PSEB 9th Class Physical Education Solutions Chapter 5 1947 के पश्चात् पंजाब में खेलों की प्रगति

Punjab State Board PSEB 9th Class Physical Education Book Solutions Chapter 5 1947 के पश्चात् पंजाब में खेलों की प्रगति Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 9 Physical Education Chapter 5 1947 के पश्चात् पंजाब में खेलों की प्रगति

PSEB 9th Class Physical Education Guide 1947 के पश्चात् पंजाब में खेलों की प्रगति Textbook Questions and Answers

बहुत छोटे उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
क्या देश के विभाजन ने पंजाब में खेलों के विकास को प्रभावित किया था ?
उत्तर-
हां, किया था।

प्रश्न 2.
पंजाब में ओलिम्पिक एसोसिएशन की पुनः स्थापना कब हुई ?
उत्तर-
1948 में।

प्रश्न 3.
किन्हीं दो संस्थाओं के नाम लिखो जिन का खेलों की प्रगति में योगदान हो।
उत्तर-

  1. पंजाब पुलिस
  2. सीमा सुरक्षा बल।

प्रश्न 4.
क्या पंचायती राज खेल परिषद् लड़कियों के फुटबाल मुकाबले करवाती है अथवा नहीं ?
उत्तर-
नहीं करवाती।

प्रश्न 5.
रस्सा-कशी (Tug of War) के मुकाबले दोनों लड़के और लड़कियों के लिए करवाए जाते हैं। सही अथवा ग़लत ।
उत्तर-
सही।

प्रश्न 6.
क्या लीडर इंजीनियरिंग वर्क्स, जालन्धर खेलों की प्रगति में योगदान दे रहा है अथवा नहीं ?
उत्तर-
नहीं।

प्रश्न 7.
पंजाब शिक्षा विभाग स्कूलों में खेलों की प्रगति की कौन देखभाल करता है ?
उत्तर-
डी० पी० आई० स्कूल्ज़।

प्रश्न 8.
पंजाब शिक्षा विभाग कॉलिजों में खेलों की देखभाल कौन करता है ?
उत्तर-
डी० पी० आई० कॉलिजिज़।

प्रश्न 9.
क्या पंजाब स्पोर्ट्स विभाग का खेलों में योगदान है ?
उत्तर-
हां, पंजाब स्पोर्ट्स विभाग का योगदान है।

प्रश्न 10.
लड़कियों के लिए पंचायती राजखेल परिषद् कौन-कौन सी प्रतियोगिताएं करवाती है ?
उत्तर-

  • कबड्डी
  • हॉकी
  • खो-खो
  • रस्सा-कशी।

छोटे उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
देश के विभाजन ने पंजाब में किस प्रकार खेलों के विकास को प्रभावित किया ?
(Describe the effects of Partition of India on the sports development of Punjab.)
उत्तर-
15 अगस्त, 1947 को भारत अंग्रेजों से मुक्त हुआ। परन्तु इसके साथ ही देश का भारत तथा पाकिस्तान नामक दो देशों में विभाजन हो गया। इस विभाजन ने पंजाब की खेलों के विकास पर गहरी चोट मारी। खेलों के अच्छे-अच्छे मैदान तथा खेलों का सामान बनाने वाला नगर स्यालकोट पाकिस्तान में चला गया। खेल एसोसिएशनें टूट गईं। इस प्रकार पंजाब खेलों के क्षेत्र में शरणार्थी बन गया।

प्रश्न 2.
पंजाब में ओलम्पिक एसोसिएशन की पुनः स्थापना किस प्रकार हुई ? (How did the Punjab Olympic Association come into existence ?)
उत्तर-
भारत के विभाजन रूपी तूफान ने पंजाब के खेलों के विकास को अपनी लपेट में ले लिया। इस तूफान के गुजर जाने के पश्चात् पंजाब के खेल प्रेमियों ने अपना होश सम्भाला। उन्होंने 1948 ई० में शिमला में एक सभा बुलाई। इसके साथ ही पंजाब ओलम्पिक एसोसिएशन की स्थापना हुई। इस संस्था के प्रधान श्री जी० डी० सोंधी नियुक्त हुए।

प्रश्न 3.
कौन-सी संस्थाओं ने खेलों की प्रगति में योगदान दिया है ?
(Name the various organisations which promotes sports in our state.)
उत्तर-
निम्नलिखित संस्थाओं ने खेलों की प्रगति में योगदान दिया है—

  • पंजाब पुलिस।
  • सीमा सुरक्षा बल।
  • लीडर इंजीनियरिंग वर्क्स, जालन्धर।
  • जगतजीत कॉटन एवं टैक्सटाइल्ज़ मिल्ज़ फगवाड़ा।
  • पंजाब राज्य बिजली बोर्ड।
  • पैप्सू रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन।

प्रश्न 4.
पंचायती राज खेल परिषद कौन-से खेल मकाबले करवाती है ?
(Mention the various sports competitions which are organized by the Panchayati Raj Khel Parishad.)
उत्तर-
पंचायती राज खेल परिषद निम्नलिखित खेल मुकाबले करवाती हैलड़कों के लिए –

  1. फुटबाल
  2. हॉकी
  3. कबड्डी
  4. वालीबाल
  5. रस्साकशी
  6. एथलेटिक्स
  7. भार उठाना
  8. कुश्ती
  9. जिम्नास्टिक।

लड़कियों के लिए –

  • कबड्डी
  • खो-खो
  • हॉकी आदि।

प्रश्न 5.
पंजाब के खेल विकास में पंजाब स्पोर्ट्स विभाग का क्या स्थान है ? पंजाब स्पोर्ट्स विभाग के योगदान पर प्रकाश डालो।
(The Punjab Sports Department has a special place in the promotion of Games and Sports. Do you agree with the statement ?)
अथवा
पंजाब स्पोर्ट्स विभाग के योगदान का वर्णन करें। (Discuss the contribution of Punjab Sports Department.)
उत्तर-
पंजाब खेल विभाग (Punjab Sports Department) पंजाब सरकार ने . प्रान्त में खेलों की प्रगति के लिए 1961 में पंजाब खेल विभाग की स्थापना की। इस विभाग ने प्रान्त के प्रत्येक जिले में जिला स्पोर्ट्स विभाग खोला है। इसके प्रबन्ध का उत्तरदायित्व जिला स्पोर्ट्स अधिकारी को सौंपा गया है। प्रत्येक जिले को तहसील तथा तहसील को आगे उप-केन्द्रों (Sub-centres) में बांटा गया है। इन उप-केन्द्रों में विभिन्न खेलों के विकास के लिए तथा प्रशिक्षण के लिए कुशल कोचों की व्यवस्था की गई है।

खिलाड़ियों की सुविधा के लिए विभिन्न स्थानों पर स्पोर्ट्स होस्टल खोले गए हैं। इन होस्टलों में रहने वाले विद्याथियों के लिए सामान, फ़ीस तथा खान-पान का प्रबन्ध स्पोटर्स विभाग द्वारा किया जाता है। अच्छे खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाने के लिए और उनको उत्तम खेल के लिए प्रेरित करने के लिए वार्षिक वज़ीफे दिए जाते हैं। इतना ही नहीं पंजाब स्पोटर्स विभाग प्रति वर्ष राज्य स्तर पर सभी खेलों के मुकाबले का आयोजन करता है। ये मुकाबले ‘मैन स्पोर्टस फैस्टीक्ल’ तथा ‘विमैन स्पोर्ट्स फैस्टीवल’ के नाम से जाने जाते हैं। विभाग अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर उच्च स्थान प्राप्त करने वाले खिलाड़ियों को सम्मान-पत्र तथा वजीफे देता है। यह विभाग प्रति वर्ष अमृतसर में महाराजा रणजीत सिंह हॉकी टूर्नामैंट का आयोजन करता है। पंजाब स्पोर्ट्स विभाग पेशावर कॉलेजों (Professional Colleges) में विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित सीटों के लिए ग्रेडेशन करता है।

बड़े उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
1947 के पश्चात् पंजाब में खेलों की प्रगति के विषय में विवरण दो। (Describe the development of sports in Punjab since 1947.)
उत्तर-
15 अगस्त, 1947 को भारत आजाद हुआ। अंग्रेज़ लगभग 200 साल तक शासन करने के पश्चात् भारत छोड़ कर तो चले गए परन्तु जाते-जाते इसका विभाजन कर पाकिस्तान का निर्माण भी कर गए। इस विभाजन ने पंजाब की खेलों को बुरी तरह आघात पहुंचाया। खेलों के अच्छे-अच्छे मैदान पाकिस्तान में चले गए। पंजाब सरकार तथा लोगों की तरह पंजाब खेलों के क्षेत्र में बहुत ही पिछड़ गया। पंजाब अच्छे क्रीड़ा-क्षेत्रों से वंचित हो गया। खेलों के सामान का उत्पादन करने वाला शहर स्यालकोट (Sialkot) भी पाकिस्तान में चला गया। खेल एसोसिएशनें टूट गईं। संक्षेप में विभाजन रूपी तूफान से सम्पूर्ण वातावरण ही इस प्रकार का बन गया कि पंजाब में खेलों की स्थिति, अत्यन्त शोचनीय हो गई।

विभाजन रूपी तूफान के गुज़र जाने के बाद पंजाब के क्रीडा-प्रेमियों ने होश सम्भाला और उन्होंने पंजाब में खेलों का जीवन दान देने का निश्चय किया। परिणामतः 1948 में उन्होंने शिमला (Shimla) में एक सभा का आयोजन किया और इसी वर्ष पंजाब ओलम्पिक एसोसिएशन (Punjab Olympic Association) की पुनर्स्थापना हुई। इस संस्था के प्रथम प्रधान श्री जी० डी० सोंधी (G. D. Sondhi) तथा सचिव श्री एफ० सी० अरोड़ा (E.C. Arora) चुने गए। जल्द ही इस संस्था ने अपना कार्य शुरू कर दिया। 1948 और 1951 में हॉकी तथा वालीबाल एसोशिएशनें अस्तित्व में आईं। तत्पश्चात् धीरे-धीरे बास्केटबाल, कबड्डी, बॉक्सिग, साइकलिंग एसोसिएशनें स्थापित हुईं। विभिन्न प्रान्तों की एसोसिएशनों की स्थापना के बाद खेलों के स्तर को ऊंचा उठाने के लिए पहले जिला स्तर और फिर प्रान्तीय स्तर पर मुकाबलों का आयोजन किया गया।

1948 ई० के पश्चात् पंजाब हॉकी और वालीबाल एसोसिएशन ने पाकिस्तान और अन्य देशों से टीमों को मुकाबलों के लिए आमन्त्रित किया। इसके अतिरिक्त खेलों के स्तर को ऊंचा उठाने के लिए अखिल भारतीय स्तर (All India Level) पर टूर्नामैंटों का आयोजन किया गया। इनमें से महाराजा रणजीत सिंह टूर्नामैंट, अमृतसर, मेजर भूपेन्दर सिंह टूर्नामेंट लुधियाना, शहीद करनैल सिंह मैमोरियल टूर्नामैंट, के नाम उल्लेखनीय हैं। 1957 में पंजाब में प्रथम बार राज्य स्तर पर ओलम्पिक एसोसिएशन ने खेल मुकाबलों का आयोजन किया।

पंजाब सरकार ने भी राज्यों में खेलों के स्तर को उन्नत करने के लिए विशेष रुचि ली है। यह राज्य की यूनिवर्सिटियों को खेल का मैदान, जिमनेज़ियम, स्विमिंग-पूल आदि के निर्माण के लिए आर्थिक सहायता देती है। पंजाब में खेलों के विकास के लिए पंजाब पुलिस, बी० एस० एफ०, लीडर इंजीनीयरिंग वर्क्स जालन्धर, जगतजीत कॉटन एण्ड टैक्सटाइल्ज़ मिल्ज़, फगवाड़ा आदि ने विशेष योगदान दिया है। इनकी टीमों ने भारतीय ड्यूरांड कप दिल्ली, मुम्बई स्वर्ण कप, मुम्बई नेहरू हॉकी प्रतियोगिता, दिल्ली जैसे महत्त्वपूर्ण टूर्नामैंटों में शानदार सफलता प्राप्त की।

पंजाब सरकार ने खेलों के स्तर को ऊंचा उठाने के लिए तथा अध्यापकों के प्रशिक्षण के लिए गवर्नमैंट कॉलेज ऑफ़ फ़िजीकल एजूकेशन की स्थापना पटियाला में की है। इतनी ही नहीं पंजाब सरकार ने शारीरिक शिक्षा के विषय को अन्य विषयों की भान्ति अनिवार्य घोषित कर दिया है। इस प्रकार पंजाब सरकार की खेलों में विशेष रुचि लेने के कारण पंजाब खेलों के क्षेत्र में आश्चर्यजनक प्रगति कर रहा है। पंजाब ने देश को ऐसे सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी एवं महान् प्रबन्धक प्रदान किये हैं जिन्होंने अपने सर्वोत्तम खेल से पंजाब के ही नहीं बल्कि भारत के नाम को चार चांद लगा दिए हैं।

प्रश्न 2.
पंजाब शिक्षा विभाग ने खेलों की प्रगति में क्या योगदान दिया है ?
(Describe the contribution of the Punjab Education Department in the promotion of sports.)
उत्तर-
पंजाब शिक्षा विभाग ने खेलों की प्रगति में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। इसका संक्षिप्त वर्णन इस प्रकार है –

  • पंजाब सरकार ने खेलों को उन्नत करने के लिए डी० पी० आई० (स्कूल्ज़) तथा डी० पी० आई० (कॉलेजों) की निगरानी में एक विशेष विभाग की स्थापना की है। यह विभाग स्कूलों तथा कॉलेजों में खेलों का स्तर उन्नत करने के लिए पूरा प्रयत्न कर रहा है।
  • खेलों के विकास के लिए पंजाब शिक्षा विभाग ने 1961 में जालन्धर में स्टेट स्कूल ऑफ़ स्पोर्ट्स तथा स्टेट कॉलेज ऑफ़ स्पोर्ट्स स्थापित किए हैं। इन संस्थाओं में प्रसिद्ध खिलाड़ी प्रवेश पा कर पढ़ाई के साथ-साथ खेलों में प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। इन संस्थाओं में विद्या प्राप्त करने वाले लड़कों तथा लड़कियों के लिए भोजन, निवास तथा फ़ीस आदि का प्रबन्ध पंजाब शिक्षा विभाग करता है।
  • पंजाब शिक्षा विभाग ने प्रत्येक जिले में खेलों की देखभाल का उत्तरदायित्व जिला शिक्षा अधिकारियों को सौंप रखा है। प्रत्येक जिले में जोन (Zone) तथा ज़िले (District) स्तर पर मुकाबलों का प्रबन्ध किया जाता है। शिक्षा विभाग कुछ मुकाबले ग्रीष्म ऋतु में और कुछ मुकाबले सर्दी की ऋतु में करवाता है।
  • पंजाब शिक्षा विभाग ने खेलों के स्तर को ऊंचा उठाने के लिए विभिन्न आयु के बच्चों के लिए खेल मुकाबलों का आयोजन किया है। अब प्राइमरी, मिनी तथा जूनियर स्तर पर मुकाबले करवाए जाते हैं।
  • शिक्षा विभाग ने पटियाला, जालन्धर तथा फिरोज़पुर में सर्विस ट्रेनिंग सैंटर खोले हैं। यहां शारीरिक शिक्षा तथा खेलों में आई नवीन प्रवृत्तियों की जानकारी प्रदान की जाती है।
  • पंजाब शिक्षा विभाग ने अन्य विषयों की भान्ति शारीरिक शिक्षा को स्कूलों तथा कॉलेजों में लागू किया है।
  • शिक्षा विभाग प्रति वर्ष गर्मी की छुट्टियों में उभरते हुए नवयुवक खिलाड़ियों को उच्च स्तर के प्रशिक्षण के लिए प्रबन्ध करता है।
  • शिक्षा विभाग द्वारा स्कूलों तथा कालेजों को खेलों में उच्च-स्तर से प्रशिक्षण के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है। इससे खेल के मैदान बनाए जाते हैं और खेल का सामान खरीदा जाता है।
  • पंजाब शिक्षा विभाग राष्ट्रीय शारीरिक योग्यता लहर के लिए मुकाबलों का आयोजन करता है।
  • इस विभाग ने राज्य के विभिन्न कॉलेजों, इंजीनियरिंग तथा मैडकिल कॉलेजों के श्रेष्ठ खिलाड़ियों के लिए स्थान सुरक्षित रखे हैं। इससे उच्च-स्तर के खिलाड़ियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलता है।
    इस प्रकार पंजाब शिक्षा विभाग खेलों की प्रगति के लिए विशेष भूमिका निभा रहा है।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित का खेल प्रगति में योगदान पर नोट लिखो
(क) पंजाब राज्य के विश्वविद्यालय
(ख) पंजाब स्टेट स्पोर्ट्स कौंसिल
(ग) पंचायती राज्य खेल परिषद्
(घ) पंजाब ओलिम्पक एसोसिएशन
(ङ) पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड।
[Write the contribution of the following in the field of sports (A) The Universities of Punjab State (B) The Punjab State Council of Sports (C) The Panchayati Raj Khel Parishad (D) The Punjab Olympic Association (E) The Punjab School Education Board.]
उत्तर-
(क)पंजाब राज्य के विश्वविद्यालय
(Punjab State Universities) जब भारत का विभाजन हुआ तब पंजाब में एक ही विश्वविद्यालय पंजाब विश्वविद्यालय लाहौर में था। 1947 के विभाजन के पश्चात् विश्वविद्यालय पहले सोलन (हिमाचल प्रदेश) और बाद में यह विश्वविद्यालय चंडीगढ़ में स्थापित हो गया। इस समय पंजाब में चार विश्वविद्यालय हैं- पंजाब विश्वविद्यालय, चण्डीगढ़; पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला; पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना तथा गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर। इनमें से पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना के साथ केवल कृषि के ही कॉलेज हैं, जबकि पंजाब के अन्य कॉलेज बाकी के तीन विश्वविद्यालयों के साथ संलग्न हैं।

सभी विश्वविद्यालयों में खेलों के लिए एक डायरेक्टर नियुक्त किया गया है। डायरेक्टर विश्वविद्यालय के साथ संलग्न कॉलेजों में खेल मुकाबलों का आयोजन करता है। इसके पश्चात् वह अन्तर-विश्वविद्यालय मुकाबलों के लिए अच्छी प्रकार से प्रशिक्षित लड़कों और लडकियों की टीमें भेजता है। प्रत्येक विश्वविद्यालय में खेलों के प्रबन्धकीय विभाग बनाए गए हैं। इनका काम विश्वविद्यालय में खेल के मैदान खेल के सामान तथा खेल के मुकाबलों की व्यवस्था करना है। कृषि विश्वविद्यालय को छोड़कर अन्य विश्वविद्यालयों में बाकी विषयों की भान्ति शारीरिक शिक्षा का विषय पढ़ाया जाता है और इस विषय में परीक्षाएं भी ली जाती हैं। इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय के हर विभाग में अच्छे खिलाड़ियों के लिए सीटें सुरिक्षत रखी जाती हैं। इससे खिलाड़ियों को भी उच्च शिक्षा प्राप्त करके इंजीनियर, डॉक्टर तथा वैज्ञानिक बनने का अवसर मिलता है।

सभी विश्वविद्यालयों में खेलों की प्रगति के लिए खेल के मैदानों, स्विमिंग पूलों, स्टेडियमों, जिमनेज़ियमों की व्यवस्था की गई है। पंजाब विश्वविद्यालय तथा गुरु नानक देव विश्वविद्यालय में विशेष विभाग खोले गए हैं जहां शारीरिक शिक्षा के अध्यापकों को प्रशिक्षण दिया जाता है। संक्षेप में, हम कह सकते हैं कि विश्वविद्यालय विभिन्न क्षेत्रो में श्रेष्ठ खिलाड़ी पैदा करने में प्रशंसनीय भूमिका निभा रहे हैं।

(ख) पंजाब स्टेट स्पोर्ट्स कौंसिल (Punjab State Sports Council)-
पंजाब सरकार ने 1961 में खेलों की प्रगति के लिए संस्था की स्थापना की जिसे पंजाब स्टेट स्पोर्ट्स कौंसिल का नाम दिया गया। इस कौंसिल का प्रमुख काम प्रान्त के युवकों और युवितयों में खेल भावना का संचार करना है। राज्य में बढ़िया खेल का सामान, जिमनेज़ियम, स्टेडियम, स्विमिंग पूल आदि बनाने का उत्तरदायित्व इस संस्था के ज़िम्मे है। इस काम के लिए पंजाब सरकार तथा भारत सरकार हर साल वित्तीय सहायता प्रदान करती है।

पंजाब स्टेट स्पोर्ट्स कौंसिल ने प्रत्येक जिले में जिला स्पोर्ट्स कौंसिल (District Sports Council) स्थापित की है। यह कौंसिल ज़िले के डिप्टी कमिश्नर के अधीन काम करती है। इसके सचिव के रूप में जिला स्पोर्ट्स अधिकारी काम करता है। पंजाब स्टेट स्पोर्ट्स कौंसिल का अध्यक्ष राज्य का मुख्यमन्त्री होता है तथा राज्य का डायरेक्टर स्पोर्ट्स इसका सचिव होता है। यह कौंसिल खेलों की प्रगति के लिए विशेष प्रयत्न करती है।

यह कौंसिल प्रसिद्ध खिलाड़ियों को, जिन्होंने अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर सफलता प्राप्त की हो, ‘महाराजा रणजीत सिंह एवार्ड’ से सम्मानित करती है। यह पुराने और रिटायर्ड वृद्ध खिलाड़ियों को जिन्होंने राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर खेलों में भाग लिया है, पेन्शनें देती है। यह कौंसिल राष्ट्रीय मुकाबलों में भाग लेने वाली टीमों का सारा खर्च सहन करती है। इसके अतिरिक्त यह कौंसिल अन्तर्राष्ट्रीय मुकाबलों में भाग लेने वाले पंजाबी खिलाडियों को विदेशों में जाने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की है।

(ग) पंचायती राज खेल परिषद् (Panchayati Raj Sports Council) –
पंजाब सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में खेलों की प्रगति के लिए 1967 में पंचायती राज खेल परिषद् की स्थापना की। इस परिषद् ने ग्रामीण नवयुवकों में खेल भावना तथा खेल मुकाबलों में रुचि तथा भ्रातृत्व के गुणों का संचार करने के विशेष प्रयत्न किए। इस परिषद् ने सभी जिलों में पंचायत समितियों की स्थापना की है जो अपने जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के मुकाबलों का आयोजन करती है। प्रत्येक पंचायत समिति इन मुकाबलों के लिए 250 रु० ज़िला समितियों को देती है। पंचायती राज खेल परिषद् लड़कों के लिए फुटबाल, हॉकी, कबड्डी, वालीबाल, रस्साकशी, एथ्लैटिक्स, भार उठाने, जिमनास्टिक तथा लड़कियों के लिए कबड्डी, खो-खो, हॉकी आदि खेलों के मुकाबलों का आयोजन करती है।

(घ) पंजाब ओलम्पिक एसोसिएशन (Punjab Olympic Association) –
पंजाब ओलम्पिक एसोसिएशन की स्थापना देश के विभाजन से पूर्व 1942 में श्री जी० डी० सोंधी के प्रयत्नों के फलस्लरूप हुई थी। परन्तु 1947 में देश के विभाजन के साथ ही इस संस्था का अस्तित्व मिट गया। 1948 में श्री जी० डी० सोंधी के यत्नों से पंजाब के खेल प्रेमियों की शिमला में एक सभा हुई जिसके फलस्वरूप पंजाब ओलम्पिक एसोसिएशन का पुनर्गठन हुआ। पंजाब की सभी खेल एसोसिएशनें भी इस संस्था की सदस्य बनीं।

इस संस्था का मुख्य काम न केवल विभिन्न खेल एसोसिएशनों के कार्य की देखरेख करना है, बल्कि इसके वित्तीय व्यय पर भी नज़र रखना है। यह समय-समय पर प्रान्तीय एसोसिएशनों को खेल की प्रगति के लिए सुझाव देती है और उनके परस्पर विवादों का निपटारा करती है। यह वर्ष में एक बार ओलम्पिक दिवस मनाती है और ओलिम्पिक लहर के विषय में जानकारी प्रदान करती है।

ओलम्पिक नियमों का पालन करवाना तथा खेल मुकाबलों में पेशेवर खिलाडियों (Professional Players) को भाग लेने से रोकना इस संस्था की ज़िम्मेवारी है। इसके अतिरिक्त यह संस्था साल में एक बार प्रान्तीय स्तर पर खेल मुकाबलों का आयोजन करती है।

(ङ) पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड – (Punjab School Education Board) –
पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की स्थापना पंजाब विश्वविद्यालय की परीक्षाओं के अधिक बोझ को कम करने के लिए, परीक्षाओं को अच्छी तरह से आयोजित करने तथा शीघ्र परिणाम निकालने के लिए की गई। इस बोर्ड का काम स्कूलों की विभिन्न श्रेणियों के लिए पाठ्यक्रम तथा पुस्तकें तैयार करना है।

पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड ने एक प्रशंसनीय काम किया है। वह यह कि अन्य विषयों की भान्ति शारीरिक शिक्षा को भी विद्यार्थियों को पढ़ाने का विषय बनाया और इस विषय पर परीक्षाएं भी ली जाती हैं। पंजाब शिक्षा बोर्ड हॉकी की खेल को विशेष रूप से उन्नत करने के लिए मुकाबलों का आयोजन करता है। यह प्राइमरी स्तर पर खेलों की प्रगति के लिए ब्लॉक स्तर पर स्कूल के बच्चों के लिए खेल मुकाबले आयोजित करता है।

