PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 15 हमारा पर्यावरण

Punjab State Board PSEB 10th Class Science Book Solutions Chapter 15 हमारा पर्यावरण Textbook Exercise Questions, and Answers.

PSEB Solutions for Class 10 Science Chapter 15 हमारा पर्यावरण

PSEB 10th Class Science Guide हमारा पर्यावरण Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्न में से कौन-से समूहों में केवल जैव निम्नकरणीय पदार्थ हैं ?
(a) घास, पुष्प तथा चमड़ा
(b) घास, लकड़ी तथा प्लास्टिक
(c) फलों के छिलके, केक एवं नींबू का रस
(d) केक, लकड़ी एवं घास।
उत्तर-
(a), (c) तथा (d)।

प्रश्न 2.
निम्न से कौन आहार श्रृंखला का निर्माण करते हैं ?
(a) घास, गेहूँ तथा आम ।
(b) घास, बकरी तथा मानव
(c) बकरी, गाय तथा हाथी
(d) घास, मछली तथा बकरी।
उत्तर-
(b) घास, बकरी तथा मानव।

प्रश्न 3.
निम्न में से कौन पर्यावरण-मित्र व्यवहार कहलाते हैं ?
(a) बाज़ार जाते समय सामान के लिए कपड़े का थैला ले जाना।
(b) कार्य समाप्त हो जाने पर लाइट (बल्ब) तथा पंखे का स्विच बंद करना।
(c) मां द्वारा स्कूटर विद्यालय छोड़ने की बजाय तुम्हारा विद्यालय तक पैदल जाना
(d) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(d) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 4.
क्या होगा यदि हम एक पोषी स्तर के सभी जीवों को समाप्त कर दें ( मार डालें) ?
उत्तर-
यदि एक पोषी स्तर के सभी जीवों को समाप्त कर दें तो पारिस्थितिक संतुलन बुरी तरह प्रभावित हो जाएगा। प्रकृति की सभी खाद्य श्रृंखलाएं एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। जब किसी एक कड़ी को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाए तो उस आहार श्रृंखला का संबंध किसी दूसरी श्रृंखला से जुड़ जाता है। यदि घास → हिरण → शेर आहार श्रृंखला से शेरों को मार दिया जाए तो घास चरने वाले हिरणों की वृद्धि अनियंत्रित हो जाएगी। उनकी संख्या बहुत अधिक बढ़ जाएगी। उनकी बढ़ी हुई संख्या घास और वनस्पतियों को खत्म कर देगी जिससे वह क्षेत्र रेगिस्तान बन जाएगा। सहारा का रेगिस्तान इसी प्रकार के पारिस्थितिक परिवर्तन का उदाहरण है।

प्रश्न 5.
क्या किसी पोषी स्तर के सभी सदस्यों को हटाने का प्रभाव भिन्न-भिन्न पोषी स्तरों के लिए अलग-अलग होगा ? क्या किसी पोषी स्तर के जीवों को पारितंत्र को प्रभावित किए बिना हटाना संभव है ?
उत्तर-
किसी पोषी स्तर के सभी सदस्यों को हटाने का प्रभाव भिन्न-भिन्न पोषी स्तरों पर अलग-अलग होगा। –

  1. उत्पादकों को हटाने का प्रभाव-यदि उत्पादकों को पूर्ण रूप से नष्ट कर दिया तो सारा पारितंत्र ही नष्ट हो जाएगा। तब किसी प्रकार का जीवन नहीं रहेगा।
  2. शाकाहारियों को हटाने का प्रभाव-शाकाहारियों को नष्ट करने से उत्पादकों (पेड़-पौधों-वनस्पतियों) के जनन और वृद्धि पर रोक-टोक समाप्त हो जाएगी और मांसाहारी भूख से मर जाएंगे।
  3. मांसाहारियों को हटाने का प्रभाव-मांसाहारियों को हटा देने से शाकाहारियों की संख्या इतनी अधिक तेजी से बढ़ जाएगी कि क्षेत्र की सभी वनस्पतियाँ समाप्त हो जाएंगी।
  4. अपघटकों को हटाने का प्रभाव-अपघटकों को हटा देने से मृतक जीव-जंतुओं के ढेर लग जाएंगे।

उन के सड़े हुए शरीरों में तरह-तरह के जीवाणुओं के उत्पन्न हो जाने से बीमारियां फैलेंगी। मिट्टी में उत्पादकों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों की कमी हो जाएगी। किसी पोषी स्तर के जीवों को पारितंत्र को प्रभावित किए बिना हटाना संभव नहीं है। उत्पादकों को हटाने से शाकाहारी जीवित नहीं रह सकते हैं और शाकाहारियों के न रहने से मांसाहारी नहीं रह सकते। अपघटकों को हटा देने से उत्पादकों को अपनी वृद्धि के लिए पोषक तत्व प्राप्त नहीं हो पाएंगे।

प्रश्न 6.
जैविक आवर्धन (Biological magnification) क्या है ? क्या पारितंत्र के विभिन्न स्तरों पर जैविक आवर्धन का प्रभाव भी भिन्न-भिन्न होगा ?
उत्तर-
जैविक आवर्धन-विभिन्न साधनों द्वारा हानिप्रद रसायनों का हमारी आहार श्रृंखला में प्रवेश करना तथा उनका हमारे शरीर में सांद्रित होने की प्रक्रिया को जैव आवर्धन कहते हैं। इन रसायनों का हमारे शरीर में प्रवेश विभिन्न विधियों द्वारा हो सकता है।

हम फसलों को रोगों से बचाने के लिए कीटनाशक, पीड़कनाशक आदि रसायनों का छिड़काव करते हैं। इनका कुछ भाग मिट्टी द्वारा भूमि में रिस जाता है जिसे पौधे जड़ों द्वारा खनिजों के साथ ग्रहण कर लेते हैं। इन्हीं पौधों के उपयोग से वे रसायन हमारे शरीर में प्रवेश करते हैं तथा पौधों के लगातार सेवन से उनकी सांद्रता बढ़ती जाती है जिसके परिणामस्वरूप जैव आवर्धन का विस्तार होता है।

मनुष्य सर्वभक्षी है। वह पौधों तथा जंतुओं दोनों का उपयोग करता है तथा अनेक आहार श्रृंखलाओं में स्थान ग्रहण कर सकता है। इस कारण मानव में रसायन पदार्थों का प्रवेश तथा सांद्र शीघ्रता से होता है और जैव आवर्धन का विस्तार होता है।

उदाहरण-
उत्तरी अमेरिका में मिशीगन झील के आसपास मच्छरों को मारने के लिए बहुत अधिक डी० डी० टी० का छिड़काव किया गया जिससे पेलिकन नामक पक्षियों की संख्या बहुत कम हो गई। पर्यावरण विशेषज्ञों द्वारा यह पाया गया कि पानी में प्रति दस लाख कण में 0.2 कण डी० डी० टी० (1 ppm = \(\frac{1}{1000000} \)) है। डी० डी० टी० के उच्च स्तर के कारण पेलिकन पक्षियों के अंडों का आवरण पतला हो गया जिससे बच्चों के निकलने से पहले ही अंडे टूट जाते थे।

प्रश्न 7.
हमारे द्वारा उत्पादित अजैव निम्नीकरणीय कचरे से कौन-सी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं?
उत्तर-
हमारे द्वारा उत्पादित प्लास्टिक, डी० डी० टी० आदि से युक्त अजैव निम्नीकरणीय कचरे से अनेक समस्याएँ उत्पन्न होती हैं-

  1. नाले-नालियों में अवरोध।
  2. मृदा प्रदूषण।
  3. प्लास्टिक जैसे पदार्थों को निगल लेने से शाकाहारी जंतुओं की मृत्यु।
  4. मानव शरीर में जैव आवर्धन।
  5. पारिस्थितिक संतुलन में अवरोध।
  6. जल, वायु और मृदा प्रदूषण।
  7. सौंदर्य बोध की दृष्टि से हानिकारक और बुरा।

प्रश्न 8.
यदि हमारे द्वारा उत्पादित सारा कचरा जैव निम्नीकरणीय हो, तो क्या इनका हमारे पर्यावरण पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा ?
उत्तर-
यदि हमारे द्वारा उत्पादित सारा कचरा जैव निम्नीकरणीय हो और उसका निपटान ठीक प्रकार से कर दिया जाए तो हमारे पर्यावरण पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा।

प्रश्न 9.
ओज़ोन परत की क्षति हमारे लिए चिंता का विषय क्यों है ? इस क्षति को सीमित करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं ?
उत्तर-
विभिन्न रासायनिक कारणों से ओज़ोन परत को क्षति बहुत तेजी से हो रही है। क्लोरोफ्लोरो कार्बनों की वृद्धि के कारण ओज़ोन परत में छिद्र उत्पन्न हो गए हैं जिनसे सूर्य के प्रकाश में विद्यमान पराबैंगनी विकिरणें सीधे पृथ्वी पर आने लगी हैं जो कैंसर, मोतिया बिंद और त्वचा रोगों के कारण बन रहे हैं। ओजोन परत पराबैंगनी (UV) विकिरणों का अवशोषण कर लेती है।

इस क्षति को सीमित करने के लिए 1987 में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) में सर्वसम्मति यही बनी है कि क्लोरोफ्लोरो कार्बन (CFCs) के उत्पादन को 1986 के स्तर पर सीमित रखा जाए। मांट्रियल प्रोटोकोल में 1987 में सन् 1998 तक क्लोरोफ्लोरो कार्बन के प्रयोग में 50% की कमी करने की बीत कही गई। सन् 1992 में मांट्रियल प्रोटोकॉल की मीटिंग में 1996 तथा CFCs पर धीरे-धीरे रोक लगाने को स्वीकार किया गया। अब क्लोरोफ्लोरो कार्बन की जगह हाइड्रोफ्लोरो कार्बनों का प्रयोग आरंभ किया गया है जिसमें ओजोन परत को क्षति पहुँचाने वाले क्लोरीन या ब्रोमीन नहीं हैं। जनसामान्य में इसके प्रति भी सजगता लगभग नहीं है।

सजगता को बढ़ाये जाने की आवश्यकता है। विश्वभर की सरकारों को निम्नलिखित कार्य तत्परता से करने चाहिएं-

  1. सुपर सॉनिक विमानों का कम-से-कम प्रयोग।
  2. नाभिकीय विस्फोटों पर नियंत्रण रखना चाहिए।
  3. क्लोरोफ्लोरो कार्बन के प्रयोग को सीमित करना चाहिए।
  4. CFCs के विकल्प की तलाश करनी चाहिए।

Science Guide for Class 10 PSEB हमारा पर्यावरण InText Questions and Answers

प्रश्न 1.
क्या कारण है कि कुछ पदार्थ जैव निम्नीकरणीय होते हैं और कुछ अजैव निम्नीकरणीय ?
उत्तर-
जैव निम्नीकरणीय पदार्थ जैविक प्रक्रमों से अपघटित हो जाते हैं। वे जीवाणुओं तथा अन्य प्राणियों के द्वारा उत्पन्न एंजाइमों की सहायता से समय के साथ अपने आप अपघटित हो कर पर्यावरण का हिस्सा बन जाते हैं। लेकिन अजैव निम्नीकरण पदार्थ जैविक प्रक्रमों से अपघटित नहीं होते। अपनी संश्लिष्ट रचना के कारण उनके बंध दृढ़तापूर्वक आपस में जुड़े रहते हैं और एंजाइम उन पर अपना प्रभाव नहीं डाल पाते।

प्रश्न 2.
ऐसे दो तरीके सुझाइए जिनमें जैव निम्नीकरणीय पदार्थ पर्यावरण को प्रभावित करते हैं।
उत्तर-

  • जैव निम्नीकरणीय पदार्थ बड़ी मात्रा में पर्यावरण को प्रदूषित करते हैं। इनसे दुर्गंध और गंदगी फैलती है।
  • जैव निम्नीकरणीय पदार्थ तरह-तरह की बीमारियों को फैलाने के कारक बनते हैं। उनसे पर्यावरण में हानिकारक जीवाणु बढ़ते हैं।

प्रश्न 3.
ऐसे दो तरीके बताइए जिनमें अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ पर्यावरण को प्रभावित करते हैं।
उत्तर-

  1. अजैव निम्नीकरणीय पदार्थों का अपघटन नहीं हो पाता। वे उद्योगों में तरह-तरह के रासायनिक पदार्थों से तैयार हो कर बाद में मिट्टी में अति सूक्ष्म कणों के रूप में मिल कर पर्यावरण को क्षति पहुँचाते हैं।
  2. वे खाद्य श्रृंखला में मिलकर जैव आवर्धन करते हैं और मानवों को तरह-तरह की हानि पहुँचाते हैं।

प्रश्न 4.
पोषी स्तर क्या है ? एक आहार श्रृंखला का उदाहरण दीजिए तथा इसमें विभिन्न पोषी स्तर बनाइए।
उत्तर-
पोषी स्तर- आहार श्रृंखला में उत्पादक और उपभोक्ता का स्थान ग्रहण करने वाले जीव जीवमंडल को कोई निश्चित संरचना प्रदान करते हैं, जिसे पोषी स्तर कहते हैं। आहार श्रृंखला में उत्पादक का पहला स्थान होता है। यदि हम पौधों का सेवन करें तो श्रृंखला में केवल उत्पादक तथा उपभोक्ता स्तर होते हैं। मांसाहारियों की आहार श्रृंखला में अधिक उपभोक्ता होते हैं।
आहार श्रृंखला का उदाहरण-
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 15 हमारा पर्यावरण 1

प्रश्न 5.
पारितंत्र में अपमार्जकों की क्या भूमिका है ? ।
उत्तर-
पारितंत्र में अपमार्जक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जीवाणु मृतोपजीवी, कवक जैसे अति सूक्ष्म जीव मृत जैव अवशेषों का अपमार्जन करते हैं। ये मृत शरीरों का अपने भोजन के लिए उपयोग करते हैं। वे जटिल कार्बनिक पदार्थों को सरल पदार्थों में बदल देते हैं। फलों सब्जियों के छिलके, गले-सड़े फल, जैविक कचरा, गायभैसों का गोबर, पेड़-पौधों के गले सड़े भाग आदि अपमार्जकों के द्वारा विघटित कर दिए जाते हैं और वे आसानी से प्रकृति में पुनः मिल जाते हैं। अपमार्जक जटिल कार्बनिक पदार्थों को सरल अकार्बनिक पदार्थों में बदल देते हैं जो मिट्टी में मिलकर पौधों द्वारा पुन: उपयोग में लाए जाते हैं।

प्रश्न 6.
ओज़ोन क्या है तथा यह किसी पारितंत्र को किस प्रकार प्रभावित करती है ?
उत्तर-
ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं से बनी ओज़ोन का वायुमंडल के ऊपरी स्तर (स्ट्रैटोस्फीयर) में लगभग 16 किलोमीटर ऊपर एक आवरण है जो सूर्य से आने वाली पराबैंगनी विकिरणों से पृथ्वी की सुरक्षा करता है। पराबैंगनी विकिरण जीवों के लिए अत्यंत हानिकारक है। यह त्वचा कैंसर करती है। पृथ्वी के चारों ओर ओजोन परत समाप्त हो जाने से सूर्य के प्रकाश से आने वाली पराबैंगनी किरणें पृथ्वी पर बिना रोक-टोक पहुँचने लगेंगी और पारितंत्र को दुष्प्रभावित करने लगेंगी। सन् 1980 से वायुमंडल में ओज़ोन की मात्रा में तेज़ी से गिरावट आने लगी है।

ओज़ोन पारितंत्र को निम्नलिखित आधारों पर भी प्रभावित करती है –

  • तापमान में परिवर्तन के कारण धरती पर वर्षा में कमी।
  • चावल जैसी फ़सलों पर प्रभाव।
  • जलीय जीवों और पदार्थों पर प्रभाव।
  • मानवों में प्रतिरोध क्षमता की कमी तथा त्वचा कैंसर में वृद्धि ।
  • पारिस्थितिक असंतुलन उत्पन्न होने की संभावना
  • सूक्ष्मजीवों में उत्परिवर्तन और उनकी मृत्यु का कारण।

प्रश्न 7.
आप कचरा निपटान की समस्या कम करने में क्या योगदान कर सकते हैं ? किन्हीं दो तरीकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
कचरा व्यक्ति और समाज दोनों के लिए अति हानिकारक है क्योंकि इससे केवल गंदगी ही नहीं फैलती बल्कि यह अनेक प्रकार की बीमारियों का कारण भी बनता है। इसे निपटाने के लिए निम्नलिखित दो तरीकों को अपनाया जा सकता है-

  • पुन: चक्रण-कचरे में से कागज़, प्लास्टिक, धातुएँ, चीथड़े आदि चुन कर अलग करके उनका पुन: चक्रण किया जाना चाहिए। पुराने कागज़ और कपड़े के पुनः चक्रण से पेड़ों को कटने से बचाया जा सकता है। प्लास्टिक का बार-बार उपयोग किया जा सकता है।
  • मिट्टी में दबाना-जैव निम्नीकरण पदार्थों को मिट्टी में दबा कर कचरे का निपटान किया जा सकता है। उससे खाद प्राप्त कर खेतों में प्रयुक्त किया जा सकता है।

PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 14 ऊर्जा के स्रोत

Punjab State Board PSEB 10th Class Science Book Solutions Chapter 14 ऊर्जा के स्रोत Textbook Exercise Questions, and Answers.

PSEB Solutions for Class 10 Science Chapter 14 ऊर्जा के स्रोत

PSEB 10th Class Science Guide ऊर्जा के स्रोत Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
गर्म जल प्राप्त करने के लिए हम सौर ऊर्जा जल तापक का उपयोग किस दिन नहीं कर सकते
(a) धूप वाले दिन
(b) बादलों वाले दिन
(c) गरम दिन
(d) पवनों (वायु) वाले दिन।
उत्तर-
(b) बादलों वाले दिन ।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित में से कौन जैवमात्रा ऊर्जा स्रोत का उदाहरण नहीं है
(a) लकड़ी
(b) गोबर गैस
(c) नाभिकीय ऊर्जा
(d) कोयला।
उत्तर-
(c) नाभिकीय ऊर्जा ।

प्रश्न 3.
जितने ऊर्जा स्रोत हम उपयोग में लाते हैं उनमें से अधिकांश सौर ऊर्जा को निरूपित करते हैं। निम्नलिखित में से कौन-सा ऊर्जा स्रोत अंततः सौर ऊर्जा से व्युत्पन्न नहीं है। (a) भूतापीय ऊर्जा
(b) पवन ऊर्जा
(c) नाभिकीय ऊर्जा
(d) जैवमात्रा।
उत्तर-
(a) भूतापीय ऊर्जा।

प्रश्न 4.
ऊर्जा स्रोत के रूप में जीवाश्मी ईंधनों तथा सूर्य की तुलना कीजिए और उनमें अंतर लिखिए।
उत्तर-

जीवाश्मी ईंधन सूर्
(1) यह ऊर्जा का अनवीकरणीय स्रोत है। (1) यह ऊर्जा का विकरणीय स्रोत है।
(2) यह बहुत अधिक प्रदूषण फैलाता है। (2) यह प्रदूषण नहीं फैलाता है।
(3) रासायनिक क्रियाओं से ऊष्मा और प्रकाश उत्पन्न प्रकाश उत्पन्न करता है। (3) परमाणु संलयन से बहुत अधिक मात्रा में ऊष्मा और करता है।
(4) निरंतर ऊर्जा प्रदान नहीं कर सकता है। (4) निरंतर ऊर्जा प्रदान करता है।
(5) मानव मन चाहे ढंग से उस पर नियंत्रण कर भी अवस्था में नियंत्रण नहीं कर सकता। (5) मनचाहे ढंग से उसमें ऊर्जा उत्पत्ति पर मानव किसी सकता है।

प्रश्न 5.
जैवमात्रा तथा ऊर्जा स्रोत के रूप में जल वैद्युत् की तुलना कीजिए और उनमें अंतर लिखिए ।
उत्तर-
जैवमात्रा तथा जल विद्युत् की तुलना –

जैवमात्रा जल वैद्युत्
(1) जैव-मात्रा केवल सीमित मात्रा में ही ऊर्जा प्रदान कर सकती है। (1) जल वैद्युत् ऊर्जा का एक बड़ा स्रोत है।
(2) जैव-मात्रा से ऊर्जा प्राप्त करने के प्रक्रम में प्रदूषण फैलता है। (2) जल वैद्युत् ऊर्जा का स्वच्छ स्रोत है।
(3) जैव-मात्रा से प्राप्त ऊर्जा को सीमित स्थान में ही प्रयोग किया जा सकता है। (3) जल वैद्युत् ऊर्जा को पारेषण लाइन की सहायता से कहीं भी ले जाया जा सकता है।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित से ऊर्जा निष्कर्षित करने की सीमाएँ लिखिए
(a) पवनें
(b) तरंगें
(c) ज्वार-भाटा।
उत्तर-
(a) पवन ऊर्जा निष्कर्षण की सीमाएँ

  • पवन ऊर्जा निष्कर्षण के लिए पवन ऊर्जा फार्म की स्थापना हेतु बहुत अधिक बड़े स्थान की आवश्यकता होती है। एक MW के जनित्र के लिए 2 हेक्टेयर स्थान की आवश्यकता होती है।
  • पवन ऊर्जा तभी उत्पन्न हो सकती है जब पवन का न्यूनतम वेग 15 km/h हो।
  • हवा की तेज़ गति के कारण टूट-फूट और नुकसान की संभावनाएं अधिक होती हैं।
  • सारा वर्ष आवश्यक पवनें नहीं चलतीं।

(b) तरंगों से ऊर्जा निष्कर्षण की सीमाएँ-समुद्रीय जल तरंगों के वेग के कारण उनमें ऊर्जा समाहित होती है जिसके कारण निष्कर्षण के लिए निम्न सीमाएँ हैं

  • तरंग ऊर्जा तभी प्राप्त की जा सकती है जब तरंगें बहुत प्रबल हों।
  • इसके समय और स्थिति बहुत बड़ी परिसीमाएं हैं।

(c) ज्वार भाटा ऊर्जा निष्कर्षण की सीमाएँ-ज्वारभाटा के कारण सागर की लहरों का चढ़ना और गिरना घूर्णन गति करती पृथ्वी पर मुख्य रूप से चंद्रमा के गुरुत्वीय आर्कषण के कारण होता है। तरंगों की ऊंचाई और बांध बनाने की स्थिति इसकी प्रमुख परिसीमाएं हैं।

प्रश्न 7.
ऊर्जा स्रोतों का वर्गीकरण निम्नलिखित वर्गों में किस आधार पर करेंगे ?
(a) नवीकरणीय तथा अनवीकरणीय
(b) समाप्य तथा अक्षय क्या
(a) तथा (b) के विकल्प समान हैं ?
उत्तर-
(a) नवीकरणीय तथा अनवीकरणीय स्रोत

  • नवीकरणीय स्त्रोत-ये स्रोत ऊर्जा की उत्पत्ति तब तक करने की योग्यता रखते हैं जब तक हमारा सौर मंडल विद्यमान है। पवन ऊर्जा, जल ऊर्जा, सागर की तरंगें, परमाणु ऊर्जा आदि नवीकरणीय स्रोत हैं।
  • अनवीकरणीय स्रोत-ऊर्जा के ये स्रोत लाखों वर्ष पहले विशिष्ट स्थितियों में बने थे। एक बार उपयोग कर लिए जाने के बाद इन्हें बहुत लंबे समय तक पुन: उपयोग में नहीं लाया जा सकता। जीवाश्मी ईंधन जैसे कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैसें ऊर्जा के अनवीकरणीय स्रोत हैं।

(b) समाप्य तथा अक्षय (असमाप्य)-ऊर्जा के समाप्य स्रोत अनवीकरणीय हैं जबकि अक्षय (असमाप्य) स्रोत अनवीकरणीय हैं।

प्रश्न 8.
ऊर्जा के आदर्श स्रोत में क्या गुण होते हैं ?
उत्तर-

  • पर्याप्त मात्रा में ऊर्जा प्रदान करने की क्षमता होनी चाहिए।
  • सरलता से प्रयोग करने की सुविधा से संपन्न होनी चाहिए।
  • समान दर से ऊर्जा की उत्पत्ति होनी चाहिए।
  • सरल भंडारण के योग्य होनी चाहिए।
  • परिवहन की योग्यता से युक्त होनी चाहिए।
  • यह सस्ता और सुलभ होना चाहिए।

प्रश्न 9.
सौर कुक्कर का उपयोग करने के क्या लाभ तथा हानियां हैं? क्या ऐसे भी क्षेत्र हैं जहाँ सौर कुक्करों की सीमित उपयोगिता है ?
उत्तर-
सौर कुक्कर के लाभ-

  • ईंधन का कोई खर्च नहीं होता। ईंधन और विद्युत् की बचत है।
  • पूर्ण रूप से प्रदूषण रहित है। धीमी गति से खाना पकने के कारण भोजन के पोषक तत्व नष्ट नहीं होते।
  • किसी प्रकार की गंदगी नहीं फैलती।
  • खाना पकाते समय निरंतर देखभाल की आवश्यकता नहीं पड़ती।

सौर कुक्कर की हानियां (सीमाएँ)

  • बहुत अधिक तापमान उत्पन्न नहीं कर सकता।
  • रात के समय काम में नहीं लाया जा सकता।
  • बादलों वाले दिन काम नहीं कर सकता।
  • यह 100°C – 140°C तापमान प्राप्त करने के लिए 2-3 घंटे ले लेता है।

पृथ्वी पर कुछ ऐसे क्षेत्र भी हैं जहाँ सौर कुक्कर का उपयोग अत्यंत सीमित है। उदाहरण के लिए, चारों ओर पर्वतों से घिरी हुई घाटी जहां सूर्य की धूप दिन में बहुत कम समय के लिए मिलती है। पहाड़ी ढलानों पर प्रति एकांक क्षेत्रफल पर आपतित सौर ऊर्जा की मात्रा भी कम होती है। इसके अतिरिक्त भूमध्य रेखा से सुदूर क्षेत्रों में सूर्य की किरणें पृथ्वी की सतह पर लंबवत् आपतित नहीं होती। अतः ऐसे क्षेत्रों पर सौर कुक्कर का प्रयोग करने के लिए पर्याप्त सौर ऊर्जा नहीं मिल पाती है।

प्रश्न 10.
ऊर्जा की बढ़ती मांग के पर्यावरणीय परिणाम क्या हैं ? ऊर्जा की खपत को कम करने के उपाय लिखिए।
उत्तर-
ऊर्जा की मांग तो जनसंख्या वृद्धि के साथ निरंतर बढ़ती ही जाएगी। ऊर्जा किसी भी प्रकार की हो उसका पर्यावरण पर निश्चित रूप से कुप्रभाव पड़ेगा। ऊर्जा की खपत कम नहीं हो सकती। उद्योग-धंधे, वाहन, दैनिक आवश्यकताएं आदि सब के लिए ऊर्जा की आवश्यकता तो रहेगी। यह भिन्न बात है कि वह प्रदूषण फैलाएगा या पर्यावरण में परिवर्तन उत्पन्न करेगा।

ऊर्जा की बढ़ती मांग के कारण जीवाश्म ईंधन पृथ्वी की परतों के नीचे समाप्त होने के कगार पर पहुँच गया है। लगभग 200 वर्ष के बाद यह पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। जल विद्युत् ऊर्जा के लिए बड़े-बड़े बांध बनाए गए हैं जिस कारण पर्यावरण पर गहरा प्रभाव पड़ा है। इसलिए ऊर्जा के विभिन्न नए स्रोत खोजते समय ध्यान रखा जाना चाहिए कि उस ईंधन का कैलोरीमान अधिक हो, सरलता से प्राप्त हो, दाम भी बहुत अधिक न हो तथा स्रोत का पर्यावरण पर कुप्रभाव नहीं पड़ना चाहिए।

ऊर्जा की खपत को कम करने के लिए उपाय- इसके लिए निम्नलिखित उपाय उपयोग में लाए जा सकते हैं-

  1. घरों में विद्युत् उपकरणों का अनावश्यक प्रयोग में न किया जाए।
  2. पंखे, कूलर, ए० सी० आदि का प्रयोग करते समय परिवार के सभी सदस्य एक ही कमरे में रहने का प्रयास करें।
  3. बेहतर सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को विकसित किया जाए तथा निजी गाड़ियों के प्रयोग को हतोत्साहित किया जाए।
  4. स्ट्रीट लाइट को दिन में बंद किए जाने की समुचित व्यवस्था की जाएं।
  5. पारंपरिक उत्सवों (दीपावली, शादी समारोह आदि) पर ऊर्जा की बर्बादी पर रोक लगाई जाए।

Science Guide for Class 10 PSEB ऊर्जा के स्रोत InText Questions and Answers

प्रश्न 1.
ऊर्जा का उत्तम स्रोत किसे कहते हैं ?
उत्तर-
ऊर्जा का उत्तम स्रोत वह है जिसमें निम्नलिखित विशेषताएं हैं

  • जिसका प्रति एकांक द्रव्यमान अधिक कार्य करे।
  • जिसका भंडारण और परिवहन सुगम हो।
  • सुगमता से प्राप्त हो जाता हो।
  • सस्ता हो।

प्रश्न 2.
उत्तम ईंधन किसे कहते हैं ?
उत्तर-
उत्तम ईंधन-वह ईंधन जिसमें निम्नलिखित विशेषताएं हो, वह उत्तम ईंधन कहलाता है। उत्तम ईंधन की विशेषताएँ-

  • इसका ऊष्मीय मान (कैलोरीमान) अधिक होना चाहिए।
  • ईंधन का ज्वलन ताप उचित होना चाहिए।
  • ईंधन के दहन की दर संतुलित होनी चाहिए अर्थात् न अधिक हो और न कम।
  • ईंधन में अज्वलनशील पदार्थों की मात्रा जितनी कम हो उतना अच्छा होता है।
  • ईंधन के दहन के पश्चात् विषैले पदार्थों का उत्पादन कम-से-कम होना चाहिए।
  • ईंधन की उपलब्धता पर्याप्त तथा सुलभ होनी चाहिए।
  • ईंधन कम मूल्य पर प्राप्त हो सके।
  • ईंधन का आसानी से भंडारण तथा परिवहन सुरक्षित होना चाहिए।

प्रश्न 3.
यदि आप अपने भोजन को गर्म करने के लिए किसी भी ऊर्जा स्रोत का उपयोग कर सकते हैं तो आप किस का उपयोग करेंगे और क्यों ?
उत्तर-
हम अपना भोजन गर्म करने के लिए LPG (द्रवित पेट्रोलियम गैस) का उपयोग करना पसंद करेंगे, क्योंकि इस का ज्वलनांक अधिक नहीं है, कैलोरीमान अधिक है, दहन संतुलित दर से होता है तथा दहन के बाद विषैले पदार्थों को उत्पन्न नहीं करती।

प्रश्न 4.
जीवाश्मी ईंधन की क्या हानियाँ हैं ?
उत्तर-
जीवाश्मी ईंधन की हानियाँ-जीवाश्मी ईंधन से होने वाली प्रमुख हानियाँ निम्नलिखित हैं –

  • पृथ्वी पर जीवाश्मी ईंधन का सीमित भंडार मौजूद है जो कुछ ही समय में समाप्त हो जाएगा।
  • जीवाश्मी ईंधन, जलाने पर विषैली गैसें मुक्त कर वायु प्रदूषण फैलाते हैं।
  • जीवाश्मी ईंधन को जलाने पर उत्सर्जित गैसें कार्बन डाइऑक्साइड तथा कार्बन मोनोऑक्साइड आदि ग्रीन हाऊस प्रभाव उत्पन्न करती हैं जिसके फलस्वरूप पृथ्वी का तापमान बढ़ता चला जा रहा है।
  • जीवाश्मी ईंधन के दहन से उत्सर्जित गैसें अम्लीय वर्षा का भी कारण बनती हैं।

प्रश्न 5.
हम ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों की ओर क्यों ध्यान दे रहे हैं ?
उत्तर-
वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर ध्यान देने के कारण-हम अपनी दैनिक जीवन के विभिन्न कार्यों जैसे खाना पकाना, विद्युत् उत्पादन, औद्योगिक संयंत्रों तथा वाहन चलाने आदि के लिए जीवाश्मी ईंधनों (कोयला, पेट्रोलियम)पर निर्भर हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि जिस दर से हम जीवाश्म ईंधन का उपयोग कर रहे हैं अतिशीघ्र ही जीवाश्म ईंधन का भंडार समाप्त हो जाएगा। वैकल्पिक स्रोत जल से उत्पादित विद्युत् की भी अपनी सीमाएँ हैं। अत: जल से सभी ऊर्जा की आवश्यकताओं को पूरा करना असंभव है। इसलिए शीघ्र ही भयंकर ऊर्जा संकट होने की आशंका है। इस बात को ध्यान में रखते हुए ऊर्जा की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों की ओर ध्यान दिया जा रहा है।

प्रश्न 6.
हमारी सुविधा के लिए पवनों तथा जल ऊर्जा के पारंपरिक उपयोग में किस प्रकार के सुधार किए गए हैं ?
उत्तर-
पवनों तथा जल ऊर्जा का लंबे समय से प्रयोग मानव के द्वारा पारंपरिक रूप में किया जाता है। वर्तमान समय में इनमें कुछ सुधार किए गए हैं ताकि इनसे ऊर्जा की प्राप्ति सरलता, सहजता और सुगमता से हो।
1. पवन ऊर्जा-प्राचीन काल में पवन ऊर्जा से पवन चक्कियां चला कर कुओं से जल खींचने का काम होता था लेकिन अब पवन ऊर्जा का उपयोग विद्युत् उत्पन्न करने में किया जाने लगा है। विद्युत् उत्पन्न करने के लिए अनेक पवन चक्कियों को समुद्रीय तट के समीप विशाल क्षेत्र में लगाया जाता है। ऐसे क्षेत्र को पवन ऊर्जा फार्म कहते हैं।

2. जल ऊर्जा-प्राचीन काल में जल ऊर्जा का उपयोग जल परिवहन में किया जाता है। जल को विद्युत् ऊर्जा के रूप में प्रयोग करने के लिए पहाड़ों की ढलानों पर बांध बनाकर जल की स्थितिज ऊर्जा का उपयोग किया जाता है। आज जल विद्युत् संयंत्रों को बांधों से संबंधित किया गया है।

जल विद्युत् उत्पन्न करने के लिए नदियों के बहाव को रोक कर बड़ी-बड़ी कृत्रिम झीलों में जल इकट्ठा कर लिया गया है। इस प्रक्रिया में जल की गतिज ऊर्जा को स्थितिज ऊर्जा में रूपांतरित कर लिया जाता है। बांध के ऊपरी भाग से पाइपों द्वारा जल को बांध के आधार पर स्थापित टरबाइन के ब्लेडों पर गिराया जाता है जो विद्युत् ऊर्जा को उत्पन्न करता है।

प्रश्न 7.
सौर कुक्कर के लिए कौन-सा दर्पण-अवतल, उत्तल अथवा समतल-सर्वाधिक उपयुक्त होता है? क्यों ?
उत्तर-
सौर कुक्कर में अवतल दर्पण सर्वाधिक उपयुक्त होता है क्योंकि यह प्रकाश की सभी किरणों को वांछित स्थान की ओर परावर्तित कर केंद्रित करता है जिससे सौर कुक्कर का तापमान बढ़ जाता है।

प्रश्न 8.
महासागरों से प्राप्त हो सकने वाली ऊर्जाओं की क्या सीमाएँ हैं ?
उत्तर-
महासागरों से अपार ऊर्जा की प्राप्ति हो सकती है परंतु सदैव ऐसा संभव नहीं हो सकता क्योंकि महासागरों से ऊर्जा रूपांतरण की तीन विधियों-ज्वारीय ऊर्जा, तरंग ऊर्जा और सागरीय तापीय ऊर्जा की अपनीअपनी सीमाएं हैं।
1. ज्वारीय ऊर्जा-ज्वारीय ऊर्जा का दोहन, सागर के किसी संकीर्ण क्षेत्र पर बांध बना कर किया जाता है। बांध पर स्थापित टरबाइन ज्वारीय ऊर्जा को विद्युत् ऊर्जा में रूपांतरित कर देता है। सागर के संकीर्ण क्षेत्र पर बांध निर्मित करके ऊर्जा की उचित स्थितियां सरलता से उपलब्ध नहीं होती।

2. तरंग ऊर्जा-तरंग ऊर्जा का व्यावहारिक उपयोग केवल वहीं हो सकता है जहां तरंगें अति प्रबल हों। विश्वभर में ऐसे स्थान बहुत कम हैं जहां सागर के तटों पर तरंगें इतनी प्रबलता से टकराती हों कि उनकी ऊर्जा को विद्युत् ऊर्जा में रूपांतरित किया जा सके।

3. सागरीय तापीय ऊर्जा-सागरीय तापीय ऊर्जा की प्राप्ति के लिए संयंत्र (OTEC) तभी कार्य कर सकता है जब महासागर के पृष्ठ पर जल का ताप तथा 2 कि० मी० तक की गहराई पर जल के ताप में 20°C का अंतर हो। इस प्रकार विद्युत् ऊर्जा प्राप्त हो सकती है परंतु यह प्रणाली बहुत महंगी है।

प्रश्न 9.
भूतापीय ऊर्जा क्या होती है ?
उत्तर-
भूपर्पटी की गहराइयों में भौमिकीय परिवर्तनों के कारण तप्त क्षेत्रों में पिघलती हुई चट्टानें ऊपर की ओर धकेल दी जाती हैं। जब भूमिगत जल इन तप्त स्थलों के संपर्क में आता है तो भाप उत्पन्न होती है। कभी-कभी तप्त जल को पृथ्वी को पृष्ठ से बाहर निकलने का निकास मार्ग मिल जाता है जिसे गर्म-चश्मा या ऊष्ण स्रोत कहते हैं। कभी-कभी भाप चट्टानों के बीच रुक जाती हैं और इसका दाब बहुत अधिक हो जाता है। पाइप डालकर भाप को बाहर निकाल लिया जाता है और उसकी सहायता से विद्युत् जनित्रों के द्वारा विद्युत् उत्पन्न की जाती है। अतः भौमिकीय परिवर्तनों के कारण भूपपर्टी की गहराइयों से तप्त स्थल और भूमिगत जल से बनी भाप उत्पन्न ऊर्जा को भूतापीय ऊर्जा कहते हैं।

प्रश्न 10.
नाभिकीय ऊर्जा का क्या महत्त्व है ?
उत्तर-
नाभिकीय ऊर्जा- भारी नाभिकीय परमाणु (यूरोनियम, प्लूटोनियम, थोरियम) के नाभिक पर निम्न ऊर्जा न्यूट्रॉन से बमबारी करके हल्के नाभिकों में तोड़ा जा सकता है जिससे विशाल मात्रा में ऊर्जा मुक्त होती है। यूरोनियम के एक परमाणु के विखंडन से जो ऊर्जा मुक्त होता है वह कोयले के किसी कार्बन परमाणु के दहन से उत्पन्न ऊर्जा की तुलना में एक करोड़ गुना अधिक होती है। अतः परम्परागत ऊर्जा स्रोतों की अपेक्षा नाभिकीय विखंडन से अत्यधिक ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है। अतः विकसित और विकासशील देश नाभिकीय ऊर्जा से विद्युत् ऊर्जा का रूपांतरण कर रहे हैं।

इससे निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं-

  • अधिक ऊर्जा की प्राप्ति के लिए कम ईंधन की आवश्यकता पड़ती है।
  • यह ऊर्जा का विश्वसनीय स्रोत है और लंबे समय तक विद्युत् ऊर्जा प्रदान करने में सामर्थ्य है।
  • अन्य स्रोतों की अपेक्षा कम खर्च पर ऊर्जा प्रदान करता है।

प्रश्न 11.
क्या कोई ऊर्जा स्रोत प्रदूषण मुक्त हो सकता है ? क्यों अथवा क्यों नहीं?
उत्तर-
नहीं, कोई भी ऊर्जा स्रोत पूर्ण रूप से प्रदूषण मुक्त नहीं हो सकता। कुछ स्रोत ऊर्जा उत्पन्न करते समय प्रदूषण उत्पन्न करते हैं और कुछ ऊर्जा स्रोतों के निर्माण में प्रदूषण होता है। उदाहरण के लिए सौर-सैल को प्रदूषण मुक्त ऊर्जा स्रोत कहा जाता है, परंतु इस युक्ति के निर्माण समय प्रदूषण होता है जिससे पर्यावरण की क्षति होती है।

प्रश्न 12.
राकेट ईंधन के रूप में हाइड्रोजन का उपयोग किया जाता है। क्या आप इसे CNG की तुलना में अधिक स्वच्छ ईंधन मानते हैं? क्यों अथवा क्यों नहीं ?
उत्तर-
हाइड्रोजन निश्चित रूप से CNG की अपेक्षा स्वच्छ ईंधन है क्योंकि न तो इसका अपूर्ण दहन होता है और न ही हाइड्रोजन जल कर कोई हानिकारक गैस उत्पन्न करती है, जबकि CNG के द्वारा NO2 तथा SO2 जैसी ग्रीन हाऊस गैसें मुक्त होती हैं।

प्रश्न 13.
ऐसे दो ऊर्जा स्रोतों के नाम लिखिए जिन्हें आप नवीकरणीय मानते हैं। अपने चयन के लिए तर्क दीजिए।
उत्तर-
जैव-मात्रा तथा बहते हुए जल की ऊर्जा, ऊर्जा के दो नवीकरणीय स्रोत हैं चूँकि जैव-मात्रा (वनों से प्राप्त लकड़ी) को पुनः प्राप्त किया जा सकता है। अतः इसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत माना जा सकता है। बहते हुए जल की ऊर्जा भी वास्तव में सौर ऊर्जा का ही एक रूप है; अतः यह भी ऊर्जा का नवीकरणीय स्रोत है।

प्रश्न 14.
ऐसे दो ऊर्जा स्रोतों के नाम लिखिए जिन्हें आप समाप्य मानते हैं। अपने चयन के लिए तर्क दीजिए।
उत्तर-
कोयला तथा पेट्रोलियम, दोनों ऊर्जा के दो समाप्य स्रोत हैं। कोयला तथा पेट्रोलियम, दोनों के पृथ्वी पर उपलब्ध भंडार जल्दी ही समाप्त हो जाने वाले हैं तथा इन्हें कभी भी पुनः प्राप्त नहीं किया जा सकता; अतः ये दोनों ही ऊर्जा के समाप्य स्रोत हैं।

PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव

Punjab State Board PSEB 10th Class Science Book Solutions Chapter 13 विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव Textbook Exercise Questions, and Answers.

PSEB Solutions for Class 10 Science Chapter 13 विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव

PSEB 10th Class Science Guide विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव Textbook Questions and Answers
प्रश्न 1.
निम्नलिखित में से कौन किसी लंबे विद्युत् धारावाही तार के निकट चुंबकीय क्षेत्र का सही वर्णन करता है ?
(a) चुंबकीय क्षेत्र की क्षेत्र रेखाएँ तार के लंबवत् होती हैं।
(b) चुंबकीय क्षेत्र की क्षेत्र रेखाएँ तार के समांतर होती हैं।
(c) चुंबकीय क्षेत्र की क्षेत्र रेखाएँ अरीय होती हैं जिनका उद्भव तार से होता है।
(d) चुंबकीय क्षेत्र की संकेंद्री क्षेत्र रेखाओं का केंद्र तार होता है।
उत्तर-
(d) चुंबकीय क्षेत्र की संकेंद्री क्षेत्र रेखाओं का केंद्र तार होता है।

प्रश्न 2.
वैद्युत् चुंबकीय प्रेरण की परिघटना –
(a) किसी वस्तु को आवेशित करने की प्रक्रिया है।
(b) किसी कुंडली में विद्युत् धारा प्रवाहित होने के कारण चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करने की प्रक्रिया है।
(c) कुंडली तथा चुंबक के बीच आपेक्षिक गति के कारण कुंडली में प्रेरित विद्युत् धारा उत्पन्न करना है।
(d) किसी विद्युत् मोटर की कुंडली को घूर्णन कराने की प्रक्रिया है।
उत्तर-
(c) कुंडली तथा चुंबक के बीच आपेक्षिक गति के कारण कुंडली में प्रेरित विद्युत् धारा उत्पन्न करना है।

प्रश्न 3.
विद्युत् धारा उत्पन्न करने की युक्ति को कहते हैं
(a) जनित्र
(b) गैल्वेनोमीटर
(c) ऐमीटर
(d) मोटर।
उत्तर-
(a) जनित्र।

प्रश्न 4.
किसी ac जनित्र तथा dc जनित्र में एक मूलभूत अंतर यह है कि
(a) ac जनित्र में विद्युत् चुंबक होता है जबकि dc मोटर में स्थायी चुंबक होता है।
(b) dc जनित्र उच्च वोल्टता का जनन करता है।
(c) ac जनित्र उच्च वोल्टता का जनन करता है।
(d) ac जनित्र में सी वलय होते हैं जबकि de जनित्र में दिक्परिवर्तक होता है।
उत्तर-
(d) ac जनित्र में सी वलय होते हैं जबकि dc जनित्र में दिक्परिवर्तक होता है।

प्रश्न 5.
लघुपथन के समय परिपथ में विद्युत्धारा का मान
(a) बहुत कम हो जाता है।
(b) परिवर्तित नहीं होता।
(c) बहुत अधिक बढ़ जाता है।
(d) निरंतर परिवर्तित होता है।
उत्तर-
(c) बहुत अधिक बढ़ जाता है।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित प्रकथनों में कौन-सा सही है तथा कौन-सा गलत है ? इसे प्रकथन के सामने अंकित कीजिए
(a) विद्युत् मोटर यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत् ऊर्जा में रूपांतरित करता है।
(b) विद्युत् जनित्र वैद्युत् चुंबकीय प्रेरण के सिद्धांत पर कार्य करता है।
(c) किसी लंबी वृत्ताकार विद्युत् धारावाही कुंडली के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र समांतर सीधी क्षेत्र रेखाएँ होता है।
(d) हरे विद्युत्रोधन वाला तार प्रायः विद्युन्मय तार होता है।
उत्तर-
(a) गलत।
(b) सही।
(c) सही।
(d) गलत।

प्रश्न 7.
चुंबकीय क्षेत्र के तीन स्रोतों की सूची बनाइए।
उत्तर-
चुंबकीय क्षेत्र के स्रोत-चुंबकीय क्षेत्र के निम्नलिखित स्रोत हैं
(i) स्थायी चुंबक
(ii) विद्युत् चुंबक
(iii) पृथ्वी चुंबक
(iv) गतिमान आवेश।

प्रश्न 8.
परिनालिका चुंबक की भांति कैसे व्यवहार करती है ? क्या आप किसी छड़ चुंबक की सहायता से किसी विद्युत् धारावाही परिनालिका के उत्तर ध्रुव तथा दक्षिण ध्रुव का निर्धारण कर सकते हैं ?
उत्तर-
धारावाही परिनालिका तथा छड़ चुंबक में समानताएँ-

  • छड़ चुंबक तथा धारावाही परिनालिका. दोनों को स्वतंत्रतापूर्वक लटकाने पर दोनों के अक्ष उत्तर-दक्षिण दिशा में ठहरते हैं।
  • छड़ चुंबक तथा धारावाही परिनालिका दोनों समान ध्रुवों को प्रतिकर्षित और असमान ध्रुवों को आकर्षित करते हैं।
  • छड़ चुंबक तथा धारावाही परिनालिका दोनों चुंबकीय पदार्थों (जैसे लोहा, कोबाल्ट, तथा निक्कल) को आकर्षित करते हैं।
  • छड़ चुंबक तथा धारावाही परिनालिका दोनों के निकट दिक्सूचक सूई लाने पर सूई विक्षेपित हो जाती है।
  • स्वतंत्रतापूर्वक लटक रहे चुंबक या धारावाही परिनालिका को धारावाही तार के समीप लाने पर दोनों विक्षेपित हो जाते हैं।

छड़ चुंबक द्वारा धारावाही परिनालिका के ध्रुव निर्धारण करना

  1. एक स्वतंत्रतापूर्वक क्षितिज अवस्था में लटक रही धारावाही परिनालिका के एक सिरे के निकट छड़ चुंबक का उत्तरी ध्रुव लाएँ। यदि धारावाही परिनालिका आकर्षित होती है तो यह सिरा परिनालिका का दक्षिणी ध्रुव होगा तथा विपरीत सिरा उत्तरी ध्रुव होगा।
  2. यदि छड़ चुंबक का उत्तरी ध्रुव परिनालिका के समीप लाने पर परिनालिका विक्षेपित हो जाती है तो छड़ चुंबक के उत्तरी ध्रुव के सामने वाला परिनालिका का सिरा उत्तरी ध्रुव और विपरीत सिरा दक्षिणी ध्रुव होगा।

प्रश्न 9.
किसी चुंबकीय क्षेत्र में स्थित विद्युत् धारावाही चालक पर आरोपित बल कब अधिकतम होता है?
उत्तर-
किसी चुंबकीय क्षेत्र में स्थित विद्युत् धारावाही चालक पर आरोपित बल तब अधिकतम होता है जब विद्युत् धारा की दिशा चुंबकीय क्षेत्र की दिशा के लंबवत् होती है।

प्रश्न 10.
मान लीजिए आप किसी चैंबर में अपनी पीठ को किसी दीवार से लगाकर बैठे हैं। कोई इलेक्ट्रॉन पुंज आपके पीछे की दीवार के सामने वाली दीवार की ओर क्षैतिजतः गमन करते हुए किसी प्रबल चुंबकीय क्षेत्र द्वारा आपके दाईं ओर विक्षेपित हो जाता है। चुंबकीय क्षेत्र की दिशा क्या है?
उत्तर-
फ्लेमिंग के वामहस्त नियम के अनुसार आरोपित बल की दिशा चुंबकीय क्षेत्र तथा विद्युत् धारा दोनों की दिशाओं के लंबवत् होती है। विद्युत् धारा की दिशा इलेक्ट्रॉनों की गति की दिशा के विपरीत होती है, इसलिए चुंबकीय क्षेत्र की दिशा नीचे की ओर होगी।

प्रश्न 11.
विद्युत् मोटर का नामांकित आरेख खींचिए। इसका सिद्धांत तथा कार्यविधि स्पष्ट कीजिए। विद्युत् मोटर में विभक्त वलय का क्या महत्त्व है ?
अथवा अंकित चित्र की सहायता से विद्युत् मोटर का सिद्धांत, रचना और कार्यविधि समझाओ।
अथवा
विद्युत् मोटर का सिद्धांत क्या है ? नामांकित चित्र बनाकर इसकी बनावट स्पष्ट करें। कार्यविधि का संक्षेप वर्णन करो। दैनिक जीवन में इसके दो उपयोग लिखो।
उत्तर-
विद्युत् मोटर– विद्युत् मोटर एक ऐसा यंत्र है जो विद्युत् ऊर्जा (विद्युत् धारा) को यांत्रिक ऊर्जा (गति) में परिवर्तित कर देता है। विद्युत् मोटर का दैनिक जीवन में प्रयोग बाल सुखाने वाला यंत्र (ड्रॉयर), पंखे, पानी का पंप आदि से लेकर कई प्रकार के वाहनों और उद्योगों में किया जाता है।
सिद्धांत- जब किसी धारा वाहक कुंडली को चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है तो इसकी कुंडली की भुजाओं पर वाहक बल क्रिया करता है जो कुंडली को घुमाने का प्रयत्न करता है।

बनावट-विद्युत् मोटर के निम्नलिखित भाग हैं –
1. आर्मेचर कुंडली-ABCD आर्मेचर कुंडली है। यह एक नर्म लोहे की छड़ के गिर्द लपेटी गई कुंडली है जो अपने अक्ष के गिर्द घूमने के लिए स्वतंत्र होती है।

2. दिक् परिवर्तक-दिक् परिवर्तक कुंडली, विभक्त वलयों S1 और S2 भागों में विभक्त होती है। कुंडली के सिरे इन विभक्त वलयों S1 और S2 से जुड़े होते हैं।

3. हॉर्स-शू चुंबक- कुंडली को हॉर्स-शू चुंबक के शक्तिशाली ध्रुवों के बीच रखा जाता है।

4. कार्बन ब्रुश-कार्बन ब्रुशों B1 तथा B2 का जोड़ा विभक्त वलयों को दबाकर रखता है । d.c. का एक स्रोत इन कार्बन ब्रुशों से जुड़ा होता है।
कार्य विधि-मान लो कुंडली ABCD का तल क्षैतिजीय है तथा विभक्त वलय S1 और S2 ब्रुश B1 और B,sub>2 को छू रहे हैं, जैसा कि चित्र में दर्शाया गया है। धारा अघड़ीवत् दिशा या (घड़ी की दिशा से उल्ट) में प्रवाहित की जाती है।

फ्लेमिंग के बाएं हाथ नियम के अनुसार भुजा AB बाहर की तरफ कागज़ के तल पर लंबात्मक दिशा में एक बल F महसूस करती है। भुजा DC अंदर की तरफ कागज के तल के समानांतर बल F महसूस करती है।CB और AD भुजाएं क्योंकि चुंबकीय क्षेत्र के समानांतर हैं, इसलिए कोई बल महसूस नहीं करतीं। भुजा AB और CD पर क्रिया कर रहे बल बराबर परंतु विलोम दिशायी हैं जो विभिन्न बिंदुओं पर क्रिया करके एक बल युग्म बनाते हैं जिससे कुंडली |

दिक् परिवर्तक घड़ीवत दिशा में घूमने लगती है। जब कुंडली कागज़ के तल के लंबात्मक ऊर्ध्वाधर दिशा में आ जाती है तथा भुजा AB ऊपर और CD नीचे हो जाती है तो बल युग्म शून्य हो जाता है परंतु जड़त्व के कारण कुंडली घूमती रहती है। विभक्त वलय S1 ब्रुश B2 के | तथा विभक्त वलय S2 ब्रुश B1 के संपर्क में आ जाता है।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव 1

विभक्त वलय अपनी स्थिति बदलते हैं न कि ब्रुश B1 और B2 फिर जब विद्युत् धारा कुंडली में दिशा ABCD में गुज़रती है तो कुंडली की भुजाओं पर क्रिया करके बल उस दिशा में बल युग्म बनाता है। इसके परिणामस्वरूप कुंडली उसी दिशा में निरंतर घूमती रहती है।
इस तरह मोटर की कुंडली के अक्ष पर यदि कोई पहिया लगा दिया जाये तो यह पहिया अनेक मशीनों को चला सकता है। विद्युत् धारा के उत्क्रमित होने पर दोनों भुजाओं पर आरोपित बलों की दिशाएं भी उत्क्रमित हो जाती हैं। कुंडली की जो भुजा पहले नीचे धकेली गई थी वह अब ऊपर की ओर धकेली जाती है और दूसरी ऊपर जाने वाली भुजा नीचे धकेल दी जाती है। प्रत्येक आधे घूर्णन के बाद यह क्रम दोहराया जाता है।

प्रश्न 12.
ऐसी कुछ युक्तियों के नाम लिखिए जिनमें विद्युत् मोटर उपयोग किए जाते हैं ?
उत्तर-
विद्युत् मोटर का उपयोग विद्युत् पंखों, रेफ्रिजरेटरों, विद्युत् मिश्रकों, वाशिंग मशीनों, कंप्यूटरों, MP 3 प्लेयरों, जल पंप, गेहूँ पीसने वाली मशीन आदि में किया जाता है।

प्रश्न 13.
कोई विद्युत्रोधी ताँबे की तार की कुंडली किसी गैल्वेनोमीटर से संयोजित है। क्या होगा यदि कोई छड़ चुंबक
(i) कुंडली में धकेला जाता है ?
(ii) कुंडली के भीतर से बाहर खींचा जाता है ?
(iii) कुंडली के भीतर स्थिर रखा जाता है ?
उत्तर-
(i) जैसे ही छड़ चुंबक, कुंडली के भीतर धकेला जाता है वैसे ही गैल्वनोमीटर की सूई में क्षणिक विक्षेप उत्पन्न होता है। यह कुंडली में विद्युत् धारा की उपस्थिति का संकेत देता है।
(ii) जब चुंबक को कुंडली के भीतर से बाहर की ओर खींचा जाता है तो सूई में क्षणिक विक्षेप होता है परंतु विपरीत दिशा में होता है।
(iii) यदि चुंबक को कुंडली के भीतर स्थिर रखा जाता है तो कुंडली में कोई विद्युत् धारा उत्पन्न नहीं होती। अर्थात् विक्षेप शून्य हो जाता है।

प्रश्न 14.
दो वृत्ताकार कुंडली A तथा B एक-दूसरे के निकट स्थित हैं। यदि कुंडली A में विद्युत् धारा में कोई परिवर्तन करें, तो क्या कुंडली B में कोई विद्युत् धारा प्रेरित होगी ? कारण लिखिए।
उत्तर-
हाँ। जब कुंडली A में से प्रवाहित विद्युत् धारा में परिवर्तन किया जाता है तो कुंडली B में विद्युत् धारा प्रेरित होगी। कुंडली A में विद्युत् धारा में परिवर्तन के कारण इसकी चुंबकीय बल रेखाएं जो कुंडली B के साथ संबंधित हैं बदल जाती हैं और यह कुंडली B में प्रेरित विद्युत् धारा को उत्पन्न कर देती हैं।

प्रश्न 15.
निम्नलिखित की दिशा को निर्धारित करने वाला नियम लिखिए-
(i) किसी विद्युत् धारावाही सीधे चालक के चारों ओर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र।
(ii) किसी चुंबकीय क्षेत्र में, क्षेत्र के लंबवत् स्थित विद्युत् धारावाही सीधे चालक पर आरोपित बल, तथा।
(iii) किसी चुंबकीय क्षेत्र में किसी कुंडली के घूर्णन करने पर उस कुंडली में उत्पन्न प्रेरित विद्युत् धारा।
उत्तर-
(i) धारावाही सीधे चालक के चारों ओर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र की दिशा दक्षिण हस्त अंगुष्ठ नियम निर्धारित करता है। दक्षिण हस्त अंगुष्ठ नियम-यदि आप अपने दाहिने चुंबकीय हाथ में विद्युत् धारावाही चालक को इस प्रकार पकड़े हुए हैं कि आपका अंगूठा विद्युत् धारा की दिशा की ओर संकेत करता है, तो आपकी अंगुलियाँ चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र की क्षेत्र रेखाओं की दिशा को प्रदर्शित करेंगी। इसे दक्षिण हस्त अंगुष्ठ नियम कहते हैं।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव 2
(ii) चुंबकीय क्षेत्र में रखे गए धारावाही चालक पर लगने वाले बल की दिशा फ्लेमिंग के वामहस्त नियम द्वारा निर्धारित होती है।
फ्लेमिंग का वामहस्त (बायां हाथ ) नियम-अपने वामहस्त के अंगूठे, तर्जनी के मध्यमा अंगुली को इस प्रकार फैलाओ कि वे परस्पर लंबवत् हो। तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र को निर्दिष्ट करें तथा मध्यमा अंगुली धारा के प्रवाह की दिशा को इंगित करे तो अंगूठा चालक की दिशा को प्रवाहित करेगी।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव 3

(iii) चुंबकीय क्षेत्र में किसी कुंडली की गति के चालक की गति कारण उसमें प्रेरित धारा की दिशा फ्लेमिंग के दक्षिण हस्त (दाहिने हाथ) नियम द्वारा ज्ञात होती है।

चुंबकीय क्षेत्र फ्लेमिंग का दक्षिण हस्त नियम-अपने दाहिने हाथ की तर्जनी, मध्यमा अंगुली तथा अंगूठे को इस प्रकार फैलाइए कि ये तीनों एक-दूसरे के परस्पर लंबवत् | चालक में प्रेरित हों। यदि तर्जनी अंगुली चुंबकीय क्षेत्र की दिशा की ओर | विद्युत् धारा संकेत करे तथा अंगूठा चालक की गति की दिशा में हो, प्रेरित विद्युत् धारा तो मध्यम अंगुली चालक में प्रेरित विद्युत् धारा की ।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव 4

प्रश्न 16.
नामांकित आरेख खींचकर किसी विद्युत् जनित्र का मूल सिद्धांत तथा कार्यविधि स्पष्ट कीजिए। इसमें ब्रुशों का क्या कार्य है?
अथवा
अंकित चित्र की सहायता से विद्युत् जनित्र का सिद्धांत, रचना एवं कार्यविधि समझाओ।
उत्तर-
प्रत्यावर्ती धारा डायनमो अथवा विद्युत् जनित्र-विद्युत् जनित्र एक ऐसा यंत्र है जो यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत् ऊर्जा में बदलता है। इसका कार्य फैराडे के विद्युत्-चुंबकीय प्रेरण के सिद्धांत पर निर्भर है।

सिद्धांत-जब किसी बंद कुंडली को किसी शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र में तेजी से घुमाया जाता है तो उसमें से होकर गुजरने वाले चुंबकीय-फ्लक्स में लगातार परिवर्तन होता रहता है, जिसके कारण कुंडली में एक विद्युत् धारा प्रेरित हो जाती है। कुंडली को घुमाने में किया गया कार्य ही कुंडली में विद्युत् ऊर्जा के रूप में परिणत हो जाता है।

फ्लेमिंग का दायें हाथ का नियम-अपने दायें हाथ के अंगूठे, तर्जनी और मध्यमा अंगुली को इस प्रकार फैलाओ कि प्रत्येक एक-दूसरे के साथ समकोण बनाए तो तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र की ओर संकेत करती है, अंगूठा चालक की गति की दिशा को प्रदर्शित करता है और मध्यमा अंगुली कुंडली में उत्पन्न विद्युत् धारा की दिशा को दिखाती है।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव 5
रचनाकिसी साधारण प्रत्यावर्ती जनित्र में निम्नलिखित प्रमुख भाग होते हैं
1. आर्मेचर (Armature)-इसमें नरम लोहे की क्रोड पर तांबे की अवरोधी तार की अधिक वलयों वाली आयातकार कुंडली ABCD होती है, जिसे आर्मेचर कहते हैं। इसे एक धुरी पर लगाया जाता है जो घूम सकती है।

2. क्षेत्र चुंबक (Field Magnet)-कुंडली को शक्तिशाली चुंबकों के बीच स्थापित किया जाता है। छोटे जनित्रों में स्थायी चुंबक लगाए जाते हैं, परंतु बड़े जनित्रों में विद्युत् चुंबकों का प्रयोग किया जाता है। ये क्षेत्र चुंबक चुंबकीय क्षेत्र को उत्पन्न करते हैं।

3. स्लिप रिंगज़ (Slip Rings)-धातु के दो खोखले रिंग R1 और R2 को कुंडली की धुरी पर लगाया जाता है। कुंडली की भुजाओं AB और CD को क्रमशः इनसे जोड़ दिया जाता है। आर्मेचर के घूमने के साथ R1 और R2 भी साथ-साथ घूमते हैं।

4. दो कार्बन ब्रुशों B1 और B2 से विद्युत् धारा को Load तक ले जाया जाता है। चित्र में इसे गैल्वनोमीटर से जोड़ा गया है जो विद्युत् धारा को मापता है।

