PSEB 10th Class SST Solutions History Chapter 5 गुरु गोबिन्द सिंह जी का जीवन, खालसा की संरचना, युद्ध तथा उनका व्यक्तित्व

Punjab State Board PSEB 10th Class Social Science Book Solutions History Chapter 5 गुरु गोबिन्द सिंह जी का जीवन, खालसा की संरचना, युद्ध तथा उनका व्यक्तित्व Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 10 Social Science History Chapter 5 गुरु गोबिन्द सिंह जी का जीवन, खालसा की संरचना, युद्ध तथा उनका व्यक्तित्व

SST Guide for Class 10 PSEB गुरु गोबिन्द सिंह जी का जीवन, खालसा की संरचना, युद्ध तथा उनका व्यक्तित्व Textbook Questions and Answers

(क) निम्नलिखित प्रत्येक प्रश्न का उत्तर एक शब्द/एक पंक्ति (1-15 शब्दों) में लिखो

प्रश्न 1.
गुरु गोबिन्द राय जी का जन्म कब और कहां हुआ ? उनके माता-पिता का नाम भी बताओ।
उत्तर-
22 दिसम्बर, 1666 ई० को पटना में। उनकी माता का नाम गुजरी जी और पिता का नाम श्री गुरु तेग़ बहादुर जी था।

प्रश्न 2.
बचपन में पटना में गुरु गोबिन्द जी क्या-क्या खेल खेलते थे?
उत्तर-
नकली लड़ाइयां तथा अदालत लगाकर अपने साथियों के झगड़ों का निपटारा करना।

प्रश्न 3.
गुरु गोबिन्द राय जी ने किस-किस अध्यापक से शिक्षा ली?
उत्तर-
काज़ी पीर मुहम्मद, पण्डित हरजस, राजपूत बजर सिंह, भाई साहिब चन्द, भाई सतिदास आदि से।

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प्रश्न 4.
कश्मीरी पण्डितों की क्या समस्या थी ? गुरु तेग़ बहादुर जी ने उसे कैसे हल किया?
उत्तर-
औरंगज़ेब कश्मीरी पण्डितों को ज़बरदस्ती मुसलमान बनाना चाहता था। गुरु तेग़ बहादुर जी ने इस समस्या को आत्म-बलिदान देकर हल किया।

प्रश्न 5.
भंगानी की विजय के बाद गुरु गोबिन्द राय ने कौन-कौन से किले बनवाए?
उत्तर-
आनन्दगढ़, केशगढ़, लोहगढ़ तथा फतेहगढ़।

प्रश्न 6.
पांच प्यारों के नाम लिखिए।
उत्तर-
भाई दया सिंह, भाई धर्म सिंह, भाई मोहकम सिंह, भाई साहब सिंह तथा भाई हिम्मत सिंह।

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प्रश्न 7.
गुरु गोबिन्द सिंह जी ज्योति जोत कैसे समाए?
उत्तर-
एक पठान ने गुरु साहिब के पेट में छुरा घोंप दिया।

प्रश्न 8.
‘खण्डे का पाहुल’ तैयार करते समय किन-किन बाणियों का पाठ किया जाता है?
उत्तर-
जपुजी साहिब, आनन्द साहिब, जापु साहिब, सवैये, चौपाई आदि बाणियों का।

प्रश्न 9.
खालसा का सृजन कब और कहां किया गया?
उत्तर-
1699 ई० में आनन्दपुर साहिब में।

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प्रश्न 10.
बिलासपुर के राजा भीमचन्द पर खालसा की स्थापना का क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर-
उसने गुरु जी के विरुद्ध कई पहाड़ी राजाओं से गठजोड़ कर लिया।

प्रश्न 11.
नादौन के युद्ध का क्या कारण था?
उत्तर-
पहाड़ी राजाओं ने गुरु साहिब से मित्रता स्थापित करके मुग़ल सरकार को वार्षिक कर देना बन्द कर दिया था।

प्रश्न 12.
मुक्तसर का पुराना नाम क्या था? इसका यह नाम क्यों रखा गया?
उत्तर-
खिदराना। खिदराना के युद्ध में शहीदी को प्राप्त हुए सिक्खों को 40 मुक्ते’ का नाम दिया गया और उनकी याद में खिदराना का नाम मुक्तसर रखा गया।

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प्रश्न 13.
‘ज़फ़रनामा’ नामक पत्र गुरु जी ने किसे लिखा था?
उत्तर-
मुग़ल सम्राट औरंगजेब को।

प्रश्न 14.
गुरु गोबिन्द सिंह जी की प्रसिद्ध चार रचनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर-
जापु साहिब, ज़फ़रनामा, अकाल उस्तति तथा शस्त्र नाम माला।

(ख) निम्नलिखित प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग 30-50 शब्दों में लिखिए

प्रश्न 1.
गुरु गोबिन्द सिंह जी ने पटना में अपना बचपन कैसे बिताया?
उत्तर-
गुरु गोबिन्द सिंह जी ने बचपन के पांच वर्ष पटना में व्यतीत किए। वहां उनकी देख-रेख उनके मामा कृपाल ने की। कहते हैं कि घूड़ाम (पटियाला में स्थित) का एक मुस्लिम फ़कीर भीखणशाह बालक गोबिन्द राय के दर्शनों के लिए पटना गया था। बालक को देखते ही उसने यह भविष्यवाणी की थी कि “यह बालक बड़ा होकर महान् पुरुष बनेगा और लोगों का पथ-प्रदर्शन करेगा।” उसकी यह भविष्यवाणी बिल्कुल सत्य सिद्ध हुई। गुरु जी में महानता के लक्षण बाल्यकाल से ही दिखाई देने लगे थे। वे अपने साथियों को दो टोलियों में बांटकर युद्ध का अभ्यास किया करते थे और उन्हें कौड़ियां तथा मिठाई आदि देते थे। वे उनके झगड़ों का निपटारा भी करते थे। कोई भी निर्णय करते समय वे बड़ी सूझबूझ से काम लेते थे।

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प्रश्न 2.
गुरु गोबिन्द सिंह जी के राजसी चिह्नों का वर्णन करो।
उत्तर-
गुरु गोबिन्द सिंह जी ने अपने दादा गुरु हरगोबिन्द जी की भान्ति राजसी चिह्नों को अपनाया। वे राजगद्दी जैसे ऊँचे सिंहासन पर विराजमान होने लगे और अपनी पगड़ी पर कलगी सजाने लगे। उन्होंने अपने सिक्खों के दीवान सुन्दर तथा मूल्यवान् तम्बुओं में लगाने आरम्भ कर दिये। वे साहसी सिक्खों के साथ-साथ अपने पास हाथी तथा घोड़े भी रखने लगे। वे आनन्दपुर के जंगलों में शिकार खेलने जाते। इसके अतिरिक्त उन्होंने ‘रणजीत नगारा’ भी बनवाया।

प्रश्न 3.
खालसा के नियमों का वर्णन करो।
उत्तर-
खालसा की स्थापना 1699 ई० में गुरु गोबिन्द सिंह जी ने की । खालसा के नियम निम्नलिखित थे

  1. प्रत्येक खालसा अपने नाम के साथ ‘सिंह’ शब्द लगाएगा । खालसा स्त्री अपने नाम के साथ ‘कौर’ शब्द लगाएगी ।
  2. खालसा में प्रवेश से पूर्व प्रत्येक व्यक्ति को ‘खण्डे के पाहुल’ का सेवन करना पड़ेगा । तभी वह स्वयं को खालसा कहलवाएगा।
  3. प्रत्येक ‘सिंह’ आवश्यक रूप से पांच ‘ककार’ धारण करेगा-केश, कड़ा, कंघा, किरपान तथा कछहरा।
  4. सभी सिक्ख प्रतिदिन प्रात:काल स्नान करके उन पांच बाणियों का पाठ करेंगे जिनका उच्चारण ‘खण्डे का पाहुल’ तैयार करते समय किया गया था।

प्रश्न 4.
भंगानी के युद्ध के क्या कारण थे?
उत्तर-
भंगानी की लड़ाई 1688 ई० में पहाड़ी राजाओं तथा गुरु गोबिन्द राय जी के बीच हुई । इस लड़ाई के निम्नलिखित कारण थे

  1. पहाड़ी राजा गुरु गोबिन्द राय जी की सैनिक गतिविधियों को अपने लिए खतरा समझते थे।
  2. गुरु जी मूर्ति-पूजा के विरोधी थे । परन्तु पहाड़ी राजा मूर्ति-पूजा में विश्वास करते थे।
  3. गुरु जी ने मुगल सेना में से निकाले गए 500 पठानों को अपनी सेना में भर्ती कर लिया था। पहाड़ी राजा मुग़ल सरकार के स्वामिभक्त थे । इसलिए वे गुरु जी के विरुद्ध हो गए।
  4. मुग़ल फ़ौजदारों ने पहाड़ी राजाओं को गुरु जी के विरुद्ध उकसा दिया था।
  5. गुरु जी के साथ पहाड़ी राजा भीमचन्द की पुरानी शत्रुता थी। भीमचन्द के पुत्र की बारात गढ़वाल जा रही थी, परन्तु सिक्खों ने इन्हें पाऊंटा साहब से न गुज़रने दिया। परिणामस्वरूप पहाड़ी राजाओं ने गुरु जी से युद्ध करने का निर्णय कर लिया।

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प्रश्न 5.
आनन्दपुर साहिब की दूसरी लड़ाई कब हुई? इसका संक्षेप में वर्णन करो।
उत्तर-
आनन्दपुर की दूसरी लड़ाई 1704 ई० में हुई। आनन्दपुर साहिब के पहले युद्ध में गुरु गोबिन्द साहिब से पहाड़ी राजा बुरी तरह पराजित हुए थे। सन्धि के बाद भी वे पुनः सैनिक तैयारियां करने लगे । उन्होंने गुज्जरों को अपने साथ मिला लिया । मुगल सम्राट ने भी उनकी सहायता की प्रार्थना को स्वीकार कर लिया । 1704 ई० में सरहिन्द के गवर्नर वज़ीर खां ने सिक्खों की शक्ति को कुचलने के लिए विशाल सेना भेजी। सभी ने मिलकर आनन्दपुर का घेरा डाल दिया। गुरु जी ने अपने वीर सिक्खों की सहायता से डट कर मुग़लों का सामना किया, परन्तु धीरे-धीरे सिक्खों की रसद समाप्त हो गई । उन्हें भूख और प्यास सताने लगी। इस कठिन समय में 40 सिक्ख बेदावा लिखकर गुरु जी का साथ छोड़कर चले गए। अन्त में 21 दिसम्बर, 1704 ई० को माता गुजरी जी के कहने पर गुरु जी ने आनन्दपुर साहिब को छोड़ दिया।

प्रश्न 6.
चमकौर साहिब की लड़ाई पर नोट लिखें।
उत्तर-
सरसा नदी को पार करके गुरु गोबिंद सिंह जी चमकौर पहुंचे। वहां उन्होंने गांव के ज़मींदार के कच्चे मकान में आश्रय लिया परन्तु पहाड़ी राजाओं तथा मुग़ल सेनाओं ने उन्हें वहां भी घेर लिया। उस समय गुरु जी के साथ केवल 40 सिक्ख तथा उनके दोनों साहिबजादे अजीत सिंह तथा जुझार सिंह थे। फिर भी गुरु जी ने साहस न छोड़ा और मुग़लों का डट कर सामना किया। इस युद्ध में उनके दोनों साहिबजादे वीरगति को प्राप्त हुए। इसके अतिरिक्त 35 सिक्ख भी लड़ते-लड़ते शहीद हो गए। इनमें तीन प्यारे भी शामिल थे। परिस्थितियां बिल्कुल विपरीत थीं। अत: सिक्खों के प्रार्थना करने पर गुरु जी अपने पांच साथियों सहित माछीवाड़ा के जंगलों की ओर चले गए।

प्रश्न 7.
खिदराना की लड़ाई का वर्णन करो।
उत्तर-
चमकौर के युद्ध के पश्चात् गुरु गोबिन्द सिंह जी खिदराना में दाब नामक स्थान पर पहुंचे। वहां मुग़लों से उनका अन्तिम युद्ध हुआ। इस युद्ध में वे 40 सिक्ख भी गुरु जी के साथ आ मिले जो आनन्दपुर के दूसरे युद्ध में उनका साथ छोड़ गए थे। उन्होंने अपनी गुरु भक्ति का परिचय दिया और लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। उनकी इस गुरु भक्ति तथा बलिदान से गुरु जी बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने वहां इन शहीदों की मुक्ति के लिए प्रार्थना की । ये 40 शहीद इतिहास में ’40 मुक्ते ‘ कहलाते हैं। इस लड़ाई में माई भागो विशेष रूप से गुरु साहिब के पक्ष में लड़ने के लिए पहुंची थी। वह भी बुरी तरह से घायल हुई। अंत में गुरु साहिब विजयी रहे और मुग़ल सेना परास्त होकर भाग खड़ी हुई।

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प्रश्न 8.
गुरु गोबिन्द सिंह जी के सेनानायक के रूप में व्यक्तित्व का वर्णन करो।
उत्तर-
गुरु गोबिन्द सिंह जी एक कुशल सेनापति तथा वीर सैनिक थे । पहाड़ी राजाओं तथा मुग़लों के विरुद्ध लड़े गए प्रत्येक युद्ध में उन्होंने अपने वीर सैनिक होने का परिचय दिया। तीर चलाने, तलवार चलाने तथा घुड़सवारी करने में तो वे विशेष रूप से निपुण थे। गुरु जी में एक उच्च कोटि के सेनानायक के भी सभी गुण विद्यमान थे। उन्होंने कम सैनिक तथा कम युद्ध सामग्री के होते हुए भी पहाड़ी राजाओं तथा मुग़लों के नाक में दम कर दिया। चमकौर की लड़ाई में तो उनके साथ केवल चालीस सिक्ख थे, परन्तु गुरु जी के नेतृत्व में उन्होंने वे हाथ दिखाए कि एक बार तो हज़ारों की मुग़ल सेना घबरा उठी।

(ग) निम्नलिखित प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग 100-120 शब्दों में लिखिए

प्रश्न 1.
गुरु गोबिन्द सिंह जी के जीवन के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर-
गुरु गोबिन्द सिंह जी सिक्खों के दसवें तथा अन्तिम गुरु थे। उनमें आध्यात्मिक नेता, उच्चकोटि के संगठनकर्ता, सफल सेनानायक, प्रतिभाशाली विद्वान् तथा महान् सुधारक सभी के गुण विद्यमान थे। उनके जीवन का संक्षिप्त वर्णन इस प्रकार है —
जन्म तथा माता-पिता — गुरु गोबिन्द सिंह जी का जन्म 22 दिसम्बर,1666 ई० में पटना (बिहार की राजधानी) में हुआ। वह गुरु तेग़ बहादुर जी के इकलौते पुत्र थे। उनकी माता का नाम गुजरी जी था। आरम्भ में उनका नाम गोबिन्द दास रखा गया परन्तु कुछ समय पश्चात् उन्हें गोबिन्द राय भी कहा जाने लगा।

पटना में बचपन — गोबिन्द राय जी ने अपने जीवन के प्रारम्भिक पाँच वर्ष पटना में व्यतीत किए। बचपन में वह ऐसे खेल खेलते थे, जिनसे यह पता चलता था कि एक दिन वह धार्मिक एवं महान् नेता बनेंगे। वह अपने साथियों की दौड़ें, कुश्तियाँ तथा नकली युद्ध करवाया करते थे। वह स्वयं भी इन खेलों में भाग लेते थे। वह अपने साथियों के झगडे का निपटारा करने के लिए अदालत भी लगाया करते थे। __ लखनौर में दस्तार — बंदी की रस्म-1671 ई० में बालक गोबिन्द राय जी की लखनौर में दस्तारबन्दी की रस्म पूरी की गई।
शिक्षा-1672 ई० के आरम्भ में गुरु तेग़ बहादुर जी अपने परिवार सहित चक नानकी (आनन्दपुर साहिब) में रहने लगे। यहां गोबिन्दराय जी को संस्कृत, फारसी तथा पंजाबी भाषा के साथ-साथ घुड़सवारी तथा अस्त्र-शस्त्र चलाने की शिक्षा दी गई।

पिता की शहादत तथा गुरु — गद्दी की प्राप्ति-1675 ई० में गुरु साहिब के पिता गुरु तेग़ बहादुर जी ने मुग़ल अत्याचारों के विरोध में अपनी शहीदी दे दी। पिता जी की शहादत के पश्चात् गोबिन्द राय जी ने गुरुगद्दी सम्भाली और सिक्खों का नेतृत्व करना आरम्भ किया।

विवाह-कुछ विद्वानों के अनुसार गोबिन्द राय जी ने माता जीतो, माता सुन्दरी तथा माता साहिब कौर नामक तीन स्त्रियों से विवाह किया था। परंतु कुछ विद्वान ये तीनों नाम माता जीतो जी के ही मानते हैं। गुरु जी के चार पुत्र हुएसाहिबजादा अजीत सिंह, साहिबजादा जुझार सिंह, साहिबजादा जोरावर सिंह तथा साहिबजादा फतह सिंह।

सेना का संगठन — सिक्ख धर्म की रक्षा के लिए गुरु साहिब के लिए सेना का संगठन करना अत्यन्त आवश्यक था। अत: गुरु साहिब जी की ओर से यह घोषणा कर दी गई कि जिस सिक्ख के चार पुत्र हों, उनमें से वह दो पुत्रों को उनकी सेना में भर्ती करवाए। सिक्खों को यह भी आदेश दिया गया कि वे अन्य वस्तुओं के स्थान पर घोड़े तथा शस्त्र भेंट करें। परिणामस्वरूप शीघ्र ही गुरु साहब के पास बहुत-से सैनिक तथा युद्ध-सामग्री इकट्ठी हो गई। उन्होंने सढौरा के पीर बुद्ध शाह के 500 पठान सैनिकों को भी अपनी सेना में शामिल कर लिया।

गुरु जी के राजसी चिह्न तथा शानदार दरबार — गुरु गोबिन्द राय जी ने भी अपने दादा गुरु हरगोबिन्द जी की भान्ति राजसी चिह्नों को अपनाया। वह राजगद्दी की तरह ऊँचे सिंहासन पर विराजमान होने लगे और अपनी पगड़ी पर कलगी सजाने लगे। उन्होंने सिक्खों के दीवान सुन्दर तथा मूल्यवान् तम्बुओं में लगाने आरम्भ कर दिए। वह साहसी सिक्खों के साथ-साथ अपने पास हाथी तथा घोड़े भी रखने लगे। वह आनन्दपुर के जंगलों में शिकार खेलने जाते। इसके अतिरिक्त उन्होंने ‘रणजीत नगारा’ भी बनवाया।
गुरु जी पाऊँटा साहब में — गुरु साहिब द्वारा आनन्दपुर साहिब में की गई कार्यवाहियाँ बिलासपुर के राजा भीमचन्द को अच्छी नहीं लगीं। इसलिए वह किसी-न-किसी बहाने गुरु जी से युद्ध करना चाहता था। परन्तु गुरु जी उससे लड़ाई करके अपनी सैनिक शक्ति नहीं गंवाना चाहते थे। इसलिए वह नाहन के राजा मेदिनी प्रकाश के निमन्त्रण पर नाहन राज्य में चले गए। वहां उन्होंने यमुना नदी के किनारे एक सुन्दर एकान्त स्थान को चुन लिया। उस स्थान का नाम ‘पाऊँटा’ रखा गया।
खालसा की स्थापना से पहले (पूर्व खालसा काल) की लड़ाइयां —

  1. 1688 ई० में गुरु जी को भंगानी की लड़ाई लड़नी पड़ी। इस युद्ध में गुरु जी ने राजा फतह शाह तथा उसके साथियों को हराया।
  2. इसी बीच मुग़ल सम्राट औरंगज़ेब ने 1693 ई० में पंजाब के शासकों को आदेश दिया कि वे गुरु जी के विरुद्ध युद्ध छेड़ें। अतः कांगड़ा प्रदेश के फ़ौजदार ने अपने पुत्र खानजादा को गुरु जी के विरुद्ध भेजा, परन्तु सिक्खों ने उसे हरा दिया।
  3. 1696 ई० के आरम्भ में कांगड़ा प्रदेश के फ़ौजदार ने हुसैन खान को गुरु जी के विरुद्ध भेजा। परन्तु वह पहाड़ी राजाओं के साथ ही उलझ कर रह गया।

खालसा की स्थापना — 1699 ई० में बैसाखी के दिन गुरु गोबिन्द राय जी ने खालसा की साजना की। उन्होंने अमृत तैयार करके पाँच प्यारों-दया राम, धर्म दास, मोहकम चन्द, साहब चन्द तथा हिम्मत राय को छकाया और उनके नाम के साथ ‘सिंह’ शब्द लगाया। गुरु जी ने स्वयं भी अपने नाम के साथ ‘सिंह’ शब्द जोड़ा।
उत्तर खालसा काल की लड़ाइयां-खालसा की स्थापना के बाद के काल को ‘उत्तर खालसा काल’ कहा जाता है। इस काल में गुरु जी युद्धों में ही उलझे रहे। उन्होंने 1701 ई० में आनन्दपुर का पहला युद्ध, 1702 ई० में निरमोह का युद्ध, 1702 ई० में ही बसौली का युद्ध, 1704 ई० में आनन्दपुर का दूसरा युद्ध, शाही टिब्बी का युद्ध तथा 1705 ई० में चमकौर का युद्ध लड़ा। चमकौर से निकलकर वह माछीवाड़ा, दीना कांगड़ आदि स्थानों से होते हुए खिदराना (मुक्तसर) पहुँचे। वहाँ 1705 ई० में उन्होंने मुग़ल सेना को हराया। खिदराना से वह तलवंडी साबो चले गए। ___ गुरु साहिब का ज्योति-जोत समाना-गुरु गोबिन्द सिंह जी सितम्बर, 1708 ई० में नंदेड़ (दक्षिण) पहुँचे। एक दिन सायं एक पठान ने गुरु साहिब के पेट में छुरा घोंप दिया। इसी घाव के कारण 7 अक्तूबर, 1708 ई० को गुरु जी ज्योति-जोत समा गए।

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प्रश्न 2.
गुरु गोबिन्द सिंह जी को खालसा के सृजन की आवश्यकता क्यों पड़ी?
उत्तर-
प्रत्येक वर्ग, जाति, धर्म तथा समुदाय के जीवन में एक ऐसा भी दिन आता है जब उसका रूप परिवर्तन होता है सिक्ख धर्म के इतिहास में भी एक ऐसा दिन आया जब गुरु नानक देव जी के सन्त ‘सिंह’ बनकर उभरे। यह महान परिवर्तन 1699 ई० में गुरु गोबिन्द सिंह जी द्वारा खालसा की स्थापना से आया। गुरु साहिब को निम्नलिखित कारणों से खालसा की स्थापना की आवश्यकता पड़ी

  1. प्रथम नौ गुरु साहिबान के कार्य-खालसा की स्थापना की पृष्ठभूमि गुरु नानक देव जी के समय से ही तैयार हो रही थी। गुरु नानक देव जी ने जाति-प्रथा तथा मूर्ति-पूजा का खण्डन किया और अत्याचारों के विरुद्ध आवाज़ उठाई। इस प्रकार उन्होंने खालसा की स्थापना के बीज बोये। गुरु नानक देव जी के पश्चात् सभी गुरु साहिबान ने इन्हीं बातों का बढ़-चढ़ कर प्रचार किया। गुरु अर्जन देव जी की शहीदी को देखते हुए छठे गुरु हरगोबिन्द जी ने ‘नवीन नीति’ का अनुसरण किया और सिक्खों को ‘सन्त सिपाही’ बना दिया। नौवें गुरु तेग़ बहादुर जी ने धर्म की रक्षा के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया और शहीदी से पूर्व अपने सिक्खों से ये शब्द कहे-“न किसी से डरो और न किसी को डराओ।” उनके इन शब्दों से सिक्खों में वीरता और साहस के भाव उत्पन्न हुए जो खालसा की स्थापना की आधारशिला बने।
  2. औरंगजेब के अत्याचार-गुरु गोबिन्द सिंह जी के समय में मुग़लों के अत्याचार दिन-प्रतिदिन बढ़ते जा रहे थे। मुग़ल सम्राट औरंगज़ेब ने हिन्दुओं के अनेक मन्दिर गिरवा दिये थे और उन्हें सरकारी पदों से हटा दिया था। उसने हिन्दुओं पर अतिरिक्त कर और कुछ अन्य अनुचित प्रतिबन्ध भी लगा दिये। सबसे बढ़कर वह हिन्दुओं को बलपूर्वक मुसलमान बना रहा था। फलस्वरूप हिन्दू धर्म का अस्तित्व मिटने को था। गुरु गोबिन्द सिंह जी अत्याचारों के विरोधी थे और वे अत्याचारी को मिटाने के लिए दृढ़ संकल्प थे। इसलिए उन्होंने खालसा पंथ की स्थापना करके एक शक्तिशाली सेना का संगठन किया।
  3. जाति-पाति का अस्तित्व-भारतीय समाज में अभी तक भी बहुत-सी बुराइयां चली आ रही थीं। इनमें से एक बुराई जाति-प्रथा की थी। ऊँच-नीच के भेदभाव के कारण हिन्दू जाति पतन की ओर जा रही थी। गंडा सिंह के मतानुसार जाति-पाति राष्ट्रीय एकता के मार्ग में एक बहुत बड़ी बाधा बन गई थी। शूद्रों तथा उच्च जाति के लोगों के बीच एक बहुत बड़ा अन्तर आ चुका था। इस अन्तर को मिटाने के लिए इस समय कोई गम्भीर कदम उठाना अत्यन्त आवश्यक था। इसी कारण से गुरु गोबिन्द सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना करने का विचार किया। गुरु जी चाहते थे कि इस पंथ के लोग अपने सभी भेद-भावों को भूल कर एकता के सूत्र में बंध जायें।
  4. पहाड़ी राजाओं द्वारा गुरु जी का विरोध-खालसा की स्थापना से पहले गुरु गोबिन्द सिंह जी शिवालिक की पहाड़ी रियासतों के राजाओं के साथ मिलकर अत्याचारी मुग़ल साम्राज्य के विरुद्ध एक संयुक्त मोर्चा बनाना चाहते थे। परन्तु शीघ्र ही गुरु जी को यह पता चल गया कि पहाड़ी राजाओं पर विश्वास नहीं किया जा सकता। ऐसी दशा में गुरु गोबिन्द सिंह जी ने निश्चय कर लिया कि औरंगज़ेब के अत्याचारों का सामना करने के लिये उनका अपना सैनिक दल होना आवश्यक है। अतः उन्होंने खालसा पंथ की स्थापना की।
  5. गुरु जी के जीवन का उद्देश्य–’बचित्तर नाटक’, जोकि गुरु जी की आत्मकथा है, में गुरु साहिब ने लिखा है कि उनके निजी जीवन का उद्देश्य संसार में धर्म का प्रचार करना, अत्याचारी लोगों का नाश करना तथा सन्त-महात्माओं की रक्षा करना है। किसी शस्त्रधारी धार्मिक संगठन के बिना यह उद्देश्य पूरा नहीं हो सकता था। फलस्वरूप गुरु साहिब ने खालसा की स्थापना आवश्यक समझी।

प्रश्न 3.
खालसा की स्थापना का क्या महत्त्व था?
उत्तर-
खालसा की स्थापना सिक्ख इतिहास की एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण घटना मानी जाती है। डॉ० हरिराम गुप्ता के शब्दों में, “खालसा की स्थापना देश के धार्मिक तथा राजनीतिक इतिहास की एक युग-प्रवर्तक घटना थी।” (“The creation of the Khalsa was an epoch making event in the religious and political history of the country.”)
इस घटना का महत्त्व निम्नलिखित बातों से जाना जा सकता है —

  1. गुरु नानक देव जी द्वारा प्रारम्भ किए गए कार्यों की पूर्ति-गुरु नानक देव जी ने सिक्ख धर्म की नींव रखी थी। गुरु गोबिन्द सिंह जी ने खालसा का सृजन करके उनके द्वारा प्रारम्भ किए गए कार्य को सम्पन्न किया।
  2. मसन्द प्रथा का अन्त-चौथे गुरु रामदास जी ने ‘मसन्द प्रथा’ का आरम्भ किया था। मसन्दों ने सिक्ख धर्म के प्रचार तथा प्रसार में उल्लेखनीय योगदान दिया था। परन्तु गुरु तेग़ बहादुर जी के समय तक मसन्द लोग स्वार्थी, लोभी तथा भ्रष्टाचारी हो गए थे। इसलिए गुरु गोबिन्द सिंह जी ने अपने सिक्खों को आदेश दिया कि वे मसन्दों से कोई सम्बन्ध न रखें। परिणामस्वरूप मसन्द-प्रथा समाप्त हो गई।
  3. खालसा संगतों के महत्त्व में वृद्धि-गुरु गोबिन्द सिंह जी ने खालसा संगत को ‘खण्डे का पाहुल’ छकाने का अधिकार दिया। उन्हें आपस में मिलकर निर्णय करने का अधिकार भी दिया गया। परिणामस्वरूप खालसा संगतों का महत्त्व बढ़ गया।
  4. सिक्खों की संख्या में वृद्धि-गुरु गोबिन्द सिंह जी ने अपने सिक्खों को अमृत छका कर खालसा बनाया। इसके उपरान्त गुरु साहिब ने यह आदेश दे दिया कि खालसा के कोई पाँच सदस्य अमृत छका कर किसी को भी खालसा में शामिल कर सकते हैं। फलस्वरूप सिक्खों की संख्या में निरन्तर वृद्धि होने लगी।
  5. सिक्खों में नई शक्ति का संचार-खालसा की स्थापना से सिक्खों में एक नई शक्ति का संचार हुआ। अमृत छकने के बाद वे स्वयं को ‘सिंह’ कहलाने लगे। ‘सिंह’ कहलाने के कारण उनमें भय तथा कायरता का कोई अंश न रहा। वे अपना चरित्र भी शुद्ध रखने लगे। इसके अतिरिक्त खालसा जाति-पाति का भेदभाव समाप्त हो जाने से सिंहों में एकता की भावना मज़बूत हुई।
  6. मुग़लों का सफलतापूर्वक विरोध-गुरु गोबिन्द सिंह जी ने खालसा का सृजन करके सिक्खों में वीरता तथा साहस की भावनाएं भर दीं। उन्होंने चिड़िया को बाज़ से तथा एक सिक्ख को एक लाख से लड़ना सिखाया। परिणामस्वरूप गुरु जी के सिक्खों ने 1699 ई० से 1708 ई० तक मुगलों के साथ कई सफलतापूर्वक युद्ध लड़े।।
  7. गुरु साहिब के पहाड़ी राजाओं से युद्ध-खालसा की स्थापना से पहाड़ी राजा भी घबरा गए। विशेष रूप से बिलासपुर का राजा भीमचन्द गुरु साहिब की सैनिक कार्यवाहियों को देख कर भयभीत हो उठा। उसने अन्य कई पहाड़ी राजाओं से गठजोड़ करके गुरु साहिब की शक्ति को दबाने का प्रयास किया। अतः गुरु साहिब को पहाड़ी राजाओं से कई युद्ध करने पड़े।
  8. सिक्ख सम्प्रदाय का पृथक् स्वरूप-गुरु गोबिन्द सिंह जी के काल तक सिक्खों के अपने कई तीर्थ-स्थान बन गए थे। उनके लिए पवित्र ग्रन्थ ‘आदि ग्रन्थ साहिब’ का संकलन भी हो चुका था। वे अपने ही ढंग से तीज-त्योहार मनाते थे। अब खालसा की स्थापना से सिक्खों ने पाँच ‘ककारों’ का पालन करना आरम्भ कर दिया। इस प्रकार उन्होंने अपने बाहरी स्वरूप को भी जन-साधारण से अलग कर लिया।
  9. लोकतान्त्रिक तत्त्वों का प्रचलन-गुरु गोबिन्द सिंह जी ने ‘पाँच प्यारों’ को अमृत छकाने के बाद स्वयं उनके हाथों से अमृत छका। उन्होंने यह आदेश दिया कि कोई भी पाँच सिंह या संगत किसी भी व्यक्ति को अमृत छका कर सिंह बना सकती है। अपने ज्योति जोत समाने से पहले गुरु जी ने गुरु-शक्ति को ‘गुरु ग्रन्थ साहिब’ तथा खालसा में बांट कर लोकतान्त्रिक परम्परा की नींव रखी।
  10. सिक्खों की राजनीतिक शक्ति का उत्थान-खालसा के संगठन से सिक्खों में वीरता, निडरता, हिम्मत तथा आत्म-बलिदान की भावनाएँ जागृत हो उठीं। परिणामस्वरूप सिक्ख एक राजनीतिक शक्ति के रूप में उभरे।
    सच तो यह है कि खालसा की स्थापना ने ‘सिंहों’ को ऐसा अडिग विश्वास प्रदान किया जिसे कभी भी विचलित नहीं किया जा सकता।

PSEB 10th Class SST Solutions History Chapter 5 गुरु गोबिन्द सिंह जी का जीवन, खालसा की संरचना, युद्ध तथा उनका व्यक्तित्व

प्रश्न 4.
गुरु गोबिन्द सिंह जी की पूर्व खालसा काल की लड़ाइयों का वर्णन करो।
उत्तर-
गुरु गोबिन्द सिंह जी के जीवन काल में 1675 ई० से 1699 ई० तक का समय पूर्व खालसा काल के नाम से विख्यात है। इस काल में गुरु साहिब ने निम्नलिखित लड़ाइयां लड़ी___

  1. भंगानी का युद्ध-बिलासपुर का राजा भीमचन्द गुरु जी की बढ़ती हुई सैनिक शक्ति से घबरा उठा और वह उनके विरुद्ध युद्ध की तैयारी करने लगा। यह बात नाहन के राजा मेदिनी प्रकाश के लिए चिन्ताजनक थी। इसलिए उसने गुरु जी से सम्बन्ध बढ़ाने चाहे और गुरु जी को अपने यहां आमन्त्रित किया। गुरु जी पाऊंटा पहुंचे और वहां उन्होंने पौण्टा नामक किले का निर्माण करवाया। कुछ समय पश्चात् भीमचन्द ने अपने पुत्र की बारात को पाऊंटा में से गुज़ारना चाहा, परन्तु गुरु जी जानते थे कि उसकी नीयत ठीक नहीं है। इसलिए उन्होंने भीमचन्द को पाऊंटा में से गुज़रने की आज्ञा न दी। भीमचन्द ने इसे अपना अपमान समझा और अपने पुत्र के विवाह के पश्चात् अन्य पहाड़ी राजाओं की सहायता से गुरु जी पर आक्रमण कर दिया। पाऊंटा से कोई 6 मील दूर भंगानी के स्थान पर घमासान लड़ाई लड़ी गई। इस लड़ाई में गुरु जी ने पहाड़ी राजाओं को बुरी तरह से परास्त किया।
  2. नादौन का युद्ध-भंगानी की विजय के पश्चात् भीमचन्द और अन्य पहाड़ी राजाओं ने गुरु जी से मित्रता कर ली और मुग़ल सम्राट को कर देना बन्द कर दिया। इस पर सरहिन्द के मुग़ल गवर्नर ने अलिफ खां के नेतृत्व में पहाड़ी राजाओं तथा गुरु जी के विरुद्ध एक विशाल सेना भेजी। कांगड़ा से 20 मील दूर नादौन के स्थान पर घमासान युद्ध हुआ। इस युद्ध में मुग़ल बुरी तरह पराजित हुए।
  3. मुग़लों से संघर्ष-मुग़ल सम्राट औरंगज़ेब उस समय दक्षिण में था जब गुरु साहिब की शक्ति बढ़ रही थी। उसने पंजाब में मुग़ल फ़ौजदारों को आदेश दिया कि वह गुरु साहिब के विरुद्ध कार्यवाही करें।
    1. सर्वप्रथम कांगड़ा प्रदेश के फ़ौजदार दिलावर खां ने अपने पुत्र खानज़ादा रुस्तम खां के अधीन गुरु साहिब के विरुद्ध 1694 ई० में मुहिम भेजी। सिक्ख पहले ही उससे दो-दो हाथ करने को तैयार थे। उन्होंने शत्रु पर अभी कुछ गोले ही बरसाए थे कि खानजादा तथा उसके साथी भयभीत होकर भाग गए। इस प्रकार गुरु साहिब को बिना युद्ध किए ही विजय प्राप्त हुई।
    2. 1696 ई० के आरम्भ में दिलावर खां ने हुसैन खां को आनन्दपुर साहब पर आक्रमण करने के लिए भेजा। मार्ग में हुसैन खां ने गुलेर तथा जसवान के राजाओं से कर मांगा। परन्तु उन्होंने कर देने की बजाय हुसैन खां से युद्ध करने का निर्णय कर लिया। भीमचन्द (बिलासपुर) तथा किरपाल चन्द (कांगड़ा) हुसैन खां से जा मिले। परन्तु गुरु जी ने अपने कुछ सिक्खों को हुसैन खां के विरुद्ध भेजा। हुसैन खां की पराजय हुई और वह मारा गया।
    3. हुसैन खां की मृत्यु के पश्चात् दिलावर खां ने जुझार सिंह तथा चंदेल राय के नेतृत्व में सेनाएँ भेजीं। परन्तु वे भी आनन्दपुर साहिब में पहुँचने से पहले ही राजा राजसिंह (जसवान) से पराजित होकर भाग गईं।
    4. अंततः मुग़ल सम्राट औरंगजेब ने शहज़ादा मुअज्जम को गुरु साहिब तथा पहाड़ी राजाओं के विरुद्ध भेजा। उसने लाहौर पहुँच कर मिर्जा बेग के नेतृत्व में एक विशाल सेना पहाड़ी राजाओं के विरुद्ध भेजी। वह पहाड़ी राजाओं को परास्त करने में सफल रहा।

प्रश्न 5.
गुरु गोबिन्द सिंह जी की उत्तर-काल की लड़ाइयों का वर्णन करो।
उत्तर-
उत्तर-खालसा काल में गुरु जी अनेक युद्धों में उलझे रहे। इन युद्धों का संक्षिप्त वर्णन इस प्रकार है —

