PSEB 12th Class History Solutions Chapter 8 गुरु हर राय जी और गुरु हर कृष्ण जी

Punjab State Board PSEB 12th Class History Book Solutions Chapter 8 गुरु हर राय जी और गुरु हर कृष्ण जी Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 12 History Chapter 8 गुरु हर राय जी और गुरु हर कृष्ण जी

निबंधात्मक प्रश्न (Essay Type Questions)

गुरु हर राय जी (Guru Har Rai Ji)

प्रश्न 1.
गुरु हर राय जी के जीवन और उपलब्धियों के संबंध में आप क्या जानते हैं ? (What do you know about Guru Har Rai Ji’s early career and achievements ?)
उत्तर-
गुरु हर राय जी सिखों के सातवें गुरु थे। उनके गुरुकाल (1645 से 1661 ई०) को सिख पंथ का शांतिकाल कहा जा सकता है। गुरु हर राय जी के आरंभिक जीवन तथा उनके अधीन सिख पंथ के विकास का संक्षिप्त वर्णन इस प्रकार है—
1. जन्म तथा माता-पिता (Birth and Parentage)-गुरु हर राय जी का जन्म 30 जनवरी, 1630 ई० को कीरतपुर साहिब नामक स्थान पर हुआ। उनके माता जी का नाम बीबी निहाल कौर था। आप गुरु हरगोबिंद जी के पौत्र तथा बाबा गुरदित्ता जी के पुत्र थे।

2. बाल्यकाल तथा विवाह (Childhood and Marriage)-आप बाल्यकाल से ही शाँत प्रकृति, मृदुभाषी तथा दयालु स्वभाव के थे। कहते हैं कि एक बार हर राय जी बाग में सैर कर रहे थे। उनके चोले से लग जाने से कुछ फूल झड़ गए। यह देखकर आपकी आँखों में आँसू आ गए। आप किसी का भी दुःख सहन नहीं कर सकते थे।
आपका विवाह अनूप शहर (यू० पी०) के दया राम जी की सुपुत्री सुलक्खनी जी से हुआ। आपके घर दो पुत्रों राम राय तथा हर कृष्ण ने जन्म लिया।

3. गुरुगद्दी की प्राप्ति (Assumption of Guruship)-गुरु हरगोबिंद जी के पाँच पुत्र थे। बाबा गुरदित्ता, अणि राय तथा अटल राय अपने पिता के जीवन काल में स्वर्गवास को चुके थे। शेष दो में से सूरजमल का सांसारिक मामलों की ओर आवश्यकता से अधिक झुकाव था तथा तेग़ बहादुर जी का बिल्कुल नहीं। इसलिए गुरु हरगोबिंद जी ने बाबा गुरदित्ता के छोटे पुत्र हर राय जी को अपना उत्तराधिकारी बनाया। आप 8 मार्च, 1645 ई० को गुरुगद्दी पर विराजमान हुए। इस प्रकार आप सिखों के सातवें गुरु बने।

4. गुरु हर राय जी के समय में सिख धर्म का विकास (Development of Sikhism under Guru Har Rai Ji)—आप 1645 ई० से 1661 ई० तक गुरुगद्दी पर विराजमान रहे। आपने सिख धर्म के प्रचार के लिए तीन मुख्य केंद्र स्थापित किए जिन्हें ‘बख्शीशें’ कहा जाता था। पहली बख्शीश एक संन्यासी गिरि की थी जिसकी भक्ति से प्रसन्न होकर गुरु साहिब ने उसका नाम भक्त भगवान रख दिया। उसने पूर्वी भारत में सिख धर्म के बहुत-से केंद्र स्थापित किए। इनमें पटना, बरेली तथा राजगिरी के केंद्र प्रसिद्ध हैं। दूसरी बख्शीश सुथरा शाह की थी। उसे सिख धर्म के प्रचार के लिए दिल्ली भेजा गया। तीसरी बख्शीश भाई फेरु की थी। उनको राजस्थान भेजा गया था। इसी प्रकार भाई नत्था जी को ढाका, भाई जोधा जी को मुलतान भेजा गया तथा आप स्वयं पंजाब के कई स्थानों जैसे जालंधर, करतारपुर, हकीमपुर, गुरदासपुर, अमृतसर, पटियाला, अंबाला तथा हिसार आदि गए।

5. फूल को आशीर्वाद (Blessing to Phool)-एक दिन काला नामक श्रद्धालु अपने भतीजों संदली तथा फूल को गुरु जी के दर्शन हेतु ले आया। उनकी शोचनीय हालत को देखते हुए गुरु साहिब ने उन्हें आशीर्वाद दिया कि एक दिन वे बहुत धनी बनेंगे। गुरु जी की यह भविष्यवाणी सत्य निकली। फूल की संतान ने फूलकिया मिसल की स्थापना की।

6. राजकुमार दारा की सहायता (Help to Prince Dara)-गुरु हर राय जी के समय दारा शिकोह पंजाब का गवर्नर था। वह औरंगज़ेब का बड़ा भाई था। सत्ता प्राप्त करने के प्रयास में औरंगज़ेब ने उसे विष दे दिया। इस कारण वह बहुत बीमार हो गया। उसने गुरु साहिब से आशीर्वाद माँगा। गुरु साहिब ने अमूल्य जड़ी-बूटियाँ देकर दारा की चिकित्सा की। इस कारण वह गुरु साहिब का आभारी हो गया। वह प्रायः उनके दर्शन के लिए आया करता।

7. गुरु हर राय जी को दिल्ली बुलाया गया (Guru Har Rai Ji was summoned to Delhi)औरंगज़ेब को संदेह था कि गुरु ग्रंथ साहिब में कुछ श्लोक इस्लाम धर्म के विरुद्ध हैं। इस बात की पुष्टि के लिए उसने आपको अपने दरबार में उपस्थित होने के लिए कहा। गुरु साहिब ने अपने पुत्र रामराय को औरंगजेब के पास भेजा। औरंगजेब ने ‘आसा दी वार’ में से एक पंक्ति की ओर संकेत करते हुए उससे पूछा कि इसमें मुसलमानों का विरोध क्यों किया गया है। यह पंक्ति थी,
मिटी मुसलमान की पेडै पई कुम्हिआर॥
घड़ भाँडे इटा कीआ जलदी करे पुकार॥
इसका अर्थ था मुसलमान की मिट्टी कुम्हार के घमट्टे में चली जाएगी जो इससे बर्तन तथा ईंटें बनाएगा। जैसेजैसे वह जलेगी तैसे-तैसे मिट्टी चिल्लाएगी। औरंगज़ेब के क्रोध से बचने के लिए रामराय ने कहा कि इस पंक्ति में भूल से बेईमान शब्द की अपेक्षा मुसलमान शब्द लिखा गया है। गुरु ग्रंथ साहिब के इस अपमान के कारण आपने रामराय को गुरुगद्दी से वंचित कर दिया।

8. उत्तराधिकारी की नियुक्ति (Nomination of the Successor)—गुरु हर राय जी ने ज्योति-जोत समाने से पूर्व आपने गुरुगद्दी अपने छोटे पुत्र हर कृष्ण को सौंप दी। 6 अक्तूबर, 1661 ई० को गुरु हर राय जी ज्योति जोत समा गए।

9. गुरु हर राय जी के कार्यों का मूल्याँकन (Estimate of the works of Guru Har Rai Ji)-गुरु हर राय जी हालाँकि अल्प आयु में ही ज्योति-जोत समा गए परंतु उन्होंने सिख पंथ के विकास में अमूल्य योगदान दिया। आप जी ने माझा, दोआबा और मालवा में सिख धर्म का प्रचार किया। आपने संगत और पंगत की मर्यादा को पूरी तेजी के साथ जारी रखा। आपके दवाखाने से बिना किसी भेद-भाव के निःशुल्क चिकित्सा और सेवा प्रदान की जाती थी। इस प्रकार आपने सिख धर्म के विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया।

PSEB 12th Class History Solutions Chapter 8 गुरु हर राय जी और गुरु हर कृष्ण जी

गुरु हर कृष्ण जी (Guru Har Krishan Ji)

प्रश्न 2.
गुरु हर कृष्ण जी के समय सिख पंथ के हुए विकास का संक्षिप्त वर्णन करें।
(Give a brief account of Development of Sikhism during the pontificate of Guru Har Kishan Ji.)
उत्तर-
गुरु हर कृष्ण जी सिख इतिहास में बाल गुरु के नाम से जाने जाते हैं। वे 1661 ई० से लेकर 1664 ई० तक गुरुगद्दी पर विराजमान रहे। उनके अधीन सिख पंथ में हुए विकास का वर्णन निम्नलिखित अनुसार है—
1. जन्म और माता-पिता (Birth and Parents)-गुरु हर कृष्ण जी का जन्म 7 जुलाई, 1656 ई० में कीरतपुर साहिब में हुआ। आप गुरु हर राय साहिब के छोटे पुत्र थे। आप जी की माता का नाम सुलक्खनी जी था। रामराय आपके बड़े भाई थे।

2. गुरुगद्दी की प्राप्ति (Assumption of Guruship)-गुरु हर राय जी ने अपने बड़े पुत्र राम राय को उसकी अयोग्यता के कारण गुरुगद्दी से वंचित कर दिया था । 1661 ई० को गुरु हर राय जी ने हर कृष्ण जी को गुरुगद्दी सौंप दी। उस समय हर कृष्ण जी की आयु मात्र 5 वर्ष थी। इस कारण इतिहास में आपको बाल गुरु के नाम से याद किया जाता है। यद्यपि आप उम्र में बहुत छोटे थे पर फिर भी आप बहुत उच्च प्रतिभा के स्वामी थे। आप में अद्वितीय सेवा भावना, बड़ों के प्रति मान-सम्मान, मीठा बोलना, दूसरों के प्रति सहानुभूति तथा अटूट भक्तिभावना इत्यादि के गुण कूट-कूट कर भरे हुए थे। इन गुणों के कारण ही गुरु हर राय जी ने आपको गुरुगद्दी सौंपी। इस प्रकार आप सिखों के आठवें गुरु बने। आप 1664 ई० तक गुरुगद्दी पर विराजमान रहे।

3. राम राय का विरोध (Opposition of Ram Rai)-राम राय गुरु हर राय जी का बड़ा पुत्र होने के कारण गुरु साहिब के पश्चात् गुरुगद्दी का अधिकारी स्वयं को समझता था, परंतु गुरु हर राय जी उसे पहले ही गुरुगद्दी से वंचित कर चुके थे। जब उसे ज्ञात हुआ कि गुरुगद्दी हर कृष्ण जी को सौंपी गई है तो वह यह बात सहन न कर सका। उसने गद्दी हथियाने के लिए षड्यंत्र रचने आरंभ कर दिए। उसने बहुत-से बेईमान और स्वार्थी मसंदों को अपने साथ मिला लिया। इन मसंदों द्वारा उसने यह घोषणा करवाई कि वास्तविक गुरु राम राय हैं और सभी सिख उसी – अपना गुरु मानें परंतु वह उसमें सफल न हो पाया। फिर उसने औरंगजेब से सहायता लेने का प्रयास किया। औरंगजेब ने गुरु साहिब को दिल्ली बुलाया ताकि दोनों गुटों की बात सुनकर वह अपना निर्णय दे सके।

4. गुरु साहिब का दिल्ली जाना (Guru Sahib’s Visit to Delhi)—गुरु साहिब को दिल्ली लाने का कार्य औरंगज़ेब ने राजा जय सिंह को सौंपा। राजा जय सिंह ने अपने दीवान परस राम को गुरु जी के पास भेजा। गुरु जी ने औरंगजेब से मिलने और दिल्ली जाने से इंकार कर दिया, परंतु परस राम के यह कहने पर कि दिल्ली की संगतें गुरु साहिब के दर्शनों के लिए बेताब हैं, गुरु साहिब ने दिल्ली जाना तो स्वीकार कर लिया, परंतु औरंगजेब से भेंट करने से इंकार कर दिया। आप 1664 ई० में दिल्ली चले गए और राजा जय सिंह के घर निवास करने के लिए मान गए। गुरु साहिब की औरंगजेब से भेंट हुई अथवा नहीं, इस संबंध में इतिहासकारों में बहुत मतभेद पाए जाते हैं।

5. ज्योति-जोत समाना (Immersed in Eternal Light)—उन दिनों दिल्ली में चेचक और हैजा फैला हुआ था। गुरु हर कृष्ण जी ने यहाँ बीमारों, निर्धनों और लावारिसों की तन, मन और धन से अथक सेवा की। चेचक और हैज़े के सैंकड़ों रोगियों को ठीक किया, परंतु इस भयंकर बीमारी का आप स्वयं भी शिकार हो गए। यह बीमारी उनके लिए घातक सिद्ध हुई। उन्हें बहुत गंभीर अवस्था में देखते हुए श्रद्धालुओं ने प्रश्न किया कि आपके पश्चात् उनका नेतृत्व कौन करेगा तो आप ने एक नारियल मंगवाया। नारियल और पाँच पैसे रखकर माथा टेका और “बाबा बकाला” का उच्चारण करते हुए 30 मार्च, 1664 ई० को दिल्ली में ज्योति-जोत समा गए। आपकी याद में यहाँ गुरुद्वारा बाला साहिब का निर्माण किया गया है।

गुरु हर कृष्ण जी ने कोई अढ़ाई वर्ष के लगभग गुरुगद्दी संभाली और गुरु के रूप में आपने सभी कर्त्तव्य बड़ी सूझ-बूझ से निभाए। आप इतनी कम आयु में भी तीक्ष्ण बुद्धि, उच्च विचार और अलौकिक ज्ञान के स्वामी थे।

संक्षिप्त उत्तरों वाले प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
सिख पंथ के विकास में गुरु हर राय जी का गुरुकाल क्यों महत्त्वपूर्ण है ?
(Why is pontificate of Guru Har Rai Ji considered important in the development of Sikhism ?).
अथवा
गुरु हर राय जी पर एक संक्षिप्त नोट लिखें।
(Write a short note on Guru Har Rai Ji.)
अथवा
सिख धर्म में गुरु हर राय जी का क्या योगदान है ?
(What is the contribution of Guru Har Rai Ji for the development of Sikh religion ?)
अथवा
गुरु हर राय जी के जीवन एवं कार्यों के बारे में संक्षेप में लिखें। (Write in short about the life and works of Guru Har Rai Ji.)
उत्तर-
सिखों के सातवें गुरु, गुरु हर राय जी का जन्म 30 जनवरी, 1630 ई० को कीरतपुर साहिब में हुआ था। आप बचपन से ही साधू स्वभाव के थे। 1645 ई० से लेकर 1661 ई० तक गुरुगद्दी पर विराजमान रहे। उनका गुरुकाल सिख धर्म के शांतिपूर्वक विकास का काल था। गुरु हर राय साहिब ने सिख धर्म का प्रचार करने के लिए पंजाब के कई स्थानों का भ्रमण किया। इसके अतिरिक्त गुरु साहिब ने पंजाब से बाहर अपने प्रचारक भेजे। परिणामस्वरूप सिख धर्म का काफ़ी प्रसार हुआ। गुरु जी ने अपने छोटे पुत्र हर कृष्ण को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया।

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प्रश्न 2.
धीरमल संबंधी एक संक्षिप्त नोट लिखें।
(Write a short note about Dhirmal.)
उत्तर-
धीरमल गुरु हर राय जी का बड़ा भाई था। वह चिरकाल से गुरुगद्दी प्राप्त करने का प्रयत्न कर रहा था। जब धीर मल को यह समाचार. मिला कि सिख संगतों ने तेग़ बहादुर जी को अपना गुरु मान लिया है तो उसके क्रोध की कोई सीमा न रही। उसने शींह नामक एक मसंद के साथ मिल कर गुरु जी की हत्या का षड्यंत्र रचा। शीह के साथियों ने गुरु साहिब के घर का बहुत-सा सामान लूट लिया। बाद में धीरमल तथा शींह द्वारा क्षमा याचना करने पर गुरु साहिब ने उन्हें क्षमा कर दिया।

प्रश्न 3.
गुरु हर कृष्ण जी पर एक संक्षिप्त नोट लिखें। उनको बाल गुरु क्यों कहा जाता है?
(Write a brief note on Guru Har Krishsn Ji. Why is He called Bal Guru ?)
अथवा
सिख धर्म में गुरु हर कृष्ण जी का क्या योगदान था ?
(What was the contribution of Guru Har Krishan Ji in the development of Sikhism ?)
अथवा
गुरु हर कृष्ण जी पर संक्षेप नोट लिखो। (Write a short note on Guru Har Krishan Ji.)
उत्तर-
सिखों के आठवें गुरु, गुरु हर कृष्ण जी गुरु हर राय जी के छोटे पुत्र थे। वह 1661 ई० में गुरुगद्दी पर विराजमान हुए। उस समय उनकी आयु केवल पाँच वर्ष थी। इस कारण उनको ‘बाल गुरु’ के नाम से याद किया जाता है। गुरु हर कृष्ण जी के बड़े भाई राम राय के उकसाने पर औरंगजेब ने गुरु साहिब को दिल्ली आने का आदेश दिया। गुरु साहिब 1664 ई० में दिल्ली गए। उन दिनों दिल्ली में भयानक चेचक एवं हैजा फैला हुआ था। गुरु जी ने वहाँ पर बीमारों की अथक सेवा की। वह 30 मार्च, 1664 ई० को ज्योति-जोत समा गए।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Type Questions)

(i) एक शब्द से एक पंक्ति तक के उत्तर (Answer in One Word to One Sentence)

प्रश्न 1.
गुरु हरगोबिंद जी के उत्तराधिकारी कौन थे ?
अथवा
गुरु हरगोबिंद जी ने किसको अपना उत्तराधिकारी बनाया ?
उत्तर-
गुरु हर राय जी।

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प्रश्न 2.
गुरु हर राय जी का जन्म कहाँ हुआ था ?
उत्तर-
कीरतपुर साहिब।

प्रश्न 3.
गुरु हर राय जी के.पिता जी का नाम बताएँ।
उत्तर-
बाबा गुरदित्ता जी।

प्रश्न 4.
सिखों के सातवें गुरु कौन थे ?
अथवा
सातवें सिख गुरु का क्या नाम था ?
उत्तर-
गुर हर राय जी।

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प्रश्न 5.
गुरु हर राय जी कब गुरुगद्दी पर आसीन हुए ?
उत्तर-
1645 ई०

प्रश्न 6.
दारा शिकोह कौन था ?
उत्तर-
शाहजहाँ का सबसे बड़ा पुत्र।

प्रश्न 7.
गुरु हर राय जी ने सिख धर्म के प्रचार के लिए काबुल किसे भेजा था ?
उत्तर-
भाई गोंदा जी को।

प्रश्न 8.
गुरु हर राय जी ने सिख धर्म के प्रचार के लिए ढाका किसे भेजा था ?
उत्तर-
भाई नत्था जी को।

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प्रश्न 9.
गुरु हर राय जी कब ज्योति-जोत समाए ?
उत्तर-
1661 ई०।

प्रश्न 10.
सिखों के आठवें गुरु कौन थे ?
उत्तर-
गुरु हर कृष्ण जी।

प्रश्न 11.
गुरु हर कृष्ण जी का जन्म कहाँ हुआ?
उत्तर-
कीरतपुर साहिब।

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प्रश्न 12.
गुरु हर कृष्ण जी का जन्म कब हुआ था?
उत्तर-
7 जुलाई, 1656 ई०।

प्रश्न 13.
गुरु हर कृष्ण जी गुरुगद्दी पर कब बैठे ?
उत्तर-
1661 ई०।

प्रश्न 14.
सिखों के बाल गुरु कौन थे ?
उत्तर-
गुरु हर कृष्ण जी।

प्रश्न 15.
गुरु हर कृष्ण जी का गुरुकाल बताएँ।
उत्तर-
1661 ई० से 1664 ई०

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प्रश्न 16.
गुरुगद्दी पर बैठने के पश्चात् गुरु हर कृष्ण जी को किसके विरोध का सामना करना पड़ा ?
उत्तर-
राम राय के

प्रश्न 17.
गुरु हर कृष्ण जी कब ज्योति-जोत समाए ?
उत्तर-
1664 ई०

प्रश्न 18.
गुरु हर कृष्ण जी कहाँ ज्योति-जोत समाए थे ?
उत्तर-
दिल्ली।

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(ii) रिक्त स्थान भरें (Fill in the Blanks)

प्रश्न 1.
…………… सिखों के सातवें गुरु थे।
उत्तर-
(गुरु हर राय जी)

प्रश्न 2.
गुरु हर राय जी का जन्म …………… में हुआ।
उत्तर-
(1630 ई०)

प्रश्न 3.
गुरु हर राय जी का जन्म …………. नाम के स्थान पर हुआ।
उत्तर-
(कीरतपुर साहिब)

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प्रश्न 4.
गुरु हर राय जी के पिता का नाम …………. था।
उत्तर-
(बाबा गुरदित्ता जी)

प्रश्न 5.
गुरु हर राय जी ……………. में गुरुगद्दी पर बैठे। .
उत्तर-
(1645 ई०)

प्रश्न 6.
……………. सिखों के आठवें गुरु थे।
उत्तर-
(गुरु हर कृष्ण जी)

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प्रश्न 7.
गुरु हर कृष्ण जी ……………. में गुरुगद्दी पर बैठे।
उत्तर-
(1661 ई०)

प्रश्न 8.
गुरु हर कृष्ण जी दिल्ली में ………… के बंगले में ठहरे।
उत्तर-
(राजा जय सिंह)

प्रश्न 9.
………… को बाल गुरु के नाम से याद किया जाता है।
उत्तर-
(गुरु हर कृष्ण जी)

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(ii) ठीक अथवा गलत (True or False)

नोट-निम्नलिखित में से ठीक अथवा गलत चुनें।

प्रश्न 1.
गुरु हर राय जी सिखों के सातवें गुरु थे।
उत्तर-
ठीक

प्रश्न 2.
गुरु हर राय जी का जन्म 1630 ई० में हुआ था।
उत्तर-
ठीक

प्रश्न 3.
गुरु हर राय जी के पिता जी का नाम बाबा बुड्डा जी था।
उत्तर-
गलत

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प्रश्न 4.
गुरु हर राय जी की माता जी का नाम बीबी निहाल कौर था।
उत्तर-
ठीक

प्रश्न 5.
गुरु हर राय जी 1661 ई० में गुरुगद्दी पर बिराजमान हुए।
उत्तर-
गलत

प्रश्न 6.
गुरु हर कृष्ण जी सिखों के आठवें गुरु थे।
उत्तर-
ठीक

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प्रश्न 7.
गुरु हर कृष्ण जी को बाल गुरु के नाम से भी जाना जाता है।
उत्तर-
ठीक

प्रश्न 8.
गुरु हर कृष्ण जी 1664 ई० में ज्योति-ज्योत समाए।
उत्तर-
ठीक

(iv) बहु-विकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions):

नोट-निम्नलिखित में से ठीक उत्तर का चयन कीजिए

प्रश्न 1.
सिखों के सातवें गुरु कौन थे ?
(i) गुरु हरगोबिंद जी
(ii) गुरु हर राय जी
(iii) गुरु हर कृष्ण जी
(iv) गुरु तेग़ बहादुर जी।
उत्तर-
(ii)

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प्रश्न 2.
गुरु हर राय जी का जन्म कब हुआ ?
(i) 1627 ई० में
(ii) 1628 ई० में
(iii) 1629 ई० में
(iv) 1630 ई० में।
उत्तर-
(iv)

प्रश्न 3.
गुरु हर राय जी के पिता जी का क्या नाम था ?
(i) गुरदित्ता जी
(ii) अटल राय जी
(ii) अणि राय जी
(iv) सूरजमल जी।
उत्तर-
(i)

प्रश्न 4.
गुरु हर राय जी गुरुगद्दी पर कब बैठे ?
(i) 1635 ई० में
(ii) 1637 ई० में
(ii) 1645 ई० में ,
(iv) 1655 ई० में।
उत्तर-
(iii)

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प्रश्न 5.
दारा शिकोह कौन था ?
(i) शाहजहाँ का बड़ा बेटा
(ii) शाहजहाँ का छोटा बेटा
(iii) जहाँगीर का बड़ा बेटा
(iv) औरंगज़ेब का बड़ा बेटा।
उत्तर-
(i)

प्रश्न 6.
गुरु हर राय जी ने अपना उत्तराधिकारी किसको नियुक्त किया ?
(i) हर कृष्ण जी को
(ii) तेग़ बहादुर जी को
(iii) राम राय को
(iv) गुरदित्ता जी को।
उत्तर-
(i)

प्रश्न 7.
गुरु हर राय जी कब ज्योति-जोत समाए थे ?
(i) 1645 ई० में
(ii). 1660 ई० में
(iii) 1661 ई० में
(iv) 1664 ई० में।
उत्तर-
(iii)

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प्रश्न 8.
सिखों के आठवें गुरु कौन थे ?
(i) गुरु हर कृष्ण जी
(ii) गुरु तेग बहादुर जी
(iii) गुरु हर राय जी
(iv) गुरु गोबिंद सिंह जी।
उत्तर-
(i)

प्रश्न 9.
गुरु हर कृष्ण जी का जन्म कब हुआ ?
(i) 1630 ई० में
(ii) 1635 ई० में
(iii) 1636 ई० में
(iv) 1656 ई० में।
उत्तर-
(iv)

प्रश्न 10.
गुरु हर कृष्ण जी के पिता जी कौन थे ?
(i) गुरु हरगोबिंद साहिब जी
(ii) गुरु हर राय जी
(iii) बाबा गुरदित्ता जी
(iv) बाबा बुड्डा जी।
उत्तर-
(ii)

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प्रश्न 11.
सिख इतिहास में ‘बाल गुरु’ के नाम से किसको जाना जाता है ?
(i) गुरु रामदास जी को
(ii) गुरु हर राय जी को
(iii) गुरु हर कृष्ण जी को
(iv) गुरु गोबिंद सिंह जी को।
उत्तर-
(iii)

प्रश्न 12.
गुरु हर कृष्ण जी गुरुगद्दी पर कब विराजमान हुए ?
(i) 1645 ई० में
(ii) 1656 ई० में
(iii) 1661 ई० में
(iv) 1664 ई० में।
उत्तर-
(iii)

प्रश्न 13.
गुरु हर कृष्ण जी कब ज्योति-जोत समाए ?
(i) 1661 ई० में
(ii) 1662 ई० में
(iii) 1663 ई० में
(iv) 1664 ई० में।
उत्तर-
(iv)

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प्रश्न 14.
गुरु हर कृष्ण जी कहाँ ज्योति-जोत समाए ?
(i) लाहौर
(ii) दिल्ली
(iii) मुलतान
(iv) जालंधर
उत्तर-
(ii)

Long Answer Type Question

प्रश्न 1.
सिख पंथ के विकास में गुरु हर राय जी का समय क्यों महत्त्वपूर्ण है ?
(Why is pontificate of Guru Har Rai Ji considered important in the development of Sikhism ?).
अथवा
गुरु हर राय जी पर एक संक्षिप्त नोट लिखें।
(Write a short note on Guru Har Rai Ji.)
अथवा
गुरु हर राय जी के बारे में आप क्या जानते हैं ?
(What do you know about Guru Har Rai Ji ?)
उत्तर-
गुरु हर राय जी 1645 ई० से 1661 ई० तक गुरुगद्दी पर विराजमान रहे। इस समय के दौरान उन्होंने सिख धर्म के विकास के लिए निम्नलिखित कार्य किए—
1. गुरु हर राय जी के समय में सिख धर्म का विकास-गुरु हर राय जी ने सिख धर्म के प्रचार के लिए तीन मुख्य केंद्र स्थापित किए जिन्हें ‘बख्शीशें’ कहा जाता था। भगत,गिरि को पूर्वी भारत, सुथरा शाह को दिल्ली, भाई फेरू को राजस्थान, भाई नत्था जी को ढाका, भाई जोधा जी को मुलतान भेजा गया तथा आपने स्वयं पंजाब के कई स्थानों का भ्रमण किया। इस कारण सिख पंथ का बहुत प्रसार हुआ।

2. फूल को आशीर्वाद-एक दिन काला नामक श्रद्धालु अपने भतीजों संदली तथा फूल को गुरु हर राय जी के दर्शन हेतु ले आया। उनकी शोचनीय हालत को देखते हुए गुरु साहिब ने उन्हें आशीर्वाद दिया कि एक दिन वे बहुत धनी बनेंगे। गुरु जी की यह भविष्यवाणी सत्य निकली। फूल ने फूलकिया मिसल की स्थापना की।

3. राजकुमार दारा की सहायता-गुरु हर राय जी के समय दारा शिकोह पंजाब का गवर्नर था। वह औरंगजेब का बड़ा भाई था। सत्ता प्राप्त करने के प्रयास में औरंगज़ेब ने उसे विष दे दिया। इस कारण वह बहुत बीमार हो गया। उसने गुरु साहिब से आशीर्वाद माँगा। गुरु साहिब ने अमूल्य जड़ी-बूटियाँ देकर दारा की चिकित्सा की। इस कारण वह गुरु साहिब का आभारी हो गया। वह प्रायः उनके दर्शन के लिए आने लगा।

4. गुरु हर राय साहिब को दिल्ली बुलाया गया-औरंगज़ेब को संदेह था कि गुरु ग्रंथ साहिब में कुछ श्लोक इस्लाम धर्म के विरुद्ध हैं। इस बात की पुष्टि के लिए उसने गुरु हर राय जी को अपने दरबार में उपस्थित होने के लिए कहा। गुरु साहिब ने अपने पुत्र रामराय को औरंगजेब के पास भेजा। गुरुवाणी की ग़लत व्याख्या के कारण आपने रामराय को गुरुगद्दी से वंचित कर दिया।

5. उत्तराधिकारी की नियुक्ति-गुरु हर राय जी ने अपने ज्योति-जोत समाने से पूर्व गुरुगद्दी अपने छोटे पुत्र हरकृष्ण को सौंप दी। गुरु हर राय जी 6 अक्तूबर, 1661 ई० को कीरतपुर साहिब में ज्योति-जोत समा गए।

प्रश्न 2.
धीरमल संबंधी एक संक्षिप्त नोट लिखें। (Write a short note about Dhirmal.)
उत्तर-
धीरमल गुरु हर राय जी का बड़ा भाई था। वह चिरकाल से गुरुगद्दी प्राप्त करने का प्रयत्न कर रहा था। बकाला में जो विभिन्न 22 मंजियाँ स्थापित हुईं उनमें से एक धीरमल की भी थी। जब धीरमल को यह समाचार मिला कि सिख संगतों ने तेग़ बहादुर जी को अपना गुरु मान लिया है तो उसके क्रोध की कोई सीमा न रही। उसने शीह नामक एक मसंद के साथ मिल कर गुरु जी की हत्या का षड्यंत्र रचा। एक दिन शींह तथा उसके सशस्त्र गुंडों ने गुरु जी पर आक्रमण कर दिया। इस आक्रमण के समय गुरु जी के कंधे में गोली लगी जिससे वह घायल हो गए, परंतु वह शाँत बने रहे। शीह के साथियों ने गुरु साहिब के घर का बहुत-सा सामान लूट लिया। इस घटना से सिख रोष से भर उठे तथा उन्होंने मक्खन शाह के नेतृत्व में धीरमल के घर पर आक्रमण कर दिया। वह न केवल धीरमल तथा शींह को पकड़ कर गुरु जी के पास लाए अपितु गुरु जी का लूटा हुआ सामान भी वापस ले आए। धीरमल तथा शींह द्वारा क्षमा याचना करने पर गुरु साहिब ने उन्हें क्षमा कर दिया।

PSEB 12th Class History Solutions Chapter 8 गुरु हर राय जी और गुरु हर कृष्ण जी

प्रश्न 3.
गुरु हरकृष्ण जी पर एक संक्षिप्त नोट लिखें। उनको बाल गुरु क्यों कहा जाता है ? (Write a brief note on Guru Har Krishan Ji. Why is he called Bal Guru ?)
अथवा
गुरु हरकृष्ण जी पर संक्षेप नोट लिखो। (Write a short note on Guru Har Krishan Ji.)
अथवा
गुरु हरकृष्ण जी के बारे में विस्तारपूर्वक वर्णन करें।
(Explain in detail about Guru Har Krishan Ji.)
उत्तर-
गुरु हरकृष्ण जी सिखों के आठवें गुरु थे। आपके गुरुगद्दी के समय (1661-1664 ई०) सिख पंथ के विकास का संक्षिप्त वर्णन निम्नलिखित अनुसार है—
1. गुरुगद्दी की प्राप्ति-गुरु हर राय जी ने अपने बड़े पुत्र रामराय को उसकी अयोग्यता के कारण गुरुगद्दी से वंचित कर दिया था। 1661 ई० को गुरु हर राय जी ने हरकृष्ण जी को गुरुगद्दी सौंप दी। उस समय हरकृष्ण साहिब की आयु मात्र 5 वर्ष थी। इस कारण इतिहास में आपको बाल गुरु के नाम से याद किया जाता है। आप सिखों के आठवें गुरु बने। आप 1664 ई० तक गुरुगद्दी पर विराजमान रहे।

2. रामराय का विरोध-रामराय गुरु हर राय जी का बड़ा पुत्र होने के कारण गुरु साहिब के पश्चात् गुरुगद्दी का अधिकारी स्वयं को समझता था, परंतु गुरु हर राय जी उसे पहले ही गुरुगद्दी से वंचित कर चुके थे। जब उसे ज्ञात हुआ कि गुरुगद्दी हरकृष्ण साहिब को सौंपी गई है तो वह यह बात सहन न कर सका। उसने गद्दी हथियाने के लिए षड्यंत्र रचने आरंभ कर दिए।

3. गुरु हरकृष्ण जी का दिल्ली जाना-गुरु हरकृष्ण जी को दिल्ली लाने का कार्य औरंगज़ेब ने राजा जय सिंह को सौंपा। राजा जय सिंह ने अपने दीवान परस राम को गुरु जी के पास भेजा। गुरु जी ने औरंगज़ेब से मिलने और दिल्ली जाने से इंकार कर दिया, परंतु परस राम के यह कहने पर कि दिल्ली की संगतें गुरु साहिब के दर्शनों के लिए बेताब हैं, गुरु साहिब ने दिल्ली जाना तो स्वीकार कर लिया, परंतु औरंगज़ेब से भेंट करने से इंकार कर दिया। आप 1664 ई० में दिल्ली चले गए और राजा जय सिंह के घर निवास करने के लिए मान गए। गुरु साहिब की औरंगज़ेब से भेंट हुई अथवा नहीं, इस संबंध में इतिहासकारों में बहुत मतभेद पाए जाते हैं।

4. ज्योति-जोत समाना-उन दिनों दिल्ली में चेचक और हैजा फैला हुआ था। गुरु हरकृष्ण जी ने यहाँ बीमारों, निर्धनों और अनाथों की तन, मन और धन से अथक सेवा की। परंतु इस भयंकर बीमारी का आप स्वयं भी शिकार हो गए। आप 30 मार्च, 1664 ई० को दिल्ली में ज्योति-जोत समा गए। आपकी याद में यहाँ गुरुद्वारा बाला साहिब का निर्माण किया गया है।

Source Based Questions

नोट-निम्नलिखित अनुच्छेदों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उनके अंत में पूछे गए प्रश्नों का उत्तर दीजिए।
1
गुरु हर राय जी 1645 ई० से लेकर 1661 ई० तक गुरुगद्दी पर आसीन रहे। उनकी गुरुगद्दी का समय सिख इतिहास में शाँति का काल कहा जा सकता है। गुरु हर राय साहिब जी सिख धर्म का प्रचार करने के लिए पंजाब के कई स्थानों पर जैसे जालंधर, अमृतसर, करतारपुर, गुरदासपुर, फिरोज़पुर, पटियाला, अंबाला, करनाल और हिसार इत्यादि स्थानों पर गए। इसके अतिरिक्त गुरु साहिब ने पंजाब से बाहर अपने प्रचारक भेजे। अपने प्रचार दौरे के दौरान गुरु साहिब ने अपने एक श्रद्धालु फूल को यह आशीर्वाद दिया कि उसकी संतान शासन करेगी। गुरु साहिब की यह भविष्यवाणी सत्य निकली। गुरु हर राय जी ने अपने छोटे पुत्र हर कृष्ण जी को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया।

  1. गुरु हर राय जी गुरुगद्दी पर कब बैठे थे ?
  2. गुरु हर राय जी सिख धर्म का प्रचार करने के लिए पंजाब के कौन-से स्थानों पर गए ? किन्हीं दो के नाम बताएँ।
  3. गुरु हर राय जी ने अपने किस श्रद्धालु को यह वरदान दिया कि उसकी संतान राज करेगी?
  4. गुरु हर राय जी ने अपना उत्तराधिकारी किसे नियुक्त किया ?
  5. शाहजहाँ के बड़े पुत्र का क्या नाम था ?
    • दारा
    • शुज़ा
    • औरंगजेब
    • मुराद।

उत्तर-

  1. गुरु हर राय जी 1645 ई० में गुरुगद्दी पर बैठे थे।
  2. गुरु हर राय जी सिख धर्म का प्रचार करने के लिए पंजाब में जालंधर तथा अमृतसर में गए।
  3. गुरु हर राय जी ने अपने एक श्रद्धालु फूल को यह आर्शीवाद दिया कि उसकी सन्तान राज करेगी।
  4. गुरु हर राय जी ने हर कृष्ण जी को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया।
  5. दारा।

PSEB 12th Class History Solutions Chapter 8 गुरु हर राय जी और गुरु हर कृष्ण जी

2
गुरु हर कृष्ण जी गुरु हर राय जी के छोटे पुत्र थे। वह 1661 ई० में गुरगद्दी पर बैठे। वह सिखों के आठवें गुरु थे। जिस समय वह गुरुगद्दी पर बैठे तो उस समय उनकी आयु केवल पाँच वर्ष थी। इस कारण उनको ‘बाल गुरु’ के नाम से स्मरण किया जाता है। गुरु हरकृष्ण जी के बड़े भाई राम राय ने आप जी को गुरुगद्दी दिए जाने का कट्टर विरोध किया, क्योंकि वह अपने आपको गुरुगद्दी का वास्तविक अधिकारी मानता था। जब वह अपनी कुटिल चालों में सफल न हो सका तो उसने औरंगजेब से सहायता माँगी। इस संबंध में औरंगज़ेब ने गुरु साहिब को दिल्ली आने का आदेश दिया। गुरु साहिब 1664 ई० में दिल्ली गए। वहाँ वह राजा जय सिंह के यहाँ ठहरे। उन दिनों दिल्ली में भयानक चेचक एवं हैजा फैला हुआ था। गुरु जी ने इन बीमारों, ग़रीबों एवं अनाथों की भरसक सेवा की।

  1. सिखों के आठवें गुरु कौन थे ?
  2. गुरु हर कृष्ण जी …………. में गुरुगद्दी पर बैठे थे।
  3. गुरु हर कृष्ण जी को बाल गुरु क्यों कहा जाता है ?
  4. राम राय कौन था ?
  5. गुरु हर कृष्ण जी ने दिल्ली में कौन-सी सेवा निभाई ?

उत्तर-

  1. सिखों के आठवें गुरु हर कृष्ण जी थे।
  2. 1661 ई०।
  3. क्योंकि गुरुगद्दी पर बैठते समय उनकी आयु केवल 5 वर्ष की थी।
  4. राम राय गुरु हर कृष्ण जी का बड़ा भाई था।
  5. गुरु हर कृष्ण जी जिस समय दिल्ली में थे उस समय वहाँ चेचक तथा हैज़ा नामक बीमारियाँ फैली हुई थीं। गुरु जी ने इन बीमारों, ग़रीबों तथा अनाथों की बहुत सेवा की।

PSEB 12th Class History Solutions Chapter 8 गुरु हर राय जी और गुरु हर कृष्ण जी

गुरु हर राय जी और गुरु हर कृष्ण जी PSEB 12th Class History Notes

  • गुरु हर राय जी (Guru Har Rai Ji)-गुरु हर राय जी का जन्म 30 जनवरी, 1630 ई० को कीरतपुर साहिब में हुआ—आप गुरु हरगोबिंद जी के पौत्र थे—आपका विवाह अनूप शहर के दया राम जी की सुपुत्री सुलक्खनी जी से हुआ—आप 8 मार्च, 1645 ई० को गुरुगद्दी पर विराजमान हुए—आपने सिख धर्म के प्रचार के लिए तीन केंद्र स्थापित किए जिन्हें ‘बख्शीशें’ कहा जाता था—मुग़ल सम्राट शाहजहाँ का पुत्र दारा प्रायः उनके दर्शनों के लिए आता था गुरु जी ने दारा की औरंगजेब के विरुद्ध सहायता की औरंगजेब द्वारा दिल्ली बुलाए जाने पर आपने अपने पुत्र रामराय को दिल्ली भेजा— रामराय द्वारा दिल्ली दरबार में गुरुवाणी का गलत अर्थ बताने पर, उसे गुरुगद्दी से वंचित कर दिया गया-आपने अपने छोटे पुत्र हर कृष्ण जी को अपना उत्तराधिकारी चुना—आप 6 अक्तूबर, 1661 ई० को कीरतपुर साहिब में ज्योति जोत समा गए।
  • गुरु हर कृष्ण जी (Guru Har Krishan Ji)-गुरु हर कृष्ण जी का जन्म 7 जुलाई, 1656 ई० को कीरतपुर साहिब में हुआ—आपके पिता जी का नाम गुरु हर राय साहिब तथा माता जी का नाम सुलक्खनी था—आप मात्र 5 वर्ष की आयु में 1661 ई० को गुरुगद्दी पर विराजमान हुए—आपको बाल गुरु के नाम से स्मरण किया जाता है—आपको औरंगजेब द्वारा दिल्ली बुलाया गया—आप 1664 ई० में दिल्ली गए यहाँ आपने चेचक और हैज़ा से पीड़ित बीमारों की अथक सेवा की आप स्वयं इस भयंकर बीमारी का शिकार हो गए—आप 30 मार्च, 1664 ई० को दिल्ली में ज्योति जोत समा गए— ज्योति जोत समाने से पूर्व आपने “बाबा बकाला” शब्द का उच्चारण किया– जिससे अभिप्राय था कि सिखों का अगला गुरु बाबा बकाला में है।

PSEB 12th Class Geography Solutions Chapter 7 परिवहन/यातायात, संचार तथा व्यापार

Punjab State Board PSEB 12th Class Geography Book Solutions Chapter 7 परिवहन/यातायात, संचार तथा व्यापार Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 12 Geography Chapter 7 परिवहन/यातायात, संचार तथा व्यापार

PSEB 12th Class Geography Guide परिवहन/यातायात, संचार तथा व्यापार Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक वाक्य में दें:

प्रश्न 1.
यातायात प्रबंध को मुख्य रूप में कौन-सी किस्मों में विभाजित किया जाता है ?
उत्तर-
यातायात प्रबंध को मुख्य रूप में इन किस्मों में विभाजित किया जाता है-

  • स्थल मार्ग यातायात।
  • जल मार्ग यातायात।
  • वायु मार्ग यातायात।

प्रश्न 2.
स्थल मार्ग यातायात की कौन-सी तीन किस्में होती हैं ?
उत्तर-
स्थल मार्ग यातायात की सड़कें, रेलवे तथा पाइप लाइन तीन मुख्य किस्में होती हैं।

प्रश्न 3.
कौन-से राज्य भारत के दोनों गलियारा (सड़कों) योजनाओं में संभेद हैं ?
उत्तर-
उत्तर प्रदेश तथा मध्य प्रदेश दोनों गलियारा योजनाओं में संभेद राज्य हैं।

PSEB 12th Class Geography Solutions Chapter 7 परिवहन/यातायात, संचार तथा व्यापार

प्रश्न 4.
रेल गेज कौन-सी किस्मों की होती हैं ?
उत्तर-
भारतीय रेल गेजों की निम्नलिखित तीन किस्में होती हैं-

  • चौड़ी गेज (Broad Gauge)
  • मीटर गेज (Metre Gauge)
  • perluf 1757 (Narrow Gauge).

प्रश्न 5.
विश्व की प्रथम रेलवे लाइन कब बिछाई गई ?
उत्तर-
विश्व की प्रथम रेलवे लाइन सन 1863 से 1869 में अमेरिका में बिछाई गई।

प्रश्न 6.
ट्रांस साइबेरियाई रेलवे लाइन कहा तक हैं ?
उत्तर-
ट्रांस साइबेरियाई रेलवे लाइन मास्को से रूस के पर्व में ब्लादिवोस्तोक तक हैं।

प्रश्न 7.
भारत में कितने रेलवे गलियारे हैं ?
उत्तर-
भारत में 2014 के बजट के अनुसार 9 रेलवे गलियारे हैं।

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प्रश्न 8.
IRCTC का पूरा नाम क्या है ?
उनर-
IRCTC का पूरा नाम इण्डियन कैटरिंग एंड टूरिज्म कार्पोरेशन लिमिटेड है।

प्रश्न 9.
भारत में कितने जल मार्गों को राष्ट्रीय स्तर के माना जाता है ?
उत्तर-
भारत में 10 जल मार्गों को राष्ट्रीय स्तर के माना जाता है।

प्रश्न 10.
उत्तरी अमेरिका की कोई दो बड़ी झीलों के नाम लिखो।
उत्तर-
उत्तरी अमेरिका की बड़ी झीलें हैं-सुपीरियर, मिशिगन, हायरन, एरी, ओटारियो तथा सेंट लॉरेस।

प्रश्न 11.
भारत की पहली वायु सेवा कब शुरू हुई तथा कहां तक थी ?
उत्तर-
भारत की पहली वायु सेवा 1911 में शुरू हुई तथा इसका इलाहाबाद से नैनी तक, 10 कि०मी० की दूरी के लिए वायु डाक का प्रयोग किया गया।

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प्रश्न 12.
पंजाब के कौन-से दो अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे हैं ?
उत्तर-
पंजाब में अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे अमृतसर तथा मोहाली में हैं।

प्रश्न 13.
TAPI पाइप लाइन का पूरा नाम लिखो।
उत्तर-
तुर्कमेनिस्तान-अफ़गानिस्तान-पाकिस्तान-भारत पाइप लाइन।

प्रश्न 14.
संचार की कौन सी प्रमुख किस्में हैं ?
उत्तर-
संचार की मुख्य किस्में हैं-

  • व्यक्तिगत संचार
  • जन संचार।

प्रश्न 15.
GATT का पूरा नाम क्या है ?
उत्तर-
जनरल ऐग्रीमैंट ओन टैरिफज एंड ट्रेड। (शुल्क तथा व्यापार पर समझौते)।

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प्रश्न 2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर चार पंक्तियों में दें: .

प्रश्न 1.
भारत की ग्रामीण सड़क योजना से पहचान करवाओ।
उत्तर-
इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों का विकास करना है तथा ऐसा करके कम से कम 1500 व्यक्तियों की तथा इससे अधिक जनसंख्या वाले गांवों को आपस में सड़क मार्ग के साथ जोड़ा जाता है। यह सड़कें इस प्रकार बनाई जाती हैं कि हर प्रकार की मौसमी मुसीबतों को सहन कर सकें।

प्रश्न 2.
सूबाई सड़क मार्ग क्या होते हैं ?
उत्तर-
जब किसी राज्य में व्यापारिक तथा भारी यात्री यातायात के लिए सड़कें बनाई जाए, वह राज्य सड़क मार्ग होते हैं। यह सड़कें जो कि आर्थिक कारवाई की नब्ज़ मानी जाती हैं, जिला मुख्य केंद्रों को राज्यों की राजधानियों के राष्ट्रीय शाहमार्ग के साथ मिलाती हैं।

प्रश्न 3.
‘सुनहरी चतुर्भुज’ कौन से शहरों को आपस में जोड़ती हैं ?
उत्तर-
‘सुनहरी चतुर्भुज’ भारत के अहमदाबाद, भुवनेश्वर, जयपुर, कानपुर, पुणे, सूरत, नैलूर विजयवाड़ा, गंटूर तथा बंगलुरु इत्यादि शहरों को आपस में जोड़ती हैं।

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प्रश्न 4.
19वीं सदी के अंत तक भारत में कौन-से तीन रेलवे-मार्ग बने हैं ?
उत्तर-
19वीं सदी के अंत तक भारत में कोलकाता, मुंबई तथा चेन्नई तीन प्रमुख नये रेलवे-मार्ग बने हैं।

प्रश्न 5.
कोलकाता कौन-कौन से रेलवे जोनों का मुख्यालय है ?
उत्तर-
कोलकाता पूर्वी रेलवे तथा मैट्रो रेलवे जोनों का मुख्यालय है।

प्रश्न 6.
कैनेडियन पैसेफ़िक रेलवे क्या है ?
उत्तर-
कैनेडियन पैसेफिक रेलवे, पार महाद्वीप रेल मार्ग की एक उदाहरण है जो कि उत्तरी अमेरिका महाद्वीप में कैनेडा के नागरिकों की सेवा कर रहा है इसका कुछ हिस्सा संयुक्त राज्य अमेरिका में भी निकलता है। इस मार्ग का निर्माण 1881 में शुरू हुआ था तथा अभी तक विस्तार चल रहा है।

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प्रश्न 7.
डाइमंड चतुर्भुज कौन-से राज्यों को छू पाएगी?
उत्तर-
डाइमंड चतुर्भुज उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली, हरियाणा, आन्ध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, बिहार, उड़ीसा, झारखण्ड तथा पश्चिमी बंगाल राज्यों को छू पाएगी।

प्रश्न 8.
दिल्ली आगरा रेल गलियारा से पहचान करवाओ।
उत्तर-
दिल्ली आगरा रेल गलियारा का उद्घाटन 5 अप्रैल, 2016 में हुआ है। दिल्ली से आगरा तक 160 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ़्तार के साथ आगरा गतिमान ऐक्सप्रैस चलाई गई।

प्रश्न 9.
भारत में आंतरिक जल यातायात कौन-से दरियाओं में होती है ?
उत्तर-
भारत में आंतरिक जल यातायात के अनुकूल दरिया हैं-गंगा, भगीरथी, हुगली, ब्रह्मपुत्र, महानदी, कृष्णा, जुयारी, काली, शरावति, नेर्तावति इत्यादि।

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प्रश्न 10.
व्यक्तिगत संचार के साधन कौन-कौन से हैं ?
उत्तर-
व्यक्तिगत संचार के प्रमुख साधन हैं-

  • डाक सेवाएं
  • ई-मेल सेवा
  • फैक्स संदेश
  • टैलीफोन
  • कोरियर सेवा
  • कम्प्यूटर या सैलफोन सेवाएं।

प्रश्न 3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 10-12 पंक्तियों में दें:

प्रश्न 1.
भारत के उत्तर दक्षिण तथा पूर्व-पश्चिम गलियारा प्रोजैक्टों से पहचान करवाओ।
उत्तर-
भारत के उत्तर-दक्षिण तथा पूर्व-पश्चिम गलियारा प्रोजैक्टों का मुख्य उद्देश्य देश के हर कोने तक बढ़िया सड़क-मार्गों का जाल बिछाने का है। इस योजना की देख-रेख की पूरी ज़िम्मेदारी नैशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अंतर्गत की गई जो कि केंद्रीय सड़क यातायात तथा शाहमार्ग मंत्रालय के अंतर्गत काम कर रही है। इस प्रकल्प का मुख्य उद्देश्य चार से छः मार्गी, कुल 7300 कि०मी० लंबी सड़क का निर्माण करने से है जो उत्तर से दक्षिण की तरफ श्रीनगर से कन्या कुमारी, पूर्व से पश्चिम की तरफ पोरबंदर से सिलचर तक बनाना था। उत्तर-दक्षिण गलियारा जो कि श्रीनगर से कन्या-कुमारी तक है, इसकी लंबाई 4000 कि०मी० है तथा यह कोची के साथ जुड़ता है। पूर्व-पश्चिम गलियारा जो कि पोरबंदर से सिलचर तक है इसकी लंबाई 3300 किलोमीटर है। यह दोनों सड़क मार्ग गलियारे 17 राज्यों को छूते हैं। जो हैं-जम्मू तथा कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आन्ध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, गुजरात, राजस्थान, बिहार, पश्चिमी बंगाल तथा असम। यहां यह भी है कि उत्तर-दक्षिण तथा पूर्व-पश्चिम गलियारे बनाने के लिए सिर्फ राष्ट्रीय शाहमार्ग ही प्रयोग किये जाते हैं। उत्तर प्रदेश का झाँसी प्रदेश वह रेलवे जंक्शन है जहाँ सड़क गलियारे आपस में काटते हैं।

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प्रश्न 2.
सुनहरी चतुर्भुज सड़क मार्ग योजना पर नोट लिखो।
उत्तर-
सुनहरी चतुर्भुज, राष्ट्रीय शाहमार्ग विकास प्रकल्प के अधीन भारत में सम्पूर्ण होने वाली सबसे बड़ी सड़क निर्माण योजना है। इसका प्रबंध भी राष्ट्रीय शाहमार्ग अथॉरिटी के अंतर्गत ही था। यह दुनिया की पांचवीं बड़ी सड़क निर्माण योजना है। यह योजना साल 2001 में प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा प्रारंभ की गई जो 2012 में सम्पूर्ण होनी थी। इस प्रकल्प में भारत के चार महानगरों दिल्ली, मुंबई, चेन्नई तथा कोलकाता को आपस में मिसाली सड़क-मार्ग के साथ जोड़े जाने की एक योजना है जो कि रेखा-गणितिक आकृति होने के कारण तथा चतुर्भुज का आकार होने के कारण सुनहरी चतुर्भुज कहलाती है। इस योजना से जुड़े सड़क-मार्ग के साथ कुछ बड़े शहर लगते हैं जैसे बंगलूरु, अहमदाबाद, जयपुर, भुवनेश्वर, कानपुर, पुणे, सूरत, नैलूर, विजयवाड़ा तथा गंटूर। इस सुनहरी चतुर्भुज की लंबाई 5846 कि०मी० है तथा इसके अंतर्गत चार तथा छः मार्गी ऐक्सप्रेस हाईवे बनाए गए हैं। इस चतुर्भुज का शाहमार्ग देश के 13 राज्यों में से निकलता है तथा सबसे अधिक हिस्सा आंध्र प्रदेश में है तथा सबसे कम हिस्सा दिल्ली में पड़ता है।

प्रश्न 3.
भारतीय रेलवे नीति के मुख्य उद्देश्य क्या हैं ? लिखो ?
उत्तर-
भारतीय रेलवे नीति के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं-

  1. रेलवे मार्गों की लंबाई बढ़ाना।
  2. गेज का परिवर्तन भाव सौड़ी मीटर गेज को चौड़ी लाइन में बदलता।
  3. रेल मार्ग का बिजलीकरण करना।
  4. रेल प्रबंध की कार्य कुशलता में सुधार करना।
  5. पुराने भाप के इंजनों तथा डीज़ल इंजनों को बदल कर बिजली इंजन प्रयोग में लाने।
  6. सिगनल संचार तकनीक को सुधारना।
  7. मुसाफ़िरों के लिए अच्छी सुविधाएं उपलब्ध करवाना।
  8. यात्री किराया में स्थिरता लाना।
  9. ऊंची रफ़्तार की गाड़ियों को चलाना।
  10. रेलवे कार्य के लिए कंप्यूटर प्रयोग में लाना।

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प्रश्न 4.
भारतीय रेलवे जोनों पर नोट लिखो।
उत्तर-
स्वतन्त्रता के पश्चात् भारतीय रेल प्रबंध को भारतीय रेलवे बोर्ड ने 6 जोनों में विभाजित किया था जो थेउत्तरी खंड, पश्चिमी खंड, पूर्वी खंड, मध्यम खंड, दक्षिणी खंड तथा उत्तर-पूर्वी खंड परंतु बाद में सन् 1958 से 1960 तक तीन अन्य खंड बना दिए गए जिस के साथ रेलवे के कुल 9 जोन बन गए तथा लगभग तीन दहाकों के पश्चात् रेलवे में अब 18 जोन हैं, जो ये हैंक्रम संख्या

