PSEB 9th Class Home Science Solutions Chapter 3 पारिवारिक साधनों की व्यवस्था

Punjab State Board PSEB 9th Class Home Science Book Solutions Chapter 3 पारिवारिक साधनों की व्यवस्था Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 9 Home Science Chapter 3 पारिवारिक साधनों की व्यवस्था

PSEB 9th Class Home Science Guide पारिवारिक साधनों की व्यवस्था Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
पारिवारिक साधनों से आप क्या समझते हो?
उत्तर-
पारिवारिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए परिवार में उपलब्ध साधनों का प्रयोग किया जाता है। इन साधनों को दो भागों में बांटा गया है –
(i) मानवीय साधन (ii) भौतिक साधन।
दैनिक कार्यों में मौजूद साधनों का प्रयोग किया जाता है अथवा साधनों के प्रयोग से भी कार्य किया जाता है।

PSEB 9th Class Home Science Solutions Chapter 3 पारिवारिक साधनों की व्यवस्था

प्रश्न 2.
पारिवारिक साधनों का वर्गीकरण कैसे किया जा सकता है ?
उत्तर-
साधनों का वर्गीकरण दो भागों में किया जा सकता है –(i) मानवीय साधन (ii) गैर-मानवीय अथवा भौतिक साधन।
(i) मानवीय साधन हैं-कुशलता, ज्ञान, शक्ति, दिलचस्पी, मनोवृत्ति तथा रुचियां आदि।
(ii) भौतिक साधन हैं-समय, धन, सामान, जायदाद, सुविधाएं आदि।

प्रश्न 3.
मानवीय साधन कौन-से हैं ?
उत्तर-
यह वे साधन हैं जो मानव के अन्दर होते हैं। ये हैं-योग्यताएं, कुशलता, रुचियां, ज्ञान, शक्ति, समय, दिलचस्पी, मनोवृत्ति आदि।

प्रश्न 4.
भौतिक साधन कौन-से हैं ?
उत्तर-
गैर-मानवीय अथवा भौतिक साधन हैं-धन, समय, जायदाद, सुविधाएं आदि।

PSEB 9th Class Home Science Solutions Chapter 3 पारिवारिक साधनों की व्यवस्था

लघु उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 5.
समय और शक्ति की व्यवस्था से आप क्या समझते हो ?
उत्तर-
समय ऐसा साधन है जो कि सभी के लिए समान होता है। जब किसी कार्य को करने की शक्ति तथा समय का प्रयोग किया जाता है तो थकावट महसूस होती है। इसलिए समय तथा शक्ति दोनों साधनों को सही ढंग से प्रयोग करना चाहिए ताकि कार्य भी हो जाये तथा थकावट भी ज़रूरत से ज्यादा न हो तथा दोनों की बचत भी हो जाये।

प्रश्न 6.
पारिवारिक साधनों की क्या विशेषताएं होती हैं ?
उत्तर-

  1. यह साधन सीमित होते हैं।
  2. साधन उपयोगी होते हैं तथा इनका प्रयोग कई रूपों में किया जा सकता है।
  3. साधनों का प्रभावशाली प्रयोग किसी भी व्यक्ति के जीवन स्तर को प्रभावित करता
  4. सभी साधनों का उचित प्रयोग परस्पर सम्बन्धित होता है तथा इस तरह उद्देश्यों की पूर्ति होती है।
  5. इन साधनों के उचित प्रयोग से हमारी इच्छाओं की पूर्ति होती है।

प्रश्न 7.
पारिवारिक साधनों को प्रभावित करने वाले तत्त्व कौन-से हैं ?
उत्तर–
पारिवारिक साधनों को प्रभावित करने वाले तत्त्व हैं –
परिवार का आकार तथा रचना, जीवन-स्तर, घर की स्थिति, परिवार के सदस्यों की शिक्षा, गृह निर्माता की कुशलता तथा योग्यता, ऋतु, आर्थिक स्थिति आदि।

प्रश्न 8.
योजना बनाकर समय और शक्ति के व्यय को कैसे कम किया जा सकता है ?
उत्तर-
योजना बनाकर कार्य किया जाये तो समय तथा शक्ति के खर्च को कम किया जा सकता है। योजना बनाने से पहले सारे कार्यों की सूची बनाई जाती है। इस तरह यह पता लगाया जाता है कि कौन-सा कार्य किस समय तथा कौन-से सदस्य द्वारा किया जाना है। योजना में अपने व्यक्तिगत कार्यों तथा मनोरंजन के लिए भी समय रखा जाता है। योजनाबद्ध ढंग से कार्य करने से रोज़ एक जैसी शक्ति का प्रयोग होता है। इस तरह अधिक थकावट भी नहीं होती। योजनाएं दैनिक कार्यों के अतिरिक्त साप्ताहिक तथा वार्षिक कार्यों के लिए भी तैयार की जाती हैं। इस तरह समय तथा शक्ति के खर्च को घटाया जा सकता है।

प्रश्न 9.
निर्णय लेने की प्रक्रिया से आप क्या समझते हो ?
उत्तर-
निर्णय अथवा फैसला लेने की प्रक्रिया को गृह-प्रबन्ध का अभिन्न अंग माना गया है। निर्णय लेने की क्रिया से अभिप्राय है किसी समस्या के हलें के लिए विभिन्न विकल्पों में से सही विकल्प का चुनाव करना। किसी भी तरह का निर्णय लेने के लिए निम्नलिखित चरणों में से गुजरना पड़ता है –

PSEB 9th Class Home Science Solutions Chapter 3 पारिवारिक साधनों की व्यवस्था 1

प्रश्न 10.
निर्णय लेने से पूर्व सोच-विचार करना क्यों आवश्यक है ?
उत्तर-
जब परिवार में कोई समस्या आ जाये तो उसके हल के लिए सोच-विचार करके ही निर्णय लेना चाहिए। प्रत्येक समस्या के हल के लिए कई विकल्प होते हैं। विभिन्न विकल्पों की जानकारी प्राप्त करनी चाहिए तथा प्रत्येक विकल्प कई तत्त्वों का समूह होता है। इनमें से कई तत्त्व समस्या के हल के लिए सहायक होते हैं तथा कई नहीं, कई कम सहायक होते हैं तथा कई अधिक सहायक होते हैं। इसलिए इन तत्त्वों की जानकारी प्राप्त करनी तथा कई स्थितियों में आपको किसी अन्य अनुभवी व्यक्ति की सलाह भी लेनी पड़ती है ताकि ठीक विकल्प का चुनाव हो सके। जैसे मनोरंजन की समस्या के लिए कई विकल्प हैं जैसे सिनेमा जाना, कोई खेल खरीदना अथवा टेलीविज़न खरीदना। इन सभी विकल्पों के बारे में जानकारी लेना तथा फिर एक उपयुक्त विकल्प जैसे कि टेलीविज़न का चुनाव किया जाता है। क्योंकि यह एक लम्बे समय तक चलने वाला मनोरंजन का साधन है। इसके साथ परिवार के प्रत्येक सदस्य के लिए मनोरंजन के कार्यक्रम मिल सकते हैं। इसलिए इन सभी तत्त्वों को ध्यान में रखकर सभी विकल्पों के बारे में सोच-समझकर ही निर्णय लेना चाहिए।

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प्रश्न 11.
सही निर्णय गृह व्यवस्था में कैसे उपयोगी होता है ?
उत्तर-
सही निर्णय लिए जाएं तो समय, शक्ति, धन आदि की बचत हो सकती है। यदि घर की व्यवस्था सोच-समझकर तथा सही निर्णय न लेकर की जाए तो घर अस्त-व्यस्त हो जाता है। घर के सदस्यों में मेल-मिलाप नहीं रहता। कोई भी कार्य समय पर नहीं होता तथा मानसिक तथा शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस तरह सही निर्णय घर की व्यवस्था में बड़ा लाभदायक होता है।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 12.
पारिवारिक साधन मानवीय उद्देश्यों को प्राप्त करने में कैसे सहायक होते हैं ? इन्हें प्रभावित करने वाले तत्त्व कौन-से हैं ?
उत्तर-
परिवार के लिए उपलब्ध साधन, पारिवारिक लक्ष्यों अथवा उद्देश्यों की पूर्ति करने में सहायक होते हैं। दैनिक कार्यों में मौजूद साधनों का प्रयोग किया जाता है अथवा साधनों के प्रयोग से भी कार्य किया जाता है। साधनों के सफल प्रयोग को कई तत्त्व प्रभावित करते हैं –

  1. परिवार का आकार तथा रचना-जिन परिवारों में छोटे बच्चे अथवा बुजुर्ग होते हैं वहां गृहिणी को अधिक कार्य करना पड़ता है। परन्तु बच्चे बड़े होकर गृहिणी की मदद करने लग जाते हैं, तथा कई बुजुर्ग भी घर के काम-काज में मदद कर देते हैं।
  2. जीवन-स्तर-सादा जीवन व्यतीत करने वालों के लक्ष्य आसानी से प्राप्त किये जा सकते हैं।
  3. घर की स्थिति-यदि घर, स्कूल अथवा कॉलेज, मार्कीट आदि के निकट हो तो आने-जाने का काफ़ी समय तथा शक्ति बच जाती है। यदि घर बड़ी सड़क के नज़दीक हो तो धूल-मिट्टी काफ़ी आती है तथा सफ़ाई पर काफ़ी समय नष्ट हो जाता है।
  4. आर्थिक स्थिति-यदि अधिक आय हो तो घर में नौकर रखे जा सकते हैं तथा कई कार्य बाहर से भी करवाये जा सकते हैं। यदि आय कम हो तो गृहिणी को सभी कार्य स्वयं ही करने पड़ते हैं।
  5. परिवार के सदस्यों की शिक्षा-पढ़े-लिखे लोग आधुनिक साधनों का प्रयोग करके अपनी शक्ति तथा समय की काफ़ी बचत कर लेते हैं। जैसे एक पढ़ी-लिखी गृहिणी वाशिंग मशीन तथा मिक्सी आदि का अधिक प्रयोग करेगी जबकि अनपढ़ लोग पुराने परम्परागत साधनों तथा रिवाजों पर ही निर्भर रहते हैं।
  6. ऋतु बदलना-गांवों में बिजाई-कटाई के समय कार्य अधिक करना पड़ता है और समय कम। शहरों में ऋतु बदलने पर गर्म-ठण्डे कपड़ों आदि को निकालना तथा रखना आदि कार्य बढ़ जाते हैं।
  7. गृह निर्माता की कुशलता तथा योग्यताएं-एक कुशल गृहिणी अपनी योग्यता से समय तथा शक्ति की बचत कर सकती है।

प्रश्न 13.
समय और शक्ति पारिवारिक साधन कैसे हैं ? योजना बनाकर इनके व्यय को कैसे कम किया जा सकता है ?
उत्तर-
समय सभी के लिए ही बराबर होता है। एक दिन में 24 घण्टे होते हैं। परन्तु शक्ति सभी के पास एक जैसी नहीं होती तथा आयु के साथ-साथ इसमें अन्तर पड़ता रहता है। जब कोई कार्य किया जाता है तो समय तथा शक्ति दोनों खर्च होते हैं। योजना बनाकर कार्य किया जाये तो इन दोनों की बचत की जा सकती है। एक समझदार गृहिणी को समय तथा शक्ति के खर्च को घटाने के लिए योजना बनाने में कोई मुश्किल नहीं आती। योजना को लिखकर बनाना चाहिए तथा योजना में लचीलापन होना चाहिए ताकि आवश्यकता पड़ने पर इसको बदला जा सके। सभी कार्यों की सूची बनाने के पश्चात् योजना बनानी चाहिए। यह भी तय कर लेना चाहिए कि इनमें से कौन-से कार्य किस सदस्य ने तथा कब करने हैं। दैनिक कार्यों के अतिरिक्त साप्ताहिक तथा वार्षिक कार्यों की भी योजना बना लेनी चाहिए। अधिक भारी कार्य के पश्चात् हल्के कार्य को स्थान देना चाहिए ताकि अधिक थकावट न हो। योजना में अपने व्यक्तिगत तथा मनोरंजन के कार्यों के लिए भी समय रखना चाहिए। योजना इस तरह बनाएं कि प्रतिदिन ज़रूरी कार्यों तथा मनोरंजन के कार्यों में लगभग एक जैसी शक्त्रि व्यय हो। इस तरह योजनाबद्ध तरीके से कार्य करके शक्ति तथा समय दोनों की बचत हो जाती है।

Home Science Guide for Class 9 PSEB पारिवारिक साधनों की व्यवस्था क्षेत्र Important Questions and Answers

रिक्त स्थान भरें

  1. पारिवारिक साधनों को …………………….. भागों में बांटा जाता है।
  2. मानवीय साधन, मानव के …………………….. होते हैं।
  3. पारिवारिक साधन …………………………. होते हैं।
  4. ………………………… में ही मनुष्य को मानसिक सन्तुष्टि मिलती है।
  5. साधन हमारी …………………………… की पूर्ति करते हैं।

उत्तर-

  1. दो,
  2. अन्दर,
  3. सीमित,
  4. घर,
  5. इच्छाओं।

एक शब्द में उत्तर दें

प्रश्न 1.
गृह निर्माता का कर्त्तव्य आमतौर पर कौन निभाता है ?
उत्तर-
गृहिणी।

प्रश्न 2.
सीमित साधनों के द्वारा कार्य बढ़िया कैसे हो सकता है ?
उत्तर-
अच्छी व्यवस्था द्वारा।

प्रश्न 3.
समय को कितने भागों में बांटा जा सकता है ?
उत्तर-
तीन।

ठीक/ग़लत बताएं

  1. साधन दो प्रकार के होते हैं-मानवीय, भौतिक।
  2. साधन असीमित होते हैं।
  3. साधनों का उचित प्रयोग करके हम अपनी इच्छायों की पूर्ति करते हैं।
  4. समय ऐसा साधन है जो कि सभी के पास बराबर होता है।
  5. परिवार का आकार तथा रचना पारिवारिक साधनों को प्रभावित नहीं करती।
  6. सही निर्णय घर की व्यवस्था के लिए लाभदायक है।

उत्तर-

  1. ठीक
  2. ग़लत
  3. ठीक
  4. ठीक
  5. ग़लत
  6. ठीक।

PSEB 9th Class Home Science Solutions Chapter 3 पारिवारिक साधनों की व्यवस्था

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पारिवारिक साधनों को प्रभावित करने वाले कारक हैं –
(A) परिवार का आकार
(B) घर की स्थिति
(C) ऋतु
(D) सभी ठीक।
उत्तर-
(D) सभी ठीक

प्रश्न 2.
निम्न में ठीक हैं –
(A) जब किसी कार्य को करने के लिए समय तथा शक्ति का प्रयोग होता है तो थकावट महसूस होती है
(B) साधन सीमित हैं
(C) सही निर्णय लेने से समय, शक्ति, धन आदि की बचत हो सकती है
(D) सभी ठीक।
उत्तर-
(D) सभी ठीक

प्रश्न 3.
ठीक तथ्य है
(A) साधन असीमित होते हैं
(B) साधनों की उपयोगिता नहीं होती
(C) धन भौतिक साधन है
(D) सभी ठीक।
उत्तर-
(C) धन भौतिक साधन है

PSEB 9th Class Home Science Solutions Chapter 3 पारिवारिक साधनों की व्यवस्था

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
योजना बनाने के अतिरिक्त गृहिणी को कौन-सी अन्य बातों का ज्ञान होना चाहिए जिससे समय तथा शक्ति बच सकती हो ?
उत्तर-

  1. सभी चीज़ों को अपने स्थान पर रखो ताकि ज़रूरत पड़ने पर वस्तु को ढूंढने में समय नष्ट न हो।
  2. काम करने के लिए सामान अच्छा तथा ठीक हालत में होना चाहिए।
  3. काम करने वाली जगह पर रोशनी का ठीक प्रबन्ध होना चाहिए।
  4. काम करने के सुधरे तरीकों का प्रयोग करना चाहिए।
  5. घर के सभी सदस्यों की मदद लेनी चाहिए। यदि फिर भी कार्य तथा आय के साधन ठीक हों तो कार्य बाहर से भी करवाया जा सकता है।
  6. काम करने वाली जगह की ऊंचाई अथवा वस्तुओं के हैण्डल ऐसे हों कि कन्धों पर अधिक भार न पडे।

प्रश्न 2.
मूल्यांकन करने से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
कुछ देर किसी योजना के अनुसार कार्य करते रहने के पश्चात् देखा जाता है कि नियत लक्ष्य प्राप्त हो रहे हैं, अथवा नहीं। यदि लक्ष्य प्राप्त न हो रहे हों तो योजना में फेरबदल किया जाता है तथा इस तरह अपनी योजना का मूल्यांकन किया जाता है ताकि नियत लक्ष्यों की पूर्ति हो सके।

प्रश्न 3.
मानवीय साधन कौन-से हैं ?
उत्तर-
यह वे साधन हैं जो मानव के अन्दर होते हैं। ये हैं-योग्यताएं, कुशलता, रुचियां, ज्ञान, शक्ति, समय, दिलचस्पी, मनोवृत्ति आदि।
इन साधनों का उचित प्रयोग करके गृह प्रबन्ध बढ़िया ढंग से किया जा सकता है। किसी कार्य को करने की योग्यता तथा कुशलता हो तो कार्य में रुचि तथा दिलचस्पी स्वयं पैदा हो जाती है। नए उपकरणों तथा मशीन आदि के बारे में ज्ञान हो तो समय तता शक्ति की बचत हो जाती है। घर के सदस्यों की शक्ति भी एक मानवीय साधन है।

प्रश्न 4.
भौतिक साधन कौन-से हैं और गृह व्यवस्था के लिए कैसे लाभदायक है ?
उत्तर-
गैर-मानवीय अथवा भौतिक साधन हैं-धन, समय, जायदाद, सुविधाएं आदि। इन सभी के उचित प्रयोग से गृह-व्यवस्था ठीक ढंग से की जा सकती है तथा परिवार के उद्देश्यों तथा ज़रूरतों की पूर्ति की जा सकती है।

पारिवारिक साधनों की व्यवस्था PSEB 9th Class Home Science Notes

  • परिवार के उद्देश्यों तथा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए उपलब्ध साधनों की सहायता ली जाती है।
  • पारिवारिक साधनों को दो भागों में बांटा गया है –
    (i) मानवीय साधन (ii) भौतिक साधन।
  • कार्य करने की कुशलता, ज्ञान, शक्ति, समय, दिलचस्पी, मनोवृत्ति तथा रुचियां आदि मानवीय साधन हैं।
  • धन, सामान, जायदाद, सुविधाएं आदि ग़ैर-मानवीय अथवा भौतिक साधन हैं।
  • समय ऐसा साधन है जो सभी के लिए बराबर होता है।
  • समय को तीन भागों में बांटा जा सकता है-कार्य, विश्राम, नींद आदि।
  • विभिन्न व्यक्तियों में शक्ति भी अलग-अलग होती है तथा एक ही व्यक्ति में सारी उम्र एक जैसी शक्ति नहीं रहती।
  • जब किसी कार्य को करने के लिए समय तथा शक्ति का प्रयोग किया जाता है तो थकावट अनुभव होती है।
  • परिवार का आकार तथा रचना, जीवन स्तर, घर की स्थिति, आर्थिक स्थिति, परिवार के सदस्यों की शिक्षा, गृह निर्माता की कुशलता तौँ योग्यताएं, ऋतु बदलने से कार्य आदि पारिवारिक साधनों को प्रभावित करने वाले तत्त्व हैं।
  • योजनाबद्ध तरीके से कार्य करके समय तथा शक्ति के खर्च को कम किया जा सकता है।
  • रोज़ाना कार्यों के अतिरिक्त साप्ताहिक तथा वार्षिक कार्यों की भी योजना बनानी चाहिए।
  • यदि घर की आय के साधन ठीक हों तो घर के कार्य बाहर से करवाकर भी समय तथा शक्ति का बचाव किया जा सकता है।
  • जब किसी योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जाता है तो कुछ देर पश्चात् पता लग जाता है कि नियत लक्ष्यों की पूर्ति हो रही है अथवा नहीं।
  • यदि उद्देश्यों की पूर्ति न हो रही हो तो अपनी योजना में परिवर्तन कर लेना चाहिए ताकि आगे के लिए उद्देश्यों की पूर्ति हो सके।
  • ठीक निर्णय लिए जाएं तो कार्य अच्छी तरह तथा आसानी से हो जाते हैं।
  • घर का प्रबन्धक अथवा गृहिणी सोच-समझकर निर्णय न करे तो घर अस्त-व्यस्त हो जाता है।

PSEB 9th Class Home Science Solutions Chapter 10 मनुष्य के विकास के पड़ाव

Punjab State Board PSEB 9th Class Home Science Book Solutions Chapter 10 मनुष्य के विकास के पड़ाव Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 9 Home Science Chapter 10 मनुष्य के विकास के पड़ाव

PSEB 9th Class Home Science Guide मनुष्य के विकास के पड़ाव Textbook Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
मनुष्य के विकास के कितने पड़ाव होते हैं? नाम बताओ।
उत्तर-
मानवीय विकास के निम्नलिखित पड़ाव हैं —

  1. बचपन
  2. किशोरावस्था
  3. बालिग
  4. बुढ़ापा।

प्रश्न 2.
बचपन को कितनी अवस्थाओं में बांटा जा सकता है?
उत्तर-बचपन को निम्नलिखित अवस्थाओं में बांटा जाता है–

  1. जन्म से दो वर्ष तक
  2. दो से तीन वर्ष तक
  3. तीन से छः वर्ष का बच्चा
  4. छ: से किशोरावस्था तक।

प्रश्न 3.
कितने महीने का बच्चा बिना सहारे खड़ा होने लगता है?
उत्तर-
9 माह का बच्चा बिना सहारे के खड़ा होने लगता है।

PSEB 9th Class Home Science Solutions Chapter 10 मनुष्य के विकास के पड़ाव

प्रश्न 4.
किस उमर में बच्चे का शारीरिक विकास बहुत तेज़ गति से होता है?
उत्तर-
2 से 3 वर्ष के बच्चे की शारीरिक तौर पर वृद्धि तेज़ी से होती है। शारीरिक विकास के साथ ही उसका सामाजिक विकास इस समय बड़ी तेजी से होता है।

प्रश्न 5.
कितनी आयु का बच्चा कानूनी रूप से वयस्क समझा जाता है?
उत्तर-
पहले 21 वर्ष के बच्चे को बालिग समझा जाता था परन्तु अब 18 वर्ष के बच्चे को बालिग समझा जाता है जबकि 20 वर्ष की आयु तक उसका शारीरिक विकास होता रहता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 6.
किशोरावस्था के दौरान लड़कों में किस प्रकार के परिवर्तन आते हैं?
उत्तर-

  1. किशोरावस्था में लड़कों की दाड़ी तथा मूंछ फूटनी आरम्भ हो जाती है।
  2. उनकी टांगें-बांहें अधिक लम्बी हो जाती हैं तथा आवाज़ फटती है। उनके लिए यह अनोखी बात होती है।
  3. उनके गले की हड्डी बाहर को उभर आती है।
  4. लड़के स्वयं को बड़ा समझने लगते हैं तथा उनसे माता-पिता की ओर से लगाई गई पाबन्दियां बर्दाश्त नहीं होती।
  5. वह कभी बड़ों की तरह तथा कभी बच्चों की तरह बर्ताव करने लगते हैं।
  6. किशोरावस्था में लड़के अधिक भावुक हो जाते हैं।
  7. अपने शरीर में आए जिस्मानी परिवर्तनों के बारे उनमें जानने की इच्छा पैदा होती है।

प्रश्न 7.
किशोरावस्था के दौरान माता-पिता के उनके बच्चों के प्रति क्या कर्त्तव्य हैं?
उत्तर-

  1. बच्चों को लिंग शिक्षा सम्बन्धी पूरी जानकारी देनी चाहिए। बच्चों को एड्स जैसी जानलेवा बीमारी तथा नशों के बुरे परिणामों के बारे में भी जानकारी देनी चाहिए।
  2. किशोर बच्चों से माता-पिता के मित्रों वाले सम्बन्ध होने बहुत आवश्यक हैं ताकि बच्चा बिना परेशानी अपनी शारीरिक तथा मानसिक परेशानी उनके साथ साझी कर सके तथा मां-बाप द्वारा दिये सुझावों का पालन कर सके।
  3. मां-बाप तथा अध्यापकों को किशोरों से अपना व्यवहार एक जैसा रखना चाहिए। किसी हालत में उन्हें छोटा तथा कभी बड़ा कहकर उनके मन में उलझन पैदा नहीं करनी चाहिए। इस तरह उसे यह समझ नहीं आता कि वह वास्तव में बड़ा हो गया है या अभी छोटा ही है।
  4. माता-पिता को भी इस अवस्था में अपने बच्चे के प्रति पूर्ण विश्वास वाला तथा हिम्मत वाला व्यवहार करना चाहिए ताकि उनका सर्वपक्षीय विकास ठीक ढंग से हो सके।
    अपनी ऊर्जा (शक्ति) खर्च करने के लिए कई प्रकार की रुचियों में रुझाने के लिए समय मिलना चाहिए जैसे खेल-कूद, कहानी पढ़ना, गाना-बजाना आदि।

प्रश्न 8.
प्रौढ़ावस्था में मनुष्य के सामाजिक कर्त्तव्य क्या होते हैं?
उत्तर-

  1. मनुष्य इस आयु में सामाजिक रीति-रिवाजों के अनुसार अपनी ज़िम्मेदारियों का निर्वाह करता है।
  2. मनुष्य उचित व्यवसाय का चुनाव करता है तथा अपने जीवन साथी का चुनाव करके घर बसा लेता है।
  3. बच्चे पालता है, दुनियादारी निभाता है, माता-पिता, छोटे बहन-भाइयों तथा अन्य रिश्तेदारों की जिम्मेवारी सम्भालता है।

प्रश्न 9.
बच्चा और बूढ़ा एक समान क्यों कहा जाता है? संक्षेप में लिखो।
उत्तर-
वृद्धावस्था में मनुष्य का शरीर कमजोर हो जाता है। उसके लिए चलना, फिरना, उठना, बैठना कठिन हो जाता है। आँखों से दिखाई देना तथा कानों से सुनना कम हो जाता है। ज्ञानेन्द्रियां अपना कार्य करना बन्द कर देती हैं। कई रंगों की पहचान नहीं कर सकते तथा कइयों को अंधराता हो जाता है।
इस तरह वृद्धों को विशेष देखभाल की ज़रूरत पड़ती है। जैसे छोटे बच्चों को होती है। इसीलिए बच्चे तथा वृद्ध को एक जैसा कहा जाता है।

PSEB 9th Class Home Science Solutions Chapter 10 मनुष्य के विकास के पड़ाव

प्रश्न 10.
स्कूल बच्चे के सामाजिक और मानसिक विकास में सहायक होता है। कैसे?
उत्तर-
स्कूल में बच्चे अपने साथियों से पढ़ना तथा खेलना तथा कई बार बोलना भी सीखते हैं। इस तरह उनमें सहयोग की भावना पैदा होती है। बच्चा जब अपने स्कूल का कार्य करता है तो उसमें ज़िम्मेदारी का बीज बो दिया जाता है। जब वह अध्यापक का कहना मानता है तो उसमें बड़ों के प्रति आदर की भावना पैदा होती है।
बच्चा स्कूल में अपने साथियों से कई नियम सीखता है तथा कई अच्छी आदतें सीखता है जो आगे चलकर उसके व्यक्तित्व को उभारने में सहायक हो सकती हैं।

प्रश्न 11.
किशोरावस्था में लड़के और लड़कियों में होने वाले परिवर्तनों का तुलनात्मक वर्णन करो।
उत्तर-

किशोर लड़के किशोर लड़कियां
(1) इस आयु में लड़कों की दाढ़ी तथा आने लगती हैं। (1) लड़कियों को माहवारी आने लगती मूंछे है।
(2) उनका शरीर बेढंगा (टांगें, बाजू लम्बी होने होना) हो जाता है तथा आवाज़ फटने लगती है। (2) इनके विभिन्न अंगों पर चर्बी जमा लगती है तथा कई आन्तरिक बदलाव जैसे दिल तथा फेफड़ों के आकार में वृद्धि होती है।
(3) इस आयु में लड़कों को खेल, पढ़ाई, कम्प्यूटर, समाज सेवा आदि सीखने पर जोर देना चाहिए। (3) लड़कियों को पढ़ाई, कढ़ाई, कम्प्यूटर, स्वैटर बुनना, संगीत, पेंटिंग आदि ज़ोर सीखने पर देना चाहिए।

प्रश्न 12.
प्रारम्भिक वर्षों में माता-पिता बच्चे के व्यक्तित्व के विकास में किस प्रकार योगदान डालते हैं?
उत्तर-
बच्चे के व्यक्तित्व को बनाने में माता-पिता का बड़ा योगदान होता है क्योंकि बच्चा जब अभी छोटा ही होता है तभी माता-पिता की भूमिका उसकी ज़िन्दगी में आरम्भ हो जाती है। बच्चे के प्रारम्भिक वर्षों में बच्चे को भरपूर प्यार देना, उस द्वारा किये प्रश्नों के उत्तर देना, बच्चे को कहानियां सुनाना आदि से बच्चे का व्यक्तित्व उभरता है तथा माता-पिता इसमें काफ़ी सहायक होते हैं।

प्रश्न 13.
बच्चों को टीके लगवाने क्यों ज़रूरी हैं ? बच्चों को कौन-से टीके किस आयु में लगवाने चाहिएं? और क्यों?
उत्तर-
बच्चों को कई खतरनाक जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए उन्हें टीके लगाये जाते हैं। इन टीकों का सिलसिला जन्म के पश्चात् आरम्भ हो जाता है। बच्चों को 2 वर्ष की आयु तक चेचक, डिप्थीरिया, खांसी, टिटनस, पोलियो, हेपेटाइटस, बी०सी०जी० तथा टी०बी० आदि के टीके लगवाये जाते हैं। छ: वर्ष में बच्चों को कई टीकों की बूस्टर डोज़ भी दी जाती है।

प्रश्न 14.
बच्चे में 3 से 6 वर्ष की आयु तक होने वाले विकास का वर्णन करो।
उत्तर-
इस आयु में बच्चे की शारीरिक वृद्धि तेजी से होती है तथा उसकी भूख कम हो जाती है। वह अपना कार्य स्वयं करना चाहता है।
बच्चे को रंगों तथा आकारों का ज्ञान हो जाता है तथा उसकी रुचि ड्राईंग, पेंटिंग, ब्लॉक्स से खेलने तथा कहानियां सुनने की ओर अधिक हो जाती है।
बच्चा इस आयु में प्रत्येक बात की नकल करने लग जाता है।

प्रश्न 15.
दो से तीन वर्ष के बच्चे में होने वाले भावनात्मक विकास सम्बन्धी जानकारी दो।
उत्तर-
इस आयु के दौरान बच्चा मां की सभी बातें नहीं मानना चाहता। ज़बरदस्ती करने पर वह ऊंची आवाज़ में रोता है, ज़मीन पर लोटता है, तथा हाथ-पैर मारने लगता है। कई बार वह खाना-पीना भी छोड़ देता है। माता-पिता को ऐसी हालत में चाहिए कि उसको न डांटें परन्तु जब वह शांत हो जाए तो उसे प्यार से समझाना चाहिए।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 16.
किशोरावस्था के दौरान लिंग शिक्षा देना क्यों ज़रूरी है?
उत्तर-
किशोरावस्था आने पर बच्चों के शरीर में कई तरह के परिवर्तन आते हैं। उनके प्रजनन अंगों का विकास होता है। लड़कियों को माहवारी आने लगती है। शरीर के विभिन्न अंगों पर चर्बी जमा होनी आरम्भ हो जाती है। किशोरावस्था में बच्चे में विरोधी लिंग के प्रति आकर्षण पैदा हो जाता है। बच्चों को इन सभी परिवर्तनों की जानकारी नहीं होती तथा वह यह जानकारी अपने दोस्तों-मित्रों से हासिल करने की कोशिश करते हैं अथवा ग़लत किताबें पढ़ते हैं तथा अपने मन में ग़लत धारणाएं बना लेते हैं। वैसे तो हमारे समाज में लड़केलड़कियों के मिलने के अवसर कम ही होते हैं परन्तु कई बार यदि उन्हें इकट्ठे रहने का मौका मिल जाये तो इसके ग़लत परिणाम भी निकल सकते हैं।
इसलिए यह आवश्यक हो जाता है कि किशोरों को माता-पिता तथा अध्यापक अच्छी तरह लिंग शिक्षा प्रदान करें। उनके साथ स्वयं मित्रों वाला व्यवहार करें तथा उनकी समस्याओं को समझें तथा सुलझाएं ताकि उन्हें ग़लत संगति में जाने से रोका जा सके। उन्हें एड्स जैसी भयानक बीमारी की भी जानकारी देनी चाहिए।

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प्रश्न 17.
बच्चों से मित्रतापूर्वक व्यवहार रखने से उनमें कौन-से सद्गुण विकसित होते हैं? विस्तारपूर्वक लिखो।
उत्तर-
बच्चे के व्यक्तित्व तथा भावनात्मक विकास में माता-पिता के प्यार तथा मित्रतापूर्वक व्यवहार की बड़ी महत्ता है। माता-पिता के प्यार से बच्चे को यह विश्वास हो जाता है कि उसकी प्राथमिक ज़रूरतें उसके माता-पिता पूरी करेंगे। माता-पिता की ओर से बच्चे द्वारा पूछे गये प्रश्नों के उत्तर देने पर बच्चे का दिमागी विकास होता है। उसे स्वयं पर विश्वास होने लगता है। माता-पिता द्वारा बच्चे को कहानियां सुनाने पर उसका मानसिक विकास होता है। कई बार बच्चा मां का कहना नहीं मानना चाहता तथा ज़बरदस्ती करने पर गुस्सा होता है। ऊँची आवाज़ में रोता है, हाथ-पैर मारता है तथा ज़मीन पर लोटने लग जाता है। ऐसी हालत में बच्चे को डांटना नहीं चाहिए तथा शांत होने पर उसे प्यार से माता-पिता द्वारा समझाया जाना चाहिए कि वह ऐसे ग़लत करता है। इस तरह बच्चे को पता चल जाता है कि माता-पिता उससे किस तरह के व्यवहार की उम्मीद करते हैं।

बच्चे से दोस्ताना व्यवहार रखने पर बच्चों को अपनी समस्याओं का हल ढूँढने के लिए ग़लत रास्तों पर नहीं चलना पड़ता अपितु उनमें यह विश्वास पैदा होता है कि माता-पिता उसे सही मार्ग बताएंगे।

वह ग़लत संगति से बच जाता है। उसमें अच्छी रुचियां जैसे ड्राईंग, पेंटिंग, संगीत. अच्छी किताबें पढ़ना आदि पैदा होती हैं। वह अपनी शक्ति का प्रयोग अच्छे कार्यों में करता है। इस तरह वह एक अच्छा व्यक्तित्व बन कर उभरता है।

प्रश्न 18.
वृद्धावस्था में पैसे के साथ प्यार क्यों बढ़ जाता है?
उत्तर-
वृद्धावस्था मनुष्य की ज़िन्दगी का अन्तिम पड़ाव होता है। इस पड़ाव पर पहुंच कर अलग-अलग मानवों पर अलग-अलग प्रभाव होता है। कई तो अभी भी ऐसे हँसमुख तथा स्वस्थ रहते हैं तथा कई हर समय यही सोचते हैं कि वह बूढ़े हो गये हैं, अब उन्हें और भी कई बीमारियां लग जाएंगी तथा वह और भी बूढ़े हो जाते हैं। इस उम्र में कमजोरी तो आती है जोकि मानसिक तथा शारीरिक दोनों तरह की होती है। कइयों की नेत्र ज्योति घट जाती है। कई बार ज्ञानेन्द्रियां कमजोर हो जाती हैं। दाँत टूट जाते हैं। शरीर काम नहीं कर सकता : कइयों की रंगों को पहचानने की शक्ति कम हो जाती है तथा कइयों को अंधराता हो जाता है। परन्तु ऐसी हालत में भी मनुष्य यह चाहता है कि वह आर्थिक पक्ष से रिश्तेदारों का मोहताज न हो, उसके पास अपने पैसे हों तथा उसकी स्वतन्त्रता को कोई फर्क न पड़े। धन तो अब वह कमा नहीं सकता इसलिए वह प्रत्येक पैसे को खर्च करते समय कई बार सोचता है। इस तरह वृद्धावस्था में धन के प्रति उसका मोह बढ़ जाता है। वृद्धावस्था में नींद भी कम आती है, कानों से कम सुनाई देता है। सांसारिक वस्तुओं से प्यार कम हो जाता है तथा परमात्मा की ओर ध्यान बढ़ जाता है।

Home Science Guide for Class 9 PSEB मनुष्य के विकास के पड़ाव Important Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

रिक्त स्थान भरें-

  1. प्रौढ़ावस्था के . ……………… पड़ाव हैं।
  2. महीने का बच्चा स्वयं खड़ा हो सकता है।
  3. ……………… वर्ष के बच्चे बालिग हो जाते हैं।
  4. छः वर्ष में बच्चों को …………………. डोज़ भी दी जाती है।
  5. ………………… वर्ष में बच्चा सीढ़ियां चढ़-उतर सकता है।

उत्तर-

  1. दो,
  2. 10,
  3. 18,
  4. टीकों की बूस्टर,
  5. दो।

एक शब्द में उत्तर दें

प्रश्न 1.
कितने माह का बच्चा बिना सहारे के बैठ सकता है?
उत्तर-
9 माह का।

प्रश्न 2.
प्रौढ़ावस्था की पहली अवस्था कब तक होती है?
उत्तर-
40 वर्ष तक।

प्रश्न 3.
कितनी आयु में लड़कियों के फेफड़ों की वृद्धि पूर्ण हो जाती है?
उत्तर-
17 वर्ष।

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प्रश्न 4.
औरतों में माहवारी किस आयु में बंद हो जाती है?
उत्तर-
45 से 50 वर्ष।

ठीक/ग़लत बताएं

  1. 2 वर्ष में बच्चा सीढ़ियां चढ़-उतर सकता है।
  2. वृद्ध अवस्था का प्रभाव सभी पर एक जैसा होता है।
  3. स्कूल में बच्चे का मानसिक तथा सामाजिक विकास होता है।
  4. 9 महीने का बच्चा सहारे के बिना खड़ा हो सकता है।
  5. 6 वर्ष का होने पर बच्चे को कई टीकों के बूस्टर डोज़ दिए जाते हैं।
  6. किशोर अवस्था में लड़कों की दाड़ी तथा मूंछ निकलनी शुरू हो जाती है।

उत्तर-

  1. ठीक,
  2. ग़लत,
  3. ठीक,
  4. ठीक,
  5. ठीक,
  6. ठीक।

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कितनी देर का बच्चा स्वयं उठ कर खड़ा हो सकता है –
(A) 6 माह का
(B) 1 वर्ष का
(C) 3 महीने का
(D) 8 महीने का।
उत्तर-
(B) 1 वर्ष का

प्रश्न 2.
कानूनी रूप में बच्चा कितनी आयु में वयस्क हो जाता है –
(A) 15 वर्ष
(B) 20 वर्ष
(C) 18 वर्ष
(D) 25 वर्ष।
उत्तर-
(C) 18 वर्ष

प्रश्न 3.
कौन-सा तथ्य ठीक है –
(A) किशोरावस्था में लड़के अधिक भावुक हो जाते हैं।
(B) बच्चे तथा वृद्ध को एक समान कहा जाता है।
(C) किशोर अवस्था को तूफानी तथा दबाव वाली अवस्था माना गया है।
(D) सभी ठीक।
उत्तर-
(D) सभी ठीक।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
जन्म से दो वर्ष तक के बच्चे में सामाजिक तथा भावनात्मक विकास के बारे में आप क्या जानते हो?
उत्तर-
इस आयु का बच्चा जिन आवाज़ों को सुनता है, उनका मतलब समझने की कोशिश करता है। वह प्यार तथा क्रोध की आवाज़ को समझता है। वह अपने आस-पास के लोगों को पहचानना आरम्भ कर देता है। जब बच्चे को अपने माता-पिता तथा परिवार के अन्य सदस्यों द्वारा पूरा लाड़-प्यार मिलता है तथा उसकी प्राथमिक आवश्यकताएं पूरी की जाती हैं तो उसे विश्वास हो जाता है कि उसकी ज़रूरतें उसके माता-पिता पूरी करेंगे। उसका इस तरह भावनात्मक तथा सामाजिक विकास आरम्भ हो जाता है।

प्रश्न 2.
दो से तीन वर्ष के बच्चे के विकास बारे तम क्या जानते हो?
उत्तर-
शारीरिक विकास-2 से 3 वर्ष के बच्चे की शारीरिक तौर पर वृद्धि तेज़ी से होती है। शारीरिक विकास के साथ ही उसका सामाजिक विकास इस समय बड़ी तेजी से होता है। __मानसिक विकास-इस आयु का बच्चा नई चीजें सीखने की कोशिश करता है। वह पहले से अधिक बातें समझना आरम्भ कर देता है। वह अपने आस-पास के बारे में कई प्रकार के प्रश्न पूछता है। इस समय माता-पिता का कर्तव्य है कि वह बच्चे के प्रश्नों के उत्तर ज़रूर दें। बच्चे को प्यार से पास बिठा कर कहानियां सुनाने से उसका मानसिक विकास होता है।

सामाजिक विकास-इस आय में बच्चे को दूसरे बच्चों की मौजूदगी का अहसास होने लग जाता है। अपनी मां के अतिरिक्त अन्य व्यक्तियों से भी प्यार करने लगता है। अब वह अपने कार्य जैसे भोजन करना, कपड़े पहनना, नहाना, बुट पालिश करना आदि स्वयं ही करना चाहता है।
भावनात्मक विकास-इस आयु में बच्चा मां की सभी बातें नहीं मानना चाहता। ज़बरदस्ती करने पर वह ऊँची आवाज़ में रोता, हाथ-पैर मारता तथा ज़मीन पर लेटने लगता है। कई-कई बार खाना-पीना भी छोड़ देता है। गुस्से की अवस्था में बच्चे को डांटना नहीं चाहिए तथा जब वह शांत हो जाये तो प्यार से उसे समझाना चाहिए। इस तरह बच्चे में मातापिता के प्रति प्यार तथा विश्वास की भावना पैदा होती है तथा उसे यह अहसास होने लगता है कि उसके माता-पिता उससे किस तरह के व्यवहार की उम्मीद रखते हैं।

प्रश्न 3.
तीन से छः वर्ष के बच्चे के विकास के बारे में जानकारी दो।
उत्तर-
शारीरिक विकास- इस आयु में बच्चे की वृद्धि तेज़ी से होती है परन्तु उसको भूख कम लगती है। वह परिवार के बड़े सदस्यों के साथ बैठकर वही भोजन खाना चाहता है जो वे खाते हैं। बच्चे के शारीरिक विकास के लिए बच्चे की खुराक में दूध, अण्डा, पनीर तथा अन्य प्रोटीन वाले भोजन पदार्थ अधिक मात्रा में शामिल करने चाहिएं। बच्चा धीरे-धीरे अपना कार्य करने लगता है तथा उसे जहां तक हो सके अपने काम स्वयं करने देने चाहिएं। इस तरह वह आत्म-निर्भर बनता है।
मानसिक विकास- इस आयु के बच्चे में ड्राईंग, पेंटिंग, ब्लॉक्स से खेलना तथा कहानियां सुनने आदि में रुचि पैदा होती है। उसे रंगों तथा आकारों का भी ज्ञान हो जाता है।
सामाजिक तथा भावनात्मक विकास-बच्चा जब दूसरे बच्चों से मिलता-जुलता है उसमें सहयोग की भावना पैदा होती है। बच्चा इस आयु में प्रत्येक बात की नकल करता है इसलिए जहां तक हो सके उसके सामने कोई ऐसी बात न करो जिसका उसके मन पर बुरा प्रभाव पड़े जैसे सिग्रेट पीना।

प्रश्न 4.
किशोरावस्था में लड़कियों में आने वाले परिवर्तनों के बारे में बताओ।
उत्तर-

  1. इस आयु में लड़कियों को माहवारी आने लगती है। क्योंकि उन्हें इसके कारण का पता नहीं होता, कई बार वे घबरा जाती हैं।
  2. इस आयु में लड़कियां अधिक समझदार हो जाती हैं तथा कई बार पढ़ाई में भी तेज़ हो जाती हैं।
  3. इस आयु में लड़कियां जल्दी भावुक हो जाती हैं। कई बार छोटी-सी बात पर रोने लगती हैं। उदास तथा नाराज़ भी रहने लगती हैं।
  4. वह अपनी आलोचना नहीं सहन कर सकतीं तथा शीघ्र रुष्ट हो जाती हैं।
  5. इस आयु में जागते ही सपने देखना आरम्भ कर देती हैं।

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प्रश्न 5.
किशोरावस्था क्या है तथा इसमें होने वाले विकास के बारे में बताओ।
उत्तर-
जब लड़कों की मस फूटती है तथा लड़कियों को माहवारी आने लगती है, इसको किशोरावस्था कहते हैं। यह एक ऐसा पड़ाव है जब बच्चा न तो बच्चों में गिना जाता है न ही बालिगों में। उसमें शारीरिक परिवर्तन आने के साथ-साथ बच्चे की ज़िम्मेदारियां, फर्ज़ तथा दूसरों से रिश्तों में भी परिवर्तन आता है।
इसके दो भाग होते हैं-प्राथमिक तथा बाद की किशोरावस्था।

शारीरिक विकास-इस आयु में शारीरिक परिवर्तनों की गति कम हो जाती है तथा प्रजनन अंगों का विकास होता है। इस पड़ाव पर लड़कियां अपना कद पूरा कर लेती हैं तथा शरीर के विभिन्न अंगों पर चर्बी जमा होनी आरम्भ हो जाती है। बाह्य परिवर्तनों के साथ-साथ शरीर में कुछ आन्तरिक परिवर्तन भी होते हैं जैसे पाचन प्रणाली में पेट का आकार लम्बा हो जाता है तथा आंतों की लम्बाई तथा चौड़ाई भी बढ़ती है। पेट तथा आंतों की मांसपेशियां मज़बूत हो जाती हैं। जिगर का भार भी बढ़ जाता है। इसके अतिरिक्त किशोरावस्था में दिल की वृद्धि भी तेजी से होती है। 17,18 वर्ष की आयु तक इसका भार जन्म के भार से 12 गुणा बढ़ जाता है। श्वास प्रणाली में 17 वर्ष की आयु में लड़कियों के फेफड़ों की वृद्धि पूर्ण हो जाती है। इस आयु में प्रजनन अंगों तथा उनसे सम्बन्धित गलैंड्स का भी तेजी से विकास होता है तथा अपना कार्य करना आरम्भ कर देता हैं।

भावनात्मक तथा मानसिक विकास-कई मनोवैज्ञानिक किशोरावस्था को तूफानी तथा दबाव (Storm and Stress) वाली अवस्था मानते हैं। इसमें भावनाएं बड़ी तीव्र तथा बेकाबू हो जाती हैं परन्तु जैसे-जैसे आयु बढ़ती है भावनात्मक व्यवहार में परिवर्तन आता है। इस आयु में बच्चे को बच्चे की तरह समझने से भी वह गुस्सा मनाते हैं। वह अपना गुस्सा चुप रह कर अथवा ऊँची आवाज़ में नाराज़ करने वाली की आलोचना करते हैं। इसके अतिरिक्त जो बच्चे उससे पढ़ाई में अथवा व्यवहार के तौर पर बढ़िया हों उनके प्रति ईर्ष्यालु हो जाते हैं। परन्तु धीरे-धीरे इन सभी भावनाओं पर बच्चा काबू पाना सीखता है। वह सभी के सामने अपना क्रोध ज़ाहिर नहीं कर सकता। पूरे भावनात्मक विकास वाला बच्चा अपने व्यवहार को स्थिर रखता है। इस अवस्था के दौरान बच्चे की सामाजिक दिलचस्पी तथा व्यवहार पर हम उमर मित्रों का अधिक प्रभाव पड़ता है। इस अवस्था में बच्चे की मनोरंजक, शैक्षणिक, धार्मिक तथा फैशन प्रति नई रुचियां विकसित होती हैं । किशोरावस्था में बच्चे में विपरीत लिंग प्रति आकर्षण भी पैदा हो जाता है तथा वह इस कम्पनी में आनन्द महसूस करता है। इस अवस्था का एक अन्य महत्त्वपूर्ण पहलू यह है कि बच्चों का व पारिवारिक रिश्तों प्रति लगाव कम होना आरम्भ हो जाता है। बच्चा अपने व्यक्तित्व तथा अस्तित्व प्रति अधिक चेतन हो जाता है। सामाजिक वातावरण के अनुसार बच्चा अपने व्यक्तित्व के विकास तथा अस्तित्व जताने की कोशिश करता है परन्तु कई बार घर के हालात तथा आर्थिक कारण उसके उद्देश्यों की पूर्ति में रुकावट बन जाते हैं। इन परिस्थितियों में कई बार बच्चा हार जाने तथा घटियापन के अहसास का शिकार हो जाता है तथा बच्चे का व्यवहार साधारण नहीं रहता तथा व्यक्तित्व के विकास प्रक्रिया में बिगाड़ पैदा हो जाता है।

प्रश्न 6.
बुढ़ापे की क्या खास विशेषताएं हैं?
उत्तर-
बुढ़ापे की कुछ विशेषताएं हैं जो इसे मानवीय ज़िन्दगी की एक विलक्षण अवस्था बनाती हैं। इस आयु में शारीरिक तथा मानसिक कमज़ोरी आने लगती है इस आयु में बुजुर्गों की पाचन शक्ति, चलना-फिरना, बीमारियां सहने की शक्ति, सुनने तथा देखने की शक्ति घट जाती है। इसके साथ बालों का सफ़ेद होना, चमड़ी पर झुर्रियां पड़ जाती हैं। बुर्जुगों की शारीरिक तथा मानसिक परिवर्तन उनके सामाजिक तथा पारिवारिक जीवन (Adjustment) को प्रभावित करती हैं। इन परिवर्तनों का बुजुर्गों की बाह्य दिखावट, कपड़े पहनने, मनोरंजन, सामाजिक, आर्थिक तथा धार्मिक गतिविधियों पर प्रभाव पड़ता है।
इस आयु में मनुष्य सामाजिक ज़िम्मेदारी से धीरे-धीरे पीछे हटता जाता है तथा उसकी धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि होती है। इस आयु में व्यक्ति को बहुत सारी बीमारियां भी आ घेरती हैं जिनसे छुटकारा पाने के लिए उसकी निर्भरता परिवार पर बढ़ जाती है । इस अवस्था में परिवार के सदस्यों का बुजुर्गों प्रति व्यवहार बुजुर्गों के लिए खुशी अथवा उदासी का कारण बनता है। बुजुर्गों में एकांकीपन, परिवार पर बोझ, सामाजिक सम्मान घटने का अहसास मानसिक परेशानी का कारण बन जाता है।
जीवन के अन्तिम पड़ाव पर पहुंचते हुए बुजुर्ग सभी प्राथमिक ज़रूरतों की पूर्ति के लिए एक छोटे बच्चे की तरह पूर्णतः परिवार पर निर्भर हो जाता है। इस अवस्था दौरान कई बार बुजुर्गों में बच्चों वाली आदतें उत्पन्न हो जाती हैं।

प्रश्न 7.
जन्म से दो वर्ष तक होने वाले शारीरिक विकास के पड़ावों का वर्णन करो।
उत्तर-
जन्म से दो वर्ष के दौरान होने वाले शारीरिक विकास निम्नलिखित अनुसार हैं

  1. 6 हफ्ते की आयु तक बच्चा मुस्कुराता है तथा किसी रंगीन वस्तु की ओर टिकटिकी लगाकर देखता है।
  2. 3 महीने की आयु तक बच्चा चलती-फिरती वस्तु से अपनी आँखों को घुमाने लगता है।
  3. 6 महीने का बच्चा सहारे से तथा 8 महीने का बच्चा बिना सहारे के बैठ सकता है। (4) 9 महीने का बच्चा सहारे के बिना खड़ा हो सकता है।
  4. 10 महीने का बच्चा स्वयं खड़ा हो सकता है तथा सरल, सीधे शब्द जैसे-काका, पापा, मामा, टाटा आदि बोल सकता है।
  5. 1 वर्ष का बच्चा स्वयं उठकर खड़ा हो सकता है तथा उंगली पकड़कर अथवा स्वयं चलने लगता है।
  6. 11 वर्ष का बच्चा बिना किसी सहारे के चल सकता है तथा 2 वर्ष में बच्चा सीढ़ियों पर चढ़ सकता है।

प्रश्न 8.
बच्चों को टीकों की बूस्टर दवा कब दिलाई जाती है?
उत्तर-
छ: वर्ष का होने पर बच्चे को कई टीकों के बूस्टर डोज़ दिए जाते हैं ताकि उन्हें कई जानलेवा बीमारियों से बचाया जा सके।

मनुष्य के विकास के पड़ाव PSEB 9th Class Home Science Notes

  • मानवीय जीवन का आरम्भ बच्चे के मां के गर्भ में आने से होता है।
  • मानवीय विकास के विभिन्न पड़ाव होते हैं जैसे ; बचपन, किशोरावस्था, प्रौढ़ावस्था तथा वृद्धावस्था।
  • बच्चा जन्म से लेकर दो वर्ष तक बेचारा-सा तथा दूसरों पर निर्भर होता है।
  • 12 वर्ष का बच्चा स्वयं चल सकता है तथा 2 वर्ष में बच्चा सीढ़ियां चढ़-उतर सकता है।
  • दो वर्ष के बच्चों को कई प्रकार की बीमारियों से बचाने के लिए टीके लगाए जाते हैं।
  • दो से तीन वर्ष का बच्चा नई चीजें सीखने की कोशिश करता है।
  • छ: वर्ष तक बच्चे की,खाने, पीने, सोने, टट्टी-पेशाब तथा शारीरिक सफ़ाई की आदतें पक्की हो जाती हैं।
  • स्कूल में बच्चे का मानसिक तथा सामाजिक विकास होता है।
  • जब लड़कों की मस फूटती है तथा लड़कियों को माहवारी आने लग जाती है तो इस आयु को किशोसवस्था कहते हैं।
  • किशोरों के माता-पिता का यह कर्त्तव्य है कि वह अपने बच्चों को लिंग शिक्षा सही ढंग से दें।
  • इस आयु में बच्चे स्वयं को बालिग समझने लगते हैं।
  • पहले बच्चे कानूनी तौर पर 21 वर्ष की आयु पर बालिग हो जाते थे तथा अब 18 वर्ष की आयु के बच्चे को कानूनी तौर पर बालिग करार दे दिया जाता है।
  • प्रौढ़ावस्था के दो पड़ाव हैं। 40 वर्ष तक पहली तथा 40 से 60 वर्ष की पिछली प्रौढ़ावस्था।
  • 45 से 50 वर्ष की आयु में औरतों को माहवारी बन्द हो जाती है।
  • वृद्धावस्था के प्रत्येक व्यक्ति पर अलग-अलग प्रभाव होता है।
  • वृद्धावस्था में नींद कम आती है तथा दाँत खराब होने के कारण भोजन ठीक तरह नहीं खाया जा सकता।

PSEB 9th Class Home Science Solutions Chapter 11 वस्त्र धोने के लिए सामान

Punjab State Board PSEB 9th Class Home Science Book Solutions Chapter 11 वस्त्र धोने के लिए सामान Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 9 Home Science Chapter 11 वस्त्र धोने के लिए सामान

PSEB 9th Class Home Science Guide वस्त्र धोने के लिए सामान Textbook Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
वस्त्र धोने में प्रयोग होने वाले सामान को कितने भागों में बांटा जा सकता है?
उत्तर-

  1. स्टोर करने के लिए सामान
  2. वस्त्र धोने के लिए सामान
  3. वस्त्र सुखाने के लिए सामान
  4. वस्त्र इस्तरी करने के लिए सामान।

प्रश्न 2.
वस्त्र संग्रह करने के लिए हमें क्या-क्या सामान चाहिए?
उत्तर-
इसके लिए हमें अलमारी, लांडरी बैग अथवा गंदे वस्त्र रखने के लिए टोकरी की ज़रूरत होती है। मर्तबान तथा प्लास्टिक के डिब्बे भी आवश्यक होते हैं।

PSEB 9th Class Home Science Solutions Chapter 11 वस्त्र धोने के लिए सामान

प्रश्न 3.
वस्त्र धोने के लिए हम पानी कहां से प्राप्त करते हैं?
उत्तर-
वस्त्र धोने के लिए वर्षा का पानी, दरिया का पानी, चश्मे का पानी तथा कुएं आदि स्रोतों से पानी प्राप्त किया जा सकता है।

प्रश्न 4.
हल्के और भारी पानी में क्या अन्तर है?
उत्तर

भारी पानी हल्का पानी
(1) इसमें अशुद्धियां होती हैं। (1) इसमें अशुद्धियां नहीं होती।
(2) इसमें साबुन की झाग नहीं बनती। (2) इसमें आसानी से साबुन की झाग बन जाती है।

प्रश्न 5.
भारी पानी को हल्का कैसे बनाया जा सकता है?
उत्तर-
भारी पानी को उबाल कर तथा चूने के पानी से मिलाकर हल्का बनाया जा सकता है अथवा फिर कास्टिक सोडा अथवा सोडियम बाइकार्बोनेट से प्रक्रिया करके इसको हल्का बनाया जाता है।

प्रश्न 6.
स्थाई और अस्थाई भारी पानी में क्या अन्तर हैं ?
उत्तर-

अस्थाई भारी पानी स्थाई भारी पानी
(1) इसमें कैल्शियम तथा मैग्नीशियम क्लोराइड तथा सल्फेट घुले होते हैं। (1) इसमें कैल्शियम तथा मैग्नीशियम के लवण होते हैं।
(2) इसको उबालकर तथा चूने के पानी से मिलाकर हल्का बनाया जाता है। (2) कास्टिक सोडा अथवा सोडियम बाइ-कार्बोनेट से प्रक्रिया करके छानकर इसको हल्का बनाया जाता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 7.
वस्त्रों की धुलाई में पानी का क्या महत्त्व है?
उत्तर-

  1. पानी को विश्वव्यापी घोलक कहा जाता है। इसलिए वस्त्रों पर लगे दाग तथा मिट्टी आदि पानी में घुल जाते हैं तथा वस्त्र साफ़ हो जाते हैं।
  2. पानी वस्त्र को गीला करके अन्दर तक चला जाता है तथा उसको साफ़ कर देता है।

प्रश्न 8.
पानी के स्त्रोत के आधार पर पानी का वर्गीकरण कैसे करोगे?
उत्तर-
पानी के स्रोत के आधार पर पानी का वर्गीकरण निम्नलिखित ढंग से किया जा सकता है

  1. वर्षा का पानी-यह पानी का सबसे शुद्ध रूप होता है। यह हल्का पानी होता है, परन्तु हवा की अशुद्धियां इसमें घुली होती हैं। इसको वस्त्र धोने के लिये प्रयोग किया जा सकता है।
  2. दरिया का पानी-पहाड़ों की बर्फ पिघल कर दरिया बनते हैं। जैसे-जैसे यह पानी मैदानी इलाकों में आता रहता है इसमें अशुद्धियों की मात्रा बढ़ती रहती है तथा पानी गंदा सा हो जाता है। यह पानी पीने के लिए ठीक नहीं होता, परन्तु इससे वस्त्र धोए जा सकते हैं।
  3. चश्मे का पानी-धरती के नीचे इकट्ठा हुआ पानी किसी कमज़ोर स्थान से बाहर निकल आता है, इसको चश्मा कहते हैं। इस पानी में कई खनिज लवण घुले होते हैं इसको कई बार दवाई के लिए भी प्रयोग किया जा सकता है। वस्त्र धोने के लिए यह पानी ठीक है।
  4. कुएँ का पानी-धरती को खोदकर जो पानी बाहर निकलता है वह पानी पीने के लिए ठीक होता है। इसको कुएँ का पानी कहते हैं। इससे वस्त्र धोए जा सकते हैं।
  5. समुद्र का पानी-इस पानी में काफ़ी अधिक अशुद्धियां होती हैं। यह पीने के लिए तथा वस्त्र धोने के लिए भी ठीक नहीं होता।

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प्रश्न 9.
वस्त्र धोने के लिए पानी के अतिरिक्त अन्य कौन-कौन सा सामान चाहिए?
उत्तर-
वस्त्र धोने के लिए पानी के अतिरिक्त साबुन, टब, बाल्टियां, चिल्मचियां, मग, रगड़ने वाला ब्रुश तथा फट्टा, पानी गर्म करने वाली देग, वस्त्र धोने वाली मशीन, सक्शन वाशर आदि सामान ज़रूरत होती है।

प्रश्न 10.
वस्त्र सुखाने के लिए क्या-क्या सामान चाहिए? महानगरों और फ्लैटों में रहने वाले लोग वस्त्र कैसे सखाते हैं?
उत्तर-
वस्त्रों को सुखाने के लिए प्राकृतिक धूप तथा हवा की ज़रूरत होती है। परन्तु अन्य सामान जिसकी ज़रूरत होती है, वह है

  1. रस्सी अथवा तार,
  2. क्लिप तथा हैंगर
  3. वस्त्र सुखाने वाला रैक,
  4. वस्त्र सुखाने के लिए बिजली की कैबिनेट।