  1. आनन्दपुर का प्रथम युद्ध 1701 ई०-खालसा की स्थापना से पहाड़ी राजा घबरा गए। अतः बिलासपुर के राजा भीमचन्द ने गुरु जी को पत्र लिखा कि वे या तो आनन्दपुर छोड़ दें या जितना समय वह वहाँ रहे हैं उसका किराया दें। गुरु जी ने उसकी इस अनुचित माँग को अस्वीकार कर दिया। इस पर भीमचन्द ने अन्य पहाड़ी राजाओं के साथ मिलकर आनन्दपुर पर आक्रमण कर दिया। गुरु जी कम सैनिकों के होते हुए भी उन्हें परास्त करने में सफल हो गए। तत्पश्चात् पहाड़ी राजाओं ने मुग़लों से सहायता प्राप्त की और एक बार फिर आनन्दपुर पर आक्रमण किया। इस बार भी उन्हें मुँह की खानी पड़ी। विवश होकर उन्हें गुरु जी से सन्धि करनी पड़ी। सन्धि की शर्त के अनुसार गुरु साहिब आनन्दपुर छोड़कर निरमोह नामक स्थान पर चले गये।
  2. निरमोह का युद्ध 1702 ई०-राजा भीमचन्द ने अनुभव किया कि उसके लिए सिक्खों की शक्ति को समाप्त करना असम्भव है। अतः उसने मुग़ल सरकार से सहायता की मांग की। 1702 ई० के आरम्भ में एक ओर से राजा भीमचन्द की सेना और दूसरी ओर से सरहिन्द के सूबेदार के नेतृत्व में मुग़ल सेना ने निरमोह पर आक्रमण कर दिया। आस-पास के गूजरों ने भी आक्रमणकारियों का साथ दिया। सिक्खों ने बड़ी वीरता से शत्रु का सामना किया। एक रात तथा एक दिन तक लड़ाई होती रही। अन्त में गुरु जी ने शत्रु की सेना को भागने पर विवश कर दिया।
  3. सतलुज की लड़ाई 1702 ई०-निरमोह की विजय के पश्चात् गुरु जी ने निरमोह छोड़ने का निर्णय कर लिया। उन्होंने अभी सतलुज नदी को पार भी नहीं किया था कि शत्रु सेना ने उन पर पुनः आक्रमण कर दिया। लगभग चार घण्टे युद्ध चला जिसमें गुरु जी विजयी रहे।
  4. बसौली का युद्ध 1702 ई०-सतलुज नदी को पार करके गुरु जी अपने सिक्खों सहित बसौली में चले गए। यहां भी राजा भीमचन्द की सेना ने गुरु जी की सेना का पीछा किया। परन्तु गुरु जी ने उन्हें फिर से हरा दिया। क्योंकि बसौली तथा जसवान के राजा गुरु जी के मित्र थे, इसलिए भीमचन्द ने गुरु जी से समझौता करने में ही अपनी भलाई समझी। यह सन्धि 1702 ई० के मध्य में हुई। परिणामस्वरूप गुरु जी फिर से आनन्दपुर में आ गए।
  5. आनन्दपुर का दूसरा युद्ध 1704-पहाड़ी राजाओं ने एक संघ स्थापित करके गुरु जी से आनन्दपुर छोड़कर चले जाने के लिए कहा। जब गुरु जी ने उनकी मांग को स्वीकार न किया तो उन्होंने गुरु जी पर धावा बोल दिया। परन्तु उन्हें एक बार फिर मुंह की खानी पड़ी। अपनी पराजय का बदला लेने के लिए भीमचन्द तथा अन्य पहाड़ी राजाओं ने मुग़ल सरकार से सहायता प्राप्त कर गुरु जी पर आक्रमण कर दिया और आनन्दपुर साहिब को चारों ओर से घेर लिया। परिणामस्वरूप सिक्खों के लिए युद्ध जारी रखना कठिन हो गया। सिक्खों ने आनन्दपुर छोड़कर जाना चाहा, परन्तु गुरु जी न माने। इस संकट के समय में चालीस सिक्ख अपना ‘बेदावा’ लिख कर गुरु जी का साथ छोड़ गए। अन्त में 21 दिसम्बर, 1704 ई० को माता गुजरी जी के कहने पर गुरु साहिब ने आनन्दपुर साहिब को छोड़ दिया।
  6. शाही टिब्बी का युद्ध-गुरु गोबिन्द सिंह जी द्वारा आनन्दपुर छोड़ देने के पश्चात् शत्रु ने आनन्दपुर पर अपना अधिकार कर लिया। उन्होंने सिक्खों का पीछा भी किया। गुरु जी के आदेश पर उनके सिक्ख ऊधे सिंह ने अपने 50 साथियों के साथ शत्रु की विशाल सेना का शाही टिब्बी नामक स्थान पर डट कर सामना किया। भले ही ये सभी सिक्ख शहीद हो गए, तो भी उन्होंने सैंकड़ों शत्रुओं को मौत के घाट उतार दिया।
  7. सरसा की लड़ाई-आगे बढ़ते हुए गुरु साहिब तथा उनके साथी सरसा नदी पर पहुँचे। शत्रु की सेना भी उनके निकट पहुँच चुकी थी। गुरु जी ने अपने एक मुख्य सिक्ख भाई जीवन सिंह रंगरेटा को लगभग 100 सिक्खों सहित शत्रु का सामना करने के लिए पीछे छोड़ दिया था। इन सिक्खों ने शत्रु का डट कर सामना किया तथा शत्रु को भारी क्षति पहुँचाई। । उस समय सरसा नदी में बाढ़ आई हुई थी। फिर भी गुरु जी, उनके सैंकड़ों सिक्ख तथा साथी अपने घोड़ों सहित नदी में कूद पड़े। इस भाग-दौड़ में बहुत-से सिक्ख तथा गुरु जी के छोटे साहिबजादे ज़ोरावर सिंह तथा फतेह सिंह तथा माता गुजरी जी उनसे बिछुड़ गए।
  8. चमकौर का युद्ध 1705 ई०-सरसा नदी को पार करके गुरु जी चमकौर पहुंचे। परन्तु पहाड़ी राजाओं तथा मुग़ल सेनाओं ने उन्हें वहाँ भी घेर लिया। उस समय गुरु जी के साथ केवल 40 सिक्ख तथा उनके दो साहिबजादे अजीत सिंह तथा जुझार सिंह थे। फिर भी गुरु जी ने मुग़लों का डट कर सामना किया। इस युद्ध में 35 सिक्ख तथा दोनों साहिबजादे अजीत सिंह तथा जुझार सिंह वीरगति को प्राप्त हुए। गुरु साहिब खिदराना पहुंचे।
  9. खिदराना का युद्ध 1705 ई०-खिदराना में मुग़लों से गुरु जी का अन्तिम युद्ध हुआ। इस युद्ध में वे 40 सिक्ख भी गुरु जी के साथ आ मिले जो आनन्दपुर के दूसरे युद्ध में उनका साथ छोड़ गए थे। गुरु जी के पास लगभग 2000 सिक्ख थे जिन्हें 10,000 मुग़ल सैनिकों का सामना करना पड़ा। गुरु जी के पास पुनः आए सिक्खों ने अपनी गुरु भक्ति का परिचय दिया और लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। उनकी गुरु भक्ति तथा बलिदान से गुरु जी बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने वहां इन शहीदों की मुक्ति के लिए प्रार्थना की। ये 40 शहीद इतिहास में 40 मुक्ते’ कहलाते हैं। आज भी सिक्ख अपनी अरदास के समय इन्हें याद करते हैं। उनकी याद में खिदराना का नाम मुक्तसर पड़ गया।

PSEB 10th Class SST Solutions History Chapter 5 गुरु गोबिन्द सिंह जी का जीवन, खालसा की संरचना, युद्ध तथा उनका व्यक्तित्व

प्रश्न 6.
मनुष्य के रूप में आप गुरु गोबिन्द सिंह जी के बारे में क्या जानते हैं?
उत्तर-
गुरु गोबिन्द सिंह जी सिक्ख इतिहास की महानतम् विभूतियों में से एक थे। वह सचरित्र, साहस, सन्तोष तथा सहनशीलता की मूर्ति थे। मानव के रूप में इनका और कहीं उदाहरण मिलना कठिन ही नहीं, अपितु असम्भव है। आदर्श मानव के रूप में गुरु साहिब के चरित्र के विभिन्न पक्षों का वर्णन इस प्रकार है —

  1. प्रभावशाली आकृति-गुरु गोबिन्द सिंह जी एक सुन्दर आकृति वाले पुरुष थे। उनका कद लम्बा, रंग गोरा, माथा चौड़ा तथा शरीर गठा हुआ था। उनके चेहरे पर एक विशेष चमक थी। वह शस्त्र धारण करके रहते थे. उनकी पगड़ी पर कलगी लगी रहती थी और उनके हाथ में बाज़ होता था।
  2. आदर्श पुत्र तथा पिता-गुरु जी आदर्श पुत्र तथा पिता थे। अपने पिता को यह कहकर कि “बलिदान देने के लिए आपसे बढ़कर योग्य कौन हो सकता है,” उन्होंने एक आदर्श पुत्र होने का ज्वलन्त उदाहरण दिया। धर्म के लिए उन्होंने अपने चारों पुत्रों को हँसते-हँसते बलिदान कर दिया। उनके दो पुत्र दीवार में जीवित चिनवा दिए गए। उनके अन्य दो पुत्र आनन्दपुर के दूसरे युद्ध में शहीद हो गए थे। यह गुरु जी के आदर्श पिता होने का स्पष्ट प्रमाण है। गुरु जी अपनी माता जी की आज्ञा का पालन करना भी अपना बहुत बड़ा कर्त्तव्य समझते थे। उन्होंने अपनी माता जी के कहने पर आनन्दपुर का किला खाली कर दिया था।
  3. दृढ़ संकल्प-गुरु गोबिन्द सिंह जी एक दृढ़ संकल्प वाले व्यक्ति थे। भयंकर से भयंकर विपत्तियां भी उन्हें अपने मार्ग से विचलित न कर सकीं। अभी वह 9 वर्ष के ही थे कि उनके पिता ने धर्म की रक्षा के लिए अपना बलिदान दे दिया। उनके दो पुत्रों को दीवार में जीवित चिनवा दिया गया। उनके अन्य दो पुत्र युद्ध में शहीदी को प्राप्त हुए। इतना होने पर भी गुरु जी अपने पथ से विचलित नहीं हुए। उन्होंने सत्य के मार्ग पर चलते हुए आजीवन संघर्ष जारी रखा।
  4. उदार तथा सहनशील-मुग़ल सम्राट औरंगज़ेब ने अपनी धार्मिक कट्टरता के कारण गुरु गोबिन्द सिंह जी के पिता गुरु तेग़ बहादुर जी को शहीद कर दिया था, फिर भी गुरु गोबिन्द सिंह जी के मन में मुसलमानों के प्रति कोई घृणा नहीं थी। गुरु साहिब के उदार तथा सहनशील स्वभाव के कारण ही पीर मुहम्मद, पीर बुद्ध शाह, निहंग खान, नबी खां, गनी खां जैसे मुसलमान गुरु जी के मित्र थे। गुरु जी की सेना में भी अनेक मुसलमान तथा पठान सैनिक थे।
  5. सर्वगुण-सम्पन्न-गुरु जी एक सर्वगुण-सम्पन्न व्यक्ति थे। वे निडर, सहनशील तथा स्वतन्त्र विचारों वाले व्यक्ति थे। उस समय की सबसे बड़ी शक्ति मुग़ल भी उन्हें न डरा सकी। उन्होंने अपने पुत्रों का बलिदान दे दिया, परन्तु मुग़लों के सामने घुटने न टेके। उनके स्वतन्त्र विचारों का ज्ञान हमें उनकी रचना ‘ज़फ़रनामा’ से हो जाता है। ज़फ़रनामा में उन्होंने औरंगजेब की शक्ति को ललकारा था। उन्होंने इसमें औरंगज़ेब के पिठू कर्मचारियों की खुले रूप से निन्दा की है। इन सब बातों से हमें पता चलता है कि गुरु जी एक स्वतन्त्र विचारों वाले व्यक्ति थे।

प्रश्न 7.
चमकौर साहिब तथा खिदराना की लड़ाई का वर्णन करें।
उत्तर-
चमकौर साहिब तथा खिदराना की लड़ाइयां गुरु गोबिन्द सिंह जी द्वारा लड़ी गईं दो महत्त्वपूर्ण लड़ाइयां थीं। . ये दोनों लड़ाइयां गुरु साहिब ने उत्तर खालसा काल में लड़ी।

  1. चमकौर का युद्ध 1705 ई०-सरसा नदी को पार करके गुरु साहिब अपने सिक्खों सहित चमकौर साहिब पहुंच गए। उस समय उनके साथ केवल 40 सिक्ख थे। उनके दो बड़े साहिबजादे अजीत सिंह तथा जुझार सिंह उनके साथ थे। वहां उन्होंने एक कच्ची गढ़ी में शरण ली। इसी बीच शत्रु सेना ने उन पर आक्रमण कर दिया। सिक्खों ने इसका उत्तर बड़ी वीरता से दिया। गुरु जी के दोनों साहिबजादे बड़े साहस से लड़े। शत्रु को मारते-काटते वे शहीदी को प्राप्त हुए। पाँच प्यारों में से तीन प्यारे-साहिब सिंह, मोहकम सिंह तथा हिम्मत सिंह ने भी इसी युद्ध में शहादत प्राप्त की। अन्त में गुरु जी के सिंहों में से केवल पांच सिंह ही रह गए। उन्होंने हुक्मनामे के रूप में गुरु जी को चमकौर साहिब छोड़ जाने के लिए विवश कर दिया। भाई दया सिंह तथा भाई धरम सिंह उनके साथ गढ़ी से बाहर चले गए। शेष सिंह लड़ते-लड़ते वीरगति को प्राप्त हुए।
    गुरु गोबिन्द सिंह जी माछीवाड़ा, आलमगीर, दीना आदि स्थानों से होते हुए खिदराना की ओर चले गए।
  2. खिदराना का युद्ध 1705 ई०-चमकौर साहिब से चलकर गुरु गोबिन्द सिंह जी जब खिदराना में ढाब नामक स्थान पर पहुंचे तो उस समय तक उनके साथ असंख्य सिक्ख शामिल हो चुके थे। वे 40 सिंह जो आनन्दपुर के दूसरे युद्ध में गुरु जी को ‘बेदावा’ लिख कर गुरु साहिब का साथ छोड़ गए थे, वे भी वहां पहुंच गए। उनके साथ माई भागो विशेष रूप से गुरु जी के पक्ष में लड़ने के लिए वहाँ पहुंची थी। कुल मिला कर गुरु जी के पास लगभग 2,000 सिक्ख थे।
    दूसरी ओर सरहिन्द का सूबेदार वज़ीर खां 10,000 सैनिकों की विशाल सेना लेकर वहां पहुंचा। 29 दिसम्बर, 1705 ई० को खिदराना की ढाब नामक स्थान पर घमासान युद्ध हुआ। इस युद्ध में भी गुरु साहिब तथा उनके साथियों ने अपने अद्वितीय शौर्य का परिचय दिया। उन्होंने शत्रु की भयंकर मार-काट की। वहाँ पानी की कमी के कारण मुग़लों के लिए लड़ना बड़ा कठिन था। परिणामस्वरूप मुग़ल सेना परास्त हो कर भाग खड़ी हुई। चाहे माई भागो बुरी तरह से घायल हुई तथा बेदावा लिखने वाले 40 सिंह भी शहीद हो गए, परन्तु विजय गुरु जी की ही हुई। गुरु जी ने चालीस सिंहों की वीरता देख कर उनके मुखिया भाई महा सिंह के सामने उनकी ओर से दिया गया ‘बेदावा’ फाड़ दिया। उन सिक्खों को अब इतिहास में ‘चालीस मुक्ते’ कह कर याद किया जाता है। उनकी याद में ही खिदराना का नाम ‘मुक्तसर’ पड़ गया।

PSEB 10th Class Social Science Guide गुरु गोबिन्द सिंह जी का जीवन, खालसा की संरचना, युद्ध तथा उनका व्यक्तित्व Important Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Type Questions)

I. उत्तर एक शब्द अथवा एक लाइन में

प्रश्न 1.
(i) गुरु गोबिन्द सिंह जी के बचपन का क्या नाम था?
(ii) उन्होंने कब से कब तक गुरु गद्दी का संचालन किया?
उत्तर-
(i) गुरु गोबिन्द सिंह जी के बचपन का नाम गोबिन्द राय था।
(ii) उन्होंने 1675 ई० में गुरु गद्दी सम्भाली। गुरु जी ने 1708 ई० तक गुरु गद्दी का संचालन किया।

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प्रश्न 2.
गुरु गोबिन्द सिंह जी ने कौन-सा नगारा बनवाया?
उत्तर-
गुरु गोबिन्द सिंह जी ने एक नगारा बनवाया जिसे रणजीत नगारा के नाम से पुकारा जाता था।

प्रश्न 3.
(i) आनन्दपुर का प्रथम युद्ध किस-किस के बीच हुआ?
(ii) इस युद्ध में किसकी विजय हुई?
उत्तर-
(i) आनन्दपुर का प्रथम युद्ध बिलासपुर के पहाड़ी राजा भीमचन्द तथा गुरु गोबिन्द सिंह जी के बीच हुआ।
(ii) इस युद्ध में गुरु जी ने पहाड़ी राजा को बुरी तरह परास्त किया।

प्रश्न 4.
आनन्दपुर के दूसरे युद्ध में किसकी विजय हुई?
उत्तर-
आनन्दपुर के दूसरे युद्ध में गुरु गोबिन्द सिंह जी की विजय हई।

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प्रश्न 5.
(i) भंगानी का युद्ध कब हुआ?
(ii) दो पहाड़ी राजाओं के नाम बताओ जो इस युद्ध में गुरु गोबिन्द सिंह जी के विरुद्ध लड़े।
उत्तर-
(i) भंगानी का युद्ध 1688 ई० में हुआ।
(ii) इस युद्ध में बिलासपुर का राजा भीमचन्द तथा कांगड़ा का राजा कृपाल चन्द गुरु साहिब के विरुद्ध लड़े।

प्रश्न 6.
(i) आनन्दपुर की सभा में कितने व्यक्तियों ने अपने आपको बलिदान देने के लिए उपस्थित किया?
(ii) उसमें से पहला व्यक्ति कौन था?
उत्तर-
(i) इस सभा में पांच व्यक्तियों ने अपने आपको बलिदान देने के लिए उपस्थित किया।
(ii) इनमें से पहला व्यक्ति लाहौर का दयाराम खत्री था।

प्रश्न 7.
खालसा के सदस्य आपस में मिलते समय किन शब्दों से एक-दूसरे का अभिवादन करते हैं?
उत्तर-
खालसा के सदस्य ‘वाहिगुरु जी का खालसा’, ‘वाहिगुरु जी की फतेह’ कह कर एक-दूसरे का अभिवादन करते हैं।

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प्रश्न 8.
(i) गुरु जी के दो साहिबजादों के नाम बताओ जिन्हें जीवित दीवार में चिनवा दिया गया था।
(ii) उनके किन दो साहिबजादों ने चमकौर के युद्ध में शहीदी दी?
उत्तर-
(i) गुरु जी के दो साहिबजादों जोरावर सिंह तथा फतेह सिंह को जीवित दीवार में चिनवा दिया गया।
(ii) चमकौर के युद्ध में शहीदी देने वाले दो साहिबजादे थे-अजीत सिंह तथा जुझार सिंह।

प्रश्न 9.
गुरु गोबिन्द राय जी के बचपन के प्रथम पांच वर्ष कहां बीते?
उत्तर-
पटना में।

प्रश्न 10.
गुरु गोबिन्द राय जी की दस्तारबंदी कहां हुई?
उत्तर-
लखनौर में।

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प्रश्न 11.
गुरु तेग बहादुर जी की शहीदी कब हुई?
उत्तर-
11 नवम्बर, 1675 ई० को।

प्रश्न 12.
गुरु तेग बहादुर साहिब के शीश का, अन्तिम संस्कार किसने और कहां किया?
उत्तर-
गुरु तेग़ बहादुर साहिब के शीश का अन्तिम संस्कार भाई नेता तथा गोबिन्द्र राय जी ने आनन्दपुर साहिब में किया।

प्रश्न 13.
गुरु गोबिन्द राय जी द्वारा अपनाए गए किसी एक राजसी चिन्ह का नाम बताओ।
उत्तर-
कलगी।

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प्रश्न 14.
‘पाऊंटा साहिब’ का क्या अर्थ है?
उत्तर-
‘पाऊंटा साहिब’ का अर्थ है-पैर रखने का स्थान।

प्रश्न 15.
सढौरा की पठान सेना का नेता कौन था?
उत्तर-
पीर बुद्धू शाह।।

प्रश्न 16.
गुरु गोबिन्द सिंह जी ने खिदराना (मुक्तसर) में मुगल सेना को कब हराया?
उत्तर-
1705 में।

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प्रश्न 17.
गुरु गोबिन्द सिंह जी कब और कहां ज्योति जोत समाए?
उत्तर-
गुरु गोबिन्द सिंह जी 7 अक्तूबर, 1708 को नंदेड़ में ज्योति जोत समाए।

प्रश्न 18.
किस मुगल बादशाह ने हिन्दुओं को इस्लाम धर्म अपनाने पर विवश किया?
उत्तर-
औरंगजेब ने।

प्रश्न 19.
गुरु गोबिन्द सिंह जी की जीवन कथा से सम्बन्धित ग्रन्थ कौन-सा है?
उत्तर-
बचित्तर नाटक।

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प्रश्न 20.
खालसा स्त्री अपने नाम के साथ कौन-सा अक्षर लगाती है?
उत्तर-
कौर।

प्रश्न 21.
खालसा को कितने ‘ककार’ धारण करने होते हैं?
उत्तर-
पांच।

प्रश्न 22.
मसन्द प्रथा को किसने समाप्त किया?
उत्तर-
गुरु गोबिन्द सिंह जी ने।

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प्रश्न 23.
सिक्खों के अन्तिम तथा दसवें गुरु कौन थे?
उत्तर-
गुरु गोबिन्द सिंह जी।

प्रश्न 24.
प्रत्येक खालसा के नाम के साथ लगा ‘सिंह’ शब्द किस बात का प्रतीक है?
उत्तर-
यह शब्द उनकी वीरता तथा निडरता का प्रतीक है।

प्रश्न 25.
नादौन का युद्ध कब हुआ?
उत्तर-
1690 ई० में।

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प्रश्न 26.
उत्तर-खालसा काल की समयावधि क्या थी?
उत्तर-
1699-1708 ई०।

प्रश्न 27.
निरमोह का युद्ध कब हुआ?
उत्तर-
1702 ई० में।

प्रश्न 28.
आनन्दपुर साहिब में ‘बेदावा’ लिखने वाले 40 सिंहों को खिदराना के युद्ध में क्या नाम दिया गया?
उत्तर-
चालीस मुक्ते।

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प्रश्न 29.
आनन्दपुर साहिब के दूसरे युद्ध में ‘बेदावा’ लिखने वाले 40 सिक्खों का मुखिया कौन था?
उत्तर-
भाई महा सिंह।

प्रश्न 30.
गुरु गोबिन्द सिंह साहिब के जीवन काल का अन्तिम युद्ध कौन सा था?
उत्तर-
खिदराना का युद्ध।

प्रश्न 31.
‘आदि ग्रन्थ साहिब’ को अन्तिम रूप किसने दिया?
उत्तर-
गुरु गोबिन्द सिंह साहिब जी ने।

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II. रिक्त स्थानों की पूर्ति

  1. गुरु गोबिन्द राय जी के पिता का नाम …………….. और माता का नाम ………. था।
  2. खालसा की स्थापना …………… ई० में हुआ।
  3. मुक्तसर का पुराना नाम …………….. था।
  4. गुरु गोबिन्द सिंह जी ने ‘जफ़रनामा’ नामक पत्र मुग़ल सम्राट् ………….. को लिखा।
  5. श्री गुरु …………. को लोकतंत्र प्रणाली का प्रारम्भकर्ता कहा जाता है।
  6. मसन्द प्रथा को …………… ने समाप्त किया।
  7. आनन्दपुर साहिब के दूसरे युद्ध में ‘बेदावा’ लिखने वाले 40 सिखों का मुखिया ……… था।

उत्तर-

  1. श्री गुरु तेग़ बहादुर जी, गुजरी जी,
  2. 1699,
  3. खिदराना,
  4. औरंगज़ेब,
  5. गोबिंद सिंह जी,
  6. गुरु गोबिन्द सिंह जी,
  7. भाई महा सिंह।

III. बहविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
गुरु गोबिन्द राय जी का जन्म हुआ
(A) 2 दिसंबर, 1666 ई० को
(B) 22 दिसंबर, 1666 ई० को
(C) 22 दिसंबर, 1661 ई० को
(D) 2 दिसंबर, 1661 ई० को।
उत्तर-
(B)

प्रश्न 2.
गुरु गोबिन्द जी ने शिक्षा ली
(A) काजी पीर मुहम्मद
(B) पटना में
(C) भाई सतिदास
(D) अमृतसर में।
उत्तर-
(D) अमृतसर में।

प्रश्न 3.
ख़ालसा का सृजन हुआ
(A) करतारपुर में
(B) पण्डित हरजस से
(C) आनंदपुर साहिब में
(D) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(C) आनंदपुर साहिब में

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प्रश्न 4.
भंगानी का युद्ध कब हुआ?
(A) 1699 ई० में
(B) 1705 ई० में
(C) 1688 ई० में
(D) 1675 ई० में।
उत्तर-
(C) 1688 ई० में

प्रश्न 5.
गुरु गोबिन्द सिंह जी ने खिदराना (श्री मुक्तसर साहिब) में मुग़ल सेना को पराजित किया
(A) 1688 ई० में
(B) 1699 ई० में
(C) 1675 ई० में
(D) 1705 ई० में।
उत्तर-
(B) 1699 ई० में

IV. सत्य-असत्य कथन

प्रश्न-सत्य/सही कथनों पर (✓) तथा असत्य/ग़लत कथनों पर (✗) का निशान लगाएं

  1. पहाड़ी राजाओं ने अब तक मुग़लों के विरुद्ध गुरु गोबिंद सिंह जी का साथ दिया।
  2. ‘खालसा’ की स्थापना पटना में हुई।
  3. ‘बचित्तर नाटक’ गुरु गोबिंद सिंह जी की आत्मकथा है।
  4. ‘चालीस मुक्तों’ का संबंध खिदराना के युद्ध से है।
  5. सिक्ख परम्परा में ‘खण्डे के पाहुल’ की बहुत बड़ी महिमा है।

उत्तर-

  1. (✗),
  2. (✗),
  3. (✓),
  4. (✓),
  5. (✓).

V. उचित मिलान

  1. ज़फरनामा लखनौर
  2. गोबिन्द राय जी की दस्तारबंदी – पीर बुद्ध शाह
  3. सढौरा की पठान सेना का नेता – गुरु गोबिन्द सिंह जी
  4. मसन्द प्रथा को समाप्त किया – मुग़ल सम्राट औरंगजेब

उत्तर-

  1. ज़फरनामा-मुग़ल सम्राट औरंगजेब,
  2. गोबिन्द राय जी की दस्तारबंदी-लखनौर,
  3. सढौरा की पठान सेना का नेता-पीर बुद्धू शाह,
  4. मसन्द प्रथा को समाप्त किया-गुरु गोबिन्द सिंह जी।

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छोटे उत्तर वाले प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
पहाड़ी राजाओं तथा गुरु गोबिन्द सिंह जी के बीच भंगानी के युद्ध ( 1688 ई०) पर एक संक्षिप्त नोट लिखो।
(Sure)
उत्तर-
पहाड़ी राजा गुरु जी द्वारा की जा रही सैनिक तैयारियों को अपने लिए खतरा समझते थे। इस कारण वे गुरु जी के विरुद्ध थे। इन्हीं दिनों एक और घटना घटी। बिलासपुर के पहाड़ी राजा भीमचन्द ने अपने पुत्र की बारात को पाऊंटा से गुजारना चाहा, परन्तु गुरु जी ने उसे पाऊंटा से गुजरने की आज्ञा न दी। भीमचन्द ने इसे अपना अपमान समझा
और उसने पुत्र के विवाह के पश्चात् अन्य पहाड़ी राजाओं की सहायता से गुरु जी पर आक्रमण कर दिया। पाऊंटा से कोई 6 मील दूर भंगानी नामक स्थान पर घमासान लड़ाई लड़ी गई। युद्ध में पठान तथा उदासी सैनिक गुरु जी का साथ छोड़ गए। परन्तु ठीक उसी समय सढौरा का पीर बुद्धू शाह गुरु जी की सहायता के लिए आ पहुंचा। अपने 4 पुत्रों और 700 शिष्यों सहित उनकी सहायता से गुरु जी ने पहाड़ी राजाओं को बुरी तरह परास्त किया। यह गुरु जी की पहली महत्त्वपूर्ण विजय थी।

प्रश्न 2.
खालसा की स्थापना पर एक संक्षिप्त नोट लिखो।
उत्तर-
1699 ई० को वैशाखी के दिन गुरु गोबिन्द सिंह जी ने आनन्दपुर में एक विशाल सभा बुलाई। इस सभा में लगभग 80 हजार लोग शामिल हुए। जब सभी लोग अपने-अपने स्थान पर बैठ गए तो गुरु जी ने नंगी तलवार घुमाते हुए कहा-“क्या आप में कोई ऐसा सिक्ख है जो धर्म के लिए अपना सिर दे सके ?” गुरु जी ने इस वाक्य को तीन बार दोहराया। तब लाहौर निवासी दयाराम ने अपने को बलिदान के लिए पेश किया। गुरु जी उसे शिविर में ले गए। बाहर आकर उन्होंने एक बार फिर बलिदान की मांग की। तब क्रमशः धर्मदास, मोहकमचन्द, साहिब चन्द, हिम्मत राय बलिदान के लिए उपस्थित हुए। सिक्ख इतिहास में इन पांच व्यक्तियों को ‘पंज प्यारे’ कह कर पुकारा जाता है। गुरु जी ने दोधारी तलवार खण्डा से तैयार किया हुआ पाहुल अर्थात् अमृत उन्हें छकाया। वे ‘खालसा’ कहलाए और सिंह बन गए। गुरु जी ने स्वयं भी उनके हाथों से अमृतपान किया। इस प्रकार गुरु गोबिन्द राय से गुरु गोबिन्द सिंह जी बन गए।

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प्रश्न 3.
पूर्व खालसा काल ( 1675 से 1699) में गुरु गोबिन्द सिंह जी की किन्हीं चार सफलताओं का वर्णन करो।
उत्तर-
इस काल में गुरु साहिब की चार सफलताओं का वर्णन इस प्रकार है

  1. सेना का संगठन-गुरु गोबिन्द सिंह जी अभी 9 वर्ष के ही थे कि उनके पिता को हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए शहीदी देनी पड़ी! गुरु जी ने धर्म की रक्षा करनी थी। इसलिए उन्होंने सेना का संगठन करना आरम्भ कर दिया।
  2. रणजीत नगारे का निर्माण-गुरु जी ने एक नगारा भी बनवाया जिसे रणजीत नगारा के नाम से पुकारा जाता था। शिकार पर निकलते समय इस नगारे को बजाया जाता था।
  3. पाऊंटा दुर्ग का निर्माण-गुरु जी नाहन के राजा मेदिनी प्रकाश के निमन्त्रण पर उसके यहां गए। वहां उन्होंने पाऊंटा नामक किले का निर्माण करवाया।
  4. पहाड़ी राजाओं से संघर्ष-1688 ई० में बिलासपुर के राजा भीमचन्द ने अन्य पहाड़ी राजाओं की सहायता से गुरु जी पर आक्रमण कर दिया। भंगानी नामक स्थान पर घमासान लड़ाई हुई। युद्ध में गुरु जी ने पहाड़ी राजाओं को बुरी तरह परास्त किया।

प्रश्न 4.
सिक्ख इतिहास में खालसा की स्थापना का क्या महत्त्व है?
उत्तर-
सिक्ख इतिहास में खालसा की स्थापना एक अति महत्त्वपूर्ण घटना मानी जाती है।

  1. इसकी स्थापना से सिक्खों के एक नए वर्ग-सन्त सिपाहियों का जन्म हुआ। इससे पहले सिक्ख केवल नाम जपने को ही वास्तविक धर्म मानते थे, परन्तु अब गुरु जी ने तलवार को भी धर्म का आवश्यक अंग बना दिया।
  2. खालसा की स्थापना से सिक्खों की संख्या लगातार बढ़ने लगी। खालसा के नियमों के अनुसार कोई भी पांच सदाचारी सिक्ख ‘खण्डे का पाहुल’ छका कर अर्थात् अमृतपान करा कर किसी को भी खालसा पन्थ में सम्मिलित कर सकते थे।
  3. खालसा की स्थापना से पंजाब में जातीय भेदभाव की दीवारें टूटने लगी और शताब्दियों से पिसती आ रही दलित जातियों को नया जीवन मिला।
  4. खालसा की स्थापना से सिक्खों में वीरता की भावना उत्पन्न हुई। निर्बल से निर्बल सिक्ख भी सिंह (शेर) का रूप धारण करके सामने आया।

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प्रश्न 5.
गुरु गोबिन्द सिंह जी के चरित्र एवं व्यक्तित्व की कोई चार महत्त्वपूर्ण विशेषताएं बताओ।
उत्तर-
गुरु गोबिन्द सिंह जी एक महान् चरित्र तथा व्यक्तित्व के स्वामी थे।

  1. महान् विद्वान्-गुरु साहिब एक उच्च कोटि के विद्वान् भी थे। उन्हें पंजाबी, संस्कृत, फ़ारसी तथा ब्रज भाषा का पूरा ज्ञान था। उन्होंने अनेक काव्यों की रचना की जिसमें ‘अकाल उस्तत’, ‘बचित्तर नाटक’ तथा ‘चण्डी दी वार’ प्रमुख हैं।
  2. महान् संगठनकर्ता, सैनिक तथा सेनानायक-गुरु जी एक महान् संगठनकर्ता, सैनिक तथा सेनानायक थे। उन्होंने खालसा की स्थापना करके सिक्खों को सैनिक रूप से संगठित किया। उन्होंने कई लड़ाइयों में अपने सैनिकों का कुशल नेतृत्व भी किया।
  3. महान् सन्त तथा धार्मिक नेता-गुरु साहिब एक महान् सन्त तथा धार्मिक नेता के गुणों से परिपूर्ण थे। उन्होंने अपने सिक्खों में गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं का प्रचार किया और धर्म की रक्षा के लिए उन्हें लड़ना सिखाया।
  4. उच्चकोटि के समाज सुधारक-गुरु साहिब ने जाति-पाति का विरोध किया और अन्य सामाजिक कुरीतियों की घोर निन्दा की।

प्रश्न 6.
क्या गुरु गोबिन्द सिंह जी एक राष्ट्र-निर्माता थे ? किन्हीं चार तथ्यों के आधार पर अपने तथ्यों की पुष्टि कीजिए।
उत्तर-
गुरु गोबिन्द सिंह जी निःसन्देह एक महान् राष्ट्र निर्माता थे।

  1. गुरु साहिबान ने गुरु नानक देव जी द्वारा रखी गई नींव के ऊपर एक ऐसे महल का निर्माण किया जहां बैठ कर लोग अपने भेदभाव भूल गए। मुसलमानों से युद्ध करने में उनका उद्देश्य कोई अलग राज्य स्थापित करना नहीं था बल्कि देश से अत्याचारों का नाश करना था। उनका मुग़लों से कोई धार्मिक विरोध नहीं था।
  2. गुरु साहिब ने खालसा की स्थापना करके सिक्खों में एकता की भावना उत्पन्न की। इससे खालसा के द्वार सभी जातियों के लिए समान रूप से खुले थे। अतः गुरु जी द्वारा स्थापित यह संस्था एक राष्ट्रीय संस्था ही थी।
  3. गुरु साहिब ने जिस साहित्य की रचना की वह किसी एक जाति के लिए नहीं अपितु पूरे राष्ट्र के लिए है।
  4. गुरु साहिब द्वारा समाज सुधार कार्य भी राष्ट्र निर्माण से ही प्रेरित था।

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बड़े उत्तर वाले प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
भंगानी के युद्ध ( 1688 ई०) का विस्तृत वर्णन कीजिए।
उत्तर-
भंगानी का युद्ध 1688 ई० में पहाड़ी राजाओं तथा गुरु गोबिन्द सिंह जी के बीच हुआ। इस युद्ध में भाग लेने वाले प्रमुख पहाड़ी राजा थे-बिलासपुर का शासक भीमचन्द, कटोच का शासक कृपाल, श्रीनगर का शासक फतेहशाह, गुलेर का शासक गोपालचन्द तथा जस्सोवाल का शासक केसर चन्द। इन राजाओं का मुखिया बिलासपुर का राजा भीमचन्द था।
कारण-गुरु जी तथा पहाड़ी राजाओं के बीच भंगानी के युद्ध के मुख्य कारण निम्नलिखित थे

  1. गुरु जी ने अपने अनुयायियों को अपनी सेना में भर्ती करना आरम्भ कर दिया था। उन्होंने सैनिक सामग्री भी इकट्ठी करनी आरम्भ कर दी थी। पहाड़ी राजा गुरु जी की इन सैनिक गतिविधियों को सन्देह की दृष्टि से देखने लगे।
  2. पहाड़ी राजा मूर्ति-पूजा में विश्वास रखते थे, परन्तु गुरु जी ने पाऊंटा में रहते हुए मूर्ति-पूजा का घोर खण्डन किया।
  3. गुरु जी अब शाही ठाठ-बाठ से रहने लगे थे। उनके इस कार्य से भी पहाड़ी राजाओं के मन में ईर्ष्या पैदा हो गई।
  4. गुरु जी पहाड़ी प्रदेश में रहकर सैनिक तैयारियां कर रहे थे। अत: पहाड़ी राजा यह नहीं चाहते थे कि गुरु जी के कारण उन्हें सम्राट औरंगज़ेब से उलझना पड़े।
  5. सिक्ख गुरु जी को बहुमूल्य भेटें देते रहते थे। इन भेंटों के कारण पहाड़ी राजा गुरु जी से ईर्ष्या करने लगे थे।
  6. इस युद्ध का तात्कालिक कारण यह था कि बिलासपुर के पहाड़ी राजा भीमचन्द ने अपने पुत्र की बारात को पाऊंटा में से गुज़ारना चाहा। परन्तु गुरु जी को उसकी नीयत पर सन्देह था, इसलिए उन्होंने उसे ऐसा करने की अनुमति न दी। क्रोध में आकर उसने अन्य पहाड़ी राजाओं की सहायता से गुरु जी पर आक्रमण कर दिया।

घटनाएं-गुरु साहिब ने युद्ध के लिए भंगानी नामक स्थान को चुना। युद्ध शुरू होते ही गुरु जी के लगभग 500 पठान सैनिक उनका साथ छोड़ गए। परंतु उसी समय सढौरा के पीर बुद्ध शाह अपने चार पुत्रों तथा 700 अनुयायियों सहित गुरु जी से आ मिला। 22 सितंबर 1688 ई० को दोनों पक्षों में एक घमासान युद्ध हुआ। वीरतापूर्वक लड़ते हुए सिक्खों ने पहाड़ी राजाओं को बुरी तरह हराया।

युद्ध का महत्त्व-भंगानी की विजय गुरु गोबिन्द सिंह जी के जीवन की पहली तथा अत्यन्त महत्त्वपूर्ण विजय थी। इसका निम्नलिखित महत्त्व था

  1. इस विजय से गुरु जी की शक्ति की धाक जम गई।
  2. गुरु जी को विश्वास हो गया कि वह अपने अनुयायियों को अच्छी तरह से संगठित करके मुग़लों के अत्याचारों का सफलतापूर्वक सामना कर सकते हैं।
  3. पहाड़ी राजाओं ने गुरु जी का विरोध छोड़कर उनसे मित्रतापूर्ण सम्बन्ध स्थापित कर लिए।
  4. इस विजय ने गुरु जी को पाऊंटा साहिब छोड़कर फिर से आनन्दपुर में जाने का अवसर प्रदान किया।
  5. राजा भीमचन्द ने विशेषकर गुरु जी से मित्रता की नीति अपनाई।
  6. गुरु साहिब ने भीमचन्द की मित्रता का लाभ उठाते हुए आनन्दपुर में आनन्दगढ़, केशगढ़, लोहगढ़ तथा फतेहगढ़ नामक चार किलों का निर्माण करवाया।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित बिन्दुओं के आधार पर गुरु गोबिन्द सिंह जी के चरित्र एवं व्यक्तित्व का वर्णन कीजिए

  1. संगठनकर्ता
  2. सन्त तथा धार्मिक नेता
  3. समाज सुधारक
  4. कवि तथा विद्वान्।

उत्तर-

  1. संगठनकर्ता के रूप में गुरु गोबिन्द सिंह जी एक महान् संगठनकर्ता थे। उनकी संगठन शक्ति असाधारण थी। उन्होंने ‘खालसा की स्थापना’ करके सामाजिक तथा धार्मिक भेदभावों के कारण बिखरी हुई सिक्ख जनता को एक सूत्र में पिरो दिया। गुरु जी पहले भारतीय नेता थे, जिन्होंने प्रजातन्त्रात्मक सिद्धान्त सिखाए तथा अपने अनुयायियों को गुरमत्ता अर्थात् सब. की राय पर चलने को तैयार किया।” वास्तव में ही गुरु गोबिन्द सिंह जी ने ‘खालसा’ का द्वार सभी जातियों के लिए खोलकर एक राष्ट्रीय संगठन को जन्म दिया।
  2. सन्त तथा धार्मिक नेता के रूप में गुरु जी एक धार्मिक नेता के रूप में महान् थे। सहनशीलता उनके धर्म का विशेष गुण था। उन्हें इस्लाम धर्म उतना ही प्यारा था जितना कि अपना धर्म, परन्तु गुरु, जी का धर्म यह आज्ञा नहीं देता था कि माला हाथ में लिए चुपचाप अत्याचारों को सहन करते जाओ। उनकी ‘खालसा स्थापना’ का मुख्य उद्देश्य ही अत्याचारों का विरोध करना था।
    एक सन्त होने के नाते गुरु जी को सर्वशक्तिमान ईश्वर पर पूरा भरोसा था और वह अपने सभी कार्य उसी की कृपा पर छोड़ देते थे। उनके महान् सन्त होने का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि उनकी नज़र में धन की कोई कीमत नहीं थी। उन्हें जब कभी भी कहीं से धन प्राप्त हुआ, उन्होंने सारे का सारा धन निर्धनों तथा ज़रूरतमन्दों में बांट दिया।
  3. समाज सुधारक के रूप में गुरु गोबिन्द सिंह जी एक महान् सुधारक भी थे। उन्होंने जाति-प्रथा और मूर्ति-पूजा आदि सामाजिक बुराइयों का घोर खण्डन किया। उनके द्वारा स्थापित ‘खालसा’ में सभी जातियों के लोग प्रवेश पा सकते थे। गुरु जी के प्रयत्नों से वे जातियां जो समाज पर कलंक समझी जाती थीं अब वीर योद्धा बन गईं और उन्होंने देश तथा धर्म की रक्षा का भार सम्भाल लिया। गुरु जी ने यज्ञ, बलि आदि व्यर्थ के कर्म काण्डों का खुला विरोध किया और समाज को एक आदर्श रूप प्रदान किया।
  4. कवि तथा विद्वान् के रूप में गुरु गोबिन्द सिंह जी एक उच्च कोटि के कवि तथा विद्वान् थे। उन्हें पंजाबी, संस्कृत, फारसी, हिन्दी आदि सभी भाषाओं का पूरा ज्ञान था। उन्हें कविता लिखने का विशेष चाव था। उनकी कविताएं मार्मिकता तथा वीरता से परिपूर्ण हैं। जापु साहिब, ज़फ़रनामा, चण्डी दी वार, अकाल उस्तत तथा बचित्तर नाटक गुरु जी की महत्त्वपूर्ण रचनाएं मानी जाती हैं। गुरु जी कवियों की संगति में बैठने में भी विशेष रुचि लेते थे। पाऊंटा में रहते हुए उनके पास 52 कवि थे।

