PSEB 12th Class Sociology Solutions Chapter 8 आधुनिकीकरण व वैश्वीकरण

Punjab State Board PSEB 12th Class Sociology Book Solutions Chapter 8 आधुनिकीकरण व वैश्वीकरण Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 12 Sociology Chapter 8 आधुनिकीकरण व वैश्वीकरण

पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न (TEXTUAL QUESTIONS)

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्न

A. बहुविकल्पीय प्रश्न-

प्रश्न 1.
परिवर्तन की संरचनात्मक प्रक्रिया है :
(क) केवल आधुनिकीकरण
(ख) केवल वैश्वीकरण
(ग) आधुनिकीकरण व वैश्वीकरण
(घ) कोई नहीं।
उत्तर-
(ग) आधुनिकीकरण व वैश्वीकरण।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित में किसका विचार था कि आधुनिकीकरण की प्रक्रिया वैयक्तिक बंधनों से अवैयक्तिक सम्बन्धों की ओर जाती है :
(क) दुर्थीम
(ख) वैबर
(ग) कार्ल मार्क्स
(घ) कोई नहीं।
उत्तर-
(ख) वैबर।

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प्रश्न 3.
निम्नलिखित में से किसका विचार था कि आधुनिकीकरण की प्रक्रिया यांत्रिक एकता से जैविक एकता की ओर परिवर्तन है :
(क) दुर्थीम
(ख) वैबर
(ग) कार्ल मार्क्स
(घ) कोई नहीं।
उत्तर-
(क) दुर्थीम।

प्रश्न 4.
वस्तुओं व सेवाओं के सीमा पार लेन-देन की मात्रा व प्रकार में वृद्धि तथा अन्तर्राष्ट्रीय प्रसार के द्वारा विश्व के देशों में बढ़ रही अन्तर्निर्भरता को कहते हैं :
(क) पश्चिमीकरण
(ख) आधुनिकीकरण
(ग) आधुनिकीकरण
(घ) वैश्वीकरण।
उत्तर-
(घ) वैश्वीकरण। .

प्रश्न 5.
वैश्वीकरण का अर्थ है :
(क) व्यापार बाधाओं में कटौती
(ख) तकनीकी का स्वतन्त्र प्रवाह
(घ) कोई नहीं।
(ग) दोनों
उत्तर-
(ग) दोनों।

B. रिक्त स्थान भरें-

1. एक करिश्माई नेता वह है जो अपने व्यक्तित्व द्वारा लोगों को प्रभावित करने का ………….. रखता है।
2. आधुनिकीकरण की प्रक्रिया में,…………………. स्तर व्यक्ति के दृष्टिकोण व व्यक्तित्व के विशिष्ट लक्षणों में परिवर्तन दिखाता है।
3. एल० पी० जी० का अभिप्राय लिब्राइजेशन, ……….. तथा ………. है।
4. सार्वजनिक क्षेत्र से निजी क्षेत्र में स्वामित्व के हस्तान्तरण में परिवर्तन ……………………… कहलाता है।
5. …………………. विश्वभर के देशों में बढ़ रही आर्थिक अन्तर्निर्भरता है।
उत्तर-

  1. सामर्थ्य,
  2. सामाजिक,
  3. प्राइवेटाइज़ेशन, ग्लोब्लाइज़ेशन,
  4. निजीकरण,
  5. वैश्वीकरण।

C. सही/ग़लत पर निशान लगाए-

1. आधुनिकीकरण की गति एक समाज से दूसरे समाज में भिन्न होती है।
2. ब्रिटिश नीति का लघु स्तर पर कम-से-कम हस्तक्षेप होने के कारण समाज में औद्योगीकरण, नगरीकरण व न्याय व्यवस्था में न्यूनतम अथवा बिल्कुल ही परिवर्तन नहीं आया।
3. आधुनिकीकरण एक क्रमगत प्रक्रिया है जिससे एक क्षेत्र में परिवर्तन से दूसरे क्षेत्र में परिवर्तन होता है।।।
4. वैश्वीकरण की प्रक्रिया विश्व के विभिन्न देशों में भिन्न होती है।
5. वैश्वीकरण अन्तर्निर्भरता पर जोर नहीं देता है।
उत्तर-

  1. सही,
  2. गलत,
  3. सही,
  4. सही,
  5. गलत।

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D. निम्नलिखित शब्दों का मिलान करें-

कॉलम ‘ए’ — कॉलम ‘बी’
आधुनिकीकरण — अवैयक्तिक बंधन
वैश्वीकरण — यांत्रिक एकता
दुर्थीम– वैश्विक गाँव
वैबर — तकनीकी परिवर्तन
मार्शल मैक्ल्यूहन — अन्तर्निर्भरता
उत्तर-
कॉलम ‘ए’ — कॉलम ‘बी’
आधुनिकीकरण — तकनीकी परिवर्तन
वैश्वीकरण — अन्तर्निर्भरता
दुर्थीम — एकता
वैबर — अवैयक्तिक बंधन
मार्शल मैक्ल्यूहन — वैश्विक गाँव

II. अति लघु उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1. वैश्विक गाँव की अवधारणा किसने दी है ?
उत्तर-मार्शल मैक्ल्यूहन ने।

प्रश्न 2. यांत्रिक तथा जैविक एकता की अवधारणा किसने दी है ?
उत्तर-इमाईल दुर्शीम ने।

प्रश्न 3. सार्वजनिक क्षेत्र से निजी क्षेत्र में स्वामित्व के हस्तांतरण का नियंत्रण क्या कहलाता है ?
उत्तर-निजीकरण।

प्रश्न 4. एक प्रक्रिया बाजार सिद्धान्तों की दिशा में अर्थव्यवस्था नवीकरण की प्रक्रिया क्या कहलाती है ?
उत्तर-उदारीकरण।

प्रश्न 5. करिश्माई नेता से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर-वह नेता जो अपने व्यक्तित्व से जनता को प्रभावित करता है उसे करिश्माई नेता कहते हैं।

प्रश्न 6. आधुनिकीकरण की प्रक्रिया में चार क्षेत्रों के नाम लिखें।
उत्तर-तकनीक, कृषि, उद्योग तथा वातावरण आधुनिकता के चार क्षेत्र हैं।

प्रश्न 7. आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के तीन कारण लिखें।
उत्तर-नगरीकरण, औद्योगीकरण, आधुनिक शिक्षा, आधुनिकीकरण के सामने आने के कारण हैं।

प्रश्न 8. आधुनिकीकरण की दो विशेषताओं का उल्लेख करें।
उत्तर-

  1. यह लगातार तथा लम्बे समय तक चलने वाली प्रक्रिया है।
  2. इससे समाज के प्रत्येक क्षेत्र में परिवर्तन आता है।

प्रश्न 9. वैश्वीकरण की दो विशेषताओं का उल्लेख करें।
अथवा
वैश्वीकरण की विशेषताओं के दो नाम लिखो।
उत्तर-

  1. इस प्रक्रिया से अलग-अलग देशों में अन्तर्निर्भरता बढ़ती है।
  2. इससे लोगों का, तकनीक व विचारों का मुक्त प्रवाह होता है।

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प्रश्न 10. करिश्माई नेता से आप क्या समझते है ?
उत्तर-वह नेता जो अपने व्यक्तित्व से जनता को प्रभावित करता है उसे करिश्माई नेता कहते हैं।

प्रश्न 11. एल० पी० जी० (LPG) का क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-L- Liberalisation (उदारीकरण), P-Privatisation (निजीकरण) तथा G-Globalisation (वैश्वीकरण)।

III. लघु उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
आधुनिकीकरण से आपका क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
आधुनिकीकरण का अर्थ जीवन जीने के आधुनिक तथा नए ढंगों व नए मूल्यों को अपना लेना। पहले इसका अर्थ काफ़ी तंग घेरे में लिया जाता था, परन्तु अब इसमें कृषि आर्थिकता तथा औद्योगिक आर्थिकता में परिवर्तन को भी शामिल किया जाता है।

प्रश्न 2.
आधुनिकीकरण की किन्हीं दो विशेषताओं का संक्षेप में उल्लेख करें।
उत्तर-

  1. यह एक क्रान्तिकारी प्रक्रिया है जिस में समाज परंपरागत से आधुनिक हो जाता है। इसमें लोगों के जीवन जीने के ढंगों में पूर्ण परिवर्तन आ जाता है।
  2. आधुनिकीकरण की प्रक्रिया एक लंबी प्रक्रिया है जिसमें परंपरागत रूप से आधुनिक रूप में परिवर्तित होने में कई पीढ़ियां लग जाती हैं।

प्रश्न 3.
आधुनिकीकरण के दो कारणों का संक्षेप में उल्लेख करें।
अथवा
आधुनिकीकरण के तीन कारणों के नाम लिखिए।
उत्तर-

  • पश्चिमी शिक्षा के आने से लोगों ने पढ़ना लिखना शुरू किया जिससे उन्होंने पश्चिमी देशों के आधुनिक विचारों को अपनाना शुरू कर दिया।
  • औद्योगीकरण के कारण इस क्षेत्र में नए आविष्कार हुए जिस कारण मनुष्यों का कार्य मशीनों ने ले लिया। इससे आधुनिकीकरण आ गया।
  • अंग्रेजों ने भारत में अपनी संस्कृति को फैलाना शुरू किया जिस कारण यहां पर आधुनिकीकरण आना शुरू हुआ।

प्रश्न 4.
वैश्वीकरण से आप क्या समझते हैं ?
अथवा
वैश्वीकरण।
उत्तर-
वैश्वीकरण का साधारण शब्दों में अर्थ है अलग-अलग देशों के बीच वस्तुओं, सेवाओं, विचारों, सूचना, लोगों तथा पूँजी का बेरोक-टोक प्रवाह। इससे उन देशों की आर्थिक, सामाजिक व सांस्कृतिक सीमाओं के बंधन टूट जाते हैं। यह सब कुछ संचार के विकसित साधनों के कारण मुमकिन हुआ है।

प्रश्न 5.
निजीकरण से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर-
सरकार ने कई निगमों का निर्माण किया है जिन्हें वह कई बार व्यक्तिगत हाथों में बेच देते हैं। इस प्रकार जनतक क्षेत्र की या सरकारी कंपनियों को निजी हाथों में बेचने की प्रक्रिया को निजीकरण कहते हैं। उदाहरण के लिए नाल्को (NALCO), वी० एस० एन० एल० (V.S.N.L.) इत्यादि।

प्रश्न 6.
उदारीकरण से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर-
नियंत्रित अर्थव्यवस्था से अनावश्यक प्रतिबन्धों को हटाना उदारीकरण है। उद्योगों तथा व्यापार से अनावश्यक प्रतिबन्धों को हटाना ताकि अर्थव्यवस्था अधिक प्रगतिशील, मुक्त तथा Competitive बन सके, उदारीकरण कहलाता है। यह आर्थिक प्रक्रिया व समाज में आर्थिक परिवर्तनों की प्रक्रिया है।

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IV. दीर्घ उत्तरों वाले प्रश्न-

प्रश्न 1.
पारम्परिक व आधुनिक समाज में अन्तर स्पष्ट करें।
उत्तर-

  • परंपरागत समाजों में गुज़ारे पर आधारित आर्थिकता होती है अर्थात् उत्पादन केवल आवश्यकताओं को पूर्ण करने के लिए किया जाता है जबकि आधुनिक समाजों में बाजार को देख कर किया जाता है।
  • परंपरागत समाजों में काफी साधारण रूप का श्रम विभाजन पाया जाता है जोकि लिंग पर आधारित होता है जबकि आधुनिक समाजों में श्रम विभाजन विशेषीकरण पर आधारित होती है जिसमें कई आधार होते हैं।
  • परंपरागत समाजों के लोग स्थानीय रूप से अन्तर्निर्भर होते हैं। जबकि आधुनिक समाजों में सम्पूर्ण विश्व के लोग वैश्विक रूप से अन्तर्निर्भर होते हैं।
  • परंपरागत समाजों में तकनीक बिल्कुल साधारण स्तर की होती है जबकि आधुनिक समाजों में तकनीक काफ़ी अधिक विकसित होती है।

प्रश्न 2.
यांत्रिक व जैविक एकता में अन्तर स्पष्ट करें।
उत्तर-

  • यांत्रिक एकता व्यक्ति को समाज के साथ बिना किसी बिचौलिए के जोड़ देती है। आंगिक एकता में व्यक्ति समाज पर इस कारण निर्भर हो जाता है क्योंकि वह अन्य व्यक्तियों पर निर्भर होता है।
  • यांत्रिक एकता समानताओं पर आधारित होती है जबकि जैविक एकता का आधार श्रम विभाजन है।
  • यांत्रिक एकता की शक्ति सामूहिक चेतना की शक्ति में होती है। जैविक एकता की उत्पत्ति कार्यात्मक भिन्नता पर आधारित होती है।
  • यांत्रिक एकता व्यक्तित्व के विकास के विरुद्ध है जबकि जैविक एकता व्यक्तित्व के विकास का पूर्ण मौका प्रदान करती है।
  • यांत्रिक एकता आदिम तथा प्राचीन समाजों में मिलती है जबकि जैविक एकता आधुनिक समाजों की विशेषता है जिनका प्रमुख लक्षण श्रम विभाजन है।

प्रश्न 3.
आधुनिकीकरण क्या है ? इसके दोनों स्तरों का उल्लेख करें।
उत्तर-
आधुनिकीकरण का अर्थ है जीवन जीने के आधुनिक तथा नए ढंगों तथा नए मूल्यों को अपना लेना। पहले इसका अर्थ काफी तंग घेरे में लिया जाता था परन्तु अब इसमें कृषि आर्थिकता से औद्योगिक आर्थिकता में परिवर्तन को भी शामिल किया जाता है। इसने परंपरागत लोगों तथा पुराने बंधनों में बंधे हुए लोगों को वर्तमान स्थितियों के अनुसार बदल दिया है। इससे लोगों की विचारधारा, पसंद, जीवन जीने के ढंगों में बहुत से परिवर्तन आए। दूसरे शब्दों में वैज्ञानिक तथा तकनीकी आविष्कारों ने सामाजिक संबंधों की सम्पूर्ण व्यवस्था में बहुत से परिवर्तन ला दिए तथा परंपरागत विचारधारा के स्थान पर नई विचारधारा सामने आ गई। आधुनिकीकरण की प्रक्रिया प्रत्येक समाज की आवश्यकताओं तथा स्थितियों के अनुसार अलग-अलग होती है।

प्रश्न 4.
वैश्वीकरण से क्या अभिप्राय है ? दो प्रकार के वैश्वीकरण की व्याख्या करें।
उत्तर-
वैश्वीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें देश की अर्थव्यवस्था का संबंध अन्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं से जोड़ा जाता है। साधारण शब्दों में एक देश के अन्य देशों के साथ वस्तुओं, सेवाओं, व्यक्तियों के बीच बेरोक-टोक आदान-प्रदान को वैश्वीकरण कहा जाता है। इस प्रक्रिया की सहायता से अलग-अलग देशों की अर्थव्यवस्थाएं एकदूसरे के सम्पर्क में आती हैं। देशों में व्यापार का मुक्त आदान-प्रदान होता है। इस प्रकार विश्व की अलग-अलग अर्थव्यवस्थाओं के एकीकरण की प्रक्रिया को वैश्वीकरण कहा जाता है। वैश्वीकरण के कई प्रकार होते हैं जैसे कि आर्थिक वैश्वीकरण जिसमें विश्व की अलग-अलग अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे से जुड़ जाती हैं तथा तकनीकी वैश्वीकरण जिसमें एक देश में आविष्कार हुई तकनीक अन्य देशों में पहुँच जाती है।

प्रश्न 5.
वैश्वीकरण की अवधारणा को उदाहरण सहित स्पष्ट करें।
उत्तर-
वैश्वीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें देश की अर्थव्यवस्था का संबंध अन्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं से जोड़ा जाता है। साधारण शब्दों में एक देश के अन्य देशों के साथ वस्तुओं, सेवाओं, व्यक्तियों के बीच बेरोक-टोक आदान-प्रदान को वैश्वीकरण कहा जाता है। इस प्रक्रिया की सहायता से अलग-अलग देशों की अर्थव्यवस्थाएं एकदूसरे के सम्पर्क में आती हैं। देशों में व्यापार का मुक्त आदान-प्रदान होता है। इस प्रकार विश्व की अलग-अलग अर्थव्यवस्थाओं के एकीकरण की प्रक्रिया को वैश्वीकरण कहा जाता है। वैश्वीकरण के कई प्रकार होते हैं जैसे कि आर्थिक वैश्वीकरण जिसमें विश्व की अलग-अलग अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे से जुड़ जाती हैं तथा तकनीकी वैश्वीकरण जिसमें एक देश में आविष्कार हुई तकनीक अन्य देशों में पहुँच जाती है।

V. अति दीर्घ उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
आधुनिकीकरण से आप क्या समझते हैं ? इसकी विशेषताओं का विस्तार सहित वर्णन करें।
अथवा
आधुनिकीकरण पर एक नोट लिखो।
अथवा
आधुनिकीकरण की विशेषताओं की विस्तृत रूप में व्याख्या करो।
उत्तर-
आधुनिकीकरण की प्रक्रिया आधुनिक समाजों के विकसित होने पर ही पाई जाती है। भारतीय समाज के ऊपर आधुनिकीकरण की प्रक्रिया का आरम्भ अंग्रेज़ों के भारत पर राज्य करने के पश्चात् हुआ जब लोग पश्चिमीकरण (पश्चिमी संस्कृति) के सम्पर्क में आए तो उनमें कई प्रकार के परिवर्तन आ गए। आधुनिकीकरण आधुनिक समाज की एक विशेषता है। एम० एन० श्रीनिवास के अनुसार,” आधुनिकीकरण एवं पश्चिमीकरण इन दोनों में अन्तर पाया जाता है। उनके अनुसार पश्चिमीकरण का संकल्प आधुनिकीकरण के संकल्प से अधिक नैतिक दृष्टिकोण से निरपेक्षता संकल्प है। इससे किसी भी संस्कृति के अच्छे व बुरे होने का ज्ञान नहीं होता है जबकि आधुनिकीकरण एक कीमत रहित संकल्प नहीं है क्योंकि आधुनिकीकरण को सदैव उचित, ठीक एवं अच्छा ही माना जाता है। इस कारण ही श्रीनिवास ने आधुनिकीकरण के स्थान पर पश्चिमीकरण के प्रयोग को ही महत्त्व दिया। इन दोनों में कोई विशेष अन्तर नहीं बतलाया। परन्तु श्रीनिवास जी ने पश्चिमीकरण को ही सदैव महत्त्व दिया है। इस प्रकार उनके विचारों से एक बात तो स्पष्ट हो जाती है कि आधुनिकीकरण की प्रक्रिया प्रगतिवादी होती है। इस प्रक्रिया का विस्तारपूर्वक वर्णन करने के लिए अनेक समाजशास्त्रियों ने अपने विचार प्रकट किए हैं-

1. मैरियन जे० लैवी (Marrion J. Levy) के अनुसार, “आधुनिकीकरण की मेरी परिभाषा शक्ति के बेजान साधनों एवं हथियारों का प्रयोग जो गतिविधियों के परिणामों को बढ़ाते हैं के ऊपर आधारित है। मैं इन दोनों तत्त्वों के बीच प्रत्येक को अटूट क्रम का आधार समझता हूं। एक समाज का कम या अधिक आधुनिक होना तब तक समझा जाता है जब तक इसके सदस्य शक्ति के बेजान साधनों का प्रयोग अपनी गतिविधियों के परिणामों को बढ़ाने के लिए करते हैं। इन दोनों में से कोई भी तत्त्व समाज विशेष में न तो पूरक एवं गायब है, न ही विशेष तौर पर उपस्थित होता है।”

2. वीनर (Veiner) के अनुसार, आधुनिकीकरण के कई पक्ष हैं-

  • राजनीतिक आधुनिकीकरण (Political Modernization)—इसमें महत्त्वपूर्ण संस्थाएं, राजनीतिक दलों, सांसदों, वोट अधिकार तथा गुप्त वोटों जो सहभागी निर्णय को मिलने में समर्थ हों, का विकास शामिल है।
  • सांस्कृतिक आधुनिकीकरण (Cultural Modernization)-प्रतिपूरक रूप से धर्म-निष्पक्षता तथा विचारधाराओं से लगाव पैदा करना है।
  • आर्थिक आधुनिकीकरण (Economic Modernization)—यह औद्योगीकरण से भिन्न होता है।

3. डॉ. योगेन्द्र सिंह (Dr. Yogender Singh) के अनुसार, “साधारणत: आधुनिक होने का तात्पर्य ‘फैशनेबल’ से लिया गया है। आधुनिकीकरण एक सांस्कृतिक धारणा है जिसमें तार्किक, सर्वव्यापक दृष्टिकोण, हमदर्दी, वैज्ञानिक विश्व दृष्टि, मानवता, तकनीकी प्रगति आदि शामिल हैं।”

4. आईनस्टैड (Eienstadt) के अनुसार, “ऐतिहासिक तौर पर आधुनिकीकरण एक परिवर्तन की प्रक्रिया है। उस किस्म की सामाजिक, राजनीतिक एवं आर्थिक व्यवस्था की तरफ उन्मुख है, जो 17वीं शताब्दी से लेकर 19वीं शताब्दी तक पश्चिमी यूरोपीय देशों एवं अमेरिका में विकसित हुआ और धीरे-धीरे सम्पूर्ण यूरोपीय देशों में फैल गया। 19वीं एवं 20वीं शताब्दी में जिनका प्रसार दक्षिण अमेरिका, एशिया एवं अफ्रीका के महाद्वीप में हुआ।” ।

इस तरह इन परिभाषाओं के आधार पर हम कह सकते हैं कि आधुनिकीकरण की प्रक्रिया वह प्रक्रिया है, जिसमें पुरानी व्यवस्था में परिवर्तन आ जाता है। उसके स्थान पर नई एवं अच्छी व्यवस्था स्थान ले लेती है। यह प्रक्रिया किसी भी समाज में पाई जाती है और इसकी मात्रा अलग-अलग समाजों में अलग-अलग होती है।

आधुनिकीकरण की विशेषताएं (Characteristics of Modernization)-

1. इस प्रक्रिया के साथ शहरीकरण एवं औद्योगिकीकरण का विकास होता है (It leads to the development of Urbanization & Industrialization)-शहरों के साथ औद्योगिकीकरण भी पाया जाता है। जहां-जहां पर भी उद्योगों की स्थापना हुई, वहीं-वहीं पर शहरों का भी विकास होने लग गया। गांवों की भी अधिक-से-अधिक जनसंख्या शहरों की तरफ जाने लगी। शहरों में प्रत्येक प्रकार की सुविधाएं प्राप्त होती हैं। व्यवसायों की भी अधिकता पाई जाती है। संचार एवं यातायात के साधनों के विकसित होने के कारण शहरी समाज में काफ़ी परिवर्तन आया है। इस कारण शहरों के परिवारों, जाति इत्यादि संस्थाओं में भी काफ़ी परिवर्तन आया। इस कारण ही शहरीकरण एवं संस्कृतिकरण में हम भेद समझते हैं। जहां भी शहरों का विकास हुआ, वहां आधुनिकता पाई जाने लगी। इसी कारण शहर गांवों से अधिक विकसित हुए।

2. इस प्रक्रिया के साथ शिक्षा का प्रसार होता है (This process develops the education)-शिक्षा के क्षेत्र में आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के साथ तेजी से विकास हुआ। तकनीकी शिक्षा में काफ़ी प्रगति हुई। प्राचीन काल में केवल ऊंची जाति के ही लोगों को शिक्षा दी जाती थी परन्तु समाज में जैसे प्रगति हुई, उसी प्रकार तकनीकी संस्थाओं की भी आवश्यकता पड़ने लगी। इसी कारण कई तकनीकी केन्द्र भी स्थापित हुए। इसके अतिरिक्त व्यावसायिक शिक्षा का महत्त्व भी बढ़ा। जो व्यक्ति जिस कार्य को करने की शिक्षा प्राप्त करता था, उसको वही काम ही मिल जाया करता था। इस कारण आधुनिकीकरण की प्रक्रिया ने शिक्षा के क्षेत्र में काफ़ी परिवर्तन लाया।

3. इस प्रक्रिया से अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्ध भी बढ़ते हैं (It Increases the International relations)आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के द्वारा विभिन्न देशों में सहयोगिता आरम्भ हुई। यू० एन० ओ० (U.N.O.) के अस्तित्व में आने के पश्चात् प्रत्येक देश की सुरक्षा का भी प्रबन्ध किया जाने लग पड़ा है। संसार में आपसी सम्बन्ध व शांति का वातावरण पैदा करना काफ़ी आवश्यक था। यू० एन० ओ० द्वारा मानवीय अधिकारों को सुरक्षित रखने का यत्न किया गया। इस संस्था द्वारा किसी भी देश की निजी समस्याओं को सुलझाने के लिए भी यत्न किए गए। शांति को बरकरार रखना ही इसका एकमात्र उद्देश्य है। जब भी दो देशों के बीच संघर्ष की स्थिति पैदा होती है तो U.N.O. की कोशिश के साथ दोनों देशों के बीच सम्बन्ध सुधारे जाते हैं। इस प्रकार आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के साथ सहयोगिता का वातावरण बना दिया गया है।

4. इस प्रक्रिया के कारण सामाजिक विभेदीकरण का विकास होता है (This process develops & increases the process of Social differentiation)-आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के साथ जैसे-जैसे हमारा समाज जटिल होता गया, तो समाज में विभेदीकरण की प्रक्रिया और भी तेज़ होती गई। समाज में भौतिक क्रान्ति के साथ-साथ सामाजिक विभेदीकरण में भी वृद्धि हो गई। इस प्रक्रिया के द्वारा हमें उस स्थिति का ज्ञान हो जाता है, जिस कारण समाज विभिन्न भागों में बंटा होता है। यह प्रक्रिया मानव एवं मानव के बीच और समूह एवं समूह के बीच वैर भाव की भावनाओं को विकसित ही नहीं होने देती है। इस प्रकार जब भी समाज साधारण अवस्था से कठिन अवस्था की तरफ बढ़ता है तो विभेदीकरण अवश्य पाया जाता है। कई प्रकार की सामाजिक आवश्यकताएं होती हैं। इस प्रक्रिया के बिना हम समाज में श्रम-विभाजन नहीं कर सकते। इस प्रकार आधुनिकीकरण में जैसे-जैसे विकास होता है तो समाज के प्रत्येक क्षेत्र जैसे कि धार्मिक, आर्थिक, शैक्षिक इत्यादि में उन्नति होने लग जाती है। इस कारण विभेदीकरण की प्रक्रिया भी तेज़ हो जाती है।

5. इससे सामाजिक गतिशीलता बढ़ती है (It increases Social Mobility)—सामाजिक गतिशीलता आधुनिक समाजों की मुख्य विशेषता होती है। शहरी समाज में श्रम विभाजन, विशेषीकरण, देशों की भिन्नता, उद्योग, व्यापार, यातायात के साधन तथा संचार के साधनों इत्यादि ने सामाजिक गतिशीलता को बढ़ा दिया है। प्रत्येक व्यक्ति अपनी योग्यता, बुद्धि इत्यादि के साथ ग़रीब से अमीर बन सकता है। व्यक्ति जिस पेशे में लाभ देखता है उसी को अपनाना शुरू कर देता है। पेशे के सम्बन्ध में वह स्थान परिवर्तन भी कर लेता है। इस प्रकार सामाजिक गतिशीलता की प्रक्रिया के द्वारा परम्परागत कीमतों की जगह नई कद्रों-कीमतों का भी विकास हुआ है।

6. इससे समाज सुधारक लहरें आगे आई हैं (Social reform movements came into being due to this) आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के द्वारा समाज सुधारक लहरों का विकास होना शुरू हो गया। समाज में जब भी परिवर्तन आता है तो उसका समाज पर प्रभाव अच्छा तथा गलत भी होता है। जब हम इस प्रभाव के अच्छे गुणों की तरफ देखते हैं तो हमें समाज में प्रगति होती नज़र आती है। जब हम इसकी बुराइयों की तरफ देखते हैं तो हमें समाज के विघटन के बारे में पता चलना शुरू हो जाता है। आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के द्वारा कई समाज सुधारक लहरें पैदा हुईं जिनका मुख्य उद्देश्य समाज में पाई जाने वाली बुराइयों को समाप्त करना होता है ताकि समाज में सन्तुलन बना रहे। इससे समाज में और प्रगति होती है। समाज सुधारक लहरों तथा आन्दोलनों की मदद से समाज में मिलने वाली उन कीमतों को खत्म किया जाता है जो समाज को गिरावट की तरफ ले जाती है। इस तरह इस प्रक्रिया के द्वारा समाज में परिवर्तन आ जाता है।

7. इसके साथ व्यक्ति की स्थिति में परिवर्तन हो जाता है (It changes the status of Individual)आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के द्वारा स्थिति परिवर्तन भी पाया गया है। सर्वप्रथम हम यह देखते हैं कि प्राचीन समय में जाति विशेष व्यवसाय को अपनाना आवश्यक था। परन्तु आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के द्वारा एक तरफ के व्यवसायों की अधिकता पाई गई। दूसरी तरफ विशेषीकरण की स्थिति पैदा हो गई। इस प्रकार व्यक्ति की परिस्थितियों में तत्काल परिवर्तन आ गए। जाति प्रथा अलोप हो गई और उसके स्थान पर वर्ग व्यवस्था पैदा होने लग पड़ी। व्यक्ति को स्थिति उसकी योग्यतानुसार प्राप्त होने लगी। इस प्रकार आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के द्वारा सामाजिक संगठन और विभिन्न समूहों की स्थितियों में परिवर्तन आने लग गया।

PSEB 12th Class Sociology Solutions Chapter 8 आधुनिकीकरण व वैश्वीकरण

प्रश्न 2.
आधुनिकीकरण पर निबन्ध लिखें।
उत्तर-
आधुनिकीकरण की प्रक्रिया आधुनिक समाजों के विकसित होने पर ही पाई जाती है। भारतीय समाज के ऊपर आधुनिकीकरण की प्रक्रिया का आरम्भ अंग्रेज़ों के भारत पर राज्य करने के पश्चात् हुआ जब लोग पश्चिमीकरण (पश्चिमी संस्कृति) के सम्पर्क में आए तो उनमें कई प्रकार के परिवर्तन आ गए। आधुनिकीकरण आधुनिक समाज की एक विशेषता है। एम० एन० श्रीनिवास के अनुसार,” आधुनिकीकरण एवं पश्चिमीकरण इन दोनों में अन्तर पाया जाता है। उनके अनुसार पश्चिमीकरण का संकल्प आधुनिकीकरण के संकल्प से अधिक नैतिक दृष्टिकोण से निरपेक्षता संकल्प है। इससे किसी भी संस्कृति के अच्छे व बुरे होने का ज्ञान नहीं होता है जबकि आधुनिकीकरण एक कीमत रहित संकल्प नहीं है क्योंकि आधुनिकीकरण को सदैव उचित, ठीक एवं अच्छा ही माना जाता है। इस कारण ही श्रीनिवास ने आधुनिकीकरण के स्थान पर पश्चिमीकरण के प्रयोग को ही महत्त्व दिया। इन दोनों में कोई विशेष अन्तर नहीं बतलाया। परन्तु श्रीनिवास जी ने पश्चिमीकरण को ही सदैव महत्त्व दिया है। इस प्रकार उनके विचारों से एक बात तो स्पष्ट हो जाती है कि आधुनिकीकरण की प्रक्रिया प्रगतिवादी होती है। इस प्रक्रिया का विस्तारपूर्वक वर्णन करने के लिए अनेक समाजशास्त्रियों ने अपने विचार प्रकट किए हैं-

1. मैरियन जे० लैवी (Marrion J. Levy) के अनुसार, “आधुनिकीकरण की मेरी परिभाषा शक्ति के बेजान साधनों एवं हथियारों का प्रयोग जो गतिविधियों के परिणामों को बढ़ाते हैं के ऊपर आधारित है। मैं इन दोनों तत्त्वों के बीच प्रत्येक को अटूट क्रम का आधार समझता हूं। एक समाज का कम या अधिक आधुनिक होना तब तक समझा जाता है जब तक इसके सदस्य शक्ति के बेजान साधनों का प्रयोग अपनी गतिविधियों के परिणामों को बढ़ाने के लिए करते हैं। इन दोनों में से कोई भी तत्त्व समाज विशेष में न तो पूरक एवं गायब है, न ही विशेष तौर पर उपस्थित होता है।”

2. वीनर (Veiner) के अनुसार, आधुनिकीकरण के कई पक्ष हैं-

  • राजनीतिक आधुनिकीकरण (Political Modernization)—इसमें महत्त्वपूर्ण संस्थाएं, राजनीतिक दलों, सांसदों, वोट अधिकार तथा गुप्त वोटों जो सहभागी निर्णय को मिलने में समर्थ हों, का विकास शामिल है।
  • सांस्कृतिक आधुनिकीकरण (Cultural Modernization)-प्रतिपूरक रूप से धर्म-निष्पक्षता तथा विचारधाराओं से लगाव पैदा करना है।
  • आर्थिक आधुनिकीकरण (Economic Modernization)—यह औद्योगीकरण से भिन्न होता है।

3. डॉ. योगेन्द्र सिंह (Dr. Yogender Singh) के अनुसार, “साधारणत: आधुनिक होने का तात्पर्य ‘फैशनेबल’ से लिया गया है। आधुनिकीकरण एक सांस्कृतिक धारणा है जिसमें तार्किक, सर्वव्यापक दृष्टिकोण, हमदर्दी, वैज्ञानिक विश्व दृष्टि, मानवता, तकनीकी प्रगति आदि शामिल हैं।”
4. आईनस्टैड (Eienstadt) के अनुसार, “ऐतिहासिक तौर पर आधुनिकीकरण एक परिवर्तन की प्रक्रिया है। उस किस्म की सामाजिक, राजनीतिक एवं आर्थिक व्यवस्था की तरफ उन्मुख है, जो 17वीं शताब्दी से लेकर 19वीं शताब्दी तक पश्चिमी यूरोपीय देशों एवं अमेरिका में विकसित हुआ और धीरे-धीरे सम्पूर्ण यूरोपीय देशों में फैल गया। 19वीं एवं 20वीं शताब्दी में जिनका प्रसार दक्षिण अमेरिका, एशिया एवं अफ्रीका के महाद्वीप में हुआ।” ।

इस तरह इन परिभाषाओं के आधार पर हम कह सकते हैं कि आधुनिकीकरण की प्रक्रिया वह प्रक्रिया है, जिसमें पुरानी व्यवस्था में परिवर्तन आ जाता है। उसके स्थान पर नई एवं अच्छी व्यवस्था स्थान ले लेती है। यह प्रक्रिया किसी भी समाज में पाई जाती है और इसकी मात्रा अलग-अलग समाजों में अलग-अलग होती है।

आधुनिकीकरण की विशेषताएं (Characteristics of Modernization)-

1. इस प्रक्रिया के साथ शहरीकरण एवं औद्योगिकीकरण का विकास होता है (It leads to the development of Urbanization & Industrialization)-शहरों के साथ औद्योगिकीकरण भी पाया जाता है। जहां-जहां पर भी उद्योगों की स्थापना हुई, वहीं-वहीं पर शहरों का भी विकास होने लग गया। गांवों की भी अधिक-से-अधिक जनसंख्या शहरों की तरफ जाने लगी। शहरों में प्रत्येक प्रकार की सुविधाएं प्राप्त होती हैं। व्यवसायों की भी अधिकता पाई जाती है। संचार एवं यातायात के साधनों के विकसित होने के कारण शहरी समाज में काफ़ी परिवर्तन आया है। इस कारण शहरों के परिवारों, जाति इत्यादि संस्थाओं में भी काफ़ी परिवर्तन आया। इस कारण ही शहरीकरण एवं संस्कृतिकरण में हम भेद समझते हैं। जहां भी शहरों का विकास हुआ, वहां आधुनिकता पाई जाने लगी। इसी कारण शहर गांवों से अधिक विकसित हुए।

2. इस प्रक्रिया के साथ शिक्षा का प्रसार होता है (This process develops the education)-शिक्षा के क्षेत्र में आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के साथ तेजी से विकास हुआ। तकनीकी शिक्षा में काफ़ी प्रगति हुई। प्राचीन काल में केवल ऊंची जाति के ही लोगों को शिक्षा दी जाती थी परन्तु समाज में जैसे प्रगति हुई, उसी प्रकार तकनीकी संस्थाओं की भी आवश्यकता पड़ने लगी। इसी कारण कई तकनीकी केन्द्र भी स्थापित हुए। इसके अतिरिक्त व्यावसायिक शिक्षा का महत्त्व भी बढ़ा। जो व्यक्ति जिस कार्य को करने की शिक्षा प्राप्त करता था, उसको वही काम ही मिल जाया करता था। इस कारण आधुनिकीकरण की प्रक्रिया ने शिक्षा के क्षेत्र में काफ़ी परिवर्तन लाया।

3. इस प्रक्रिया से अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्ध भी बढ़ते हैं (It Increases the International relations)आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के द्वारा विभिन्न देशों में सहयोगिता आरम्भ हुई। यू० एन० ओ० (U.N.O.) के अस्तित्व में आने के पश्चात् प्रत्येक देश की सुरक्षा का भी प्रबन्ध किया जाने लग पड़ा है। संसार में आपसी सम्बन्ध व शांति का वातावरण पैदा करना काफ़ी आवश्यक था। यू० एन० ओ० द्वारा मानवीय अधिकारों को सुरक्षित रखने का यत्न किया गया। इस संस्था द्वारा किसी भी देश की निजी समस्याओं को सुलझाने के लिए भी यत्न किए गए। शांति को बरकरार रखना ही इसका एकमात्र उद्देश्य है। जब भी दो देशों के बीच संघर्ष की स्थिति पैदा होती है तो U.N.O. की कोशिश के साथ दोनों देशों के बीच सम्बन्ध सुधारे जाते हैं। इस प्रकार आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के साथ सहयोगिता का वातावरण बना दिया गया है।

4. इस प्रक्रिया के कारण सामाजिक विभेदीकरण का विकास होता है (This process develops & increases the process of Social differentiation)-आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के साथ जैसे-जैसे हमारा समाज जटिल होता गया, तो समाज में विभेदीकरण की प्रक्रिया और भी तेज़ होती गई। समाज में भौतिक क्रान्ति के साथ-साथ सामाजिक विभेदीकरण में भी वृद्धि हो गई। इस प्रक्रिया के द्वारा हमें उस स्थिति का ज्ञान हो जाता है, जिस कारण समाज विभिन्न भागों में बंटा होता है। यह प्रक्रिया मानव एवं मानव के बीच और समूह एवं समूह के बीच वैर भाव की भावनाओं को विकसित ही नहीं होने देती है। इस प्रकार जब भी समाज साधारण अवस्था से कठिन अवस्था की तरफ बढ़ता है तो विभेदीकरण अवश्य पाया जाता है। कई प्रकार की सामाजिक आवश्यकताएं होती हैं। इस प्रक्रिया के बिना हम समाज में श्रम-विभाजन नहीं कर सकते। इस प्रकार आधुनिकीकरण में जैसे-जैसे विकास होता है तो समाज के प्रत्येक क्षेत्र जैसे कि धार्मिक, आर्थिक, शैक्षिक इत्यादि में उन्नति होने लग जाती है। इस कारण विभेदीकरण की प्रक्रिया भी तेज़ हो जाती है।

5. इससे सामाजिक गतिशीलता बढ़ती है (It increases Social Mobility)—सामाजिक गतिशीलता आधुनिक समाजों की मुख्य विशेषता होती है। शहरी समाज में श्रम विभाजन, विशेषीकरण, देशों की भिन्नता, उद्योग, व्यापार, यातायात के साधन तथा संचार के साधनों इत्यादि ने सामाजिक गतिशीलता को बढ़ा दिया है। प्रत्येक व्यक्ति अपनी योग्यता, बुद्धि इत्यादि के साथ ग़रीब से अमीर बन सकता है। व्यक्ति जिस पेशे में लाभ देखता है उसी को अपनाना शुरू कर देता है। पेशे के सम्बन्ध में वह स्थान परिवर्तन भी कर लेता है। इस प्रकार सामाजिक गतिशीलता की प्रक्रिया के द्वारा परम्परागत कीमतों की जगह नई कद्रों-कीमतों का भी विकास हुआ है।

6. इससे समाज सुधारक लहरें आगे आई हैं (Social reform movements came into being due to this) आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के द्वारा समाज सुधारक लहरों का विकास होना शुरू हो गया। समाज में जब भी परिवर्तन आता है तो उसका समाज पर प्रभाव अच्छा तथा गलत भी होता है। जब हम इस प्रभाव के अच्छे गुणों की तरफ देखते हैं तो हमें समाज में प्रगति होती नज़र आती है। जब हम इसकी बुराइयों की तरफ देखते हैं तो हमें समाज के विघटन के बारे में पता चलना शुरू हो जाता है। आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के द्वारा कई समाज सुधारक लहरें पैदा हुईं जिनका मुख्य उद्देश्य समाज में पाई जाने वाली बुराइयों को समाप्त करना होता है ताकि समाज में सन्तुलन बना रहे। इससे समाज में और प्रगति होती है। समाज सुधारक लहरों तथा आन्दोलनों की मदद से समाज में मिलने वाली उन कीमतों को खत्म किया जाता है जो समाज को गिरावट की तरफ ले जाती है। इस तरह इस प्रक्रिया के द्वारा समाज में परिवर्तन आ जाता है।

7. इसके साथ व्यक्ति की स्थिति में परिवर्तन हो जाता है (It changes the status of Individual)आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के द्वारा स्थिति परिवर्तन भी पाया गया है। सर्वप्रथम हम यह देखते हैं कि प्राचीन समय में जाति विशेष व्यवसाय को अपनाना आवश्यक था। परन्तु आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के द्वारा एक तरफ के व्यवसायों की अधिकता पाई गई। दूसरी तरफ विशेषीकरण की स्थिति पैदा हो गई। इस प्रकार व्यक्ति की परिस्थितियों में तत्काल परिवर्तन आ गए। जाति प्रथा अलोप हो गई और उसके स्थान पर वर्ग व्यवस्था पैदा होने लग पड़ी। व्यक्ति को स्थिति उसकी योग्यतानुसार प्राप्त होने लगी। इस प्रकार आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के द्वारा सामाजिक संगठन और विभिन्न समूहों की स्थितियों में परिवर्तन आने लग गया।

प्रश्न 3.
आधुनिकीकरण के विभिन्न कारणों का विस्तार सहित वर्णन करें।
अथवा
आधुनिकीकरण के चार कारण लिखो।
अथवा
आधुनिकीकरण के लिए नगरीकरण ओर औद्योगिकीकरण उत्तरदायी कारण हैं, चर्चा कीजिए।
उत्तर-
वैसे तो आधुनिकीकरण के बहुत से कारण हो सकते हैं, परन्तु उनमें से प्रमुख कारणों का वर्णन इस प्रकार है-

1. नगरीकरण (Urbanisation)-अंग्रेज़ों के भारत आने से भारत में नगरीकरण की प्रक्रिया का विकास शुरू हुआ। उन्होंने कई बड़े नगर बसाए जैसे कि कलकत्ता, मद्रास तथा बम्बई। स्वतन्त्रता के बाद तो नगरीकरण की प्रक्रिया का विकास तेज़ गति से हुआ। यह कहा जाता है कि नगरीय क्षेत्रों में गाँवों की तुलना में काफ़ी अधिक Infrastructure होता है। व्यक्ति नगरों में अच्छा जीवन व्यतीत कर सकता है। यह कारण है कि पिछले कुछ दशकों में काफ़ी बड़ी संख्या में ग्रामीण लोग नगरों में जाकर रहने लग गए ताकि वहां पर मौजूद अधिक रोज़गार के मौकों, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं, शैक्षिक संस्थाओं, मनोरंजन के साधनों का लाभ उठाया जा सके। इस प्रकार नगरीकरण की प्रक्रिया ने नगरों में आधुनिकीकरण की प्रक्रिया को बढ़ाने में सहायता की।

2. औद्योगीकरण (Industrialisation)-औद्योगीकरण की प्रक्रिया का अर्थ है उद्योगों के विकास की प्रक्रिया। औद्योगिक क्रान्ति के कारण बड़े-बड़े उद्योग स्थापित हुए तथा समय के साथ-साथ उद्योगों में प्रयोग होने वाली मशीनों में बहुत से परिवर्तन आए। नई तथा आधुनिक मशीनों ने उत्पादन की प्रक्रिया को काफ़ी तेज़ कर दिया। यह सब मशीनें तथा तकनीक सभी देशों में फैल गई। उत्पादन मानवीय हाथों से निकलकर मशीनों के पास चला गया जिसने आधुनिकीकरण की प्रक्रिया को बढ़ाने में काफ़ी बड़ी भूमिका अदा की।

3. शिक्षा (Education) शिक्षा व्यक्ति के अंदर छिपी हुई योग्यता को बाहर निकाल देती है तथा उनमें ज्ञान का भंडार भर देती है। शिक्षा के कारण ही लोग तकनीकी आविष्कार करते हैं। इसे विकास की प्रक्रिया का महत्त्वपूर्ण सूचक माना जाता है। क्योंकि शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात् लोग नए आविष्कार करते हैं, इस कारण इसे आधुनिकीकरण लाने में काफ़ी महत्त्वपूर्ण माना जाता है।