बड़े शहरों में फ्लैटों में रहने वाले लोग कपड़ों को सुखाने के लिए रैकों का प्रयोग करते हैं। ऑटोमैटिक वाशिंग मशीन की सहायता भी ली जा सकती है।

प्रश्न 11.
वस्त्र सुखाने के लिए क्या-क्या सामान चाहिए? हमारे देश में वस्त्र सुखाने के लिए कौन-सा ढंग अपनाया जाता है?
उत्तर-
वस्त्र धोने के लिए सामान-देखें प्रश्न 10 का उत्तर।
हमारे देश में साधारणतः घर खुले से होते हैं। छतों अथवा चौबारों पर जहां धूप आती हो रस्सियां अथवा तारों को ठीक ऊंचाई पर बांधकर इन पर वस्त्र सुखाने के लिए लटकाये जाते हैं।
बड़े शहरों में जहां घर खुले नहीं होते तथा लोग फ्लैटों में रहते हैं, वस्त्रों को रैकों पर सुखाया जाता है।
आजकल वाशिंग मशीनों का प्रयोग तो हर कहीं होने लगा है। इनके साथ भी वस्त्र सुखाये जा सकते हैं।

प्रश्न 12.
वस्त्रों को इस्तरी करना क्यों ज़रूरी है और कौन-कौन से सामान की आवश्यकता पड़ती है?
उत्तर-
वस्त्र धोकर जब सुखाये जाते हैं, इनमें कई सिलवटें पड़ जाती हैं तथा वस्त्र की दिखावट बुरी-सी हो जाती है। कपड़ों को प्रैस करके इनकी सिलवटें आदि तो निकल ही जाती हैं साथ ही वस्त्र में चमक भी आ जाती है तथा वस्त्र साफ़-सुथरा लगता है।
वस्त्र प्रैस करने के लिए निम्नलिखित सामान की ज़रूरत पड़ती है
बिजली अथवा कोयले से चलने वाली प्रैस, प्रेस करने के लिए फट्टा आदि।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 13.
धुलाई के लिए प्रयोग होने वाले सही सामान के चयन से समय और श्रम की बचत कैसे होती है?
उत्तर-
धुलाई के लिए प्रयोग होने वाला सामान इस तरह है

  1. स्टोर करने के लिए सामान
  2. वस्त्र धोने के लिए सामान
  3. वस्त्र सुखाने के लिए सामान
  4. वस्त्र प्रैस करने के लिए सामान।

जब धोने वाले वस्त्र पहले ही इकट्ठे करके एक अल्मारी अथवा टोकरी आदि में रखे जाएं जो कि धोने वाले स्थान के नज़दीक रखी हो तो वस्त्र धोते समय सारे घर से विभिन्न कमरों से पहले वस्त्र इकट्ठे करने का समय बच जाता है। यह आदत गृहिणी को सारे घर के सदस्यों को डालनी चाहिए कि जो भी धोने वाला कपड़ा हो उसे इस काम के लिए बनाई अलमारी अथवा टोकरी में रखें।

घर में साबुन, डिटर्जेंट, नील, ब्रुश आदि आवश्यक सामान पहले ही मौजूद होना चाहिए। इस तरह नहीं होना चाहिए कि उधर से वस्त्र धोने आरम्भ कर लिये जाएं तथा बाद में पता चले घर में तो साबुन अथवा कोई अन्य आवश्यक सामान नहीं है। इस तरह समय तथा मेहनत दोनों नष्ट होते हैं।

धोने के लिए पानी भी हल्का ही प्रयोग करना चाहिए क्योंकि भारी पानी में साबुन की झाग नहीं बनती तथा वस्त्र अच्छी तरह नहीं निखरते। इसलिए पानी को गर्म करके अथवा अन्य तरीके से पानी को हल्का बना लेना चाहिए। वस्त्र सुखाने का भी ठीक प्रबन्ध होना चाहिए। रस्सियों आदि को अच्छी तरह बांधना चाहिए तथा कपड़ों पर क्लिप आदि लगा लेने चाहिए ताकि हवा चले तो वस्त्र उड़ न जाएं। यदि रैक हैं तो इन्हें पहले ही खोल लेना चाहिए। इस तरह विभिन्न आवश्यक सामान पहले ही इकट्ठा किया हो तो समय तथा मेहनत की त्चत हो जाती है।

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प्रश्न 14.
वस्त्र धुलाई के समान को किन-किन भागों में बांटा जा सकता है?
उत्तर-
स्टोर करने के लिए सामान-

  1. अलमारी-धोने वाले कमरे के नज़दीक अलमारी होनी चाहिए जिसमें साबुन, नील, मावा, रीठे, दाग उतारने वाला सामान आदि होना चाहिए।
  2. लाऊण्डरी बैग अथवा वस्त्र रखने के लिए टोकरी-इसमें घर के गंदे वस्त्र रखे जाते हैं।
  3. मर्तबान तथा प्लास्टिक के डिब्बे-रीठे, दाग उतारने का सामान, नील, डिटर्जेंट आदि इनमें रखा जाता है।

वस्त्र धोने के लिए सामान-

  1. पानी-पानी एक विश्वव्यापी घोलक है। इसमें सभी तरह की मैल घुल जाती है तथा इस तरह इसका कपड़ों की धुलाई में महत्त्वपूर्ण स्थान है। पानी को विभिन्न स्रोतों से प्राप्त किया जा सकता है। वर्षा का पानी, दरिया का पानी, चश्मे का पानी, कुएँ के पानी का प्रयोग वस्त्र धोने के लिए किया जा सकता है।
  2. साबुन-वस्त्र धोने के लिए कई सफ़ाईकारी पदार्थ, साबुन तथा डिटर्जेंट मिलते हैं। वस्त्र साफ़ करने में इनका बड़ा महत्त्वपूर्ण स्थान है।
  3. टब तथा बाल्टियां- इनमें वस्त्र भिगोकर रखे, धोये तथा खंगाले जाते हैं। यह लोहे, प्लास्टिक अथवा पीतल के होते हैं। इनमें नील देने, रंग देने तथा मावा देने का भी कार्य किया जाता है।
    PSEB 9th Class Home Science Solutions Chapter 11 वस्त्र धोने के लिए सामान (1)
  4. चिल्मचियां तथा मग-इनमें नील, मावा आदि देने का कार्य किया जाता है। यह प्लास्टिक, तामचीनी तथा पीतल आदि के होते हैं।
  5. लकड़ी का चम्मच तथा डण्डा-इससे नील अथवा मावा घोलने का कार्य किया जाता है। चद्दरें, खेस आदि को डण्डे अथवा थापी से पीट कर साफ़ किया जाता है।
  6. हौदी-धुलाई वाले कमरे में पानी की टूटी के नीचे सीमेंट की हौदी बनी हई होनी चाहिए। इससे काम आसान हो जाता है। हौदी के दोनों ओर सीमेंट अथवा लकड़ी के फट्टे लगे होने चाहिएं ताकि धोकर वस्त्र इन पर रखे जा सकें। इनकी ढलान हौदी की ओर होनी चाहिए।
  7. रगड़ने वाला ब्रुश तथा फट्टा-प्लास्टिक के ब्रुशों का प्रयोग वस्त्र के अधिक मैले हिस्से को रगड़कर मैल उतारने के लिए किया जाता है। फट्टा लकड़ी, स्टील अथवा जस्त का बना होता है। इस पर रखकर वस्त्र को रगड़कर मैल निकाली जाती है।
    PSEB 9th Class Home Science Solutions Chapter 11 वस्त्र धोने के लिए सामान (2)
  8. गर्म पानी-वस्त्र धोने के लिए या तो बिजली के बायलर में पानी गर्म किया जाता है या फिर आग के सेक से बर्तन में डालकर पानी गर्म किया जाता है।
  9. वस्त्र धोने वाली मशीन-इससे समय तथा. शक्ति दोनों की बचत होती, अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार इसको खरीदा जा सकता है।
  10. सक्शन वाशर-भारी, ऊनी, कम्बल, साड़ियां तथा अन्य वस्त्र इसके प्रयोग से आसानी से धोए जा सकते हैं।
    PSEB 9th Class Home Science Solutions Chapter 11 वस्त्र धोने के लिए सामान (3)

वस्त्र सुखाने के लिए सामान — वस्त्रों को धोने के पश्चात् साधारणतः प्राकृतिक धूप तथा हवा में सुखाया जाता है। अन्य आवश्यक सामान इस तरह हैं —

  1. रस्सी अथवा तार-रस्सी को अथवा तार को खींचकर खूटियों तथा खम्बों में बांधा जाता है। रस्सी नायलॉन, सन अथवा सूत की हो सकती है। जंग रहित लोहे की तार भी हो सकती है।
  2. क्लिप तथा हैंगर-वस्त्र तार पर लटका कर क्लिप लगा दी जाती है ताकि हवा चलने पर वस्त्र नीचे गिरकर खराब न हो जाएं। बढ़िया किस्म के वस्त्र हैंगर में डालकर सुखाए जा सकते हैं।
  3. वस्त्र सुखाने वाले रैक-बरसातों में अथवा बड़े शहरों में जहां लोग फ्लैटों में रहते हैं वहां रैकों पर वस्त्र सुखाये जाते हैं । यह एल्यूमीनियम अथवा लकड़ी के हो सकते हैं। इन्हें फोल्ड करके सम्भाला भी जा सकता है।
    PSEB 9th Class Home Science Solutions Chapter 11 वस्त्र धोने के लिए सामान (4)
  4. वस्त्र सुखाने के लिए बिजली की कैबिनेट-विकसित देशों में प्रायः इसका प्रयोग होता है। खासकर जहां अधिक ठण्ड अथवा वर्षा होती है उन देशों में इनका प्रयोग साधारण है।
    इनके अतिरिक्त ऑटोमैटिक वाशिंग मशीनों से भी वस्त्र सुखाये जा सकते हैं।
    PSEB 9th Class Home Science Solutions Chapter 11 वस्त्र धोने के लिए सामान (5)

वस्त्र प्रैस करने वाला सामान —

  1. प्रेस-वस्त्र प्रैस करने के लिए बिजली अथवा कोयले वाली प्रेस का प्रयोग किया जाता है। प्रैस लोहे, पीतल तथा स्टील की मिलती है।
  2. प्रैस करने वाला फट्टा — यह लकड़ी का होता है, फट्टे के स्थान पर बैंच अथवा मेज आदि का भी प्रयोग किया जा सकता है । इस पर एक कम्बल बिछा कर ऊपर पुरानी चादर बिछा लेनी चाहिए।
    PSEB 9th Class Home Science Solutions Chapter 11 वस्त्र धोने के लिए सामान (6)

प्रश्न 15.
वस्त्र धोने के लिए पानी कहां से प्राप्त किया जा सकता है और क्यों? कैसा पानी वस्त्र धोने के लिए उपयुक्त नहीं और क्यों?
उत्तर-
देखो प्रश्न 8 का उत्तर।
समुद्र के पानी का प्रयोग वस्त्र धोने के लिए नहीं किया जा सकता क्योंकि इसमें बहुत सारी अशुद्धियां मिली होती हैं।

Home Science Guide for Class 9 PSEB वस्त्र धोने के लिए सामान Important Questions and Answers

वस्तुनिक प्रश्न

रिक्त स्थान भरें-

  1. पानी घोलक है।
  2. हल्के पानी में …………….. की झाग शीघ्र बनती है।
  3. …………….. पानी में बहुत-सी अशुद्धियां होती हैं।
  4. स्रोत के आधार पर पानी को …………………. किस्मों में बांटा गया है।
  5. ……………… भारी पानी में कैल्शियम क्लोराइड होता है।

उत्तर-

  1. यूनिवर्सल,
  2. साबुन,
  3. समुद्र के,
  4. पांच,
  5. स्थायी।

एक शब्द में उत्तर दें

प्रश्न 1.
भारे पानी में कौन-से लवण होते हैं?
उत्तर-
कैल्शियम तथा मैग्नीशियम के लत्रण।

प्रश्न 2.
स्वाद के अनुसार पानी कितने प्रकार का है?
उत्तर-
दो प्रकार का।

प्रश्न 3.
फ्लैटों में रहने वाले लोग कपड़े कहां सुखाते हैं?
उत्तर-
रैकों में।

प्रश्न 4.
साबुन को क्या कहा जाता है?
उत्तर-
सफाईकारी।

प्रश्न 5.
बिजली की कैबिनेट का प्रयोग कपड़े सुखाने के लिए किन देशों में हो रहा
उत्तर-
विकसित देशों में।

ठीक ग़लत बताएं

  1. लांडरी बैग में धोने वाले कपड़े एकत्र किए जाते हैं।
  2. पानी एक विश्वव्यापी घोलक है।
  3. पानी दो प्रकार का होता है हल्का तथा भारी।
  4. हल्के पानी में साबुन की झाग नहीं बनती।
  5. समुद्र का पानी पीने के लिए तथा कपड़े धोने के लिए ठीक नहीं होता।
  6. कपड़ों को धूप में सुखाना ठीक है।

उत्तर-

  1. ठोक,
  2. ठीक,
  3. ठीक,
  4. ग़लत,
  5. ठीक,
  6. ठीक।

बहविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
धुलाई के लिए प्रयोग होने वाला सामान है
(A) स्टोर करने वाला
(B) कपड़े धोने वाला
(C) कपड़े सुखाने वाला
(D) सभी ठीक।
उत्तर-
(D) सभी ठीक।

प्रश्न 2.
कपड़े धोने के लिए सामान है
(A) पानी
(B) साबुन
(C) टब, बाल्टियां
(D) सभी ठीक।
उत्तर-
(D) सभी ठीक।

प्रश्न 3.
ठीक तथ्य हैं
(A) फ्लैटों में रहने वाले रैकों पर कपड़े सुखाते हैं
(B) धूप में कपड़े सुखाना अच्छा है
(C) समुद्र के पानी से कपड़े नहीं धो सकते
(D) सभी ठीक।
उत्तर-
(D) सभी ठीक।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
धोबी को वस्त्र देने के क्या नुकसान हैं?
उत्तर-

  1. धोबी कई बार वस्त्र साफ़ करने के लिए ऐसी विधियों का प्रयोग करता है जिससे वस्त्र जल्दी फट जाते हैं अथवा फिर कमजोर हो जाते हैं।
  2. कई बार वस्त्रों के रंग खराब हो जाते हैं।
  3. छूत की बीमारियां होने का भी डर रहता है।
  4. धोबी से वस्त्र धुलाना महंगा पड़ता है।

प्रश्न 2.
जल चक्र क्या है?
उत्तर-
प्राकृतिक रूप में पानी कुओं, चश्मों, दरियाओं तथा समुद्रों में से मिलता है। धरती पर सूर्य की धूप से यह पानी भाप बनकर उड़ जाता है तथा वायुमण्डल में जलवाष्प के रूप में इकट्ठा होता रहता है तथा बादलों का रूप धारण कर लेता है। जब यह भारी हो जाते हैं तो वर्षा, ओलों तथा बर्फ के रूप में पानी दुबारा धरती पर आ जाता है। यह पानी शुरू से दरियाओं द्वारा होता हुआ समुद्र में मिल जाता है। तथा यह चक्र इसी तरह चलता रहता है।

प्रश्न 3.
स्वादानुसार पानी का वर्गीकरण कैसे किया गया है?
उत्तर-
स्वादानुसार पानी दो तरह का होता है-

  1. मीठा अथवा हल्का पानी-इस पानी का स्वाद मीठा होता है।
  2. खारा पानी-यह पानी स्वाद में नमकीन-सा होता है।

प्रश्न 4.
पानी का वर्गीकरण अशुद्धियों के अनुसार किस प्रकार किया गया है?
उत्तर-
अशुद्धियों के अनुसार पानी दो प्रकार का है

  1. हल्का पानी-इसमें अशुद्धियां नहीं होतीं तथा यह पीने में स्वादिष्ट होता है। इसमें साबुन की झाग भी शीघ्र बनती है।
  2. भारी पानी-इसमें कैल्शियम तथा मैग्नीशियम के लवण घुले होते हैं। यह साबुन से मिलकर झाग नहीं बनाता। यह भी दो तरह का होता है अस्थाई भारी पानी तथा स्थाई भारी पानी।

प्रश्न 5.
वस्त्र धोने के लिए थापी अथवा डण्डे का प्रयोग क्यों नहीं करना चाहिए? वस्त्र धोने वाला फट्टा क्या होता है?
उत्तर-
थापी का अधिक प्रयोग किया जाये तो कई बार वस्त्र फट जाते हैं, वस्त्र धोने वाला फट्टा स्टील अथवा लकड़ी का बना होता है। इस पर रखकर वस्त्रों को साबुन लगाकर रगड़ा जाता है। इस तरह वस्त्र से मैल उतर जाती है।

प्रश्न 6.
आप वस्त्र सुखाने के लिए लोहे के तार का प्रयोग करोगे अथवा नाइलॉन की रस्सी का?
उत्तर-
वैसे तो दोनों का प्रयोग किया जा सकता है परन्तु लोहे की तार को जंग लग जाता है जिससे वस्त्र पर दाग पड़ जाते हैं। इसलिए नाइलॉन की रस्सी अधिक उपयुक्त रहेगी।

वस्त्र धोने के लिए सामान PSEB 9th Class Home Science Notes

  • घर में वस्त्र कपड़े धोने के लिए कई तरह का सामान चाहिए।
  • वस्त्र धोने का सामान अपनी आर्थिक हालत अनुसार तथा आवश्यकतानुसार ही लो।
  • लाऊण्डरी बैग में धोने वाले वस्त्र इकट्ठे किये जाते हैं।
  • पानी एक विश्वव्यापी घोलक है, इसमें साधारणतः प्रत्येक प्रकार की मैल घुल जाती है।
  • पानी प्राप्त करने के लिए विभिन्न स्रोत हैं। वर्षा, दरिया, कुएं, चश्मे तथा समुद्र का पानी।
  • समुद्र का पानी वस्त्र धोने के लिए प्रयोग नहीं किया जा सकता है।
  • पानी दो तरह का होता है-हल्का तथा भारी।
  • हल्के पानी में साबुन की झाग शीघ्र बनती है।
  • भारी पानी स्थाई तथा अस्थाई दो तरह का होता है। अस्थाई भारे पानी को उबाल कर हल्का किया जा सकता है।
  • साबुनों को सफ़ाईकारी कहा जाता है। यह चर्बी तथा खारों के मिश्रण से बनता
  • टब, बाल्टियां, चिल्मचियां आदि का प्रयोग नील देने, मावा देने, वस्त्र भिगोने, खंगालने आदि के लिए किया जाता है।
  • फ्लैटों में रहने वाले लोग वस्त्र सुखाने के लिए रैकों का प्रयोग करते हैं।
  • विकसित देशों में वस्त्र सुखाने के लिए बिजली की कैबिनेट का प्रयोग किया जाता है।
  • वस्त्र को साफ़-सुथरी, चमकदार, सिलवट रहित दिखावट प्रदान करने के लिए इस्तरी किया जाता है।

PSEB 9th Class Home Science Solutions Chapter 4 घरेलू सफ़ाई

Punjab State Board PSEB 9th Class Home Science Book Solutions Chapter 4 घरेलू सफ़ाई Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 9 Home Science Chapter 4 घरेलू सफ़ाई

PSEB 9th Class Home Science Guide घरेलू सफ़ाई Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
घर की सफाई में किस प्रकार का सामान प्रयोग में आता है ?
उत्तर-
घर की सफाई के लिए पांच प्रकार के सामान का प्रयोग होता हैपोचा तथा पुराने कपड़े, झाड़ तथा ब्रुश, बर्तन, सफाई के लिए साबुन तथा अन्य प्रतिकारक, सफाई करने वाले यन्त्र।

PSEB 9th Class Home Science Solutions Chapter 4 घरेलू सफ़ाई

प्रश्न 2.
सफाई करने के कौन-कौन से ढंग हैं ?
उत्तर-
सफाई विभिन्न ढंगों से की जाती है जैसे-झाड़ तथा ब्रुश से, पानी से धोना, कपड़े से झाड़कर पोंछना, बिजली की मशीन (वैक्यूम क्लीनर) से।

प्रश्न 3.
दैनिक सफाई और मासिक सफाई में क्या अन्तर है ?
उत्तर-
दैनिक सफाई-प्रतिदिन की जाने वाली सफाई को दैनिक सफाई कहते हैं। रोजाना सफाई में प्रत्येक कमरे में झाड़-पोचा लगाया जाता है।
मासिक सफाई- यह सफाई महीने बाद तथा महीने में एक बार की जाती है। जैसेरसोई तथा अल्मारियों की सफाई आदि।

प्रश्न 4.
वैक्यूम क्लीनर कैसा उपकरण है ?
उत्तर-
यह एक बिजली से चलने वाली मशीन है। जब इसको बिजली से जोड़कर सफाई करने वाले स्थान पर चलाया जाता है तो सारी मिट्टी आदि इसके अन्दर खींची जाती है तथा एक थैली में इकट्ठी हो जाती है। यह मशीन प्रयोग करने से धूल नहीं उड़ती तथा सफाई भी अच्छी तरह से हो जाती है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 5.
घर की सफाई क्यों ज़रूरी होती है ?
उत्तर-

  1. सफाई करने से घर साफ तथा सुन्दर लगता है जो कि गृहिणी की सुघड़ता का सूचक होता है।
  2. गन्दे घर की हवा दूषित होती है जिसमें सांस लेने से स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। सफाई करने से घर की हवा भी साफ हो जाती है।
  3. अधिक समय गन्दा रखने से घर का सामान जल्दी खराब हो जाता है। गन्दी जगह पर बैठने को किसी का मन नहीं करता।
  4. गन्दे घर में कई प्रकार के कीटाणु, मक्खी, मच्छर आदि पैदा होते हैं जो कई तरह की बीमारियां फैलाते हैं।

PSEB 9th Class Home Science Solutions Chapter 4 घरेलू सफ़ाई

प्रश्न 6.
घर की सफाई करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ?
उत्तर-
घर की सफाई के समय ध्यान में रखने योग्य महत्त्वपूर्ण बातें

  1. घर के सभी सदस्यों को घर की सफाई के प्रति दिलचस्पी होनी चाहिए। क्योंकि सदस्यों को घर की सफाई के दौरान सभी सदस्यों का सहयोग अनिवार्य होता है।
  2. सफाई करने से पहले योजना बना लेनी चाहिए क्योंकि बिना योजना से की जाने वाली सफाई में अधिक समय खराब होता है।
  3. सफाई करते समय ज़रूरत का सारा सामान एक जगह पर इकट्ठा कर लेना चाहिए।
  4. सफाई के साधनों का प्रयोग करने के पश्चात् उन्हें फिर से साफ करके रख लेना चाहिए ताकि वह दोबारा प्रयोग में लाए जा सके जैसे पॉलिश करने के पश्चात् ब्रुश मिट्टी के तेल से साफ करके सम्भाल लेना चाहिए ताकि वह दोबारा प्रयोग किया जा सके।
  5. सफाई करते समय ठीक प्रकार की सामग्री का प्रयोग करना चाहिए। इससे सफाई भी ठीक ढंग से होती है तथा समय तथा शक्ति की भी बचत होती है।
  6. सफाई सही ढंग तथा ध्यान से करनी चाहिए। लापरवाही से की गई सफाई घर को साफ बनाने के स्थान पर और भी बदसूरत बना देती है।

प्रश्न 7.
घर की सफाई करने के लिए कौन-कौन सा सामान चाहिए ?
उत्तर-
घर की सफाई के लिए सामान का विवरण इस प्रकार है –

  1. पोचा तथा पुराने कपड़े-दरवाजे, खिड़कियां झाड़ने के लिए चारों तरफ से उलेडा हुआ मोटा कपड़ा चाहिए। फर्श की सफाई के लिए खद्दर, टाट, खेस के टुकड़े को पोचे के तौर पर प्रयोग किया जा सकता है। पॉलिश करने तथा चीज़ों को चमकाने के लिए फ्लालेन आदि जैसे कपड़े की ज़रूरत है। शीशे की सफाई के लिए पुराने सिल्क के कपड़े का प्रयोग किया जा सकता है।
  2. झाड़ तथा ब्रश-विभिन्न कार्यों के लिए अलग-अलग ब्रश मिल जाते हैं। कालीन तथा दरी साफ करने के लिए सख्त ब्रुश, बोतलें साफ करने के लिए लम्बा तथा नर्म ब्रुश, रसोई की हौदी साफ करने के लिए छोटा पर साफ ब्रुश, फर्श साफ करने के लिए तीलियों का ब्रुश आदि । इसी तरह सूखा कूड़ा इकट्ठा करने के लिए नर्म झाड़ तथा फर्शों की धुलाई के लिए बांसों वाला झाड़ आदि मिल जाते हैं।
  3. सफाई के लिए बर्तन-रसोई में सब्जियों आदि के छिलके डालने के लिए ढक्कन वाला डस्टबिन तथा अन्य कमरों में प्लास्टिक के डिब्बे अथवा टोकरियां रखनी चाहिएं। इन्हें रोज़ खाली करके दोबारा इनके स्थान पर रख देना चाहिए।
  4. सफाई के लिए साबुन आदि-सफाई करने के लिए साबुन, विम सोडा, नमक, सर्फ, पैराफिन आदि की ज़रूरत होती है। दाग-धब्बे दूर करने के लिए नींबू, सिरका, हाइड्रोक्लोरिक तेज़ाब आदि की ज़रूरत होती है। कीटाणु समाप्त करने के लिए फिनाइल तथा डी० डी० टी० आदि की ज़रूरत होती है।
  5. सफाई करने वाले उपकरण-वैक्यूम क्लीनर एक ऐसा उपकरण है जिससे फर्श, सोफे, गद्दियां आदि से धूल तथा मिट्टी साफ की जा सकती है। यह बिजली से चलता है।

प्रश्न 8.
सफाई करने के कौन-कौन से ढंग हैं ?
उत्तर-
सफाई विभिन्न ढंगों से की जा सकती है जैसे-झाड़ तथा ब्रुश -से, पानी से धोकर, कपड़े से झाड़ कर पोंछना, बिजली की मशीन से।
सीमेंट, चिप्स, पत्थर आदि वाले फर्श की सफाई झाड से की जाती है जबकि घास तथा कालीन के लिए तीलियों वाला झाड़ का प्रयोग किया जाता है।
बाथरूम तथा रसोई को रोज़ धोकर साफ किया जाता है।
घर के साजो-सामान पर पड़ी धूल-मिट्टी को कपड़े से झाड़-पोंछ कर साफ किया जाता
है।

प्रश्न 9.
सफाई करने के लिए क्या बिजली की कोई मशीन है ? यदि हां, तो कौन-सी और कैसे प्रयोग में लाई जाती है ?
उत्तर-
बिजली से चलने वाली सफाई मशीन वैक्यूम क्लीनर है। इससे फर्श, पर्दे, दीवारें, सोफा, दरियां, फर्नीचर, कालीन आदि साफ किये जा सकते हैं।
यह एक ऊंचे हैण्डल वाली मोटर है। इसमें एक थैली लगी होती है। जब इसको चलाया जाता है तो सारी मिट्टी इसमें चली जाती है। यह मिट्टी थैली में इकट्ठी हो जाती है। सफाई कर लेने के पश्चात् थैली को उतार कर झाड़ लिया जाता है। इस मशीन के प्रयोग से मिट्टी नहीं उड़ती तथा सफाई भी अच्छी होती है।

प्रश्न 10.
सफाई करने के लिए कौन-कौन से झाड़ और ब्रुश की ज़रूरत पड़ती
उत्तर-

1. ब्रुश-सफाई के लिए कई तरह के ब्रुशों का प्रयोग किया जाता है। ब्रुश खरीदने के लिए एक विशेष बात का ध्यान रखें कि उसे किस चीज़ की सफाई के लिए प्रयोग करना है। कालीन तथा दरी साफ करने के लिए सख्त ब्रुश, रसोई की हौदी साफ करने के लिए छोटा परन्तु सख्त ब्रुश, दीवारें साफ करने के लिए नर्म ब्रुश, फर्श को साफ करने के लिए तीलियों का ब्रुश, बोतलें साफ करने के लिए लम्बा तथा नर्म ब्रुश, छोटी वस्तुएं साफ करने के लिए दांतों वाले ब्रुश, फर्श से काई उतारने के लिए तारों वाले सख्त ब्रुश की ज़रूरत होती है। फर्नीचर की पॉलिश करने के लिए नर्म ब्रुश का प्रयोग किया जाता है। दीवारों पर सफेदी करने के लिए मूंजी की कूची तथा दरवाजे, खिड़कियां तथा अल्मारियों को पेंट अथवा पॉलिश करने के लिए 1½ इंच वाले तथा दीवारों पर पेंट अथवा डिस्टैंपर करने के लिए तीन-चार इंच वाले ब्रुशों की ज़रूरत पड़ती है। बाथरूम में फ्लशों को साफ करने के लिए विशेष प्रकार के गोल, नर्म ब्रुश प्रयोग किये जाते हैं। दीवारों से जाले उतारने के लिए भी लम्बी डण्डी वाले ब्रुश होते हैं।

2. झाड़-घर को तथा घर के और सामान को साफ करने के लिए विभिन्न प्रकार के झाड़ प्रयोग में लाये जाते हैं। सूखा कूड़ा इकट्ठा करने के लिए नर्म जैसे झाड़ तथा फर्शों की धुलाई के लिए अथवा घास पर फेरने के लिए तीलियों वाले मोटे बांस के झाड़ की ज़रूरत होती है। सफाई करने के लिए कई बार खजूर तथा नारियल के पत्तों के झाड़ भी प्रयोग किये जाते हैं। आजकल बाज़ार में लम्बे डंडे वाले झाड़ नुमा ब्रुश भी मिल जाते हैं जिनसे खड़ेखड़े फर्शों की सफाई की जाती है।

प्रश्न 11.
घर में सफाई की व्यवस्था कैसे की जा सकती है ?
उत्तर-
घर में सफाई की व्यवस्था को पांच भागों में बांटा जा सकता है :

  1. दैनिक सफाई
  2. साप्ताहिक सफाई
  3. मासिक सफाई
  4. वार्षिक सफाई
  5. विशेष अवसर पर सफाई।

PSEB 9th Class Home Science Solutions Chapter 4 घरेलू सफ़ाई

प्रश्न 12.
दैनिक सफाई से आप क्या समझते हो ? इसके क्या लाभ हैं? .
उत्तर-
दैनिक सफाई दैनिक सफाई में वे कार्य शामिल किये जाते हैं जो प्रतिदिन किये जाते हैं। इसके कई लाभ हैं। दैनिक सफाई करने से कोई भी सामान अधिक गन्दा नहीं होता। यदि बहुत गन्दे सामान को साफ करना हो तो समय, शक्ति तथा धन भी अधिक खर्च होता है। परन्तु प्रतिदिन करने से बिल्कुल अनुभव नहीं होता। दैनिक सफाई सुबह ही करनी चाहिए। क्योंकि रात को सारा गरदा, मिट्टी चीजों पर जम जाती है। इसलिए साफ करना कठिन होता है। दैनिक सफाई के लिए बहुत योजनाबन्दी की ज़रूरत नहीं पड़ती क्योंकि यह सभी कार्य करने की आदत ही बन चुकी होती है। यह सारे कार्य या तो गृहिणी स्वयं करती है अथवा फिर परिवार के सदस्यों की सहायता ली जाती है तथा कई बार नौकरों से करवाए जाते हैं।

दैनिक सफाई के लिए सबसे पहले परदे पीछे करके कांच की खिड़कियां खोल देनी चाहिएं जिससे ताजा हवा तथा रोशनी घर में आ सके। फिर कमरों की चादरें झाड कर बिछा दें। बिखरे हुए सामान को अपनी-अपनी जगह पर रखें। फिर कमरों में रखे कूडेदानों को खाली करके सभी कमरों, बरामदे तथा आंगन में झाड़ लगाओ। फिर कपड़ा लेकर मेज़, कुर्सियां, टेबल तथा अन्य कमरों में पड़े सामान की झाड़-पोंछ करनी चाहिए। झाड़-पोचा करते समय कपड़ा ज़ोर से पटक कर न मारें, इस तरह करने से धूल एक स्थान से उड़कर दूसरी जगह पड़ जाती है तथा चीजें टूटने का भी डर रहता है। इसके पश्चात् कोई मोटा कपड़ा जैसे पुराना तौलिया आदि लेकर, बाल्टी में पानी लेकर, कपड़ा गीला करके सभी कमरों में पोचा लगाना चाहिए। भिन्न-भिन्न सामान को ठीक करके टिकाने पर रखा जाता है। इस तरह पूरा घर साफ-सुथरा हो जाता है। यदि घर में कहीं कच्ची जगह है तो पहले वहां हल्का सा पानी का छिड़काव कर लेना चाहिए ताकि झाड़ लगाने पर अधिक मिट्टी न उड़े।

प्रश्न 13.
दैनिक तथा साप्ताहिक सफाई में क्या अन्तर है ?
उत्तर-
दैनिक सफाई-दैनिक सफाई में वह कार्य शामिल हैं जो रोज़ किये जाते हैं।
साप्ताहिक सफाई-यह सफाई सप्ताह के बाद तथा सप्ताह में एक बार की जाती है।
साप्ताहिक सफाई के अन्तर्गत किये जाने वाले कार्य समय सीमित होने के कारण गृहिणी के लिए यह सम्भव नहीं कि वह घर की प्रत्येक चीज़ को रोज़ साफ करे। वैसे ही कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिनकी रोज़ाना सफाई की ज़रूरत नहीं होती। इसलिए ऐसे सारे कार्य जैसे चादरों, गिलाफों अथवा सोफे के कपड़ों को रोजाना बदलने की ज़रूरत नहीं होती। इसलिए ऐसे कार्य जैसे कालीन की सफाई, गिलाफ, फ्रिज की सफाई, रसोई की शैल्फ तथा गैस स्टोव की सफाई, रसोई घर के डिब्बों की सफाई, बाथरूम की बाल्टियां, मग तथा साबुनदानी आदि की सफाई साप्ताहिक सफाई में ही आते हैं।

इसके अतिरिक्त यदि गृहिणी के पास समय हो तो कपड़ों वाली अल्मारियों को साफ किया जा सकता है जिससे ज़रूरत पड़ने पर सामान आसानी से ढूंढा जा सकता है। साप्ताहिक सफाई में घर के सभी कमरों, बरामदों आदि से जाले उतारने बहुत ज़रूरी हैं। गृहिणी को यह योजना बनाकर (जबानी अथवा लिखित) रखनी चाहिए कि इस सप्ताह के कार्य कौन-से हैं।

प्रश्न 14.
वार्षिक सफाई और विशेष अवसर पर सफाई कैसे की जाती है ?
उत्तर-

  1. वार्षिक सफाई वार्षिक सफाई, रोज़ाना, साप्ताहिक तथा मासिक सफाई से अधिक विस्तृत होती है। यह कम-से-कम छ:-सात दिन का कार्य होता है। इस कार्य में समय, शक्ति तथा धन भी अधिक खर्च होता है। इसलिए इस कार्य के लिए गृहिणी को पूरी योजनाबन्दी करनी चाहिए। परिवार के अलग-अलग नौकरों तथा सदस्यों को भी कार्य बांटे जाते हैं। घर का सारा सामान एक तरफ करके विस्तृत रूप में सफाई की जाती है ताकि घर से धूल-मिट्टी तथा कीड़े-मकौड़े समाप्त हो सकें। इस सफाई के दौरान घर के टूटे-फूटे सामान की मुरम्मत, पॉलिश तथा अनावश्यक सामान को भी निकाला जाता है। कीड़े-मकौड़े समाप्त करने के लिए घर में सफेदी भी कराई जानी चाहिए। पेटियों तथा अल्मारियों आदि के सामान को धूप लगवानी चाहिए
  2.  विशेष अवसरों तथा त्योहारों के लिए सफाई-हमारे देश में त्योहारों तथा विशेष अवसरों पर घर की सफाई की जाती है। जैसे दीवाली पर घर में सफेदी करवाई जाती है तथा साथ ही घर की सफाई भी की जाती है। यदि परिवार में किसी बच्चे का विवाह हो तो वार्षिक सफाई वाली सभी क्रियाएं की जाती हैं। पर कई अवसर ऐसे होते हैं जब घर का कुछ हिस्सा ही साफ करके सजाया जाता है। जैसे कि जन्म दिन को मनाने के समय अथवा किसी परिवार को खाने पर बुलाने के मौके पर केवल ड्राईंग रूम की ही खास सफाई की जाती है।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 15.
घर की सफाई गृहिणी की सुघड़ता का सूचक है। कैसे ?
उत्तर-
एक साफ-सुथरा तथा सजा हुआ घर गृहिणी की सूझ-बूझ तथा कुशलता का प्रत्यक्ष रूप है। इसलिए सफाई निम्नलिखित बातों के कारण भी महत्त्वपूर्ण हैं –

  1. सफाई न करने से घर की हवा दूषित हो जाती है जिसमें सांस लेने से स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
  2. गन्दे स्थान पर मक्खियां-मच्छर तथा अन्य कई रोग पैदा करने वाले कीटाणु भी अधिक बढ़ते हैं जो बीमारियों की,जड़ हैं।
  3. गन्दे घर में बैठकर काम करने को दिल नहीं करता। यहां तक कि आस-पड़ोस के लोग भी गन्दगी देखकर घर आना पसन्द नहीं करते।
  4. सफाई करने से घर सजा हुआ दिखाई देता है। यदि सफाई न की जाये तो घर की प्रत्येक वस्तु पर मिट्टी, धूल तथा कूड़ा-कर्कट इकट्ठा हो जाता है जिससे घर गन्दा होने के साथ-साथ घर का सामान भी खराब होना आरम्भ हो जाता है।
  5. साफ-सुथरे सजे हुए घर से गृहिणी की समझदारी का पता चलता है। घर के अन्य कार्यों में से घर की सफाई एक महत्त्वपूर्ण कार्य है।

प्रश्न 16.
घर की सफाई कैसे की जाती है और इसके लिए क्या सामान आवश्यक है ?
उत्तर-
सफाई विभिन्न ढंगों से की जा सकती है जैसे-झाड़ तथा ब्रुश से, पानी से धोकर, कपड़े से झाड़कर पोंछना, बिजली की मशीन से।
सीमेंट, चिप्स तथा पत्थर आदि वाली फर्श की सफाई फूल झाड़ से की जाती है जबकि घास तथा कालीन के लिए तीलियों वाला झाड़ प्रयोग किया जाता है।
गुसलखाना तथा रसोई आदि को रोज़ धोकर साफ किया जाता है। घर के साजो-सामान पर पड़ी धूल-मिट्टी को कपड़े से झाड़-पोंछ कर साफ किया जाता है।
घर की सफाई के लिए सामान का विवरण इस प्रकार है –

  1. पोचा तथा पुराने कपड़े-दरवाजे, खिड़कियां झाड़ने के लिए चारों तरफ से उलेड़ा हुआ मोटा कपड़ा चाहिए। फर्श की सफाई के लिए खद्दर, टाट, खेस के टुकड़े पोचे के तौर पर प्रयोग किए जाते हैं। पॉलिश करने तथा चीज़ों को चमकाने के लिए फलालेन आदि जैसे कपड़े की ज़रूरत है। कांच की सफाई के लिए पुराने सिल्क के कपड़े का प्रयोग किया जा सकता है।
  2. झाड़ तथा बुश-विभिन्न कार्यों के लिए अलग-अलग ब्रुश मिल जाते हैं। कालीन तथा दरी साफ करने के लिए सख्त ब्रुश, बोतलें साफ करने के लिए लम्बा तथा नर्म ब्रुश, रसोई की हौदी साफ करने के लिए छोटा पर साफ ब्रुश, फर्श साफ करने के लिए तीलियों का ब्रुश आदि। इसी तरह सूखा कूड़ा इकट्ठा करने के लिए नर्म झाड़ तथा फर्शों की धुलाई के लिए बांसों वाला झाड़ आदि मिल जाते हैं।
  3. सफाई के लिए बर्तन-रसोई में सब्जियों आदि के छिलके डालने के लिए ढक्कन वाला डस्टबिन तथा अन्य कमरों में प्लास्टिक के डिब्बे अथवा टोकरियां रखनी चाहिएं। इन्हें रोज़ खाली करके दोबारा इनके स्थान पर रख देना चाहिए।
  4. सफाई के लिए साबुन आदि-सफाई करने के लिए साबुन, विम सोडा, नमक, सर्फ, पैराफिन आदि की ज़रूरत होती है। दाग-धब्बे दूर करने के लिए नींबू, सिरका, हाइड्रोक्लोरिक तेज़ाब आदि की ज़रूरत होती है। कीटाणु समाप्त करने के लिए फिनाइल तथा डी० डी० टी० आदि की ज़रूरत होती है।
  5. सफाई करने वाले उपकरण-वैक्यूम क्लीनर एक ऐसा उपकरण है जिससे फर्श, सोफे, गद्दियां आदि से धूल तथा मिट्टी झाड़ी जा सकती है। यह बिजली से चलता है।

PSEB 9th Class Home Science Solutions Chapter 4 घरेलू सफ़ाई

प्रश्न 17.
घर की सफाई की व्यवस्था कैसे और किस आधार पर की जाती है ?
उत्तर-
गृहिणी हर रोज़ सारे घर की सफाई नहीं कर सकती क्योंकि यह थका देने वाला कार्य है। इसलिए इस कार्य को करने के लिए सूझ-बूझ से योजना बनाई जाती है। गृहिणी अपनी सुविधा के अनुसार सफाई कर सकती है। घर की सफाई की व्यवस्था को पांच भागों में बांटा जा सकता है –

  1. रोज़ाना सफाई
  2. साप्ताहिक सफाई
  3. मासिक सफाई
  4. वार्षिक सफाई
  5. विशेष अवसरों पर सफाई।

1. रोज़ाना अथवा दैनिक सफाई-रोज़ाना सफाई से हमारा अभिप्राय उस सफाई से है जो घर में रोज़ की जाती है। इसलिए गृहिणी का यह मुख्य कर्त्तव्य है कि वह घर के उठने-‘ बैठने, पढ़ने-लिखने, सोने के कमरे, रसोई घर, आंगन, बाथरूम, बरामदा तथा लैटरिन की हर रोज़ सफाई करें। रोजाना सफाई में साधारणतः इधर-उधर बिखरी चीज़ों को ठीक तरह लगाना, फर्नीचर को झाड़ना-पोंछना, फर्श पर झाड़ लगाना, गीला पोचा लगाना आदि आते हैं।

2. साप्ताहिक सफाई-एक अच्छी गृहिणी को घर के रोज़ाना जीवन में अनेक कार्य करने पड़ते हैं। इसलिए यह सम्भव नहीं कि वह एक ही दिन में घर की पूरी सफाई कर सके। समय की कमी के कारण घर में जो चीजें हर रोज़ साफ नहीं की जातीं उन्हें सप्ताह में अथवा पन्द्रह दिनों में एक बार अवश्य साफ कर लेना चाहिए। अगर ऐसा न किया गया तो दरवाजों तथा दीवारों की छतों पर जाले इकट्ठे हो जायेंगे। दरवाज़ों तथा खिड़कियों के शीशों, फर्नीचर की सफाई, बिस्तर झाड़ना तथा धूप लगवाना, अल्मारियों की सफाई तथा दरी, कालीन को झाड़ना तथा धूप लगवाना आदि कार्य सप्ताह में एक बार अवश्य किये जाने चाहिएं।

3. मासिक सफाई-जिन कमरों अथवा वस्तुओं की सफाई सप्ताह में एक बार न हो सके, उन्हें महीने में एक बार जरूर साफ करना चाहिए। साधारणत: सारे महीने की खाद्यसामग्री एक बार ही खरीदी जाती है। इसलिए भण्डार गृह में रखने से पहले भण्डार घर को अच्छी तरह झाड़-पोंछ कर ही उसमें खाद्य सामग्री रखी जानी चाहिए। मासिक सफाई के अन्तर्गत अनाज, दालों, अचार, मुरब्बे तथा मसाले आदि को धूप लगवानी चाहिए। अल्मारी के जाले, बल्बों के शेड आदि भी साफ करने चाहिएं।

4. वार्षिक सफाई-वार्षिक सफाई का अभिप्राय वर्ष में एक बार सारे घर की पूरी तरह सफाई करना है। वार्षिक सफाई के अन्तर्गत घर में सफेदी करना, टूटे स्थानों की मरम्मत, दरवाजों, खिड़कियों तथा दहलीज़ों की मरम्मत तथा सफाई तथा रंग-रोगन करवाना, फर्नीचर तथा अन्य सामान की मरम्मत, वार्निश, पॉलिश आदि आती है। कमरों में से सारे सामान को हटाकर चूना, पेंट अथवा डिस्टैंपर करवाना सफाई के पश्चात् फर्श को रगड़ कर धोना तथा दागधब्बे हटाना, सफाई के पश्चात् सारे सामान को दोबारा व्यवस्थित करना वार्षिक कार्य है। इस प्रकार की सफाई से कमरों को नवीन रूप प्रदान होता है। रज़ाई, गद्दों को खोलकर रुई साफ करवाना, धुनाई आदि भी वर्ष में एक बार किया जाता है।

हमारे देश में जब वर्षा ऋतु समाप्त हो जाती है, दशहरे अथवा दीवाली के समय वार्षिक सफाई की जाती है, लीपने-पोचने तथा पॉलिश करवाने से सुन्दरता तो बढ़ती ही है, रोग फैलाने वाले कीटाणु भी नष्ट हो जाते हैं । इसलिए स्वास्थ्य के पक्ष में भी एक बार घर की पूरी सफाई आवश्यक है।

5. विशेष अवसरों तथा त्योहारों के लिए सफाई -हमारे देश में त्योहारों तथा विशेष अवसरों पर घर की सफाई की जाती है। जैसे दीवाली पर घर में सफेदी करवाई जाती है तथा साथ ही घर की सफाई भी की जाती है। यदि परिवार में किसी बच्चे को विवाह हो तो भी वार्षिक सफाई वाली सभी क्रियाएं की जाती हैं। पर कई अवसर ऐसे होते हैं जब घर का कुछ भाग ही साफ करके सजाया जाता है जैसे कि जन्म दिन को मनाने के समय अथवा किसी परिवार को खाने पर बुलाने के अवसर पर केवल ड्राईंग-रूम की ही खास सफाई की जाती है।

Home Science Guide for Class 9 PSEB घरेलू सफ़ाई Important Questions and Answers

रिक्त स्थान भरें

  1. रसोई तथा अल्मारियों की सफ़ाई ………… ….. सफ़ाई है।
  2. घर के सभी सदस्यों की …………………. के प्रति रुचि होनी चाहिए।
  3. सूखा कूड़ा एकत्र करने के लिए …………………. झाड़ का प्रयोग करें।
  4. पॉलिश करने के लिए तथा चीज़ों को चमकाने के लिए …………………. कपड़े का प्रयोग करें।

उत्तर-

  1. मासिक
  2. सफ़ाई
  3. नर्म
  4. फलालेन या लिनन।

एक शब्द में उत्तर दें

प्रश्न 1.
शीशे को चमकाने के लिए कैसे कपड़े का प्रयोग ठीक रहता है ?
उत्तर-
सिल्क।

प्रश्न 2.
चांदी की सफाई के लिए पॉलिश का नाम बताएं।
उत्तर-
सिल्वो।

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प्रश्न 3.
सबसे पहले किस कमरे की सफाई करनी चाहिए ?
उत्तर-
खाना बनाने वाले कमरे की।

प्रश्न 4.
फ्रिज़ को कब साफ़ करना चाहिए ?
उत्तर-
सप्ताह में एक बार।

ठीक/ग़लत बताएं

  1. घर की सफ़ाई के प्रति घर के सभी सदस्यों की रुचि होनी चाहिए।
  2. मासिक सफ़ाई महीने बाद की जाती है।
  3. स्नानागृह को महीने बाद धोना चाहिए न कि प्रतिदिन।
  4. बिजली से चलने वाली सफ़ाई वाली मशीन है माइक्रोवेव।
  5. धूल के कण, गंदगी का प्राकृतिक कारण है।
  6. पेंट वाली लकड़ी को प्रतिदिन झाड़न वाले कपड़े से पोंछे।

उत्तर-

  1. ठीक
  2. ठीक
  3. ग़लत
  4. ग़लत
  5. ठीक
  6. ठीक।

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मानव विकार है –
(A) कफ़
(B) थूक
(C) पसीना
(D) सभी।
उत्तर-(D) सभी।

प्रश्न 2.
ठीक तथ्य हैं –
(A) गंदे घर में बैठ कर कार्य करने का मन नहीं करता
(B) साफ़ सुन्दर सजे हुए घर से गृहिणी की सूझबूझ का पता चलता है
(C) सप्ताह वाली सफ़ाई सप्ताह में एक बार की जाती है
(D) सभी ठीक।
उत्तर-(D) सभी ठीक।

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प्रश्न 3.
सफ़ाई के लिए प्रयोग वाला सामान है –
(A) झाड़
(B) बिजली की मशीन
(C) ब्रश
(D) सभी ठीक।
उत्तर-(D) सभी ठीक।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
दैनिक सफ़ाई में क्या-क्या कार्य करने आवश्यक होते हैं ?
उत्तर-
दैनिक सफ़ाई में निम्नलिखित कार्य आवश्यक रूप से करने होते हैं –

  1. घर के सारे कमरों के फ़र्श, खिड़कियां, दरवाजे, मेज़ तथा कुर्सी की झाड़-पोंछ करना।
  2. घर में रखे कडेदान आदि की सफाई करना।
  3. शौचालय तथा स्नानघर आदि की सफाई करना।
  4. रसोई में काम आने वाले बर्तनों की सफ़ाई तथा रख-रखाव।

प्रश्न 2.
घर में गन्दगी होने के मुख्य कारण क्या हैं ?
उत्तर-

  1. प्राकृतिक कारण-धूल के कण, वर्षा और बाढ़ के पानी के बहाव के कारण आने वाली गन्दगी, मकड़ी के जाले, पक्षियों और अन्य जीवों द्वारा फैलाई गन्दगी।
  2. मानव विकार-मल-मूत्र, कफ, थूक, खांसी, पसीना तथा बालों का झड़ना।
  3. घरेलू कार्य-खाद्य पदार्थों की सफ़ाई से निकलने वाली गन्दगी, साग-सब्जी, फ़ल आदि के छिलके, खाने वाली वस्तुएं, बर्तन आदि का धोना, कपड़ों की धुलाई, साबुन की झाग, मैल, नील, स्टार्च, रद्दी कागज़ के टुकड़े, सिलाई से निकलने वाले कपड़ों के टुकड़े, कताई की रूई तथा उसका झाड़न आदि।

प्रश्न 3.
दैनिक सफ़ाई क्यों आवश्यक है ? तथा घर की सफ़ाई कैसे करनी चाहिए ?
उत्तर-
दैनिक सफ़ाई से हमारा अभिप्राय उस सफ़ाई से है जो घर में रोजाना की जाती है। इसलिए गृहिणी का कर्तव्य है कि वह घर के उठने-बैठने, पढ़ने-लिखने, सोने के कमरे, रसोई, आंगन, बाथरूम, बरामदा तथा शौचालय की प्रतिदिन सफ़ाई करे। दैनिक सफ़ाई के अन्तर्गत साधारणतः इधर-उधर बिखरी हुई वस्तुओं को ठीक तरह टिकाना, फर्नीचर को झाड़ना-पोंछना, फ़र्श पर झाड़ करना, गीला पोछा करना आदि आते हैं।

प्रश्न 4.
शौचालय, बाथरूम में फिनाइल क्यों छिड़कायी जाती है.?
उत्तर-
शौचालय, बाथरूम को रोजाना फिनाइल से धोना चाहिए तथा इन्हें खुली हवा लगनी चाहिए। नहीं तो यह मक्खी, मच्छर के घर बन जाएंगे। जिससे कई प्रकार की बीमारियां हो सकती हैं।

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प्रश्न 5.
घर में फर्नीचर की पॉलिश कैसे तैयार की जाती है ?
उत्तर-
फर्नीचर की पॉलिश तैयार करने के लिए अलसी का तेल दो हिस्से, तारपीन का तेल-एक हिस्सा, सिरका एक हिस्सा, मैथिलेटिड स्पिरिट-एक हिस्सा लेकर मिला लो। इस तरह पॉलिश तैयार हो जाती है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
फर्नीचर की देखभाल कैसे की जाती है ?
उत्तर-
लकड़ी के फर्नीचर को नर्म साफ़ कपड़े से साफ़ किया जाता है क्योंकि कठोर ब्रुश का प्रयोग करने से लकड़ी पर खरोंचें पड़ सकती हैं। लकड़ी को गीला नहीं करना चाहिए। फर्नीचर की लकड़ी को पेंट अथवा पॉलिश की जाती है। पेंट तथा पॉलिश को विभिन्न विधियों से अलग किया जाता है।

पॉलिश की लकड़ी की सम्भाल-इसको प्रतिदिन नर्म कपड़े से साफ़ करना चाहिए। अधिक गन्दी होने की सूरत में साबुन वाले पानी से धोकर फ्लालेन के कपड़े से पोंछ लेना चाहिए। कम गन्दी लकड़ी को साफ़ करने के लिए आधे लीटर गुनगुने पानी में दो बड़े चम्मच सिरके के मिलाकर घोल तैयार किया जाता है। इस घोल में गीला करके फ्लालेन के कपड़े से फर्नीचर को साफ़ करो। यदि फर्नीचर की लकड़ी की पॉलिश काफ़ी खराब हो गई हो अथवा चमक घट जाए तो मैन्शन पॉलिश अथवा क्रीम का प्रयोग करके सफ़ाई की जाती है। सनमाइका लगे फर्नीचर को साफ़ करना आसान होता है। इसको गीले कपड़े से पोंछा जा सकता है तथा दाग उतारने के लिए साबुन का प्रयोग किया जा सकता है।

पेंट की हई लकडी-पेंट वाली लकडी प्रतिदिन झाडने वाले कपड़े से पोंछो। यदि ज़रूरत हो तो कुछ दिनों के पश्चात् साबुन वाले गुनगुने पानी तथा फ्लालेन के कपड़े से इसे साफ़ करो। कोनों को अच्छी तरह साफ़ किया जाता है। अधिक गन्दे हिस्सों को साफ़ करने के लिए साफ़ ब्रुश प्रयोग करो। पेंट से चिकनाहट के दाग उतारने के लिए पानी में थोड़ी पैराफिन मिला ली जाती है परन्तु पैराफिन का अधिक मात्रा में प्रयोग किया जाए तो पेंट खराब हो जाता है।

कपड़ा चढ़ा हुआ फर्नीचर-इसको रोज़ सूखे कपड़े से झाड़ना चाहिए। कभी-कभी गर्म कपड़े साफ़ करने वाले ब्रुश से साफ़ करो। रैक्सिन अथवा चमड़े वाले फर्नीचर को रोज़ गीले कपड़े से साफ़ करो। चिकनाहट के दाग उतारने के लिए कपड़े को साबुन वाले गुनगुने पानी से भिगो कर रगड़ो। कभी-कभी थोड़ा सा अलसी का तेल कपड़े पर लगाकर चमड़े के फर्नीचर पर रगड़ने से चमड़ा मुलायम रहता है तथा दरारें नहीं पड़तीं।

घरेलू सफ़ाई PSEB 9th Class Home Science Notes

  • गन्दे घर का घर के सदस्यों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है तथा कई प्रकार की बीमारियां फैल सकती हैं।
  • गन्दे घर में कई तरह के कीटाणु, मक्खी-मच्छर आदि पैदा होते हैं तथा बीमारियां फैलाते हैं।
  • सफाई सही ढंग से करनी चाहिए। लापरवाही तथा बिना ढंग से सफाई की जाये तो साफ होने के स्थान पर घर और भी बदसूरत हो जायेगा।
  • सफाई के लिए प्रयोग में आने वाला सामान पांच प्रकार का होता है –
    पोचा तथा पुराने कपड़े, झाड़ तथा ब्रुश, बर्तन, सफाई करने वाले यन्त्र, सफाई के लिए साबुन तथा अन्य प्रतिकारक।
  • सफाई करने के कई ढंग हैं –
    झाड़ तथा ब्रुश से, पानी से धोकर, कपड़े से झाड़कर पोंछना, बिजली की मशीन (वैक्यूम क्लीनर) से।
  • लकड़ी के फर्नीचर को नर्म, साफ कपड़े से साफ करना चाहिए।
  • घर की व्यवस्था को पांच भागों में बांटा जा सकता है –
    रोज़ाना सफाई, साप्ताहिक सफाई, मासिक सफाई, वार्षिक सफाई, विशेष अवसर पर सफाई।

PSEB 9th Class SST Solutions Geography Chapter 2b पंजाब : धरातल/भू-आकृतियां

Punjab State Board PSEB 9th Class Social Science Book Solutions Geography Chapter 2b पंजाब : धरातल/भू-आकृतियां Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 9 Social Science Geography Chapter 2b पंजाब : धरातल/भू-आकृतियां

SST Guide for Class 9 PSEB पंजाब : धरातल/भू-आकृतियां Textbook Questions and Answers

(क) नक्शा कार्य (Map Work) :

प्रश्न 1.
पंजाब के रेखाचित्र में अंकित करें :
उत्तर-

  1. होशियारपुर शिवालिक तथा रोपड़ शिवालिक शृंखालायें
  2. सतलुज का बेट क्षेत्र।

प्रश्न 2.
अर्ध पर्वतीय, मैदानी तथा दक्षिण-पश्चिम रेतीले टीलों वाले क्षेत्रों में पड़ते जिलों की सारणियां बनाकर कक्षा में लगाएं।
नोट-विद्यार्थी यह प्रश्न अध्याय में दिए गए मानचित्र की सहायता से स्वयं करें।

(ख) निम्नलिखित वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के उत्तर दें :

प्रश्न 1.
प्राचीन जलोढ़ निर्मित क्षेत्र को क्या कहा जाता है ?
उत्तर-
बांगर।

PSEB 9th Class SST Solutions Geography Chapter 2b पंजाब : धरातल/भू-आकृतियां

प्रश्न 2.
खाडर (खादर) या बेट से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
खाडर अथवा बेट नई जलोढ़ मिट्टी के मैदान हैं। यह मिट्टी नदियों के किनारों पर निचले क्षेत्रों में पाई जाती है।

प्रश्न 3.
पंजाब के मैदानों को किन भागों में वर्गीकृत किया जाता है ?
उत्तर-
पंजाब के मैदानों को पांच भागों में बांटा जाता है-

  1. चो वाले मैदान,
  2. बाढ़ के मैदान,
  3. नैली,
  4. जलोढ़ के मैदान,
  5. जलोढ़ मैदानों के बीच स्थित रेतीले टीले।

प्रश्न 4.
पंजाब में रेत के टीले किस दिशा में थे/हैं।
उत्तर-
रेतीले टिब्बे पंजाब के दक्षिण पश्चिम में राजस्थान की सीमा के साथ-साथ पाए जाते हैं।

प्रश्न 5.
चंगर किसे कहते हैं ?
उत्तर-
आनंदपुर साहिब के नज़दीक कंडी क्षेत्र को चंगर कहा जाता है।

प्रश्न 6.
सही और गलत कथन बताएं-
(i) हिमालय की बाहरी श्रेणी का नाम शिवालिक है। ( )
(ii) कंडी क्षेत्र रूपनगर व पटियाला ज़िलों के दक्षिण में है। ( )
(iii) होशियारपुर शिवालिक, सतलुज व व्यास नदियों के बीच है। ( )
(iv) पंजाब के दक्षिण-पूर्व क्षेत्र में घग्गर के जलोढ़ मैदान, नैली में मिलते हैं। ( )
उत्तर-

  1. सही,
  2. गलत,
  3.  सही,
  4. सही।

(ग) निम्नलिखित प्रश्नों के संक्षेप उत्तर दें:

प्रश्न 1.
कंडी क्षेत्र की विशेषताएं लिखें तथा बतायें ये क्षेत्र कौन-से जिलों में पड़ते हैं ?
उत्तर-
पंजाब की शिवालिक पहाड़ियों के पश्चिम तथा रूपनगर (रोपड़) जिले की नूरपुर बेदी तहसील के पूर्व में स्थित मैदानी प्रदेश को स्थानीय भाषा में कंडी क्षेत्र कहा जाता है। इस क्षेत्र की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं

  1. यह क्षेत्र पंजाब के 5 लाख हेक्टेयर भू-भाग में फैला हुआ है जो पंजाब के कुल क्षेत्रफल का 10% हिस्सा है।
  2. इस क्षेत्र की मृदा मुसामदार (Porons) है।
  3. इसमें बहुत से चोअ मिलते हैं।
  4. यहां जल-स्तर काफ़ी गहरा है।

ज़िले-इस क्षेत्र में होशियारपुर, रूपनगर (रोपड़) आदि जिले शामिल हैं।

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प्रश्न 2.
चोअ क्या होते हैं ? उदाहरण देकर बतायें।
उत्तर-
चोअ एक प्रकार के बरसाती नाले हैं। ये नाले वर्षा के मौसम में भरकर बहने लगते हैं। शुष्क ऋतु में इनमें पानी सूख जाता है। ऐसे नालों को मौसमी चोअ कहते हैं। रूपनगर (रोपड़) के शिवालिक प्रदेश में बहुत अधिक मौसमी नाले पाए जाते हैं। यहाँ पर इन्हें राओ और घाड़ (Rao & Ghar) भी कहा जाता है।

प्रश्न 3.
पंजाब के जलोढ़ मैदानों की उत्पत्ति के विषय पर नोट लिखें।
उत्तर-
पंजाब का 70% भू-भाग जलोढ़ी मैदानों से घिरा हुआ है। यह मैदान भारत के गंगा और सिंध के मैदान का भाग है। इनकी उत्पत्ति हिमालय क्षेत्र से नदियों द्वारा बहाकर लाई गई मिट्टी के जमाव से हुई है। इन नदियों में सिंध और उसकी सहायक नदियों सतलुज, रावी, व्यास का महत्त्वपूर्ण योगदान है। समुद्र तल से इन मैदानों की ऊंचाई 200 मीटर से 300 मीटर तक है।

प्रश्न 4.
गुरदासपुर-पठानकोट शिवालिक पर नोट लिखें।
उत्तर-
गुरदासपुर-पठानकोट शिवालिक की पहाड़ी श्रेणी का विस्तार गुरदासपुर और पठानकोट जिलों के बीच है। पठानकोट जिले का धार कलां ब्लॉक पूरी तरह शिवालिक पहाड़ों के बीच स्थित है। इन पहाड़ों की औसत ऊंचाई 1000 मीटर के लगभग है।
इस क्षेत्र की पहाड़ी ढलाने, पानी के तेज बहाव के कारण किनारों से कट गई हैं जिससे ये काफी तीखी हो गई
इस क्षेत्र में बहने वाली मौसमी नदियाँ (Seasonal River) चक्की खड्ड और उसकी सहायक नदियां व्यास नदी में गिरती हैं।

PSEB 9th Class Social Science Guide पंजाब : धरातल/भू-आकृतियां Important Questions and Answers

बहुविकल्पीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
पंजाब का अधिकतर भू-भाग कैसा है ?
(क) पहाड़ी
(ख) मैदानी
(ग) पठारी
(घ) मरुस्थलीय।
उत्तर-
(ख) मैदानी.