1947 के पश्चात् पंजाब में खेलों की प्रगति PSEB 9th Class Physical Education Notes

  • देश के विभाजन का खेलों पर प्रभाव-पंजाब का 1947 में विभाजन हुआ। जिसका खेलों पर बहुत प्रभाव पड़ा क्योंकि इससे खेलों के बहुत-से मैदान पाकिस्तान में चले गए।
  • पंजाब में ओलम्पिक एसोसिएशन की स्थापना-इस एसोसिएशन की स्थापना 1948 में हुई जिसके प्रथम प्रधान जी० डी० सौन्धी और सैक्रेटरी प्रो० एफ० सी० अरोड़ा बने।
  • संस्थाओं का खेलों की प्रगति में योगदान-पंजाब पुलिस विभाग, सीमा सुरक्षा बल, पंजाब राज्य बिजली बोर्ड आदि संस्थानों ने खेलों की प्रगति में योगदान दिया।
  • पंजाब खेल विभाग-1961 में पंजाब ने खेल विभाग की स्थापना की जिस द्वारा प्रत्येक जिले में जिला स्पोर्ट्स विभाग की स्थापना की गई और खिलाड़ियों के लिए स्पोर्ट्स होस्टल बनाए गए।
  • पंजाब राज्य की यूनिवर्सिटियां-पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़, पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला, पंजाब खेतीबाड़ी यूनिवर्सिटी लुधियाना, गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी अमृतसर हैं। जिनमें डायरेक्टर स्पोर्ट्स नियुक्त किए गए हैं, जो खेलों का संचालन करते हैं।
  • पंजाब स्टेट स्पोर्ट्स कौंसिल-यह कौंसिल 1971 में खेलों की प्रगति के लिए आरम्भ हुई, जिसका मुख्य कार्य पंजाब के युवकों और युवतियों में खेल भावना का संचार करना है।
  • पंचायती राज्य खेल परिषद्-पंजाब सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में खेलों की प्रगति के लिए 1967 में पंचायती राज खेल परिषद् की स्थापना की। जिसे अब पंजाब राज्य खेल विभाग में मिलाया गया है।
  • पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड-पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड ने दूसरे विषयों की तरह शारीरिक शिक्षा को विषय के रूप में अपनाया और ये खेलों का संगठन सभी पंजाब के स्कूलों में करता है।

PSEB 8th Class Science Solutions Chapter 14 विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव

Punjab State Board PSEB 8th Class Science Book Solutions Chapter 14 विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 8 Science Chapter 14 विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव

PSEB 8th Class Science Guide विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव Textbook Questions and Answers

अभ्यास

प्रश्न 1.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
(a) विद्युत् चालन करने वाले अधिकांश द्रव ……………….., ………………… तथा ………………. के विलयन होते हैं।
(b) किसी विलयन से विद्युत् धारा प्रवाहित होने पर …………………… प्रभाव उत्पन्न होता है।
(c) यदि कॉपर सल्फेट विलयन से विद्युत् धारा प्रवाहित की जाए तो कॉपर बैटरी के ………………………….. टर्मिनल से संयोजित प्लेट पर निक्षेपित होता है।
(d) विद्युत् धारा द्वारा किसी पदार्थ पर वांछित धातु की परत निक्षेपित करने की प्रक्रिया को ………………… कहते हैं।
उत्तर-
(a) अम्ल, क्षार, लवण
(b) रासायनिक
(c) -ve (ऋण)
(d) विद्युत् लेपन।

प्रश्न 2.
जब किसी संपरीक्षित्र के स्वतंत्र सिरों को किसी विलयन में डुबोते हैं तो चुंबकीय सुई विक्षेपित होती है। क्या आप ऐसा होने के कारण की व्याख्या कर सकते हैं ?
उत्तर-
विलयन में विद्युत् धारा के प्रवाहित होने से चुंबकीय सुई विक्षेपित होती है।

PSEB 8th Class Science Solutions Chapter 14 विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव

प्रश्न 3.
ऐसे तीन द्रवों के नाम लिखिए जिनका परीक्षण चित्र में दर्शाए अनुसार करने पर चुंबकीय सुई विक्षेपित हो सके।
PSEB 8th Class Science Solutions Chapter 14 विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव 1
उत्तर-
अम्ल, क्षार और लवण के विलयन।

प्रश्न 4.
चित्र में दर्शायी गई व्यवस्था में बल्ब नहीं जलता। क्या आप संभावित कारणों की सूची बना सकते हैं ? अपने उत्तर की व्याख्या कीजिए।
PSEB 8th Class Science Solutions Chapter 14 विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव 2
उत्तर-
चित्र में दर्शाई गई व्यवस्था में बल्ब प्रदीप्त नहीं होता है परंतु इसका अर्थ यह नहीं कि द्रव में से धारा प्रवाहित नहीं हो रही। हो सकता है कि द्रव इतना दुर्बल हो कि बल्ब को प्रदीप्त करने में समर्थ न हो। इसलिए विश्वसनीय जाँच के लिए, LED का उपयोग किया जा सकता है, जो बहुत ही दुर्बल विद्युत् धारा से भी प्रदीप्त हो उठता है।

प्रश्न 5.
दो द्रवों A तथा B के विद्युत् चालन की जाँच करने के लिए एक संपरीक्षित्र का प्रयोग किया गया। यह देखा गया कि संपरीक्षित का बल्ब द्रव A के लिए चमकीला दीप्त हुआ जबकि द्रव B के लिए अत्यंत धीमा दीप्त हुआ। आप निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि :
(i) द्रव A, द्रव B से अच्छा चालक है।
(ii) द्रव B, द्रव A से अच्छा चालक है।
(iii) दोनों द्रवों की चालकता समान है।
(iv) द्रवों की चालकता के गुणों की तुलना इस प्रकार नहीं की जा सकती।
उत्तर-
(i) द्रव A, द्रव B से अच्छा चालक है।

प्रश्न 6.
क्या शुद्ध जल विद्युत् का चालन करता है ? यदि नहीं, तो इसे चालन बनाने के लिए हम क्या कर सकते हैं ?
उत्तर-
शुद्ध जल विद्युत् का चालन नहीं करता। इसको चालक बनाने के लिए इसमें कुछ बूंदें तनु सल्फ्यूरिक अम्ल की डालनी चाहिए।

प्रश्न 7.
आग लगने के समय, फायरमैन पानी के हौज़ (पाइपों) का उपयोग करने से पहले उस क्षेत्र की मुख्य विद्युत् आपूर्ति को बन्द कर देते हैं। व्याख्या कीजिए कि वे ऐसा क्यों करते हैं ?
उत्तर-
शुद्ध जल विद्युत्हीन चालक है, परंतु नल का जल विद्युत् का अच्छा चालक है। विद्युत् के झटके से बचने के लिए फायरमैन पानी के हौज (पाइपों) का उपयोग करने से पहले मुख्य विद्युत् आपूर्ति को बंद कर देते हैं।

PSEB 8th Class Science Solutions Chapter 14 विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव

प्रश्न 8.
तटीय क्षेत्र में रहने वाला एक बालक अपने संपरीक्षित से पीने के पानी तथा समुद्र के पानी का परीक्षण करता है। वह देखता है कि समुद्र के पानी के लिए चुंबकीय सुई अधिक विक्षेप दर्शाती है। क्या आप इसके कारण की व्याख्या कर सकते हैं ? ।
उत्तर-
समुद्र के पानी में लवणों की सघनता अधिक होती है। इसी कारण चुंबकीय सुई अधिक विक्षेपित होती है।

प्रश्न 9.
क्या तेज़ वर्षा के समय किसी लाइनमैन के लिए बाहरी मुख्य लाइन के विद्युत् तारों की मरम्मत .. करना सुरक्षित होता है ? व्याख्या कीजिए।
उत्तर-
नहीं, लाइनमैन के लिए वर्षा के समय, बाहरी मुख्य लाइन के विद्युत् तारों की मरम्मत करना सुरक्षित नहीं है क्योंकि वर्षा का जल विद्युत् का चालक है, जिससे लाइनमैन को विद्युत् झटका लग सकता है।

प्रश्न 10.
पहेली ने सुना था कि वर्षा का जल उतना ही शुद्ध है जितना कि आसुत जल। इसलिए उसने एक स्वच्छ काँच के बर्तन में कुछ वर्षा का जल एकत्रित करके संपरीक्षित्र से उसका परीक्षण किया। उसे यह देखकर आश्चर्य हुआ कि चुंबकीय सुई विक्षेप दर्शाती है। इसका क्या कारण हो सकता है ?
उत्तर-
निसंदेह वर्षा का जल आसुत जल की तरह ही शुद्ध होता है, परंतु वातावरण अशुद्धियों से भरा पड़ा है। ये अशुद्धियाँ वर्षा के जल में घुल कर इसे विद्युत् चालक बना देती हैं।

प्रश्न 11.
अपने आस-पास उपलब्ध विद्युत्लेपित वस्तुओं की सूची बनाइए।
उत्तर-
विद्युत् लेपित वस्तुएँ-

  1. साइकिल का हैंडल
  2. कार के पहिए
  3. कृत्रिम गहने
  4. स्नानगृह के नल
  5. गैस चुल्हे के बर्नर।

प्रश्न 12.
जो प्रक्रिया आपने पाठ्य-पुस्तक के क्रियाकलाप 14.7 में देखी वह कॉपर के शोधन में उपयोग होती है। एक पतली शुद्ध कॉपर छड़ एवं एक अशुद्ध कॉपर की छड़ इलेक्ट्रोड के रूप में उपयोग की जाती है। कौन-सा इलेक्ट्रोड बैटरी के धन टर्मिनल से संयोजित किया जाए ? कारण भी लिखिए।
उत्तर-
जब कॉपर सल्फेट विलयन में विद्युत् धारा प्रवाहित की जाती है, तो कॉपर सल्फेट, कॉपर और सल्फेट में नियोजित होता है। कॉपर ऋण टर्मिनल पर जुड़े अशुद्ध कॉपर इलेक्ट्रोड पर निक्षेपित हो जाता है जबकि धन टर्मिनल पर जुड़ा शुद्ध कॉपर इलेक्ट्रोड विलयन में कॉपर की आपूर्ति करता है।

PSEB 8th Class Science Solutions Chapter 14 विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव

PSEB Solutions for Class 8 Science विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव Important Questions and Answers

TYPE-I
अति लघु उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
क्या मानव शरीर विद्युत् चालक है या विद्युत् प्रतिरोधक ?
उत्तर-
विद्युत् चालक।

प्रश्न 2.
विद्युत चालक (Conductors) क्या है ?
उत्तर-
विद्युत् चालक – पदार्थ जो अपने में से विद्युत् धारा प्रवाहित होने देते हैं, विद्युत् चालक कहलाते हैं। उदाहरण-चाँदी, ताँबा, एल्यूमीनियम, लोहा, मानव शरीर आदि।

प्रश्न 3.
विद्युतरोधक (Insulators) क्या है ?
उत्तर-
विद्युतरोधक-वे पदार्थ जो अपने से विद्युत् धारा प्रवाहित नहीं होने देते, विद्युत्रोधक कहलाते हैं। उदाहरण-लकड़ी, रबड़, रेशम तथा प्लास्टिक आदि।

प्रश्न 4.
क्या सभी द्रव विद्युत् प्रवाहित होने देते हैं ?
उत्तर-
नहीं।

प्रश्न 5.
एल० ई० डी० (LED) क्या है ?
उत्तर-
एल० ई० डी०-प्रकाश उत्सर्जक डायोड।

प्रश्न 6.
उस प्रक्रम का नाम बताओ जिसमें कोई भी रासायनिक पदार्थ विद्युत् धारा के प्रवाह से अपघटित हो जाता है ?
उत्तर-
विद्युत् अपघटन (Electrolysis)।

PSEB 8th Class Science Solutions Chapter 14 विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव

प्रश्न 7.
अम्लयुक्त जल के विद्युत् अपघटन से क्या उत्पाद मिलते हैं ?
उत्तर-
हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन।

प्रश्न 8.
विद्युत् लेपन में विद्युत् धारा का कौन-सा प्रभाव उपयोग में आता है ?
उत्तर-
रासायनिक प्रभाव।

प्रश्न 9.
विद्युत् धारा का कौन-सा प्रभाव बल्ब जलाने में सहायक होता है ?
उत्तर-
ऊष्मीय प्रभाव।

प्रश्न 10.
दुर्बल और थोड़ी विद्युत् धारा का परीक्षण कैसे होता है ?
उत्तर-
एल० ई० डी० के उपयोग से।

प्रश्न 11.
विद्युत् धारा के विभिन्न प्रभावों के नाम लिखो।
उत्तर-
ऊष्मीय प्रभाव, रासायनिक तथा चुंबकीय प्रभाव।

प्रश्न 12.
क्या वायु विद्युत्रोधक है ?
उत्तर-
हाँ।

PSEB 8th Class Science Solutions Chapter 14 विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव

प्रश्न 13.
कुछ द्रवों के नाम बताइए जो विद्युत् चालक हैं ?
उत्तर-
नींबू का रस, चूने का पानी, सिरका, नल का जल।

प्रश्न 14.
क्या विद्युत् चालकों को विद्युत्हीन चालकों में, विशेष परिस्थितियों में वर्गीकृत कर सकते
उत्तर-
हाँ।

प्रश्न 15.
कौन-से द्रव विद्युत् चालन कर सकते हैं ?
उत्तर-
म्ल, क्षार और लवण के विलयन।

प्रश्न 16.
इलेक्ट्रोड (Electrodes) क्या है ?
उत्तर-
इलेक्ट्रोड – बैटरी से जोड़ने के लिए विद्युत् चालक द्रव में उपयुक्त की जाने वाली धातु की छड़ें, इलेक्ट्रोड कहलाती हैं।

प्रश्न 17.
किस प्रक्रम द्वारा सस्ती धातु को सोने अथवा महँगी धातु से ढका जाता है ?
उत्तर-
विद्युत् लेपन।

प्रश्न 18.
क्या विद्युत् लेपन लाभकारी प्रक्रम है ?
उत्तर-
हाँ।

PSEB 8th Class Science Solutions Chapter 14 विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव

TYPE-II
लघु उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
वायु विद्युत् की अच्छी चालक नहीं है। प्रयोग द्वारा दर्शाइए।
उत्तर-
वायु विद्युत्हीन चालक – एक बल्ब लेकर एक सैल और स्विच से इसे जोड़ो। जब स्विच में पिन का उपयोग होता है तो बल्ब प्रकाशमान हो जाता है। परंतु पिन को हटाने से स्विच के बीच वायु होती है और विद्युत् धारा नहीं बहती। इससे सिद्ध होता है कि वायु विद्युत् की अच्छी चालक नहीं है।

प्रश्न 2.
विद्युत् अपघटन (Electrolysis) क्या है ?
उत्तर-
विद्युत् अपघटन – विद्युत् के प्रवाह से रासायनिक यौगिकों के विलयन का अपघटित होना, विद्युत् अपघटन कहलाता है। जब अम्लीय जल में से विद्युत् धारा प्रवाहित होती है तो यह अपने संघटक-हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में टूट जाता है। हाइड्रोजन कैथोड पर और ऑक्सीजन एनोड पर एकत्रित होती है।

प्रश्न 3.
विद्युत् लेपन (Electroplating) क्या है ?
उत्तर-
विद्युत् लेपन – विद्युत् अपघटन के प्रक्रम द्वारा किसी सस्ती धातु पर मूल्यवान धातु (जैसे जस्त, चाँदी और सोने) की पतली परत चढ़ा कर संक्षरण से बचाया जा सकता है। इस प्रक्रम को विद्युत् लेपन कहते हैं।

प्रश्न 4.
LED पर एक संक्षिप्त नोट लिखो।
उत्तर-
एल० ई० डी० (LED) – यह प्रकाश उत्सर्जक डायोड है। यह अति दुर्बल विद्युत् धारा से भी दीप्त हो उठता है।

इसमें एक बल्ब और दो तारें होती हैं। तारों को लीड्स कहते हैं। एक तार दूसरे की अपेक्षा थोड़ी लंबी होती है। लंबी तार, बैटरी के धन (+ve) टर्मिनल से तथा छोटी तार बैटरी के ऋण (-ve) टर्मिनल से जोडते हैं।
PSEB 8th Class Science Solutions Chapter 14 विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव 3

TYPE-III
दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
क्या जल विद्युत् का अच्छा चालक है ? क्या होता है जब जल में साधारण नमक मिलाया जाता है ?
उत्तर-
प्रयोग – शुद्ध अथवा आसुत जल विद्युत् के रोधक हैं। दो कार्बन की छड़ें आसुत जल में डुबोएँ और उन्हें बल्ब, 6V बैटरी और स्विच से जोड़ें, बल्ब दीप्त नहीं होगा। इसका निष्कर्ष है कि आसुत जल विद्युत्हीन चालक है।

अब आसुत जल के स्थान पर साधारण नमक का विलयन उपयोग में लाएँ। स्विच दबाते ही बल्ब दीप्त हो जाएगा। इससे सिद्ध होता है कि आसुत जल विद्युत्रोधक है, परंतु अशुद्ध जल विशेष तौर पर साधारण नमक मिश्रित जल विद्युत् का अच्छा चालक है।
PSEB 8th Class Science Solutions Chapter 14 विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव 4

प्रश्न 2.
विद्युत् लेपन क्या है ? इसके उपयोग लिखिए।
उत्तर-
विद्युत् लेपन – इस प्रक्रिया में सस्ती धातु पर महँगी धातु की पतली परत, विद्युत् धारा के प्रवाह से रोपित की जाती है। जब विद्युत् धारा रासायनिक यौगिक अथवा द्रव में से प्रवाहित होती है तो यह अपने संघटकों से टूट जाता है।
PSEB 8th Class Science Solutions Chapter 14 विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव 5

धन-आयन, ऋण इलेक्ट्रोड की तरफ और ऋण-आयन-धन इलेक्ट्रोड की ओर आकर्षित होते हैं। इस प्रक्रिया का उपयोग घटिया वस्तुओं पर धातुओं की पतली परत विलोपित करने के लिए किया जाता है।

विद्युत् लेपन के उपयोग

  1. लोहे को संक्षरण से बचाने के लिए निकिल अथवा क्रोमियम से विलोपित किया जाता है।
  2. कृत्रिम आभूषण, जो सस्ती धातुओं से बनते हैं, उन्हें आकर्षित बनाने के लिए सोने अथवा चाँदी से विलोपित करते हैं।
  3. साइकिल के हैंडल, पहिए के रिम, कारों के भाग क्रोमियम से विलोपित होते हैं ताकि वे चमकदार तथा आकर्षक बन सकें।
  4. लोहे पर टीन की पतली परत विलोपित करने से टीन के डिब्बे तैयार किये जाते हैं।

PSEB 8th Class Science Solutions Chapter 14 विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव

प्रश्न 3.
एक चम्मच कॉपर से कैसे विलोपित किया जा सकता है ?
उत्तर-
प्रयोग – एक चम्मच लो जिसका कॉपर से विद्युत् लेपन करना है। एक कॉपर प्लेट लो और उसे एनोड इलेक्ट्रोड की जगह बैटरी के धन (+ve) टर्मिनल से जोड़ो। चम्मच को ऋण (-ve) टर्मिनल से जोड़ो। एक रियोस्टेट (Rheostat), स्विच और एममीटर (Ammetre) को भी धारा में जोड़ो जैसा कि चित्र में दर्शाया गया है।
PSEB 8th Class Science Solutions Chapter 14 विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव 6

काँच के जार में कॉपर सल्फेट (CuSO4) का विलयन लो। रियोस्टेट (Rheostat) को इस तरह स्थापित करो कि विलयन में से उचित धारा का प्रवाह हो। (प्रायः 1A धारा 100 cm2 क्षेत्रफल के लिए पर्याप्त होती है अर्थात् यदि चम्मच का क्षेत्रफल दोनों तरफ से 60 cm2 है तो 0.6 A धारा का प्रवाह होना अनिवार्य है।) अब विद्युत् धारा का प्रवाह 5-10 मिनट तक होने दें ताकि चम्मच पर चमकता हुआ कॉपर विलोपित हो जाए।

PSEB 3rd Class Welcome Life Solutions Chapter 5 Love the Trees

Punjab State Board PSEB 3rd Class Welcome Life Book Solutions Chapter 5 Love the Trees Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 3 Welcome Life Chapter 5 Love the Trees

Welcome Life Guide for Class 3 PSEB Love the Trees Textbook Questions and Answers

Verbal Questions

Question 1.
Which class did Sukhan take?
Answer:
Sukhan had appeared for the first class examination.

Question 2.
Who planted the guava plant?
Answer:
The guava plant was planted by Dada Ji.

Question 3.
Why should guava plant not be given soapy water?
Answer:
It is dirty water so the plant should not be poured.

PSEB 3rd Class Welcome Life Solutions Chapter 5 Love the Trees

Question 4.
Where is the guava plant planted?
Answer:
Guava plant was planted in the kitchen garden of the house.

Fill in the blanks
1. The guava plant shook leaning towards ……………………… .
Answer:
both

2. You ……………………….. my mom.
Answer:
like

3. His mother called him to eat ………………………. from the kitchen.
Answer:
bread.

Some other actions

Question 1.
Have you ever talked to a tree? How did you feel talking to the guava plant?
Answer:
We enjoyed talking to the guava plant because they also feel the same as us.

Question 2.
Which tree do you like? If you want to name a tree what name would you like?
Answer:
We love the mango tree. My mango tree’s name is Aman Singh that’s why we like this name.

Question 3.
Try talking with any tree in your school, they will be very happy to talk to you.
Answer:
Yes, I talk to my school tree daily and ask about their condition. They also make us feel great.

PSEB 3rd Class Welcome Life Solutions Chapter 5 Love the Trees

Welcome Life Guide for Class 3 PSEB Love the Trees Important Questions and Answers

(i) Multiple Choice Questions:

Question 1.
What is our relationship with trees?
(A) Like mother and father
(B) Like grandparents
(C) As uncle and aunt
(D) As sister and brother.
Answer:
(A) Like mother and father.

Question 2.
From where do you get fruit?
(A) From trees
(B) From fields
(C) From plants
(D) Not from anyone.
Answer:
(A) From trees.

Question 3.
What do plants and trees give us?
(A) Oxygen
(B) Water
(C) Soil
(D) Everything (A), (B), (C).
Answer:
(A) Oxygen.

Question 4.
What is the basic requirement?
(A) Home
(B) Come clothes
(C) Bread
(D) All these.
Answer:
(D) All these.

PSEB 3rd Class Welcome Life Solutions Chapter 5 Love the Trees

Question 5.
The Plant shakes very loudly as if saying.
(A) “Very good very good”
(B) Very bad
(C) Wind.
(D) Was shaking anyway.
Answer:
(A) “Very good, very good”.

(ii) Questions short of one sentence:

Question 1.
With whom did Sukhn talk?
Answer:
With Guava plants.

Question 2.
What does mummy feel about Guava Plant?
Answer:
Best.

Question 3.
What does dada Ji feel about Guava Plant?
Answer:
Very good, very good.

Question 4.
How did those children feel talking to the trees?
Answer:
Good.

Question 5.
What do trees give us in summer?
Answer:
The wind bubble.

PSEB 3rd Class Welcome Life Solutions Chapter 5 Love the Trees

Question 6.
What else do we get from trees?
Answer:
Fruits and vegetables.

Question 7.
What should we do with trees?
Answer:
Friendship.

(iii) Brain Exercise
PSEB 3rd Class Welcome Life Solutions Chapter 5 Love the Trees 1
Answer:
PSEB 3rd Class Welcome Life Solutions Chapter 5 Love the Trees 2

(iv) Questions with big answers

Question 1.
Why are trees and plants are important?
Answer:
Trees give us favorite fruits like mango, apple, orange, pomegranate, Chiku, plum and guava, etc. We get wood to build houses from trees. We get lots of vegetables and food items from the trees. That is why everyone says:
“Plant trees, save yourself.”

PSEB 3rd Class Welcome Life Solutions Chapter 5 Love the Trees

Question 2.
What do simplicity and comfort explain to us?
Answer:
Plants are also like our relatives. Talk with them, take care of them, give them cold water and clean their leaves with water. By doing this, they feel fresh. They gives us fresh fruits and vegetables to eat.

PSEB 3rd Class Welcome Life Solutions Chapter 4 Let us, Love – Be Faithful

Punjab State Board PSEB 3rd Class Welcome Life Book Solutions Chapter 4 Let us, Love – Be Faithful Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 3 Welcome Life Chapter 4 Let us, Love – Be Faithful

Welcome Life Guide for Class 3 PSEB Let us, Love – Be Faithful Textbook Questions and Answers

Verbal questions

Question 1.
What is the place where we are born?
Answer:
It is called the motherland.

Question 2.
Will you stop your parents from throwing dirt in the river?
Answer:
Yes.

Question 3.
Have you really seen the mountains or seen on television?
Answer:
Yes, we really seen the mountain.

PSEB 3rd Class Welcome Life Solutions Chapter 4 Let us, Love - Be Faithful

Question 4.
Which crop field have you seen?
Answer:
We have seen fields of wheat, sugarcane and mustard.

Question 5.
Have you ever heard the love songs for motherland or Punjab?
Answer:
Yes, The song “ mere desh ki dharti”, is my favorite song.

Verbal questions

Question 1.
Who are the great people?
Answer:
Those who never worry about their happiness. They live and die for the people. They are great people.