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प्रश्न 3.
‘खालसा’ की स्थापना किस प्रकार हुई? इसके सिद्धान्तों का वर्णन करो।
उत्तर-
‘खालसा’ की स्थापना 1699 ई० में गुरु गोबिन्द सिंह जी ने की। इसे सिक्ख इतिहास की महानतम घटना माना जाता है। खालसा की स्थापना के मुख्य चरण निम्नलिखित थे

  1. पांच प्यारों का चुनाव-1699 ई० में बैसाखी के दिन गुरु गोबिन्द सिंह जी ने आनन्दपुर साहिब में सिक्खों की एक विशाल सभा बुलाई। इस सभा में विभिन्न प्रदेशों से 80,000 के लगभग लोग इकट्ठे हुए। गुरु जी सभा में पधारे और तलवार को म्यान से निकाल कर घुमाते हुए कहा-“कोई ऐसा सिक्ख है जो धर्म के लिए अपने प्राणों का बलिदान दे सके।” यह सुनकर सभा में सन्नाटा छा गया। गुरु जी ने अपने शब्दों को तीन बार दोहराया। अन्त में दयाराम नामक एक क्षत्रिय ने अपने आपको बलिदान के लिए प्रस्तुत किया। गुरु जी उसे समीप लगे एक तम्बू में ले गये। कुछ समय के पश्चात् वह तम्बू से बाहर आए और उन्होंने एक और व्यक्ति का शीश मांगा। इस बार दिल्ली निवासी धर्मदास जाट ने अपने आप को भेंट किया। गुरु गोबिन्द सिंह जी ने यह क्रम तीन बार फिर दोहराया। क्रमशः मोहकम चन्द, साहिब चन्द तथा हिम्मत राय नामक तीन अन्य व्यक्तियों ने अपने आपको बलिदान के लिए प्रस्तुत किया। यहां यह स्पष्ट करना उचित होगा कि गुरु जी ने यह सब कुछ अपने अनुयायियों की परीक्षा लेने के लिए किया। तम्बू में गुरु जी ने उनके साथ क्या किया, इस बारे में वह स्वयं भली-भान्ति जानते थे। अन्त में गुरु जी पांचों व्यक्तियों को सभा के सामने लाए और उन्हें ‘पंज प्यारे’ की उपाधि दी।
  2. खण्डे का पाहुल-पांच प्यारों का चुनाव करने के पश्चात् गुरु जी ने उन्हें अमृतपान करवाया जिसे ‘खण्डे का पाहुल’ कहा जाता है। यह अमृत गुरु जी ने विभिन्न बाणियों का पाठ करते हुए स्वयं तैयार किया।
    सभी प्यारों के नाम के पीछे ‘सिंह’ शब्द जोड़ दिया गया। फिर गुरु जी ने पांच प्यारों के हाथ से स्वयं अमृत छका। इस प्रकार ‘खालसा’ का जन्म हुआ।

खालसा पंथ के सिद्धान्त

खालसा पंथ के सिद्धान्त निम्नलिखित हैं

  1. ‘खालसा’ में प्रवेश करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को ‘खण्डे का पाहुल’ का सेवन करना पड़ेगा। तब वह स्वयं को खालसा कहलवाएगा।
  2. प्रत्येक खालसा अपने नाम के साथ ‘सिंह’ शब्द लगाएगा और खालसा स्त्री अपने नाम के साथ ‘कौर’ शब्द लगाएगी।
  3. प्रत्येक खालसा पाँच ‘ककार’-केश, कंघा, कड़ा, कछहरा तथा किरपान धारण करेगा।
  4. खालसा केवल एक ईश्वर में विश्वास रखेगा तथा किसी देवी-देवता तथा मूर्ति की पूजा से दूर रहेगा।
  5. वह प्रात:काल जल्दी उठ कर स्नान करेगा और पाँच बाणियों-जपुजी साहिब, जापु साहिब, आनन्द साहिब, सवैये तथा चौपाई का पाठ करेगा।
  6. वह दस नाखूनों की किरत अर्थात् मेहनत की कमाई करेगा। वह अपनी नेक कमाई में से धार्मिक कार्यों के लिए दसवन्द (दसवां हिस्सा) भी निकालेगा।
  7. वह जाति-पाति तथा ऊँच-नीच के भेदभाव में विश्वास नहीं रखेगा।
  8. प्रत्येक खालसा गुरु तथा पंथ के लिए अपना सर्वस्व बलिदान करने को सदैव तैयार रहेगा।
  9. वह अस्त्र-शस्त्र धारण करेगा और धर्म की रक्षा के लिए युद्ध लड़ने के लिए तत्पर रहेगा।
  10. वह तम्बाकू तथा अन्य नशीली वस्तुओं का सेवन नहीं करेगा।
  11. वह नैतिकता का पालना करेगा और अपने चरित्र को शुद्ध रखेगा।
  12. खालसा लोग आपस में मिलते समय ‘वाहिगुरु जी का खालसा, वाहिगुरु जी की फतह’ कह कर एकदूसरे का अभिवादन करेंगे।

PSEB 10th Class SST Solutions History Chapter 5 गुरु गोबिन्द सिंह जी का जीवन, खालसा की संरचना, युद्ध तथा उनका व्यक्तित्व

गुरु गोबिन्द सिंह जी का जीवन, खालसा की संरचना, युद्ध तथा उनका व्यक्तित्व PSEB 10th Class History Notes

  • जन्म तथा माता-पिता-गुरु गोबिन्द साहिब का जन्म 22 दिसम्बर, 1666 ई० को पटना में हुआ। उनके पिता गुरु तेग़ बहादुर जी थे। उनकी माता जी का नाम गुजरी जी था।
  • बचपन तथा शिक्षा-गुरु गोबिन्द सिंह जी के बचपन का नाम गोबिन्द राय था। उनके जीवन के आरम्भिक पांच वर्ष पटना में बीते। उन्होंने फ़ारसी की शिक्षा काज़ी पीर मुहम्मद से तथा गुरुमुखी की शिक्षा भाई सतिदास से प्राप्त की। उन्होंने संस्कृत का ज्ञान पण्डित हरजस से तथा घुड़सवारी और अस्त्र-शस्त्र चलाने की शिक्षा (सैनिक शिक्षा) बजर सिंह नामक राजपूत से प्राप्त की।
  • सैनिक संगठन-गुरु गोबिन्द सिंह जी सिक्खों को सैनिक शक्ति बनाना चाहते थे। अतः उन्होंने भेंट में हथियार तथा घोड़े प्राप्त करने को अधिक महत्त्व दिया।
  • खालसा की स्थापना–’खालसा की स्थापना’ गुरु गोबिन्द सिंह जी ने 1699 ई० में की । खालसा की स्थापना के तीन प्रमुख उद्देश्य थे-मुग़लों के बढ़ते हुए अत्याचारों से मुक्ति, जाति प्रथा के दोषों को समाप्त करना तथा दोषपूर्ण मसन्द प्रथा का अन्त करना ।
  • पांच ककार-खालसा के पांच ककार थे-केश, कंघा, कड़ा, किरपाण तथा कछहरा।
  • खालसा की स्थापना का महत्त्व-खालसा की स्थापना से सिक्खों में एक नए वर्ग सन्त सिपाहियों का जन्म हुआ जिसके परिणामस्वरूप सिक्ख आगे चलकर राजनीतिक शक्ति के रूप में उभरे।
  • साहित्यिक रचनाएं-गुरु साहिब ने पाऊंटा में, ‘अकाल उस्तत’, ‘शस्त्र नाम माला’ तथा ‘चण्डी दी वार’ की रचना की।
  • भंगानी का युद्ध-भंगानी का युद्ध 1688 ई० में हुआ । इस युद्ध में बिलासपुर का राजा भीमचन्द तथा कांगड़ा का राजा कृपाल चन्द गुरु साहिब के विरुद्ध लड़े और पराजित हुए।
  • नादौन का युद्ध-नादौन का युद्ध 1690 ई० में हुआ। यह युद्ध मुग़लों और पहाड़ी राजाओं के बीच हुआ। गुरु गोबिन्द सिंह जी इस युद्ध में पहाड़ी राजाओं के पक्ष में लड़े थे। उन्होंने मुग़ल सेनाओं को परास्त किया।
  • आनन्दपुर का प्रथम युद्ध, 1701 ई०-आनन्दपुर का प्रथम युद्ध बिलासपुर के पहाड़ी राजा भीमचन्द तथा गुरु गोबिन्द सिंह जी के बीच हुआ। इस युद्ध में गुरु जी ने पहाड़ी राजा को बुरी तरह परास्त किया।
  • आनन्दपुर का दूसरा युद्ध, 1704 ई०-आनन्दपुर के दूसरे युद्ध में बिलासपुर, कांगड़ा तथा गुलेर के पहाड़ी राजा गुरु साहिब के विरुद्ध लड़े । इस युद्ध में गुरु गोबिन्द सिंह जी की विजय हुई।
  • ज्योति-जोत समाना-गुरु जी 1708 ई० में मुग़ल सम्राट् बहादुरशाह के साथ दक्षिण की ओर गए। कुछ समय के लिए वह नांदेड़ नामक स्थान पर ठहरे। वहीं पर 7 अक्तूबर, 1708 ई० को छुरा लगने से ‘गुरु साहिब’ ज्योतिजोत समा गए।

PSEB 8th Class Home Science Solutions Chapter 1 निजी देखभाल

Punjab State Board PSEB 8th Class Home Science Book Solutions Chapter 1 निजी देखभाल Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 8 Home Science Chapter 1 निजी देखभाल

PSEB 8th Class Home Science Guide निजी देखभाल Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
भोजन के तत्त्वों के नाम लिखिए।
उत्तर-
कार्बोज, प्रोटीन, वसा, विटामिन तथा लवण।

प्रश्न 2.
ऊर्जा प्रदान करने वाले तत्त्व कौन-से होते हैं ?
उत्तर-
कार्बोहाइड्रेट्स तथा वसा।

प्रश्न 3.
प्रोटीन के दो प्रमुख प्राप्ति स्त्रोत बताएं।
उत्तर-
अण्डा व दालें।

PSEB 8th Class Home Science Solutions Chapter 1 निजी देखभाल

प्रश्न 4.
कैल्शियम हमारे शरीर के लिए क्यों आवश्यक है ?
अथवा
कैल्शियम का शरीर के लिए प्रमुख कार्य क्या है ?
अथवा
कैल्शियम के कोई दो लाभ बताओ।
उत्तर-

  1. शरीर में अस्थियों और दाँतों का निर्माण करना।
  2. स्नायुओं को स्वस्थ रखता है।

प्रश्न 5.
भारतीय आहार में प्रमुख कमी कौन-सी है ?
उत्तर-
भोजन में कैलोरियों की मात्रा कम होना।

प्रश्न 6.
गर्मियों में सूती कपड़े क्यों पहने जाते हैं ?
उत्तर-
सूती कपड़े गर्मी के संचालक हैं तथा पानी कम चूसते हैं।

PSEB 8th Class Home Science Solutions Chapter 1 निजी देखभाल

प्रश्न 7.
सिल्क के कपड़े मुख्यतः सर्दियों में पहने जाने का कारण लिखें।
उत्तर-
सिल्क गर्मी का अच्छा संचालक नहीं है इसलिए इसे सर्दियों में प्रयोग करते हैं।

प्रश्न 8.
खाने के साथ ज्यादा पानी क्यों नहीं पीना चाहिए?
उत्तर-
खाने के साथ अधिक पानी नहीं पीना चाहिए, क्योंकि भोजन को पचाने वाले रस पतले हो जाते हैं और भोजन जल्दी से पचता नहीं है।

प्रश्न 9.
पैरों के लिए जूते और जुराब का चुनाव करते समय सबसे अधिक ध्यान रखने योग्य बात कौन-सी है ?
उत्तर-
जुराबें और जूते तंग नहीं हों। जूते खुले भी न हों तथा जुराबों का इलास्टिक तंग न हो।

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लघूत्तर प्रश्न

प्रश्न 1.
आवश्यकता से अधिक या कम खाने के क्या नुकसान हैं ?
उत्तर-
अगर आवश्यकता से अधिक खाना खाते हैं तो आमाशय और आंतों को अधिक मेहनत करनी पड़ती है। इससे गुर्दो पर भी अधिक दबाव पड़ता है। खाए हुए भोजन में उबाल-सा आ जाता है जिससे गैस बनती है। इससे पेट खराब हो जाता है। मुंह से बदबू आने लग जाती है और सिर दखने लग जाता है।

अगर अधिक समय तक आवश्यकता से अधिक भोजन खाया जाए तो पेट की बीमारियां हो जाती हैं, जैसे-आमाशय की बीमारियां, गुर्दो में खराबी और खून का दबाव बढ़ सकता है। तन्तुओं में अधिक चर्बी जम जाती है और आदमी मोटा हो जाता है। पेशाब में शक्कर आने का रोग हो जाता है।

अगर आवश्यकता से कम खाना खाते हैं तो भार में कमी आ जाती है, कमज़ोरी और खून की कमी हो जाती है। कम खाने से बीमारियों का सामना करने की शक्ति कम हो जाती है और विशेषकर तपेदिक होने का डर रहता है। बच्चे यदि कम खाना खाएं तो मन्द बुद्धि के हो जाते हैं और जल्दी थक जाते हैं। उनके शरीर का विकास भी पूरा नहीं होता और उनका कद और भार भी अपनी आयु के अनुसार कम रहता है।

प्रश्न 2.
क्रीम और तेल क्यों प्रयोग किए जाते हैं ? इनकी जगह और क्या इस्तेमाल किया जा सकता है ?
उत्तर-
प्रतिदिन साबुन के साथ स्नान करने और सिर धोने से त्वचा खुश्क हो जाती है। हमारी त्वचा की ऊपरी तह के तन्तु भी झड़कर त्वचा पर जम जाते हैं और त्वचा को खुश्क करते हैं। ये सैल सिकरी के रूप में सिर में देखे जा सकते हैं। पतझड़ और सर्दियों में त्वचा अधिक खुश्क हो जाती है जिसके लिए ज़रूरी हो जाता है कि त्वचा को चमकदार और लचकदार बनाने के लिए सिर और शरीर की किसी तेल के साथ मालिश करनी चाहिए। सिर और त्वचा पर तेल सिर्फ मला ही नहीं जाता बल्कि मालिश की जाती है। इस तरह करने से हमारी त्वचा के नीचे की तेल की ग्रन्थियाँ हरकत में आ जाती हैं और इनसे कुदरती तेल निकलते हैं जो हमारी त्वचा को मुलायम रखते हैं।

चेहरे पर लगाने के लिए आजकल कई तरह की क्रीमें बाजार में मिलती हैं। विशेषकर सर्दियों में बच्चों के मुँह फट जाते हैं। इसको ठीक करने के लिए भी चिकनाई वाली क्रीम लगाई जाती है। आजकल और भी कई तरह की क्रीमें मिलती हैं, जिनको लगाने से चेहरे की कील, छाइयां दूर होती हैं और चेहरे पर निखार आता है। तेल और क्रीम की जगह मक्खन, ग्लिसरीन या ग्लिसरीन में नींबू का रस मिलाकर इस्तेमाल कर सकते हैं। इनसे भी चेहरा मुलायम होता है।

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प्रश्न 3.
टेलकम पाउडर के क्या लाभ हैं ?
उत्तर-
टेलकम पाउडर से निम्नलिखित लाभ हैं-

  1. टेलकम पाउडर पसीने को सोख लेता है।
  2. इसे लगाने से पसीने की बदबू नहीं आती है।
  3. टेलकम पाउडर के इस्तेमाल से कपड़ों पर पसीने का धब्बा नहीं होता।
  4. इसका इस्तेमाल दवाइयों के रूप में भी किया जाता है।

प्रश्न 4.
कपड़े क्यों पहने जाते हैं ? (पंजाब बोर्ड, 2002, 03, 04, 06)
अथवा
कपड़ों की आवश्यकता के क्या कारण हैं ?
उत्तर-

  1. गर्मी, सर्दी और मौसम की कठिनाइयों से बचने के लिए कपड़े पहने जाते हैं।
  2. कपड़े पहने हों तो मच्छर, कीट आदि के काटने से बचा जा सकता है।
  3. गिरने पर शरीर पर चोट का प्रभाव कम होता है।
  4. अग्निशमन करने वालों के कपड़े विशेष रेशे से बनते हैं, जिनमें आग कम लगती है।

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प्रश्न 5.
कपड़ों के रेशे कितनी प्रकार के होते हैं ? वर्णन करो।
अथवा
पहनने वाले वस्त्र किन-किन रेशों से बने होते हैं ? वर्णन कीजिए।
उत्तर-
कपड़ों के रेशे मुख्य रूप से पाँच प्रकार के होते हैं-
(1) सूती कपड़े,
(2) लिनन,
(3) रेशम
(4) ऊन,
(5) टैरीलीन, नाइलॉन आदि।

1. सूती कपड़े-ये कपास से बनाये जाते हैं। सूती कपड़े गर्मी के अच्छे संचालक होते हैं और पानी को बहुत अधिक नहीं सोखते। सूती कपड़ा अधिक मज़बूत और सस्ता होता है।
निजी देखभाल इसलिए प्रत्येक घरों में इसका इस्तेमाल किया जाता है। गर्मियों के दिनों में नीचे पहनने और ऊपर पहनने के लिए तथा सर्दियों में नीचे पहनने के लिए इन कपड़ों का इस्तेमाल किया जाता है।

2. लिनन-यह पौधों से बनाई जाती है। यह सूती कपड़े की अपेक्षा अधिक महंगी होती है। देखने में यह सूती कपड़े की अपेक्षा अधिक चमकदार, स्पर्श करने में मुलायम और सूती कपड़े की अपेक्षा अधिक अच्छी लगती है, परन्तु पहनने और धोने में सूती कपड़े के समान ही होती है।

3. रेशम- यह रेशम के कीड़ों से बनायी जाती है। यह गर्मी की अच्छी संचालक नहीं होती और पानी भी अधिक नहीं सोखता है। इसलिए इसका इस्तेमाल सर्दियों में किया जाता है। रेशम नर्म और चमकदार होने के कारण पहनी हुई लगती है। लेकिन महंगी होने के कारण इसका अधिक इस्तेमाल नहीं किया जाता।

4. ऊन-यह गर्मी की अच्छी संचालक नहीं होती। पानी भी अधिक सोखती है। इसलिए ऊनी कपड़े सर्दियों में पहने जाते हैं। ऊनी कपड़े खुले बुने हुए होते हैं। इनके छेदों में हवा भर जाती है, जो शरीर की गर्मी को बाहर नहीं जाने देती। पोले होने के बावजूद भी यह शरीर में नहीं चिपकती क्योंकि यह अधिक पानी सोखती है। ऊनी कपड़े थोड़े खुरदरे होते हैं। इसलिए ऊनी रेशों के नीचे पहनने वाले कपड़े नहीं बनाए जाते।

5. टैरीलीन, नाइलॉन आदि-ये कपड़े पहनने में हल्के, धोने में आसान और अधिक दिनों तक चलते हैं। ये कपड़े पानी को नहीं सोखते और गर्मी के अच्छे संचालक नहीं होते। इसलिए गर्मियों में नहीं पहने जा सकते। ये धोने में आसान और बिना प्रैस किए ही पहने जा सकते हैं। इसकी जुराबें और जाँघिए भी बनाए जाते हैं।

प्रश्न 6.
जूते और जुराबें किस प्रकार की होनी चाहिए ?
उत्तर-
जूते और जुराबें नाप के अनुसार होनी चाहिएं। जूते तंग भी न हों तथा न ही खुले हों। दोनों स्थितियों में पैरों में दर्द होगा या जख्म हो सकते हैं। जुराबों का ईलास्टिक भी तंग न हो।

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प्रश्न 7.
तंग कपड़े पहनने से क्या हानियाँ होती हैं ?
उत्तर-
तंग कपड़े पहनने से निम्नलिखित हानियां होती हैं

  1. तंग कपड़े पहनने से खून का दौरा, साँस लेने की क्रिया, पाचन क्रिया और मांसपेशियों की हिलजुल ठीक तरह नहीं हो सकती।
  2. तंग कपड़े पहनने से ठीक ढंग से उटना, बैठना और काम करना मुश्किल हो जाता
  3. पेटियाँ ज्यादा कसकर नहीं बाँधनी चाहिएं और लचकदार हिस्से भी ज्यादा तंग नहीं होने चाहिएं।
  4. तंग पोशाक में खुली पोशाक की अपेक्षा अधिक सर्दी लगती है।

प्रश्न 8.
निशास्ते वाले भोजन पदार्थों से कौन-सा पौष्टिक तत्त्व मिलता है ?
उत्तर-
निशास्ते वाले भोजन पदार्थों से कार्बोहाइड्रेट पौष्टिक तत्त्व मिलता है। इससे हमें ऊर्जा मिलती है तथा हमारा शरीर कार्य करने में सक्षम होता है।

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प्रश्न 9.
वनस्पति और प्राणीजन प्रोटीन में क्या अन्तर है ?
अथवा
प्रोटीन की प्राप्ति के स्रोत बताओ।
उत्तर-
वनस्पति तथा प्राणीजन प्रोटीन में अन्तर-

वनस्पति प्रोटीन प्राणी जन प्रोटीन
1. अनाज-गेहूँ, ज्वार, बाजरा, चावल, मकई, रागी, जई से प्राप्त होता है। 1. जन्तु प्रोटीन-अण्डा, मांस, मछली, कलेजी आदि से प्राप्त होता है।
2. दालें-अरहर, उरद, मूंग, मसूर, सोयाबीन व चने की दाल, चपटी सेम, सूखी मटर आदि से प्राप्त होता है। 2. दूध व दूध से बने पदार्थ- गाय, भैंस, बकरी व माता का दूध, सूखा दूध, दही, पनीर आदि से प्राप्त होता है।

 

प्रश्न 10.
तन्तुओं की मरम्मत और नये तन्तुओं के निर्माण के लिए भोजन के कौनसे पौष्टिक तत्त्व आवश्यक हैं ?
अथवा
शरीर के विकास के लिए भोजन का कौन-सा पोषक तत्त्व ज़रूरी है ?
उत्तर-
तन्तुओं की मरम्मत तथा नये तन्तु बनाने के लिए भोजन में प्रोटीन नामक पौष्टिक तत्व होता है। इस तत्व को दालों, पनीर, दूध, दही, मीट, अण्डा आदि से प्राप्त किया जा सकता है। सोयाबीन इसका सबसे सस्ता स्रोत है।

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प्रश्न 11.
कोई ऐसा भोजन बताओ, जिसे पूर्ण आहार कहा जा सके।
उत्तर-
ऐसा भोजन पदार्थ जिसमें से हमें सभी पौष्टिक तत्व प्राप्त हो जाएं को पूर्ण आहार कहा जाता है। ऐसे दो पदार्थ हैं :-

  1. दूध
  2. अण्डा।

प्रश्न 12.
तेल से शरीर की मालिश करने का क्या लाभ है ?
उत्तर-
तेल से शरीर पर मालिश करने का लाभ यह है कि हमारी त्वचा के नीचे की तेल की ग्रन्थियां हरकत में आ जाती हैं और इनसे कुदरती तेल निकलते हैं जो हमारी त्वचा को मुलायम रखते हैं।

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प्रश्न 13.
त्वचा के नीचे स्थित तेल ग्रन्थियों को उत्तेजित करने के लिए क्या करना चाहिए ?
उत्तर-
त्वचा के नीचे की तेल ग्रन्थियों को उत्तेजित करने के लिए तेल से मालिश करना चाहिए।

प्रश्न 14.
कोल्ड क्रीम और वेनिशिंग क्रीम में क्या अन्तर है ?
उत्तर-
कोल्ड क्रीम और वेनिशिंग क्रीम में अन्तर

कोल्ड क्रीम केनिशिंग क्रीम
(1) कोल्ड क्रीम सर्दियों में इस्तेमाल की जाती है। (1) वेनिशिंग क्रीम किसी भी ऋतु में  इस्तेमाल की जा सकती है।
(2) कोल्ड क्रीम में चिकनाई होती है। (2) वेनिशिंग क्रीम में चिकनाई नहीं होती है।

 

प्रश्न 15.
ठीक ढंग से कपड़े पहनने का क्या महत्त्व है ?
उत्तर-
ठीक ढंग के कपड़े पहनने का निम्नलिखित महत्त्व है-

  1. यह शरीर को गर्मी, सर्दी और बाहर की चोटों से बचाता है।
  2. यह शरीर की गर्मी को ठीक रखता है।
  3. ठीक ढंग के कपड़े अपने आपको सजाने और मर्यादा रखने के लिए भी पहनते हैं।

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प्रश्न 16.
जूते पैरों के नाप के क्यों होने चाहिएं ?
उत्तर–
पाँव के बूट न तंगा और न ही अधिक खुले बल्कि माप के होने चाहिए। तंग जूतों में पाँव घुटे रहते हैं और पाँव पर छाले पड़ जाते हैं। अधिक खुले जूते में भी पाँव हिलता रहता है जिससे ज़ख्म हो सकते हैं। इसलिए जूते माप के ही खरीदने चाहिएं।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
भोजन के कौन-कौन से तत्त्व हैं और ये कौन-कौन से स्रोतों से मिलते हैं ?
उत्तर-
भोजन के तत्त्व छ: प्रकार के होते हैं-
(1) कार्बोहाइड्रेट,
(2) वसा (चिकनाई),
(3) प्रोटीन,
(4) पानी,
(5) खनिज लवण,
(6) विटामिन।
प्राप्ति के स्रोत-

  1. कार्बोहाइड्रेट के स्रोत-चावल, आटा, आलू, शक्करकंदी, केला, गुड़, चीनी, शहद, फल।
  2. वसा (चिकनाई) स्रोत-दूध, घी, मक्खन, तेल, तेलों के बीज, सूखे मेवे, जानवरों की चर्बी और वनस्पति घी।
  3. प्रोटीन के स्रोत-वनस्पति प्रोटीन–सोयाबीन, राजमाह, चने, दालें, मटर, फलियों से। पशु-प्रोटीन-अण्डा, दूध, मांस, मछली और मुर्गे आदि।
  4. पानी के स्रोत-भोजन जो हम खाते हैं तथा पानी जो हम पीते हैं।
  5. खनिज लवण के स्रोत–दूध, कलेजी, अण्डे, हरी सब्जियां, फल आदि।
  6. विटामिन के स्त्रोत-दूध, दही, अण्डे का पीला भाग, मछली के यकृत के तेल, मछली, घी, मक्खन, हरी पत्तेदार सब्जियां, टमाटर, गाजर, पका पपीता, आम, कद्, सन्तरा, नींबू आदि।

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प्रश्न 2.
भोजन खाते समय किन-किन बातों का ध्यान रखना आवश्यक है ?
उत्तर-
भोजन खाते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना आवश्यक है-

  1. भोजन हमेशा ताज़ा और खुशबूदार होना चाहिए ताकि खाने का दिल करे।
  2. भोजन बासी, ज़रूरत से कम या अधिक पका हुआ नहीं होना चाहिए।
  3. सुबह और शाम के खाने में भिन्नता होनी चाहिए।
  4. खाना हमेशा समय पर खाना चाहिए।
  5. आवश्यकता से अधिक खाना खाने से पेट खराब हो सकता है, क्योंकि आमाशय को अधिक कार्य करना पड़ता है।
  6. खाने के साथ अधिक पानी नहीं पीना चाहिए क्योंकि भोजन को पचाने वाले रस पतले हो जाते हैं और भोजन जल्दी पचता नहीं है।
  7. भोजन को धीरे-धीरे अच्छी तरह चबाकर खाना चाहिए।

प्रश्न 3.
साबुन का निजी सफ़ाई में क्या महत्त्व है ?
उत्तर-
हमारे शरीर की त्वचा के नीचे तेल की ग्रन्थियां होती हैं, जिनमें से तेल निकलकर त्वचा पर आता रहता है। ऊपर की त्वचा के तन्तु भी टूटते रहते हैं जो कि तेल के कारण त्वचा के साथ चिपके रहते हैं। वातावरण से उड़कर मिट्टी और कपड़ों की चूर्ण भी त्वचा के साथ लग जाती है। गर्मियों में शरीर पर पसीना भी बहुत आता है। यदि इन सारी चीज़ों को शरीर से न साफ़ किया जाए तो त्वचा के साथ ही चिपकी रह जाएगी जिनमें बैक्टीरिया पलने लगेंगे। इससे न केवल शरीर से बदबू आने लगती है, बल्कि कई तरह के त्वचा के रोग भी हो जाते हैं। इनको सिर्फ पानी के साथ ही धोने से साफ़ नहीं किया जा सकता है। साबुन मलने से चिकनाई पानी में घुल जाती है और फिर मैल भी पानी से साफ़ हो जाती है। पूरे शरीर पर साबुन मलने से थोड़ी मालिश भी होती है जिससे त्वचा में हरकत होती है। स्नान के लिए हमेशा नरम साबुन का इस्तेमाल करना चाहिए।

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प्रश्न 4.
कपड़े पहनते समय कौन-कौन सी बातें ध्यान में रखना आवश्यक हैं ?
उत्तर-
कपड़े पहनते समय निम्नलिखित बातें ध्यान में रखना आवश्यक हैं-

  1. मौसम के अनुसार कपड़े पहनने चाहिए जिससे शरीर का तापमान ठीक रहे।
  2. गर्मियों में हल्के, खुले और फीके रंगों के कपड़े पहनने चाहिए।
  3. सर्दियों में काले या गाढ़े रंग के कपड़े पहनना लाभदायक है, क्योंकि ये रंग सबसे अधिक सूरज की किरणों को सोख लेते हैं।
  4. नीचे के कपड़े जो शरीर के साथ चिपके होते हैं रोज़ बदलने चाहिएं।
  5. रात और दिन में पहनने वाले कपड़े अलग-अलग होना चाहिएं। (6) गीले कपड़े नहीं पहनने चाहिएं।

Home Science Guide for Class 8 PSEB निजी देखभाल Important Questions and Answers

I. बहुविकल्पी प्रश्न

प्रश्न 1.
विटामिन B की कमी से कौन-सा रोग होता है ?
(क) बेरी-बेरी
(ख) स्कर्वी
(ग) अंधराता
(घ) अनीमिया।
उत्तर-
(क) बेरी-बेरी

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प्रश्न 2.
विटामिन C का स्रोत नहीं है
(क) आँवला
(ख) संगतरा
(ग) नींबू
(घ) कोई नहीं।
उत्तर-
(घ) कोई नहीं

प्रश्न 3.
ऊन के रेशों की सतह कैसी होती है ?
(क) खुरदरी
(ख) मुलायम
(ग) चीकनी
(घ) कोई नहीं।
उत्तर-
(क) खुरदरी

प्रश्न 4.
पानी में घुलनशील विटामिन है
(क) A
(ख) D
(ग) C
(घ) कोई नहीं।
उत्तर-
(ग) C

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प्रश्न 5.
कोल्ड क्रीम का प्रयोग ……… मौसम में किया जाता है।
(क) सर्द
(ख) गर्म
(ग) वरसात
(घ) कोई नहीं।
उत्तर-
(क) सर्द

प्रश्न 6.
दूध कैसा आहार है ?
(क) पूर्ण
(ख) आधा
(ग) अपूर्ण
(घ) साधारण।
उत्तर-
(क) पूर्ण

प्रश्न 7.
शरीर की सफ़ाई के लिए आवश्यक है। (From Board M.Q.P.)
(क) साबुन
(ख) तेल
(ग) क्रीम तथा पाऊडर
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(क) साबुन

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II. ठीक/गलत बताएं

  1. सोयाबीन में प्रोटीन तत्त्व मिलता है।
  2. आँवले में विटामिन C होता है।
  3. कोल्ड क्रीम में चिकनाई होती है।
  4. निशास्ते वाले भोजन में प्रोटीन अधिक होता है। 5. तंग वस्त्र पहनना अच्छी बात है।

उत्तर-

III. रिक्त स्थान भरें

  1.  ………………. क्रीम किसी भी ऋतु में प्रयोग की जा सकती है।
  2. शरीर का निर्माण करने वाले तत्त्व प्रोटीन तथा …….
  3. वनस्पति वाली खुराक में अधिक ……………… होता है।
  4. सिर और शरीर पर ………………. लगाने से त्वचा चमकदार रहती है।

उत्तर-

  1. वेनिशिंग,
  2. खनिज लवण,
  3. फोक,
  4. तेल।

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IV. एक शब्द में उत्तर देंप्रश्न

प्रश्न 1.
नींबू और संतरे में कौन-सा विटामिन पाया जाता है ?
उत्तर-
विटामिन सी।

प्रश्न 2.
विटामिन सी की कमी से कौन-सा रोग हो जाता है ?
उत्तर-
स्कर्वी।

प्रश्न 3.
दूध को कैसा आहार कहा जाता है ?
उत्तर-
सम्पूर्ण आहार।

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प्रश्न 4.
बेरी-बेरी रोग किस विटामिन की कमी से होता है ?
उत्तर-
विटामिन B की कमी से।

प्रश्न 5.
भोजन के कौन-से. पौष्टिक तत्त्व में नाइट्रोजन पाई जाती है ?
उत्तर-
प्रोटीन में।

प्रश्न 6.
विटामिन B की कमी से कौन-सा रोग हो जाता है ?
उत्तर-
बेरी बेरी।

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प्रश्न 7.
भोजन का कौन-सा पौष्टिक तत्त्व सोयाबीन में सब से अधिक पाया जाता
उत्तर-
प्रोटीन तत्त्व।

प्रश्न 8.
नींबू तथा आंवले में कौन-सा विटामिन पाया जाता है ?
उत्तर-
विटामिन

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भोजन के तत्त्वों के नाम लिखें।
उत्तर-
कार्बोज, प्रोटीन, चिकनाई, विटामिन तथा लवण।

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प्रश्न 2.
भोजन के तत्त्व शरीर के लिए क्यों आवश्यक होते हैं ?
उत्तर-
शरीर को जीवित रखने तथा शारीरिक विकास हेतु।

प्रश्न 3.
भोजन के हमारे शरीर के लिए प्रमुख कार्य क्या हैं ?
उत्तर-
शरीर निर्माण, ऊर्जा प्रदान करना, शरीर में होने वाली क्रियाओं पर नियन्त्रण करना तथा शरीर को रोग निवारक क्षमता प्रदान करना।

प्रश्न 4.
हमारे शरीर का पोषण करने वाले तत्त्व क्या कहलाते हैं ?
उत्तर-
पोषक तत्त्व।

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प्रश्न 5.
शरीर का निर्माण करने वाले तत्त्व क्या होते हैं ?
उत्तर-
प्रोटीन्स तथा खनिज लवण।

प्रश्न 6.
शरीर की सुरक्षा करने वाले पदार्थ कौन-से होते हैं ?
उत्तर-
विटामिन्स तथा खनिज लवण।

प्रश्न 7.
जल का शरीर के लिए प्रमुख कार्य क्या है ?
उत्तर-
यह पोषक तत्त्वों तथा शरीर क्रियाओं के नियमन का कार्य करता है।

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प्रश्न 8.
कार्बोज किस-किस तत्त्व से मिलकर बनते हैं ?
उत्तर-
कार्बन, हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन।

प्रश्न 9.
प्रोटीन किस-किस तत्त्व से मिलकर बने होते हैं ?
उत्तर-
कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, फॉस्फोरस एवं गन्धक।

प्रश्न 10.
कार्बोज के दो प्रमुख प्राप्ति स्रोत बताएं।
उत्तर-
अनाज तथा गन्ना।

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प्रश्न 11.
प्रोटीन के दो प्रमुख स्रोत बताएं।
उत्तर-
अण्डा तथा दालें।

प्रश्न 12.
किन-किन वनस्पतियों में प्रोटीन अधिक पाया जाता है ?
उत्तर-
दालें, अनाज, सोयाबीन, अखरोट, मूंगफली, बादाम, सेम के बीज, मटर आदि।

प्रश्न 13.
जन्तुओं से प्राप्त किन-किन पदार्थों में प्रोटीन अधिक मात्रा में होती है ?
उत्तर-
दूध, दही, मक्खन, पनीर, अण्डे, मांस, मछली।

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प्रश्न 14.
कौन-कौन से स्टार्चयुक्त पदार्थों में कार्बोहाइड्रेट अधिक पाया जाता है ?
उत्तर-
चावल, गेहूँ, शकरकन्द, मक्का, साबूदाना, जौ, अखरोट, आलू आदि।

प्रश्न 15.
वसा के दो प्रमुख स्त्रोत बताइए।
उत्तर-
तेलीय बीज तथा दूध।।

प्रश्न 16.
शरीर के लिए आवश्यक पाँच खनिज तत्त्व बताइए।
उत्तर-
कैल्शियम, फॉस्फोरस, लोहा, आयोडीन तथा सोडियम।

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प्रश्न 17.
हमारे शरीर को जल-प्राप्ति के प्रमुख स्त्रोत क्या हैं ?
उत्तर-

  1. भोजन जो हम खाते हैं, तथा
  2. पानी जो हम पीते हैं।

प्रश्न 18.
कार्बोहाइड्रेट का प्रमुख कार्य क्या है ?
उत्तर-
शरीर की क्रियाशीलता हेतु ऊर्जा प्रदान करना।

प्रश्न 19.
शरीर में वसा का प्रमुख कार्य क्या है ?
उत्तर-
शरीर को ऊर्जा तथा शक्ति प्रदान करना।

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प्रश्न 20.
लोहा प्राप्ति के प्रमुख साधन क्या हैं ?
उत्तर-
लिवर, मांस, मछली, अण्ड, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, अनाज, पूर्ण गेहूँ, दालें, सेला चावल आदि।

प्रश्न 21.
(1) लोहा शरीर के लिए क्यों आईयक है ?
(2) लोहे की कमी से कौन-सा रोग हो जाता
उत्तर-

  1. प्रोटीन के साथ संयोग करके हीमोग्लोबिन का निर्माण करता है।
  2. अनीमिया।

प्रश्न 22.
शरीर में सोडियम का एक कार्य बताइए।
उत्तर-
शरीर में क्षार तथा अम्ल का सन्तुलन बनाए रखना।

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प्रश्न 23.
(i) विटामिन ‘ए’ की कमी के चार मुख्य प्राव लि
अथवा
विटामिन ‘ए’ की कमी से कौन-सा रोग होता है ?
(ii) आँखों की रोशनी के लिए कौन-सा विटामिन ज़रूरी है ?
(iii) अंधराता रोग ( रतौंधी) किस विटामिन की कमी से होता है ?
उत्तर-

  1. अंधराता रोग,
  2. मांसपेशियां कमज़ोर हो जाती हैं,
  3. शरीर दुर्बल हो जाता है,
  4. रोग क्षमता कम हो जाती है।

प्रश्न 24.
रिकेटरोधी विटामिन किसे कहते हैं ?
उत्तर-
विटामिन D को।

प्रश्न 25.
विटामिन C की प्राप्ति के प्रमुख साधन क्या हैं ?
उत्तर-
खट्टे रसदार फल, जैसे-आँवला, सन्तरा, टमाटर आदि।

