PSEB 8th Class Hindi Vyakaran विराम-चिह्न

Punjab State Board PSEB 8th Class Hindi Book Solutions Hindi Grammar Viram Chinh विराम-चिह्न Exercise Questions and Answers, Notes.

PSEB 8th Class Hindi Grammar विराम-चिह्न

प्रश्न 1.
विराम चिहन किसे कहते हैं ? उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
विराम चिह्न-बोलते समय हम सब कुछ एक ही गति से नहीं बोलते जाते। एक वाक्य के मध्य में कहीं-कहीं कुछ क्षणों के लिए रुकते हैं और इसी प्रकार वाक्य के समाप्त होने पर भी रुकना पड़ता है। इसी रुकने को ‘विराम’ कहते हैं। इसी विराम को प्रकट करने के लिए हम जिन चिह्नों को लिखते हैं, उन्हें ‘विराम चिह्न’ कहते हैं।
जैसे-पकड़ो मत, जाने दो।
पकड़ो, मत जाने दो।
इन दोनों वाक्यों में विराम चिह्न अल्पविराम के प्रयोग से अर्थ ही उलट गया है। लिखते समय जिन विराम चिहनों का प्रयोग होता है वे निम्नलिखित हैं

1. पूर्ण विराम (।) : वाक्य की पूर्ति की सूचना देने वाले चिह्न को पूर्ण विराम कहते हैं; जैसे-जीवन में अनुशासन का विशेष महत्त्व है।
2. अर्द्ध विराम (;) : वाक्य की पूर्ण समाप्ति न होने पर भी जहाँ बीच में समाप्ति सी लगे। अगले वाक्य से जोड़ने वाले अव्यय का अभाव हो, तब इसका प्रयोग होता है; जैसे-आजकल शिक्षा का उद्देश्य नौकरी है; इसलिए इसका वास्तविक महत्त्व जाता रहा
3. अल्पविराम (,) : पढ़ते समय जहाँ थोड़ी देर ठहरना हो, वहाँ अल्प विराम (,) लगाते हैं; जैसे-लोकमान्य तिलक, मालवीय, महात्मा गाँधी आदि महान् नेता थे।
4. अपूर्ण विराम (:-) : आगे जाने वाली बात के लिए पहले वाक्य से संकेत करना हो तो इसका निर्देशक वाक्य के साथ प्रयोग होता है; जैसे-निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं चार का उत्तर दीजिए
5. प्रश्न सूचक (?) : वाक्य को प्रश्न वाचक सूचित करने के लिए इसका प्रयोग होता है; जैसे-क्या मूर्ख को समझाना सरल है ?
6. विस्मयादिबोधक (!) : मानसिक आवेगों को प्रकट करने के लिए इसका प्रयोग होता है। जैसे हाय ! मैं मारा गया। उफ ! इतनी पीड़ा।
7. निर्देशक (-) : किसी शब्द के भाव को साफ-साफ स्पष्ट करने के लिए उसके आगे लगाया जाता है; जैसे-लाला लाजपतराय-पंजाब केसरी–ने अंग्रेजी साम्राज्य की जड़ें हिला दी थीं। यथा, जैसे आदि शब्द के बाद भी इसका प्रयोग होता है।
8. संयोजक (-) : यह ससम्त पदों के बीच लगकर समास की सूचना देता है; जैसे–माता-पिता, सुख-दुःख।
9. कोष्ठक चिहन [ ] : किसी बात के स्पष्टीकरण के लिए इसका अर्थ वाक्य का अंग न बनाते हुए इसमें लिखा जाता है; जैसे-30 जनवरी हमारे राष्ट्रपिता (महात्मा गाँधी) की बलिदान तिथि है।
10. उद्धरण चिह्न (“”) : जब किसी वक्ता या लेखक की उक्ति को ज्यों-कात्यों उद्धृत करना हो; जैसे-लाला लाजपतराय ने कहा था, “मेरे शरीर पर पड़ी एक-एक लाठी ब्रिटिश साम्राज्य के कफ़न में कील का काम देगी।”
11. लाघव चिह्न (०) : किसी शब्द को संक्षेप में लिखने के लिए इसका प्रयोग होता है; जैसे-पं० नेहरू। ला० लाजपतराय। डॉ० राजेन्द्र प्रसाद।
12. सम्बोधन चिह्न (!) : किसी को बुलाने या पुकारने में इसका प्रयोग होता है; जैसे हे ईश्वर ! हम पर दया करो।

PSEB 8th Class Hindi Vyakaran विराम-चिह्न

अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

1. निम्नलिखित में जहाँ जो विराम चिह्न लग सकता है, लगाएँ

प्रश्न (1)
मित्र कैसा अद्भुत खेल है क्या जीवन भी एक खेल के समान है थोड़ा सोच कर बताना
उत्तर:
“मित्र, कैसा अद्भुत खेल है ? क्या जीवन भी एक खेल के समान है ? थोड़ा सोचकर बताना।”

प्रश्न (2)
उसने पुस्तकें कॉपियाँ तथा कुछ अन्य सामान खरीदा सामान को थैले में डाल कर दुकानदार से पूछा कितने पैसे दूँ।
उत्तर:
उसने पुस्तकें, कापियाँ तथा कुछ अन्य सामान खरीदा ; सामान को थैले में डाल कर दुकानदार से पूछा, “कितने पैसे दूँ ?”

प्रश्न (3)
मेरे मित्र दौड़ कर आओ यह देखो कितना सुन्दर फूल खिला है इसे तोड़ना मत मित्र ने मुझसे कहा
उत्तर:
मेरे मित्र ! दौड़ कर आओ। यह देखो कितना सुन्दर फूल खिला है। “इसे तोड़ना मत।”-मित्र ने मुझसे कहा।

प्रश्न (4)
पिता पुत्र तथा पुत्री तीनों एक साथ बोले क्या गाड़ी अभी तक नहीं आई नहीं आई” मैं उत्तर में बोला।
उत्तर:
पिता, पुत्र तथा पुत्री-तीनों एक साथ बोले, “क्या गाड़ी अभी तक नहीं आई।” नहीं आई, मैं उत्तर में बोला।

प्रश्न (5)
यह देखकर उस किसान ने कहा देखा एकता का प्रभाव यदि तुम सब इसी प्रकार इकट्ठे रहोगे तुम्हारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता यदि तुम अलग-अलग रहे तो तुम्हारा भी हाल छड़ियों जैसे होगा शत्रु आसानी से तुम्हें नष्ट कर देगा इसलिए मेरे उपदेश को मन में धारण करके उस पर आचरण करना इससे तुम्हें सारा जीवन सुख और ऐश्वर्य प्राप्त होगा यह उपदेश देकर किसान चल बसा।
उत्तर:
यह देखकर उस किसान ने कहा, “देखा, एकता का प्रभाव, यदि तुम सब इसी प्रकार इकट्ठे रहोगे तुम्हारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। यदि तुम अलग-अलग रहे तो तुम्हारा भी हाल छड़ियों जैसा होगा। शत्रु आसानी से तुम्हें नष्ट कर देगा। इसलिए मेरे उपदेश को मन में धारण करके उस पर आचरण करना। इससे तुम्हें सारा जीवन सुख और ऐश्वर्य प्राप्त होगा।”-यह उपदेश देकर किसान चल बसा।।

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प्रश्न (6)
पंजाब भारत के बाजू के समान है जिसमें सदा तलवार पकड़ी रहती है अब दुनिया के हर भाग में पंजाबी रहते हैं उनकी बहादुरी तपस्या लगन कुर्बानी की कहानियाँ सुनकर बड़े-बड़े पत्थर दिल भी हिल जाते हैं पंजाबियों के कार्यों से भारत पर ही नहीं वरन् सारे संसार पर प्रभाव पड़ा है संसार का प्रत्येक मनुष्य इस बात को मानता है कि पंजाबी बहादुर निर्भीक और हिम्मती हैं।
उत्तर:
पंजाब भारत के बाजू के समान है, जिसमें सदा तलवार पकड़ी रहती है। अब दुनिया के हर भाग में पंजाबी रहते हैं। उनकी बहादुरी, तपस्या, लगन, कुर्बानी की कहानियाँ सुनकर बड़े-बड़े पत्थर दिल भी हिल जाते हैं। पंजाबियों के कार्यों से भारत पर ही नहीं वरन् सारे संसार पर प्रभाव पड़ा है। संसार का प्रत्येक मनुष्य इस बात को मानता है कि पंजाबी बहादुर, निर्भीक और हिम्मती हैं।

2. उपयुक्त विराम चिह्न लगाएँ

प्रश्न (1)
उसके मस्तिष्क का सिन्दूर पोंछती हुई चाची ने उत्तर दिया अभागिनी तेरा करम फूट गया
उत्तर:
उसके मस्तिष्क का सिन्दूर पोंछती हुई चाची ने उत्तर दिया, “अभागिनी ! तेरा करम फूट गया।”

प्रश्न (2)
संजय ने पापा से पूछा पापा यह फसल कहीं-कहीं से क्यों कटी हुई है
उत्तर-संजय ने पापा से पूछा, “पापा यह फसल कहीं से क्यों कटी हुई है?”

प्रश्न (3)
मुझे आते देख पिता जी बोले बेटी तैयार नहीं हुई देर न कर वे लोग आधपौन घंटे तक आने वाले हैं
उत्तर:
मुझे आते देख, पिता जी बोले, “बेटी तैयार नहीं हुई। देर न कर, वे लोग आध-पौन घंटे तक आने वाले हैं।”

प्रश्न (4)
माँ तुम रो क्यों रही हो क्या तुम्हें अपने किए पर दुःख है राकेश ने प्रश्न किया
उत्तर:
“माँ, तुम रो क्यों रही हो ? क्या तुम्हें अपने किए पर दुःख है ?” राकेश ने प्रश्न किया।

PSEB 8th Class Hindi Vyakaran विराम-चिह्न

प्रश्न (5)
स्वामी रामतीर्थ एक कवि दार्शनिक सन्त देशभक्त तथा समाज सुधारक थे।
उत्तर:
स्वामी रामतीर्थ एक कवि, दार्शनिक, सन्त, देशभक्त तथा समाज-सुधारक थे।

प्रश्न (6)
सैनिक सचिव के पद पर रहते हुए उन्हें अनेक कटु अनुभव हुए चपरासी तक उनके हाथों से फाइलें लेने में कतराते थे उन्हें पानी तक नहीं मिलता था।
उत्तर:
सैनिक-सचिव के पद पर रहते हुए उन्हें अनेक कटु अनुभव हुए। चपरासी तक उनके हाथों से फाइलें लेने में कतराते थे। उन्हें पानी तक नहीं मिलता था।

प्रश्न (7)
धोबी ने कपड़े गिनकर कहा बाबू साहब लिखिए चौदह पायजामे बीस कमीजें।
उत्तर:
धोबी ने कपड़े गिनकर कहा, “बाबू साहब ! लिखिए-चौदह पायजामे, बीस कमीजें।

प्रश्न (8)
दोनों ने बारी-बारी से उत्तर दिया हम बी० ए० पास हैं नौकरी की तलाश में हैं।
उत्तर:
दोनों ने बारी-बारी से उत्तर दिया, “हम बी० ए० पास हैं। नौकरी की तलाश में हैं।”

प्रश्न (9)
महात्मा बुद्ध ने बड़े प्रेमपूर्वक उससे पूछा मैं तो ठहर गया भला तुम कब ठहरोगे
उत्तर:
महात्मा बुद्ध ने बड़े प्रेमपूर्वक उससे पूछा, “मैं तो ठहर गया, भला तुम कब ठहरोगे ?”

प्रश्न (10)
बच्चो शान्तिपूर्वक बैठो अध्यापक ने कहा
उत्तर:
“बच्चो, शान्तिपूर्वक बैठो”-अध्यापक ने कहा।

प्रश्न (11)
मोहन तुम क्या कर रहे हो ज़रा इधर तो आओ माँ ने कहा
उत्तर:
“मोहन तुम क्या कर रहे हो ? ज़रा इधर तो आओ”-माँ ने कहा।

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प्रश्न (12)
बेटी मुझे माफ कर दो मैं लालच में अन्धा हो गया था तुमने मेरी आँखें खोल दी हैं
उत्तर:
“बेटी, मुझे माफ कर दो। मैं लालच में अन्धा हो गया था। तुमने मेरी आँखें खोल दी हैं।”

प्रश्न (13)
महात्मा बुद्ध ने बड़े प्रेमपूर्वक अंगुलिमाल से कहा मैं तो ठहर गया भला तुम कब ठहरोगे
उत्तर:
महात्मा बुद्ध ने बड़े प्रेमपूर्वक अंगुलिमाल से कहा- “मैं तो ठहर गया, भला तुम कब ठहरोगे ?”

प्रश्न (14)
सच्च है सच्चे पातशाह भाई कन्हैया ने निःसंकोच स्वीकार किया।
उत्तर:
“सच्च है सच्चे पातशाह !” भाई कन्हैया ने निःसंकोच स्वीकार किया।

प्रश्न (15)
सबकी आँखें आकाश की ओर लगी रहती थीं मगर वहाँ दुर्भाग्य की घटाएँ थीं पानी की घटाएँ न थीं
उत्तर:
सबकी आँखें आकाश की ओर लगी रहती थीं, मगर वहाँ दुर्भाग्य की घटाएँ थीं, पानी की घटाएँ न थीं।

प्रश्न (16)
मैंने कहा, बाबा अब नहीं रहा जाता कहीं से रोटी का टुकड़ा ला दें
उत्तर:
मैंने कहा, बाबा अब नहीं रहा जाता; कहीं से रोटी का टुकड़ा ला दें।”

प्रश्न (17)
मेरे हृदय में गुदगुदी सी होने लगी पूछा तो तुमने महाराज के दर्शन किए हैं
उत्तर:
मेरे हृदय में गुदगुदी-सी होने लगी; पूछा-“तो तुमने महाराज के दर्शन किए

PSEB 8th Class Hindi Vyakaran विराम-चिह्न

प्रश्न (18)
धोबी के कपड़े गिनकर कहा बाबू साहब लिखिए चौदह पायजामे बीस कमीजें मैंने कॉपी उठा ली और लिखने लगा।
उत्तर:
धोबी के कपड़े गिनकर कहा, “बाबू साहब ! लिखिए चौदह पायजामे, बीस कमीजें।” मैंने कॉपी उठा ली और लिखने लगा।

प्रश्न (19)
भगवान् अब मौत दे दे ग़रीब थे पर किसी के सामने हाथ तो नहीं फैलाते
उत्तर:
भगवान् अब मौत दे दे। ग़रीब थे, पर किसी के सामने हाथ तो नहीं फैलाते

प्रश्न (20)
एक युवक ने कहा अंकल हौसला रखो बस दो मिनट में अस्पताल पहुंचे।
उत्तर:
एक युवक ने कहा, “अंकल ! हौसला रखो, बस दो मिनट में अस्पताल पहुँचे।”

प्रश्न (21)
क्या करूँ एक ही बच्चा है इतने दिनों बाद मिला भी तो मृत्यु उसको अपने चंगुल में दबा रही है, इसे कैसे बचाऊँ
उत्तर:
‘क्या करूँ, एक ही बच्चा है। इतने दिनों बाद मिला भी तो मृत्यु उसको अपने चंगुल में दबा रही है। इसे कैसे बचाऊँ ?’

PSEB 8th Class Hindi Vyakaran विराम-चिह्न

प्रश्न (22)
मुँह खोलने में कष्ट होने पर भी शिष्टाचार के नाते उन्होंने पूछ ही लिया बेटा तुम क्या काम करते हो।।
उत्तर:
मुंह खोलने में कष्ट होने पर भी शिष्टाचार के नाते उन्होंने पूछ ही लिया, “बेटा तुम क्या काम करते हो ?”

प्रश्न (23)
अच्छा भाई चाय तो वैसे मैं अभी घर से पीकर आया हूँ पर तुम बुरा न मान जाओ इसलिए तुम्हारा साथ देता हूँ
उत्तर:
“अच्छा भाई ! चाय तो वैसे मैं अभी घर से पीकर आया हूँ, पर तुम बुरा न मान जाओ, इसलिए तुम्हारा साथ देता हूँ।”

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 3 रक्त की आत्मकथा

Punjab State Board PSEB 8th Class Hindi Book Solutions Chapter 3 रक्त की आत्मकथा Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 8 Hindi Chapter 3 रक्त की आत्मकथा

Hindi Guide for Class 8 PSEB रक्त की आत्मकथाTextbook Questions and Answers

(क) भाषा – बोध

I. शब्दार्थ

नाड़ी = शरीर की रक्त वहन करने वाली शिरा। संपूर्ण = सारा। विश्व = संसार। अपेक्षा = बजाए की तुलना में। कार्य स्थल = काम करने का स्थान। जटिल = कठिन। संरचना = बनावट। वयस्क = अठारह वर्ष से अधिक आयु वाला। सूक्ष्मदर्शी = एक यंत्र, जिसमें छोटी चीज़ का बड़ा आकार दिखाई देता है। अनीमिया = रक्ताल्पता (रक्त की कमी)। विकसित = बनना, बढ़ना। उत्पादन = निर्माण, बनना। परिवर्तन = बदलाव। निरंतर = लगातार। जमावड़ा = इकट्ठा होना। बेझिझक = बिना संकोच। घुसपैठ = पहुँच। द्रव्य = तरल पदार्थ। नामुराद = जिस की कोई कामना न हो। स्वेच्छा = अपनी इच्छा से। अत्यन्त = बहुत। संकल्प = इरादा, निश्चय। पर्याप्त = काफ़ी। व्यर्थ = बेकार।

II. इन मुहावरों और लोकोक्ति के अर्थ समझते हुए वाक्यों में प्रयोग करें

चैन की साँस लेना, प्राण देना, शहीद होना, साँस में साँस आना, हाथ कंगन को आरसी क्या।
उत्तर:
1. चैन की साँस लेना-भूकंप के झटकों के बाद पुत्र को सुरक्षित घर वापस आया देख माँ ने चैन की सांस ली।
2. प्राण देना-देश की आजादी के लिए लाखों देश भक्तों ने अपने प्राण दे दिए थे।
3. शहीद होना-वीर सैनिक दुश्मन के टेंक को बम से उड़ाने के बाद शहीद हो गया था।
4. साँस में साँस आना-मेरे पीछे लगे कुत्ते को जब तुमने मार भगाया तब मेरी साँस में साँस आई।
5. हाथ कंगन को आरसी क्या-तुम्हारे बस्ते में से मैंने अपनी कॉपी तुम्हारे सामने ही निकाली है और तुम स्वयं को अभी भी चोर नहीं मान रहे। अब तुम्हीं बताओ कि हाथ कंगन को आरसी क्या?