रेलवे जोन — मुख्यालय

  1. उत्तरी रेलवे — नई दिल्ली
  2. उत्तर-पूर्वी रेलवे — गोरखपुर
  3. उत्तर-पूर्वी फ्रंटीयर — मालीगाऊ (गुवाहाटी)
  4. पूर्वी रेलवे — कोलकाता
  5. दक्षिणी-पूर्वी रेलवे — बिलासपुर
  6. दक्षिणी-मध्यम रेलवे — सिकंद्राबाद
  7. दक्षिणी रेलवे — चेन्नई
  8. मध्य रेलवे — मुंबई
  9. पश्चिमी रेलवे — मुंबई
  10. दक्षिणी-पश्चिमी रेलवे — हुँबली
  11. उत्तर-पश्चिमी रेलवे — जयपुर
  12. पश्चिमी-मध्यम रेलवे — जबलपुर
  13. उत्तरी-मध्यम रेलवे  – इलाहाबाद
  14. दक्षिणी-पूर्वी मध्यम रेलवे — बिलासपुर
  15. पूर्वी तटवर्ती — भुवनेश्वर
  16. पूर्वी रेलवे मध्यम रेलवे — हाजीपुर  मध्यम रेलवे
  17. कोंकण रेलवे — नई दिल्ली
  18. मैट्रो रेलवे — कोलकाताइलाहाबाद

प्रश्न 5.
अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के आधार क्या हो सकते हैं ? भारत की दरामद तथा बरामद पर नोट लिखो।
उत्तर-
अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के आधार-

  • प्राकृतिक साधनों के अस्तित्व में फर्क।
  • मांग तथा पूर्ति में अंतर।
  • तकनीकी विकास में अंतर।
  • जलवायु तथा आर्थिक विकास में अंतर।
  • व्यापारिक देशों की जंग तथा अमन के हालात।
  • व्यापारिक नीतियां तथा देशों के बीच आपसी राजनीतिक संबंध

भारत की दरामद तथा बरामद-भारत में उत्पादन किया गया फालतू सामान बेच दिया जाता है तथा जिसकी आवश्यकता होती है वह सामान खरीद लिया जाता है जो सामान बेचा जाता है उसको बरामद तथा जो सामान खरीदा जाता है उसे दरामद कहते हैं। भारत खनिज ईंधन, खनिज तेल, मोम, जैविक रसायन, फार्मेसी उत्पादन, गेहूं से बनी वस्तुएं, अनाज, बिजली की मशीनरी, कपास से सूती कपड़ा, प्लास्टिक/कहवा, मसाले इत्यादि का बरामद करता है तथा पैट्रोल, खनिज, मशीनरी, खाद्य, लोहा तथा इस्पात, मोती तथा कीमती पत्थर, सोना तथा चांदी, रसायन, दवाइयां फाईबर इत्यादि दरामद की जाती हैं।

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प्रश्न 6.
भारत के अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों तथा प्रमुख बंदरगाहों के नाम लिखो।
उत्तर-
भारत के अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे-भारत के प्रमुख हवाई अड्डे निम्नलिखित हैं-
PSEB 12th Class Geography Solutions Chapter 7 परिवहनयातायात, संचार तथा व्यापार 1
भारतीय बंदरगाहें-कांडला, पोरबंदर, सूरत, पणजी, मर्मागाओ, मंगलौर, कोची, तूतीकोरन, नागापट्नम, चेन्नई, ईनौर, मछलीपटनम, काकीनाड़ा, विशाखापटनम, पाराद्वीप, हलदिया प्रमुख बंदरगाहें हैं।

प्रश्न 7.
व्यक्तिगत संचार तथा जन संचार की आपसी तुलना करो।
उत्तर-
व्यक्तिगत संचार –

  1. जब दो व्यक्ति या दो से अधिक व्यक्ति आमने सामने होकर किसी साधन की सहायता के साथ अपनी भावनाओं, विचारों तथा संदेशों को बांटना व्यक्तिगत संचार कहलाता है।
  2. ऐसे संचार में दोनों पक्ष एक दूसरे से परिचित होते हैं।
  3. इसमें कुछ साधनों का प्रयोग किया जाता है जैसे- डाक सेवाएं, ई-मेल, फैक्स, टैलीफोन, कोरियर, कंप्यूटर इत्यादि।

जन संचार-

  1. जब कोई संदेश एक बड़ी गिनती में लोगों के साथ बाँटा जाता है उसको जन संचार कहते हैं।
  2. संचार पक्ष में शामिल लोग एक-दूसरे से परिचित नहीं होते।
  3. जन संचार में कुछ साधन प्रयोग किए जाते हैं जैसे-जनतक ऐलान, रेडियो, टी०वी०, सिनेमा,अख़बार, सैटेलाईट, इंटरनैट संचार इत्यादि।

PSEB 12th Class Geography Solutions Chapter 7 परिवहन/यातायात, संचार तथा व्यापार

प्रश्न 8.
कांडला-बठिंडा पाइप लाइन पर नोट लिखो।
उत्तर-
कांडला-बठिंडा पाइप लाइन ऑयल कार्पोरेशन (IOC) की ओर बठिंडा के तेल शोधक कारखाने को कच्चा तेल पहुँचाने के लिए 1443 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन 2392 करोड़ रुपए खर्च कर बिछाने की योजना बनाई गई थी। इस योजना का पहला चरण जो कांडला से सागानौर तक था। 1996 में पूरा हो गया तथा मई 1996 में सागानोर से पानीपत तथा जून 1996 में पानीपत से बठिंडा तक का चरण पूरा कर दिया गया था। इस प्रकल्प का अगला चरण शुरू कर दिया गया जो कि चल रहा है। यह बठिंडा-जम्मू-श्रीनगर गैस पाइप लाइन बिछाने का है। इस प्रकल्प के पूरा होने से जम्मू तथा कश्मीर को हर समय रसोई गैस की सप्लाई मिल सकेगी। इसलिए यह प्रकल्प जम्मू कश्मीर सूबे के लिए विशेष महत्त्व रखता है।

प्रश्न 9.
भारतीय राष्ट्रीय जल मार्गों पर नोट लिखो।
उत्तर-
भारतीय राष्ट्रीय जल मार्ग-भारत में 10 मार्गों को राष्ट्रीय जल-मार्ग का दर्जा हासिल है। यह हैं-

  1. गंगा, हल्दिया तथा इलाहाबाद के बीच।
  2. ब्रह्मपुत्र, सेतिया तथा युबड़ी के बीच।
  3. पश्चिमी उटी नहर, कोल्लम से कोटापुर्म के बीच।
  4. केरल में चंपाकारा नहर के साथ का क्षेत्र।
  5. केरल में उद्योगमंडल नहर के साथ का क्षेत्र।
  6. ब्रह्मनी नदी तलचर से धर्मरा तक।
  7. काकीनाड़ा से पांडिचेरी तक।
  8. गोदावरी नदी में भदराचलम से राजामुंदरी तक।
  9. कृष्णा नदी में वज़ीरावाद से विजयवाड़ा तक।
  10. लखीमपुर से भंग तक।

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प्रश्न 10.
भारतीय वायु यातायात से पहचान करवाओ।
उत्तर-
भारत जैसे बड़े तथा घनी जनसंख्या वाले देश के लिए वायु यातायात का बहुत महत्त्व है। भारत में वायु यातायात का आरंभ 1911 के साल में हुआ जब इलाहाबाद से लेकर नैनी तक, 10 कि०मी० की दूरी के साथ वायु डाक सेवा का प्रयोग किया गया था। इसके बाद कई वायु अड्डे भी बनाये गए तथा फलाईंग क्लब भी बनाए गए जिसके साथ वायु यातायात को प्रोत्साहन मिला। देश की आज़ादी के बाद तथा विभाजन समय (1947) भारत में चार वायु सेवाएं हैं-टाटा सन्ज लिमिटेड, इण्डियन नैशनल एयरवेज़, एयर सर्विसज़ आफ इंडिया तथा डैकन एयरवेज तथा 1951 में चार कंपनियां भारत में वायु सेवाएं लाने के काम में जुट गई। बाद में इन कंपनियों की मलकियत सरकार ने अपने हाथों में ले ली तथा दो कार्पोरेशनें बना दीं। एयर इंडिया जो अन्तर्राष्ट्रीय उड़ानों के लिए थी तथा दूसरी इण्डियन एयर लाइन्ज़ घरेलु उड़ानों के लिए थी।

प्रश्न 4. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 20 पंक्तियों में दो :

प्रश्न 1.
भारत की अलग-अलग सड़क योजनाओं से पहचान करवाओ।
उत्तर-
किसी भी देश में सड़कों के लिए विशेष स्थान होता है। लोगों तथा समान को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने के लिए सड़कों का ही प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा सड़क यातायात अन्य यातायात के साधनों से सबसे सस्ता है। सड़क मार्गों का जाल फैलाने के लिए कई सड़क योजनाओं को बनाया गया है। जैसे-

1. नागपुर योजना (Nagpur Plan)-यह योजना भारत में सड़कों के प्रसार के लिए 1943 में बनाई गई थी।
इस योजना के अधीन देश की मुख्य सड़कों तथा आम सड़कों तथा अन्य सड़कों की लंबाई भी बढ़ती गई।

2. बीस वर्षीय योजना (Twenty Year Plan)-इस योजना की शुरुआत 1961 में हुई। इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश में सड़कों की कुल लंबाई 6 लाख 56 हजार किलोमीटर से बढ़ाकर 10 लाख 60 हज़ार किलोमीटर तक करना था तथा सड़क घनत्व भी प्रति 100 कि०मी० रकबे में 32 कि०मी० करना था। इस योजना को पूरा करने के लिए 20 सालों का समय तय किया गया।

3. ग्रामीण सड़क योजना (The Rural Road Development Plan)-इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के बीच सड़कों का विकास करके कम-से-कम 1500 व्यक्तियों की तथा इससे अधिक आबादी वाले गाँवों को आपस में सड़क मार्गों के साथ जोड़ना था। यह सड़कें इस तरह बनाई जाती हैं कि मौसमी कठिनाइयों को सहन कर सके।

4. बी०ओ०टी० (निर्माण, उपयोग तथा हवाले करो) (Built, Operate and Transfer Scheme)-इस योजना में प्राइवेट बिल्डरों तथा ठेकेदारों को सड़कों तथा पुलों का निर्माण करने के लिए ठेके दिए गए थे तथा यह सहमति भी दी गई कि यह अपना निर्माण सड़क से जाने वाले वाहनों के चालकों से सीमित किए समय के लिए टोल टैक्स इकट्ठा करना तथा फिर सड़कों को सरकार के हवाले कर देना। यह योजना एक सफल योजना रही तथा देश के कई हिस्सों में इस योजना को सफलता हासिल हुई।

5. केंद्रीय सड़क फंड (Central Road Fund)-इस फंड के साथ संबंधित एक्ट दिसंबर 2000 में लागू किया गया था। इस एक्ट के अनुसार सड़कों का विकास पैट्रोल तथा डीज़ल पर लगे टैक्स तथा कस्टम कर को इकट्ठा करके किया जाएगा।

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प्रश्न 2.
नए राष्ट्रीय शाहमार्ग अंकण योजना पर विस्तार सहित नोट लिखो।
उत्तर-
राष्ट्रीय शाह मार्ग अंकण योजना एक नई अंकण योजना थी। भारत में यह मार्ग प्रबंध भारत सरकार की एजेन्सियों की तरफ से चलाया तथा संभाला गया है। राष्ट्रीय शाह मार्ग की लंबाई जून 2016 तक एक लाख 87 किलोमीटर थी। इनमें लगभग 26,200 किलोमीटर शाहमार्ग 4 मार्ग तथा बाकी 2 मार्ग हैं। केंद्रीय सरकार के तय किए उद्देश्य के मुताबिक सन् 2017 से हर रोज 30 कि०मी० शाह मार्ग विकसित किए जाए तथा नए विकास के लिए लुक तथा कोयले की बजाए सीमेंट का प्रयोग किया जाए। हाल ही में कई सड़क मार्गों को राष्ट्रीय मार्ग घोषित किया गया है। अब बड़े क्षेत्रों तथा शहरों के इधर-उधर बाईपास बनाये जा रहे हैं, ताकि शाह मार्गों पर यातायात का बहाव बिना रोक-टोक के निरंतर चलता रहे। इन शाहमार्ग का विकास तेजी से हो रहा है। 2004 से 2014 के समय में शाह मार्ग में सिर्फ 18,000 कि०मी० की वृद्धि हुई है।

भारतीय सड़क यातायात तथा हाईवेज़ मंत्रालय ने 28 अप्रैल, 2010 को एक नोटीफिकेशन निकाला तथा इसमें राष्ट्रीय शाहमार्ग को नए अंकों का प्रबंध दिया। यह नया नम्बर राष्ट्रीय शाहमार्ग के भौगोलिक क्षेत्र का ज्ञान हमें करवाता है। अब पूर्व से पश्चिम दिशा की तरफ जा रहे सारे शाहमार्ग का क्रम पहचान अंक टांक अंक हैं जिन की शुरुआत उत्तर में हो रही है तथा जैसे-जैसे हम दक्षिण दिशा की ओर जाते हैं क्रम अंक में वृद्धि होनी शुरू हो जाती है तथा जैसे ही विस्तार अंक में वृद्धि होगी, शाहमार्ग पहचान अंक कम होता चला जाएगा, विस्तार अंक के कम होने के साथ पहचान अंक में वृद्धि होगी।

उदाहरण के तौर पर राष्ट्रीय शाहमार्ग नंबर 1 जम्मू कश्मीर में है तथा नंबर 87 तमिलनाडु में है। अब इससे पता चलता है कि उत्तर-दक्षिण दिशा की ओर जाते शाहमार्ग का क्रम पहचान अंक जिस्त है तथा इसकी शुरुआत पूर्व में होकर पश्चिम की ओर जाते समय बढ़ती है। जैसे ही लंबकार अंक कम होगा तब शाहमार्ग पहचान अंक के वृद्धि होगी तथा लंबकार अंक बढ़ेगा तो शाहमार्ग पहचान अंक कम हो जाएगा। जैसे कि राष्ट्रीय शाहमार्ग नंबर-2 उत्तर-पूर्वी राज्यों में पड़ता है तथा नंबर 68 राजस्थान से गुजरात की ओर जा रहा है।

राष्ट्रीय शाहमार्ग की एक और विशेषता यह है कि प्रमुख राष्ट्रीय शाहमार्गों का पहचान अंक एकहरा, दोहरा होता है परंतु उनमें निकल रहे अगले शाहमार्ग के पहचान अंक तीहरे होते हैं, भाव सैंकड़ों में होते हैं। जहाँ यह भी वर्णन योग्य है कि नई अंकण योजना में सिर्फ पुराने शाहमार्गों के अंक ही नहीं बदले गए, बल्कि मार्गों का सारा प्रबंध दुबारा से किया गया है, जैसे कि राष्ट्रीय शाहमार्ग नंबर 27 जो पोरबंदर से सिलचर तक है तथा पूर्व से पश्चिमी गलियारा है। कितने ही पुराने राष्ट्रीय शाहमार्ग को हर मार्ग आपस में जोड़ रहा है। आज के नये प्रबंध के अनुसार अब देश में 218 राष्ट्रीय शाहमार्ग हैं तथा 78 प्रमुख शाहमार्ग तथा 140 राष्ट्रीय मार्ग है जो शाह राज्यों में ही निकल रहे हैं। इन को ऑफ सूट हाईवेज कहा जाता है। इन ऑफ सूट हाईवेज की पहचान अंक सैंकड़ों में हुआ है तथा अधिक पहचान अंक का ईकाई अंक दिशा निर्धारण करता है, जैसे कि यह इकाई अंक टांक हैं, तो शाहमार्ग में निकला मार्ग भी पूर्व-पश्चिम दिशा में है तथा यह अंक इकाई है, जिस्त हैं तब शाहमार्ग में निकला मार्ग भी उत्तर-दक्षिण दिशा में है।

प्रश्न 3.
पार-महाद्वीपीय रेलवे जालों से पहचान करवाओ।
उत्तर-
पार-महाद्वीपीय रेलवे मार्ग लंबी दूरी तय करने वाले रेल मार्ग हैं। इन रेल-मार्गों का जाल ऐसा है जो कि महाद्वीप की सारी भूमि को पार करके दूसरे महासागर के साथ लगते महाद्वीप के सिरे तक पहुंच जाता है। पार-महाद्वीप रेल-मार्गों का इतिहास आज से तकरीबन 150 साल पुराना है। संसार की सबसे पहली रेल लाईन 1863 से 1869 के बीच अमेरिका में पसारी गई जो कि यू०एस०ए० में से गुजरती हुई अंध-महासागर के तट पर होती हुई प्रशांत महासागर तक 1776 मील का रास्ता तय करती थी। संसार में और भी कई पार-महाद्वीप रेल मार्गों का निर्माण हुआ है जो कि बहुत बड़ी संख्या में मुसाफिरों तथा माल को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए जाने गए। ट्रांस साइबेरियाई रेल मार्ग मास्को से रूस के पूर्व के तरफ वलादिवोस्तोक तक 9,289 किलोमीटर लंबा है तथा इसका निर्माण 1891 से 1916 तक के समय हुआ था। इस की कई शाखाएं हैं जो मास्को से इस मार्ग की सहायता के साथ चीन, मंगोलिया तथा उत्तरी कोरिया से जोड़ती हैं। इस मार्ग का विस्तार अभी भी चल रहा है।

कैनेडियन पैसेफिक रेल-मार्ग-रेलवे मार्ग की यह एक बहुत अच्छी उदाहरण हैं। यह रेल मार्ग कनाडा में पूर्वी भाग में हैलीफैक्स से चलकर पश्चिमी में बैन्कूवर तक पहुंचता है। यह रेल मार्ग दुर्ग पर्वत क्षेत्रों में से गुजरता है। इस रेल मार्ग से लकड़ी, खनिज पदार्थ, गेहूँ व लोहे का परिवहन होता है। इस मार्ग का निर्माण 1881 में शुरू किया गया तथा अभी तक इसका विस्तार हो रहा है।

पार ऑस्ट्रेलिया रेलवे मार्ग-यह रेलवे मार्ग पोर्ट ओगस्ता से लेकर कालगुरली तक फैला है। इसका काम 1917 में पूरा हो गया था यह रेल-मार्ग ऑस्ट्रेलिया के पूर्व से पश्चिमी सिरो को आपस में मिलाता है। ब्रिसबेन से बारस्ता सिडनी-मैलबोरन-ऐडिलेड इस मार्ग पथ तक पहुँचता है। इसके निर्माण के समय से ही इसमें तीन गेजों का उपयोग किया गया था जिस कारण इसकी शुरुआत तक का सफर सच हो गया। बाद में 1970 के साल में इसको एक रेलवे गेज में बदला गया। आज के समय सिडनी पथ के बीच वाले रेलवे मार्ग को इण्डिन पैसेफिक रूट कहते हैं।

पनामा कैनाल रेलवे-यह रेलवे मार्ग पनामा नहर के समांतर चलता है तथा मध्य अमेरिका में अंध महासागर के तट से प्रशांत महासागर के तट तक चली जाती है जो कि 77 कि०मी० तक लंबी है। अंध महासागर के शहर कोलेन से प्रशांत महासागर के शहर बल्लबरा तक का रेलवे मार्ग ज्यादा लंबा तो नहीं परंतु यह मार्ग विश्व के बड़े महासागरों को मिलाता है जिस कारण इसका महत्त्व काफी बढ़ गया है। यह रेल मार्ग मुसाफिरों तथा माल को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाता है।

दक्षिणी अमेरिका में पार इण्डियन तथा पार ऐमेजीयन रेलवे प्रकल्प हैं। अफ्रीकन यूनियन ऑफ रेलवेज़ भी अफ्रीका में पार-महाद्वीपी रेल प्रकल्प बनाने की योजना बना रहे हैं।

भारत का रेलवे नैटवर्क दुनिया का सबसे बड़ा नैटवर्क है, जो कि हर रोज 1 करोड़ 80 लाख यात्रियों को तथा 20 लाख टन माल को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुँचाया जाता है। ऐसा विस्तृत रेल प्रबंध ही भारतीय रेलवे कहलाता हैं।

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प्रश्न 4.
देश की तेज रफ़्तार शाही गाड़ियों से पहचान करवाओ।
उत्तर-
रेल के द्वारा सफर बाकी यातायात के साधनों से सस्ता तथा अधिक आरामदायक होता है। भारत में रेल मार्गों का महत्त्व बढ़ रहा है क्योंकि देश में सफर को आसान बनाने के लिए तेज़ रफ़्तार गाड़ियों को चलाया जा रहा है। ताकि समय की बचत की जा सके। सरकार इस तरफ काफी मेहनत कर रही है देश में पहले ही कुछ तेज़ रफ़्तार गाड़ियां हैं। जिनमें से मुख्य हैं

  1. नयी दिल्ली-आगरा गतिमान ऐक्सप्रैस, रफ़्तार 160 कि०मी०/घंटा।
  2. नयी दिल्ली-भोपाल शताब्दी एक्सप्रैस, इसकी रफ़्तार 91 कि०मी०/घंटा है।
  3. मुंबई-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रैस, इसकी रफ़्तार 90.46 कि०मी०/घंटा है।
  4. सियालदा-नई दिल्ली दुरंतो एक्सप्रैस, इसकी रफ्तार 91.0 कि०मी० प्रति घंटा है।
  5. नयी दिल्ली-कानपुर शताब्दी एक्सप्रैस, इसकी रफ़्तार 89.63 कि०मी०/घंटा है ।
  6. नयी दिल्ली-हावड़ा, दुरांतो एक्सप्रैस, इसकी रफ़्तार 88.21 कि०मी०/घंटा है।
  7. नयी दिल्ली-हावड़ा, दुरांतो ऐक्सप्रैस, इसकी रफ्तार 87.06 कि०मी०/घंटा है।
  8. नयी दिल्ली-इलाहाबाद, दुरांतो ऐक्सप्रैस, इसकी रफ़्तार 86.85 कि०मी०/घंटा है।
  9. सियालदा-नयी दिल्ली राजधानी ऐकस्प्रेस, इसकी रफ़्तार 87.06 कि०मी०/घंटा है।
  10. निजामुद्दीन-बांद्रा गरीब रथ, इसकी रफ्तार 82.80 कि०मी० प्रति घंटा।

तेज़ रेल गाड़ियों के अलग देश में रेल गाड़ी की एक और सहूलियत भी है जिसमें सफर शाही सुविधाओं से लैस होता है। इनको लग्ज़री गाड़ियां कहते हैं। इनका प्रबंध इण्डियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कार्पोरेशन लिमिटड (IRCTC) द्वारा किया गया। कुछ शाही गाड़ियों की सूची निम्नलिखित है-

I. महाराजा ऐक्सप्रैस-यह ऐक्सप्रैस देश के सैलानी महत्त्व रखने वाले स्थानों की शाही सैर करवाती है।
II. पैलेस ऑन वहील्ज़-यह ऐक्सप्रैस राजस्थान के सबसे बढ़िया सैलानी स्थानों की शाही सैर करवाती है।
III. द डैकन उड़ीसी-यह ऐक्सप्रैस शाही ढंग से दक्षिणी भारत की सैर करवाती है।
IV. रॉयल राजस्थान ऑन व्हील्स-यह हमें भारत की संस्कृति की शाही यात्रा करवाती है।
V. रॉयल ओरिएंट ट्रेन-यह रेलवे हमें मध्य भारत की शाही सैर करवाती है।
VI. गोल्डन चैरीयट- यह रेल हमें महाराष्ट्र तथा गुजरात की शाही सैर करवाती है।
VII. फैरी कुईन ऐक्सप्रैस-यह हमें राजस्थान तथा अलवर तथा सरिसका की यात्रा करवाती है।

प्रश्न 5.
संसार के प्रमुख समुद्री मार्गों पर नोट लिखो।
उत्तर-
संसार में व्यापार का एक बड़ा हिस्सा समुद्री मार्गों के द्वारा किया जाता है। समुद्री जहाजों की सहायता से भारी तथा आवश्यक चीज़ों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाया जाता है। यह स्थान बदली का एक सस्ता ढंग है। संसार में व्यापार अलग-अलग समुद्री मार्गों द्वारा किया जाता है तथा व्यापार के लिए छोटे मार्ग को चुना जाता है। संसार के प्रसिद्ध समुद्री मार्ग निम्नलिखित हैं-

1. उत्तरी अंध-महासागरीय मार्ग (North Atlantic Route)- यह समुद्री मार्ग विश्व में सबसे अधिक उपयोग किया जाता है तथा इसके द्वारा ही संसार का आधे से ज्यादा समुद्री व्यापार हो रहा है। इस क्षेत्र की मुख्य व्यापारिक बंदरगाहें हैं-रॉटरडैम, एंटवर्प, लंडन, बोस्टन, न्यूयॉर्क, फिलाडेल्फिया हैं।

2. केप ऑफ़ गुड होप (Cape of Good Hope)-यह समुद्री मार्ग अमेरिका महाद्वीप के दक्षिणी हिस्से से लेकर आशा अंतरीप हिस्से के आस-पास घूमता है।

3. भू-मध्य सागरीय स्वेज़ ऐशियाई मार्ग (The Mediterranean-SuejAsiatic Route)—यह मार्ग ऐशियाई तथा यूरोपीय देश को स्वेज़ नहर की सहायता से आपस में जोड़ता है।

4. पनामा नहर मार्ग (Panama Canal Route)-यह मार्ग अंध-महासागर तथा प्रशांत महासागर को आपस में मिलाता है तथा प्रशांत महासागर द्वार कहलाता है।

5. दक्षिणी अंध महासागरीय मार्ग (South Atlantic Route)-यूरोप के पश्चिमी देशों को अंध महासागर के रास्ते की सहायता के साथ दक्षिणी अमेरिका के पूर्वी उटी क्षेत्रों से मिलाकर व्यापार का मौका दिया जाता है।

6. पार प्रशांत-मार्ग (The Transpacific Route)-इस मार्ग का मुख्य केंद्र हवाई टापू में स्थित है।

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Geography Guide for Class 12 PSEB परिवहन/यातायात, संचार तथा व्यापार Important Questions and Answers

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर (Objective Type Question Answers)

A. बहु-विकल्पी प्रश्न :

प्रश्न 1.
भारत में सबसे लंबा राष्ट्रीय महामार्ग कौन-सा है ?
(A) NH
(B) NHS
(C) NH
(D) NHA
उत्तर-
(C) NH

प्रश्न 2.
संसार में सबसे लंबा रेलमार्ग कौन-सा है ?
(A) यूनियन पैसिफ़िक
(B) कैनेडियन नैशनल
(C) ट्रांस साइबेरियन
(D) ट्रांस इण्डियन।
उत्तर-
(C) ट्रांस साइबेरियन

प्रश्न 3.
ट्रांस साइबेरियन रेलमार्ग के पूर्वी छोर पर स्थित स्टेशन है ?
(A) हनोई
(B) शंघाई
(C) टोकियो
(D) ब्लाडी वास्टेक।
उत्तर-
(D) ब्लाडी वास्टेक।

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प्रश्न 4.
भारतीय रेलवे सिस्टम को कितने रेलवे जोन में विभाजित किया है ?
(A) 9
(B) 16
(C) 14
(D) 12.
उत्तर-
(B) 16

प्रश्न 5.
निम्नलिखित में से कौन-सी स्थल मार्ग यातायात की किस्म नहीं है :
(A) सड़कें
(B) रेलें
(C) पाइप लाइनें
(D) हवाई अड्डा।
उत्तर-
(C) पाइप लाइनें

प्रश्न 6.
राष्ट्रीय मार्गों का निर्माण तथा देखभाल कौन करता है ?
(A) केंद्र सरकार
(B) ज़िला सरकार
(C) बी०ओ०टी०
(D) NHAY.
उत्तर-
(A) केंद्र सरकार

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प्रश्न 7.
यमुना एक्सप्रेस हाईवे किस के हवाले है ?
(A) नोएडा तथा आगरा
(B) आगरा तथा दिल्ली
(C) दिल्ली तथा हिमाचल
(D) दिल्ली तथा पंजाब।
उत्तर-
(A) नोएडा तथा आगरा

प्रश्न 8.
सुनहरी चतुर्भुज सड़क मार्ग प्रकल्प में निम्नलिखित महानगरी में किसको शामिल नहीं किया जाता ?
(A) दिल्ली
(B) मुंबई
(C) अहमदाबाद
(D) चेन्नई।
उत्तर-
(C) अहमदाबाद

प्रश्न 9.
भारत सरकार के सड़क यातायात मंत्रालय के 28 अप्रैल, 2010 के नोटिफिकेशन में राष्ट्रीय शाहमार्ग को क्या प्रदान किया गया ?
(A) नई सड़कें
(B) नए अंक
(C) नए मार्ग
(D) सड़कों की मुरम्मत।
उत्तर-
(B) नए अंक

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प्रश्न 10.
देश में पहली रेल यात्रा मुंबई से थाने तक की गई :
(A) 1853
(B) 1854
(C) 1865
(D) 1868.
उत्तर-
(A) 1853

प्रश्न 11.
दूसरी रेलवे लाइन जो कोलकाता से रानीगंज तक थी यह कब बिछाई गई ?
(A) 1853
(B) 1854
(C) 1870
(D) 1865.
उत्तर-
(B) 1854

प्रश्न 12.
1950-51 के अंत तक रेलवे लाइनों की लंबाई कितनी थी ?
(A) 53,596 कि०मी०
(B) 53,000 कि०मी०
(C) 58,000 कि०मी०
(D) 60,000 कि०मी० ।
उत्तर-
(A) 53,596 कि०मी०

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प्रश्न 13.
उत्तर पूर्वी रेलवे जोन का मुख्यालय कहां पर है ?
(A) गोरखपुर
(B) दिल्ली
(C) आगरा
(D) कोलकाता।
उत्तर-
(A) गोरखपुर

प्रश्न 14.
संसार की पहली रेलवे अमेरिका में कब बिछाई गई ?
(A) 1863 से 1869
(B) 1865-66
(C) 1870-75
(D) 1870-71.
उत्तर-
(A) 1863 से 1869

प्रश्न 15.
मध्य अमेरिका में कौन-सी नहर अंध-महासागर के तट तक जाती है ?
(A) पिली का
(B) पनामा
(C) राईन
(D) वूलर।
उत्तर-
(B) पनामा

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प्रश्न 16.
साल 2014 के बजट अनुसार देश में कितने अर्ध तेज रेल गलियारे स्थापित किये जाते थे ?
(A) 9
(B) 10
(C) 6
(D) 5.
उत्तर-
(A) 9

प्रश्न 17.
निम्नलिखित में से कौन-सी लग्ज़री गाड़ी की उदाहरण नहीं है ?
(A) महाराजा ऐक्सप्रैस
(B) हावड़ा दुरांतो ऐक्सप्रेस
(C) पैलेस ऑन वहीक्लज़
(D) गोल्डन चैरीअट।
उत्तर-
(B) हावड़ा दुरांतो ऐक्सप्रेस

प्रश्न 18.
भारत में हवाई यातायात का प्रारंभ किस साल में हुआ ?
(A) 1910
(B) 1911
(C) 1921
(D) 1922.
उत्तर-
(B) 1911

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प्रश्न 19.
संचार की प्रमुख कितनी किस्में हैं ?
(A) 2
(B) 1
(C) 3
(D) 4.
उत्तर-
(A) 2

प्रश्न 20.
भारत निम्नलिखित में कौन-सी चीज़ों की दरामद नहीं करता ?
(A) पैट्रोल
(B) खनिज
(C) लोहा तथा इस्पात
(D) गेहूँ।
उत्तर-
(D) गेहूँ।

B. खाली स्थान भरें :

1. यातायात सुविधाओं को मुख्य रूप में …………. भागों में बांटा जाता है।
2. नागपुर योजना ………………… के साल में बनाई गई।
3. देश में यातायात का बहाव संभव बनाने के लिए . ……………. नाम से शाह मार्ग का निर्माण किया गया।
4. सन् 1871 तक तीन प्रमुख शहरों कोलकाता, ………………….. तथा …………………. रेल तंत्र द्वारा आपस में जोड़े गए।
5. भारतीय रेल तीन गेज चौड़ी, सौड़ी तथा ……………… गेज में बांटी जाती हैं।
6. एशिया तथा यूरोप के देशों को .. ……………. नहर की सहायता के साथ आपस में मिलाया गया।
उत्तर-

  1. तीन,
  2. 1943,
  3. एक्सप्रेस हाईवेज,
  4. मुंबई, चेन्नई,
  5. मीटर,
  6. स्वेज।

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C. निम्नलिखित कथन सही (√) हैं या गलत (x):

1. बीस वर्षीय योजना 1961 में आरंभ की गई।
2. पूर्व पश्चिमी गलियारा राजस्थान से पोरबंदर तक है।
3. सुनहरी चतुर्भुज दुनिया की पाँचवीं सबसे बड़ी सड़क योजना है।
4. देश में रेल-तंत्र विकसित करने का एक उद्देश्य था सिगनल संचार तकनीक में सुधार करना।
5. गोल्डन चैरीअट महाराष्ट्र और गुजरात की शाही सैर करवाती है।
उत्तर-

  1. सही
  2. गलत,
  3. सही,
  4. सही,
  5. सही।

II. एक शब्द /एक पंक्ति वाले प्रश्नोत्तर (One Word/Line Question Answers) :

प्रश्न 1.
ट्रशरी व्यवसाय क्या है ?
उत्तर-
जो सेवाएं प्रदान करते हैं।

प्रश्न 2.
परिवहन साधनों के तीन प्रकार बताएं।
उत्तर-
जल-मार्ग, थल मार्ग, हवाई-मार्ग।

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प्रश्न 3.
भारतीय सड़क मार्ग की लंबाई बताओ।
उत्तर-
18 लाख कि०मी०।

प्रश्न 4.
स्वर्ण चतुर्भुज से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
राष्ट्रीय मार्गों का जाल जो दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता को जोड़ता है।

प्रश्न 5.
ट्रांस साईबेरियन रेलमार्ग कौन-से स्थानों को जोड़ता है ?
उत्तर-
वलादिवोस्तक और सेंट पीटरसबर्ग।

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प्रश्न 6.
संसार में सबसे लंबा रेलमार्ग कौन-सा है ?
उत्तर-
ट्रांस साईबेरियन रेलमार्ग 8800 कि०मी० लंबा है।

प्रश्न 7.
भारत में रेलमार्गों की कुल लंबाई बताओ।
उत्तर-
63000 कि०मी०।

प्रश्न 8.
संसार के दो अंदरूनी जलमार्गों के नाम बताओ।
उत्तर-
राइन नदी और महान झीलें।

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प्रश्न 9.
अंध-महासागर पर दो बंदरगाहें बताओ।
उत्तर-
लंदन और न्यूयार्क।

प्रश्न 10.
स्वेज नहर किन सागरों को जोड़ती है ?
उत्तर-
लाल सागर और रूम सागर।

प्रश्न 11.
पनामा नहर किन सागरों को जोड़ती है ?
उत्तर-
अंध महासागर और प्रशांत महासागर।

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प्रश्न 12.
भारत के पश्चिमी तट पर दो बंदरगाहों के नाम बताओ।
उत्तर-
कांडला और मुंबई।

प्रश्न 13.
थल-मार्ग के यातायात प्रबंध की तीन किस्में बताओ।
उत्तर-
सड़कें, पाइप लाइन और रेल।

प्रश्न 14.
पहली रेल यात्रा कब और कहाँ तक की गई ?
उत्तर-
1853 में मुंबई से थाने तक।

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प्रश्न 15.
लग्ज़री गाड़ियों का प्रबंध किसके अधीन है ?
उत्तर-
भारतीय रेलवे कैटरिंग और टूरिज्म कार्पोरेशन लिमिटेड।

प्रश्न 16.
राष्ट्रीय यातायात नीति कमेटी के अनुसार कितने जल मार्गों को राष्ट्रीय जलमार्ग ऐलान किया गया ?
उत्तर-
10 जल मार्गों को।

प्रश्न 17.
ऐयरपोर्ट्स अथारिटी ऑफ इण्डिया की ओर से दी जाने वाली जानकारी/सूचना के अनुसार कितने अंतर्राष्ट्रीय और घरेलू हवाई अड्डे हैं ?
उत्तर-
30 अंतर्राष्ट्रीय और 400 घरेलू हवाई अड्डे हैं।

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प्रश्न 18.
संसार में सबसे लंबी कच्चे तेल की पाइप लाइन कहाँ बिछाई गई ?
उत्तर-
उत्तरी अमेरिका में।

प्रश्न 19.
TAPI पाइप लाइन किस ओर से विकसित की गई ?
उत्तर-
एशियाई विकास बैंक।

प्रश्न 20.
संचार की मुख्य किस्में बताओ।
उत्तर-
व्यक्तिगत और जन-संचार।

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प्रश्न 21.
व्यापार से आपका क्या भाव है ?
उत्तर-
वस्तुओं और सेवाओं की खरीदो-फरोख्त की क्रिया को व्यापार कहा जाता है।

प्रश्न 22.
भारत की ओर से बरामद की जाने वाली वस्तुओं के नाम बताओ।
उत्तर-
खनिज तेल, मोम, ईंधन, जैविक रसायन, फार्मेसी, उत्पादन, कनक/गेहूँ से बनी वस्तुएँ।

प्रश्न 23.
भारत की मुख्य चार बंदरगाहों के नाम बताओ।
उत्तर-
मैंगलोर, कोची, सूरत, पणजी।

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प्रश्न 24.
आलमी व्यापार संगठन क्या है ?
उत्तर-
यह एक अंतर-सरकारी संस्था है, जो अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को क्रमबद्ध करती है और अलग-अलग देशों के मध्य व्यापारिक नियमावली निश्चित करती है।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
यातायात सविधाओं को कौन-से वर्गों में वर्गीकृत किया जाता है ?
उत्तर-
यातायात सुविधाओं को निम्नलिखित वर्गों में वर्गीकृत किया जाता है-

  1. स्थल मार्ग यातायात
  2. जल मार्ग यातायात
  3. वायु मार्ग यातायात।

प्रश्न 2.
यातायात के साधन कौन-से ज़रूरी तत्त्वों पर निर्भर करता है ?
उत्तर-
यातायात के साधन के विकास में कई तत्त्वों का योगदान रहता है। यातायात मार्ग का निर्धारण आवश्यक है। वाहन तथा ऊर्जा के साधन परिवहन मार्गों पर प्रभाव डालते हैं। स्थल आकृति, मौसम परिवहन साधनों को प्रभावित करते हैं। आर्थिक विकास में कच्चे माल की प्राप्ति परिवहन के लिए आवश्यक तत्त्व है।

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प्रश्न 3.
अंतर-महाद्वीपी रेल-मार्ग किसे कहते हैं ? उदाहरण दो।
उत्तर-
अंतर महाद्वीपीय रेल-मार्ग उन रेल मार्गों को कहते हैं जो महाद्वीप के एक किनारे को दूसरे किनारे से जोड़ते हैं। यह रेल-मार्ग महाद्वीप के उल्ट तटों पर स्थित स्थानों को जोड़ते हैं। ट्रांस साइबेरियाई रेल-मार्ग तथा ट्रांस कैनेडियन रेल मार्ग इसकी दो उदाहरण हैं।

प्रश्न 4.
रेलमार्ग किन हिस्सों में बनाये जाते हैं ?
उत्तर-

  • रेलमार्ग हमेशा मैदानी समतल हिस्सों में बनाये जाते हैं।
  • रेल मार्ग हमेशा घनी जनसंख्या वाले प्रदेशों तथा आर्थिक रूप में विकसित प्रदेशों में बनाये जाते हैं।
  • बंदरगाहों को देश के आंतरिक हिस्सों से जोड़ने के लिए रेलमार्गों का निर्माण किया जाता है।

प्रश्न 5.
भारत के सीमावर्ती सड़क मार्ग बताओ।
उत्तर-
भारत के सीमावर्ती प्रदेशों में सड़कों का निर्माण करने के लिए सीमा सड़क बोर्ड की सन् 1960 में स्थापना की गई। भारत में सीमा निकट प्रदेशों में 27,000 कि०मी० लंबी पक्की सड़कें बनाई गई हैं। जिन में मनाली से लेह तक मुख्य सड़क है। इस सड़क की औसत ऊंचाई 4270 मीटर है।

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प्रश्न 6.
संसार के मुख्य समुद्री मार्गों का महत्त्व बताओ।
उत्तर-
यातायात के साधनों में समुद्री यातायात सबसे सस्ता तथा महत्त्वपूर्ण साधन है। संसार का अधिकतर व्यापार समुद्री मार्ग के द्वारा होता है। जब बहुत सारे जहाज एक निश्चित मार्गों पर चलते हैं, तब उसे समुद्री मार्ग कहते हैं।

प्रश्न 7.
भारतीय रेल-मार्गों की अलग-अलग आकार की पटरियां बताओ।
उत्तर-
भारत में रेल मार्ग तीन तरह के हैं:

  1. चौड़ी पटरी (Broad Gauge)-1.68 मीटर चौड़ी।
  2. छोटी पटरी (Metre Gauge)-1 मीटर चौड़ाई।
  3. तंग पटरी (Narrow Gauge)-0.68 मीटर चौड़ाई।

प्रश्न 8.
पनामा नहर की महत्ता बताओ।
उत्तर-
इस नहर के निर्माण के साथ अंध-महासागर के मध्य दूरी कम हो गई है। इससे पहले जहाज़ दक्षिणी अमेरिका के केप हारन का चक्कर ला कर जाते हैं। इस नहर से सबसे अधिक लाभ संयुक्त राज्य अमेरिका को हुआ है। इसके पश्चिमी तथा पूर्वी तटों के मध्य दूरी कम हो गई है। संयुक्त राज्य अमेरिका के पूर्वीतट से आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, दक्षिणी अमेरिका, जापान की बंदरगाहों की दूरी कम हो गई है। इस नहर द्वारा यूरोप को कोई विशेष लाभ नहीं है।

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प्रश्न 9.
HBJ गैस पाइप लाइन का वर्णन करो।
उत्तर-
भारत में गैस परिवहन के लिए हजीरा-विजयपुर-जगदीशपुर पाइप लाइन बनाई गई है। यह पाइप लाइन 1700 किलोमीटर लंबी है। यह पाइप लाइन गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश राज्यों से गुजरती है। इस गैस के साथ विजयपुर, सवाई माधोपुर, जगदीशपुर, शाहजहांपुर, अंबाला तथा बबराला में खाद बनाने की योजना है।

प्रश्न 10.
व्यक्तिगत संचार से आपका क्या अर्थ है ?
उत्तर-
जब दो या दो से ज्यादा व्यक्ति आमने-सामने होकर या किसी साधन का उपयोग करके कोई जानकारी, विचार संदेश आपस में आदान-प्रदान करें उसे व्यक्तिगत संचार कहते हैं। ऐसे संचार के साधनों में व्यक्ति आपस में एक-दूसरे से पहचान करवाते हैं। मुख्य साधन हैं-डाक सेवाएं, टैलीफोन, ई-मेल इत्यादि।

प्रश्न 11.
राष्ट्रीय व्यापार के कोई चार आधार लिखो।
उत्तर-
राष्ट्रीय व्यापार के आधार निम्नलिखित हैं-

  • मांग तथा पूर्ति में अंतर।
  • प्राकृतिक साधनों के अस्तित्व में अंतर।
  • माल के मूल्यों में अंतर।
  • व्यापारिक नीतियां।

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प्रश्न 12.
आलमी व्यापार संगठन (World Trade Organization) क्या हैं ?
उत्तर-
आलमी व्यापार संगठन पहली बार जनवरी, 1995 को मराकेश समझौते द्वारा अस्तित्व में आया। जिस में संसार के 123 देशों ने हस्ताक्षर किए तथा शुल्क और व्यापार पर सामान्य समझौता (General Agreement on Tarrifism and Trade) का अंत कर दिया। इस संगठन का मुख्य दफ्तर जनेवा में है। खासकर व्यापारिक मसलों का समाधान तथा नियमों को लागू इस द्वारा ही किया जाता है। यह संगठन आलमी व्यापार स्तर को सुधार से राष्ट्रीय व्यापार को ज्यादा महत्त्वपूर्ण बना रहा है।

प्रश्न 13.
NNB पाइप लाइन का वर्णन करो।
उत्तर-
NNB नाहरकटिया नानूमती बरोनी पाइप लाइन देश की पहली पाइप लाइन है जो कि नाहरकटिया के तेल के कुओं से नानूमती तक कच्चा तेल पहुँचाने के लिए बिछाई गई थी तथा बाद में यह पाइप लाइन बरोनी तक बढ़ा दी गई। इसकी लंबाई 1167 कि०मी० है तथा अब इसको उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर तक बढ़ा दिया गया है। इस NNB पाइप लाइन का काम 1962 तक शुरू हो गया था जब तक कि बरोनी तक का भाग 1964 में शुरू किया गया।

प्रश्न 14.
उत्तरी अंध महासागरी मार्ग पर नोट लिखो।
उत्तर-
यह संसार के प्रमुख समुद्री मार्गों में एक है। यह जल-मार्ग संसार का सबसे अधिक उपयोग में आने वाला जल मार्ग है। इस जल मार्ग के द्वारा आधे से अधिक समुद्री व्यापार किया जा रहा है। उत्तरी अंध महासागर मार्ग की प्रमुख बंदरगाहें हैं-रॉटरडैम, फिलाडेल्फिया, ऐंटवर्प, लंदन, न्यूयॉर्क, बोस्टन इत्यादि हैं।

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प्रश्न 15.
जल-मार्गी यातायात को कौन-से दो भागों में विभाजित किया जाता है ?
उत्तर-
जल मार्गी यातायात को मुख्य रूप में दो भागों में विभाजित किया जाता है :

  1. आंतरिक जल मार्ग
  2. समुद्री जल मार्ग।

प्रश्न 16.
सड़क मार्गों का जाल बिछाने के लिए कौन-सी योजनाएं देश में चल रही हैं ?
उत्तर-
सड़क मार्गों का जाल बिछाने के लिए मुख्य योजनाएं हैं :

  • नागपुर योजना
  • बीस वर्षीय योजना
  • ग्रामीण सड़क योजना
  • बी०ओ०टी०
  • केंद्रीय सड़क फंड।

प्रश्न 17.
सड़क यातायात आसान क्यों है ?
उत्तर-
स्थल यातायात का मुख्य साधन सड़कें हैं। यह एक सस्ता तथा तेज़ यातायात का साधन है। सड़कें खेतों को फैक्ट्रियों के साथ तथा वस्तुओं को विक्रेताओं तथा खरीददारों तक पहुँचाने का एक साधन है। सड़कें असमतल तथा ऊँचे-नीचे स्थानों पर भी बनाई जा सकती हैं। घनी यूरोपीय सड़कें उन देशों के विकास का एक मुख्य साधन हैं।

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प्रश्न 18.
पनामा नहर की मुख्य विशेषताएं बताओ।
उत्तर-
पनामा नहर-

  1. यह पनामा के स्थान पर स्थित है तथा U.S.A. का इस पर अधिकार है।
  2. इस नहर से निकलने वाले जहाजों पर टैक्स कम लगाया जाता है।
  3. इसके कारण अंध महासागर तथा प्रशांत महासागर के बीच दूरी कम हो गई।
  4. यह नहर संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए बहुत उपयोगी है क्योंकि इस कारण अब जहाजों को केप होरन तक नहीं जाना पड़ता।

प्रश्न 19.
सड़क मार्गों के क्या दोष हैं ?
उत्तर-

  1. सड़क मार्ग महंगे हैं।
  2. इनसे वायु प्रदूषण होता है।
  3. अधिक दूरी तक भारी वस्तुओं का परिवहन नहीं होता।
  4. दुर्घटनाएं प्रतिदिन बढ़ रही हैं।

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
परिवहन के विभिन्न साधनों के प्रकार बताओ।
उत्तर-
परिवहन के विभिन्न साधनों के प्रकार हैं-

  1. स्थल परिवहन
  2. जल परिवहन
  3. वायु परिवहन।

स्थल परिवहन में सड़कें, रेलें तथा पाइप लाइनें शामिल हैं। जल परिवहन के मुख्य रूप हैं-

  1. आंतरिक मार्ग
  2. समुद्री मार्ग।

वायु परिवहन में वायुयान सेवाएं गिनी जाती हैं।

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प्रश्न 2.
ग्रामीण सड़कें तथा ज़िला सड़कों में अंतर स्पष्ट करो।
उत्तर-
ग्रामीण सड़कें-

  1. यह सड़कें गाँव को जिले से जोड़ती हैं।
  2. ग्रामीण सड़कें अकसर समतल तथा स्थाई नहीं होती।
  3. इन सड़कों में काफी मोड़ आते हैं जिन पर भारी वाहन नहीं चल सकते।

जिला सड़कें-

  1. यह सड़कें कस्बे, बड़े गांवों तथा जिला केंद्रों को आपस में जोड़ती हैं।
  2. यह सड़कें अकसर स्थाई होती हैं।
  3. यहां पर मोड़ ज्यादा नहीं होते तथा अक्सर भारी वाहन चलते हैं।

प्रश्न 3.
भारतीय सड़कों की मुख्य विशेषताएं बताओ।
उत्तर-
भारतीय सड़कों की विशेषताएं निम्नलिखित हैं-

  • भारत में पक्की सड़कों की लंबाई 8 लाख 88 हजार कि०मी० है।
  • भारत में कच्ची सड़कों की लंबाई 9 लाख 55 हजार कि०मी० है।
  • भारत में हर 100 वर्ग किलोमीटर के पीछे 48 किलोमीटर सड़कें हैं जहां पर हर एक लाख लोगों के पीछे 293 किलोमीटर सड़कें हैं।
  • देश में राष्ट्रीय राज मार्गों की लंबाई 313558 किलोमीटर है।
  • इन सड़कों पर लगभग 37 लाख मोटर गाड़ियां चलती हैं।
  • भारतीय सड़कों को हर साल ₹ 1580 करोड़ की आमदन होती है।
  • भारत का 30% सामान सड़कों के द्वारा परिवहन किया जाता है।

प्रश्न 4.
रेल मार्गों के विकास का क्या महत्त्व है ?
उत्तर-
स्थलीय परिवहन में रेल-मार्ग एक महत्त्वपूर्ण साधन है। आधुनिक युग में देश में आर्थिक, सामाजिक तथा राजनीतिक दृष्टि से रेलों का बड़ा महत्त्व है।
महत्त्व-

  1. रेल-मार्ग किसी क्षेत्र के खनिज पदार्थों के विकास में सहायता करते हैं।
  2. रेल मार्ग औद्योगिक क्षेत्र में कच्चे माल तथा तैयार माल के वितरण में सहायता करते हैं।
  3. रेल मार्ग व्यापार को उन्नत करते हैं।
  4. रेल मार्ग राजनीतिक एकता व स्थिरता लाने में योगदान देते हैं।
  5. रेल मार्ग संकट काल में सहायता कार्यों में महत्त्वपूर्ण हैं।
  6. कम जनसंख्या वाले प्रदेशों में रेलमार्ग-जनसंख्या वृद्धि का आधार बनते हैं।
  7. लंबी-लंबी दूरियों को जोड़ने में रेलों ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वास्तव में रेल मार्गों के विकास में मानव ने दूरी और समय पर विजय प्राप्त कर ली है।

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प्रश्न 5.
आंतरिक जल मार्गों का क्या महत्त्व है ?
उत्तर-
जल मार्ग दो प्रकार के हैं-आंतरिक तथा महासागरी मार्ग। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिए समुद्री मार्गों का प्रयोग किया जाता है। किसी देश के प्रादेशिक व्यापार के लिए नदियां, नहरें, झीलों का आंतरिक जलमार्गों के रूप में प्रयोग किया जाता है। __मनुष्य प्राचीन काल से ही नदियों तथा नहरों का यातायात के लिए प्रयोग करता आया है। आजकल विकसित देशों में आंतरिक जल मार्गों को बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है। कृषि तथा उद्योगों के विकास में आंतरिक जल मार्ग महत्त्वपूर्ण हैं।

प्रश्न 6.
गोल्डन कुआर्डीलेटरल या सुनहरी चतुर्भुज से आपका क्या भाव है ?
उत्तर-
गोल्डन कुआर्डीलेटर भारत में बनाई गई पहली सड़क निर्माण योजना है जो कि राष्ट्रीय शाहमार्ग विकास प्रकल्प के तहत शुरू की गई। इसको संसार की पाँचवीं बड़ी सड़क निर्माण योजना का दर्जा हासिल है। इस प्रकल्प में भारत के चार प्रसिद्ध महानगरों दिल्ली, मुंबई, चेन्नई तथा कोलकाता को आपस में मिलाये जाने की योजना है जोकि एक चतुर्भुज की आकृति लेती है जिस के कारण इसको सुनहरी चतुर्भुज भी कहते हैं। इस सड़क योजना से जुड़े बड़े शहर हैं-अहमदाबाद, बैंगलोर, भुवनेश्वर, जयपुर, कानपुर, पुणे, सूरत, नैलूर, विजयवाड़ा तथा गंटूर। इस चतुर्भुज की कुल लंबाई 5846 किलोमीटर है तथा इसके अधीन चार तथा छः मार्गी ऐक्सप्रेस हाईवे निर्मित किए गए हैं। इस योजना का शाहमार्ग देश 13 राज्यों में से गुजरता है तथा इन 13 राज्यों में आन्ध्र प्रदेश में सबसे अधिक तथा दिल्ली में सबसे कम भाग पड़ता है। इस प्रकल्प के कारण औद्योगिक व्यापार को प्रोत्साहन मिला है।

प्रश्न 7.
डाइमंड कुआर्डिलेटरल का वर्णन करो।
उत्तर-
डाइमंड कुआर्डिलेटरल भारत के प्रसिद्ध महानगरों (दिल्ली, मुंबई, कोलकाता तथा चेन्नई) को आपस में तेज रफ़्तार से चलने वाली रेल गाड़ियों के साथ जोड़ने की योजना को कहते हैं। यह सड़क योजना सुनहरी चतुर्भुज जैसी ही है। देश के रेल तंत्र को आरामदायक बनाने तथा इसमें सुधार लाने के लिए तेज रफ्तार रेल गाड़ियों तथा बुलेट ट्रेन जैसी गाड़ियों को चलाया गया जिस प्रकल्प में यह रेल गाड़ियां चलाई गई, उसको डायमंड कुआर्डीलेटरल प्रकल्प कहते हैं। इस रेल मार्ग द्वारा कई बड़े शहर आपस में जुड़ गए जैसे-उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली, हरियाणा, आन्ध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल, बिहार, उड़ीसा, झारखण्ड तथा पश्चिमी बंगाल इत्यादि राज्यों में से गुजरते हैं। यहाँ बिजली की सुविधा भी है क्योंकि यह मार्ग चौड़ी गेज वाले हैं। इन रेलों की रफ्तार 250 किलोमीटर प्रति घंटा की होगी जब कि रेल गाड़ियों 320 कि०मी० प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ेगी।

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प्रश्न 8.
समुद्री मार्गों की महत्ता बताओ।
उत्तर-
यातायात के साधनों में समुद्री यातायात सबसे सस्ता तथा महत्त्वपूर्ण साधन है। विश्व का ज्यादातर व्यापार समुद्री मार्गों द्वारा होता है। जब बहुत सारे जहाज़ एक निश्चित मार्ग से चलते हैं तब उसे समुद्री मार्ग कहते हैं।

समुद्री मार्गों की महत्ता (Importance of Ocean Routes)-

  • यह सबसे सस्ता यातायात का साधन है।
  • यह प्राकृतिक मार्ग है। समुद्र में मार्ग बनाने में कुछ खर्च नहीं होता।
  • जहाजों को चलाने के लिए कोयला या पैट्रोल कम खर्च होता है।
  • समुद्री मार्ग असल में अंतर्राष्ट्रीय मार्ग हैं, क्योंकि सारे महासागर एक-दूसरे से मिले हैं।
  • ‘इन मार्गों पर जहाजों की कम दुर्घटना होती है।
  • इन मार्गों द्वारा दूर-दूर के देशों के आपसी सम्पर्क बढ़े हैं।
  • इन मार्गों द्वारा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में वृद्धि होती हैं।