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प्रश्न 26.
कौन-कौन से शर्करायुक्त पदार्थों में कार्बोहाइड्रेट अधिक पाया जाता है ?
उत्तर-
शहद, चीनी, गुड़, शीरा, चुकन्दर, अंगूर तथा अन्य मीठे फल।

प्रश्न 27.
जन्तुओं से प्राप्त होने वाले वसा पदार्थ कौन-से हैं ?
उत्तर-
घी, दूध, मक्खन, क्रीम, दही, पनीर, जानवरों की चर्बी, मछली, अण्डे की सफेदी।

प्रश्न 28.
वनस्पति से प्राप्त होने वाले वसा पदार्थ कौन-से हैं ?
उत्तर-
मूंगफली, सरसों, तिल, नारियल, बादाम, अखरोट, चिलगोजा आदि।

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प्रश्न 29.
प्रोटीन की कमी से होने वाले दो रोग कौन-से हैं ?
उत्तर-
मेरेस्मस तथा क्वाशियोरकर।

प्रश्न 30.
आवश्यकता से अधिक मात्रा में कार्बोज लेने से कौन-से रोग हो जाते हैं ?
उत्तर-

  1. मोटापा या मेदुरता, तथा
  2. मधुमेह (डायबिटीज़)।

प्रश्न 31.
शरीर में आवश्यकता से कम मात्रा में कार्बोहाइड्रेट का क्या प्रभाव होता है ?
उत्तर-

  1. दुर्बलता,
  2. शरीर की क्रियाशीलता कम होना,
  3. त्वचा में झुर्रियाँ पड़ना,
  4. त्वचा का लटक जाना,
  5. आन्तरिक अवयवों के विकास में अवरुद्धि।

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प्रश्न 32.
शरीर में आयोडीन की कमी से कौन-सा रोग हो जाता है ?
उत्तर-
गोइटर (Goitre)

प्रश्न 33.
रेयॉन के वस्त्रों पर अम्ल तथा क्षार का क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर-
शक्तिशाली अम्ल तथा क्षार दोनों से ही रेयॉन के वस्त्रों को हानि होती है।

प्रश्न 34.
रेयॉन किस प्रकार का रेशा है ?
उत्तर-
सेल्यूलोज से उत्पादित कृत्रिम रेशा।

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प्रश्न 35.
रेयॉन के वस्त्रों को धोते समय क्या बातें वर्जित हैं ?
उत्तर-
वस्त्र को पानी में फुलाना, ताप, शक्तिशाली रसायनों तथा ऐल्कोहल का प्रयोग।

प्रश्न 36.
रेयॉन के वस्त्रों की धुलाई के लिए कौन-सी विधि उपयुक्त होती है ?
उत्तर-
गूंधने और निपीडन की विधि।

प्रश्न 37.
रेयॉन के वस्त्रों को कहाँ सुखाना चाहिए ?
उत्तर-
छायादार स्थान पर तथा बिना लटकाये हुए चौरस स्थान पर।

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प्रश्न 38.
रेयॉन के वस्त्रों पर इस्तरी किस प्रकार करनी चाहिए ?
उत्तर-
कम गर्म इस्तरी वस्त्र के उल्टी तरफ़ से करनी चाहिए। इस्तरी करते समय वस्त्र में हल्की सी नमी होनी चाहिए।

प्रश्न 39.
ऊन का तन्तु कैसा होता है ?
उत्तर-
काफी कोमल, मुलायम और प्राणिजन्य।

प्रश्न 40.
ऊन का तन्तु आपस में किन कारणों से जुड़ जाता है ?
उत्तर-
नमी, क्षार, दबाव तथा गर्मी के कारण।

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प्रश्न 41.
ऊन के तन्तुओं की सतह कैसी होती है ?
उत्तर-
खुरदरी।

प्रश्न 42.
ऊन के रेशों की सतह खुरदरी क्यों होती है ?
उत्तर-
क्योंकि ऊन की सतह पर परस्पर व्यापी शल्क होते हैं।

प्रश्न 43.
ऊन के रेशों की सतह के शल्कों की प्रकृति कैसी होती है ?
उत्तर-
लसलसी, जिससे शल्क जब पानी के सम्पर्क में आते हैं तो फूलकर नरम हो जाते हैं।

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प्रश्न 44.
ऊन के रेशों के शत्रु क्या हैं ?
उत्तर-
नमी, ताप और क्षार

प्रश्न 45.
ताप के अनिश्चित परिवर्तन से रेशों पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर-
रेशों में जमाव व सिकुड़न हो जाती है।

प्रश्न 46.
ऊन के वस्त्रों को किस प्रकार के साबुन से धोना चाहिए ?
उत्तर-
कोमल प्रकृति के शुद्ध क्षार रहित साबुन से।

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प्रश्न 47.
धुलाई से कभी-कभी ऊन क्यों जुड़ जाती है ?
उत्तर-
ऊनी वस्त्र को धोते समय जब उसे पानी या साबुन के घोल में हिलाया डुलाया जाता है तो ऊन के तन्तुओं के रेशे आपस में एक-दूसरे के ऊपर चढ़ जाते हैं जिसके फलस्वरूप ऊन जुड़ जाती है।

प्रश्न 48.
शरीर की वृद्धि के लिए भोजन का कौन-सा तत्त्व आवश्यक है ?
उत्तर-
प्रोटीन।

प्रश्न 49.
साबुन का निजी सफ़ाई में क्या महत्त्व है ?
उत्तर-
साबुन चिकनाई को अपने में घोल लेता है तथा इस प्रकार जो मैल चिकनाई के साथ चिपकी होती है, भी पानी डालने से निकल जाती है।

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प्रश्न 50.
विटामिन-सी की कमी से कौन-सा रोग हो जाता है ?
उत्तर-
स्कर्वी।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पोषण तत्त्व या पोषक तत्त्व (Nutrients) क्या होते हैं ?
उत्तर-
वे तत्त्व जो हमारे शरीर का पोषण करते हैं, पोषण तत्त्व या पोषक तत्त्व कहलाते हैं। ये भोजन के घटक (Components) होते हैं। ये शरीर की वृद्धि, जनन तथा स्वस्थ जीवनयापन के लिए आवश्यक होते हैं। साधारण रूप में छ: प्रकार के तत्त्व या भोज्य घटक हैं जो हमारे शरीर का पोषण करते हैं। ये हैं-

  1. प्रोटीन्स (Proteins),
  2. वसा 15 (Fats),
  3. कार्बोज (Carbohydrates),
  4. खनिज लवण (Minerals),
  5. विटामिन्स (Vitamins),
  6. जल (Water)

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प्रश्न 2.
प्रोटीन क्या है ? आहार में इसकी कमी से क्या हानियाँ हैं ?
उत्तर-
प्रोटीन भोजन के आवश्यक तत्त्वों में से एक तत्त्व है।
जीवद्रव्य का निर्माण करने वाला मुख्य पदार्थ प्रोटीन है। पानी के अतिरिक्त शरीर में सर्वाधिक अंश प्रोटीन का है। प्रोटीन शरीर के तन्तु, रक्त, एन्जाइम, अन्तःस्रावी ग्रन्थियों से निकलने वाले हारमोन्स, कोमल तन्तु एवं अस्थियों में होता है। प्रोटीन, कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन के संयोग से बना ऐसा यौगिक है जो विभिन्न प्रकार के ऐमीनो अम्लों के संयोजन से बनता है।
कमी और हानियाँ-

  1. बच्चों के आहार में प्रोटीन की कमी हो जाने से उसका विकास रुक जाता है।
  2. सूखा और क्वाशियारकर रोग हो जाता है।
  3. वयस्कों में इसकी कमी से भार होने के साथ एनीमिया रोग भी हो जाता है।

प्रश्न 3.
विभिन्न पोषक तत्त्वों (Nutrients) के विशिष्ट कार्य बताइए।
उत्तर-
विभिन्न पोषक तत्त्वों के विशिष्ट कार्य निम्नलिखित हैं-
1. कार्बोज-इनका प्रमुख कार्य ऊर्जा प्रदान करना है। जिन कार्बोजों का शरीर में उसी समय उपभोग नहीं हो पाता, वे संग्रह कर लिए जाते हैं। ये वसा के रूप में परिवर्तित होकर संग्रहीत होते हैं। ये संग्रहीत पदार्थ जब आवश्यकता होती है तब ऊर्जा प्रदान करते हैं।

2. प्रोटीन-प्रोटीन का मुख्य कार्य नए ऊतकों का निर्माण तथा पूर्व-निर्मित कोशिकाओं की मरम्मत करना होता है। प्रोटीन सुरक्षा प्रदान करने वाले तथा नियामक (Regulator) भी होते हैं। आवश्यकता से अधिक मात्रा में ग्रहण किए गए प्रोटीन, कार्बोज तथा बसा में परिवर्तित होकर शरीर में संग्रहीत हो जाते हैं।

3. वसा-वसा का मुख्य कार्य शरीर को ऊर्जा प्रदान करना है। ये वसा घुलित विटामिनों तथा आवश्यक वसीय अम्लों के वाहक भी होते हैं। आवश्यकता से अधिक ग्रहण किए गए वसा शरीर में चर्बी के रूप में जमा हो जाते हैं।

4. खनिज-इनका कार्य शरीर-निर्माण (हड्डी, दाँत और कोमल ऊतकों के रचनात्मक भाग) तथा नियमन (पेशी संकुचन) होता है।

5. विटामिन-इनका कार्य शरीर की वृद्धि तथा विभिन्न शारीरिक क्रियाओं के नियमन का होता है। . 6. जल-शरीर का आवश्यक भाग जल होता है। जल पोषक तत्त्वों के संवहन तथा शारीरिक क्रियाओं के नियमन का कार्य करता है।

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प्रश्न 4.
भोजन का हमारे शरीर के लिए मुख्य कार्य क्या है ?
उत्तर-
भोजन हमारे शरीर को गर्मी और शक्ति देता है। नए कोष बनाता है और पुरानों की मुरम्मत करता है और हमारे शरीर में ऐसे हारमोन्स और एन्जाइम बनाता है जिससे हमारा शरीर ठीक अवस्था में रहता है।

प्रश्न 5.
क्रीम और तेल का निजी सफाई में क्या महत्त्व है ?
उत्तर-
सिर तथा शरीर पर तेल लगाने से त्वचा की खुश्की दूर हो जाती है तथा एक चमक सी आ जाती है। क्रीम से चेहरा चमकदार तथा निखर जाता है कई क्रीमों से चेहरे पर कील तथा छाइयां दूर हो जाते हैं।

प्रश्न 6.
वस्त्रों के रेशे मुख्यतः कितनी प्रकार के होते हैं ?
उत्तर-
वस्त्रों के रेशे मुख्यतः पांच प्रकार के होते हैं-सूती, लिनन, रेशम, ऊन, टैरीलीन।

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प्रश्न 7.
कोल्ड क्रीम के बारे में क्या जानते हो ?
उत्तर-
कोल्ड क्रीम का प्रयोग सर्दियों में होता है तथा इसमें चिकनाई होती है ताकि खुश्की दूर की जा सके।

प्रश्न 8.
भारतीय खुराक में कमियां क्या हैं ?
उत्तर-
भारतीय खुराक की साधारण कमियाँ निम्नलिखित हैं-

  1. भोजन में कैलोरी की मात्रा कम होना।
  2. भोजन मे प्रोटीन की कमी।
  3. प्राणीजन प्रोटीन का बहुत कम या बिल्कुल न होना।
  4. चिकनाई का बहुत कम होना और प्राणीजन चिकनाई का न होना।
  5. एक या अधिक विटामिनों की कमी होना।
  6. एक या अधिक खनिज लवण की कमी, खासकर चूना और लोहे की कमी।

प्रश्न 9.
यदि आवश्यकता से कम भोजन खाया जाए तो क्या होता है ?
उत्तर-
कई बार ऐसी परिस्थितियां बन जाती हैं, जब भोजन की उपलब्धता पूर्ण रूप से नहीं होती है तथा हम कम भोजन खाने के लिए मजबूर हो जाते हैं; जैसे-लड़ाई के दिनों में, बाढ़ की स्थिति में, भुखमरी जैसे हालात होने पर। पूर्ण आहार न मिलने पर शरीर का भार कम होने लगता है, कमज़ोरी हो जाती है, रक्त की कमी हो जाती है, रोगों से लड़ने की शक्ति भी कम हो जाती है। बच्चे यदि पूरा भोजन नहीं लेते तो वे बुद्ध बन जाते हैं।

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प्रश्न 10.
आवश्यकता से अधिक भोजन खाने से क्या होता है ?
उत्तर-
ऐसी स्थिति में अमाशय तथा आंतों को अधिक कार्य करना पड़ता है। गुर्दो पर बोझ पड़ता है। पेट में गैस पैदा होती है। मुँह में से बदबू आने लगती है तथा सिर दर्द करने लगता है। पेट सम्बन्धी रोग हो जाते हैं, रक्त दबाव बढ़ जाता है तथा कई अन्य रोग हो सकते हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कार्बोज के विभिन्न स्रोत तथा कार्य बताइए।
उत्तर-
शरीर को शक्ति प्रदान करने का मुख्य साधन कार्बोहाइड्रेट है।
स्रोत या साधन–सबसे अधिक कार्बोज अनाजों में मिलता है, इसके बाद जड़ व तने वाली सब्जियों में। कुछ मात्रा में दालों एवं फलों में भी मिलता है।

  1. शुद्ध कार्बोहाइड्रेट भोज्य पदार्थ-चीनी, गुड़, शहद, साबूदाना एवं अरारोट ।
  2. अनाज-गेहूँ, चावल, ज्वार, बाजरा, रांगी, जौ, मक्की।
  3. दालें-उड़द, मूंग, अरहर, चने की दाल, मसूर, कुलथ आदि।
  4. जड़ एवं भूमि कन्द-आलू, शकरकन्दी, चुकन्दर आदि।
  5. ताजे व सूखे फल-अंजीर, खजूर, अंगूर, किशमिश, मुनक्का, खुमानी आदि।
    PSEB 8th Class Home Science Solutions Chapter 1 निजी देखभाल 1
    चित्र 1.1 कार्बोज प्राप्त करने के साधन

उपयोग-

  1. कार्बोज शरीर को शक्ति प्रदान करते हैं। एक ग्राम कार्बोज के जलने पर हमें चार कैलोरी शक्ति मिलती है।
  2. यह प्रोटीन द्वारा उत्पन्न हुई अतिरिक्त ऊर्जा को नष्ट होने से बचाता है।
  3. यह विटामिन ‘K’ तथा नियासिन के निर्माण में शरीर में पाए जाने वाले जीवाणुओं की सहायता करता है। …
  4. कार्बोज शरीर के ताप को एक-सा रखते हैं।
  5. कार्बोज नलिकाविहीन ग्रन्थियों के रस निष्कासन में सहायक हैं।

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प्रश्न 2.
वसा के स्त्रोत तथा कार्य लिखिए।
उत्तर-
1. स्रोत-
(1) तेल और घी-मूंगफली, सरसों का तेल, नारियल का तेल, देसी घी, वनस्पति घी एवं मक्खन।।
2. मेवा व बीज-बादाम, काजू, नारियल, मूंगफली, पिस्ता, अखरोट, सोयाबीन आदि।
3. दूध व दूध से बने पदार्थ-गाय-भैंस का दूध, खोआ, सूखा दूध आदि। मांसाहारी भोजन-अण्डा, मांस, मछली, लिवर आदि।
PSEB 8th Class Home Science Solutions Chapter 1 निजी देखभाल 2
चित्र 1.2 वसा प्राप्त करने के साधन
4. कार्य-

  1. वसा का प्रमुख कार्य हमारे शरीर को ऊर्जा तथा शक्ति प्रदान करना है। वसाएँ ऊर्जा के सबसे अधिक सान्द्रित स्रोत हैं। 1 ग्राम वसा से हमें 9 कैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है।
  2. वसा में शरीर के लिए आवश्यकतानुसार ऊर्जा संग्रह का गुण होता है।
  3. वसाएं वसा घुलित विटामिनों (A, D, E, K) को शरीर में पहुंचाती हैं तथा इन विटामिनों के अवशोषण में सहायता करती हैं।
  4. वसाएं वसीय अम्लों का स्रोत होती हैं। ये बाल्यावस्था में वृद्धि के लिए अत्यन्त आवश्यक होती हैं और त्वचा को स्वस्थ बनाए रखती हैं।
  5. वसाएं शरीर के अंगों के चारों ओर गद्दी का कार्य करती हैं। उन्हें ठीक स्थान पर सीधे रखती हैं। उन्हें चोटों से बचाती हैं तथा स्नायुओं की रक्षा भी करती हैं।
  6. वसाएँ ताप की अल्पचालक होने के कारण शरीर की ऊर्जा की हानि को रोकती हैं।
  7. वसाओं की उपस्थिति से भोजन के स्वाद तथा परितृप्ति में वृद्धि होती है।

प्रश्न 3.
भारतीय आहार की कमियों के बारे में लिखें।
उत्तर-
स्वयं उत्तर दें।

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निजी देखभाल PSEB 8th Class Home Science Notes

  • भोजन हमारे शरीर को गर्मी और शक्ति देता है।
  • भोजन हमारे शरीर में ऐसे हारमोन्स और एन्ज़ाइम बनाता है जिससे हमारा शरीर ठीक अवस्था में रहता है।
  • भोजन के तत्त्व 6 प्रकार के होते हैं-कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन, पानी, खनिज लवण और विटामिन।
  • कार्बोहाइड्रेट, वसा और प्रोटीन हमारे शरीर को गर्मी और काम करने की शक्ति देते है।
  • कार्बोहाइड्रेट हमें निशास्ते वाली चीज़ों-चावल, आटा, आलू, शक्करकंदी, केला, गुड़, चीनी, शहद और फलों से मिलता है।
  • वसा-दूध, घी, मक्खन, तेल, तेलों के बीज, सूखे मेवे, जानवरों की चर्बी और वनस्पति घी से मिलती है।
  • प्रोटीन-वनस्पति और प्राणीजन दोनों साधनों से मिलती है।
  • खनिज लवण हमें दूध, कलेजी, अण्डे, हरी सब्जियों और फलों से भी मिलते हैं।
  • आवश्यकता से अधिक खाना खाने से आमाशय और आँतों को अधिक मेहनत करनी पड़ती है।
  • कम खाने से बीमारियों का सामना करने की शक्ति कम हो जाती है और विशेषकर तपेदिक रोग होने का डर रहता है। बच्चे यदि कम खाना खाएं तो मन्द बुद्धि के हो
    जाते हैं और जल्दी थक जाते हैं।
  • स्नान करने के लिए हमेशा नरम साबुन का इस्तेमाल करना चाहिए।
  • हमेशा स्नान करते समय अच्छे साबुनों का ही इस्तेमाल करना चाहिए, जैसे- हमाम, रैक्सोना, लिरिल, सन्दल मोती आदि।
  • कई साबुनों में कीटाणुनाशक दवाई कारबोलिक और नीम आदि भी पाए जाते हैं, जैसे-लाइफबॉय, डीटोल, नीको और नीम साबुन में।
  • छोटे बच्चों के लिए जैतून का तेल या खास बनाए हुए तेलों की मालिश करनी चाहिए।
  • सूती कपड़े गर्मी के अच्छे संचालक होते हैं और पानी को भी ज्यादा नहीं सोखते।
  • रेशम-यह रेशम के कीड़ों से बनायी जाती है।
  • टैरीलीन, नाइलॉन-ये कपड़े पहनने में हल्के, धोने में आसान और अधिक दिनों तक चलने वाले होते हैं।
  • मौसम के अनुसार इस तरह के कपड़े पहनने चाहिएं जिससे शरीर का तापमान ठीक रहता है। गर्मियों में हल्के, खुले और फीके रंगों के कपड़े पहनने चाहिएं।
  • रंगदार कपड़े नीचे पहनने वाले कपड़ों के लिए इस्तेमाल नहीं करने चाहिएं।
  • पोशाक में तंग (कसे) पोशाक से कम सर्दी लगती है। खुले कपड़े पहनने से कपड़ों और शरीर के बीच में एक हवा की तह बन जाती है जिस कारण शरीर की गर्मी
    बाहर नहीं निकलती।
  •  गर्मियों में बाहर जाते समय सिर पर टोपी डालनी चाहिए ताकि सिर पर सूर्य की किरणों का असर न हो।
  •  गर्मियों में चप्पल पहननी चाहिए, खेलते समय बच्चों को कपड़े के बूट पहनने चाहिएं।

PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 3 आपसी संबंध

Punjab State Board PSEB 10th Class Welcome Life Book Solutions Chapter 3 आपसी संबंध Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 10 Welcome Life Chapter 3 आपसी संबंध

PSEB 10th Class Welcome Life Guide आपसी संबंध Textbook Questions and Answers

अभ्यास-I

प्रश्न 1.
इस नाटक को पढ़ने के बाद आपको क्या महसूस हुआ?
उत्तर-
इस नाटक को पढ़ने के बाद, हमने महसूस किया कि हमें बड़ों के साथ दुर्व्यवहार नहीं करना चाहिए बल्कि उनके साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए। जब हम बच्चे थे, तो उन्होंने हमें बड़े प्यार से पाला और जब वे काफी बूढ़े हो गए और वे कुछ नहीं कर सकते, तो हमें उनसे दूर नहीं होना चाहिए, बल्कि उसी प्यार से उनकी सेवा करनी चाहिए जैसे उन्होंने की थी। ऐसे करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है और हमारे बच्चों को यह भी प्रेरित करता है कि हम बड़ों के साथ कैसा व्यवहार करें।

प्रश्न 2.
आप अपने बड़ों की देखभाल कैसे करते हैं?
उत्तर-

  1. हम अपने बड़ों के साथ कभी दुर्व्यवहार नहीं करते हैं। इसके बजाय हम उनके साथ बड़े प्यार से बात करते हैं। इससे उन्हें खुशी होती है, चाहे वे कितनी भी कठिनाई का सामना कर रहे हों।
  2. हम उन्हें प्यार से खिलाते हैं ताकि वे अलग-अलग महसूस न करें।
  3. हम अपने बड़ों के साथ प्यार से बैठते हैं और उनके जीवन के अनुभवों को सुनते हैं ताकि हम जीवन में वे गलतियां न करें जो शायद उन्होंने की हों।
  4. कभी-कभी हमें उनके साथ बैठना और बातचीत करनी चाहिए ताकि वे अकेलापन महसूस न करें।

प्रश्न 3.
नाटक का कौन-सा चरित्र है, आप सबसे अधिक सहनशील व्यक्ति पाते हैं?
उत्तर-
मुझे रितंबर (पोता) नाटक में सबसे अधिक सहनशील चरित्र के रूप में मिलता है। इसका कारण यह है कि वह अपनी दादी से बहुत प्यार करता है लेकिन वह उसके लिए कर कुछ नहीं सकता। वह देखता है कि कैसे उसके पिता (करणबीर) और मां (सिमरन) उसकी दादी के साथ दुर्व्यवहार करते हैं। कई बार वह इसका विरोध करता है लेकिन असहाय है। उसकी दादी को वृद्धाश्रम भेज दिया जाता है लेकिन वह कुछ नहीं कर पाता। उसके पास धैर्य दिखाने के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं बचा।

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प्रश्न 4.
नाटक के पात्रों के बारे में अपनी राय दें। 1. दादी 2. रितंबर 3. माँ 4. करणबीर।
उत्तर-

  1. दादी-वह इस लघु नाटक की बेहतरीन पात्र है क्योंकि वह जानती थी कि करणबीर उनका गोद लिया
    पुत्र है और कुछ और कहने की बजाय वह कहती है कि उसे एक वृद्धाश्रम भेज दे। यह घर में चल रहे रोज़ाना के झगड़े को रोक देगा। वह वृद्धाश्रम में गर्मी में रहती है लेकिन अपने बेटे को दो पंखे और फ्रिज दान करने के लिए कहती है ताकि दूसरों को भीषण गर्मी से राहत मिल सके। इस तरह, वह भाग्य के रूप में हर दुःख को समाप्त करती है।
  2. रितंबर-रितंबर लघु नाटक का सबसे सहनशील चरित्र है क्योंकि वह अपनी दादी से बहुत प्यार करता है, , लेकिन वह अपनी दादी के लिए कुछ नहीं कर सकता। वह अपनी दादी के लिए अपने माता-पिता से भी लड़ता है लेकिन वे कभी भी उसकी भावनाओं की परवाह नहीं करते। इसलिए वह काफी सहनशील लगता है।
  3. माँ (सिमरन)-सिमरन ने इस नाटक में बहू का किरदार निभाया है और वह दोहरे चरित्र की है। एक तरफ वह अपनी सास को सताती है और अपने पति को उसे वृद्धाश्रम भेजने के लिए मजबूर करती है और दूसरी तरफ वह अपने भाई को धमकी देती है कि वह माँ की देखभाल करे। इस तरह उसे एक क्रूर बहू और एक प्यारी बेटी के रूप में चित्रित किया गया है।
  4. पापा (करणबीर)-करणबीर नाटक का एक पात्र है जो अपनी माँ को वृद्धाश्रम भेजता है। उसने कभी अपने बेटे की परवाह नहीं की और न ही कभी अपनी माँ के लिए कोई प्यार दिखाया। अंत में, जब उसे पता चलता है कि वह गोद लिया पुत्र है, तो वह अपनी माँ को वापस अपने घर ले जाने का फैसला करता है।

अभ्यास-II

स्थिति 1:
आप एक सड़क पर जा रहे हैं। आपके सामने, एक लड़का एक केला खा रहा है और वह केले के छिलके को सड़क पर फेंक देता है, तो आपकी प्रतिक्रिया क्या होगी?
(i) आप लड़के को उसकी ग़लती के बारे में समझाएंगे।
(ii) आप केले के छिलके को उठाने के लिए किसी और को बुलाएंगे।
(iii) आप स्वयं केले के छिलके को उठाकर कूड़ेदान में फेंक देंगे।
(iv) आप पुलिस को कॉल करेंगे और लड़के की शिकायत करेंगे।
उत्तर-
(i) आप लड़के को उसकी ग़लती के बारे में समझाएंगे।

स्थिति 2:
आपके जन्मदिन पर आपके दोस्तों ने आपको खाली चॉक बाक्स गिफ्ट किया है। बाक्स पूरी तरह से खाली है। आपकी प्रतिक्रिया क्या होगी?
(i) आप उनसे बात करनी बंद कर देंगे।
(ii) आप उन्हें देखेंगे और मुस्कुराएंगे।
(iii) आप उनकी उपेक्षा करेंगे।
(iv) आप उनके प्रति गुस्से में देखेंगे।
उत्तर-
(i) आप उन्हें देखेंगे और मुस्कुराएंगे।

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Welcome Life Guide for Class 10 PSEB आपसी संबंध Important Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

(क) बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
रितंबर की आयु क्या है?
(a) 7-8 वर्ष
(b) 8-9 वर्ष
(c) 9-10 वर्ष
(d) 11-12 वर्ष।
उत्तर-
(a) 7-8 वर्ष।

प्रश्न 2.
करणबीर को किसने कहा कि वह गोद लिया हुआ बेटा है?
(a) माँ ने
(b) सिमरन ने
(c) प्रबंधक ने
(d) रितंबर ने।
उत्तर-
(c) प्रबंधक ने।

प्रश्न 3.
दादी को उनके बेटे करणबीर ने कहां भेजा था?
(a) सिमरन के घर पर
(b) वृद्धाश्रम
(c) तीर्थ यात्रा
(d) घूमने के लिए।
उत्तर-
(b) वृद्धाश्रम।

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प्रश्न 4.
………… की सामाजिक सीमाएं होती हैं?
(a) देशों
(b) संबंधों
(c) राज्यों
(d) ये सभी।
उत्तर-
(b) संबंधों।

प्रश्न 5.
संबंधों को क्यों बना कर रखना चाहिए?
(a) संबंधों को तोड़ने के लिए
(b) संबंध बनाने के लिए
(c) संबंधों को बचाने के लिए
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(c) संबंधों को बचाने के लिए।

प्रश्न 6.
जब भी हम किसी से विदाई लेते हैं
(a) धन्यवाद कहना चाहिए
(b) मीठी यादें साझा करके
(c) फोन नंबर साझा करके
(d) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(d) उपरोक्त सभी।

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प्रश्न 7.
जिस कहानी को अंत तक नहीं ला सकते
(a) उसको अच्छा मोड़ देकर छोड़ देना चाहिए
(b) उसको घसीटना चाहिए
(c) उसको बढ़ाना चाहिए
(d) उसको जबरदस्ती आगे बढ़ाना चाहिए।
उत्तर-
(a) उसको अच्छा मोड़ देकर छोड़ देना चाहिए।

प्रश्न 8.
इनमें से कौन-सी अच्छे व्यवहार की विशेषता है?
(a) खुश रहो
(b) आशावादी रहो
(c) मीठा बोला
(d) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(d) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 9.
सभी पात्रों में से कौन चतुर है?
(a) दादी
(b) रितंबर
(c) सिमरन
(d) प्रबंधक।
उत्तर-
(c) सिमरन।

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(ख) खाली स्थान भरें

  1. ………….. के साथ समय बिताना उनकी असली पूजा है।
  2. सिमरन ने अपने …………. को माँ की देखभाल करने के लिए कहा।
  3. करणबीर अपनी माँ को ………… में छोड़ देता है।
  4. ………….. महीनों के बाद, करणबीर अपनी माँ को मिलने के लिए जाता है।
  5. ………….. करणबीर से कहता है कि उसके पिता ने उसे वृद्धाश्रम से गोद लिया था।
  6. हर ………… की एक सीमा होती है।
  7. …………. हमारे व्यक्तित्व को चमका देता है।

उत्तर-

  1. बुजुर्ग.
  2. भाई.
  3. वृद्धाश्रम,
  4. छह,
  5. प्रबंधक,
  6. रिश्ते,
  7. अच्छा व्यवहार।

(ग) सही/ग़लत चुनें

  1. करणबीर रितंबर का पिता था।
  2. हमें बुरी यादों को भूल जाना चाहिए।
  3. हमें एक अच्छे मोड़ पर संबंधों को छोड़ना चाहिए।
  4. व्यक्ति पूरे जीवन के लिए संबंध बनाए रखते हैं।
  5. अच्छा व्यवहार हमारे व्यक्तित्व को चमका देता है।
  6. हमें सामाजिक मर्यादाओं का परीक्षण नहीं करना चाहिए।

उत्तर-

  1. सही,
  2. सही,
  3. सही,
  4. ग़लत,
  5. सही,
  6. ग़लत।

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(घ) कॉलम से मेल करें

कॉलम ए — कॉलम बी
(a) ओमिनियस — (i) निषिद्ध
(b) टी०बी० — (ii) विधि
(c) मापदंड — (iii) जो किसी के बारे में ग़लत सोचता है
(d) प्रतिबंध — (iv) रोग
(e) शिष्टाचार — (v) नियम।
उत्तर-
(a) ओमिनियस — (iii) जो किसी के बारे में ग़लत सोचता है
(b) टी०बी० — (iv) रोग
(c) मापदंड — (v) नियम
(d) प्रतिबंध — (i) निषिद्ध
(e) शिष्टाचार — (ii) विधि।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
हम अपने बुजुर्गों की पूजा कैसे कर सकते हैं?
उत्तर-
समय बिताना और उनकी सेवा करना ही बुजुर्गों की सच्ची पूजा है।

प्रश्न 2.
‘मनहूस’ कौन है?
उत्तर-दादी के अनुसार, “जो बुरा है, दूसरों के बारे में बुरा सोचता है और जो घर पर पूरे दिन लड़ता है वह एक मनहूस है।
(iv) रोग

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प्रश्न 3.
सिमरन ने रितंबर को उसकी दादी के पास जाने से क्यों रोका?
उत्तर-
क्योंकि सिमरन ने सोचा कि दादी को खांसी है, टी०बी० है और रितंबर को बीमार कर सकती है।

प्रश्न 4.
करणबीर को अपनी माँ को वृद्धाश्रम में छोड़ने के लिए किसने कहा?
उत्तर-
सिमरन ने करणबीर को अपनी माँ को वृद्धाश्रम में छोड़ने के लिए कहा।

प्रश्न 5.
सिमरन ने किसको और क्या खुशखबरी दी?
उत्तर-
सिमरन ने अपने भाई को खुशखबरी दी कि करणबीर ने अपनी माँ को वृद्धाश्रम में छोड़ दिया है।

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प्रश्न 6.
सिमरन ने अपने भाई को क्या धमकी दी?
उत्तर-
सिमरन ने अपने भाई को धमकी दी कि वह माँ की देखभाल करे नहीं तो वह उसे अपने घर ले जाएगी।

प्रश्न 7.
रितंबर ने अपने पिता को क्या बताया?
उत्तर-
रितंबर ने अपने पिता से कहा कि एक दिन वह अपने पिता को भी किसी वृद्धाश्रम भेज देगा।

प्रश्न 8.
दादी ने अपने बेटे को वृद्धाश्रम क्यों बुलाया?
उत्तर-
क्योंकि वह चाहती थी कि करणबीर दो पंखे और फ्रिज वृद्धाश्रम में दान करे।

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प्रश्न 9.
प्रबंधक ने करणबीर को क्या रहस्य बताया?
उत्तर-
प्रबंधक ने करणबीर को बताया कि पैंतीस साल पहले, उसके पिता ने उसे इसी वृद्धाश्रम से गोद लिया था।

प्रश्न 10.
करणबीर को अपनी ग़लती का एहसास कब हुआ?
उत्तर-
जब उसने महसूस किया कि वह गोद लिया हुआ बेटा है, तो उसे अपनी ग़लती का एहसास हुआ।

प्रश्न 11.
करणबीर ने ग़लती का एहसास होने पर क्या किया?
उत्तर-
वह अपनी माँ को अपने घर वापस ले आया।

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प्रश्न 12.
हमें किस सीमा को पार नहीं करना चाहिए?
उत्तर-
हमें रिश्तों की सीमा को पार नहीं करना चाहिए।

प्रश्न 13.
हमें समाज में क्या जांच करनी चाहिए?
उत्तर-
हमें समाज द्वारा तय की गई सीमाओं की जांच करनी चाहिए।

प्रश्न 14.
हमें किस शिष्टाचार को समझना चाहिए?
उत्तर-
हमें रिश्तों के शिष्टाचार को समझना चाहिए।

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प्रश्न 15.
रिश्तों को बनाए रखते हुए क्या देखना है?
उत्तर-
हमें रिश्तों की सीमा नहीं लांघनी चाहिए।

प्रश्न 16.
रिश्ते निभाते समय किस चीज़ का ध्यान रखना चाहिए?
उत्तर-
रिश्ते निभाते समय हमें ध्यान रखना चाहिए कि किसी ओर हम इतना भी न जाएं कि और रिश्तों को भूल ही जाएं।

प्रश्न 17.
क्या सभी रिश्ते जीवन भर चलते हैं?
उत्तर-
नहीं, सभी रिश्ते जीवन भर नहीं चलते।

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प्रश्न 18.
हम किसी से विदाई कैसे ले सकते हैं?
उत्तर-
हमें किसी से उचित शिष्टाचार से विदाई लेनी चाहिए।

प्रश्न 19.
एक अच्छे व्यवहार की विशेषताएं क्या हैं?
उत्तर-
खुश रहना, सकारात्मक रहना, कड़ी मेहनत करना, धीरे बोलना इत्यादि ऐसी विशेषताएं हैं जिनमें हमें संबंधों की सीमाएं पार नहीं करनी चाहिएं।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
नाटक की शुरुआत कैसे होती है?
उत्तर-
नाटक की शुरुआत घर के ड्राइंग रूम में होती है जहां दादी और उसका पोता रितंबर बैठे हैं और खेल रहे हैं। पोते ने दादी को उसके साथ खेलने के लिए कहा लेकिन वह थकने पर उसे मना कर देती है। फिर पोता अपनी दादी से पूछता है कि ‘ओमिनस’ का अर्थ क्या है। सबसे पहले दादी उसे समझने के लिए छोटा कहकर उसे टाल देती है लेकिन अंत में वह उसे बताती है कि वह व्यक्ति ओमिनस (Ominous) है जो खुद बुरा है और दूसरों के लिए बुरा सोचता है और जिसके कारण घर हमेशा मुसीबत में रहता है।

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प्रश्न 2.
सिमरन (माँ) क्यों नहीं चाहती कि उसका बेटा अपनी दादी के साथ खेले?
उत्तर-
सिमरन को उसकी सास पसंद नहीं थी। जब सास को खांसी होती है, तो वह सोचती है कि वह टी०बी० की मरीज है और अपनी दादी के साथ खेलने से रितंबर भी उसी से पीड़ित हो जाएगा। इसके साथ ही वह यह भी कहती है कि उसकी सास कभी भी घर का काम नहीं करती और पूरे दिन खांसती रहती है। इसलिए सिमरन नहीं चाहती कि उसका बेटा अपनी दादी के साथ खेले।

प्रश्न 3.
अपने बेटे और बहू का झगड़ा होते देख दादी क्या कहती है?
उत्तर-
जब करणबीर घर वापस आता है तो सिमरन उसकी माँ के बारे में बहुत बुरा बोलती है। सिमरन यह भी कहती है कि बुढिया को पता नहीं है कि उसने किस बीमारी से संपर्क किया है और पूरे दिन खांसी होती है। जब दादी उन दोनों के बीच लड़ाई सुनती है तो वह अपने बेटे से कहती है कि लड़ने की ज़रूरत नहीं है। इससे बेहतर है कि उसे किसी वृद्धाश्रम में छोड़ आए। वहां पर वह अपने बचे हुए दिन काट लेगी। करणबीर अपनी मां को वृद्धाश्रम छोड़ आता है।

प्रश्न 4.
दादी छह महीने के बाद अपने बेटे को वृद्धाश्रम क्यों बुलाती है?
उत्तर-
वह बड़ी समस्या के साथ वृद्धाश्रम में पहले छह महीने बिताती है लेकिन उसके बाद वह अपने बेटे को बुलाती है। सिमरन और करणबीर को लगता है कि वह अपनी मौत के किनारे पर है और इसलिए उसने उन्हें बुलाया है। जब वे वहां जाते हैं तो मां अपने पुत्र करणबीर को वहां दो पंखे दान करने के लिए कहती है क्योंकि वहां काफी गर्मी है। वह उसे फ्रिज दान करने के लिए भी कहती है क्योंकि गर्मियों के दौरान पानी बहुत गर्म होता है। वह करणबीर को कहती है कि जब उसका बेटा रितंबर उसे वृद्धाश्रम में छोड़ देगा, तो उसके आखिरी दिन आराम से व्यतीत होंगे।

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प्रश्न 5.
करणबीर को अपनी ग़लती का एहसास कब होता है?
उत्तर-
जब करणबीर वृद्धाश्रम में अपनी माँ से मिलने गया, तो उसने उससे दो पंखे और एक फ्रिज वहां पर दान करने के लिए कहा। जब करणबीर अपनी माँ से बात कर रहा था तो उस समय वृद्धाश्रम का प्रबंधक वहां आता है, उसे पहचानता है और उसे बताता है कि वृद्ध महिला के पति हरदेव सिंह बराड़ ने उसे उसी वृद्धाश्रम से गोद लिया था। यह सुनने के बाद करणबीर को अपनी ग़लती का एहसास होता है और वह अपनी माँ को अपने साथ वापस ले जाता है।

प्रश्न 6.
संबंध छोड़ने का शिष्टाचार क्या है?
उत्तर-
एक व्यक्ति अपने जीवन काल के दौरान कई रिश्ते बनाता है। कुछ रिश्ते जीवन भर चलते हैं लेकिन कुछ रिश्ते रास्ते में टूट जाते हैं और दिल के एक कोने में रह जाते हैं। कई बार, हमें एहसास होता है कि यह रिश्ता लंबे समय तक नहीं रहेगा और इसे यहां रोकना बेहतर है। इसलिए हमें ऐसे रिश्ते को उचित तरीके से खत्म करना चाहिए। हमें दूसरे व्यक्ति से बात करनी चाहिए और विनम्रता से उसे यह बताना चाहिए कि अब रिश्ते को निभाना संभव नहीं है। इसके आगे बढ़ना बेहतर है। रिश्ते से आगे बढ़ने का यह सबसे अच्छा तरीका है।