कार्य विधि-जब कुंडली को चुंबक के ध्रुवों N और S के बीच घड़ी की सूई की विपरीत दिशा (anticlock wise) में घुमाया जाता है तब AB नीचे और CD ऊपर की दिशा में गति करती है। उत्तरी ध्रुव के निकट AB चुंबकीय रेखाओं को काटती है और CD ऊपर दक्षिणी ध्रुव के निकट रेखाओं को काटती है। इससे AB और DC में प्रेरित धारा उत्पन्न होती है। फ्लेमिंग के दायें हाथ के नियमानुसार विद्युत् धारा B से A और D से C की ओर बहती है। प्रभावी विद्युत् धारा DCBA की दिशा में प्रवाहित होती है। आधे चक्कर के बाद कुंडली के AB और DC अपनी स्थिति को बदल लेते हैं। AB दायीं तरफ और DC बायीं तरफ हो जाएंगे इससे AB ऊपर तथा DC नीचे की ओर जाएंगे। इस परिवर्तन के कारण कुंडली में धारा की दिशा आधे चक्र के बाद उलट जाएगी।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव 6
इस व्यवस्था में एक ब्रुश सदा उस भुजा के साथ संपर्क में रहता है जो चुंबकीय क्षेत्र में ऊपर की ओर गति करती है जबकि दूसरा ब्रुश सदा नीचे की ओर गति करने वाली भुजा के संपर्क में रहता है।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव 7

प्रश्न 17.
किसी विद्युत् परिपथ में लघुपथन (शॉर्ट सर्किट) कब होता है ?
उत्तर-
जब किसी घरेलू अथवा औद्योगिक परिपथ में जीवित तार (फेज तार) तथा उदासीन तार (न्यूट्रल तार) परस्पर सम्पर्कित हो जाते हैं तो परिपथ का लघुपथन हो जाता है। इस स्थिति में परिपथ का प्रतिरोध अचानक शून्य हो जाता है और धारा का मान एकाएक बहुत अधिक बढ़ जाता है।

प्रश्न 18.
भूसंपर्क तार का क्या कार्य है ? धातु के आवरण वाले विद्युत् साधित्रों को भू-संपर्कित करना क्यों आवश्यक है?
उत्तर-
भूसंपर्क तार-घरेलू विद्युत् परिपथ में विद्युत्मय तथा उदासीन तारों के साथ एक तीसरा तार भी लगा होता है। इस तार का संपर्क घर के निकट जमीन के नीचे गहराई में दबी धातु की प्लेट के साथ होता है। इस तार का रोधन हरे रंग का होता है। इस तार को भूसंपर्क तार कहते हैं। यह तार विद्युत् धारा को अल्प-प्रतिरोध चालन पथ प्रस्तुत करता है।

धातु के साधित्रों (उपकरणों) जैसे–बिजली की प्रेस, फ्रिज, टोस्टर आदि को भूसंपर्क तार से जोड़ दिया जाता है। इससे यह सुनिश्चित हो जाता है कि साधित्र की बॉडी में विद्युत् धारा का क्षरण होने पर बॉडी का विभव भूमि के विभव के बराबर बना रहे। इससे साधित्र का उपयोग करने वाले व्यक्ति को गंभीर विद्युत् झटका लगने का खतरा समाप्त हो जाता है।

Science Guide for Class 10 PSEB विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव InText Questions and Answers

प्रश्न 1.
चुंबक के निकट लाने पर दिक्सूचक की सूई विक्षेपित क्यों हो जाती है ?
उत्तर-
चुंबक के निकट लाने पर चुंबक का चुंबकीय क्षेत्र, दिक्सूचक की सूई जोकि एक प्रकार का छोटा चुंबक है, पर बलयुग्म लगाता है। इससे चुंबकीय सूई विक्षेपित हो जाती है।

प्रश्न 2.
किसी छड़ चुंबक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं खींचिए।
उत्तर-
छड़ चुंबक की चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं-
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव 8

प्रश्न 3.
चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के गुणों की सूची बनाइए।
उत्तर-
चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के गुण-

  1. चुंबक के बाहर चुंबकीय क्षेत्र की रेखाएं उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव की ओर तथा चुंबक के अंदर दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव की ओर जाती हैं।
  2. चुंबकीय क्षेत्र की बल रेखा के किसी बिंदु पर खींची गई स्पर्श रेखा (Tangent) उस बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा प्रदर्शित करती है।
  3. कोई दो चुंबकीय क्षेत्र बल रेखाएं परस्पर एक-दूसरे को नहीं काटती, क्योंकि एक बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की दो दिशाएं संभव नहीं हैं।
  4. किसी स्थान पर चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की संघनता उस स्थान पर चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता के अनुक्रमानुपाती होती है।
  5. एक समान (uniform) चुंबकीय क्षेत्र की चुंबकीय रेखाएं परस्पर समानांतर तथा बराबर दूरी पर होती हैं।

प्रश्न 4.
दो चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं एक-दूसरे को प्रतिच्छेद क्यों नहीं करती ?
उत्तर-
यदि चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं एक-दूसरे को प्रतिच्छेद (काटेंगी) करेंगी, तो उस बिंदु पर क्षेत्र की दो दिशाएं होंगी जो कि असंभव है। दिक्सूचक सूई को इस बिंदु पर रखने से चुंबकीय सूई दो दिशाओं की ओर संकेत करेगी जोकि संभव नहीं हो सकता।

प्रश्न 5.
मेज़ के तल में पड़े तार के वृत्ताकार पाश पर विचार कीजिए। मान लीजिए इस पाश में दक्षिणावर्त विद्युत्धारा प्रवाहित हो रही है। दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम को लागू करके पाश के भीतर तथा बाहर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा ज्ञात कीजिए।
उत्तर-
चित्र के अनुसार मेज़ के तल पर तार का वृत्ताकार पाश जिसमें दक्षिणावर्त विद्युत् धारा प्रवाहित हो रही है, में दक्षिणहस्त अंगुष्ठ (दाहिना हाथ अंगूठा) नियमानुसार अंगुलियों के मुड़ने की दिशा चुंबकीय क्षेत्र की दिशा को प्रदर्शित करेगी। चित्र से साफ़ है कि पाश के भीतर चुंबकीय क्षेत्र की पाश के तल के लंबवत् ऊपर से नीचे की ओर होंगी।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव 9

प्रश्न 6.
किसी दिए गए क्षेत्र में चुंबकीय क्षेत्र एक समान है। इसे निरूपित करने के लिए आरेख खींचिए।
उत्तर-
एक समान चुंबकीय क्षेत्र को परस्पर समानांतर बल रेखाओं द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। इसलिए इसका निरूपण निम्न चित्र अनुसार होगा-
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव 10

प्रश्न 7.
सही विकल्प चनिए : किसी विद्युत धारावाही सीधी लंबी परिनालिका के भीतर चुंबकीय क्षेत्र
(a) शून्य होता है
(b) इसके सिरे की ओर जाने पर घटता है
(c) इसके सिरे की ओर जाने पर बढ़ता है
(d) सभी बिंदुओं पर समान होता है।
उत्तर-
(b) इसके सिरे की ओर जाने पर घटता है।

प्रश्न 8.
किसी प्रोटॉन का निम्नलिखित में से कौन-सा गुण किसी चुंबकीय क्षेत्र में मुक्त गति करते समय परिवर्तित हो जाता है ? ( यहाँ एक से अधिक सही उत्तर हो सकते हैं।)
(a) द्रव्यमान
(b) चाल
(c) वेग
(d) संवेग।
उत्तर-
(c) वेग तथा (d) संवेग।

प्रश्न 9.
क्रियाकलाप 13.7 में, हमारे विचार से छड़ AB का विस्थापन किस प्रकार प्रभावित होगा, यदि
(i) छड़ AB में प्रवाहित विद्युत धारा में वृद्धि हो जाए
(ii) अधिक प्रबल नाल चुंबक प्रयोग किया जाए और
(iii) छड़ AB की लंबाई में वृद्धि कर दी जाए ?
उत्तर-
(i) छड़ का विस्थापन बढ़ जाएगा; क्योंकि छड़ पर लग रहा बल प्रवाहित विद्युत धारा के अनुक्रमानुपाती होता है।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव 11
(ii) छड़ का विस्थापन बढ़ जाएगा; क्योंकि छड़ पर लग रहा बल चुंबकीय क्षेत्र के अनुक्रमानुपाती होता है।
(iii) छड़ का विस्थापन बढ़ जाएगा; क्योंकि इस पर कार्यरत बल छड़ की लंबाई के अनुक्रमानुपाती होता है।

प्रश्न 10.
पश्चिम की ओर प्रक्षेपित कोई धनावेशित कण (अल्फा-कण) किसी चुंबकीय क्षेत्र द्वारा उत्तर की ओर विक्षेपित हो जाता है। चुंबकीय क्षेत्र की दिशा क्या है ?
(a) दक्षिण की ओर
(b) पूर्व की ओर
(c) अधोमुखी
(d) उपरिमुखी।
उत्तर-
(d) उपरिमुखी (ऐसा फ्लेमिंग के वामहस्त नियम के अनुसार होगा)।

प्रश्न 11.
फ्लेमिंग का वामहस्त नियम लिखिए।
अथवा
फ्लेमिंग का वामहस्त नियम चित्र की सहायता से वर्णन करो।
उत्तर-
फ्लेमिंग का वामहस्त का नियम (बायाँ हाथ नियम)-इस नियम के अनुसार, “अपने बाएँ हाथ की तर्जनी, मध्यमा तथा अँगूठे को इस प्रकार फैलाएँ कि ये तीनों एक-दूसरे को परस्पर लंबवत् हों (जैसा कि चित्र में दर्शाया गया है) यदि तर्जनी अंगुली चुंबकीय क्षेत्र की दिशा और मध्यमा अंगुली चालक में प्रवाहित विद्युत धारा की दिशा की ओर संकेत करती है तो अँगूठा चालक की गति की दिशा या चालक पर लग रहे बल की दिशा की ओर संकेत करेगा।”
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव 12

प्रश्न 12.
विद्युत् मोटर का क्या सिद्धांत है ?
उत्तर-
विद्युत मोटर का सिद्धांत- जब किसी कुंडली को चुंबकीय क्षेत्र में रखकर उसमें धारा प्रवाहित की जाती है तो कुंडली पर एक बल युग्म कार्य करने लगता है जो कुंडली को उसकी अक्ष पर घुमाने का प्रयास करता है। यदि कुंडली अपनी अक्ष पर घूमने के लिए स्वतंत्र हो तो वह घूमने लगती है।

प्रश्न 13.
विद्युत् मोटर में विभक्त वलय की क्या भूमिका है ?
उत्तर-
विद्युत् मोटर में विभक्त वलय (Split rings) की भूमिका-विद्युत मोटर में विभक्त वलय का कार्य कुंडली में प्रवाहित धारा की दिशा को बदलना है अर्थात् यह दिक् परिवर्तक का कार्य करता है। जब कुंडली आधा चक्कर पूर्ण कर लेती है तो विभक्त वलयों का एक ओर के ब्रुशों से संपर्क समाप्त हो जाता है और विपरीत ब्रुशों से संपर्क जुड़ जाता है जिसके फलस्वरूप कुंडली में धारा की दिशा सदैव इस प्रकार बनी रहती है कि कुंडली एक ही दिशा में घूमती रहती है। यदि विद्युत मोटर में विभक्त वलय न हों तो मोटर आधा चक्कर लगाकर रुक जाएगी।

प्रश्न 14.
किसी कुंडली में विद्युत् धारा प्रेरित करने के विभिन्न ढंग स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
कुंडली में विद्युत धारा प्रेरित करने के विभिन्न ढंग –

  • कुंडली को स्थिर रख कर, छड़ चुंबक को कुंडली की ओर लाने पर या फिर कुंडली से दूर ले जाकर कुंडली में विद्युत धारा प्रेरित की जा सकती है।
  • चुंबक को स्थिर रखे हुए कुंडली को चुंबक के निकट लाकर या फिर दूर ले जाकर कुंडली में विद्युत धारा प्रेरित की जा सकती है।
  • कुंडली को किसी चुंबकीय क्षेत्र में घुमाकर कुंडली में विद्युत धारा प्रेरित की जा सकती है।
  • कुंडली के समीप रखी हुई किसी दूसरी कुंडली में विद्युत् धारा की मात्रा में परिवर्तन करने से पहली कुंडली में विद्युत्धारा प्रेरित की जा सकती है।

प्रश्न 15.
विद्युत् जनित्र का सिद्धांत लिखिए। .
उत्तर-
विद्युत् जनित्र का सिद्धांत- जब किसी बंद कुंडली को किसी शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र में तेजी से घुमाया जाता है तो उसमें से होकर गुजरने वाले चुंबकीय-फ्लक्स में लगातार परिवर्तन होता रहता है, जिसके कारण कुंडली में विद्युत् धारा प्रेरित हो जाती है। कुंडली को घुमाने में किया गया कार्य ही कुंडली में विद्युत् ऊर्जा के रूप में परिणत हो जाता है।

प्रश्न 16.
दिष्ट धारा के कुछ स्रोतों के नाम लिखिए।
उत्तर-
दिष्ट धारा के स्रोत-

  1. विद्युत् सेल या बैटरी
  2. दिष्ट धारा जनित्र
  3. डायनमो
  4. बटन सेल।

प्रश्न 17.
प्रत्यावर्ती विद्युत् धारा उत्पन्न करने वाले स्रोतों के नाम लिखिए।
उत्तर-

  • जनित्र प्रत्यावर्ती विद्युत्धारा उत्पन्न करते हैं।
  • पन विद्युत् संयंत्र।

प्रश्न 18.
सही विकल्प का चयन कीजिए
तांबे की तार की एक आयताकार कुंडली किसी चुंबकीय क्षेत्र में घूर्णी गति कर रही है। इस कुंडली में प्रेरित विद्युत् धारा की दिशा में कितने परिभ्रमण के पश्चात् परिवर्तन होता है ?
(a) दो
(b) एक
(c) आधे
(d) चौथाई।
उत्तर-
(c) आधे।

प्रश्न 19.
विद्युत् परिपथों तथा साधित्रों में सामान्यत: उपयोग होने वाले दो सुरक्षा उपायों के नाम लिखिए।
उत्तर-

  • फ्यूज तार तथा
  • भू-संपर्क तार।

प्रश्न 20.
2 kW शक्ति अनुमतांक का एक विद्युत् तंदूर किसी घरेलू विद्युत् परिपथ (220V) में प्रचालित किया जाता है जिसका विद्युत् धारा अनुमतांक 5A है। इससे आप किस परिणाम की अपेक्षा करते हैं ? स्पष्ट कीजिए।
हल-घरेलू परिपथ की धारा अनुमतांक 5A है, इसका यह अर्थ हुआ कि घर की मुख्य लाइन में 5A का फ्यूज तार लगा है।
विद्युत् तंदूर की शक्ति P = 2kW = 2000 W जबकि V = 220 V माना विद्युत् तंदूर द्वारा ली जाने वाली धारा I है, तो
P = V x I से,
I= \(\frac{P}{V}\)
= \(\frac{2000 \mathrm{~W}}{220 \mathrm{~V}}\)
= 9.09 A
अर्थात् विद्युत् तंदूर मुख्य लाइन से 9.09A की धारा लेगी जो कि फ्यूज़ की क्षमता से अधिक है। अतः अतिभारण होगा जिसके फलस्वरूप फ्यूज़ की तार पिघल जाएगी और विद्युत् पथ अवरोधित हो जाएगा।

प्रश्न 21.
घरेलू विद्युत् परिपथों में अतिभारण से बचाव के लिए क्या सावधानी बरतनी चाहिए ?
उत्तर-
अतिभारण से बचाव के लिए सावधानियां

  1. विद्युत् प्रवाह के लिए प्रयुक्त की जाने वाली तारें अच्छे प्रतिरोधन पदार्थ से ढकी होनी चाहिए।
  2. विद्युत् परिपथ विभिन्न वर्गों में बंटे होने चाहिए और प्रत्येक साधित्र का अपना फ्यूज़ होना चाहिए।
  3. उच्च शक्ति प्राप्त करने वाले एयर कंडीशनर, फ्रिज, वाटर हीटर, हीटर, प्रैस आदि को एक साथ प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  4. एक ही सॉकेट से बहुत-से विद्युत् साधित्रों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत

Punjab State Board PSEB 10th Class Science Book Solutions Chapter 12 विद्युत Textbook Exercise Questions, and Answers.

PSEB Solutions for Class 10 Science Chapter 12 विद्युत

PSEB 10th Class Science Guide विद्युतTextbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
प्रतिरोध R के किसी तार के टुकड़े को पाँच बराबर भागों में काटा गया है। इन टुकड़ों को फिर पार्श्वक्रम में संयोजित कर देते हैं। यदि संयोजन का तुल्य प्रतिरोध R’ है तो R/R’ अनुपात का मान क्या है?
(a) 1/25
(b) 1/5
(c) 5
(d) 25.
हल-प्रत्येक कटे हुए भाग का प्रतिरोध R/5 होगा।
∴ R1 = R2 = R3 = R4 = R5 = \(\frac{\mathrm{R}}{5}\)
∴ पाँच कटे हुए टुकड़ों को पार्यक्रम में संयोजित करने पर
img
∴ R’ = \(\frac{\mathrm{R}}{25}\)
या \(\frac{\mathrm{R}}{\mathrm{R}^{\prime}}\) = 25
उत्तर : (d) 25

प्रश्न 2.
निम्नलिखित में से कौन-सा पद, विद्युत् परिपथ में विद्युत् शक्ति को निरूपित नहीं करता है –
(a) I2R
(b) IR2
(c) VI
(d) V2/R.
हल –
विद्युत् शक्ति P =V × I
= VxI
= (IR)xI
= I2R
= \(\frac{\mathrm{V}^{2}}{\mathrm{R}^{2}}\) x R
= \(\frac{\mathrm{V}^{2}}{\mathrm{R}^{2}} \times h\)
= \(\frac{\mathrm{V}^{2}}{\mathrm{R}}\)
अतः केवल IR2 विद्युत् परिपथ में विद्युत् शक्ति को निरूपित नहीं करता है।
उत्तर-
(b) IR2

प्रश्न 3.
किसी विद्युत् बल्ब का अनुमतांक 220V; 110W है। जब इसे 110V पर प्रचालित करते हैं तब इसके द्वारा उपभुक्त शक्ति कितनी होती है ?
(a) 100W
(b) 75W
(c) 50W
(d) 25W.
हल-सूत्र
P = \(\frac{\mathrm{V}^{2}}{\mathrm{R}}\)
बल्ब का प्रतिरोध R = \(\frac{\mathrm{v}^{2}}{\mathrm{P}}\)
= \(\frac{(220)^{2}}{100}\)
= \(\frac{220 \times 220}{100}\) = 484 Ω

∴ दूसरी दशा में 110V पर प्रचालित करने पर बल्ब द्वारा उपयुक्त शक्ति
P1 = \(\frac{\mathrm{V}_{1}^{2}}{\mathrm{R}}\)
= \(\frac{110 \times 110}{484}\)
= 25W
उत्तर-
(d) 25W.

प्रश्न 4.
दो चालक तार जिनके पदार्थ, लंबाई तथा व्यास समान हैं किसी विद्युत् परिपथ में पहले श्रेणीक्रम में और फिर पार्यक्रम में संयोजित किए जाते हैं। श्रेणीक्रम तथा पार्श्वक्रम संयोजन में उत्पन्न ऊष्माओं का अनुपात क्या होगा?
(a) 1: 2
(b) 2 : 1
(c) 1:4
(d) 4 : 1.
हल–
क्योंकि सभी तार एक ही प्रकार के पदार्थ, लंबाई व व्यास के हैं, इसलिए सभी का प्रतिरोध समान होगा। मान लो यह R है। दोनों को पार्यक्रम में जोड़ने पर प्रतिरोध
Rs = R + R = 2R
दोनों को श्रेणी क्रम में जोड़ने पर प्रतिरोध \(\frac{1}{\mathrm{R}_{p}}=\frac{1}{\mathrm{R}}+\frac{1}{\mathrm{R}}\)
= \(\frac{2}{\mathrm{R}}\)
श्रेणी क्रम में उत्पन्न ऊष्मा H1 = Ps = \(\frac{\mathrm{V}^{2}}{\mathrm{R}_{s}}\)
पार्श्वक्रम में उत्पन्न ऊष्मा H2 = Pp = \(\frac{\mathrm{V}^{2}}{\mathrm{R}_{p}} \)
यदि विभवांतर V है तो ऊष्माओं का अनुपात
\(\frac{\mathrm{H}_{1}}{\mathrm{H}_{2}}=\frac{\mathrm{V}^{2} / \mathrm{R}_{s}}{\mathrm{~V}^{2} / \mathrm{R}_{p}}\)
= \(\frac{\mathrm{R}_{p}}{\mathrm{R}_{s}}=\frac{\mathrm{R} / 2}{2 \mathrm{R}}\)
= \(\frac{1}{4}\)
उत्तर-(C) 1:4

प्रश्न 5.
किसी विद्युत् परिपथ में दो बिंदुओं के बीच विभवांतर मापने के लिए वोल्टमीटर को किस प्रकार संयोजित किया जाता है ?
उत्तर-
दो बिंदुओं के बीच का विभवांतर मापने के लिए वोल्टमीटर को दोनों बिंदुओं के बीच पार्श्वक्रम में संयोजित किया जाता है।

प्रश्न 6.
किसी ताँबे की तार का व्यास 0.5 mm तथा प्रतिरोधकता 1.8 x 10-8 2m है। 10Ω प्रतिरोध का प्रतिरोधक बनाने के लिए कितने लंबे तार की आवश्यकता होगी? यदि इससे दोगुने व्यास का तार लें तो प्रतिरोध में क्या अंतर आएगा?
उत्तर-
दिया है, प्रतिरोधकता (p) = 1.6 x 10-8 Ωm,
प्रतिरोध (R) = 10Ω
व्यास (2r) = 0.5 mm = 5 x 10-4 m
∴ त्रिज्या (r) = 2.5 x 10-4 m
अब तार का अनुप्रस्थ क्षेत्रफल A = πr²
= 3.14 x (2.5 x 10-4)2 m2
= 19.625 x 10-8 m2
∴ सूत्र R = P\(\frac{l}{\mathrm{~A}}\) से,
तार को लंबाई (l) = \(\frac{\mathrm{R} \times \mathrm{A}}{\rho}\)
= \(\frac{10 \Omega \times 19.625 \times 10^{-8} \mathrm{~m}^{2}}{1.6 \times 10^{-8} \Omega \mathrm{m}}\)
= 12.26 × 103m
= 122.6 m उत्तर
व्यास दोगुना करने पर त्रिज्या दोगुनी तथा अनुप्रस्थ क्षेत्रफल (A = πr²) चार गुना हो जाएगा।
∵ R ∝ \(\frac{1}{\mathrm{~A}}\)
∴ क्षेत्रफल चार गुना होने पर प्रतिरोध एक-चौथाई रह जाएगा।
अर्थात् तथा प्रतिरोध R’ = \(\frac{1}{4}\) R
= \(\frac{1}{4}\) × R
= \(\frac{1}{4}\) × 10
= 2.5Ω उत्तर

प्रश्न 7.
किसी प्रतिरोधक के सिरों के बीच विभवांतर V के विभिन्न मानों के लिए उससे प्रवाहित विद्युत् धाराओं I के संगत मान आगे दिए गए हैं
I(ऐंपियर) : 0.5 1.0 2.0 3.0 4.0
v (वोल्ट) : 1.6 3.4 6.7 10.2 13.2
V और I के बीच ग्राफ खींचकर इस प्रतिरोधक का प्रतिरोध ज्ञात कीजिए।
हल- अभीष्ट ग्राफ के लिए देखिए संलग्न चित्र-
प्रतिरोधक का प्रतिरोध = ग्राफ की ढाल
अर्थात् R= \(\frac{\Delta \mathrm{V}}{\Delta \mathrm{I}}\)
दिए गए आँकड़ों से,
V1 = 3.4 V, V2 = 10.2V
तथा संगत विद्युत् धाराएँ I1 = 1.0A, I2 = 3.0A .
ΔV = V2 – V1
= 10.2 – 3.4 = 6.8V
ΔI = I2 – I1
= 3.0 – 1.0
= 2.0A
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत 2

∴ प्रतिरोध R= \(\frac{\Delta \mathrm{V}}{\Delta \mathrm{I}}\)
= \(\frac{6.8 \mathrm{~V}}{2.0 \mathrm{~A}}\)
R = 3.4Ω उत्तर

प्रश्न 8.
किसी अज्ञात प्रतिरोध के प्रतिरोधक के सिरों से 12V की बैटरी को संयोजित करने पर परिपथ में 2.5 mA विद्युत् धारा प्रवाहित होती है। प्रतिरोधक का प्रतिरोध परिकलित कीजिए।
हल-
दिया है, विभवांतर V= 12V प्रवाहित धारा I = 2.5 mA = 2.5 x 10-3 A
∴ प्रतिरोधक का प्रतिरोध R= \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{I}}\)
= \(\frac{12 \mathrm{~V}}{2.5 \times 10^{-3} \mathrm{~A}}\)
= 4.8 × 103 Ω
= 4.8 kΩ उत्तर

प्रश्न 9.
9V की किसी बैटरी को 0.2Ω, 0.3Ω, 0.4Ω, 0.5Ω तथा 12Ω के प्रतिरोधकों के साथ श्रेणीक्रम में संयोजित किया गया है। 12Ω के प्रतिरोधक से कितनी विद्युत् धारा प्रवाहित होगी?
हल-
दिया है R1 = 0. 2Ω, R2 = 0.3Ω, R3 = 0.4Ω, R4 = 0.5Ω, तथा R5 = 12Ω
श्रेणी संयोजन का कुल प्रतिरोध R = R1 + R2 + R3 + R4 + R5
= 0.2 + 0.3 + 0.4 + 0.5 + 12
= 13.4Ω
∴ परिपथ में प्रवाहित कुल धारा I = \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{R}}\)
= \(\frac{9 \mathrm{~V}}{13.4 \Omega}\)
= 0.67A
श्रेणी संयोजन में प्रत्येक प्रतिरोध से 0.67A की धारा प्रवाहित होगी।
श्रेणी क्रम में संयोजित सभी चालकों (प्रतिरोधकों) में से समान विद्युत धारा प्रवाहित होगी, इसलिए 120 के प्रतिरोधक में से प्रवाहित धारा = 0.67A उत्तर

प्रश्न 10.
176Ω प्रतिरोध के कितने प्रतिरोधकों को पार्यक्रम में संयोजित करें कि 220V के विद्युत् स्रोत से संयोजन से 5A विद्युत् धारा प्रवाहित हो?
हल-
दिया है,
V= 220V,
I = 5A
∴ संयोजन का तुल्य प्रतिरोध R = \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{I}}\)
= \(\frac{220 \mathrm{~V}}{5 \mathrm{~A}}\)
या R = 44Ω
R1 = R2 =……..= Rn = 176Ω
मान लो ऐसे n प्रतिरोधक पार्श्वक्रम में जोड़े गए हैं, तब
∴ \(\frac{1}{\mathrm{R}}=\frac{1}{\mathrm{R}_{1}}+\frac{1}{\mathrm{R}_{2}}+\ldots \ldots+\frac{1}{\mathrm{R}_{n}}\)
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत 3
अतः 4 प्रतिरोधक पार्श्वक्रम में जोड़ने होंगे। उत्तर

प्रश्न 11.
यह दर्शाइए कि आप 6Ω प्रतिरोध के तीन प्रतिरोधकों को किस प्रकार संयोजित करेंगे कि प्राप्त संयोजन का प्रतिरोध
(i) 9Ω,
(ii) 4Ω हो।
हल-
(i) 9Ω का प्रतिरोध पाने के लिए, पहले दो प्रतिरोधकों को समांतर क्रम में तथा तीसरे प्रतिरोध को श्रेणी क्रम में जोड़ना होगा।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत 4
मान लो पार्श्व संयोजन का प्रतिरोध R है।
∴ \(\frac{1}{R}=\frac{1}{6}+\frac{1}{6}\) = \(\frac{2}{6}\)
∴ R = \(\frac{6}{2}\) = 3Ω होगा।

यह 3Ω का तुल्य प्रतिरोध, 6Ω के तीसरे प्रतिरोध के साथ श्रेणी क्रम में जुड़कर प्रतिरोध 3Ω + 6Ω = 90 का होगा। उत्तर

(ii) 4Ω का प्रतिरोध पाने के लिए पहले 6Ω के दो प्रतिरोधकों को श्रेणीक्रम में जोड़ना होगा तत्पश्चात् तीसरा प्रतिरोधक इनके पार्श्वक्रम में जोड़ना होगा। 6Ω तथा 6Ω के दो प्रतिरोधों के श्रेणी संयोजन का तुल्य प्रतिरोध 6Ω + 6Ω = 12Ω होगा। यह 12Ω का प्रतिरोध 6Ω के साथ पार्श्वक्रम में जोड़ने से 4Ω का प्रतिरोध देगा।
∵ \(\frac{1}{R}=\frac{1}{6}+\frac{1}{12}\)
= \(\frac{2+1}{12}\)
= \(\frac{3}{12}\)
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत 5
∴ R = \(\frac{12}{3}\)
= 4 Ω उत्तर

प्रश्न 12.
220 V की विद्युत् लाइन पर उपयोग किए जाने वाले बहुत से बल्बों का अनुमतांक 10w है। यदि 220V लाइन से अनुमत अधिकतम विद्युत् धारा 5A है तो इस लाइन के दो तारों के बीच कितने बल्ब पार्श्वक्रम में संयोजित किए जा सकते हैं?
हल-
माना n बल्बों को पार्यक्रम में जोड़ा है। तब परिपथ में कुल शक्ति P= n x एक बल्ब की शक्ति
= n x 10 W
= 10n W
दिया है, V= 220V,
I = 5A
P = V × I से,
10Ω = 220V × 5A
n = 220V× 5A
∴ n = \(\frac{220 \mathrm{~V} \times 5 \mathrm{~A}}{10 \Omega}\)
= 110
अर्थात् 110 बल्बों को पार्श्वक्रम में जोड़ा जा सकता है।

वैकल्पिक विधि
प्रत्येक बल्ब का प्रतिरोध (r) = \(\frac{\mathrm{V}^{2}}{\mathrm{P}}\)
= \(\frac{(220)^{2}}{10}\)
= \(\frac{220 \times 220}{10}\)
= 4840Ω

परिपथ की कुल प्रतिरोधकता (R) = \(\frac{220 \mathrm{~V}}{5 \mathrm{~V}}\) = 44 Ω
मान लो बल्बों की कुल संख्या n है।
तो प्रतिरोधकता (R) = \(\frac{r}{n}\)
⇒ n= \(\frac{r}{n}=\frac{4840}{44}\) =110 उत्तर

प्रश्न 13.
किसी विद्युत् भट्टी की तप्त प्लेट दो प्रतिरोधक कुंडलियों A तथा B की बनी हैं जिनमें प्रत्येक का प्रतिरोध 242 है तथा इन्हें पृथक्-पृथक् श्रेणीक्रम में अथवा पार्श्वक्रम में संयोजित करके उपयोग किया जा सकता है। यदि यह भट्टी 220V विद्युत् स्रोत से संयोजित की जाती है तो तीनों प्रकरणों में प्रवाहित विद्युत् धाराएँ क्या हैं?
हल-
दिया है, V = 220V, कुंडलियों का प्रतिरोध R1 = R2 = 24Ω
प्रथम दशा में, जब किसी एक कुंडली को में प्रयोग किया जाता है तो कुल प्रतिरोध R = R1 = 24Ω
∴ प्रवाहित धारा I = \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{R}}=\frac{220 \mathrm{~V}}{24 \Omega}\) 9.17 A

दूसरी दशा में, जब दोनों कुंडलियों को श्रेणीक्रम में प्रयोग किया जाता है, तब
कुल प्रतिरोध R= R1 + R2
= 24Ω + 24Ω
श्रेणीकृत कुंडलियों में प्रवाहित धारा I = \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{R}}=\frac{220 \mathrm{~V}}{48 \Omega}\)
= 4.58 A

तीसरी दशा में, जब कुंडलियों को पार्श्वक्रम में प्रयोग किया जाता है, तब
\(\frac{1}{\mathrm{R}}=\frac{1}{\mathrm{R}_{1}}+\frac{1}{\mathrm{R}_{2}}\)
= \(\frac{1}{24}+\frac{1}{24}\)
= \(\frac{2}{24}\)
∴ R = \(\frac{24}{2}\)
= 12 Ω

प्रवाहित विद्युत् धारा I = \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{R}}\)
∴ I = \(\frac{220 \mathrm{~V}}{12 \Omega}\)
I = 18.3A उत्तर

प्रश्न 14.
निम्नलिखित परिपथों में प्रत्येक में 20 प्रतिरोधक द्वारा उपयुक्त शक्तियों की तुलना कीजिए :
(i) 6V की बैटरी से संयोजित 12 तथा 22 श्रेणीक्रम संयोजन,
(ii) 4V बैटरी से संयोजित 120 तथा 22 का पार्श्वक्रम संयोजन।
हल-
(i) दिया है, V = 6V
1Ω व 2Ω के श्रेणी-संयोजन का प्रतिरोध
R = 1Ω + 2Ω = 3Ω
∴ परिपथ में प्रवाहित विद्युत् धारा I = \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{R}}\)
= \(\frac{6 \mathrm{~V}}{3 \Omega}\)
= 2A
श्रेणीक्रम में प्रत्येक प्रतिरोध में से 2A की धारा प्रवाहित होगी।
∴ 2Ω के प्रतिरोधक द्वारा उपयुक्त शक्ति
P1 = I2R
= (2A)2 x 20
= 8w

(ii) ∵ दोनों प्रतिरोध पार्श्वक्रम में जुड़े हैं; इसलिए प्रत्येक प्रतिरोध के सिरों के बीच एक ही विभवांतर, 4V होगा।
∴ 2Ω के प्रतिरोध द्वारा उपयुक्त शक्ति
P2 = \(\frac{\mathrm{V}^{2}}{\mathrm{R}}\)
= \(\frac{(4 \mathrm{~V})^{2}}{2 \Omega}\)
∴ = \(\frac{16}{2}\)
∴ P2 = 8W
अतः दोनों दशाओं में 2Ω प्रतिरोधक में समान शक्ति व्यय होगी। उत्तर

प्रश्न 15.
दो विद्युत् लैंप, जिनमें से एक का अनुमतांक 100W; 220V तथा दूसरे का 60 W; 220V है, विद्युत् मेंस के साथ पार्श्वक्रम में संयोजित हैं। यदि विद्युत् आपूर्ति की वोल्टता 220V है तो मेंस से कितनी धारा ली जाती है?
हल-
प्रथम लैंप के लिए, विभवांतर V1 = 220V
लैंप की शक्ति P1 = 100W माना इसका प्रतिरोध R1 है तो
P= \(\frac{\mathrm{V}^{2}}{\mathrm{R}}\) से,
प्रथम लैंप का प्रतिरोध, R1 = \(\frac{v_{1}^{2}}{P_{1}}\) = \(\frac{(220 \mathrm{~V})^{2}}{100 \mathrm{~W}}\)
= 484Ω

दूसरे लैंप के लिए, विभवांतर V2 = 220 V,
लैंप की शक्ति P2 = 60W
∴ दूसरे लैंप का प्रतिरोध R2 = \(\frac{\mathrm{V}_{2}^{2}}{\mathrm{P}_{2}}\)
= \(\frac{(220 \mathrm{~V})^{2}}{60 \mathrm{~W}}\)
= \(\frac{2420}{3}\) Ω
दोनों लैंप को पार्यक्रम में जोड़ने पर संयोजन का प्रतिरोध R हो तो
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत 6
∵ लाइन वोल्टेज V = 220V
∴ लाइन से ली जाने वाली धारा I = \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{R}}\)
= \(\frac{220 \mathrm{~V}}{302.5 \Omega}\)
= 0.73 A उत्तर

प्रश्न 16.
किसमें अधिक विद्युत् ऊर्जा उपभुक्त होती है : 250w का टी० वी० सेट जो एक घंटे तक चलाया जाता है अथवा 120W का विद्युत् हीटर जो 10 मिनट के लिए चलाया जाता है ?
हल-
T.V. सेट के लिए, P1 = 250w
= 250 Js-1
t1 = 1h = 60 x 60s
∴ T.V. सेट द्वारा उपभुक्त विद्युत् ऊर्जा = P1 × t1,
= 250 Js-1 x (60 x 60s)
= 900000J
= 9x 105 J …………………….(i)

विद्युत् हीटर के लिए,
P2 = 120W
= 120 Js-1 तथा
t2 = 10 min.
= 10 x 60s
∴ विद्युत् हीटर द्वारा उपभुक्त विद्युत् ऊर्जा = P2 x t2
= 120 Js-1 x (10 x 60s)
= 72000J = 7.2 x 104J ………………………(ii)
समीकरण (i) तथा (ii) से स्पष्ट है कि T.V. सेट द्वारा उपभुक्त ऊर्जा अधिक है।

प्रश्न 17.
82 प्रतिरोध का कोई विद्युत् हीटर विद्युत् मेंस से 2 घंटे तक 15A विद्युत् धारा लेता है। हीटर में उत्पन्न ऊष्मा की दर परिकलित कीजिए।
हल-
दिया है, R = 8Ω,
I = 15A विद्युत् हीटर में ऊष्मा उत्पन्न होने की दर अर्थात् विद्युत् हीटर की शक्ति P = I2R
= (15A)2 x 8Ω
= 225×8
= 1800 W

प्रश्न 18.
निम्नलिखित को स्पष्ट कीजिए-
(a) विद्युत् लैम्पों के तंतुओं के निर्माण में प्रायः एकमात्र टंगस्टन का ही उपयोग क्यों किया जाता है?
(b) विद्युत् तापन युक्तियों जैसे ब्रेड-टोस्टर तथा विद्युत् इस्तरी के चालक शुद्ध धातुओं के स्थान पर मिश्रधातुओं के क्यों बनाए जाते हैं ?
(c) घरेलू विद्युत् परिपथों में श्रेणीक्रम संयोजन का उपयोग क्यों नहीं किया जाता है।
(d) किसी तार का प्रतिरोध उसकी अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल में परिवर्तन के साथ किस प्रकार परिवर्तित होता है?
(e) विद्युत् संचारण के लिए प्राय: कॉपर तथा ऐलुमिनियम के तारों का उपयोग क्यों किया जाता है ?
उत्तर-
(a) क्योंकि टंगस्टन की उच्च प्रतिरोधकता (5.2 x 10-8 ओम-मीटर) है तथा टंगस्टन का गलनांक भी अन्य धातुओं की तुलना में बहुत ऊंचा (3400°C) होता है, इसलिए विद्युत् लैंपों के तंतुओं के निर्माण में प्रायः एकमात्र टंगस्टन ही उपयोग किया जाता है।

(b) मिश्रधातुओं की प्रतिरोधकता, शुद्ध धातुओं की तुलना से अधिक होती है तथा ताप वृद्धि के साथ इनकी प्रतिरोधकता से नगण्य परिवर्तन होता है। इसके अतिरिक्त मिश्रधातुओं का ऑक्सीकरण भी कम होता है जिसके फलस्वरूप मिश्रधातुओं में बने चालकों की आयु शुद्ध धात्विक चालकों की तुलना में अधिक होती है। इसलिए ब्रेड-टोस्टर, विद्युत् इस्तरी आदि के चालक मिश्रधातुओं के बनाए जाते हैं।

(c) श्रेणीक्रम संयोजन में जैसे-जैसे नये प्रतिरोधक जुड़ते जाते हैं, परिपथ का कुल प्रतिरोध बढ़ता जाता है और अलग-अलग प्रतिरोधकों के सिरों के बीच उपलब्ध विभवांतर घटता जाता है। अतः परिपथ में धारा भी कम हो जाती है। यदि घरों में प्रकाश करने के लिए श्रेणीबद्ध व्यवस्था प्रयोग की जाए तो परिपथ में जितने अधिक लैंप जुड़े होंगे, उनका प्रकाश उतना ही कम हो जाएगा। इसके अतिरिक्त श्रेणीबद्ध व्यवस्था प्रयोग करने पर स्विच ऑन करने पर सभी लैम्प एक साथ प्रदीप्त होंगे तथा स्विच ऑफ करने पर सभी लैंप एक साथ बुझ जाएँगे, जबकि पार्श्वक्रम व्यवस्था करने पर इच्छानुसार स्वतंत्र रूप से किसी भी लैंप को प्रकाशित या अप्रकाशित किया जा सकता है।

(d) तार का प्रतिरोध उसकी अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है। अर्थात् मोटी तार का अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल अधिक होगा और उसका प्रतिरोध कम होगा। \(\left(R \propto \frac{1}{A}\right)\)

(e) विद्युत् के सर्वश्रेष्ठ चालकों में प्रथम स्थान पर चाँदी, दूसरे पर ताँबा तथा तीसरे स्थान पर एल्यूमिनियम है। चाँदी एक कीमती धातु है तथा अपेक्षाकृत कम मात्रा में उपलब्ध है। इसलिए विद्युत् संचारण व्यवस्था में चाँदी के स्थान पर सस्ती तथा पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध धातुएं ताँबा तथा एल्यूमिनियम प्रयोग की जाती है।

Science Guide for Class 10 PSEB विद्युत InText Questions and Answers

प्रश्न 1.
विद्युत् परिपथ का क्या अर्थ है ?
उत्तर-
विद्युत् परिपथ- विद्युत् स्रोत से विभिन्न घटकों में से होकर विद्युत् धारा बहने के सतत् तथा बंद पथ को विद्युत् परिपथ कहा जाता है। विद्युत्धारा के घटक-विद्युत्धारा के निम्नलिखित प्रमुख घटक हैं-

  • विद्युत् स्रोत (बैटरी अथवा सेल)
  • चालक
  • स्विच (कुंजी)
  • कोई अन्य उपकरण जो परिपथ में जोडा गया हो।

प्रश्न 2.
विद्युत्धारा के मात्रक की परिभाषा लिखिए।
अथवा
विद्युत्धारा की इकाई का नाम लिखें। इसकी परिभाषा भी लिखें।
उत्तर-
विद्युत्धारा का S.I. मात्रक ‘ऐंपियर’ है जिसे ‘A’ से व्यक्त किया जाता है।
ऐंपियर-जब किसी चालक में 1 सेकंड में 1 कूलॉम आवेश का प्रवाह होता है तो प्रयुक्त विद्युत्धारा की मात्रा को 1 ऐंपियर कहा जाता है।
∴ 1A = \(\frac{1 \mathrm{C}}{1 \mathrm{~s}}\)

प्रश्न 3.
एक कूलॉम आवेश की रचना करने वाले इलेक्ट्रानों की संख्या परिकलित कीजिए।
उत्तर-
हम जानते हैं कि 1 इलेक्ट्रॉन पर आवेश = 1.6 x 10-19C
माना 1 कूलॉम की रचना करने वाले इलेक्ट्रॉनों की संख्या = n
∴ n x 1.6 x 10-19C = 1C

या n = \(\frac{1}{1.6 \times 10^{-19}}\)
= \(\frac{1 \times 10^{19}}{1.6}\)
= \(\frac{10}{16} \times 10^{9}\)
= 0.625 x 1019
. = 6.25 x 1018
अतः 1 कूलॉम (c) = 6.25 x 1018 इलेक्ट्रॉन उत्तर

प्रश्न 4.
उस युक्ति का नाम लिखिए जो किसी चालक के सिरों पर विभवांतर बनाए रखने में सहायता करती है।
उत्तर-
सेल एक ऐसी युक्ति है जो किसी चालक के सिरों पर विभवांतर बनाए रखने में सहायता करती है।

प्रश्न 5.
यह कहने का क्या तात्पर्य है कि दो बिंदुओं के बीच विभवांतर 17 है?
उत्तर-
दो बिंदुओं के बीच विभवांतर 1V से तात्पर्य है कि दो बिंदुओं के बीच 1 कूलॉम आवेश ले जाने में 1 जूल कार्य होता है।

प्रश्न 6.
6V बैटरी से गुजरने वाले हर एक कूलॉम आवेश को कितनी ऊर्जा दी जाती है?
हल : यहाँ
विभवांतर (V) = 6V
आवेश की मात्रा (Q) = 1 कूलॉम
दी गई ऊर्जा (किया गया कार्य) (W) = ?
हम जानते हैं, विभवांतर = PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत 7

V= \(\frac{W}{Q}\)
∴ दी गई ऊर्जा W = V × Q
= 6V × 1C
= 6 जूल (J) उत्तर

प्रश्न 7.
किसी चालक का प्रतिरोध किन कारकों पर निर्भर करता है?
उत्तर-
चालक के प्रतिरोध की निर्भरता-किसी चालक का प्रतिरोध निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करता है –
(i) चालक की लंबाई (l)-किसी चालक का प्रतिरोध चालक की लंबाई (l) के अनुक्रमानुपाती होता है।
अर्थात् R ∝ l
(ii) चालक की अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल (A)-किसी चालक का प्रतिरोध उसकी अनुप्रस्थ काट (A) के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
अर्थात्
R ∝ \(\frac{1}{\mathrm{~A}}\)

(iii) चालक के पदार्थ की प्रकृति-किसी चालक का प्रतिरोध उस चालक के पदार्थ की प्रकृति पर निर्भर करता है।
R ∝ \(\frac{l}{\mathrm{~A}}\)
अथवा R = ρ × \(\frac{l}{\mathrm{~A}}\)
जहाँ ρ अनुपातिकता स्थिराँक है।

प्रश्न 8.
समान पदार्थ के दो तारों में यदि एक पतला तथा दूसरा मोटा हो तो इनमें से किसमें विद्युत् धारा आसानी से प्रवाहित होगी जबकि उन्हें समान विद्युत् स्रोत से संयोजित किया जाता है ? क्यों?
उत्तर-
हम जानते हैं कि चालक तार का प्रतिरोध तार के अनुप्रस्थ काट (Area of Cross-Section) के व्युत्क्रमानुपाती होता है। अर्थात् मोटी तार का प्रतिरोध कम और पतली तार का प्रतिरोध अधिक होगा।
अब R ∝ \(\frac{1}{A}\)
इसलिए मोटी तार का प्रतिरोध पतली तार की अपेक्षा कम होने के कारण उसमें से विद्युत्धारा का प्रवाह अधिक तथा सुगमता से होता है।

प्रश्न 9.
मान लीजिए किसी वैद्युत अवयव के दो सिरों के बीच विभवांतर को उसके पूर्व के विभवांतर की तुलना में घटाकर आधा कर देने पर भी उसका प्रतिरोध नियत रहता है। तब उस अवयव से प्रवाहित होने वाली विद्युत्धारा में क्या परिवर्तन होगा?
उत्तर-
मान लो पूर्व अवस्था में विद्युत् अवयव के दो सिरों के बीच विभवांतर V, प्रतिरोध R तथा प्रवाहित होने वाली विद्युत्धारा I है, तो ओम नियम के अनुसार, I = \( \frac{\mathrm{V}}{\mathrm{R}}\) …………………………….(1)
यदि वैद्युत् अवयव के दोनों सिरों के बीच विभवांतर पूर्व अवस्था का आधा करें (अर्थात \(\frac{\mathrm{V}}{2}\) करें) जबकि प्रतिरोध नियत रहे तो विद्युत्धारा की मात्रा बदलकर I’ हो जायेगी।
∴ I’ = \(\frac{\frac{\mathrm{V}}{2}}{\mathrm{R}}\)
⇒ I’ = \(\frac{V}{2 R}\) …………………………….(2)
(2) को (1) से भाग देने पर
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत 8
∴ I’ =\(\frac{1}{2}\) x I अर्थात् विद्युत्धारा पूर्व अवस्था की तुलना में आधी रह जायेगी।

प्रश्न 10.
विद्युत् टोस्टरों तथा विद्युत् इस्तरियों के तापन अवयव शुद्ध धातु के न बनाकर किसी मिश्रधातु के क्यों बनाए जाते हैं ?
उत्तर-
विद्युत् टोस्टरों तथा विद्युत् इस्तरियों के तापन अवयव शुद्ध धातु के न बनाकर किसी मिश्रधातु के बनाए जाते हैं। इसके निम्नलिखित कारण हैं:

  • मिश्र धातुओं की प्रतिरोधकता अवयवी धातुओं की अपेक्षा अधिक होती है।
  • मिश्र धातुओं का उच्चताप पर शीघ्र ही दहन (उपचयन) नहीं होता है।
  • मिश्रधातुओं का गलनाँक अधिक होता है।

प्रश्न 11.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर पाठ्य-पुस्तक की तालिका 12.2 में दिए गए आँकड़ों के आधार पर दीजिए:
(a) आयरन (Fe) तथा मर्करी (Hg) में कौन अच्छा विद्युत् चालक है?
(b) कौन-सा पदार्थ सर्वश्रेष्ठ चालक है।
उत्तर-
(a) आयरन (Fe) मर्करी (Hg) की अपेक्षा अच्छा चालक है क्योंकि आयरन की प्रतिरोधकता मर्करी की अपेक्षा अधिक होती है।
(b) चाँदी सर्वश्रेष्ठ चालक है क्योंकि इसका प्रतिरोध (1.60 x 10-8Ωm) न्यूनतम है।

प्रश्न 12.
किसी विद्युत् परिपथ का व्यवस्था आरेख खींचिए जिसमें 27 के तीन सेलों की बैटरी, एक 5Ω प्रतिरोधक, एक 8Ω प्रतिरोधक, एक 12Ω प्रतिरोधक तथा एक प्लग कुंजी सभी श्रेणीक्रम में संयोजित हों।
उत्तर-
विद्युत् परिपथ व्यवस्था आरेख
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत 9

प्रश्न 13.
प्रश्न 1 का परिपथ चित्र दोबारा खींचिए तथा इसमें प्रतिरोधकों से प्रवाहित विद्युत्धारा को मापने के लिए ऐमीटर तथा 12Ω के प्रतिरोधक के सिरों के बीच विभवांतर मापने के लिए वोल्टमीटर लगाइए। ऐमीटर तथा वोल्टमीटर के क्या पाठ्याँक होंगे?
हल-
यहाँ r1 = 5Ω
r2 = 8Ω
r3 = 12 Ω
परिपथ का कुल प्रतिरोध (R) = ?
हम जानते हैं प्रतिरोधकों को श्रेणी क्रम में संयोजित करने पर परिपथ का कुल प्रतिरोध R = r1 + r2+ r3
R = 5Ω + 8Ω + 120 Ω
R = 25Ω.
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत 10

बैटरी के टर्मीनलों के बीच कुल विभवांतर A = 2 V
अब, ओम के नियम अनुसार I = \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{R}}\)
I = \( \frac{2 \mathrm{~V}}{25 \Omega}\)
I = 0.08A

12Ω के प्रतिरोधक के सिरों के बीच विभवांतर = I x r3
= 0.08 x 12
= 0.96 वोल्ट (V)

∴ ऐमीटर तथा वोल्टमीटर के पाठ्याँक क्रमश: 0.08A तथा 0.96V होंगे।

प्रश्न 14.
जब (a) 12 तथा 106
(b) 1Ω तथा 103Ω तथा 106Ω के प्रतिरोध पार्श्वक्रम में संयोजित किए जाते हैं तो इनके तुल्य प्रतिरोध के संबंध में आप क्या निर्णय करेंगे?
हल-
(a) दिया है r1 = 1Ω
तथा r2 = 106
माना R तुल्य प्रतिरोध है, तो पार्श्वक्रम में संयोजित करने पर \(\frac{1}{\mathrm{R}}=\frac{1}{r_{1}}=\frac{1}{r_{2}}\)
= \(\frac{1}{1}+\frac{1}{10^{6}}\)
= \(\frac{10^{6}+1}{10^{6}}\)
= \(\frac{1000000+1}{1000000}\)
= \(\frac{1000001}{1000000}\)
R = \( \frac{1000000}{1000001}\) = 0.9Ω (लगभग) उत्तर

(b) यहाँ
r1 = 1Ω
r2 = 103
r = 106
माना R तुल्य प्रतिरोध है तो पार्यक्रम में संयोजित किए जाने पर
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत 11
∴ R = \(\frac{10^{6}}{10^{6}+10^{3}+1}\)
= \(\frac{1000000}{1001001} \)
= 0.9Ω (लगभग) उत्तर

प्रश्न 15.
100Ω का एक विद्युत् लैंप, 50Ω का एक विद्युत् टोस्टर तथा 5002 का एक जल फिल्टर 200V के विद्युत् स्रोत से पार्श्वक्रम में संयोजित है। उस विद्युत् इस्तरी का प्रतिरोध क्या है जिसे यदि समान स्त्रोत के साथ संयोजित कर दें तो वह उतनी ही विद्युत् धारा लेती है जितनी तीनों युक्तियाँ लेती हैं। यह भी ज्ञात कीजिए कि इस विद्युत् इस्तरी से कितनी विद्युत् धारा प्रवाहित होती है ?
हल-
100Ω का विद्युत् लैंप, 502 का विद्युत् टोस्टर तथा 500Ω का फिल्टर पार्श्वक्रम में संयोजित किया गया है और R इनका तुल्य प्रतिरोध है तो ओम नियमानुसार
\(\frac{1}{R}=\frac{1}{100}+\frac{1}{50}+\frac{1}{500}\)
= \(\frac{5+10+1}{500}\)
= \(\frac{16}{500}\)
∴ R = \(\frac{500}{16}\) = 31.25 Ω
अतः विद्युत् इस्तरी का तुल्य प्रतिरोध = R = 31.250Ω
विभवांतर V = 220V विद्युत्धारा की मात्रा
(I) = ?
हम जानते हैं I = \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{R}}\)
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत 12
∴ I = 7.04A उत्तर

प्रश्न 16.
श्रेणीक्रम में संयोजित करने के स्थान पर वैद्युत् युक्तियों को पार्यक्रम में संयोजित करने के क्या लाभ हैं?
उत्तर-
वैद्युत् युक्तियों को श्रेणीक्रम की अपेक्षा पार्श्वक्रम में संयोजित करने के लाभ-
1. किसी श्रेणी बद्ध विद्युत् परिपथ में शुरू से अंत तक विद्युत् धारा नियत रहती है जोकि व्यावहारिक नहीं है। यदि हम किसी विद्युत् परिपथ में विद्युत् बल्ब तथा विद्युत् हीटर को श्रेणीक्रम में संयोजित करें तो यह उचित प्रकार से कार्य नहीं कर पायेंगे क्योंकि इन्हें भिन्न मानों की विद्युत् धाराओं की आवश्यकता होगी। इसके विपरीत पार्श्वक्रम परिपथ में विद्युत् धारा विभिन्न वैद्युत् युक्तियों में विभाजित हो जाती है।

2. श्रेणीबद्ध परिपथ की यदि एक विद्युत् युक्ति कार्य करना बंद कर देती है तो परिपथ टूट जाता है तथा अन्य युक्तियाँ कार्य करना बंद कर देती हैं। इसके विपरीत पार्यक्रम परिपथ में विद्युत् धारा विभिन्न विद्युत् युक्तियों में विभाजित होने पर अन्य युक्तियाँ कार्य करती रहती हैं।

3. प्रतिरोधों को पार्श्वक्रम में जोड़ने से किसी भी चालक में स्विच की सहायता से विद्युत्धारा स्वतंत्रतापूर्वक प्रवाहित या रोकी जा सकती है जिससे विद्युत् यक्तियों को स्वतंत्रतापूर्वक प्रयोग में लाया जा सकता है।

प्रश्न 17.
2Ω, 3Ω तथा 6Ω के तीन प्रतिरोधकों को किस प्रकार संयोजित करेंगे कि संयोजन का कुल प्रतिरोध
(a) 4Ω
(b) 1Ω हो?
हल-
(a) कुल प्रतिरोध 4Ω प्राप्त करने के लिए-ऐसा करने के लिए 3Ω तथा 6Ω के प्रतिरोधकों को समानांतर क्रम करके 2Ω के प्रतिरोधक के साथ श्रेणीक्रम में संयोजित किया जाता है।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत 13
मान लो r2 = 3Ω और r3 = 6Ω को समानांतर क्रम में संयोजित करने पर कुल प्रतिरोध । है, तो
\(\frac{1}{r}=\frac{1}{r_{2}}+\frac{1}{r_{3}}\)
= \(\frac{1}{3}+\frac{1}{6}\)
या \(\frac{1}{r}=\frac{2+1}{6}\)
\( \frac{1}{r}=\frac{3}{6}\)
\(\frac{1}{r}=\frac{1}{2}\)
∴ r = 2Ω
अब r1 = 2Ω, तथा r = 2Ω को श्रेणी क्रम में संयोजित करने पर मान लो कुल प्रतिरोध है, तो R = r1 +r
= 2Ω + 2Ω = 4Ω.

(b) कुल प्रतिरोध 1Ω प्राप्त करने के लिए संयोजन-1Ω का कुल प्रतिरोध प्राप्त करने के लिए r1 = 2Ω, r2 = 3Ω तथा r3 = 6Ωको समानांतर क्रम में जोड़ना होगा।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत 14
मान लो कुल प्रतिरोध R है तो समानांतर क्रम के सूत्र से,
\(\frac{1}{R}=\frac{1}{r_{1}}+\frac{1}{r_{2}}+\frac{1}{r_{3}}\)
= \(\frac{1}{2}+\frac{1}{3}+\frac{1}{6}\)
= \(\frac{3+2+1}{6}\)
= \(\frac{6}{6}\)
R = 1Ω

प्रश्न 18.
4Ω, 8Ω, 12Ω तथा 24Ω प्रतिरोध की चार कुंडलियों को किस प्रकार संयोजित करें कि संयोजन से
(a) अधिकतम
(b) निम्नतम प्रतिरोध प्राप्त हो सके ?
हल-
(a) अधिकतम प्रतिरोध प्राप्त करने हेतु संयोजन-यदि इन चारों प्रतिरोधों को श्रेणीक्रम में रखा जाए तो अधिकतम प्रतिरोध प्राप्त होगा।
Rs = r1+r2+r3+r4
= 4Ω + 8Ω + 12Ω + 24Ω
= 480 उत्तर

(b) न्यूनतम प्रतिरोध प्राप्त करने हेतु–यदि दिए गए चारों प्रतिरोधों को पार्यक्रम में जोड़ा जाए तो न्यूनतम प्रतिरोध प्राप्त होगा।
∴ \(\frac{1}{\mathrm{R}_{p}}=\frac{1}{r_{1}}+\frac{1}{r_{2}}+\frac{1}{r_{3}}+\frac{1}{r_{4}}\)
= \(\frac{1}{4}+\frac{1}{8}+\frac{1}{12}+\frac{1}{24}\)
= \(\frac{6+3+2+1}{24}\)
= \(\frac{12}{24}\)
\(\frac{1}{\mathrm{R}_{p}}=\frac{1}{2}\)
∴RP = 2Ω. उत्तर

प्रश्न 19.
किसी विद्युत् हीटर की डोरी क्यों उत्तप्त नहीं होती जबकि उसका तापन अवयव उत्तप्त हो जाता है?
उत्तर-
हम जानते हैं
H = I2Rt
⇒ H ∝ R
तापन अवयव का उच्च प्रतिरोध होता है जिस कारण अधिक विद्युत् ऊर्जा, ताप ऊर्जा में परिवर्तित होती है जिससे तापन अवयव उत्तप्त हो जाता है। दूसरी तरफ विद्युत् हीटर की डोरी का प्रतिरोध बहुत कम होता है जिससे वह उत्तप्त नहीं होती है।

प्रश्न 20.
एक घंटे में 50V विभवांतर से 96000 कूलॉम आवेश को स्थानांतरित करने में उत्पन्न ऊष्मा परिकलित कीजिए?
हल-
दिया है, स्थानांतरित आवेश Q = 96000 कूलॉम, 1 = 1 घंटा समय = 60 x 60 सेकंड,
विभवांतर V = 50 वोल्ट
⇒ उत्पन्न उष्मा ऊर्जा, H = Q x V
= 96000 x 50
= 48250000
= 4.825 x 10 जूल
∴ H = 4.825 x 103 किलो जूल उत्तर

प्रश्न 21.
20Ω प्रतिरोध की कोई विद्युत् इस्तरी 5A विद्युत् धारा लेती है। 30s में उत्पन्न उष्मा परिकलित कीजिए।
हल –
दिया है
प्रतिरोध (R) = 20Ω
विद्युत्धारा (I) = 5A
समय (1) = 30s
उत्पन्न उष्मा (H) = ?
हम जानते हैं, उत्पन्न हुई उष्मा ऊर्जा (H) = I2Rt
= (5)2 x 20 x 30 J
= 25 x 20 x 30 J
= 15000 J (जूल)
= 1.5 x 104J उत्तर

प्रश्न 22.
विद्युत् धारा द्वारा प्रदत्त ऊर्जा की दर का निर्धारण कैसे किया जाता है ?
उत्तर-
विद्युत् धारा द्वारा प्रदत्त ऊर्जा की दर का निर्धारण विद्युत् शक्ति द्वारा किया जाता है।

प्रश्न 23.
कोई विद्युत् मोटर 220V के विद्युत् स्रोत से 5.0A विद्युत् धारा लेता है। मोटर की शक्ति निर्धारित कीजिए तथा 2 घंटे में मोटर द्वारा उपभुक्त ऊर्जा परिकलित कीजिए।
हल–
दिया है, विद्युत् धारा (I) = 5.0A
विद्युत् विभवांतर (V) = 220V
समय (t) = 2 घंटे ज्ञात करना है,
मोटर की शक्ति (P) = ?
1 घंटे में उपभुक्त ऊर्जा (E) = ?
हम जानते हैं, शक्ति (P) = Vx I
= 220×5
= 1100 W (वाट) उत्तर

मोटर द्वारा 2 घंटे में उपभुक्त ऊर्जा (E) = Pxt
= 1100 वाट x 2 घंटे
= 2200 वाट-घंटे (Wh)
= 2.2 किलोवाट-घंटा (KWh) उत्तर

PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार

Punjab State Board PSEB 10th Class Science Book Solutions Chapter 11 मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार Textbook Exercise Questions, and Answers.

PSEB Solutions for Class 10 Science Chapter 11 मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार

PSEB 10th Class Science Guide मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार Textbook Questions and Answers

1. मानव नेत्र अभिनेत्र लैंस की फोकस दूरी को समायोजित करके विभिन्न दूरियों पर रखी वस्तुओं को फोकसित कर सकता है। ऐसा हो पाने का कारण है –
(a) ज़रा-दूरदृष्टिता
(b) समंजन
(c) निकट-दृष्टि
(d) दीर्घ-दृष्टि।
उत्तर-
(b) समंजन।

2. मानव नेत्र जिस भाग पर किसी वस्तु का प्रतिबिंब बनाते हैं, वह है
(a) कार्निया
(b) परितारिका
(c) पुतली
(d) दृष्टिपटल।
उत्तर-
(d) दृष्टिपटल।

3. सामान्य दृष्टि के वयस्क के लिए सुस्पष्ट दर्शन की अल्पतम दूरी होती है लगभग
(a) 25 m
(b) 2.5 cm
(c) 25 cm
(d) 2.5 m.
उत्तर-
(c) 25 cm.