प्रश्न 9.
जन संचार के साधनों का वर्णन करो।
उत्तर-
जब हम बडी गिनती में लोगों तक कोई संदेश या विचार पहुँचाना चाहते हैं या जनता के साथ बांटना चाहते हैं तो उसे जन संचार कहते हैं। ऐसा संचार कई प्रकार के साधनों द्वारा किया जाता है। जिसमें व्यक्तिगत संचार की तरह पक्ष एक-दूसरे से परिचित नहीं होता। जनसंचार के प्रमुख साधन हैं-

  1. जनतक घोषणा, रैली इत्यादि।
  2. रेडियो, टेलीविज़न।
  3. अख़बारें, रसाले, मैगज़ीन ।
  4. सिनेमा।
  5. कंप्यूटर की सहायता से ही जनतक सूचना।
  6. इंटरनैट संचार।
  7. औजू सैट।

प्रश्न 10.
व्यापार से आपका क्या अर्थ है ? इसकी किस्में बताओ।
उत्तर-
वस्तुओं को बेचने तथा खरीदने को व्यापार कहते हैं या किसी वस्तु के लेन-देन को व्यापार कहते हैं। यह खरीददार तथा विक्रेता के बीच की अदायगी की क्रिया है। व्यापार मुख्य रूप में दो प्रकार का होता है-

  1. निजी व्यापार।
  2. राष्ट्रीय व्यापार।

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प्रश्न 11.
राष्ट्रीय व्यापार तथा इसके क्या कारण हैं ?
उत्तर-
जब व्यापार/बेच-खरीद/लेन-देन राष्ट्रीय स्तर पर होता है, तब उसे राष्ट्रीय व्यापार कहते हैं। अगर कोई देश अपने देश की सीमाओं से बाहर कोई व्यापार लेन-देन करता है उसको अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कहते हैं। राष्ट्रीय व्यापार के कारण निम्नलिखित हैं-

  • किसी देश में प्राकृतिक साधनों की कमी।
  • देश में वस्तुओं की मांग तथा पूर्ति में अंतर।
  • तकनीकी साधनों की कमी के कारण कई बार वस्तुओं को दूसरे देश से मंगवाना पड़ता है।
  • भौगोलिक भिन्नता।
  • आर्थिक विकास में कमी।
  • व्यापारिक देशों में जंग तथा अमन शांति के हालात।
  • व्यापारिक नीतियां।
  • देश के आपसी संबंध।

प्रश्न 12.
भारतीय आयात तथा निर्यात पर नोट लिखो।
उत्तर-
उत्पादित फालतू सामान को जब किसी और देश में बेचा जाता है तब उसे निर्यात कहते हैं तथा स्रोतों की कमी के कारण जब किसी देश से स्रोतों को खरीदा जाता है तो उसे आयात कहते हैं।

भारतीय निर्यात-भारत खनिज तेल, खनिज मोम, जैविक रसायन, फार्मेसी उत्पादन, गेहूँ से बनी वस्तुओं, अनाज, बिजली की मशीनरी, कपास के सूती कपड़े, काहवा, चाय, मसाले इत्यादि बाकी देशों को निर्यात करता है।
भारतीय आयात-भारत पैट्रोल, खनिज मशीनरी, खाद्य, लोहा तथा इस्पात, मोती, कीमती पत्थर, सोना, चांदी, खुराकी तेल, रसायन, दवाइयां, कागज़ फाईबर इत्यादि दूसरे देशों से आयात करता है।

प्रश्न 13.
आलमी व्यापार संगठन (WTO) पर नोट लिखो।
उत्तर-
सन् 1995 में गैट का रूप बदलकर विश्व व्यापार संगठन बनाया गया। यह जनेवा में एक स्थायी संगठन के रूप में कार्यरत है तथा यह व्यापारिक झगड़ों का निपटारा भी करता है। यह संगठन सेवाओं के व्यापार को भी नियंत्रित करता है। किंतु इसे अभी भी महत्त्वपूर्ण कर रहित नियंत्रणों जैसे निर्यात निषेध, निरीक्षण की आवश्यकता, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा स्तरों तथा आयात लाइसेंस व्यवस्था जिनसे आयात प्रभावित होना है, को सम्मिलित करना शेष है। आलमी व्यापार संगठन में 123 देशों ने हस्ताक्षर करके जनरल एग्रीमैंट का खात्मा कर दिया है। इस प्रकार आलमी व्यापार संगठन राष्ट्रीय व्यापार को अच्छा तथा महत्त्वपूर्ण बना देता है

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निबंधात्मक प्रश्न (Essay Type Questions)

प्रश्न 1.
यातायात से आपका क्या भाव है ? देश में प्रशासकीय प्रबंध के आधार पर सड़कों का वर्गीकरण करो तथा सड़क-मार्गों का जाल बिछाने के लिए बनाई योजनाओं के बारे में विस्तार से चर्चा करो।
या
भारतीय सड़कों के विकास का वर्णन करो।
उत्तर-
यातायात-मनुष्य, जानवरों तथा वस्तुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने को या वस्तुओं के परिवहन को यातायात कहते हैं। यातायात के मुख्य वर्ग हैं

  1. स्थल-मार्ग यातायात।
  2. जल-मार्ग यातायात।
  3. वायु-मार्ग यातायात।

सड़कों का प्रशासकीय प्रबंध के आधार पर वर्गीकरण-प्रशासकीय प्रबंध के आधार पर सड़कों का वर्गीकरण निम्नलिखित किया गया है –
1. ग्रामीण सड़कें (Rural Roads)—जो सड़कें गाँव को जिले की सड़कों से मिलाती हैं, ग्रामीण सड़कें कहलाती हैं। इन सड़कों में मोड़ काफी होते हैं यहाँ बहुत भारी वाहनों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

2. जिला सड़कें (District Roads)—यह सड़कें जिले की सड़कों, कस्बे तथा बड़े गाँवों को आपस में जोड़ती हैं। इन सड़कों की देखभाल जिला परिषद् तथा आम जनता की ज़िम्मेदारी होती है।

3. राज्य मार्ग (State Highways) राज्य के व्यापार तथा भारी यात्री यातायात की किस्म राज्य मार्गों के अधीन आती है। यह सड़कें आर्थिकता की मुख्य इकाई होती हैं, सड़कों के मुख्य केंद्रों को राज्य की राजधानियों तथा राष्ट्रीय शाहमार्गों के साथ मिलाती हैं।

4. राष्ट्रीय शाह मार्ग (National Highways)-राष्ट्रीय शाहमार्गों की देख-भाल की ज़िम्मेदारी केंद्रीय सरकार की होती है। भारत में राष्ट्रीय शाहमार्ग एथॉरिटी इन मार्गों की देख-रेख करती है। यह सड़कें देश के सारे कोनों तक फैली हुई हैं।

5. सीमान्त इलाकों की सड़के (Border Roads)-इन सड़कों की देख-भाल की ज़िम्मेदारी सीमान्त सड़क संगठन के अंतर्गत आती है।

सड़क योजनाएं-सड़कें किसी देश के विकास की रीढ़ की हड्डी हैं। यह वस्तुओं, मनुष्य, जानवरों, स्रोतों इत्यादि के परिवहन में अहम् तथा महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करती हैं। इसके अलावा इन सड़कों द्वारा सफर करना आसान तथा आरामदायक भी होता है। सड़कों का अच्छा तथा सड़क-मार्गों का जाल बिछाने के लिए कई योजनाएं देश अंदर चल रही हैं।

1. नागपुर योजना (Nagpur Plan)-नागपुर योजना सन् 1943 में भारत में सड़कें बिछाने के लिए बनाई गई। इस योजना में देश की प्रमुख सड़कों के अलावा और आम सड़कों की लंबाई भी बढ़ाई गई।

2. बीस वर्षीय योजना (Twenty Year Plan)-इस योजना की शुरुआत 1961 में हुई। इस योजना का उद्देश्य देश में सड़कों की लंबाई 6 लाख 56 कि०मी० से बढ़ाकर 10 लाख 60 हज़ार कि०मी० तक करना था तथा इसके लिए समय 20 साल तय किया गया।

3. ग्रामीण सड़क विकास योजना (The Rural Road Development Scheme)-इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में सड़कों का विकास करना था।

4. बी०ओ०टी० योजना (Build, Operate and Transfer Scheme)-इस योजना में प्राईवेट बिल्डरों तथा
ठेकेदारों को सड़कें तथा पुलों का निर्माण करने के लिए ठेके दिए गए तथा इज़ाजत दी गई कि वह निर्माण की गई सड़क पर गुजरने वाले वाहनों के चालकों से टोल टैक्स ले सकेंगे तथा बाद में सड़क भारत सरकार के हवाले कर देंगे।

5. केन्द्रीय सड़क फंड (Cential Road Fund)-इस फंड को दिसम्बर 2000 में शुरू किया गया। इसके अनुसार पैट्रोल तथा डीज़ल पर टैक्स तथा कस्टम ड्यूटी लगाकर इकट्ठा किया पैसा सड़कों के विकास पर लगाया जाएगा। भारत में प्राचीन काल से ही सड़कों की महत्ता रही हैं। शेरशाह सूरी ने जी०टी०रोड के राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण किया। आजादी के बाद 10 वर्षीय नागपुर योजना के अधीन सड़कों के विकास की योजना बनाई गई। भारत की मुख्य सड़कें निम्न हैं।

राष्ट्रीय मार्ग (National Highways)

  • ग्रैंड ट्रंक रोड (Grand Trunk Road)-कोलकाता से अमृतसर तक है। इसको शेरशाह सूरी मार्ग भी कहा जाता है।
  • दिल्ली-मुंबई रोड।
  • कोलकाता-मुंबई रोड।
  • मुंबई-चेन्नई रोड।
  • ग्रेट दक्षिण रोड।
  • कोलकाता-चेन्नई रोड।
  • पठानकोट- श्रीनगर रोड।
  • भारत की सीमावर्ती प्रदेशों में सड़कों का निर्माण करने के लिए सीमा सड़क बोर्ड को सन् 1960 में स्थापित किया गया। भारत में सीमान्त प्रदेशों में 7000 कि०मी० लम्बी पक्की सड़कें बनायी गई हैं। जिनमें मनाली से लेकर लेह तक मुख्य सड़कें हैं। इस सड़क की औसत ऊंचाई 4270 मीटर है।

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PSEB 12th Class Geography Solutions Chapter 7 परिवहन/यातायात, संचार तथा व्यापार

प्रश्न 2.
संसार के प्रमुख रेल मार्गों की स्थिति तथा महत्त्व का वर्णन करो।
उत्तर-
स्थल यातायात में रेलवे सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण साधन है। सन् 1819 में भाप के इंजन की खोज के साथ रेल के यातायात का प्रारंभ ग्रेट ब्रिटेन में हुआ। आधुनिक युग में किसी देश में आर्थिक, सामाजिक तथा राजनीतिक दृष्टि से रेलवे का बड़ा महत्त्व है।

महत्त्व-

  • रेलमार्ग किसी क्षेत्र के खनिज पदार्थों के विकास में सहायता करते हैं।
  • रेलमार्ग औद्योगिक क्षेत्र में कच्चे माल तथा तैयार माल के वितरण में सहायता करते हैं।
  • रेलमार्ग व्यापार को उन्नत करते हैं।
  • रेलमार्ग राजनीतिक एकता व स्थिरता लाने में योगदान देते हैं।
  • रेलमार्ग संकट काल में सहायता कार्यों में महत्त्वपूर्ण हैं।
  • कम जनसंख्या वाले प्रदेशों में रेल-मार्ग जनसंख्या वृद्धि का आधार बनते हैं।
  • लम्बी-लम्बी दूरियों को जोड़ने में रेलों ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई हैं। वास्तव में रेल-मार्गों के विकास से मानव ने दूरी और समय पर विजय प्राप्त कर ली है।

रेलमार्गों की स्तिति के तत्त्व (Factors of Location),

  1. अधिक जनसंख्या हो।
  2. समतल मैदानी धरातल हो।
  3. औद्योगिक तथा व्यापारिक विकास अधिक हो।
  4. खनिज पदार्थ के अधिक भंडार हो।
  5. तकनीकी ज्ञान प्राप्त हो।

संसार के मुख्य रेलमार्ग (Major Railways) रेलमार्गों की सबसे अधिक लंबाई संयुक्त राज्य अमेरिका में हैं। कई देशों में मोटर, सड़कें तथा जल मार्गों के अधिक विकास के कारण रेलमार्ग कम हैं।
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ट्रांस-साइबेरियन रेलमार्ग-यह रेलमार्ग 9289 कि०मी० लम्बा है तथा संसार में सबसे लम्बा रेलमार्ग है। यह रेल मार्ग साइबेरिया तथा यूराल प्रदेश के आर्थिक तथा औद्योगिक विकास का आधार है। यह एक अन्तः महाद्वीपीय मार्ग है। यह रेल-मार्ग पश्चिम में बाल्टिक सागर पर स्थित सेंट पीटर्जसवर्ग बन्दरगाह के पूर्व में प्रशान्त महासागर पर स्थित ब्लाडीवोस्टक बन्दरगाह को जोड़ता है। इस रेल-मार्ग के मुख्य स्टेशन मास्को, रंयाजन, कुइबाशेव चेलिया बिन्सक, ओमस्क, नीवी सिबीरस्क, चीता इकूटस्क तथा खाबारीवस्क हैं । इस रेलमार्ग द्वारा कोयला, तेल, लकड़ी, खनिज, कृषि उत्पाद, मशीनरी तथा औद्योगिक उत्पादों का आदान-प्रदान पूर्व से पश्चिम को होता है।

2. कैनेडियन पैसेफिक रेलमार्ग-कनाडा का पूर्व-पश्चिम में अधिक विस्तार है। यह रेलमार्ग कनाडा में पूर्वी भाग में हैली फैक्स से चलकर पश्चिम में बेन्कूवर तक पहुंचता है। यह रेलमार्ग दुर्गम पर्वत क्षेत्रों में से गुजरता है। इस रेलमार्ग से लकड़ी, खनिज पदार्थ, गेहूं व लोहे का परिवहन होता है। कैनेडियन पैसेफिक रेल-मार्ग की लम्बाई 7050 किलोमीटर हैं। इस मार्ग पर सेंटजॉन मांट्रिगल, ओटावा, विनीपेग इत्यादि नगर स्थित है। यह रेल-मार्ग क्यूबेक मांट्रियल के औद्योगिक क्षेत्र को कोणधारी वनों तथा प्रेयरीज के गेहूं से जोड़ता हैं। इस प्रकार यह रेल मार्ग राजनीतिक तथा आर्थिक रूप से एकता स्थापित करता है।

3. संयुक्त राज्य अमेरिका के रेलमार्ग संयुक्त राज्य अमेरिका के पूर्वी भाग में रेलवे का अधिक विकास हुआ है। पश्चिम में जनसंख्या कम है। यहां शुष्क जलवायु तथा पर्वतीय भागों के कारण रेलमार्ग कम हैं। यह रेलमार्ग देश के पश्चिमी तथा पूर्वी क्षेत्रों को आपस में मिलाता है। देश के मध्यवर्ती क्षेत्र की कृषि तथा खनिज क्षेत्रों के लिए यह बहुत योग्य सिद्ध हुए हैं। इस देश में मुख्य महाद्वीप रेलमार्ग निम्नलिखित हैं।

  • उत्तरी पैसेफिक रेलमार्ग-यह मार्ग शिकागो से होकर सेंटपाल पोर्टलैंड तक जाता है।
  • दक्षिणी पैसेफिक रेलमार्ग-यह रेलमार्ग पश्चिम में लॉस एंजिलस तक जाता है।
  • महान् उत्तरी रेलमार्ग-यह रेलमार्ग सुपीरियर झील के तट से डिओलब में होकर सीटल तक जाता है।
  • यूनियन पैसेफिक रेलमार्ग-यह रेलमार्ग एटलांटिक तट से लेकर न्यूयॉर्क और फिर यहां से शिकागो, उमाहा, सान फ्रांसिस्को तथा प्रशांत महासागर तट तक जाता है। शिकागो संसार का सबसे बड़ा रेलकेंद्र है।

4. केप काहिरा रेलमार्ग-यह रेलमार्ग अफ्रीका के दक्षिणी किनारे को उत्तरी किनारे से जोड़ता है। यह मार्ग केपटाऊन से प्रारम्भ होकर काहिरा तक है। इस मार्ग के मध्य में कई कठिनाइयां हैं जैसे सहारा मरुस्थल, ऊंचे पर्वत, जल प्रपात इत्यादि। इन प्रतिबन्धों के कारण रेलमार्ग पूरा नहीं हो सका। यह रेल मार्ग केपटाऊन से शुरू होकर किंबरले से जाइरे देश में बोकामा तक है। इसके पीछे विक्टोरिया झील तक सड़क या रेलमार्ग की सुविधा है। इसके आगे नील नदी के किनारे खरतूम तक सड़क मार्ग है। इसके आगे काहिरा तक रेलमार्ग है। इस रेलमार्ग के विकास के साथ अफ्रीका महाद्वीप के कई क्षेत्रों में खनिज पदार्थ तथा कृषि पदार्थों के निर्यात में भी वृद्धि हुई है।

5. ट्रांस एण्डियन रेलमार्ग (Trans Andean Railway)-यह रेलमार्ग दक्षिणी अमेरिका से चिली के वालप्रेसो नगर तथा अजेन्टाइना के ब्यूनस आयर्स नगर को मिलाता है। यह रेलमार्ग एण्डीज पर्वतों को 3485 मीटर की ऊंचाई से पार करके उस्पलाटा दर्रे तथा सुरंगों से गुजरता है। यह पम्पास के कृषि तथा पशुपालन क्षेत्रों को चिली के खनिज तथा फल उत्पादन क्षेत्र से जोड़ता है।

6. दिल्ली-लंदन-मार्ग (Delhi London Railway)—इस मार्ग के साथ यूरोप तथा एशिया के महाद्वीपों को मिलाने की योजना है। यह प्रकल्प आर्थिक तथा सामाजिक कमिशन के अधीन है। इस मार्ग पर कई देशों में इस योजना को पूरा करने के प्रयास किये जा रहे हैं ताकि लंदन को इण्डोनेशिया से मिलाया जा सके। यह भारत से पश्चिम की तरफ पाकिस्तान मध्य पूर्व (इरान, इराक, तुर्की) से यूरोप तक जाएगा। कई राजनीतिक बंदिशों के कारण कई स्थानों पर जैसे बर्मा-बंगला देश में यह काम सफल नहीं हो सका है। इस मार्ग पर तुर्की के पास बासकोर्स में इंग्लैंड चैनल के रास्ते समुद्र पार करना पड़ेगा तथा नावों का प्रयोग करना पड़ेगा। इण्डोनेशिया से लंदन तक यह यात्रा 15 दिनों में पूरी की जाएगी।

7. भारतीय रेलमार्ग (Indian Railway) परिवहन के साधनों में रेलों का महत्त्व सबसे अधिक है। 1853 ई० में भारत में प्रथम रेल लाइन 32 कि०मी० लम्बी मुम्बई से थाना स्टेशन तक बनाई गई। भारतीय रेलवे की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं-

    1. भारतीय रेल-मार्ग एशिया का सबसे लम्बा रेलमार्ग है।
    2. भारतीय रेल-मार्ग 62211 कि०मी० लम्बा है।
    3. विश्व में भारत का चौथा स्थान है।
    4. भारतीय रेलों मे 18 लाख कर्मचारी काम करते हैं।
    5. प्रतिदिन 12670 रेलगाड़ियां लगभग 13 लाख कि०मी० दूरी पर चलती हैं तथा 7100 रेलवे स्टेशन हैं।
    6. प्रतिदिन लगभग 350 करोड़ यात्री यात्रा करते हैं तथा 22 करोड़ टन भार ढोया जाता है।
    7. भारतीय रेलों में 8000 करोड़ रुपए की पूंजी लगी हुई है तथा प्रतिवर्ष 21,000 करोड़ रुपए की आय होती है।
    8. भारतीय रेलों में 11,000 रेल इंजन, 38,000 सवारी डिब्बों तथा 4 लाख सामान ढोने वाले डिब्बे हैं।
    9. भारत में 80% सामान तथा 70% यात्री रेलों द्वारा ही ले जाए जाते हैं।

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    1. भारतीय रेलों का अधिक विस्तार उत्तरी भारत के समतल मैदान में है।
    2. भारत में जम्मू कश्मीर, पूर्वी क्षेत्र, पश्चिमी घाट, छोटा नागपुर पठार तथा थार के मरुस्थल में रेलमार्ग कम
    3. दक्षिणी भारत में पथरीली, ऊंची-नीची भूमि के कारण, छोटी-छोटी नदियों पर जगह जगह पुल बनाने की असुविधा है।
    4. अब भारतीय रेलों पर 3454 डीजल इंजन तथा 1533 बिजली के इंजन 4950 भाप इंजन हैं।

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    1. लगभग 9100 किलोमीटर लम्बे रेलमार्ग पर बिजली से चलने वाली गाड़ियां दौड़ती हैं। भारत में रेलमार्ग तीन प्रकार के हैं –

(i) चौड़ी पटरी (Broad Gauge)-1.68 मीटर चौड़ाई।
(ii) छोटी पटरी (Metre Gauge)-1 मीटर चौड़ाई।
(iii) तंग पटरी (Narrow Gauge)-0.68 मीटर चौड़ाई है।

रेल क्षेत्र (Railway Zones)—अच्छे प्रबंध के लिए भारतीय रेलों में अलग-अलग तरह से विभाजित किया गया है। भारत में 1958 से 1966 तक भारतीय रेलवे के कुल 9 क्षेत्र थे। लगभग तीन दहाकों के बाद यही रेल प्रबंध जारी रहा पर अब भारतीय रेलवे के कुल 18 क्षेत्र हैं, जो इस प्रकार हैं –

रेल क्षेत्र — प्रमुख कार्यालय

1. उत्तरी रेलवे — नई दिल्ली
2. उत्तरी-पूर्वी रेलवे — गोरखपुर
3. उत्तर पूर्वी सीमान्त रेलवे — मालीगाऊ (गुवाहाटी)
4. पूर्वी रेलवे — कोलकाता
5. दक्षिणी-पूर्वी रेलवे — बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
6. दक्षिण-मध्य रेलवे — सिकंदराबाद
7. दक्षिणी रेलवे — चेन्नई
8. मध्य रेलवे — मुंबई
9. पश्चिमी रेलवे — मुंबई
10. दक्षिण-पश्चिमी रेलवे — हुबली (बंगलौर)
11. उत्तर पश्चिमी रेलवे — जयपुर
12. पश्चिमी मध्य रेलवे — जबलपुर
13. उत्तर मध्य रेलवे — इलाहाबाद
14. दक्षिण-पूर्वी मध्य रेलवे — बिलासपुर
15. पूर्व तटवर्ती रेलवे — भुवनेश्वर
16. पूर्व मध्य रेलवे — हाजीपुर
17. कोंकण रेलवे — न्यू दिल्ली
18. मैट्रो रेलवे — कोलकाता।

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प्रश्न 3.
जल यातायात तथा जल मार्ग यातायात की किस्में बताओ। विश्व के मुख्य समुद्री मार्गों का विस्तार सहित वर्णन करो।
उत्तर-
यातायात के साधनों में समुद्री यातायात सबसे सस्ता तथा महत्त्वपूर्ण साधन है। विश्व का अधिकतर व्यापार समुद्री मार्ग के द्वारा होता है। जब बहुत सारे जहाज़ एक निश्चित मार्ग पर चलते हैं तब उसे समुद्री मार्ग कहते हैं।
समुद्री मार्गों का महत्त्व (Importance of Ocean Routes)-

  • यह सबसे सस्ता यातायात का साधन है।
  • यह प्राकृतिक मार्ग है। समुद्र में मार्ग बनाने में कुछ खर्च नहीं होता।
  • जहाजों को चलाने के लिए कोयला तथा पैट्रोल कम खर्च होता है।
  • समुद्री मार्ग असलियत में अंतर्राष्ट्रीय मार्ग है क्योंकि सारे महामार्ग एक दूसरे से मिले हैं।
  • इन मार्गों पर जहाजों की दुर्घटनाएं कम होती हैं।
  • इन मार्गों द्वारा दूर दूर देशों के आपसी सम्पर्क बढ़ जाते हैं।
  • इन मार्गों द्वारा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में भी वृद्धि होती है।

समुद्री मार्गों को प्रभावित करने वाले तत्व (Factors influencing the Ocean Routes) अधिकतर समुद्री मार्ग महान् चक्कर के अनुसार कम दूरी के कारण बनाये जाते हैं। जल मार्ग हिंद तोदियों से बचा कर बनाये जाते हैं। समुद्री मार्ग तूफानी क्षेत्रों तथा कोहरे से दूर होते हैं। समुद्री मार्गों में ईंधन के लिए कोयला, तेल तथा परिवहन के लिए माल ज्यादा प्राप्त हो।

जल मार्गों की किस्में-जल मार्ग मुख्य रूप में दो तरह के होते हैं-

1. आंतरिक जलमार्ग
2. समुद्री जलमार्ग

1. आंतरिक जलमार्ग-किसी देश या पृथ्वी पर स्थित जल साधनों, झीलों, नहरों इत्यादि के द्वारा यातायात को आंतरिक जलमार्गी यातायात कहते हैं। किसी देश के प्रादेशिक व्यापार के लिए नदियां, नहरें तथा झीलों का आन्तरिक जल मार्गों के रूप में प्रयोग किया जाता है। मनुष्य प्राचीन काल से ही नदियों तथा नहरों का यातायात के लिए प्रयोग करता आया है। आजकल विकसित देशों में आंतरिक जल-मार्गों का बड़े पैमाने पर प्रयोग किया जाता है। कृषि तथा उद्योगों के विकास में आंतरिक जल-मार्ग महत्त्वपूर्ण है। आन्तरिक जल मार्गों पर कई तत्वों का प्रभाव पड़ता है। नदियों तथा नहरों में जल अधिक मात्रा में हों, जल का प्रवाह सारा साल लगातार तथा सीधा होना चाहिए। अधिक ढाल जल प्राप्त अधिक घुमाव तथा रेत के जमाव से यातायात में बाधाएं उत्पन्न हो जाती हैं। शीतकाल में नदियां हिम से जमनी नहीं चाहिए।

प्रमुख आंतरिक जलमार्ग-

  1. फ्रांस में सीन तथा रीन नदियां यातायात के लिए प्रयोग की जाती हैं।
  2. पश्चिमी जर्मनी में राईन (Rhine) नदी सबसे महत्त्वपूर्ण जल मार्ग है। यह नदी पश्चिमी जर्मनी के व्यापार की जीवनरेखा है। इस नदी द्वारा रूहर घाटी से खनिज पदार्थों का परिवहन किया जाता है।
  3. यूरोप में कई अन्य नदियां, डैन्यूब, वेसर, ऐल्ब, ओडर, विसबूला भी महत्त्वपूर्ण जल मार्ग हैं।
  4. रूस में वोल्गा, नीपर नदियां यातायात के साधन के रूप में प्रयोग की जाती हैं।
  5. उत्तरी अमेरिका में महान झीलें तथा मिसीसिपी नदी तथा सेंट लारेंस जल-मार्ग महत्त्वपूर्ण है।
  6. भारत में गंगा तथा ब्रह्मपुत्र नदी, चीन में यंगसी नदी तथा बर्मा में इरावती नदी महत्त्वपूर्ण भीतरी जल-मार्ग हैं।
  7. दक्षिणी अमेरिका में अमेज़न नदी से तट से 1600 कि०मी० अन्दर तक जहाज़ चलाए जा सकते हैं। परन्तु कम जनसंख्या तथा पिछड़ेपन के कारण इस घाटी में इस जल-मार्ग का महत्त्व कम है।
  8. अफ्रीका में नील, नाईजर, कांगो तथा जैम्बजी नदियां जल प्रपातों के कारण अधिक उपयोगी नहीं हैं।
  9. संसार में कई देशों में नहरें भी यातायात के साधन के रूप में प्रयोग की जाती हैं। पश्चिमी जर्मनी में कील नहर और राईन नहर, रूस में वोल्गा-वाल्टिक नहर, उत्तरी अमेरिका में हडसन-मोहाक नहर, इंग्लैण्ड में मानचेस्टर, लिवरपूल नहर, भारत में बकिंघम नहर यातायात के लिए महत्त्वपूर्ण हैं।

II. समद्री जलमार्ग- अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार मुख्यतः समुद्री मार्ग द्वारा ही होता है। स्थल मार्ग की अधिकता के कारण मुख्य समुद्री मार्ग मध्य अक्षांशों में स्थित हैं। संसार के मुख्य समुद्री मार्ग निम्नलिखित हैं-

1. उत्तरी अन्ध महासागरीय मार्ग (North Atlantic Route) यह संसार का सब से अधिक उपयोग किया जाने वाला समुद्री मार्ग है। यह मार्ग 40° – 50° उत्तर अक्षांशों में यूरोप तथा उत्तरी अमेरिका के बीच स्थित हैं। यह संसार का सबसे व्यस्ततम व्यापारिक मार्ग है। संसार के 75% जलयान इस मार्ग पर चलते हैं। संसार के आधे से अधिक बन्दरगाह इस मार्ग पर स्थित हैं। इस मार्ग के किनारों पर यूरोप तथा उत्तरी अमेरिका के उन्नत औद्योगिक प्रदेश हैं। इसलिए संसार का 25% व्यापार इसी मार्ग से होता है। यह मार्ग महान् वृत्त है। इस पर कोयला व तेल की सुविधाएं हैं। संसार के गहरे, सुरक्षित बन्दरगाह हैं। यहां बड़े-बड़े शिपयार्ड स्थित हैं। परन्तु न्यूयार्क के निकट रेतीले, तट, न्यूफाउण्डलैंड के निकट कोहरा व हिमखण्ड की कठिनाइयां हैं। यूरोप की ओर लन्दन/लिवरपूल, ग्लासगो, ओसलो, हैम्बर्ग, रोटरडम, लिस्बन प्रमुख बन्दरगाह हैं।

2. स्वेज नहर मार्ग (Suez Canal Route)—यह सागर रूम सागर तथा लाल सागर को जोड़ने वाली स्वेज नहर के कारण महत्त्वपूर्ण मार्ग है। यह संसार का दूसरा बड़ा मार्ग है। इसे सबसे अधिक लम्बा मार्ग होने के कारण ग्रांड ट्रंक मार्ग भी कहते हैं। इस मार्ग पर संसार की घनी जनसंख्या वाले प्रदेश स्थित हैं। इस मार्ग पर कोयला व तेल की सुविधाएं प्राप्त हैं। इस मार्ग के कारण यूरोप तथा एशिया के लगभग 81000 किलोमीटर की दूरी कम हो गई है। इस नहर द्वारा इंग्लैंड के साम्राज्य व व्यापार को बहुत सुरक्षा प्राप्त थी। इसे ब्रिटिश साम्राज्य की जीवन रेखा भी कहा जाता है। रूम सागर व लाल सागर को पार करने के पश्चात् इसकी तीन शाखाएं हो
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जाती हैं। अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया तथा एशिया की ओर लन्दन, लिवरपूल, मोर्सेल्ज, लिस्बन, नेपल्स, सिकन्दरिया प्रमुख बन्दरगाह हैं। लंदन, कराची, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, कोलम्बो, रंगून, सिंगापुर, हांगकांग, शंघाई योकोहामा, मेलबोर्न, विलिंगटन प्रमुख बंदरगाह हैं।

3. पनामा नहर मार्ग (Panama Canal Route)-अन्ध महासागर तथा प्रशांत महासागर को मिलाने वाली
पनामा नहर के 1914 में निर्माण होने से इस मार्ग का महत्त्व बढ़ गया है। इस मार्ग का विशेष महत्त्व संयुक्त ‘राज्य अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया तथा न्यूज़ीलैंड को है। इस मार्ग के खुल जाने के कारण दक्षिणी अमेरिका के Cape Horn का चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं रही। इस प्रकार अमेरिका के पूर्वी तथा पश्चिमी तटों के बीच 10,000 किलोमीटर की दूरी कम हो गई। आकलैंड, वालपरेसी, लॉस ऐंजल्स, सानफ्रांसिस्को, बैनकूवर तथा प्रिंस रूपर्ट प्रमुख बन्दरगाह हैं। किंगस्टन हवाना, रियो-डी-जैनेरो, पनामा, न्यू ओरलियनज प्रमुख बन्दरगाह हैं।

4. आशा अन्तरीप मार्ग (Cope of Good Hope Route)—यह एक प्राचीन समुद्री मार्ग है। 1498 में वास्को डी-गामा ने इस मार्ग की खोज की। स्वेज नहर के बन्द हो जाने के कारण इस मार्ग का महत्त्व बढ़ गया है। यह मार्ग दक्षिणी अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया व न्यूज़ीलैंड के लिए महत्त्वपूर्ण है। इस मार्ग पर कोयला व तेल की सुविधाएं प्राप्त हैं। यह मार्ग स्वेज़ मार्ग की अपेक्षा सस्ता व ठण्डा है तथा बड़े-बड़े जहाज इस मार्ग पर गुज़र सकते हैं। लंदन, लिवरपूल, लिस्बन, लागोस, मानचेस्टर इत्यादि यूरोप की बन्दरगाहें हैं।

5. प्रशान्त महासागरीय मार्ग (Trans-Pacific Route)—यह मार्ग एशिया तथा अमेरिका महाद्वीपों को मिलाता है। यह मार्ग कम महत्त्वपूर्ण है। इस मार्ग की लम्बाई बहुत अधिक है तथा इसके किनारों पर कम उन्नत प्रदेश हैं। इस मार्ग पर हिमशिलाओं का अभाव है। इस मार्ग की कई शाखाएं होनोलूलू नामक स्थान पर मिलती हैं। योकोहामा, हांगकांग, शंघाई, मनीला, बेंकूवर, प्रिंस, रूपर्ट, सानफ्रांसिस्को, लास ऐंजल्स प्रमुख बन्दरगाह हैं।

6. दक्षिणी अन्ध महासागरीय मार्ग (South Atlantic Route)-यह मार्ग दक्षिणी अमेरिका तथा यूरोप के देशों को मिलाता है। ब्राज़ील के केप सन रोके से आगे इस मार्ग के दो भाग हो जाते हैं। यह यूरोप की तथा दूसरा अमेरिका की ओर यहां दक्षिणी अफ्रीका से आने वाले मार्ग भी मिलते हैं। उत्तर की ओर यूरोप तथा उत्तरी अमेरिका के प्रसिद्ध बन्दरगाह तथा दक्षिण की ओर व्यूनस आयर्स, मोण्टी वीडियो, रियो-डी-जेनेरो, बहियां, सैन्टाज़ हैं।

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प्रश्न 4.
भारत की प्रमुख बन्दरगाहों का वर्णन करो। उनकी स्थिति, विशेषताएं तथा व्यापारिक महत्त्व बताएं।
उत्तर-
समुद्र पत्तन समुद्र के किनारे जहाजों के ठहरने के स्थान होते हैं। इनके द्वारा किसी देश का विदेशी व्यापार होता है। एक आदर्श बन्दरगाह के लिए कटी फटी तट रेखा, अधिक गहरा जल, सम्पन्न पृष्ठ-भूमि, उत्तम जलवायु तथा समुद्र मार्गों पर स्थित होना आवश्यक है। भारत की तट रेखा 61,00 किलोमीटर लम्बी है। इस तट रेखा पर अच्छी बन्दरगाहों की कमी है। केवल 10 प्रमुख बन्दरगाहें, 22 मध्यम बन्दरगाहें तथा 145 छोटी बन्दरगाहें हैं।

भारत की प्रमुख बन्दरगाहें-भारत के पश्चिमी तट पर कांडला, मुम्बई, मारमगाओ तथा कोचीन प्रमुख बन्दरगाहें हैं। पूर्वी तट पर कोलकाता पाराद्वीप, विशाखापट्टनम तथा चेन्नई प्रमुख बन्दरगाहें हैं। मंगलौर तथा तूतीकोरन का बड़े बन्दरगाहों के रूप में विस्तार किया जा रहा है। भारत की प्रमुख बन्दरगाहों का उल्लेख इस प्रकार है।

(क) पश्चिमी तट की बन्दरगाहें

1. कांडला (Kandla)-

(i) स्थिति (Location)—यह बन्दरगाह खाड़ी कच्छ (Gulf of Kutch) के शीर्ष (Head) पर स्थित है।
(ii) विशेषताएं (Characteristics)
(a) यह एक सुरक्षित व प्राकृतिक बन्दरगाह है।
(b) इसकी पृष्ठ-भूमि बहुत विशाल तथा सम्पन्न है, उसमें समस्त उत्तर-पश्चिमी भारत के उपजाऊ प्रदेश हैं।
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(c) समुद्र की गहराई 10 मीटर से अधिक है।
(d) यहां बड़े-बड़े जहाजों के ठहरने की सुविधाएं हैं।
(e) यह स्थान स्वेज़ (Suez) समुद्री मार्ग पर स्थित है।
(f) यह बन्दरगाह कराची की बन्दरगाह का स्थान लेगी।

(iii) व्यापार (Trade)
(a) आयात (Imports)—सूती कपड़ा, सीमेंट, मशीनें तथा दवाइयां।
(b) निर्यात (Exports)-सूती कपड़ा, सीमेंट, अभ्रक, तिलहन, नमक।

2. मुम्बई (Mumbai)

(i) स्थिति (Location)-यह बन्दरगाह पश्चिमी तट के मध्य भाग पर एक छोटे-से टापू पर स्थित है। यह टापू एक पुल द्वारा स्थल से मिला हुआ है।

(ii) विशेषताएं (Characteristics)
(a) यह भारत की सबसे बड़ी प्राकृतिक व सुरक्षित बन्दरगाह है।
(b) स्वेज़ मार्ग पर स्थित होने के कारण यूरोप (Europe) के निकट स्थित है।
(c) इसी पृष्ठ-भूमि में काली मिट्टी का कपास क्षेत्र तथा उन्नत औद्योगिक प्रदेश है।
(d) अधिक गहरा जल होने के कारण बड़े-बड़े जहाज़ ठहर सकते हैं, परन्तु यहां कोयले की कमी है।
(e) यहां पांच डॉको (Docks) में उत्तम गोदामों की व्यवस्था है।
(f) यह भारत की सबसे बड़ी बन्दरगाह है।
(g) इसे भारत का सिंहद्वार (Gateway of India) भी कहते हैं। यह महाराष्ट्र की राजधानी है। यहां ट्राम्बे में भाभा अणु शक्ति केन्द्र, मैरीन ड्राइव, इण्डिया गेट तथा ऐलीफेंटा गुफाएं दर्शनीय स्थान हैं। यह भारतीय जल-सेना का प्रमुख केन्द्र हैं।

(iii) व्यापार (Trade)-

(a) आयात (Import) मशीनरी, पैट्रोल, कोयला, कागज़ कच्ची फिल्में।
(b) निर्यात (Exports)-सूती कपड़ा, तिलहन, मैंगनीज, चमड़ा, तम्बाकू।
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3. मारमगाओ (Marmago)
(i) स्थिति (Location)—यह बन्दरगाह पश्चिम तट गोआ (Goa) में स्थित है।
(ii) विशेषताएं (Characteristics)
(a) यह एक प्राकृतिक बन्दरगाह है।
(b) इसकी पृष्ठ-भूमि में महाराष्ट्र तथा कर्नाटक प्रदेश के पश्चिमी भाग हैं।
(c) इसमें 50 के लगभग जहाज़ खड़े हो सकते हैं।
(iii) 214P (Trade)—
(a) आयात (Imports)-खाद्यान्न, रासायनिक खाद, मशीनें, खनिज तेल।
(b) निर्यात (Exports)–नारियल, मूंगफली, मैंगनीज़, खनिज, लोहा।

4. कोचीन (Cochin)
(i) स्थिति (Location) यह बन्दरगाह मालबार तट पर केरल प्रदेश में पाल घाट दर्रे के सामने स्थित हैं।
(ii) विशेषताएँ (Characteristics)-
(a) यह बन्दरगाह एक लैगून झील (Lagoon) के किनारे स्थित होने के कारण सुरक्षित और प्राकृतिक बन्दरगाह है।
(b) इसकी पृष्ठ-भूमि में नीलगिरि का बागानी कृषि क्षेत्र तथा कोयम्बटूर का औद्योगिक प्रदेश स्थित है।
(c) यह जल-मार्ग द्वारा पृष्ठ-भूमि से मिला हुआ है।
(d) यह पूर्वी एशिया तथा ऑस्ट्रेलिया के जलमार्गों पर स्थित है।
(e) भारत का दूसरा पोत निर्माण केन्द्र (Shipyard) यहां पर है।
(iii) व्यापार (Trade)-
(a) आयात (Imports)-चावल, कोयला, पैट्रोल, रसायन, मशीनरी।
(b) निर्यात (Exports)-कहवा, चाय, काजू, गर्म मसाले, नारियल, इलायची, रबड़ सूती कपड़ा।

(ख) पूर्वी तट की बन्दरगाहें
1. कोलकाता (Kolkata)(i) स्थिति (Location)—यह एक नदी पत्तन (Riverport) है। यह खाड़ी बंगाल में गंगा के डेल्टा प्रदेश पर हुगली नदी के बाएं किनारे पर तट से 120 किलोमीटर भीतर स्थित है।
(ii) विशेषताएं (Characteristics)-
(a) इनकी पृष्ठ-भूमि बहुत विशाल तथा सम्पन्न है जिसमें गंगा घाटी का कृषि क्षेत्र, छोटा नागपुर का खनिज व उद्योग क्षेत्र तथा बंगाल, असम का चाय और पटसन क्षेत्र शामिल हैं।
(b) यह दूर पूर्व में जापान तथा अमेरिका के जल-मार्ग पर स्थित है।
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(c) परन्तु यह एक कृत्रिम बन्दरगाह है तथा गहरी नदी है।
(d) प्रति वर्ष नदियों की रेत और मिट्टी हटाने के लिए काफ़ी खर्च करना पड़ता है।
(e) जहाज़ केवल ज्वार-भाटा के समय ही आ जा सकते हैं। बड़े जहाजों को 70 किलोमीटर दूर
डायमण्ड हारबर (Diamond Harbour) में ही रुक जाना पड़ता है। () इस बन्दरगाह के विस्तार के लिए हल्दिया (Haldia) नामक स्थान पर एक विशाल पत्तन का निर्माण
किया जा रहा है। यह भारत की दूसरी बड़ी बन्दरगाह है।

(iii) व्यापार (Trade)-
(a) आयात (Imports)—मोटरें, पेट्रोल, रबड़, चावल, मशीनरी।
(b) निर्यात (Exports)—पटसन, चाय, खनिज लोहा, कोयला, चीनी, अभ्रक।

2. विशाखापट्टनम (Vishakhapatnam)-
(i) स्थिति (Location)—यह बन्दरगाह पूर्वी तट पर कोलकाता और चेन्नई के मध्य स्थित है।
(ii) fagtuang (Characteristics)

(a) डाल्फिन नोज (Dalphin-Nose) नाम की कठोर चट्टानों से घिरे होने के कारण यह एक सुरक्षित व प्राकृतिक बन्दरगाह है।
(b) इसकी पृष्ठ-भूमि में लोहा, कोयला तथा मैंगनीज़ का महत्त्वपूर्ण खनिज क्षेत्र है।
(c) यहां तेल, कोयला, ईंधन आदि सुलभ हैं।
(d) भारत का जहाज़ बनाने का सबसे बड़ा कारखाना यहां पर स्थित है।
(e) यह भारत की तीसरी प्रमुख बन्दरगाह है।

(ii) व्यापार (Trade)-
(a) आयात (Imports)-मशीनरी, चावल, पैट्रोल, खाद्यान्न।
(b) निर्यात (Exports)-मैंगनीज़, लोहा, तिलहन, चमड़ा, लाख, तम्बाकू।
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3. पारादीप (Paradip)
(i) स्थिति (Location)—यह बन्दरगाह खाड़ी बंगाल में कटक से 160 किलोमीटर दूर स्थित है।
(ii) विशेषताएं (Characteristics)-

(a) यह एक नवीनतम बन्दरगाह है।
(b) यह एक सुरक्षित व प्राकृतिक बन्दरगाह है।
(c) पानी की अधिक गहराई के कारण यहां बड़े-बड़े जहाज़ ठहर सकते हैं।
(d) इसकी पृष्ठभूमि में उड़ीसा का विशाल खनिज क्षेत्र है।
(e) उड़ीसा के खनिज पदार्थों के निर्यात के लिए इस बन्दरगाह का विशेष महत्त्व है।

(iii) व्यापार (Trade)-

(a) निर्यात (Exports)-जापान का लोहा, मैंगनीज़, अभ्रक आदि खनिज पदार्थ ।
(b) आयात (Imports)-मशीनरी, तेल, चावल।

4. चेन्नई (Chennai)
(i) स्थिति (Location)—यह बन्दरगाह तमिलनाडु राज्य में कोरोमण्डल तट पर स्थित है।
(ii) विशेषताएं (Characteristics)-
(a) यह एक कृत्रिम बन्दरगाह है।
(b) कंकरीट की दो मोटी जल-तोड़ दीवारें (Break waters) बनाकर यह सुरक्षित बन्दरगाह बनाई गई है।
(c) इसकी पृष्ठभूमि में एक उपजाऊ कृषि क्षेत्र तथा औद्योगिक प्रदेश है।
(d) यहां कोयले की कमी है।

(iii) व्यापार (Trade)-
(a) आयात (Imports)-चावल, कोयला, मशीनरी, पैट्रोल, लोहा, इस्पात।
(b) निर्यात (Exports)-चाय, कहवा, गर्म मसाले, तिलहन, चमड़ा, रबड़।

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प्रश्न 5.
स्वेज़ नहर के भौगोलिक, आर्थिक तथा सैनिक महत्त्व का वर्णन करो।
उत्तर-
स्वेज नहर (Suez Canal)
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1. स्थिति (Location)-स्वेज़ नहर संसार की सबसे बड़ी जहाज़ी नहर (Navigation Canal) है। यह नहर अरब गणराज्य (U.A.R.) में स्थित है। यह नहर स्वेज़ के स्थलडमरू मध्य (Suez Isthmus) को काट कर बनाई गई है।

2. इतिहास (History)—इस नहर का निर्माण एक फ्रांसीसी इन्जीनियर फटनेण्ड डी लैसैप्स (Ferdinand De Lesseps) की देख-रेख में सन् 1859 ई० में शुरू हुआ। इस निर्माण में लगभग 10 वर्ष लगे। इस नहर को 17 नवम्बर, 1869 को चालू किया गया। इसके निर्माण काल में 1 लाख 20 हज़ार मजदूरों की जानें गईं। इस नहर के निर्माण पर 180 लाख पौंड खर्च हुए। इस नहर का निर्माण स्वेज नहर कम्पनी (Suez Canal Company) द्वारा किया गया। इस कम्पनी के अधिकतर हिस्से (Shares) फ्रांस तथा इंग्लैंड के थे। इस प्रकार इस नहर पर इंग्लैंड तथा फ्रांस का अधिकार था। यह नहर 99 वर्षों के पट्टे पर दी गई थी। परन्तु मिस्र के राष्ट्रपति कर्नल नासिर ने 26 जुलाई, 1956 को इस नहर के राष्ट्रीयकरण की घोषणा कर दी। 1967 में मिस्र व इज़राइल में युद्ध हुआ तथा नहर स्वेज़ जहाजों के लिए बन्द हो गई। 1975 में स्वेज़ नहर पुनः खुल गई है।

3. सागर तथा बन्दरगाह (Sea And Ports)—यह नहर रक्त सागर (Red Sea) तथा रूम सागर (Mediterranean Sea) को मिलाती है। रूम सागर की ओर पोर्ट सईद (Port Said) तथा रक्त सागर की ओर पोट स्वेज़ (Port Suez) की बन्दरगाह है। इस नहर की कुल लम्बाई 162 किलोमीटर, चौड़ाई 60 से 65 मीटर तक तथा कमसे-कम गहराई 10 मीटर है। यह नहर पूरी लम्बाई में समुद्र तल पर बनी है।

इस नहर के मार्ग में नमकीन पानी की तीन झीलें हैं-

  1. लिटिल बिटर झील (Little Bitter Lake)
  2. ग्रेट बिटर झील (Great Bitter Lake)
  3. टिमशाह झील (Timshah Lake) ।

इस नहर को पार करने में 12 घण्टे लग जाते हैं। जहाज़ औसत रूप से 14 किलोमीटर प्रति घण्टा की गति से चलते हैं। कम चौड़ाई के कारण एक साथ दो जहाज़ गुज़र सकते हैं। इसलिए एक जहाज़ को झील में ठहरा लिया जाता है।

4. महत्त्व (Importance)-

  • यह मार्ग संसार की घनी जनसंख्या वाले मध्य क्षेत्र में से गुज़रता है।
  • इस मार्ग पर बहुत अधिक देश स्थित हैं जिनके द्वारा विभिन्न वस्तुओं का व्यापार होता है।
  • इस मार्ग पर ईंधन के लिए कोयला व तेल मिल जाते हैं।
  • इस मार्ग पर छोटे-छोटे कई मार्ग मिल जाते हैं।
  • इस मार्ग पर कई उत्तम बन्दरगाह स्थित हैं।
  • यह नहर तीन महाद्वीपों के केन्द्र पर स्थित है। (It is located at the crossroads of three continents) यहां यूरोप, अफ्रीका तथा एशिया महाद्वीप के मार्ग निकलते हैं।
  • इस नहर द्वारा इंग्लैंड के साम्राज्य तथा व्यापार की रक्षा होती है। इसलिए इसे ब्रिटिश साम्राज्य की जीवन रेखा (Life Line of British Empire) भी कहते हैं।
  • इस नहर के खुल जाने से दक्षिणी अफ्रीका का चक्कर काटकर आने-जाने की आवश्यकता नहीं रही।

5. व्यापारिक महत्त्व (Commercial Importance)-इस नहर के बन जाने से यूरोप तथा एशिया सुदूर पूर्व के बीच दूरी काफ़ी कम हो गई। कई देशों की दूरी की बचत निम्नलिखित है –

स्थान से स्थान तक दूरी की बचत
1. लन्दन खाड़ी फारस 8800 किलोमीटर
2. लन्दन मुम्बई 8000 किलोमीटर
3. लन्दन सिंगापुर 6000 किलोमीटर
4. लन्दन मम्बासा 4800 किलोमीटर
5. लन्दन जकार्ता 1500 किलोमीटर
6. लन्दन सिडनी 6000 किलोमीटर
7. न्यूयार्क मुम्बई 4000 किलोमीटर
8. न्यूयार्क हांगकांग 8800 किलोमीटर

 

6. व्यापार (Trade)-इस नहर के कारण एशिया तथा यूरोप के बीच व्यापार अधिक हो गया है। नहर को चौड़ा व गहरा करने के कारण अब औसत रूप से 87 जहाज़ प्रतिदिन गुज़र सकते हैं। 1976 में इस नहर में लगभग 20,000 जहाजों ने प्रवेश किया। इस मार्ग पर संसार का 25% व्यापार होता है। इसमें से अधिकतर जहाज़ ब्रिटेन को जाते हैं। 70% जहाज़ तेल वाहक जहाज़ (Oil Tankers) होते हैं। इस मार्ग से यूरोप को कच्चे माल (Raw Materials) जाते हैं तथा यूरोप से तैयार माल व मशीनरी एशिया को भेजी जाती है। एशिया की ओर से कपास, पटसन, चाय, चीनी, काहवा, गेहूं, तेल, ऊन, मांस, डेयरी पदार्थ, रेशम, रबड़, चावल, तांबा, तम्बाकू, चमड़ा आदि पदार्थ यूरोप को भेजे जाते हैं। इस नहर द्वारा भारत का 60% निर्यात तथा 70% आयात व्यापार होता था। परन्तु अब यह व्यापार आशा अन्तरीप मार्ग से होता है।

7. त्रुटियां (Drawbacks)-इस नहर में निम्नलिखित त्रुटियां भी हैं-

  • यह नहर कम चौड़ी व कम गहरी है। इसलिए बड़े-बड़े आधुनिक जहाज़ तथा बड़े-बड़े तेल वाहक जहाज़ (Oil Tankers) नहीं गुज़र सकते हैं।
  • एक पक्षीय यातायात होने के कारण नहर पार करने में समय अधिक लगता है।
  • यह मार्ग बहुत महंगा है। जहाज़ों से बहुत अधिक चुंगी कर (Taxes) वसूल किया जाता है।
  • दोनों ओर से मरुस्थल की रेत उड़-उड़ कर नहर में गिरती है। इसे साफ करने पर बहुत व्यय करना पड़ता है।

8. भविष्य (Future)-स्वेज़ नहर पर आधुनिक सुविधाएं प्रदान करने की योजना है। कई बार म्रिस-इज़राइल
झगड़े के कारण यह नहर बन्द रही है। परन्तु अब संसार का अधिकतर व्यापार आशा अन्तरीप मार्ग पर तेज़ जहाज़ों से होने लग पड़ा है। भविष्य में स्वेज नहर इतनी महत्त्वपूर्ण नहीं होगी। (It will not be the same old romantic Suez Canal.)