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 3 रक्त की आत्मकथा

(ख) विषय – बोध

I. इन प्रश्नों के उत्तर एक या दो वाक्यों में लिखें

प्रश्न (क)
रक्त के कितने अंग होते हैं ? उनके नाम लिखें।
उत्तर:
रक्त में चार अंग होते हैं-प्लाज्मा, लाल रक्त कोशिकाएं, सफेद रक्त कणिकाएं और प्लेटलेट्स।

प्रश्न (ख)
लाल कोशिकाओं का रंग किस पदार्थ के कारण लाल होता है ?
उत्तर:
लाल कोशिकाएं हीमोग्लोबिन के कारण लाल होती हैं।

प्रश्न (ग)
हीमोग्लोबिन किस-किस तत्व का बना होता है ?
उत्तर:
हीमोग्लोबिन लोहे और प्रोटीन से बना होता है।

प्रश्न (घ)
लाल कोशिकाओं का मुख्य कार्य क्या है ?
उत्तर:
लाल कोशिकाएँ फेफड़ों से ऑक्सीजन को शरीर के अंगों तक और कार्बन डाइऑक्साइड को शरीर से बाहर फिंकवाती हैं।

प्रश्न (ङ)
लाल कोशिकाओं का विकास कहाँ होता है ?
उत्तर:
लाल कोशिकाओं का विकास बोन मैरो में होता है।

प्रश्न (च)
श्वेत कोशिकाएँ क्या कार्य करती हैं ?
उत्तर:
श्वेत कणिकाएँ बाहरी रोगाणुओं से लड़ कर शरीर को स्वस्थ रखती हैं।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 3 रक्त की आत्मकथा

प्रश्न (छ)
प्लेटलेट्स कोशिकाएँ रक्त जमाव में कैसे सहायता करती हैं ?
उत्तर:
पारदर्शी प्लेटलेट्स प्लाज्मा में उपस्थित विशेष प्रोटीन के साथ मिल कर मकड़ी के जाल की तरह एक बढ़िया-सा जाल लाल कोशिकाओं को रोक देता है। पपड़ी के रूप में जम कर यह रक्त जमाव कर देता है।

प्रश्न (ज)
प्लाज्मा का विकास शरीर के किस अंग में होता है ?
उत्तर:
प्लाज्मा का विकास जिगर (लिवर) में होता है।

प्रश्न (झ)
एक वयस्क स्त्री और पुरुष में प्रति किलोग्राम रक्त की कितनी मात्रा होती है ?
उत्तर:
एक वयस्क स्त्री में प्रति किलोग्राम में 67 सी०सी० और पुरुष में 75 सी०सी० रक्त की मात्रा होती है।

प्रश्न (ज)
किस आयु वर्ग के व्यक्ति रक्तदान कहाँ-कहाँ पर जाकर कर सकते हैं ?
उत्तर:
अठारह वर्ष से लेकर पैंसठ वर्ष आयु वर्ग के स्वस्थ व्यक्ति किसी मान्यता प्राप्त ब्लड बैंक, रक्त शिविर या आवश्यकता पड़ने पर किसी भी मरीज को रक्तदान कर सकते हैं।

II. इन प्रश्नों के उत्तर चार या पाँच वाक्यों में लिखें :

प्रश्न (क)
रक्त के मुख्य अंग कौन-कौन से हैं ? प्रत्येक अंग के बारे में लिखें।
उत्तर:
रक्त के मुख्य अंग प्लाज्मा, लाल कोशिकाएँ, श्वेत कोशिकाएँ और प्लेटलेट्स होते हैं। प्लाज्मा हल्के पीले रंग का द्रव्य है जिसमें उसके अन्य सभी अंग तैरते रहते हैं और इसी की सहायता से अपना-अपना काम करते हैं। इसका विकास जिगर (लिवर) में होता है। लाल रक्त कोशिकाएँ हीमोग्लोबिन की उपस्थिति के कारण लाल होती हैं। इनका आकार बालूशाही की तरह होता है। ये फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर शरीर के अंगों तक भेजती हैं तथा कार्बन डाइऑक्साइड को फेफड़ों के द्वारा शरीर से बाहर निकालती हैं। श्वेत कोशिकाएँ बोन मैरो में बनती हैं। इनकी संख्या लाल कोशिकाओं से बहुत कम होती है पर ये आकार में उनसे दुगुनी बड़ी होती हैं। ये शरीर में प्रवेश करने वाले रोगाणुओं से लड़ती हैं और शरीर को रोगों से बचाती हैं। प्लेटलेट्स पारदर्शी छोटी सपाट प्लेटों जैसे होते हैं। ये रक्त को बहने से रोकने के लिए जमाव क्रिया में सहायता करते हैं।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 3 रक्त की आत्मकथा

प्रश्न (ख)
लाल कोशिकाओं के बारे में आपने क्या सीखा ?
उत्तर:
लाल कोशिकाओं का रंग सदा लाल होता है और इसका कारण इनमें उपस्थित हीमोग्लोबिन होता है जो लोहे और प्रोटीन से बनता है। लाल कोशिकाओं की बनावट दोनों ओर से दबी बालूशाही जैसी होती है। किसी वयस्क पुरुष में रक्त की एक बूंद में इनकी संख्या लगभग पचास लाख तक होती है लेकिन स्त्रियों और बच्चों में इनकी संख्या इससे भिन्न होती है। लाल कोशिकाएँ दिन-रात काम करती हैं और फेफड़ों से ऑक्सीजन ले कर शरीर के सभी अंगों तक पहुँचाती हैं। ये ही कार्बन डाइऑक्साइड को फेफड़ों के माध्यम से शरीर से बाहर निकलती हैं। लाल कोशिकाएं बोन-मैरो में बनती हैं और इनकी आयु . चार महीने ही होती है।

प्रश्न (ग)
श्वेत कोशिकाओं के बारे में आपने क्या सीखा ?
उत्तर:
श्वेत रक्त कोशिकाएं बोन मैरो में बनती हैं। ये प्लाज्मा में तैरती रहती हैं। ये लाल कोशिकाओं से आकार में दो गुणा बड़ी होती हैं लेकिन संख्या में बहुत कम होती हैं। रक्त की एक बूंद में इनकी संख्या लगभग दस हज़ार होती है। ये शरीर में प्रवेश करने वाले रोगाणुओं से लड़ती हैं और उन्हें मार कर बीमारियों से हमारी रक्षा करती हैं। किसी चोट से निकली मवाद या पस भरी हुई श्वेत रक्त कोशिकाएं ही होती हैं। इनकी आयु कुल छ: सात घण्टे ही होती है। ये आवश्यकतानुसार बढ़ कर शरीर की रक्षा करती हैं और इन्हें किसी विशेष प्रकार के भोजन की आवश्यकता नहीं होती।

प्रश्न (घ)
प्लेटलेट्स की क्या भूमिका है ?
उत्तर:
प्लेटलेट्स प्लाज़मा में तैरने वाले पारदर्शी छोटी-छोटी सपाट-प्लेटों की तरह होते हैं। ये शरीर से बहने वाले रक्त की जमाव-क्रिया में सहायता देती हैं। रक्त के प्रति घन मिलीमीटर में इनकी संख्या लगभग डेढ़ लाख से चार लाख तक होती है। चोट लग जाने की स्थिति में ये एक विशेष प्रोटीन के साथ मिलकर मकड़ी के जाल की तरह जालासा बना देती है जिससे लाल रक्त कणिकाएं बाहर बहनी बन्द हो जाती हैं। समय के साथ ये त्वचा के साथ विकसित होकर घाव को भर देती हैं। इन्हें किसी विशेष भोजन की आवश्यकता नहीं होती। ये अपनी तरह की अन्य कोशिकाओं को स्वयं विकसित कर लेती

प्रश्न (ङ)
प्लाज़मा के बारे में आपने क्या जाना ?
उत्तर:
प्लाज़मा रक्त का प्रमुख अंग है जिसमें रक्त की अन्य कोशिकाएं अपने-अपने कार्य करने के लिए तैरती रहती हैं। हल्के-पीले रंग के इस द्रव्य की उपस्थिति में ही रक्त के अंग अपने काम को पूरा कर पाते हैं। यह जिगर (लिवर) में बनता है और इसकी रचना अनेक प्रकार के प्रोटीन्ज़ से होती है। आवश्यकता पड़ने पर जिगर (लिवर) इसका विकास सामान्य की अपेक्षा आठ गुणा तेज़ी से कर सकता है।

प्रश्न (च)
रक्त दान करना क्यों जरूरी है ?
उत्तर:
प्रत्येक मनुष्य के जीवन के लिए रक्त बहुत आवश्यक होता है। यह जीवन का प्रमुख आधार है। यह कृत्रिम रूप से नहीं बनाया जा सकता। यह बोन मैरो में ही बनता है। दुर्घटनाओं, भयंकर बीमारियों, बड़े आप्रेशनों आदि के कारण अनेक बार शरीर में रक्त कम हो जाता है जिसे तत्काल पूरा करने के लिए स्वस्थ लोगों के रक्तदान से सहायता लेनी ही पड़ती है। ऐसा करने से रक्तदाता को कोई क्षति नहीं होती लेकिन ज़रूरतमन्द व्यक्ति की जान बच जाती है। रक्तदान को इसीलिए महादान भी कहा जाता है।

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(ग) व्यावहारिक व्याकरण

I. इन शब्दों के विपरीत अर्थ वाले शब्द बनायें

उपस्थित = …………………
उचित = …………..
इच्छा = …………..
आवश्यकता = …………..
नियमित = …………..
स्वस्थ = …………..
हिंसा = …………..
पूर्ति = …………..
जन्म = …………..
एक = …………..
ग्रहण = …………..
सामान्य = …………..
उत्तर:
उपस्थित = अनुपस्थित
उचित = अनुचित
इच्छा = अनिच्छा
आवश्यकता = अनावश्यकता
नियमित = अनियमित
स्वस्थ = अस्वस्थ
हिंसा = अहिंसा
पूर्ति = अपूर्ति
जन्म = मरण
एक = अनेक
ग्रहण = त्याग
सामान्य = असामान्य।

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II. इन शब्दों में से मूल शब्द पहचान कर लिखें

सम्पूर्ण = …………..
संरचना = …………..
संकल्प = …………..
सुरक्षित = …………..
नियमित = …………..
विकसित = …………..
प्रदर्शित = …………..
सुरक्षा = …………..
उत्तर:
सम्पूर्ण = पूर्ण
संरचना = रचना
संकल्प = कल्प
सुरक्षित = रक्षा
नियमित = नियम
विकसित = विकास
प्रदर्शित = दर्श
सुरक्षा = रक्षा

III. इन शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखें-

रक्त = …………..
स्वस्थ = …………..
नाड़ी = …………..
भूमिका = …………..
घुसपैठ = …………..
उत्तर:
रक्त = लहू, शोणित
स्वस्थ = निरोग, हृष्टपुष्ट
नाड़ी = नली, रक्तवाहिनी
भूमिका = पृष्ठभूमि, प्रस्तावना
घुसपैठ = बलपूर्वक प्रवेश, बँसना।

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IV. इन रेखांकित विशेषण शब्दों के भेद का नाम लिखिए

प्रश्न (क)
मेरा रंग लाल होता है। (गुणवाचक विशेषण)
उत्तर:
गुणवाचक विशेषण।

प्रश्न (ख)
वयस्क पुरुष में मेरी एक बूंद में इनकी संख्या लगभग पचास लाख होती है।
उत्तर:
वयस्क = गुणवाचक विशेषण, एक = निश्चित संख्यावाचक विशेषण। लगभग पचास लाख-अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण।

प्रश्न (ग)
इनके स्थान पर नई कोशिकाएं जन्म ले लेती हैं।
उत्तर:
नई = गुणवाचक विशेषण।

प्रश्न (घ)
हमें सदैव सन्तुलित भोजन लेना चाहिए।
उत्तर:
सन्तुलित-गुण वाचक विशेषण।

प्रश्न (ङ)
मेरी श्वेत कोशिकाएं आपके शरीर में किसी रोगाणु की घुसपैठ के समय किसी बहादुर सिपाही की तरह बचाव के लिए आती हैं।
उत्तर:
श्वेत = गुणवाचक विशेषण, बहादुर = गुणवाचक विशेषण।

अतिरिक्त ज्ञान:

(क) अपने रक्त समूह (ब्लड ग्रुप) की जाँच करवायें। अपना रक्त समूह नोट करके रखें।
(ख) रक्त समूह आठ प्रकार के होते हैं ए-पाजिटिव, ए-नेगेटिव, बी-पाजिटिव, बी-नेगेटिव, ए-बी पाजिटिव, ए-बी नेगेटिव, ओ-पाज़िटिव, ओ-नेगेटिव।
(ग) मान्यता प्राप्त संस्था को ही रक्त दान करें।
(घ) रक्त बेचना दण्डनीय अपराध है।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 3 रक्त की आत्मकथा

PSEB 8th Class Hindi Guide रक्त की आत्मकथा Important Questions and Answers

बहुविकल्पीय प्रश्न निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर सही विकल्प चुनकर लिखें

प्रश्न 1.
किसके कारण इन्सानों का जीवन चलता है ?
(क) माँस
(ख) खाल
(ग) बाल
(घ) रक्त।
उत्तर:
रक्त।

प्रश्न 2.
रक्त का रंग क्या होता है ?
(क) लाल
(ख) नीला
(ग) पीला
(घ) बैंगनी।
उत्तर:
लाल।

प्रश्न 3.
कोशिकाएँ सदा किसमें तैरती हैं ?
(क) प्लेटों में
(ख) प्लाज्मा में
(ग) प्लैटिनिम में
(घ) प्लाटों में।
उत्तर:
प्लाज्मा में।

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प्रश्न 4.
हीमोग्लोबिन की कमी से कौन-सा रोग होता है ?
(क) अफारा
(ख) आसियाना
(ग) अनीमिया
(घ) शूगर।
उत्तर:
अनीमिया।

प्रश्न 5.
रक्त में लाल कोशिकाओं की आयु कितने मास की होती है ?
(क) दो
(ख) तीन
(ग) चार
(घ) पाँच।
उत्तर:
चार

प्रश्न 6.
कितने वर्ष की आयु का स्वस्थ व्यक्ति रक्तदान कर सकता है ?
(क) 15-20
(ख) 18-50
(ग) 18-60
(घ) 18-65.
उत्तर:
18-65.

प्रश्न 7.
लाल कोशिकाओं का विकास कहाँ होता है ?
(क) बौनमैरी में
(ख) प्लाज्मा में
(ग) प्रोटीन में
(घ) प्लेटलेस में।
उत्तर:
बोनमैरी में।

प्रश्न 8.
रक्त में मुख्य रूप से कितने अंग होते हैं ?
(क) दो
(ख) तीन
(ग) चार
(घ) पाँच।
उत्तर:
दो।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 3 रक्त की आत्मकथा

रक्त की आत्मकथा Summary

रक्त की आत्मकथा पाठ का सार

रक्त अपनी कहानी सुनाते हुए कहता है कि उसके कारण ही हम इन्सानों का जीवन चलता है। वह निरन्तर हमारी नाड़ियों में बहता रहता है। लाल रंग का रक्त शरीर से किसी भी कारण बाहर निकलने पर पानी की तरह बहता है। रक्त के मुख्य रूप से दो हिस्से होते हैं-प्लाज्मा और कोशिकाएँ। कोशिकाएँ सदा प्लाज्मा में तैरती रहती हैं। रक्त का 55 प्रतिशत भाग प्लाज्मा होती है और शेष 45 प्रतिशत भाग लाल कोशिकाएँ, श्वेत कोशिकाएँ और पारदर्शी प्लेटलेट्स कोशिकाएँ बनाती हैं। लाल कोशिकाओं के कारण रक्त लाल रंग का दिखाई देता है। किसी भी वयस्क पुरुष के खून की एक बूंद में लाल कोशिकाओं की लगभग संख्या पचास लाख होती है। बच्चों और स्त्रियों में इनकी संख्या बदल जाती हैं। इनका लाल रंग हीमोग्लोबिन नामक एक पदार्थ के कारण होता है। लाल कोशिकाओं की बनावट ऐसी होती है जैसे बालूशाही को दोनों ओर से दबाया गया हो। ये लाल कोशिकाएँ दिन-रात चौबीसों घंटे ऑक्सीजन को फेफड़ों से शरीर के अंगों तक पहुँचाती हैं और कार्बन डाइऑक्साइड को फेफड़ों के माध्यम से बाहर फेंकती हैं। हीमोग्लोबिन लोहे और प्रोटीन से बनता है। यदि रक्त में हीमोग्लोबिन कम हो जाए तो अनीमिया नामक बीमारी हो जाती है। लाल कोशिकाओं का विकास ‘बोन मैरो’ नामक पदार्थ में होता है जो हड्डियों के खोखले भाग में भरा होता है। बोन मैरो का तीन-चौथाई भाग श्वेत कोशिकाओं और प्लेटलेट्स बनाने का कार्य करता है।

रक्त में लाल कोशिकाओं की आयु चार महीने ही होती है। रक्त के निर्माण के लिए हम सब को प्रोटीन, लोह तत्व और विटामिन खाने चाहिएं। यदि रक्त अधिक मात्रा में बह जाए तो बोन मैरो इसके उत्पादन को आठ गुणा तक बढ़ा सकती है। रक्त का प्रत्येक हिस्सा हमारे लिए उपयोगी होता है। श्वेत कोशिकाएँ शरीर का सुरक्षा कवच बनती हैं और आकार में लाल कोशिकाओं से दो गुणा बड़ी होती हैं, पर संख्या में कम होती हैं। ये रोगाणुओं से लड़ती हैं। जब ये मर जाती हैं तो पस या मवाद के रूप में दिखाई देती हैं। इनकी आयु छ:-सात घंटे ही होती है। प्लाज्मा में तैरती प्लेटलेट्स कोशिकाएँ छोटी-छोटी पारदर्शी प्लेटों की तरह होती हैं। ये रक्त की जमाव क्रिया में सहायक होती हैं। इनकी संख्या प्रति घन मिलीमीटर में डेढ़ लाख से चार लाख तक होती है। जब कभी चोट लगती है तो ये प्लाज्मा में उपस्थित एक विशेष प्रोटीन के साथ मिल कर एक जाल-सा बना देती है जिससे खून बहना बंद हो जाता है। जरूरत पड़ने पर प्लेटलेट्स अपने जैसी कोशिकाओं को स्वयं बना लेते हैं। इन्हीं के कारण हम मच्छरों से फैलने वाले ‘डेंगू’ से बच पाते हैं। हल्के-पीले रंग का प्लाज्मा अन्य सभी अंगों को साथ लेकर कार्य करता है। कोशिका के तीनों अंग इसी में तैरते रहते हैं। प्लाज्मा तरह-तरह के प्रोटीन्ज़ से बनता है और इसका विकास जिगर (लिवर) में होता है। जब कभी कोई व्यक्ति रक्त दान करता है तो जिगर सामान्य की अपेक्षा आठ गुना तेज़ी से इसका निर्माण कर देता है। किसी वयस्क पुरुष के शरीर में रक्त की मात्रा 75 सी०सी० प्रति किलोग्राम और वयस्क स्त्री में यह 67 सी०सी० प्रति किलोग्राम होती है। जरूरत पड़ने पर अपना रक्त दूसरों को दान दिया जा सकता है। रक्त फैक्ट्रियों में नहीं बनाया जा सकता। इसलिए इसे जरूरतमंद लोगों को देना चाहिए। अठारह से पैंसठ वर्ष का कोई भी स्वस्थ व्यक्ति प्रत्येक तीन महीने बाद रक्त दान कर सकता है। अब ऐसी अनेक मशीनें हैं जो रक्त के हिस्सों को अलग-अलग कर सकती हैं और अलग-अलग रोगियों को उन्हें दिया जा सकता है। रक्त बहुत उपयोगी है और इसे हिंसा के द्वारा कभी नहीं बहाना चाहिए।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 2 ईदगाह

Punjab State Board PSEB 8th Class Hindi Book Solutions Chapter 2 ईदगाह Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 8 Hindi Chapter 2 ईदगाह

Hindi Guide for Class 8 PSEB ईदगाह Textbook Questions and Answers

(क) भाषा – बोध

I. शब्दार्थ

ईद = मुसलमानों का प्रसिद्ध त्योहार। ईदगाह = ईद के दिन मुसलमानों के एकत्र होकर नमाज़ पढ़ने की जगह। रमजान = रोजा रखने का महीना। बिसात = पूंजी। जाज़िम = दरी के ऊपर बिछाने की छपी चादर। विपन्नता = ग़रीबी। सिजदे = सिर झुकाना। कवायद = मार्च, परेड। हिंडोला = झूला। जिरह = बहस। आपत्ति = एतराज। वजू = नमाज़ पढ़ने से पहले हाथ-मुँह धोने का काम। कोष = खज़ाना। भिश्ती = मशक से पानी ढोने वाला। घुड़कियाँ = धमकी देना। स्नेह = प्यार। कचोट = चुभन । दामन = आँचल। सहसा = अचानक। रहस्य = भेद।