4. अभिनेत्र लैंस की फोकस दूरी में परिवर्तन किया जाता है
(a) पुतली द्वारा
(b) दृष्टिपटल द्वारा
(c) पक्ष्माभी द्वारा
(d) परितारिका द्वारा।
उत्तर-
(c) पक्ष्माभी द्वारा।

प्रश्न 5.
किसी व्यक्ति को अपनी दूर की दृष्टि को संशोधित करने के लिए -5.5 डाइऑप्टर क्षमता के लैंस की आवश्यकता है। अपनी निकट की दृष्टि को संशोधित करने के लिए उसे +1.5 डाइऑप्टर क्षमता के लैंस की आवश्यकता है। संशोधित करने के लिए आवश्यक लैंस की फोकस दूरी क्या होगी
(i) दूर की दृष्टि के लिए
(ii) निकट की दृष्टि के लिए ?
हल :
(i) दिया है : दूर की वस्तुओं को स्पष्ट देखने के लिए दूर दृष्टि को संशोधित करने के लिए आवश्यक लैंस की क्षमता (P) = – 5.5 D .
लैंस की क्षमता सूत्र से P = \(\frac{1}{f(\text { in } m)}\)
या f = \(\frac{1}{\mathrm{P}}\)
∴ फोकस दूरी (f) = \(\frac{1}{-5.5}\)
= \(-\frac{100}{5.5}\) cm
= \(\frac{-200}{11}\) cm

(ii) दिया है : निकट पड़ी वस्तुओं को स्पष्ट देखने के लिए निकट दृष्टि संशोधित करने के लिए आवश्यक लैंस की क्षमता (P) = + 1.5 D
लैंस के क्षमता सूत्र से (P) = \(\frac{1}{F(\text { in } m)}\)
या फोकस दूरी (f) = \(\frac{1}{P}\) : (in m)
= \(\frac{1}{+1.5} \) cm
= \(\frac{10}{15}\) cm
= \(\frac{1000}{15}\) cm
= \(\frac{200}{3}\) cm

प्रश्न 6.
किसी निकट-दृष्टि दोष से पीड़ित व्यक्ति का दूर बिंदु नेत्र के सामने 80 cm दूरी पर है। इस दोष को संशोधित करने के लिए आवश्यक लैंस की प्रकृति तथा क्षमता क्या होगी ?
हल : क्योंकि निकट दृष्टि दोष से ग्रसित व्यक्ति का दूर बिंदु 80 cm की दूरी पर है, इसलिए उस व्यक्ति को एक ऐसे लैंस की आवश्यकता है जो अनंत पर पड़ी वस्तु का प्रतिबिंब आँख के सामने 80 cm की दूरी पर बना सके।
∴ वस्तु की दूरी (u) = – α
प्रतिबिंब की नेत्र लैंस से दूरी (v) = –80 cm .
लैंस की फोकस दूरी (f) = ?
लैंस सूत्र \(\frac{1}{v}-\frac{1}{u}=\frac{1}{f}\) से
\(\frac{1}{-80}-\frac{1}{-\infty}=\frac{1}{f}\)
\(-\frac{1}{80}+\frac{1}{\propto}=\frac{1}{f}\)
∵ \(\frac{1}{\alpha}\) = 0

या \(-\frac{1}{80}=\frac{1}{f}\)
∴ फोकस दूरी (1)
= –80 cm
= – 0.8 m
लैंस की क्षमता (P) = \(\frac{1}{f}\)
= \(\frac{1}{-0.8} \mathrm{D}\)
= \(-\frac{1}{0.8} \mathrm{D}\)
= -1.25 D चूँकि लैंस की क्षमता ऋणात्मक है, इसलिए अभीष्ट लैंस की प्रकृति अवतल (अपसारी) है जिसकी क्षमता -1.25 D है।

प्रश्न 7.
चित्र बनाकर दर्शाइए कि दीर्घ-दृष्टि दोष कैसे संशोधित किया जाता है। एक दीर्घ-दृष्टि दोषयुक्त नेत्र का निकट बिंदु 1 m है। इस दोष को संशोधित करने के लिए आवश्यक लैंस की क्षमता क्या होगी ? यह मान लीजिए कि सामान्य नेत्र का निकट बिंदु 25 cm है।
उत्तर-
दीर्घ दृष्टि (दूरदृष्टि) दोष से ग्रसित व्यक्ति का निकट बिंदु सामान्य दृष्टि वाली आँख की तुलना में थोडा दूर खिसक जाता है जिसके फलस्वरूप व्यक्ति समीप पड़ी वस्तुओं को स्पष्ट नहीं देख पाता है। इस दोष को दूर करने के लिए उत्तल लैंस (अभिसारी लैंस) प्रयोग किया जाता है जैसा कि निम्न चित्र में दर्शाया गया है :
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार 1
(c) दीर्घ-दृष्टि दोष का संशोधन प्रश्नानुसार, सामान्य नेत्र का निकट बिंदु 25 cm है जो नेत्र दोष के कारण खिसक कर 1 m (= 100 cm) दूर पहुँच गया है। इसलिए दृष्टि दोष से पीड़ित व्यक्ति को एक ऐसे लैंस की आवश्यकता है जो 25 cm पर रखी वस्तु का प्रतिबिंब 1 m अर्थात् 100 cm पर बनाए।
अतः u = – 25 cm
v = – 100 cm
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार 2
∴ f = \(\frac{100}{3}\) cm
या f = \(\frac{1}{3}\) m
∴ अभीष्ट लैंस की क्षमता P = \(\frac{1}{f}(\text { in m) }\)
= \(\frac{1}{1 / 3}\)
= + 3D
अतः दृष्टि दोष के निवारण हेतु +3D क्षमता के उत्तल लैंस की आवश्यकता होगी।

प्रश्न 8.
सामान्य नेत्र 25 cm से निकट रखी वस्तुओं को सुस्पष्ट क्यों नहीं देख पाते ?
उत्तर-
जब वस्तु सामान्य नेत्र से 25 cm की दूरी पर रखी होती है तो नेत्र अपनी संपूर्ण समंजन क्षमता का प्रयोग करके वस्तु का प्रतिबिंब रेटिना पर बना देती है जिससे वस्तु स्पष्ट दिखाई देती है। यदि उसी वस्तु को 25 cm से कम दूरी पर रखा जाता है तो नेत्र लैंस द्वारा उस वस्तु का प्रतिबिंब रेटिना पर नहीं बन पाता है जिससे वस्तु स्पष्ट दिखाई नहीं दे पाती है।

प्रश्न 9.
जब हम नेत्र से किसी वस्तु की दूरी को बढ़ा देते हैं तो नेत्र में प्रतिबिंब दूरी का क्या होता है ?
उत्तर-
सामान्य दृष्टि वाले मनुष्य के लिए वस्तु की नेत्र से दूरी बढ़ाने पर भी नेत्र दवारा बने प्रतिबिंब की दूरी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है, क्योंकि नेत्र लैंस वस्तु की प्रत्येक स्थिति तारे की के लिए समंजन क्षमता का उपयोग करके वस्तु का प्रतिबिंब रेटिना पर आभासी स्थिति ही बनाता है।

प्रश्न 10.
तारे क्यों टिमटिमाते हैं ?
उत्तर-
तारों का टिमटिमाना-तारों का टिमटिमाना प्रतीत होना तारों के प्रकाश का वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण होता है। वायुमंडल में प्रवेश करने के पश्चात् पृथ्वी के तल तक पहुँचने तक तारे का प्रकाश वायुमंडलीय माध्यम के क्रमिक बढ़ते हुए अपवर्तनांक द्वारा अपवर्तन होता है जिससे प्रकाश को अभिलंब की तरफ झुका देता है। क्षितिज के निकट देखने पर तारे की आभासी स्थिति उसकी वास्तविक ऊचाई पर प्रतात हाता हा वायुमडल का भातिक चित्र-वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण अवस्थाएँ स्थायी न होने के कारण यह आभासी स्थिति निरंतर थोड़ी तारे की आभासी स्थिति बदलती रहती है तथा आँखों में प्रवेश करने वाले तारों के प्रकाश की मात्रा बदलती रहती है जिस कारण कोई तारा कभी चमकीला और कभी धुंधला प्रतीत होता है जोकि टिमटिमाने का प्रभाव है।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार 3

प्रश्न 11.
व्याख्या कीजिए कि ग्रह क्यों नहीं टिमटिमाते।
उत्तर-
ग्रह तारों की अपेक्षा पृथ्वी के बहुत निकट होते हैं तथा इन्हें विस्तृत स्रोत माना जा सकता है। यदि ग्रहों को बिंदु आकार के अनेक प्रकाश स्रोतों का संग्रह मान लें तो प्रत्येक बिंदु स्रोत का प्रकाश हमारी आँखों में प्रवेश करने वाले प्रकाश की मात्रा में कुल परिवर्तन का औसत शून्य मान होगा जिससे ग्रहों की आभासी स्थिति स्थिर रहेगी और टिमटिमाने का प्रभाव भी समाप्त हो जाएगा।

प्रश्न 12.
सूर्योदय के समय सूर्य रक्ताभ क्यों प्रतीत होता है ?
उत्तर-
सूर्योदय के समय सूर्य रक्ताभ दिखाई देना-सूर्योदय (या सूर्यास्त) के समय सूर्य से आने वाले प्रकाश को हमारे नेत्रों में पहुंचने से पहले वायु मंडल की वायु
नीले प्रकाश का कम की मोटी परतों में से गुज़रता है। यहाँ धूलकणों प्रकीर्ण होने से सूर्य प्रकीर्णन तथा जलकणों की वायुमंडल में उपस्थिति के रक्ताभ प्रतीत होना कारण कम तरंगदैर्ध्य वाले रंग (जैसे नीला, बैंगनी आदि) का प्रकीर्णन हो जाता है तथा केवल लंबी तरंगदैर्ध्य वाली प्रकाश तरंगें जैसे | क्षितिज के कि लाल सीधी हमारे नेत्रों तक पहुँचती हैं। निकट सूर्य – इस प्रकार सूर्योदय (या सूर्यास्त) के समय चित्र-सूर्योदय तथा सूर्यास्त के समय सूर्य का रक्ताभ प्रतीत सूर्य रक्ताभ प्रतीत होता है।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार 4

प्रश्न 13.
किसी अंतरिक्षयात्री को आकाश नीले की अपेक्षा काला क्यों प्रतीत होता है ?
उत्तर-
अत्याधिक ऊँचाई पर उड़ते समय अंतरिक्ष यात्री के लिए कोई भी वायुमंडल नहीं होता है। इसलिए वायु के अणुओं या अन्य सूक्ष्म कणों की अनुपस्थिति के कारण प्रकाश का प्रकीर्णन नहीं होता है जिससे अंतरिक्ष यात्रियों को आकाश काला दिखाई देता है।

Science Guide for Class 10 PSEB मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार InText Questions and Answers

प्रश्न 1.
नेत्र की समंजन क्षमता से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
नेत्र की समंजन क्षमता-अभिनेत्र लेंस रेशेदार जेलीवत पदार्थ का बना होता है। इसकी वक्रता में कुछ सीमाओं तक पक्ष्माभी पेशियों (ciliary muscles) द्वारा रूपांतरण किया जा सकता है। अभिनेत्र लेंस की वक्रता में परिवर्तन होने पर इसकी फोकस दूरी भी परिवर्तित हो जाती है। जब पेशियाँ शिथिल हो जाती हैं तो अभिनेत्र लेंस पतला हो जाता है तथा इसकी फोकस दूरी बढ़ जाती है। इस स्थिति में हम दूर रखी वस्तुओं को स्पष्ट देख पाने में समर्थ होते हैं। जब आप निकट पड़ी वस्तुओं को देखते हैं तब पक्ष्माभी पेशियाँ सिकुड़ जाती हैं। इससे अभिनेत्र लेंस की वक्रता बढ़ जाती है और अभिनेत्र लेंस मोटा हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप अभिनेत्र लेंस की फोकस दूरी कम हो जाती है जिससे आप निकट पड़ी वस्तु को स्पष्ट देख सकते हैं। अभिनेत्र लेंस की वह क्षमता जिसके कारण लेंस अपनी फोकस दूरी को समयोजित कर लेता है समंजन कहलाती है।

प्रश्न 2.
निकट दृष्टि दोष का कोई व्यक्ति 1.2 m से अधिक दूरी पर रखी वस्तुओं को सुस्पष्ट नहीं देख सकता। इस दोष को दूर करने के लिए प्रयुक्त संशोधक लेंस किस प्रकार का होना चाहिए ?
उत्तर-निकट दृष्टि दोषयुक्त नेत्र 1.2 m से अधिक दूरी पर रखी वस्तुओं को नहीं देख सकता क्योंकि वस्तुओं का प्रतिबिंब दृष्टिपटल (रेटिना) पर न बनकर रेटिना के सामने बनता है। इस दोष को उपयुक्त क्षमता के अवतल लेंस (अपसारी लेंस) के उपयोग द्वारा संशोधित किया जा सकता है।

प्रश्न 3.
मानव नेत्र की सामान्य दृष्टि के लिए दूर बिंदु तथा निकट बिंदु नेत्र से कितनी दूरी पर होते हैं ?
उत्तर-
मानव नेत्र की सामान्य दृष्टि के लिए निकट बिंदु की नेत्र से दूरी 25 cm और दूर बिंदु की नेत्र से दूरी अनंत होती है अर्थात् नीरोग मानव आँख 25 cm और अनंत के बीच कहीं भी स्थित वस्तु को साफ़-साफ़ देख सकती है।

प्रश्न 4.
अंतिम पंक्ति में बैठे किसी विद्यार्थी को श्यामपट्ट पढ़ने में कठिनाई होती है। यह विद्यार्थी किस दृष्टि दोष से पीड़ित है ? इसे किस प्रकार संशोधित किया जा सकता है ?
उत्तर-
विद्यार्थी निकट दृष्टि दोष से पीड़ित है जिसे उपयुक्त क्षमता के अवतल लैंस द्वारा संशोधित किया जा सकता है।

PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन

Punjab State Board PSEB 10th Class Science Book Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन Textbook Exercise Questions, and Answers.

PSEB Solutions for Class 10 Science Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन

PSEB 10th Class Science Guide प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्न में से कौन-सा पदार्थ लेंस बनाने के लिए प्रयुक्त नहीं किया जा सकता ?
(a) जल
(b) काँच
(c) प्लास्टिक
(d) मिट्टी।
उत्तर-
(d) मिट्टी।

प्रश्न 2.
किसी बिंब का अवतल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिंब आभासी, सीधा तथा बिंब से बड़ा पाया गया। वस्तु की स्थिति कहाँ होनी चाहिए ?
(a) मुख्य फोकस तथा वक्रता केंद्र के बीच
(b) वक्रता केंद्र पर
(c) वक्रता केंद्र से परे
(d) दर्पण के ध्रुव तथा मुख्य फोकस के बीच।
उत्तर-
(d) दर्पण के ध्रुव तथा मुख्य फोकस के बीच।

प्रश्न 3.
किसी बिंब का वास्तविक तथा समान साइज़ का प्रतिबिंब प्राप्त करने के लिए बिंब को उत्तल लेंस के सामने कहाँ रखें ?
(a) लेंस के मुख्य फोकस पर
(b) फोकस दूरी की दोगुनी दूरी पर
(c) अनंत पर
(d) लेंस के प्रकाशिक केंद्र तथा मुख्य फोकस के बीच।
उत्तर-
(b) फोकस दूरी की दोगुनी दूरी पर।

प्रश्न 4.
किसी गोलीय दर्पण तथा किसी पतले गोलीय लेंस दोनों की फोकस दूरियाँ 15 cm हैं। दर्पण तथा लेंस संभवतः है
(a) दोनों अवतल
(b) दोनों उत्तल
(c) दर्पण अवतल तथा लेंस उत्तल
(d) दर्पण उत्तल तथा लेंस अवतल।
उत्तर-
(b) दोनों उत्तल।

प्रश्न 5.
किसी दर्पण से आप चाहे कितनी ही दूरी पर खड़े हों, आपका प्रतिबिंब सदैव सीधा प्रतीत होता है। संभवतः दर्पण है
(a) केवल समतल
(b) केवल अवतल
(c) केवल उत्तल
(d) या तो समतल अथवा उत्तल।
उत्तर-
(d) या तो समतल अथवा उत्तल।।

प्रश्न 6.
किसी शब्द कोष (dictionary) में पाए गए छोटे अक्षरों को पढ़ते समय आप निम्न में से कौन-सा लेंस पसंद करेंगे ?
(a) 50 cm फोकस दूरी का एक उत्तल लेंस
(b) 50 cm फोकस दूरी का एक अवतल लेंस
(c) 5 cm फोकस दूरी का एक उत्तल लेंस
(d) 5 cm फोकस दूरी का एक अवतल लेंस।
उत्तर-
(a) 50 cm फोकस दूरी का एक उत्तल लेंस।
.
प्रश्न 7.
15 cm फोकस दूरी के एक अवतल दर्पण का उपयोग करके हम किसी बिंब का सीधा प्रतिबिंब बनाना चाहते हैं। बिंब का दर्पण से दूरी का परिसर (Range) क्या होना चाहिए ? प्रतिबिंब की प्रकृति कैसी है ? प्रतिबिंब बिंब से बड़ा है अथवा छोटा। इस स्थिति में प्रतिबिंब बनने का एक किरण आरेख बनाइए।
उत्तर-
अवतल दर्पण से वस्तु का सीधा प्रतिबिंब प्राप्त करने के लिए वस्तु को अवतल दर्पण के ध्रुव तथा मुख्य फोकस के बीच रखना चाहिए। इसलिए वस्तु को ध्रुव से दूरी 0 cm से अधिक तथा 15 cm से कम होनी चाहिए। ऐसा करने से वस्तु का प्रतिबिंब काल्पनिक सीधा तथा आकार में वस्तु से बड़ा होगा।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 1

प्रश्न 8.
निम्न स्थितियों में प्रयुक्त दर्पण का प्रकार बताइए
(a) किसी कार का अग्र-दीप ( हैडलाइट)
(b) किस वाहन का पार्श्व/पश्च-दृश्य दर्पण
(c) सौर भट्टी अपने उत्तर की कारण सहित पुष्टि कीजिए।
उत्तर-
(a) कार के हैडलाइट (अग्रदीप) में अवतल दर्पण का प्रयोग किया जाता है। बल्ब को अवतल दर्पण के मुख्य फोकस पर रखा जाता है। बल्ब से निकलने वाली प्रकाश किरणें दर्पण से परावर्तन के पश्चात् समानांतर हो जाती हैं। इससे एक शक्तिशाली समानांतर प्रकाश किरण पंज प्राप्त होता है।

(b) वाहनों में पार्श्व दर्पण (या पश्च दृश्य दर्पण) के रूप में उत्तल दर्पण को वरीयता दी जाती है क्योंकि उत्तल दर्पण सदैव वस्तु का सीधा तथा वस्तु की अपेक्षा छोटे आकार क प्रतिबिंब बनाता है जिससे इसका दृष्टि-क्षेत्र बढ़ जाता है। ऐसा करने से वाहन चालक छोटे से दर्पण में ही संपूर्ण क्षेत्र को देख पाता है।

(c) सौर भट्टी में अवतल दर्पण का प्रयोग किया जाता है। गर्म किये जाने वाले बर्तन को दर्पण के मुख्य फोकस पर रखा जाता है। सूर्य से आ रही समांतर किरणें दर्पण से परावर्तन होने के पश्चात् फोकस पर रखे बर्तन पर संपूर्ण उष्मीय ऊर्जा को केंद्रित कर देती हैं।

प्रश्न 9.
किसी उत्तल लेंस का आधा भाग काले कागज़ से ढक दिया गया है। क्या यह लेंस किसी बिंब का पूरा प्रतिबिंब बन पाएगा ? अपने उत्तर की प्रयोग द्वारा जाँच कीजिए। अपने प्रेक्षणों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर-
हाँ, यह लेंस वस्तु (बिंब) का पूरा प्रतिबिंब बनाएगा। प्रायोगिक जाँचविधि-

  • एक प्रकाशिक बैंच पर एक स्टैंड में उत्तल लेंस लगाओ।
  • एक स्टैंड में जलती हुई मोमबत्ती लगाकर लेंस की फोकस दूरी से थोड़ा अधिक दूरी पर प्रकाशिक बैंच पर रखो।
  • अब लेंस के दूसरी तरफ प्रकाशिक बैंच पर स्टैंड में पर्दा लगाकर उस को आगे-पीछे सरका कर ऐसी स्थिति में रखें कि उस पर मोमबत्ती का तीखा तथा उल्टा प्रतिबिंब प्राप्त हो जाए।
  • अब लेंस के निचले आधे भाग को काला कागज़ चिपका कर ढक दें ताकि लेंस के ऊपरी आधे भाग से प्रकाश का अपवर्तन होने से प्रतिबिंब बनें। इस स्थिति में आप देखेंगे कि मोमबत्ती का पूर्ववत् पूरा प्रतिबिंब प्राप्त होगा परंतु इसकी तीव्रता पहले प्रतिबिंब की तुलना में कम हो जाती है।

व्याख्या-मोमबत्ती के किसे बिंदु से चलने वाली प्रकाश किरणें लेंस के विभिन्न भागों से अपवर्तित होकर एक बिंदु पर मिलेंगी। लेंस के निचले आधे भाग को काला कर देने पर भी उस बिंदु पर प्रकाश की किरणें आएँगी जिससे मोमबत्ती का प्रतिबिंब पूरा प्रतिबिंब प्राप्त होगा, परंतु किरणों की काला कागज़ संख्या कम होने के कारण प्रतिबिंब की तीव्रता कम हो जाएगी।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 2

प्रश्न 10.
5 cm लंबा कोई बिंब 10 cm फोकस दूरी के किसी अभिसारी लेंस से 25 cm दूरी पर रखा जाता है। प्रकाश किरण-आरेख खींचकर बनने वाले प्रतिबिंब की स्थिति, साइज़ तथा प्रकृति ज्ञात कीजिए।
हल : यहाँ वस्तु की अभिसारी लेंस से दूरी (u) = -25 cm
अभिसारी लेंस की फोकस दूरी (f) = + 10 cm
अभिसारी लेंस से प्रतिबिंब की दूरी (v) = ?
वस्तु (बिंब) की लंबाई (O) = + 5 cm
प्रतिबिंब की लंबाई (साइज़) (I) = ?
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 3
लेंस सूत्र से,
\(\frac{1}{v}-\frac{1}{u}=\frac{1}{f}\)
या \(\frac{1}{v}=\frac{1}{f}+\frac{1}{u}\)
= \(\frac{1}{10}+\frac{1}{-25}\)
= \(\frac{1}{10}-\frac{1}{25}\)
= \(\frac{5-2}{50}\)
= \(\frac{3}{50}\)
∴ u = \(+\frac{50}{3}\) cm

अर्थात् प्रतिबिंब लेंस के दूसरी तरफ लेंस से \(\frac{50}{3}\) cm की दूरी पर बनेगा।
हम जानते हैं लेंस का आवर्धन (m) = \(\frac{v}{u}=\frac{\mathrm{I}}{\mathrm{O}}\) से
\(\frac{I}{5}=\frac{\frac{50}{3}}{-25}\)
\(\frac{I}{5}=\frac{50}{3 \times(-25)}\)
∴ I = \(\frac{5 \times 50}{3 \times 25}\)
= \(-\frac{10}{3}\) cm
अर्थात् प्रतिबिंब की लंबाई (साइज़) = \(\frac{10}{3}\) cm होगी। ऋण चिह्न दर्शाता है कि प्रतिबिंब मुख्य अक्ष के नीचे होगा जोकि वास्तविक तथा उल्टा होगा।

प्रश्न 11.
15 cm फोकस दूरी का कोई अवतल लेंस किसी बिंब का प्रतिबिंब लेंस से 10 cm दूरी पर बनाता है। बिंब लेंस से कितनी दूरी पर स्थित है ? किरण आरेख खींचिए।
हल : दिया है, अवतल लेंस की फोकस दूरी (f) = -15 cm
क्योंकि अवतल लेंस द्वारा बना प्रतिबिंब सदैव आभासी होता है, और लेंस के सामने उसी ओर बनता है जिस तरफ वस्तु होती है।
∴ υ = -10 cm
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 4
अब लेंस सूत्र से .
\(\frac{1}{v}-\frac{\mathrm{I}}{u}=\frac{1}{f}\)
.या \(\frac{\mathrm{I}}{u}=\frac{1}{v}-\frac{\mathrm{I}}{f}\)
= \(\frac{1}{-10}-\frac{1}{-15}\)
= \(-\frac{1}{10}+\frac{1}{15}\)
= \(\frac{-3+2}{30}=-\frac{1}{30}\)
u = – 30 cm
अर्थात् वस्तु (बिंब) लेंस के सम्मुख 30 cm की दूरी पर है।

प्रश्न 12.
15 cm फोकस दूरी के किसी उत्तल दर्पण से कोई बिंब 10 cm दूरी पर रखा है। प्रतिबिंब की स्थिति तथा प्रकृति ज्ञात कीजिए।
हल : दिया है, उत्तल दर्पण की फोकस दूरी (1) = + 15 cm
वस्तु की दर्पण से दूरी (u) = – 10 cm
दर्पण सूत्र \(\frac{1}{u}+\frac{1}{v}=\frac{1}{f}\) से
\(\frac{1}{v}=\frac{1}{f}-\frac{1}{u}\)
\(\frac{1}{15}-\frac{1}{-10}\)
= \(\frac{1}{15}+\frac{1}{10}\)
= \(\frac{2+3}{30}\)
= \(\frac{5}{30}\)
= \(\frac{1}{6}\)
∴ υ = + 6 cm उत्तर धनात्मक चिह्न यह दर्शाता है कि प्रतिबिंब दर्पण के पीछे 6 cm की दूरी पर बनेगा। धनात्मक चिह्न यह भी दर्शाता है कि यह प्रतिबिंब सीधा तथा आभासी है।

प्रश्न 13.
एक समतल दर्पण द्वारा उत्पन्न आवर्धन + 1 है। इसका क्या अर्थ है ?
उत्तर-
एक समतल दर्पण द्वारा उत्पन्न आवर्धन m = +1 यह दर्शाता है कि दर्पण द्वारा बनाए गए प्रतिबिंब का आकार वस्तु के आकार के बराबर है तथा धनात्मक चिह्न (+) यह प्रदर्शित करता है कि समतल दर्पण द्वारा बनाया गया प्रतिबिंब दर्पण के पीछे बन रहा है तथा यह आभासी और सीधा है।

प्रश्न 14.
5.0 cm लंबाई का कोई बिंब 30 cm वक्रता त्रिज्या के किसी उत्तल दर्पण के सामने 20 cm दूरी पर पर रखा गया है। प्रतिबिंब की स्थिति, प्रकृति तथा साइज़ ज्ञात कजिए।
हल- दिया है, वस्तु की उत्तल दर्पण से दूरी (u) = -20 cm
उत्तल दर्पण की वक्रता त्रिज्या (R) = + 30 cm
उत्तल दर्पण की फोकस दूरी (f) = \(\frac{+30}{2}\) cm
= 15 cm
वस्तु की लंबाई (O) = +5.0 cm
दर्पण सूत्र
\(\frac{1}{u}+\frac{1}{v}=\frac{1}{f}\) से
\(\frac{1}{v}=\frac{1}{f}-\frac{1}{u}\)
\(\frac{1}{15}-\frac{1}{-20}\)
= \(\frac{4+3}{60}=\frac{7}{60}\)
∴ υ = \(+\frac{60}{7}\) cm
∴ प्रतिबिंब की दर्पण से दूरी (v) = \(+\frac{60}{7}\) cm उत्तर

अर्थात् धनात्मक चिह्न यह दर्शाता है कि प्रतिबिंब दर्पण के दूसरी ओर \(\frac{60}{7}\) cm की दूरी पर बनेगा। यदि प्रतिबिंब की ऊँचाई (साइज़) I’ है तो आवर्धन सूत्र द्वारा
m = – \(\frac{v}{u}=\frac{\mathrm{I}}{\mathrm{O}} \) से
\(-\frac{60}{7}-20=\frac{1}{5}\)
\(\frac{60}{7 \times 20}=\frac{I}{5}\)
∴ I = \(+\frac{15}{7}\) cm उत्तर
धनात्मक चिह्न (+) यह स्पष्ट करता है कि प्रतिबिंब सीधा तथा आभासी होगा तथा दर्पण के पीछे \(\frac{15}{7}\) cm की दूरी पर बनेगा।

प्रश्न 15.
7.0 cm साइज़ का कोई बिंब 18 cm फोकस दूरी के किसी अवतल दर्पण के सामने 27 cm दूरी पर रखा गया है। दर्पण से कितनी दूरी पर किसी परदे को रखें कि उस पर वस्तु का स्पष्ट फोकसित प्रतिबिंब प्राप्त किया जा सके। प्रतिबिंब का साइज़ तथा प्रकृति ज्ञात कीजिए।
हल : दिया है, वस्तु (बिंब) का आकार (साइज़) (O) = + 7.0 cm
अवतल दर्पण की फोकस दूरी (f) = -18 cm
वस्तु की दर्पण से दूरी (u) = -27 cm
प्रतिबिंब की दर्पण से दूरी (v) = ?
प्रतिबिंब का साइज़ (I) = ?

दर्पण सूत्र \(\frac{1}{u}+\frac{1}{v}=\frac{1}{f}\) से
\(\frac{1}{v}=\frac{1}{f}-\frac{1}{u}\)
= \(\frac{1}{-18}-\frac{1}{-27}\)
= \(-\frac{1}{18}+\frac{1}{27}\)
= \(\frac{-3+2}{54}\)
= \(-\frac{1}{54} \)
v = -54 cm
ऋणात्मक चिह्न (-) यह दर्शाता है कि प्रतिबिंब दर्पण के सामने 54 cm की दूरी पर बनेगा। इसलिए पर्दे को दर्पण के सामने 54 cm की दूरी पर रखना चाहिए। उत्तर

अब दर्पण के आवर्धन सूत्र से,
m = \(-\frac{v}{u}=\frac{\mathrm{I}}{\mathrm{O}}\)
\(-\frac{(-54)}{(-27)}=\frac{I}{7}\)
\(-\frac{54}{27}=\frac{I}{7}\)
या I = \(-\frac{54 \times 7}{27}\)
I = -14 cm उत्तर
अर्थात् प्रतिबिंब का साइज़ (ऊँचाई) 14 cm होगा। ऋणात्मक चिह्न (-) यह दर्शाता है कि प्रतिबिंब वास्तविक तथा उल्टा होगा।

प्रश्न 16.
उस लेंस की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए जिसकी क्षमता -2.0 D है। यह किस प्रकार का लेंस
हल : दिया है,
लेंस की क्षमता (P) = -2.0 D
लेंस की फोकस दूरी (f) = ?
हम जानते हैं,
लस का क्षमता (P) = img
प्रतिबिंब की दर्पण से दूरी (v) = ?
प्रतिबिंब का साइज़ (I) = ?
दर्पण सूत्र \(\frac{1}{u}+\frac{1}{v}=\frac{1}{f}\) से
\(\frac{1}{v}=\frac{1}{f}-\frac{1}{u}\)
V = -54 cm ऋणात्मक चिह्न (-) यह दर्शाता है कि प्रतिबिंब दर्पण के सामने 54 cm की दूरी पर बनेगा। इसलिए पर्दे को दर्पण के सामने 54 cm की दूरी पर रखना चाहिए। उत्तर

अब दर्पण के आवर्धन सूत्र से,
m = \(-\frac{v}{u}=\frac{\mathrm{I}}{\mathrm{O}}\)
\(-\frac{(-54)}{(-27)}=\frac{I}{7}\)
\(-\frac{54}{27}=\frac{I}{7} \)
या I = \(\frac{54 \times 7}{27}\)
∴ I = -14 cm उत्तर
अर्थात् प्रतिबिंब का साइज़ (ऊँचाई) 14 cm होगा। ऋणात्मक चिह्न (-) यह दर्शाता है कि प्रतिबिंब वास्तविक तथा उल्टा होगा।

प्रश्न 16.
उस लेंस की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए जिसकी क्षमता -2.0 D है। यह किस प्रकार का लेंस है ?
हल : दिया है, लेंस की क्षमता (P) = -2.0 D
लेंस की फोकस दूरी (f) = ?
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 6
-2 = \(\frac{100}{f}\)
∴ f = \(\frac{-100}{2}\)
= -50 cm उत्तर
ऋणात्मक चिह्न यह दर्शाता है कि लेंस अवतल लेंस है।

प्रश्न 17.
कोई डॉक्टर + 1.5 D क्षमता का संशोधक लेंस निर्धारित करता है। लेंस की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए। क्या निर्धारित लेंस अभिसारी है अथवा अपसारी ?
हल : दिया है, लेंस की क्षमता (P) = + 1.5 D
लेंस की फोकस दूरी (f) = ?
लेंस की क्षमता सूत्र से P = \(\frac{1}{f}\)
1.5 = \(\frac{1}{1.5}\)
∴ f = \(\frac{10}{15}\)
= \(\frac{2}{3}\)
f = + 67 cm
धनात्मक चिह्न (+) यह दर्शाता है कि लेंस अभिसारी लेंस उत्तल लेंस है। उत्तर

Science Guide for Class 10 PSEB प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन InText Questions and Answers

प्रश्न 1.
अवतल दर्पण के मुख्य फोकस की परिभाषा लिखिए।
उत्तर-
अवतल दर्पण का मुख्य फोकस- यह मुख्य अक्ष पर वह बिंदु है जहाँ अवतल दर्पण के मुख्य अक्ष के समानांतर आपतित किरणें दर्पण से परावर्तन होने के पश्चात् मिलती हैं।

प्रश्न 2.
एक गोलीय दर्पण की वक्रता त्रिज्या 20 cm है। इसकी फोकस दूरी क्या होगी ?
हल-दिया है-
गोलीय दर्पण की वक्रता त्रिज्या (R) = 20 cm
∴ गोलीय दर्पण की फोकस दूरी (f) = \(\frac{\mathrm{R}}{2}\)
= \(\frac{20}{2}\) cm
= 10 cm

प्रश्न 3.
उस दर्पण का नाम बताइए जो बिंब का सीधा तथा आवर्धित प्रतिबिंब बना सके।
उत्तर-
अवतल दर्पण बिंब (वस्तु) का सीधा तथा आवर्धित प्रतिबिंब बनाता है जब बिंब को दर्पण के फोकस तथा ध्रुव के मध्य रखा जाता है।

प्रश्न 4.
हम वाहनों में उत्तल दर्पण को पश्च-दृश्य दर्पण के रूप में वरीयता क्यों देते हैं ?
उत्तर-
वाहनों में उत्तल दर्पण को पश्च-दृश्य दर्पण के रूप में वरीयता-उत्तल दर्पण को पश्य-दृश्य के रूप में वरीयता देने के निम्नलिखित कारण हैं

  • उत्तल दर्पण सदैव वस्तु का सीधा प्रतिबिंब बनाता है।
  • उत्तल दर्पण वस्तु की अपेक्षा छोटा प्रतिबिंब बनाता है जिससे दृष्टि क्षेत्र बढ़ जाता है और वाहन चालक ट्रैफिक वाले लगभग संपूर्ण क्षेत्र को देख पाता है।

प्रश्न 5.
उस उत्तल दर्पण की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए जिसकी वक्रता त्रिज्या 32 cm है।
हल :
दिया है, उत्तल दर्पण की वक्रता त्रिज्या (R) = + 32 cm
उत्तल दर्पण की फोकस दूरी (1) = ?
हम जानते हैं f = \(\frac{\mathrm{R}}{2} \)
∴ उत्तल दर्पण की फोकस दूरी (f) = \(\frac{+32}{2}\)
= + 16 cm उत्तर

प्रश्न 6.
कोई अवतल दर्पण आपके सामने 10 cm दूरी पर रखे किसी बिंब का तीन गुणा आवर्धित (बड़ा) प्रतिबिंब बनाता है। प्रतिबिंब दर्पण से कितनी दूरी पर है ?
हल-
दिया है, बिंब (वस्तु) की अवतल दर्पण से दूरी (u) = –10 cm
प्रतिबिंब का आवर्धन (m) = \(\frac{-v}{u}\) = -3
या \(\frac{v}{u}\) =3
या υ =3×4 =
= 3x -10
∴ υ = -30 cm उत्तर अर्थात् प्रतिबिंब की दर्पण से दूरी 30 cm है। ऋणात्मक चिह्न यह दर्शाता है कि प्रतिबिंब दर्पण के सामने बिंब की ओर ही बनेगा।

प्रश्न 7.
वायु में गमन करती प्रकाश की एक किरण जल में तिरछी प्रवेश करती है। क्या प्रकाश किरण अभिलंब की ओर झुकेगी अथवा अभिलंब से दूर हटेगी ? बताइए क्यों ?
उत्तर-
वायु में गमन करती प्रकाश की एक किरण जब जल में तिरछी प्रवेश करेगी तो यह किरण अभिलंब की ओर झुकेगी क्योंकि जल, वायु की अपेक्षा सघन माध्यम है और जल में प्रकाश की चाल में कमी आ जाएगी।

प्रश्न 8.
प्रकाश वायु से 1.50 अपवर्तनाँक की काँच की पलेट में प्रवेश करता है। काँच में प्रकाश की चाल कितनी है ? निर्वात में प्रकाश की चाल 3 x 10 m/s है।
हल : दिया है, काँच का अपवर्तनाँक (aug) = 1.50
निर्वात (वायु) में प्रकाश की चाल (c) = 3 x 108 m/s
काँच में प्रकाश की चाल (Vg) = ?
वायु में प्रकाश की चाल
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 7

प्रश्न 9.
पाठ्य-पुस्तक की सारणी 10:3 से अधिकतम प्रकाशिक घनत्व के माध्यम को ज्ञात कीजिए। न्यूनतम प्रकाशिक घनत्व के माध्यम को भी ज्ञात कीजिए।
उत्तर-
सारणी 10-3 से स्पष्ट है कि हीरे का अपवर्तनांक 2.42 है जोकि सबसे अधिक है तथा वायु का अपवर्तनांक 1.0003 है जोकि सबसे कम है। अतः हीरे का प्रकाशिक घनत्व अधिकतम तथा वायु का घनत्व न्यूनतम है।

प्रश्न 10.
आपको किरोसिन, तारपीन का तेल तथा जल दिए गए हैं। इनमें से किसमें प्रकाश सबसे अधिक तीव्र गति से चलता है ? सारणी 10.3 में दिए गए आँकड़ों का उपयोग कीजिए।
उत्तर-
हम जानते हैं कि अधिक अपवर्तनांक वाला माध्यम प्रकाशिक सघन माध्यम होता है जिसमें प्रकाश की चाल कम होती है तथा कम अपवर्तनांक वाले माध्यम प्रकाशिक विरल माध्यम होता है जिसमें प्रकाश की चाल कम होती है। सारणी 10-3 से स्पष्ट है कि किरोसिन का अपवर्तनांक 1.44, तारपीन के तेल का अपवर्तनाँक 1-47 तथा जल का अपवर्तनांक 1.33 है। इन आँकड़ों से स्पष्ट है कि जल का अपवर्तनांक न्यूनतम है, इसलिए जल में प्रकाश सबसे तीव्र गति से चलता है।

प्रश्न 11.
हीरे का अपवर्तनांक 2-42 है। इस कथन का क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
हीरे का अपवर्तनांक 2.42 है। इस कथन का अभिप्राय यह है कि हीरे में प्रकाश की चाल, निर्वात में प्रकाश की चाल की अपेक्षा \(\frac{1}{2.42}\) गुना है।

प्रश्न 12.
किसी लेंस की 1 डाइऑप्टर क्षमता को परिभाषित कीजिए।
उत्तर-
1 डाइऑप्टर उस लेंस की क्षमता है जिसकी फोकस दूरी 1 मीटर (= 100 सेंटीमीटर) हो। उत्तल लेंस की क्षमता धनात्मक तथा अवतल लेंस की क्षमता ऋणात्मक मानी जाती है।

प्रश्न 13.
कोई उत्तल लेंस किसी सुई का वास्तविक तथा उलटा प्रतिबिंब उस लेंस से 50 cm दूर बनाता है। यह सुई, उत्तल लेंस के सामने कहाँ रखी है, यदि इसका प्रतिबिंब उसी साइज़ का बन रहा है जिस साइज़ का बिंब है ? लेंस की क्षमता ज्ञात कीजिए।
हल-दिया है, उत्तल लेंस से प्रतिबिंब की दूरी (ν) = + 50 cm
[ν का चिह्न + है क्योंकि प्रतिबिंब वास्तविक तथा उल्टा है।]
प्रतिबिंब का साइज़ अथवा ऊँचाई (I) = बिंब (वस्तु) का साइज़ (O)
∴ आवर्धन (m) = \(\frac{\mathrm{I}}{\mathrm{O}}\) =-1
[वास्तविक प्रतिबिंब के लिए आवर्धन ऋणात्मक होता है।]

परंतु लेंस के लिए m = \(\frac{v}{u}\)
∴ \(\frac{v}{u}\) = -1
या v = υ
या u = – υ
u = – υ
∴ u = (-50) cm
= 50 cm
अत: सूई (बिंब) उत्तल लेंस के सामने 50 cm की दूरी पर रखी है।
लेंस सूत्र \(\frac{1}{v}-\frac{1}{u}=\frac{1}{f}\) से
\(\frac{1}{50}-\frac{1}{-50}=\frac{1}{f}\)
\(\frac{1}{50}+\frac{1}{50}=\frac{1}{f}\)
\(\frac{1+1}{50}=\frac{1}{f}\)
\(\frac{2}{50}=\frac{1}{f}\)
\(\frac{1}{25}=\frac{1}{f}\)
∴ f = 25 cm = 0.25 cm
∴ लेंस की क्षमता (P) = \(\frac{1}{f(\text { in metres })}\)
= \(\frac{1}{0.25}\) D
लेंस की क्षमता (P) = + 4 D उत्तर

प्रश्न 14.
2 m फोकस दूरी वाले किसी अवतल लेंस की क्षमता ज्ञात कीजिए।
हल :
दिया है, अवतल लेंस की फोकस दूरी (f) = -2 m
[अवतल लेंस की फोकस दूरी ऋणात्मक मानी जाती है।] अवतल लेंस की क्षमता (P) = ?
हम जानते हैं,
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 9
= \(\frac{1}{-2}\) D
= \(\frac{1}{-2}\) D
अवतल लेंस की क्षमता (P) = -0.5 D उत्तर

PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 9 आनुवंशिकता एवं जैव विकास

Punjab State Board PSEB 10th Class Science Book Solutions Chapter 9 आनुवंशिकता एवं जैव विकास Textbook Exercise Questions, and Answers.

PSEB Solutions for Class 10 Science Chapter 9 आनुवंशिकता एवं जैव विकास

PSEB 10th Class Science Guide आनुवंशिकता एवं जैव विकास Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
मेंडल के एक प्रयोग में लंबे मटर के पौधे जिनके बैंगनी पुष्प थे, का संकरण बौने पौधों जिनके सफ़ेद पुष्प थे, से कराया गया। इनकी संतति के सभी पौधों में पुष्प बैंगनी रंग के थे। परंतु उनमें से लगभग आधे बौने थे। इससे कहा जा सकता है, लंबे जनक पौधों की आनुवंशिक रचना निम्न थी –
(a) TTWW
(b) TTww
(c) Tt ww
(c) Tt Ww.
उत्तर-
(c) TtWW.

प्रश्न 2.
समजात अंगों के उदाहरण हैं –
(a) हमारा हाथ तथा कुत्ते के अग्रपाद
(b) हमारे दाँत तथा हाथी के दाँत
(c) आलू एवं घास के उपरिभूस्तारी
(d) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(d) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 3.
विकासीय दृष्टिकोण से हमारी किससे अधिक समानता है
(a) चीन के विद्यार्थी
(b) चिम्पैंज़ी
(c) मकड़ी
(d) जीवाणु।
उत्तर-
(a) चीन के विद्यार्थी।

प्रश्न 4.
एक अध्ययन से पता चला कि हल्के रंग की आँखों वाले बच्चे के जनक ( माता-पिता) की आँखें भी हल्के रंग की होती हैं। इसके आधार पर क्या हम कह सकते हैं कि आँखों के हल्के रंग का लक्षण प्रभावी है अथवा अप्रभावी ? अपने उत्तर की व्याख्या कीजिए।
उत्तर-
सभी बच्चों में अपने माता-पिता के लक्षण प्रकट होते हैं। माता-पिता से हल्के रंग की आँखों का बच्चों में आ जाना सहज स्वाभाविक है। इस अवस्था में तो आँखों के हल्के रंग का लक्षण प्रभावी है पर इसे हर बच्चे की अवस्था में प्रभावी नहीं कह सकते। यह अप्रभावी भी हो सकता है।

प्रश्न 5.
जैव-विकास तथा वर्गीकरण का अध्ययन क्षेत्र परस्पर किस प्रकार संबंधित है ?
उत्तर-
जीवों में वर्गीकरण का अध्ययन उन में विद्यमान समानताओं और भेदों के आधार पर किया जाता है। उनमें समानता इसलिए प्रकट होती है कि वे किसी समान पूर्वज से उत्पन्न हुए हैं और उनमें भिन्नता विभिन्न प्रकार के पर्यावरणों में की जाने वाली अनुकूलता के कारण से है। उनमें बढ़ती जटिलता को जैव विकास के उत्तरोत्तर क्रमिक आधार पर स्थापित कर अंतर्संबंधों का ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है।

प्रश्न 6.
समजात तथा समरूप अंगों को उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर-
समजात अंग-पौधों और प्राणियों के वे अंग जिनकी आधारभूत रचना एक समान होती है पर उनके कार्य भिन्न-भिन्न होते हैं, उन्हें समजात अंग कहते हैं। जैसे-पक्षियों के पंख, मनुष्य की भुजाएं, कुत्ते की अगली टांगें, मेंढक के अग्रपाद, गाय, घोड़े आदि के अग्रपाद। ये सभी अंग रचना के आधार पर एक समान हैं पर इनका जीवों में कार्य अलग-अलग है।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 9 आनुवंशिकता एवं जैव विकास 1
चित्र-समजात अंग समरूप अंग-जीवों के वे अंग जो देखने में एक समान हों, पर उनकी रचना और कार्य भिन्न-भिन्न हों, उन्हें समरूप अंग कहते हैं; जैसे कीटों के पंख, पक्षियों के पंख, चमगादड़ के पंख। इन सभी जीवों में पंख देखने में एक-समान दिखाई देते हैं, परंतु उनकी रचना
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 9 आनुवंशिकता एवं जैव विकास 2
कीट के पंख और कार्य भिन्न हैं। मटर, अंगूर आदि पौधों में प्रतान चित्र-समरूप अंग भी इसी के उदाहरण हैं।

प्रश्न 7.
कुत्ते की खाल का प्रभावी रंग पीढ़ी ज्ञात करने के उद्देश्य से एक प्रोजेक्ट बनाइए।
उत्तर-
काले रंग के नर और सफ़ेद रंग की मादा के संयोग से उत्पन्न यदि सारे पिल्ले युग्मक काले रंग के हों तो कुत्ते की खाल का प्रभावी
रंग काला ही होगा। तीन कुत्ते काले और एक  सभी काली त्वचा वाले लक्षण कुत्ता सफेद होगा। यह दर्शाता है कि काला रंग प्रभावी रंग है।
कुत्तों के अलग-अलग रंगों का कारण अविकल्पी जीनों की आपसी क्रिया के कारण होता है जिसमें F2 अनुपात 12 : 3 : 1 होता है। इसलिए शुद्ध नस्लों के बीच संकरण कराए बिना किसी सही-सटीक निर्णय तक नहीं पहुंचा जा सकता।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 9 आनुवंशिकता एवं जैव विकास 3

प्रश्न 8.
विकासीय संबंध स्थापित करने में जीवाश्म का क्या महत्त्व है ?
उत्तर-
विकासीय संबंध स्थापित करने में जीवाश्म अति महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। युगों पहले जो जीव ऐसे वातावरण में चले गए थे जहां उनका पूरा अपघटन नहीं हुआ था तो उनके शरीर की छाप चट्टानों पर सुरक्षित रह गई। वे परिरक्षित जीवाश्म ही जीवाश्म कहलाते हैं। जब जीवाश्मों की खुदाई से प्राप्ति की जाती है तो उनकी प्राप्ति की गहराई से पता लग जाता है कि वह लगभग कितना पुराना है। ‘फॉसिल डेटिंग’ इस काम में सहायक सिद्ध होती चित्र-जीवाश्मों से विकासीय संबंध है।

जो जीवाश्म जितनी अधिक गहराई से प्राप्त होगा वह उतना ही पुराना होगा। लगभग 10 करोड़ वर्ष पहले समुद्र तल में अकशेरुकी जीवों के जो जीवाश्म प्राप्त होते हैं वे सबसे पुराने हैं। इसके कुछ मिलियन वर्ष बाद जब डायनोसॉर मरे तो उनके जीवाश्म अकशेरुकी जीवों के जीवाश्मों से ऊपरी सतह में बने। इसके कुछ मिलियन वर्ष बाद जब घोड़े के समान जीव जीवाश्मों में बदले तो उन्हें डायनोसॉरों के जीवाश्मों से ऊपर स्थान मिला। इसी से उनका विकासीय संबंध स्थापित होता है।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 9 आनुवंशिकता एवं जैव विकास 4

प्रश्न 9.
किन प्रमाणों के आधार पर हम कह सकते हैं कि जीवन की उत्पत्ति अजैविक पदार्थों से हुई है ?
उत्तर-
विभिन्न जातियों के विकासीय संबंधों का अध्ययन यही दर्शाता है कि जीवन की उत्पत्ति एक ही जाति से हुई है। एक ब्रिटिश वैज्ञानिक जे० बी० एस० हाल्डेन ने सबसे पहली बार सुझाव दिया था कि जीवों की उत्पत्ति उन अजैविक पदार्थों से हुई होगी जो पृथ्वी की उत्पत्ति के समय बने थे। सन् 1953 में स्टेनल एल० मिलर और हेराल्ड सी० डरे ने ऐसे कृत्रिम वातावरण का निर्माण किया था जो प्राचीन वातावरण के समान था। इस वातावरण में ऑक्सीजन नहीं थी। इसमें अमोनिया, मीथेन और हाइड्रोजन सल्फाइड थे। उसमें एक पात्र में जल भी था जिसका तापमान 100°C से कम रखा गया था। जब गैसों के मिश्रण से चिंगारियाँ उत्पन्न की गईं जो आकाशीय बिजलियों के समान थीं। मीथेन से 15% कार्बन सरल कार्बनिक यौगिक यौगिकों में बदल गए। इनमें एमीनो अम्ल भी संश्लेषित हुए जो प्रोटीन के अणुओं का निर्माण करते हैं। इसी आधार पर हम कह सकते हैं कि जीवन की उत्पत्ति अजैविक पदार्थों से हुई है।

प्रश्न 10.
अलैंगिक जनन की अपेक्षा लैंगिक जनन द्वारा उत्पन्न विभिन्नताएँ अधिक स्थायी होती हैं, व्याख्या कीजिए। यह लैंगिक प्रजनन करने वाले जीवों के विकास को किस प्रकार प्रभावित करता है ?
उत्तर-
अलैंगिक जनन की अपेक्षा लैंगिक जनन द्वारा उत्पन्न विभिन्नताएँ अधिक स्थाई होती हैं। अलैंगिक जनन एक ही जीव से होने के कारण केवल उसी के गण उसकी संतान में जाते हैं और वे बिना परिवर्तन हए पीढी दर पीढी समान ही रहते हैं। लैंगिक जनन नर और मादा के युग्मकों के संयोग से होता है जिनमें भिन्न-भिन्न जीन होने के कारण संकरण के समय विभिन्नता वाली संतान उत्पन्न होती है। उदाहरण के लिए सभी मानव युगों पहले अफ्रीका में उत्पन्न हुए थे पर जब उनमें से अनेक ने अफ्रीका छोड़ दिया और धीरे-धीरे सारे संसार में फैल गए तो लैंगिक जनन से उत्पन्न विभिन्नताओं के कारण उनकी त्वचा का रंग, कद, आकार आदि में परिवर्तन आ गया।

प्रभावित करने के कारण/आधार-
I. लैंगिक जनन में DNA की प्रतिकृति में हुई त्रुटियों के कारण विभिन्नताएं उत्पन्न हो जाती हैं।
II. नर और मादा के क्रॉसिंग ओवर के समय समजात गुणसूत्रों के समान भाग आपस में बदल जाते हैं।
III. संतान को अपने माता-पिता से बराबर आनुवंशिक पदार्थ प्राप्त होता है जिसमें जीन परस्पर क्रिया कर अनेक नए विकल्पों को जन्म दे सकती है।
IV. संतान के लिंग और विभिन्नताएं सदा इस संयोग पर निर्भर करती हैं कि माता-पिता का कौन-सा मादा युग्मक नर शुक्राणु के साथ संयोजित होगा।

प्रश्न 11.
संतति में नर एवं मादा जनकों द्वारा आनुवंशिक योगदान में बराबर की भागीदारी किस प्रकार सुनिश्चित की जाती है ?
उत्तर-
प्रत्येक कोशिका में गुणसूत्रों का एक जोड़ा होता है-एक नर से और दूसरा मादा से। जब युग्मक बनते हैं तो गुणसूत्रों के जोड़े से आधे-आधे गुणसूत्र उसे प्राप्त होते हैं। युग्मकों के संलयन से गुणसूत्र फिर से मिल जाते हैं। इसलिए संतति में नर एवं मादा जनकों द्वारा आनुवांशिक योगदान में बराबर की भागीदारी होती है। उदाहरणमनुष्य में 23 जोड़े अर्थात् 46 गुण सूत्र पाए जाते हैं। इनमें से 22 जोड़े अलिंगी गुण सूत्र और 23वां जोड़ा लिंगी गुण सूत्र कहलाता है। नर में XY गुण सूत्र और मादा में XX गुण सूत्र होते हैं। प्रजनन कोशिका के निरंतर विभाजन से ही जनन संभव हो पाता है। जब लैंगिक जनन की प्रक्रिया में संतति की रचना होती है तब नर और मादा उसे समान रूप से आनुवंशिक पदार्थ प्रदान करते हैं। इसी कारण संतति में नर और मादा जनकों द्वारा आनुवंशिक योगदान में बराबर की भागीदारी सुनिश्चित की जाती है।

प्रश्न 12.
केवल वे विभिन्नताएँ जो किसी एकल जीव (व्यष्टि) के लिए उपयोगी होती हैं, समष्टि में । अपना अस्तित्व बनाए रखती हैं। क्या आप इस कथन से सहमत हैं ? क्यों एवं क्यों नहीं ?
उत्तर-
हाँ, लैंगिक जनन के परिणामस्वरूप जीव में अनेक प्रकार की विभिन्नताएँ उत्पन्न होती हैं लेकिन वे सारी विभिन्नताएँ अपना अस्तित्व बनाकर नहीं रख पातीं। जीव के सामाजिक व्यवहार के कारण उन विभिन्नताओं में अंतर आ जाता है। यह संभव है कि सामाजिक जीव चींटी के अस्तित्व को उसकी विभिन्नता प्रभावित करे और वह जीवित न रह पाए लेकिन बाघ जैसे प्राणी के अस्तित्व को संभवतः वह प्रभावित न करे और उसका अस्तित्व बना रहे।

Science Guide for Class 10 PSEB जीव जनन कैसे करते हैं InText Questions and Answers

प्रश्न 1.
यदि एक ‘लक्षण-A’ अलैंगिक प्रजनन वाली समष्टि के 10 प्रतिशत सदस्यों में पाया जाता है तथा ‘लक्षण-B’ उसी समष्टि में 60 प्रतिशत जीवों में पाया जाता है, तो कौन-सा लक्षण पहले उत्पन्न होगा?
उत्तर-
लक्षण-B’ अलैंगिक प्रजनन वाली समष्टि में 60 प्रतिशत जीवों में पाया जाता है जो ‘लक्षण-A’ प्रजनन वाली समष्टि से 50% अधिक है इसलिए ‘लक्षण-B’ पहले उत्पन्न हुआ होगा।

प्रश्न 2.
विभिन्नताओं के उत्पन्न होने से किसी स्पीशीज़ का अस्तित्व किस प्रकार बढ़ जाता है ?
उत्तर-
विभिन्नताओं के उत्पन्न होने से किसी स्पीशीज़ की उत्तरजीविता की संभावना बढ़ जाती है। प्राकृतिक चयन ही किसी स्पीशीज़ की उत्तरजीविता का आधार बनता है जो वातावरण में घटित होता है। समय के साथ उनमें जो प्रगति की प्रवृत्ति दिखाई देती है उसके साथ उन के शारीरिक अधिकल्प में जटिलता की वृद्धि भी हो जाती है। ऊष्णता को सहन करने की क्षमता वाले जीवाणुओं की अधिक गर्मी में बचने की संभावना अधिक होती है। पर्यावरण द्वारा उत्तम परिवर्तन का चयन जैव विकास प्रक्रम का आधार बनता है। विभिन्ताएँ प्राकृतिक वरण में सहायता देती हैं और विपरीत परिस्थितियों से जूझने में सहायक होती हैं। ये अनुकूलन को बढ़ावा देती हैं।

प्रश्न 3.
मेंडल के प्रयोगों द्वारा कैसे पता चला कि लक्षण प्रभावी अथवा अप्रभावी होते हैं ?
उत्तर-
जब मेंडल ने मटर के लंबे पौधे और बौने पौधे का संकरण कराया तो उसे प्रथम संतति पीढ़ी F, में सभी पौधे लंबे प्राप्त हुए थे। इसका अर्थ था कि दो लक्षणों में से केवल एक पैतृक लक्षण ही दिखाई दिया। उन दोनों का मिश्रित प्रमाण दिखाई नहीं दिया। उसने पैतृक पौधों और F2 पीढ़ी के पौधों को स्वपरागण से उगाया। इस दूसरी पीढ़ी F1 में सभी पौधे लंबे नहीं थे। इसमें एक चौथाई पौधे बौने थे। मेंडल ने लंबे पौधों के लक्षण को प्रभावी और बौने पौधों के लक्षण को अप्रभावी कहा।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 9 आनुवंशिकता एवं जैव विकास 5

प्रश्न 4.
मेंडल के प्रयोगों से कैसे पता चला कि विभिन्न लक्षण स्वतंत्र रूप से वंशानुगत होते हैं ?
उत्तर-
मेंडल ने दो विभिन्न विकल्पों, लक्षणों वाले मटर के पौधों का चयन कर उनसे पौधे उगाए थे। लंबे पौधे तथा बौने पौधे का संकरण करा कर प्राप्त संतति में लंबे एवं बौने पौधों की गणना की। प्रथम संतति पीढ़ी (F1) में कोई पौधा बीच की ऊंचाई का नहीं था। सभी पौधे लंबे थे। दो लक्षणों में से केवल एक पैतृक लक्षण ही दिखाई दिया था लेकिन दूसरी पीढ़ी (F2) में सभी पौधे लंबे नहीं थे बल्कि उनमें से एक चौथाई बौने पौधे थे। इससे स्पष्ट हुआ कि किसी भी लक्षण के दो विकल्प लैंगिक जनन द्वारा उत्पन्न होने वाले जीवों में किसी भी लक्षण के दो विकल्प की स्वतंत्र रूप से वंशानुगत होती है।

प्रश्न 5.
एक ‘A’- रुधिर वर्ग’ वाला पुरुष एक स्त्री जिसका रुधिर वर्ग ‘0’ से विवाह करता है। उनकी पुत्री का रुधिर वर्ग ‘0’ है। क्या यह सूचना पर्याप्त है यदि आप से कहा जाए कि कौन-सा विकल्प लक्षणरुधिर वर्ग ‘A’ अथवा ‘0’ प्रभावी लक्षण है ? अपने उत्तर का स्पष्टीकरण दीजिए।
उत्तर-
रुधिर समूह ‘O’ प्रभावी लक्षण है क्योंकि वह F-I पीढ़ी में रुधिर समूह ‘O’ प्रकट हुआ है। यह सूचना प्रभावी और प्रभावी लक्षण को प्रकट करने के लिए पर्याप्त है। रुधिर वर्ग-A (प्रतिजन-A) के लिए जीन प्रभावी हैं और जीन प्रारूप IA IA या IAi है। स्त्री का रुधिर वर्ग ‘O’ है इसलिए उसका जीन प्रारूप ‘ii’ समयुग्मी है। पुत्री के रुधिर वर्ग ‘O’ को क्रास से इस प्रकार दिखाया जा सकता है-
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 9 आनुवंशिकता एवं जैव विकास 6
रुधिर वर्ग ‘O’ उसी स्थिति में होता है जब रक्त में प्रतिजन A और प्रतिजन B नहीं होता।

प्रश्न 6.
मानव में बच्चे का लिंग निर्धारण कैसे होता है ?
उत्तर-
मानव में बच्चे का लिंग निर्धारण-मानवों में लिंग का निर्धारण विशेष लिंग गुण सूत्रों के आधार पर होता है। नर में XY गुण सूत्र होते हैं और मादा में XX गुण सूत्र विद्यमान होते हैं। इससे स्पष्ट है कि मादा के पास Y गुण सूत्र होता ही नहीं है। जब नर-मादा के संयोग से संतान उत्पन्न होती है तो मादा किसी भी अवस्था में नर शिशु को उत्पन्न करने में समर्थ हो ही नहीं सकती क्योंकि नर शिशु में XY गुण सूत्र होने चाहिएँ।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 9 आनुवंशिकता एवं जैव विकास 7
निषेचन क्रिया में यदि पुरुष का X लिंग गुण सूत्र स्त्री के X लिंग गुणसूत्र से मिलता है तो इससे XX जोड़ा बनेगा अतः संतान लड़की के रूप में होगी लेकिन जब पुरुष का Y लिंग गुण सूत्र स्त्री के X लिंग गुण सूत्र से मिलकर निषेचन करेगा तो XY बनेगा। इससे लड़के का जन्म होगा। किसी भी परिवार में लड़के या लड़की का जन्म पुरुष के गुण सूत्रों पर निर्भर करता है क्योंकि Y गुण सूत्र तो केवल उसी के पास होता है।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 9 आनुवंशिकता एवं जैव विकास 8

प्रश्न 7.
वे कौन-से विभिन्न तरीके हैं जिनके द्वारा विशेष लक्षण वाले व्यष्टि जीवों की संख्या समष्टि में बढ़ सकती है ?
उत्तर-
यदि जनसंख्या में परिवर्तन उत्पन्न होते हैं और वे परिवर्तन व्यष्टि की सुरक्षा एवं पोषण के प्रति अनुकूल प्राकृतिक अवस्थाएँ उपस्थित करते हैं तो विशेष लक्षण वाले व्यष्टि जीवों की संख्या समष्टि में बढ़ सकती है। प्राकृतिक प्रभेद चयन और आनुवंशिक अनुकूलता इस कार्य में विशेष सहयोग प्रदान करते हैं।

प्रश्न 8.
एक एकल जीव द्वारा उपार्जित लक्षण सामान्यतः अगली पीढ़ी में वंशानुगत नहीं होते। क्यों ?
उत्तर-
एक एकल जीव द्वारा उपार्जित लक्षण उसकी जनन कोशिकाओं की जीन पर प्रभाव नहीं डालते इसलिए वे सामान्यतः अगली पीढ़ी में वंशानुगत नहीं होते।