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प्रश्न 6.
पनामा नहर के भौगोलिक, आर्थिक व राजनीतिक महत्त्व का वर्णन करो।
उत्तर-
पनामा नहर (Panama Canal)-
1. स्थिति (Location)-यह नहर मध्य अमेरिका (Central America) के पनामा गणराज्य में स्थित है। यह नहर पनामा स्थल डमरू मध्य (Panama Isthmus) को काटकर बनाई गई है।

2. इतिहास (History)-स्वेज़ नहर की सफलता को देखकर पनामा नहर के निर्माण की योजना बनाई गई।
1882 ई० में फर्डिनेण्ड-डी-लैसैप्स ने इस नहर का निर्माण कार्य आरम्भ किया परन्तु पीले ज्वर तथा मलेरिया के कारण हजारों श्रमिक मर गए। अतः यह प्रयत्न असफल रहा। उसके पश्चात् सन् 1904 में संयुक्त राज्य (U.S.A.) सरकार ने इस नहर का निर्माण आरम्भ किया। यह नहर दस वर्ष में 15 अगस्त 1914 को बन कर तैयार हुई। इसके निर्माण पर 712 करोड़ पौंड खर्च हुए। यह नहर संयुक्त राज्य के अधीन है। इस नहर के निर्माण में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। इसलिए नहर का सफलतापूर्वक निर्माण आधुनिक विज्ञान की बहुत बड़ी सफलता है। (“The construction of Panama Canal was a great feat of Engineering.”) इस नहर का निर्माण दो खाड़ियों (Bays), एक कृत्रिम झील (Artifical Lake), एक प्राकृतिक झील (Natural Lake) तथा तीन द्वार प्रणालियों (Lock Systems) द्वारा किया गया है। इस नहर का तल समुद्र तल के समान नहीं है। इसका निर्माण कुलबेरा (Culbera) नामक पहाड़ी को काट कर किया गया है। गातुन (Gatun) नामक कृत्रिम झील बनाई गई हैं। इस नहर में तीन स्थानों पर फाटक बनाए गए हैं।

1. गातुन (Gatun) द्वार।
2. पैड्रो मिग्वल (Padromiguel) द्वार।
3. मिरा फ्लोर्स (Miraflore) द्वार।

इन द्वारों को खोलकर जल-स्तर समान किया जाता है। फिर जलयान ऊपर चढ़ाए या नीचे गाटुन बाँध उतारे जाते हैं।
यह दोहरी द्वार प्रणाली (Double Lock System) है जिससे एक ही समय में दोनों ओर यातायात सम्भव है। इस प्रकार जहाज़ों को इस नहर में 45 मीटर तक ऊपर चढ़ना या नीचे उतरना पड़ता है। इस नहर को चार्जेस (Charges) नदी द्वारा जल-विद्युत प्रदान की जाती है जिसके प्रकाश व जलयानों को खींचने की शक्ति मिलती है।
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3. सागर तथा बन्दरगाह (Seas and Ports)—यह नहर प्रशान्त महासागर (Pacific Ocean) तथा अन्ध महासागर (Atlantic Ocean) को मिलाती है। इसे प्रशान्त महासागर का द्वार (Gateway of the Pacific) भी कहते हैं। प्रशान्त तट पर पनामा (Panama) तथा अन्धमहासागर तट पर कालोन (Colon) के बन्दरगाह हैं। यह नहर 8.16 किलोमीटर लम्बी, 12 मीटर गहरी तथा 90 से 300 मीटर चौड़ी है। इस नहर को पार करने में 8 घण्टे लगते हैं। इस नहर में से बड़े-बड़े जहाज़ नहीं गुज़र सकते।

4. महत्त्व (Importance)-(1) इस नहर के निर्माण से अन्ध महासागर तथा प्रशान्त महासागर के बीच दूरी कम हो गई है। (Panama Canal has changed the element of distance in geography of transport.”) इससे पहले दक्षिणी अमेरिका के (सिरे) केप हार्न (Cape Horn) का चक्कर लगा कर जाते थे। इस नहर से सबसे अधिक लाभ संयुक्त राज्य अमेरिका (U.S.A.) को हुआ है। इसके पश्चिमी व पूर्वी तट से ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, दक्षिणी अमेरिका, जापान की बन्दरगाहों की दूरी कम हो गई है। इस नहर के द्वारा यूरोप को कोई विशेष लाभ नहीं है। कई देशों की दूरी की बचत इस प्रकार है –

स्थान से स्थान तक दूरी की बचत
1. न्यूयार्क सान फ्रांसिस्को 1300 किलोमीटर
2. न्यूयार्क सिडनी 6000 किलोमीटर
3. न्यूयार्क हांगकांग 7000 किलोमीटर
4. न्यूयार्क वालपरेसो 6800 किलोमीटर
5. न्यूयार्क टोकियो 6000 किलोमीटर
6. न्यूयार्क सिडनी 700 किलोमीटर
7. न्यूयार्क सान फ्रांसिस्को 9000 किलोमीटर

(2) इस नहर के कारण पश्चिमी द्वीप समूह (West Indies) का महत्त्व बढ़ गया है।
(3) इस नहर के कारण संयुक्त राज्य संकट के समय एक ही नौ-सेना (Navy) से पश्चिमी व पूर्वी तट की रक्षा कर सकता है।

5. व्यापार (Trade)-इस नहर द्वारा व्यापार में बहुत वृद्धि हुई है। औसत रूप से प्रतिदिन 50 जहाज़ गुजरते हैं।
प्रति वर्ष लगभग 15,000 जहाज़ प्रवेश करते हैं। अन्ध महासागर से प्रशान्त महासागर की ओर अधिक व्यापार होता है। पूर्व की ओर से संयुक्त राज्य व यूरोप से शिल्पी वस्तुएं, खनिज पदार्थ, तेल, मशीनें, दवाइयां, सूती व ऊनी कपड़ा भेजा जाता है। पश्चिमी की ओर से डेयरी पदार्थ, मांस, रेशम, रबड़, चाय, तम्बाकू, नारियल, शोरा, तांबा भेजा जाता है।

6. त्रुटियां (Drawbacks)-इस मार्ग में निम्नलिखित दोष –

  1. इस नहर में बड़े-बड़े जहाज़ नहीं गुज़र सकते।
  2. द्वार प्रणाली के कारण काफ़ी असुविधा रहती है।
  3. इस मार्ग पर बन्दरगाह बहुत कम हैं।
  4. इस नहर के साथ के देश उन्नत नहीं हैं।

7. भविष्य (Future)-दक्षिणी अमेरिका के देश बड़ी तेज़ी से उन्नति कर रहे हैं। इनके विकास के कारण इस मार्ग पर व्यापार बढ़ेगा।

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प्रश्न 7.
भारतीय में तेल तथा गैस पाइप लाइनों की विस्तार से व्याख्या करो।
उत्तर-
पाइप लाइन भी परिवहन का एक महत्त्वपूर्ण साधन है। इस साधन के द्वारा खास कर तरल पदार्थों का परिवहन किया जाता है। इन पाइप लाइनों की सहायता से तरल पदार्थ जैसे तेल तथा गैस को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाया जाता है। इन पाइप लाइनों की सहायता से कोयले को भी तरल पदार्थ के रूप में एक जगह से दूसरी जगह पहुँचाया जाता है। पाइप लाइन द्वारा लेकर जाए जाने वाले स्रोत हैं-पैट्रोलियम तथा पैट्रोलियम से बने पदार्थ, प्राकृतिक गैस, जैविक ईंधन इस तरीके से एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाये जाते हैं। पंप स्टेशनों को तेल पाइपों के द्वारा ही चलाया जाता है। इसी प्रकार बहुत सारे प्राकृतिक पदार्थों को तरल रूप में तबदील करके इनको पाइप लाइनों के द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाया जाता है।

कुछ प्रमुख राष्ट्रीय पाइप लाइनें हैं-
1. तुर्कमेनिस्तान अफगानिस्तान-पाकिस्तान भारत (TAPI पाइप लाइन)-इस पाइप लाइन का विकास एशियाई विकास बैंक द्वारा किया गया तथा यह प्राकृतिक गैस पाइप लाइन है। यह पाइप लाइन, तुर्कमेनिस्तान, अफगानिस्तान तथा पाकिस्तान में से गुजरती है। इस प्रकल्प का प्रारम्भ 13 दिसंबर, 2015 में किया गया तथा 2019 तक पूरी करने की योजना बनाई गई है। इस पाइप लाइन की दिशा उत्तर से दक्षिण तक है। इसकी कुल लंबाई 1814 कि०मी० बनती है।

2. हजीरा-विजयपुर-जगदीशपुर ( HBJ) पाइप लाइन-यह पाइप लाइन मध्य प्रदेश के मध्य में स्थित विजयपुर या विजैपुर दोनों नामों से पहचानी जाती है। इसलिए इसको HBJ या HVJ कहते हैं। यह पाइप लाइन गैस अथॉरिटी ऑफ इण्डिया की तरफ से बिछाई गयी। इस प्रकल्प का प्रारम्भ 1986 में किया गया तथा 1997 में पूरा हो गया। भारत में गैस परिवर्तन के लिए हजीरा-विजयपुर, जगदीशपुर पाइप लाइन बनाई गई। यह पाइप लाइन 1700 किलोमीटर लम्बी है। यह पाइप लाइन गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश राज्यों में से गुजरती है। इस गैस से विजयपुर, सवाई माधोपुर, जगदीशपुर, शाहजहांपुर, अंबाला, बथराला खाद बनाने की योजना है।

3. नाहरकटिया-नानूमती-बरौनी पाइप लाइन-NNB देश की ऐसी पहली पाइप लाइन है जो कि नाहरकटिया के तेल के कुओं से नानूमती (असम) तक कच्चा तेल पहुंचाने के लिए बिछाई गई थी तथा इसके बाद बरौनी (बिहार) तक इसको बढ़ा दिया गया है। इस पाइप लाइन की लम्बाई 1167 किलोमीटर है तथा अब तक इसको उत्तर प्रदेश के शहर कानपुर तक बढ़ा दिया गया है। इस पाइप लाइन ने 1962 तक अपना काम आरम्भ कर लिया था तथा इसका बरौनी का भाग 1964 तक क्रियाशील हुआ।

4. जामनगर लोनी LPG पाइप लाइन-यह पाइप लाइन गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (GAIL) की तरफ 1250 करोड़ की लागत से तैयार की गई है। यह पाइप लाइन 1269 किलोमीटर लम्बी है। यह भारत के गुजरात, राजस्थान, हरियाणा तथा उत्तर प्रदेश इत्यादि राज्यों में से गुजरती है। यह पाइप लाइन दुनिया की सबसे लम्बी पाइप लाइन है तथा यह पाइप लाइन 3 लाख एल० पी०जी० सिलिंडरों जितनी गैस हर रोज़ 1269 कि०मी० की दूरी तक लेकर जाती है। पाइप लाइन द्वारा इस काम के लिए 500 करोड़ रुपये की बचत होती हैं।

5. कांडला-बठिंडा पाइप लाइन-कांडला-बठिंडा पाइप लाइन इण्डियन आयल कार्पोरेशन (IOC) की तरफ
से बठिंडा के तेल शोधक कारखाने को कच्चा तेल पहुंचाने के लिए 2392 करोड़ रुपये के खर्च से तैयार किये गए थे। इस पाइप लाइन की लम्बाई 1443 किलोमीटर है। इस योजना का पहला चरण कांडला से लेकर सांगानौर तक था। यह चरण 1996 में पूरा हो गया था। इस पाइप लाइन का अगला चरण जारी है। यह चरण बठिंडा-जम्मू-श्रीनगर तक गैस पाइप लाइन बिछाने का है।

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प्रश्न 8.
भारतीय वायुमार्ग यातायात का वर्णन करो तथा राष्ट्रीय हवाई अड्डों की जानकारी दो।
उत्तर-
आधुनिक समय में वायुमार्ग यातायात सबसे अधिक तीव्रगामी यातायात है। यह यातायात लम्बे सफर के लिए बहुत लाभदायक है। आज के समय में संसार भर में वायु यातायात उपलब्ध है। भारतीय घनी आबादी वाले देशों में वायुमार्ग मौजूद है। भारत में वायु यातायात का प्रारम्भ 1911 में हुआ। इसके बाद भारत में कई हवाई अड्डों का निर्माण हो गया। संसार में वायु मार्गों का विकास प्रथम विश्व युद्ध के पश्चात् हुआ। इसमें मार्गों के निर्माण पर खर्च नहीं होता केवल हवाई अड्डों का निर्माण करना पड़ता है। 1947 में देश की आजादी के समय चार मुख्य कंपनियों के द्वारा ही हवाई यातायात शुरू किया। ये कंपनियां थीं टाटा-सन्ज लिमिटेड, इण्डियन नैशनल एयरवेज़, एयर सर्विस आफ इंडिया तथा डैकन ऐयरवेज़। 1951 तक 4 और कंपनियों ने भारत में हवाई यातायात के लिए काम शुरू कर दिया। इसके बाद कंपनियों का स्वामित्व भारत सरकार ने अपने अधिकार क्षेत्र में ले लिया तथा दो कॉर्पोरेशनें बना दीं। एयर इंडिया तथा इण्डियन एयरलाइन्ज/परंतु आज ये कॉर्पोरेशनें एक ही हो चुकी हैं।

Airports Authority of India की तरफ से दी गई जानकारी से पता चलता है कि 30 राष्ट्रीय हवाई अड्डे हैं तथा 400 के करीब घरेलू हवाई अड्डे हैं, जबकि विदेशी कंपनियों के जहाजों को सिर्फ राष्ट्रीय हवाई अड्डों से ही उड़ानें भरने की अनुमति है।

पंजाब में इस समय दो राष्ट्रीय हवाई अड्डे हैं जो अमृतसर तथा मोहाली में हैं तथा पंजाब में राष्ट्रीय हवाई अड्डों के अलावा बठिंडा, साहनेवाल, पटियाला तथा पठानकोट में घरेलू हवाई अड्डे हैं।

यू०एस०ए०, यूरोप तथा आसियान की विदेशी कंपनियों को भारत में उड़ानों को भरने की मन्जूरी दिए जाने के बाद कई प्राइवेट कंपनियों ने जिनमें एयरवेज, स्पाइस जैट, गो इंडिगो, किंग फिशर, विस्तारा इत्यादि के जहाज़ भी अब भारत के देशी तथा विदेशी उड़ानें चला रहे हैं।

संसार में हवाई मार्गों का विकास विश्वयुद्ध के बाद हुआ। आजकल इसका बहुत बड़ा महत्त्व है। यह एक तेज़ गति वाला साधन है। इस में मार्गों के निर्माण में कोई खर्च नहीं होता। इससे पर्वतों, विशाल महासागरों व मरुस्थलों के पार पहुँचा जा सकता है। जहां दूसरे साधन नहीं पहुँच सकते। विभिन्न संस्कृतियों के बड़े-बड़े नगरों के वायुमार्गों द्वारा जुड़े होने से अंतर्राष्ट्रीय भावना का विकास होता है।
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वायु मार्गों के गुण तथा दोष-
संसार के वायु मार्गों का विकास पहले विश्व युद्ध के पश्चात् हुआ। आजकल इसका बहुत बड़ा महत्त्व है। यह एक तीव्रगामी साधन है। इसमें मार्गों के निर्माण पर कोई खर्च नहीं होता। केवल हवाई अड्डों का निर्माण करना पड़ता है। इससे पर्वतों, विशाल महासागरों व मरुस्थलों के पार पहुंचा जा सकता है। जहाँ दूसरे साधन नहीं पहुँच सकते। विभिन्न संस्कृतियों के बड़े-बड़े नगरों के वायु मार्गों द्वारा जुड़े होने में अंतर्राष्ट्रीय भावना का विकास होता है।
परंतु इस साधन पर व्यय बहुत होता है। इसका व्यापारिक महत्त्व भी अधिक नहीं है। वायुयानों द्वारा यात्रियों, डाक व शीघ्र खराब होने वाले पदार्थों का परिवहन होता है।

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प्रश्न 9.
व्यापार से आपका क्या भाव है ? इसकी किस्मों का विस्तार से वर्णन करो।
उत्तर-
वस्तुओं की क्रय-विक्रय/लेन-देन/खरीद-वेच को व्यापार कहते हैं। यह व्यापार की क्रिया खरीददार तथा विक्रेता के बीच का लेन-देन होता है। व्यापार मुख्य रूप में दो प्रकार का होता है।

1. निजी व्यापार-जो व्यापार निजी तौर पर या दो या अधिक लोगों के मध्य होता है वह छोटे स्तर का व्यापार होता है।
2. राष्ट्रीय स्तर का व्यापार-इस प्रकार के व्यापार में वस्तुओं को खरीदना बेचना राष्ट्रीय स्तर पर होता है। ज्यादातर राष्ट्रीय सीमाओं या इलाकों के पार किया व्यापार राष्ट्रीय व्यापार कहलाता है। राष्ट्रीय व्यापार करने के कई कारण हैं-

  1. किसी देश में प्राकृतिक साधनों की कमी।
  2. देश में वस्तुओं की मांग तथा पूर्ति में अंतर।
  3. तकनीकी साधनों की कमी कारण कई बार वस्तुएं किसी अन्य देश से मंगवानी पड़ती हैं।
  4. भौगोलिक भिन्नता के कारण स्रोतों में अंतर आ जाता है।
  5. व्यापारिक नीति तथा आर्थिक विकास में अंतर।
  6. देशों के आपसी संबंध।

विश्व व्यापार संगठन (WTO)- सन् 1995 में गैट का रूप बदलकर विश्व व्यापार संगठन बनाया गया। यह जेनेवा में एक स्थायी संगठन के रूप में कार्यरत है तथा यह व्यापारिक झगड़ों का निपटारा भी करता है। यह संगठन सेवाओं के व्यापार को भी नियंत्रित करता है, किंतु इसे अभी भी महत्त्वपूर्ण कर रहित नियंत्रणों जैसे निर्यात निषेध, निरीक्षण की आवश्यकता, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा स्तरों तथा आयात लाइसैंस व्यवस्था, जिनसे आयात प्रभावित होता है, को सम्मिलित करना शेष है।

भारत सरकार की तरफ से Indian Institute of Foreign Trade की स्थापना की गयी है। इन संस्था की स्थापना 1963 में की गयी। यह भारत के पहले 10 चोटी के व्यापारिक तथा कारोबारी आदारों में एक संस्था है। इस संस्था के आदारे नई दिल्ली तथा कोलकाता में मौजूद है।
मौजूदा समय में 120 से अधिक क्षेत्र व्यापार संगठन संसार का 52% व्यापार कंट्रोल कर रहे हैं।

PSEB 12th Class Geography Solutions Chapter 7 परिवहन/यातायात, संचार तथा व्यापार

परिवहन/यातायात, संचार तथा व्यापार PSEB 12th Class Geography Notes

  • वस्तुओं तथा यात्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने को यातायात कहते हैं। किसी भी देश के ।
    विकास के लिए यातायात से संबंधित गतिविधियां एक अहम भूमिका निभाती हैं। यातायात सुविधाओं को | मुख्य रूप में तीन वर्गों में विभाजित किया जाता है-

    • स्थल मार्ग यातायात
    • जल मार्ग यातायात
    • वायु मार्ग यातायात
  • स्थल मार्ग यातायात में सड़कें तथा रेलवे प्रारंभिक यातायात के साधन हैं।
  • भारतीय यातायात का तंत्र एक विशाल प्रसार है। 1950-51 में कुल स्थल मार्ग 4 लाख किलोमीटर था जो कि 2007-08 में 33.1 लाख कि०मी० तक पहुँच गया।
  • सड़कों का जाल पसारने के लिए कई योजनाएं, जैसे कि नागपुर पलान बीस वर्षीय, ग्रामीण सड़क विकास योजना, बी०ओ०टी० केंद्रीय सड़क फंड इत्यादि देश में चल रही हैं।
  • सड़कों में ग्रामीण सड़कें, जिला, राज्य, राष्ट्रीय शाह मार्ग इत्यादि वर्गों में वर्गीकृत किया जाता है।
  • उत्तर-दक्षिण तथा पूर्व-पश्चिम गलियारा प्रोजैक्ट देश के हर कोने तक बढ़िया सड़क-मार्गों का जाल | पसारने के लिए बनाया गया। इस योजना की देख-रेख की ज़िम्मेदारी राष्ट्रीय हाईवे एथारिटी ऑफ इंडिया के सुपुर्द की गई।
  • भारत में राष्ट्रीय शाहमार्ग प्रबंध, भारत सरकार की एजैन्सी की ओर से चलाया तथा संभाला जाता है।
  • भारतीय रेलवे तीन गेज पर गाड़ियां चलाती हैं-चौड़ी गेज पटरी, मीटर गेज पटरी तथा संकीर्ण गेज पटरी।
  • भारतीय रेलवे के कुल 18 ज़ोन हैं।
  •  संसार की पहली रेलवे लाइन 1863 से 1869 के बीच अमेरिका में बिछाई गई।
  • ट्रांस साइबेरियाई रेल मार्ग मास्को से रूस के पूर्व में व्लादिवोस्तोक तक 9,289 किलोमीटर लंबा है। यह विश्व का सबसे लंबा रेल मार्ग है।
  • स्वेज नहर लाल सागर तथा रोम सागरों को आपस में जोड़ती है।
  • पनामा नहर अंधमहानगरों दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई को तेज़ी से चलने वाली रेल गाड़ी के तंत्र जोड़ने की योजना को डायमंड चतुर्भुज कहते हैं।
  • भारत में अर्ध तेज़ रफ़्तार रेलवे गलियारे हैं।
  • पाइप लाइन द्वारा तरल गैसीय पदार्थों की स्थान बदली की जाती है।
  • जब हम अपने विचारों, संदेश, भावनाओं को लिखकर या बोलकर दूसरों तक पहुँचाते हैं, उसे संचार कहते हैं। इसके दो मुख्य प्रकार हैं-
    • व्यक्तिगत संचार,
    •  जन-संचार।
  • यातायात-वस्तुओं तथा मनुष्य को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने को यातायात कहते हैं।
  • यातायात के साधनों की किस्में-यातायात के साधनों को मुख्य रूप में तीन किस्मों में विभाजित किया जाता ‘ है-स्थल, जल तथा वायु मार्ग।
  • राष्ट्रीय शाह मार्ग-राष्ट्रीय मार्गों का निर्माण तथा देखभाल भारत की केंद्र सरकार करती है। इस तरह की सड़कें राज्यों की राजधानियों, बंदरगाहों और नामवर तथा महत्त्वपूर्ण शहरों को आपस में मिलाती हैं।
  • सुनहरी चतुर्भुज सड़क मार्ग-इस प्रोजैक्ट में भारत के चार महानगर दिल्ली, मुंबई, चेन्नई तथा कोलकाता को सड़क-मार्ग से जोड़ा गया है तथा इसका चतुर्भुज आकार होने के कारण इसको चतुर्भुज मार्ग कहते हैं।
  • बंदरगाह-भारत में 12 मुख्य बंदरगाहें हैं।
  • जलमार्गों की किस्में-
    • आंतरिक जल मार्ग
    • समुद्री जल मार्ग।
  • संचार-जब हम अपने संदेश, भाव, विचारों को लिखकर या बोलकर पहुँचाते हैं इस क्रिया को संचार कहते हैं।
  • संचार की किस्में-
    • व्यक्तिगत संचार
    • जन संचार।
  • व्यापार-वस्तु को बेचने तथा खरीदने की क्रिया को व्यापार कहते हैं।
  • भारत में ईंधन, खनिज तेल, खनिज मोम, जैविक रसायन फार्मेसी उत्पादन तथा चीजें निर्यात (बरामद) की जाती हैं। पैट्रोल, खनिज, मशीनरी, खादें, लोहा इस्पात, मोती के कीमती पत्थर, सोना-चांदी, खुराकी तेल, कागज़, दवाइयां, फर्नीचर इत्यादि का आयात (दरामद) किया जाता है।

PSEB 11th Class Practical Geography Chapter 1 नक्शे

Punjab State Board PSEB 11th Class Geography Book Solutions Practical Geography Chapter 1 नक्शे.

PSEB 11th Class Practical Geography Chapter 1 नक्शे

प्रश्न 1.
नक्शे से क्या अभिप्राय है ? इसकी विशेषताएँ बताएँ।
उत्तर-
नक्शा (Map)-धरती या उसके किसी भाग के ऊपर से दिखाई देने वाले स्वरूप को समतल कागज़ पर चित्रण को नक्शा कहते हैं (A map is the conventional representation of the earth or a part of it as seen from the above.)। किसी भी क्षेत्र के लक्षणों को स्पष्ट करने के लिए नक्शे बनाए जाते हैं । नक्शा या मानचित्र (Map) शब्द लातीनी भाषा के शब्द मप्पा (Mappa) से लिया गया है। नक्शे की विशेषताएँ-

  1. नक्शे समतल कागज़ पर बनाए जाते हैं, जिनमें लंबाई और चौड़ाई भी दिखाई जा सकती है।
  2. नक्शे एक निश्चित पैमाने पर ही बनाए जाते हैं।
  3. प्राकृतिक और सांस्कृतिक लक्षणों को रूढ़ चिन्हों द्वारा दिखाया जाता है। नक्शे अक्षांश और देशांतर रेखाओं की मदद से बनाए जाते हैं।

प्रश्न 2.
नक्शे के आवश्यक तत्त्व बताएँ।
उत्तर-
नक्शे के आवश्यक तत्त्व-किसी भाग का ठीक वर्णन देने के लिए नक्शों पर नीचे लिखे तत्त्व ज़रूर दिखाए जाते हैं

  1. नक्शे का शीर्षक
  2. पैमाना
  3. दिशा
  4. संकेत
  5. अक्षांश और देशांतर रेखाएँ।

PSEB 11th Class Geography Practical Chapter 1 नक्शे

प्रश्न 3.
मानचित्र कला की परिभाषा दें।
उत्तर-
मानचित्र कला-नक्शा बनाने की कला को मानचित्र कला या नक्शाकशी की कला (Cartography) कहा जाता है। इसमें धरातलीय नक्शे, हवाई फोटो नक्शे आदि बनाए जाते हैं।

प्रश्न 4.
चार्ट (Chart) और प्लान (Plan) में अंतर बताएँ।
उत्तर-
चार्ट (Chart) और (Plan)—चार्ट शब्द फ्रांसीसी भाषा के शब्द कार्टे (Carte) से लिया गया है। चार्ट शब्द का अर्थ नक्शा होता है। वास्तव में चार्ट अलग-अलग आंकड़ों का रेखाचित्र होता है। इन चार्टों पर समुद्री जहाज़ों के मार्ग भी दिखाए जाते हैं।
‘प्लान’ शब्द भवनों के नक्शों के लिए प्रयोग होता है। इसका पैमाना 6″ : 1 मील से बड़ा होता है। इससे किसी जायदाद या भूमि का विस्तारपूर्वक वर्णन किया जाता है।

PSEB 11th Class Geography Practical Chapter 1 नक्शे

प्रश्न 5.
नक्शों की क्या ज़रूरत होती है ?
उत्तर-
नक्शों की ज़रूरत-पृथ्वी एक गोला है। यह केवल ग्लोब के साथ ही सही रूप में दिखाई जा सकती है। ग्लोब पृथ्वी का एक छोटा-सा प्रतिरूप या नमूना है। परंतु कई बार ग्लोब के प्रयोग में मुश्किलें आती हैं, जिसके लिए नक्शों का प्रयोग ज़रूरी हो जाता है।

  1. ग्लोब पर पूरी पृथ्वी का एक समय में अध्ययन नहीं हो सकता।
  2. ग्लोब पर किसी क्षेत्र को विस्तारपूर्वक दिखाया नहीं जा सकता।
  3. ग्लोब पर दो स्थानों की दूरी मापनी मुश्किल होती है।
  4. ग्लोब पर दो क्षेत्रों का तुलनात्मक अध्ययन संभव नहीं है।
    यही कारण है कि नक्शों के प्रयोग को आवश्यक समझा जाता है। पृथ्वी या उसके किसी भाग को एक समतल कागज़ पर दिखाया जा सकता है।

प्रश्न 6.
नक्शों के महत्त्व का वर्णन करें।
उत्तर-
नक्शों का महत्त्व-नक्शे भौगोलिक अध्ययन के लिए ज़रूरी उपकरण (Tools) हैं। आज के युग में नक्शों . का महत्त्व बहुत बढ़ गया है। वास्तव में नक्शे ही भूगोल की कुंजी होते हैं। ये भूगोल के विद्यार्थियों के लिए एक संकेत लिपि (Short Hand) का काम करते हैं। नक्शों का महत्त्व कई क्षेत्रों में बढ़ता जा रहा है।

  1. भूगोल-प्रयोगात्मक भूगोल के लिए नक्शे आवश्यक होते हैं। इनके बिना भूगोल का विद्यार्थी एक ऐसे सिपाही के समान होता है, जिसके पास हथियार नहीं हों।
  2. युद्धों में प्रयोग-आज के युग में युद्ध नक्शों के सहारे ही लड़े जाते हैं। दूसरे विश्वयुद्ध में कई करोड़ नक्शे तैयार किए गए थे। हिटलर के शब्दों में “Give me a detailed map of a country and I shall conquer it.”
  3. यात्रियों के लिए-नक्शे यात्रियों और पर्यटकों के लिए ज़रूरी होते हैं। ये मार्ग-प्रदर्शन में सहायता करते हैं।
  4. प्रबंधकों के लिए-नक्शों के द्वारा ही अलग-अलग प्रांतों का राज्य-प्रबंध चलाया जाता है।
  5. आवागमन के साधनों के लिए-नक्शे रेल, सड़क, समुद्री और हवाई मार्गों की जानकारी के लिए प्रयोग किए जाते हैं।
  6. नक्शे विद्यार्थियों, अध्यापकों, उद्योगपतियों, अर्थशास्त्रियों, इतिहासकारों और इंजीनियरों के लिए लाभदायक होते हैं।

PSEB 11th Class Geography Practical Chapter 1 नक्शे

प्रश्न 7.
नक्शों का वर्गीकरण करें।
उत्तर-
नक्शों का वर्गीकरण-नक्शाकशी की कला बड़ी प्राचीन है। आज से लगभग चार हजार वर्ष पहले भी नक्शे बनाए जाते थे। प्राचीन समय में भारतीय, यूनानी, रोमन आदि जातियों को इस कला की जानकारी थी। नक्शे कई प्रकार के होते हैं। इनका वर्गीकरण दो प्रकार से किया जा सकता है-

  1. पैमाने के आधार पर (According to Scale)
  2. उद्देश्य के आधार पर (According to Purpose)

1. पैमाने के आधार पर नक्शे (According to Scale)-
पैमाने के आधार पर नक्शे दो प्रकार के होते हैं1. छोटे पैमाने के नक्शे (Small Scale Maps)—ये नक्शे छोटे पैमाने पर बनाए जाते हैं। इनमें पैमाना – 1 इंच : 16 मील से छोटा होता है। संसार के नक्शे, एटलस नक्शे और दीवारी नक्शे इस प्रकार के हो सकते हैं।
2. बड़े पैमाने के नक्शे (Large Scale Maps)—इन नक्शों पर भवनों और संपत्ति का अधिक विस्तृत वर्णन दिखाया जाता है। यह आमतौर पर 6″ : 1 मील पैमाने पर होता है। इस प्रकार पैमाने के आधार पर चार प्रकार के नक्शे होते हैं-

  • सीमावर्ती नक्शे (Cadastral Maps) ये बड़े पैमाने के नक्शे होते हैं, जिनमें जायदाद संबंधी विषय दिखाए जाते हैं। इनका प्रयोग पटवारी और नगरपालिकाएँ करती हैं।
  • स्थल-आकृतिक नक्शे (Topographical Maps)-1″ : 1 मील के पैमाने से बने नक्शे किसी क्षेत्र के प्राकृतिक और सांस्कृतिक लक्षणों को दिखाते हैं। जिस प्रकार सर्वे विभाग के नक्शे।
  • दीवारी नक्शे (Wall Maps)-शिक्षा के क्षेत्र में प्रयोग किए जाने वाले नक्शे छोटे पैमाने के होते हैं।
  • एटलस नक्शे (Atlas Maps)-ये छोटे पैमाने के नक्शे होते हैं। कई प्रकार के नक्शों को पुस्तकीय आकार देकर मान-चित्रावली तैयार की जाती है।

2. उद्देश्य के आधार पर नक्शे (Maps According to Purpose)-
उद्देश्य को आधार मानकर नीचे लिखे प्रकार के भौतिक और सांस्कृतिक नक्शे बनाए जाते हैं-

  • धरातलीय नक्शे (Relief Maps)—इसमें किसी क्षेत्र के धरातल, जल-प्रवाह, मिट्टी आदि का विभाजन दिखाया जाता है।
  • भू-गर्भीय नक्शे (Geological Maps)-इनमें अलग-अलग प्रकार की चट्टानों आदि का विभाजन दिखाया जाता है।
  • मौसमी नक्शे (Weather Maps)—वायुमंडल की दशाओं को दिखाने वाले नक्शों को मौसमी नक्शे कहा जाता है। भारत में ये नक्शे पुणे (Pune) में तैयार किए जाते हैं।
  • वनस्पति नक्शे (Vegetation Maps)-इन नक्शों में भूमि के प्रयोग और विभाजन दिखाए जाते हैं।
  • भूमि-प्रयोग के नक्शे (Land use Maps)-इन नक्शों में भूमि के प्रयोग और विभाजन दिखाए जाते हैं।
  • अंतर्राष्ट्रीय नक्शे (International Maps)—ये नक्शे 1/1000000 के पैमाने पर बनाए जाते हैं।
  • राजनीतिक नक्शे (Political Maps)—इन नक्शों पर राजनीतिक सीमाएँ, देश, नगर और राजधानियाँ दिखाई जाती हैं।
  • आबादी के नक्शे (Population Maps)—इन नक्शों पर आबादी का विभाजन और घनत्व दिखाए जाते हैं।
  • परिवहन नक्शे (Transport Maps)-इन नक्शों पर सड़कों, रेलों, समुद्री और हवाई मार्गों के नक्शे दिखाए जाते हैं।
  • आर्थिक नक्शे (Economic Maps)—इन नक्शों पर कृषि, पशु-पालन उद्योग, व्यापार आदि कारकों का वर्णन किया जाता है।
  • भाषा संबंधी नक्शे (Linguistic Maps)—अलग-अलग प्रदेशों में बोली जाने वाली भाषाओं का विभाजन इन नक्शों पर दिखाया जाता है।
    मानव-जाति के नक्शे (Ethnographic Maps)—इन नक्शों पर अलग-अलग प्रदेशों में रहने वाली मानव-जातियों का विभाजन दिखाया जाता है।

PSEB 12th Class Political Science Solutions Chapter 5 उदारवाद

Punjab State Board PSEB 12th Class Political Science Book Solutions Chapter 5 उदारवाद Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 12 Political Science Chapter 5 उदारवाद

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-

प्रश्न 1.
उदारवाद क्या है ? इसके मुख्य सिद्धान्तों का वर्णन कीजिए। (What is Liberalism ? Discuss its main principles.)
अथवा
उदारवाद की परिभाषा दीजिए तथा इसके मुख्य सिद्धान्तों का वर्णन कीजिए। (Define Liberalism and Explain its basic principles.)
अथवा
उदारवाद की परिभाषा बताइए और इसकी मुख्य विशेषताओं की व्याख्या कीजिए। (Define Liberalism and discuss its main characteristics.)
उत्तर-
उदारवाद आधुनिक युग की एक महत्त्वपूर्ण विचारधारा है। यूरोपीय देशों पर इस विचारधारा का बहुत गहरा प्रभाव पड़ा है। परन्तु उदारवाद की एक निश्चित परिभाषा देना अति कठिन कार्य है। इसका कारण यह है कि उदारवाद एक निश्चित और क्रमबद्ध विचारधारा नहीं है। उदारवाद किसी एक विचारक की देन नहीं है और न ही इसका किसी एक युग के साथ सम्बन्ध है। यह एक ऐसी व्यापक विचारधारा है जिसमें अनेक विद्वानों के विचार और आदर्श शामिल हैं और जो समय के साथ-साथ परिवर्तित होते रहे हैं। लॉक और लॉस्की तक और आगे भी इसका क्रम चलता जा रहा है तथा इसका कोई अन्त नहीं है। अत: उदारवाद को सीमाओं में बांधना एक कठिन कार्य है। लॉस्की (Laski) ने ठीक ही कहा है, “उदारवाद की व्याख्या करना या परिभाषा देना सरल कार्य नहीं है क्योंकि यह कुछ सिद्धान्तों का समूहमात्र ही नहीं है बल्कि मस्तिष्क में रहने वाला विचार भी है।”

उदारवाद से सम्बन्धित गलत धारणाएं-उदारवाद के अर्थ को समझने के लिए यह जानना अति आवश्यक है कि उदारवाद क्या नहीं है ?

1. उदारवाद अनुदारवाद का उल्टा नहीं है-कुछ लोग उदारवाद को अनुदारवाद (Conservatism) का उल्टा मानते हैं। अनुदारवाद परिवर्तनों और सुधार का विरोध करने वाली विचारधारा है। परन्तु उदारवाद ने 19वीं शताब्दी तक उन सभी संस्थाओं, कानूनों और प्रथाओं का विरोध किया जिनमें राजा, सामन्तों और वर्ग के विशेषाधिकारों की रक्षा होती थी। इस प्रकार उदारवादियों ने क्रान्तिकारी परिवर्तनों का जोरों से समर्थन किया। किन्तु आज जब साम्यवादी पूंजीवाद को समाप्त करने की बाद करते हैं तो उदारवादी उनका विरोध करते हैं। एल्बर्ट बिजबोर्ड (Albert Weisbord) ने ठीक ही कहा है, “विरोधात्मक रूप में पूरे इतिहास में उदारवादियों ने क्रान्ति को प्रारम्भ किया है और फिर इसके विरोध में संघर्ष किया है।”

2. उदारवाद व्यक्तिवाद नहीं है-कुछ व्यक्ति उदारवाद को व्यक्तिवाद का पर्यायवाची मानते हैं जोकि पूर्णतः सत्य नहीं है। निःसन्देह व्यक्तिवाद उदारवाद की आधारशिला है परन्तु दोनों एक ही चीज़ नहीं है। सेबाइन (Sabine) ने इन दोनों में भिन्नता को स्पष्ट करते हुए कहा है, “19वीं शताब्दी के तीसरे चरण के अन्त तक इन दोनों में कोई विशेष भेद नहीं था, क्योंकि उस समय तक ये दोनों विचारधाराएं व्यक्ति के जीवन में राज्य के हस्तक्षेप की विरोधी थीं, लेकिन बाद
में स्थिति बदल गई और उदारवाद में काफ़ी परिवर्तन आ गया। इसका रूप सकारात्मक हो गया है। उदारवाद व्यक्ति के स्थान पर सामाजिक हित को महत्त्व देने लगा है। यहां तक कि जन-कल्याण के लक्ष्य को पूरा करने के लिए व्यक्तियों के जीवन में हस्तक्षेप करना या उस पर नियन्त्रण करना राज्य का आवश्यक कार्य बन गया है।”

3. उदारवाद और लोकतन्त्र एक नहीं है-कुछ विद्वान् लोकतन्त्र को ही उदारवाद मानते हैं जो कि ठीक नहीं है। यद्यपि उदारवाद और लोकतन्त्र में गहरा सम्बन्ध है, परन्तु दोनों एक ही नहीं है। उदारवाद व्यक्ति की स्वतन्त्रता पर जोर देता है जबकि लोकतन्त्र समानता को महत्त्व देता है। उदारवाद वास्तव में लोकतन्त्र से कुछ अधिक है।

उदारवाद का सही अर्थ-उदारवाद को अंग्रेजी में ‘लिबरलिज्म’ (Liberalism) कहते हैं। इस शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द ‘लिबरलिस’ (Liberalis) से हुई है जिसका शाब्दिक अर्थ है-स्वतन्त्र व्यक्ति (Free man) । इस सिद्धान्त का सार यही है कि व्यक्ति को स्वतन्त्रता मिले जिससे वह अपने व्यक्तित्व का विकास तथा उसकी अभिव्यक्ति कर सके। इनसाइक्लोपीडिया ब्रिटेनिका (Encyclopaedia Britainica) के अनुसार, “उदारवाद के सारे विचार का सार स्वतन्त्रता का सिद्धान्त है, इसके अतिरिक्त स्वतन्त्रता का विचार इसका समूल है।” मैकगवर्न (Macgovern) के शब्दों में, “एक राजनीतिक सिद्धान्त के रूप में उदारवाद दो पृथक् तत्त्वों का मिश्रण है। इनमें से एक तत्त्व लोकतन्त्र है और दूसरा है व्यक्तिवाद।” (“Liberalism as a political creed is compound of two separate elements. One of these is democracy, the other is individualism.”) उदारवाद एक तरफ लोकतन्त्रीय व्यवस्था का समर्थन करता है और दूसरी ओर व्यक्ति को अपने व्यक्तित्व के विकास के लिए पूर्ण अवसर देना चाहता है। उदारवाद व्यक्ति को ही समस्त मानवीय व्यवस्था का केन्द्र मानता है। सारटोरी (Sartori) ने उदारवाद की सरल परिभाषा दी है। उसके शब्दों में, “साधारण शब्दों में उदारवाद व्यक्तिगत स्वतन्त्रता, न्यायिक सुरक्षा तथा संवैधानिक राज्य का सिद्धान्त व व्यवहार है।” (“In simple words liberalism is the theory. and practice of individual liberty, Judicial defence and constitutional state.”)

बट्रेण्ड रसल (Bertand Russel) के अनुसार, “उदारवादी विचारधारा व्यवहार में जियो और जीने दो, सहनशील तथा स्वतन्त्रता जिस सीमा तक सार्वजनिक व्यवस्था आज्ञा दे तथा राजनीतिक मामलों में कट्टरता का अभाव है।”
हैलोवेल (Hallowell) ने उदारवाद का अर्थ निम्नलिखित विश्वासों में अंकित किया है-

  • मनुष्य के व्यक्तित्व का सर्वोच्च मूल तथा सभी व्यक्तियों की आध्यात्मिक समानता।
  • व्यक्ति की इच्छा की स्वतन्त्रता।
  • व्यक्ति की भलाई व दृढ़ विवेकशीलता।
  • जीवन, स्वतन्त्रता तथा सम्पत्ति के अधिकारों का अस्तित्व।
  • व्यक्ति के प्राकृतिक अधिकारों को सुरक्षित बनाए रखने के उद्देश्य से पारस्परिक सहमति द्वारा राज्य की रचना।
  • व्यक्ति तथा राज्य के बीच प्रसंविदापूर्ण सम्बन्ध ; आदि समझौते की शर्तों का उल्लंघन हो तो व्यक्ति को राज्य के विरुद्ध विद्रोह करने का अधिकार है।
  • सामाजिक नियन्त्रण के यन्त्र के रूप में कानून का प्रशासकीय आदेश से ऊपर होना।
  • व्यक्ति को राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, मानसिक और धार्मिक आदि सभी क्षेत्रों में स्वतन्त्रता है और उसे स्वतन्त्र होना चाहिए।
  • विवेक पर आश्रित एक सर्वोच्च यथार्थ का अस्तित्व जिसे व्यक्ति के अन्त:करण व चिन्तन द्वारा प्राप्त किया जा सके।
    उदारवाद के मुख्य सिद्धान्त या विशेषताएं-

यद्यपि उदारवाद अनेक विचारधाराओं का सम्मिश्रिण है, फिर भी इसके कुछ सर्वमान्य मौलिक सिद्धान्त हैं, जिनमें मुख्य निम्नलिखित हैं-

1. मानवीय विवेक में आस्था (Faith in Human Reason)-उदारवाद का मूल सिद्धान्त मानवीय बुद्धि और विवेक में आस्था है। मध्य युग में यूरोप के अनेक देशों में ईसाइयत ने मनुष्य की बुद्धि को कठोर बन्धनों में जकड़ रखा था और वह धर्म, ईश्वर तथा पोप को ही सब कुछ मानता था। परन्तु नवजागरण ने इन बन्धनों को तोड़ दिया और मनुष्य को विवेक द्वारा विश्व की संस्थाओं को समझने के लिए कहा। 17वीं तथा 18वीं शताब्दी में जॉन लॉक और टॉमस पेन जैसे उदारवादियों ने इस बात पर बल दिया कि मनुष्य को किसी भी ऐसे सिद्धान्त, कानून या परम्परा को नहीं मानना चाहिए जिसकी उपयोगिता बुद्धि से सिद्ध न होती हो। टॉमस पेन ने रूढ़िवादी परम्पराओं को चुनौती देते हुए कहा है, “मेरा अपना मन ही मेरा चर्च है।” इस प्रकार उदारवाद भावना के स्थान पर विवेक को महत्त्व देता है।

2. इतिहास तथा परम्परा का विरोध (Opposition of History and Tradition)—मध्य युग में अन्धविश्वास और रूढ़िवादी परम्पराओं का बोलबाला था। उदारवाद अन्धविश्वासों और रूढ़ियों के विरुद्ध विद्रोह था। उदारवादियों ने इस बात पर जोर दिया कि उन्हीं संस्थाओं, सिद्धान्तों तथा कानूनों इत्यादि को स्वीकार किया जाए तो विवेक के साथ संगत हों। इंग्लैण्ड के उपयोगितावादी उदारवादियों ने उँपयोगिता के आधार पर पहले से चली आ रही व्यवस्था और परम्पराओं का खण्डन किया। उदारवाद के प्रभाव के कारण ही इंग्लैण्ड, अमेरिका और फ्रांस में क्रान्तियां हुईं। परन्तु उदारवाद सदा ही विद्यमान व्यवस्था का विरोधी नहीं रहा है और आज तो वह व्यवस्था को समाप्त करने के बिल्कुल पक्ष में नहीं है।

3. मानवीय स्वतन्त्रता का पोषक (Supporter of Human Freedom)-उदारवाद का मूल सिद्धान्त है कि मनुष्य जन्म से ही स्वतन्त्र है और स्वतन्त्रता उसका प्राकृतिक एवं जन्मसिद्ध अधिकार है। स्वतन्त्रता का अभिप्राय यह है कि मनुष्य के जीवन पर किसी स्वेच्छाचारी सत्ता का नियन्त्रण न हो और उसे अपने विवेक के अनुसार आचरण करने की स्वतन्त्रता हो। लॉस्की (Laski) के अनुसार, “उदारवाद का स्वतन्त्रता से सीधा सम्बन्ध है क्योंकि इसका जन्म समाज के किसी वर्ग के द्वारा जन्म अथवा धर्म पर आधारित विशेषाधिकारों का विरोध करने के लिए हुआ है।”

4. राज्य का उद्देश्य मनुष्य के व्यक्तित्व का विकास करना है (The purpose of the State is to develop the personality of the individual)-उदारवादियों के अनुसार, व्यक्ति के विकास में ही राज्य व समाज का विकास है और व्यक्ति की भलाई में राज्य की भलाई है। इसलिए राज्य का उद्देश्य मनुष्य के व्यक्तित्व का विकास करना है।

5. व्यक्ति साध्य तथा राज्य साधन (Man is the End, State is the Mean)-उदारवादी व्यक्ति को साध्य और राज्य को साधन मानते हैं। मानवीय संस्थाएं और समुदाय व्यक्ति के लिए बने हैं। इसलिए राज्य का कार्य व्यक्ति की सेवा करना है। वह सेवक है, स्वामी नहीं। व्यक्ति के उद्देश्य की पूर्ति करना ही राज्य का उद्देश्य है। उदारवादी आदर्शवादियों के इस कथन में विश्वास नहीं करते कि समाज व्यक्तियों की एक उच्च नैतिक संस्था है। आधुनिक उदारवादी व्यक्ति और समाज के हित में सामंजस्य स्थापित करते हैं और दोनों को एक-दूसरे का पूरक मानते हैं न कि विरोधी।

6. राज्य कृत्रिम संस्था है (State is an Artificial institution)-उदारवादी राज्य को ईश्वरीय या प्राकृतिक संस्था नहीं मानते बल्कि वे राज्य को कृत्रिम संस्था मानते हैं। उनके मतानुसार राज्य का निर्माण व्यक्तियों ने अपने विशेष आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए किया है। यदि राज्य व्यक्तियों की आवश्यकताओं को पूरा नहीं करता तो व्यक्तियों को यह अधिकार प्राप्त है कि वह राज्य और समाज के संगठन में आवश्यकतानुसार परिवर्तन कर सके।

7. व्यक्ति के प्राकृतिक अधिकारों की धारणा में विश्वास (Belief in the concept of Natural Rights of Man)-उदारवाद व्यक्ति के प्राकृतिक अधिकारों में विश्वास करता है। प्राकृतिक अधिकार वह अधिकार है जो व्यक्ति को जन्म से प्राप्त होते हैं। लॉक के अनुसार, जीवन, स्वतन्त्रता और सम्पत्ति के अधिकार प्रमुख प्राकृतिक अधिकार हैं। राज्य एवं समाज प्राकृतिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं कर सकते। राज्य का परम कर्तव्य प्राकृतिक अधिकारों की रक्षा करना है।

8. धर्म-निरपेक्षता में विश्वास (Faith in Secularism) मध्य युग में चर्च का व्यक्ति के जीवन पर पूरा नियन्त्रण था। उदारवादियों ने धर्म के विशेषाधिकारों का विरोध किया तथा व्यक्ति की धार्मिक स्वतन्त्रता पर बल दिया। उदारवादियों ने धार्मिक संस्थाओं को राज्य से अलग रखने की बात कही और सभी व्यक्तियों को समान रूप से धर्म की स्वतन्त्रता देने पर बल दिया। उदारवाद के अनुसार, धर्म व्यक्ति का व्यक्तिगत मामला है और राज्य को व्यक्तिगत धर्म में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

9. लोकतन्त्र का समर्थन (Support of Democracy)-लोकतन्त्र उदारवाद का अभिन्न अंग है। उदारवाद का जन्म ही स्वेच्छाचारी शासन के विरुद्ध प्रतिक्रिया के रूप में हुआ और लोकतन्त्र उदारवाद का मूल तत्त्व है। उदारवाद लोक प्रभुसत्ता में विश्वास रखता है। उदारवाद के अनुसार मनुष्य स्वतन्त्र पैदा हुआ है, इसलिए उस पर शासन उसकी सहमति से होना चाहिए। व्यक्ति को अधिकार तभी प्राप्त हो सकते हैं यदि ‘लोकतान्त्रिक शासन प्रणाली हो और व्यक्ति को शासन के निर्माण में अधिकार प्राप्त हों। इसलिए उदारवाद का निर्वाचित संसद्, वयस्क मताधिकार, प्रेस की स्वतन्त्रता एवं निष्पक्ष न्यायालय में पूर्ण विश्वास है।

10. संवैधानिक शासन (Constitutional Government)-उदारवाद का उदय निरंकुश एवं स्वेच्छाचारी शासन की प्रतिक्रिया के रूप में हुआ। इसलिए उदारवाद निरंकुश शासन का विरोधी है। उदारवाद सीमित सरकार अर्थात् सरकार की सीमित शक्तियों का समर्थन करता है। यदि शासक मनमानी करता है या अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करता है तो जनता को ऐसे शासक के विरुद्ध विद्रोह करने का अधिकार है। लॉक ने इंग्लैण्ड की 1688 की क्रान्ति का समर्थन किया।

11.बहसमुदाय समाज में विश्वास (Belief in Pluralistic Society)-उदारवादियों के अनुसार, मनुष्य अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अनेक समुदायों की स्थापना करता है। समाज में अनेक समुदाय होते हैं और राज्य भी एक समुदाय है। राज्य विभिन्न समुदायों में सामंजस्य स्थापित करते है। व्यक्ति के जीवन के कई पहलू हैं जो राज्य के कार्य-क्षेत्र से बाहर हैं। कई समुदाय जैसे परिवार राज्य से अधिक प्राकृतिक और मौलिक है। लॉस्की और मैकाइवर ने बहु-समुदाय समाज की धारणा पर विशेष बल दिया।

12. अन्तर्राष्ट्रीय और विश्व-शान्ति में विश्वास (Faith in Internationalism and World Peace)उदारवाद ‘जियो और जीने दो’ के सिद्धान्त पर आधारित है। यह विश्व-शान्ति तथा विश्व-बन्धुत्व के आदर्श में विश्वास करता है। प्रत्येक राष्ट्र को धीरे-धीरे शान्तिपूर्वक प्रगति करनी चाहिए और उसे अन्य राष्ट्रों की प्रगति में सहायता करनी चाहिए। प्रत्येक राष्ट्र को दूसरे राष्ट्र की अखण्डता एवं सीमा का आदर करना चाहिए और किसी राष्ट्र को दूसरे के विरुद्ध शक्ति का प्रयोग नहीं करना चाहिए। अन्तर्राष्ट्रीय समस्याओं का हल अन्तर्राष्ट्रीय कानून और शान्तिपूर्वक साधनों द्वारा होना चाहिए।

PSEB 12th Class Political Science Solutions Chapter 5 उदारवाद

प्रश्न 2.
उदारवाद के मुख्य सिद्धान्तों का वर्णन करो। (Explain the main Principles of Liberalism.)
अथवा
उदारवाद के मूल सिद्धान्तों की विवेचना करो। (Discuss the Fundamental Principles of Liberalism.)
उत्तर-
यद्यपि उदारवाद अनेक विचारधाराओं का सम्मिश्रिण है, फिर भी इसके कुछ सर्वमान्य मौलिक सिद्धान्त हैं, जिनमें मुख्य निम्नलिखित हैं-

1. मानवीय विवेक में आस्था (Faith in Human Reason)-उदारवाद का मूल सिद्धान्त मानवीय बुद्धि और विवेक में आस्था है। मध्य युग में यूरोप के अनेक देशों में ईसाइयत ने मनुष्य की बुद्धि को कठोर बन्धनों में जकड़ रखा था और वह धर्म, ईश्वर तथा पोप को ही सब कुछ मानता था। परन्तु नवजागरण ने इन बन्धनों को तोड़ दिया और मनुष्य को विवेक द्वारा विश्व की संस्थाओं को समझने के लिए कहा। 17वीं तथा 18वीं शताब्दी में जॉन लॉक और टॉमस पेन जैसे उदारवादियों ने इस बात पर बल दिया कि मनुष्य को किसी भी ऐसे सिद्धान्त, कानून या परम्परा को नहीं मानना चाहिए जिसकी उपयोगिता बुद्धि से सिद्ध न होती हो। टॉमस पेन ने रूढ़िवादी परम्पराओं को चुनौती देते हुए कहा है, “मेरा अपना मन ही मेरा चर्च है।” इस प्रकार उदारवाद भावना के स्थान पर विवेक को महत्त्व देता है।

2. इतिहास तथा परम्परा का विरोध (Opposition of History and Tradition)—मध्य युग में अन्धविश्वास और रूढ़िवादी परम्पराओं का बोलबाला था। उदारवाद अन्धविश्वासों और रूढ़ियों के विरुद्ध विद्रोह था। उदारवादियों ने इस बात पर जोर दिया कि उन्हीं संस्थाओं, सिद्धान्तों तथा कानूनों इत्यादि को स्वीकार किया जाए तो विवेक के साथ संगत हों। इंग्लैण्ड के उपयोगितावादी उदारवादियों ने उँपयोगिता के आधार पर पहले से चली आ रही व्यवस्था और परम्पराओं का खण्डन किया। उदारवाद के प्रभाव के कारण ही इंग्लैण्ड, अमेरिका और फ्रांस में क्रान्तियां हुईं। परन्तु उदारवाद सदा ही विद्यमान व्यवस्था का विरोधी नहीं रहा है और आज तो वह व्यवस्था को समाप्त करने के बिल्कुल पक्ष में नहीं है।

3. मानवीय स्वतन्त्रता का पोषक (Supporter of Human Freedom)-उदारवाद का मूल सिद्धान्त है कि मनुष्य जन्म से ही स्वतन्त्र है और स्वतन्त्रता उसका प्राकृतिक एवं जन्मसिद्ध अधिकार है। स्वतन्त्रता का अभिप्राय यह है कि मनुष्य के जीवन पर किसी स्वेच्छाचारी सत्ता का नियन्त्रण न हो और उसे अपने विवेक के अनुसार आचरण करने की स्वतन्त्रता हो। लॉस्की (Laski) के अनुसार, “उदारवाद का स्वतन्त्रता से सीधा सम्बन्ध है क्योंकि इसका जन्म समाज के किसी वर्ग के द्वारा जन्म अथवा धर्म पर आधारित विशेषाधिकारों का विरोध करने के लिए हुआ है।”

4. राज्य का उद्देश्य मनुष्य के व्यक्तित्व का विकास करना है (The purpose of the State is to develop the personality of the individual)-उदारवादियों के अनुसार, व्यक्ति के विकास में ही राज्य व समाज का विकास है और व्यक्ति की भलाई में राज्य की भलाई है। इसलिए राज्य का उद्देश्य मनुष्य के व्यक्तित्व का विकास करना है।

5. व्यक्ति साध्य तथा राज्य साधन (Man is the End, State is the Mean)-उदारवादी व्यक्ति को साध्य और राज्य को साधन मानते हैं। मानवीय संस्थाएं और समुदाय व्यक्ति के लिए बने हैं। इसलिए राज्य का कार्य व्यक्ति की सेवा करना है। वह सेवक है, स्वामी नहीं। व्यक्ति के उद्देश्य की पूर्ति करना ही राज्य का उद्देश्य है। उदारवादी आदर्शवादियों के इस कथन में विश्वास नहीं करते कि समाज व्यक्तियों की एक उच्च नैतिक संस्था है। आधुनिक उदारवादी व्यक्ति और समाज के हित में सामंजस्य स्थापित करते हैं और दोनों को एक-दूसरे का पूरक मानते हैं न कि विरोधी।

6. राज्य कृत्रिम संस्था है (State is an Artificial institution)-उदारवादी राज्य को ईश्वरीय या प्राकृतिक संस्था नहीं मानते बल्कि वे राज्य को कृत्रिम संस्था मानते हैं। उनके मतानुसार राज्य का निर्माण व्यक्तियों ने अपने विशेष आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए किया है। यदि राज्य व्यक्तियों की आवश्यकताओं को पूरा नहीं करता तो व्यक्तियों को यह अधिकार प्राप्त है कि वह राज्य और समाज के संगठन में आवश्यकतानुसार परिवर्तन कर सके।

7. व्यक्ति के प्राकृतिक अधिकारों की धारणा में विश्वास (Belief in the concept of Natural Rights of Man)-उदारवाद व्यक्ति के प्राकृतिक अधिकारों में विश्वास करता है। प्राकृतिक अधिकार वह अधिकार है जो व्यक्ति को जन्म से प्राप्त होते हैं। लॉक के अनुसार, जीवन, स्वतन्त्रता और सम्पत्ति के अधिकार प्रमुख प्राकृतिक अधिकार हैं। राज्य एवं समाज प्राकृतिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं कर सकते। राज्य का परम कर्तव्य प्राकृतिक अधिकारों की रक्षा करना है।