4. करिश्माई नेता (Charismatic Leader)—करिश्माई नेता वह नेता होता है जो लोगों को अपने व्यक्तित्व से प्रभावित करता है। उसमें लोगों को प्रभावित करने का सामर्थ्य होता है जिस कारण वे उसके अनुयायी बन जाते हैं। ऐसे नेता अपने करिश्माई व्यक्तित्व से अपने अनुयायियों को आधुनिक विचारों व मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं। इससे समाज में आधुनिकीकरण आता है।

5. जनसम्पर्क के साधन (Means of Mass Media)-जनसम्पर्क के साधनों में हम समाचार-पत्र, मैगज़ीन, पुस्तकें, टी० वी०, रेडियो, फिल्में, इंटरनैट इत्यादि को लेते हैं। इन जनसम्पर्क के साधनों ने समाज में आम जनता के लिए नए विचारों, व्यवहारों तथा सूचनाओं को खोलकर रख दिया है। नई सूचना लाने में जनसम्पर्क के साधन एक महत्त्वपूर्ण साधन बनकर सामने आए हैं जिससे आधुनिकीकरण को आगे बढ़ाने में काफ़ी सहायता मिली है।

PSEB 12th Class Sociology Solutions Chapter 8 आधुनिकीकरण व वैश्वीकरण

प्रश्न 4.
आधुनिकीकरण की प्रक्रिया पर नोट लिखें।
उत्तर-
आधुनिकीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसने समाज के प्रत्येक पक्ष को प्रभावित किया है। इसमें समय के साथ-साथ नई व्यवस्था का विस्तार भी शामिल होता है जिसने सामाजिक संरचना तथा मनोवैज्ञानिक तथ्यों को भी परिवर्तित कर दिया है। क्योंकि समाज अधिक उत्पादक तथा प्रगतिशील बन जाता है इसलिए यह सामाजिक तथा सांस्कृतिक पक्ष से और भी जटिल बन जाता है। इस बारे मैक्स वैबर ने ठीक कहा है कि आधुनिकीकरण की प्रक्रिया में परिवर्तन आने से व्यक्तिगत रिश्ते अवैयक्तिक संबंधों में परिवर्तित हो जाते हैं। यहां इमाईल दुर्शीम भी कहते हैं कि आधुनिकीकरण की प्रक्रिया में परिवर्तन आने से समाज की यान्त्रिक एकता जैविक एकता में परिवर्तित हो जाती है।

औद्योगीकरण के आने से समाज के प्रत्येक क्षेत्र में परिवर्तन आ गया तथा समाज परंपरागत से आधुनिक में बदल गया। यह सब कुछ मुमकिन हुआ है जब कम विकसित क्षेत्रों के लोग विकसित क्षेत्रों में जाने लग गए। इससे पहले कि कोई समाज आधुनिकीकरण की प्रक्रिया का आरम्भ करे, उसे कुछ बातों को मानना आवश्यक है जैसे कि नई शैक्षिक व्यवस्था को अपनाना, नई तकनीक को अपनाने की इच्छा इत्यादि। समाजशास्त्रियों ने आधुनिकीकरण की प्रक्रिया में चार अन्तर्सम्बन्धित प्रक्रियाओं के बारे में बताया है तथा वे हैं

  • तकनीकी क्षेत्र में परिवर्तन की प्रक्रिया साधारण से वैज्ञानिक तकनीक की तरफ सामने आती है। उदाहरण के लिए हैण्डलूम से पावरलूम का परिवर्तन।
  • कृषि के क्षेत्र में भी यह परिवर्तन निर्वाह आर्थिकता के बाजार आर्थिकता में परिवर्तित हो जाता है। उदाहरण के लिए अब बड़े किसान मज़दूरों की सहायता से नकद फसलों को बाज़ार में बेचने के लिए ही पैदा करते हैं।
  • औद्योगिक क्षेत्र में यह मानवीय श्रम से मशीनी श्रम में परिवर्तित हो गया है। उदाहरण के लिए पहले हल बैल से कृषि होती थी, अब यह ट्रैक्टर से होती है।
  • वातावरण के क्षेत्र में भी लोग गाँवों से नगरों की तरफ जा रहे हैं। उदाहरण के लिए उद्योगों के नज़दीक के गाँवों में रहने वाले लोग उद्योगों में कार्य करने के लिए नगरों की तरफ जाते हैं।

आधुनिकीकरण को दो स्तरों पर देखकर समझा जा सकता है। व्यक्तिगत स्तर पर व्यक्ति के व्यवहार तथा उसके विशेष व्यक्तिगत गुणों में परिवर्तन आ जाता है। नए विचारों को मानना, तर्कसंगत दृष्टिकोण तथा अपने विचार प्रकट करने की इच्छा में भी परिवर्तन आ जाता है। आधुनिक व्यक्ति योजना बनाने, संगठन बनाने पर बल देता है। व्यक्ति का विज्ञान तथा तकनीक में विश्वास होता है। आजकल आधुनिकता पर बल देना सम्पूर्ण विश्व में फैल रहा है।

प्रश्न 5.
वैश्वीकरण की विस्तार सहित चर्चा करें।
उत्तर-
वैश्वीकरण की प्रक्रिया एक व्यापक आर्थिक प्रक्रिया है जोकि सभी समाजों एवं देशों में फैली हुई होती है। इसमें भिन्न-भिन्न देशों में आपस में मुक्त व्यापार एवं आर्थिक सम्बन्ध होते हैं। वास्तव में कोई भी देश अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने में समर्थ नहीं होता। उसको अपनी एवं अपने लोगों की आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ता है। इस प्रकार उस देश के ऊपर भी अन्य देश अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु निर्भर रहते हैं। इस प्रकार आपस में निर्भरता के कारण अलग-अलग देशों में आपसी सम्बन्ध स्थापित हुए और एक विचार आया कि क्यों न एक-दूसरे देशों के बीच मुक्त व्यापार सम्बन्ध स्थापित किए जाएं। इन बढ़ते हुए आर्थिक सम्बन्धों एवं मुक्त व्यापार के विचार को ही वैश्वीकरण का नाम दे दिया गया है। वैश्वीकरण की धारणा में उदारीकरण (Liberalisation) की धारणा है जिसमें विभिन्न देश, अपने देश में व्यापार करने के लिए अन्य देशों के लिए रास्ते खोल देते हैं। यह वैश्वीकरण की धारणा कोई बहुत पुरानी धारणा नहीं है बल्कि यह तो 10-15 वर्ष पुरानी धारणा है, जिसने सम्पूर्ण दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया। आज इसी कारण ही दुनिया सिमट रही है या छोटी हो रही है। हम अपने देश में ही या अपने ही शहर में दूसरे देशों में बनी वस्तुएं खरीद सकते हैं। उदाहरणतः कोई भी क्षेत्र देख लें, हमारे देश में विदेशी कारें, Merceedes, General Motors, Rolls Royce, Ferrari, Honda, Mitsubishi, Hyundai, Skoda etc.

आ गई हैं। जबकि आज से 25 वर्ष पहले ये सभी कारें हमारे देश में दिखाई नहीं पड़ती थीं। यह केवल वैश्वीकरण एवं उदारीकरण के कारण ही सम्भव हुआ है, जिस कारण हमारे देश का बाज़ार विदेशी कम्पनियों के लिए खुल गया है। इस प्रकार प्रत्येक क्षेत्र में देसी एवं विदेशी वस्तुओं की भरमार हो गई है। यह भी वैश्वीकरण होता है, जिसमें भिन्नभिन्न देश अन्य देशों में कम्पनियों के लिए अपने रास्ते खोल देते हैं और मुक्त व्यापार को बढ़ावा देते हैं। आज दुनिया सिमट कर छोटा-सा गांव या फिर शहर बनकर रह गई है। सरकार प्रत्येक वर्ग में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (Foreign Direct Investment) बढ़ा रही है। यह ही वैश्वीकरण होता है।

20वीं शताब्दी खत्म होते-होते एक नई प्रक्रिया सामने आई जिसने अन्तर्निर्भरता तथा आपसी लेन-देन के आधार पर सम्पूर्ण संसार को प्रभावित किया। इस प्रक्रिया को वैश्वीकरण कहते हैं। वैश्वीकरण एक बहुपक्षीय प्रक्रिया है। आजकल विश्व एक वैश्विक गाँव बन गया है। अब हमें कुछ पलों में ही पता चल जाता है कि सम्पूर्ण विश्व में क्या हो रहा है। आजकल संसार एक समाज में परिवर्तित हो रहा है। वैश्वीकरण के कारण लोग एक देश को छोड़कर अन्य देशों में जा रहे हैं। आजकल संचार के साधनों की सहायता से हम विश्व के किसी भी कोने में बैठकर आसानी से बातचीत कर सकते हैं। यह वैश्वीकरण तथा इंटरनैट के कारण ही मुमकिन हो पाया है।

प्रश्न 6.
वैश्वीकरण क्या है ? इसके प्रकारों की विस्तार सहित चर्चा करें।
अथवा तकनीकी वैश्वीकरण को वैश्वीकरण के प्रकार के रूप में लिखें।
उत्तर-
वैश्वीकरण की प्रक्रिया एक व्यापक आर्थिक प्रक्रिया है जोकि सभी समाजों एवं देशों में फैली हुई होती है। इसमें भिन्न-भिन्न देशों में आपस में मुक्त व्यापार एवं आर्थिक सम्बन्ध होते हैं। वास्तव में कोई भी देश अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने में समर्थ नहीं होता। उसको अपनी एवं अपने लोगों की आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ता है। इस प्रकार उस देश के ऊपर भी अन्य देश अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु निर्भर रहते हैं। इस प्रकार आपस में निर्भरता के कारण अलग-अलग देशों में आपसी सम्बन्ध स्थापित हुए और एक विचार आया कि क्यों न एक-दूसरे देशों के बीच मुक्त व्यापार सम्बन्ध स्थापित किए जाएं। इन बढ़ते हुए आर्थिक सम्बन्धों एवं मुक्त व्यापार के विचार को ही वैश्वीकरण का नाम दे दिया गया है। वैश्वीकरण की धारणा में उदारीकरण (Liberalisation) की धारणा है जिसमें विभिन्न देश, अपने देश में व्यापार करने के लिए अन्य देशों के लिए रास्ते खोल देते हैं। यह वैश्वीकरण की धारणा कोई बहुत पुरानी धारणा नहीं है बल्कि यह तो 10-15 वर्ष पुरानी धारणा है, जिसने सम्पूर्ण दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया। आज इसी कारण ही दुनिया सिमट रही है या छोटी हो रही है। हम अपने देश में ही या अपने ही शहर में दूसरे देशों में बनी वस्तुएं खरीद सकते हैं। उदाहरणतः कोई भी क्षेत्र देख लें, हमारे देश में विदेशी कारें, Merceedes, General Motors, Rolls Royce, Ferrari, Honda, Mitsubishi, Hyundai, Skoda etc.

आ गई हैं। जबकि आज से 25 वर्ष पहले ये सभी कारें हमारे देश में दिखाई नहीं पड़ती थीं। यह केवल वैश्वीकरण एवं उदारीकरण के कारण ही सम्भव हुआ है, जिस कारण हमारे देश का बाज़ार विदेशी कम्पनियों के लिए खुल गया है। इस प्रकार प्रत्येक क्षेत्र में देसी एवं विदेशी वस्तुओं की भरमार हो गई है। यह भी वैश्वीकरण होता है, जिसमें भिन्नभिन्न देश अन्य देशों में कम्पनियों के लिए अपने रास्ते खोल देते हैं और मुक्त व्यापार को बढ़ावा देते हैं। आज दुनिया सिमट कर छोटा-सा गांव या फिर शहर बनकर रह गई है। सरकार प्रत्येक वर्ग में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (Foreign Direct Investment) बढ़ा रही है। यह ही वैश्वीकरण होता है।

20वीं शताब्दी खत्म होते-होते एक नई प्रक्रिया सामने आई जिसने अन्तर्निर्भरता तथा आपसी लेन-देन के आधार पर सम्पूर्ण संसार को प्रभावित किया। इस प्रक्रिया को वैश्वीकरण कहते हैं। वैश्वीकरण एक बहुपक्षीय प्रक्रिया है। आजकल विश्व एक वैश्विक गाँव बन गया है। अब हमें कुछ पलों में ही पता चल जाता है कि सम्पूर्ण विश्व में क्या हो रहा है। आजकल संसार एक समाज में परिवर्तित हो रहा है। वैश्वीकरण के कारण लोग एक देश को छोड़कर अन्य देशों में जा रहे हैं। आजकल संचार के साधनों की सहायता से हम विश्व के किसी भी कोने में बैठकर आसानी से बातचीत कर सकते हैं। यह वैश्वीकरण तथा इंटरनैट के कारण ही मुमकिन हो पाया है।

वैश्वीकरण के प्रकार-वैश्वीकरण के कई प्रकार होते हैं जिनका वर्णन इस प्रकार है-

1. पर्यावरणीय वैश्वीकरण (Ecological Globalisation)-वैश्वीकरण के इस प्रकार में हम वातावरण प्रदूषण को ले सकते हैं जिससे ओजोन परत प्रभावित हो रही है। इससे विश्व-तापीकरण भी बढ़ रहा है। सांसारिक स्तर पर इस समस्या से निपटने के प्रयास किए जा रहे हैं। अलग-अलग देशों में समझौतें हो रहे हैं ताकि वातावरण प्रदूषण को रोका जा सके। ओजोन परत को बचाने के लिए Montreal Protocol भी बनाया गया ताकि वातावरण में छोडी जाने वाली कार्बन डाइआक्साइड की मात्रा को कम किया जा सके।

2. सांस्कृतिक वैश्वीकरण (Cultural Globalisation)-सांस्कृतिक वैश्वीकरण का अर्थ है संसार के एक हिस्से में मौजूद नियमों, विचारों, मूल्यों इत्यादि का दूसरे हिस्से में हस्तांतरण। यह हस्तांतरण इंटरनैट, मीडिया, घूमने इत्यादि के कारण मुमकिन हो पाया है। इससे अलग-अलग संस्कृतियों के लोगों के बीच अन्तक्रिया बढ़ गई तथा सांस्कृतिक प्रथाओं का आदान-प्रदान शुरू हो गया।

3. आर्थिक वैश्वीकरण (Economic Globalisation) आर्थिक, वैश्वीकरण का अर्थ है सम्पूर्ण विश्व में वस्तुओं, सेवाओं तथा पूँजी के आदान-प्रदान के कारण उत्पन्न हुई अन्तर्निर्भरता। इस अन्तर्निर्भरता के कारण एक देश की आर्थिकता का गलत प्रभाव विश्व स्तर पर देखने को मिल जाता है। उदाहरण के लिए 2009 में एक वैश्विक संकट आया जिसने विश्वभर में देशों को प्रभावित किया।

4. तकनीकी वैश्वीकरण (Technological Globalisation)-तकनीकी वैश्वीकरण का अर्थ है संचार के साधनों में आए क्रान्तिकारी परिवर्तन जिनसे संसार का एक हिस्सा बाकी हिस्सों से आसानी से जुड़ गया। आधुनिक यातायात के साधनों ने भौगोलिक अन्तरों को कम कर दिया है तथा कई प्रकार के लेन-देन शुरू हो गए। उदाहरण के लिए मोबाइल, इंटरनैट इत्यादि।

5. राजनीतिक वैश्वीकरण (Political Globalisation) राजनीतिक वैश्वीकरण में एक समान नीतियों को चारों तरफ अपनाया जाता है। अपनी-अपनी समस्याओं के कारण अलग-अलग देश एक-दूसरे से सन्धियां करते हैं। इस कारण ही कई अन्तर्राष्ट्रीय संगठन भी अस्तित्व में आए हैं। उदाहरण के लिए संयुक्त राष्ट्र।

प्रश्न 7.
वैश्वीकरण की विशेषताओं का विस्तार सहित उल्लेख करें।
अथवा
वैश्वीकरण की विशेषताओं की विस्तारपूर्वक व्याख्या कीजिए।
उत्तर-
वैश्वीकरण की विशेषताएं (Characteristics of Globalisation) विश्वव्यापीकरण वास्तव में भिन्न-भिन्न देशों की आपस में निर्भरता होने पर अस्तित्व में आया है। वास्तव में विभिन्न देश अपनी-अपनी आवश्यकताओं के कारण विभिन्न देशों पर निर्भर होते हैं। इसी कारण वह एक-दूसरे के साथ आयात-निर्यात करते हैं। इस कारण वैश्वीकरण का सिद्धान्त अस्तित्व में आया।

1. विश्व व्यापार (World Trade)—वैश्वीकरण की सबसे महत्त्वपूर्ण एवं आवश्यक विशेषता है विश्व व्यापार। यह दुनिया के व्यापार का सबसे मज़बूत आधार है। यह भिन्न क्षेत्रों एवं देशों में रहने वालों को आपस में जोड़ता है और उनको आपस में व्यापार करवाता है। जैसे–भारतवर्ष में चाय का उत्पादन सबसे अधिक होता है, इसी कारण विभिन्न देश भारत से चाय का व्यापार करते हैं और अरब देशों में तेल के भण्डार अधिक होने पर विभिन्न देश वहां से तेल के ऊपर निर्भर रहते हैं। इस प्रकार विभिन्न देश, विभिन्न वस्तुओं के लेन-देन के कारण आपस में निर्भर रहते हैं। भारत के लोग अरब के लोगों और अरब के लोग भारत के लोगों पर निर्भर करते हैं। इससे विश्व व्यापार बढ़ा एवं वैश्वीकरण भी बढ़ा।

2. आर्थिक वैश्वीकरण (Economic Globalisation)-वैश्वीकरण ने संसार में नई आर्थिकता पैदा की है। अब एक देश की आर्थिकता दूसरे देश की आर्थिकता पर निर्भर करती है। इस कारण विश्व आर्थिकता (World Economy) का सिद्धान्त हमारे सामने आया। विभिन्न देश आर्थिकता के कारण आपस में जुड़ गए हैं। उनमें इसी कारण सांस्कृतिक तत्त्वों का आदान-प्रदान भी आरम्भ हो गया। निवेश, लेन-देन, श्रम-विभाजन, विशेषीकरण, उत्पादन, खपत आदि का इस व्यापार में काफ़ी महत्त्वपूर्ण भाग है। आर्थिक वैश्वीकरण ने पूंजीवाद को काफ़ी आगे बढ़ाया है। अब अन्तर्राष्ट्रीय आर्थिकता की संरचना के बारे में लोग सोच रहे हैं।

3. बाज़ार का वैश्वीकरण (Globalisation of Market)—वैश्वीकरण ने बाज़ार को भी बढ़ा दिया है। प्रत्येक बाज़ार का उत्पादन के तौर पर ही नहीं, बल्कि खपत के आधार पर भी वैश्वीकरण हो गया है। अब कई देशों की कम्पनियां दूसरे देशों के बाजारों को ध्यान में रख कर वस्तुओं का उत्पादन करने लग गई हैं। इस प्रकार उत्पादन एवं खपत विदेशी बाजार की आवश्यकताओं पर निर्भर रहने लग पड़े हैं। इसके कारण देश का अन्य देशों के साथ व्यापार बढ़ता है और विदेशी मुद्रा (Foreign Exchange) देश में आती है। इस प्रकार बाज़ार भी विदेशों के ऊपर निर्भर रहने लग पड़े हैं। बाजार में विदेशी वस्तुओं की अधिकता हो गई है। यहां तक कि खाने-पीने की डिब्बा बंद वस्तुएं भी विदेशों से आने लग गई हैं। इस प्रकार वैश्वीकरण ने बाज़ार को भी व्यापक बना दिया है।

4. श्रम विभाजन (Division of Labour)-वैश्वीकरण ने श्रम विभाजन को भी काफ़ी बढ़ाया है। अब लोग कोई कोर्स सीख कर ही विदेशों में जाते हैं। उदाहरणतः लोग विदेशों में जाने से पूर्व कम्प्यूटर के कई-कई प्रकार के कोर्स (Course) करते हैं ताकि वह विदेशों में जाकर पैसे कमा सकें। अखबारों में भी भिन्न-भिन्न प्रकार के व्यक्तियों की आवश्यकताओं के बारे में भी लिखा हुआ पाया जाता है जोकि किसी भी क्षेत्र में निपुण हो। श्रम विभाजन इस कारण बढ़ गया है और विभिन्न क्षेत्रों में निपुण व्यक्तियों की आवश्यकता भी बढ़ गई है। यह केवल वैश्वीकरण की ही देन है कि इसने श्रम विभाजन को बढ़ाया है।

5. श्रमिकों का एक देश से दूसरे देश में जाना (Migration of labourers to other countries)वैश्वीकरण की एक और विशेषता है कि श्रमिकों का एक देश से दूसरे देश की ओर कार्य के लिए जाना। साधारणतः दक्षिण एशिया के भिन्न-भिन्न व्यवसायों में निपुण लोग पश्चिम देशों में कार्य हेतु जाते हैं क्योंकि एशिया के लोगों को पश्चिमी देशों की कमाई अधिक लगती है। दुनिया भर के श्रमिक विभिन्न देशों में जाकर पैसे कमाते हैं और कार्य करते हैं। इसलिए वैश्वीकरण के कारण ही श्रमिक विदेशों में जाकर कार्य करके धन प्राप्त करते हैं।

6. विश्व-आर्थिकता (World Economy)-वैश्वीकरण की एक अन्य विशेषता आर्थिकता का बढ़ना है। अब एक देश की आर्थिकता केवल एक देश तक सीमित होकर नहीं रह गई है क्योंकि उस देश की आर्थिकता के ऊपर अन्य देशों की आर्थिकता का प्रभाव पड़ता है। भिन्न-भिन्न देशों में व्यापार बढ़ने पर आर्थिकता की एक-दूसरे के ऊपर निर्भरता बढ़ी है। इस तरह अन्तर्निर्भरता के कारण विश्व आर्थिकता एवं विश्व व्यापार में वृद्धि हुई है।

प्रश्न 8.
वैश्वीकरण की प्रक्रिया पर विस्तृत नोट लिखें।
उत्तर-
वैश्वीकरण की प्रक्रिया एक व्यापक आर्थिक प्रक्रिया है जोकि सभी समाजों एवं देशों में फैली हुई होती है। इसमें भिन्न-भिन्न देशों में आपस में मुक्त व्यापार एवं आर्थिक सम्बन्ध होते हैं। वास्तव में कोई भी देश अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने में समर्थ नहीं होता। उसको अपनी एवं अपने लोगों की आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ता है। इस प्रकार उस देश के ऊपर भी अन्य देश अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु निर्भर रहते हैं। इस प्रकार आपस में निर्भरता के कारण अलग-अलग देशों में आपसी सम्बन्ध स्थापित हुए और एक विचार आया कि क्यों न एक-दूसरे देशों के बीच मुक्त व्यापार सम्बन्ध स्थापित किए जाएं। इन बढ़ते हुए आर्थिक सम्बन्धों एवं मुक्त व्यापार के विचार को ही वैश्वीकरण का नाम दे दिया गया है। वैश्वीकरण की धारणा में उदारीकरण (Liberalisation) की धारणा है जिसमें विभिन्न देश, अपने देश में व्यापार करने के लिए अन्य देशों के लिए रास्ते खोल देते हैं। यह वैश्वीकरण की धारणा कोई बहुत पुरानी धारणा नहीं है बल्कि यह तो 10-15 वर्ष पुरानी धारणा है, जिसने सम्पूर्ण दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया। आज इसी कारण ही दुनिया सिमट रही है या छोटी हो रही है। हम अपने देश में ही या अपने ही शहर में दूसरे देशों में बनी वस्तुएं खरीद सकते हैं। उदाहरणतः कोई भी क्षेत्र देख लें, हमारे देश में विदेशी कारें, Merceedes, General Motors, Rolls Royce, Ferrari, Honda, Mitsubishi, Hyundai, Skoda etc.

आ गई हैं। जबकि आज से 25 वर्ष पहले ये सभी कारें हमारे देश में दिखाई नहीं पड़ती थीं। यह केवल वैश्वीकरण एवं उदारीकरण के कारण ही सम्भव हुआ है, जिस कारण हमारे देश का बाज़ार विदेशी कम्पनियों के लिए खुल गया है। इस प्रकार प्रत्येक क्षेत्र में देसी एवं विदेशी वस्तुओं की भरमार हो गई है। यह भी वैश्वीकरण होता है, जिसमें भिन्नभिन्न देश अन्य देशों में कम्पनियों के लिए अपने रास्ते खोल देते हैं और मुक्त व्यापार को बढ़ावा देते हैं। आज दुनिया सिमट कर छोटा-सा गांव या फिर शहर बनकर रह गई है। सरकार प्रत्येक वर्ग में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (Foreign Direct Investment) बढ़ा रही है। यह ही वैश्वीकरण होता है।

20वीं शताब्दी खत्म होते-होते एक नई प्रक्रिया सामने आई जिसने अन्तर्निर्भरता तथा आपसी लेन-देन के आधार पर सम्पूर्ण संसार को प्रभावित किया। इस प्रक्रिया को वैश्वीकरण कहते हैं। वैश्वीकरण एक बहुपक्षीय प्रक्रिया है। आजकल विश्व एक वैश्विक गाँव बन गया है। अब हमें कुछ पलों में ही पता चल जाता है कि सम्पूर्ण विश्व में क्या हो रहा है। आजकल संसार एक समाज में परिवर्तित हो रहा है। वैश्वीकरण के कारण लोग एक देश को छोड़कर अन्य देशों में जा रहे हैं। आजकल संचार के साधनों की सहायता से हम विश्व के किसी भी कोने में बैठकर आसानी से बातचीत कर सकते हैं। यह वैश्वीकरण तथा इंटरनैट के कारण ही मुमकिन हो पाया है।

वैश्वीकरण की प्रक्रिया एक व्यापक आर्थिक प्रक्रिया है जोकि सभी समाजों एवं देशों में फैली हुई होती है। इसमें भिन्न-भिन्न देशों में आपस में मुक्त व्यापार एवं आर्थिक सम्बन्ध होते हैं। वास्तव में कोई भी देश अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने में समर्थ नहीं होता। उसको अपनी एवं अपने लोगों की आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ता है। इस प्रकार उस देश के ऊपर भी अन्य देश अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु निर्भर रहते हैं। इस प्रकार आपस में निर्भरता के कारण अलग-अलग देशों में आपसी सम्बन्ध स्थापित हुए और एक विचार आया कि क्यों न एक-दूसरे देशों के बीच मुक्त व्यापार सम्बन्ध स्थापित किए जाएं। इन बढ़ते हुए आर्थिक सम्बन्धों एवं मुक्त व्यापार के विचार को ही वैश्वीकरण का नाम दे दिया गया है। वैश्वीकरण की धारणा में उदारीकरण (Liberalisation) की धारणा है जिसमें विभिन्न देश, अपने देश में व्यापार करने के लिए अन्य देशों के लिए रास्ते खोल देते हैं। यह वैश्वीकरण की धारणा कोई बहुत पुरानी धारणा नहीं है बल्कि यह तो 10-15 वर्ष पुरानी धारणा है, जिसने सम्पूर्ण दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया। आज इसी कारण ही दुनिया सिमट रही है या छोटी हो रही है। हम अपने देश में ही या अपने ही शहर में दूसरे देशों में बनी वस्तुएं खरीद सकते हैं। उदाहरणतः कोई भी क्षेत्र देख लें, हमारे देश में विदेशी कारें, Merceedes, General Motors, Rolls Royce, Ferrari, Honda, Mitsubishi, Hyundai, Skoda etc.

आ गई हैं। जबकि आज से 25 वर्ष पहले ये सभी कारें हमारे देश में दिखाई नहीं पड़ती थीं। यह केवल वैश्वीकरण एवं उदारीकरण के कारण ही सम्भव हुआ है, जिस कारण हमारे देश का बाज़ार विदेशी कम्पनियों के लिए खुल गया है। इस प्रकार प्रत्येक क्षेत्र में देसी एवं विदेशी वस्तुओं की भरमार हो गई है। यह भी वैश्वीकरण होता है, जिसमें भिन्नभिन्न देश अन्य देशों में कम्पनियों के लिए अपने रास्ते खोल देते हैं और मुक्त व्यापार को बढ़ावा देते हैं। आज दुनिया सिमट कर छोटा-सा गांव या फिर शहर बनकर रह गई है। सरकार प्रत्येक वर्ग में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (Foreign Direct Investment) बढ़ा रही है। यह ही वैश्वीकरण होता है।

20वीं शताब्दी खत्म होते-होते एक नई प्रक्रिया सामने आई जिसने अन्तर्निर्भरता तथा आपसी लेन-देन के आधार पर सम्पूर्ण संसार को प्रभावित किया। इस प्रक्रिया को वैश्वीकरण कहते हैं। वैश्वीकरण एक बहुपक्षीय प्रक्रिया है। आजकल विश्व एक वैश्विक गाँव बन गया है। अब हमें कुछ पलों में ही पता चल जाता है कि सम्पूर्ण विश्व में क्या हो रहा है। आजकल संसार एक समाज में परिवर्तित हो रहा है। वैश्वीकरण के कारण लोग एक देश को छोड़कर अन्य देशों में जा रहे हैं। आजकल संचार के साधनों की सहायता से हम विश्व के किसी भी कोने में बैठकर आसानी से बातचीत कर सकते हैं। यह वैश्वीकरण तथा इंटरनैट के कारण ही मुमकिन हो पाया है।

वैश्वीकरण के प्रकार-वैश्वीकरण के कई प्रकार होते हैं जिनका वर्णन इस प्रकार है-

1. पर्यावरणीय वैश्वीकरण (Ecological Globalisation)-वैश्वीकरण के इस प्रकार में हम वातावरण प्रदूषण को ले सकते हैं जिससे ओजोन परत प्रभावित हो रही है। इससे विश्व-तापीकरण भी बढ़ रहा है। सांसारिक स्तर पर इस समस्या से निपटने के प्रयास किए जा रहे हैं। अलग-अलग देशों में समझौतें हो रहे हैं ताकि वातावरण प्रदूषण को रोका जा सके। ओजोन परत को बचाने के लिए Montreal Protocol भी बनाया गया ताकि वातावरण में छोडी जाने वाली कार्बन डाइआक्साइड की मात्रा को कम किया जा सके।

2. सांस्कृतिक वैश्वीकरण (Cultural Globalisation)-सांस्कृतिक वैश्वीकरण का अर्थ है संसार के एक हिस्से में मौजूद नियमों, विचारों, मूल्यों इत्यादि का दूसरे हिस्से में हस्तांतरण। यह हस्तांतरण इंटरनैट, मीडिया, घूमने इत्यादि के कारण मुमकिन हो पाया है। इससे अलग-अलग संस्कृतियों के लोगों के बीच अन्तक्रिया बढ़ गई तथा सांस्कृतिक प्रथाओं का आदान-प्रदान शुरू हो गया।

3. आर्थिक वैश्वीकरण (Economic Globalisation) आर्थिक, वैश्वीकरण का अर्थ है सम्पूर्ण विश्व में वस्तुओं, सेवाओं तथा पूँजी के आदान-प्रदान के कारण उत्पन्न हुई अन्तर्निर्भरता। इस अन्तर्निर्भरता के कारण एक देश की आर्थिकता का गलत प्रभाव विश्व स्तर पर देखने को मिल जाता है। उदाहरण के लिए 2009 में एक वैश्विक संकट आया जिसने विश्वभर में देशों को प्रभावित किया।

4. तकनीकी वैश्वीकरण (Technological Globalisation)-तकनीकी वैश्वीकरण का अर्थ है संचार के साधनों में आए क्रान्तिकारी परिवर्तन जिनसे संसार का एक हिस्सा बाकी हिस्सों से आसानी से जुड़ गया। आधुनिक यातायात के साधनों ने भौगोलिक अन्तरों को कम कर दिया है तथा कई प्रकार के लेन-देन शुरू हो गए। उदाहरण के लिए मोबाइल, इंटरनैट इत्यादि।

5. राजनीतिक वैश्वीकरण (Political Globalisation) राजनीतिक वैश्वीकरण में एक समान नीतियों को चारों तरफ अपनाया जाता है। अपनी-अपनी समस्याओं के कारण अलग-अलग देश एक-दूसरे से सन्धियां करते हैं। इस कारण ही कई अन्तर्राष्ट्रीय संगठन भी अस्तित्व में आए हैं। उदाहरण के लिए संयुक्त राष्ट्र।

वैश्वीकरण की विशेषताएं (Characteristics of Globalisation) विश्वव्यापीकरण वास्तव में भिन्न-भिन्न देशों की आपस में निर्भरता होने पर अस्तित्व में आया है। वास्तव में विभिन्न देश अपनी-अपनी आवश्यकताओं के कारण विभिन्न देशों पर निर्भर होते हैं। इसी कारण वह एक-दूसरे के साथ आयात-निर्यात करते हैं। इस कारण वैश्वीकरण का सिद्धान्त अस्तित्व में आया।

1. विश्व व्यापार (World Trade)—वैश्वीकरण की सबसे महत्त्वपूर्ण एवं आवश्यक विशेषता है विश्व व्यापार। यह दुनिया के व्यापार का सबसे मज़बूत आधार है। यह भिन्न क्षेत्रों एवं देशों में रहने वालों को आपस में जोड़ता है और उनको आपस में व्यापार करवाता है। जैसे–भारतवर्ष में चाय का उत्पादन सबसे अधिक होता है, इसी कारण विभिन्न देश भारत से चाय का व्यापार करते हैं और अरब देशों में तेल के भण्डार अधिक होने पर विभिन्न देश वहां से तेल के ऊपर निर्भर रहते हैं। इस प्रकार विभिन्न देश, विभिन्न वस्तुओं के लेन-देन के कारण आपस में निर्भर रहते हैं। भारत के लोग अरब के लोगों और अरब के लोग भारत के लोगों पर निर्भर करते हैं। इससे विश्व व्यापार बढ़ा एवं वैश्वीकरण भी बढ़ा।

2. आर्थिक वैश्वीकरण (Economic Globalisation)-वैश्वीकरण ने संसार में नई आर्थिकता पैदा की है। अब एक देश की आर्थिकता दूसरे देश की आर्थिकता पर निर्भर करती है। इस कारण विश्व आर्थिकता (World Economy) का सिद्धान्त हमारे सामने आया। विभिन्न देश आर्थिकता के कारण आपस में जुड़ गए हैं। उनमें इसी कारण सांस्कृतिक तत्त्वों का आदान-प्रदान भी आरम्भ हो गया। निवेश, लेन-देन, श्रम-विभाजन, विशेषीकरण, उत्पादन, खपत आदि का इस व्यापार में काफ़ी महत्त्वपूर्ण भाग है। आर्थिक वैश्वीकरण ने पूंजीवाद को काफ़ी आगे बढ़ाया है। अब अन्तर्राष्ट्रीय आर्थिकता की संरचना के बारे में लोग सोच रहे हैं।

3. बाज़ार का वैश्वीकरण (Globalisation of Market)—वैश्वीकरण ने बाज़ार को भी बढ़ा दिया है। प्रत्येक बाज़ार का उत्पादन के तौर पर ही नहीं, बल्कि खपत के आधार पर भी वैश्वीकरण हो गया है। अब कई देशों की कम्पनियां दूसरे देशों के बाजारों को ध्यान में रख कर वस्तुओं का उत्पादन करने लग गई हैं। इस प्रकार उत्पादन एवं खपत विदेशी बाजार की आवश्यकताओं पर निर्भर रहने लग पड़े हैं। इसके कारण देश का अन्य देशों के साथ व्यापार बढ़ता है और विदेशी मुद्रा (Foreign Exchange) देश में आती है। इस प्रकार बाज़ार भी विदेशों के ऊपर निर्भर रहने लग पड़े हैं। बाजार में विदेशी वस्तुओं की अधिकता हो गई है। यहां तक कि खाने-पीने की डिब्बा बंद वस्तुएं भी विदेशों से आने लग गई हैं। इस प्रकार वैश्वीकरण ने बाज़ार को भी व्यापक बना दिया है।

4. श्रम विभाजन (Division of Labour)-वैश्वीकरण ने श्रम विभाजन को भी काफ़ी बढ़ाया है। अब लोग कोई कोर्स सीख कर ही विदेशों में जाते हैं। उदाहरणतः लोग विदेशों में जाने से पूर्व कम्प्यूटर के कई-कई प्रकार के कोर्स (Course) करते हैं ताकि वह विदेशों में जाकर पैसे कमा सकें। अखबारों में भी भिन्न-भिन्न प्रकार के व्यक्तियों की आवश्यकताओं के बारे में भी लिखा हुआ पाया जाता है जोकि किसी भी क्षेत्र में निपुण हो। श्रम विभाजन इस कारण बढ़ गया है और विभिन्न क्षेत्रों में निपुण व्यक्तियों की आवश्यकता भी बढ़ गई है। यह केवल वैश्वीकरण की ही देन है कि इसने श्रम विभाजन को बढ़ाया है।

5. श्रमिकों का एक देश से दूसरे देश में जाना (Migration of labourers to other countries)वैश्वीकरण की एक और विशेषता है कि श्रमिकों का एक देश से दूसरे देश की ओर कार्य के लिए जाना। साधारणतः दक्षिण एशिया के भिन्न-भिन्न व्यवसायों में निपुण लोग पश्चिम देशों में कार्य हेतु जाते हैं क्योंकि एशिया के लोगों को पश्चिमी देशों की कमाई अधिक लगती है। दुनिया भर के श्रमिक विभिन्न देशों में जाकर पैसे कमाते हैं और कार्य करते हैं। इसलिए वैश्वीकरण के कारण ही श्रमिक विदेशों में जाकर कार्य करके धन प्राप्त करते हैं।

6. विश्व-आर्थिकता (World Economy)-वैश्वीकरण की एक अन्य विशेषता आर्थिकता का बढ़ना है। अब एक देश की आर्थिकता केवल एक देश तक सीमित होकर नहीं रह गई है क्योंकि उस देश की आर्थिकता के ऊपर अन्य देशों की आर्थिकता का प्रभाव पड़ता है। भिन्न-भिन्न देशों में व्यापार बढ़ने पर आर्थिकता की एक-दूसरे के ऊपर निर्भरता बढ़ी है। इस तरह अन्तर्निर्भरता के कारण विश्व आर्थिकता एवं विश्व व्यापार में वृद्धि हुई है।

PSEB 12th Class Sociology Solutions Chapter 8 आधुनिकीकरण व वैश्वीकरण

अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न (OTHER IMPORTANT QUESTIONS)

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्न

A. बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
उस प्रक्रिया को क्या कहते हैं जो परिवर्तन पर आधारित है तथा जो किसी वस्तु के अच्छे या बुरे होने के बारे में बताती है ?
(क) संस्कृतिकरण
(ख) औद्योगीकरण
(ग) नगरीकरण
(घ) आधुनिकीकरण।
उत्तर-
(घ) आधुनिकीकरण।

प्रश्न 2.
आधुनिकीकरण के लिए क्या आवश्यक है ?
(क) शिक्षा का उच्च स्तर
(ख) यातायात तथा संचार के साधनों का विकास
(ग) उद्योगों को प्राथमिकता देना।
(घ) उपर्युक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपर्युक्त सभी।

प्रश्न 3.
भारत में आधुनिकीकरण लाने के लिए कौन उत्तरदायी है ?
(क) मुग़ल शासक
(ख) भारत सरकार
(ग) अंग्रेजी सरकार
(घ) कोई नहीं।
उत्तर-
(क) मुग़ल शासक।

प्रश्न 4.
उस प्रक्रिया को क्या कहते हैं जिसमें अलग-अलग देशों के बीच मुक्त व्यापार, सेवाएं, पूंजी निवेश तथा लोगों का आदान-प्रदान होता है ?
(क) निजीकरण
(ख) वैश्वीकरण
(ग) आधुनिकीकरण
(घ) उदारीकरण।
उत्तर-
(ख) वैश्वीकरण।

प्रश्न 5.
सरकारी कंपनियों को निजी हाथों में बेचने की प्रक्रिया को क्या कहते हैं ?
(क) निजीकरण
(ख) वैश्वीकरण
(ग) उदारीकरण
(घ) आधुनिकीकरण।
उत्तर-
(क) निजीकरण।

प्रश्न 6.
नियंत्रित अर्थव्यवस्था से अनावश्यक प्रतिबन्धों को हटाने को क्या कहते हैं?
(क) निजीकरण
(ख) वैश्वीकरण
(ग) उदारीकरण
(घ) आधुनिकीकरण।
उत्तर-
(ग) उदारीकरण।

B. रिक्त स्थान भरें-

1. सांस्कृतिक पिछड़ेपन का सिद्धान्त …………….. ने दिया था।
2. जापानी लोग वैश्वीकरण को ….. कहते हैं।
3. …….. ने वैश्वीकरण के चार आधार दिए हैं।
4. नियंत्रित अर्थव्यवस्था से अनावश्यक प्रतिबन्ध हटाने को ……………… कहते हैं।
5. सार्वजनिक कंपनियों को व्यक्तिगत हाथों में देने की प्रक्रिया को …………….. कहते हैं।
उत्तर-

  1. विलियम आगबर्न,
  2. Gurobaruka,
  3. Giddens,
  4. उदारीकरण,
  5. निजीकरण।

C. सही/ग़लत पर निशान लगाएं-

1. वैश्वीकरण में पूँजी तथा सेवाओं का आदान-प्रदान नहीं होता।
2. वैश्वीकरण में संसार एक वैश्विक गाँव बनकर रह गया है।
3. वैबर के अनुसार आधुनिकीकरण से व्यक्तिगत संबंध अवैयक्तिक बन जाते हैं।
4. आधुनिकीकरण की प्रक्रिया में कम पूँजी निवेश से आधुनिकता आ जाती है।
5. आधुनिकीकरण से तकनीक साधारण से वैज्ञानिक हो जाती है।
उत्तर-

  1. सही,
  2. सही,
  3. सही,
  4. गलत,
  5. सही।

II. एक शब्द/एक पंक्ति वाले प्रश्न उत्तर

प्रश्न 1. आधुनिकीकरण का क्या अर्थ है ?
उत्तर-आधुनिक जीवन जीने के तरीकों तथा मूल्यों को अपनाने की प्रक्रिया को आधुनिकीकरण कहते हैं।

प्रश्न 2. आधुनिकीकरण ने कौन-से प्रमुख क्षेत्रों का विकास किया है ?
उत्तर-उद्योगों, यातायात व संचार के साधन, स्वास्थ्य व शैक्षिक सुविधाएं इत्यादि।

प्रश्न 3. आधुनिक समाजों की प्रमुख विशेषता क्या होती है ?
उत्तर-आधुनिक समाज एक-दूसरे पर अपनी आवश्यकताओं के लिए आत्मनिर्भर होते हैं।

प्रश्न 4. सबसे पहले किसने शब्द आधुनिकीकरण का प्रयोग किया था ?
उत्तर- डेनियल लर्नर ने।

प्रश्न 5. आधुनिकीकरण की प्रक्रिया लंबी क्यों है ?
उत्तर-क्योंकि समाज के आधुनिक होने में कई पीढ़ियां लग जाती हैं।

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प्रश्न 6. सांस्कृतिक पिछड़ापन का सिद्धांत किसने दिया था ?
उत्तर-सांस्कृतिक पिछड़ापन का सिद्धांत विलियम एफ० आगबन ने दिया था।

प्रश्न 7. दुर्थीम ने आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के बारे में क्या कहा था ?
उत्तर-दुर्थीम के अनुसार आधुनिकीकरण की प्रक्रिया में यान्त्रिक एकता जैविक एकता में बदल जाती है।

प्रश्न 8. आधुनिकीकरण की प्रक्रिया में एक रुकावट बताएं।
उत्तर-कम विकसित देशों में औपनिवेशिक शासन।

प्रश्न 9. आधुनिकीकरण का एक कारण बताएं।
उत्तर-नगरीकरण का बढ़ना, उद्योगों का विकसित होना, शिक्षा का प्रसार।

प्रश्न 10. वैश्विक ग्राम का संकल्प किसने दिया था ?
उत्तर- वैश्विक ग्राम का संकल्प मार्शल मैक्ल्यूहन ने दिया था।

प्रश्न 11. वैश्वीकरण को इंडोनेशिया में क्या कहते हैं ?
उत्तर-वैश्वीकरण को इंडोनेशिया में globalisari कहते हैं।

प्रश्न 12. वैश्वीकरण की एक विशेषता बताएं।
उत्तर-वैश्वीकरण में स्थानीय कार्य विश्व के स्तर पर फैल जाते हैं।

प्रश्न 13. LPG का क्या अर्थ है ?
उत्तर-Liberalisation, Privatisation तथा Globalisation.