प्रश्न 9.
बाघों की संख्या में कमी आनुवंशिकता के दृष्टिकोण से चिंता का विषय क्यों है ?
उत्तर-
बाघों में आनुवंशिक विभिन्नता लगभग नहीं के बराबर है। यदि अत्यंत तेजी से बदलती पर्यावरणीय स्थितियों में परिवर्तन नहीं आया तो वे सब नाटकीय रूप से समाप्त हो जाएंगे। उदाहरण के लिए-यदि किसी बाघ में किसी भयानक रोग का संक्रमण हो जाए तो सभी बाघ उसी से मर जाएँगे क्योंकि संक्रमण उनकी जीन की आवृत्ति को प्रभावित करेगा। बाघों की निरंतर घटती संख्या भी यही संकेत कर रही है कि पर्यावरण में आया परिवर्तन उनके लिए अनुकूल नहीं रहा है और वे शायद शीघ्र ही समाप्त हो जाएं।

प्रश्न 10.
वे कौन-से कारक हैं जो नई स्पीशीज़ के उद्भव में सहायक हैं ?
उत्तर-
नई स्पीशीज़ के उद्भव में निम्नलिखित कारक सहायक होते हैं –

  • आनुवंशिक अपवहन।
  • लिंगी प्रजनन के परिणामस्वरूप उत्पन्न उत्परिवर्तन।
  • दो उपसमष्टियों का एक-दूसरे से भौगोलिक पृथक्करण जिसके फलस्वरूप समिष्टियों के सदस्य परस्पर एकलिंगी प्रजनन नहीं कर पाते।
  • प्राकृतिक चयन।

प्रश्न 11.
क्या भौगोलिक पृथक्करण स्वपरागित स्पीशीज़ के पौधों के जाति-उद्भव का प्रमुख कारण हो सकता है ? क्यों या क्यों नहीं ?
उत्तर-
हाँ। विभिन्न भौगोलिक स्थितियों के कारण विभिन्न पौधों में भी भिन्नताएँ होंगी। लक्षण दो प्रकार के होते हैं-जननकीय लक्षण और पर्यावरणीय लक्षण। स्वपरागित प्रजाति की जीन संरचना में कोई परिवर्तन न होने के कारण विभिन्नताएँ उत्पन्न नहीं होतीं पर पर्यावरणीय लक्षणों के कारण ये स्वयं को एक जाति के रूप में स्थापित कर लेती हैं।

प्रश्न 12.
क्या भौगोलिक पृथक्करण अलैंगिक जनन वाले जीवों के जाति-उद्भव का प्रमुख कारक हो सकता है ? क्यों अथवा क्यों नहीं ?
उत्तर-
नहीं। अलैंगिक जनन वाले जीवों में पीढ़ियों तक विभिन्नता उत्पन्न नहीं होती। भौगोलिक पृथक्करण से अनेक पीढ़ियों तक उन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि अति न्यून विभिन्नताएँ स्पीशीज़ के लिए पर्याप्त नहीं होंगी।

प्रश्न 13.
उन अभिलक्षणों का एक उदाहरण दीजिए जिनका उपयोग हम दो स्पीशीज़ के विकासीय संबंध निर्धारण के लिए करते हैं ?
उत्तर-
पक्षी, मेंढक, छिपकली, घोड़ा और मानव में चार पाद हैं और उन सभी की आधारभूत संरचना एक समान है चाहे वे सब प्राणी इनसे अलग-अलग काम लेते हैं। ऐसे समजात अभिलक्षणों से भिन्न दिखाई देने वाली अलग-अलग स्पीशीज़ के बीच विकासीय संबंध का निर्धारण करते हैं।

प्रश्न 14.
क्या एक तितली और चमगादड़ के पंखों को समजात अंग कहा जा सकता है ? क्यों अथवा क्यों नहीं?
उत्तर-
तितली और चमगादड़ दोनों जीवों के पंख उड़ने का काम करते हैं पर इन्हें समजात अंग नहीं कहा जा सकता क्योंकि इनके पंखों की मूल रचना और उत्पत्ति एक समान नहीं होती चाहे इनके कार्य एक समान होते हैं। ये इनके समवृत्ति अंग हैं।

प्रश्न 15.
जीवाश्म क्या हैं ? वह जैव-विकास प्रक्रम के विषय में क्या दर्शाते हैं ?
उत्तर-
जीवाश्म- जीवों के चट्टानों में दबे अवशेषों को जीवाश्म कहते हैं। युगों पहले जिन जीवों का अपघटन नहीं हो सका था वे मिट्टी में मिल गए थे। उनके शरीर की छाप गीली मिट्टी पर रह गई थी और वह मिट्टी बाद में चट्टान में बदल गई थी। जीवाश्म पौधों या जंतुओं के अवशेष हैं।
इनसे निम्नलिखित जानकारियां प्राप्त होती हैं –
I. आज पाए जाने वाले जीवजंतुओं से पुरातन काल में पाए जाने वाले जीव-जंतु बहुत भिन्न थे।
II. पक्षियों का विकास सरीसृपों से हुआ।
III. टैरिडोफाइट और जिम्नोस्पर्म से ऐन्जियोस्पर्म विकसित हुए।
IV. सरल जीवों से ही जटिल जीवों का विकास हुआ।
V. विभिन्न पौधों और जंतुओं के वर्गों के विकास क्रम का पता चलता है।
VI. मानव विकास की प्रक्रिया का पता चलता है।

प्रश्न 16.
क्या कारण है कि आकृति, आकार, रंग-रूप में इतने भिन्न दिखाई पड़ने वाले मानव एक ही स्पीशीज़ के सदस्य हैं ?
उत्तर-
विभिन्न स्थानों पर मिलने वाले मानवों की आकृति, आकार, रंग-रूप में भिन्नता वास्तव में आभासी है। इनकी भिन्नता का जैविक आधार तो है पर सभी मानव एक ही स्पीशीज़ के सदस्य हैं। उनमें किसी प्रकार का आनुवंशिक विचलन नहीं है। आनुवंशिक विचलन ही किसी स्पीशीज़ को दूसरे से भिन्न करता है।

प्रश्न 17.
विकास के आधार पर क्या आप बता सकते हैं कि जीवाणु, मकड़ी, मछली तथा चिम्पैंजी में किसका शारीरिक अभिकल्प उत्तम है ? अपने उत्तर की व्याख्या कीजिए।
उत्तर-
जब पृथ्वी पर जीवन का विकास हुआ था तब जीवाणु सबसे पहले बनने वाले जीव थे। युगों बाद वे अभी भी अपना अस्तित्व कायम रखे हुए हैं। उन्होंने पर्यावरण में आने वाले सभी परिवर्तनों को सफलतापूर्वक झेला है और उनके अनुसार अनुकूलन किया है इसलिए वे विस्तार के आधार पर पूर्ण रूप से सफ़ल और समर्थ हैं। इसी प्रकार मकड़ी, मछली तथा चिंपैंजी ने भी अपने-अपने जीवन को विपरीत परिस्थितियों में ढालने के लिए अनुकूलन किया है। इसलिए सभी का शारीरिक अधिकल्प उत्तम है। किसी को भी शारीरिक अधिकल्प निकृष्ट नहीं कहा जा सकता।

PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 1 ਰਸਾਇਣਿਕ ਕਿਰਿਆਵਾਂ ਅਤੇ ਸਮੀਕਰਣਾਂ

Punjab State Board PSEB 10th Class Science Book Solutions Chapter 1 ਰਸਾਇਣਿਕ ਕਿਰਿਆਵਾਂ ਅਤੇ ਸਮੀਕਰਣਾਂ Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 10 Science Chapter 1 ਰਸਾਇਣਿਕ ਕਿਰਿਆਵਾਂ ਅਤੇ ਸਮੀਕਰਣਾਂ

PSEB 10th Class Science Guide ਰਸਾਇਣਿਕ ਕਿਰਿਆਵਾਂ ਅਤੇ ਸਮੀਕਰਣਾਂ Textbook Questions and Answers

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਹੇਠ ਲਿਖੀ ਗਈ ਰਸਾਇਣਿਕ ਕਿਰਿਆ ਦੇ ਸੰਬੰਧ ਵਿੱਚ ਕਿਹੜੇ ਕਥਨ ਗਲਤ ਹਨ:
2PbO(s) + C(s) → 2Pb(s) + CO2(g)
(a) ਸ਼ੈੱਡ ਦਾ ਲਘੂਕਰਨ ਹੋ ਰਿਹਾ ਹੈ ।
(b) ਕਾਰਬਨ-ਡਾਈਆਕਸਾਈਡ ਦਾ ਆਕਸੀਕਰਨ ਹੋ ਰਿਹਾ ਹੈ ।
(c) ਕਾਰਬਨ ਦਾ ਆਕਸੀਕਰਨ ਹੋ ਰਿਹਾ ਹੈ ।
(d) ਚੈੱਡ ਆਕਸਾਈਡ ਦਾ ਲਘੂਕਰਨ ਹੋ ਰਿਹਾ ਹੈ ।
(i) (a) ਅਤੇ (b)
(ii) (a) ਅਤੇ (c)
(iii) (a), (b) ਅਤੇ (c)
(iv) ਸਾਰੇ ।
ਉੱਤਰ-
(i) (a) ਅਤੇ (b) ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
Fe2O3 + 2Al → Al2O3 + 2Fe ਉਪਰੋਕਤ ਰਸਾਇਣਿਕ ਕਿਰਿਆ ਇੱਕ ਉਦਾਹਰਣ ਹੈ :
(a) ਸੰਯੋਜਨ ਕਿਰਿਆ
(b) ਦੂਹਰਾ ਵਿਸਥਾਪਨ ਕਿਰਿਆ
(c) ਅਪਘਟਨ ਕਿਰਿਆ ।
(d) ਵਿਸਥਾਪਨ ਕਿਰਿਆ ।
ਉੱਤਰ-
ਉਪਰੋਕਤ ਰਸਾਇਣਿਕ ਕਿਰਿਆ ਵਿਸਥਾਪਨ ਕਿਰਿਆ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿੱਚ Al, Fe2O3 ਦੇ Fe ਨੂੰ ਵਿਸਥਾਪਿਤ ਕਰਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਲਈ (d) ਸਹੀ ਉੱਤਰ ਹੈ ।

PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 1 ਰਸਾਇਣਿਕ ਕਿਰਿਆਵਾਂ ਅਤੇ ਸਮੀਕਰਣਾਂ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਕੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜਦੋਂ ਪਤਲਾ ਹਾਈਡਰੋਕਲੋਰਿਕ ਐਸਿਡ ਲੋਹ ਬੂਰਨ ਉੱਤੇ ਪਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ? ਸਹੀ ਉੱਤਰ ਤੇ ਨਿਸ਼ਾਨ ਲਗਾਉ ।
(a) ਹਾਈਡਰੋਜਨ ਗੈਸ ਅਤੇ ਆਇਰਨ ਕਲੋਰਾਈਡ ਪੈਦਾ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।
(b) ਕਲੋਰੀਨ ਗੈਸ ਅਤੇ ਆਇਰਨ ਹਾਈਡਰੋਕਸਾਈਡ ਪੈਦਾ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।
(c) ਕੋਈ ਕਿਰਿਆ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ ।
(d) ਆਇਰਨੇ ਲੂਣ ਅਤੇ ਪਾਣੀ ਪੈਦਾ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਉਪਰੋਕਤ ਕਿਰਿਆ ਇਸ ਪ੍ਰਕਾਰ ਹੈ –
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 1 ਰਸਾਇਣਿਕ ਕਿਰਿਆਵਾਂ ਅਤੇ ਸਮੀਕਰਣਾਂ 1
ਜਿਸ ਵਿੱਚ H2 ਅਤੇ FeCl2 ਮਿਲਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਲਈ (a) ਸਹੀ ਉੱਤਰ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਸੰਤੁਲਿਤ ਰਸਾਇਣਿਕ ਸਮੀਕਰਣ ਕੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ? ਰਸਾਇਣਿਕ ਸਮੀਕਰਣ ਨੂੰ ਸੰਤੁਲਿਤ ਕਿਉਂ ਕੀਤਾ ਜਾਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਸੰਤੁਲਿਤ ਰਸਾਇਣਿਕ ਸਮੀਕਰਣ-ਜੇ ਕਿਸੇ ਰਸਾਇਣਿਕ ਪ੍ਰਤੀਕਿਰਿਆ ਵਿੱਚ ਅਭਿਕਾਰਕ ਅਤੇ ਉਤਪਾਦਾਂ ਦੇ ਪਰਮਾਣੂਆਂ ਦੀ ਗਿਣਤੀ ਬਰਾਬਰ ਹੋਵੇ, ਤਾਂ ਉਹ ਸੰਤੁਲਿਤ ਰਸਾਇਣਿਕ ਸਮੀਕਰਣ ਕਹਾਉਂਦੀ ਹੈ ।

ਸਮੀਕਰਣ ਨੂੰ ਸੰਤੁਲਿਤ ਕਰਨਾ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਪੁੰਜ ਦੇ ਸੁਰੱਖਿਅਣ ਦੇ ਨਿਯਮ ਅਨੁਸਾਰ ਕਿਸੇ ਵੀ ਰਸਾਇਣਿਕ ਪ੍ਰਤੀਕਿਰਿਆ ਵਿੱਚ ਪੁੰਜ ਦਾ ਨਾ ਤਾਂ ਨਿਰਮਾਣ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਨਾ ਹੀ ਵਿਨਾਸ਼ ਇਸਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਦੋਵੇਂ ਪਾਸੇ ਪੁੰਜ ਸਮਾਨ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ ਉਦੋਂ ਹੀ ਸੰਭਵ ਹੈ ਜਦੋਂ ਦੋਨੋਂ ਪਾਸੇ ਦੇ ਤੱਤਾਂ ਦੇ ਪਰਮਾਣੂਆਂ ਦੀ ਗਿਣਤੀ ਬਰਾਬਰ ਹੋਵੇ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
ਹੇਠ ਲਿਖੇ ਕਥਨਾਂ ਨੂੰ ਰਸਾਇਣਿਕ ਸਮੀਕਰਣਾਂ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਬਦਲੋ ਅਤੇ ਫਿਰ ਸੰਤੁਲਿਤ ਕਰੋ :
(a) ਹਾਈਡਰੋਜਨ ਗੈਸ ਨਾਈਟਰੋਜਨ ਗੈਸ ਨਾਲ ਜੁੜ ਕੇ ਅਮੋਨੀਆ ਬਣਾਉਂਦੀ ਹੈ ।
(b) ਹਾਈਡਰੋਜਨ ਸਲਫਾਈਡ ਗੈਸ ਹਵਾ ਵਿੱਚ ਬਲ ਕੇ ਪਾਣੀ ਅਤੇ ਸਲਫਰ ਡਾਈਆਕਸਾਈਡ ਬਣਾਉਂਦੀ ਹੈ ।
(c) ਬੇਰੀਅਮ ਕਲੋਰਾਈਡ ਅਤੇ ਐਲੂਮੀਨੀਅਮ ਸਲਫੇਟ ਦੇ ਘੋਲ ਪ੍ਰਤੀਕਿਰਿਆ ਕਰਕੇ ਐਲੂਮੀਨੀਅਮ ਕਲੋਰਾਈਡ ਅਤੇ ਬੇਰੀਅਮ ਸਲਫੇਟ ਦਾ ਅਵਖੇਪ ਬਣਾਉਂਦੇ ਹਨ ।.
(d) ਪੋਟਾਸ਼ੀਅਮ ਧਾਤ ਪਾਣੀ ਨਾਲ ਕਿਰਿਆ ਕਰਕੇ ਪੋਟਾਸ਼ੀਅਮ ਹਾਈਡਰੋਕਸਾਈਡ ਅਤੇ ਹਾਈਡਰੋਜਨ ਗੈਸ ਪੈਦਾ ਕਰਦੀ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
(a) N2(g) + 32H(g) → 2NH3(g)
(b) 2H2S(g) + 3O2(g) → 2H2O(l) + 2SO2(g)
(c) Al2(SO4)3 + BaCl2(s) → 3BaSO4↓+ 2AlCl3(aq)
(d) 2K(S) + 2H2O(l) → 2KOH(aq) + H2(g).

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 6.
ਹੇਠ ਲਿਖੀਆਂ ਰਸਾਇਣਿਕ ਸਮੀਕਰਣਾਂ ਨੂੰ ਸੰਤੁਲਿਤ ਕਰੋ :
(a) HNO3 + Ca(OH)2 → Ca(NO3)2 + H2O
(b) NaOH + H2SO4 → Na2SO4 + H2O
(c) NaCl + AgNO3 → AgCl + NaNO3
(a) BaCl2 + H2SO4 → BaSO4 + HCl.
ਉੱਤਰ-
(a) 2HNO3 + Ca(OH)2 → Ca(NO3)2 + 2H2O
(b) 2NaOH + H2SO4 → Na2SO4 + 2H2O
(c) NaCl + AgNO3 → AgCl + NaNO3
(d) BaCl2 + H2SO4 → BaSO4 + 2HCl

PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 1 ਰਸਾਇਣਿਕ ਕਿਰਿਆਵਾਂ ਅਤੇ ਸਮੀਕਰਣਾਂ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 7.
ਹੇਠ ਲਿਖੀਆਂ ਕਿਰਿਆਵਾਂ ਲਈ ਸੰਤੁਲਿਤ ਰਸਾਇਣਿਕ ਸਮੀਕਰਣਾਂ ਲਿਖੋ-
(a) ਕੈਲਸ਼ੀਅਮ ਹਾਈਡਰੋਕਸਾਈਡ + ਕਾਰਬਨ-ਡਾਈਆਕਸਾਈਡ → ਕੈਲਸ਼ੀਅਮ ਕਾਰਬੋਨੇਟ + ਪਾਣੀ
(b) ਜ਼ਿੰਕ + ਸਿਲਵਰ ਨਾਈਟਰੇਟ → ਜਿੰਕ ਨਾਈਟਰੇਟ + ਸਿਲਵਰ
(c) ਐਲੂਮੀਨੀਅਮ + ਕਾਪਰ ਕਲੋਰਾਈਡ → ਐਲੂਮੀਨੀਅਮ ਕਲੋਰਾਈਡ + ਕਾਪਰ
d) ਬੇਰੀਅਮ ਕਲੋਰਾਈਡ + ਪੋਟਾਸ਼ੀਅਮ ਸਲਫੇਟ → ਬੇਰੀਅਮ ਸਲਫੇਟ + ਪੋਟਾਸ਼ੀਅਮ ਕਲੋਰਾਈਡ ।
ਉੱਤਰ-
(a) Ca(OH)2 + CO2 → CaCO3 + H2O
(b) Zn + 2AgNO3 → Zn(NO3)2 + 2Ag
(c) 2Al + 3CuCl2 → 2AlCl3 + 3Cu
d) BaCl3 +K2SO4 → BaSO4 + 2KCl

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 8.
ਹੇਠ ਲਿਖਿਆਂ ਲਈ ਸੰਤੁਲਿਤ ਰਸਾਇਣਿਕ ਸਮੀਕਰਣਾਂ ਲਿਖੋ ਅਤੇ ਹਰ ਇੱਕ ਰਸਾਇਣਿਕ ਕਿਰਿਆ ਦੀ , ਕਿਸਮ ਦੱਸੋ !
(a) ਪੋਟਾਸ਼ੀਅਮ ਬੋਮਾਈਡ (aq) + ਬੇਰੀਅਮ ਆਈਓਡਾਈਡ (aq) → ਪੋਟਾਸ਼ੀਅਮ ਆਇਓਡਾਈਡ (aq) + ਬੇਰੀਅਮ ਬੋਮਾਈਡ (s)
(b) ਜ਼ਿੰਕ ਕਾਰਬੋਨੇਟ (s) → ਜ਼ਿੰਕ ਆਕਸਾਈਡ (s) + ਕਾਰਬਨ-ਡਾਈਆਕਸਾਈਡ (g)
(c) ਹਾਈਡਰੋਜਨ (g) + ਕਲੋਰੀਨ (g) – ਹਾਈਡਰੋਜਨ ਕਲੋਰਾਈਡ (g)
(d) ਮੈਗਨੀਸ਼ੀਅਮ (s) + ਹਾਈਡਰੋਕਲੋਰਿਕ ਐਸਿਡ (aq) → ਮੈਗਨੀਸ਼ੀਅਮ ਕਲੋਰਾਈਡ (aq) + ਹਾਈਡਰੋਜਨ (g)
ਉੱਤਰ-
(a) 2KBr (aq) + BaI2(aq) → 2KI(aq) + BaBr2(aq) ਇਹ ਇਕ ਦੋਹਰੀ ਵਿਸਥਾਪਨ ਕਿਰਿਆ ਹੈ ।

(b) ZnCO3 (s) → ZnO(s) + CO2 (g) ਇਹ ਵਿਯੋਜਨ (ਅਪਘਟਨ) ਅਭਿਕਿਰਿਆ ਹੈ ।

(c) H2(g) + Cl2(g) → 2HCl(g)
ਇਹ ਸੰਯੋਜਨ ਕਿਰਿਆ ਹੈ ।

(d) Mg(s) + 2HCl (aq) – MgCl2(aq) + H(g)
ਇਹ ਵਿਸਥਾਪਨ ਕਿਰਿਆ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 9.
ਤਾਪ-ਨਿਕਾਸੀ ਅਤੇ ਤਾਪ-ਸੋਖੀ ਕਿਰਿਆ ਤੋਂ ਕੀ ਭਾਵ ਹੈ ? ਉਦਾਹਰਨਾਂ ਦਿਉ ।
ਉੱਤਰ-
ਤਾਪ-ਨਿਕਾਸੀ ਕਿਰਿਆ (Exothermic reaction)-ਜਿਹੜੀਆਂ ਕਿਰਿਆਵਾਂ ਵਿੱਚ ਉਤਪਾਦ ਦੇ ਨਾਲ ਤਾਪ ਦਾ ਵੀ ਉਤਸਰਜਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਉਸਨੂੰ ਤਾਪ-ਨਿਕਾਸੀ ਕਿਰਿਆ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।
ਉਦਾਹਰਨ-
(1) ਕੁਦਰਤੀ ਗੈਸ ਦਾ ਦਹਿਣ
CH4(g) + 2O2(g) → CO2(g) + 2H2O (1) + ਤਾਪ

(2) ਕੋਕ ਦਾ ਵਹਿਣ
C(s) + O2(g) → CO2(g) + ਤਾਪ

(3) ਸਾਹ ਦੌਰਾਨ ਸਰੀਰ ਵਿੱਚ ਤਾਪ ਊਰਜਾ ਪੈਦਾ ਹੋਣਾ ।
C6H12O6(ag) + 6O2 (g) → 6CO2(g) + 6H2O (1) + ਤਾਪ

ਤਾਪ-ਸੋਖੀ ਕਿਰਿਆ (Endothermic reaction)
ਜਿਹੜੀਆਂ ਕਿਰਿਆਵਾਂ ਵਿੱਚ ਤਾਪ ਦਾ ਸੋਖਣ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਤਾਪ-ਸੋਖੀ ਕਿਰਿਆ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।
ਉਦਾਹਰਨਾਂ-
(1) ਕੋਕ ਦੀ ਭਾਫ਼ ਨਾਲ ਕਿਰਿਆ
C(s) + H2O(s) + ਤਾਪ → CO(s) + H2(g)

(2) N2 ਅਤੇ O2 ਦੀ ਕਿਰਿਆ
N2(g) + O2(g) + ਤਾਪ ਊਰਜਾ → 2NO(g) ਨਾਈਟਰਿਕ ਆਕਸਾਈਡ

(3) CaCO3 ਦਾ ਗਰਮ ਹੋਣਾ
CaCO3 + ਤਾਪ → CaO(s) + CO2(g)

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 10.
ਸਾਹ ਕਿਰਿਆ ਨੂੰ ਤਾਪ-ਨਿਕਾਸੀ ਕਿਰਿਆ ਕਿਉਂ ਸਮਝਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ? ਵਿਆਖਿਆ ਕਰੋ ।
ਜਾਂ
ਸਾਹ ਕਿਰਿਆ ਨੂੰ ਤਾਪ-ਨਿਕਾਸੀ ਕਿਰਿਆ ਕਿਉਂ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰਜੀਉਂਦੇ ਰਹਿਣ ਲਈ ਸਾਨੂੰ ਉਰਜਾ ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਇਹ ਉਰਜਾ ਸਾਨੂੰ ਭੋਜਨ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਪਾਚਨ ਕਿਰਿਆ ਦੇ ਦੌਰਾਨ ਖਾਧ ਪਦਾਰਥ ਛੋਟੇ-ਛੋਟੇ ਟੁਕੜਿਆਂ ਵਿੱਚ ਟੁੱਟ ਜਾਂਦਾ ਹੈ , ਜਿਵੇਂ-ਚਾਵਲ, ਆਲੂ ਅਤੇ ਬੈਡ ਵਿੱਚ ਕਾਰਬੋਹਾਈਡਰੇਟ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਕਾਰਬੋਹਾਈਡਰੇਟ ਦੇ ਟੁੱਟਣ ਨਾਲ ਗੁਲੂਕੋਜ਼ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਗੁਲੂਕੋਜ਼ ਸਾਡੀਆਂ ਸਰੀਰ ਦੀਆਂ ਕੋਸ਼ਿਕਾਵਾਂ ਵਿੱਚ ਮੌਜੂਦ ਆਕਸੀਜਨ ਨਾਲ ਮਿਲ ਕੇ ਸਾਨੂੰ ਊਰਜਾ ਪ੍ਰਦਾਨ ਕਰਦਾ ਹੈ । ਅਰਥਾਤ ਸਾਹ ਕਿਰਿਆ ਵਿੱਚ ਊਰਜਾ ਪੈਦਾ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਇਸ ਲਈ ਸਾਹ, ਕਿਰਿਆ ਨੂੰ ਤਾਪ-ਨਿਕਾਸੀ ਕਿਰਿਆ ਆਖਦੇ ਹਨ ।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 1 ਰਸਾਇਣਿਕ ਕਿਰਿਆਵਾਂ ਅਤੇ ਸਮੀਕਰਣਾਂ 2

PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 1 ਰਸਾਇਣਿਕ ਕਿਰਿਆਵਾਂ ਅਤੇ ਸਮੀਕਰਣਾਂ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 11.
ਅਪਘਟਨ ਕਿਰਿਆਵਾਂ ਨੂੰ ਸੰਯੋਜਨ ਕਿਰਿਆਵਾਂ ਦੇ ਉਲਟ ਕਿਉਂ ਆਖਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ? ਇਹਨਾਂ ਕਿਰਿਆਵਾਂ ਲਈ ਸਮੀਕਰਣਾਂ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਸੰਯੋਜਨ ਕਿਰਿਆ ਵਿੱਚ ਦੋ ਜਾਂ ਦੋ ਤੋਂ ਵੱਧ ਪਦਾਰਥ ਮਿਲ ਕੇ ਇਕ ਨਵਾਂ ਪਦਾਰਥ ਪ੍ਰਦਾਨ ਕਰਦਾ ਹੈ । ਅਪਘਟਨ ਕਿਰਿਆ ਸੰਯੋਜਨ ਕਿਰਿਆ ਦੇ ਉਲਟ ਹੁੰਦੀ ਹੈ | ਅਪਘਟਨ ਕਿਰਿਆ ਵਿੱਚ ਏਕਲ ਪਦਾਰਥ ਅਪਘਟਿਤ ਹੋ ਕੇ ਦੋ ਜਾਂ ਦੋ ਤੋਂ ਵੱਧ ਪਦਾਰਥ ਪ੍ਰਦਾਨ ਕਰਦਾ ਹੈ ।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 1 ਰਸਾਇਣਿਕ ਕਿਰਿਆਵਾਂ ਅਤੇ ਸਮੀਕਰਣਾਂ 3
ਅਪਘਟਨ ਕਿਰਿਆ ਦੇ ਉਦਾਹਰਨ ਹਨ-
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 1 ਰਸਾਇਣਿਕ ਕਿਰਿਆਵਾਂ ਅਤੇ ਸਮੀਕਰਣਾਂ 4

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 12.
ਉਨ੍ਹਾਂ ਅਪਘਟਨ ਕਿਰਿਆਵਾਂ ਦੀ ਇਕ-ਇਕ ਸਮੀਕਰਨ ਲਿਖੋ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਤਾਪ ਊਰਜਾ, ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਅਤੇ ਬਿਜਲੀ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਊਰਜਾ ਦਿੱਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
(1) ਅਪਘਟਨ ਕਿਰਿਆ ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਤਾਪ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਹੁੰਦੀ ਹੈ-
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 1 ਰਸਾਇਣਿਕ ਕਿਰਿਆਵਾਂ ਅਤੇ ਸਮੀਕਰਣਾਂ 5
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 1 ਰਸਾਇਣਿਕ ਕਿਰਿਆਵਾਂ ਅਤੇ ਸਮੀਕਰਣਾਂ 6

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 13.
ਵਿਸਥਾਪਨ ਕਿਰਿਆ ਅਤੇ ਦੂਹਰਾ-ਵਿਸਥਾਪਨ ਕਿਰਿਆ ਵਿੱਚ ਕੀ ਅੰਤਰ ਹੈ ? ਇਨ੍ਹਾਂ ਪ੍ਰਤੀਕਿਰਿਆਵਾਂ ਦੀਆਂ ਸਮੀਕਰਣਾਂ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਵਿਸਥਾਪਨ ਕਿਰਿਆ-ਜਦੋਂ ਕੋਈ ਇਕ ਤੱਤ ਦੂਸਰੇ ਤੱਤ ਨੂੰ ਉਸਦੇ ਯੌਗਿਕ ਨਾਲ ਵਿਸਥਾਪਿਤ ਕਰ ਦਿੰਦਾ ਹੈ, ਤਾਂ ਉਹ ਵਿਸਥਾਪਨ ਕਿਰਿਆ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
ਉਦਾਹਰਨ-
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 1 ਰਸਾਇਣਿਕ ਕਿਰਿਆਵਾਂ ਅਤੇ ਸਮੀਕਰਣਾਂ 7

ਦੂਹਰਾ-ਵਿਸਥਾਪਨ ਕਿਰਿਆ – ਦੂਹਰਾ-ਵਿਸਥਾਪਨ ਕਿਰਿਆ ਵਿੱਚ ਦੋ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਪਰਮਾਣੂ ਜਾਂ ਪਰਮਾਣੂਆਂ ਦੇ ਸਮੂਹ (ਆਇਨ’ ਦਾ ਆਪਸ ਵਿੱਚ ਆਦਾਨ-ਪ੍ਰਦਾਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
ਉਦਾਹਰਨ-
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 1 ਰਸਾਇਣਿਕ ਕਿਰਿਆਵਾਂ ਅਤੇ ਸਮੀਕਰਣਾਂ 8
ਉਪਰੋਕਤ ਉਦਾਹਰਨ ਵਿਸਥਾਪਨ ਅਤੇ ਦੂਹਰਾ ਵਿਸਥਾਪਨ ਪ੍ਰਤੀਕਿਰਿਆਵਾਂ ਦਾ ਅੰਤਰ ਸਪੱਸ਼ਟ ਕਰਦੇ ਹਨ ।

PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 1 ਰਸਾਇਣਿਕ ਕਿਰਿਆਵਾਂ ਅਤੇ ਸਮੀਕਰਣਾਂ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 14.
ਸਿਲਵਰ ਦੇ ਸ਼ੁੱਧੀਕਰਨ ਵਿੱਚ, ਸਿਲਵਰ ਨਾਈਟਰੇਟ ਦੇ ਘੋਲ ਤੋਂ ਸਿਲਵਰ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਨ ਲਈ ਕਾਪਰ ਧਾਤ ਦੁਆਰਾ ਵਿਸਥਾਪਨ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਨਾਲ ਸੰਬੰਧਿਤ ਰਸਾਇਣਿਕ ਕਿਰਿਆ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 1 ਰਸਾਇਣਿਕ ਕਿਰਿਆਵਾਂ ਅਤੇ ਸਮੀਕਰਣਾਂ 9

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 15.
ਅਵਖੇਪਨ ਪ੍ਰਤੀਕਿਰਿਆ ਤੋਂ ਤੁਹਾਡਾ ਕੀ ਭਾਵ ਹੈ ? ਉਦਾਹਰਣ ਦੇ ਕੇ ਵਿਆਖਿਆ ਕਰੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਅਵਖੇਪਨ ਪ੍ਰਤੀਕਿਰਿਆ-ਜਦੋਂ ਦੋ ਘੋਲਾਂ ਨੂੰ ਮਿਲਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਪ੍ਰਤੀਕਿਰਿਆ ਨਾਲ ਸਫ਼ੈਦ ਰੰਗ ਦੇ ਪਦਾਰਥ ਦਾ ਨਿਰਮਾਣ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜੋ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਅਘੁਲਣਸ਼ੀਲ ਹੋਣ । ਇਸ ਅਘੁਲਣਸ਼ੀਲ ਪਦਾਰਥ ਨੂੰ ਅਵਖੇਪ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਜਿਸ ਪ੍ਰਤੀਕਿਰਿਆ ਵਿੱਚ ਅਵਖੇਪਾਂ ਦਾ ਨਿਰਮਾਣ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਉਸ ਨੂੰ ਅਵਖੇਪਣ ਤੀਕਿਰਿਆ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 1 ਰਸਾਇਣਿਕ ਕਿਰਿਆਵਾਂ ਅਤੇ ਸਮੀਕਰਣਾਂ 10
Ba2+ ਅਤੇ \(\mathrm{SO}_{4}^{2-}\) ਦੀ ਕਿਰਿਆ ਵਿੱਚ BaSO4 ਦੇ ਅਵਖੇਪ ਦਾ ਨਿਰਮਾਣ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 16.
ਆਕਸੀਜਨ ਦੀ ਪ੍ਰਾਪਤੀ ਜਾਂ ਹਾਨੀ ਦੇ ਸੰਬੰਧ ਵਿੱਚ ਹੇਠ ਦਿੱਤੀਆਂ ਦੀ ਵਿਆਖਿਆ ਦੋ-ਦੋ ਉਦਾਹਰਨਾਂ ਦੇ ਕੇ ਕਰੋ ।
(a) ਆਕਸੀਕਰਨ
(b) ਲਘੂਕਰਨ ।
ਉੱਤਰ-
(a) ਆਕਸੀਕਰਨ-ਕਿਸੇ ਪ੍ਰਤੀਕਿਰਿਆ ਵਿੱਚ ਪਦਾਰਥ ਦਾ ਆਕਸੀਕਰਨ ਉਦੋਂ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜਦੋਂ ਉਸ ਵਿੱਚ ਆਕਸੀਜਨ ਦਾ ਵਾਧਾ ਜਾਂ ਹਾਈਡਰੋਜਨ ਦੀ ਹਾਨੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
ਉਦਾਹਰਨ-
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 1 ਰਸਾਇਣਿਕ ਕਿਰਿਆਵਾਂ ਅਤੇ ਸਮੀਕਰਣਾਂ 11
ਇੱਥੇ H2 ਵਿੱਚ O2 ਦਾ ਵਾਧਾ ਅਰਥਾਤ H2 ਦੇ ਨਾਲ O2 ਨੇ ਮਿਲ ਕੇ ਪਾਣੀ ਬਣਾਇਆ ਹੈ ।

(b) ਲਘੂਕਰਨ- ਪਦਾਰਥ ਦਾ ਲਘੂਕਰਨ ਉਦੋਂ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜਦੋਂ ਉਸ ਵਿੱਚ ਆਕਸੀਜਨ ਦੀ ਹਾਨੀ ਜਾਂ ਹਾਈਡਰੋਜਨ ਦਾ ਵਾਧਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
ਉਦਾਹਰਨ-
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 1 ਰਸਾਇਣਿਕ ਕਿਰਿਆਵਾਂ ਅਤੇ ਸਮੀਕਰਣਾਂ 12

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 17.
ਇੱਕ ਭੂਰੇ (Brown) ਰੰਗ ਦਾ ਚਮਕਦਾਰ ਤੱਤ ਝੂ’ ਹਵਾ ਦੀ ਹੋਂਦ ਵਿੱਚ ਗਰਮ ਕਰਨ ਨਾਲ ਕਾਲੇ ਰੰਗ ਦਾ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਤੱਤ ‘x’ ਅਤੇ ਕਾਲੇ ਰੰਗ ਦੇ ਪੈਦਾ ਹੋਏ ਯੌਗਿਕ ਦਾ ਨਾਂ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਇਹ ਤੱਤ ‘X’ ਕਾਪਰ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਕਾਪਰ ਹੀ ਇਕ ਭੂਰੇ ਰੰਗ ਦਾ ਚਮਕਦਾਰ ਤੱਤ ਹੈ ਜੋ ਹਵਾ ਦੀ ਮੌਜੂਦਗੀ ਵਿੱਚ ਗਰਮ ਕਰਨ, ਤੇ ਕਾਲੇ ਰੰਗ ਦਾ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ 0 ਨਾਲ ਪ੍ਰਤੀਕਿਰਿਆ ਕਰਕੇ ਇਹ ਕਾਪਰ ਆਕਸਾਈਡ ਬਣਾਉਂਦਾ ਹੈ ।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 1 ਰਸਾਇਣਿਕ ਕਿਰਿਆਵਾਂ ਅਤੇ ਸਮੀਕਰਣਾਂ 13

PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 1 ਰਸਾਇਣਿਕ ਕਿਰਿਆਵਾਂ ਅਤੇ ਸਮੀਕਰਣਾਂ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 18.
ਲੋਹੇ ਦੀਆਂ ਵਸਤੂਆਂ ਨੂੰ ਅਸੀਂ ਪੇਂਟ ਕਿਉਂ ਕਰਦੇ ਹਾਂ ?
ਉੱਤਰ-
ਪੇਂਟ ਕਰਨ ਨਾਲ ਲੋਹੇ ਦਾ ਉੱਪਰੀ ਭਾਗ ਛੁਪ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਹਵਾ ਦੇ ਨਾਲ ਸਿੱਧਾ ਸੰਪਰਕ ਵਿੱਚ ਨਹੀਂ ਆਉਂਦਾ ਜਿਸ ਕਾਰਨ ਉਸ ਵਿੱਚ ਜੰਗ ਨਹੀਂ ਲੱਗਦਾ । ਇਸ ਲਈ ਪੇਂਟ ਕਰਨ ਨਾਲ ਅਸੀਂ ਲੋਹੇ ਦੇ ਉਸ ਪਦਾਰਥ ਨੂੰ ਢੰਗ ਲੱਗਣ ਤੋਂ ਬਚਾ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 19.
ਤੇਲ ਅਤੇ ਫੈਟਸ (Fat) ਰੱਖਣ ਵਾਲੀਆਂ ਭੋਜਨ ਵਸਤਾਂ ਨੂੰ ਨਾਈਟਰੋਜਨ ਨਾਲ ਕਿਉਂ ਪ੍ਰਭਾਵਿਤ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਤੇਲ ਅਤੇ ਫੈਟਸ (Fat) ਰੱਖਣ ਵਾਲੀਆਂ ਭੋਜਨ ਵਸਤਾਂ ਨੂੰ ਹਵਾ-ਰੋਧੀ ਬਰਤਨਾਂ ਵਿੱਚ ਰੱਖਣ ਨਾਲ ਆਕਸੀਕਰਨ ਦੀ ਗਤੀ ਹੌਲੀ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਤੇਲ ਅਤੇ ਵਸਾਯੁਕਤ ਪਦਾਰਥ ਨੂੰ ਨਾਈਟਰੋਜਨ ਨਾਲ ਇਸ ਲਈ ਯੁਕਤ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਕਿ ਉਸ ਵਿੱਚ ਆਕਸੀਕਰਨ ਨਾ ਹੋ ਸਕੇ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 20.
ਹੇਠ ਲਿਖੇ ਪਦਾਂ ਦੀ ਵਿਆਖਿਆ ਉਦਾਹਰਨ ਦੇ ਕੇ ਕਰੋ ।
(a) ਖੋਰਨ
(b) ਦੁਰਗੰਧਤਾ ।
ਉੱਤਰ-
(a) ਖੋਰਨ (Corrosion) – ਲੋਹੇ ਤੋਂ ਬਣੀਆਂ ਵਸਤਾਂ ਚਮਕੀਲੀਆਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਪਰ ਕੁਝ ਸਮੇਂ ਬਾਅਦ ਇਨ੍ਹਾਂ ਤੇ ਲਾਲ ਜਿਹੀ ਭੂਰੇ ਰੰਗ ਦੀ ਪਰਤ ਚੜ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਆਮ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਇਸ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਨੂੰ ਲੋਹੇ ਤੇ ਜ਼ੰਗ ਲੱਗਣਾ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ । ਕੁੱਝ ਹੋਰ ਧਾਤਾਂ ਵਿੱਚ ਵੀ ਅਜਿਹਾ ਹੀ ਪਰਿਵਰਤਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਜਦੋਂ ਕੋਈ ਧਾਤ ਆਪਣੇ ਆਸ-ਪਾਸ ਤੇਜ਼ਾਬ, ਨਮੀ ਆਦਿ ਦੇ ਸੰਪਰਕ ਵਿੱਚ ਆਉਂਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਇਹ ਖੁਰਣ ਲਗਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਨੂੰ ਖੋਰਨ ਕਿਰਿਆ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ । ਚਾਂਦੀ ਦੇ ਉੱਪਰ ਕਾਲੀ ਪਰਤ ਅਤੇ ਤਾਂਬੇ ਉੱਪਰ ਹਰੀ ਪਰਤ ਚੜਨਾ ਖੋਰਨ ਦੇ ਉਦਾਹਰਨ ਹਨ ।
ਖੋਰਨ ਕਾਰਨ ਕਾਰ ਦੇ ਢਾਂਚੇ, ਪੁਲ, ਜਹਾਜ਼ ਅਤੇ ਧਾਤ ਖ਼ਾਸ ਕਰਕੇ ਲੋਹੇ ਤੋਂ ਬਣੀਆਂ ਵਸਤਾਂ ਨੂੰ ਬਹੁਤ ਹਾਨੀ ਪੁੱਜਦੀ ਹੈ ।

(b) ਦੁਰਗੰਧਤਾ (Rancidity) – ਵਸਾਯੁਕਤ ਅਤੇ ਤੇਲ ਯੁਕਤ ਪਦਾਰਥ ਸਮੱਗਰੀ ਜਦੋਂ ਲੰਬੇ ਸਮੇਂ ਤੱਕ ਰੱਖੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਉਸਦੇ ਸਵਾਦ ਜਾਂ ਗੰਧ ਵਿੱਚ ਬਦਲਾਓ ਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਆਕਸੀਕਰਨ ਹੋਣ ਤੇ ਤੇਲ ਅਤੇ ਵਸਾ ਵਿਕ੍ਰਿਤ ਧੀ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਸਵਾਦ ਅਤੇ ਗੰਧ ਬਦਲ ਜਾਂਦੇ ਹਨ | ਆਮ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਤੇਲ ਯੁਕਤ ਅਤੇ ਵਸਾਯੁਕਤ ਖਾਧ ਸਮੱਗਰੀ ਵਿੱਚ ਆਕਸੀਕਰਨ ਰੋਕਣ ਵਾਲੇ ਪਦਾਰਥ ਪ੍ਰਤੀ ਆਕਸੀਕਰਨ) ਮਿਲਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਵਾਯੁਰੋਧੀ ਬਰਤਨਾਂ ਵਿੱਚ ਖਾਧ ਸਮੱਗਰੀ ਰੱਖਣ ਨਾਲ ਆਕਸੀਕਰਨ ਦੀ ਗਤੀ ਹੌਲੀ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਕੀ ਤੁਸੀਂ ਜਾਣਦੇ ਹੋ ਕਿ ਚਿਪਸ ਬਣਾਉਣ ਵਾਲੇ ਚਿਪਸ ਦੀ ਥੈਲੀ ਨੂੰ ਨਾਈਟਰੋਜਨ ਵਰਗੀ ਗੈਸ ਨਾਲ ਭਰ ਦਿੰਦੇ ਹਨ ਤਾਂਕਿ ਚਿਪਸ ਦਾ ਆਕਸੀਕਰਨ ਨਾ ਹੋ ਸਕੇ ਅਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਦੇਰ ਤੱਕ ਸੁਰੱਖਿਅਤ ਰੱਖਿਆ ਜਾ ਸਕੇ ।

Science Guide for Class 10 PSEB ਰਸਾਇਣਿਕ ਕਿਰਿਆਵਾਂ ਅਤੇ ਸਮੀਕਰਣਾਂ InText Questions and Answers

ਅਧਿਆਇ ਦੇ ਅੰਦਰ ਦਿੱਤੇ ਗਏ ਪ੍ਰਸ਼ਨ ਅਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਉੱਤਰ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਹਵਾ ਵਿੱਚ ਜਲਾਉਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਮੈਗਨੀਸ਼ੀਅਮ ਰਿਬਨ ਨੂੰ ਸਾਫ਼ ਕਿਉਂ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਜੇ ਮੈਗਨੀਸ਼ੀਅਮ ਰਿਬਨ ਨਮ ਹਵਾ ਦੇ ਸੰਪਰਕ ਵਿੱਚ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ, ਤਾਂ ਉਸ ਉੱਪਰ ਸਫ਼ੈਦ ਰੰਗ ਦੀ ਮੈਗਨੀਸ਼ੀਅਮ ਆਕਸਾਈਡ ਦੀ ਪਰਤ ਜੰਮ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਇਹ ਪਰਤ ਮੈਗਨੀਸ਼ੀਅਮ ਦੇ ਜਲਾਉਣ ਵਿੱਚ ਅਵਰੋਧ ਪੈਦਾ ਕਰਦੀ ਹੈ । ਇਸ ਲਈ ਮੈਗਨੀਸ਼ੀਅਮ ਰਿਬਨ ਨੂੰ ਜਲਾਉਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਰੋਗਮਾਰ ਨਾਲ ਸਾਫ਼ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਹੇਠ ਲਿਖੀਆਂ ਰਸਾਇਣਿਕ ਕਿਰਿਆਵਾਂ ਦੀਆਂ ਸੰਤੁਲਿਤ ਸਮੀਕਰਣਾਂ ਲਿਖੋ
(i) ਹਾਈਡਰੋਜਨ + ਕਲੋਰੀਨ → ਹਾਈਡਰੋਜਨ ਕਲੋਰਾਈਡ .
(ii) ਬੇਰੀਅਮ ਕਲੋਰਾਈਡ + ਐਲੂਮੀਨੀਅਮ ਸਲਫੇਟ → ਬੇਰੀਅਮ ਸਲਫੇਟ + ਐਲੂਮੀਨੀਅਮ ਕਲੋਰਾਈਡ
(iii) ਸੋਡੀਅਮ + ਪਾਣੀ → ਸੋਡੀਅਮ ਹਾਈਡਰੋਕਸਾਈਡ + ਹਾਈਡਰੋਜਨ ।
ਉੱਤਰ-
(i) H2 + Cl2 → 2HCl
(ii) 3BaCl2 + Al2(SO4) → 3BaSO4 + 2AlCl3
(iii) 2Na + 2H2O → 2NaOH + H2

PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 1 ਰਸਾਇਣਿਕ ਕਿਰਿਆਵਾਂ ਅਤੇ ਸਮੀਕਰਣਾਂ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਨਿਮਨਲਿਖਤ ਰਸਾਇਣਿਕ ਕਿਰਿਆਵਾਂ ਲਈ ਸੰਕੇਤਾਂ ਸਹਿਤ ਸੰਤੁਲਿਤ ਰਸਾਇਣਿਕ ਸਮੀਕਰਣਾਂ ਲਿਖੋ
(i) ਬੇਰੀਅਮ ਕਲੋਰਾਈਡ ਅਤੇ ਸੋਡੀਅਮ ਸਲਫੇਟ ਦੇ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਘੋਲ ਆਪਸ ਵਿੱਚ ਕਿਰਿਆ ਕਰਕੇ ਅਘੁਲ ਸੋਡੀਅਮ ਸਲਫੇਟ ਅਤੇ ਸੋਡੀਅਮ ਕਲੋਰਾਈਡ ਦਾ ਘੋਲ ਪੈਦਾ ਕਰਦੇ ਹਨ ।
(ii) ਸੋਡੀਅਮ ਹਾਈਡਰੋਕਸਾਈਡ ਦਾ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਘੋਲ ਹਾਈਡਰੋਕਲੋਰਿਕ ਐਸਿਡ ਦੇ ਪਾਣੀ ਘੋਲ ਨਾਲ ਕਿਰਿਆ ਕਰਕੇ ਸੋਡੀਅਮ ਕਲੋਰਾਈਡ ਦਾ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਘੋਲ ਅਤੇ ਪਾਣੀ ਬਣਾਉਂਦੇ ਹਨ ।
ਉੱਤਰ-
(i) BaCl2 (aq) + Na2SO4 (aq) →BaSO4(s) + 2NaCl(aq)
(ii) NaOH (aq) + HCl (aq) → NaCl (aq) + H2O (l).

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਕਿਸੇ ਵਸਤੂ ‘X’ ਦਾ ਘੋਲ ਸਫੈਦੀ ਲਈ ਉਪਯੋਗ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ :
(i) ਵਸਤੂ ‘X’ ਦਾ ਨਾਂ ਅਤੇ ਉਸਦਾ ਸੂਤਰ ਲਿਖੋ ।
(ii) ਉਕਤ (i) ਵਿੱਚ ਲਿਖੀ ਵਸਤੂ ‘X’ ਦੀ ਪਾਣੀ ਨਾਲ ਹੁੰਦੀ ਕਿਰਿਆ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
(i) ‘X’ ਦਾ ਨਾਮ ਹੈ – ਬਿਨਾਂ ਬੁੱਝਿਆ ਚੂਨਾ ਅਰਥਾਤ ਕੈਲਸ਼ੀਅਮ ਆਕਸਾਈਡ, ਸੂਤਰ = CaO
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 1 ਰਸਾਇਣਿਕ ਕਿਰਿਆਵਾਂ ਅਤੇ ਸਮੀਕਰਣਾਂ 14

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
ਕਿਰਿਆ 1.7 ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਪਰਖਨਲੀ ਵਿੱਚ ਇਕੱਤਰ ਹੋਈ ਗੈਸ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਦੂਜੀ ਨਾਲੋਂ ਦੁੱਗਣੀ ਕਿਉਂ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ? ਉਸ ਗੈਸ ਦਾ ਨਾਂ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਪਾਣੀ ਦੇ ਬਿਜਲਈ ਅਪਘਟਨ ਵਿੱਚ ਹੇਠ ਲਿਖੀ ਪ੍ਰਤੀਕਿਰਿਆ ਹੁੰਦੀ ਹੈ-
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 1 ਰਸਾਇਣਿਕ ਕਿਰਿਆਵਾਂ ਅਤੇ ਸਮੀਕਰਣਾਂ 15
ਇਸ ਪ੍ਰਤੀਕਿਰਿਆ ਵਿੱਚ ਹਾਈਡਰੋਜਨ ਅਤੇ ਆਕਸੀਜਨ 2:1 ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਮਿਲਦੀ ਹੈ ।
ਦੁੱਗਣੀ ਪਾਈ ਜਾਣ ਵਾਲੀ ਗੈਸ ਹਾਈਡਰੋਜਨ ਹੈ । ਅਧਿਆਇ ਦੇ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 6.
ਜਦੋਂ ਲੋਹੇ (IRON) ਦੀ ਮੇਖ ਨੂੰ ਕਾਪਰ ਸਲਫੇਟ ਦੇ ਘੋਲ ਵਿੱਚ ਡੁਬੋਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਘੋਲ ਦਾ ਰੰਗ ਕਿਉਂ ਬਦਲ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਜਦੋਂ ਲੋਹੇ ਦੀ ਮੇਖ ਨੂੰ ਕਾਪਰ ਸਲਫੇਟ ਦੇ ਘੋਲ ਵਿੱਚ ਡੁਬੋਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਇਹ ਕਾਪਰ ਸਲਫੇਟ ਦੇ ਘੋਲ ਵਿੱਚੋਂ ਕਾਪਰ ਨੂੰ ਪ੍ਰਸਥਾਪਿਤ ਕਰਨ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ ਰੱਖਦਾ ਹੈ । ਜਿਸ ਕਰਕੇ ਆਇਰਨ ਸਲਫੇਟ ਬਣ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 1 ਰਸਾਇਣਿਕ ਕਿਰਿਆਵਾਂ ਅਤੇ ਸਮੀਕਰਣਾਂ 16
ਇਸ ਪ੍ਰਤੀਕਿਰਿਆ ਦੇ ਦੌਰਾਨ CuSO4 ਦਾ ਨੀਲਾ ਰੰਗ ਹੌਲੀ-ਹੌਲੀ ਛਿੱਕਾ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 1 ਰਸਾਇਣਿਕ ਕਿਰਿਆਵਾਂ ਅਤੇ ਸਮੀਕਰਣਾਂ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 7.
ਕਿਰਿਆ 1.10 ਵਿੱਚ ਦਿੱਤੀ ਉਦਾਹਰਣ ਤੋਂ ਬਿਨਾਂ ਦੂਹਰੇ-ਵਿਸਥਾਪਨ ਕਿਰਿਆ ਦੀ ਹੋਰ ਉਦਾਹਰਨ ਦਿਓ ।
ਉੱਤਰ-
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 1 ਰਸਾਇਣਿਕ ਕਿਰਿਆਵਾਂ ਅਤੇ ਸਮੀਕਰਣਾਂ 17

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 8.
ਹੇਠ ਲਿਖੀਆਂ ਰਸਾਇਣਿਕ ਕਿਰਿਆਵਾਂ ਵਿੱਚ ਆਕਸੀਕਰਿਤ ਅਤੇ ਲਘੂਕਰਿਤ ਹੋਈਆਂ ਵਸਤਾਂ ਦੀ ਪਛਾਣ ਕਰੋ-
(i) 4Na(s) + O2(g) → 2Na2O(s)
(ii) CuO(s) + H2(g) → Cu(s) + H2O(1)
ਉੱਤਰ-
(i) 4Na (s) + O2(g) → 2Na2O(s)
ਆਕਸੀਕਰਿਤ ਪਦਾਰਥ = Na
ਲਘੂਕਰਿਤ ਪਦਾਰਥ = O2

(ii) CuO(s) + H2(g) → Cu(s) + H2O(1) .
ਆਕਸੀਕਰਿਤ ਪਦਾਰਥ = H2
ਲਘੂਕਰਿਤ ਪਦਾਰਥ = CuO

PSEB 10th Class Home Science Solutions Chapter 10 ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦਾ ਵਰਗੀਕਰਨ

Punjab State Board PSEB 10th Class Home Science Book Solutions Chapter 10 ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦਾ ਵਰਗੀਕਰਨ Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 10 Home Science Chapter 10 ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦਾ ਵਰਗੀਕਰਨ

Home Science Guide for Class 10 PSEB ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦਾ ਵਰਗੀਕਰਨ Textbook Questions and Answers

ਅਭਿਆਸ
ਵਸਤੂਨਿਸ਼ਠ ਪ੍ਰਸ਼ਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦੀ ਲੰਬਾਈ ਦੇ ਅਧਾਰ ‘ਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਕਿਹੜੀਆਂ ਸ਼੍ਰੇਣੀਆਂ ਵਿਚ ਵੰਡਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ?
ਜਾਂ
ਛੋਟੇ ਰੇਸ਼ੇ ਅਤੇ ਲੰਬੇ ਰੇਸ਼ੇ ਕੀ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਨੂੰ ਲੰਬਾਈ ਦੇ ਅਧਾਰ ‘ਤੇ ਦੋ ਸ਼੍ਰੇਣੀਆਂ ਵਿਚ ਵੰਡਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ –

  1. ਛੋਟੇ ਰੇਸ਼ੇ ਜਾਂ ਸਟੇਪਲ ਰੇਸ਼ੇ (Staple fibre-ਇਹਨਾਂ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦੀ ਲੰਬਾਈ ਛੋਟੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਇਸ ਦੀ ਲੰਬਾਈ ਇੰਚਾਂ ਜਾਂ ਸੈਂਟੀਮੀਟਰਾਂ ਵਿਚ ਮਾਪੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਇਹ ਆਮ ਤੌਰ ‘ਤੇ 1/4 ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ 18 ਇੰਚ ਤਕ ਲੰਮੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਸਿਲਕ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਸਾਰੇ ਕੁਦਰਤੀ ਰੇਸ਼ੇ ਸਟੇਪਲ ਰੇਸ਼ੇ ਹਨ ।
  2. ਲੰਮੇ ਰੇਸ਼ੇ (ਫਿਲਾਮੈਂਟ (Filament_ਇਹਨਾਂ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦੀ ਲੰਬਾਈ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਇਸ ਨੂੰ ਮੀਟਰਾਂ ਵਿਚ ਨਾਪਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਸਿਲਕ ਅਤੇ ਬਨਾਵਟੀ ਰੇਸ਼ੇ ਫਿਲਾਮੈਂਟ ਰੇਸ਼ੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਕੁਦਰਤੀ ਫਿਲਾਮੈਂਟ ਰੇਸ਼ੇ ਦੀਆਂ ਦੋ ਉਦਾਹਰਨਾਂ ਦਿਉ ।
ਉੱਤਰ-
ਕੁਦਰਤੀ ਫਿਲਾਮੈਂਟ ਰੇਸ਼ੇ ਸਿਰਫ ਸਿਲਕ ਹੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3. ਸੈਲੂਲੋਜ਼ ਰੇਸ਼ੇ ਕਿਹੜੇ-ਕਿਹੜੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਸੈਲੂਲੋਜ਼ ਰੇਸ਼ੇ ਕਪਾਹ ਦੇ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਜਾਂ ਲੱਕੜੀ ਦੇ ਗੁੱਦੇ ਨੂੰ ਬਨਾਵਟੀ ਰੇਸ਼ੇ ਨਾਲ ਰਲਾ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਰੇਆਨ ਦੀਆਂ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਕਿਸਮਾਂ ਹਨ ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਵਿਸਕੋਲ ਕਿਉਪਰਾਮੋਨੀਅਮ ਅਤੇ ਨੀਟਰੋ ਸੈਲਲੋਜ਼ ।

PSEB 10th Class Home Science Solutions Chapter 10 ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦਾ ਵਰਗੀਕਰਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
(i) ਕੁਦਰਤੀ ਰੇਸ਼ੇ ਕਿੱਥੋਂ-ਕਿੱਥੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ?
(ii) ਕੁਦਰਤੀ ਰੇਸ਼ੇ ਕਿਹੜੇ-ਕਿਹੜੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
(i) ਕੁਦਰਤੀ ਰੇਸ਼ੇ ਪੌਦਿਆਂ ਦੇ ਤਣਿਆਂ ਦੇ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿਚ ਸਣ, ਪਟਸਨ ਅਤੇ ਕਪਾਹ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਜਾਨਵਰਾਂ ਦੇ ਵਾਲਾਂ ਤੋਂ ਉੱਨ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿਚ ਅਤੇ ਰੇਸ਼ਮ ਦੇ ਕੀੜਿਆਂ ਤੋਂ ਰੇਸ਼ਮ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਕੱਚੀ ਧਾਤ ਜਾਂ ਖਣਿਜ ਪਦਾਰਥ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿਚ ਐਸਬੈਸਟਾਸ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿਚ ਮਿਲਦੇ ਹਨ ।
(ii) ਸਣ, ਪਟਸਨ, ਕਪਾਹ, ਰੇਸ਼ਮ ਆਦਿ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
ਮਨੁੱਖ ਦੁਆਰਾ ਤਿਆਰ ਕੀਤੇ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਨੂੰ ਕਿਹੜੀਆਂ-ਕਿਹੜੀਆਂ ਸ਼੍ਰੇਣੀਆਂ ਵਿਚ ਵੰਡਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਮਨੁੱਖ ਦੁਆਰਾ ਤਿਆਰ ਕੀਤੇ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਨੂੰ ਮੁੱਖ ਚਾਰ ਸ਼੍ਰੇਣੀਆਂ ਵਿਚ ਵੰਡਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ

  1. ਸੈਲੂਲੋਜ਼ ਦੇ ਪੁਨਰ ਨਿਰਮਾਣ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੋਣ ਵਾਲੇ ਬਨਾਵਟੀ ਰੇਸ਼ੇ-ਇਹ ਰੇਸ਼ੇ ਲੱਕੜੀ ਦੇ ਗੁੱਦੇ ਜਾਂ ਕਪਾਹ ਦੇ ਛੋਟੇ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਨੂੰ ਰਸਾਇਣਿਕ ਪਦਾਰਥਾਂ ਨਾਲ ਮਿਲਾ ਕੇ ਬਣਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।
  2. ਥਰਮੋਪਲਾਸਟਿਕ ਰੇਸ਼ੇ (Thermoplastic Fibres)-ਗਰਮ ਹੋਣ ਨਾਲ ਇਹ ਰੇਸ਼ੇ ਸੜਨ ਦੀ ਥਾਂ ਪਿਘਲ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਇਸੇ ਲਈ ਇਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਥਰਮੋਪਲਾਸਟਿਕ ਰੇਸ਼ੇ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਜਿਵੇਂ ਕਿ-ਨਾਈਲੋਨ, ਪੌਲਿਸਟਰ ਅਤੇ ਐਸੀਟੇਟ ਆਦਿ ।
  3. ਧਾਤ ਤੋਂ ਬਣੇ ਰੇਸ਼ੇ-ਗੋਟੇ, ਚਰੀ ਲਈ ਵਰਤੇ ਜਾਣ ਵਾਲੇ ਰੇਸ਼ੇ ਸੋਨਾ, ਚਾਂਦੀ, ਐਲਮੀਨੀਅਮ ਧਾਤਾਂ ਤੋਂ ਬਣਦੇ ਹਨ ।
  4. ਗਲਾਸ, ਫਾਇਬਰ/ਸ਼ੀਸ਼ੇ ਤੋਂ ਬਣੇ ਰੇਸ਼ੇ-ਇਹ ਰੇਸ਼ੇ ਸ਼ੀਸ਼ੇ ਨੂੰ ਪਿਘਲਾ ਕੇ ਬਣਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 6.
ਥਰਮੋਪਲਾਸਟਿਕ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਤੋਂ ਕੀ ਭਾਵ ਹੈ ?
ਜਾਂ
ਥਰਮੋਪਲਾਸਟਿਕ ਰੇਸ਼ੇ ਕੀ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਥਰਮੋਪਲਾਸਟਿਕ ਰੇਸ਼ੇ ਬਣਾਵਟੀ ਰੇਸ਼ੇ ਹਨ ਭਾਵ ਕਿ ਮਨੁੱਖ ਦੁਆਰਾ ਬਣਾਏ ਹੋਏ । ਇਹ ਰੇਸ਼ੇ ਗਰਮੀ ਨਾਲ ਸੜਨ ਦੀ ਬਜਾਏ ਪਿਘਲ ਜਾਂਦੇ ਹਨ, ਇਸੇ ਕਰਕੇ ਇਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਥਰਮੋਪਲਾਸਟਿਕ ਰੇਸ਼ੇ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 7.
ਥਰਮੋਪਲਾਸਟਿਕ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦੀਆਂ ਚਾਰ ਉਦਾਹਰਨਾਂ ਦਿਉ ।
ਉੱਤਰ-
ਨਾਈਲੋਨ, ਟੈਰੀਲੀਨ, ਪੌਲਿਸਟਰ, ਐਕਰੀਲਿਕ ਅਤੇ ਐਸੀਟੇਟ ਥਰਮੋਪਲਾਸਟਿਕ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦੀਆਂ ਉਦਾਹਰਨਾਂ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 8.
ਰੇਔਨ ਕਿਸ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦਾ ਰੇਸ਼ਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਰੇਔਨ ਵੀ ਮਨੁੱਖ ਦੁਆਰਾ ਤਿਆਰ ਕੀਤਾ ਰੇਸ਼ਾ ਹੈ ਪਰ ਇਹ ਰੇਸ਼ੇ ਕੁਦਰਤੀ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਵਿਚ ਜਿਵੇਂ-ਕਪਾਹ ਜਾਂ ਪਟਸਨ ਜਾਂ ਸਣ ਦੇ ਗੁੱਦੇ ਵਿਚ ਰਸਾਇਣਿਕ ਪਦਾਰਥ ਮਿਲਾ ਕੇ ਤਿਆਰ ਕੀਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 9.
ਧਾਤ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੋਣ ਵਾਲੇ ਰੇਸ਼ੇ ਕਿਹੜੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਗੋਟੇ ਅਤੇ ਜਰੀ ਦੇ ਰੇਸ਼ੇ ਸੋਨਾ, ਚਾਂਦੀ ਅਤੇ ਐਲੂਮੀਨੀਅਮ ਧਾਤਾਂ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਇਨ੍ਹਾਂ ਧਾਤਾਂ ਨੂੰ ਪਿਘਲਾ ਕੇ ਬਾਰੀਕ ਰੇਸ਼ੇ ਤਿਆਰ ਕੀਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਪਰ ਅੱਜ-ਕਲ੍ਹ ਸੋਨਾ-ਚਾਂਦੀ ਮਹਿੰਗੀਆਂ ਧਾਤਾਂ ਹੋਣ ਕਰਕੇ ਐਲੂਮੀਨੀਅਮ ਦੇ ਰੇਸ਼ੇ ਬਣਾ ਕੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਉੱਪਰ ਸੋਨੇ ਅਤੇ ਚਾਂਦੀ ਦੀ ਪਰਤ ਚੜ੍ਹਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।