Question 2.
Why should the great people of our country be remembered?
Answer:
Our country is on the path of progress because of the great people of our country.

Fill in the blanks:

Question 3.
They never worry about their happiness.
……………………………….
Answer:
They never worry about their happiness.

Live for People Die for People
Question 4.
Match
Constitution APJ. Abdul Kalam
Seva (Sevice) Dr. B.R. Ambedkar
Hanging Mother Teresa
Science Shaheed Bhagat Singh
Answer:
PSEB 3rd Class Welcome Life Solutions Chapter 4 Let us, Love - Be Faithful 1

Question 5.
Apart from these great people, what other great people of the country can you name?
Answer:
They are Mahatma Gandhi, Lala Lajpat Rai, Rani Lakshmi Bai of Jhansi, Pandit Jawaharlal Nehru, etc. are many great people.

PSEB 3rd Class Welcome Life Solutions Chapter 4 Let us, Love - Be Faithful

Verbal questions

Question 1.
How should the whole world be?
(A) Where love is love.
(B) Those who work for themselves.
(C) Just about your family.
(D) Those who don’t think of anyone.
Answer:
(A) Where love is love.

Question 2.
What should we say?
(A) That which comes in the mouth
(B) Only good words.
Answer:
(B) Only good words.

Question 3.
When will this world be like a family?
(A) When everyone will live in love.
(B) When people don’t care about each other.
Answer:
(A) When everyone will live in love.

Welcome Life Guide for Class 3 PSEB Let us, Love – Be Faithful Important Questions and Answers

(i) Multiple Choice Questions :

Question 1.
What should we not do?
(A) Cutting down the mountain
(B) Throwing garbage in the river
(C) Deforestation
(D) All these.
Answer:
(D) All these.

Question 2.
Pandit Jawaharlal :
(A) Loved the country
(B) Come just love yourself
(C) Only with your love
(D) Did not love anyone.
Answer:
(D) Loved the country.

PSEB 3rd Class Welcome Life Solutions Chapter 4 Let us, Love - Be Faithful

Question 3.
Who are the great people?
(A) Those who do great things for others.
(B) Who work for themselves.
(C) Who think only about their family.
(D) Who doesn’t think of anyone.
Answer:
(A) Those who do great things for others.

Question 4.
Who were the martyrs?
(A) Dr. Ambedkar
(B) Bhagat Singh
(C) Mother Teresa
(D) None.
Answer:
(B) Bhagat Singh

Question 5.
Who were Bhagat Singh’s associates?
(A) Poor
(B) Labour
(C) Women
(D) Rajguru and Sukhdev.
Answer:
(D) Rajguru and Sukhdev.

Question 6.
How should we live?
(A) By mutual consent
(B) By fighting
(C) Together.
Answer:
(C) Together.

(ii) Questions and answers shorter than one sentence:

Question 1.
Who are the great people?
Answer:
Those people who do great things.

Question 2.
Whom had the spirit of service?
Answer:
Mother Teresa.

Question 3.
Who drafted the Constitution?
Answer:
Dr. Ambedkar.

PSEB 3rd Class Welcome Life Solutions Chapter 4 Let us, Love - Be Faithful

Question 4.
Who had the passion to die for the country?
Answer:
Sardar Bhagat Singh Ji.

(iii) Brain Exercise :
PSEB 3rd Class Welcome Life Solutions Chapter 4 Let us, Love - Be Faithful 2
Answer:
PSEB 3rd Class Welcome Life Solutions Chapter 4 Let us, Love - Be Faithful 3

(iv) Question with big answer :

Question 1.
What kind of love should we all have? How should we be loved?
Answer:
The one who lives in harmony, the one who gives happiness, the one who trusts in each other, one who speaks
sweetly with everyone. This world is like a family. We must all live together.

Question 2.
What inspirations are provided to us by the stories of great persons?
Answer:
The stories of great, persons give us the inspiration to serve the country and its people. It also gives us inspiration to work hard, simplicity and high thinking.

PSEB 3rd Class Welcome Life Solutions Chapter 3 We are All Equal

Punjab State Board PSEB 3rd Class Welcome Life Book Solutions Chapter 3 We are All Equal Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 3 Welcome Life Chapter 3 We are All Equal

Welcome Life Guide for Class 3 PSEB We are All Equal Textbook Questions and Answers

Page-21

Question 1.
Should there be a difference between boys and girls?
Answer:
No, there should be no difference between boys and girls.

Question 2.
Is there a difference between boys and girls?
Answer:
No, Both are equal.

Mark who can do what:
PSEB 3rd Class Welcome Life Solutions Chapter 3 We are All Equal 1

Verbal questions

(A) If right, then tick on the smile face? If Wrong then tick on a sad face.
PSEB 3rd Class Welcome Life Solutions Chapter 3 We are All Equal 3
Answer:
PSEB 3rd Class Welcome Life Solutions Chapter 3 We are All Equal 4

PSEB 3rd Class Welcome Life Solutions Chapter 3 We are All Equal 5

PSEB 3rd Class Welcome Life Solutions Chapter 3 We are All Equal 7

PSEB 3rd Class Welcome Life Solutions Chapter 3 We are All Equal

True or False

Question 1.
Whatcangirisdo?
(A) Education
(B) Job
(C) Homework
(D) All.
Answer:
(D) All.

Question 2.
‘If sons are sweet fruits and then daughters are also sweet cancels. Who said this saying?
(A) Mother
(B) Father
(C) Grandpa
(D) Grandmother.
Answer:
(D) Grandmother.

Question 3.
Why should not we discriminate against?
(A) Appearance
(B) Caste
(C) Religion
(D) Not with anyone.
Answer:
(D) Not with anyone.

Question 4.
Whom should we love?
(A) Birds
(B) Animals
(C) Human beings
(D) With all these.
Answer:
(D) With all these.

Question 5.
Whom should we respect?
(A) Colleges
(B) Elders
(C) Little ones.
(D) All of above.
Answer:
(D) All of above.

Welcome Life Guide for Class 3 PSEB We are All Equal Important Questions and Answers

(i) Multiple Choice Questions :

Question 1.
Who can become a doctor, lawyer, and teacher?
(A) Boys
(B) Girls
(C) Both
(D) Not for anyone.
Answer:
(C) Both.

Question 2.
Flowers from the same garden :
(A) Boys
(B) Girls
(C) Both
(D) None.
Answer:
(C) Both.

Question 3.
With whom we should live with love and respect?
(A) With adults
(B) With the little one
(C) With animals
(D) With all.
Answer:
(D) With all.

PSEB 3rd Class Welcome Life Solutions Chapter 3 We are All Equal

(ii) Questions and answers shorter than one sentence :

Question 1.
Should we respect elders?
Answer:
Yes, we should always respect elders.

Question 2.
Are all members of the household equal?
Answer:
Yes.

Question 3.
Are only girls smarter in studies?
Answer:
No.

Question 4.
Do we get justice with equality?
Answer:
Yes.

(iii) Fill in the blanks :

1. Human beings should not ……………………… against anyone.
Answer:
Discrimination,

2. Mandeep and Karamvir were ………………………… .
Answer:
Siblings,

3. With equality everyone gets …………………………… .
Answer:
Honor,

4. There should be no ……………………… between boy and girl.
Answer:
Differences,

5. …………………… have equal rights.
Answer:
Animals and humans.

PSEB 3rd Class Welcome Life Solutions Chapter 3 We are All Equal

(iv) A question with long answer :

Question 1.
What motivations do teachers give to children?
Answer:
Teachers inspire children that all the members living in the house, animals, and birds have equal rights. Everyone gets justice and dignity only by living together. There should be no difference between boys and girls.

PSEB 3rd Class Welcome Life Solutions Chapter 2 Be Honest

Punjab State Board PSEB 3rd Class Welcome Life Book Solutions Chapter 2 Be Honest Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 3 Welcome Life Chapter 2 Be Honest

Welcome Life Guide for Class 3 PSEB Be Honest Textbook Questions and Answers

Page-14

Verbal questions

Question 1.
Who found the hundred rupees?
Answer:
Harjot Singh found hundred rupees.

Question 2.
To whom did Harjot hand over a hundred rupee note?
Answer:
Harjot handed over a hundred rupee note to the shopkeeper.

PSEB 3rd Class Welcome Life Solutions Chapter 2 Be Honest

Question 3.
Whose name was the Rupees 100?
Answer:
One hundred rupees note was by Sham Singh Ji.

Question 4.
Do you think Harjot Singh did the right thing or the wrong thing?
Answer:
Harjot Singh did a good and commendable job. He made everyone proud.

Welcome Life Guide for Class 3 PSEB Be Honest Important Questions and Answers

(i) Multiple Choice Questions:

Question 1.
Honest child :
(A) increases the pride of all.
(B) is mean.
(C) always think your own.
(D) all these things happen.
Answer:
(A) increases the pride of all.

Question 2.
What did the honest child get?
(A) Well done.
(B) Nothing.
(C) Fighting.
(D) All correct.
Answer:
(A) Well done.

(ii) Questions short of one sentence:

Question 1.
Who is Harjot Singh?
Answer:
Harjot Singh is a third-class student in Elementary School, Asarpur.

Question 2.
How much money did Harjot Singh get?
Answer:
100 rupees.

PSEB 3rd Class Welcome Life Solutions Chapter 2 Be Honest

Question 3.
To whom did Harjot- give 100 rupees?
Answer:
To shopkeeper.

Question 4.
What did the shopkeeper say?
Answer:
Well done.

Question 5.
In which class did Harjot study?
Answer:
Third class.

Question 6.
Who explained honesty to him?
Answer:
Teachers.

Question 7.
Whose pride did Harjit Singh raise?
Answer:
Parents, teachers and the school.

Question 8.
To whom did the shopkeeper return the hundred rupees?
Answer:
To Sham Singh.

(ii) Brain Exercise:
PSEB 3rd Class Welcome Life Solutions Chapter 2 Be Honest 1
Answer:
PSEB 3rd Class Welcome Life Solutions Chapter 2 Be Honest 2

(iii) Questions with big answers

Question 1.
What do we learn from the story of Harjot Singh?
Answer:
Haijot Singh is a wise child. From him, we learn to be honest. His honesty makes us very happy. He will increase the pride of his parents, teachers and the school and make the name bright.

PSEB 3rd Class Welcome Life Solutions Chapter 2 Be Honest

Question 2.
Tell the story of Kirpal Singh.
Answer:
Kripal Singh was very upset: -because someone had stolen his car lease. He, along with his friend, thought of stealing someone else’s car lease. When he was stealing someone else’s car lease, he felt that he was also doing wrong.

PSEB 3rd Class Welcome Life Solutions Chapter 1 Our Food and Water

Punjab State Board PSEB 3rd Class Welcome Life Book Solutions Chapter 1 Our Food and Water Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 3 Welcome Life Chapter 1 Our Food and Water

Welcome Life Guide for Class 3 PSEB Our Food and Water Textbook Questions and Answers

Question 1.
Which food items go spoil in the house?
Answer:

  • Milk,
  • Vegetables,
  • Fruit,
  • Pulses,
  • Rice.

Question 2.
How do we know that food is not edible?
Answer:
From the following we can get food is not edible :

  • By the smell of seeing.
  • The date written on the packet.
  • By colour.
  • By taste.

Question 3.
How does food spoil?
Answer:
By Germs, fungi, bacteria and smell etc.

Question 4.
What happens by eating old food?
Answer:
Children can have abdominal pain, vomiting, diarrhea, and dysentery.

Question 5.
What should be take care of?
Answer:
We should take care of that we should never eat old food.

Question 6.
How does bread get mold?
Answer:
We wet a piece of a bread and keep it in a closed box for a few days and after a few days, we see that it gets moldy.

Verbal questions

Question 1.
What will you do to check if canned/packaged food is bad or not?
(A) The colour of the packet.
(B) Date written on the packet.
(C) Packet / box size.
(D) All these.
Answer:
(D) All these.

Question 2.
As soon as Sukhman opened the tiffin today, lie said, “Today the vegetable seem to be spoiled. Tell how did Sukhman know that the vegetable is spoiled.
(A) By smell
(B) By change of colour
(C) By taste
(D) None of these.
Answer:
(A) By smell.

 

Page 5

Activity-1
Students, according to the above picture, some pictures are given below as a solution to the causes of contamination of food. Looking at those pictures, write the solution in your own words.
PSEB 3rd Class Welcome Life Solutions Chapter 1 Our Food and Water 1
Answer:
PSEB 3rd Class Welcome Life Solutions Chapter 1 Our Food and Water 2

 

Page-6

Activity-2
Make a list of things to remember based on the above information.
Answer:
1. Food should be kept covered.
2. The toilet door should be closed.
3. Hands should be washed with clean; water.
4. The house should be clean.
5. Keeping food in the fridge can also prevent spoilage.

Let’s try to understand :

Question 1.
According to the above information, what is the main cause of food contamination?
(A) Open stool
(B) Flies
(C) Water
(D) Plants.
Answer:
(B) Flies.

Question 2.
What should be done to protect the food from the Flies?
(A) Flies should be killed.
(B) Food should be kept covered.
(C) The stool should be in the toilet.
(D) Both “A” and “B”.
Answer:
(B) Food should be kept covered.

 

Page-8

Activity-2
Amit is talking to his grandfather about the homework given by the teacher. The information collected with Dada Ji’s advice is to be filled in the table below, what does Dada ji tell him?
Answer:

Water resources Reason of spoil
1. River Wastage throw
2. Pond Wastage throw
3. Well Wastage throw
4. Tap Not well way to use
5. Sea By throwing dirty chemicals of factories

 

Page-9

Activity-2
Based on the reasons given by the teacher for the contamination of water, what can you do to prevent water contamination?
Answer:
Some methods of water contamination are as follows :

  1. Keep the water covered.
  2. Do not throw dirt, garbage in die water.
  3. Do not bath animals in the pond.
  4. Protecting from dirty chemicals of factories.

Verbal questions

Question 1.
How do you estimate water contamination?
(A) From its colour.
(B) From its taste.
(C) From its smell.
(D) From all these.
Answer:
(D) From all these.

Question 2.
What is the natural cause of water contamination?
(A) Garbage
(B) Water from factories discharges river waste
(C) Throwing dirt
(D) Dust.
Answer:
(D) Dust.

 

Page-11

Question 1.
What can you learn from this story, “Water never runs out”?
Answer:
We learnt that the Tulu pumps have drawn all the water from our taps as we run to fill the taps and tanks. Truly, man has raised his standard of living and lowered the level of water.

 

Page-12

Multiple Choice Questions
Question 1.
How can water be saved?
(A) By putting it in the bucket.
(B) By using water wisely.
(C) Not using water.
(D) By all these.
Answer:
(B) By using water wisely.

Question 2.
What do you think will drain the water?
(A) By playing with water.
(B) Washing clothes.
(C) With sunshine.
(D) By losing in vain.
Answer:
(D) By losing in vain.

Welcome Life Guide for Class 3 PSEB Our Food and Water Important Questions and Answers

(i) Multiple Choice Questions:

Question 1.
Why didn’t Avatar come to school?
(A) He had Diarrhoea, vomiting, and fever.
(B) He was going for a walk.
(C) He has some work at home.
(D) None of these.
Answer:
(A) Diarrhoea, vomiting, and fever.

Question 2.
How does food spoil?
(A) By Germs, fungi, and bacteria
(B) By keeping in the fridge
(C) By covering the food.
(D) By all of them.
Answer:
(A) By Germs, fungi, and bacteria.

Question 3.
How does water get dirty?
(A) The tank has not been cleaned for several days.
(B) If the pipe fit right.
(C) By touching the water.
(D) By using the water properly.
Answer:
(A) The tank has not been cleaned for several days.

(ii) Answers shorter than one sentence:

Question 1.
Should we drink contaminated water?
Answer:
No, w should not drink contaminated water.

Question 2.
What Is the natural reason for the contamination of water?
Answer:
Dust.

Question 3.
Water is a precious stone of life. Is it true?
Answer:
Yes, absolutely right.

Question 4.
How can we conserve water?
Answer:
By not wasting water.

(iii) Fill in the blanks:

1. …………………………. are also a cause of food contamination.
Answer:
Flies,

2. Flies can make us ………………………. .
Answer:
Sick,

3. Keep the water ……………………… .
Answer:
Cover,

4. Water sources are ……………………….. .
Answer:
River pond, sea.

(iv) Brain Exercise:

(a)
PSEB 3rd Class Welcome Life Solutions Chapter 1 Our Food and Water 3
Answer:
PSEB 3rd Class Welcome Life Solutions Chapter 1 Our Food and Water 4
(b)

PSEB 3rd Class Welcome Life Solutions Chapter 1 Our Food and Water 5
Answer:
PSEB 3rd Class Welcome Life Solutions Chapter 1 Our Food and Water 6

(v) Question with big answer

Question 1.
How many diseases are caused by drinking contaminated water?
Answer:
By drinking contaminated water can lead to many diseases. Such as:
PSEB 3rd Class Welcome Life Solutions Chapter 1 Our Food and Water 7

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 16 प्राकृतिक संसाधनों का संपोषित प्रबंधन

Punjab State Board PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 16 प्राकृतिक संसाधनों का संपोषित प्रबंधन Important Questions and Answers.

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 16 प्राकृतिक संसाधनों का संपोषित प्रबंधन

दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
वन्य संपदा की सुरक्षा के लिए कौन-कौन से उपाय हैं ?
उत्तर-
वन्य संपदा की सुरक्षा के उपाय-

  • वृक्षों को काटना बंद होना चाहिए।
  • केवल वे ही वृक्ष काटे जाएं तो सूख जाएं या जिन्हें कोई गंभीर बीमारी लग जाए और उनके स्थान पर नये वृक्ष लगाये जाने चाहिए।
  • वृक्षों की प्रति वर्ष गिनती की जानी चाहिए और वृक्षारोपण के लक्ष्य को पूर्ण करना चाहिए।
  • वन-महोत्सव मनाया जाना चाहिए। यह हमारे देश की वृक्षारोपण की परंपरा है जिसके अनुसार वनमहोत्सव सप्ताह में हज़ारों नये वृक्ष लगाये जाते हैं।
  • नये लगाए गए वृक्षों की देखभाल करनी चाहिए।
  • वनारोपण की नयी योजना लागू होनी चाहिए।
  • वन संपदा को जंगल की आग से बचाने के लिए उचित प्रबंध होना चाहिए।
  • वृक्षों को बीमारियों से बचाने के लिए रासायनिक दवाइयों का इस्तेमाल करना चाहिए।

प्रश्न 2.
पर्यावरण प्रदूषण के घटकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
मानव तथा पर्यावरण का आपस में गहरा तथा अटूट संबंध है। मानव ही पर्यावरण को स्वच्छ या प्रदूषित करता है तथा उसका प्रभाव मानव को ही उसी रूप में प्रभावित करता है। मानव समाज के लिए स्वच्छ तथा स्वास्थ्यवर्धक पर्यावरण अति आवश्यक है। परंतु पर्यावरण को स्वच्छ और स्वास्थ्यवर्धक बनाना मनुष्यों पर ही निर्भर करता है।

मानव की क्रियाओं का अनियोजन होना पर्यावरण को उतनी ही अधिक हानि पहुंचाता है। महानगरों में ट्रकों तथा बसों से निकलता काला धुंआ, नदियों में नालों का गंदा पानी तथा सड़कों पर बिखरा कूड़ा-कर्कट आदि महानगरों के पर्यावरण को दूषित करते हैं। ये सभी क्रियाकलाप मिलजुल कर हमारे पर्यावरण के सभी घटकों जैसे-जल, वायु तथा मृदा के साथ-साथ हमें जीवित रखने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

जनसंख्या में लगातार वृद्धि पर्यावरण को प्रदूषित करने में मानव की प्रमुख भूमिका है। जनसंख्या के बढ़ने से आवास, वस्त्र तथा खाद्य पदार्थों की आवश्यकता भी बढ़ जाती है। आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्राकृतिक संपदाओं की हानि होती है। जैसे जंगलों को अत्यधिक काटा जाना; भूमिगत जल का अनियंत्रित उपयोग, जीवाश्म ईंधन का अत्यधिक उपयोग, औद्योगिकीकरण आदि। वे सभी किसी-न-किसी रूप में पर्यावरण को प्रदूषित करते हैं।

जब प्राकृतिक साधन पर्यावरण को पुनः स्वच्छता प्रदान नहीं कर सकते तो प्रदूषण होता है। औद्योगिक दुर्घटनाओं तथा बिना नियोजित लगाए गए कारखानों आदि से भी पर्यावरण प्रदूषित होता है। अत्यधिक रसायनों का उपयोग भी इसी का एक घटक है। प्राकृतिक संपदाओं का अतिशोषण भी पर्यावरण के प्रदूषण को बढ़ावा देता है। औद्योगिक क्रांति से वायु तथा जल प्रदूषण होता है। अम्लीय वर्षा, अंतः दहन इंजनों द्वारा प्रचलित वाहनों द्वारा अधिक मात्रा में सल्फर युक्त यौगिकों को वायु में मुक्त करने का परिणाम है। ऐरोसाल के उपयोग से ओजोन सतह की हानि हो रही है।

मानव के विभिन्न क्रियाकलापों के परिणाम से उत्पन्न अपशिष्ट पदार्थ पर्यावरण को प्रदूषित करने में सबसे आगे हैं। ये अपशिष्ट पदार्थ अत्यंत घातक होते हैं तथा इनका प्रभाव दूर-दूर तक फैल जाता है। इनका निपटान आजकल विश्व की समस्या है। इनका पुन: चक्रण ही पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचा सकता है। पर्यावरण को प्रदूषित करने में मुख्य भूमिका मनुष्य की है, इसके साथ-साथ इस प्रदूषित पर्यावरण का शिकार भी प्रमुख रूप से मानव ही है।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 16 प्राकृतिक संसाधनों का संपोषित प्रबंधन

प्रश्न 3.
कोयला एवं पेट्रोलियम का प्रयोग सावधानीपूर्वक क्यों करना चाहिए ?
उत्तर-
कोयला और पेट्रोलियम पेड़-पौधों तथा जीव जंतुओं से बनते हैं जिनमें कार्बन के अतिरिक्त हाइड्रोजन, नाइट्रोजन एवं सल्फर भी होते हैं। जब इन्हें जलाया जाता है तो कार्बन डाइऑक्साइड, जल, नाइट्रोजन के ऑक्साइड तथा सल्फर के ऑक्साइड उत्पन्न होती हैं। अपर्याप्त वायु में जलाने पर कार्बन डाइऑक्साइड के स्थान पर मोनो ऑक्साइड उत्पन्न होती है। इन उत्पादों में से नाइट्रोजन और सल्फर के ऑक्साइड तथा कार्बन मोनोआक्साइड विषैली गैसें हैं। कार्बन डाइऑक्साइड एक ग्रीन हाउस गैस है।

कोयला और पेट्रोलियम कार्बन के विशाल भंडार हैं। यदि इनकी संपूर्ण मात्रा का कार्बन न जलाने पर कार्बन डाइऑक्साइड में परिवर्तित हो गया तो पृथ्वी पर ऑक्सीजन की उपलब्धता तो अत्यंत हो जाएगी पर साथ ही साथ कार्बन डाइऑक्साइड से अधिकता वैश्विक ऊष्मण होने का कारण बन जाएगी। इसलिए इन संसाधनों का उपयोग सावधानीपूर्वक करना चाहिए।

प्रश्न 4.
गंगा का प्रदूषण किस प्रकार हो रहा है ? इसकी सफाई योजना पर टिप्पणी कीजिए।
उत्तर-
गंगा हिमालय पर्वत में स्थित गंगोत्री से लेकर बंगाल की खाड़ी तक लगभग 2500 किलोमीटर तक यात्रा करती है। वह विभिन्न राज्यों के सौ से अधिक नगरों और कस्बों से गुजरती है जिस कारण उसमें तरह-तरह की गंदगियों का मिलना स्वाभाविक है।

गंगा का प्रदूषण मुख्य रूप से अग्रलिखित प्रकार का है-

  • औद्योगिक कचरा।
  • अनौपचारित मल और अपशिष्ट।
  • मृत शरीरों को तटों पर जलाना, जल में बहाना और मृत शरीरों की राख और हड्डियों को गंगा के जल में डालना।
  • अंधविश्वास के कारण गंगा में नहाना। गंगा की सफाई योजना गंगा के जल में धार्मिक कारणों से अस्थि प्रवाह किया जाता है।

इसलिए इसके जल में, मानव आंत में पाया जाने वाला कोलिफार्म जीवाणु उपस्थित है और उसकी MPN (Most Probable Number) जल के अधोप्रवाह में बढ़ता जाता है। सन् 1985 में, गंगा के प्रदूषण को दूर करने के लिए गंगा सफाई योजना शुरू की गयी थी। जिसका बजट प्रथम चरण में 462 करोड़ रुपये और द्वितीय चरण में 416 करोड़ रुपये था। इस अभियान के अनुसार 873 मिलियन लीटर जल प्रतिदिन उपचारित करना था। वर्तमान में गंगा की सफाई योजना में तेजी लाए जाने की परम आवश्यकता है तभी इसमें निरंतर बढ़ते प्रदूषण पर नियंत्रण पाया जा सकेगा।

लघु उत्तरात्मक प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
प्राकृतिक संसाधन को उदाहरण सहित परिभाषित कीजिए।
उत्तर-
प्राकृतिक संसाधन (Natural Resources)-प्रकृति में पाए जाने वाले मनुष्य के लिए उपयोगी पदार्थों को प्राकृतिक संसाधन कहते हैं। उदाहरण-वायु, जल, मिट्टी, खनिज, कोयला, पेट्रोलियम आदि प्राकृतिक संसाधन हैं।