8. धर्म-निरपेक्षता में विश्वास (Faith in Secularism) मध्य युग में चर्च का व्यक्ति के जीवन पर पूरा नियन्त्रण था। उदारवादियों ने धर्म के विशेषाधिकारों का विरोध किया तथा व्यक्ति की धार्मिक स्वतन्त्रता पर बल दिया। उदारवादियों ने धार्मिक संस्थाओं को राज्य से अलग रखने की बात कही और सभी व्यक्तियों को समान रूप से धर्म की स्वतन्त्रता देने पर बल दिया। उदारवाद के अनुसार, धर्म व्यक्ति का व्यक्तिगत मामला है और राज्य को व्यक्तिगत धर्म में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

9. लोकतन्त्र का समर्थन (Support of Democracy)-लोकतन्त्र उदारवाद का अभिन्न अंग है। उदारवाद का जन्म ही स्वेच्छाचारी शासन के विरुद्ध प्रतिक्रिया के रूप में हुआ और लोकतन्त्र उदारवाद का मूल तत्त्व है। उदारवाद लोक प्रभुसत्ता में विश्वास रखता है। उदारवाद के अनुसार मनुष्य स्वतन्त्र पैदा हुआ है, इसलिए उस पर शासन उसकी सहमति से होना चाहिए। व्यक्ति को अधिकार तभी प्राप्त हो सकते हैं यदि ‘लोकतान्त्रिक शासन प्रणाली हो और व्यक्ति को शासन के निर्माण में अधिकार प्राप्त हों। इसलिए उदारवाद का निर्वाचित संसद्, वयस्क मताधिकार, प्रेस की स्वतन्त्रता एवं निष्पक्ष न्यायालय में पूर्ण विश्वास है।

10. संवैधानिक शासन (Constitutional Government)-उदारवाद का उदय निरंकुश एवं स्वेच्छाचारी शासन की प्रतिक्रिया के रूप में हुआ। इसलिए उदारवाद निरंकुश शासन का विरोधी है। उदारवाद सीमित सरकार अर्थात् सरकार की सीमित शक्तियों का समर्थन करता है। यदि शासक मनमानी करता है या अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करता है तो जनता को ऐसे शासक के विरुद्ध विद्रोह करने का अधिकार है। लॉक ने इंग्लैण्ड की 1688 की क्रान्ति का समर्थन किया।

11.बहसमुदाय समाज में विश्वास (Belief in Pluralistic Society)-उदारवादियों के अनुसार, मनुष्य अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अनेक समुदायों की स्थापना करता है। समाज में अनेक समुदाय होते हैं और राज्य भी एक समुदाय है। राज्य विभिन्न समुदायों में सामंजस्य स्थापित करते है। व्यक्ति के जीवन के कई पहलू हैं जो राज्य के कार्य-क्षेत्र से बाहर हैं। कई समुदाय जैसे परिवार राज्य से अधिक प्राकृतिक और मौलिक है। लॉस्की और मैकाइवर ने बहु-समुदाय समाज की धारणा पर विशेष बल दिया।

12. अन्तर्राष्ट्रीय और विश्व-शान्ति में विश्वास (Faith in Internationalism and World Peace)उदारवाद ‘जियो और जीने दो’ के सिद्धान्त पर आधारित है। यह विश्व-शान्ति तथा विश्व-बन्धुत्व के आदर्श में विश्वास करता है। प्रत्येक राष्ट्र को धीरे-धीरे शान्तिपूर्वक प्रगति करनी चाहिए और उसे अन्य राष्ट्रों की प्रगति में सहायता करनी चाहिए। प्रत्येक राष्ट्र को दूसरे राष्ट्र की अखण्डता एवं सीमा का आदर करना चाहिए और किसी राष्ट्र को दूसरे के विरुद्ध शक्ति का प्रयोग नहीं करना चाहिए। अन्तर्राष्ट्रीय समस्याओं का हल अन्तर्राष्ट्रीय कानून और शान्तिपूर्वक साधनों द्वारा होना चाहिए।

PSEB 12th Class Political Science Solutions Chapter 5 उदारवाद

प्रश्न 3.
पुरातन उदारवाद तथा समकालीन उदारवाद में मुख्य अन्तर बताइए।
(Distinguish between Classical Liberalism and Contemporary Liberalism)
अथवा
परम्परावादी उदारवाद तथा समकालीन उदारवाद में अन्तर की व्याख्या कीजिए।
(Explain differences between Classical Liberalism and Modern Liberalism.)
उत्तर-
शास्त्रीय उदारवाद तथा समकालीन उदारवाद में भेद का निम्नलिखित प्रकार से वर्णन किया जाता है-

1. व्यक्तिवाद के सम्बन्ध में अन्तर-शास्त्रीय उदारवाद व्यक्तिवाद का समर्थन करता है, और कई विद्वान् उदारवाद और व्यक्तिवाद को एक ही मानते हैं, परन्तु समकालीन उदारवाद व्यक्तिवाद का खण्डन करता है। शास्त्रीय उदारवाद का आरम्भ ‘व्यक्ति’ से होता है, परन्तु समकालीन उदारवाद का आरम्भ ‘समूह’ तथा ‘संस्था’ से होता है।

2. प्राकृतिक अधिकारों के सम्बन्ध में अन्तर–शास्त्रीय उदारवाद व्यक्ति को प्राप्त प्राकृतिक अधिकारों का समर्थन करता है। शास्त्रीय उदारवाद के अनुसार जीवन, स्वतन्त्रता तथा सम्पत्ति के आधार प्राकृतिक अधिकार हैं। समकालीन उदारवाद व्यक्ति के अधिकारों को समाज की देन मानते हैं तथा उसे वह अधिकार देने का समर्थन करता है जो व्यक्तिगत तथा सामाजिक हित में है।

3. स्वतन्त्रता के सम्बन्ध में अन्तर-शास्त्रीय उदारवाद स्वतन्त्रता के नकारात्मक रूप पर बल देता है जबकि समकालीन उदारवाद स्वतन्त्रता के सकारात्मक रूप पर बल देता है। अत: जहां शास्त्रीय उदारवाद स्वतन्त्रता और राज्य के कार्य करने की शक्ति को परस्पर विरोधी मानता है, वहीं समकालीन उदारवाद स्वतन्त्रता और राज्य के कार्य करने की शक्ति को परस्पर विरोधी न मानकर सहयोगी मानता है।

4. राज्य के कार्यों के सम्बन्ध में अन्तर-शास्त्रीय उदारवाद इस बात पर बल देता है कि राज्य को कम-से-कम कार्य करने चाहिएं जबकि समकालीन उदारवाद इस बात पर बल देता है कि राज्य को सार्वजनिक कल्याण के लिए काम करने चाहिएं। शास्त्रीय उदारवाद राज्य को सीमित कार्य करने के लिए कहता है जबकि समकालीन उदारवाद राज्य को सभी तरह के कल्याणकारी कार्य करने के लिए कहता है। समकालीन उदारवाद व्यक्ति के विकास के लिए सभी तरह के कार्यों को करने के लिए राज्य को कहता है।

5. राज्य के सम्बन्ध में अन्तर-शास्त्रीय उदारवाद राज्य को एक आवश्यक बुराई मानता है। इसके अनुसार मनुष्य के सर्वांगीण विकास में मुख्य बाधा राज्य ही है, और राज्य के रहते व्यक्ति अपना पूर्ण विकास नहीं कर सकता। इसके विपरीत समकालीन उदारवाद राज्य को एक आवश्यक बुराई न मानकर प्राकृतिक और नैतिक संस्था मानता है। समकालीन उदारवादियों के अळुसार राज्य समस्त वर्गों के हितों को ध्यान में रखकर ही कार्य करता है।

6. दृष्टिकोण के सम्बन्ध में अन्तर-शास्त्रीय उदारवाद अपने दृष्टिकोण में सुधारवादी है जबकि समकालीन उदारवादी यथास्थिति को बनाए रखने के समर्थक हैं।

7. स्वतन्त्र व्यापार एवं पूंजीवाद के सम्बन्ध में अन्तर-शास्त्रीय उदारवाद स्वतन्त्र व्यापार तथा पूंजीवाद का समर्थन करता है जबकि समकालीन उदारवाद पूंजीवाद पर अंकुश लगाए जाने का समर्थन करता है। शास्त्रीय उदारवाद, राज्य को अर्थ-व्यवस्था को नियमित करने की शक्ति देने के विरुद्ध है जबकि समकालीन उदारवाद राज्य की हस्तक्षेप की नीति का समर्थन करता है। समकालीन उदारवाद श्रमिकों के हितों के लिए और सामाजिक कल्याण के लिए व्यापार और उद्योगों को नियन्त्रित करने के पक्ष में है। इसके अनुसार स्वतन्त्र व्यापार एवं अनियन्त्रित प्रतियोगिता ग़रीब को और ग़रीब एवं अमीर को और अमीर बना देती है।

8. विचारधारा के आधार पर अन्तर–शास्त्रीय उदारवाद मध्य वर्ग की एक राजनीतिक विचारधारा है जबकि समकालीन उदारवाद शक्ति-सम्पन्न पूंजीवादी वर्ग की विचारधारा है।

9. राज्य के हस्तक्षेप की नीति के सम्बन्ध में अन्तर-शास्त्रीय उदारवाद आर्थिक क्षेत्र में राज्य के हस्तक्षेप के विरुद्ध है। शास्त्रीय उदारवाद आर्थिक क्षेत्र में व्यक्ति को पूर्ण स्वतन्त्रता देने के पक्ष में है, परन्तु समकालीन उदारवाद । आर्थिक क्षेत्र में राज्य के हस्तक्षेप का समर्थन करता है।

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प्रश्न 4.
उदारवाद का शाब्दिक अर्थ बताते हुए, समकालीन (आधुनिक) उदारवाद की चार विशेषताएं बताओ।
(Give the verbal meaning of the word Liberalism and explain four features of contemporary Liberalism.).
उत्तर-
उदारवाद का अर्थ-इसके लिए प्रश्न नं. 1 देखें।
समकालीन (आधुनिक) उदारवाद की विशेषताएं-जे० एस० मिल, ग्रीन, लॉस्की आदि विद्वान् समकालीन उदारवाद के मुख्य समर्थक माने जाते हैं। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं-

1. प्राकृतिक अधिकारों का खण्डन-समकालीन उदारवादियों ने प्राकृतिक अधिकारों का खण्डन किया है और अधिकारों को समाज की देन माना है। समकालीन उदारवाद उन अधिकारों का समर्थन करता है जो व्यक्तिगत तथा सामूहिक हित में हों।.

2. राज्य के कल्याणकारी कार्य-समकालीन उदारवाद राज्य के कार्यों को सीमित नहीं करता है। समकालीन उदारवाद के अनुसार राज्य को सार्वजनिक कल्याण के लिए सभी कार्य करने चाहिए। लॉस्की ने राज्य को अधिकतम भलाई करने वाली सामाजिक संस्था माना जाता है। जो राज्य जनता की भलाई का जितना अधिक कार्य करता है वह उतना ही अच्छा होता है।

3. स्वतन्त्रता के सकारात्मक रूप का समर्थन-समकालीन उदारवाद स्वतन्त्रता के सकारात्मक रूप पर बल देता है। स्वतन्त्रता का अर्थ है-बन्धनों का अभाव। राज्य लोगों के कल्याण के लिए व्यक्तिगत स्वतन्त्रता पर प्रतिबन्ध लगा सकता है। समकालीन उदारवाद के अनुसार स्वतन्त्रता का अर्थ उन कार्यों को करने की स्वतन्त्रता है जो कार्य करने योग्य हैं।

4. मानवीय स्वतन्त्रता का पोषक-उदारवाद का मूल सिद्धान्त है कि मनुष्य जन्म से ही स्वतन्त्र है और.स्वतन्त्रता उसका प्राकृतिक एवं जन्म सिद्ध अधिकार है। स्वतन्त्रता का अभिप्राय यह है कि मनुष्य के जीवन पर किसे स्वेच्छाचारी सत्ता का नियन्त्रण न हो और उसे अपने विवेक के अनुसार आचरण करने की स्वतन्त्रता हो।

लघु उत्तरीय प्रश्न-

प्रश्न 1.
उदारवाद के शाब्दिक अर्थों की व्याख्या कीजिए।
अथवा
उदारवाद से आपका क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
उदारवाद आधुनिक युग की एक महत्त्वपूर्ण विचारधारा है। उदारवाद को अंग्रेज़ी में लिबरलिज्म’ (Liberalism) कहते हैं। इस शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द ‘लिबरलिस’ से हुई है जिसका शाब्दिक अर्थ है-स्वतन्त्र व्यक्ति। इस सिद्धान्त का सार यही है कि व्यक्ति को स्वतन्त्रता मिले जिससे वह अपने व्यक्तित्व का विकास तथा उसकी अभिव्यक्ति कर सके। उदारवाद एक ऐसी व्यापक विचारधारा है जिसमें अनेक विद्वानों के विचार और आदर्श शामिल हैं और जो समय के साथ-साथ परिवर्तित होते रहते हैं। उदारवाद एक तरफ लोकतान्त्रिक व्यवस्था का समर्थन करता है और दूसरी तरफ व्यक्ति को अपने व्यक्तित्व के विकास के लिए पूरे अवसर देना चाहता है। उदारवाद व्यक्ति को ही समस्त मानवीय व्यवस्था का केन्द्र मानता है।

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प्रश्न 2.
उदारवाद की कोई चार परिभाषाएं दें।
अथवा उदारवाद की कोई भी दो परिभाषाएं लिखें।
उत्तर-

  • इन्साइक्लोपीडिया ब्रिटेनिका के अनुसार, “उदारवाद के सारे विचार का सार स्वतन्त्रता का सिद्धान्त है। इसके अतिरिक्त स्वतन्त्रता का विचार इसका मूल है।”
  • मैकगर्वन के शब्दों में, “एक राजनीतिक सिद्धान्त के रूप में उदारवाद दो पृथक् तत्त्वों का मिश्रण है। इनमें से एक तत्त्व लोकतन्त्र है और दूसरा व्यक्तिवाद है।”..
  • सारटोरी के अनुसार, “साधारण शब्दों में उदारवाद व्यक्तिगत स्वतन्त्रता, न्यायिक सुरक्षा तथा संवैधानिक राज्य का सिद्धान्त व व्यवहार है।”
  • बट्रेण्ड रसल के अनुसार, “उदारवादी विचारधारा व्यवहार में जियो और जीने दो, सहनशील तथा स्वतन्त्रता जिस सीमा तक सार्वजनिक व्यवस्था आज्ञा दे तथा राजनीतिक मामलों में कट्टरता का अभाव है।”

प्रश्न 3.
परम्परागत उदारवाद किसे कहते हैं ?
अथवा
परम्परावादी उदारवाद क्या है ?
उत्तर-
शास्त्रीय उदारवाद (परम्परावादी उदारवाद) अपने प्रारम्भिक रूप में व्यक्तिवाद के निकट रहा है। शास्त्रीय उदारवाद को व्यक्तिवाद का दूसरा नाम कहा जा सकता है। लॉक ने व्यक्तिगत स्वतन्त्रता तथा सीमित राज्य के सिद्धान्त पर बल दिया है। लॉक द्वारा प्रस्तुत यह सिद्धान्त शास्त्रीय उदारवाद की आधारशिला माना जाता है। शास्त्रीय उदारवाद मानव व्यक्तित्व के असीम मूल्य तथा व्यक्तियों की आध्यात्मिक समानता में विश्वास रखता है। शास्त्रीय उदारवाद व्यक्ति के प्राकृतिक अधिकारों का समर्थन करता है। शास्त्रीय उदारवाद ने विशेषकर जीवन, स्वतन्त्रता तथा सम्पत्ति के अधिकार पर बल दिया है। शास्त्रीय उदारवाद राज्य को एक आवश्यक बुराई मानता है। इसके अनुसार वह सरकार सबसे अच्छी है जो कम-से-कम शासन करे। शास्त्रीय उदारवाद राज्य के कार्यों को सीमित करने पर बल देता है। शास्त्रीय उदारवादियों के मतानुसार राज्य का अधिक हस्तक्षेप व्यक्ति की स्वतन्त्रता को कम कर देता है। शास्त्रीय उदारवाद खुली प्रतियोगिता, स्वतन्त्र व्यापार तथा पूंजीवाद का समर्थन करता है।

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प्रश्न 4.
परम्परावादी उदारवाद की कोई चार विशेषताएं लिखें।
उत्तर-
परम्परावादी उदारवाद की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं-

  • राज्य एक आवश्यक बुराई है-परम्परावादी उदारवाद राज्य को एक आवश्यक बुराई मानता है। इसके अनुसार वह सरकार सबसे अच्छी है जो कम-से-कम शासन करे।
  • राज्य के न्यूनतम कार्य-परम्परावादी उदारवाद राज्य को कम-से-कम कार्य देने के पक्ष में है। परम्परावादी उदारवादियों के मतानुसार राज्य का कार्य केवल जीवन तथा सम्पत्ति की रक्षा करना और अपराधियों को दण्ड देना ही है। राज्य की शिक्षा, कृषि, व्यापार इत्यादि कार्य नहीं करने चाहिए।
  • मानव की स्वतन्त्रता-परम्परावादी उदारवाद मानव की स्वतन्त्रता का महान् समर्थक है। इसके अनुसार व्यक्ति को जीवन के हर क्षेत्र में स्वतन्त्रता प्राप्त होनी चाहिए। स्वतन्त्रता का अर्थ बन्धनों का अभाव माना गया है।
  • परम्परागत उदारवाद खुली प्रतियोगिता का समर्थन करता है।

प्रश्न 5.
समकालीन उदारवाद किसे कहते हैं ?
अथवा
समकालीन उदारवाद क्या है ?
उत्तर-
जे० एस० मिल, ग्रीन, लॉस्की आदि विद्वान् समकालीन उदारवाद के मुख्य समर्थक माने जाते हैं। समकालीन उदारवाद ने प्राकृतिक अधिकारों का खण्डन किया और अधिकारों को समाज की देन माना है। समकालीन उदारवाद उन अधिकारों का समर्थन करता है जो व्यक्तिगत तथा सामूहिक हित में हों। समकालीन उदारवाद ने खुली प्रतियोगिता का विरोध किया है। समकालीन उदारवाद राज्य को अधिक कार्य देने के पक्ष में है ताकि समस्त जनता का कल्याण हो सके। समकालीन उदारवाद स्वतन्त्रता और कानून में विरोध नहीं मानता बल्कि कानून को स्वतन्त्रता का संरक्षक मानता है। समकालीन उदारवाद ने सकारात्मक स्वतन्त्रता का समर्थन किया है।

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प्रश्न 6.
समकालीन उदारवाद की कोई चार विशेषताएं लिखें।
उत्तर-
जे० एस० मिल, ग्रीन, लॉस्की आदि विद्वान् समकालीन उदारवाद के मुख्य समर्थक माने जाते हैं। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं
1. प्राकृतिक अधिकारों का खण्डन-समकालीन उदारवादियों ने प्राकृतिक अधिकारों का खण्डन किया है और अधिकारों को समाज की देन माना है। समकालीन उदारवाद उन अधिकारों का समर्थन करता है जो व्यक्तिगत तथा सामूहिक हित में हों।

2. राज्य के कल्याणकारी कार्य-समकालीन उदारवाद राज्य के कार्यों को सीमित नहीं करता है। समकालीन उदारवाद के अनुसार राज्य को सार्वजनिक कल्याण के लिए सभी कार्य करने चाहिए। लॉस्की ने राज्य को अधिकतम भलाई करने वाली सामाजिक संस्था माना है। जो राज्य जनता की भलाई का जितना अधिक कार्य करता है वह उतना ही अच्छा होता है।

3. स्वतन्त्रता के सकारात्मक रूप का समर्थन–समकालीन उदारवाद स्वतन्त्रता के सकारात्मक रूप पर बल देता है। स्वतन्त्रता का अर्थ है-बन्धनों का अभाव। राज्य लोगों के कल्याण के लिए व्यक्तिगत स्वतन्त्रता पर प्रतिबन्ध लगा सकता है। समकालीन उदारवाद के अनुसार स्वतन्त्रता का अर्थ उन कार्यों को करने की स्वतन्त्रता है जो कार्य करने योग्य है।

4. समकालीन उदारवाद आर्थिक क्षेत्र में राज्य के हस्तक्षेप का समर्थन करता है।

प्रश्न 7.
पुरातन उदारवाद और समकालीन उदारवाद में चार अन्तर लिखो।
उत्तर-
शास्त्रीय उदारवाद तथा समकालीन उदारवाद में निम्नलिखित अन्तर पाए जाते हैं-

  • शास्त्रीय उदारवाद का आरम्भ ‘व्यक्ति’ से होता है, परन्तु समकालीन उदारवाद का आरम्भ ‘समूह’ तथा ‘संस्था’ से होता है।
  • शास्त्रीय उदारवाद व्यक्ति को प्राप्त प्राकृतिक अधिकारों का समर्थन करता है। समकालीन उदारवाद व्यक्ति के
    अधिकारों को समाज की देन मानता है तथा उसे वह अधिकार देने का समर्थन करता है है जो व्यक्तिगत तथा सामाजिक हित में हैं।
  • शास्त्रीय उदारवाद स्वतन्त्रता के नकारात्मक रूप पर बल देता है जबकि समकालीन उदारवाद स्वतन्त्रता के सकारात्मक रूप पर बल देता है।
  • शास्त्रीय उदारवाद राज्य को एक आवश्यक बुराई मानता है जबकि समकालीन उदारवाद राज्य को एक आवश्यक बुराई न मानकर प्राकृतिक और नैतिक संस्था मानता है।

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प्रश्न 8.
उदारवाद के चार सिद्धान्तों का वर्णन करो।
उत्तर-
उदारवाद आधुनिक युग की एक महत्त्वपूर्ण विचारधारा है। उदारवाद के मूल सिद्धान्त निम्नलिखित हैं-

  • मानवीय स्वतन्त्रता का पोषक-उदारवाद का मूल सिद्धान्त है कि मनुष्य जन्म से ही स्वतन्त्र है और स्वतन्त्रता उसका प्राकृतिक एवं जन्मसिद्ध अधिकार है। स्वतन्त्रता का अभिप्राय यह है कि मनुष्य के जीवन पर किसी स्वेच्छाचारी सत्ता का नियन्त्रण न हो और उसे अपने विवेक के अनुसार आचरण करने की स्वतन्त्रता हो।
  • राज्य का उद्देश्य मनुष्य के व्यक्तित्व का विकास करना है-उदारवादियों के अनुसार व्यक्ति के विकास में राज्य व समाज का विकास है और व्यक्ति की भलाई में राज्य की भलाई है। इसलिए राज्य का उद्देश्य मनुष्य के व्यक्तित्व का विकास करना है।
  • व्यक्ति साध्य तथा राज्य साधन-उदारवादी व्यक्ति को साध्य और राज्य को साधन मानते हैं। मानवीय संस्थाएं और समुदाय व्यक्ति के लिए बने हैं। इसलिए राज्य का कार्य व्यक्ति की सेवा करना है। वह सेवक है, स्वामी नहीं। व्यक्ति के उद्देश्य की पूर्ति करना ही राज्य का उद्देश्य है।
  • उदारवाद का निर्वाचित संसद, वयस्क मताधिकार, प्रैस की स्वतन्त्रता एवं निष्पक्ष न्यायालय में पूर्ण विश्वास है।

प्रश्न 9.
उदारवाद के विरोध में चार तर्क लिखो।
उत्तर-

  • मनुष्य केवल स्वार्थी नहीं है- उदारवादी विशेषकर बैन्थम जैसे उदारवादियों ने मनुष्य को स्वार्थी माना है। परन्तु यह धारणा ग़लत है। कोई भी व्यक्ति पूरी तरह न तो स्वार्थी है और न ही परमार्थी।
  • राज्य एक आवश्यक बुराई नहीं है-अनेक उदारवादियों ने राज्य को एक आवश्यक बुराई माना है, जोकि ठीक नहीं है। राज्य बुराई नहीं है। यह मनुष्य की सामाजिक चेतना की स्वाभाविक अभिव्यक्ति है।
  • अस्पष्ट धारणा-उदारवाद की विचारधारा स्पष्ट नहीं है। इसकी निश्चित परिभाषा नहीं की जा सकती और न ही इसके सिद्धान्तों पर सभी उदारवादी सहमत हैं।
  • राज्य की अयोग्यता का तर्क उचित नहीं है।

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अति लघु उत्तरीय प्रश्न-

प्रश्न 1.
उदारवाद के शाब्दिक अर्थ का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
उदारवाद आधुनिक युग की एक महत्त्वपूर्ण विचारधारा है। उदारवाद को अंग्रेजी में ‘लिबरलिज्म’ (Liberalism) कहते हैं। इस शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द ‘लिबरलिस’ से हुई है जिसका शाब्दिक अर्थ है-स्वतन्त्र व्यक्ति। इस सिद्धान्त का सार यही है कि व्यक्ति को स्वतन्त्रता मिले जिससे वह अपने व्यक्तित्व का विकास तथा उसकी अभिव्यक्ति कर सके।

प्रश्न 2.
उदारवाद की दो परिभाषाएं दें।
उत्तर-

  • इन्साइक्लोपीडिया ब्रिटेनिका के अनुसार, उदारवाद के सारे विचार का सार स्वतन्त्रता का सिद्धान्त है। इसके अतिरिक्त स्वतन्त्रता का विचार इसका मूल है।
  • मैकग्वन के शब्दों में, “एक राजनीतिक सिद्धान्त के रूप में उदारवाद दो पृथक् तत्त्वों का मिश्रण है। इसमें से एक तत्त्व लोकतन्त्र है दूसरा व्यक्तिवाद है।”

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प्रश्न 3.
परम्परावादी उद्गारवाद क्या है ?
उत्तर-
परम्परागत (शास्त्रीय) उदारवाद मानव व्यक्तित्व के असीम मूल्य तथा व्यक्तियों की आध्यात्मिक समानता में विश्वास रखता है। शास्त्रीय उदारवाद व्यक्ति के प्राकृतिक अधिकारों का समर्थन करता है। शास्त्रीय उदारवाद ने विशेषकर जीवन, स्वतन्त्रता तथा सम्पत्ति के अधिकार पर बल दिया है। शास्त्रीय उदारवाद राज्य को एक आवश्यक बुराई मानता है।

प्रश्न 4.
समकालीन उदारवाद क्या है ?
उत्तर-
समकालीन उदारवाद उन अधिकारों का समर्थन करता है जो व्यक्तिगत तथा सामूहिक हित में हों। समकालीन उदारवाद ने खुली प्रतियोगिता का विरोध किया है। समकालीन उदारवाद राज्य को अधिक कार्य देने के पक्ष में है ताकि समस्त जनता का कल्याण हो सके।

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प्रश्न 5.
शास्त्रीय उदारवाद तथा समकालीन उदारवाद में दो अन्तर करें।
उत्तर-

  • शास्त्रीय उदारवाद का आरम्भ ‘व्यक्ति’ से होता है, परन्तु समकालीन उदारवाद का आरम्भ ‘समूह’ तथा ‘संस्था’ से होता है।
  • शास्त्रीय उदारवाद व्यक्ति को प्राप्त प्राकृतिक अधिकारों का समर्थन करता है। समकालीन उदारवाद व्यक्ति के अधिकारों को समाज की देन मानता है तथा उसे वह अधिकार देने का समर्थन करता है जो व्यक्तिगत तथा सामाजिक हित में हैं।

प्रश्न 6.
उदारवाद के कोई दो सिद्धान्त लिखो।
उत्तर-

  • मानवीय स्वतन्त्रता का पोषक-उदारवाद का मूल सिद्धान्त है कि मनुष्य जन्म से ही स्वतन्त्र है और स्वतन्त्रता उसका प्राकृतिक एवं जन्मसिद्ध अधिकार है।
  • राज्य का उद्देश्य मनुष्य के व्यक्तित्व का विकास करना है-उदारवादियों के अनुसार व्यक्ति के विकास में राज्य व समाज का विकास है और व्यक्ति की भलाई में राज्य की भलाई है। इसलिए राज्य का उद्देश्य मनुष्य के व्यक्तित्व का विकास करना है।

PSEB 12th Class Political Science Solutions Chapter 5 उदारवाद

वस्तुनिष्ठ प्रश्न-

प्रश्न I. एक शब्द/वाक्य वाले प्रश्न उत्तर

प्रश्न 1.
Liberalism शब्द की उत्पत्ति किस भाषा से हुई है ?
उत्तर-
Liberalism शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा से हुई है।

प्रश्न 2.
किस विद्वान ने ‘स्वतन्त्रता पर निबन्ध’ पस्तक लिखी ?
उत्तर-
‘स्वतन्त्रता पर निबन्ध’ पुस्तक जे० एस० मिल ने लिखी।

प्रश्न 3.
उदारवाद का अंग्रेज़ी रूप क्या है ?
उत्तर-
उदारवाद का अंग्रेज़ी रूप Liberalism है।

PSEB 12th Class Political Science Solutions Chapter 5 उदारवाद

प्रश्न 4.
Liberalism शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के किस शब्द से हुई है ?
उत्तर-
Liberalism शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के लिबरलिस शब्द से हुई है।

प्रश्न 5.
उदारवाद शब्द का मूल क्या है?
उत्तर-
उदारवाद शब्द का मूल स्वतन्त्र व्यक्ति है।

प्रश्न 6.
उदारवाद के कितने रूप हैं ?
उत्तर-
उदारवाद के दो रूप हैं।

PSEB 12th Class Political Science Solutions Chapter 5 उदारवाद

प्रश्न 7.
उदारवाद के कोई दो रूपों के नाम लिखें।
अथवा
उदारवाद के दो रूप लिखें।
उत्तर-
(1) शास्त्रीय उदारवाद
(2) समकालीन उदारवाद।

प्रश्न 8.
उदारवाद के कोई एक व्याख्याकार का नाम लिखो।
उत्तर-
लॉस्की।

प्रश्न 9.
उदारवाद की एक परिभाषा लिखें।
उत्तर-
सारटोरी के अनुसार, “सामान्य शब्दों में उदारवाद व्यक्तिगत स्वतन्त्रता, न्यायिक सुरक्षा तथा संवैधानिक राज्य का सिद्धान्त तथा व्यवहार है।”

PSEB 12th Class Political Science Solutions Chapter 5 उदारवाद

प्रश्न 10.
उदारवाद के अर्थ लिखो।
उत्तर-
उदरवाद का अर्थ है, कि व्यक्ति को स्वतन्त्रता मिले, जिससे वह अपने व्यक्तित्व का विकास तथा उसकी अभिव्यक्ति कर सके।

प्रश्न 11.
समकालीन या आधुनिक उदारवाद से आपका क्या अभिप्राय है ?
अथवा
समकालीन उदारवाद से क्या भाव है ?
उत्तर-
समकालीन उदारवाद उन अधिकारों का समर्थन करता है, जो व्यक्तिगत तथा सामूहिक हित में हो, यह सकारात्मक स्वतन्त्रता का समर्थन करता है।

प्रश्न 12.
परम्परावादी उदारवाद से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
परम्परावादी उदारवाद मानव व्यक्तित्व के असीम मूल्यों तथा व्यक्तियों की आध्यात्मिक समानता में विश्वास रखता है, यह व्यक्ति के प्राकृतिक अधिकारों का समर्थन करता है।

PSEB 12th Class Political Science Solutions Chapter 5 उदारवाद

प्रश्न II. खाली स्थान भरें-

1. उदारवाद ………… का उल्टा नहीं है।
2. उदारवाद ………… नहीं है।
3. उदारवाद व्यक्ति की स्वतन्त्रता पर जोर देता है, जबकि लोकतन्त्र ……….. को महत्त्व देता है।
4. उदारवाद को अंग्रेजी में ………… कहते हैं। ।
5. Liberalism शब्द की उत्पत्ति ………… भाषा के शब्द से हुई है।
उत्तर-

  1. अनुदारवाद
  2. व्यक्तिवाद
  3. समानता
  4. Liberalism
  5. लैटिन।

प्रश्न III. निम्नलिखित वाक्यों में से सही एवं ग़लत का चुनाव करें-

1. शास्त्रीय उदारवाद व्यक्तिवाद का दूसरा नाम कहा जा सकता है।
2. जॉन लॉक एक प्रसिद्ध अमेरिकन राजनीतिक विद्वान् थे।
3. जॉन लॉक ने लेवियाथान नामक पुस्तक लिखी।
4. लॉक के अनुसार जीवन का अधिकार, स्वतन्त्रता का अधिकार एवं सम्पत्ति का अधिकार मनुष्य के प्राकृतिक अधिकार हैं।
5. एडम स्मिथ ने आर्थिक आधार पर राज्य के कार्यों को सीमित किया और व्यक्ति के कार्यों में राज्य के हस्तक्षेप को अनुचित माना।
उत्तर-

  1. सही
  2. ग़लत
  3. ग़लत
  4. सही
  5. सही।

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प्रश्न IV. बहुविकल्पीय प्रश्न-

प्रश्न 1.
यह कथन किसका है कि, “उदारवाद की व्याख्या करना या परिभाषा देना सरल कार्य नहीं है, क्योंकि यह कुछ सिद्धान्तों का समूह नहीं है, बल्कि मस्तिष्क में रहने वाला विचार है।”
(क) लॉस्की
(ख) विलोबी
(ग) टी० एच० ग्रीन
(घ) लासवैल।
उत्तर-
(क) लॉस्की

प्रश्न 2.
हेलोवेल ने उदारवाद का अर्थ किस प्रकार प्रकट किया है ?
(क) व्यक्ति की इच्छा की स्वतन्त्रता
(ख) व्यक्ति की भलाई एवं दृढ़ विवेकशीलता
(ग) जीवन, स्वतन्त्रता तथा सम्पत्ति के अधिकारों का अस्तित्व
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

PSEB 12th Class Political Science Solutions Chapter 5 उदारवाद

प्रश्न 3.
निम्न में से उदारवाद का सिद्धान्त है-
(क) मानवीय विवेक में आस्था
(ख) इतिहास एवं परम्परा का विरोध
(ग) मानवीय स्वतन्त्रता का पोषक
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 4.
जॉन लॉक किस देश का राजनीतिक विद्वान् था ?
(क) भारत
(ख) अमेरिका
(ग) इंग्लैण्ड
(घ) जर्मनी।
उत्तर-
(ग) इंग्लैण्ड

PSEB 12th Class Political Science Solutions Chapter 5 उदारवाद

प्रश्न 5.
शास्त्रीय उदारवाद की विशेषता है-
(क) व्यक्ति की सर्वोच्च महानता
(ख) व्यक्ति साध्य और राज्य साधन
(ग) राज्य एक आवश्यक बुराई है
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 6 संतुलित भावुक विकास

Punjab State Board PSEB 10th Class Welcome Life Book Solutions Chapter 6 संतुलित भावुक विकास Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 10 Welcome Life Chapter 6 संतुलित भावुक विकास

PSEB 10th Class Welcome Life Guide संतुलित भावुक विकास Textbook Questions and Answers

नोट-इस अध्याय के कोई पाठ्य प्रश्न नहीं हैं।

पाठ पर आधारित प्रश्न

मेरी भावनाओं की सूझ

नीचे दिए खाके में कुछ भावनाएं दी गई हैं। इस तालिका को पूरा करके आप अपनी भावनाओं की संवेदनशीलता का अंदाजा लगा सकते हो —
PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 6 संतुलित भावुक विकास 1

मुझे खुशी होती है जब …………

  1. कोई मेरे काम की तारीफ करता है।
  2. मेरे दोस्त मेरे साथ खेलते हैं।
  3. मेरा परिणाम बहुत अच्छा आता है।

मुझे दुःख होता है जब …………

  1. कोई मेरे बारे में गलत बोलता है।
  2. कोई मेरी पीठ पीछे मेरी निंदा करता है।
  3. जब मेरी मेहनत का नतीजा अच्छा नहीं आता है।

मुझे डर लगता हैं जब …………

  1. शिक्षक को कोई मेरे बारे में कुछ गलत कहता है।
  2. मेरे पेपर अच्छे नहीं होते और बुरा परिणाम आना हो।

मुझे नफरत हैं जब …………
कोई मेरी पीठ पीछे बात करके मुझे बदनाम करता है और सामने बोलने की हिम्मत नहीं करता।

मुझे गर्व महसूस होता है जब …………
मेरी मेहनत का अच्छा परिणाम आता है और हर कोई मेरा सम्मान करता है।

PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 6 संतुलित भावुक विकास

मैं निराश हो जाता हूँ जब ………….
मेरी मेहनत के बावजूद, परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं आता।

मुझे सहानुभूति होती है जब ……..
मेरे दोस्तों को कम अंक मिलते हैं और मैं अपने आस-पास बहुत सारे गरीब लोगों को देखता हूँ।

मुझे विश्‍वास है कि जब …………
हर कोई मुझसे कहता है कि यदि इस बार नहीं तो अगली बार परिणाम बेहतर होंगे क्योंकि मेहनत व्यर्थ नहीं जाती है।

सकारात्मक भावनाएं

PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 6 संतुलित भावुक विकास 2

नकारात्मक भावनाएं
PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 6 संतुलित भावुक विकास 3
PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 6 संतुलित भावुक विकास 4

PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 6 संतुलित भावुक विकास

सहपाठियों से विचार करने की कला

(क) अपने दोस्तों के नाम लिखो।
1. ……………….. 2. ……………… 3. ………………..
(ख) आप अपने दोस्तों से कितनी बार नाराज होते हैं?
कभी नहीं/अक्सर/कभी कभी।
(ग) आप अपने दोस्तों के साथ नाराज़गी से कितनी देर के बाद खेलना फिर से शुरू करते ैं?
(घ) अपने साथियों को खुश करने के लिए आप क्या प्रयास करते हैं?
उत्तर-
(क) क, ख, ग …….।
(ख) कभी-कभी।
(ग) थोड़ी देर बाद जब आक्रोश दूर हो जाता है।
(घ) मैं उन्हें टहलने के लिए बाहर ले जाता हूँ और साथ में बैठकर कुछ खा लेता हूँ। इसका बिल का भुगतान करता हूँ।

मान लीजिए आपका एक दोस्त एक दिन आपके साथ कैंटीन जाता है। आप चाय और समोसे का ऑर्डर करते हैं लेकिन वह केवल चाय लेता है, समोसे की कीमत पूछने के बाद। ऐसी स्थिति में आप क्या करेंगे? उत्तर-इस स्थिति में मैं उसे एक समोसा खरीद दूंगा और हम एक साथ समोसा खाएंगे।
आपकी कक्षा में एक छात्र बिना नाश्ता किए स्कूल में आ गया है। वह अपना टिफिन-बॉक्स भी नहीं लाया। आप उसके लिए क्या करेंगे ? उत्तर-मैं उसके साथ अपना टिफिन साझा करूँगा और कहूंगा कि वह चिंता न करे। हम उसके साथ हैं।

PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 6 संतुलित भावुक विकास

Welcome Life Guide for Class 10 PSEB संतुलित भावुक विकास Important Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

(क) बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रखने से किस पर बुरा प्रभाव पड़ता है?
(a) मानसिक स्वास्थ्य
(b) पारिवारिक संबंध
(c) सामाजिक संबंध
(d) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(d) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 2.
बुरे प्रभावों से बचने के लिए हमें क्या करना चाहिए?
(a) भावनाओं को खुलकर व्यक्त करना चाहिए
(b) भावनाओं को नियंत्रण में रखना चाहिए
(c) कोई भावनाएं नहीं होनी चाहिए
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(b) भावनाओं को नियंत्रण में रखना चाहिए।

PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 6 संतुलित भावुक विकास

प्रश्न 3.
इनमें से कौन-सा एक सकारात्मक भाव है?
(a) खुशी
(b) उदासी
(c) ईर्ष्या
(d) निराशा।
उत्तर-
(a) खुशी।

प्रश्न 4.
इनमें से कौन-सा एक नकारात्मक भाव है?
(a) दुःख
(b) गौरव
(c) सहानुभूति
(d) प्यार!
उत्तर-
(a) दुःख।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित में से सकारात्मक भावना चुनें
(a) गर्व
(b) विश्वास
(c) सहानुभूति
(d) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(d) उपरोक्त सभी।

PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 6 संतुलित भावुक विकास

प्रश्न 6.
नकारात्मक भावना का पता करो।
(a) दुःख
(b) चिंता
(c) डर
(d) ये सभी।
उत्तर-
(d) ये सभी।

(ख) खाली स्थान भरें

  1. ………… लिखना एक अच्छी आदत है।
  2. गर्व करना एक ………………… भावना है।
  3. ईर्ष्या करना एक …………………. भावना है।
  4. हमें अपनी ………………… को काबू में रखना चाहिए।
  5. डायरी एक महत्त्वपूर्ण ………………… बन जाती है।

उत्तर-

  1. डायरी,
  2. सकारात्मक,
  3. नकारात्मक,
  4. भावनाएं,
  5. दस्तावेज़।

PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 6 संतुलित भावुक विकास

(ग) सही/ग़लत चुनें

  1. हमें भावनाओं को नियंत्रण में रखना चाहिए।
  2. खुशी व्यक्त करना नकारात्मक भावना है।
  3. बेचैनी और भय सकारात्मक भावनाएं हैं।
  4. हमें डायरी लिखने की आदत नहीं डालनी चाहिए।
  5. भावनाओं को व्यक्त करने की एक सीमा होनी चाहिए।

उत्तर-

  1. सही,
  2. ग़लत,
  3. ग़लत,
  4. ग़लत,
  5. सही।

(घ) कॉलम से मेल करे

कॉलम I — कॉलम II
(a) उत्तेजना (जोश) — (i) नकारात्मक भाव
(b) भावनाओं पर नियंत्रण — (ii) सकारात्मक भाव
(c) क्रोध — (iii) अच्छी आदतें
(d) विश्वास (iv) भावना
(e) डायरी लिखना — (v) भाव व्यक्त करना।
उत्तर-
कॉलम I — कॉलम II
(a) उत्तेजना (जोश) — (iv) भावना
(b) भावनाओं पर नियंत्रण — (v) भाव व्यक्त करना
(c) क्रोध — (i) नकारात्मक भाव
(d) विश्वास — (ii) सकारात्मक भाव
(e) डायरी लिखना — (iii) अच्छी आदतें

PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 6 संतुलित भावुक विकास

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भावनाओं के संतुलन से क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
इसका मतलब है कि हमें पता होना चाहिए कि कब और कितनी भावनाओं को व्यक्त करना है।

प्रश्न 2.
भावनाओं को नियंत्रण करने की आवश्यकता क्यों है?
उत्तर-
यदि हम अपनी भावनाओं को नियंत्रित नहीं करेंगे, तो हमें कई नुकसान हो सकते हैं।

प्रश्न 3.
हमारे पास किस प्रकार की भावनाएं होती हैं?
उत्तर-
भय, सुख, दुःख, हैरानी, पश्चाताप, विश्वास, प्रेम इत्यादि।

PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 6 संतुलित भावुक विकास

प्रश्न 4.
भावनाओं को नियंत्रित न करने से क्या हानि है?
उत्तर-
यह हमारे मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक संबंधों और सामाजिक संबंधों पर बुरा असर डाल सकता है।

प्रश्न 5.
भावनाओं को व्यक्त करने के लिए क्या ज़रूरी है?
उत्तर-
भावनाओं को व्यक्त करने की निश्चित सीमा होनी चाहिए।

प्रश्न 6.
डायरी लिखने से क्या फायदा है?
उत्तर-
इससे हम अपने अच्छे पलों को सहेज सकते हैं जो हमारे जीवन में आए हैं।

PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 6 संतुलित भावुक विकास

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भावनाओं को व्यक्त करने पर एक नोट लिखो।
उत्तर-
हमारे पास बहुत सारी भावनाएँ हैं जैसे कि भय, चिंता, घबराहट, खुशी, प्यार इत्यादि। भावनाओं को नियंत्रण में रखना बहुत आवश्यक है अन्यथा हमें इसके परिणाम, भुगतने होंगे। यदि भावनाएं नियंत्रण से बाहर हो जाएंगी, तो इससे हमारे स्वास्थ्य, सामाजिक संबंधों और पारिवारिक संबंधों पर बुरा प्रभाव हो सकता है। इसलिए उन्हें नियंत्रण में रखना आवश्यक है। इसके साथ-साथ हमें यह भी सीखना चाहिए कि भावुक होकर हम कोई ऐसी गलती न कर बैठें जिससे हमें बाद में पश्चाताप हो।

प्रश्न 2.
तस्वीर की मदद से सकारात्मक भावनाएं दिखाएं।
उत्तर-
PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 6 संतुलित भावुक विकास 5

प्रश्न 3.
तस्वीर की मदद से नकारात्मक भावनाएं दिखाएं।
उत्तर-
PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 6 संतुलित भावुक विकास 6

PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 6 संतुलित भावुक विकास

प्रश्न 4.
हमें डायरी लिखने की आदत क्यों होनी चाहिए?
उत्तर-
डायरी लिखना एक अच्छी आदत है क्योंकि इसमें हम अपनी जिंदगी के वह पल संभाल सकते हैं जो हमारी जिंदगी में बीते हैं। हम खुश होते हैं जब हम अपनी डायरी से अपने पुरानी यादों को याद करते हैं। डायरी हमारे लिए एक महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ बन जाती है। इसीलिए सबको डायरी लिखने की आदत डालनी चाहिए और इसे जिंदगी का एक अहम हिस्सा बनाना चाहिए।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न-हम इस अध्याय से क्या सीखते हैं ? विस्तार से बताएं।
उत्तर-

  1. हर व्यक्ति की बहुत सी भावनाएँ होती हैं जिनको वे समय-समय पर व्यक्त करते हैं।
  2. सकारात्मक भावनाओं में हम गर्व, विश्वास, प्यार, खुशी इत्यादि को शामिल करते हैं। नकारात्मक भावनाओं में हम गुस्सा शर्म, ईर्ष्या, डर इत्यादि को शामिल करते हैं।
  3. हमें अपनी भावनाओं को नियंत्रित करने की आवश्यकता है अन्यथा हमारे मानसिक, पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों पर उनका हानिकारक प्रभाव पड़ता है।
  4. हमें अपनी भावनाओं को सोच-समझ कर व्यक्त करना चाहिए ताकि किसी और को गुस्सा न आए। इसलिए, भावनाओं का संतुलन रखना महत्त्वपूर्ण है।
  5. हमें डायरी लिखने की आदत डालनी चाहिए और अपनी भावनाओं को केवल डायरी में व्यक्त करना चाहिए।
  6. डायरी एक अनमोल दस्तावेज़ बन जाती है जिसे हम अपनी पुरानी यादों को ताज़ा करने के लिए कभी भी पढ़ सकते हैं।

PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 6 संतुलित भावुक विकास

संतुलित भावुक विकास PSEB 10th Class Welcome Life Notes

  • हर व्यक्ति के पास बहुत सारी भावनाएं होती हैं जैसे कि खुशी, दुःख बेचैनी, घबराहट, डर इत्यादि। इन भावनाओं पर नियंत्रण रखना आवश्यक है नहीं तो वे हानिकारक साबित हो सकती हैं।
  • यदि हम अपनी भावनाओं को नियंत्रित नहीं करते, तो हम भावुक होकर ऐसी गलती कर बैठेंगे, जिससे हमें बाद में पश्चाताप होगा।
  • यदि हम स्वयं में स्वयं-मूल्यांकन की भावना विकसित करते हैं, तो हम बेहतर नागरिक बन सकते हैं। इस तरह की भावनाएँ हमारे जीवन में बहुत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
  • हमें अपनी भावनाओं का संतुलन रखना चाहिए और उन्हें एक निश्चित सीमा तक ही व्यक्त करना चाहिए।
  • हमारे पास कुछ सकारात्मक और कुछ नकारात्मक भावनाएँ हैं और उन्हें ठीक से समन्वित करने की आवश्यकता है।
  • नकारात्मक भावनाओं से छुटकारा पाकर सकारात्मक भावनाओं के प्रति अधिक झुकाव होना चाहिए।
  • दोस्तों के बीच घूमने की प्रवृत्ति होनी चाहिए होती भी है। यह हमें उनके करीब जाने और हमारी भावनाओं को उनके साथ साझा करने की अनुमति देता है। ऐसा करने से डिप्रेशन या तनाव जैसी समस्याओं से बेचा जा सकता है।
  • बहुत से लोग डायरी लिखना पसंद करते हैं और यह एक बहुत अच्छी आदत है। डायरी में हम अपने दैनिक जीवन के अच्छे या बुरे पल लिख सकते हैं। यह डायरी बाद में हमारे जीवन का एक वैध दस्तावेज बन जाती है।

PSEB 12th Class Political Science Solutions Chapter 6 मार्क्सवाद

Punjab State Board PSEB 12th Class Political Science Book Solutions Chapter 6 मार्क्सवाद Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 12 Political Science Chapter 6 मार्क्सवाद

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-

प्रश्न 1.
मार्क्स के समाजवाद के कोई छः सिद्धान्तों का वर्णन कीजिए। (Discuss any six Principles of Marxian Socialism.)
अथवा
मार्क्सवाद के मुख्य सिद्धान्तों का वर्णन करो। (Discuss the main principles of Marxism.)
अथवा
मार्क्सवाद क्या है ? कार्ल मार्क्स के चार महत्त्वपूर्ण सिद्धान्तों का वर्णन करें। (What is Marxism ? Discuss four important principles of Karl Marx.)
अथवा मार्क्सवाद के मुख्य सिद्धान्तों का वर्णन कीजिए।। (Explain the main principles of Marxism.)
उत्तर-
कार्ल मार्क्स को साम्यवाद का जन्मदाता माना जाता है। उसने ही समाजवाद को वैज्ञानिक और व्यावहारिक रूप देने का प्रथम प्रयत्न किया। मार्क्सवादी समाज को सर्वहारा समाजवींद (Proletarian Socialism) तथा वैज्ञानिक समाजवाद (Scientific Socialism) के नाम से पुकारा जाता है। मार्क्स इसलिए अपने समाजवाद को वैज्ञानिक कहता है, क्योंकि यह इतिहास के आधार पर आधारित है। मार्क्स से पहले साइमन, फोरियर तथा ओवन ने भी समाजवाद से सम्बन्धित विचार प्रस्तुत किए थे, परन्तु उनके समाजवाद को वैज्ञानिक इसलिए नहीं कहा जाता क्योंकि यह इतिहास पर आधारित न होकर केवल कल्पना पर आधारित था। वेपर (Wayper) के शब्दों में, “उन्होंने केवल सुन्दर गुलाब के नज़ारे लिए थे, गुलाब के वृक्षों के लिए जमीन तैयार नहीं की थी।” प्रो० जोड (Prof. Joad) ने लिखा है, “मार्क्स इसलिए पहला समाजवादी लेखक था जिसकी जातियों को हम वैज्ञानिक कह सकते हैं। क्योंकि उसने न केवल अपने उद्देश्यों के समाज की भूमिका तैयार की बल्कि उसने विस्तार में यह भी बताया है कि वह किन-किन स्थितियों में से होता हुआ स्थापित हो सकेगा।” ।

लुइस वाशरमैन (Washerman) ने मार्क्स के विषय में लिखा है, “उसने समाजवाद को एक षड्यन्त्र के रूप में पाया और उसे एक आन्दोलन के रूप में छोड़ा।” (“He found socialism a conspiracy and left it a movement.”) मार्क्स ने सामाजिक विकास का एक वैज्ञानिक तथा क्रमिक अध्ययन किया। मार्क्स की भौतिकवादी तथा आर्थिक व्याख्या ही मार्क्सवाद है।

मार्क्स ने न केवल अपने विचारों को क्रमबद्ध रूप में प्रतिपादित किया है बल्कि यह भी बताया है कि इनको किस प्रकार लागू किया जा सकता है। मार्क्सवादी विचारधारा एक अविभाज्य इकाई है जिसके चार आधार स्तम्भ हैं-

(1) द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद (Dialectical Materialism)
(2) इतिहास की भौतिकवादी व्याख्या (Materialistic Interpretation of History)
(3) वर्ग-संघर्ष का सिद्धान्त (Theory of Class-Struggle)
(4) अतिरिक्त मूल्य का सिद्धान्त (Theory of Surplus Value)।

1. द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद (Dialectical Materialism) मार्क्सवादी साम्यवाद का मूलाधार उनका द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद (Dialectical Materialism) था। इस सिद्धान्त के द्वारा मार्क्स ने समाज के विकास के नियमों को खोजने का प्रयास किया। यह सिद्धान्त उसने अपने दार्शनिक गुरु हीगल से लिया जो कहता था, “संसार में समस्त विकास का कारण विरोधों का संघर्ष (Conflict of opposites) से होता है।” परन्तु मार्क्स ने हीगल के प्रथमवादी सिद्धान्त को भौतिकता के रंग में रंग दिया। इसलिए उसने कहा कि मानव समाज में प्रगति वर्गों में आर्थिक संघर्ष के कारण होती कार्ल मार्क्स के विचार द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद सारे दर्शन के आधार हैं। सभी नए विचार इसी आधार पर उत्पन्न होते हैं। मार्क्स जानता था कि समाज का विकास स्वाभाविक होता है। प्रकृति में चारों ओर संघर्ष चल रहा है जो अन्तर्विरोधी है। यह अन्तर्विरोध दो प्रकार का है अर्थात् एक वाद (Thesis) और दूसरा प्रतिवाद (Anti-thesis)। दोनों प्रकार के विरोधों में वाद तथा प्रतिवाद में संघर्ष निरन्तर चलता रहता है। जिस प्रकार वस्तुएं अपनी मूल प्रकृति में वाद तथा प्रतिवाद में एक-दूसरे की विरोधी होती हैं। जब ‘वाद’ का अपने ‘प्रतिवाद’ से टकराव होता है तो पारस्परिक प्रतिक्रियास्वरूप दोनों ही वस्तुओं के दिखलाई देने वाले स्वरूप का लोप हो जाता है तथा एक नवीन वस्तु का जन्म होता है। मार्क्स ने इसे ‘संवाद’ (Synthesis) का नाम दिया है। उसके अनुसार इस ‘संवाद’ का जन्म दोनों परस्पर विरोधी वस्तुओं के संयोग से हुआ है। अतः इनमें दोनों ही पूर्ववर्ती वस्तुओं के अंश विद्यमान रहते हैं। कालान्तर में यही ‘संवाद’ (Synthesis) ‘वाद’ (Thesis) का रूप धारण कर लेता है। विकास की यह प्रतिक्रिया अविरल रूप में चलती रहती है। ‘संवाद’ को मार्क्स ‘वाद’ एवं ‘प्रतिवाद’ का सुधरा हुआ रूप मानता है। इस प्रकार मार्क्स ने हीगल द्वारा प्रतिपादित द्वन्द्ववादी पद्धति को विचार जगत् में ला खड़ा किया। मार्क्स के शब्दों में, “हीगल का द्वन्द्ववाद सिर के बल खड़ा था मैंने उसे पैरों के बल पर खड़ा किया है।”

मार्क्स ने अपनी द्वन्द्ववादी पद्धति द्वारा समाज के विकास के इतिहास का विवरण प्रस्तुत किया तथा कहा कि समाज में विभिन्न वर्ग होते हैं। इन वर्गों में परस्पर संघर्ष होता रहता है। यह संघर्ष इस समय तक चलता रहता है जब तक समाय में सभी वर्ग समाप्त नहीं हो जाते। धीरे-धीरे ये वर्ग मज़दूर में लुप्त हो जाते हैं। तथा ‘श्रमिक वर्ग की तानाशाही’ (Dictatorship of the Proletariat) स्थापित हो जाती है।

2. इतिहास की भौतिकवादी व्याख्या (Materialistic Interpretation of History) कार्ल मार्क्स ने द्वन्द्वात्मक ढंग से ही इतिहास की भी व्याख्या की है। उसका कहना था कि समस्त ऐतिहासिक घटनाओं में आर्थिक घटनाओं का ही प्रभाव पड़ता है। समस्त सामाजिक ढांचा आर्थिक ढांचे के अनुसार ही बदलता रहता है। किसी भी युग का इतिहास ले लिया जाए। उस युग की सभ्यता केवल उस वर्ग का ही इतिहास दिखाई देगी जिसके पास आर्थिक शक्ति थी और उत्पादन के साधनों पर जिसका नियन्त्रण था। उत्पादन के साधन परिवर्तनशील हैं, परन्तु जिस वर्ग के पास उन साधनों का नियन्त्रण होता है, वे इस परिवर्तन में बाधा डालते हैं। इससे समाज मे दो परस्पर विरोधी गुट पैदा हो जाते हैं। और संघर्ष आरम्भ हो जाता है। एक गुट के पास आर्थिक शक्ति होती है तथा दूसरा गुट उसे प्राप्त करना चाहता है। समस्त ऐतिहासिक घटनाओं पर आर्थिक ढांचे का प्रभाव पड़ता है। यहां तक कि धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक विचार-धाराएं भी आर्थिक विचारधारा से प्रभावित होती हैं।