प्रश्न 14. वैश्वीकरण का एक कारण बताएं।
उत्तर-वैश्वीकरण यातायात व संचार के साधनों के कारण मुमकिन हो सका है।

प्रश्न 15. वैश्वीकरण का एक परिणाम बताएं।
उत्तर-इससे देश में विदेशी पूँजी निवेश बढ़ता है।

प्रश्न 16. FDI का क्या अर्थ है ?
उत्तर-FDI का अर्थ है Foreign Direct Investment (विदेशी पूँजी निवेश)।

III. अति लघु उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
आधुनिकीकरण क्या होता है ?
उत्तर-
आधुनिकीकरण का अर्थ है जीवन जीने के आधुनिक व नए तरीकों तथा मूल्यों को अपना लेना। समाज तथा व्यक्ति को आधुनिक होने के लिए कई पीढ़ियां लग जाती हैं क्योंकि वह आधुनिक वस्तुओं को तो आसानी से अपना लेता है परन्तु अपने विचारों को आसानी से नहीं बदलता।

प्रश्न 2.
आधुनिकीकरण के तीन नकारात्मक प्रभाव बताएं।।
उत्तर-

  • आधुनिकीकरण के कारण संयुक्त परिवार टूट रहे हैं तथा केंद्रीय परिवार सामने आ रहे हैं।
  • ऐश करने की वस्तुएं बढ़ रही हैं जिसका नई पीढ़ी पर गलत प्रभाव पड़ रहा है।
  • इस कारण अनैतिकता बढ़ रही है तथा समाज में अनैतिक कार्य बढ़ रहे हैं।

प्रश्न 3.
आधुनिकीकरण के लिए क्या आवश्यक है ?
उत्तर-

  • इसके लिए शिक्षा का स्तर अच्छा होना चाहिए।
  • यातायात तथा संचार के साधनों का अच्छा विकास होना चाहिए।
  • देश में कृषि के स्थान पर उद्योगों का अधिक विकास होना चाहिए।

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प्रश्न 4.
वैश्वीकरण का क्या अर्थ है ?
उत्तर-
वैश्वीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे एक देश की अर्थव्यवस्था का संबंध अन्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं के साथ जोड़ा जाता है। इसका अर्थ है कि एक देश का अन्य देशों के साथ वस्तुओं, पूँजी तथा श्रम का बेरोक-टोक आदान-प्रदान होता है। व्यापार का देशों में मुक्त आदान-प्रदान होता है।

प्रश्न 5.
उदारीकरण क्या होता है ?
उत्तर-
नियंत्रित अर्थव्यवस्था के अनावश्यक प्रतिबंधों को हटाना उदारीकरण है। उद्योगों व व्यापार से अनावश्यक प्रतिबंधों को हटाना ताकि अर्थव्यवस्था अधिक प्रतिस्पर्धी, प्रगतिशील तथा मुक्त बन सके। इसे ही उदारीकरण कहते हैं । यह एक आर्थिक प्रक्रिया है तथा समाज में आर्थिक परिवर्तनों की प्रक्रिया है।

प्रश्न 6.
निजीकरण क्या होता है ?
उत्तर-
लोकतांत्रिक देशों में मिश्रित प्रकार की अर्थव्यवस्था होती है। इस अर्थव्यवस्था में सार्वजनिक कंपनियां होती हैं जो सरकार के नियंत्रण में होती हैं। इन सार्वजनिक कंपनियों को निजी हाथों में देना ताकि वे अधिक लाभ कमा सकें, निजीकरण होता है।

प्रश्न 7.
वैश्वीकरण के कौन-से तीन मुख्य पक्ष हैं ?
उत्तर-

  • सकारात्मक पक्ष जिसमें वैश्वीकरण के बहुत से लाभ होते हैं।
  • निष्पक्षता जिसके अनुसार वैश्वीकरण विकास की एक आवश्यक प्रक्रिया है।
  • नकारात्मक पक्ष जो आर्थिक मुश्किलें व आय में असमानता लाता है।

IV. लघु उत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
आधुनिकीकरण।
उत्तर-
आधुनिकीकरण की प्रक्रिया का अर्थ वह परिवर्तन है जो पश्चिमीकरण के प्रभाव अधीन होता है परन्तु यह सिर्फ मौलिक दिशा में पाया जाता है। इस प्रक्रिया के द्वारा विभिन्न प्रकार की भारतीय संस्थाओं ने नया रूप धारण किया तथा आधुनिक समय में परिवर्तन आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के परिणामस्वरूप ही पाया जाता है तथा इस प्रक्रिया के परिणाम हमेशा प्रगतिशील पाए गए हैं।

प्रश्न 2.
आधुनिकीकरण की दो विशेषताएं।
उत्तर-

  • सामाजिक भिन्नता-आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के कारण समाज के विभिन्न क्षेत्र काफ़ी Complex हो गए तथा व्यक्तिगत प्रगति भी पाई गई। इस वजह से विभेदीकरण की प्रक्रिया भी तेज़ हो गई।
  • सामाजिक गतिशीलता-आधुनिकीकरण के द्वारा प्राचीन सामाजिक, आर्थिक तत्त्वों का रूपान्तरण हो जाता है; मनुष्यों के आदर्शों की नई कीमतें स्थापित हो जाती हैं तथा गतिशीलता बढ़ जाती है।

प्रश्न 3.
आधुनिकीकरण द्वारा लाए गए दो परिवर्तन।
उत्तर-

  • धर्म-निरपेक्षता- भारतीय समाज में धर्म-निरपेक्षता का आदर्श स्थापित हुआ। किसी भी धार्मिक समूह का सदस्य देश के ऊंचे से ऊंचे पद को प्राप्त कर सकता है। प्यार, हमदर्दी, सहनशीलता इत्यादि जैसे गुणों का विकास समाज में समानता पैदा करता है। यह सब आधुनिकीकरण की वजह से है।
  • औद्योगीकरण-औद्योगीकरण की तेजी के द्वारा भारत की बढ़ती जनसंख्या की ज़रूरतें पूरी करनी काफ़ी आसान हो गईं। एक तरफ बड़े पैमाने के उद्योग शुरू हुए तथा दूसरी तरफ घरेलू उद्योग तथा संयुक्त परिवारों का खात्मा हुआ।

प्रश्न 4.
आधुनिकीकरण तथा सामाजिक गतिशीलता।
उत्तर-
सामाजिक गतिशीलता आधुनिक समाजों की मुख्य विशेषता है। शहरी समाज में कार्य की बांट, विशेषीकरण, कार्यों की भिन्नता, उद्योग, व्यापार, यातायात के साधन तथा संचार के साधनों इत्यादि ने सामाजिक गतिशीलता को काफ़ी तेज़ कर दिया। प्रत्येक व्यक्ति अपनी योग्यता, बुद्धि के साथ गरीब से अमीर बन जाता है। जिस कार्य से उसे लाभ प्राप्त होता है वह उस कार्य को करना शुरू कर देता है। कार्य के लिए वह स्थान भी परिवर्तित कर लेता है। इस तरह सामाजिक गतिशीलता की प्रक्रिया के द्वारा परम्परावादी कीमतों की जगह नई कीमतों का विकास हुआ। इस तरह निश्चित रूप में कहा जा सकता है कि आधुनिकीकरण से सामाजिक गतिशीलता बढ़ती है।

प्रश्न 5.
आधुनिकीकरण से नए वर्गों की स्थापना होती है।
उत्तर-
आधुनिकीकरण की प्रक्रिया व्यक्ति को प्रगति करने के कई मौके प्रदान करती है। इस वजह से कई नए वर्गों की स्थापना होती है। समाज में यदि सिर्फ एक ही वर्ग होगा तो वह वर्गहीन समाज कहलाएगा। इसलिए आधुनिक समाज में कई नए वर्ग अस्तित्व में आए हैं। आधुनिक समाज में सबसे ज्यादा महत्त्व पैसे का होता है। इसलिए लोग जाति के आधार पर नहीं बल्कि राजनीति तथा आर्थिक आधारों पर बंटे हुए होते हैं। वर्गों के आगे आने का कारण यह है कि अलग-अलग व्यक्तियों की योग्यताएं समान नहीं होतीं। मजदूर संघ अपने हितों की प्राप्ति के लिए संघर्ष का रास्ता भी अपना लेते हैं। अलग-अलग कार्यों के लोगों ने तो अलग-अलग अपने संघ बना लिए हैं।

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प्रश्न 6.
आधुनिकीकरण/ मशीनीकरण।
उत्तर-
भारत में मशीनीकरण के द्वारा कृषि से सम्बन्धित कार्यों में काफ़ी परिवर्तन पाया गया। शुरू में हमारा देश काफ़ी लम्बे समय तक खाद, अनाज इत्यादि के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहता था। मशीनीकरण तथा आधुनिकीकरण की वजह से हमारा देश आत्म-निर्भरता की स्थिति में पहुँच चुका है तथा बाकी हिस्सों में भी काफ़ी परिवर्तन पाया गया

प्रश्न 7.
आधुनिकीकरण / सामाजिक परिवर्तन।
उत्तर-
आधुनिकीकरण ने सामाजिक परिवर्तन की काफ़ी तेज़ गति से हमारे समाज में कई प्रकार के परिवर्तन ला दिए। औरतों की शिक्षा पर तो काफ़ी प्रभाव डाला है। इसके अलावा विधवा विवाह, दहेज प्रथा तथा औरतों की स्थिति इत्यादि में भी काफ़ी परिवर्तन ला दिया। इसके सम्बन्ध में अनेक कानून पास हुए। इस प्रकार सामाजिक बुराइयों को खत्म करने के लिए यह प्रक्रिया काफ़ी प्रभावशाली सिद्ध हुई है।

प्रश्न 8.
औद्योगीकरण।
उत्तर–
प्रत्येक समाज को अपने लोगों की ज़रूरतें पूर्ण करने के लिए औद्योगीकृत बनना पड़ता है। प्रत्येक क्षेत्र में उद्योगों का विकास होना ही औद्योगीकरण कहलाता है। इसका मुख्य उद्देश्य बड़े पैमाने पर उत्पादन करना है। औद्योगीकरण केन्द्रों में आबादी इस कारण भी अधिक होती है। पूँजीवाद भी औद्योगीकरण के आने से ही आरम्भ हुआ था।

प्रश्न 9.
शहरीकरण।
उत्तर-
शहरीकरण भी औद्योगीकरण के साथ ही बढ़ा है। शहरीकरण के द्वारा समाज में कई तरह के परिवर्तन पाए गए। जनसंख्या का बढ़ना, सामाजिक गतिशीलता, सामाजिक संस्थाओं के स्वरूपों में परिवर्तन, मनोरंजन के साधनों का बढ़ना इत्यादि भी शहरीकरण के कारण ही पाए गए। गांवों पर भी शहरीकरण का प्रभाव पड़ा तथा गांवों के लोग शहरों में आकर रहने लगे। समाज के प्रत्येक क्षेत्र में परिवर्तन शहरीकरण के परिणामस्वरूप पाया गया।

प्रश्न 10.
वैश्वीकरण।
उत्तर-
वैश्वीकरण की प्रक्रिया एक व्यापक आर्थिक प्रक्रिया है जो सभी समाजों में फैली होती है। इसमें अलगअलग देशों के बीच मुक्त व्यापार तथा आर्थिक सम्बन्ध होते हैं। सभी देश अपनी ज़रूरतों के लिए एक-दूसरे पर निर्भर होते हैं जिस वजह से अलग-अलग देशों में मुक्त व्यापार पर आधारित आर्थिक सम्बन्धों का विचार हमारे सामने आया। इस विचार को वैश्वीकरण कहते हैं।

प्रश्न 11.
वैश्वीकरण की विशेषताएं।
उत्तर-

  • इस प्रक्रिया में पूरी दुनिया में व्यापार चलता है।
  • इससे दुनिया में नई आर्थिकता कायम हुई है।
  • इसमें बाज़ार बढ़ कर पूरी दुनिया में हो गया है।
  • इससे श्रम विभाजन बढ़ा है।
  • इससे विशेषज्ञ एक देश से दूसरे देश में जाने लग गए हैं।

प्रश्न 12.
वैश्वीकरण का भारत पर प्रभाव।
उत्तर-

  • भारत के विश्व निर्यात में बढ़ौतरी हुई।
  • भारत में विदेशी निवेश बढ़ा है।
  • भारत का विदेशी मुद्रा भण्डार बढ़ा है।
  • भारत का सफ़ल घरेलू उत्पाद बढ़ा है।
  • तकनीकी तथा शैक्षिक सुधार हुए हैं।
  • औद्योगिक कार्यों का विकास हुआ है।

बड़े उत्तरों वाले प्रश्न-

प्रश्न 1.
आधुनिकीकरण के भारतीय समाज पर प्रभावों का वर्णन करें।
उत्तर-
आधुनिकीकरण की प्रक्रिया अंग्रेज़ी सरकार के भारत आने के बाद शुरू हुई। अंग्रेज़ों ने वास्तव में अपनी संस्कृति को भारत में लागू करने के लिए कई परिवर्तन किए। एक तरफ उन्होंने भारतीय समाज के अन्दरूनी राज्यों से सम्पर्क स्थापित करने के लिए यातायात के साधनों का विकास किया तथा दूसरी तरफ संचार के साधनों द्वारा दूर-दूर के लोगों से सम्पर्क स्थापित किया। प्रैस को भी सम्पूर्ण स्वतन्त्रता प्राप्त हुई। भारत के दूसरे देशों से भी सम्पर्क स्थापित हो गए। इसके अलावा अंग्रेजों ने परम्परागत विचारों को ख़त्म करके नए विचारों का समाज में संचार करना शुरू कर दिया। इस प्रकार भारतीय समाज में आधुनिकता आनी शुरू हो गई। भारतीय समाज की परम्परागत सामाजिक संस्थाओं; जैसे कि जाति व्यवस्था, परिवार व्यवस्था, विवाह व्यवस्था इत्यादि में परिवर्तन आने शुरू हो गए। इस प्रक्रिया द्वारा समाज में बहुत-से परिवर्तन आए जिनका वर्णन निम्नलिखित है

1. धर्म-निष्पक्षता (Secularization)-धर्म-निष्पक्षता की प्रक्रिया को आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के द्वारा लोगों तक पहुंचाया गया। स्वतन्त्रता के पश्चात् भारत में सभी धर्मों के लोगों को बराबर समझा गया। प्रत्येक व्यक्ति समाज के बीच किसी भी स्थिति को प्राप्त कर सकता है। प्रत्येक धर्म के व्यक्तियों को दूसरे व्यक्तियों के साथ प्यार एवं सहनशीलता वाले सम्बन्ध स्थापित करने के बारे में चेतन किया जाने लगा। विभिन्न धर्मों की धार्मिक क्रियाओं, आदर्शों आदि का आदर किया जाने लगा। इस प्रकार लोगों में एकता की भावना पैदा होने लग गई। धर्म-निष्पक्षता का सिद्धान्त प्रत्येक क्षेत्र में लागू किया जाने लगा।

2. पश्चिमीकरण (Westernization)—पश्चिमीकरण से ही सम्बन्धित आधुनिकीकरण की प्रक्रिया है। पश्चिमीकरण का प्रभाव भारतीय समाज के ऊपर अंग्रेज़ी सरकार के आने के उपरान्त ही आरम्भ हुआ और पश्चिमीकरण की प्रक्रिया धीरे-धीरे आधुनिकीकरण में परिवर्तित होने लग पड़ी। श्री निवास के अनुसार, “भारतीय लोगों ने अन्धाधुन्ध या सोचेसमझे बिना पूर्ण पश्चिमी संस्कृति को ही नहीं अपनाया, बल्कि कुछ एक ने इसे ग्रहण किया, कुछ एक ने इसका त्याग कर दिया। पश्चिमी संस्कृति के वह तत्त्व जिन्हें भारतीय लोगों ने ग्रहण किया उनका भी भारतीय रूपान्तर (Transformation) भी हुआ। जहां अंग्रेज़ी संस्कृति और जीवन शैली के कुछ तत्त्वों ने भारतीयों को अपनी तरफ आकर्षित किया वहां अंग्रेज़ी संस्कृति के विभिन्न पक्ष, भारतीय जनसंख्या के विभिन्न भागों को आकर्षित करने लग गए। इस प्रकार भारतीय लोगों का आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के साथ परिवर्तित होने का मुख्य कारण पश्चिमीकरण की गतिशीलता के साथ भी सम्बन्धित है।

3. औद्योगीकरण (Industrialization)-औद्योगीकरण आधुनिक समाज की मुख्य विशेषता है। भारत में औद्योगीकरण का पाया जाना पश्चिमी संस्कृति के प्रभाव के कारण है। भारत में कई बड़े उद्योग, विदेशों की सहायता के साथ ही स्थापित किए गए हैं। जैसे कि हम देख रहे हैं कि भारत की जनसंख्या में वृद्धि Geometrically होती है अर्थात् 7×7 = 49 है और उत्पादन में वृद्धि Arithmetically होता है अर्थात् 7+7 = 14। इस तरह जिस प्रकार जनसंख्या की तेजी के साथ वृद्धि हुई है, उसी प्रकार औद्योगिक विकास का होना भी आवश्यक हो गया है। वास्तव में औद्योगीकरण का सम्बन्ध बड़े पैमाने पर उत्पादन करने से होता है। औद्योगीकरण के विकास के साथ ही समाज में पूंजीवाद का विकास सम्भव हुआ। प्रत्येक व्यक्ति की यह इच्छा होती है कि वह इस प्रकार का कार्य करे, कि उसे अधिक-से-अधिक लाभ की प्राप्ति हो। समाज में औद्योगिक क्रान्ति ने नए तकनीकी व्यवसायों को जन्म दिया। औद्योगीकृत समाजों में व्यक्ति को समाज में उसकी जाति के आधार पर नहीं बल्कि उसकी योग्यता पर आधारित कार्य मिलने लगा गया। इस कारण पैतृक व्यवसाय को अपनाने वाली परम्परागत प्रथा का भी खात्मा हुआ। औद्योगिक शहरों में रहने से लोगों के जीवन जीने के ढंगों में बिल्कुल ही परिवर्तन आ गया। गांवों में पाए जाने वाले घरेलू उद्योग तो औद्योगीकरण के विकास से बिल्कुल ही ठप्प हो गए। इस कारण गांवों में प्राचीन समय से चली आ रही संयुक्त परिवार की व्यवस्था तो बिल्कुल ही ख़त्म हो गई। भारत की आर्थिक व्यवस्था भी बदल गई। प्रत्येक क्षेत्र में उद्योगों का विकास होने लग गया। ब्रिटेन, जापान, अमेरिका इत्यादि जैसे कई देशों ने भारत में अपने उद्योग स्थापित किए। इस तरह आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के द्वारा हमारे समाज में औद्योगीकरण की प्रगति हुई।

4. शहरीकरण (Urbanization)-औद्योगीकरण के विकास से ही शहरीकरण की प्रक्रिया भी सामने आई। जहां भी उद्योग विकसित हुए, उन स्थानों पर शहरों का विकास होना शुरू हो गया। गांवों के लोग रोज़गार की तलाश में शहरों में आकर रहने लगे। आधुनिकीकरण की प्रक्रिया की शुरुआत ही शहरों के विकास द्वारा हुई। शहरों में घनी आबादी तथा ज्यादा सामाजिक गतिशीलता पाई गई। यातायात तथा संचार के साधनों के विकास से गांवों तथा शहरों में सम्पर्क स्थापित हो गया। इस प्रकार शहरीकरण के द्वारा विभिन्न सामाजिक संस्थाओं का तो नक्शा ही बदल गया। औरतों की स्थिति में बहुत तेजी से परिवर्तन आए। वह प्रत्येक क्षेत्र में पुरुषों की बराबरी करने लग गई। शहरों में संयुक्त परिवार की जगह केन्द्रीय परिवारों को ज़्यादा मान्यता प्राप्त हुई। केन्द्रीय परिवारों में स्त्रियों तथा मर्दो को समान स्थिति प्राप्त हुई। यदि हम आधुनिक समय में शिक्षा के क्षेत्र की तरफ देखें तो स्त्रियां मर्दो से ज़्यादा पढ़ी-लिखी हैं। औरतें प्रत्येक क्षेत्र में तरक्की कर रही हैं। अब वह अपने आपको आदमी के ऊपर निर्भर नहीं समझती बल्कि वह अब स्वयं ही पैसे कमा रही है तथा आत्म-निर्भर हो गई है।

शहरों में लोगों के रहने-सहने का स्तर भी काफ़ी ऊँचा है। लोग ज़्यादा सुविधाएं प्राप्त करने की तरफ आकर्षित रहते हैं। इस कारण उनका दृष्टिकोण भी व्यक्तिवादी हो गया है। देश के सम्बन्ध में बहुत ज्यादा गतिशीलता पाई गई है क्योंकि जाति प्रथा का पेशे से सम्बन्ध ख़त्म ही हो गया है। शहरीकरण के कारण वर्ग व्यवस्था अस्तित्व में आई। व्यक्ति को समाज में स्थिति उसकी योग्यता के अनुसार प्राप्त होने लगी। पैसे की महत्ता दिन-प्रतिदिन बढ़ने लगी।
इस प्रकार शहरों में पैसे, स्थिति तथा शिक्षा का महत्त्व ज़्यादा पाया जाने लगा। शहरों में विज्ञान का प्रभुत्व होने के कारण धर्म का प्रभाव भी बहुत कम हो गया। शहरों में द्वितीयक समूहों का बढ़ता महत्त्व, जनसंख्या का बढ़ना, आधुनिकता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, सुविधाओं इत्यादि को प्राप्त करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति प्रयत्न करता है। इस कारण व्यक्तियों के आपसी सम्बन्ध रस्मी तथा अस्थिर होते हैं।
शहरी लोग ज्यादा पढ़े-लिखे होते हैं जिस कारण वह नई परिस्थितियों को समझ कर उनको जल्दी अपना लेते हैं। कुछ समस्याएं भी शहरीकरण से पाई जाती हैं जैसे बेरोज़गारी, गन्दी बस्तियां, ज़्यादा तलाक दर, आत्महत्या इत्यादि। परन्तु कई सामाजिक बुराइयों का खात्मा भी हुआ जैसे कि जाति प्रथा, बाल-विवाह, सती प्रथा इत्यादि।

5. नई श्रेणियों की स्थापना (Establishment of New Classes) आधुनिकीकरण की प्रक्रिया ने व्यक्तियों को प्रगति करने के कई अवसर प्रदान किए। इस कारण कई नए वर्गों की स्थापना हुई। समाज में यदि एक वर्ग होगा तो वह वर्गहीन समाज कहलाएगा। इस कारण आधुनिक समाज के बीच कई वर्ग अस्तित्व में आए। नए वर्गों के अस्तित्व में आने का एक कारण यह भी होता है कि विभिन्न व्यक्तियों की योग्यताएं एक जैसी नहीं होती हैं। इस कारण वह धन, शिक्षा, व्यवसाय आदि के दृष्टिकोण से अलग होते हैं। इस कारण ही नए वर्ग अस्तित्व में आते हैं।

आधुनिक समाज में सबसे ज्यादा महत्त्व पैसे का होता है। इस कारण लोग जाति के आधार पर नहीं बल्कि राजनीति तथा आर्थिक आधार पर विभिन्न वर्गों में बंटे हुए हैं। औद्योगिक क्षेत्र में पूंजीपतियों का मुकाबला करने के लिए मज़दूर संघ स्थापित हो गए हैं। यह मजदूर संघ अपने अधिकारों की प्राप्ति के लिए संघर्ष का रास्ता भी अपना लेते हैं। आधुनिक समय में तो अपने-अपने हितों की रक्षा के लिए अलग-अलग पेशों से सम्बन्धित लोगों ने संघ बना लिए हैं।

6. कृषि के क्षेत्र में विकास (Development in Agricultural Area)-भारत के गांवों की अधिकतर जनसंख्या कृषि के व्यवसाय को अपनाती है। कृषि करने के लिए प्राचीन भारतीय समाज में तो शारीरिक मेहनत का ही प्रयोग होता है, परन्तु आधुनिक काल में तो कृषि करने के लिए नई-नई मशीनों एवं तकनीकों का आविष्कार हो गया है। बड़े-बड़े खेतों में ट्रैक्टरों के साथ खेतीबाड़ी की जाने लग पड़ी है। नई-नई रासायनिक खादों का प्रयोग होने लग पड़ा है जिस कारण उत्पादन में भी वृद्धि हुई है। फसल को काटने हेतु कम्बाइनों का प्रयोग किया जाने लग पड़ा है। इन सब कारणों के कारण कृषि में कम परिश्रम के होने पर भी उत्पादन में वृद्धि हो गई है। इस कारण ही कई लोग बेरोज़गार हो गए और कारखानों में जाकर कार्य करने लग पड़े। __ कृषि के क्षेत्र में आधुनिकीकरण के साथ-साथ मशीनीकरण भी हुआ है। सर्वप्रथम भारत उर्वरक के क्षेत्र में दूसरे देशों पर निर्भर करता था। परन्तु हरित क्रान्ति (Green Revolution) के साथ-साथ वह आत्मनिर्भर हो गया। इससे ग्रामीण लोगों की आर्थिक स्थिति एवं जीवन शैली में भी काफ़ी परिवर्तन हुआ है।

PSEB 12th Class Sociology Solutions Chapter 8 आधुनिकीकरण व वैश्वीकरण

7. कल्याणकारी राज्यों की स्थापना (Establishment of Welfare States)—स्वतन्त्रता के बाद भारतीय संविधान के अनुसार हमारे देश में कल्याणकारी राज्यों की धारणाओं को अपनाया गया जिस कारण राज्यों के कार्य काफ़ी बढ़ गए। इस कारण ही सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रिया दिनों-दिन तेज़ होती जा रही है। भारत की केन्द्रीय सरकार एवं राज्य सरकार इस बात की कोशिश कर रही है कि व्यापारियों की, उपभोक्ताओं की, पूंजीपतियों की, उद्यमियों की, बड़े एवं कुटीर उद्योगों सभी की साझे तौर पर रक्षा की जाए। देश के धन का समान विभाजन किया जाए एवं यह सुरक्षित किया जाए कि उत्पादन केवल सीमित हाथों में न रह जाए। इसके लिए आधुनिकीकरण की प्रक्रिया ही ज़िम्मेदार है।

8. लोकतंत्रीकरण (Democratization)-राजनीति में लोकतंत्रीकरण की प्रक्रिया आधुनिकीकरण के कारण ही आई। भारत को संसार का सबसे बड़ा लोकतंत्रीकरण देश कहा गया है, क्योंकि भारत में उन सभी को वोट देने का अधिकार है, जिनकी आयु 18 वर्ष से अधिक है। कानून के दृष्टिकोण से सभी एक समान हैं। प्रत्येक व्यक्ति को कुछ मौलिक अधिकार प्राप्त हैं, जिनको कोई नहीं छीन सकता। देश में आर्थिक असमानताएं दूर की जा रही हैं। संविधान के बीच राज्यों की नीतियों के कुछ निर्देशित सिद्धान्त दिए गए हैं, ताकि राज्य इन सिद्धान्तों के अनुसार ही नियम बनाए। लोगों को इस बात का अधिकार है कि यदि उन्हें सरकार का कार्य पसन्द नहीं है तो वह सरकार को बदल सकते हैं। इस प्रकार भारत में लोकतान्त्रिक प्रणाली काफ़ी मज़बूत है और यह सब कुछ आधुनिकीकरण की ही देन है।

9. कई अन्य परिवर्तन (Many Other Changes)-आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के द्वारा सरकार ने भी अपनी नीतियों में परिवर्तन किया है। समाज की प्रगति हेतु पूर्व निश्चित योजनाएं बना ली जाती हैं। इन योजनाओं के अधीन ऐसे योजनाबद्ध परिवर्तन किए जाते हैं, जिसके द्वारा परिवर्तन की प्रक्रिया को स्वाभाविक रूप से क्रियात्मक रहने की स्वतन्त्रता नहीं दी जाती है बल्कि उसके स्थान पर प्राप्त साधनों एवं परिस्थितियों को ध्यान में रखकर वर्तमान व्यवस्था में परिवर्तन लाने की योजना बनाई जाती है।

प्रश्न 2.
वैश्वीकरण के परिणामों का वर्णन करें।
अथवा समाज पर वैश्वीकरण के प्रभावों की चर्चा कीजिए।
उत्तर-
वैश्वीकरण के परिणाम (Consequences of Globalisation)-भारत में 1991 में आर्थिक सुधार आरम्भ हुए और भारतीय अर्थव्यवस्था के भूमण्डलीकरण की प्रक्रिया तेज़ हो गई। वैश्वीकरण के भारतीय अर्थव्यवस्था पर भिन्न-भिन्न भागों के ऊपर प्रभाव एवं परिणाम निम्नलिखित हैं

1. भारत के विश्व निर्यात के हिस्से में वृद्धि (Increase of Indian Share in World Export)वैश्वीकरण की प्रक्रिया के कारण भारत के विश्व निर्यात में वृद्धि हुई। 20वीं शताब्दी के अन्तिम दशक में भारत की वस्तुओं और सेवाओं में 125% वृद्धि हुई। 1990 में भारत का विश्व की वस्तुओं एवं सेवाओं के निर्यात में हिस्सा 0.55% था जोकि 1999 में बढ़कर 0.75% हो गया था।

2. भारत में विदेशी निवेश (Foreign Investment in India) विदेशी निवेश में वृद्धि भी वैश्वीकरण का एक लाभ है क्योंकि विदेशी निवेश के साथ अर्थव्यवस्था के साथ उत्पादन की क्षमता बढ़ती है। 1995-96 से 2016 में इससे काफ़ी अधिक बढोत्तरी हुई। इस समय के दौरान वार्षिक औसत के साथ लगभग 1140 मिलियन डालर का विदेशी लाभ हुआ।

3. विदेशी मुद्रा भण्डार (Foreign Exchange Kesernes) आयात के लिए विदेशी मुद्रा आवश्यक है। जून, 1991 में विदेशी मुद्रा भण्डार 1 Billion डॉलर था जिसके साथ केवल 2 सप्ताह की आयात आवश्यकताएं पूरी की जा सकती थीं। इसके पश्चात् भारत में नई आर्थिक नीतियों को अपनाया गया। वैश्वीकरण एवं उदारीकरण की नीतियों को बढ़ावा दिया गया, जिस कारण देश के विदेशी मुद्रा भण्डार लगभग 390 Billion Dollars के आसपास हैं।

4., सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि दर (Growth of Gross Domestic Product)—वैश्वीकरण के कारण देश के सकल घरेलू उत्पादन में वृद्धि हुई। 1980 में 5.63% जो 2005 के बाद 8-9% हो गई। आजकल यह 7% के करीब है।

5. बेरोज़गारी में वृद्धि (Increase in Unemployment)-भूमण्डलीकरण के साथ बेरोज़गारी में वृद्धि होती है। 20वीं शताब्दी के अन्तिम दशक में मैक्सिको, दक्षिण कोरिया, थाईलैण्ड, सिंगापुर, इण्डोनेशिया, मलेशिया के बीच
वैश्वीकरण के कारण आर्थिक संकट आया है। इस कारण लगभग 1 करोड़ लोग बेरोज़गार हो गए और वह ग़रीबी की रेखा के नीचे आ गए। 1990 के दशक के आरम्भ में बेरोजगारी की दर 6% थी जोकि 2000 तक 7% हो गई।

6. कृषि के ऊपर प्रभाव (Impact on Agriculture) देश के सकल घरेलू उत्पाद में खेती एवं इससे सम्बन्धित कार्यों का हिस्सा 20% है जबकि अमेरिका में 2% है फ्रांस एवं जापान के बीच 5% है। यदि श्रम शक्ति को देखो तो भारत की 69% श्रम शक्ति को खेती के विकास से सम्बन्धित कार्यों से रोज़गार प्राप्त है जबकि अमेरिका एवं इंग्लैण्ड में ऐसे कार्यों में 2.6% श्रम शक्ति है। विश्वव्यापार के नियमों के अनुसार दुनिया को इस संगठन के सभी सदस्य देश को खेती क्षेत्र के निवेश के लिए दुनिया के प्रत्येक देश के लिए योजना है। इस प्रकार आने वाला समय भारत की खेती एवं अर्थव्यवस्था के लिए चुनौतीपूर्ण रहने की सम्भावना है।

7. तकनीकी एवं शिक्षात्मक सुधार (Educational & Technical Development)-वैश्वीकरण एवं उदारीकरण का शिक्षा के ऊपर भी काफ़ी प्रभाव पड़ा। लेकिन तकनीकी क्षेत्र में तो काफ़ी चमत्कार भी हुआ। संचार एवं यातायात के साधनों के कारण दुनिया की दूरी काफ़ी कम हो गई है। Internet and Computers ने तो इस क्षेत्र में क्रान्तिकारी विकास कार्य किए हैं।

आधुनिकीकरण व वैश्वीकरण PSEB 12th Class Sociology Notes

  • साधारण शब्दों में आधुनिकीकरण का अर्थ है जीवन जीने के आधुनिक तथा नए तरीकों व नए मूल्यों को अपना लेना। पहले इसका अर्थ काफ़ी तंग घेरे में लिया जाता था, परन्तु अब इसमें कृषि आर्थिकता व औद्योगिक आर्थिकता में परिवर्तन को भी शामिल किया जाता है।
  • सबसे पहले आधुनिकीकरण शब्द का प्रयोग Daniel Lerner ने मध्य-पूर्वीय समाजों का अध्ययन करते हुए किया। उनके अनुसार आधुनिकीकरण परिवर्तन की एक ऐसी प्रक्रिया है जो गैर पश्चिमी देशों में पश्चिमी देशों के साथ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबधों के कारण आती है।
  • आधुनिकीकरण की कई विशेषताएं हैं जैसे कि यह एक क्रान्तिकारी तथा जटिल प्रक्रिया है, यह काफ़ी लंबा समय चलने वाली प्रक्रिया है, इसे वापस नहीं किया जा सकता, इससे समाज में प्रगति आती है, इत्यादि।
  • आधुनिकीकरण के आने के कई कारण हैं जैसे कि नगरों का बढ़ना, बड़े-बड़े उद्योगों का सामने आना, शिक्षा के स्तर का बढ़ना, संचार के साधनों का विकास, किसी करिश्माई नेता द्वारा समाज में परिवर्तन लाना इत्यादि।
  • आधुनिकीकरण की प्रक्रिया का हमारे समाज के प्रत्येक हिस्से पर प्रभाव पड़ा जैसे कि जाति प्रथा के बंधन ___ कमज़ोर पड़ गए, परिवारों का स्वरूप बदल गया, पश्चिमी शिक्षा का प्रभाव बढ़ गया, नई कानून व्यवस्था सामने आई, समाज में बहुत से सुधार हुए इत्यादि।
  • आज के संसार को एक वैश्विक ग्राम के नाम से जाना जाता है क्योंकि वैश्वीकरण की प्रक्रिया ने सभी देशों को एक-दूसरे के नज़दीक ला दिया है। आजकल हमें घर बैठे ही पता चल जाता है कि सम्पूर्ण विश्व में क्या हो रहा है ?
  • वैश्वीकरण का साधारण शब्दों में अर्थ है अलग-अलग देशों के बीच वस्तुओं, सेवाओं, विचारों, सूचना, लोगों तथा पूँजी का बेरोक-टोक प्रवाह। इससे उन देशों की आर्थिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक सीमाओं के बंधन टूट जाते हैं। यह सब कुछ संचार के विकसित साधनों के कारण मुमकिन हुआ है।
  • वैश्वीकरण की कई विशेषताएं होती हैं जैसे कि स्थानीय कार्यों का वैश्विक स्तर पर आना, प्रत्येक कार्य में तेजी का होना, सम्पूर्ण संसार में एक स्तर पर वस्तुओं की मौजूदगी, देशों के अन्तर्सम्बन्धों का बढ़ना, आदान-प्रदान का बढ़ना इत्यादि।
  • वैश्वीकरण के लिए दो प्रक्रियाओं का होना काफ़ी आवश्यक है वह है उदारीकरण व निजीकरण। उदारीकरण का अर्थ है बाज़ार के नियमों के अनुसार अपनी आर्थिकता को चलाना तथा निजीकरण का अर्थ है सरकारी कंपनियों को निजी क्षेत्र को बेच देना।
  • वैश्वीकरण के कई कारण होते हैं; जैसे कि यातायात तथा संचार में साधनों का विकास, सरकारों की तरफ से आर्थिक सीमाओं को खोल देना, बड़ी-बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों का सामने आना इत्यादि।
  • वैश्वीकरण का हमारे देश पर काफ़ी प्रभाव पड़ा जैसे कि व्यापारिक उदारीकरण का सामने आना, विदेशी पूँजी का निवेश, विदेशों से पैसे का देश में आना, तकनीक का आदान-प्रदान, आर्थिक मार्किट का सामने आना, वस्तुओं का अलग-अलग देशों में बनना इत्यादि।
  • बाहरी स्रोत (Outsourcing)—किसी अन्य कम्पनी को कार्य करने के लिए देने को बाहरी स्रोत कहते हैं।
  • विनिवेश (Disinvestment)-सरकारी अथवा जनतक क्षेत्र की कंपनियों का निजीकरण विनिवेश कहलाता है।
  • करिश्माई नेता (Charismatic Leader)—वह नेता जिसके व्यक्तित्व में कई करिश्माई गुण होते हैं तथा जो अपने व्यक्तित्व से लोगों को प्रभावित करता है।
  • धर्मनिष्पक्षता (Secularization)—वह विश्वास जिसमें राज्य, नैतिकता, शिक्षा इत्यादि धर्म के प्रभाव से काफ़ी दूर होते हैं।
  • उदारीकरण (Liberalisation)-बाज़ार पर सरकारी नियन्त्रण को कम कर देना तथा आर्थिक सीमाओं को खोल देना।

PSEB 9th Class Home Science Solutions Chapter 5 घर का सामान

Punjab State Board PSEB 9th Class Home Science Book Solutions Chapter 5 घर का सामान Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 9 Home Science Chapter 5 घर का सामान

PSEB 9th Class Home Science Guide घर का सामान Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
किसी भी उपकरण को खरीदते समय पारिवारिक बजट को ध्यान में रखना क्यों जरूरी है ?
उत्तर-
कोई उपकरण खरीदने से पहले यह देख लेना चाहिए कि क्या परिवार का बजट इतना है कि इसे खरीदा जा सके। यदि गृहिणी के पास समय तथा शक्ति हो तो उसको कम खर्च वाले उपकरण खरीद लेने चाहिएं। यदि आवश्यकता से अधिक खर्च कर लिया जाए तो घर के अन्य कार्य छूट सकते हैं।

प्रश्न 2.
दो ऐसे उपकरणों के नाम लिखो जिनसे समय और शक्ति की बचत हो सके।
उत्तर-
कपड़े धोने वाली मशीन, कुकिंग रेंज, टोस्टर, बिजली की मिक्सी, माइक्रोवेव ओवन आदि।

प्रश्न 3.
घरेलू उपकरणों की आवश्यकता क्यों होती है ?
उत्तर-
आज के युग में मानवीय उद्देश्य तथा ज़रूरतें बढ़ गई हैं। इसलिए समय तथा शक्ति बचाने के लिए उपकरणों का प्रयोग किया जाता है। उपकरणों की मदद से कम समय में कार्य किया जा सकता है।

PSEB 9th Class Home Science Solutions Chapter 5 घर का सामान

प्रश्न 4.
घर में रैफ्रिजरेटर की ज़रूरत क्यों होती है ?
उत्तर-
यह खाने वाले पदार्थों को ठण्डा रखने के काम आता है। इसमें फल तथा सब्जियां ताज़े रहते हैं। भोजन मिट्टी तथा धूल से बचा रहता है तथा इसका स्वाद तथा शक्ल ठीक रहती है। सब्जियां तथा फल एक बार लाये जा सकते हैं तथा बार-बार बाज़ार नहीं जाना पड़ता।

प्रश्न 5.
कपड़े धोने वाली मशीनें कौन-कौन सी हो सकती हैं ?
उत्तर-
ये मशीनें दो तरह की हो सकती हैं (i) ऑटोमैटिक (ii) नॉन-आटोमौटिक। ऑटोमैटिक मशीनें अपने आप कपड़ों को धोती, खंगालती तथा निचोड़ती हैं। नॉनऑटोमैटिक मशीनें केवल कपड़े धोती हैं।

प्रश्न 6.
कपड़े धोने वाली ऑटोमैटिक मशीन के दो लाभ लिखें ?
उत्तर-
ऑटोमैटिक मशीनें कपड़ों को धोती, खंगालती तथा निचोड़ती हैं। मशीन के प्रयोग से साबुन तथा समय दोनों की बचत होती है तथा मेहनत की भी बचत हो जाती है। अधिक वर्षा वाले इलाकों अथवा जहां कपड़ों को बाहर सुखाने का इन्तजाम नहीं हो सकता वहां ऑटोमैटिक कपड़े धोने वाली मशीन काफ़ी लाभदायक सिद्ध हुई है क्योंकि कपड़े मशीन में ही सूख जाते हैं।

प्रश्न 7.
बिजली की प्रैस घर में क्यों ज़रूरी है?
उत्तर-
मनुष्य का व्यक्तित्व उस द्वारा पहने हुए बढ़िया कपड़ों के कारण बढ़िया तथा बुरे कपड़ों के कारण बुरा लगता है। प्रैस से कपड़ों में से सिलवटें आदि निकल जाती हैं तथा यह पहने हए सन्दर लगते हैं। घर में प्रैस हो तो समय तथा शक्ति बचाई जा सकती
प्रैसें दो तरह की हो सकती हैं-ऑटोमैटिक तथा नॉन-ऑटोमैटिक। ऑटोमैटिक प्रैसें भाप वाली भी हो सकती हैं तथा कइयों में रेग्यूलेटर भी लगा होता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 8.
बायोगैस के बारे में आप क्या जानते हो ?
उत्तर-
बायोगैस जानवरों के मल-मूत्र से तैयार होती है। बायोगैस में लगभग 60% मीथेन गैस होती है जो ज्वलनशील गैस है। इसको नालियों द्वारा गांवों के घरों में भेजा जाता है। इसका प्रयोग भोजन पकाने में किया जाता है। बायोगैस को सिलिण्डरों में नहीं भरा जा सकता। बचा हुआ मल-मूत्र खाद के रूप में खेतों में प्रयोग किया जा सकता है।

प्रश्न 9.
टोस्टर किस काम आता है और यह कैसा होता है ?
उत्तर-
टोस्टर-टोस्टर डबलरोटी के टुकड़ों को सीधे सेक से सेंकने तथा कुरकुरा करने के लिए प्रयोग किया जाता है। इसका प्रयोग साधारणत: प्रत्येक घर में किया जाता है। यह तीन तरह के होते हैं- (i) ऑटोमैटिक (ii) नॉन-ऑटोमोटिक (iii) सेमी-ऑटोमैटिक।
ऑटोमैटिक टोस्टर में ताप कण्ट्रोल, समय सूचक के रंग सूचक यन्त्र लगे होते हैं । यह भी तीन तरह के होते हैं-कुएं के आकार के-इसमें डबलरोटी तथा स्लाइस डाले जाते हैं। जब यह सेंके जाते हैं तो अपने आप बाहर आ जाते हैं। इसमें डबलरोटी के बुरादे के लिए ट्रे भी लगी होती है। भट्ठी के आकार वाले टोस्टर में बन्द तथा रोल भी गर्म किए जाते हैं। इसमें बाहर निकालने के लिए ट्रे की भी व्यवस्था होती है। तीसरा कुएं तथा भट्ठी के मिश्रण वाले टोस्टर में डबल रोटी, केक, रोल्स सेंकने के लिए कम तापमान वाला भाग बना होता है।

PSEB 9th Class Home Science Solutions Chapter 5 घर का सामान (1)

PSEB 9th Class Home Science Solutions Chapter 5 घर का सामान

प्रश्न 10.
मिक्सी आजकल हर घर में ज़रूरी समझी जाती है। क्यों ?
उत्तर-
इस उपकरण में गीले तथा सूखे भोजन पदार्थ पीसे जाते हैं । हाथ से कूटने तथा पीसने से समय तथा शक्ति दोनों ही अधिक लगते हैं। परन्तु मिक्सी में कूटने पीसने अथवा पीठी बनाना आदि के लिए प्रयोग करने से गृहिणी की शक्ति तथा समय दोनों की ही बचत हो जाती है। इसलिए समय तथा शक्ति बचाने के लिए मिक्सी आजकल हर घर में आवश्यक हो गई है।

PSEB 9th Class Home Science Solutions Chapter 5 घर का सामान (2)

प्रश्न 11.
यदि बिजली की मिक्सी घर में न हो तो उसके स्थान पर किस उपकरण का प्रयोग किया जाता हैं और कैसे ?
उत्तर-
यदि घर में बिजली की मिक्सी न हो तो हाथ से चलाने वाले ग्राइंडर का प्रयोग किया जाता है। इससे मसाला आदि पीसने का कार्य किया जाता है। यह लोहे का बना हुआ होता है। इसको एक पेंच की मदद से फिट किया जाता है। मसाला डालने के लिए इसके ऊपर एक मुंह सा बना होता है। इस में गीला अथवा सूखा मसाला डालकर इसको हत्थी से घुमाया जाता है। पीसा हुआ मसाला आगे नाली के रास्ते से बाहर आ जाता है। हाथ से चलाने वाली इस तरह की ही कीमा बनाने तथा जूस निकालने वाली मशीनें भी मिल जाती हैं।

PSEB 9th Class Home Science Solutions Chapter 5 घर का सामान (3)