प्रश्न 7.
“अच्छा व्यवहार और रवैया हमारे व्यक्तित्व को चमका देता है”। स्पष्ट करो।
उत्तर-
इस तथ्य से कोई इनकार नहीं है कि अच्छा व्यवहार और रवैया हमारे व्यक्तित्व को चमका देता है। किसी विशेष समय में, हम कैसे प्रतिक्रिया या व्यवहार करते हैं, यह सब हमारे व्यक्तित्व के बारे में बताता है। इसलिए हमें इस तरह से व्यवहार करना सीखना चाहिए कि यह दूसरों के लिए एक सबक बन जाए। इसलिए, हमें खुश रहना चाहिए, कड़ी मेहनत करनी चाहिए, सकारात्मक बनना चाहिए और दूसरों के साथ विनम्रता से बात करनी चाहिए। ये एक अच्छे व्यवहार के गुण हैं और यह हमारे व्यक्तित्व के बारे में भी बताते हैं।

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दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
सभी रिश्तों की सामाजिक सीमाएं होती हैं।” कथन की व्याख्या करो।
उत्तर-
हमारे समाज ने कुछ नियम बनाए हैं कि हमारे रिश्ते कुछ सीमाओं के भीतर रहने के लिए बाध्य हैं, इसके अतिरिक्त यह भी बताया गया है कि हर रिश्ते में कितनी सीमा की आवश्यकता होती है। इसलिए हम कभी भी अपनी सीमाओं को पार नहीं करते हैं। हमारे माता-पिता, शिक्षक, दोस्त इत्यादि हमें लगातार ऐसी सीमाओं के बारे में बताते हैं। इसलिए हमें ऐसी सीमाओं की पहचान करनी चाहिए। सीमाओं का उल्लंघन न करें, यह हमारे साथ-साथ समाज के लिए भी अच्छा होगा।

घर के अंदर संबंध घनिष्ठता रखते हैं लेकिन घर के बाहर के रिश्ते बनावटी होते हैं और निकटता कम होती है। यह हमारे प्यार और तीव्रता पर निर्भर करता है। कई बार हम किसी अजनबी के साथ बहुत अच्छे संबंध बना लेते हैं और कभी-कभी हमारे खून के रिश्तेदारों के साथ भी खटास भरे रिश्ते बन जाते हैं। रिश्ते निभाना आसान नहीं होता। यह पेंसिल के साथ कागज़ पर एक रेखा खींचने जैसा नहीं है। यह ऐसा रिश्ता है जो जल्दी खत्म नहीं हो सकता। इसलिए रिश्तों की मर्यादा बनाए रखना ज़रूरी है।

प्रश्न 2.
रिश्ता तोड़ने या छोड़ते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
उत्तर-
हम सभी एक सामाजिक जीवन जीते हैं और एक सामाजिक जीवन जीते हए, हम कई रिश्ते बनाते हैं। कछ रिश्ते जीवन भर चलते हैं लेकिन कुछ रिश्ते खत्म हो जाते हैं। किसी रिश्ते को खत्म करते समय, हमें कुछ बातों को ध्यान में रखना चाहिए ताकि यदि भविष्य में उस रिश्ते को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता होती है, तो हम आसानी से ऐसा कर सकेंगे। हमें रिश्ते को खत्म करते समय निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखना चाहिए

  1. व्यक्ति के साथ बिताया गया समय याद रखें और उसे अच्छे से धन्यवाद दें।
  2. खट्टी यादें छोड़ दें और केवल अच्छी यादों को याद रखें और साझा करें।
  3. यदि आप उस व्यक्ति के साथ संपर्क रखना चाहते हैं।
  4. यदि आप उस व्यक्ति पर विश्वास नहीं करते हैं, तो आप भावुक न हों और उस व्यक्ति के साथ निजी जानकारी साझा न करें।
  5. उस व्यक्ति पर क्रोधित न हों या बदला लेने की कोशिश न करें ताकि बाद में पछताना न पड़े। इसलिए यह कहा जाता है कि एक कहानी को एक अच्छे मोड़ पर समाप्त करना अच्छा होगा जिसे अंत तक नहीं लिया जा सकता।

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आपसी संबंध PSEB 10th Class Welcome Life Notes

  • यह अध्याय एक छोटे नाटक से शुरू होता है, जो हमें बताता है कि हमें हमारे बुजुर्गों का सम्मान करना चाहिए।
  • नाटक की शुरुआत दादी और उसके पोते (रितंबर) के बीच हुई बातचीत से शुरू होता है। जो दोनों के बीच आंतरिक प्रेम और सहानुभूति को दिखाता है।
  • फिर कहानी में बहू (सिमरन) प्रवेश करती है जो अपने बेटे (रितंबर) को उसकी दादी से दूर रखना चाहती है।
  • तब दादी का बेटा (करणबीर सिंह बराड़) सामने आता है और उसकी पत्नी (सिमरन) उसे बताती है कि उसकी माँ (दादी) अपने पोते (रितंबर) को मेरे (सिमरन) खिलाफ उकसा रही है। वह करणबीर से पूछती है कि या तो वह अपनी माँ को वृद्धाश्रम भेज दे या वह अपनी मां के घर चली जाएगी।
  • अंत में दादी आती है और अपने बेटे करणबीर से कहती है कि उसे वृद्धाश्रम भेज दे क्योंकि वह यहां नहीं रह सकती।
  • एक तरफ करणबीर अपनी माँ को वृद्धाश्रम भेजता है और दूसरी तरफ सिमरन अपने भाई को माँ की देखभाल करने की धमकी देती है कि नहीं तो वह माँ को अपने घर ले जाएगी।
  • फिर छह महीने बाद दृश्य बदल जाता है जब वृद्धाश्रम से करणबीर की माँ का फोन आता है कि वह उसे मिलना चाहती है।
    करणबीर और सिमरन को लगता है कि यह उसका आखिरी समय है और इसलिए वह दोनों उससे मिलने के लिए तैयार हो गए।
  • दादी अपने बेटे करणबीर को दो पंखे और एक फ्रिज वृद्धाश्रम में दान करने के लिए कहती है क्योंकि लोगों को वहां बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। करणबीर चीज़ों को दान करने के लिए सहमत हो जाता है।
  • इसी समय वृद्धाश्रम का प्रबंधक आता है, करणबीर को पहचानता है और उसे बताता है कि पैंतीस साल पहले उसके पिता हरदेव सिंह ने उसे यहां से गोद लिया था। यदि वह उसे न अपनाता तो वह कहीं भिखारी होता।
  • प्रबंधक की बात सुनने के बाद, करणबीर और सिमरन को एहसास हुआ कि उन्होंने अपनी माँ के साथ गलत किया है। उन्होंने माँ को सॉरी कहा और अपने घर ले गये।
  • यह लघु नाटक हमें बताता है कि हमें अपने बड़ों के साथ दुर्व्यवहार नहीं करना चाहिए। इसके बजाय हमें उनका सम्मान करना चाहिए और उनसे आशीर्वाद लेना चाहिए।
  • हर रिश्ते की एक सामाजिक सीमा होती है और हमें ऐसी सीमाओं का ध्यान रखना चाहिए।
  • सभी रिश्ते महत्त्वपूर्ण हैं और उनके महत्त्व को ध्यान में रखते हुए हमें अपनी सीमाएं बनाए रखनी चाहिए।
  • करीबी और दूर के रिश्तों में प्यार और तीव्रता होनी चाहिए। इसलिए रिश्तों की मर्यादा में रहना चाहिए।
  • व्यक्ति जीवन में कई तरह के रिश्ते बनाता है। कुछ रिश्ते जीवन भर चलते हैं और कुछ रास्ते में ही टूट जाते हैं। कुछ रिश्ते सिर्फ दिल में रहते हैं।
  • कल्पना कीजिए कि यदि हमें कोई रिश्ता छोड़ने की ज़रूरत है, तो हमें कुछ बातों को ध्यान में रखना चाहिए। हमें एक-दूसरे को धन्यवाद कहना चाहिए। फोन नंबर साझा करना चाहिए इत्यादि।
  • हमें बच्चों के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए और यह अच्छा व्यवहार हमारे व्यक्तित्व की पहचान बन जाता है।

PSEB 7th Class Physical Education Objective Questions and Answers

Punjab State Board PSEB 7th Class Physical Education Book Solutions Physical Education Objective Questions and Answers.

PSEB 7th Class Physical Education Objective Questions and Answers

बहुविकल्पीय प्रश्न

पाठ-1 : मनुष्य का शरीर

प्रश्न 1.
मानव शरीर को कितने भागों में बांटा जा सकता है ?
(क) दो
(ख) तीन
(ग) चार
(घ) पाँच।
उत्तर-
(क) दो

प्रश्न 2.
हमारे शरीर में कुल कितनी हड्डियां हैं ?
(क) 300
(ख) 250
(ग) 275
(घ) 206
उत्तर-
(घ) 206

प्रश्न 3.
शारीरिक ढाँचे के कार्य हैं
(क) सुरक्षा
(ख) आकार
(ग) गतिशीलता
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 4.
रक्त प्रवाह प्रणाली के अंग
(क) हृदय
(ख) धमनियां
(ग) शिराएं
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 5.
हमारे शरीर में मुख्य प्रणालियां हैं
(क) मांसपेशी प्रणाली
(ख) रक्त प्रवाह प्रणाली
(ग) श्वास क्रिया प्रणाली
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

पाठ-2 : शारीरिक शक्ति एवं व्यायाम के लाभ

प्रश्न 1.
शारीरिक क्षमता के गुण
(क) गति
(ख) शक्ति
(ग) साहस (क्षमता), लचकता
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 2.
व्यायाम के लाभ हैं
(क) रोग दूर हो जाते हैं
(ख) शरीर में से व्यर्थ पदार्थ बाहर निकल जाते हैं
(ग) मनुष्य की आयु बढ़ जाती है
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 3.
व्यायाम के और अधिक लाभ
(क) रक्त साफ रहता है
(ख) मांसपेशियां मज़बूत हो जाती हैं
(ग) रक्त में सफेद रक्त के कण बढ़ जाते हैं
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

पाठ-3 : शारीरिक ढांचा और इसकी कुरूपताएं

प्रश्न 1.
अच्छे शारीरिक ढांचे के लाभ हैं
(क) ढांचा सुन्दर लगता है
(ख) दौड़ना, चुस्ती, फुर्ती बनी रहती है
(ग) स्वास्थ्य ठीक रहता है
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 2.
शारीरिक ढांचे की कुरूपताएं
(क) कूबड़ का निकलना
(ख) कुल्हों का आगे की ओर निकलना
(ग) रीढ़ की हड्डी का टेढ़ा होना
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 3.
कूबड़ के निकलने के कारण
(क) नज़र का कमज़ोर होना
(ख) ऊंचा सुनाई देना
(ग) कम रोशनी में आगे की ओर झुक कर पढ़ना
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 4.
कूबड़पन दूर करने की विधियां
(क) उठते-बैठते और चलते समय ठोडी को ऊपर की ओर करना
(ख) पीठ के नीचे तकिया रखकर लेटना
(ग) दीवार से लगी सीढ़ी से लटकना
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 5.
कमर के अधिक आगे निकल जाने के कारण
(क) बच्चों में पेट आगे निकल कर चलने की आदत
(ख) ज़रूरत से ज्यादा भोजन करना ।
(ग) स्त्रियों का ज्यादा बच्चे पैदा करना
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 6.
कमर की कुरूपता को दूर करने के उपाय
(क) सीधे खड़े होकर शरीर के ऊपरी भाग को आगे झुकाना और सीधा करना
(ख) पीठ के बल लेटकर उठना और फिर लेटना
(ग) सावधान अवस्था में खड़े होकर बार-बार पैरों को स्पर्श करना
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 7.
चपटे पैर ठीक करने की कसरत
(क) पंजों के भार चलना
(ख) पंजों के बल साइकिल चलाना
(ग) डंडेदार सीढ़ियों पर चढ़ना-उतरना
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

पाठ-4 : रवेल में लगने वाली चोटें व उनका इलाज

प्रश्न 1.
प्रत्यक्ष चोटों की किस्में
(क) रगड़
(ख) त्वचा का फटना
(ग) गहरा घाव
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 2.
जोड़ के उतरने का क्या भाव है ?
(क) हड्डी जोड़ से बाहर आ जाती है
(ख) जोड़ गति करना बंद कर देता है
(ग) खिलाड़ी खेलने में असमर्थ हो जाता है
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 3.
मोच के कारण
(क) चोट वाले स्थान पर तीव्र दर्द होता है
(ख) चोट वाले जोड़ पर सूजन आ जाती है
(ग) चोट वाले स्थान का रंग लाल हो जाता है
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 4.
खेल में चोटें लगने के कारण
(क) खेल के प्रति कम जानकारी
(ख) असावधानी
(ग) शरीर को कम गर्माना
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 5.
हड्डी के उतरने के लक्षण
(क) जोड़ का आकार बदल जाता है
(ख) अंग गति नहीं कर सकता
(ग) तीव्र दर्द होता है
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 6.
खिंचाव के कारण
(क) चोट वाले स्थान पर दर्द होता है
(ख) खिलाड़ी दौड़ नहीं सकता
(ग) चोटिल स्थान पर सूजन आ जाती है
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

पाठ-5 : योग

प्रश्न 1.
आसन की कितनी किस्में हैं ?
(क) तीन
(ख) दो
(ग) एक
(घ) उपरोक्त में से कोई नहीं।
उत्तर-
(क) तीन

प्रश्न 2.
योग का भाव बताएं
(क) जुड़ना
(ख) जोड़
(ग) आत्मा को परमात्मा के साथ जोड़ना
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 3.
आसनों के सिद्धांत
(क) आसन करने के लिए आयु और लिंग का ध्यान रखना
(ख) आसन करते समय ज़ोर न लगाना
(ग) आसन धीरे-धीरे करना
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 4.
योग की गलत धारणाएं
(क) योग को किसी विशेष धर्म से जोड़ना
(ख) योग केवल पुरुषों के लिए है
(ग) योग केवल रोगियों के लिए है
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 5.
आसन करने के सिद्धान्त
(क) आसन करते समय मांसपेशियों में तनाव आवश्यक है
(ख) गर्भवती महिलाओं को और हृदय के मरीजों को कठिन आसन नहीं करने चाहिए।
(ग) आसन कुदरत के सिद्धान्तों के अनुसार करने चाहिए
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

पाठ-6 : रवेलों का महत्त्व

प्रश्न 1.
बड़ी खेलों के नाम
(क) फुटबाल, हॉकी, क्रिकेट, टेबल टेनिस
(ख) खो-खो, बॉस्कटबाल
(ग) बैडमिन्टन, कुश्ती और कबड्डी
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 2.
छोटी खेलों के नाम
(क) रूमाल उठाना, कोटला छपाकी, गुल्ली डण्डा
(ख) लीडर ढूंढ़ना, बिल्ली चूहा, तीन-तीन या चार-चार
(ग) राजा-रानी, मथौला घोड़ी, दायरे वाली खो-खो .
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 3.
मनुष्य की मूल कुशलताएं
(क) चलना
(ख) दौड़ना
(ग) कूदना और फैंकना
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 4.
खेलने के लाभ
(क) वृद्धि और विकास
(ख) समय का उचित प्रयोग
(ग) भावनाओं पर काबू पाना
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 5.
खेलों से व्यक्ति में कौन-कौन से गुण पैदा होते हैं ?
(क) अच्छा स्वास्थ्य
(ख) सुडोल शरीर
(ग) तेज़ बुद्धि का विकास
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 6.
राष्ट्र को खेलों के लाभ
(क) राष्ट्रीय एकता
(ख) सीमाओं की रक्षा
(ग) अच्छे और अनुभवी नेता
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

पाठ-7 : स्काऊटिंग और गाइडिंग

प्रश्न 1.
स्काऊटिंग और गाइडिंग के लाभ
(क) बच्चों को ताकतवर और वफादार बनाते हैं
(ख) जात-पात और नफरत से दूरी
(ग) दूसरे प्रांतों के लोगों से मुलाकात
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 2.
स्काऊटिंग के नियम
(क) स्काऊटिंग की आन विश्वसनीय
(ख) स्काऊटिंग वफादार होता है
(ग) स्काऊटिंग सभी का दोस्त
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 3.
स्काऊटिंग शिक्षा के साथ बहुमुखी विकास
(क) यह बच्चों को ताकतवर, वफादार, देशभक्त बनाते हैं
(ख) स्काऊट रैलियों से अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्ध बनते हैं
(ग) स्काऊट अपने प्राध्यापक और सीनियर का आदेश मानते हैं और लोगों के प्रति प्यार बढ़ता है
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 4.
स्काऊटिंग लहर का जन्मदाता कौन था ?
(क) लार्ड बैटन पावल
(ख) मार्क मिलन
(ग) माडलैस
(घ) कोई नहीं।
उत्तर-
(क) लार्ड बैटन पावल

प्रश्न 5.
स्काऊटिंग लहर सबसे पहले कहां आरम्भ हुई ?
(क) बर्तानिया
(ख) होलैण्ड
(ग) अमेरिका
(घ) उपरोक्त कोई नहीं।
उत्तर-
(क) बर्तानिया

पाठ-8 : नशीले पदार्थों के विद्यार्थियों पर कुप्रभाव

प्रश्न 1.
नशीले पदार्थों के नाम बताएं
(क) शराब
(ख) तम्बाकू
(ग) भांग और अफीम
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 2.
कोई दो प्रणालियों के नाम बताएं जिनका प्रभाव नशीले पदार्थों से होता है
(क) पाचन प्रणाली
(ख) रक्त संचार प्रणाली
(ग) मानसिक प्रणाली
(घ) हड्डी प्रणाली।
उत्तर-
(क) पाचन प्रणाली और (ख) रक्त संचार प्रणाली

प्रश्न 3.
खिलाड़ी पर पड़ने वाले नशीले पदार्थों के बुरे प्रभाव लिखें
(क) बेफिक्री
(ख) गैर-ज़िम्मेदार
(ग) चक्कर आना
(घ) उपरोक्त में से कोई नहीं।
उत्तर-
(क) बेफिक्री और (ख) गैर-ज़िम्मेदार

प्रश्न 4.
नशीले पदार्थों से छुटकारा पाने के ढंग लिखें
(क) प्रेरणा
(ख) कान्फ्रेंस
(ग) मनोचिकित्सक
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 5.
तम्बाकू पीने के बुरे प्रभाव
(क) कैंसर का खतरा बढ़ जाता है
(ख) तम्बाकू से टी०बी० हो सकती है
(ग) पेट खराब रहता है
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 6.
शराब के हमारे स्वास्थ्य पर कुप्रभाव
(क) दिमाग पर बुरा प्रभाव
(ख) गुर्दे कमज़ोर हो जाते हैं
(ग) पाचन प्रणाली खराब हो सकती है
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

PSEB 7th Class Home Science Solutions Chapter 1 व्यक्तिगत स्वास्थ्य विज्ञान

Punjab State Board PSEB 7th Class Home Science Book Solutions Chapter 1 व्यक्तिगत स्वास्थ्य विज्ञान Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 7 Home Science Chapter 1 व्यक्तिगत स्वास्थ्य विज्ञान

PSEB 7th Class Home Science Guide व्यक्तिगत स्वास्थ्य विज्ञान Textbook Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
स्वस्थ त्वचा की क्या पहचान है?
उत्तर-
चिकनी, ठोस और जगह पर होती है।

प्रश्न 2.
स्वस्थ बाल कैसे होते हैं?
उत्तर-
चमकीले और साफ़।

प्रश्न 3.
आँखों को नीरोग रखने के लिए क्या करना चाहिए?
उत्तर-
आँखों को धुआँ, धूल, धूप तथा तेज़ रोशनी से बचाना चाहिए।

PSEB 7th Class Home Science Solutions Chapter 1 व्यक्तिगत स्वास्थ्य विज्ञान

लघूत्तर प्रश्न

प्रश्न 1.
खुश्क त्वचा और चिकनी चमड़ी वालों को अपनी चमड़ी ठीक रखने के लिए कौन-से ढंग प्रयोग में लाने चाहिएँ?
उत्तर-
खुश्क त्वचा और चिकनी चमड़ी वालों को विशेष तौर से सर्दियों में रात को सोने से पहले मुँह धोकर ग्लिसरीन में नींबू का रस मिलाकर लगाना चाहिए और साबुन
की जगह बेसन से मुँह धोना चाहिए।

प्रश्न 2.
अगर किसी की आँखें दर्द करती हों या जुकाम लगा हो तो उसका रूमाल क्यों प्रयोग नहीं करना चाहिए?
उत्तर-
आँखों का दर्द या जुकाम एक छूत की बीमारी है। अगर आँखें दर्द करती हों या जुकाम लगा हो तो रोगी को अपना रूमाल अलग रखना चाहिए, नहीं तो यह रोग दूसरों में भी फैल जाएगा।

प्रश्न 3.
कान में कोई तीखी वस्तु क्यों नहीं घुमानी चाहिए?
उत्तर-
कान में कोई नुकीली वस्तु चलाने से बाह्य कान में घाव हो जाते हैं और पर्दा भी फट जाने का डर रहता है इसलिए कानों में कोई नुकीली वस्तु नहीं चलाना चाहिए।

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निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
व्यक्तिगत सफ़ाई से क्या अभिप्राय है ? नाक, गले और चेहरे को कैसे साफ़ रखा जा सकता है? स्पष्ट करें।
उत्तर-
व्यक्तिगत सफ़ाई का अभिप्राय है अपने शरीर की सफ़ाई तथा अन्य बातों जैसे खुराक, व्यायाम, सोना या आराम करना आदि पर भी ध्यान देना, जिससे शरीर स्वस्थ और ठीक हालत में रह सके।

नाक की सफ़ाई-नाक श्वास लेने व निकालने का मार्ग है। नाक के अन्दर भी चिपचिपा या लेसदार स्राव निकलता है। नाक को रोज़ाना अन्दर से बाहर की ओर को साफ़ करना चाहिए। नाक की सफ़ाई बहुत आवश्यक है। यदि नाक में गन्दगी होगी तो शरीर के अन्दर नाक से श्वास नहीं जा पाएगी और श्वास-नली में संक्रमण हो सकता है। मुँह से साँस लेना रोगों का घर है। नाक को बहुत ज़ोर से सिनकना नहीं चाहिए अन्यथा नाक और गले के कृमि श्रवण नली द्वारा कान के बीच वाले भाग में पहुँचकर श्रवण शक्ति को प्रभावित कर सकते हैं। गले की सफ़ाई-गले को साफ़ करने के लिए बच्चे को गरारे करना सिखाना चाहिए। रात को सोने से पहले बच्चे का मुँह और गला साफ़ करना चाहिए। अगर बच्चे का गला खराब हो तो पानी उबालकर गुनगुना करके उसमें नमक डालकर गरारे करवाने चाहिएँ। अगर गले में टोन्सिल होने का शक हो तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। लापरवाही करने से बच्चा बीमार रहता है और उसका शारीरिक विकास ठीक नहीं हो पाता है।

चेहरे की सफ़ाई-प्रतिदिन चेहरे को अच्छी तरह बढ़िया साबुन तथा गुनगुने पानी के साथ दो-तीन बार धोना चाहिए। साबुन हमेशा हाथों पर मलकर मुँह पर लगाना चाहिए। इसके बाद मुँह को कई बार गुनगुने पानी से धोना चाहिए ताकि साबुन साफ़ हो जाए। इसके बाद साफ़ तौलिये से मुंह को अच्छी तरह पोंछना चाहिए ताकि रोम छिद्र खुल जाएँ।

प्रश्न 2.
सुन्दर दिखने के लिए चेहरे की सफ़ाई क्यों आवश्यक है?
उत्तर-
सुन्दर दिखने के लिए प्रतिदिन दो-तीन बार एक बढ़िया साबुन से चेहरे को धोकर साफ़ तौलिये से पोंछना चाहिए। चेहरे को साफ़ करते समय आँखें, नाक, कान, गला, मुँह और दाँतों का ध्यान रखना चाहिए। इन अंगों को साफ़ करते समय जो रूमाल, तौलिया या और कोई अन्य वस्तु इस्तेमाल की जाए वह अच्छी तरह साफ़ और स्वच्छ होना
चाहिए।

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प्रश्न 3.
त्वचा गन्दी क्यों हो जाती है ? उसको कैसे साफ़ रखा जा सकता है ?
उत्तर-
भारतवर्ष जैसे गर्म देश में रहने वाले लोगों की त्वचा अधिक गन्दी होती है, क्योंकि यहाँ अधिक पसीना आता है। पसीना एक दूषित पदार्थ है और इसमें अनेक पदार्थ जैसे उपचर्म की टूटी-फूटी कोशिकाएँ, धूल के कण आदि के अलावा अनेक जीवाणु भी फँस जाते हैं तथा इन पदार्थों को सड़ाते हैं। इससे दुर्गन्ध आने लगती है। अनेक प्रकार के चर्म रोग उत्पन्न हो जाते हैं।

त्वचा की सफाई के लिए प्रतिदिन ताजे या हल्के गुनगुने पानी से स्नान करना आवश्यक है। इससे (वचा के छिद्र खुल जाते हैं और पसीना निकलता रहता है। त्वचा से गन्दगी हट जाने से बीमारियों की आशंका नहीं रहती है। स्नान करते समय शरीर को साबुन आदि से साफ़ करना अच्छा रहता है। शरीर को रगड़ना भी आवश्यक है ताकि इसकी मॉलिश हो सके।

प्रश्न 4.
आप अपने बालों की रक्षा कैसे करोगे?
उत्तर-
बालों की रक्षा
(i) सप्त एक बार बाल में तेल लगाकर अच्छी तरह मॉलिश करना चाहिए।
(ii) बालों को धोने के बाद अच्छी तरह तौलिये से पोंछकर, फिर खुला छोड़कर सुखाना चाहिए।)
(iii) जब तक बाल अच्छी तरह सूख न जाएँ जूड़ा या चोटी नहीं बनानी चाहिए।
(iv) प्रतिदिन दो बार बालों में कंघी करना चाहिए।
(v) कंघी या ब्रुश को प्रत्येक सप्ताह धोकर अच्छी तरह धूप में सुखाना चाहिए।

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Home Science Guide for Class 7 PSEB व्यक्तिगत स्वास्थ्य विज्ञान Important Questions and Answers

अति छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
WHO के विचार से स्वास्थ्य क्या है?
उत्तर-
WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) के विचार से स्वास्थ्य में मनुष्य का सम्पूर्ण शारीरिक, मानसिक व संवेगात्मक कल्याण निहित है।

प्रश्न 2.
जीवन में सुखी रहने के लिए क्या आवश्यक है?
उत्तर-
शरीर का स्वस्थ और शक्तिशाली होना।

प्रश्न 3.
त्वचा को नियमित रूप से साफ़ करना आवश्यक क्यों है?
उत्तर-
त्वचा से पसीना और अपशिष्ट पदार्थ बाहर निकलते हैं। यदि त्वचा को साफ़ नहीं किया जाए तो मैल जम जाता है जिसके कारण त्वचा के छिद्र बंद हो जाते हैं, इसलिए त्वचा को नियमित रूप से साफ़ करना आवश्यक है।

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प्रश्न 4.
दाँतों को साफ़ करना आवश्यक क्यों है?
उत्तर–
दाँतों को खोखले होने से, गिरने से, दर्द होने से बचने के लिए दाँतों को साफ़ करना आवश्यक है।

प्रश्न 5.
कानों में सलाई या तिनका क्यों नहीं फेरना चाहिए?
उत्तर-
कानों में सलाई या तिनका फेरने से बाह्य कान में घाव हो जाते हैं और पर्दा भी फट सकता है इसलिए कानों में सलाई नहीं फेरनी चाहिए।

प्रश्न 6.
कान का संक्रमण होने पर इसका इलाज तुरन्त क्यों करवाना चाहिए?
उत्तर-
कान का संक्रमण होने पर यदि इसका इलाज न करवाया जाए तो यह दिमाग़ तक नुकसान पहुँचा सकता है इसलिए इसका इलाज तुरन्त करवा लेना चाहिए।

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प्रश्न 7.
नियमित व्यायाम व उत्तम आसन शरीर के लिए क्यों आवश्यक हैं?
उत्तर-
शरीर को सुन्दर, सुगठित व स्वस्थ रखने के लिए।

प्रश्न 8.
दाँतों को केरीज रोग से बचाने के लिए क्या उपाय किए जाने चाहिए?
उत्तर-

  1. भोजन के बाद कुल्ला करना चाहिए,
  2. दाँतों को अंगुली से साफ़ करना चाहिए।

प्रश्न 9.
दाँतों का केरीज रोग क्या होता है?
उत्तर-
दाँतों में कार्बोहाइड्रेट युक्त तथा मीठे पदार्थों के सड़ने से जीवाणुओं की क्रिया से एसिड बनता है जो दाँतों के एनेमल को क्षीण कर देता है।

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प्रश्न 10.
पायरिया रोग के लक्षण क्या हैं?
उत्तर-

  1. मसूड़े सूजने लगते हैं,
  2. मसूड़ों में पीड़ा होती है,
  3. मसूड़ों से दाँत अलग होने लगते हैं,
  4. मुँह से दुर्गन्ध आती है।

प्रश्न 11.
स्वस्थ आँखें कैसी होती हैं?
उत्तर-
चौकन्नी, साफ़ और मलविहीन।

प्रश्न 12.
स्वस्थ नाक की क्या पहचान है?
उत्तर-
साफ़ और साँस लेती हुई होती है।

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प्रश्न 13.
स्वस्थ मुख और होंठ कैसे होते हैं?
उत्तर-
स्वस्थ मुख प्रसन्न और आनन्दित तथा स्वस्थ होंठ लाल और गीले होते हैं।

प्रश्न 14.
स्वस्थ गला किसे कहते हैं?
उत्तर-
साफ़, गीला तथा बाधा विहीन होता है।

प्रश्न 15.
स्वस्थ दाँत कैसे होते हैं?
उत्तर-
साफ़, सही और कष्टविहीन होते हैं।

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प्रश्न 16.
स्वस्थ मसूड़े कैसे होने चाहिएँ?
उत्तर-
ठोस तथा लाल।

प्रश्न 17.
स्वस्थ तथा अस्वस्थ हाथ में क्या अन्तर होता है?
उत्तर-
हाथ की हथेलियाँ लाल होने पर स्वस्थ तथा पीली होने पर अस्वस्थ मानी जाती।

छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
व्यायाम शरीर के लिए क्यों आवश्यक है?
उत्तर-
व्यायाम हमारे स्वास्थ्य के लिए तथा शरीर को निरोग रखने के लिए अत्यन्त आवश्यक है। इसके विभिन्न कारण हैं

  1. व्यायाम करने से भोजन शीघ्र पच जाता है तथा भूख खुलकर लगती है।
  2. व्यायाम करने से शरीर की गन्दगी शीघ्र बाहर निकल जाती है।
  3. व्यायाम करने से शरीर की मांसपेशियाँ मज़बूत हो जाती हैं जिससे शरीर मजबूत होता है।

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प्रश्न 2.
नियमित स्नान के क्या लाभ हैं ?
उत्तर-
नियमित स्नान से शरीर को निम्न लाभ होते हैं-

  1. त्वचा की स्वच्छता होती है।
  2. रोमकूपों के मुँह खुल जाते हैं।
  3. स्नान के बाद तौलिए से शरीर रगडने से रक्त संचरण उत्तम होता है।
  4. स्नान से हानिकारक पदार्थों तथा रोगाणुओं से मुक्ति मिलती है।
  5. धुलकर बह जाने से पसीने की दुर्गन्ध जाती रहती है।

प्रश्न 3.
नाखूनों की सफ़ाई क्यों आवश्यक है ? नाखूनों को किस प्रकार साफ़ करना चाहिए?
उत्तर-
नाखूनों के अन्दर किसी प्रकार की गन्दगी नहीं रहनी चाहिए क्योंकि भोजन के साथ इनमें उपस्थित रोगों के कीटाणु, जीवाणु आदि आहार-नाल में पहुँचकर विकार उत्पन्न करेंगे। नाखूनों को काटते रहना चाहिए अथवा ब्रुश इत्यादि से भली-भाँति साफ़ करना चाहिए।

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बड़े उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
व्यक्तिगत सफ़ाई का स्वास्थ्य में क्या महत्त्व है?
उत्तर-
यह सर्वविदित मान्यता है कि स्वस्थ शरीर जीवन धारण के योग्य होता है। जिसका शरीर स्वस्थ नहीं वह जीवन धारण करने के बाद भी सांसारिक सुखों का उपभोग नहीं कर सकता। अस्वस्थ मनुष्य का जीवन दूसरों के लिए भार हो जाता है। अतः मनुष्य का स्वस्थ रहने के लिए प्रकृति के नियमों का पालन करना, उसके अनुकूल चलना और बच्चों को भी उसी के अनुसार चलाना चाहिए। व्यक्तिगत स्वास्थ्य के अन्तर्गत स्वास्थ्य के नियमों के अतिरिक्त शारीरिक या शरीर के प्रत्येक अंग की सफ़ाई का बहुत अधिक महत्त्व है।
व्यक्तिगत सफ़ाई के अन्तर्गत निम्नलिखित की सफ़ाई आती है

  1. मुँह व दाँतों की सफ़ाई-इससे दाँत खोखले होने, गिरने तथा किसी प्रकार का रोग होने से बचे रहते हैं।
  2. आँखों की सफ़ाई-इससे आँखें चौकन्नी, साफ़ और मलविहीन रहती हैं। आँखों की सफ़ाई रहने से आँखों के रोग नहीं होते।
  3. नाक की सफ़ाई-इससे श्वास-नली में संक्रमण नहीं होता।
  4. कानों की सफ़ाई-इससे कानों में दर्द व खुजली नहीं होती और जीवाणुओं का आक्रमण भी नहीं होता।
  5. त्वचा की सफ़ाई-त्वचा की सफ़ाई से त्वचा के रोग नहीं होते तथा शरीर में फुर्ती बनी रहती है।
  6. हाथों तथा नाखूनों की सफ़ाई-नाखूनों में गन्दगी जमा होने से कई रोगों के कीटाणु पनपने लगते हैं और हाथों से मुँह में चले जाते हैं।
  7. वस्त्रों में सफ़ाई-स्वच्छ व साफ़-सुथरे कपड़े पहनने से शरीर स्वस्थ व मन प्रसन्न रहता है। गन्दे वस्त्रों में रोग के कीटाणु पनपते हैं जो शरीर को रोगी बनाने में सहायक होते है।

प्रश्न 2.
आँख और नाक को कैसे साफ़ रखा जा सकता है?
उत्तर-
आँखों की सफाई व सुरक्षा-आँखें हमारे शरीर में अत्यन्त ही महत्त्वपूर्ण अंग है। इनसे ही हम विभिन्न वस्तुओं को देख सकते हैं। इसलिए यह कहावत है कि ‘आँखें हैं तो जहान है’ कही जाती है। इनकी स्वच्छता तथा सुरक्षा के लिए निम्नलिखित उपाय किए जाने चाहिएं

  1. आँखों को बाहर की गन्दगी जैसे धूल-मिट्टी, कूड़ा-करकट, कीट-पतंगे आदि से बचाना चाहिए। कुछ धूल तथा जीवाणु तो आँख के द्वारा बाहर निकल जाते हैं यदि किसी कारण से आँखों में कुछ गिर जाए तो उसको नार्मल सेलाइन या साफ़ जल से धो डालना चाहिए।
  2. मुँह तथा आँखों को कई बार धोने तथा पोंछने से सफ़ाई होती है।
  3. गन्दे हाथों से अथवा गन्दे रूमाल से आँखों को नहीं पोंछना चाहिए, न ही इन्हें रगड़ना या मलना चाहिए।
  4. तौलिया, साबन, बाल्टी, मग तथा मँह पोंछने का कपडा जिनका उपयोग दसरे व्यक्ति करते हों, प्रयोग नहीं करना चाहिए, विशेषकर दुखती आँखों वाले व्यक्ति का।
  5. आँखों को तेज़ धूप, चकाचौंध अथवा तेज़ रोशनी से बचाना चाहिए। इसके लिए धूप के चश्मे आदि का प्रयोग किया जा सकता है।
  6. कम प्रकाश में लिखना-पढ़ना अथवा कोई महीन काम करना आँखों के लिए घातक सिद्ध हो सकता है।
  7. आँखों की विभिन्न बीमारियों जैसे-रोहे इत्यादि से आँखों को बचाना चाहिए और यदि इनमें से कोई रोग हो तो तुरन्त ही नेत्र-विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।

नाक की सफ़ाई-नाक श्वास लेने व निकालने का मार्ग है। नाक के अन्दर भी चिपचिपा या लेसदार स्राव निकलता है। नाक को रोजाना अन्दर से बाहर की ओर को साफ़ करना चाहिए। नाक की सफ़ाई बहुत आवश्यक है। यदि नाक में गन्दगी होगी तो शरीर के अन्दर नाक से श्वास नहीं जा पाएगी और श्वास-नली में संक्रमण हो सकता है। मुँह से साँस लेना रोगों का घर है। नाक को बहुत ज़ोर से सिनकना नहीं चाहिए अन्यथा नाक और गले के कृमि श्रवण नली द्वारा कान के बीच वाले भाग में पहुँचकर श्रवण शक्ति को प्रभावित कर सकते हैं।

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एक शब्द में उत्तर दें

प्रश्न 1.
कान को ……….. वस्तु से साफ़ नहीं करना चाहिए।
उत्तर-
नुकीली।

प्रश्न 2.
त्वचा से पसीना तथा ………….. पदार्थ बाहर निकलते हैं।
उत्तर-
अपशिष्ट।

प्रश्न 3.
आँखों की एक बीमारी का नाम बताएं।
उत्तर-
रोहे।

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प्रश्न 4.
नियमित स्नान से किसके मुँह खुल जाते हैं?
उत्तर-
रोमकूपों के।

प्रश्न 5.
…………. से आंखें नहीं पोछनी चाहिए।
उत्तर-
गंदे रूमाल से।

प्रश्न 6.
…………… बाल चमकीले तथा साफ़ होते हैं।
उत्तर-
स्वस्थ।

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प्रश्न 7.
नियमित स्नान का एक लाभ बताएं।
उत्तर-
त्वचा की सफाई हो जाती है।

व्यक्तिगत स्वास्थ्य विज्ञान PSEB 7th Class Home Science Notes

  • प्रतिदिन चेहरे को अच्छी तरह बढ़िया साबुन तथा गुनगुने पानी से दो-तीन बार धोना चाहिए।
  • चेहरे की त्वचा को ठीक रखने के लिए रात को सोने से पहले मुँह को अच्छी तरह साबुन से धोने के बाद बेसन का उबटन मलना चाहिए और उसके बाद गुनगुने पानी से मुँह को धो लेना चाहिए।
  • नाक को प्रतिदिन साफ़ करना चाहिए ताकि नाक का रास्ता साफ़ हो जाए और अच्छी तरह साँस लिया जा सके।
  • गले को साफ़ करने के लिए बच्चे को गरारे करना सिखाना चाहिए।
  • बच्चे का गला खराब हो तो पानी को उबालकर गुनगुना करके उसमें नमक डालकर गरारे करवाने चाहिए।
  • बालों तथा सिर की सफ़ाई करने की उतनी ही आवश्यकता है जितनी चमड़ी की। सिर और बालों को सप्ताह में एक-दो बार अवश्य धोना चाहिए।
  • सप्ताह में एक बार सिर में तेल लगाकर अच्छी तरह मॉलिश करना चाहिए, जिससे नाड़ियों को उत्तेजित किया जा सके।
  • प्रतिदिन पानी और साबन के साथ स्नान करना चाहिए और बाद में साफ़ तौलिए से पूरे शरीर को अच्छी तरह पोंछना चाहिए।
  • तेल के साथ मॉलिश करना और भाप के साथ स्नान करना स्वास्थ्य और ताज़गी के लिए अच्छे समझे जाते हैं।
  • खुश्क चमड़ी वालों को विशेष तौर से सर्दियों में रात को सोते समय मुँह धोकर ग्लिसरीन में नींबू का रस मिलाकर लगाना चाहिए और साबुन की जगह बेसन से मुँह धोना चाहिए।

PSEB 6th Class Social Science Solutions Chapter 10 हड़प्पा सभ्यता

Punjab State Board PSEB 6th Class Social Science Book Solutions History Chapter 10 हड़प्पा सभ्यता Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 6 Social Science History Chapter 10 हड़प्पा सभ्यता

SST Guide for Class 6 PSEB हड़प्पा सभ्यता Textbook Questions and Answers

I. निम्न प्रश्नों के उत्तर लिखें

प्रश्न 1.
हड़प्पा सभ्यता के कुछ महत्त्वपूर्ण नगरों के नाम बतायें।
उत्तर-
हड़प्पा सभ्यता के महत्त्वपूर्ण नगर हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, लोथल, कालीबंगन, बनवाली आदि थे।

प्रश्न 2.
सिन्धु घाटी के लोगों के सामाजिक जीवन के बारे में आप क्या जानते
उत्तर–
सिन्धु घाटी सभ्यता के लोगों का सामाजिक जीवन बहुत विकसित था। समाज में तीन वर्गों के लोग रहते थे। पहला वर्ग अमीर लोगों, दूसरा वर्ग किसानों तथा छोटे-छोटे पेशेवर लोगों का और तीसरा वर्ग मज़दूरों का था। लोगों का रहन-सहन आज की तरह ही था। लोगों के भोजन के मुख्य पदार्थ गेहूं, ज्वार, चावल, दालें, फल, सब्जियां तथा दूध थे। कुछ लोग मांसाहारी भी थे। लोग सूती तथा ऊनी, दोनों प्रकार के कपड़े पहनते थे। स्त्रियां तथा पुरुष, दोनों शृंगार करते थे तथा आभूषण पहनते थे। अमीर लोग सोने-चांदी एवं कीमती पत्थरों के आभूषण जबकि ग़रीब लोग हड्डियों, पकी मिट्टी तथा मनकों के बने हुए आभूषण पहनते थे।

लोग खेलों के शौकीन थे। नाचना-गाना, जुआ अथवा चौपड़ खेलना, शिकार करना आदि मनोरंजन के मुख्य साधन थे। बच्चों के खेलने के लिए पकी मिट्टी के तरह-तरह के खिलौने बनाये जाते थे, जिनमें जानवरों की मूर्तियां तथा बैलगाड़ियां आदि प्रमुख थीं।

प्रश्न 3.
सिन्धु घाटी सभ्यता की नगर योजना के बारे में एक नोट लिखें।
उत्तर-
सिन्धु घाटी सभ्यता में नगर-निर्माण उच्चकोटि का था। नगर दो भागों में बंटे हुए थे-ऊंचा भाग तथा निचला भाग। ऊंचे भाग में बड़े-बड़े धार्मिक तथा सार्वजनिक भवन थे। यहां शासक वर्ग के लोग रहते थे। निचले भाग में साधारण लोगों के निवास स्थान थे। नगरों की सड़कें सीधी जाती थीं तथा एक-दूसरी को समकोण पर काटती थीं। नगरों में नालियों की बहुत अच्छी व्यवस्था की गई थी, जिसके कारण नगर में सफ़ाई रहती थी।

PSEB 6th Class Social Science Solutions Chapter 10 हड़प्पा सभ्यता

प्रश्न 4.
हड़प्पा सभ्यता के पतन के क्या कारण थे?
उत्तर-
लगभग 1500 ई० पूर्व हड़प्पा सभ्यता का पतन हो गया। इस सभ्यता के पतन के कारणों के बारे में निश्चित रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता। भिन्न-भिन्न विद्वानों ने अपने-अपने अनुमान के अनुसार इसके पतन के कारण बताये हैं –

1. कुछ विद्वानों का विचार है कि आर्य लोगों ने सिन्धु घाटी के लोगों के साथ युद्ध करके उन्हें हरा दिया था। फलस्वरूप हड़प्पा सभ्यता नष्ट हो गई। परन्तु इस विचार को आज कोई महत्त्व नहीं दिया जाता।

2. कुछ विद्वानों के अनुसार सिन्धु तथा इसकी सहायक नदियों में लगातार बाढ़ आने के कारण इस सभ्यता का नाश हो गया।

3. कुछ विद्वानों का कथन है कि लगभग 1900 ई० पू० सरस्वती नदी के सूख जाने के कारण हड़प्पा सभ्यता के लोग पूर्व की ओर गंगा के मैदान में चले गए थे। .