3. वर्ग-संघर्ष (Class-Struggle) मार्क्स का कहना था कि आज तक सारा संघर्ष एक वर्ग-संघर्ष के अतिरिक्त कुछ नहीं है। आरम्भ में ही समाज दो विरोधी वर्गों में बंटा हुआ रहता है-पूंजीपति और मज़दूर, अमीर और ग़रीब, शोषक और शोषित अर्थात् एक वे जिनके पास आर्थिक व राजनीतिक शक्ति होती है और दूसरे वे जिनके पास कोई शक्ति नहीं होती (Haves and Have-note)। मालिक और नौकर तथा शासक और शासित के वर्ग परस्पर विरोधी ही हैं। आरम्भ से ही आर्थिक शक्ति के किसी-न-किसी एक वर्ग के पास रही है और राजनीतिक शक्ति भी आर्थिक शक्ति के साथ ही मिलती आई है। ऐसे वर्ग ने सदा दूसरे वर्ग पर अन्याय और अत्याचार किए और राज्य ने इसमें उसका साथ दिया। इन दोनों विरोधी वर्गों के हित कभी एक-दूसरे से मेल नहीं खा सकते। प्राचीनकाल में दास-प्रथा थी और दासों का शोषण होता था। राज्य की शक्ति का प्रयोग भी दासों के विरुद्ध होता आया है। सामन्त युग में आर्थिक शक्ति सामन्तों के पास थी जिससे किसानों का शोषण होता था। आधुनिक पूंजीवादी समाज में मजदूरों का शोषण होता है और इस कार्य में राज्य की शक्ति पूंजीवादियों का ही साथ देती है। शोषित वर्ग के पास अपनी दशा को सुधारने के लिए क्रान्ति के अतिरिक्त और कोई साधन नहीं है। विभिन्न देशों में हुई क्रान्तियां इस बात का प्रमाण हैं। साम्यवादी घोषणा-पत्र (Communist Manifesto) में कहा गया था, “स्वामी और गुलाम, उच्च कुल तथा निम्न कुल, ज़मींदार तथा कृषक संघ में अधिकारी और मज़दूर अर्थात् शोषण करने वाले तथा शोषित वर्ग सदैव एक दूसरे के विरोधी रहे हैं।”

4. अतिरिक्त मूल्य का सिद्धान्त (Theory of Surplus Value)-अतिरिक्त मूल्य के सिद्धान्त पर मार्क्स के विचार मुख्य रूप से आधारित हैं। उसका कहना था कि किसी वस्तु के उत्पादन में श्रम का ही मुख्य हाथ है। मजदूर ही कच्चे माल को पक्के माल में बदलता है। किसी भी वस्तु का मूल्य उस पर लगे श्रम और समय अनुसार ही निश्चित होता है। आधुनिक पूंजीवादी समाज में कच्चे माल अथवा पूंजी पर कुछ धनिकों का ही नियन्त्रण है और मज़दूर के पास अपना श्रम बेचने के अतिरिक्त और कोई रास्ता नहीं। पूंजीपति मज़दूर को उसकी पूरी मजदूरी नहीं देता। उसे केवल इतना वेतन दिया जाता है कि वह जीवित रह सके और पूंजीपतियों की सेवा करता रहे। मज़दूरी और वस्तु के मूल्य में जो अन्तर है, वह वास्तव में मज़दूर का भाग है, परन्तु पूंजीपति उसे लाभ कहकर अपने पास रख लेता है। यही अतिरिक्त मूल्य है जो मज़दूर को मिलना चाहिए, पूंजीपति का उस पर कोई अधिकार नहीं है। पूंजीपति का लाभ मजदूर की मज़दूरी में से छीने गए भाग के अतिरिक्त कुछ नहीं है। मजदूर की मजदूरी एक नाशवान् वस्तु है और वह अपनी उचित मज़दूरी के लिए अधिक दिन तक उसे नष्ट नहीं कर सकते। पूंजीपति मजदूरों की इस शोचनीय दशा का अनुचित लाभ उठाते हैं और उन्हें कम मज़दूरी पर काम करने को विवश करते हैं। पूंजीपति अधिक-से-अधिक लाभ उठा कर मज़दूरों को और भी ग़रीब बनाते हैं।

मार्क्स के अन्य महत्त्वपूर्ण विचार इस प्रकार हैं-

5. पूंजीवाद का आत्मनाश (Self-destruction of Capitalism)-कार्ल मार्क्स ने कहा है कि वर्तमान पूंजीवाद स्वयं ही नाश की ओर जा रहा है। निजी सम्पत्ति और खुली प्रतियोगिता के कारण अमीर अधिक अमीर और ग़रीब अधिक ग़रीब होते जा रहे हैं। छोटे-छोटे पूंजीपति बड़े-बड़े पूंजीपतियों का मुकाबला नहीं कर सकते। कुछ समय बाद उसकी थोड़ी-बहुत सम्पत्ति नष्ट हो जाती है और वे मज़दूर वर्ग में मिल जाते हैं। इस प्रकार पूंजीपतियों की संख्या घटती जा रही है और मजदूरों की संख्या बढ़ती जा रही है। कुछ समय के बाद पूंजीपतियों की संख्या इतनी कम रह जाएगी कि मजदूरों के लिए उनके विरुद्ध क्रान्ति करना बड़ा ही सरल हो जाएगा। उद्योगों के एक ही स्थान पर केन्द्रीयकरण तथा मशीनों के अधिक-से-अधिक प्रयोग के कारण भी पूंजीवाद स्वयं नाश की ओर जा रहा है। एक ही स्थान पर अधिक उद्योग हो ने से मजदूरों की संख्या भी बढ़ती जाती है। वे एक-दूसरे के सम्पर्क में आते हैं और उनमें एकता उत्पन्न होती है। मशीनों के कारण मज़दूरों में बेरोज़गारी बढ़ती है और वे पूंजीपतियों के विरोधी हो जाते हैं।

6. राज्य के लुप्त हो जाने में विश्वास (Faith in Withering away of the State)-मार्क्सवाद के अनुसार राज्य का प्रयोग शासक वर्ग श्रमिकों के शोषण के लिए करता है। इसलिए मार्क्सवादी राज्य को समाप्त कर देना चाहते हैं ताकि इसके द्वारा किसी का शोषण न हो सके। क्रान्ति के पश्चात् सर्वहारा वर्ग की तानाशाही की स्थापना हो जाएगी। सर्वहारा वर्ग धीरे-धीरे पूंजीवाद को समाप्त करके वर्ग-भेदों को समाप्त कर देगा। जब कोई वर्ग नहीं रहेगा तब राज्य की भी कोई आवश्यकता नहीं रहेगी और राज्य स्वयं लुप्त हो जाएगा।

7. क्रान्तिकारी साधनों में विश्वास (Faith in Revolutionary Methods)–मार्क्सवादी पूंजीवाद को समाप्त करने के लिए क्रान्ति में विश्वास रखता है। मार्क्स का विश्वास था कि शान्तिपूर्वक साधनों द्वारा पूंजीवाद को समाप्त करके साम्यवाद की स्थापना नहीं की जा सकती क्योंकि पूंजीवादी कभी सत्ता त्यागना नहीं चाहेंगे।

8. एक दल और दलीय अनुशासन में विश्वास (Faith in One Party and Party Discipline)मार्क्सवादी एक दल के शासन और दलीय अनुशासन में विश्वास रखते हैं। मार्क्सवाद के अनुसार शासन की बागडोर केवल साम्यवादी दल के हाथ में होनी चाहिए और किसी अन्य दल की स्थापना नहीं की जा सकती। मार्क्सवाद कठोर दलीय अनुशासन में विश्वास रखता है। कोई भी सदस्य पार्टी की नीतियों के विरुद्ध आवाज़ नहीं उठा सकता।

9. धर्म में कोई विश्वास नहीं (No Faith in Religion) मार्क्सवाद का धर्म में कोई विश्वास नहीं है। मार्क्स धर्म को लोगों के लिए अफीम मानता है। वह धर्म को पूंजीपतियों का समर्थक मानता है। पूंजीपतियों ने धर्म के नाम पर श्रमिकों और ग़रीबों को गुमराह किया है ताकि वे उनके विरुद्ध आवाज़ न उठाएं।

10. वर्गविहीन तथा राज्यविहीन समाजवादी समाज की स्थापना (Establishment of Classless and Stateless Socialist Society)-कार्ल मार्क्स का उद्देश्य अन्त में एक वर्गविहीन तथा राज्यविहीन समाज की स्थापना करना है। एक ऐसा समाज जिसमें विरोधी न हों बल्कि सब के सब मज़दूर हों और कार्य करके अपना पेट पालते हों, जिसमें कोई राज्य न हो क्योंकि राज्य शक्ति पर खड़ा है और जिसके पास भी इसकी शक्ति जाएगी, वह उसका प्रयोग करके दूसरों पर अत्याचार और शोषण करेगा। राज्य के होते हुए समाज का दो विरोधी गुटों में बंटना स्वाभाविक है। वर्गविहीन तथा राज्यविहीन समाय की स्थापना के लिए कार्ल मार्क्स ने निम्नलिखित स्तरों का उल्लेख किया-

(क) सामाजिक क्रान्ति (Social Revolution)-कार्ल मार्क्स ने साम्यवादी समाज की स्थापना के लिए प्रथम प्रयास सामाजिक क्रान्ति को बताया है। वैसे तो पूंजीवाद स्वयं ही नाश की ओर जा रहा है, परन्तु उसकी जड़ें काफ़ी गहरी हैं। मजदूरों को अपनी दशा सुधारने के लिए प्रयत्न अवश्य करने चाहिएं। मजदूरों को चाहिए कि वे अपने आपको संगठित करें और उनमें वर्ग जागृति (Class consciousness) लाने के प्रयत्न किए जाने चाहिएं। संगठित होकर अपनी शक्ति को बढ़ा कर उन्हें हिंसात्मक कार्यों का सहारा लेना चाहिए और हिंसा द्वारा इस वर्तमान पूंजीवादी व्यवस्था को नष्ट-भ्रष्ट करना चाहिए। शान्तिपूर्ण तरीकों से या हिंसा द्वारा जैसे भी हो मजदूरों को राज्यसत्ता अपने हाथ में लेनी चाहिए। कार्ल मार्क्स ने मज़दूरों द्वारा सत्ता की प्राप्ति के लिए सभी साधनों को उचित बताया।

(ख) सर्वहारा अर्थात् मज़दूर वर्ग की तानाशाही (Dictatorship of the Proletariat) क्रान्ति और वर्गविहीन तथा राज्यविहीन समाज की स्थापना के बीच के समय को मार्क्स ने मजदूर वर्ग की तानाशाही के रूप में रखा है। केवल क्रान्ति करके ही मज़दूरों का उद्देश्य पूरा नहीं होता और पूंजीवाद एकदम ही नष्ट नहीं हो सकता। राज्यसत्ता पर अधिकार करके मजदूरों को चाहिए कि वे इस मशीनरी का प्रयोग पूंजीपतियों के विरुद्ध और पूंजीवाद को मूलतः नष्ट करने में करें। निजी सम्पत्ति की समाप्ति राष्ट्रीयकरण, व्यापार और व्यवसाय पर नियन्त्रण, भारी कर व्यवस्था (Heavy Taxation), विशेषाधिकारी की समाप्ति, सबके लिए समान कार्य आदि के कानून बनाकर और बल प्रयोग करके पूंजीवाद को नष्ट किया जा सकता है। . कार्ल मार्क्स तथा अन्य समाजवादी राज्य को अच्छी नहीं समझते और अन्त में उसे समाप्त करने के पक्ष में हैं, परन्तु इस अन्तरिम क्रान्तिकारी काल (Transitional Stage) में वे उसे रखने के पक्ष में हैं। जिस शक्ति से पहले पूंजीपति ग़रीबों और मजदूरों का शोषण करते थे, उसी से अब मज़दूर पूंजीपतियों को नष्ट करेंगे। पूंजीपति वर्ग के पूर्ण रूप से समाप्त होने पर जब समाज में परस्पर विरोधी वर्ग न होंगे और सब लोग श्रमिक ही होंगे तो उस समय राज्य को तोड़ दिया जाएगा।

(ग) वर्गविहीन तथा राज्यविहीन समाजवादी समाज (Classless and Stateless Socialist Society)जब पूंजीपतियों की समाप्ति हो जाएगी तो समाज में कोई वर्ग-संघर्ष नहीं होगा। सभी व्यक्ति श्रमिक वर्ग के होंगे इस प्रकार समाज वर्गविहीन हो जाएगा। समाज में आर्थिक समानता उत्पन्न हो जाएगी। ऐसी दशा में राज्य की कोई आवश्यकता नहीं होगी और इसे समाप्त कर दिया जएगा। राज्य का स्थान ऐसे समुदाय ले लेंगे जो व्यक्तियों द्वारा स्वतन्त्र और स्वेच्छा से बनाए जाएंगे ऐसा समाज स्थापित करना साम्यवाद का अन्तिम उद्देश्य है। अधिकतर साम्यवादी परिवार धार्मिक संस्थाओं को उचित नहीं मानते और इस समाज में उनके लिए भी कोई स्थान नहीं देते।

11. उद्देश्य साधनों का औचित्य बताते हैं (Ends Justify The Means)-मार्क्सवाद के अनुसार उद्देश्य साधनों का औचित्य बताते हैं। अत: मार्क्सवादी उद्देश्य की प्राप्ति के लिए कोई भी साधन अपनाने के पक्ष में हैं।

12. निजी क्षेत्र का विरोध (Against Private Ownership)—मार्क्सवादी निजी क्षेत्र का विरोध करता है। मार्क्सवाद के अनुसार निजी क्षेत्र को समाप्त करके सामूहिक अधिकार क्षेत्र स्थापित करना चाहिए।

13. बेगानगी का सिद्धान्त (Theory of Alienation)-मार्क्सवाद के अनुसार मज़दूर मजदूरी करते-करते तथा पूंजीपति अधिक-से-अधिक लाभ कमाने की लालसा में अपने आस-पास के वातावरण से कट जाते हैं।

14. मार्क्सवाद को संसार में फैलना (Global Spread of Marxsim)-मार्क्सवादी मार्क्सवाद को एक आन्दोलन बनाकर पूरे विश्व में फैला देना चाहते हैं।

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लघु उत्तरीय प्रश्न-

प्रश्न 1.
मार्क्सवाद क्या है?
उत्तर-
कार्ल मार्क्स की रचनाओं में दिए गए विचारों को सामूहिक रूप में मार्क्सवाद का नाम दिया जाता है। मार्क्स को साम्यवाद का जन्मदाता माना जाता है जिसने समाजवाद को वैज्ञानिक और व्यावहारिक रूप देने का प्रथम प्रयत्न किया। मार्क्स इसलिए अपने समाजवाद को वैज्ञानिक कहता है, क्योंकि यह इतिहास पर आधारित है। मार्क्स ने सामाजिक विकास का वैज्ञानिक तथा क्रमिक अध्ययन किया। मार्क्स की भौतिकवादी और आर्थिक व्याख्या ही मार्क्सवाद है। मार्क्स ने न केवल अपने विचारों को क्रमबद्ध रूप में प्रतिपादित किया है बल्कि यह भी बताया है कि इनको किस प्रकार लागू किया जा सकता है। मार्क्सवादी विचारधारा एक अविभाज्य इकाई है जिसके चार आधार स्तम्भ हैं-(1) द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद, (2) इतिहास की भौतिकवादी व्याख्या (3) वर्ग-संघर्ष का सिद्धान्त, (4) अतिरिक्त मूल्य का सिद्धान्त।

प्रश्न 2.
कार्ल मार्क्स की प्रमुख रचनाओं के नाम लिखें।
अथवा
कार्ल मार्क्स की तीन रचनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर-
कार्ल मार्क्स जर्मनी का एक प्रसिद्ध विद्वान् था। मार्क्स ने अपने जीवन काल में अनेक ग्रन्थ व लेख लिखे उनमें से प्रमुख के नाम निम्नलिखित हैं

  • The Poverty of Philosophy 1874.
  • कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो 1848.
  • दास कैपीटल 1867.
  • Value, Price and Profit 1865.

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प्रश्न 3.
कार्ल मार्क्स का वर्ग संघर्ष का सिद्धान्त लिखो।
अथवा
कार्ल मार्क्स का श्रेणी युद्ध का सिद्धान्त क्या है ?
उत्तर-
वर्ग संघर्ष का सिद्धान्त मार्क्स का एक प्रमुख सिद्धान्त है जो समाज में होने वाले परिवर्तनों को सूचित करता है। मार्क्स के अनुसार समाज में सदैव दो विरोधी वर्ग रहे हैं। एक वह वर्ग जिसके पास उत्पादन के साधनों का स्वामित्व है और दूसरा वह जो केवल शारीरिक श्रम करता है। अपने-अपने हितों की रक्षा के लिए इन दोनों वर्गों के बीच सदैव संघर्ष होता रहता है। मार्क्स का कथन है कि आज तक का समाज का इतिहास वर्ग संघर्ष का इतिहास है। मार्क्स ने वर्ग संघर्ष के सिद्धान्त को ऐतिहासिक आधार पर प्रमाणित किया है। आदिम युग में मनुष्य की आवश्यकताएं बहुत कम थीं। सम्पत्ति व्यक्तिगत न होकर सामूहिक थी। इसलिए कोई वर्ग नहीं था और न ही वर्ग संघर्ष था। परन्तु इसके पश्चात् उत्पादन के साधनों पर थोड़े-से व्यक्तियों ने स्वामित्व स्थापित कर लिया और शेष दास बन गए। इस प्रकार वर्गों की उत्पति हुई जिससे वर्ग संघर्ष उत्पन्न हो गया। कार्ल मार्क्स के अनुसार, यह संघर्ष तभी समाप्त होगा जब पूंजीवाद का नाश होगा और साम्यवाद की स्थापना होगी।

प्रश्न 4.
कार्ल मार्क्स का भौतिकवाद द्वन्द्ववाद का सिद्धान्त क्या है?
उत्तर-
मार्क्स के अनुसार प्रत्येक समाज में विरोधी शक्तियां होती हैं और इनके परस्पर विरोध से समाज का विकास होता है। मार्क्स के अनुसार, पूंजीवादी व्यवस्था में पूंजीवादी वर्ग तथा मजदूर वर्ग दो विरोधी शक्तियां पाई जाती हैं। दोनों के परस्पर संघर्ष से पूंजीवाद का नाश हो जायेगा तथा एक नया समाजवादी समाज अस्तित्व में आएगा। मार्क्स ने यह सिद्धान्त हीगल से ग्रहण किया है। द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद में निम्नलिखित विशेषताएं होती हैं-

  • पदार्थ एक हकीकत है, जो सभी परिवर्तनों के लिए उत्तरदायी है।
  • प्रत्येक वस्तु व स्थिति परिवर्तनशील है।
  • प्रत्येक तथ्य (Fact) में अन्तर्विरोध किया है।
  • स्थान और स्थितियां विकास को अवश्य प्रभावित करती हैं।

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प्रश्न 5.
मार्क्सवादी इतिहास की भौतिकवादी व्याख्या की विवेचना कीजिए।
अथवा
कार्ल मार्क्स के इतिहास की भौतिकवादी व्याख्या का सिद्धान्त लिखो।
उत्तर-
इतिहास की द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद द्वारा व्याख्या को मार्क्स ने इतिहास की भौतिकवादी व्याख्या का नाम दिया। मार्क्स ने इतिहास का विश्लेषण भौतिकवाद के माध्यम से किया। मार्क्स का कहना था कि समस्त ऐतिहासिक घटनाओं में आर्थिक घटनाओं का ही प्रभाव पड़ता है। समस्त सामाजिक ढांचा आर्थिक ढांचे के अनुसार ही बदलता रहता है। किसी भी युग का इतिहास ले लिया जाए, उस युग की सभ्यता केवल उस वर्ग के ही इतिहास में दिखाई देगी जिसके पास आर्थिक शक्ति थी और उत्पादन के साधनों पर जिसका नियन्त्रण था। उत्पादन के साधन परिवर्तनशील हैं, परन्तु जिस वर्ग के पास उन साधनों का नियन्त्रण होता है, वे इस परिवर्तन में बाधा डालते हैं। इससे समाज में दो परस्पर विरोधी गुट पैदा हो जाते हैं और संघर्ष आरम्भ हो जाता है। एक गुट के पास आर्थिक शक्ति होती है तथा दूसरा गुट उसे प्राप्त करना चाहता है। समस्त ऐतिहासिक घटनाओं पर आर्थिक ढांचे का प्रभाव पड़ता है। यहां तक कि धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक विचारधाराएं भी आर्थिक विचारधारा से प्रभावित होती हैं।

प्रश्न 6.
कार्ल मार्क्स का अतिरिक्त मूल्य का सिद्धान्त क्या है ?
अथवा
मार्क्स का अधिक मूल्य का सिद्धान्त क्या है?
उत्तर-
अतिरिक्त मूल्य के सिद्धान्त पर मार्क्स के विचार मुख्य रूप से आधारित हैं। उसका कहना था कि किसी वस्तु के उत्पादन में श्रम का ही मुख्य हाथ है। मज़दूर ही कच्चे माल को पक्के माल में बदलता है। किसी भी वस्तु का मूल्य उस पर लगे श्रम और समय अनुसार ही निश्चित होता है। आधुनिक पूंजीवादी समाज में कच्चे माल अथवा पूंजी पर कुछ धनिकों का ही नियन्त्रण है और मजदूर के पास अपना श्रम बेचने के अतिरिक्त और कोई स्रोत नहीं। पूंजीवादी मजदूर को उसकी पूरी मज़दूरी नहीं देता। उसे केवल इतनी मज़दूरी दी जाती है कि वह जीवित रह सके और पूंजीपतियों की सेवा करता रहे। मज़दूरी और वस्तु के मूल्य में जो अन्तर है, वह वास्तव में मज़दूर का भाग है, परन्तु पूंजीपति उसे लाभ कहकर अपने पास रख लेता है। यही अतिरिक्त मूल्य है जो मज़दूर को मिलना चाहिए, पूंजीपति का उस पर कोई अधिकार नहीं है।

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प्रश्न 7.
कार्ल मार्क्स के पूंजीवाद के आत्मनाश के सिद्धान्त के बारे में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर-
कार्ल मार्क्स ने कहा कि वर्तमान पूंजीवाद स्वयं ही नाश की ओर जा रहा है। निजी सम्पत्ति और खुली प्रतियोगिता के कारण अमीर अधिक अमीर और ग़रीब और अधिक गरीब होते जा रहे हैं। छोटे-छोटे पूंजीपति बड़ेबड़े पूंजीपतियों का मुकाबला नहीं कर सकते। कुछ समय बाद उसकी थोड़ी-बहुत सम्पत्ति नष्ट हो जाती है और वे मज़दूर वर्ग में मिल जाते हैं। इस प्रकार पूंजीपतियों की संख्या घटती जा रही है और मज़दूरों की संख्या बढ़ती जा रही है। कुछ समय के बाद पूंजीपतियों की संख्या इतनी कम रह जाएगी कि मज़दूरों के लिए उनके विरुद्ध क्रान्ति करना बड़ा ही सरल हो जाएगा। उद्योगों के एक ही स्थान पर केन्द्रीयकरण तथा मशीनों के अधिक-से-अधिक प्रयोग के कारण भी पूंजीवाद स्वयं नाश की ओर जा रहा है। एक ही स्थान पर अधिक उद्योग होने से मजदूरों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। वे एक-दूसरे के सम्पर्क में आते हैं जिससे उनमें एकता उत्पन्न होती है। मशीनों के कारण मजदूरों में बेरोजगारी बढ़ती जाती है जिससे वे पूंजीपतियों के विरोधी हो जाते हैं।

प्रश्न 8.
मार्क्सवाद के मुख्य सिद्धान्तों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-

  • द्वन्द्वात्मक सिद्धान्त-मार्क्सवादी साम्यवाद का मूलाधार उनका भौतिक द्वन्द्वावाद था। इस सिद्धान्त के द्वारा मार्क्स ने समाज के विकास के नियमों को खोजने का प्रयास किया।
  • इतिहास की भौतिकवादी व्याख्या-मार्क्स ने द्वन्द्वात्मक ढंग से ही इतिहास की भी व्याख्या की है। उसका कहना था कि समस्त ऐतिहासिक घटनाओं में आर्थिक घटनाओं का ही प्रभाव पड़ता है। किसी भी युग का इतिहास ले लिया जाए तो उस युग की सभ्यता केवल उस वर्ग का ही इतिहास दिखाई देगी जिसके पास आर्थिक शक्ति थी और उत्पादन के साधनों पर जिसका नियन्त्रण होता था।
  • वर्ग संघर्ष-मार्क्स का कहना था कि समाज दो विरोधी वर्गों में बंटा हुआ होता है-पूंजीवादी और मज़दूर, शोषक और शोषित। इन दोनों विरोधी वर्गों के हित कभी एक-दूसरे से मेल नहीं खा सकते। शोषित वर्ग के पास अपनी दशा सुधारने के लिए क्रान्ति के अतिरिक्त कोई साधन नहीं है। विभिन्न देशों में हुई क्रान्तियां इस बात का प्रमाण हैं।
  • मार्क्सवाद का एक अन्य महत्त्वपूर्ण सिद्धान्त अतिरिक्त मूल्य का सिद्धान्त है।

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प्रश्न 9.
मार्क्स का मज़दूरों की तानाशाही का क्या अर्थ है ?
अथवा
मार्क्सवाद का ‘मज़दूरों की तानाशाही’ से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
मार्क्स का यह विश्वास था कि जब श्रमिक संगठित हो जाएंगे और क्रान्ति का बीड़ा उठाएंगे तो पूंजीपति वर्ग अवश्य ही समाप्त हो जाएगा और सर्वहारा वर्ग अर्थात् श्रमिक वर्ग की तानाशाही स्थापित हो जाएगी। क्रान्ति और वर्ग विहीन समाज की स्थापना के बीच के समय को मार्क्स ने सर्वहारा वर्ग की तानाशाही के रूप में माना है। सर्वहारा के अधिनायकतन्त्र के अन्तर्गत राज्य में वर्ग विरोध का अन्त हो जाएगा। सर्वहारा वर्ग के अधिनायकतन्त्र के समय में राज्य एक वर्ग का न होकर सम्पूर्ण समाज का प्रतिनिधि बन जाता है। सर्वहारा वर्ग का अधिनायकतन्त्र एक प्रकार से श्रमिकों के प्रजातन्त्र का रूप धारण करता है। पूंजीपति वर्ग के पूर्ण रूप से समाप्त होने पर जब समाज में परस्पर विरोधी वर्ग नहीं होंगे और सब लोग श्रमिक ही होंगे तब राज्य अनावश्यक हो जाएगा और स्वयं ही समाप्त हो जाएगा।

प्रश्न 10.
मार्क्सवादियों के धर्म के सम्बन्ध में विचार लिखो।
अथवा
कार्ल मार्क्स का धर्म के सम्बन्ध में क्या विचार था ?
उत्तर-
मार्क्सवादियों का धर्म में कोई विश्वास नहीं था। वह धर्म को लोगों के लिए अफ़ीम समझते थे, क्योंकि जनता धर्म के चक्कर में पड़ कर अन्ध-विश्वासी, रूढ़िवादी, अप्रगतिशील और कायर बन जाती है। मार्क्सवादी धर्म को पूंजीपतियों की रक्षा का यन्त्र मानते हैं। उनका मत है कि पूंजीपति वर्ग धर्म की आड़ में ग़रीब या श्रमिक वर्ग का शोषण करते हैं। इसलिए मार्क्सवादियों ने धर्म को कोई महत्त्व नहीं दिया। साम्यवादी देशों में धर्म को कोई महत्त्व नहीं दिया जाता है।

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प्रश्न 11.
मार्क्सवादियों के राज्य के सम्बन्ध में विचार लिखिए।’
अथवा
मार्क्सवादियों के राज्य के बारे में विचार लिखो।
उत्तर-
मार्क्सवादी राज्य को न तो ईश्वरीय संस्था मानते हैं और न ही किसी समझौते का परिणाम। मार्क्सवादियों के विचारानुसार राज्य का उदय सामाजिक विकास के फलस्वरूप हुआ है। यह समाज के दो वर्गों के बीच संघर्ष का परिणाम है। मार्क्स के अनुसार राज्य कभी कल्याणकारी संस्था नहीं हो सकती क्योंकि राज्य की सत्ता का प्रयोग शोषक वर्ग अपने हितों के लिए करता है। राज्य का सही विकास पूंजीपति युग में हुआ जिसकी शुरुआत मध्य युग के बाद हुई। पंजीपति वर्ग ने श्रमिक वर्ग का शोषण करने के लिए राज्य रूपी यन्त्र का प्रयोग किया और राज्य को और शक्तिशाली बनाया। मार्क्स का विचार है कि वर्तमान बुर्जुआ राज्य को श्रमिक वर्ग क्रान्ति द्वारा समाप्त कर देगा और उसके स्थान पर मज़दूर राज्य (Proletarian State) की स्थापना होगी। मज़दूर राज्य में श्रमिक वर्ग अथवा सर्वहारा वर्ग की तानाशाही की स्थापना होगी। जब पूंजीवाद का पूर्ण विनाश हो जाएगा और राज्य समस्त समाज का वास्तविक प्रतिनिधि बन जाएगा तब राज्य अनावश्यक हो जाएगा। अन्त में राज्य अपने आप लोप हो जाएगा और वर्ग-विहीन तथा राज्य-विहीन समाज की स्थापना हो जाएगी।

प्रश्न 12.
कार्ल मार्क्स के वर्ग विहीन समाज से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
मार्क्सवाद के अनुसार पूंजीवाद ही समाज में संघर्ष का प्रमुख कारण है। पूंजीपति अपने निहित स्वार्थों के लिए श्रमिकों का शोषण करते हैं। अतः जब तक पूंजीवाद का नाश नहीं होगा तब तक न तो समाज से संघर्ष की समाप्ति होगी और न ही वर्ग विहीन समाज का सपना साकार होगा। मार्क्सवाद के अनुसार जब पूंजीपतियों की समाप्ति हो जाएगी तो समाज में कोई वर्ग-संघर्ष नहीं होगा । सभी व्यक्ति श्रमिक वर्ग के होंगे। इस प्रकार समाज वर्ग विहीन हो जाएगा। समाज में आर्थिक समानता उत्पन्न हो जाएगी। ऐसी दशा में राज्य की कोई आवश्यकता नहीं होगी और राज्य विलुप्त हो जाएगा। राज्य का स्थान ऐसे समुदाय ले लेंगे जो व्यक्ति द्वारा स्वतन्त्रता और स्वेच्छा से बनाए जाएंगे। ऐसा समाज स्थापित करना साम्यवाद का अन्तिम उद्देश्य है। अधिकतर साम्यवादी धार्मिक संस्थाओं को उचित नहीं मानते और इस समाज में इन्हें कोई स्थान नहीं देते।

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प्रश्न 13.
मार्क्सवाद की आलोचना के किन्हीं चार आधारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
मार्क्सवाद की आलोचना मुख्यत: निम्नलिखित आधारों पर की गई है
1. इतिहास वर्ग संघर्ष की कहानी मात्र नहीं है-कार्ल मार्क्स का यह कहना भी सर्वथा उचित नहीं है कि समस्त इतिहास वर्ग संघर्ष की कहानी है। सभी देशों के इतिहास इस बात के साक्षी हैं कि यहां पर बहुत-से शासक ऐसे हुए जिन्होंने अपनी शक्ति का दुरुपयोग न करके शान्ति और व्यवस्था का साम्राज्य स्थापित किया और लोगों ने परस्पर विरोध की बजाय एकता के सूत्र में बंध कर राष्ट्र और समाज की उन्नति के कार्य किए। इतिहास को वर्ग संघर्ष की कहानी कहना इतिहास का गलत चित्रण करना है।

2. राज्य एक बुराई नहीं है-मार्क्सवाद राज्य को एक बुराई मानता है जो वर्ग संघर्ष को बढ़ावा देती है और पूंजीवादियों को मज़दूरों के शोषण में सहायता देती है, परन्तु यह बात ग़लत है। राज्य एक बुराई नहीं बल्कि अच्छाई है। राज्य लोगों की इच्छा पर आधारित शक्ति पर नहीं।

3. धर्म पर आघात अन्यायपूर्ण-मार्क्सवाद ने धर्म को अफ़ीम कहा है, जो कि उचित नहीं है।
4. मार्क्स के अनुसार राज्य लुप्त हो जाएगा, परन्तु राज्य पहले से भी अधिक शक्तिशाली हुआ है।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न-

प्रश्न 1.
मार्क्सवाद क्या है ?
उत्तर-
कार्ल मार्क्स की रचनाओं में दिए गए विचारों को सामूहिक रूप में मार्क्सवाद का नाम दिया जाता है। मार्क्स को साम्यवाद का जन्मदाता माना जाता है जिसने समाजवाद को वैज्ञानिक और व्यावहारिक रूप देने का प्रथम प्रयत्न किया। मार्क्स ने न केवल अपने विचारों को क्रमबद्ध रूप में प्रतिपादित किया है बल्कि यह भी बताया है कि इनको किस प्रकार लागू किया जा सकता है।

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प्रश्न 2.
आप कार्ल मार्क्स के वर्ग संघर्ष के सिद्धांत के विषय में क्या जानते हैं ? .
उत्तर-
मार्क्स के अनुसार समाज में सदैव दो विरोधी वर्ग रहे हैं। एक वह वर्ग जिसके पास उत्पादन के साधनों का स्वामित्व है और दूसरा वह जो केवल शारीरिक श्रम करता है। अपने-अपने हितों की रक्षा के लिए इन दोनों वर्गों के बीच सदैव संघर्ष होता रहता है।

प्रश्न 3.
कार्ल मार्क्स का अतिरिक्त मूल्य का सिद्धान्त क्या है ?
उत्तर-
अतिरिक्त मूल्य के सिद्धान्त पर मार्क्स के विचार मुख्य रूप से आधारित हैं। उसका कहना था कि किसी वस्तु के उत्पादन में श्रम का ही मुख्य हाथ है। परन्तु पूंजीवादी मजदूर को उसकी पूरी मज़दूरी नहीं देता। उसे केवल इतनी मज़दूरी दी जाती है कि वह जीवित रह सके और पूंजीपतियों की सेवा करता रहे। मज़दूरी और वस्तु के मूल्य में जो अन्तर है, वह वास्तव में मज़दूर का भाग है, परन्तु पूंजीपति उसे लाभ कहकर अपने पास रख लेता है। यही अतिरिक्त मूल्य है जो मज़दूर को मिलना चाहिए।

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प्रश्न 4.
मार्क्सवाद के दो मुख्य सिद्धान्तों का वर्णन करें।
उत्तर-
1. द्वन्द्वात्मक सिद्धान्त-मार्क्सवादी साम्यवाद का मूलाधार उनका भौतिक द्वन्द्ववाद था। इस सिद्धान्त के द्वारा मार्क्स ने समाज के विकास के नियमों को खोजने का प्रयास किया।

2. इतिहास की भौतिकवादी व्याख्या-मार्क्स ने द्वन्द्वात्मक ढंग से ही इतिहास की भी व्याख्या की है। उसका कहना था कि समस्त ऐतिहासिक घटनाओं में आर्थिक घटनाओं का ही प्रभाव पड़ता है।

प्रश्न 5.
कार्ल मार्क्स (मार्क्सवाद) राज्य के विरुद्ध क्यों है ?
उत्तर-
कार्ल मार्क्स राज्य को शोषण का यन्त्र मानता है। यह समाज के दो वर्गों बीच संघर्ष का परिणाम है। मार्क्स के अनुसार राज्य कभी कल्याणकारी संस्था नहीं हो सकती क्योंकि राज्य की सत्ता का प्रयोग शोषक वर्ग अपने हितों के लिए करता है।

PSEB 12th Class Political Science Solutions Chapter 6 मार्क्सवाद

प्रश्न 6.
मार्क्सवाद की वर्गहीन और राज्यहीन धारणा से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर-
मार्क्सवाद के अनुसार जब पूंजीपतियों की समाप्ति हो जाएगी तो समाज में कोई वर्ग-संघर्ष नहीं होगा। सभी व्यक्ति श्रमिक वर्ग के होंगे। इस प्रकार समाज वर्ग विहीन हो जाएगा। समाज में आर्थिक समानता उत्पन्न हो जाएगी। ऐसी दशा में राज्य की कोई आवश्यकता नहीं होगी और राज्य विलुप्त हो जाएगा।

प्रश्न 7.
मार्क्स का मज़दूरों की तानाशाही का क्या अर्थ है ?
उत्तर-
मार्क्स का यह विश्वास था कि जब श्रमिक संगठित हो जाएंगे और क्रान्ति का बीड़ा उठाएंगे तो पूंजीपति वर्ग अवश्य ही समाप्त हो जाएगा और सर्वहारा वर्ग अर्थात् श्रमिक वर्ग की तानाशाही स्थापित हो जाएगी। क्रान्ति और वर्ग विहीन समाज की स्थापना के बीच के समय को मार्क्स ने सर्वहारा वर्ग की तानाशाही के रूप में माना है। सर्वहारा के अधिनायकतन्त्र के अन्तर्गत राज्य में वर्ग विरोध का अन्त हो जाएगा।

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प्रश्न 8.
कार्ल मार्क्स के धर्म सम्बन्धी विचारों का वर्णन करें।
उत्तर-
मार्क्सवादियों का धर्म में कोई विश्वास नहीं था। वह धर्म को लोगों के लिए अफ़ीम समझते थे, क्योंकि जनता धर्म के चक्कर में पड़ कर अन्ध-विश्वासी, रूढ़िवादी, अप्रगतिशील और कायर बन जाती है। मार्क्सवादी धर्म को पूंजीपतियों की रक्षा का यन्त्र मानते हैं। उनका मत है कि पूंजीपति वर्ग धर्म की आड़ में ग़रीब या श्रमिक वर्ग का शोषण करते हैं।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न-

प्रश्न I. एक शब्द/वाक्य वाले प्रश्न-उत्तर

प्रश्न 1.
मार्क्सवाद का संस्थापक कौन है ?
उत्तर-
मार्क्सवाद का संस्थापक कार्ल मार्क्स है।

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प्रश्न 2.
कार्ल मार्क्स कौन था ?
उत्तर-
कार्ल मार्क्स साम्यवादी विचारक था जिसका जन्म जर्मनी में 5 मई, 1818 ई० को हुआ। कार्ल मार्क्स को वैज्ञानिक समाजवाद का जनक माना जाता है।

प्रश्न 3.
कार्ल मार्क्स की दो प्रसिद्ध रचनाओं के नाम लिखो।
अथवा
कार्ल-मार्क्स की एक प्रसिद्ध रचना का नाम लिखो।
उत्तर-

  1. दास कैपिटल
  2. कम्युनिस्ट मैनीफेस्टो।

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प्रश्न 4.
मार्क्सवाद से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर-
मार्क्स की रचनाओं में प्रकट किए गए विचारों के सामूहिक रूप को मार्क्सवाद कहा जाता है।

प्रश्न 5.
मार्क्सवाद का कोई एक आधारभूत सिद्धान्त लिखो।
उत्तर-
वर्ग संघर्ष का सिद्धान्त मार्क्सवाद का एक प्रमुख सिद्धान्त है। मार्क्स के अनुसार अब तक का इतिहास वर्ग संघर्ष का इतिहास है।

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प्रश्न 6.
द्वन्द्ववाद किस भाषा के किस शब्द से लिया गया है ?
उत्तर-
द्वन्द्ववाद (Dialictic) ग्रीक भाषा के शब्द डाइलगो (Dialogo) से लिया गया है, जिसका अर्थ है, वादविवाद करना।

प्रश्न 7.
मार्क्सवाद की एक आलोचना लिखो।
उत्तर-
मार्क्सवाद राज्य को समाप्त करने के पक्ष में है, परन्तु यह सम्भव नहीं है।

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प्रश्न 8.
मार्क्सवाद का अन्तिम उद्देश्य क्या है ?
उत्तर-
मार्क्सवाद का अन्तिम उद्देश्य वर्ग-विहीन और राज्य-विहीन साम्यवादी समाज की स्थापना करना है।

प्रश्न 9.
वर्ग-विहीन समाज का क्या अर्थ है ?
उत्तर-
मार्क्स के अनुसार साम्यवादी क्रान्ति के बाद श्रमिक वर्ग का आधिपत्य स्थापित हो जाएगा और समाज में कोई वर्ग नहीं होगा। ऐसा समाज वर्ग-विहीन समाज कहलाएगा।

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प्रश्न 10.
द्वन्द्ववाद किस भाषा के किस शब्द से लिया गया है?
उत्तर-
द्वन्द्ववाद (Dialictic) ग्रीक भाषा के शब्द डाइलगो (Dialogo) से लिया गया है जिसका अर्थ है, वादविवाद करना।

प्रश्न 11.
कार्ल-मार्क्स के दो मुख्य सिद्धान्तों के नाम लिखो।
उत्तर-

  1. द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद
  2. वर्ग संघर्ष का सिद्धान्त।

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प्रश्न II. खाली स्थान भरें-

1. …………….. को साम्यवाद का जन्मदाता माना जाता है।
2. वर्ग-संघर्ष का सिद्धान्त ……………. ने दिया।
3. मार्क्स के अनुसार हीगल का द्वन्द्ववाद ……………. के बल खड़ा था मैंने उसे पैरों के बल पर खड़ा किया।
4. मार्क्सवाद के अनुसार ……………. समाप्त हो जायेगा।
5. ऐंजलस के अनुसार राज्य पूंजीपतियों की ……………. मात्र है।
उत्तर-

  1. कार्ल मार्क्स
  2. कार्ल मार्क्स
  3. सिर
  4. राज्य
  5. प्रबन्धक समिति।

प्रश्न III. निम्नलिखित वाक्यों में से सही एवं ग़लत का चुनाव करें-

1. मार्क्सवाद का जन्मदाता लॉस्की है।
2. राज्य सम्बन्धी मार्क्स की भविष्यवाणी सही साबित नहीं हुई।
3. मार्क्स के अनुसार पूंजीपति का उद्देश्य सदैव अधिक-से-अधिक मुनाफा कमाने का होता है।
4. मार्क्स ने सर्वहारा के अधिनायक तन्त्र का समर्थन नहीं किया।
5. सोरल ने मार्क्सवादी वर्ग को एक अमूर्त कल्पना कहा है।
उत्तर-

  1. ग़लत
  2. सही
  3. सही
  4. ग़लत
  5. सही।

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प्रश्न IV. बहुविकल्पीय-

प्रश्न 1.
वर्ग संघर्ष का सिद्धान्त किसने दिया है ?
(क) हॉब्स
(ख) लॉक
(ग) मार्क्स
(घ) रूसो।
उत्तर-
(ग) मार्क्स

प्रश्न 2.
“दास कैपिटल’ नामक पुस्तक किसने लिखी ?
(क) मार्क्स
(ख) लेनिन
(ग) माओ
(घ) लॉस्की।
उत्तर-
(क) मार्क्स

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प्रश्न 3.
यह कथन किसका है, “राज्य केवल एक ऐसा यन्त्र है जिसकी सहायता से एक वर्ग दूसरे वर्ग का शोषण करता है।”
(क) कार्ल मार्क्स
(ख) लेनिन
(ग) फ्रेडरिक एंजल्स
(घ) हीगल।
उत्तर-
(क) कार्ल मार्क्स

प्रश्न 4.
मार्क्सवाद के अनुसार राज्य के अस्तित्व से पूर्व आदिम समाज कैसा था ?
(क) वर्ग-विहीन समाज
(ख) दो वर्गों वाला समाज
(ग) वर्ग संघर्ष वाला समाज
(घ) अनेक वर्गों वाला समाज।
उत्तर-
(क) वर्ग-विहीन समाज

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प्रश्न 5.
मार्क्सवाद का सिद्धान्त किसने दिया था ?
(क) लेनिन
(ख) कार्ल मार्क्स
(ग) स्टालिन
(घ) माओ।
उत्तर-
(ख) कार्ल मार्क्स

प्रश्न 6.
यह कथन किसका है, “प्रत्येक समाज में दो वर्ग होते हैं।”
(क) आल्मण्ड पावेल
(ख) एस० एस० उलमार
(ग) रॉबर्ट डाहल
(घ) कार्ल मार्क्स।
उत्तर-
(घ) कार्ल मार्क्स।

PSEB 7th Class Home Science Solutions Chapter 4 खाना बनाने के सिद्धान्तन

Punjab State Board PSEB 7th Class Home Science Book Solutions Chapter 4 खाना बनाने के सिद्धान्त Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 7 Home Science Chapter 4 खाना बनाने के सिद्धान्त

PSEB 7th Class Home Science Guide खाना बनाने के सिद्धान्त Textbook Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
भोजन ज्यादा देर पकाने से क्या नष्ट हो जाता है?
उत्तर-
विटामिन तथा खनिज लवण।

प्रश्न 2.
फलों और सब्जियों का पतला छिलका उतारने की सलाह क्यों दी जाती है?
उत्तर-
छिलकों के बिल्कुल नीचे ही विटामिन तथा खनिज लवण होते हैं, इसलिए मोटा छिलका उतारने से ये नष्ट हो जाते हैं।

प्रश्न 3.
डिब्बाबंद भोजन खरीदते समय हमें किस बात का ध्यान रखना चाहिए?
उत्तर-
डिब्बा फूला हुआ था पिचका हुआ न हो।

PSEB 7th Class Home Science Solutions Chapter 4 खाना बनाने के सिद्धान्त

प्रश्न 4.
खाने वाले सोडे का प्रयोग भोजन पकाने में क्यों वर्जित है?
उत्तर-
इससे विटामिन तथा खनिज लवण नष्ट हो जाते हैं।

लघूत्तर प्रश्न

प्रश्न 1.
भोजन पकाते समय किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
उत्तर-
भोजन पकाते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए

  1. चोकर सहित आटे का प्रयोग करना चाहिए इसमें विटामिन पाया जाता है। रोटी सेंकने से कम-से-कम आधा घण्टा पहले ही आटा गूंध कर स्वच्छ गीले कपड़े से ढक कर रखें।
  2. चावल पकाने से पूर्व बार-बार न धोयें, इससे खनिज लवण और विटामिन नष्ट हो जाते हैं।
  3. भोजन सदैव स्वच्छ बर्तन में ही पकाना चाहिए।
  4. गृहिणी को अपने हाथ और नाखून साफ़ रखने चाहिए।
  5. रसोईघर में प्रयोग आने वाले कपड़े, जैसे-तौलिया, नेपकिन, झाड़न, पोंछा आदि स्वच्छ होना चाहिए।
  6. बर्तनों को खुला नहीं छोड़ना चाहिए, इससे कीड़े-मकौड़े का भोजन में गिरने का डर रहता है।
  7. दाल, सब्जी में पानी केवल उतना ही डालना चाहिए जिससे भोजन पक जाए।
    अधिक पानी डालकर फिर फेंकने से बहुत-से खनिज लवण एवं विटामिन नष्ट हो जाते हैं।
  8. भोजन धीमी आँच पर पकाना चाहिए; भाप द्वारा पकाना सबसे उत्तम होता है इसके लिए प्रेशर कुकर का प्रयोग करना चाहिए।
  9. भोजन को ढक्कनदार बर्तन में पकाना चाहिए।
  10. दूध को धीमी आँच पर न उबालकर तेज़ आँच पर उबालना चाहिए।
  11. मांस व अण्डे को बहुत अधिक नहीं पकाना चाहिए।
  12. भोजन पकाते समय सोडे का प्रयोग नहीं करना चाहिए; इससे विटामिन B नष्ट हो जाते हैं।
  13. भोजन में अधिक मसालों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। अधिक मिर्च, मसाले व घी के प्रयोग से व्यक्ति का स्वास्थ्य खराब हो जाता है।
  14. भोजन पकाने के पश्चात् परोसने में देर न करें। पके हुए भोजन को पुनः गर्म करना ठीक नहीं होता है।

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प्रश्न 2.
भोजन पकाते समय निजी सफ़ाई से क्या भाव है?
उत्तर-
भोजन पकाते समय निजी सफ़ाई से भाव निम्नलिखित हैं

  1. जिन लोगों को जुकाम, गला खराब, खाँसी, फ्लू, फोड़े आदि हों उन्हें खाना पकाने का काम नहीं करना चाहिए।
  2. खाना पकाते समय हाथ और नाखून हमेशा साफ़ होना चाहिए। कपड़े भी साफ़ होने चाहिएं और बालों को अच्छी तरह बाँधकर रखना चाहिए।
  3. कच्चे मीट, मछली, सब्जियों और फलों के छिलकों को हाथ लगाने से पहले हाथ अच्छी तरह धो लेने चाहिए।
  4. भोजन को चलाते समय कड़छी या चम्मच का इस्तेमाल करना चाहिए। जहाँ तक हो सके भोजन को हाथ नहीं लगाना चाहिए।
  5. खाना बनाते समय अगर छींक या खाँसी आने लगे तो मुँह को ढक लेना चाहिए।
  6. जिस चम्मच के साथ खाने का स्वाद देखना हो उसको फिर धोकर इस्तेमाल करना चाहिए।

प्रश्न 3.
रसोई और बर्तनों की सफ़ाई कैसे करनी चाहिए?
उत्तर-
रसोई तथा बर्तनों की सफाई निम्नलिखित ढंग से करनी चाहिए

  1. रसोईघर के दरवाजों और खिड़कियों पर जाली लगी होनी चाहिए ताकि मक्खी, मच्छर, आदि अन्दर न आ सके।
  2. रसोईघर की सफ़ाई हर रोज़ खाना खाने के बाद जूठे बर्तनों को साफ़ करने के बाद करनी चाहिए। दिन में एक बार रसोई को अच्छी तरह साफ़ करना चाहिए। सप्ताह में एक बार जाले उतार कर दीवारों को साफ़ करना चाहिए और साल में एक बार या दो बार सफेदी करनी चाहिए।
  3. खाना पकाने वाले बर्तनों को प्रत्येक बार इस्तेमाल करने के बाद अच्छी तरह साफ़ करना चाहिए। मीट काटने के बाद चाकू को धो लेना चाहिए।
  4. बर्तनों या शैल्फ जहां कच्छा मीट, मुर्गा या मछली रखी हो वहां दूसरी खाने की वस्तु रखने से पहले उसे अच्छी तरह साफ़ करना चाहिए।
  5. जूठे बर्तनों को साफ़ बर्तनों से अलग रखना चाहिए।
  6. जूठे बर्तनों को धोने के लिए गर्म पानी और साबुन या डिटरजेन्ट का इस्तेमाल करना चाहिए। इससे बर्तन साफ़ और कीटाणुरहित हो जाते हैं। बर्तनों को धोकर अगर धूप में सुखाया जाए तो इनमें चमक आ जाती है।

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निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
खाना पकाने के सिद्धान्त लिखो।
उत्तर-
खाना पकाने के निम्नलिखित सिद्धान्त हैं

  1. खाना पकाते समय सब्जियों के छिलके उतारने चाहिएं।
  2. इनको ज्यादा नहीं धोना और न ही ज्यादा देर तक भिगोकर रखना चाहिए।
  3. भोजन को हमेशा ढककर पकाना चाहिए।
  4. जिस पानी में भोजन पकाया जाए उसे फेंकना नहीं चाहिए।
  5. भोजन को धूप में नहीं रखना चाहिए और भोजन पकाते समय सोडा नहीं डालना चाहिए।
  6. सब्जियों को बहुत छोटे-छोटे टुकड़ों में नहीं काटना चाहिए।

प्रश्न 2.
भोजन खरीदते समय कौन-कौन सी बातों का ध्यान रखना चाहिए?
उत्तर-
भोजन खरीदते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए

  1. भोजन ऐसे स्थानों से खरीदना चाहिए जहां सफ़ाई का पूरा ध्यान रखा जाता हो। जिस बाज़ार में मक्खियां, मच्छर या दूसरे कीड़े-मकौड़े और चूहे आदि हों, वहाँ से भोजन की कोई वस्तु नहीं खरीदनी चाहिए।
  2. बेचने वाले दुकानदार साफ़ होने चाहिएं, उसके कपड़े साफ़ हों और सेहत अच्छी हो। अगर उनको खाँसी या जुकाम लगा हो तो उससे खाने की वस्तु नहीं खरीदनी चाहिए।
  3. मीट खरीदते समय यह देखना ज़रूरी है कि जानवर बीमार न हो और साथ ही उस पर डॉक्टर की मोहर भी लगी होनी चाहिए।
  4. डिब्बे में बन्द वस्तु खरीदते समय यह देख लेना चाहिए कि डिब्बा फूला हुआ या चिपका हुआ न हो। फूले हुए डिब्बे में बैक्टीरिया होते हैं। जहाँ तक सम्भव हो सके डिब्बे किसी अच्छी फ़र्म के बने ही इस्तेमाल करने चाहिए।
  5. फल और सब्जियाँ गली-सड़ी नहीं होनी चाहिए। (6) दालें, चावल, आटे आदि में कीड़े या सुसरी नहीं होनी चाहिए।
  6. दूध और दूध से बनी वस्तुएँ ताजी होनी चाहिएँ और उनसे खट्टी महक नहीं आनी चाहिए।
  7. कटे हुए फल-सब्जियाँ, जिन पर धूल पड़ी होने का सन्देह हो या उन पर मक्खियां बैठी हों, नहीं खरीदनी चाहिए।
  8. पका हुआ भोजन खरीदना हो तो उसकी सफ़ाई के बारे में पूरी जाँच-पड़ताल कर लेनी चाहिए।
  9. भोजन की चीजें लाने के बाद सूखी चीज़ों को सूखे डिब्बों में भरकर रसोई की अलमारी या स्टोर में रख देना चाहिए।

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प्रश्न 3.
रसोई की सफ़ाई से क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
रसोईघर के प्रत्येक स्थान को धो-पोंछकर साफ़ करना चाहिए। भोजन समाप्त होने के बाद बची हुई खाद्य-सामग्री को दूसरे स्वच्छ बर्तनों में रखकर जालीदार अलमारी . या रेफ्रीजरेटर में रख देना चाहिए। जूठे बर्तनों को साफ़ करने के स्थान पर ही साफ़ किया जाना चाहिए। भोजन पकाने तथा परोसने के स्थान को पहले गीले तथा फिर सूखे कपड़े से पोंछकर स्वच्छ करना चाहिए। बर्तनों को साफ़ करके यथास्थान व्यवस्थित करना चाहिए। नल, फर्श, सिंक आदि को साफ़ करके सूखा रखने का प्रयत्न करना चाहिए। रसोईघर की चौकी, तख्त, मेज, कुर्सी की सफाई भी प्रतिदिन की जानी चाहिए तथा फर्श को भी पानी से प्रतिदिन सींक को झाडू या कूची से रगड़कर धोना चाहिए।

प्रश्न 4.
भोजन घर लाने के बाद ताज़ी और सूखी चीज़ों की सम्भाल आप कैसे करोगे?
उत्तर-
भोजन की चीजें घर लाने के बाद सूखी चीज़ों को सूखे डिब्बों में भरकर रसोई की अलमारी या स्टोर में रख देना चाहिए। ताजी सब्जियों और फलों को फ्रिज या किसी अन्य ठण्डी जगह पर रखना चाहिए। मीट लाने के बाद अगर फ्रिज़ हो तो उसको सबसे ठण्डे खाने में रखना चाहिए। अगर ऐसा न हो सके तो उसे जल्दी ही पका लेना चाहिए।
दूध को हमेशा उबालकर जाली के साथ ढककर रखना चाहिए। अगर फ्रिज़ हो तो उसमें रखना चाहिए नहीं तो ठण्डी जगह का पानी दूध वाले बर्तन में रखना चाहिए।