प्रश्न 12.
प्रैशर कुक्कर के क्या लाभ हैं और यह किस धातु का बना हुआ होता है ?
उत्तर-
प्रैशर कुक्कर में खाना शीघ्र पक जाता है विशेषकर पहाड़ी क्षेत्रों में तो इसका काफ़ी महत्त्व है। क्योंकि इससे भाप बाहर नहीं निकलती, खाने के पौष्टिक तत्त्व खराब नहीं होते। खाना एक पतीले से 1/3 समय में पक जाता है। इससे मेहनत, समय तथा पैसे की भी बचत होती है। सब्जियों का स्वाद तथा रंग भी ठीक रहता है।
प्रैशर कुक्कर एल्यूमीनियम, प्रैस्ड एल्यूमीनियम अथवा स्टेनलेस स्टील का बना हो सकता है।

प्रश्न 13.
गैस के चूल्हे के बारे में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर-
गैस का चूल्हा—गैस से खाना बनाने का काम आसान तथा सफ़ाई से होता है। क्योंकि गैस से बर्तन काले नहीं होते। गैस के चूल्हे एक, दो तथा तीन बर्नरों वाले भी मिलते हैं। गैसे के चूल्हे को रबड़ की नाली से सिलिण्डर से जोड़ा जाता है। बर्नरों के आगे रेग्यूलेटर लगे होते हैं जो सेक को अधिक, कम करने तथा चूल्हा वाल्व बन्द करने का कार्य करते हैं। सिलिण्डर पर भी रेग्यूलेटर लगा होता है जो सिलिण्डर से गैस को चूल्हे तक पहुँचाता है।PSEB 9th Class Home Science Solutions Chapter 5 घर का सामान (4)

कुकिंग रेंज-कुकिंग रेंज से भोजन पकाने के लिए बहुत कम समय लगता है। इसमें बेकिंग तथा ग्रिलिंग भी की जाती है। कुकिंग रेंज गैस से चलने वाले तथा बिजली से चलने वाले भी होते हैं। इसकी बॉडी स्टील की अथवा लोहे की बनी होती है। इसके ऊपर चार चूल्हे होते हैं, उसके नीचे ग्रिल, फिर ओवन होता है। गैस पावर प्लग में लगाई जाती है तथा बिजली वाले की तार पावर प्लग में लगाई जाती है। कई कुकिंग रेंज में ओवन के नीचे एक और डिब्बा बना होता है जिसमें भोजन पकाकर रख दो तो काफ़ी समय गर्म रहता है। इसके सामने वाली तरफ चूल्हों के नीचे रेग्यूलेटर लगे होते हैं जो तापमान को कण्ट्रोल करते हैं।PSEB 9th Class Home Science Solutions Chapter 5 घर का सामान (5)

PSEB 9th Class Home Science Solutions Chapter 5 घर का सामान

प्रश्न 14.
अन्य ईंधनों की अपेक्षा सौर कुक्कर कैसे लाभदायक है?
उत्तर-
सौर कुक्कर सूर्य की ऊर्जा से कार्य करता है। सूर्य की किरणें सौर कुक्कर के पैराबोलिक परावर्तक यन्त्र की सतह पर पड़ती हैं तथा ताप ऊर्जा पैदा करती हैं। इस ऊर्जा का प्रयोग भोजन पकाने में होता है।

PSEB 9th Class Home Science Solutions Chapter 5 घर का सामान (6)

सौर कुक्कर निम्नलिखित कारणों से लाभदायक हैं –

  1. भारत एक गर्म देश है। यहां सारा वर्ष सूर्य की रोश नी तथा गर्मी उपलब्ध रहती है। सोलर कुक्कर क्योंकि सूर्य की किरणों से ऊर्जा प्राप्त करता है इसलिए यहां यह कुक्कर बहुत कामयाब है। इस तरह सौर कुक्कर ऊर्जा पैदा करने का एक सस्ता साधन है।
  2. सौर कुक्कर में खाना पकाने को 3 से 7 घण्टे का समय लगता है।
  3. सौर कुक्कर में खाना पकाने से कोई भी बाई-प्रोडक्ट नहीं पैदा होता। इसलिए वातावरण में प्रदूषण पैदा नहीं करता।

प्रश्न 15.
ओवन किस काम आता है?
उत्तर-
विद्युत् ओवन-यह गोल आकार का अथवा चौकोर डिब्बे के आकार का यन्त्र होता है। यह केक, बिस्कुट, डबलरोटी, पीज़ा, तथा सब्जियां आदि बेक करने के काम आता है। गोल ओवन साधारणतः एल्यूमीनियम का बना होता है तथा चौकोर किसी जंग रहित धातु अथवा एल्यूमीनियम का होता है। इसके दो भाग होते हैं – तल तथा ढक्कन। निचले भाग में एलीमेन्ट लगा होता है। इस गोल चैम्बर के बाहर की ओर एक स्थान पर नियन्त्रण बॉक्स लगा होता है जिस पर थर्मोस्टेट, इण्डीकेटर तथा एक सॉकेट लगी होती है। थर्मोस्टेट से जितना तापमान चाहिए, कर लिया जाता है। जब ओवन इच्छित तापमान पर पहुंच जाता है तो विद्युत् प्रवाह आरभ हो जाता है। यह सिस्टम ऑटोमैटिक ओवन में ही होता है। बाजार में रेग्यूलेटर के बिना भी ओवन मिलते हैं परन्तु यह कम लाभदायक होते हैं। इनमें तापमान बहुत बढ़ने से भोजन जल जाता है।PSEB 9th Class Home Science Solutions Chapter 5 घर का सामान (7)

बेकिंग करते समय इसका ढक्कन निचले भाग पर फिट किया जाता है। ढक्कन के दोनों तरफ प्लास्टिक के हैण्डल लगे होते हैं। जिससे ढक्कन को उतारना तथा चढ़ाना आसान होता है। ढक्कन के ऊपरी तरफ बीच में कांच की खिड़की बनी होती है यहां से भोजन की स्थिति का अन्दाज़ा लगाया जा सकता है। कांच के आस-पास दो छिद्र होते हैं जिसमें कोई सूई अथवा सिलाई डालकर भोजन की स्थिति का पता लगाया जा सकता है। ओवन के साथ एक गोल बर्तन तथा एक प्लेट (Base Plate) मिलती है। कोई भोजन बनाते समय यह प्लेट नीचे रखकर ऊपर गोल भोजन वाला बर्तन रखा जाता है, यह प्लेट एक सहारे का काम करती है।

प्रश्न 16.
माइक्रो ओवन किस काम आता है ?
उत्तर-
यह बिजली से चलने वाला भोजन पकाने के लिए प्रयोग किया जाने वाला उपकरण है। सूक्ष्म-तरंग अथवा माइक्रोवेव में विद्युत्-चुम्बकीय तरंगें पैदा करने के लिए एक चुम्बकीय यन्त्र मेग्नेट्रॉन लगा होता है। भोजन इन सूक्ष्म तरंगों को चूस लेता है जिससे भोजन अणु 24500 लाख प्रति सैकिण्ड की गति से कांपते हैं। इस तरह भोजन के अणु आपस में इतनी तेज़ी से रगड़ खाते हैं तथा इस तरह बहुत ज्यादा गर्मी पैदा होती है तथा मिनटों में ही भोजन पक कर तैयार हो जाता है। माइक्रोवेव में भोजन अपने में पाई जाने वाली नमी के अनुसार ही भोजन पकने के दौरान पैदा हुई विद्युत् चुम्बकीय ऊर्जा को सोखता है। इस तरह भोजन को एक सार पकाने में मुश्किल आती है।

प्रश्न 17.
स्टोव कितनी प्रकार के हो सकते हैं और कौन-कौन से ?
उत्तर-
स्टोव मिट्टी के तेल से चलने वाले स्टोव दो तरह के होते हैं-हवा भरने वाले तथा बत्तियों वाले।PSEB 9th Class Home Science Solutions Chapter 5 घर का सामान (8)

बत्तियों वाला स्टोव बत्तियों वाले स्टोव की टंकी में जब तेल डाला जाता है तो बत्तियां तेल चूस कर जलती हैं तथा पम्प वाले स्टोव में टंकी में तेल भरने के पश्चात् इसका तेल वाला मुंह अच्छी तरह बन्द करके हवा भरने से तेल बर्नर पर आ जाता है, फिर आग से इसको जलाया जाता है।

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प्रश्न 18.
रसोई के बर्तन कौन-कौन सी धातुओं से बने होते हैं ?
उत्तर-
रसोई के बर्तन पीतल, तांबा, एल्यूमीनियम तथा नॉन स्टिक, चांदी, लोहा तथा स्टील आदि धातुओं तथा मिश्रित धातुओं के बने होते हैं। आजकल स्टेनलेस स्टील से बने हुए बर्तन काफ़ी प्रचलित हैं। इसका कारण है कि यह एक चमकीली धातु होने के कारण इसको बार-बार पॉलिश करने की ज़रूरत नहीं पड़ती। इस पर तेज़ाब तथा क्षार का प्रभाव भी नहीं होता तथा इसको जंग भी नहीं लगता।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 19.
घर के सामान का चयन करते समय किन बातों को ध्यान में रखोगे ?
उत्तर-
घर के सामान के चुनाव के समय निम्नलिखित बातें ध्यान में रखनी चाहिएं –
(i) कीमत, (ii) डिज़ाइन, (iii) स्तर, (iv) सम्भाल तथा रख-रखाव, (v) उपयोगिता, सेवा सुविधाएं तथा गारण्टी।
(i) कीमत-कोई भी उपकरण खरीदते समय उसकी उपयोगिता के साथ-साथ उसकी कीमत को भी ध्यान में रखना बहुत ज़रूरी है। उदाहरणत: यदि मिक्सी की खरीद करनी है तो यह ध्यान में रखना आवश्यक है कि वह काटने, पीसने, जूस निकालने तथा आटा गूंथना आदि सभी काम करती हो न कि विभिन्न कार्यों के लिए विभिन्न मशीनों को खरीदना पड़े। इसलिए ऐसी स्थिति में फूड प्रोसैसर ही ठीक रहता है। दूसरी बात यह आवश्यक नहीं कि महंगे उपकरण ही अच्छे होते हैं। कई बार स्थानिक (local) अच्छी कम्पनियां भी अपनी मशहरी के लिए कम कीमत रखती हैं। इसलिए विभिन्न स्थानों से कीमत की तुलना करनी बहुत आवश्यक है।

(ii) डिज़ाइन किसी भी उपकरण की खरीददारी के समय उसका डिज़ाइन एक महत्त्वपूर्ण विषय है। डिज़ाइन उपकरण के आकार, भार, सन्तुलन तथा पकड़ने की सुविधाओं आदि से सम्बन्धित है। उपकरण का आकार परिवार के सदस्यों की संख्या पर निर्भर करता है। डिज़ाइन हमेशा साधारण होना चाहिए ताकि साफ़ सफ़ाई करना आसान हो। भार तथा सन्तुलन ठीक होना चाहिए ताकि उपकरण को चलाते समय वह ठीक से टिका रहे। यदि उपकरण हिलता-जुलता होगा, भार सन्तुलन ठीक नहीं होगा तो उपकरण के गिरने का खतरा रहता है। उपकरण को पकड़ने के लिए कोई हैण्डल अथवा ऐसी जगह बनी हो जहां से आसानी से तथा पूरी जकड़ से पकड़ा जा सके।

(iii) स्तर–उपकरणों की खरीद हमेशा विश्वसनीय, बढ़िया तथा स्टैंडर्ड अर्थात् राष्ट्रीय, अन्तर्राष्ट्रीय कम्पनियों से करनी चाहिए जैसे कि विद्वान् कहते हैं कि “महंगा रोए एक बार, सस्ता रोए बार-बार” अर्थात् बहुत बार हम कीमत कम होने के कारण वस्तु खरीद लेते हैं जो कि थोड़े समय में ही खराब हो जाती है जबकि महंगी तथा विश्वसनीय कम्पनी की चीज़ बढ़िया तथा टिकाऊ होती है।
यह समान खरीदते समय आई० एस० आई० (ISI) के मार्के का भी ध्यान रखना चाहिए। जिन कम्पनियों की वस्तुएं आई० एस० आई० (Indian Standard Institute) द्वारा प्रमाणित हों वही खरीदनी चाहिए।

(iv) सम्भाल तथा रख-रखाव-बर्तनों अथवा उपकरणों को खरीदते समय उनकी सम्भाल तथा रख-रखाव का भी बहुत महत्त्व है। यदि खरीदे गए बर्तन अथवा उपकरण की सम्भाल अधिक है तो वह गृहिणी के कार्य को आसान करने की बजाए और भी बढ़ा देता है। जैसे कि पीतल के बर्तनों की सम्भाल, स्टील के बर्तनों से अधिक है। इस तरह है बजाए कि पूरे उपकरण की सफ़ाई के। इसलिए अलग-अलग होने वाले पुों को प्राथमिकता देनी चाहिए।

(v) उपयोगिता—किसी वस्तु की खरीद के समय परिवार तथा परिवार के सदस्यों के लिए उसकी उपयोगिता का ध्यान रखना चाहिए। किसी उपकरण को सामाजिक स्तर की निशानी के रूप में नहीं खरीदना चाहिए अपितु परिवार तथा गृहिणी के लिए उसकी महत्ता तथा उपयोगिता को ध्यान में रखकर ही खरीददारी करनी चाहिए। वस्तुओं के प्रयोग का सही ढंग, प्रयोग के लिए दी सावधानियां इनकी उपयोगिता को बढ़ाने में सहायक हो सकती हैं। बिजली अथवा गैस से चलने वाले उपकरणों को बिजली तथा गैस की उपलब्धि को ध्यान में रखकर ही प्रयोग करना चाहिए।

(vi) सेवा सुविधाएं तथा गारण्टी-बहुत सारे उपकरणों में प्रयोग करते-करते कोईन-कोई खराबी पड़ जाती है जिससे उसके पुर्जे तथा विशेषज्ञ मकैनिकों की आवश्यकता होती है। कई स्टैण्डर्ड की कम्पनियां ये सुविधाएं बढ़िया प्रदान करती हैं, इसलिए जो कम्पनी ये सुविधाएं प्रदान कर सके उनके उपकरणों को खरीदने को प्राथमिकता देनी चाहिए। ऐसी मरम्मत की सुविधा तथा पुर्जे न मिलने से उपकरण व्यर्थ हो जाता है। इसी तरह खरीददारी दौरान उपकरण का गारण्टी का समय तथा गारण्टी समय में किस-किस तरह की सुविधा मिल सकती है, इस बारे जानकारी भी लेना बहुत आवश्यक है। बहुतसी कम्पनियां गारण्टी समय में मुफ्त मरम्मत करती हैं तथा कई परिस्थितियों में उपकरण को बदल भी देते हैं।

प्रश्न 20.
रेफ्रिजरेटर और कपड़े धोने वाली मशीन के क्या-क्या कार्य हैं ?
उत्तर-
फ्रिज के कार्य-फ्रिज का प्रयोग खाने वाली वस्तुओं को ठण्डा करके स्टोर करने के लिए किया जाता है। इसमें कुछ दिनों के लिए सब्जियां तथा फल स्टोर किए जा सकते हैं, इस तरह बार-बार बाज़ार जाकर समय नष्ट नहीं होता। अन्य भी खाने वाली वस्तुएं इसमें रखी जा सकती हैं।
फ्रिज की सफ़ाई तथा देखभाल

  1. हर महीने फ्रिज की पूरी सफ़ाई करनी चाहिए। सफ़ाई करने के लिए सबसे पहले इसका विद्युत् स्विच बन्द करके तार निकाल लेनी चाहिए। फिर सभी शैल्फों, चिल ट्रे, किस्प ट्रे तथा उससे ऊपर वाला कांच आदि बाहर निकाल लेने चाहिएं। कैबिनेट का आन्तरिक हिस्सा तथा दरवाज़े की गास्टक रबड़ की लाइनिंग को साबुन वाले गर्म पानी से साफ़ करो। इसके पश्चात् इस को अच्छी तरह धोकर सुखाओ तथा कपड़े से पोंछ दें। कैबिनेट के बाहरी हिस्से को बड़े ध्यान से सोडे के गुनगुने घोल (एक बड़ा चम्मच सोडा एक लिटर पानी में ) साफ़ करो तथा धोकर सुखा दो। इसके पश्चात् इसको नर्म सूखे कपड़े से रगड़ कर चमकाया जा सकता है। इस सारी सफ़ाई को डीफ्रास्टिंग के समय करने को प्राथमिकता देनी चाहिए। फ्रिज की मोटर से धूल मिट्टी उतारने के लिए लम्बे हैण्डल वाला ब्रुश प्रयोग करना चाहिए।
  2. भोजन को ठीक तापमान वाले खाने में ही रखना चाहिए जैसे कि मीट तथा मछली को पॉलीथीन के लिफ़ाफों में अच्छी तरह बन्द करके फ्रीज़र में रखना चाहिए। मक्खन तथा अण्डे आदि दरवाज़े में बनी जगह पर रखने चाहिएं।
  3. भोजन पदार्थों को ढक कर रखना चाहिए।
  4. फ्रिज को कभी भी बहुत ज्यादा न भरो क्योंकि इससे चैम्बर में हवा का प्रवाह ठीक तरह नहीं होता।
  5. दरवाज़े को बार-बार नहीं खोलना चाहिए।
  6. फ्रिज के इर्द-गिर्द हवा के प्रवाह के लिए कम-से-कम दीवार से 20 सेंटीमीटर की दूरी होनी चाहिए। परन्तु आजकल ऐसे फ्रिज आ रहे हैं जिनके लिए बहुत थोड़ी दूरी (10 सें० मी०) भी रखी जा सकती है।
  7. बर्फ को कभी भी चाकू अथवा किसी तेज़ धार वाली चीज़ से नहीं खरोंचना चाहिए।
  8. फ्रिज को कभी भी ऐसे स्थान पर नहीं रखना चाहिए जहां सूर्य की किरणें सीधी पड़ती हों।
  9. फ्रिज को हमेशा समतल फ़र्श पर रखना चाहिए नहीं तो कण्डैन्सर की मोटर ठीक तरह से कार्य नहीं करेगी तथा दरवाज़ा ठीक तरह से बन्द नहीं हो सकेगा।
  10. थर्मोस्टेट के डायल को इस स्थिति में रखना चाहिए कि जहां फ्रीज़र लगभग 18°C तापमान बनाए रखे।

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कपड़े धोने वाली मशीन-यह भी बिजली से चलने वाला उपकरण है। इसमें कपड़े धोने, खंगालने तथा निचोड़ने जैसे सभी कार्य हो जाते हैं।
सफ़ाई तथा देखभाल –

  1. मशीन खरीदते समय इसके साथ एक छोटी-सी किताब मिलती है जिसमें इसका प्रयोग तथा सम्भाल बारे आवश्यक निर्देश दिए होते हैं। इस किताब को अच्छी तरह पढ़कर मशीन का प्रयोग करना चाहिए।
  2. मशीन में कभी भी मशीन की क्षमता से अधिक कपड़े नहीं डालने चाहिएं।
  3. धुलाई समाप्त होते ही ‘वाश-टब’ तथा कपड़े सुखाने वाले टब को खाली कर देना चाहिए। फिर वाश टब में साफ़ पानी डालकर तथा मशीन चलाकर इसको अच्छी तरह धोकर रखना चाहिए। महीने में एक बार विलोडक को बाहर निकालकर साफ़ करके सुखाकर अगली बार प्रयोग के लिए अलग करके रख लेना चाहिए।
  4. कभी भी टब को साफ़ करने के लिए कोई सख्त ब्रुश अथवा डिटरजेंट न प्रयोग करें। टब की सफ़ाई के लिए कभी-कभी सिरके के घोल में कपड़ा भिगोकर साफ़ किया जाता है।
  5. मशीन का ढक्कन थोड़ा सा खुला रहने दें ताकि मशीन में से गन्दी बदबू न आए।
  6. पानी निकालने वाली नाली को नीचे करके सारे पानी को निकाल देना चाहिए नहीं तो धीरे-धीरे यह रबड़ की नाली खराब हो जाएगी।
  7. टब में पानी हमेशा टब में बने निशान तक ही डालना चाहिए।
  8. यदि कभी आवश्यकता हो तो मशीन की मरम्मत हमेशा किसी विश्वासपात्र दुकानदार से ही करवानी चाहिए।

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प्रश्न 21.
रसोई में काम आने वाले बिजली के दो उपकरणों के कार्य और देखभाल के बारे में बताओ।
उत्तर-
रसोई में काम आने वाले बिजली के यन्त्रों में मिक्सी तथा फ्रिज आते हैं। मिक्सी के कार्य-इस उपकरण में गीले तथा सूखे भोजन पदार्थ पीसे जाते हैं। इसमें कूटने, पीसने अथवा पीठी बनाना आदि कार्य किये जाते हैं। इससे समय तथा शक्ति की बचत हो जाती है।
सफ़ाई तथा देखभाल –

  1. चलती हुई मोटर पर कभी भी मिक्सी को उतारने अथवा लगाने की कोशिश न करें।
  2. जग को बहुत ज्यादा नहीं भरना चाहिए तथा कम-से-कम इतना पदार्थ अवश्य हो कि ब्लेड पदार्थ में डूबे हों।
  3. तैयार चीज़ को जग से निकालने से पहले स्विच बन्द कर देना चाहिए तथा सामान हमेशा लकड़ी की चम्मच अथवा स्पेचूला से ही निकालना चाहिए।
  4. इसको साफ़ करने के लिए गीले कपड़े से साफ़ करके फिर सूखे कपड़े से पोंछ दो। जग तथा ब्लेड को साबुन तथा गुनगुने पानी के घोल से साफ़ करके पानी से धो लें। फिर सूखे कपड़े से सुखा कर रखो।
  5. मोटर को लगातार अधिक समय के लिए न चलाएं नहीं तो गर्म होकर मोटर सड़ सकती है।
  6. सुरक्षा के तौर पर हमेशा पहले प्लग को स्विच में से निकाल देना चाहिए तथा उसके पश्चात् जग को मोटर से अलग करना चाहिए।
    नोट-फ्रिज के कार्य तथा देखभाल के लिए देखो प्रश्न नं० 20।

प्रश्न 22.
रसोई में बिजली के बिना चलने वाले दो उपकरणों के कार्य और देखभाल के बारे में बताओ।
उत्तर-
प्रैशर कुक्कर तथा गैस का चूल्हा बिजली के बगैर चलने वाले उपकरण हैं।
प्रैशर कुक्कर का कार्य-प्रैशर कुक्कर खाना पकाने के काम आता है तथा इसमें खाना जल्दी पक जाता है। इससे खाने के पौष्टिक तत्त्व भी खराब नहीं होते।
प्रैशर कुक्कर सफ़ाई तथा देखभाल –

  1. कुक्कर को प्रयोग से पहले उसकी भाप नली साफ़ कर लेनी चाहिए।
  2. प्रयोग से पहले इसका सेफ्टी वाल्व चैक कर लेना चाहिए।
  3. कुक्कर को कभी भी पूरा ऊपर तक नहीं भरना चाहिए, केवल दो तिहाई हिस्सा ही भरना चाहिए।
  4. कुक्कर को बहुत समय तक आग पर नहीं रखना चाहिए।
  5. इसमें कोई भी भोजन पानी के बिना नहीं डालना चाहिए।
  6. कुक्कर को साफ़ करने के पश्चात् ढक्कन खोलकर रखना चाहिए।
  7. समय-समय पर इसकी रबड़ चैक करते रहना चाहिए।
  8. कुक्कर को कभी भी सोडे से साफ़ नहीं करना चाहिए।
  9. कुक्कर के ढक्कन को न तो आग पर ले जाना चाहिए तथा न ही आग के नज़दीक।

गैस चूल्हे का कार्य-इसका प्रयोग खाना बनाने के लिए किया जाता है। इसमें सेक को अधिक, कम करने के लिए रेग्यूलेटर लगे होते हैं।
गैस चूल्हे की देखभाल तथा सफ़ाई –

  1. हमेशा गैस खोलने से पहले माचिस जलानी चाहिए।
  2. इसकी लौ बर्तन से बाहर नहीं होनी चाहिए।
  3. जब काम हो जाए तो पहले सिलिण्डर से गैस बन्द करो तथा फिर चूल्हे के स्विच से। इस तरह करने से पाइप की गैस प्रयोग हो जाती है।
  4. रबड़ की नाली को समय-समय पर चैक करते रहना चाहिए नहीं तो गैस लीक होने का डर रहता है।
  5. गैस सिलिण्डर को आग वाले बर्तनों पर नहीं रखना चाहिए नहीं तो आग लगने का डर रहता है।
  6. प्रयोग के पश्चात् गैस स्टोव को अच्छी तरह साफ़ करना चाहिए।
  7. बर्तनों को साफ़ करने के लिए कभी-कभी सोडे के पानी में उबाल लेना चाहिए।

प्रश्न 23.
आजकल गैस के चूल्हे का प्रयोग क्यों बढ़ रहा है ? यह कैसा होता है और इसकी देखभाल कैसे की जाती है ?
उत्तर-
गैस का चूल्हा खाना पकाने के लिए प्रयोग किया जाता है। यह एक साफ़सुथरा तथा आसान साधन है। इसको जलाना तथा बुझाना बहुत ही असान होता है। इससे बर्तन भी काले नहीं होते। इसलिए इसका प्रयोग बढ़ रहा है।
शेष उत्तर के लिए देखें प्रश्न 13 तथा 22।

प्रश्न 24.
नॉन स्टिक बर्तन कैसे होते हैं ? किस काम आते हैं और इनकी देखभाल कैसे की जाती है ?
उत्तर-
नॉन स्टिक बर्तन एल्यूमीनियम के होते हैं जिनके अन्दर टेफ्लोन की परत चढी होती है। इनमें खाने वाली चीज़ चिपकती नहीं इसलिए घी का प्रयोग बहुत कम मात्रा में करके चीज़ों को पकाया जा सकता है। इसमें खाने को हिलाने के लिए धातु का चम्मच अथवा कांटे के स्थान पर लकड़ी का चम्मच प्रयोग किया जाता है ताकि टेफ्लोन की परत उतर न जाए। फ्राइपैन आदि के हैण्डल लकड़ी अथवा एक विशेष प्रकार के प्लास्टिक के होते हैं जोकि गर्म नहीं होते। हैण्डल की लम्बाई इस तरह होती है कि उसके भार से पैन उलट न जाए।
सम्भाल –

  1. गर्म बर्तन में पानी नहीं डालना चाहिए, इस तरह करने से धातु खराब हो जाती है।
  2. इस बर्तन में स्टील के चम्मच, कड़छी अथवा कांटे का प्रयोग न करके लकड़ी के चम्मच का प्रयोग करो।
  3. कोई खाने की चीज़ पैन में सड़ गई हो तो पैन में पानी तथा सोडा डालकर धीरे-धीरे गर्म करना चाहिए ताकि जला हुआ खाना जल्दी तथा बिना खरोंचे उतर जाए। इन बर्तनों को प्लास्टिक के फूंदे से साबुन वाले गुनगुने पानी से साफ़ करना चाहिए। अधिक कठोर फूंदे से इस पर खरोंचें पड़ सकती हैं तथा कोटिंग भी खराब हो सकती है।

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प्रश्न 25.
रसोई के बर्तनों की देखभाल कैसे करोगे ? क्या भिन्न-भिन्न धातुओं के बर्तनों की देखभाल भी अलग-अलग की जाती है ?
उत्तर-
विभिन्न किस्मों की धातुओं की सफ़ाई

बर्तनों की किस्म विशेषताएं सफाई तथा देखभाल विशेष सावधानी सफाई के लिए चीजें
1. स्टेनलेस स्टील स्टील, लोहे तथा कार्बन के मिश्रण से बनता है । यह एक मज़बूत धातु है। इससे भोजन पकाने, परोसने तथा भोजन पदार्थ सम्भालने वाले बर्तन बनते हैं। स्टील के बर्तनों को साफ़ करना आसान होता है। किसी साबुन अथवा डिटर्जेंट तथा गर्म पानी से साफ़ करके, साफ़ पानी में धो लें। साफ़ तथा सूखे कपड़े से पोंछ कर सुखा लो। बर्तन में से जले हुए दाग उतारने के लिए स्टील वूल प्रयोग की जा सकती है। चिकनाई उतारने के लिए अखबार का प्रयोग करना चाहिए। स्टील के बर्तनों को अधिक सेंक नहीं लगाना चाहिए नहीं तो काले निशान पड़ जाते हैं। कुछ मसाले भी स्टील को पीला कर देते हैं। यह दाग कच्चे आलू से उतारे जा सकते है। 1. साबुन तथा डिटर्जेंट

2. रोएं-रहित साफ़ कपड़ा

3. स्टील वूल

4. स्पंज/स्क्रबर

5. कच्चा आलू

2. पीतल यह तांबे तथा जिंक का मिश्रण है। इससे बर्तन तथा सजावट का सामान बनाया जाता है। यह भी एक मजबूत धातु है। पीतल के बर्तनों को विम अथवा राख से साफ़ करके पानी से धोएं, फिर सूखे कपड़े से पोंछ कर सुखाएं। यदि दाग हों तो नींबू का रस अथवा इमली तथा नमक से रगड़ें। सजावट की चीजों के लिए गुनगुने पानी का प्रयोग किया जा सकता है। खाने वाले बर्तनों की बाहर से सिरका तथा नमक के मिश्रण से पॉलिश की जा सकती है। यह बर्तन के अन्दर प्रयोग नहीं करना चाहिए। सजावट के सामान पर ब्रासो की”पॉलिश प्रयोग की जा सकती है। 1. गर्म पानी, विम, राख तथा सोडा आदि।

2. नींबू, सिरका, इमली तथा नमक आदि।

3. नर्म कपड़ा

4. ब्रासो पॉलिश

3. एल्यूमीनियम यह एक हल्की धातु होती है। इस पर ऑक्सीकरण का कोई प्रभाव नहीं होता। यह धातु हल्की तथा नर्म होती है। गर्म पानी तथा कोई नर्म डिटर्जेंट अथवा साबुन के घोल से साफ़ करना चाहिए। तेल तथा डिटर्जेंट इसका रंग खराब कर देते हैं। भोजन के सड़ने अथवा दागों को उतारने के लिए गर्म पानी में भिगो कर रख दो, फिर लकड़ी के चम्मच अथवा प्लास्टिक के स्क्रबर से साफ़ करो। लोहे की तारों वाला, स्क्रबर एल्यूमीनियम में लाइनें बना देता है। यदि एल्यूमीनियम का बर्तन काला हो जाये तो कच्चे टमाटर बर्तन में पकाओ अथवा एक गिलास में पानी, 1 चम्मच सिरका डालकर तब तक गर्म करो जब तक कालापन दूर न हो जाये। उस के पश्चात् स्टील वूल तथा साबुन से साफ़ करो। 1. गर्म पानी

2. नर्म साबुन

3. टमाटर, सिरका

4. स्टील वूल

4. लोहा लोहे को यदि पहले गर्म न किया जाए तो ऑक्सीकरण से इस पर जंग लग जाता है। यह धातु भारी तथा कठोर होती है, परन्तु गिरने पर टूट जाती है। गर्म, साबुन वाले पानी में धोना चाहिए, फिर साफ़ पानी में धोकर पोंछ कर सुखा लो अथवा फिर गर्म करके सुखाओ। जले हुए भोजन को उतारने के लिए गर्म पानी में भिगोकर लकड़ी के चम्मच से खरोंचें। जरूरत पड़ने पर बेकिंग पाऊडर छिड़क कर साफ़ किया जा सकता है अथवा फिर छनी हुई रेत से भी रगड़ा जा सकता है। कास्ट आयरन के बर्तनों की सीज़निंग आवश्यक होती है नहीं तो जंग लग जाता है तथा भोजन बर्तन के नीचे लगने लगता है। इसलिए घी अथवा रेत को धीमी आंच पर बर्तन में डालकर काफ़ी देर तक गर्म करो। यह बर्तन कुछ ते” चूस जायेगा। बचा हुआ तेल अथवा घी निकालकर अखबार से पोंछ कर साबुन वाले गर्म पानी से धो लें। लोहे पर किसी प्रकार की पॉलिश की ज़रूरत नहीं। यदि जंग के दाग हों तो मिट्टी के तेल तथा स्टील वूल से साफ़ किए जा सकते हैं। 1. साबुन

2. तारों वाला ब्रुश

3. रेत तथा स्टील वूल

4. बेकिंग सोडा

5. तेल / घी

6. मिट्टी का तेल

5. चांदी यह सफेद रंग की चमकदार धातु होती है। इस पर नमक का हानिकारक प्रभाव होता है। हवा, भोजन तथा धुएं में पाई जाने वाली गन्धक से काले धब्बे पड़ जाते हैं। इस लिए इसकी विशेष देखभाल तथा सम्भाल करनी पड़ती है। इसके गहने, बर्तन तथा सजावट की चीजें बनती हैं। साबुन वाले गर्म पानी में थोड़ा-सा सोडा मिलाकर धोना चाहिए। फिर साफ़ पानी से निकालकर अच्छी तरह पोंछकर सुखाएं। चांदी के बर्तनों में कभी भी बचा हुआ भोजन नहीं रहने देना चाहिए। उसी समय साफ़ कर देना चाहिए। यह बर्तन अधिक समय तक पानी में भी नहीं रहना चाहिए। पोंछ कर सुखाकर टिशू पेपर अथवा फलालेन के कपड़े में लपेट कर रखो। यदि लम्बे समय तक सम्भालना हो तो थोड़ी-सी वैसलीन अथवा तेल मलकर टिशू पेपर में लपेटकर फलालेन की गुथली में रखना चाहिए। पॉलिश लगाने के पश्चात् चीज़ को धीरे से लपेटना चाहिए नहीं तो उस पर उंगलियों के निशान पड़ जाते हैं। पॉलिश करने के लिए सिल्वो का प्रयोग किया जाता है। साफ़ तथा नर्म कपड़े पर लगा कर अच्छी तर चमकाना चाहिए। चांदी की पॉलिश घर में भी बनाई जा सकती है।

सूखी पॉलिश

सामान- सफेदी–8 हिस्से, जौहरी की लाली 1 हिस्सा।

विधि-दोनों चीज़ों को अच्छी तरह मिलाकर एक डिब्बे में डालकर रख लो।तरल पॉलिश सामान-(1) साबुन के टुकड़े 15 ग्राम

(2) जौहरी की लाली-8 हिस्से

(3) मैथिलेटिड स्प्रिट-2 बड़े चम्मच

(4) सफेदी-80 ग्राम

(5) अमोनिया-1 बड़ा चम्मच

(6) उबलता हुआ पानी–250

ग्राम

विधि-साबुन को गर्म पानी में घोल लें तथा ठण्डा होने को रखें। बाकी सारा सूखा सामान एक चौड़े मुंह वाली शीशी में डाल दो, इस पर साबुन का घोल डालो। बाद में अमोनिया तथा स्प्रिट डालकर बोतल का ढक्कन बन्द कर दो। प्रयोग से पहले बोतल को अच्छी तरह हिला लो।

1. साबुन

2. नर्म तथा मुलायम कपड़ा

3. पॉलिश

6. कांच तथा चीनी मिट्टी साधारणतः यह भोजन परोसने वाले बर्तन ही होते हैं पर आजकल कांच के बर्तन ताप निरोधक भी हैं जिनको गैस अथवा ओवन में प्रयोग किया जाता है। गर्म बर्तनों को ठण्डे पानी में नहीं डालना चाहिए। इन बर्तनों को गर्म, साबुन वाले पानी से धोना चाहिए। पानी में थोड़ा-सा बेकिंग सोडा डालने से जमा हुआ भोजन आसानी से उतर जाता है। यदि फ़िर भी बर्तन साफ़ न हों तो लकड़ी का चम्मच अथवा प्लास्टिक का ब्रुश प्रयोग किया जा सकता है। इन बर्तनों को रात भर गन्दे नहीं रहने देना चाहिए। इससे दाल सब्जियों के दाग़ पड़ जाते हैं। साफ़ करके सूखे कपड़े से पोंछ कर सुखा कर रखें। इन बर्तनों के लिए किसी पॉलिश की ज़रूरत नहीं होती। प्रयोग से पहले यदि थोड़ा-सा घी अथवा तेल बर्तन को लगाया जाए तो भोजन नहीं चिपकता। 1. साबुन

2. बेकिंग सोडा

3. नर्म कपड़ा

7. प्लास्टिक प्लास्टिक के बर्तन भोजन परोसने तथा खाद्य पदार्थ सम्भालने के लिए प्रयोग किए जाते हैं। यह बर्तन अधिक ताप सहन नहीं कर सकते, पिघल जाते हैं। धूप में इनका रंग भी खराब हो जाला है। गुनगुने साबुन वाले घोल में स्पंज से साफ़ करने चाहिएं। झरियों आदि में फंसी गन्दगी को साफ़ करने के लिए दांतों वाले ब्रुश का प्रयोग करो। यदि गन्दगी बहुत अधिक जमी है तो मिट्टी के तेल से साफ़ किये जा सकते हैं। धोने के पश्चात् अच्छी तरह सुखा कर पोंछ कर रखो। इन पर किसी पॉलिश की ज़रूरत नहीं। 1. नर्म साबुन

2. मिट्टी का तेल

3. नर्म कपड़ा

प्रश्न 26.
प्रैशर कुक्कर के कार्य और बनावट के बारे में बताओ।
उत्तर-
1. प्रैशर कुक्कर—यह एक बन्द प्रकार का पतीला है, जिसमें बनने वाली भाप का दबाव भोजन को थोड़े समय में पका देता है। इसमें बने भोजन की पौष्टिकता भी बनी रहती है। साथ ही गृहिणी के समय तथा शक्ति का भी बचाव होता है। इस बर्तन को प्रैशर कुक्कर कहा जाता है। यह दबाये अथवा ढाले हुए एल्यूमीनियम अथवा स्टेनलैस स्टील की चादर से बनाये जाते हैं। यह एक गहरे तल वाला बर्तन होता है, जिसकी एक तरफ हैण्डल लगा होता है। इसके ऊपर एक ढक्कन होता है, इस ढक्कन पर दबाव नली वाल्व, वेट तथा सुरक्षित वाल्व लगा होता है। ढक्कन के साथ एक रबड़ का छल्ला होता है, जो इसे अच्छी तरह बन्द करता है। यह साधारणतः दो तरह के होते हैं। पहली किस्म के कुक्कर में एक ढक्कन होता है जो निचले बर्तन (पतीले जैसे) के ऊपरी घेरे के अन्दर सरक जाता है तथा इसका हुक हैण्डल से लगाने के पश्चात् यह कुक्कर की हवा निकलने से रोक देता है (हॉकिन्स तथा यूनाइटिड प्रेशर कुक्कर आदि) दूसरी किस्म के कुक्कर में इसका ढक्कन निचले बर्तन के किनारे से बाहर की ओर लगता है। ढक्कन तथा बर्तन पर बने तीर के निशान ढक्कन बन्द करने तथा खोलने का ढंग बताते हैं। इसमें भी रबड़ का छल्ला एक मज़बूत सील का काम करता है। इसमें पकाने वाले प्रत्येक भोजन के लिए अलग-अलग समय होता है। किसी के लिए दो मिनट, किसी के लिए पांच मिनट आदि। समय पूरा होने पर कुक्कर को आग से उतार लो तथा ठण्डा करने के पश्चात् खोलना चाहिए।

PSEB 9th Class Home Science Solutions Chapter 5 घर का सामान (10)

PSEB 9th Class Home Science Solutions Chapter 5 घर का सामान

प्रश्न 27.
पीतल और चांदी के सजावटी सामान को कैसे साफ़ और पॉलिश करोगे ?