प्रश्न 2.
पंजाब के शिवालिक पहाड़ों की उत्पत्ति किन दो भू-भागों के टकराने का परिणाम थी ?
(क) गोंडवाना लैंड तथा भाबर मैदान
(ख) अंगारा लैंड तथा शिवालिक मैदान
(ग) गोंडवाना लैंड तथा यूरेशिया प्लेट
(घ) अंगारालैंड तथा यूरेशिया प्लेट।।
उत्तर-
(ग) गोंडवाना लैंड तथा यूरेशिया प्लेट

प्रश्न 3.
बारी दोआब का एक अन्य नाम कौन-सा है ?
(क) मालवा
(ख) चज
(ग) नैली
(घ) माझा।
उत्तर-
(घ) माझा।

प्रश्न 4.
पंजाब के तराई प्रदेश का चोओं से घिरा प्रदेश क्या कहलाता है ?
(क) कंडी
(ख) बारी दोआब
(ग) बेट
(घ) बेला।
उत्तर-
(क) कंडी

प्रश्न 5.
घग्गर के जलोढ़ मैदानों का एक नाम है-
(क) चो
(ख) नैली
(ग) टैथीज़
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(ख) नैली

PSEB 9th Class SST Solutions Geography Chapter 2b पंजाब : धरातल/भू-आकृतियां

रिक्त स्थानों की पूर्ति

  1. पंजाब के ……………. में रेत के टीले मिलते हैं।
  2. कंडी क्षेत्र पंजाब के कुल क्षेत्रफल का ……….. प्रतिशत भाग है।
  3. सिरसा नदी के निकट कंडी क्षेत्र को …………. कहा जाता है।
  4. पंजाब का 70% भू-भाग ………….. मैदान है।
  5. पंजाब के मैदान ………. तथा ………… के मैदानों का भाग है।

उत्तर-

  1. दक्षिण-पश्चिम,
  2. 10,
  3. घाड़,
  4. जलोढ़ी,
  5. गंगा, सिंध।

उचित मिलान :

1. बारी दोआब – (i) होशियारपुर शिवालिक
2. बाढ़ के मैदान – (ii) रोपड़ शिवालिक
3. सतलुज-घग्गर – (iii) बेट
4. ब्यास-सतलुज – (iv) माझा।
उत्तर-

  1. माझा।
  2. बेट
  3. रोपड़ शिवालिक
  4. होशियारपुर शिवालिक।

अति लघु उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
शिवालिक की पहाड़ियां पंजाब के किस ओर स्थित हैं ?
उत्तर-
पूर्व और उत्तर-पूर्व में।

प्रश्न 2.
पंजाब की शिवालिक पहाड़ियां किस राज्य की सीमाओं को छूती हैं ?
उत्तर-
हिमाचल प्रदेश।

प्रश्न 3.
पंजाब की शिवालिक पहाड़ियों की औसत ऊंचाई कितनी है ?
उत्तर-
600 मीटर से 1500 मीटर तक।

प्रश्न 4.
पठानकोट जिले का कौन-सा ब्लॉक पूरी तरह गुरदासपुर-पठानकोट शिवालिक पहाड़ियों के बीच स्थित है ?
उत्तर-
धार कलां।

प्रश्न 5.
होशियारपुर शिवालिक का सबसे ऊँचा ब्लॉक/विकास खण्ड कौन-सा है ?
उत्तर-
तलवाड़ा (741 मीटर)

प्रश्न 6.
होशियारपुर शिवालिक के दो प्रमुख चोओं के नाम बताओ।
उत्तर-
कोट मैंरा, ढल्ले की खड्ड।

प्रश्न 7.
किस नदी के कारण रोपड़ शिवालिक श्रेणी की निरंतरता टूट जाती है ?
उत्तर-
सतलुज की सहायक नदी सरसा के कारण।

प्रश्न 8.
कंडी क्षेत्र का निर्माण कौन-सी भू-रचनाओं के आपस में मिलने से हुआ है ?
उत्तर-
जलोढ़ पंख।

प्रश्न 9.
पंजाब के जलोढ़ मैदान कौन-कौन सी भौगोलिक इकाइयों में बंटे हुए हैं ?
उत्तर-
बारी दोआब, बिस्त दोआब, सिज दोआब।

प्रश्न 10.
पंजाब में नदियों के रास्ता बदलने से बने ढाए (Dhaiya) कहां देखे जा सकते हैं ? (कोई एक स्थान)
उत्तर-
फिल्लौर।

प्रश्न 11.
पंजाब के जलोढ़ मैदानों में नदियों से दूर ऊंचे क्षेत्रों को क्या नाम दिया जाता है ?
उत्तर-
बांगर।

प्रश्न 12.
पंजाब की शिवालिक पहाड़ियों की लगभग लंबाई कितनी है ?
उत्तर-
280 कि०मी०।

प्रश्न 13.
होशियारपुर शिवालिक अपने दक्षिणी भाग में क्या कहलाता है ?
उत्तर-
कटार की धार।

PSEB 9th Class SST Solutions Geography Chapter 2b पंजाब : धरातल/भू-आकृतियां

प्रश्न 14.
होशियारपुर शिवालिक की लंबाई-चौड़ाई बताओ।
उत्तर-
होशियारपुर शिवालिक की लंबाई 130 किलोमीटर और चौड़ाई 5 से 8 किलोमीटर तक है।

लघु उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
पंजाब के धरातल में भिन्नता पाई जाती है। उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
पंजाब के धरातलीय नक्शे पर सरसरी दृष्टि डालने पर यह एक मैदानी क्षेत्र दिखाई देता है परंतु भौगोलिक दृष्टि और भू-वैज्ञानिक रचना के अनुसार इसमें काफी भिन्नता पाई जाती है।
पंजाब के मैदान संसार के सबसे ऊपजाऊ मैदानों में से एक हैं। पंजाब के पूर्व और उत्तर-पूर्व में शिवालिक की पहाडियां हैं। पंजाब के दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र में रेत के टीले भी मिलते हैं। राज्य में जगह-जगह चोअ दिखाई देते हैं।

प्रश्न 2.
पंजाब में शिवालिक की पहाड़ियों का विस्तार बताएं। इसके तीन भाग कौन-कौन से हैं ?
उत्तर-
शिवालिक की पहाड़ियां बाह्य हिमालय का भाग हैं। यह पर्वत पंजाब के पूर्व में हिमाचल प्रदेश की सीमा के साथ-साथ 280 किलोमीटर की लंबाई में फैले हुए हैं।
शिवालिक की पहाड़ियों के तीन भाग हैं-

  1. गुरदासपुर-पठानकोट शिवालिक-ये पहाड़ियां रावी और ब्यास नदियों तक फैली हैं।
  2. होशियारपुर शिवालिक-ये पहाड़ियां ब्यास और सतलुज नदियों तक हैं।
  3. रोपड़ शिवालिक-इसका विस्तार सतलुज और घग्गर नदी तक है।

प्रश्न 3.
पंजाब के कंडी क्षेत्र का निर्माण कहां और कैसे हुआ है ?
उत्तर-
कंडी क्षेत्र का निर्माण शिवालिक की तराई में बने गिरीपद मैदानों (Foothill planes) में हुआ है। इनके निर्माण में जलोढ़ पंखों का हाथ है। ये भू-रचनाएं गिरीपद मैदानों में आपस में मिलती हैं और कंडी क्षेत्र बनाती हैं। इस प्रदेश में भूमिगत जल का स्तर काफी नीचे है।

प्रश्न 4.
होशियारपुर शिवालिक को दक्षिण में ‘कटार की धार’ क्यों कहा जाता है ?
उत्तर-
होशियारपुर शिवालिक की ढलाने नालीदार अपरदन के कारण बहुत अधिक फटी-कटी हैं। इसके अतिरिक्त यहां बहने वाले चोओं ने भी इन पहाड़ियों को कई स्थानों पर बुरी तरह काट दिया है। कटी-फटी पहाड़ियों के सिरे तीखे होने के कारण इन पहाड़ियों को ‘कटार की धार’ कहते हैं।

प्रश्न 5.
रोपड़ शिवालिक की कोई चार विशेषताएं बताओ।
उत्तर-

  1. शिवालिक की यह श्रेणी सतलुज और घग्गर नदियों के बीच स्थित है। इसका विस्तार रूपनगर (रोपड़) जिले में हिमाचल प्रदेश की सीमा के उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व की ओर है।
  2. यह पहाड़ उत्तर में नंगल से शुरू होकर चंडीगढ़ के नजदीक घग्गर नदी तक चले जाते हैं।
  3. इस श्रेणी की लंबाई 90 किलोमीटर तक है। इस श्रेणी की निरंतरता (Continuity) सतलुज की सहायक नदी सरसा के कारण टूट जाती है।
  4. दूसरी शिवालिक श्रेणियों की तरह यह श्रेणी भी मौसमी चोओं से भरी हुई है। इन्हें राओ (Rao) तथा घाड़ (Ghar) भी कहा जाता है।

प्रश्न 6.
पंजाब के जलोढ़ मैदानों का दोआबो के अनुसार वर्गीकरण करते हुए एक सूची बनाएं।
उत्तर-
पंजाब के जलोढ़ मैदान

बारी दोआब (ब्यास-रावी) बिस्त दोआब (ब्यास-सतलुज) सिज-दोआब (सतलुज-जमना)
रावी-सक्की किरन पश्चिमी दोआब कोटकपूरा पठार
सकी किरन-उदियारा मंजकी दोआब नैली
उदियारा-कसूर ढक दोआब पभाध
बेट/खाडर बाढ़ के मैदान
पट्टी-ब्यास रेतीले टिब्बे

प्रश्न 7.
शिवालिक पहाड़ों (पहाड़ियों) की उत्पत्ति कैसे हुई ?
उत्तर-
शिवालिक पहाड़ियों की उत्पत्ति भी हिमालय की तरह टैथीज़ सागर से हुई। इनका निर्माण सागर में जमा कीचड़, चिकनी मिट्टी, ककड़-पत्थर आदि के ऊँचा उठने से हुआ। एक विचार के अनुसार मायोसीन (Miocene) काल में हिमालय के निर्माण के समय हिमालय के सामने एक छिछला सागर अस्तित्व में गया। लाखों वर्षों तक इसमें गाद जमा होती रही। कुछ समय बाद यूरेशिया प्लेट के गोंडवाना लैड से टकराने पर जमा पदार्थों ने ऊपर उठकर पहाड़ों का रूप ले लिया। यही पहाड़ शिवालिक पहाड़ कहलाते हैं।

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प्रश्न 8.
पंजाब के मैदानों का सबसे बड़ा क्षेत्र कौन-सा है ? इसमें शामिल ज़िलों के नाम बताओ।
उत्तर-
पंजाब के मैदानों का सबसे बड़ा क्षेत्र मालबा है। इसमें फिरोजपुर, फरीदकोट का उत्तरी भाग, मोगा, लुधियाना, बरनाला, संगरूर, पटियाला, पश्चिमी रूपनगर, साहिबजादा अजीत सिंह नगर (मोहाली), फतेहगढ़ साहिब आदि ज़िले शामिल हैं।

प्रश्न 9.
पंजाब के किन्हीं दो दोआबों के नाम लिखो तथा उनमें शामिल ज़िलों के बारे में बताओ।
उत्तर-
बारी दोआब तथा बिस्त दोआब पंजाब के दो प्रमुख दोआब हैं। इनका वर्णन इस प्रकार है

  1. बारी दोआब-पंजाब में रावी और सतलुज नदियों के बीच का क्षेत्र बारी दोआब कहलाता है। इसे ‘माझा क्षेत्र’ भी कहा जाता है। इसमें पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर और तरनतारन के ज़िले आते हैं।
  2. बिस्त दोआब-बिस्त दोआब ब्यास और सतलुज नदियों के बीच का क्षेत्र है। इसमें जालंधर, कपूरथला, होशियारपुर और शहीद भगत सिंह नगर (नवांशहर) के जिले आते हैं।

प्रश्न 10.
पंजाब के जलोढ़ मैदानों के बीच स्थित रेतीले टीलों पर नोट लिखो।
उत्तर-
सतलुज नदी के दक्षिणी भाग में पानी का बहाव घग्गर नदी की ओर है। इस क्षेत्र में बाढ़ के दिनों में पानी के बह जाने से रेत के टीले बन गए हैं। बाढ़ों से बचाव के लिए कई स्थानों पर नाले तथा नालियां बनाई गई हैं। अब इन टीलों को कृषि योग्य बना लिया गया है।

प्रश्न 11.
पंजाब के दक्षिण पश्चिमी भाग में स्थित रेतीले टीलों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर-
पंजाब के दक्षिण-पश्चिम में राजस्थान के साथ लगती सीमा पर जगह-जगह रेतीले टीले दिखाई देते हैं। इस प्रकार के टीले प्रायः भठिंडा, मानसा, फाजिल्का, फरीदकोट, संगरूर, मुक्तसर तथा पटियाला ज़िलों के दक्षिणी भागों में मिलते हैं। फिरोजपुर जिले के मध्यवर्ती भागों में भी कुछ टीले पाए जाते हैं। इन टीलों की ढलान टेढ़ी मेढ़ी है।
इस क्षेत्र की जलवायु अर्ध शुष्क है। अब पंजाब में रेत के टीलों को समतल करके खेती की जाने लगी है। पंजाब के मेहनती किसानों ने सिंचाई की सहायता से कृषि को उन्नत किया है। परिणामस्वरूप इस क्षेत्र की प्राकृतिक भौगोलिक विशेषता लगभग लुप्त हो गई है।

दीर्घ उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
पंजाब को धरातल के अनुसार हम कौन-कौन से भागों में बांट सकते हैं ? शिवालिक की पहाड़ियों का विस्तृत वर्णन करो।
उत्तर-
इसमें कोई संदेह नहीं कि पंजाब अपने विशाल उपजाऊ मैदानों के लिए संसार भर में प्रसिद्ध है। परंतु यह केवल मैदानी क्षेत्र नहीं है। इसके धरातल में काफी भिन्नता पाई जाती है। इसके पूर्व और उत्तर-पूर्व में शिवालिक की पहाड़ियां हैं। पंजाब के दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र में रेत के टीले भी हैं। पंजाब के धरातल को हम नीचे लिखे क्षेत्रों में बांट सकते हैं

  1. शिवालिक की पहाड़ियां
  2. विशाल जलोढ़ी मैदान
  3. जलोढ़ मैदानों के मध्य (दक्षिण-पश्चिम के) रेतीले टीले।

PSEB 9th Class SST Solutions Geography Chapter 2b पंजाब धरातलभू-आकृतियां 1

शिवालिक की पहाड़ियां बाह्य हिमालय का भाग हैं। ये पर्वत पंजाब के पूर्व में हिमाचल प्रदेश की सीमा के साथसाथ 280 किलोमीटर की लंबाई में फैले हुए हैं।
इस पर्वत श्रेणी की औसत चौड़ाई 5 से 12 किलोमीटर तक है। समुद्र तल से इसकी औसत ऊंचाई 600 से 1500 मीटर तक है।
शिवालिक की पहाड़ियों के भाग-शिवालिक की पहाड़ियों को तीन भागों में बांटा जा सकता है-

  1. गुरदासपुर-पठानकोट शिवालिक रावी और ब्यास नदियों तक,
  2. होशियारपुर शिवालिक ब्यास और सतलुज नदियों तक
  3. रोपड़ शिवालिक सतलुज और घग्गर तक।

इन भागों का विस्तृत वर्णन इस प्रकार है-

1. गुरदासपुर-पठानकोट शिवालिक इस पहाड़ी श्रेणी का विस्तार गुरदासपुर और पठानकोट जिलों के बीच है। पठानकोट जिले का धार कलां ब्लॉक पूरी तरह शिवालिक पहाड़ों के बीच स्थित है। इन पहाड़ों की औसत ऊंचाई 1000 मीटर के लगभग है।
इस क्षेत्र की पहाड़ी ढलाने, पानी के तेज बहाव के कारण किनारों से कट जाती हैं जिससे गहरी खाइयां/खड्डे (Gullies) बन जाती हैं। इस क्षेत्र में बहने वाली मौसमी नदियाँ (Seasonal River) चक्की खड्डु और उसकी सहायक नदियां ब्यास नदी में गिरती हैं।

2. होशियारपुर शिवालिक होशियारपुर शिवालिक का क्षेत्र ब्यास और सतलुज के मध्य होशियारपुर, शहीद भगत सिंह (नवांशहर) और रूपनगर जिले के नूरपूर बेदी ब्लॉक के बीच फैला हुआ है। इसकी लंबाई 130 किलोमीटर और चौड़ाई 5 से 8 किलोमीटर तक है। उत्तर में ये पहाड़ियाँ अधिक चौड़ी हैं परंतु दक्षिण में नीची तथा तंग हो जाती हैं। इसका सबसे ऊँचा ब्लॉक तलवाड़ा है और जिसकी ऊँचाई 741 मीटर तक है। शिवालिक की ये ढलाने नालीदार अपरदन (Gully Erosion) का बुरी तरह शिकार हैं और बहुत ज्यादा कटी फटी हैं। प्रत्येक किलोमीटर बाद प्रायः एक चोअ (Choe) आ जाता है। इन चोओं के अपरदन (Headward Erosion) के कारण ये पहाड़ कई स्थानों पर कटे हुए हैं। होशियारपुर के दक्षिण में इन्हें कटार की धार भी कहा जाता है। इसका बीच वाला भाग गढ़शंकर के पूर्व में स्थित है। कोट, मैरां, डले की खड़ यहां के प्रमुख चोअ हैं।

3. रोपड़ शिवालिक-शिवालिक की यह श्रेणी सतलुज और घग्गर नदियों के बीच स्थित है। यह रूपनगर (रोपड़) जिले में हिमाचल प्रदेश की सीमा के साथ उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व ओर फैली हुई है। ये पहाड़ उत्तर में नंगल से शुरू होकर चंडीगढ़ के नजदीक घग्गर नदी तक चले जाते हैं। इनकी लंबाई 90 किलोमीटर तक है। इस श्रेणी की निरंतरता (Continuity) सतलुज की सहायक नदी सरसा के कारण टूट जाती है। अन्य शिवालिक श्रेणियों की तरह यह श्रेणी भी मौसमी नालों से भरी हुई है। यहां पर इन नालों को राओ और घार (Rao & Ghare) भी कहा जाता है।

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प्रश्न 2.
पंजाब के मैदान की उत्पत्ति कैसे हुई ? इनकी भौगोलिक दृष्टि से बांट करो।
उत्तर-
पंजाब के मैदान गंगा और सिंध के मैदान का भाग हैं। ये मैदान सिंध और उसकी सहायक नदियों रावी, ब्यास, सतलुज और उसकी सहायक नदियों द्वारा हिमालय से बहाकर लाई गई मिट्टी के जमाव से है। इन मैदानों की समुद्र तल से औसत ऊंचाई 200 मी० से 300 मी० तक है। इनकी ढलान पूर्व से पश्चिम की ओर है।
भौगोलिक बांट-भौगोलिक दृष्टि से पंजाब के मैदानों को 5 भागों में बांटा जा सकता है-

  1. चो (नालों) वाले क्षेत्रों के मैदान
  2. बाढ़ के मैदान
  3. नैली
  4. जलोढ़ के मैदान
  5. जलोढ़ मैदानों के बीच स्थित रेतीले (बालू के) टीले

(i) चोअ (नालों) वाले क्षेत्रों के मैदान-ये मैदान शिवालिक पहाड़ियों की तराई में स्थित हैं। यह प्रदेश चोओं से घिरा है। वर्षा के मौसम में इन चोओं में प्रायः बाढ़ आ जाती है। इससे जान-माल की बहुत हानि होती है। इन मैदानों की मिट्टी में कंकड़ पाए जाते हैं। इसके नीचे पानी का स्तर काफी नीचा होता है।

(ii) बाढ़ के मैदान-इन मैदानों में रावी, ब्यास तथा सतलुज़ के बाढ़ वाले मैदान शामिल हैं। इन मैदानों को बेट भी कहा जाता है। पंजाब में फिल्लौर बेट, आनंदपुर बेट तथा नकोदर बेट इसके मुख्य उदाहरण हैं।

(iii) नैली-पंजाब के दक्षिण-पूर्व में घग्गर नदी ने जलोढ़ के मैदानों का निर्माण किया है। इन मैदानों को स्थानीय भाषा में नैली कहते हैं। इन नैलियों में वर्षा ऋतु में बाढ़ें आ जाती हैं। घुड़ाम, समाना तथा सरदूलगढ़ इन मैदानों के मुख्य उदाहरण हैं।
(iv) जलोढ़ के मैदान-बारी तथा बिस्त दोआब के प्रदेश जलोढ़ी मिट्टी से बने हैं। इन मैदानों में खाडर तथा बांगर दोनों प्रकार की मिट्टियां पाई जाती हैं।

(v) जलोढ़ मैदानों के बीच स्थित बालू टीले-सतलुज नदी के दक्षिणी भाग में पानी का बहाव घग्गर नदी की
ओर है। बाढ़ के दिनों में यहां पानी के बहने से रेत के टीले बन जाते हैं। बाढ़ों से बचाव के लिए कई स्थानों पर नाले तथा नालियाँ बनाई गई हैं। अब इन टीलों को कृषि योग्य बना लिया गया है।

पंजाब : धरातल/भू-आकृतियां PSEB 9th Class Geography Notes

  • पंजाब का भौतिक मानचित्र देखने में पंजाब मुख्य एक मैदानी प्रदेश दिखाई देता है। परंतु यहाँ अन्य भी कई भू-आकार देखने को मिलते हैं।
  • पंजाब के मैदान संसार के सबसे उपजाऊ मैदानों में से एक हैं।
  • भौतिक दृष्टि से पंजाब के मैदानों को पांच भागों में बांटा जा सकता है : चोअ वाले मैदान, बाढ़ के मैदान, नैली, जलोढ़ मैदान तथा बालू (रेत) के टिब्बे।
  • दोआब का अर्थ है दो नदियों के बीच का प्रदेश।
  • पंजाब के पूर्वी तथा उत्तर-पूर्वी भाग में शिवालिक की पहाड़ियां स्थित हैं।
  • शिवालिक श्रेणी के अध्ययन के लिए इसे गुरदासपुर-पठानकोट शिवालिक, होशियारपुर शिवालिक तथा रोपड़ शिवालिक आदि भागों में बांटा गया है।
  • पंजाब का कंडी क्षेत्र विच्छेदित लहरदार मैदानों से बना है। इसमें काफी चोअ हैं।
  • पंजाब सरकार ने डेरा बस्सी, चंडीगढ़, रोपड़-बलाचौर, होशियारपुर तथा मुकेरियाँ के पूरे क्षेत्र को कंडी क्षेत्र घोषित किया हुआ है।
  • बारी दोआब का एक और नाम माझा भी है।
  • मंड, बेट, चंगर, घाड़, बेला आदि नदियों के समीप पड़ने वाले निचले क्षेत्रों के नाम हैं।
  • नैली, घग्गर नदी द्वारा बनाए गए जलोढ़ मैदानों का स्थानीय नाम है।
  • पंजाब के किसानों ने सुदूर दक्षिण-पश्चिम के टीलों को लगभग समाप्त कर दिया है। अब इस भाग में सिंचाई द्वारा सफल खेती की जाने लगी है।
  • जलोढ़ मैदानों में खादर तथा बांगर दो प्रकार की मिट्टियां मिलती हैं।
  • खादर नई जलोढ़ मिट्टी होती है जो बहुत ही उपजाऊ होती है। बांगर पुरानी जलोढ़ होने के कारण कंकड़-पत्थरों से भरी होती है।
  • बारी तथा बिस्त दोआब के प्रदेश जलोढ़ी मिट्टी से बने हैं। इन मैदानों में खादर तथा बांगर दोनों प्रकार की मिट्टियां पाई जाती हैं।
  • मैदान बाढ़ के मैदान नदियों के किनारे पर निचले भागों में मिलते हैं। इनका निर्माण बाढ़ के पानी द्वारा मिट्टी के जमाव से होता है।

 

PSEB 9th Class SST Solutions Geography Chapter 2a भारत : धरातल/भू-आकृतियां

Punjab State Board PSEB 9th Class Social Science Book Solutions Geography Chapter 2a भारत : धरातल/भू-आकृतियां Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 9 Social Science Geography Chapter 2a भारत : धरातल/भू-आकृतियां

SST Guide for Class 9 PSEB भारत : धरातल/भू-आकृतियां Textbook Questions and Answers

(क) नक्शा कार्य (Map Work) :

प्रश्न 1.
भारत के रेखा मानचित्र में अंकित करें :
उत्तर-

  • कराकोरम, पीर पंजाल, शिवालिक, सतपुड़ा, पटकोई वम्म, खासी और गारो की पहाड़ियां।
  • कंचनजुंगा, गोडविन, ऑस्टिन, धौलगिरी, गुरु शिखर व अनाईमुटी पहाड़ियां।
  • कोई पांच दर्रे और तीन पठारी क्षेत्र।
    नोट-विद्यार्थी यह प्रश्न अध्याय में दिए गए मानचित्रों की सहायता से स्वयं करें।

(ख) निम्नलिखित वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के उत्तर दें:

प्रश्न 1.
भारत को भू-आकृति आधार पर वर्गीकृत करते हुए दो भागों के नाम लिखें।
उत्तर-
भारत को भू-आकृति के आधार पर पांच भागों में बांटा जा सकता है-

  1. हिमालय पर्वत
  2. उत्तरी विशाल मैदान व मरुस्थल
  3. प्रायद्वीपीय पठार
  4. तटीय मैदान
  5. भारतीय द्वीप समूह।

प्रश्न 2.
अगर आप गुरु शिखर पर हैं, तो कौन-सी पर्वत श्रृंखला में हैं ?
उत्तर-
माऊंट आबू (अरावली पहाड़ी)।।

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प्रश्न 3.
भारतीय उत्तरी मैदान की लंबाई व चौड़ाई कितनी है ?
उत्तर-
भारत के उत्तरी मैदान की लंबाई लगभग 2400 किलोमीटर तथा चौड़ाई 150 से 300 किलोमीटर है।

प्रश्न 4.
भारतीय द्वीपों को कैसे वर्गीकृत किया जाता है ?
उत्तर-
भारतीय द्वीपों को मुख्य रूप से दो भागों में बाँटा जाता है-

  1. अंडेमान निकोबार द्वीप समूह तथा
  2. लक्षद्वीप समूह।

प्रश्न 5.
निम्न में से कौन-सा नाम मैदान का नहीं है ?
(i) भाबर
(ii) बांगर
(iii) केयाल
(iv) कल्लर।
उत्तर-
(iii) केयाल।

प्रश्न 6.
इनमें से कौन-सी झील नहीं है ?
(i) सैडल
(ii) सांबर
(iii) चिल्का
(iv) वैबानंद।
उत्तर-
(i) सैडल।

प्रश्न 7.
इनमें से कौन-सा नाम अलग पहचान का हैं ?
(i) शारदा
(ii) कावेरी
(ii) गोमती
(iv) यमुना।
उत्तर-
(i) कावेरी।

प्रश्न 8.
कौन-सी पर्वतीय श्रृंखला हिमालियाई नहीं है ?
(i) रक्शपोशी
(ii) डफ़ला
(iii) जास्कर
(iv) नीलगिरी।
उत्तर-
(iv) नीलगिरी।

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(ग) निम्नलिखित प्रश्नों के संक्षेप उत्तर दें:

प्रश्न 1.
हिमालय पर्वत की उत्पत्ति पर एक नोट लिखें।
उत्तर-
जहां आज हिमालय हैं, वहां कभी टैथीज (Tythes) नाम का एक गहरा सागर लहराता था। यह दो विशाल भू-खंडों से घिरा एक लंबा और उथला सागर था। इसके उत्तर में अंगारा लैंड और दक्षिण में गोंडवानालैंड नाम के दो भू-खंड थे। लाखों वर्षों तक इन दो भू-खंडों का अपरदन होता रहा। अपरदित पदार्थ अर्थात् कंकड़, पत्थर, मिट्टी, गाद आदि टैथीज सागर में जमा होते रहे। ये दो विशाल भू-खंड धीरे-धीरे एक-दूसरे की ओर खिसकते रहे। सागर में जमी मिट्टी आदि की परतों में मोड़ (वलय) पड़ने लगे। ये वलय द्वीपों की एक श्रृंखला के रूप में उभर कर पानी की सतह से ऊपर आ गये। कालांतर में विशाल वलित पर्वत श्रेणियों का निर्माण हुआ, जिन्हें हम आज हिमालय के नाम से पुकारते हैं।

प्रश्न 2.
खाडर मैदानों के विषय में बताएं कि ये बेट से अलग कैसे हैं ?
उत्तर-
खाडर एक प्रकार की नई जलोढ़ मिट्टी वाला मैदान है। इस मिट्टी को नदियां अपने साथ लाकर निचले प्रदेशों में बिछाती हैं। यह मिट्टी बहुत ही उपजाऊ होती है। पंजाब में इस प्रकार की मिट्टी वाले प्रदेशों को ‘बेट’ भी कहा जाता है। इस प्रकार बेट खाडर मिट्टी वाले मैदानों का स्थानीय नाम है।

प्रश्न 3.
मध्य हिमालय पर एक नोट लिखें।
उत्तर-
मध्य हिमालय को लघु हिमालय भी कहा जाता है। इसकी औसत ऊंचाई 5050 मीटर तक है। इन श्रेणियों की पहाड़ियां 60 से 80 किलोमीटर की चौड़ाई में मिलती हैं।

  1. श्रेणियाँ-जम्मू कश्मीर में पीर पंजाल व नागा टिब्बा, हिमाचल में धौलाधार, नेपाल में महाभारत, उत्तराखंड में मसूरी और भूटान में थिम्पू इस पर्वतीय भाग की मुख्य पर्वत श्रेणियां हैं।
  2. घाटियाँ-इस भाग में कश्मीर घाटी के कुछ भाग, कांगड़ा घाटी, कुल्लू घाटी, भागीरथी घाटी व मंदाकिनी घाटी जैसी लाभकारी व स्वास्थ्यवर्द्धक घाटियां मिलती है।
  3. स्वास्थ्यवर्द्धक स्थान-इस क्षेत्र में शिमला, श्रीनगर, मसूरी, नैनीताल, दार्जिलिंग, चकराता आदि प्रमुख स्वास्थ्यवर्द्धक व रमणीय केंद्र हैं।

प्रश्न 4.
पश्चिम और पूर्वी घाटों में क्या अंतर है ?
उत्तर-

  1. पश्चिम घाट उत्तर से दक्षिण तक अरब सागर के समांतर फैले हैं। इसके विपरीत पूर्वी घाट का विस्तार खाड़ी बंगाल के साथ-साथ है।
  2. पश्चिम घाट के पर्वत एक लंबी श्रृंखला बनाते हैं। परंतु पूर्वी घाट नदियों द्वारा कट जाने के कारण अलग-अलग पहाड़ियों के रूप में दिखाई देते हैं।
  3. पश्चिम घाट के पर्वत पूर्वी घाट की अपेक्षा अधिक ऊंचे तथा स्पष्ट हैं।
  4. पूर्वी घाट की सबसे ऊंची चोटी महेंद्रगिरि है। इसके विपरीत पश्चिम घाट की सबसे ऊंची चोटी अनाईमुदी है।
  5. पश्चिम घाट में थाल घाट, भोर घाट, पाल घाट, शेनकोटा आदि दरें हैं। परंतु पूर्वी घाट में कोई भी महत्त्वपूर्ण दर्रा नहीं है।

प्रश्न 5.
भारतीय द्वीप समूहों का वर्गीकरण कीजिए तथा द्वीपों के नाम लिखो।
उत्तर-
भारतीय द्वीपों की कुल संख्या 267 है। इन्हें निम्नलिखित दो भागों में बांटा जाता है

  1.  बंगाल की खाड़ी में स्थित अंडेमान-निकोबार द्वीप समूह-ये द्वीप उत्तर-पूर्वी पर्वत श्रेणी अराकान योमा (म्यांमार में) का भी विस्तार हैं। इनकी संख्या 204 है। सैडल (Saddle Peak) अंडेमान की सबसे ऊंची चोटी है। इसकी ऊंचाई 737 मीटर है। निकोबार में 19 द्वीप शामिल हैं। जिनमें से ग्रेटर निकोबार सबसे बड़ा द्वीप है।
  2. अरब सागर में स्थित लक्षद्वीप समूह-इन द्वीपों की कुल संख्या 34 है। इसके उत्तर में अमिनदिवी (Amindivi) तथा दक्षिण में मिनीकोय (Minicoy) द्वीप स्थित हैं। इन द्वीपों का मध्यवर्ती भाग लक्कादिव (Laccadive) कहलाता है।

प्रश्न 6.
भाबर और तराई में अंतर बताएं।
उत्तर-
भाबर वे मैदानी प्रदेश होते हैं जहां नदियां पहाड़ों से निकल कर मैदानी प्रदेश में प्रवेश करती हैं और अपने साथ लाए रेत, कंकड़, बजरी, पत्थर आदि का यहां निक्षेप (जमा) करती हैं। भाबर क्षेत्र में नदियां भूमि तल पर बहने की बजाए भूमि के नीचे बहती हैं।
जब भाबर मैदानों की भूमिगत नदियां पुनः भूमि पर उभरती हैं, तो ये दलदली क्षेत्रों का निर्माण करती हैं। शिवालिक पहाड़ियों के समानांतर फैली ऐसी आर्द्र दलदली भूमि की पट्टी को तराई प्रदेश कहते हैं। यहां घने वन भी पाये जाते हैं तथा जंगली जीव-जंतु भी अधिक संख्या में मिलते हैं।

(घ) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से दें:

प्रश्न 1.
प्रायद्वीपीय पठार और उनकी पर्वतीय श्रृंखलाओं के विषय में विस्तार में लिखें।
उत्तर-
प्रायद्वीपीय पठार भारत के मध्य से लेकर सुदूर दक्षिण तक फैला हुआ है। यह पठार क्रिस्टलीय आग्नेय तथा
रूपांतरित चट्टानों से बना है। त्रिभुज के आकार के इस प्राचीन भू-भाग का शीर्ष बिन्दु कन्याकुमारी है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यहां की वन-संपदा है। इन पठारों को मुख्य रूप से तीन भागों में बांटा जा सकता है। इन भागों तथा उनमें स्थित पर्वत श्रेणियों का वर्णन इस प्रकार है

1. मध्य भारत का पठार-यह पठारी प्रदेश मारवाड़ प्रदेश के पूर्व में फैला है। इसकी समुद्र तल से ऊँचाई 250500 मी० तक है। इसकी दरार घाटी में चंबल तथा उसकी सहायक नदियां बहती हैं। यह पठार अपनी गहरी घाटियों के लिए प्रसिद्ध है। इस पठार के पूर्व में यमुना के निकट बुंदेलखंड का प्रदेश स्थित है।

2. मालवा पठार-पश्चिम में अरावली पर्वत, उत्तर में बुंदेलखंड तथा बघेलखंड, पूर्व में छोटा नागपुर, राजमहल की पहाड़ियां तथा शिलांग के पठार तक और दक्षिण की ओर सतपुड़ा की पहाड़ियों तक घिरा हुआ पठार मालवा का पठार कहलाता है। इसका शीर्ष शिलांग के पठार पर है। इस पठार की उत्तरी सीमा अवतल चापाकार की तरह है। इस पठार में बनास, चंबल, केन तथा बेतवा नामक नदियां बहती हैं। इसकी औसत ऊंचाई 900 मी० है। पारसनाथ तथा नैत्रहप्पाट इसकी मुख्य चोटियां हैं। इसकी तीन पर्वत श्रेणियां हैं-अरावली पर्वत श्रेणी, विंध्याचल पर्वत श्रेणी तथा सतपुड़ा पर्वत श्रेणी।
अरावली पर्वत श्रेणी सबसे पुरानी पर्वत श्रेणी है। इसकी लंबाई लगभग 800 किलोमीटर तक है। इसकी सबसे ऊंची चोटी गुरु शिखर (1722 मी०) है। इसमें गोरनघाट नामक एक दर्रा भी स्थित है। सतपुड़ा की पहाड़ियां 900 किलोमीटर की लंबाई में फैली हैं। इस पर्वत श्रेणी की सबसे ऊंची चोटी (धूपगढ़ 1350 मी०) है। अमरकंटक दूसरी ऊंची चोटी है।

3. दक्कन (दक्षिण) का पठार-इसकी औसत ऊँचाई 300 से 900 मीटर तक है। इसके धरातल को मौसमी नदियों ने कांट-छांट कर सात स्पष्ट भागों में बांटा हुआ है-

  1. महाराष्ट्र का टेबल लैंड,
  2. दंडकारण्य-छत्तीसगढ़ क्षेत्र,
  3. तेलंगाना का पठार,
  4. कर्नाटक का पठार,
  5. पश्चिमी घाट,
  6. पूर्वी घाट,
  7. दक्षिणी पहाड़ी समूह।

पश्चिमी घाट की औसत ऊंचाई 1200 मीटर और पूर्वी घाट की 500 मीटर है। दक्षिण भारत की सभी महत्त्वपूर्ण नदियां पश्चिमी घाट से निकलती हैं। उत्तर से दक्षिण तक पश्चिमी घाट में चार प्रसिद्ध दर्रे हैं-थालघाट, भोरघाट, पालघाट तथा शेनकोटा। पूर्वी घाट पश्चिमी घाट की अपेक्षा अधिक चौड़े कटे-फटे तथा टूटी पहाड़ियों वाला है। पूर्वी घाट की सबसे ऊंची चोटी महेंद्रगिरी (1500 मी०) है।

पश्चिमी और पूर्वी घाट जहां जाकर मिलते हैं, उन्हें नीलगिरि पर्वत कहते हैं। इन पर्वतों की सबसे ऊंची चोटी दोदाबेटा है अथवा डोडाबेटा जो 2637 मीटर ऊंची है।
सच तो यह है कि प्रायद्वीपीय पठार खनिज पदार्थों का भंडार है और इसका भारत की आर्थिकता में बड़ा महत्त्व है। यहां चाय, रबड़, गन्ना, कॉफ़ी आदि की कृषि भी की जाती है।

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प्रश्न 2.
गंगा-ब्रह्मपुत्र के मैदानों की बनावट व उनके क्षेत्रीय वर्गीकरण पर नोट लिखें।
उत्तर-
(क) गंगा के मैदान-गंगा-ब्रह्मपुत्र के मैदान के मुख्य भौगोलिक पक्षों का वर्णन इस प्रकार है

  1. स्थिति-यह मैदान उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिमी बंगाल राज्यों में स्थित है। यह पश्चिम में यमुना, पूर्व में बंगलादेश की अंतर्राष्ट्रीय सीमा, उत्तर में शिवालिक तथा दक्षिण में प्रायद्वीपीय पठार के उत्तरी विस्तार के मध्य फैला हुआ है।
  2. नदियाँ-इस मैदान में गंगा, यमुना, घागरा, गण्ड्क, कोसी, सोन, बेतवा तथा चंबल नदियां बहती हैं।
  3. भू-आकारीय नाम-गंगा के तराई वाले उत्तरी क्षेत्रों में बनी दलदली पेटियों को ‘कौर (caur) कहा जाता है। इसकी दक्षिणी सीमा में बड़े-बड़े खड्ड (Ravines) मिलते हैं जिन्हें ‘जाला’ व ‘ताल’ (Jala & Tal) अथवा बंजर भूमि कहते हैं। इसके अतिरिक्त समस्त मैदान में पुरानी जमीं बांगर और नई बिछी खादर की जलोढ़ पट्टियों को ‘खोल’ (Khols) कहा जाता है। गंगा और यमुना दोआब में पवनों के निक्षेप द्वारा निर्मित बालू के टीलों को उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद तथा बिजनौर जिलों में ‘भूर’ (Bhur) के नाम से जाना जाता है।
  4. ढलान तथा क्षेत्रफल-गंगा के मैदान की ढलान पूर्व की ओर है।
    महाराष्ट्र टेबल लैंड बेसाल्ट के लावे से बना है। कर्नाटक के पठार में बाबा बूदन की पहाड़ियों में स्थित मूल्नगिरी (1913 मी०) सबसे ऊँची चोटी है।
  5. विभाजन-ऊँचाई के आधार पर गंगा के मैदानों को निम्नलिखित तीन उप-भागों में विभाजित किया जा सकता है
    • ऊपरी मैदान-इन मैदानों को गंगा-यमुना दोआब भी कहते हैं। इनके पश्चिम में यमुना नदी है तथा 100 मीटर की ऊंचाई तक मध्यम ढाल वाले क्षेत्र इसकी पूर्वी सीमा बनाते हैं। रुहेलखंड तथा अवध का मैदान भी इन्हीं मैदानों में सम्मिलित हैं।
    • मध्यवर्ती मैदान-इस मैदान को बिहार के मैदान या मिथिला (Mithila) मैदान भी कहते हैं, जिसकी ऊंचाई लगभग 50 से 100 मीटर के बीच है। यह घागरा नदी से लेकर कोसी नदी तक फैला है। इस मैदान की लंबाई 600 कि०मी० तथा चौड़ाई 330 कि०मी० है।
    • निचले मैदान-गंगा के ये मैदानी भाग समुद्र तल से लगभग 50 मीटर ऊंचे हैं। इसकी लंबाई 580 कि०मी० तथा चौड़ाई 200 कि०मी० है। ये राजमहल तथा गारो पर्वत श्रेणियों के मध्य एक समतल डेल्टाई क्षेत्र बनाते हैं। इसके उत्तर में तराई पट्टी के द्वार (Duar) मिलते हैं तथा दक्षिण में विश्व का सबसे बड़ा सुंदरवन डेल्टा स्थित है।

(ख) ब्रह्मपुत्र के मैदान-इस मैदान को आसाम (असम) का मैदान भी कहा जाता है। समुद्र तल से इसकी ऊंचाई 250 मी० से लेकर 550 मी० तक है।

प्रश्न 3.
भारत के तटीय मैदानों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
तटवर्ती मैदान अरब सागर तथा बंगाल की खाड़ी के साथ-साथ फैले हुए हैं। इन्हें दो भागों में बांटा जाता है-पश्चिमी तट के मैदान तथा पूर्वी तट के मैदान। इनका वर्णन इस प्रकार है
पश्चिमी मैदान-

  1. इसके पश्चिम में अरब सागर और पूर्व में पश्चिमी घाट की पहाड़ियां हैं।
  2. इन मैदानों की लंबाई 1500 कि०मी० और चौड़ाई 65 कि०मी० है। इन मैदानों में डेल्टाई निक्षेप का अभाव है।
  3. पश्चिमी मैदानों को धरातलीय विस्तार के आधार पर चार भागों में बांटते हैं-गुजरात का तटीय मैदान, कोंकण का तटीय मैदान, मालाबार तट का मैदान, केरल का मैदान। गुजरात का मैदान कच्छ से महाराष्ट्र होते हुए खंबात की खाड़ी तक चला जाता है। इसका निर्माण साबरमती, माही, लूनी तथा तापी नदियों द्वारा लाकर बिछाई गई मिट्टी से हुआ है। कोंकण का मैदान दमन से गोवा तक 500 मीटर की लंबाई में फैला है। मुंबई इस तट की प्रमुख बंदरगाह है। कोंकण तट को कारावली तथा केनारा भी कहा जाता है। मालावार का तटवर्ती मैदान मंगलूर से कन्याकुमारी तक फैला है। झीलों अथवा लैगूनों वाले इस मैदान की लंबाई 845 कि०मी० है। बैबानंद द्रत मैदान की सबसे बड़ी झील है।।
  4. इन मैदानों में नर्मदा तथा ताप्ती नदियां बहती है। ये डेल्टा बनाने की बजाए ज्वारनदमुख बनाती हैं।
  5. पश्चिमी मैदान में ग्रीष्म काल में वर्षा होती है। यह वर्षा दक्षिण-पश्चिम पवनों के कारण होती है। ।

पूर्वी तट के मैदान-

  1. पूर्वी तट के मैदानों के पूर्व में बंगाल की खाड़ी तथा पश्चिम में पूर्वी घाट की पहाड़ियां हैं।
  2. इन मैदानों की लंबाई 2000 कि०मी० है और इनकी औसत चौड़ाई 150 कि०मी० है। ये अपेक्षाकृत अधिक चौड़े हैं तथा इनमें जलोढ़ मिट्टी का निक्षेप है।
  3. पूर्वी तटीय मैदान के दो भाग हैं-उत्तरी तटीय मैदान तथा दक्षिण तटीय मैदान। उत्तरी मैदान को उत्तरी सरकार या गोलकुंडा या काकीनाडा भी कहते हैं। दक्षिण तटीय मैदान को कोरोमंडल तट कहा जाता हैं।
  4. इस मैदान की प्रमुख नदियां महानदी, कावेरी, गोदावरी तथा कृष्णा है।
  5. इस मैदान में पुलिकट तथा चिल्का नामक झीलें पाई जाती हैं। उड़ीसा की चिल्का झील भारत में खारे पानी की सबसे बड़ी झील है।

प्रश्न 4.
निम्न पर नोट लिखें
(i) राजस्थान के मैदान और मरुस्थल
(ii) मालवा का पठार
(iii) उच्चतम हिमालय।
उत्तर-
(i) राजस्थान के मैदान और मरुस्थल-यह मरुस्थल पंजाब तथा हरियाणा के दक्षिणी भागों से लेकर गुजरात के रण ऑफ़ कच्छ तक फैला हुआ है। यह समतल तथा शुष्क मरुस्थल थार मरुस्थल के नाम से जाना जाता है। अरावली पर्वत श्रेणी इसकी पूर्वी सीमा बनाती है। इसके पश्चिम में अन्तर्राष्ट्रीय सीमा लगती है। यह लगभग 650 कि०मी० लंबा तथा 250 कि० मी० चौड़ा है। अति प्राचीन काल में यह क्षेत्र समुद्र के नीचे दबा हुआ था। ऐसे भी प्रमाण मिलते हैं कि यह मरुस्थल किसी समय उपजाऊ रहा होगा। परंतु वर्षा की मात्रा बहुत कम होने के कारण आज यह क्षेत्र रेत के बड़े-बड़े टीलों में बदल गया है। थार मरुस्थल के पूर्वी भाग को ‘राजस्थान बांगर’ भी कहा जाता है।

(ii) मालवा का पठार-पश्चिम में अरावली पर्वत, उत्तर में बुंदेलखंड तथा बघेलखंड पूर्व में छोटा नागपुर, राजमहल की पहाड़ियां तथा शिलांग के पठार तक और दक्षिण की ओर सतपुड़ा की पहाड़ियों तक घिरा हुआ पठार मालवा का पठार कहलाता है। इसका शीर्ष शिलांग के पठार पर है। इस पठार की उत्तरी सीमा अवतल चापाकार की तरह है। इस पठार में बनास, चंबल, केन तथा बेतवा नामक नदियां बहती हैं। इसकी औसत ऊंचाई 900 मी० है। पारसनाथ तथा नैत्रहप्पाट इसकी मुख्य चोटियां हैं। इसको तीन पर्वत श्रेणियां हैं-अरावली पर्वत श्रेणी, विंध्याचल पर्वत श्रेणी तथा सतपुड़ा पर्वत श्रेणी।

(iii) उच्चतम हिमालय-इसे महान् हिमालय भी कहते हैं। हिमालय का यह विशाल भाग पश्चिम में सिंधु नदी की घाटी से लेकर उत्तर-पूर्व में ब्रह्मपुत्र की दिहांग घाटी तक फैला हुआ है। इसकी मुख्य धरातलीय विशेषताओं का वर्णन इस प्रकार है

  1. यह देश की सबसे लंबी तथा ऊंची पर्वत श्रेणी है। इसमें ग्रेनाइट तथा नीस जैसी परिवर्तित रवेदार चट्टानें मिलती हैं।
  2. इसकी चोटियां बहुत ऊंची हैं। संसार की सबसे ऊंची पर्वत चोटी माऊंट एवरेस्ट (8848 मीटर) इसी पर्वत श्रृंखला में स्थित है। यहां की चोटियां सदा बर्फ से ढकी रहती हैं।
  3. इसमें अनेक दर्रे हैं जो पर्वतीय मार्ग जुटाते हैं।
  4. इसमें काठमांड तथा कश्मीर जैसी महत्त्वपूर्ण घाटियां स्थित हैं।

प्रश्न 4.
हिमालय पर्वत और दक्षिण पठार के लाभों की तुलना करें।
उत्तर-
हिमालय पर्वत तथा ढक्कन का पठार भारत के दो महत्त्वपूर्ण भू-भाग हैं। ये दोनों ही भू-भाग अपने-अपने ढंग से भारत देश को समृद्ध बनाते हैं। इनके लाभों की तुलना इस प्रकार की जा सकती है
हिमालय के लाभ-

  1. वर्षा-हिंद महासागर से उठने वाली मानसून पवनें हिमालय पर्वत से टकरा कर खूब वर्षा करती हैं। इस प्रकार यह उत्तरी मैदान में वर्षा का दान देता है। इस मैदान में पर्याप्त वर्षा होती है।
  2. उपयोगी नदियां-उत्तरी भारत में बहने वाली सभी मुख्य नदियां गंगा, यमुना, सतलुज, ब्रह्मपुत्र आदि हिमालय पर्वत से ही निकलती हैं। ये नदियां सारा साल बहती रहती हैं। शुष्क ऋतु में हिमालय की बर्फ इन नदियों को जल देती है।
  3. फल तथा चाय-हिमालय की ढलाने चाय की खेती के लिए बड़ी उपयोगी हैं। इनके अतिरिक्त पर्वतीय ढलानों पर फल भी उगाए जाते हैं।
  4. उपयोगी लकड़ी-हिमालय पर्वत पर घने वन पाये जाते हैं। ये वन हमारा धन हैं। इनसे प्राप्त लकड़ी पर भारत के अनेक उद्योग निर्भर हैं। यह लकड़ी भवन निर्माण कार्यों में भी काम आती है।
  5. अच्छे चरागाह-हिमालय पर हरी-भरी चरागाहें मिलती हैं। इनमें पशु चराये जाते हैं।
  6. खनिज पदार्थ-इन पर्वतों में अनेक प्रकार के खनिज पदार्थ पाए जाते हैं।
  7. पर्यटन-हिमालय में अनेक सुंदर और रमणीक घाटियां हैं। कश्मीर घाटी ऐसी ही एक प्रसिद्ध घाटी है। इसे पृथ्वी का स्वर्ग कहा जाता है। अन्य प्रमुख घाटियां हिमाचल प्रदेश में कुल्लू तथा कांगड़ा और उत्तरांचल में कुमायूँ की घाटियाँ हैं। सारे संसार से पर्यटक इन घाटियों की मनोहर छटा को निहारने के लिए यहां आते हैं।

दक्कन (दक्षिणी) पठार के लाभ

  1. दक्षिण का पठार खनिजों से संपन्न है। देश के 98% खनिज भंडार दक्षिणी पठार में ही मिलते हैं यहां कोयला, लोहा, तांबा, मैंगनीज़, अभ्रक, सोना आदि बहुमूल्य खनिज पाये जाते हैं।
  2. यहां की मिट्टी, कपास, चाय, रबड़, गन्ना, कॉफी, मसालों, तंबाकू आदि के उत्पादन के लिए महत्त्वपूर्ण है।
  3. यहां नदियां जलप्रपात बनाती हैं जो जलविद्युत् के उत्पादन के लिये उपयोगी है।
  4. इस भाग में साल, सागवान, चंदन आदि के वन पाये जाते हैं।
  5. यहां उटकमंड, पंचमढ़ी, महाबालेश्वर आदि पर्यटन स्थानों का विकास हुआ है।

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PSEB 9th Class Social Science Guide भारत : धरातल/भू-आकृतियां Important Questions and Answers

बहुविकल्पीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
माऊंट एवरेस्ट की ऊंचाई है-
(क) 9848 मी०
(ख) 7048 मी०
(ग) 8848 मी०
(घ) 6848 मी०।
उत्तर-
(ग) 8848 मी०

प्रश्न 2.
पूर्वी घाट का सबसे ऊँचा शिखर कौन-सा है ?
(क) डोडाबेटा
(ख) महेन्द्रगिरी
(ग) पुष्पागिरी
(घ) कोलाईमाला।
उत्तर-
(ख) महेन्द्रगिरी

प्रश्न 3.
हिमालय का अधिकतर भाग फैला है-
(क) भारत में
(ख) नेपाल में
(ग) तिब्बत में
(घ) भूटान में।
उत्तर-
(ग) तिब्बत में

प्रश्न 4.
हिमालय पर्वतों की उत्पत्ति हुई है-
(क) टैथीज़ सागर से
(ख) अंध-महासागर से
(ग) हिंद महासागर से
(घ) खाड़ी बंगाल से।
उत्तर-
(क) टैथीज़ सागर से

प्रश्न 5.
रावी और ब्यास के मध्य भाग को कहा जाता है-
(क) बिस्त दोआब
(ख) प्रायद्वीपीय पठार
(ग) चज दोआब
(घ) मालाबार दोआब।
उत्तर-
(क) बिस्त दोआब

प्रश्न 6.
कोंकण तट का विस्तार है-
(क) दमन से गोआ तक
(ख) मुम्बई से गोआ तक
(ग) दमन से बंगलौर तक
(घ) मुम्बई से दमन तक।
उत्तर-
(क) दमन से गोआ तक

प्रश्न 7.
पश्चिमी घाट की प्रमुख चोटी है-
(क) गुरु शिखर
(ख) कालस्थाए
(ग) कोंकण शिखर
(घ) माऊंट
उत्तर-
(ख) कालस्थाए

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प्रश्न 8.
सतलुज, ब्रह्मपुत्र तथा गंगा जल प्रवाह प्रणालियों से बना मैदान कहलाता ह-
(क) दक्षिणी विशाल मैदान
(ख) पूर्वी विशाल मैदान
(ग) उत्तरी विशाल मैदान
(घ) तिब्बत का मैदान।
उत्तर-
(ग) उत्तरी विशाल मैदान

रिक्त स्थानों की पूर्ति :

1. ट्रांस हिमालय की औसत ऊंचाई …………. मीटर है।
2. दफा बम्म तथा ……………. हिमालय की पूर्वी शाखाओं की प्रमुख चोटियां हैं।
3. ………….. विश्व की सबसे ऊंची पर्वत चोटी है।
4. त्रिभुजाकार भारतीय प्रायद्वीपीय पठार का शीर्ष बिंदु ………….. है।
5. थाल घाट, भोर घाट तथा …………. पश्चिमी घाट के दर्रे हैं।
6. चिल्का झील भारत की सबसे बड़ी …………… पानी की झील है।
7. ………… नदी भारतीय विशाल पठार के दो भागों के बीच सीमा बनाती है।
8. ……….. हिमालय भारत की सबसे लंबी और ऊंची पर्वत श्रृंखला है।
9. मालाबार तट का विस्तार गोआ से ………….. तक है।
10. छत्तीसगढ़ का मैदान ……………… द्वारा बना है।
उत्तर-

  1. 6000
  2. सारामती
  3. माऊंट एवरेस्ट
  4. कन्याकुमारी
  5. पाल घाट
  6. खारे
  7. नर्मदा
  8. बृहत्
  9. मंगलौर
  10. महानदी।

सत्य-असत्य कथन :

प्रश्न-सत्य/सही कथनों पर (✓) तथा असत्य/ग़लत कथनों पर (✗) का निशान लगाएं-
1. ट्रांस हिमालय को तिब्बत हिमालय भी कहा जाता है।
2. हिमालय के अधिकतर स्वास्थ्यवर्धक स्थान बृहत् हिमालय में स्थित हैं।
3. उत्तरी विशाल मैदान की रचना में कावेरी तथा कृष्णा नदियों का महत्त्वपूर्ण योगदान है।
4. पश्चिम घाट में थाल घाट, भोर घाट तथा पाल घाट नामक तीन दर्रे स्थित हैं।
5. पश्चिमी घाट को सहाद्रि भी कहा जाता है। |
उत्तर-

  1. (✓)
  2. (✗)
  3. (✗)
  4. (✗)
  5. (✓)

उचित मिलान :

1. उत्कल – सहयाद्रि
2. सागर मथ्था – अरब सागर
3. पश्चिमी घाट – तटवर्ती मैदान
4. लक्षद्वीप – माऊंट ऐवरेस्ट।
उत्तर-

  1. तटवर्ती मैदान
  2. माऊंट ऐवरेस्ट।
  3. घाट–सहयाद्रि
  4. लक्षद्वीप

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अति लघु उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
हिमालय पर्वत श्रेणी की आकृति कैसी है ?
उत्तर-
हिमालय पर्वत श्रेणी की आकृति एक चाप (Curve) जैसी है।

प्रश्न 2.
हिमालय पर्वतीय क्षेत्रों का जन्म कैसे हुआ ?
उत्तर-
हिमालय पर्वतीय क्षेत्र की उत्पत्ति टेथिस सागर में जमा गाद में बल पड़ने से हुई।

प्रश्न 3.
ट्रांस हिमालय की प्रमुख चोटियों के नाम बताइए।
उत्तर-
ट्रांस हिमालय की मुख्य चोटियां हैं—विश्व की दूसरी ऊंची चोटी माऊंट के (गाडविन ऑस्टिन), गशेरबम-I तथा गशेरबम-II

प्रश्न 4.
बृहत् हिमालय में 8000 मीटर से अधिक ऊंची चोटियां कौन-कौन सी हैं ?
उत्तर-
बृहत् हिमालय की 8000 मीटर से अधिक ऊंची चोटियां हैं-माऊंट एवरेस्ट (8848 मीटर), कंचनजंगा, मकालू, धौलागिरी, अन्नपूर्णा आदि।

प्रश्न 5.
भारत की युवा एवं प्राचीन पर्वत मालाओं के नाम बताइए।
उत्तर-
हिमालय पर्वत भारत के युवा पर्वत हैं और वहां के प्राचीन पर्वत अरावली, विंध्याचल, सतपुड़ा आदि हैं।

प्रश्न 6.
देश में रिफ्ट या दरार घाटियां कहां मिलती हैं ?
उत्तर-
भारत में दरार घाटियां प्रायद्वीपीय पठार में पाई जाती हैं।

प्रश्न 7.
डेल्टा से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
नदी के निचले भागों में बने स्थल-रूप को डेल्टा कहते हैं।

प्रश्न 8.
भारत के मुख्य डेल्टाई क्षेत्रों के नाम बताओ।
उत्तर-
भारत के प्रमुख डेल्टाई क्षेत्र हैं-गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा क्षेत्र, गोदावरी नदी डेल्टा क्षेत्र, कावेरी नदी डेल्टा क्षेत्र, कृष्णा नदी डेल्टा क्षेत्र तथा महानदी का डेल्टा क्षेत्र।

प्रश्न 9.
हिमालय पर्वत के दरों के नाम बताइए।
उत्तर-
हिमालय पर्वत में पाये जाने वाले मुख्य दरे हैं-बुरज़िल, जोझीला, लानक ला, चांग ला, खुरनक ला, बाटा खैपचा ला, शिपकी ला, नाथु ला, तत्कला कोट इत्यादि।

प्रश्न 10.
लघु हिमालय की मुख्य पर्वतीय श्रेणियों के नाम बताइए।
उत्तर-
लघु हिमालय की पर्वत श्रेणियां हैं-