Home Science Guide for Class 7 PSEB खाना बनाने के सिद्धान्त Important Questions and Answers

अति छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
भोज्य पदार्थ को पकाने का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर-
भोजन को पचने योग्य बनाना।

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प्रश्न 2.
प्रोटीन पर पकाने का क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर-
प्रोटीन पकाने पर सुपाच्य (पचने योग्य) हो जाती है तथा तरल प्रोटीन ठोस रूप में बदल जाती है।

प्रश्न 3.
कार्बोहाइड्रेट्स पर पकाने का क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर-
पकाने से कार्बोहाइड्रेट्स पचने योग्य तथा मीठे हो जाते हैं।

प्रश्न 4.
पकाने का वसा पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर-
पकाने से वसा पिघलती है और सुपाच्य बन जाती है।

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प्रश्न 5.
सब्जी पकाने का मुख्य अभिप्राय क्या है?
उत्तर-
सब्जी के सैलुलोज को मुलायम करना तथा श्वेतसार कणों को फुलाकर जिलेटिन के रूप में परिवर्तित करना।

प्रश्न 6.
किन खनिज तत्त्वों पर ताप का प्रभाव बहुत कम पड़ता है?
उत्तर-
कैल्शियम तथा लोहे पर।

प्रश्न 7.
कैरोटीन पकाने पर नष्ट क्यों नहीं होता?
उत्तर-
क्योंकि यह जल में घुलनशील नहीं है।

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प्रश्न 8.
भोजन पकाने से विटामिन ‘बी’ तथा ‘सी’ प्रायः नष्ट क्यों हो जाते हैं?
उत्तर-
जल में घुलनशील होने तथा ताप द्वारा नष्ट हो जाने के कारण।

प्रश्न 9.
शक्कर को गर्म करने पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर-
शक्कर को गर्म करने पर वह भूरे रंग का हो जाता है। इसको अधिक गर्म करने पर काले रंग का हो जाता है।

प्रश्न 10.
कौन-से पदार्थ पेट में अधिक वायु बनाते हैं?
उत्तर-
कच्चे सलाद पेट में अधिक वायु बनाते हैं।

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छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
रसोईघर के लिए निम्नलिखित केन्द्रों की व्यवस्था आप कैसी करेंगी?
(क) तैयारी केन्द्र,
(ख) खाना पकाने व परोसने का केन्द्र।
उत्तर-
(क) तैयारी केन्द्र-खाना पकाने से पूर्व खाद्य पदार्थों की तैयारी करनी पड़ती है। इनमें दाल-चावल चुनना व धोना, साग-सब्जी धोना व काटना, आटा छानना, गूंधना आदि जैसे कार्य रहते हैं। कार्य करने के लिए शेल्फों की ऊँचाई गृहिणी की लम्बाई के अनुसार उचित होनी चाहिए जिससे गृहिणी को कार्य करने में असुविधा न हो। इन शेल्फों के नीचे तथा ऊपर अलमारियों में भोजन की तैयारी में उपयोग में आने वाले उपकरण आटा, दालें आदि संग्रहीत करके रखी जा सकती हैं।

(ख) खाना पकाने व परोसने का केन्द्र-भोजन पकाने के लिए जिन वस्तुओं की आवश्यकता होती है, उन्हें ऐसे स्थान पर रखना चाहिए, जिससे गृहिणी को अधिक दौड़ धूप न करनी पड़े। भोजन पकाने के केन्द्र के निकट ही एक ऐसा स्थान या अलमारी हो जिसमें सभी मसालों से भरी शीशियां, घी, तेल तथा पकाने के बर्तन हों।

भोजन पकाने के बाद भोजन परोसना सबसे महत्त्वपूर्ण कार्य है। भोजन दो प्रकार से परोसा जाता है-भारतीय शैली तथा विदेशी शैली।
भारतीय शैली में खाना थाली एवं कटोरियों में परोसकर प्रायः रसोईघर में चौकी पर रखा जाता है और व्यक्ति पटरे पर बैठकर खाता है। विदेशी शैली में खाना डोंगों में भरकर मेज़ पर लगाया जाता है और व्यक्ति इच्छानुसार स्वयं परोसकर खाता है।

प्रश्न 2.
रसोईघर के बर्तनों की धुलाई व सफ़ाई के उत्तम प्रबन्ध के लिए किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
उत्तर-
जूठे तथा भोजन पकाए हुए बर्तनों को साफ़ करने के लिए एक निश्चित स्थान होना चाहिए। बर्तन साफ़ करने के केन्द्र के पास सिंक की व्यवस्था अवश्य होनी चाहिए। सिंक के पास एक ओर गंदे बर्तन तथा दूसरी ओर धुले बर्तन रखने के लिए शेल्फ होने चाहिएं। सिंक कभी कोने में नहीं होना चाहिए। इस केन्द्र में विम, छनी हुई राख, सर्फ, मिट्टी, ब्रश, स्पंज तथा झाडू आदि रखने की व्यवस्था होनी चाहिए।

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एक शब्द में उत्तर दें

प्रश्न 1.
सब्ज़ियाँ तथा फलों के छिलकों के बिल्कुल नीचे ………….. तथा ……………. होते हैं।
उत्तर-
विटामिन, खनिज लवण।

प्रश्न 2.
……… सहित आटे का प्रयोग करना चाहिए इसमें विटामिन ‘बी’ होता है।
उत्तर-
चोकर।

प्रश्न 3.
श्वेतसार के कण पकाने पर फूल जाते हैं तथा किस रूप में परिवर्तित होते हैं?
उत्तर-
जिलेटिन।

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प्रश्न 4.
कैरोटीन …………. में घुलनशील नहीं है।
उत्तर-
जल।

प्रश्न 5.
अधिक गर्म करने पर शक्कर कैसी हो जाती है?
उत्तर-
काली।

प्रश्न 6.
गर्म करने से तरल प्रोटीन ……. रूप में बदल जाता है।
उत्तर-
ठोस।

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प्रश्न 7.
भोजन को …………….. सेंक पर पकाना चाहिए।
उत्तर-
मध्यम।

खाना बनाने के सिद्धान्त PSEB 7th Class Home Science Notes

  • सब्जियों और फलों के छिलकों के बिल्कुल नीचे ही विटामिन और खनिज लवण होते हैं।
  • अधिक देर तक खाना पकाने से भी विटामिन और खनिज लवण नष्ट हो जाते हैं। इसलिए भोजन उतनी देर तक ही पकाना
  • चाहिए जब तक वह गल कर पचने योग्य न हो जाए।
  • कुछ विटामिन और खनिज लवण पानी में घुल जाते हैं। इसलिए सब्जियों को धोने के बाद ही काटना चाहिए।
  • जिन लोगों को जुकाम, गला खराब, खांसी, फ्लू, फोड़े आदि हों उन्हें खाना पकाने का काम नहीं करना चाहिए।
  • खाना पकाते समय हाथ और नाखून हमेशा साफ़ होने चाहिए।
  • भोजन को हिलाते समय कड़छी या चम्मच का इस्तेमाल करना चाहिए।
  • रसोईघर के दरवाजों और खिड़कियों पर जाली लगी होनी चाहिए ताकि मक्खी, मच्छर आदि अन्दर न आ सकें।
  • खाना पकाने वाले बर्तनों को प्रतिदिन इस्तेमाल करने के बाद अच्छी तरह साफ़ करना चाहिए।
  • जूठे बर्तनों को साफ़ बर्तनों से अलग रखना चाहिए।
  • जूठे बर्तनों को धोने के लिए गर्म पानी, साबुन या डिटरजेन्ट का इस्तेमाल करना चाहिए।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 20 सामाजिक/धार्मिक सुधार

Punjab State Board PSEB 11th Class History Book Solutions Chapter 20 सामाजिक/धार्मिक सुधार Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 11 History Chapter 20 सामाजिक/धार्मिक सुधार

महत्त्वपूर्ण परीक्षा-शैली प्रश्न

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. उत्तर एक शब्द से एक वाक्य तक

प्रश्न 1.
राजा राममोहन राम की मृत्यु के बाद ब्रह्म समाज का पुनर्गठन किसने किया?
उत्तर-
देवेंद्रनाथ टैगोर ने।

प्रश्न 2.
कलकत्ता में पहला विधवा विवाह कब हुआ?
उत्तर-
1856 में।

प्रश्न 3.
स्वामी दयानंद का देहांत कब हुआ?
उत्तर-
1883 ई० में।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 20 सामाजिक/धार्मिक सुधार

प्रश्न 4.
आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद का संबंध किस प्रदेश से था?
उत्तर-
गुजरात से।

प्रश्न 5.
सर सैय्यद अहमद खां को ‘सर’ की उपाधि कब मिली?
उत्तर-
1888 ई० में।

2. रिक्त स्थानों की पूर्ति

(i) सर सैय्यद अहमद खां का देहांत … ………….. में हुआ।
(ii) आजकल निरंकारियों का मुख्यालय ……………….. में है।
(iii) सिंह सभा लहर के प्रयत्नों से 1892 ई० में …………….. में खालसा कॉलेज की स्थापना हुई।
(iv) नामधारियों को ………….. भी कहा जाता है।
(v) बाबा दयाल का देहांत 1855 ई० में ……………. में हुआ।
उत्तर-
(i) 1898 ई०
(ii) चण्डीगढ़
(iii) अमृतसर
(iv) कूका
(v) रावलपिंडी।

3. सही गलत कथन

(i) प्रार्थना समाज की स्थापना महादेव गोबिंद रानाडे ने की। — (✓)
(ii) रामकृष्ण मिशन के संस्थापक स्वामी रामकृष्ण थे। — (✗)
(iii) मोहम्मडन ऐंग्लो-ओरियंटल कॉलेज की स्थापना अलीगढ़ में हुई। — (✓)
(iv) वहाबी आन्दोलन का आरम्भ सर सैय्यद अहमद खां ने किया था। — (✗)
(v) कूका आन्दोलन को 1872 ई० में दबा दिया गया। — (✓)

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4. बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न (i)
कादियां निम्न में से किस लहर का केंद्र था?
(A) कूका
(B) नामधारी
(C) निरंकारी
(D) अहमदिया।
उत्तर-
(B) नामधारी

प्रश्न (ii)
निरंकारी सम्प्रदाय के संस्थापक थे-
(A) बाबा दयाल
(B) दरबारा सिंह जी
(C) बाबा रामसिंह जी
(D) हुक्म सिंह जी।
उत्तर-
(D) हुक्म सिंह जी।

प्रश्न (iii)
‘सत्यार्थ प्रकाश’ किस संस्था की प्रसिद्ध पुस्तक है?
(A) रामकृष्ण मिशन
(B) आर्य समाज
(C) ब्रह्म समाज
(D) प्रार्थना समाज।
उत्तर-
(A) रामकृष्ण मिशन

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प्रश्न (iv)
भारत में पश्चिमी विचारधारा से प्रभावित पहले मुस्लिम समाज सुधारक थे-
(A) गुलाम कादरी
(B) सर सैय्यद अहमद खां
(C) आगा खां
(D) मिर्जा गुलाम अहमद।
उत्तर-
(C) आगा खां

प्रश्न (v)
रामकृष्ण मिशन किस नाम से प्रसिद्ध हुआ।
(A) कांची मठ
(B) पुरी मठ
(C) वैलूर मठ
(D) श्रृंगेरी मठ।
उत्तर-
(B) पुरी मठ

II. अति छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत में पहला धार्मिक-सामाजिक आन्दोलन किस प्रान्त में तथा किस विचारधारा के अधीन हुआ ?
उत्तर-
भारत में पहला धार्मिक-सामाजिक आन्दोलन बंगाल में हुआ। यह पश्चिमी विचारधारा के अधीन हुआ।

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प्रश्न 2.
‘रिवाइवलिजम’ से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
धर्म के नाम पर तथा बीते समय का हवाला देते हुए लोगों में जागृति लाने के प्रयास को रिवाइवलिज़म का नाम दिया जाता है।

प्रश्न 3.
ब्रह्म समाज की स्थापना कब, कहां और किसने की ?
उत्तर-
ब्रह्म समाज की स्थापना 1829 में, कलकत्ता (कोलकाता) में राजा राम मोहन राय ने की।

प्रश्न 4.
राजा राममोहन राय का जन्म कब और कहां हुआ तथा इन्होंने किन तीन भाषाओं में पुस्तकें लिखीं तथा पत्रिकायें निकाली ?
उत्तर-
राजा राममोहन राय का जन्म बंगाल में 1772 में हुआ। इन्होंने फारसी, अंग्रेज़ी तथा बंगाली भाषाओं में पुस्तकें लिखीं तथा पत्रिकायें निकाली।

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प्रश्न 5.
स्त्रियों की दशा सुधारने के सन्दर्भ में राजा राममोहन राय ने किन दो बातों पर जोर दिया ?
उत्तर-
राजा राममोहन राय ने बाल-विवाह तथा सती प्रथा को समाप्त करने पर जोर दिया।

प्रश्न 6.
ब्रह्म समाज के कार्यक्रम का धार्मिक उद्देश्य क्या था ?
उत्तर-
ब्रह्म समाज के कार्यक्रम का धार्मिक उद्देश्य एक परमात्मा की उपासना पर बल देना और वेदों और उपनिषदों की तर्कसंगत व्याख्या करना था।

प्रश्न 7.
राजा राममोहन राय का देहान्त कब हुआ तथा इसके बाद ब्रह्म समाज का पुनर्गठन किसने किया ?
उत्तर-
राजा राममोहन राय का देहान्त 1833 में हुआ। इसके बाद ब्रह्म समाज का पुनर्गठन देवेन्द्र नाथ टैगोर ने किया।

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प्रश्न 8.
ईश्वर चन्द्र विद्यासागर ने किस प्रान्त में तथा किन सुधारों का प्रचार किया ?
उत्तर-
ईश्वर चन्द्र विद्यासागर ने बंगाल में विधवा विवाह के पक्ष में प्रचार किया।

प्रश्न 9.
विधवा विवाह के पक्ष में कानून कब पास हुआ तथा कलकत्ता (कोलकाता) में पहला विधवा विवाह कब हुआ?
उत्तर-
विधवा विवाह के पक्ष में कानून 1855 में पास हुआ। कलकत्ता (कोलकाता) में पहला विधवा विवाह 1856 में हुआ:

प्रश्न 10.
1865 तक ब्रह्म समाज की बंगाल में शाखाओं की संख्या क्या थी तथा इस समय बंगाल से बाहर किन तीन प्रान्तों में उनके केन्द्र थे ?
उत्तर-
1865 तक ब्रह्म समाज की बंगाल में शाखाओं की संख्या 50 थी। इस समय बंगाल से बाहर इसके केन्द्र उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु तथा पंजाब में थे।

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प्रश्न 11.
ब्रह्म समाज दो भागों में कब विभक्त हुआ तथा इनके नेता कौन थे ?
उत्तर-
ब्रह्म समाज 1865 में दो भागों में विभक्त हुआ। इनके नेता देवेन्द्र नाथ टैगोर तथा केशवचन्द्र सेन थे।

प्रश्न 12.
रामकृष्ण मिशन की स्थापना कब और कहां हुई तथा किस नाम से प्रसिद्ध हुआ ?
उत्तर-
रामकृष्ण मिशन की स्थापना सन् 1896 में कलकत्ता (कोलकाता) में हुई। यह वैलूर मठ के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

प्रश्न 13.
रामकृष्ण मिशन का संस्थापक कौन था तथा यह किस नाम से प्रसिद्ध हुआ ?
उत्तर-
रामकृष्ण मिशन के संस्थापक स्वामी विवेकानन्द थे। यह मिशन वैलूर मठ के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

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प्रश्न 14.
रामकृष्ण परमहंस तथा स्वामी विवेकानन्द का देहान्त कब हुआ ?
उत्तर-
रामकृष्ण परमहंस तथा स्वामी विवेकानन्द का देहान्त क्रमश: 1886 तथा 1902 में हुआ।

प्रश्न 15.
स्वामी विवेकानन्द ने किन चार बातों का खण्डन किया ?
उत्तर-
स्वामी विवेकानन्द ने जाति-पाति, कर्मकाण्ड, व्यर्थ की रीतियों तथा अन्धविश्वासों का खण्डन किया।

प्रश्न 16.
स्वामी विवेकानन्द ने भारत से बाहर किन दो महाद्वीपों में अपने विचारों का प्रचार किया ?
उत्तर-
स्वामी विवेकानन्द ने भारत से बाहर अमेरिका तथा यूरोप महाद्वीपों में अपने विचारों का प्रचार किया।

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प्रश्न 17.
सामाजिक सुधार और सेवा के लिए रामकृष्ण मिशन ने कौन-सी चार प्रकार की संस्थाएं बनाईं ?
उत्तर-
सामाजिक सुधार और सेवा के लिए रामकृष्ण मिशन ने स्कूल स्थापित किए, अस्पतालों का निर्माण करवाया, अनाथ आश्रम बनवाये तथा पुस्तकालय खोले।

प्रश्न 18.
महाराष्ट्र में धार्मिक तथा सामाजिक सुधार के लिए पहला संगठन कौन-सा था तथा यह कब स्थापित हुआ ?
उत्तर-
महाराष्ट्र में धार्मिक तथा सामाजिक सुधार के लिए पहला संगठन ‘परमहंस सभा’ था। यह 1849 ई० में स्थापित हुआ।

प्रश्न 19.
ज्योतिबा फूले स्त्रियों की दशा सुधारने के लिए किन दो बातों के पक्ष में थे ?
उत्तर-
ज्योतिबा फुले स्त्रियों को शिक्षा दिलाने तथा विधवा विवाह के पक्ष में थे।

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प्रश्न 20.
महाराष्ट्र में प्रार्थना सभा’ की स्थापना कब हुई तथा इसके दो प्रमुख नेता कौन थे ?
उत्तर-
महाराष्ट्र में ‘प्रार्थना सभा’ की स्थापना 1867 में हुई। इसके दो प्रमुख नेता जस्टिस महादेव रानाडे तथा रामकृष्ण गोपाल थे।

प्रश्न 21.
महाराष्ट्र में धार्मिक-सामाजिक आन्दोलन के चार नेताओं के नाम बताएं तथा इन्होंने अपने विचारों का प्रचार अधिकतर कौन-सी भाषा में किया ?
उत्तर-
महाराष्ट्र में धार्मिक-सामाजिक आन्दोलनों के चार नेता ज्योतिबा फूले, महादेव गोविन्द रानाडे, गोपाल भण्डारकर तथा गोपाल हरि देश गुरु थे। इन्होंने अपने विचारों का प्रचार अधिकतर मराठी भाषा में किया।

प्रश्न 22.
आर्य समाज के संस्थापक कौन थे तथा यह किस प्रदेश से थे ?
उत्तर-
आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानन्द थे। यह गुजरात प्रदेश से थे।

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प्रश्न 23.
आर्य समाज की स्थापना कब तथा कहां हुई तथा यह पंजाब में कब आया ?
उत्तर-
आर्य समाज की स्थापना 1875 में बम्बई (मुम्बई) में हुई तथा यह पंजाब में 1877 में आया।

प्रश्न 24.
स्वामी दयानन्द की प्रसिद्ध पुस्तक का नाम क्या था तथा यह किस वर्ष में प्रकाशित हुई ?
उत्तर-
स्वामी दयानन्द की प्रसिद्ध पुस्तक का नाम ‘सत्यार्थ प्रकाश’ था। यह 1874 में प्रकाशित हुई।

प्रश्न 25.
स्वामी दयानन्द ने किन चार बातों का विरोध किया ?
उत्तर-
स्वामी दयानन्द ने मूर्ति-पूजा, जाति-पाति, पुरोहितों की प्रभुसत्ता तथा तीर्थ यात्रा का विरोध किया।

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प्रश्न 26.
स्वामी दयानन्द का देहान्त कब हुआ तथा 1911 तक आर्य समाजियों की संख्या कितनी हो गई ?
उत्तर-
स्वामी दयानन्द का देहान्त 1883 में हुआ। 1911 तक आर्य समाजियों की संख्या 24 लाख तक पहुंच गई थी।

प्रश्न 27.
पंजाब में सबसे पहले ऐंग्लो-वैदिक स्कूल तथा कॉलेज कब और कहां स्थापित हुए ?
उत्तर-
पंजाब में सबसे पहले ‘एंग्लो-वैदिक’ स्कूल तथा कॉलेज 1886 में लाहौर में स्थापित हुए।

प्रश्न 28.
सैय्यद अहमद बरेलवी ने कौन-सा अभियान चलाया तथा बाद में यह पंजाब के किस शासक के विरुद्ध हो गया?
उत्तर-
सैय्यद अहमद बरेलवी ने वहाबी अभियान चलाया। बाद में यह पंजाब के शासक महाराजा रणजीत सिंह के विरुद्ध हो गया।

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प्रश्न 29.
1886 के बाद वहाबी प्रभाव अधीन पंजाब के मुसलमानों में कौन-सी दो धार्मिक लहरों का उदय हुआ ?
उत्तर-
1886 के बाद वहाबी प्रभाव अधीन पंजाब के मुसलमानों में दो धार्मिक सुधारों अहले-कुरान तथा अहले हदीस की लहरें आईं।

प्रश्न 30.
भारत में पश्चिमी विचारधारा से प्रभावित पहले मुस्लिम समाज सुधारक कौन थे तथा उनका जन्म कहां हुआ ?
उत्तर-
भारत में पश्चिमी विचारधारा से प्रभावित पहले मुस्लिम समाज सुधारक सैय्यद अहमद खां थे। उनका जन्म दिल्ली में हुआ।

प्रश्न 31.
सर सैय्यद खां को सर की उपाधि कब मिली और उनका देहान्त कब हुआ ?
उत्तर-
सर सैय्यद अहमद खां को सर की उपाधि 1888 ई० में मिली तथा उनका देहान्त 1898 ई० में हुआ।

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प्रश्न 32.
‘मोहम्मडन ओरिएन्टल’ कॉलेज की स्थापना कब और कहां हुई तथा यह अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में कब परिवर्तित हो गया ?
उत्तर-
‘मोहम्मडन ओरिएन्टल’ कॉलेज की स्थापना 1875 ई० में हुई। यह 1920 में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में परिवर्तित हुआ।

प्रश्न 33.
अलीगढ़ आन्दोलन से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
अलीगढ़ आन्दोलन से अभिप्राय उस सामाजिक आन्दोलन से है जिसका आरम्भ सर सैय्यद अहमद खां के नेतृत्व में मुस्लिम समाज में सुधार लाने के लिए हुआ था।

प्रश्न 34.
सर सैय्यद अहमद खां के अतिरिक्त अलीगढ़ आन्दोलन के चार नेताओं के नाम बताओ।
उत्तर-
सर सैय्यद अहमद खां के अतिरिक्त अलीगढ़ आन्दोलन के चार नेता-मौलवी नजीर अहमद, जकाउल्ला, अलताफ हुसैन हाली तथा शिबली नोमानी थे।

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प्रश्न 35.
अलीगढ़ आन्दोलन के अन्तर्गत स्त्रियों की दशा सुधारने के लिए कौन-सी तीन सामाजिक कमजोरियों के विरुद्ध आवाज़ उठाई गई ?
उत्तर-
अलीगढ़ आन्दोलन के अन्तर्गत स्त्रियों की दशा सुधारने के लिए पर्दा प्रथा, बहुविवाह तथा तुरन्त तलाक जैसी सामाजिक कमजोरियों के विरुद्ध आवाज़ उठाई गई।

प्रश्न 36.
पंजाब में मुसलमानों में धार्मिक तथा सामाजिक सुधार के लिए बनी संस्थाओं को क्या कहा जाता था तथा 1890 तक इनकी संख्या क्या थी ?
उत्तर-
पंजाब में मुसलमानों में धार्मिक तथा सामाजिक सुधार के लिए बनी संस्थाओं को ‘अन्जुमन-इस्लामिया’ कहा जाता था। 1890 तक इनकी संख्या 60 से अधिक थी।

प्रश्न 37.
मिर्जा गुलाम अहमद का सम्बन्ध किस धार्मिक लहर से है तथा इनका जन्म पंजाब में कब और कहां हुआ ?
उत्तर-
मिर्जा गुलाम अहमद का सम्बन्ध अहमदिया लहर से है तथा उनका जन्म 1835 ई० में जिला गुरदासपुर के कादियां नामक स्थान पर हुआ।

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प्रश्न 38.
मिर्जा गुलाम अहमद ने अपने अनुयायी बनाने कब शुरू किए तथा अपने आपको पैगम्बर कब कहना आरम्भ किया ?
उत्तर-
मिर्जा गुलाम अहमद ने 1890 ई० में अपने अनुयायी बनाने शुरू किये। 1900 ई० में उन्होंने अपने आपको पैगम्बर कहना आरम्भ कर दिया।

प्रश्न 39.
अहमदिया लहर में दो सम्प्रदाय कब बन गए तथा उसके केन्द्र कहां थे ?
उत्तर-
अहमदिया लहर में दो सम्प्रदाय 1914 ई० में बने तथा उसके केन्द्र कादियां तथा लाहौर में थे।

प्रश्न 40.
अहमदिया लोगों ने भारत से बाहर अपने मत का प्रचार कौन-से तीन महाद्वीपों में किया ?
उत्तर-
अहमदिया लोगों ने भारत से बाहर अपने मत का प्रचार अफ्रीका, यूरोप तथा अमेरिका में किया।

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प्रश्न 41.
निरंकारी सम्प्रदाय के संस्थापक कौन थे तथा इनका जन्म कहां और कौन-से परिवार में हुआ ?
उत्तर-
निरंकारी सम्प्रदाय के संस्थापक बाबा दयाल थे। इनका जन्म पेशावर के एक खत्री सर्राफ के घर हुआ।

प्रश्न 42.
बाबा दयाल ने गुरु ग्रन्थ साहिब की मर्यादा के अनुसार साधारण जीवन के कौन-से चार अवसरों के लिए नीतियां चलाईं ?
उत्तर-
बाबा दयाल ने गुरु ग्रन्थ साहिब की मर्यादा के अनुसार जन्म, नामकरण, विवाह तथा मरण से सम्बन्धित अवसरों पर रीतियां चलाईं।

प्रश्न 43.
बाबा दयाल का देहान्त कब और कहां हुआ तथा दयालसर किस स्थान को कहा जाता है ?
उत्तर-
बाबा दयाल का देहान्त 1855 ई० में रावलपिंडी में हुआ। जिस स्थान पर उनकी देह को नदी में समर्पित किया गया, वहां उनके नाम पर बाद में दयालसर बना।

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प्रश्न 44.
बाबा दयाल के उत्तराधिकारी का नाम लिखो तथा उन्होंने किस दोआब में अपने विचारों का प्रचार किया ?
उत्तर-
बाबा दयाल के उत्तराधिकारी का नाम बाबा दरबारा सिंह था। उन्होंने सिन्ध सागर में अपने विचारों का प्रचार किया।

प्रश्न 45.
बाबा दरबारा सिंह का देहान्त कब हुआ तथा उनके दो उत्तराधिकारियों के नाम बताएं।
उत्तर-
बाबा दरबारा सिंह का देहान्त 1870 ई० में हुआ। उनके दो उत्तराधिकारी साहिब रत्ता जी तथा बाबा गुरदित्तौ सिंह थे।

प्रश्न 46.
1947 ई० से पहले पंजाब के किस दोआब में निरंकारियों ने अपने मत का प्रचार किया तथा आजकल उनका मुख्यालय कौन-सा है ?
उत्तर-
1947 ई० से पहले पंजाब के सिन्ध सागर दोआब में निरंकारियों ने अपने मत का प्रचार किया। आजकल इनका मुख्यालय चण्डीगढ़ में है।

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प्रश्न 47.
नामधारी लहर के संस्थापक कौन थे तथा उन्होंने अपने धार्मिक विचारों का प्रचार पंजाब के कौन-से दोआब में किया ?
उत्तर-
नामधारी लहर के संस्थापक बाबा बालक सिंह थे। इन्होंने अपने धार्मिक विचारों का प्रचार पंजाब के सिन्ध सागर दोआब में किया।

प्रश्न 48.
बाबा बालक सिंह का देहान्त कब हुआ तथा उनके श्रद्धालुओं को ‘नामधारी’ क्यों कहा जाता था ?
उत्तर-
बाबा बालक सिंह का देहान्त 1862 ई० में हुआ। ‘नाम’ स्मरण पर विशेष बल देने के कारण उनके श्रद्धालुओं को ‘नामधारी’ कहा जाता था।

प्रश्न 49.
नामधारी लहर को पंजाब के केन्द्रीय जिलों में किसने फैलाया तथा ये किस जिले के रहने वाले थे ?
उत्तर-
नामधारी लहर को पंजाब के केन्द्रीय जिलों में बाबा राम सिंह ने फैलाया। यह लुधियाना जिले (भैनी गांव) के रहने वाले थे।

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प्रश्न 50.
नामधारियों के पहरावे की चार विशेषताएं क्या थी ?
उत्तर-
नामधारी सफेद खद्दर का कुर्ता तथा कछहरा पहनते थे। वे सीधी पगड़ी बांधते थे तथा गले में सफेद ऊन की माला डालते थे।

प्रश्न 51.
नामधारियों में बहुसंख्या समाज के कौन-से तीन वर्गों की थी तथा बाबा राम सिंह का पारिवारिक व्यवसाय क्या था ?
उत्तर-
नामधारियों में बहुसंख्या तरखानों, जाटों तथा मजहबी सिक्खों की थी। बाबा राम सिंह का पारिवारिक व्यवसाय बढ़ईगिरी था।

प्रश्न 52.
बाबा राम सिंह ने स्त्रियों की दशा सुधारने के लिए कौन-सी दो बातों पर बल दिया ?
उत्तर-
बाबा राम सिंह ने लड़कियों को पैदा होते ही मार देने की प्रथा का विरोध किया। उन्होंने विधवा विवाह का समर्थन किया।

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प्रश्न 53.
लोग नामधारियों को कूका क्यों कहने लग गए ?
उत्तर-
नामधारी लोग शब्द बाणी पढ़ते समय ऊंची आवाज़ में बोलने या चीख (कूक) मारने लगते थे। इसलिए उन्हें कूका कहा जाने लगा।

प्रश्न 54.
बाबा राम सिंह ने अपने श्रद्धालुओं के साथ सम्पर्क रखने के लिए कौन-सी दो विधियां अपनाईं ?
उत्तर-
बाबा राम सिंह ने अपने श्रद्धालुओं के साथ सम्पर्क रखने के लिए विभिन्न जिलों में अपने प्रतिनिधि या सूबे नियुक्त किए। उन्होंने अपनी डाक व्यवस्था भी बना ली।

प्रश्न 55.
1871 ई० में नामधारियों ने किन दो स्थानों पर कसाइयों को मारा था तथा उन्हें क्या सजा दी गई ?
उत्तर-
1871 ई० में नामधारियों ने अमृतसर तथा रायकोट में कसाइयों को मारा था। उन्हें फांसी की सजा दी गई।

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प्रश्न 56.
नामधारियों ने मालेरकोटला पर हमला कब किया तथा उन्हें क्या सज़ा दी गई ?
उत्तर-
नामधारियों ने मालेरकोटला पर 1872 ई० में हमला किया। इस कारण उन्हें गिरफ्तार करके तोपों से उड़ा दिया गया।

प्रश्न 57.
बाबा राम सिंह को रंगून कब भेजा गया तथा उन्हें क्या सज़ा दी गई ?
उत्तर-
बाबा राम सिंह को 1872 ई० में रंगून भेजा गया। उन्हें देश निकाला मिला था।

प्रश्न 58.
बाबा राम सिंह के बाद नामधारियों का नेतृत्व करने वाले दो गुरु कौन थे ?
उत्तर-
बाबा राम सिंह के बाद नामधारियों का नेतृत्व करने वाले दो गुरु-बाबा हरि सिंह और बाबा प्रताप सिंह थे।

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प्रश्न 59.
सब से पहले दो सिंह सभायें कब तथा कहां स्थापित की गई ?
उत्तर-
पहली सिंह सभा 1873 ई० में अमृतसर और दूसरी 1879 में लाहौर में स्थापित की गई।

प्रश्न 60.
19वीं सदी में सिंह सभाओं की संख्या कितनी हो गई तथा इनका सदस्य कौन बन सकता था ?
उत्तर-
19वीं सदी में सिंह सभाओं की संख्या 120 हो गई। कोई भी सिक्ख इनका सदस्य बन सकता था।

प्रश्न 61.
सिंह सभाओं में कौन-से चार वर्गों के लोग शामिल थे ?
उत्तर-
सिंह सभाओं में उच्च वर्ग के ज़मींदार, साधारण किसान, नौकरी पेशा तथा व्यापारी शामिल थे ।

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प्रश्न 62.
‘चीफ खालसा दीवान’ कब स्थापित हुआ तथा इसने क्या भूमिका निभाई ?
उत्तर-
चीफ खालसा दीवान 1902 में स्थापित हुआ। इसने सिंह सभा लहर का नेतृत्व किया तथा सिक्खों के प्रतिनिधि की भूमिका निभाई।

प्रश्न 63.
‘खालसा ट्रस्ट सोसाइटी’ कब स्थापित हुई तथा इसका क्या उद्देश्य था ?
उत्तर-
खालसा ट्रस्ट सोसाइटी 1894 ई० में स्थापित हुई। उसका उद्देश्य पंजाबी भाषा तथा गुरुमुखी लिपि में नए विचारों का प्रचार करना था।

प्रश्न 64.
सिंह सभा लहर के प्रभाव अधीन निकाली जाने वाली दो पत्रिकाओं के नाम बताएं।
उत्तर-
सिंह सभा लहर के प्रभाव अधीन निकाली जाने वाली दो पत्रिकाएं खालसा समाचार’ तथा ‘खालसा एडवोकेट’ थीं।

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प्रश्न 65.
सिंह सभाओं ने स्त्रियों की दशा सुधारने के लिए किन दो बातों पर जोर दिया ?
उत्तर-
सिंह सभा ने स्त्रियों की दशा सुधारने के लिए लड़कियों की शिक्षा तथा स्त्री-पुरुष समानता पर बल दिया।

प्रश्न 66.
सिंह सभा लहर के शिक्षा के कार्यक्रम का क्या प्रयोजन था ?
उत्तर-
सिंह सभा लहर के शिक्षा के कार्यक्रम का प्रयोजन विज्ञान तथा अंग्रेज़ी को नैतिक और धार्मिक शिक्षा के साथ जोड़ना था।

प्रश्न 67.
सिंह सभा लहर के प्रयत्नों से बनी सबसे महत्त्वपूर्ण शिक्षा संस्था कब तथा कहां स्थापित हुई ?
उत्तर-
सिंह सभा लहर के प्रयत्नों से 1892 ई० में अमृतसर में खालसा कॉलेज की स्थापना हुई ।

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प्रश्न 68.
सिक्ख एजुकेशनल कान्फ्रेंस कब स्थापित की गई तथा उसका क्या उद्देश्य था ?
उत्तर-
सिक्ख एजुकेशनल कान्फ्रेंस 1908 ई० में स्थापित की गई। इसका उद्देश्य शिक्षा सम्बन्धी विचार-विमर्श करना तथा शिक्षा के क्षेत्र का विस्तार करना था। .

प्रश्न 69.
सिंह सभा लहर के चार नेताओं के नाम बताएं।
उत्तर-
सिंह सभा लहर के चार नेता बाबा खेम सिंह बेदी, सरदार ठाकुर सिंह संधावालिया, प्रो० गुरुमुख सिंह और ज्ञानी . दित्त सिंह थे।

प्रश्न 70.
बीसवीं सदी के पहले दो दशकों में सभाओं ने गुरुद्वारों के सुधार के लिए कौन-से दो प्रकार के यत्न किए ?
उत्तर-
बीसवीं सदी के पहले दो दशकों में सभाओं के प्रयत्नों से हरमंदर साहिब के बाहरी हिस्सों से मूर्तियों को उठा लिया गया। सिंह सभाओं ने इन्हीं गुरुद्वारों से महन्तों को निकलवाने के लिए सरकार से भी टक्कर ली।

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II. छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
किस विचारधारा के प्रभाव अधीन ब्रह्म समाज की स्थापना हुई तथा इसका क्या उद्देश्य था ?
उत्तर-
ब्रह्म समाज की स्थापना पश्चिमी विचारधारा तथा भारतीय विचारधारा के संगम के कारण हुई। ब्रह्म समाज के संस्थापक राजा राममोहन राय पश्चिमी विज्ञान तथा तकनीकी को भारतीयता का रंग देना चाहते थे। इसी बात से प्रेरित हो कर उन्होंने ब्रह्म समाज की 1829 ई० में स्थापना की। इस सभा का उद्देश्य एक परमात्मा की उपासना पर बल देना और वेदों एवं उपनिषदों की तर्कसंगत व्याख्या करना था। मूर्ति-पूजा और सामाजिक त्रुटियों का विरोध करना भी इसका एक उद्देश्य था। जाति-पाति के भेद-भाव समाप्त करना भी सभा का महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम था। स्त्रियों की पुरुषों के साथ समानता भी इसके आदर्शों में सम्मिलित था। अतः राजा राम मोहन राय ने सती प्रथा को समाप्त करने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया।

प्रश्न 2.
रामकृष्ण मिशन की विचारधारा तथा कार्यक्रम बताएं।
उत्तर-
रामकृष्ण मिशन की स्थापना सन् 1896 में स्वामी विवेकानन्द ने कलकत्ता (कोलकाता) में की। यह मिशन विवेकानन्द ने अपने गुरु रामकृष्ण परमहंस के नाम पर चलाया था। रामकृष्ण की रुचि विशेष रूप से धार्मिक सुधार में थी। स्वामी विवेकानन्द का विचार था कि मुक्ति प्राप्त करने के बहुत से मार्ग हैं। वे मुसलमानों और ईसाइयों के साथ भी सम्पर्क रखते थे। उनका यह भी विचार था कि मनुष्य की सेवा करना परमात्मा की सेवा है। स्वामी विवेकानन्द ने अपने गुरु के विचारों का प्रचार करने के लिए रामकृष्ण मिशन की स्थापना की। इसके अतिरिक्त उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि धर्म के द्वारा ही समाज का पुनर्निर्माण हो सकता है। वे वेदान्त के पक्ष में थे। उन्होंने जाति-पाति का जोरदार खण्डन किया। वे कर्मकाण्ड की व्यर्थ रीतियों और अन्ध-विश्वासों का भी सख्ती से विरोध करते थे। रामकृष्ण मिशन स्थापित करने के छः वर्ष पश्चात् स्वामी विवेकानन्द का देहान्त हो गया। परन्तु तब तक भारत के बहुत-से नगरों में इसको केन्द्र खुल चुके थे। समाज-सुधार और सेवा के क्षेत्र में रामकृष्ण मिशन ने बहुत से स्कूल स्थापित किये, अस्पताल खोले, अनाथ आश्रम चलाये और पुस्तकालय खोले।

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प्रश्न 3.
महाराष्ट्र में समाज सुधारकों ने किस बात पर जोर दिया ?
उत्तर-
महाराष्ट्र में सुधार लहर के उद्देश्य लगभग अन्य सुधारकों से मेल खाते थे। 1849 ई० में ‘परमहंस सभा’ स्थापित हुई। इसका उद्देश्य परमात्मा की एकता का प्रचार करना और जाति-पाति का विरोध करना था। ज्योतिबा फूले ने स्त्री शिक्षा पर बल दिया। वे विधवा-विवाह के पक्ष में भी थे। कुछ समय पश्चात् एक ‘विधवा पुनर्विवाह सभा’ स्थापित हुई। इसी तरह गोपाल हरि देशमुख ने अपने प्रगतिशील विचारों द्वारा सामाजिक त्रुटियों का खण्डन किया।

महाराष्ट्र में सबसे महत्त्वपूर्ण संस्था 1867 में ‘प्रार्थना सभा’ के नाम से स्थापित हुई। इसके प्रतिनिधि धार्मिक सुधार की अपेक्षा सामाजिक सुधार में अधिक रुचि रखते थे। जस्टिस महादेव गोविन्द रानाडे और रामकृष्ण गोपाल भण्डारकर ने इस सभा द्वारा समाज की सेवा की। अनाथों के लिए आश्रम खोले गए। सामाजिक सुधार और सेवा की यह रुचि 20वीं सदी के आरम्भ तक चलती रही।

प्रश्न 4.
स्वामी दयानन्द के सामाजिक तथा धार्मिक विचार क्या थे ?
उत्तर-
आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानन्द सरस्वती थे। उन्होंने समाज का सुधार करने के लिए 1875 ई० में आर्य समाज की स्थापना की। थोड़े ही समय पश्चात् सारे देश में इसकी शाखाओं का जाल-सा बिछ गया। स्वामी दयानन्द के अपने स्वतन्त्र विचार थे जिनका संक्षिप्त वर्णन इस प्रकार है

  • ईश्वर एक है। वह सर्वव्यापी तथा सर्वशक्तिमान् है। उसका कोई आकार नहीं है। अतः उसकी मूर्ति बनाकर पूजा करना व्यर्थ है।
  • वेद सत्य हैं। वेद ईश्वर की वाणी हैं। वेद ही हमें जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति दिला सकते हैं।
  • ज्ञान के प्रकाश से अज्ञान के अन्धकार का नाश करना चाहिए।
  • शुद्धि द्वारा प्रत्येक धर्म का अनुयायी हिन्दू बन सकता है।
  • पूर्वजों के श्राद्ध, बाल-विवाह तथा छूतछात के भेदभाव वैदिक धर्म के विपरीत हैं। इस संस्था ने पंजाब के साथ-साथ पूरे देश में धार्मिक तथा सामाजिक उत्थान के लिए महत्त्वपूर्ण कार्य किए।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 20 सामाजिक/धार्मिक सुधार

प्रश्न 5.
‘अलीगढ़ आन्दोलन’ से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
अलीगढ़ आन्दोलन एक मुस्लिम आन्दोलन था। यह आन्दोलन सर सैय्यद अहमद खां ने मुसलमानों में जागृति पैदा करने के लिए चलाया। उस समय मुसलमान काफ़ी पिछड़े हुए थे। वे अरबी और फारसी को छोड़कर अन्य किसी भी भाषा की शिक्षा प्राप्त करना अपने धर्म के विरुद्ध समझते थे। इसलिए वे सरकारी नौकरियों से वंचित थे। ऐसी दशा में सर सैय्यद अहमद खां ने मुसलमानों को ऊंचा उठाने का निश्चय किया। उन्होंने मुसलमानों को अंग्रेज़ी शिक्षा प्राप्त करने की प्रेरणा दी। मुस्लिम समाज की कुरीतियों को दूर करने के लिए उन्होंने ‘तहजीब-उल-अकल’ नामक एक पत्रिका निकालनी आरम्भ की। 1875 ई० में उन्होंने अलीगढ़ में ऐंग्लो-ओरियण्टल कॉलेज की स्थापना की। यह कॉलेज 1920 ई० में मुस्लिम विश्वविद्यालय बना। इस विश्वविद्यालय ने अनेक विचारकों को जन्म दिया।

प्रश्न 6.
बाबा राम सिंह की शिक्षाएं क्या थी ?
उत्तर-
बाबा राम सिंह प्रमुख नामधारी नेता थे। उनकी शिक्षाएं बड़ी सरल एवं प्रभावशाली थीं। वह जाति प्रथा के कट्टर विरोधी थे। उन्होंने सभी धर्मों के लोगों को अपना शिष्य बनाया। हिन्दू-मुसलमान आदि सभी लोग कूका मत में सम्मिलित हो सकते थे। वे ब्राह्मणों, महन्तों तथा बेदियों के प्रभुत्व को स्वीकार नहीं करते थे। उन्होंने मूर्ति पूजा का भारी विरोध किया। उन्होंने अन्तर्जातीय विवाह तथा विधवा विवाह पर बल दिया। बाबा रामसिंह जी ने लोगों को उच्च नैतिक जीवन व्यतीत करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अपने शिष्यों को आडम्बर, झूठ तथा धोखेबाज़ी से दूर रहने का आदेश दिया। उन्होंने ब्राह्मणों के धार्मिक पाखण्डों के विरुद्ध आवाज़ उठाई तथा सती-प्रथा बन्द करवाने का प्रयास किया। वह बाल-विवाह, कन्या-वध तथा लड़कियों के विक्रय के कट्टर विरोधी थे। उन्होंने अपने शिष्यों में विवाह की आनन्द कारज प्रथा प्रचलित की। फलस्वरूप विवाह सादा और कम खर्चीला हो गया। कूका लोगों को पवित्र स्थानों पर नंगे सिर जाने की आज्ञा नहीं थी। गुरु राम सिंह ने नामधारियों के लिए दोहरी पगड़ी पहनना आवश्यक बताया। उन्होंने अपने अनुयायियों को दसवें गुरु गोबिन्द सिंह द्वारा रचित ‘ग्रन्थ साहिब’ के अध्ययन करने की प्रेरणा दी।

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प्रश्न 7.
सिंह सभा लहर के उद्देश्य तथा कार्यक्रम के बारे में बताएं।
उत्तर-
सिंह सभा लहर का आरम्भ 1873 ई० में हुआ। 1890 ई० तक 120 स्थानों पर सिंह सभाएं स्थापित हो चुकी थीं। इस लहर का मुख्य उद्देश्य प्राचीन सिक्ख परम्पराओं और खालसा आचरण को फिर से लागू करना था। इनका दूसरा उद्देश्य पंजाबी भाषा तथा गुरुमुखी लिपि का प्रचार करना था। शिक्षा का प्रसार करना भी इस लहर का एक उद्देश्य था।

इस लहर को संगठित करने के लिए 1902 में ‘चीफ खालसा दीवान’ बनाया गया। पंजाबी भाषा के विकास के लिए ‘खालसा ट्रैक्ट सोसाइटी’ स्थापित की गई। अमृतसर में खालसा कॉलेज की स्थापना हुई। 1908 में सिक्ख एजूकेशनल कांफ्रैंस का गठन हुआ। इस तरह सिंह सभा लहर ने गुरुद्वारों को महन्तों से आजाद कराया और सिक्खों में सामाजिक तथा राजनीतिक जागृति पैदा की।

प्रश्न 8.
अहमदिया लहर का धार्मिक पक्ष क्या था ?
उत्तर-
अहमदिया लहर को कादियानी लहर भी कहा जाता है। इसके संस्थापक मिर्जा गुलाम अहमद थे। उनका जन्म 1835 ई० में गुरदासपुर जिले के कादियां नामक स्थान पर हुआ था। उसे देश में प्रचलित सभी धार्मिक लहरों के विषय में पूरी-पूरी जानकारी थी। वह भी देश में अपने ही ढंग से धर्म-सुधार करना चाहता था। वह यह भी चाहता था, कि देश में ईसाई मिशनरियों तथा आर्य समाज के बढ़ते हुए प्रभाव को रोका जाये। अतः उसने लोगों के सामने इस्लाम की एक नई व्याख्या प्रस्तुत की। कुरान के महत्त्व पर अत्यधिक बल दिया और इसकी व्याख्या करना उचित ठहराया। उसकी यही विचारधारा अहमदिया लहर के नाम से प्रसिद्ध हुई। 1890 ई० में अनेक लोग उसके अनुयायी बन गये। उसका प्रभाव इतना बढ़ गया कि 1900 ई० में उसने अपने आपको मसीहा तथा पैगम्बर कहना आरम्भ कर दिया। 1908 ई० में उसकी मृत्यु हो गई। परन्तु उसके उत्तराधिकारियों ने इस आन्दोलन को जारी रखा। 1914 ई० में यह आन्दोलन दो शाखाओं में बंट गया। एक का केन्द्र कादियां में रहा और दूसरी शाखा ने लाहौर में अपना केन्द्र स्थापित किया।

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प्रश्न 9.
धार्मिक और सामाजिक आन्दोलनों ने मुख्य रूप से किन दो विषयों पर बल दिया ?
उत्तर-
धार्मिक और सामाजिक आन्दोलनों ने मुख्य रूप से दो महत्त्वपूर्ण सामाजिक समस्याओं पर बल दिया : स्त्रियों की भलाई तथा जाति भेद को समाप्त करना। इन कार्यक्रमों का आधार मानवीय समानता की विचारधारा थी। परन्तु समानता की यह विचारधारा केवल धर्म के क्षेत्र तक ही सीमित नहीं थी। इसका राजनीतिक महत्त्व भी था। अंग्रेजों के राज्य में कानूनी रूप से तो सभी भारतीय समान थे, परन्तु सामाजिक या राजनीतिक रूप से नहीं थे।

भारत में स्त्रियों की संख्या देश की जनसंख्या से लगभग आधी थी। विश्व के अन्य समाजों की भान्ति भारत में भी स्त्री पुरुष के अधीन थी। धर्म और कानून की व्यवस्था भी उसके पक्ष में नहीं थी। पर्दा प्रथा, सती प्रथा, बाल विवाह आदि कुप्रथाएं इसी असमानता का परिणाम थीं। धार्मिक और सामाजिक आन्दोलनों ने स्त्रियों की भलाई पर बल दिया। उनके प्रयासों का परिणाम भी अच्छा निकला। धीरे-धीरे स्त्रियों ने राजनीतिक, आर्थिक, धार्मिक और सामाजिक आन्दोलनों में स्वयं भाग लेना आरम्भ कर दिया। उन्होंने समानता की मांग की। देश के प्रमुख नेताओं ने इसका जोरदार समर्थन किया। परिणामस्वरूप स्त्रीपुरुष की समानता का आदर्श स्वीकार कर लिया गया।

प्रश्न 10.
आर्य समाज के संस्थापक कौन थे ? इस संस्था द्वारा किए गए किन्हीं चार धार्मिक तथा सामाजिक सुधारों का वर्णन कीजिए।
अथवा
19वीं शताब्दी में समाज-सुधार के क्षेत्र में आर्य समाज की क्या भूमिका रही ?
उत्तर-
आर्य समाज की स्थापना स्वामी दयानन्द सरस्वती ने की थी। इस संस्था द्वारा किए गए चार धार्मिक तथा सामाजिक सुधारों का वर्णन निम्नलिखित है–

  1. इस संस्था ने जाति-प्रथा के विरुद्ध आवाज़ उठाई और भाईचारे की भावना पर बल दिया।
  2. इस संस्था ने सती-प्रथा, बाल-विवाह तथा कन्या-वध आदि सामाजिक कुप्रथाओं का विरोध किया।
  3. इसने विधवाओं को पुनः विवाह करने की अनुमति देने तथा स्त्री शिक्षा के प्रसार पर जोर दिया।
  4. इस संस्था ने समाज में प्रचलित मूर्ति-पूजा तथा अन्ध-विश्वास का खण्डन किया।

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प्रश्न 11.
मुसलमानों में जागृति लाने के लिए सर सैय्यद अहमद खां ने क्या-क्या कार्य किए ?
उत्तर-
सर सैय्यद अहमद खां ने मुसलमानों में जागृति लाने के लिए निम्नलिखित कार्य किए-
1. उनका विश्वास था कि मुसलमानों में केवल पश्चिमी शिक्षा के प्रसार द्वारा ही जागृति लाई जा सकती है, इसलिए उन्होंने मुसलमानों को पश्चिमी शिक्षा प्राप्त करने और पश्चिमी साहित्य का अध्ययन करने की प्रेरणा दी।

2. उन्होंने अलीगढ़ में एम० ए० ओ० कॉलेज की स्थापना की। यहां मुसलमान विद्यार्थियों को पश्चिमी ढंग से शिक्षा दी जाती थी।

3. उनका विचार था कि मुसलमानों के उत्थान के लिए अंग्रेजों की सहानुभूति प्राप्त करना आवश्यक है, इसलिए उन्होंने मुसलमानों को अंग्रेजों के प्रति वफ़ादार रहने की प्रेरणा दी।

4. उन्होंने मुसलमानों के दृष्टिकोण को आधुनिक बनाने के लिए कुरान की वैज्ञानिक व्याख्या प्रस्तुत की।

प्रश्न 12.
भारतीय नारी की दशा सुधारने के लिए आधुनिक सुधारकों द्वारा किए गए कोई चार कार्य लिखिए।
उत्तर-
1. सती-प्रथा के कारण स्त्री को अपने पति की मृत्यु पर उसके साथ जीवित ही चिता में जल जाना पड़ता था। आधुनिक समाज-सुधारकों के प्रयत्नों से इस अमानवीय प्रथा का अन्त हो गया।

2. विधवाओं को पुनः विवाह करने की आज्ञा नहीं थी। समाज-सुधारकों के प्रयत्नों से उन्हें दोबारा विवाह करने की आज्ञा मिल गई।

3. आधुनिक सुधारकों का विश्वास था कि पर्दे में बन्द रहकर नारी कभी उन्नति नहीं कर सकती, इसलिए उन्होंने स्त्रियों को पर्दा न करने के लिए प्रेरित किया।

4. स्त्रियों को ऊंचा उठाने के लिए समाज-सुधारकों ने स्त्री शिक्षा पर विशेष बल दिया।

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प्रश्न 13.
ब्रह्म समाज की सामाजिक उपलब्धियों पर नोट लिखें।
उत्तर-
ब्रह्म समाज की स्थापना 1828 ई० में राजा राममोहन राय ने की। इस संस्था की सामाजिक उपलब्धियों का वर्णन इस प्रकार है-
1. राजा राममोहन राय ने सती प्रथा का अन्त करने का प्रयास किया। उनके प्रयत्नों से लॉर्ड विलियम बैंटिक ने 1829 ई० में एक कानून पास करके सती प्रथा को अवैध घोषित कर दिया।

2. ब्रह्म समाज ने जातीय भेद-भाव, छुआछूत, मानव-बलि, बहु-पत्नी विवाह तथा अन्य अनेक सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध आवाज़ उठाई।

3. ब्रह्म समाज ने स्त्रियों की दशा सुधारने के लिए स्त्री-शिक्षा पर विशेष बल दिया।

4. ब्रह्म समाज ने देश में पश्चिमी शिक्षा और पश्चिमी सभ्यता के प्रसार पर बल दिया। 1817 ई० में राजा राममोहन राय ने कलकत्ता (कोलकाता) में एक अंग्रेजी स्कूल का संचालन किया। उन्होंने 1825 ई० में एक वेदान्त कॉलेज की स्थापना की जहां पश्चिमी ढंग से शिक्षा का प्रसार होता था।

प्रश्न 14.
आर्य समाज की राजनीतिक उपलब्धियों के बारे में लिखें।
उत्तर-
राजनीतिक क्षेत्र में भी आर्य समाज का योगदान बड़ा ही महत्त्वपूर्ण था। स्वामी दयानन्द पहले व्यक्ति थे, जिन्होंने ‘स्वराज्य’ शब्द का प्रयोग किया। स्वामी जी ने लोगों को कहा कि वे विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करें। साथ ही उन्होंने लोगों को स्वदेशी वस्तुओं के प्रयोग के लिए प्रेरणा दी। उन्होंने हिन्दी को राज्यभाषा का पद दिलाने की पहल की। स्वतन्त्रता आन्दोलन में कांग्रेस का नेतृत्व करने वाले कुछ व्यक्ति भी आर्य समाज से प्रभावित थे। इस आन्दोलन में भाग लेने वाले लाला लाजपतराय, मदन मोहन मालवीय, स्वामी श्रद्धानन्द, रामभज आदि व्यक्ति आर्य समाज से ही सम्बन्ध रखते थे। इसके अतिरिक्त क्रान्तिकारी आन्दोलन में आर्य समाज ने काफ़ी योगदान दिया।

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IV. निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
ब्रह्म समाज की उपलब्धियों का वर्णन करें।
उत्तर-
ब्रह्म समाज के संस्थापक राजा राममोहन राय थे। वह एक उच्चकोटि के समाज सुधारक थे। उन्होंने हिन्दू समाज में से न केवल प्रचलित कुप्रथाओं का ही अन्त किया, बल्कि उसे इसाई धर्म के प्रभाव से भी बचाया। उन्होंने सबसे पहले आत्मीय सभा की स्थापना की। इसके पश्चात् 1828 ई० में उन्होंने ब्रह्म समाज की नींव डाली। उन्होंने ब्रह्म समाज के माध्यम से समाज में प्रचलित अनेक कुप्रथाओं का विरोध किया। उन्होंने लोगों का ध्यान वेदों तथा उपनिषदों की महानता की ओर दिलाया और उनसे वेदों द्वारा बताये गये मार्ग पर चलने को कहा।