PSEB 10th Class Home Science Solutions Chapter 10 ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦਾ ਵਰਗੀਕਰਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 10.
ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਵਾਲੇ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦੀਆਂ ਦੋ ਉਦਾਹਰਨਾਂ ਦਿਉ ।
ਉੱਤਰ-
ਜਾਨਵਰਾਂ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੋਣ ਵਾਲੇ ਰੇਸ਼ੇ ਪ੍ਰੋਟੀਨ-ਯੁਕਤ ਰੇਸ਼ੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਜਾਨਵਰਾਂ-ਭੇਡਾਂ, ਊਠ ਅਤੇ ਖਰਗੋਸ਼ਾਂ ਦੇ ਵਾਲਾਂ ਤੋਂ ਬਣੀ ਉੱਨ ਪ੍ਰੋਟੀਨ-ਯੁਕਤ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦੀਆਂ ਉਦਾਹਰਨਾਂ ਹਨ ਇਸੇ ਤਰ੍ਹਾਂ ਸਿਲਕ ਦੇ ਕੀੜਿਆਂ ਤੋਂ ਤਿਆਰ ਹੋਏ ਸਿਲਕ ਦੇ ਰੇਸ਼ੇ ਵੀ ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਵਾਲੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 11.
ਮਿਸ਼ਰਤ ਰੇਸ਼ੇ ਕਿਹੜੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ? ਕੋਈ ਚਾਰ ਉਦਾਹਰਨਾਂ ਦਿਉ ।
ਉੱਤਰ-
ਮਿਸ਼ਰਤ ਰੇਸ਼ੇ ਦੋ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੇ ਰੇਸ਼ੇ ਮਿਲਾ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ, ਜਿਵੇਂਕਪਾਹ ਅਤੇ ਪਟਸਨ ਆਦਿ ਨਾਲ ਪੌਲਿਸਟਰ ਜਾਂ ਟੈਰੀਲੀਨ ਮਿਲਾ ਕੇ ਮਿਸ਼ਰਤ ਰੇਸ਼ੇ ਤਿਆਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਇਸੇ ਤਰ੍ਹਾਂ ਉੱਨ ਅਤੇ ਐਕਰੀਲਿਕ ਰੇਸ਼ੇ ਮਿਲਾ ਕੇ ਕੈਸ਼ਲੋਨ ਤਿਆਰ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 12.
ਪੌਦਿਆਂ ਦੇ ਤਣਿਆਂ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੋਣ ਵਾਲੇ ਕੁਦਰਤੀ ਰੇਸ਼ੇ ਕਿਹੜੇ-ਕਿਹੜੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਪੌਦਿਆਂ ਦੇ ਤਣਿਆਂ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੋਣ ਵਾਲੇ ਕੁਦਰਤੀ ਰੇਸ਼ੇ ਹੇਠ ਲਿਖੇ ਹਨਲਿਨਨ-ਜੋ ਫਲੈਕਸ ਪੌਦੇ ਦੇ ਤਣੇ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਪਟਸਨ-ਇਹ ਜੂਟ ਦੇ ਪੌਦੇ ਦੇ ਤਣੇ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਰੇਮੀ-ਇਹ ਵੀ ਪੌਦੇ ਦੇ ਤਣੇ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਸਣ-ਇਹ ਰੇਸ਼ਾ ਵੀ ਪੌਦੇ ਦੇ ਤਣੇ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਛੋਟੇ ਉੱਤਰਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਮੂਲ ਗੁਣਾਂ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਵਿਚ ਕਿਹੜੇ-ਕਿਹੜੇ ਹੋਰ ਗੁਣ ਹੋ ਸਕਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਵਿਚ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਮੂਲ ਗੁਣਾਂ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਹੇਠ ਲਿਖੇ ਗੁਣ ਵੀ ਹੋਣੇ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹਨ

  1. ਦਿੱਖ (Luster)
  2. ਪਾਣੀ ਸੋਖਣ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ (Absorption of water)
  3. ਚਿਪਕਣਾ (Felting)
  4. ਅੱਗ-ਫੜਨ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ (Flammability)
  5. ਸੰਘਣਾਪਨ (Density)
  6. ਤਾਪ-ਪ੍ਰਤੀਰੋਧਕਤਾ (Resistance to heat).
  7. ਤੇਜ਼ਾਬ ਅਤੇ ਖਾਰਾਪਨ ਸਹਿਣ ਦੀ ਸ਼ਕਤੀ (Resistance to acid and alkalies)
  8. ਵੱਟ ਨਾ ਪੈਣ (Resilitience)
  9. ਵਲਦਾਰ ਹੋਣਾ (Crimp) ਆਦਿ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਸੂਤੀ ਰੇਸ਼ੇ ਨੂੰ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦਾ ਸਿਰਤਾਜ ਕਿਉਂ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
ਜਾਂ
ਸੂਤੀ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਨੂੰ ਸਭ ਤੋਂ ਚੰਗਾ ਕਿਉਂ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਸੂਤੀ ਰੇਸ਼ੇ ਨੂੰ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦਾ ਸਿਰਤਾਜ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਇਸ ਰੇਸ਼ੇ ਵਿਚ ਬਹੁਤ ਗੁਣ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਜਿਵੇਂ ਕੁਦਰਤੀ ਚਮਕ ਦਾ ਹੋਣਾ, ਮਜ਼ਬੂਤ ਰੇਸ਼ਾ ਅਤੇ ਤਾਪ ਦਾ ਸੰਚਾਲਕ ਹੋਣ ਦੇ ਨਾਲ-ਨਾਲ ਇਸ ਵਿਚ ਪਾਣੀ ਸੋਖਣ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ ਵੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਇਸੇ ਕਰਕੇ ਹੀ ਇਹ ਕੱਪੜੇ ਗਰਮੀਆਂ ਅਤੇ ਸਰਦੀਆਂ ਵਿਚ ਠੀਕ ਰਹਿੰਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਰੇਸ਼ੇ ਦੇ ਕੱਪੜੇ ਚਮੜੀ ਲਈ ਸੁਖਦਾਇਕ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਨੂੰ ਉਬਾਲਿਆ ਵੀ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ, ਇਸੇ ਕਰਕੇ ਹੀ ਹਸਪਤਾਲ ਵਿਚ ਪੱਟੀਆਂ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਵਰਤਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਸੂਤੀ ਰੇਸ਼ਾ ਇਨ੍ਹਾਂ ਗੁਣਾਂ ਕਰਕੇ ਹੀ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦਾ ਸਿਰਤਾਜ ਮੰਨਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਕਿਹੜੇ ਗੁਣਾਂ ਕਾਰਨ ਸੂਤੀ ਕੱਪੜੇ ਨੂੰ ਗਰਮੀਆਂ ਵਿਚ ਪਹਿਨਿਆ ਜਾਂਦਾ
ਉੱਤਰ-
ਸੂਤੀ ਕੱਪੜੇ ਤਾਪ ਦੇ ਸੰਚਾਲਕ ਅਤੇ ਪਾਣੀ ਸੋਖਣ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ ਰੱਖਦੇ ਹਨ । ਜਿਸ ਨਾਲ ਇਹ ਸਰੀਰ ਦਾ ਪਸੀਨਾ ਸੋਖ ਲੈਂਦੇ ਹਨ । ਇਸੇ ਕਰਕੇ ਹੀ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਗਰਮੀਆਂ ਵਿਚ ਪਹਿਨਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਤਾਪ ਦੇ ਸੰਚਾਲਕ ਹੋਣ ਕਰਕੇ ਤਾਪ ਇਨ੍ਹਾਂ ਵਿਚੋਂ ਲੰਘ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਜੋ ਪਸੀਨਾ ਸੁੱਕਣ ਵਿਚ ਮਦਦ ਕਰਦੇ ਹਨ । ਇਹਨਾਂ ਦੋਹਾਂ ਗੁਣਾਂ ਕਰਕੇ ਇਹ ਰੇਸ਼ੇ ਠੰਢੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਗਰਮੀਆਂ ਵਿਚ ਸਭ ਤੋਂ ਸੁਖਾਵੇਂ ਰਹਿੰਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਹਲਕੇ ਖਾਰ ਅਤੇ ਤੇਜ਼ਾਬਾਂ ਦਾ ਇਨ੍ਹਾਂ ‘ਤੇ ਕੋਈ ਅਸਰ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ ਜਿਸ ਕਰਕੇ ਪਸੀਨੇ ਨਾਲ ਖ਼ਰਾਬ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੇ ।

PSEB 10th Class Home Science Solutions Chapter 10 ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦਾ ਵਰਗੀਕਰਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਸੁਤੀ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਤੋਂ ਬਣਾਏ ਕੱਪੜੇ ਦੀ ਦੇਖਭਾਲ ਕਿਵੇਂ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ ਕੱਪੜਾ ਕਿੱਥੇ ਵਰਤਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-

  1. ਸੁਤੀ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦੇ ਕੱਪੜਿਆਂ ਨੂੰ ਉਬਾਲ ਕੇ ਵੀ ਧੋਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ | ਪਰ ਰੰਗਦਾਰ ਸੂਤੀ ਕੱਪੜਿਆਂ ਨੂੰ ਉਬਾਲਣਾ ਨਹੀਂ ਚਾਹੀਦਾ ਅਤੇ ਨਾ ਹੀ ਤੇਜ਼ ਧੁੱਪ ਵਿਚ ਸੁਕਾਉਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ । ਜਦ ਕਿ ਸਫ਼ੈਦ ਕੱਪੜਿਆਂ ਨੂੰ ਧੁੱਪ ਵਿਚ ਸੁਕਾਉਣ ਨਾਲ ਜ਼ਿਆਦਾ ਸਫ਼ੈਦੀ ਆਉਂਦੀ ਹੈ ।
  2. ਸੁਤੀ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਉੱਪਰ ਖਾਰ ਦਾ ਕੋਈ ਮਾੜਾ ਅਸਰ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ ਸੋ ਕਿਸੇ ਵੀ ਸਾਬਣ ਨਾਲ ਧੋਤੇ ਜਾ ਸਕਦੇ ਹਨ ।
  3. ਸਤੀ ਕੱਪੜਿਆਂ ਉੱਪਰ ਰੰਗਕਾਟ ਦਾ ਵੀ ਕੋਈ ਮਾੜਾ ਪ੍ਰਭਾਵ ਨਹੀਂ ਪੈਂਦਾ । ਸੋ ਖ਼ਾਸ ਕਰ ਕਲੋਰੀਨ ਰੰਗਕਾਟ ਵਰਤਣੇ ਚਾਹੀਦੇ ਹਨ । ਤੇਜ਼ ਰੰਗਕਾਟ ਕੱਪੜੇ ਨੂੰ ਕਮਜ਼ੋਰ ਕਰ ਦਿੰਦੇ ਹਨ ।
  4. ਸੂਤੀ ਕੱਪੜਿਆਂ ਨੂੰ ਪੂਰਾ ਸੁਕਾ ਕੇ ਹੀ ਅਲਮਾਰੀ ਵਿਚ ਸਾਂਭਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਨਹੀਂ ਤਾਂ ਉੱਲੀ ਲੱਗ ਸਕਦੀ ਹੈ ।
  5. ਇਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਸਿਲੀ-ਸਿਲ੍ਹੀ ਤੇਜ਼ ਗਰਮ ਪੈਂਸ ਨਾਲ ਪ੍ਰੈੱਸ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਨਾਲ ਕੱਪੜੇ ਦੇ ਪੂਰੇ ਵੱਟ ਨਿਕਲ ਕੇ ਚਮਕ ਆ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਸੂਤੀ ਰੇਸ਼ੇ ਪਹਿਨਣ ਵਾਲੇ ਕੱਪੜਿਆਂ, ਚਾਦਰਾਂ, ਖੇਸ, ਮੇਜਪੋਸ਼, ਤੌਲੀਏ ਅਤੇ ਪਰਦੇ ਆਦਿ ਲਈ ਵਰਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
ਸੂਤੀ ਰੇਸ਼ੇ ਦੇ ਗੁਣ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਤੀ ਰੇਸ਼ਾ ਕਪਾਹ ਦੇ ਪੌਦੇ ਤੋਂ ਤਿਆਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਰੇਸ਼ੇ ਵਿਚ 87 ਤੋਂ 9090 ਸੈਲੂਲੋਜ਼, 5 ਤੋਂ 8% ਪਾਣੀ ਅਤੇ ਬਾਕੀ ਅਸ਼ੁੱਧੀਆਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ । ਸੂਤੀ ਰੇਸ਼ੇ ਦੇ ਗੁਣ ਹੇਠ ਲਿਖੇ ਹਨ

  • ਸੂਤੀ ਰੇਸ਼ੇ ਦੀ ਲੰਬਾਈ ਅੱਧੇ ਇੰਚ ਤੋਂ ਦੋ ਇੰਚ ਤਕ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਆਮ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਇਸ ਦਾ ਰੰਗ ਚਿੱਟਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
  • ਇਸ ਰੇਸ਼ੇ ਵਿਚ ਕੁਦਰਤੀ ਚਮਕ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ ।
  • ਇਹ ਇਕ ਮਜ਼ਬੂਤ ਅਤੇ ਹੰਢਣਸਾਰ ਰੇਸ਼ਾ ਹੈ ।
  • ਇਸ ਰੇਸ਼ੇ ਵਿਚ ਪਾਣੀ ਸੋਖਣ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ ਕਾਫ਼ੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਜਿਸ ਕਰਕੇ ਇਹ ਸਰੀਰ ਦਾ ਪਸੀਨਾ ਸੋਖ ਲੈਂਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਗੁਣ ਕਰਕੇ ਹੀ ਤੌਲੀਏ ਸੂਤੀ ਰੇਸ਼ੇ ਦੇ ਬਣਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।
  • ਇਹ ਰੇਸ਼ਾ ਤਾਪ ਦਾ ਵਧੀਆ ਸੰਚਾਲਕ ਹੈ । ਗਰਮੀ ਇਸ ਵਿਚੋਂ ਲੰਘ ਸਕਦੀ ਹੈ । ਸੂਤੀ ਰੇਸ਼ੇ ਦੀ ਪਾਣੀ ਸੋਖਣ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ ਅਤੇ ਤਾਪ ਸੰਚਾਲਕਤਾ ਕਾਰਨ ਹੀ ਸੂਤੀ ਕੱਪੜੇ ਗਰਮੀਆਂ ਵਿਚ ਪਹਿਨਣ ਲਈ ਸਭ ਤੋਂ ਅਰਾਮਦਾਇਕ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 6.
ਲਿਨਨ ਤੇ ਸੂਤੀ ਕੱਪੜੇ ਵਿਚ ਕੀ ਸਮਾਨਤਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਲਿਨਨ ਤੇ ਸੂਤੀ ਕੱਪੜੇ ਵਿਚ ਹੇਠ ਲਿਖੀਆਂ ਸਮਾਨਤਾਵਾਂ ਹਨ

  • ਇਹ ਦੋਵੇਂ ਰੇਸ਼ੇ ਕੁਦਰਤੀ ਰੇਸ਼ੇ ਹਨ । ਸੂਤੀ ਰੇਸ਼ਾ ਕਪਾਹ ਤੋਂ ਬਣਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਲਿਨਨ | ਫਲੈਕਸ ਪੌਦੇ ਦੇ ਤਣੇ ਤੋਂ ਤਿਆਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
  • ਲਿਨਨ ਅਤੇ ਸੂਤੀ ਰੇਸ਼ੇ ਦੋਹਾਂ ਵਿਚ ਪਾਣੀ ਸੋਖਣ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ ਵੱਧ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
  • ਦੋਵੇਂ ਰੇਸ਼ੇ ਤਾਪ ਦੇ ਵਧੀਆ ਸੰਚਾਲਕ ਹਨ ।
  • ਲਿਨਨ ਅਤੇ ਸੂਤੀ ਦੋਵੇਂ ਰੇਸ਼ੇ ਮਜ਼ਬੂਤ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਗਿੱਲੇ ਹੋਣ ‘ਤੇ ਮਜ਼ਬੂਤੀ ਹੋਰ ਵੀ ਵੱਧ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 7.
ਲਿਨਨ ਦੇ ਕੱਪੜੇ ਦੀਆਂ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਈਆਂ ਦੱਸੋ ।
ਜਾਂ
ਲਿਨਨ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਅਤੇ ਇਸ ਦੀ ਦੇਖਭਾਲ ਬਾਰੇ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਸੂਤੀ ਕੱਪੜੇ ਦੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਲਿਨਨ ਨੂੰ ਜਲਾਉਣ ਸਮੇਂ ਕਾਗਜ਼ ਦੇ ਸੜਨ ਵਰਗੀ ਗੰਧ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਅੱਗ ਤੋਂ ਬਾਹਰ ਕੱਢਣ ਤੇ ਆਪਣੇ ਆਪ ਥੋੜੀ ਦੇਰ ਜਲਦਾ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ | ਜਲਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਸਲੇਟੀ ਰੰਗ ਦੀ ਸੁਆਹ ਬਣ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਲਿਨਨ ਨੂੰ ਦਰਮਿਆਨੀ ਤੋਂ ਤੇਜ਼ ਪ੍ਰੈੱਸ | ਨਾਲ ਐੱਸ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਦੇ ਰੇਸ਼ੇ ਮਜ਼ਬੂਤ ਅਤੇ ਹੰਢਣਸਾਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਲਈ ਬਿਸਤਰਿਆਂ ਦੀਆਂ ਚਾਦਰਾਂ ਆਦਿ ਬਣਾਈਆਂ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ । ਲਿਨਨ ਉੱਤੇ ਖਾਰ ਦਾ | ਅਸਰ ਘੱਟ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਰੇਸ਼ੇ ਵਿਚ ਕੁਦਰਤੀ ਚਮਕ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 8.
ਲਿਨਨ ਦੇ ਕੱਪੜੇ ਕਿਹੜੀ ਰੁੱਤ ਵਿਚ ਪਹਿਨੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਕਿਉਂ ? ਇਹਨਾਂ ਦੀ ਦੇਖਭਾਲ ਕਿਵੇਂ ਕਰੋਗੇ ?
ਉੱਤਰ-
ਲਿਨਨ ਦੇ ਕੱਪੜੇ ਗਰਮੀਆਂ ਵਿਚ ਹੀ ਪਹਿਨੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਕਿਉਂਕਿ ਇਸ ਦੇ | ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਵਿਚ ਪਾਣੀ ਸੋਖਣ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ ਅਤੇ ਤਾਪ ਸੰਚਾਲਕਤਾ ਵੱਧ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਜਿਸ ਨਾਲ | ਇਹ ਗਰਮੀਆਂ ਵਿਚ ਠੰਢਕ ਪਹੁੰਚਾਉਂਦੇ ਹਨ ।

ਲਿਨਨ ਦੇ ਕੱਪੜਿਆਂ ਦੀ ਦੇਖਭਾਲ ਹੇਠ ਲਿਖੇ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ –

  1. ਇਹ ਰੇਸ਼ੇ ਮਜ਼ਬੂਤ ਹੋਣ ਕਰਕੇ ਰਗੜ ਕੇ ਜਾਂ ਥਾਪੀ ਨਾਲ ਧੋਤੇ ਜਾ ਸਕਦੇ ਹਨ |ਪਰ | ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਉਬਾਲਣਾ ਨਹੀਂ ਚਾਹੀਦਾ ਕਿਉਂਕਿ ਗਰਮੀ ਨਾਲ ਖ਼ਰਾਬ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।
  2. ਲਿਨਨ ਦੇ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ‘ਤੇ ਖਾਰ ਦਾ ਕੋਈ ਅਸਰ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ । ਇਸ ਕਰਕੇ ਕਿਸੇ ਵੀ ਸਾਬਣ ਨਾਲ ਧੋਤੇ ਜਾ ਸਕਦੇ ਹਨ ।
  3. ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਸਿਲੇ-ਸਿਲ੍ਹੇ ਹੀ ਪ੍ਰੈੱਸ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ।
  4. ਲਿਨਨ ਦੇ ਰੰਗ ਪੱਕੇ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੇ । ਇਸ ਲਈ ਇਹਨਾਂ ਕੱਪੜਿਆਂ ਨੂੰ ਛਾਂ ਵਿਚ ਸੁਕਾਉਣਾ | ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ।
  5. ਲਿਨਨ ਦੇ ਕੱਪੜੇ ਨੂੰ ਕੀੜਾ ਬਹੁਤ ਜਲਦੀ ਲਗਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਕਰਕੇ ਧੋ ਕੇ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ | ਸੁਕਾ ਕੇ ਸੁੱਕੀ ਜਗ੍ਹਾ ‘ਤੇ ਸੰਭਾਲਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 9.
ਸੂਤੀ ਅਤੇ ਲਿਨਨ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਹੋਰ ਕਿਹੜੇ ਕੁਦਰਤੀ ਰੂਪ ਵਿਚ ਮਿਲਣ ਵਾਲੇ ਰੇਸ਼ੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਸੂਤੀ ਅਤੇ ਲਿਨਨ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਪਟਸਨ, ਨਾਰੀਅਲ ਦੇ ਰੇਸ਼ੇ, ਕਪੋਕ, ਰੇਮੀ, ਸਣ, ਪਿੰਨਾ ਅਤੇ ਸਾਈਸਲ ਰੇਸ਼ੇ ਹਨ, ਜੋ ਕੁਦਰਤੀ ਰੂਪ ਵਿਚ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।

  • ਪਟਸਨ-ਇਹ ਰੇਸ਼ਾ ਜੂਟ ਦੇ ਪੌਦੇ ਦੇ ਤਣੇ ਤੋਂ ਮਿਲਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਰੇਸ਼ਾ ਜ਼ਿਆਦਾ ਮਜ਼ਬੂਤ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ ਅਤੇ ਇਸ ਵਿਚ ਕੁਦਰਤੀ ਚਮਕ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਇਹ ਰੇਸ਼ੇ ਥੋੜੇ ਖੁਰਦਰੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ, ਇਹ ਆਮ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਸਜਾਵਟੀ ਸਾਮਾਨ, ਥੈਲੇ, ਬੋਰੀਆਂ, ਮੈਟ ਤੇ ਗਲੀਚੇ ਆਦਿ ਲਈ ਵਰਤਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਪਰ ਅੱਜ-ਕਲ੍ਹ ਇਸ ਵਿਚ ਥੋੜ੍ਹਾ ਸੂਤੀ ਜਾਂ ਲਿਨਨ ਦੇ ਰੇਸ਼ੇ ਮਿਲਾ ਕੇ ਇਸ ਨੂੰ ਪੋਸ਼ਾਕਾਂ ਲਈ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
  • ਨਾਰੀਅਲ ਦੇ ਰੇਸ਼ੇ (P.S.E.B. 2007IA)-ਇਹ ਰੇਸ਼ੇ ਨਾਰੀਅਲ ਦੇ ਬੀਜ ਦੇ ਛਿਲਕੇ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਗਿਰੀ ਅਤੇ ਬਾਹਰਲੇ ਛਿਲਕੇ ਦੇ ਵਿਚਕਾਰ ਇਹ ਰੇਸ਼ੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਇਹ ਭੂਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਇਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਆਮ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਰੰਗਿਆ ਨਹੀਂ ਜਾਂਦਾ । ਇਹ ਆਮ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਟਾਟ, ਸੋਫਿਆਂ ਅਤੇ ਗੱਦਿਆਂ ਵਿਚ ਭਰਨ ਅਤੇ ਜੁੱਤੀਆਂ ਦੇ ਤਲੇ ਬਣਾਉਣ ਦੇ ਕੰਮ ਆਉਂਦਾ ਹੈ ।
  • ਕਪੋਕ–ਇਹ ਕਪੋਕ ਬੂਟੇ ਦੇ ਬੀਜਾਂ ਦੇ ਵਾਲਾਂ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਹਲਕਾ, ਨਰਮ ਅਤੇ ਹਵਾ ਵਿਚ ਉੱਡਣ ਵਾਲਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਰੇਸ਼ੇ ਨੂੰ ਜ਼ਿਆਦਾਤਰ ਸਰਾਹਣਿਆਂ, ਸੋਫਿਆਂ ਅਤੇ ਗੱਦਿਆਂ ਵਿਚ ਭਰਨ ਲਈ ਵਰਤਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਗਿੱਲਾ ਹੋਣ ‘ਤੇ ਜਲਦੀ ਸੁੱਕ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
  • ਰੇਮੀ-ਇਹ ਵੀ ਪੌਦੇ ਦੇ ਤਣੇ ਤੋਂ ਮਿਲਣ ਵਾਲਾ ਰੇਸ਼ਾ ਹੈ । ਇਸ ਨੂੰ ਲਿਨਨ ਦੀ ਥਾਂ ਵਰਤਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਦੇ ਰੇਸ਼ੇ ਲੰਮੇ, ਮਜ਼ਬੂਤ, ਚਮਕਦਾਰ ਅਤੇ ਸਫ਼ੈਦ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਪਰ ਇਹਨਾਂ ਵਿਚ ਅਕੜਾਅ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
  • ਸਣ-ਇਹ ਵੀ ਪੌਦੇ ਦੇ ਤਣੇ ਤੋਂ ਮਿਲਣ ਵਾਲਾ ਰੇਸ਼ਾ ਹੈ ਪਰ ਇਹ ਲਿਨਨ ਅਤੇ ਪਟਸਨ ਤੋਂ ਮਜ਼ਬੂਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਲੰਮਾ, ਮਜ਼ਬੂਤ ਅਤੇ ਭੂਰੇ ਰੰਗ ਦਾ ਰੇਸ਼ਾ ਹੈ । ਆਮ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਰੱਸੀਆਂ, ਡੋਰੀਆਂ ਅਤੇ ਵਧੀਆ ਕੱਪੜਾ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਵੀ ਵਰਤਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
  • ਪਿੰਨਾ-ਇਹ ਰੇਸ਼ਾ ਅਨਾਨਾਸ ਦੇ ਪੱਤਿਆਂ ਤੋਂ ਮਿਲਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਚਿੱਟੇ ਤੋਂ ਕਰੀਮ ਰੰਗ ਦਾ ਬਾਰੀਕ, ਚਮਕਦਾਰ ਅਤੇ ਮਜ਼ਬੂਤ ਰੇਸ਼ਾ ਹੈ । ਇਸ ਨੂੰ ਬੈਗ ਜਾਂ ਹੋਰ ਅਜਿਹਾ ਸਾਮਾਨ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਵਰਤਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
  • ਸਾਈਸਲ-ਇਹ ਰੇਸ਼ਾ ਅਜੇਣ ਨਾਮ ਦੇ ਪੌਦੇ ਦੇ ਪੱਤਿਆਂ ਤੋਂ ਮਿਲਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਰੇਸ਼ੇ ਨੂੰ ਤੇਜ਼ ਰੰਗਾਂ ਵਿਚ ਰੰਗ ਕੇ ਗਲੀਚੇ, ਮੈਟ, ਰੱਸੀਆਂ ਅਤੇ ਬੁਰਸ਼ ਆਦਿ ਬਣਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 10.
ਜਾਨਵਰਾਂ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੋਣ ਵਾਲੇ ਮੁੱਖ ਰੇਸ਼ੇ ਕਿਹੜੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਜਾਨਵਰਾਂ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੋਣ ਵਾਲੇ ਮੁੱਖ ਰੇਸ਼ੇ ਉੱਨ ਅਤੇ ਉੱਨ ਦੀਆਂ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਕਿਸਮਾਂ; ਜਿਵੇਂ-ਮੈਰੀਨੋ, ਲਾਮਾ, ਹੀਰ, ਪਸ਼ਮੀਨਾਂ ਅਤੇ ਕਸ਼ਮੀਅਰ ਉੱਨ । ਸਿਲਕ ਜੋ ਰੇਸ਼ਮ ਦੇ ਕੀੜੇ ਦੀ ਤਾਰ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਫਰ-ਜੋ ਮਿੰਕ ਅਤੇ ਅੰਗੋਰਾ ਖਰਗੋਸ਼ ਦੇ ਵਾਲਾਂ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।

PSEB 10th Class Home Science Solutions Chapter 10 ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦਾ ਵਰਗੀਕਰਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 11.
ਜਾਨਵਰਾਂ ਦੇ ਰੇਸ਼ੇ ਜਾਨਵਰਾਂ ਦੇ ਕਿਸ ਭਾਗ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਜਾਨਵਰਾਂ ਦੇ ਰੇਸ਼ੇ ਜਾਨਵਰਾਂ ਦੇ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਭਾਗਾਂ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਜਿਵੇਂ ਹੇਠਾਂ ਦੱਸਿਆ ਹੈ –

ਰੇਸ਼ੇ ਜਾਨਵਰ ਅਤੇ ਸਰੀਰ ਦਾ ਹਿੱਸਾ ਜਿੱਥੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ
1. ਉੱਨ ਅਤੇ ਇਸ ਦੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਜਿਵੇਂ ਮੈਰੀਨੋ, ਮੁਹੇਰ, ਲਾਮਾ, ਪਸ਼ਮੀਨਾ ਕਸ਼ਮੀਅਰ ਉੱਨ । ਭੇਡ ਦੇ ਵਾਲਾਂ ਤੋਂ ਅਤੇ ਖ਼ਾਸ ਕਿਸਮ ਦੀ ਉੱਨ ਖ਼ਾਸ ਕਿਸਮ ਦੀਆਂ ਭੇਡਾਂ ਅੰਗੋਰਾ ਅਤੇ ਕਸ਼ਮੀਰੀ ਬੱਕਰੀ, ਊਠ, ਲਾਮਾ ਅਤੇ ਖਰਗੋਸ਼ ਦੇ ਵਾਲਾਂ ਤੋਂ ਮਿਲਦੀ ਹੈ ।
2. ਸਿਲਕ ਰੇਸ਼ਮ ਦੇ ਕੀੜੇ ਦੀ ਲਾਰ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
3. ਫਰ ਮਿੰਕ ਅਤੇ ਅੰਗੋਰਾ ਜਾਨਵਰਾਂ ਦੀ ਚਮੜੀ ਦੇ ਵਾਲਾਂ ਤੋਂ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 12.
ਸਿਲਕ ਕਿਸ ਜਾਨਵਰ ਤੋਂ ਅਤੇ ਕਿਵੇਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਸਿਲਕ ਜਾਨਵਰ ਵਰਗ ਦਾ ਰੇਸ਼ਾ ਹੈ । ਇਹ ਰੇਸ਼ਮ ਦੇ ਕੀੜੇ ਦੀ ਲਾਰ ਤੋਂ ਬਣਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਯੁਕਤ ਰੇਸ਼ਾ ਹੈ । ਰੇਸ਼ਮ ਦਾ ਕੀੜਾ ਜੋ ਕਿ ਸ਼ਹਿਤੂਤ ਦੇ ਪੱਤਿਆਂ ‘ਤੇ ਪਲਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਮੂੰਹ ਵਿਚੋਂ ਇਕ ਲਾਰ ਜਿਹੀ ਕੱਢਦਾ ਹੈ ਜੋ ਹਵਾ ਦੇ ਸੰਪਰਕ ਵਿਚ ਆ ਕੇ ਜੰਮ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਰੇਸ਼ੇ ਦਾ ਰੂਪ ਧਾਰ ਲੈਂਦੀ ਹੈ । ਇਹ ਰੇਸ਼ਾ ਲਾਰਵੇ ਦੇ ਆਸ-ਪਾਸ ਲਿਪਟ ਕੇ ਇਕ ਖੋਲ ਜਿਹਾ ਬਣਾ ਲੈਂਦਾ ਹੈ, ਇਸ ਨੂੰ ਕੋਕੂਨ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਲਾਰਵਾ ਅੱਠ ਹਫਤਿਆਂ ਦਾ ਹੋ ਕੇ ਲਾਰ ਕੱਢਣ ਲਗਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਆਪਣੇ ਖੋਲ ਵਿਚ ਹੀ ਬੰਦ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਇਸ ਕੋਕੂਨ ਵਿਚ ਤਕਰੀਬਨ 18003600 ਮੀਟਰ ਲੰਮਾ ਧਾਗਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਧਾਗੇ ਦਾ ਰੰਗ ਕਦੇ-ਕਦੇ ਸਫ਼ੈਦ ਪੀਲਾ ਅਤੇ ਕਦੇ-ਕਦੇ ਹਰਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਲਾਰਵੇ ਦੇ ਵੱਧ ਕੇ ਬਾਹਰ ਨਿਕਲਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਹੀ ਇਹਨਾਂ ਕੋਕੂਨਾਂ ਨੂੰ ਇਕੱਠੇ ਕਰਕੇ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਉਬਾਲ ਲਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਇਸ ਨਾਲ ਰੇਸ਼ੇ ‘ਤੇ ਲੱਗੀ ਗੂੰਦ ਉੱਤਰ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਲਾਰਵਾ ਅੰਦਰ ਮਰ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਫਿਰ ਰੇਸ਼ੇ ਨੂੰ ਉਤਾਰਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਰੇਸ਼ਾ ਬਹੁਤ ਨਰਮ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਲਈ 3 ਤੋਂ 6 ਰੇਸ਼ੇ ਇਕੱਠੇ ਕਰ ਕੇ ਲਪੇਟ ਕੇ ਲੜੀਆਂ ਬਣਾਈਆਂ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ । ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦੀ ਗਿਣਤੀ ਧਾਗੇ ਦੀ ਮੋਟਾਈ ਮੁਤਾਬਿਕ ਲਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਫਿਰ ਇਸ ਧਾਗੇ ਤੋਂ ਕੱਪੜਾ ਤਿਆਰ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਕੀੜੇ ਪਾਲਣ ਅਤੇ ਸਿਲਕ ਤਿਆਰ ਕਰਨ ਨੂੰ ਮੈਰੀਕਲਚਰ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 13.
ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦੀ ਪ੍ਰਾਪਤੀ ਦੇ ਸਾਧਨ ਅਨੁਸਾਰ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਵਰਗੀਕਰਨ ਕਰੋ ।
ਤੰਤੂਆਂ ਦਾ ਵਿਸਤਰਿਤ ਵਰਗੀਕਰਨ ਕਰੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਾਧਨਾਂ ਦੇ ਆਧਾਰ ‘ਤੇ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦੀ ਪ੍ਰਾਪਤੀ ਦਾ ਵਰਗੀਕਰਨ ਹੇਠ ਦਿੱਤਾ ਹੈ –
PSEB 10th Class Home Science Solutions Chapter 10 ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦਾ ਵਰਗੀਕਰਨ 1

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 14.
ਰੇਸ਼ਮ ਨੂੰ ਕਿਨ੍ਹਾਂ ਗੁਣਾਂ ਕਾਰਨ ਕੱਪੜਿਆਂ ਦੀ ਰਾਣੀ ਮੰਨਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
ਜਾਂ
ਸਿਲਕ ਨੂੰ ਕੱਪੜਿਆਂ ਦੀ ਰਾਣੀ ਕਿਉਂ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਰੇਸ਼ਮ ਕੁਦਰਤੀ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਵਿਚ ਸਭ ਤੋਂ ਲੰਮਾ ਰੇਸ਼ਾ ਹੈ । ਇਹ ਰੇਸ਼ਾ ਮਜ਼ਬੂਤ ਅਤੇ ਲਚਕਦਾਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਪਰ ਗਿੱਲਾ ਹੋ ਕੇ ਕਮਜ਼ੋਰ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਰੇਸ਼ੇ ਵਿਚ ਚਮਕ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਧ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜਿਸ ਨਾਲ ਵੇਖਣ ਨੂੰ ਸੋਹਣਾ ਲੱਗਦਾ ਹੈ । ਇਸੇ ਲਈ ਇਸ ਨੂੰ ਕੱਪੜਿਆਂ ਦੀ ਰਾਣੀ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 15.
ਸਿਲਕ ਦੀਆਂ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਈਆਂ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਿਲਕ ਦੀਆਂ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਈਆਂ ਹੇਠ ਲਿਖੀਆਂ ਹਨ

  1. ਬਣਤਰ-ਖੁਰਦਬੀਨ ਹੇਠਾਂ ਇਸ ਦੇ ਰੇਸ਼ੇ ਚਮਕਦਾਰ ਅਤੇ ਦੂਹਰੇ ਧਾਗੇ ਦੇ ਬਣੇ ਦਿਖਾਈ ਦਿੰਦੇ ਹਨ ਜਿਸ ਉੱਪਰ ਥਾਂ-ਥਾਂ ਗੰਦ ਦੇ ਧੱਬੇ ਲੱਗੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।
  2. ਲੰਬਾਈ-ਇਹ ਕੁਦਰਤੀ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਵਿਚੋਂ ਸਭ ਤੋਂ ਲੰਮਾ ਰੇਸ਼ਾ ਹੈ । ਇਸ ਰੇਸ਼ੇ ਦੀ ਲੰਬਾਈ ਲਗਪਗ 750 ਤੋਂ 1100 ਮੀਟਰ ਤਕ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
  3. ਦਿਖ-ਇਸ ਰੇਸ਼ੇ ਦੀ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਧ ਚਮਕ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
  4. ਮਜ਼ਬੂਤੀ-ਕੁਦਰਤੀ ਰੂਪ ਵਿਚ ਮਿਲਣ ਵਾਲੇ ਸਭ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਤੋਂ ਇਹ ਮਜ਼ਬੂਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਪਰ ਗਿੱਲਾ ਹੋ ਕੇ ਕਮਜ਼ੋਰ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
  5. ਰੰਗ-ਇਸ ਦਾ ਰੰਗ ਸਫ਼ੈਦ ਪੀਲਾ ਜਾਂ ਸਲੇਟੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
  6. ਲਚਕੀਲਾਪਨ-ਇਹ ਰੇਸ਼ਾ ਲਚਕਦਾਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਇਸ ਲਈ ਇਸ ਵਿਚ ਵਟ ਘੱਟ ਪੈਂਦੇ ਹਨ ।
  7. ਪਾਣੀ ਸੋਖਣ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ-ਇਹ ਰੇਸ਼ਾ ਆਸਾਨੀ ਨਾਲ ਪਾਣੀ ਸੋਖ ਲੈਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਜਲਦੀ ਹੀ ਸੁੱਕ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

PSEB 10th Class Home Science Solutions Chapter 10 ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦਾ ਵਰਗੀਕਰਨ 2

8. ਤਾਪ ਸੰਚਾਲਕਤਾ-ਇਸ ਵਿਚੋਂ ਤਾਪ ਨਿਕਲ ਨਹੀਂ ਸਕਦਾ ਇਸ ਕਰਕੇ ਇਹ ਤਾਪ ਦਾ ਸੰਚਾਲਕ ਨਹੀਂ ਹੈ । ਇਸੇ ਕਰਕੇ ਗਰਮੀਆਂ ਵਿਚ ਨਹੀਂ ਪਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ।

9. ਅਮਲ ਦਾ ਅਸਰ-ਹਲਕੇ ਅਮਲ ਦਾ ਕੋਈ ਬੁਰਾ ਅਸਰ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ ।

10. ਖਾਰ ਦਾ ਅਸਰ-ਹਲਕੀ ਖਾਰ ਵੀ ਇਸ ਰੇਸ਼ੇ ਨੂੰ ਖ਼ਰਾਬ ਕਰ ਦਿੰਦੀ ਹੈ, ਇਸ ਲਈ ਕਲੋਰੀਨ ਯੁਕਤ ਰੰਗਕਾਟ ਨਹੀਂ ਵਰਤਣੇ ਚਾਹੀਦੇ ।

11. ਰੰਗਾਈ-ਇਸ ਰੇਸ਼ੇ ‘ਤੇ ਰੰਗ ਜਲਦੀ ਤੇ ਪੱਕਾ ਚੜ੍ਹਦਾ ਹੈ, ਇਸ ਲਈ ਹਰ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੇ ਰੰਗ ਨਾਲ ਰੰਗਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ।

12. ਤਾਪ ਨਾਲ-ਸਿਲਕ ਦੇ ਜਲਣ ਤੇ ਵਾਲ ਜਾਂ ਖੰਭ ਸੜਨ ਦੀ ਗੰਧ ਆਉਂਦੀ ਹੈ ।

ਅੱਗ ਤੋਂ ਬਾਹਰ ਕੱਢਣ ‘ਤੇ ਆਪਣੇ ਆਪ ਬੁੱਝ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਸੜਨ ਪਿੱਛੋਂ ਉਘੜ-ਦੁਗੜ ਕਾਲਾ ਮਣਕਾ ਜਿਹਾ ਬਣ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਲਈ ਗਰਮ ਪਾਣੀ ਨਾਲ ਧੋਣ, ਧੁੱਪ ਵਿਚ ਸੁਕਾਉਣ ਅਤੇ ਗਰਮ ਸ ਨਾਲ ਪਿੱਸ ਕਰਨ ਨਾਲ ਖ਼ਰਾਬ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 16.
ਸਿਲਕ ਅਤੇ ਉੱਨ ਦੋਨੋਂ ਹੀ ਤਾਪ ਦੇ ਕੁਚਾਲਕ ਹਨ ਪਰ ਫਿਰ ਉੱਨ ਜ਼ਿਆਦਾ ਨਿੱਘੀ ਕਿਉਂ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਉੱਨ ਅਤੇ ਸਿਲਕ ਦੋਵੇਂ ਹੀ ਕੁਦਰਤੀ ਅਤੇ ਜਾਨਵਰਾਂ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਰੇਸ਼ੇ ਹਨ । ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਦੋਵੇਂ ਹੀ ਤਾਪ ਦੇ ਕੁਚਾਲਕ ਹਨ ਅਤੇ ਦੋਹਾਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਸਰਦੀਆਂ ਵਿਚ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਪਰ ਫਿਰ ਵੀ ਸਿਲਕ ਨਾਲੋਂ ਉੱਨ ਜ਼ਿਆਦਾ ਨਿੱਘੀ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਸਿਲਕ ਦਾ ਕੱਪੜਾ ਪਤਲਾ ਅਤੇ ਉੱਪਰਲੀ ਸਤੂ ਮੁਲਾਇਮ ਹੋਣ ਕਰਕੇ ਬਾਹਰ ਵਾਲੀ ਠੰਢ ਨਾਲ ਠਰ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਪਰ ਉੱਨ ਦਾ ਕੱਪੜਾ ਮੋਟਾ ਅਤੇ ਖੁਰਦਰਾ ਹੋਣ ਕਰਕੇ ਠਰਦਾ ਨਹੀਂ ਅਤੇ ਸਰੀਰ ਦੀ ਗਰਮੀ ਬਾਹਰ ਨਹੀਂ ਆਉਣ ਦਿੰਦਾ । ਇਸ ਕਰਕੇ ਉੱਨ ਸਿਲਕ ਨਾਲੋਂ ਵਧੇਰੇ ਨਿੱਘੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।

PSEB 10th Class Home Science Solutions Chapter 10 ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦਾ ਵਰਗੀਕਰਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 17.
ਉੱਨ ਵਿਚ ਅਜਿਹਾ ਕਿਹੜਾ ਤੱਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜੋ ਦੂਸਰੇ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਵਿਚ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ ਅਤੇ ਰਚਨਾ ਬਾਰੇ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਉੱਨ ਵਿਚ ਇਕ ਖ਼ਾਸ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾ ਹੈ ਜੋ ਬਾਕੀ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਵਿਚ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ । ਉੱਨ ਦੇ ਰੇਸ਼ੇ ਵਿਚ ਲਹਿਰੀਆ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਨੂੰ ਕਰੰਪ (crimp) ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ |ਲਹਿਰੀਏ ਦੀ ਗਿਣਤੀ ਰੇਸ਼ੇ ਦੀ ਮਜ਼ਬੂਤੀ ਅਤੇ ਆਕਾਰ ‘ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦੀ ਹੈ । ਰੇਸ਼ਾ ਜਿੰਨਾ ਬਾਰੀਕ ਹੋਵੇ ਉੱਨਾ ਹੀ ਮਜ਼ਬੂਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾ ਕਰਕੇ ਰੇਸ਼ੇ ਇਕ-ਦੂਜੇ ਨਾਲ ਜੁੜ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਜਿਸ ਨੂੰ ਫੈਲਟਿੰਗ (Felting) ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾ ਕਰਕੇ ਇਸ ਤੋਂ ਨਮਦਾ, ਕੰਬਲ, ਗਲੀਚੇ ਆਦਿ ਬਣਦੇ ਹਨ । ਰਚਨਾ-ਉੱਨ ਦਾ ਮੁੱਖ ਤੱਤ ਕਿਰੋਟਿਨ ਨਾਮ ਦਾ ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿਚ ਕਾਰਬਨ, ਹਾਈਡਰੋਜਨ, ਆਕਸੀਜਨ ਅਤੇ ਨਾਈਟਰੋਜਨ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਸਲਫਰ ਵੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 18.
ਸਿਲਕ ਅਤੇ ਉੱਨ ਦੇ ਗੁਣਾਂ ਵਿਚ ਸਮਾਨਤਾ ਕਿਉਂ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਸਿਲਕ ਅਤੇ ਉੱਨ ਦੋਵੇਂ ਰੇਸ਼ੇ ਕੁਦਰਤੀ ਅਤੇ ਜਾਨਵਰਾਂ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਦੋਵੇਂ ਰੇਸ਼ੇ ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਯੁਕਤ ਹਨ ਅਤੇ ਇਨ੍ਹਾਂ ਵਿਚ ਕਾਰਬਨ, ਹਾਈਡਰੋਜਨ, ਆਕਸੀਜਨ ਅਤੇ ਨਾਈਟਰੋਜਨ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਲਈ ਇਹਨਾਂ ਵਿਚ ਕਈ ਸਮਾਨਤਾਵਾਂ ਹਨ ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਸਰਦੀਆਂ ਵਿਚ ਹੀ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਦੋਵੇਂ ਹੀ ਤਾਪ ਦੇ ਕੁਚਾਲਕ ਹਨ । ਇਹਨਾਂ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਨੂੰ ਕੀੜਾ ਜਲਦੀ ਲਗ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਦੋਹਾਂ ਦੀ ਬਹੁਤ ਸੰਭਾਲ ਕਰਨੀ ਪੈਂਦੀ ਹੈ । ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਇਹਨਾਂ ਉੱਪਰ ਤਾਪ ਦਾ ਮਾੜਾ ਅਸਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 19.
ਸੁਤੀ ਅਤੇ ਲਿਨਨ ਦੇ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦੇ ਗੁਣਾਂ ਵਿਚ ਸਮਾਨਤਾ ਕਿਉਂ ਹੈ ?
ਜਾਂ
ਸੂਤੀ ਅਤੇ ਲਿਨਨ ਦੇ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦੇ ਗੁਣਾਂ ਵਿੱਚ ਕੀ ਸਮਾਨਤਾ ਹੈ ?
ਜਾਂ
ਲਿਨਨ ਤੇ ਸੂਤੀ ਕੱਪੜੇ ਵਿਚ ਕੀ ਸਮਾਨਤਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਇਹ ਦੋਵੇਂ ਰੇਸ਼ੇ ਕੁਦਰਤੀ ਅਤੇ ਪੌਦਿਆਂ ਤੋਂ ਮਿਲਦੇ ਹਨ । ਸੂਤੀ ਰੇਸ਼ਾ ਕਪਾਹ ਦੇ ਰੂ ਤੋਂ ਬਣਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਲਿਨਨ ਦਾ ਰੇਸ਼ਾ ਫਲੈਕਸ ਪੌਦੇ ਦੇ ਤਣੇ ਅਤੇ ਟਾਹਣੀਆਂ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਇਹਨਾਂ ਦੋਹਾਂ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਵਿਚ ਸੈਲੂਲੋਜ਼ ਵੱਧ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਕਰਕੇ ਇਹਨਾਂ ਵਿਚ ਕਾਫ਼ੀ ਸਮਾਨਤਾ ਹੈ; ਜਿਵੇਂ ਦੋਵੇਂ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦੀ ਲੰਬਾਈ ਛੋਟੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਇਹ ਰੇਸ਼ੇ ਮਜ਼ਬੂਤ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਪਾਣੀ ਸੋਖਣ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ ਵੀ ਵੱਧ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਇਹ ਦੋਵੇਂ ਰੇਸ਼ੇ ਹੀ ਤਾਪ ਦੇ ਸੰਚਾਲਕ ਹਨ ਜਿਸ ਕਰਕੇ ਗਰਮੀਆਂ ਵਿਚ ਪਹਿਨਣ ਲਈ ਆਰਾਮਦਾਇਕ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 20.
ਉੱਨੀ ਕੱਪੜਿਆਂ ਦੀ ਦੇਖ-ਭਾਲ ਕਿਵੇਂ ਕਰੋਗੇ ?
ਜਾਂ
ਉੱਨ ਦੀ ਦੇਖਭਾਲ ਬਾਰੇ ਵਿਸਤਾਰ ਨਾਲ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਊਨੀ ਰੇਸ਼ੇ ਕਮਜ਼ੋਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਗਿੱਲੇ ਹੋ ਕੇ ਹੋਰ ਵੀ ਕਮਜ਼ੋਰ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਲਈ ਬਹੁਤ ਧਿਆਨ ਨਾਲ ਧੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ । ਗਿੱਲਾ ਹੋਣ ਨਾਲ ਕੱਪੜਾ ਭਾਰਾ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਲਟਕਾ ਕੇ ਨਹੀਂ ਸੁਕਾਉਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਕਿਉਂਕਿ , ਭਾਰੇ ਹੋਣ ਕਰਕੇ ਇਹਨਾਂ ਦਾ ਅਕਾਰ ਵਿਗੜ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਉੱਨ ਦੇ ਕੱਪੜਿਆਂ ਨੂੰ ਜ਼ਿਆਦਾ ਦੇਰ ਤਕ ਭਿਉਂ ਕੇ ਨਹੀਂ ਰੱਖਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਅਤੇ ਨਾ ਹੀ ਰਗੜ ਕੇ ਧੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਲਈ ਪਾਣੀ ਦੇ ਤਾਪਮਾਨ ਦਾ ਵੀ ਧਿਆਨ ਰੱਖਣਾ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ਕਿ ਪਾਣੀ ਨਾ ਜ਼ਿਆਦਾ ਗਰਮ ਅਤੇ ਨਾ ਹੀ ਠੰਢਾ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ |

ਉਨੀ ਕੱਪੜੇ ਨੂੰ ਸੁਕਾਉਣ ਲਈ ਅਖ਼ਬਾਰ ਜਾਂ ਕਾਗਜ਼ ਤੇ ਧੋਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲੋਂ ਕੱਪੜੇ ਦੇ ਆਕਾਰ ਦਾ ਖਾਕਾ ਬਣਾ ਕੇ ਪੱਧਰੀ ਥਾਂ ਤੇ ਰੱਖ ਕੇ ਸੁਕਾਉਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ|  ਜੇ ਹੋ ਸਕੇ ਤਾਂ ਡਰਾਈਕਲੀਨ ਕਰਵਾ ਲੈਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ : ਉਨੀ ਕੱਪੜੇ ਨੂੰ ਪ੍ਰੈੱਸ ਵੀ ਬਹੁਤ ਧਿਆਨ ਨਾਲ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ । ਕੱਪੜੇ ਤੇ ਸਿੱਧੀ ਪ੍ਰੈੱਸ ਨਹੀਂ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ । ਸਿੱਲਾ ਜਿਹਾ ਸੂਤੀ ਕੱਪੜਾ ਵਿਛਾ ਕੇ ਹਲਕੀ ਗਰਮ ਸ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ । ਇਹਨਾਂ ਕੱਪੜਿਆਂ ਨੂੰ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਸੁਕਾ ਕੇ ਸੁੱਕੀ ਥਾਂ ‘ਤੇ ਸੰਭਾਲ ਕੇ ਰੱਖਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਉੱਨੀ ਰੇਸ਼ੇ ਨੂੰ ਕੀੜਾ ਜਲਦੀ ਲਗ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 21.
ਐਸਬੈਸਟਾਸ ਕਿਹੋ ਜਿਹਾ ਰੇਸ਼ਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਇਹ ਕੁਦਰਤੀ ਰੂਪ ਵਿਚ ਮਿਲਣ ਵਾਲਾ ਰੇਸ਼ਾ ਹੈ । ਇਹ ਕੱਚੀ ਧਾਤ ਜਾਂ ਖਣਿਜ ਪਦਾਰਥ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਅੱਗ ਵਿਚ ਰੱਖਣ ‘ਤੇ ਸਦਾ ਨਹੀਂ । ਇਸ ਉੱਪਰ ਤੇਜ਼ਾਬ ਅਤੇ ਖਾਰ ਦਾ ਕੋਈ ਅਸਰ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ । ਅੱਗ ਬੁਝਾਉਣ ਲਈ ਵਰਤੇ ਜਾਣ ਵਾਲੇ ਕੱਪੜੇ ਵੀ ਇਸ ਰੇਸ਼ੇ ਤੋਂ ਬਣਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਆਮ ਪਹਿਨਣ ਵਾਲੇ ਕੱਪੜੇ ਇਸ ਤੋਂ ਨਹੀਂ ਬਣਾਏ ਜਾਂਦੇ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 22.
ਅਜਿਹੀ ਰੇਔਨ ਦਾ ਨਾਂ ਦੱਸੋ ਜੋ ਥਰਮੋਪਲਾਸਟਿਕ ਵੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਐਸੀਟੇਟ ਰੇਔਨ ਦੇ ਰੇਸ਼ੇ ਥਰਮੋਪਲਾਸਟਿਕ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਨਾਲ ਮੇਲ ਖਾਂਦੇ ਹਨ । ਇਹ ਰੇਸ਼ੇ ਵੇਖਣ ਨੂੰ ਨਰਮ ਅਤੇ ਚਮਕਦਾਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਆਮ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਘਰੇਲੂ ਪੁਸ਼ਾਕਾਂ ਅਤੇ ਵਸਤਰ ਬਣਾਉਣ ਦੇ ਕੰਮ ਆਉਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 23.
ਬਨਾਉਟੀ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਰੇਸ਼ਾ ਕਿਵੇਂ ਬਣਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਬਨਾਉਟੀ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਰੇਸ਼ਾ ਤਿਆਰ ਕਰਨ ਲਈ ਰਸਾਇਣਿਕ ਪਦਾਰਥਾਂ ਨੂੰ ਨਿਯੰਤਰਿਤ ਹਾਲਤਾਂ ਵਿਚ ਕਿਰਿਆ ਕਰਕੇ ਰੇਸ਼ੇ ਬਣਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਫਿਰ ਬਾਰੀਕ ਛੇਕਾਂ ਵਾਲੀ ਛਾਣਨੀ ਵਿਚੋਂ ਕੱਢਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਭਾਗ ਹਵਾ ਦੇ ਸੰਪਰਕ ਵਿਚ ਆ ਕੇ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦਾ ਰੂਪ ਧਾਰ ਲੈਂਦੇ ਹਨ ।
PSEB 10th Class Home Science Solutions Chapter 10 ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦਾ ਵਰਗੀਕਰਨ 3

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 24.
ਥਰਮੋਪਲਾਸਟਿਕ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦੇ ਮੁੱਖ ਗੁਣ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਥਰਮੋਪਲਾਸਟਿਕ ਰੇਸ਼ਾ ਕਾਰਬਨ, ਹਾਈਡਰੋਜਨ, ਆਕਸੀਜਨ ਅਤੇ ਨਾਈਟਰੋਜਨ ਤੱਤਾਂ ਤੋਂ ਮਿਲ ਕੇ ਬਣਦਾ ਹੈ ।
ਇਸ ਰੇਸ਼ੇ ਦੀਆਂ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਵਾਂ ਹੇਠ ਲਿਖੀਆਂ ਹਨ –

  • ਇਹ ਫਿਲਾਮੈਂਟ ਰੇਸ਼ੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਲੰਬਾਈ ਇੱਛਾ ਅਨੁਸਾਰ ਰੱਖੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ।
  • ਇਹ ਰੇਸ਼ੇ ਮਜ਼ਬੂਤ ਅਤੇ ਚਮਕਦਾਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਇਸ ਦੇ ਕੱਪੜੇ ਹੰਢਣਸਾਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।
  • ਇਹਨਾਂ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦੀ ਪਾਣੀ ਸੋਖਣ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ ਬਹੁਤ ਘੱਟ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਇਸ ਲਈ ਇਹ ਜਲਦੀ ਸੁੱਕ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਕਰਕੇ ਇਹ ਕੱਪੜੇ ਪਸੀਨਾ ਵੀ ਨਹੀਂ ਸੋਖਦੇ ।
  • ਇਹ ਰੇਸ਼ੇ ਤਾਪ ਦੇ ਕੁਚਾਲਕ ਹੁੰਦੇ ਹਨ, ਇਸ ਕਰਕੇ ਗਰਮੀਆਂ ਵਿਚ ਨਹੀਂ ਵਰਤੇ ਜਾਂਦੇ ।
  • ਥਰਮੋਪਲਾਸਟਿਕ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ‘ਤੇ ਖਾਰ ਦਾ ਕੋਈ ਅਸਰ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ, ਜਦ ਕਿ ਤੇਜ਼ਾਬ ਵਿਚ ਇਹ ਰੇਸ਼ੇ ਘੁਲ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।
  • ਥਰਮੋਪਲਾਸਟਿਕ ਰੇਸ਼ੇ ਤਾਪ ਨਾਲ ਪਿਘਲ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਜਲਣ ’ਤੇ ਪਲਾਸਟਿਕ ਦੇ ਸੜਨ ਵਰਗੀ ਗੰਧ ਆਉਂਦੀ ਹੈ । ਇਹ ਜ਼ਿਆਦਾ ਗਰਮੀ ਨਹੀਂ ਸਹਾਰ ਸਕਦੇ, ਇਸ ਲਈ ਘੱਟ ਗਰਮ ਪ੍ਰੈੱਸ ਨਾਲ ਪ੍ਰੈੱਸ ਕਰਨੇ ਚਾਹੀਦੇ ਹਨ ।
  • ਇਹਨਾਂ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਨੂੰ ਕੋਈ ਉੱਲੀ ਜਾਂ ਟਿੱਡੀ ਆਦਿ ਨਹੀਂ ਲਗਦੀ !