प्रश्न 2.
3R के सिद्धांत से आप क्या समझते हो ? वर्णन करो।
उत्तर-
पहले ‘R’ का अर्थ है Reduce अर्थात् कम करना। इसका यह अर्थ है कि हमें कम-से-कम वस्तुओं का प्रयोग करना चाहिए। उदाहरण के लिए हम बिजली के पंखे तथा बल्ब के स्विच बंद करके विद्युत् के अपव्यय को रोक सकते हैं। इसी प्रकार कम-से-कम जल का उपयोग करके तथा लीक होने वाले नल तथा पाइप की मरम्मत करवा के भी हम जल के अपव्यय को रोक सकते हैं।

दूसरे ‘R’ का अर्थ है Recycle अर्थात् पुनः चक्रण। इसका अर्थ है कि हमें प्लास्टिक, कागज़, काँच, धातु की वस्तुएँ आदि पदार्थों का पुनः चक्रण करके इनसे उपयोगी वस्तुएँ बनानी चाहिएं। हमें ऐसी चीज़ों को कचरे के डिब्बे में नहीं डालना चाहिए बल्कि इन्हें अपने कचरे से अलग करना होगा ताकि यह दुबारा उपयोगी बनाई जा सकें।

तीसरा ‘R’ है Reuse अर्थात् पुन: उपयोग। यह पुन:चक्रण से भी अच्छा तरीका है क्योंकि पुनःचक्रण से भी कुछ न कुछ ऊर्जा व्यर्थ जाती है। पुन: उपयोग के तरीके में हम एक ही वस्तु का बार-बार उपयोग कर सकते हैं। उदाहरणविभिन्न खाद्य पदाथों के साथ आए डिब्बे तथा केन हम अन्य सामान रखने में प्रयोग कर सकते हैं।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 16 प्राकृतिक संसाधनों का संपोषित प्रबंधन

प्रश्न 3.
गंगा के जल प्रदूषण को किस प्रकार रोका जा सकता है ?
उत्तर-
गंगा के जल प्रदूषण को निम्नलिखित विधियों से रोका जा सकता है

  • औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले हानिकारक कचरे को गंगा में गिरने से रोक कर।
  • नदी में मृत पशुओं को बहाने से रोक कर।
  • घरों-व्यापारिक संस्थानों से निकले कूड़े को नदी में न बहा कर।
  • नदी में कपड़े न धो कर।
  • जल स्रोतों के निकट मल-मूत्र को न त्याग कर।
  • नदी में राख और शवों को न बहा कर।

प्रश्न 4.
पुनः चक्रण क्या है ? इसके लिए हम क्या कर सकते हैं ?
उत्तर-
पुनः चक्रण-पुरानी अखबारों, कॉपी-किताबों, धातु से बनी पुरानी-बेकार वस्तुओं, प्लास्टिक आदि को कुछ प्रक्रियाओं के द्वारा नए रूप में परिवर्तित किया जा सकता है, जिसे पुनः चक्रण कहते हैं। पुनः चक्रण के लिए हम अग्रलिखित कार्य कर सकते हैं-

  • ऐसी वस्तुएं खरीदें जिनका पुनः चक्रण संभव हो।
  • ऐसी वस्तुएं प्रयोग करें जो पुनः चक्रण से निर्मित हों।
  • पुन: चक्रण के लिए उपयुक्त वस्तुओं को खराब होने से पहले बेच दें।

प्रश्न 5.
‘चिपको आंदोलन’ ने सरकार तथा लोगों को क्या सिखाया है ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
चिपको आंदोलन-‘चिपको आंदोलन’ बहुत तेजी से विभिन्न समुदायों में फैल गया है। जन संचार माध्यमों ने भी इसमें महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। इसने सरकार को यह सोचने पर विवश कर दिया कि वन संसाधनों के समुचित उपयोग के लिए प्राथमिकता तय करने के लिए पुनर्विचार की आवश्यकता है। लोगों को अनुभव ने सिखा दिया है कि वनों के विनाश से केवल वन की उपलब्धता ही प्रभावित नहीं होती बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता और जल स्रोत भी प्रभावित होते हैं। स्थानीय लोगों की भागीदारी निश्चित रूप से वनों के प्रबंधन में होनी चाहिए।

प्रश्न 6.
भौम जल के क्या लाभ हैं ?
उत्तर-
भौम जल के लाभ-

  • यह जल वाष्पित होकर वायुमंडल में मिलता नहीं है।
  • इसमें जीव जंतु तथा पादपों का जनन नहीं हो पाता।
  • यह भौम स्तर में सुधार लाता है।
  • यह पौधों को नमी प्रदान करता है।
  • यह जीव-जंतुओं के कारण प्रदूषित और संदूषित नहीं हो पाता।

प्रश्न 7.
जीवाश्म ईंधन क्या हैं तथा किस प्रकार बनते हैं ? इसके दो उदाहरण बताओ।
उत्तर-
जीवाश्म ईंधन-जंतु तथा वनस्पति के अवशेष पृथ्वी की सतह में दबते रहे हैं जो धीरे-धीरे तलछट के नीचे दब कर एकत्रित होते जाते हैं। इस प्रकार उन्हें ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं होती। तलछट के आवरण के नीचे न तो इनका ऑक्सीकरण होता है और न ही विघटन, परंतु इसी तलछट के भार के कारण इन अवशेषों से पानी तथा अन्य वाष्पीजन्य पदार्थ निचुड़ कर बाहर निकल जाते हैं। इन्हीं पदार्थों को जीवाश्म ईंधन कहते हैं। जीवाश्म ईंधन ऊर्जा युक्त कार्बन यौगिकों के वे अणु हैं जिनका निर्माण मूलत: सौर ऊर्जा का उपयोग करते हुए वनस्पतियों ने किया था। जीवाश्म ईंधन के उदाहरण कोयला, पेट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस हैं।

प्रश्न 8.
“जल जीवन के लिए आवश्यक है।” इस कथन को सिद्ध कीजिए।
उत्तर-
जल निम्नलिखित कारणों से जीवन के लिए आवश्यक है

  • जल हमारे शरीर की सभी रासायनिक प्रक्रियाओं में भाग लेता है।
  • जल शरीर में तापमान को स्थिर रखता है।
  • जल पोषक पदार्थों को शरीर के विभिन्न भागों तक पहुँचाता है।
  • जल भल-मूत्र के विसर्जन में सहायता करता है।
  • जल पदार्थों के परिवहन में सहायता करता है।
  • कृषि, कारखानों तथा विद्युत् के लिए भी जल आवश्यक है।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 16 प्राकृतिक संसाधनों का संपोषित प्रबंधन

प्रश्न 9.
जल संरक्षण के कुछ प्रमुख उपाय लिखिए।
उत्तर-
जल के संरक्षण हेतु उपाय

  • जल को सिंचाई के लिए उपयोग करना।
  • बाढ़ नियंत्रण तथा हाइड्रोलोजिकल सर्वे और बाँध निर्माण करना।
  • भूमिगत जल की रिचार्जिंग तथा व्यय को रोकना।
  • अधिक जल तथा कम जल वाले स्थानों को स्थानांतरण करना।
  • मृदा अपरदन को रोकने के लिए बाह्य मृदा को बनाए रखना।

प्रश्न 10.
कुछ वायु प्रदूषकों के नाम लिखिए।
उत्तर-
वायु के मुख्य प्रदूषक निम्नलिखित हैं-

  • कार्बन मोनोक्साइड
  • कार्बन डाइऑक्साइड
  • सल्फर तथा नाइट्रोजन के ऑक्साइड
  • फ्लोराइडज के यौगिक
  • धातुएं तथा हाइड्रोकार्बन।

प्रश्न 11.
प्रदूषण नियंत्रण के पाँच उपाय बताओ।
उत्तर-
प्रदूषण को रोकने के लिए हमें निम्नलिखित उपाय करने चाहिएँ –

  • गोबर गैस का निर्माण करना चाहिए।
  • अजैव विघटनशील पदार्थों को गड्ढों में डालना चाहिए।
  • अपशिष्ट पदार्थों का चक्रीकरण करना चाहिए।
  • वाहित मल तथा उत्सर्जी पदार्थ आदि का सही ढंग से विसर्जन करना चाहिए।
  • आटोमोबाइल्स में सी० एन० जी० का प्रयोग करना चाहिए।

प्रश्न 12.
वनों के कटने से क्या हानि होती है ?
उत्तर-
यदि वृक्षों के कटने की दर उनकी वृद्धि से अधिक हो तो वृक्षों की संख्या धीरे-धीरे कम होती जाएगी। वृक्ष वाष्पण की क्रिया से बड़ी मात्रा में जल मुक्त करते हैं। इससे वर्षा वाले बादल आसानी से बनते हैं। जब वन कम हो जाते हैं तब उस क्षेत्र में वर्षा कम होती है। इससे वृक्ष कम संख्या में उग पाते हैं। इस प्रकार एक दुष्चक्र आरंभ हो जाता है और वह क्षेत्र रेगिस्तान भी बन सकता है। वृक्षों के बहुत अधिक मात्रा में कटने से जैव पदार्थों से समृद्ध मिट्टी की सबसे ऊपरी परत वर्षा के पानी के साथ बहकर लुप्त होने लगती है।

प्रश्न 13.
कोयला और पेट्रोलियम को किस प्रकार लंबे समय तक बचाया जा सकता है ?
उत्तर-
कोयला पेट्रोलियम का उपयोग मशीनों की दक्षता पर भी निर्भर करता है। यातायात के साधनों में आंतरिक दहन-इंजन का प्रयोग होता है। लंबे समय से इसके उपयोग के लिए शोध किया जा रहा है कि इनमें ईंधन का पूर्ण दहन किस प्रकार सुनिश्चित किया जा सकता है। यह भी प्रयत्न किया जा रहा है कि इनकी दक्षता भी बढ़े तथा वायु प्रदूषण को भी कम किया जा सके और इन्हें लंबे समय तक बचाया जा सके।

प्रश्न 14.
राष्ट्रीय उद्यान और वन्य जीव अभयारण्य में अंतर लिखिए।
उत्तर-

राष्ट्रीय उद्यान जीव अभयारण्य
(1) चीता, गैंडा, शेर आदि विशेष वन्य जीवों को आवास प्रदान किया जाता है। (1) जीव-जंतुओं की सामान्य प्रजातियों को प्राकृतिक वातावरण में सुरक्षा दी जाती है।
(2) क्षेत्र 100 वर्ग किलोमीटर से 500 वर्ग किलोमोटर तक होता है। (2) क्षेत्र 500 वर्ग किलोमीटर से 1000 वर्ग किलोमीटर तक होता है।
(3) चारों ओर पक्की दीवारें बनाई जाती हैं। (3) चारों ओर ऊँची जालीदार अस्थायी दीवारें बनाई जाती हैं।

अति लघु उत्तरात्मक प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
प्रदूषण क्या है?
उत्तर-
प्रदूषण-प्राकृतिक रूप में पाए जाने वाले अथवा शुद्ध रूप में पाए जाने वाले पदार्थों में धूल कण तथा अन्य नुकसानदेह पदार्थों का मिश्रण प्रदूषण कहलाता है।

प्रश्न 2.
किन्हीं पाँच प्राकृतिक संसाधनों के नाम बताएँ।
उत्तर-

  1. वन
  2. वन्य जीवन
  3. जल
  4. कोयला
  5. पेट्रोलियम।

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प्रश्न 3.
पर्यावरण को बचाने के लिए तीन R. के नाम बताएँ।
उत्तर-

  1. Reduce (कम करो)
  2. Recycle (पुनः चक्रण)
  3. Reuse (पुनः प्रयोग)।

प्रश्न 4.
किन वस्तुओं को पुनः चक्रण द्वारा दुबारा इस्तेमाल कर सकते हैं?
उत्तर-
प्लास्टिक, काँच, कागज़ एवं धातु की वस्तुएँ।

प्रश्न 5.
CFC का पूरा नाम बताएँ।
उत्तर-
क्लोरो फलोरो कार्बन।

प्रश्न 6.
ऊर्जा के अनवीकरणीय स्रोतों के उदाहरण दें।
उत्तर-
कोयला एवं पेट्रोलियम।

प्रश्न 7.
ऊर्जा के दो परंपरागत स्त्रोतों के नाम बताएँ।
उत्तर-
खनिज ईंधन और बहता हुआ पानी।

प्रश्न 8.
संसाधन यदि वर्तमान दर से प्रयोग में आते रहे तो यह कितने समय तक उपलब्ध रहेंगे ?
उत्तर-
पेट्रोलियम के संसाधन लगभग अगले 40 वर्षों तथा कोयले के संसाधन अगले 200 वर्षों तक उपलब्ध रह सकते हैं।

प्रश्न 9.
अपशिष्ट पदार्थों को किन दो वर्गों में रखा जा सकता है ? इनमें से कौन-सा अधिक घातक होता है ?
उत्तर-

  1. जैव निम्नीकरणीय अपशिष्ट पदार्थ।
  2. जैव अनिम्नीकरणीय अपशिष्ट पदार्थ। इन दोनों में से जैव अनिम्नीकरणीय पदार्थ अधिक घातक हैं।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Type Questions)
बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
इंदिरा गाँधी नहर से किस राज्य के बड़े क्षेत्र को हरा-भरा बनाने में सहायता मिली ?
(a) उत्तर प्रदेश
(b) उत्तराखंड
(c) छत्तीसगढ़
(d) राजस्थान।
उत्तर-
(d) राजस्थान।

प्रश्न 2.
अमृता देवी बिश्नोई राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया जाता है
(a) जीव संरक्षण हेतु
(b) वनोन्मूलन हेतु
(c) वनों के विनाश को रोकने हेतु
(d) जल संरक्षण हेतु।
उत्तर-
(a) जीव संरक्षण हेतु।

प्रश्न 3.
जल संग्रह की “कुल्ह” तकनीक प्रचलन में है
(a) राजस्थान में
(b) हिमाचल प्रदेश में
(c) उत्तराखंड में
(d) मध्यप्रदेश में।
उत्तर-
(b) हिमाचल प्रदेश में।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 16 प्राकृतिक संसाधनों का संपोषित प्रबंधन

प्रश्न 4.
1970 के प्रथम दशक में चिपको आंदोलन कहां आरंभ हुआ ?
(a) कुमायुं में
(b) गढ़वाल में
(c) हिमाचल प्रदेश में
(d) असम में।
उत्तर-
(b) गढ़वाल में।

प्रश्न 5.
गंगा सफाई योजना कब आरंभ हुई ?
(a) 1945 में
(b) 1965 में
(c) 1985 में
(d) 2005 में।
उत्तर-
(c) 1985 में।

प्रश्न 6.
राष्ट्रीय वन पॉलिसी बनाई गई थी ?
(a) 1988
(b) 1989
(c) 1990
(d) 1991.
उत्तर-
(a) 1988.

प्रश्न 7.
पुनः चक्रण किया जा सकता है
(a) प्लास्टिक
(b) पॉलिथीन
(c) धातु
(d) इन सभी का।
उत्तर-
(d) इन सभी का।

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-

(i) प्रकृति में मिलने वाले मनुष्य के लिए उपयोगी पदार्थों को ………………………. कहते हैं।
उत्तर-
प्राकृतिक संसाधन

(ii) ……………………… समाप्त होने वाला प्राकृतिक संसाधन है।
उत्तर-
मिट्टी

(iii) ……………………………… न समाप्त होने वाला प्राकृतिक संसाधन है।
उत्तर-
सौर ऊर्जा

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 16 प्राकृतिक संसाधनों का संपोषित प्रबंधन

(iv) किसी बड़े क्षेत्र में अधिक वृक्ष लगाकर जंगलों को विकसित करना ………………………… कहलाता है।
उत्तर-
वनीकरण

(v) CFC का पूरा नाम …………………………. है।
उत्तर-
क्लोरो-फ्लोरो कार्बन।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 15 हमारा पर्यावरण

Punjab State Board PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 15 हमारा पर्यावरण Important Questions and Answers.

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 15 हमारा पर्यावरण

दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में अंतर स्पष्ट कीजिए
(i) पारिस्थितिक तंत्र तथा जीवोम या बायोम।
(ii) आहार श्रृंखला तथा खाद्य जाल।
(iii) मांसाहारी और सर्वभक्षी।
उत्तर-
(i) पारिस्थितिक तंत्र तथा जीवोम या बायोम –

पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem) जीवोम या बायोम (Biome)
(1) यह जैव जगत् की स्वयंधारी (Self-Sustaining) इकाई है। (1) यह बहुत से पारिस्थितिक तंत्रों का समूह है।
(2) यह जैव जीवों और अजैव पर्यावरण से मिल क्षेत्र के अनेक पारिस्थितिक तंत्र होते हैं। (2) इसमें समान जलवायु वाले एक निश्चित भौगोलिक कर बना है।
(3) यह जैव जगत् की अपेक्षाकृत छोटी इकाई है। (3) यह जैव जगत् की एक बहुत बड़ी इकाई है।

(ii) आहार श्रृंखला तथा खाद्य जाल –

आहार श्रृंखला (Food Chain) खाद्य जाल (Food Web)
(1) यह किसी पारितंत्र में भोजन तथा ऊर्जा प्रवाह को प्रदर्शित करती है। (1) इसमें पोषण स्तर की खाद्य शृंखलाओं से जुड़े होते हैं।
(2) यह भोजन प्राप्त करने की क्रमबद्ध आहार श्रृंखला है। (2) इसमें एक खाद्य श्रृंखला के जीव किसी-न-किसी पोषण स्तर पर अन्य खाद्य श्रृंखलाओं से जुड़ कर खाद्य श्रृंखलाओं का जाल-सा बनाते हैं।
(3) इसमें पोषण स्तर सीमित है। (3) इसमें पोषण स्तर पारितंत्र में प्राकृतिक संतुलन को प्रकट करते हैं।
(4) यह सीमित और छोटी होती है।
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(4) यह कई खाद्य श्रृंखलाओं का जाल है।
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(iii) मांसाहारी और सर्वभक्षी

मांसाहारी (Carnivore) सर्वभक्षी (Omnivore)
(1) ये अन्य जीव-जंतुओं का मांस ही खाते हैं जैसे शेर, चीता आदि। (1) ये जीव-जंतुओं का मांस तथा पेड़-पौधों दोनों से अपना भोजन प्राप्त कर लेते हैं, जैसे मनुष्य, चील आदि।
(2) ये खाद्य श्रृंखला के तीसरे या उससे आगे के स्तर पर आते हैं। (2) ये प्रायः दूसरे पोषण स्तर पर होते हैं।
(3) ये प्राय: जंगलों में रहते हैं। (3) यह किसी भी स्थान पर रह सकते हैं।
(4) इनके कंतक दांत कम विकसित और कील दांत तथा नाखून अधिक विकसित होते हैं। (4) इनमें दोनों प्रकार के दांत और नाखून विकसित

प्रश्न 2.
आहार श्रृंखला छोटी कैसे हो जाती है ?
उत्तर-
ऊर्जा का प्रवाह एक ही दिशा में होता है तथा उसका विभिन्न चरणों में स्थानांतरण होता रहता है। ऊर्जा के प्रत्येक स्थानांतरण पर ऊर्जा का 10% भाग रह जाता है। यदि आहार श्रृंखला में अधिक चरण हों तो ऊर्जा की अत्यधिक मात्रा व्यर्थ हो जाएगी। ऊर्जा को बचाने के लिए प्रकृति में आहार श्रृंखलाएं छोटी हो जाती हैं। आहार श्रृंखला में ऊर्जा स्थानांतरण के दौरान उत्पादक स्तर पर अधिक ऊर्जा उपलब्ध होती है। आहार श्रृंखला में दाहिने हाथ की ओर जाने पर ऊर्जा की उपलब्धता कम होती जाती है। उदाहरण : घास → टिड्डा → मेंढक → सांप → मोर

यदि इस श्रृंखला में मेंढक को समाप्त कर दिया जाये तो श्रृंखला प्रभावित हो जाएगी। इस अवस्था में निम्नलिखित परिवर्तन दिखायी देंगे

  • टिड्डों की संख्या बढ़ जाएगी।
  • मेंढक न मिलने के कारण सांपों की संख्या कम हो जाएगी।
  • सांपों की संख्या का मोरों की संख्या पर प्रभाव पड़ेगा।

मनुष्य के अवांछनीय अनेक कार्यों के कारण खाद्य शृंखला छोटी हो जाती है और उससे प्रकृति में असंतुलन पैदा हो जाता है।

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प्रश्न 3.
क्या आहार श्रृंखला में छः से अधिक स्तर हो सकते हैं? यदि नहीं तो क्यों?
उत्तर-
आहार श्रृंखला के प्रत्येक चरण में ऊर्जा का स्थानांतरण होता है तथा ऊर्जा में लगातार कमी होती जाती है। तीन या चार चरणों के उपरांत ऊर्जा केवल नाम मात्र की ही रह जाती है। प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया द्वारा हरे पौधे सौर ऊर्जा का केवल 1% भाग ही अंतर्ग्रहण करते हैं तथा शेष वातावरण में ही व्यर्थ हो जाता है। दूसरे चरण में पौधों को शाकाहारी खाते हैं तो कैवल 10% ही ऊर्जा शाकाहारियों को प्राप्त होती है।

यदि हम सौर ऊर्जा से प्राप्त ऊर्जा को केवल 1000 J मान लें तो पौधे केवल 10 J ऊर्जा प्राप्त कर सकते हैं तथा शाकाहारी केवल 1 J ऊर्जा प्राप्त करते हैं। इसी प्रकार जब शाकाहारी को मांसाहारी भक्षण करते हैं तो उसे केवल 0.01 J ऊर्जा ही प्राप्त होगी। अतः ज्यों-ज्यों आहार श्रृंखला के चरण बढ़ते जाते हैं वैसे-वैसे ही उपलब्ध ऊर्जा की मात्रा भी कम होती जाती है। इसी आधार पर यह परिणाम निकलता है कि किसी भी आहार श्रृंखला में छः या अधिक चरण संभव नहीं होते हैं। उत्पादक स्तर पर ऊर्जा अधिक उपलब्ध होती है तथा बाद में लगातार कम होती जाती है तथा अंतिम स्तर पर ऊर्जा अत्यधिक कम प्राप्त होती है।

लघु उत्तरात्मक प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
पर्यावरण को परिभाषित करो। इसके प्रमुख घटकों के नाम लिखिए।
अथवा
पर्यावरण पदधति क्या होती है ? इसके कितने भाग होते हैं?
उत्तर-
पर्यावरण वह भौतिक एवं जैव संसार है जिसमें हम सभी रहते हैं। इसके प्रमुख घटक जैव और अजैव हैं। जैव घटक-समस्त जीव-जंतु, पौधे तथा मानव जैव घटक के वर्ग में आते हैं। अजैव घटक- भौतिक या अजैव घटकों में वायु, जल तथा स्थल हैं। वायु से श्वसन क्रिया होती है, जल को हम पीते हैं तथा स्थल पर हमारा निवास होता है। इनके अतिरिक्त मौसम संबंधी घटक हैं-सौर ऊर्जा, ताप, प्रकाश, वर्षा आर्द्रता, पवन-वेग इत्यादि।

प्रश्न 2.
जैव निम्नीकरण अपशिष्ट तथा अजैव निम्नीकरण अपशिष्ट पदार्थों में अंतर बताओ। प्रत्येक के उचित उदाहरण भी दो।
उत्तर –

जैव निम्नीकरणीय पदार्थ अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ
(1) ये वे अपशिष्ट पदार्थ हैं जिन्हें हानि रहित पदार्थों में तोड़ा जा सकता है जैसे-गोबर घास आदि। (1) ये वे अपशिष्ट पदार्थ हैं जिन्हें हानिरहित पदार्थों में नहीं तोड़ा जा सकता है। जैसे-डी० डी० टी०, प्लास्टिक आदि।
(2) ये पदार्थ जीवाणुओं, बैक्टीरिया द्वारा अपघटित हो जाते हैं और इस प्रकार पारिस्थितिक तंत्र में संतुलन बनाये रखते हैं। (2) ये पदार्थ बैक्टीरिया जैसे जीवाणुओं द्वारा अपघटित नहीं होते हैं।

प्रश्न 3.
जीवमंडल की परिभाषा दीजिए।
उत्तर-
जीवमंडल-जीवमंडल का अर्थ है ‘जीव का क्षेत्र’। पृथ्वी पर स्थल, जल तथा वायु विद्यमान हैं जो पौधों तथा जंतुओं का जीवन बनाए रखने में सहायता करते हैं। पृथ्वी पर जीवन बनाए रखने वाले ये क्षेत्र आपस में मिल कर जीवमंडल का निर्माण करते हैं। पृथ्वी के स्थलमंडल,जलमंडल और वायुमंडल तथा उनमें रहने सभी पौधों तथा जंतुओं को इकट्ठे रूप से जीवमंडल (Biosphere) कहते हैं।

प्रश्न 4.
पारिस्थितिक तंत्र किसे कहते हैं ? इसका जीवमंडल से क्या संबंध है ?
उत्तर –
पारिस्थितिक तन्त्र-जीवमंडल में ऊर्जा और पदार्थ का आदान-प्रदान जैव एवं अजैव घटकों के बीच लगातार होता रहता है, इस तंत्र को ही पारिस्थितिक तंत्र कहते हैं। तालाब, झील, जंगल, खेत और मानव-निर्मित जीवशाला में जैव और अजैव घटक आपस में क्रियाएं करते रहते हैं जो एक पारिस्थितिक तंत्र को प्रकट करते हैं। जैव संख्या, जैव तथा अजैव पारिस्थितिक तंत्र के घटक हैं, जो इस तंत्र को संरचना तथा गतिशीलता प्रदान करते हैं। कोई तालाब, वन या घास का मैदान पारिस्थितिक तंत्र के उदाहरण हैं।