II. निम्नलिखित शब्दों का अर्थ लिखकर वाक्यों में प्रयोग करेंकोष, बिसात, स्नेह, दामन, हिंडोला, कचोट।

उत्तर:
कोष = खज़ाना-हमारा राष्ट्रीय कोष अच्छी स्थिति में है। बिसात = हैसियत, जमा पूंजी-अपनी बिसात देखकर व्यापार करो। स्नेह = प्यार-माता का अपने बच्चे से स्वाभाविक स्नेह होता है। दामन = आँचल-कभी अपने दामन पर बुराई का काला धब्बा मत लगने दो। हिंडोला = झूला-हिंडोला देखकर बच्चे उस पर बैठने के लिए मचल उठते हैं। कचोट = चुभन-उसे क्यों कचोट रहे हो, अपना काम करो।

III. निम्नलिखित मुहावरों का वाक्यों में प्रयोग करें

पैरों में पर लगना, दिल बैठ जाना, राई का पर्वत बनाना, रंग जमाना, बाल भी बाँका न होना, भेंट हो जाना, मैदान मार लेना, मन गद्गद् हो जाना।
उत्तर:
पैरों में पर लगना – बच्चे को सम्भाल कर रखो, अब इसके पैरों में पर लग गए हैं।
राई का पर्वत बनाना – शीला तो हर बात को राई का पर्वत बना देती है, उस की बातों पर विश्वास मत किया करो।
रंग जमना – पार्टी में गायिका के आने पर रंग जमना शुरू हो गया था।
बाल भी बांका न होना – बस-दुर्घटना कितनी गंभीर थी, परन्तु नन्हें बच्चे का बाल भी बांका न हुआ।
भेंट हो जाना = मिल जाना-आज बरसों बाद मेरी रीना से भेंट हो गई थी।
मैदान मार लेना = जीत जाना-इस वर्ष तो हॉकी मैच में हमारे स्कूल ने मैदान मार लिया।
मन गद्गद् हो जाना = खुश हो जाना-पुरस्कार प्राप्त कर मेरा मन गद्गद् हो गया

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(ख) विषय – बोध

I. रिक्त स्थानों की पूर्ति करो

(क) अमीना का दिल …………. रहा है।
(ख) इस्लाम की …………….. में सब बराबर हैं।
(ग) ईदगाह जाने वालों की ……………. नज़र आने लगी।
(घ) चिमटे ने सभी को …………. कर लिया।
(ङ) बुढ़िया का …………… तुरन्त स्नेह में बदल गया।
उत्तर:
(क) कचोट
(ख) निगाह
(ग) टोलियाँ
(घ) मोहित
(ङ) क्रोध।

II. इन प्रश्नों के उत्तर एक या दो वाक्यों में लिखें

प्रश्न (क)
नमाज़ खत्म होने पर लोग क्या करते हैं ?
उत्तर:
नमाज़ खत्म होने पर लोग आपस में गले मिलते हैं।

प्रश्न (ख)
रमजान के कितने दिनों बाद ईद आती है ?
उत्तर:
रमजान के तीस दिनों बाद ईद आती है।

प्रश्न (ग)
ईद का त्योहार किस धर्म से सम्बन्धित है ?
उत्तर:
ईद का त्योहार मुस्लिम धर्म से सम्बन्धित है।

प्रश्न (घ)
हामिद हिंडोले में क्यों नहीं चढ़ता ?
उत्तर:
हामिद के पास केवल तीन पैसे थे। वह थोड़े-से मज़े के लिए उन पैसों को व्यर्थ खर्च करना नहीं चाहता था। इसलिए वह हिंडोले में नहीं चढ़ता।

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III. इन प्रश्नों के उत्तर चार या पाँच वाक्यों में लिखें

प्रश्न 1.
ईद का त्योहार कब आता है ? इस दिन मुसलमान क्या करते हैं ?
उत्तर:
ईद का त्योहार रमजान के पूरे तीस रोजों के बाद आता है। इस दिन मुसलमान ईदगाह जाकर नमाज़ पढ़ते हैं। फिर आपस में गले मिलते हैं। इस त्योहार पर भारी मेला लगता है। बाज़ार सजते हैं। नये-नये कपड़ों से सजे लोग भिन्न-भिन्न प्रकार की चीजें खरीदते हैं।

प्रश्न 2.
अमीना हामिद को मेले क्यों नहीं भेजना चाहती ?
उत्तर:
अमीना सोचती है कि गांव के बच्चे अपने-अपने बाप के साथ जा रहे हैं। वह उसे मेले में अकेला कैसे भेजे ? भीड़-भाड़ में बच्चा कहीं खो गया तो क्या होगा ? फिर यह नन्हा-सा बच्चा तीन कोस चलेगा कैसे ? पैरों में छाले पड़ जाएंगे। जूते भी तो उसके पास नहीं थे। इसी कारण अमीना हामिद को मेले में नहीं भेजना चाहती थी।

प्रश्न 3.
हामिद ने अपनी दादी के लिए चिमटा क्यों खरीदा ?
उत्तर:
हामिद ने अपनी दादी के लिए चिमटा इसलिए खरीदा क्योंकि रोटी पकाते समय उसकी बूढ़ी दादी के हाथ जल जाते हैं। घर में चिमटा नहीं है। हामिद ने सोचा कि चिमटे को पाकर दादी प्रसन्न हो जाएगी और दुआएँ देगी। उसकी उंगलियाँ नहीं जलेंगी। घर में एक काम की चीज़ भी हो जाएगी।

प्रश्न 4.
हामिद का चिमटा रुस्तमे हिन्द कैसे है ?
उत्तर:
हामिद का चिमटा रुस्तमे हिन्द इसलिए है, क्योंकि वह बड़ा बहादुर है। उसमें आग में कूदने की शक्ति है और आग में बहादुर ही कूद सकते हैं। उसके साथियों के मिट्टी के बने खिलौने वकील, भिश्ती और सिपाही बहादुरी का काम नहीं कर सकते। चिमटा अपने साथियों के खिलौनों को तोड़ भी सकता है। अतः वह रुस्तमे हिन्द है।

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(ग) व्यावहारिक व्याकरण :

I. वचन बदलें

1. बन्दूक = बन्दूकें
आँख = …………
सड़क = ………..
किताब = ……….
दुआ = …………
उत्तर:
बन्दूक = बन्दूकें
आँख = आँखें
सड़क = सड़कें
किताब = किताबें
दुआ = दुआएँ

2. चिमटा = चिमटे
पैसा = ………..
खिलौना – ………..
ताँगा = ………..
हिंडोला = ………..
उत्तर:
चिमटा = चिमटे
पैसा = पैसे
खिलौना = खिलौने
ताँगा = ताँगे
हिंडोला = हिंडोले

3. टोली = टोलियाँ
घुड़की = ………..
उंगली = ………..
पसली = ………..
चर्खि = ………..
उत्तर:
टोली = टोलियाँ
घुड़की = घुड़की
उंगली = उँगलियाँ
पसली = पसलियाँ
चर्खि = चर्खियाँ

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II. लिंग बदलें-

1. धोबी = धोबिन
सुनार = ………..
ग्वाला = ……….
तेली = ………..
उत्तर:
धोबी. = धोबिन
सुनार = सुनारिन
ग्वाला = ग्वालिन
तेली = तेलिन

2. ऊँट = ऊँटनी
सिंह = ……..
हंस = ………..
शेर = ………..
उत्तर:
ऊँट = ऊँटनी
सिंह = सिंहनी
हंस = हंसनी
शेर = शेरनी

3. दादा = दादी
चिमटा= ……..
बच्चा = ……..
लड़का= ……..
उत्तर:
दादा = दादी
चिमटा= चिमटी
बच्चा = बच्ची
लड़का= लड़की

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III. विपरीतार्थक शब्द लिखें

प्रसन्न – ……………..
महँगा – ……………..
विवेक – ……………..
आगे – ……………..
धीरे – ……………..
धूप – ……………..
उत्तर:
प्रसन्न – अप्रसन्न
महँगा – सस्ता
विवेक – अविवेक
आगे – पीछे
धीरे – तेज़
धूप – छाँव

IV. इन भिन्नार्थक शब्द-युग्मों के अर्थ दिए गए हैं। इनके अर्थों को ध्यान में रखते हुए वाक्य बनाएँ

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 2 ईदगाह 1
उत्तर:
I. मैं मोहन की ओर मुड़ा और उसका हाथ पकड़ लिया।
II. मैंने नरेश के कुल के विषय पर नदी के कूल पर सब कुछ जानना चाहा था।
II. सूर्यास्त के अभिराम दृश्य को आप अविराम निहार रहे थे।
IV. इस कलि काल में कोई कली भी सुरक्षित नहीं है।
V. घाट का शुल्क आज जमा कराना था पर शुक्ल धन के अभाव में ऐसा न कर पाया।
VI. सभी बच्चे क्रम से अपने-अपने कर्म के विषय में बतला रहे थे।
VII. आप के पास तो अपने प्रमाण-पत्रों का परिमाण बहुत अधिक है।
VIII. चिर काल से सुदामा इसी पुराने चीर का उपयोग कर रहा था। ।

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V. इन वाक्यों में से संज्ञा शब्द छाँटकर उनके भेद का नाम लिखें

1. हामिद के पाँव में जूते नहीं हैं।
2. यह हिंडोला है।
3. हामिद खिसिया जाता है।
4. अमीना का दिल कचोट रहा है।
5. चिमटे ने सभी को मोहित कर लिया।
उत्तर:
1. हामिद-व्यक्तिवाचक संज्ञा। पाँव-जातिवाचक संज्ञा। जूतेजातिवाचक संज्ञा।
2. हिंडोला-जातिवाचक संज्ञा ।
3. हामिद-व्यक्तिवाचक संज्ञा।
4. अमीना–व्यक्तिवाचक संज्ञा। दिल-जातिवाचक संज्ञा ।
5. चिमटे-जातिवाचक संज्ञा।

VI. रेखांकित शब्दों में कौन-सा सर्वनाम है ?

प्रश्न 1.
यह देखो, हिंडोला है।
उत्तर:
यह-निश्चयवाचक

प्रश्न 2.
वह सबको ललचाई आँखों से देखता है।
उत्तर:
वह–अन्य पुरुषवाचक

प्रश्न 3.
यहाँ कोई धन और पद नहीं देखता।
उत्तर:
कोई-अनिश्चय वाचक

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प्रश्न 4.
क्यों नहीं कुछ लेकर खाता ?
उत्तर:
क्यों-प्रश्नवाचक, कुछ-अनिश्चयवाचक

प्रश्न 5.
वे सब के सब आगे बढ़ जाते हैं।
उत्तर:
वे अन्य पुरुषवाचक

प्रश्न 6.
उसे ख्याल आया, दादी के पास चिमटा नहीं है।
उत्तर:
उसे-अन्य पुरुषवाचक

प्रश्न 7.
इसे क्या करेगा ?
उत्तर:
इसे-निश्चयवाचक

प्रश्न 8.
वह रोने लगी।
उत्तर:
वह-अन्य पुरुषवाचक।

(घ) रचनात्मक ज्ञान

प्रश्न (क)
मान लीजिए आप स्कूल की तरफ से शिमला शैक्षिक भ्रमण पर जाते हैं। वहाँ से आप अपने छोटे भाई-बहन के लिए कुछ न कुछ खरीद कर लाते हो। आप अपने दादादादी के लिए वहाँ से क्या खरीदकर लायेंगे? अपने शब्दों में लिखें।
उत्तर:
जब मैं स्कूल की तरफ से शिमला शैक्षिक भ्रमण के लिए जाऊँगा तो मैं अपने दादा जी के लिए लक्कड़ बाज़ार से एक सुंदर-सी मज़बूत छड़ी खरीद कर लाऊँगा। वे हर सुबह सैर करने जाते हैं। छड़ी से उन्हें सहारा मिलेगा, चलने में सहायता मिलेगी और आवारा कुत्ते भी उनके पास नहीं आएंगे। मैं अपनी दादी के लिए एक टोपी लाऊँगा। वे सर्दी में भी सिर पर शाल नहीं ओढतीं। टोपी से उनका सिर ठंड से बचा रहेगा।

प्रश्न (ख)
यदि आप साधन सम्पन्न हैं और आप अपने दोस्तों के साथ कहीं पिकनिक पर गये हैं। आपका कोई एक ऐसा दोस्त है जिसके पास आपके बनस्पित कम पैसे हैं तो क्या आप उसे चिढ़ा-चिढ़ाकर चीजें खायेंगे या मिल बाँटकर ; लिखें।
उत्तर:
मैं अपने दोस्त के प्रति उसे बुरा भाव प्रकट करने वाला कोई काम नहीं करूँगा। मैं उसके साथ मिल-बाँट कर खाऊँगा। मैं उसे महसूस ही नहीं होने दूंगा कि उसके पास कम पैसे हैं।

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PSEB 8th Class Hindi Guide ईदगाह Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
ईदगाह में नमाज़ के दृश्य का वर्णन करें।
उत्तर:
ईदगाह में नमाज़ का दृश्य बहुत प्रभावशाली था। ज़मीन पर जाज़िम बिछा हुआ था। रोज़े रखने वालों की कई पंक्तियाँ लगी थीं। यहाँ सब लोग बराबर थे। अमीरग़रीब का कोई फर्क नहीं था। लाखों लोग सिजदे में एक साथ सिर झुकाते, फिर इकट्ठे खड़े हो जाते। एक साथ झुकते और एक साथ घुटनों के बल बैठ जाते। कई बार यही क्रिया होती।

प्रश्न 2.
हामिद के हाथ में चिमटा देखकर अमीना क्रोध में क्यों आई ?
उत्तर:
हामिद के हाथों में चिमटा देखकर अमीना को क्रोध इसलिए आया क्योंकि उसने तो हामिद को कुछ खाने-पीने के लिए, खिलौने के लिए या और कोई मनचाही चीज़ लाने के लिए पैसे दिए थे। लेकिन हामिद ने अपनी खुशी के लिए कुछ भी न लिया। इस पर अमीना को क्रोध आ गया। इसे क्या पता था कि उसी के सुख के लिए वह चिमय लाया है।

प्रश्न 3.
हामिद के चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ लिखें।
उत्तर:
त्यागी – हामिद बड़ा त्यागी लड़का है। वह अमीना के दिए पैसे अपने लिए खर्च नहीं करता बल्कि उनसे वह दादी के लिए चिमटा लाता है, ताकि रोटी सेंकते समय उसकी अँगलियाँ न जलें। उन पैसों से वह न कोई खिलौना लेता है और न उससे खाने की चीजें खरीदता है।

संतोषी – हामिद के साथी महमूद, मोहसिन, नूरे और शम्मी ऊँटों और घोड़ों पर बैठ कर एक पैसे में पच्चीस चक्करों का मज़ा लेते हैं। लेकिन हामिद एक पैसा खोना नहीं चाहता, वह बड़ा सन्तोषी है। हामिद खिलौने के लिए भी पैसे खर्च नहीं करता और न मिठाई खाने की इच्छा रखता है।

बुद्धिमान् – वह अपने घर की हालत समझता है। जब उसके साथी चिमटा खरीदने पर उससे हँसी-मखौल करते हैं, तब वह अपनी युक्तियाँ देकर उनको कायल कर लेता है। सब उसे अपने खिलौने दिखाने लगते हैं और उसका चिमटा देखते हैं। हामिद अपने साथियों के मज़ाक को समझता है। इसीलिए वह मिठाइयों की बदनामी करता है और मिठाई नहीं खरीदता। उससे उसकी बुद्धिमत्ता प्रकट होती है।

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बहुविकल्पीय प्रश्न निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर सही विकल्प चुनकर लिखें

प्रश्न 1.
‘ईदगाह’ कहानी के लेखक का नाम क्या है
(क) प्रेमचन्द
(ख) जैनेन्द्र
(ग) यशपाल
(घ) मीना शर्मा।
उत्तर:
प्रेमचन्द।

प्रश्न 2.
अमीना हामिद की क्या लगती है ?
(क) नानी
(ख) माता
(ग) दादी
(घ) चाची।
उत्तर:
दादी।

प्रश्न 3.
ईदगाह किन वृक्षों की घनी छांह में बनी हुई थी ?
(क) नीम
(ख) इमली
(ग) आम
(घ) जामुन।
उत्तर:
इमली।

प्रश्न 4.
हामिद के पास कितने पैसे थे ?
(क) दो
(ख) तीन
(ग) चार
(घ) पाँच
उत्तर:
तीन।

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प्रश्न 5.
हामिद ने दादी के लिए क्या खरीदा ?
(क) चप्पल
(ख) चिमटा
(ग) चम्मच
(घ) चायदानी।
उत्तर:
चिमटा।

प्रश्न 6.
‘रुस्तमे हिंद’ कौन-सी वस्तु है ?
(क) सिपाही
(ख) वकील
(ग) भिश्ती
(घ) चिमटा।
उत्तर:
चिमटा।

प्रश्न 7.
रमज़ान के कितने रोजों के बाद ईद का दिन आता है ?
(क) बीस
(ख) तीस
(ग) चालीस
(घ) पचास।
उत्तर:
तीस।

प्रश्न 8.
हामिद कितने वर्ष का है ?
(क) 10-12
(ख) 12-13
(ग) 13-14
(घ) 14-15.
उत्तर:
13-14.

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ईदगाह Summary

ईदगाह कहानी का सार

रमजान के पूरे तीस रोज़ के बाद आज ईद का दिन आया था। सारे गाँव में हलचल मची हुई थी। सब ईदगाह जाने की तैयारी कर रहे थे। लड़के सबसे ज्यादा खुश थे। वे बारबार अपने पैसे गिन रहे थे। हामिद उन सबसे ज्यादा प्रसन्न था। उसके पास केवल तीन पैसे थे। हामिद के माता-पिता मर चुके थे। अब वह अपनी बूढ़ी दादी अमीना के साथ रहता था और उसकी गोद में सोता था। गाँव में बच्चे अपने-अपने बाप के साथ मेले को जाने की तैयारी कर रहे थे। हामिद की दादी उसे अकेले मेले में भेजना नहीं चाहती थी। हामिद के जिद्द करने पर वह उसे भेजने के लिए मान गई थी। गाँव से टोलियाँ मेले के लिए चली तो हामिद भी साथ चल पड़ा। सब बच्चे कभी दौड़ कर आगे निकल जाते और कभी पेड़ के नीचे बैठ कर पीछे वालों का इन्तजार करने लगते। शहर को जाने वाला रास्ता शुरू हो गया था। ईदगाह जाने वालों की टोलियाँ नज़र आने लगी थीं। ग्रामीणों का यह दल अपनी ग़रीबी से बेखबर धीरे-धीरे चल रहा था। बच्चों को नगर की सभी चीजें बड़ी अनोखी लग रही थीं।
.इमली के घने वृक्षों की छाया में बनी हुई ईदगाह नज़र आने लगी थी। हजारों की संख्या में लोग एक के पीछे एक पंक्ति बना कर खड़े थे। ग्रामीणों का दल भी पिछली पंक्ति में जाकर खड़ा हो गया था। नमाज़ शुरू हुई। सभी सिर एक साथ सिजदे के लिए झुकते और फिर सब के सब एक साथ खड़े हो जाते। ऐसा कई बार हुआ।

नमाज़ खत्म होने पर सभी लोग एक-दूसरे के गले मिले। फिर सभी बच्चे मिठाई और खिलौनों की दुकानों पर टूट पड़े। बहुत-से लोग हिंडौला झूल रहे थे। हामिद के साथी महमूद, मोहसिन, नूरे और सम्मी घोड़ों और ऊँटों पर बैठे क्योंकि उनके पास पैसे थे। हामिद उन्हें दूर खड़ा देखता रहा। वह अपने तीन पैसे फ़िजूल में खर्च करना नहीं चाहता था। फिर महमूद, मोहसिन और नूरे ने अपनी पसन्द के खिलौने खरीदे। वे सब दो-दो पैसे के खिलौने थे। हामिद यह नहीं चाहता कि अपने पैसे खिलौनों पर खर्च करे। उसने अपनी दादी के लिए तीन पैसे में एक चिमटा खरीद लिया।

हामिद ने जब चिमटा ले जाकर अपनी दादी को दिखाया तो वह नाराज़ हुई। किन्तु जब हामिद ने बताया कि तवे से उसकी उँगलियाँ जल जाती थीं इसलिए उसने चिमटा खरीदा था तब यह सुनकर बूढ़ी दादी बच्चों की तरह रोने लगी और हामिद उसे चुप कराने और उसके आँसू पोंछने लगा था।

PSEB 8th Class Hindi Vyakaran समास

Punjab State Board PSEB 8th Class Hindi Book Solutions Hindi Grammar Samas समास Exercise Questions and Answers, Notes.