  1. कश्मीर में पीर पंजाल तथा नागा टिब्बा,
  2. हिमाचल में धौलाधार तथा कुमाऊं,
  3. नेपाल में महाभारत,
  4. उत्तराखंड में मसूरी,
  5. भूटान में थिम्पू।

प्रश्न 11.
लघु हिमालय में स्थित स्वास्थ्यवर्धक घाटियों के नाम बताइए।
उत्तर-
लघु हिमालय के मुख्य स्वास्थ्यवर्धक स्थान शिमला, श्रीनगर, मसूरी, नैनीतालं, दार्जिलिंग तथा चकराता हैं।

प्रश्न 12.
देश की प्रमुख ‘दून’ घाटियों के नाम बताइए।
उत्तर-
देश की मुख्य दून घाटियां हैं-देहरादून, पतली दून, कोथरीदून, ऊधमपुर, कोटली आदि।

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प्रश्न 13.
हिमालय क्षेत्र की पूर्वी किनारे वाली प्रशाखाओं (Eastern off shoots) के नाम बताइए।
उत्तर-
हिमालय की प्रमुख पूर्वी श्रेणियां पटकोई बम्म, गारो, खासी, जयंतिया तथा त्रिपुरा की पहाड़ियां हैं।

प्रश्न 14.
उत्तर-पश्चिमी मैदान में कौन-कौन से अंतर-दोआब (Inter fluxes) मिलते हैं ?
उत्तर-

  1. बारी दोआब तथा माझा का मैदान,
  2. बिस्त दोआब,
  3. मालवा का मैदान,
  4. हरियाणा का मैदान।

प्रश्न 15.
ब्रह्मपुत्र के मैदानों की औसत ऊंचाई कितनी है ?
उत्तर-
250-550 मी०।

प्रश्न 16.
(i) अरावली पर्वत श्रेणी का विस्तार कहां से कहां तक है तथा
(ii) इसकी सबसे ऊंची चोटी का नाम क्या है ?
उत्तर-

  1. अरावली पर्वत श्रेणी दिल्ली से गुजरात तक फैली हुई है।
  2. इसकी सबसे ऊंची चोटी का नाम गुरु शिखर है।

प्रश्न 17.
थारमरुस्थल (भारत) की तीन खारे पानी की झीलों के नाम बताओ।
उत्तर-
सांभर, चिदवाना तथा सारमोल।

प्रश्न 18.
पूर्वी घाट की दक्षिणी पहाड़ियों के नाम बताइए।
उत्तर-
जवद्दी (Jawaddi), गिन्गी, शिवराई, कौलईमाला, पंचमलाई, गोंडुमलाई इत्यादि पूर्वी घाट की दक्षिणी पहाड़ियां हैं।

प्रश्न 19.
दक्षिणी पठार के पहाड़ी भागों पर कौन-कौन से रमणीय स्थान ( हिल स्टेशन ) हैं ?
उत्तर-
दोदाबेटा, ऊटाकमुंड, पलनी तथा कोडाईकनाल।

प्रश्न 20.
अरब सागर में मिलने वाले द्वीपों के नाम बताओ।
उत्तर-
अरब सागर में स्थित उत्तरी द्वीपों को अमीनोदिवी (Aminolivi), मध्यवर्ती द्वीपों को लक्काद्वीप तथा दक्षिणी भाग को मिनीकोय कहा जाता है।

प्रश्न 21.
देश का दक्षिणी सीमा बिंदु कहां स्थित है ?
उत्तर-
देश का दक्षिणी सीमा बिंदु ग्रेट निकोबार के इंदिरा प्वाइंट (Indira Point) पर स्थित है।

प्रश्न 22.
तटीय मैदानों से समस्त भारत को मिलने वाले तीन प्रमुख लाभों को बताओ।
उत्तर-

  1. गहरे प्राकृतिक पोताश्रय
  2. लैगून तथा
  3. उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी की प्राप्ति।

प्रश्न 23.
ट्रांस हिमालय को ‘तिब्बत हिमालय’ क्यों कहा जाता है ?
उत्तर-
इसका कारण यह है कि ट्रांस हिमालय का अधिकतर भाग तिब्बत में है।

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प्रश्न 24.
दून किसे कहते हैं ?
उत्तर-
‘दून’ बाह्य हिमालय में स्थित वे झीलें हैं जो मिट्टी से भर गई हैं।

प्रश्न 25.
विश्व की दूसरी सबसे ऊंची पर्वत चोटी कौन-सी है ?
उत्तर-
K2

प्रश्न 26.
भारत के प्रायद्वीपीय पठार का शीर्ष बिंदु कौन-सा है ?
उत्तर-
कन्याकुमारी।

प्रश्न 27.
भारत के किस राज्य में पश्चिमी घाट नीलगिरी के नाम से विख्यात है ?
उत्तर-
तमिलनाडु।

प्रश्न 28.
कौन-सी नदी भारतीय विशाल पठार के दो भागों के बीच सीमा बनाती है ?
उत्तर-
नर्मदा।

प्रश्न 29.
भारत के प्रमुख द्वीप समूह कौन-कौन से हैं और ये कहां स्थित हैं ?
उत्तर-

  1. भारत के प्रमुख द्वीप समूह अंडमान तथा निकोबार और लक्षद्वीप हैं।
  2. ये क्रमश: बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में स्थित हैं।

प्रश्न 30.
हिमालय की कौन-सी श्रेणी शिवालिक कहलाती है ?
उत्तर-
बाह्य हिमालय।

प्रश्न 31.
भारत के उत्तरी विशाल मैदान की रचना में किस-किस जल प्रवाह प्रणाली का योगदान रहा है ?
उत्तर-
भारत के उत्तरी विशाल मैदान की रचना में सतलुज, ब्रह्मपुत्र तथा गंगा जल प्रवाह प्रणालियों का योगदान है।

प्रश्न 32.
गोआ से मंगलौर तक का समुद्री तट क्या कहलाता है ?
उत्तर-
मालाबार तट।

प्रश्न 33.
कोंकण तट कहां से कहां तक फैला है ?
उत्तर-
कोंकण तट दमन से गोआ तक फैला है।

प्रश्न 34.
भारत का कौन-सा भू-भाग खनिजों का विशाल भंडार है ?
उत्तर–
प्रायद्वीपीय पठार।

लघु उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
हिमालय पर्वत के क्रमवार उत्थान (uplifts) के बारे में कोई दो प्रमाण दीजिए।
उत्तर-
हिमालय का जन्म आज से लगभग 400 लाख वर्ष पहले टैथीज (Tythes) सागर से हुआ है। एक लंबे समय तक तिब्बत पठार तथा दक्षिण पठार की नदियां टैथीज सागर में तलछट लाकर जमा करती रहीं। फिर दोनों पठार एक-दूसरे की ओर खिसकने लगे। इससे तलछट में मोड़ पड़ने लगे और यह ऊंचा उठने लगा। इसी उठाव से हिमालय पर्वत का निर्माण हुआ है। यह क्रमिक उठाव आज भी जारी है।

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प्रश्न 2.
हिमालय पर्वत माला एवं दक्षिण के पठार के बीच क्या समानताएं पायी जाती हैं ?
उत्तर-
हिमालय पर्वत तथा दक्षिण के पठार में निम्नलिखित समानताएं पायी जाती हैं-

  1. इन दोनों भू-भागों का निर्माण एक-दूसरे की उपस्थिति के कारण हुआ।
  2. हिमालय पर्वतों की भांति दक्षिणी पठार में भी अनेक खनिज पदार्थ पाये जाते हैं।
  3. इन दोनों भौतिक भागों में वन पाये जाते हैं जो देश में लकड़ी की मांग को पूरा करते हैं।

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प्रश्न 3. क्या हिमालय पर्वत अभी भी युवा अवस्था में है ?
उत्तर-इसमें कोई संदेह नहीं है कि हिमालय पर्वत अभी भी युवा अवस्था में है। इनकी उत्पत्ति नदियों द्वारा टैथीज सागर में बिछाई गई तलछट से हुई है। बाद में इसके दोनों ओर स्थित भूखंडों के एक-दूसरे की ओर खिसकने से तलछट में मोड़ पड़ गया जिससे हिमालय पर्वतों की ऊंचाई बढ़ गई। आज भी ये पर्वत ऊंचे उठ रहे हैं। इसके अतिरिक्त इन पर्वतों का निर्माण देश के अन्य पर्वतों की तुलना में काफ़ी बाद में हुआ। अतः हम कह सकते हैं कि हिमालय पर्वत अभी भी अपनी युवा अवस्था में है।

प्रश्न 4.
उत्तरी विशाल मैदानी भाग में किस-किस जलोढ़ी मैदान का निर्माण हुआ है ?
उत्तर-
उत्तरी विशाल मैदान में निम्नलिखित जलोढ़ मैदानों का निर्माण हुआ है-

  1. खाडर के मैदान,
  2. बांगर के मैदान,
  3. भाबर के मैदान,
  4. तराई के मैदान,
  5. रेह व कल्लर मिट्टी के बंजर मैदान,
  6. भूर।

प्रश्न 5.
स्थिति के आधार पर भारत के द्वीपों को कितने भागों में बांटा जा सकता है ? उदाहरणों सहित व्याख्या करें।
उत्तर-
स्थिति के अनुसार भारत के द्वीपों को दो मुख्य भागों में बांटा जा सकता है-तट से दूर स्थित द्वीप तथा तट के निकट स्थित द्वीप।

  1. तट से दूर स्थित द्वीप-इन द्वीपों की कुल संख्या 230 के लगभग है। ये समूहों में पाये जाते हैं। दक्षिणी-पूर्वी
    अरब सागर में स्थित ऐसे द्वीपों का निर्माण प्रवाल भित्तियों के जमाव से हुआ है। इन्हें लक्षद्वीप कहते हैं। अन्य द्वीप क्रमशः अमीनदिवी, लक्काद्वीप तथा मिनीकोय के नाम से प्रसिद्ध हैं। बंगाल की खाड़ी में तट से दूर स्थित द्वीपों के नाम हैं-अंडमान द्वीप समूह, निकोबार, नारकोडम तथा बैरन आदि।
  2. तट के निकट स्थित द्वीप-इन द्वीपों में गंगा के डेल्टे के निकट स्थित सागर, शोरट, ह्वीलर, न्युमूर आदि द्वीप शामिल हैं। इस प्रकार के अन्य द्वीप हैं-भासरा, दीव, बन, ऐलिफैंटा इत्यादि।

प्रश्न 6.
तटवर्ती मैदानों की देश को क्या महत्त्वपूर्ण देन है ?
उत्तर-
तटीय मैदानों की देश को निम्नलिखित देन है-

  1. तटीय मैदान बढ़िया किस्म के चावल, खजूर, नारियल, मसालों, अदरक, लौंग, इलायची आदि की कृषि के लिए विख्यात हैं।
  2. ये मैदान अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में अग्रणी हैं।
  3. इन मैदानों से समस्त देश में बढ़िया प्रकार की समुद्री मछलियां भेजी जाती हैं।
  4. तटीय मैदानों में स्थित गोआ, तमिलनाडु तथा मुंबई के समुद्री बीच पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं।
  5. देश में प्रयोग होने वाला नमक पश्चिमी तटीय मैदानों में तैयार किया जाता है।

प्रश्न 7.
तट के मैदान न केवल संकरे हैं, बल्कि डेल्टाई निक्षेपण से भी विहीन हैं, व्याख्या कीजिए।
उत्तर-
भारत के पश्चिमी तट के मैदान संकरे हैं और यहां डेल्टाई निक्षेप का भी अभाव है। इसके कारण निम्नलिखित हैं

  1. पश्चिमी तट पर सागर दूर तक अंदर चला गया है। इसके अतिरिक्त पश्चिमी घाट की पहाड़ियां कटी-फटी नहीं हैं। परिणामस्वरूप पश्चिमी तट के मैदानों के विस्तार में बाधा आ गई है। इसी कारण ये मैदान संकरे हैं।
  2. जो नदियां पश्चिमी घाट से होकर अरब सागर में गिरती हैं, उनका बहाव तेज़ है, परंतु बहाव क्षेत्र कम है। परिणामस्वरूप ये नदियां (नर्मदा, ताप्ती) डेल्टे नहीं बनातीं, अपितु ज्वारनदमुख बनाती हैं।

प्रश्न 8.
प्रायद्वीपीय पठार का देश के लिए क्या महत्त्व रहा है ? कोई तीन बिंदु लिखिए।
उत्तर-

  1. प्रायद्वीपीय पठार प्राचीन गोंडवाना लैंड का भाग है जो खनिज पदार्थों में धनी है। अतः यह देश के लिए खनिज पदार्थों का बहुत बड़ा स्रोत रहा है।
  2. प्रायद्वीपीय पठार के दोनों ओर घाटों पर बने जल-प्रपात तटीय मैदानों को सिंचाई के लिए जल तथा औद्योगिक विकास के लिए बिजली देते हैं।
  3. यहां के वन देश के अन्य भागों में लकड़ी की मांग को पूरा करते हैं।

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प्रश्न 9.
निम्नलिखित में अंतर स्पष्ट करें-
(i) बांगर और खादर/खाडर
(ii) नाले (चो), नदी और बंजर भूमि।
उत्तर-

  1. बांगर और खादर/खाडर-उत्तर प्रदेश, बिहार तथा पश्चिमी बंगाल में बहने वाली नदियों में प्रत्येक वर्ष बाढ़ आ जाती है और वे अपने आस-पास के क्षेत्रों में मिट्टी की नई परतें बिछा देती हैं। बाढ़ से प्रभावित इस तरह के मैदानों को खादर के मैदान भी कहा जाता है।
    बांगर वह ऊंची भूमि होती है जो बाढ़ के पानी से प्रभावित नहीं होती और जिसमें चूने के कंकड़-पत्थर अधिक मात्रा में मिलते हैं। इसे रेह तथा कल्लर भूमि भी कहते हैं।
  2. नाले (चो), नदी और बंजर भूमि-चो वे छोटी-छोटी नदियां होती हैं जो वर्षा ऋतु में अकस्मात् सक्रिय हो उठती हैं। ये भूमि में गहरे गड्ढे बनाकर उसे कृषि के अयोग्य बना देते हैं।
    बहते हुए जल को नदी कहते हैं। इसका स्रोत किसी पर्वतीय स्थान (हिमानी) पर होता है। यह अंततः किसी सागर या भूमिगत स्थान पर जा मिलती है। बंजर भूमि से अभिप्राय ऐसी भूमि से है जिसकी उपजाऊ क्षमता न के बराबर होती है। ऐसी भूमि खेती के अयोग्य होती है। भारत में उत्तरी प्रायद्वीपीय पठार तथा पश्चिमी शिवालिक पहाड़ियों के आस-पास बंजर भूमि का विस्तार है।

प्रश्न 10.
हिमालय पर्वत की चार विशेषताएं बताओ।
उत्तर-

  1. ये पर्वत भारत के उत्तर में स्थित हैं। ये एक चाप की तरह कश्मीर से अरुणाचल प्रदेश तक फैले हुए हैं। संसार का कोई भी पर्वत इनसे अधिक ऊंचा नहीं है। इनकी लंबाई 2400 किलोमीटर और चौड़ाई 240 से 320 किलोमीटर तक है।
  2. हिमालय पर्वत की तीन समानांतर शृंखलाएं हैं। उत्तरी श्रृंखला सबसे ऊंची है तथा दक्षिणी श्रृंखला सबसे कम ऊंची है। इन श्रृंखलाओं के बीच बड़ी उपजाऊ घाटियां हैं।
  3. इन पर्वतों की मुख्य चोटियां ऐवरेस्ट, नागा पर्वत, गाडविन ऑस्टिन (K2), नीलगिरि, कंचनजंगा आदि हैं। ऐवरेस्ट संसार की सबसे ऊंची पर्वत चोटी है। इसकी ऊंचाई 8848 मीटर है।
  4. हिमालय की पूर्वी शाखाएं.भारत तथा म्यनमार की सीमा बनाती हैं। हिमालय की पश्चिमी शाखाएं पाकिस्तान में हैं। इनके नाम सुलेमान तथा किरथर पर्वत हैं। इन शाखाओं में खैबर तथा बोलान के प्रे स्थित हैं।

प्रश्न 11.
भारत के विशाल उत्तरी मैदान का संक्षिप्त वर्णन कीजिए। भारत की अर्थव्यवस्था में इनका क्या महत्त्व है ?
उत्तर-
भारत का विशाल उत्तरी मैदान हिमालय पर्वत के साथ-साथ पश्चिम से पूर्व तक फैला हुआ है। इसका विस्तार राजस्थान से असम तक है। इसके कुछ पश्चिमी रेतीले भाग को छोड़कर शेष सारा मैदान बहुत ही उपजाऊ है। इनका निर्माण नदियों द्वारा बहाकर लाई गई जलोढ़ मिट्टी से हुआ है। इसलिए इसे जलोढ़ मैदान भी कहते हैं। इसे चार भागों में बांटा जा सकता है–

  1. पंजाब-हरियाणा का मैदान,
  2. थार मरुस्थलीय मैदान,
  3. गंगा का मैदान,
  4.  ब्रह्मपुत्र का मैदान। भारत की आर्थिक समृद्धि का आधार यही विशाल मैदान है। यहां नाना प्रकार की फसलें उगाई जाती हैं। इसके पूर्वी भागों में खनिज पदार्थों के विशाल भंडार विद्यमान हैं।

प्रश्न 12.
भारत के पश्चिमी तथा पूर्वी तटीय मैदानों की तुलना करो।
उत्तर-

पश्चिमी तटीय मैदान पूर्वी तटीय मैदान
1. ये मैदान पश्चिमी घाट तथा अरब सागर के बीच स्थित हैं। 1. ये मैदान पूर्वी घाट तथा खाड़ी बंगाल के बीच स्थित हैं।
2. ये मैदान बहुत ही असमतल एवं संकुचित हैं। 2. ये मैदान अपेक्षाकृत समतल एवं चौड़े हैं
3. इस मैदान में कई ज्वारनदमुख और लैगून हैं। 3. इस मैदान में कई नदी डेल्टा हैं।

प्रश्न 13.
किन्हीं चार बातों के आधार पर प्रायद्वीपीय पठार तथा उत्तर के विशाल मैदानों की तुलनात्मक समीक्षा कीजिए।
उत्तर-

  1. उत्तर के विशाल मैदानों का निर्माण जलोढ़ मिट्टी से हुआ है जबकि प्रायद्वीपीय पठार का निर्माण प्राचीन ठोस चट्टानों से हुआ है।
  2. उत्तर के विशाल मैदानों की समुद्र तल से ऊंचाई प्रायद्वीपीय पठार की अपेक्षा बहुत कम है।
  3. विशाल मैदानों की नदियां हिमालय पर्वत से निकलने के कारण सारा वर्ष बहती हैं। इसके विपरीत पठारी भाग की नदियां केवल बरसात के मौसम में ही बहती हैं।
  4. विशाल मैदानों की भूमि उपजाऊ होने के कारण यहां गेहूं, जौ, चना, चावल आदि की कृषि होती है। दूसरी ओर पठारी भाग में कपास, बाजरा तथा मूंगफली की कृषि की जाती है।

प्रश्न 14.
ट्रांस हिमालय से क्या भाव है ?
उत्तर-
हिमालय पर्वत की ये विशाल श्रेणियां भारत के उत्तर-पश्चिम में स्थित पामीर की गांठ (Pamir’s Knot) से उत्तर-पूर्वी दिशा के समानांतर फैली हुई हैं। इसका अधिकतर भाग तिब्बत में है। इसलिए इन्हें ‘तिब्बत हिमालय’ भी कहा जाता है। इनकी कुल लंबाई 1000 किलोमीटर और चौड़ाई (दोनों किनारों पर) 40 किलोमीटर है परंतु इसका केंद्रीय भाग 222 किलोमीटर के लगभग हो जाता है। इनकी औसत ऊंचाई 6000 मीटर है। इसकी मुख्य पर्वतीय श्रेणियां जास्कर, कराकोरम, लद्दाख और कैलाश हैं। यह पर्वतीय क्षेत्र बहुत ऊंची एवं मोड़दार चोटियों तथा विशाल हिमानियों (Glaciers) के लिए प्रसिद्ध है। माऊंट K2 इस क्षेत्र की सबसे ऊंची एवम् संसार की दूसरी सबसे ऊंची चोटी है।

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प्रश्न 15.
बाह्य हिमालय पर एक नोट लिखो।
उत्तर-
बाह्य हिमालय को शिवालिक श्रेणी, उप-हिमालय और दक्षिणी हिमालय के नाम से भी पुकारा जाता है। ये पर्वत श्रेणियां लघु हिमालय के दक्षिण भाग के समानांतर पूर्व से पश्चिम की तरफ फैली हुई हैं। इनकी औसत लंबाई 2400 किलोमीटर मीटर तथा चौड़ाई 50 से 15 किलोमीटर तक है। इस क्षेत्र का निर्माण टरशरी युग में हुआ था। इस क्षेत्र में लंबी व गहरी तलछटी चट्टानें मिलती हैं जिनकी रचना चिकनी मिट्टी, रेत, पत्थर, स्लेट आदि के निक्षेपों द्वारा हुई है जो हिमालय से अपरदन द्वारा इन क्षेत्रों में जमा किया जाता रहा है। इस भाग की प्रसिद्ध घाटियां देहरादून, पतलीदून, कोथरीदून, छोखंभा, ऊधमपुर तथा कोटली हैं।

प्रश्न 16.
हिमालय की पूर्वी तथा पश्चिमी शाखाओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
(क) पूर्वी शाखाएं-इन शाखाओं को पूर्वांचल (Purvanchal) भी कहते हैं। अरुणाचल प्रदेश में ब्रह्मपुत्र नदी की दिहांग गॉर्ज से लेकर ये श्रृंखलाएं भारत और म्यनमार (बर्मा) की सीमा बनाती हुई दो भागों में बँट जाती हैं

  1. गंगा-ब्रह्मपुत्र द्वारा निर्मित शाखाएं बंगलादेश के मैदानों तक पहुंचती हैं जिसमें दफा बम्म, पटकोई बम्म, गारो, खासी, जयंतिया व त्रिपुरा की पहाड़ियाँ आती हैं।
  2. ये शाखाएं पटकोई बम्म से शुरू होकर नागा पर्वत, बरेल, लुशाई से होती हुई इरावदी के डेल्टे तक पहुंचती हैं। . हिमालय की इन पूर्वी शाखाओं में दफा बम्म और सारामती प्रमुख ऊंची चोटियां हैं।

(ख) पश्चिमी शाखाएं-उत्तर-पश्चिम में पामीर की गांठ से हिमालय श्रेणियों की आगे दो उप-शाखाएं बन जाती हैं। एक शाखा पाकिस्तान के मध्य में से सॉल्ट रेंज, सुलेमान व किरथर होती हुई दक्षिणी-पश्चिमी दिशा में अरब सागर तक पहुंचती है। दूसरी शाखा अफ़गानिस्तान से होकर हिंदुकुश तथा कॉकेशस पर्वत की श्रृंखला से जा मिलती है।
भारत-प्रमुख पर्वत चोटियां
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प्रश्न 17.
विशाल उत्तरी मैदानों की चार धरातलीय विशेषताएं बताओ।
उत्तर-
विशाल उत्तरी मैदानों की चार प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं-

  1. समतल मैदान-संपूर्ण उत्तरी भारतीय मैदान समतल और सपाट है।
  2. नदियों का जाल-इस संपूर्ण मैदानी क्षेत्र में दरियाओं व नदनालों (Choes) का जाल सा बिछा हुआ है। इनके कारण यहां दोआब क्षेत्रों का निर्माण हुआ है। पंजाब राज्य का नाम भी पांच नदियों के बहने के कारण तथा एकसार मिट्टी जमा होने के कारण पंज-आब पड़ा है।
  3. भू-आकार-इन मैदानों में जलोढ़ पंखे, जलोढ़ीय शंकु, विसर्पाकार नदियां, प्राकृतिक सीढ़ी बंध, बाढ़ के मैदान जैसे भू-आकार देखने को मिलते हैं।
  4. मैदानी तलछट-इन मैदानों के तलछट में चिकनी मिट्टी (clay), बालू, दोमट और सिल्ट ज्यादा मोटाई में मिलती है। चिकनी मिट्टी अर्थात् पांडु मिट्टी नदियों के मुहानों के समीप अधिक मिलती है और ऊपरी भागों में बालू की मात्रा में वृद्धि होती जाती है।

प्रश्न 18.
विशाल उत्तरी मैदानों में पाये जाने वाले चार जलोढ़क मैदानों का वर्णन करो।
उत्तर-
विशाल उत्तरी मैदानों में पाये जाने वाले चार जलोढक मैदानों का वर्णन इस प्रकार है-

  1. खादर के मैदान-उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिमी बंगाल की नदियों में हर साल बाढ़ों के आने के कारण मृदा की नई तहें बिछ जाती हैं। इन नदियों के आस-पास बाढ़ वाले क्षेत्रों को खादर के मैदान कहा जाता है।
  2. बांगर के मैदान-ये वे ऊंचे मैदानी क्षेत्र हैं जहाँ पर बाढ़ का पानी नहीं पहुंच पाता। यहाँ की पुरानी तलछटों में चूने के कंकड़ अधिक मात्रा में मिलते हैं।
  3. भाबर के मैदान-उत्तर भारत में जब दरिया शिवालिक के पहाड़ी प्रदेशों को छोड़कर, समतल प्रदेश में प्रवेश करते हैं तो यह अपने साथ लाई बालू, कंकड़, बजरी, पत्थर आदि के जमाव द्वारा जिन मैदानों का निर्माण करते हैं, उसे भाबर के मैदान कहा जाता है। ऐसे मैदानी क्षेत्रों में छोटी-छोटी नदियों का पानी अक्सर धरती के नीचे बहता है।
  4. तराई के मैदान-जब भाबर क्षेत्रों में अलोप हुई नदियों का पानी पुनः धरातल से निकल आता है तब पानी के इकट्ठे हो जाने के कारण दलदली क्षेत्र (Marshy Lands) बन जाते हैं। इसमें गर्मी व नमी के कारण सघन वन हो जाते हैं और जंगली जीव-जंतुओं की भरमार हो जाती है।

प्रश्न 19.
पंजाब-हरियाणा मैदान की चार विशेषताएं लिखो। .
उत्तर-

  1. यह मैदान सतलुज, रावी, ब्यास व घग्घर नदियों द्वारा लाई गई मिट्टियों के जमाव से बना है। 1947 में भारत व पाकिस्तान के बीच अंतर्राष्ट्रीय सीमा के बन जाने के कारण इसका अधिकतर भाग पाकिस्तान में चला गया है।
  2. उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व तक इनकी लंबाई 640 किलोमीटर तथा औसत चौड़ाई 300 किलोमीटर है।
  3. इस मैदान की औसत ऊंचाई 300 मीटर तक है।
  4. इस उपजाऊ मैदान का क्षेत्रफल 1.75 लाख वर्ग किलोमीटर है।

प्रश्न 20.
ब्रह्मपुत्र के मैदान पर एक भौगोलिक टिप्पणी लिखो।
उत्तर-
ब्रह्मपुत्र के मैदान को असम का मैदान भी कहा जाता है। यह असम की पश्चिमी सीमा से लेकर असम के सुदूर उत्तर-पूर्व में सादिआ (Sadiya) तक फैला हुआ है। समुद्र तल से इसकी औसत ऊँचाई 250-550 मी० है। इसका निर्माण ब्रह्मपुत्र तथा उसकी सहायक नदियों द्वारा बिछाई गई मिट्टी से हुआ है। इस तंग मैदान में लगभग प्रत्येक वर्ष बाढ़ों के कारण नवीन तलछटों का निक्षेप होता रहता है। इस मैदान का ढलान उत्तर-पूर्वी तथा पश्चिम की ओर है।

दीर्घ उत्तरों वाले प्रश्न।

प्रश्न 1.
भारत को धरातलीय आधार पर विभिन्न भागों में बांटो तथा किसी एक भाग का विस्तार से वर्णन करो।
उत्तर-
धरातल के आधार पर भारत को हम पांच भौतिक विभागों में बांट सकते हैं-

  1. हिमालय पर्वतीय क्षेत्र
  2. उत्तर के मैदान व मरुस्थल
  3. प्रायद्वीपीय पर्वत
  4. तट के मैदान
  5.  भारतीय द्वीप समूह।

इनमें से हिमालय पर्वतीय क्षेत्र का वर्णन इस प्रकार है
हिमालय पर्वत-हिमालय पर्वत भारत की उत्तरी सीमा पर एक चाप के रूप में फैले हैं। पूर्व से पश्चिम तक इसकी लंबाई 2400 कि० मी० तथा कश्मीर हिमालय में इसकी चौड़ाई 400 से 500 कि० मी० तक है।
ऊंचाई के आधार पर हिमालय पर्वतों को निम्नलिखित पांच उपभागों में बांटा जा सकता

  1. ट्रांस हिमालय-इस विशाल पर्वत-श्रेणी का अधिकांश भाग तिब्बत में होने के कारण इसे तिब्बती हिमालय भी कहा जाता है। इसकी कुल लंबाई 1000 कि० मी० तथा चौड़ाई (किनारों पर) 40 कि० मी० है। इन पर्वतों की औसत ऊंचाई 6000 मी० है। भारत की सबसे ऊँची चोटी माऊंट K2 गॉडविन ऑस्टिन तथा गशेरबम I तथा II इन पर्वतों की सबसे ऊंची चोटियां हैं।
  2. महान् (उच्चतम) हिमालय- यह भारत की सबसे लंबी तथा ऊंची पर्वत-श्रेणी है। इसकी लंबाई 2400 कि० मी० तथा औसत ऊँचाई 5100 मी० है। इसकी औसत ऊंचाई 6000 मीटर है। संसार की सबसे ऊंची चोटी माऊंट एवरेस्ट (8848 मी०) इसी पर्वत श्रेणी में स्थित है।
  3. लघु-हिमालय-इसे मध्य हिमालय भी कहा जाता है। इसकी औसत ऊंचाई 5050 मी० से लेकर 5050 मी० तक है। इस पर्वत श्रेणी की ऊंची चोटियां शीत ऋतु में बर्फ से ढक जाती हैं। यहां शिमला, श्रीनगर, मसूरी, नैनीताल, दार्जिलिंग, चकराता आदि स्वास्थ्यवर्धक स्थान पाये जाते हैं।
  4. बाह्य हिमालय-इस पर्वत श्रेणी को शिवालिक श्रेणी, उप-हिमालय तथा दक्षिणी हिमालय के नाम से भी पुकारा जाता है। इन पर्वतों के दक्षिण में कई झीलें पायी जाती थीं। बाद में इनमें मिट्टी भर गई और इन्हें दून (Doon) (पूर्व में इन्हें द्वार (Duar) कहा जाता है) कहा जाने लगा। इनमें देहरादून, पतलीदून, कोथरीदून, ऊधमपुर, कोटली आदि शामिल हैं।
  5. पहाड़ी शाखाएं-हिमालय पर्वतों की दो शाखाएं हैं–पूर्वी शाखाएं तथा पश्चिमी शाखाएं। पूर्वी शाखाएं-इन शाखाओं को पूर्वांचल भी कहा जाता है। इन शाखाओं में ढफा बुम, पटकाई बुम, गारो, खासी, जैंतिया तथा त्रिपुरा की पहाड़ियां सम्मिलित हैं।
    पश्चिमी शाखाएं-उत्तर-पश्चिम में पामीर की गांठ से हिमालय की दो उपशाखाएं बन जाती हैं। एक शाखा पाकिस्तान की साल्ट रेंज, सुलेमान तथा किरथर होते हुए दक्षिण-पश्चिम में अरब सागर तक पहुंचती है। दूसरी शाखा अफ़गानिस्तान में स्थित हिंदुकुश तथा कॉकेशस पर्वत श्रेणी से जा मिलती है।

प्रश्न 2.
हिमालय की उत्पत्ति एवं बनावट पर लेख लिखो और बताइए कि क्या हिमालय अभी भी बढ़ रहे हैं ?
उत्तर-
हिमालय की उत्पत्ति तथा बनावट का वर्णन इस प्रकार है-
उत्पत्ति-जहां आज हिमालय है, वहां कभी टैथीज (Tythes) नाम का सागर लहराता था। यह दो विशाल भू-खंडों से घिरा एक लंबा और उथला सागर था। इसके उत्तर में अंगारा लैंड और दक्षिण में गोंडवानालैंड नाम के दो भू-खंड थे। लाखों वर्षों तक इन दो भू-खंडों का अपरदन होता रहा। अपरदित पदार्थ अर्थात् कंकड़, पत्थर, मिट्टी, गाद आदि टैथीज सागर में जमा होते रहे। ये दो विशाल भू-खंड धीरे-धीरे एक-दूसरे की ओर खिसकते रहे। सागर में जमी मिट्टी आदि की परतों में मोड़ (वलय) पड़ने लगे। ये वलय द्वीपों की एक श्रृंखला के रूप में उभर कर पानी की सतह से ऊपर आ गये। कालान्तर में विशाल वलित पर्वत श्रेणियों का निर्माण हुआ, जिन्हें हम आज हिमालय के नाम से पुकारते हैं।

बनावट-हिमालय पर्वतीय क्षेत्र एक उत्तल चाप (Convex Curve) जैसा दिखाई देता है जिसका मध्यवर्ती भाग नेपाल की सीमा तक झुका हुआ है। इसके उत्तर-पश्चिमी किनारे सफ़ेद कोह, सुलेमान तथा किरथर की पहाड़ियों द्वारा अरब सागर में पहुंच जाते हैं। इसी प्रकार के उत्तर-पूर्वी किनारे टैनेसरीम पर्वत श्रेणियों के माध्यम से बंगाल की खाड़ी तक पहुंच जाते हैं।

हिमालय पर्वतों की दक्षिणी ढाल भारत की ओर है। यह ढाल बहुत ही तीखी है। परंतु इसकी उत्तरी ढाल साधारण है। यह चीन की ओर है। दक्षिणी ढाल के अधिक तीखा होने के कारण इस पर जल-प्रपात तथा तंग नदी-घाटियां पाई जाती हैं।

ऊंचाई की दृष्टि से हिमालय की पर्वत श्रेणियों को पांच उपभागों में बांटा जा सकता है-

  1. ट्रांस हिमालय,
  2. महान् हिमालय,
  3. लघु हिमालय,
  4. बाह्य हिमालय तथा
  5. पहाड़ी शाखाएं।

हिमालय पर्वत की मुख्य विशेषता यह है कि ये आज भी ऊंचे उठ रहे हैं।

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प्रश्न 3.
देश के विशाल उत्तरी मैदानों के आकार, जन्म एवं क्षेत्रीय विभाजन का वर्णन करो।
उत्तर-
भारत के विशाल उत्तरी मैदानों के आकार, जन्म तथा क्षेत्रीय विभाजन का वर्णन इस प्रकार है
आकार-रावी नदी से लेकर गंगा नदी के डैल्टे तक इस मैदान की कुल लंबाई लगभग 2400 कि० मी० तथा चौड़ाई 150 से 200 कि० मी० तक है। समुद्र तल से इसकी औसत ऊंचाई 180 मी० के लगभग है। अनुमान है कि इसकी गहराई 5 कि० मी० से लेकर 32 कि० मी० तक है। इसका कुल क्षेत्रफल 7.5 लाख वर्ग कि० मी० है।
जन्म-भारत का उत्तरी मैदान उत्तर में हिमालय तथा दक्षिण में विशाल प्रायद्वीपीय पठार से निकलने वाली नदियों द्वारा बहाकर लाई हुई मिट्टी से बना है। लाखों, करोड़ों वर्ष पहले भू-वैज्ञानिक काल में उत्तरी मैदान के स्थान पर टैथीज नामक एक सागर लहराता था। इस सागर से विशाल वलित पर्वत श्रेणियों का निर्माण हुआ, जिन्हें हम हिमालय के नाम से पुकारते हैं। हिमालय की ऊंचाई बढ़ने के साथ-साथ उस पर नदियां तथा अनाच्छादन के दूसरे कारक सक्रिय हो गए। इन कारकों ने पर्वत प्रदेश का अपरदन किया और यह भारी मात्रा में गाद ला-ला कर टैथीज सागर में जमा करने लगे। सागर सिकुड़ने लगा। नदियां जो मिट्टी इसमें जमा करती रहीं, वह बारीक पंक जैसी थी। इस मिट्टी को जलोढ़क कहते हैं। अत: टैथीज सागर के स्थान पर जलोढ़ मैदान अर्थात् उत्तरी मैदान का निर्माण हुआ।
क्षेत्रीय विभाजन-विशाल उत्तरी मैदान को निम्नलिखित चार क्षेत्रों में बांटा जा सकता है-

  1. पंजाब हरियाणा का मैदान-इस मैदान का निर्माण सतलुज, रावी, ब्यास तथा घग्घर नदियों द्वारा लाई गई मिट्टियों से हुआ है। इसमें बारी दोआब, बिस्त दोआब, मालवा का मैदान तथा हरियाणा का मैदान शामिल है।
  2. थार मरुस्थल का मैदान-पंजाब तथा हरियाणा के दक्षिणी भागों से लेकर गुजरात में स्थित कच्छ की रण तक के इस मैदान को थार मरुस्थल का मैदान कहते हैं।
  3. गंगा का मैदान-गंगा का मैदान उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार तथा पश्चिम बंगाल में स्थित है।
  4. ब्रह्मपुत्र का मैदान-इसे असम का मैदान भी कहा जाता है। यह असम की पश्चिमी सीमा से लेकर असम के अति उत्तरी भाग सादिया (Sadiya) तक लगभग 720 किलोमीटर की लंबाई में फैला हुआ है। समुद्र तल से इतनी औसत ऊंचाई 250-550 मी० है।

प्रश्न 4.
हिमालय तथा प्रायद्वीपीय पठार के भौतिक लक्षणों की तुलना कीजिए तथा अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
हिमालय तथा प्रायद्वीपीय पठार की तुलना भूगोल की दृष्टि से बड़ी रोचक है।

  1. बनावट-हिमालय तलछटी शैलों से बना है और यह संसार का सबसे युवा पर्वत है। इसकी ऊंचाई भी सबसे अधिक है। इसकी औसत ऊंचाई 5000 मीटर है।
    इसके विपरीत प्रायद्वीपीय पठार का जन्म आज से 50 करोड़ वर्ष पूर्व प्रिकैम्बरीअन महाकाल में हुआ था। ये आग्नेय शैलों से निर्मित हुआ है।
  2. विस्तार-हिमालय जम्मू-कश्मीर से अरुणाचल प्रदेश तक फैला हुआ है। इसके पूर्व में पूर्वी श्रेणियां और पश्चिम में पश्चिमी श्रेणियां हैं। पूर्वी श्रेणियों में खासी, गारो, जयंतिया तथा पश्चिमी श्रेणियों में हिंदुकुश तथा किरथर श्रेणियां पाई जाती हैं। हिमालय के पांच भाग हैं-ट्रांस हिमालय, महान् हिमालय, लघु हिमालय, बाह्य हिमालय तथा पहाड़ी शाखाएं।
  3. इसके विपरीत प्रायद्वीपीय पठार के दो भाग हैं-मालवा का पठार तथा दक्कन का पठार । ये अरावली पर्वत से लेकर शिलांग के पठार तक तथा दक्षिण में कन्याकुमारी तक फैला हुआ है। इसमें पाई जाने वाली प्रमुख पर्वत श्रेणियां हैंअरावली पर्वत श्रेणी, विंध्याचल पर्वत श्रेणी तथा सतपुड़ा पर्वत श्रेणी।
    इसके अतिरिक्त यहां पूर्वी घाट की पहाड़ियां, पश्चिमी घाट की पहाड़ियां तथा नीलगिरि पर्वत आदि पाये जाते हैं।
  4. नदियां-हिमालय से निकलने वाली नदियां बर्फीले पर्वतों से निकलने के कारण सारा साल बहती हैं। प्रायद्वीपीय पठार की नदियां बरसाती नदियां हैं। शुष्क ऋतु में इनमें पानी का अभाव हो जाता है।
  5. आर्थिक महत्त्व-प्रायद्वीपीय पठार में अनेक प्रकार के खनिज पाये जाते हैं।

प्रश्न 5.
पश्चिमी तथा पूर्वी हिमालय की उप-शाखाओं की चित्र सहित व्याख्या कीजिए।
उत्तर-
हिमालय तथा प्रायद्वीपीय पठार की तुलना भूगोल की दृष्टि से बड़ी रोचक है।

  1. बनावट-हिमालय तलछटी शैलों से बना है और यह संसार का सबसे युवा पर्वत है। इसकी ऊंचाई भी सबसे अधिक है। इसकी औसत ऊंचाई 5000 मीटर है।
    इसके विपरीत प्रायद्वीपीय पठार का जन्म आज से 50 करोड़ वर्ष पूर्व प्रिकैम्बरीअन महाकाल में हुआ था। ये आग्नेय शैलों से निर्मित हुआ है।
  2. विस्तार-हिमालय जम्मू-कश्मीर से अरुणाचल प्रदेश तक फैला हुआ है। इसके पूर्व में पूर्वी श्रेणियां और पश्चिम में पश्चिमी श्रेणियां हैं। पूर्वी श्रेणियों में खासी, गारो, जयंतिया तथा पश्चिमी श्रेणियों में हिंदुकुश तथा किरथर श्रेणियां पाई जाती हैं। हिमालय के पांच भाग हैं-ट्रांस हिमालय, महान् हिमालय, लघु हिमालय, बाह्य हिमालय तथा पहाड़ी शाखाएं।
  3. इसके विपरीत प्रायद्वीपीय पठार के दो भाग हैं-मालवा का पठार तथा दक्कन का पठार । ये अरावली पर्वत से लेकर शिलांग के पठार तक तथा दक्षिण में कन्याकुमारी तक फैला हुआ है। इसमें पाई जाने वाली प्रमुख पर्वत श्रेणियां हैंअरावली पर्वत श्रेणी, विंध्याचल पर्वत श्रेणी तथा सतपुड़ा पर्वत श्रेणी।
    इसके अतिरिक्त यहां पूर्वी घाट की पहाड़ियां, पश्चिमी घाट की पहाड़ियां तथा नीलगिरि पर्वत आदि पाये जाते हैं।
  4. नदियां-हिमालय से निकलने वाली नदियां बर्फीले पर्वतों से निकलने के कारण सारा साल बहती हैं। प्रायद्वीपीय पठार की नदियां बरसाती नदियां हैं। शुष्क ऋतु में इनमें पानी का अभाव हो जाता है।
  5. आर्थिक महत्त्व-प्रायद्वीपीय पठार में अनेक प्रकार के खनिज पाये जाते हैं।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित पर नोट लिखो-
1. विन्ध्याचल,
2. सतपुड़ा,
3. अरावली पर्वत,
4. नीलगिरि की पहाडियां।
उत्तर-

  1. विंध्याचल-विंध्याचल पर्वत श्रेणियों का पश्चिमी भाग लावे से बना है। इसका पूर्वी भाग कैमूर तथा भानरेर की श्रेणियां कहलाता है। इसकी दक्षिणी ढलानों के पास नर्मदा नदी बहती है।
  2. सतपुड़ा-सतपुड़ा की पहाड़ियां नर्मदा नदी के दक्षिण किनारे के साथ-साथ पूर्व में महादेव तथा मैकाल की पहाड़ियों के सहारे बिहार में स्थित छोटा नागपुर की पहाड़ियों तक जा पहुंचती हैं। इसकी मुख्य चोटियां हैं-धूपगढ़ तथा अमरकंटक। इस पर्वत श्रेणी की औसत ऊंचाई 1120 मी० है।
  3. अरावली पर्वत-अरावली पर्वत श्रेणी दिल्ली से गुजरात तक 800 कि० मी० की लंबाई में फैला हुआ है। इनकी दिशा दक्षिण-पश्चिम है और यहां अब पहाड़ियों के बचे-खुचे टुकड़े ही रह गये हैं। इसकी सबसे ऊंची चोटी माऊंट आबू (1722 मी०) है।
  4. नीलगिरि की पहाड़ियां-पश्चिमी घाट की पहाड़ियां तथा पूर्वी घाट की पहाड़ियां दक्षिण में जहां जाकर आपस में मिलती हैं, उन्हें दक्षिणी पहाड़ियां या नीलगिरि की पहाड़ियां कहते हैं। इन्हें नीले पर्वत भी कहते हैं।

प्रश्न 7.
“क्या भारत के भिन्न-भिन्न भौतिक भाग एक-दूसरे से अलग स्वतंत्र इकाइयां हैं या ये एक-दूसरे के पूरक हैं ?” इस कथन की उदाहरणों सहित व्याख्या करो।
उत्तर-
इसमें कोई शक नहीं कि भारत की भिन्न-भिन्न भौतिक इकाइयां एक-दूसरे की पूरक हैं। वे देखने में अलग अवश्य लगते हैं, परंतु उनका अस्तित्व अलग नहीं है। यदि हम उनके जन्म और उनके मिलने वाले प्राकृतिक भंडारों का अध्ययन करें तो स्पष्ट हो जायेगा कि वे पूरी तरह एक-दूसरे पर निर्भर हैं।
(क) जन्म-

  1. हिमालय पर्वत का जन्म ही प्रायद्वीपीय पठार के अस्तित्व में आने के पश्चात् हुआ है।
  2. उत्तरी मैदानों का जन्म उन निक्षेपों से हुआ है, जिनके लिए प्रायद्वीपीय पठार तथा हिमालय पर्वत की नदियां उत्तरदायी हैं।
  3. प्रायद्वीपीय पठार की पहाड़ियां, दरार घाटियां तथा अपभ्रंश हिमालय के दबाव के कारण ही अस्तित्व में आए हैं।
  4. तटीय मैदानों का जन्म प्रायद्वीपीय घाटों की मिट्टी से हुआ है।

(ख) प्राकृतिक भंडार-

  1. हिमालय पर्वत बर्फ का घर है। इसकी नदियां जल प्रपात बनाती हैं और इनसे जो बिजली बनाई जाती है, उसका उपयोग पूरा देश करता है।
  2. भारत के विशाल मैदान उपजाऊ मिट्टी के कारण पूरे देश के लिए अन्न का भंडार है। इसमें बहने वाली गंगा नदी सारे भारत को प्रिय है।
  3. प्रायद्वीपीय पठार में खनिजों का खज़ाना दबा पड़ा है। इसमें लोहा, कोयला, तांबा, अभ्रक, मैंगनीज़ आदि कई प्रकार के खनिज दबे पड़े हैं, जो देश के विकास के लिए अनिवार्य हैं।
  4. तटीय मैदान देश को चावल, मसाले, अदरक, लौंग, इलायची जैसे व्यापारिक पदार्थ प्रदान करते हैं।
    सच तो यह है कि देश की भिन्न-भिन्न इकाइयां एक दूसरे की पूरक हैं और ये देश के आर्थिक विकास में अपना विशेष योगदान देती हैं।

PSEB 9th Class SST Solutions Geography Chapter 2a भारत : धरातल/भू-आकृतियां

प्रश्न 8.
पश्चिमी तटीय मैदानों का उसके उपभागों सहित विस्तृत विवरण दीजिए।
उत्तर-
पश्चिमी तटीय मैदान कच्छ के रण से लेकर कन्याकुमारी तक फैले हुए हैं। ये विस्तृत संकरे मैदान हैं। इनकी चौड़ाई 65 कि.मी. के लगभग है। इनका ढलान दक्षिण तथा दक्षिण-पश्चिम की ओर है। इन मैदानों को धरातलीय विशेषताओं के आधार पर चार प्रमुख भागों में विभाजित किया जा सकता है-

  1. गुजरात का तटवर्ती मैदान,
  2. कोंकण का तटवर्ती मैदान,
  3. मालाबार का तटवर्ती मैदान,
  4. केरल का मैदान।

1. गुजरात का तटवर्ती मैदान-इस तटवर्ती मैदानी भाग में साबरमती, माही, लुनी, बनास, नर्मदा, ताप्ती आदि नदियों के तलछट के जमाव से कच्छ तथा काठियावाड़ के प्रायद्वीपीय मैदान और सौराष्ट्र के लंबवत् मैदानों का निर्माण हुआ है। कच्छ का क्षेत्र अभी भी दलदली तथा समुद्र तल से नीचा है। काठियावाड़ के प्रायद्वीपीय भाग में लावा युक्त गिर पर्वतीय श्रेणियां भी मिलती हैं। यहाँ की गिरनार पहाड़ियों में स्थित गोरखनाथ चोटी की ऊंचाई सबसे अधिक है। गुजरात का यह तटवर्ती मैदान 400 किलोमीटर लंबा तथा 200 किलोमीटर चौड़ा है। इसकी औसत ऊंचाई 300 मीटर है।

2. कोंकण का तटवर्ती मैदान-दमन से लेकर गोआ तक का मैदान कोंकण तट कहलाता है। इसके अधिकतर तटवर्ती भागों में धंसने की क्रिया होती रहती है। इसीलिए इस 500 किलोमीटर लंबे मैदान की पट्टी की चौड़ाई 50 से 80 किलोमीटर तक रह जाती है। इस मैदानी भाग में तीव्र समुद्री लहरों द्वारा बनी संकरी खाड़ियां, आंतरिक कटाव (Coves) और समुद्री बालू में बीच (Beach) आदि भू-आकृतियां मिलती हैं। थाना की संकरी खाड़ी में प्रसिद्ध मुंबई द्वीप स्थित है।

3. मालाबार का तटवर्ती मैदान-यह गोआ से लेकर मंगलौर तक लगभग 225 किलोमीटर लंबा तथा 24 किलोमीटर चौड़ा मैदान है। इसे कर्नाटक का तटवर्ती मैदान भी कहते हैं। यह उत्तर की ओर संकरा परंतु दक्षिण की ओर चौड़ा है। कई स्थानों पर इसका विस्तार कन्याकुमारी तक भी माना जाता है। इस मैदान में मार्मागोआ, मान्ढवी तथा शेरावती नदियों के समुद्री जल में डूबे हुए मुहाने (Estuaries) मिलते हैं।

4. केरल के मैदान-मंगलौर से लेकर कन्याकुमारी तक 500 किलोमीटर लंबे, 10 किलोमीटर चौड़े तथा 300 मीटर ऊंचे भू-भाग केरल के मैदान कहलाते हैं। इनमें बहुत-सी झीलें (Lagoons) तथा काईल अथवा क्याल (Kayals) पाये जाते हैं। क्याल झीलों का स्थानीय नाम है। यहाँ पर बैंबानद (Vembanad) और अष्टमुदई (Astamudi) की झीलों वाले क्षेत्रों में नौकाओं का व्यापारिक स्तर पर प्रयोग होता है।

भारत : धरातल/भू-आकृतियां PSEB 9th Class Geography Notes

  • विज्ञान की वह शाखा जो भू-आकृतियों के निर्माण तथा इसके लिए उत्तरदायी कारकों का अध्ययन करती है, ‘भू-आकृति विज्ञान’ कहलाती है।
  • भारत के कुल क्षेत्रफल का 43% मैदानी, 29.3% पहाड़ी और 27.7% पठारी प्रदेश है।
  • धरातल के अनुसार भारत को पांच भागों में बांटा जा सकता है-
    1. हिमालय पर्वत,
    2. उत्तर के विशाल मैदान व मरुस्थल,
    3. प्रायद्वीपीय पठार का क्षेत्र
    4. तट के मैदान
    5. भारतीय द्वीप समूह।
  • 12 करोड़ वर्ष पहले हिमालय के स्थान पर टेथिस नामक एक कम गहरा सागर था।
  • संसार की सबसे ऊंची पर्वत चोटी माऊंट एवरेस्ट तथा भारत की गॉडविन-ऑस्टन (K2) है।
  • उपमहाद्वीप के प्रसिद्ध दर्रे बृहत् हिमालय में स्थित हैं। मध्य हिमालय अपने रमणीक स्थानों के लिए प्रसिद्ध है।
  • भाबर, तराई, बांगर, खाडर, रेह, भूर आदि विभिन्न प्रकार के मैदान हैं।
  • बिस्त तथा बारी दोआब भारत में है और चज दोआब पाकिस्तान में है।
  • सुंदर वन का अर्थ है-सुंदरी नामक वृक्षों से भरा हुआ वन (जंगल)।
  • मध्य भारत का पठार, मालवा का पठार और दक्कन का पठार भारत के पठारी क्षेत्र हैं। ये भारत के प्रायद्वीपीय पठार के भाग हैं।
  • थाल घाट, भोर घाट, पाल घाट तथा शेनकोश पश्चिमी घाट के दर्रे हैं।
  • पूर्वी घाट का पठारी क्षेत्र खनिजों का भंडार है।
  • कच्छ, कोंकण, मालाबार, कोरोमंडल और उत्कल तटवर्ती मैदानों के भाग हैं।
  • भारतीय द्वीप समूह में लगभग 267 द्वीप हैं। इन्हें दो भागों में बांटा जाता है-बंगाल की खाड़ी में स्थित अंडेमान-निकोबार तथा अरब सागर में स्थित लक्षद्वीप समूह।
  •  मालवा का पठार त्रिभुज के आकार का है। खनिज पदार्थों के लिए प्रसिद्ध छोटा नागपुर का पठार भी मालवा के पठार का एक भाग है।

PSEB 9th Class SST Solutions Civics Chapter 4 भारतीय संसदीय लोकतंत्र

Punjab State Board PSEB 9th Class Social Science Book Solutions Civics Chapter 4 भारतीय संसदीय लोकतंत्र Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 9 Social Science Civics Chapter 4 भारतीय संसदीय लोकतंत्र

SST Guide for Class 9 PSEB भारतीय संसदीय लोकतंत्र Textbook Questions and Answers

(क) रिक्त स्थान भरें :

  1. …………….. सर्वोच्च न्यायालय के जजों की नियुक्ति करते हैं।
  2. भारत के राष्ट्रपति महोदय अपनी समस्त शक्तियों का प्रयोग …………………. के परामर्श से करते हैं।

उत्तर-

  1. राष्ट्रपति
  2. प्रधानमंत्री।

(ख) बहुविकल्पीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
भारत में कानून निर्माण की अंतिम शक्ति किसके पास है ?
(अ) मंत्रिमंडल
(आ) संसद्
(इ) लोकसभा
(ई) राष्ट्रपति।
उत्तर-
(ई) राष्ट्रपति

प्रश्न 2.
मंत्रिमंडल की सभाओं की अध्यक्षता करता है :
(अ) राष्ट्रपति
(आ) राज्यपाल (इ) प्रधानमंत्री
(ई) दल का प्रमुख।
उत्तर-
(इ) प्रधानमंत्री।

PSEB 9th Class SST Solutions Civics Chapter 4 भारतीय संसदीय लोकतंत्र

(ग) निम्नलिखित कथनों में सही के लिए तथा गलत के लिए चिन्ह लगाएं :

  1. प्रधानमंत्री देश का संवैधानिक प्रमुख होता है।
  2. भारतीय संसद् में लोकसभा, राज्यसभा व राष्ट्रपति सम्मिलित हैं।

उत्तर-

  1. (✗)
  2. (✓)

अति लघु उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत में संघ व राज्यों में कौन-सी शासन प्रणाली अपनाई गई है ?
उत्तर-
भारत में संघ व राज्यों में संसदीय शासन प्रणाली अपनाई गई है।

प्रश्न 2.
संसदीय प्रणाली में देश की वास्तविक कार्यपालिका कौन होता है ?
उत्तर-
संसदीय प्रणाली में देश की वास्तविक कार्यपालिका प्रधानमंत्री व उसका मंत्रिमंडल होते हैं।

प्रश्न 3.
भारत में नाममात्र कार्यपालिका कौन है ?
उत्तर-
भारत में राष्ट्रपति नाममात्र कार्यपालिका है।

प्रश्न 4.
राष्ट्रपति के चुनाव में कौन-कौन भाग लेता है ?
उत्तर-
राष्ट्रपति को एक निर्वाचक मंडल द्वारा चुना जाता है जिसमें लोकसभा, राज्यसभा तथा राज्य विधानसभाओं (दिल्ली, पुड्डुचेरी तथा जम्मू-कश्मीर भी) के चुने हुए सदस्य होते हैं।

प्रश्न 5.
संसदीय प्रणाली की कोई दो विशेषताएं लिखें।
उत्तर-

  1. संसदीय प्रणाली में देश का मुखिया नाममात्र कार्यपालिका होता है।
  2. चुनाव के पश्चात् संसद् (लोक सभा) में जिस दल को बहुमत प्राप्त होता है, वह सरकार का निर्माण करता है।

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प्रश्न 6.
भारत में संसद् के निम्न सदन को क्या कहा जाता है ?
उत्तर-
भारत में संसद् के निम्न सदन को लोकसभा कहा जाता है।

प्रश्न 7.
राज्यसभा में राष्ट्रपति कितने सदस्य मनोनीत कर सकता है ?
उत्तर-
राष्ट्रपति राज्यसभा में 12 सदस्य मनोनीत कर सकता है जिन्हें साहित्य, कला, विज्ञान व समाज सेवा के क्षेत्र में व्यावहारिक अनुभव व विशेष ज्ञान प्राप्त होता है।

प्रश्न 8.
राज्यसभा के सदस्यों का कार्यकाल कितना होता है ?
उत्तर-
राज्यसभा के सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है परंतु एक तिहाई सदस्य दो वर्षों के पश्चात् रिटायर हो जाते हैं।

प्रश्न 9.
कैनेडा व ऑस्ट्रेलिया में देश के प्रमुख के पद का नाम क्या है ?
उत्तर-
कैनेडा व आस्ट्रेलिया में देश के प्रमुख पद को गवर्नर जनरल कहते हैं।

प्रश्न 10.
प्रधानमंत्री व मंत्रियों को उनके पद की शपथ ग्रहण कौन करवाता है ?
उत्तर-
प्रधानमंत्री व मंत्रियों को उनके पद की शपथ ग्रहण राष्ट्रपति करवाता है।

प्रश्न 11.
मंत्रिमंडल की सभाओं की अध्यक्षता कौन करता है ?
उत्तर-
मंत्रिमंडल की सभाओं की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करता है।

प्रश्न 12.
कार्यपालिका व विधानपालिका के पारस्परिक संबंधों के आधार पर शासन प्रणाली के कौन-से दो रूप होते हैं ?
उत्तर-

  1. संसदात्मक-इसमें मंत्रिमंडल अपने कार्यों के लिए विधानपालिका के प्रति उत्तरदायी होता है।
  2. प्रधानात्मक-इसमें कार्यपालिका को विधानपालिका द्वारा हटाया नहीं जा सकता।

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प्रश्न 13.
संसदीय शासन प्रणाली किस देश से ली गई है ?
उत्तर-
संसदीय शासन प्रणाली इंग्लैंड से ली गई है।

प्रश्न 14.
इंग्लैंड में संसद् के उच्च व निम्न सदन को क्या कहते हैं ?
उत्तर-
इंग्लैंड में संसद् के उच्च सदन को ‘हाऊस आफ़ लार्ड्स’ (House of Lords) तथा निम्न सदन को ‘हाऊस आफ कॉमनस’ (House of Commons) कहा जाता है।।

लघु उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
प्रधानमन्त्री की नियुक्ति कैसे होती है ?
उत्तर-
लोकसभा के चुनावों के पश्चात् जिस दल या दलों के गठबंधन को बहुमत प्राप्त हो जाता है, वह अपना एक नेता चुनता है तथा उस नेता को राष्ट्रपति सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करते हैं। उस नेता को राष्ट्रपति प्रधानमंत्री नियुक्त कर देते हैं तथा प्रधानमंत्री की सलाह पर मंत्रिमंडल की नियुक्ति हो जाती है।

प्रश्न 2.
मंत्रियों की सम्मिलित ज़िम्मेदारी से क्या भाव है ?
उत्तर-

  1. मंत्रियों की सम्मिलित ज़िम्मेदारी का अर्थ है कि संपूर्ण मंत्रिमंडल संसद् अथवा विधानपालिका के प्रति उत्तरदायी होता है। इसका अर्थ है कि चाहे कोई मंत्री मंत्रिमंडल के किसी निर्णय से असहमति रखता हो उसे संसद् के अंदर उस निर्णय का समर्थन करना ही पड़ता है।
  2. यदि संसद् में किसी मंत्री के विरुद्ध निंदा प्रस्ताव या अविश्वास प्रस्ताव पास हो जाए तो इसे संपूर्ण मंत्रिमंडल के विरुद्ध अविश्वास समझा जाएगा तथा प्रधानमंत्री व संपूर्ण मंत्रिमंडल को त्याग-पत्र देना पड़ेगा।
  3. संसद् सदस्य मंत्रियों से उनके विभाग से संबंधित प्रश्न भी पूछ सकते हैं।

प्रश्न 3.
विधानपालिका मंत्रियों पर किस प्रकार नियंत्रण रखती है ?
उत्तर-

  1. यदि संसद् में किसी मंत्री के विरुद्ध निंदा प्रस्ताव या अविश्वास प्रस्ताव पास हो जाए तो इसे संपूर्ण मंत्रिमंडल के विरुद्ध अविश्वास समझा जाएगा तथा प्रधानमंत्री व संपूर्ण मंत्रिमंडल को त्याग-पत्र देना पड़ेगा।
  2. संसद् सदस्य मंत्रियों से उनके विभाग से संबंधित प्रश्न भी पूछ सकते हैं।

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प्रश्न 4.
प्रधानमंत्री के किन्हीं तीन कार्यों का संक्षेप में वर्णन करें।
उत्तर-