4. कुछ विद्वानों के अनुसार भूकम्प अथवा किसी अन्य प्राकृतिक विपदा के कारण इस सभ्यता का अन्त हो गया था।

5. कुछ विद्वानों के अनुसार सिन्धु घाटी की भूमि में रेगिस्तान फैल गया तथा इसमें ण की मात्रा बढ़ गई। परिणामस्वरूप भूमि की उपजाऊ-शक्ति समाप्त हो गई। अतः धु घाटी के लोग अन्य स्थानों पर जाकर रहने लगे।

प्रश्न 5.
सिन्धु घाटी के लोगों का आर्थिक जीवन कैसा था?
उत्तर–
सिन्धु घाटी के लोगों का आर्थिक जीवन समृद्ध था। लोगों के मुख्य व्यवसाय कृषि, पशुपालन तथा व्यापार थे। इसके अतिरिक्त लोग कुछ अन्य उद्योग-धन्धे भी करते थे।

1. कृषि-सिन्धु घाटी के लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि था। सिंचाई नदियों द्वारा की जाती थी। गेहूं, चावल, जौ तथा कपास की कृषि मुख्य रूप में होती थी। खेतों को हल तथा बैलों के साथ जोता जाता था। लोग तिल तथा सरसों भी पैदा करते थे।

2. पशुपालन-लोग बैल, भैंस, भेड़, बकरियां, ऊंट, हाथी, घोड़े तथा कुत्ते पालते थे।

3. व्यापार-नगर व्यापार के केन्द्र थे। गाड़ियों तथा नौकाओं में माल लाया जाता था। मुद्रा की कमी के कारण व्यापार वस्तुओं की अदला-बदली द्वारा ही होता था। व्यापार देशी तथा विदेशी, दोनों प्रकार का था। विदेशी व्यापार मुख्य तौर पर अफ़गानिस्तान, ईरान तथा मैसोपोटामिया के साथ होता था।

4. अन्य उद्योग-धन्धे-पत्थर तथा तांबे की अनेक वस्तुएं बनाई जाती थीं। शिल्पकार मूर्तियां, बर्तन, औज़ार तथा हथियार आदि बनाते थे। कपड़े की छपाई तथा सूत कातने का कार्य भी होता था।

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प्रश्न 6.
पंजाब में हड़प्पा सभ्यता के किन्हीं दो केन्द्रों के बारे में लिखें।
उत्तर-
पुरातत्त्व विशेषज्ञों ने पंजाब में खुदाई करके हड़प्पा सभ्यता के अनेक केन्द्रों की खोज की है। ये केन्द्र संघोल, रोहीड़ा, सुनेत तथा कोटला निहंग खान हैं। इन केन्द्रों में से संघोल तथा रोहीड़ा केन्द्रों का वर्णन इस प्रकार है –

1. संघोल-संघोल एक छोटा-सा गांव है जो ज़िला लुधियाना में लुधियाना-चण्डीगढ़ सड़क पर स्थित है। इसे ‘ऊंचा गांव’ भी कहा जाता है। यहां की खुदाई से 2000 ई० पूर्व के समय के लोगों की जानकारी प्राप्त हुई है। यहां कुछ मूर्तियां, मिट्टी के बर्तन, माला के मनके तथा तांबे के औज़ार मिले हैं। इन वस्तुओं का सम्बन्ध हड़प्पा सभ्यता से है।

2. रोहीड़ा-रोहीड़ा जिला संगरूर में स्थित है। यहां की खुदाई से बर्तन, पकी ईंटें, मिट्टी के खिलौने आदि मिले हैं। यहां खुदाई का काम 1976-77 ई० में किया गया था।

II. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें

  1. हड़प्पा सभ्यता मिस्र की सभ्यता से लगभग ………… गुणा विशाल थी।
  2. पंजाब में ………, …, ………. तथा …….. में इस (हड़प्पा) सभ्यता के अवशेष प्राप्त हुए हैं।
  3. मकान …………. तथा ……………. के बने हुए थे।
  4. एक विशाल …………. भवन मोहनजोदड़ो से प्राप्त हुआ है।
  5. मर्द तथा स्त्रियां दोनों …………. तथा …………. के शौकीन थे।
  6. लोग …………. की पूजा करते थे।
  7. पीपल के वृक्ष को ………….. समझा जाता था।

उत्तर-

  1. बीस
  2. कोटला निहंग खां, संघोल, रोहिड़ा, सुनेत
  3. पक्की ईंटों, लकड़ी
  4. स्तम्भों वाला
  5. आभूषणों (गहनों), फैशन
  6. मातृ देवी
  7. पवित्र।

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III. सही जोड़े बनायें

(1) पशुपति – (क) बन्दरगाह
(2) मोहनजोदड़ो – (ख) लेखन कला
(3) लोथल – (ग) देवता
(4) चित्रलिपि – (घ) विशाल स्नानगृह।
उत्तर-सही जोड़े
(1) पशुपति – देवता
(2) मोहनजोदड़ो – विशाल स्नानगृह
(3) लोथल – बन्दरगाह
(4) चित्रलिपि – लेखन कला

IV. सही (✓) अथवा ग़लत (✗) का निशान लगायें

  1. रोपड़ पाकिस्तान में स्थित है।
  2. हड़प्पा के लोग मातृदेवी की पूजा नहीं करते थे।
  3. पंजाब में सिन्धु सभ्यता के कोई अवशेष नहीं मिले हैं।
  4. सिन्धु घाटी के लोगों को लेखन कला नहीं आती थी।

उत्तर-

  1. (✗)
  2. (✗)
  3. (✗)
  4. (✗)

PSEB 6th Class Social Science Guide हड़प्पा सभ्यता Important Questions and Answers

कम से कम शब्दों में उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
पंजाब का एक हड़प्पा-स्थल लुधियाना जिले में स्थित है जिसे उच्चपिंड कहा जाता है। क्या आप उसका नाम बता सकते हैं?
उत्तर-
संघोल।

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प्रश्न 2.
हड़प्पा तथा मोहनजोदड़ो हड़प्पा सभ्यता के दो प्रमुख स्थल हैं। बताइए इनके अवशेष वर्तमान में किस देश में हैं?
उत्तर-
पाकिस्तान में।

प्रश्न 3.
सिंधु घाटी की सभ्यता की कांस्य की नृत्यांगना की मूर्ति किस प्राचीन स्थल से मिली है?
उत्तर-
मोहनजोदड़ो।

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्न में से कौन-सा हड़प्पा स्थल हरियाणा से संबंध नहीं रखता?
(क) सुनेत
(ख) बनवाली
(ग) मिताथल
उत्तर-
(क) सुनेत

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प्रश्न 2.
नीचे दिखाई गई योगी की मूर्ति का संबंध निम्न में से किस सभ्यता से है?
PSEB 6th Class Social Science Solutions Chapter 9 हड़प्पा सभ्यता 1
(क) गुप्तकालीन सभ्यता
(ख) वैदिक सभ्यता
(ग) हड़प्पा सभ्यता।
उत्तर-
(ग) हड़प्पा सभ्यता

प्रश्न 3.
हड़प्पा की कुछ मुद्राओं पर एक चित्रलिपि में लेख मिलते हैं। इससे क्या पता चलता है?
(क) लोग मुद्राएं बनाने में निपुण थे।
(ख) उन्हें लेखन कला का ज्ञान था।
(ग) वे मूर्तियों पर उनके बनाने की तिथि लिखते थे।
उत्तर-
(ख) उन्हें लेखन कला का ज्ञान था।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
हड़प्पा सभ्यता को सिन्धु घाटी सभ्यता क्यों कहते हैं?
उत्तर-
हड़प्पा सभ्यता के कई स्थान सिन्धु तथा इसकी सहायक नदियों के किनारे हुए थे। इसीलिए इसे सिन्धु घाटी सभ्यता भी कहते हैं।

PSEB 6th Class Social Science Solutions Chapter 10 हड़प्पा सभ्यता

प्रश्न 2.
हड़प्पा की सभ्यता के आरम्भ होने का लगभग समय बताएं।
उत्तर-
हड़प्पा सभ्यता का आरम्भ आज से लगभग 7000 वर्ष पूर्व हुआ।

प्रश्न 3.
हड़प्पा सभ्यता की सड़कों की क्या विशेषता थी?
उत्तर-
हड़प्पा सभ्यता की सड़कें सीधी थीं तथा एक-दूसरी को समकोण पर काटती थीं। वायु चलने पर ये अपने आप साफ़ हो जाती थीं।

प्रश्न 4.
हड़प्पा सभ्यता का विशाल स्नानगृह कहां मिला है?
उत्तर-
हड़प्पा सभ्यता का विशाल स्नानगृह मोहनजोदड़ो में मिला है।

PSEB 6th Class Social Science Solutions Chapter 10 हड़प्पा सभ्यता

प्रश्न 5.
पंजाब में हड़प्पा सभ्यता के किन्हीं चार स्थानों के नाम बताएं।
उत्तर-
पंजाब में हड़प्पा सभ्यता के चार स्थान संघोल, रोहिड़ा, सुनेत तथा कोटला निहंग खां हैं।

प्रश्न 6.
हड़प्पा सभ्यता की नालियों की दो विशेषताएं बताएं।
उत्तर-

  1. हड़प्पा सभ्यता की नालियां भूमिगत थीं।
  2. शहर की नालियों का पानी एक बड़ी नाली द्वारा शहर से बाहर जाता था।

प्रश्न 7.
वर्तमान हरियाणा में हड़प्पा सभ्यता के स्थानों के नाम बताएं।
उत्तर-
(1) बनावली,
(2) राखीगढ़ी,
(3) मिताथल,
(4) कुनाल।

PSEB 6th Class Social Science Solutions Chapter 10 हड़प्पा सभ्यता

प्रश्न 8.
पंजाब में हड़प्पा सभ्यता के स्थानों की खुदाई करने वाले दो पुरातत्ववेताओं के नाम लिखो।
उत्तर-
आर० डी० बैनर्जी तथा दया राम साहनी।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
संसार की आरम्भिक सभ्यताओं का विकास नदियों के किनारों पर क्यों हुआ?
उत्तर-
संसार की आरम्भिक सभ्यताओं का विकास नदियों के किनारों पर निम्नलिखित कारणों से हुआ –

  1. नदी घाटियों का निर्माण नदियों द्वारा लाई गई मिट्टी से हुआ था। इसलिए ये बहुत । उपजाऊ थे।
  2. लोगों को पर्याप्त मात्रा में पानी प्राप्त होता था।
  3. यातायात तथा सामान लाने-ले जाने के लिए नदियों का प्रयोग किया जा सकता था।

प्रश्न 2.
संसार की आरम्भिक सभ्यताओं के चार केन्द्र बताओ।
उत्तर-
संसार की आरम्भिक सभ्यताओं के चार केन्द्र ये थे –

  1. नील नदी की घाटी (मिस्र),
  2. दज़ला तथा फ़रात नदियों की घाटी (मैसोपोटामिया),
  3. सिन्धु नदी की घाटी (सिन्धु),
  4. ह्वांग-हो तथा यंगसी-क्यांग नदियों की घाटी (चीन)।

PSEB 6th Class Social Science Solutions Chapter 10 हड़प्पा सभ्यता

प्रश्न 3.
हड़प्पा सभ्यता का विस्तार बताएं।
उत्तर-
हड़प्पा सभ्यता का विस्तार भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिमी भाग में लगभग सिन्धु नदी से लेकर प्राचीन सरस्वती (आधुनिक घग्गर नदी) नदी तक था। इसमें वर्तमान पाकिस्तान, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ भाग तथा दक्षिणी अफगानिस्तान शामिल थे।

प्रश्न 4.
हड़प्पा सभ्यता के मकानों के निर्माण का वर्णन करें।
उत्तर-
हड़प्पा सभ्यता में मकान पकी ईंटों तथा लकड़ी से बनाये जाते थे। मकान के निर्माण में पत्थरों का प्रयोग बहुत कम किया जाता था। बड़े मकानों में अनेक कमरे होते थे जबकि छोटे मकान एक या दो कमरों वाले होते थे। प्रत्येक घर में एक रसोईघर तथा स्नान-गृह होता था। कई बड़े मकान दो-मंजिला भी होते थे तथा इनमें एक आंगन तथा कुआं होता था। मकान की नालियों का निकास बाहर गली की भूमिगत नालियों में होता था।

प्रश्न 5.
हड़प्पा सभ्यता के मुख्य भवनों के बारे में बताएं।
उत्तर-
हड़प्पा सभ्यता के मुख्य भवन निम्नलिखित थे –

1. विशाल स्नानगृह-यह वर्माकार भवन मोहनजोदड़ो में मिला है। ऐसा माना जाता है कि विशेष अवसरों पर लोग स्नान करने के लिए यहां इकट्ठे होते थे।
2. अनाज के गोदाम-ये भवन हड़प्पा तथा मोहनजोदड़ो में मिले हैं।
3. सभा भवन-मोहनजोदड़ो में स्तम्भों वाला एक भवन मिला है। इसका प्रयोग शायद सभा करने के लिए किया जाता था।

PSEB 6th Class Social Science Solutions Chapter 10 हड़प्पा सभ्यता

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
हड़प्पा सभ्यता के लोगों के भोजन, वस्त्रों तथा आभूषणों के बारे में बताएं।
उत्तर-
भोजन-हड़प्पा सभ्यता के लोगों का भोजन सभ्य लोगों जैसा था। वे गेहूं, चावल, सब्जियां, फल तथा दूध का प्रयोग करते थे। कुछ लोग माँस तथा मछली भी ख़ाते थे

वस्त्र-हड़प्पा सभ्यता के लोग सूती तथा ऊनी वस्त्र पहनते थे। खुदाई में पुरुष की एक मूर्ति मिली है जिससे पता चलता है कि लोग धोती की तरह की एक पोशाक र कन्धों पर शाल जैसे वस्त्र का प्रयोग करते थे। स्त्रियों के वस्त्र भी कुछ इसी प्रकार के

आभूषण-हड़प्पा सभ्यता की स्त्रियां तथा पुरुष, दोनों आभूषण पहनने के शौका थे। आभूषण सोने, चाँदी, हाथी दांत तथा तांबे आदि के बनाये जाते थे। मुख्य आभूषणों में हार, बालों के गहने, हाथ के कंगन, अंगूठियां आदि सम्मिलित थीं। स्त्रियों के कुछ विशेष गहने तरागड़ी, नाक के कांटे, बुंदे, पायजेब आदि थे। धनी लोग सोने, चाँदी, हाथी दांत तथा कीमती मोतियों के बने गहने पहनते थे, जबकि निर्धन लोग सिप्पियों, हड्डियों, तांबे तथा पत्थर के आभूषणों का प्रयोग करते थे।

प्रश्न 2.
पंजाब के कौन-से स्थानों से हड़प्पा सभ्यता के अवशेष प्राप्त हुए हैं? किन्हीं चार स्थानों के बारे में विस्तार से लिखें।
उत्तर-
विभिन्न खुदाइयों से पता चलता है कि पंजाब भी हड़प्पा सभ्यता का मुख्य केन्द्र था। यहाँ निम्नलिखित स्थानों से हड़प्पा सभ्यता के अवशेष मिले हैं –

1. संघोल-संघोल एक छोटा-सा गांव है जो लुधियाना-चण्डीगढ़ सड़क पर स्थित है। इसे ‘ऊँचा गांव’ भी कहते हैं। यहां की खुदाइयों से 2000 ई० पूर्व के समय के लोगों की जानकारी प्राप्त हुई है। यहां कुछ मूर्तियां, मिट्टी के बर्तन, माला के मनके तथा तांबे के औज़ार मिले हैं। इन वस्तुओं का सम्बन्ध हड़प्पा सभ्यता से है।

2. रोहिड़ा-रोहिड़ा मण्डी अहमदगढ़ से 6 किलोमीटर दूर है। यहां की खुदाइयों से बर्तन, पकी ईंटें, मिट्टी के खिलौने आदि मिले हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि यहां हड़प्पा संस्कृति तथा रोहिड़ा की अपनी संस्कृति साथ-साथ फलती-फूलती रहीं।

3. सुनेत-सुनेत ज़िला लुधियाना में स्थित है। यहां की खुदाइयों से 1800 ई० पूर्व से 1400 ई० पूर्व तक की सभ्यता की जानकारी मिलती है।

4. रोपड़-यहां की खुदाइयों से मिट्टी के बर्तन तथा माला के मनके मिले हैं। ऐसा लगता है कि यह स्थान हड़प्पा सभ्यता के समय काफ़ी समृद्ध था।

PSEB 6th Class Social Science Solutions Chapter 10 हड़प्पा सभ्यता

हड़प्पा सभ्यता PSEB 6th Class Social Science Notes

  • हड़प्पा सभ्यता के विभिन्न नाम – हड़प्पा सभ्यता को सिन्धु घाटी सभ्यता एवं सिन्धुसरस्वती सभ्यता भी कहा जाता है।
  • हड़प्पा सभ्यता का उदय – हड़प्पा सभ्यता का उदय आज से लगभग सात हज़ार वर्ष पूर्व भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिमी भागों में हुआ था।
  • हड़प्पा सभ्यता की जानकारी – हड़प्पा सभ्यता की जानकारी 1921-1922 ई० में पाकिस्तान के हड़प्पा तथा मोहनजोदड़ो नामक स्थानों पर खुदाई से प्राप्त हुई थी।
  • हड़प्पा सभ्यता की नगर योजना – हड़प्पा सभ्यता की नगर योजना आधुनिक महानगरों के समान सुनियोजित थी।
  • हड़प्पा सभ्यता का सबसे महत्त्वपूर्ण भवन – हड़प्पा सभ्यता का सबसे महत्त्वपूर्ण भवन मोहनजोदड़ो का विशाल स्नानगृह थे।
  • हड़प्पा सभ्यता के लोगों के प्रमुख खाद्य पदार्थ – हड़प्पा सभ्यता के लोगों के प्रमुख खाद्य पदार्थ गेहूँ, ज्वार, चावल, दालें, फल, सब्जियां तथा दूध थे।
  • हड़प्पा सभ्यता के लोगों के वस्त्र – हड़प्पा सभ्यता के लोग ऊनी व सूती, दोनों प्रकार के वस्त्र पहनते थे।
  • हड़प्पा सभ्यता के लोगों के मनोरंजन के प्रमुख साधन – हड़प्पा सभ्यता के लोगों के मनोरंजन के प्रमुख साधन नृत्य, जुआ खेलना, चौपड़, शिकार तथा दौड़ इत्यादि थे।
  • हड़प्पा सभ्यता के लोगों के प्रमुख व्यवसाय – कृषि तथा पशुपालन हड़प्पा सभ्यता के लोगों के प्रमुख व्यवसाय थे।
  • हड़प्पा सभ्यता के लोगों के विदेशी व्यापार के मार्ग – हड़प्पा सभ्यता के लोग दूसरे देशों के साथ जल व स्थल, दोनों मार्गों द्वारा व्यापार करते थे।
  • हड़प्पा सभ्यता के लोगों के देवीदेवता – हड़प्पा सभ्यता के लोग मातृदेवी, पशुपति (भगवान् शिव), बैल तथा पीपल की उपासना करते थे।
  • हड़प्पा सभ्यता का पतन – हड़प्पा सभ्यता का पतन लगभग 1500 ई० पू० में हुआ।

PSEB 12th Class Political Science Solutions Chapter 2 तुलनात्मक राजनीति

Punjab State Board PSEB 12th Class Political Science Book Solutions Chapter 2 तुलनात्मक राजनीति Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 12 Political Science Chapter 2 तुलनात्मक राजनीति

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-

प्रश्न 1.
तुलनात्मक राजनीति से आप क्या समझते हैं ? (What do you understand by Comparative Politics ?)
उत्तर-
तुलनात्मक राजनीति आधुनिक राजनीति विज्ञान की महत्त्वपूर्ण देन है। तुलनात्मक राजनीति वर्तमान में विश्वव्यापी स्तर पर राजनीति-शास्त्रियों व विचारकों के अध्ययन की प्रमुख विषय-वस्तु बन चुकी है। तुलनात्मक राजनीति का अध्ययन यद्यपि ऐतिहासिक काल से चला आ रहा है तथापि इसका महत्त्व आधुनिक युग में ही बढ़ा है। इसका कारण यह है कि प्रत्येक विषय के वैज्ञानिक अध्ययन के लिए तुलनात्मक अध्ययन अनिवार्य है और बिना तुलनात्मक अध्ययन के किसी भी विषय की वैज्ञानिक व्याख्या सम्भव नहीं है। यही बात राजनीति विज्ञान पर लागू होती है।

तुलनात्मक राजनीति का अध्ययन आधुनिक राजनीति शास्त्र की इस बदलती हुई प्रवृत्ति का परिचायक है। यद्यपि तुलनात्मक राजनीति का सामान्य अर्थ विदेशी सरकारों का संवैधानिक अध्ययन (Constitutional study of foreign government) है किन्तु आधुनिक राजनीति शास्त्र सम्पूर्ण विश्व की राजनीतिक पद्धति की कल्पना करता है।

तुलनात्मक राजनीति का अर्थ तथा परिभाषाएँ (Meaning and Definitions of Comparative Politics)तुलनात्मक राजनीति का अर्थ किन्हीं दो देशों अथवा दो सरकारों की राजनीति की तुलना करना अथवा कुछ देशों के संविधानों की तुलना नहीं है। तुलनात्मक राजनीति से हमारा अभिप्राय राजनीतिक संस्थाओं के तुलनात्मक अध्ययन से है। राजनीतिक संस्थाएं सरकार अथवा शासन के विभिन्न अंगों को कहा जाता है। शासन राज्य की एक मुख्य संस्था है जिसके मुख्य तीन अंग होते हैं-कार्यपालिका, विधानपालिका तथा न्यायपालिका। स्तरों की दृष्टि से शासन में केन्द्रीय सरकार, प्रादेशिक सरकार तथा स्थानीय सरकारें होती हैं, शासकीय प्रशासन, वित्तीय प्रशासन, असैनिक सरकार तथा अन्य सामाजिक मूल्य भी शासन के महत्त्वपूर्ण अंग होते हैं। यह सभी अंग तथा अन्य शासकीय अंग राजनीतिक संस्थाएं कहलाती हैं। तुलनात्मक राजनीति का उद्देश्य विभिन्न राजनीतिक व्यवस्थाओं (Political Systems) अथवा शासन की राजनीतिक संस्थाओं (Political Institutions) का तुलनात्मक अध्ययन करना है। तुलनात्मक राजनीति के विद्वानों ने भिन्न-भिन्न परिभाषाएं दी हैं, जिनमें मुख्य परिभाषाएं निम्नलिखित हैं-

1. एडवर्ड ए० फ्रीमैन (Edward A. Freeman) के अनुसार, “तुलनात्मक राजनीति संस्थाओं तथा सरकारों के विविध प्रकारों का एक तुलनात्मक विवेचन तथा विश्लेषण है।”

2. जीन ब्लोण्डेल (Jean Blondel) के अनुसार, “तुलनात्मक राजनीति वर्तमान विश्व में राष्ट्रीय सरकारों के प्रतिमानों का अध्ययन है।”

3. राल्फ बराइबन्ती (Ralf Braibanti) के अनुसार, “तुलनात्मक राजनीति सम्पूर्ण सामाजिक व्यवस्था के उन तत्त्वों
की पहचान और व्याख्या है जो राजनीतिक कार्यों तथा उनके संस्थागत प्रकाशन को प्रभावित करते हैं।”

4. आर० सी० मैक्रीडीस (R. C. Macridis) के शब्दों में, “हैरोडोटस तथा अरस्तु के समय से ही राजनीतिक मूल्यों, विश्वासों, संस्थाओं, सरकारों और राजनीतिक व्यवस्थाओं में विविधताएं जीवन्त रही हैं और इन विविधताओं में समान तत्त्वों की छानबीन करने का जो पद्धतीय प्रयास है उसे तुलनात्मक राजनीति का विश्लेषण कहा जाना चाहिए।”

उपर्युक्त परिभाषाओं से स्पष्ट है कि तुलनात्मक राजनीति के अन्तर्गत केवल सरकारों का ही तुलनात्मक अध्ययन नहीं होता बल्कि इससे राजनीतिक व गैर-राजनीतिक, कानूनी व गैर-कानूनी, संवैधानिक व संविधानातिरिक्त, कबीलों की राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक आदि तथ्यों का भी अध्ययन किया जाता है। इसमें सम्पूर्ण समाज के उन तथ्यों का अध्ययन जो किसी भी रूप में राजनीतिक प्रणाली को प्रभावित करते हैं तुलनात्मक राजनीति का अध्ययन संस्थागत अथवा सैद्धान्तिक न होकर व्यावहारिक है।

प्रश्न 2.
तुलनात्मक राजनीति की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन करो। (Describe the main characteristics of Comparative Politics.)
उत्तर-
तुलनात्मक राजनीति की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
1. मूल्य मुक्त धारणा (Value-free theory) तुलनात्मक सरकार के विद्वान् अपना अध्ययन कुछ मूल्यों को ध्यान में रखकर ही करते थे। इसलिए उन्होंने कुछ ही विषयों पर बार-बार लिखा। परन्तु तुलनात्मक राजनीति के विद्वान् मूल्य निरपेक्ष अध्ययन पर बल देते हैं।

2. अन्तः अनुशासनात्मक दृष्टिकोण (Inter-Disciplinary Approach)-तुलनात्मक राजनीति एक अन्तः अनुशासनात्मक दृष्टिकोण अथवा धारणा है। इसके विद्वान् अधिक-से-अधिक उन उपकरणों व शास्त्रीय अवधारणाओं का प्रयोग करते हैं जो वे समाजशास्त्र, मनोविज्ञान, मानवशास्त्र, अर्थशास्त्र, जीव विज्ञान इत्यादि से ग्रहण करते हैं।

3. विश्लेषणात्मक व व्याख्यात्मक अध्ययन (Analytical and Explanatory Study)—आधुनिक दृष्टिकोण में परिकल्पनाएं की जाती हैं, परीक्षण किए जाते हैं तथा आंकड़ों को एकत्रित किया जाता है। विश्लेषणात्मक पद्धति से परिकल्पनाओं की जांच की जाती है और जांच के आधार पर उन परिकल्पनाओं का धारण, संशोधन अथवा खण्डन किया जाता है। तुलनात्मक राजनीति में विश्लेषणात्मक पद्धति का महत्त्व दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है।

4. विकासशील देशों का अध्ययन (Study of Developing Countries) आधुनिक तुलनात्मक राजनीति में केवल पश्चिमी देशों का ही अध्ययन नहीं किया जाता है वरन एशिया, लैटिन अमेरिका तथा अफ्रीका के विकासशील देशों के अध्ययन की ओर भी ध्यान दिया जाता है।

5. वैज्ञानिक तथा व्यवस्थित अध्ययन (Scientific and Systematic Study) तुलनात्मक राजनीति में वैज्ञानिक तथा व्यवस्थित अध्ययन को अपनाया जाता है क्योंकि इसमें कार्य-करण और क्रिया-प्रतिक्रिया का सम्बन्ध स्थापित करने की कोशिश की जाती है।

6. व्यवस्थामूलक दृष्टिकोण (Systematic Approach)-तुलनात्मक राजनीति में संविधान के अध्ययन की अपेक्षा राजनीतिक व्यवस्था के अध्ययन को अधिक महत्त्वपूर्ण माना जाता है और उसी के आधार पर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं तथा संस्थाओं का तुलनात्मक अध्ययन किया जाता है।

7. व्यवहारवादी अध्ययन सम्बन्धी दृष्टिकोण (Behavioural Approach of Study)—तुलनात्मक राजनीति के आधुनिक उपागम ‘व्यवहारवादी दृष्टिकोण’ पर आधारित हैं, जिसके अन्तर्गत राजनीतिक संस्थाओं के अध्ययन के साथ-साथ मानव स्वभाव, सामाजिक व राजनीतिक पर्यावरण का भी अध्ययन किया जाता है।।

8. संरचनात्मक व कार्यात्मक दृष्टिकोण (Structural and functional Approach)-आधुनिक दृष्टिकोण की एक महत्त्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह संरचना तथा कार्य मूलक दृष्टिकोण है। आधुनिक युग में सभी विद्वान् इस बात पर सहमत हैं कि राजनीतिक व्यवस्थाओं तथा संस्थाओं की संरचना और कार्यों में बहुत ही घनिष्ठ सम्बन्ध होता है। दोनों एक-दूसरे को प्रभावित ही नहीं करते, अपितु एक-दूसरे के नियामक भी होते हैं।

PSEB 12th Class Political Science Solutions Chapter 2 तुलनात्मक राजनीति

लघु उत्तरीय प्रश्न-

प्रश्न 1.
तुलनात्मक राजनीति से क्या भाव है ?
अथवा
तुलनात्मक राजनीति का क्या अर्थ है ?
उत्तर-
तुलनात्मक राजनीति का अर्थ किन्हीं दो देशों अथवा दो सरकारों की राजनीति की तुलना करना अथवा कुछ देशों के संविधानों की तुलना करना नहीं है। तुलनात्मक राजनीति से हमारा अभिप्राय राजनीतिक संस्थाओं के तुलनात्मक अध्ययन से है। अब यह प्रश्न उठता है कि राजनीतिक संस्थाएं क्या हैं। राजनीतिक संस्थाएं सरकार अथवा शासन के विभिन्न अंगों को कहा जाता है। शासन राज्य की एक मुख्य संस्था है, जिसके मुख्य तीन अंग होते हैं-कार्यपालिका, विधानपालिका तथा न्यायपालिका। स्तरों की दृष्टि से शासन में केन्द्रीय सरकार, प्रादेशिक सरकार तथा स्थानीय सरकारें होती हैं। शासकीय प्रशासन, वित्तीय व्यवस्था, असैनिक सरकार तथा अन्य सामाजिक मूल्य भी शासन के महत्त्वपूर्ण अंग होते हैं। ये सभी अंग तथा अनेक अन्य शासकीय अंग राजनीतिक संस्थाएं कहलाते हैं। तुलनात्मक राजनीति का उद्देश्य विभिन्न राजनीतिक व्यवस्थाओं (Political System) अथवा शासन की राजनीतिक संस्थाओं (Political Institutions) का तुलनात्मक अध्ययन करना है।

प्रश्न 2.
तुलनात्मक राजनीति की कोई तीन परिभाषाएं लिखें।
अथवा
तुलनात्मक राजनीति की कोई चार परिभाषाएं लिखें।
उत्तर-
तुलनात्मक राजनीति की तीन परिभाषाएँ निम्नलिखित हैं-

  • एडवर्ड ए० फ्रीमैन के अनुसार, “तुलनात्मक राजनीतिक संस्थाओं तथा सरकारों के विविध प्रकारों का एक तुलनात्मक विवेचन तथा विश्लेषण है।”
  • जीन ब्लोण्डेल के अनुसार, “तुलनात्मक राजनीति वर्तमान विश्व में राष्ट्रीय सरकारों के प्रतिमानों का अध्ययन है।”
  • एम० कर्टिस के अनुसार, “तुलनात्मक राजनीति राजनीतिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली और राजनीतिक व्यवहार में पाई जाने वाली महत्त्वपूर्ण नियमितताओं, समानताओं और अन्तरों से सम्बन्धित है।”
  • राल्फ बराइबत्ती के अनुसार, “तुलनात्मक राजनीति सम्पूर्ण सामाजिक व्यवस्था के उन तत्त्वों की पहचान और व्याख्या है जो राजनीतिक कार्यों तथा उनके संस्थागत प्रकाशन को प्रभावित करती है।”

PSEB 12th Class Political Science Solutions Chapter 2 तुलनात्मक राजनीति

प्रश्न 3.
तुलनात्मक राजनीति की कोई तीन विशेषताएं लिखें।
अथवा
तुलनात्मक राजनीति की कोई चार विशेषताएं लिखिए।
उत्तर-

  • मूल्य मुक्त धारणा–तुलनात्मक सरकार के विद्वान् अपना अध्ययन कुछ मूल्यों को ध्यान में रखकर ही करते थे। इसलिए उन्होंने कुछ ही विषयों पर बार-बार लिखा। परन्तु तुलनात्मक राजनीति के विद्वान् मूल्य निरपेक्ष अध्ययन पर बल देते हैं।
  • अन्तः अनुशासनात्मक दृष्टिकोण—तुलनात्मक राजनीति एक अन्तः अनुशासनात्मक दृष्टिकोण अथवा धारणा है। इसके विद्वान् अधिक-से-अधिक उन उपकरणों व शास्त्रीय अवधारणाओं का प्रयोग करते हैं जो वे समाजशास्त्र, मनोविज्ञान, मानवशास्त्र, अर्थशास्त्र जीव विज्ञान इत्यादि से ग्रहण करते हैं।
  • विश्लेषणात्मक व व्याख्यात्मक अध्ययन–आधुनिक दृष्टिकोण में परिकल्पनाएं की जाती हैं, परीक्षण किए जाते हैं तथा आंकड़ों को एकत्रित किया जाता है। विश्लेषणात्मक पद्धति से परिकल्पनाओं की जांच की जाती है और जांच के आधार पर उन परिकल्पनाओं का धारण, संशोधन अथवा खण्डन किया जाता है। तुलनात्मक राजनीति में विश्लेषणात्मक पद्धति का महत्त्व दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है।
  • वैज्ञानिक तथा व्यवस्थित अध्ययन-तुलनात्मक राजनीति में वैज्ञानिक तथा व्यवस्थित अध्ययन अपनाया जाता है।

प्रश्न 4.
तुलनात्मक राजनीति के अध्ययन की क्या महत्ता है ?
उत्तर-

  • तुलनात्मक राजनीति के अध्ययन से राजनीतिक व्यवहार को समझने में सहायता मिलती है।
  • तुलनात्मक राजनीति के अध्ययन से भिन्न-भिन्न राजनीतिक व्यवस्थाओं की समानताओं तथा असमानताओं को समझा जा सकता है।
  • तुलनात्मक राजनीति के अध्ययन से विकासशील देशों की राजनीतिक व्यवस्थाओं को समझने में सहायता मिलती है।
  • तुलनात्मक राजनीति का अध्ययन राजनीति को एक वैज्ञानिक अध्ययन बनाता है।

PSEB 12th Class Political Science Solutions Chapter 2 तुलनात्मक राजनीति

प्रश्न 5.
तुलनात्मक राजनीति और तुलनात्मक सरकार में अंतर लिखिए ?
उत्तर-

  • विषय क्षेत्र सम्बन्धी अन्तर-तुलनात्मक सरकार का विषय क्षेत्र तुलनात्क राजनीति के क्षेत्र से सीमित
  • जन्म सम्बन्धी अन्तर-तुलनात्मक सरकार का विषय लगभग उतना ही पुराना है जितना कि स्वयं राजनीति शास्त्र पुराना है। राजनीति शास्त्र के पितामह अरस्तु ने अपने समय की 158 सरकारों की तुलनात्मक अधययन करके तुलनात्मक विश्लेषण सम्बन्धी अपने विचार दिये थे। परन्तु तुलनात्मक सरकार की अपेक्षा राजनीति एक नया विषय है।
  • उद्देश्य सम्बन्धी अन्तर-तुलनात्मक सरकार व तुलनात्मक राजनीति में मुख्य अन्तर उद्देश्य सम्बन्धी है। प्रत्येक विषय के अध्ययन का कोई-न-कोई उद्देश्य अवश्य होता है। तुलनात्मक सरकार के अध्ययन के बावजूद इसका उद्देश्य स्पष्ट नहीं होता जबकि तुलनात्मक राजनीति के अध्ययन से इसका उद्देश्य सिद्धान्त निर्माण (Theory Building) स्पष्ट हो जाता है।
  • तुलनात्मक शासन सैद्धान्तिक और संस्थागत अध्ययन है, जबकि तुलनात्मक राजनीति व्यावहारिक और वैज्ञानिक अध्ययन है।

प्रश्न 6.
तुलनात्मक राजनीति के रास्ते में आने वाली किन्हीं चार रुकावटों के बारे में लिखिए।
उत्तर-

  • क्षेत्र सम्बन्धी रुकावट-तुलनात्मक राजनीति के रास्ते में पहली रुकावट यह आती है कि इसके क्षेत्र में क्या-क्या शामिल किया जाए ?
  • दृष्टिकोण सम्बन्धी रुकावट-तुलनात्मक राजनीति के रास्ते में दूसरी रुकावट यह है कि इसके अध्ययन के लिए किन-किन दृष्टिकोणों का प्रयोग किया जाए ?
  • विकासशील देशों की परिस्थितियां-तुलनात्मक राजनीति के रास्ते में विकासशील देशों की खराब आर्थिक एवं सामाजिक परिस्थितियां रुकावट पैदा करती हैं।
  • कठिन शब्दावली-तुलनात्मक राजनीति की शब्दावली कठिन है।