Home Science Guide for Class 9 PSEB घर का सामान Important Questions and Answers

रिक्त स्थान भरो

  1. कुकिंग रेंज साधारणतः …………………. चूल्हों वाले होते हैं।
  2. ………… डबलरोटी के टुकड़ों को सीधा सेंकने के लिए प्रयोग होता है।
  3. फ्रिज के बर्फ वाले खाने में तापमान …………………. °C होता है।
  4. मिक्सी को ………………. भाग से अधिक न भरें।
  5. सौर कुक्कर में खाना पकाने में …………………. घंटे का समय लगता है।

उत्तर-

  1. चार
  2. टोस्टर
  3. 7
  4. 2/3
  5. 3 से 7।

एक शब्द में उत्तर दें

प्रश्न 1.
गैस सिलेण्डर में कितनी गैस होती है ?
उत्तर-
लगभग 15 कि०ग्रा०।

प्रश्न 2.
स्टेनलेस स्टील की खोज कब की गई ?
उत्तर-
1912 में।

प्रश्न 3.
माइक्रोवेव ओवन में भोजन के अणुओं के कांपने की गति बताएं।
उत्तर-
24500 लाख प्रति सेकंड।

प्रश्न 4.
प्रैशर कुक्कर में पतीले की अपेक्षा कितने समय में खाना पक जाता
उत्तर-
एक तिहाई समय।

प्रश्न 5.
हमें कौन-सी मोहर लगी प्रेस खरीदनी चाहिए ?
उत्तर-
आई०एस०आई० मोहर लगी।

ठीक/ग़लत बताएं

  1. उपकरण खरीदते समय परिवार के बजट की चिन्ता न करें।
  2. फ्रीज़ के बर्फ वाले भाग का तापमान -7°C होता है।
  3. मिक्सी को पूरा भर कर चलाएं।
  4. कुकिंग रेंज प्रायः चार चूल्हों वाले होते हैं।
  5. माइक्रोवेव ओवन में सूक्ष्म तरंगों से गर्मी पैदा होती है।
  6. माइक्रोवेव में भोजन के अणु 24500 लाख प्रति सैकंड की गति से कांपते

उत्तर-

  1. ग़लत
  2. ठीक
  3. ग़लत
  4. ठीक
  5. ठीक
  6. ठीक।

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
घर के सामान का चयन कौन-सी बातों को ध्यान में रखकर करोगे ?
(A) कीमत
(B) स्तर
(C) उपयोगिक
(D) सभी।
उत्तर-
(D) सभी।

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प्रश्न 2.
ठीक तथ्य हैं –
(A) माइक्रोवेव बिजली से चलने वाला भोजन पकाने के लिए प्रयोग होने वाला उपकरण है।
(B) मिट्टी के तेल से चलने वाले स्टोव दो तरह के होते हैं।
(C) स्टोव की टंकी सदा दो तिहाई ही भरनी चाहिए।
(D) सभी ठीक।
उत्तर-
(D) सभी ठीक।

प्रश्न 3.
माइक्रोवेव में भोजन के अणुयों की कंपन गति है –
(A) 20000 लाख प्रति सैकंड
(B) 24500 लाख प्रति सैकंड
(C) 50000 लाख प्रति सैकंड
(D) 10000 लाख प्रति सैकंड।
उत्तर-
(B) 24500 लाख प्रति सैकंड

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
घरेलू उपकरण नज़दीक की दुकान से क्यों खरीदने चाहिएं ?
उत्तर-
कई बार जब उपकरण में कोई त्रुटि आ जाती है तो नज़दीक के दुकानदार से इसकी मरम्मत करवाना आसान रहता है।

प्रश्न 2.
घरेलू उपकरण कैसे दुकानदार से खरीदने चाहिएं ?
उत्तर-
इनको ऐसे दुकानदार से खरीदो जो कि ग्राहक को महत्ता देते हों तथा जिनके पास कम्पनी की चीज़ बेचने का लाइसैंस हो।

प्रश्न 3.
प्रैशर कुक्कर को प्रयोग करते समय कौन-सी बातों को ध्यान में रखोगे ?
उत्तर-

  1. यदि दो वस्तुएं इकट्ठी अर्थात् एक समय में ही पकानी चाहें तो इस बात का ध्यान रखने की ज़रूरत है कि जो वस्तुएं पकाना चाहते हो, उन्हें पकाने के लिए लगभग एक-सा समय लगे।
  2. ढक्कन बन्द करते समय यह देखना ज़रूरी है कि कहीं रबड़ का छल्ला न निकला हो।
  3. भोजन पकाते समय पानी हमेशा आवश्यक मात्रा में ही हो।
  4. जब भाप निकास नली से निकलती दिखाई दे तो दबाव को ठीक कर देना चाहिए अर्थात् सेक कम कर दो।
  5. भोजन पकाने के पश्चात् कुक्कर को कभी भी नहीं खोलना चाहिए, ऐसा करने से भाप तुरन्त तेज़ी से बाहर निकलती है तथा इससे मुंह की चमड़ी जलने का भय रहता है।

प्रश्न 4.
स्टोव की देखभाल तथा सफ़ाई के बारे में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर-
देखभाल तथा सफ़ाई –

  1. बत्तियों वाले स्टोव की बत्तियां ऊपर से काटते रहना चाहिए।
  2. स्टोव की टंकी हमेशा दो तिहाई ही भरनी चाहिए।
  3. रोज़ाना स्टोव को गीले कपड़े से बाहर से अच्छी तरह साफ़ करना चाहिए।
  4. जलते हुए स्टोव में कभी भी तेल नहीं डालना चाहिए।
  5. हवा वाले स्टोव में अधिक हवा भरने से स्टोव फट सकता है।

प्रश्न 5.
टोस्टर की देखभाल तथा सफ़ाई कैसे की जाती है ?
उत्तर-
देखभाल तथा सफ़ाई –

  1. टोस्ट को निकालने के लिए कभी भी चाकू अथवा कांटे का प्रयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे ऐलीमेण्ट की तार को नुकसान हो सकता है।
  2. हर बार टोस्टर को प्रयोग के पश्चात् टोस्टर को उल्टा करके डबलरोटी के टुकड़ों को निकालने के लिए टोस्टर को हाथ से हल्का थपथपा दो।
  3. प्रयोग के समय हमेशा टोस्टर को तापरोधक तथा बिजली के कुचालक स्थान पर ही रखना चाहिए।
  4. काम खत्म करके टोस्टर को बिजली के सम्पर्क से अलग करके ठण्डा होने दें, फिर तार को इसके आस-पास लपेट कर रख दो।

प्रश्न 6.
कपड़े धोने वाली मशीन का चुनाव करते समय कौन-सी बातें ध्यान में रखनी चाहिएं ?
उत्तर-

  1. मशीन की लागत तथा उसे चलाते समय होने वाले खर्च की जानकारी प्राप्त कर लेनी चाहिए।
  2. मशीन की गारण्टी बारे जानकारी प्राप्त कर लेनी चाहिए।
  3. मशीन में कोई तीखी चीज़ न हो जिससे अटक कर कपड़ों के फटने का डर हो।
  4. मशीन की तारें ताप रोकने वाली हों।
  5. मशीन पर एनेमल की परत होनी चाहिए। एल्यूमीनियम की मशीन शीघ्र खराब हो जाती है तथा स्टैनलैस स्टील की मशीन की लागत अधिक होती है।

प्रश्न 7.
उपकरण अच्छी कम्पनी का ही खरीदना चाहिए ? क्यों ?
उत्तर-
कोई भी उपकरण अच्छी कम्पनी का इसलिए खरीदना चाहिए क्योंकि अच्छी कम्पनियां अपने उपकरणों पर गारण्टी देती हैं। यदि यह खराब हो जाएं तो कम्पनी वाले उपकरण को मुफ्त ठीक कर देते हैं।

प्रश्न 8.
उपकरण ज़रूरत के अनुसार खरीदना चाहिए न कि सजावट के लिए । क्यों ?
उत्तर-
उपकरणों का प्रयोग तथा खरीद इसलिए किया जाता है ताकि समय तथा शक्ति बच जाए। इसलिए इन्हें आवश्यकतानुसार खरीदना चाहिए न कि सजावट के लिए।

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प्रश्न 9.
रैफ्रिजरेटर की देखभाल कैसे की जाती है ?
उत्तर-
खाने वाली चीज़ों को ठीक तापमान के अनुसार शैल्फ में रखो जैसे मांस तथा मछली को बर्फ़ वाले खाने (freezer) में तथा सब्जियों को निचली तरफ रखो। सारे फ्रिज में बदबू न फैले इसलिए मांस मछली को प्लास्टिक के लिफ़ाफे में डालकर रखो । फ्रिज में खाना हमेशा ढककर रखो। 15 दिन बाद फ्रिज की सफ़ाई अवश्य करो ताकि फालतू बर्फ़ तथा जमा हुआ पानी साफ़ हो जाए। इससे फ्रिज़ की कार्यकुशलता बढ़ती है। फ्रिज का दरवाज़ा बार-बार नहीं खोलना चाहिए। इससे फ्रिज का तापमान घटता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कपड़े धोने वाली मशीन के बारे में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर-
कपड़े धोने वाली मशीन-विशेषतः काम-काजी गृहणियों के लिए यह मशीन बहुत लाभदायक है। यह कपड़े धोने के कार्य को बहुत आसान कर देती है। आजकल दो तरह की कपड़े धोने की मशीनें मिलती हैं। एक विलोडक किस्म तथा दूसरी बेलनाकार। यह विलोडक मोटर के चलने से घूमता है। इसके इर्द-गिर्द ब्लेड लगे होते हैं। इन ब्लेडों की संख्या, आकार तथा बनावट अलग-अलग होती है।

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इसके अतिरिक्त ये मशीनें स्वैचालित तथा अर्द्ध-स्वैचालित भी होती हैं। फुली ऑटोमैटिक मशीनों में एक ही टब होता है। इसकी पानी लेने वाली नाली की पक्की फिटिंग पानी वाली टूटी से की जाती है जहां से मशीन चलाने पर यह अपने आप पानी लेकर, सर्फ लेकर, धोकर तथा सुखा कर ही बन्द होती है। जबकि सेमी-ऑटोमैटिक मशीन में दो टब होते हैं। एक कपड़े धोने के लिए तथा दूसरा कपड़े खंगालने तथा सुखाने के लिए। इसमें कपड़े धोने के पश्चात् कपड़ों को निकाल कर दूसरे टब में डाला जाता है तथा पानी का रुख भी दूसरे टब में करना पड़ता है। फिर यहां कपड़े खंगालने के पश्चात् पानी बन्द कर दिया जाता है तथा कपड़े अपने आप सूख जाते हैं।

प्रश्न 2.
विद्युत् प्रैस बारे आप क्या जानते हैं ? इसकी देखभाल तथा सफ़ाई बारे आप क्या जानते हैं ?
उत्तर-
विद्युत् प्रैस कपड़ों की सिलवटें निकालने तथा चमक लाने के लिए प्रैस का प्रयोग किया जाता है। प्रैसें भी कई तरह की होती हैं, जैसे-शुष्क प्रैस; वाष्प तथा शुष्क प्रैस : छिड़काव, वाष्प तथा शुष्क प्रैस। शुष्क प्रैसें सिंथैटिक कपड़ों के लिए ठीक होती हैं जबकि सूती तथा ऊनी कपड़ों के लिए छिड़काव तथा वाष्य प्रैसे बढ़िया रहती हैं। ऐसी प्रैस से कपड़े भी अच्छे प्रैस होते हैं तथा समय और शक्ति भी कम लगते हैं। इन पैसों में एक थर्मोस्टेट होता है जो तापमान को कण्ट्रोल करता है। इसके ऊपर ही विभिन्न कपड़ों के नाम भी लिखे होते हैं जैसे-सती, ऊनी, रेशमी आदि। जिस तरह के कपडे प्रेस करने हों, थर्मोस्टेट को वहां सैट किया जाता है। इन प्रैसों में पानी डालने के लिए सामने एक रास्ता बना होता है। प्रेस के साथ ही एक कप भी मिलता है जिससे पानी डाला जाता है। प्रेस के सामने हैण्डल से एक यन्त्र होता है जिसको दबाने से सामने से पानी का छिड़काव हो जाता है। इसी तरह भाप के लिए प्रैस के तल पर छिद्र होते हैं जिनके द्वारा भाप निकलती है। प्रैस के तल की प्लेट जंग रहित धातु की बनी होती है। बिजली की तार प्रेस के पीछे लगी होती है।
देखभाल तथा सफ़ाई –

1. प्रेस के प्रयोग के पश्चात् इसका प्लग स्विच से निकाल देना चाहिए।
2. प्रयोग के बाद ठण्डी होने पर तार हैण्डल के इर्द-गिर्द लपेट कर अच्छी तरह से खड़ी करके रखनी चाहिए।
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3. वाष्प तथा छिड़काव वाली प्रैस में हमेशा डिसटिल्ड पानी ही डालना चाहिए।
4. दाग लगने पर तल को खरोंचना नहीं चाहिए अपितु प्रैस को पूरा गर्म करके अखबार पर नमक डालकर उस पर फेरना चाहिए, दाग साफ़ हो जाएंगे।
5. अधिक गन्दी प्रैस को पैराफिन मोम से साफ़ किया जा सकता है।

प्रश्न 3.
कुकिंग रेंज की देखभाल तथा सफ़ाई बारे क्या जानते हो ?
उत्तर-
देखभाल तथा सफ़ाई –

  1. बिजली से चलने वाले कुकिंग रेंज को लकड़ी के फट्टे पर रखना चाहिए।
  2. कुकिंग रेंज को प्रयोग के पश्चात् ठण्डा होने पर साफ़ करना चाहिए।
  3. इसकी सफ़ाई के लिए पानी तथा साबुन का प्रयोग करना चाहिए तथा बाद में सूखे कपड़े से पोंछना चाहिए। यदि फिर भी सफ़ाई ठीक न हो तो सोडे का प्रयोग किया जा सकता है, पर यदि कुकिंग रेंज एल्यूमीनियम का है तो फिर सोडा प्रयोग न करें।
  4. बर्तनों की सफ़ाई के लिए कभी-कभी इन्हें सोडे के पानी में उबाल देना चाहिए। फिर ब्रुश से साफ़ करके पानी से धोकर धूप में सुखा लें।
  5. ओवन तथा ग्रिल से भोजन निकालने के पश्चात् थोड़ी देर उसके दरवाजे खुले रहने देने चाहिएं क्योंकि भोजन पकने के दौरान भाप से अन्दर नमी हो जाती है, दरवाजा खुला रखने से यह सूख जाएगी नहीं तो जंग लग सकता है।

प्रश्न 4.
घरेलू उपकरणों के सुरक्षित प्रयोग के लिए कुछ ध्यान रखने योग्य बातें बताओ।
उत्तर-

  1. जब कोई भी उपकरण खरीदते हैं तो उसके साथ एक छोटी-सी किताब मिलती है जिसमें उपकरण की बनावट तथा प्रयोग बारे जानकारी दी होती है, उसको अच्छी तरह पढ़कर उसमें दिये निर्देशों के अनुसार इनका प्रयोग करना चाहिए।
  2. बिजली वाले यन्त्रों को प्लग लगाते समय दो पिनों वाले प्लग के स्थान पर तीन पिनों वाले प्लग को प्राथमिकता देनी चाहिए क्योंकि इसमें तीसरी तार अर्थ वाली होती है। यदि कभी शार्ट सर्किट हो जाए तो उपकरण जलने से बच जाता है।
  3. बिजली वाले यन्त्रों को बच्चों की पहुंच से दूर रखना चाहिए।
  4. बिजली वाले यन्त्रों को कभी भी चलते समय गीले हाथ नहीं लगाने चाहिएं।
  5. प्रयोग के पश्चात् साफ़ करते समय यन्त्र की मोटर में पानी नहीं पड़ना चाहिए। उसे केवल गीले कपड़े से ही साफ़ करना चाहिए।
  6. बिजली के यन्त्र की कभी भी सीधी तारें नहीं लगानी चाहिएं। विद्युत् टेस्ट पैन तथा विद्युत् निरोधक टेप घर में अवश्य रखने चाहिएं।
  7. प्रयोग के पश्चात् पहले यन्त्र का बटन बन्द करना चाहिए तथा फिर प्लग में से शू निकालना चाहिए।
  8. गैस के चूल्हों को साफ़ रखना चाहिए। गैस वाली नाली की समय-समय पर परख करते रहना चाहिए ताकि गलने अथवा टूटने से गैस लीक न हो। हो सके तो हर छः मास पश्चात् पाइप बदल लेनी चाहिए।
  9. गैस के प्रयोग के पश्चात् इसको रेग्यूलेटर से बन्द करो तथा फिर चूल्हे के स्विच बन्द करो।
  10. गैस का सिलिण्डर बदलते समय बहुत सावधानी रखनी चाहिए। सिलिण्डर बदलने के पश्चात् साबुन वाला घोल अथवा गैस टैस्ट करने वाला तरल लगाकर टैस्ट कर लेना चाहिए कि गैस लीक तो नहीं कर रही। लीक करता हुआ सिलिण्डर नहीं लगाना चाहिए।
  11. बत्तियों वाले स्टोव की बत्तियां हमेशा साफ़ रखनी चाहिएं ताकि स्टोव धुआं न दें। कभी भी जलते स्टोव में तेल नहीं डालना चाहिए।

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घर का सामान PSEB 9th Class Home Science Notes

  • घरेलू उपकरणों के प्रयोग से समय तथा शक्ति दोनों की बचत हो जाती है।
  • बाज़ार में सर्वेक्षण करने के पश्चात् ही सामान खरीदना चाहिए।
  • सामान ऐसे दुकानदार से खरीदो जो कम्पनी की ओर से नियत डीलर हो तथा ग्राहक को महत्ता देता हो।
  • उपकरण अच्छी कम्पनी के ही खरीदने चाहिएं।
  • उपकरण खरीदते समय पारिवारिक बजट का ध्यान रखना चाहिए।
  • फ्रिज खाने वाले पदार्थों को ठण्डा रखने के काम आता है।
  • फ्रिज बिजली से चलता है तथा इसमें 4-5 °C से भी कम तापमान होता है।
  • फ्रिज के बर्फ वाले खाने में तापमान – 7°C होता है।
  • कपड़े धोने वाली मशीन बिजली से चलती है तथा इससे कपड़े धोने का काम आसान हो जाता है।
  • यह मशीन दो तरह की होती है, ऑटोमैटिक तथा सेमी-ऑटोमैटिक।
  • ऑटोमैटिक मशीनें कपड़ों को धोती, खंगालती तथा निचोड़ती हैं।
  • बिजली से चलने वाली प्रैसें दो तरह की होती हैं: ऑटोमैटिक तथा सेमी ऑटोमैटिक।
  • प्रैस का जो हिस्सा कपड़े को छूता है उसे तला कहते हैं।
  • टोस्टर का प्रयोग डबलरोटी के टुकड़ों को सेंकने के लिए किया जाता है।
  • मिक्सी से मसाले पीसना, रगड़ना तथा मिलाने का काम आसानी से हो जाता
  • इससे मिल्क शेक, जूस, सूप, आदि बनाए जाते हैं।
  • विभिन्न कामों के लिए मिक्सी में अलग-अलग ब्लेड लगे होते हैं।
  • मिक्सी को 2/3 हिस्से से अधिक नहीं भरना चाहिए तथा उपरि ढक्कन बन्द करके रखना चाहिए।
  • बिजली की मिक्सी महंगी होने के कारण कुछ लोग हाथ से चलने वाला ग्राइंडर प्रयोग करते हैं। इसमें गीला अथवा सूखा मसाला डालकर पीसा जाता है।
  • प्रेशर कुक्कर दालें, सब्जियां बनाने के काम आता है। यह एल्यूमीनियम अथवा स्टील का बना होता है।
  • प्रैशर कुक्कर का ढक्कन बन्द करके इस पर एक भार लगाया जाता है, यह ध्यान रखें कि इस भार वाला सुराख खुला होना चाहिए।
  • कुक्कर में खाना पकने को एक तिहाई समय लग जाता है।
  • प्रैशर कुक्कर में भोजन के पौष्टिक तत्त्व खराब नहीं होते।
  • खाना पकाने का कार्य गैस के चूल्हे पर किया जाता है।
  • मुम्बई, कोलकाता आदि जैसे शहरों में गैस पानी की तरह पाइपों द्वारा घरों में जाती है।
  • गैस का चूल्हा खाना पकाने का एक साफ़-सुथरा तथा आसान साधन है।
  • कुकिंग रेंज साधारणतः चार चूल्हों वाले होते हैं।
  • इनके साथ भूनने, सेंकने तथा उबालने अथवा तलने का कार्य किया जा सकता है। इस तरह समय की बचत हो जाती है।
  • यदि गैस चूल्हे अथवा गैस लीकेज में समस्या आए तो विशेषज्ञ से ही खुलवाएं।
  • मिट्टी के तेल से चलने वाले स्टोव दो तरह के होते हैं, पम्म वाले तथा बत्तियों वाले।
  • रसोई के बर्तन कई धातुओं के बने हो सकते हैं। जैसे, पीतल, तांबा, चांदी, एल्यूमीनियम, लोहा तथा स्टील आदि।
  • बायोगैस प्लांट में जानवरों के मलमूत्र से गैस बनाई जाती है जिसे गोबर गैस कहते हैं।
  • सोलर कुक्कर. ऐसा उपकरण है जोकि सौर ऊर्जा का प्रयोग करके खाना पकाने के काम आता है।
  • ओवन बिजली अथवा गैस पर काम करने वाला उपकरण है। इसमें भोजन बेक किया जाता है तथा सेंका जाता है।
  • माइक्रोवेव ओवन एक विशेष प्रकार का ओवन होता है। इसमें विद्युत् चुम्बकीय तरंगें पैदा करने वाला चुम्बकीय यन्त्र लगा होता है। यह सूक्ष्म तरंगें (माइक्रोवेवस) पैदा करता है।
  • सूक्ष्म तरंगों को चूसने पर गर्मी पैदा होती है। भोजन के अणु 24500 लाख प्रति सैकिण्ड की गति से कांपते हैं। अणुओं को इतना तेज़ी से रगड़ने पर बहुत गर्मी पैदा होती है।
  • स्टील की सफ़ाई साबुन अथवा विम तथा पानी से की जाती है।
  • काँच के बर्तनों को गिलास, कप, प्लेट आदि को विम आदि से साफ़ किया जाता है।
  • मेल्मोवेयर नई तरह का कठोर प्लास्टिक होता है। इसकी सफ़ाई साबुन वाले पानी अथवा डिटर्जेंट के घोल में कपड़ा भिगोकर की जाती है। अधिक गन्दा होने की सूरत में सोडे का पानी (सोडा बाइकार्बोनेट) का प्रयोग किया जा सकता है।

PSEB 8th Class Physical Education Solutions Chapter 8 नशों के प्रति जागरूकता

Punjab State Board PSEB 8th Class Physical Education Book Solutions Chapter 8 नशों के प्रति जागरूकता Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 8 Physical Education Chapter 8 नशों के प्रति जागरूकता

PSEB 8th Class Physical Education Guide नशों के प्रति जागरूकता Textbook Questions and Answers

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

प्रश्न 1.
नशीले पदार्थों के सेवन से क्या होता है?
उत्तर-
आजकल निम्नलिखित नशीले पदार्थों के कुप्रभाव व्यक्ति के जीवन पर पड़ते हैं:

  • शरीर पर कुप्रभाव-नशे के पदार्थों के सेवन से मनुष्य की पाचन प्रणाली, मांसपेशी प्रणाली, रक्त प्रणाली, स्वास्थ्य प्रणाली में कई प्रकार के रोग लग जाते हैं। लगातार नशीले पदार्थों के सेवन से हाथ, पांव कांपने लग जाते हैं और रक्त प्रभाव बढ़ जाता है।
  • सामाजिक जीवन पर कुप्रभाव-नशीले पदार्थों के सेवन से व्यक्ति के सामाजिक जीवन पर कुप्रभाव पड़ता है। समाज में उसकी कोई इज्जत नहीं रहती। उसके साथ कोई व्यक्ति मेल-मिलाप नहीं रखना चाहता है और उसके चरित्र पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है।
  • व्यवहार पर कुप्रभाव-नशों के सेवन से व्यक्ति का अपने आप पर नियंत्रण नहीं रहता। वह नशे में बिना किसी कारण के झगड़ा कर लेता है और उसके व्यवहार में चिड़चिड़ापन आ जाता है। अपने मित्रों और परिवार से अलग रहने लग जाता है।

PSEB 8th Class Physical Education Solutions Chapter 6 खेलें और अनुशासन

प्रश्न 2.
नशे के बढ़ रहे रुझान के कौन-कौन से कारण हैं ?
उत्तर-
नशे के प्रति बढ़ रहे रुझान के भिन्न-भिन्न कारण हैं :

  • सामाजिक कारण-चल-चित्र में दिखाए जाने वाले नशों के दृश्य बच्चों को नशीले पदार्थों का सेवन करने के लिए प्रेरित करते हैं। बच्चे हीरो और हिरोइन की नकल उतारने में अपनी शान समझते हैं।
  • तकनीक का प्रभाव-आजकल इंटरनेट में बच्चे नशे करने के नए-नए ढंग सीखते हैं। इस तरह नई तकनीक के प्रभाव के कारण बच्चे नशे के जाल में फंस जाते हैं।
  • पारिवारिक कारण-परिवार में झगड़ा, अनबन और तलाक की स्थिति का माहौल हो तो बच्चे बिगड़ जाते हैं। माता-पिता का अधिक प्यार भी बच्चों को बिगाड़ देता है। इन परिस्थितियों में बच्चों पर मानसिक दबाव रहता है और वह नशे की तरफ आकर्षित हो जाते हैं।
  • मित्र मंडली का प्रभाव-बच्चा अपना अधिक-से-अधिक समय अपने मित्रों के साथ बिताता है, जिसका प्रभाव बच्चे पर पड़ता है। यदि मित्र मंडली में कोई भी उसका साथी नशे का सेवन करता है तो उसे भी नशीले पदार्थों की आदत पड़ जाएगी।
  • अपने साथियों में दिखावा-बच्चा जब अपने मित्रों के साथ रहता है, तो दूसरे बच्चों के आर्थिक स्तर से तुलना करने की कोशिश करता है। इस प्रकार वह नशीले पदार्थों का सेवन करके अपने सिर को दूसरे बच्चों से ऊंचा दिखाना चाहता है।

प्रश्न 3.
नशों के कुप्रभाव लिखिए।
उत्तर-

  • शरीर पर कुप्रभाव-नशे मनुष्य के शरीर को खोखला कर देते हैं। नशीले पदार्थ व्यक्ति की सभी प्रणालियों पर बुरा प्रभाव डालते हैं और व्यक्ति नशों के कारण रोगी रहने लग जाता है। उसकी मांसपेशियां कमज़ोर होने लग जाती हैं। उसकी याददाश्त भी कमजोर हो जाती है। व्यक्ति को कैंसर जैसे रोग होने का डर लगा रहता है। नशे करने वाले व्यक्ति के हाथ-पांव कांपने लग जाते हैं और वह अपना मानसिक संतुलन खो बैठता है।
  • सामाजिक जीवन पर कुप्रभाव-यहां नशीले पदार्थों का सेवन व्यक्ति के व्यवहार और शरीर पर कुप्रभाव डालता है वहां पर सामाजिक जीवन पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ता है।
  • व्यवहार पर कुप्रभाव-नशीले पदार्थों का सेवन करने वाले व्यक्ति का अपने आप पर नियंत्रण नहीं रहता। बिना किसी कारण नशे की हालत में लोगों से लड़ाई-झगड़ा करने लग जाता है। इस प्रकार वह अपने दोस्तों और परिवार से अलग हो जाता है।

प्रश्न 4.
नशे की रोकथाम के लिए कौन-कौन से ढंग होते हैं ?
उत्तर-

  • खेलें तथा मनोरंजन क्रियाएं-खेल बच्चों के शरीर को स्वस्थ करते हैं – और उनके खाली समय का सदुपयोग होता है जिससे उनका ध्यान नशीले पदार्थों की तरफ नहीं जाता है।
  • सेमीनार लगाना-बच्चों को नशों के कुप्रभाव के बारे में जानकारी देने के लिए कॉलेज, स्कूलों में सेमीनार का आयोजन करना चाहिए। इस प्रकार सेमीनार में विशेषज्ञों को आमंत्रित करके बच्चों को नशे के कुप्रभाव के बारे में जानकारी देनी चाहिए। जानकारी मिलने पर बच्चे नशीले पदार्थों से दूर रहेंगे।
  • मनोवैज्ञानिक तैयारी-नशे करने वाला व्यक्ति यह मानता है कि वह नशा करता है। इसलिए नशे करने वाले व्यक्ति के साथ मित्रता और प्यार भरा व्यवहार करना चाहिए। प्यार से यदि नशा करने वाला व्यक्ति नशीले पदार्थों को छोड़ने के लिए तैयार हो जाए तो उसकी सहायता करनी चाहिए।
  • परिवार की भूमिका-नशीले पदार्थों का सेवन छुड़ाने के लिए परिवार को बहुत सहायता करनी चाहिए। क्योंकि यदि नशेड़ी से प्यार न किया जाए तो वह अपने आपको अकेला महसूस करता है। इसलिए नशेड़ी व्यक्ति को परिवार की तरफ से पूर्ण सहयोग मिलना चाहिए।
  • योग अभ्यास-योग भारत की प्राचीन संस्कृति है और विश्व भर में इसकी बहुत देन है। योग द्वारा मानसिक तथा शारीरिक तनाव दूर हो जाते हैं और व्यक्ति उसके लगातार अभ्यास से शारीरिक और मानसिक रोगों से बच जाता है और नशे की आदत से भी छुटकारा पाया जा सकता है।
  • प्रेरणा-बच्चों को नशीले पदार्थों का सेवन करने से दूर रखने के लिए अध्यापक और माता-पिता प्रेरणा देकर महत्त्वपूर्ण योगदान कर सकते हैं। उनको चाहिए कि वे समयसमय पर नशों के कुप्रभाव के बारे में बच्चों को बताते रहें, जिससे वे प्रेरणा लेकर नशों की तरफ न जाएं।

Physical Education Guide for Class 8 PSEB नशों के प्रति जागरूकता Important Questions and Answers

बहुविकल्पाय प्रश्न

प्रश्न 1.
नशे के कुप्रभाव लिखें –
(क) नशे से मनुष्य खोखला हो जाता है
(ख) कई प्रकार के रोग लग जाते हैं
(ग) पाचन और मांस पेशी प्रणाली खराब हो जाती है
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 2.
नशे के बढ़ रहे रुझान के कारण हैं –
(क) सामाजिक कारण
(ख) तकनोलजी का प्रभाव
(ग) पारिवारिक कारण ।
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 3.
नशे को रोकने के उपाय हैं –
(क) प्रेरणा
(ख) सैमीनार लगाना
(ग) मनोवैज्ञानिक तौर पर प्यार करना
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

PSEB 8th Class Physical Education Solutions Chapter 6 खेलें और अनुशासन

प्रश्न 4.
नशीले पदार्थों के कोई चार नाम लिखें –
(क) शराब
(ख) तम्बाकू
(ग) अफीम और गांजा
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

बहुत छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
नारकोटिक्स क्या है ?
उत्तर-
यह वह पदार्थ है जिनका सेवन करने से व्यक्ति का शारीरिक और मानसिक तौर पर संतुलन बिगड़ जाता है।

प्रश्न 2.
नशीले पदार्थ खाने वाले मनुष्य में क्या-क्या तबदीलियां आती हैं ?
उत्तर-
यह पदार्थ खाने वाले मनुष्य में अनोखा बदलाव आता है। उसको आस-पास की सुधबुध नहीं रहती।

प्रश्न 3.
नशीले पदार्थ खाने वाले पर क्या प्रभाव पड़ते हैं ?
उत्तर-
यह नशीले पदार्थ मनुष्य के सामाजिक और आर्थिक तौर पर परिवार को बर्बाद कर देते हैं। वह अपने परिवार में अपना विश्वास खो देता है।

प्रश्न 4.
नशीले पदार्थ खाने वाले के कोई दो बुरे प्रभाव लिखो।
उत्तर-

  1. सामाजिक तौर पर व्यक्ति दुःखी हो जाता है।
  2. पारिवारिक सम्बन्ध टूट जाते हैं।

प्रश्न 5.
नशीले पदार्थ खाने से शरीर पर क्या बुरा प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर-
1. शरीर और मन काबू नहीं रहता।
व्यवहार बदल जाता है।

प्रश्न 6.
नशीले पदार्थ से छुटकारा पाने के लिए कोई दो तरीके लिखो।
उत्तर-

  • प्रेरणा-बच्चे को नशीले पदार्थ छुड़वाने में माता-पिता, स्कूल अध्यापक और बड़े बुजुर्ग प्रेरणा देकर बहुत ही महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकते हैं।
  • मनोवैज्ञानिक तरीका-नशीले पदार्थों से छुटकारा पाना बहुत कठिन है और व्यक्ति को मानसिक तौर पर नशीले पदार्थ छोड़ने की कोशिश करनी चाहिए।

प्रश्न 1.
नारकोटिक्स से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
नारकोटिक्स वह पदार्थ हैं, जिनके सेवन से व्यक्ति का जीवन समाप्त हो जाता है। उससे कोई मित्रता नहीं करना चाहता और उसके रिश्तेदार उससे दूर रहना चाहते हैं।

प्रश्न 2.
नशे के प्रति बढ़ रहे रुझान के कारण लिखें।
उत्तर-

  • कई दफा बच्चे अपने आपका दूसरे परिवारों से मुकाबला करने लगते हैं। अपने आप के लिए ऊंची-ऊंची बातें करते हैं और नशीले पदार्थ लेने लग जाते हैं।
  • तकनीक का प्रभाव-आजकल इंटरनैट ने बच्चों को बहुत प्रभावित किया है और बच्चे नए-नए तरीकों से इंटरनैट से नशे करने के लिए आकर्षित हो जाते हैं।

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प्रश्न 3.
नशे से शरीर पर बुरे प्रभाव लिखें।
उत्तर-
नशीले पदार्थों का सेवन व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक तौर पर खोखला कर देता है। उसके साथ कोई भी दोस्ती नहीं करना चाहता और उसका सामाजिक जीवन भी बर्बाद हो जाता है।

प्रश्न 4.
नशे के कुप्रभाव लिखो।
उत्तर-
नशे से शरीर खोखला हो जाता है। नशीले पदार्थ के सेवन से पाचन प्रणाली में रोग लग जाते हैं। कई दफ़ा व्यक्ति को कैंसर जैसे रोग का सामना करना पड़ता है। व्यक्ति का रक्त संचार बढ़ जाता है और मांसपेशियां कमज़ोर होने लगती हैं । हृदयघात की संभावना बढ़ जाती है। अधिक नशीले पदार्थ का सेवन करने से व्यक्ति के हाथ-पांव कांपने लगते हैं।

PSEB 8th Class Social Science Solutions Chapter 26 मौलिक अधिकार तथा मानवीय अधिकारों के कारण मौलिक कर्त्तव्य

Punjab State Board PSEB 8th Class Social Science Book Solutions Civics Chapter 26 मौलिक अधिकार तथा मानवीय अधिकारों के कारण मौलिक कर्त्तव्य Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 8 Social Science Civics Chapter 26 मौलिक अधिकार तथा मानवीय अधिकारों के कारण मौलिक कर्त्तव्य

SST Guide for Class 8 PSEB मौलिक अधिकार तथा मानवीय अधिकारों के कारण मौलिक कर्त्तव्य Textbook Questions and Answers

I. निम्नलिखित खाली स्थान भरो :

1. भारतीय संविधान में ………… मौलिक अधिकार शामिल किए गए हैं।
2. भारतीय संविधान में मौलिक अधिकार अनुच्छेद ……….. में दर्ज या शामिल हैं।
3. संविधान की धारा 25 ………… की मनाही करती है।
4. पहला मौलिक अधिकार …………. है।
5. प्रैस की स्वतंत्रता ………. के अधीन दी गई है।
उत्तर-

  1. सात प्रकार के
  2. 14-32
  3. धर्म के आधार पर भेदभाव
  4. समानता का अधिकतर
  5. स्वतन्त्रता के अधिकार।

II. निम्नलिखित वाक्यों में ठीक (✓) या ग़लत (✗) के चिन्ह लगाओ :

1. संविधान के समक्ष हम सब समान हैं। – (✓)
2. अधिकार और कर्त्तव्य में कोई सम्बन्ध नहीं है। – (✗)
3. न्यायपालिका मौलिक अधिकारों की रक्षक है। – (✓)
4. शिक्षा का अधिकार मौलिक अधिकार है। – (✓)
5. सरकारी शिक्षा संस्थाओं में धर्म, जाति या रंग के आधार पर दाखिला देने से इन्कार किया जा सकता है। – (✗)

III. विकल्प वाले प्रश्न :

प्रश्न 1.
मुफ्त तथा आवश्यक शिक्षा क अधिकार कौन-सी कक्षा से तक लागू है ?
(क) पांचवीं
(ख) आठवीं
(ग) दसवीं
(घ) बारहवीं।
उत्तर-
(ख) आठवीं

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प्रश्न 2.
मनुष्यों का व्यापार करने की मनाही किस अधिकार अधीन शामिल है ?
(क) संवैधानिक उपचारों का अधिकार
(ख) समानता का अधिकार
(ग) शोषण के विरुद्ध अधिकार
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(ग) शोषण के विरुद्ध अधिकार

प्रश्न 3.
भारत में शिक्षा के अधिकार का एक्ट कब से लागू हुआ ?
(क) 4 अगस्त 2009
(ख) दिसम्बर 2002
(ग) 1 अप्रैल 2010
(घ) 1 अप्रैल 2009
उत्तर-
(घ) 1 अप्रैल 2009

प्रश्न 4.
शिक्षा का अधिकार संविधान की कौन-सी धारा के अन्तर्गत आता है ?
(क) धारा 21
(ख) धारा 21-A
(ग) धारा 20
(घ) उपरोक्त में से कोई नहीं।
उत्तर-
(ख) धारा 21-A

IV. नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर 1-15 शब्दों में लिखें:

प्रश्न 1.
अधिकारों से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
अधिकार हमें समाज से प्राप्त सुविधाएं हैं। साधारण अर्थों में अधिकार मनुष्य की वे उचित मांगें हैं जो उसके विकास तथा कल्याण के लिए आवश्यक हैं। अधिकारों को राज्य तथा समाज की मान्यता प्राप्त होती है।

प्रश्न 2.
प्रारम्भिक अधिकार के अर्थ लिखें।
उत्तर-
मौलिक (प्रारम्भिक) अधिकार वे अधिकार हैं जिन्हें देश के संविधान में अंकित किया है। इन्हें संवैधानिक उपचारों द्वारा सुरक्षा प्रदान की गई है। ये अधिकार मनुष्य के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक हैं।

प्रश्न 3.
किन्हीं दो अधिकारों से जुड़े दो कर्त्तव्य लिखो।
उत्तर-

  1. कानून सभी को समान समझता है। इसलिए हमारा कर्तव्य है कि हम किसी से कोई भेदभाव न करें।
  2. हमें अनेक प्रकार की स्वतन्त्रता का अधिकार प्राप्त है। इस अधिकार के साथ यह कर्त्तव्य जुड़ा हुआ है कि हम दूसरों की स्वतन्त्रताओं का ध्यान रखें।

प्राश्न 4.
संवैधानिक उपचारों के अधिकार से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर-
संवैधानिक उपचारों के अधिकार के अनुसार राज्य किसी व्यक्ति के मौलिक अधिकार नहीं छीन सकता। यदि किसी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है तो वह व्यक्ति न्यायपालिका की शरण ले सकता है।

प्रश्न 5.
छुआछूत को किस अधिनियम द्वारा समाप्त किया गया है ?
उत्तर-
छुआछूत की समाप्ति संविधान के अनुच्छेद 17 द्वारा की गई है।

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V. नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर 50-60 शब्दों में लिखें:

प्रश्न 1.
शिक्षा के अधिकार पर संक्षिप्त नोट लिखो।
उत्तर-
संविधान में शिक्षा का अधिकार संविधान 86वें संशोधन के अनुसार शामिल किया गया। अनुच्छेद 21-A में शामिल इस अधिकार के अनुसार 6 से 14 साल के प्रत्येक बच्चे नि:शुल्क तथा अनिवार्य शिक्षा का अधिकार दिया गया। इस बारे में 2009 में एक एक्ट (कानून) पास किया गया। यह कानून अप्रैल 2010 से जम्मू एवं कश्मीर को छोड़ कर सारे देश में यह कानून लागू हो गया। आज 6-14 वर्ष की आयु वर्ग के सभी बच्चे मुफ्त तथा अनिवार्य प्रारंभिक शिक्षा का लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

प्रश्न 2.
संविधान में कौन-कौन से मौलिक अधिकार दर्ज हैं ?
उत्तर-
संविधान में निम्नलिखित मौलिक अधिकार दर्ज हैं(1) समानता का अधिकार (2) स्वतन्त्रता का अधिकार (3) शोषण के विरुद्ध अधिकार । (4) धार्मिक स्वतन्त्रता का अधिकार (5) सांस्कृतिक तथा शैक्षिक अधिकार (6) संवैधानिक उपचारों का अधिकार (7) शिक्षा का अधिकार।

प्रश्न 3.
अधिकार तथा कर्तव्य ‘एक सिक्के के दो पहलू’ हैं। कैसे ?
उत्तर-
अधिकार और कर्त्तव्य एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। ये एक-दूसरे के पूरक हैं। अधिकारों के बिना कर्त्तव्यों और कर्त्तव्यों के बिना अधिकारों का कोई अर्थ नहीं रह जाता है। इसलिए प्रायः यह कहा जाता है कि एक नागरिक के अधिकार दूसरे के कर्त्तव्य हैं। यदि हम केवल अपने अधिकारों का ही प्रयोग करते हैं और अपने कर्त्तव्य नहीं निभाते हैं तो इसका अर्थ यह होगा कि हम दूसरे नागरिक के अधिकारों का हनन कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, नागरिक को अपने जीवन की रक्षा का अधिकार प्राप्त है। अतः हमारा भी यह कर्त्तव्य है कि हम दूसरे नागरिकों के जीवन की रक्षा के विरुद्ध कार्य न करें। अतः स्पष्ट है कि अधिकारों और कर्तव्यों में गहरा सम्बन्ध है।

प्रश्न 4.
शोषण के विरुद्ध अधिकार की व्याख्या कीजिए।
उत्तर-
हमारे समाज में चिरकाल से निर्धन व्यक्तियों, स्त्रियों तथा बच्चों का शोषण होता चला आ रहा है। इसे समाप्त करने के लिए संविधान में शोषण के विरुद्ध अधिकार की व्यवस्था की गई है। इसके अनुसार –

  • मनुष्यों के व्यापार और बिना वेतन दिए ज़बरदस्ती काम करवाने पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया है। इसका उल्लंघन करने वाले को कानून के अनुसार दण्ड दिया जा सकता है।
  • 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को कारखानों, खानों या जोखिम भरी नौकरी पर नहीं लगाया जा सकता। वास्तव में उनसे कोई ऐसा कार्य नहीं लिया जा सकता जो उनके विकास में बाधा डाले।

प्रश्न 5.
हम मौलिक अधिकारों की रक्षा कैसे कर सकते हैं?
उत्तर-
हम अपने मौलिक अधिकारों की रक्षा संवैधानिक उपचारों के अधिकारों के अधीन कर सकते हैं। इसके अनुसार यदि कोई हमारे मौलिक अधिकारों का हनन करता है तो हम उसके विरुद्ध न्यायालय में जा सकते हैं। यहां तक कि सरकार भी हमारे मौलिक अधिकारों का हनन नहीं कर सकती। न्याय संगत होने पर न्यायालय हमें हमारे अधिकार वापिस दिलाता है।

PSEB 8th Class Social Science Guide मौलिक अधिकार तथा मानवीय अधिकारों के कारण मौलिक कर्त्तव्य Important Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Multiple Choice Questions)

सही जोड़े बनाइए:

1. अधिकार – संविधान में अंकित
2. मौलिक अधिकार – मनुष्य की उचित मांगें
3. स्वतंत्रता का अधिकार – न्यायपालिका की शरण
4. संवैधानिक उपचारों का अधिकार – विचार अभिव्यक्त करना
उत्तर-

  1. मनुष्य की उचित मांगें,
  2. सविधान में अंकित
  3. विचार अभिव्यक्त करना
  4. न्यायपालिका की शरण।

अति छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
भारतीय संविधान में मौलिक अधिकार किन अनुच्छेदों में अंकित हैं ? इन्हें किस आधार पर सम्मिलित किया गया है ?
उत्तर-
भारतीय संविधान में मौलिक अधिकार अनुच्छेद 14 से 32 तक अंकित हैं। संविधान में ये अधिकार संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान के आधार पर सम्मिलित किए गए हैं।

प्रश्न 2.
मानवीय अधिकारों से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर-
वे अधिकार जो मनुष्य को मानवीय जीवन जीने के योग्य बनाते हैं, उन्हें मानवीय अधिकार कहा जाता है। ये अधिकार मानव को मान-सम्मान का जीवन जीने में सहायता करते हैं।

प्रश्न 3.
समानता का अधिकार क्या है ?
उत्तर-
समानता का अधिकार एक महत्त्वपूर्ण मौलिक अधिकार है। इसके अनुसार सभी व्यक्ति कानून के सामने समान हैं। किसी भी नागरिक के साथ ऊँच-नीच, धनी-निर्धन, रंग, नस्ल, जाति तथा जन्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता।

प्रश्न 4.
धर्म के अधिकार के साथ कौन-सा कर्त्तव्य जुड़ा हुआ है ?
उत्तर-
धर्म के अधिकार को बनाये रखने के लिए हमें किसी धर्म तथा धार्मिक स्थल की निन्दा नहीं करनी चाहिए। हमारा कर्तव्य है कि हम सभी धर्मों का सम्मान करें।

प्रश्न 5.
समानता के अधिकार को बनाये रखने के लिए संविधान की धारा 15 तथा 25 में क्या-क्या कहा गया है ?
उत्तर-

  • संविधान की धारा 15 के अनुसार किसी भी नागरिक के साथ धर्म, जाति, लिंग तथा नस्ल के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता।
  • संविधान की धारा 25 के अनुसार किसी भी व्यक्ति के लिए धर्म के आधार पर भेदभाव करना निषेध है।

PSEB 8th Class Social Science Solutions Chapter 26 मौलिक अधिकार तथा मानवीय अधिकारों के कारण मौलिक कर्त्तव्य

छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
सांस्कृतिक तथा शिक्षा के मूल अधिकार तथा इससे जुड़े कर्त्तव्य की व्याख्या कीजिए।
उत्तर-
नागरिकों को अपनी भाषा, लिपि और संस्कृति को सुरक्षित रखने का अधिकार है। भाषा या नस्ल के आधार पर किसी भी नागरिक को ऐसी शिक्षा-संस्थाओं में प्रवेश पाने से नहीं रोका जाएगा जो सरकार अथवा सरकारी सहायता द्वारा चलाई जा रही हैं।

अत: हमारा कर्त्तव्य है कि हम इस अधिकार का सम्मान करें। हमें रंग, नस्ल, जाति के आधार पर किसी को भी सरकारी शिक्षा संस्थानों में प्रवेश लेने से नहीं रोकना चाहिए। हमें चाहिए कि हम सभी की लिपि, संस्कृति, बोली तथा धर्म का सम्मान करें। राजकीय संस्थानों को सहायता देते समय भी किसी प्रकार का कोई भेदभाव न हो।

प्रश्न 2.
भारतीय नागरिक को प्राप्त किन्हीं चार मौलिक अधिकारों का वर्णन करो।
उत्तर-

  1. स्वतन्त्रता का अधिकार भारतीय नागरिकों को भ्रमण करने, विचार प्रकट करने तथा व्यवसाय सम्बन्धी स्वतन्त्रता दी गई है।
  2. धार्मिक स्वतन्त्रता–भारत के लोगों को किसी भी धर्म को मानने अथवा छोड़ने की स्वतन्त्रता दी गई है। वे धार्मिक संस्थाओं का निर्माण कर सकते हैं या उन्हें चला सकते हैं।
  3. शिक्षा का अधिकार-भारतवासियों को किसी भी भाषा को पढ़ने तथा अपनी संस्कृति और लिपि की रक्षा का अधिकार भी प्रदान किया गया है।

समता का अधिकार-प्रत्येक नागरिक को समता का अधिकार प्रदान किया गया है और हर प्रकार के भेदभाव को मिटा दिया गया है। कोई भी व्यक्ति अपनी योग्यता के बल पर उच्च से उच्च पद प्राप्त कर सकता है।

प्रश्न 3.
अधिकारों तथा कर्तव्यों में क्या सम्बन्ध है?
उत्तर-
अधिकारों तथा कर्त्तव्य एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। ये एक-दूसरे के साथ जुड़े हुए हैं। इन्हें एक-दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता। एक के बिना दूसरे का कोई अर्थ नहीं है।

प्रश्न 4.
भारतीय संविधान में मौलिक अधिकार सम्मिलित क्यों किए गए हैं ?
उत्तर-
कुछ अधिकार मनुष्य के शारीरिक, मानसिक, नैतिक तथा सांस्कृतिक विकास के लिए आवश्यक हैं। इनके बिना व्यक्ति का सर्वांगीण विकास नहीं हो सकता है। इन्हें मौलिक अधिकार कहा जाता है। नागरिकों को इन अधिकारों की गारंटी देने के लिए इन्हें संविधान में सम्मिलित किया गया है। इतना ही नहीं संवैधानिक उपचारों द्वारा इन अधिकारों को सुरक्षा भी प्रदान की गई है। यदि राज्य या कोई अन्य व्यक्ति इन अधिकारों का हनन करता है, तो पीड़ित व्यक्ति न्यायालय की शरण ले सकता है।

प्रश्न 5.
धर्म की स्वतन्त्रता हमारे संविधान के अनुसार कैसे लागू की गई है ? ।
उत्तर-
हमारे संविधान में धर्म की स्वतन्त्रता को निम्नलिखित ढंग से लागू किया गया है.