जीवमंडल का प्रत्येक घटक अपना विशिष्ट कार्य करता है। इनके कुल कार्यों का सारा योग जीवमंडल को स्थिरता प्रदान करता है। किसी भौगोलिक क्षेत्र में सारे पारिस्थितिक तंत्र एक साथ मिलकर बायोम बनाते हैं तथा समस्त बायोम मिलकर जीवमंडल बनाते हैं। अतः जीवमंडल का एक प्रमुख घटक पारिस्थितिक तंत्र है जो जीवमंडल को गतिशीलता प्रदान करता है।

प्रश्न 5.
उत्पादक और उपभोक्ता में अंतर बताओ।
उत्तर-

उत्पादक (Producer) उपभोक्ता (Consumer)
(1) ऐसे जीव जो प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया से अपना भोजन बनाते हैं उन्हें उत्पादक कहते हैं। (1) ऐसे जीव जो अपने भोजन के लिए दूसरे जीवों पर निर्भर करते हैं, उपभोक्ता कहते हैं।
(2) हरे पौधे उत्पादक जीव कहलाते हैं। (2) सारे जंतु उपभोक्ता कहलाते हैं।

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प्रश्न 6.
अपघटक क्या हैं ? जीवमंडल में अपघटकों का क्या महत्त्व है ?
अथवा
पदार्थों के पुन: चक्रण में अपघटकों की भूमिका का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
अपघटक-अपघटक वे सूक्ष्म जीव हैं जो मृत पौधों एवं जंतुओं के शरीर में उपस्थित कार्बनिक यौगिकों का अपघटन करते हैं तथा उन्हें सरल यौगिकों और तत्वों में बदल देते हैं। ये सरल यौगिक तथा तत्व पृथ्वी के पोषण भंडार में वापस चले जाते हैं। जीवमंडल में अपघटकों का महत्त्व-अपघटक जीव मृत पौधों और जंतुओं के मृत शरीरों के अपघटन में सहायता करते हैं तथा इस प्रकार वातावरण को स्वच्छ रखने का कार्य करते हैं। अपघटक जीव मृत पौधों एवं जंतुओं के मृत शरीरों में उपस्थित विभिन्न तत्वों को फिर से पृथ्वी के पोषण भंडार में वापस पहुँचाने का कार्य भी करते हैं। पोषक तत्व पुनः प्राप्त हो जाने से मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बनी रहती है और यह मिट्टी बार-बार फ़सलों का पोषण करती रहती है।

प्रश्न 7.
ऊर्जा की दृष्टि से कौन-सा व्यक्ति-शाकाहारी या मांसाहारी-अधिक लाभ प्राप्त करता है ? क्यों ?
उत्तर-
ऊर्जा की दृष्टि से शाकाहारी व्यक्ति अधिक लाभ प्राप्त करता है। कारण-पौधे प्रथम पोषी स्तर हैं। एक पोषी स्तर से अगले पोषी स्तर को सामान्य रूप में लगभग 10% कम ऊर्जा का स्थानांतरण होता है। इससे स्पष्ट है कि मांसाहारी व्यक्ति को शाकाहारी व्यक्ति की तुलना में कम ऊर्जा प्राप्त होती है।

प्रश्न 8.
पारिस्थितिक संतुलन किस प्रकार बना रहता है ?
उत्तर-
प्रकृति में खाद्य श्रृंखलाएँ जुड़ी होती हैं। कई बार उनमें से एक की कोई कड़ी किसी कारण समाप्त हो जाती है। तब उस आहार श्रृंखला का किसी अन्य श्रृंखला से संबंध जुड़ जाता है और खाद्य पदार्थों और ऊर्जा के प्रवाह का संतुलन बना रहता है। यदि ऐसे किसी जंगल में सारे हिरण समाप्त हो जायें तो इसकी पूर्ति करने के लिए जंगल का शेर किसी जंगली जानवर को मार कर कड़ी को पूरा कर लेता है। इस प्रकार पारिस्थितिक संतुलन बना रहता है।

प्रश्न 9.
कौन-से रसायन ओज़ोन छिद्र के लिए प्रमुख कारण बने हुए हैं ?
उत्तर-
ओज़ोन छिद्र के मुख्य कारण-

  1. एयरोसोल दहन
  2. आधुनिक अग्निशामक
  3. नाभिकीय विस्फोट
  4. हैलोजन
  5. सल्फेट एयरोसोल
  6. CFCs (क्लोरोफ्लोरो कार्बन), CBC (क्लोरो ब्रोमो कार्बन आदि जिनका प्रशीतकों में उपयोग किया जाता है।)

प्रश्न 10.
पारिस्थितिक पिरामिड जीवमंडल में पोषण रीति की संरचना को किस प्रकार प्रदर्शित करते हैं ?
उत्तर-
पारिस्थितिक पिरामिड आहार श्रृंखलाओं तथा उनके पोषी स्तरों का ग्राफीय निरूपण (graphical representation) करते हैं। पारिस्थितिक पिरामिड विभिन्न पोषी स्तरों को इस प्रकार प्रदर्शित करते हैं; पारिस्थितिक पिरामिड का ‘आधार’ उत्पादक जीवों जैसे कि पौधों से प्रदर्शित करता है।
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पिरामिड के आधार (base) से जैसे-जैसे ऊपर जाते हैं, पिरामिड का आकार पतला होता जाता है तथा उच्चतर पोषी स्तरों को प्रकट करता है। पारिस्थितिक पिरामिड की चोटी सर्वोच्च मांसाहारी जीवों को प्रदर्शित करती है।

प्रश्न 11.
वायुमंडल में ओज़ोन किस प्रकार बनती है ? इसके रिक्तिकरण को स्पष्ट करें।
उत्तर-
ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं से ओज़ोन 0, के अणु बनते हैं। सामान्य ऑक्सीजन के अणु में दो परमाणु होते हैं। ऑक्सीजन सभी प्रकार के वायविक प्राणियों के जीवन के लिए आवश्यक है। पर ओज़ोन एक घातक विष है। वायुमंडल के ऊपरी स्तर में ओज़ोन अति आवश्यक कार्य पूरा करती है। यह सूर्य से आने वाली पराबैंगनी विकिरण से पृथ्वी के लिए एक सुरक्षा कवच तैयार करती है। पराबैंगनी विकिरण पृथ्वी पर रहने वाले जीवों के लिए अत्यंत हानिकारक है। ये विकिरण त्वचा का कैंसर उत्पन्न करती है।

वायुमंडल के उच्चतर स्तर पर पराबैंगनी (UV) विकिरण के प्रभाव से ऑक्सीजन (O2) अणुओं से ओजोन बनती है। उच्च ऊर्जा वाले पराबैंगनी (UV) विकिरण ऑक्सीजन अणुओं (O2) को विघटित कर स्वतंत्र ऑक्सीजन (O) परमाणु बनाती हैं। ऑक्सीजन के यह स्वतंत्र परमाणु संयुक्त होकर ओज़ोन बनाते हैं।
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प्रश्न 12.
भोजन श्रृंखला क्या होती है ? उदाहरण भी दो।
उत्तर-
भोजन श्रृंखला-उत्पादक, उपभोक्ता तथा अपघटक से मिलकर बनने वाली शृंखला भोजन श्रृंखला कहलाती है। भोजन श्रृंखला के उदाहरण-घास → टिड्डा → मेंढक → साँप → मोर।

प्रश्न 13.
विघटक क्या होते हैं ? पारितंत्र में विघटकों की क्या भूमिका है ?
उत्तर-
विघटक-जीवाणु तथा कवक जैसे सूक्ष्मजीव मृत जीवों के अवेशषों का विघटन करते हैं, जिन्हें विघटक कहते हैं। पारितंत्र में विघटक की भूमिका-विघटक जटिल कार्बनिक पदार्थों को सरल अकार्बनिक पदार्थों में परिवर्तित कर देते हैं जो मिट्टी में मिल जाते हैं तथा पौधों द्वारा पुन: उपयोग में लाए जाते हैं।

अति लघु उत्तरात्मक प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
‘जैव निम्नीकरणीय’ पदार्थ किसे कहते हैं ?
उत्तर-
वे पदार्थ जो जैविक प्रक्रमों द्वारा अपघटित हो जाते हैं उन्हें ‘जैव निम्नीकरणीय’ कहते हैं।

प्रश्न 2.
किन्हीं चार जैव निम्नीकरणीय पदार्थों के उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
सब्जी-फलों के छिलके, कागज, भूसा, चारा।

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प्रश्न 3.
अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ किसे कहते हैं ?
उत्तर-
वे पदार्थ जो जैविक प्रक्रमों द्वारा अपघटित नहीं हो पाते उन्हें अजैव निम्नीकरणीय कहते हैं।

प्रश्न 4.
अजैव निम्नीकरणीय पदार्थों के दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
प्लास्टिक, काँच।

प्रश्न 5.
पारितंत्र के अजैव कारकों के उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
ताप, वर्षा, वायु, मिट्टी, खनिज आदि।

प्रश्न 6.
प्राकृतिक पारितंत्र के उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
वन, तालाब, झील।

प्रश्न 7.
उत्पादक किसे कहते हैं ?
उत्तर-
जो प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया से सूर्य के प्रकाश और क्लोरोफिल की उपस्थिति में अकार्बनिक पदार्थों से कार्बनिक पदार्थ का निर्माण पर सकते हैं, उन्हें उत्पादक कहते हैं।

प्रश्न 8.
उपभोक्ता किसे कहते हैं ?
उत्तर-
जो जीव भोजन के लिए सीधे या परोक्ष रूप से उत्पादकों पर आश्रित रहते हैं, उन्हें उपभोक्ता कहते हैं।

प्रश्न 9.
उपभोक्ता के चार उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
मानव, शेर, बंदर, चिड़िया।

प्रश्न 10.
सूक्ष्मजीव अपमार्जक क्यों कहलाते हैं ?
उत्तर-
सूक्ष्मजीव जटिल कार्बनिक पदार्थों को सरल अकार्बनिक पदार्थों में बदल देते हैं जो मिट्टी में चले जाते हैं और पुनः पौधों के द्वारा उनका उपयोग किया जाता है।

प्रश्न 11.
जीवमंडल किसे कहते हैं ?
उत्तर-
पृथ्वी पर पाए जाने वाले सभी प्राकृतिक क्षेत्र तथा उसमें पाए जाने वाले सभी जीव-जंतु परस्पर मिलकर जीवमंडल कहलाते हैं।

प्रश्न 12.
जीवमंडल के प्रमुख घटक लिखिए।
उत्तर-
जैव घटक तथा अजैव घटक जीवमंडल के प्रमुख घटक हैं।

प्रश्न 13.
सर्वभक्षी या सर्वाहारी किसे कहते हैं ?
उत्तर-
वे जीव जो भोजन के लिए पौधे एवं जंतुओं दोनों का उपयोग करते हैं उन्हें सर्वभक्षी या सर्वाहारी कहते हैं, जैसे-मानव।

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प्रश्न 14.
किसी जलीय आहार श्रृंखला का उदाहरण लिखिए।
उत्तर-
काई या शैवाल → छोटे जंतु → छोटी मछली → बड़ी मछली।

प्रश्न 15.
जैव यौगिकीकरण क्या है ?
उत्तर-
जीवाणुओं तथा शैवाल द्वारा किए गए नाइट्रोजन स्थिरीकरण को जैव यौगिकीकरण कहते हैं।

प्रश्न 16.
जैव-निम्नीकरण कचरा क्या होता है ?
उत्तर-
जैव-निम्नीकरण कचरा-ऐसा कचरा जो जैविक प्रक्रमों से अपघटित हो जाता है। ऐसा कचरा जीवाणुओं तथा अन्य प्राणियों के द्वारा उत्पन्न हुए एन्जाइमों की सहायता से समय के साथ अपने आप अपघटित हो जाता है।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Type Questions)
बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्न में से कौन-से समूहों में केवल जैव निम्नकरणीय पदार्थ हैं ?
(a) घास, पुष्प तथा चमड़ा
(b) घास, लकड़ी तथा प्लास्टिक
(c) फलों के छिलके, केक एवं नींबू का रस
(d) केक, लकड़ी एवं घास।
उत्तर-
(a) (c) तथा (d)।

प्रश्न 2.
निम्न से कौन आहार श्रृंखला का निर्माण करते हैं ?
(a) घास, गेहूँ तथा आम
(b) घास, बकरी तथा मानव
(c) बकरी, गाय तथा हाथी
(d) घास, मछली तथा बकरी।
उत्तर-
(b) घास, बकरी तथा मानव।

प्रश्न 3.
घास स्थल परितंत्र में उत्पादक है –
(a) घास
(b) टिड्डा
(c) मेंढक
(d) साँप।
उत्तर-
(a) घास।

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प्रश्न 4.
जैव अनिम्नीकरणीय पदार्थ है-
(a) कागज़
(b) मृतपादप
(c) पॉलिथीन
(d) कच्चे फल।
उत्तर-
(c) पॉलिथीन।

प्रश्न 5.
जीवमंडल में ऊर्जा का मुख्य स्रोत है
(a) वायु
(b) सूर्य
(c) पौधे .
(d) परमाणु ऊर्जा।
उत्तर-
(b) सूर्य।

प्रश्न 6.
जीवमंडल में सम्मिलित है –
(a) वायुमंडल
(b) स्थलमंडल
(c) जलमंडल
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर-
(d) उपर्युक्त सभी।

प्रश्न 7.
वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण नहीं करता है:
(a) राइज़ोबियम
(b) ई० कोलाई
(c) नाइट्रोसोमोनास
(d) नीले हरे शैवाल।
उत्तर-
(b) ई० कोलाई।

प्रश्न 8.
क्लोरो-फ्लुओरो-कार्बन्स (CFCs) का प्रयोग होता है
(a) रेफ्रिजरेटर में
(b) एयरकंडीशनर में
(c) गद्देदार फोम में
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर-
(d) उपर्युक्त सभी।

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-

(i) ……………………….. जैविक तथा अजैविक अवयवों के पूर्ण समन्वय से बनी व्यवस्था है।
उत्तर-
जैवमंडल

(ii) एक खाद्य श्रृंखला में …………………………. को छोड़कर सभी जीव उपभोक्ता हैं।
उत्तर-
उत्पादक

(iii) किसी भी खाद्य श्रृंखला में प्रायः प्रथम पोषक स्तर ……………………….. होते हैं।
उत्तर-
हरे पादप

(iv) अधिकतर खाद्य शृंखलाएँ …………………. से शुरू होती हैं।
उत्तर-
पौधों

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(v) ……………………….. अपशिष्ट पदार्थों तथा मृत जीवों के शरीर के भागों को सरल पदार्थों में तोड़कर अपना भोजन प्राप्त करते हैं।
उत्तर-
अपघटक।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ऊर्जा के स्रोत

Punjab State Board PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ऊर्जा के स्रोत Important Questions and Answers.

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ऊर्जा के स्रोत

दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
चित्र की सहायता से बॉक्सनुमा सौर कुक्कर की संरचना व कार्यविधि का वर्णन कीजिए।
अथवा
सौर कुक्कर का सिद्धांत, रचना और कार्यविधि अंकित चित्र द्वारा समझाओ।
अथवा
सौर परावर्तक और सौर संकेंद्रक क्या है ? यह कहाँ पर उपयोग किए जाते हैं ? एक बॉक्सनुमा सौरकुक्कर की कार्यविधि की व्याख्या करो।
अथवा
बॉक्सनुमा सौर कुक्कर की बनावट तथा कार्यविधि का एक साफ़ तथा लेबल किए हुए चित्र की सहायता से वर्णन कीजिए।
उत्तर-
सौर परावर्तक-ये समतल दर्पण हैं जिनका प्रयोग सौर विकिरणों को परावर्तन करने के लिए किया जाता है। सौर परावर्तकों का प्रयोग उन यंत्रों में किया जाता है जहाँ मध्यम तापमान की आवश्यकता होती है। यहाँ सौर-विकिरणों का परावर्तन समतल दर्पणों द्वारा किया जाता है और ये विकिरणें काले रंग के बर्तन पर पड़ती हैं। काली सतह वाले बर्तन विकिरणों को अवशोषित करके गर्म हो जाते हैं। यह आयोजन सौर कुक्करों और सौर-जल ऊष्मकों (हीटरों) में उपयोग किया जाता है।

सौर संकेंद्रक-ये प्रायः अभिसारी लेंस या दर्पण हैं जिनके द्वारा सौर विकिरणों को केंद्रित करके उच्चताप प्राप्त किया जाता है। इनका प्रयोग मुख्यतः सौर संकेंद्रक कुक्करों में जहाँ बेक करना या तलने की आवश्यकता हो, किया जाता है। इनमें परावर्तक अवतल या परावलयिक हैं। इस प्रकार ऊर्जा एक बड़े क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में संकेंद्रित की जाती है। इनके प्रयोग 1000 या अधिक लोगों के लिए आवश्यक रसोई घरों में भाप उत्पन्न करने के लिए किया जाता है।

बॉक्सनुमा सोलर कुक्कर- यह एक ऐसी युक्ति है, जिसमें सौर ऊर्जा का उपयोग करके भोजन को पकाया जाता है, इसलिए इसे सौर चूल्हा भी कहते हैं। चित्र में बॉक्सनुमा सौर कुक्कर को प्रदर्शित किया गया है। सिद्धांत-काली सतह अधिक ऊष्मा का अवशोषण करती है परंतु कुछ समय पश्चात् काली सतह इस अवशोषित ऊष्मा का विविकरण प्रारंभ कर देती है। ऊष्मा की इस हानि को रोकने के लिए काली पट्टी को किसी ऊष्मारोधी बाक्स में रखकर उसे काँच की पट्टी से ढक दिया जाता है। बाक्स की अंदर की दीवारों को काले रंग से पेंट कर दिया जाता है ताकि अधिक-से-अधिक ऊष्मा का अवशोषण हो सके तथा परावर्तन द्वारा ऊष्मा का नुकसान कम-से-कम हो।

संरचना-सामान्यत: यह एक लकड़ी का बक्सा A होता है जिसे बाहरी बक्सा भी कहते हैं। इस लकड़ी के बक्से के अंदर लोहे अथवा ऐलुमिनियम की चादर का बना एक और बक्सा होता है, इसे भीतरी बक्सा कहते हैं। भीतरी बक्से के अंदर की दीवारें तथा नीचे की सतह काली कर दी जाती है, जिससे कि सौर ऊर्जा का अधिक-सेअधिक अवशोषण हो तथा परावर्तन द्वारा ऊष्मा की कम-से-कम हानि हो। भीतरी बक्से तथा बाहरी बक्से के बीच
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ऊर्जा के स्रोत 1
के खाली स्थान में थर्मोकोल अथवा काँच की रुई अथवा कोई भी ऊष्मारोधी पदार्थ भर देते हैं, इससे सौर कुक्कर की ऊष्मा बाहर नहीं जा पाती। सौर कुक्कर के बक्से के ऊपर एक लकड़ी के फ्रेम में मोटे काँच का एक ढक्कन G लगा होता है, जिसे आवश्यकतानुसार खोला तथा बंद किया जा सकता है, तथा यह ग्रीन हाऊस प्रभाव पैदा करता है। सौर कुक्कर के बक्से में एक समतल दर्पण M भी लगा होता है जो कि परावर्तक तल का कार्य करता है।

कार्यविधि- पकाए जाने वाले भोजन को स्टील अथवा ऐलुमिनियम के एक बर्तन C में डालकर जिसकी बाहरी सतह काली पुती हो, सौर कुक्कर के अंदर रख देते हैं तथा ऊपर से शीशे के ढक्कन को बंद कर देते हैं। परावर्तक तल M अर्थात् समतल दर्पण को चित्रानुसार खड़ा करके सौर कुक्कर को धूप में रख देते हैं। जब सूर्य के प्रकाश की किरणें परावर्तक तल M पर गिरती हैं तो परावर्तक तल उन्हें तीव्र प्रकाश किरण पुंज के रूप में सौर कुक्कर के ऊपर डालता है।

सूर्य की ये किरणें काँच के ढक्कन में से गुज़रकर सौर कुक्कर के बक्से में प्रवेश कर जाती हैं तथा कुक्कर के अंदर की काली सतह द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है। अब यह सतहें ऊष्मा की पराबैंगनी विकिरणों के रूप में निकास करना आरंभ करती हैं परंतु ऊपर की सतह पर स्थापित काँच की पट्टी इन विकिरणों को बाहर नहीं जाने देती हैं। इसलिए बक्से के भीतर की ऊष्मा अंदर रह जाती है। कुक्कर का भीतरी तापमान 2-3 घंटे में 100°C से 140°C हो जाता है। जिन भोज्य पदार्थों को हल्की गर्मी की आवश्यकता होती है उन्हें इस सौर कुक्कर में सुगमता से पकाया जा सकता है।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ऊर्जा के स्रोत

प्रश्न 2.
एक नामांकित चित्र बनाकर सौर जल ऊष्मक की संरचना तथा कार्य-विधि का वर्णन करो।
उत्तर-
सौर जल ऊष्मक- यह एक ऐसी युक्ति है जिसमें सौर ऊर्जा का उपयोग करके पानी गर्म किया जाता है। सौर जल ऊष्मक का नामांकित चित्र नीचे दर्शाया गया है :
सौर जल ऊष्मक में एक ऊष्मारोधी बक्सा B होता है जो अंदर से काला पेंट किया होता है। इसके अंदर काले रंग से पुती हुई तांबे की ट्यूबें T एक कुंडली के रूप में होती हैं। सौर जल ऊष्मक का बक्सा तथा तांबे की ट्यूबें काले रंग की इसलिए की जाती हैं कि वे अधिक दक्षता से सूर्य की ऊष्मीय किरणों को अवशोषित कर सकें। संवहन तथा विकिरण द्वारा ऊष्मा की हानि को रोकने के लिए बक्से के ऊपर शीशे का ढक्कन लगाया जाता है। सौर जल ऊष्मक की तांबे की ट्यूबों के दोनों सिरे जल भंडारण टैंक D से जुड़े होते हैं। सौर जल ऊष्मक के भंडारण टैंक को भवन की छत के ऊपर रखा जाता है ताकि उन्हें सूर्य का प्रकाश सारा दिन प्राप्त हो।
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कार्य-विधि-ठंडा पानी पाइप P के रास्ते भंडारण टैंक D में प्रवेश होता है तथा वहां से पाइप Q के द्वारा जल ऊष्मक B तांबे की ट्यूबों T में चला जाता है। ये तांबे की ट्यूबें सौर ऊर्जा का अवशोषण करके गर्म हो जाती हैं। जब ठंडा जल इन गर्म तांबे की ट्यूबों में से गुज़रते हुए गर्म हो जाता है। यह गर्म जल तांबे की ट्यूब के दूसरे सिरे से निकल कर पाइप R की सहायता से भंडारण टैंक के ऊपरी भाग में चला जाता है। गर्म जल हल्का होने के कारण भंडारण टैंक के ऊपरी भाग में ही रहता है तथा पाइप S के द्वारा उपयोग के लिए बाहर निकाला जा सकता है। इस प्रकार सौर जल ऊष्मक के भंडारण टैंक का सारा जल काफ़ी गर्म हो जाता है।

प्रश्न 3.
(i) अंकित चित्र की सहायता से गुंबद आकार जैव गैस संयंत्र की रचना व कार्यविधि समझाओ।
(ii) तैरते हुए गैस होल्डर बायो गैस संयंत्र की रचना और कार्यविधि समझाओ।
अथवा
जैव अपशिष्ट से जैव गैस प्राप्त करने की विधि का विस्तृत वर्णन कीजिए। इस गैस को प्राप्त करने के कोई दो लाभ लिखिए।
उत्तर-
जैव गैस का निर्माण-जैव गैस कई ईंधन गैसों का मिश्रण है। इसे ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में जैव पदार्थों के अपघटन से प्राप्त किया जाता है। जैव गैस का मुख्य संघटक मेथेन (CH4) गैस है जो कि एक आदर्श ईंधन जैव गैस उत्पादन के लिए गोबर, वाहित मल, फल-सब्जियों तथा कृषि आधारित उद्योगों के अपशिष्ट आदि का प्रयोग किया जाता है। जैव गैस बनाने के लिए दो प्रकार के संयंत्रों का प्रयोग किया जाता है-

  • स्थायी गुंबद संयंत्र तथा
  • प्लावी (तैरती) गैस होल्डर वाला बायो गैस संयंत्र।

(i) स्थिर गुंबदाकार बायोगैस संयंत्र की कार्यविधि-गोबर तथा पानी की बराबर मात्रा का घोल बनाकर टैंक M में लिया जाता है। गोबर तथा पानी के इस घोल को प्रवेश चैंबर I के रास्ते से संपाचक टैंक T में भेज दिया जाता है। संपाचक टैंक का काफ़ी भाग गोबर तथा पानी के मिश्रण से भर दिया जाता है परंतु उसके ऊपर का गुंबद D बायोगैस एकत्रित करने के लिए खाली छोड़ दिया जाता है। मिश्रण 50-60 दिन रखा रहने दिया गया है।

