्योंकि देश में अधिक लोग कृषि पर निर्भर करते हैं, अधिक कृषि उत्पादन वाले क्षेत्रों में अधिक भोजन प्राप्ति के कारण घनी जनसंख्या होती है। चावल उत्पन्न करने वाले क्षेत्रों में साल में तीन-तीन फसलों के कारण अधिक लोगों का निर्वाह हो सकता है। इसीलिए मानसूनी एशिया में अधिक जनसंख्या है।

ii) उद्योग (Industries)—औद्योगिक विकास से अधिक लोगों को रोजगार मिलता है। औद्योगिक नगरों के निकट बहुत सी बस्तियां बस जाती हैं तथा जनसंख्या अधिक हो जाती है। यूरोप, जापान में औद्योगिक विकास के कारण ही अधिक जनसंख्या है। इन क्षेत्रों में अधिक व्यापार के कारण भी घनी जनसंख्या होती है।

iii) यातायात के साधनों की सुविधा (Easy Means of Transportation)—यातायात के साधनों की सुविधाओं के कारण उद्योगों, कृषि तथा व्यापार का विकास होता है। तटीय क्षेत्रों में जल-मार्ग की सुविधा के कारण संसार की अधिकतर जनसंख्या निवास करती है। पर्वतीय भागों तथा कई भीतरी प्रदेशों में यातायात के साधनों की कमी के कारण कम जनसंख्या होती है, जैसे–पश्चिमी चीन में।

iv) नगरीय विकास (Urban Development) किसी नगर के विकास के कारण उद्योग, व्यापार तथा परिवहन का विकास हो जाता है। शिक्षा, मनोरंजन इत्यादि सुविधाओं के कारण नगरों में तेजी से जनसंख्या बढ़ जाती है।

v) विदेशी आय का आकर्षण (Attraction of Foreign Money)-कम जनसंख्या वाले क्षेत्रों में कई विदेशी कम्पनियां अधिक वेतन देकर तकनीकी श्रमिकों को रोजगार प्रदान करती हैं। इसलिए भारत और पाकिस्तान इत्यादि कई एशियाई देशों से लोग यहां आकर बस गए हैं।

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प्रश्न 2.
प्रवास (Migration) से आपका क्या भाव है ? इसके क्या कारण हैं ? इसकी किस्में बताओ।
या
प्रवास का क्या अर्थ है ? इसकी किस्में और कारण बताओ।
उत्तर-
प्रवास (Migration)—जनसंख्या तबदीली के निर्णायक कारकों में यह तीसरा मुख्य कारण है। यह एक अच्छी कोशिश है जो लोगों द्वारा जनसंख्या तथा साधनों के बीच एक संतुलन बनाने के लिए की जाती है। यह स्थिर तथा अस्थिर दो प्रकार की होती है। अस्थाई रूप का अर्थ है अगर मौसम खराब होने के कारण, सालाना या कम समय के लिए कोई मनुष्य अपना स्थान छोड़ कर चला जाए पर अगर कोई मनुष्य शादी के बाद, रोज़गार के लिए पूरी तरह से किसी स्थान को छोड़ कर किसी और स्थान पर रहने के लिए चला जाए तो इसे स्थिर प्रवास कहते हैं।
प्रवास की किस्में-जनसंख्या की स्थानीय गति मुख्य रूप में गाँव से गाँव की तरफ, गाँव से शहरों की तरफ, शहर से शहर की तरफ, शहर से गाँव की तरफ प्रवास होती है। प्रवास की मुख्य किस्में इस प्रकार हैं—

1. मौसमी प्रवास (Seasonal Migration)—प्रवास मुख्य रूप में स्थाई और अस्थाई होती है। अस्थाई स्थान बदली मौसमी स्थान बदली होती है। ये कृषि के लिए काम करने वाले श्रमिक होते हैं जो उन स्थानों पर आ जाते हैं जहाँ खेती की कटाई, बिनाई के लिए श्रमिकों की जरूरत होती है। ये श्रमिक एक खास समय के लिए आते हैं जैसे कि यू०पी० और बिहार से पंजाब में खरीफ़ और रबी की फसलों के समय आते हैं।

2. अंतर्राष्ट्रीय प्रवास (International Migration)-एक देश और महाद्वीप के बीच के प्रवास को अंतर्राष्ट्रीय प्रवास कहते हैं। कुछ समय के अंदर ही इस तरह की प्रवास के कारण महाद्वीपों के जनसंख्या घनत्व में फर्क आने लग जाता है। आज के दौर में अंतर्राष्ट्रीय प्रवास ने तेज गति हासिल की है, क्योंकि कुछ महाद्वीपों के बीच खास रोज़गार के मौके लोगों को आकर्षित करते हैं। 21वीं सदी की शुरूआत में यू० एन० के एक सर्वेक्षण के अनुसार लगभग 120 मिलियन लोग पूरे देश के अंदर, नज़दीक के देशों में चले गए हैं।

3. अंतरमुखी प्रवास (Internal Migration)—यह जनांकन का एक बहुत ज़रूरी तत्त्व है। इससे लोग अपने क्षेत्र छोड़कर दूसरे क्षेत्र में चले जाते हैं और दूसरे क्षेत्र की जनसंख्या घनत्व बढ़ा देते हैं। जैसे कि विद्यार्थी उच्च शिक्षा के लिए शहरों में चले जाते हैं। पंजाब में ही पटियाला शहर के व्यक्ति राजपुरा जा कर रहने लगे हैं। यह अंतरमुखी प्रवास है।

4. ग्रामीण प्रवास (Rural Migration)—जब बढ़िया और उपजाऊ भूमि के कारण गाँव के लोग उपजाऊ भूमि वाले क्षेत्र में चले जाते हैं, उसे ग्रामीण प्रवास कहते हैं।

प्रवास के कारण-प्रवास के कारणों में प्रतिकर्ष तथा अपकर्ष कारक खास स्थान रखते हैं। प्रवास के कारण निम्नलिखितानुसार हैं—
I. आर्थिक कारण (Economic Reasons) आर्थिक कारण प्रवास के कारणों में सबसे अधिक भूमिका निभाते हैं। कुछ आर्थिक कारण निम्नलिखित हैं—

  1. उपजाऊ जमीन जिस पर कृषि निर्भर करती है।
  2. खेती के लिए आदर्श हालात।
  3. उद्योगों की बहुतायत जो किसी स्थान के विकास की खास कड़ी है।
  4. रोजगार के अवसरों का होना जिसके साथ व्यक्ति का भविष्य जुड़ा है।
  5. यातायात और संचार के साधन इत्यादि।

II. सामाजिक कारण (Social Reasons) सामाजिक कारण भी स्थान बदली के लिए समान रूप में ज़रूरी हैं। जैसे कि शादी एक सामाजिक प्रथा है और शादी के बाद लड़कियों को पति के घर रहना पड़ता है। स्थान बदली के मुख्य सामाजिक कारण निम्नलिखित हैं—