  • प्रत्येक व्यक्ति को अपनी इच्छा से किसी भी धर्म को मानने, उस पर आचरण करने, और उसका प्रचार करने का समान अधिकार है।
  • लोग अपनी इच्छा से धार्मिक तथा परोपकारी संस्थाओं की स्थापना कर सकते हैं तथा उनका प्रबन्ध चला सकते हैं।
  • किसी भी व्यक्ति को ऐसे कर देने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा जिनका प्रयोजन किसी धर्म विशेष का प्रचार करना है।
  • शिक्षा-संस्थाओं में किसी विद्यार्थी को किसी धर्म विशेष की शिक्षा प्राप्त करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।

प्रश्न 6.
क्या अभी भी हमारे देश में रंग, नसल, धर्म तथा जाति के आधार पर भेदभाव है ?
उत्तर-
भारतीय संविधान द्वारा रंग, नसल, धर्म तथा जाति के आधार पर होने वाले भेदभाव को समाप्त कर दिया गया है, परन्तु खेद की बात यह है कि अभी इस भेदभाव को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सका। आज भी अपने आप को उच्च कहने वाले लोग दूसरों से घृणा करते हैं और उनके साथ अपमानजनक व्यवहार करते हैं। अतः इसके लिए विशेष कदम उठाने की आवश्यकता है। इस प्रकार के भेदभाव के विरुद्ध जो कानून बने हैं, उन्हें सभी लोगों तक पहुँचाना आवश्यक है। इन्हें कठोरता से लागू करने की भी ज़रूरत है।

प्रश्न 7.
भारतीय नागरिक को प्राप्त किन्हीं तीन मौलिक अधिकारों का वर्णन करो।
उत्तर-

  • स्वतन्त्रता का अधिकार भारतीय नागरिकों को भ्रमण करने, विचार प्रकट करने तथा व्यवसाय सम्बन्धी स्वतन्त्रता दी गई है।
  • धार्मिक स्वतन्त्रता का अधिकार–भारत के लोगों को किसी भी धर्म को मानने अथवा छोड़ने की स्वतन्त्रता दी गई है। वे धार्मिक संस्थाओं का निर्माण कर सकते हैं या उन्हें चला सकते हैं।
  • समानता का अधिकार प्रत्येक नागरिक को समानता का अधिकार प्रदान किया गया है और हर प्रकार के भेदभाव को मिटा दिया गया है। कोई भी व्यक्ति अपनी योग्यता के बल पर उच्च से उच्च पद प्राप्त कर सकता है।

PSEB 8th Class Social Science Solutions Chapter 26 मौलिक अधिकार तथा मानवीय अधिकारों के कारण मौलिक कर्त्तव्य

मौलिक अधिकार तथा मानवीय अधिकारों के कारण मौलिक कर्त्तव्य PSEB 8th Class Social Science Notes

  • अधिकार – अधिकार हमें समाज से प्राप्त सुविधाएं हैं। राज्य इन्हें उचित मानता है।
  • मौलिक अधिकार – नागरिकों के लिए संविधान में अंकित अधिकार मौलिक अधिकार कहलाते हैं। इनकी सुरक्षा के लिए संवैधानिक उपचारों की व्यवस्था की गई है।
  • महत्त्वपूर्ण मूल (मौलिक) अधिकार – धर्म की स्वतन्त्रता, स्वतन्त्रता तथा समानता के अधिकार बहुत-ही महत्त्वपूर्ण अधिकार हैं।
  • कर्त्तव्य – अधिकारों की सुरक्षा के लिए राज्य हमसे जो मांग करता है, वह हमारा कर्त्तव्य है। कर्तव्यों के बिना अधिकारों का कोई अर्थ नहीं है। इसलिए प्रत्येक अधिकार के साथ कर्तव्य जुड़ा है।
  • धर्म की स्वतन्त्रता | धर्म की स्वतन्त्रता का अर्थ है कि राज्य की दृष्टि में सभी धर्म समान हैं। नागरिकों को कोई भी धर्म मानने की स्वतन्त्रता है। वे अपने धार्मिक स्थानों पर स्वतन्त्रतापूर्वक आजा सकते हैं और अपने ढंग से पूजा-पाठ कर सकते हैं।
  • सांस्कृतिक और शैक्षणिक अधिकार – हमारे देश के अल्पसंख्यकों को संविधान द्वारा अपनी शिक्षा संस्थाएं स्थापित करने का अधिकार प्राप्त है। सरकार इन संस्थाओं को वित्तीय सहायता देने में कोई भेदभाव नहीं करती।
  • समानता का अधिकार – समानता के अधिकार के अनुसार देश के सभी नागरिक कानून के सामने समान हैं। सभी के लिए एक जैसी न्याय प्रणाली अपनाई गई है। सभी नागरिक सार्वजनिक स्थानों का एक जैसा प्रयोग कर सकते हैं।

PSEB 8th Class Social Science Solutions Chapter 24 संविधान तथा कानून

Punjab State Board PSEB 8th Class Social Science Book Solutions Civics Chapter 24 संविधान तथा कानून Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 8 Social Science Civics Chapter 24 संविधान तथा कानून

SST Guide for Class 8 PSEB संविधान तथा कानून Textbook Questions and Answers

I. निम्नलिखित खाली स्थान भरो :

1. भारत का संविधान ……………… को लागू किया गया।
2. …………….. भारत के पहले राष्ट्रपति थे।
3. दहेज विरुद्ध कानून ………………. में बना था।
4. भारतीय संविधान ………….. साल ……………….. महीने …………….. दिनों में तैयार किया गया।
5. भ्रूण हत्या का मूल कारण ……………… रीति है।
उत्तर-

  1. 26 जनवरी, 1950
  2. डॉ० राजेंद्र प्रसाद
  3. 1961 ई०
  4. 2, 11, 18
  5. दहेज।

II. प्रत्येक वाक्य के सामने सही (✓) या ग़लत (✗) के चिन्ह लगाएं :

1. डांडी नामक स्थान पर गांधी जी ने नमक कानून तोड़ा। – (✓)
2. न्यायपालिका संविधान की रक्षा नहीं करती है। – (✗)
3. भारत में कानून का शासन चलता है। – (✓)
4. बुरे कानूनों की उल्लंघना करनी लोकतन्त्रीय सरकार की विशेषता है। – (✓)
5. कानून अनिश्चित नियम होते हैं। – (✗)

III. विकल्प वाले प्रश्न :

प्रश्न 1.
भारतीय संविधान कब लागू किया गया था ?
(क) 26 नवंबर, 1949
(ख) 26 जनवरी, 1950
(ग) 26 जनवरी, 1930
(घ) 26 जनवरी, 1940.
उत्तर-
26 जनवरी

प्रश्न 2.
संविधान सभा की मसौदा कमेटी के प्रधान कौन थे ?
(क) डॉ० राजेंद्र प्रसाद
(ख) डॉ० बी० आर० यावेदकर
(ग) महात्मा गांधी
(घ) पंडित जवाहर लाल नेहरू।
उत्तर-
डॉ० बी० आर० अम्बेदकर

प्रश्न 3.
निम्नलिखित में से भारत में कौन सर्वोच्च है ?
(क) प्रधानमंत्री
(ख) राष्ट्रपति
(ग) न्यायपालिका
(घ) संविधान।
उत्तर-
संविधान

प्रश्न 4.
मसौदा कमेटी के सदस्यों की संख्या बताओ।
(क) 11
(ख) 18
(ग) 07
(घ) 02.
उत्तर-
07.

PSEB 8th Class Social Science Solutions Chapter 24 संविधान तथा कानून

IV. निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर 1-15 शब्दों में दें :

प्रश्न 1.
संविधान से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
संविधान वह कानूनी दस्तावेज़ है जिसके द्वारा देश का प्रशासन चलाया जाता है। संविधान देश के सभी कानूनों से श्रेष्ठ होता है।

प्रश्न 2.
संविधान 26 जनवरी, 1950 से क्यों लागू किया गया ?
उत्तर-
हमारा संविधाम 26 जनवरी के ऐतिहासिक महत्त्व को देखते हुए इस तिथि को लागू किया गया। 26 जनवरी, 1930 को देश में पूर्ण स्वतन्त्रता दिवस मनाया गया था।

प्रश्न 3.
कानून के शाब्दिक अर्थ लिखें।
उत्तर-
कानून अंग्रेज़ी भाषा के शब्द लॉ (Law) का अनुवाद है। लॉ शब्द टिऊटोनिक शब्द ‘लैग’ से निकला है जिसका अर्थ है निश्चित। इस प्रकार कानून का अर्थ है- निश्चित नियम।

प्रश्न 4.
कानून की क्या महत्ता है ?
उत्तर-
कानून किसी भी संस्था अथवा देश में व्यवस्था बनाये रखने में सहायक है। इसके बिना कोई भी संस्था सुचारु रूप से नहीं चल सकती। स्कूल के भी अपने कानून (नियम) होते हैं जिनके कारण स्कूल में अनुशासन बना रहता है।

प्रश्न 5.
निष्पक्ष न्यायपालिका से आपका क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
न्यायपालिका की निष्पक्षता से भाव यह है कि वह कार्यपालिका अथवा विधानपालिका के दबाव के बिना स्वतन्त्र रूप से न्याय करे। भारत में भी न्यायपालिका को निष्पक्ष बनाया गया है। यदि कोई संस्था संविधान के अनुसार कार्य नहीं करती तो न्यायपालिका उसे असंवैधानिक घोषित कर सकती है।

प्रश्न 6.
महात्मा गाँधी जी द्वारा कब-कब आन्दोलन चलाए गए ?
उत्तर-
महात्मा गाँधी ने 1921 में असहयोग आन्दोलन, 1930 में सिविल अवमानना (अवज्ञा) आन्दोलन तथा 1942 में भारत छोड़ो आन्दोलन चलाया।

V. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 50-60 शब्दों में दें:

प्रश्न 1.
संविधान की सर्वोच्चता से आपका क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
संविधान एक कानूनी दस्तावेज़ है। यह देश का सर्वोच्च कानून है। सरकार के सभी महत्त्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति से पहले पद ग्रहण करने वाले व्यक्ति को संविधान को सर्वोच्च मानने तथा इसकी पालना करने की शपथ दिलाई जाती है। यदि कोई संस्था संविधान के अनुसार कार्य नहीं करती, तो उसे न्यायपालिका द्वारा गैर-संवैधानिक घोषित कर दिया जाता है। इसी प्रकार संविधान-विरोधी कानूनों को भी रद्द कर दिया जाता है।

प्रश्न 2.
भारतीय संविधान का निर्माण कैसे हुआ ?
उत्तर-
स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात् एक संवैधानिक कमेटी बनाई गयी। डॉ० राजेन्द्र प्रसाद को इस कमेटी (संविधान सभा) का स्थायी प्रधान चुना गया। यह संविधान सभा पूर्ण प्रभुसत्ता सम्पन्न थी।

मसौदा कमेटी का गठन तथा संविधान का निर्माण-संविधान को नियमित रूप देने के लिए 29 अगस्त, 1947 को सात सदस्यों की एक कमेटी का गठन किया गया। इसके प्रधान डॉ० बी० आर० अम्बेदकर थे। इस मसौदा कमेटी ने भिन्न-भिन्न देशों के संविधानों का अध्ययन करके अन्य देशों के संविधानों से बहुत-से सिद्धान्तों को इकट्ठा किया। संविधान सभा की कुल 11 बैठकें हुईं। 26 नवम्बर, 1949 को भारतीय संविधान बनकर तैयार हो गया। यह संविधान 26 जनवरी, 1950 को लागू किया गया।

प्रश्न 3.
भारत में न्यायपालिका को निष्पक्ष कैसे बनाया गया है ?
उत्तर-
न्यायपालिका को संविधान की रक्षा के लिए सर्वोच्च तथा निष्पक्ष बनाया गया है। न्यायपालिका संविधान की. पालना को सुनिश्चित बनाती है। यदि कोई संस्था संविधान के अनुसार कार्य नहीं करती तो उसे असंवैधानिक घोषित कर दिया जाता है। न्यायपालिका को न्यायिक पुन:निरीक्षण का अधिकार प्राप्त है। इसका अर्थ यह है कि यदि किसी विधानमण्डल द्वारा बनाया गया कानून संविधान की भावना का उल्लंघन करता है तो न्यायपालिका उसे रद्द कर सकती है। इसी प्रकार यह कार्यपालिका द्वारा लागू किसी भी संविधान विरोधी आदेश को असंवैधानिक घोषित कर सकती है।

प्रश्न 4.
गांधी जी ने अंग्रेजों के विरुद्ध कौन-कौन से आंदोलन चलाये ?
उत्तर-
अंग्रेजी सरकार की बहुत सी मीतियां जनहित विरोधी थीं। अपना हित साधने के लिए उन्होंने समय समय पर अनेक काले कानून पास किए। गांधी जी ने उनकी इन नीतियों तथा काले कानूनों का विरोध करने के लिए निम्नलिखित आंदोलन चलाए –

  1. 1920 में असहयोग आंदोलन।
  2. 1930 में सिविल अवमानना (अवज्ञा) आंदोलन।
  3. 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन।

प्रश्न 5.
शराबबन्दी से क्या अभिप्राय है और इसे लागू क्यों करना चाहिए ?
उत्तर-
शराबबन्दी का अर्थ है-शराब बनाने, शराब की बिक्री तथा शराब पीने पर कानूनी प्रतिबन्ध।।
मद्यपान एक बहुत बड़ी बुराई है। एक सर्वेक्षण के अनुसार हमारे देश में हर चौथा व्यक्ति मद्यपान करता है। शराब ‘पर प्रतिदिन करोड़ों रुपये व्यय होते हैं। इतना ही नहीं शराब पीने से धन के साथ-साथ समय तथा स्वास्थ्य की भी हानि. होती है। शराब मनुष्य को नैतिक पतन की ओर भी ले जाती है। इसलिए मद्य निषेध को लागू करना आवश्यक ही नहीं अनिवार्य है।

PSEB 8th Class Social Science Solutions Chapter 24 संविधान तथा कानून

PSEB 8th Class Social Science Guide संविधान तथा कानून Important Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Multiple Choice Questions)

सही जोड़े बनाइए :

1. संविधान – न्यायपालिका
2. संविधान की रक्षा – 31 दिसंबर, 1929
3. संविधान तैयार हुआ – कानूनी दस्तावेज
4. कांग्रेस द्वारा सम्पूर्ण स्वतंत्रता की घोषणा – 26 नवम्बर 1949.
उत्तर-

  1. कानूनी दस्तावेज़
  2. न्यायपालिका
  3. 26 नवम्बर, 1949
  4. 31 दिसंबर 1929.

अति छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत कब स्वतन्त्र हुआ ?
उत्तर-
भारत 15 अगस्त, 1947 को स्वतन्त्र हुआ।

प्रश्न 2.
भारत का संविधान किसने बनाया ? इसके प्रधान (अध्यक्ष) कौन थे ?
उत्तर-
भारत का संविधान एक संविधान सभा (संवैधानिक कमेटी) ने बनाया। इसके अध्यक्ष डॉ० राजेन्द्र प्रसाद थे।

प्रश्न 3.
संविधान सभा की मसौदा कमेटी का गठन कब हुआ ? इसके अध्यक्ष कौन थे ?
उत्तर-
संविधान सभा की मसौदा कमेटी का गठन 29 अगस्त, 1947 को हुआ। इसके अध्यक्ष डॉ० बी० आर० अम्बेदकर थे।

प्रश्न 4.
भारत के प्रथम राष्ट्रपति कौन थे ? उन्हें संविधान सभा की किस बैठक में राष्ट्रपति चुना गया ?
उत्तर-
भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ० राजेन्द्र प्रसाद थे। उन्हें संविधान सभा की अन्तिम बैठक में 25 जनवरी, 1950 को राष्ट्रपति चुना गया।

प्रश्न 5.
न्यायपालिका को निष्पक्ष तथा स्वतन्त्र बनाने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं ?
उत्तर-
इस उद्देश्य से न्यायाधीशों की नियुक्ति, वेतन तथा भत्ते और कार्यकाल अन्य कर्मचारियों से अलग किए गए

प्रश्न 6.
सिविल अवमानना तथा असहयोग आन्दोलन के कार्यक्रम में शामिल दो बातें बताओ।
उत्तर-

  1. अंग्रेज़ी सरकार द्वारा बनाए गए सामान का प्रयोग न करना।
  2. उनके द्वारा बनाये गए वस्त्र धारण न करना।

प्रश्न 7.
नमक कानून कहाँ और किस प्रकार तोड़ा गया ? .
उत्तर-
नमक कानून महात्मा गाँधी के नेतृत्व में डांडी नामक स्थान पर तोड़ा गया। वहाँ अंग्रेजी सरकार द्वारा बनाये गए नमक को नष्ट किया गया और समुद्र के पानी से स्वयं नमक बना कर खाने के आदेश दिए गए।

प्रश्न 8.
किन-किन राज्यों की सरकारों ने मद्य निषेध विधेयक पारित किए ? क्या ये सार्थक सिद्ध हुए ?
उत्तर-
मद्य निषेध विधेयक गुजरात, हरियाणा, केरल तथा आन्ध्र प्रदेश की सरकारों ने पारित किए। परन्तु ये अधिक सार्थक सिद्ध नहीं हुए।

PSEB 8th Class Social Science Solutions Chapter 24 संविधान तथा कानून

छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत के संविधान के निर्माण तथा लागू होने पर एक नोट लिखो।
उत्तर-
स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात् एक संवैधानिक कमेटी बनाई गयी। डॉ० राजेन्द्र प्रसाद को इस कमेटी (संविधान सभा) का स्थायी प्रधान चुना गया। यह संविधान सभा पूर्ण प्रभुसत्ता सम्पन्न थी।

मसौदा कमेटी का गठन तथा संविधान का निर्माण-संविधान को नियमित रूप देने के लिए 29 अगस्त, 1947 को सात सदस्यों की एक कमेटी का गठन किया गया। इसके प्रधान डॉ० बी० आर० अम्बेदकर थे। इस मसौदा कमेटी ने भिन्न-भिन्न देशों के संविधानों का अध्ययन करके अन्य देशों के संविधानों से बहुत-से सिद्धान्तों को इकट्ठा किया। संविधान सभा की कुल 11 बैठकें हुईं। 26 नवम्बर, 1949 को भारतीय संविधान बनकर तैयार हो गया। इसे तैयार होने में 2 वर्ष, 11 महीने तथा 18 दिन लगे। यह संविधान 26 जनवरी, 1950 को लागू किया गया। 25 जनवरी, 1950 को संविधान सभा की अन्तिम बैठक हुई। इसमें डॉ० राजेन्द्र प्रसाद को भारत का प्रथम राष्ट्रपति चुना गया।

प्रश्न 2.
दहेज प्रथा पर क्यों और कैसे रोक लगाई गई ?
उत्तर-
दहेज की कुप्रथा हमारे समाज के लिए बहुत बड़ा अभिशाप थी। निर्धन वर्ग के लिए तो यह शताब्दियों से एक समस्या बनी हुई थी। निर्धन लोग प्रायः ऋण लेकर अपनी लड़कियों को दहेज देते थे। इससे समाज में स्त्री जाति का मान-सम्मान कम हो गया। अत: लोग कन्या भ्रूण हत्या करने लगे। इससे लड़कों की तुलना में लड़कियों का अनुपात कम होता गया। अतः दहेज प्रथा पर रोक लगाने के लिए सरकार को कानून बनाना पड़ा। इसके अनुसार दहेज लेना या देना अवैध घोषित कर दिया गया, परन्तु आज भी इस कानून को दृढ़ता से लागू करने की आवश्यकता है।

प्रश्न 3.
भारतीय संविधान की भूमिका लिखें।
उत्तर-
भारतीय संविधान को सर्वोच्च दस्तावेज़ माना गया है।

  1. सरकार में विशिष्ट पदों पर नियुक्ति से पूर्व व्यक्ति को संविधान की पालना की शपथ दिलाई जाती है।
  2. सभी राजकीय तथा अराजकीय संस्थाएँ संविधान के अनुसार ही कार्य करती हैं।
  3. न्यायपालिका को स्वतन्त्र एवं निष्पक्ष बनाया गया है। उसे संविधान की रक्षा के लिए बहुत से अधिकार दिए गए हैं। इनमें से एक महत्त्वपूर्ण अधिकार संविधान की रक्षा तथा व्याख्या का है।
  4. संविधान के अनुसार देश में पूर्ण लोकतन्त्रीय ढांचा स्थापित किया गया है। इसमें नागरिकों को बहुत से अधिकार दिए गए हैं। इनमें से सरकार की आलोचना करने का अधिकार बहुत ही महत्त्वपूर्ण है।

प्रश्न 4.
संविधान तथा कानून से आप क्या समझते हो ?
उत्तर-
संविधान संविधान एक मौलिक दस्तावेज़ है। यह सर्वोच्च है। ये उन नियमों का समूह है जिनके अनुसार देश का शासन चलाया जाता है। इसी के अनुसार राज्य तथा नागरिकों के आपसी सम्बन्ध निश्चित किए गए हैं। सभी राजकीय तथा अराजकीय संस्थाओं को संविधान के अनुसार ही कार्य करना पड़ता है।
कानून-कानून वे नियम हैं जो देश में शान्ति और व्यवस्था बनाये रखते हैं। इनका निर्माण केन्द्रीय तथा राज्य विधानपालिकाएं करती हैं। सभी नागरिकों के लिए देश के कानूनों का पालन करना अनिवार्य है। कानूनों को भंग करने पर दण्ड दिया जा सकता है।

प्रश्न 5.
कानून का अर्थ तथा इसकी भूमिका क्या है ?
उत्तर-
अर्थ-कानून अंग्रेजी भाषा के शब्द लॉ (Law) का अनुवाद है। Law (लॉ) शब्द टिऊटोनिक शब्द ‘लैग’ से निकला है। इसका अर्थ है-निश्चित। इस प्रकार ‘कानून’ शब्द का अर्थ है-निश्चित नियम।

कानून की भूमिका-सामाजिक जीवन में कानूनों का बहुत अधिक महत्त्व है। ये हमारे सामाजिक जीवन को नियन्त्रित करते हैं। इनके बिना हमारा सामाजिक जीवन सुचारु रूप से नहीं चल सकता। उदाहरण के लिए यदि स्कूल के नियमों (कानूनों) का पालन न किया जाए तो अनुशासनहीनता का वातावरण बन जाएगा। इसी प्रकार यदि कानून अपराधों को नियन्त्रित न करें, तो चारों ओर अराजकता फैल जाएगी और जन-जीवन सुरक्षित नहीं रह पायेगा।

प्रश्न 6.
नागरिक के अधिकार कौन-से हैं ? आलोचना के अधिकार की व्याख्या करें।
उत्तर-
संविधान द्वारा नागरिकों को जो अधिकार दिए गए हैं, उन्हें मूल अथवा मौलिक अधिकार कहते हैं। इन __ अधिकारों में निम्नलिखित अधिकार शामिल हैं-

  1. समानता का अधिकार
  2. स्वतन्त्रता का अधिकार
  3. शोषण के विरुद्ध अधिकार
  4. धार्मिक स्वतन्त्रता का अधिकार
  5. संस्कृति और शिक्षा का अधिकार
  6. संवैधानिक उपचारों का अधिकार।

आलोचना का अधिकार-आलोचना का अधिकार स्वतन्त्रता के अधिकार में शामिल है। इसका अर्थ है कि नागरिकों को अपने विचार व्यक्त करने की स्वतन्त्रता है। इसके अनुसार जब कोई सरकार लोगों के हितों के विरुद्ध कोई कानून बनाती है, तो लोग इसका विरोध कर सकते हैं।

PSEB 8th Class Social Science Solutions Chapter 24 संविधान तथा कानून

संविधान तथा कानून PSEB 8th Class Social Science Notes

  • संविधान – संविधान वह कानूनी दस्तावेज़ है जिसके अनुसार किसी देश का प्रशासन चलाया जाता है। यह देश का सर्वोच्च मौलिक कानून है।
  • भारत के संविधान का निर्माण – भारत का संविधान एक मसौदा कमेटी ने तैयार किया। इसके निर्माण में 2 वर्ष 11 महीने तथा 18 दिन लगे। यह 26 नवम्बर, 1949 को बनकर तैयार हुआ।
  • संविधान का लागू होना – भारत का संविधान 26 जनवरी, 1950 को लागू हुआ। 1930 में इसी दिन देश में पहली बार स्वतन्त्रता दिवस मनाया गया था।
  • कानून – कानून का अर्थ है-निश्चित नियम। कानून सामाजिक जीवन को नियमित करते हैं।
  • न्यायपालिका भारत की न्यायपालिका को स्वतन्त्र एवं निष्पक्ष बनाया गया है। यह देश के संविधान तथा कानूनों की रक्षा करती है।
  • मद्य निषेध – मद्य निषेध का अर्थ है मदिरापान पर कानूनी रोक। कई प्रान्तीय सरकारों ने मद्य निषेध लागू करने के लिए कानून बनाए, परन्तु वे पूर्ण रूप से सार्थक सिद्ध नहीं हुए।

PSEB 8th Class Social Science Solutions Chapter 8 आपदा प्रबन्ध

Punjab State Board PSEB 8th Class Social Science Book Solutions Geography Chapter 8 आपदा प्रबन्ध Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 8 Social Science Geography Chapter 8 आपदा प्रबन्ध

SST Guide for Class 8 PSEB आपदा प्रबन्ध Textbook Questions and Answers

I. नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर 20-25 शब्दों में दो :

प्रश्न 1.
आपदा किसे कहा जाता है ?
उत्तर-
मनुष्य को अपने जीवन में प्रकृति तथा अपने आप द्वारा पैदा किए गए कई खतरों का सामना करना पड़ा है। जब यह खतरे मनुष्य के लिए घातक बन जाते हैं, तो इन्हें आपदा कहते हैं।

प्रश्न 2.
‘प्राकृतिक आपदा’ मुख्य रूप से कौन-कौन से हैं ?
उत्तर-
मुख्य प्राकृतिक आपदा हैं- भूकम्प (भूचाल), ज्वालामुखी, सुनामी, बाढ़, चक्रवात, सूखा, भूस्खलन (१ का सरकना) तथा हिमस्खलन (बर्फ के तोदों का सरकना)।

प्रश्न 3.
‘आपदा प्रबन्धन’ विषय में क्या-क्या शामिल हैं ?
उत्तर-
‘आपदा प्रबन्धन’ का सम्बन्ध प्रकोपों से होने वाली हानि को कम करने से है। इस विषय में अग्रलि बातें शामिल हैं

  • आपदा आने से पहले की तैयारी
  • आपदा के समय बचाव तथा
  • आपदा के बाद समाज को फिर से जीवन देना।

प्रश्न 4.
भूचाल ( भूकम्प) से आपका क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
भूमि के हिलने की क्रिया को भूचाल या भूकम्प कहते हैं। यह हल्का भी हो सकता है और बहुत तीव्र भी।

प्रश्न 5.
ज्वालामुखी किसे कहते हैं ? इसकी किस्मों के नाम लिखो।
उत्तर-
धरती के भीतर बहुत अधिक गर्मी के कारण चट्टानें पिघली हुई अवस्था में हैं। ये धरती के किसी कमज़ोर भाग से लावे के रूप में बाहर आ जाती हैं। इस क्रिया को ज्वालामुखी कहा जाता है।
ज्वालामुखी की किस्में-ज्वालामुखी मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं-(1) क्रियाशील ज्वालामुखी (2) सुप्त ज्वालामुखी तथा (3) बुझे हुए ज्वालामुखी।

प्रश्न 6.
सुनामी कैसे पैदा होती है ?
उत्तर-
सुनामी ऊँची-ऊँची समुद्री लहरें होती हैं। ये भूकम्प, ज्वालामुखी विस्फोट तथा धरती के खिसकने से पैदा होती हैं। ये बहुत-ही विनाश करती हैं।

प्रश्न 7.
बाढ़ आने के मुख्य क्या कारण हैं ?
उत्तर-
बाढ़ आने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं
(1) अधिक वर्षा (2) तेज़ चक्रवात (3) बादलों का फटना (4) पानी के निकास का ठीक प्रबन्ध न होना (5) बांधों का टूटना (6) नदियों तथा दरियाओं के तल पर मिट्टी का जमाव (7) नदियों तथा दरियाओं के प्रभाव में आने वाले प्रदेशों में आवासों का निर्माण करना।

प्रश्न 8.
चक्रवात क्या होते हैं ? इन्हें किस-किस नाम से पुकारा जाता है ?
उत्तर-
वात तूफ़ान या तेज़ हवाएं होती हैं जिनकी गति 63 किमी० प्रति घंटा या इससे अधिक होती है। ये हवा के कम दबाव से पैदा होते हैं।
अन्य नाम- चक्रवातों को उत्तरी अमेरिका में ‘हरीकेन’, दक्षिण-पूर्वी एशिया में ‘टाईफून’ तथा भारत में आंधी या तूफ़ान कहा जाता है।

PSEB 8th Class Social Science Solutions Chapter 8 आपदा प्रबन्ध

प्रश्न 9.
‘भूमि खिसकने’ के कौन-कौन से कारण हो सकते हैं ?
उत्तर-
भूमि खिसकने के निम्नलिखित कारण हो सकते हैं(1) धरती की अन्दरूनी (आन्तरिक) हलचल (2) तेज़ वर्षा का होना (3) ज्वालामुखी क्रिया (4) खानें खोदना।

प्रश्न 10.
मानवीय प्रकोप किसे कहते हैं ?
उत्तर-
मानवीय प्रकोप वे प्रकोप होता है जो मनुष्य प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं पैदा करता है। यह काम नुष्य जान-बूझ कर अथवा अनजाने में करता है। बम धमाके तथा आतंकवादी हमले इसके उदाहरण हैं।

प्रश्न 11.
महामारी से आपका क्या भाव है ?
उत्तर-
जब कोई बीमारी बहुत अधिक फैल जाती है तथा लोगों को प्रभावित करती है, तो उसे महामारी कहते हैं। I, डेंगू, बुखार, पीला बुखार या दस्त जैसी बीमारियां कभी-कभी महामारी का रूप ले लेती हैं।

नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर 70-75 शब्दों में लिखो :

प्रश्न 1.
आपदाएं मानव को किस प्रकार प्रभावित करती हैं ?
उत्तर-
आपदाएं मानव जीवन को बहुत अधिक प्रभावित करती हैं –

  • इनके कारण जान-माल की भारी हानि होती है।
  • नागरिक सुविधाएं ठप्प पड़ जाती हैं जिससे जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है।
  • कई लोग अपनों से बिछुड़ जाते हैं।
  • खड़ी फ़सलें तथा पशु बह जाते हैं।
  • लाशों के गलने-सड़ने से महामारियां फैलती हैं। (6) वर्षों की उन्नति मिनटों में समाप्त हो जाती है।

प्रश्न 2.
भूचाल आने के कारण और संसार के प्रसिद्ध भूचाल क्षेत्र बताओ।
उत्तर-
कारण-भूचाल धरती की आन्तरिक हलचलों के कारण आते हैं। इन हलचलों से धरती की टैक टोनिक प्लेटें खिसक जाती हैं और भूकम्प तरंगें पैदा होती हैं। परिणामस्वरूप धरती हिलने लगती है जिसे भूचाल अथवा भूकम्प कहते हैं।
भूचाल क्षेत्र-

  • संसार के 2/3 भूचाल प्रशान्त महासागर के ‘ज्वाला चक्र’ (Ring of Fire) में आते हैं।
  • संसार के मुख्य पर्वतीय क्षेत्र, जैसे कि हिमालय तथा आल्पस भी भूकम्पग्रस्त क्षेत्र माने जाते हैं।
  • भारत के भूचालग्रस्त प्रदेशों में कश्मीर तथा पश्चिमी हिमालय, मध्य हिमाचल, उत्तर-पूर्वी भारत, सिन्धु-गंगा के मैदान, राजस्थान एवं गुजरात के प्रदेश तथा पूर्वी तथा पश्चिमी द्वीप-समूह शामिल हैं।

PSEB 8th Class Social Science Solutions Chapter 8 आपदा प्रबन्ध (1)

प्रश्न 3.
भूचाल आपदा प्रबन्धन में हमें किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
उत्तर-
भूचाल आपदा प्रबन्धन में हमें नीचे दी गई बातों का ध्यान रखना चाहिए-

  • भूचाल ग्रस्त प्रदेशों में भवनों के नक्शे तथा बनावट इस प्रकार की होनी चाहिए कि भूचाल आने पर उन्हें कोई हानि न पहुँचे। घरों तथा अन्य इमारतों का बीमा भी अवश्य होना चाहिए।
  • भूचाल आने पर भय या घबराहट का वातावरण पैदा नहीं होने देना चाहिए; बल्कि शान्ति रखकर दिमाग़ से क लेना चाहिए।
  • भूचाल आने पर यदि आप घर के अन्दर हों, तो बाहर नहीं भागना चाहिए, बल्कि बेड्, मेज, दरवाज़े जैसी कि कठोर वस्तु के बीच चले जाना चाहिए।
  • यदि भूचाल के समय बाहर हो तो किसी खुले स्थान पर चले जाना चाहिए। इमारतों, वृक्षों, बिजली के ता. तथा खम्बों से दूर रहना चाहिए।
  • हमें आपस में मिलकर भूचाल प्रभावित लोगों की सहायता करनी चाहिए। उन्हें मेडीकल तथा रहने की सुवि देने का प्रयास करना चाहिए।
  • मलबे में दबे लोगों को तेज़ी से निकालना चाहिए और घायलों को जल्दी से जल्दी अस्पताल पहुंच चाहिए।
  • भूकम्प से प्रभावित यातायात तथा संचार के साधनों को जितनी जल्दी हो सके फिर से चालू कर लेना चा
  • सरकार को चाहिए कि वह बेघर हुए लोगों को फिर से बसाने के लिए आवश्यक सुविधाएं दे।

प्रश्न 4.
ज्वालामुखी और सुनामी से बचाव के लिए क्या-क्या प्रबन्ध करना चाहिए ?
उत्तर-
ज्वालामुखी से बचाव-

  • ज्वालामुखी विस्फोट वाले स्थान के निकट घर या कोई और इमारत नहीं बनानी चाहिए।
  • ज्वालामुखी विस्फोट के लक्षण दिखाई देने पर वहां से बहुत दूर चले जाना चाहिए। इसके लिए यातायात के तीव्र साधनों को प्रयोग करना चाहिए।

PSEB 8th Class Social Science Solutions Chapter 8 आपदा प्रबन्ध (2)

  • हानि पहुँचने की स्थिति में सरकार को हर प्रकार की सहायता के लिए तैयार रहना चाहिए।

PSEB 8th Class Social Science Solutions Chapter 8 आपदा प्रबन्ध

सुनामी से बचाव-

  • सुनामी की सूचना मिलने पर समुद्र की ओर नहीं जाना चाहिए।
  • समुद्र में चल रहे जहाज़ों तथा नावों को वापिस बन्दरगाह पर आ जाना चाहिए।
  • मछुआरों को लहरें शान्त होने के बाद ही समुद्र में जाना चाहिए।
  • यदि लहरें बहुत तेज़ी से समुद्र तट की ओर आ रही हों, तो वहाँ बसे लोगों को वह स्थान छोड़कर दूर चले जाना चाहिए।
  • सभी को मिलकर मुसीबत में फंसे लोगों की सहायता करनी चाहिए।
  • सरकार को सुनामी की आपदा से निपटने के लिए हर समय तैयार रहना चाहिए।

प्रश्न 5.
सूखे से बचने के लिए कौन-कौन-से कदम उठाने चाहिएँ।
उत्तर-
सूखे से बचाव के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं-

  • पानी का प्रयोग सूझबूझ से करें। इसे व्यर्थ न बहने दें।
  • सूखाग्रस्त क्षेत्रों में अधिक-से-अधिक वृक्ष लगाएं। वृक्ष वर्षा लाने में सहायता करते हैं।
  • सूखाग्रस्त प्रदेश में ऐसी फ़सलें उगायें जिन्हें कम पानी की ज़रूरत होती हैं। मक्का, बाजरा, दालें आदि फसलें इसी प्रकार की फ़सलें हैं।

PSEB 8th Class Social Science Solutions Chapter 8 आपदा प्रबन्ध (3)

  • सरकार को चाहिए कि वह सूखाग्रस्त प्रदेशों में आसपास के अधिक पानी वाले क्षेत्रों से पानी पहुँचाये।
  • सूखाग्रस्त क्षेत्रों में वर्षा के पानी को तालाबों अथवा बांधों में इकट्ठा कर लेना चाहिए। इस पानी का प्रयोग ज़रूरत के समय किया जा सकता है।
  • सूखाग्रस्त क्षेत्रों में कृषि के स्थान पर दूसरे आर्थिक धन्धों को बढ़ावा देना चाहिए, ताकि अधिक पानी की समस्या न रहे।

प्रश्न 6.
कौन-कौन से उपाय हमें महामारी जैसी आपदा से बचा सकते हैं ?
उत्तर-

  • महामारी से बचने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि बीमारियों से ही बचा जाए। शुद्ध, साफ पानी तथा साफ़-सुथरा वातावरण हमें बीमारियों से बचा सकता है।
  • बीमारी फैलने पर डॉक्टरी सुविधाओं का उचित प्रबन्ध होना चाहिए। इसके लिए अस्पतालों में चिकित्सा की पूरी व्यवस्था होनी चाहिए।
  • शहरों के आसपास गन्दी बस्तियों को विकसित न होने दिया जाये।
  • शहरों, गांवों तथा स्कूलों में नियमित रूप से बीमारी की जांच होनी चाहिए ताकि महामारी के खतरे से बचा जाए।

PSEB 8th Class Social Science Solutions Chapter 8 आपदा प्रबन्ध (4)

PSEB 8th Class Social Science Solutions Chapter 8 आपदा प्रबन्ध

III. नीचे लिखे प्रश्नों का उत्तर लगभग 250 शब्दों में लिखो :

प्रश्न 1.
बाढ़ और चक्रवात जैसी आपदाओं से बचने के लिए हमें क्या-क्या उपाय करने चाहिएँ ? विस्तार सहित लिखिए।
उत्तर-
बाढ़ तथा चक्रवात जैसी आपदाओं से बचने के लिए निम्नलिखित उपाय किये जाने चाहिएँ- ‘.
बाढ़-

  • बाढ़ग्रस्त प्रदेशों में लोगों को समय-समय पर मौसम विभाग से जानकारी लेते रहना चाहिए। यदि खतर अधिक हो तो लोगों को अपना स्थान अस्थायी रूप से छोड़ देना चाहिए तथा किसी सुरक्षित स्थान पर चले जाना चाहिए
  • बाढ़ आने से पहले लोगों को अपना सामान किसी ऊँचे स्थान पर अथवा छत पर ढक कर रख देना चाहिए
  • बाढ़ के समय पानी को उबाल कर ही पीना चाहिए।
  • बाढ़ में फंसे लोगों को सेना की सहायता से हेलीकाप्टरों द्वारा बाहर निकालने का प्रयास करना चाहिए।
  • सरकार को चाहिए कि वह बाढ़ प्रभावित लोगों तक खाने-पीने का सामान तथा आवश्यक दवाइयाँ पहुँचाये
  • बाढ़ से बेघर हुए लोगों को रहने का स्थान दिया जाये।
  • बाढ़ के बाद फैलने वाली बीमारियों तथा महामारियों से बचाव के लिए चिकित्सा सुविधाओं का उचित प्रब होना चाहिए।
  • सभी लोगों का यह कर्त्तव्य है कि वे बाढ़ प्रभावित लोगों की हर सम्भव सहायता करें।
  • बाढ़ों के वेग को कम करने के लिए अधिक-से-अधिक वृक्ष लगाने चाहिएँ।

PSEB 8th Class Social Science Solutions Chapter 8 आपदा प्रबन्ध (5)

चक्रवात-मनुष्य के लिए चक्रवातों को रोक पाना सम्भव नहीं है। फिर भी निम्नलिखित उपायों द्वारा चक्रवातों से होने वाली हानि को कम किया जा सकता है

  • समुद्र तट के निकट कच्चे घर अथवा झोंपड़ियां नहीं बनानी चाहिएँ।
  • चक्रवातों से प्रभावित लोगों को बड़े-बड़े भवनों, स्कूलों तथा अन्य सार्वजनिक इमारतों में शरण देनी चाहिए।
  • चक्रवातों का खतरा होने पर जहाजों, नावों तथा मछुआरों को समुद्र में नहीं जाना चाहिए।
  • चक्रवात प्रभावित क्षेत्रों में ऐसे मकान बनाये जाने चाहिएँ जो चक्रवातों की तेज़ गति का सामना कर सकें।
  • चक्रवातों के कारण आने वाली बाढ़ों से बचाव के लिए बाढ़-विरोधी पग उठाने चाहिएं।
  • समुद्र तट के साथ चक्रवातों की उलटी दिशा में वृक्षों की पंक्तियां लगा देनी चाहिए। इस प्रकार चक्रवात के वेग को कम किया जा सकता है।
  • चक्रवातों के आने की सूचना लगातार प्राप्त करते रहना चाहिए तथा उनसे बचाव के लिए दिए गए सुझावों का पालन करते रहना चाहिए।
  • सरकार की ओर से चक्रवातों की आपदा से निपटने तथा लोगों की सहायता के लिए उचित प्रबन्ध होना चाहिए।

प्रश्न 2.
मानवीय आपदा क्या हैं ? किन्हीं दो मानवीय आपदाओं के ‘आपदा प्रबन्धन’ का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।
उत्तर-
कुछ आपदा मनुष्य प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं उत्पन्न करता है। यह काम मनुष्य जानबूझ कर या अनजाने में करता है। इन आपदाओं को मानवीय आपदा कहते हैं। बम धमाके तथा आतंकी हमले और बांधों का टूटना मानवीय आपदाओं के उदाहरण हैं। दो मानवीय आपदाओं के ‘आपदा प्रबन्धन’ का वर्णन इस प्रकार हैं-

1. बम धमाके आतंकी हमले-बम देश की बाहरी शत्रु से रक्षा के लिए बनाये गये थे। परन्तु कुछ लोग इनका प्रयोग देश में तबाही मचाने के लिए करते हैं। कई आतंकवादी गुट देश में अशान्ति फैलाने का काम करते हैं। फलस्वरूप कई निर्दोष लोग मारे जाते हैं। अन्य प्रभावित लोगों को भी बम धमाकों तथा आतंकी हमलों के कारण तरह-तरह के कष्ट झेलने पड़ते हैं। ये हमले देश के विकास में भी बाधा डालते हैं। 11 सितम्बर, 2001 को अमेरिका के शहरों पर हुए आतंकी हमलों में हज़ारों लोग मारे गए थे और भारी आर्थिक क्षति हुई थी।

बचाव-

  • सरकारों को राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर बातचीत द्वारा इन हमलों से निपटने की योजना बनानी चहिए।
  • लावारिस पड़ी किसी भी वस्तु को हाथ नहीं लगाना चाहिए। हो सकता है कि इनमें बम हो। इनकी सूचना तुरन्त पुलिस को देनी चाहिए।
  • बम धमाकों या आतंकी हमले के समय अफरा-तफ़री तथा भय का वातावरण नहीं बनने देना चाहिए, बल्कि र्य से काम लेना चाहिए।
  • पुलिस तथा गुप्तचर विभाग को आतंकी गतिविधियों पर कड़ी नज़र रखनी चाहिए। भीड़ भरे स्थानों पर पर्याप्त कसी की ज़रूरत होती है।
  • पकड़े गए अपराधियों को कानून के अनुसार कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
  • आतंकी हमलों में घायल लोगों को जितनी जल्दी हो सके अस्पताल पहुँचाना चाहिए।
  • कानून तथा सुरक्षा की व्यवस्था बनाये रखनी चाहिए।

2. बांधों का टूटना-बांधों में बहुत अधिक पानी इकट्ठा रहता है। इसलिए किसी बांध के टूट जाने पर बाढ़ से भी खतरनाक स्थिति पैदा हो जाती है। यदि बांध बहुत बड़ा हो तो संकट और अधिक बढ़ जाता है। मानव जीवन अस्तव्यस्त हो जाता है। पशु तथा खड़ी फ़सलें बह जाती हैं। इस आपदा से बचाव के लिए बाढ़ों से बचाव वाले उपाय करने चाहिएँ। सरकार को लोगों के जान-माल की सुरक्षा के लिए विशेष प्रबन्ध करने चाहिएं।

PSEB 8th Class Social Science Guide आपदा प्रबन्ध Important Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Multiple Choice Questions)

(क) रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए :

1. भूकम्प (भूचाल). ज्वालामुखी, सुनामी, बाढ़ आदि …….. आपदाएं हैं।
2. बम धमाके, आतंकवाद, प्रदूषण आदि ………. आपदाएं हैं।
3. भूमि के हिलने की क्रिया को ………… कहते हैं।
4. हैजा, डेंग, पीला बुखार या दस्त जैसी बीमारियां जब अधिक लोगों को प्रभावित करती हैं तो वे ………..कहलाती हैं।
5. भूकम्प की तरंगे पृथ्वी के भीतर जिस विशेष स्थान पर उत्पन्न होती है, उस स्थान को भूकम्प का ……………. कहते हैं।
6. लावा के पृथ्वी पर आने की क्रिया को ………. कहा जाता है।
उत्तर-

  1. प्राकृतिक
  2. मानवीय
  3. भूचाल या भूकम्प
  4. महामारी
  5. उद्गम-केंद्र
  6. ज्वालामुखी उद्गार।

PSEB 8th Class Social Science Solutions Chapter 8 आपदा प्रबन्ध

(ख) सही कथनों पर (✓) तथा गलत कथनों पर (✗) का निशान लगाएं :