  1. प्रधानमंत्री परिषद् का निर्माण करता है।
  2. प्रधानमंत्री अलग-अलग मंत्रियों को उनके विभागों का वितरण करता है।
  3. प्रधानमंत्री राष्ट्रपति तथा मंत्रिमंडल के बीच एक कड़ी का कार्य करता है।
  4. वह राष्ट्रपति को सलाह देकर लोकसभा को उसका समय पूर्ण होने से पहले भंग भी करवा सकता है।
  5. वह मंत्रिमंडल की बैठकों की अध्यक्षता करता है।

प्रश्न 5.
लोकसभा की संरचना पर नोट लिखो।
उत्तर-
लोकसभा को निम्न सदन भी कहा जाता है। इसके अधिकतम 552 सदस्य हो सकते हैं। इन 552 में से 530 सदस्य राज्यों में से चुन कर आएंगे, 20 सदस्य केंद्र शासित प्रदेशों में से चुन कर आएंगे तथा 2 सदस्यों को राष्ट्रपति एंग्लो भारतीय समुदाय (Anglo Indian Community) में से नियुक्त करेगा अगर उसे लगेगा कि इनका लोकसभा में प्रतिनिधित्व नहीं है। वर्तमान में लोकसभा के 545 सदस्य हैं जिनमें 530 राज्यों से, 13 केंद्र शासित प्रदेशों से चुन कर आते हैं तथा 2 सदस्यों को राष्ट्रपति ने मनोनीत किया है।।

प्रश्न 6.
राज्यसभा के सदस्यों का चयन कैसे किया जाता है ?
उत्तर-
राज्यसभा के अधिकतम 250 सदस्य हो सकते हैं। इन 250 में से 238 सदस्य राज्यों में से चुन कर आते हैं तथा 12 सदस्यों को राष्ट्रपति मनोनीत करते हैं जिन्हें साहित्य, कला, विज्ञान तथा समाज सेवा का विशेष ज्ञान व व्यावहारिक अनुभव है। 238 सदस्यों को राज्य विधानसभाओं के चुने हुए सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पर इकहरी परिवर्तित वोट द्वारा चुना जाता है।

प्रश्न 7.
राष्ट्रपति की कोई चार शक्तियों का वर्णन करें।
उत्तर-
राष्ट्रपति की चार शक्तियां निम्नलिखित हैं-

  1. प्रशासनिक शक्तियां-भारत का समस्त प्रशासन राष्ट्रपति के नाम पर चलाया जाता है और भारत सरकार के सभी निर्णय औपचारिक रूप से उसी के नाम पर लिए जाते हैं। देश का सर्वोच्च शासक होने के नाते वह नियम तथा अधिनियम भी बनाता है।
  2. मंत्रिपरिषद् से संबंधित शक्तियां-राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की नियुक्ति करता है और उसके परामर्श से अन्य मंत्रियों की नियुक्ति करता है। वह प्रधानमंत्री की सलाह पर मंत्रियों को अपदस्थ कर सकता है।
  3. सैनिक शक्तियां-राष्ट्रपति राष्ट्र की सशस्त्र सेनाओं का सर्वोच्च सेनापति है। वह स्थल, जल तथा वायु सेनाध्यक्षों की नियुक्ति करता है। वह फील्ड मार्शल की उपाधि भी प्रदान करता है। वह राष्ट्रीय रक्षा समिति का अध्यक्ष है।
  4. राज्यपालों की नियुक्ति-राष्ट्रपति राज्यों के राज्यपालों को अपने प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त करता है।

प्रश्न 8.
मंत्रिपरिषद् के गठन पर नोट लिखें।
उत्तर-
संघीय मंत्रीपरिषद् का निर्माण संविधान की धारा 75 के अंतर्गत यह व्यवस्था की गई है कि राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की नियुक्ति करेगा और फिर उसकी सलाह से अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाएगी। परंतु राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की नियुक्ति अपनी इच्छा से नहीं कर सकता। जिस दल को लोकसभा में बहुमत प्राप्त होता है, उसी दल के नेता को राष्ट्रपति प्रधानमंत्री नियुक्त करता है। अपनी नियुक्ति के पश्चात् प्रधानमंत्री अपने साथियों अर्थात् अन्य मंत्रियों की सूची तैयार करता है और राष्ट्रपति उस सूची के अनुसार ही अन्य मंत्रियों की नियुक्ति करता है।

दीर्घ उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
राज्य सभा की संरचना पर नोट लिखें।
उत्तर-राज्यसभा के अधिकतम 250 सदस्य हो सकते हैं। इन 250 में से 238 सदस्य राज्यों में से चुन कर आते हैं तथा 12 सदस्यों को राष्ट्रपति मनोनीत करते हैं जिन्हें साहित्य, कला, विज्ञान तथा समाज सेवा का विशेष ज्ञान व व्यावहारिक अनुभव है। 238 सदस्यों को राज्य विधानसभाओं के चुने हुए सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पर इकहरी परिवर्तित वोट द्वारा चुना जाता है।

PSEB 9th Class SST Solutions Civics Chapter 4 भारतीय संसदीय लोकतंत्र

प्रश्न 2.
संसदीय शासन प्रणाली में प्रधानमंत्री के नेतृत्व पर नोट लिखें।
उत्तर-
भारत के राज्य प्रबंध में प्रधानमंत्री को बड़ा महत्त्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। राष्ट्रपति राज्य का मुखिया है जबकि सरकार का मुखिया प्रधानमंत्री है। प्रधानमंत्री देश का वास्तविक शासक है।
नियुक्ति-प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है। राष्ट्रपति अपनी इच्छानुसार किसी भी व्यक्ति को प्रधानमंत्री नियुक्त नहीं कर सकता। वह केवल उसी व्यक्ति को प्रधानमंत्री नियुक्त कर सकता है जो लोकसभा में बहुमत प्राप्त पार्टी का नेता हो।
प्रधानमंत्री के कार्य तथा शक्तियां

  1. मंत्रिमंडल का नेता-प्रधानमंत्री मंत्रिमंडल का नेता है। मंत्रिमंडल को बनाने वाला और नष्ट करने वाला प्रधानमंत्री है।
  2. मंत्रिमंडल का निर्माण-राष्ट्रपति प्रधानमंत्री के परामर्श से अन्य मंत्रियों को नियुक्त करता है।
  3. विभागों का विभाजन-प्रधानमंत्री अपने मंत्रियों में विभागों का विभाजन करता है।
  4. मंत्रिमंडल का सभापति-प्रधानमंत्री मंत्रिमंडल का सभापति होता है। मंत्रिमंडल के अधिकतर निर्णय वास्तव में प्रधानमंत्री के ही निर्णय होते हैं।
  5. मंत्रियों की पदच्युति-संविधान के अनुसार मंत्री राष्ट्रपति की प्रसन्नता तक अपने पद पर रहते हैं, परंतु वास्तव में मंत्री तब तक अपने पद पर रह सकते हैं जब तक उन्हें लोकसभा का समर्थन प्राप्त है।
  6. प्रधानमंत्री का समन्वयकारी रूप-प्रधानमंत्री सरकार के भिन्न-भिन्न विभागों तथा उनके कार्यों में तालमेल रखता है।
  7. राष्ट्रपति का मुख्य सलाहकार राष्ट्रपति प्रशासन के प्रत्येक मामले पर प्रधानमंत्री की सलाह लेता है। राष्ट्रपति को प्रधानमंत्री की सलाह के अनुसार ही शासन चलाना पड़ता है।
  8. संसद् का नेता–प्रधानमंत्री को संसद् का नेता माना जाता है। सरकार की नीतियों की सभी महत्त्वपूर्ण घोषणाएं प्रधानमंत्री द्वारा की जाती हैं। प्रधानमंत्री की सलाह पर ही राष्ट्रपति संसद् का अधिवेशन बुलाता है।
  9. लोक सभा को भंग करने का अधिकार-प्रधानमंत्री राष्ट्रपति को सलाह देकर लोकसभा को भंग करवा सकता है।
  10. नियुक्तियां-शासन के सभी उच्च अधिकारियों की नियुक्ति प्रधानमंत्री की सिफ़ारिश पर राष्ट्रपति करता है।
  11. संकटकालीन शक्तियां-राष्ट्रपति अपनी संकटकालीन शक्तियों का प्रयोग प्रधानमंत्री की सलाह से करता

प्रश्न 3.
राष्ट्रपति के निर्वाचन की योग्यता, चुनाव व कार्यकाल का संक्षेप में वर्णन करें।
उत्तर-
राष्ट्रपति को देश का संवैधानिक मुखिया कहा जाता है। निर्वाचन की योग्यताएं-

  1. वह भारत का नागरिक हो।
  2. उसकी आयु 35 वर्ष से ऊपर हो।
  3. वह लोकसभा का सदस्य बनने की सभी योग्यताएं रखता हो।
  4. वह केंद्रीय सरकार या राज्य सरकारों के अंतर्गत किसी लाभ के पद पर न हो।

चुनाव-भारत के राष्ट्रपति को अप्रत्यक्ष ढंग से चुना जाता है उसे एक निर्वाचक मंडल द्वारा चुना जाता है जिसमें लोक सभा, राज्य सभा तथा राज्य विधानसभाओं के केवल चुने हुए सदस्य होते हैं (दिल्ली व पुड्डुचेरी भी)। मनोनीत सदस्य इस चुनाव में भाग नहीं ले सकते। – कार्यकाल-भारत के राष्ट्रपति का चुनाव 5 वर्षों के लिए होता है। परंतु उसे महादोष का महाभियोग (Impeachment) लगाकर 5 वर्ष से पहले भी हटाया जा सकता है। नए राष्ट्रपति को कार्यवाहक राष्ट्रपति की अवधि खत्म होने से पहले चुना जाता है। अगर ऐसा न हो तो कार्यवाहक राष्ट्रपति उस समय तक अपने पद पर रहता है जब तक नए राष्ट्रपति को निर्वाचित न कर लिया जाए। अगर राष्ट्रपति त्यागपत्र दे दे या उसे महाभियोग पास करके हटा दिया जाए तो छः महीने के अंदर नए राष्ट्रपति का चुनाव करना पड़ता है। इस स्थिति में उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है।

प्रश्न 4.
मंत्रिपरिषद् की सामूहिक व व्यक्तिगत ज़िम्मेदारी (दायित्व) से क्या अभिप्राय है ? व्याख्या करें।
उत्तर-

  1. सामूहिक उत्तरदायित्व-भारतीय संविधान की धारा 75 (3) में स्पष्ट किया गया है कि मंत्रिपरिषद् सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी है। भारतीय मंत्रिमंडल उसी समय तक अपने पद पर रह सकता है जब तक कि उसे लोकसभा का विश्वास प्राप्त हो। यदि लोकसभा का बहुमत मंत्रिमंडल के विरुद्ध हो जाए तो उसे अपना त्याग-पत्र देना पड़ेगा। मंत्रिमंडल एक इकाई की तरह काम करता है और यदि लोकसभा किसी एक मंत्री के विरुद्ध अविश्वास का प्रस्ताव पास कर दे तो सब मंत्रियों को अपना पद छोड़ना पड़ता है।
  2. व्यक्तिगत उत्तरदायित्व- अगर सभी मंत्रियों का सामूहिक दायित्व है तो उनका कुछ व्यक्तिगत दायित्व भी है। सभी मंत्री अपने विभाग के लिए व्यक्तिगत रूप से भी उत्तरदायी होते हैं। अगर किसी विभाग में कोई गलत कार्य हो तो उस मंत्री से प्रश्न पूछे जा सकते हैं। अगर किसी विभाग का कार्य ठीक ढंग से न चल रहा हो तो प्रधानमंत्री उससे त्यागपत्र भी मांग सकता है। यदि वह त्यागपत्र नहीं देता तो प्रधानमंत्री उसे राष्ट्रपति को कहकर निष्कासित भी करवा सकता है।

PSEB 9th Class Social Science Guide भारतीय संसदीय लोकतंत्र Important Questions and Answers

बहुविकल्पीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
भारतीय संसद् के कितने सदन हैं ?
(क) 1
(ख) 2
(ग) 3
(घ) 4.
उत्तर-
(ख) 2

प्रश्न 2.
भारतीय संसद् के उपरि सदन को क्या कहते हैं ?
(क) राज्य सभा
(ख) लोकसभा
(ग) विधानपरिषद्
(घ) उपरोक्त में से कोई नहीं।
उत्तर-
(क) राज्य सभा

प्रश्न 3.
भारतीय संसद् के निचले सदन को क्या कहते हैं ?
(क) राज्य सभा
(ख) लोकसभा
(ग) विधानसभा
(घ) उपरोक्त में से कोई नहीं।
उत्तर-
(ख) लोकसभा

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प्रश्न 4.
भारत के वर्तमान राष्ट्रपति कौन हैं ?
(क) श्रीमती सोनिया गांधी
(ख) श्रीमती सुषमा स्वराज ।
(ग) श्री हामिद अंसारी
(घ) श्री रामनाथ कोविंद।
उत्तर-
(घ) श्री रामनाथ कोविंद।

प्रश्न 5.
भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री कौन हैं ?
(क) नरेंद्र मोदी
(ख) प्रणव मुखर्जी
(ग) लाल कृष्ण आडवाणी
(घ) अर्जुन सिंह।
उत्तर-
(क) नरेंद्र मोदी

प्रश्न 6.
प्रधानमंत्री की नियुक्ति कौन करता है ?
(क) राष्ट्रपति
(ख) स्पीकर
(ग) राज्यपाल
(घ) उप-राष्ट्रपति।
उत्तर-
(क) राष्ट्रपति

प्रश्न 7.
2019 में 17वीं लोकसभा का स्पीकर किसे चुना गया ?
(क) ओम बिरला
(ख) प्रणव मुखर्जी
(ग) सोनिया गांधी
(घ) राहुल गांधी।
उत्तर-
(क) ओम बिरला

प्रश्न 8.
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति कौन करता है ?
(क) प्रधानमंत्री
(ख) राष्ट्रपति
(ग) उपराष्ट्रपति
(घ) स्पीकर।
उत्तर-
(ख) राष्ट्रपति

प्रश्न 9.
सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का मासिक वेतन कितना है ?
(क) 50,000
(ख) 2,80,000
(ग) 1,50,000
(घ) 2,00,000
उत्तर-
(ख) 2,80,000

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प्रश्न 10.
भारतीय नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा कौन करता है ?
(क) राष्ट्रपति
(ख) प्रधानमंत्री
(ग) सर्वोच्च न्यायालय
(घ) स्पीकर।
उत्तर-
(ग) सर्वोच्च न्यायालय

रिक्त स्थान भरें :

  1. भारत में देश के मुखिया को ……………….. कहते हैं।
  2. 2014 के लोकसभा चुनावों के पश्चात् ………………. की सरकार बनी थी।
  3. भारत में वास्तविक शक्तियां …………………. के पास होती हैं।
  4. संसद् में लोकसभा, राज्यसभा तथा …………………. शामिल हैं।
  5. लोकसभा के अधिकतम ………………… सदस्य हो सकते हैं।
  6. राज्यसभा के अधिकतम …………………. सदस्य हो सकते हैं।
  7. राष्ट्रपति ………….. समुदाय के 2 सदस्य लोकसभा में मनोनीत कर सकते हैं।
  8. भारत का राष्ट्रपति बनने के लिए ……………….. आयु कम-से-कम होनी चाहिए।

उत्तर-

  1. राष्ट्रपति
  2. नरेंद्र मोदी
  3. प्रधानमंत्री
  4. राष्ट्रपति
  5. 552
  6. 250
  7. एंग्लो इंडियन
  8. 85 वर्ष।

सही/गलत :

  1. भारत में प्रधानात्मक व्यवस्था है।
  2. लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पास होने से सरकार को त्याग-पत्र देना पड़ जाता है।
  3. मंत्री बनने के लिए संसद् सदस्य होना आवश्यक नहीं है।
  4. लोकसभा इंग्लैंड के हाऊस आफ़ कॉमन की तरह है।
  5. राष्ट्रपति राज्यसभा के 12 सदस्य मनोनीत करता है।
  6. लोकसभा के अध्यक्ष को स्पीकर कहते हैं।
  7. साधारण बिल के लिए राष्ट्रपति की पूर्व स्वीकृति आवश्यक है।

उत्तर-

  1. (✗)
  2. (✓)
  3. (✗)
  4. (✓)
  5. (✓)
  6. (✓)
  7. (✗)

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अति लघु उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
भारतीय संसद् के कितने सदन हैं ? उनके नाम लिखो।
उत्तर-
भारतीय संसद् के दो सदन हैं-लोकसभा व राज्यसभा।

प्रश्न 2.
भारतीय संसद् के निम्न तथा उपरि सदन का नाम बताइए।
उत्तर-
लोकसभा संसद् का निम्न सदन है और राज्यसभा उपरि सदन है।

प्रश्न 3.
राज्यसभा किस का प्रतिनिधित्व करती है ?
उत्तर-
राज्यसभा राज्यों तथा संघीय क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करती है।

प्रश्न 4.
राज्यसभा की कुल संख्या कितनी हो सकती है और आजकल कितनी है ?
उत्तर-
राज्यसभा की कुल संख्या 250 हो सकती है परंतु आजकल 245 है।

प्रश्न 5.
राज्यसभा के कितने सदस्यों को राष्ट्रपति मनोनीत करता है ?
उत्तर-
राष्ट्रपति राज्यसभा के 12 सदस्यों को मनोनीत करता है।

प्रश्न 6.
राज्यसभा के सदस्य कितने वर्ष के लिए चुने जाते हैं ?
उत्तर-
राज्यसभा के सदस्य छः वर्ष के लिए चुने जाते हैं।

प्रश्न 7.
राज्यसभा की अध्यक्षता कौन करता है ?
उत्तर-
उप-राष्ट्रपति राज्यसभा की अध्यक्षता करता है।

प्रश्न 8.
लोकसभा का अधिवेशन कौन बुलाता है ?
उत्तर-
राष्ट्रपति जब चाहे लोकसभा का अधिवेशन बुला सकता है।

प्रश्न 9.
संसद् के दोनों सदनों में से कौन-सा सदन शक्तिशाली है ?
उत्तर-
लोकसभा।

प्रश्न 10.
साधारण बिल संसद् के किस सदन में पहले पेश किया जाता है ?
उत्तर-
साधारण बिल संसद् के दोनों सदनों में से किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है।

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प्रश्न 11.
वित्त विधेयक संसद् के किस सदन में पेश किया जाता है ?
उत्तर-
लोकसभा।

प्रश्न 12.
लोकसभा के अध्यक्ष को क्या कहते हैं ?
उत्तर-
लोकसभा के अध्यक्ष को स्पीकर कहते हैं।

प्रश्न 13.
लोकसभा के सदस्य कितने समय के लिए चुने जाते हैं ?
उत्तर-
लोकसभा के सदस्य पांच वर्ष के लिए चुने जाते हैं।

प्रश्न 14.
संसद् की कोई एक शक्ति लिखें।
उत्तर-
संसद् देश के लिए कानून बनाती है।

प्रश्न 15.
संसद् की सर्वोच्चता पर एक प्रतिबंध बताएं।
उत्तर-
देश का संविधान लिखित है, जो संसद् की शक्तियों को सीमित करता है।

प्रश्न 16.
लोकसभा की कुल सदस्य संख्या कितनी हो सकती है और आजकल कितनी है ?
उत्तर-
लोकसभा की कुल सदस्य संख्या 552 हो सकती है, परंतु आजकल 545 है।

प्रश्न 17.
राज्यसभा के अध्यक्ष का कोई एक कार्य बताइए।
उत्तर-
राज्यसभा का अध्यक्ष राज्यसभा के अधिवेशन की अध्यक्षता करता है।

प्रश्न 18.
किस एक परिस्थिति में संसद् का संयुक्त अधिवेशन बुलाया जाता है ?
उत्तर-
संसद् के दोनों सदनों के विवादों को हल करने के लिए संसद् के दोनों सदनों का संयुक्त अधिवेशन बुलाया जाता है।

प्रश्न 19.
राज्यसभा का सदस्य बनने के लिए कोई एक योग्यता बताएं।
उत्तर-
राज्यसभा का सदस्य बनने के लिए कम-से-कम 30 वर्ष आयु होनी चाहिए।

प्रश्न 20.
राज्यसभा की किसी एक विशेष शक्ति का वर्णन करें।
उत्तर-
राज्यसभा राज्य सूची के किसी विषय को राष्ट्रीय महत्त्व का घोषित करके संसद् को इस पर कानून बनाने के अधिकार दे सकती है।

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प्रश्न 21.
लोकसभा का सदस्य बनने के लिए किसी एक योग्यता का वर्णन करें।
उत्तर-
लोकसभा का सदस्य बनने वाले उम्मीदवार की आयु 25 वर्ष से कम न हो।

प्रश्न 22.
लोकसभा तथा राज्यसभा के सदस्यों के चुनाव में क्या अंतर है ?
उत्तर-
लोकसभा के सदस्य जनता द्वारा प्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं, जबकि राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव अप्रत्यक्ष तौर पर जनता द्वारा होता है।

प्रश्न 23.
क्या राज्यसभा एक गौण सदन है ? इसके पक्ष में एक तर्क दें।
उत्तर-
राज्यसभा को धन संबंधी कोई शक्ति प्राप्त नहीं है।

प्रश्न 24.
लोकसभा तथा राज्यसभा के समान अधिकारों का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
लोकसभा तथा राज्यसभा को साधारण बिलों पर समान अधिकार प्राप्त हैं।

प्रश्न 25.
लोकसभा की कोई एक शक्ति लिखें।
उत्तर-
लोकसभा मंत्रिपरिषद् के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पास करके उसे हटा सकती है।

प्रश्न 26.
लोकसभा अध्यक्ष का कोई एक कार्य बताएं।
उत्तर-
लोकसभा अध्यक्ष लोकसभा की कार्यवाही का संचालन करता है।

प्रश्न 27.
लोकसभा अध्यक्ष का चुनाव कौन करता है ?
उत्तर-
लोकसभा अध्यक्ष का चुनाव लोकसभा के सदस्य अपने में से ही करते हैं।

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प्रश्न 28.
2019 में 17वीं लोकसभा का अध्यक्ष किसे चुना गया ?
उत्तर-
2019 में 17वीं लोकसभा का अध्यक्ष ओम बिरला को चुना गया।

प्रश्न 29.
साधारण विधेयक तथा वित्त विधेयक में एक अंतर बताएं।
उत्तर-
साधारण विधेयक संसद् के किसी भी सदन में पेश किए जा सकते हैं, जबकि वित्त विधेयक केवल लोकसभा में ही पेश हो सकता है।

प्रश्न 30.
सामूहिक उत्तरदायित्व से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
सामूहिक उत्तरदायित्व से अभिप्राय मंत्रियों का संसद् के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होना है। किसी एक मंत्री की नीति गलत सिद्ध होने पर संपूर्ण मंत्रिपरिषद् को त्याग-पत्र देना पड़ता है।

प्रश्न 31.
भारत में किस प्रकार की शासन प्रणाली को अपनाया गया है ?
उत्तर-
भारत में संसदीय शासन प्रणाली को अपनाया गया है।

प्रश्न 32.
संसद् मंत्रिमंडल को किस प्रकार हटा सकती है ?
उत्तर-
संसद् मंत्रिमंडल को अविश्वास प्रस्ताव पास करके हटा सकती है।

प्रश्न 33.
संसद् के दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन की अध्यक्षता कौन करता है ?
उत्तर-
संसद् के दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन की अध्यक्षता स्पीकर करता है।

प्रश्न 34.
लोकसभा को कौन भंग कर सकता है ?
उत्तर-
लोकसभा को मंत्रिपरिषद् की सिफ़ारिश पर राष्ट्रपति भंग कर सकता है।

प्रश्न 35.
केंद्रीय कार्यपालिका में कौन-कौन शामिल हैं ?
उत्तर-
केंद्रीय कार्यपालिका में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति तथा प्रधानमंत्री एवं उसकी मंत्रिपरिषद् शामिल है।

प्रश्न 36.
भारत के राष्ट्रपति का चुनाव कैसे होता है ?
उत्तर-
भारत के राष्ट्रपति का चुनाव एक चुनाव मंडल द्वारा होता है।

प्रश्न 37.
राष्ट्रपति के निर्वाचक मंडल में कौन-कौन सम्मिलित होता है ?
उत्तर-
निर्वाचक मंडल में संसद् के दोनों सदनों के चुने हुए सदस्य और प्रांतीय विधानसभाओं (दिल्ली तथा पुड्डुचेरी भी) के चुने हुए सदस्य सम्मिलित होते हैं।

प्रश्न 38.
राष्ट्रपति का कार्यकाल कितना है ? उसे क्या दोबारा चुना जा सकता है ?
उत्तर-
राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्ष है और उसे दोबारा चुने जाने का अधिकार है।

प्रश्न 39.
भारत के प्रथम राष्ट्रपति और वर्तमान राष्ट्रपति का नाम लिखें।
उत्तर-
प्रथम राष्ट्रपति डॉ० राजेंद्र प्रसाद और वर्तमान राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद हैं।

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प्रश्न 40.
प्रधानमंत्री की नियुक्ति कौन करता है ?
उत्तर-
राष्ट्रपति प्रधानमंत्री को नियुक्त करता है।

प्रश्न 41.
मंत्रिमंडल की बैठकों की अध्यक्षता कौन करता है ?
उत्तर-
प्रधानमंत्री।

प्रश्न 42.
मंत्रियों की नियुक्ति कौन करता है ?
उत्तर-
राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर मंत्रियों को नियुक्त करता है।

प्रश्न 43.
प्रधानमंत्री की अवधि बताइए।
उत्तर-
प्रधानमंत्री की अवधि निश्चित नहीं होती। उसकी अवधि लोकसभा के समर्थन पर निर्भर करती है।

प्रश्न 44.
राष्ट्रपति का मासिक वेतन कितना है ?
उत्तर-
राष्ट्रपति का मासिक वेतन ₹ 5 लाख है।

प्रश्न 45.
राष्ट्रपति राष्ट्रीय संकटकाल की घोषणा कब कर सकता है ?
उत्तर-
राष्ट्रपति राष्ट्रीय संकटकाल की घोषणा युद्ध, विदेशी आक्रमण तथा सशस्त्र विद्रोह की स्थिति में कर सकता है।

प्रश्न 46.
संकटकाल कितने प्रकार का होता है ?
उत्तर-
संकटकाल तीन प्रकार का होता है।

प्रश्न 47.
राष्ट्रपति कब अध्यादेश जारी कर सकता है ?
उत्तर-
जब संसद् का अधिवेशन न हो रहा हो और संकटकालीन परिस्थितियां बाध्य करती हों, तब राष्ट्रपति अध्यादेश जारी कर सकता है।

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प्रश्न 48.
राष्ट्रपति लोकसभा में कितने सदस्य मनोनीत कर सकता है ?
उत्तर-
राष्ट्रपति लोकसभा में 2 एंग्लो इंडियन सदस्यों को मनोनीत कर सकता है।

प्रश्न 49.
राष्ट्रपति की एक कार्यकारी शक्ति लिखें।
उत्तर-
राष्ट्रपति प्रधानमंत्री को नियुक्त करता है।

प्रश्न 50.
राष्ट्रपति की कोई एक वैधानिक शक्ति लिखें।
उत्तर-
राष्ट्रपति संसद् का अधिवेशन बुला और उसे स्थगित कर सकता है।

प्रश्न 51.
राष्ट्रपति की एक वित्तीय शक्ति लिखें।
उत्तर-
राष्ट्रपति वित्त आयोग की नियुक्ति करता है।

प्रश्न 52.
भारतीय मंत्रिमंडल की एक विशेषता लिखें।
उत्तर-
संसद् एवं मंत्रिमंडल में घनिष्ठ संबंध है।

प्रश्न 53.
केंद्रीय मंत्रिपरिषद् का कोई एक कार्य लिखें।
उत्तर-
केंद्रीय मंत्रिपरिषद् गृह एवं विदेश नीति निर्धारित करती है।

लघु उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
लोकसभा तथा राज्यसभा के कितने सदस्य होते हैं ?
उत्तर-
लोकसभा की अधिकतम कुल संख्या 552 हो सकती है पर आजकल 545 है। इनमें 543 निर्वाचित सदस्य हैं और दो ऐंग्लो इंडियन हैं। राज्यसभा की अधिकतम संख्या 250 हो सकती है पर आजकल 245 हैं। इनमें 233 राज्य के प्रतिनिधि हैं और 12 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत हैं।

प्रश्न 2.
राज्यसभा के अध्यक्ष के कोई तीन कार्य बताइए।
उत्तर-

  1. वह राज्यसभा के अधिवेशन का सभापतित्व करता है।
  2. वह राज्यसभा में शांति बनाए रखने तथा उसकी बैठकों को ठीक प्रकार से चलाने के लिए जिम्मेदार है।
  3. वह सदस्यों को बोलने की आज्ञा देता है।

प्रश्न 3.
लोकसभा तथा राज्यसभा के सदस्यों के चुनाव में क्या अंतर है ?
उत्तर-
लोकसभा के सदस्य जनता द्वारा प्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं और प्रत्येक नागरिक को जिसकी आयु 18 वर्ष हो, वोट डालने का अधिकार प्राप्त होता है। एक निर्वाचन क्षेत्र से एक ही उम्मीदवार का चुनाव होता है और जिस उम्मीदवार को सबसे अधिक मत प्राप्त होते हैं उसे ही विजयी घोषित किया जाता है। राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा किया जाता है। इस तरह राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव अप्रत्यक्ष तौर पर जनता द्वारा होता है।

प्रश्न 4.
लोकसभा की कोई तीन शक्तियां लिखें।
उत्तर-

  1. लोकसभा राज्यसभा के साथ मिल कर कानून बनाती है।
  2. लोकसभा मंत्रिपरिषद् के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पास करके उसे हटा सकती है।
  3. वित्त विधेयक लोकसभा में पेश किया जाता है।

प्रश्न 5.
लोकसभा का सदस्य होने के लिए व्यक्ति में क्या योग्यताएं होनी चाहिए ?
उत्तर-
लोकसभा का सदस्य वही व्यक्ति बन सकता है जिसमें निम्नलिखित योग्यताएं हों-

  1. वह भारत का नागरिक हो।
  2. वह 25 वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो।।
  3. वह भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अंतर्गत किसी लाभदायक पद पर आसीन न हो।

प्रश्न 6.
राज्यसभा का सदस्य बनने के लिए क्या योग्यताएं होनी चाहिए ?
उत्तर-
राज्यसभा का सदस्य बनने के लिए निम्नलिखित योग्यताएं निश्चित हैं-

  1. वह भारत का नागरिक हो।
  2. वह तीस वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो।
  3. वह संसद् द्वारा निश्चित अन्य योग्यताएं रखता हो।

प्रश्न 7.
स्पीकर के तीन कार्य लिखें।
उत्तर-

  1. सदन की कार्यवाही चलाने के लिए सदन में शांति और व्यवस्था बनाए रखना स्पीकर का कार्य है।
  2. स्पीकर सदन के नेता से सलाह करके सदन का कार्यक्रम निर्धारित करता है।
  3. स्पीकर सदन की कार्यवाही-नियमों की व्याख्या करता है। स्पीकर ही कार्यवाही के नियमों पर की गई आपत्ति पर निर्णय देता है जोकि अंतिम होता है।

प्रश्न 8.
संसद् की सर्वोच्चता से आप क्या जानते हैं ?
उत्तर-
संसद् की सर्वोच्चता से अभिप्राय यह है कि संसद् देश की सर्वोच्च संस्था है। इसमें जनता द्वारा निर्वाचित सदस्य होते हैं। अतः इसके द्वारा बनाए गए कानून वास्तव में जनता स्वयं बनाती है। मंत्रिपरिषद् अपने कार्यों के लिए संसद् के प्रति उत्तरदायी होती है। सरकारी आय-व्यय पर भी इसका नियंत्रण रहता है। अतः स्पष्ट है कि संसद् ही वास्तव में देश की सर्वोच्च संस्था है।

प्रश्न 9.
लोकसभा का कार्यकाल कितना होता है ?
उत्तर-
लोकसभा का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है। परंतु राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद् की सिफ़ारिश पर इसे पांच वर्ष से पहले भी भंग कर सकता है। संकटकालीन स्थिति में इसका कार्यकाल एक समय में संसद् द्वारा एक वर्ष के लिए बढ़ाया जा सकता है।

प्रश्न 10.
अविश्वास प्रस्ताव से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर-
प्रधानमंत्री तथा अन्य मंत्री तब तक अपने पद पर बने रहते हैं, जब तक उन्हें लोकसभा के बहुमत का विश्वास प्राप्त है। यदि लोकसभा इसके विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पास कर दे, तो इन्हें अपने पद से त्याग-पत्र देना पड़ता है।

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प्रश्न 11.
लोकसभा के सदस्यों के चुनाव की विधि का वर्णन करें।
उत्तर-
लोकसभा के सदस्यों का चुनाव प्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली के आधार पर होता है। सभी नागरिकों को जिनकी आयु 18 वर्ष या इससे अधिक हो, चुनाव में वोट डालने का अधिकार है। चुनाव गुप्त मतदान प्रणाली के आधार पर होता है। 5 लाख से साढ़े सात लाख की जनसंख्या के आधार पर एक सदस्य चुना जाता है।

प्रश्न 12.
लोकसभा की वित्तीय शक्तियाँ लिखें।
उत्तर-

  1. बजट तथा धन बिल सर्वप्रथम लोकसभा में ही पेश हो सकते हैं।
  2. राज्यसभा अधिक-से-अधिक धन बिल को 14 दिन तक रोक सकती है।
  3. देश के धन पर वास्तविक नियंत्रण लोकसभा का है।

प्रश्न 13.
राज्यसभा की कोई तीन शक्तियां लिखें।
उत्तर-

  1. साधारण बिल राज्यसभा में पेश हो सकता है। दोनों सदनों द्वारा पास होने पर ही साधारण बिल राष्ट्रपति के पास भेजा जा सकता है।
  2. संवैधानिक मामलों में राज्यसभा को लोकसभा के समान अधिकार प्राप्त हैं।
  3. राज्यसभा धन बिल या बजट को अधिक-से-अधिक 14 दिन तक रोक सकती है।

प्रश्न 14.
भारत के राष्ट्रपति का चुनाव कैसे होता है ?
उत्तर-
राष्ट्रपति का चुनाव एक चुनाव मंडल द्वारा होता है जिसमें संसद् के दोनों सदनों के चुने हुए सदस्य तथा राज्यों की विधानसभाओं (दिल्ली, पुड्डुचेरी तथा जम्मू-कश्मीर भी) के चुने हुए सदस्य सम्मिलित होते हैं। उनका चुनाव एकल संक्रमणीय मत प्रणाली (Single Transferable Vote System) द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व के अनुसार होता है। राष्ट्रपति के चुनाव में एक सदस्य एक मत वाली विधि नहीं अपनाई गई। वैसे एक मतदाता को केवल एक ही मत मिलता है। परंतु उसके मत की गणना नहीं होती बल्कि उसका मूल्यांकन होता है। राष्ट्रपति पद पर चुने जाने के लिए यह आवश्यक है कि उम्मीदवार को मतों का पूर्ण बहुमत अवश्य प्राप्त होना चाहिए।

प्रश्न 15.
राष्ट्रपति राज्य का नाममात्र मुखिया है। कैसे ?
उत्तर-
समस्त शासन राष्ट्रपति के नाम पर चलता है, परंतु वह नाममात्र का मुखिया है जबकि अमेरिका का राष्ट्रपति राज्य का वास्तविक मुखिया है। इसका कारण यह है कि अमेरिका में अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली है जबकि भारत में संसदीय शासन प्रणाली है। राष्ट्रपति अपनी शक्तियों का प्रयोग मंत्रिमंडल की सलाह से करता है। वास्तविक कार्यपालिका मंत्रिमंडल है। अभी तक चौदह राष्ट्रपति हुए हैं और सभी ने संवैधानिक मुखिया के रूप में कार्य किया है।

प्रश्न 16.
राष्ट्रपति की तीन विधायनी शक्तियां लिखें।
उत्तर-
राष्ट्रपति की मुख्य विधायनी शक्तियां निम्नलिखित हैं-

  1. राष्ट्रपति की संसद् के अधिवेशन बुलाने और सत्रावसान संबंधी शक्तियां-राष्ट्रपति संसद् के दोनों सदनों का अधिवेशन बुला सकता है। अधिवेशन का समय बढ़ा सकता है तथा उसे स्थगित कर सकता है।
  2. राष्ट्रपति द्वारा संसद् में भाषण-राष्ट्रपति संसद् के दोनों सदनों को अलग-अलग या दोनों के सम्मिलित अधिवेशन को संबोधित कर सकता है। नई संसद् का तथा वर्ष का पहला अधिवेशन राष्ट्रपति के भाषण से ही आरंभ होता है।
  3. राज्यसभा के 12 सदस्य मनोनीत करना-राष्ट्रपति राज्यसभा के लिए ऐसे 12 सदस्यों को मनोनीत करता है जिन्हें साहित्य, कला, विज्ञान या सामाजिक सेवा के विषय में विशेष ज्ञान या अनुभव प्राप्त हो।

प्रश्न 17.
क्या राष्ट्रपति तानाशाह बन सकता है ?
उत्तर-
राष्ट्रपति तानाशाह नहीं बन सकता और अगर संकटकाल में भी तानाशाह बनना चाहे तो भी नहीं बन सकता। इसका महत्त्वपूर्ण कारण यह है कि भारत में संसदीय शासन प्रणाली को अपनाया गया है और इसमें राष्ट्रपति नाममात्र का मुखिया होता है। राष्ट्रपति की शक्तियों का वास्तव में प्रयोग प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल द्वारा किया जाता है। राष्ट्रपति यदि मनमानी करने की कोशिश करे तो उसे संसद् महाभियोग द्वारा हटा सकती है। राष्ट्रपति संकटकाल की घोषणा मंत्रिपरिषद् की लिखित सलाह से ही कर सकता है। संसद् साधारण बहुमत से प्रस्ताव पास करके राष्ट्रपति को संकटकाल समाप्त करने को कह सकती है।

प्रश्न 18.
प्रधानमंत्री कैसे नियुक्त होता है ?
उत्तर-
प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा होती है, परंतु ऐसा करने में वह अपनी इच्छा से काम नहीं ले सकता। प्रधानमंत्री के पद पर उसी व्यक्ति को नियुक्त किया जाता है जो लोकसभा में बहुमत प्राप्त दल का नेता हो। आम चुनाव के बाद जिस राजनीतिक दल को सदस्यों का बहुमत प्राप्त होगा, उस दल के नेता को राष्ट्रपति सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करता है। यदि किसी राजनीतिक दल को लोकसभा में स्पष्ट बहुमत प्राप्त न हो तो भी राष्ट्रपति को इस बारे में पूर्ण स्वतंत्रता नहीं मिलती बल्कि कठिनाई का सामना करना पड़ता है। ऐसी दशा में उसी व्यक्ति को प्रधानमंत्री नियुक्त किया जाता है जो लोकसभा के बहुमत सदस्यों का सहयोग प्राप्त कर सकता हो।

प्रश्न 19.
प्रधानमंत्री की किन्हीं तीन शक्तियों का वर्णन करें।
उत्तर-
प्रधानमंत्री की निम्नलिखित मुख्य शक्तियां हैं-

  1. प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद् का निर्माण करता है-राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री की सलाह से अन्य मंत्रियों की नियुक्ति करता है।
  2. विभागों का विभाजन-प्रधानमंत्री अपने साथियों को चुनता ही नहीं अपितु उनमें विभागों का विभाजन भी करता है। वह किसी मंत्री को कोई भी विभाग दे सकता है और जब चाहे इसमें परिवर्तन कर सकता है।
  3. प्रधानमंत्री मंत्रिमंडल का सभापति-प्रधानमंत्री, मंत्रिमंडल का सभापति होता है। वह कैबिनेट की बैठकों में सभापतित्व करता है।

प्रश्न 20.
प्रधानमंत्री की स्थिति की चर्चा करो।
उत्तर-
प्रधानमंत्री की शक्तियों तथा कार्यों को देखकर यह स्पष्ट हो जाता है कि वह हमारे संविधान में सबसे अधिक शक्तिशाली अधिकारी है। संविधान द्वारा कार्यकारी शक्तियां राष्ट्रपति को दी गई हैं, परंतु इनका प्रयोग प्रधानमंत्री द्वारा ही किया जाता है, वह देश की वास्तविक मुख्य कार्यपालिका है। एक प्रसिद्ध लेखक के शब्दों में, प्रधानमंत्री की अन्य मंत्रियों में वह स्थिति है जो सितारों में चंद्रमा (Shining moon among the lesser stars) की होती है।

प्रश्न 21.
मंत्रिपरिषद् के किन्हीं तीन कार्यों का वर्णन करो।
उत्तर-
मंत्रिपरिषद् के मुख्य कार्य निम्नलिखित हैं-

  1. राष्ट्रीय नीति का निर्माण-मंत्रिमंडल का सबसे महत्त्वपूर्ण कार्य नीति-निर्माण करना है।
  2. विदेशी संबंधों का संचालन-मंत्रिमंडल विदेश नीति का भी निर्माण करता है और विदेशी संबंधों का संचालन करता है।
  3. प्रशासन पर नियंत्रण-प्रशासन का प्रत्येक विभाग किसी-न-किसी मंत्री के अधीन होता है और संबंधित मंत्री अपने विभाग को सुचारु ढंग से चलाने का प्रयत्न करता है।

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प्रश्न 22.
केंद्रीय मंत्रिपरिषद् में कितने प्रकार के मंत्री होते हैं ? व्याख्या करें।
उत्तर-
केंद्रीय मंत्रिपरिषद् में तीन प्रकार के मंत्री होते हैं-कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री तथा उपमंत्री।

  1. कैबिनेट मंत्री-मंत्रिपरिषद् के सबसे महत्त्वपूर्ण मंत्रियों को कैबिनेट मंत्री कहा जाता है और कैबिनेट मंत्री महत्त्वपूर्ण विभाग के अध्यक्ष होते हैं।
  2. राज्य मंत्री-राज्य मंत्री कैबिनेट मंत्री के सहायक के रूप में कार्य करते हैं। ये कैबिनेट के सदस्य नहीं होते तथा न ही ये कैबिनेट की बैठक में भाग लेते हैं।
  3. उपमंत्री-ये किसी विभाग के स्वतंत्र रूप में अध्यक्ष नहीं होते। इनका कार्य केवल किसी दूसरे मंत्री के कार्य में सहायता देना होता है।

प्रश्न 23.
भारत के राष्ट्रपति की संकटकालीन शक्तियों का वर्णन करो।
उत्तर-
भारतीय संविधान के अनुसार राष्ट्रपति की संकटकालीन शक्तियां इस प्रकार हैं

  1. भारतीय राष्ट्रपति राष्ट्रीय संकटकाल की घोषणा कर सकता है, यदि उसे विश्वास हो जाए कि देश में गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है।
  2. राष्ट्रपति को जब राज्यपाल अथवा किसी अन्य स्रोत से विश्वास हो जाए, कि किसी राज्य में संवैधानिक मशीनरी असफल हो गई है, तो उस राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा सकता है।
  3. राष्ट्रपति को यदि यह विश्वास हो जाए कि भारत या इसके किसी क्षेत्र में वित्तीय स्थायित्व संकट में है, तो तब राष्ट्रपति वित्तीय आपात्काल की घोषणा कर सकता है।

प्रश्न 24.
क्या प्रधानमंत्री तानाशाह बन सकता है ?
उत्तर-
प्रधानमंत्री तानाशाह नहीं बन सकता क्योंकि

  1. प्रधानमंत्री संसद् के प्रति उत्तरदायी है और संसद् प्रधानमंत्री को निरंकुश बनने से रोकती है।
  2. प्रधानमंत्री जनमत के विरुद्ध नहीं जा सकता।
  3. प्रधानमंत्री को सदैव विरोधी पार्टी का ध्यान रखना पड़ता है।

प्रश्न 25.
प्रधानमंत्री तथा मंत्रिपरिषद् के आपसी संबंधों की चर्चा कीजिए।
उत्तर-
प्रधानमंत्री लोकसभा के बहुमत दल का नेता होता है। वह स्वयं ही मंत्रिपरिषद् का निर्माण करता है। वह मंत्रियों में विभागों का बंटवारा करता है एवं मंत्रिपरिषद् की अध्यक्षता करता है। यदि कोई मंत्री प्रधानमंत्री की नीति अनुसार कार्य नहीं करता तो उसे त्याग-पत्र देना पड़ता है। यदि वह मंत्री त्याग-पत्र न दे, तो प्रधानमंत्री त्याग-पत्र देकर मंत्रिपरिषद् को भंग कर सकता है तथा नवीन मंत्रिपरिषद् का गठन करता है, जिसमें उस मंत्री को शामिल नहीं करता।

प्रश्न 26.
राष्ट्रपति की कोई तीन न्यायिक शक्तियां बताइए।
उत्तर-
राष्ट्रपति की तीन न्यायिक शक्तियां इस प्रकार हैं-

  1. राष्ट्रपति सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालय के मुख्य तथा अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति करता है।
  2. राष्ट्रपति जटिल कानूनी प्रश्न पर उच्चतम न्यायालय से परामर्श मांग सकता है।
  3. राष्ट्रपति को क्षमादान करके तथा अपराधी के दंड को कम करने की शक्ति प्राप्त है।

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प्रश्न 27.
सरकार की शक्तियां क्या हैं ?
उत्तर-
सरकार के तीन अंग हैं-विधानपालिका, कार्यपालिका तथा न्यायपालिका। इन तीनों अंगों के अपने अलगअलग कार्य हैं-

  1. विधानपालिका देश के लिए कानून बनाती है।
  2. कार्यपालिका कानूनों को लागू करती है तथा सरकार का संचालन करती है।
  3. न्यायपालिका न्याय प्रदान करती है तथा कानूनों का उल्लंघन करने वालों को दंड देती है।

दीर्घ उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
संसद् की शक्तियों तथा कार्यों का वर्णन करें।
उत्तर-
संसद् की शक्तियों तथा कार्यों का वर्णन इस प्रकार है-

  1. विधायिनी शक्तियां-संसद् का मुख्य कार्य कानून निर्माण करना है। संसद् की कानून बनाने की शक्तियां बड़ी व्यापक हैं। संघीय सूची में दिए गए सभी विषयों पर इसे कानून बनाने का अधिकार है। समवर्ती सूची पर संसद् और राज्यों की विधानपालिका दोनों को ही कानून बनाने का अधिकार है परंतु यदि किसी विषय पर संसद् और राज्य की विधानपालिका के कानून में पारस्परिक विरोध हो तो संसद् का कानून लागू होता है। कुछ परिस्थितियों में राज्यसूची के विषयों पर भी कानून बनाने का अधिकार संसद् को प्राप्त है।
  2. वित्तीय शक्तियां-संसद् राष्ट्र के धन पर नियंत्रण रखती है। वित्तीय वर्ष के आरंभ होने से पहले बजट संसद् में पेश किया जाता है। संसद् इस पर विचार करके अपनी स्वीकृति देती है। संसद् की स्वीकृति के बिना सरकार जनता पर कोई टैक्स नहीं लगा सकती और न ही धन खर्च कर सकती है।
  3. कार्यपालिका पर नियंत्रण-हमारे देश में संसदीय शासन प्रणाली को अपनाया गया है। राष्ट्रपति संवैधानिक अध्यक्ष होने के नाते संसद् के प्रति उत्तरदायी नहीं है जबकि मंत्रिमंडल अपने समस्त कार्यों के लिए संसद् के प्रति उत्तरदायी है। मंत्रिमंडल तब तक अपने पद पर रह सकता है जब तक उसे लोकसभा में बहुमत का समर्थन प्राप्त रहे।
  4. राष्ट्रीय नीतियों को निर्धारित करना-भारतीय संसद् केवल कानून ही नहीं बनाती बल्कि वह राष्ट्रीय नीतियां भी निर्धारित करती है।
  5. न्यायिक शक्तियां-संसद् राष्ट्रपति और उप-राष्ट्रपति को यदि वे अपने कार्यों का ठीक प्रकार से पालन न करें तो महाभियोग चलाकर अपने पद से हटा सकती है। संसद् के दोनों सदन सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालयों के जजों को हटाने का प्रस्ताव पास करके राष्ट्रपति को भेज सकते हैं। कुछ अन्य पदाधिकारियों को पद से हटाए जाने का प्रस्ताव भी संसद् के द्वारा पास किया जा सकता है।
  6. संवैधानिक शक्तियां-भारतीय संसद् को संविधान में संशोधन करने का भी अधिकार प्राप्त है।
  7. सार्वजनिक मामलों पर वाद-विवाद-संसद् में जनता के प्रतिनिधिं होते हैं और इसलिए यह सार्वजनिक मामलों पर वाद-विवाद का सर्वोत्तम साधन है। संसद् में ही सरकार की नीतियों तथा निर्णयों पर वाद-विवाद होता है और उनकी विभिन्न दृष्टिकोणों से आलोचना की जाती है।
  8. निर्वाचन संबंधी अधिकार-संसद् उप-राष्ट्रपति का चुनाव करती है। संसद् राष्ट्रपति के चुनाव में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। लोकसभा अपने स्पीकर तथा डिप्टी स्पीकर का चुनाव करती है और राज्यसभा अपने उप-अध्यक्ष का चुनाव करती है।

प्रश्न 2.
राष्ट्रपति की महत्त्वपूर्ण कार्यकारी शक्तियां लिखें।
उत्तर-
राष्ट्रपति की मुख्य कार्यकारी शक्तियां अग्रलिखित हैं-

  1. प्रशासनिक शक्तियां-भारत का समस्त प्रशासन राष्ट्रपति के नाम पर चलाया जाता है और भारत सरकार के सभी निर्णय औपचारिक रूप से उसी के नाम पर लिए जाते हैं। देश का सर्वोच्च शासक होने के नाते वह नियम तथा अधिनियम भी बनाता है।
  2. मंत्रिपरिषद् से संबंधित शक्तियां-राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की नियुक्ति करता है और उसके परामर्श से अन्य मंत्रियों की नियुक्ति करता है। वह प्रधानमंत्री की सलाह पर मंत्रियों को अपदस्थ कर सकता है।
  3. सैनिक शक्तियां-राष्ट्रपति राष्ट्र की सशस्त्र सेनाओं का सर्वोच्च सेनापति है। वह स्थल, जल तथा वायु सेनाध्यक्षों की नियुक्ति करता है। वह फील्ड मार्शल की उपाधि भी प्रदान करता है । वह राष्ट्रीय रक्षा समिति का अध्यक्ष
  4. नियुक्तियां-संघ सरकार की सभी महत्त्वपूर्ण नियुक्तियां राष्ट्रपति द्वारा की जाती हैं।
  5. केंद्रीय प्रदेशों का प्रशासन-केंद्रीय प्रदेशों का प्रशासन राष्ट्रपति के नाम पर ही चलाया जाता है।

प्रश्न 3.
राष्ट्रपति की विधायिनी शक्तियां लिखें।
उत्तर-
राष्ट्रपति की मुख्य विधायिनी शक्तियां निम्नलिखित हैं

  1. राष्ट्रपति की संसद् के अधिवेशन बुलाने और सत्रावसान संबंधी शक्तियां-राष्ट्रपति संसद् के दोनों सदनों का अधिवेशन बुला सकता है। अधिवेशन का समय बढ़ा सकता है तथा उसे स्थगित कर सकता है। राष्ट्रपति ही अधिवेशन का समय और स्थान निश्चित करता है।
  2. राष्ट्रपति द्वारा संसद् में भाषण-राष्ट्रपति संसद् के दोनों सदनों को अलग-अलग या दोनों के सम्मिलित अधिवेशन को संबोधित कर सकता है। नयी संसद् का तथा वर्ष का पहला अधिवेशन राष्ट्रपति के भाषण से ही आरंभ होता है।
  3. राज्यसभा के 12 सदस्य मनोनीत करना-राष्ट्रपति राज्यसभा के लिए ऐसे 12 सदस्यों को मनोनीत करता है जिन्हें साहित्य, कला, विज्ञान या सामाजिक सेवा के विषय में विशेष ज्ञान या अनुभव प्राप्त हो।
  4. अध्यादेश-जब संसद् का अधिवेशन न हो रहा हो तब राष्ट्रपति अध्यादेश जारी कर सकता है।
  5. राष्ट्रपति को 2 एंग्लो-इंडियनों को लोकसभा का सदस्य मनोनीत करने का अधिकार प्राप्त है।

प्रश्न 4.
मंत्रिपरिषद् पर संसदीय नियंत्रण पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर-
हमारे देश में संसदीय शासन प्रणाली को अपनाया गया है। संसद् कई तरीकों से मंत्रिमंडल पर प्रभाव डाल सकती है और उस पर नियंत्रण रख सकती है और उसे अपनी इच्छा के अनुसार कार्य करने के लिए बाध्य कर सकती

  1. प्रश्न–संसद् के सदस्य मंत्रियों से उनके विभागों के कार्यों के संबंध में प्रश्न पूछ सकते हैं जिनका मंत्रियों को उत्तर देना पड़ता है।
  2. बहस-संसद् राष्ट्रपति के उद्घाटन भाषण पर बहस करती है जबकि सरकार की समस्त नीति की आलोचना की जाती है।
  3. काम-रोको प्रस्ताव-किसी गंभीर समस्या पर विचार करने के लिए संसद् के सदस्यों द्वारा काम-रोको प्रस्ताव (Adjournment Motion) भी पेश किए जाते हैं, जिनका उद्देश्य यह होता है कि सदन के निश्चित कार्यक्रम को रोककर उस गंभीर समस्या पर पहले विचार किया जाए। इसमें सरकार की काफ़ी आलोचना की जाती है।
  4. ध्यानाकर्षण प्रस्ताव-जब लोकसभा का अधिवेशन चल रहा हो तो उस समय यदि कोई सदस्य सदन का ध्यान किसी आवश्यक घटना की ओर आकर्षित करना चाहता हो तो वह ध्यानाकर्षण प्रस्ताव प्रस्तुत कर सकता है। ऐसे प्रस्ताव सभा का ध्यान किसी महत्त्वपूर्ण घटना की ओर आकर्षित करने के लिए प्रस्तुत किए जाते हैं।
  5.  मंत्रिमंडल को हटाना–संसद् यदि मंत्रिमंडल की नीतियों और कार्यों से संतुष्ट न हो तो वह मंत्रिमंडल को अपने पद से हटा सकती है। अविश्वास प्रस्ताव केवल लोकसभा द्वारा ही पास किया जा सकता है।

प्रश्न 5.
संसदीय प्रणाली की कुछ विशेषताएं बताएं।
उत्तर-
संसदीय सरकार वह शासन व्यवस्था है जिसमें मंत्रिमंडल विधानपालिका अर्थात् संसद् के लोकप्रिय सदन के समक्ष अपनी राजनीतिक नीतियों व कार्यों के लिए उत्तरवादी होता है जबकि राज्य का अध्यक्ष जोकि नाममात्र की कार्यपालिका है उत्तरदायी नहीं होता।
विशेषताएं-

  1. देश का मुखिया नाममात्र कार्यपालिका–संसदीय व्यवस्था में देश का मुखिया अर्थात् राष्ट्रपति नाममात्र का मुखिया होता है। क्योंकि वास्तविक शक्ति प्रधानमंत्री व मंत्रिमंडल के पास होती है।
  2. स्पष्ट बहुमत-संसदीय व्यवस्था में शासन उस राजनीतिक दल द्वारा चलाया जाता है जिसे चुनावों में स्पष्ट बहुमत मिल जाता है। वह दल चुनाव जीतने के पश्चात् अपने नेता का चुनाव करता है जिसे राष्ट्रपति सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करता है।
  3. संसद् की सदस्यता अनिवार्य-मंत्री बनने के लिए यह आवश्यक है कि उनके पास संसद् की सदस्यता हो। अगर कोई संसद् सदस्य नहीं है तो प्रधानमंत्री की सिफ़ारिश पर राष्ट्रपति उसे मंत्री तो बना सकता है परंतु उसे 6 महीने के भीतर संसद् सदस्य बनना आवश्यक है अन्यथा उसे पद छोड़ना पड़ सकता है।
  4. सामूहिक दायित्व-मंत्रिमंडल अपने कार्यों के लिए सामूहिक रूप से विधानपालिका अर्थात् संसद् के प्रति उत्तरदायी होता है। उनसे संसद् में किसी भी प्रकार का प्रश्न पूछा जा सकता है। अगर संसद (लोकसभा) चाहे तो उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास करके उन्हें त्याग-पत्र देने के लिए बाध्य भी कर सकती है।
  5. प्रधानमंत्री का नेतृत्व-संसदीय व्यवस्था में मंत्रिमंडल का नेता हमेशा प्रधानमंत्री होता है। राष्ट्रपति अलगअलग मंत्रियों की नियुक्ति उसके परामर्श के अनुसार ही करता है। वह अलग-अलग मंत्रियों के कार्यों को देखता है तथा उनमें सामंजस्य बैठाने का प्रयास करता है।

PSEB 9th Class SST Solutions Civics Chapter 4 भारतीय संसदीय लोकतंत्र

भारतीय संसदीय लोकतंत्र PSEB 9th Class Civics Notes

  • सरकार के तीन अंग होते हैं-विधानपालिका, कार्यपालिका तथा न्यायपालिका। विधानपालिका का कार्य है-कानून बनाना, कार्यपालिका का कार्य है-कानूनों को लागू करना तथा न्यायपालिका का कार्य है कानूनों को लागू करना।
  • हमारे देश में संसदीय कार्यप्रणाली है अर्थात् मंत्रिमंडल के सदस्यों के लिए संसद् का सदस्य होना आवश्यक है। मंत्री उस समय तक अपने पद पर बने रह सकते हैं जब तक उन्हें विधानपालिका में बहुमत प्राप्त होता है।
  • संसदीय कार्यप्रणाली में देश का एक संवैधानिक मुखिया होता है जिसके पास बहुत-सी शक्तियां होती हैं। परंतु वह व्यावहारिक रूप से इन शक्तियों का प्रयोग नहीं कर सकता। ये शक्तियां मंत्रिमंडल उसके नाम पर प्रयोग करता है।
  • इस व्यवस्था में देश का शासन उस राजनीतिक दल द्वारा निश्चित समय के लिए चलाया जाता है जिसके पास संसद् (लोक सभा) में बहुमत होता है।
  • संसदीय शासन प्रणाली में प्रधानमंत्री मंत्रिमंडल का नेतृत्व करता है तथा वह बहुमत दल का नेता होता है। राष्ट्रपति की सभी शक्तियों का प्रयोग भी वह ही करता है।
  • भारत के संविधान के अनुच्छेद 79 के अंतर्गत भारत में संसद् की व्यवस्था की गई है जिसमें लोक सभा, राज्य सभा व राष्ट्रपति शामिल है।
  • लोकसभा को संपूर्ण जनता द्वारा सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार द्वारा चुना जाता है तथा यह जनता का प्रतिनिधित्व करती है। राज्यसभा राज्यों का प्रतिनिधित्व करती है तथा इसके सदस्यों का चुनाव राज्यों की विधानसभाओं द्वारा किया जाता है।
  • देश के संवैधानिक मुखिया को राष्ट्रपति कहते हैं जिसे निर्वाचक मंडल के चुने हुए सदस्यों द्वारा चुना जाता है। देश का संपूर्ण शासन राष्ट्रपति के नाम पर चलता है।
  • राष्ट्रपति को संविधान ने बहुत-सी शक्तियां दी हैं परंतु यह व्यवस्था भी की गई है कि वह अपनी शक्तियों का प्रयोग मंत्रिमंडल की सलाह पर ही करेगा। उसे कई प्रकार की वैधानिक कार्यकारी, वित्तीय, न्यायिक आपातकालीन शक्तियां दी गई हैं।
  • प्रधानमंत्री की सहायता के लिए एक मंत्रिमंडल नियुक्त किया जाता है जिसमें तीन प्रकार के मंत्री होते हैं तथा वह हैं-कैबिनेट मंत्री, राज्यमंत्री तथा उपमंत्री। इन मंत्रियों को प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति नियुक्त करता है।
  • संसदीय सरकार में वास्तविक शासन प्रधानमंत्री ही चलाता है। जिस दल को लोकसभा के चुनाव में बहुमत प्राप्त होता है वह अपने एक नेता का चुनाव करता है जिसे राष्ट्रपति प्रधानमंत्री नियुक्त कर देता है।
  • चाहे प्रधानमंत्री की शक्तियों को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि वह देश का सर्वोसर्वा होता है परंतु ऐसा नहीं है। उसकी शक्तियां भी एक दायरे में बँधी होती हैं तथा वह भी जनादेश का विरोध नहीं कर सकता।

PSEB 9th Class SST Solutions Civics Chapter 6 संविधान के अंतर्गत नागरिकों के मौलिक अधिकार

Punjab State Board PSEB 9th Class Social Science Book Solutions Civics Chapter 6 संविधान के अंतर्गत नागरिकों के मौलिक अधिकार Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 9 Social Science Civics Chapter 6 संविधान के अंतर्गत नागरिकों के मौलिक अधिकार

SST Guide for Class 9 PSEB संविधान के अंतर्गत नागरिकों के मौलिक अधिकार Textbook Questions and Answers

(क) रिक्त स्थान भरें :

  1. भारतीय संविधान द्वारा नागरिकों को ……….. मौलिक अधिकार प्रदान किए गए हैं।
  2. नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार संविधान के अनुच्छेद …………. द्वारा ……………. संशोधन के अंतर्गत दिया गया है।

उत्तर-

  1. छ:
  2. 21 A, 86वें।।

(ख) बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
‘बालश्रम’ किस अधिकार द्वारा प्रतिबंधित है ?
(अ) स्वतंत्रता का अधिकार
(आ) समानता का अधिकार
(इ) शोषण विरुद्ध अधिकार
(ई) संवैधानिक उपचारों का अधिकार।
उत्तर-
(इ) शोषण विरुद्ध अधिकार

PSEB 9th Class SST Solutions Civics Chapter 6 संविधान के अंतर्गत नागरिकों के मौलिक अधिकार

प्रश्न 2.
धर्मनिरपेक्ष राज्य का अर्थ है
(अ) वह राज्य जहां केवल एक ही धर्म हो
(आ) वह राज्य जिसमें कोई धर्म न हो
(इ) वह राज्य जहां बहुत से धर्म हों
(ई) वह राज्य जिसका कोई राजकीय धर्म नहीं। ”
उत्तर-
(ई) वह राज्य जिसका कोई राजकीय धर्म नहीं।।

(ग) निम्नलिखित कथनों में सही के लिए तथा गलत के लिए चिन्ह लगाएं :

  1. अधिकार सामाजिक जीवन की वे अवस्थाएं हैं जिनके बिना मानव का पूर्ण विकास नहीं हो सकता।
  2. धर्म-निरपेक्ष का अर्थ है लोग किसी भी धर्म को अपनाने के लिए स्वतंत्र हैं।

उत्तर-

  1. (✓)
  2. (✓)

अति लघु उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
मौलिक अधिकार संविधान के किस भाग में अंकित हैं ?
उत्तर-
मौलिक अधिकार संविधान के तीसरे भाग में अंकित हैं।

प्रश्न 2.
मौलिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए भारतीय न्यायपालिका को कौन-सी शक्ति प्राप्त है ?
उत्तर-
मौलिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए भारतीय न्यायपालिका को संवैधानिक उपचारों के अधिकार की शक्ति प्राप्त है।

प्रश्न 3.
उस विधेयक का नाम बताएं जिसमें बाल गंगाधर तिलक ने भारतीयों के लिए अंग्रेजों से कुछ अधिकारों की माांग की थी ?
उत्तर-
बाल गंगाधर तिलक ने स्वराज विधेयक की मांग की थी।

प्रश्न 4.
अंग्रेजों से पुरुषों व स्त्रियों के लिए समान अधिकारों की मांग किस रिपोर्ट में की गई थी ?
उत्तर-
नेहरू रिपोर्ट।

प्रश्न 5.
व्यक्ति द्वारा किया गया उचित दावा जिसे समाज स्वीकार करता है एवं राज्य कानून द्वारा लागू करता है, को क्या कहते हैं ?
उत्तर-
मौलिक अधिकार।

प्रश्न 6.
संपत्ति का अधिकार, मौलिक अधिकारों की सूची से कब और किस संशोधन द्वारा विकसित किया गया ?
उत्तर-
1978 में 44वें संवैधानिक संशोधन द्वारा संपत्ति के अधिकार को कानूनी अधिकार बना दिया गया था।

प्रश्न 7.
कोई दो मौलिक अधिकार बताएं जो विदेशियों को भी प्राप्त हैं।
उत्तर-
स्वतंत्रता का अधिकार, कानून के सामने समानता का अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार।

प्रश्न 8.
बच्चों के शिक्षा के अधिकार को मौलिक अधिकारों से संबंधित किस अनुच्छेद के अधीन दर्ज किया गया है ?
उत्तर-
अनुच्छेद 21 A.