PSEB 8th Class Hindi Grammar समास

प्रश्न 1.
समास किसे कहते हैं ? इसके भेदों का वर्णन करें।
उत्तर:
परस्पर सम्बन्ध रखने वाले दो या दो से अधिक पदों के मेल को समास कहते हैं; जैसे-माता-पिता = माता और पिता।

विग्रह : समस्त पदों में विभिन्न चिहनों को जोड़कर अलग-अलग पद करने की क्रिया को विग्रह कहते हैं; जैसे-‘माता-पिता’ समस्त पद का विग्रह होगा-माता और पिता।
समास के भेद : समास में दो पद होते हैं, एक पूर्व पद दूसरा उत्तर पद। इन पदों की प्रधानता के आधार पर समास के चार भेद होते हैं –
1. अव्ययीभाव समास
2. द्वन्द्व समास
3. बहुब्रीहि समास
4. तत्पुरुष समास।

1. अव्ययीभाव समास : जिस समास में पूर्व (पहला) पद प्रधान होता है उसे अव्ययी भाव समास कहते हैं। जैसे-
यथाशक्ति – शक्ति के अनुसार
भरपेट – पेट भरकर
यथाविधि – विधि के अनुसार
आजीवन – जीवन भर
प्रतिदिन – दिन-दिन
आमरण – मरने तक।

2. द्वन्द्व समास : जिस समास में पूर्व और उत्तर दोनों पद प्रधान होते हैं, उसे द्वन्द्व समास कहते हैं। जैसे
माता-पिता – माता और पिता
सुख-दुख – सुख और दुख
नर-नारी – नर और नारी
देवासुर – देव और असुर
राम-लक्ष्मण – राम और लक्ष्मण
दिन-रात – दिन और रात।

3. बहुव्रीहि समास : जिस समास में पूर्व और उत्तर पद प्रधान न होकर कोई अन्य पद प्रधान हो उसे बहुव्रीहि समास कहते हैं। जैसे
दशानन – दश हैं आनन(मुख) जिसके (रावण), लंबोदर – लंबा है उदर (पेट) जिसका (गनेश)।
त्रिनेत्र – तीन नेत्र (आंख) हैं जिसके (शिव), पीतांबर – पीले हैं वस्त्र जिसके (श्रीराम, कृष्ण)।

4. तत्पुरुष समास : जिस समास में उत्तर (दूसरा) पद प्रधान होता है, उसे तत्पुरुष समास कहते हैं। जैसे-विद्यालय-विद्या के लिए आलय, देवालय-देव के लिए आलय।
तत्पुरुष समास के भेद-
तत्पुरुष समास के भेद इस प्रकार हैं
(i) कर्म तत्पुरुष – यशप्राप्त-यश को प्राप्त, ग्रामगत-ग्राम को जाना
(ii) करण तत्पुरुष – तुलसीकृत-तुलसी द्वारा कृत, हस्तलिखित-हाथ के द्वारा लिखित।
(iii) सम्प्रदान तत्पुरुष – रसोईघर-रसोई के लिए घर, विद्यार्थी-विद्या के लिए अर्थी।
(iv) अपादान तत्पुरुष – विद्याहीन-विद्या से हीन, धनहीन-धन से हीन।
(v) सम्बन्ध तत्पुरुष – राजपुरुष-राजा का पुरुष, गंगाजल-गंगा का जल
(vi) अधिकरण तत्पुरुष – घुड़सवार-घोड़े पर सवार, ग्रहप्रवेश-गृह (घर) में प्रवेश।

तत्पुरुष समास के अन्य भेद-
तत्पुरुष समास के कुछ अन्य भेद भी होते हैं
(i) कर्मधारय : जिस समास में उत्तर पद प्रधान होता है। जिस समास में पहले और दूसरे पद में विशेष्य-विशेषण का सम्बन्ध हो, उसे कर्मधारय समास कहते हैं। जैसे
महात्मा – महान है जो आत्मा
लाल मिर्च – लाल है जो मिर्च।
कमल नयन – कमल के समान नयन (आँख)
चंद्रमुख – चन्द्रमा के समान मुख।।

(ii) द्विगु समास : जिस समास में पूर्व पद संख्या का बोध कराए उसे द्विगु समास कहते हैं। जैसे
पंचवटी – पांच वृक्षों का समूह
सप्ताह – सात दिनों का समूह
नवरत्न – नौ रत्नों का समूह
शताब्दी – सौ वर्षों का समूह ।

(iii) नञ् समास : जिस समास में पहला पद निषेधवाचक हो, उसे नञ् समास कहते हैं। जैसे
अजर – न जर
अमर – न मर
अन्याय – न न्याय
अनीति – न नीति
असत्य – न सत्य
अस्थिर – न स्थिर।

PSEB 8th Class Hindi Vyakaran समास

प्रश्न 2.
कर्मधारय और बहुब्रीहि समास में क्या अन्तर है ? उदाहरण देकर स्पष्ट करो।
उत्तर:
(1) कर्मधारय तत्पुरुष समास में दूसरा पद प्रधान होता है, परन्तु बहुब्रीहि समास में दोनों पदों में कोई भी पद प्रधान नहीं होता। वरन् एक तीसरा अन्य पद प्रधान होता है।

(2) कर्मधारय में एक पद दूसरे पद का विशेषण या उपमान होता है, किन्तु बहुब्रीहि का ‘समस्त पद’ अनावश्यक रूप से किसी अन्य तीसरे पद का सूचक (विशेषण) होता है। जैसे-नीलकण्ठ और पीताम्बर शब्दों का यदि विग्रह किया जाए–नीला जो कण्ठ’ तथा ‘पीत जो अम्बर’ तो ये दोनों कर्मधारय समास के उदाहरण होंगे। परन्तु जब इनका विग्रह हो–नीला है कण्ठ जिसका’ तथा ‘पीत है अम्बर जिसका’, तो ये दोनों शब्द क्रमशः ‘शिवजी’ तथा ‘श्रीकृष्ण’ के विशेषण होने के कारण बहुब्रीहि समाज के उदाहरण कहे जाएंगे।

प्रश्न 3.
सन्धि और समास में क्या अन्तर है ? उदाहरण देकर स्पष्ट करें।
उत्तर:

सन्धि समास
1. अति समीप आए हुए दो वर्गों में होती है। 1. समास आपस में सम्बन्ध रखने वाले दो या दो से अधिक शब्दों में होता है।
2. दो वर्गों में सन्धि होती है। अतः ये आपस में इस तरह घुल-मिल जाते हैं कि इनको अलग करना कठिन होता है। 2. दो शब्दों के मेल होने के कारण ही पद इकट्ठे रखे जाते हैं। प्रायः घुल-मिल नहीं जाते।
3. सन्धि में कारक का लोप होना ज़रूरी नहीं है। 3. समास में कारक का लोप होना प्रायः ज़रूरी है।

उदाहरण –
सन्धि :
इति + आदि = इत्यादि।
सत् + जन = सज्जन।

समास :
राजा का पुरुष = राजपुरुष।
घन की तरह श्याम = घनश्याम।

PSEB 8th Class Hindi Vyakaran समास

समास :
परस्पर सम्बन्ध रखने वाले दो अथवा दो से अधिक पदों के मेल का नाम समास है ; जैसे-राजा का पुत्र = राजपुत्र। समास के भेद-
(i) अव्ययी भाव
(ii) तत्पुरुष
(iii) द्वन्द्व
(iv) बहुब्रीहि।

1. अव्ययी भाव :
जिस समास का पहला पद प्रधान हो, वह अव्ययी भाव समास होता है। पहला खण्ड अव्यय होता है।
जैसे- क्षण-क्षण = प्रति क्षण
यथाक्रम = क्रम के अनुसार
अनपढ़ = बिना पढ़ा-लिखा
आजन्म = जन्म भर
यथाशक्ति = शक्ति के अनुसार
भरपेट = पेटभर कर
हाथों हाथ = हाथ-हाथ में
आमरण = मरण तक
आजीवन = जीवन-पर्यन्त
हर समय = हर समय में
प्रतिक्षण = क्षण-क्षण
बीचों बीच = बीच-बीच में
प्रतिदिन = दिन-दिन के प्रति
साफ़-साफ़ = बिल्कुल साफ़

2. तत्पुरुष जिस समास में दूसरा पद प्रधान होता है। जैसे राजा का महल = राजमहल। तत्पुरुष के भेद इस प्रकार हैं
(i) कर्म तत्पुरुष :
स्वर्गगत = स्वर्ग को गत (गया हुआ)
शरणापन्न = शरण में आपन्न
ग्रामगत = ग्राम (गाँव) को गत
सुख प्राप्त = सुख को प्राप्त
(गया हुआ) फल प्राप्त = फल को प्राप्त
शरणागत = शरण को आगत (गया हुआ)

(ii) करण तत्पुरुष :
रेखांकित = रेखा से अंकित
दई मारा = दैव से मारा
तुलसीकृत = तुलसी द्वारा कृत
मुँहमाँगा = मुँह से माँगा
हस्तलिखित = हाथ से लिखित
हृदयहीन = हृदय से हीन
रेलयात्रा = रेल द्वारा यात्रा
मनमानी = मन से मानी
भाग्यहीन = भाग्य से हीन
विचारहीन = विचार से हीन

PSEB 8th Class Hindi Vyakaran समास

(iii) सम्प्रदान तत्पुरुष :
हवन सामग्री = हवन के लिए सामग्री
देश भक्ति = देश के लिए भक्ति
रसोईघर = रसोई के लिए घर
हथकड़ी = हाथों के लिए कड़ी
सत्याग्रह = सत्य के लिए आग्रह
राहखर्च = राह के लिए खर्च

(iv) अपादान तत्पुरुष :
जन्मरोगी = जन्म से रोगी
धर्मभ्रष्ट = धर्म से भ्रष्ट
नरकभय = नरक से भय
पदच्युत = पद से च्युत
चोरभय = चोर से भय
धनहीन = धन से हीन

(v) सम्बन्ध तत्पुरुष :
विश्वासपात्र = विश्वास का पात्र
राष्ट्रपति = राष्ट्र का पति
घुड़दौड़ = घोड़ों की दौड़
जन्मभूमि = जन्म की भूमि
माखनचोर = माखन का चोर
राजपुत्र = राजा का पुत्र
रामकहानी = राम की कहानी
राजसभा = राजा की सभा
राजकन्या = राजा की कन्या
रामदरबार = राम का दरबार
बैलगाड़ी = बैलों की गाड़ी
विद्याप्रेमी = विद्या का प्रेमी
मंत्रिमंडल = मंत्रियों का मण्डल
राजमहल = राजा का महल
देशभक्त = देश का भक्त
नगरवधू = नगर की वधू
राजभवन = राजा का भवन
प्रजापति = प्रजा का पति

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(vi) अधिकरण तत्पुरुष :
आत्मविश्वास = आत्मा पर विश्वास
आप-बीती = आप पर बीती
नराधम = नरों में अधम
धर्मवीर = धर्म में वीर
नीतिनिपुण = नीति में निपुण
ग्रामवास = ग्राम में वास

(vii) नञ् तत्पुरुष :
अछूत = जो छूत न हो
अपठित = जो पठित न हो
अनपढ़ = जो पढ़ा न हो
अनहोनी = जो न होनी हो

(viii) कर्मधारय :
वचनामृत = वचन रूपी अमृत
भलामानुस = भला जो मनुष्य
चन्द्रमुख = चन्द्र जैसा मुख
चरण कमल = कमल जैसे चरण
घनश्याम = घन जैसा श्याम
आशा किरण = आशा रूपी किरण
नीलकण्ठ = नील जैसा कण्ठ
भवसागर = भव रूपी किरण
कमलनयन = कमल जैसे नयन
परमानन्द = परम आनन्द
महादेव = महान् देव
परमात्मा = परम आत्मा

PSEB 8th Class Hindi Vyakaran समास

द्विगु :
पहला पद संख्यावाचक-
द्विग = दो गौओं का समूह
नवग्रह = नौ ग्रहों का समूह
सप्तसिन्धु = सात सिन्धुओं का समूह
त्रिलोकी = तीन लोकों का समूह
त्रिफला = तीनों फलों का समूह
दोपहर = दो पहरों का समूह
नवरत्न = नौ रत्नों का समूह
चौराहा = चार रास्तों का समूह
चौमासा = चार मासों का समूह
सतसई = सात सौ पदों का समूह

3. द्वन्द्व
जिसमें दोनों खण्ड प्रधान हों। विग्रह करने पर जिसमें ‘और’ ‘अथवा’ का प्रयोग होता है ; जैसे-
माता-पिता = माता और पिता
हाथी-घोड़े = हाथी और घोडे
सुख-दुःख = सुख और दुःख
दिन-रात = दिन और रात
अन्न-जल = अन्न और जल
पाप-पुण्य = पाप और पुण्य
जल-वायु = जल और वायु
खट्टा-मीठा = खट्टा और मीठा
गरीब-अमीर = गरीब और अमीर
दाल-रोटी = दाल और रोटी
हाथ-पाँव = हाथ और पाँव
धेला-पैसा = धेला और पैसा
खान-पान = खान और पान
राम-लक्ष्मण = राम और लक्ष्मण
ऋषि-मुनि = ऋषि और मुनि
देवी-देवता = देवी और देवता
भाई-बहन = भाई और बहन
तन-मन = तन और मन
दाल-भात = दाल और भात
राग-रंग = राग और रंग
माँ-बाप = माँ और बाप
चाय-पानी = चाय और पानी

PSEB 8th Class Hindi Vyakaran समास

4. बहुब्रीहि जिस समास का कोई भी पद प्रधान न हो बल्कि समस्त पद अपने पदों से भिन्न किसी अन्य पद का विशेषण हो ; जैसे-
दशानन = दश आननों वाला
पीताम्बर = पीले वस्त्रों वाला
विशाल हृदय = विशाल है हृदय जिसका
बारहसिंगा = बारह सींगों वाला
जितेन्द्रिय = इन्द्रियों को जीतने वाला
महात्मा = महान् आत्मा वाला।
कनफटा = फटे कानों वाला
पतझड़ = जिसमें पत्ते झड़ जाते हैं।
लालकुर्ती = लाल कुर्ती वाला
चन्द्रानन = चन्द्र जैसा आनन
चन्द्रामुखी = चन्द्र जैसे मुख वाली
बड़बोला = बड़े बोलों वाला
हँसमुख = हँसी है मुख पर जिसके
दशमुख = दश हैं मुख जिसके
अमूल्य = मूल्य नहीं है जिसका
विषयवासना = विषयों की वासना
आश्चर्यचकित = आश्चर्य से चकित
भाग्यहीन = हीन भाग्य वाला।

PSEB 8th Class Hindi Vyakaran सन्धि

Punjab State Board PSEB 8th Class Hindi Book Solutions Hindi Grammar Sandhi सन्धि Exercise Questions and Answers, Notes.

PSEB 8th Class Hindi Grammar सन्धि

प्रश्न 1.
सन्धि किसे कहते हैं ? इसके कितने भेद हैं ?
उत्तर:
दो वर्गों के परिवर्तन सहित मेल को संधि कहते हैं;
जैसे-पर + उपकार = परोपकार, जगत् + ईश = जगदीश।

सन्धि के तीन भेद :
1. स्वर सन्धि : स्वरों का स्वरों के साथ मेल होने पर स्वरों में जो परिवर्तन होता है, उसे स्वर सन्धि कहते हैं;
जैसे-विद्या + अर्थी = विद्यार्थी (आ + अ = आ)।

2. व्यंजन सन्धि : व्यंजनों का व्यंजनों के साथ या स्वरों के साथ मेल होने पर व्यंजनों में जो परिवर्तन होता है, उसे व्यंजन सन्धि कहते हैं;
जैसे-तत् + लीन = तल्लीन (त् + ल = ल्ल), जगत् + अम्बा = जगदम्बा (त + अ = द)।

3. विसर्ग सन्धि : विसर्गों का स्वरों अथवा व्यंजनों के साथ मेल होने पर विसर्गों में जो परिवर्तन होता है, उसे विसर्ग सन्धि कहते हैं;
जैसे-निः+ आकार = निराकार। नि: + छल = निश्छल।

नोट : सन्धि के नियम और उसके विस्तृत उदाहरण स्मरण तालिका में देखिए।

PSEB 8th Class Hindi Vyakaran सन्धि

सन्धि :
समीपता के कारण दो अक्षरों या वर्गों में मेल हो जाने से उसमें जो विकार होता है, उसे सन्धि कहते हैं; जैसे-विद्या + आलय = विद्यालय। राका + ईश = राकेश।
सन्धि तीन प्रकार की होती है-
(क) स्वर सन्धि
(ख) व्यंजन सन्धि
(ग) विसर्ग सन्धि।

(क) स्वर सन्धि :
दो स्वरों में जो मेल होता है, उसे स्वर सन्धि कहा जाता है। जैसे-धर्म + अर्थ = धर्मार्थ। स्वर सन्धि के भेद इस प्रकार हैं

1. दीर्घ सन्धि
अ + अ = आ, अ + आ = आ
आ + अ = आ, आ + आ = आ
अधिक + अधिक = अधिकाधिक
खाद्य + अन्न = खाद्यान्न
स्थान + अन्तरण = स्थानान्तरण
दया + आनन्द = दयानन्द
देव + आलय = देवालय
राम + अवतार = रामावतार
दीर्घ + आयु = दीर्घायु
धर्म + अर्थ = धर्मार्थ
शास्त्र + अर्थ = शास्त्रार्थ
परम + आत्मा = परमात्मा
परम + अर्थ = परमार्थ
परा + अधीन = पराधीन
क्षुधा + आर्त = क्षुधात
पुरुष + अर्थ = पुरुषार्थ
श्रद्धा + अंजलि = श्रद्धांजलि
महा + आत्मा = महात्मा
विद्या + अर्थी = विद्यार्थी
अल्प + आहार = अल्पाहार
दीप + आवली = दीपावली
विद्या + आलय = विद्यालय
शिव + आलय = शिवालय
हिम + आलय = हिमालय
शरण + अर्थी = शरणार्थी
नर + इन्द्र = नरेन्द्र

PSEB 8th Class Hindi Vyakaran सन्धि

इ+ इ = ई, इ + ई = ई
ई + इ = ई, ई + ई = ई
कवि + इन्द्र = कवीन्द्र
कवि + ईश्वर = कवीश्वर
मुनि + ईश्वर = मुनीश्वर
गिरि + ईश = गिरीश
परि + ईक्षा = परीक्षा
प्रति + ईक्षा = प्रतीक्षा
प्रति + एक = प्रत्येक
मही + ईश = महीश
रवि + इन्द्र = रवीन्द्र
रजनी + ईश = रजनीश
हरि + इच्छा = हरीच्छा
हरि + ईश = हरीश
सती + ईश = सतीश