राजा राममोहन राय की मृत्यु के पश्चात् ब्रह्म समाज दो शाखाओं में बंट गया। पहली शाखा आदि समाज की थी जिसका नेतृत्व देवेन्द्रनाथ टैगोर ने किया। दूसरी शाखा साधारण समाज की थी जिसका नेतृत्व केशवचन्द्र सेन ने किया। ब्रह्म समाज अथवा राजा राममोहन राय की उपलब्धियों का वर्णन इस प्रकार है-

1. सामाजिक जागृति-

  1. राजा राममोहन राय ने सती-प्रथा का अन्त करने का प्रयास किया। उनके प्रयत्नों से 1829 ई० में लॉर्ड विलियम बैंटिंक ने एक कानून पास करके सती-प्रथा को अवैध घोषित कर दिया। यह राजा राममोहन राय तथा ब्रह्म समाज की बहुत बड़ी विजय थी।
  2. उन्होंने जातीय भेद-भाव, छुआछूत, मानव बलि तथा अन्य सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध आवाज़ उठाई।
  3. उन्होंने स्त्रियों की दशा सुधारने के लिए स्त्री-शिक्षा पर विशेष बल दिया।

2. धार्मिक जागृति-

  1. उन्होंने मूर्ति-पूजा तथा अन्ध-विश्वासों का जोरदार खण्डन किया।
  2. उन्होंने लोगों को एक ही ईश्वर में विश्वास रखने के लिए प्रेरित किया।
  3. उन्होंने लोगों को पापों से दूर रहने और अच्छे कर्म करने का उपदेश दिया। उनका कहना था कि ईश्वर की भक्ति ही मोक्ष-प्राप्ति का एकमात्र साधन है।

3. सांस्कृतिक जागृति-राजा राममोहन राय ने देश में पश्चिमी शिक्षा और पश्चिमी सभ्यता के प्रसार पर बल दिया। उनका कहना था कि पश्चिमी विचारों के प्रसार से सामाजिक कुरीतियाँ अपने-आप दूर हो जाएंगी। शिक्षा के प्रसार के लिए उन्होंने 1817 ई० में कलकत्ता (कोलकाता) में एक अंग्रेजी स्कूल का संचालन किया। ब्रह्म समाज ने 1825 ई० में एक वेदान्त कॉलेज की स्थापना की जहां पश्चिमी ढंग से शिक्षा का प्रसार किया जाता था। .. सच तो यह है कि राजा राममोहन राय ने भारतीय समाज को कई कुरीतियों से मुक्त कराने में महान् कार्य किया। इसलिए उन्हें नये युग का अग्रदूत और भारतीय राष्ट्रवाद का पिता कहा जाता है। मिस कोलिट के अनुसार, “उन्होंने भारत को उसके अतीत से आधुनिक युग में लाने के लिए एक पुल का कार्य किया।”

प्रश्न 2.
आर्य समाज पर एक विस्तृत नोट लिखो।
उत्तर-
आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानन्द जी थे। उन्होंने 1875 ई० में बम्बई (मुम्बई) के स्थान पर आर्य समाज की स्थापना की। लाहौर में आर्य समाज की स्थापना अप्रैल, 1877 में हुई। शीघ्र ही लाहौर आर्य समाज का मुख्य केन्द्र बन गया।

उद्देश्य तथा आदर्श-आर्य समाज की स्थापना का मुख्य उद्देश्य वेदों का प्रचार करना तथा मूर्ति पूजा और खोखले रीतिरिवाजों का खण्डन करना था। स्वामी जी ने कर्म व मोक्ष पर भी बल दिया। उन्होंने लोगों को “पुनः वेदों की ओर चलो” का आदेश दिया। उनके द्वारा रचित सत्यार्थ प्रकाश में वेदों का ज्ञान भण्डार छिपा है।

उन्होंने स्त्री व पुरुष की समानता पर बल दिया। इसलिए उन्होंने कन्या वध तथा सती प्रथा जैसी कुरीतियों का विरोध किया। वह विधवा विवाह के पक्ष में थे। स्वामी जी ने जाति-पाति का भी कड़ा विरोध किया।

उन्होंने समाज में अज्ञानता को दूर करने के लिए अनिवार्य शिक्षा का समर्थन किया। वह स्त्री शिक्षा के भी समर्थक थे। उन्होंने हिन्दी भाषा को राष्ट्रीय भाषा बनाने का तर्क प्रस्तुत किया।

30 अक्तूबर, 1883 ई० को स्वामी दयानन्द का देहान्त हो गया। उनके पश्चात् भी उनके अनुयायियों ने आर्य समाज के कार्य का प्रसार किया।

धार्मिक कार्य-धार्मिक क्षेत्र में आर्य समाज ने मूर्ति पूजा व कर्मकाण्डों का त्याग करने की शिक्षा दी।।
सामाजिक कार्य-

(i) आर्य समाज ने जाति-पाति की कड़ी आलोचना की। निम्न वर्ग का स्तर ऊँचा उठाने के लिए शिक्षा तथा आर्थिक सहायता का प्रबन्ध किया। इस दिशा में उनका दूसरा प्रयास शुद्धि आन्दोलन था।

(ii) समाज ने अनाथ बच्चों के लिए अनाथालय स्थापित किए।

(iii) विधवा स्त्रियों की सहायता के लिए विधवा आश्रम स्थापित किए गए। शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षा के क्षेत्र में आर्य समाज का बहुमूल्य योगदान है। स्वामी जी को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए उनके अनुयायियों ने 1886 ई० में दयानन्द ऐंग्लो वैदिक (D.A.V.) के नाम पर शिक्षण संस्थाएं स्थापित की।

राजनीतिक क्षेत्र में स्वामी जी की स्वराज्य की प्राथमिकता ने इनके अनुयायियों को देश प्रेम से ओत-प्रोत कर दिया। लाला लाजपत राय, स्वामी हंसराज, स्वामी श्रद्धानन्द, मदन मोहन मालवीय तथा रामभज जैसे बहुत से आर्य समाजियों ने भारत के स्वतन्त्रता संग्राम में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।।

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प्रश्न 3.
नामधारी (कूका) आन्दोलन पर विस्तारपूर्वक लिखें।
उत्तर-
नामधारी आन्दोलन का आरम्भ-नामधारी लहर का आरम्भ 1857 ई० में हुआ। इस वर्ष वैशाखी के दिन बाबा रामसिंह ने एक सम्प्रदाय की स्थापना की, जिसे ‘नामधारी’ सम्प्रदाय कहा जाता है। ‘नामधारी’ लोग मन्त्रों को मस्ती में उच्च स्वर में गाते थे। ऊंचे स्वर में गाए जाने वाले गीत अथवा कूक के कारण उन्हें कूका कहा जाने लगा और उनके प्रचार कार्य को ‘कूका आन्दोलन’ का नाम दिया गया। इस लहर का प्रमुख केन्द्र भैणी गांव था जोकि ज़िला लुधियाना में स्थित है। बाबा रामसिंह जी स्वयं भी यहीं के रहने वाले थे।
नामधारी आन्दोलन के सिद्धान्त अथवा शिक्षाएं-इस आन्दोलन के प्रमुख सिद्धान्त और शिक्षाएं निम्नलिखित थी-

  1. एक ईश्वर में श्रद्धा।
  2. श्वेत वस्त्र तथा श्वेत ऊन के मनकों की माला पहनना और सीधी पगड़ी पहनना।
  3. श्री गुरु ग्रन्थ साहिब पर अटल विश्वास रखना तथा इसका पाठ करना।
  4. गुरु गोबिन्द सिंह को अपना गुरु मानना।
  5. बाल विवाह, कन्या वध, गो हत्या, दहेज तथा जाति-पाति का विरोध करना।
  6. सादा जीवन, नशीली वस्तुओं का निषेध, पुरोहित वाद, मूर्ति पूजा का खण्डन तथा अन्धविश्वासों का विरोध करना।
  7. पांच ककार धारण करना।

बाबा रामसिंह अंग्रेज़ विरोधी थे तथा स्वदेशी को महत्त्व देते थे। उन्होंने अपने अनुयायियों को अंग्रेज़ सरकार की नौकरी अस्वीकार करने के लिए कहा। यहां तक कि उन्होंने लोगों को रेल, सरकारी विद्यालय, नौकरियां, कार्यालय, अदालतें, सरकारी डाक-तार आदि का बहिष्कार करने के लिए भी कहा। बाबा राम सिंह ने लोगों को विदेशी वस्तुओं तथा कपड़े का भी बहिष्कार करने की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को चर्खे पर बने खद्दर का प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया।

अंग्रेजी सरकार से टकराव-नामधारी सिक्खों ने शीघ्र ही शस्त्र धारण कर लिए। फलस्वरूप अंग्रेजों के साथ उनकी सीधी टक्कर आरम्भ हो गई। उस समय अनेक इसाई मिशनरी सिक्खों के विरुद्ध प्रचार करते थे और अंग्रेजों की ओर से ‘गो हत्या’ की भी खुली छूट थी। नामधारी सिक्ख इन बातों को सहन न कर सके और उन्होंने रायकोट के बूचड़खाने पर आक्रमण करके अनेक गो-हत्यारों को मार डाला। इस आरोप में 66 नामधारियों को तोपों से उड़ा दिया गया। बाबा रामसिंह जी को भी देश-निकाला देकर रंगून भेज दिया गया। यहीं पर 1885 ई० में उनका देहान्त हो गया। इसके बाद भी कुछ नामधारियों ने अपना धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम जारी रखा।

प्रश्न 4.
सिंह सभा लहर क्या थी और यह किस प्रकार अस्तित्व में आई ?
उत्तर-
पंजाब में नामधारी आन्दोलन की गति धीमी होने के बाद सिक्खों में एक अन्य लहर चली। यह लहर थी-सिंह सभा लहर। यह लहर बड़ी ही महत्त्वपूर्ण थी। इस लहर का राजनीति से इतना सम्बन्ध नहीं था जितना कि सिक्खों की सामाजिक तथा धार्मिक गतिविधियों से था। सिंह सभा आन्दोलन का आरम्भ सिक्खों ने अपनी कौमी सुरक्षा के लिए किया।

पहली सिंह सभा की स्थापना 1873 ई० को हुई। खेम सिंह बेदी, विक्रम सिंह आहलूवालिया और ठाकुर सिंह संधावालिया को इस सभा का प्रधान चुन लिया गया। 1879 ई० में लाहौर में एक और सभा की स्थापना की गई। इस सभा के सदस्य मध्यवर्गीय पढ़े-लिखे व्यक्ति थे। पंजाब का गवर्नर सर रॉबर्ट इजर्टन भी इस सभा का सदस्य बन गया और उसने उस समय के वायसराय लॉर्ड लैंसडाऊन को सभा की सहायता करने के लिए कहा। अप्रैल, 1880 ई० को दोनों सभाओं की संयुक्त बैठक हुई परन्तु मामला सुलझ न सका। – 1892-93 ई० में सरदार सुन्दर सिंह मजीठिया नेता के रूप में उभरे। उनका ‘अमृतसर खालसा दीवान’ तथा ‘लाहौर खालसा दीवान’ में समान प्रभाव था। उन्होंने 11 नवम्बर, 1901 ई० को कुछ प्रसिद्ध सिक्ख नेताओं की अमृतसर में सभा बुलाई। इस सभा में एकमत से यह प्रस्ताव पास किया गया कि सिक्खों को एक सर्व-सिक्ख सभा की आवश्यकता है जो उनके हितों की रक्षा करे। लाहौर के खालसा दीवान को भी इसमें शामिल होने के लिए कहा गया जिसने यह बात सहर्ष स्वीकार कर ली। अतः 30 अक्तूबर, 1902 ई० को ‘चीफ खालसा दीवान’ की स्थापना हुई। चीफ खालसा दीवान के उद्देश्य थे-

  1. उच्च शिक्षा प्रदान करने के लिए खालसा कॉलेज को दृढ़ करना और उसका विकास करना
  2. सिक्खों में शिक्षा आन्दोलन को संगठित करना तथा स्कूलों और कॉलेजों की स्थापना करना।
  3. पंजाबी साहित्य को सुधारना।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 20 सामाजिक/धार्मिक सुधार

प्रश्न 5.
सिंह सभा लहर की उपलब्धियों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर-
सिंह सभा की सफलताओं का वर्णन इस प्रकार है-
(1) अमृतसर में एक खालसा कॉलेज की स्थापना की गई। यह कॉलेज शीघ्र ही पंजाबी साहित्य का एक मुख्य केन्द्र बन गया। पंजाब के बहुत से नगरों में खालसा स्कूल खोले गए। इन स्कूलों में बच्चों को गुरुमुखी भाषा में शिक्षा दी जाने लगी।

(2) 1908 ई० के पश्चात् प्रान्त के अनेक भागों में वार्षिक शिक्षा सभाओं का आयोजन किया गया। इसके परिणामस्वरूप कई नई सिक्ख संस्थाओं की स्थापना हुई। इसमें गुजरांवाला का खालसा कॉलेज तथा फिरोज़पुर में सिक्ख कन्या महाविद्यालय प्रमुख थे।

(3) सिंह सभा ने सिक्ख धर्म के प्रचार की ओर भी पूरा ध्यान दिया। साहबसिंह बेदी, अतरसिंह, खेमसिंह बेदी तथा संगत सिंह ने धर्म प्रचार का बड़ा सराहनीय कार्य किया। इसके परिणामस्वरूप बहुत से हिन्दू सिक्ख धर्म में शामिल हो गए।

(4) भाई वीर सिंह ने ‘खालसा ट्रैक्ट सोसायटी’ की स्थापना की। उन्होंने खालसा समाचार नाम का समाचार-पत्र भी आरम्भ किया। भाई काहन सिंह जी ने इसमें अमूल्य योगदान दिया। उन्होंने सिक्ख धर्म तथा संस्कृति पर विश्व कोष लिखा। भाई दित्त सिंह . तथा अन्य अनेक कवियों तथा गद्य लेखकों ने पंजाब के साहित्य को समृद्ध बनाया।

PSEB 11th Class Agriculture Solutions Chapter 9 सूअर, भेड़ें/बकरियां और खरगोश पालना

Punjab State Board PSEB 11th Class Agriculture Book Solutions Chapter 9 सूअर, भेड़ें/बकरियां और खरगोश पालना Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 11 Agriculture Chapter 9 सूअर, भेड़ें/बकरियां और खरगोश पालना

PSEB 11th Class Agriculture Guide सूअर, भेड़ें/बकरियां और खरगोश पालना Textbook Questions and Answers

(क) एक-दो शब्दों में उत्तर दो-

प्रश्न 1.
सूअरों की मुख्य नस्लों के नाम लिखो।
उत्तर-
सफेद यार्कशायर, लैंडरेस।

प्रश्न 2.
मादा सूअर एक साल में कितने बच्चे पैदा करती है ?
उत्तर-
एक वर्ष में 20-24 बच्चे देती है।

प्रश्न 3.
मादा सूअर एक साल में कितनी बार सू जाती है ?
उत्तर-
दो बार।

प्रश्न 4.
सूअर के बच्चों की खुराक में कितनी प्रोटीन होनी चाहिए ?
उत्तर-
20-22% ।

प्रश्न 5.
12 सप्ताह के खरगोश का कितना भार होता है ?
उत्तर-
2 किलोग्राम।

प्रश्न 6.
बकरी की किस्में बताओ।
उत्तर-
देसी नसल-बीटल, जमनापरी। विदेशी नसल-सानन, अलपाइन तथा बोअर।

प्रश्न 7.
भेड़ की किस्में बताओ।
उत्तर-
मैरीनो, कोरीडेल।

प्रश्न 8.
बीटल बकरी कौन से क्षेत्र में मिलती है ?
उत्तर-
पंजाब के अमृतसर, गुरदासपुर, फिरोज़पुर तथा तरनतारन जिलों में।

प्रश्न 9.
जमनापरी कौन से क्षेत्र में मिलती है ?
उत्तर-
उत्तर प्रदेश के पश्चिमी भाग में।

प्रश्न 10.
माँस वाले छेले को कब खस्सी करवाना चाहिए ?
उत्तर-
2 माह की आयु तक।

(ख) एक-दो वाक्यों में उत्तर दो-

प्रश्न 1.
सूअरों की देसी और विदेशी नस्लों में अन्तर बताओ।
उत्तर-
सूअर की देसी नस्लों का शारीरिक विकास बहुत कम होता है और देसी नस्लों के बच्चों की पैदावार भी कम होती है।
विदेशी नस्लों का शारीरिक विकास तेज़ी से होता है और इस नसल के बच्चों की पैदावार भी अधिक है।

प्रश्न 2.
सूअरों को कौन-कौन सी सस्ती खुराक डाली जा सकती है ?
उत्तर-
सब्जी मंडी की बची-खुची खराब हुई सब्ज़ियाँ और पत्ते, होस्टलों, होटलों और कैन्टीनों की जूठन, गन्ने के रस की मैल और लस्सी आदि, जैसे-सस्ते पदार्थों का प्रयोग सूअरों के आहार के लिए किया जा सकता है।

प्रश्न 3.
सूअरों की खुराक की बनावट बताओ।
उत्तर-
सूअरों के बच्चों की खुराक में 20-22% प्रोटीन देना चाहिए और रेशे की मात्रा 5% से अधिक नहीं होनी चाहिए। बढ़ रहे सूअरों की खराक में 16-18% प्रोटीन होना चाहिए और बड़े जानवरों को 2-3 किलोग्राम हरा चारा भी देना चाहिए।

प्रश्न 4.
उत्तम बकरी के गुण बताओ।
उत्तर-
उत्तम बकरी का चुनाव उसकी 120 दिनों के प्रसव बाद के दूध को देखकर की जाती है। उत्तम बकरी को 2 साल की आयु तक बच्चों को जन्म देना चाहिए। बकरी की वेल लम्बी होनी चाहिए। बढ़िया चमकीले बालों वाली होनी चाहिए।

प्रश्न 5.
खरगोश की ऊन और माँस वाली किस्मों के नाम बताओ।
उत्तर-
खरगोश की माँस वाली किस्में हैं-सोवियत चिंचला, न्यूज़ीलैंड व्हाइट, ग्रेअ जिंऐट, व्हाइट जिऐंट।
खरगोश की ऊन वाली किस्में हैं-रूसी अंगोरा, ब्रिटिश अंगोरा, जर्मन अंगोरा।

प्रश्न 6.
खरगोश किस तरह के खाने को ज्यादा पसन्द करता है ?
उत्तर-
खरगोश शाकाहारी जानवर है। इसको नेपीअर बाजरा, पालक, वांह, लुसण, गिन्नी घास, बरसीम, हरे पत्ते और सब्जियों के पत्ते खाने पसन्द हैं।

प्रश्न 7.
खरगोश का खुड्डा या पिंजरा किस तरह का होना चाहिए ?
उत्तर-
खुड्डे या पिंजरें लकड़ी के बनाए जाते हैं जो भिन्न-भिन्न आकार के हो सकते हैं; पर इनमें मलमूत्र के निकास और रोशनी का पूरा प्रबन्ध होना चाहिए।

प्रश्न 8.
खरगोश हर साल कितने सूए और हर सूए में कितने बच्चों को जन्म देता है ?
उत्तर-
मादा खरगोश हर साल में 6-7 बार बच्चों को जन्म देती है और हर प्रसव में 5-7 बच्चों को जन्म देती है।

प्रश्न 9.
खरगोश की भिन्न-भिन्न नस्लों की ऊन पैदावार के बारे में लिखो।
उत्तर-
खरगोश की किस्म — ऊन की मात्रा।
रूसी अंगोरा – 215 ग्राम
ब्रिटिश अंगोरा – 230 ग्राम
जर्मन अंगोरा – 590 ग्राम

प्रश्न 10.
खरगोश की खुराक में प्रोटीन की मात्रा के बारे में बताओ।
उत्तर-
दूध न देने वाली मादा के आहार में 12-15% प्रोटीन और दूध दे रहे जानवर के आहार में 16-20% प्रोटीन तत्व देना चाहिए।

(ग) पांच-छ: वाक्यों में उत्तर दो-

प्रश्न 1.
सूअर पालन व्यवसाय को लाभदायक बनाने के लिए कौन से तथ्य हैं ?
उत्तर-
सूअर पालन के धन्धे को लाभदायक बनाने के लिए तथ्य हैं –

  • नसल का सही चुनाव करना।
  • सूअर और सूअरी का स्वास्थ्य अच्छा होना चाहिए।
  • सूअरों को बीमारियों से बचाने के लिए अच्छा सन्तुलित आहार देना चाहिए।
  • सूअर और सूअरी को रखने और देखभाल का सही प्रबन्ध होना चाहिए।
  • सूअरी की सेहत अच्छी हो, त्वचा कसी हुई और नर्म, बाल भी नर्म, आंखें भी चमकदार, टांगें मज़बूत और कम-से-कम 12 थन होने चाहिए।
  • सूअरी को 8-9 माह की आयु में जब उसका भार 90 किलोग्राम हो, आस करवानी चाहिए।
  • बच्चों से अधिक मास की प्राप्ति के लिए इन्हें 3-4 सप्ताह की आयु में खस्सी करवा लेना चाहिए।

प्रश्न 2.
सूअरों के बाड़े के बारे में विस्तार से बताओ।
उत्तर-
सूअरों के शैड भूमि से ऊँचे, सस्ते तथा आरामदायक होने चाहिए। एक बढ़ रहे सूअर को 8 वर्ग फुट तथा दूध से हट चुकी सूअरी को 10-12 वर्ग फुट स्थान की आवश्यकता होती है। 20 बच्चे रखने के लिए 160 वर्ग फुट स्थान की आवश्यकता होती है। सूअरियों को इकट्ठा रखना हो तो 10 से अधिक नहीं रखनी चाहिए। बच्चों वाली सूअरी के कमरे में दीवार से हट के गार्ड रेलिंग लगानी चाहिए। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि सूअरी के नीचे आकर बच्चे मर न जाएं। रेलिंग की फर्श से ऊंचाई 10-12 इंच तथा इतना ही इसको दीवार से दूर रखना चाहिए।

प्रश्न 3.
भेड़ों, बकरियों के बाड़े के बारे नोट लिखो।
उत्तर-
भेड़ों, बकरियों के शैड खुले तथा हवादार होने चाहिए। इनमें सीलन नहीं होनी चाहिए। शैड की लम्बाई पूर्व-पश्चिम दिशा की तरफ होनी चाहिए। एक बकरी या भेड़ को लगभग 10 वर्ग फुट स्थान की आवश्यकता होती है। लेले तथा छेले को 4 वर्ग फुट स्थान की आवश्यकता होती है। शैड के आस-पास 5-6 फुट ऊँची दीवार की हो या कंडियाली तार लगी होनी चाहिए। इससे कुत्ते आदि हानि नहीं कर सकते। शैड के आस-पास पतझड़ी वृक्ष, जैसे-शहतूत, पापुलर, डेक आदि लगा लेने चाहिए।

प्रश्न 4.
खरगोश की खुराक की बनावट के बारे बताओ।
उत्तर-
खरगोश को दालें, फलीदार हरा तथा सूखा चारा, अनाज, बन्दगोभी, गाजर तथा रसोई की बची-खुची वस्तुएँ आदि से पाला जा सकता है। राशन को दलकर या गोलियां बना कर खरगोश को आहार दिया जा सकता है। गोलियां बना कर आहार देने से खरगोश को सांस की बीमारी से बचाव होता है तथा राशन की बचत भी होती है। दूध से हरी मादा को आहार में 12-15% प्रोटीन देना चाहिए तथा दूध दे रही मादा की आहार में प्रोटीन की मात्रा 16-20% होनी चाहिए। खरगोश को गेहूँ, मक्की, बाजरा, चावल की पालिश, मीट मील, धातु का मिश्रण, मूंगफली की खल तथा नमक आदि वाला आहार बनाकर दी जाती है। खरगोश रवाह, गिन्नी घास, नेपियर बाजरा, लुसन, पालक, हरे पत्ते वाली सब्जियां आदि को पसन्द करते हैं। खरगोश अपने शरीर के दसवें भाग के बराबर पानी भी पी जाते हैं। इसलिए पानी का प्रबन्ध भी होना चाहिए।

प्रश्न 5.
खरगोश के पिंजरों के बारे में जानकारी दो।
उत्तर-
खुड्डे या डिब्बे लकड़ी के बनाए जाते हैं जो भिन्न-भिन्न आकार के हो सकते हैं। परन्तु इनमें मलमूत्र के निकास तथा प्रकाश का पूरा प्रबन्ध होना चाहिए। जब बच्चे दूध छोड़ देते हैं, तो इनको पिंजरों में रखा जाता है। पिंजरे का आकार 5 फुट लम्बा तथा 4 फुट चौड़ा होता है। इसमें लगभग 20 बच्चे रखे जाते हैं। नर तथा मादा को अलग-अलग जिस पिंजरे में रखा जाता है उसका आकार 2 फुट लम्बा, 1-2 फुट चौड़ा तथा 1 फुट ऊंचा होना चाहिए।

Agriculture Guide for Class 11 PSEB सूअर, भेड़ें/बकरियां और खरगोश पालना Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरीय प्रश्न-

प्रश्न 1.
सूअर की नसल सफेद यार्कशायर का कद तथा रंग बताओ।
उत्तर-
कद मध्यम, रंग सफेद होता है।

प्रश्न 2.
सूअर की कौन-सी नसल उत्तर भारत में बहुत प्यारी है?
उत्तर-
सफेद यार्कशायर।

प्रश्न 3.
लैंडरेस सूअर का मूल घर बताओ।
उत्तर-
डैनमार्क देश।

प्रश्न 4.
स्वस्थ मादा सूअर कितने महीने की आयु में पहली बार कामवेग में आती है ?
उत्तर-
5-6 माह में।

प्रश्न 5.
बढ़ रहे सूअरों के आहार में कितना प्रोटीन होना चाहिए ?
उत्तर-
16-18%।

प्रश्न 6.
बढ़ रहे सूअर को कितने स्थान की आवश्यकता है ?
उत्तर-
8 वर्ग फुट।

प्रश्न 7.
दूध से हट चुकी मादा सूअर को कितने स्थान की आवश्यकता है ?
उत्तर-
10-12 वर्ग फुट ।

प्रश्न 8.
मादा सूअर के कमरे में गार्ड रेलिंग फर्श से कितनी ऊंची होनी चाहिए ?
उत्तर-
10-12 इंच।

प्रश्न 9.
गरीब की गाय किस को कहा जाता है ?
उत्तर-
बकरी को।

प्रश्न 10.
बकरी की देसी नस्ल के नाम बताओ।
उत्तर-
बीटल, जमनापरी।

प्रश्न 11.
बकरी का चुनाव कितने दिन का प्रसव बाद का दूध देख कर किया जाता है ?
उत्तर-
120 दिन।

प्रश्न 12.
भेड़/बकरी का गर्भकाल का समय कितना है ?
उत्तर-
145-153 दिनों का।

प्रश्न 13.
शैड की दिशा किस तरह होनी चाहिए ?
उत्तर-
पूर्व-पश्चिम की तरफ।

प्रश्न 14.
बकरी या भेड़ को कितने स्थान की आवश्यकता होती है ?
उत्तर-
10 वर्ग फुट।

प्रश्न 15.
लेले या छेले (भेड़, बकरी के बच्चे ) को कितने स्थान की आवश्यकता है ?
उत्तर-
4 वर्ग फुट।

प्रश्न 16.
भेड़/बकरी को वर्ष में कितने बार बच्चे देने चाहिए ?
उत्तर-
3 बार।

प्रश्न 17.
मादा खरगोश वर्ष में कितनी बार बच्चे देती है ?
उत्तर-
6-7 बार।

प्रश्न 18.
खरगोश की औसत आयु कितनी है ?
उत्तर-
5 वर्ष।

प्रश्न 19.
खरगोश की ऊन वाली किस्म लिखो।
उत्तर-
रूसी अंगोरा, जर्मन अंगोरा।

प्रश्न 20.
खरगोश की मांस वाली नस्लें बताओ।
उत्तर-
सोवियत चिंचला, ग्रेअ जिएंट।

प्रश्न 21.
दूध से हट चुकी खरगोश के आहार में कितना प्रोटीन होना चाहिए ?
उत्तर-
12-15%।

प्रश्न 22.
दूध दे रही मादा खरगोश का आहार में कितना प्रोटीन होना चाहिए ?
उत्तर-
16-20%।

प्रश्न 23.
6 सप्ताह का खरगोश प्रतिदिन कितना हरा चारा तथा आहार खा जाता है ?
उत्तर-
100 ग्राम हरा चारा तथा 50 ग्राम आहार।

प्रश्न 24.
खरगोश से पहली बार ऊन कितनी आयु में ली जा सकती है ?
उत्तर-
4 माह की आयु में।।

प्रश्न 25.
एक खरगोश से वर्ष में कितनी ऊन प्राप्त हो जाती है ?
उत्तर-
500-700 ग्राम।

लघु उत्तरीय प्रश्न –

प्रश्न 1.
सूअर की किस्म सफेद यार्कशायर के बारे में बताओ।
उत्तर-
यह सफेद रंग की मध्यम कद वाली नस्ल है। इसकी वेल लम्बी तथा कान खड़े होने चाहिए। इसको पंजाब में आसानी से पाला जा सकता है।

प्रश्न 2.
सूअर की नस्ल लैंडरेस के बारे में बताएं।
उत्तर-
यह विदेशी नस्ल है। इसके कान लटकते हुए, वेल लम्बी तथा रंग सफेद होता है। इसका मूल देश डैनमार्क है। इसके लिए मीट में चर्बी कम मात्रा में होती है।

प्रश्न 3.
मादा सूअर के आस में आने के बारे में बताओ।
उत्तर-
मादा सूअर पहली बार 5-6 माह की आयु में हीट में आ जाती है। पर 90 किलो भार की, 8-9 माह की सूअरी को ही आस में लाना चाहिए।

प्रश्न 4.
मादा सूअर कैसी होनी चाहिए ?
उत्तर-
मादा सूअर का स्वास्थ्य अच्छा होना चाहिए। त्वचा कसी हुई तथा नर्म, बाल नर्म होने चाहिए। टांगें मजबूत होनी चाहिए तथा थन 12 होने चाहिए।

प्रश्न 5.
सूअरों को कितने स्थान की आवश्यकता है ?
उत्तर-
बढ़ रहे सूअर को 8 वर्ग फुट स्थान की आवश्यकता है तथा दूध से हट चुकी सूअरी को 10-12 वर्ग फुट स्थान की आवश्यकता है।

प्रश्न 6.
बच्चों वाली मादा सूअर के कमरे में गार्ड रेलिंग क्यों लगाई जाती है ?
उत्तर-
इसलिए लगाई जाती है ताकि बच्चे सूअरी के नीचे आकर मर न जाए।

प्रश्न 7.
बकरी की नस्ल बीटल के बारे में जानकारी दें।
उत्तर-
यह काले भूरे रंग की होती है तथा इसमें सफेद धब्बे होते हैं। इसके कान लम्बे, लटकते हुए, टेढ़े तथा चेहरा उभरा होता है। मुहाने का आकार बड़ा होता है तथा पहली प्रसव डेढ़ वर्ष की आयु तक मिल सकता है। यह नस्ल अमृतसर, फिरोजपुर, तरनतारन तथा गुरदासपुर में मिलती है।

प्रश्न 8.
जमनापरी नस्ल का विवरण दें।
उत्तर-
इस नस्ल की बकरी का रंग सफेद हल्का भूरा तथा मुंह तथा सिर पर धब्बे होते हैं। इसके कान लटकते हुए, बिंधे तथा नाक उभरा हुआ होता है। इसका कद लम्बा तथा टांगें भी लम्बी होती हैं। यह नस्ल देखने में सुन्दर लगती है तथा उत्तर प्रदेश के पश्चिमी भाग में मिलती है।

प्रश्न 9.
खरगोश की ऊन उतारने के बारे में बताओ।
उत्तर-
खरगोश से 4 माह की आयु में पहली बार ऊन उतारी जा सकती है। कटाई के समय ऊन कम-से-कम 2 इंच लम्बी होनी चाहिए। पूरी ऊन तो खरगोश के एक वर्ष का होने पर मिलती है। एक वर्ष में खरगोश से लगभग 500-700 ग्राम ऊन मिलती है तथा हर वर्ष मिलती रहती है।

प्रश्न 10.
भेड़ों/बकरियों, खरगोशों को पालने के लिए प्रशिक्षण लेने के बारे में बताओ।
उत्तर-
इन जानवरों के पालने के लिए, प्रशिक्षण लेने के लिए जिले के डिप्टी डायरैक्टर पशु-पालन विभाग, कृषि विज्ञान केन्द्र या गडवासु लुधियाना से सम्पर्क किया जा सकता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-

प्रश्न 1.
बकरी की नस्लों के बारे में जानकारी दें।
उत्तर-
स्वयं उत्तर दें।

प्रश्न 2.
सूअरों की नस्लों के बारे में जानकारी दें।
उत्तर-
स्वयं उत्तर दें।

सूअर, भेड़ें/बकरियां और खरगोश पालना PSEB 11th Class Agriculture Notes

  • सूअर अपने वंश की वृद्धि तेजी से करते हैं तथा कम आहार लेते हैं।
  • सूअरों की विदेशी नस्ल है-सफेद यार्कशायर, लैंडरेस।
  • स्वस्थ मादा सूअर पहली बार 5-6 माह की आयु में कामवेग में आती हैं।
  • मादा सूअर वर्ष में दो बार प्रसव कर सकती है तथा एक बार में 10-12 बच्चे पैदा करती है। 5. सूअरों के 160 वर्ग फुट में 20 बच्चे रखे जा सकते हैं।
  • बकरी का दूध बीमारों तथा बुजुर्गों के लिए बहुत गुणकारी है।
  • बकरी की नस्लें हैं-बीटल, जमनापरी।
  • बकरी की विदेशी नस्लें हैं-सानन, अलपाइन तथा वोअर।
  • भेड़ों की नस्लें हैं-मैरीनो, कोरीडेल।
  • अच्छी बकरी का चुनाव उसके 120 दिन के सूए के दूध को देख कर किया जाता है।
  • बकरी तथा भेड़ का गर्भकाल का समय 145-153 दिन है।
  • बकरी या भेड़ को लगभग 10 फुट जगह की आवश्यकता होती है। जब के भेड़ या बकरी के बच्चे को लगभग 4 फुट जगह की आवश्यकता है।
  • जो छेले मांस के लिए रखे जाते हैं उनको 2 माह की आयु में खस्सी करवा लेना चाहिए।
  • खरगोश की भादा पहली बार 6-9 माह की आयु में गर्भ धारण कर सकती है।
  • खरगोश की आयु औसतन 5 वर्ष की है।
  • खरगोश की ऊन के लिए पाली जाने वाली किस्में हैं-जर्मन अंगोरा, ब्रिटिश अंगोरा, रूसी अंगोरा।
  • खरगोश की मांस वाली किस्में हैं-ग्रे ज्वाइंट, सोवियत चिंचला, वाइट ज्वाइंट, न्यूजीलैंड वाइट।
  • वार्षिक ऊन की क्रमशः पैदावार रूसी, ब्रिटिश तथा जर्मन अंगोरा से 215, 230 तथा 590 ग्राम है।
  • 4 माह की आयु में खरगोश से पहली बार ऊन प्राप्त की जा सकती है।
  • भेड़ों, बकरियों या खरगोश पालन का व्यवसाय शुरू करने से पहले प्रशिक्षण ले लेना चाहिए।

PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 7 फैसले लेने की योग्यता

Punjab State Board PSEB 10th Class Welcome Life Book Solutions Chapter 7 फैसले लेने की योग्यता Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 10 Welcome Life Chapter 7 फैसले लेने की योग्यता

PSEB 10th Class Welcome Life Guide फैसले लेने की योग्यता Textbook Questions and Answers

भाग-I

सही/ग़लत चुनें

  1. मैं वह पाठ्यक्रम चुनूंगा जो मेरे माता-पिता कहते हैं, भले ही मुझे उस में कोई दिलचस्पी न हो।
  2. यदि मैं अपने परिवार या अन्य परिस्थितियों के कारण डॉक्टर नहीं बन पाता, तो चिकित्सा पेशे जैसे अन्य कोर्स फार्मासिस्ट, नर्सिंग भी तो किए जा सकते हैं।
  3. हमारे भाग्य में जो होगा मिल जाएगा इसलिए काम को लेकर ज्यादा चिंता की ज़रूरत नहीं है।
  4. मुझे वही कोर्स चुनना है, जो मेरे सहपाठी चुनेंगे।
  5. मुझे जीवन में जो बनना है, मुझे वहीं अपना रास्ता चुनना है, यह बात मुझ पर लागू होती है।

उत्तर-

  1. ग़लत,
  2. सही,
  3. ग़लत,
  4. ग़लत,
  5. सही।

भाग-II

प्रश्न 1.
दसवीं के बाद मुझे क्या करना है?
उत्तर-
मैं एक मल्टीनेशनल कंपनी में मैनेजर बनना चाहता हूँ। इसलिए मैं कॉमर्स लूंगा, ताकि मैं बी. कॉम करके एम. बी. ए. करूं और अपने सपने पूरे कर सकूँ। इससे मैं अधिक धन अर्जित कर सकूँगा और अपनी इच्छा के अनुसार काम कर सकूँगा।

PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 7 फैसले लेने की योग्यता

प्रश्न 2.
अपने आस पास के लोगों के कुछ व्यवसायों के नाम लिखिए।
उत्तर-

  1. डॉक्टर
  2. इंजीनियर
  3. मैनेजर
  4. सुनार
  5. डेयरीफार्मिंग
  6. शिक्षक/प्रोफेसर
  7. सरकारी नौकरी
  8. किराना दुकानदार
  9. दुकानदार
  10. कारपेंटर

प्रश्न 3.
मुझे क्या काम करके अधिक खुशी मिलती है?
उत्तर-
मैं एक बड़ी कंपनी में मैनेजर बनना चाहता हूँ। उसका काम सबके काम पर नज़र रखना है। इसलिए मुझे ऐसा काम करने में खुशी मिलती है जिसमें दूसरों के काम पर नज़र रखनी हो और उसमें सुधार के बारे बताना हो।

अभ्यास (पेज 58)

प्रश्न-कई कठिन परिस्थितियों में फैसला लेने के लिए सामान्य ज्ञान कार्य करता है। उदाहरण के लिए “छात्र एक प्रश्न का उत्तर दें कि एक आदमी घर से बाहर था और लगातार बारिश में भीग रहा था। उसका
फैसले लेने की योग्यता पूरा शरीर बारिश में भीगा हुआ था। उसका सिर पूरी तरह से नंगा था और उसके सिर पर कोई पगड़ी, टोपी या ऐसा कुछ भी नहीं था जिससे वह अपने सिर को गीला होने से बचा सके। लेकिन उसके सिर का एक भी बाल गीला नहीं हुआ। यह कैसे संभव हो सकता है?”
उत्तर-
उसके सिर पर बाल नहीं हैं क्योंकि वह पूरी तरह गंजा था। जीवन में ऐसे कई प्रश्न हमारे सामने आ सकते हैं जिनके उत्तर देते समय हमें सामान्य ज्ञान का उपयोग करना आवश्यक है।

PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 7 फैसले लेने की योग्यता

पाठ पर अधारित प्रश्न

गतिविधि

इस चित्र की कहानी की तरफ ध्यान दें। एक गिलहरी सड़क पार करने लगी, बीच से ही पीछे मुड़ गई, फिर उसे लगा कि सामने से आ रही कार से बच कर पहले ही निकल जाएगी। फिर आगे बढ़ी, पीछे मुड़ने के ख्याल से जब पीछे गई तो पीछे की तरफ से बस आ रही थी। वह फिर आगे बढ़ी और कार के टायर के नीचे आकर मर गई। दुविधा के कारण वह समय पर फैसला नहीं ले सकी।
PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 7 फैसले लेने की योग्यता 1

प्रश्न 1. सही उत्तर चुनो

प्रश्न 1.
गिलहरी की मौत का कारण …………….. था।
(a) बस
(b) कार
(c) दुविधा
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(c) दुविधा।

PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 7 फैसले लेने की योग्यता

प्रश्न 2.
खाली स्थान भरो गिलहरी बच सकती थी अगर वह ……… समय पर ……….. निर्णय लेती।
उत्तर-
ठीक, ठीक।

कक्षा में चर्चा करके आगे दी स्थितियों पर जो बेहतर निर्णय सामने आये उसे लिखें।

स्थिति-1:
क और ख दोनों ही आपके अच्छे मित्र हैं, लेकिन वह एक-दूसरे से झगड़ पड़े, क ने आपसे ख से न बोलने के लिए कहा है, जबकि ख ने आपसे क से बात न करने के लिए कहा है तो आपका निर्णय क्या होगा?
उत्तर-
मैं दोनों को बैठा कर उनकी बात सुनूंगा, उनकी गलतफहमी दूर करूंगा और उन्हें फिर से दोस्त बनाऊंगा।

स्थिति-2:
कल आपकी क्लास में गणित की परीक्षा होगी। आप गणित में बहुत अच्छे हैं लेकिन आपके दोस्तों ने परीक्षा न देने का फैसला किया। आपका निर्णय क्या होगा?
उत्तर-
मैं उन्हें समझाऊंगा कि हमें टेस्ट देना चाहिए। हो सकता है कि हमें कम अंक मिलें लेकिन हम नई चीजें सीखेंगे। मैं उन्हें बताऊंगा कि स्थिति से भागना अच्छा नहीं है लेकिन हमें बड़ी हिम्मत के साथं इसका सामना करना चाहिए।
प्यारे छात्रो ! अब हम अनुमान लगाते हैं कि कौन से पेशे में अभी अधिक सफल हो सकता है। आपको अभी के लिए जो काम अधिक ठीक लगता है उस अनुसार अभी को उस काम के अन्यों से अधिक अंक दें। प्रत्येक काम के लिए हम अभी को पांच में से अंक देंगे।

काम तथा व्यवसाय कुल अंक 5
1. व्यापार
2. डॉक्टर
3. ड्राइविंग
4. कृषि
5. साहित्यिक (कलाकारी)
6. वाहन/परिवहन कार्य
7. वैज्ञानिक
8. विदेश
9. मैकेनिक

उत्तर-यह सारणी छात्र अपने मित्र की इच्छा अनुसार खुद भरेंगे।

PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 7 फैसले लेने की योग्यता

Welcome Life Guide for Class 10 PSEB फैसले लेने की योग्यता Important Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

(क) बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
जीवन जीने के लिए किसी व्यक्ति को क्या करना पड़ता है?
(a) काम करना पड़ता है
(b) ऐश करनी पड़ती है
(c) सोना पड़ता है
(d) जागना पड़ता है।
उत्तर-
(a) काम करना पड़ता है।

प्रश्न 2.
हमें किस प्रकार का काम करना चाहिए?
(a) जिसे हम पसंद करते हैं
(b) जिसमें अधिक पैसे हों
(c) जिसे करके खुशी मिले
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर-
(d) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 3.
राजा ने अपने बेटों को क्यों बुलाया?
(a) उत्तराधिकारी का फैसला करने के लिए
(b) अन्य राज्य पर हमला करने के लिए
(c) राज्य को विभाजित करने के लिए
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(a) उत्तराधिकारी का फैसला करने के लिए।

PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 7 फैसले लेने की योग्यता

प्रश्न 4.
राजा ने अपने किस बेटे को उत्तराधिकारी चुना?
(a) पहले
(b) दूसरे
(c) तीसरे
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(c) तीसरे।

प्रश्न 5.
तीसरे बेटे ने ऐसा क्या किया कि राजा ने उसे अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया?
(a) उसने राजा को 100 रुपए लौटा दिए
(b) उसने महल को कचरे से भर दिया
(c) उसने महल को सुगंध से भर दिया
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(c) उसने महल को सुगंध से भर दिया।

प्रश्न 6.
किसने कहा, “कल्पना ज्ञान से अधिक महत्त्वपूर्ण है?”
(a) आइंस्टीन
(b) गैलीलियो
(c) मैरी क्यूरी
(d) सुकरात
उत्तर-
(a) आइंस्टीन।

PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 7 फैसले लेने की योग्यता

(ख) खाली स्थान भरें

  1. मानव जीवन बहुत …………… है।
  2. छात्रों में ………….. का कौशल होना चाहिए।
  3. आइंस्टीन ने कहा था कि ……….. ज्ञान से बहुत महत्त्वपूर्ण है।
  4. आइंस्टीन ने ……………. पुरस्कार जीता था।
  5. प्रत्येक व्यक्ति में ……….. का कौशल होना चाहिए।

उत्तर-

  1. जटिल,
  2. सामान्य ज्ञान,
  3. कल्पना,
  4. नोबेल,
  5. सामान्य ज्ञान।

(ग) सही/ग़लत चुनें

  1. प्रत्येक छात्र को सामान्य ज्ञान के कौशल का उपयोग करना चाहिए।
  2. कठिन समय में बुद्धि काम आती है।
  3. राजा के चार पुत्र थे।
  4. निरंतर चलने पर ही लक्ष्य तक पहुँच सकते हैं।
  5. हमें अपनी इच्छा अनुसार व्यवसाय अपनाना चाहिए।

उत्तर-

  1. सही,
  2. सही,
  3. ग़लत,
  4. सही,
  5. सही।

PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 7 फैसले लेने की योग्यता

(घ) कॉलम से मेल करें

कॉलम ए — कॉलम बी
(a) व्यापार — (i) समझ
(b) क्षमता — (ii) व्यवसाय
(c) दुविधा — (iii) अनुमान
(d) कल्पना — (iv) कौशल
(e) सामान्य ज्ञान — (v) असमंजस
उत्तर-
कॉलम ए — कॉलम बी
(a) व्यापार — (ii) व्यवसाय
(b) क्षमता — (iv) कौशल
(c) दुविधा — (v) असमंजस
(d) कल्पना — (iii) अनुमान
(e) सामान्य ज्ञान — (i) समझ

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन यापन के लिए क्या करना पड़ता है?
उत्तर-
प्रत्येक व्यक्ति को अपना जीवन यापन करने के लिए कोई न कोई काम करना पड़ता है।

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प्रश्न 2.
हमें किस प्रकार का काम करना चाहिए?
उत्तर-
हमें वह काम करना चाहिए जिससे हमें अधिक धन और खुशी मिले।

प्रश्न 3.
क्या कोई काम छोटा या बड़ा होता है?
उत्तर-
नहीं, कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता ।

प्रश्न 4.
व्यवसाय अपनाने के दौरान हमें किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
उत्तर-
व्यवसाय का चयन करते समय हमें अपनी पसंद और बड़ों के अनुभव को ध्यान में रखना चाहिए।

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प्रश्न 5.
राजा ने अपने बेटों को परखने का फैसला क्यों किया?
उत्तर-
क्योंकि वह सिंहासन के लिए अपना उत्तराधिकारी चुनना चाहता था।

प्रश्न 6.
राजा ने अपने तीसरे बेटे को उत्तराधिकारी क्यों चुना?
उत्तर-
क्योंकि राजा के तीसरे पुत्र ने सही समय पर सही फैसला लिया था।

प्रश्न 7.
राजा के तीसरे बेटे ने 100 रुपये का क्या किया?
उत्तर-
तीसरे बेटे ने 100 रुपये के कई सुगंध खरीदे और उन्हें महल में रखा। इससे सारा महल खुशबू से भर गया।

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प्रश्न 8.
हम अपने व्यक्तित्व को किस तरह महका सकते हैं?
उत्तर-
हम अपने व्यक्तित्व को अच्छे गुणों से महका सकते हैं।

प्रश्न 9.
अगर हम अच्छे गुणों को अपनाएंगे तो क्या होगा?
उत्तर-
अच्छे गुणों से हमारे मन में बुरे विचार नहीं आएंगे और हमारा व्यक्तित्व अपने आप बढ़िया होगा।

प्रश्न 10.
मानव जीवन किस प्रकार का है?
उत्तर-
मानव जीवन काफी जटिल और चुनौतियों से भरा है।

PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 7 फैसले लेने की योग्यता

प्रश्न 11.
अल्बर्ट आइंस्टीन कौन थे?
उत्तर-
वह एक प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी थे जिन्होंने नोबेल पुरस्कार जीता था।

प्रश्न 12.
आइंस्टीन ने कल्पना के बारे में क्या बताया?
उत्तर-
उन्होंने बताया के कल्पना ज्ञान से ज्यादा महत्त्वपूर्ण है।

प्रश्न 13.
इस अध्याय का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर-
इस अध्याय का मुख्य उद्देश्य छात्रों में सामान्य ज्ञान का कौशल पैदा करना है।

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प्रश्न 14.
सामान्य ज्ञान का महत्त्व क्या है?
उत्तर-
सामान्य ज्ञान के साथ हम अपनी छोटी-बड़ी समस्याओं को भी आसानी से हल कर सकते हैं।

लघु उत्तराय प्रश्न

प्रश्न 1.
हमें कौन सा व्यवसाय चुनना चाहिए?
उत्तर-
प्रत्येक व्यक्ति को अपना जीवन निर्वाह करने के लिए कोई न कोई काम करना पड़ता है। इसलिए उसे कोई न कोई व्यवसाय अपनाना पड़ता है। लेकिन व्यवसाय को अपनाने के दौरान, कुछ चीजों को ध्यान में रखना चाहिए। यह बेहतर होगा यटि व्यवसाय हमारी पसंद का होगा। साथ ही अगर उसमें अच्छा पैसा और खुशी मिलती है, तो इससे बेहतर कुछ नहीं है। इस तरह, अगर हम इन बातों का ध्यान रखेंगे, तो हम बेहतरीन पेशा चुनकर अच्छी जिंदगी जी पाएंगे।

प्रश्न 2.
पेशा चुनने में कौन हमारी मदद कर सकता है?
उत्तर-
ऐसा कहा जाता है कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता लेकिन व्यक्ति की सोच बड़ी-छोटी हो सकती है। किसी भी काम को देखने का हमारा नज़रिया सकारात्मक होना चाहिए। तब हम बहुत आसानी से व्यवसाय चुन सकते हैं। इसीलिए हम अपने माता-पिता से सलाह ले सकते हैं। हम अपने शिक्षकों या स्कूल परामर्शदाताओं से बात कर सकते हैं। हम सही निर्णय लेने के लिए इंटरनेट, समाचार पत्रों या टी.वी. का उपयोग कर सकते हैं। इससे हमारा समय बचेगा और हम एक बेहतर पेशा चुन पाएंगे।

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प्रश्न 3.
किसी व्यक्ति में निर्णय लेने की क्षमता क्यों होनी चाहिए?
उत्तर-
इस तथ्य में कोई शक नहीं है कि किसी व्यक्ति के पास निर्णय लेने की क्षमता होनी चाहिए। यदि कोई व्यक्ति सही समय पर सही निर्णय लेता है, तो वह हमेशा जीवन में प्रगति करेगा लेकिन अगर सही समय पर.गलत निर्णय लिया गया तो जीवन बर्बाद हो सकता है। इसलिए कोई भी बुजुर्गों की मदद ले सकता है और अपने निर्णय लेने के कौशल को निखारने के लिए परामर्शदाताओं से बात कर सकता है। इस तरह, वह जीवन में बहुत प्रगति करेगा।

प्रश्न 4.
जीवन में सामान्य ज्ञान या ज्ञान का क्या महत्त्व है?
उत्तर-
प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में कई चुनौतियों का सामना करता है। यदि कोई समस्या है तो यह हमारा सामान्य ज्ञान या समझदारी है जो हमारी मदद करती है। इसका कारण यह है कि कभी कभी व्यावहारिक जीवन में, हमें दिल की न सुन कर और बुद्धिमानी से निर्णय लेना पड़ता है जो सभी के लिए काफी फलदायी होता है। कभी कभी हम अपनी कल्पना और सामान्य ज्ञान की मदद से बड़ी-बड़ी समस्याओं को भी हल कर सकते हैं। इसीलिए प्रत्येक मनुष्य में सामान्य ज्ञान होना चाहिए और उसका उपयोग करने का कौशल भी होना चाहिए।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न-अध्याय में दिए गए निर्णय लेने के कौशल के बारे में राजा की कहानी पर चर्चा करें।
उत्तर-एक बार एक राजा था जिसके तीन बेटे थे। राजा उनमें से अपने उत्तराधिकारी का चयन करना चाहता था कि कौन उसका उत्तराधिकारी बनेगा। इस लिए उसने निर्णय लेने की क्षमता के साथ-साथ उनकी परख करने का निर्णय लिया। उसने तीनों बेटों में प्रत्येक बेटे को 100 रुपये दिये और उनसे कुछ भी खरीदने को कहा जिसके साथ पूरा महल भरा जा सके। बड़े बेटे ने सोचा कि वह पूरे महल को केवल 100 रुपये से कैसे भर सकता है। इसीलिए उसने अपने पिता को पैसे लौटा दिए। दूसरे बेटे ने 100 के साथ कचरा खरीदा और पूरे महल को भर दिया। राजा को गुस्सा आ गया और उसने उसे महल की सफाई का काम दे दिया। राजा के तीसरे बेटे ने 100 रुपये के साथ कई सुगंध खरीदे और महल को सुगंध से भर दिया। राजा ने उसे अपने उत्तराधिकारी के रूप में चुनने का पुरस्कार दिया क्योंकि उसने सही समय पर सही निर्णय लिया। इसलिए एक व्यक्ति के पास सही समय पर सही निर्णय लेने की क्षमता होनी चाहिए।

PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 7 फैसले लेने की योग्यता

फैसले लेने की योग्यता PSEB 10th Class Welcome Life Notes

  • यह अध्याय भविष्य में एक व्यवसाय का चयन करने के मुद्दे के साथ शुरू होता है, कि व्यक्ति को क्या व्यवसाय चुनना चाहिए।
    वास्तव में, लोग हमेशा इस बात को लेकर दुविधा होते हैं कि वे कौन सा व्यवसाय अपनाएं जिसमें उन्हें अधिक पैसा मिले और साथ ही उनका दिल भी लगा रहे।
  • कई बच्चे माता-पिता के दबाव में होते हैं कि उन्हें वही व्यवसाय अपनाना है जो उनके माता-पिता चाहते हैं। चाहे बच्चे की इच्छा हो या न हो। यह गलत है।
  • हमें वही व्यवसाय अपनाना चाहिए जिसे करने का मन हो। हमें दबाव में नहीं आना चाहिए। माता-पिता को अपने बच्चों की इच्छाओं को ध्यान में रखना चाहिए। उन्हें प्रत्येक पेशे के लाभ और हानियों के बारे में बताया जाना चाहिए ताकि वे सही निर्णय ले सकें।
  • सभी में निर्णय लेने की क्षमता होनी चाहिए। भले ही हम अलग-अलग समय पर अलग-अलग निर्णय लेते हैं। कभी-कभी उस निर्णय को लेने में इतना समय लगता है जिससे उसकी अहमियत कम हो जाती है। इसलिए सही समय पर सही फैसले लेने चाहिए।
  • हम अपने व्यक्तित्व को अच्छे गुणों की खुशबू से महका सकते हैं। इससे हमारे मन में बुरे विचार नहीं आएंगे और अच्छे गुण आ जाएंगे। व्यक्ति में कठिन परिस्थितियों से निपटने के लिए पूर्ण आत्मविश्वास भी होना चाहिए। ताकि कठिन परिस्थितियों का डट के सामना किया जा सके।
  • व्यक्ति को अपने जीवन में सामान्य ज्ञान का प्रयोग करने की आवश्यकता है। इस तरह हम कठिन परिस्थितियों में नहीं फंसते और सभी समस्याएं आसानी से हल हो जाती हैं।
  • जीवन में कई ऐसे अवसर आते हैं जब किसी समस्या के बारे में निर्णय लेना काफी मुश्किल हो जाता है। ऐसी स्थिति में, सामान्य ज्ञान उपयोगी है। सभी में सामान्य ज्ञान और सही समय पर इसका उपयोग करने का कौशल होना चाहिए। इससे जीवन आसान बनता है।