प्रश्न 9.
मौलिक अधिकार किस अनुच्छेद से किस अनुच्छेद तक दर्ज हैं ?
उत्तर-
अनुच्छेद 14-32 तक।

प्रश्न 10.
‘अस्पृश्यता के उन्मूलन’ के लिए भारत के संविधान में किस अनुच्छेद अधीन व्यवस्था की गई है ?
उत्तर-
अनुच्छेद 17 से अस्पृश्यता के उन्मूलन की व्यवस्था की गई है।

लघु उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
‘समानता का अधिकार’ की संक्षेप में व्याख्या करें। .
उत्तर-
समानता का अधिकार लोकतंत्र की आधारशिला है जिसका वर्णन अनुच्छेद 14 से 18 तक में किया गया है।

  1. संविधान के अनुच्छेद 14 में ‘कानून के समक्ष समता’ और ‘कानूनों के समान संरक्षण’ शब्दों का एक साथ प्रयोग किया गया है।
  2. अनुच्छेद 15 के अनुसार राज्य किसी नागरिक के विरुद्ध धर्म, मूल, वंश, जाति, लिंग अथवा इनमें से किसी के भी आधार पर कोई भेदभाव नहीं करेगा।
  3. अनुच्छेद 16 राज्य में सरकारी नौकरियों या पदों पर नियुक्ति के संबंध में, सब नागरिकों को समान अवसर प्रदान करता है।
  4. अनुच्छेद 17 द्वारा अस्पृश्यता को समाप्त किया गया है।
  5. अनुच्छेद 18 के अनुसार यह व्यवस्था की गई है कि सेना या शिक्षा संबंधी उपाधि के अतिरिक्त राज्य कोई और उपाधि नहीं देगा।

PSEB 9th Class SST Solutions Civics Chapter 6 संविधान के अंतर्गत नागरिकों के मौलिक अधिकार

प्रश्न 2.
‘न्यायपालिका की न्याय पुनर्निरीक्षण’ की शक्ति पर नोट लिखें।
उत्तर-
न्यायिक पुनर्निरीक्षण न्यायालयों की वह शक्ति है जिसके द्वारा वह विधानसभा के कानूनों तथा कार्यपालिका के आदेशों की जांच कर सकता है और यदि ये कानून और आदेश संविधान के विरुद्ध हों तो उनको असंवैधानिक एवं अवैध घोषित कर सकते हैं। न्यायालय कानून की उन्हीं धाराओं को अवैध घोषित करते हैं जो संविधान के विरुद्ध होते हैं, न कि समस्त कानून को। न्यायालय उन्हीं कानूनों को अवैध घोषित कर सकता है जो उसके सामने मुकद्दमें के रूप में आते हैं।

प्रश्न 3.
न्यायपालिका को स्वतंत्र बनाने के लिए भारत के संविधान में क्या व्यवस्थाएं की गई हैं ?
उत्तर-

  1. न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए न्यायाधीशों की नियुक्ति कार्यपालिका द्वारा होनी चाहिए।
  2. न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए न्यायाधीशों को अच्छा वेतन तथा रिटायर होने के पश्चात् पेंशन मिलनी चाहिए।
  3. न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए न्यायाधीशों के पद की सुरक्षा होनी चाहिए और पद की अवधि लंबी होनी चाहिए।

प्रश्न 4.
‘धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार’ की संक्षेप में व्याख्या करें।
उत्तर-
अनुच्छेद 25 से 28 तक में नागरिकों के धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार का वर्णन किया गया है। प्रत्येक व्यक्ति की अपनी इच्छानुसार धर्म को मानने तथा अपने इष्टदेव की पूजा करने का अधिकार है। लोगों को धार्मिक संस्थाएं स्थापित करने का, उनका प्रबंध करने का और धार्मिक संस्थाओं को संपत्ति इत्यादि रखने के अधिकार दिए गए हैं। किसी भी व्यक्ति को ऐसा टैक्स देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता जिसे किसी विशेष धर्म के लिए प्रयोग किया जाना हो।

प्रश्न 5.
भारत के नागरिकों को अनुच्छेद 19 के अंतर्गत कौन-कौन सी स्वतंत्रताएं प्रदान की गई हैं ?
उत्तर-
भारतीय नागरिकों को स्वतंत्रता के अधिकार के तहत अनुच्छेद 19 से 22तक कुछ स्वतंत्रताएं दी गई हैं। अनुच्छेद 19 के अनुसार नागरिकों को भाषण देने और विचार प्रकट करने, शांतिपूर्ण तथा बिना हथियारों के इकट्ठे होने, संघ या समुदाय बनाने, घूमने-फिरने, किसी भी स्थान पर बसने या कोई भी व्यवसाय करने की स्वतंत्रता प्राप्त है। परंतु, इन स्वतंत्रताओं पर एक प्रतिबंध भी हैं। अनुच्छेद 20 से 22 तक नागरिकों को व्यक्तिगत स्वतंत्रताएं प्रदान की गई हैं।

प्रश्न 6.
‘शोषण-विरुद्ध अधिकार’ की व्याख्या करें।
उत्तर-
अनुच्छेद 23 तथा 24 के अनुसार नागरिकों को शोषण के विरुद्ध अधिकार दिए गए हैं।

  1. अनुच्छेद 23 के अनुसार व्यक्तियों को खरीदा या बेचा नहीं जा सकता है और न ही किसी व्यक्ति से बेगार ली जा सकती है।
  2. अनुच्छेद 24 के अनुसार 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को किसी ऐसे कारखाने या खान में नौकरी पर नहीं रखा जा सकता, जहां उसके स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ने की संभावना हो।

प्रश्न 7.
मौलिक अधिकार-मौलिक कैसे हैं ? अपने उत्तर की पुष्टि तर्क सहित करें।
उत्तर-
मौलिक अधिकारों को निम्नलिखित कारणों से मौलिक कहा जाता है.

  1. मौलिक अधिकार मूल रूप से मानवीय अधिकार हैं। मनुष्य होने के नाते इन अधिकारों का उपयोग करना ही चाहिए।
  2. मौलिक अधिकार हमें संविधान ने दिए हैं और संविधान देश का मौलिक कानून है। यदि नागरिक को सुखी तथा लोकतांत्रिक जीवन व्यतीत करना है, तो ये अधिकार प्राप्त होने ही चाहिए।
  3. संविधान ने इन अधिकारों को लागू करने के लिए प्रभावशाली विधि अपनाई है। अधिकारों का हनन होने पर कोई भी नागरिक न्यायालय की सहायता से अपने अधिकारों की रक्षा कर सकता है।

PSEB 9th Class SST Solutions Civics Chapter 6 संविधान के अंतर्गत नागरिकों के मौलिक अधिकार

दीर्घ उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
मौलिक अधिकारों का स्वरूप कैसा है ? संक्षेप में व्याख्या करें।
उत्तर-
मौलिक अधिकारों का स्वरूप निम्नलिखित है

  1. व्यापक और विस्तृत-भारतीय संविधान में लिखित मौलिक अधिकार बड़े विस्तृत तथा व्यापक हैं। इनका वर्णन संविधान के तीसरे भाग की 24 धाराओं में किया गया है। नागरिकों को 6 प्रकार के मौलिक अधिकार दिए गए हैं और प्रत्येक अधिकार की विस्तृत व्याख्या की गई है।
  2. मौलिक अधिकार सब नागरिकों के लिए हैं-संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों की एक विशेषता यह है कि ये भारत के सभी नागरिकों को समान रूप से प्राप्त हैं। ये अधिकार सभी को जाति, धर्म, रंग, लिंग आदि के भेदभाव के बिना दिए गए हैं।
  3. मौलिक अधिकार असीमित नहीं हैं-कोई भी अधिकार पूर्ण और असीमित नहीं हो सकता। भारतीय संविधान में दिए गए मौलिक अधिकार भी असीमित नहीं हैं। संविधान के अंतर्गत मौलिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं।
  4. मौलिक अधिकार न्याय योग्य हैं-यदि किसी नागरिक के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया जाता है, तो वह नागरिक न्यायालय के पास जा सकता है। इसके पीछे कानूनी शक्ति है।
  5. सकारात्मक व नकारात्मक-मौलिक अधिकार सकारात्मक भी हैं तथा नकारात्मक भी। जहां एक तरफ यह सरकार के कुछेक कार्यों पर प्रतिबंध लगाते हैं वहीं दूसरी तरफ यह सरकार को कुछ सकारात्मक आदेश भी देते हैं।
  6. नागरिक व राजनीतिक स्वरूप-हमारे अधिकारों को दो श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है-नागरिक व राजनीतिक, संघ बनाने, विचार प्रकट करने, बिना हथियार इकट्ठे होने जैसे अधिकार राजनीतिक होते हैं। इसके साथ समानता का अधिकार, सांस्कृतिक व शिक्षा संबंधी अधिकार नागरिक अधिकार हैं।
  7. इनकी उल्लंघना नहीं हो सकती–संसद् में कानून पास करवा कर अथवा कार्यपालिका द्वारा आदेश पास करके अधिकारों को न तो खत्म किया जा सकता है न ही उनमें परिवर्तन किया जा सकता है। अगर ऐसा किया जाता है तो न्यायपालिका उस आदेश को रद्द भी कर सकती है।

प्रश्न 2.
अनुच्छेद 20 से 22 तक मौलिक अधिकारों सम्बन्धी की गई व्यवस्थाओं की व्याख्या करें।
उत्तर-
जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा (Right to life and Personal Liberty) Art. 2022) अनुच्छेद 20 व्यक्ति और उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करता है, जैसे-

  1. किसी व्यक्ति को किसी ऐसे कानून का उल्लंघन करने पर दंड नहीं दिया जा सकता जो कानून उसके अपराध करते समय लागू नहीं था।
  2. किसी व्यक्ति को उससे अधिक सज़ा नहीं दी जा सकती जितनी अपराध करते समय प्रचलित कानून के अधीन दी जा सकती है।
  3. किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध उसी अपराध के लिए एक बार से अधिक मुकद्दमा नहीं चलाया जाएगा और दंडित नहीं किया जाएगा।
  4. किसी अभियुक्त को अपने विरुद्ध गवाही देने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। अनुच्छेद 21 में लिखा है कि कानून द्वारा स्थापित पद्धति के बिना किसी व्यक्ति को उसको व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जाएगा।

दिसंबर, 2007 में राष्ट्रपति ने 86वें संवैधानिक संशोधन को अपनी स्वीकृति प्रदान की। इस स्वीकृति के बाद शिक्षा का अधिकार (Right in Education) संविधान के तीसरे भाग में शामिल होने के कारण एक मौलिक अधिकार बन गया है। 1 अप्रैल, 2010 से बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 लागू होने के पश्चात् 6 वर्ष से 14 वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे को निःशुल्क और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा पाने का कानूनी अधिकार मिल गया है।
गिरफ्तारी एवं नज़रबंदी के विरुद्ध रक्षा-अनुच्छेद 22 गिरफ्तार तथा नज़रबंद नागरिकों के अधिकारों की घोषणा करता है। अनुच्छेद 22 के अनुसार

  1. गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को गिरफ्तारी के तुरंत पश्चात् उसको गिरफ्तारी के कारणों से परिचित कराया जाना चाहिए।
  2. उसे अपनी पसंद के वकील से परामर्श लेने और उनके द्वारा सफाई पेश करने का अधिकार होगा।
  3. बंदी-गृह में बंद किए गए किसी व्यक्ति को बंदी गृह से मैजिस्ट्रेट के न्यायालय तक की यात्रा के लिए आवश्यक समय निकाल कर 24 घंटों के अंदर निकट से निकट मैजिस्ट्रेट के न्यायालय में उपस्थिति किया जाए।
  4. बिना मैजिस्ट्रेट की आज्ञा के 24 घंटों से अधिक समय के लिए किसी व्यक्ति को कारावास में नहीं रखा जाएगा।

अपवाद-अनुच्छेद 22 में लिखे अधिकार उस व्यक्ति को नहीं मिलते जो शत्रु विदेशी है या जो निवारक नज़रबंद कानून के अनुसार गिरफ्तार किये गये हो।
भारतीय संसद् देश की प्रतिरक्षा, विदेशी संबंधों की सार्वजनिक सुरक्षा एवं व्यवस्था को बनाए रखने के लिए और भारत संघ की रक्षा के लिए निवारक निषेध अधिनियम का आश्रय ले सकती ।
स्वतंत्रता के अधिकार का निलंबन (Suspension of Right to Freedom)-राष्ट्रपति संकटकाल की घोषणा करके संविधान में दिए गए स्वतंत्रता के अधिकार को निलंवित कर सकता है तथा साथ ही उच्च न्यायालयों तथा सर्वोच्च न्यायालयों में इन स्वतंत्रताओं के विरुद्ध अपील करने के अधिकार का भी निषेध कर सकता है। 44वें संशोधन के अंतर्गत यह व्यवस्था की गई है कि अनुच्छेद 21 के अंतर्गत दिए गए निजी स्वतंत्रता के अधिकार को आपातकालीन स्थिति के दौरान भी स्थगित नहीं किया जा सकता।

प्रश्न 3.
धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के अंतर्गत अनुच्छेद 25 से 28 तक की गई व्यवस्थाओं की व्याख्या करें।
उत्तर-
संविधान के अनुच्छेद 25 से 28 तक में नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार दिया गया है। सभी व्यक्तियों को अंतःकरण की स्वतंत्रता का समान अधिकार प्राप्त है और बिना रोक-टोक के धर्म में विश्वास रखने धार्मिक कार्य करने तथा प्रचार करने का अधिकार है। सभी व्यक्तियों को धार्मिक मामलों का प्रबंध करने की स्वतंत्रता दी गई है। किसी भी व्यक्ति को कोई ऐसा कर देने के लिए विवश नहीं किया जा सकता जिसको इकट्ठा करके किसी विशेष धर्म या धार्मिक समुदाय के विकास को बनाए रखने के लिए खर्च किया जाना हो। किसी भी सरकारी संस्था में कोई धार्मिक शिक्षा नहीं दी जा सकती। गैर सरकारी शिक्षा संस्थाओं में जिन्हें राज्य द्वारा मान्यता प्राप्त है अथवा जिन्हें सरकारी सहायता प्राप्त होती है किसी विद्यार्थी को उसकी इच्छा के विरुद्ध धार्मिक शिक्षा ग्रहण करने या धार्मिक पूजा पाने में सम्मिलित होने के लिए विवश नहीं किया जा सकता।

प्रश्न 4.
संवैधानिक उपचारों के अधिकार की संक्षेप में व्याख्या करें।
उत्तर-
भारतीय संविधान के निर्माताओं को डर था कि कहीं सरकारें निरंकुश हो कर जनता के अधिकारों का हनन ही न कर दें। इसलिए उन्होंने भारतीय नागरिकों के मौलिक अधिकारों को संविधान में डालने के साथ साथ इन अधिकारों को लागू करने की व्यवस्था भी की। अगर भारत के किसी भी नागरिक के अधिकारों का किसी व्यक्ति, समूह या सरकार की तरफ से उल्लंघन होता है तो ऐसी स्थिति में नागरिक राज्य के उच्च न्यायालय अथवा सर्वोच्च न्यायालय में जाकर अपने अधिकारों की मांग कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में न्यायालय उन्हें उनके अधिकार वापिस दिलाएगा। उन्हें लागू करने के लिए उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय पांच प्रकार की लेख (Writs) जारी कर सकता है। यह है

  1. बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus)
  2. परमादेश या फरमान लेख (Mandamus)
  3. प्रतिषेध लेख (Certiorari)
  4. अधिकार पृच्छा लेख (Prohibition)
  5. उत्प्रेषण लेख (Quo-warranto)

PSEB 9th Class Social Science Guide संविधान के अंतर्गत नागरिकों के मौलिक अधिकार Important Questions and Answers

बहुविकल्पीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
मानव के लिए क्या आवश्यक है ?
(क) हिंसा
(ख) अज्ञानता
(ग) अधिकार
(घ) बेरोज़गारी।
उत्तर-
(ग) अधिकार

PSEB 9th Class SST Solutions Civics Chapter 6 संविधान के अंतर्गत नागरिकों के मौलिक अधिकार

प्रश्न 2.
भारतीय संविधान में मौलिक अधिकारों का वर्णन किस भाग में किया गया है ?
(क) तीसरे भाग में
(ख) चौथे भाग में
(ग) पांचवें भाग में
(घ) छठे भाग में।
उत्तर-
(क) तीसरे भाग में

प्रश्न 3.
भारतीय संविधान में मूल अधिकार कितने हैं ?
(क) 5
(ख) 6
(ग) 7
(घ) 8
उत्तर-
(ख) 6

प्रश्न 4.
स्वतंत्रता के अधिकार की व्यवस्था किस अनुच्छेद में की गई है ?
(क) अनुच्छेद 14-18
(ख) अनुच्छेद 19-22
(ग) अनुच्छेद 23-24
(घ) अनुच्छेद 25-28
उत्तर-
(ख) अनुच्छेद 19-22

प्रश्न 5.
संविधान के कौन-से अनुच्छेद में समानता के अधिकार का वर्णन किया गया ?
(क) अनुच्छेद 14-18
(ख) अनुच्छेद 19-22
(ग) अनुच्छेद 23-24
(घ) अनुच्छेद 25-28.
उत्तर-
(क) अनुच्छेद 14-18

प्रश्न 6.
शोषण के विरुद्ध अधिकार संविधान में कौन-से अनुच्छेद में मिलते हैं ?
(क) अनुच्छेद 14-18
(ख) अनुच्छेद 19-22
(ग) अनुच्छेद 23-24
(घ) अनुच्छेद 25-28
उत्तर-
(ग) अनुच्छेद 23-24

प्रश्न 7.
धार्मिक अधिकारों की व्यवस्था किन अनुच्छेदों में की गई है ?
(क) अनुच्छेद 14-18
(ख) अनुच्छेद 19-22
(ग) अनुच्छेद 23-24
(घ) अनुच्छेद 25-28.
उत्तर-
(घ) अनुच्छेद 25-28.

प्रश्न 8.
संवैधानिक उपचारों के अधिकार का वर्णन संविधान के किस अनुच्छेद में किया गया है ?
(क) अनुच्छेद 25-28
(ख) अनुच्छेद 29-30
(ग) अनुच्छेद 32
(घ) अनुच्छेद 35-40
उत्तर-
(ग) अनुच्छेद 32

प्रश्न 9.
संविधान के कौन-से.अनुच्छेद द्वारा अस्पृश्यता की समाप्ति की गई है ?
(क) अनुच्छेद 17
(ख) अनुच्छेद 18
(ग) अनुच्छेद 19
(घ) अनुच्छेद 20
उत्तर-
(क) अनुच्छेद 17

प्रश्न 10.
भारत किस प्रकार का राज्य है ?
(क) धर्म-निरपेक्ष
(ख) हिंदू राज्य
(ग) मुस्लिम राज्य
(घ) सिख राज्य।
उत्तर-
(क) धर्म-निरपेक्ष

PSEB 9th Class SST Solutions Civics Chapter 6 संविधान के अंतर्गत नागरिकों के मौलिक अधिकार

रिक्त स्थान भरें :

  1. सन् ……………. में बाल गंगाधर तिलक ने अंग्रेज़ों को स्वराज बिल पास करने को कहा।
  2. 1946 ई० में ………. ने भारतीय लोगों के लिए मौलिक अधिकारों का समर्थन किया।
  3. संपत्ति के अधिकार को ……… संशोधन से कानूनी अधिकार बना दिया गया था।
  4. शिक्षा के अधिकार को अनुच्छेद ……….. में डाला गया था।
  5. …………… को अनुच्छेद 17 से समाप्त कर दिया गया था।
  6. अनुच्छेद ………….. हमें कानून के सामने समानता देता है।
  7. संवैधानिक उपचारों का अधिकार अनुच्छेद ……….. में दिया गया है।

उत्तर-

  1. 1895
  2. कबिनेट मिशन
  3. 44 वें
  4. 21- A
  5. अस्पृश्यत
  6. 15
  7. 32

सही/गलत :

  1. अधिकारों से हमारे जीवन में रुकावटें आती हैं।
  2. मौलिक अधिकार अनुच्छेद 14 से 32 तक दर्ज हैं।
  3. अनुच्छेद 15 किसी भी प्रकार के भेदभाव की मनाही करता है।
  4. अनुच्छेद 19 में दस प्रकार की स्वतंत्रताएं दी गई हैं।
  5. हमें अपना व्यवसाय चुनने की स्वतंत्रता नहीं है।
  6. अनुच्छेद 24 बच्चों की सुरक्षा के लिए है।

उत्तर-

  1. (✗)
  2. (✓)
  3. (✓)
  4. (✗)
  5. (✗)
  6. (✓)

अति लघु उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
अधिकार किसे कहते हैं ? स्पष्ट करें।
उत्तर-
मनुष्य को अपना विकास करने के लिए कुछ सुविधाओं की आवश्यकता होती है, उन्हीं सुविधाओं को हम अधिकार कहते हैं।

प्रश्न 2.
अधिकार की एक परिभाषा लिखें।
उत्तर-
बोसांके के अनुसार, “अधिकार वह मांग है जिसे समाज मान्यता देता है और राज्य लागू करता है।”

प्रश्न 3.
अधिकार के कोई एक महत्त्वपूर्ण तथ्य का वर्णन करें।
उत्तर-
अधिकार समाज द्वारा प्रदान और राज्य द्वारा लागू किया जाना ज़रूरी है।

प्रश्न 4.
अधिकारों की एक विशेषता बताएं।
उत्तर-
अधिकार व्यक्ति का किसी कार्य को करने की स्वतंत्रता का दावा है जो यह समाज से प्राप्त करता है या सुविधाओं की मांग को अधिकार कहते हैं।

प्रश्न 5.
कानूनी अधिकार किसे कहते हैं ?
उत्तर-
कानूनी अधिकार वे अधिकार होते हैं जिन्हें राज्य की मान्यता प्राप्त होती है और उस व्यक्ति को दंड मिलता है जो इन अधिकारों का उल्लंघन करता है।

प्रश्न 6.
नागरिक के दो महत्त्वपूर्ण राजनीतिक अधिकार लिखें।
उत्तर-

  1. मत देने का अधिकार
  2. चुनाव लड़ने का अधिकार।

प्रश्न 7.
मौलिक अधिकार का अर्थ बताओ।
उत्तर-
जिन कानूनी अधिकारों का उल्लेख संविधान में होता है, उन्हें मौलिक अधिकारों का नाम दिया जाता है।

प्रश्न 8.
अधिकार व्यक्ति के लिए क्यों आवश्यक हैं ? कोई एक तर्क दीजिए।
उत्तर-
अधिकार व्यक्ति के लिए आवश्यक हैं, क्योंकि अधिकारों द्वारा ही व्यक्ति अपना संपूर्ण विकास कर सकता है।

प्रश्न 9.
मौलिक अधिकारों का वर्णन संविधान के किस भाग में कितनी धाराओं में किया गया है?
उत्तर-
इनका वर्णन संविधान में तीसरे भाग की 24 धाराओं में धारा 12 से 35 तक में किया गया है।

प्रश्न 10.
भारतीय संविधान में मूल अधिकार कितने हैं?
उत्तर-
44वें संशोधन के बाद भारतीय संविधान में 6 प्रकार के मौलिक अधिकारों का वर्णन किया गया है।

प्रश्न 11.
अनुच्छेद 14 से 18 कौन-से मौलिक अधिकार से संबंधित हैं?
उत्तर-
अनुच्छेद 14 से 18 समानता के अधिकार से संबंधित हैं।

प्रश्न 12.
स्वतंत्रता के अधिकार की व्यवस्था कौन-से अनुच्छेदों में की गई है?
उत्तर-
अनुच्छेद 19 से 22 में स्वतंत्रता के अधिकार की व्यवस्था की गई है।

प्रश्न 13.
धार्मिक अधिकारों की व्यवस्था किन अनुच्छेदों में की गई है?
उत्तर-
धार्मिक अधिकारों की व्यवस्था अनुच्छेद 25 से 28 में की गई है।

प्रश्न 14.
शोषण के विरुद्ध अधिकार संविधान में कौन-से अनुच्छेद में मिलते हैं ?
उत्तर-
अनुच्छेद 23 और 24 शोषण के विरुद्ध अधिकार से संबंधित हैं।

प्रश्न 15.
संवैधानिक उपचारों के अधिकार से आपका क्या अभिप्राय है? ।
उत्तर-
संवैधानिक उपचारों का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 32 में अंकित है। इस अधिकार के आधार पर कोई भी व्यक्ति अपने मौलिक अधिकार को लागू करवाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में प्रार्थना-पत्र दे सकता है।

प्रश्न 16.
भारतीय संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों की एक विशेषता बताएं।
उत्तर-
भारतीय संविधान में लिखित मौलिक अधिकार बड़े व्यापक तथा विस्तृत हैं। प्रत्येक अधिकार की विस्तार से व्याख्या की गई है।

प्रश्न 17.
संविधान के कौन-से अनुच्छेद द्वारा अस्पृश्यता की समाप्ति की गई है?
उत्तर-
अनुच्छेद 17 के द्वारा अस्पृश्यता को समाप्त किया गया है।

PSEB 9th Class SST Solutions Civics Chapter 6 संविधान के अंतर्गत नागरिकों के मौलिक अधिकार

प्रश्न 18.
कानून के समक्ष समानता का क्या अर्थ है ?
उत्तर-
कानून के समक्ष समानता का साधारण अर्थ यह है कि कानून सभी व्यक्तियों को समान समझता है तथा किसी भी आधार पर किसी व्यक्ति के पक्ष या विपक्ष में कानून के द्वारा कोई भेदभाव नहीं किया जाता।

प्रश्न 19.
भारतीय नागरिकों को किस प्रकार की उपाधियां दी जा सकती हैं ?
उत्तर-
शैक्षणिक तथा सैनिक उपाधियां।

प्रश्न 20.
अनुच्छेद 19 में दी गई किन्हीं दो स्वतंत्रताओं का वर्णन करो।
उत्तर-

  1. भाषण देने तथा विचार प्रकट करने की स्वतंत्रता।
  2. समुदाय या संघ बनाने की स्वतंत्रता।

प्रश्न 21.
शोषण के विरुद्ध अधिकार की एक विशेषता लिखें।
उत्तर-
कोई भी व्यक्ति दूसरे से ज़बरदस्ती श्रम नहीं करवा सकता और न ही व्यक्तियों को बेचा या खरीदा जा सकता है।

प्रश्न 22.
धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का क्या अर्थ है?
उत्तर-
लोगों को कोई भी धर्म मानने, आचरण करने, प्रचार करने तथा धार्मिक संस्थाएं स्थापित करने की स्वतंत्रता धार्मिक अधिकार कहलाती है।

प्रश्न 23.
कोई ऐसे दो मौलिक अधिकार बताओ जो भारत को धर्म-निरपेक्ष राज्य सिद्ध करते हैं।
उत्तर-
अनुच्छेद 14 से 18 के अधीन दिया गया समानता का अधिकार तथा 25 से 28 के अधीन दिया गया धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार भारतीय राज्य के धर्म-निरपेक्ष स्वरूप को स्पष्ट करते हैं।

प्रश्न 24.
सांस्कृतिक तथा शिक्षा संबंधी अधिकार का क्या अर्थ है? .
उत्तर-
अल्पसंख्यकों को अपनी भाषा, लिपि और संस्कृति की रक्षा करने के लिए शिक्षा संस्थान स्थापित करने का अधिकार है।

प्रश्न 25.
ऐसे दो लेखों के नाम लिखो जो मौलिक अधिकारों को लागू करवाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी किए जा सकते हैं।
उत्तर-

  1. बंदी प्रत्यक्षीकरण।
  2. परमादेश लेख।

प्रश्न 26.
संपत्ति का मौलिक अधिकार किस संशोधन द्वारा कानूनी अधिकार बनाया गया है?
उत्तर-
44वें संशोधन द्वारा।

प्रश्न 27.
संविधान के कौन-से अनुच्छेद में संपत्ति के अधिकार की व्यवस्था की गई है?
उत्तर-
44वें संशोधन द्वारा संविधान में एक नया अनुच्छेद 300 A अंकित किया गया है जिसमें संपत्ति के अधिकार की व्यवस्था की गई है।

प्रश्न 28.
क्या मौलिक अधिकार सीमित किए जा सकते हैं?
उत्तर-
संविधान द्वारा मौलिक अधिकारों पर कुछ पाबंदियां लगाई गई हैं। संसद् संवैधानिक संशोधन द्वारा इन अधिकारों को और अधिक सीमित कर सकती है।

प्रश्न 29.
संविधान का कौन-सा अनुच्छेद जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से संबंधित है?
उत्तर-
संविधान के अनुच्छेद 20 से 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से संबंधित है।

प्रश्न 30.
‘हेबियस कापर्स’ (Habeas Corpus) का क्या अर्थ है ?
उत्तर-
‘हेबियस कापर्स’ (Habeas Corpus) लैटिन भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है, ‘हमारे सम्मुख शरीर को प्रस्तुत करो।’ (Let us have the body.)

प्रश्न 31.
‘मैंडामस’ (Mandamus) का अर्थ स्पष्ट करो।
उत्तर-
‘मैंडामस’ (Mandamus) लैटिन भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है ‘हम आदेश देते हैं।'(We command.)

प्रश्न 32.
संविधान के किस अनुच्छेद के अंतर्गत नागरिक अपने अधिकारों की रक्षा के लिए सर्वोच्च न्यायालय के पास जा सकता है ?
उत्तर-
संविधान के अनुच्छेद 32 के अंतर्गत नागरिक अपने अधिकारों की रक्षा के लिए सर्वोच्च न्यायालय के पास जा सकता है।

प्रश्न 33.
संविधान के लिए किस अनुच्छेद द्वारा संसद् को मौलिक अधिकारों को सीमित करने की मनाही की गई है ?
उत्तर-
संविधान के अनुच्छेद 13 द्वारा संसद् को मौलिक अधिकारों को सीमित करने की मनाही की गई है।

प्रश्न 34.
किस मौलिक अधिकार को संकटकाल के समय भी स्थगित नहीं किया जा सकता है ?
उत्तर-
व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार को संकटकाल के समय भी स्थगित नहीं किया जा सकता।

प्रश्न 35.
शिक्षा के अधिकार को कौन-से संवैधानिक संशोधन द्वारा मौलिक अधिकारों में शामिल किया गया ?
उत्तर-
शिक्षा के अधिकार को 86वें संवैधानिक संशोधन द्वारा मौलिक अधिकारों में शामिल किया गया।

प्रश्न 36.
उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति कौन और किसकी सलाह से करता है ?
उत्तर-
उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीशों की सलाह से करता है।

लघु उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
अधिकार का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
मनुष्य को अपना विकास करने के लिए कुछ सुविधाओं की आवश्यकता होती है। मनुष्य को जो सुविधाएं समाज से मिली होती हैं उन्हीं सुविधाओं को हम अधिकार कहते हैं। साधारण शब्दों में अधिकार से अभिप्रायः उन सुविधाओं और अवसरों से होता है जो मनुष्य के व्यक्तित्व के विकास के लिए आवश्यक होती हैं और उन्हें समाज ने मान्यता दी होती है।

प्रश्न 2.
अधिकारों की कोई दो विशेषताएं लिखें।
उत्तर-

  1. अधिकार समाज में ही संभव हो सकते हैं। समाज के बाहर अधिकारों का न कोई अस्तित्व है और न कोई आवश्यकता।
  2. अधिकार सीमित होते हैं। अधिकार कभी असीमित नहीं होते बल्कि ये सीमित शक्तियां होती हैं जो व्यक्ति के विकास के लिए आवश्यक होती हैं।

प्रश्न 3.
अधिकारों की कोई दो परिभाषाएं लिखें।
उत्तर-

  1. डॉ० वेणी प्रसाद के अनुसार, “अधिकार वे सामाजिक अवस्थाएं हैं जो व्यक्ति की उन्नति के लिए आवश्यक हैं। अधिकार सामाजिक जीवन का आवश्यक पक्ष हैं।”
  2. ग्रीन के अनुसार, “अधिकार व्यक्ति के भौतिक विकास के लिए आवश्यक बाहरी अवस्थाएं हैं।”

प्रश्न 4.
अधिकारों के प्रकार बताइए।
उत्तर-
अधिकारों को प्रायः तीन भागों में बांटा जा सकता है जो इस प्रकार हैं-प्राकृतिक अधिकार, नैतिक अधिकार तथा कानूनी अधिकार।

  1. प्राकृतिक अधिकार-प्राकृतिक अधिकारों का अर्थ है वे अधिकार जो व्यक्ति को प्रकृति ने दिए हैं।
  2. नैतिक अधिकार-नैतिक अधिकार व्यक्ति की नैतिक भावनाओं पर आधारित होते हैं। इन अधिकारों को कानूनी मान्यता प्राप्त नहीं होती।
  3. कानूनी अधिकार-कानूनी अधिकारों को राज्य की मान्यता प्राप्त होती है। राज्य के कानून इन्हें लागू करते हैं। कानूनी अधिकार चार प्रकार के होते हैं-मौलिक अधिकार, सामाजिक अधिकार, राजनीतिक अधिकार तथा आर्थिक अधिकार।

PSEB 9th Class SST Solutions Civics Chapter 6 संविधान के अंतर्गत नागरिकों के मौलिक अधिकार

प्रश्न 5.
भारतीय संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों की कोई दो विशेषताएं लिखें।
उत्तर-
संविधान में जो भी मौलिक अधिकार घोषित किए गए हैं, उनकी कुछ अपनी ही विशेषताएं हैं, जो इस प्रकार

  1. व्यापक और विस्तृत-भारतीय संविधान में लिखित मौलिक अधिकार बड़े व्यापक तथा विस्तृत हैं। नागरिकों को 6 प्रकार के मौलिक अधिकार दिए गए हैं और प्रत्येक अधिकार की विस्तार से व्याख्या की गई है।
  2. मौलिक अधिकार सब नागरिकों के लिए हैं-संविधान में दिए गए मौलिक अधिकार सभी को जाति, धर्म, रंग, लिंग आदि के भेदभाव के बिना दिए गए हैं।

प्रश्न 6.
मौलिक अधिकारों का क्या अर्थ है ?
अथवा
मौलिक अधिकारों से आपका क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
जिन कानूनी अधिकारों का उल्लेख संविधान में होता है उन्हें मौलिक अधिकार का नाम दिया जाता है। ये वे अधिकार होते हैं जो व्यक्ति के विकास के लिए अनिवार्य समझे जाते हैं। भारत, अमेरिका, जापान, फ्रांस तथा अन्य लोकतंत्रात्मक देशों के नागरिकों को मौलिक अधिकार प्राप्त हैं।

प्रश्न 7.
हमारे संविधान द्वारा निर्मित किन्हीं दो मौलिक अधिकारों का वर्णन कीजिए।
किन्हीं दो मौलिक अधिकारों का वर्णन करो।
उत्तर-
44वें संशोधन के बाद भारतीय नागरिकों को छः प्रकार के अधिकार प्राप्त हैं।

  1. समानता का अधिकार-समानता के अधिकार का वर्णन अनुच्छेद 14 से 18 तक में किया गया है। कानन के सामने सभी बराबर हैं और कोई कानून से ऊपर नहीं है। भेदभाव की मनाही की गई है और सार्वजनिक स्थानों का प्रयोग गे नागरिक कर सकते हैं। अस्पृस्यता को समाप्त कर दिया गया है।
  2. धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार-अनुच्छेद 25 से 28 तक में नागरिकों के धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार का या गया है। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी इच्छानुसार धर्म को मानने तथा अपने इष्टदेव की पूजा करने का अधिकार को धार्मिक संस्थाएं स्थापित करने, उनका प्रयोग करने और धार्मिक संस्थाओं को संपत्ति आदि रखने के अधिकार हए गए हैं।

प्रश्न 8.
भारतीय संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों के नाम लिखें।
उत्तर-
संविधान में 44वें संशोधन के बाद नागरिकों को 6 प्रकार के मौलिक अधिकार दिए गए हैं-

  1. समानता का अधिकार
  2. स्वतंत्रता का अधिकार
  3. शोषण के विरुद्ध अधिकार
  4. धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार
  5. सांस्कृतिक और शैक्षणिक अधिकार
  6. संवैधानिक उपायों का अधिकार।

प्रश्न 9.
कन्हीं दो परिस्थितियों का वर्णन करें जिनमें मौलिक अधिकारों को सीमित किया जा सकता है। – प्रश्न 9. दि
उत्तर-

  1. युद्ध तथा विदेशी आक्रमण के समय घोषित राष्ट्रीय संकटकाल के दौरान राष्ट्रपति अधिकारों को सीमित कर सकता है।
  2. सशस्त्र विद्र रोह तथा आंतरिक गड़बड़ी के कारण घोषित आपात्काल में मौलिक अधिकारों को स्थगित किया जा सकता है।

प्रश्न 10.
मौलिक अधिकारों की श्रेणी में से संपत्ति के अधिकार को क्यों निकाल दिया गया है ?
उत्तर-
भारतीय संविधान में मूल रूप से संपत्ति के अधिकार का मौलिक अधिकारों के अध्याय में वर्णन किया गया था, परंतु 44वें संशोधन द्वारा संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकारों में से निकाल दिया गया है। मौलिक अधिकारों की श्रेणी में से संपत्ति के अधिकार को निम्नलिखित कारणों से निकाला गया है-

  1. भारत में निजी संपत्ति के बढ़ते प्रभाव को कम करने के लिए संपत्ति के अधिकार को मूल अधिकारों में से निकाल दिया गया है।
  2. 42वें संशोधन द्वारा प्रस्तावना में समाजवाद शब्द रखा गया है। समाजवाद और संपत्ति का अधिकार एक साथ नहीं चलते। अत: संपत्ति के अधिकार को मूल अधिकारों से निकाल दिया गया है।

प्रश्न 11.
संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों के कोई दो दोष बताइए।
उत्तर-
मौलिक अधिकारों की निम्नलिखित आधारों पर कड़ी आलोचना की गई है-

  1. बहुत अधिक बंधन-मौलिक अधिकारों पर इतने अधिक प्रतिबंध लगाए गए हैं कि अधिकारों का महत्त्व बहत कम हो गया है। इन अधिकारों पर इतने अधिक प्रतिबंध हैं कि नागरिकों को यह समझने के लिए कठिनाई आती है कि इन अधिकारों द्वारा उन्हें कौन-कौन-सी सुविधाएं दी गई हैं।
  2. आर्थिक अधिकारों का अभाव-मौलिक अधिकारों की इसलिए भी कड़ी आलोचना की गई है कि इस अध्याय में आर्थिक अधिकारों का वर्णन नहीं किया गया है जबकि समाजवादी राज्यों में आर्थिक अधिकार भी दिए जाते हैं।

प्रश्न 12.
संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों के कोई दो महत्त्व बताइए।
उत्तर-
मौलिक अधिकारों के अध्ययन का महत्त्व निम्नलिखित शीर्षकों के अधीन किया जाता है-

  1. मौलिक अधिकार कानून का शासन स्थापित करते हैं- मौलिक अधिकारों का महत्त्व इसमें है कि ये कानून के शासन की स्थापना करते हैं। सभी व्यक्ति कानून के समक्ष समान हैं और सभी को कानून द्वारा संरक्षण प्राप्त है।
  2. मौलिक अधिकार अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा करते हैं-अल्पसंख्यकों को अपनी भाषा, लिपि तथा संस्कृति को सुरक्षित रखने का अधिकार दिया गया है। अल्पसंख्यक अपनी पसंद की शिक्षा संस्थाओं की स्थापना कर सकते हैं और उनका संचालन भी कर सकते हैं। सरकार अल्पसंख्यकों के साथ किसी प्रकार का भेदभाव नहीं करेगी।

PSEB 9th Class SST Solutions Civics Chapter 6 संविधान के अंतर्गत नागरिकों के मौलिक अधिकार

प्रश्न 13.
मौलिक अधिकारों तथा नीति-निर्देशक सिद्धांतों में अंतर स्पष्ट करो।
उत्तर-

  1. मौलिक अधिकार न्याय योग्य हैं जबकि निर्देशक सिद्धांत न्याय योग्य नहीं हैं। मौलिक अधिकारों को न्यायालयों द्वारा लागू करवाया जा सकता है जबकि निर्देशक सिद्धांतों को न्यायालयों द्वारा लागू नहीं करवाया जा सकता है।
  2. मौलिक अधिकारों का उद्देश्य राजनीतिक लोकतंत्र है जबकि निर्देशक सिद्धांतों का उद्देश्य आर्थिक लोकतंत्र है।
  3. मौलिक अधिकार लोगों के अधिकार हैं जबकि निर्देशक सिद्धांत राज्य के कर्त्तव्य हैं।
  4. मौलिक अधिकारों को निलंबित किया जा सकता है जबकि निर्देशक सिद्धांतों को निलंबित नहीं किया जा सकता।

प्रश्न 14.
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 23 तथा 24 में क्या व्यवस्था की गई है ?
उत्तर-
अनुच्छेद 23 और 24 के अनुसार नागरिकों को शोषण के विरुद्ध अधिकार दिए गए हैं। व्यक्तियों को बेचा या खरीदा नहीं जा सकता और न ही किसी व्यक्ति से बेगार ली जा सकती है। 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को किसी ऐसे कारखाने या खान में नौकरी पर नहीं रखा जा सकता, जहां उसके स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ने की संभावना हो।

प्रश्न 15.
संवैधानिक उपचारों के अधिकार के अंतर्गत न्यायपालिका किस प्रकार के आदेशों को जारी कर सकती है ?
उत्तर-
मौलिक अधिकारों को लागू करने के लिए न्यायपालिका निम्नलिखित आदेश जारी कर सकती है

  1. बंदी प्रत्यक्षीकरण लेख
  2. परमादेश का आज्ञा-पत्र
  3. मनाही आज्ञा-पत्र
  4. उत्प्रेषण लेख तथा
  5. अधिकार पृच्छा लेख।

प्रश्न 16.
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 29 तथा 30 में क्या व्यवस्था की गई है ?
उत्तर-
अनुच्छेद 29 तथा 30 के अंतर्गत नागरिकों को विशेषतया अल्पसंख्यकों को सांस्कृतिक तथा शैक्षणिक अधिकार प्रदान किए गए हैं जो अग्रलिखित हैं-

  1. भाषा, लिपि और संस्कृति को बनाए रखने का अधिकार-
    • अनुच्छेद 29 के अनुसार भारत के किसी भी क्षेत्र में रहने वाले नागरिकों के किसी भी वर्ग या उसके किसी भाग को जिसकी अपनी भाषा, लिपि अथवा संस्कृति हो उसे यह अधिकार है कि यह उनकी रक्षा करे।
    • किसी भी नागरिक को राज्य द्वारा या उसकी सहायता से चलाए जाने वाली शिक्षा संस्था में प्रवेश देने से धर्म, जाति, वंश, भाषा या इसमें किसी के आधार पर इंकार नहीं किया जा सकता।
  2. अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा-
    • अनुच्छेद 30 के अनुसार सभी अल्पसंख्यकों को, चाहे वे धर्म पर आधारित हों या भाषा पर, यह अधिकार प्राप्त है कि वे अपनी इच्छानुसार शिक्षा संस्थाओं की स्थापना करें तथा उनका प्रबंध करें।
    • अनुच्छेद 30 के अनुसार राज्य द्वारा शिक्षा संस्थाओं को सहायता देते समय शिक्षा संस्था के प्रति इस आधार पर भेदभाव नहीं होगा कि वह अल्पसंख्यकों के प्रबंध के अधीन हैं, चाहे वह अल्पसंख्यक भाषा के आधार पर हो या धर्म के आधार पर।

प्रश्न 17.
परमादेश लेख से क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
‘परमादेश’ शब्द का अर्थ है “हम आज्ञा देते हैं।” इस निर्देश के द्वारा न्यायालय सरकार को कानूनाधीन अपने कर्त्तव्य को पूरा करने का आदेश दे सकता है। इस आदेश द्वारा अधिकार के विषय में सरकार की उन लापरवाहियों को संशोधित किया जा सकता है जो नागरिकों के अधिकारों के लिए घातक सिद्ध होती हैं।

प्रश्न 18.
मौलिक अधिकारों का उल्लेख संविधान में क्यों किया गया है ?
उत्तर-
भारतीय संविधान में नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लेख इसलिए किया गया है कि सभी नागरिकों को बिना किसी भेदभाव के मूल अधिकार प्राप्त होने की गारंटी मिल सके। मौलिक अधिकारों का वर्णन उस सिद्धांत की पुष्टि के लिए किया गया है, जिसके अनुसार सरकार कानून के अनुसार कार्य करे न कि गैर-कानूनी तरीके से।

प्रश्न 19.
‘कानून के समक्ष समता’ के सिद्धांत की व्याख्या कीजिए।
उत्तर-
कानून के समक्ष समानता (समता) का अर्थ यह है कि कानून के सामने सभी बराबर हैं और किसी को विशेषाधिकार प्राप्त नहीं है। कोई भी व्यक्ति देश के कानून के ऊपर नहीं है। सभी व्यक्ति भले ही उनकी कुछ भी स्थिति हो, साधारण कानून के अधीन हैं और उन पर साधारण न्यायालय में मुकद्दमा चलाया जा सकता है। कानून छोटा-बड़ा, अमीर गरीब, ऊंच-नीच और छुआछूत आदि के आधार पर किसी प्रकार का भेदभाव नहीं करेंगा। कानून के समक्ष समता का दूसरा अर्थ यह है कि समान परिस्थितियों में सबसे समान व्यवहार किया जाए।

प्रश्न 20.
भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को समझाइए।
उत्तर-
प्रत्येक नागरिक को भाषण देने तथा विचार प्रकट करने की स्वतंत्रता प्राप्त है। कोई भी नागरिक बोलकर या लि लखकर अपने विचार प्रकट कर सकता है। प्रेस की स्वतंत्रता भाषण देने तथा विचार प्रकट करने की स्वतंत्रता का एक साधन है। परंतु भाषण देने और विचार अभिव्यक्त करने की स्वतंत्रता असीमित नहीं है। संसद् भारत की प्रभुसत्ता भार जडता, राज्य की सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था, शिष्टता अथवा नैतिकता, न्यायालय का अपमान, मान-हानि लिए उत्तेजित करना आदि के आधारों पर भाषण तथा विचार प्रकट करने की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगा सकती है।

प्रश्न 21.
अधिकार-पच्छा लेख (Writ of Ouo-warranto) से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर-
इसका अर्थ है ‘किसके आदेश से’ अथवा किस अधिकार से। यह आदेश उस समय जारी किया जाता है काव्यात किसी ऐसे कार्य को करने का दावा करता हो जिसको करने का उसका अधिकार न हो। इस आदेश अनुसार अप्प : न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय किसी व्यक्ति को एक पद ग्रहण करने से रोकने के लिए निषेधाज्ञा जारी
सकता है और उक्त पद के रिक्त होने की तब तक के लिए घोषणा कर सकता है जब तक न्यायालय द्वारा कोई निर्णय न हो।

प्रश्न 22.
शिक्षा के अधिकार की व्याख्या करें। उत्त
उत्तर-
दसबर, – 2002 में पास किए गए 86वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम द्वारा संविधान के अनुच्छेद 2 में 21A नाम का नया अनु छेद शामिल किया गया। इस अनुच्छेद में शिक्षा के अधिकार (Right to Education) की व्यवस्था की गई है। इस संवैधानिक संशोधन अधिनियम के अनुसार यह व्यवस्था की गई है कि 6 साल से 14 साल तक की आयु के सभी भारतीय बच्चों को शिक्षा का मौलिक अधिकार प्राप्त हो। साथ ही यह भी व्यवस्था की गई है कि बच्चों के माता-पिता तथा अभिभावकों का यह कर्त्तव्य होगा कि वे अपने बच्चों के लिए ऐसी सुविधाएं तथा अवसर उपलब्ध करवाएं, जिससे बच्चे शिक्षा प्राप्त कर सकें। सरकार भी 6 साल के बच्चों के बचपन तथा शिक्षा की देख-रेख के लिए आवश्यक व्यवस्था करेगी। 1 अप्रैल, 2010 से बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 लागू होने के पश्चात् 6वर्ष से 14 वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे को निःशुल्क और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा पाने का कानूनी अधिकार मिल गया है।

प्रश्न 23.
न्यायपालिका की स्वतंत्रता का क्या अर्थ है ?
उत्तर-
न्यायपालिका की स्वतंत्रता का अर्थ है न्यायाधीश स्वतंत्र, निष्पक्ष तथा निडर हों। न्यायाधीश निष्पक्षता से न्याय तभी कर सकते हैं, जब उन पर किसी प्रकार का दबाव न हो। न्यायपालिका विधानमंडल तथा कार्यपालिका के अधीन नहीं होनी चाहिए और विधानमंडल तथा कार्यपालिका को न्यायपालिका के कार्यों में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं होना चाहिए।

प्रश्न 24.
भारत में सर्वोच्च न्यायालय नागरिकों के मौलिक अधिकारों की कैसे रक्षा करता है ?
उत्तर-
यदि कोई व्यक्ति यह समझे कि सरकार ने उसके मौलिक अधिकारों में हस्तक्षेप किया है या कोई कानून मौलिक अधिकार के विरुद्ध बनाया गया है तो यह सर्वोच्च न्यायालय के पास जा सकता है और सर्वोच्च न्यायालय कई प्रकार के अभिलेख जारी कर सकता है और किसी कानून को अवैध भी घोषित कर सकता है।

प्रश्न 25.
भारतीय संविधान स्वतंत्र न्यायपालिका की रक्षा कैसे करता है ?
उत्तर-

  1. नीति-निर्देशक सिद्धांत न्यायपालिका को कार्यपालिका से स्वतंत्र करने का आदेश देता है।
  2. मुख्य तथा अन्य सभी न्यायाधीशों की नियुक्ति निर्धारित न्यायिक अथवा कानूनी योग्यताओं के आधार पर की जाती है।
  3. न्यायाधीशों को अच्छा वेतन दिया जाता है। 4. उनका कार्यकाल निश्चित है।

दीर्घ उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
अधिकारों से आप क्या समझते हैं ? इसकी विशेषताओं का वर्णन करें।।
उत्तर-
मनुष्यों को अपना विकास करने के लिए कुछ सुविधाओं की आवश्यकता होती है। मनुष्य को जो सुविधाएं समाज में मिली होती हैं, उन्हीं सुविधाओं को अधिकार कहते हैं। साधारण शब्दों में अधिकार से अभिप्राय उन स विधाओं और अवसरों से है जो मनुष्य के व्यक्तित्व के विकास के लिए आवश्यक हैं और उन्हें समाज में मान्यता प्राप्त है। अन्य शब्दों में, अधिकार वे सुविधाएं हैं जिनके कारण हमें किसी कार्य को करने या न करने की शक्ति मिलती है। विभिन्न लेखकों ने अधिकार की विभिन्न परिभाषाएं दी हैं। कुछ मुख्य परिभाषाएं निम्नलिखित हैं :

  1. ग्रीन के अनुसार, “अधिकार व्यक्ति के मौलिक विकास के लिए आवश्यक बाहरी अवस्थाएं हैं।”
  2. बोसांके के अनुसार, “अधिकार वह मांग है जिसे समाज मान्यता देता है और राज्य लागू करता है।”
  3. लॉस्की के शब्दों में, “अधिकार सामाजिक जीवन की वे अवस्थाएं हैं जिनके बिना कोई व्यक्ति अपने जीवन का विकास नहीं कर सकता।” विशेषताएं-
  4. अधिकार समाज में ही संभव हो सकते हैं।
  5. अधिकार व्यक्ति का दावा है।
  6. अधिकार समाज द्वारा मान्य होते हैं।
  7. अधिकार तर्कसंगत एवं नैतिक होते हैं।
  8. अधिकार असीमित नहीं होते।
  9. अधिकार लोकहित में प्रयोग किये जाते हैं।
  10. अधिकारों के साथ कर्त्तव्य जुड़े होते हैं।

PSEB 9th Class SST Solutions Civics Chapter 6 संविधान के अंतर्गत नागरिकों के मौलिक अधिकार

प्रश्न 2.
हमारे संविधान में निहित मौलिक अधिकार पर एक संक्षिप्त लेख लिखिए।
उत्तर-
भारतीय संविधान में मौलिक अधिकारों का वर्णन संविधान के तीसरे भाग में धारा 12 से 35 तक की 24 धाराओं में किया गया है। 44वें संशोधन के बाद नागरिकों को 6 प्रकार के मौलिक अधिकार प्राप्त हैं, जो इस प्रकार

  1. समानता का अधिकार-समानता के अधिकार का वर्णन अनुच्छेद 14 से 18 तक में किया गया है। कानून के सामने सभी बराबर हैं और कोई कानून से ऊपर नहीं है। भेदभाव की मनाही की गई है और सार्वजनिक स्थानों का प्रयोग सभी कर सकते हैं। छुआछूत को समाप्त कर दिया गया है और सेना तथा शिक्षा संबंधी उपाधियों को छोड़कर अन्य सभी उपाधियों को समाप्त कर दिया है।
  2. स्वतंत्रता का अधिकार-नागरिकों के स्वतंत्रता के अधिकार का वर्णन अनुच्छेद 19 से 22 तक में किया गया है। अनुच्छेद 19 के अनुसार नागरिकों को भाषण देने और विचार प्रकट करने, शांतिपूर्ण तथा बिना हथियारों के इकट्ठे होने, संघ या समुदाय बनाने, घूमने-फिरने, किसी भी स्थान पर बसने या कोई भी व्यवसाय करने की स्वतंत्रता प्राप्त है। परंतु इन स्वतंत्रताओं पर एक प्रतिबंध भी है। अनुच्छेद 20 से 22 तक नागरिकों को व्यक्तिगत स्वतंत्रता प्रदान की गई है।
  3. शोषण के विरुद्ध अधिकार-अनुच्छेद 23 और 24 के अनुसार नागरिकों को शोषण के विरुद्ध अधिकार दिए गए हैं। व्यक्तियों को बेचा या खरीदा नहीं जा सकता और न ही किसी व्यक्ति से बेगार ली जा सकती है। 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को किसी ऐसे कारखाने या खान में नौकरी पर नहीं रखा जा सकता, जहां उसके स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ने की संभावना हो।
  4. धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार-अनुच्छेद 25 से 28 तक में नागरिकों के धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार का वर्णन किया गया है। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी इच्छानुसार धर्म को मानने तथा अपने इष्ट देव की पूजा करने का अधिकार है। लोगों को धार्मिक संस्थाएं स्थापित करने, उनका प्रबंध करने का और धार्मिक संस्थाओं को संपत्ति आदि रखने के अधिकार दिए गए हैं। सरकारी शैक्षणिक संस्थाओं में धार्मिक शिक्षा नहीं दी जा सकती। किसी भी व्यक्ति को ऐसा टैक्स देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता जिसे किसी विशेष धर्म के लिए प्रयोग किया जाना हो।
  5. संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकार-अनुच्छेद 29 और 30 के अंतर्गत नागरिकों को संस्कृति तथा शिक्षा संबंधी अधिकार दिए गए हैं। प्रत्येक जाति या समुदाय को अपनी भाषा, लिपि, संस्कृति और साहित्य को बनाए रखने, उनका प्रसार तथा विकास करने का अधिकार है। सभी अल्पसंख्यकों को अपनी इच्छानुसार शिक्षा संस्थाओं की स्थापना करने तथा उनका प्रबंध करने का अधिकार प्राप्त है। राज्य द्वारा शिक्षा संस्थाओं को अनुदान देते समय भेद-भाव नहीं किया जाएगा।
  6. संवैधानिक उपायों का अधिकार-अनुच्छेद 32 के अनुसार प्रत्येक नागरिक अपने मौलिक अधिकारों की प्राप्ति और रक्षा के लिए उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय के पास जा सकते हैं। उच्च न्यायालयों तथा सर्वोच्च न्यायालय को इस संबंध में कई प्रकार के लेख (Writs) जारी करने का अधिकार है।

प्रश्न 3.
भारतीय संविधान में दिए गए समानता के अधिकार की व्याख्या करें।
उत्तर-
समानता का अधिकार एक महत्त्वपूर्ण मौलिक अधिकार है जिसका वर्णन अनुच्छेद 14 से 18 तक में किया गया है। समानता का अधिकार लोकतंत्र की आधारशिला है। भारतीय संविधान में नागरिकों को निम्नलिखित प्रकार की समानता प्रदान की गई है-