उ+ उ = ऊ, उ + ऊ = ऊ
ऊ + उ = ऊ, ऊ + ऊ = ऊ
गुरु + उपदेश = गुरुपदेश
भानु + उदय = भानूदय
मनु + उपदेश = मनूपदेश
वधू + उत्सव = वधूत्सव
सिन्धु + उर्मि = सिन्धर्मि

ऋ+ ऋ = ऋ
पितृ + ऋद्धि = पितृद्धि
पितृ + ऋण = पितृण
मातृ + ऋण = मातृण

2. यण् सन्धि
इ, ई, उ,ऊ, ऋ से परे कोई अन्य स्वर हो तो इ, ई,को य, उ, ऊ को व् और ऋ को र हो जाता है; जैसे,
इ, ई + विजातीय स्वर-र्
अति + आवश्यक = अत्यावश्यक
उपरि + उक्त = उपर्युक्त
अति + अधिक = अत्यधिक
अति + अन्त = अत्यन्त
अति + आचार = अत्याचार
प्रति + एक = प्रत्येक
यदि + अपि = यद्यपि
इति + आदि = इत्यादि
प्रति + उपकार = प्रत्युपकार

उ, ऊ + विजातीय स्वर-व्
अनु + एषण = अन्वेषण
वधू + आगमन = वध्वागमन
मधु + अरि = मध्वरि
प्रति + उत्तर = प्रत्युत्तर
सु + अल्प = स्वल्प
सु + आगत = स्वागत

ऋ + विजातीय स्वर-र्
पितृ + अर्पण = पित्रर्पण
पितृ + आदेश = पित्रादेश

PSEB 8th Class Hindi Vyakaran सन्धि

3. गुण सन्धि
यदि अ, आ से आगे इ, ई हों तो दोनों का ‘ए’ उ,ऊ हो तो दोनों का ‘ओ’ और ऋ हो तो दोनों का अर हो जाता है ; जैसे,

अ, आ + इ, ई = ए
उमा + ईश = उमेश
उप + इन्द्र = उपेन्द्र
गण + ईश = गणेश
गज + इन्द्र = गजेन्द्र
वीर + इन्द्र = वीरेन्द्र
धर्म + इन्द्र = धर्मेन्द्र
परम + ईश्वर = परमेश्वर
महा + इन्द्र = महेन्द्र
महा + ईश्वर = महेश्वर
देव + इन्द्र = देवेन्द्र
रमा + ईश = रमेश
महा + ईश = महेश
भारत + इन्दु = भारतेन्दु
राजा + इन्द्र – राजेन्द्र
सुर + इन्द्र = सुरेन्द्र
सुर + ईश = सुरेश

अ, आ + उ, ऊ = ओ
ईश्वर + उपासना = ईश्वरोपासना
गंगा + उदक = गंगोदक
चन्द्र + उदय = चन्द्रोदय
पर + उपकार = परोपकार
पुत्र + उत्सव = पुत्रोत्सव
भाग्य + उदय = भाग्योदय
महा + उदय = महोदय
महा + उत्सव = महोत्सव
हित + उपदेश = हितोपदेश
वीर + उचित = वीरोचित
सूर्य + उदय = सूर्योदय

अ, आ + ऋ = अर्
ग्रीष्म + ऋतु = ग्रीष्मर्तु
देव + ऋषि = देवर्षि
ब्रह्म + ऋषि ब्रह्मर्षि
महा + ऋषि = महर्षि

PSEB 8th Class Hindi Vyakaran सन्धि

4. वृद्धि सन्धि
अ, आ से आगे ए, ऐ हों तो दोनों को ऐ, और ओ, औ हों तो दोनों को औ हो जाता है ; जैसे,

आ + ए, ऐ = ऐ
तथा + एव = तथैव
एक + एक = एकैक
तद + एव = तदैव
सदा + एव = सदैव
महा + ऐश्वर्य = महैश्वर्यवन + औषधि = वनौषधि
मत + एक्य = मतैक्य

अ, आ + ओ, औ = औ
जल + ओघ = जलौघ
दन्त + ओष्ठ = दन्तौष्ठ
महा + औषधि = महौषधि
परम + औदार्य = परमौदार्य

5. अयादि सन्धि ए, ऐ, ओ, औ, इनके आगे यदि इनसे भिन्न स्वर हो तो एक को अय, ऐ को आय, ओ को अव् और औ को आव हो जाता है ; जैसे-

ए + कोई स्वर = अय्
च + अन = चयन
ने + अन = नयन

ऐ + कोई स्वर = अय्
गै + अक = गायक
गै + अन = गायन
नै + अक = नायक

ओ + कोई स्वर = अव्
पो + अन = पवन
भो + अन = भवन

औ + कोई स्वर = आव्
पौ + अक = पावक
नौ + इक = नाविक
भौ + अक = भावुक

PSEB 8th Class Hindi Vyakaran सन्धि

(ख) व्यंजन सन्धि :
व्यंजन के आगे स्वर या व्यंजन आने से जो सन्धि होती है, उसे व्यंजन सन्धि कहते हैं; जैसे जगत् + नाथ = जगन्नाथ। अन्य उदाहरण

1. च, छ, ज् परे होने पर त् को च ज हो जाता है
उत् + चारण = उच्चारण
सत् + जन = सज्जन
विपत् + जाल = विपज्जा
शरत् + चन्द्र = शरच्चन्द्र
सत् + चरित्र = सच्चरित्र
उत् + ज्वल = उज्ज्वल

2. ड् परे होने पर त् को ड् और ट् परे होने पर त् को ट् हो जाता है।
उत् + डयन = उड्डयन
बृहत् + टीका = बृहट्टीका

3. म.परे होने पर पहले वर्ण को उसका पाँचवाँ वर्ण हो जाता है।
उत् + नति = उन्नति
तत् + मय = तन्मय
उत् + नत = उन्नत
वाक् + मय = वाड्मय
उत् + मत्त = उन्मत्त
षट् + मास = षण्मास
जगत् + नायक = जगन्नायक
षट् + मुख = षण्मुख
जगत् + नाथ = जगन्नाथ
चित् + मय = चिन्मय

PSEB 8th Class Hindi Vyakaran सन्धि

4. पूर्व वर्ण को तीसरा वर्ण
अप् + ज = अब्ज
तद् + भव = तद्भव
अच् + अन्त = अजन्त
तद् + रूप = तद्प
उत् + गार : उद्गार
दिक् + गज = दिग्गज
उत् + घाटन = उद्घाटन
दिक् + विजय = दिग्विजय
उत् + ज्वल = उज्वल
वाक् + ईश = वागीश
उत् + यान = उद्यान
भगवत् + भक्ति = भगवद्भक्ति
उत् + योग = उद्योग
विदत् + जन = विद्वज्जन
जगत् + ईश = जगदीश
सत् + गति = सद्गति
जगत् + बन्धु = जगबन्धु
सत् + भाव = सद्भाव
सत् + आनन्द = सदानन्द
सत् + जन = सज्जन
सत् + धर्म = सद्धर्म
षट् + आनन = षडानन

PSEB 8th Class Hindi Vyakaran सन्धि

5. पूर्व त् को द् और आगे ह को पूर्व वर्ण का चौथा वर्ण हो जाता है।
उत् + हार = उद्धार
तत् + हित = तद्धित
उत् + हरण = उद्धरण
वाक् + हरि = वाग्घरि

6. पूर्व त् को च् और आगे के श् को छ हो जाता है।
उत् + शृंखल = उच्छृखल
तत् + शिव = तच्छिव
उत् + शिष्ट = उच्छिष्ट
विद्युत् + शक्ति = विधुच्छक्ति

7. स्वर के आगे छ जाने पर छ के साथ च भी आ जाता है।
आ + छादन = आच्छादन
वृक्ष + छाया = वृक्षच्छाया
परि + छेद = परिच्छेद
सन्धि + छेद = सन्धिच्छेद

8. पूर्व म् को अगले वर्ण का पाँचवाँ वर्ण हो जाता है।
अहम् + कार = अहंकार
सम् + चय = संचय
सम् + गति = संगति
सम् + तति = सन्तति
सम् + पूर्ण = सम्पूर्ण
सम् + जय = संजय
सम् + तोष = सन्तोष
सन् + कल्प = संकल्प

PSEB 8th Class Hindi Vyakaran सन्धि

9. स, ल, र, व, श परे होने पर म् को अनुस्वार हो जाता है
सम् + सार = संसार
सम् + वाद = संवाद
सम् + लग्न = संलग्न
सम् + हार = संहार
सम् + योग = संयोग
सम् + सद् = संसद्
सम् + रक्षण = संरक्षण
सन् + शय = संशय
सम् + यम = संयम

10. ऋ, ष, र से परे न को ण हो जाता है।
ऋ+ न = ऋण
पोष् + अन = पोषण
तृष् + ना = तृष्णा
भर + अन = भरण
निर् + नय = निर्णय
भूष् + अन = भूषण
परि + नाम = परिणाम
निर् + मान = निर्माण

11. इ, उ से परे स को ष और ल परे होने पर त् को ल हो जाता है।
अभि + सेक = अभिषेक
वि + सम = विषम
नि + सेध = निषेध
सु + समा = सुषमा
नि + सिद्ध = निषिद्ध
सु + सुप्ति = सुषुप्ति
उत् + लंघन = उल्लंघन
तत् + लीन = तल्लीन
उत् + लास = उल्लास
उत् + लेख = उल्लेख

PSEB 8th Class Hindi Vyakaran सन्धि

(ग) विसर्ग सन्धि :

पूर्व विसर्ग को ओ हो जाता है
मनः + अनुकूल = मनोनुकूल
यशः + अभिलाशी = यशोभिलाषी
मनः + अनुसार = मनोऽनुसार
यशः + अर्जन = यशोर्जन
तेजः + मय = तेजोमय
यशः + गान = यशोगान
तपः + वन = तपोवन
मनः + योग = मनोयोग
मनः + रंजन = मनोरंजन
मनः + हर = मनोहर
मनः + रथ = मनोरथ
मनः + रम = मनोरम

र परे होने पर पूर्व र का लोप और इ को ई हो जाता है
निर् + रव = नीरव
निर् + रज = नीरज
निर् + रोग = नीरोग
निर् + रस = नीरस

पूर्व विसर्ग को र हो जाता है।
दुः + ग = दुर्ग
निः + गुण = निर्गुण
दुः + गुण = दुर्गुण
नि: + आकार = निराकार
दुः + गति = दुर्गति
निः + विघ्न = निर्विघ्न
दुः + गन्ध = दुर्गन्ध
नि: + जन = निर्जन
दुः + बल = दुर्बल
निः + धन = निर्धन
दुः + आशा = दुराशा
‘निः + बल = निर्बल
दुः + गम = दुर्गम

श परे होने पर विसर्ग को श हो जाता है
दुः + शासन = दुश्शासन
निः + छल = निश्छल
दुः + चरित्र = दुश्चरित्र
निः + चय = निश्चय

PSEB 8th Class Hindi Vyakaran सन्धि

प, क, ख फ परे होने पर विसर्ग को ष् हो जाता है
चतुः + पाद = चतुष्पाद
धनुः + टंकार = धनुष्टंकार
दुः + परिणाम = दुष्परिणाम
धनुः + पाणि = धनुष्पाणि

त, स, क के परे होने पर पूर्व विसर्ग को स् हो जाता है
अन्तः + तल = अन्तस्तल
नमः + ते = नमस्ते
दुः + तर = दुस्तर
नमः + कार = नमस्कार
निः + तार = निस्तार
पुरः + कार = पुरस्कार
निः + सन्देह = निस्सन्देह
श्रेयः + कर = श्रेयस्कर
उत्तर + अधिकारी = उत्तराधिकारी
निर् + दोष = निर्दोष

PSEB 8th Class Hindi Vyakaran उपसर्ग तथा प्रत्यय

Punjab State Board PSEB 8th Class Hindi Book Solutions Hindi Grammar Upasarg Tatha Pratyay उपसर्ग तथा प्रत्यय Exercise Questions and Answers, Notes.

PSEB 8th Class Hindi Grammar उपसर्ग तथा प्रत्यय

1. उपसर्ग

प्रश्न 1.
उपसर्ग किसे कहते हैं? इसके कितने प्रकार हैं?
उत्तर:
जो शब्दांश या क्रिया के आरम्भ में जुड़ कर उसके अर्थ को बदल देते हैं, उन्हें उपसर्ग कहा जाता है।
जैसे-प्र + हार = प्रहार (हार + माला या हार जाना) प्रहार का अर्थ है-हमला या चोट करना। उपसर्ग के भेद- (i) संस्कृत उपसर्ग (ii) हिन्दी उपसर्ग (iii) उर्दू उपसर्ग।

(i) संस्कृत के उपसर्ग :

उपसर्ग अर्थ उदाहरण
प्र आगे, अधिक प्रारम्भिक, प्रबल, प्रसन्न, प्रगति, प्रवाहित
परा पीछे, उल्टा पराभव, पराजय, पराकाष्ठा
अप बुरा, हीन अपकार, अपमान, अपयश
सम पूर्ण, अच्छा संस्था, सम्मान, संगति, संस्कार, सम्पूर्ण
अनु समान, पीछे अनुरूप, अनुज, अनुकरण, अनुसन्धान
अव बुरा, नीचे अवगुण, अवनति, अवतरण
निस् बिना निश्चल, निश्चिन्त, निष्कपट
निर् बिना निर्बल, निर्जन, निर्धन, निर्माण
दुस् बुरा दुष्कर्म, दुश्चरित्र, दुस्साहस
दुर् बुरा, कठिन दुर्दशा, दुर्जन, दुर्गम
वि भिन्न, विशेष वितरित, वियोग, विदेश, विज्ञान, विशेष
तक, से लेकर, उल्टा आजन्म, आचरण, आश्रम, आकुल
नि अभाव, विशेष निवारण, नियुक्त, निधन
अधि ऊपर अधिकार, अधिपति, अध्यक्ष
अति अच्छा, ऊपर अत्युत्तम, अत्यन्त, अतिकाल
सु अच्छा , सरल सुडौल, सुअवसर, सुगम
उत् ऊपर उत्पन्न, उद्धार, उत्कर्ष, उन्मुक्त
अभि सामने अभिमुख, अभ्यागत, अभिमान
प्रति सामने, उल्टा प्रत्यक्ष, प्रतिकूल, प्रत्येक
परि सब ओर परिजन, परिक्रमा, परिपूर्ण
उप निकट, गौण उपकार, उपमान, उपमन्त्री

(ii) हिन्दी के उपसर्ग :

उपसर्ग अर्थ उदाहरण
अन रहित अनमोल, अनजान, अनबन
नि रहित निडर, निहत्था
अध आधा अधमरा, अधखिला
रहित औगन, औतार, औघट
भर पूर भरपूर, भरपेट
उल्टा, विरुद्ध असत्य, अगम, अचर
सह साथ, सरल सहचर, सहयोग, सहकारी
कु बुरा कुपुत्र, कुयोग, कुकर्म
सत अच्छा सत्कर्म, सज्जन, सदाचार
स्व अपना स्वदेश, स्वतन्त्र

(iii) उर्दू के उपसर्ग :

उपसर्ग अर्थ उदाहरण
कम हीन, थोड़ा कम उम्र, कमज़ोर, कम्बख्त, कमसिन
खुश श्रेष्ठता खुशबू, खुशकिस्मत, खुशहाल, खुशखबरी, खुशनसीबी, खुशमिजाज
गैर निषेध गैर-हाज़िर, गैर-कानूनी, गैर-मुमकिन
ना अभाव नामुमकिन, नापसन्द, नाराज़, नालायक,नाचीज़, नादान, नासमझ
बद बुरा बदमाश, बदनाम, बदकिस्मत, बदबू, बदहज़मी, बदनीयत।
बे बिना बेकाम, बेइमान, बेवकूफ, बेनाम, बेकसूर, बेचारा, बेइज्जत, बेकार, बेअक्ल
ला बिना लाचार, लाजवाब, लापरवाह, लापता, लावारिस
सर मुख्य सरकार, सरपंच, सरदार, सरताज, सरगना
हम बराबर, समान हमउम्र, हमदर्दी, हमराह, हमवतन, हमपेशा

PSEB 8th Class Hindi Vyakaran उपसर्ग तथा प्रत्यय

2. प्रत्यय

प्रश्न 1.
प्रत्यय किसे कहते हैं और इसके कितने भेद हैं ?
उत्तर:
जो शब्दांश धातु या शब्द के अन्त में जुड़ कर उसके रूप को बदल देते हैं, उन्हें प्रत्यय कहा जाता है।
प्रत्यय के भेद-
(1) तिडन्त प्रत्यय
(2) कृदन्त
(3) तद्धित
(4) स्त्री प्रत्यय।

1. तिडन्त : जो धातु के साथ लगकर क्रिया बनाते हैं, उसे तिडन्त प्रत्यय कहते हैं ; जैसे-जान से गया, जाएगा, जाता हुआ।
2. कृदन्त : जो धातु के साथ लगकर शब्द लगाए , उसे कृदन्त प्रत्यय कहते हैं; जैसे-गायक (गौ + अक), लड़ाई (लड़ + आई) आदि। .
3. तद्धित : जो शब्द के साथ लगकर नवीन शब्दों का निर्माण करें उसे तद्धित प्रत्यय कहते हैं ; जैसे-कोमल, कोमलता, मृदु-मृदुता, सुनार (सुन + आर), लठैत, सपेरा आदि।
4. स्त्री प्रत्यय : जो शब्द के अन्त में जुड़ कर स्त्रीलिंग बना देते हैं ; जैसे ई, आ, इन, नी, आनी आदि। पुत्री, बाला, धोबिन, मोरनी, पण्डितानी।

प्रश्न 2.
उपसर्ग और प्रत्यय का भेद दो-दो उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
उपसर्ग शब्द के आदि में लगकर उसके अर्थ को बदल देता है, जबकि प्रत्यय शब्द के अन्त में लगकर उसके अर्थ को बदल देता है ; जैसे-उपसर्ग :
(i) भाव (विचार) से प्रभाव (प्र + भाव) = असर।
(ii) हार (माला) से प्रहार (प्र + हार) = चोट, हमला।
प्रत्यय :
(i) ईर्ष्या (डाह) से ईर्ष्यालु (डाह) करने वाला।
(ii) पाठ, (सबक) से पाठक (पढ़ने वाला)।

अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों से उपसर्ग और प्रत्यय अलग-अलग कर के लिखिए-
निराधार, परीक्षा, थानेदार, पराधीन, चालक, व्यावहारिक, प्रचार, नीरस, अत्यन्त, हार्दिक, प्रगति, थकावट।
उत्तर:

शब्द उपसर्ग प्रत्यय
निराधार निर
परीक्षा परी
थानेदार दार
पराधीन परा
चालक
व्यावहारिक इक
प्रचार प्र
नीरस निर्
अत्यन्त अति
हार्दिक
प्रगति प्र
थकावट आवट

PSEB 8th Class Hindi Vyakaran उपसर्ग तथा प्रत्यय

प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रत्यय लगाकर एक-एक शब्द की रचना करो
(क) ई, (ख) नी, (ग) वाला, (घ) मान, (ङ) इक, (च) ता, (छ) त्व, (ज) इत, (झ) पा, (ञ) वट।
उत्तर:
प्रत्यय – शब्द
(क) ई – बेटी
(ख) नी – मोरनी
(ग) वाला – दूध वाला
(घ) मान – शाक्तिमान
(ङ) इक – वैदिक
(च) ता – जीता
(छ) त्व – पशुत्व
(ज) इत – क्रोधित
(झ) पा – मोटापा
(ञ) वट – बनावट