इस अवधि के दौरान गोबर का पानी की उपस्थिति में अनॉक्सी-सूक्ष्मजीवों द्वारा निम्नीकरण होता है जिससे बायोगैस बनाने लगती है और धीरे-धीरे गुंबदाकार टंकी D में इकट्ठी होती रहती है। गुम्बर में इकट्ठी हुई बायोगैस को गैस निर्गम S से पाइपों द्वारा घरों तक पहुंचाया जाता है। बायोगैस की उपलब्धता लगातार बनाए रखने के लिए बायोगैस संयंत्र में नियमित रूप से घोल डाला जाता है। संपाचक टैंक में बायोगैस बनने के बाद शेष बचा गोबर का घोल, निर्गम चैंबर के रास्ते टैंक F में लाया जाता है। टैंक F से गोबर के अपयुक्त घोल या स्लरी को खेती में ले जाकर खाद के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
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(ii) तैरते हुए गैस होल्डर वाले बायोगैस संयंत्र की कार्य-विधि-बायोगैस या जैव गैस बनाने के लिए आवश्यक पदार्थ हैं-पशुओं का गोबर तथा पानी। गोबर तथा पानी की बराबर मात्रा टैंक M में मिलाकर गोबर का घोल या स्लरी (slurry) बना लेते हैं। गोबर तथा पानी के इस घोल को प्रवेश पाइप I द्वारा संपाचक टैंक T में डाल दिया जाता है। धीरे-धीरे संपाचक टैंक को तो गोबर तथा पानी के मिश्रण से भर दिया जाता है, परंतु उसके ऊपर बायोगैस इकट्ठी करने के लिए तैरती हुई टंकी छोड़ दी जाती है।
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गोबर तथा पानी के घोल को संपाचक टैंक में लगभग 60 दिन के लिए रखा रहने देते हैं। इस अवधि के दौरान गोबर का पानी की उपस्थिति में अनॉक्सी-सूक्ष्मीजीवों द्वारा निम्नीकरण होता है जिससे बायोगैस बनती है जो धीरेधीरे तैरती हुई टंकी H में इकट्ठी होती रहती है। तैरती हुई गैस टंकी में एकत्रित बायोगैस को निर्गम S से पाइपों द्वारा घरों तक पहुंचाया जाता है।

बायोगैस की उपलब्धता लगातार बनाये रखने के लिए बायोगैस संयंत्र में नियमित रूप से समय-समय पर गोबर का घोल डाला जाता है। संपाचक टैंक T में बायोगैस बनने के बाद बची हुई स्लरी, निर्गम पाइप 0 के रास्ते टैंक F में आ जाती है। टैंक F से गोबर के उपयुक्त घोल या स्लरी को खेतों में ले जाकर खाद के रूप में प्रयोग किया जाता है। जैव-गैस के लाभ- यह एक उत्तम ईंधन है जो बिना धुआँ दिए जलती है। इसको जलाने से राख जैसा कोई ठोस अपशिष्ट भी नहीं बचता है। इस प्रकार, जैव-गैस एक पर्यावरण हितैषी ईंधन है।

डाइजेस्टर में, जैव गैस प्राप्त करने के पश्चात् शेष स्लरी में नाइट्रोजन तथा फॉस्फोरस के यौगिक प्रचुर मात्रा में होते हैं; अतः एक उत्तम खाद का कार्य करती है। इस प्रकार, जैव गैस प्राप्त करने की क्रिया में न केवल हमें एक उत्तम ईंधन प्राप्त होता है, साथ ही खेतों के लिए खाद भी प्राप्त होती है तथा पर्यावरण भी प्रदूषित होने से बच जाता है।

अवायुजीवी (अनॉक्सी) अपघटन-डाइजेस्टर में उपस्थित अवायुजीवी सूक्ष्मजीवों को ऑक्सीजन की आवश्यकता नहीं होती है; अतः ये ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में ही स्लरी का अपघटन करते हैं। ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होने वाला इस प्रकार का अपघटन अवायुजीवी अथवा अनॉक्सी अपघटन कहलाता है।

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प्रश्न 4.
पवन चक्की का कार्य-सिद्धांत क्या है ? पवन चक्की का विवरण चित्र सहित समझाइए।
अथवा
पवन चक्की के कार्य-सिद्धांत को स्पष्ट कीजिए।
अथवा
पवन चक्की का सिद्धांत, रचना, कार्य-विधि चित्र सहित समझाएं। पवन ऊर्जा के उपयोग तथा सीमाएँ भी लिखिए।
उत्तर-
पवन चक्की- यह एक ऐसी युक्ति है जिसमें पवन की गतिज ऊर्जा को घूर्णन गति द्वारा यांत्रिक ऊर्जा और फिर विद्युत् ऊर्जा में बदला जाता है।
पवन चक्की की रचना-पवन चक्की की रचना को चित्र में प्रदर्शित किया गया है। इसमें ऐलुमिनियम के पतले-चपटे आयताकार खंडों के रूप में, बहुत-सी पंखुड़ियाँ लोहे के पहिये पर लगी रहती हैं। यह पहिया एक ऊर्ध्वाधर स्तंभ के ऊपरी सिरे पर लगा रहता है तथा अपने केंद्र से घूमने वाली शाफ्ट यांत्रिक बंधन गुजरने वाली लौह शाफ्ट (अक्ष) के परितः घूम सकता है। पहिये का तल स्वतः वायु की गति की ब्लेड दिशा के लंबवत् समायोजित हो जाता है, जिससे वायु सदैव पंखुड़ियों पर सामने से टकराती है। पहिये की अक्ष एक लोहे की फ्रैंक से जुड़ी रहती है। बैंक का दूसरा सिरा उस मशीन अथवा डायनमों से जुड़ा रहता है, जिसे पवन ऊर्जा द्वारा गति प्रदान करनी होती है।
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कार्यविधि-जब तीव्र गतिशील पवन, पवन-चक्की के ब्लेडों से टकराती है तो वह उन पर एक बल लगाती है, जिसके कारण पवन चक्की के ब्लेड घूमते लगने हैं। पवन चक्की के घूर्णन (rotation) का प्रभाव उसके ब्लेडों की विशेष बनावट के कारण होता है तो बिजली के पंखे के ब्लेडों के समान होती है। पवन चक्की को एक ऐसा बिजली का पंखा समझा जा सकता है जो विपरीत दिशा में कार्य कर रहा हो क्योंकि जब पंखे के ब्लेड घूमते हैं तो पवन बहती है परंतु जब पवन बहती है तो पवन चक्की के ब्लेड घूमते हैं। घूमते हुए ब्लेडों की घूर्णन गति के कारण पवन चक्की से गेहूं पीसने की चक्की को चलाना, जल-पंप चलाना, मिट्टी के बर्तन के चाक को घुमाना आदि कार्य किए जा सकते हैं। पवन चक्की ऐसे स्थानों पर लगाई जाती है, जहाँ वायु लगभग पूरे वर्ष तीव्र गति से चलती रहती है।

चित्र में पवन चक्की द्वारा पानी खींचने की क्रिया का प्रदर्शन किया गया है। पवन चक्की की फ्रैंक एक जल-पंप की पिस्टन छड़ से जोड़ दी जाती है। जब वायु, पवन चक्की के ब्लेड से टकराती है तो चक्की का पहिया घूमने लगता है, और पहिये से जुड़ी अक्ष घूमने लगती है। शाफट की घूर्णन गति के कारण फ्रैंक ऊपर-नीचे होने लगती है और जल-पंप की पिस्टन छड़ भी ऊपर-नीचे गति करने लगती है तथा जल-पंप से जल बाहर निकलने लगता है।
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पवन ऊर्जा के उपयोग

  • पाल-चालित नौकाओं को चलाने के लिए।
  • पवन चक्कियों से आटा-चक्कियाँ और जल पंप आदि को चलाने के लिए।
  • वायुयानों द्वारा उड़ान भरने के लिए।
  • विद्युत् उत्पन्न करने के लिए।

पवन ऊर्जा की हानियाँ (सीमाएँ) –
यद्यपि पवन ऊर्जा के अनेक लाभ हैं, परंतु इसमें कई बाधाएं भी हैं जैसे मान लो जब हमें ऊर्जा की आवश्यकता हो और उस समय पवन प्रवाह न हो रहा हो। इसके अतिरिक्त यह भी हो सकता है कि उस समय पवन-प्रवाह तीव्र न हो और यह चक्की को न चला सके। पवन-चक्की को स्थापित करने के लिए खुला क्षेत्र भी चाहिए। एक अन्य कमी यह भी है कि इसे स्थापित करने के लिए निर्माण के लिए लागत अत्याधिक आती है।

प्रश्न 5.
सौर सेल क्या होता है ? इनका क्या उपयोग है ?
अथवा
सौर सेल क्या होता है ? इसका क्या सिद्धांत है ? इसकी रचना चित्र बनाकर स्पष्ट करो। कोई चार उपयोग लिखें।
अथवा
सौर सेल क्या है ? सौर सेलों के विकास तथा उपयोगों पर एक टिप्पणी लिखिए।
उत्तर-
सौर सेल-यह एक ऐसी युक्ति (या यंत्र) है जो सौर ऊर्जा को सीधे ही विद्युत् ऊर्जा में परिवर्तित कर देती है। चूंकि सौर ऊर्जा को प्रकाश ऊर्जा भी कहते हैं इसलिए हम भी कह सकते हैं कि “सौर सेल एक ऐसी युक्ति या (यंत्र) है जो प्रकाश ऊर्जा को विद्युत् ऊर्जा में परिवर्तित कर देता है।”

सौर सेल का विकास-आज से लगभग 100 वर्ष पहले यह खोज हो चुकी थी कि सेलीनियम की किसी पतली पर्त को सौर प्रकाश में रखने पर विद्युत् उत्पन्न होती है। यह भी ज्ञात था कि सेलेनियम के किसी टुकड़े पर आपतित सौर ऊर्जा का केवल 0.6% भाग ही विद्युत् ऊर्जा में परिवर्तित हो पाता है। चूँकि इस प्रकार के सौर सेल की दक्षता बहुत कम थी, इसलिए विद्युत् उत्पादन के लिए इस परिघटना का उपयोग करने के कोई विशेष प्रयास नहीं किए गए।

प्रथम व्यावहारिक सौर सेल सन् 1954 में बनाया गया था। यह सौर सेल लगभग 1.0% सौर ऊर्जा को विद्युत् ऊर्जा में परिवर्तित कर सकता था। इस सौर सेल की दक्षता भी बहुत कम थी। अंतरिक्ष कार्यक्रमों द्वारा बढ़ती हुई माँग के कारण अधिक-से-अधिक दक्षता वाले सौर सेलों को विकसित करने की दर तेज़ी से बढ़ी है। सौर सेलों के निर्माण के लिए अर्धचालकों के उपयोग से सौर सेलों की दक्षता बहुत अधिक बढ़ गई है। सिलिकॉन, गैलियम तथा जर्मेनियम जैसे अर्धचालकों से बने हुए सौर सेलों की दक्षता 10 से 18% तक होती है। सेलेनियम से बने आधुनिक सौर सेलों की दक्षता 25% तक होती है।
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सौर सेलों के उपयोग-सौर सेलों का उपयोग दुर्गम तथा दूरस्थ स्थानों में विद्युत् ऊर्जा उपलब्ध कराने में अत्यंत प्रभावशाली सिद्ध हुआ है। सौर सेलों के महत्त्वपूर्ण उपयोग अग्रलिखित हैं-

(i) अंतरिक्ष में उपयोग-कृत्रिम उपग्रहों और अंतरिक्ष में भेजे गये अनुसंधान यंत्रों के लिए विद्युत् का प्रयोजन करने के लिए।

(ii) ग्रामीण विद्युतीकरण-विद्युत् का संग्रहण करके सौर सेल ग्रामीण क्षेत्रों को 24 घंटे बिजली दे सकते हैं।

(iii) गलियों को प्रकाशित करना-छोटे सौर पैनलों और स्टोरेज बैटरी के प्रयोग से बहुत से स्थानों पर स्ट्रीट लाइट का प्रबंध किया गया है। इनका प्रयोग समुद्र में स्थित प्रकाश स्तंभों (Light houses) में भी किया गया है।

(iv) जल खींचना-कृषि में सिंचाई कार्यों के लिए जलपंपों द्वारा धरती की गहराई से जल खींचने के लिए सौर सेलों भी प्रयोग किया जा चुका है।

(v) जल का खारापन दूर करने/शुद्ध करने वाले संयंत्र-अनेक स्थानों पर सौर सेलों द्वारा उत्पन्न शक्ति के आधार पर जल का शोधन करने के लिए उद्योग लगाये गये हैं।

(vi) हाइड्रोजन उत्पादन-सौर सेल विद्युत् उत्पन्न करते हैं जिससे जल का विद्युत् अपघटन करके हाइड्रोजन उत्पन्न की जाती है। इस हाइड्रोजन को साफ़ ईंधन के रूप में प्रयोग किया जा सकता है।

(vii) शक्ति फ़ार्म-सौर सेलों के बड़े पैनलों को परस्पर जोड़ कर अधिक शक्ति उपलब्ध हो जाती है। उचित ढंग द्वारा इसे दिष्ट धारा (D.C.) से प्रत्यावर्ती धारा (A.C.) में परिवर्तित किया जाता है और फिर आगे शक्ति ग्रिड से जोड़ दिया जाता है।

(viii) अन्य उपयोग-उच्च सुयोग्यता वाले सेल इलेक्ट्रॉनिक घड़ियां या केलक्यूलेटरों में भी देखे जा सकते हैं।

प्रश्न 6.
सौर पैनल क्या हैं ? सौर पैनलों के उपयोग की व्याख्या करने के लिए एक ब्लॉक रेखाचित्र बनाओ।
उत्तर-
सौर सेल पैनल- यह अर्ध-चालकों की सहायता से बनाई गई ऐसी युक्ति है जो सौर ऊर्जा को विद्युत् ऊर्जा में परिवर्तित करके उपयोगी कार्य करती है। सूर्य की किरणें बनावटसौर सेल पैनल अनेक सौर सेलों के सामूहिक रूप से कार्य करने की योग्यता पर आधारित होते हैं। अनेक सौर सेलों के विशेष क्रम में सौर सेल व्यवस्थित करके सौर सेल पैनल बनाये जाते हैं। इसे ऐसे स्थान पर लगाया जाता है जहां पर्याप्त मात्रा में धूप आती हो। पैनल की दिशा को बदलने की सौर पैनल से डी० सी० आऊटपुट लाने वाली तारें व्यवस्था भी की जाती है।
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कार्यविधि-सिलिकॉन तथा गैलियम जैसे अर्ध-चालकों की सहायता से बनाये गए सौर सेलों के पैनल पर जब सौर ऊर्जा पड़ती है तो अर्ध-चालक के दो भागों में विभवांतर स्टोरेज बैटरी उत्पन्न हो जाता है। चार वर्ग सेमी० के एक सौर सेल के द्वारा 60 मि० ली० ऐंपियर धारा लगभग 0.4 – 0.5 वोल्ट पर उत्पन्न होती है। सौर सेलों की कम या अधिक संख्या के आधार पर कम या अधिक विदयुत् ऊर्जा प्राप्त की जाती है।

उपयोग-

  • सड़कों पर प्रकाश की व्यवस्था की जाती है।
  • कृत्रिम उपग्रहों तथा अंतरिक्ष अन्वेषक यानों में विद्युत् का प्रबंध किया जाता है।

प्रश्न 7.
नाभिकीय (न्यूक्लीयर) विखंडन से आपका क्या तात्पर्य है ? नाभिकीय (न्यूक्लीयर) विखंडन का एक उदाहरण दो।
अथवा
नाभिकीय विखंडन से क्या अभिप्राय है ? इसको एक उदाहरण की सहायता से स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
न्यूक्लीयर विखंडन- यह वह क्रिया है जिसमें भारी परमाणु (जैसे यूरेनियम, प्लूटोनियम या थोरियम) के नाभिक को निम्न ऊर्जा न्यूट्रॉन से बमबारी कराकर हल्के नाभिकों में तोड़ा जाता है जिसके फलस्वरूप विशाल मात्रा में ऊर्जा मुक्त होती है। नाभिकीय विखंडन की प्रक्रिया में थोड़े से द्रव्यमान (mass) की हानि होती है जो अत्यधिक ऊर्जा के रूप में प्रकट होती है।

नाभिकीय विखंडन अभिक्रिया में मूल नाभिक तथा उत्पाद नाभिकों के द्रव्यमानों का अंतर Δm, ऊर्जा E में परिवर्तित हो जाता है। जो E = mc2 द्वारा नियंत्रित की जाती है, यहाँ c प्रकाश की निर्वात में चाल है। नाभिकीय ऊर्जा को इलेक्ट्रॉन वोल्ट के मात्रक में व्यक्त किया जाता है।
1 eV = 1.602 x 10-19J

न्यूक्लीयर विखंडन का उदाहरण-यूरेनियम-235 में न्यूक्लीयर विखंडन की प्रक्रिया मंद गति से चलने वाले न्यूट्रॉनों की बमबारी से होती है। जब यूरेनियम-235 परमाणुओं पर धीमी गति वाले न्यूट्रॉनों की बमबारी की जाती है तो यूरेनियम का भारी नाभिक टूटकर दो मध्यम भार वाले परमाणु, बेरियम-139 तथा क्रिप्टॉन-94 बना देता है तथा तीन न्यूट्रॉन उत्सर्जित करता है। इस विखंडन प्रक्रिया के दौरान यूरेनियम का कुछ द्रव्यमान खो जाता है तथा इसके बदले ऊर्जा की गति विशाल मात्रा उत्पन्न होती है।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ऊर्जा के स्रोत 9
इस नाभिकीय ऊर्जा का उपयोग विद्युत् उत्पादन के लिए किया जाता है।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ऊर्जा के स्रोत

प्रश्न 8.
नाभिकीय संलयन से क्या अभिप्राय है ? एक उदाहरण से स्पष्ट कीजिए।
अथवा
न्यूक्लीयर संलयन से क्या तात्पर्य है ? इसका एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
नाभिकीय संलयन- यह वह प्रक्रिया है जिसमें दो हल्के न्यूक्लियस (नाभिक) आपस में संयोग करके एक भारी न्यूक्लियस बनाते हैं तथा ऊर्जा की अत्यधिक मात्रा उत्पन्न होती है। इस प्रक्रिया में थोड़े से द्रव्यमान की हानि होती है जो ऊर्जा के रूप में प्रकट होती है।
उदाहरण-भारी हाइड्रोजन जिसे ड्यूटीरियम भी कहा जाता है हाइड्रोजन तत्व का एक आइसोटोप है जिसे 12H संकेत से दर्शाया जाता है। जब ड्यूटीरियम के परमाणुओं को उच्च ताप तक गर्म किया जाता है तो ड्यूटीरियम के दो नाभिक परस्पर संयोग करके हीलियम का भारी नाभिक बना देते हैं तथा ऊर्जा की विशाल मात्रा मुक्त होती है इस अभिक्रिया को निम्नलिखित समीकरण द्वारा दर्शाया जा सकता है :
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ऊर्जा के स्रोत 10
सूर्य के भीतर भारी हाइड्रोजन का हीलियम में परिवर्तन नाभिकीय संलयन अभिक्रिया का उदाहरण है।

प्रश्न 9.
नाभिकीय विखंडन तथा नाभिकीय संलयन में अंतर स्पष्ट कीजिए।
अथवा
न्यूक्लियर विखंडन तथा न्यूक्लीयर संलयन में अंतर स्पष्ट करो।
उत्तर–
नाभिकीय विखंडन तथा नाभिकीय संलयन में अंतर-

नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission) नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion)
(1) भारी नाभिक हल्के नाभिक में परिवर्तित होते हैं। (1) हल्के नाभिक भारी नाभिक में परिवर्तित होते हैं।
(2) इस अभिक्रिया के संपन्न होने के लिए ताप की आवश्यकता होती है। (2) इस अभिक्रिया के संपन्न होने के लिए ताप की आवश्यकता नहीं होती है।
(3) नाभिकीय विखंडन के उत्पाद साधारणतः रेडियोएक्टिव होते हैं और उन्हें प्रक्रिया के बाद निपटाने की समस्या होती है। (3) नाभिकीय संलयन के उत्पाद रेडियो एक्टिव नहीं होते हैं। अतः उन्हें निपटाने की समस्या नहीं होती है।
(4) यह एक नियंत्रित अभिक्रिया है। (4) यह एक अनियंत्रित अभिक्रिया है।
(5) इस प्रक्रिया में अपेक्षाकत कम ऊर्जा उत्पन्न है। (5) इस प्रक्रिया में विशाल मात्रा में ऊर्जा उत्पन्न होती होती है।
(6) यह परमाणु बम बनाने का आधार होती है। (6) यह हाइड्रोजन बम बनाने का आधार होती है।
(7) इस प्रक्रिया में विखंडनीय ईंधन बहुत महंगा सस्ते तथा सुलभ प्राप्त हो जाते हैं। (7) इस प्रक्रिया को प्रारंभ करने वाले पदार्थ बहुत होता है।

लघु उत्तरात्मक प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
जीवाश्म किसे कहते हैं ?
उत्तर-
जीवाश्म या फॉसिल (Fossils)-पौधों तथा जंतुओं के कठोर भाग या उनके चट्टानों पर बने हुए प्राचीन चिह्न जो हमें चट्टानों की खुदाई करते समय मिलते हैं, उनको जीवाश्म कहते हैं। फॉसिल लातीनी (Latin) भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ “खोदकर निकाली गई वस्तु” है। जैसे पशुओं की हड्डियों, उनके पिंजर, उनके पैरों के चिह्न, पंजे या पंजों के छपे निशान सभी जीवाश्म हैं। इनसे हमें जीव विकास के विषय में पता चलता है।

प्रश्न 2.
जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuel) की परिभाषा दीजिए। उसकी उचित उदाहरण दीजिए। ऊर्जा संकट से निपटने के लिए जीवाश्म ईंधन के उपयोग के लिए ध्यान में रखने वाली दो सावधानियां बताइए।
उत्तर-
जीवाश्म ईंधन-जीव-जंतुओं के अवशेष जो भूमि के नीचे दबे रहे और ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में अपघटित होकर ईंधन बने उन्हें जीवाश्म ईंधन कहते हैं। ऊर्जा संकट से बचने के लिए सावधानियां कोयला, तेल और प्राकृतिक गैस जैसे ऊर्जा स्रोतों के समाप्त होने के खतरे से निम्नलिखित ढंगों द्वारा बचा जा सकता है –

  • हमें जीवाश्म ईंधन से प्राप्त ऊर्जा का प्रयोग करते समय अत्यंत ध्यान रखना चाहिए और केवल उसी समय इस ईंधन का उपयोग करना चाहिए जब इसका कोई वैकल्पिक नवीकरणीय स्रोत उपलब्ध न हो।
  • हमें नई वैकल्पिक टैक्नालॉजी का पता लगाना चाहिए ताकि हम ऊर्जा से भरपूर नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों जैसे-बायोमास तथा सूर्य आदि से ऊर्जा प्राप्त कर सकें।
  • हमें ऊर्जा को व्यर्थ नष्ट नहीं होने देना चाहिए।

प्रश्न 3.
यदि हम जीवाश्म ईंधनों का उपयोग अत्यधिक तीव्र दर से करें तो उसका परिणाम क्या होगा ? कारण सहित समझाएं।
उत्तर-
जीवाश्म ईंधन पृथ्वी के अंदर अत्यंत मंद गति से होने वाली असामान्य प्रक्रियाओं द्वारा बने हैं। दबे हुए पेड़-पौधों तथा जंतु अवशेषों से जीवाश्म ईंधन बनने की प्रक्रिया में करोड़ों वर्ष लग जाते हैं। जो जीवाश्म ईंधन हम आजकल पृथ्वी में से खोद कर निकाल रहे हैं, वे करोड़ों वर्ष पहले पृथ्वी में दबे जीव-जंतुओं से बने हैं। यदि हम जीवाश्म ईंधनों का उपयोग अत्यंत तेज़ गति से करेंगे तो वे शीघ्र ही समय से पूर्व समाप्त हो जाएंगे।

प्रश्न 4.
L.P.G. को एक आदर्श ईंधन क्यों माना जाता है ?
उत्तर-
L.P.G. एक आदर्श ईंधन-L.P.G. को निम्नलिखित विशेषताओं के कारण आदर्श ईंधन माना जाता है-

  • L.P.G. का कैलोरीमान अधिक है।
  • L.P.G. का ज्वलनाँक अधिक है।
  • L.P.G. के दहन के पश्चात् विषैले पदार्थों की उत्पत्ति बहुत कम होती है।
  • L.P.G. की दहन दर संतुलित होती है।
  • L.P.G. में अदाह्य पदार्थ की मात्रा कम होती है।

प्रश्न 5.
किसी अच्छे ईंधन की क्या विशेषताएँ हैं ?
अथवा
अच्छे ( आदर्श ) ईंधन की कम-से-कम 6 विशेषताएँ लिखो।
अथवा
उत्तम ईंधन के गुण लिखें।
उत्तर-
उत्तम ( आदर्श ) ईंधन के गुण-

  • इसका ऊष्मीय मान (कैलोरीमान) अधिक होना चाहिए।
  • ईंधन का उचित ज्वलन ताप होना चाहिए।
  • ईंधन के दहन की दर संतुलित होनी चाहिए अर्थात् न अधिक हो और न कम हो।
  • ईंधन में अज्वलनशील पदार्थों की मात्रा जितनी कम हो उतना अच्छा होता है।
  • ईंधन के पश्चात् विषैले पदार्थों की उत्पत्ति कम-से-कम होनी चाहिए।
  • ईंधन की उपलब्धता पर्याप्त तथा सुलभ होनी चाहिए।
  • ईंधन कम मूल्य पर प्राप्त हो सके।
  • ईंधन का आसानी से भंडारण तथा परिवहन सुरक्षित होना चाहिए।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ऊर्जा के स्रोत

प्रश्न 6.
पनविद्युत् कैसे उत्पन्न की जाती है ? इसके लाभ और हानि बताओ।
अथवा
जल-विद्युत् संयंत्र में विद्युत् कैसे पैदा की जाती है ? चित्र सहित समझाओ।
उत्तर –
पनविद्युत् उत्पन्न करने का मूल सिद्धांत-नदियों में बहते हुए पानी को बांध की सहायता से इकट्ठा कर लिया जाता है। अब बांध के उच्च स्तर से जल को पइपों द्वारा उसकी तली के पास लगाए विद्युत् जनित्र पर गिराया जाता है। इस प्रक्रम में जल की स्थितिज ऊर्जा गिरते पानी की गतिज ऊर्जा में परिवर्तित होती है। यह गतिशील पानी टरबाइनों को घुमाता है जिसके परिणामस्वरूप विद्युत् जनित्र में लगी आरमेचर घूमती है जिससे विद्युत् ऊर्जा उत्पादित होती है।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ऊर्जा के स्रोत 11

लाभ-

  • वायुमंडल में किसी प्रकार का प्रदूषण नहीं फैलता क्योंकि इसमें किसी ईंधन को नहीं जलाया जाता।
  • पनविद्युत् की प्राप्ति के साथ-साथ नहरों से सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी को प्राप्ति हो जाती है।

हानियाँ-

  • वातावरण से संबंधित अनेक परिस्थितिक समस्याएं उत्पन्न होती हैं। जीव-जंतुओं और पेड़-पौधों का प्राकृतिक वातावरण नष्ट हो जाता है।
  • सामाजिक जीवन प्रभावित होता है। लोग अपनी धरती से अलग हो जाते हैं।

प्रश्न 7.
जीव द्रव्यमान क्या है ?
उत्तर-
जीव द्रव्यमान-पेड़-पौधों (या वनस्पतियों) तथा जंतुओं के शरीर में स्थित पदार्थों को जीव द्रव्यमान अथवा बायो-मास (Bio-mass) कहते हैं।

प्रश्न 8.
बायोगैस क्या है ? इसके कोई चार उपयोग लिखो।
उत्तर-
बायोगैस-जंतुओं तथा पौधों के अपशिष्ट का पानी की उपस्थिति तथा ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में सूक्ष्मजीवों द्वारा अपघटन होने पर मीथेन (CH4 ) कार्बन डाइआक्सॉइड (CO2), हाइड्रोजन (H2) तथा नाइट्रोजन (N2) गैसों का मिश्रण प्राप्त होता है जिसे बायोगैस कहते हैं। इसका मुख्य तत्त्व मीथेन है।
बायोगैस का संघटन मीथेन = 50% से 70%
कार्बन डाइऑक्साइड = 30% से 40%
हाइड्रोजन = 5% से 10%
नाइट्रोजन = 1% से 2%
तथा हाइड्रोजन सल्फाइड = कम मात्रा में।

बायोगैस के उपयोग (लाभ)-

  • यह भोजन पकाने के लिए ईंधन के रूप में प्रयोग किया जाता है।
  • यह इंजन को चलाने के लिए ईंधन के रूप में प्रयोग किया जाता है।
  • इसको सड़कों पर प्रकाश करने के लिए भी प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 9.
जब गैस प्लांट में गोबर का प्रयोग करने के कोई दो कारण बताइए ।
उत्तर-
जैव गैस प्लांट में गोबर के प्रयोग के कारण-

  1. गोबर को सीधे ही उपलों के रूप में जलाने से उसमें उपस्थित नाइट्रोजन तथा फॉस्फोरस जैसे पोषक तत्त्व नष्ट हो जाते हैं। जैव गैस प्लांट में गोबर का प्रयोग करने से साफ़-सुथरा ईंधन प्राप्त होने के पश्चात् अपशिष्ट स्लरी को खेतों में खाद के रूप में प्रयोग किया जा सकता है।
  2. गोबर को उपलों के रूप में जलाने से अत्यधिक धुआं उत्पन्न होता है जिससे वायु प्रदूषित होती है। दूसरी ओर जैव गैस बनती है जिससे वायु प्रदूषित नहीं होती।

प्रश्न 10.
कारण बताइएबायोगैस संयंत्र किसानों के लिए वरदान क्यों समझे जाते हैं ? ..
उत्तर-
आधुनिक युग में बायोगैस संयंत्र किसानों के लिए वास्तव में एक वरदान है। इस संयंत्र द्वारा जंतुओं तथा वनस्पति के अपशिष्ट पदार्थों का सरलता से ऑक्सी-सूक्ष्म जीवों द्वारा पानी की उपस्थिति में निम्नीकरण किया जाता है। इस प्रक्रिया में बायोगैस (मीथेन, CO2, H2, H2S का मिश्रण) उत्पन्न होती है जो एक अत्यंत लाभदायक धुआं रहित ईंधन है। इस ईंधन का प्रयोग घरों में गैस स्टोव में ऊष्मा उत्पन्न करने के लिए किया जाता है। इसके अतिरिक्त शेष जो घोल बच जाता है उसमें नाइट्रोजन तथा फॉस्फोरस की मात्रा अत्यधिक होती है जिसे एक अच्छी अजैविक खाद के रूप में उपयोग किया जाता है।

इस सारी प्रक्रिया में वातावरण भी प्रदूषित नहीं होता। बायोगैस का उपयोग करके किसान खेतों की सिंचाई करने के लिए पंप सैट के इंजन चलाते हैं। बायोगैस का उपयोग डीज़ल की अपेक्षा सस्ता होता है। इन उपयोगों के आधार पर कहा जाता है कि बायोगैस संयंत्र किसानों के लिए वरदान है।

प्रश्न 11.
सामूहिक बायोगैस संयंत्र से क्या तात्पर्य है ? इन्हें लगाने के मुख्य कारण क्या हैं ?
उत्तर–
सामूहिक बायोगैस संयंत्र- बहुत से परिवारों द्वारा मिल कर लगाया गया बायोगैस संयंत्र सामूहिक बायोगैस संयंत्र कहलाता है। इस प्रकार के संयंत्र निम्नलिखित कारणों से लगाए जा रहे हैं-

  • अनेक परिवारों में संयंत्र को क्रियाशील रखने के लिए बड़ी मात्रा में जंतु नहीं होते।
  • कुछ परिवार आरंभ में होने वाला खर्च उठाने में असमर्थ होते हैं।
  • अनेक संयंत्र लगाने की जगह सांझा एक ही संयंत्र लगाना सस्ता पड़ता है।

प्रश्न 12.
जैव गैस प्लांट में गोबर का प्रयोग करने के कोई दो कारण बताइए ।
उत्तर-

  • गोबर को सीधे ही उपलों के रूप में जलाने से उसमें उपस्थित नाइट्रोजन तथा फॉस्फोरस जैसे पोषक तत्त्व नष्ट हो जाते हैं। जैव गैस प्लांट में गोबर का प्रयोग करने से साफ़-सुथरा ईंधन प्राप्त करने के पश्चात् अवशिष्ट स्लरी को खेतों में खाद के रूप में प्रयोग किया जा सकता है।
  • गोबर को उपलों के रूप में जलाने से अत्यधिक धुआं उत्पन्न होता है जिसमें वायु प्रदूषित होती है। दूसरी ओर जैव गैस बनती है जिससे वायु प्रदूषित नहीं होती।

प्रश्न 13.
खाना पकाने के लिए उपलों का प्रयोग करने के स्थान पर गोबर को बायोगैस संयंत्र में प्रयोग करना क्यों अच्छा है ? इसके तीन कारण बताइए।
उत्तर-
जब गोबर जलता है तो यह काफ़ी धुआं उत्पन्न करता है जिससे वायु प्रदूषण होता है। गोबर का बायोगैस संयंत्र में प्रयोग निम्नलिखित बातों के कारण अच्छा समझा जाता है-

  1. बायोगैस बिना धुएं के जलती है।
  2. बायोगैस काफ़ी मात्रा में ऊष्मा पैदा करती है।
  3. संयंत्र में बचा हुआ व्यर्थ पदार्थ नाइट्रोजन तथा फॉस्फोरस के यौगिकों से भरा हुआ होता है और इसे खाद के रूप में प्रयोग किया जा सकता है।

प्रश्न 14.
सूर्य की ऊर्जा का स्रोत क्या है ?
उत्तर-
सूर्य से ऊर्जा का विमोचन नाभिकीय संलयन अभिक्रिया द्वारा होता है। सूर्य के क्रोड में हाइड्रोजन के नाभिक अत्यधिक तीव्र गति से गतिशील रहते हैं। जब ये नाभिक परस्पर संलयित होकर अधिक द्रव्यमान वाले तत्त्व के नाभिक बनाते हैं तब अत्यधिक ऊर्जा उत्पन्न होती है। यह ऊर्जा हमें उस समय प्राप्त होती है जब पृथ्वी सूर्य के सामने होती है। सूर्य में उपस्थित हाइड्रोजन के भारी आइसोटोप ड्यूटीरियम के नाभिक सूर्य के अंदर परस्पर मिल कर हीलियम उत्पन्न करते हैं तथा इसके साथ-साथ ऊर्जा भी उत्पन्न होती है। हाइड्रोजन के संलयन हेतु नाभिकों को उच्च वेग से टकराना आवश्यक होता है। यह तभी संभव होता है जब ताप लगभग 4000,000°C हो।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ऊर्जा के स्रोत

प्रश्न 15.
यद्यपि सूर्य ऊर्जा का विशाल स्रोत है फिर भी सौर ऊर्जा केवल सीमित रूप से उपयोग में क्यों लाई जा रही है ?
उत्तर-
सूर्य हमारी पृथ्वी पर ऊर्जा का सबसे विशाल स्रोत है। यह ऊर्जा हम तक बहुत ही विसरित रूप में पहुंचती है। पृथ्वी के वायुमंडल के ऊपरी भाग के प्रत्येक वर्ग मीटर द्वारा 1.36 kJ ऊर्जा प्रति सैकिंड प्राप्त की जाती है। इसका 47% भाग पृथ्वी तल के प्रत्येक वर्गमीटर तक एक सेकिंड में पहुंचता है। ऊर्जा की यह अल्प मात्रा भी समान रूप से उपलब्ध नहीं है। इसी कारण सौर ऊर्जा का केवल सीमित उपयोग किया जा सकता है।

प्रश्न 16.
सौर ऊर्जा का दैनिक कार्यों में प्रमुख पारंपरिक उपयोग बताओ।
उत्तर-
सौर ऊर्जा पारंपरिक रूप में निम्नलिखित दैनिक कार्यों के लिए. उपयोग की जा रही है-

  • कपड़े सुखाने में।
  • समुद्री जल से नमक बनाने में।
  • फसल काटने के बाद अनाज में से नमी की मात्रा कम करने में।
  • सब्जियाँ, फल और मछली सुखाने में।

प्रश्न 17.
सौर ऊर्जा का प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रूप से किस प्रकार दोहन किया जाता है ? बताओ।
अथवा
सौर ऊर्जा के चार उपयोग बताओ।
उत्तर-
सौर ऊर्जा को ऊष्मा के रूप में इकट्ठा करके या विद्युत् में परिवर्तित करके इसका दोहन किया जा सकता है। पौधों में सौर ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदल कर तथा सागरीय लहरों की ऊर्जा का दोहन करके सौर ऊर्जा को अप्रत्यक्ष रूप में उपयोग में लाया जा सकता है।

प्रश्न 18.
सौर ऊष्मक युक्तियों में कांच की पट्टी का क्या महत्त्व है ?
उत्तर-
सौर ऊष्मक युक्तियों में कांच की पट्टी का महत्त्व-ऊष्मारोधी बाक्स में काली पट्टी की ऊपरी सतह को किसी कांच की पट्टी से ढक दिया जाता है। कांच की पट्टी का यह विशेष गुण है कि यह सौर प्रकाश में विद्यमान अवरक्त विकिरणों को अपने भीतर से गुज़रने देती है। कांच की पट्टी को पार करने के बाद उस की तैरंगदैर्ध्य अधिक हो तथा जिनका उत्सर्जन उन वस्तुओं से हो रहा हो जो तुलनात्मक रूप से निम्न ताप पर हैं।

प्रश्न 19.
सौर तापन युक्तियों की कोई दो परिसीमाएं लिखो।
उत्तर-
सौर तापन युक्तियों की परिसीमाएं-

  1. इन्हें सूर्य ऊर्जा से बहुत अल्प मात्रा में तथा विसरित रूप में प्राप्त किया जाता है। इस प्रकार उच्च ताप प्राप्त करने में इन युक्तियों की क्षमता नहीं होती है। इसके अतिरिक्त एक ही स्थान पर सौर ऊर्जा समान रूप से प्राप्त नहीं होती बल्कि प्रतिदिन बदलती रहती है। ये युक्तियां वर्षा वाले दिन काम करने में असमर्थ होती हैं।
  2. सभी सौर तापन युक्तियों को सूर्य की दिशा में लगातार बदलना पड़ता है ताकि उन पर सौर किरणेंलंबरूप सीधी पड़े।

प्रश्न 20.
हमारी ऊर्जा की सभी आवश्यकताओं की आपूर्ति सौर-सेलों के उपयोग से क्यों नहीं हो सकती ? दो कारण लिखिए।
उत्तर-
यद्यपि सौर सेल किसी प्रकार का प्रदूषण नहीं फैलाते और इसका प्रयोग भी बहुत सुविधाजनक है पर फिर भी इनका प्रयोग हम अपनी सभी ऊर्जा संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए नहीं कर सकते। इसके प्रमुख कारण हैं-

  • सौर सेलों की कार्य-क्षमता केवल 20% होती है।
  • सौर सेल रात और आकाश में बादलों के समय काम नहीं करते।
  • सौर सेलों का निर्माण बहुत महंगा है।

प्रश्न 21.
उन चार क्षेत्रों के नाम लिखिए जहाँ सौर सेलों को ऊर्जा-स्रोत के रूप में उपयोग किया जाता है।
उत्तर-
सौर सेलों का उपयोग-

  1. कृत्रिम भू-उपग्रहों और अंतरिक्ष अन्वेषकों में।
  2. इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में।
  3. सड़कों पर प्रकाश व्यवस्था और दूर-स्थित क्षेत्रों में टेलीविज़न कार्यक्रमों को प्रदर्शित करने में।
  4. समुद्रों में स्थित प्रकाश स्तंभों (light houses) तथा पेट्रोलियम प्राप्त करने वाले स्थलों पर।

प्रश्न 22.
यह समझाइये कि पिछले कुछ दशकों में सौर सेलों का महत्त्व क्यों बढ़ गया है ?
उत्तर-
सौर सेल में उपयोग किए जाने वाले तत्व अधिक मात्रा में कम दाब में उपलब्ध हैं तथा इनकी अधिक क्षमता है। सौर सेल के उपयोग से प्रदूषण नहीं होता। कृत्रिम उपग्रहों, सौर पैनलों, वैज्ञानिक उपकरणों, दूरसंचार साधनों आदि में इनका प्रयोग सरलता से किया जा सकता है। इन कारणों के फलस्वरूप सौर सेलों का महत्त्व पिछले कुछ दर्शकों में बढ़ गया है।

प्रश्न 23.
पवन ऊर्जा-फॉर्म केवल कुछ विशेष क्षेत्रों में ही क्यों स्थापित किए जा सकते हैं ? कारण लिखिए।
उत्तर-
पवन ऊर्जा की प्राप्ति सभी जगह पर नहीं हो सकती। यह केवल उन्हीं स्थानों पर संभव हो सकती है। जहाँ इसके लिए अनुकूल परिस्थितियाँ हों। पवन ऊर्जा-फॉर्मों के लिए निम्नलिखित आवश्यकताओं की पूर्ति होनी चाहिए-

  • पवन की गति 15 किमी/घंटा या इससे अधिक होनी चाहिए।
  • सारा वर्ष पवन को इसी गति से प्रतिदिन 12 घंटे या इससे अधिक समय के लिए बहना चाहिए। यदि वे शर्ते पूर्ण हो जाती हों तो पवन ऊर्जा फ़ार्मो की स्थापना की जा सकती है।

प्रश्न 24.
अर्ध-चालक क्या होते हैं ?
उत्तर-
अर्ध-चालक- अर्धचालक वे पदार्थ हैं जिनकी विद्युत् चालकता से कम परंतु रोधकों की अपेक्षा अधिक होती है। आमतौर पर प्रयोग किये जाने वाले अर्ध-चालक पदार्थ जर्मेनियम और सिलिकॉन हैं।

प्रश्न 25.
पवन किसे कहते हैं ? पवन किस प्रकार चलती है ?
उत्तर-
पवन-गतिशील वायु को पवन कहते हैं । पवन का चलना-धुव्रीय क्षेत्रों की तुलना में भू-मध्य रेखीय क्षेत्रों में सौर प्रकाश की तीव्रता अधिक होती है। परिणामस्वरूप भू-मध्य रेखीय क्षेत्रों में पृथ्वी की सतह के निकट की वायु शीघ्र ही गर्म हो जाती है और ऊपर की ओर उठने लगती है। इस खाली स्थान को भरने के लिए ध्रुवीय क्षेत्रों की अपेक्षाकृत ठंडी वायु भू-मध्य रेखीय क्षेत्रों की ओर प्रवाह करने लगती है और निरंतर हवा चलने लगती है। वायु के इस प्रवाह में पृथ्वी के घूर्णन तथा स्थानीय परिस्थितियों के कारण लगातार बाधा पड़ती रहती है।

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प्रश्न 26.
ऐसे तीन कारक बताइये जो पवन को गतिशील करने के लिए उत्तरदायी हैं ।
उत्तर-
पवन को गतिशील करने के लिए निम्नलिखित तीन कारक उत्तरदायी हैं

  • सूर्य की स्थिति
  • वायु के तापमान का अंतर
  • वायु के दाब का अंतर।

प्रश्न 27.
किसी बाँध द्वारा उत्पन्न की गई जल-विद्युत् को सौर ऊर्जा का ही अन्य रूप माना जा सकता है। समझाइए।
उत्तर-
बहुत हुए जल से उत्पन्न विद्युत् को जल-विद्युत् कहते हैं। सौर ऊर्जा की ऊष्मा को समुद्र, वृक्षों के पत्तों तथा पृथ्वी की सतह पर उपस्थित जल स्रोतों में से जल का वाष्पीकरण करने के लिए प्रयोग किया जाता है। इस प्रकार उत्पादित जल वाष्प वायुमंडल में ऊपर उठते हैं। यह जल वाष्प ठंडे होकर वापिस वर्षा के रूप में नीचे गिरते हैं।

वर्षा का पानी तथा बर्फ के पिघलने तथा बर्फ से बना जल, जल-बांध में इकट्ठा कर लिया जाता है। इस प्रकार सौर ऊर्जा जल की स्थितिज ऊर्जा में बदल जाती है। इस पानी को तीव्र गति से प्रवाहित किया जाता है और इस प्रकार स्थितिज ऊर्जा गतिज ऊर्जा में बदल जाती है। जब यह तीव्र गति में बह रहा जल टरबाइन के ब्लेडों से टकराता है तो इसकी गतिज ऊर्जा टरबाइन की स्थानांतरित हो जाती है जिससे विद्युत् उत्पन्न होती है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि जल विद्युत् सौर ऊर्जा का अन्य रूप है।

प्रश्न 28.
जल ऊर्जा का एक महत्त्वपूर्ण प्रतिबंध (limitation) बताइए। इसका एक लाभ भी लिखें।
उत्तर-
जल ऊर्जा का एक महत्त्वपूर्ण प्रतिबंध यह है कि पन-चक्की को चलाने के लिए बहता हुआ जल प्रत्येक स्थान पर अधिक मात्रा में उपलब्ध नहीं होता। इसलिए कार्य को करने के लिए जल ऊर्जा का उपयोग केवल उन्हीं स्थानों पर हो सकता है जहां बहता हुआ जल अधिक मात्रा में उपलब्ध हो। जल ऊर्जा का एक महत्त्वपूर्ण लाभ यह है कि इसके उपयोग से पर्यावरण का प्रदूषण नहीं होता।

प्रश्न 29.
समुद्र तापीय ऊर्जा क्या है ?
उत्तर-
समुद्र तापीय ऊर्जा (Ocean Thermal Energy या OTE)-सागर ऊर्जा के बड़े भंडार हैं। यदि ऊर्जा के इस स्रोत को प्रयोग में लाया जा सके तो हमें बहुत अधिक मात्रा में ऊर्जा उपलब्ध हो जाएगी। महासागरों की ‘सतह के जल’ तथा ‘1000m गहराई के जल’ के ताप में सदैव कुछ अंतर होता है। सागर में कई स्थानों पर तो ताप में यह अंतर 20°C तक भी होता है। महासागर की सतह के जल तथा गहराई के जल के ताप में अंतर के कारण उपलब्ध ऊर्जा को ‘सागरीय तापीय ऊर्जा’ कहते हैं।

प्रश्न 30.
सौर ऊर्जा महासागरों में किन दो रूपों में प्रकट होती है ? उनके नाम लिखिए ।
उत्तर-

  1. सौर ऊर्जा के प्रभाव से पवनें चलती हैं। समुद्र तल पर बहने वाली पवनें जल तरंगों को उत्पन्न करती हैं और उन्हें तटों की ओर निरंतर बहने के लिए गति प्रदान करती हैं जिससे जल को गतिज ऊर्जा उपयोगी कार्यों के करने में सहायक बनती है।
  2. सूर्य की गर्मी से समुद्रों का पानी गर्म होता है। उसकी लहरों का तापमान बदलता है जिस कारण सागर ऊष्मीय ऊर्जा (OTE) प्राप्त की जाती है।

प्रश्न 31.
“महासागर ऊर्जा के विशाल भंडार हैं ।”-इस कथन को स्पष्ट करो ।
उत्तर-
महासागर ऊर्जा के विशाल भंडार- महासागर वास्तव में ही ऊर्जा के विशाल भंडार हैं जिनके द्वारा अपार मात्रा में ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है। ऊर्जा उत्पत्ति के आधार निम्नलिखित हैं-

  • सागरों की लहरें गतिज ऊर्जा के कारण विद्युत् उत्पन्न करती हैं।
  • सागरों की विभिन्न सतहों के ताप के अंतर से विद्युत् ऊर्जा की उत्पत्ति की जा सकती है।
  • चंद्रमा और सूर्य के आकर्षण के कारण उत्पन्न ज्वार-भाटा से टरबाइन घुमाकर विद्युत् उत्पन्न की जा सकती है जो सागर तटों पर रहने वालों के लिए वरदान बन सकती है।
  • सागरों के विभिन्न स्थानों पर लवणों की सांद्रता अलग-अलग होने के कारण उनसे ऊर्जा उत्पन्न की जा सकती है।
  • समुद्री जीवन को ईंधन के रूप में प्रयुक्त करके पर्याप्त मात्रा में ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है।

प्रश्न 32.
भू-तापीय ऊर्जा क्या है ? इसके मुख्य उपयोग क्या हैं ?
उत्तर-
भू-तापीय ऊर्जा-पृथ्वी की सतह के निचले गर्म चट्टानों वाले स्रोत को भू-तापीय ऊर्जा कहा जाता है। भ-तापीय ऊर्जा का अस्तित्व पथ्वी के मध्य भाग के बहत अधिक गर्म होने के कारण है। यह प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर सूर्य पर निर्भर नहीं। धरती के नीचे स्थित पिघली हुई चट्टानें, जिनको मैग्मा कहा जाता है, भू-तापीय ऊर्जा के स्रोत हैं। जब मैग्मा पृथ्वी की सतह के कुछ निकट आता है तो स्थान गर्म बन जाता है। इसके संपर्क में आने वाला जल गर्म हो जाता है और भाप में बदल जाता है।

यह भाप चट्टानों के बीच में फंस जाती है और बहुत उंचे दबाव पर होती है। जब पृथ्वी के अंदर इन गर्म स्थानों तक पाइप डाले जाते हैं तो भाप बहुत अधिक दबाव से बाहर निकलती है। इस भाप को टरबाइनों को चलाने के लिए प्रयोग में लाया जाता है। टरबाइनों के चलने से विद्युत् उत्पन्न होती है।

  • सारा साल प्रतिदिन 24 घंटे तक विद्युत् चल सकती है।
  • क्योंकि इनमें कोई ईंधन नहीं जलाया जाता, अतः प्रदूषण नहीं होता है।
  • विद्युत् उत्पन्न करने में खर्च भी कम आता है।

प्रश्न 33.
विखंडन तथा संलयन में उत्पन्न होने वाली ऊर्जाओं की तुलना कीजिए।
उत्तर-
विखंडन और संलयन के दौरान उत्पन्न ऊर्जा में बहुत बड़ा अंतर है। जब एक ग्राम यूरेनियम को विखंडित किया जाता है तो लगभग 6.2 x 1010 J ऊर्जा उत्पन्न होती है। लेकिन जब 1 ग्राम ड्यूटीरियम को संलयित किया जाता है तो 2.3 x 1012 J ऊर्जा उत्पन्न होती है। परमाणु विखंडन को संलयन की अपेक्षा अधिक हानिकारक माना जाता है क्योंकि विखंडन प्रक्रिया से वातावरण में रेडियो सक्रियता बढ़ जाती है जिसके परिणामस्वरूप गुणसूत्रों और जीन में परिवर्तन आ जाता है। ल्यूकीरिया (blood cancer) हो जाता है तथा जैविक आधार पर अनेक दोष उत्पन्न हो जाते हैं।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ऊर्जा के स्रोत

प्रश्न 34.
ऊर्जा के नवीकरणीय और अनवीकरणीय स्रोतों के बीच अंतर स्पष्ट करो ।
अथवा
ऊर्जा के नवीकरणीय और अनवीकरणीय साधनों के बीच अंतर बताओ।
उत्तर-
हमारे घरों में मुख्य रूप से प्रयुक्त की जाने वाली ऊर्जा दो प्रकार की है-
अनवीकरणीय (Non-renewable)-ऊर्जा के वे स्रोत जिनकी खपत हो जाने के पश्चात् उन्हें दोबारा उत्पादित नहीं किया जा सकता, ऊर्जा के अनवीकरणीय स्रोत कहलाते हैं। खाना पकाने के लिए हम कोयला, मिट्टी का तेल, L.P.G. आदि का प्रयोग करते हैं । सर्दियों में लकड़ी का कोयला भी गर्मी प्राप्त करने के लिए जलाते हैं। एक बार प्रयुक्त हो जाने के पश्चात् पुनः इन की प्राप्ति नहीं हो सकती। पेड़-पौधों की लकड़ी को भी इसी के अंतर्गत लिया जाता है। यह स्रोत प्रदूषण फैलाते हैं। इसकी उपलब्धता सीमित है।

नवीकरणीय (Renewable)-ऊर्जा के वे स्रोत जिनका कुछ समय के पश्चात् पुनउत्पादन किया जा सकता है, नवीकरणीय स्रोत कहलाते हैं। ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोत बहुत-से हैं। सूर्य, वायु, जल आदि कुछ नवीकरणीय स्रोत हैं। इनका प्रयोग करने से ये पुनउत्पादित हो जाते हैं। इन स्रोतों के उपयोग से प्रदूषण भी नहीं होता है। ये असीमित और साफ़ ऊर्जा के स्रोत हैं।

प्रश्न 35.
क्या ऊर्जा के सारे नवीकरणीय स्रोत प्रदूषण उत्पन्न नहीं करते ? व्याख्या करो।
उत्तर-
ऊर्जा के अधिकांश नवीकरणीय स्रोत लगभग प्रदूषण रहित हैं, केवल जैव मात्रा (जैव अपशिष्ट पदार्थ) ऐसा नहीं है। ऊर्जा के अधिकांश नवीकरणीय स्रोत बहुत-से हैं। सूर्य, वायु, जल, कृषि के अपशिष्ट, लकड़ी और पशुओं का गोबर आदि। सूर्य ऊर्जा का स्रोत है। जल से ऊर्जा प्राप्त की जाती है। जैव मात्रा जलाने वाली लकड़ी, पशुओं का गोबर, शहरों में उपलब्ध विघटनकारी अपशिष्ट पदार्थ, फसलों के अपशिष्ट पदार्थ आदि को जलाने पर यह ऊर्जा का कार्य करता है और उत्सर्जित हुआ धुआँ वायु का प्रदूषण करता है।

प्रश्न 36.
पवन चक्की क्या होती है ? इसके लाभ लिखो।
उत्तर-
पवन चक्की- यह एक ऐसी युक्ति है जिसमें पवन की गतिज ऊर्जा को घूर्णन गति द्वारा यांत्रिक ऊर्जा और फिर विद्युत् ऊर्जा में बदला जाता है। पवन चक्की की रचना-पवन चक्की की रचना को चित्र में प्रदर्शित किया गया है। इसमें ऐलुमिनियम के पतले-चपटे आयताकार खंडों के रूप में, बहुत-सी पंखुड़ियाँ लोहे के पहिये पर लगी रहती हैं। यह पहिया एक ऊर्ध्वाधर स्तंभ के ऊपरी सिरे पर लगा रहता है तथा अपने केंद्र से घूमने वाली शाफ्ट यांत्रिक बंधन गुजरने वाली लौह शाफ्ट (अक्ष) के परितः घूम सकता है। पहिये का तल स्वतः वायु की गति की ब्लेड दिशा के लंबवत् समायोजित हो जाता है, जिससे वायु सदैव पंखुड़ियों पर सामने से टकराती है। पहिये की अक्ष एक लोहे की फ्रैंक से जुड़ी रहती है। बैंक का दूसरा सिरा उस मशीन अथवा डायनमों से जुड़ा रहता है, जिसे पवन ऊर्जा द्वारा गति प्रदान करनी होती है।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ऊर्जा के स्रोत 5

कार्यविधि-जब तीव्र गतिशील पवन, पवन-चक्की के ब्लेडों से टकराती है तो वह उन पर एक बल लगाती है, जिसके कारण पवन चक्की के ब्लेड घूमते लगने हैं। पवन चक्की के घूर्णन (rotation) का प्रभाव उसके ब्लेडों की विशेष बनावट के कारण होता है तो बिजली के पंखे के ब्लेडों के समान होती है। पवन चक्की को एक ऐसा बिजली का पंखा समझा जा सकता है जो विपरीत दिशा में कार्य कर रहा हो क्योंकि जब पंखे के ब्लेड घूमते हैं तो पवन बहती है परंतु जब पवन बहती है तो पवन चक्की के ब्लेड घूमते हैं। घूमते हुए ब्लेडों की घूर्णन गति के कारण पवन चक्की से गेहूं पीसने की चक्की को चलाना, जल-पंप चलाना, मिट्टी के बर्तन के चाक को घुमाना आदि कार्य किए जा सकते हैं। पवन चक्की ऐसे स्थानों पर लगाई जाती है, जहाँ वायु लगभग पूरे वर्ष तीव्र गति से चलती रहती है।

चित्र में पवन चक्की द्वारा पानी खींचने की क्रिया का प्रदर्शन किया गया है। पवन चक्की की फ्रैंक एक जल-पंप की पिस्टन छड़ से जोड़ दी जाती है। जब वायु, पवन चक्की के ब्लेड से टकराती है तो चक्की का पहिया घूमने लगता है, और पहिये से जुड़ी अक्ष घूमने लगती है। शाफट की घूर्णन गति के कारण फ्रैंक ऊपर-नीचे होने लगती है और जल-पंप की पिस्टन छड़ भी ऊपर-नीचे गति करने लगती है तथा जल-पंप से जल बाहर निकलने लगता है।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ऊर्जा के स्रोत 6
पवन ऊर्जा के उपयोग

  • पाल-चालित नौकाओं को चलाने के लिए।
  • पवन चक्कियों से आटा-चक्कियाँ और जल पंप आदि को चलाने के लिए।
  • वायुयानों द्वारा उड़ान भरने के लिए।
  • विद्युत् उत्पन्न करने के लिए।

पवन ऊर्जा की हानियाँ (सीमाएँ) –
यद्यपि पवन ऊर्जा के अनेक लाभ हैं, परंतु इसमें कई बाधाएं भी हैं जैसे मान लो जब हमें ऊर्जा की आवश्यकता हो और उस समय पवन प्रवाह न हो रहा हो। इसके अतिरिक्त यह भी हो सकता है कि उस समय पवन-प्रवाह तीव्र न हो और यह चक्की को न चला सके। पवन-चक्की को स्थापित करने के लिए खुला क्षेत्र भी चाहिए। एक अन्य कमी यह भी है कि इसे स्थापित करने के लिए निर्माण के लिए लागत अत्याधिक आती है।

प्रश्न 37.
सौर सैल पैनल कैसे तैयार किया जाता है ? चित्र सहित वर्णन करें।
उत्तर-
सौर सैल पैनल का निर्माण-सौर सेल पैनल अनेक सौर सैलों के सामूहिक रूप से निर्मित किया जाता है। यहाँ अनेक सौर सैलों को विशेष क्रम में व्यवस्थित करके सौर सैल पैनल बनाये जाते हैं, जिससे उसकी कार्य क्षमता बढ़ जाती है।

सौर सेल पैनल- यह अर्ध-चालकों की सहायता से बनाई गई ऐसी युक्ति है जो सौर ऊर्जा को विद्युत् ऊर्जा में परिवर्तित करके उपयोगी कार्य करती है। सूर्य की किरणें बनावटसौर सेल पैनल अनेक सौर सेलों के सामूहिक रूप से कार्य करने की योग्यता पर आधारित होते हैं। अनेक सौर सेलों के विशेष क्रम में सौर सेल व्यवस्थित करके सौर सेल पैनल बनाये जाते हैं। इसे ऐसे स्थान पर लगाया जाता है जहां पर्याप्त मात्रा में धूप आती हो। पैनल की दिशा को बदलने की सौर पैनल से डी० सी० आऊटपुट लाने वाली तारें व्यवस्था भी की जाती है।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ऊर्जा के स्रोत 8

कार्यविधि-सिलिकॉन तथा गैलियम जैसे अर्ध-चालकों की सहायता से बनाये गए सौर सेलों के पैनल पर जब सौर ऊर्जा पड़ती है तो अर्ध-चालक के दो भागों में विभवांतर स्टोरेज बैटरी उत्पन्न हो जाता है। चार वर्ग सेमी० के एक सौर सेल के द्वारा 60 मि० ली० ऐंपियर धारा लगभग 0.4 – 0.5 वोल्ट पर उत्पन्न होती है। सौर सेलों की कम या अधिक संख्या के आधार पर कम या अधिक विदयुत् ऊर्जा प्राप्त की जाती है।

उपयोग-

  • सड़कों पर प्रकाश की व्यवस्था की जाती है।
  • कृत्रिम उपग्रहों तथा अंतरिक्ष अन्वेषक यानों में विद्युत् का प्रबंध किया जाता है।

अति लघु उत्तरात्मक प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
ऊर्जा का अंतत: मुख्य स्रोत कौन-सा है ?
उत्तर-
सूर्य।

प्रश्न 2.
ऊर्जा के स्रोतों को कितने भागों में बांटा जा सकता है ?
उत्तर-
ऊर्जा के स्रोतों को दो भागों में बांटा जा सकता है-

  1. नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत
  2. अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोत।

प्रश्न 3.
बायोगैस के अवयव कौन-कौन से हैं ?
उत्तर-
CH4, CO2, H2, तथा H2S । इनमें से मीथेन 65% होती है।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ऊर्जा के स्रोत

प्रश्न 4.
किन्हीं दो जीवाश्म ईंधनों के नाम लिखिए।
उत्तर-

  1. कोयला,
  2. पेट्रोलियम।

प्रश्न 5.
एक कारण बताओ जिसके आधार पर हम यह कह सकते हैं कि बायोगैस एक अच्छा ईंधन है।
उत्तर-
इसका अधिक भाग मीथेन है जो स्वयं उत्तम ईंधन है।

प्रश्न 6.
बायोगैस संयंत्र किसानों के लिए वरदान क्यों माना जाता है ?
उत्तर-
इसमें गैसीय ईंधन के अतिरिक्त स्लरी के रूप में खाद मिलती है।

प्रश्न 7.
L.P.G. के अवयव लिखिए।
उत्तर-
इथेन, प्रोपेन तथा ब्यूटेन। L.P.G. का मुख्य अवयव ब्यूटेन है, जिसे उच्च दाब पर तरल रूप में बदला जा सकता है।

प्रश्न 8.
अनवीकरणीय ईंधन कौन-कौन से हैं ?
उत्तर-

  • कोयला,
  • पेट्रोलियम तथा
  • प्राकृतिक गैस।

प्रश्न 9.
कोल गैस क्या है ?
उत्तर-
कोल गैस –यह हाइड्रोजन, मीथेन तथा कार्बन मोनोऑक्साइड का मिश्रण है।

प्रश्न 10.
जीव द्रव्यमान (biomass) क्या होता है ?
उत्तर–
जीव द्रव्यमान-पौधों तथा जंतुओं के शरीर में उपस्थित पदार्थों को जीव द्रव्यमान कहते हैं।

प्रश्न 11.
पवन ऊर्जा की परिभाषा लिखो।
उत्तर-
पवन ऊर्जा (Wind Energy)-वायु के विशाल द्रव्यमान की गतिशीलता से संबंधित गतिज ऊर्जा को पवन ऊर्जा कहते हैं।

प्रश्न 12.
ईंधन के रूप में गोबर की उपलों की कोई दो हानियां लिखो।
उत्तर-

  1. इनका दहन अपूर्ण होता है, जिससे धुआं उत्पन्न होता है।
  2. गोबर में उपस्थित लाभप्रद तत्व नष्ट हो जाते हैं।

प्रश्न 13.
बायोगैस का मुख्य स्त्रोत क्या हैं ?
उत्तर–
बायोगैस का मुख्य स्रोत गोबर है।

प्रश्न 14.
ईंधन के अतिरिक्त बायोगैस का एक उपयोग लिखिए ।
उत्तर-
बायोगैस का प्रयोग सड़कों का प्रकाश करने में होता है।

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प्रश्न 15.
बायोगैस संयंत्र की कौन-सी विभिन्न किस्में हैं ?
उत्तर-

  • स्थायी गुंबद संयंत्र
  • तैरती गैस टंकी संयंत्र।

प्रश्न 16.
सौर पैनल क्या है ?
उत्तर-
सौर पैनल- यह अर्ध-चालकों से बनाई गई ऐसी युक्ति है जो सौर ऊर्जा को विद्युत् ऊर्जा में परिवर्तित करके उपयोगी कार्य करता है।

प्रश्न 17.
किन्हीं चार अर्ध-चालकों के नाम बनाओ जिनसे सौर सैल बनाये जाते हैं।
अथवा
ऐसे दो पदार्थों के नाम बनाओ जिनका उपयोग सौर सैल के निर्माण में किया जाता है ?
उत्तर-
सिलिकॉन, गैलियम, सेलेनियम, जर्मेनियम।।

प्रश्न 18.
अर्ध-चालकों से निर्मित सौर सेलों की दक्षता कितनी है ?
उत्तर-
10%-18%.

प्रश्न 19.
सागरीय तापीय ऊर्जा को किस उपयोगी रूप में बदला जा सकता है ?
उत्तर-
विद्युत् में।

प्रश्न 20.
अर्ध-चालकों की चालकता को किस प्रकार बढ़ाया जा सकता है ?
उत्तर-
अर्ध-चालकों की चालकता को विशेष अपद्रव्य (Impurity) मिलाकर बढ़ाया जा सकता है।

प्रश्न 21.
पारंपरिक रूप से सौर ऊर्जा के दो उपयोग लिखिए।
उत्तर-

  • कपड़े सुखाने से,
  • समुद्र के पानी से नमक बनाने में।

प्रश्न 22.
सौर पैनेलों के दो लाभ लिखिए।
उत्तर-

  1. सड़कों पर प्रकाश करने,
  2. जल-पंप चलाने में।

प्रश्न 23.
कृत्रिम उपग्रहों में विद्युत् ऊर्जा किस साधन से प्राप्त की जाती है ?
उत्तर-
सौर पैनलों से।

प्रश्न 24.
जीवाश्म ईंधन किसे कहते हैं ?
उत्तर-
जीवाश्म ईंधन-जीव-जंतुओं के अवशेष धरती के नीचे दबे रहे और ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में अपघटित होकर ईंधन में परिवर्तित हो गए जिसे जीवाश्म ईंधन कहा जाता है। उदाहरण-कोयला, पेट्रोलियम ।

प्रश्न 25.
अनवीकरणीय ईंधनों के तीन उदाहरण दें।
उत्तर-

  1. कोयला
  2. मिट्टी का तेल
  3. L.P.G.

प्रश्न 26.
किन्हीं दो नवीनीकृत स्रोतों के नाम लिखो।
उत्तर-
नवीनीकृत स्रोतों के नाम (Names of Renewable Sources)-

  • जल
  • हवा।

प्रश्न 27.
बायोगैस किन पदार्थों से तैयार की जाती है ?
उत्तर-
बायोगैस-जंतुओं तथा पौधों के अपशिष्ट, जल की उपस्थिति तथा ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में सूक्ष्मजीवों द्वारा अपघटन होने पर बायोगैस तैयार होती है।

प्रश्न 28.
समुद्र तापीय ऊर्जा क्या है ?
उत्तर-
समुद्र तापीय ऊर्जा-समुद्र की सतह के जल तथा गहराई वाले जल के तापमान में अंतर के कारण प्राप्त हुई ऊर्जा को समुद्र तापीय ऊर्जा कहते हैं।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ऊर्जा के स्रोत

प्रश्न 29.
शारीरिक कार्यों को करने के लिए किस ऊर्जा को आवश्यकता होती है ?
उत्तर-
पेशीय ऊर्जा।

प्रश्न 30.
किस ईंधन के उपयोग ने औद्योगिक क्रांति को संभव बनाया ?
उत्तर-
कोयले के उपयोग ने ।

प्रश्न 31.
जीवाश्म ईंधन ऊर्जा के कैसे स्रोत हैं ?
उत्तर-
अनवीकरणीय स्रोत।

प्रश्न 32.
विद्युत् संयंत्रों में किस ईंधन को जलाकर प्रायः भाप बनाई जाती है ?
उत्तर-
जीवाश्म ईंधन (कोयला) को।

प्रश्न 33.
जिन संयंत्रों में ईंधन को जलाकर ऊष्मीय ऊर्जा उत्पन्न की जाती है, उन्हें क्या कहते हैं ?
उत्तर-
तापीय विद्युत् संयंत्र।

प्रश्न 34.
जल विद्युत् संयंत्रों में स्थितिज ऊर्जा का परिवर्तन किस प्रकार की ऊर्जा में होता है ?
उत्तर-
गतिज ऊर्जा से विद्युत् ऊर्जा।

प्रश्न 35.
पवन ऊर्जा फार्म किसे कहते हैं ?
उत्तर-
जब किसी विशाल क्षेत्र में अनेक पवन चक्कियाँ लगाई जाती हैं तो उस क्षेत्र को पवन ऊर्जा फार्म कहते हैं।

प्रश्न 36.
किस देश को पवनों का देश कहा जाता है ?
उत्तर-
डेनमार्क को।

प्रश्न 37.
पवन ऊर्जा के लिए पवनों की चाल कितनी होनी चाहिए ?
उत्तर-
15 Km/h से अधिक।

प्रश्न 38.
सौर कक्कर में कांच की शीट का ढक्कन क्यों लगाया जाता है ?
उत्तर-
ग्रीन हाऊस प्रभाव उत्पन्न करने के लिए।

प्रश्न 39.
सौर सेल सौर ऊर्जा को किस ऊर्जा में रूपांतरित करते हैं ?
उत्तर-
विद्युत् ऊर्जा में।

प्रश्न 40.
महासागरों में जल का स्तर किस कारण चढ़ता और गिरता है ?
उत्तर-
चंद्रमा के गुरुत्वीय आकर्षण के कारण।

प्रश्न 41.
नाभिकीय ऊर्जा किस कारण उत्पन्न होता है ?
उत्तर-
नाभिकीय विखंडन से।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ऊर्जा के स्रोत

प्रश्न 42.
भारी नाभिक तत्त्वों के तीन उदाहरण दीजिए ।
उत्तर-

  • यूरेनियम,
  • प्लूटोनियम,
  • थोरियम।

प्रश्न 43.
अल्बर्ट आइंस्टीन का नाभिकीय विखंडन संबंधी सूत्र लिखिए।
उत्तर-
E = Δ mc2 |

प्रश्न 44.
हमारे देश में नाभिकीय विद्युत् संयंत्र कहाँ-कहाँ स्थित हैं ?
उत्तर-
तारापुर (महाराष्ट्र) राणा प्रताप सागर (राजस्थान), कलपाक्कम (तमिलनाडु), नरौरा (उत्तर प्रदेश), कटरापर (गुजरात) और कैगा (कर्नाटक) ।

प्रश्न 45.
C.N.G. का पूरा नाम लिखिए।
उत्तर-
संपीड़ित प्राकृतिक गैस (Compressed Natural Gas).

प्रश्न 46.
ऊर्जा का अंततः मुख्य स्रोत कौन-सा है ?
उत्तर-
सूर्य।

प्रश्न 47.
सौर सैल किस ऊर्जा को किस ऊर्जा में परिवर्तित करता है ?
उत्तर-
सौर ऊर्जा को विद्युत् ऊर्जा में।।

प्रश्न 48.
विद्युत् उत्पादन करने के लिए किस ऊर्जा का उपयोग करने से पर्यावरण का प्रदूषण नहीं होता ?
उत्तर-
पवन ऊर्जा।

प्रश्न 49.
सौर सैल क्या होते हैं ?
उत्तर-
सौर सैल एक ऐसी युक्ति है जो सौर ऊर्जा को विद्युत् ऊर्जा में परिवर्तित करती है।

प्रश्न 50.
कृत्रिम उपग्रहों में विद्युत् ऊर्जा किस साधन से प्राप्त की जाती है ?
उत्तर-
सौर पैनलों से।

प्रश्न 51.
चित्र में दर्शाए गए यंत्र में किस किस्म का दर्पण अधिक सही होता है ?
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ऊर्जा के स्रोत 11
उत्तर-
समतल दर्पण।

प्रश्न 52.
नीचे दिए चित्र में दर्शाए गए यंत्र का नाम लिखो। इसमें क्या तैयार किया जा रहा है?
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ऊर्जा के स्रोत 12
उत्तर-
यंत्र का नाम-स्थिर गुम्बदाकार बायो गैस संयंत्र है। इस यंत्र में बायो गैस (जैव गैस) तैयार की जा रही है ।

प्रश्न 53.
नीचे दिए गये चित्र में 1 तथा 2 को अंकित करो।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ऊर्जा के स्रोत 13
उत्तर-
1. समतल दर्पण
2. बाहरी लकड़ी का बक्सा।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Type Questions)
बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
अनवीकरणीय स्रोत है
(a) सौर ऊर्जा
(b) पवन ऊर्जा
(c) प्राकृतिक गैस
(d) जल।
उत्तर-
(c) प्राकृतिक गैस।

प्रश्न 2.
जल विद्युत् संयंत्र में प्रयोग की जाती है
(a) पवन ऊर्जा
(b) बहते जल की ऊर्जा
(c) कोयले के जलने से उत्पन्न हुई ऊर्जा
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर-
(b) बहते जल की ऊर्जा।

प्रश्न 3.
एक ताप विद्युत् संयंत्र में प्रयोग की जाती है
(a) पवन ऊर्जा
(b) बहते जल की ऊर्जा
(c) जीवाश्म ईंधन के दहन से उत्पन्न ऊर्जा
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर-
(c) जीवाश्म ईंधन के दहन से उत्पन्न ऊर्जा।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ऊर्जा के स्रोत

प्रश्न 4.
एक बॉक्सनुमा सौर कुक्कर को 2-3 घंटे सूर्य के प्रकाश में रखने पर उसका ताप परिसर होगा –
(a) 60°C से 80°C
(b) 80°C से 100°C
(c) 100°C से 140°C
(d) 140°C से 180°C.
उत्तर-
(c) 100°C से 140°C.

प्रश्न 5.
सौर ऊर्जा को विद्युत् ऊर्जा में बदलता है-
(a) सौर जल ऊष्मक
(b) सौर सैल पैनल
(c) सौर भट्टी
(d) सौर कुक्कर।
उत्तर-
(b) सौर सैल पैनल।

प्रश्न 6.
सौर सैल बनाने के लिए किसका उपयोग किया जाता है ?
(a) कार्बन
(b) सिलिकॉन
(c) सोडियम
(d) कोबाल्ट।
उत्तर-
(b) सिलिकॉन।

प्रश्न 7.
वह उपकरण जो ऊर्जा के एक रूप को यांत्रिक ऊर्जा में बदलता है क्या कहलाता है ?
(a) सौर कुक्कर
(b) सौर सैल
(c) इंजन
(d) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(c) इंजन।

प्रश्न 8.
निम्नलिखित में से कौन जैव मात्रा ऊर्जा स्रोत का उदाहरण नहीं है ?
(a) लकड़ी
(b) गोबर गैस
(c) कोयला
(d) नाभिकीय गैस।
उत्तर-
(d) नाभिकीय ऊर्जा।

प्रश्न 9.
निम्नलिखित में से कौन ठोस ईधन नहीं है ?
(a) कोयला
(b) लकड़ी
(c) कोक
(d) किरोसीन।
उत्तर-
(d) किरोसीन।

प्रश्न 10.
निम्न में से कौन-सा अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है ?
(a) पवन ऊर्जा
(b) सौर ऊर्जा
(c) जीवाश्मी ईंधन
(d) जल ऊर्जा।
उत्तर-
(c) जीवाश्मी ईंधन।

प्रश्न 11.
ऊर्जा का वास्तविक एकमात्र स्रोत क्या है ?
(a) सूर्य
(b) जल
(c) यूरेनियम
(d) जीवाश्मी ईंधन।
उत्तर-
(a) सूर्य।

प्रश्न 12.
बायोगैस का मुख्य अवयव है
(a) CO2
(b) CH4
(c) H2
(d) H2S.
उत्तर-
(b) CH4

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-

(i) सोलर कुक्कर …………………. ऊर्जा को …………………………. ऊर्जा में रूपांतरित करता है।
उत्तर-
प्रकाश, ऊष्मीय

(ii) टार्च का जलना ……………………………. ऊर्जा का विद्युत ऊर्जा में रूपांतरण है।
उत्तर-
रासायनिक

(iii) ……………………… गैस, जैव गैस का मुख्य घटक है।
उत्तर-
मीथेन

(iv) पवन-चक्की में पवन की …………………………. ऊर्जा का उपयोग यांत्रिक कार्यों को करने में होता है।
उत्तर-
गतिज

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ऊर्जा के स्रोत

(v) जल-विद्युत सयंत्रों में गिरते हुए जल की …………………………… ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में रूपांतरित किया जाता है।
उत्तर-
स्थितिज।