  1. लोगों की धार्मिक सोच और धार्मिक स्थानों पर रहने की लोगों की इच्छा।
  2. निजी और सार्वजनिक तत्त्व और सामाजिक उत्थान।
  3. बेहतरीन शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की बहुतायत।
  4. सरकार की जनता की भलाई के लिए बनाई नीतियां। ‘
  5. लोगों की निजी आज़ादी।

III. जनांकन कारण (Demographic Reasons)-कुछ जनांकन कारण नीचे लिखे अनुसार हैं—

  1. आयु सरंचना (Age Composition)-प्रवास में लोगों की आयु भी खास भूमिका निभाती है।
  2. क्षेत्रीय असमानता (Regional Difference)-जनसंख्या के घनत्व में क्षेत्रीय असमानता होती है। प्रवास कई क्षेत्रीय सीमाओं पर भी निर्भर करती है जैसे कि राज्य के अंदर का प्रवास।
  3. राज्य की अंदरूनी प्रवास (Interstate Migration)-जब प्रवास राज्य के अंदर-अंदर ही होता है उसे राज्य के अंदर प्रवास कहते हैं।
  4. अंतर राज्य प्रवास (Intra State Migration)-जब प्रवास एक राज्य से दूसरे राज्य में होती हैं उसे अंतर राज्य प्रवास कहते हैं।
  5. अंतर्राष्ट्रीय प्रवास (International Migration)-जब लोग एक देश को छोड़कर दूसरे देश में चले जाते हैं उसे अंतर्राष्ट्रीय प्रवास कहते हैं।

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प्रश्न 3.
आज़ादी के बाद के संदर्भ की उदाहरण देकर भारत में शहरीकरण के दौर के बारे में चर्चा करो।
उत्तर-
भारत की बहुत जनसंख्या गाँवों में रहती है और उनका मुख्य काम कृषि है। पर कुछ लोग बेहतर सुविधा के कारण शहरों में रहना पसंद करते हैं। शहरों में स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा के बेहतरीन अवसर और रोजगार के अच्छे अवसर उपलब्ध होते हैं इसलिए गाँवों के लोग शहरों की तरफ आकर्षित होते जा रहे हैं। आज से लगभग 200 साल पहले संसार के सिर्फ 2.5% लोग ही थे जो शहरों में रहते थे पर आज के समय में 40% से अधिक लोग हैं जो शहरों में रहते हैं। 2011 की हुई जनगणना के अनुसार यह प्रतिशत 31.20% तक पहुँच चुका है। जनगणना के अनुसार जनसंख्या को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है—

  1. शहरी जनसंख्या,
  2. ग्रामीण जनसंख्या।

जो लोग शहर में रहते हैं, वे शहरी जनसंख्या के अधीन आते हैं। स्थानीय स्तर पर गाँवों का प्रबंध पंचायत संभालती हैं और शहरों का प्रबंध नगर कौंसिल संभालती है। माना जाता है कि देश के अधिकतर लोग खेतीबाड़ी के कामों में लगे हुए हैं।
भारत एक कृषि उत्पादन वाला देश है। अधिकतर लोग गाँव में रहते हैं। भारत के सांस्कृतिक विकास की गाँव एक मुख्य इकाई है। भारत में शहरी जनसंख्या भी काफी है। 2011 की जनगणना के अनुसार 31.20% लोग शहरों में रहते हैं। भारत में देश के सारे शहरी क्षेत्रों से ज्यादा शहरीकरण है। पर भारत में शहरीकरण की मात्रा बाकी देशों से कम है।

देश शहरी जनसंख्या (%) प्रतिशत
यू० एस० ए० 70
ब्राजील 68
इजिप्ट 44
पाकिस्तान 29
भारत 27.8

शहरी जनसंख्या में वृद्धि-जनसंख्या के विस्फोट के कारण शहरी जनसंख्या की वृद्धि की गति में काफी तेजी आई है। पिछले 100 सालों में भारत की कुल जनसंख्या तीन गुणा से अधिक हो चुकी है। पर शहरी जनसंख्या ग्यारह गुणा बढ़ गई है।
ग्रामीण और शहरी जनसंख्या
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शहरी जनसंख्या की वृद्धि साल 1901-61 के बीच धीरे थी। पर 1961-81 के समय में जाकर यह वृद्धि बहुत तेज हो गई।
इस समय दौरान शहरी जनसंख्या 7.8 करोड़ से 15.6 करोड़ तक बढ़ गई। बड़े शहरों के कारण शहरीकरण की गति काफी तेज़ हो गई। बहुत सारे औद्योगिक कस्बों का बनना शुरू हो गया। भारतीय कस्बों को मुख्य रूप में नीचे लिखी 6 श्रेणियों में बाँटा जाता है—

  1. पहले दर्जे के शहर-1 लाख से अधिक जनसंख्या
  2. दूसरे दर्जे के शहर-50,000 से 99,999 तक जनसंख्या
  3. तीसरे दर्जे के शहर-20,000 से 49,999 तक जनसंख्या
  4. चौथे दर्जे से शहर-10,000 से 19,999 तक जनसंख्या
  5. पांचवें दर्जे के शहर-5,000 से 9,999 तक जनसंख्या
  6. छठे दर्जे के शहर-5000 से कम जनसंख्या।

आज़ादी के बाद बड़े शहरों की संख्या बढ़ गई जबकि छोटे शहरों की संख्या कम हो गई। शहरों के जीवन, सुविधा, ज़रूरतें तथा लाभ के कारण लोग शहरों की तरफ आकर्षित होने लगे जिस कारण शहरों की जनसंख्या में वृद्धि हो गई। शहरीकरण की सुविधाएं तथा आकर्षित करने वाले कारणों के सिवाय अब शहरों में शहरी लोगों को कई प्रकार की समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है। जैसे कि—

  1. जनसंख्या की वृद्धि के कारण रहने के लिए स्थान तथा मकान दोनों की कमी पैदा हुई तथा मुंबई जैसे शहरों में चॉल (Chawl) इत्यादि में लोगों ने रहना शुरू कर दिया।
  2. इन स्थानों का पर्यावरण शुद्ध न होने के कारण गंदी बस्तियों का जन्म हुआ।
  3. साधनों की बहुलता के कारण प्रदूषण की समस्या आगे आई।
  4. शहरों में अपराधों की संख्या बढ़नी शुरू हो गई।
  5. यातायात और संचार के साधनों में कमी पड़ गई।
  6. पीने के लिए शुद्ध जल की कमी शहरों में आम देखने को मिलने लगी।