PSEB 12th Class Political Science Solutions Chapter 2 तुलनात्मक राजनीति

अति लघु उत्तरीय प्रश्न-

प्रश्न 1.
तुलनात्मक राजनीति का क्या अर्थ है ?
उत्तर-
तुलनात्मक राजनीति से हमारा अभिप्राय राजनीतिक संस्थाओं के तुलनात्मक अध्ययन से है। अब यह प्रश्न उठता है कि राजनीतिक संस्थाएं क्या हैं। राजनीतिक संस्थाएं सरकार अथवा शासन के विभिन्न अंगों को कहा जाता है। तुलनात्मक राजनीति का उद्देश्य विभिन्न राजनीतिक व्यवस्थाओं (Political System) अथवा शासन की राजनीतिक संस्थाओं (Political Institutions) का तुलनात्मक अध्ययन करना है।

प्रश्न 2.
तुलनात्मक राजनीति की दो परिभाषाएं लिखें।
उत्तर-

  • एडवर्ड ए० फ्रीमैन के अनुसार, “तुलनात्मक राजनीतिक संस्थाओं तथा सरकारों के विविध प्रकारों का एक तुलनात्मक विवेचन तथा विश्लेषण है।”
  • जीन ब्लोण्डेल के अनुसार, “तुलनात्मक राजनीति वर्तमान विश्व में राष्ट्रीय सरकारों के प्रतिमानों का अध्ययन है।”

प्रश्न 3.
तुलनात्मक राजनीति के अधीन कौन-से दो विषयों की तुलना की जा सकती है ?
उत्तर-
तुलनात्मक राजनीति के अधीन शासन एवं राजनीति की तुलना की जाती है अर्थात् इनके अधीन किन्हीं दो देशों के शासन एवं उनकी राजनीति की तुलना की जाती है।

PSEB 12th Class Political Science Solutions Chapter 2 तुलनात्मक राजनीति

प्रश्न 4.
तुलनात्मक राजनीति की दो विशेषताएं लिखिए।
उत्तर-

  • मूल्य मुक्त धारणा–तुलनात्मक राजनीति के विद्वान् मूल्य निरपेक्ष अध्ययन पर बल देते हैं।
  • अन्त: अनुशासनात्मक दृष्टिकोण—तुलनात्मक राजनीति एक अन्तः अनुशासनात्मक दृष्टिकोण अथवा धारणा चारणा है

प्रश्न 5.
तुलनात्मक राजनीति के विषय क्षेत्र के कोई दो मुख्य विषय लिखिए।
उत्तर-

  • तुलनात्मक राजनीति में विभिन्न राज्यों की सरकारी संरचनाओं का व्यापक विवरण मिलता है।
  • तुलनात्मक राजनीति में राजनीतिक दलों के संगठन, कार्यक्रम तथा कार्यों का अध्ययन करता है।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न-

प्रश्न I. एक शब्द/वाक्य वाले प्रश्न-उत्तर

प्रश्न 1.
राजनीतिक शास्त्र में तुलनात्मक अध्ययन का प्रतिपादक किसे माना जाता है ?
उत्तर-
राजनीतिक शास्त्र में तुलनात्मक अध्ययन का प्रतिपादक अरस्तू को माना जाता है।

PSEB 12th Class Political Science Solutions Chapter 2 तुलनात्मक राजनीति

प्रश्न 2.
अरस्तू ने कितने संविधानों का तुलनात्मक अध्ययन किया था ?
उत्तर-
रस्तू ने लगभग 158 संविधानों का तुलनात्मक अध्ययन किया था।

प्रश्न 3.
तुलनात्मक राजनीति से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर-
तुलनात्मक राजनीति से हमारा अभिप्राय राजनीति संस्थाओं के तुलनात्मक अध्ययन से है।

प्रश्न 4.
तुलनात्मक राजनीति की कोई एक परिभाषा लिखिए।
उत्तर-
एडवर्ड ए० फ्रीमैन के अनुसार, “तुलनात्मक राजनीति संस्थाओं तथा सरकारों के विविध प्रकारों का एक तुलनात्मक विवेचन तथा विश्लेषण है।”

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प्रश्न 5.
तुलनात्मक राजनीति और तुलनात्मक सरकार में अन्तर बताएं।
उत्तर-
तुलनात्मक सरकार सैद्धान्तिक और संस्थागत अध्ययन है, जबकि तुलनात्मक राजनीति व्यावहारिक और वैज्ञानिक अध्ययन है।

प्रश्न 6.
तुलनात्मक राजनीति के विषय क्षेत्र का कोई एक मुख्य विषय लिखें।
उत्तर-
विभिन्न देशों की सरकारी संरचनाओं का अध्ययन।

प्रश्न 7.
तुलनात्मक राजनीति की कोई दो विशेषताएं लिखें।
अथवा
तुलनात्मक राजनीति की कोई एक विशेषता लिखिए।
उत्तर-
(1) मूल्य मुक्त धारणा।
(2) अन्तः अनुशासनात्मक दृष्टिकोण।

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प्रश्न 8.
तुलनात्मक शासन एवं राजनीति में किस पर अधिक बल दिया गया है ?
उत्तर-
अंत: अनुशासन अध्ययन पर अधिक बल दिया गया है।

प्रश्न 9.
तुलनात्मक राजनीति की कोई एक समस्या लिखिए।
उत्तर-
संयुक्त शब्दावली का अभाव।

प्रश्न 10.
किन विद्वानों ने परम्परावादी दृष्टिकोण का निर्जीव राजनीति विज्ञान कहकर खण्डन किया है?
उत्तर-
आधुनिक विद्वानों ने।

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प्रश्न II. खाली स्थान भरें-

1. तुलनात्मक राजनीति से अभिप्राय राजनीतिक संस्थाओं के ………….. अध्ययन से है।
2. शासन राज्य की एक मुख्य संस्था है, जिसके मुख्य तीन अंग होते हैं :- कार्यपालिका, ……………. एवं न्यायपालिका।
3. …………… के अनुसार तुलनात्मक राजनीति संस्थाओं तथा सरकारों के विविध प्रकारों का एक तुलनात्मक विवेचन एवं विश्लेषण है।
4. ……………. के अनुसार, तुलनात्मक राजनीति वर्तमान विश्व में राष्ट्रीय सरकारों के प्रतिमानों का अध्ययन है।
उत्तर-

  1. तुलनात्मक
  2. विधानपालिका
  3. एडवर्ड ए० फ्रीमैन
  4. जीन ब्लोण्डेल।

प्रश्न III. निम्नलिखित वाक्यों में से सही एवं ग़लत का चुनाव करें-

1. तुलनात्मक राजनीति परम्परागत राजनीति विज्ञान की देन है।
2. तुलनात्मक राजनीति से अभिप्राय राजनीतिक संस्थाओं के तुलनात्मक अध्ययन से है।
3. तुलनात्मक राजनीति की एक विशेषता मूल्य मुक्त अध्ययन है।
4. तुलनात्मक राजनीति में अन्तः अनुशासनात्मक दृष्टिकोण पर बल नहीं दिया जाता।
5. मैक्रीडीस एवं वार्ड के अनुसार तुलनात्मक राजनीति एक ऐसा गाइड है, जो घर बैठे-बिठाए हमें देश-विदेश की सैर करा देता है।
उत्तर-

  1. ग़लत
  2. सही
  3. सही
  4. ग़लत
  5. सही।

PSEB 12th Class Political Science Solutions Chapter 2 तुलनात्मक राजनीति

प्रश्न IV. बहुविकल्पीय प्रश्न –

प्रश्न 1.
“राजनीति में मानव स्वभाव” नामक पुस्तक किसने लिखी?
(क) राबर्ट डहल
(ख) लुसियन पाई
(ग) डेविड एप्टर
(घ) ग्राम वालेस।
उत्तर-
(घ) ग्राम वालेस।

प्रश्न 2.
तुलनात्मक राजनीति का आरम्भ कब से माना जाता है?
(क) 19वीं शताब्दी से
(ख) 20वीं शताब्दी के प्रारंभ से
(ग) 18वीं शताब्दी से
(घ) 17वीं शताब्दी से।
उत्तर-
(ख) 20वीं शताब्दी के प्रारंभ से

प्रश्न 3.
तुलनात्मक सरकार एवं तुलनात्मक राजनीति में –
(क) कोई अन्तर नहीं
(ख) अन्तर है
(ग) उपरोक्त दोनों
(घ) उपरोक्त में से कोई नहीं।
उत्तर-
(ख) अन्तर है

PSEB 12th Class Political Science Solutions Chapter 2 तुलनात्मक राजनीति

प्रश्न 4.
“तुलनात्मक राजनीति का अर्थ समकालीन विश्व में राष्ट्रीय सरकारों के ढांचे का अध्ययन है।” यह कथन किसका है ?
(क) एडवर्ड फ्रीमैन
(ख) अरस्तू
(ग) जीन ब्लोण्डेल
(घ) ज्यूफ्री के० राबर्टस।
उत्तर-
(ग) जीन ब्लोण्डेल

प्रश्न 5.
तुलनात्मक शासन एवं राजनीति में ज़ोर दिया जाता है-
(क) ऐतिहासिक अध्ययन पर
(ख) केवल संवैधानिक ढांचे पर
(ग) अन्तःअनुशासन अध्ययन पर
(घ) उपरोक्त में से कोई नहीं।
उत्तर-
(ग) अन्तःअनुशासन अध्ययन पर

PSEB 7th Class Social Science Solutions Chapter 18 लोकतन्त्र तथा समानता

Punjab State Board PSEB 7th Class Social Science Book Solutions Civics Chapter 18 लोकतन्त्र तथा समानता Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 7 Social Science Civics Chapter 18 लोकतन्त्र तथा समानता

SST Guide for Class 7 PSEB लोकतन्त्र तथा समानता Textbook Questions and Answers

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 1-15 शब्दों में लिखें

प्रश्न 1.
लोकतंत्रीय सरकार से क्या भाव है ?
उत्तर-
लोकतंत्र (प्रजातन्त्र) लोगों की अपनी सरकार होती है, अर्थात् वहां का शासन लोगों की इच्छानुसार चलाया जाता है। कानून के अनुसार भी शासन चलाने की शक्ति लोगों के हाथ में होती है। प्रजातन्त्र में कानून का शासन (Rule of Law) होता है। प्रजातान्त्रिक सरकार लोगों द्वारा ही बनाई जाती है और वह लोगों के कल्याण के लिए ही कार्य करती है। अब्राहिम लिंकन के शब्दों में प्रजातान्त्रिक सरकार ‘लोगों की, लोगों द्वारा और लोगों के लिए’ होती है।

प्रश्न 2.
‘कानून के शासन’ से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर-
कानून के शासन से अभिप्राय यह है कि देश का शासन निश्चित कानूनों अथवा नियमों के अनुसार चलाया जाता है। सरकार इन नियमों की अवहेलना नहीं कर सकती। उसकी शक्ति का स्रोत कानून होते हैं।

प्रश्न 3.
मताधिकार का लोकतंत्र में क्या महत्त्व है ?
उत्तर-
आधुनिक लोकतंत्र प्रतिनिधि लोकतंत्र है। इसमें नागरिक अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं जो सरकार चलाते हैं और कानून बनाते हैं। इन प्रतिनिधियों का चुनाव वोट अथवा मताधिकार द्वारा किया जाता है। यदि सरकार अयोग्य हो, तो उसे भी मताधिकार द्वारा बदला जाता है। इसलिए लोकतंत्र में मताधिकार बहुत ही महत्त्वपूर्ण होता है।

PSEB 7th Class Social Science Solutions Chapter 18 लोकतन्त्र तथा समानता

प्रश्न 4.
प्रधानात्मक सरकार कौन-सी होती है ?
उत्तर-
कृपया इसके लिए 50-60 शब्दों वाला प्रश्न नं. 4 पढ़ें।

प्रश्न 5.
लोकतंत्र में लोकमत का क्या महत्त्व है ?
उत्तर-
लोकमत से अभिप्राय लोगों की इच्छा से है। लोकतंत्र में नीतियों का निर्माण लोकमत के आधार पर ही होता है। लोकमत की उपेक्षा करने वाली सरकार को अगले चुनावों में बदल दिया जाता है। इस प्रकार लोकतन्त्र में लोकमत बहुत ही महत्त्वपूर्ण होता है।

प्रश्न 6.
कौन से देश में आज भी प्रत्यक्ष लोकतंत्र है ?
उत्तर-
स्विट्ज़रलैण्ड में आज भी प्रत्यक्ष लोकतंत्र है।

PSEB 7th Class Social Science Solutions Chapter 18 लोकतन्त्र तथा समानता

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर 50-60 शब्दों में लिखें :

प्रश्न 1.
लोकतंत्र के अस्तित्व में आने संबंधी संक्षिप्त नोट लिखें।
उत्तर-
लोकतंत्र (प्रजातन्त्र) का आरम्भ यूनान के शहर ऐथन्ज़ में हुआ। वहां का प्रजातन्त्र लगभग 2500 वर्ष पुराना है। यह प्रत्यक्ष (सीधा) लोकतंत्र था जिसमें सभी लोग मिलकर शासन चलाते थे। वे लोग वर्ष में कई बार एकत्रित होकर सभा किया करते थे। वहां पर लोगों द्वारा राज्य प्रबन्ध चलाने के निर्णय लिए जाते थे। उस समय सीधा लोकतंत्र इसलिए सम्भव था क्योंकि लोगों की संख्या कम थी और सभी एक स्थान पर बैठकर निर्णय ले सकते थे। सीधा प्रजातन्त्र इसलिए भी सम्भव था क्योंकि उस समय लोकतान्त्रिक देशों में स्त्रियों, विदेशियों और दासों को शासन में भाग लेने का अधिकार नहीं था।

प्रश्न 2.
स्वतन्त्रता की धारणा के विकास के संबंध में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर-
स्वतन्त्रता लोकतन्त्र का मूल आधार है। इस धारणा का विकास 17वीं शताब्दी में इंग्लैंड की शानदार क्रान्ति तथा 18वीं शताब्दी में फ्रांस की क्रान्ति के साथ हुआ। आरम्भ में मतदान का अधिकार केवल धनी लोगों को ही प्राप्त था। समय की आवश्यकता के अनुसार सभी वयस्क स्त्री-पुरुषों को मतदान का अधिकार दिया गया।

19वीं और 20वीं शताब्दी में प्रजातन्त्र के समानता के अधिकार ने और ज़ोर पकड़ा। यह अधिकार पहले केवल राजनीतिक क्षेत्र तक ही सीमित था। समय की आवश्यकता के अनुसार आर्थिक तथा सामाजिक क्षेत्रों में भी समानता के अधिकार पर बल दिया जाने लगा। लोगों को कई प्रकार की स्वतन्त्रताएं भी दी गईं। इनमें विचारों की स्वतन्त्रता प्रमुख थी।

प्रश्न 3.
लोकतन्त्र सबसे पहले किस देश में स्थापित हुआ ?
उत्तर-
लोकतन्त्र सबसे पहले यूनान में स्थापित हुआ। वहां लोकतन्त्र का विकास ऐथन्स नगर में हुआ। वहां का लोकतन्त्र लगभग 2500 वर्ष पुराना है। ऐथन्स के लोग साल में कई बार इकट्ठे होते थे और सभा करते थे। इन सभाओं में वे मिलकर निर्णय लेते थे कि राज्य प्रबन्ध किस प्रकार चलाया जाए।

PSEB 7th Class Social Science Solutions Chapter 18 लोकतन्त्र तथा समानता

प्रश्न 4.
लोकतंत्रीय सरकार के चार भिन्न-भिन्न स्वरूपों का नाम लिखें।
उत्तर-
(1) प्रधानात्मक सरकार
(2) संसदीय सरकार
(3) एकात्मक सरकार
(4) संघात्मक सरकार।
1. प्रधानात्मक (अध्यक्षात्मक) सरकार-प्रधानात्मक सरकार में राष्ट्रपति सीधे लोगों द्वारा चुना जाता है। वह राज्य का वास्तविक शासक होता है। इसलिए राष्ट्रपति और मन्त्री एक ही राजनीतिक दल से नहीं होते। इस प्रकार की प्रधानात्मक लोकतान्त्रिक सरकार अमेरिका में है। वहां का राष्ट्रपति भारत के राष्ट्रपति की अपेक्षा अधिक शक्तिशाली है।

2. संसदीय सरकार-संसदीय अथवा संसदात्मक सरकार में संसद् अधिक शक्तिशाली होती है। राष्ट्रपति केवल नाममात्र का मुखिया होता है। राज्य की वास्तविक शक्ति प्रधानमन्त्री के पास होती है। मन्त्रिपरिषद् के सभी सदस्य संसद् अर्थात् विधानपालिका से ही लिए जाते हैं। इसलिए संसदात्मक सरकार में विधानपालिका एवं कार्यपालिका में तालमेल बना रहता है।

3. एकात्मक सरकार-एकात्मक प्रजातन्त्र में राज्यों और केन्द्र के बीच शक्तियों का विभाजन होता है। परन्तु केन्द्र राज्यों की अपेक्षा अधिक शक्तिशाली होता है। हमारे भारत का संविधान भी संघात्मक है, परन्तु किसी आन्तरिक संकट के समय केन्द्रीय सरकार की शक्तियां बढ़ जाती हैं।

4. संघात्मक सरकार-संघात्मक सरकार में संविधान लिखित एवं कठोर होता है। राज्यों और केन्द्र के बीच शक्तियों का बंटवारा होता है। प्रत्येक राज्य की अपनी सरकार होती है। भारत में भी संघात्मक सरकार है।

प्रश्न 5.
संसदीय लोकतंत्र से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर-
संसदात्मकं अथवा संसदीय लोकतन्त्र में संसद् अधिक शक्तिशाली होती है। राष्ट्रपति नाममात्र का मुखिया होता है। राज्य की वास्तविक शक्ति प्रधानमन्त्री के पास होती है। मन्त्रिपरिषद् के सभी सदस्य संसद् अर्थात् विधानपालिका से ही लिये जाते हैं। इसलिए संसदीय सरकार में विधानपालिका तथा कार्यपालिका के बीच तालमेल बना रहता है।

PSEB 7th Class Social Science Solutions Chapter 18 लोकतन्त्र तथा समानता

प्रश्न 6.
लोकतंत्रीय सरकार की कोई दो विशेषताएं लिखें।
उत्तर-
लोकतंत्र को प्रजातंत्र भी कहा जाता है। आधुनिक युग में लोकतंत्रीय सरकार को सर्वश्रेष्ठ सरकार माना जाता है। सफल लोकतंत्र के लिए कुछ शर्तों का होना अनिवार्य है। लोकतन्त्र सरकार की विशेषताओं का संक्षिप्त वर्णन निम्नलिखित है :–

1. सत्तेत नागरिक-प्रजातन्त्र सरकार का मूल आधार लोकमत है, जिसके आधार पर सरकार चलाई जाती है। इसलिए लोगों का सचेत होना बहुत आवश्यक है। इसका अर्थ यह है कि जनता राजनीतिक रूप से परिपक्व हो। ऐसे लोग ही अपने प्रतिनिधियों पर नियन्त्रण रख सकते हैं।

2. योग्य एवं सचेत नेतागण-यदि सरकार पढ़े-लिखे तथा सचेत नेताओं द्वारा चलाई जायेगी, तो सरकार योग्य होगी। केवल समझदार मतदाता (वोटर) ही ऐसे नेताओं को चुन सकते हैं।

3. अनुशासित नागरिक एवं राजनीतिक दल-प्रजातन्त्र में लोगों का अनुशासित होना बहुत आवश्यक है। तभी वे सरकार की गलत नीतियों और अनुचित कार्यों का विरोध करके सरकार को ठीक ढंग से कार्य करने पर विवश कर सकते हैं। लोगों में दूसरों के विचारों के प्रति आदर भी होना चाहिए। लोगों के राजनीतिक विचारों में भिन्नता के आधार पर राजनीतिक दल बनते हैं। लोगों के प्रतिनिधि चुनाव द्वारा चुने जाते हैं। चुनावों के लिए राजनीतिक दल बहुत ही महत्त्वपूर्ण होते हैं। राजनीतिक दल लोगों को सरकार के कार्यों के बारे सूचित करके लोक मत बनाने में सहायता करते हैं। इसलिए राजनीतिक दलों का सचेत और अनुशासित होना अति आवश्यक है।

4. सामाजिक एवं आर्थिक समानता-प्रजातन्त्र में धनी एवं निर्धन का अन्तर नहीं होना चाहिए। यदि सभी नागरिक सामाजिक और आर्थिक रूप से समान नहीं होंगे तो प्रजातन्त्र सफल नहीं हो सकता। इसलिए समाज में जाति, धर्म और भाषा के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए।

5. सहनशीलता-लोकतन्त्र में बहुमत प्राप्त दल का शासन होता है। परन्तु दल का उदार होना आवश्यक है। विरोधी दल को भी शासक दल के प्रति सहनशील होना चाहिए। सहनशीलता प्रजातन्त्र की सफलता के लिए एक महत्त्वपूर्ण विशेषता है।
नोट-विद्यार्थी कोई दो लिखें।

प्रश्न 7.
सामाजिक तथा आर्थिक समानता से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर-
सामाजिक समानता-सामाजिक समानता का अर्थ है कि सामाजिक दृष्टि से सभी व्यक्ति समान हैं। किसी के साथ जन्म स्थान, रंग, धर्म, जाति, लिंग आदि के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाता। सभी व्यक्ति समाज के उपयोगी अंग हैं। किसी व्यक्ति विशेष को कोई विशेष महत्त्व नहीं दिया जाता।

आर्थिक समानता-आर्थिक समानता का अर्थ है कि देश में धनी एवं निर्धन का अन्तर नहीं होना चाहिए। समाज के किसी वर्ग का शोषण न हो। इसका अर्थ यह भी है कि उत्पादन के साधन कुछ एक व्यक्तियों के हाथों में सीमित न हों। सभी को रोज़ी कमाने के समान अवसर प्राप्त हों।

PSEB 7th Class Social Science Solutions Chapter 18 लोकतन्त्र तथा समानता

प्रश्न 8.
आधुनिक युग में लोकतंत्रीय सरकार अत्यधिक प्रिय क्यों है ?
उत्तर-
आज संसार के अधिकतर देशों में लोकतन्त्रीय सरकार है। ऐसी सरकार कल्याणकारी होती है और मानव अधिकारों एवं स्वतन्त्रता को विशेष महत्त्व देती है। लोकतन्त्र में कानून की दृष्टि में सभी बराबर माने जाते हैं। ये कानून भी लोगों के अपने प्रतिनिधियों द्वारा बनाए जाते हैं। लोकतन्त्र को लोकप्रिय बनाने वाले कई अन्य आधार भी हैं जिनका संक्षिप्त वर्णन इस प्रकार है :–

1. समानता-प्रजातन्त्र में अमीरी-गरीबी, धर्म या जाति के आधार पर किसी से कोई भेदभाव नहीं किया जाता। कानून की दृष्टि से सब समान होते हैं। इसलिए तानाशाही सरकार की अपेक्षा प्रजातान्त्रिक सरकार अधिक लोकप्रिय

2. स्वतन्त्रता-प्रजातन्त्र में लोग हर पक्ष में स्वतन्त्र होते हैं। वे कोई भी व्यवसाय अपनाने, अपने विचारों को प्रकट करने और किसी भी क्षेत्र में रहने के लिए स्वतन्त्र होते हैं। परन्तु तानाशाही राज्य में लोगों को तानाशाह राजा की आज्ञा अनुसार चलना पड़ता है।

3. निर्णय लेने की कार्य विधि-प्रजातन्त्र में राज्य प्रबन्ध चलाने के लिए निर्णय लेने का एक विशेष ढंग होता है, जोकि लोगों के हाथ में होता है। लोग अपने प्रतिनिधि चुनकर विधानपालिका में भेजते हैं। ये प्रतिनिधि शासन चलाने के लिए कानून बनाते हैं। विधानपालिका में बहमत दल सरकार बनाती है। सरकार लोगों की इच्छानुसार कार्य करती है। यदि सरकार लोगों की इच्छानुसार कार्य न करे, तो जनता, उसे अगले चुनावों में बदल सकती है।

4. नागरिकों की सक्रिय भागीदारी-प्रजातन्त्र में सभी मतदाता चुनाव लड़ सकते हैं या चुनाव में अपना मत इच्छानुसार दे सकते हैं। देश के शासन में सभी बराबर के भागीदार हैं। तानाशाही राज्यों में ऐसा नहीं होता। इसलिए आधुनिक समय में प्रजातान्त्रिक सरकार अधिक लोकप्रिय है।

5. मतभेद दूर करना-प्रजातन्त्र में किसी पर भी अपना विचार थोपा नहीं जाता, बल्कि सभी के विचारों का आदर किया जाता है। शासक दल विरोधी दल के सुझावों पर उदारता से विचार करता है। दूसरी ओर विरोधी दल सरकार के कार्यों में उदारता से सहयोग देता है। इस प्रकार प्रजातन्त्र में वैचारिक मतभेदों को उदारतापूर्वक दूर किया जाता है। इसी कारण प्रजातान्त्रिक सरकार अधिक पसन्द की जाती है।

6. मानव गौरव (शान) में वृद्धि-स्वतन्त्रता, समानता तथा भाईचारा प्रजातन्त्र के मुख्य सिद्धान्त हैं। इनके आधार पर ही फ्रांस में प्रजातन्त्र का आरम्भ हुआ। प्रजातन्त्र में केवल राजनीतिक स्वतन्त्रता और समानता ही नहीं होती, अपितु सामाजिक तथा आर्थिक समानता भी होती है। इसके लिए सरकार सभी देशवासियों को रोज़ी कमाने के लिए समान अवसर प्रदान करती है। आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए नौकरियों में स्थान आरक्षित किये जाते हैं। इस प्रकार प्रजातन्त्र में मानव गौरव और शान को बढ़ाने के लिए हर सम्भव प्रयत्न किया जाता है।

(ग) खाली स्थान भरें

  1. भारत एक ………….. गणराज्य है।
  2. हमारे देश की केन्द्रीय सरकार का नाममात्र का प्रधान …………… है और राज्य सरकारों के मुख्य ……………. होते हैं।
  3. लोकतंत्र का आरम्भ ………………. के शहर ……………… में हुआ।
  4. ………………. ही ऐसा देश है जहां आज भी प्रत्यक्ष लोकतंत्र है।
  5. लोकतंत्र का आरम्भिक सिद्धांत …………. तथा ……………. है।

उत्तर-

  1. लोकतंत्रीय,
  2. राष्ट्रपति, राज्यपाल,
  3. यूनान, एथेंस
  4. स्विट्ज़रलैण्ड
  5. स्वतन्त्रता तथा समानता।

PSEB 7th Class Social Science Solutions Chapter 18 लोकतन्त्र तथा समानता

(घ) निम्नलिखित वाक्यों में ठीक (✓) या गलत (✗) का निशान लगाओ

  1. भारत एक लोकतंत्रीय गणराज्य है।
  2. स्विट्ज़रलैण्ड ही ऐसा देश है जहाँ आज भी प्रत्यक्ष लोकतंत्र चल रहा है।
  3. वोट डालने का अधिकार केवल कुछ बालिगों (वयस्कों) को ही प्राप्त है।
  4. लोकतंत्रीय देश में कानून का राज्य होता है।
  5. आधुनिक लोकतंत्र की स्थापना पहले फ्रांस देश में हुई थी।

संकेत-

  1. (✓)
  2. (✓)
  3. (✗)
  4. (✓)
  5. (✗)

(ङ) बहु-वैकल्पिक प्रश्नोत्तर

निम्नलिखित प्रश्नों के सही उत्तर पर निशान लगाएं :–
प्रश्न 1.
लोकतांत्रिक सरकार लोगों की, लोगों के लिए तथा लोगों के द्वारा-यह कथन है
(क) इब्राहिम लिंकन
(ख) लास्की
(ग) डेविड ईस्टन।
उत्तर-
(क) इब्राहिम लिंकन

PSEB 7th Class Social Science Solutions Chapter 18 लोकतन्त्र तथा समानता

प्रश्न 2.
आधुनिक युग में किस सरकार को सर्वोत्तम माना जाता है ?
(क) तानाशाही सरकार
(ख) लोकतांत्रिक सरकार
(ग) सैनिक शासन।
उत्तर-
(ख) लोकतांत्रिक सरकार

प्रश्न 3.
लोकतांत्रिक सरकार वाले देशों में देश के मुखिया कितनी तरह के होते हैं ?
(क) चार
(ख) पाँच
(ग) दो।
उत्तर-
(ग) दो।

PSEB 7th Class Social Science Guide लोकतन्त्र तथा समानता Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
प्रजातन्त्र (लोकतन्त्र) की दो विशेषताएं बताओ।
उत्तर-

  1. लोकतन्त्र में शासन चलाने की शक्ति लोगों के हाथ में होती है।
  2. लोकतन्त्र में सरकार की नीतियों का निर्णय लोगों की इच्छा के अनुसार लिया जाता है।

PSEB 7th Class Social Science Solutions Chapter 18 लोकतन्त्र तथा समानता

प्रश्न 2.
लोकतन्त्र कौन-कौन से दो प्रकार का होता है ?
उत्तर-

  1. प्रत्यक्ष अथवा सीधा लोकतन्त्र
  2. अप्रत्यक्ष अथवा प्रतिनिधि लोकतन्त्र।

प्रश्न 3.
प्रत्यक्ष लोकतन्त्र तथा अप्रत्यक्ष लोकतन्त्र में क्या अन्तर है ?
उत्तर-
प्रत्यक्ष लोकतन्त्र में शासन की नीतियों के निर्माण में सभी नागरिक सीधे रूप में भाग लेते हैं। इसके विपरीत अप्रत्यक्ष लोकतन्त्र में नागरिक अपने प्रतिनिधि चुनते हैं जो शासन की नीतियों का निर्माण करते हैं।

प्रश्न 4.
लोकतन्त्रीय सरकार में देश के मुखिया कौन-कौन से दो प्रकार के होते हैं ? भारत से उदाहरण दें।
उत्तर-
लोकतन्त्रीय सरकार में देश के दो प्रकार के मुखिया होते हैं-नाममात्र मुखिया और वास्तविक मुखिया। हमारे देश की केन्द्रीय सरकार का नाममात्र का मुखिया राष्ट्रपति और राज्यों में राज्यपाल है जबकि केन्द्र में वास्तविक मुखिया प्रधानमन्त्री और राज्य में मुख्यमन्त्री होता है।

PSEB 7th Class Social Science Solutions Chapter 18 लोकतन्त्र तथा समानता

प्रश्न 5.
गणराज्य क्या होता है ?
उत्तर-
जिस देश का प्रमुख लोगों के द्वारा चुना जाता है उसे गणराज्य कहा जाता है।

प्रश्न 6.
हम भारत को लोकतान्त्रिक गणराज्य क्यों कहते हैं ?
उत्तर-
भारत एक लोकतन्त्र है। देश का मुखिया अर्थात् राष्ट्रपति लोगों द्वारा चुना जाता है। इसलिए भारत को लोकतान्त्रिक गणराज्य कहते हैं।

प्रश्न 7.
राजतन्त्रीय लोकतन्त्र क्या होता है ? एक उदाहरण भी दें।
उत्तर-
राजतन्त्रीय लोकतन्त्र में देश का मुखिया राजा या रानी होते हैं। वे लोगों द्वारा नहीं चुने जाते बल्कि उनका पद परम्परागत होता है। वे नाममात्र के मुखिया होते हैं। इंग्लैंड में राजतन्त्रीय लोकतन्त्र है।

PSEB 7th Class Social Science Solutions Chapter 18 लोकतन्त्र तथा समानता

प्रश्न 8.
प्रजातन्त्र (लोकतन्त्र) का मुख्य सिद्धान्त क्या है ? यह किस बात पर आधारित है ?
उत्तर-
लोकतन्त्र का मुख्य सिद्धान्त कानून का शासन है। यह मानव की स्वतन्त्रता तथा समानता पर आधारित है।

प्रश्न 9.
व्यापक (सार्वभौम) वयस्क मताधिकार क्या होता है ?
उत्तर-
जब देश के सभी वयस्क स्त्री-पुरुषों को बिना किसी भेदभाव के मतं देने का अधिकार दिया जाता है, तो उसे सार्वभौम वयस्क मताधिकार कहा जाता है।

प्रश्न 10.
कार्यपालिका तथा विधानपालिका के प्रभाव की दृष्टि से लोकतान्त्रिक सरकार कौन-कौन से दो प्रकार की होती है ?
उत्तर-

  1. प्रधानात्मक (अध्यक्षात्मक) सरकार
  2. संसदीय सरकार।

PSEB 7th Class Social Science Solutions Chapter 18 लोकतन्त्र तथा समानता

प्रश्न 11.
केन्द्र तथा राज्य सरकारों के बीच शक्तियों के विभाजन के आधार पर लोकतान्त्रिक सरकार कौन-कौन से दो प्रकार की होती है ?
उत्तर-

  1. एकात्मक सरकार
  2. संघात्मक सरकार।

प्रश्न 12.
“लोकतन्त्र अथवा प्रजातन्त्र राज्य सरकार का एक प्रकार नहीं, अपितु एक जीवन-परीक्षण है।” स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
प्रजातन्त्र में समाज में किसी भी आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जाता। कानून की दृष्टि में अमीर-गरीब, स्त्री-पुरुष सब समान हैं। प्रत्येक को अपने व्यक्तित्व का विकास करने का अधिकार होता है। जाति या जन्म के आधार पर किसी को भी कोई विशेष सुविधा प्राप्त नहीं होती, क्योंकि प्रजातान्त्रिक समाज में इस प्रकार के भेद-भाव के लिए कोई स्थान नहीं होता। यदि आर्थिक एवं सामाजिक पक्ष से सभी स्त्री-पुरुष समान होंगे तभी सभी लोग राजनीतिक पक्ष से भी समान होंगे। इसीलिए प्रजातन्त्र राज्य सरकार का एक प्रकार नहीं अपितु एक जीवन परीक्षण है।

सही जोड़े बनाइए:

  1. लोकतन्त्र का आरम्भ – यूरोप
  2. आधुनिक लोकतन्त्र की सबसे पहले स्थापना – भारत
  3. प्रधानात्मक लोकतन्त्र – एथेंस (यूनान)
  4. संसदीय सरकार – अमेरिका

उत्तर-

  1. लोकतन्त्र का आरम्भ – एथेंस (यूनान)
  2. आधुनिक लोकतन्त्र की सबसे पहले स्थापना – यूरोप
  3. प्रधानात्मक लोकतन्त्र – अमेरिका
  4. संसदीय सरकार – भारत।

PSEB 7th Class Social Science Solutions Chapter 18 लोकतन्त्र तथा समानता

लोकतन्त्र तथा समानता PSEB 7th Class Social Science Notes

  • लोकतन्त्र – लोकतन्त्र जनता का शासन होता है। इसमें शासन की सारी शक्ति जनता के पास होती है। शासन को कानून के अनुसार चलाया जाता है।
  • स्वतन्त्रता और समानता – स्वतन्त्रता और समानता लोकतन्त्र के मूल आधार हैं।
  • कानून का शासन – कानून के शासन से अभिप्राय ऐसे शासन से है जिसमें शासक अपनी इच्छानुसार नहीं बल्कि एक निश्चित संविधान के अनुसार शासन करता है। ऐसे शासन में राज्य का मुखिया जनता पर मनमानी नहीं कर सकता और जनता उससे पूछ सकती है कि उसने अमुक कार्य क्यों किया है। इस शासन प्रणाली को हम संवैधानिक शासन-प्रणाली भी कह सकते हैं।
  • प्रत्यक्ष लोकतन्त्र – प्रत्यक्ष लोकतन्त्र में जनता स्वयं अपने शासन का संचालन करती है। आज के युग में प्रत्यक्ष लोकतन्त्र की सम्भावना नहीं है।
  • अप्रत्यक्ष लोकतन्त्र – अप्रत्यक्ष लोकतन्त्र में शासन चलाने का कार्य जनता के प्रतिनिधि करते हैं। अतः अप्रत्यक्ष लोकतन्त्र में प्रतिनिधियों के चयन का कार्य अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। यह कार्य निर्वाचनों के द्वारा किया जाता है।
  • प्रजातन्त्र तथा राजनैतिक दल – प्रजातन्त्र में राजनैतिक दलों का सरकार पर नियन्त्रण होता है। विपक्षी दल सरकार की आलोचना करते हैं और उसके कार्यों पर नियन्त्रण रखते हैं।
  • जनमत अथवा लोकमत – प्रजातन्त्र की सफलता के लिए जनमत की भूमिका अति अनिवार्य है। स्वस्थ जनमत राजनीतिक दलों पर नियन्त्रण रखता है।
  • लोकतन्त्र तथा चुनाव – लोकतन्त्र में चुनावों का विशेष महत्त्व है। लोग चुनावों द्वारा ही अपने प्रतिनिधि चुनते हैं और अयोग्य सरकार को बदलते हैं।
  • व्यापक वयस्क मताधिकार – जब सभी वयस्कों को मतदान का अधिकार दिया जाता है तो उसे व्यापक वयस्क मताधिकार कहा जाता है। यह समानता के नियम पर आधारित है।
  • तानाशाही – तानाशाही राज्य में शासन की शक्ति एक या कुछ एक तानाशाह लोगों के हाथ में होती है। ऐसे देशों में चुनाव नहीं कराये जाते और न ही सरकार लोगों की इच्छा के आधार पर चलाई जाती है। केवल तानाशाह के पास ही शासन की सारी शक्ति होती है।

PSEB 6th Class Social Science Solutions Chapter 9 आदि-मानव – पाषाण युग

Punjab State Board PSEB 6th Class Social Science Book Solutions History Chapter 9 आदि-मानव – पाषाण युग Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 6 Social Science History Chapter 9 आदि-मानव – पाषाण युग

SST Guide for Class 6 PSEB आदि-मानव – पाषाण युग Textbook Questions and Answers

I. निम्नलिखित के संक्षिप्त उत्तर लिखें

प्रश्न 1.
पुरा-पाषाण युग के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर-
पुरा-पाषाण युग उस युग को कहा जाता है जब मनुष्य एक शिकारी तथा संग्राहक था। इस युग में मनुष्य का जीवन प्राकृतिक वस्तुओं पर निर्भर था। उसे आग का कोई ज्ञान नहीं था, इसलिए वह जंगली कन्द-मूल तथा जानवरों का कच्चा मांस खाता था। जंगली जानवरों से अपनी रक्षा के लिए वह समूह बनाकर रहता था। वह रात को वृक्षों पर अथवा गुफ़ाओं में रहता था। वह आम तौर पर वस्त्रहीन रहता था, परन्तु कभी-कभी अपने शरीर को बहुत अधिक सर्दी तथा गर्मी से बचाने के लिए जानवरों की खालों, वृक्षों के पत्तों तथा छिलकों से ढक लेता था। जानवरों के शिकार के लिए वह पत्थर से बने हथियारों अथवा वृक्षों की शाखाओं का प्रयोग करता था।

प्रश्न 2.
नव-पाषाण युग के पाँच महत्त्वपूर्ण लक्षण बतायें।
उत्तर-
पाषाण युग के तीसरे तथा अन्तिम युग को ‘नव-पाषाण युग’ कहा जाता है। इस युग के पाँच महत्त्वपूर्ण लक्षण निम्नलिखित थे –

  1. मानव एक स्थान पर टिक कर रहने लगा था। उसने अनाज उगाना तथा भोजन पकाना आरम्भ कर दिया था।
  2. मानव के औज़ार पहले से अधिक तेज़ तथा हल्के थे जिसके कारण उसकी काम करने की क्षमता बढ़ गई थी।
  3. मानव ने भोजन पकाने तथा रखने के लिए पकी मिट्टी के बर्तन बनाने सीख लिए थे।
  4. मानव ने गुफ़ाओं की दीवारों पर चित्र बनाकर अपनी कला का प्रदर्शन करना शुरू कर दिया था।
  5. मानव कीमती पत्थरों, पकी मिट्टी तथा हाथी दांत आदि के मनके बनाकर उन्हें आभूषणों के रूप में प्रयोग करने लगा था।