  1. काना के समक्ष समानता-संविधान के अनुच्छेद 14 में “विधि के समक्ष समानता” और “कानूनों के समान । संरक्षण” शब्दों का एक साथ प्रयोग किया गया है और संविधान में लिखा है कि भारत के राज्य क्षेत्र में किसी भी व्यक्ति को कानन के समक्ष समानता और कानून के समान संरक्षण से राज्य द्वारा वंचित नहीं किया जाएगा।
    कानून के समक्ष समानता का अर्थ यह है कि कानून के सामने सभी बराबर हैं और किसी को विशेषाधिकार प्राप्त नहीं है। – कानून के समान संरक्षण का यह अभिप्राय है कि समान परिस्थितियों में सबके साथ समान व्यवहार किया जाए।
  2. भेद-भाव की मनाही-अनुच्छेद 15 के अनुसार निम्नलिखित व्यवस्था की गई है-
    • राज्य किसी नागरिक के विरुद्ध धर्म, मूल वंश, जाति, लिंग, जन्म-स्थान अथवा इनमें से किसी के आधार पर कोई भेद-भाव नहीं करेगा।
    • दुकानों, सार्वजनिक भोजनालयों, होटलों और मनोरंजन के सार्वजनिक स्थानों पर धर्म, लिंग, जाति इत्यादि किसी आधार पर किसी नागरिक को अयोग्य व प्रतिबंधित नहीं किया जाएगा।
  3.  सरकारी नौकरियों के लिए अवसर की समानता-अनुच्छेद 16 राज्यों में सरकारी नौकरियों या पदों पर नियुक्ति के संबंध में सब नागरिकों को समान अवसर प्रदान करता है। सरकारी नौकरियों या पदों पर नियुक्ति के संबंध में धर्म, मूल वंश, जाति, लिंग, जन्म-स्थान, निवास या इसमें से किसी एक के आधार पर किसी नागरिक के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा।
  4. अस्पृश्यता की समाप्ति-अनुच्छेद 17 द्वारा छुआछूत को समाप्त किया गया है। किसी भी व्यक्ति के साथ अस्पर्श जैसा व्यवहार करना या उसको अछूत समझ कर सार्वजनिक स्थानों, होटलों, घाटों, तालाबों, कुओं, सिनेमाघरों, पार्कों तथा मनोरंजन के स्थानों के उपयोग से रोकना कानूनी अपराध है।
  5. उपाधियों की समाप्ति-अनुच्छेद 18 के अनुसार यह व्यवस्था की गई है कि
    • सेना या शिक्षा संबंधी उपाधि के अतिरिक्त राज्य कोई और उपाधि नहीं देगा।
    • भारत का कोई भी नागरिक किसी विदेशी राज्य से कोई उपाधि स्वीकार नहीं करेगा।

भारत सरकार नागरिकों को भारत रत्न (Bharat Ratna), पद्म विभूषण (Padma Vibhushan), पद्म भूषण (Padma Bhushan), पद्म श्री (Padma Shri) आदि उपाधियां देती है। जिस कारण आलोचकों का कहना था कि ये उपाधियां अनुच्छेद 18 के साथ मेल नहीं खातीं।

संविधान के अंतर्गत नागरिकों के मौलिक अधिकार PSEB 9th Class Civics Notes

  • समाज में रहते हुए लोग कई प्रकार की सुविधाओं का प्रयोग करते हैं जैसे कि समानता, अभिव्यक्ति, कहीं भी आना जाना, कोई भी पेशा अपनाना, किसी भी धर्म को मानना इत्यादि। इन सभी सुविधाओं को अधिकार कहा जाता है।
  • अधिकार को हम व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह की उस उचित मांग का नाम दे सकते हैं जिन्हें समाज तथा राज्य मान्यता देता है व जिसके बिना अच्छा जीवन जीना मुमकिन ही नहीं है।
  • हमारे देश के संविधान ने नागरिकों को अच्छा जीवन देने व उनका गौरव बरकरार रखने के लिए कुछ अधिकार दिए हैं जिन्हें मौलिक अधिकार कहा जाता है। यह संविधान के तीसरे भाग तथा अनुच्छेद 12 35 तक दर्ज हैं।
  • हमारे मौलिक अधिकार अत्यंत विस्तृत हैं, उनका नकारात्मक व सकारात्मक स्वरूप होता है, यह असीमित नहीं है परंतु न्यायसंगत है तथा इनकी उल्लंघना नहीं की जा सकती।
  • शुरुआत में नागरिकों को सात प्रकार के अधिकार दिए गए थे जिनमें से संपत्ति के अधिकार को 1978 में 44 वें संवैधानिक संशोधन से हटा कर इसे कानूनी अधिकार बना दिया गया था। इस कारण हमारे मौलिक अधिकारों की संख्या छः रह गई थी।
  • सन् 2002 में 86 वें संशोधन द्वारा बच्चों को शिक्षा का अधिकार दिया गया था परंतु इसे कोई नया नंबर न देकर अनुच्छेद 21A में डाल दिया गया था।
  • हमारे छ: मौलिक अधिकार इस प्रकार हैं
    • समानता का अधिकार (अनुच्छेद 14 से 18)
    • स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 19 से 22)
    • शोषण के विरुद्ध अधिकार (अनुच्छेद 23 से 24)
    • धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 25 से 28)
    • सांस्कृतिक एवं शिक्षा संबंधी अधिकार (अनुच्छेद 29 से 30)
    • संवैधानिक उपचारों का अधिकार (अनुच्छेद 32)
  • हमारे देश में न्यायपालिका की सुरक्षा व स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के कई प्रावधान किए गए हैं। यह सब इसलिए किया गया है ताकि न्यायपालिका निडर होकर अपना निर्णय दे सके।
  • हमारे न्यायालय (उच्चतम तथा उच्च) को न्यायिक पुनर्निरीक्षण का अधिकार दिया गया है जिसका अर्थ है कि न्यायपालिका विधानपालिका द्वारा बनाए कानून का निरीक्षण भी कर सकती है। अगर उसे लगता है कि यह कानून संविधान में मूल सिद्धांतों के विरुद्ध है तो इसे निरस्त (Null and Void) भी किया जा सकता है।
  • उच्चतम न्यायालय को न्यायिक पुनर्निरीक्षण का अधिकार इसलिए दिया गया है ताकि सरकार के सभी अंग अपने अपने अधिकार क्षेत्र में रहकर कार्य करें तथा संविधान की आत्मा के अनुरूप कार्य करें।
  • मौलिक अधिकार इसलिए मौलिक हैं क्योंकि यह व्यक्ति के सर्वपक्षीय विकास के लिए आवश्यक हैं।

PSEB 9th Class SST Solutions Civics Chapter 5 लोकतंत्र एवं चुनाव राजनीति

Punjab State Board PSEB 9th Class Social Science Book Solutions Civics Chapter 5 लोकतंत्र एवं चुनाव राजनीति Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 9 Social Science Civics Chapter 5 लोकतंत्र एवं चुनाव राजनीति

SST Guide for Class 9 PSEB लोकतंत्र एवं चुनाव राजनीति Textbook Questions and Answers

(क) रिक्त स्थान भरें :

  1. भारत में केंद्रीय संसद् के चुने हुए प्रतिनिधि को ……….. कहा जाता है।
  2. प्रथम लोकसभा चुनाव ……. ई० में हुआ।
  3. मुख्य चुनाव आयुक्त तथा उप-चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति ……. द्वारा की जाती है।

उत्तर-

  1. एम० पी०
  2. 1952
  3. राष्ट्रपति

(ख) बहुविकल्पीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
लोगों के प्रतिनिधि
(अ) नियुक्त किए जाते हैं
(आ) लोगों द्वारा निश्चित समय के लिए चुने जाते हैं
(इ) लोगों द्वारा पक्के तौर पर चुने जाते हैं
(ई) राष्ट्रपति द्वारा चुने जाते हैं
उत्तर-
(आ) लोगों द्वारा निश्चित समय के लिए चुने जाते हैं

प्रश्न 2.
निम्नलिखित में कौन-सा लोकतंत्र का स्तंभ नहीं है ?
(अ) राजनैतिक दल
(आ) निष्पक्ष व स्वतंत्र चुनाव
(इ) गरीबी
(ई) वयस्क मताधिकार।
उत्तर-
(इ) गरीबी

(ग) निम्नलिखित कथनों में सही के लिए तथा गलत के लिए चिन्ह लगाएं :

  1. भारत में बहुदलीय प्रणाली है।
  2. चुनाव आयुक्त का मुख्य कार्य चुनाव का निर्देशन, प्रबंधन व निरीक्षण करना है।

उत्तर-

  1. (✓)
  2. (✓)

अति लघु उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
ग्राम पंचायत के लिए चुने गए प्रतिनिधि को क्या कहा जाता है ?
उत्तर-
ग्राम पंचायत के लिए चुने गए प्रतिनिधि को पंच कहा जाता है।

प्रश्न 2.
विधानसभा के लिए चुने गए प्रतिनिधि को क्या कहते हैं ?
उत्तर-
विधानसभा के लिए चुने गए प्रतिनिधि को एम० एल० ए० (MLA) कहते हैं।

प्रश्न 3.
चुनाव विधियों के नाम लिखें।
उत्तर-
प्रत्यक्ष चुनाव तथा अप्रत्यक्ष चुनाव।

PSEB 9th Class SST Solutions Civics Chapter 5 लोकतंत्र एवं चुनाव राजनीति

प्रश्न 4.
राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति का चुनाव किस विधि द्वारा किया जाता है ?
उत्तर-
राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति का चुनाव अप्रत्यक्ष विधि द्वारा किया जाता है। उन्हें जनता द्वारा चुने हुए प्रतिनिधियों द्वारा चुना जाता है।

प्रश्न 5.
भारत में चुनाव कराने वाली संस्था का क्या नाम है ?
उत्तर-
भारत में चुनाव कराने वाली संस्था का नाम चुनाव आयोग है।

प्रश्न 6.
भारत में चुनाव प्रणाली की कोई दो विशेषताएं बतलाएं।
उत्तर-

  1. भारत में चुनाव वयस्क मताधिकार के आधार पर करवाए जाते हैं।
  2. एक चुनाव क्षेत्र से ही एक ही उम्मीदवार का चयन किया जा सकता है।

प्रश्न 7.
चुनाव विवाद के संबंध में याचिका कहां दायर की जा सकती है ?
उत्तर-
चुनाव संबंधी विवाद के लिए याचिका उच्च न्यायालय में दायर की जा सकती है।

प्रश्न 8.
चुनाव आयोग के कोई दो कार्य लिखें।
उत्तर-

  1. चुनाव आयोग वोटर सूची तैयार तथा संशोधित करवाता है।
  2. चुनाव आयोग अलग-अलग राजनीतिक दलों को मान्यता देता है।

प्रश्न 9.
पंजाब विधानसभा के चुनाव क्षेत्र कितने हैं ?
अथवा
पंजाब विधानसभा की कितनी सीटें हैं ?
उत्तर-
पंजाब विधानसभा के 117 चुनाव क्षेत्र या सीटें हैं।

प्रश्न 10.
भारत में चुनाव-प्रक्रिया का संचालन कौन करता है ?
उत्तर-
भारत में चुनाव-प्रक्रिया का संचालन चुनाव आयोग करता है।

प्रश्न 11.
मुख्य चुनाव आयुक्त व उप-चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति कौन करता है ?
उत्तर-
इनकी नियुक्ति राष्ट्रपति करता है।

प्रश्न 12.
मुख्य चुनाव आयुक्त व उप चुनाव आयुक्तों के पद का कार्यकाल कितना है ?
उत्तर-
6 वर्ष अथवा 65 वर्ष तक की आयु तक वह अपने पद पर बने रह सकते हैं।

लघु उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
चुनाव का लोकतांत्रिक देशों में क्या महत्त्व है ?
उत्तर-
लोकतंत्र में चुनाव का बड़ा भारी महत्त्व है। चुनाव के द्वारा ही जनता अपना प्रतिनिधि चुनती है और उनके माध्यम से शासन में भाग लेती है तथा शासन पर अपना नियंत्रण रखती है। चुनाव के कारण ही जनता अर्थात् मतदाताओं का महत्त्व क्या रहता है और यदि कोई मंत्री या प्रतिनिधि अपना कार्य ठीक प्रकार से न करें तो मतदाता उसे अगले चुनाव में वोट न देकर असफल कर सकते हैं। चुनाव के समय जनता को सरकार की आलोचना का भी अवसर मिलता है और वह अपनी इच्छानुसार सरकार को बदल सकती है। चुनाव ही एक ऐसा साधन है जिसके कारण जनता अपने को देश का शासक समझ और कह सकती है। चुनावों से जनता को राजनीतिक शिक्षा भी मिलती है, क्योंकि चुनावों के दिनों में सभी और सरकार अपने-अपने कार्यों का प्रचार करती तथा एक-दूसरे की आलोचना करती है। इससे नागरिकों को पता चल जाता है कि देश की समस्याएं क्या हैं और उन्हें कैसे हल किया जाए।

PSEB 9th Class SST Solutions Civics Chapter 5 लोकतंत्र एवं चुनाव राजनीति

प्रश्न 2.
चुनाव प्रक्रिया के पड़ावों की तालिका बताएँ।
उत्तर-

  1. चुनाव क्षेत्रों का परिसीमन
  2. चुनाव तिथियों की घोषणा
  3. नामांकण पत्र भरना
  4. नामांकन पत्र वापिस लेना
  5. चुनाव अभियान चलाना
  6. चुनाव प्रचार बंद करना
  7. मतदान करना
  8. मतगणना
  9. परिणाम घोषित करना।

प्रश्न 3.
चुनाव अभियान से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
जब नामांकन पत्र वापिस लेने की तारीख समाप्त हो जाती है तो इसके पश्चात् सभी उम्मीदवारों को कम से कम 20 दिन चुनाव प्रचार के लिए दिए जाते हैं। इस चुनाव प्रचार को ही चुनाव अभियान का नाम दिया जाता है।

इस समय के दौरान चुनाव लड़ रहे सभी उम्मीदवार अपने पक्ष में प्रचार करते हैं ताकि अधिक-से-अधिक वोट उन्हें डाल सकें। राजनीतिक दल व उम्मीदवार जनता को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए घोषणा-पत्र सामने लाते हैं तथा जनता के साथ बहुत से वायदे भी किए जाते हैं। चुनाव से 48 घंटे पहले चुनाव अभियान बंद कर दिया जाता है।

प्रश्न 4.
मतदान केंद्र पर बलात् अधिकार करने से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
मतगणना वाले स्थान या केंद्र को एक या एक से अधिक व्यक्तियों द्वारा घेरना, वोट की गणना करने वाले कर्मचारियों से मतपेटी या मशीनें छीन लेना या कोई ऐसी गतिविधि जिससे चुनाव में विघ्न उत्पन्न हो बूथ केपचरिंग या मतदान केंद्र पर बलात् अधिकार कहलाता है। काबूले के अनुसार यदि कोई ऐसा करेगा तो उसे कम से कम 6 महीने की सजा तथा जुर्माने का प्रावधान है तथा इस कारावास की अवधि को दो वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। परंतु अगर कोई सरकारी कर्मचारी ऐसा करता है तो उसे 1 वर्ष की सज़ा व जुर्माना होगा तथा सजा को तीन वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है।

प्रश्न 5.
राजनीतिक दलों की चुनाव में क्या भूमिका है ?
उत्तर-
लोकतंत्र रूपी गाड़ी में राजनीतिक दल पहिए के समान होते हैं जिनके बिना चुनाव करवाना मुमकिन ही नहीं है। हम राजनीतिक दलों के बिना लोकतंत्र की कल्पना भी नहीं कर सकते। संपूर्ण विश्व में सरकार चाहे कोई हो, राजनीतिक दल तो होते ही हैं। चाहे उत्तरी कोरिया जैसी तानाशाही हो या भारत जैसा लोकतंत्र, राजनीतिक दल तो होते ही हैं। भारत में बहुदलीय व्यवस्था है। भारत में 8 राष्ट्रीय दल हैं 59 क्षेत्रीय दल हैं तथा अगर उन सभी दलों को मिला दिया जाए जो चुनाव आयोग के पास पंजीकृत हैं तो यह संख्या 1700 के करीब है।

प्रश्न 6.
भारत के कोई चार राष्ट्रीय दलों के नाम लिखें।
उत्तर-

  1. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
  2. भारतीय जनता पार्टी
  3. बहुजन समाज पार्टी
  4. कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया।

प्रश्न 7.
भारत के कोई चार क्षेत्रीय दलों के नाम लिखें।
उत्तर-

  1. शिरोमणि अकाली दल (पंजाब)
  2. शिवसेना (महाराष्ट्र)
  3. आम आदमी पार्टी (दिल्ली व पंजाब)
  4. तेलगुदेशम् पार्टी (आंध्र प्रदेश)

प्रश्न 8.
मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से कैसे निष्कासित किया जा सकता है.?
उत्तर-
वैसे तो मुख्य चुनाव आयुक्त का कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु जो पहले हो जाए, होता है परंतु उसे उसका कार्यकाल पूर्ण होने से पहले भी उसे हटाया जा सकता है। यदि संसद् के दोनों सदन उसके विरुद्ध दो तिहाई बहुमत से दोष प्रस्ताव पारित करके राष्ट्रपति के पास भेज दें तो उसे राष्ट्रपति उसके पद से हटा सकते हैं।

दीर्घ उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
भारतीय चुनाव प्रणाली की मुख्य विशेषताओं का वर्णन संक्षेप में करें।
उत्तर-
भारतीय चुनाव प्रणाली की निम्नलिखित विशेषताएं हैं

  1. वयस्क मताधिकार-भारतीय चुनाव प्रणाली की प्रथम विशेषता वयस्क मताधिकार है। भारत के प्रत्येक नागरिक को जिसकी आयु 18 वर्ष या इससे अधिक हो मताधिकार प्राप्त है।
  2. संयुक्त चुनाव पद्धति-भारतीय चुनाव प्रणाली की मुख्य विशेषता संयुक्त चुनाव पद्धति है। इसमें प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में एक ही निर्वाचक सूची होती है जिसमें उस क्षेत्र के सभी मतदाताओं के नाम होते हैं और वे सभी मिलकर एक प्रतिनिधि को चुनते हैं।
  3. अनुसूचित जातियों तथा पिछड़े वर्गों के लिए सुरक्षित स्थान-संयुक्त चुनाव प्रणाली के बावजूद भी हमारे संविधान निर्माताओं ने अनुसूचित तथा पिछड़े वर्गों के लिए स्थान सुरक्षित कर दिए हैं। संविधान के अनुसार अनुसूचित जाति तथा पिछड़े वर्गों के लिए लोकसभा तथा राज्य विधानसभाओं के स्थान सुरक्षित कर दिए हैं।
  4. गुप्त मतदान-भारत में मतदान गुप्त रूप से होता है।
  5. प्रत्यक्ष चुनाव-भारत में लोकसभा, राज्यों की विधानसभाओं, नगरपालिकाओं, पंचायतों आदि के चुनाव जनता के द्वारा प्रत्यक्ष रूप से होते हैं और ये संस्थाएं ही शक्ति का वास्तविक प्रयोग करती हैं।

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प्रश्न 2.
चुनाव आयुक्त के कार्यों का संक्षेप में वर्णन करें।
उत्तर-
चुनाव आयुक्त के कार्यों का वर्णन इस प्रकार है-

  1. चुनाव आयुक्त का सबसे प्रथम कार्य सभी प्रकार के चुनावों के लिए मतदाता सूचियां तैयार करवाना तथा उनमें संशोधन करवाना है।
  2. चुनाव का निर्देशन, नियंत्रण व निरीक्षण करवाना भी चुनाव आयुक्त का कार्य है।
  3. चुनाव के लिए समय सूची तैयार करना तथा चुनाव करवाने के लिए चुनाव की तिथियों का चुनाव आयुक्त ही करता है।
  4. चुनाव से संबंधित साधारण नियम बनाना तथा मनोनीत पत्रों की सुरक्षा भी उसका ही कार्य है।
  5. राजनीतिक दलों के लिए आचार संहिता भी वह ही लागू करवाते हैं।
  6. चुनाव चिह्न देना तथा राजनीतिक दलों को मान्यता देना भी उनका ही कार्य है।
  7. चुनाव रद्द करना, किसी स्थान पर दोबारा चुनाव करवाना तथा बूथ गड़बड़ी जैसी घटनाओं को रोकना भी उनका कार्य है।
  8. न्यायपालिका द्वारा चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित व्यक्तियों के लिए कुछ छूट देना भी चुनाव आयुक्त का ही कार्य है।

प्रश्न 3.
चुनाव प्रक्रिया के मुख्य पड़ावों का संक्षेप में वर्णन करें।
उत्तर-
भारत में चुनाव प्रक्रिया के निम्नलिखित चरण हैं

  1. चुनाव क्षेत्र निश्चित करना-चुनाव प्रबंध में सर्वप्रथम कार्य चुनाव क्षेत्र को निश्चित करना है। लोकसभा में जितने सदस्य चुने जाते हैं, लंगभग समान जनसंख्या वाले उतने ही क्षेत्रों में सारे भारत को बांट दिया जाता है। इसी प्रकार विधानसभाओं के चुनाव में राज्य को समान जनसंख्या वाले चुनाव क्षेत्र में बांट दिया जाता है और प्रत्येक क्षेत्र से एक सदस्य चुना जाता है।
  2. मतदाताओं की सूची-मतदाता सूचियां तैयार करना चुनाव प्रक्रिया की दूसरी अवस्था है। सबसे पहले मतदाताओं की अस्थायी सूची तैयार की जाती है। इन सूचियों को कुछ एक विशेष स्थानों पर जनता को देखने के लिए रख दिया जाता है। यदि उस सूची में किसी का नाम लिखने से रह गया हो या किसी का नाम गलत लिख दिया गया हो तो उसको एक निश्चित तिथि तक संशोधन करवाने के लिए प्रार्थना-पत्र देना होता है। फिर संशोधित सूचियां तैयार की जाती हैं।
  3. चुनाव तिथि की घोषणा–चुनाव आयोग चुनाव की तिथि की घोषणा करता है। चुनाव आयोग नामांकन-पत्र भरने की तिथि, नाम वापस लेने की तिथि, नामांकन-पत्रों की जांच-पड़ताल की तिथि निश्चित करता है।
  4. उम्मीदवारों का नामांकन-चुनाव कमिशन द्वारा की गई चुनाव घोषणा के पश्चात् विभिन्न राजनीतिक दलों के उम्मीदवार अपने नामांकन-पत्र दाखिल करते हैं। राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों के अतिरिक्त स्वतंत्र उम्मीदवार भी अपने नामांकन-पत्र प्रस्तुत करते हैं।
  5. मतदान-निश्चित तिथि पर मतदान होता है। मतदान के लिए प्रत्येक चुनाव क्षेत्र में मतदान केंद्र बनाए जाते हैं। प्रत्येक चुनाव केंद्र का एक मुख्य अधिकारी तथा कई सहायक अधिकारी होते हैं। प्रत्येक मतदाता को एक मत-पत्र दिया जाता है जिस पर मतदाता मर्जी से किसी उम्मीदवार पर क्रास का निशान लगा देता है।
  6. परिणामों की घोषणा-चुनावों के पश्चात् मतों की गिनती होती है। गिनती के समय उम्मीदवार तथा उनके प्रतिनिधि अंदर बैठे रहते हैं। जो उम्मीदवार सबसे अधिक वोटें प्राप्त करता है, उसे विजयी घोषित कर दिया जाता है।

प्रश्न 4.
चुनाव के महत्त्व पर संक्षेप में नोट लिखें।
उत्तर-
लोकतंत्र में चुनाव का बड़ा भारी महत्त्व है। चुनाव के द्वारा ही जनता अपना प्रतिनिधि चुनती है और उनके माध्यम से शासन में भाग लेती है तथा शासन पर अपना नियंत्रण रखती है। चुनाव के कारण ही जनता अर्थात् मतदाताओं का महत्त्व क्या रहता है और यदि कोई मंत्री या प्रतिनिधि अपना कार्य ठीक प्रकार से न करें तो मतदाता उसे अगले चुनाव में वोट न देकर असफल कर सकते हैं। चुनाव के समय जनता को सरकार की आलोचना का भी अवसर मिलता है और वह अपनी इच्छानुसार सरकार को बदल सकती है। चुनाव ही एक ऐसा साधन है जिसके कारण जनता अपने को देश लोकतंत्र एवं चुनाव राजनीति का शासक समझ और कह सकती है। चुनावों से जनता को राजनीतिक शिक्षा भी मिलती है, क्योंकि चुनावों के दिनों में सभी और सरकार अपने-अपने कार्यों का प्रचार करती तथा एक-दूसरे की आलोचना करती है। इससे नागरिकों को पता चल जाता है कि देश की समस्याएं क्या हैं और उन्हें कैसे हल किया जाए।

PSEB 9th Class Social Science Guide लोकतंत्र एवं चुनाव राजनीति Important Questions and Answers

बहुविकल्पीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
भारत में किस प्रकार का लोकतंत्र पाया जाता है ?
(क) प्रतिनिधि लोकतंत्र
(ख) प्रत्यक्ष लोकतंत्र
(ग) राजतांत्रिक लोकतंत्र
(घ) उपरोक्त में से कोई नहीं।
उत्तर-
(क) प्रतिनिधि लोकतंत्र

प्रश्न 2.
भारत में लोकसभा एवं राज्य विधानसभा के चुनाव कितने वर्षों बाद होते हैं ?
(क) 2 वर्ष
(ख) 4 वर्ष
(ग) 5 वर्ष
(घ) 7 वर्ष।
उत्तर-
(ग) 5 वर्ष

प्रश्न 3.
भारत में मतदान के लिए न्यूनतम कितनी आयु होनी चाहिए ?
(क) 15 वर्ष
(ख) 18 वर्ष
(ग) 20 वर्ष
(घ) 25 वर्ष।
उत्तर-
(ख) 18 वर्ष

प्रश्न 4.
निर्वाचन आयोग के कितने सदस्य हैं ?
(क) 1 सदस्य
(ख) 2 सदस्य
(ग) 3 सदस्य
(घ) 4 सदस्य।
उत्तर-
(ग) 3 सदस्य

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प्रश्न 5.
मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति कौन करता है ?
(क) राष्ट्रपति
(ख) प्रधानमंत्री
(ग) स्पीकर
(घ) गृहमंत्री।
उत्तर-
(क) राष्ट्रपति

प्रश्न 6.
भारत में लोकसभा के अब तक कितने चुनाव हो चुके हैं ?
(क) 12
(ख) 13
(ग) 14
(घ) 16
उत्तर-
(घ) 16

प्रश्न 7.
भारत में लोकसभा का पहला आम चुनाव कब हुआ ?
(क) 1950
(ख) 1951
(ग) 1952
(घ) 1955
उत्तर-
(ग) 1952

प्रश्न 8.
भारत में लोकसभा का 16वां चुनाव कब हुआ ?
(क) 2006
(ख) 2008
(ग) 2007
(घ) 2014
उत्तर-
(घ) 2014

प्रश्न 9.
किस पहले राज्य में मतदाता पहचान पत्र का प्रयोग किया गया था ?
(क) हरियाणा
(ख) पंजाब
(ग) उत्तर प्रदेश
(घ) तमिलनाडु।
उत्तर-
(क) हरियाणा

रिक्त स्थान भरें :

  1. लोकतांत्रिक देश में ……… का बहुत महत्त्व होता है।
  2. मुख्य चुनाव आयुक्त ……….. वर्षों के लिए नियुक्त किए जाते हैं।
  3. लोकसभा व विधानसभाओं के चुनाव ………… वर्षों के पश्चात् होते हैं।
  4. देश में …………. राष्ट्रीय दल हैं।
  5. नगरपालिका के चुने हुए प्रत्याशी को ……. कहते हैं।
  6. चुनाव आयुक्त को ………… नियुक्त करता है।

उत्तर-

  1. चुनाव
  2. छ:
  3. पांच
  4. सात
  5. पार्षद
  6. राष्ट्रपति

सही/गलत :

  1. मुख्य चुनाव आयुक्त को प्रधानमंत्री हटा सकते हैं।
  2. चुनाव करवाने का कार्य सरकार करती है।
  3. लोकसभा के चुने हुए सदस्य को एम० एल० ए० कहते हैं।
  4. मतदाता सूची में संशोधन का कार्य चुनाव आयोग का होता है।
  5. चुनाव आयोग राजनीतिक दलों को मान्यता देता है।

उत्तर-

  1. (✗)
  2. (✗)
  3. (✗)
  4. (✓)
  5. (✓)

अति लघु उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत में कौन-सी शासन प्रणाली 1950 में अपनाई गई ?
उत्तर-
लोकतांत्रिक शासन प्रणाली।

प्रश्न 2.
भारत में कौन-सी प्रतिनिधित्व प्रणाली पाई जाती है ?
उत्तर-
प्रादेशिक प्रतिनिधित्व प्रणाली।

प्रश्न 3.
भारत में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव कितने वर्षों के बाद होते हैं ?
उत्तर-
पांच वर्ष।

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प्रश्न 4.
लोकसभा की निर्वाचित सीटें (सदस्य संख्या) कितनी हैं ?
उत्तर-
543.

प्रश्न 5.
लोकतांत्रिक चुनाव की शर्ते लिखें।
उत्तर–
प्रत्येक नागरिक को एक वोट का अधिकार प्राप्त हो और प्रत्येक वोट का मूल्य समान हो।

प्रश्न 6.
चुनावी प्रतियोगिता का एक महत्त्वपूर्ण दोष लिखें।
उत्तर-
निर्वाचन क्षेत्र में लोगों में गुटबंदी की भावना पैदा हो जाती है।

प्रश्न 7.
आम चुनाव किसे कहते हैं ?
उत्तर-
लोकसभा के निर्धारित समय के पश्चात् (5 वर्ष के पश्चात्) होने वाले चुनावों को आम चुनाव कहते हैं।

प्रश्न 8.
मध्यावधि चुनाव किसे कहते हैं ?
उत्तर-
मध्यावधि चुनाव उस चुनाव को कहते हैं जो चुनाव विधानमंडल के निश्चित कार्यकाल की समाप्ति के पूर्व कराए जाते हैं।

प्रश्न 9.
भारतीय चुनाव प्रणाली की एक विशेषता लिखें।
उत्तर-
भारत में संयुक्त चुनाव प्रणाली को अपनाया गया है।

प्रश्न 10.
भारत में मतदाता कौन है?
उत्तर-
जिस नागरिक की आयु 18 वर्ष या इससे अधिक हो, उसे मताधिकार प्राप्त है। चुनाव में उसी नागरिक को मत डालने दिया जाता है जिसका नाम मतदाता सूची में हो।

प्रश्न 11.
मतदाता सूची से आपका क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
जिस सूची में मतदाताओं के नाम लिखे होते हैं, उसे मतदाता सूची कहते हैं।

प्रश्न 12.
क्या चुनाव आयोग किसी राजनीतिक दल की मान्यता समाप्त कर सकता है ?
उत्तर-
चुनाव आयोग को यह अधिकार प्राप्त है कि यदि कोई राष्ट्रीय या क्षेत्रीय स्तर का दल निर्धारित मापदंडों को पूरा नहीं करता तो चुनाव आयोग उसकी मान्यता समाप्त कर सकता है।

प्रश्न 13.
भारतीय संविधान के किस अध्याय व किन अनुच्छेदों में चुनाव व्यवस्था का वर्णन किया गया है ?
उत्तर-
भारतीय संविधान के 15वें अध्याय के अनुच्छेद 324 से 329 तक चुनाव व्यवस्था का वर्णन किया गया है।

प्रश्न 14.
निर्वाचन आयोग के कितने सदस्य हैं ?
उत्तर-
आजकल चुनाव आयोग में एक मुख्य चुनाव आयुक्त व दो अन्य चुनाव आयुक्त हैं।

प्रश्न 15.
चुनाव आयोग की नियुक्ति कौन करता है ?
उत्तर-
चुनाव आयोग की नियुक्ति संविधान के अनुसार राष्ट्रपति के द्वारा की जाती है।

प्रश्न 16.
मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति कौन करता है ?
उत्तर-
मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है।

प्रश्न 17.
चुनाव आयोग के सदस्यों का कार्यकाल बताइए।
उत्तर-
चुनाव आयोग के सदस्यों का कार्यकाल राष्ट्रपति नियम बनाकर निश्चित करता है। प्रायः यह अवधि 6 वर्ष होती है।

प्रश्न 18.
भारतीय चुनाव आयोग का कोई एक कार्य लिखें।
उत्तर-
चुनाव आयोग का मुख्य कार्य संसद् तथा राज्य विधान सभाओं के चुनाव करवाना तथा उनकी मतदाता सूची तैयार करवाना है।

प्रश्न 19.
चुनाव चिह्न का क्या महत्त्व है ?
उत्तर-
भारत के अधिकांश मतदाता अनपढ़ हैं जिस कारण मतदाता चुनाव चिह्न को पहचान कर ही अपनी पसंद के राजनीतिक दल तथा उम्मीदवार को मत देते हैं।

प्रश्न 20.
चुनाव याचिका का क्या अर्थ है ?
उत्तर-
चुनाव में यदि कोई उम्मीदवार चुनाव के नियमों का उल्लंघन करता है या भ्रष्ट तरीकों का इस्तेमाल करता है तब संबंधित व्यक्ति द्वारा उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय में दी गई याचिका को चुनाव याचिका कहते हैं।

प्रश्न 21.
भारत में चुनाव याचिका की सुनवाई कौन करता है ?
उत्तर-
भारत में चुनाव याचिका की सुनवाई सीधे उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय में की जा सकती है।

प्रश्न 22.
भारतीय चुनाव प्रणाली का कोई एक दोष बताएं।
उत्तर-
भारत में सांप्रदायिकता का बड़ा प्रभाव है और इसने हमारी प्रगति में सदैव बाधा उत्पन्न की है।

प्रश्न. 23.
चुनाव प्रणाली में सुधार करने का एक उपाय बताएं।
उत्तर-
बूथों पर कब्जा करने वालों को कड़ी सज़ा देनी चाहिए।

प्रश्न 24.
भारत में अब तक लोकसभा के कितने चुनाव हो चुके हैं ?
उत्तर-
अब तक लोकसभा के 17 चुनाव हो चुके हैं।

प्रश्न 25.
भारत में पहली लोकसभा का चुनाव किस वर्ष में हुआ था ?
उत्तर-
भारत में पहली लोकसभा का चुनाव 1952 में हुआ था।

प्रश्न 26.
भारत सरकार द्वारा किया गया एक चुनाव सुधार बताइए।
उत्तर-
61वें संशोधन द्वारा मताधिकारी की आयु 21 वर्ष से हटाकर 18 वर्ष कर दी गई।

प्रश्न 27.
सन् 1989 में पारित संविधान द्वारा मताधिकार की आयु सीमा में क्या परिवर्तन किया गया है ?
उत्तर-
मताधिकार की आयु सीमा 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दी गई।

प्रश्न 28.
चुनाव प्रचार के लिए क्या-क्या तरीके अपनाए जाते हैं ?
उत्तर-
चुनाव घोषणा-पत्र, चुनाव सभा एवं जुलूस, घर-घर जाकर मत याचना इत्यादि।

प्रश्न 29.
निर्धारित मतदान के समय से कितने घंटे पहले चुनाव प्रचार कानूनतः बंद कर दिया जाता है ?
उत्तर-
निर्धारित मतदान के समय से 48 घंटे पहले चुनाव प्रचार कानूनतः बंद कर दिया जाता है।

PSEB 9th Class SST Solutions Civics Chapter 5 लोकतंत्र एवं चुनाव राजनीति

प्रश्न 30.
भारत में मताधिकार का आधार क्या है ?
उत्तर-
भारत में मताधिकार का आधार आयु है।

प्रश्न 31.
भारत में चुनाव करवाने का उत्तरदायित्व किसका है ?
उत्तर-
भारत में चुनाव करवाने का उत्तरदायित्व चुनाव आयोग का है।

प्रश्न 32.
राजनीतिक दलों के चुनाव चिन्ह कौन निश्चित करता है ?
उत्तर-
राजनीतिक दलों के चुनाव चिन्ह चुनाव आयोग निश्चित करता है।

प्रश्न 33.
‘एक नागरिक एक मत’ का सिद्धांत किसका प्रतीक है ?
उत्तर-
‘एक नागरिक एक मत’ का सिद्धांत राजनीतिक एकता का प्रतीक है।

प्रश्न 34.
उप चुनाव किसे कहते हैं ?
उत्तर-
जो चुनाव रिक्त स्थान की पूर्ति के लिए करवाया जाता है, उसे उप चुनाव कहते हैं।

लघु उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
भारतीय मतदाता की कौन-सी तीन योग्यताएं होनी चाहिए?
उत्तर-

  1. वह भारत का नागरिक होना चाहिए।
  2. आयु कम-से-कम 18 वर्ष होनी चाहिए।
  3. मतदाता सूची में नाम होना चाहिए।

प्रश्न 2.
भारत में निर्वाचकीय प्रवृत्तियों पर एक संक्षिप्त नोट लिखो।
उत्तर-
भारत में निर्वाचकीय प्रवृत्तियों को संक्षेप में निम्नलिखित रूप में बताया जा सकता है-

  1. भारत में सोलह आम चुनावों के फलस्वरूप नागरिकों में निर्वाचक चेतना का विकास हुआ।
  2. चुनाव में मतदाताओं की अभिरुचि बढ़ी है।
  3. मतदाताओं को राजनीतिक दलों की नीतियों तथा कार्यक्रम का ज्ञान हुआ है।

प्रश्न 3.
चुनाव चिह्न पर एक टिप्पणी लिखिए।
उत्तर-
ज़ो राजनीतिक दल चुनाव में हिस्सा लेते हैं उन्हें चुनाव आयोग चुनाव चिह्न प्रदान करता है। चुनाव चिह्न राजनीतिक दल की पहचान होता है। भारत में अधिकांश मतदाता अनपढ़ हैं। अनपढ़ मतदाता चुनाव चिह्न को पहचान कर ही अपनी पसंद के राजनीतिक दल अथवा उम्मीदवार को मत देते हैं।

प्रश्न 4.
चुनाव आयोग की स्वतंत्रता भारतीय प्रजातंत्र की कार्यशीलता को किस तरह प्रभावित करती है?
उत्तर-
भारतीय संविधान के अंतर्गत चुनाव कराने के लिए एक स्वतंत्र चुनाव आयोग की व्यवस्था की गई है। चुनाव आयोग की स्वतंत्रता ने भारतीय प्रजातंत्र की कार्यशीलता को काफ़ी प्रभावित किया है। चुनाव आयोग की स्वतंत्रता ने भारतीय प्रजातंत्र को सुदृढ़ तथा सफल बनाने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। बिना स्वतंत्रता के चुनाव आयोग स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव कराने में सफल नहीं हो सकता था। चुनाव आयोग की स्वतंत्रता के कारण ही लोकसभा के पंद्रह आम चुनाव स्वतंत्रता एवं निष्पक्षता से हो चुके हैं। स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनावों के कारण ही जनता की प्रजातंत्र के प्रति आस्था बढ़ी है।

प्रश्न 5.
भारत में चुनाव प्रक्रिया में सुधार के लिए किन्हीं दो सुधारों का वर्णन करो।
उत्तर-
भारत की चुनाव प्रक्रिया में निम्नलिखित दो सुधार किए जाने अति आवश्यक हैं

  1. निष्पक्षता-चुनाव निष्पक्ष ढंग से होने चाहिए। सत्तारूढ़ दल को चुनाव में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए और न ही अपने दल के हित में सरकारी मशीनरी का प्रयोग करना चाहिए।
  2. चुनाव व्यय-एक चुनाव क्षेत्र में एक उम्मीदवार द्वारा धन व्यय करने के लिए निश्चित की गई धन की सीमा में वह धन भी सम्मिलित किया जाना चाहिए जो धन उम्मीदवार के मित्रों और उसके राजनीतिक दल द्वारा खर्च किया जाता है।

प्रश्न 6.
चुनाव के रद्दीकरण से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
चुनाव के रद्दीकरण से अभिप्राय है कि यदि चुनाव प्रचार के दौरान किसी प्रत्याशी की मृत्यु हो जाए तो उस चुनाव क्षेत्र का चुनाव कुछ समय के लिए चुनाव आयोग द्वारा निरस्त किया जाता था। फरवरी, 1992 में जनप्रतिनिधि कानून में एक संशोधन करके यह व्यवस्था की गई है कि यदि किसी निर्दलीय प्रत्याशी की मृत्यु हो गई हो तो उस चुनाव क्षेत्र के चुनाव रद्द नहीं किए जाएंगे।

प्रश्न 7.
भारत में निर्वाचन प्रक्रिया की किन्हीं दो अवस्थाओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर-
भारत में चुनाव प्रक्रिया की निम्नलिखित अवस्थाएं हैं

  1. चुनाव क्षेत्र निश्चित करना-चुनाव प्रबंध में सर्वप्रथम कार्य चुनाव क्षेत्र को निश्चित करना है। लोकसभा में जितने सदस्य चुने जाने हों, लगभग समान जनसंख्या वाले उतने ही क्षेत्रों में सारे भारत को बांट दिया जाता है। इसी प्रकार विधानसभाओं के चुनाव में राज्य को समान जनसंख्या वाले चुनाव क्षेत्र में बांट दिया जाता है और प्रत्येक क्षेत्र से एक सदस्य चुना जाता है।
  2. चुनाव तिथि की घोषणा-चुनाव आयोग चुनाव की तिथि की घोषणा करता है। चुनाव आयोग नामांकन-पत्र भरने की तिथि, नाम वापस लेने की तिथि, नामांकन-पत्रों की जांच-पड़ताल की तिथि निश्चित करता है।

दीर्घ उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत में वयस्क मताधिकार के सिद्धान्त को अपनाने के पक्ष में कोई पांच तर्क दीजिए।
उत्तर-

  1. लोकतंत्र में प्रभुसत्ता जनता के पास होती है, इसीलिए समानता के आधार पर सभी को मत का अधिकार मिलना चाहिए।
  2. कानूनों का प्रभाव सभी पर पड़ता है, इसलिए मताधिकार सभी को.मिलना चाहिए।
  3. व्यक्ति के विकास के लिए मताधिकार आवश्यक है।
  4. वयस्क मताधिकार द्वारा चुनी गई सरकार अधिक शक्तिशाली रहती है।
  5. वयस्क मताधिकार से लोगों में राजनीतिक जागृति उत्पन्न होती है और उन्हें राजनीतिक शिक्षा भी मिलती है।

प्रश्न 2.
चुनाव अभियान (Election Campaign) के तरीकों की संक्षिप्त व्याख्या करो।
उत्तर-
चुनाव से पूर्व राजनीतिक दल, उम्मीदवार, सदस्य चुनाव अभियान के अंतर्गत अनेक तरीके अपनाते हैं जिनमें महत्त्वपूर्ण निम्नलिखित हैं-

  1. चुनाव घोषणा-पत्र-प्रत्येक प्रमुख दल और कभी-कभी निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव में अपना-अपना घोषणा-पत्र जारी करते हैं।
  2. चुनाव सभाएं व जुलूस-पार्टी के सदस्य व उम्मीदवार चुनाव अभियान के अंतर्गत सभाओं व जुलूस का आयोजन करके जनसाधारण से संपर्क स्थापित करके अपने उद्देश्यों व नीतियों को स्पष्ट करते
  3. भित्ति चित्र, पोस्टर व पर्चे-चुनाव अभियान के अंतर्गत अपनाए जाने वाले अन्य तरीके भित्ति चित्र, पोस्टर व पर्चे हैं, जिनके द्वारा उम्मीदवार व पार्टी के चिह्न का प्रचार मतदाताओं में किया जाता है।
  4. झंडे एवं ध्वजाएं-भिन्न-भिन्न पार्टियों के झंडों एवं ध्वजाओं को घरों, गैर-सरकारी कार्यालयों, दुकानों, रिक्शा, स्कूटरों, ट्रकों व कारों पर लटका कर चुनाव प्रचार किया जाता है।
  5. लाउड स्पीकर व ग्रामोफोन-अनेक तरह के वाहनों के ऊपर लाउड स्पीकर एवं ग्रामोफोन को लगाकर सड़कों व मुहल्लों में चुनाव अभियान के प्रचार का महत्त्वपूर्ण साधन अपनाया जाता है।

प्रश्न 3.
भारत में चुनाव में निम्न स्तर की जन-सहभागिता के लिए उत्तरदायी पांच तत्त्वों की व्याख्या करें।
उत्तर-
भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। 2019 की 17वीं लोकसभा के चुनाव के अवसर पर
मतदाताओं की संख्या 89 करोड़ से अधिक थी। भारत में चुनाव में अधिकांश मतदाता वोट डालने नहीं जाते हैं। भारत में निम्न स्तर की जन-सहभागिता के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं

  1. अनपढ़ता-भारत की अधिकांश जनता अनपढ़ है। अशिक्षित व्यक्ति मताधिकार का महत्त्व नहीं समझता न ही अधिकांश अशिक्षित व्यक्तियों को मताधिकार का प्रयोग करना आता है।
  2. गरीबी-गरीब व्यक्ति चुनाव लड़ना तो दूर की बात वह चुनाव लड़ने की बात सोच भी नहीं सकता। गरीब व्यक्ति मताधिकार का महत्त्व नहीं समझता और अपनी वोट को बेचने के लिए तैयार हो जाता है।
  3. बेकारी-भारत में जन-सहभागिता के निम्न स्तर के होने का एक कारण बेकारी है। भारत में करोड़ों लोग बेकार हैं। बेकार व्यक्ति मताधिकार को कोई महत्त्व नहीं देता और अपना वोट बेचने के लिए तैयार हो जाता है।
  4. शिक्षित लोगों में राजनीतिक उदासीनता-चुनाव में अधिकांश शिक्षित लोग वोट डालने नहीं जाते।
  5. मतदान केंद्रों का दूर होना-मतदान केंद्र दूर होने के कारण कई मतदाता वोट डालने नहीं जाते।

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प्रश्न 4.
भारतीय चुनाव आयोग की रचना का वर्णन करें।
उत्तर-
चुनाव आयोग में मुख्य आयुक्त तथा कुछ अन्य सदस्य हो सकते हैं। इनकी संख्या राष्ट्रपति द्वारा निश्चित की जाती है। 1989 से पूर्व चुनाव आयोग एक सदस्यीय था। 1989 में कांग्रेस सरकार ने मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ दो चुनाव आयुक्त नियुक्त किए , परंतु राष्ट्रीय मोर्चा सरकार ने इस फैसले को बदल दिया था। 1 अक्तूबर, 1993 को केंद्र सरकार ने दो नए चुनाव आयुक्तों कृषि सचिव एस० एस० गिल और विधि आयोग के सदस्य जी० वी० जी० कृष्णामूर्ति की नियुक्ति कर चुनाव आयोग को तीन सदस्यीय बनाने का महत्त्वपूर्ण कदम उठाया। दिसंबर, 1993 को संसद् ने चुनाव आयोग को बहु-सदस्यीय बनाने संबंधी विधेयक पारित कर दिया। मुख्य चुनाव आयुक्त तथा अन्य सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है।

प्रश्न 5.
भारत की निर्वाचन प्रणाली की कोई पांच कमजोरियां लिखिए।
उत्तर-
भारत में चुनाव प्रणाली तथा चुनावों में कई दोष हैं जो मुख्य रूप से निम्नलिखित हैं-

  1. एक सदस्यीय चुनाव क्षेत्र-भारत में एक सदस्यीय चुनाव क्षेत्र है और एक स्थान के लिए बहुत-से उम्मीदवार खड़े हो जाते हैं। कई बार थोड़े-से मत प्राप्त करने वाला उम्मीदवार भी चुनाव जीत सकता है।
  2. जाति और धर्म के नाम पर वोट-जाति और धर्म के नाम पर खुले रूप से मत मांगे और डाले जाते हैं।
  3. धन का अधिक खर्च- भारत में चुनाव में धन का बहुत अधिक खर्च होता है, जिसे देखकर साधारण व्यक्ति तो चुनाव लड़ने की कल्पना भी नहीं कर सकता है।
  4. सरकारी मशीनों का दुरुपयोग-सत्तारूढ़ दल चुनाव जीतने के लिए सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करता है। इससे चुनाव निष्पक्ष रूप में नहीं होते हैं।
  5. जाली वोटें भुगताना-चुनाव जीतने के लिए जाली वोटें बड़े पैमाने पर भुगताई जाती हैं।

प्रश्न 6.
भारतीय चुनाव प्रणाली में कोई पांच महत्त्वपूर्ण सुधार समझाइए।
उत्तर-
चुनाव प्रणाली के दोषों को निम्नलिखित ढंगों से दूर किया जा सकता है-

  1. निष्पक्षता-चुनाव निष्पक्ष ढंग से होने चाहिए। सत्तारूढ़ दल को चुनाव में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए न ही अपने दल के हित में सरकारी मशीनरी का प्रयोग करना चाहिए।
  2. धन के प्रभाव को कम करना-इसके लिए पब्लिक फंड बनाना चाहिए और उम्मीदवारों की धन से सहायता करनी चाहिए। चुनाव का खर्च शासन को ही देना चाहिए।
  3. आनुपातिक चुनाव प्रणाली-प्रायः सभी विपक्षी दल वर्तमान में एक सदस्यीय चुनाव क्षेत्र की प्रणाली से संतुष्ट नहीं हैं। कांग्रेस को अल्पसंख्यक मत मिलते हैं पर संसद् में सीटें बहुत अधिक मिलती हैं। आम तौर पर सभी विरोधी दल आनुपातिक चुनाव प्रणाली के पक्षधर हैं।
  4. परिचय-पत्र-जाली मतदान को रोकने के लिए मतदाताओं को परिचय-पत्र दिए जाने चाहिए।
  5. कड़ी सज़ा-बूथों पर कब्जा करने वालों को कड़ी सज़ा देनी चाहिए।

लोकतंत्र एवं चुनाव राजनीति PSEB 9th Class Civics Notes

  • हमारा देश एक लोकतांत्रिक देश है तथा लोकतंत्र की सबसे महत्त्वपूर्ण पहचान उसकी चुनावी राजनीति होती है। लोकतंत्र में एक निश्चित समय के पश्चात् चुनाव करवाए जाते हैं तथा सरकार का चुनाव किया जाता है।
  • देश का प्रशासन चलाने के लिए कुछ निर्णय लिए जाते हैं तथा निर्णय लेने का अधिकार उन लोगों के पास होता है जिन्हें जनता वोट देकर चुनती है।
  • जनता अपने प्रतिनिधियों का चुनाव इसलिए करती है ताकि उनकी समस्याओं को उनके ही स्तर पर हल किया जा सके।
  • आज के समय में चुनाव का बहुत महत्त्व है क्योंकि इससे सरकार में परिवर्तन करना आसान है तथा इससे सरकारों को निरंकुश होने से रोका जा सकता है।
  • हमारे देश में एक वयस्क-एक वोट-एक मूल्य का सिद्धांत लागू किया गया है ताकि चुनावी राजनीति में समानता लाई जा सके।
  • हमारे देश में लोकसभा, राज्य विधान सभाओं तथा स्थानीय स्वै-संस्थाओं के लिए प्रत्यक्ष चुनाव करवाए जाते हैं तथा इन सब चुनावों के लिए इकहरी वोटर सूची तैयार की जाती है।
  • भारत में चुनाव वयस्क मताधिकार के आधार पर करवाए जाते हैं तथा जिस व्यक्ति की आयु 18 वर्ष से अधिक है वह वोट देने के योग्य हो जाता है।
  • देश में मतदाताओं को मत गुप्त रूप से प्रयोग करने का अधिकार दिया गया है ताकि किसी अन्य व्यक्ति को पता न चल सके कि हमने किसे वोट दिया है।
  • हमारे देश में चुनाव करवाने का उत्तरदायित्व स्वतंत्र तथा निष्पक्ष चुनाव आयोग को दिया गया है। इसके तीन सदस्य होते हैं जिनकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
  • चुनाव आयोग कई महत्त्वपूर्ण कार्य करता है जैसे कि वोटर सूची तैयार करवाना, चुनाव का निर्देशन करना, चुनावों से संबंधित नियम बनाने, आचार संहिता लागू करना, चुनाव चिन्ह देना, राजनीतिक दलों को मान्यता देना, चुनाव करवाना इत्यादि।
  • लोकतंत्र में आशा की जाती है कि चुनाव स्वतंत्र व निष्पक्ष हो। इसके लिए सरकार तथा चुनाव आयोग ने चुनावी प्रक्रिया में बहुत से परिवर्तन किए हैं।
  • चुनावी प्रक्रिया काफी लंबी प्रक्रिया है जिसमें चुनावी क्षेत्रों का परिसीमन, चुनाव तिथियों की घोषणा, नामांकन पत्र भरना व वापिस लेना, चुनाव अभियान चलाना, मतदान करना, मतगणना करना तथा परिणाम घोषित करना शामिल है।
  • राजनीतिक दल लोकतंत्र में काफी महत्त्वपूर्ण स्थान रखते हैं क्योंकि इसके बिना चुनाव नहीं हो सकते। भारत में बहुदलीय व्यवस्था है।
  • देश में दो प्रकार के दल-राष्ट्रीय व क्षेत्रीय दल पाए जाते हैं। देश में 8 राष्ट्रीय राजनीतिक दल व 59 क्षेत्रीय – राजनीतिक दल हैं।

PSEB 9th Class SST Solutions History Chapter 2 श्री गुरु नानक देव जी तथा समकालीन समाज

Punjab State Board PSEB 9th Class Social Science Book Solutions History Chapter 2 श्री गुरु नानक देव जी तथा समकालीन समाज Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 9 Social Science History Chapter 2 श्री गुरु नानक देव जी तथा समकालीन समाज

SST Guide for Class 9 PSEB श्री गुरु नानक देव जी तथा समकालीन समाज Textbook Questions and Answers

(क) बहुविकल्पीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
ऋग्वेद के अनुसार पंजाब का नाम क्या था ?
(क) हड़प्पा
(ख) सप्त सिंधु
(ग) पंचनद
(घ) पेंटापोटामिया।
उत्तर-
(ख) सप्त सिंधु

प्रश्न 2.
निम्नलिखित में चीनी यात्री कौन था ?
(क) चाणक्य
(ख) लॉर्ड कर्जन
(ग) हयनसांग
(घ) कोई भी नहीं।
उत्तर-
(ग) हयनसांग

प्रश्न 3.
पंजाब को अंग्रेज़ी साम्राज्य में कब मिलाया गया ?
(क) 1849 ई०
(ख) 1887 ई०
(ग) 1889 ई०
(घ) 1901 ई०
उत्तर-
(क) 1849 ई०

PSEB 9th Class SST Solutions History Chapter 2 श्री गुरु नानक देव जी तथा समकालीन समाज

प्रश्न 4.
यह दोआब कम उपजाऊ है-
(क) चज्ज दोआब
(ख) सिंधु सागर दोआब
(ग) रचना दोआब
(घ) बारी दोआब।
उत्तर-
(ख) सिंधु सागर दोआब

प्रश्न 5.
घग्गर और यमुना के बीच का क्षेत्र
(क) मालवा
(ख) बांगर
(ग) माझा
(घ) कोई भी नहीं।
उत्तर-
(ख) बांगर

प्रश्न 6.
मालवा क्षेत्र किन नदियों के मध्य स्थित है ?
(क) सतलुज और यमुना
(ख) सतलुज और घग्गर
(ग) घग्गर और यमुना
(घ) सतलुज और ब्यास।
उत्तर-
(ख) सतलुज और घग्गर

(ख) रिक्त स्थान भरें:

  1. ……. सभ्यता का जन्म पंजाब में हुआ था।
  2. ‘पेंटा’ का अर्थ ……………. है और ‘पोटामिया’ का अर्थ …….. है।
  3. भौगोलिक दृष्टिकोण से पंजाब को …………. भागों में बांटा गया है।
  4. …………… चिनाब और जेहलम नदियों के बीच का इलाका है।
  5. सिक्ख धर्म के संस्थापक ………. थे।
  6. भाषा के आधार पर ……………. को पंजाब का पुनर्गठन किया गया।
  7. माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई ………….. मीटर है।

उत्तर-

  1. हड़प्पा
  2. पांच, नदी
  3. तीन
  4. चज दोआब
  5. श्री गुरु नानक देव जी
  6. 1 नवंबर, 1966
  7. 8848

(ग) सही मिलान करो :

(क) – (ख)
1. ऋग्वेद – (i) उत्तर-पश्चिमी पर्वत
2. सुलेमान – (i-) सेकिया
3. बांगर – (iii) उप-पर्वतीय क्षेत्र
4. शिवालिक – (iv) सप्त सिंधु
5. यूनसांग – (v) घग्गर और यमुना।
उत्तर-

  1. सप्त सिंधु
  2. पश्चिमी पर्वत
  3. घग्गर और यमुना
  4. पर्वतीय क्षेत्र
  5. सेकिया।

PSEB 9th Class SST Solutions History Chapter 2 श्री गुरु नानक देव जी तथा समकालीन समाज

(घ) निम्नलिखित में अन्तर स्पष्ट करें :

1. ‘मालवा’ तथा ‘बांगर’
2. ‘पश्चिमी पंजाब’ तथा ‘पूर्वी पंजाब’
3. ‘दर्रे’ तथा ‘दोआब’
4. हिमालय तथा उप पर्वतीय क्षेत्र
5. ‘चज’ दोआब तथा ‘बिस्त जालंधर दोआब’
उत्तर-

  1. ‘मालवा’ तथा ‘बांगर’ :
    • मालवा-सतलुज तथा घग्गर नदियों के मध्य में फैले प्रदेश को ‘मालवा’ कहते हैं । लुधियाना, पटियाला, नाभा, संगरूर, फरीदकोट, भटिंडा आदि प्रसिद्ध नगर इस भाग में स्थित हैं।
    • बांगर अथवा हरियाणा-यह प्रदेश घग्गर तथा यमुना नदियों के मध्य में स्थित है। इसके मुख्य नगर अंबाला, कुरुक्षेत्र, पानीपत, जींद, रोहतक, करनाल, गुड़गांव तथा हिसार हैं। यह भाग एक ऐतिहासिक मैदान भी है जहाँ अनेक निर्णायक युद्ध लड़े गए।
  2. ‘पश्चिमी पंजाब’ तथा ‘पूर्वी पंजाब’-1947 ई० में स्वतंत्रता के समय पंजाब को दो भागों में बांटा गया : पश्चिमी पंजाब तथा पूर्वी पंजाब। पंजाब का पश्चिमी भाग मुस्लिम बहुसंख्यक क्षेत्र था। वह अलग होकर पाकिस्तान के रूप में नया देश बना। पूर्वी पंजाब भारत का हिस्सा बना। उस समय पंजाब के 13 ज़िले पाकिस्तान में चले गए तथा शेष 16 ज़िले भारतीय पंजाब में रह गए।
  3. ‘रे’ तथा ‘दोआब’ :
    • दर्रे-ये ऊंचे पहाड़ों के बीच में से गुजरने के लिए प्रकृति द्वारा बनाए गए मार्ग होते हैं। इन दुर्गम मार्गों में से होकर पर्वतों को पार किया जा सकता है।
    • दोआब-दो नदियों के बीच की भूमि को दोआब कहते हैं। पंजाब का मैदान पांच दोआबों से बना हैं।
  4. हिमालय तथा उप पर्वतीय क्षेत्र : हिमालय-हिमालय अर्थात् हिम + आलय का अर्थ है बर्फ का घर। हिमालय की पहाड़ियां पंजाब में श्रृंखलाबद्ध हैं। इन पहाड़ियों को ऊंचाई के अनुसार तीन भागों में बांटा जाता है-महान् हिमालय, मध्य हिमालय तथा बाहरी हिमालय।
    उप-पर्वतीय क्षेत्र (तराई क्षेत्र)-यह क्षेत्र हिमालय की पीर-पंजाल पहाड़ियों के दक्षिण में स्थित है। इसमें शिवालिक और कसौली की पहाड़ियों के ढलान वाले प्रदेश शामिल हैं। इस क्षेत्र की पहाड़ियों की औसत ऊंचाई 10003000 फुट है।
  5. ‘चज’ दोआब तथा ‘बिस्त-जालंधर’ दोआब :
    • चज दोआब-चिनाब तथा जेहलम नदियों के मध्य क्षेत्र को चज दोआब के नाम से पुकारा जाता है। इस दोआब के प्रसिद्ध नगर गुजरात, भेरा तथा शाहपुर हैं।
    •  बिस्त-जालंधर दोआब-इस दोआब में सतलुज तथा ब्यास नदियों के बीच का प्रदेश सम्मिलित है। यह प्रदेश बड़ा उपजाऊ है। जालंधर और होशियारपुर इस दोआब के प्रसिद्ध नगर हैं।

अति लघु उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
पंजाब शब्द से क्या भाव है ?
उत्तर-
पंजाब से भाव पांच नदियों के प्रदेश से है। पंजाब’ फारसी के दो शब्दों-पंज तथा आब के मेल से बना है। पंच का अर्थ है पांच और आब का अर्थ है पानी अर्थात् नदी।

प्रश्न 2.
यूनानियों ने पंजाब का क्या नाम रखा ?
उत्तर-
यूनानियों ने पंजाब का नाम पेंटापोटामिया अर्थात् पांच नदियों की धरती रखा था। पेंटा का अर्थ है पांच और पोटामिया का अर्थ है नदी।

प्रश्न 3.
‘सप्त सिंधु’ से क्या भाव है ?
उत्तर-
वैदिक काल में पंजाब को सप्त सिंधु कहा जाता था क्योंकि उस समय यह सात नदियों का प्रदेश था।

प्रश्न 4.
1947 ई० में पंजाब को किन दो भागों में बांटा गया था ?
उत्तर-
1947 ई० में पंजाब को पश्चिमी पंजाब तथा पूर्वी पंजाब दो भागों में बांटा गया था। पश्चिमी हिस्सा पाकिस्तान बना तथा पूर्वी हिस्सा भारत को मिला।

प्रश्न 5.
पंजाब की उत्तर-पश्चिमी सीमा में स्थित किन्हीं दो दरों के नाम लिखो।
उत्तर-पंजाब की उत्तर-पश्चिमी सीमा में स्थित रे हैं-खैबर, कुर्रम, टोची आदि।

प्रश्न 6.
पंजाब को भाषा के आधार पर कब और कितने राज्यों में बांटा गया ?
उत्तर-
पंजाब को भाषा के आधार पर 1 नवंबर, 1966 को दो राज्यों-पंजाब तथा हरियाणा में बांटा गया।

PSEB 9th Class SST Solutions History Chapter 2 श्री गुरु नानक देव जी तथा समकालीन समाज

लघु उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
पंजाब के भिन्न-भिन्न ऐतिहासिक नामों पर प्रकाश डालें।
उत्तर-
पंजाब के नाम समय-समय पर बदलते रहे हैं-

  1. वैदिक काल में पंजाब को सप्त सिंधु (सात नदियों की धरती) कहा जाता था।
  2. प्राचीन महाकाव्य रामायण, महाभारत तथा पुराणों में पंजाब को पंचनद बताया गया है।
  3. यूनानियों ने पंजाब को पेंटापोटामिया (Pentapotamia) नाम रखा था-पेय का अर्थ है पांच और पोटामिया का अर्थ है नदी अर्थात् पांच (दरियाओं) नदियों की धरती।
  4. टक कबीले ने पंजाब को टक प्रदेश अथवा टकी का नाम दिया।
  5. चीनी यात्री हयूनसांग ने पंजाब को सेकिया कहकर पुकारा।
  6. महाराजा रणजीत सिंह के समय पंजाब लाहौर सूबा के नाम से जाना जाने लगा।
  7. मुग़ल सम्राट अकबर ने पंजाब को पंजाब का नाम दिया। पंजाब फारसी भाषा में पंज और आब से मिलकर बना है। पंज का अर्थ है पांच और आब का अर्थ है पानी।
  8. 1849 ई० में अंग्रेजों ने इसे अपने राज्य में मिला लिया और उसे पंजाब प्रांत नाम दिया।
  9. 1947 ई० में भारत-पाकिस्तान बंटवारे में पंजाब को पूर्वी पंजाब तथा पश्चिमी पंजाब नामक दो भागों में बांटा गया। परंतु दोनों ही देशों में आज भी इसे पंजाब के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 2.
पंजाब के इतिहास का अध्ययन करने के लिए पंजाब की भौगोलिक विशेषताओं का अध्ययन क्यों जरूरी है ?
उत्तर-
किसी भी प्रदेश का इतिहास वहां के भूगोल की देन होता है। इसलिए किसी प्रदेश के इतिहास के अध्ययन के लिए उस प्रदेश की भौगोलिक अवस्थाओं का अध्ययन ज़रूरी है। पंजाब के रहन-सहन, खान-पान, वेश-भूषा, लोगों के स्वभाव तथा विचार शक्ति काफी सीमा तक भौगोलिक तथ्यों द्वारा प्रभावित हुई है। यहां की प्रत्येक घटना यहां के किसी-न-किसी भौगोलिक तथ्य से जुड़ी हुई है। यहां का उपजाऊ मैदान सभ्यता का पलना बना। समय पड़ने पर यही मैदान रणभूमि बना और यहां के लाखों वीरों ने अपने प्राणों की आहुति दी। यहां की नदियों ने अनेक बार आक्रमणकारियों का मार्ग दर्शन किया। यहां के वनों का महत्त्व भी कुछ कम नहीं है। मुग़ल अत्याचारी से पीड़ित पंजाब के लोगों को इन्हीं वनों ने अनेक बार आश्रय दिया। यहां के समृद्ध मैदानों ने आक्रमणकारियों को आक्रमण करने की प्रेरणा दी। इस प्रकार पंजाब के भूगोल ने पंजाब को रंगभूमि और रणभूमि दोनों का स्तर प्रदान किया।

प्रश्न 3.
पंजाब को भारत का प्रवेश द्वार क्यों कहा जाता है ?
उत्तर-
हिमालय की पश्चिमी शाखाओं के कारण पंजाब वर्षों तक भारत के प्रवेश द्वार का काम करता रहा है। इन पर्वत श्रेणियों में स्थित दरों से गुज़रना कठिन नहीं है। अतः आर्यों से लेकर मंगोलों तक सभी आक्रमणकारी इन्हीं मार्गों द्वारा भारत पर आक्रमण करते रहे क्योंकि ये दरें उन्हें सीधा, पंजाब की धरती पर पहुंचा देते थे। सर्वप्रथम उन्हें पंजाब के लोगों से संघर्ष करना पड़ा। उन्हें पराजित करने पर ही वे पूर्व की ओर आगे बढ़ सके। इस प्रकार पंजाब भारत के लिए प्रवेश द्वार की भूमिका निभाता रहा है।

प्रश्न 4.
पंजाब में इस्लाम धर्म का प्रसार तेजी से क्यों हुआ ?
उत्तर-
पंजाब में इस्लाम धर्म का प्रसार तेज़ी से हुआ क्योंकि सभी मुस्लिम आक्रमणकारी पहले पंजाब में आकर बसे। उन्होंने यहां के लोगों को इस्लाम धर्म स्वीकार करने के लिए विवश किया। मुस्लिम धर्म प्रचारक, सूफी संतों तथा व्यापारियों ने भी इस कार्य में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। हिन्दू धर्म के कठोर रीति-रिवाज़ों से तंग आ चुके लोगों ने आसानी से इस्लाम धर्म को अपना लिया। परिणामस्वरूप पंजाब में इस्लाम धर्म काफ़ी तेजी से फैला।

प्रश्न 5.
पंजाब की भौगोलिक स्थिति का लोगों के आर्थिक जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा ?
उत्तर-
पंजाब की भौगोलिक स्थिति ने यहां के लोगों के जीवन को आर्थिक रूप से दृढ़ता प्रदान की। हिमालय की नदियां प्रत्येक वर्ष नई मिट्टी लाकर पंजाब के मैदानों में बिछाती रहीं। परिणामस्वरूप पंजाब का मैदान उपजाऊ मैदानों में गिना जाने लगा। उपजाऊ भूमि के कारण यहां अच्छी फसल होती रही और यहां के लोग समृद्ध होते गए। इन नदियों से पंजाब की भूमि सींची भी जाती थी। बर्फ से ढके रहने के कारण हिमालय से निकलने वाली नदियां सारा साल बहती रहती हैं और कृषि के लिए वरदान सिद्ध हुई हैं। हिमालय से प्राप्त लकड़ी के कारण पंजाब में फर्नीचर तथा खेल का सामान बनने लगा। इन्हीं पर्वतों से पंजाब के लोगों को गंदा बिरोजा, जड़ी-बूटियां तथा अन्य अनेक उपयोगी वस्तुएं प्राप्त होती रहीं जिससे पंजाब में उद्योगों का विकास हुआ।

दीर्घ उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
पंजाब की भौगोलिक विशेषताओं का वर्णन करो।
अथवा
पंजाब के उप-पर्वतीय (तराई) प्रदेश के बारे में लिखो।
अथवा
पंजाब के मैदानी क्षेत्र की भौतिक विशेषताओं पर एक नोट लिखो।
उत्तर- भौगोलिक रूप से पंजाब का अध्ययन बहुत ही रोचक है। इस दृष्टि से पंजाब को तीन भागों में बांटा जा सकता है

  1. हिमालय तथा उसकी उत्तर पश्चिमी पर्वतीय श्रेणियां
  2. उप-पर्वतीय क्षेत्र अथवा तराई प्रदेश
  3. मैदानी क्षेत्र।

1. हिमालय तथा उसकी उत्तर-पश्चिमी पर्वतीय श्रेणियां-हिमालय अर्थात् हिम+आलय का अर्थ है-बर्फ का घर। भारत के उत्तर में स्थित यह ऊंचा पर्वत वर्ष में अधिकतर समय बर्फ से ढका रहता है। पश्चिम से पूर्व की ओर इसकी लम्बाई लगभग 2400 कि०मी० तथा उत्तर से दक्षिण की ओर औसत चौड़ाई लगभग 250 कि०मी० है। संसार की सबसे ऊंची पर्वत चोटी माऊंट एवरेस्ट (8848 मी०) हिमालय में ही स्थित है परन्तु हिमालय की सभी पहाड़ियों की ऊंचाई एक समान नहीं है।

पंजाब के उत्तर-पश्चिम में हिमालय की पश्चिमी शाखाएं स्थित हैं। इन शाखाओं में किरथार तथा सुलेमान की पर्वतश्रेणियां सम्मिलित हैं। इन पर्वतों की ऊंचाई अधिक नहीं है। इनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनमें अनेक दर्रे हैं इन दरों में खैबर का दर्रा महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। अधिकतर आक्रमणकारियों के लिए यही दर्रा प्रवेश-द्वार बना रहा। .