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प्रश्न 4.
भारत में जनसंख्या वितरण की विभिन्नता तथा इसके कारणों का वर्णन करो।
उत्तर-
जनसंख्या का वितरण (Distribution of Population)-भारत क्षेत्रफल के आधार पर संसार में सातवां बड़ा देश है परन्तु जनसंख्या की दृष्टि से भारत का विश्व में दूसरा स्थान है। 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की कुल जनसंख्या 121 करोड़ थी तथा जनसंख्या घनत्व 382 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० था। भारत में जनसंख्या का वितरण बहुत असमान है। देश में प्राकृतिक तथा आर्थिक दशाओं की विभिन्नता के कारण जनसंख्या के वितरण तथा घनत्व में बहुत विभिन्नता है। गंगा-सतलुज के उपजाऊ मैदान में देश के 23% क्षेत्र में 52% जनसंख्या का संकेन्द्रण है जबकि हिमालय के पर्वतीय भाग में 13% क्षेत्र में केवल 2% जनसंख्या निवास करती है। केन्द्र शासित प्रदेश दिल्ली में जनसंख्या का घनत्व 11297 है जबकि अरुणाचल प्रदेश में केवल 10 है। सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य उत्तर प्रदेश है जहां 20 करोड़ से अधिक लोग रहते हैं।

भारत में जनसंख्या घनत्व, धरातल, मिट्टी के उपजाऊपन, वर्षा की मात्रा तथा जल सिंचाई पर निर्भर करता है। भारत मूलतः कृषि प्रधान देश है। इसलिए अधिक घनत्व उन प्रदेशों में पाया जाता है जहां भूमि की कृषि उत्पादन क्षमता अधिक है। जनसंख्या का घनत्व वर्षा की मात्रा पर निर्भर करता है। पिछले कुछ वर्षों में औद्योगिक क्षेत्रों में भी जनसंख्या घनत्व बढ़ता जा रहा है।

जनसंख्या का घनत्व (Density of Population)—किसी प्रदेश की जनसंख्या तथा भूमि के क्षेत्रफल के अनुपात को जनसंख्या घनत्व कहते हैं। इसे निम्न प्रकार से प्रकट किया जाता है कि एक वर्ग कि०मी० में औसत रूप से कितने व्यक्ति रहते हैं।
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उदाहरण के लिए भारत का कुल क्षेत्रफल 32.8 लाख वर्ग कि०मी० है तथा जनसंख्या 121 करोड़ है। इस प्रकार भारत की औसत जनसंख्या
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भारत को जनसंख्या के घनत्व के आधार पर क्रमशः तीन भागों में विभाजित किया जाता है।
1. अधिक घनत्व वाले भाग (Densely Populated Areas)-इस भाग में वे राज्य शामिल हैं जहां जनसंख्या घनत्व 500 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० से अधिक है। अधिक घनत्व वाले क्षेत्र प्रायद्वीपीय भारत के चारों ओर एक मेखला बनाते हैं। पंजाब से लेकर गंगा के डेल्टा तक जनसंख्या का घनत्व अधिक है। एक अनुमान हैं कि इस भाग के 17% क्षेत्रफल में 43% जनसंख्या निवास करती है।
जनसंख्या घनत्व-व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०

राज्य घनत्व राज्य घनत्व
पश्चिमी बंगाल 1029 उत्तर प्रदेश 828
केरल 859 तमिलनाडु 555
बिहार 1102 पंजाब 550

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(i) पश्चिमी तटीय मैदान-इस भाग में केरल प्रदेश में घनत्व 859 व्यक्ति प्रतिवर्ग कि०मी० है।
कारण—

  1. अधिक वर्षा
  2. मैदानी भाग तथा उपजाऊ मिट्टी
  3. चावल की अधिक उपज
  4. उद्योगों के लिए जल विद्युत्
  5. उत्तम बन्दरगाहों का होना
  6. जलवायु पर समुद्र का समकारी प्रभाव।

(ii) पश्चिमी बंगाल-इस भाग में घनत्व 1029 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० है।
कारण—

  1. गंगा नदी का उपजाऊ डेल्टा
  2. अधिक वर्षा
  3. चावल की वर्ष में तीन फसलें
  4. कोयले के भण्डार
  5. प्रमुख उद्योगों का स्थित होना।

(iii) उत्तरी मैदान-इस भाग में विभिन्न प्रदेशों के घनत्व-बिहार (1102), उत्तर प्रदेश (828), पंजाब (550),
व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०।
कारण—

  1. सतलुज, गंगा आदि नदियों के उपजाऊ मैदान
  2. पर्याप्त वर्षा तथा स्वास्थ्यप्रद जलवायु
  3. जल सिंचाई की सुविधाएं
  4. कृषि के लिए आदर्श दशाएं
  5. व्यापार, यातायात तथा उद्योगों का विकास
  6. नगरों का अधिक होना।

(iv) पूर्वी तट- इस भाग में तमिलनाडु प्रदेश में घनत्व 555 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० है।
कारण—

  1. नदियों के उपजाऊ डेल्टा
  2. उद्योगों की अधिकता
  3. गर्म आर्द्र जलवायु
  4. चावल का अधिक उत्पादन
  5. दोनों ऋतुओं में वर्षा
  6. जल सिंचाई की सुविधा।

2. साधारण घनत्व वाला भाग (Moderately Populated Area)—इस भाग में वे राज्य शामिल हैं जिनका घनत्व 200 से 500 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० है। मुख्य रूप से ये प्रदेश पूर्वी तथा पश्चिमी घाट, अरावली पर्वत तथा गंगा के मैदान की सीमाओं के अन्तर्गत स्थित हैं।
जनसंख्या घनत्व-व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०

राज्य घनत्व राज्य घनत्व
हरियाणा 573 आन्ध्र प्रदेश 308
गोआ 399 कर्नाटक 319
असम 397 गुजरात 308
महाराष्ट्र 365 उड़ीसा 269
त्रिपुरा 350

कारण—

  1. इन भागों में पथरीली या रेतीली धरातल होने के कारण कृषि उन्नत नहीं है।
  2. कृषि के लिए वर्षा पर्याप्त नहीं है।
  3. उद्योग उन्नत नहीं हैं।
  4. यातायात के साधन उन्नत नहीं हैं।
  5. परन्तु जल सिंचाई, लावा मिट्टी तथा खनिज पदार्थों के कारण साधारण जनसंख्या मिलती है।

3. कम घनत्व वाला भाग (Sparsely Populated Area)-इस भाग में वे प्रान्त शामिल हैं जिनका घनत्व 200 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० से कम है।
(i) उत्तर-पूर्वी भारत-इस भाग में मणिपुर, मेघालय, नागालैंड, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश तथा मिज़ोरम शामिल हैं।
जनसंख्या घनत्व-व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०

राज्य घनत्व राज्य घनत्व
मणिपुर 122 सिक्किम 86
मेघालय 132 मिजोरम 52
नागालैंड 119 अरुणाचल प्रदेश 17