प्रश्न 3.
मध्य-पाषाण युग के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर-
मध्य-पाषाण युग का आरम्भ पुरा-पाषाण युग के पश्चात् हुआ। इस युग में मानव के जीवन स्तर में कुछ सुधार हुआ। उसने कई नई चीजें सीखीं। उसने टूटे हुए पत्थर के टुकड़ों के स्थान पर नुकीले तथा तराशे हुए पत्थर के हथियार जैसे कि कुल्हाड़ी, भाले, गंडासे आदि बनाने आरम्भ कर दिए। वह इन औज़ारों तथा हथियारों को लकड़ी की एक लम्बी छड़ से बांध कर प्रयोग में लाने लगा। उसे इस बात का भी पता चल गया कि अनाज को काफ़ी समय तक इकट्ठा करके रखा जा सकता है। इसलिए उसने अनाज को इकट्ठा करना शुरू कर दिया। वह गुफ़ाओं के अतिरिक्त लकड़ी, बांस तथा पत्तों की झोंपड़ियां भी बनाने लगा था। फलस्वरूप मनुष्य गांव बनाकर स्थायी रूप से रहने लगा।

PSEB 6th Class Social Science Solutions Chapter 9 आदि-मानव – पाषाण युग

प्रश्न 4.
पहिये के आविष्कार ने मानव की क्या सहायता की?
उत्तर-
मानव के विकास में पहिये के आविष्कार का बहुत महत्त्वपूर्ण स्थान है। इस आविष्कार के कारण मानव ने बड़ी तेजी से उन्नति की। इस आविष्कार ने मानव जीवन को कई प्रकार से आसान बना दिया।

  1. पहिये का प्रयोग जानवरों द्वारा खींची जाने वाली गाड़ियों में होने लगा। परिणामस्वरूप मानव के लिए यात्रा करना तथा सामान ढोना आसान हो गया।
  2. पहिये ने पानी खींचने में मानव की सहायता की।
  3. मानव ने पहिये की सहायता से मिट्टी के बर्तन बनाने आरम्भ कर दिए।

प्रश्न 5.
गुहा-चित्रों के बारे में एक नोट लिखें।
उत्तर-
गुहा-चित्रों से अभिप्राय गुफा-चित्रों से है। आदि-मानव गुफ़ाओं तथा पत्थर के विश्राम-गृहों में रहते समय इनकी दीवारों पर नुकीले पत्थरों तथा रंगों की सहायता से मानवों, जानवरों तथा शिकार के चित्र बनाता था। ये चित्र आमतौर पर रेखा-चित्र होते थे परन्तु कई बार वह इनमें रंग भी भरता था। ऐसे चित्र भारत के अनेक भागों तथा संसार में कई स्थानों पर प्राप्त हुए हैं। भारत में मध्य प्रदेश में भोपाल के निकट भीमबैठका के गुहा-चित्र देखने योग्य हैं, जिनमें मानवों को नाचते हुए दिखाया गया है। इससे पता चलता है कि पाषाण युग में नृत्य मनोरंजन का एक साधन था तथा लोग समूहों में नाचते-गाते थे।

II. सही जोड़े बनायें

  1. पेलियोलिथिक एज – (क) गुहा मानव
  2. मेसोलिथिक एज – (ख) गुहा-चित्र
  3. भीमबैठका – (ग) प्राचीन पाषाण युग
  4. शिकारी-खाद्य संग्रहक – (घ) मध्य पाषाण युग।

उत्तर-सही जोड़े

  1. पेलियोलिथिक एज – गुहा मानव
  2. मेसोलिथिक एज – मध्य पाषाण युग
  3. भीमबैठका – गुहा-चित्र
  4. शिकारी-खाद्य संग्रहक – प्राचीन पाषाण युग।

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III. सही (✓) अथवा ग़लत (✗) का निशान लगायें

  1. पुरा-पाषाण युग में मानव कृषि के लिए हल चलाता था।
  2. अग्नि का आविष्कार एक वैज्ञानिक ने किया।
  3. पाषाण युग के गुहा-चित्र अनेक स्थानों से मिले हैं।
  4. नव पाषाण युग का अर्थ आधुनिक समय है।

उत्तर-

  1. (✗)
  2. (✗)
  3. (✓)
  4. (✗)

PSEB 6th Class Social Science Guide आदि-मानव – पाषाण युग Important Questions and Answers

कम से कम शब्दों में उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
एक ऐसा युग था जब मानव जानवरों का शिकार करता था और कच्चा मांस खाता था। क्या आप उस युग का नाम बता सकते हैं?
उत्तर-
पुरा पाषाण युग।

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प्रश्न 2.
मानव ने मनके बनाने के लिए सर्वप्रथम किस चीज़ का प्रयोग किया?
उत्तर-
कीमती पत्थर।

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
दर्शाए गए चित्र में आदि मनुष्य मिट्टी के बर्तन बना रहा है। इस के लिए वह किस चीज़ का प्रयोग करता था?
PSEB 6th Class Social Science Solutions Chapter 8 आदि-मानव – पाषाण युग 1
(क) चाक अथवा पहिया
(ख) नुकीले पत्थर
(ग) तांबे का सांचा
उत्तर-
(क) चाक अथवा पहिया

प्रश्न 2.
आदि-मानव ने अग्नि का प्रयोग किस काम में नहीं किया?
(क) धातु पिघलाना
(ख) भोजन पकाना
(ग) मिट्टी के बर्तन पकाना।
उत्तर-(क) धातु पिघलाना

PSEB 6th Class Social Science Solutions Chapter 9 आदि-मानव – पाषाण युग

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पुरा-पाषाण युग को अंग्रेज़ी में क्या कहते हैं? यूनानी भाषा में इसका क्या अर्थ है?
उत्तर-
पुरा-पाषाण युग को अंग्रेज़ी में ‘पेलियोलिथिक पीरियड’ कहते हैं। यूनानी भाषा में इसका अर्थ ‘पुराना पत्थर’ है।

प्रश्न 2.
पुरा-पाषाण युग में आदि-मानव के कौन-कौन से औज़ार तथा हथियार थे? मानव इनका प्रयोग किस लिए करता था?
उत्तर-
पुरा-पाषाण युग में पत्थर की बनी कुल्हाड़ियां, भाले तथा गंडासे आदि-मानव के औज़ार तथा हथियार थे। मानव इनका प्रयोग शिकार करने के लिए करता है।

प्रश्न 3.
पाषाण युग का यह नाम क्यों पड़ा?
उत्तर-
इस युग में पत्थर के औज़ारों और हथियारों का प्रयोग होता था। पत्थर के कारण ही इस युग का नाम पाषाण (पत्थर) युग पड़ा।

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प्रश्न 4.
पुरा-पाषाण युग का आरम्भ कब हुआ?
उत्तर-
पुरा-पाषाण युग का आरम्भ लगभग 5 लाख वर्ष से अढ़ाई लाख वर्ष के मध्य में हुआ।

प्रश्न 5.
आग का आविष्कार कब हुआ?
उत्तर-
आग का आविष्कार पुरा-पाषाण युग के अन्तिम चरण में हुआ।

प्रश्न 6.
बुद्धिधारी मानव का जन्म कब हुआ?
उत्तर-
बुद्धिधारी मानव का जन्म पुरा-पाषाण युग के अन्तिम चरण में हुआ।

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प्रश्न 7.
भोजन इकट्ठा करने की अवस्था से आप क्या समझते हैं?
उत्तर-
भोजन इकट्ठा करने की अवस्था वह समय था जब मानव को कृषि का कोई ज्ञान नहीं था। वह कन्द-मूल, फल आदि इकट्ठे करके उन्हें भोजन के रूप में प्रयोग करता था। वह भोजन की तलाश में स्थान-स्थान पर घूमता रहता था।

प्रश्न 8.
नव-पाषाण युग का आरम्भ कब हुआ?
उत्तर-
नव-पाषाण युग का आरम्भ लगभग 10,000 वर्ष से 12,000 वर्ष पूर्व हुआ।

प्रश्न 9.
नव-पाषाण काल का मुख्य आविष्कार क्या था?
उत्तर-
नव-पाषाण काल का मुख्य आविष्कार पहिया था। इस आविष्कार से मानव के जीवन में क्रान्तिकारी परिवर्तन आया।

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प्रश्न 10.
पहिए के आविष्कार के दो लाभ बताएं।
उत्तर-
पहिए के आविष्कार से मिट्टी के बर्तन बनाने तथा यातायात के साधनों में तेजी से परिवर्तन आया।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आग के आविष्कार ने मनुष्य की किस प्रकार सहायता की?
उत्तर-
आग के आविष्कार ने मनुष्य की बहुत सहायता की। अब मनुष्य ने आग जलाकर भोजन पकाना आरम्भ कर दिया। मनुष्य अपने आपको सर्दियों में गर्म रखने, अपनी गुफाओं तथा विश्राम-गृहों में रात को रोशनी करने तथा जंगली जानवरों से अपनी रक्षा करने के लिए आग का प्रयोग करने लगा था।

प्रश्न 2.
पूर्व ऐतिहासिक काल की जानकारी हमें किससे मिलती है?
उत्तर-
पूर्व ऐतिहासिक काल की जानकारी हमें उन स्थानों की खुदाइयों से प्राप्त । पुरातत्व वस्तुओं से मिलती है जहां उस समय के मानव रहते थे। इन वस्तुओं में मानवों तथा जानवरों की हड्डियां, पुराने औजार तथा हथियार और दैनिक उपयोग की वस्तुएं शामिल हैं।

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प्रश्न 3.
कृषि का आरम्भ किस प्रकार हुआ?
उत्तर-
आदि-मानव अनाज के जो दाने भूमि पर फेंक देता था, उनमें से नए पौधे उत्पन्न होते थे तथा बहुत-सा अनाज प्राप्त होता था। इस प्रकार आदि-मानव ने यह सीखने का प्रयत्न किया कि शीघ्र तथा बढ़िया पैदावार के लिए मिट्टी में बीजों को कब बोना चाहिए तथा कृषि के लिए भूमि को किस प्रकार तैयार करना चाहिए। इससे कृषि का आरंभ हुआ।

प्रश्न 4.
कृषि के आविष्कार का मानव जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर-
कृषि के आविष्कार ने मानव जीवन पर गहरा प्रभाव डाला। अब मनुष्य को भोजन की खोज के लिए इधर-उधर घूमने की ज़रूरत नहीं थी। उसका खानाबदोश जीवन समाप्त हो गया तथा वह एक स्थान पर टिक कर रहने लगा।

प्रश्न 5.
आदि-मानव के वस्त्रों तथा आभूषणों के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर-
आदि-मानव अपने आपको सर्दी तथा वर्षा आदि से बचाने के लिए जानवरों की खालों तथा वृक्षों की छाल तथा पत्तों से अपने शरीर को ढकता था। पुरुष तथा स्त्रियां दोनों ही आभूषणों का प्रयोग करते थे। ये आभूषण कीमती पत्थरों, पकी मिट्टी तथा हाथी दांत आदि के बने मनके होते थे। लोग ऐसे आभूषण स्वयं बनाते थे।

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निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
आदि-मानव के जीवन के बारे में लिखो।
उत्तर-
आदि-मानव का जीवन बहुत कठोर था। उसके जीवन की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित थीं –
1. खानाबदोश जीवन-वह खानाबदोश था और नग्न रहता था। अपने भोजन की तलाश में वह एक स्थान से दूसरे स्थान पर घूमता रहता था।

2. भोजन-अपनी भूख मिटाने के लिए मानव जंगलों से प्राप्त कन्द-मूल, फल अथवा जानवरों का मांस खाता था। जब एक स्थान पर फल तथा जानवर समाप्त हो जाते थे तो वह उस स्थान को छोड़कर दूसरे स्थान पर चला जाता था। उसे कृषि का कोई ज्ञान नहीं था। वह आग जलाना भी नहीं जानता था। इसलिए वह जानवरों के मांस को कच्चा ही खाता था। अपनी प्यास बुझाने के लिए वह नदियों के किनारे रहना पसन्द करता था।

प्रश्न 2.
नव-पाषाण युग के मानव की भोजन पैदा करने की अवस्था की जानकारी दें।
उत्तर-
नव-पाषाण युग के आरम्भ में मानव भोजन इकट्ठा करने की अवस्था से भोजन पैदा करने की अवस्था में आ गया। अन्य शब्दों में, मानव कृषि करना सीख गया। कृषि के आरम्भ से मानव का जीवन सरल और सभ्य हो गया। उसने अनाज, सब्जियां तथा फल पैदा करने आरम्भ कर दिए। कृषि करने के लिए उसने अपने औज़ारों तथा हथियारों में भी परिवर्तन किए। सिंचाई के लिए पानी की आवश्यकता को पूरा करने के लिए उसने नदियों के किनारे कृषि करना आरम्भ किया। वह मुख्य रूप से गेहूं, चावल तथा जौ उगाता था।
कृषि के कार्य में मानव का परिवार भी उसकी सहायता करता था। इस कार्य में स्त्रियों का बहुत योगदान था।

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प्रश्न 3.
नव-पाषाण युग के मानव के रहन-सहन की जानकारी दें।
उत्तर-
नव-पाषाण युग के आरम्भ होने तक मानव के जीवन तथा रहन-सहन के ढंग में बहुत-से परिवर्तन आ गए। आग की खोज, नए औज़ारों के प्रयोग, पशुपालन तथा कृषि के आरम्भ ने मानव के जीवन को सभ्य बना दिया।

1. स्थिर जीवन-कृषि ने मानव के जीवन में स्थिरता पैदा कर दी। भोजन पैदा करने
अवस्था में पहुंचकर मानव सांस्कृतिक विकास के मार्ग पर अग्रसर हुआ। कृषि ने उसकी भोजन की आवश्यकता को पूरा किया। इसलिए अब उसे भोजन की तलाश में एक स्थान से दूसरे स्थान पर घूमना नहीं पड़ता था। पशुपालन के व्यवसाय के विकास से मानव प्रगति के मार्ग पर चल पड़ा।

2. समाज का निर्माण तथा सहयोग-नव-पाषाण युग में जो लोग कृषि नहीं करते थे, वे कृषकों पर निर्भर थे। इसी प्रकार कृषक अपनी अन्य आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बढ़ई तथा कुम्हारों पर निर्भर रहते थे। इस प्रकार समाज का निर्माण हुआ तथा सहयोग की भावना का जन्म हुआ।

3. श्रम-विभाजन-विभिन्न व्यवसाय अपनाने से श्रम का विभाजन हुआ तथा धीरेधीरे कार्यों में निपुणता भी आ गई। परिणामस्वरूप व्यवस्थित जीवन का आरम्भ हुआ।

आदि-मानव – पाषाण युग PSEB 6th Class Social Science Notes

  • पृथ्वी पर मानव जीवन का आरंभ – पृथ्वी पर मानव जीवन लगभग 40 लाख वर्ष पूर्व आरंभ हुआ।
  • प्रारम्भिक मानव का रहन-सहन – आरम्भ में मानव का रहन-सहन पशुओं जैसा था।
  • शिकारी-संग्राहक – पुरा-पाषाण युग के आदि-मानव को शिकारी संग्राहक के नाम से जाना जाता है।
  • पाषाण युग – पाषाण युग उस काल को कहा जाता है जब मानव पत्थर के औज़ारों तथा हथियारों का प्रयोग करता था।
  • पाषाण युग का विभाजन – पाषाण युग को पुरा-पाषाण युग, मध्य-पाषाण युग तथा नव-पाषाण युग, तीन भागों में बांटा जाता है।
  • आग की खोज – आग की खोज शायद दो पत्थरों को आपस में रगड़ने से हुई थी।
  • प्रारम्भिक पहिया – प्रारम्भ में मानव लकड़ी के गोल गट्ठों का पहिए के रूप में उपयोग करता था।
  • स्थायी मानव जीवन का आरम्भ – कृषि की खोज के पश्चात् स्थायी मानव जीवन का आरम्भ हुआ।
  • पाषाण-चित्र – आदि मानव गुफ़ाओं तथा विश्राम-स्थलों की दीवारों पर चित्र बनाया करता था। इन्हें पाषाण– चित्र कहते हैं। ऐसे चित्र भोपाल के निकट भीमबैठका में मिले हैं।
  • आदि-मानव के आभूषण – आदि-मानव पत्थरों, पकी मिट्टी तथा हाथी दांत इत्यादि से बने मनकों का आभूषणों के रूप में प्रयोग करता था।

PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 2 तर्कशील सोच

Punjab State Board PSEB 10th Class Welcome Life Book Solutions Chapter 2 तर्कशील सोच Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 10 Welcome Life Chapter 2 तर्कशील सोच

PSEB 10th Class Welcome Life Guide तर्कशील सोच Textbook Questions and Answers

अभ्यास – I

प्रश्न 1.
पंजाब का दूसरा भाग कहाँ स्थित है?
(a) दिल्ली
(b) कनाडा
(c) पाकिस्तान
(d) राजस्थान।
उत्तर-
(b) पाकिस्तान ।

प्रश्न 2.
पंजाब में कितने विधानसभा क्षेत्र हैं?
(a) 116
(b) 21
(c) 31
(d) 117
उत्तर-
(d) 117.

प्रश्न 3.
पंजाब में कितने संसदीय निर्वाचन क्षेत्र (लोकसभा) हैं?
(a) 117
(b) 13
(c) 21
(d) 22.
उत्तर-
(b) 13.

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प्रश्न 4.
यूनानियों ने पंजाब को किस नाम से बुलाया?
(a) सप्त-सिंधु
(b) पेंटापोटामिया
(c) पंचनद
(d) सिंध।
उत्तर-
(b) पेंटापोटामिया।

प्रश्न 5.
पंजाब का विश्व का सबसे पुराना विश्वविद्यालय कौन-सा है?
(a) पंजाबी विश्वविद्यालय
(b) पंजाब विश्वविद्यालय
(c) तक्षशिला विश्वद्यिालय
(d) नालंदा विश्वविद्यालय।
उत्तर-
(b) तक्षशिला विश्वद्यिालय।

अभ्यास-II

वर्कशीट के लिए प्रश्न

प्रश्न 1.
संदीप के मन में कौन-सी गलत धारणा थी?
उत्तर-
संदीप के दिमाग में यह गलत धारणा थी कि उत्पाद और टॉनिक शारीरिक शक्ति बढ़ाते हैं और एथलीट खेलों में बेहतर प्रदर्शन करते हैं। वह मेहनत के बजाय दवा और उत्पाद लेना पसंद कर रहे थे जो कि ग़लत धारणा है।

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प्रश्न 2.
मैडम ने अपनी जवान छात्राओं को क्या समझाया?
उत्तर-
मैडम ने जवान छात्राओं को समझाया कि वे अपने मन में गलत धारणा न रखें। कई लोग अपने मज़बूत शरीर को दिखाने के लिए दवाओं का उपयोग करते हैं जो कि ग़लत है। बच्चे स्टेशल मीडिया विज्ञापनों के जाल में फंस जाते हैं। इन विज्ञापनों के जाल में फंसने से पहले हमें सावधानी से सोचने की ज़रूरत है। इन दवाओं को लेने के बजाय, हमें मेहनत और देसी आहार पर अधिक ध्यान देना चाहिए। मैडम ने लड़कियों से कहा कि हमारे पास बहुत से उदाहरण हैं जहाँ सामान्य परिवारों के कई खिलाड़ियों ने कड़ी मेहनत की है और बहुत सफलता प्राप्त की है।

प्रश्न 3.
प्रिंट मीडिया इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया को देखते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
उत्तर-
कंपनियों प्रिंट मीडिया और सोशल मीडिया पर अपने उत्पादों का विज्ञापन करती हैं। इस प्रकार के विज्ञापन किसी भी टीवी चैनल का हिस्सा नहीं हैं और इन पर लिखा होता है कि यह एक कंपनी का विज्ञापन है। इसलिए, इससे पहले कि हम उन्हें खरीदें और उनके जाल में पड़ें। हमें उनके बारे में सच्चाई का पता लगाना चाहिए। हमें तर्कसंगत रूप से सोचना चाहिए कि क्या यह संभव है। यदि नहीं, तो हमें वह उत्पाद नहीं खरीदना चाहिए।

प्रश्न 4.
हम गलतफहमियों से कैसे छुटकारा पा सकते हैं?
उत्तर-
हमें किसी भी चीज़ के बारे में तर्कसंगत रूप से सोचना चाहिए कि यह सही है या ग़लत। हमें दूसरों से बात करनी चाहिए और यदि हमारे विचार मेल खाते हैं, तो हमें गलतफहमी को दूर करना चाहिए और इसके पीछे के कारण पर विचार करना चाहिए।

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Welcome Life Guide for Class 10 PSEB तर्कशील सोच Important Questions and Answers

(क) बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कौन-से छात्र अद्वितीय और सफल होते हैं?
(a) वह जो समय को महत्त्व देता है
(b) वह जो खेल खेलता है
(c) जो सोशल मीडिया पर मस्त हो
(d) इनमें से कोई भी नहीं।
उत्तर-
(a) वह जो समय को महत्त्व देता है।

प्रश्न 2.
समाज में लैंगिक भेदभाव को किसने दूर किया है?
(a) धर्म
(b) विज्ञान और प्रौद्योगिकी
(c) सोसायटी
(d) सरकार।
उत्तर-
(b) विज्ञान और प्रौद्योगिकी।

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प्रश्न 3.
कौन-सा उदाहरण हमें महिलाओं की हिम्मत और दया के बारे में बताता है?
(a) माई भागो
(b) माता गुजरी
(c) रानी लक्ष्मीबाई
(d) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(d) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 4.
क्या हम आधुनिक समय में लैंगिक भेदभाव देख सकते हैं?
(a) हाँ
(b) नहीं
(c) पता नहीं
(d) कुछ नहीं कह सकते।
उत्तर-
(a) हाँ!

प्रश्न 5.
हमें किस की कद्र करनी चाहिए?
(a) पैसे की
(b) समय की
(c) अंधविश्वास की
(d) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(b) समय की।

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प्रश्न 6.
वर्तमान युग में हम ……….. का सही उपयोग करके बचत कर सकते हैं।
(a) धर्म
(b) सोशल मीडिया
(c) समाचार पत्र
(d) पत्रिका।
उत्तर-
(b) सोशल मीडिया।

प्रश्न 7.
………….. के साथ हम अपना समय अच्छे से बिता सकते हैं?
(a) नियोजन
(b) मोबाइल
(c) टी०वी०
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(a) नियोजन।

प्रश्न 8.
आधुनिक क्रांतिकारी परिवर्तनों के वर्तमान युग में ……… की भूमिका काफी बढ़ गई है।
(a) धर्म
(b) सरकार
(c) संचार के साधन
(d) व्यक्तिगत साधन।
उत्तर-
(c) संचार के साधन।

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प्रश्न 9.
संचार के साधनों से हमें क्या मिलता है?
(a) सूचना
(b) ज्ञान
(c) मनोरंजन
(d) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(d) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 10.
संचार के साधनों का अवगण क्या है?
(a) एक व्यक्ति स्वाभाविक हो जाता है।
(b) बच्चे बुरी आदतों को अपनाते हैं।
(c) बच्चे अपने वास्तविक उद्देश्य से विचलित होते हैं।
(d) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(d) उपरोक्त सभी।

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(ख) खाली स्थान भरें

  1. …………. के उपयोग से हम अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं।
  2. ………….. के उपयोग से हमें बहुत-सी जानकारी मिलती है।
  3. ………….. का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए।
  4. आदि काल से ही समाज में ………… और ……….. के बीच भेदभाव चल रहा है।
  5. हमें मन में …………… धारणाएं नहीं रखनी चाहिए।

उत्तर-

  1. समय,
  2. संचार के साधनों,
  3. सोशल मीडिया,
  4. लड़के, लड़कियां,
  5. ग़लत।

(ग) सही/ग़लत चुनें

  1. हमें ग़लत धारणाओं से बचना चाहिए।
  2. लिंग आधारित भेदभाव आधुनिक समाज की एक धारणा है।
  3. लड़कों और लड़कियों के बीच भेदभाव प्राचीन काल से चला आ रहा है।
  4. कई लोग मीडिया के जाल में फंस जाते हैं।
  5. खाने के उत्पाद खेलकूद के लिए आवश्यक हैं।

उत्तर-

  1. सही,
  2. ग़लत,
  3. सही,
  4. सही,
  5. ग़लत।

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(घ) कॉलम से मेल करें

कॉलम ए — कॉलम बी
(a) भेदभाव — (i) संचार का साधन
(b) विचित्र — (ii) सप्त सिंधु
(c) अनुसूची — (iii) अंतर
(d) इंटरनेट — (iv) विशेष
(e) पंजाब — (v) टाइम टेबल।
उत्तर-
(a) भेदभाव — (iii) अंतर
(b) विचित्र — (iv) विशेष
(c) अनुसूची — (v) टाइम टेबल
(d) इंटरनेट — (i) संचार का साधन
(e) पंजाब — (ii) सप्त सिंधु।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
क्या समाज में लिंग आधारित भेदभाव होता है?
उत्तर-
हां, समाज में लिंग आधारित भेदभाव होता है।

प्रश्न 2.
किस ने समाज में लिंग आधारित भेदभाव को कम किया है?
उत्तर-
विज्ञान और प्रौद्योगिकी ने समाज में लिंग आधारित भेदभाव को काफी कम कर दिया है।

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प्रश्न 3.
किन पहलुओं से, हम एक लड़के और लड़की के बीच अंतर नहीं देख सकते?
उत्तर-
साहस, मानसिक स्तर, कड़ी मेहनत इत्यादि के दृष्टिकोण से।

प्रश्न 4.
महिलाओं की बहादुरी, वीरता और दयालुता का उदाहरण दें।
उत्तर-
माई भागो, माता गुजरी, रानी लक्ष्मीबाई इत्यादि महिलाएं बहादुरी, वीरता और दयालुता की उदाहरणे है।

प्रश्न 5.
क्या आधुनिक समय में कोई लिंग आधारित भेदभाव है?
उत्तर–
हाँ, आधुनिक समय में लिंग आधारित भेदभाव है।

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प्रश्न 6.
कौन-से छात्र विशिष्ट तथा सफल हैं?
उत्तर-
समय को महत्त्व देने वाले छात्र विशिष्ट तथा सफल हैं।

प्रश्न 7.
हमें समय की कद्र क्यों करनी चाहिए?
उत्तर-
क्योंकि एक बार समय निकल जाने के बाद कभी वापस नहीं आता।

प्रश्न 8.
समय बर्बाद होने पर क्या होता है?
उत्तर-
समय हमारी कद्र नहीं करेगा और हम जीवन में सफल नहीं हो पाएंगे।

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प्रश्न 9.
कौन-सा छात्र जीवन में सफल हो जाता है?
उत्तर-
जो छात्र समय की योजना बनाते हैं, वह जीवन में सफल हो जाते हैं।

प्रश्न 10.
समय नियोजन से क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
इसका मतलब है कि समय हमें इस तरह से लगाना चाहिए कि हर मिनट का उपयोग हो सके।

प्रश्न 11.
हम अपना समय कैसे बचा सकते हैं?
उत्तर-
सोशल मीडिया का प्रयोग करके हम अपना समय बचा सकते हैं।

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प्रश्न 12.
सोशल मीडिया का उपयोग करने से क्या फायदा है?
उत्तर-
हमें सोशल मीडिया से बहुत सारी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

प्रश्न 13.
आधुनिक समय में किसकी भूमिका काफ़ी बढ़ गई है?
उत्तर-
आधुनिक समय में संचार के साधनों की भूमिका काफी बढ़ गई है।

प्रश्न 14.
मीडिया चलाने वाली कंपनियों का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर-
उनका मुख्य उद्देश्य पैसा कमाना है।

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प्रश्न 15.
संचार के साधन हमें क्या प्रदन करते हैं?
उत्तर-
वह हमें विभिन्न प्रकार की जानकरी प्रदान करते हैं।

प्रश्न 16.
संचार के दुरुपयोग के सधनों का नुकसान क्या है?
उत्तर-
लोग गलत आदतें अपनाते हैं और अपने वास्तविक उद्देश्यों से भटक जाते हैं।

प्रश्न 17.
इंटरनेट और मोबाइल का उपयोग करने से पहले छात्रों को क्या प्रतिज्ञा करनी चाहिए?
उत्तर-
उन्हें यह संकल्प लेना चाहिए कि वह उनका उपयोग केवल अपना ज्ञान बढ़ाने के लिए करेंगे।

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प्रश्न 18.
इंटरनेट और संचार के साधनों का सही उपयोग करने से क्या लाभ है?
उत्तर-
वह अपने ज्ञान को बढ़ाते हैं और एक व्यक्ति के व्यक्तित्व को चमकते हैं।

प्रश्न 19.
गेम खेलने के लिए उत्पादों और टॉनिक का उपयोग करना आवश्यक है?
उत्तर-
नहीं, ऐसी चीज़ों का उपयोग करने की कोई आवश्यकता नहीं है।

प्रश्न 20.
हम एक खेल में कैसे महारत हासिल कर सकते हैं?
उत्तर-
निरंतर अभ्यास से, हम एक खेल में महारत हासिल कर सकते हैं।

PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 2 तर्कशील सोच

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
लिंग भेदभाव से क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
समाज में दो लिंग होते हैं-पुरुष और स्त्री। यदि उनके बीच कोई भेदभाव होता है, तो इसे लैंगिक भेदभाव कहा जाता है। हमारे समाज में, पुरुषों की तुलना में महिलाओं में बहत भेदभाव किया जाता है। उदाहरण के लिए कुछ कार्य हैं, जिनके बारे में यह कहा जाता है कि वे केवल पुरुषों के लिए हैं। पुरुष शारीरिक रूप से शक्तिशाली होते हैं और वे महिलाओं के साथ भेदभाव करते हैं। महिलाओं को कोई अधिकार नहीं दिया गया। इसे लैंगिक भेदभाव कहा जाता है।

प्रश्न 2.
क्या वर्तमान समाज में लैंगिक भेदभाव मौजूद है?
उत्तर-
हां, वर्तमान समाज में लिंग भेदभाव अभी भी मौजूद है। इसका सामान्य उदाहरण किसी भी कार्य स्थल पर देखा जा सकता है जहां महिलाओं को पुरुषों की तुलना में कम वेतन दिया जाता है। राजनीतिक जीवन में बहुत कम महिलाएं हैं। ज्यादातर अपराध महिलाओं से जुड़े हैं। हालांकि उन्हें संविधान द्वारा समान अधिकार दिए गए हैं, लेकिन समाज में समानता प्राप्त करने में असमर्थ हैं।

प्रश्न 3.
क्या हमें लड़कों और लड़कियों के बीच भेदभाव को खत्म करना चाहिए?
उत्तर-
हाँ, समाज में इस भेदभाव को खत्म करना चाहिए। एक आदर्श समाज समानता पर आधारित है और ऐसे समाज में कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। यदि हम पुरुषों और महिलाओं द्वारा किए गए कार्यों को देखते हैं, तो हम आसानी से देख सकते हैं कि महिलाओं को अधिक कठिन काम दिए जाते हैं और उन्हें पूरा करने के लिए बहुत धैर्य की आवश्यकता होती है। पुरुष इस तरह के कार्यों को उचित तरीके से पूरा करने में असमर्थ हैं। इसीलिए भेदभाव को खत्म करना होगा और सामाजिक समानता लाने के प्रयास करने होंगे।

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प्रश्न 4.
हमें समय की कद्र क्यों करनी चाहिए?
उत्तर-
ऐसा कहा जाता है कि अतीत वापस नहीं आता है। एक बार समय समाप्त हो जाता है, चाहे आप कितनी भी कोशिश कर लें, यह वापस नहीं आएगा। यदि हम समय को महत्त्व देते हैं, तो हम अपने सभी काम समय पर और सही तरीके से कर पाएंगे, समय का सही मूल्य पड़ेगा। समय सार का होगा और हमारा जीवन सफल होगा। इसलिए, सबसे पहले यह महत्त्वपूर्ण है कि हमें अपना समय बचाना चाहिए। यदि हम अपने समय का ध्यान रखते हैं तो निश्चित रूप से हम जीवन में प्रगति कर पाएंगे और अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर पाएंगे। इसीलिए कहा जाता है कि समय अमूल्य है और हमें इसे बर्बाद नहीं करना चाहिए।

प्रश्न 5.
“समय का सही उपयोग समय का सबसे अच्छा सदुपयोग है।” कथन स्पष्ट करो।
उत्तर-
यह सही कहा जाता है कि समय का सही उपयोग समय का सबसे ,सदुपयोग है। वास्तव में यह हमारे हाथ में है कि हम अपने समय का उपयोग कैसे करते हैं। यदि कोई व्यक्ति अपने समय का बुद्धिमानी से उपयोग करता है, शिक्षा प्राप्त करता है और प्रगति करने के लिए प्रयास करता है, तो उसका ज्ञान और धन निश्चित रूप से बढ़ता है। लेकिन यदि वह ऐसा नहीं करता, न तो ज्ञान और न ही पैसा उसके पास जाता है। एक छात्र को हमेशा अपना खुद का टाइम टेबल बनाने और सभी विषयों पर बराबर ध्यान देने के लिए कहा जाता है। यदि वह अपनी समय सारिणी निर्धारित नहीं करता है और व्यर्थ में समय बिताता है, तो आने वाले समय में उसके लिए सही नहीं होगा। इसलिए सभी को अपने समय का सदुपयोग जीवन में प्रगति करने के लिए करना चाहिए।

प्रश्न 6.
हम बेहतर तरीके से सोशल मीडिया का उपयोग कैसे कर सकते हैं?
उत्तर-
हमारे जीवन में सोशल मीडिया का महत्त्व इन दिनों बहुत बढ़ गया है। फेसबुक, इंस्टाग्राम, गूगल इत्यादि सोशल मीडिया में शामिल हैं। इनमें से गूगल हमारे लिए बहुत मददगार हो सकता है। हर प्रकार की जानकारी गूगल पर उपलब्ध है। कोई फर्क नहीं पड़ता कि विषय क्या है, गूगल हमें एक सेकंड के भीतर जानकारी प्रदान करता है। इसके अलावा जब हम काम करते हुए थक जाते हैं, तो हम फेसबुक, इंस्टाग्राम इत्यादि पर अपना मनोरंजन कर सकते हैं। इस तरह, हम अपने जीवन को कई तरीकों से दिलचस्प बना सकते हैं, उनका सही इस्तेमाल कर सकते हैं।

PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 2 तर्कशील सोच

प्रश्न 7.
स्कूल के शिक्षा द्वारा छात्रों के व्हाट्सएप समूह बनाने के क्या लाभ हैं?
उत्तर-

  1. व्याटसएप ग्रुप बनाकर, शिक्षक छात्रों को होमवर्क दे सकते हैं।
  2. यदि छात्रों को पढ़ाई करते समय कोई समस्या आती है, तो वह शिक्षकों से प्रश्न पूछ सकते हैं।
  3. छात्र एक-दूसरे के प्रश्नों का उत्तर देते हैं जिससे सभी छात्र पाठ की दोहराई कर सकते हैं।
  4. छात्र परीक्षा के समय में एक-दूसरे के करीब आते हैं और एक-दूसरे की मदद करते हैं।
  5. समूह का उचित उपयोग बच्चों के लिए फायदेमंद है क्योंकि वे जानते हैं कि किसी विशेष क्षण में क्या करना है या क्या नहीं करना है।

प्रश्न 8.
क्या हम उत्पादों और टॉनिक का उपयोग करके अपने खेल में सुधार कर सकते हैं?
उत्तर-
नहीं, खेल उत्पादों और टॉनिक का सेवन करके नहीं सुधारा जा सकता। यह केवल एक विशेष क्षण के लिए शारीरिक शक्ति बढ़ा सकता है। यदि शरीर को इसकी आदत हो जाए तो शरीर क्षतिग्रस्त हो सकता है। खेल को केवल हार्डवर्क से ही बेहतर बनाया जा सकता है और बड़ी सफलता प्राप्त की जा सकती है। यह एक गलत धारणा है कि उत्पादों और टॉनिक का सेवन करके खेल को बेहतर बनाया जा सकता है। हमें इस तरह की गलतफहमियों से दूर रहना चाहिए।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न-हम मोबाइल, इंटरनेट और संचार के अन्य साधनों का सही उपयोग कैसे कर सकते हैं?
उत्तर-वर्तमान समय में हमारे जीवन में संचार की भूमिका बहुत बढ़ गई है और हम इसका भरपूर उपयोग कर रहे हैं। हमें इसकी आदत नहीं बनानी चाहिए । इसके बजाय हमें इसका उचित उपयोग करना चाहिए। निम्नलिखित विधियों के साथ हम मोबाइल, इंटरनेट और संचार के अन्य साधनों का सही उपयोग कर सकते हैं

  1. हमें मोबाइल फोन पर गेम नहीं खेलनी चाहिए, हमें इसका उपयोग ज्ञान प्राप्त करने के लिए करना चाहिए।
  2. हर प्रकार की जानकारी गूगल पर उपलब्ध है। संचार के साधनों का उपयोग कर हमें जानकारी एकत्र करनी चाहिए और अपने विषय में कुशल बनना चाहिए।
  3. वर्तमान में, छात्र मोबाइल और इंटरनेट के साथ शिक्षा ले रहे हैं। इसका इस्तेमाल समझदारी से करना चाहिए।
  4. मोबाइल या कंप्यूटर के अधिक उपयोग से हमारी आँखों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसका उपयोग सीमित सीमा तक किया जाना चाहिए।
  5. ऐसे साधनों का उपयोग करके हम अपने व्यक्तित्व का विकास कर सकते हैं और एक बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकते हैं।
  6. इनकी सहायता से छात्र अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं अर्थात् जीवन में प्रगति कर सकते हैं।

PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 2 तर्कशील सोच

तर्कशील सोच PSEB 10th Class Welcome Life Notes

  • सदियों से हमारे समाज में लड़कों और लड़कियों के बीच भेदभाव किया जाता है। लड़कों को लड़कियों से बेहतर माना जाता है और इसका मुख्या कारण पुरुष प्रधान समाज है।
  • आधुनिक समय में विज्ञान और प्रौद्योगिकी ने इस लिंग भेदभाव को बहुत हद तक खत्म कर दिया है। यद्यपि यह भेदभाव कम हुआ है लेकिन फिर भी यह भेदभाव अभी भी कई क्षेत्रों में व्याप्त है।
  • हमारे पास इतिहास में कई उदाहरणें हैं जिनसे हमें पता चलता है कि आवश्यकता पड़ने पर महिलाओं ने बहुत साहस दिखाया है; जैसे कि रानी लक्ष्मीबाई। यह हमें महिलाओं में कुछ गुणों को भी दिखाता है जैसे कि साहस, दूसरों की मदद करना इत्यादि।
  • समाज में रहते हुए, हमें हर प्रकार के भेदभाव का विरोध करना चाहिए और समाज में समानता लाने का प्रयास करना चाहिए।
  • हमें समय का बुद्धिमानी से उपयोग करना चाहिए। यदि आज हम समय को महत्त्व नहीं देते हैं, तो कल यह हमें महत्त्व नहीं देगा।
  • यह आवश्यक है कि हमें एक समय सारणी बनानी चाहिए और उसके अनुसार अपना जीवन ढालना चाहिए। यह हमारे जीवन में अनुशासन लाएगी और हम सही समय पर सब कुछ करने में सक्षम होंगे।
  • हमें सोशल मीडिया का बेहतर तरीके से उपयोग करना चाहिए। हमें अच्छा ज्ञान प्राप्त करना चाहिए और केवल उस समय को सोशल मीडिया के लिए समर्पित करना चाहिए जिसकी आवश्यकता है। मनोरंजन के लिए, हम सोशल मीडिया को छोड़कर अन्य साधनों का उपयोग कर सकते हैं।
  • हमें रचनात्मक तरीके से मोबाइल, इंटरनेट और संचार के अन्य साधनों का उपयोग करना चाहिए। वे हमें अध्ययन के लिए बहुत अच्छी सामग्री प्रदान करते हैं। इनका सही तरीके से उपयोग करके हम एक बेहतर व्यक्तित्व का निर्माण कर सकते हैं। प्रत्येक छात्र को रचनात्मक तरीके से उनका उपयोग करना चाहिए।
  • हमारे आसपास बहुत सारी नकारात्मकता फैली हुई है। हमें किसी भी तरह की नकारात्मकता से बचना चाहिए और जितना हो सके सकारात्मकता को अपनाने और फैलाने की कोशिश करनी चाहिए।
  • साथ ही, हमें समाज में मौजूद भ्रांतियों से भी बचना चाहिए। हमें अपने विवेक और दिमाग का उपयोग ग़लत धारणाओं से बचने के लिए करना चाहिए और उन्हें समाज से हटाने का प्रयास करना चाहिए।