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 25.
ਥਰਮੋਪਲਾਸਟਿਕ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਦਿਨ-ਪ੍ਰਤੀ-ਦਿਨ ਕਿਉਂ ਵੱਧ ਰਹੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਥਰਮੋਪਲਾਸਟਿਕ ਰੇਸ਼ੇ ਮਜ਼ਬੂਤ, ਲਚਕਦਾਰ, ਹੰਢਣਸਾਰ, ‘ਧੋਣ ਅਤੇ ਸੰਭਾਲਣ ਵਿਚ ਆਸਾਨ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਲਈ ਇਸ ਨੂੰ ਜੁਰਾਬਾਂ, ਖੇਡਾਂ ਲਈ ਪਹਿਨਣ ਵਾਲੇ ਕੱਪੜੇ ਅਤੇ ਆਮ ਪਹਿਨਣ ਵਾਲੇ ਕੱਪੜਿਆਂ ਲਈ ਵਰਤਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਮਜ਼ਬੂਤੀ ਕਾਰਨ ਇਸ ਦੀਆਂ ਰੱਸੀਆਂ, ਡੋਰੀਆਂ ਆਦਿ ਵੀ ਬਣਾਈਆਂ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ । ਇਸ ਨੂੰ ਦੂਸਰੇ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਨਾਲ ਮਿਲਾ ਕੇ ਵੀ ਵਰਤਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਰੇਸ਼ੇ ਦੀ ਮਜ਼ਬੂਤੀ ਕਾਰਨ ਹੀ ਇਸ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਦਿਨ-ਬ-ਦਿਨ ਵਧਦੀ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈ ।

PSEB 10th Class Home Science Solutions Chapter 10 ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦਾ ਵਰਗੀਕਰਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 26.
ਮਿਸ਼ਰਤ ਰੇਸ਼ੇ ਬਣਾਉਣ ਦੇ ਕੀ ਲਾਭ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਮਿਸ਼ਰਤ ਰੇਸ਼ੇ ਬਣਾਉਣ ਨਾਲ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਮਜ਼ਬੂਤੀ ਅਤੇ ਹੰਢਣਸਾਰਤਾ ਵੱਧ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਸਾਂਭ-ਸੰਭਾਲ ਵੀ ਸੌਖੀ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਮਿਸ਼ਰਤ ਰੇਸ਼ੇ ਸਸਤੇ ਵੀ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਦਾਗ ਵੀ ਘੱਟ ਲੱਗਦੇ ਹਨ । ਇਹਨਾਂ ਦੇ ਰੰਗ ਵੀ ਪੱਕੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਵੇਖਣ ਨੂੰ ਵੀ ਸੋਹਣੇ ਲੱਗਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 27.
ਬਨਾਉਟੀ ਕੱਪੜਿਆਂ ਨੂੰ ਸੰਭਾਲਣਾ ਆਸਾਨ ਕਿਉਂ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਬਨਾਉਟੀ ਕੱਪੜਿਆਂ ਦੀ ਦੇਖ-ਭਾਲ ਅਤੇ ਸੰਭਾਲ ਆਸਾਨ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਇਹ ਧੋਣੇ ਸੌਖੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਗਰਮ ਪਾਣੀ ਦੀ ਲੋੜ ਨਹੀਂ ਪੈਂਦੀ । ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਰੰਗ ਪੱਕੇ ਹੋਣ ਕਰਕੇ ਧੋਣ ਨਾਲ ਜਾਂ ਪੈਂਸ ਨਾਲ ਖ਼ਰਾਬ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੇ । ਪੈਂਸ ਦੀ ਵੀ ਜ਼ਿਆਦਾ ਲੋੜ ਨਹੀਂ ਪੈਂਦੀ ਟਿੱਡੀਆਂ, ਕੀੜਿਆਂ ਜਾਂ ਉੱਲੀ ਦੁਆਰਾ ਕੋਈ ਨੁਕਸਾਨ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ ਕਿਉਂਕਿ ਇਹ ਰਸਾਇਣਾਂ ਤੋਂ ਬਣੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਲਈ ਸੰਭਾਲਣੇ ਵੀ ਸੌਖੇ ਹਨ ।

ਨਿਬੰਧਾਤਮਕ ਪ੍ਰਸ਼ਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਰੇਸ਼ੇ ਤੋਂ ਕੱਪੜਾ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਕਿਹੜੇ ਮੂਲ ਗੁਣ ਹੋਣੇ ਚਾਹੀਦੇ ਹਨ ?
ਜਾਂ
ਰੇਸ਼ੇ ਤੋਂ ਕੱਪੜਾ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਮੂਲ ਗੁਣਾਂ ਦਾ ਵਰਣਨ ਕਰੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਕੁਦਰਤ ਵਿਚ ਅਨੇਕਾਂ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੇ ਰੇਸ਼ੇ ਮਿਲਦੇ ਹਨ ਪਰ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਤੋਂ ਕੱਪੜਾ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਇਹਨਾਂ ਵਿਚ ਕੁੱਝ ਮੂਲ ਗੁਣ ਹੋਣੇ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹਨ ਤਾਂ ਹੀ ਇਹਨਾਂ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਤੋਂ ਕੱਪੜਾ ਬਣਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ।

ਇਹ ਮੁਲ ਗੁਣ ਹੇਠ ਲਿਖੇ ਹਨ –

  1. ਰੇਸ਼ੇ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿਚ ਹੋਣਾ (Staple)
  2. ਮਜ਼ਬੂਤੀ (Strength/Tenacity)
  3. ਲਚਕੀਲਾਪਨ (Elasticity/Flexibility)
  4. ਇਕਸਾਰਤਾ (Uniformity)
  5. ਜੁੜਨ ਸ਼ਕਤੀ (Spinning Quality/Cohesiveness) ।

1. ਰੇਸ਼ੇ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿਚ ਹੋਣਾ (ਸਟੇਪਲ) -ਰੇਸ਼ੇ ਸਟੇਪਲ ਜਾਂ ਫਿਲਾਮੈਂਟ ਦੋ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੇ ਹੋ ਸਕਦੇ ਹਨ । ਸਟੇਪਲ ਤੋਂ ਭਾਵ ਹੈ ਕਿ ਰੇਸ਼ੇ ਤੋਂ ਕੱਪੜਾ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਉਹਨਾਂ ਦੀ ਖ਼ਾਸ ਲੰਬਾਈ ਅਤੇ ਵਿਆਸ ਦਾ ਹੋਣਾ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ਤਾਂ ਹੀ ਉਹਨਾਂ ਦੀ ਤਸੱਲੀਬਖਸ਼ ਵਰਤੋਂ ਹੋ ਸਕਦੀ ਹੈ । ਵਿਆਸ ਦੇ ਮੁਕਾਬਲਤਨ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦੀ ਲੰਬਾਈ ਬਹੁਤ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜੋ ਘੱਟੋ-ਘੱਟ 1 : 100 ਦੇ ਅਨੁਪਾਤ ਵਿਚ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ । ਜੇਕਰ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦੀ ਲੰਬਾਈ ਅੱਧਾ ਇੰਚ ਤੋਂ ਘੱਟ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਉਹ ਧਾਗਾ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਇਸਤੇਮਾਲ ਨਹੀਂ ਕੀਤੇ ਜਾ ਸਕਦੇ ।

ਮਨੁੱਖ ਦੁਆਰਾ ਤਿਆਰ ਕੀਤੇ ਅਤੇ ਸਿਲਕ ਦੇ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦੀ ਲੰਬਾਈ ਤਾਂ ਬਹੁਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਪਰੰਤ ਉੱਨ ਅਤੇ ਕਪਾਹ ਦੇ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦੀ ਲੰਬਾਈ ਘੱਟ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਪਰ ਇਹਨਾਂ ਦੇ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਵਿਚ ਆਪਸ ਵਿਚ ਜੁੜ ਕੇ ਕੱਤੇ ਜਾਣ ਦਾ ਗੁਣ ਬਹੁਤ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜੋ ਕੱਪੜਾ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਲਾਭਕਾਰੀ ਹੈ । ਕਪਾਹ ਦੇ ਛੋਟੇ ਰੇਸ਼ੇ ਜਿਹਨਾਂ ਤੋਂ ਧਾਗਾ ਨਹੀਂ ਬਣਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ, ਉਹਨਾਂ ’ਤੇ ਰਸਾਇਣਿਕ ਪਦਾਰਥਾਂ ਦੀ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਨਾਲ ਰੇਸ਼ੇ ਦਾ ਪੁਨਰ ਨਿਰਮਾਣ ਕਰਕੇ ਰੇਔਨ ਦਾ ਰੇਸ਼ਾ ਬਣਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਲਈ ਹੀ ਰੇਔਨ ਦੇ ਗੁਣ ਸੂਤੀ ਕੱਪੜੇ ਨਾਲ ਕਾਫ਼ੀ ਮਿਲਦੇ ਹਨ ।

2. ਮਜ਼ਬੂਤੀ-ਰੇਸ਼ੇ ਤੋਂ ਕੱਪੜਾ ਬਣਾਉਣਾ ਇਕ ਲੰਬੀ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਹੈ । ਰੇਸ਼ੇ ਇੰਨੇ ਮਜ਼ਬੂਤ ਚਾਹੀਦੇ ਹਨ ਕਿ ਕਤਾਈ, ਸਫ਼ਾਈ ਅਤੇ ਬੁਣਾਈ ਸਮੇਂ ਪੈ ਰਹੀ ਖਿੱਚ ਦਾ ਮੁਕਾਬਲਾ ਕਰ ਸਕਣ ਅਤੇ ਹੰਢਣਸਾਰ ਕੱਪੜੇ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿਚ ਬਦਲੇ ਜਾ ਸਕਣ । ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦੀ ਮਜ਼ਬੂਤੀ ਤੇ ਵਾਤਾਵਰਨ ਦੀ ਨਮੀ ਦਾ ਅਸਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
ਆਮ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਕੁਦਰਤੀ ਰੂਪ ਵਿਚ ਪੌਦਿਆਂ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੋਣ ਵਾਲੇ ਰੇਸ਼ੇ ਜਦੋਂ ਗਿੱਲੇ ਹੋਣ ਤਾਂ ਜ਼ਿਆਦਾ ਮਜ਼ਬੂਤ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਜਦ ਕਿ ਦੂਜੇ ਰੇਸ਼ੇ ਜਿਵੇਂ ਰੇਔਨ ਅਤੇ ਉੱਨ, ਸਿਲਕ ਆਦਿ ਗਿੱਲੇ ਹੋਣ ‘ਤੇ ਕਮਜ਼ੋਰ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।

3. ਲਚਕੀਲਾਪਨ -ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਵਿਚ ਟੁੱਟੇ ਬਗੈਰ ਮੁੜ ਸਕਣ ਦਾ ਗੁਣ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਜੋ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਇੱਕ-ਦੂਜੇ ‘ਤੇ ਲਪੇਟ ਕੇ ਵਲ ਦੇ ਕੇ ਧਾਗਾ ਬਣਾਇਆ ਜਾ ਸਕੇ ਜਿਸ ਤੋਂ ਕਿ ਕੱਪੜਾ ਬਣਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਗੁਣ ਕੱਪੜੇ ਨੂੰ ਹੰਢਣਸਾਰ ਬਣਾਉਣ ਅਤੇ ਮੁੜ ਪੁਰਾਣੀ ਸ਼ਕਲ ਅਤੇ ਆਕਾਰ ਬਰਕਰਾਰ ਰੱਖਣ ਵਿਚ ਮਦਦ ਕਰਦਾ ਹੈ । ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਵਿਚ ਲਚਕ ਵੱਧ ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਉਹਨਾਂ ਵਿਚ ਵੱਟ ਘੱਟ ਪੈਂਦੇ ਹਨ ।

4. ਇਕਸਾਰਤਾ-ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦੀ ਲੰਬਾਈ ਅਤੇ ਵਿਆਸ ਵਿਚ ਇਕਸਾਰਤਾ ਹੋਣ ਨਾਲ ਉਹਨਾਂ ਤੋਂ ਸਾਫ ਅਤੇ ਇਕਸਾਰ ਧਾਗਾ ਬਣਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਨਾਲ ਕੱਪੜਾ ਵੀ ਮੁਲਾਇਮ ਅਤੇ ਸਾਫ਼ ਬਣਦਾ ਹੈ ।

5. ਜੁੜਨ ਸ਼ਕਤੀ -ਚੰਗੀ ਕਤਾਈ ਲਈ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਵਿੱਚ ਆਪਸ ਵਿਚ ਜੁੜ ਸਕਣ ਦੀ ਸ਼ਕਤੀ ਦਾ ਹੋਣਾ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ਤਾਂ ਜੋ ਉਹਨਾਂ ਦੀ ਕਤਾਈ ਹੋ ਸਕੇ ।
ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦੀ ਜੁੜਨ ਸ਼ਕਤੀ ਚਾਰ ਗੱਲਾਂ ‘ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦੀ ਹੈ ।

  • ਰੇਸ਼ੇ ਦੀ ਲੰਬਾਈ ।
  • ਰੇਸ਼ੇ ਦੀ ਬਾਰੀਕੀ
  • ਰੇਸ਼ੇ ਦੀ ਸੜਾ ਦੀ ਕਿਸਮ
  • ਲਚਕੀਲਾਪਨ ।

ਰੇਸ਼ੇ ਵਿਚ ਜਿੰਨੀ ਜੁੜਨ ਸ਼ਕਤੀ ਵਧੇਰੇ ਹੋਵੇਗੀ ਉੱਨੀ ਹੀ ਕੜਾਈ ਉਪਰੰਤ ਧਾਗੇ ਦੀ ਬਾਰੀਕੀ ਅਤੇ ਮਜ਼ਬੂਤੀ ਹੋਵੇਗੀ ਅਤੇ ਇਹ ਹੀ ਗੁਣ ਕੱਪੜੇ ਵਿਚ ਵੀ ਆਉਣਗੇ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਗਰਮੀਆਂ ਵਿਚ ਪਹਿਨਣ ਲਈ ਕਿਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਤੋਂ ਬਣੇ ਕੱਪੜੇ ਠੀਕ ਰਹਿੰਦੇ ਹਨ ? ਬਨਾਉਟੀ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਬਣਾਏ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਤੋਂ ਬਣੇ ਕੱਪੜੇ ਗਰਮੀਆਂ ਵਿਚ ਕਿਉਂ ਨਹੀਂ ਪਹਿਨੇ ਜਾਂਦੇ ?
ਉੱਤਰ-
ਗਰਮੀਆਂ ਵਿਚ ਪਹਿਨਣ ਲਈ ਸੂਤੀ ਅਤੇ ਲਿਨਨ ਰੇਸ਼ੇ ਦੇ ਕੱਪੜੇ ਠੀਕ ਰਹਿੰਦੇ ਹਨ ਕਿਉਂਕਿ ਇਨ੍ਹਾਂ ਵਿਚ ਪਾਣੀ ਸੋਖਣ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ ਵੱਧ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜਿਸ ਨਾਲ ਇਹ ਪਸੀਨਾ ਸੋਖ ਲੈਂਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਤਾਪ ਦੇ ਸੰਚਾਲਕ ਹੋਣ ਕਰਕੇ ਪਸੀਨੇ ਨੂੰ ਸੁੱਕਣ ਵਿਚ ਮਦਦ ਕਰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਠੰਢੇ ਰਹਿੰਦੇ ਹਨ । ਇਸੇ ਲਈ ਇਹ ਕੱਪੜੇ ਗਰਮੀਆਂ ਵਿਚ ਵੱਧ ਆਰਾਮਦਾਇਕ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਇਹ ਰੇਸ਼ੇ ਮਜ਼ਬੂਤ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਪਰ ਗਿੱਲੇ ਹੋਣ ‘ਤੇ ਹੋਰ ਵੀ ਮਜ਼ਬੂਤੀ ਵੱਧ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਸੂਤੀ ਅਤੇ ਲਿਨਨ ਦੇ ਕੱਪੜਿਆਂ ਦੇ ਉਲਟ ਬਨਾਉਟੀ ਰੇਸ਼ੇ ਗਰਮੀਆਂ ਵਿਚ ਨਹੀਂ ਪਹਿਨੇ ਜਾਂਦੇ ਕਿਉਂਕਿ ਇਹ ਪਾਣੀ ਨਹੀਂ ਸੋਖਦੇ ਅਤੇ ਪਸੀਨਾ ਆਉਣ ‘ਤੇ ਗਿੱਲੇ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਪਰ ਪਸੀਨਾ ਸੁੱਕਦਾ ਨਹੀਂ । ਤਾਪ ਦੇ ਕੁਚਾਲਕ ਹੋਣ ਕਰਕੇ ਸਰੀਰ ਦੀ ਗਰਮੀ ਬਾਹਰ ਨਹੀਂ ਨਿਕਲ ਸਕਦੀ ਸੋ ਇਨ੍ਹਾਂ ਵਿਚ ਵੱਧ ਗਰਮੀ ਲੱਗਦੀ ਹੈ । ਇਸ ਲਈ ਇਹ ਕੱਪੜੇ ਗਰਮੀਆਂ ਵਿਚ ਨਹੀਂ ਪਹਿਨੇ ਜਾਂਦੇ ।

PSEB 10th Class Home Science Solutions Chapter 10 ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦਾ ਵਰਗੀਕਰਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਕੁਦਰਤ ਵਿਚ ਮਿਲਣ ਵਾਲੇ ਰੇਸ਼ੇ ਕਿਹੜੇ-ਕਿਹੜੇ ਹਨ ? ਕਿਸੇ ਇਕ ਰੇਸ਼ੇ ਦੀਆਂ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਈਆਂ, ਰਚਨਾ ਅਤੇ ਦੇਖਭਾਲ ਬਾਰੇ ਲਿਖੋ ।
ਜਾਂ
ਸੁਤੀ ਰੇਸ਼ੇ ਦੀਆਂ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਵਾਂ ਅਤੇ ਦੇਖਭਾਲ ਬਾਰੇ ਵਿਸਥਾਰ ਵਿਚ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਕੁਦਰਤੀ ਰੂਪ ਵਿਚ ਪੌਦਿਆਂ, ਜਾਨਵਰਾਂ ਅਤੇ ਖਣਿਜ ਪਦਾਰਥਾਂ ਜਾਂ ਕੱਚੀ ਧਾਤ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੋਣ ਵਾਲੇ ਰੇਸ਼ੇ ਕੁਦਰਤੀ ਰੇਸ਼ੇ ਹਨ ।
ਇਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਪ੍ਰਾਪਤੀ ਦੇ ਸਾਧਨ ਦੇ ਅਧਾਰ ‘ਤੇ ਤਿੰਨ ਸ਼੍ਰੇਣੀਆਂ ਵਿਚ ਵੰਡਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ –

(ਉ) ਪੌਦਿਆਂ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੋਣ ਵਾਲੇ ਰੇਸ਼ੇ-ਇਹ ਪੌਦਿਆਂ ਦੇ ਬੀਜਾਂ ਦੇ ਵਾਲਾਂ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿਚ ਕਪਾਹ ਅਤੇ ਤਣਿਆਂ ਦੇ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿਚ ਸਣ, ਪਟਸਨ ਆਦਿ ਹਨ ।

(ਅ) ਜਾਨਵਰਾਂ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੋਣ ਵਾਲੇ ਰੇਸ਼ੇ-ਜਾਨਵਰਾਂ ਦੇ ਵਾਲਾਂ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿਚ ਉੱਨ ਅਤੇ ਰੇਸ਼ਮ ਦੇ ਕੀੜਿਆਂ ਤੋਂ ਰੇਸ਼ਮ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਧਾਤ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੋਣ ਵਾਲੇ ਰੇਸ਼ੇ-ਕੱਚੀ ਧਾਤ ਜਾਂ ਖਣਿਜ ਪਦਾਰਥਾਂ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿਚ ਐਸਬੈਸਟੀਸ ਕੁਦਰਤੀ ਰੂਪ ਵਿਚ ਧਰਤੀ ਦੀ ਤਹਿ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੋਣ ਵਾਲਾ ਰੇਸ਼ਾ ਹੈ ।

ਕੁਦਰਤੀ ਰੇਸ਼ੇ-ਇਹ ਰੇਸ਼ੇ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਪੌਦਿਆਂ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਪੌਦਿਆਂ ਤੋਂ ਮਿਲਣ ਵਾਲੇ ਇਹ ਰੇਸ਼ੇ, ਜਿਵੇਂ-ਕਪਾਹ ਸੂ), ਲਿਨਨ, ਜੂਟ ਅਤੇ ਨਾਰੀਅਲ ਦੇ ਰੇਸ਼ੇ ਆਦਮੀ ਲਈ ਬਹੁਤ ਲਾਭਕਾਰੀ ਹਨ । ਇਹ ਪੌਦਿਆਂ ਦੇ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਹਿੱਸਿਆਂ; ਜਿਵੇਂ-ਬੀਜ, ਤਣੇ, ਪੱਤੇ ਜਾਂ ਫਲ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਸੂਤੀ ਰੇਸ਼ੇ-ਇਹ ਰੇਸ਼ਾ ਪੁਰਾਣੇ ਸਮੇਂ ਤੋਂ ਭਾਰਤ ਵਿਚ ਉਗਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਸੂਤੀ ਰੇਸ਼ਾ ਕਪਾਹ ਦੇ ਪੌਦੇ ਦੇ ਬੀਜਾਂ ਦੇ ਵਾਲ ਹਨ । ਕਪਾਹ ਦਾ ਬੂਟਾ 90-120 ਸੈਂਟੀਮੀਟਰ ਉੱਚਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜੋ ਗਰਮ, ਸਿੱਲ੍ਹੀ ਅਤੇ ਕਾਲੀ ਮਿੱਟੀ ਵਾਲੀ ਜ਼ਮੀਨ ਵਿਚ ਉਗਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਇਸ ਦੀ ਡੋਡੀ ਜੋ ਫੁੱਲ ਵਿਚ ਬਦਲ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਜਿੱਥੇ ਬਾਅਦ ਵਿਚ ਟਿੰਡਾ ਬਣ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਡਾ ਪੱਕ ਕੇ ਫੁੱਟ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਜਿਸ ਨਾਲ ਰੂੰ (ਕਪਾਹ ਬਾਹਰ ਨਿਕਲ ਆਉਂਦੀ ਹੈ । ਤੂੰ ਹੀ ਅਸਲ ਵਿਚ ਕਪਾਹ ਦੇ ਬੂਟੇ ਦੇ ਫਲ ਹਨ, ਜਿਸ ਤੋਂ ਵੜੇਵੇਂ (ਬੀਜ) ਅਤੇ ਕਪਾਹ ਬੀਜਾਂ ਦੇ ਵਾਲ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਕਰ ਲਏ ਜਾਂਦੇਂ ਹਨ | ਕਪਾਹ ਦੀ ਕੰਘੀ ਕਰਕੇ ਛੋਟੇ ਅਤੇ ਲੰਬੇ ਰੇਸ਼ੇ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਕਰ ਲਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਲੰਬੇ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਤੋਂ ਮਸ਼ੀਨਾਂ ਨਾਲ ਧਾਗਾ ਬਣਾ ਕੇ ਕੱਪੜਾ ਬਣਾ ਲਿਆ ਜਾਂਦਾ । ਹੈ | ਪਹਿਲਾਂ ਘਰਾਂ ਵਿਚ ਹੀ ਚਰਖੇ ਨਾਲ ਧਾਗਾ ਬਣਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਸੀ ਜਿਸ ਤੋਂ ਖੱਦਰ ਜਾਂ ਖੇਸ ਵਗੈਰਾ ਵੀ ਘਰ ਹੀ ਬਣਾਏ ਜਾਂਦੇ ਸਨ ।

(ਉ) ਰਚਨਾ-ਸੂਤੀ · ਰੇਸ਼ੇ ਵਿਚ 87-90% ਸੈਲੂਲੋਜ, 5 ਤੋਂ 8% ਪਾਣੀ ਅਤੇ ਬਾਕੀ ਅਸ਼ੁੱਧੀਆਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ।
(ਆ) ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਈਆਂ

  1. ਬਣਤਰ-ਕਪਾਹ ਦਾ ਰੇਸ਼ਾ ਖੁਰਦਬੀਨ ਨਾਲ ਦੇਖਣ ਤੇ ਨਾਲੀ ਦੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦਿਖਦਾ ਹੈ ।
    ਜਿਸ ਵਿਚ ਰਸ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਜਦ ਕਪਾਹ ਪੱਕਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਇਹ ਰਸ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਤੇ ਰੇਸ਼ਾ ਚਪਟਾ, ਮੁੜੇ ਹੋਏ ਰਿਬਨ ਦੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਲਗਦਾ ਹੈ ।
  2. ਲੰਬਾਈ-ਇਹ ਛੋਟਾ ਰੇਸ਼ਾ ਹੈ, ਇਸ ਦੀ ਲੰਬਾਈ 3 ਇੰਚ ਤੋਂ ਦੋ ਇੰਚ ਤਕ ਹੋ ਸਕਦੀ ਹੈ ।
  3. ਰੰਗ-ਆਮ ਤੌਰ ‘ਤੇ, ਰੰਗ ਚਿੱਟਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਪਰ ਕਪਾਹ ਦੀ ਕਿਸਮ ਅਨੁਸਾਰ ਇਸ ਦਾ ਰੰਗ ਕਰੀਮ ਜਾਂ ਹਲਕਾ ਭੂਰਾ ਵੀ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ ।

PSEB 10th Class Home Science Solutions Chapter 10 ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦਾ ਵਰਗੀਕਰਨ 4
4. ਦਿਖ-ਇਸ ਵਿਚ ਕੁਦਰਤੀ ਚਮਕ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ ਪਰ ਰਸਾਇਣਿਕ ਕਿਰਿਆ ਜਿਸ ਨੂੰ ਮਰਸੀਰਾਈਜੇਸ਼ਨ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ, ਨਾਲ ਇਸ ਦੀ ਦਿਖ ਸੁਧਾਰੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ।

5. ਮਜ਼ਬੂਤੀ-ਇਹ ਇੱਕ ਮਜ਼ਬੂਤ ਰੇਸ਼ਾ ਹੈ, ਇਸ ਲਈ ਕਾਫ਼ੀ ਰਗੜ ਸਹਿ ਸਕਦਾ ਹੈ । ਗਿੱਲੇ ਹੋਣ ਨਾਲ ਮਜ਼ਬੂਤੀ ਹੋਰ ਵੱਧ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਮਰਸੀਰਾਈਜੇਸ਼ਨ ਨਾਲ ਪੱਕੇ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਮਜ਼ਬੂਤ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

6. ਲਚਕੀਲਾਪਨ-ਇਹਨਾਂ ਵਿਚ ਲਚਕ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ, ਇਸ ਲਈ ਸੂਤੀ ਕੱਪੜੇ ਵਿੱਚ ਵੱਟ ਜਲਦੀ ਪੈਂਦੇ ਹਨ ।

7. ਪਾਣੀ ਸੋਖਣ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ-ਇਹਨਾਂ ਦੀ ਨਮੀ ਜਾਂ ਪਾਣੀ ਸੋਖਣ ਸ਼ਕਤੀ ਚੰਗੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਜਿਸ ਕਰਕੇ ਪਸੀਨਾ ਸੋਚ ਸਕਦੇ ਹਨ । ਇਸੇ ਲਈ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਗਰਮੀਆਂ ਵਿਚ ਪਹਿਨਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਗੁਣ ਕਾਰਨ ਹੀ ਸੁਤੀ ਰੇਸ਼ੇ ਦੇ ਤੌਲੀਏ ਬਣਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।

8. ਤਾਪ ਚਾਲਕਤਾ-ਇਹ ਤਾਪ ਦੇ ਚੰਗੇ ਸੰਚਾਲਕ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਗਰਮੀ ਇਹਨਾਂ ਵਿਚੋਂ ਦੀ ਲੰਘ ਸਕਦੀ ਹੈ । ਇਸ ਲਈ ਹੀ ਇਹ ਪਸੀਨੇ ਨੂੰ ਸੁੱਕਣ ਵਿਚ ਮਦਦ ਕਰਦੇ ਹਨ | ਸੂਤੀ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦੀ ਚੰਗੀ ਪਾਣੀ ਸੋਖਣ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ ਅਤੇ ਚੰਗੀ ਤਾਪ ਸੁਚਾਲਕਤਾ ਕਾਰਨ ਵੀ ਇਹ ਠੰਢੇ ਰੇਸ਼ੇ ਹਨ ਅਤੇ ਗਰਮੀਆਂ ਵਿਚ ਪਹਿਨਣ ਲਈ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਧ ਉੱਚਿਤ ਅਤੇ ਢੁੱਕਵੇਂ ਹਨ ।

9. ਰਸਾਇਣਾਂ ਦਾ ਪ੍ਰਭਾਵ-ਖਾਰ ਦਾ ਇਹਨਾਂ ‘ਤੇ ਬਹੁਤ ਚੰਗਾ ਪ੍ਰਭਾਵ ਪੈਂਦਾ ਹੈ ਪਰੰਤੂ ਹਲਕੇ ਜਾਂ ਗਾੜੇ ਤੇਜ਼ਾਬ ਨਾਲ ਖ਼ਰਾਬ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।

10. ਰੰਗਾਈ-ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਰੰਗਣਾ ਆਸਾਨ ਹੈ ਪਰ ਧੁੱਪ ਅਤੇ ਧੋਣ ਨਾਲ ਇਹਨਾਂ ਦੇ ਰੰਗ ਖ਼ਰਾਬ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।

11. ਉੱਲੀ ਦਾ ਅਸਰ-ਸਿੱਲ੍ਹੇ ਕੱਪੜਿਆਂ ਨੂੰ ਉੱਲੀ ਬਹੁਤ ਲੱਗ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਖ਼ਰਾਬ ਕਰ ਦਿੰਦੀ ਹੈ । ਪਰ ਕੀੜਾ ਨਹੀਂ ਲਗਦਾ |

12. ਹੋਰ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਈਆਂ-ਇਹਨਾਂ ‘ਤੇ ਗਰਮੀ ਦਾ ਅਸਰ ਘੱਟ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਕਰਕੇ ਇਹ ਕੱਪੜੇ ਉਬਾਲੇ ਵੀ ਜਾ ਸਕਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਧੁੱਪੇ ਸੁਕਾਏ ਵੀ ਜਾ ਸਕਦੇ ਹਨ | ਪਰ ਰੰਗਦਾਰ ਕੱਪੜਿਆਂ ਦਾ ਰੰਗ ਖ਼ਰਾਬ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਕਰਕੇ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਨਾ ਤਾਂ ਉਬਾਲਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਨਾ ਹੀ ਧੁੱਪੇ ਸੁਕਾਉਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ।

13. ਤਾਪ ਦਾ ਅਸਰ-ਸੁਤੀ ਰੋਸ਼ਾ ਅੱਗ ਜਲਦੀ ਪਕੜਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਪੀਲੀ ਲਾਟ ਨਾਲ ਜਲਦਾ ਹੈ | ਜਲਣ ਸਮੇਂ ਕਾਗਜ਼ ਦੇ ਜਲਣ ਵਰਗੀ ਗੰਧ ਆਉਂਦੀ ਹੈ |
ਅੱਗ ਤੋਂ ਪਰੇ ਕਰਨ ‘ਤੇ ਵੀ ਆਪਣੇ ਆਪ ਜਲਦਾ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ । ਜਲਣ ਉਪਰੰਤ ਸਲੇਟੀ ਰੰਗ ਦੀ ਸੁਆਹ ਬਣਦੀ ਹੈ ।

ਦੇਖ-ਭਾਲ-

  • ਸਫ਼ੈਦ ਸੂਤੀ ਕੱਪੜਿਆਂ ਨੂੰ ਗਰਮ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਜਾਂ ਉਬਾਲ ਕੇ ਅਤੇ ਰਗੜ ਕੇ ਧੋਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ । ਰੰਗਦਾਰ ਕੱਪੜਿਆਂ ਨੂੰ ਠੰਢੇ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਹੀ ਧੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਛਾਵੇਂ ਹੀ ਸੁਕਾਉਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਪਰ ਸਫ਼ੈਦ ਕੱਪੜਿਆਂ ਨੂੰ ਧੁੱਪੇ ਸੁਕਾਉਣ ਨਾਲ ਉਹਨਾਂ ਵਿਚ ਹੋਰ ਸਫ਼ੈਦੀ ਆਉਂਦੀ ਹੈ ।
  • ਖਾਰ ਦਾ ਮਾੜਾ ਅਸਰ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ, ਇਸ ਲਈ ਕਿਸੇ ਵੀ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੇ ਸਾਬਣ ਨਾਲ ਧੋਤੇ ਜਾ ਸਕਦੇ ਹਨ ।
  • ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਸਿੱਲ੍ਹੇ ਹੀ ਪ੍ਰੈੱਸ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ । ਦਰਮਿਆਨੀ ਅਤੇ ਤੇਜ਼ ਗਰਮ ਪ੍ਰੈੱਸ ਨਾਲ ਸ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ।
  • ਰੰਗਕਾਟ ਦਾ ਇਹਨਾਂ ‘ਤੇ ਬੁਰਾ ਅਸਰ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ ਖ਼ਾਸ ਕਰਕੇ ਕਲੋਰੀਨ ਵਾਲੇ ਰੰਗਕਾਟ | ਤੇਜ਼ ਰੰਗਕਾਟ ਕੱਪੜੇ ਨੂੰ ਕਮਜ਼ੋਰ ਕਰ ਦਿੰਦੇ ਹਨ ।
  • ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਕਦੇ ਵੀ ਸਿੱਲ੍ਹੇ-ਸਿੱਲ੍ਹ ਨਹੀਂ ਸੰਭਾਲਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਕਿਉਂਕਿ ਇਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਉੱਲੀ ਜਲਦੀ ਲੱਗ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।

ਲਿਨਨ-ਇਹ ਫਲੈਕਸ ਪੌਦੇ ਦੇ ਤਣੇ ਅਤੇ ਟਾਹਣੀਆਂ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੋਣ ਵਾਲਾ ਰੇਸ਼ਾ ਹੈ । ਇਹ ਪੌਦਾ ਘੱਟ ਗਰਮ ਪਰ ਜ਼ਿਆਦਾ ਨਮੀਦਾਰ ਸਿੱਲ੍ਹੇ ਮੌਸਮ ਵਿਚ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਹਨਾਂ ਪੌਦਿਆਂ ਦੀ ਲੰਬਾਈ 10 ਇੰਚ ਤੋਂ 40 ਇੰਚ ਤਕ ਹੋ ਸਕਦੀ ਹੈ । ਇਹ ਰੇਸ਼ਾ ਗੂੰਦ ਜਿਹੀ ਨਾਲ ਤਣੇ ਦੇ ਨਾਲ ਜੁੜਿਆ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਹਨਾਂ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਨੂੰ ਪੌਦਿਆਂ ਤੋਂ ਸਹੀ ਰੂਪ ਵਿਚ ਉਤਾਰਨ ਲਈ ਪੌਦਿਆਂ ਦੇ ਤਣਿਆਂ ਨੂੰ ਐਸ, ਰਸਾਇਣ ਜਾਂ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਰੱਖ ਕੇ ਜਿਵੇਂ ਨਦੀ ਜਾਂ ਤਲਾਬ ਜਾਂ ਰਸਾਇਣਾਂ ਨਾਲ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਕਰਕੇ ਉਫਨਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਨੂੰ ਨਰਮਾਉਣਾ ਜਾਂ ਗਲਾਉਣਾ (Retting) ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਨਰਮਾਉਣ ਨਾਲ ਗੂੰਦ ਜਿਹਾ ਗਲ ਕੇ ਵੱਖ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਰੇਸ਼ੇ ਢਿੱਲੇ ਪੈ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਵੱਖਰੇ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।
(ਉ) ਰਚਨਾ-ਇਸ ਵਿਚ 70-85 ਪ੍ਰਤੀਸ਼ਤ ਸੈਲੂਲੋਜ਼ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਬਾਕੀ ਅਸ਼ੁੱਧੀਆਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ।
(ਅ) ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਈਆਂ –
1. ਬਣਤਰ-ਲਿਨਨ ਦਾ ਰੇਸ਼ਾ ਖੁਰਦਬੀਨ ਦੇ ਹੇਠਾਂ ਲੰਬਾ, ਸਿੱਧਾ, ਇਕਸਾਰ, ਚਮਕਦਾਰ ਅਤੇ ਚਿਕਨਾ ਦਿਖਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿਚ ਬਾਂਸ ਵਾਂਗ ਥੋੜ੍ਹੀ-ਥੋੜ੍ਹੀ ਦੂਰੀ ‘ਤੇ ਗੰਢਾਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ।
PSEB 10th Class Home Science Solutions Chapter 10 ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦਾ ਵਰਗੀਕਰਨ 5
2. ਲੰਬਾਈ-ਇਹ ਵੀ ਛੋਟਾ ਰੇਸ਼ਾ ਹੀ ਹੈ ਅਤੇ ਰੇਸ਼ੇ ਦੀ ਲੰਬਾਈ 6-40 ਇੰਚ ਤਕ ਹੋ ਸਕਦੀ ਹੈ । 12 ਇੰਚ ਤੋਂ ਛੋਟੇ ਰੇਸ਼ੇ ਨੂੰ ਕੱਪੜੇ ਦੀ ਬੁਣਾਈ ਲਈ ਇਸਤੇਮਾਲ ਨਹੀਂ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ।

3. ਰੰਗ-ਇਸ ਦਾ ਰੰਗ ਫਿੱਕੇ ਪੀਲੇ ਤੋਂ ਫਿੱਕਾ ਭੂਰਾ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ |

4. ਦਿਖ (ਚਮਕ)-ਇਸ ਵਿਚ ਸੂਤੀ ਰੇਸ਼ੇ ਨਾਲੋਂ ਜ਼ਿਆਦਾ ਚਮਕ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਪਰ ਸਿਲਕ ਤੋਂ ਥੋੜੀ ਘੱਟ ।

5. ਲਚਕੀਲਾਪਨ-ਇਹ ਸੂਤੀ ਰੇਸ਼ੇ ਨਾਲੋਂ ਵੀ ਘੱਟ ਲਚਕੀਲੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸ ਲਈ ਵੱਟ ਹੋਰ ਵੀ ਜ਼ਿਆਦਾ ਪੈਂਦੇ ਹਨ ।

6. ਮਜ਼ਬੂਤੀ-ਇਹ ਰੇਸ਼ਾ ਸੂਤੀ ਰੇਸ਼ੇ ਤੋਂ ਵੀ ਵੱਧ ਮਜ਼ਬੂਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਗਿੱਲਾ ਹੋ ਕੇ ਇਸ ਦੀ ਮਜ਼ਬੂਤੀ ਹੋਰ ਵੀ ਵੱਧ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।

7. ਪਾਣੀ ਸੋਖਣ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ-ਪਾਣੀ ਸੋਖਣ ਦੀ ਸ਼ਕਤੀ ਸੂਤੀ ਰੇਸ਼ੇ ਤੋਂ ਵੀ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।

8. ਤਾਪ ਚਾਲਕਤਾ-ਸੂਤੀ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਤੋਂ ਵੀ ਵੱਧ ਤਾਪ ਦੇ ਸੰਚਾਲਕ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸ ਲਈ ਗਰਮੀਆਂ ਵਿਚ ਸੁਤੀ ਰੇਸ਼ੇ ਤੋਂ ਵੱਧ ਠੰਢਕ ਪਹੁੰਚਾਉਂਦੇ ਹਨ ।

9. ਰਸਾਇਣਾਂ ਦਾ ਅਸਰ-ਇਹ ਤੇਜ਼ ਤੇਜ਼ਾਬ ਨਾਲ ਖ਼ਰਾਬ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਜਦੋਂ ਕਿ ਸੂਤੀ ਕੱਪੜੇ ਵਾਂਗ ਖਾਰ ਦਾ ਅਸਰ ਘੱਟ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

10. ਰੰਗਾਈ-ਸੂਤੀ ਕੱਪੜੇ ਦੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਸਿੱਧੇ ਰੰਗਾਂ ਨਾਲ ਰੰਗੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਰੰਗਾਈ ਸੂਤੀ ਕੱਪੜੇ ਤੋਂ ਮੁਸ਼ਕਿਲ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਪਰ ਧੋਣ ਅਤੇ ਧੁੱਪ ਵਿਚ ਸੁਕਾਉਣ ਸਮੇਂ ਰੰਗ ਜਲਦੀ ਫਿੱਕੇ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਰੰਗ ਪੱਕੇ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੇ ।

11. ਉੱਲੀ ਅਤੇ ਕੀੜੇ ਦਾ ਅਸਰ-ਇਸ ਨੂੰ ਕੀੜਾ ਬਹੁਤ ਜਲਦੀ ਲਗ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

12. ਹੋਰ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਈਆਂ-ਸੂਤੀ ਕੱਪੜੇ ਦੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਹੀ ਇਸ ਨੂੰ ਜਲਾਉਣ ਸਮੇਂ ਪੇਪਰ ਦੇ ਜਲਣ ਵਰਗੀ ਗੰਧ ਆਉਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਅੱਗ ਤੋਂ ਬਾਹਰ ਕੱਢਣ ’ਤੇ ਆਪਣੇ ਆਪ ਥੋੜੀ ਦੇਰ ਜਲਦਾ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ । ਜਲਣ ਉਪਰੰਤ ਸਲੇਟੀ ਰੰਗ ਦੀ ਸੁਆਹ ਬਣਦੀ ਹੈ । ਦਰਮਿਆਨੀ ਤੋਂ ਤੇਜ਼ ਪ੍ਰੈੱਸ ਨਾਲ ਪ੍ਰੈੱਸ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ । ਲਿਨਨ ਦੀਆਂ ਕਈ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਈਆਂ ਸੂਤੀ ਕੱਪੜੇ ਨਾਲ ਮੇਲ ਖਾਂਦੀਆਂ ਹਨ ਪਰ ਜ਼ਿਆਦਾ ਗਰਮੀ ਨਾਲ ਇਹ ਰੇਸ਼ੇ ਖ਼ਰਾਬ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਇਸ ਲਈ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਉਬਾਲਣਾ ਨਹੀਂ ਚਾਹੀਦਾ | ਇਹ ਰੇਸ਼ੇ ਮਜ਼ਬੂਤ ਹੋਣ ਕਾਰਨ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਵੀ ਰਗੜ ਕੇ ਧੋਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ।

ਦੇਖਭਾਲ-ਇਹਨਾਂ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ‘ਤੇ ਖਾਰ ਦਾ ਮਾੜਾ ਅਸਰ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ । ਇਸ ਕਰਕੇ ਕਿਸੇ ਵੀ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੇ ਸਾਬਣ ਨਾਲ ਧੋਏ ਜਾ ਸਕਦੇ ਹਨ । ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਸੂਤੀ ਕੱਪੜਿਆਂ ਦੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਸਿਲ੍ਹੇਸਿਲ੍ਹੇ ਹੀ ਪ੍ਰੈੱਸ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਮਜ਼ਬੂਤ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸ ਲਈ ਰਗੜ ਕੇ ਧੋਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ । ਗਰਮੀ ਨਾਲ ਖ਼ਰਾਬ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸ ਲਈ ਉਬਾਲਣਾ ਨਹੀਂ ਚਾਹੀਦਾ । ਇਹਨਾਂ ਦੇ ਰੰਗ ਪੱਕੇ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੇ ਇਸ ਲਈ ਛਾਂ ਵਿਚ ਹੀ ਸੁਕਾਉਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ । ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਕੀੜਾ ਬਹੁਤ ਜਲਦੀ ਲਗਦਾ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਧੋ ਕੇ ਸੁਕਾ ਕੇ ਸਾਫ਼ ਸੁੱਕੀ ਜਗ੍ਹਾ ‘ਤੇ ਰੱਖਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ।

PSEB 10th Class Home Science Solutions Chapter 10 ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦਾ ਵਰਗੀਕਰਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਜਾਨਵਰਾਂ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੋਣ ਵਾਲੇ ਰੇਸ਼ੇ ਕਿਹੜੇ ਹਨ ? ਇਹਨਾਂ ਦੀ ਰਚਨਾ ਅਤੇ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਈਆਂ ਬਾਰੇ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਜਾਨਵਰਾਂ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੋਣ ਵਾਲੇ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਵਿਚ ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਦਾ ਅੰਸ਼ ਵੱਧ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਕਰਕੇ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਰੇਸ਼ੇ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ । ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਕਈ ਗੁਣ ਇਕ ਸਾਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਜ਼ਿਆਦਾਤਰ ਜਾਨਵਰਾਂ ਦੇ ਵਾਲਾਂ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਸਿਲਕ (ਰੇਸ਼ਮ-ਇਹ ਜਾਨਵਰਾਂ ਤੋਂ ਮਿਲਣ ਵਾਲਾ ਪ੍ਰੋਟੀਨਯੁਕਤ ਰੇਸ਼ਾ ਹੈ ਜੋ ਸਿਲਕ ਦੇ ਕੀੜੇ ਦੇ ਲਾਰਵੇ ਦੀ ਲਾਰ ਤੋਂ ਬਣਦਾ ਹੈ । ਰਚਨਾ-ਇਹ ਰੇਸ਼ੇ ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਤੋਂ ਬਣੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਜਿਸ ਵਿਚ ਕਾਰਬਨ, ਹਾਈਡਰੋਜਨ, ਆਕਸੀਜਨ ਅਤੇ ਨਾਈਟਰੋਜਨ ਤੱਤ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।

(ੳ) ਆਮ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਈਆਂ –

1.ਬਣਤਰ-ਖੁਰਦਬੀਨ ਹੇਠਾਂ ਰੇਸ਼ਮ ਦੇ ਰੇਸ਼ੇ ਚਮਕਦਾਰ, ਦੁਹਰੇ ਧਾਗੇ ਦੇ ਬਣੇ ਹੋਏ ਦਿਸਦੇ ਹਨ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ‘ਤੇ ਜਗ੍ਹਾ-ਜਗ੍ਹਾ ਗੂੰਦ ਦੇ ਧੱਬੇ ਲੱਗੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।
PSEB 10th Class Home Science Solutions Chapter 10 ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦਾ ਵਰਗੀਕਰਨ 6

2. ਲੰਬਾਈ-ਕੁਦਰਤੀ ਰੂਪ ਵਿਚ ਮਿਲਣ ਵਾਲਾ ਇੱਕੋ ਇਕ ਫਿਲਾਮੈਂਟ ਰੇਸ਼ਾ ਹੈ । ਰੇਸ਼ੇ ਦੀ ਲੰਬਾਈ 750 ਤੋਂ 1100 ਮੀਟਰ ਤਕ ਹੋ ਸਕਦੀ ਹੈ ।

3. ਰੰਗ-ਇਸ ਦਾ ਰੰਗ ਕਰੀਮ ਤੋਂ ਭੂਰਾ ਜਾਂ ਸਲੇਟੀ ਜਿਹਾ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ ।

4. ਦਿਖ (ਚਮਕ)-ਇਹਨਾਂ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਵਿਚ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਧ ਚਮਕ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਇਸ ਲਈ ਸਿਲਕ ਨੂੰ ਕੱਪੜਿਆਂ ਦੀ ਰਾਣੀ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

5. ਮਜ਼ਬੂਤੀ-ਕੁਦਰਤੀ ਰੂਪ ਵਿਚ ਮਿਲਣ ਵਾਲੇ ਸਭ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਤੋਂ ਮਜ਼ਬੂਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਪਰ ਗਿੱਲਾ ਹੋਣ ‘ਤੇ ਇਹਨਾਂ ਦੀ ਮਜ਼ਬੂਤੀ ਘਟਦੀ ਹੈ ।

6. ਲਚਕੀਲਾਪਨ-ਲਚਕ ਚੰਗੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਇਸੇ ਲਈ ਹੀ ਵੱਟ ਘੱਟ ਪੈਂਦੇ ਹਨ ।

7. ਪਾਣੀ ਸੋਖਣ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ-ਆਸਾਨੀ ਨਾਲ ਪਾਣੀ ਸੋਖ ਲੈਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਮਹਿਸੂਸ ਵੀ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ ਕੱਪੜਾ ਗਿੱਲਾ ਹੈ । ਸੁਕਾਉਣ ਤੇ ਕੱਪੜਾ ਬਰਾਬਰ ਸੁੱਕਦਾ ਹੈ।

8. ਤਾਪ ਚਾਲਕਤਾ-ਉੱਨ ਵਾਂਗ ਤਾਪ ਦੇ ਚੰਗੇ ਚਾਲਕ ਨਹੀਂ ਜਿਸ ਕਰਕੇ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਸਰਦੀਆਂ ਵਿਚ ਪਹਿਨਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਹਨਾਂ ਦੀ ਸਤਾ ਮੁਲਾਇਮ ਹੋਣ ਕਾਰਨ, ਉੱਨ ਜਿੰਨੇ ਨਿੱਘੇ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੇ।

9. ਰਸਾਇਣਾਂ ਦਾ ਪ੍ਰਭਾਵ-ਉੱਨ ਵਾਂਗ ਹਲਕੇ ਤੇਜ਼ਾਬ ਦੁਆਰਾ ਖ਼ਰਾਬ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੇ ਪਰ ਹਲਕੀ ਖਾਰ ਵੀ ਇਹਨਾਂ ‘ਤੇ ਬੁਰਾ ਪ੍ਰਭਾਵ ਪਾਉਂਦੀ ਹੈ । ਕਲੋਰੀਨ ਯੁਕਤ ਰੰਗ ਕਾਟਾਂ ਦਾ ਇਸਤੇਮਾਲ ਨਹੀਂ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ।

10. ਰੰਗਾਈ-ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਰੰਗ ਜਲਦੀ ਅਤੇ ਪੱਕੇ ਚੜ੍ਹਦੇ ਹਨ ਜੋ ਧੁੱਪ ਅਤੇ ਧੋਣ ਨਾਲ ਵੀ ਜਲਦੀ ਖ਼ਰਾਬ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੇ । ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਹਰ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੇ ਰੰਗ ਨਾਲ ਰੰਗਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ।

11. ਤਾਪ ਦਾ ਪ੍ਰਭਾਵ-ਸਿਲਕ ਦੇ ਜਲਣ ਸਮੇਂ ਚਰ-ਚਰ ਦੀ ਆਵਾਜ਼ ਆਉਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਖੰਭਾਂ ਜਾਂ ਵਾਲਾਂ ਦੇ ਜਲਣ ਵਰਗੀ ਗੰਧ ਆਉਂਦੀ ਹੈ । ਅੱਗ ਤੋਂ ਬਾਹਰ ਕੱਢਣ ‘ਤੇ ਆਪਣੇ ਆਪ ਬੁਝ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਜਲਣ ਉਪਰੰਤ ਉਘੜਾ-ਦੁਘੜਾ ਕਾਲਾ ਮਣਕਾ ਬਣਦਾ ਹੈ । ਧੁੱਪ ਵਿਚ ਸੁਕਾਉਣ ਨਾਲ ਜਾਂ ਗਰਮ ਪਾਣੀ ਨਾਲ ਧੋਣ ਨਾਲ ਅਤੇ ਗਰਮ ਪ੍ਰੈੱਸ ਕਰਨ ਨਾਲ ਕੱਪੜਾ ਕਮਜ਼ੋਰ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਚਮਕ ਤੇ ਰੰਗ ਵੀ ਖ਼ਰਾਬ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।

12. ਹੋਰ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਈਆਂ-ਗਿੱਲੇ ਹੋ ਕੇ ਕੱਪੜਾ ਕਮਜ਼ੋਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਰਗੜਨ ਨਾਲ ਫਟ ਸਕਦਾ ਹੈ ।

ਉੱਨ-ਰਚਨਾ-ਉੱਨ ਦਾ ਮੁੱਖ ਤੱਤ ਕਿਰੇਟਿਨ (Keratin) ਨਾਮਕ ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿਚ ਕਾਰਬਨ, ਹਾਈਡਰੋਜਨ, ਆਕਸੀਜਨ ਅਤੇ ਨਾਈਟਰੋਜਨ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਸਲਫਰ ਵੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।

(ਅ) ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਈਆਂ

  • ਬਣਤਰ-ਖੁਰਦਬੀਨ ਦੇ ਹੇਠਾਂ ਉੱਨ ’ਤੇ ਤੰਤੂ ਦੀਆਂ ਪਰਤਾਂ ਜਿਹੀਆਂ ਇਕ-ਦੂਜੇ ‘ਤੇ ਉੱਤੇ ਜਗਾ ਜਗਾ ਤੋਂ ਚੜ੍ਹੀਆਂ ਦਿਖਦੀਆਂ ਹਨ । ਜਿੰਨੀਆਂ ਇਹ ਪਰਤਾਂ ਸੰਘਣੀਆਂ ਹੋਣਗੀਆਂ, ਉੱਨ ਉਤਨੀ ਹੀ ਨਿੱਘੀ ਹੋਵੇਗੀ । ਇਸੇ ਗੁਣ ਕਾਰਨ ਹੀ ਇਹ ਸਿਲਕ ਤੋਂ ਵੱਧ ਨਿੱਘਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
  • ਲੰਬਾਈ-ਇਹ ਵੀ ਸਟੇਪਲ (ਛੋਟਾ) ਰੇਸ਼ਾ ਹੈ । ਇਹਨਾਂ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦੀ ਲੰਬਾਈ 1-18 ਇੰਚ ਤਕ ਹੋ ਸਕਦੀ ਹੈ ।

PSEB 10th Class Home Science Solutions Chapter 10 ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦਾ ਵਰਗੀਕਰਨ 7

  • ਰੰਗ-ਆਮ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਕਰੀਮ, ਪਰ ਮੋਤੀਆ, ਸਫ਼ੈਦ, ਕਾਲੇ ਅਤੇ ਭੂਰੇ ਰੰਗ ਵਿਚ ਵੀ ਮਿਲਦੇ ਹਨ ।
  • ਦਿੱਖ-ਇਹਨਾਂ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਵਿਚ ਕੋਈ ਚਮਕ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ ।
  • ਮਜ਼ਬੂਤੀ-ਇਹ ਕਮਜ਼ੋਰ ਕਿਸਮ ਦਾ ਤੰਤੂ ਹੈ ।ਗਿੱਲਾ ਹੋਣ ‘ਤੇ ਇਸ ਦੀ ਮਜ਼ਬੂਤੀ ਹੋਰ ਘਟਦੀ ਹੈ ।
  • ਲਚਕੀਲਾਪਨ-ਇਸ ਰੇਸ਼ੇ ਵਿਚ ਲਚਕ ਕਾਫ਼ੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਹੀ ਇਹਨਾਂ ਤੋਂ ਬਣੇ ਕੱਪੜਿਆਂ ਵਿਚ ਵੱਟ ਘੱਟ ਪੈਂਦੇ ਹਨ ।
  • ਪਾਣੀ ਸੋਖਣ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ-ਪਾਣੀ ਜਾਂ ਨਮੀ ਸੋਖਣ ਦੀ ਤਾਕਤ ਬਹੁਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਇਹ ਕੱਪੜੇ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਭਿਉਣ ‘ਤੇ ਬਹੁਤ ਪਾਣੀ ਸੋਖ ਲੈਂਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਹੌਲੀ-ਹੌਲੀ ਸੁੱਕਦੇ ਹਨ । ਇਹ ਕਮਜ਼ੋਰ ਰੇਸ਼ਾ ਗਿੱਲੇ ਹੋਣ ‘ਤੇ ਹੋਰ ਵੀ ਕਮਜ਼ੋਰ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਲਈ ਰਗੜ ਕੇ ਨਹੀਂ ਧੋਤੇ ਜਾ ਸਕਦੇ ।
  • ਤਾਪ ਚਾਲਕਤਾ-ਸਿਲਕ ਦੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਉੱਨ ਦਾ ਰੇਸ਼ਾ ਤਾਪ ਦਾ ਚੰਗਾ ਚਾਲਕ ਨਹੀਂ ਹੈ । ਤਾਪ ਦਾ ਕੁਚਾਲਕ ਹੋਣ ਕਾਰਨ ਹੀ ਸਰਦੀਆਂ ਵਿਚ ਪਹਿਨਣ ਲਈ ਉਪਯੋਗੀ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਇਹ ਸਰੀਰ ਦੀ ਗਰਮੀ ਨੂੰ ਬਾਹਰ ਨਹੀਂ ਨਿਕਲਣ ਦਿੰਦੇ ।
  • ਰਸਾਇਣਾਂ ਦਾ ਪ੍ਰਭਾਵ-ਹਲਕੇ ਤੇਜ਼ਾਬ ਦਾ ਇਹਨਾਂ ‘ਤੇ ਕੋਈ ਪ੍ਰਭਾਵ ਨਹੀਂ ਪੈਂਦਾ । ਤੇਜ਼ ਤੇਜ਼ਾਬ ਠੀਕ ਨਹੀਂ । ਖਾਰ ਨਾਲ ਬਹੁਤ ਨੁਕਸਾਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਰੰਗਣ ਸਮੇਂ ਹਲਕੇ ਤੇਜ਼ਾਬ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਪਰ ਧੋਣ ਸਮੇਂ ਸੋਡੇ ਦਾ ਇਸਤੇਮਾਲ ਬਿਲਕੁਲ ਨਹੀਂ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ |
  • ਰੰਗਾਈ-ਤੇਜ਼ਾਬ ਵਾਲੇ ਰੰਗਾਂ ਨਾਲ ਇਹਨਾਂ ਦੀ ਰੰਗਾਈ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਇਹ ਰੰਗ ਨੂੰ ਜਲਦੀ ਆਪਣੇ ਅੰਦਰ ਸਮਾ ਲੈਂਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਰੰਗ ਵੀ ਪੱਕੇ ਚੜ੍ਹਦੇ ਹਨ । ਇਹਨਾਂ ’ਤੇ ਰੰਗਕਾਟ ਦਾ ਇਸਤੇਮਾਲ ਨਹੀਂ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਕਿਉਂਕਿ ਇਹ ਖੁਰਦਰੇ ਅਤੇ ਕਮਜ਼ੋਰ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।
  • ਕੀੜੇ ਅਤੇ ਉੱਲੀ ਦਾ ਪ੍ਰਭਾਵ-ਇਹਨਾਂ ਕੱਪੜਿਆਂ ਨੂੰ ਕੀੜਾ ਬਹੁਤ ਜਲਦੀ ਲੱਗਦਾ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਸੰਭਾਲਣ ਸਮੇਂ ਬਹੁਤ ਸਾਵਧਾਨੀ ਦੀ ਲੋੜ ਹੈ ।
  • ਤਾਪ ਦਾ ਪ੍ਰਭਾਵ-ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਜਲਾਉਣ ਸਮੇਂ ਵਾਲਾਂ ਦੇ ਜਲਣ ਵਰਗੀ ਗੰਧ ਆਉਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਹੌਲੀ-ਹੌਲੀ ਚਰ-ਚਰ ਕਰਕੇ ਜਲਦੇ ਹਨ | ਅੱਗ ਤੋਂ ਬਾਹਰ ਕੱਢਣ ’ਤੇ ਬੁਝ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਜਲਣ ਉਪਰੰਤ ਕਾਲੇ ਰੰਗ ਦਾ ਉਘੜਾ-ਦੁਘੜਾ, ਭੁਰਭੁਰਾ ਮਣਕਾ ਬਣ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਐੱਸ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਸਿੱਧੇ ਕੱਪੜੇ ‘ਤੇ ਨਹੀਂ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਸਗੋਂ ਮਲਮਲ ਦਾ ਸਿੱਲ੍ਹਾ ਕੱਪੜਾ ਵਿਛਾ ਕੇ ਹਲਕੀ ਪ੍ਰੈੱਸ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
ਲਿਨਨ ਦੇ ਕੱਪੜਿਆਂ ਦੀਆਂ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਵਾਂ ਦੱਸੋ !
ਉੱਤਰ-
ਖੁਦ ਉੱਤਰ ਦਿਓ ।

Home Science Guide for Class 10 PSEB ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦਾ ਵਰਗੀਕਰਨ Important Questions and Answers

ਬਹੁਤ ਛੋਟੇ ਉੱਡਰਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1. ਛੋਟੇ (ਸਟੇਪਲ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦੀ ਲੰਬਾਈ ਕਿੰਨੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
1/4 ਤੋਂ 18 ਇੰਚ ਲੰਮੇ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਲੰਮੇ (ਫਿਲਾਮੇਂਟ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦੀ ਲੰਬਾਈ ਕਿੰਨੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਮੀਟਰਾਂ ਵਿਚ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਛੋਟੇ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦੀ ਉਦਾਹਰਨ ਦਿਉ ।
ਉੱਤਰ-
ਲਗਭਗ ਸਾਰੇ ਕੁਦਰਤੀ ਰੇਸ਼ੇ ।

PSEB 10th Class Home Science Solutions Chapter 10 ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦਾ ਵਰਗੀਕਰਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਰੇਸ਼ਮ ਕਿਹੋ ਜਿਹਾ ਰੇਸ਼ਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਲੰਮਾ ਰੇਸ਼ਾ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
ਬਨਾਵਟੀ ਫਿਲਾਮੈਂਟ ਰੇਸ਼ੇ ਕਿਹੜੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਨਾਈਲੋਨ, ਪਾਲਿਸਟਰ ॥

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 6.
ਦੋ ਕੁਦਰਤੀ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦੀ ਉਦਾਹਰਨ ਦਿਓ (ਦੇ ਨਾਂ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਣ, ਪਟਸਨ, ਕਪਾਹ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 7.
ਕੋਈ ਦੋ ਧਾਤ ਤੋਂ ਬਣੇ ਰੇਸ਼ੇ ਦੀ ਉਦਾਹਰਨ ਦਿਉ ।
ਉੱਤਰ-
ਗੋਟੇ, ਜਰੀ ਆਦਿ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 8.
ਥਰਮੋਪਲਾਸਟਿਕ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦੀ ਉਦਾਹਰਨ ਦਿਓ ।
ਉੱਤਰ-
ਨਾਈਲੋਨ, ਪੋਲਿਸਟਰ, ਐਸਟੇਟ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 9.
ਕੈਸ਼ਮਿਲੋਨ ਕਿਹੋ ਜਿਹਾ ਰੇਸ਼ਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਇਹ ਮਿਸ਼ਰਤ ਰੇਸ਼ਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 10.
ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਵਾਲਾ ਰੇਸ਼ਾ ਕਿਹੜਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਊਨ, ਸਿਲਕ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 11.
ਸੂਤੀ ਰੇਸ਼ੇ ਵਿਚ ਕਿੰਨੇ ਪ੍ਰਤੀਸ਼ਤ ਸੈਲੂਲੋਜ਼ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
87 ਤੋਂ 90%.