कारण—

  1. असमतल तथा पर्वतीय धरातल
  2. वन प्रदेश की अधिकता
  3. मलेरिया का प्रकोप
  4. उद्योगों का पिछड़ापन
  5. यातायात के साधनों की कमी
  6. ब्रह्मपुत्र नदी की भयानक बाढ़ों से हानि।

(ii) कच्छ तथा राजस्थान प्रदेश-इस भाग में राजस्थान का थार का मरुस्थल तथा खाड़ी कच्छ के प्रदेश शामिल हैं।
कारण—

1. कम वर्षा
2. कठोर जलवायु
3. मरुस्थलीय भूमि के कारण कृषि का अभाव
4. खनिज तथा उद्योगों की कमी
5. जल सिंचाई के साधनों की कमी
6. गुजरात की खाड़ी तथा कच्छ क्षेत्र का दलदली होना।

(iii) जम्मू-कश्मीर तथा हिमाचल प्रदेश-हिमाचल पर्वत के पहाड़ी क्षेत्र में जनसंख्या बहुत कम है। हिमाचल प्रदेश में प्रति वर्ग कि० मी० 123 घनत्व है तथा जम्मू कश्मीर में प्रति वर्ग कि० मी० घनत्व 124 है।
कारण—

1. शीतकाल में अधिक सर्दी
2. बर्फ से ढके प्रदेश का होना
3. पथरीली धरातल के कारण कम कृषि क्षेत्र
4. यातायात के साधनों की कमी
5. वनों का अधिक विस्तार
6. सीमान्त प्रदेश का होना
7. उद्योगों की कमी।

(iv) मध्य प्रदेश- इस प्रान्त में कुछ भागों में बहुत कम जनसंख्या है। मध्य प्रदेश में जनसंख्या घनत्व प्रति वर्ग कि० मी० 196 है।

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प्रश्न 5.
लिंग अनुपात से आपका क्या अर्थ है ? जनसंख्या के अध्ययन में इसका क्या योगदान है ? भारत में लिंग अनुपात कम होने के क्या कारण हैं ?
उत्तर-
लिंग अनुपात-लिंग अनुपात किसी समाज में औरतों की स्थिति का महत्त्वपूर्ण मापदंड है। भारत में लिंग अनुपात का अर्थ है कि 1000 पुरुषों पीछे स्त्रियों की संख्या कितनी है जैसे कि—
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इसमें अगर लिंग अनुपात 1000 हो तो इसका अर्थ है कि स्त्रियों और पुरुषों की जनसंख्या बराबर है अगर 1000 से ज्यादा हो तो स्त्रियों की संख्या ज्यादा होगी और 1000 से कम है तो स्त्रियों की संख्या कम होगी।

जनसंख्या के अध्ययन में लिंग अनुपात का योगदान-किसी देश की जनसंख्या के अध्ययन में लिंग अनुपात का असर सिर्फ जनांकन को भी प्रभावित नहीं करता बल्कि इसके सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक स्वरूप को भी प्रभावित करता है। यह जन्म दर और मृत्यु दर को भी प्रभावित करता है। अंतर्मुखी और बाहरमुखी स्थान बदली भी लिंग अनुपात द्वारा प्रभावित होती है। सामाजिक भलाई में, सामाजिक सेवाएं जैसे कि मां और बच्चे, बूढों के लिए यह सब कुछ लिंग अनुपात पर ही आधारित है। अगर किसी देश के विकास के बारे प्रोग्राम का स्वरूप तैयार करना होता है। उस समय उस के लिंग अनुपात के बारे में पता लगाना बहुत ज़रूरी है। जनसंख्या का रिकॉर्ड लिंग अनुपात और आयु संरचना के आधार पर बनाया जाता है।
Sex Ratio (Females per 1000 males) India 1901—2001

Year Sex Ratio Sex Ratio in Children (0-6 years)
1901 972
1911 964
1921 955
1931 950
1941 945
1951 946
1961 941 976
1971 930 964
1981 934 962
1991 929 945
2001 933 927

 

लिंग अनुपात बहुत महत्त्व रखता है क्योंकि यह सामाजिक विकास का स्पष्ट, निर्विवादी और सुविधाजनक सूचक है। हर व्यक्ति का समाज में अपना एक खास महत्त्व है। इस प्रकार परिवार और समाज में उसका स्थान लिंग अनुपात द्वारा दिखाया जा सकता है। जैसे कि हिन्दू परिवार में व्यक्तियों की संख्या स्त्रियों से अधिक होती है। पश्चिम की तरफ औद्योगिक विकास के कारण इन क्षेत्रों में स्त्रियों परिवार संभालने तथा पुरुष खेती इत्यादि का काम करते हैं। आज के समय में स्त्री पुरुष के बराबर घर के बाहर काम कर रही है पर पुरुष घर संभालने का काम आज भी बहुत कम कर रहे हैं।

सन् 1901 से लोकर 2011 तक भारत में लिंग अनुपात हमेशा कम रहा है। सन् 2011 की जनगणना आंकड़ों के अनुसार भारत में पुरुषों और स्त्रियों की संख्या क्रमश: 62.37 करोड़ और 58.64 करोड़ थी जबकि भारत की कुल जनसंख्या 121.00 करोड़ थी।

केरल का लिंग अनुपात 1084 है जबकि पंजाब की स्थिति बहुत ही चिंताजनक है यहां यह लिंग अनुपात सिर्फ 893 है। सन् 2001 का पंजाब का लिंग अनुपात 876 था और सन् 2011 में लिंग अनुपात (893) में कुछ सुधार आया है।

भारत में लिंग अनुपात कम होने के कारण-पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश तथा गुजरात (800 लड़कियों के पीछे 1000 लड़के) इसके अतिरिक्त दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली, जो कि देश का एक खुशहाल कस्बा माना जाता है, लिंग अनुपात में समानता नहीं है।
भारत लिंग अनुपात की समस्या के साथ लड़ रहा है। 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में लिंग अनुपात 940 था। इसके लिए बहुत सारे कारक जिम्मेदार हैं जो इस प्रकार हैं—

1. सामाजिक कारक (Social Factors)–पुरुष प्रधान समाज में सब से अधिक महत्त्व पुरुष को दिया जाता है। पुराने विचारों के अनुसार अगर बच्चा लड़का होता हो तो इसके साथ परिवार का कुल आगे बढ़ता है।
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साक्षरता की कमी के कारण उनकी यह पुरानी सोच भी लिंग अनुपात के कम होने का कारण है। उनकी सोच है कि शादी के बाद लड़की अपना घर छोड़ कर ससुराल में चली जाती है जिसके कारण बुढ़ापे में माता-पिता का ख्याल नहीं रख सकती और उनका लड़का बुढ़ापे में लाठी के समान है।

2. तकनीकी कारण (Technological Factors) तकनीकी विकास के कारण अल्ट्रासोनीग्राफी द्वारा लिंग की जांच करवा ली जाती है जिस कारण लड़की पता लगने पर उसे पेट में ही कत्ल करवा दिया जाता है।

3. जागरुकता की कमी (Lack of Awareness) आर्थिक विकास में स्त्रियों का योगदान कम रहा है। इसके कारण स्त्रियों को पुरुष के बराबर महत्त्व समाज में नहीं दिया जाता। कुछ खास चीजें और जरूरतें भी स्त्रियों को प्रदान नहीं की जाती।

4. आर्थिक कारण (Economic Factors)-कई समाजिक बुराइयां जैसे कि दहेज जो समाज में लिंग अनुपात पर असर डालती है। दहेज माता-पिता के ऊपर फालतू बोझ होता है। इसलिए परिवार में एक लड़का चाहिए जो कि भविष्य में परिवार की आमदनी में योगदान डालता है यह माना जाता है।

5. सुरक्षा निर्गमन (Security Issues)—आजकल के समय में स्त्रियों के साथ बलात्कार जैसे संगीन अपराध काफी देखने में आ रहे हैं। इस कारण उन्हें ज्यादा से ज्यादा सुरक्षा की ज़रूरत है।

प्रश्न 6.
संसार की जनसंख्या के मुख्य तत्त्वों का वर्णन करें। पृथ्वी पर जनसंख्या के वितरण का वर्णन करो।
उत्तर-
मानवीय भूगोल के अध्ययन में मनुष्य का केन्द्रीय स्थान है। मनुष्य अपने प्राकृतिक तथा सांस्कृतिक वातावरण से प्रभावित होता है और उसमें परिवर्तन करता है। पृथ्वी पर जनसंख्या के वितरण में लगातार परिवर्तन होता । चला आया है। इस समय जनसंख्या के वितरण में बहुत असमानता है। इस असमानता के प्रमुख कारण विश्वव्यापी हैं।
मुख्य तत्त्व (Main Factors)—

  1. सन् 1650 से 2000 तक संसार की जनसंख्या 50 करोड़ से बढ़ कर 700 करोड़ तक हो गई। इस प्रकार यह आठ गुना हो गई।
  2. वर्तमान में बढ़ाव की दर के साथ यह जनसंख्या सन् 2100 तक दोगुनी हो जाने की उम्मीद है।
  3. धरती पर लगभग 14.5 करोड़ वर्ग कि०मी० थल भाग में 700 करोड़ की जनसंख्या रहती है।
  4. संसार में जनसंख्या का औसत घनत्व 41 व्यक्ति प्रतिवर्ग कि०मी० है।
  5. संसार में सबसे ज्यादा आबादी एशिया महाद्वीप में 430 करोड़ है।
  6. संसार में सबसे अधिक आबादी चीन में लगभग 127 करोड़ है।
  7. संसार में सबसे अधिक आबादी घनत्व बांग्लादेश में 805 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० है।
  8. संसार में 90% आबादी थल के 10% भाग में केन्द्रित है।
  9. संसार की कुल जनसंख्या का 2 भाग 20°N से 40°N अक्षांश के बीच केन्द्रित है। कुल जनसंख्या का 4/5 भाग 20° से 60°N अक्षांश में निवास करता है।

जनसंख्या का वितरण (Distribution of Population)-पृथ्वी पर जनसंख्या का वितरण बड़ा असमान है। पृथ्वी पर थोड़े से भाग घने बसे हुए हैं जबकि अधिक भाग खाली पड़े हैं। विश्व की 50% जनसंख्या केवल 5% स्थल भाग पर निवास करती है। जबकि 50% स्थल भाग पर केवल 5% लोग रहते हैं। जनसंख्या के घनत्व के आधार पर पृथ्वी को तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है—
1. अधिक घनत्व वाले प्रदेश (Areas of High Density)-इन क्षेत्रों में जनसंख्या का घनत्व 200 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० से अधिक है। इस अधिक घनत्व के दो आधार हैं—
(i) कृषि प्रधान देश-पूर्वी एशिया तथा दक्षिणी एशिया में।
(ii) औद्योगिक प्रदेश-पश्चिमी यूरोप तथा उत्तर पूर्वी अमेरिका में।

  1. दक्षिणी तथा पूर्वी एशिया-पूर्वी एशिया में चीन, जापान, फिलीपाइन द्वीप तथा ताइवान में घनी . जनसंख्या मिलती है। दक्षिणी एशिया में भारत, श्रीलंका, पाकिस्तान तथा बांग्लादेश में जनसंख्या का घनत्व अधिक है। इसके अतिरिक्त जाव द्वीप नील नदी घाटी में भी घनी जनसंख्या मिलती है। चीन में संसार की लगभग एक चौथाई जनसंख्या निवास करती है। ह्वांग हो, यंगसी तथा सिकियांग घाटी घनी जनसंख्या वाले क्षेत्र हैं। भारत में गंगा के मैदान तथा पूर्वी तटीय मैदान में जनसंख्या का अधिक महत्त्व है। जापान में क्वांटो मैदान (Kwanto Plain), बांग्लादेश में गंगा-ब्रह्मापुत्र डेल्टा, बर्मा में इरावदी डेल्टा, पाकिस्तान में सिन्धु घाटी अधिक जनसंख्या वाले क्षेत्र हैं। बांग्लादेश में संसार का सबसे अधिक जनसंख्या घनत्व 16 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर में मिलते हैं।
  2. पश्चिमी यूरोप तथा उत्तरी-पूर्वी अमेरिका-पश्चिमी यूरोप में इंग्लिश चैनल से लेकर रूस से यूक्रेन क्षेत्र तक 50° उत्तरी अक्षांशों के साथ-साथ घनी जनसंख्या मिलती है। यूरोप में 50° अक्षांश को जनसंख्या की धुरी (Axis of Population) कहते हैं। इस क्षेत्र में इंग्लैंड, जर्मनी में रुहर घाटी, इटली में पो डेल्टा, फ्रांस में पेरिस बेसिन, रूस में मास्को-यूक्रेन क्षेत्र अधिक जनसंख्या वाले प्रदेश हैं। उत्तरी अमेरिका के पूर्वी भाग में अटलांटिक तट, सैट लारेंस घाटी तथा महान् झीलों के क्षेत्र में अधिक
    जनसंख्या घनत्व है। इन सब प्रदेशों में जनसंख्या का आधार उद्योग है।

अधिक घनत्व के कारण—

  1. निर्माण उद्योगों का अधिक होना।
  2. सम शीतोष्ण जलवायु।।
  3. समुद्री मार्गी तथा व्यापार का अधिक उन्नत होना।
  4. मिश्रित कृषि के कारण अधिक उत्पादन।
  5. खनिज क्षेत्रों में विशाल भण्डार।
    PSEB 12th Class Geography Solutions Chapter 2 मानवीय संसाधन-जनसंख्या और इसमें परिवर्तन 14
  6. तटीय स्थिति।
  7. लोगों का उच्च जीवन स्तर।
  8. वैज्ञानिक तथा तकनीकी ज्ञान में अधिक वृद्धि।
  9. नगरीकरण के कारण बड़े-बड़े नगरों का विकास।

2. मध्यम घनत्व वाले प्रदेश (Areas of Moderate Density)-इन प्रदेशों में 25 से 200 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर घनत्व मिलता है। इस भाग में निम्नलिखित प्रदेश शामिल हैं। उत्तरी अमेरिका में प्रेयरीज़ का मध्य मैदान, अफ्रीका का पश्चिमी भाग, यूरोप में पूर्वी यूरोप तथा पूर्वी रूस, दक्षिणी अमेरिका में उत्तर-पूर्वी ब्राज़ील, मध्य चिली, मैक्सिको का पठार, एशिया में भारत का दक्षिणी पठार, पश्चिमी चीन तथा हिन्द चीन, पूर्वी ऑस्ट्रेलिया।

3. कम घनत्व वाले प्रदेश (Areas of Low Density)—इन प्रदेशों में जनसंख्या घनत्व 25 व्यक्ति प्रति वर्ग
किलोमीटर से कम है। लगभग 5% क्षेत्र में जनसंख्या घनत्व केवल 2 से 3 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है। यह लगभग निर्जन प्रदेश है। इस भाग में ऊँचे पर्वतीय तथा पठारी प्रदेश, शुष्क मरुस्थल, उष्ण-आर्द्र घने वन तथा टुण्ड्रा जलवायु के ठण्डे प्रदेश शामिल हैं। जैसे उच्च पर्वतीय भाग, मरुस्थल घने वन, टुण्ड्रा प्रदेश इत्यादि।
कम घनत्व के कारण—इन प्रदेशों में मानवीय जीवन के लिए बहुत कम सुविधाएँ प्राप्त हैं तथा लोग कठिनाइयों भरा जीवन व्यतीत करते हैं। इन प्रदेशों को सतत् कठिनाइयों के प्रदेश भी कहा जाता है।

  1. पर्वतीय भागों में समतल भूमि की कमी।
  2. पथरीली तथा रेतीली मिट्टी।
  3. ठण्डे प्रदेशों में कठोर शीत जलवायु
  4. पानी की कमी तथा छोटे उपज काल के कारण कृषि का अभाव।
  5. टुण्ड्रा प्रदेशों में स्थायी बर्फ।
  6. परिवहन के साधनों की कमी।
  7. घातक कीड़ों तथा बीमारियों के कारण कम जनसंख्या।
  8. खनिज पदार्थों तथा उद्योगों का अभाव।

PSEB 12th Class Geography Solutions Chapter 2 मानवीय संसाधन-जनसंख्या और इसमें परिवर्तन

मानवीय संसाधन-जनसंख्या और इसमें परिवर्तन PSEB 12th Class Geography Notes

  • पथ्वी पर बहत सारे प्राकृतिक स्रोत मिलते हैं। किसी देश के विकास के लिए प्राकृतिक संसाधनों का होना अति । आवश्यक है। मनुष्य अपनी तकनीक अथवा हुनर का उपयोग करके प्राकृतिक स्रोतों का तेज गति के साथ उपयोग कर रहा है। इसलिए कह सकते हैं कि संसार का सबसे कीमती स्रोत मनुष्य है। किसी देश का मनुष्य उस देश । का भविष्य होता है। इसलिए जनसंख्या की वृद्धि दर, घनत्व इत्यादि के बारे में पढ़ना अति आवश्यक है।
  • जनसंख्या की दृष्टि से भारत दूसरा स्थान रखता है। साल 2011 के अंत तक संसार की जनसंख्या 700 करोड़ के आंकड़े को पार कर गई है। भारत दुनिया का सातवां बड़ा देश है और यह संसार के कुल क्षेत्र । का सिर्फ 2.4% भाग है। रूस, कैनेडा, यू०एस०ए०, ब्राज़ील और आस्ट्रेलिया जैसे देश हमारे देश से बहुत । बड़े देश हैं पर इनकी आबादी भारत के मुकाबले बहुत कम है।
  • जनसंख्या का घनत्व कई प्राकृतिक कारणों के कारण बढ़ता अथवा कम होता जाता है। जनसंख्या घनत्व किसी देश अथवा क्षेत्र की आबादी की औसत होती है। इसके घनत्व को जलवायु, यातायात अथवा संचार के स्रोत, धर्म, प्राकृतिक स्रोतों की बहुतायत इत्यादि कारक काफी हद तक प्रभावित करते हैं। जब आरम्भिक जनसंख्या की गिनती बढ़ती है तो उसको जनसंख्या की वृद्धि कहते हैं। भारत में प्रत्येक 10 सालों के बाद जनगणना होती है और 10 सालों बाद जो परिवर्तन आबादी में आता है उसे जनसंख्या में वृद्धि कहते हैं। जनसंख्या के परिवर्तन को मुख्य रूप में जन्म दर, मृत्यु दर, स्थान परिवर्तन इत्यादि तत्व प्रभावित करते हैं। स्थान परिवर्तन हर जगह पर प्रभाव डालते हैं। जिस जगह को लोग छोड़ कर चले गये उस पर भी, जहाँ पर जाकर लोगों ने रहना शुरू किया वहाँ पर भी प्रभाव पड़ता है। स्थान बदली के कई तरह के कारक हैं। मुख्य रूप में इन्हें दो हिस्सों प्रतिकर्ष कारक और अपकर्ष कारक के रूप में बाँटा जाता है। किसी देश की जनसंख्या में अलग-अलग आयु वर्ग के लोग रहते हैं। आयु के अनुसार से इन्हें वर्गों , में बाँटा जाता है जैसे कि (0-14) साल जो अपने माता-पिता पर निर्भर करते हैं, (60 साल) जो अपने बच्चों पर निर्भर करते हैं और (15-59) जो कमाते हैं। इस आयु वर्ग के अनुसार ही देश में आर्थिक स्तर को निर्धारित किया जाता है। किसी देश की जनसंख्या के अध्ययन में लिंग अनुपात और साक्षरता का बहुत । महत्त्व होता है। इस द्वारा देश के सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक स्वरूप का पता लगाया जा सकता है।
  • कुल जनसंख्या-सन् 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की कुल जनसंख्या 121.02 करोड़ है, जो कि संसार की कुल जनसंख्या का 17.5% है।
  • चीन के बाद जनसंख्या के आधार पर भारत का दूसरा स्थान है।
  • जनसंख्या घनत्व-जनसंख्या घनत्व किसी देश की जनसंख्या और इलाके का अनुपात होता है। साधारणतया पर इसे व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर के रूप में प्रदर्शित किया जाता है।
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  • भारत का जनसंख्या घनत्व-2011 के आंकड़ों के अनुसार भारत का जनसंख्या घनत्व 382 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है।
  • जनसंख्या के घनत्व को प्रभावित करने वाले कारक-जनसंख्या के घनत्व को प्रभावित करने वाले कारक जलवायु, मिट्टी की किस्म, धरातल, जल, खनिज पदार्थ और प्राकृतिक स्रोत इत्यादि की उपलब्धि। इसके अतिरिक्त कई सामाजिक कारक जैसे रीति-रिवाज, सोच इत्यादि अति आवश्यक कारक हैं।
  • हर साल 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है।
  • जनसंख्या परिवर्तन के निर्णायक तत्व-जनसंख्या तबदीली के मुख्य निर्णायक तत्व हैं-जन्म दर, मृत्यु दर और प्रवास।
  • जन्म दर-किसी एक साल के दौरान जीवित जन्म अथवा मध्य सालों की जनसंख्या के अनुपात को जन्म दर कहते हैं।
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  • लिंगानुपात-लिंगानुपात का अर्थ है एक हजार पुरुषों के पीछे औरतों की गिनती।
  • एशिया की जनसंख्या संसार की सबसे अधिक जनसंख्या है।

PSEB 6th Class Home Science Practical विभिन्न प्रकार के चूल्हे

Punjab State Board PSEB 6th Class Home Science Book Solutions Practical विभिन्न प्रकार के चूल्हे Notes.

PSEB 6th Class Home Science Practical विभिन्न प्रकार के चूल्हे

अति छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
चूल्हा किसे कहते हैं ?
उत्तर-
कोई भी ऐसी चीज़ जिसमें आग जलाकर भोजन पकाया जाए, उसको चूल्हा कहते हैं।

प्रश्न 2.
अंगीठी कितने प्रकार की होती है ?
उत्तर-
अंगीठी दो प्रकार की होती है।

प्रश्न 3.
हैदराबादी या धुआँ रहित चूल्हा की खोज किसने की ?
उत्तर-
डॉक्टर राजू ने।

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प्रश्न 4.
ठोस ईंधन के अन्तर्गत कौन-कौन से ईंधन आते हैं ?
उत्तर-
लकड़ी, उपलें, लकड़ी का कोयला, पत्थर का कोयला (कोक)।

प्रश्न 5.
गाँवों में अधिकतर किस प्रकार के ईंधन का प्रयोग किया जाता है?
उत्तर-
लकड़ी तथा उपलों का।

छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
हैदराबादी या धुआँ रहित चूल्हा के बारे में तुम क्या जानते हो? सचित्र वर्णन करो।
उत्तर-
हैदाराबादी चूल्हे में लकड़ी या पत्थर का कोयला प्रयोग करते हैं। इसमें ईंधन कम खर्च होता है, क्योंकि थोड़ा-सा सेंक भी व्यर्थ नहीं जाता है। यह चूल्हा हैदराबाद के डॉ० राजू की खोज है। इसीलिए इसको हैदराबादी या डॉ० राजू का धुआँ रहित चूल्हा कहते हैं। इसका धुआँ चिमनी के रास्ते बाहर निकलता है। इसकी आकृति अंग्रेज़ी के अक्षर L की तरह होती है।
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चित्र 1.1. हैदराबादी चूल्हा

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प्रश्न 2.
देसी चूल्हा क्या है? इसके जलाने की विधि एवं सावधानी लिखो।
उत्तर-
गाँव के प्रत्येक घर में ईंट और मिट्टी का बना चूल्हा खाना बनाने में इस्तेमाल किया जाता है। इसे देसी चूल्हा कहते हैं।
जलाने की विधि-किसी पुराने फटे कपड़े, फूस के कागज़ को आग लगाकर चूल्हे में रखकर ऊपर पतली लकड़ियाँ रखकर आग लगाई जाती है।
सावधानी-

  1. कपड़ा या कागज़ हाथ में पकड़कर आग लगाते हुए यह ध्यान रखना चाहिए कि हाथ जल न जाए।
  2. लकड़ियों पर ज़्यादा मिट्टी का तेल नहीं डालना चाहिए।

प्रश्न 3.
पम्प वाले स्टोव के बारे में तुम क्या जानते हो लिखो। सावधानियाँ बताओ।
उत्तर-
पम्प वाले स्टोव भी तेल से जलाये जाते हैं। इसमें तेल डालने के लिए एक टंकी होती है जिसमें तेल भर दिया जाता है। टंकी के बीच में ऊपर से एक बरनर लगा रहता है तथा पम्प के द्वारा हवा भर दी जाती है। हवा भरने में तेल की गैस बनकर एक छोटे से छिद्र के द्वारा बाहर निकलती है। ताप को नियन्त्रित करने के लिए बरनर के ऊपर एक कटोरी लगी होती है। स्टोव में तीन स्टैंड होते हैं जिसके ऊपर एक जाली जैसा तवा रहता है।
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चित्र 1.2. पम्प वाला स्टोव
सावधानियाँ-

  1. हवा भरते समय पम्प सावधानी से प्रयोग करना चाहिए।
  2. स्टोव जलाते समय लाइटर के साथ बरनर को गर्म करने के बाद ही पम्प से हवा भरनी चाहिए।
  3. यदि पम्प करते समय छेद बन्द हो तो पिन मारकर छेद को खोल लेना चाहिए।
  4. स्टोव प्रत्येक दिन साफ़ करना चाहिए।
  5. हमेशा मिट्टी के साफ़ तेल का प्रयोग करना चाहिए।

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प्रश्न 4.
ईंधन के रूप में उपले जलाने से लाभ तथा हानियों का उल्लेख करो।
उत्तर-
उपलों से लाभ यह है कि ये अन्य ईंधन से सस्ते पड़ते हैं तथा इनको बनाने के लिए ज़्यादा परिश्रम भी नहीं करना पड़ता।
उपलों से हानि यह है कि ये लकड़ी के समान ही धुआँ देते हैं जो रसोई में फैल जाता है। बर्तन तथा रसोई इसके कारण काले हो जाते हैं। इनको इकट्ठा करके रखना स्वास्थ्य की दृष्टि से हानिकारक होता है, क्योंकि बरसात के दिनों में इनसे मच्छर उत्पन्न हो जाते हैं जो मलेरिया रोग फैलाते हैं।

प्रश्न 5.
ईंधन के रूप में लकड़ी जलाने से लाभ तथा हानियाँ बताओ।
उत्तर-
लकड़ी जलाने से लाभ-लकड़ी जलाने से एक लाभ यह है कि यह अन्य ईंधन की अपेक्षा सस्ती मिलती है और इसलिए अधिकतर घरों में जलायी जाती है। यह ताप उत्पन्न करने का उपयोगी एवं सुविधाजनक साधन है।