2. उप-पर्वतीय क्षेत्र अथवा तराई प्रदेश-हिमालय प्रदेश के उच्च प्रदेशों और पंजाब के मैदानी प्रदेशों के मध्य तराई का प्रदेश स्थित है। इसे उप-पर्वतीय प्रदेश भी कहा जाता है। यह 160 कि० मीटर से 320 कि० मीटर तक चौड़ा है और इसकी ऊंचाई 300 से 900 मीटर तक है। यह भाग अनेक घाटियों के कारण हिमालय पर्वत श्रेणियों से अलगसा दिखाई देता है। इस भाग में सियालकोट, कांगड़ा, होशियारपुर, गुरदासपुर, अंबाला का कुछ क्षेत्र सम्मिलित है। सामान्य रूप से यह एक पर्वतीय प्रदेश है। अतः यहां उपज बहुत कम होती है। वर्षा के कारण यहां अनेक रोग फैलते हैं। जहां कहीं भूमि को कृषि योग्य बनाया गया है वहां आलू, चावल-गेहूँ तथा मक्का की कृषि की जाने लगी है। यहां आने-जाने के साधनों का भी पूरी तरह से विकास नहीं हो पाया है। यहां की जनसंख्या कम है। यहां के लोगों को अपना जीवन-निर्वाह करने के लिए कड़ा परिश्रम करना पड़ता है। प्रकृति की सुंदर छटा के कारण यह प्रदेश बहुत की आकर्षक है और वनों से आच्छादित इसकी घाटियां मनमोहक दृश्य प्रस्तुत करती हैं।

PSEB 9th Class SST Solutions History Chapter 2 श्री गुरु नानक देव जी तथा समकालीन समाज

3. मैदानी क्षेत्र-पंजाब के मैदानी क्षेत्र को दो भागों में बांटा गया है-पूर्वी मैदान तथा पश्चिमी मैदान। यमुना तथा रावी के मध्य स्थित भाग को ‘पूर्वी मैदान’ कहते हैं। यह प्रदेश अधिक उपजाऊ है। यहां की जनसंख्या भी घनी है। रावी तथा सिंध के मध्य वाले भाग को ‘पश्चिमी मैदान’ कहते हैं। यह प्रदेश पूर्वी मैदान की तुलना में कम समृद्ध है।
(क) पाँच दोआब-दो नदियों के बीच की भूमि को दोआब कहते हैं। पंजाब का मैदानी भाग निम्नलिखित पाँच दोआबों से घिरा हुआ है।

  1. सिंध सागर दोआब-जेहलम तथा सिंध नदियों के बीच के प्रदेश को सिंध सागर दोआब कहा जाता है। यह प्रदेश अधिक उपजाऊ नहीं है। जेहलम तथा रावलपिंडी यहां के प्रसिद्ध नगर हैं।
  2. रचना दोआब-इस भाग में रावी तथा चिनाब नदियों के बीच का प्रदेश सम्मिलित है जो काफ़ी उपजाऊ है। गुजरांवाला तथा शेखूपुरा इस दोआब के प्रसिद्ध नगर हैं।
  3. बिस्त-जालंधर दोआब-इस दोआब में सतलुज तथा ब्यास नदियों के बीच का प्रदेश सम्मिलित है। यह प्रदेश बड़ा उपजाऊ है। जालंधर और होशियारपुर इस दोआब के प्रसिद्ध नगर हैं।
  4. बारी दोआब-ब्यास तथा रावी नदियों के बीच के प्रदेश को बारी दोआब कहा जाता है। यह अत्यंत उपजाऊ क्षेत्र है। पंजाब के मध्य में स्थित होने के कारण इसे ‘माझा’ भी कहा जाता है। पंजाब के दो सुविख्यात नगर लाहौर तथा अमृतसर इसी दोआब में स्थित हैं।
  5. चज दोआब-चिनाब तथा जेहलम नदियों के मध्य क्षेत्र को चज दोआब के नाम से पुकारा जाता है। इस दोआब के प्रसिद्ध नगर गुजरात, भेरा तथा शाहपुर हैं।

(ख) मालवा तथा बांगर-पांच दोआबों के अतिरिक्त पंजाब के मैदानी भाग में सतलुज तथा यमुना के मध्य का विस्तृत मैदानी क्षेत्र भी सम्मिलित है। इसको दो भागों में बांटा जा सकता है-मालवा तथा बांगर।

  1. मालवा-सतलुज तथा घग्घर नदियों के मध्य में फैले प्रदेश को ‘मालवा’ कहते हैं। लुधियाना, पटियाला, नाभा, संगरूर, फरीदकोट, भटिंडा आदि प्रसिद्ध नगर इस भाग में स्थित हैं।
  2. बांगर अथवा हरियाणा-यह प्रदेश घग्घर तथा यमुना नदियों के मध्य में स्थित है। इसके मुख्य नगर अंबाला, कुरुक्षेत्र, पानीपत, जींद, रोहतक, करनाल, गुड़गांव तथा हिसार हैं। यह भाग एक ऐतिहासिक मैदान भी है जहां अनेक निर्णायक युद्ध लड़े गए।

प्रश्न 2.
पंजाब की भौगोलिक स्थिति ने पंजाब के राजनीतिक और धार्मिक क्षेत्र के इतिहास पर क्या प्रभाव डाला ? विस्तार सहित बताओ।
उत्तर-
पंजाब भारत के उत्तर-पश्चिम में स्थित एक अति उपजाऊ प्रदेश है। इसकी आदर्श स्थिति ने यहां के इतिहास को एक-एक विशिष्ट रूप प्रदान किया है। वैसे भी किसी प्रदेश का इतिहास वहां के भूगोल की कोख से ही जन्म लेता है। पंजाब का इतिहास भी कोई अपवाद नहीं है। यहां के लोगों ने राजनीतिक, सामाजिक तथा धार्मिक क्षेत्रों में महत्त्वपूर्ण सफलताएं प्राप्त की हैं। संक्षेप में पंजाब की स्थिति ने पंजाब के इतिहास को निम्नलिखित रंगों में रंगा है-

1. राजनीतिक क्षेत्र पर प्रभाव-

  • पंजाब के उत्तर-पश्चिम में स्थित दरों ने आक्रमणकारियों के लिए प्रवेश द्वार का काम किया। सभी आरंभिक आक्रमणकारी उत्तर-पश्चिम की दिशा से भारत में प्रवेश करते रहे। उनका सामना करने के लिए पंजाब के वीर सपूत आगे बढ़े।
  • सभी महत्त्वपूर्ण तथा निर्णायक युद्ध इसी धरती पर ही लड़े गए। चंद्रगुप्त मौर्य ने भारत में प्रथम विशाल साम्राज्य स्थापित किया था, परंतु उसके साम्राज्य की नींव पंजाब से ही पड़ी। हर्ष के साम्राज्य की पहली राजधानी थानेश्वर (कुरुक्षेत्र के समीप) भी पंजाब में ही थी।
  • पंजाब के वनों तथा पर्वतों ने सिक्खों को संकट के समय शरण दी। यहीं रह कर सिक्खों ने गुरिल्ला युद्ध प्रणाली द्वारा मुग़लों तथा अहमदशाह अब्दाली के दांत खट्टे किए।
  • अंग्रेज़ पंजाब पर सबसे अन्त में अधिकार कर सके। इसका कारण यह था कि उन्होंने देश के पूर्वी तट से भारत में प्रवेश किया था। यह प्रदेश पंजाब से बहुत दूर था।

2. धार्मिक क्षेत्र पर प्रभाव-धार्मिक क्षेत्र में पंजाब की भौगोलिक स्थिति ने यहां के इतिहास पर निम्नलिखित प्रभाव डाले :

वैदिक धर्म का जन्म तथा विकास-वैदिक धर्म का आरम्भ वेदों से माना जाता है। वेद चार हैं ऋग्वेद, सामवेद, अथर्ववेद, यजुर्वेद। इनमें से ऋग्वेद सबसे प्राचीन और सर्वोच्च है। इसकी रचना पंजाब की धरती पर ही हुई है। इस प्रकार यह पंजाब वैदिक धर्म के प्रचार का केन्द्र रहा है।

इस्लाम धर्म का प्रसार-इस्लाम धर्म का जन्म मक्का-मदीना में हुआ और तेज़ी से मध्य एशिया के देशों में फैल गया। इन देशों से मुस्लिम आक्रमणकारी धर्म-प्रचारक, व्यापारी, सूफी संत आदि उत्तर-पश्चिमी दरों के रास्ते भारत आए। मुस्लिम आक्रमणकारियों ने पंजाब पर अपना अधिकार कर लिया और यहाँ के लोगों को इस्लाम धर्म अपनाने पर विवश किया। इसके अतिरिक्त हिन्दू समाज में प्रचलित कठोर रीति-रिवाजों और जाति भेदभाव के कारण निम्न जाति के बहुत से लोगों ने इस्लाम धर्म अपना लिया। इस तरह पंजाब में इस्लाम धर्म का काफ़ी तेजी से प्रसार हुआ।

सिक्ख धर्म का उदय तथा विकास-विदेशी हमलावरों के कारण पंजाब के लोगों पर कई प्रकार के अत्याचार हुए। उस समय हिन्दू समाज जाति भेद, कर्मकाण्डों और पाखण्डों में फंस चुका था। इस प्रकार लोगों का जीवन अत्यन्त दयनीय हो गया था। ऐसे वातावरण में पंजाब की धरती पर एक महान् क्रांतिकारी महापुरुष श्री गुरु नानक देव जी ने जन्म लिया। उन्होंने प्रचलित जाति भेद, कर्मकाण्डों, पाखण्डों और राजनैतिक अत्याचारों का विरोध किया। उन्होंने संसार को सबके कल्याण (सरबत दा भला) का संदेश दिया जिसने सिक्ख धर्म की नींव डाली। श्री गुरु नानक देव जी के बाद नौ . गुरुओं ने सिक्ख धर्म के प्रचार व प्रसार में अपना योगदान दिया। अत्याचारों के विरुद्ध और धर्म की रक्षा के लिए दो सिक्ख गुरुओं ने अपने बलिदान भी दिए। परिणामस्वरूप पंजाब में सिक्ख धर्म तेज़ी से विकसित हुआ।

प्रश्न 3.
विदेशी हमलों का पंजाब के लोगों के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा ?
उत्तर-
विदेशी हमलों का पंजाब के लोगों के जीवन पर बुरे तथा अच्छे दोनों प्रकार के प्रभाव पड़े। इनका अलगअलग वर्णन इस प्रकार है-
बुरे प्रभाव

  1. अत्याचार-विदेशी आक्रमणकारियों ने पंजाब के लोगों पर अनेक अत्याचार किए। मुस्लिम हमलावरों ने उन्हें इस्लाम कबूल करने के लिए विवश किया। उन्होंने यह कार्य तलवार के बल पर करने का प्रयास किया।
  2. जन-धन की हानि-विदेशी हमलों से पंजाब के लोगों को जन-धन की भारी हानि उठानी पड़ी। इन हमलों में कई लोग मारे गए और कृषि उजड़ गई।
  3. कला और साहित्य के विकास में बाधा-पंजाब प्राचीन सभ्यता एवं संस्कृति का पलना था। यहां की कला और साहित्य काफ़ी विकसित थे। विदेशी हमलों से इनके विकास में बाधा पड़ी। कई ग्रंथ तथा कलाकृत्तियां नष्ट हो गईं।

अच्छे प्रभाव

  1. पंजाबियों के विशेष गुण-लगातार युद्धों में उलझे रहने के कारण पंजाब के लोगों में वीरता, साहस, परिश्रम जैसे अच्छे गुण उत्पन्न हुए। आज भी पंजाब के लोगों में ये गुण विद्यमान हैं।
  2. समृद्ध मिश्रित संस्कृति का विकास-विदेशियों के सम्पर्क में रहने से पंजाब में एक मिश्रित संस्कृति का विकास हुआ। पंजाबियों के खान-पान, पहनावे तथा रहन-सहन में कई नए मूल्य जुड़ गए। इस प्रकार पंजाब की विशेष संस्कृति काफ़ी समृद्ध हो गई।
    सत्य तो यह है कि विदेशी हमलों ने पंजाब तथा पंजाबियों के चरित्र को एक नया रूप प्रदान किया।

PSEB 9th Class SST Solutions History Chapter 2 श्री गुरु नानक देव जी तथा समकालीन समाज

PSEB 9th Class Social Science Guide श्री गुरु नानक देव जी तथा समकालीन समाज Important Questions and Answers

बहुविकल्पीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
पंजाब में पहले सिख राज्य की स्थापना की___
(क) श्री गुरु नानक देव जी
(ख) महाराजा रणजीत सिंह
(ग) बंदा सिंह बहादुर
(घ) गुरु गोबिंद सिंह जी।
उत्तर-
(ग) बंदा सिंह बहादुर

प्रश्न 2.
पंजाब को भाषा के आधार पर दो भागों में बांटा गया
(क) 1947 ई० में
(ख) 1966 ई० में
(ग) 1950 ई० में
(घ) 1971 ई० में
उत्तर-
(ख) 1966 ई० में

प्रश्न 3.
अंग्रेज़ों तथा महाराजा रणजीत सिंह के बीच सीमा का काम करता था
(क) सतलुज दरिया
(ख) चिनाब दरिया
(ग) रावी दरिया
(घ) ब्यास दरिया।
उत्तर-
(क) सतलुज दरिया

प्रश्न 4.
आज हिंद-पाक सीमा का काम कौन-सा दरिया करता है ?
(क) रावी दरिया
(ख) चिनाब दरिया
(ग) ब्यास दरिया
(घ) सतलुज दरिया।
उत्तर-
(क) रावी दरिया

प्रश्न 5.
शाह ज़मान ने भारत (पंजाब) पर आक्रमण किया
(क) 1811 ई० में
(ख) 1798 ई० में
(ग) 1757 ई० में
(घ) 1794 ई० में।
उत्तर-
(ख) 1798 ई० में

प्रश्न 6.
दिल्ली को भारत की राजधानी बनाया
(क) लॉर्ड विलियम बेंटिंक ने
(ख) लॉर्ड माऊंटबेटन ने
(ग) लॉर्ड हार्डिंग ने
(घ) लॉर्ड कर्जन ने।
उत्तर-
(ग) लॉर्ड हार्डिंग ने

PSEB 9th Class SST Solutions History Chapter 2 श्री गुरु नानक देव जी तथा समकालीन समाज

रिक्त स्थान भरें:

  1. पंजाब को ………… काल में सप्त सिंधु कहा जाता था।
  2. दो दरियाओं के बीच के भाग को ………… कहते हैं।
  3. मुग़ल शासक अकबर ने पंजाब को ………. प्रांतों में बांटा।
  4. महाराजा रणजीत सिंह के अधीन पंजाब को ……….. राज्य के नाम से पुकारा जाने लगा।
  5. रामायण तथा महाभारत काल में पंजाब को …….. कहा जाता था।
  6. सिकंदर ने भारत पर …………. ई० पू० में आक्रमण किया।

उत्तर-

  1. वैदिक
  2. दोआबा
  3. दो
  4. लाहौर
  5. सेकिया
  6. 326

सही मिलान करो:

(क) – (ख)
1. महाराजा रणजीत सिंह – (i) सतलुज तथा ब्यास
2. पंजाब का अंग्रेजी राज्य में विलय – (ii) लार्ड हार्डिंग
3. रामायण तथा महाभारत – (iii) लाहौर राज्य
4. दिल्ली भारत की राजधानी – (iv) 1849 ई०
5. बिस्त-जालन्धर दोआब – (v) सेकिया
उत्तर-

  1. लाहौर राज्य
  2. 1849 ई०
  3. सेकिया
  4. लार्ड हार्डिंग
  5. सतलुज तथा ब्यास

अति लघु उत्तरों वाले प्रश्न

उत्तर एक लाइन अथवा एक शब्द में :

प्रश्न 1.
भारत के बंटवारे के बाद ‘पंजाब’ शब्द उचित क्यों नहीं रह गया ?
उत्तर-
बंटवारे से पहले पंजाब पांच दरियाओं की धरती था, परंतु बंटवारे के कारण इसके तीन दरिया पाकिस्तान में चले और वर्तमान पंजाब में केवल दो दरिया (ब्यास तथा सतलुज) ही शेष रह गए।

प्रश्न 2.
भारत के बंटवारे का पंजाब पर क्या प्रभाव पड़ा ?
उत्तर-
भारत के बंटवारे से पंजाब भी दो भागों में बंट गया।

प्रश्न 3.
भौगोलिक दृष्टिकोण से पंजाब को कितने भागों में बांटा जाता है ? उनके नाम लिखिए।
उत्तर-
भौगोलिक दृष्टिकोण से पंजाब को तीन भागों में बांटा जाता है-

  1. हिमालय तथा उसकी उत्तर-पश्चिमी पहाड़ियां
  2. उप पहाड़ी क्षेत्र (पहाड़ की तलहटी के क्षेत्र)
  3. मैदानी क्षेत्र।

प्रश्न 4.
अगर पंजाब के उत्तर में हिमालय न होता तो यह कैसा इलाका होता ?
उत्तर-
अगर पंजाब के उत्तर में हिमालय न होता तो यह इलाका शुष्क तथा ठंडा बन कर रह जाता।

प्रश्न 5.
‘दोआबा’ शब्द से क्या भाव है ?
उत्तर-
दो दरियाओं के बीच के भाग को दोआंबा कहते हैं।

प्रश्न 6.
दरिया सतलुज तथा दरिया घग्गर के बीच के इलाके को क्या कहा जाता है तथा यहां के निवासियों को क्या कहते हैं ?
उत्तर-
दरिया सतलुज तथा दरिया घग्गर के बीच के इलाके को ‘मालेवा’ कहा जाता है। यहां के निवासियों को मलवई कहते हैं।

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प्रश्न 7.
1. दोआबा बिस्त का यह नाम क्यों पड़ा ?
2. इसके किन्हीं दो प्रसिद्ध शहरों के नाम लिखिए।
उत्तर-

  1. दोआबा बिस्त ब्यास तथा सतलुज नदियों के बीच का प्रदेश है जिनके नाम के पहले अक्षरों के जोड़ से ही इस दोआब का नाम बिस्त पड़ा है।
  2. जालंधर तथा होशियारपुर इस दोआबे के दो प्रसिद्ध शहर हैं।

प्रश्न 8.
1. दोआबा बारी को ‘माझा’ क्यों कहा जाता है तथा
2. यहां के निवासियों को क्या कहते हैं ?
उत्तर-

  1. दोआबा बारी पंजाब के मध्य में स्थित होने के कारण माझा कहलाता है।
  2. इसके निवासियों को ‘मझेल’ कहते हैं।

प्रश्न 9.
मुग़ल बादशाह अकबर ने पंजाब को कौन-कौन से दो प्रांतों में विभाजित किया ?
उत्तर-
लाहौर तथा मुलतान।

प्रश्न 10.
महाराजा रणजीत सिंह के अधीन पंजाब को किस नाम से पुकारा जाने लगा था ?
उत्तर-
महाराजा रणजीत सिंह के अधीन पंजाब को ‘लाहौर राज्य’ के नाम से पुकारा जाने लगा था।

प्रश्न 11.
पंजाब को अंग्रेजी राज्य में कब मिलाया गया ?
उत्तर-
पंजाब को अंग्रेज़ी राज्य में 1849 ई० में मिलाया गया।

प्रश्न 12.
पंजाब को भाषा के आधार पर कब बांटा गया ?
उत्तर-
पंजाब को भाषा के आधार पर 1966 ई० में बांटा गया।

प्रश्न 13.
हिमालय के पश्चिमी दरों के मार्ग से पंजाब पर आक्रमण करने वाली किन्हीं चार जातियों के नाम बताओ।
उत्तर-
इन दरों के मार्ग से पंजाब पर आक्रमण करने वाली चार जातियां थीं-आर्य, शक, यूनानी तथा कुषाण।

प्रश्न 14.
पंजाब के मैदानी क्षेत्र को कौन-कौन से दो भागों में विभक्त किया जाता है ?
उत्तर-
पंजाब के मैदानी क्षेत्र को पूर्वी मैदान तथा पश्चिमी मैदान में विभक्त किया जाता है।

प्रश्न 15.
भारतीय पंजाब में अब कौन-से दो दरिया रह गये हैं ?
उत्तर-
सतलुज तथा ब्यास।

प्रश्न 16.
रामायण तथा महाभारत काल में पंजाब को क्या कहा जाता था ?
उत्तर-
सेकिया।

प्रश्न 17.
दिल्ली को भारत की राजधानी किस गवर्नर-जनरल ने बनाया ?
उत्तर-
लार्ड हार्डिंग ने।

प्रश्न 18.
हिमालय की पश्चिमी श्रृंखलाओं में स्थित किन्हीं दो दरों के नाम बताओ।
उत्तर-
खैबर तथा टोची।

प्रश्न 19.
दिल्ली भारत की राजधानी कब बनी ?
उत्तर-
1911 में।

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प्रश्न 20.
सिकंदर ने भारत पर कब आक्रमण किया ?
उत्तर-
326 ई० पू० में।

प्रश्न 21.
शाह ज़मान ने भारत (पंजाब) पर आक्रमण कब किया ?
उत्तर-
1798 ई० में।

प्रश्न 22.
अंग्रेज़ों तथा महाराजा रणजीत सिंह के बीच कौन-सा दरिया सीमा का काम करता था ?
उत्तर-
सतलुज।

प्रश्न 23.
आज किस दरिया का कुछ भाग हिंद-पाक सीमा का काम करता है ?
उत्तर-
रावी।

प्रश्न 24.
महाराजा रणजीत सिंह के समय पंजाब की राजधानी कौन-सी थी ?
उत्तर-
लाहौर।

प्रश्न 25.
पंजाब के मैदानी क्षेत्र को वास्तविक पंजाब’ क्यों कहा गया है ? कोई एक कारण बताओ।
उत्तर-
यह क्षेत्र अत्यंत उपजाऊ है और समस्त पंजाब की समृद्धि का आधार है।

प्रश्न 26.
पंजाब के किस मैदानी क्षेत्र में महाभारत का युद्ध, पानीपत के तीन युद्ध तथा तराइन के दो युद्ध लड़े गए ?
उत्तर-
बांगर।

प्रश्न 27.
मालवा प्रदेश किन नदियों के बीच स्थित है ?
उत्तर-
मालवा प्रदेश सतलुज और घग्घर नदियों के बीच में स्थित है।

प्रश्न 28.
पंजाब के मालवा प्रदेश का नाम किसके नाम पर पड़ा ?
उत्तर-
पंजाब के मालवा प्रदेश का नाम यहां बसने वाले मालव कबीले के नाम पर पड़ा।

प्रश्न 29.
पंजाब के किन्हीं चार नगरों के नाम बताओ जहां निर्णायक ऐतिहासिक युद्ध हुए।
उत्तर-
तराइन, पानीपत, पेशावर तथा थानेसर में निर्णायक युद्ध हुए।

प्रश्न 30.
पाकिस्तानी पंजाब को किस नाम से पुकारा जाता है ?
उत्तर-
पश्चिमी पंजाब।

प्रश्न 31.
हिंदी-बाखत्री तथा हिंदी-पारथी राजाओं के अधीन पंजाब की राजधानी कौन-सी थी ?
उत्तर-
साकला (सियालकोट)।

प्रश्न 32.
दो दरियाओं के मध्य भाग के लिए ‘दोआबा’ शब्द का प्रचलन किस मुगल शासक के समय में हुआ ?
उत्तर-
अकबर।

PSEB 9th Class SST Solutions History Chapter 2 श्री गुरु नानक देव जी तथा समकालीन समाज

लघु उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
हिमालय की पहाड़ियों के कोई चार लाभ लिखिए।
उत्तर-
हिमालय की पहाड़ियों के मुख्य लाभ निम्नलिखित हैं-

  1. हिमालय से निकलने वाली नदियां सारा साल बहती हैं। ये नदियां पंजाब की भूमि को उपजाऊ बनाती हैं।
  2. हिमालय की पहाड़ियों पर घने वन पाये जाते हैं। इन वनों से जड़ी-बूटियां तथा लकड़ी प्राप्त होती है।
  3. इस पर्वत की ऊंची बर्फीली चोटियां शत्रु को भारत पर आक्रमण करने से रोकती हैं।
  4. हिमालय पर्वत मानसून पवनों को रोक कर वर्षा लाने में सहायता करते हैं।

प्रश्न 2.
किन्हीं तीन दोआबों का संक्षिप्त वर्णन करो।
उत्तर-

  1. दोआबा सिंध सागर-इस दोआबे में दरिया सिंध तथा दरिया जेहलम के मध्य का प्रदेश आता है। यह भाग अधिक उपजाऊ नहीं है।
  2. दोआब चज-चिनाब तथा जेहलम नदियों के मध्य क्षेत्र को चज दोआबा के नाम से पुकारते हैं। इस दोआब के प्रसिद्ध नगर गुजरात, भेरा तथा शाहपुर हैं।
  3. दोआबा रचना-इस भाग में रावी तथा चिनाब नदियों के बीच का प्रदेश सम्मिलित है जो काफी उपजाऊ है। गुजरांवाला तथा शेखूपुरा इस दोआब के प्रसिद्ध नगर हैं।

प्रश्न 3.
पंजाब के दरियाओं ने इसके इतिहास पर क्या प्रभाव डाला है ?
उत्तर-
पंजाब के दरियाओं (नदियों) ने सदा शत्रु के बढ़ते कदमों को रोका। बाढ़ के दिनों में तो यहां के दरिया (नदियां) समुद्र का रूप धारण कर लेते हैं और उन्हें पार करना असंभव हो जाता है। यहां के दरिया (नदियां) जहां आक्रमणकारियों के मार्ग में बाधा बने, वहां ये उनके लिए मार्ग-दर्शक भी बने। लगभग सभी आक्रमणकारी अपने विस्तार क्षेत्र का अनुमान इन्हीं नदियों की दूरी के आधार पर ही लगाते थे। पंजाब के दरियाओं (नदियों) ने प्राकृतिक सीमाओं का काम भी किया। मुग़ल शासकों ने अपनी सरकारों, परगनों तथा सूबों की सीमाओं का काम इन्हीं दरियाओं (नदियों) से ही लिया। यहां के दरियाओं (नदियों) ने पंजाब के मैदानों को उपजाऊ बनाया और लोगों को समृद्धि प्रदान की।

प्रश्न 4.
विभिन्न कालों में पंजाब की सीमाओं की जानकारी दीजिए।
उत्तर-
पंजाब की सीमाएं समय-समय पर बदलती रही हैं-

  1. ऋग्वेद में बताए गए पंजाब में सिंध, जेहलम, रावी, चिनाब, ब्यास, सतलुज तथा सरस्वती नदियों का प्रदेश सम्मिलित था।
  2. मौर्य तथा कुषाण काल में पंजाब की पश्चिमी सीमा हिंदुकुश के पर्वतों तक चली गई थी तथा तक्षशिला इसका एक भाग बन गया था।
  3. सल्तनत काल में पंजाब की सीमाएं लाहौर तथा पेशावर तक थीं जबिक मुग़ल काल में पंजाब दो प्रांतों में बंट गया था-लाहौर तथा मुल्तान।
  4. महाराजा रणजीत सिंह के समय पंजाब (लाहौर) राज्य का विस्तार सतलुज नदी से पेशावर तक था।
  5. लाहौर राज्य के अंग्रेजी साम्राज्य में विलय के पश्चात् इसका नाम पंजाब रखा गया।
  6. भारत विभाजन के समय पंजाब के मध्यवर्ती प्रदेश पाकिस्तान में चले गए।
  7. पंजाब भाषा के आधार पर तीन राज्यों में बंट गया-पंजाब, हरियाणा तथा हिमाचल प्रदेश।

प्रश्न 5.
पंजाब के इतिहास को हिमालय पर्वत ने किस तरह से प्रभावित किया ?
उत्तर-
हिमालय पर्वत ने पंजाब के इतिहास पर निम्नलिखित प्रभाव डाले हैं-

  1. पंजाब भारत का द्वार पथ-हिमालय की पश्चिमी शाखाओं के कारण पंजाब अनेक युगों से भारत का द्वार पथ रहा। इन पर्वतीय श्रेणियों में स्थित दरों को पार करके अनेक आक्रमणकारी भारत पर आक्रमण करते रहे।
  2. उत्तर-पश्चिमी सीमा की समस्या-पंजाब का उत्तर-पश्चिमी भाग भारतीय शासकों के लिए सदा एक समस्या बना रहा। जो शासक इस भाग में स्थित दरौं की उचित रक्षा नहीं कर सके, उन्हें पतन का मुंह देखना पड़ा।
  3. विदेशी आक्रमणों से रक्षा-हिमालय पर्वत ऊंचा है तथा हमेशा बर्फ से ढका रहता है। इस लिये इसे पार करना बड़ा कठिन था। परिणामस्वरूप पंजाब उत्तर की ओर से एक लंबे समय तक आक्रमणकारियों से सदा सुरक्षित रहा।
  4. आर्थिक समृद्धि-हिमालय के कारण पंजाब एक समृद्ध प्रदेश बना। हिमालय की नदियां प्रत्येक वर्ष नई मिट्टी ला-लाकर पंजाब के मैदानों में बिछाती रहीं। परिणामस्वरूप पंजाब का मैदान संसार के उपजाऊ मैदानों में गिना जाने लगा।

प्रश्न 6.
पंजाब ने भारतीय इतिहास में क्या भूमिका निभाई है ?
उत्तर-
पंजाब ने अपनी अद्वितीय भौगोलिक स्थिति के कारण भारत के इतिहास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह प्रदेश भारत में सभ्यता का पालना बना। भारत की सबसे प्राचीन सभ्यता (सिंधु घाटी की सभ्यता) इसी क्षेत्र में फलीफूली। आर्यों ने भी अपनी सत्ता का केंद्र इसी प्रदेश को बनाया। उन्होंने वेद, पुराण, महाभारत, रामायण आदि महत्त्वपूर्ण कृतियों की रचना की। पंजाब ने भारत के प्रवेश द्वार के रूप में भी कार्य किया। मध्यकाल तक भारत में आने वाले सभी आक्रमणकारी पंजाब के मार्ग से ही भारत आये। अतः पंजाब वासियों ने बार-बार आक्रमणकारियों के बढ़ते कदमों को रोकने के लिए बार-बार उनसे युद्ध किए। इसके अतिरिक्त पंजाब हिंदू तथा सिक्ख धर्म की जन्म-भूमि भी रहा है। गुरु नानक देव जी ने अपना पावन संदेश इसी धरती पर दिया। यहीं रहकर गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की और मुग़लों के धार्मिक अत्याचारों का विरोध किया। बंदा बहादुर तथा महाराजा रणजीत सिंह के कार्य भी भारत के इतिहास में महत्त्वपूर्ण स्थान रखते हैं। नि:संदेह पंजाब ने भारत के इतिहास में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है।

प्रश्न 7.
पंजाब के इतिहास को दृष्टि में रखते हुए पंजाब के भौतिक भागों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर-
पंजाब के इतिहास को दृष्टि में रखते हुए पंजाब को मुख्य रूप से तीन भौतिक भागों में बांटा जा सकता है-

  1. हिमालय तथा उत्तरी-पश्चिमी पर्वतीय श्रेणियां
  2. तराई प्रदेश तथा
  3. मैदानी क्षेत्र।

पंजाब के उत्तर में विशाल हिमालय पर्वत फैला है। इसकी ऊंची-ऊंची चोटियां सदैव बर्फ से ढकी रहती हैं। हिमालय की तीन श्रेणियां हैं जो एक-दूसरे के समानांतर फैली हैं। हिमालय की उत्तर-पश्चिमी शाखाओं में अनेक महत्त्वपूर्ण दर्रे हैं जो प्राचीन काल में आक्रमणकारियों, व्यापारियों तथा धर्म प्रचारकों को मार्ग जुटाते रहे। पंजाब का दूसरा भौतिक भाग तराई (तलहटी) प्रदेश है। यह पंजाब के पर्वतीय तथा उपजाऊ मैदानी भाग के मध्य में विस्तृत है। इस भाग में जनसंख्या बहुत कम है। पंजाब का सबसे महत्त्वपूर्ण भौतिक भाग इसका उपजाऊ मैदानी प्रदेश है। यह उत्तर-पश्चिम में सिंधु नदी से लेकर दक्षिण-पूर्व में यमुना नदी तक फैला हुआ है। यह हिमालय से निकलने वाली नदियों द्वारा लाई गई उपजाऊ मिट्टी से बना है और आरंभ से ही पंजाब की समृद्धि का आधार रहा है।

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प्रश्न 8.
पंजाब की भौतिक विशेषताओं ने पंजाब के इतिहास को किस प्रकार प्रभावित किया है ?
उत्तर-
पंजाब की भौतिक विशेषताओं ने पंजाब के इतिहास को अपने-अपने ढंग से प्रभावित किया है।

  1. हिमालय की पश्चिमी शाखाओं के दरों ने अनेक आक्रमणकारियों को मार्ग दिया। अत: पंजाब के शासकों के लिए उत्तरी-पश्चिमी सीमा की सुरक्षा सदा एक समस्या बनी रही। इसके साथ-साथ हिमालय की बर्फ से ढकी ऊंचीऊंची चोटियां पंजाब की आक्रमणकारियों (उत्तर की ओर से) से रक्षा भी करती रहीं।
  2. हिमालय के कारण पंजाब में अपनी एक विशेष संस्कृति का भी विकास हुआ।
  3. पंजाब का उपजाऊ एवं धनी प्रदेश आक्रमणकारियों के लिए सदा आकर्षण का कारण बना रहा। फलस्वरूप इस धरती पर बार-बार युद्ध हुए।
  4. तराई प्रदेश ने संकट के समय सिक्खों को शरण दी। यहां रहकर सिक्खों ने अत्याचारी शासकों का विरोध किया और अपने अस्तित्व को बनाए रखा। अतः स्पष्ट है कि पंजाब का इतिहास वास्तव में इस प्रदेश के भौतिक तत्त्वों की ही देन है।

प्रश्न 9.
पंजाब को अंग्रेजी राज्य में कब और किसने मिलाया ? स्वतंत्रता आंदोलन में पंजाब के योगदान का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
पंजाब को 1849 में लॉर्ड डल्हौज़ी ने अंग्रेज़ी राज्य में मिलाया। स्वतंत्रता आंदोलन में पंजाब का योगदान अद्वितीय था। पंजाब में ही भाई राम सिंह ने कूका आंदोलन की नींव रखी। 20वीं शताब्दी में सिंह सभा लहर, गदर पार्टी, गुरुद्वारा सुधार आंदोलन, बब्बर अकाली आंदोलन, नौजवान सभा तथा अकाली दल के माध्यम से यहां के वीरों ने स्वतंत्रता आंदोलन को सक्रिय बनाया। भगत सिंह ने मातृभूमि की जंजीरें तोड़ने के लिए फांसी के फंदे को चूम लिया।
पंजाब : भौगोलिक विशेषताएं तथा प्रभाव करतार सिंह सराभा तथा सरदार ऊधम सिंह जैसे पंजाबी वीरों ने भी हंसते-हंसते भारत माता के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिये। अंतत: 1947 में भारत की स्वतंत्रता के साथ पंजाब भी अंग्रेजों की दासता से मुक्त हो गया।

प्रश्न 10.
पंजाब की पर्वतीय तलहटी अथवा तराई प्रदेश की मुख्य विशेषताएं बताओ।
उत्तर-
तराई प्रदेश हिमाचल प्रदेश के उच्च प्रदेशों और पंजाब के मैदानी प्रदेशों के मध्य स्थित हैं। इसकी ऊंचाई 308 में 923 मीटर तक है। यह भाग अनेक घाटियों के कारण हिमालय पर्वत श्रेणियों से अलग-सा दिखाई देता है। इस भाग में सियालकोट, कांगड़ा, होशियारपुर, गुरदासपुर तथा अंबाला का कुछ क्षेत्र सम्मिलित है। सामान्य रूप से यह एक पर्वतीय प्रदेश है। अतः यहां उपज बहुत कम होती है। वर्षा के कारण यहां अनेक रोग फैलते हैं। यहां आने जाने के साधनों का भी पूरी तरह से विकास नहीं हो पाया है। इसलिए यहां की जनसंख्या कम है। यहां के लोगों को अपना जीवन-निर्वाह करने के लिए कड़ा परिश्रम करना पड़ता है। इस परिश्रम ने उन्हें बलवान् तथा हृष्ट-पुष्ट बना दिया है।

प्रश्न 11.
पंजाब के मैदानी प्रदेश ने पंजाब के इतिहास को कहां तक प्रभावित किया है ?
उत्तर-
पंजाब के इतिहास पर पंजाब के मैदानी प्रदेश की स्पष्ट छाप दिखाई देती है।-

  1. इस प्रदेश की भूमि अत्यंत उपजाऊ है जिसके कारण यह प्रदेश सदा समृद्ध रहा। पंजाब के मैदानों की यह संपन्नता बाह्य शत्रुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई।
  2. पंजाब निर्णायक युद्धों का केंद्र बना रहा। पेशावर, कुरुक्षेत्र, करी, थानेश्वर, तराइन, पानीपत आदि नगरों में घमासान युद्ध हुए। केवल पार्नीपत के मैदान में तीन बार निर्णायक युद्ध हुए।
  3. अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण जहां पंजाबियों ने अनेक युद्धों का सामना किया, वहां निर्मम अत्याचारों का सामना भी किया। उदाहरण के लिए तैमूर ने पंजाब के लोगों पर अनगिनत अत्याचार किए थे।
  4. निरंतर युद्धों में उलझे रहने के कारण पंजाब के लोगों में वीरता एवं निर्भीकता के विशेष गुण उत्पन्न हुए। 5. पंजाब के मैदानी प्रदेश में आर्यों ने हिंदू धर्म का विकास किया। इसी प्रदेश ने मध्यकाल में गुरु नानक साहिब जैसे महान् संत को जन्म दिया जिनकी सरल शिक्षाएं सिक्ख धर्म के रूप में प्रचलित हुईं। इन सब तथ्यों से स्पष्ट है कि पंजाब के मैदानी प्रदेश ने पंजाब के इतिहास में अनेक अध्यायों का समावेश किया।

दीर्घ उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
ऋग्वैदिक काल से 1966 तक पंजाब के बदलते राजनीतिक स्वरूप (सीमा संबंधी परिवर्तनों) की चर्चा कीजिए।
उत्तर-
ऋग्वैदिक काल से लेकर भारत की स्वतंत्रता के कई वर्ष बाद तक पंजाब की सीमाओं में लगातार बदलाव होते रहे हैं। इसके कुछ उदाहरण नीचे दिए गए हैं :
ऋग्वैदिक काल से मुगल काल तक

  1. ऋग्वेद के समय सिंधु नदी से सरस्वती नदी के बीच का क्षेत्र (सप्तसिंधु) पंजाब में शामिल था।
  2. चंद्रगुप्त मौर्य ने अपने राज्य का विस्तार पश्चिम की ओर अफगानिस्तान और बलोचिस्तान के क्षेत्रों तक कर लिया। इस प्रकार उसने पंजाब की सीमाओं को हिंदुकुश पर्वतों तक पहुँचा दिया और तक्षशिला भी पंजाब का हिस्सा बन गया।
  3. हिंद-बाखतरी और हिंद-पारथी राजाओं के समय में पंजाब की सीमा अफगानिस्तान को छूती थी और इसकी राजधानी साकला (सियालकोट पाकिस्तान) थी।
  4. दिल्ली सल्तनत के समय में पंजाब (लाहौर प्रांत) की सीमा सतलुज नदी से पेशावर तक थी।
  5. मुगल बादशाह अकबर ने पंजाब को दो प्रांतों में बांट दिया-लाहौर प्रांत व मुल्तान प्रांत
  6. अंग्रेज़ी काल में महाराजा रणजीत सिंह के समय पंजाब पूर्व में सतलुज नदी से लेकर पश्चिम में खैबर दर्रे तक फैल
  7. 1849 ई० में पंजाब को अंग्रेजी साम्राज्य में मिला लिया गया। 1857 ई० के विद्रोह के बाद दिल्ली (सतलुज नदी से यमुना नदी तक के क्षेत्र) को भी पंजाब का हिस्सा बना दिया गया।
  8. 1901 ई० में लार्ड कर्जन ने एक और परिवर्तन किया। उसने पश्चिम में सिंधु नदी के पार के क्षेत्र को पंजाब से अलग करके उत्तर-पश्चिमी सीमान्त प्रदेश बना दिया।
  9. 1911 ई० में लार्ड हार्डिंग ने पूर्व में सतलुज नदी से यमुना नदी तक के प्रदेश को एक बार फिर पंजाब से अलग कर दिया और दिल्ली को भारत की राजधानी बना दिया। इस प्रकार इतिहास में पंजाब पहली बार सही अर्थों में पाँच नदियों की धरती के रूप में सामने आया।
  10. स्वतन्त्रा प्राप्ति के बाद 1947 ई० में भारत विभाजन के समय पंजाब का भी विभाजन कर दिया गया। पंजाब का पश्चिमी भाग नए बने देश पाकिस्तान में चला गया और पूर्वी भाग भारत में ही रह गया। पाकिस्तान में पंजाब के 29 जिलों में से 13 ज़िले और भारतीय पंजाब में 16 शामिल किए गए।
  11. 1956 में देश के राज्यों का पुनगर्छन किया गया। इसमें मालवा की रियासतों को समाप्त करके पंजाब में मिला दिया गया।
  12. 1 नवंबर 1966 को भाषा के आधार पर पंजाब का फिर से विभाजन किया गया। इसमें से हरियाणा नामक नया राज्य अस्तित्व में आया। पंजाब के कुछ पहाड़ी प्रदेश हिमाचल प्रदेश में मिला दिए गए।

प्रश्न 2.
“हिमालय पर्वत ने पंजाब के इतिहास पर गहरा प्रभाव डाला है।” इस कथन की पुष्टि कीजिए।
उत्तर-
हिमालय पर्वत पंजाब के उत्तर में एक विशाल दीवार की भांति स्थित है। इस पर्वत ने पंजाब के इतिहास को पूरी तरह प्रभावित किया है-

  1. पंजाब भारत का द्वार पथ-हिमालय की पश्चिमी शाखाओं के कारण पंजाब अनेक युगों में भारत का द्वार पथ रहा। आर्यों से लेकर ईरानियों तक सभी आक्रमणकारी इन्हीं मार्गों द्वारा भारत पर आक्रमण करते रहे। परंतु सर्वप्रथम उन्हें पंजाब के लोगों से संघर्ष करना पड़ा। इस प्रकार पंजाब भारत के लिए द्वार की भूमिका निभाता रहा है।
  2. उत्तर-पश्चिमी सीमा की समस्या-पंजाब का उत्तर-पश्चिमी भाग भारतीय शासकों के लिए सदा एक समस्या बना रहा। भारतीय शासकों को इनकी रक्षा के लिए काफ़ी धन व्यय करना पड़ा। डॉ० बुध प्रकाश ने ठीक ही कहा है, “जब कभी शासकों का इस प्रदेश (उत्तर-पश्चिमी सीमा) पर नियंत्रण ढीला पड़ गया, तभी उनका साम्राज्य छिन्न-भिन्न होकर अदृश्य हो गया।”
  3. विदेशी आक्रमणों से रक्षा-हिमालय पर्वत बहुत ऊंचा है और सदा बर्फ से ढका रहता है। परिणामस्वरूप यह प्रदेश उत्तर की ओर से एक लंबे समय तक आक्रमणकारियों से सुरक्षित रहा।
  4. आर्थिक समृद्धि-हिमालय के कारण पंजाब एक समृद्ध प्रदेश बना। इसकी नदियां प्रत्येक वर्ष नई मिट्टी लाकर पंजाब के मैदानों में बिछाती रहीं। परिणामस्वरूप पंजाब का मैदान संसार के उपजाऊ मैदानों में गिना जाने लगा। उपजाऊ भूमि के कारण यहां अच्छी फसल होती रही और यहां के लोग समृद्ध होते चले गए।
  5. विदेशों से व्यापारिक संबंध-उत्तर-पश्चिमी पर्वत श्रेणियों में स्थित दरों के कारण पंजाब के विदेशों से व्यापारिक संबंध स्थापित हुए। एशिया के देशों के व्यापारी इन्हीं दरों के मार्ग से यहां आया करते थे और पंजाब के व्यापारी उन देशों में जाया करते थे।
  6. पंजाब की विशेष संस्कृति-हिमालय की पश्चिमी शाखाओं के दरों द्वारा यहां ईरानी, अरब, तुर्क, मुग़ल, अफ़गान आदि जातियां आईं और यहां अनेक भाषाओं जैसे संस्कृत, अरबी, फारसी, तुर्की आदि का संगम हुआ। इस मेल-मिलाप से पंजाब में एक विशिष्ट संस्कृति का जन्म हुआ जिसमें देशी तथा विदेशी तत्त्वों का संगम था।

PSEB 9th Class SST Solutions History Chapter 2 श्री गुरु नानक देव जी तथा समकालीन समाज

प्रश्न 3.
पंजाब के भूगोल अथवा भौगोलिक स्थिति के पंजाब के इतिहास पर जो सामाजिक, सांस्कृतिक तथा आर्थिक प्रभाव पड़े, उनका विस्तृत वर्णन कीजिए।
उत्तर-
पंजाब के भूगोल ने पंजाब के समाज, संस्कृति तथा आर्थिक जीवन के लगभग हर पक्ष पर गहरा प्रभाव डाला। इसका विस्तृत विवरण इस प्रकार है :
I. सांस्कृतिक व सामाजिक क्षेत्र में प्रभाव

  1. पंजाबियों की विशेष संस्कृति-मध्य एशिया की ओर से आने वाले सभी विदेशी आक्रमणकारी सबसे पहले पंजाब में ही आए। इनमें से कुछ पंजाब में ही बस गए और उन्होंने यहाँ की स्त्रियों से विवाह भी कर लिए। हिन्दुओं ने इनके वंशजों को अपनी जाति में शामिल करने से इन्कार कर दिया। जिससे कई नई जातियों का जन्म हुआ। इस प्रकार पंजाब में एक मिली-जुली नई सभ्यता और संस्कृति का विकास हुआ। इसके अतिरिक्त जब ये हमलावर यहाँ से वापिस गए वे यहाँ की संस्कृति भी अपने साथ ले गए। फलस्वरूप विदेशों में पंजाबी संस्कृति का प्रसार और प्रचार हुआ।
  2. पंजाबियों के विशेष गुण तथा जीवन-शैली में परिवर्तन-पंजाब के लोगों को बार-बार विदेशी आक्रमणों का सामना करना पड़ा। अतः वे प्रायः युद्ध में ही व्यस्त रहते थे। युद्धों ने पंजाबियों में साहस, हिम्मत और मेहनत के गुण उत्पन्न किये। लगातार विदेशी लोगों के सम्पर्क में आने के कारण पंजाबियों के खान-पान, रीति-रिवाज़ों, भाषा, रहन-सहन और पहनावे में भी परिवर्तन आए।
  3. कला और साहित्य पर प्रभाव-पंजाब ने प्राचीनकाल से ही कला और साहित्य में बहुत उन्नति की थी। परन्तु सदियों तक विदेशी आक्रमणों के कारण पंजाब की कला और साहित्य को बहुत अधिक क्षति उठानी पड़ी। इस समय के दौरान विदेशी संस्कृति के प्रभाव से पंजाब की भवन निर्माण कला में गुम्बद और मेहराब आदि का प्रयोग होने लगा।

II. आर्थिक क्षेत्र में प्रभाव

  1. पंजाबियों का मुख्य व्यवसाय कृषि-पंजाब का अधिकांश प्रदेश मैदानी है। यहाँ सारा वर्ष बहती नदियों द्वारा लाई गई मिट्टी से बने मैदान बहुत ही उपजाऊ हैं। अतः यहाँ के लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि है। यहाँ गेहूँ, चावल, कपास, दालें, मक्की, ज्वार, चने, गन्ना, तिल्हन व सरसों आदि अनेक फसलें हैं। यहाँ के पहाड़ी लोग भेड़-बकरियाँ पालते हैं।
  2. विदेशी व्यापार-पंजाब की समृद्धि ने विदेशी लोगों को हमेशा ही अपनी ओर आकर्षित किया है। उत्तरपश्चिमी पर्वतों में स्थित दर्रे पंजाब को मध्य एशिया से जोड़ते थे। इन दरों ने व्यापारिक मार्ग का काम किया। भारतीय और विदेशी व्यापारी इन दरों के मार्ग से आते जाते रहे। इसी लिए प्राचीन काल से ही पंजाब के मध्य एशिया से अच्छे व्यापारिक सम्बन्ध रहे हैं।
  3. व्यापारिक नगरों का उदय-अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण पंजाब व्यापार का बहुत बड़ा केन्द्र बन गया। पंजाब के इस घरेलू और विदेशी व्यापार के कारण यहाँ कई बड़े व्यापारिक नगरों का उदय हुआ। इनमें लाहौर, मुल्तान, पेशावर, गुजरांवाला अमृतसर, जालन्धर, हिसार और फिरोज़पुर जैसे व्यापारिक नगर प्रमुख हैं।
    सच तो यह है कि पंजाब की समृद्ध भूमि ने विदेशियों को अपनी ओर आकर्षित किया। जिसने इसके पूरे इतिहास को नये रूप में रंग दिया।

श्री गुरु नानक देव जी तथा समकालीन समाज PSEB 9th Class History Notes

  • पंजाब (अर्थ) – पंजाब फ़ारसी भाषा के दो शब्दों ‘पंज’ तथा ‘आब’ के मेल से बना है। पंज का अर्थ है-पांच तथा आब का अर्थ है-पानी, जो नदी का प्रतीक है। अतः पंजाब से अभिप्राय है-पांच नदियों का प्रदेश।
  • पंजाब के बदलते नाम – पंजाब को भिन्न-भिन्न कालों में भिन्न-भिन्न नामों से पुकारा जाता रहा है। ये नाम हैं-सप्त सिंधु, पंचनद, पेंटापोटामिया, सेकिया, लाहौर सूबा, उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रांत आदि।
  • भौतिक भाग – भौगोलिक दृष्टि से पंजाब को तीन भागों में बांटा जा सकता है-
    • हिमालय तथा उसकी उत्तर-पश्चिमी पर्वत श्रृंखलाएं
    • उप-पर्वतीय क्षेत्र (पहाड़ की तलहटी के क्षेत्र)
    • मैदानी क्षेत्र।
  • मालवा प्रदेश – मालवा प्रदेश सतलुज और घग्घर नदियों के बीच में स्थित है। प्राचीन काल में इस प्रदेश में ‘मालव’ नाम का एक कबीला निवास करता था। इसी कबीले के नाम पर इस प्रदेश का नाम ‘मालवा’ रखा गया।
  • हिमालय का पंजाब के इतिहास पर प्रभाव – हिमालय की पश्चिमी शाखाओं में स्थित दरों के कारण पंजाब भारत का द्वार बना। मध्यकाल तक भारत पर आक्रमण करने वाले लगभग सभी आक्रमणकारी इन्हीं दरों द्वारा भारत आये।
  • पंजाब के मैदानी भाग – पंजाब का मैदानी भाग बहुत समृद्ध था। इसी समृद्धि ने विदेशी आक्रमणकारियों को भारत पर आक्रमण करने के लिए प्रेरित किया।
  • पंजाब की नदियों का पंजाब के इतिहास पर प्रभाव – पंजाब की नदियों ने आक्रमणकारियों के लिए बाधा का काम किया। इन्होंने पंजाब की प्राकृतिक सीमाओं का काम भी किया। मुग़ल शासकों ने अपनी सरकारों, परगनों तथा सूबों की सीमाओं का काम इन्हीं नदियों से ही लिया।
  • तराई प्रदेश – पंजाब का तराई प्रदेश घने जंगलों से घिरा हुआ है। संकट के समय में इन्हीं वनों ने सिक्खों को आश्रय दिया। यहां रहकर उन्होंने अपनी सैनिक शक्ति बढ़ाई और अत्याचारियों से टक्कर ली।
  • पंजाब में रहने वाली विभिन्न जातियां – पंजाब में विभिन्न जातियों के लोग निवास करते हैं। इनमें से जाट, सिक्ख, राजपूत, पठान, खत्री, अरोड़े, गुज्जर, अराइन आदि प्रमुख हैं।
  • 1849 ई० -पंजाब को ब्रिटिश साम्राज्य में मिलाया गया।
  • 1857 ई० -दिल्ली और हिसार के क्षेत्र पंजाब में शामिल।
  • 1901 ई० -पंजाब प्रदेश में से उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रदेश बनाया गया।
  • 1911 ई०.-दिल्ली को पंजाब से अलग किया गया।
  • 1947 ई० -भारत के विभाजन के समय पंजाब दो भागों पश्चिमी पंजाब और पूर्वी पंजाब में विभाजित हो गया।
  • 1 नवंबर, 1966 ई०-पंजाब को भाषा के आधार पर पंजाब और हरियाणा दो प्रांतों में बांटा गया और कुछ इलाका हिमाचल प्रदेश में शामिल कर दिया गया।