1. जब खतरे मनुष्य के लिए घातक बन जाते हैं तो इन्हें आपदा कहते हैं।
2. भूमि के हिलने की क्रिया को ज्वालामुखी कहते हैं।
3. रिक्टर स्केल पर 8 से अधिक तीव्रता वाले भूचाल खतरनाक माने जाते हैं।
4. मानवीय प्रकोप वह प्रकोप होता हैं जो मनुष्य प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं पैदा करता है।
5. यदि वर्षा प्राप्ति की आशा रखने वाले किसी स्थान पर लम्बी अवधि तक अंधिक वर्षा का मौसम बना रहे तो उसे सूखा कहते हैं।
6. सुनामी ऊँची-ऊँची समुद्री लहरें होती हैं।
उत्तर-

(ग) सही विकल्प चुनिए:

प्रश्न 1.
उत्तरी अमरीका में चक्रवात को किस नाम से पुकारा जाता है ?
(i) आंधी
(ii) तूफ़ान
(iii) हरीकेन
(iv) टाईफून।
उत्तर-
हरीकेन

प्रश्न 2.
निम्नलिखित में से कौन-सी मानवीय आपदा है ?
(i) भूचाल
(ii) बम धमाके
(iii) ज्वालामुखी
(iv) सुनामी।
उत्तर-
बम धमाके

प्रश्न 3.
जल संसाधन की कमी से जुड़ी आपदा है
(i) ज्वालामुखी
(ii) सूखा
(iii) भूमि का खिसकना
(iv) महामारी।
उत्तर-
सूखा।

(घ) सही जोड़े बनाइए :

1. भूचाल – अधिक वर्षा
2. ज्वालामुखी – तूफ़ान
3. चक्रवात – रिक्टर पैमाना
4. बाढ़ – लावा।
उत्तर-

  1. रिक्टर पैमाना
  2. लावा,
  3. तूफ़ान,
  4. अधिक वर्षा ।

अति छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
किस तीव्रता वाले भूचाल खतरनाक माने जाते हैं ?
उत्तर-
रिक्टर स्केल पर 8 से अधिक तीव्रता वाले भूचाल खतरनाक माने जाते हैं।

प्रश्न 2.
यू० एस० ए० में सबसे बड़ा आतंकवादी हमला कब तथा किन दो स्थानों पर हुआ ?
उत्तर-
11 सितम्बर, 2001 को न्यूयॉर्क शहर तथा पेंटागन पर।।

प्रश्न 3.
भूचाल के उदगम-केन्द्र तथा अभिकेन्द्र की परिभाषा दीजिए।
उत्तर-
उदगम केन्द्र-भूकम्प की तरंगें पृथ्वी के भीतर किसी विशेष स्थान पर उत्पन्न होती हैं। इस स्थान को उद्गम-केन्द्र कहते हैं।
2. अधिकेन्द्र-भूकम्प की तरंगें भूमि के भीतर उत्पन्न होती हैं। इस भूकम्पीय उद्गम केन्द्र के ठीक ऊपर भू-पृष्ठ पर स्थित बिन्दु को अभिकेन्द्र कहते हैं।

प्रश्न 4.
‘भूचाल’ से क्या हानि होती है ?
उत्तर-

  • भूचाल से पृथ्वी में दरारें पड़ जाती हैं। मकान, सड़कें, पुल, रेलमार्ग आदि टूट जाते हैं। कई लोग मारे जाते हैं।
  • पानी, बिजली तथा गैस की आपूर्ति ठप्प पड़ जाती है।

प्रश्न 5.
26 दिसंबर, 2004 की सुनामी ने कितने देशों को प्रभावित किया और इससे लगभग कितने लोग मारे गये ?
उत्तर-
26 दिसंबर, 2004 की सुनामी ने दक्षिणी और दक्षिण-पूर्वी एशिया तथा अफ्रीका के 11 देशों को प्रभावित केया। इससे 105 लाख से भी अधिक लोग मारे गए।

प्रश्न 6.
‘बाढ़’ किसे कहते हैं ?
उत्तर-
जब नदियों तथा नहरों का जल इनके किनारे तोड़कर आस-पास के क्षेत्र में फैल जाता है, तो उसे बाढ कहते हैं।

PSEB 8th Class Social Science Solutions Chapter 8 आपदा प्रबन्ध

प्रश्न 7.
चक्रवात अथवा उष्ण चक्रवात क्या होते हैं और ये कैसे बनते हैं ?
उत्तर-
चक्रवात या तूफान, एक प्रकार की तेज़ हवाएं होती हैं जिनकी गति 63 किलोमीटर प्रति घण्टा या इससे अधिक होती है। चक्रवात वायु के कम दबाव के कारण बनते हैं। अधिकतर चक्रवात भूमध्य रेखा से 5° से 20° उत्तर था दक्षिण में पैदा होते हैं।

प्रश्न 8.
सूखा किसे कहते हैं ?
उत्सर-
यदि वर्षा प्राप्ति की आशा रखने वाले किसी स्थान पर लम्बी अवधि तक शुष्क मौसम की स्थिति बनी रहे, उसे सूखा कहते हैं। सूखा कभी-कभी वर्षों तक जारी रहता है। सूखे से जल स्रोत तथा वनस्पति सूख जाती है और टी में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ जाती हैं।

छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
रिक्टर स्केल तथा मरकाली स्केल में क्या अन्तर हैं ?
उत्तर-
रिक्टर स्केल-यह भूचाल की तीव्रता को मापने का खुला पैमाना है। इससे पता चलता है कि भूचाल का एक झटका कितना तीव्र है। रिक्टर पैमाने में 8 की तीव्रता वाला भूचाल 4 की तीव्रता वाले पैमाने से बहुत अधिक तीव्र होता है।
इसके विपरीत मरकाली स्केल भूचाल से हुई हानि को बताता है। इसे ‘कोई हानि नहीं’ से लेकर ‘सब कुछ नष्ट हो गया’ तक 12 वर्गों में बाँटा गया है।

प्रश्न 2.
ज्वालामुखी की किस्मों की संक्षिप्त जानकारी दो।
उत्तर-ज्वालामुखी की तीन किस्में हैं-क्रियाशील ज्वालामुखी, सुप्त ज्वालामुखी तथा बुझा हुआ ज्वालामुखी।

  • क्रियाशील ज्वालामुखी-ऐसे ज्वालामुखी में से कभी-कभी लावा निकलता रहता है।
  • सुप्त ज्वालामुखी-ऐसा ज्वालामुखी काफी समय से शान्त होता है। इसमें से पिछले इतिहास में इनमें से कभी लावा निकला होता है।
  • बुझा हुआ ज्वालामुखी-बुझा हुआ ज्वालामुखी वह होता है जिसके चिन्ह तो दिखाई देते हैं, परन्तु पिछले इतिहास में उनके फटने का कोई रिकार्ड नहीं मिलता।

प्रश्न 3.
चक्रवात किस प्रकार आपदा का रूप धारण कर लेते हैं ? इनसे होने वाली हानियों का वर्णन करो
उत्तर-
जब चक्रवातों की गति 100 किलोमीटर प्रति घण्टा से बढ़ जाती है तो ये आपदा का रूप धारण कर लेते हैं तथा आस-पास के क्षेत्रों में भारी विनाश करते हैं

  • बिजली तथा टेलीफोन की तारों के खम्बे भी गिर जाते हैं।
  • वृक्ष जड़ों से उखड़कर सड़कों पर गिर जाते हैं और यातायात ठप्प हो जाता है।
  • घास-फूस के कच्चे घरों तथा कमज़ोर मकानों को काफी क्षति पहुंचती है।
  • नावों और समुद्री जहाजों को भी काफी हानि होती है।
  • बहुत-से मनुष्य तथा पशु चक्रवातों की लपेट में आकर मारे जाते हैं।
  • खेतों में खड़ी फसलें ढह जाती है। जिससे कृषकों को हानि होती है।

प्रश्न 4.
पानी के बांधों या डैमों का टूट जाने की आपदा तथा बचाव पर नोट लिखो।।
उत्तर-
बांधों अथवा डैमों में पानी की मात्रा बहुत अधिक होती है। इनके टूटने से पानी तेजी से बहने लगता है और बाढ़ की स्थिति पैदा हो जाती है। यदि डैम बहुत बड़े हों तो आपदा और भी विनाशकारी हो जाती है जिससे मानव जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। इसलिए बाढ़ों से निपटने के लिए सभी प्रबन्ध करने चाहिये। लोगों की जान और मा की सुरक्षा करना सरकार का मुख्य कार्य बनता है।

PSEB 8th Class Social Science Solutions Chapter 8 आपदा प्रबन्ध (6)

प्रश्न 5.
औद्योगिक दुर्घटनाओं सम्बन्धी आपदा क्या होती है ?
उत्तर-
उद्योगों में बड़ी-बड़ी मशीनें, रासायनिक पदार्थ, कई प्रकार के ज्वलनशील पदार्थ तथा ज़हरीली गैसों का प्रयोग होता है। इनका प्रयोग करते समय कभी-कभी दुर्घटनाएं भी हो जाती हैं। कई बार तो ये दुर्घटनाएं इतनी विशाल तथा भयंकर होती हैं कि इन्हें भुला पाना भी कठिन हो जाता है। भोपाल गैस लीक की विनाशकारी घटना अभी भी हमारे मन में ताज़ा है। इस दुर्घटना में हज़ारों लोगों की मृत्यु हो गई थी और बहुत-से बच्चे अभी भी अपंग पैदा हो रहे हैं। कई बार उद्योगों में गैस सिलैण्डर फटने से आग भी लग जाती है या कोई बड़ी दुर्घटना घटित हो जाती है।

प्रश्न 6.
औद्योगिक दुर्घटनाओं से बच-बचाव कैसे किया जा सकता है ?
उत्तर-
औद्योगिक दुर्घटनाओं से बच-बचाव के लिए उद्योगों में आवश्यक प्रबन्ध होने चाहिएँ-

  1. आग बुझाने वाले यन्त्र हर समय तैयार रहने चाहिये।
  2. दुर्घटना के समय उद्योगों में श्रमिकों तथा अन्य कर्मचारियों को बाहर निकालने के तीव्र तथा उचित प्रबन्ध होने चाहियें।
  3. आतंक का वातावरण नहीं बनने देना चाहिये, बल्कि शान्त रहकर बचाव कार्य को पूरा करना चाहिए।
  4. प्रभावित लोगों को शीघ्र ही डॉक्टरी सहायता देनी चाहिये।
  5. उद्योगों में काम करने वाले कर्मियों को बीमा की सुविधा भी उपलब्ध होनी चाहिये।
  6. सरकार को चाहिए कि वह प्रभावित लोगों को हर सम्भव सहयोग तथा सहायता दे।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न-
भूमि तथा बर्फ के तोदों के सरकने की आपदाओं का वर्णन करते हुए, उनसे बच-बचाव के उपाय लिखें।
उत्तर-
अन्य प्राकृतिक आपदाओं की तरह भूमि सरकने (खिसकने) तथा बर्फ के तोदों के सरकने की आपदाएं भी कभी-कभी काफ़ी विनाशकारी होती हैं। इनका वर्णन इस प्रकार है

1. भूमि का खिसकना-भूमि के खिसकने का अर्थ है पृथ्वी को गुरुत्वाकर्षण शक्ति के कारण चट्टानों तथा मिट्टी का ढलान से नीचे की ओर खिसकना। इसमें भूमि एकदम और तेज़ी से नीचे की ओर सरकती है। यदि पहाड़ की ढलान तेज़ हो तो भूमि का नीचे की ओर सरकना (खिसकना) और भी तेज़ हो जाता है।
PSEB 8th Class Social Science Solutions Chapter 8 आपदा प्रबन्ध (7)
कारण-भूमि सरकने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे-

  1. पृथ्वी की भीतरी हलचल
  2. तेज़ वर्षा
  3. ज्वालामुखी क्रिया
  4. भूचाल का आना
  5. खानों का खोदना
  6. वनों को काटने से भूमि का अपरदन होने तथा भूमि के नंगा हो जाने से भी खिसकने की क्रिया बढ़ जाती है।

हानियां-

  1. भूमि के सरकने से बहुत-सा क्षेत्र मिट्टी के नीचे दब जाता है।
  2. सड़कों और वनस्पति को बहुत हानि होती है।
  3. सरकती हुई भूमि की लपेट में आने वाली मोटर गाड़ियों, पशुओं तथा मनुष्यों को भारी क्षति का सामना करना पड़ता है।

भूमि सरकने (खिसकने) से बचाव-,

  1. जिन क्षेत्रों में भूमि खिसकने की क्रिया अधिक होती है, उनकी पहचान करके वहां घर और इमारतें न बनाई जायें।
  2. वनस्पति हीन पर्वतों की ढलानों अर्थात् नंगी चट्टानों पर भूमि का सरकना अधिक होता है। इसलिए वनों की कटाई पर पाबंदी लगाई जाये और वहां घास तथा पेड़-पौधे आदि लगवाये जायें।
  3. ढलानों से बहने वाला पानी भूमि सरकने में सहायक होता है। इसलिए इस जल के निकास की उचित व्यवस्था की जाये।
  4. ऐसे क्षेत्रों में बिजली तथा टेलीफोन की तारों और जल पाइपों को या तो पृथ्वी के भीतर डाला जाए या ऊपर लटकाया जाये, ताकि भूमि सरकने से ये टूट न जायें।
  5. पहाड़ी ढलानों पर वृक्षों को लाइनों में लगाया जाये, ताकि भूमि सरकने की गति को कम किया जा सके।
  6. पर्वतों के साथ-साथ सड़कों के दोनों ओर ऊंची-ऊंची दीवारें (Retaining Walls) बना देनी चाहिए ताकि सरकती हुई मिट्टी सड़क पर आने से पहले ही ढक जाए।

PSEB 8th Class Social Science Solutions Chapter 8 आपदा प्रबन्ध

2. बर्फ के तोदों का खिसकना-पर्वतों की ढलानों से बर्फ का खिसकना मानव के लिए काफी कष्टदायक सिद्ध होता है। इससे सड़कें, इमारतें तथा मोटर गाड़ियों को बहुत क्षति पहुंचती है। यदि समस्या बढ़ जाये तो जान माल की भारी हानि होती है।
यह आपदा ऊंचे पहाड़ों पर बर्फ पड़ने से पैदा होती है। जब पहाड़ों पर बर्फ का जमाव बढ़ जाए, तो बर्फ के ऊपरी ढेर फिसल कर पर्वत की ढलान पर सरकने लगते हैं।
बर्फ के तोदों से बचाव-

  • लोगों को बर्फ से खिसकने के सम्बन्ध में पूरा ज्ञान होना चाहिये। यदि ऐसा होगा तो ही वे अपने आप को बचा सकेंगे।
  • ऐसे स्थानों में अधिक-से-अधिक वृक्ष लगाने चाहियें। वृक्ष बर्फ के खिसकने में रुकावट का काम करते हैं।
  • बर्फ के खिसकने वाली पर्वतीय ढलानों पर बर्फ के तोदों के मार्ग में बाधा डालने के लिए इस प्रकार का निर्माण किया जाये जिससे तोदों की तीव्रता तथा दिशा बदल जाये। इस प्रकार इससे होने वाली हानि को कम किया जा सकता है।
  • यदि बर्फ सड़कों पर गिर जाये तो यह आवागमन को रोक देती है। इस बर्फ को बर्फ काटने वाली मशीन या ‘हल्के धमाकों से सड़क से हटाया जा सकता है इन्हें बुलडोजर की सहायता से भी हटाया जा सकता है।
  • बर्फ के खिसकने के प्रकोप से प्रभावित हुए लोगों के लिए आवश्यक सहायता तथा अन्य सुविधाएं प्रदान करवाना सरकार की जिम्मेवारी बन जाती है।

आपदा प्रबन्ध PSEB 8th Class Social Science Notes

  • आपदा – खतरे जब भयंकर दुर्घटनाओं का रूप धारण कर लेते हैं तो उन्हें आपदा का नाम दिया जाता है। ये दो प्रकार के होते हैं-प्राकृतिक तथा मानवीय।
  • आपदा प्रबन्धन – यह एक महत्त्वपूर्ण विषय है जो प्राकृतिक या मानवीय प्रकोपों से उत्पन्न विनाश को कम करने में हमारी सहायता करता है।
  • प्राकृतिक आपदा – सुनामी, भूचाल, ज्वालामुखी विस्फोट, चक्रवात, बाढ़, सूखा आदि।
  • मानवीय आपदा – बम धमाके, आतंकवाद, प्रदूषण, बांधों का टूटना, औद्योगिक दुर्घटनाएं, महामारी आदि।
  • बचाव के उपाय – कुछ प्राकृतिक आपदाओं का पूर्व अनुमान लगाया जा सकता है। अतः उनके घटित होने से पहले ही बचाव के उचित उपाय कर लेने चाहिएं। परन्तु जिनका पूर्व अनुमान नहीं लगाया जा सकता, उनके घटित होने पर ही बचाव के उचित पग उठा कर हानि को कम किया जा सकता है।
  • भारत में आपदा प्रबन्धन अथॉरिटीज़ और संस्थाएं – भारत में बहुत-सी संस्थाएं आपदा प्रबन्धन के छोटे से लेकर इंजीनियरिंग तक के कोर्स करवाती है और आपदा प्रबन्धन के बारे में जानकारी भी उपलब्ध करवाती हैं।
  • इनमें से कुछ ये हैं(1) सैंटरल आपदा प्रबन्धन अथॉरिटी, नई दिल्ली (2) आपदा प्रबन्धन नेशनल केन्द्र, नई दिल्ली (3) भूचाल इंजीनियरिंग सूचना केन्द्र आई० आई० टी० कानपुर, उत्तर प्रदेश (4) आपदा प्रबन्धन संस्था, भोपाल, मध्य प्रदेश (5) इन्दिरा गान्धी. ओपन यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली (6) सैंटरल बोर्ड ऑफ सैकेण्डरी एजूकेशन, नई दिल्ली।

PSEB 8th Class Social Science Solutions Chapter 7 मानवीय संसाधन

Punjab State Board PSEB 8th Class Social Science Book Solutions Geography Chapter 7 मानवीय संसाधन Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 8 Social Science Geography Chapter 7 मानवीय संसाधन

SST Guide for Class 8 PSEB मानवीय संसाधन Textbook Questions and Answers

I. नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर 20-25 शब्दों में दो :

प्रश्न 1.
मानवीय संसाधनों से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
मानवीय संसाधनों से अभिप्राय किसी देश की जनसंख्या से है। मानवीय संसाधनों को गिनती तथा गुणवत्ता दोनों पक्षों से देखा जाता है। किसी देश की उन्नति का आधार गुणवत्ता वाली जनसंख्या होती है।

प्रश्न 2.
जनगणना किसे कहते हैं और यह कितने वर्षों के बाद की जाती है?
उत्तर-
किसी देश की जनसंख्या की गिनती को जनगणना कहते हैं। जनगणना में लोगों की गिनती के साथ-साथ उनके कुछ सामाजिक तथा आर्थिक पक्षों की जानकारी भी प्राप्त की जाती है। जनगणना प्रत्येक 10 वर्ष के बाद होती है।

प्रश्न 3.
लिंग अनुपात क्या होता है ? इसका फार्मूला भी लिखो।
उत्तर-
लिंग आधारित जनसंख्या के अनुपात को लिंग अनुपात कहते हैं। इसमें प्रति 1000 पुरुषों के पीछे स्त्रियों की गिनती की जाती है। लिंग अनुपात का फार्मूला यह है –
PSEB 8th Class Social Science Solutions Chapter 7 मानवीय संसाधन (1)

प्रश्न 4.
‘कन्या भ्रूण हत्या’ किसे कहते हैं ?
उत्तर-
कुछ लोगों द्वारा लड़की को जन्म लेने से पहले ही मां के पेट में मार दिया जाता है। इसे ‘कन्या भ्रूण हत्या’ कहते हैं।

प्रश्न 5.
जनसंख्या को मुख्य रूप से कौन-कौन से आयु गुटों में बांटा जा सकता है ?
उत्तर-
जनसंख्या को मुख्य रूप से तीन आयु गुटों में बांटा जा सकता है(1) 0-14 वर्ष (2) 15-64 वर्ष (3) 65 वर्ष या अधिक।

PSEB 8th Class Social Science Solutions Chapter 7 मानवीय संसाधन

प्रश्न 6.
साक्षरता किसे कहते हैं ?
उत्तर-
जनसंख्या में शिक्षित लोगों की दर को साक्षरता कहते हैं। उदाहरण के लिए भारत में साक्षरता की दर 73% है अर्थात् प्रति 100 लोगों में 73 लोग ही पढ़े-लिखे हैं।

प्रश्न 7.
विकासशील देशों में लोगों को पढ़ने का अवसर क्यों नहीं मिलता ?
उत्तर-
विकासशील देशों में संसाधनों की कमी है जिसके कारण लोगों की पहली आवश्यकता रोटी कमाना है। इसलिए विकासशील देशों में लोगों को पढ़ने का अवसर नहीं मिलता।।

प्रश्न 8.
भारत में प्राइमरी तथा अपर-प्राइमरी स्कूलों की संख्या कितनी है ?
उत्तर-
भारत में लगभग 8.5 लाख प्राइमरी स्कूल तथा अपर-प्राइमरी स्कूल हैं।

प्रश्न 9.
प्राकृतिक वृद्धि दर क्या होती है ? उदाहरण बताकर वर्णन कीजिए।
उत्तर-
जन्म दर तथा मृत्यु दर के अन्तर को प्राकृतिक वृद्धि दर कहते हैं। यदि जन्म दर मृत्यु दर से अधिक हो तो प्राकृतिक वृद्धि दर सकारात्मक (+) होती है। विपरीत स्थिति में प्राकृतिक वृद्धि दर नकारात्मक (-) होती है। .

प्रश्न 10.
सर्वशिक्षा अभियान (कार्यक्रम) का मुख्य उद्देश्य क्या है ?
उत्तर-
सर्वशिक्षा अभियान का मुख्य उद्देश्य 6 से 14 वर्ष तक के सभी बच्चों को आरम्भिक स्तर की शिक्षा दिलवाना है।

प्रश्न 11.
जनसंख्या घनत्व किसे कहते हैं ?
उत्तर-
किसी प्रदेश या देश के एक वर्ग किलोमीटर अथवा एक वर्गमील क्षेत्र में औसत रूप से रहने वाले लोगों की संख्या को जनसंख्या का घनत्व कहते हैं। इसे ज्ञात करने का फार्मूला इस प्रकार है-
PSEB 8th Class Social Science Solutions Chapter 7 मानवीय संसाधन (2)

II. नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर 70-75 शब्दों में दीजिए :

प्रश्न 1.
मानवीय साधनों के महत्त्व पर एक नोट लिखो।
उत्तर-
मानवीय साधन बहुत ही महत्त्वपूर्ण हैं। अन्य साधनों को मनुष्य ही अपनी कुशलता द्वारा उपयोगी बनाता है। अब उसकी शक्ति उसकी गुणवत्ता से मापी जाती है। जिस देश में जितने अधिक लोग उच्च शिक्षा प्राप्त, कुशल तथा प्रशिक्षित होते हैं, वह देश उतनी अधिक उन्नति करता है।
उदाहरण के लिए जापान, ताईवान तथा स्विट्ज़रलैंड जैसे छोटे-छोटे देशों में प्राकृतिक साधनों की कमी है। फिर भी उन्होंने अपने मानवीय साधनों के बल पर बहुत अधिक उन्नति की है।

प्रश्न 2.
लिंग अनुपात क्या है और इसके कम होने के क्या कारण हैं ?
उत्तर-
जनसंख्या में प्रति हजार पुरुषों के पीछे स्त्रियों की संख्या को लिंग अनुपात कहते हैं। भारत में लिंग अनुपात कम है अर्थात् हमारे देश में पुरुषों की तुलना में स्त्रियों की संख्या कम है। इसके निम्नलिखित कारण हैं

  • महिलाओं में मृत्यु दर अधिक है।
  • कन्याओं की भ्रूण हत्या की जाती है।
  • समाज में महिलाओं को निम्न स्थान प्राप्त है।
  • परिवार में बालिकाओं की उपेक्षा की जाती है। उन्हें उचित आहार नहीं दिया जाता इसलिए वे कुपोषण का शिकार हो जाती हैं।
  • बालिकाओं को शिक्षा तथा अन्य सविधाओं से वंचित रखा जाता है।
  • समाज में पुत्र को प्राथमिकता दी जाती है। उदाहरण के लिए यदि किसी छोटे परिवार में पहला लड़का पैदा हो जाता है तो दूसरे बच्चे को जन्म ही नहीं दिया जाता।
  • कई लड़कियां विवाह के पश्चात् दहेज की बलि चढ़ा दी जाती हैं।

प्रश्न 3.
भारत में 0-14 वर्ष के आयु गुट प्रतिशत (%) में कितने हैं ? सरकार को भिन्न-भिन्न आयु गुटों के लिए क्या यत्न करने चाहिएं ?
उत्तर-
भारत में 0-14 वर्ष का आयु गुट 30% है। सरकार को विभिन्न आयु गुटों के लिए निम्नलिखित यत्न करने चाहिएं।

  1. 0–14 वर्ष का आयु गुट बच्चों का गुट है। उनके लिए शिक्षा तथा स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था करनी चाहिए। उन्हें स्वच्छ मनोरंजन तथा खेलकूद के साधन जुटाने चाहिएं।
  2. 14-64 वर्ष का आयु गुट काम करने वाला गुट है। सरकार को उन्हें रोजगार के अवसर प्रदान करने चाहिएं।
  3. 65 वर्ष या इसके अधिक आयु गुट के लोगों को खाने-पीने तथा स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं देनी चाहिएं। उनके लिए पेंशन का भी प्रबंध करना चाहिए।

प्रश्न 4.
जनसंख्या परिवर्तन कैसे होता है ? विस्तार से समझाइए। .
उत्तर-
किसी स्थान की जनसंख्या स्थिर नहीं रहती। इसमें परिवर्तन आता रहता है। यह परिवर्तन मुख्यतः दो तरीकों से होता है। (1) जन्म दर तथा मृत्यु दर में परिवर्तन (2) आवास एवं प्रवास।

  1. जन्म दर तथा मृत्यु दर में परिवर्तन-जन्म दर बढ़ने पर जनसंख्या बढ़ जाती है। इसके विपरीत मृत्यु दर बढ़ने पर जनसंख्या में कमी आ जाती है। इन दोनों दरों के अंतर को प्राकृतिक वृद्धि दर कहते हैं ! यह दर जनसंख्या में हुए परिवर्तन को दर्शाती है।
  2. आवास तथा प्रवास-काम आदि की तलाश में कुछ लोग विदेश में जाकर रहने लगते हैं या एक स्थान छोड़ कर किसी दूसरे स्थान पर बस जाते हैं। इस प्रकार जहां से लोग जाते हैं, वहां की जनसंख्या कम हो जाती है। दूसरी ओर जहां जाकर लोग बसते हैं, वहां की जनसंख्या बढ़ जाती है।

प्रश्न 5.
भारत में जनसंख्या वितरण पर नोट लिखें।
उत्तर-
भारत में जनसंख्या का वितरण एक समान नहीं है। भारत का क्षेत्रफल 3.28 मिलियन वर्ग किलोमीटर है। 2011 की जनगणना के अनुसार देश की कुल जनसंख्या लगभग 1.21 अरब है। देश की कुल जनसंख्या का लगभग 50% भाग देश के केवल छ: राज्यों में रहता है। ये राज्य हैं-उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिमी बंगाल तथा आन्ध्र प्रदेश तथा तेलंगाना। शेष 50% जनसंख्या बाकी के 23 राज्यों तथा 7 केन्द्र शासित प्रदेशों में रहती है। दिल्ली शहर देश की राजधानी तथा एक बड़ा शहर होने के साथ-साथ देश की 1.39% जनसंख्या को पाल रहा है। देश के अन्य बड़े शहर जैसे कोलकाता, मुम्बई, चेन्नई, बंगलुरु, हैदराबाद, अहमदाबाद आदि भी जनसंख्या के बड़े केन्द्र हैं। देश के पूर्वी भागों में जनसंख्या कम है।

प्रश्न 6.
संसार की औसत जनसंख्या कितनी है ? अधिक तथा कम जनसंख्या घनत्व वाले क्षेत्रों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
संसार की औसत जनसंख्या घनत्व 52 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है। परन्तु संसार के सभी भागों में जनसंख्या का घनत्व एक समान नहीं है। एशिया तथा यूरोप महाद्वीप सघन जनसंख्या वाले महाद्वीप हैं। संसार के बड़ेबड़े शहरों में भी जनसंख्या का घनत्व अधिक है। इन शहरों में शंघाई, टोकियो, न्यूयार्क, लंदन, पेरिस, सिडनी, दिल्ली आदि शामिल हैं। दूसरी ओर उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका तथा आस्ट्रेलिया में जनसंख्या का घनत्व कम है।

प्रश्न 7.
सघन जनसंख्या घनत्व की क्या-क्या हानियां हैं ?
उत्तर-
सघन जनसंख्या घनत्व की निम्नलिखित हानियां हैं –

  • सघन जनसंख्या के कारण लोगों के रहने के लिए घरों या आवास की समस्या पैदा हो जाती है। लोगों को मजबूर होकर झुग्गी झोंपड़ियों में रहना पड़ता है। इससे गंदी बस्तियों का विकास होता है।
  • जनसंख्या अधिक होने पर महंगाई बढ़ जाती है। इसलिए दैनिक प्रयोग की वस्तुओं तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं की कमी हो जाती है। इससे जमाखोरी तथा भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है।
  • अधिक जनसंख्या वाले क्षेत्रों में बीमारियां या महामारियां फैलने का डर बना रहता है।
  • युद्ध के समय सघन जनसंख्या वाले क्षेत्रों को सबसे अधिक हानि उठानी पड़ती है।

प्रश्न 8.
कन्या भ्रूण हत्या के क्या नुकसान हैं और इसे रोकने के लिए सरकार द्वारा क्या प्रयत्न किए जा रहे हैं ?
उत्तर-
आज विज्ञान ने जन्म से पूर्व बच्चे का लिंग निर्धारण आसान बना दिया है। अत: कुछ लोग लड़कियों को जन्म लेने से पहले ही मां के पेट में मार डालते हैं। इसे भ्रूण हत्या कहा जाता है। यह एक बहुत बड़ा पाप है।
नुकसान-

  • इससे लिंग अनुपात कम होता जा रहा है। परिणामस्वरूप कई लड़कों की आजीवन शादी नहीं हो पाती।
  • ऐसे लड़के तथा उनके मां-बाप दिमागी रूप से परेशान रहते हैं। समाज में उन्हें अच्छी नज़र से नहीं देखा जाता।
    सरकारी प्रयत्न-सरकार ने भ्रूण हत्या के विरुद्ध कठोर कानून बनाए हैं। लिंग-निर्धारण तथा भ्रूण-हत्या दोनों ही दंडनीय अपराध हैं।

PSEB 8th Class Social Science Solutions Chapter 7 मानवीय संसाधन

III. नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर लगभग 250 शब्दों में लिखो :

प्रश्न 1.
जनसंख्या वितरण और जनसंख्या घनत्व में क्या अंतर हैं ? इन्हें प्रभावित करने वाले तत्त्वों का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।
उत्तर-
जनसंख्या का वितरण-जनसंख्या वितरण से अभिप्राय संसार के किसी देश या प्रदेश में बसने वाले लोगों की संख्या से है। किसी स्थान पर जनसंख्या बहुत अधिक हो सकती है तो किसी स्थान पर बहुत कम। प्रायः मैदानी प्रदेशों में जनसंख्या अधिक होती है, जबकि पहाड़ी तथा रेतीले प्रदेशों में कम लोग निवास करते हैं।
जनसंख्या घनत्व-जनसंख्या घनत्व से अभिप्राय किसी प्रदेश या देश के एक वर्ग किलोमीटर या एक वर्गमील क्षेत्र में औसत रूप से रहने वाले लोगों से है। यह पूरे देश या प्रदेश के लिए एक समान होता है।
जनसंख्या वितरण तथा जनसंख्या घनत्व को प्रभावित करने वाले तत्त्व-जनसंख्या का वितरण तथा जनसंख्या घनत्व को बहुत-से तत्त्व प्रभावित करते हैं। इनमें कुछ महत्त्वपूर्ण तत्त्वों का वर्णन इस प्रकार है-

  • धरातल-धरातल मनुष्य के रहने के लिए बहुत ही महत्त्वपूर्ण है। मानव पर्वतीय क्षेत्रों के स्थान पर समतल क्षेत्र में रहना अधिक पसन्द करता है क्योंकि वहां कृषि करना आसान होता है।
  • जलवायु-लोग अधिक शीत, अधिक उष्ण या अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों की बजाय ऐसे क्षेत्रों में रहना पसंद करते हैं जहां की जलवायु स्वास्थ्य के अनुकूल हो। इसलिए अनुकूल जलवायु क्षेत्र ही सघन जनसंख्या वाले क्षेत्र होते हैं। उदाहरण के लिए साईबेरिया जैसे ठंडे या भूमध्य रेखा के समीप अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में जनसंख्या कम है।
  • मिट्टियां-उपजाऊ मिट्टियों वाले क्षेत्र मानव के रहने के लिए अनुकूल माने जाते हैं। इसलिए ऐसे भागों में सघन जनसंख्या पाई जाती है।
  • जल-जल मानव की अनेक आवश्यकताएं पूरी करता है। इसलिए जिन क्षेत्रों का जल साफ-सुथरा और पीने योग्य हो, वहां सघन जनसंख्या पाई जाती है। मरुस्थलों में पानी की कमी होने के कारण जनसंख्या कम होती है।
  • खनिज पदार्थ-जिस क्षेत्र में खनिज पदार्थ अधिक पाये जाते हैं वहां सघन जनसंख्या पाई जाती है। उदाहरण के लिए झारखंड के छोटा नागपुर पठार तथा उड़ीसा में अधिक खनिज पदार्थ मिलते हैं । इसलिए वहां का जनसंख्या घनत्व अधिक है।
  • उद्योग-औद्योगिक केन्द्र मनुष्य को अपनी ओर आकर्षित करते हैं, क्योंकि वहां रोजगार के अवसर अधिक होते हैं। संसार में टोकियो, शंघाई, डीट्रोयट, मुम्बई, कोलकाता, नोएडा, गुड़गांव, लुधियाना आदि औद्योगिक शहर बहुत ही सघन जनसंख्या वाले हैं।
  • यातायात के साधन-यातायात के साधनों का विकास भी जनसंख्या वितरण या जनसंख्या घनत्व को प्रभावित करता है। जहां यातायात के साधन अधिक विकसित होते हैं वहीं जनसंख्या भी अधिक पाई जाती है। भारत के उत्तरी मैदानों में यातायात के विकास के कारण ही सघन जनसंख्या पाई जाती है।
  • शहरीकरण-आज रोज़गार तथा अन्य सुविधाओं को देखते हुए मनुष्य गांवों को छोड़कर शहरों की ओर भाग रहा है। शहरों में उसे सभी आवश्यक सुविधाएं, सेवाएं तथा मनोरंजन के साधन प्राप्त हो जाते हैं। इसी कारण संसार के सभी बड़े शहरों में जनसंख्या तथा जनसंख्या घनत्व अधिक है।

प्रश्न 2.
सघन और कम सघन जनसंख्या के लाभ व हानियां लिखिए।
उत्तर-
सघन या कम सघन जनसंख्या के जहां लाभ हैं, वहां उनकी हानियां भी हैं। इनका संक्षिप्त वर्णन इस प्रकार है –
1. सघन जनसंख्या के लाभ –

  • सरकार सघन जनसंख्या वाले क्षेत्रों के विकास की ओर विशेष ध्यान देती है।
  • सघन जनसंख्या वाले क्षेत्रों में औद्योगिक विकास की गति बहुत तेज़ होती है।
  • सघन जनसंख्या होने के कारण उद्योगों के लिए सस्ते श्रमिक आसानी से मिल जाते हैं।
  • अधिक जनसंख्या वाले क्षेत्र उद्योगों में तैयार माल की खपत के लिए अच्छी मण्डी का काम करते हैं।
  • अधिक जनसंख्या वाले क्षेत्रों में यातायात के साधनों का विकास तेज़ी से होता है।
  • जनसंख्या अधिक होने के कारण स्कूल, कॉलेज आदि शिक्षा केन्द्र बड़ी संख्या में खोले जाते हैं।
  • अधिक सघन क्षेत्र साईंस और तकनीकी की दृष्टि से विकसित होते हैं।
  • ऐसे क्षेत्र आर्थिक दृष्टि से भी काफ़ी उन्नत होते हैं।

सघन जनसंख्या घनत्व की हानियां-

  • सघन जनसंख्या के कारण लोगों के रहने के लिए घरों या आवास की समस्या पैदा हो जाती है। लोगों को मजबूर होकर झुग्गी झोंपड़ियों में रहना पड़ता है। इससे गंदी बस्तियों का विकास होता है।
  • जनसंख्या अधिक होने पर महंगाई बढ़ जाती है। इसलिए दैनिक प्रयोग की वस्तुओं तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं की कमी हो जाती है। इससे जमाखोरी तथा भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है।
  • अधिक जनसंख्या वाले क्षेत्रों में बीमारियां या महामारियां फैलने का डर बना रहता है। (4) युद्ध के समय सघन जनसंख्या वाले क्षेत्रों को सबसे अधिक हानि उठानी पड़ती है।

कम सघन जनसंख्या घनत्व के लाभ-

  • कम सघन क्षेत्रों में जनसंख्या कम होने के कारण लोगों की आवश्यकताएं आसानी से पूरी हो जाती है।
  • लोगों को रहने के लिए सस्ते घर प्राप्त करने में कठिनाई नहीं आती।
  • ऐसे क्षेत्रों में लोग प्राकृतिक साधनों का पूरा आनन्द उठा सकते हैं।
  • स्वास्थ्य की दृष्टि से कम जनसंख्या वाले क्षेत्र अच्छे होते हैं।

कम सघन जनसंख्या की हानियां –

  • कम सघन क्षेत्रों में यातायात के साधनों का विकास पूरी तरह से नहीं हो पाता।
  • उद्योगों के विकास के लिए श्रमिकों की कमी होती है या फिर श्रम बहुत महंगा होता है।
  • जनसंख्या कम होने के कारण तैयार माल की खपत के लिए मण्डियों की कमी होती है।
  • लोगों को आधुनिक सुविधाएं पूरी तरह से प्राप्त नहीं हो पाती क्योंकि ये क्षेत्र पिछड़े रह जाते हैं।

PSEB 8th Class Social Science Guide मानवीय संसाधन Important Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Multiple Choice Questions)

(क) रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए :

1. जनगणना प्रत्येक …….. वर्ष के बाद होती है।
2. किसी क्षेत्र के एक वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में औसत रूप से रहने वाले लोगों की संख्या को ……….. कहते हैं।
3. ……… अभियान का मुख्य उद्देश्य 6 से 14 वर्ष तक के सभी बच्चों को आरम्भिक स्तर की शिक्षा __दिलवाना है।
4. जो व्यक्ति किसी भी भाषा में पढ़ सकता है, लिख सकता तथा समझ सकता है उसे ……….. कहा जाता है। ”
5. ……… संसाधन सबसे महत्त्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है।
उत्तर-

  1. 10
  2. जनसंख्या घनत्व
  3. सर्वशिक्षा
  4. साक्षर
  5. मानवीय।

(ख) सही कथनों पर (✓) तथा गलत कथनों पर (x) का निशान लगाएं :

1. प्रति हजार व्यक्तियों के पीछे जन्म लेने वाले जीवित बच्चों की संख्या को वृद्धि दर कहा जाता है।
2. सभी संसाधनों का विकास मानव संसाधन के विकास पर निर्भर है।
3. जनसंख्या को मुख्य रूप से दो आयु गुटों (वर्गों) में बांटा गया है।
4. राष्ट्रीय जनगणना नीति, 2000 का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2014 तक जनसंख्या का संतुलन स्थिर करना है।
5. अधिक जनसंख्या वाले क्षेत्रों में बीमारियाँ या महामारियाँ फैलने का डर बना रहता है।
6. लड़की को जन्म लेने से पहले माँ के पेट में मारने को ‘कन्या भ्रूण हत्या’ कहा जाता है।
उत्तर-

  1. (✗)
  2. (✓)
  3. (✗)
  4. (✓)
  5. (✓)
  6. (✓).

PSEB 8th Class Social Science Solutions Chapter 7 मानवीय संसाधन

अति छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
यू० एस० ए०, आस्ट्रेलिया तथा कनाडा जैसे देश मानवीय साधनों में निरन्तर धनी क्यों होते जा रहे हैं?
उत्तर-
ये देश मानवीय साधनों में इसलिए धनी होते जा रहे हैं क्योंकि अन्य देशों से शिक्षित तथा अनुभवी लोग इन देशों में जा रहे हैं।

प्रश्न 2.
जनसंख्या बनावट के अध्ययन का क्या लाभ है ?
उत्तर-
जनसंख्या बनावट के अध्ययन से जनसंख्या के विभिन्न सामाजिक, आर्थिक तथा संख्यात्मक पक्षों की जानकारी होती है। इस जानकारी का प्रयोग मानवीय विकास की योजनाएं बनाने में किया जाता है।

प्रश्न 3.
पूरे संसार का लिंग अनुपात कितना है ? संसार के दो महाद्वीपों के नाम बताओ जहां लिंग अनुपात अधिक है ? यह कितना-कितना है ?
उत्तर-
पूरे संसार का लिंग अनुपात 985 है। यूरोप तथा उत्तरी अमेरिका महाद्वीपों में लिंग अनुपात अधिक है। यह क्रमश: 1072 तथा 1031 है।

प्रश्न 4.
भारत के किस राज्य में लिंग अनुपात सबसे अधिक है ? यह कितना है ?
उत्तर-
भारत के केरल राज्य में लिंग अनुपात सबसे अधिक है। यह 1084 है।

प्रश्न 5.
पंजाब तथा हरियाणा में लिंग अनुपात कितना-कितना है ?
उत्तर-
क्रमश: 895 तथा 879.

प्रश्न 6.
साक्षर किसे कहते हैं ?
उत्तर-
जो व्यक्ति किसी भी भाषा में पढ़ सकता है, लिख सकता तथा समझ सकता है, उसे साक्षर कहा जाता है।

प्रश्न 7.
भारत के किस राज्य के लोग सबसे अधिक शिक्षित हैं और किस राज्य के लोग सबसे कम ?
उत्तर-
भारत के केरल राज्य के लोग सबसे अधिक शिक्षित हैं, जबकि बिहार राज्य में सबसे कम लोग शिक्षित हैं।

प्रश्न 8.
पंजाब राज्य की कुल तथा स्त्रियों की शिक्षा (साक्षरता) दर कितनी-कितनी है ?
उत्तर-
क्रमश: 75.8% तथा 70.7%

प्रश्न 9.
पिछली जनगणना कब हुई थी ? अगली जनगणना कब होगी ?
उत्तर-
पिछली जनगणना 2011 में हुई थी। अगली जनगणना 2021 में होगी।

प्रश्न 10.
जनसंख्या की दृष्टि से भारत का संसार में कौन-सा स्थान है ? संसार की कुल जनसंख्या का कितने प्रतिशत भाग भारत में रहता है ?
उत्तर-
जनसंख्या की दृष्टि से भारत का संसार में दूसरा स्थान है। संसार की कुल जनसंख्या का 17.% भाग भारत में रहता है।

प्रश्न 11.
संसार में सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश कौन-सा है ?
उत्तर-
चीन।

प्रश्न 12.
राष्ट्रीय जनसंख्या नीति, 2000 का क्या उद्देश्य था ?
उत्तर-
वर्ष 2045 तक जनसंख्या का संतुलन स्थिर करना।

छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत में शिक्षा के प्रसार के लिए क्या प्रयत्न किये जा रहे हैं ?
उत्तर-
भारत में शिक्षा के प्रसार के लिए हर सम्भव प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार भी शिक्षा की उन्नति के लिए बहुत प्रयत्न कर रही है। –

  • देश में 8.5 लाख प्राइमरी और अपर प्राइमरी स्कूल हैं। इन स्कूलों में 44 लाख से अधिक अध्यापक पढ़ा रहे हैं।
  • देश में एलीमैंटरी शिक्षा का स्तर ऊंचा उठाने के लिए नवम्बर 2000 से ‘सर्व शिक्षा अभियान’ कार्यक्रम प्रारम्भ किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य 6-14 वर्ष आयु वर्ग के सभी बच्चों को आठ वर्ष तक शिक्षा दिलवाना है।
  • राष्ट्रीय साक्षरता मिशन (National Literacy Mission) प्रौढ़ शिक्षा (Adult Education) देने के लिए भरपूर प्रयास कर रहा है।
  • सरकार पूरा प्रयास कर रही है कि शिक्षा के मार्ग में जो भी कठिनाइयां आ रही हैं, उन्हें दूर करके 100% शिक्षा का उद्देश्य प्राप्त किया जा सके।

प्रश्न 2.
जन्म दर, मृत्यु दर तथा प्राकृतिक वृद्धि दर से क्या अभिप्राय है ? प्राकृतिक वृद्धि दर का उदाहरण भी दें।
उत्तर-
जन्म दर-एक वर्ष में 1000 लोगों के पीछे जितने जीवित बच्चे (Live Birth) जन्म लेते हैं। उसे जन्म दर (Birth Rate) कहा जाता है।
मृत्यु दर-एक वर्ष में 1000 लोगों के पीछे मरने वाले लोगों की संख्या को मृत्यु दर (Death Rate) कहा जाता है।
प्राकृतिक वृद्धि दर-जन्म दर और मृत्यु दर में जो अन्तर होता है उसे “प्राकृतिक वृद्धि दर” (Natural Growth Rate) कहा जाता है। उदाहरण के लिए यदि जन्म दर 30 है और मृत्यु दर 10 हो तो प्राकृतिक वृद्धि दर (30-10) 20 होगी। इसका अर्थ यह है कि एक वर्ष में 1000 व्यक्तियों के पीछे 20 व्यक्तियों की वृद्धि हुई है।

प्रश्न 3.
भारत में जनसंख्या घनत्व पर एक नोट लिखो।
उत्तर-
भारत सघन जनसंख्या घनत्व वाला देश है। इसका जनसंख्या घनत्व प्रत्येक जनगणना के साथ बढ़ता जा रहा है। वर्ष 1901 में भारत का औसत जनसंख्या घनत्व 77 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर था। परन्तु 2011 में यह 382 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर तक पहुंच गया।

  • देश के पर्वतीय क्षेत्रों तथा पूर्वी राज्यों में जनसंख्या घनत्व कम है।
  • गुजरात, कर्नाटक, सीमांध्र, त्रिपुरा, महाराष्ट्र, झारखण्ड, असम और गोवा आदि राज्यों में मध्यम जनसंख्या घनत्व पाया जाता है।
  • उत्तर प्रदेश, केरल, पश्चिमी बंगाल और केन्द्र शासित प्रदेशों में जनसंख्या घनत्व अधिक सघन है। दिल्ली और चण्डीगढ़ शहरों में जनसंख्या घनत्व क्रमश 11320 और 9258 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है। परन्तु लेह (जम्मू और कश्मीर) और लाहौल स्पीति (हिमाचल प्रदेश) जैसे जिलों में जनसंख्या घनत्व केवल 3-4 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर ही है।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न-
जनसंख्या की मौलिक विशेषताओं को जानने में सहायक किन्हीं तीन महत्त्वपूर्ण घटकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
जनसंख्या की मौलिक विशेषताओं को आयु, लिंग, साक्षरता, व्यवसाय, भाषा आदि अनेक घटकों द्वारा आंका जा सकता है। इनमें से तीन महत्त्वपूर्ण घटकों का वर्णन इस प्रकार है-

1. आयु वर्ग-जनसंख्या को साधारणतः तीन आयु वर्गों में विभाजित करते हैं-युवा वर्ग (0-14 वर्ष), कार्यशील वर्ग (15-64 वर्ष) और वृद्ध (65 वर्ष तथा अधिक)। इसे जनसंख्या का आयु वर्ग कहते हैं। इन तीनों आयु वर्गों में कार्यशील जनसंख्या का अनुपात सबसे कम बदलता है, परन्तु बच्चों तथा वृद्धों की संख्या में मुख्य रूप से अन्तर पाया जाता है। अन्य विकासशील देशों की तरह भारत में भी कुल जनसंख्या का बहुत बड़ा प्रतिशत (लगभग 30%) 0-14 ई के बच्चों का है।
स्वीडन जैसे विकसित देश में युवाओं का प्रतिशत बहुत कम है। जापान जैसे देश में वृद्ध लोगों का प्रतिशत बहुत धिक है।

2. लिंग अनुपात-हमारे देश में लिंग अनुपात (प्रति हज़ार पुरुषों पर स्त्रियों की संख्या) कम है। यह अनुपात धीरे– रे कम हुआ है। केवल केरल राज्य एक अपवाद है। वहां प्रति हजार पुरुषों पर स्त्रियों की संख्या अधिक है।

3. साक्षरता-साक्षरता अर्थात् साक्षर लोगों का प्रतिशत जनसंख्या की गुणवत्ता बताने वाले संकेतकों में से एक है। पारे देश में साक्षरता दर धीरे-धीरे बढ़ी है। यह लगभग 73% प्रतिशत (2011) है। पुरुषों में साक्षरता दर स्त्रियों की ‘ना में अधिक है। सबसे अधिक साक्षर राज्य केरल है।

PSEB 8th Class Social Science Solutions Chapter 7 मानवीय संसाधन

मानवीय संसाधन PSEB 8th Class Social Science Notes

  • मानवीय संसाधन तथा उनका महत्त्व- मानवीय संसाधन बहुत ही महत्त्वपूर्ण संसाधन हैं। सभी संसाधनों का विकास मानव संसाधन के विकास पर ही निर्भर करता है।
  • मानवीय संसाधनों का विकास – राष्ट्र को ऊँचा उठाने के लिए हमें अपने मानवीय संसाधनों को विकसित, शिक्षित
    एवं प्रशिक्षित करना अनिवार्य है।
  • 2011 की जनगणना – 2011 की जनगणना के अनुसार हमारे देश की कुल जनसंख्या लगभग 1.21 अरब है।
    देश की अधिकतर जनसंख्या मैदानी भागों में निवास करती है।
  • लिंग अनुपात किसी प्रदेश में स्त्री-पुरुष के संख्यात्मक अनुपात को वहां का लिंग अनुपात कहते हैं।
    इसे प्रति हजार पुरुषों पर स्त्रियों की संख्या के रूप में व्यक्त किया जाता है।
    PSEB 8th Class Social Science Solutions Chapter 7 मानवीय संसाधन (3)
  • आयु संरचना – जनसंख्या को सामान्यतः तीन आयु गुटों में विभाजित किया जाता है-(1) 0 से 14 वर्ष (2) 15 से 64 वर्ष तथा (3) 65 वर्ष या इस से अधिक।
  • शिक्षित व्यक्ति (साक्षर) – जो व्यक्ति किसी भी भाषा को पढ़-लिख और समझ सकता है उसे शिक्षित व्यक्ति कहा जाता है।
  • जन्म दर – प्रति हज़ार व्यक्तियों के पीछे जन्म लेने वाले जीवित बच्चों की संख्या को जन्म-दर कहा जाता है।
  • मृत्यु-दर – प्रति हज़ार व्यक्तियों के पीछे जितने व्यक्तियों की मृत्यु होती है उसे मृत्यु दर कहते हैं।
  • जनसंख्या घनत्व –
    PSEB 8th Class Social Science Solutions Chapter 7 मानवीय संसाधन (4)

PSEB 8th Class Physical Education Solutions Chapter 7 योग

Punjab State Board PSEB 8th Class Physical Education Book Solutions Chapter 7 योग Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 8 Physical Education Chapter 7 योग

PSEB 8th Class Physical Education Guide योग Textbook Questions and Answers

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

प्रश्न 1.
योग दर्शन क्या है ?
उत्तर-
योग दर्शन में मनुष्य की आत्मा परमात्मा का अंश है। मनुष्य अपने जीवन की भाग-दौड़ में भगवान को भूल गया है, जिस कारण प्राणी परमात्मा द्वारा प्रदान की गई वास्तविक शक्ति को खो बैठा है। इस कारण मनुष्य अपने कर्तव्यों का पालन करने में असमर्थ हो जाता है, जिस कारण उसे निराशा मिलती है और उसका मन भटकता रहता है। वह किसी भी समस्या का हल ढूँढने में असमर्थ हो जाता है। मनुष्य स्वयं को शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक एवं आध्यात्मिक तौर पर कमज़ोर कर लेता है। मनुष्य अपने जीवन को अशांत और दुःखों में घिरा हुआ महसूस करता है।
‘योग दर्शन’ भटके हुए मनुष्यों को सन्मार्ग पर ले जाने का साधन है। योग मनुष्य को सदा अहिंसा की राह पर चलने की प्रेरणा देता है। अतः योगदर्शन ‘अहिंसा’ को परम धर्म मानता है।

प्रश्न 2.
योग के लक्ष्य से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
योग का मुख्य लक्ष्य शरीर का मानसिक, आध्यात्मिक तथा भावनात्मक विकास करना है और आत्मा को परमात्मा से मिलाना है। हम कह सकते हैं कि योग के द्वारा संसार की कठिनाइयों से पार पाया जा सकता है। योग मनुष्य को जीवन की सभी जटिल समस्याओं का दृढ़ता के साथ सामना करने के लिए तैयार करता है ताकि वह कभी भी अपने मार्ग से न भटक सके।

PSEB 8th Class Physical Education Solutions Chapter 7 योग

प्रश्न 3.
योग के कौन-कौन से उद्देश्य हैं ?
उत्तर-

  • उच्च स्तर की चेतना की प्राप्ति-मन की एकाग्रता, साधना व अन्य आध्यात्मिक अभ्यासों से अंतरात्मा को दैवी शक्ति से जोड़ा जा सकता है। इस तरह उच्च अवस्था तक पहुँची हुई अंतरात्मा के कारण सहज ज्ञान अर्थात् उच्च स्तरीय चेतनता की प्राप्ति हो जाती है।
  • आध्यात्मिक जीवन-योग आसन व्यक्ति को उसके मन को एकाग्र करने में सहायक होते हैं, जिसके फलस्वरूप वह आत्मिक शांति अनुभव करता है। इस कारण उसमें धार्मिक विश्वास, मानवीय मूल जीवन के सिद्धांत तथा नैतिकता उत्पन्न होती है।
  • स्वस्थ बनाना–योग आसन शारीरिक व्यायाम है। यदि सही ढंग से नियमित रूप से योग का अभ्यास किया जाये तो व्यक्ति का शरीर सदैव बलशाली, स्वस्थ तथा चुस्त रहता है। योग के भिन्न-भिन्न आसन हमारे शरीर के भिन्न-भिन्न अंगों की प्रणालियों को स्वस्थ रखते हैं तथा रोगों से लड़ने की शक्ति को बढ़ाते हैं। अत: प्रत्येक व्यक्ति के लिए योगासन बहुत लाभदायक हैं।
  • भावनाओं पर नियंत्रण करना–योग आसन मनुष्य को अपनी भावनाओं पर काबू पाने के योग्य बनाते हैं। इस तरह उसके मन का संतुलन बना रहता है। इसलिए चिंता तथा परेशानियों से घिरे लोगों के लिए योग एक वरदान सिद्ध हुआ है।
  • मानसिक तौर पर सुदृढ़ बनाना-योग न केवल मनुष्य को शारीरिक दृष्टि से बलशाली बनाता है अपितु उसके मन को एकाग्र करके स्थिर भी रखता है, जिससे वह मानसिक तौर पर मज़बूत हो जाता है तथा उसमें आत्मविश्वास जागृत हो जाता है।

प्रश्न 4.
अष्टांग योग के बारे में आप क्या जानते हो ?
उत्तर-
अष्टांग योग (Ashtang Yoga) अष्टांग योग के आठ अंग हैं, इसलिए इसका नाम अष्टांग योग है। योगाभ्यास की पतंजलि ऋषि द्वारः आठ अवस्थाएं मानी गई हैं : इन्हें पतंजलि ऋषि का अष्टांग योग भी कहते हैं

  • यम (Yama, Forbearance)
  • नियम (Niyama, Observance)
  • 372447 (Asana, Posture)
  • प्राणायाम (Pranayama, Regulation of Breathing)
  • प्रत्याहार (Pratyahara, Abstraction)
  • धारना (Dharna, Concentration)
  • ध्यान (Dhyana, Meditation)
  • समाधि (Samadhi, Trance)।

योग की ऊपरी बताई गई आठ अवस्थाओं में से पहली पांच अवस्थाओं का सम्बन्ध आन्तरिक यौगिक क्रियाओं से है। इन सभी अवस्थाओं को आगे फिर इस प्रकार वर्गीकृत किया गया है –

1. यम (Yama, Forbearance) -यम के निम्नलिखित पांच अंग हैं –

  • 316H (Ahimsa, Non-violence)
  • सत्य (Satya, Truth)
  • असतेय (Astey, Conquest of the sense of mind)
  • अपरिग्रह (Aprigraha, Non-receiving)
  • ब्रह्मचर्य (Brahmacharya, Celibacy)।

2. नियम (Niyama, Observance)—नियम के निम्नलिखित पांच अंग हैं –

  1. शौच (Shauch, Obeying the call of nature)
  2. सन्तोष (Santosh, Contentment)
  3. तप (Tapas, Penance)
  4. स्वाध्याय (Savadhyay, Self-study)
  5. ईश्वर परिधान (Ishwar Pridhan, God Consciousness)

3. आसन (Asana or Posture) आसनों की संख्या उतनी है जितनी कि इस संसार में पशु-पक्षियों की। आसन-शारीरिक क्षमता, शक्ति के अनुसार, प्रतिदिन सांस द्वारा हवा को बाहर निकालने, सांस रोकने और फिर सांस लेने से करने चाहिएं।

4. प्राणायाम (Pranayama, Regulation of Breathing)-प्राणायाम उपासना की मांग है। इसको तीन भागों में बांटा जा सकता है- (From Board M.Q.P.) –

  • पूरक (Purak, Inhalation)
  • रेचक (Rechak, Exhalation) और
  • कुम्भक (Kumbhak, Holding of Breath)।
  • कई प्रकार से सांस लेने तथा इसे रोककर बाहर निकालने को प्राणायाम कहते हैं।
  • प्रत्याहार (Pratyahara, Abstraction)-प्रत्याहार से अभिप्राय है वापिस लाना तथा सांसारिक प्रसन्नताओं से मन को मोड़ना।
  • धारना (Dharna, Concentration)-अपनी इन्द्रियों पर नियन्त्रण रखने को धारना कहते हैं, जो बहुत कठिन है।
  • ध्यान (Dhyana, Meditation)-जब मन पर नियन्त्रण हो जाता है तो ध्यान लगना आरम्भ हो जाता है। इस अवस्था में मन और शरीर नदी के प्रवाह की भान्ति हो जाते हैं जिसमें पानी की धाराओं का कोई प्रभाव नहीं होता।
  • समाधि (Samadhi, Trance)-मन की वह अवस्था जो धारना से आरम्भ होती है, समाधि में समाप्त हो जाती है। इन सभी अवस्थाओं का आपस में गहरा सम्बन्ध है।

योग विज्ञान संसार के लिए भारत की अमूल्य देन है। आजकल भारत में नहीं बल्कि विदेशों में भी सब सर्वप्रिय होता जा रहा है। इसकी उपयोगिता की धाक् को सभी डॉक्टरों और शारीरिक शिक्षा के शिक्षकों ने स्वीकार किया है। योग-आसन व्यायाम विधिपूर्वक, पूर्णतया वैज्ञानिक एवं शारीरिक संगठन के अनुकूल हैं।

Physical Education Guide for Class 8 PSEB योग Important Questions and Answers

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
योग क्या है ?
(क) जोड़
(ख) आत्मा को परमात्मा से जोड़ना
(ग) अहिंसा का पालन करना
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

PSEB 8th Class Physical Education Solutions Chapter 7 योग

प्रश्न 2.
योग के उद्देश्य हैं
(क) भावनाओं पर काबू रखना
(ख) स्वस्थ रहना
(ग) शारीरिक तौर पर मजबूत होना
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 3.
अष्टांग योग के कितने अंग हैं ?
(क) चार
(ख) छः
(ग) सात
(घ) आठ।
उत्तर-
(घ) आठ।

बहुत छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
आसन करने के पश्चात् कब नहाना चाहिए?
उत्तर-
आसन करने के आधे घण्टे के पश्चात् नहाना चाहिए।

प्रश्न 2.
आसन करने की जगह कैसी होनी चाहिए?
उत्तर-
जगह समतल होनी चाहिए।

प्रश्न 3.
आसन करते समय कैसे कपड़े पहनने चाहिए ?
उत्तर-
हमें ढीले-ढीले और कम-से-कम कपड़े पहनने चाहिए।

प्रश्न 4.
कब्ज-दूर करने के लिए कौन-सा आसन करना चाहिए ?
उत्तर-
कब्ज-दूर करने के लिए ताड़ आसन और सर्वांग आसन करना चाहिए।

प्रश्न 5.
मोटापा दूर करने के लिए कौन-सा आसन करना चाहिए ?
उत्तर-
मोटापा दूर करने के लिए हल आसन और धनुर आसन करना चाहिए।

PSEB 8th Class Physical Education Solutions Chapter 7 योग

प्रश्न 6.
पेट की बीमारियों को और मोटापा दूर करने के लिए कौन-सा आसन करना चाहिए ?
उत्तर-
पश्चिमोत्तान और भुजंग आसन।

प्रश्न 7.
भारतीय व्यायाम की प्राचीन विधि कौन-सी है ?
उत्तर-
योगासन।

प्रश्न 8.
शीर्षासन प्रतिदिन कम-से-कम कितने समय के लिए करना चाहिए ?
उत्तर-
2 मिनट के लिए।

प्रश्न 9.
शीर्षासन के कोई दो लाभ बताओ।
उत्तर-

  1. शीर्षासन से स्मरण शक्ति तेज़ होती है।
  2. मोटापा दूर होता है।

प्रश्न 10.
वज्रासन के कोई दो लाभ बताओ।
उत्तर-

  1. इससे स्वप्नदोष दूर हो जाता है।
  2. इससे शूगर का रोग दूर हो जाता है।

प्रश्न 11.
हर्निया तथा नल रोगों को ठीक करने में कौन-सा आसन सहायक हो सकता है ?
उत्तर-
चक्र आसन।

प्रश्न 12.
आत्मा को परमात्मा से मिलाने का महत्त्वपूर्ण ढंग कौन-सा है ?
उत्तर-
योग।

प्रश्न 13.
मानसिक एकाग्रता के लिए कौन-सा योगासन सर्वोत्तम है ?
उत्तर-
पद्मासन।

PSEB 8th Class Physical Education Solutions Chapter 7 योग

छोटे उत्तर चाले प्रश्न

प्रश्न 1.
योग किसे कहते हैं ?
उत्तर-
योग भारतीय व्यायाम की प्राचीन विधि है। यह विधि शरीर की रचना के अनुसार है एवं पूर्णतया वैज्ञानिक है। योग साधना हमें योग्यतापूर्ण, स्वस्थ, सुन्दर, शक्तिशाली तथा गुणवान् बनाती है। यह हमें चिन्ताओं, घबराहट, परेशानी से छुटकारा दिलाती है।

प्रश्न 2.
योग आत्मा और परमात्मा से मिलाप करने का महत्त्वपूर्ण साधन है। कैसे ?
उत्तर-
प्राचीन काल के साधु-महात्माओं की बातें तथा विचार हम आज तक सुनते आ रहे हैं। उनके विचारों के अनुसार यदि किसी व्यक्ति ने आत्मा का परमात्मा से मिलाप कराना है तो उसका साधन हमारा शरीर है। वही मनुष्य आत्मा को परमात्मा से मिला सकता है या दर्शन करा सकता है जो शारीरिक रूप से स्वस्थ हो। अभिप्राय यह है कि उसका मन पूर्णतः स्वच्छ और स्वस्थ हो।।
हम योग साधनों के द्वारा शरीर को ठीक रख सकते हैं। इससे बहुत-सी बीमारियां अपने आप दूर हो जाती हैं। इससे सिद्ध होता है कि योग आत्मा तथा परमात्मा में मिलाप कराने का महत्त्वपूर्ण साधन है।

प्रश्न 3.
योगासन आज देश-विदेश में लोकप्रिय हो रहे हैं, क्यों ?
उत्तर-
योगासन भारत के व्यायाम की प्राचीन विधि है। आजकल यह व्यायाम-विधि देश-विदेश में लोकप्रिय हो रही है। इसका कारण इसकी उपयोगिता है। सभी डॉक्टरों तथा शारीरिक शिक्षा के अध्यापकों ने इसकी प्रशंसा की है। इसके अतिरिक्त योगासन व्यायाम-विधि पूर्ण रूप से वैज्ञानिक और शारीरिक बनावट के अनुकूल है।

प्रश्न 4.
योग आसन के लिए पाँच आवश्यक बातें लिखो।
उत्तर-

  1. आसन सदैव खाली पेट करो।
  2. आसन खुले और एकांत स्थान पर करो।
  3. आसन आवश्यकता के अनुसार करो।
  4. आसन प्रतिदिन कम-से-कम 15 मिनट करो।
  5. आसन नहाने से पूर्व करो।

PSEB 8th Class Physical Education Solutions Chapter 7 योग

प्रश्न 5.
योग के लाभ क्या हैं ?
उत्तर-
योग के लाभ (Advantages of Yoga Asana)—योग के हमें निम्नलिखित लाभ हैं –

  1. योगासनों से मनुष्य का शरीर स्वस्थ रहता है।
  2. इससे बहुत-सी बीमारियां दूर हो जाती हैं।
  3. मानसिक कमज़ोरी दूर हो जाती है।
  4. शरीर शक्तिशाली बन जाता है।
  5. मनुष्य पर शीघ्र घबराहट का प्रभाव नहीं पड़ता।
  6. चिन्ता तथा परेशानियां दूर हो जाती हैं।
  7. मनुष्य का शरीर आकर्षक तथा सुगठित बन जाता है।

PSEB 8th Class Physical Education Solutions Chapter 6 खेलें और अनुशासन

Punjab State Board PSEB 8th Class Physical Education Book Solutions Chapter 6 खेलें और अनुशासन Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 8 Physical Education Chapter 6 खेलें और अनुशासन

PSEB 8th Class Physical Education Guide खेलें और अनुशासन Textbook Questions and Answers

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

प्रश्न 1.
अनुशासन का क्या अर्थ है ?
उत्तर-
अनुशासन से अभिप्राय (Meaning of discipline) अनुशासन से अभिप्राय है नियमों का पालन करना या नियन्त्रण में रहना या नियमों के अनुसार जीवन व्यतीत करना। अनुशासन एक प्रशिक्षण (ट्रेनिंग) है जिससे ठीक ढंग से जीवन बिताने, आदेश मानने और आत्म-नियन्त्रण की शिक्षा मिलती है। हमारे नियमबद्ध होकर काम करने को ही अनुशासन कहा जाता है।

प्रश्न 2.
अनुशासन कितने प्रकार का होता है?
उत्तर-
अनुशासन के प्रकार (Types of discipline)-अनुशासन दो प्रकार का होता है

  1. आत्म-अनुशासन (Self-discipline)
  2. आरोपित अनुशासन (Forced or Commanded Discipline)

1. आत्म-अनुशासन (Self-discipline)-इसमें नियमों का पालन करने की भावना मन में अपने आप उत्पन्न होती है और मनुष्य बिना किसी के सहारे अकेले ही नियमबद्ध होकर काम करता है। यह अनुशासन स्थायी होता है।
2. आरोपित अनुशासन (Forced Discipline)-इसमें नियमों का पालन किसी के आदेशानुसार किया जाता है। इस प्रकार का अनुशासन अस्थायी होता है। यह तब तक ही रहता है जब तक डर या भय पैदा करने वाला व्यक्ति या अवस्था बनी रहती है। इन दोनों में आत्म-अनुशासन ही अच्छा होता है। बच्चों में आत्म-अनुशासन की भावना होनी चाहिए ताकि वे अच्छे विद्यार्थी या योग्य नागरिक बन सकें।

PSEB 8th Class Physical Education Solutions Chapter 6 खेलें और अनुशासन

प्रश्न 3.
अनुशासन की आवश्यकता और महत्त्व के बारे में आप क्या जानते हो ?
उत्तर-
अनुशासन की आवश्यकता- इसके लिए अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नों में छोटे उत्तर वाला प्रश्न नं0 2 देखो।
मनुष्य जीवन के लिए अनुशासन का महत्त्व (Importance of Discipline in human life)-अनुशासन समाज की आधारशिला है। इसके बिना मनुष्य जीवन का चलना असम्भव है। प्रत्येक मनुष्य के अनुशासन में रहने से समस्त समाज और राष्ट्र अनुशासनबद्ध हो जाता है। यह प्रत्येक जाति, समाज और देश का आधार है। मानव जीवन में प्रत्येक क्षेत्र में इसकी अत्यधिक आवश्यकता है। इसका महत्त्व निम्नलिखित बातों से ज्ञात होता है –

  1. अनुशासन अच्छे विद्यार्थी और योग्य नागरिक पैदा करता है।
  2. अनुशासन में रह कर बच्चे अपने अध्यापकों, माता-पिता और वृद्ध जनों का आदरसम्मान करना सीख जाते हैं।
  3. अनुशासन से बच्चे आज्ञाकारी बनना सीखते हैं।
  4. अनुशासित बच्चे दूसरों से अच्छा व्यवहार करते हैं।
  5. अनुशासन से मनुष्य में समय पर काम करने की आदत पड़ जाती है।
  6. अनुशासन व्यक्ति के व्यक्तित्व का विकास करता है।
  7. अनुशासन से मनुष्य में अच्छी आदतें और अच्छे गुण उत्पन्न होते हैं।
  8. अनुशासन सामाजिक जीवन के सुधार में सहायता करता है।
  9. अनुशासन समाज और राष्ट्र को उन्नत और शक्तिशाली बनाता है।
  10. अनुशासन आदर्श राष्ट्र का निर्माण करता है और इसकी शक्ति को स्थिर रखता है।
  11. अनुशासित देश ही उन्नत और सम्पन्न होते हैं।
  12. अनुशासन मनुष्य जीवन को सफल बनाता है।
  13. अनुशासन देश की सुरक्षा करने में सहायता करता है।
  14. अनुशासन के द्वारा स्कूल तथा घर में रहन-सहन की उचित स्थिति बनी रहती है।
  15. अनुशासन से मनुष्य का सर्वोन्मुखी विकास होता है।
  16. अनुशासित मज़दूर भी अपने उद्योग का उत्पादन बढ़ाने में सफल रहते हैं।
  17. अनुशासन में रह कर ही मनुष्य का मानसिक विकास होता है, क्योंकि वह प्रत्येक कार्य सोच-विचार कर नियमानुसार करता है।

जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए प्रत्येक मनुष्य को अनुशासन में रहना चाहिए। घर, स्कूल और खेलों के मैदान में बच्चों को अनुशासन सीखने का अवसर मिलता है।

प्रश्न 4.
खेलों और अनुशासन का आपस में क्या सम्बन्ध है ?
उत्तर-
खेल और अनुशासन का बहुत गहरा सम्बन्ध है क्योंकि खेल में अनुशासन के बिना जीत नहीं प्राप्त हो सकती। खेलों से खिलाड़ियों के आचरण का विकास होता है। किसी भी खिलाड़ी के चरित्र में अनुशासन का बहुत बड़ा रोल होता है और अनुशासन के बिना चरित्र का निर्माण नहीं हो सकता। अनुशासन के बिना खिलाड़ियों के जीवन में अनेक प्रकार की कठिनाइयां आ जाती हैं और खिलाड़ी पर काबू पाना मुश्किल हो जाता है। कुदरत की सारी सृष्टि अनुशासन में ही चल रही है। जैसे कि सूरज हर रोज़ सुबह अनुशासन के साथ चढ़ता है और शाम के समय छिप जाता है। पृथ्वी अपनी गति और नियम के अनुसार घूमती है। इस तरह मनुष्य के जीवन में अनुशासन का होना आवश्यक है। उसके जीवन में अनुशासन का महत्त्व समझाने के लिए सब से अच्छा समय उसका बचपन होता है। बचपन में अनुशासन का निर्माण बहुत अच्छे तरीके के साथ कर सकते हैं। खेलें खिलाड़ी में आज्ञा का पालन, आपसी तालमेल, ईमानदारी और मानसिक संतुलन और कर्तव्य की पालना करना सिखाती हैं। हम कह सकते हैं कि अनुशासन सफलता की कुंजी है। यह कुंजी हमें खेल द्वारा मिलती है।

प्रश्न 5.
खेलें विद्यार्थी के जीवन में अनुशासन कैसे उत्पन्न करती हैं ?
अथवा
बच्चे स्कूलों में अनुशासन कैसे सीखते हैं ?
उत्तर–स्कूल का वातावरण विद्यार्थियों को अनुशासित बनाता है। स्कूल में बच्चे अपने अध्यापकों का सम्मान करते हैं और उनकी आज्ञा का पालन करते हैं। दोस्तों, मित्रों और अन्य विद्यार्थियों से प्रेम से मिलते हैं। इकट्ठे मिल कर बैठना, पढ़ना-लिखना और खेलना उनका स्वभाव बन जाता है। वह समय पर स्कूल जाते हैं। स्कूल का काम प्रतिदिन पूरा करते हैं, चोरी और झूठ बोलने से डरते हैं और एक-दूसरे की सहायता करते हैं। यह गुण उनके चरित्र का अभिन्न अंग बन जाता है। स्कूल में मुख्याध्यापक महोदय का आदेश शेष सभी अध्यापक मानते हैं। अध्यापकों के आदेश स्कूल के अन्य कर्मचारी मानते हैं। स्कूल में प्रत्येक काम अनुशासित ढंग से किया जाता है। ऐसे वातावरण में रह कर बच्चे, अनुशासनबद्ध जीवन व्यतीत करना सीख जाते हैं। इस प्रकार स्कूल का वातावरण विद्यार्थियों को अनुशासन सिखाने में बहुत सहायक होता है।

Physical Education Guide for Class 8 PSEB खेलें और अनुशासन Important Questions and Answers

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
अनुशासन कितने प्रकार का है ?
(क) दो
(ख) तीन
(ग) चार
(घ) पाँच।
उत्तर-
(क) दो

प्रश्न 2.
अनुशासन का महत्त्व है
(क) अनुशासन से बच्चे आज्ञाकारी बनते हैं
(ख) अनुशासन वाले दूसरों से अच्छा व्यवहार करते हैं
(ग) अनुशासन से आदमी समय अनुसार कार्य करता है
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 3.
खेलें और अनुशासन का संबंध है
(क) खेलों में अनुशासन द्वारा जीत मिलती है
(ख) खेल से विद्यार्थियों के आचरण का विकास होता है
(ग) अनुशासन से चरित्र निर्माण होता है
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

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प्रश्न 4.
अनुशासन के कौन-से गुण हैं ?
(क) समय की पाबंदी
(ख) आज्ञा पालन
(ग) सहनशीलता
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 5.
अनुशासन हीनता देश के लिए क्यों हानिकारक है ?
(क) देश खुशहाल नहीं हो सकता
(ख) देश उन्नति नहीं कर सकता
(ग) देश दूसरों पर निर्भर करने लगता है
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

बहुत छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
नियमों का पालन करने या नियन्त्रण में रहने का क्या अर्थ है ?
उत्तर-
अनुशासन।

प्रश्न 2.
प्राचीन शिक्षा संस्थाओं में किस बात पर विशेष बल दिया जाता था ?
उत्तर-
विद्यार्थी को अनुशासित बनाने पर।

प्रश्न 3.
आजकल शिक्षा संस्थाओं में विद्यार्थी कैसे हैं ?
उत्तर-
अनुशासनहीन।

प्रश्न 4.
राष्ट्र निर्माण और राष्ट्र की शक्ति कैसे स्थिर होती है ?
उत्तर-
अनुशासन द्वारा।

प्रश्न 5.
अनुशासन बच्चों को क्या बनना सिखाता है ?
उत्तर-
आज्ञाकारी।

प्रश्न 6.
अनुशासन व्यक्ति का कैसा विकास करता है ?
उत्तर-
मानसिक।

प्रश्न 7.
अनुशासन का गुण किन चीज़ों द्वारा विकसित होता है ?
उत्तर-
खेलों द्वारा।

प्रश्न 8.
अनुशासन कितनी प्रकार का होता है ?
उत्तर-
दो ; आत्म-अनुशासन, बलात् अनुशासन।

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प्रश्न 9.
विद्यार्थियों में अनुशासन लाने के लिए सबसे पहला स्थान किसका है ?
उत्तर-
विद्यार्थियों में अनुशासन लाने का सबसे पहला स्थान अध्यापकों का है ।

छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
बच्चे घरों में अनुशासन सीखते हैं। कैसे ?
उत्तर-
घर बच्चों को अनुशासन सिखाने की प्राथमिक पाठशाला है। घर में माता-पिता, बहन-भाई, चाचा-चाची, दादा-दादी आदि इकट्ठे रहते हैं। परिवार में सबसे बड़ा व्यक्ति परिवार का मुखिया होता है। शेष सभी उसकी इच्छानुसार काम करते हैं। सभी सदस्य एक-दूसरे से प्यार करते हैं और बच्चों का सम्मान करते हैं। एक-दूसरे का सुख-दुःख बांटते हैं। घर में प्रेम तथा सहानुभूतिपूर्ण वातावरण बना रहता है। परिवार के सभी सदस्य अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं। ऐसे वातावरण में बच्चे अनुशासन में रहना सीख जाते हैं। घर में बच्चा बचपन में ही अनुशासन सीख जाता है। छोटे बच्चे बहन-भाइयों को माता-पिता और वृद्धजनों का सम्मान करते देख कर बड़ों का सम्मान करना सीख जाते हैं।

प्रश्न 2.
क्या समाज और देश को अनुशासन की आवश्यकता है ? अपने विचार प्रकट करो।
उत्तर-
मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। वह अकेला अलग नहीं रह सकता। जीवन के कार्यों के लिए उसे दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता है। वह अपनी सभी आवश्यकताओं को स्वयं पूरा नहीं कर सकता। हमें प्रतिदिन कई व्यक्तियों से सहायता लेनी पड़ती है। इसलिए हम समाज के नियमों का उल्लंघन नहीं कर सकते। सामाजिक नियमों का पालन करने के लिए हमारा अनुशासन में रहना बहुत आवश्यक है। हमारे अनुशासन में रहने से ही समाज बना रह सकता है। अनुशासनहीनता जीवन के लिए हानिकारक है।

लोगों को सरकार द्वारा बनाये गए कानूनों का पालन करना पड़ता है। यह तभी सम्भव हो सकता है जब सभी मनुष्य अनुशासन में रहें। समाज और देश को बाह्य आक्रमणों का सामना करने और आन्तरिक गड़बड़ी को रोकने के योग्य बनाने के लिए नागरिकों का अनुशासित होना बहुत ज़रूरी है। कोई भी देश तभी उन्नति कर सकता है यदि उसके नागरिक अनुशासित हों। देश की उन्नति के लिए समस्त समाज का अनुशासित होना आवश्यक है। अनुशासनहीनता समाज व देश के हित में ठीक नहीं है। हमें देश के हितों के विरुद्ध कभी भी कोई काम नहीं करना चाहिए। इसलिए हम कह सकते हैं कि समाज और देश को अनुशासन की अत्यधिक आवश्यकता है।

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प्रश्न 3.
अनुशासनहीनता देश के लिए क्यों हानिकारक है ?
उत्तर-
अनुशासनहीनता से देश को हानियां (Disadvantages of Indiscipline to the Country)-समाज के नियमों का पालन करने के लिए हमारा अनुशासन में रहना बहुत आवश्यक है।

  • अनुशासनहीनता समाज के लिए भी हानिकारक है।
  • देश की खुशहाली और उन्नति के लिए अनुशासन बहुत ही आवश्यक है। देश की उन्नति में अनुशासन का बहुत महत्त्व है।
  • परन्तु अनुशासनहीनता देश के लिए बहुत अधिक हानिकारक है।
  • कई विद्यार्थी, मज़दूर और कई अन्य सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं के कर्मचारी हड़तालें और तोड़-फोड़ कर देश की सम्पत्ति को क्षति पहुंचाते हैं। ऐसी अनुशासनहीनता देश के हित में नहीं होती।

हम में से और हमारे नियुक्त व्यक्तियों से ही सरकार बनती है। सरकार कानून बनाती है और लोगों को इन कानूनों का पालन करना पड़ता है। यदि देशवासियों में अनुशासनहीनता होगी तो आन्तरिक गड़बड़ी अथवा बाहरी हमले से देश की रक्षा नहीं की जा सकेगी। अनुशासनहीनता के कारण देश उन्नति नहीं कर सकता।

PSEB 8th Class Physical Education Solutions Chapter 5 सुनहरी लड़का : श्री अभिनव बिन्द्रा

Punjab State Board PSEB 8th Class Physical Education Book Solutions Chapter 5 सुनहरी लड़का : श्री अभिनव बिन्द्रा Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 8 Physical Education Chapter 5 सुनहरी लड़का : श्री अभिनव बिन्द्रा

PSEB 8th Class Physical Education Guide सुनहरी लड़का : श्री अभिनव बिन्द्रा Textbook Questions and Answers

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

प्रश्न 1.
अभिनव बिन्द्रा का जन्म कब और कहाँ हआ ?
उत्तर-
अभिनव बिन्द्रा का जन्म पंजाब के बीच बसे जिला एस०ए० एस० नगर (मोहाली) के कस्बा जीरकपुर में एक सिक्ख परिवार में 28 सितम्बर, 1982 ई० को पिता डॉ० अपजीत सिंह बिन्द्रा और श्रीमती बबली बिन्द्रा के घर हुआ।

प्रश्न 2.
अभिनव बिन्द्रा ने ओलम्पिक खेलों में प्रथम बार कब भाग लिया ?
उत्तर-
अभिनव बिन्द्रा की सख्त मेहनत रंग लाने लगी। उसका पन्द्रह साल की आयु में 1998 की कामनवैल्थ खेलों में सब से छोटी आयु के खिलाड़ी के रूप में भारतीय टीम में चयन हुआ। इस तरह उसने 2000 की ओलम्पिक खेलों में सिडनी में अठारह साल की आयु में भाग लिया। चाहे अभिनव को जहाँ कोई स्थान प्राप्त नहीं हुआ फिर भी इतनी छोटी आयु में ओलम्पिक खेलों में भाग लेना भी एक उपलब्धि थी। 2004 मे ऐथन्ज में ओलम्पिक खेलों में भी उसने भाग लिया फिर भी इसको कामयाबी नहीं मिली ।

प्रश्न 3.
अभिनव बिन्द्रा विश्व विजेता कब बना ?
उत्तर-
अभिनव बिन्द्रा 2006 में विश्व चैम्पियनशिप (जगरेब) में विश्व विजेता बना।

प्रश्न 4.
अभिनव बिन्द्रा ने ओलम्पिक में सोने का तमगा कब जीता?
उत्तर-
अभिनव बिन्द्र ने 2004 में ऐथन्ज़ में ओलम्पिक खेलों में भाग लिया। फिर भी उसको कामयाबी नहीं मिली और 2008 की ओलम्पिक खेलों में बीजिंग में उसने दुनिया भर के निशानेबाज़ों के चारों खाने चित करके ओलम्पिक खेलों में सोने का तमगा भारत की गोद में डाला।

प्रश्न 5.
भारत सरकार की ओर से अभिनव बिन्द्रा को कौन-कौन से अवार्ड प्रदान किये गये?
उत्तर-
भारत सरकार ने उसको अर्जुन अवार्ड, राजीव गांधी खेल रत्न अवार्ड पद्म भूषण अवार्ड आदि विशेष सम्मान दिए। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जीत दर्ज करने के कारण उस को ‘गोल्डन ब्वॉय’ भी कहा जाता है।

PSEB 8th Class Physical Education Solutions Chapter 5 सुनहरी लड़का : श्री अभिनव बिन्द्रा

Physical Education Guide for Class 8 PSEB सुनहरी लड़का : श्री अभिनव बिन्द्रा Important Questions and Answers

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
अभिनव बिन्द्रा का जन्म कहाँ हुआ ?
(क) जीरकपुर
(ख) बठिंडा
(ग) गुरदासपुर
(घ) चण्डीगढ़।
उत्तर-
(क) जीरकपुर

प्रश्न 2.
अभिनव बिन्द्रा का जन्म कब हुआ ?
(क) 1982
(ख) 1985
(ग) 1980
(घ) 1986.
उत्तर-
(क) 1982

प्रश्न 3.
अभिनव बिन्द्रा ने ओलम्पिक में कब भाग लिया ?
(क) 2000 में
(ख) 1896 में
(ग) 2004 में
(घ) 2008 में।
उत्तर-
(ग) 2004 में

प्रश्न 4.
अभिनव बिन्द्रा विश्व विजयी कब बने ?
(क) 2004 में
(ख) 2000 में
(ग) 2008 में
(घ) 2002 में।
उत्तर-
(क) 2004 में

प्रश्न 5.
अभिनव बिन्द्रा ने सोने का तगमा कब जीता ?
(क) 2004
(ख) 2008
(ग) 2000
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(ख) 2008

प्रश्न 6.
भारत सस्कार ने अभिनव बिन्द्रा को कौन-कौन से अवार्ड दिए ?
(क) अर्जुन अवार्ड
(ख) खेल रतन अवार्ड
(ग) पदम् भूषण अवार्ड
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

PSEB 8th Class Physical Education Solutions Chapter 5 सुनहरी लड़का : श्री अभिनव बिन्द्रा

बहत छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
अभिनव बिन्द्रा का जन्म कब हुआ ?
उत्तर-
अभिनव बिन्द्रा का जन्म एक सिक्ख परिवार में 28 सितम्बर, 1982 ई० को हुआ।

प्रश्न 2.
अभिनव बिन्द्रा ने सबसे पहले निशानेबाज़ी किस से सीखी ?
उत्तर-
अभिनव बिन्द्रा ने सबसे पहले निशानेबाज़ी लेफ्टीनेंट कर्नल जागीर सिंह ढिल्लों से सीखी।

प्रश्न 3.
अभिनव बिन्द्रा काम्नवैल्थ खेलों के लिए कब चुना गया?
उत्तर-
अभिनव बिन्द्रा 15 साल की आयु में 1998 में काम्नवैल्थ खेलों में चुना गया।

प्रश्न 4:
अभिनव बिन्द्रा को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर खेल प्राप्ति में कौन-सा सम्मान मिला?
उत्तर-
एक विदेशी गन बनाने वाली कंपनी ने सोने की राइफल देकर सम्मानित किया।

प्रश्न 5.
अभिनव बिन्द्रा को किस ओलम्पिक में सोने का तमगा मिला ?
उत्तर-
अभिनव बिन्द्रा को 2008 की बीजिंग ओलम्पिक खेलों में सोने का तमगा मिला।

प्रश्न 6.
भारत सरकार ने उसको (अभिनव बिन्द्रा) क्या-क्या अवार्ड दिए ?
उत्तर-

  1. अर्जुन अवार्ड
  2. राजीव गांधी खेल रत्न अवार्ड
  3. पद्म भूषण अवार्ड।

छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
अभिनव बिन्द्रा ने निशानेबाज़ी में ऐतिहासिक सोने का तमगा कब जीता ?
उत्तर-
ओलम्पिक खेलों में समूचा भारत और उसके माता-पिता सांसें रोक कर आगे उसकी जीत के लिए प्रार्थना कर रहे थे। बेशक अभिनव बिन्द्रा पहले राउंड में थोड़ा पीछे रह गया था परन्तु वह आपनी एकाग्रता को बरकरार रखता हुआ सही निशाना लगाने की कोशिश करता रहा । आखिर उसने अपनी ज़िन्दगी का बेहतरीन निशाना साधा जिस के साथ वह ओलम्पिक खेलों में व्यक्तिगत सोने का तमगा जीतने वाला पहला भारतीय खिलाड़ी बन गया।

प्रश्न 2.
अभिनव बिन्द्रा को निशानेबाज़ी के लिए किस ने प्रेरित किया ?
उत्तर-
राणा गुरमीत सिंह सोढी जो पंजाब के खेल मंत्री रहे थे, अभिनव बिन्द्रा के पिता जी को मिले। उनके पिता ने बिन्द्रा को शूटिंग की सिखलाई देने के लिए कहा। उन्होंने अभिनव बिन्द्रा के पिता जी को सलाह देते कहा कि वह अभिनव बिन्द्रा को निशानेबाज़ी खेल के लिए उत्साहित करें। बिन्द्रा के पिता जी ने उसकी सलाह मान ली और निशानेबाज़ी के लिए किसी अच्छे कोच के बारे में बताने के लिए कहा।

प्रश्न 3.
अभिनव बिन्द्रा की निशानेबाज़ी की लगन के बारे में लिखें।
उत्तर-
अभिनव बिन्द्रा को अभ्यास के लिए अपने घर ही शूटिंग रेंज तैयार करवा दिया ताकि वह निर्विघ्न अभ्यास करे। वह सारा-सारा दिन अभ्यास में लगा रहता। उसको दोस्तों के साथ घूमना बिल्कुल पसन्द नहीं था। उसने सिर्फ अपने आप को निशानेबाज़ी के अभ्यास पर केन्द्रित कर लिया। क्योंकि उसका उद्देश्य ओलम्पिक खेलों में भारत के लिए सोने का तमगा जीतना था।

PSEB 8th Class Physical Education Solutions Chapter 5 सुनहरी लड़का : श्री अभिनव बिन्द्रा

प्रश्न 4.
अभिनव बिन्द्रा के प्रारम्भिक जीवन के बारे में लिखो।
उत्तर-
अभिनव बिन्द्रा का जन्म पंजाब के बीच बसे जिला एस०ए० एस० नगर (मोहाली) के कस्बा जीरकपुर में एक सिक्ख परिवार में 28 सितम्बर, 1982 ई० को पिता डॉ० अपजीत सिंह बिन्द्रा और श्रीमती बबली बिन्द्रा के घर हुआ। वह दो बहन भाई थे। उसे परिवार में सबसे छोटा होने के कारण माता-पिता की तरफ से बहुत लाड-प्यार मिला। उसने प्रारंभिक शिक्षा दून स्कूल (देहरादून) और सेंट स्टीफन्ज़ स्कूल (चण्डीगढ़) से हासिल की। उसने बी०बी०ए० की पढ़ाई विदेश जाकर प्राप्त की ।