लकड़ी जलाने से हानियाँ-लकड़ी जलाने से रसोई में धुआँ फैलता है। बर्तन धुएँ के कारण काले हो जाते हैं। धुएँ के कारण दम घुटने लगता है। आँखों से पानी बहने लगता है। धुआँ होने से रसोई की दीवारें आदि खराब हो जाती है। अतः धुएँ से बचने के लिए चूल्हे के ऊपर चिमनी की व्यवस्था होनी चाहिए।

प्रश्न 6.
लकड़ी के कोयले को ईंधन के रूप में प्रयोग करने से क्या लाभ तथा क्या हानियाँ हैं?
उत्तर-
लकड़ी के कोयले पर खाना पकाने से धुएँ की हानियों से बचा जा सकता है और बर्तन भी ज्यादा काले नहीं होते।
लकड़ी के कोयले से हानि यह है कि जल्दी ही इसकी राख बन जाती है और इसका उपयोग लकड़ी की अपेक्षा अधिक महँगा है।

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प्रश्न 7.
पत्थर के कोयले को ईंधन के रूप में प्रयोग करने से लाभ तथा हानि बताओ।
उत्तर-
पत्थर के कोयले से लाभ यह है कि ये देर तक सुलगते हैं तथा जल जाने के बाद धुआँ भी नहीं देते और इसके ताप से बर्तन भी काले नहीं होते।

इससे हानि यह है कि यह कोयला जलकर कार्बन मोनोऑक्साइड (Carbon monoxide) गैस उत्पन्न करता है। दरवाजे, खिड़कियाँ यदि बन्द रह जाएँ तो इस गैस का ज़हरीला प्रभाव पड़ता है और गैस से दम घुटने लगता है। यहाँ तक कि कभी-कभी व्यक्ति की मृत्यु हो जाने की सम्भावना भी रहती है। अतः इसे जलाकर खिड़की व दरवाज़ों को खोलकर रखना चाहिए जिससे गैस का निकास हो सके।

प्रश्न 8.
स्टोव के प्रयोग से क्या लाभ तथा हानियाँ हैं?
उत्तर-
बिना बत्ती वाले अर्थात् गैस के स्टोव से लाभ यह है कि यह अधिक ताप देता है तथा भोजन जल्दी पक जाता है। यह तेल की बदबू एवं धुआँ नहीं देता। इसमें तेल कम खर्च होता है तथा श्रम की बचत होती है।
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चित्र 1.3. बत्ती वाला स्टोव
इससे हानि यह है कि गैस का दबाव बढ़ने से कभी-कभी इसके फटने का डर रहता है। बत्ती वाले स्टोव से लाभ यह है कि इसे जलाने में आसानी रहती है। लेकिन यह स्टोव तेल की बदबू एवं धुआँ देता है। यदि इसे असावधानी से प्रयोग किया जाये तो इसके खराब होने का डर रहता है। अतः इसकी बत्तियों को समय-समय पर काटते रहना चाहिए। तेल को छानकर टंकी में डालना चाहिए। टंकी में तेल भरा रहना चाहिए। बत्तियाँ छोटी-छोटी हो गई हों या बरनर खराब हो गया हो तो बदलते रहना चाहिए। स्टोव में तेल भर कर उसे बाहर से पोंछ देना चाहिए तथा इसकी समय-समय पर सफ़ाई करवाते रहना चाहिए।

प्रश्न 9.
ईंधन के रूप में गैस का प्रयोग किस प्रकार लाभदायक है ? इससे क्या हानि होती है?
उत्तर-
गैस से लाभ यह है कि ईंधन का यह एक सुविधाजनक साधन है, इससे धुआँ नहीं फैलता, श्रम एवं समय की बचत होती है, रसोई गन्दी नहीं होती तथा इसे जलाने तथा इसमें खाना बनाने में अधिक समय खर्च नहीं होता।
इससे हानि यह है कि ज़रा सी असावधानी से गैस के सिलिन्डर फटने का डर रहता है। परन्तु अब ऐसे प्रबन्ध किए गए हैं कि गैस सिलिन्डर अधिक सुरक्षित हैं।

PSEB 6th Class Home Science Practical विभिन्न प्रकार के चूल्हे

विभिन्न प्रकार के चूल्हे PSEB 6th Class Home Science Notes

  • कोई भी ऐसी चीज़ जिसमें आग जलाकर भोजन पकाया जाए, उसको चूल्हा कहते |
  • अंगीठी दो प्रकार की होती है
    • कोयले वाली
    • बूरे वाली (बुरादे वाली)।
  • हैदराबादी या धुआँ रहित चूल्हा की खोज डॉक्टर राजू ने की।
  • तेल के स्टोव भी दो प्रकार हैं-
    • पम्प वाला
    • एक या अधिक बत्तियों वाला।
  • स्टोव जलाते समय लाइटर के साथ बरनर को गर्म करने के बाद ही पम्प से हवा । भरनी चाहिए। |
  • रोटी बनाते समय ढीले-ढाले और आरामदायक कपड़े पहनना चाहिए।

PSEB 6th Class Home Science Practical चाय बनाना और परोसना

Punjab State Board PSEB 6th Class Home Science Book Solutions Practical चाय बनाना और परोसना Notes.

PSEB 6th Class Home Science Practical चाय बनाना और परोसना

सामग्री—

  1. चाय की पत्ती — 3/4 छोटी चम्मच
  2. चीनी — 1 छोटी चम्मच
  3. दूध — 2-3 बड़े चम्मच
  4. पानी — 1 कप

विधि—पहले केतली में उबलता हुआ थोड़ा-सा पानी डालकर, केतली में चारों ओर हिलाकर, निकाल दें ताकि वह गर्म हो जाए। अब उसमें चाय की पत्ती डाल दें। ऊपर से उबलता हुआ पानी डालकर इसे पाँच मिनट ढक कर रख दें। इसे गर्म दूध और चीनी के साथ परोसें।

PSEB 6th Class Home Science Practical चाय बनाना और परोसना

नोट-

  1. जितने कप चाय बनानी हो उसी हिसाब से सामग्री की मात्रा लें।
  2. दूध, चाय और चीनी की मात्रा स्वादानुसार घटाई-बढ़ाई जा सकती है।
  3. चाय बनाकर देने के लिए प्याले में चीनी और केतली से चाय (गर्म पानी में पत्ती मिली हुई) डालें। प्याला थोड़ा खाली रखें और उसमें दूध मिलायें। चाय तैयार हो जायेगी। इसे बर्तन में डालकर गर्म-गर्म परोस दें।

कुल मात्रा—1 व्यक्ति के लिए।