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 12.
ਲਿਨਨ ਕਿੱਥੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਫਲੈਕਸ ਪੌਦੇ ਦੇ ਤਣੇ ਤੋਂ ।

PSEB 10th Class Home Science Solutions Chapter 10 ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦਾ ਵਰਗੀਕਰਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 13.
ਕਿਸੇ ਦੋ ਬਨਸਪਤੀ ਤੰਤੂਆਂ ਦੇ ਨਾਂ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਤੀ, ਲਿਨਨ, ਨਾਰੀਅਲ ਦੇ ਰੇਸ਼ੇ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 14.
ਲੰਬਾਈ ਅਤੇ ਚੌੜਾਈ ਵਿਚ ਚੱਲਣ ਵਾਲੇ ਧਾਗੇ ਦਾ ਨਾਂ ਦੱਸੋ ।
ਜਾਂ
ਤਾਨਾ ਅਤੇ ਬਾਨਾ ਕੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਜਦੋਂ ਕੱਪੜਾ ਬੁਣਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਲੰਬਾਈ ਵਿਚ ਚੱਲਣ ਵਾਲੇ ਧਾਗੇ ਨੂੰ ਤਾਨਾ ਅਤੇ ਚੌੜਾਈ ਵਿੱਚ ਚੱਲਣ ਵਾਲੇ ਧਾਗੇ ਨੂੰ ਬਾਨਾ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਛੋਟੇ ਉੱਤਰਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਨਾਰੀਅਲ ਦੇ ਰੇਸ਼ੇ ਕਿਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਕਿਸ ਕੰਮ ਆਉਂਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਨਾਰੀਅਲ ਦੇ ਰੇਸ਼ੇ ਨਾਰੀਅਲ ਦੇ ਬੀਜ ਦੇ ਛਿਲਕੇ ਤੋਂ ਤਿਆਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਇਹ ਗਿਰੀ ਅਤੇ ਬਾਹਰਲੇ ਛਿਲਕੇ ਦੇ ਵਿਚਕਾਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਸਮੁੰਦਰ ਦੇ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਭਿਉਂ ਕੇ ਨਰਮ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਫਿਰ ਕੁੱਟ-ਕੁੱਟ ਕੇ ਸਾਫ਼ ਕਰਕੇ ਬਾਹਰ ਕੱਢ ਲਿਆ ਜਾਂਦਾ | ਇਹਨਾਂ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਨੂੰ ਆਮ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਰੰਗਿਆ ਨਹੀਂ ਜਾਂਦਾ ਇਹਨਾਂ ਦਾ ਆਪਣਾ ਰੰਗ ਗੂੜ੍ਹਾ ਭਰਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਨਾਰੀਅਲ ਦੇ ਰੇਸ਼ੇ ਅਕੜਾਅ ਵਾਲੇ ਅਤੇ ਮਜ਼ਬੂਤ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਵੱਟ ਨਹੀਂ ਪੈਂਦੇ ਜ਼ਿਆਦਾਤਰ ਇਹ ਰੇਸ਼ੇ ਸੋਫਿਆਂ ਅਤੇ ਗੱਦਿਆਂ ਨੂੰ ਭਰਨ ਲਈ ਵਰਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਪਰ ਇਨ੍ਹਾਂ ਤੋਂ ਟਾਟ ਅਤੇ ਜੁੱਤੀਆਂ ਦੇ ਤਲੇ ਵੀ ਬਣਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਚੀਨ ਦੀ ਲਿਨਨ ਕਿਸ ਰੇਸ਼ੇ ਤੋਂ ਤਿਆਰ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਦੇ ਕੀ ਗੁਣ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਚੀਨ ਦੀ ਲਿਨਨ ਪੌਦੇ ਦੇ ਤਣੇ ਤੋਂ ਤਿਆਰ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਨੂੰ ਰੇਮੀ ਵੀ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਪੌਦੇ ਜਪਾਨ, ਫਰਾਂਸ, ਮਿਸਰ, ਇਟਲੀ ਅਤੇ ਰਸ ਵਿਚ ਉਗਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਦੇ ਪੌਦੇ 4 ਤੋਂ 8 ਫੁੱਟ ਉੱਚੇ ਹੋ ਸਕਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਦੇ ਤਣਿਆਂ ਨੂੰ ਕੱਟ ਕੇ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਗਲਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਫਿਰ ਰਸਾਇਣਾਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਨਾਲ ਫਾਲਤੂ ਗੁੰਦ ਕੱਢ ਦਿੱਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਉਸ ਤੋਂ ਪਿੱਛੋਂ ਕੰਘੀ ਕਰਕੇ ਇਸ ਦੇ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਨੂੰ ਸਾਫ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਰੇਸ਼ੇ ਲੰਮੇ, ਮਜ਼ਬੂਤ, ਚਮਕਦਾਰ, ਬਾਰੀਕ ਅਤੇ ਸਫ਼ੈਦ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਇਹਨਾਂ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਵਿਚ ਅਕੜਾਅ ਵੱਧ ਅਤੇ ਲਚਕ ਘੱਟ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਕੁਦਰਤ ਵਿਚ ਮਿਲਣ ਵਾਲੇ ਰੇਸ਼ੇ ਕਿਹੜੇ-ਕਿਹੜੇ ਹਨ ? ਕਿਸੇ ਇਕ ਰੇਸ਼ੇ ਦੀਆਂ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਵਾਂ ਅਤੇ ਦੇਖਭਾਲ ਬਾਰੇ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਦੇਖੋ ਉਪਰੋਕਤ ਪ੍ਰਸ਼ਨਾਂ ਵਿੱਚ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਪਟਸਨ ਕੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਇਹ ਪੌਦੇ ਦੇ ਤਣੇ ਤੋਂ ਮਿਲਣ ਵਾਲਾ ਰੇਸ਼ਾ ਹੈ । ਇਸ ਨਾਲ ਰੱਸੀਆਂ, ਡੋਰੀਆਂ ਅਤੇ ਵਧੀਆ ਕੱਪੜਾ ਬਣਦਾ ਹੈ ।

PSEB 10th Class Home Science Solutions Chapter 10 ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦਾ ਵਰਗੀਕਰਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
ਉੱਨ ਕੀ ਹੈ ? ਇਸ ਦੀਆਂ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਵਾਂ ਅਤੇ ਦੇਖਭਾਲ ਬਾਰੇ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਨ ਦੀਆਂ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਈਆਂ, ਵਰਤੋਂ ਅਤੇ ਦੇਖਭਾਲ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਉਪਰੋਕਤ ਪ੍ਰਸ਼ਨ ਦੇਖੋ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 6.
ਬਣਾਉਟੀ ਕੱਪੜਿਆਂ ਨੂੰ ਸੰਭਾਲਣਾ ਆਸਾਨ ਕਿਉਂ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਬਣਾਉਟੀ ਕੱਪੜਿਆਂ ਨੂੰ ਕੀੜੇ ਅਤੇ ਉੱਲੀ ਨਹੀਂ ਲੱਗਦੀ । ਇਸ ਲਈ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਸੰਭਾਲਣਾ ਸੌਖਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 7.
ਸੂਤੀ ਰੇਸ਼ੇ ਅਤੇ ਲਿਨਨ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਬਾਰੇ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਸੂਤੀ ਰੇਸ਼ੇ ਦੀ ਵਰਤੋਂ

  1. ਸੂਤੀ ਰੇਸ਼ੇ ਤੋਂ ਬਣੇ ਕੱਪੜੇ ਗਰਮੀਆਂ ਲਈ ਵਧੀਆ ਅਤੇ ਚਮੜੀ ਲਈ ਆਰਾਮਦਾਇਕ ਹਨ ।
  2. ਸੂਤੀ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਨੂੰ ਦੂਸਰੇ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਨਾਲ ਮਿਲਾ ਕੇ ਮਿਸ਼ਰਤ ਧਾਗੇ ਬਣਦੇ ਹਨ ।
  3. ਸੂਤੀ ਕੱਪੜੇ ਨੂੰ ਉਬਾਲਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਲਈ ਹਸਪਤਾਲਾਂ ਵਿਚ ਇਸ ਤੋਂ ਪੱਟੀਆਂ ਬਣਦੀਆਂ ਹਨ ।

ਲਿਨਨ ਦੀ ਵਰਤੋਂ –

  • ਗਰਮੀਆਂ ਦੀਆਂ ਪੁਸ਼ਾਕਾਂ ਬਣਦੀਆਂ ਹਨ, ਠੰਢਕ ਦੇਣ ਵਾਲੀਆਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ।
  • ਮਜ਼ਬੂਤ ਅਤੇ ਲੰਬੇ ਸਮੇਂ ਤੱਕ ਚੱਲਣ ਵਾਲਾ ਕੱਪੜਾ ਹੈ, ਇਸ ਲਈ ਚਾਦਰਾਂ ਬਣਦੀਆਂ ਹਨ ।
  • ਮੇਜ਼ਪੋਸ਼ ਆਦਿ ਵੀ ਬਣਦੇ ਹਨ ।
  • ਗਰਮੀਆਂ ਵਿਚ ਅੰਦਰ ਪਾਉਣ ਵਾਲੇ ਕੱਪੜੇ ਵੀ ਬਣਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 8.
ਬਣਾਉਟੀ ਰੇਸ਼ੇ ਕੀ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਅਜਿਹੇ ਰੇਸ਼ੇ ਜੋ ਮਨੁੱਖ ਦੁਆਰਾ ਬਣਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ, ਨੂੰ ਬਣਾਉਟੀ ਰੇਸ਼ੇ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ । ਜਿਵੇਂ-ਰੇਆਨ, ਨਾਈਲੋਨ, ਟੈਰਾਲੀਨ, ਆਰਲੋਨ ਆਦਿ ਬਣਾਉਟੀ ਰੇਸ਼ੇ ਹਨ । ਇਨ੍ਹਾਂ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਤੋਂ ਬਣੇ ਕੱਪੜਿਆਂ ਨੂੰ ਸਿੰਥੈਟਿਕ ਕੱਪੜੇ ਵੀ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 9.
ਉੱਨ ਦੀਆਂ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਵਾਂ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਦੇਖੋ ਉਪਰੋਕਤ ਪ੍ਰਸ਼ਨਾਂ ਵਿੱਚ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 10.
ਸਿਲਕ ‘ਤੇ ਤਾਪ ਦਾ ਕੀ ਅਸਰ ਪੈਂਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਦੇਖੋ ਉਪਰੋਕਤ ਪ੍ਰਸ਼ਨਾਂ ਵਿੱਚ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 11.
ਲਿਨਨ ਦੀਆਂ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਈਆਂ, ਵਰਤੋਂ ਅਤੇ ਦੇਖਭਾਲ ਦੇ ਬਾਰੇ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਦੇਖੋ ਉਪਰੋਕਤ ਪ੍ਰਸ਼ਨਾਂ ਵਿੱਚ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 12.
ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਵਿੱਚ ਮਜ਼ਬੂਤੀ ਦਾ ਹੋਣਾ ਕਿਉਂ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਦੇਖੋ ਉਪਰੋਕਤ ਪ੍ਰਸ਼ਨਾਂ ਵਿੱਚ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 13.
ਸਿਲਕ ਦੀ ਦੇਖਭਾਲ ਬਾਰੇ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਿਲਕ ਤੋਂ ਬਣੇ ਕੱਪੜੇ ਬੜੇ ਨਾਜ਼ੁਕ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਇਹ ਗਿੱਲੇ ਹੋਣ ਤੇ ਹੋਰ ਵੀ ਕਮਜ਼ੋਰ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਲਈ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਪੋਲਾ-ਪੋਲਾ ਦਬਾ ਕੇ ਧੋਣਾ ਪੈਂਦਾ ਹੈ । ਰਗੜ ਨਾਲ ਇਹ ਫਟ ਸਕਦੇ ਹਨ | ਖ਼ਾਰ ਅਤੇ ਗਰਮ ਪਾਣੀ ਦਾ ਇਹਨਾਂ ਤੇ ਮਾੜਾ ਪ੍ਰਭਾਵ ਪੈਂਦਾ ਹੈ । ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਡਰਾਈਕਲੀਨ ਹੀ ਕਰਵਾ ਲਿਆ ਜਾਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ । ਜਦੋਂ ਇਹ ਸਿਲ੍ਹੇ ਹੋਣ ਤਾਂ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਪ੍ਰੈੱਸ ਕਰ ਲੈਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ । ਪਸੀਨੇ ਨਾਲ ਵੀ ਇਹ ਕਮਜ਼ੋਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸ ਲਈ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਸੂਤੀ ਕੱਪੜੇ ਦਾ ਅੰਦਰਗ ਲਾ ਲੈਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ।

PSEB 10th Class Home Science Solutions Chapter 10 ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦਾ ਵਰਗੀਕਰਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 14.
ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦੀ ਲੰਬਾਈ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਵਰਗੀਕਰਨ ਕਰੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਦੇਖੋ ਉਪਰੋਕਤ ਪ੍ਰਸ਼ਨਾਂ ਵਿੱਚ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 15.
ਰੇਸ਼ੇ ਤੋਂ ਕੱਪੜਾ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਰੇਸ਼ੇ ਵਿਚ ਲਚਕੀਲਾਪਣ ਦਾ ਹੋਣਾ ਕਿਉਂ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਦੇਖੋ ਉਪਰੋਕਤ ਪ੍ਰਸ਼ਨਾਂ ਵਿੱਚ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 16.
ਮਿਸ਼ਰਤ ਰੇਸ਼ੇ ਕਿਹੜੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਇਹਨਾਂ ਦੀ ਦੇਖਭਾਲ ਬਾਰੇ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਦੇਖੋ ਉਪਰੋਕਤ ਪ੍ਰਸ਼ਨਾਂ ਵਿੱਚ –
ਦੇਖਭਾਲ-ਮਿਸ਼ਰਤ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦੀ ਦੇਖਭਾਲ ਸੌਖੀ ਹੀ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਇਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਧੋਣਾ ਸੌਖਾ ਹੈ । ਉੱਲੀ ਨਹੀਂ ਲਗਦੀ, ਧੁੱਪ ਵਿਚ ਰੰਗ ਖ਼ਰਾਬ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ । ਕੀੜੇ ਵੀ ਘੱਟ ਨੁਕਸਾਨ ਕਰਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 17.
ਰੇਸ਼ੇ ਤੋਂ ਕੱਪੜੇ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਰੇਸ਼ੇ ਦਾ ਰੂਪ ਵਿਚ ਹੋਣਾ ਅਤੇ ਜੁੜਨ ਸ਼ਕਤੀ ਦਾ ਹੋਣਾ ਕਿਉਂ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਦੇਖੋ ਉਪਰੋਕਤ ਪ੍ਰਸ਼ਨਾਂ ਵਿੱਚ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 18.
ਕੈਸ਼ਮੀਲੋਨ ਅਤੇ ਫਾਇਬਰ ਗਲਾਸ ਬਾਰੇ ਦੱਸੋ !
ਉੱਤਰ-

  • ਕੈਸ਼ਮੀਲੋਨ-ਇਹ ਆਰਲੋਨ ਦੀ ਹੀ ਇਕ ਕਿਸਮ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਤੋਂ ਸਵੈਟਰ, ਸ਼ਾਲਾਂ, ਕੋਟ ਆਦਿ ਬਣਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਈਆਂ-ਕੈਸ਼ਮੀਲੋਨ ਵਿੱਚ ਨਾਈਲੋਨ ਵਰਗੇ ਗੁਣ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਪਰ ਇਸ ਦੀ ਦਿਖ ਉੱਨ ਦੇ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਵਰਗੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਇਹ ਉੱਨ ਤੋਂ ਸਸਤੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਰੰਗ ਪੱਕਾ ਅਤੇ ਇਹ ਮਜ਼ਬੂਤ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਕੁੱਝ ਸਮਾਂ ਵਰਤੋਂ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਇਸ ਤੋਂ ਬਣੇ ਕੱਪੜੇ ਤੇ ਬੁਰ ਆ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।
  • ਫਾਇਬਰ ਗਲਾਸ-ਇਨ੍ਹਾਂ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਵਸਤਰਾਂ ਲਈ ਘੱਟ ਹੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਪਰ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਪਾਰਦਰਸ਼ੀ ਪਰਦੇ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 19.
ਕੁਦਰਤੀ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਬਾਰੇ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਦੇਖੋ ਉਪਰੋਕਤ ਪ੍ਰਸ਼ਨਾਂ ਵਿੱਚ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 20.
ਸੂਤੀ ਰੇਸ਼ੇ ਦੀਆਂ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਈਆਂ, ਵਰਤੋਂ ਤੇ ਦੇਖਭਾਲ ਬਾਰੇ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਦੇਖੋ ਉਪਰੋਕਤ ਪ੍ਰਸ਼ਨਾਂ ਵਿੱਚ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 21.
ਤਾਪ ਅਤੇ ਰੰਗਾਈ ਦਾ ਉੱਨ ‘ ਤੇ ਕੀ ਅਸਰ ਪੈਂਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਦੇਖੋ ਉਪਰੋਕਤ ਪ੍ਰਸ਼ਨਾਂ ਵਿੱਚ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 22.
ਲੰਬੇ ਰੇਸ਼ੇ । ਫਿਲੈਮੈਂਟ ਰੇਸ਼ੋ ਕੀ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਦੇਖੋ ਉਪਰੋਕਤ ਪ੍ਰਸ਼ਨਾਂ ਵਿੱਚ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 23.
ਪਟਸਨ ਅਤੇ ਨਾਰੀਅਲ ਦੇ ਰੇਸ਼ੇ ਬਾਰੇ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਦੇਖੋ ਉਪਰੋਕਤ ਪ੍ਰਸ਼ਨਾਂ ਵਿੱਚ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 24.
ਧਾਤੂਆਂ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਬਾਰੇ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਦੇਖੋ ਉਪਰੋਕਤ ਪ੍ਰਸ਼ਨਾਂ ਵਿੱਚ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 25.
ਟੈਰੀਲੀਨ ਤੰਤੂ ਦਾ ਦੂਜਾ ਨਾਂ ਕੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਪੋਲੀਐਸਟਰ ।

PSEB 10th Class Home Science Solutions Chapter 10 ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦਾ ਵਰਗੀਕਰਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 26.
ਕਪਾਸ ਅਤੇ ਸਿਲਕ ਦੀਆਂ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਵਾਂ ਦੀ ਤੁਲਨਾ ਕਰੋ ।
ਉੱਤਰ –

ਕਪਾਸ ਸਿਲਕ
1. ਇਹ ਸਟੇਪਲ ਰੇਸ਼ਾ ਹੈ । ਇਸ ਦੀ ਲੰਬਾਈ ½ ਇੰਚ ਤੋਂ 2 ਇੰਚ ਤੱਕ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਇਹ ਕੁਦਰਤੀ ਰੂਪ ਵਿਚ ਮਿਲਣ ਵਾਲਾ ਇੱਕੋ ਇਕ ਫਿਲਾਮੈਂਟ ਰੇਸ਼ਾ ਹੈ । ਇਸ ਦੀ ਲੰਬਾਈ 750 ਤੋਂ 1100 ਮੀਟਰ ਤੱਕ ਹੋ ਸਕਦੀ ਹੈ ।
2. ਆਮ ਤੌਰ ਤੇ ਰੰਗ ਚਿੱਟਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਦਾ ਰੰਗ ਕਰੀਮ ਭੂਰਾ ਜਾਂ ਸਲੇਟੀ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ ।
3. ਕੁਦਰਤੀ ਚਮਕ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ । ਕੁਦਰਤੀ ਚਮਕ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
4. ਲਚਕ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ ਅਤੇ ਵੱਟ ਪੈ ਜਾਂਦੇ ਹਨ। ਲਚਕ ਵਧੇਰੇ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਤੇ ਵੱਟ ਵੀ ਨਹੀਂ ਪੈਂਦਾ !
5. ਰੰਗਣਾ ਆਸਾਨ ਹੈ ਪਰ ਧੁੱਪ ਅਤੇ ਧੋਣ ਨਾਲ ਰੰਗ ਖ਼ਰਾਬ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ। ਰੰਗ ਜਲਦੀ ਅਤੇ ਪੱਕੇ ਚੜ੍ਹਦੇ ਹਨ ਜੋ ਧੁੱਪ ਅਤੇ ਧੋਣ ਨਾਲ ਵੀ ਖ਼ਰਾਬ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੇ ।
6. ਗਿੱਲੇ ਹੋਣ ਤੇ ਕੱਪੜੇ ਮਜ਼ਬੂਤ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਗਿੱਲੇ ਹੋਣ ਤੇ ਰੇਸ਼ੇ ਕਮਜ਼ੋਰ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 27.
ਰੇਸ਼ੇ ਅਤੇ ਫਿਲਾਮੈਂਟ ਦੀ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾ ਦਿਓ ਅਤੇ ਰੇਸ਼ੇ ਦੇ ਵਰਗੀਕਰਨ ਬਾਰੇ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਦੇਖੋ ਉਪਰੋਕਤ ਪ੍ਰਸ਼ਨਾਂ ਵਿੱਚ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 28.
ਤ੍ਰਿਮ ਰੇਸ਼ੇ ਖ਼ਰੀਦਣਾ ਲੋਕ ਕਿਉਂ ਅਧਿਕ ਪਸੰਦ ਕਰਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਬਨਾਵਟੀ ਰੇਸ਼ੇ ਮਜ਼ਬੂਤ ਹੁੰਦੇ ਹਨ, ਇਹਨਾਂ ਤੇ ਆਮ ਕਰਕੇ ਕੀੜੇ, ਉੱਲੀ ਆਦਿ ਦਾ ਅਸਰ ਵੀ ਘੱਟ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਧੋ ਕੇ ਸੁਕਾਉਣਾ ਅਤੇ ਸੰਭਾਲਣਾ ਵੀ ਸੌਖਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਦੇਖਣ ਨੂੰ ਵੀ ਸੋਹਣੇ ਲਗਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਲਈ ਬਨਾਵਟੀ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦੀ ਪਸੰਦ ਵੱਧ ਗਈ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 29.
(ੳ) ਮਿਸ਼ਰਤ ਕੱਪੜੇ ਕੀ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ? ਗਰਮ ਅਤੇ ਠੰਡੀ ਦੋਵੇਂ ਮੌਸਮ ਵਿੱਚ ਪਾਉਣ ਵਾਲੇ ਮਿਸ਼ਰਤ ਕੱਪੜੇ ਦਾ ਇੱਕ ਉਦਾਹਰਨ ਦਿਓ ।
(ਅ) ਮਿਸ਼ਰਤ ਕੱਪੜੇ ਕੀ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
(ਉ) ਬਨਾਵਟੀ ਰੇਸ਼ੇ ਅਤੇ ਕੁਦਰਤੀ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਨੂੰ ਮਿਲਾ ਕੇ ਜੋ ਰੇਸ਼ੇ ਤਿਆਰ ਕੀਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਮਿਸ਼ਰਤ ਰੇਸ਼ੇ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ; ਜਿਵੇਂ
ਪੌਲੀਐਸਟਰ + ਸੂਤੀ = ਪੋਲੀਵਸਤਰ
ਟੈਰਾਲੀਨ + ਸੁਤੀ = ਟੈਰੀਕਾਟ
ਪੋਲੀਐਸਟਰ + ਉੱਨ = ਟੈਰੀਟੂਲ
ਟੈਰੀਕਾਟ ਅਜਿਹਾ ਮਿਸ਼ਰਤ ਕੱਪੜਾ ਹੈ ਜਿਸ ਨੂੰ ਦੋਵੇਂ ਮੌਸਮਾਂ ਵਿੱਚ ਪਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ।
(ਆ) ਖੁਦ ਉੱਤਰ ਦਿਓ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 30.
ਸੂਤੀ ਰੇਸ਼ੇ ਦੇ ਗੁਣਾਂ ਦਾ ਵਰਣਨ ਕਰੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਦੇਖੋ ਉਪਰੋਕਤ ਪ੍ਰਸ਼ਨਾਂ ਵਿਚ ।

ਵੱਡੇ ਉੱਡਰਾਂ ਵਾਲੇ ਸਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਰੇਆਨ ਦੀ ਵਰਤੋਂ, ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਈਆਂ ਅਤੇ ਦੇਖਭਾਲ ਬਾਰੇ ਦੱਸੋ !
ਉੱਤਰ-
ਰੇਆਨ ਦੀ ਵਰਤੋਂ-ਰੇਆਨ ਵਿਚ ਰੇਸ਼ਮ ਵਰਗੀ ਚਮਕ ਹੋਣ ਦੇ ਕਾਰਨ ਇਸ ਨੂੰ ਨਕਲੀ ਰੇਸ਼ਮ ਵੀ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਨਾਲ ਘੱਟ ਅਤੇ ਵੱਧ ਚਮਕ ਵਾਲੇ ਕੱਪੜੇ, ਜਿਵੇਂਜਾਰਜਟ, ਕਰੇਪ, ਬੰਬਰ ਆਦਿ ਬਣਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਆਮ ਪਾਉਣ ਵਾਲੇ ਕੱਪੜਿਆਂ ਲਈ ਵੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।

ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਵਾਂ-ਰੇਆਨ ਪੁਨਰਨਿਰਮਿਤ ਸੈਲੂਲੋਜ਼ ਦੇ ਰੇਸ਼ੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।
ਇਸ ਵਿਚ ਕਾਰਬਨ, ਹਾਈਡਰੋਜਨ, ਆਕਸੀਜਨ ਵਰਗੇ ਤੱਤ ਹੁੰਦੇ ਹਨ –

  • ਸੁਖਮਦਰਸ਼ੀ ਹੇਠਾਂ ਰਚਨਾ-ਰੇਸ਼ਾ ਇਕ ਸਮਾਨ ਗੋਲ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

PSEB 10th Class Home Science Solutions Chapter 10 ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦਾ ਵਰਗੀਕਰਨ 8

  • ਲੰਬਾਈ-ਇਹ ਲੰਬੇ ਰੇਸ਼ੇ (ਫਿਲਾਮੈਂਟ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।
  • ਰੰਗ-ਇਹਨਾਂ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦਾ ਰੰਗ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ । ਇਹ ਪਾਰਦਰਸ਼ੀ ਹਨ ।
  • ਲਚਕੀਲਾਪਨ-ਇਹਨਾਂ ਵਿਚ ਲਚਕ ਘੱਟ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਧੋਣ ’ਤੇ ਸੁੰਗੜ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਪ੍ਰੈੱਸ ਕਰਨ ‘ਤੇ ਫਿਰ ਪਹਿਲਾਂ ਵਰਗਾ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
  • ਤਾਪ ਚਾਲਕਤਾ-ਇਹ ਤਾਪ ਦੇ ਚਾਲਕ ਹਨ
  • ਮਜ਼ਬੂਤੀ-ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਪਾਉਣ ਤੇ ਕਮਜ਼ੋਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ, ਵੈਸੇ ਇਹਨਾਂ ਦੀ ਮਜ਼ਬੂਤੀ ਘੱਟ ਜਾਂ ਵੱਧ ਹੋ ਸਕਦੀ ਹੈ ।
  • ਜਲ ਸੋਖਣ ਸ਼ਕਤੀ-ਰੇਆਨ ਦੀ ਜਲ ਸੋਖਣ ਸ਼ਕਤੀ ਕੁਦਰਤੀ ਸੈਲੂਲੋਜ਼ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਤੋਂ ਵੱਧ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
  • ਰਸਾਇਣਾਂ ਦਾ ਅਸਰ-ਅਮਲ ਦਾ ਬੁਰਾ ਅਸਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਪਰ ਖਾਰ ਦਾ ਅਸਰ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ ।
  • ਰੰਗਾਈ-ਇਸ ਨੂੰ ਰੰਗਣਾ ਸੌਖਾ ਹੈ । ਕੋਈ ਵੀ ਰੰਗ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਰੰਗ ਪੱਕਾ ਚੜ੍ਹਦਾ ਹੈ । ਧੁੱਪ ਵਿਚ ਰੰਗ ਖ਼ਰਾਬ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ ਪਰ ਰੰਗਕਾਟ ਨਾਲ ਰੰਗ ਕਮਜ਼ੋਰ ਪੈ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
  • ਤਾਪ ਦਾ ਅਸਰ-ਅੱਗ ਵਿਚ ਇਕ ਦਮ ਜਲਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਕਾਗਜ਼ ਦੇ ਜਲਣ ਵਰਗੀ | ਗੰਧ ਆਉਂਦੀ ਹੈ ।

ਦੇਖਭਾਲ-ਇਹ ਰੇਸ਼ੇ ਗਿੱਲੇ ਹੋਣ ਤੇ ਕਮਜ਼ੋਰ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।ਰਗੜ ਨਾਲ ਵੀ ਜਲਦੀ ਖ਼ਰਾਬ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਇਹਨਾਂ ਕੱਪੜਿਆਂ ਨੂੰ ਨਿਚੋੜਨਾ ਅਤੇ ਇਹਨਾਂ ‘ਤੇ ਵੱਧ ਦਬਾਅ ਨਹੀਂ ਪਾਉਣਾ | ਚਾਹੀਦਾ । ਵੱਧ ਗਰਮ ਪੈਂਸ ਵੀ ਨਹੀਂ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ । ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਸੁਕਾ ਕੇ ਹੀ ਸੰਭਾਲਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ । ਸਿਲਵਰ ਫਿਸ਼ ਅਤੇ ਫਲੂੰਦੀ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਹਾਨੀ ਪਹੁੰਚਾ ਸਕਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਪੋਲੀਐਸਟਰ (ਟੈਰਾਲੀਨ) ਦੀ ਵਰਤੋਂ, ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਈਆਂ ਅਤੇ ਦੇਖਭਾਲ ਬਾਰੇ ਦੱਸੋ ।
ਜਾਂ
ਪੋਲੀਐਸਟਰ ਦੀਆਂ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਵਾਂ ਅਤੇ ਵਰਤੋਂ ਬਾਰੇ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਪ੍ਰਯੋਗ-
1. ਇਹਨਾਂ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਨੂੰ ਦੂਸਰੇ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਨਾਲ ਮਿਲਾ ਕੇ ਮਿਸ਼ਰਤ ਰੇਸ਼ੇ ਤਿਆਰ ਕੀਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਜਿਵੇਂ –

    • ਟੈਰੀਕਾਟ – ਟੈਰਾਲੀਨ + ਸੂਤੀ
    • ਟੈਰੀਫੂਲ – ਟੈਰਾਲੀਨ + ਉੱਨ
    • ਟੈਰੀ ਰੂਬੀਆ – ਟੈਰਾਲੀਨ + ਸੁਤੀ
    • ਟੈਰੀ ਸਿਲਕ – ਟੈਰਾਲੀਨ + ਸਿਲਕ
  1. ਕੱਪੜੇ ਸਰੀਰ ਲਈ ਠੀਕ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਮਜ਼ਬੂਤ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।
  2. ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਦਾਗ਼ ਘੱਟ ਲੱਗਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਧੋਣਾ ਸੌਖਾ ਹੈ ।
  3. ਇਹਨਾਂ ਤੋਂ ਆਮ ਪਹਿਣਨ ਵਾਲੇ ਅਤੇ ਦੂਜੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੇ ਕੱਪੜੇ ਵੀ ਬਣਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।

ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਵਾਂਰਚਨਾ-ਇਹ ਇਕ ਬਹੁਲਕ ਹੈ –

  • ਸੂਖ਼ਮਦਰਸ਼ੀ ਹੇਠਾਂ ਰਚਨਾ-ਇਸਦੇ ਰੇਸ਼ੇ ਗੋਲ, ਸਿੱਧੇ, ਚੀਕਨੇ ਅਤੇ ਇੱਕੋ ਜਿਹੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।
  • ਰੰਗ-ਇਸ ਦੇ ਰੇਸ਼ੇ ਸਫ਼ੈਦ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।

PSEB 10th Class Home Science Solutions Chapter 10 ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦਾ ਵਰਗੀਕਰਨ 9

  • ਮਜ਼ਬੂਤੀ-ਇਹ ਮਜ਼ਬੂਤ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਮਜ਼ਬੂਤੀ ਨੂੰ ਹੋਰ ਵੀ ਵਧਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ।
  • ਲੰਬਾਈ-ਇਹ ਫਿਲਾਮੈਂਟ ਅਤੇ ਸਟੇਪਲ ਦੋਵੇਂ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।
  • ਲਚਕ-ਇਹਨਾਂ ਵਿਚ ਸੁਤੀ ਅਤੇ ਲਿਨਨ ਤੋਂ ਵੱਧ ਲਚਕ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਨਾਈਲਾਨ ਤੋਂ ਘੱਟ ਲਚਕ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
  • ਦਿਖਾਵਟ-ਚਮਕ ਲੋੜ ਅਨੁਸਾਰ ਘੱਟ ਜਾਂ ਵੱਧ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ।
  • ਤਾਪ ਚਾਲਕ-ਤਾਪ ਦੇ ਚੰਗੇ ਚਾਲਕ ਨਹੀਂ ਹਨ ।
  • ਰਸਾਇਣਾਂ ਦਾ ਅਸਰ-ਅਮਲ ਅਤੇ ਖਾਰ ਦਾ ਬੁਰਾ ਅਸਰ ਨਹੀਂ ਪੈਂਦਾ ।
  • ਰੰਗਾਈ-ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਰੰਗਾਂ ਨਾਲ ਹੀ ਰੰਗਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ।
  • ਤਾਪ ਦਾ ਅਸਰ-ਜਲਨ ਤੇ ਤਿੱਖੀ ਗੰਧ ਆਉਂਦੀ ਹੈ । ਗਰਮੀ ਨਾਲ ਪਿਘਲ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।

ਦੇਖਭਾਲ-ਧੋਣਾ ਸੌਖਾ ਹੈ, ਉੱਲੀ ਅਤੇ ਕੀੜੇ ਨਹੀਂ ਲੱਗਦੇ । ਧੁੱਪ ਵਿਚ ਰੰਗ ਖ਼ਰਾਬ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ । ਪ੍ਰੈੱਸ ਦੀ ਬਹੁਤੀ ਲੋੜ ਨਹੀਂ ਪੈਂਦੀ । ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਸੰਭਾਲਣਾ ਸੌਖਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਸਿਲਕ ਦੀਆਂ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਈਆਂ, ਵਰਤੋਂ ਅਤੇ ਦੇਖਭਾਲ ਬਾਰੇ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਈਆਂ ਲਈ ਦੇਖੋ ਉਪਰੋਕਤ ਪ੍ਰਸ਼ਨ ।
ਵਰਤੋਂ-ਸਿਲਕ ਦੇ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਤੋਂ ਬਣੇ ਵਸਤਰਾਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਉਤਸਵਾਂ, ਸ਼ਾਦੀਆਂ ਦੇ ਮੌਕੇ ਜਾਂ ਖਾਸ ਮੌਕਿਆਂ ਤੇ ਪਹਿਣਨ ਲਈ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਸਿਲਕ ਤੋਂ ਘਰ ਦੇ ਸਾਜੋ-ਸਮਾਨ ਜਿਵੇਂ, ਗਲੀਚੇ, ਕੁਸ਼ਨ, ਪਰਦੇ ਆਦਿ ਅਤੇ ਹੋਰ ਸਜਾਵਟੀ ਸਮਾਨ ਵੀ ਬਣਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਸਿਲਕ ਮਹਿੰਗਾ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਇਸ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਅਮੀਰ ਲੋਕ ਵਧੇਰੇ ਕਰਦੇ ਹਨ ।

PSEB 10th Class Home Science Solutions Chapter 10 ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦਾ ਵਰਗੀਕਰਨ

ਦੇਖਭਾਲ-ਰੇਸ਼ਮ ਦਾ ਰੇਸ਼ਾ ਬਹੁਤ ਨਾਜ਼ੁਕ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਗਿੱਲਾ ਹੋ ਕੇ ਹੋਰ ਵੀ ਨਾਜ਼ਕ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਇਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਧੋਣ ਲਈ ਰਗੜਨਾ ਨਹੀਂ ਚਾਹੀਦਾ ਸਗੋਂ ਪੋਲੇ-ਪੋਲੇ ਦਬਾ ਕੇ ਧੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ । ਇਨ੍ਹਾਂ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਨੂੰ ਗਰਮ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਵੀ ਨਹੀਂ ਪਾਉਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਅਤੇ ਸਿਲਕ ਦੇ ਕੱਪੜਿਆਂ ਨੂੰ ਡਰਾਈਕਲੀਨ ਕਰਵਾਉਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ । ਪ੍ਰੈੱਸ ਕਰਨ ਲੱਗਿਆਂ ਇਨ੍ਹਾਂ ਤੇ ਪਾਣੀ ਨਹੀਂ ਛਿੜਕਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਸਗੋਂ ਜਦੋਂ ਇਹ ਸਿਲ੍ਹੇ ਹੋਣ, ਇਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਪ੍ਰੈੱਸ ਕਰ ਲੈਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ । ਪਸੀਨੇ ਨਾਲ ਵੀ ਸਿਲਕ ਦੇ ਰੇਸ਼ੇ ਕਮਜ਼ੋਰ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ |

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਸਿਲਕ (ਰੇਸ਼ਮ ਦੀਆਂ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਈਆਂ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਦੇਖੋ ਉਪਰੋਕਤ ਪ੍ਰਸ਼ਨਾਂ ਵਿਚ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
ਸੂਤੀ ਤੇ ਰੇਸ਼ਮੀ ਤੰਤੂਆਂ ਦੀਆਂ ਭੌਤਿਕ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਵਾਂ ਦਾ ਮੁਲਾਂਕਣ ਕਰੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਦੇਖੋ ਉਪਰੋਕਤ ਪ੍ਰਸ਼ਨਾਂ ਵਿੱਚ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 6.
ਮਾਨਵ ਨਿਰਮਿਤ ਤੰਤੂ ਕਿਹੜੇ ਹਨ ? ਕਿਸੇ ਇੱਕ ਤੰਤੂ ਦੀਆਂ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਵਾਂ ਦਾ ਵਰਣਨ ਕਰੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਦੇਖੋ ਉਪਰੋਕਤ ਪ੍ਰਸ਼ਨਾਂ ਵਿਚ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 7.
ਸੁਤੀ ਰੇਸ਼ੇ ਦੀਆਂ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਵਾਂ ਦਾ ਵਰਣਨ ਕਰੋ । ਸੂਤੀ ਰੇਸ਼ੇ ਦੇ ਗੁਣਾਂ ਬਾਰੇ ਵਿਸਥਾਰ ਵਿਚ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਦੇਖੋ ਉਪਰੋਕਤ ਪ੍ਰਸ਼ਨਾਂ ਵਿਚ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 8.
ਲਿਨਨ ਦੇ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦੀਆਂ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਵਾਂ, ਵਰਤੋਂ ਅਤੇ ਦੇਖਭਾਲ ਬਾਰੇ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਖੁਦ ਕਰੋ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ.9.
ਥਰਮੋਪਲਾਸਟਿਕ ਰੇਸ਼ੇ ਕਿਹੜੇ-ਕਿਹੜੇ ਹਨ ? ਕਿਸੇ ਇਕ ਥਰਮੋਪਲਾਸਟਿਕ ਰੇਸ਼ੇ ਦੀਆਂ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਵਾਂ, ਵਰਤੋਂ ਅਤੇ ਦੇਖਭਾਲ ਵਿਸਥਾਰ ਵਿਚ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਖ਼ੁਦ ਕਰੋ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 10.
ਉੱਨ ਦੇ ਰੇਸ਼ੇ ਦੂਰਬੀਨ ਹੇਠਾਂ ਕਿਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦਿਖਦੇ ਹਨ ? ਚਿੱਤਰ ਬਣਾਓ । ਇਨ੍ਹਾਂ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦੀਆਂ ਕੀ-ਕੀ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਵਾਂ ਹਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਖੁਦ ਕਰੋ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 11.
ਸੁਨੀਤਾ ਦੀ ਭੈਣ ਦਾ ਵਿਆਹ 15 ਦਸੰਬਰ ਨੂੰ ਹੋਣਾ ਹੈ । ਉਸਦੇ ਵਿਆਹ ਲਈ ਕੁਦਰਤੀ ਰੇਸ਼ੇ ਦਾ ਸੂਟ ਸਿਲਵਾਉਣਾ ਹੈ । ਉਸਨੂੰ ਕਿਹੜੇ ਕੁਦਰਤੀ ਰੇਸ਼ੇ ਦੀ ਚੋਣ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ? ਨਾਂ
ਦੱਸੋ । ਇਸ ਰੇਸ਼ੇ ਦੀਆਂ ਕੀ-ਕੀ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਵਾਂ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
(ਰੇਸ਼ਮੀ), ਖੁਦ ਕਰੋ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 12.
ਸਿਲਕ ਦੇ ਰੇਸ਼ੇ ਦੂਰਬੀਨ ਹੇਠਾਂ ਕਿਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੇ ਦਿਖਦੇ ਹਨ ? ਚਿੱਤਰ ਬਣਾਓ । ਇਸ ਰੇਸ਼ੇ ਦੀਆਂ ਕੀ-ਕੀ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਵਾਂ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਖ਼ੁਦ ਕਰੋ !

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 13.
ਕਪਾਹ ਦਾ ਰੇਸ਼ਾ ਦੂਰਬੀਨ ਹੇਠਾਂ ਕਿਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦਾ ਦਿਖਦਾ ਹੈ ? ਚਿੱਤਰ ਬਣਾਓ । ਇਸ ਰੇਸ਼ੇ ਦੀਆਂ ਕੀ-ਕੀ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਵਾਂ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਖ਼ੁਦ ਕਰੋ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 14.
ਲਿਨਨ ਅਤੇ ਸੂਤੀ ਕੱਪੜਿਆਂ ਵਿਚ ਕੀ ਸਮਾਨਤਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਖ਼ੁਦ ਕਰੋ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 15.
ਸੀਤਲ ਇੱਕ ਫੁਟਬਾਲ ਦਾ ਖਿਡਾਰੀ ਹੈ ।ਉਸਨੇ ਖੇਡਾਂ ਦੇ ਮੁਕਾਬਲੇ ਵਿੱਚ ਭਾਗ ਲੈਣਾ ਹੈ ।
ਉਸਨੂੰ ਕਿਸ ਰੇਸ਼ੇ ਦਾ ਬਣਿਆ ਟਰੈਕਸੂਟ ਖਰੀਦਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਰੇਸ਼ੇ ਦੀਆਂ ਦੀ ਕੀ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਵਾਂ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਖ਼ੁਦ ਕਰੋ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 16.
ਸਿਲਕ ਨੂੰ ਕੱਪੜਿਆਂ ਦੀ ਰਾਣੀ ਕਿਉਂ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ? ਤੁਸੀਂ ਸਿਲਕ ਦੇ ਕੱਪੜਿਆਂ ਦੀ ਦੇਖਭਾਲ ਕਿਵੇਂ ਕਰੋਗੇ ?
ਉੱਤਰ-
ਖੁਦ ਕਰੋ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 17.
ਰੀਮਾ ਨੇ ਬਾਰਿਸ਼ ਦੇ ਮੌਸਮ ਵਿਚ ਪਿਕਨਿਕ ਲਈ ਜਾਣਾ ਹੈ ।
ਉਸਦੇ ਪਹਿਣਨ ਵਾਲੇ ਕੱਪੜਿਆਂ ਲਈ ਕਿਹੜੇ ਰੇਸ਼ੇ ਦੀ ਚੋਣ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਰੇਸ਼ੇ ਦੀਆਂ ਕੀ-ਕੀ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਵਾਂ ਹਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਖ਼ੁਦ ਉੱਤਰ ਦਿਉ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 18.
ਜਾਨਵਰਾਂ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੋਣ ਵਾਲੇ ਰੇਸ਼ੇ ਕਿਹੜੇ ਹਨ ? ਇਹਨਾਂ ਦੀਆਂ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਵਾਂ ਅਤੇ ਦੇਖਭਾਲ ਬਾਰੇ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਖੁਦ ਉੱਤਰ ਦਿਓ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 19.
ਪੋਲੀਐਸਟਰ ਦੀ ਵਰਤੋਂ, ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਵਾਂ ਅਤੇ ਦੇਖਭਾਲ ਬਾਰੇ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਖ਼ੁਦ ਉੱਤਰ ਦਿਓ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 20.
ਰੇਮੋਨ ਦੀ ਵਰਤੋਂ, ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਵਾਂ ਅਤੇ ਦੇਖਭਾਲ ਬਾਰੇ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਖ਼ੁਦ ਉੱਤਰ ਦਿਓ ।

ਵਸਤੂਨਿਸ਼ਠ ਪ੍ਰਸ਼ਨ

I. ਖ਼ਾਲੀ ਸਥਾਨ ਭਰੋ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਛੋਟੇ ਰੇਸ਼ੇ …….. ਇੰਚ ਤਕ ਲੰਬੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।
ਉੱਤਰ-
18,

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਲਿਨਨ …….. ਪੌਦੇ ਦੇ ਤਣੇ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਫਲੈਕਸ,

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਕੁਦਰਤੀ ਫਿਲਾਮੈਂਟ ਰੇਸ਼ਾ ਸਿਰਫ਼ …….. ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਿਲਕ,

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਉੱਨ ਅਤੇ ਐਕਰੀਲਿਕ ਰੇਸ਼ੇ ਮਿਲਾ ਕੇ …….. ਰੇਸ਼ਾ ਬਣਦਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਕੈਮਿਲਾਨ,

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
ਸੂਤੀ ਰੇਸ਼ੇ ਵਿਚ …….. ਪ੍ਰਤੀਸ਼ਤ ਸੈਲੂਲੋਜ਼ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
87-90%

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 6.
…………… ਅਤੇ …………… ਏਠਨ ਦੇਣ ਦੇ ਦੋ ਪ੍ਰਕਾਰ ਹਨ ।
ਉੱਤਰ-
S, Z,

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 7.
ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਤੰਤੂ ਨੂੰ ………………. ਤੰਤੂ ਵੀ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਕੁਦਰਤੀ,

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 8.
ਅਧਿਕਤਰ ਮਾਨਵ ਨਿਰਮਿਤ ਤੰਤੂਆਂ ਵਿਚ ……………. ਲਚੀਲਾਪਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਵਧੇਰੇ,

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 9.
ਰੇਸ਼ਮੀ ਰੇਸ਼ਾ ………….. ਕਿਸਮ ਦਾ ਰੇਸ਼ਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਕੁਦਰਤੀ,

PSEB 10th Class Home Science Solutions Chapter 10 ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦਾ ਵਰਗੀਕਰਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 10.
………… ਅਤੇ …………… ਦੋ ਪ੍ਰਾਕ੍ਰਿਤਕ ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਤੰਤੂ ਹਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਰੇਸ਼ਮ, ਉੱਨ,

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 11.
…………. · ਇੱਕ ਮਾਨਵ ਨਿਰਮਿਤ ਤੰਤੂ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਰੇਆਨ ।

II ਠੀਕ / ਗਲਤ ਦੱਸੋ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਛੋਟੇ ਰੇਸ਼ੇ 18 ਇੰਚ ਤੱਕ ਲੰਮੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਠੀਕ,

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਸਣ ਕੁਦਰਤੀ ਰੇਸ਼ਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਠੀਕ,

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਰੇਆਨ ਮਨੁੱਖ ਦੁਆਰਾ ਤਿਆਰ ਕੀਤਾ ਰੇਸ਼ਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਠੀਕ,

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਸੂਤੀ ਰੇਸ਼ੇ ਵਿਚ ਕੁਦਰਤੀ ਚਮਕ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ ।
ਉੱਤਰ-
ਠੀਕ,

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
ਸਾਈਸਲ ਇਕ ਕੀੜਾ ਹੈ !
ਉੱਤਰ-
ਗ਼ਲਤ,

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 6.
ਰੇਸ਼ਮ ਤਾਪ ਦਾ ਸੰਚਾਲਕ ਨਹੀਂ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਠੀਕ ॥

III. ਬਹੁਵਿਕਲਪੀ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਉੱਨ ਲਈ ਠੀਕ ਹੈ –
(ਉ) ਕੁਦਰਤੀ ਰੇਸ਼ਾ
(ਅ) ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਰੇਸ਼ਾ
(ਈ) ਜਾਨਵਰਾਂ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ
(ਸ) ਸਾਰੇ ਠੀਕ ।
ਉੱਤਰ-
(ਸ) ਸਾਰੇ ਠੀਕ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦੀ ਜੁੜਨ ਸ਼ਕਤੀ ਨਿਰਭਰ ਹੈ –
(ਉ) ਰੇਸ਼ੇ ਦੀ ਲੰਬਾਈ
(ਅ) ਰੇਸ਼ੇ ਦੀ ਬਾਰੀਕੀ
(ਈ) ਲਚਕੀਲਾਪਨ
(ਸ) ਸਾਰੇ ਠੀਕ ।
ਉੱਤਰ-
(ਸ) ਸਾਰੇ ਠੀਕ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਪੌਦਿਆਂ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੋਣ ਵਾਲਾ ਰੇਸ਼ਾ ਨਹੀਂ ਹੈ –
(ਉ) ਸਣ
(ਅ) ਉੱਨ
(ਇ) ਪਟਸਨ
(ਸ) ਕਪਾਹ !
ਉੱਤਰ-
(ਅ) ਉੱਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਥਰਮੋਪਲਾਸਟਿਕ ਰੇਸ਼ਾ ਨਹੀਂ ਹੈ –
(ਉ) ਨਾਈਲੋਨ
(ਅ ਪੋਲਿਸਟਰ,
(ਇ) ਕਪਾਹ
(ਸ) ਸਾਰੇ ਠੀਕ ॥
ਉੱਤਰ-
(ਇ) ਕਪਾਹ |

ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦਾ ਵਰਗੀਕਰਨ PSEB 10th Class Home Science Notes

ਪਾਠ ਇਕ ਨਜ਼ਰ ਵਿਚ

  • ਕੱਪੜਾ ਮਨੁੱਖੀ ਜੀਵਨ ਦੀਆਂ ਮੁੱਢਲੀਆਂ ਲੋੜਾਂ ਵਿਚੋਂ ਇਕ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਲੋੜ ਹੈ । ਇਸ ਲੋੜ ਨੂੰ ਪੂਰਾ ਕਰਨ ਲਈ ਅਸੀਂ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੇ ਕੱਪੜੇ ਪਹਿਨਦੇ ਹਾਂ ਅਤੇ ਘਰ ਵਿਚ ਹੋਰ ਕਈ ਕੰਮਾਂ ਲਈ ਵਰਤਦੇ ਹਾਂ, ਜਿਵੇਂ-ਪਰਦੇ, ਚਾਦਰਾਂ, ਤੌਲੀਏ, ਮੇਜ਼ਪੋਸ਼ ਆਦਿ ।
  • ਇਹ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਕੱਪੜੇ ਧਾਗਿਆਂ ਤੋਂ ਬਣਦੇ ਹਨ । ਜੇ ਕੱਪੜੇ ਨੂੰ ਸਿਰੇ ਤੋਂ ਵੇਖੋ ਤਾਂ ਧਾਗੇ ਨਿਕਲ ਆਉਂਦੇ ਹਨ । ਪਰ ਇਹ ਧਾਗੇ ਵਾਲਾਂ ਵਰਗੇ ਬਾਰੀਕ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਤੋਂ ਬਣਦੇ ਹਨ । ਇਹ ਰੇਸ਼ੇ ਕੱਪੜੇ ਦੀ ਇਕ ਮਲ ਇਕਾਈ ਹੈ ।
  • ਵੱਖ-ਵੱਖ ਕਿਸਮ ਦੇ ਕੱਪੜੇ, ਜਿਵੇਂ-ਉਨੀ, ਸੂਤੀ, ਰੇਸ਼ਮੀ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਤੋਂ ਬਣਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਇਹ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਰੇਸ਼ੇ ਪ੍ਰਾਪਤ ਵੀ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਸਾਧਨਾਂ ਤੋਂ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।

PSEB 10th Class Home Science Solutions Chapter 9 ਗਰਭ ਅਵਸਥਾ

Punjab State Board PSEB 10th Class Home Science Book Solutions Chapter 9 ਗਰਭ ਅਵਸਥਾ Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 10 Home Science Chapter 9 ਗਰਭ ਅਵਸਥਾ

Home Science Guide for Class 10 PSEB ਗਰਭ ਅਵਸਥਾ Textbook Questions and Answers

ਅਭਿਆਸ
ਵਸਤੂਨਿਸ਼ਠ ਪ੍ਰਸ਼ਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਗਰਭ ਅਵਸਥਾ ਤੋਂ ਤੁਸੀਂ ਕੀ ਸਮਝਦੇ ਹੋ ?
ਉੱਤਰ-
ਗਰਭ ਅਵਸਥਾ ਗਰਭ ਧਾਰਨ ਕਰਨ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਜਨਮ ਤਕ ਦੇ ਸਮੇਂ ਨੂੰ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਜੋ ਕਿ ਆਮ ਤੌਰ ‘ਤੇ 280 ਦਿਨ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਪਰ ਕਈ ਵਾਰੀ ਕਈ ਕਾਰਨਾਂ ਕਰਕੇ ਇਹ ਸਮਾਂ ਘੱਟ ਤੋਂ ਘੱਟ 190 ਅਤੇ ਵੱਧ ਤੋਂ ਵੱਧ 330 ਦਿਨ ਵੀ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ । ਬੱਚੇ ਦੇ ਵਿਕਾਸ ਦੀ ਦ੍ਰਿਸ਼ਟੀ ਤੋਂ ਇਹ ਸਮਾਂ ਬਹੁਤ ਹੀ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਇਸ ਸਮੇਂ ਇਕ ਕੋਸ਼ ਤੋਂ ਹੀ ਉਹ ਪੂਰਨ ਮਨੁੱਖੀ ਜੀਵ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿਚ ਵਿਕਸਿਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਗਰਭ ਦੇ ਸਮੇਂ ਨੂੰ ਅਸੀਂ ਕਿੰਨੇ ਅਤੇ ਕਿਹੜੇ ਭਾਗਾਂ ਵਿਚ ਵੰਡ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ?
ਉੱਤਰ-
ਗਰਭ ਧਾਰਨ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਜਨਮ ਤਕ ਦੀ ਅਵਸਥਾ ਨੂੰ ਗਰਭ ਅਵਸਥਾ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਅਸੀਂ ਇਸ ਸਮੇਂ ਨੂੰ ਤਿੰਨ ਭਾਗਾਂ ਵਿਚ ਵੰਡ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ।
ਗਰਭ ਦੇ ਸਮੇਂ ਵਿਚ ਬੱਚਾ ਇਕ ਅੰਡਕੋਸ਼ ਤੋਂ ਪੂਰਨ ਮਨੁੱਖੀ ਜੀਵ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿਚ ਵਿਕਸਿਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

  • ਅੰਡੇ ਦੀ ਅਵਸਥਾ (Ovum Stage) ਸਮਾਂ-ਗਰਭ ਧਾਰਨ ਤੋਂ ਦੋ ਹਫ਼ਤੇ ਤਕ।
  • ਐਮਬਰੀਓ ਦੀ ਅਵਸਥਾ (Embryo Stage) ਸਮਾਂ-ਦੂਸਰੇ ਹਫ਼ਤੇ ਤੋਂ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਕੇ ਦੂਸਰੇ ਮਹੀਨੇ ਦੇ ਅੰਤ ਤਕ ।
  • ਭਰੂਣ ਦੀ ਅਵਸਥਾ (Foetus Stage) ਸਮਾਂ-ਤੀਸਰੇ ਮਹੀਨੇ ਤੋਂ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਕੇ ਬੱਚੇ ਦੇ ਜਨਮ ਤਕ ॥

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਅੰਡੇ ਦੀ ਅਵਸਥਾ ਤੋਂ ਤੁਸੀਂ ਕੀ ਸਮਝਦੇ ਹੋ ਅਤੇ ਇਹ ਕਿੰਨੀ ਦੇਰ ਦੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਅੰਡੇ ਦੀ ਅਵਸਥਾ ਜਾਂ ਓਵਮ ਅਵਸਥਾ ਦਾ ਸਮਾਂ ਗਰਭ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋਣ ਤੋਂ ਦੋ ਹਫ਼ਤੇ ਤਕ ਗਿਣਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਕਾਲ ਦੌਰਾਨ ਇਸ ਵਿਚ ਕੋਈ ਜ਼ਿਆਦਾ ਤਬਦੀਲੀ ਨਹੀਂ ਆਉਂਦੀ । ਇਸ ਸਮੇਂ ਦੌਰਾਨ ਇਹ ਆਪਣੀ ਜਰਦੀ ‘ਤੇ ਜ਼ਿੰਦਾ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਸਮੇਂ ਇਹ ਫੈਲੋਪੀਅਨ ਟਿਊਬ ਤੋਂ ਬੱਚੇਦਾਨੀ ਵਿਚ ਪਹੁੰਚਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਆਪਣੇ ਆਪ ਨੂੰ ਬੱਚੇਦਾਨੀ ਦੀ ਦੀਵਾਰ ਨਾਲ ਜੋੜ ਕੇ ਮਾਂ ਦੇ ਆਧਾਰ ‘ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ।

PSEB 10th Class Home Science Solutions Chapter 9 ਗਰਭ ਅਵਸਥਾ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਐਮਬਰੀਓ ਦੀ ਅਵਸਥਾ ਤੋਂ ਤੁਸੀਂ ਕੀ ਸਮਝਦੇ ਹੋ ਅਤੇ ਕਿੰਨੀ ਦੇਰ ਦੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-

  • ਇਹ ਅਵਸਥਾ ਗਰਭ ਦੇ ਦੂਸਰੇ ਹਫ਼ਤੇ ਤੋਂ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਕੇ ਦੂਸਰੇ ਮਹੀਨੇ ਦੇ ਅੰਤ ਤਕ ਚਲਦੀ ਹੈ ।
  • ਪਹਿਲੇ ਮਹੀਨੇ ਵਿਚ ਐਮਬਰੀਓ ਵਿਚ ਖੂਨ ਪਹੁੰਚਾਉਣ ਲਈ ਨਿੱਕੀਆਂਨਿੱਕੀਆਂ ਰਗਾਂ ਬਣਦੀਆਂ ਹਨ ।
  • ਇਸ ਸਮੇਂ ਵਿਚ ਬੱਚੇ ਦੇ ਸਰੀਰਕ ਵਿਕਾਸ ਵਿਚ ਬਹੁਤ ਤੇਜ਼ੀ ਨਾਲ ਵਾਧਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
  • ਇਸ ਅਵਸਥਾ ਦੇ ਅਖ਼ੀਰ ਵਿਚ ਐਮਬਰੀਓ ਇਨਸਾਨੀ ਜੀਵ ਦੀ ਸ਼ਕਲ ਧਾਰਨ ਕਰ ਲੈਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
ਪਲੈਸੈਂਟਾ ਕੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਜਿੱਥੇ ਅੰਡਾ ਆਪਣੇ ਆਪ ਨੂੰ ਬੱਚੇਦਾਨੀ ਨਾਲ ਜੋੜ ਲੈਂਦਾ ਹੈ ਉੱਥੇ ਹੀ ਪਲੈਸੈਂਟਾ ਬਣਨ ਲੱਗ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਪਲੈਸੈਂਟਾ ਹੀ ਹੋਣ ਵਾਲੇ ਬੱਚੇ ਨੂੰ ਮਾਂ ਦੇ ਸਰੀਰ ਤੋਂ ਖੁਰਾਕ ਪਹੁੰਚਾਉਂਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਇਕ ਪਾਸੇ ਬੱਚੇਦਾਨੀ ਤੇ ਦੂਸਰੇ ਪਾਸੇ ਬੱਚੇ ਦੇ ਨਾਤੂ ਨਾਲ ਜੁੜਿਆ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 6.
ਨਾਤੂ ਤੋਂ ਤੁਸੀਂ ਕੀ ਸਮਝਦੇ ਹੋ, ਗਰਭ ਦੌਰਾਨ ਇਸ ਦਾ ਕੀ ਕੰਮ ਹੈ ?
ਜਾਂ
ਨਾਤੁ ਕੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਨਾਤੂ ਇਕ ਪਾਸੇ ਐਮਬਰੀਓ ਦੇ ਪੇਟ ਦੀ ਦੀਵਾਰ ਨਾਲ ਅਤੇ ਦੂਜੇ ਪਾਸੇ ਪਲੈਸੈਂਟਾ ਨਾਲ ਜੁੜਿਆ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਰੱਸੀ ਦੀ ਬਣਤਰ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਗਰਭ ਦੇ ਅਖੀਰ ਤਕ ਇਹ 10 ਤੋਂ 20 ਇੰਚ ਤਕ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਨਾੜ ਰਾਹੀਂ ਐਮਬਰੀਓ ਦਾ ਮਲਮੂਤਰ ਛਣ ਕੇ ਪਲੈਸੈਂਟਾ ਦੁਆਰਾ ਮਾਂ ਦੇ ਖੂਨ ਦੀਆਂ ਨਾਲੀਆਂ ਵਿਚ ਚਲਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤੇ ਮਾਂ ਦੇ ਸਰੀਰ ਰਾਹੀਂ ਬਾਹਰ ਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 7.
ਐਮਨੀਉਟਿਕ ਸੈਕ ਦਾ ਗਰਭ ਸਮੇਂ ਕੀ ਕੰਮ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਐਮਨੀਉਟਿਕ ਸੈਕ ਐਮਬਰੀਓ ਦੇ ਸਮੇਂ ਵਧਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਇਕ ਥੈਲੀ ਵਾਂਗ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਵਿਚ ਲੇਸਦਾਰ ਤਰਲ ਪਦਾਰਥ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿਚ ਬੱਚਾ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਤਰਲ ਪਦਾਰਥ ਬੱਚੇ ਨੂੰ ਸੱਟ ਲੱਗਣ ਤੋਂ ਬਚਾਉਂਦਾ ਹੈ ।

ਛੋਟੇ ਉੱਤਰਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 8.
ਐਮਬਰੀਓ ਦੇ ਵਧਣ ਸਮੇਂ ਕਿਹੜੇ-ਕਿਹੜੇ ਸਹਾਇਕ ਅੰਗਾਂ ਦਾ ਢਾਂਚਾ ਤਿਆਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਜਾਂ
ਐਮਬਰੀਓ ਦੇ ਵਧਣ ਵਿਚ ਕਿਹੜੇ-ਕਿਹੜੇ ਸਹਾਇਕ ਅੰਗ ਕੰਮ ਕਰਦੇ ਹਨ ? ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਗਰਭ ਅਵਸਥਾ ਦੌਰਾਨ ਐਮਬਰੀਓ ਦੇ ਵਧਣ ਦਾ ਸਮਾਂ ਦੁਸਰੇ ਹਫਤੇ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਦੂਸਰੇ ਮਹੀਨੇ ਦੇ ਅੰਤ ਤਕ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਪਹਿਲੇ ਮਹੀਨੇ ਵਿਚ ਐਮਬਰੀਓ ਵਿਚ ਖੂਨ ਪਹੁੰਚਾਉਣ ਵਾਲੀਆਂ ਨਿੱਕੀਆਂ-ਨਿੱਕੀਆਂ ਨਾੜੀਆਂ ਦਾ ਵਿਕਾਸ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਇਸ ਦੌਰਾਨ ਬੱਚੇ ਦਾ ਵਾਧਾ ਤੇਜ਼ੀ ਨਾਲ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਸਮੇਂ ਦੌਰਾਨ ਐਮਬਰੀਓ ਇਨਸਾਨੀ ਜੀਵ ਦੀ ਸ਼ਕਲ ਧਾਰਨ ਕਰ ਲੈਂਦਾ ਹੈ । ਐਮਬਰੀਓ ਦੇ ਆਪਣੇ ਵੱਧਣ ਦੇ ਨਾਲ-ਨਾਲ ਇਸ ਸਮੇਂ ਦੌਰਾਨ ਇਹ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਸਹਾਇਕ ਅੰਗਾਂ ਦਾ ਢਾਂਚਾ ਵੀ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿਚ ਪਲੈਸੈਂਟਾ, ਨਾੜ ਅਤੇ ਐਮਨਿਓਟਿਕ ਸੈਕ ਆਦਿ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਇਹ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਢਾਂਚਾ ਪੈਦਾ ਹੋਣ ਤਕ ਬੱਚੇ ਨੂੰ ਖੁਰਾਕ ਪਹੁੰਚਾਉਣ ਲਈ ਲੋੜੀਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 9.
ਭਰੂਣ ਦੀ ਅਵਸਥਾ ਕਿੰਨੀ ਲੰਬੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਦੌਰਾਨ ਭਰੂਣ ਵਿਚ ਕੀ-ਕੀ ਤਬਦੀਲੀਆਂ ਆਉਂਦੀਆਂ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਗਰਭ ਦੀ ਤੀਸਰੀ ਤੇ ਸਭ ਤੋਂ ਲੰਬੀ ਅਵਸਥਾ ਭਰੂਣ ਦੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਇਹ ਤੀਸਰੇ ਮਹੀਨੇ ਤੋਂ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਕੇ ਬੱਚੇ ਦੇ ਜਨਮ ਤਕ ਚਲਦੀ ਹੈ । ਇਸ ਅਵਸਥਾ ਵਿਚ ਨਵੇਂ ਅੰਗ ਨਹੀਂ ਬਣਦੇ ਪਰ ਐਮਬਰੀਓ ਅਵਸਥਾ ਵੇਲੇ ਦੇ ਬਣੇ ਹੋਏ ਅੰਗਾਂ ਦਾ ਵਿਕਾਸ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਤੀਸਰੇ ਮਹੀਨੇ ਤਕ ਭਰੁਣ ਦੀ ਲੰਬਾਈ ਤਿੰਨ ਇੰਚ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ | ਪੰਜਵੇਂ ਮਹੀਨੇ ਤਕ ਬੱਚੇ ਦੇ ਸਾਰੇ ਅੰਗ ਮਨੁੱਖ ਵਾਂਗ ਵਿਕਸਿਤ ਹੋਣ ਲੱਗਦੇ ਹਨ । ਮਾਂ ਨੂੰ ਪੇਟ ਵਿਚ ਬੱਚੇ ਦੀ ਹਰਕਤ ਮਹਿਸੂਸ ਹੋਣ ਲੱਗਦੀ ਹੈ । ਸੱਤਵੇਂ ਮਹੀਨੇ, ਬੱਚਾ ਪੂਰਾ ਇਨਸਾਨੀ ਜੀਵ ਦੀ ਸ਼ਕਲ ਵਿਚ ਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਦੀ ਚਮੜੀ ਲਾਲ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਜਨਮ ਸਮੇਂ ਤਕ ਬੱਚੇ ਦੀ ਲੰਬਾਈ 19-20 ਇੰਚ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਤੇ ਆਮ ਬੱਚੇ ਦਾ ਭਾਰ 7 ਪੌਂਡ ਦੇ ਲਗਪਗ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