प्रश्न 3.
उपसर्ग ‘अध’ लगाकर शब्द बनाएँमरा, खिला।
उत्तर:
अधमरा, अधखिला

प्रश्न 4.
निम्नलिखित प्रत्ययों की सहायता से दो-दो शब्द बनाइएइया, मान, वान, आइट।
उत्तर:
इया – खटिया, लुटिया।
मान – बुद्धिमान् शाक्तिमान।
वान – बलवान, दयावान।
आहट – खड़खड़ाहट, चिकनाहट।

प्रश्न 5.
वाला-प्रत्यय लगाकर शब्द बनाएँमिठाई, दूध, सब्जी।
उत्तर:
मिठाई वाला, दूध वाला, सब्जी वाला।

प्रश्न 6.
इक-प्रत्यय लगाकर शब्द बनाएँसंसार, बुद्धि, शरीर।
उत्तर:
सांसारिक, बौद्धिक, शारीरिक।

प्रश्न 7.
ई-प्रत्यय लगाकर शब्द बनाएँघमण्ड, सच्चा, लोभ।
उत्तर:
घमण्डी, सच्चाई, लोभी।

PSEB 8th Class Hindi Vyakaran उपसर्ग तथा प्रत्यय

प्रश्न 8.
ईय-प्रत्यय लगाकर शब्द बनाएँदर्शन, भारत, स्वर्ग, पुस्तक, राष्ट्र।
उत्तर:
दर्शनीय, भारतीय, स्वर्गीय, पुस्तकीय, राष्ट्रीय।

प्रश्न 9.
हार-प्रत्यय लगाकर शब्द बनाएँपालन, होन, तारण।
उत्तर:
पालनहार, होनहार, तारणहार।

प्रश्न 10.
इत-प्रत्यय लगाकर शब्द बनाएँक्रोध, सम्बन्ध।
उत्तर:
क्रोधित, सम्बन्धित।

प्रश्न 11.
मय-प्रत्यय लगाकर शब्द बनाएँमंगल, करुणा, दुःख।
उत्तर:
मंगलमय, करुणामय, दुःखमय।

प्रश्न 12.
ता-प्रत्यय लगाकर शब्द बनाएँप्रौढ़, क्रूर, प्रसन्न।
उत्तर:
प्रौढ़ता, क्रूरता, प्रसन्नता।

PSEB 8th Class Hindi Vyakaran उपसर्ग तथा प्रत्यय

प्रश्न 13.
इक-प्रत्यय लगाकर शब्द बनाएँधर्म, इतिहास, वेद, अंश।
उत्तर:
धार्मिक, ऐतिहासिक, वैदिक, आंशिक।

प्रश्न 14.
‘अनु’ उपसर्ग लगाकर निम्नलिखित शब्द बनाइए (कोई एक)शासन, मान, ज।
उत्तर:
(i) अनुशासन
(ii) अनुमान
(iii) अनुज।

PSEB 8th Class Hindi Vyakaran वाच्य विचार

Punjab State Board PSEB 8th Class Hindi Book Solutions Hindi Grammar Vachya Vichar वाच्य विचार Exercise Questions and Answers, Notes.

PSEB 8th Class Hindi Grammar वाच्य विचार

प्रश्न 1.
वाच्य किसे कहते हैं ? वाच्य के भेद भी लिखो।
अथवा
वाच्य किसे कहते हैं ? वह कितने प्रकार का होता है ? उदाहरण देकर स्पष्ट करो।
उत्तर:
क्रिया के जिस रूपान्तर से यह जाना जाए कि वाच्य में क्रिया के विधान का मुख्य विषय कर्ता है या कर्म अथवा भाव, उसे वाच्य कहते हैं।
वाच्य तीन प्रकार के हैं-
1. कर्तृवाच्य : जब क्रिया के विधान का विषय कर्ता हो ; उसे कर्तृवाच्य कहते हैं; जैसे-राधा गीत गाती है। राम पढ़ता है।
2. कर्मवाच्य : जब क्रिया के विधान का विषय कर्म हो ; उसे कर्मवाच्य कहते हैं; जैसे-राधा से गीत गाया जाता है। राम से पढ़ा जाता है।
3. भाववाच्य : जब क्रिया के विधान का विषय न कर्ता हो न कर्म वरन् भाव ही क्रिया के विधान का विषय हो तो उसे भाववाच्य कहा जाता है; जैसे-सुरेश से उठा जाता

विशेष :
1. कर्तवाच्य : सकर्मक और अकर्मक दोनों क्रियाओं का होता है।
2. कर्मवाच्य : यह केवल अकर्मक क्रियाओं का होता है।
3. भाववाच्य : यह केवल सकर्मक क्रियाओं का होता है।

कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य तथा भाववाच्य बनाने की विधि-
(क) कर्ता के साथ करण कारक लगाओ।।
(ख) कर्म के साथ कर्ता लगाओ और विभक्ति रहित कर दो।
(ग) कर्मवाच्य और भाववाच्य को कर्तृवाच्य में बदलते समय उल्टी प्रक्रिया करते हैं।

कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य :

कर्तृवाच्य – कर्मवाच्य
(1) मैं रोटी खाता हूँ। – (1) मुझसे रोटी खाई जाती है।
(2) मैं पत्र लिखता हूँ। – (2) मुझ से पत्र लिखा जाता है।
(3) मैं पिता जी को पत्र भेजता हूँ। – (3) मुझ से पिता जी को पत्र भेजा जाता है।

कर्तृवाच्य से भाववाच्य :

कर्तृवाच्य – भाववाच्य
(1) राम तेज़ दौड़ता है। – (1) राम से तेज़ दौड़ा जाता है।
(2) मैं सर्दियों में नहीं नहाता। – (2) मुझ से सर्दियों में नहीं नहाया जाता।

कर्मवाच्य से कर्तृवाच्य :

कर्मवाच्य – कर्तृवाच्य
(1) तुम से दूध नहीं पीया जाता। – (1) तुम दूध नहीं पी सकते।
(2) मुझ से ऐसी बातें नहीं सुनी जातीं। – (2) मैं ऐसी बात नहीं सुन सकता।

भाववाच्य से कर्तृवाच्य :

भाववाच्य – कर्तृवाच्य
(1) तुम से सवेरे नहीं उठा जाता। – (1) तुम सवेरे नहीं उठ सकते।
(2) हम से देर तक नहीं जागा जाता। – (2) हम देर तक नहीं जाग सकते।

PSEB 8th Class Hindi Vyakaran वाच्य विचार

वाच्य परिवर्तन सम्बन्धी कुछ उदाहरण :

कर्तवाच्य – कर्मवाच्य
(1) भिखारी भोजन खाता है। – भिखारी द्वारा भोजन खाया जाता है।
(2) पुलिस ने चोरों को पकड़ लिया है। – पुलिस द्वारा चोर पकड़े गए।
(3) चुनाव अधिकारी ने मतों की गिनती की। – चुनाव अधिकारी द्वारा मत गिने गए।
(4) राम ने खाना खाया। – राम द्वारा खाना खाया गया।
(5) शेर ने हिरण को मार डाला। – शेर द्वारा हिरण मारा गया।
(6) सीता लेख लिखेगी। – सीता द्वारा लेख लिखा जाएगा।
(7) मोहन ने दूध पीया। – मोहन द्वारा दूध पीया जाएगा।
(8) पशु चारा खाते हैं। – पशुओं द्वारा चारा खाया जाता है।
(9) क्या सुरेन्द्र ने सिनेमा देखा? – क्या सुरेन्द्र द्वारा सिनेमा देखा गया?
(10) अब मैं स्कूल नहीं जाऊँगा? – अब मुझसे स्कूल नहीं जाया जाएगा।
(11) अब मैं नहीं पढुंगा। – अब मुझसे पढ़ा नहीं जाएगा।
(12) मोहन समाचार-पत्र पढ़ता है। – मोहन द्वारा समाचार-पत्र पढ़ा जाता है।
(13) माता जी ने मुझे वहाँ देखा। – माता जी द्वारा मैं वहाँ देखा गया।
(14) कुत्ते ने उसे काट खाया। – कुत्ते द्वारा वह काट खाया गया।
(15) कमला ने दौड़ लगाई। – कमला द्वारा दौड़ लगाई गई।
(16) हमारी टीम ने मैच जीता। – हमारी टीम द्वारा मैच जीता गया।
(17) हम सो नहीं सकते। – हमसे सोया नहीं जाता।
(18) पिता जी पत्र लिखेंगे। – पिता जी द्वारा पत्र लिखा जाएगा।
(19) स्त्रियाँ गीत गा रही हैं। – स्त्रियों द्वारा गीत गाए जा रहे हैं।
(20) मनुष्य अन्न खाते हैं। – मनुष्य द्वारा अन्न खाया जाता है।

PSEB 8th Class Hindi Vyakaran वाच्य विचार

अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

1. नीचे लिखे वाक्यों में वाच्य बदलो-

(1) हम चाय नहीं पीते।
उत्तर:
हमसे चाय नहीं पी जाती।

(2) मैं कह नहीं सकता।
उत्तर:
मुझसे कहा नहीं जा सकता।

(3) विद्यार्थी ग्राम को जाता है।
उत्तर:
विद्यार्थी द्वारा ग्राम को जाया जाता है।

(4) सोहन द्वारा सिनेमा देखा जाता है।
उत्तर:
सोहन सिनेमा देखता है।

(5) विद्यार्थी हँसते हैं।
उत्तर:
विद्यार्थियों द्वारा हँसा जाता है।

(6) बुद्ध हँसे।
उत्तर:
बुद्ध द्वारा हँसा गया।

(7) गुरु जी ने उत्तर दिया।
उत्तर:
गुरु जी द्वारा उत्तर दिया गया।

(8) बुद्ध ने उसे शिष्य बनाया।
उत्तर:
बुद्ध द्वारा वह शिष्य बनाया गया।

(9) लड़कियाँ स्कूल को जाती हैं।
उत्तर:
लड़कियों द्वारा स्कूल जाया जाता है।

(10) माता पुत्र को दूध पिलाती है।
उत्तर:
माता द्वारा पुत्र को दूध पिलाया जाता है।

PSEB 8th Class Hindi Vyakaran वाच्य विचार

(11) चाँद चमकता है।
उत्तर:
चाँद द्वारा चमका जाता है।

(12) माली पौधों को सींचता है।
उत्तर:
माली द्वारा पौधे सींचे जाते हैं।

(13) किसान बीजों को बोता है।
उत्तर:
किसान द्वारा बीज बोये जाते हैं।

(14) छात्रों ने मेजें थपथपाईं।
उत्तर:
छात्रों द्वारा मेजें थपथपाई गईं।

(15) अध्यापकों ने प्रदर्शन किया।
उत्तर:
अध्यापकों द्वारा प्रदर्शन किया गया।

(16) भगत सिंह ने साण्डर्स को गोली से उड़ा दिया।
उत्तर:
भगत सिंह द्वारा साण्डर्स को गोली से उड़ा दिया गया।

(17) मैं आपकी बात नहीं समझा।
उत्तर:
मुझसे आपकी बात नहीं समझी गई।

(18) देखो, ऐसा मत करो।
उत्तर:
देखो, ऐसा न किया जाए।

(19) चपड़ासी ने घंटी बजाई।
उत्तर:
चपड़ासी द्वारा घंटी बजाई गई।

(20) वे तितलियाँ पकड़ते हैं।
उत्तर:
उनके द्वारा तितलियाँ पकड़ी जाती हैं।

(21) मैं यह पुस्तक पढ़ सकता हूँ।
उत्तर:
मुझसे यह पुस्तक पढ़ी जा सकती है।

(22) मैं तो ठहर गया, भला तुम कब ठहरा जाएगा।
उत्तर:
मुझसे तो ठहरा गया, भला तुमसे कब ठहरोगे।

(23) बुद्ध शान्तिपूर्वक मुस्कुरा रहे हैं।
उत्तर:
बुद्ध द्वारा शान्तिपूर्वक मुस्कुराया जा रहा है।

(24) योगी ने उसे योग विद्या सिखलाई।
उत्तर:
योग द्वारा उसे विद्या सिखलाई गई।

PSEB 8th Class Hindi Vyakaran काल प्रकरण

Punjab State Board PSEB 8th Class Hindi Book Solutions Hindi Grammar Kal Prakaran काल प्रकरण Exercise Questions and Answers, Notes.

PSEB 8th Class Hindi Grammar काल प्रकरण

प्रश्न 1.
काल किसे कहते हैं ? काल के भेद बताओ।
उत्तर:
क्रिया के जिस रूप से उसके होने या करने के समय का बोध हो, उसे काल कहते हैं। काल के मुख्य तीन भेद हैं-(1) भूतकाल, (2) वर्तमान काल, (3) भविष्यत् काल।

1. वर्तमान काल :
जिस क्रिया के रूप से पता चले कि काम अभी हो रहा है, उसे वर्तमान-काल कहते हैं।
इसके तीन भेद हैं-
(i) सामान्य वर्तमान।
(ii) अपूर्ण या तात्कालिक वर्तमान।
(iii) संदिग्ध वर्तमान।

(i) सामान्य वर्तमान : क्रिया का वह रूप जिससे काम के वर्तमान समय में सामान्यतः होने का बोध हो; जैसे–मोहन जाता है।
(ii) अपूर्ण वर्तमान : क्रिया का वह रूप जिससे ज्ञान होता है कि काम शुरू हो गया है और अभी जारी है, उसे अपूर्ण या तात्कालिक वर्तमान कहते हैं; जैसे–मोहन जा रहा
(ii) संदिग्ध वर्तमान : क्रिया का वह रूप जिससे मालूम होता है कि क्रिया वर्तमान में हो रही है, किन्तु उसके होने में सन्देह हो, उसे संदिग्ध वर्तमान कहते हैं; जैसे-मोहन जाता होगा।

2. भूतकाल :
जिस क्रिया के रूप से पता चले कि काम बीते हुए समय में पूरा हो गया, उसे भूतकाल की क्रिया कहते हैं।
इसके छ: भेद हैं-
(i) सामान्य भूत : क्रिया के जिस रूप से यह मालूम हो कि बीते हुए समय में सामान्यतः पूरा हो गया, उसे सामान्यत भूत कहते हैं; जैसे–मोहन ने साँप देखा।
(ii) आसन्न भूत : क्रिया के जिस रूप से यह ज्ञात हो कि काम अभी-अभी पूरा हुआ है, उसे आसन्न भूत कहते हैं; जैसे-मोहन ने साँप देखा है।
(ii) पूर्ण भूत : क्रिया के जिस रूप से यह ज्ञात हो कि काम बहुत पहले पूरा हो चुका था, उसे पूर्ण भूत कहते हैं; जैसे–मोहन ने साँप देखा था।
(iv) अपूर्ण भूत-क्रिया के जिस रूप से क्रिया का भूतकाल में होना पाया जाए , लेकिन पूर्ण हुआ या नहीं ज्ञात न हो, उसे अपूर्ण भूत कहते हैं; जैसे-मोहन साँप देख रहा था।
(v) संदिग्ध भूत-जिस क्रिया के करने या होने में सन्देह हो, उसे संदिग्ध भूत कहते हैं; जैसे–मोहन ने साँप देखा होगा।
(vi) हेतु-हेतुमद् भूत-क्रिया के जिस रूप से कार्य के भूतकाल में होने या किए जाने में शर्त पाई जाए, उसे हेतु-हेतुमद् भूत कहते हैं; जैसे-यदि साँप देखता तो चला जाता।

3. भविष्यत् काल :
क्रिया के जिस रूप से किसी काम का आने वाले समय में किया जाना या होना ज्ञात हो, उसे भविष्यत् काल कहते हैं।
इसके दो भेद हैं-
(i) सामान्य भविष्यत्।
(ii) सम्भाव्य भविष्यत्।

(i) सामान्य भविष्यत् : क्रिया के जिस रूप में काम का सामान्य रूप से भविष्य में किया जाना या होना पाया जाए, उसे सामान्य भविष्यत् कहते हैं; जैसे–मोहन जाएगा।
(ii) सम्भाव्य भविष्यत् : क्रिया का वह रूप जिससे काम के भविष्य मे होने या किए जाने की सम्भावना है, पर निश्चय नहीं, उसे सम्भाव्य भविष्यत् कहते हैं; जैसे-मोहन दिल्ली जाए।

PSEB 8th Class Hindi Vyakaran काल प्रकरण

प्रश्न 2.
भूतकाल किसे कहते हैं ? उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भूतकाल :
जिस क्रिया के रूप से पता चले कि काम बीते हुए समय में पूरा हो गया, उसे भूतकाल की क्रिया कहते हैं।
इसके छ: भेद हैं-
(i) सामान्य भूत : क्रिया के जिस रूप से यह मालूम हो कि बीते हुए समय में सामान्यतः पूरा हो गया, उसे सामान्यत भूत कहते हैं; जैसे–मोहन ने साँप देखा।
(ii) आसन्न भूत : क्रिया के जिस रूप से यह ज्ञात हो कि काम अभी-अभी पूरा हुआ है, उसे आसन्न भूत कहते हैं; जैसे-मोहन ने साँप देखा है।
(ii) पूर्ण भूत : क्रिया के जिस रूप से यह ज्ञात हो कि काम बहुत पहले पूरा हो चुका था, उसे पूर्ण भूत कहते हैं; जैसे–मोहन ने साँप देखा था।
(iv) अपूर्ण भूत-क्रिया के जिस रूप से क्रिया का भूतकाल में होना पाया जाए , लेकिन पूर्ण हुआ या नहीं ज्ञात न हो, उसे अपूर्ण भूत कहते हैं; जैसे-मोहन साँप देख रहा था।
(v) संदिग्ध भूत-जिस क्रिया के करने या होने में सन्देह हो, उसे संदिग्ध भूत कहते हैं; जैसे–मोहन ने साँप देखा होगा।
(vi) हेतु-हेतुमद् भूत-क्रिया के जिस रूप से कार्य के भूतकाल में होने या किए जाने में शर्त पाई जाए, उसे हेतु-हेतुमद् भूत कहते हैं; जैसे-यदि साँप देखता तो चला जाता।

PSEB 8th Class Hindi Vyakaran काल प्रकरण

अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

1. निम्नलिखित वाक्यों को वर्तमान काल में बदलो

(1) गतवर्ष मोहन ने रामायण की कहानी पढ़ी थी।
उत्तर:
इस वर्ष मोहन रामायण की कहानी पढ़ता

(2) एक नहीं अनेक उदाहरण मिल जाएँगे।
उत्तर:
एक नहीं अनेक ऐसे उदाहरण मिल जाते

(3) सभा में उपस्थित हर एक सदस्य मत है।
उत्तर:
सभा में उपस्थित हर एक सदस्य का यही का यही मत था।

(4) मैं आपके दर्शन करने आया था।
उत्तर:
मैं आपके दर्शन करने आया हूँ।

(5) गाँव के ज्यादातर लोग अनपढ़ थे।
उत्तर:
गाँव के ज्यादातर लोग अनपढ़ हैं।

(6) वह दूसरे कमरे में गया।
उत्तर:
वह दूसरे कमरे में जाता है।

(7) धनी ने ब्राह्मण को दान दिया।
उत्तर:
धनी ब्राह्मण को दान देता है।

(8) इसी नदी ने रुख बदल लिया।
उत्तर:
यह नदी रुख बदलती है।

PSEB 8th Class Hindi Vyakaran काल प्रकरण

2. निम्नलिखित वाक्यों को भूतकाल में बदलो

(1) फसल कहीं-कहीं से कटी हुई है।
उत्तर:
फसल कहीं-कहीं से कटी हुई थी।

(2) अर्जुन की आंखें भर आती हैं।
उत्तर:
अर्जुन की आँखें भर आईं।

(3) वह गुरु की ओर देखता है।
उत्तर:
उसने गुरु की ओर देखा।

(4) एकलव्य के अंगूठे से रक्त बहता है।
उत्तर:
एकलव्य के अंगूठे से रक्त बहने लगा।

(5) देव आठवीं श्रेणी का विद्यार्थी है।
उत्तर:
देव आठवीं श्रेणी का विद्यार्थी था।

(6) मैं स्कूल में काम करता हूँ।
उत्तर:
मैंने स्कूल में काम किया।

(7) माता जी सुबह जल्दी उठती हैं।
उत्तर:
माता जी सुबह जल्दी उठतीं थीं।

(8) महेश बुराई से घृणा करता है।
उत्तर:
महेश बुराई से घृणा करता था।

PSEB 8th Class Hindi Vyakaran काल प्रकरण

3. निम्नलिखित वाक्यों को भूतकाल से भविष्यत् काल में बदलो

(1) राम आया, श्याम गया।
उत्तर:
राम आएगा, श्याम जाएगा।

(2) मोहन ने तलवार चलाई।
उत्तर:
मोहन तलवार चलाएगा।

(3) मैंने बाजा बजाया।
उत्तर:
मैं बाजा बजाऊँगा।

(4) सोहन ने गीता पढ़ी।
उत्तर:
सोहन गीता पढ़ेगा।

(5) देव ने दरबार साहब देखा।
उत्तर:
देव दरबार साहब देखेगा।

(6) गार्ड ने हरी झंडी दिखाई।
उत्तर:
गार्ड हरी झंडी दिखाएगा।

(7) मैं आज घर नहीं गई।
उत्तर:
मैं आज घर नहीं आऊँगी।

PSEB 8th Class Hindi Vyakaran अविकारी शब्द (अव्यय)

Punjab State Board PSEB 8th Class Hindi Book Solutions Hindi Grammar Avikari Shabd (Avyay) अविकारी शब्द (अव्यय) Exercise Questions and Answers, Notes.

PSEB 8th Class Hindi Grammar अविकारी शब्द (अव्यय)

प्रश्न 1.
अव्यय किसे कहते हैं ? ये कितने प्रकार के होते हैं ?
उत्तर:
जिन शब्दों का लिंग, वचन, कारक, काल आदि के कारण कोई रूप नहीं बदलता उन्हें अव्यय कहते हैं। अव्यय का दूसरा नाम अविकारी शब्द है।
अव्यय चार प्रकार के होते हैं-
(1) क्रिया विशेषण
(2) सम्बन्ध बोधक
(3) समुच्चय बोधक
(4) विस्मयादि बोधक।

PSEB 8th Class Hindi Vyakaran अविकारी शब्द (अव्यय)

1. क्रिया विशेषण

प्रश्न 1.
क्रिया विशेषण का लक्षण (परिभाषा) लिखकर उसके भेदों का वर्णन करो।
अथवा
क्रिया विशेषण किसे कहते हैं ? उसके कितने भेद हैं ?
उत्तर:
वे शब्द जो क्रिया की विशेषता प्रकट करें, उसे क्रिया विशेषण कहते हैं; जैसे-धीरे-धीरे, यहाँ से, कल, आज, ऊँचे से ऊँचाई आदि। क्रिया विशेषण के चार भेद हैं
1. कालवाचक :
जो क्रिया विशेषण शब्द क्रिया के होने का समय सूचित करते हैं उन्हें कालवाचक क्रिया विशेषण कहते हैं; जैसे-आज, कल, परसों, जब, तब, कब, साय, प्रात: आदि।
उदाहरण :
(i) मैं प्रातः व्यायाम करता हूँ।
(ii) आजकल वर्षा हो रही है।
(iii) परसों मेला देखने चलेंगे।

2. स्थानवाचक :
जो क्रिया विशेषण क्रिया के स्थान या दिशा के विषय में बोध कराएँ उन्हें स्थानवाचक क्रिया विशेषण कहते हैं; जैसे–यहाँ, वहाँ, आगे, पीछे, मध्य, ऊपर, नीचे, इधर, किधर, दाहिने, बाएँ, सामने आदि।
उदाहरण :
(i) इधर-उधर मत देखो।
(ii) भीतर जा कर पढ़ो।
(ii) यहाँ बैठो।

3. परिमाणवाचक :
जो क्रिया विशेषण क्रिया के परिमाण को प्रकट करें उन्हें परिमाणवाचक क्रिया विशेषण कहते हैं; जैसे-अधिक, जितना, थोड़ा, बहुत, कम आदि।
उदाहरण :
(i) कम बोलो, अधिक सोचो।
(ii) तनिक हँसो भी।
(iii) चाय में दूध काफी है, चीनी थोड़ी है।

4. रीतिवाचक :
जो क्रिया विशेषण क्रिया की रीति या विधि का बोध कराएँ उन्हें रीतिवाचक क्रिया विशेषण कहते हैं; जैसे-धीरे-धीरे, जल्दी, शीघ्र, तेज़ आदि।
उदाहरण :
(i) दिन जल्दी-जल्दी ढलता है।
(ii) मैं तो ठीक पढ़ रहा था।
(iii) क्या तुम पैदल चलोगे ?

PSEB 8th Class Hindi Vyakaran अविकारी शब्द (अव्यय)

2. संबंध बोधक

प्रश्न 1.
संबंध बोधक अव्यय किसे कहते हैं ? उदाहरण देकर स्पष्ट करो।
उत्तर:
जो संज्ञा और सर्वनाम के आगे-पीछे आ कर वाक्यों के दूसरे शब्दों से उसका सम्बन्ध बताते हैं, उन्हें सम्बन्ध बोधक अव्यय कहा जाता है; जैसे-ऊपर, भीतर, आगे, पीछे, ऊँचे, नीचे, समीप, दूर, बाहर, सहित आदि।
उदाहरण:
(i) डर के मारे उसका चेहरा पीला पड़ गया।
(ii) मेरा घर विद्यालय के पीछे है।

3. समुच्चय बोधक

प्रश्न 1.
समुच्चय बोधक अथवा योजक अव्यय किसे कहते हैं ?
अथवा
योजक की परिभाषा लिखें।
उत्तर:
जो दो शब्दों, वाक्यांशों या वाक्यों को मिलाते हैं, उन्हें समुच्चय बोधक या योजक अव्यय कहते हैं; जैसे-और, भी, तथा, कि, अथवा, अतः, किन्तु, परन्तु, इसलिए, मानो आदि।
उदाहरण :
(i) मोहन ने कहा कि मैं आपकी प्रतीक्षा करूँगा।
(ii) मैंने तो बहुत कहा किन्तु वह नहीं माना।

4. विस्मयादि बोधक

प्रश्न 1.
विस्मयादि बोधक किसे कहते हैं ? उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
जो शब्द विस्मय हर्ष, शोक, घृणा आदि भावों को प्रकट करते हैं, उन्हें विस्मयादि बोधक कहते हैं; जैसे-ओहो, आह, हाय, बाप रे, खूब, वाह-वाह, धन्य, अरे, अजी इत्यादि।
उदाहरण :
(i) हाय ! मैं मारा गया।
(ii) वाह ! क्या फिल्म थी।
(iii) धन्य ! गुरुदेव जो आप यहाँ पधारे।

PSEB 8th Class Hindi Vyakaran अविकारी शब्द (अव्यय)

आति लघत्तरात्मक प्रश्न

1. निम्नलिखित वाक्यों में से क्रिया विशेषण शब्द छाँटो

प्रश्न 1.
(क) रवि आज भोजन नहीं करेगा।
(ख) धीरे-धीरे चलो।
(ग) इतना मत पढ़ो।
(घ) वहाँ घोर अंधेरा है।।
(ङ) उस दिन वर्षा सुबह से हो रही थी।
(च) गुफा में रुक-रुक कर पानी टपक रहा था।
(छ) धीरे-धीरे सब ठीक हो जाएगा।
(ज) शेषनाग नामक स्थान पर रात भर टिकना अनिवार्य होता है।
(झ) वीर पुरुष किसी से नहीं डरता।
(ज) मोहन आज भोजन नहीं करेगा।
उत्तर:
(क) आज
(ख) धीरे-धीरे
(ग) इतना
(घ) वहाँ
(ङ) सुबह
(च) रुक-रुक
(छ) धीरे-धीरे
(ज) रात भर
(झ) किसी से
(ज) आज।

2. निम्नलिखित वाक्यों में से सम्बन्ध बोधक शब्द छाँटो

प्रश्न 1.
(क) तुम्हारे अतिरिक्त यहाँ कोई नहीं है।
(ख) गाँव से परे मठ में एक पुजारी रहता था।
(ग) मैं अध्यापक के विरुद्ध गवाही नहीं दूंगा।
(घ) पेड़ के नीचे छाया का आनंद लो।
उत्तर:
(क) तुम्हारे अतिरिक्त,
(ख) परे,
(ग) के विरुद्ध
(घ) नीचे।

PSEB 8th Class Hindi Vyakaran अविकारी शब्द (अव्यय)

3. निम्नलिखित वाक्यों में समुच्चय बोधक (योजक) शब्द छाँटो

प्रश्न 1.
(क) नित्य भजन कीजिए, ताकि मन शांत रहे।
(ख) योगेश और अवधेश दोनों साथी हैं।
(ग) रवि गाता ही नहीं, अपितु नाचता भी है।
(घ) यदि इस समय ओले पड़े, तो फसल नष्ट हो जाएगी।
(ङ) जो करेगा सो भरेगा।
(च) मेरे लिए जैसा रमेश वैसे ही तुम।
उत्तर:
(क) ताकि,
(ख) और,
(ग) अपितु,
(घ) यदि, तो,
(ङ) जो, सो,
(च) जैसा, वैसे।

4. निम्नलिखित वाक्यों में से विस्मयादि बोधक शब्द छाँटो

प्रश्न 1.
(क) छिः छिः मोहिनी ! तुम कितनी गन्दी हो।
(ख) ओह, कितना बड़ा साँप है।
(ग) हाय ! हाय ! दुष्ट पुत्र ने मुझे बर्बाद कर दिया।
(घ) शाबाशं ! कैप्टन तुम्हारी टीम जीत गई।
(ङ) वाह! कितना सुन्दर दृश्य है।
उत्तर:
(क) छिः छिः
(ख) ओह !
(ग) हाय ! हाय !
(घ) शाबाश
(ङ) वाह!

PSEB 8th Class Hindi Vyakaran अविकारी शब्द (अव्यय)

प्रश्न 2.
‘ओह’ शब्द को विस्मयादिबोधक वाक्य में प्रयोग कीजिए।
उत्तर:
ओह ! यह क्या हुआ।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 1 कोई नहीं बेगाना

Punjab State Board PSEB 8th Class Hindi Book Solutions Chapter 1 कोई नहीं बेगाना Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 8 Hindi Chapter 1 कोई नहीं बेगाना

Hindi Guide for Class 8 PSEB कोई नहीं बेगाना Textbook Questions and Answers

(क) भाषा ज्ञान

I. शब्दार्थ

उत्तर:
गर्जना = तीव्र आवाज़, गरजने की क्रिया।
वीर बाँकुरे = बहादुर जवान।
मशक = भेड़ या बकरी की खाल की सिलाई कर के बनाया हुआ थैला जिस में भिश्ती पानी ढोते हैं।
समदृष्टि = सब को बराबर समझना।
बेगाना = पराया, अनजान।
माहेर = क्रुपा
सेवारात = सेवा में लीन।

II. अर्थ समझते हुए वाक्यों में प्रयोग करें :

घमसान, उपहार, समदृष्टि, उपकार, उपचार, दुःख हरना, जीवनदान देना, जान बचाना।
उत्तर:
(i) घमसान = आज के युग में किसी भी तरीके से धन इकट्ठा करने का घमसान मचा हुआ है, जो उचित नहीं है।
(ii) उपहार = मेरे जन्मदिन पर मम्मी-पापा ने मुझे उपहार में एक सुन्दर घड़ी दी है।
(ii) समदृष्टि = सभी की समदृष्टि ही समाज को ऊँचा उठा सकती है।
(iv) उपकार = आप के उपकार का मूल्य मैं कभी नहीं चुका सकता।
(v) उपचार = हमारे नगर में घायल पक्षियों के उपचार का सुन्दर प्रबन्ध किया गया
(vi) दुःख हरना = सभी प्राणियों के दुःख हरना तो ईश्वर के हाथ में ही है।
(vii) जीवनदान देना = डॉक्टरों के परिश्रम ने रोगी को जीवन दान देना लगभग निश्चित कर दिया था।
(viii) जान बचाना = अब रोगी की जान बचाना डॉक्टरों के लिए सम्भव है।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 1 कोई नहीं बेगाना

(ख) विचार बोध

I. इन प्रश्नों के उत्तर एक या दो वाक्यों में लिखें :

प्रश्न (क)
भाई कन्हैया कौन था ?
उत्तर-भाई कन्हैया गुरु गोबिन्द सिंह जी के शिष्य थे और वे गुरु घर के एक सेवादार थे।

प्रश्न (ख)
वह घायलों की सेवा किस प्रकार करता था ?
उत्तर:
भाई कन्हैया प्यास से परेशान घायल लोगों को पानी पिला कर सेवा करता था।

प्रश्न (ग)
वह अपने और बेगाने का भेदभाव क्यों नहीं करता था ?
उत्तर:
उन्हें सभी इन्सानों में ईश्वर दिखाई देता था, इसलिए वह अपने और बेगाने में भेदभाव नहीं करता था।

प्रश्न (घ)
विरोधियों ने दशमेश पिता से उसकी क्या शिकायत की ?
उत्तर:
विरोधियों ने गुरु जी से शिकायत की थी कि वह युद्धभूमि में घायल पड़े मुसलमान सैनिकों को भी पानी पिलाता था जिससे वे जीवन दान पा जाते थे जिससे सिख वीरों की मेहनत बेकार हो जाती थी। वह बेगानों की सहायता करता है।

प्रश्न (ङ)
भाई कन्हैया ने गुरु जी को शिकायत का क्या उत्तर दिया ?
उत्तर:
भाई कन्हैया ने गुरु जी को शिकायत का उत्तर देते हुए कहा था कि उसे सभी में गुरु जी का रूप दिखता था। उसके लिए कोई पराया नहीं था।

प्रश्न (च)
गुरु जी ने भाई कन्हैया को मरहम क्यों दी ?
उत्तर:
गुरु जी भाई कन्हैया के इन्सानियत से भरे स्वभाव से खुश हो गए थे और उन्होंने उसे मरहम दी थी जिससे वह युद्धभूमि में घायल पड़े सैनिकों की पीड़ा और कष्टों को भी कम कर सके। वे किसी प्रकार का भेद-भाव नहीं करते थे।

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II. इन काव्य-पंक्तियों की सप्रसंग व्याख्या करें :

“अव्वल अल्ला नूर वही है, कुदरत के सब बन्दे,
सब जग फैला नूर उसी का, कौन भले कौन मन्दे।”
उत्तर:
भाई कन्हैया ने गुरु गोबिन्द सिंह जी के समक्ष कहा था कि मैंने तो गुरुवाणी का केवल इतना ही अर्थ समझा है कि मुझे हर प्राणी में परम पिता परमात्मा ही दिखाई देते हैं। मुझे सभी अपने लगते हैं और कोई भी पराया नहीं लगता। वह परमात्मा ही तो सबसे श्रेष्ठ हैं, प्रमुख हैं, सर्वोपरि है। इस सृष्टि की ज्योति वही है और सारे इन्सान, सारे प्राणी उसी परमात्मा की कुदरत से उत्पन्न हुए हैं। सारे संसार में उसी का तेज फैला हुआ है। केवल वही है जिससे सारी सृष्टि बनी है। जब सभी उस परमात्मा की सन्तान हैं तो फिर कौन अच्छा है और कौन बुरा ? अर्थात् न कोई बुरा है और न अच्छा, न कोई छोटा है और न कोई बड़ा। सारे मानव एक-दूसरे के समान हैं। भाव है कि हमें धर्म और जाति के आधार पर मानव को नहीं बांटना चाहिए।

(ग) व्यावहारिक व्याकरण

I. ‘उप’ और ‘बे’ शब्दांश लगाकर नये शब्द बनायें :

उप + हार = उपहार
उप + वास = ………………..
उप + नयन = ………………..
उप + हास = ………………..
उप + कार = ………………..
बे + रहम = ………………..
बे + कायदा = ………………..
बे + कसूर = ………………..
बे + मेल = ………………..
बे + रोक = ………………..
बे + मिसाल = ………………..
उत्तर:
उप + हार = उपहार
उप + वास = उपवास
उप + नयन = उपनयन
उप + हास = उपहास
उप + कार = उपकार
बे + रहम = बेरहम
बे + कायदा = बेकायदा
बे + कसूर = बेकसूर
बे + मेल = बेमेल
बे + रोक = बेरोक
बे + मिसाल = बेमिसाल।

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II. ‘गुरु’ लगाकर नये शब्द बनायें जैसे-गुरुवाणी

उत्तर:
गुरुकृपा, गुरुशिक्षा, गुरुप्रदत्त, गुरुदक्षिणा, गुरुदास, गुरुप्रशंसा, गुरुनिष्ठा, गुरुपद, गुरुपाद, गुरुगौरव, गुरुकुल, गुरुदीक्षा, गुरुप्रेम।

III. इन शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखें :

शत्रु = …………..
युद्ध = …………..
धरती = …………..
पानी = …………..
गर्मी = …………..
उपहार = …………..
गुरु दुःख = …………..
बेगाना = …………..
मेहर = …………..
कृपा = …………..
नूर = …………..
हाथ = …………..
घाव = …………..
उत्तर:
शत्रु = दुश्मन , अरि।
युद्ध = लड़ाई , रण।
धरती = अवनि , पृथ्वी।
पानी = जल , नीरज।
गर्मी = ग्रीष्म , निदाघ।
उपहार = भेंट , सौगात।
गुरु = शिक्षक , बड़ा।
दुःख = पीड़ा , कष्ट।
बेगाना = पराया , अन्य।
मेहर = कृपा , दया।
कृपा = दया , करुणा।
नूर = प्रकाश , चमक।
हाथ = हस्त , कर।
घाव = चोट , जख्म।

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IV. विपरीत अर्थ वाले शब्द लिखें:

युद्ध = ……………
दुःख = …………..
गुरु = …………..
मुश्किल = …………..
धरती = …………..
शत्रु = …………..
प्यास = …………..
शिकायत = …………..
उत्तर:
युद्ध = शान्ति
दुःख = सुख
गुरु = चेला (शिष्य)
मुश्किल = आसान
धरती = आकाश
शत्रु = मित्र
प्यास = तृप्ति/तृप्त
शिकायत = रजा/सुलह।

PSEB 8th Class Hindi Guide कोई नहीं बेगाना Important Questions and Answers

बहुविकल्पीय प्रश्न निम्नलिखित. प्रश्नों के उत्तर सही विकल्प चुनकर लिखें

प्रश्न 1.
‘कोई नहीं बेगाना’ कविता के कवि कौन हैं ?
(क) डॉ० योगेन्द्र बख्शी
(ख) डॉ० बच्चन
(ग) डॉ० रघुवंश ।
(घ) डॉ० संसार चन्द्र।
उत्तर:
डॉ. योगेन्द्र बख्शी।

प्रश्न 2.
कहाँ घमासान युद्ध हुआ था ?
(क) अमृतसर
(ख) पटना साहिब
(ग) आनन्दपुर साहिब
(घ) बंगला साहिब।
उत्तर:
आनन्दपुर साहिब।

प्रश्न 3.
दशमेश गुरु कौन हैं ?
(क) गुरु नानक देव जी
(ख) गुरु तेग बहादुर जी
(ग) गुरु गोबिन्द सिंह जी
(घ) गुरु रामदास जी।
उत्तर:
गुरु गोबिन्द सिंह जी।

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प्रश्न 4.
कन्धे पर मशक उठाए पानी कौन पिला रहा था ?
(क) भाई बंदा
(ख) भाई कन्हैया
(ग) भाई रमैया
(घ) भाई सतनाम।
उत्तर:
भाई कन्हैया।

प्रश्न 5.
‘देखू हर प्राणी में प्रभुवर’ किसका मतलब है ?
(क) गुरुवाणी का
(ख) कन्हैया का
(ग) योगेन्द्र बख्शी का
(घ) रमैया का।
उत्तर:
गुरुवाणी का।

कोई नहीं बेगाना सप्रसंग व्याख्या

1. आनन्दपुर साहब के बाहर
जब हुआ युद्ध घमसान,
दशमेश गुरु का हर सिख
लड़ो हथेली पर रख जान।
तोपों की गर्जना भयंकर
‘सत श्री अकाल’ का गान,
अल्ला हू अकबर के नारे
बहरे कर देते थे कान।

शब्दार्थ:
घमसान = भयंकर, बहुत ज़ोर से। दशमेश = दशम् गुरु श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी। हर = प्रत्येक। गर्जना = तीव्र आवाज़, गरजने की क्रिया।

प्रसंग:
यह पद्यांश डॉ० योगोन्द्र बख्शी द्वारा रचित ‘कोई नहीं बेगाना’ नामक कविता से लिया गया है। इसमें कवि ने आनन्दपुर साहब के बाहर सिखों और मुसलमानों के बीच हुए भयंकर युद्ध का वर्णन किया है।

व्याख्या:
कवि कहता है कि जब आनन्दपुर साहब के बाहर सिख-सैनिकों के साथ मुसलमानों की लड़ाई हुई थी तब दशम गुरु गोबिन्द सिंह की सेना का प्रत्येक सिख सिपाही मरने का डर छोड़ कर जी-जान से लड़ा था। तोपों की भयंकर आवाज़, सिख वीरों के द्वारा किया गया ‘सत श्री अकाल’ का गान और मुसलमान सैनिकों के ‘अल्ला हु अकबर’ के नारे कानों को बहरा कर रहे थे। भाव है कि दोनों पक्षों के सैनिक अति वीरता और साहस से एक-दूसरे के सामने अपनी-अपनी जीत के लिए डटे हुए थे।

विशेष:

  1. कवि ने सिख सैनिकों और मुसलमानों के बीच हुई लड़ाई की भयंकरता को प्रकट किया है।
  2. कवि की भाषा सरल और सरस है।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 1 कोई नहीं बेगाना

2. वीर बाँकुरे डटकर लड़ते
धरती पर बिछ-बिछ जाते,
गिरते-गिरते फिर उठते
पानी-पानी चिल्लाते।
गर्मी का यह कठिन महीना
उन वीरों पर भारी था,
जलते तपते मैदानों में
युद्ध अभी तक जारी था।

शब्दार्थ: वीर बाँकुरे = बहादुर जवान। कठिन = कठोर, मुश्किल। जारी = चलना, होना।

प्रसंग:
प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक में संकलित कविता ‘कोई नहीं बेगाना’ से ली गई हैं। इसके रचयिता डॉ० योगेन्द्र बख्शी हैं। कवि ने सिखों और मुसलमान वीरों के बीच गर्मियों के मौसम में हुए भयंकर युद्ध का वर्णन किया है।

व्याख्या:
कवि कहता है कि सिख और मुसलमान सेनाओं के बहादुर जवान एकदूसरे के विरुद्ध डट कर लड़ रहे थे। वे एक-दूसरे के आघात से घायल होकर धरती पर गिरते जाते थे। वे गिर कर फिर लड़ने के लिए उठ जाते थे और अपनी प्यास बुझाने के लिए ‘पानी-पानी’ चिल्लाते थे। गर्मी का बहुत कष्टकारी महीना था। युद्ध लड़ने वाले दोनों तरफ के बहादुरों के लिए गर्मी का महीना बहुत भारी पड़ रहा था। सूर्य की गर्मी से मैदान तप रहे थे, दहक रहे थे लेकिन उनके कारण लड़ाई बन्द नहीं हो रही थी। दोनों पक्षों के बीच लड़ाई अभी तक बिना रुके हुए चल रही थी। भाव है कि सूर्य की तेज गर्मी और तपे हुए मैदान भी दोनों पक्षों की लड़ाई को रोकने में असफल रहे थे।

विशेष:

  1. कवि ने सिख और मुस्लिम सैनिकों के बीच हुई भयंकर लड़ाई का वर्णन किया है जिसे विपरीत परिस्थितियां भी रोक नहीं पा रही थीं।
  2. भाषा, सरल-सरस और जोश से भरी हुई है। |

3. जलती-तपती दोपहरी में
गुरुघर का इक सेवादार,
कन्धे पर इक मशक उठाए
देता पानी का उपहार।
संगत की सेवा करता
भाई कन्हैया उस का नाम
गुरुवाणी का भक्त अनोखा
करता जनसेवा का काम।

शब्दार्थ:
जलती-तपती = गर्मी से जली और तपी हुई। दोपहरी = दोपहर का समय। इक = एक। मशक = भेड़ या बकरी की खाल की सिलाई कर के बनाया हुआ थैला जिस में भिश्ती पानी ढोते हैं। उपहार = भेंट। अनोखा = अद्भुत ।

प्रसंग:
प्रस्तुत पंक्तियाँ डॉ० योगेन्द्र बख्शी द्वारा रचित कविता ‘कोई नहीं बेगाना’ से ली गई हैं जिसमें कवि ने सब मानव एक समान है का संदेश दिया है।

व्याख्या:
तेज गर्मी के कारण दोपहर का समय जल-सा रहा था; दहक रहा था। उस गर्मी में गुरुघर का एक सेवादार अपने कन्धे पर भेड़-बकरी की खाल से बनी एक मशक उठा कर सभी सैनिकों को पानी की भेंट दे रहा था। वह घायल और प्यासे सैनिकों को पानी पिला रहा था। सभी लोगों की समान रूप से सेवा करने वाले उस व्यक्ति का नाम भाई कन्हैया था। वह गुरुवाणी का अनूठा और अद्भुत भक्त था। वह लोगों की सेवा करने का काम करता था। भावार्थ है कि दोपहर की तेज गर्मी में अपनी तपन को भुला कर भाई कन्हैया सभी भेद- भावों से दूर रह लोगों की सेवा करता था। वह सच्चा सेवादार था।

विशेष:

  1. कवि ने भाई कन्हैया के इन्सानी गुण को प्रकट किया है।
  2. भाषा सरल और सरस है।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 1 कोई नहीं बेगाना

4. सब में गुरु का रूप देखता
सबकी सेवा करता था,
हर प्यासे की प्यास बुझाता
दुःख सभी के हरता था।
समदृष्टि थी शत्रु मित्र में
दोनों उसको एक समान,
हर घायल को पानी देना
होता उसका पहला काम।

शब्दार्थ: दुःख = कष्ट, पीड़ा। हरता = दूर करता, मिटाता। समदृष्टि = सब को बराबर समझना। शत्रु = दुश्मन। समान = बराबर ।

प्रसंग:
प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक में संकलित कविता ‘कोई नहीं बेगाना’ से ली गई हैं जिसके रचयिता डॉ० योगेन्द्र बख्शी हैं। कवि ने भाई कन्हैया के इन्सानियत के भावों और सेवा-भाव को व्यक्त किया है।

व्याख्या:
कवि कहता है कि भाई कन्हैया सभी लोगों में अपने गुरु का रूप देखता था और उन सब की एक समान सेवा करता था। वह हर प्यासे की प्यास बुझाता था और गर्मी से उत्पन्न सभी के दुखों को मिटाता था। उसकी नज़र में न कोई शत्रु था और न कोई मित्र था। शत्रु और मित्र दोनों ही उसके लिए एक बराबर थे। युद्धभूमि में हर घायल व्यक्ति को पानी देना उसका पहला काम था। भाव है कि सच्चे इन्सान के मन में किसी के लिए अपनेपराये का भेदभाव नहीं होता।

विशेष:

  1. कवि ने भाई कन्हैया के इन्सानियत और बड़प्पन के भावों को प्रकट किया है जिसके लिए सारे इन्सान एक बराबर थे।
  2. कवि की भाषा सरल और सरस है।

5. हुई साँझ तो सिख वीरों ने
छेड़ी एक विरोधी तान,
जिनको मुश्किल से हम मारे
उनको देता जीवन दान।
लगता गुरुवर ! भाई कन्हैया
का दुश्मन से नाता है।
घायल शत्रु को जल देता,
उसकी जान बचाता है।

शब्दार्थ: साँझ = शाम, संध्या। वीरों = बहादुरों। तान = स्वर, आवाज़। मुश्किल = कठिनाई। नाता = सम्बन्ध।

प्रसंग:
प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक में दी गई कविता ‘कोई नहीं बेगाना’ से ली गई हैं जिसके रचयिता डॉ० योगेन्द्र बख्शी हैं। भाई कन्हैया बिना किसी भेदभाव के घायल सिख और मुसलमान सैनिकों को पानी पिलाकर जीवन दान दिया करता था। सिख सैनिकों को यह अच्छा नहीं लगता था।

व्याख्या:
कवि कहता है कि जैसे ही शाम हुई और लड़ाई बन्द हुई वैसे ही सिख बहादुरों ने एक ही आवाज़ में भाई कन्हैया के विरोध में ऊँची आवाज़ उठाई। उन्होंने कहा कि जिन मुसलमान सैनिकों को वे मुश्किल से घायल करते थे उन्हें भी पानी पिला कर वह उन्हें नया जीवन-दान दे देता था। हे गुरु जी! हमें लगता है कि इसका दुश्मनों से कोई सम्बन्ध है। यह दुश्मन के घायल सिपाहियों को युद्ध भूमि में पानी पिलाता है और उनकी जान बचाता है। भाव है कि सिख वीरों को भाई कन्हैया का इन्सानियत का भाव भी दुश्मनी से भरा हुआ प्रतीत होता है क्योंकि वहाँ वह सिख वीरों को ही नहीं बल्कि मुसलमान सैनिकों को भी युद्धभूमि में पानी पिलाता था।

विशेष:

  1. सिख वीरों के मन में उत्पन्न स्वार्थी भावों के कारण भाई कन्हैया पर दोषारोपण किया गया है।
  2. भाषा सरल, सरस और भावपूर्ण है।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 1 कोई नहीं बेगाना

6. हँस कर बोले दशम पिता फिर
क्यों भाई क्या कहते हो,
ठीक शिकायत क्या सिखों की
सबकी सेवा करते हो ?
हाथ जोड़ कर चरण छुए
नतमस्तक हो वचन कहे,
गुरुवर ! सब को जल देता हूँ
मानो सब में आप रहे।

शब्दार्थ: दशम पिता = दशम गुरु गोबिन्द सिंह जी। चरण = पैर। नतमस्तक = सिर झुका कर प्रणाम करना।

प्रसंग:
प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक में संकलित कविता ‘कोई नहीं बेगाना’ से ली गई हैं। इसके रचयिता डॉ० योगेन्द्र बख्शी हैं। सिख वीरों ने भाई कन्हैया पर आरोप लगाया था कि वे युद्धभूमि में मुस्लिम सैनिकों की पानी पिला कर सहायता करते थे। वे उनसे मिले हुए थे।

व्याख्या:
सिख वीरों के द्वारा लगाए गए आरोप को सुन कर दशम् गुरु गोबिन्द सिंह जी ने हँसते हुए भाई कन्हैया से पूछा कि क्यों भाई ! क्या सिखों की यह शिकायत ठीक थी कि वह सब की सेवा करते था। यह सुन कर भाई कन्हैया ने हाथ जोड़कर गुरु जी के पाँव छुए और सिर झुका कर ये शब्द कहे कि गुरुवर! मैं तो सभी को ऐसे पानी देता हूँ जैसे सब में आप ही विद्यमान हों। मुझे तो सब में आप ही दिखाई देते हैं। भाव है कि भाई कन्हैया को गुरु जी के प्रति अपार भक्ति के कारण सभी में वही दिखाई देते थे। उन्हें कोई भी पराया नहीं लगता था।

विशेष:

  1. कवि ने भाई कन्हैया की अपार गुरु-भक्ति को सरल शब्दों में प्रकट कर दिया है।
  2. भाषा सरल, सरस और भावपूर्ण है।

7. गुरुवाणी का मतलब मैंने
केवल बस इतना जाना,
देखें हर प्राणी में प्रभुवर
कोई नहीं है बेगाना।
अव्वल अल्ला नूर वही है
कुदरत के सब बन्दे,
सब जग फैला नूर उसी का
कौन भले कौन मन्दे।

शब्दार्थ:
मतलब = अर्थ। बेगाना = पराया, अनजान। अव्वल = प्रथम, पहला। अल्ला = ईश्वर। नर = ज्योति, प्रकाश, तेज, परमात्मा का नाम। कुदरत = प्रकृति । बन्दे = इन्सान । भले = अच्छे। मन्दे = बुरे।

प्रसंग:
प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक में संकलित कविता ‘कोई नहीं बेगाना’ से ली गई हैं। इस कविता के रचयिता डॉ० योगेन्द्र बख्शी हैं। भाई कन्हैया ने गुरु गोबिन्द सिंह जी के प्रश्न का उत्तर देते हुए माना था कि उनके लिए कोई भी प्राणी न तो छोटा है और न ही बड़ा। वे सभी बराबर हैं जिनमें परमात्मा बसता है।

व्याख्या:
भाई कन्हैया ने गुरु गोबिन्द सिंह जी के समक्ष कहा था कि मैंने तो गुरुवाणी का केवल इतना ही अर्थ समझा है कि मुझे हर प्राणी में परम पिता परमात्मा ही दिखाई देते हैं। मुझे सभी अपने लगते हैं और कोई भी पराया नहीं लगता। वह परमात्मा ही तो सबसे श्रेष्ठ हैं, प्रमुख हैं, सर्वोपरि है। इस सृष्टि की ज्योति वही है और सारे इन्सान, सारे प्राणी उसी परमात्मा की कुदरत से उत्पन्न हुए हैं। सारे संसार में उसी का तेज फैला हुआ है। केवल वही है जिससे सारी सृष्टि बनी है। जब सभी उस परमात्मा की सन्तान हैं तो फिर कौन अच्छा है और कौन बुरा ? अर्थात् न कोई बुरा है और न अच्छा, न कोई छोटा है और न कोई बड़ा। सारे मानव एक-दूसरे के समान हैं। भाव है कि हमें धर्म और जाति के आधार पर मानव को नहीं बांटना चाहिए।

विशेष:

  1. भाई कन्हैया के माध्यम से सृष्टि का रहस्य प्रकट किया गया है और उसी के आधार पर सब को एक समान माना गया है।
  2. भाषा सरस और भावपूर्ण है। उर्दू शब्दों का प्रयोग किया गया है। |

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 1 कोई नहीं बेगाना

8. दशम पिता गदगद हो बोले,
सच्चे सिख ! गुरु मेहर करे,
भेदभाव बिन सेवारत जो
उसके सिर प्रभु हाथ धरे।
यह मरहम भी ले लो मुझ से
तुम सबका उपकार करो,
हर घायल में प्रभु को देखो
घावों का उपचार करो।

शब्दार्थ:
गद्गद् = प्रसन्न। मेहर = कृपा। भेदभाव = अंतर; ऊँच-नीच का भाव। सेवारत = सेवा में लीन। हाथ धरे = कृपा करे। उपकार = भला, कल्याण। घावों = घाव, चोट, जख्म। उपचार = इलाज।

प्रसंग:
प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक में संकलित कविता ‘कोई नहीं बेगाना’ से ली गई हैं जिसकी रचना डॉ० योगेन्द्र बख्शी ने की है। गुरु गोबिन्द सिंह जी ने भाई कन्हैया के उत्तर को सुनकर उसे आशीर्वाद दिया था और उस पर ईश्वर की कृपा बनी रहने की प्रार्थना की थी।

व्याख्या:
भाई कन्हैया के उत्तर को सुन कर दशम पिता गुरु गोबिन्द सिंह जी प्रसन्न हो गए, खुशी से भर उठे। उन्होंने उसे सम्बोधित करते हुए कहा कि हे सच्चे सिख ! ईश्वर तुम पर कृपा बनाये रखे। जो व्यक्ति बिना भेदभाव किए हुए समाज में रहते हुए सबकी सेवा करता रहता है, ईश्वर उसके सिर पर अपनी कृपा का हाथ सदा बनाए रखें। तुम मुझ से यह मरहम भी ले लो और बिना जात-पात और धर्म का ध्यान रखे हुए सब का भला करो, सब की सेवा करो। तुम हर घायल व्यक्ति में ईश्वर को देखो, सबको एक समान समझो और सब के घावों का ईलाज करो, उन्हें कष्टों से मुक्त करो। भाव है कि गुरु जी ने अपने मानवतावादी भावों से सबका कल्याण करने की बात सदा ही सबसे कही थी।

विशेष:

  1. गुरु गोबिन्द सिंह जी ने समाज में व्याप्त भेदभाव का विरोध करते हुए सबको एक समान ईश्वर की सन्तान माना था।
  2. भाषा सरल और सरस है।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 1 कोई नहीं बेगाना

कोई नहीं बेगाना Summary

कोई नहीं बेगाना कविता का सार

डॉ० योगेन्द्र बख्शी के द्वारा रचित कविता ‘कोई नहीं बेगाना’ मानवतावादी कविता है। इन्सान वही अच्छा होता है जो किसी में भी भेदभाव न करे। आनन्दपुर साहब के बाहर गुरु गोबिन्द सिंह जी की सेना की मुसलमानों से भयंकर लड़ाई हो रही थी। गर्मियों के दिन थे। सूर्य की गर्मी से सारे मैदान दहक-से रहे थे। युद्ध में हर वीर अपनी जान की परवाह किए बिना लड़ रहा था। तोपें गरज रहीं थीं। दोनों सेनाओं के सैनिक पूरे जोश में भरे हुए थे। सिख सैनिक ‘सत श्री अकाल’ का जयघोष कर रहे थे तो मुसलमान सैनिक ‘अल्ला हू अकबर’ के नारे लगा रहे थे। दोनों तरफ के सैनिक घायल हो-होकर धरती पर गिर रहे थे। वे तड़प रहे थे और प्यास के कारण पानी-पानी चिल्ला रहे थे। गुरुघर का एक सेवादार भाई कन्हैया कन्धे पर एक मशक लिए हुए सिखों और मुसलमानों को पानी पिला रहा था। उसे उन सभी घायल सैनिकों में गुरु का ही रूप दिखाई दे रहा था। वह अपने और पराये का कोई भेद नहीं कर रहा था। जब शाम हुई तो सिख सैनिकों ने गुरु जी से शिकायत की कि जिन मुसलमान सैनिकों को हम काट कर नीचे गिराते हैं उन्हें ही भाई कन्हैया पानी पिलाता है। उनकी जान बचा कर वह दुश्मन का काम कर रहा था। गुरु जी ने हँस कर भाई कन्हैया से इस शिकायत के बारे में पूछा। उसने हाथ जोड़ कर गुरु जी के पाँव छू कर अपना सिर झुकाते हुए कहा कि वह सभी को एक समान पानी पिलाता था क्योंकि उसे उन सभी में आप ही दिखाई दे रहे थे। गुरुबाणी के अनुसार तो उसे हर प्राणी में भगवान् ही दिखता था। कोई भी तो पराया नहीं। इस संसार के हर प्राणी में परमात्मा का ही तो नूर हैचाहे वह अच्छा है या बुरा। दशम गुरु ने प्रसन्न होकर कहा कि अरे सच्चे सिख, ईश्वर तुम पर कृपा करे। तुम मुझ से मरहम भी लो और इसे सभी घायलों के घावों पर लगाओ। तुम सभी से एक-सा व्यवहार करो।