PSEB 10th Class Home Science Solutions Chapter 9 ਗਰਭ ਅਵਸਥਾ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 10.
ਕਿਹੜੇ-ਕਿਹੜੇ ਕਾਰਕ ਭਰੂਣ ਦੇ ਵਾਧੇ ‘ਤੇ ਅਸਰ ਪਾਉਂਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਖੁਦ ਉੱਤਰ ਦਿਓ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 11.
ਗਰਭ ਦੇ ਸਮੇਂ ਦੀਆਂ ਆਮ ਤਕਲੀਫ਼ਾਂ ਕਿਹੜੀਆਂ-ਕਿਹੜੀਆਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ?
ਜਾਂ
ਗਰਭ ਦੇ ਸਮੇਂ ਦੀਆਂ ਤਿੰਨ ਸਰੀਰਕ ਤਕਲੀਫ਼ਾਂ ਬਾਰੇ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਖ਼ੁਦ ਕਰੋ ।

ਨਿਬੰਧਾਤਮਕ ਪ੍ਰਸ਼ਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 12.
ਗਰਭ ਅਵਸਥਾ ਸਮੇਂ ਦੌਰਾਨ ਭਰੂਣ ਦੀ ਅਵਸਥਾ ਤੋਂ ਤੁਸੀਂ ਕੀ ਸਮਝਦੇ ਹੋ ? ਭਰੂਣ ਦੇ ਵਾਧੇ ‘ਤੇ ਅਸਰ ਪਾਉਣ ਵਾਲੇ ਕਾਰਕ ਕਿਹੜੇ-ਕਿਹੜੇ ਹਨ ? ”
ਉੱਤਰ-
ਭਰੁਣ ਦੀ ਅਵਸਥਾ-ਗਰਭ ਦੀ ਤੀਸਰੀ ਤੇ ਸਭ ਤੋਂ ਲੰਬੀ ਅਵਸਥਾ ਭਰੁਣ ਦੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਇਹ ਤੀਸਰੇ ਮਹੀਨੇ ਤੋਂ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਕੇ ਬੱਚੇ ਦੇ ਜਨਮ ਤਕ ਚਲਦੀ ਹੈ ।
ਇਸ ਅਵਸਥਾ ਵਿਚ ਨਵੇਂ ਅੰਗ ਨਹੀਂ ਬਣਦੇ ਪਰ ਐਮਬਰੀਓ ਦੀ ਅਵਸਥਾ ਵੇਲੇ ਬਣੇ ਹੋਏ ਅੰਗਾਂ ਦਾ ਵਿਕਾਸ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਤੀਸਰੇ ਮਹੀਨੇ ਤਕ ਭਰੁਣ ਦੀ ਲੰਬਾਈ ਤਿੰਨ ਇੰਚ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ |

ਗਰਭ ਦੀ ਇਸ ਅਵਸਥਾ ਵਿਚ ਪੰਜਵੇਂ ਮਹੀਨੇ ਤਕ ਅੰਦਰ ਦੇ ਸਾਰੇ ਅੰਗ ਵੱਡੇ ਮਨੁੱਖਾਂ ਵਾਂਗ ਹੀ ਬਣਨ ਲੱਗਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਮਾਂ ਆਪਣੇ ਸਰੀਰ ਵਿਚ ਬੱਚੇ ਦੀਆਂ ਹਰਕਤਾਂ ਮਹਿਸੂਸ ਕਰਨ ਲੱਗ ਪੈਂਦੀ ਹੈ । ਸੱਤਵੇਂ ਮਹੀਨੇ ਤਕ ਬੱਚਾ ਪੂਰਾ ਇਨਸਾਨੀ ਜੀਵ ਦੀ ਸ਼ਕਲ ਵਿਚ ਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਜਨਮ ਸਮੇਂ | ਬੱਚੇ ਦੀ ਲੰਬਾਈ 19-20 ਇੰਚ ਤੇ ਭਾਰ 7 ਪੌਂਡ ਦੇ ਲਗਪਗ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਭਰੂਣ ਦੇ ਵਾਧੇ ‘ਤੇ ਅਸਰ ਪਾਉਣ ਵਾਲੇ ਕਾਰਕ –
ਜਨਮ ਸਮੇਂ ਹਰੇਕ ਬੱਚੇ ਦੀ ਲੰਬਾਈ ਤੇ ਭਾਰ ਅਲੱਗ-ਅਲੱਗ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਦੇ ਬਹੁਤ | ਸਾਰੇ ਕਾਰਕ ਹਨ ਜਿਹੜੇ ਗਰਭ ਅਵਸਥਾ ਸਮੇਂ ਬੱਚੇ ਦੇ ਵਿਕਾਸ ਉੱਪਰ ਅਸਰ ਪਾਉਂਦੇ ਹਨ

1. ਮਾਂ ਦਾ ਪੋਸ਼ਣ-ਗਰਭ ਅਵਸਥਾ ਦੌਰਾਨ ਬੱਚੇ ਨੂੰ ਭੋਜਨ ਮਾਂ ਕੋਲੋਂ ਮਿਲਦਾ ਹੈ । ਮਾਂ ਦੀ ਖੁਰਾਕ ਦਾ ਅਸਰ ਭਰੁਣ ਦੇ ਵਿਕਾਸ ‘ਤੇ ਪੈਂਦਾ ਹੈ ।
ਇਸ ਲਈ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ਕਿ ਮਾਂ ਲੋੜ ਅਨੁਸਾਰ ਸੰਤੁਲਿਤ ਭੋਜਨ ਲਏ, ਤਾਂ ਜੋ ਬੱਚੇ ਨੂੰ ਖੁਰਾਕ ਦੇ ਸਾਰੇ ਜ਼ਰੂਰੀ ਤੱਤ ਮਿਲ ਜਾਣ ।

2. ਮਾਂ-ਬਾਪ ਦੀ ਉਮਰ-ਖੋਜ ਦੁਆਰਾ ਇਹ ਗੱਲ ਸਿੱਧ ਹੋ ਚੁੱਕੀ ਹੈ ਕਿ ਬੱਚੇ ਨੂੰ ਜਨਮ ਦੇਣ ਲਈ ਮਾਂ ਦੀ ਸਭ ਤੋਂ ਚੰਗੀ ਉਮਰ 21 ਤੋਂ 35 ਸਾਲ ਤਕ ਹੈ । ਇਸ ਤੋਂ ਵੱਡੀ ਜਾਂ ਛੋਟੀ ਉਮਰ ਦੀ ਮਾਂ ਅਜਿਹੇ ਬੱਚਿਆਂ ਨੂੰ ਜਨਮ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਵਿਚ ਕਮੀਆਂ ਰਹਿ ਸਕਦੀਆਂ ਹਨ ।

3. ਮਾਂ ਦੀ ਸਿਹਤ (P.S.E.B. 2009/B)-ਮਾਂ ਦੀ ਸਿਹਤ ਦਾ ਭਰੂਣ ਦੇ ਵਾਧੇ ਨਾਲ ਸਿੱਧਾ ਸੰਬੰਧ ਹੈ । ਜੇਕਰ ਮਾਂ ਕਿਸੇ ਛੂਤ ਵਾਲੀ ਬਿਮਾਰੀ ਦੀ ਰੋਗਣ ਹੋਵੇ ਜਾਂ ਕਿਸੇ ਭਿਆਨਕ ਬਿਮਾਰੀ ਦੀ ਪਕੜ ਵਿਚ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਬੱਚਾ ਅੰਨਾ, ਗੁੰਗਾ ਜਾਂ ਬੋਲਾ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਰੋਗੀ ਵੀ । ਮਾਂ ਦੇ ਏਡਜ਼ ਜਾਂ ਐੱਚ. ਆਈ. ਵੀ. ਪੋਜ਼ੀਟਿਵ ਦੀ ਸ਼ਿਕਾਰ ਹੋਣ ਤੇ ਇਹ ਰੋਗ ਬੱਚੇ ਵਿਚ ਵੀ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਦਾ ਕਿ ਹਾਲੇ ਤਕ ਕੋਈ ਇਲਾਜ ਨਹੀਂ।

4. ਨਸ਼ੀਲੇ ਪਦਾਰਥਾਂ ਦਾ ਸੇਵਨ-ਜੇ ਗਰਭ ਅਵਸਥਾ ਸਮੇਂ ਮਾਂ ਸਿਗਰਟ, ਸ਼ਰਾਬ ਆਦਿ ਦਾ ਸੇਵਨ ਕਰੇ ਤਾਂ ਬੱਚਾ ਦਿਮਾਗੀ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਰੋਗੀ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ ਤੇ ਉਸ ਦੇ ਦਿਲ ਦੀ ਧੜਕਣ ਵੀ ਆਮ ਬੱਚਿਆਂ ਨਾਲੋਂ ਤੇਜ਼ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।

5. ਮਾਤਾ-ਪਿਤਾ ਦਾ ਦ੍ਰਿਸ਼ਟੀਕੋਣ-ਜੇਕਰ ਮਾਂ ਗਰਭ ਅਵਸਥਾ ਵਿਚ ਬੱਚੇ ਦੇ ਲਿੰਗ ਪਤੀ ਵਧੇਰੇ ਚਿੰਤਾ ਗ੍ਰਸਤ ਰਹੇ ਤਾਂ ਬੱਚੇ ਦੀ ਸਰੀਰਕ ਅਤੇ ਮਾਨਸਿਕ ਸਥਿਤੀ ‘ਤੇ ਅਸਰ ਪੈਂਦਾ ਹੈ ।ਉਸ ਦਾ ਵਿਕਾਸ ਰੁਕ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਬੱਚੇ ਵਿਚ ਜਨਮ ਦੇ ਨਾਲ ਹੀ ਸਰੀਰਕ ਅਤੇ ਮਾਨਸਿਕ ਵਿਕਾਰ ਪੈਦਾ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।

6. ਆਰ. ਐੱਚ. ਤੱਤ (P.S.E.B. 2009/B)-ਜਿਸ ਮਨੁੱਖ ਵਿਚ ਆਰ. ਐਚ. ਤੱਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਉਸ ਨੂੰ ਆਰ. ਐੱਚ. ਪੋਜ਼ੀਟਿਵ (RH+) ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ । ਜਿਸ ਵਿਚ ਇਹ ਤੱਤ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ ਉਸ ਨੂੰ ਆਰ. ਐੱਚ. ਨੈਗਟਿਵ (RH-) ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ । ਜੇਕਰ ਮਾਂ ਅਤੇ ਪਿਤਾ ਦੇ ਆਰ. ਐੱਚ. ਮੇਲ ਨਾ ਖਾਂਦੇ ਹੋਣ ਤਾਂ ਸੰਭਵ ਹੈ ਕਿ ਬੱਚੇ ਅਤੇ ਮਾਂ ਦਾ ਆਰ. ਐੱਚ. ਤੱਤ ਵੱਖਰਾ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ | ਆਰ. ਐੱਚ. ਤੱਤ ਵੱਖ ਹੋਣ ਤੇ ਖ਼ੂਨ ਵਿਚ ਲਾਲ ਕਣ ਨਸ਼ਟ ਹੋਣ ਕਾਰਨ ਬੱਚਾ ਅਨੀਮੀਆ ਦਾ ਸ਼ਿਕਾਰ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ ਜਾਂ ਜਨਮ ਤੋਂ ਤੁਰੰਤ ਬਾਅਦ ਮਰ ਵੀ ਸਕਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਲਈ ਗਰਭ ਧਾਰਨ ਕਰਨ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਆਦਮੀ ਅਤੇ ਔਰਤ ਨੂੰ ਆਪਣੇ ਆਰ. ਐੱਚ. ਤੱਤ ਦੀ ਪਰਖ ਕਰਵਾ ਲੈਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ।

7. ਐਕਸ-ਰੇ (X-Rays) (2006) ਗਰਭ ਅਵਸਥਾ ਦੌਰਾਨ ਕਈ ਵਾਰ ਐਕਸ-ਰੇ ਕਰਵਾਉਣਾ ਪੈ ਸਕਦਾ ਹੈ । ਜੇਕਰ ਬਾਰ-ਬਾਰ ਐਕਸ-ਰੇ ਕਰਵਾਉਣਾ ਪਵੇ ਤਾਂ ਗਰਭਪਾਤ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ ਜਾਂ ਬੱਚੇ ਵਿਚ ਸਰੀਰਕ ਅਤੇ ਮਾਨਸਿਕ ਵਿਕਾਰ ਵੀ ਪੈਦਾ ਹੋ ਸਕਦੇ ਹਨ । ਐਕਸ-ਰੇ ਦੇ ਅਸਰ ਨਾਲ ਬੱਚੇ ਮੰਦ ਬੁੱਧੀ ਜਾਂ ਅੰਗਹੀਣ ਵੀ ਪੈਦਾ ਹੋ ਸਕਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਲਈ ਸਿਰਫ਼ ਜ਼ਰੂਰਤ ਸਮੇਂ ਹੀ ਐਕਸ-ਰੇ ਕਰਵਾਉਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ।

PSEB 10th Class Home Science Solutions Chapter 9 ਗਰਭ ਅਵਸਥਾ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 13.
ਗਰਭ ਅਵਸਥਾ ਨੂੰ ਕਿਹੜੇ ਭਾਗਾਂ ਵਿਚ ਵੰਡਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ? ਇਹਨਾਂ ਦੌਰਾਨ ਕੀ-ਕੀ ਤਬਦੀਲੀਆਂ ਆਉਂਦੀਆਂ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਗਰਭ ਧਾਰਨ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਬੱਚੇ ਦੇ ਜਨਮ ਤਕ ਦੇ ਸਮੇਂ ਨੂੰ ਗਰਭ ਅਵਸਥਾ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਸਮਾਂ ਆਮ ਤੌਰ ‘ਤੇ 280 ਦਿਨਾਂ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
ਇਹ ਸਮਾਂ ਬੱਚੇ ਦੇ ਵਿਕਾਸ ਦੀ ਦ੍ਰਿਸ਼ਟੀ ਤੋਂ ਬਹੁਤ ਅਹਿਮ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਇਸ ਸਮੇਂ ਦੌਰਾਨ ਹੀ ਬੱਚਾ ਇਕ ਕੋਸ਼ ਤੋਂ ਪੂਰਨ ਮਨੁੱਖੀ ਜੀਵ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿਚ ਵਿਕਸਿਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

ਗਰਭ ਅਵਸਥਾ ਦੇ ਇਸ ਸਮੇਂ ਨੂੰ ਅਸੀਂ ਤਿੰਨ ਭਾਗਾਂ ਵਿਚ ਵੰਡ ਸਕਦੇ ਹਾਂ –

  • ਅੰਡੇ ਦੀ ਅਵਸਥਾ (Ovum Stage)
  • ਐਮਬਰੀਓ ਦੀ ਅਵਸਥਾ (Embryo Stage)
  • ਭਰੂਣ ਦੀ ਅਵਸਥਾ (Foetus Stage) ।

1. ਅੰਡੇ ਦੀ ਅਵਸਥਾ (Ovum Stage-ਇਹ ਸਮਾਂ ਗਰਭ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋਣ ਤੋਂ ਦੋ ਹਫ਼ਤੇ ਤਕ ਗਿਣਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਸਮੇਂ ਵਿਚ ਉਪਜਾਉ ਅੰਡਾ ਜ਼ਿਆਦਾ ਨਹੀਂ ਬਦਲਦਾ ਕਿਉਂਕਿ ਉਸ ਨੂੰ ਖ਼ੁਰਾਕ ਪਹੁੰਚਾਉਣ ਦਾ ਬਾਹਰਲਾ ਵਸੀਲਾ ਅਜੇ ਨਹੀਂ ਬਣਿਆ ਹੁੰਦਾ ਅਤੇ ਇਹ ਆਪਣੇ ਅੰਡੇ ਦੀ ਜਰਦੀ ‘ਤੇ ਹੀ ਜਿਊਂਦਾ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ । ਇਸੇ ਸਮੇਂ ਹੀ ਇਹ ਫੈਲੋਪੀਅਨ ਟਿਊਬ ਤੋਂ ਗਰਭ ਸਥਾਨ ਜਾਂ ਬੱਚੇਦਾਨੀ ਵਿਚ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਵਿਚ ਲਗਪਗ ਤਿੰਨ ਦਿਨ ਲੱਗਦੇ ਹਨ । ਨਵਾਂ ਜੀਵਨ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋਣ ਦੇ ਦਸ ਦਿਨ ਤੋਂ ਚੌਦਾਂ ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਅੰਦਰ ਅੰਡਾ ਆਪਣੇ ਆਪ ਨੂੰ ਗਰਭ ਸਥਾਨ ਦੀ ਦੀਵਾਰ ਨਾਲ ਜੋੜ ਲੈਂਦਾ ਹੈ ਤੇ ਮਾਂ ਦੇ ਆਹਾਰ ‘ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

2. ਐਮਬਰੀਓ ਭਰੁਣ ਦੀ ਪਹਿਲੀ ਅਵਸਥਾ ਦੀ ਅਵਸਥਾ (Embryo Stage)-ਇਹ ਅਵਸਥਾ ਗਰਭ ਦੇ ਦੂਸਰੇ ਹਫਤੇ ਤੋਂ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਕੇ ਦੂਸਰੇ ਮਹੀਨੇ ਦੇ ਅੰਤ ਤਕ ਚਲਦੀ ਹੈ । ਪਹਿਲੇ ਮਹੀਨੇ ਵਿਚ ਐਮਬਰੀਓ ਵਿਚ ਖੂਨ ਪਹੁੰਚਾਉਣ ਲਈ ਨਿੱਕੀਆਂ-ਨਿੱਕੀਆਂ ਰਗਾਂ ਬਣ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ । ਇਸ ਸਮੇਂ ਪੈਦਾ ਹੋਣ ਵਾਲੇ ਬੱਚੇ ਦੇ ਸਰੀਰ ਦੇ ਵਿਕਾਸ ਵਿਚ ਬਹੁਤ ਤੇਜ਼ੀ ਨਾਲ ਵਾਧਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਅਵਸਥਾ ਵਿਚ ਐਮਬਰੀਓ ਦੀ ਲੰਬਾਈ ਡੇਢ ਤੋਂ ਦੋ ਇੰਚ ਅਤੇ ਭਾਰ 2-3 ਐੱਸ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਅਵਸਥਾ ਦੇ ਅਖੀਰ ਵਿਚ ਐਮਬਰੀਓ ਇਨਸਾਨੀ ਜੀਵ ਦੀ ਸ਼ਕਲ ਧਾਰਨ ਕਰ ਲੈਂਦਾ ਹੈ ਤੇ ਚਿਹਰੇ ਦੇ ਲਗਪਗ ਸਾਰੇ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਅੰਗ ਬਣ ਜਾਂਦੇ ਹਨ | ਅੱਖਾਂ, ਨੱਕ, ਕੰਨ, ਬੁੱਲ੍ਹ ਉਭਰੇ ਹੋਏ ਦਿਸਣ ਲੱਗ ਪੈਂਦੇ ਹਨ ।

ਲੱਤਾਂ ਅਤੇ ਬਾਹਵਾਂ ਦਾ ਵਿਕਾਸ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਹੱਥਾਂ ਅਤੇ ਪੈਰਾਂ ਦੀਆਂ ਉਂਗਲਾਂ ਬਣਨ ਲੱਗ ਪੈਂਦੀਆਂ ਹਨ ਤੇ ਬਾਹਰਲੇ ਲਿੰਗ ਅੰਗ ਵੀ ਮਾਮੂਲੀ ਜਿਹੇ ਦਿਸਣ ਲੱਗ ਪੈਂਦੇ ਹਨ । ਐਮਬਰੀਓ ਦੇ ਆਪਣੇ ਵਧਣ ਦੇ ਨਾਲ-ਨਾਲ ਇਸੇ ਸਮੇਂ ਦੌਰਾਨ ਇਕ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਢਾਂਚਾ ਵੀ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਨੂੰ ਸਹਾਇਕ ਅੰਗ (ਪਲੈਸੈਂਟਾ, ਨਾਡੂ ਅਤੇ ਐਮਨੀਉਟਿਕ ਸੈਕ) ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਢਾਂਚਾ ਪੈਦਾ ਹੋਣ ਤਕ ਬੱਚੇ ਨੂੰ ਖੁਰਾਕ ਪਹੁੰਚਾਉਣ ਲਈ ਲੋੜੀਂਦਾ ਹੈ ।

ਸਹਾਇਕ ਅੰਗ –

  • ਪਲੈਸੈਂਟਾ-ਜਿੱਥੇ ਅੰਡਾ ਬੱਚੇਦਾਨੀ ਦੀ ਕੰਧ ਨਾਲ ਆਪਣੇ ਆਪ ਨੂੰ ਜੋੜ ਲੈਂਦਾ ਹੈ | ਉੱਥੇ ਹੀ ਪਲੈਸੈਂਟਾ ਬਣਨ ਲੱਗ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਪਲੈਸੈਂਟਾ ਹੀ ਹੋਣ ਵਾਲੇ ਬੱਚੇ ਨੂੰ ਮਾਂ ਦੇ ਸਰੀਰ ਤੋਂ ਖ਼ੁਰਾਕ ਪਹੁੰਚਾਉਂਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਇਕ ਪਾਸਿਓਂ ਬੱਚੇਦਾਨੀ ਅਤੇ ਦੂਸਰੇ ਪਾਸੇ ਨਾਤੂ ਨਾਲ | ਜੁੜਿਆ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
  • ਨਾਤੂ-ਨਾਤੂ ਇਕ ਪਾਸੇ ਐਮਬਰੀਓ ਦੇ ਪੇਟ ਦੀ ਬਾਹਰਲੀ ਦੀਵਾਰ ਨਾਲ ਅਤੇ ਦੂਜੇ | ਪਾਸੇ ਪਲੈਸੈਂਟਾ ਨਾਲ ਜੁੜਿਆ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਰੱਸੀ ਵਰਗਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਗਰਭ ਦੇ ਅੰਤ ਤਕ ਨਾਡੂ ਇਕ ਪੁਰਸ਼ ਦੇ ਅੰਗੂਠੇ ਦੀ ਮੋਟਾਈ ਜਿੰਨਾ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤੇ ਇਸ ਦੀ ਲੰਬਾਈ 10 ਇੰਚ ਤੋਂ 20 ਇੰਚ ਤਕ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਨਾੜ ਰਾਹੀਂ ਐਮਬਰੀਓ ਦਾ ਮਲਮੂਤਰ ਛਣ ਕੇ ਪਲੈਸੈਂਟਾ ਰਾਹੀਂ ਮਾਂ ਦੇ ਖੂਨ ਦੀਆਂ ਨਾਲੀਆਂ ਵਿਚ ਚਲਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤੇ ਮਾਂ ਦੇ ਸਰੀਰ ਦੇ ਰਾਹੀਂ ਬਾਹਰ ਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
  • ਐਮਨਿਓਟਿਕ ਸੈਕ-ਤੀਸਰਾ ਅੰਗ ਜਿਹੜਾ ਐਮਬਰੀਓ ਦੇ ਸਮੇਂ ਵਧਦਾ ਹੈ, ਐਮਨਿਓਟਿਕ ਸੈਕ ਜਾਂ ਥੈਲੀ ਹੈ । ਇਹ ਥੈਲੀ ਪਲੈਸੈਂਟਾ ਨਾਲ ਜੁੜੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਤੇ ਵਿਚ ਇਕ ਲੇਸਦਾਰ ਤਰਲ ਪਦਾਰਥ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿਚ ਬੱਚਾ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਤਰਲ ਪਦਾਰਥ ਬੱਚੇ ਨੂੰ ਸੱਟ ਲੱਗਣ ਤੋਂ ਬਚਾਉਂਦਾ ਹੈ।

(3) ਭਰੂਣ ਦੀ ਅਵਸਥਾ (Foetus Stage-ਗਰਭ ਦੀ ਤੀਸਰੀ ਤੇ ਸਭ ਤੋਂ ਲੰਬੀ ਅਵਸਥਾ ਭਰੂਣ ਦੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਇਹ ਤੀਸਰੇ ਮਹੀਨੇ ਤੋਂ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਕੇ ਬੱਚੇ ਦੇ ਜਨਮ ਤਕ ਚਲਦੀ ਹੈ । ਇਸ ਅਵਸਥਾ ਵਿਚ ਨਵੇਂ ਅੰਗ ਨਹੀਂ ਬਣਦੇ ਪਰ ਐਮਬਰੀਓ ਦੀ ਅਵਸਥਾ ਵੇਲੇ ਬਣੇ ਹੋਏ ਅੰਗਾਂ ਦਾ ਵਿਕਾਸ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਤੀਸਰੇ ਮਹੀਨੇ ਤਕ ਭਰੁਣ ਦੀ ਲੰਬਾਈ ਲਗਪਗ ਤਿੰਨ ਇੰਚ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਗਰਭ ਦੀ ਇਸ ਅਵਸਥਾ ਵਿਚ ਪੰਜਵੇਂ ਮਹੀਨੇ ਤਕ ਅੰਦਰ ਦੇ ਸਾਰੇ ਅੰਗ ਵੱਡੇ ਮਨੁੱਖ ਵਾਂਗ ਹੀ ਬਣਨ ਲੱਗਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਮਾਂ ਆਪਣੇ ਸਰੀਰ ਵਿਚ ਬੱਚੇ ਦੀਆਂ ਹਰਕਤਾਂ ਮਹਿਸੂਸ ਕਰਨ ਲੱਗ ਪੈਂਦੀ ਹੈ । ਪੰਜਵੇਂ ਮਹੀਨੇ ਵਿਚ ਹੀ ਬੱਚੇ ਦੇ ਦਿਲ ਦੀ ਧੜਕਣ ਦੀ ਆਵਾਜ਼ ਉੱਚੀ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।

ਸੱਤਵੇਂ ਮਹੀਨੇ ਵਿਚ ਬੱਚਾ ਪੂਰਾ ਇਨਸਾਨੀ ਜੀਵ ਦੀ ਸ਼ਕਲ ਵਿਚ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਦੀ ਚਮੜੀ ਲਾਲ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਭਰੂਣ ਇਹੋ ਜਿਹੀ ਹਾਲਤ ਵਿਚ ਪਹੁੰਚ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਕਿ ਜੇ ਬੱਚਾ ਕਿਸੇ ਕਾਰਨ ਵਕਤ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਪੈਦਾ ਹੋ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਉਸ ਦੇ ਬਚਣ ਦੀ ਸੰਭਾਵਨਾ ਤਾਂ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਪਰ ਅਜਿਹਾ ਬੱਚਾ ਕਮਜ਼ੋਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ। | ਜਨਮ ਸਮੇਂ ਬੱਚੇ ਦੀ ਲੰਬਾਈ 19 ਤੋਂ 20 ਇੰਚ ਤੇ ਇਕ ਆਮ ਬੱਚੇ ਦਾ ਭਾਰ ਲਗਪਗ 7 ਪੌਂਡ ਜਾਂ ਇਸ ਤੋਂ ਵੱਧ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

PSEB 10th Class Home Science Solutions Chapter 9 ਗਰਭ ਅਵਸਥਾ

Home Science Guide for Class 10 PSEB ਗਰਭ ਅਵਸਥਾ Important Questions and Answers

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਗਰਭ ਅਵਸਥਾ ਕਿੰਨੇ ਦਿਨਾਂ ਦੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
280 ਦਿਨਾਂ ਦੀ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਗਰਭ ਅਵਸਥਾ ਨੂੰ ਕਿੰਨੇ ਭਾਗਾਂ ਵਿਚ ਵੰਡ ਸਕਦੇ ਹੋ ?
ਉੱਤਰ-
ਤਿੰਨ ਭਾਗਾਂ ਵਿਚ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਗਰਭ ਅਵਸਥਾ ਦੇ ਤਿੰਨ ਭਾਗਾਂ ਦੇ ਨਾਂ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਅੰਡੇ ਦੀ ਅਵਸਥਾ, ਐਮਬਰੀਓ ਦੀ ਅਵਸਥਾ, ਭਰੂਣ ਦੀ ਅਵਸਥਾ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਅੰਡੇ ਦੀ ਅਵਸਥਾ ਦਾ ਸਮਾਂ ਗਰਭ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋਣ ਤੋਂ ਕਿੰਨੇ ਹਫ਼ਤੇ ਤੱਕ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਦੋ ਹਫ਼ਤੇ ਤੱਕ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
ਐਮਬਰੀਓ ਅਵਸਥਾ ਕਿੰਨੀ ਦੇਰ ਦੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਗਰਭ ਸਮੇਂ ਦੇ ਦੂਜੇ ਹਫ਼ਤੇ ਤੋਂ ਦੂਸਰੇ ਮਹੀਨੇ ਦੇ ਅੰਤ ਤੱਕ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 6.
ਨਾਤੂ ਦੀ ਲੰਬਾਈ ਕਿੰਨੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
10 ਤੋਂ 20 ਇੰਚ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 7.
ਜਨਮ ਸਮੇਂ ਤੱਕ ਬੱਚੇ ਦੀ ਲੰਬਾਈ ਕਿੰਨੀ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
19-20 ਇੰਚ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 8.
ਆਮ ਕਰਕੇ ਜਨਮ ਸਮੇਂ ਬੱਚੇ ਦਾ ਭਾਰ ਕਿੰਨਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
7 ਪੌਂਡ !

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 9.
ਬੱਚੇ ਨੂੰ ਜਨਮ ਦੇਣ ਲਈ ਮਾਂ ਦੀ ਠੀਕ ਉਮਰ ਕਿੰਨੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
21 ਤੋਂ 35 ਸਾਲ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 10.
ਗਰਭ ਸਮੇਂ ਬਾਰ-ਬਾਰ ਐਕਸਰੇ ਕਰਵਾਉਣ ਦਾ ਕੀ ਨੁਕਸਾਨ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਇਸੇ ਨਾਲ ਗਰਭਪਾਤ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 11.
ਐਮਬਰੀਓ ਦੇ ਸਹਾਇਕ ਅੰਗ ਕਿਹੜੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਪਲੈਸੇਂਟਾ, ਨਾਡੂ ਅਤੇ ਐਮਨੀਉਟਿਕ ਸੈਟ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 12.
ਭਰੂਣ ਅਵਸਥਾ ਦਾ ਸਮਾਂ ਕਿੰਨਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਜਾਂ
ਗਰਭ ਅਵਸਥਾ ਦੀ ਕਿਹੜੀ ਅਵਸਥਾ ਸਭ ਤੋਂ ਲੰਬੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਭਰੂਣ ਅਵਸਥਾ ਗਰਭ ਸਮੇਂ ਦੇ ਤੀਸਰੇ ਮਹੀਨੇ ਤੋਂ ਜਨਮ ਸਮੇਂ ਤੱਕ ॥

PSEB 10th Class Home Science Solutions Chapter 9 ਗਰਭ ਅਵਸਥਾ

ਛੋਟੇ ਉੱਡਰਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਗਰਭ ਸਮੇਂ ਕੋਈ ਦੋ ਤਿੰਨ ਤਕਲੀਫਾਂ ਦੇ ਬਾਰੇ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਦੇਖੋ ਉਪਰੋਕਤ ਪ੍ਰਸ਼ਨਾਂ ਵਿਚ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਗਰਭਵਤੀ ਔਰਤ ਦੀ ਪਿੱਠ ਅਤੇ ਮਾਸ-ਪੇਸ਼ੀਆਂ ਵਿਚ ਦਰਦ ਕਿਉਂ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਦੇਖੋ ਉਪਰੋਕਤ ਪ੍ਰਸ਼ਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਐਮਨਿਓਟਿਕ ਸੈਕ ਕੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਖੁਦ ਉੱਤਰ ਦਿਓ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਗਰਭ ਦੇ ਸਮੇਂ ਨਸ਼ੀਲੇ ਪਦਾਰਥਾਂ ਦਾ ਸੇਵਨ ਕਿਉਂ ਨਹੀਂ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ?
ਉੱਤਰ-
ਖੁਦ ਉੱਤਰ ਦਿਓ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
ਗਰਭ ਦੌਰਾਨ ਦਿਲ ਕਿਉਂ ਮਤਲਾਂਉਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਪਿੱਠ ਵਿੱਚ ਦਰਦ ਕਿਉਂ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਦੇਖੋ ਉਪਰੋਕਤ ਪ੍ਰਸ਼ਨਾਂ ਵਿਚ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 6.
ਭਰੂਣ ਦੇ ਵਾਧੇ ਤੇ ਮਾਂ-ਬਾਪ ਦੀ ਉਮਰ ਦਾ ਕੀ ਅਸਰ ਪੈਂਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਖ਼ੁਦ ਉੱਤਰ ਦਿਓ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 7.
ਗਰਭ ਦੇ ਸਮੇਂ ਔਰਤ ਦੇ ਸਰੀਰ ਤੇ ਖਾਰਸ਼ ਕਿਉਂ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਧੱਬੇ ਕਿਉਂ ਪੈਂਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਦੇਖੋ ਉਪਰੋਕਤ ਪ੍ਰਸ਼ਨਾਂ ਵਿਚ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 8.
ਅੰਡੇ, ਐਮਬਰੀਓ ਅਤੇ ਭਰੂਣ ਦੀ ਅਵਸਥਾ ਬਾਰੇ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਖੁਦ ਉੱਤਰ ਦਿਓ ।

PSEB 10th Class Home Science Solutions Chapter 9 ਗਰਭ ਅਵਸਥਾ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 9.
ਭਰੂਣ ਦੀ ਅਵਸਥਾ ਬਾਰੇ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਖ਼ੁਦ ਉੱਤਰ ਦਿਓ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 10.
R.H. ਕਾਰਕ ਬਾਰੇ ਤੁਸੀਂ ਕੀ ਸਮਝਦੇ ਹੋ ?
ਉੱਤਰ-
ਦੇਖੋ ਉਪਰੋਕਤ ਪ੍ਰਸ਼ਨਾਂ ਵਿਚ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 11.
ਐਮਬਰੀਓ ਦੇ ਵੱਧਣ ਵਿਚ ਕਿਹੜੇ-ਕਿਹੜੇ ਸਹਾਇਕ ਅੰਗ ਕੰਮ ਕਰਦੇ ਹਨ ? ਸੰਖੇਪ ਵਰਣਨ ਕਰੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਖ਼ੁਦ ਉੱਤਰ ਦਿਓ ।

ਵੰਸ਼ੇ ਉੱਡਰਾਂ ਵਾਲੇ ਸਨ ,

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਗਰਭ ਅਵਸਥਾ ਤੋਂ ਕੀ ਭਾਵ ਹੈ ? ਇਸ ਸਮੇਂ ਦੌਰਾਨ ਗਰਭਵਤੀ ਔਰਤ ਨੂੰ ਕਿਹੜੀਆਂ ਆਮ ਤਕਲੀਫਾਂ ਹੋ ਸਕਦੀਆਂ ਹਨ ?
ਜਾਂ
ਗਰਭਵਤੀ ਇਸਤਰੀ ਨੂੰ ਕਿਹੜੇ ਕਸ਼ਟਾਂ ਤੋਂ ਗੁਜ਼ਰਨਾ ਪੈਂਦਾ ਹੈ ? ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਓ ।
ਗਰਭ ਸਮੇਂ ਦੀਆਂ ਤਕਲੀਫਾਂ ਦਾ ਵਰਣਨ ਕਰੋ ।
ਜਾਂ
ਗਰਭ ਅਵਸਥਾ ਵਿੱਚ ਕਿਹੜੇ-ਕਿਹੜੇ ਦੁੱਖ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਵਿਸਥਾਰ ਵਿਚ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਗਰਭ ਧਾਰਨ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਬੱਚੇ ਦੇ ਜਨਮ ਤਕ ਮਾਂ ਦੇ ਪੇਟ ਅੰਦਰ ਬੱਚੇ ਦੀ ਅਵਸਥਾ ਨੂੰ ਗਰਭ ਅਵਸਥਾ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ । ਆਮ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਇਹ ਸਮਾਂ 280 ਦਿਨ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ | ਪਰ ਕਈ ਵਾਰ ਮਾਂ ਨੂੰ ਕਿਸੇ ਬਿਮਾਰੀ ਜਾਂ ਹੋਰ ਕਿਸੇ ਕਾਰਨ ਕਰਕੇ ਇਹ ਸਮਾਂ ਘੱਟ ਕੇ 190 ਦਿਨ ਵੀ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ ਤੇ ਵੱਧ ਤੋਂ ਵੱਧ 330 ਦਿਨ | ਇਸ ਸਮੇਂ ਦੌਰਾਨ ਬੱਚੇ ਦਾ ਵਿਕਾਸ ਇਕ ਅੰਡ ਕੋਸ਼ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਪੂਰਨ ਮਨੁੱਖੀ ਜੀਵ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿਚ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਕਾਲ ਦਾ ਪ੍ਰਭਾਵ ਜੀਵਨ ਭਰ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ ।

ਗਰਭ ਅਵਸਥਾ ਨੂੰ ਤਿੰਨ ਭਾਗਾਂ ਵਿਚ ਵੰਡਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ –

  • ਅੰਡੇ ਦੀ ਅਵਸਥਾ (Ovum Stage)
  • ਐਮਬਰੀਓ ਅਵਸਥਾ (Embryo Stage)
  • ਭਰੂਣ ਅਵਸਥਾ (Foetus Stage) ।

ਗਰਭਵਤੀ ਔਰਤ ਦੀਆਂ ਤਕਲੀਫਾਂ-ਗਰਭ ਅਵਸਥਾ ਦੀਆਂ ਤਕਲੀਫਾਂ ਸਾਰੀਆਂ ਔਰਤਾਂ ਨੂੰ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀਆਂ । ਕਈ ਔਰਤਾਂ ਗਰਭ ਦੇ ਪੂਰੇ 9 ਮਹੀਨੇ ਪੂਰੇ ਆਰਾਮ ਨਾਲ ਗੁਜ਼ਾਰ ਲੈਂਦੀਆਂ ਹਨ । ਪਰ ਕਈ ਔਰਤਾਂ ਨੂੰ ਪੂਰੇ 9 ਮਹੀਨੇ ਕੋਈ ਨਾ ਕੋਈ ਤਕਲੀਫ ਰਹਿੰਦੀ ਹੈ ।

ਗਰਭ ਸਮੇਂ ਹੋਣ ਵਾਲੀਆਂ ਆਮ ਤਕਲੀਫਾਂ ਹੇਠ ਲਿਖੀਆਂ ਹਨ –
1. ਜੀਅ ਕੱਚਾ ਹੋਣਾ-ਇਹ ਜ਼ਿਆਦਾਤਰ ਸਵੇਰੇ ਵੇਲੇ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਪਰ ਕਈ ਵਾਰ ਕਿਸੇ ਸਮੇਂ ਵੀ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ । ਜਿਸ ਨਾਲ ਖਾਣ ਨੂੰ ਮਨ ਨਹੀਂ ਕਰਦਾ | ਆਮ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਇਹ ਤਕਲੀਫ ਗਰਭ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਤਿੰਨ ਮਹੀਨੇ ਹੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਇਸ ਤਕਲੀਫ ਦਾ ਵਾਪਰਨਾ ਗਰਭ ਦੀ ਕੁਦਰਤੀ ਅਵਸਥਾ ਸਮਝੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ। ਇਸ ਨੂੰ ਮਾਰਨਿੰਗ ਸਿਕਨੈਸ ਵੀ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਨੂੰ ਖੁਰਾਕ ਤੇ ਆਰਾਮ ਨਾਲ ਠੀਕ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ । ਬਿਸਤਰੇ ਤੋਂ ਉੱਠਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਹਲਕੀ ਨਿੰਬੂ ਵਾਲੀ ਚਾਹ ਤੇ ਮਿੱਠਾ ਬਿਸਕੁਟ ਖਾਣ ਨਾਲ ਆਰਾਮ ਮਿਲਦਾ ਹੈ ।

2. ਕਬਜ਼-ਗਰਭ ਦੇ ਦੌਰਾਨ ਔਰਤਾਂ ਨੂੰ ਕਬਜ਼ੀ ਦੀ ਸ਼ਿਕਾਇਤ ਆਮ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਉਸ ਦੀ ਰੋਜ਼ਾਨਾ ਖ਼ੁਰਾਕ, ਕਸਰਤ ਤੇ ਟੱਟੀ ਜਾਣ ਦੀ ਆਦਤ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਹੋਵੇ ਕਿ ਉਸ ਨੂੰ ਕਬਜ਼ ਨਾ ਹੋਵੇ | ਆਮ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਪਾਣੀ ਵੱਧ ਪੀਣ ਤੇ ਸੰਤੁਲਿਤ ਭੋਜਨ ਲੈਣ ਨਾਲ ਇਹ ਸ਼ਿਕਾਇਤ ਦੂਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਨਾਸ਼ਤੇ ਵਿਚ ਫਲ ਅਤੇ ਫੋਕ ਵਾਲੇ ਪਦਾਰਥ ਅਤੇ ਫਲ ਖ਼ਾਸ ਕਰਕੇ ਸੇਬ ਖਾਣ ਨਾਲ ਕਬਜ਼ ਦੀ ਸ਼ਿਕਾਇਤ ਦੂਰ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।

3. ਦਿਲ ਦੀ ਜਲਣ ਤੇ ਬਦਹਜ਼ਮੀ (P.S.E.B. 2008-ਗਰਭ ਦੇ ਮਹੀਨਿਆਂ ਵਿਚ ਕਈ ਵਾਰ ਮਾਂ ਨੂੰ ਦਿਲ ਦੀ ਜਲਣ ਮਹਿਸੂਸ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜਿਸ ਨਾਲ ਬਦਹਜ਼ਮੀ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਇਸ ਦਾ ਦਿਲ ਨਾਲ ਕੋਈ ਵਾਸਤਾ ਨਹੀਂ ਪਰ ਇਹ ਜਲਣ ਪਾਚਣ-ਪ੍ਰਣਾਲੀ ਵਿਚ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਜ਼ਿਆਦਾ ਮਸਾਲੇਦਾਰ, ਤਲੀਆਂ ਹੋਈਆਂ, ਜ਼ਿਆਦਾ ਘਿਉ ਵਾਲੀਆਂ ਤੇ ਗੈਸ ਵਾਲੀਆਂ ਚੀਜ਼ਾਂ ਤੋਂ ਪਰਹੇਜ਼ ਕਰਨ ਨਾਲ ਇਸ ਤਕਲੀਫ ਤੋਂ ਛੁਟਕਾਰਾ ਪਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ।

4. ਸਿਰ ਚਕਰਾਉਣਾ ਤੇ ਬੇਹੋਸ਼ ਹੋਣਾ-ਗਰਭਵਤੀ ਔਰਤ ਦੇ ਜ਼ਿਆਦਾ ਖੇਚਲ ਕਰਨ, ਬਹੁਤ ਸਵੇਰੇ ਉੱਠਣ, ਬਹੁਤ ਦੇਰ ਤਕ ਖੜੇ ਹੋਣ ਨਾਲ ਜਾਂ ਜ਼ਿਆਦਾ ਚੱਲਣ ਨਾਲ ਸਿਰ ਚਕਰਾਉਣ ਲੱਗ ਪੈਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਖੂਨ ਦਾ ਦਬਾਅ ਘੱਟ ਜਾਣ ਨਾਲ ਕਈ ਵਾਰ ਬੇਹੋਸ਼ ਵੀ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਜੇਕਰ ਸਿਰ ਚਕਰਾਉਣ ਲੱਗੇ ਜਾਂ ਬੇਹੋਸ਼ੀ ਜਿਹੀ ਮਹਿਸੂਸ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਪੈਰਾਂ ਅਤੇ ਸਰੀਰ ਦੇ ਪੱਧਰ ਤੋਂ ਸਿਰ ਹੇਠਾਂ ਕਰਕੇ ਲੇਟ ਜਾਵੋ | ਘਬਰਾਹਟ ਜਾਂ ਸਿਰ ਚਕਰਾਉਣ ਦੀ ਹਾਲਤ ਵਿਚ ਇਕ ਗਿਲਾਸ ਠੰਢਾ ਨਿਬੁ ਪਾਣੀ ਪੀ ਲੈਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ।

5. ਪੈਰਾਂ ਦਾ ਸੁੱਜਣਾ -ਗਰਭ ਦੇ ਅਖੀਰਲੇ ਮਹੀਨਿਆਂ ਵਿਚ ਕਈ ਵਾਰ ਗਰਭਵਤੀ ਮਾਂ ਦੇ ਪੈਰ ਸੁੱਜ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਇਹ ਤਕਲੀਫ ਖ਼ਾਸ ਕਰਕੇ ਗਰਮੀ ਦੇ ਮਹੀਨਿਆਂ ਵਿਚ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਇਹ ਇਕ ਕੁਦਰਤੀ ਅਵਸਥਾ ਸਮਝੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਤੇ ਬੱਚਾ ਪੈਦਾ ਹੋਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਪੈਰ ਆਪਣੇ ਆਪ ਪਹਿਲੀ ਅਵਸਥਾ ਵਿਚ ਆ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਆਰਾਮ ਕਰਨ ਵੇਲੇ ਪੈਰ ਤੇ ਲੱਤਾਂ ਸਰੀਰ ਨਾਲੋਂ ਉੱਚੇ ਰੱਖਣ ਨਾਲ ਇਸ ਹਾਲਤ ਵਿਚ ਸੁਧਾਰ ਆਉਂਦਾ ਹੈ ।

6. ਯੋਨੀ ਵਿਚੋਂ ਖੂਨ ਵਗਣਾ-ਜੇ ਕਦੀ ਗਰਭਵਤੀ ਇਸਤਰੀ ਦੀ ਯੋਨੀ ਵਿਚੋਂ ਖੂਨ ਨਿਕਲਣ ਲੱਗ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਉਸ ਨੂੰ ਆਪਣੇ ਪੈਰ ਉੱਚੇ ਕਰਕੇ ਲੇਟਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਤੇ ਡਾਕਟਰ ਦੀ ਸਲਾਹ ਜਲਦੀ ਤੋਂ ਜਲਦੀ ਲੈਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ | ਜ਼ਿਆਦਾ ਖੂਨ ਨਿਕਲਣ ਨਾਲ ਬਹੁਤੀ ਵਾਰ ਗਰਭਪਾਤ ਵੀ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜਾਂ ਬੱਚਾ ਵਕਤ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਪੈਦਾ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਜਦ ਤਕ ਡਾਕਟਰ ਦੀ ਸਹਾਇਤਾ ਨਾ ਪੁੱਜੇ ਕੋਈ ਦਵਾਈ ਨਹੀਂ ਲੈਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ।

PSEB 10th Class Home Science Solutions Chapter 9 ਗਰਭ ਅਵਸਥਾ

7. ਸਰੀਰ ‘ਤੇ ਖਾਰਸ਼ ਹੋਣਾ -ਕਦੀ-ਕਦੀ ਗਰਭਵਤੀ ਇਸਤਰੀ ਨੂੰ ਸਰੀਰ ’ਤੇ ਖਾਰਸ਼ ਹੋਣ ਲੱਗ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਇਸ ਬਾਰੇ ਡਾਕਟਰ ਦੀ ਸਲਾਹ ਲੈਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ।
ਸਵੇਰੇ ਨਹਾਉਣ ਦੇ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਥੋੜਾ ਜਿਹਾ ਮਿੱਠਾ ਸੋਡਾ ਪਾਉਣ ਨਾਲ ਵੀ ਲਾਭ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਜੇ ਯੋਨੀ ਦੇ ਆਸ-ਪਾਸ ਕਿਸੇ ਕਿਸਮ ਦੀ ਖਾਰਸ਼ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਡਾਕਟਰ ਨੂੰ ਦੱਸ ਕੇ ਇਲਾਜ ਕਰਵਾਉਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ।

8. ਚਮੜੀ ‘ਤੇ ਧੱਬੇ ਪੈਣੇ -ਕਈ ਔਰਤਾਂ ਦੇ ਮੂੰਹ ‘ਤੇ ਭੂਰੇ ਧੱਬੇ ਜਾਂ ਸਿਆਹੀਆਂ ਪੈ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ । ਗਰਭ ਦੀ ਅਖ਼ੀਰਲੀ ਹਾਲਤ ਵਿਚ ਕਈ ਵਾਰ ਔਰਤਾਂ ਦੇ ਵਾਲ ਜ਼ਿਆਦਾ ਖ਼ੁਸ਼ਕ ਰਹਿੰਦੇ ਹਨ ਤੇ ਭੁਰਨ ਲੱਗ ਪੈਂਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਬਾਰੇ ਜ਼ਿਆਦਾ ਚਿੰਤਾ ਕਰਨ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ ਨਹੀਂ । ਬੱਚਾ ਪੈਦਾ ਹੋਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਇਹ ਆਪਣੇ ਆਪ ਕੁਦਰਤੀ ਅਵਸਥਾ ਵਿਚ ਆ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਵਾਲਾਂ ਨੂੰ ਰੋਜ਼ ਕੰਘੀ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਤੇਲ ਦੀ ਮਾਲਿਸ਼ ਸਿਰ ਤੇ ਵਾਲਾਂ ਲਈ ਫਾਇਦੇਮੰਦ ਹੈ ।

9. ਪਿੱਠ ਤੇ ਪੱਠਿਆਂ ਵਿਚ ਦਰਦ -ਗਰਭ ਦੇ ਅਖ਼ੀਰਲੇ ਦਿਨਾਂ ਵਿਚ ਪਿੱਠ, ਪੱਟਾਂ ਅਤੇ ਲੱਤਾਂ ਵਿਚ ਦਰਦ ਹੋਣਾ ਸਾਧਾਰਨ ਗੱਲ ਹੈ । ਬੱਚੇਦਾਨੀ ਦੇ ਵਧਣ ਨਾਲ ਫੇਫੜਿਆਂ, ਪੱਟਾਂ ਅਤੇ ਲੱਤਾਂ ‘ਤੇ ਜ਼ਿਆਦਾ ਬੋਝ ਪੈਂਦਾ ਹੈ । ਜਦੋਂ ਬੱਚਾ ਸਰੀਰ ਵਿਚ ਹਰਕਤ ਕਰਕੇ ਆਪਣੀ ਹਾਲਤ ਤੇ ਜਗਾ ਬਦਲਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਦਰਦ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
ਇਹ ਦਰਦ ਨੀਵੀਂ ਅੱਡੀ ਵਾਲੀ ਚੱਪਲ ਪਹਿਨਣ ਤੇ ਆਰਾਮ ਕਰਨ ਨਾਲ ਘੱਟ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਜੇਕਰ ਅਖੀਰਲੇ ਦਿਨਾਂ ਵਿਚ ਪਿੱਠ ਵਿਚ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੀ ਦਰਦ ਹੋਵੇ, ਜਿਵੇਂ ਮਾਹਵਾਰੀ ਦੇ ਦਿਨਾਂ ਵਿਚ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਡਾਕਟਰ ਨੂੰ ਛੇਤੀ ਬੁਲਾਉਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ। ਇਹ ਬੱਚਾ ਹੋਣ ਵੇਲੇ ਦੀਆਂ ਦਰਦਾਂ ਹੋ ਸਕਦੀਆਂ ਹਨ ।

10. ਕੁੱਝ ਹੋਰ ਤਕਲੀਫਾਂ-ਉੱਪਰ ਲਿਖੀਆਂ ਗਰਭ ਦੀਆਂ ਤਕਲੀਫਾਂ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਕੁੱਝ ਹੋਰ ਤਕਲੀਫਾਂ ਜਿਵੇਂ-ਸਿਰ ਦਰਦ, ਨਜ਼ਰ ਵਿਚ ਕਮਜ਼ੋਰੀ, ਮੂੰਹ ਤੇ ਹੱਥਾਂ ‘ਤੇ ਸੋਜ, ਬੁਖ਼ਾਰ, ਅਚਾਨਕ ਸਰੀਰ ਦੇ ਕਿਸੇ ਅੰਗ ਖ਼ਾਸ ਕਰਕੇ ਪਿੱਠ, ਲੱਤਾਂ ਅਤੇ ਪੇਟ ਵਿਚ ਦਰਦ, ਜ਼ਿਆਦਾ ਉਲਟੀਆਂ ਆਉਣਾ, ਯੋਨੀ ਵਿਚੋਂ ਜ਼ੋਰ ਨਾਲ ਪਾਣੀ ਵਗਣਾ ਅਤੇ ਰੁਕ-ਰੁਕ ਕੇ ਸਾਹ ਆਉਣਾ ਆਦਿ ਹੋ ਸਕਦੀਆਂ ਹਨ । ਇਹਨਾਂ ਵਿਚੋਂ ਜੇਕਰ ਕੋਈ ਵੀ ਤਕਲੀਫ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਡਾਕਟਰ ਦੀ ਸਲਾਹ ਤੁਰੰਤ ਲੈਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਇਹਨਾਂ ਪ੍ਰਤੀ ਅਣਗਹਿਲੀ ਕਰਨ ਨਾਲ ਕਈ ਵਾਰ ਖ਼ਤਰਾ ਵੀ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ । ਥੋੜ੍ਹੇ-ਥੋੜ੍ਹੇ ਸਮੇਂ ਬਾਅਦ ਡਾਕਟਰ ਨੂੰ ਦਿਖਾਉਣ ਨਾਲ ਇਹਨਾਂ ਤਕਲੀਫਾਂ ਨੂੰ ਰੋਕਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ !

ਵਸਤੁਨਿਸ਼ਠ ਪ੍ਰਸ਼ਨ

I. ਖ਼ਾਲੀ ਸਥਾਨ ਭਰੋ –

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਗਰਭ ਅਵਸਥਾ …….. ਦਿਨਾਂ ਦੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
280,

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
…….. ਹੀ ਹੋਣ ਵਾਲੇ ਬੱਚੇ ਨੂੰ ਮਾਂ ਦੇ ਸਰੀਰ ਤੋਂ ਖ਼ੁਰਾਕ ਪਹੁੰਚਾਉਂਦਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਪਲੇਸੈਟਾਂ,

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਨਾਤੂ ਦੀ ਲੰਬਾਈ …….. ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
10-20 ਇੰਚ,

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਗਰਭ ਅਵਸਥਾ ਨੂੰ …….. ਭਾਗਾਂ ਵਿਚ ਵੰਡਿਆ ਗਿਆ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਤਿੰਨ,

PSEB 10th Class Home Science Solutions Chapter 9 ਗਰਭ ਅਵਸਥਾ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
ਅੰਡੇ ਦੀ ਅਵਸਥਾ ਨੂੰ ………….. ਵੀ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਓਵਮ ਅਵਸਥਾ ॥

II. ਠੀਕ / ਗਲਤ ਦੱਸੋ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਗਰਭ ਅਵਸਥਾ ਆਮ ਕਰਕੇ 280 ਦਿਨਾਂ ਦੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਠੀਕ,

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਐਮਬਰੀਓ ਦੀ ਅਵਸਥਾ ਗਰਭ ਧਾਰਨ ਤੋਂ ਦੁਸਰੇ ਹਫ਼ਤੇ ਤੋਂ ਸ਼ੁਰੂ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਠੀਕ,

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਜਨਮ ਸਮੇਂ ਬੱਚੇ ਦੀ ਲੰਬਾਈ 19-20 ਇੰਚ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਠੀਕ,

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਨਾਡੂ 10-20 ਇੰਚ ਲੰਬਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ !
ਉੱਤਰ-
ਠੀਕ,

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
ਜਨਮ ਸਮੇਂ ਬੱਚੇ ਦਾ ਭਾਰ 4 ਪੌਂਡ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਗ਼ਲਤ ।

III. ਬਹੁਵਿਕਲਪੀ ਪ੍ਰਸ਼ਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਐਮਬਰੀਓ ਦੇ ਸਹਾਇਕ ਅੰਗ ਹਨ –
(ਉ) ਪਲੈਸੇਂਟਾ
(ਅ) ਨਾੜੂ
(ਈ) ਐਮਨੀਉਟਿਕ ਸੈਕ
(ਸ) ਸਾਰੇ ਠੀਕ ।
ਉੱਤਰ-
(ਸ) ਸਾਰੇ ਠੀਕ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਨਾਡੂ ਦੀ ਲੰਬਾਈ ਹੁੰਦੀ ਹੈ –
(ਉ) 10-20 ਇੰਚ
(ਅ) 30 ਇੰਚ
(ਈ) 30-40 ਇੰਚ
(ਸ) ਕੋਈ ਨਹੀਂ ।
ਉੱਤਰ-
(ਉ) 10-20 ਇੰਚ

PSEB 10th Class Home Science Solutions Chapter 9 ਗਰਭ ਅਵਸਥਾ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਭਰੂਣ ਅਵਸਥਾ ਦਾ ਸਮਾਂ ਹੈ
(ਉ) ਗਰਭ ਸਮੇਂ ਤੋਂ ਤੀਸਰੇ ਮਹੀਨੇ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾ ਹਫ਼ਤਾ
(ਈ) ਦੂਸਰੇ ਹਫ਼ਤੇ ਤੋਂ
(ਸ) ਕੋਈ ਨਹੀਂ ।
ਉੱਤਰ-
(ਉ) ਗਰਭ ਸਮੇਂ ਤੋਂ ਤੀਸਰੇ ਮਹੀਨੇ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾ ਹਫ਼ਤਾ ।

ਗਰਭ ਅਵਸਥਾ PSEB 10th Class Home Science Notes

ਪਾਠ ਇਕ ਨਜ਼ਰ ਵਿਚ

  • ਗਰਭ ਧਾਰਨ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਬੱਚੇ ਦੇ ਜਨਮ ਤਕ ਦੀ ਅਵਸਥਾ ਨੂੰ ਗਰਭ ਅਵਸਥਾ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
  • ਗਰਭ ਅਵਸਥਾ ਦੇ ਤਿੰਨ ਭਾਗ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।
  • ਭਰੁਣ ਅਵਸਥਾ ਸਭ ਤੋਂ ਲੰਬੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
  • ਪਲੈਨੈੱਟ ਰਾਹੀਂ ਬੱਚਾ ਮਾਂ ਦੇ ਸਰੀਰ ਤੋਂ ਖੁਰਾਕ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਦਾ ਹੈ ।
  • ਐਮਬਰੀਓ ਅਵਸਥਾ ਵਿਚ ਹੀ ਸਹਾਇਕ ਅੰਗਾਂ ਦਾ ਢਾਂਚਾ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
  • ਮਾਂ ਦੀ ਸਿਹਤ ਤੇ ਖ਼ੁਰਾਕ ਦਾ ਬੱਚੇ ਦੀ ਸਿਹਤ ਉੱਪਰ ਸਿੱਧਾ ਅਸਰ ਪੈਂਦਾ ਹੈ ।
  • ਬੱਚੇ ਦੀ ਗਰਭ ਅਵਸਥਾ ਦੀ ਸਿਹਤ ਦਾ ਜੀਵਨ ਭਰ ਸਿਹਤ ਉੱਪਰ ਅਸਰ ਪੈਂਦਾ ਹੈ ।
  • ਗਰਭ ਅਵਸਥਾ ਵਿਚ ਮਾਂ ਵਲੋਂ ਕੀਤੇ ਗਏ ਨਸ਼ੀਲੇ ਪਦਾਰਥਾਂ ਦੇ ਸੇਵਨ ਦਾ ਬੱਚੇ ਦੇ ਉੱਪਰ ਬੁਰਾ ਅਸਰ ਪੈਂਦਾ ਹੈ ।
  • ਗਰਭ ਧਾਰਨ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਆਦਮੀ ਤੇ ਔਰਤ ਨੂੰ ਆਰ. ਐੱਚ. ਤੱਤ ਦੀ ਪਰਖ ਕਰਾ ਲੈਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ।

ਗਰਭ ਧਾਰਨ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਜਨਮ ਤਕ ਦੇ ਸਮੇਂ ਨੂੰ ਗਰਭ ਅਵਸਥਾ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਸਮਾਂ ਆਮ ਤੌਰ ‘ਤੇ 280 ਦਿਨਾਂ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ। ਇਹ ਸਮਾਂ ਬੱਚੇ ਦੇ ਵਿਕਾਸ ਦੀ ਦ੍ਰਿਸ਼ਟੀ ਤੋਂ ਬਹੁਤ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਹੈ । ਇਸ ਸਮੇਂ ਦਾ ਪ੍ਰਭਾਵ ਜੀਵਨ ਭਰ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ । ਇਸੇ ਸਮੇਂ ਦੌਰਾਨ ਬੱਚਾ ਇਕ ਅੰਡਕੋਸ਼ ਤੋਂ ਪੂਰਨ ਮਨੁੱਖੀ ਜੀਵ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿਚ ਵਿਕਸਿਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ।