PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 5 पदार्थों का पृथक्करण

Punjab State Board PSEB 6th Class Science Book Solutions Chapter 5 पदार्थों का पृथक्करण Textbook Exercise Questions, and Answers.

PSEB Solutions for Class 6 Science Chapter 5 पदार्थों का पृथक्करण

PSEB 6th Class Science Guide पदार्थों का पृथक्करण Textbook Questions, and Answers

1. खाली स्थान भरें

(i) निस्यंदन विधि अघुलनशील ……………….. को ………………… से अलग करने में सहायक होती है।
उत्तर-
अघुलनशील, विलयन

(ii) चावलों में से छोटे पत्थरों के टुकड़ों को …………………… माध्यम से अलग किया जा सकता है।
उत्तर-
हस्तचयन

(iii) बुरादा आटे से ………………… द्वारा अलग किया जाता है।
उत्तर-
निस्यंदन अथवा विनोइंग

(iv) चावलों के दानों को डंडियों से अलग करने की विधि को ………………….. कहते हैं।
उत्तर-
फटकन अथवा थैशिंग

(v) अवसाद को हिलाए बिना तरल की ऊपरी तह को गिराने की क्रिया को ………………….. कहते हैं।
उत्तर-
निस्तारण।

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2. सही या ग़लत

(i) छानन विधि में मिश्रण के अंशों का आकार अलग-अलग होता है।
उत्तर-
सही

(ii) तरल पदार्थों से भाप बनाने की प्रक्रिया को संघनन कहते हैं।
उत्तर-
ग़लत

(iii) नमक और आटे के मिश्रण को हस्त चयन विधि द्वारा अलग किया जा सकता है।
उत्तर-
ग़लत

(iv) डंडियों से दोनों को अलग करने को गहाई (थ्रेशिंग) कहते हैं।
उत्तर-
सही

3. कॉलम ‘क’ का कॉलम ‘ख’ से उचित मिलान करें

कॉलम ‘क’ कॉलम ‘ख’
(i) पानी से नमक अलग करना (क) संघनन
(ii) भारी कणों का नीचे बैठना (ख) उड़ाना
(iii) अलग-अलग अंशों का हवा द्वारा पृथक्करण (ग) वाष्पन
(iv) वाष्पों से पानी का बनना (घ) अवसादन

उत्तर-

कॉलम ‘क’ कॉलम ‘ख’
(i) पानी से नमक अलग करना (ग) वाष्पन
(ii) भारी कणों का नीचे बैठना (घ) अवसादन
(iii) अलग-अलग अंशों का हवा द्वारा पृथक्करण (ख) उड़ाना
(iv) वाष्पों से पानी का बनना (क) संघनन

4. सही विकल्प चुनें

प्रश्न (i)
हवा द्वारा मिश्रण के भारी तथा हल्के कणों को पृथक्करण की कौन-सी विधि द्वारा अलग किया जाता है?
(क) हस्तचयन
(ख) गहाई (थ्रेशिंग)
(ग) छानना
(घ) उड़ाना ।
उत्तर-
(घ) उड़ाना।

प्रश्न (ii)
बर्फ रखे गिलास के बाहर पानी की बूंदों के बनने का कारण है?
(क) गिलास से पानी का वाष्पन
(ख) वायुमंडलीय जल वाष्पों का संघनन
(ग) गिलास से पानी का बाहर आना
(घ) वायुमंडलीय जल वाष्पों का वाष्पन।
उत्तर-
(ख) वायुमंडलीय जल वाष्पों का संघनन।

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प्रश्न (iii)
आपने अपनी माता जी को चावल पकाने से पहले उसमें से मिट्टी पत्थर आदि बाहर निकालते देखा होगा। यह कौन-सी विधि हो सकती है?
(क) हस्तचयन
(ख) निस्तारण
(ग) वाष्पन
(घ) अवसादन ।
उत्तर-
(क) हस्तचयन।

प्रश्न (iv)
हमें मिश्रण में से अंशों के पृथक्करण की आवश्यकता पड़ती है ताकि
(क) दो अलग-अलग पर लाभदायक अंशों को पृथक्करण किया जा सके
(ख) अनुपयोगी अंशों को दूर किया जा सके
(ग) हानिकारक अंशों को अलग किया जा सके
(घ) सभी।
उत्तर-
(घ) सभी।

5. अति लघूत्तर प्रश्न

प्रश्न (i)
अवसादन की परिभाषा दें।
उत्तर-
मिश्रण में से भारी अविलेय कणों के नीचे बैठ जाने की क्रिया को अवसादन कहते हैं।

प्रश्न (ii)
वाष्पन से क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
किसी द्रव को उसके वाष्प रूप में बदलने की प्रक्रिया को वाष्पीकरण कहते हैं।

प्रश्न (iii)
कंबाइन मशीन किस काम के लिए प्रयोग की जाती है?
उत्तर-
कंबाइन मशीन का उपयोग कटाई और निस्यंदन दोनों प्रक्रियाओं के लिए किया जाता है।

6. लघूत्तर प्रश्न

प्रश्न (i)
वाष्पन और संघनन में अंतर बताएँ।
उत्तर-
किसी द्रव को उसके वाष्प रूप में बदलने की प्रक्रिया को वाष्पीकरण कहते हैं। वह प्रक्रिया जिसके द्वारा वाष्प जल में परिवर्तित हो जाती है, संघनन कहलाती है।

प्रश्न (ii)
अवसादन तथा निस्तारण में अंतर बताइए।
उत्तर-
अवसादन – वह विलयन जिसमें किसी विशेष तापमान पर और अधिक विलेय नहीं घुल सकता है, संतृप्त विलयन कहलाता है।
निस्तारण – वह विलयन जिसमें किसी विशेष ताप पर और अधिक विलेय घोला जा सकता है, निस्तारण विलयन कहलाता है।

प्रश्न (iii)
गहाई (थ्रेशिंग) की किस्में बताएँ।
उत्तर-
गहाई (थ्रेशिंग) तीन तरीकों से की जा सकती है-

  1. मैनुअल गहाई (थेशिंग) – यह डंडियों को जमीन पर डंडों से पीटकर या किसी कठोर वस्तु से पटक कर किया जाता है।
  2. जानवरों द्वारा गहाई (थ्रेशिंग) – कुछ जानवरों जैसे बैल को डंठल को रौंदने की अनुमति है।
  3. मशीन द्वारा गहाई (शेशिंग) – आमतौर पर इस उद्देश्य के लिए ग्रैशर का उपयोग किया जाता है।

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7. निबंधात्मक प्रश्न

प्रश्न (i)
पृथक्करण के निम्नलिखित ढंगों की व्याख्या करें।
(क) गहाई (थेशिंग)।
(ख) उगना।
(ग) छानन।
उत्तर-
(क) गहाई (थेशिंग) – थ्रेशिंग अनाज को भूसी से अलग करना है। यह तीनों में से किसी एक विधि का उपयोग करके किया जा सकता है अर्थात

  1. मनुष्यों द्वारा
  2. जानवरों की मदद से और
  3. मशीनों का उपयोग करके।

(ख) उगाना – विनोइंग एक मिश्रण के भारी और हल्के घटकों को हवा या हवा में उड़ाकर अलग करने की एक
विधि है। भूसी से अनाज को अलग करने के लिए निस्यंदन अथवा विनोइंग एक कृषि पद्धति है। इसका उपयोग
संग्रहित अनाज से घास और भूसी या अन्य कीटों को हटाने के लिए भी किया जाता है।

(ग) छानन – यह एक छाननी का उपयोग करके बड़े पदार्थों को छोटे पदार्थों से अलग करने की एक विधि है। यह अलगाव का बहुत आसान और सस्ता तरीका है। मिश्रण में समान आकार के घटकों को छालन अथवा चालन विधि से अलग नहीं किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, आप चाक पाउडर को आटे से अलग नहीं कर सकते।

प्रश्न (ii)
पृथक्करण क्या है? हमें मिश्रण में से अंशों के पृथक्करण की आवश्यकता क्यों पड़ती है?
उत्तर-
पृथक्करण – पृथक्करण का अर्थ है किसी मिश्रण के विभिन्न घटकों को पृथक् करने की प्रक्रिया। हमें निम्नलिखित कारणों से मिश्रण को उसके विभिन्न घटकों में पृथक् करने की आवश्यकता है-

  1. बेकार या हानिकारक घटकों को हटाने के लिए। उदाहरण के लिए, चाय बनाने के बाद चाय की पत्ती निकालना।
  2. उपयोगी घटक प्राप्त करने के लिए। भूसी, मिट्टी आदि को अलग कर गेहूँ/चावल के दाने प्राप्त करने के लिए
  3. शुद्ध नमूना प्राप्त करने के लिए अशुद्धियों को दूर करना। उदाहरण के लिए-गन्ने के रस से चीनी के क्रिस्टल
    या समुद्र के पानी से नमक प्राप्त करना।

Science Guide for Class 6 PSEB पदार्थों का पृथक्करण Intext Questions and Answers

सोचें और उत्तर दें (पेज 41)

प्रश्न 1.
आप टमाटर की टोकरी में से गले हुए टमाटर कैसे अलग करोगे?
उत्तर-
हस्तचयन द्वारा।

प्रश्न 2.
आप एक टोकरी में रखे काले अंगूरों को हरे अंगूरों से कैसे अलग करोगे?
उत्तर-
हस्तचयन दद्वारा।

सोचें और उत्तर दें (पेज 43)

प्रश्न 1.
छंटना तथा उड़ाना विधि में हवा का क्या कार्य है?
उत्तर-
हवा हल्के कणों को उड़ा कर भारी कणों से दूर कर देती है।

प्रश्न 2.
क्या आप इस विधि के साथ चने की दाल तथा मूंग की दाल को अलग कर सकते हो?
उत्तर-
नहीं, इस मिश्रण को निस्यंदन अथवा विनोइंग द्वारा अलग नहीं किया जा सकता है।

सोचें और उत्तर दें (पेज 43)

प्रश्न 1.
क्या आप नमक और आटे को छाननी के साथ अलग कर सकते हो? क्यों या क्यों नहीं ?
उत्तर-
नहीं, इस मिश्रण को छाननी से अलग नहीं किया जा सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि नमक और आटे के कणों का आकार लगभग समान होता है।

सोचें और उत्तर दें (पेज 45)

प्रश्न 1.
आपको एक बीकर में कुछ चाक पाउडर और पानी का घोल दिया गया है। बीकर को कुछ देर बिना हिलाए पड़ा रहने दें। आप क्या देखेगें? यह पृथक्करण की कौन-सी विधि है ?
उत्तर-
बीकर को कुछ देर तक बिना हिलाए रखने पर हम देखते हैं कि चाक तलछट के रूप में तल पर जमा हो जाएगा। अघुलनशील कणों के तल पर बसने की इस प्रक्रिया को अवसादन कहते हैं।

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सोचें और उत्तर दें (पेज 46)

प्रश्न 1.
आपके पिता जी आपको बाज़ार में ताज़े संतरे का रस लाने के लिए कहते हैं। क्या आपने जूस में से पल्प (फोक) तथा बीज अलग करने के लिए छाननी को प्रयोग करते हुए देखा है ? कौन-सी छाननी इस काम के लिए बढ़िया रहेगी? चाय छानने वाली, फिल्टर पेपर, मलमल का कपड़ा या बड़े छेदों वाली छाननी।
उत्तर-
सबसे अच्छी छाननी वह होगी जिसमें गूदे के कणों और बीजों के आकार से छोटे छेद हों। दी गई छाननीयों में से हम मलमल के कपड़े का उपयोग कर सकते हैं। हम चाय की छाननी और फिल्टर पेपर का भी उपयोग कर सकते हैं लेकिन इससे पृथक्करण बहुत धीमी गति से होगा । बड़े छेद वाली छाननी से पल्प अलग नहीं होगा।

सोचें और उत्तर दें (पेज 47)

प्रश्न 1.
दूध से “खोया” बनाने के लिए कौन-सी विधि अपनाई जाती है ?
उत्तर-
हम वाष्पीकरण नामक प्रक्रिया द्वारा दूध से “खोया” तैयार करते हैं।

सोचें और उत्तर दें (पेज 48)

प्रश्न 1.
पानी से भाप बनने की प्रक्रिया को क्या कहते हैं ?
उत्तर-
वह प्रक्रिया जिसके द्वारा जल वाष्प में परिवर्तित हो जाता है, वाष्पीकरण कहलाती है।

प्रश्न 2.
भाप से पानी बनने की प्रक्रिया को क्या कहते हैं?
उत्तर-
वह प्रक्रिया जिसके द्वारा वाष्प जल में परिवर्तित हो जाते हैं, संघनन कहलाती है।

PSEB Solutions for Class 6 Science पदार्थों का पृथक्करण Important Questions and Answers

1. बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न (i)
आम और अमरूद के ढेर में से आम पृथक् कर सकते हैं-
(क) छान कर
(ख) फटकन द्वारा
(ग) हाथ से बीन कर
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(ग) हाथ से बीन कर।

प्रश्न (ii)
निष्पावन विधि द्वारा हल्के पदार्थों को ………………….. वस्तुओं से पृथक् किया जाता है।
(क) भारी
(ख) कठोर
(ग) हल्की बड़ी
(घ) सभी विकल्प।
उत्तर-
(क) भारी।

प्रश्न (iii)
अन्नकणों से डंडियों को पृथक् करने की विधि को कहते हैं-
(क) थ्रेशिंग
(ख) हस्तचयन
(ग) निष्पादन
(घ) चालन।
उत्तर-
(क) थ्रेशिंग।

प्रश्न (iv)
इस विधि में वायु की सहायता से मिश्रण के अवयव पृथक किए जाते हैं-
(क) चालन
(ख) निष्पादन
(ग) थ्रेशिंग
(घ) निस्यंदन।
उत्तर-
(ख) निष्पादन।

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प्रश्न (v)
आटे में से चोकर और अन्य अशुद्धियों को पृथक् करने के लिए हम उपयोग करते हैं-
(क) वायु का
(ख) हाथों का
(ग) छाननी (चालनी) का
(घ) पानी का।
उत्तर-
(ग) छाननी (चालनी) का।

प्रश्न (vi)
जब मिश्रण के अवयवों के आमापों में अंतर कम होता है तो यह विधि अपनाई जाती है-
(क) निस्तारण
(ख) चालन
(ग) निष्पादन
(घ) हस्तचयन।
उत्तर-
(ख) चालन।

प्रश्न (vii)
फिल्टर या निस्पंदन के लिए मुख्यता उपयोग होती है-
(क) फिल्टर पत्र
(ख) बारीक कपड़ा
(ग) छाननी
(घ) सभी विकल्प।
उत्तर-
(घ) सभी विकल्प।

प्रश्न (viii)
दो ऐसे द्रव जो परस्पर मिश्रित नहीं होते, उनके पृथक्करण की विधि का नाम है-
(क) अवसादन
(ख) निस्तारण
(ग) निस्यंदन
(घ) चालन।
उत्तर-
(ख) निस्तारण।

प्रश्न (ix)
जब जल के मिश्रण में अधिक नमक नहीं घुल सकता उसे कहते हैं-
(क) संतृप्त विलयन
(ख) असंतृप्त विलयन
(ग) अशुद्ध विलयन
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(क) संतृप्त विलयन।

प्रश्न (x)
चावल में से धूल कणों को ……………………… विधि द्वारा पृथक् करते हैं।
(क) चालन
(ख) हस्तचयन
(ग) निष्पादन
(घ) सभी विकल्प।
उत्तर-
(क) चालन।

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2. खाली स्थान भरें

(i) अशुद्ध पदार्थों को ……………………. भी कहा जाता है।
उत्तर-
मिश्रण

(ii) दानों को डंठलों से अलग करना ………………… कहलाता है ।
उत्तर-
गहाई

(iii) वाष्प के द्रव में बनने को ………………………. कहा जाता है ।
उत्तर-
संघनन

(iv) जिस विलयन में और पदार्थ घुल सकता है, उसे ……………………….. विलयन कहते हैं।
उत्तर-
असंतृप्त

(v) …………………… और संघनन एक दूसरे के …………………… हैं।
उत्तर-
वाष्पीकरण, उल्ट।

3. सही या ग़लत चुनें

(i) चावल से कंकड़ छाननी से अलग किए जाते हैं।
उत्तर-
ग़लत

(ii) घुलनशीलता तापमान पर निर्भर करती है।
उत्तर-
सही

(iii) असंतृप्त विलयन में और पदार्थ नहीं घुल सकता है।
उत्तर-
ग़लत

(iv) कंबाइन द्वारा फूलों से बीजों को अलग किया जाता है।
उत्तर-
ग़लत

(v) शुद्ध पदार्थों की संरचना और गुण निश्चित होते हैं।
उत्तर-
सही

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4. कॉलम ‘क’ और कॉलम ‘ख’ का उचित मिलान करें

कॉलम ‘क’ कॉलम ‘ख’
(i) पानी से भाप बनना (a) भाप से पानी बनना
(ii) अनाज को भूसे से अलग करना (b) हस्तचयन
(iii) गेहूँ से छोटे कंकड़ों को अलग करना (c) थैशिंग तथा निस्यंदन
(iv) संघनन (d) चालन
(v) आटे से चोकर को अलग करना (e) वाष्पीकरण

उत्तर-

कॉलम ‘क’ कॉलम ‘ख’
(i) पानी से भाप बनना (e) वाष्पीकरण
(ii) अनाज को भूसे से अलग करना (c) थैशिंग तथा निस्यंदन
(iii) गेहूँ से छोटे कंकड़ों को अलग करना (b) हस्तचयन
(iv) संघनन (a) भाप से पानी बनना
(v) आटे से चोकर को अलग करना (d) चालन

5. अति लघूत्तर प्रश्न

प्रश्न 1.
जल के किसी नमूने में रेत को किस विधि द्वारा पृथक् करेंगे ?
उत्तर-
अवसादन विधि द्वारा।

प्रश्न 2.
दूध से मक्खन निकालने के लिए किस विधि का प्रयोग किया जाता है ?
उत्तर-
मथन विधि का।

प्रश्न 3.
चावल से बारीक रेत के कणों को किस विधि द्वारा पृथक् किया जाता है?
उत्तर-
हस्तचयन।

प्रश्न 4.
गेहूँ से भूसे को पृथक् करने के लिए किस विधि का प्रयोग किया जाता है ?
उत्तर-
निष्पादन।

प्रश्न 5.
चाय बनाते समय चाय की पत्तियों को द्रव से कैसे पृथक् किया जाता है ?
उत्तर-
छाननी द्वारा।

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प्रश्न 6.
पृथक्करण की कौन-सी विधियाँ हैं ?
उत्तर-
हस्तचयन, थ्रेशिंग, निष्पादन, अवसादन, निस्तारण तथा निस्यंदन।

प्रश्न 7.
हस्तचयन विधि क्या है ?
उत्तर-
हस्तचयन विधि का उपयोग गेहूँ, चावल तथा दालों में कुछ बड़े मिट्टी के कणों, पत्थर तथा भूसे को पृथक् किया जाता है।

प्रश्न 8.
श्रेशिंग क्या है ?
उत्तर-
थ्रेशिंग – डंडियों से अनाज को पृथक् करने के प्रक्रम को थ्रेशिंग कहते हैं। आजकल श्रेशिंग का कार्य मशीनों से किया जाता है।

प्रश्न 9.
निष्पादन किसे कहते हैं ?
उत्तर-
निष्पादन विधि का उपयोग पवन अथवा वायु के झोकों द्वारा मिश्रण से भारी तथा हल्के अवयवों को पृथक करने में किया जाता है। किसान इस विधि से हल्के भूसे को भारी अन्न कणों से पृथक् करने के लिए करते हैं।

प्रश्न 10.
चालन विधि क्या है ?
उत्तर-
चालन विधि – चालन विधि द्वारा पत्थर, डंडियाँ तथा भूसा जो निष्पादन तथा थ्रेशिंग विधि के उपयोग के बाद गेहूँ में रह जाते हैं, को दूर किया जाता है। भवन निर्माण के समय रेत से कंकर तथा पत्थर पृथक् करने के लिए भी इसका उपयोग किया जाता है।

प्रश्न 11.
चावल तथा दालों को पकाने से पहले हल्की अशुद्धियों को किस विधि से पृथक् किया जा सकता है ?
उत्तर-
हस्तचयन या अवसादन विधि द्वारा हल्की अशुद्धियों को पृथक् किया जाता है।

प्रश्न 12.
निस्तारण किसे कहते हैं ?
उत्तर-
निस्तारण – अवसादित मिश्रण को बिना हिलाए जल को मिट्टी सहित उड़ेलने की क्रिया को निस्तारण कहते हैं।

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प्रश्न 14.
जल में नमक को पृथक् करने के लिए किस विधि का प्रयोग किया जाता है ?
उत्तर-
वाष्पण।

प्रश्न 15.
संतृप्त विलयन किसे कहते हैं ?
उत्तर-
संतृप्त विलयन – जब किसी विलयन में उसी तापमान पर अधिक विलेय नहीं घुल सकता तो ऐसे विलयन को संतृप्त विलयन कहते हैं।

प्रश्न 16.
असंतृप्त विलयन किसे कहते हैं ?
उत्तर-
असंतृप्त विलयन – जब किसी विलयन में एक निश्चित तापमान पर अधिक विलेय घुल सकता, उसे अंसृप्त विलयन कहते हैं।

6. लघूत्तर प्रश्न

प्रश्न 1.
समुद्र के जल से साधारण नमक कैसे प्राप्त किया जाता है ?
उत्तर-
समुद्र के जल को लैगून में इकट्ठा किया जाता है। सूर्य की गर्मी से जल वाष्पित हो जाता है तथा नमक पीछे रह जाता है। यह नमक बाद में गट्ठों के रूप में एकत्रित कर लिया जाता है।

प्रश्न 2.
गेहूँ, चीनी तथा भूसा के मिश्रण को पृथक करने के लिए उपयोग में आने वाली विधि बताएं।
उत्तर-
गेहूँ, चीनी तथा भूसा के मिश्रण में से भूसे को निष्पादन विधि से अलग कर लेते हैं। शेष चीनी और गेहूँ को छाननी विधि द्वारा अलग किया जा सकता है।

प्रश्न 3.
द्रव में दिए गए पदार्थ को पृथक् करने में प्रयुक्त पाँच विधियों के नाम बताओ। प्रत्येक की एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
द्रव में दिए गए पदार्थ को अलग करने की विधियाँ निम्नलिखित हैं-

  1. निस्यंदन – पानी तथा रेत के मिश्रण में से पानी को अलग करना।
  2. वाष्पण – समुद्रीय जल से नमक को अलग करना।
  3. आसवन – नमकीन पानी से शुद्ध पानी को अलग करना।
  4. मथन – दूध से मक्खन निकालना।
  5. पृथक्करणीय कीप – कैरोसीन तथा पानी के मिश्रण से कैरोसीन को अलग करना।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित की परिभाषा दीजिए-
(i) आसवन
(ii) अवसादन।
उत्तर-
(i) आसवन – वह विधि जिसमें एक द्रव को उबाल कर वाष्पों में परिवर्तित किया जाता है और उन वाष्पों को ठंडा करके शुद्ध द्रव में संघनित किया जाता है, आसवन कहलाती है।

(ii) अवसादन – मिश्रण में जल मिलाने पर भारी अवयवों के नीचे तली में बैठ जाने के प्रक्रम को अवसादन कहते हैं।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 5 पदार्थों का पृथक्करण

प्रश्न 5.
दही से मक्खन को पृथक् करने के लिए दही का मथन क्यों किया जाता है ?
उत्तर-
जब दही का मथन किया जाता है तो मक्खन के कण अलग हो जाते हैं। क्योंकि मक्खन के कण शेष कणों से हल्के होते हैं। वे लस्सी पर तैरते रहते हैं और आसानी से अलग किये जा सकते हैं। इसलिए मक्खन को दही से अलग करने के लिए मथन किया जाता है।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित मिश्रण को पृथक करने में अवयवों के किस गुण का उपयोग किया जाता है ?
(i) गेहूँ तथा भूसा
(ii) रेत तथा नमक
उत्तर-
(i) गेहूँ तथा भूसा – गेहूँ भारी होने के कारण ज़मीन पर गिर जाता है जबकि भूसा हल्का होने के कारण हवा में फैलता है।
(ii) रेत तथा नमक – नमक के क्रिस्टल बनाए जा सकते हैं। रेत पानी में नहीं घुलती है।

प्रश्न 7.
चट्टानी नमक से शुद्ध नमक प्राप्त करने की विधि का वर्णन करो।
उत्तर-
चट्टानी नमक से शुद्ध नमक प्राप्त करना-चट्टानी नमक से शुद्ध नमक प्राप्त करने के लिए सबसे पहले चट्टानी नमक को बारीक पीस कर गर्म कर पानी में घोल लिया जाता है। इसके पश्चात् विलयन में से अघुलनशील अशुद्ध पदार्थों को फिल्टर से छान लिया जाता है। अब शुद्ध नमक से फिल्टरित घोल को चीनी की प्याली में डाल कर स्पिरिट लैंप पर गर्म किया जाता है। इससे पानी वाष्पित हो जाता है तथा शुद्ध नमक ठोस क्रिस्टलों के रूप में प्राप्त कर लिया जाता है।
PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 5 पदार्थों का पृथक्करण 1

प्रश्न 8.
घर में दूध से पनीर कैसे बनाया जाता है ? उसमें कौन-सी विधि का प्रयोग किया जाता है ?
उत्तर-
पनीर बनाना-निस्यंदन विधि का उपयोग करके दूध से पनीर बनाया जाता है। तुमने देखा होगा कि, पनीर बनाने के लिए दूध को उबालने से पहले उसमें नींबू का रस मिलाया जाता है। ऐसा करने पर पनीर के ठोस कणों तथा द्रव का मिश्रण प्राप्त होता है। पनीर को इस मिश्रण से कपड़े या छाननी से फिल्टर करके पृथक् किया जाता है।

प्रश्न 9.
अवसादन विधि को एक उदाहरण देते हुए समझाइये।
उत्तर-
अवसादन विधि – एक काँच का बर्तन लो। उसका 2/3 भाग पानी से भर दो। अब उसमें थोड़ी-सी मात्रा में रेत डालो। बर्तन को कुछ समय के लिए एक ओर रख दो। कुछ समय के पश्चात् आप देखोगे कि रेत के कण बर्तन के नीचे वाले सिरे पर बैठ गए
हैं। यह अवसादन को दर्शाने की सबसे सरल तथा आसान विधि है।
PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 5 पदार्थों का पृथक्करण 2

प्रश्न 10.
निम्नलिखित पर नोट लिखो-
(i) आसवन
(ii) वाष्पण।
उत्तर-
(i) आसवन – वह विधि जिसमें द्रव को उबालने से वाष्प बनते हैं तथा ऐसे बने वाष्पों को ठंडा करके द्रव में परिवर्तित किया जाता है आसवन कहलाती है। आसवित जल सभी अशुद्धियों से स्वतंत्र हो जाता है। यह विधि ऐसे द्रव को शुद्ध करने में प्रयुक्त होती है जिसमें घुलनशील तथा अघुलनशील अशुद्धियां होती हैं। उदाहरण के लिए समुद्रीय जल को इस तरह शुद्ध किया जाता है।

(ii) वाष्यण – द्रव का वाष्प में बदलने के धीमे परिवर्तन को वाष्पण कहते हैं। यह क्रिया द्रव की सतह पर होती है। यह क्रिया विलयन में से घुलनशील ठोस पदार्थ को अलग करने में प्रयुक्त होती है।

इस विधि में घुलनशील ठोस सहित घोल को एक चौड़ी मुंह वाली बोतल में रखकर गर्म किया जाता है। इसके फलस्वरूप द्रव वाष्प में परिवर्तित हो जाता है तथा ठोस पदार्थ शेष बच जाता है। यह विधि समुद्रीय जल से नमक प्राप्त करने के लिए उपयोग की जाती है।

प्रश्न 11.
फटकन तथा निस्यंदन (Winnowing) द्वारा किस प्रकार पृथक्करण होता है?
उत्तर-
यदि मिश्रण में एक अंश हल्का तथा दूसरा अंश भारी हो तो इस विधि द्वारा पवन के झोंके के प्रभाव अधीन दोनों अंशों को पृथक्-पृथक् एकत्रित किया जाता है। प्रायः किसान निस्यंदन विधि का उपयोग कर भूसे के हल्के कणों को अनाज के भारी कणों से पृथक् करते हैं। मिश्रण को खुले बर्तन या अखबार पर रख कर मैदान में ऊँचे समतल स्थान पर खड़े होकर कंधों से ऊपर ले जाकर टेढ़ा करते हैं ताकि मिश्रण नीचे ढलान की ओर खिसकना आरंभ करे। अब वायु के झोंके के अधीन हल्के कण दूर उड़ जाते हैं जबकि भारी कण निकट गिरते हैं। इस प्रकार हल्के तथा भारी कण पृथक् कर लिए जाते हैं।

7. निबंधात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
पानी में नमक के घोल में से शुद्ध पानी को कैसे अलग किया जाता है ?
उत्तर-
नमक के घोल से शुद्ध पानी को प्राप्त करने के लिए हम आसवन विधि का प्रयोग करते हैं।
आसवन विधि-
PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 5 पदार्थों का पृथक्करण 3
रिटार्ट में नमक का घोल लिया जाता है। रिटार्ट का मुंह ढक्कन से बंद कर दिया जाता है तथा इसकी गर्दन ठंडे पानी में रखी फ्लास्क में फिट की जाती है। एक गीला कपड़ा फ्लास्क के ऊपर रखा जाता है और इस बात का ध्यान रखा जाता है कि कपड़ा गीला रहे।

रिटार्ट में पड़े घोल को अब गर्म किया जाता है। कुछ देर बाद पानी उबलना शुरू कर देता है तथा इस तरह बनी भाप फ्लास्क में चली जाती है। फ्लास्क में भाप ठंडी होकर पानी के कणों में परिवर्तित हो जाती है जो फ्लास्क में एकत्रित हो जाती है। इस तरह एकत्रित पानी शुद्ध होता है।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 5 पदार्थों का पृथक्करण

प्रश्न 2.
एक मिश्रण में से पानी तथा गंधक को कैसे अलग करोगे ?
उत्तर-
पानी तथा गंधक के मिश्रण को बीकर में लो। कोप को स्टैंड में कीप को रखो। कीप के नीचे एक साफ़ बीकर रखो। फिल्टर पेपर की इस तरह तहें बनाओ ताकि एक तरफ तीन तथा एक तरफ एक तह हो।
PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 5 पदार्थों का पृथक्करण 4

इसको कीप में रखो। मिश्रण को शीशे की छड़ से धीरे-धीरे कीप में डालो। द्रव या पानी धीरे-धीरे नीचे बीकर में आ जाएगा जो गंधक से बिल्कुल स्वतंत्र होता है। इस द्रव को फिल्ट्रेट कहते हैं। ठोस गंधक फिल्टर पर शेष रह जाएगा। फिल्टर पेपर को कीप से आराम से अलग करके गंधक को सुखा लिया जाता है।

प्रश्न 3.
क्रिस्टलीकरण किसे कहते हैं ? आप फिटकरी से रवे (क्रिस्टल) किस प्रकार प्राप्त करोगे ?
उत्तर-
क्रिस्टलीकरण – यह पृथक्करण की वह विधि है जिसके द्वारा किसी द्रव में विलेय अशुद्ध ठोस पदार्थ के विलयन से शुद्ध पदार्थ प्राप्त किया जाता है। शुद्ध पदार्थ प्राप्त करने के लिए गर्म द्रव में जितना भी अशुद्ध पदार्थ घुल सके, घोल लिया जाता है। इसके पश्चात् घोल में से अघुलनशील अशुद्ध पदार्थों को फिल्टर द्वारा छान लिया जाता है। अब संतृप्त गर्म घोल को ठंडा करने पर शुद्ध ठोस पदार्थ के क्रिस्टल प्राप्त हो जाते हैं।
PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 5 पदार्थों का पृथक्करण 5
फिटकरी के क्रिस्टल (रवे) बनाने की विधि-एक बीकर को लगभग आधा पानी से भरो। इसमें थोड़ा-सा फिटकरी का पाऊडर डाल कर घोल को गर्म करो। फिटकरी का पाऊडर तब तक डालते जाओ जब तक कि वह घोल में घुल सके। अब
जल में फिटकरी का विलयन गर्म घोल को गिलास में छान लो जैसा कि चित्र में दिखाया गया है। अब गिलास को ठंडा होने दीजिए।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 4 वस्तुओं के समूह बनाना

Punjab State Board PSEB 6th Class Science Book Solutions Chapter 4 वस्तुओं के समूह बनाना Textbook Exercise Questions, and Answers.

PSEB Solutions for Class 6 Science Chapter 4 वस्तुओं के समूह बनाना

PSEB 6th Class Science Guide वस्तुओं के समूह बनाना Textbook Questions, and Answers

1. खाली स्थान भरें

(i) लकड़ी से बनाई जा सकने वाली पाँच चीज़ों के नाम लिखें।
…………….., ………………….., ………………., ……………., …………………….. .
(ii) चीनी पानी में …………………….. है।
उत्तर-
(i) मेज़, कुर्सी, हल, दरवाजा और क्रिकेट बैट।
(ii) घुलनशील।

2. सही या ग़लत

(i) पत्थर पारदर्शी होता है।
उत्तर-
ग़लत

(ii) एक लकड़ी का टुकड़ा पानी के ऊपर तैरता है।
उत्तर-
सही

(iii) खिड़कियों का काँच अपारदर्शी होता है।
उत्तर-
ग़लत

(iv) तेल पानी में घुल जाता है।
उत्तर-
ग़लत

(v) सिरका पानी में पूर्ण घुलनशील है।
उत्तर-
सही।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 4 वस्तुओं के समूह बनाना

3. कॉलम ‘क’ का कॉलम ‘ख’ से उचित मिलान करें

कॉलम ‘क’ कॉलम ‘ख’
(i) पुस्तक (क) शीशा
(ii) गिलास (ख) लकड़ी
(iii) कुर्सी (ग) कागज़
(iv) खिलौना (घ) चमड़ा
(v) बूट (ङ) प्लास्टिक

उत्तर-

कॉलम ‘क’ कॉलम ‘ख’
(i) पुस्तक (ग) कागज़
(ii) गिलास (क) काँच
(iii) कुर्सी (ख) लकड़ी
(iv) खिलौना (ङ) प्लास्टिक
(v) बूट (घ) चमड़ा

4. सही विकल्प का चयन करें

प्रश्न (i)
निम्नलिखित में से कौन-सा पदार्थ नहीं है ?
(क) पानी
(ख) ध्वनि
(ग) हवा
(घ) फल ।
उत्तर-
(ख) ध्वनि।

प्रश्न (ii)
कौन-सा गुण सभी में साँझा होता है?
(क) पदार्थ स्थान घेरते हैं पर पुंज नहीं होता।
(ख) पदार्थ स्थान घेरते हैं परंतु कुछ पुंज होता है।
(ग) पदार्थ स्थान घेरते हैं पर पुंज होता है।
(घ) पदार्थ स्थान घेरते हैं पर उनका पुंज हो सकता है तथा नहीं भी हो सकता है।
उत्तर-
(ग) पदार्थ स्थान घेरते हैं पर पुंज होता है।

प्रश्न (iii)
निम्नलिखित में से क्या पारदर्शी है?
(क) लकड़ी
(ख) काँच
(ग) कागज़
(घ) प्लास्टिक ।
उत्तर-
(ख) काँच।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 4 वस्तुओं के समूह बनाना

5. अति लघूत्तर प्रश्न

प्रश्न (i)
पारदर्शी वस्तुएँ क्या होती हैं?
उत्तर-
वे पदार्थ जिनके पार स्पष्ट देखा जा सकता है, पारदर्शी कहलाती हैं।

प्रश्न (ii)
अपारदर्शी वस्तुएँ क्या होती हैं?
उत्तर-
वे वस्तुएँ जिनके पार नहीं देखा जा सकता, अपारदर्शी कहलाती हैं।

प्रश्न (iii)
पारभासी वस्तुएँ क्या होती हैं?
उत्तर-
वे वस्तुएँ जिनके पार स्पष्ट रूप से नहीं अपितु आंशिक रूप से ही देख जा सकता है, पारभासी कहलाती हैं।

6. लघूत्तर प्रश्न

प्रश्न (i)
पारदर्शी वस्तुओं तथा अपरादर्शी वस्तुओं में अंतर बताएँ। उदाहरण दें।
उत्तर-
वे पदार्थ जिनके पार स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है, पारदर्शी पदार्थ कहलाते हैं। उदाहरण हैं काँच, साफ पानी, वायु आदि। वे पदार्थ जिनके पार स्पष्ट रूप से नहीं अपितु आंशिक रूप से ही देखा जा सकता है, पारभासी पदार्थ कहलाते हैं। उदाहरण हैं खिड़कियों में इस्तेमाल किया जाने वाला फ्रॉसटिड काँच, तैलीय पैच वाला कागज, आदि।

प्रश्न (ii)
निम्नलिखित में से चमकीली वस्तुएँ चुनें
काँच का डोंगा, प्लास्टिक का मग, स्टील की कुर्सी, सूती कमीज़, सोने की चेन, चाँदी की मुद्रिका।
उत्तर-
कांच का कटोरा, स्टील की कुर्सी, सोने की चेन और चाँदी की अंगूठी।

7. निबंधात्मक प्रश्न

प्रश्न (i)
क्या सभी तरल पानी में घुलनशील होते हैं?
उत्तर-
नहीं, सभी तरल पानी में घुलनशील नहीं होते हैं। जब पानी में हम कुछ तरल मिलाते हैं तो हमें तीन बातें दिखाई देती हैं। कुछ तरल पानी में पूरी तरह से घुल जाएंगे। कुछ तरल पदार्थ पानी में केवल आंशिक रूप से घुलेंगे। कुछ तरल पदार्थ पानी में बिल्कुल भी नहीं घुलेंगे।

  1. वे तरल जो पानी में घुल जाते हैं, मिश्रणीय तरल अथवा द्रव कहलाते हैं। उदाहरण सिरका और पानी हैं।
  2. वे तरल जो पानी में बिल्कुल भी नहीं घुलते हैं, अमिश्रणीय तरल अथवा द्रव कहलाते हैं। उदाहरण तेल और पानी हैं।
  3. वे तरल जो पानी में केवल आंशिक रूप से घुलते हैं, आंशिक रूप से मिश्रणीय द्रव कहलाते हैं। उदाहरण फिनोल और पानी हैं।

प्रश्न (ii)
पानी के ऊपर तैरने वाली चार वस्तुओं तथा पानी के ऊपर न तैरने वाली पाँच वस्तुओं की सूची
उत्तर-
कोई वस्तु पानी में डालने पर तैरेगी अथवा डूब जाएगी, इस का निर्णय उस वस्तु तथा पानी के घनत्व की तुलना करके किया जा सकता है ।

जिन वस्तुओं का घनत्व पानी के घनत्व से कम होगा वे पानी पर तैरने लगेंगी। ऐसी वस्तुएँ जो पानी पर तैर सकती हैं के उदाहरण हैं – सूखे पत्ते, लकड़ी का टुकड़ा, कॉर्क का टुकड़ा, कागज, कार्डबोर्ड, कपड़ा आदि ।

जिन वस्तुओं का घनत्व पानी से अधिक होता है वे पानी पर तैर नहीं सकती हैं। ऐसी वस्तुएँ जो पानी पर तैर नहीं सकती के उदाहरण हैं-लोहे से बनी वस्तुएं, सोने की अंगूठी, चाँदी की चेन, पत्थर, सीसे की गेंद आदि ।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 4 वस्तुओं के समूह बनाना

Science Guide for Class 6 PSEB वस्तुओं के समूह बनाना Intext Questions and Answers

सोचें और उत्तर दें (पेज 33)

प्रश्न 1.
पदार्थ किसे कहते हैं ?
उत्तर-
हमारे चारों ओर सामग्री पदार्थ हैं क्योंकि सभी वस्तुएँ जगह घेरती हैं तथा उनका पुंज होता है।

सोचें और उत्तर दें (पेज 36)

प्रश्न 1.
किसी वस्तु का घनत्व पानी के घनत्व से कम होता है। क्या यह पानी में डूबेगी या तैरेगी?
उत्तर-
यह पानी पर तैरेगी।

सोचो और उत्तर दें (पेज 37)

प्रश्न 1.
क्या साफ पानी पारदर्शी, पारभासी या अपारदर्शी होता है?
उत्तर-
साफ पानी परदर्शी होता है।

PSEB Solutions for Class 6 Science वस्तुओं के समूह बनाना Important Questions and Answers

1. बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न (i)
वस्तुओं में भिन्नता होने का कारण है-
(क) आकृति
(ख) रंग
(ग) गुण
(घ) सभी विकल्प।
उत्तर-
(घ) सभी विकल्प।

प्रश्न (ii)
संतरे और घड़े जैसी वस्तुएँ होती हैं-
(क) गोल
(ख) आयताकार
(ग) त्रिकोणी
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(क) गोल।

प्रश्न (iii)
खाद्य पदार्थ का उदाहरण है-
(क) चाक
(ख) कपास
(ग) गेहूँ
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(ग) गेहूँ।

प्रश्न (iv)
एक थाली इस्पात, काँच के अतिरिक्त हो सकती है-
(क) प्लास्टिक का
(ख) चमड़े की
(ग) तागों की
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(क) प्लास्टिक का।

प्रश्न (v)
यह पदार्थ चमकीला दिखाई देता है-
(क) सूती कपड़ा
(ख) लकड़ी का डिब्बा
(ग) ताँबे की तार
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(ग) ताँबे की तार।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 4 वस्तुओं के समूह बनाना

प्रश्न (vi)
यह खनिज नहीं है-
(क) एल्यूमिनियम
(ख) ताँबा
(ग) चाँदी
(घ) रेत।
उत्तर-
(घ) रेत।

प्रश्न (vii)
पानी में घुलनशील पदार्थ हैं-
(क) नमक
(ख) शक्कर
(ग) नील
(घ) सभी विकल्प।
उत्तर-
(घ) सभी विकल्प।

प्रश्न (viii)
जल पर तैरने वाली वस्तु नहीं है-
(क) गेंद
(ख) पत्थर
(ग) साड़ी
(घ) पंख।
उत्तर-
(ख) पत्थर।

प्रश्न (ix)
जिन पदार्थों में से प्रकाश गुज़र सके उन्हें कहते हैं-
(क) पारदर्शी
(ख) पारभासी
(ग) अपारदर्शी
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(क) पारदर्शी।

प्रश्न (x)
काँच उदाहरण है-
(क) पारदर्शी
(ख) पारभासी
(ग) अपारदर्शी
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(क) पारदर्शी।

प्रश्न (xi)
पदार्थ कितने प्रकार का होता है ?
(क) एक
(ख) दो
(ग) तीन
(घ) चार।
उत्तर-
(क) एक।

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2. खाली स्थान भरें

(i) नमक पानी में ……………………. जाता है।
उत्तर-
घुल

(ii) रबर पानी में ……………….. नहीं है।
उत्तर-
घुलनशील

(iii) प्रकाश ……………………….. वस्तुओं के पार हो जाता है।
उत्तर-
पारदर्शी

(iv) प्रकाश ……………….. वस्तुओं के पार नहीं जाता है।
उत्तर-
अपारदर्शी

(v) सोना और चाँदी ……………………… है।
उत्तर-
धातुएँ ।

3. सही या ग़लत चुनें

(i) रबर और प्लास्टिक धातुएँ हैं।
उत्तर-
ग़लत

(ii) काँच पारदर्शी होता है।
उत्तर-
सही

(iii) धातुएँ गर्म करने पर फैलती हैं।
उत्तर-
सही

(iv) कार्बन-डाइऑक्साइड पानी में नहीं घुलती है।
उत्तर-
ग़लत

(v) सूर्य का प्रकाश एक पदार्थ है।
उत्तर-
ग़लत

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4. कॉलम ‘क’ और कॉलम ‘ख’ का उचित मिलान करें

कॉलम ‘क’ कॉलम ‘ख’
(i) कॉपर (a) पानी में डूब जाता है
(ii) काँच (b) धातु
(iii) रबड़ की गेंद (c) चमड़ा
(iv) पत्थर (d) पारदर्शी
(v) जूते (e) पानी पर तैरती है

उत्तर-

कॉलम ‘क’ कॉलम ‘ख’
(i) कॉपर (b) धातु
(ii) काँच (d) पारदर्शी
(iii) रबड़ की गेंद (e) पानी पर तैरती है
(iv) पत्थर (a) पानी में डूब जाता है
(v) जूते (c) चमड़ा

5. अति लघूत्तर प्रश्न

प्रश्न 1.
वस्तुओं में क्या भिन्नताएँ होती हैं ?
उत्तर-
सभी वस्तुओं की आकृतियां, रंग तथा गुण भिन्न-भिन्न होते हैं।

प्रश्न 2.
वस्तुओं के समूह बनाने के कौन-से ढंग हैं ?
उत्तर-
वस्तुओं के समूह बनाने के बहुत-से ढंग हैं। उनको आकृतियों तथा जिस पदार्थ से बने हैं, के आधार पर बाँटा जा सकता है।

प्रश्न 3.
वस्तुएँ किन पदार्थों से बनी होती हैं ?
उत्तर-
सभी वस्तुएँ काँच, धातुएँ, प्लास्टिक, लकड़ी, रूई, कागज़, मृदा से बनी होती हैं।

प्रश्न 4.
लकड़ी से कौन-कौन सी वस्तुएँ बन सकती हैं ?
उत्तर-
लकड़ी से मेज़, कुर्सी, हल, बैलगाड़ी, खिलौने, बैट, हाकी, दरवाजे, खिड़कियाँ और अन्य कई वस्तुएं बन सकती हैं।

प्रश्न 5.
चमड़े से कौन-सी वस्तुएँ बनाई जा सकती हैं ?
उत्तर-
चमड़े से बैग, पर्स, जूतियां, बूट, बैल्ट, जैक्ट आदि बनाये जा सकते हैं।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 4 वस्तुओं के समूह बनाना

प्रश्न 6.
कागज़ से कौन-सी वस्तुएँ बनाई जाती हैं ?
उत्तर-
कागज़ से पुस्तकें, नोटबुक, समाचार-पत्र, खिलौने, कैलेंडर, डायरियां आदि बनाई जाती हैं।

प्रश्न 7.
प्लास्टिक से कौन-सी वस्तुएँ बनाई जा सकती हैं ?
उत्तर-
प्लास्टिक से बाल्टियाँ, लंच बॉक्स, खिलौने, जल पात्र, पाइप तथा इसी प्रकार की बहुत-सी वस्तुएँ बनाई जा सकती हैं।

प्रश्न 8.
पदार्थों के कोई चार गुण लिखिए।
उत्तर-
पदार्थों के गुण-

  1. द्युति,
  2. कठोरता,
  3. रुक्ष (खुरदरा) अथवा चिकना
  4. विलेयता।

प्रश्न 9.
धातु किसे कहते हैं ?
उत्तर-
धातु – वह पदार्थ जिस में द्युति (चमक) होती है और जो कठोर होते हैं, उन्हें धातु कहते हैं; जैसे-लोहा, सोना और चाँदी।

प्रश्न 10.
धातुओं के उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
लोहा, ताँबा, ऐलुमीनियम तथा सोना, धातुओं के उदाहरण हैं।

प्रश्न 11.
पानी में विलेय पदार्थों के नाम लिखिए।
उत्तर-
चीनी, नमक, नीला थोथा, शोरा आदि पानी में विलेय पदार्थ हैं।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 4 वस्तुओं के समूह बनाना

प्रश्न 12.
पानी में अविलेय पदार्थों के नाम लिखिए।
उत्तर-
चाक पाऊडर, बालू, मृदा आदि पानी में अविलेय पदार्थ हैं।

प्रश्न 13.
पानी में विलेय द्रवों के नाम लिखिए।
उत्तर-
सिरका और नींबू का रस आदि पानी में विलेय है।

प्रश्न 14.
जल में विलीन होने वाली गैस का नाम लिखिए।
उत्तर-
ऑक्सीजन गैस, जल में विलीन होने वाली गैस है।

प्रश्न 15.
जल में डूबने वाले पाँच पदार्थों के नाम लिखो।
उत्तर-
जल में डूबने वाले पदार्थ – पत्थर, चाबी, सिक्का, कंकर और राजमां।

6. लघूत्तर प्रश्न

प्रश्न 1.
पदार्थ से क्या अभिप्राय है ? पाँच पदार्थों के नाम लिखो।
उत्तर-
पदार्थ – वह सामग्री जिन से भिन्न-भिन्न प्रकार की वस्तुएं बनाती हैं उसे पदार्थ कहते हैं। पाँच पदार्थ-काँच, प्लास्टिक, लोहा, चमड़ा और लकड़ी।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 4 वस्तुओं के समूह बनाना

प्रश्न 2.
उन पदार्थों के नाम बताओ जिनसे एक से अधिक वस्तुएँ बनाई जा सकती हैं ?
उत्तर-
लकड़ी, कागज, चमड़ा, प्लास्टिक, रूई, काँच और धातुओं से एक से अधिक वस्तुएँ बनाई जा सकती हैं।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित वस्तुएं किन पदार्थों की बनी हैं ?
मेज़, कुर्सी, दरवाज़ा, पेपर, पुस्तक, नोटबुक, गिलास, प्लेट, दर्पण, शीशी।
उत्तर-

पदार्थ वस्तुओं के नाम
1. लकड़ी मेज़, कुर्सी, दरवाज़ा।
2. कागज़ पेपर, पुस्तक, नोटबुक।
3. काँच गिलास, प्लेट, दर्पण, शीशी।

प्रश्न 4.
पदार्थों में कौन-से गुण होते हैं ?
उत्तर-
पदार्थों के गुण-

  1. युति
  2. कठोरता
  3. रुक्ष
  4. विलेयता।

प्रश्न 5.
धातुओं के कोई दो गुण बताओ।
उत्तर-

  1. धातुओं में युति (चमक) होती है।
  2. धातुएँ कठोर होती हैं।

प्रश्न 6.
कोमल और कठोर पदार्थों से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
कोमल पदार्थ- जिन पदार्थों को आसानी से संपीड़ित किया जा सके अथवा खरोंचा जा सके उन्हें कोमल पदार्थ कहते हैं।
कठोर पदार्थ – जिन पदार्थों को संपीड़ित नहीं किया जा सकता अथवा खरोंचा नहीं जा सकता उन्हें कठोर पदार्थ कहते हैं।

प्रश्न 7.
विलेय और अविलेय पदार्थ किसे कहते हैं ?
उत्तर-
विलेय पदार्थ – जो पदार्थ पानी में लुप्त हो जाते हैं अथवा घुल जाते हैं उन्हें विलेय पदार्थ कहते हैं; जैसे–चीनी और नमक।
अविलेय पदार्थ – जो पदार्थ पानी में लुप्त अथवा नहीं घुलते उन्हें अविलेय पदार्थ कहते हैं; जैसे-चाक पाउडर, रेत और मृदा आदि।

प्रश्न 8.
क्या द्रव में द्रव विलीन हो सकते हैं ?
उत्तर-
द्रव में कई द्रव विलीन हो जाते हैं परंतु सभी द्रव, द्रवों में विलीन नहीं हो सकते हैं; जैसे-सिरका और नींबू का रस पानी में विलीन अथवा मिश्रित हो जाते हैं। परंतु सरसों का तेल अथवा नारियल का तेल पानी में विलीन अथवा मिश्रित नहीं होता।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 4 वस्तुओं के समूह बनाना

प्रश्न 9.
निम्नलिखित में से कौन-से पदार्थ पानी में तैरते हैं और कौन-से डूब जाते हैं-
सूखे पत्ते, कार्क का टुकड़ा, शहद की बूंद, कंकर, सिक्का, चाबी, चाय की पत्ती, अमरूद का पत्ता, सरसों का तेल।
उत्तर-
पानी में तैरने वाले पदार्थ – सूखे पत्ते, चाय की पत्ती, अमरूद, सरसों का तेल, कार्क का टुकड़ा।
पानी में डूबने वाले पदार्थ – शहद की बूंद, कंकर, सिक्का और चाबी।

प्रश्न 10.
क्या गैसें पानी में विलीन हो सकती हैं ?
उत्तर-
कुछ गैसें पानी में विलेय अथवा घुल सकती हैं, जैसे ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड जैसी गैसें पानी में घुल सकती हैं।

प्रश्न 11.
जीवित रहने के लिए ऑक्सीजन ज़रूरी है। जलीय जीव ऑक्सीजन कैसे प्राप्त करते हैं ?
उत्तर-
हम जानते हैं कि जीवित रहने के लिए ऑक्सीजन ज़रूरी है। जलीय जीव पानी में घुली हुई ऑक्सीजन प्राप्त कर लेते हैं, क्योंकि ऑक्सीजन पानी में विलेय है। इसलिए यह जलीय जीव विलेय ऑक्सीजन ग्रहण करके जीवित रहते हैं।

प्रश्न 12.
हमें पदार्थों को समूह में रखने की आवश्यकता क्यों पड़ती है ?
उत्तर-
दैनिक जीवन में हम प्रायः पदार्थों का समूहन अपनी सुविधा के लिए करते हैं। घर में हम अपनी वस्तुओं का भंडारण सामन्यत: इस प्रकार करते हैं कि जैसे वस्तुएँ एक साथ रखी जा सकें। इस प्रकार की व्यवस्था द्वारा हम आसानी से उनका पता लगा सकते हैं। इसी प्रकार कोई पंसारी प्राय: सभी प्रकार के बिस्कुटों को अपनी दुकान के एक कोने में रखता है। सभी साबुनों को अन्य स्थान पर जबकि अनाज और दालों का भंडारण किसी अन्य स्थान पर करता है।

7. निबंधात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
पारदर्शी, अपारदर्शी और पारभासी पदार्थों की परिभाषा दीजिए और इनके उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
पारदर्शी पदार्थ – जिस पदार्थ में से प्रकाश गुजर सके उस पदार्थ को पारदर्शी पदार्थ कहते हैं, जैसे-काँच, हवा, साफ़ पानी, स्पिरिट और जिन शराब।

अपारदर्शी पदार्थ – जिस पदार्थ में से प्रकाश न गुजर सके उसे अपारदर्शी पदार्थ कहते हैं। इन वस्तुओं में से दूसरी ओर नहीं देखा जा सकता, जैसे-कुर्सी, दीवार, डैस्क, ब्लैकबोर्ड, पुस्तक, पत्थर का टुकड़ा।

पारभासी पदार्थ – जिन पदार्थों में से देखा तो जा सकता है परंतु स्पष्ट रूप में नहीं, उन्हें पारभासी पदार्थ कहते हैं जैसे-चिकना कागज़, धुंधला काँच, सफेद पॉलीथीन आदि।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 4 वस्तुओं के समूह बनाना

प्रश्न 2.
निम्नलिखित पदार्थों से बनी तीन-तीन वस्तुओं के नाम लिखो-
(i) काँच
(ii) मिट्टी
(iii) लकड़ी
(iv) प्लास्टिक
(v) कागज़
(vi) ताँबा।
उत्तर-
(i) काँच-बोतल, गिलास, चूड़ियाँ।
(ii) मिट्टी-गमला, फूलदान, ईंट, घड़ा।
(iii) लकड़ी-मेज़, बैट, दरवाज़ा, सीढ़ी।
(iv) प्लास्टिक-बाल्टी, मग, कंघी।
(v) कागज़-पुस्तक, अखबार, कापी।
(vi) ताँबा-सिक्का, बर्तन, विद्युत् तार।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 3 रेशों से वस्त्र तक

Punjab State Board PSEB 6th Class Science Book Solutions Chapter 3 रेशों से वस्त्र तक Textbook Exercise Questions, and Answers.

PSEB Solutions for Class 6 Science Chapter 3 रेशों से वस्त्र तक

PSEB 6th Class Science Guide रेशों से वस्त्र तक Textbook Questions, and Answers

1. खाली स्थान भरें अलका

(i) सिल्क नर्म तथा …………………….. होती है।
उत्तर-
चमकदार

(ii) …………………… नारियल के बाहर से उतार कर प्राप्त किया जाता है।
उत्तर-
क्वायर

(iii) …………………… तथा …………………… संश्लिष्ट रेशे हैं।
उत्तर-
पॉलिएस्टर, नायलॉन

(iv) कपास एक ………………………….. रेशा है।
उत्तर-
प्राकृतिक

(v) धागा ……………………….. से प्राप्त होता है।
उत्तर-
तंतुओं ।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 3 रेशों से वस्त्र तक

2. सही या ग़लत

(i) पॉलिएस्टर (Polyester) एक प्राकृतिक रेशा है।
उत्तर-
ग़लत

(ii) ऊनाई में एक ही तरह के धागे का प्रयोग किया जाता है।
उत्तर-
सही

(iii) सूती कपड़े गर्मी और नमीयुक्त मौसम में पहनने आरामदायक होते हैं।
उत्तर-
सही

(iv) कपास से बीजों को अलग करने की विधि को रीटिंग कहा जाता है। .
उत्तर-
ग़लत

(v) रेशों से धागा बनाने के लिए उन्हें खींचा और ऐंठा जाता है।
उत्तर-
सही। वृद्धि वृद्धि

3. कॉलम ‘क’ और कॉलम ‘ख’ का उचित मिलान करें

कॉलम ‘क’ कॉलम ‘ख’
(i) पटसन (क) नारियल का बाहरी शैल
(ii) ऐक्रेलिक (ख) तना
(iii) नारियल रेशे (ग) बीजों को अलग करना
(iv) कपास ओटना (घ) संश्लिष्ट रेशे
(v) तकली (ङ) कताई

उत्तर-

कॉलम ‘क’ कॉलम ‘ख’
(i) पटसन (ख) तना
(ii) ऐक्रेलिक (घ) संश्लिष्ट रेशे
(iii) नारियल रेशे (क) नारियल का बाहरी शैल
(iv) कपास ओटना (ग) बीजों को अलग करना
(v) तकली (ङ) कताई

4. सही विकल्प का चयन करें

प्रश्न (i)
इनमें से कौन-सा कुदरती रेशा नहीं है?
(क) ऊन
(ख) रेशम
(ग) नायलॉन
(घ) पटसन ।
उत्तर-
(ख) नायलॉन।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 3 रेशों से वस्त्र तक

प्रश्न (ii)
कौन-सा कपड़ा गर्मी और नमीयुक्त मौसम में पहनने के लिए चुना जाता है ?
(क) सूती
(ख) रेशमी
(ग) ऊनी
(घ) नायलॉन ।
उत्तर-
(क) सूती।

प्रश्न (iii)
कपास के लिए टिंडों से बीज अलग करने की विधि
(क) कताई
(ख) ओटाई
(ग) रीटिंग
(घ) हाथ से चुनना ।
उत्तर-
(घ) हाथ से चुनना।

प्रश्न (iv)
एक्रेलिक एक ……………………… है।
(क) प्राकृतिक रेशा
(ख) पौधा रेशा
(ग) जंतु रेशा
(घ) संश्लिष्ट रेशा।
उत्तर-
(घ) संश्लिष्ट रेशा।

5. अति लघूत्तर प्रश्न

प्रश्न (i)
किन्हीं दो जंतु रेशों के नाम बताएँ।
उत्तर-
रेशम और ऊन।

प्रश्न (ii)
किन्हीं दो प्राकृतिक रेशों के नाम बताएँ।
उत्तर-
रेशम और ऊन।

प्रश्न (iii)
पटसन के पौधों की कटाई का ठीक समय कब होता है?
उत्तर-
जून से सितंबर तक

प्रश्न (iv)
पटसन से बनने वाली वस्तुओं की सूची बनाएँ।
उत्तर-
इसका उपयोग पर्दे, कुर्सीओं के कवर, कालीन, चटाई, रस्सी, बोरी आदि बनाने के लिए किया जाता है।

6. लघूत्तर प्रश्न

प्रश्न (i)
प्राकृतिक और संश्लिष्ट रेशों में अंतर बताएँ।
उत्तर-
प्राकृतिक तंतु-

  1. प्राकृतिक तंतु पौधों और जंतुओं से प्राप्त होते हैं।
  2. उदाहरण कपास, जूट, क्वायर, ऊन, रेशम आदि हैं।

संश्लिष्ट तंतु-

  1. दूसरी ओर कृत्रिम अथवा संश्लिष्ट तंतु मनुष्य द्वारा रसायनों का उपयोग करके तैयार किए जाते हैं।
  2. उदाहरण पॉलिएस्टर, नायलॉन, एक्रेलिक आदि हैं।

प्रश्न (ii)
रेशम के कीड़े का पालन किसे कहते हैं ?
उत्तर-
रेशम उत्पादन । रेशम के उत्पादन के लिए रेशम के कीड़ों के पालन को रेशम उत्पादन के रूप में जाना जाता है।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 3 रेशों से वस्त्र तक

प्रश्न (iii)
कपास की कताई से आप क्या समझते हैं?
उत्तर-
ओटाई-चुगे हुए रुई के गोलों से तंतुओं और बीजों को कंघी करके अलग करना ओटाई कहलाता है। ओटाई परंपरागत रूप से हाथ से की जाती थी लेकिन आजकल हमारे पास ऐसा करने के लिए मशीनें हैं।

7. निबंधात्मक प्रश्न

प्रश्न (i)
हम गर्मी में सूती कपड़े पहनने को प्राथमिकता देते हैं, क्यों?
उत्तर-
हम गर्मियों में सूती कपड़े पहनना निम्नलिखित कारणों से पसंद करते हैं-

  1. सूती कपड़े मुलायम होते हैं।
  2. सूती कपड़े भारी मात्रा में पसीना सोख लेते हैं।

गर्मी के दिनों में तापमान बहुत अधिक होता है। इस मौसम में हमें बहुत पसीना आता है। सूती कपड़े इस पसीने को सोख लेते हैं। गर्मी के कारण यह वाष्पित हो जाता है। वाष्पीकरण शीतलन का कारण बनता है। इसका मतलब है कि अगर हम गर्मियों में सूती कपड़े पहनते हैं तो हम स्वयं को अपने आसपास की गर्मी के हानिकारक प्रभावों से बचा सकते हैं।

प्रश्न (ii)
कपास की कताई कैसे की जाती है?
उत्तर-
कताई – तंतुओं से धागा बनाने की प्रक्रिया कताई कहलाती है। वस्त्र बनाने की प्रक्रिया में यह एक महत्त्वपूर्ण चरण है। तंतु प्राप्त करने के बाद हम इन्हें कताई करके तागे में बदल देते हैं। इस प्रक्रिया में रेशों को खींचकर और एक दूसरे के साथ लपेटकर तागों में बदल दिया जाता है।

कताई हस्त तकुए (तकली) या चरखे की सहायता से की जा सकती है। आजकल कताई के लिए मशीनों का उपयोग किया जाता है। हाथ की धुरी या चरखे का उपयोग छोटे पैमाने पर धागा बनाने के लिए किया जाता है। कताई मशीनें बड़े पैमाने पर धागा उत्पादन के लिए बेहतर विकल्प हैं। कताई के बाद, अगला चरण यान को बुनाई या बंधाई द्वारा वस्त्र में परिवर्तित करना है।

Science Guide for Class 6 PSEB रेशों से वस्त्र तक Intext Questions and Answers

सोचें और उत्तर दें (पेज 21)

प्रश्न 1.
किन्हीं दो प्रकार के रेशों के नाम बताएँ।
उत्तर-
रेशों के दो मुख्य प्रकार हैं-

  1. प्राकृतिक तंतुओं से बनाए जाने वाले
  2. संश्लिष्ट तंतुओं से बनाए जाने वाले ।

प्रश्न 2.
सिल्क के कपड़े को छूने पर आप कैसा महसूस करते हैं ? सिल्क का कपड़ा कैसा महसूस होता है?
उत्तर-
मुलायम और चमकदार।

प्रश्न 3.
आपका दुपट्टा किस तरह के रेशों से बना है?
उत्तर-
दुपट्टा सूती कपड़े का बना होता है।

सोचें और उत्तर दें (पेज 26)

प्रश्न 1.
उन पदार्थों के नाम बताएँ जो जूट तथा नारियल रेशे से बनते हैं ?
उत्तर-
जूट को परदे, गलीचे, रस्सीयां, स्कूल बैग बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है। नारियल तंतु को उपयोग करके दरवाजों के मैट, बुरश और रस्सीयां बनाई जाती है।

सोचें और उत्तर दें (पेज 26)

प्रश्न 1.
धागा ………………… से बनाया जाता है?
उत्तर-
तंतुओं।

प्रश्न 2.
धागा क्या है?
उत्तर-
बारीक तंतुओं के समूह से बनी संरचनाओं जिनका उपयोग विभिन्न प्रकार के वस्त्र बनाने के लिए किया जाता है, धागे कहते हैं।

प्रश्न 3.
रूई से धागा किस तरह बनाया जाता है ?
उत्तर-
हम रूई के तंतुओं से कताई और बुनाई करके धागा बनाते हैं।

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सोचें और उत्तर दें (पेज 28)

प्रश्न 1.
ऊन ……………. तथा …………….. है।
उत्तर- फूलदार रेशा है, हवा को रोककर रखता

PSEB Solutions for Class 6 Science रेशों से वस्त्र तक Important Questions and Answers

1. बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न (i)
प्रकृति से प्राप्त होने वाला तंतु है-
(क) नायलॉन
(ख) ऊनी
(ग) रेशमी
(घ) केवल ऊनी और रेशमी।
उत्तर-
(घ) केवल ऊनी और रेशमी।

प्रश्न (ii)
पादपों से प्राप्त होने वाला तंतु है-
(क) पटसन
(ख) रेशम
(ग) ऊन
(घ) नायलॉन।
उत्तर-
(क) पटसन।

प्रश्न (iii)
रेशमी तंतु प्राप्त होता है-
(क) रेशम कीट से
(ख) भेड़ से
(ग) पादपों से
(घ) सभी विकल्प।
उत्तर-
(क) रेशम कीट से।

प्रश्न (iv)
संश्लिष्ट तंतु का उदाहरण है-
(क) रेशम
(ख) ऊन
(ग) कपास
(घ) पॉलिएस्टर।
उत्तर-
(घ) पॉलिएस्टर।

प्रश्न (v)
तंतुओं से धागा बनाने की प्रक्रिया को कहते हैं-
(क) बुनाई
(ख) बंधाई
(ग) कताई
(घ) सभी विकल्प।
उत्तर-
(ग) कताई।

प्रश्न (vi)
रूई पौधे के भाग से प्राप्त होती है-
(क) पत्तों से
(ख) तने से
(ग) बीज से
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(ग) बीज से।

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प्रश्न (vii)
कपास खेत परिफलनों का रंग हो जाता है-
(क) श्वेत
(ख) पीले
(ग) हर
(घ) बैंगनी।
उत्तर-
(क) श्वेत।

प्रश्न (viii)
कपास के लिए उष्ण जलवायु और ……………… मृदा की आवश्यकता होती है।
(क) काली
(ख) लाल
(ग) पीली
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(क) काली।

प्रश्न (ix)
आजकल कपास ओटी जाती है-
(क) हाथों से
(ख) पैरों से
(ग) मशीनों से
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(ग) मशीनों से।

प्रश्न (x)
पटसन तंतु प्राप्त होता है-
(क) बीज से
(ख) पत्तों से
(ग) तने से
(घ) सभी विकल्प।
उत्तर-
(ग) तने से।

प्रश्न (xi)
कपास के बीजों को अलग करने की विधि ………………… कहलाती है।
(क) ओटना
(ख) कताई
(ग) तोड़ना
(घ) सभी विकल्प।
उत्तर-
(क) ओटना।

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2. खाली स्थान भरें

(i) पटसन एक तंतु है जो …………………. से प्राप्त होता है।
उत्तर-
पौधे

(ii) रुई कपास के ………………….. से प्राप्त की जाती है।
उत्तर-
बीज

(iii) ………………….. को काली मिट्टी की आवश्यकता होती है।
उत्तर-
कपास

(iv) पॉलिएस्टर एक ………………… तंतु है।
उत्तर-
संश्लेषित

(v) तंतुओं से …………………… बनाना कताई कहलाता है।
उत्तर-
धागा।

3. सही या ग़लत चुनें

(i) रेशे हमें पौधों से ही मिलते हैं।
उत्तर-
ग़लत

(ii) नायलॉन एक संश्लेषित तंतु है।
उत्तर-
सही

(iii) रेशे से सूत बनाने की प्रक्रिया को कताई कहते हैं।
उत्तर-
सही

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(iv) बुनाई धागे के दो सेटों को एक साथ बुनने की प्रक्रिया है।
उत्तर-
ग़लत

(v) पटसन एक संश्लेषित तंतु है।
उत्तर-
सही

4. कॉलम ‘क’ और कॉलम ‘ख’ का उचित मिलान करें

कॉलम ‘क’ कॉलम ‘ख’
(i) नायलॉन (a) ऊन
(ii) सूत (b) कोकून
(iii) कपास (c) संश्लेषित तंतु
(iv) रेशम (d) कपास
(v) भेड़ (e) काली मिट्टी

उत्तर-

कॉलम ‘क’ कॉलम ‘ख’
(i) नायलॉन (c) संश्लेषित तंतु
(ii) सूत (d) कपास
(iii) कपास (e) काली मिट्टी
(iv) रेशम (b) कोकून
(v) भेड़ (a) ऊन

5. अति लघूत्तर प्रश्न

प्रश्न 1.
वस्त्र कितनी प्रकार के होते हैं ?
उत्तर-
वस्त्र सूती, ऊनी, रेशमी और संश्लिष्ट किस्म के होते हैं।

प्रश्न 2.
हम वस्त्र कहां से प्राप्त करते हैं ?
उत्तर-
हम वस्त्र पादपों और जंतुओं के सूती, रेशमी और ऊनी तंतुओं से प्राप्त करते हैं।

प्रश्न 3.
ऊन हमें कौन-से जंतुओं से मिलती है ?
उत्तर-
ऊन हमें भेड़, बकरी, खरगोश, याक तथा ऊंटों से प्राप्त होती है।

प्रश्न 4.
रेशमी तंतु हमें किससे प्राप्त होता है ?
उत्तर-
रेशमी तंतु हमें रेशम कीट के कोकून से प्राप्त होता है।

प्रश्न 5.
संश्लिष्ट तंतु क्या होते हैं?
उत्तर-
संश्लिष्ट तंतु – जो तंतु रासायनिक पदार्थों से प्राप्त होते हैं उन्हें संश्लिष्ट तंतु कहते हैं।

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प्रश्न 6.
संश्लिष्ट तंतुओं की उदाहरणे दीजिए।
उत्तर-
पॉलिएस्टर, नायलॉन और एक्रेलिक संश्लिष्ट तंतु हैं।

प्रश्न 7.
कपास को उगाने के लिए किस प्रकार की मृदा और जलवायु अनुकूल है ?
उत्तर-
कपास को उगाने के लिए काली मृदा और ऊष्ण जलवायु अनुकूल है।

प्रश्न 8.
देश के कुछ ऐसे राज्यों के नाम बताओ जहाँ कपास अधिक मात्रा में उगाई जाती है।
उत्तर-
महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब और तमिलनाडु में कपास अधिक उगाई जाती है।

प्रश्न 9.
कपास के बालों का चयन कैसे किया जाता है ?
उत्तर-
साधारणतया कपास के बालों को हस्त चयन द्वारा प्राप्त किया जाता है।

प्रश्न 10.
पटसन तंतु पौधे के किस भाग से प्राप्त किया जाता है ?
उत्तर-
पटसन तंतु को पटसन पादप के तने से प्राप्त किया जाता है।

प्रश्न 11.
भारत में पटसन कहां-कहां उगाया जाता है ?
उत्तर-
भारत में पटसन को प्रमुख रूप से पश्चिम बंगाल, बिहार तथा असम में उगाया जाता है।

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प्रश्न 12.
पटसन के तने से पदसन के तंतुओं को कैसे पृथक किया जाता है ?
उत्तर-
कटाई के पश्चात् पटसन के तनों को कुछ दिनों तक जल में डुबाकर रखते हैं। ऐसा करने पर तने गल जाते हैं और उन्हें पटसन तंतुओं को हाथों से पृथक् कर दिया जाता है।

प्रश्न 13.
सामान्यतः पटसन फसल की कटाई कब की जाती है ?
उत्तर-
सामान्यतः पटसन फसल की कटाई पुष्पन अवस्था में करते हैं।

प्रश्न 14.
कताई किसे कहते हैं ?
उत्तर-
कताई- रेशों से धागा बनाने की प्रक्रिया को कताई कहते हैं।

प्रश्न 15.
चरखा किसे कहते हैं और किस काम आता है ?
उत्तर-
चरखा-हाथ से प्रचलित कताई में चरखे का उपयोग किया जाता है। यह भी धागा बनाने की एक युक्ति है।

6. लघूत्तर प्रश्न

प्रश्न 1.
वस्त्रों में विविधता से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
वस्त्रों की विविधता – वस्त्रों में विविधता से अभिप्राय है वस्त्र जैसे बैड शीट, कंबल, पर्दे, तौलिए, डस्टर विभिन्न प्रकार के तंतुओं-सूती, रेशमी, ऊनी और संश्लिष्ट आदि से बने होते हैं। वस्त्रों के विभिन्न प्रकार के तंतुओं से बने होने को वस्त्र विविधता कहते हैं।

प्रश्न 2.
तंतु किसे कहते हैं ? यह कितने प्रकार के होते हैं ?
उत्तर-
तंतु – तागे जिन बारीक पतली लड़ियों अथवा रेशों से बने होते हैं उन्हें तंतु कहते हैं।
तंतु की किस्में – तंतु मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं-

  1. प्राकृतिक तंतु
  2. संश्लिष्ट तंतु।

प्रश्न 3.
प्राकृतिक तंतु किसे कहते हैं ? इनकी उदाहरणे दीजिए।
उत्तर-
प्राकृतिक तंतु – वे तंतु जो पादपों और जंतुओं से बनते हैं उन्हें प्राकृतिक तंतु कहते हैं; जैसे-सूती और जूट के तंतु हमें पादपों से प्राप्त होते हैं जबकि ऊन और रेशम हमें जंतुओं से प्राप्त होते हैं। ऊन हमें भेड़ और बकरी की कर्तित ऊन से प्राप्त होती है। ऊन खरगोश, याक तथा ऊंटों के बालों से भी प्राप्त किया जा सकता है। रेशमी कीट से हमें रेशम तंतु मिलता है।

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प्रश्न 4.
संश्लिष्ट तंतु किसे कहते हैं ? इसकी उदाहरणे दीजिए।
उत्तर-
संश्लिष्ट तंतु – जो तंतु रासायनिक पदार्थों से निर्मित किये जाते हैं उन्हें संश्लिष्ट तंतु कहते हैं।
उदाहरण- पॉलिएस्टर, नॉयलान और एक्रेलिक संश्लिष्ट तंतु हैं।

प्रश्न 5.
रूई का पौधा कैसी मृदा और जलवायु में होता है ? रूई को पौधे के किस भाग में प्राप्त किया जाता है ?
उत्तर-
रूई के पौधे के लिए काली मृदा और ऊष्ण जलवायु की आवश्यकता होती है। रूई को कपास के पौधे के फूल से प्राप्त किया जाता है।

प्रश्न 6.
कपास के फूल से कपास कैसे प्राप्त किया जाता है ?
उत्तर-
कपास के पौधे का फूल जब पूर्ण परिपक्व हो जाता है तो बीज टूटकर खुल जाते हैं। कपास तंतुओं से ढके कपास बीज को देखा जा सकता है। कपास बालों से कपास को हस्त चयन द्वारा प्राप्त किया जाता है। इसके पश्चात् कपास से बीजों को ककंतों द्वारा पृथक् किया जाता है।

प्रश्न 7.
कपास का ओटना किसे कहते हैं ? यह कैसे किया जाता है ?
उत्तर-
कपास का ओटना-कपास को कपास के बीजों से पृथक् करने की क्रिया को कपास ओटना कहते हैं। कपास को पारंपरिक ढंग कंघी द्वारा हाथों से ओटा जाता है। परंतु आजकल कपास ओटने के लिए मशीनों का उपयोग किया जाता है।

प्रश्न 8.
जूट किस पौधे से प्राप्त किया जाता है ? इसकी कृषि किस ऋतु और भारत के किन भागों में की जाती है ?
उत्तर-
जूट को पटसन के पौधों से प्राप्त किया जाता है। जूट को पटसन के तने से प्राप्त किया जाता है। पटसन की खेती वर्षा ऋतु में की जाती है। इसकी खेती मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल, बिहार तथा असम में की जाती है।

प्रश्न 9.
बुनाई किसे कहते हैं ?
उत्तर-
बुनाई – यह वस्त्र बनाने की एक विधि है जिसमें धागों के दो सेटों को एक साथ व्यवस्थित किया जाता है। तागों के दो सेटों को आपस में व्यवस्थित करके वस्त्र बनाने की प्रक्रिया को बुनाई कहते हैं।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 3 रेशों से वस्त्र तक

प्रश्न 10.
बंधाई किसे कहते हैं ?
उत्तर-
बंधाई-यह एक प्रकार की विशेष बुनाई है जिसमें किसी एकल तागे का उपयोग वस्त्र के एक टुकड़े को बनाने में किया जाता है।। स्वेटर की बुनाई इसी विधि से की जाती है। बंधाई हाथों तथा मशीनों द्वारा भी की जाती है।
PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 3 रेशों से वस्त्र तक 1

प्रश्न 11.
हथकरघा क्या है ?
चित्र-स्वेटर बुनाई
उत्तर-
हथकरघा – हथकरघा हाथ द्वारा वस्त्र बनाने की युक्ति है। कई स्थानों पर वस्त्रों की बुनाई करघों पर की जाती है। करघे या तो हस्त प्रचालित होते हैं अथवा विद्युत् प्रचालित होते हैं। हथकरघे में तागों के दो सेटों को बुनकर वस्त्र बुने जाते हैं।
PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 3 रेशों से वस्त्र तक 2

7. निबंधात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
वस्त्र-सामग्री के इतिहास का वर्णन करिए।
उत्तर-
वस्त्र-सामग्री का इतिहास – प्राचीन काल में लोग पहनने के लिए किस सामग्री का उपयोग किया करते थे। वस्त्रों के विषय में आद्य प्रमाणों से ऐसा प्रतीत होता है कि प्रारंभ में लोग वृक्षों की छाल (वल्क), बड़ी-बड़ी पत्तियों, अथवा जंतुओं की चर्म और समूर से अपने शरीर को ढकते थे। कृषि समुदाय में बसना आरंभ करने के पश्चात् लोगों ने पतली-पतली टहनियों तथा घास को बुनकर चटाइयाँ तथा डलियाँ (टोकरी) बनाना सीखा। लताओं, जंतुओं की ऊन अथवा बालों को आपस में ऐंठन देकर लंबी लड़ियाँ बनाईं। इनको बुनकर वस्त्र तैयार किए। आद्य भारतवासी रूई से बने वस्त्र पहनते थे जो गंगा नदी के निकटवर्ती क्षेत्रों में उगाई जाती थी। फ्लैक्स भी एक पादप है जिससे प्राकृतिक तंतु प्राप्त होता है। आद्य मिश्र में वस्त्रों को बनाने के लिए रूई तथा फ्लैक्स की कृषि नील नदी के निकटवर्ती क्षेत्रों में की जाती थी।

उन दिनों में लोगों को सिलाई करना नहीं आता था। उस समय लोग अपने शरीर के विभिन्न भागों को वस्त्रों से ढक लेते थे। वे शरीर को आच्छादित करने के लिए कई विभिन्न ढंगों का उपयोग करते थे। सिलाई की सुई के आविष्कार के साथ लोगों ने वस्त्रों की सिलाई करके पहनने के कपड़े तैयार किए। इस आविष्कार के पश्चात् सिले कपड़ों में बहुत-सी विभिन्नताएँ आ गई हैं। परंतु आज भी साड़ियों, धोतियों, लुंगियों अथवा पगड़ियों का बिना सिले वस्त्रों के रूप में उपयोग किया जाता है।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 2 भोजन के तत्व

Punjab State Board PSEB 6th Class Science Book Solutions Chapter 2 भोजन के तत्व Textbook Exercise Questions, and Answers.

PSEB Solutions for Class 6 Science Chapter 2 भोजन के तत्व

PSEB 6th Class Science Guide भोजन के तत्व Textbook Questions, and Answers

1. खाली स्थान भरें

(i) हम स्टार्च की विद्यमानता का परीक्षण करने के लिए ……………. के घोल का प्रयोग करते हैं।
उत्तर-
आयोडीन

(ii) आलू, चावल और गेहूँ में ………………. भरपूर मात्रा में होता है।
उत्तर-
कोर्बोहाइड्रेट (स्टार्च)

(iii) खट्टे फलों में मुख्य तौर पर ………………….. विटामिन होता है ।
उत्तर-
‘C’

(iv) अनीमिया …………………. की कमी के कारण होता है।
उत्तर-
लोहा

(v) गलफड़ा ………………… की कमी के कारण होता है।
उत्तर-
आयोडीन।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 2 भोजन के तत्व

2. सही या ग़लत

(i) मानव के शरीर में सूरज की रोशनी की मदद के साथ विटामिन D बनता है।
उत्तर-
सही

(ii) दूध और दूध से बने पदार्थों से हम कैल्शियम प्राप्त करते हैं।
उत्तर-
सही

(iii) दालें चर्बी का मुख्य स्रोत हैं।
उत्तर-
ग़लत

(iv) चावल अकेले ही हमारे शरीर को सभी पौष्टिक तत्व प्रदान कर सकते हैं।
उत्तर-
ग़लत

(v) अंधराता ‘विटामिन A’ की कमी के कारण होता है।
उत्तर-
सही

3. कॉलम ‘क’ और कॉलम ‘ख’ का उचित मिलान करें

कॉलम ‘क’ कॉलम ‘ख’
(i) प्रोटीन की कमी (i) रिकेट्स
(ii) विटामिन A (ii) बेरी-बेरी
(iii) विटामिन B (iii) स्कर्वी
(iv) विटामिन C (iv) अंधराता
(v) विटामिन D (v) क्वाशीओरकर

उत्तर-

कॉलम ‘क’ कॉलम ‘ख’
(i) प्रोटीन की कमी (v) क्वाशीओरकर
(ii) विटामिन A (iv) अंधराता
(iii) विटामिन B (ii) बेरी-बेरी
(iv) विटामिन C (iii) स्क र्वी
(v) विटामिन D (i) रिकेट्स

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 2 भोजन के तत्व

4. सही विकल्प का चयन करें

प्रश्न (क)
निम्नलिखित में से कौन-सा प्रोटीन का भरपूर स्रोत है ?
(i) आलू
(ii) आम
(iii) चावल
(iv) मूंग की दाल।
उत्तर-
(iv) मूंग दाल।

प्रश्न (ख)
निम्नलिखित में से कौन-सी थायराइड ग्रंथी के सही ढंग के साथ काम करने के लिए जरूरी है?
(i) विटामिन
(ii) कैल्शियम
(iii) आयोडीन
(iv) लोहा।
उत्तर-
(iii) आयोडीन।

प्रश्न (ग)
अनीमिया किस की कमी के कारण होता है ?
(i) विटामिन
(ii) कैल्शियम
(iii) लोहा
(iv) आयोडीन ।
उत्तर-
(iv) आयोडीन।

5. अति लघूत्तर प्रश्न

प्रश्न (i)
संतुलित भोजन या संतुलित आहार क्या है ?
उत्तर-
जिस आहार में शरीर के समुचित विकास और उचित कामकाज के लिए सभी आवश्यक पोषक तत्वों, रौगे और पानी की पर्याप्त मात्रा हो, उसे संतुलित आहार कहा जाता है।

प्रश्न (ii)
कार्बोहाइड्रेट्स के मुख्य स्रोत कौन-से हैं ?
उत्तर-
बाजरा, ज्वार, चावल, गेहूँ, गुड़, आम, केला, आलू आदि।

प्रश्न (iii)
प्रोटीन को शरीर रचनात्मक भोजन क्यों कहा जाता है ?
उत्तर-
प्रोटीन शरीर की कोशिकाओं की वृद्धि और मुरम्मत के लिए आवश्यक हैं इसलिए प्रोटीन सामग्री से भरपूर खाद्य पदार्थों को शरीर निर्माण खाद्य पदार्थ कहा जाता है।

प्रश्न (iv)
मानवीय शरीर के लिए मोटे आहार का क्या महत्त्व है?
उत्तर-
रूक्षांश हमारे शरीर को अपचनीय भोजन से छुटकारा पाने में मदद करता है और कब्ज को रोकता है। यह भोजन में पानी बनाए रखने और पेट में अच्छे बैक्टीरिया के विकास में भी मदद करता है।

प्रश्न (v)
कोई दो ऐसे भोजन पदार्थों के नाम बताएँ, जिनमें चर्बी विद्यमान हो?
उत्तर-
मांस, अंडे, मछली, दूध और दूध से बने उत्पाद जैसे मक्खन, घी आदि।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 2 भोजन के तत्व

6. लघूत्तर प्रश्न

प्रश्न (i)
पानी जीवन के लिए क्यों आवश्यक है?
उत्तर-
जल जीवन के लिए आवश्यक है क्योंकि यह हमें भोजन से पोषक तत्वों के अवशोषण में मदद करता है। यह मूत्र और पसीने के रूप में शरीर से अपशिष्ट को बाहर निकालने में भी हमारी मदद करता है।

प्रश्न (ii)
हमारे शरीर के लिए आवश्यक पाँच प्रकार के पौष्टिक तत्वों के नाम बताएँ।
उत्तर-
कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, खनिज और विटामिन।

प्रश्न (iii)
हम ‘विटामिन सी’ कहाँ से प्राप्त करते हैं? मानवीय शरीर में विटामिन सी’ की कमी के कारण होने वाले रोग का नाम बताएँ।
उत्तर-
खट्टे फल (नींबू, संतरा), आँवला, टमाटर, ब्रोकली आदि से हमें विटामिन सी’ मिलता है। विटामिन सी’ की कमी के कारण हम स्कर्वी नामक रोग से पीडति होते हैं। इस बीमारी का मुख्य लक्षण मसूड़ों से खून आना है।

प्रश्न (iv)
चर्बी (वसा) और कार्बोहाइड्रेट्स को ऊर्जा देने वाले भोजन क्यों कहा जाता है। व्याख्या करो।
उत्तर-
ये ऊर्जा देने वाले खाद्य पदार्थ कहलाते हैं क्योंकि ये पचने पर विभिन्न गतिविधियों को करने के लिए बड़ी मात्रा में आवश्यक ऊर्जा छोड़ते हैं।

7. निबंधात्मक प्रश्न

प्रश्न (i)
त्रुटि रोग क्या होते हैं ? मानवीय शरीर में प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट्स की कमी के कारण होने वाले रोगों के बारे में संक्षिप्त जानकारी दें।
उत्तर-
लंबे समय तक हमारे आहार में पोषक तत्वों की कमी के कारण होने वाले रोगों को कमी रोग कहा जाता है। दूसरे शब्दों में, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन और खनिजों की कमी से कुछ रोग होते हैं जिन्हें कमी रोग कहा जाता है।

  1. प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट दोनों की कमी से होने वाला रोग मैरास्मस है। इसके मुख्य लक्षण हैं शुष्क त्वचा, सी हुई आँखें, उभरी हुई पसलियाँ, शरीर बहुत दुबला, पतला और इतना कमजोर हो जाता है कि बच्चा हिल भी नहीं सकता।
  2. प्रोटीन की कमी से होने वाला रोग क्वाशियोरकोर है। इसके मुख्य लक्षण हैं रुका हुआ विकास, चेहरे पर सूजन, त्वचा का रूखा होना, शरीर में पानी का जमा होना, बालों का सफेद होना।

प्रश्न (ii)
मानव के शरीर के लिए खनिज पदार्थों के बारे में चर्चा करें।
उत्तर-
खनिज पदार्थ भोजन के वे घटक हैं जिनकी हमें अच्छे स्वास्थ्य और शरीर के समुचित विकास के लिए आवश्यकता होती है। ये शरीर को ऊर्जा प्रदान नहीं करते हैं। इनकी बहुत कम मात्रा में आवश्यकता होती है। आयरन, कैल्शियम, आयोडीन और फास्फोरस हमारे शरीर के लिए महत्त्वपूर्ण खनिज हैं। इनकी कमी से कोई रोग हो सकता है।

आयरन या लोहा – यह आवश्यक महत्त्वपूर्ण खनिज है जिसकी आवश्यकता हमारे शरीर में हीमोग्लोबिन के निर्माण के लिए होती है । पत्तेदार सब्जियाँ, फल, गुड़ आदि इस के मुख्य स्रोत हैं। इसकी कमी से एनीमिया हो सकता है।

कैल्शियम – यह आवश्यक महत्त्वपूर्ण खनिज है जिसकी आवश्यकता हमारे शरीर में हड्डियों के निर्माण के लिए होती है। दूध और दूध से बने उत्पाद, अंडे आदि इस के मुख्य स्रोत हैं। इसकी कमी से हड्डियां कमजोर हो सकती हैं और दांत खराब हो सकते हैं।

फास्फोरस – यह आवश्यक महत्त्वपूर्ण खनिज है जिसकी आवश्यकता हमारे शरीर में हड्डियों और दांतों को मजबूती प्रदान करने के लिए होती है। दूध, पनीर, केला, बाजरा, मेवा आदि इस के मुख्य स्रोत हैं। इसकी कमी से हड्डियां कमजोर हो सकती हैं और दांत खराब हो सकते हैं।

आयोडीन – यह आवश्यक महत्त्वपूर्ण खनिज है जिसकी आवश्यकता हमारे शरीर में थायरॉयड ग्रंथि के सामान्य कामकाज के लिए होती है। आयोडीन युक्त नमक, समुद्री भोजन, हरी पत्तेदार सब्जियाँ आदि आयोडीन के मुख्य स्रोत हैं। इसकी कमी से घेघा नामक रोग हो सकता है। इस रोग का मुख्य लक्षण गर्दन में थायरॉयड ग्रंथि का बढ़ना है।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 2 भोजन के तत्व

प्रश्न (iii)
विटामिन क्या होते हैं? मानव के शरीर के लिए अलग-अलग विटामिनों के महत्त्व के बारे में चर्चा करें।
उत्तर-
विटामिन हमारे शरीर के समुचित कार्य के लिए बहुत आवश्यक होते हैं। खनिजों की तरह इनकी भी बहुत कम मात्रा में आवश्यकता होती है और ये शरीर को कोई ऊर्जा प्रदान नहीं करते हैं। हमें A, B, C, D, E और K जैसे कई विटामिनों की आवश्यकता होती है।

विटामिन A – अंडे, मांस, दूध, पनीर, हरी पत्तेदार सब्जियां, गाजर, पपीता आदि इस के मुख्य स्रोत हैं। इसकी आवश्यकता आंखों और त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने के लिए होती है। इसकी कमी से रतौंधी नामक रोग हो सकता है।

विटामिन B – दूध, हरी सब्जियां, मटर, अंडे, अनाज, मशरूम आदि इस के मुख्य स्रोत हैं। यह केंद्रीय तंत्रिका तंत्र, पाचन तंत्र के सामान्य विकास और कामकाज के लिए आवश्यक है। इसकी कमी से बेरी-बेरी नामक रोग हो सकता है।

विटामिन C – दूध, खट्टे फल (नींबू, संतरा), आँवला, टमाटर, ब्रोकोली आदि इस के मुख्य स्रोत हैं। यह हमारी प्रतिरक्षा को बढ़ाने और विभिन्न बीमारियों से लड़ने में हमारी मदद करता है। इसकी कमी से स्कर्वी या रक्तस्त्रावी मसूड़ों की बीमारी हो सकती है।

विटामिन D – इस के मुख्य स्रोत डेयरी उत्पाद, मछली के जिगर का तेल, धूप के संपर्क में आना आदि हैं। यह स्वस्थ हड्डियों और दांतों के लिए बहुत आवश्यक है। इसकी कमी से रिकेट्स नामक रोग हो सकता है।

विटामिन E – बादाम, मूंगफली, वनस्पति तेल जैसे सूरजमुखी और सोयाबीन तेल, पालक और ब्रोकोली जैसी पत्तेदार सब्जियाँ आदि इस के मुख्य स्रोत हैं। यह कोशिकाओं को क्षति से बचाता है, और विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं को कम करने में मदद करता है।

विटामिन K – हरी पत्तेदार सब्जियाँ (जैसे पालक, शलजम, सरसों, ब्रोकोली, फूलगोभी, और गोभी), मछली, मांस, अंडे और अनाज (छोटी मात्रा में होते हैं), आदि इस के मुख्य स्रोत हैं। यह रक्त के जमने के लिए आवश्यक है।

Science Guide for Class 6 PSEB भोजन के तत्व Intext Questions and Answers

सोचें और उत्तर दें (पेज 12)

प्रश्न 1.
जब हम कच्चे आलू पर आयोडीन के घोल की कुछ बूंदे डालते हैं, तो क्या होता है ?
उत्तर-
आयोडीन की बूंदे डालने से आलू का रंग नीला-काला हो जाता है।

प्रश्न 2.
आयोडीन के घोल का रंग कौन-सा होता है?
उत्तर-
बैंगनी।

प्रश्न 3.
कच्चे आलू के बिना अन्य कौन-से भोजन पदार्थों को स्टार्च की विद्यमानता के लिए प्रयोग किया जा सकता है ?
उत्तर-
उबले चावल, गेहूँ का आटा, शकरकंद और गन्ना।

सोचें और उत्तर दें (पेज 13)

प्रश्न 1.
भोजन में प्रोटीन की विद्यमानता का पता लगाने के लिए कौन से रसायनों का प्रयोग किया जाता है?
उत्तर-
कॉपर सल्फेट (CusO4) घोल और कास्टिक सोडा।

प्रश्न 2.
प्रोटीन युक्त कोई दो भोजन पदार्थों के नाम बताएँ।
उत्तर-
उबले अंडे और मटर।

सोचें और उत्तर दें (पेज 15)

प्रश्न 1.
जब हम काजू को कागज़ पर रगड़ते हैं तो यह अल्प-पारदर्शी क्यों बन जाता है?
उत्तर-
तैलीय पैच की उपस्थिति के कारण पेपर पारदर्शी हो जाता है।

प्रश्न 2.
चर्बी युक्त कोई दो भोजन पदार्थों के नाम बताएँ।
उत्तर-
काजू, मूंगफली, सरसों।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 2 भोजन के तत्व

PSEB Solutions for Class 6 Science भोजन के तत्व Important Questions and Answers

1. बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न (i)
भोजन के मुख्य संघटक/पोषक हैं-
(क) दो
(ख) चार
(ग) पाँच
(घ) दस।
उत्तर-
(ग) पाँच।

प्रश्न (ii)
सभी खाद्य पदार्थों के पोषण के लिए आवश्यक है-
(क) वसा
(ख) रूक्षांश
(ग) नमक
(घ) कुछ भी नहीं।
उत्तर-
(ख) रूक्षांश।

प्रश्न (iii)
प्रोटीन की उपस्थिति दर्शाने के लिए चाहिए-
(क) कॉपर सल्फेट और कास्टिक सोडा का विलयन
(ख) नाइट्रिक अम्ल
(ग) आयोडीन
(घ) सभी विकल्प।
उत्तर-
(क) कॉपर सल्फेट और कास्टिक सोडा का विलयन।

प्रश्न (iv)
आयोडीन द्वारा परीक्षण किया जाता है-
(क) मंड (शर्करा)
(ख) प्रोटीन
(ग) विटामिन
(घ) जल।
उत्तर-
(क) मंड (शर्करा)।

प्रश्न (v)
दूध में पोषक तत्व होता है-
(क) जल
(ख) कार्बोहाइड्रेट्स
(ग) प्रोटीन
(घ) सभी विकल्प।
उत्तर-
(घ) सभी विकल्प।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 2 भोजन के तत्व

प्रश्न (vi)
नींबू, आँवला स्रोत हैं-
(क) कार्बोहाइड्रेट्स
(ख) खनिज
(ग) प्रोटीन
(घ) विटामिन C.
उत्तर-
(घ) विटामिन C.

प्रश्न (vii)
वसा का परीक्षण किया जाता है-
(क) नमक से
(ख) स्वाद से
(ग) कागज़ पर मसलने से
(घ) असंभव है।
उत्तर-
(ग) कागज़ पर मसलने से।

प्रश्न (viii)
अंडे के सफेद भाग में होती है-
(क) प्रोटीन
(ख) विटामिन
(ग) शर्करा
(घ) सभी विकल्प।
उत्तर-
(क) प्रोटीन।

प्रश्न (ix)
ऊर्जा देने वाला पोषक है-
(क) विटामिन
(ख) खनिज
(ग) शर्करा
(घ) सभी विकल्प।
उत्तर-
(ग) शर्करा।

प्रश्न (x)
शरीर वर्धक भोजन में भरपूर होनी चाहिए-
(क) वसा
(ख) शर्करा
(ग) जल
(घ) प्रोटीन।
उत्तर-
(घ) प्रोटीन।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 2 भोजन के तत्व

प्रश्न (xi)
हड्डियों तथा दाँतों को मजबूत करता है-
(क) लोहा
(ख) मैंगनीज़
(ग) फास्फोरस
(घ) कैल्शियम।
उत्तर-
(घ) कैल्शियम।

प्रश्न (xii)
गायटर (Jघा) रोग भोजन में …………………. की कमी के कारण होता है।
(क) विटामिन K
(ख) विटामिन C
(ग) लोहा
(घ) आयोडीन।
उत्तर-
(घ) आयोडीन।

प्रश्न (xiii)
पेंघा रोग भोजन में …………………. की कमी से होता है।
(क) विटामिन K
(ख) विटामिन C
(ग) लोहा
(घ) आयोडीन।
उत्तर-
(घ) आयोडीन।

प्रश्न (xiv)
प्रोटीन को …………………….. भोजन कहते हैं।
(क) ऊर्जा देना वाला
(ख) रक्षात्मक
(ग) शरीर वर्धक
(घ) सभी विकल्प।
उत्तर-
(ग) शरीर वर्धक।

प्रश्न (xv)
सूर्य की ऊर्जा से विटामिन ………………….. की प्राप्ति होती है।
(क) B
(ख) C
(ग) D
(घ) A.
उत्तर-
(ग) D.

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2. खाली स्थान भरें

(i) मछली का तेल विटामिन ………………. का स्रोत है ।
उत्तर-
D

(ii) ………………… शरीर के विकास के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण हैं।
उत्तर-
पोषक तत्व

(iii) कार्बोहाइड्रेट …………………….. प्रकार के होते हैं।
उत्तर-
दो

(iv) ……………….. को फलों की चीनी भी कहा जाता है।
उत्तर-
फ्रक्टोज

(v) मक्खन …………………….. का स्रोत है।
उत्तर-
वसा।

3. सही या ग़लत चुनें

(i) सुक्रोज हमें फलों से मिलता है।
उत्तर-
गलत

(ii) अनाज वसा का मुख्य स्रोत है।
उत्तर-
गलत

(iii) हमें विटामिनों की आवश्यकता नहीं है।
उत्तर-
गलत

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 2 भोजन के तत्व

(iv) विटामिन A की कमी से रिकेट्स होता है।
उत्तर-
गलत

(v) घी और मक्खन प्रोटीन के मुख्य स्रोत हैं।
उत्तर-
गलत।

4. कॉलम ‘क’ और कॉलम ‘ख’ का उचित मिलान करें

कॉलम ‘क’ कॉलम ‘ख’
(i) घी और मक्खन (a) विटामिन D
(ii) दूध, अंडे और मांस (b) वसा
(iii) मछली का तेल (c) सुक्रोज
(iv) चीनी (d) रिकेट्स
(v) विटामिन डी (e) प्रोटीन

उत्तर-

कॉलम ‘क’ कॉलम ‘ख’
(i) घी और मक्खन (b) वसा
(ii) दूध, अंडे और मांस (e) प्रोटीन
(iii) मछली का तेल (a) विटामिन D
(iv) चीनी (c) सुक्रोज
(v) विटामिन डी (d) रिकेट्स

5. अति लघूत्तर प्रश्न

प्रश्न 1.
पंजाब के मुख्य खाद्य पदार्थों में क्या होता है ?
उत्तर-
रोटी, राजमां, सरसों का साग, दही और घी।

प्रश्न 2.
आँध्र प्रदेश के मुख्य खाद्य पदार्थों में क्या होता है ?
उत्तर-
चावल, अरहर की दाल तथा रसम, कुंदरना, मट्ठा, घी, अचार।

प्रश्न 3.
पोषक किसे कहते हैं ?
उत्तर-
पोषक-हमारे खाद्य पदार्थों की कच्ची सामग्री में हमारे शरीर के लिए कुछ आवश्यक घटक होते हैं जिन्हें पोषक कहते हैं।

प्रश्न 4.
हमारे भोजन में मुख्य पोषक कौन-कौन से हैं ?
उत्तर-
कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन तथा खनिज लवण।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 2 भोजन के तत्व

प्रश्न 5.
सजीवों के लिए कार्बोहाइड्रेट का क्या महत्त्व है ?
उत्तर-
कार्बोहाइड्रेट ऊर्जा प्रदान करने वाला भोजन का प्रमुख भाग है।

प्रश्न 6.
शरीर बनाने वाले भोजन का नाम बताओ।
उत्तर-
प्रोटीन शरीर बनाने वाला भोजन है।

प्रश्न 7.
मानव शरीर के लिए विटामिनों तथा खनिजों की क्या भूमिका है ?
उत्तर-
विटामिन तथा खनिज पदार्थ मानव शरीर को सुरक्षा प्रदान करने वाले भोजन के रूप में कार्य करते हैं।

प्रश्न 8.
प्रोटीन के स्त्रोत बताओ।
उत्तर-
प्रोटीन के स्रोत-मछली, मांस, दूध, दालें, सोयाबीन तथा अंडे प्रोटीन के मुख्य स्रोत हैं।

प्रश्न 9.
कार्बोहाइड्रेट के स्त्रोत बताओ।
उत्तर-
कार्बोहाइड्रेट के स्रोत-गेहूँ, चावल, मक्की, बाजरा, चीनी, आलू तथा शकरकंदी आदि।

प्रश्न 10.
हमारे शरीर में जल की प्रतिशत मात्रा कितनी है ?
उत्तर-
हमारे शरीर में जल की मात्रा 70% है।

प्रश्न 11.
वसा के स्रोतों के नाम बताओ।
उत्तर-
वसा के स्त्रोत-खाना पकाने वाले तेल, मक्खन, घी, दूध, पनीर, मूंगफली इत्यादि वसा के स्रोत हैं।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 2 भोजन के तत्व

प्रश्न 12.
विभिन्न खनिजों के नाम बताओ जिनकी हमारे शरीर को आवश्यकता होती है ?
उत्तर-
फॉस्फोरस, क्लोरीन, आयोडीन, सल्फर, नाइट्रोजन, सोडियम, पोटैशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम, लोहा, जिंक इत्यादि विभिन्न खनिज हैं जिनकी हमारे शरीर को आवश्यकता होती है।

प्रश्न 13.
कार्बोहाइड्रेट अधिक खाने पर मानवीय शरीर को क्या हो सकता है ?
उत्तर-
कार्बोहाइड्रेट अधिक मात्रा में खाने पर मोटापा हो जाता है तथा हृदय के रोग उत्पन्न हो जाते हैं।

प्रश्न 14.
वसा कम खाने से क्या हानि हो सकती है ?
उत्तर-
वसा कम खाने से आंखों की दृष्टि कमज़ोर हो जाती है तथा शरीर कमजोर हो जाता है।

प्रश्न 15.
अधिक मात्रा में वसा खाने पर क्या हानि हो सकती है ?
उत्तर-
अधिक मात्रा में वसा खाने पर हृदय के रोग लग जाते हैं। यकृत की क्रियाशीलता कम हो जाती है।

प्रश्न 16.
सब्जियों तथा फलों को प्रयोग करने से पहले क्यों धोना चाहिए ?
उत्तर-
फलों तथा सब्जियों का प्रयोग करने से पहले धोने से इनके ऊपर छिड़के गए रासायनिक पदार्थ तथा मिट्टी साफ हो जाते हैं।

प्रश्न 17.
कौन-से पोषक तत्व रक्षात्मक हैं ?
उत्तर-
विटामिन तथा खनिज पोषक तत्व रक्षात्मक हैं।

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प्रश्न 18.
शरीरवर्धक भोजन किसे कहते हैं ?
उत्तर-
शरीरवर्धक भोजन-प्रोटीन युक्त भोजन को शरीरवर्धक भोजन कहते हैं।

प्रश्न 19.
ऊर्जा देने वाला भोजन किसे कहते हैं ?
उत्तर-
वसा और कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन को ऊर्जा देने वाला भोजन कहते हैं।

प्रश्न 20.
विटामिन A का क्या कार्य है ?
उत्तर-
विटामिन A हमारी त्वचा और आंखों को स्वस्थ रखता है।

प्रश्न 21.
विटामिन C का क्या कार्य है ?
उत्तर-
विटामिन C बहुत-से रोगों से लड़ने में हमारी सहायता करता है।

प्रश्न 22.
विटामिन D का क्या कार्य है ?
उत्तर-
विटामिन D हमारी अस्थियों और दांतों के लिए कैल्सियम का उपयोग करने में हमारे शरीर की सहायता करता है।

प्रश्न 23.
विटामिन A के कौन-से स्रोत हैं ?
उत्तर-
विटामिन A के स्रोत हैं-दूध, मछली का तेल, गाजर और पपीता।

प्रश्न 24.
विटामिन C किन खाद्य पदार्थों से प्राप्त होता है?
उत्तर-
संतरा, अमरूद, मिर्च, नींबू, आंवला और टमाटर विटामिन C के स्रोत हैं।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 2 भोजन के तत्व

प्रश्न 25.
विटामिन D के कौन-से स्रोत हैं ?
उत्तर-
विटामिन D के स्रोत-दूध, मछली, मक्खन तथा अंडे विटामिन D के मुख्य स्रोत हैं।

प्रश्न 26.
रूक्षांश क्या है ?
उत्तर-
रूक्षांश- हमारे शरीर को पोषकों के अतिरिक्त आहारी रेशों की आवश्यकता होती है। इन आहारी रेशों को रूक्षांश कहते हैं।

प्रश्न 27.
रूक्षांश के मुख्य स्रोत कौन-से हैं ?
उत्तर-
रूक्षांश के स्रोत-रूक्षांश के मुख्य स्रोत साबुत खाद्यान्न दाल, आलू, ताजे फल और सब्जियां हैं।

प्रश्न 28.
रूक्षांश का क्या कार्य है ?
उत्तर-
रूक्षांश के कार्य-रूक्षांश अनपचे भोजन को शरीर में से बाहर निकालने में हमारे शरीर की सहायता करता है।

6. लघूत्तर प्रश्न

प्रश्न 1.
हमारे शरीर को पौष्टिक भोजन की आवश्यकता क्यों है ?
उत्तर-
हमारे शरीर को पौष्टिक भोजन की आवश्यकता इस कारण है-

  1. ऊर्जा प्राप्त करने के लिए।
  2. वृद्धि के लिए।
  3. स्वस्थ रहने के लिए।
  4. बीमारियों से बचने के लिए।

प्रश्न 2.
भोजन के विभिन्न समूहों के नाम बताओ।
उत्तर-
भोजन के विभिन्न समूह हैं-

  1. ऊर्जा प्रदान करने वाले भोजन-कार्बोहाइड्रेट तथा वसा।
  2. शरीर बनाने वाले भोजन-प्रोटीन।
  3. रक्षात्मक भोजन-विटामिन और खनिज।

प्रश्न 3.
रक्षात्मक भोजन क्या होते हैं ?
उत्तर-
रक्षात्मक भोजन – वे भोजन जो हमारे शरीर को बीमारियों से बचाते हैं, रक्षात्मक भोजन कहलाते हैं क्योंकि ये हमारे शरीर की साधारण वृद्धि तथा उचित कार्य के लिए आवश्यक होते हैं। विटामिन तथा खनिज रक्षात्मक भोजन हैं।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 2 भोजन के तत्व

प्रश्न 4.
संतुलित आहार से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
संतुलित आहार – वह आहार जिसमें भोजन के सभी आवश्यक अवयव उचित मात्रा में उपस्थित हों। संतुलित आहार कहलाता है। यह आवश्यक अवयव हैं-कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन, विटामिन, खनिज तथा पानी।

प्रश्न 5.
हमारे आहार में हरी सब्जियां होना क्यों आवश्यक है ?
उत्तर-
हमारे आहार में हरी सब्जियां निम्नलिखित कारणों से आवश्यक हैं-

  1. हरी सब्जियों से हमें कई प्रकार के खनिज लवण जैसे कि लोहा, कैल्शियम तथा फॉस्फोरस के लवण प्राप्त होते हैं।
  2. हरी सब्जियों से कई प्रकार के विटामिन प्राप्त होते हैं।
  3. हरी सब्जियाँ रूक्षांश के रूप में कार्य करती हैं तथा हमारे उत्सर्जन तंत्र के कार्य को ठीक करती हैं।
  4. हरी सब्जियाँ खाने से मसूड़ों की कसरत होती है।
  5. मसूड़े मज़बूत रहते हैं तथा दाँत भी सुरक्षित रहते हैं।

प्रश्न 6.
कार्बोहाइड्रेट क्या होते हैं ? यह कितनी प्रकार के होते हैं ?
उत्तर-
कार्बोहाइड्रेट – ये कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के यौगिक हैं। कार्बोहाइड्रेट से हमें ऊर्जा प्राप्त होती है। कार्बोहाइड्रेट मुख्य रूप से मंड और शर्करा के रूप में होते हैं।

प्रश्न 7.
किसी खाद्य पदार्थ में मंड की उपस्थिति का परीक्षण कैसे किया जाता है ?
उत्तर-
खाद्य पदार्थ में मंड का परीक्षण – मंड के परीक्षण के लिए आलू जैसी कच्ची सामग्री को एक डिश में अल्प मात्रा में लीजिए। इसमें तनु आयोडीन विलयन की 2 या 3 बूंदें डालिए। खाद्य पदार्थ के रंग में होने वाले परिवर्तन को देखिए। यह नीला काला हो जाएगा। यह नीला काला रंग मंड की उपस्थिति दर्शाता है।
PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 2 भोजन के तत्व 1

प्रश्न 8.
किसी खाद्य पदार्थ में प्रोटीन का परीक्षण कैसे किया जाता है ?
उत्तर-
खाद्य पदार्थ में प्रोटीन का परीक्षण – एक परखनली लीजिए और इसमें थोड़ा सा उबला हुआ अंडा डालिए। फिर इसमें थोड़ा-सा पानी डालकर अच्छी तरह हिलाएं। अब ड्रापर की सहायता से परखनली में दो बूंदें कॉपर सल्फेट के विलयन और दस बूंदें कास्टिक सोडे के विलयन की डालिए। परखनली को अच्छी तरह हिलाकर परखनली को कुछ समय के लिए रख दीजिए। परखनली में बैंगनी रंग हो जाएगा। बैंगनी रंग खाद्य पदार्थ में प्रोटीन की उपस्थिति दर्शाता है।

प्रश्न 9.
तुम खाद्य पदार्थ में वसा का परीक्षण कैसे करोगे ?
उत्तर-
खाद्य पदार्थ में वसा का परीक्षण – मूंगफली के कुछ दानों को एक सफेद कागज़ में लीजिए। अब इसको थोड़ा-सा दबाएं। आपको कागज़ पर तेल के धब्बे दिखाई देंगे। कागज़ को प्रकाश में ध्यान से देखिए। आपको तेल के धब्बे स्पष्ट दिखाई देंगे। इससे सिद्ध होता है कि कागज़ पर तेल का धब्बा खाद्य पदार्थ में वसा की उपस्थिति को दर्शाता है।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 2 भोजन के तत्व

प्रश्न 10.
कार्बोहाइड्रेट का मुख्य कार्य क्या है ? कार्बोहाइड्रेट के स्रोतों के नाम लिखिए।
उत्तर-
कार्बोहाइड्रेट का मुख्य कार्य शरीर को ऊर्जा प्रदान करना है।
कार्बोहाइड्रेट के स्रोत – आलू, गन्ना, पपीता, गेहूँ, तरबूज, शकरकंद, चावल, आम, मक्का, बाजरा आदि हैं।
PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 2 भोजन के तत्व 2

प्रश्न 11.
वसा के मुख्य स्रोत कौन-कौन से हैं ? वसा का मुख्य कार्य क्या है ?
उत्तर-
वसा के स्रोत-मूंगफली, गिरि, तिल, घी, मक्खन, मांस, दूध, मछली, क्रीम और अंडे आदि वसा का मुख्य कार्य ऊर्जा प्रदान करना है। यह कार्बोहाइड्रेट से अधिक ऊर्जा प्रदान करती है।
PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 2 भोजन के तत्व 3

प्रश्न 12.
ऊर्जा देने वाला भोजन और शरीरवर्धक भोजन किसे कहते हैं ?
उत्तर-

  1. वसा और कार्बोहाइड्रेट को ऊर्जा देने वाला भोजन कहते हैं।
  2. प्रोटीन को शरीर वर्धक भोजन कहते हैं।

प्रश्न 13.
प्रोटीन का क्या कार्य है ? इसके स्रोतों के नाम लिखिए।
उत्तर-
प्रोटीन का कार्य – प्रोटीन शरीर की वृद्धि और मरम्मत के लिए ज़रूरी है।
प्रोटीन के स्रोत-
PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 2 भोजन के तत्व 4
पादप स्रोत – चना, मूंग, दाल, राजमां, सोयाबीन, मटर आदि।
जंतु स्रोत – मांस, मछली, दूध, पनीर और अंडे।

प्रश्न 14.
विटामिन क्या होते हैं ? ये कितने प्रकार के होते हैं ?
उत्तर-
विटामिन (Vitamins) – विटामिन रोगों से हमारे शरीर की रक्षा करते हैं। विटामिन हमारी आंख, अस्थियों, दाँत और मसूढ़ों को स्वस्थ रखने में भी सहायता करते हैं।

विटामिन कई प्रकार के होते हैं, जिन्हें अलग-अलग नामों से जाना जाता है। इनमें से कुछ को विटामिन A, विटामिन B, विटामिन C, विटामिन D, विटामिन E तथा विटामिन K के नाम से जाना जाता है। विटामिनों के एक समूह को विटामिन B-कांप्लैक्स कहते हैं। हमारे शरीर को सभी प्रकार के विटामिनों की अल्प मात्रा में आवश्यकता होती है।

प्रश्न 15.
विटामिन A, C और D का कार्य लिखिए।
उत्तर-
विटामिन A हमारी त्वचा तथा आंखों को स्वस्थ रखता है। विटामिन C बहुत-से रोगों से लड़ने में हमारी मदद करता है। विटामिन D हमारी अस्थियों और दांतों के लिए कैल्शियम का उपयोग करने में हमारे शरीर की सहायता करता है।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 2 भोजन के तत्व

प्रश्न 16.
विटामिन A और B के स्रोत लिखिए।
उत्तर-
विटामिन A के स्रोत-दूध, मछली का तेल, गाजर, पपीता और आम।
PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 2 भोजन के तत्व 5
विटामिन B के स्रोत – यकृत, अंकुरित मूंगी साबुत।
PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 2 भोजन के तत्व 6

प्रश्न 17.
विटामिन C और D के स्रोत लिखिए।
उत्तर-
विटामिन C के स्रोत-संतरा, टमाटर, आंवला, नींबू, अमरूद, मिर्च आदि।
विटामिन D के स्रोत–दूध, मक्खन, मछली, अंडा यकृत।
PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 2 भोजन के तत्व 7

प्रश्न 18.
खनिज लवणों का क्या महत्त्व है ?
उत्तर-
खनिज लवणों का महत्त्व – हमारे शरीर को खनिज लवणों की आवश्यकता अल्प मात्रा में होती है। शरीर के उचित विकास तथा अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रत्येक खनिज लवण आवश्यक हैं। लोहा, फास्फोरस, कैल्शियम और आयोडीन जैसे खनिज लवण हमारे शरीर के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण हैं।

प्रश्न 19.
फॉस्फोरस के कौन-से स्रोत हैं ?
उत्तर-फॉस्फोरस के मुख्य स्रोत – दूध, केला, मटर, गूंगी और हरी पत्तेदार सब्जियाँ।
PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 2 भोजन के तत्व 8

प्रश्न 20.
लोहे के कौन-से स्रोत हैं ? इसकी कमी से कौन-सा रोग हो जाता है ?
उत्तर-
लोहे के स्रोत – मांस, मछली, सेब, आम, पपीता, हरियां पत्तेदार सब्जियाँ लोहे की कमी से अरक्तता का रोग हो जाता है।
PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 2 भोजन के तत्व 9

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 2 भोजन के तत्व

प्रश्न 21.
कैल्शियम के कौन-से स्रोत हैं ? इसकी कमी से कौन-सा रोग हो जाता है ?
उत्तर-
कैल्शियम हमें मुख्य रूप से दूध, अंडों, हरी पत्तेदार सब्जियों से प्राप्त होता है। इसकी कमी से अस्थियाँ और दंत क्षय रोग हो जाता है।
PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 2 भोजन के तत्व 10

प्रश्न 22.
फलों और सब्जियों को काटकर क्यों नहीं धोना चाहिए ?
उत्तर-
छिलका उतार कर यदि सब्जियों और फलों को धोया जाता है तो यह संभव है कि उनके कुछ विटामिन नष्ट हो जाएं। सब्जियों और फलों की त्वचा में कई महत्त्वपूर्ण विटामिन तथा खनिज-लवण होते हैं। चावल और दालों को बार-बार धोने से उनमें उपस्थित विटामिन और कुछ खनिज-लवण अलग हो सकते हैं।

प्रश्न 23.
भोजन को अधिक पकाने से क्या हानि होती है ? इससे कैसे बचा जा सकता है ?
उत्तर-
भोजन को अधिक पकाने से भोजन चाहे स्वादिष्ट हो जाता है और आसानी से पच जाता है, परंतु भोजन पकाने में कुछ पोषकों की हानि भी हो सकती है। यदि भोजन पकाने में अत्यधिक जल का उपयोग किया जाता है और बाद में उसे फेंक दिया जाता है तो कई लाभदायक प्रोटीन तथा पर्याप्त मात्रा में खनिज-लवणों की हानि हो जाती है। अधिक पकाने में विटामिन ‘C’ आसानी से गर्मी से नष्ट हो जाता है। हमें अपने आहार में फल और कच्ची सब्जियों को शामिल करना चाहिए।

प्रश्न 24.
मोटापे का क्या कारण है ? कौन-सा भोजन खाने से मोटापा बढ़ता है ?
उत्तर-
मोटापे का कारण – अधिक वसायुक्त भोजन खाने से मोटापा होता है। ज़रूरत से अधिक भोजन खाने से भी मोटापा होता है। तली हुई चीजें, समोसा, पूरी, मलाई, रबड़ी, पेड़ा आदि वसायुक्त भोजन खाने से भी मोटापा होता है।

प्रश्न 25.
अभावजन्य रोग से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
अभावजन्य रोग – एक व्यक्ति खाने के लिए पर्याप्त भोजन पा रहा है, लेकिन कभी-कभी उसके भोजन में किसी विशेष पोषक तत्व की कमी हो जाती है। यदि यह कमी लंबी अवधि तक रहती है तो वह व्यक्ति उसके अभाव से ग्रसित हो सकता है। एक या अधिक पोषकों का अभाव हमारे शरीर में रोग अथवा विकृतियां उत्पन्न कर सकता है। वे रोग जो लंबी अवधि से पोषक-पदार्थ के अभाव के कारण होते हैं, उन्हें अभावजन्य रोग कहते हैं।

प्रश्न 26.
भोजन में पर्याप्त प्रोटीन न लेने से कौन-सी विकति हो सकती है ?
उत्तर-
यदि कोई व्यक्ति अपने भोजन में पर्याप्त प्रोटीन नहीं ले रहा है तो उसे कुछ रोग हो सकते हैं जिसमें वृद्धि का अवरुद्ध होना, चेहरे पर सूजन, बालों के रंग का उड़ना, त्वचा की बीमारियां और पेचिश जैसे रोग प्रोटीन की कमी से हो सकते हैं।

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7. निबंधात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
विटामिन और खनिज लवणों के अभाव के कारण होने वाले रोगों/विकारों का विवरण दीजिए।
उत्तर-
विटामिन और खनिज लवणों के अभाव के कारण होने वाले रोग/विकार

विटामिन/खनिज लवण अभावजन्य रोग/विकार लक्षण
विटामिन A क्षीणता दृष्टिहीनता कमज़ोर दृष्टि, क्षीण प्रकाश में कम दिखाई देना, कभी-कभी पूरी तरह से दिखाई देना बंद हो जाना।
विटामिन B1 बेरी-बेरी दर्बल पेशियां और काम करने की ऊर्जा में कमी
विटामिन C स्कर्वी मसूढ़ों से खून निकलना, घाव भरने में अधिक समय का लगना
विटामिन D रिकेट्स अस्थियों का मुलायम होकर मुड़ जाना
कैल्शियम अस्थियां और दंत क्षय कमज़ोर अस्थियाँ, दंतक्षय
आयोडीन घेघा (गॉयटर) विकार गर्दन की ग्रंथि का फूल जाना, बच्चों में मानसिक विकलांगता
लोहा अरक्तता कमज़ोरी

प्रश्न 2.
भोजन के प्रत्येक अवयव की भूमिका क्या है ?
उत्तर-
भोजन के मुख्य अवयव हैं-प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट्स, वसा, विटामिन तथा खनिज।

I. प्रोटीन का महत्त्व-

  1. प्रोटीन हमारे शरीर के निर्माण, वृद्धि तथा मरम्मत के लिए आवश्यक पदार्थ हैं।
  2. प्रोटीन शरीर की कोशिकाओं और ऊतकों का निर्माण करते हैं।
  3. ये जीवद्रव्य का एक प्रमुख भाग हैं।
  4. महिलाओं में प्रोटीन दूध का निर्माण करते हैं।
  5. शरीर में एंजाइम और हार्मोन का निर्माण प्रोटीन से होता है।
  6. प्रोटीन मांसपेशियों के निर्माण के साथ-साथ उनकी रक्षा भी करते हैं।

II. कार्बोहाइड्रेट्स का महत्त्व-

  1. कार्बोहाइड्रेट्स ऊर्जा का मुख्य स्रोत है। दैनिक जीवन में अभीष्ट ऊर्जा कार्बोहाइड्रेट्स के ऑक्सीजन से प्राप्त होती है। इसके 1 ग्राम पूर्ण दहन से 17 किलो जूल ऊष्मा प्राप्त होती है।
  2. कार्बोहाइड्रेट्स रक्त में रक्त-शक्कर अनुपात को स्थिर रखते हैं।
  3. दूध पिलाने वाली माताओं में ग्लूकोज़ को लेक्टोस में बदला जाता है।
  4. मानव शरीर में कार्बोहाइड्रेट्स चर्बी या वसा में परिवर्तित होते रहते हैं।
  5. कार्बोहाइड्रेट्स से लैक्टिक एसिड और अमोनिया प्राप्त होते हैं। इनके फिर प्रोटीन बनाए जाते हैं।

III. वसा का महत्त्व-

  1. वसा ऊर्जा का मुख्य स्रोत है। इससे प्रोटीन तथा कार्बोहाइड्रेट्स से दुगुनी ऊर्जा मिलती है।
  2. वसा विटामिन A, D, E तथा K का मुख्य स्रोत है।
  3. वसा से कार्बोहाइड्रेट्स तथा एमीनो अम्ल बनाए जा सकते हैं।
  4. वसा को शरीर में एकत्र किया जा सकता है।
  5. मानव शरीर में वसा ऑक्सीजन से फॉस्फोलिपिडस बनते हैं। ये जीव द्रव्य के मुख्य अंग हैं तथा रक्त के जमने में सहायता करते हैं।

IV. विटामिन का महत्त्व-

  1. विटामिन हमारे भोजन का मुख्य अंग हैं। यद्यपि इनसे ऊर्जा प्राप्त नहीं होती फिर भी ये मानव शारीरिक
    क्रियाओं के लिए आवश्यक हैं।
  2. विटामिन के बिना स्वास्थ्य ठीक रखना कठिन है।
  3. पौधे सरल पदार्थों से विटामिन बना लेते हैं परंतु प्राणी इनका संश्लेषण नहीं कर सकते।
  4. इनकी कमी के कारण शरीर में कई अनियमितताएं पैदा हो जाती हैं।

V. खनिज का महत्त्व-

  1. ये हड्डियां तथा दांत बनाते हैं।
  2. ये लाल रक्ताणुओं के निर्माण के लिए ज़रूरी हैं।
  3. ये रक्त के जमने में सहायक होते हैं।
  4. ऊतकों, तंत्रिकाओं तथा थायरॉयड ग्रंथि के कार्य के लिए इनकी आवश्यकता होती है।
  5. जीवन की गतिविधियों के लिए कई प्रकार के खनिज तत्वों की आवश्यकता होती है।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 1 भोजन :यह कहाँ से आता है?

Punjab State Board PSEB 6th Class Science Book Solutions Chapter 1 भोजन :यह कहाँ से आता है? Textbook Exercise Questions, and Answers.

PSEB Solutions for Class 6 Science Chapter 1 भोजन :यह कहाँ से आता है?

PSEB 6th Class Science Guide भोजन :यह कहाँ से आता है? Textbook Questions, and Answers

1. खाली स्थान भरें

(i) भोजन पदार्थ बनाने के लिए आवश्यक सामग्री को …………………. कहते हैं।
उत्तर-
संघटक

(ii) अंडे के सफेद भाग को ……………. कहते हैं।
उत्तर-
एल्बुमिन

(iii) पौधे …………………… क्रिया के द्वारा अपना भोजन आप तैयार करते हैं।
उत्तर-
प्रकाश संश्लेषण

(iv) सरसों के ………………. तथा …………………… भाग भोजन के रूप में प्रयोग किये जाते हैं।
उत्तर-
पत्ते, बीज

(v) शहद की मक्खी फूलों से ………………………. एकत्र करती है।
उत्तर-
मकरंद।

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2. सही या ग़लत

(i) सभी जानवर मांसाहारी होते हैं।
उत्तर-
ग़लत

(ii) शकरकंद की जड़ को भोजन के रूप में प्रयोग किया जाता है।
उत्तर-
सही

(iii) अंडा एक बढ़िया भोजन पदार्थ नहीं है क्योंकि इसमें प्रोटीन नहीं होते।
उत्तर-
ग़लत

(iv) गन्ने के तने को जूस, चीनी, गुड़ बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है।
उत्तर-
सही

(v) मक्खन, दहीं और शहद दूध से बने पदार्थ हैं।
उत्तर-
ग़लत

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3. कॉलम ‘क’ और कॉलम ‘ख’ का उचित मिलान करें

कॉलम ‘क’ कॉलम ‘ख’
(i) गाजर (क) दालें
(ii) चने, मटर (ख) फल
(iii) गेहूँ, चावल (ग) जड़
(iv) आलू (घ) अनाज
(v) संतरा (ङ) तना

उत्तर-

कॉलम ‘क’ कालम ‘ख’
(i) गाजर (ग) जड़
(ii) चने, मटर (क) दालें
(iii) गेहूँ, चावल (घ) अनाज
(iv) आलू (ङ) तना
(v) संतरा (ख) फल

4. सही विकल्प का चयन करें

प्रश्न (i)
निम्नलिखित में से कौन-सा सर्वाहारी जानवर है ?
(क) शेर
(ख) बाज
(ग) हिरन
(घ) कौआ
उत्तर-
(घ) कौआ ।

प्रश्न (ii)
बंदगोभी का कौन-सा भाग भोजन के रूप में प्रयोग किया जाता है ?
(क) तने
(ख) जड़ें
(ग) पत्ते
(घ) इनमें से कोई नहीं ।
उत्तर-
(ग) पत्ते।

5. अति लघूत्तर प्रश्न

प्रश्न (i)
संघटक क्या होते हैं ?
उत्तर-
भोजन बनाने के लिए जिन पदार्थों की आवश्यकता होती है उन्हें संघटक कहते हैं।

प्रश्न (ii)
दूध से बनाए जाने वाले कोई तीन उत्पादों के नाम लिखें।
उत्तर-
पनीर, मक्खन, दही और क्रीम।

प्रश्न (iii)
भोजन पदार्थों में मसाले के तौर प्रयोग किए जाने वाले कोई दो बीजों के नाम बताएं।
उत्तर-
अदरक और हल्दी।

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6. लघूत्तर प्रश्न

प्रश्न (i)
बीज मानवीय भोजन का मख्य स्रोत कैसे हैं?
उत्तर-
बीज हमारे भोजन के महत्त्वपूर्ण तत्व हैं। चना, राजमाह और हरे चने (मूंग) के बीज दालें हैं । ये प्रोटीन के समृद्ध स्रोत हैं। गेहूँ, चावल और मक्का जैसे घास के पौधों के बीज अनाज के रूप में जाने जाते हैं। ये कार्बोहाइड्रेट के अच्छे स्रोत हैं। सरसों, मूंगफली और नारियल जैसे कई पौधों के बीज खाद्य तेलों के अच्छे स्रोत होते हैं।

प्रश्न (ii)
जीवित प्राणियों के लिए भोजन का क्या महत्त्व है?
उत्तर-
भोजन बहुत महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह-

  1. कार्य करने के लिए ऊर्जा प्रदान करता है।
  2. शरीर की वृद्धि और विकास में मदद करता है।
  3. हमें रोगों से बचाता है।
  4. हमें स्वस्थ रखता है। .
  5. शरीर के घायल अंगों को ठीक करने में मदद करता है।

प्रश्न (iii)
जानवरों से प्राप्त किए जाने वाले किन्हीं दो भोजन पदार्थों के बारे में संक्षिप्त में लिखें ।
उत्तर-
हमें जानवरों से अलग-अलग खाद्य उत्पाद मिलते हैं। दूध, अंडे, मांस, शहद आदि इनके कुछ उदाहरण हैं।
दूध और दूध उत्पाद – दूध का उपयोग दुनिया भर में भोजन के रूप में किया जाता है। इसे पनीर, मक्खन, दही, मलाई आदि जैसे डेयरी उत्पादों में भी परिवर्तित किया जाता है। हम भैंस, गाय, और बकरी के दूध का उपयोग करते हैं। दूध में प्रोटीन, चीनी, वसा और विटामिन होते हैं। यह सेहत के लिए बहुत अच्छा होता है।

शहद – शहद मधुमक्खियों द्वारा निर्मित मीठा और गाढ़ा तरल पदार्थ है। मधुमक्खियां फूलों से मकरंद इकट्ठा करती हैं और उसे शहद में बदल कर अपने छत्तों में जमा कर लेती हैं। शहद मेचीनी, पानी, खनिज, एंजाइम और विटामिन होते हैं। प्राचीन काल से शहद का उपयोग भोजन और औषधि के रूप में किया जा रहा है।

7. निबंधात्मक प्रश्न

प्रश्न (i)
भोजन से संबंधित आदतों के आधार पर जानवरों को किस तरह श्रेणीबद्ध किया गया है ? उदाहरणों की सहायता के साथ व्याख्या करें।
उत्तर-
हम जानवरों को उनके भोजन की आदतों के आधार पर तीन श्रेणियों में वर्गीकृत कर सकते हैं। ये हैं-

  1. शाकाहारी,
  2. मांसाहारी और
  3. सर्वाहारी।

(1) शाकाहारी – वे जानवर जो केवल पौधों और पौधों के उत्पादों को खाते हैं शाकाहारी कहलाते हैं । जैसे गाय, बकरी, खरगोश, भेड़, हिरण, हाथी, आदि।
(2) मांसाहारी – वे जानवर जो भोजन के लिए अन्य जानवरों को खाते हैं, मांसाहारी कहलाते हैं । जैसे शेर, बाघ, छिपकली, सांप, आदि।
(3) सर्वाहारी – वे जानवर जो भोजन के लिए पौधे और जानवर दोनों खाते हैं, सर्वाहारी कहलाते हैं। जैसे कौआ, भालू, कुत्ता और चूहा, आदमी, आदि ।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 1 भोजन :यह कहाँ से आता है?

Science Guide for Class 6 PSEB भोजन :यह कहाँ से आता है? Intext Questions and Answers

सोचें और उत्तर दें (पेज 2)

प्रश्न 1.
भोजन पदार्थों को बनाने के लिए जरूरी सामान को क्या कहते हैं ?
उत्तर-
संघटक।

प्रश्न 2.
खीर बनाने के लिए कौन-सी सामग्री प्रयोग की जाती है?
उत्तर-
दूध, चावल, चीनी और सूखे मेवे।

सोचें और उत्तर दें (पेज 4)

प्रश्न 1.
पौधे का वह भाग जिसे खाने के लिए प्रयोग किया जाता है, को क्या कहते है ?
उत्तर-
खाद्य भाग ।

प्रश्न 2.
आम के पौधे का कौन-सा भाग खाने के लिए योग्य होता है?
उत्तर-
फल ।

सोचें और उत्तर दें (पेज 6)

प्रश्न 1.
ऐसे दो जानवरों के नाम बताएं, जो केवल पौधों या पौधों से प्राप्त उत्पाद ही खाते हैं।
उत्तर-
गाय और बकरी

प्रश्न 2.
ऐसे दो जानवरों के नाम बताएं, जो केवल मांस ही खाते हैं।
उत्तर-
शेर और बाघ ।

प्रश्न 3.
दो ऐसे जानवरों के नाम बताएं, जो भोजन के लिए पौधों और जंतुओं दोनों पर निर्भर करते हैं। भोजन से सम्बन्धित आदतों में भिन्नता के आधार पर।
उत्तर-
बिल्ली और कुत्ता ।

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PSEB Solutions for Class 6 Science भोजन के तत्व Important Questions and Answers

1. बहुविकल्पीय प्रश्न लाया

प्रश्न (i)
यह खाद्य पदार्थ नाश्ते में खाया जाता है-
(क) मांस
(ख) दलिया
(ग) फल
(घ) सभी विकल्प।
उत्तर-
(घ) सभी विकल्प ।

प्रश्न (ii)
दूध प्राप्त होता है
(क) फलों से
(ख) पौधों से
(ग) पशुओं से
(घ) सभी विकल्प ।
उत्तर-
(ग) पशुओं से ।

प्रश्न (iii)
अंकुरित बीजों में मात्रा अधिक होती है-
(क) कार्बोहाइड्रेट्स
(ख) वसा
(ग) प्रोटीन
(घ) जल ।
उत्तर-
(ग) प्रोटीन ।

प्रश्न (iv)
शकरकंदी से हमें मिलती है-
(क) वसा
(ख) शक्कर
(ग) शहद
(घ) दूध ।
उत्तर-
(ख) शक्कर ।

प्रश्न (v)
केवल पौधे खाने वाले जंतु कहलाते हैं-
(क) मांसाहारी
(ख) शाकाहारी
(ग) सर्वाहारी
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(ख) शाकाहारी।

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प्रश्न (vi)
मांसाहारी जीव खाते हैं-
(क) पौधे
(ख) पौधे और मांस
(ग) मांस
(घ) कुछ भी नहीं।
उत्तर-
(ग) मांस।

प्रश्न (vii)
अंडे देते हैं-
(क) मुर्गी
(ख) छिपकली
(ग) कछुआ
(घ) सभी विकल्प।
उत्तर-
(घ) सभी विकल्प।

प्रश्न (viii)
खीर के संघटक हैं-
(क) दूध, चीनी, चावल
(ख) दूध, आटा, चीनी
(ग) पानी, चीनी, चावल
(घ) पानी, आटा, चीनी ।
उत्तर-
(क) दूध, चीनी, चावल ।

प्रश्न (ix)
दूध का उत्पाद नहीं है-
(क) खीर
(ख) दहीं
(ग) दाल
(घ) पनीर।
उत्तर-
(ग) दाल।

प्रश्न (x)
गाजर एक …………………… है जो हम खाते हैं।
(क) तना
(ख) जड़
(ग) फूल
(घ) फल।
उत्तर-
(ख) जड़।

प्रश्न (xi)
दूसरे जीवों को खाने वाले जीवों को क्या कहते हैं ?
(क) शाकाहारी
(ख) मांसाहारी
(ग) परजीवी
(घ) सर्वाहारी ।
उत्तर-
(ख) मांसाहारी ।

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2. खाली स्थान भरें

(i) सिंह ………………….. और बकरी …………………. है ।
उत्तर-
मांसाहारी, शाकाहारी

(ii) कौआ, कुत्ता और बिल्ली ……………………. हैं ।
उत्तर-
सर्वाहारी

(iii) जीवों से प्राप्त भोजन को …………………….. कहा जाता है ।
उत्तर-
पशु उत्पाद

(iv) पौधों से प्राप्त भोजन को …………………. कहा जाता है ।
उत्तर-
वनस्पति उत्पाद

(v) गन्ना हमें ……………………….. देता है ।
उत्तर-
चीनी ।

3. सही या ग़लत चुनें

(i) जो जानवर दूसरे जानवरों का मांस खाते हैं, वे शाकाहारी कहलाते हैं ।
उत्तर-
गलत

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(ii) दूध से ही हमें प्रोटीन मिलता है ।
उत्तर-
गलत

(iii) सरसों के बीज तेल के स्रोत हैं ।
उत्तर-
सही

(iv) गिद्ध विभाजक हैं ।
उत्तर-
गलत

(v) तोता सर्वाहारी है ।
उत्तर-
गलत

4. कॉलम ‘क’ और कॉलम ‘ख’ का उचित मिलान करें

कॉलम ‘क’ कॉलम ‘ख’
(i) दूध (a) गन्ना
(ii) शहद (b) ऊँठनी
(iii) चीनी (c) खरगोश
(iv) शाकाहारी (d) कवक
(v) विभाजक (e) मधुमक्खी

उत्तर-

कॉलम ‘क’ कॉलम ‘ख’
(i) दूध (b) ऊँठनी
(ii) शहद (e) मधुमक्खी
(ii) चीनी (a) गन्ना
(iv) शाकाहारी (c) खरगोश
(v) विभाजक (d) कवक

5. अति लघूत्तर प्रश्न

प्रश्न 1.
चार खाद्य पदार्थों के नाम लिखिए।
उत्तर-
खाद्य पदार्थ-रोटी, चावल, दाल, फूलगोभी।

प्रश्न 2.
कच्ची सामग्री किसे कहते हैं ?
उत्तर-
कच्ची सामग्री – खाद्य पदार्थ बनाने के लिए प्रयोग की जाने वाली सामग्री को कच्ची सामग्री कहते हैं। जैसे चावल बनाने के लिए पानी और चावल कच्ची सामग्री है।

प्रश्न 3.
दाल बनाने के लिए कौन-सी कच्ची सामग्री चाहिए ?
उत्तर-
दाल बनाने के लिए कच्ची दाल, जल, नमक, तेल, घी, मसाले आदि चाहिए।

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प्रश्न 4.
सब्जी बनाने के लिए कौन-से संघटनों की आवश्यकता होती है ?
उत्तर-
कच्ची सब्जी, नमक, वसा, मसाला, तेल आदि की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 5.
संघटक किसे कहते हैं ?
उत्तर-
संघटक-खाद्य पदार्थ तैयार करने के लिए जो पदार्थ प्रयोग किये जाते हैं, उन्हें संघटक कहते हैं।

प्रश्न 6.
जंतुओं से हमें कौन-से खाद्य पदार्थ प्राप्त होते हैं ?
उत्तर-
जंतुओं से हमें दूध, अंडे, मछली, मांस, मुर्गा और झींगा आदि प्राप्त होते हैं।

प्रश्न 7.
पौधे से कौन-से खाद्य संघटक प्राप्त होते हैं ?
उत्तर-
पौधे से हमें सब्जियाँ, फल आदि संघटक प्राप्त होते हैं।

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प्रश्न 8.
दूध देने वाले पशुओं के नाम लिखो।
उत्तर-
गाय, भैंस और बकरी से हमें दूध प्राप्त होता है।

प्रश्न 9.
दूध के उत्पादों के नाम लिखिए।
उत्तर-
दूध से हमें मक्खन, क्रीम, घी, पनीर और दही आदि मिलते हैं।

प्रश्न 10.
किन पौधों के पत्तों को खाद्य पदार्थ के रूप में प्रयोग किया जाता है ?
उत्तर-
पालक, सरसों और मेथी के पत्तों को खाद्य पदार्थ के रूप में प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 11.
किन पौधों के तनों को खाद्य पदार्थ के रूप में प्रयोग किया जाता है ?
उत्तर-
आलू, प्याज, लहसुन और कचालू के तने को खाद्य पदार्थ के रूप में प्रयोग किया है।

प्रश्न 12.
किस पौधे के फल को खाद्य भोजन के रूप में प्रयोग किया जाता है ?
उत्तर-
आम का फल ।

प्रश्न 13.
किसी एक पौधे का नाम बताओ जिसके विभिन्न भाग खाए जाते हैं ।
उत्तर-
सरसों के पत्ते से साग बनता है तथा इसके बीजों से तेल प्राप्त किया जाता है ।

प्रश्न 14.
अंकुरण किसे कहते हैं ?
उत्तर-
अंकुरण – बीजों के पुंगरने अथवा अंकुरित होने को अंकुरण कहते हैं।

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प्रश्न 15.
दो शाकाहारी जंतुओं के नाम बताओ।
उत्तर-
भैंस और बकरी ।

प्रश्न 16.
दो मांसाहारी जंतुओं के नाम बताओ।
उत्तर-
शेर और छिपकली।

प्रश्न 17.
दो सर्वाहारी जंतुओं के नाम बताओ।
उत्तर-
मनुष्य और कौआ।

6. लघूत्तर प्रश्न

प्रश्न 1.
जो आहार हम खाते हैं वह कहां से आता है ?
उत्तर-
जो आहार हम रोज़ाना खाते हैं वह हमें पौधों और जंतुओं से प्राप्त होता है।

प्रश्न 2.
पौधों से हमें कौन-कौन से खाद्य पदार्थ प्राप्त होते हैं ?
उत्तर-
पौधों से हमें अनाज, दालें, सब्जियाँ, मसाले, तेल, फूल और फल खाद्य पदार्थों के रूप में प्राप्त होते हैं।

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प्रश्न 3.
आपके द्वारा दिन में खाये गये खाद्य पदार्थों की सूची बनाएं।
उत्तर-
दूध, चपाती, दाल, सब्जी, फल, ब्रैड, पकौड़े, खीर आदि।

प्रश्न 4.
इडली खाद्य पदार्थ बनाने के लिए प्रयोग की गई कच्ची सामग्री और उसके स्रोतों के नाम बताओ।
उत्तर-

खाद्य मद कच्ची सामग्री स्रोत
इडली चावल पौधा
उड़द की दाल पौधा
नमक समुद्र
जल जल स्रोत

प्रश्न 5.
चिकन करी खाद्य मद के लिए कच्ची सामग्री और स्रोत बताएं।
उत्तर-

खाद्य मद कच्ची सामग्री स्रोत
चिकन करी चिकन (मुर्गा) जंतु
मसाला पौधा
तेल/घी पौधा/जंतु
जल जल स्रोत

प्रश्न 6.
बैंगन का भर्ता में से उन संघटकों को छांटिए जिनका मुख्य स्रोत पौधे हैं। यह पौधों के किन भागों से प्राप्त होते हैं ?
उत्तर-

खाद्य पदार्थ संघटक पौधे का भाग जो हमें संघटक देता है
बैंगन का भर्ता बैंगन फल
मिर्च (मसाले के रूप में) फल
तेल (मूंगफली, सरसों, बीज सोयाबीन) बीज

प्रश्न 7.
भैंस और बिल्ली द्वारा खाये जाने वाले भोजन पदार्थों के नाम लिखो।
उत्तर-

जीव का नाम खाया जाने वाला भोजन
(1) भैंस (1) घास, खली, भूसा, अनाज, पत्ती
(2) बिल्ली (2) छोटे जंतु, पक्षी, दूध।

प्रश्न 8.
शाकाहारी, मांसाहारी और सर्वाहारी जंतुओं से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
शाकाहारी – जो जंतु केवल पौधे और पादप उत्पाद खाते हैं उन्हें शाकाहारी कहते हैं; जैसे-गाय, भैंस।
मांसाहारी – जो जंतु दूसरे जंतुओं को खाते हैं उन्हें मांसाहारी कहते हैं; जैसे-शेर, मेंढक, छिपकली। सर्वाहारी-जो जंतु अपना भोजन पौधों और जंतुओं दोनों से प्राप्त करते हैं उन्हें सर्वाहारी कहते हैं; जैसे-मनुष्य और कौआ।

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प्रश्न 9.
निम्नलिखित जंतुओं में से मांसाहारी, शाकाहारी और सर्वाहारी वर्गों के जंतु छांटिए। भैंस, बकरी, चूहा, बिल्ली, शेर, बाघ, मकड़ी, गाय, छिपकली, मनुष्य, तितली, कौआ।
उत्तर-
मांसाहारी – शेर, बाघ, मकड़ी, छिपकली।
शाकाहारी – भैंस, बकरी, गाय, तितली, चूहा।
सर्वाहारी – बिल्ली, मनुष्य, कौआ।

प्रश्न 10.
अंकुरित बीजों को खाने के लिए कैसे तैयार किया जाता है ?
उत्तर-
PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 1 भोजन यह कहाँ से आता है 1
मूँग अथवा चने के कुछ सूखे बीज लीजिए। इनमें से कुछ बीजों को जल से भरे एक पात्र में डाल दें तथा एक दिन के लिए छोड़ दीजिए। अगले दिन जल को पूरी तरह निकाल दें और बीजों को गिलास में रहने दें और एक गीले कपड़े से ढक दें। पूरा दिन पड़ा रहने दें। सुबह उनमें से छोटे-छोटे पौधे उगने शुरू हो चित्र-अंकुरित बीज जाएंगे। यह अंकुरित बीज हैं। इनमें कुछ मसाले और नमक मिलाकर खायें, यह स्वादिष्ट अल्पाहार है।

प्रश्न 11.
शहद कैसे प्राप्त होता है ?
उत्तर-
PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 1 भोजन यह कहाँ से आता है 2
शहद की प्राप्ति – शहद हमें मधुमक्खियों के छत्ते से प्राप्त होता है। मधुमक्खियाँ पेड़ों पर छत्ते बनाती हैं। ये मधुमक्खियाँ फूलों से पराग एकत्रित करती हैं और इसे अपने छत्ते में भंडारित करती हैं। फूल और उनका मकरंद वर्ष के केवल कुछ समय में ही उपलब्ध होते हैं। मधुमक्खियों द्वारा भंडारित भोजन को हम शहद के रूप में उपयोग करते हैं।
चित्र–मधुमक्खियों का छत्ता

प्रश्न 12.
जंतु क्या खाते हैं ?
उत्तर-
जंतुओं का भोजन – विभिन्न जंतु विभिन्न प्रकार का भोजन खाते हैं। कुछ जंतु केवल पादप और उनके उत्पाद खाते हैं; जैसे गाय, भैंस और बकरी। ऐसे जंतुओं को शाकाहारी कहते हैं। कुछ जंतु दूसरे जंतुओं का मांस खाते हैं; जैसेछिपकली, कबूतर, गिलहरी, मेंढक, शेर और बाघ आदि। इन जंतुओं को मांसाहारी कहते हैं। कुछ जंतु पौधों के उत्पाद और दूसरे जंतुओं का मांस खाते हैं। ऐसे जंतुओं को सर्वाहारी कहते हैं; जैसे-मनुष्य, कौआ और बिल्ली आदि।

प्रश्न 13.
खाद्य सामग्री के कौन-से स्रोत हैं ?
उत्तर-
खाद्य सामग्री के स्रोत – पौधे और जंतु खाद्य सामग्री के स्रोत हैं। पौधों से हमें अनाज, फल, सब्जियाँ, बीज, तेल आदि प्राप्त होते हैं। जंतुओं से हमें खाद्य पदार्थ के रूप में दूध, अंडा, मुर्गा, मछली, झींगा, मांस आदि प्राप्त होता है।
PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 1 भोजन यह कहाँ से आता है 3

प्रश्न 14.
भोजन के रूप में पौधे के कौन-से भाग खादय पदार्थ के रूप में प्रयोग किए जाते हैं ?
उत्तर-
PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 1 भोजन यह कहाँ से आता है 4
पौधे हमारे भोजन का एक मुख्य स्रोत हैं। हम पौधे के कई भागों का उपयोग खाद्य पदार्थ के रूप में करते हैं। हम पत्तियों वाली अनेक सब्जियाँ खाते हैं। कुछ पौधों के फलों को भोजन के रूप में खाते हैं। कभी हम जड़, कभी तना तो कभी पुष्प भी भोजन के रूप में खाते हैं। जैसे-सीताफल के फूलों को चावल की पिठी में डुबोकर और तलकर पकौड़ी बनाकर खाया जाता है।

कुछ पौधों के दो या दो से अधिक भाग खाने योग्य होते हैं। जैसे-सरसों के बीज से हमें तेल प्राप्त होता है एवं इसकी पत्तियों का उपयोग साग बनाने के लिए किया जाता है।

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प्रश्न 15.
अनाज, दालें, सब्ज़ियाँ तथा फल कहाँ से प्राप्त होते हैं तथा ये किस प्रकार के जंतुओं का भोजन हैं?
उत्तर-
अनाज, दालें, सब्जियाँ तथा फल हमें पौधों से प्राप्त होते हैं। ये सभी शाकाहारी तथा सर्वआहारी जंतुओं का भोजन हैं।

7. निबंधात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
इडली, चिकन करी और खीर के लिए प्रयोग की जाने वाली कच्ची सामग्री और उनके स्रोत लिखिए।
उत्तर-
इडली, चिकन करी और खीर के संघटक और स्रोत-
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प्रश्न 2.
निम्नलिखित जंतुओं द्वारा खाये जाने वाले भोजन पदार्थों के नाम लिखिए-
भैंस, बिल्ली, चूहा, शेर, बाघ, मकड़ी, छिपकली, गाय, मनुष्य, तितली, कौआ।
उत्तर-
जंतु और उनका भोजन

जीव का नाम खाया जाने वाला भोजन
भैंस घास, खली, भूसा, अनाज, पत्ती
बिल्ली छोटे जंतु, पक्षी, दूध
चूहा अनाज, चपाती, फल, तेल, घी आदि
शेर दूसरे प्राणियों का मांस
बाघ दूसरे प्राणियों का मांस
मकड़ी छोटे कीड़े-मकौड़े और पतंगे
छिपकली कीड़े-मकौड़े, पतंगे
गाय घास, भूसा, अनाज, खाली।
मनुष्य अनाज और अन्य पौधा उत्पाद और मांस मछली और अंडा
तितली फूलों का मकरंद
कौआ अनाज, चपाती, फल, दाने और दूसरे प्राणियों का मास

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 29 पंजाब सरकार की आर्थिक स्थिति

Punjab State Board PSEB 11th Class Economics Book Solutions Chapter 29 पंजाब सरकार की आर्थिक स्थिति Textbook Exercise Questions, and Answers.

PSEB Solutions for Class 11 Economics Chapter 29 पंजाब सरकार की आर्थिक स्थिति

PSEB 11th Class Economics पंजाब सरकार की आर्थिक स्थिति Textbook Questions and Answers

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Type Questions)

प्रश्न 1.
पंजाब सरकार की आय के मुख्य कर साधन कौन-कौन से हैं ?
उत्तर-
पंजाब सरकार की आय के मुख्य साधनों को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है कर साधन-इन साधनों में बिक्री कर, उत्पादन कर, भूमि लगान, स्टैम्प ड्यूटी तथा रजिस्ट्री, मोटर गाड़ियों पर कर, विद्युत् कर, यात्रा कर इत्यादि शामिल किए जाते हैं।

प्रश्न 2.
पंजाब सरकार के विकासवादी व्यय की दो मुख्य मदों का वर्णन करें।
उत्तर-
कृषि (Agriculture)-कृषि, सहकारिता तथा पशुपालन की उन्नति के लिए सरकार व्यय करती है। वर्ष 2020-21 में इस मद पर ₹ 13267 करोड़ व्यय होने का अनुमान लगाया गया।

प्रश्न 3.
पंजाब सरकार के गैर-विकासवादी व्यय की मदों का वर्णन करें।
उत्तर-
राज्य प्रबन्ध (Administration)-पंजाब सरकार को राज्य प्रबन्ध, पुलिस तथा शान्ति स्थापित करने के लिए व्यय करना पड़ता है। वर्ष 2020-21 में इस मद पर व्यय करने के लिए ₹ 6954 करोड़ रखे गए।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 29 पंजाब सरकार की आर्थिक स्थिति

प्रश्न 4. पंजाब में सरकार की आय के मुख्य साधन बिक्री कर, उत्पादन कर, भूमि लगान, स्टैम्प ड्यूटी आदि
उत्तर-
सही।

प्रश्न 5.
पंजाब सरकार की आय व्यय से अधिक है।
उत्तर-
सही।

प्रश्न 6. पंजाब सरकार द्वारा विकासवादी व्यय ………. हैं।
(a) शिक्षा
(b) कृषि
(c) स्वास्थ्य
(d) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(d) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 7.
वर्ष 2020-21 में पंजाब सरकार की कुल आय ……………. करोड़ रुपए होने का अनुमान था।
(a) 151048
(b) 152048
(c) 153048
(d) 164048
उत्तर-
(c) 153048

प्रश्न 8.
सन् 2020-21 में पंजाब सरकार का कुल व्यय ₹ ………….. करोड़ होने का अनुमान था।
(a) 152805
(b) 162805
(c) 172805
(d) 1828808
उत्तर-
(a) 152805

प्रश्न 9.
पंजाब सरकार की आर्थिक स्थिति सन्तोषजनक है।
उत्तर-
ग़लत।

प्रश्न 10.
पंजाब सरकार को सामाजिक कल्याण की योजनाओं पर कम व्यय करना चाहिए।
उत्तर-
सही।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 29 पंजाब सरकार की आर्थिक स्थिति

प्रश्न 11.
पंजाब सरकार की आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए सुझाव दें।
उत्तर-
पंजाब को विकासवादी व्यय अधिक करना चाहिए और ग्रांटें देनी बन्द करनी चाहिए।

प्रश्न 12.
पंजाब सरकार पर 2020-21 का कुल ऋण ₹ 20 लाख करोड़ था।
उत्तर-
सही।

II. अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
पंजाब सरकार की आय के दो कर साधनों का वर्णन करें।
उत्तर-
पंजाब सरकार को करों द्वारा तथा गैर-कर साधनों द्वारा आय प्राप्त होती है। वर्ष 2020-21 में लगभग ₹ 153048 करोड़ की कुल आय प्राप्त होने का अनुमान था। पंजाब सरकार के कर साधन निम्नलिखित हैं-

  1. बिक्री कर (Sale Tax)- बिक्री कर पंजाब सरकार की आय का मुख्य साधन है। यह कर वस्तुओं तथा सेवाओं की बिक्री के समय लगाया जाता है। वर्ष 2020-21 में बिक्री द्वारा ₹ 5575 करोड़ की आय होने की सम्भावना थी।
  2. राज्य उत्पादन कर (State Excise Duty)-यह कर नशीले पदार्थों पर लगाया जाता है और 2020-21 में इस कर से ₹ 6550 करोड़ प्राप्त होने की संभावना थी।

प्रश्न 2.
पंजाब सरकार की आय के दो गैर-कर साधनों की व्याख्या करें।
उत्तर-
पंजाब सरकार को गैर-कर साधनों द्वारा भी आय प्राप्त होती है। इसके मुख्य साधन निम्नलिखित हैं-

  1. साधारण सेवाएं (General Services)-पंजाब द्वारा साधारण सेवाओं जैसे कि पुलिस, जेल, लोक सेवा से प्राप्त होती है। इस प्रकार ₹ 6754 करोड़ की आय पंजाब सरकार को प्राप्त होने की सम्भावना थी।
  2. आर्थिक विकास (Economics Services) आर्थिक सेवाओं का अर्थ सिंचाई, भूमि सुधार, पशु पालन, मछली पालन, यातायात इत्यादि सेवाओं से प्राप्त होने वाली आय से होता है। वर्ष 2020-21 में पंजाब सरकार को आर्थिक सेवाओं द्वारा ₹ 898 करोड़ की आय प्राप्त होने का अनुमान था।

प्रश्न 3.
पंजाब सरकार के दो विकास व्यय बताएं।
उत्तर-
विकास व्यय (Development Expenditure)-विकास व्यय में मुख्यतः शिक्षा, स्वास्थ्य उद्योग, सड़कें, विद्युत् इत्यादि पर व्यय को शामिल किया जाता है।

  1. शिक्षा (Education)-पंजाब सरकार द्वारा स्कूलों, कॉलेजों तथा तकनीकी संस्थाओं के संचालन पर व्यय किया जाता है। 2020-21 में पंजाब सरकार द्वारा ₹ 13037 करोड़ व्यय किए जाने का अनुमान था।
  2. स्वास्थ्य सुविधाएं (Medical Facilities)-पंजाब सरकार द्वारा स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। इसके लिए गांवों में प्राइमरी स्वास्थ्य केन्द्र, शहरों तथा कस्बों में अस्पताल स्थापित किए गए हैं। 2020-21 में स्वास्थ्य सुविधाओं पर व्यय करने के लिए ₹ 4532 करोड़ रखे गए थे।

प्रश्न 4.
पंजाब सरकार के दो गैर विकास व्यय बताएं।
उत्तर-
गैर-विकास व्यय (Non-Development Expenditure)- पंजाब सरकार को गैर-विकास व्यय जैसे कि राज्य प्रशासन, पुलिस, कर्मचारियों को वेतन तथा पेंशन देने पर काफ़ी धन व्यय करना पड़ता है। इसको गैर-विकास व्यय कहा जाता है।

  1. राज्य प्रशासन (Civil Administration)-पंजाब सरकार प्रशासन पर व्यय करती है जैसे कि पुलिस, सरकारी कर्मचारी तथा मन्त्रियों के लिए रखे गए कर्मचारियों पर काफ़ी व्यय करना पड़ता है। 2020-21 में राज्य प्रशासन पर पंजाब सरकार ने ₹ 27629 करोड़ व्यय किए।
  2. ऋण सेवाएं (Debts Services)-पंजाब सरकार द्वारा प्राप्त किए गए ऋण पर ब्याज दिया जाता है। यह ऋण केन्द्र सरकार अथवा केन्द्रीय बैंक से प्राप्त किया जाता है। 2020-21 में पंजाब सरकार द्वारा ब्याज के रूप में ₹ 19075 करोड़ व्यय करने का अनुमान था।

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III. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
पंजाब सरकार की आय के कर साधनों का वर्णन करें।
उत्तर-
पंजाब सरकार को करों द्वारा तथा गैर-कर साधनों द्वारा आय प्राप्त होती है। वर्ष 2017-18 में लगभग ₹ 60080 करोड़ की कुल आय प्राप्त होने का अनुमान था। पंजाब सरकार के कर साधन निम्नलिखित हैं-
1. जी० एस० टी० (G.S.T.)-बिक्री कर पंजाब सरकार की आय का मुख्य साधन है। यह कर वस्तुओं तथा सेवाओं की बिक्री के समय लगाया जाता है। वर्ष 2020-21 में बिक्री द्वारा ₹ 5578 करोड़ की आय होने की सम्भावना थी जोकि कुल आय का 39.56% भाग थी।

2. राज्य उत्पादन कर (Excise Duty)-इस कर को आबकारी कर भी कहा जाता है। यह कर नशीली वस्तुओं जैसे कि अफीम, शराब, भांग इत्यादि पर लगाया जाता है। आबकारी कर द्वारा 2020-21 में ₹ 6250 करोड़ की आय होने की सम्भावना थी जोकि कुल आय का 9.17% भाग थी।

3. केन्द्रीय करों में भाग (Share from Central Taxes)-कुछ कर केन्द्र सरकार द्वारा लगाए जाते हैं जैसे कि आय कर, उत्पादन कर, मृत्यु कर इत्यादि। इन करों में से राज्य सरकार को भाग दिया जाता है। 2020-21 में पंजाब सरकार को केन्द्रीय करों से ₹ 14021 करोड़ की आय प्राप्त होने का अनुमान था।

4. भूमि लगान (Land Revenue)-भूमि के मालिए द्वारा भी सरकार को आय प्राप्त होती है। वर्ष 2020-21 में पंजाब सरकार को इस कर द्वारा ₹ 78 करोड़ की आय होने का अनुमान था।

प्रश्न 2.
पंजाब सरकार के विकासवादी व्यय की संक्षेप व्याख्या करो।
उत्तर-
पंजाब सरकार द्वारा किए जाने वाले व्यय को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है –
(A) विकासवादी व्यय
(B) गैर-विकासवादी व्यय।
विकासवादी व्यय की मुख्य मदें इस प्रकार हैं-
1. शिक्षा (Education)-पंजाब सरकार को शिक्षा अर्थात् स्कूल, कॉलेज तथा तकनीकी शिक्षा प्रदान करने के लिए व्यय करना पड़ता है। प्राइवेट स्कूलों तथा कॉलेजों को आर्थिक सहायता दी जाती है। वर्ष 2020-21 में शिक्षा पर ₹ 13037 करोड़ व्यय होने का अनुमान था।

2. स्वास्थ्य सुविधाएं (Medical Facilities)-लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए पंजाब सरकार को व्यय करना पड़ता है। गांवों तथा शहरों में बीमार लोगों को इलाज की सुविधाएं प्रदान करने के लिए अस्पताल स्थापित किए गए हैं। वर्ष 2020-21 में स्वास्थ्य सुविधाओं पर पंजाब सरकार ने ₹ 4532 करोड़ व्यय करने के लिए रखे थे।

3. कृषि, सहकारिता तथा पशु-पालन (Agriculture, co-operation and Animal Husbandary)पंजाब सरकार द्वारा कृषि के विकास के लिए बहुत व्यय किया जाता है। किसानों को आधुनिक औज़ार, बढ़िया बीज तथा रासायनिक उर्वरक प्रदान की जाती है। वर्ष 2020-21 में पंजाब सरकार ने ₹ 13067 करोड़ कृषि के विकास पर व्यय करने के लिए रखे थे।

4. सिंचाई तथा बहुमुखी योजनाएं (Irrigation and Multipurpose Projects)-पंजाब में सिंचाई की तरफ अधिक ध्यान दिया जाता है। इसलिए पंजाब सरकार सिंचाई तथा बहुमुखी योजनाओं पर बहुत व्यय करती है। इसलिए नहरें, ट्यूबवैल, विद्युत् घरों के विकास पर काफ़ी व्यय किया जाता है। वर्ष 2020-21 में पंजाब सरकार ने ₹ 2510 करोड़ व्यय करने के लिए रखे थे।

प्रश्न 3.
पंजाब सरकार की आय के गैर-कर साधनों की व्याख्या करें।
उत्तर-
पंजाब सरकार को गैर-कर साधनों द्वारा भी आय प्राप्त होती है। इसके मुख्य साधन निम्नलिखित हैं-
1. साधारण सेवाएं (General Services)-पंजाब द्वारा साधारण सेवाओं जैसे कि पुलिस, जेल, लोक सेवा कमीशन इत्यादि से प्राप्त होती है। वर्ष 2020-21 में कुल आय का ₹ 6754 करोड़ साधारण सेवाओं से प्राप्त होने का अनुमान था।

2. आर्थिक विकास (Economics Services)-आर्थिक सेवाओं का अर्थ सिंचाई, भूमि सुधार, पशु पालन, मछली पालन, यातायात इत्यादि सेवाओं से प्राप्त होने वाली आय से होता है। वर्ष 2020-21 में पंजाब सरकार को आर्थिक सेवाओं द्वारा ₹ 898 करोड़ की आय प्राप्त होने का अनुमान था।

3. ऋण सेवाएं, लाभांश तथा लाभ (Debt Services, Dividends and Profits)-पंजाब सरकार को ऋण देने के बदले में ब्याज प्राप्त होता है। यह ऋण नगर पालिकाओं अथवा व्यक्तियों को दिया जाता है। इससे सरकार को ब्याज प्राप्त होता है। पंजाब सरकार को 2020-21 में इस मद द्वारा ₹ 5.2 करोड़ की आय प्राप्त होने की सम्भावना थी।

4. केन्द्रीय सरकार से प्राप्त सहायता (Aid from central Government) राज्य सरकार को केन्द्रीय सरकार से सहायता प्राप्त होती है जोकि योजनाओं को लागू करने पर व्यय की जाती है। पंजाब सरकार को वर्ष 2020-21 में केन्द्र सरकार से ₹ 30113 करोड़ की आय प्राप्त होने का अनुमान था।

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IV. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
पंजाब सरकार की आय के मुख्य साधन तथा व्यय की मदों का वर्णन करें।
(Explain the main sources of Revenue and Heads of Expenditure of the Punjab Government.)
उत्तर-
पंजाब सरकार की आय के मुख्य साधन तथा व्यय की मदों का विवरण इस प्रकार है-
आय के मुख्य साधन (Main Sources of Revenue) – पंजाब सरकार ने बजट 2020-21 के अनुसार पंजाब की कुल आय ₹ 153048 करोड़ होने का अनुमान था तथा कुल व्यय का अनुमान ₹ 154805 करोड़ था। पंजाब सरकार की आय के ढांचे (Pattern) को हम अग्रलिखित अनुसार स्पष्ट कर सकते हैं-
1. शिक्षा (Education)-पंजाब सरकार द्वारा स्कूलों, कॉलेजों तथा तकनीकी संस्थाओं के संचालन पर व्यय किया जाता है। 2020-21 में पंजाब सरकार द्वारा ₹ 13267 करोड़ व्यय किए जाने का अनुमान था।

2. स्वास्थ्य सुविधाएं (Medical Facilities)-पंजाब सरकार द्वारा स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। इसके लिए गांवों में प्राइमरी स्वास्थ्य केन्द्र, शहरों तथा कस्बों में अस्पताल स्थापित किए गए हैं। 2020-21 में स्वास्थ्य सुविधाओं पर व्यय करने के लिए ₹ 4532 करोड़ रखे गए थे।

3. कृषि तथा ग्रामीण विकास (Agriculture & Rural Development)-पंजाब का मुख्य व्यवसाय कृषि है। सरकार द्वारा कृषि के विकास के लिए व्यय किया जाता है। किसानों को आधुनिक औजार, बीज तथा रासायनिक उर्वरक प्रदान किए जाते हैं। इसके लिए 2020-21 में ₹ 6547 करोड़ व्यय का अनुमान लगाया गया तथा ग्रामीण विकास पर ₹ 678 करोड़ व्यय होने का अनुमान था।

4. सामाजिक सुरक्षा तथा कल्याण (Social Security and Welfare)-पंजाब सरकार सामाजिक सुरक्षा तथा लोगों के कल्याण के लिए भी व्यय करती है। अनुसूचित जातियों, पिछड़े वर्गों तथा निर्धन लोगों को बुढ़ापा पेंशन दी जाती है। 2020-21 में पंजाब सरकार द्वारा सामाजिक सुरक्षा तथा कल्याण पर व्यय करने के लिए ₹ 4728 करोड़ रखे गए थे।

5. उद्योग तथा खनिज (Industries and Minerals) पंजाब सरकार छोटे तथा बड़े पैमाने के उद्योगों को सुविधाएं प्रदान करती है। इन उद्योगों को कम कीमत पर प्लाट, मशीनें, कच्चा माल तथा विद्युत् आपूर्ति की जाती है। सरकार उद्योगों के माल की बिक्री का प्रबन्ध भी करती है। 2020-21 में उद्योगों तथा खनिज पर ₹ 2473 करोड़ व्यय करने का अनुमान था।

B. गैर-विकास व्यय (Non-Development Expenditure)-पंजाब सरकार को गैर-विकास व्यय जैसे कि राज्य प्रशासन, पुलिस, कर्मचारियों को वेतन तथा पेंशन देने पर काफ़ी धन व्यय करना पड़ता है। इसको गैर-विकास व्यय कहा जाता है।
1. राज्य प्रशासन (Civil Administration) पंजाब सरकार प्रशासन पर व्यय करती है जैसे कि पुलिस, सरकारी कर्मचारी तथा मन्त्रियों के लिए रखे गए कर्मचारियों पर काफ़ी व्यय करना पड़ता है। 2020-21 में राज्य प्रशासन पर पंजाब सरकार ने ₹ 24639 करोड़ व्यय किए गए।

2. ऋण सेवाएं (Debts Services)-पंजाब सरकार द्वारा प्राप्त किए गए ऋण पर ब्याज दिया जाता है। यह ऋण केन्द्र सरकार अथवा केन्द्रीय बैंक से प्राप्त किया जाता है। 2020-21 में पंजाब सरकार द्वारा ब्याज के रूप ₹ 19075 करोड़ व्यय करने का अनुमान था।

3. कर वसूली पर व्यय (Direct Demand on Revenue)-पंजाब सरकार द्वारा बहुत से कर लगाए जाते हैं जैसे कि बिक्री कर, राज्य उत्पादन कर, मनोरंजन कर इत्यादि। इन करों को एकत्रित करने के लिए सरकार को व्यय करना पड़ता है। 2020-21 में करों को एकत्रित करने के लिए ₹ 1800 करोड़ व्यय होने का अनुमान था।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 29 पंजाब सरकार की आर्थिक स्थिति

4. पेंशन तथा अन्य सेवाएं (Pension and other services)-पंजाब सरकार द्वारा पेंशन तथा अन्य सेवाएं प्रदान करने पर व्यय किया जाता है। 2020-21 में ₹ 122067 करोड़ पेंशन तथा अन्य सेवाओं पर व्यय होने का अनुमान था।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 28 1966 से पंजाब में औद्योगिक विकास

Punjab State Board PSEB 11th Class Economics Book Solutions Chapter 28 1966 से पंजाब में औद्योगिक विकास Textbook Exercise Questions, and Answers.

PSEB Solutions for Class 11 Economics Chapter 28 1966 से पंजाब में औद्योगिक विकास

PSEB 11th Class Economics 1966 से पंजाब में औद्योगिक विकास Textbook Questions and Answers

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Type Questions)

प्रश्न 1.
पंजाब में औद्योगिक ढांचे के विकास का वर्णन करें।
उत्तर-
पंजाब में अधिक उद्योग घरेलू तथा छोटे पैमाने के उद्योग हैं। मध्यम तथा बड़े पैमाने के उद्योगों की कमी पाई जाती है।

प्रश्न 2.
पंजाब में छोटे पैमाने के उद्योगों की क्या स्थिति है ?
उत्तर-
पंजाब में छोटे पैमाने के उद्योग अधिक विकसित हुए हैं। 2018-19 में छोटे पैमाने के उद्योगों की कार्यशील इकाइयां 1:98 लाख थीं।

प्रश्न 3.
छोटे पैमाने के उद्योगों से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
छोटे उद्योग तथा सहायक उद्योग वे उद्योग हैं, जिनमें एक करोड़ रुपए की अचल पूंजी का निवेश होता है।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 28 1966 से पंजाब में औद्योगिक विकास

प्रश्न 4.
जिन उद्योगों में एक करोड़ रुपए तक की पूंजी लगी होती है उनको …………. उद्योग कहा जाता है।
(a) कुटीर
(b) छोटे पैमाने के
(c) मध्यम आकार के
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(b) छोटे पैमाने के।

प्रश्न 5.
पंजाब में औद्योगिक प्रगति सन्तोषजनक है।
उत्तर-
ग़लत।

प्रश्न 6.
पंजाब में अधिक मात्रा में …………. उद्योग लगे हुए हैं।
(a) छोटे पैमाने के
(b) मध्यम आकार के
(c) बड़े पैमाने के
(d) उपरोक्त सभी प्रकार के।
उत्तर-
(a) छोटे पैमाने के।

प्रश्न 7.
पंजाब में औद्योगिक विकास की प्रगति ……… है।
उत्तर-
धीमी।

प्रश्न 8.
पंजाब में बड़े पैमाने के उद्योगों की कमी का कारण ………………… है।
(a) खनिज पदार्थों की कमी
(b) बिजली की कमी
(c) सीमावर्ती राज्य
(d) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(d) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 9.
पंजाब में वित्त की कमी के कारण औद्योगिक विकास नहीं हुआ।
उत्तर-
सही।

प्रश्न 10.
पंजाब में अल्प उद्योगों का कम विकास हुआ है।
उत्तर-
ग़लत।

प्रश्न 11. पंजाब में औद्योगिक विकास की ज़रूरत नहीं।
उत्तर-
ग़लत।

II. अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
पंजाब में औद्योगीकरण की आवश्यकता पर टिप्पणी लिखें।
अथवा
पंजाब में औद्योगीकरण के महत्त्व को स्पष्ट करें।
उत्तर-
पंजाब में औद्योगीकरण की आवश्यकता निम्नलिखित तत्त्वों से स्पष्ट हो जाती है-

  1. संतुलित विकास (Balanced Growth)-पंजाब की अर्थ-व्यवस्था का संतुलित विकास नहीं हुआ क्योंकि पंजाब के अधिकतम लोग कृषि में लगे हुए हैं। इसलिए उद्योगों का विकास आवश्यक है तो जो पंजाब का संतुलित विकास हो सके।
  2. रोज़गार में वृद्धि (Increase in Employment)-पंजाब में शहरों तथा गांवों में बेरोज़गारी पाई जाती है। उद्योगों के विकास से पंजाब में शहरी बेरोज़गारी तथा गांवों में छुपी बेरोज़गारी कम होगी। उद्योगों के विकास से पूर्ण रोज़गार की स्थिति प्राप्त की जा सकती है।

प्रश्न 2.
पंजाब में छोटे पैमाने के उद्योगों के विकास का विवरण दें।
उत्तर-
पंजाब में छोटे पैमाने के उद्योगों का विकास-
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 28 1966 से पंजाब में औद्योगिक विकास 1

प्रश्न 3.
पंजाब के कोई दो छोटे पैमाने के उद्योगों पर टिप्पणी लिखें।
उत्तर-
पंजाब के मुख्य छोटे पैमाने के उद्योग अग्रलिखित हैं

  1. हौज़री उद्योग (Hosiery Industry)-पंजाब का हौज़री उद्योग लुधियाना में केन्द्रित है। यह उद्योग न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी मशहूर है। 2015-16 इस उद्योग द्वारा ₹ 3711 करोड़ वार्षिक मूल्य का माल उत्पादित किया जाता है। इसमें 78 हज़ार लोगों को रोजगार प्राप्त होता है।
  2. साइकिल उद्योग (Cycle Industry)-पंजाब में साइकिल उद्योग छोटे स्तर तथा बड़े स्तर दोनों पर ही कार्य कर रहा है। साइकिल तथा साइकिल के पुर्जे बनाने का उद्योग लुधियाना, जालन्धर, राजपुरा तथा मालेरकोटला में स्थित है। 2015-16 में ₹ 12966 करोड़ मूल्य के साइकिल तथा साइकिल के पुों का उत्पादन किया गया। इसमें 78.4 हज़ार लोगों को रोजगार प्राप्त होता है।

प्रश्न 4.
पंजाब में मध्यम तथा बड़े पैमाने के उद्योगों की मंद प्रगति के दो कारण लिखें।
उत्तर-
पंजाब में मध्यम तथा बड़े पैमाने के उद्योगों की मंद प्रगति के कारण (Causes of Slow Progress of Medium & Large Scale Industries in Punjab)

  • खनिज पदार्थों की कमी (Lack of Mineral Resources)-पंजाब में खनिज पदार्थ बिलकुल नहीं मिलते। मध्यम तथा बड़े पैमाने के उद्योगों को काफ़ी मात्रा में कच्चे माल की आवश्यकता होती है। पंजाब में खनिज पदार्थों की कमी के कारण इनको अन्य राज्यों से मंगवाना पड़ता है। इस कारण बड़े तथा मध्यम पैमाने के उद्योगों का विकास नहीं हुआ।
  • सीमावर्ती राज्य (Border State)-पंजाब में मध्यम तथा बड़े आकार के उद्योगों की मंद प्रगति का सबसे बड़ा कारण पंजाब का सीमावर्ती राज्य होना है। पंजाब की सीमाएं पाकिस्तान से मिलती हैं। पाकिस्तान का भारत से हमेशा झगड़ा रहता है। अब तक दो युद्ध हो चुके हैं। ऐसी स्थिति में उद्यमी इस क्षेत्र में उद्योग स्थापित नहीं करना चाहते।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 28 1966 से पंजाब में औद्योगिक विकास

प्रश्न 5.
पंजाब सरकार द्वारा उद्योगों के विकास के लिए उठाए गए कोई दो कदम बताएं।
उत्तर-
1. करों में छूट (Exemption From Taxes)-नई औद्योगिक नीति में औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करने के लिए करों में छूट देने का कार्यक्रम बनाया गया है। वर्ग A के क्षेत्रों में जो नए उद्योग स्थापित किए जाते हैं उनको बिक्री कर (Sales Tax) से 10 वर्ष के लिए तथा वर्ग B के क्षेत्रों में नए स्थापित उद्योगों के लिए बिक्री कर से 7 वर्ष के लिए छूट दी जाएगी।

2. भूमि के लिए आर्थिक सहायता (Land Subsidy)-नई औद्योगिक नीति में भूमि के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की गई है। कोई भी उद्यमी किसी फोकल प्वाइंट पर भूमि की खरीद उद्योग स्थापित करने के लिए करता है तो भूमि की कीमत का 33% भाग आर्थिक सहायता के रूप में दिया जाएगा। जालन्धर के स्पोर्टस काम्पलैक्स में भूमि के लिए आर्थिक सहायता 25% दी जाएगी।

III. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
पंजाब में औद्योगीकरण की आवश्यकता पर टिप्पणी लिखें।
अथवा
पंजाब में औद्योगीकरण के महत्त्व को स्पष्ट करें।
उत्तर-
पंजाब में औद्योगीकरण की आवश्यकता निम्नलिखित तत्त्वों से स्पष्ट हो जाती है-

  1. संतुलित विकास (Balanced Growth)- पंजाब की अर्थ-व्यवस्था का संतुलित विकास नहीं हुआ क्योंकि पंजाब के अधिकतम लोग कृषि में लगे हुए हैं। इसलिए उद्योगों का विकास आवश्यक है तो जो पंजाब का संतुलित विकास हो सके।
  2. रोज़गार में वृद्धि (Increase in Employment)-पंजाब में शहरों तथा गांवों में बेरोज़गारी पाई जाती है। उद्योगों के विकास से पंजाब में शहरी बेरोज़गारी तथा गांवों में छुपी बेरोज़गारी कम होगी।
  3. उद्योगों के विकास से पूर्ण रोज़गार की स्थिति प्राप्त की जा सकती है। उद्योगों का विकास होगा। सरकार को करों द्वारा अधिक आय प्राप्त होगी इसको लोगों के कल्याण पर व्यय किया जा सकता है।
  4. कृषि पर जनसंख्या के दबाव में कमी (Less Pressure of Population on Agriculture) पंजाब में 759% जनसंख्या कृषि पर निर्भर करती है। इसलिए प्रति व्यक्ति भूमि निरंतर कम हो रही है। उद्योगों के विकास से कृषि
  5. श्रमिकों के जीवन स्तर में वृद्धि (Increase in Standard of Living of Labourers)-पंजाब में औद्योगिक विकास से श्रमिकों की मांग बढ़ेगी परिणामस्वरूप श्रमिकों के व्यय में वृद्धि होगी। इससे श्रमिक ऊँचा जीवन स्तर व्यतीत कर सकेंगे।

प्रश्न 2.
पंजाब में छोटे पैमाने के उद्योगों के विकास के कारण तथा महत्त्व का वर्णन करें।
उत्तर-
पंजाब में छोटे पैमाने के उद्योगों के विकास के कारण तथा महत्त्व को निम्नलिखित प्रकार से स्पष्ट किया जा सकता है-

  1. खनिज पदार्थों की कमी (Lack of Minerals)-पंजाब में खनिज पदार्थ नहीं पाए जाते परिणामस्वरूप बड़े पैमाने के उद्योग विकसित नहीं हो सके। इसलिए छोटे पैमाने के उद्योगों को विकसित किया गया है।
  2. बड़े उद्योगों की कमी (Lack of Large Scale Industries)-पंजाब में बड़े पैमाने के उद्योग बहुत कम हैं। उद्यमी पंजाब में उद्योग स्थापित नहीं करना चाहते क्योंकि यह सीमावर्ती राज्य है। इसलिए बड़े उद्योगों की कमी को छोटे उद्योगों द्वारा पूर्ण किया गया है।
  3. परिश्रमी लोग (Hardworking People)-पंजाब के श्रमिक मेहनती तथा कुशल हैं। इन्होंने छोटे-छोटे उद्योग स्थापित किए हैं जिससे श्रमिकों का जीवन स्तर ऊँचा हो रहा है।
  4. वित्त की कमी (Lack of Finance)-पंजाब में व्यापारिक बैंक तथा वित्तीय संस्थाओं द्वारा वित्त की सहूलतें कम प्रदान की गई हैं जबकि अन्य राज्यों में अधिक सहूलतें प्रदान की जाती हैं। वित्त की कमी के कारण बड़े पैमाने के उद्योग विकसित नहीं हो सके। इसलिए छोटे उद्योगों का महत्त्व बढ़ गया है।
  5. पंजाब सरकार की नीति (Policy of the Punjab Government)-पंजाब सरकार की औद्योगिक नीति में छोटे पैमाने के उद्योगों की तरफ विशेष ध्यान दिया गया है। इसलिए पंजाब में छोटे पैमाने के उद्योग अधिक विकसित हो गए हैं।

प्रश्न 3.
पंजाब के छोटे उद्योगों की समस्याओं का वर्णन करें।
अथवा
पंजाब में छोटे उद्योगों के मंद विकास के क्या कारण हैं ?
उत्तर-
पंजाब में छोटे उद्योगों की मुख्य समस्याएं निम्नलिखित हैं-
1. वित्त की समस्या (Problem of Finance)-पंजाब में छोटे पैमाने के उद्योगों को उचित मात्रा में वित्त प्राप्त नहीं होता। वित्त की कमी के कारण छोटे उद्योगों की विकास की गति मंद है।

2. उत्पादन के पुराने ढंग (Old Methods of Production)-पंजाब के उद्योगों में पुराने ढंग से उत्पादन किया जाता है। इसलिए उत्पादन कम होता है तथा लागत अधिक आती है।

3. कच्चे माल की समस्या (Problem of Raw Material)-पंजाब में उद्योगों के लिए कच्चा माल अन्य प्रान्तों से मंगवाना पड़ता है। इससे उत्पादन लागत बढ़ जाती है तथा उत्पादन कम होता है।

4. समस्या का सामना करना पड़ता है। इन उद्योगों को बड़े उद्योगों द्वारा तैयार माल से मुकाबला करना पड़ता है क्योंकि बड़े पैमाने पर तैयार माल सस्ता तथा बढ़िया होता है। इसलिए छोटे उद्योगों की बिक्री के समय कठिनाई होती है।

5. शक्ति की समस्या (Problem of Power)-पंजाब सरकार उद्योगों से कृषि को प्राथमिकता देती है। इसलिए समय-समय पर बिजली बंद (Power cut) का सामना करना पड़ता है।

प्रश्न 4.
पंजाब में प्रमुख छोटे पैमाने के उद्योगों का वर्णन करें।
उत्तर-
पंजाब के प्रमुख छोटे पैमाने के उद्योग निम्नलिखित हैं-

  1. हौज़री उद्योग (Hosiery Industry)-पंजाब का हौज़री उद्योग लुधियाना में केन्द्रित है। यह उद्योग न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी मशहूर है। 2015-16 में इस उद्योग में 78 हज़ार लोग कार्य करते थे तथा ₹ 3711 करोड़ का माल बनाया जाता था।
  2. साइकिल उद्योग (Cycle Industry)-पंजाब में साइकिल उद्योग छोटे तथा बड़े दोनों स्तरों पर कार्य करता है। इस उद्योग में साइकिल तथा इसके पुर्जे बनाए जाते हैं। यह उद्योग लुधियाना, जालन्धर तथा मलेरकोटला में स्थित है। वर्ष 2015-16 में, इसमें 78.4 हज़ार लोगों को रोज़गार प्राप्त है। वार्षिक ₹ 12966 करोड़ का माल तैयार किया जाता है।
  3. सिलाई मशीन उद्योग (Sewing Machine Industry)-सिलाई मशीन उद्योग पंजाब में लुधियाना, सरहिन्द, बटाला तथा जालन्धर में है। 2015-16 में सिलाई मशीनों के लगभग 57 कारखाने थे। जिनमें 13464 मजदूरों को रोज़गार प्राप्त होता था। इस उद्योग में ₹ 1254 करोड़ का वार्षिक माल तैयार होता था।
  4. खेलों का सामान बनाने का उद्योग (Sports Goods Industries) पंजाब में खेलों का सामान बनाने का उद्योग जालन्धर में है। पंजाब में बनाया गया खेलों का सामान न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी भेजा जाता है। इस उद्योग में 4561 श्रमिकों को रोजगार प्राप्त है। इसमें वार्षिक ₹ 267.57 लाख करोड़ का सामान बनाया जाता है।

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प्रश्न 5.
पंजाब में बड़े तथा मध्यम उद्योगों की मंद गति के क्या कारण हैं ?
उत्तर-
पंजाब में बड़े तथा मध्यम उद्योगों की धीमी गति के कारण निम्नलिखित हैं-
1. खनिज पदार्थों की कमी (Lack of Mineral Resources)-पंजाब में खनिज पदार्थ बिलकुल नहीं मिलते इसलिए मध्यम तथा बड़े पैमाने के उद्योगों ने काफ़ी मात्रा में कच्चे माल की आवश्यकता पड़ती है। पंजाब में खनिज पदार्थ न होने के कारण इनको अन्य राज्यों से मंगवाना पड़ता है। इस कारण बड़े तथा मध्यम पैमाने के उद्योगों का विकास नहीं हुआ।

2. सीमावर्ती राज्य (Border State)-पंजाब में मध्यम तथा बड़े पैमाने की मंद प्रगति का सबसे बड़ा कारण पंजाब का सीमावर्ती राज्य होना है। पंजाब की सीमाएं पाकिस्तान से मिलती हैं। पाकिस्तान से भारत का हमेशा झगड़ा रहता है। अब तक दो युद्ध हो चुके हैं। ऐसी स्थिति में उद्यमी इस क्षेत्र में उद्योग स्थापित नहीं करना चाहते।

3. विद्युत् की कमी (Lack of Power) विद्युत् औद्योगिक विकास के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण है। पंजाब में विद्युत् का प्रयोग कृषि में अधिक होता है। किन्तु बड़े उद्योगों के लिए काफ़ी मात्रा में विद्युत् की आवश्यकता होती है। विद्युत् की कमी के कारण बड़े तथा मध्यम उद्योगों की गति मंद है।

4. केन्द्र सरकार का कम योगदान (Less Investment by Central Government)-पंजाब में केन्द्रीय सरकार द्वारा बहुत कम निवेश किया गया है। पंजाब में केन्द्र सरकार का कुल निवेश 2.5% है। परन्तु केन्द्र सरकार ने 75% बिहार में, 12% कर्नाटक में निवेश किया है। इस कारण भी उद्योगों का विकास नहीं हो सका।

IV. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
पंजाब के छोटे, मध्य तथा बड़े स्तर के उद्योगों की प्रकृति तथा ढांचे का वर्णन करें। (Explain the nature and structure and small, medium and large scale industries of Punjab.)
अथवा
पंजाब के प्रमुख छोटे आकार के उद्योगों की व्याख्या करें। (Explain the main Small Scale Industries of Punjab.)
उत्तर-
पंजाब का औद्योगिक ढांचा (Structure of Industries in Punjab)
पंजाब में औद्योगिक ढांचे को दो भागों में विभाजित करके स्पष्ट किया जा सकता है –
A. छोटे पैमाने के उद्योग (Small Scale Industries)
B. मध्य तथा बड़े पैमाने के उद्योग (Medium & Large Scale Industries)

A. छोटे पैमाने के उद्योग (Small Scale Industries)-वर्ष 1997 के पश्चात् छोटे पैमाने के उद्योगों में उन उद्योगों को शामिल किया जाता है जिनमें ₹ 3 करोड़ तक का निवेश किया होता है। इससे पूर्व स्थिर पूंजी के निवेश की सीमा केवल ₹ 60 लाख थी।
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सूची पत्र से ज्ञात होता है कि 1978-79 में छोटे पैमाने के उद्योगों की संख्या 0.42 लाख थी जिनमें ₹ 271 करोड़ की अचल पूंजी लगी हुई थी। इन उद्योगों ₹ 751 करोड़ का उत्पादन किया जाता था तथा लगभग 2.50 लाख श्रमिक काम पर लगे हुए थे। वर्ष 2018-19 में छोटे पैमाने के उद्योगों की इकाइयों की संख्या बढ़कर 1.72 लाख हो गई है। इन उद्योगों में ₹ 86324 करोड़ की अचल पूंजी लगी हुई है जिनमें ₹ 201590 करोड़ का उत्पादन किया जाता है। यह उद्योग 16.21 लाख श्रमिकों को रोजगार प्रदान करते हैं।

पंजाब के मुख्य छोटे उद्योग (Main Small Scale Industries of Punjab) –
पंजाब के मुख्य छोटे पैमाने के उद्योग निम्नलिखित हैं
1. हौज़री उद्योग (Hosiery Industry)-पंजाब का हौजरी उद्योग लुधियाना में केन्द्रित है। यह उद्योग न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी मशहूर है। 2018-19 इस उद्योग द्वारा ₹ 3711 करोड़ वार्षिक मूल्य का माल उत्पादित किया जाता है। इसमें 82 हज़ार लोगों को रोजगार प्राप्त होता है।

2. साइकिल उद्योग (Cycle Industry)-पंजाब में साइकिल उद्योग छोटे स्तर तथा बड़े स्तर दोनों पर ही कार्य कर रहा है। साइकिल तथा साइकिल के पुर्जे बनाने का उद्योग लुधियाना, जालन्धर, राजपुरा तथा मलेरकोटला में स्थित है। 2018-19 में ₹ 13 हजार करोड़ मूल्य के साइकिल तथा साइकिल के पुर्जी का उत्पादन किया गया। इसमें 88.5 हज़ार लोगों को रोज़गार प्राप्त होता है।

3. सिलाई मशीन उद्योग (Sewing Machine Industry)-सिलाई मशीन बनाने का उद्योग लुधियाना, सरहिन्द, बटाला तथा जालन्धर में स्थित है। 2015-16 पंजाब में सिलाई मशीनों के लगभग 57 कारखाने हैं। इस उद्योग में ₹ 1356 करोड़ का माल हर वर्ष तैयार होता है तथा लगभग 13464 मजदूरों को रोज़गार प्राप्त होता है।

4. खेलों का सामान बनाने का उद्योग (Sports Goods Industry) खेलों का सामान बनाने का उद्योग जालन्धर में केन्द्रित है। पंजाब में तैयार किया खेलों का सामान न केवल भारत बल्कि विदेशों में भी भेजा जाता है। 2018-19 में इस उद्योग की 529 इकाइयां लगी हुई हैं जिनमें 9561 मज़दूरों को रोजगार प्राप्त है। वार्षिक ₹ 276.57 करोड़ का माल तैयार किया जाता है।

5. मोटर गाड़ियों के पुर्जे बनाने का उद्योग (Automobile Industry)-पंजाब में यह उद्योग लुधियाना, जालन्धर, पटियाला तथा कपूरथला में स्थित है। इस उद्योग में मोटर गाड़ियों के पुर्जे तैयार किए जाते हैं। 2019-20 इस उद्योग में ₹ 5022 लाख का माल प्रत्येक वर्ष तैयार किया जाता है। इसमें 52857 श्रमिक कार्य करते हैं।

पंजाब में मध्यम तथा बड़े स्तर के उद्योग (Medium & Large Scale Industries of Punjab) –
जिन उद्योगों में ₹ 10 करोड़ से कम पूँजी लगी होती है उसको मध्य आकार का उद्योग कहा जाता है और जिसमें ₹ 10 करोड़ से अधिक अचल पूंजी लगी होती है, उनको बड़े पैमाने के उद्योग कहा जाता है। पंजाब में मध्यम तथा बड़े पैमाने के उद्योग अधिक विकसित नहीं हो सके। इन उद्योगों की स्थिति का विवरण इस प्रकार है-
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सूची-पत्र से स्पष्ट होता है कि 1978-79 में पंजाब में मध्यम तथा बड़े आकार के उद्योगों की 188 इकाइयां थीं जिनमें ₹ 379 करोड़ स्की अचल पूंजी लगी हुई थी। उस वर्ष ₹ 711 करोड़ का उत्पादन किया गया था तथा 91 हज़ार लोग रोज़गार पर लगे हुए थे। वर्ष 2017-18 में इन उद्योगों की संख्या बढ़ कर 898 हो गई है जिनमें ₹ 69591 करोड़ की अचल पूंजी लगी हुई है। इन उद्योगों में ₹ 104973 करोड़ का उत्पादन किया गया। इनमें 2.84 लाख श्रमिक कार्य पर लगे हुए थे।

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पंजाब के मुख्य मध्यम आकार तथा बड़े पैमाने के उद्योग
(Medium & Large Scale Industries of Punjab) पंजाब के मुख्य मध्यम तथा बड़े पैमाने के उद्योग निम्नलिखित हैं
1. चीनी के कारखाने (Sugar Industry)-पंजाब में चीनी के 17 बड़े कारखाने हैं। यह उद्योग जालन्धर, कपूरथला, संगरूर, फरीदकोट, गुरदासपुर तथा रोपड़ ज़िलों में स्थित हैं। इस उद्योग में 2018-19 में ₹ 19823 करोड़ चीनी का उत्पादन हुआ। इसमें 5487 व्यक्तियों को रोजगार प्राप्त था।

2. सूती कपड़े के कारखाने (Cotton Textile Industry)-पंजाब में 2018-19 धागा बनाने के 140 कारखाने हैं। एक कारखाने में धागे से कपड़ा भी बनाया जाता है। यह कारखाने फगवाड़ा, अमृतसर, बरनाला, मलेरकोटला तथा अबोहर में स्थित हैं। इस उद्योग में 16849 श्रमिक कार्य करते हैं। 166.27 मिलियन मीटर कपड़ा वार्षिक तैयार किया जाता है।

3. स्वराज व्हीकलज लिमिटेड (Swaraj Vehicles Limited)-यह कारखाना जनतक क्षेत्र में वर्ष 1985 में ₹ 60 करोड़ की लागत से स्थापित किया गया था। इसमें माल की ढुलाई के लिए टैंपू बनाए जाते हैं। यह कारखाना 9 हज़ार मज़दूरों को रोज़गार प्रदान करता है। इसकी स्थापना मोहाली में की गई है।

4. गर्म कपड़े के कारखाने (Wollen Cloth Industry) पंजाब में गर्म कपड़ा बनाने के कारखाने धारीवाल, और छहरटा अमृतसर में हैं। इस उद्योग में 1 लाख 8 हज़ार श्रमिकों को रोजगार प्राप्त है। इसमें वार्षिक ₹ 354 करोड़ का माल तैयार किया जाता है।

प्रश्न 2.
पंजाब में मध्यम तथा बड़े पैमाने के उद्योगों के विकास को स्पष्ट करें। पंजाब में मध्यम तथा बड़े पैमाने के उद्योगों की मंद प्रगति के क्या कारण हैं ?
(Explain the development medium and Large Scale Industries in Punjab. What are the causes of slow progress of medium and Large Scale Industries ?)
उत्तर-
पंजाब में मध्यम तथा बड़े आकार के उद्योग अधिक विकसित नहीं हो सके। इन उद्योगों के विकास का अनुमान निम्नलिखित सूची-पत्र द्वारा लगाया जा सकता है-
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सूची-पत्र से ज्ञात होता है कि वर्ष 2018-19 में मध्यम तथा बड़े पैमाने के उद्योगों की संख्या 469 है। इन उद्योगों में ₹ 69591 करोड़ की अचल पूंजी लगी हुई है। इनमें उत्पादन ₹ 104973 लाख का किया गया। यह उद्योग 2.84 लाख लोगों को रोजगार प्रदान करता है परन्तु अन्य औद्योगिक राज्यों जैसे कि महाराष्ट्र, कर्नाटक इत्यादि की तरह पंजाब में इन उद्योगों की प्रगति बहुत कम रही है। मध्यम तथा बड़े उद्योगों की कम प्रगति के मुख्य कारण निम्नलिखित अनुसार हैं-
पंजाब में मध्यम तथा बड़े पैमाने के उद्योगों की मंद प्रगति के कारण (Causes of Slow Progress of Medium & Large Scale Industries in Punjab)
1. खनिज पदार्थों की कमी (Lack of Mineral Resources)-पंजाब में खनिज पदार्थ बिलकुल नहीं मिलते। मध्यम तथा बड़े पैमाने के उद्योगों को काफ़ी मात्रा में कच्चे माल की आवश्यकता होती है। पंजाब में खनिज पदार्थों की कमी के कारण इनको अन्य राज्यों से मंगवाना पड़ता है। इस कारण बड़े तथा मध्यम पैमाने के उद्योगों का विकास नहीं हुआ।

2. सीमावर्ती राज्य (Border State)-पंजाब में मध्यम तथा बड़े आकार के उद्योगों की मंद प्रगति का सबसे बड़ा कारण पंजाब का सीमावर्ती राज्य होना है। पंजाब की सीमाएं पाकिस्तान से मिलती हैं। पाकिस्तान का भारत से हमेशा झगड़ा रहता है। अब तक दो युद्ध हो चुके हैं। ऐसी स्थिति में उद्यमी इस क्षेत्र में उद्योग स्थापित नहीं करना चाहते।

3. विद्युत् की कमी (Lack of Power) विद्युत् औद्योगिक विकास के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है। पंजाब में विद्युत् का प्रयोग कृषि क्षेत्र में अधिक होता है। बड़े उद्योगों के लिए अधिक मात्रा में विद्युत् की आवश्यकता होती है किन्तु विद्युत् की कमी के कारण मध्यम तथा बड़े स्तर के उद्योगों की प्रगति धीमी है।

4. केन्द्रीय सरकार का कम योगदान (Less Investment by Central Government)-पंजाब में केन्द्रीय सरकार द्वारा बहुत कम निवेश किया गया है। पंजाब में केन्द्र सरकार का कुल निवेश 2.5% है। परन्तु केन्द्र सरकार ने 15% निवेश बिहार में, 12% निवेश कर्नाटक में लगाया है। इस कारण भी पंजाब में उद्योगों का विकास नहीं हो सका।

5. कृषि प्रधान अर्थ-व्यवस्था (Agricultural Economy)-पंजाब कृषि प्रधान राज्य है। राज्य सरकार ने भी पंचवर्षीय योजनाओं में कृषि के विकास की तरफ विशेष ध्यान दिया है। उद्योगों के विकास को आंखों से ओझल किया गया है। कृषि का महत्त्व अधिक होने के कारण लघु पैमाने के उद्योगों को प्राथमिकता दी गई ताकि रोज़गार के अधिक अवसर उपलब्ध हो सकें।

6. पूंजी की कमी (Lack of Capital)-बड़े पैमाने के उद्योगों के लिए अधिक पूंजी की आवश्यकता होती है। पंजाब में पूंजी की कमी है क्योंकि सरकार की आंतरिक सुरक्षा पर बहुत व्यय करना पड़ता है। इसलिए निवेश करने के लिए पूंजी की कमी है। निजी क्षेत्र के उद्योग विकसित नहीं हुए क्योंकि ब्याज की दर बहुत अधिक है। इसलिए मध्यम तथा बड़े पैमाने के उद्योगों में निवेश कम हुआ है।

7. औद्योगिक लड़ाई-झगड़े (Industrial Disputes)-पंजाब में अगर स्वतन्त्रता के पश्चात् औद्योगिक विकास में वृद्धि हुई है तो इससे औद्योगिक लड़ाई-झगड़े भी बढ़ गए हैं। तालाबंदी, हड़ताल आम नज़र आती है। इस कारण उत्पादन लागत बढ़ जाती है।

प्रश्न 3.
पंजाब सरकार की आधुनिक उद्योग नीति का वर्णन करें। (Explain the new Industrial Policy of Government of Punjab.)
उत्तर-
पंजाब सरकार की नई औद्योगिक नीति
(New Industrial Policy of Government of Punjab) . पंजाब में औद्योगिक विकास के लिए औद्योगिक नीति की घोषणा 16 फरवरी, 1972 को की गई। इसके पश्चात् सरकार ने 1979, 1987, 1989, 1991 में औद्योगिक नीति में परिवर्तन किए। पंजाब सरकार की नई औद्योगिक नीति की घोषणा 14 मार्च, 1996 में की गई। नई औद्योगिक नीति की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं-
1. मुख्य उद्देश्य (Main Objectives)

  • औद्योगिक विकास की दर में वृद्धि करके 12% की जाएगी।
  • राज्य के घरेलू उत्पादन में उद्योगों का भाग बढ़ाकर 25% किया जाएगा।
  • उद्योगों के विकास के लिए आवश्यक ढांचा अर्थात् सड़कें, विद्युत्, वित्त, श्रमिक, कच्चे माल की पूर्ति के लिए सहूलतें दी जाएंगी।
  • ग्रामीण बेरोज़गारों को उद्योगों तथा सम्बन्धित उद्यमों में रोज़गार की सहूलतें दी जाएंगी।
  • पंजाब में पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया जाएगा।
  • पंजाब के छोटे, मध्यम तथा बड़े स्तर के उद्योगों के लिए फोकल प्वाइंट्स स्थापित किए जाएंगे।
  • निर्यात को उत्साहित करने के लिए नई मण्डियाँ ढूंढ़ी जाएंगी।
  • आर्थिक तौर पर पिछड़े वर्ग के लोगों की आर्थिक स्थिति में सुधार किया जाएगा।
  • नए उद्योग स्थापित किए जाएंगे तथा पुराने स्थापित उद्योगों का नवीनीकरण तथा आधुनिकीकरण किया जाएगा।
  • छोटे स्तर के उद्योगों को विकसित करके रोजगार के अधिक अवसर प्रदान किए जाएंगे।

2. विकास क्षेत्र (Growth Areas)-पंजाब के भिन्न-भिन्न जिलों को औद्योगिक विकास के पक्ष से चार वर्गों में विभाजित किया गया

  • वर्ग A (Category A)-इस वर्ग में शामिल किए गए क्षेत्रों को सबसे अधिक रियायतें देने की घोषणा की गई। इसमें अमृतसर, गुरदासपुर, फिरोज़पुर, फरीदकोट तथा मानसा के ज़िले शामिल किए गए हैं।
  • वर्ग B (Category B)-इस वर्ग में जिन क्षेत्रों में शामिल किया गया है उनको वर्ग A के क्षेत्रों से कम रियायतें दी जाएंगी। इस वर्ग में राज्य के अन्य जिलों को शामिल किया गया है।
  • वर्ग C (Category C)-इस वर्ग में लुधियाना तथा जालन्धर के फोकल प्वाइंट्स छोड़ कर पंजाब के सब फोकल प्वाइंट्स को शामिल किया गया है। फोकल प्वाइंट्स पर अधिक-से-अधिक उद्योग स्थापित करने के प्रयत्न किए जाएंगे।
  • वर्ग D (Category D)-इस वर्ग में शामिल उद्योगों को कोई प्रोत्साहन तथा अनुदान नहीं दिया जाएगा। इस वर्ग में जालन्धर तथा लुधियाना की निगम सीमाओं के फोकल प्वाइंट्स तथा उनके ब्लाकों को शामिल किया गया है। वर्ग A तथा वर्ग B के क्षेत्रों को बहुत-सी रियायतों की घोषणा की गई है ताकि पिछड़े क्षेत्रों में उद्योगों का विकास हो सके।

3. कृषि आधारित उद्योगों का विकास (Incentives to Agro Based Industries)-पंजाब कृषि प्रधान राज्य है। इसलिए कृषि विकास को बनाए रखने के लिए उन उद्योगों को विकसित किया जाएगा जिनके लिए कच्चा माल कम कीमत पर राज्य में से ही प्राप्त किया जा सकता है। ऐसे उद्योगों को 10 वर्ष के लिए बिक्री कर से मुक्त किया गया है। ऋण पर ब्याज का 5% भाग सरकार द्वारा दिया जाएगा तथा स्थायी पूंजी का 30% भाग आर्थिक सहायता के रूप में दिया जाएगा जो कि अधिकतम 50 लाख रुपए तक हो सकती है।

4. करों में छूट (Exemption From Taxes)-नई औद्योगिक नीति में औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करने के लिए करों में छूट देने का कार्यक्रम बनाया गया है। वर्ग A के क्षेत्रों में जो नए उद्योग स्थापित किए जाते हैं उनको बिक्री कर (Sales Tax) से 10 वर्ष के लिए तथा वर्ग B के क्षेत्रों में नए स्थापित उद्योगों के लिए बिक्री कर से 7 वर्ष के लिए छूट दी जाएगी।

5. भूमि के लिए आर्थिक सहायता (Land Subsidy)-नई औद्योगिक नीति में भूमि के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की गई है। कोई भी उद्यमी किसी फोकल प्वाइंट पर भूमि की खरीद उद्योग स्थापित करने के लिए करता है तो भूमि की कीमत का 33% भाग आर्थिक सहायता के रूप में दिया जाएगा। जालन्धर के स्पोर्टस काम्पलैक्स में भूमि के लिए आर्थिक सहायता 25% दी जाएगी।

6. छोटे उद्योगों का आधुनिकीकरण (Modernisation of Small Scale Industries) पंजाब में छोटे पैमाने के उद्योगों को विकसित करने के लिए एक विशेष फंड की स्थापना की गई है। जो उद्यमी पुराने स्थापित किए यूनिटों का आधुनिकीकरण करना चाहते हैं उनको विशेष आर्थिक सहायता दी जाएगी।

7. मध्यम तथा बड़े उद्योगों को प्रोत्साहन (Incentives to medium & Large Scale Industries)-नई औद्योगिक नीति में यह घोषणा भी की गई कि वर्ग A के क्षेत्रों में जो उद्यमी निवेश करते हैं उनके द्वारा किए गए बड़े स्तर के उद्योगों पर अचल पूंजी पर आर्थिक सहायता दी जाएगी जहां तक A तथा B वर्ग में स्थापित उद्योगों का सम्बन्ध है अगर वहां पुराने उद्योगों का विस्तार करना चाहते हैं तो मध्यम तथा बड़े उद्योगों के विस्तार पर आर्थिक सहायता दी जाएगी।

8. पर्यटन उद्योग को प्रोत्साहन (Incentive to Tourism)-नई औद्योगिक नीति के अनुसार पंजाब में पर्यटन उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए उद्योग का दर्जा दिया गया है। पर्यटन उद्योग को वह सब सहूलतें दी जाएंगी जो अन्य साधारण उद्योगों को दी जाती हैं।

9. इलेक्ट्रोनिक वस्तुओं की इकाइयों को विशेष छूट (Special Incentive to Electronics Units)-पंजाब में जो इलेक्ट्रोनिक वस्तुओं का उत्पादन करने वाली इकाइयों को लगाया जाएगा उन उद्योगों को पूंजी निवेश के सम्बन्ध में आर्थिक सहायता तथा बिक्री कर की छूट दी जाएगी। इन उद्योगों को चुंगी करों में भी 6 वर्ष के लिए छूट देने के लिए कहा गया है।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 28 1966 से पंजाब में औद्योगिक विकास

10. ऊर्जा सुविधाएं (Power Facilities) – पंजाब में जो ओद्योगिक इकाइयां लगाई जाएंगी उनको बिजली कनेक्शन में प्राथमिकता दी जाएगी। ऐसी इकाइयों को पांच साल के लिए बिजली कर से मुक्त रखा जाएगा तथा जेनरेटिंग सैंट लगाने पर 25% की आर्थिक सहायता दी जाएगी।

11. भूमि के लिए आर्थिक सहायता (Land Subsidy)-पंजाब में जो नई औद्योगिक इकाइयां लगाई जाएंगी उनको भूमि की खरीद में आर्थिक सहायता दी जाएगी। यदि यह इकाइयां फोकल प्वाइंट्स पर लगाई जाती हैं तो भूमि की खरीद में 33 प्रतिशत आर्थिक सहायता दी जाएगी।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 27 1966 से पंजाब में कृषि का विकास

Punjab State Board PSEB 11th Class Economics Book Solutions Chapter 27 1966 से पंजाब में कृषि का विकास Textbook Exercise Questions, and Answers.

PSEB Solutions for Class 11 Economics Chapter 27 1966 से पंजाब में कृषि का विकास

PSEB 11th Class Economics 1966 से पंजाब में कृषि का विकास Textbook Questions and Answers

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Type Questions)

प्रश्न 1.
पंजाब की किसी एक व्यापारिक फसल का वर्णन करें।
उत्तर-
गन्ना (Sugarcane)-पंजाब में गन्ना फरवरी-अप्रैल में बोआ जाता है। गन्ने की फसल जनवरी-अप्रैल में काटी जाती है। पंजाब में गन्ना सभी जिलों में पैदा किया जाता है।

प्रश्न 2.
पंजाब में हरित क्रान्ति का कोई एक कारण बताएं।
उत्तर-
पंजाब में हरित क्रान्ति के कारण इस प्रकार हैं-
नई कृषि नीति-पंजाब में नई कृषि नीति में उन्नत बीज, रासायनिक उर्वरक, आधुनिक मशीनों तथा सिंचाई की सहूलतों में वृद्धि की गई है।

प्रश्न 3.
पंजाब को भारत का अनाज भण्डार क्यों कहा जाता है ?
उत्तर-
2018-19 में पंजाब द्वारा केन्द्रीय भण्डार में गेहूं का योगदान 35% तथा चावले का योगदान 25% रहा।

प्रश्न 4.
पंजाब कृषि में पिछड़ा प्रान्त है।
उत्तर-
ग़लत।

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प्रश्न 5.
पंजाब में 2019-20 में कुल उपज 315 लाख मीट्रिक टन हुई।
उत्तर-
सही।

प्रश्न 6.
पंजाब में कृषि विकास का कारण …………….. है।
(a) सिंचाई के साधन
(b) मेहनती लोग
(c) हरित क्रान्ति
(d) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(d) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 7.
हरित क्रान्ति का कोई दोष नहीं।
उत्तर-
ग़लत।

प्रश्न 8.
पंजाब को भारत के अनाज का ……………….. कहा जाता है।
उत्तर-
अन्न भण्डार।

प्रश्न 9.
पंजाब की दो खाद्य फसलों के नाम बताओ।
उत्तर-
(i) गेहूँ,
(ii) चावल।

प्रश्न 10.
पंजाब की दो व्यापारिक फसलों के नाम बताओ।
उत्तर-

  1. कपास,
  2. गन्ना।

प्रश्न 11.
पंजाब में अधिक कृषि उत्पादन के कोई दो कारण बताएं।
उत्तर-

  • सिंचाई का विस्तार,
  • आधुनिक खाद्य तथा बीजों का प्रयोग।

प्रश्न 12.
हरित क्रान्ति से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
हरित क्रान्ति का अर्थ है कृषि पैदावार में होने वाली भारी वृद्धि जो कि नई कृषि नीति के अपनाने से प्राप्त हुई है।

प्रश्न 13.
पंजाब में हरित क्रान्ति का कोई एक कारण बताएं।
उत्तर-
पंजाब में नई कृषि नीति के कारण उचित बीजों और रासायनिक खादों का प्रयोग करने के कारण हरित क्रान्ति प्राप्त होती है।

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प्रश्न 14.
पंजाब में सिंचाई के मुख्य तीन साधन बताएं।
उत्तर-

  1. नहरें,
  2. ट्यूबवैल,
  3. कुएँ।

प्रश्न 15.
हरित क्रान्ति के मुख्य दोष बताएँ।
उत्तर-
हरित क्रान्ति के परिणामस्वरूप हवा और पानी के प्रदूषण के कारण, कैंसर का रोग फैल गया है।

II. अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
पंजाब में सिंचाई की स्थिति तथा महत्त्व स्पष्ट करें।
उत्तर-
कृषि के विकास के लिए सिंचाई का महत्त्व बहुत अधिक है। पंजाब में वर्ष 1966 के पश्चात् सिंचाई सुविधाओं में काफ़ी वृद्धि हुई है। 1965-66 में 26.46 लाख हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई की सहूलतें प्राप्त थी जो कि कुल क्षेत्र का 56% भाग था। वर्ष 2015-16 में सिंचाई के अधीन क्षेत्र बढ़कर 41.37 लाख हेक्टेयर हो गया है जोकि कुल कृषि के अधीन क्षेत्र का 97.4% भाग है। पंजाब में लुधियाना, जालन्धर, पटियाला, भटिंडा, अमृतसर, फिरोज़पुर तथा फरीदकोट जिलों में सिंचाई की अधिक सुविधाएं हैं। किन्तु रोपड़ तथा नवांशहर में सिंचाई की सुविधाओं की कमी है। बारहवीं योजना में सिंचाई सुविधाओं पर 1052 करोड़ रुपये व्यय किए गए।

प्रश्न 2.
पंजाब में कृषि विकास की चर्चा करें।
उत्तर-
पंजाब में कृषि विकास की प्रकृति निम्नलिखित तत्त्वों द्वारा स्पष्ट हो जाती है-
1. कृषि उत्पादन में वृद्धि-पंजाब में कृषि उत्पादन में तीव्रता से वृद्धि हुई है। कुल अनाज का उत्पादन 1965-66 में 33 लाख टन था। 2019-20 में अनाज का उत्पादन बढ़कर 315 लाख मीट्रिक टन हो गया है। अनाज के उत्पादन में तीव्रता से वृद्धि को हरित क्रान्ति (Green Revolution) कहा जाता है।

2. उन्नत कृषि-पंजाब की कृषि बहुत उन्नत तथा अधिक प्रगतिशील है। पंजाब को प्रति हेक्टेयर उत्पादकता भारत की औसत प्रति हेक्टेयर उत्पादकता से अधिक है। पंजाब में वर्ष 1965-66 में गेहूँ की उत्पादकता 1236 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तथा चावल की उत्पादकता 100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी। 2019-20 में गेहूँ की उत्पादकता बढ़कर 5188 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तथा चावल की 4132 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो गई है।

प्रश्न 3.
पंजाब में हरित क्रान्ति के मुख्य दोष बताएं।
अथवा
पंजाब में हरित क्रान्ति के दष्प्रभावों का वर्णन करें।
उत्तर-
पंजाब में हरित क्रान्ति के केवल अच्छे प्रभाव ही नहीं पड़े बल्कि इसके कुछ दुष्प्रभाव भी पड़े हैं जोकि इस प्रकार हैं –
1. असंतुलित विकास की समस्या–हरित क्रान्ति का मुख्य दोष यह है कि समूचे राज्य में एक समान संतुलित विकास नहीं हुआ। कुछ ज़िले उत्पादन क्षेत्र में आगे बढ़ गए हैं जबकि कुछ जिलों में कृषि का विकास कम हुआ है। जैसे कि फरीदकोट, भटिंडा, फिरोज़पुर में कृषि विकास अधिक हुआ है।

2. बेरोज़गारी की समस्या हरित क्रान्ति से बेरोज़गारी की समस्या उत्पन्न हुई है। गांवों में भूमिहीन श्रमिकों में बेरोज़गारी बढ़ गई है इसलिए रोज़गार की तलाश में प्रतिदिन शहरों में आते हैं।

प्रश्न 4.
पंजाब में हरित क्रान्ति का अर्थ बताएं।
उत्तर-
हरित क्रान्ति का अर्थ (Meaning of Green Revolution)-प्रो० एफ० आर० फ्रैक्ल के अनुसार, “हरित क्रान्ति एक सुन्दर नारा है जिसके द्वारा यह सिद्ध किया जा चुका है कि विज्ञान तथा तकनीकी विकास द्वारा कृषि के क्षेत्र में शान्तिपूर्वक रूपान्तर किया जा सकता है अथवा क्रान्ति लाई जा सकती है।” हरित क्रान्ति से अभिप्राय कृषि उत्पादन में होने वाली वृद्धि से है जो कृषि में नई नीति के अपनाने के कारण हुआ है। इसलिए हम कह सकते हैं कि कृषि के क्षेत्र में जो थोड़े समय में असाधारण विकास तथा वृद्धि हुई है, उसको हरित क्रान्ति कहा जाता है। पंजाब में 1965-66 में 33 लाख टन कृषि उत्पादन किया गया जो कि 2019-20 में बढ़कर 315 लाख मीट्रिक टन हो गया है।

III. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
पंजाब में सिंचाई के भिन्न-भिन्न साधन कौन-से हैं ? पंजाब में सिंचाई क्षेत्र के विस्तार के कारण बताएं।
उत्तर-
कृषि के विकास के लिए सिंचाई का महत्त्व बहुत अधिक है। पंजाब में वर्ष 1966 के पश्चात् सिंचाई सुविधाओं में काफ़ी वृद्धि हुई है। वर्ष 2019-20 में सिंचाई के अधीन क्षेत्र बढ़कर 29% हो गया है जोकि कुल कृषि के अधीन क्षेत्र का 97.96% भाग है। पंजाब में लुधियाना, जालन्धर, पटियाला, भटिंडा, अमृतसर, फिरोजपुर तथा फरीदकोट जिलों में सिंचाई की अधिक सुविधाएं हैं। किन्तु रोपड़ तथा नवांशहर में सिंचाई की सुविधाओं की कमी है।

बारहवीं योजना में सिंचाई सुविधाओं पर ₹ 493564 करोड़ व्यय किए गए। सिंचाई के साधन (Means of Irrigation)-पंजाब में सिंचाई के साधन निम्नलिखित हैं-
1. नहरें (Canals)-पंजाब में कुल सिंचाई क्षेत्र के 43% भाग में नहरों द्वारा सिंचाई की जाती है। यह सिंचाई का मुख्य साधन है। पंजाब की मुख्य नहरें

  • भाखड़ा-नंगल नहर
  • अपर बारी दोआब नहर
  • सरहिन्द नहर
  • बिस्त दोआब नहर
  • बीकानेर नहर
  • शाह नहर इत्यादि हैं।

इन नहरों के अतिरिक्त पंजाब में सतलुज यमुना लिंक, थीन डैम, कंडी नहर, शाह नहर, फीडर, मेलवाहा डैम तथा राष्ट्रीय परियोजना पर कार्य चल रहा है।

2. ट्यूबवैल (Tubewell)-पंजाब में 50% क्षेत्र पर ट्यूबवैलों द्वारा सिंचाई की जाती है। इस समय 2019-20 में लगभग 14.76 लाख ट्यूबवैल हैं जिनमें से 13.36 लाख ट्यूबवैल विद्युत् से तथा शेष डीज़ल से चलते हैं।

3. कुएँ (Wells)-पंजाब में पहले कुओं का महत्त्व अधिक था। परन्तु अब कुओं का स्थान ट्यूबवैलों ने ले लिया है किन्तु कुछ क्षेत्रों में आज भी कुओं द्वारा सिंचाई की जाती है। इसके अतिरिक्त तालाब इत्यादि साधनों द्वारा भी सिंचाई की जाती है। फरीदकोट जिले में सिंचाई का मुख्य साधन नहरें हैं। इसके अतिरिक्त फिरोज़पुर, अमृतसर तथा लुधियाना जिलों में भी नहरों द्वारा सिंचाई की जाती है। ट्यूबवैल लगभग सभी जिलों में सिंचाई के साधन हैं किन्तु संगरूर ज़िले में ट्यूबवैल सबसे अधिक हैं।

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प्रश्न 2.
पंजाब में कृषि विकास की चर्चा करें।
उत्तर-
पंजाब में कृषि विकास की प्रकृति निम्नलिखित तत्त्वों द्वारा स्पष्ट हो जाती है –
1. कृषि उत्पादन में वृद्धि-पंजाब में कृषि उत्पादन में तीव्रता से वृद्धि हुई है। कुल अनाज का उत्पादन 1965-66 में 33 लाख टन था। 2019-20 में अनाज का उत्पादन बढ़कर 315 लाख मीट्रिक टन हो गया है। अनाज के उत्पादन में तीव्रता से वृद्धि को हरित क्रान्ति (Green Revolution) कहा जाता है।

2. उन्नत कृषि-पंजाब की कृषि बहुत उन्नत तथा अधिक प्रगतिशील है। पंजाब को प्रति हेक्टेयर उत्पादकता भारत की औसत प्रति हेक्टेयर उत्पादकता से अधिक है। पंजाब में वर्ष 1965-66 में गेहूँ की उत्पादकता 1236 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तथा चावल की उत्पादकता 100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी। 2019-20 में गेहूँ की उत्पादकता बढ़कर 5188 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तथा चावल की 4132 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो गई है।

3. कृषि की उन्नत विधि-पंजाब में कृषि करने की उन्नत विधियों का प्रयोग किया गया है। पंजाब में 2019-20 में गेहूँ तथा चावल के अधीन 100% क्षेत्रफल नए बीजों के प्रयोग से बोआ गया है। मक्की अधीन 90% तथा बाजरे अधीन 60% क्षेत्रफल नए बीजों के प्रयोग द्वारा बोआ गया था।

4. व्यापारिक कृषि-पंजाब में कृषि जीवन निर्वाह के लिए नहीं की जाती बल्कि उत्पादन को मण्डियों में बेचकर अधिक लाभ प्राप्त करने का यत्न किया जाता है। इसलिए कृषि विकास के परिणामस्वरूप व्यापारिक कृषि का प्रचलन हो गया है।

प्रश्न 3.
पंजाब में हरित क्रान्ति के मुख्य दोष बताएं।
अथवा
पंजाब में हरित क्रान्ति के दुष्प्रभावों का वर्णन करें।
उत्तर-
पंजाब में हरित क्रान्ति के केवल अच्छे प्रभाव ही नहीं पड़े बल्कि इसके कुछ दुष्प्रभाव भी पड़े हैं जोकि इस प्रकार हैं-

  1. असंतुलित विकास की समस्या–हरित क्रान्ति का मुख्य दोष यह है कि समूचे राज्य में एक समान संतुलित विकास नहीं हुआ। कुछ ज़िले उत्पादन क्षेत्र में आगे बढ़ गए हैं जबकि कुछ जिलों में कृषि का विकास कम हुआ है। जैसे कि फरीदकोट, भटिंडा, फिरोज़पुर में कृषि विकास अधिक हुआ है।
  2. बेरोज़गारी की समस्या-हरित क्रान्ति से बेरोजगारी की समस्या उत्पन्न हुई है। गांवों में भूमिहीन श्रमिकों में बेरोज़गारी बढ़ गई है इसलिए रोज़गार की तलाश में प्रतिदिन शहरों में आते हैं।
  3. अधिक व्यय की समस्या–हरित क्रान्ति के कारण कृषि में प्रयोग होने वाले साधनों की लागत बहुत अधिक हो गई है। छोटे किसान आधुनिक मशीनों, उर्वरकों तथा नए उन्नत बीजों का प्रयोग नहीं कर सकते।
  4. अमीर किसानों को लाभ-हरित क्रान्ति का लाभ बड़े अमीर किसानों को हुआ है। इससे अमीर किसान और अमीर हो गए हैं। निर्धन किसानों की हालत और बिगड़ गई है। इस प्रकार अमीर तथा गरीब किसानों में असमानता बढ़ गई है।

IV. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
वर्ष 1966 से पंजाब की कृषि के विकास की प्रकृति की मुख्य विशेषताओं का वर्णन करें।
(Explain the main features of the nature of Agricultural development in Punjab Since 1966.)
उत्तर-
पंजाब में कृषि विकास की प्रकृति (Nature of Agricultural Development in Punjab)पंजाब का पुनर्गठन 1 नवम्बर, 1966 को भाषा के आधार पर किया गया। इसके पश्चात् पंजाब की कृषि में तकनीकी क्रान्ति का आरम्भ हुआ, जिसको हरित क्रान्ति कहा जाता है। डॉ० आर० एस० जौहर तथा परमिन्द्र के अनुसार, “पंजाब में विशेषतया छठे दशक के मध्य से नई कृषि तकनीक के कारण तीव्रता से रूपांतर हुआ है।” (“The Punjab Agriculture underwent a rapid transformation particularly after the mid sixties in the wake of new farm Technology.” -Dr. R.S. Johar & Parminder Singh)

पंजाब में खनिज पदार्थ प्राप्त नहीं होते। कृषि ही अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी है। पंजाब की कृषि विकास की प्रकृति का अनुमान निम्नलिखित तत्त्वों से लगाया जा सकता है-
1. उन्नत कृषि (Progressive Agriculture)-पंजाब की कृषि देश के अन्य राज्यों की तुलना में उन्नत तथा प्रगतिशील है। पंजाब में पैदा होने वाली मुख्य फसलों का प्रति हेक्टेयर उत्पादन भारत की उत्पादन शक्ति से बहुत अधिक है। वर्ष 2019-20 में पंजाब में गेहूँ तथा चावल का प्रति हेक्टेयर उत्पादन क्रमानुसार 5188 किलोग्राम तथा 4132 किलोग्राम था।

2. आर्थिक विकास का आधार (Basis of Economic Development)-पंजाब में कृषि आर्थिक विकास का मुख्य आधार बन गई है। वर्ष 1980-81 में पंजाबी कुल आय 5,025 करोड़ में कृषि का योगदान ₹ 2,422 करोड़ था। 2019-20 में पंजाब की आय ₹ 644321 करोड़ हो गई है जिसमें कृषि का योगदान 68% है। इस प्रकार पंजाब के आर्थिक विकास में कृषि आर्थिक विकास का मुख्य साधन है।

3. कृषि का मशीनीकरण (Mechanised Agriculture)-पंजाब की कृषि में मशीनों का योगदान दिन प्रतिदिन बढ़ा है। पंजाब में ट्रैक्टर, हारवैस्टर, ट्यूबवैल आम नज़र आते हैं। राज्य में 85% बोए गए शुद्ध क्षेत्रफल पर एक से अधिक बार फसलें उगाई जाती हैं परिणामस्वरूप कृषि की उत्पादन शक्ति में वृद्धि हुई है।

4. कृषि साधनों का उत्तम प्रयोग (Proper Utilisation of Agricultural Resources)-पंजाब में कृषि के साधनों का उत्तम प्रयोग किया जाता है। कृषि के लिए उचित मिट्टी तथा जलवायु की आवश्यकता होती है। पंजाब में धरती समतल है। इसमें दोमट मिट्टी प्राप्त होती है जो कि फसलों की बोआई के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है। पंजाब में जल के लिए तीन नदियां सतलुज, ब्यास तथा रावी बहती हैं। इसलिए गहन कृषि की जाती है। वर्ष में एक-से-अधिक फसलें प्राप्त की जाती हैं।

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5. कृषि का अधिक उत्पादन (More Agricultural Production)-पंजाब में कृषि का उत्पादन बहुत अधिक होता है। यह उत्पादन न केवल पंजाब राज्य की आवश्यकताएं पूर्ण करता है बल्कि देश के लिए अन्न भण्डार का साधन है। 1966 के पश्चात् हरित क्रान्ति के परिणामस्वरूप पंजाब में उत्पादन शक्ति में बहुत वृद्धि हुई है। 1965-66 में चावल का उत्पादन 292 हज़ार टन किया गया जो 2019-20 में बढ़ कर 315 लाख टन हो गया है।

6. मुख्य फसलें (Main Crops)-पंजाब की कृषि मुख्यतः दो फसलों गेहूँ तथा चावल पर निर्भर है। पंजाब में बोए गए कुल क्षेत्र का 70% गेहूँ तथा चावल के लिए प्रयोग किया जाता है जबकि अन्य फसलों में वृद्धि सन्तोषजनक नहीं है।

7. व्यापारिक कृषि (Commercial Agriculture)-पंजाब की कृषि अब केवल जीवन निर्वाह कृषि नहीं है बल्कि कृषि उत्पादन आवश्यकता से अधिक प्राप्त किया जाता है जिसको बाज़ार में बेच कर अधिक लाभ प्राप्त करने के लिए यत्न किए जाते हैं अर्थात् पंजाब की कृषि व्यापारिक कृषि हो गई है।

8. रोज़गार का साधन (Source of Employment)-पंजाब की कृषि में प्रत्यक्ष तौर पर 65.5% जनसंख्या निर्भर करती है जिसमें कुल कार्यशील जनसंख्या का 56% भाग कृषि में कार्य करता है। इस प्रकार कृषि तथा इससे सम्बन्धित उद्योग राज्य के लोगों को रोजगार की सुविधाएं प्रदान करते हैं।

प्रश्न 2.
पंजाब में हरित क्रान्ति के क्या कारण हैं ? इसकी सफलताओं अथवा प्रभावों की व्याख्या करें।
(What are the causes of Green Revolution in Punjab ? Discuss the achievements and effects of Green Revolution.)
अथवा
नए कृषि ढांचे से क्या अभिप्राय है ? इसके कारण तथा प्राप्तियों को स्पष्ट करें। (What is new Agricultural Strategy ? Explain its causes and achievements.)
उत्तर-
पंजाब का 1 नवम्बर, 1966 को पुनर्गठन किया गया है। इस समय में नए कृषि ढांचे (New Agicultural Strategy) को अपनाया गया है। इसके परिणामस्वरूप पंजाब में कृषि का उत्पादन बहुत बढ़ गया तथा हरित क्रान्ति उत्पन्न हुई।

हरित क्रान्ति का अर्थ (Meaning of Green Revolution)—प्रो० एफ० आर० फ्रैक्ल के अनुसार, “हरित क्रान्ति एक सुन्दर नारा है जिसके द्वारा यह सिद्ध किया जा चुका है कि विज्ञान तथा तकनीकी विकास द्वारा कृषि के क्षेत्र में शान्तिपूर्वक रूपान्तर किया जा सकता है अथवा क्रान्ति लाई जा सकती है।” हरित क्रान्ति से अभिप्राय कृषि उत्पादन में होने वाली वृद्धि से है जो कृषि में नई नीति के अपनाने के कारण हुआ है। इसलिए हम कह सकते हैं कि कृषि के क्षेत्र में जो थोड़े समय में असाधारण विकास तथा वृद्धि हुई है, उसको हरित क्रान्ति कहा जाता है। पंजाब में 1965-66 में 33 लाख टन कृषि उत्पादन किया गया जो कि 2019-20 में बढ़ कर 315.35 लाख मीट्रिक टन हो गया है।

हरित क्रान्ति के कारण (Causes of Green Revolution)-पंजाब में हरित क्रान्ति के मुख्य कारण इस प्रकार-
1. भूमि सुधार (Land Reform)-पंजाब में कृषि क्षेत्र में कई प्रकार के सुधार किए गए हैं। जैसे कि भूमि की चकबन्दी की गई है। छोटे-छोटे टुकड़ों को एक स्थान पर एकत्रित किया गया है। सिंचाई साधनों का विस्तार तथा मशीनों के प्रयोग के कारण हरित क्रान्ति के लिए भूमिका तैयार की गई है।

2. कृषि अधीन क्षेत्रों का विस्तार (Extent in area Under Cultivation)-पंजाब में कृषि अधीन क्षेत्र में काफ़ी वृद्धि हुई है। 1965-66 में 38 लाख हेक्टेयर भूमि कृषि अधीन थी जोकि 2019-20 में बढ़ कर 80 लाख हेक्टेयर की गई है।

3. कृषि का मशीनीकरण (Mechanisation of Agriculture)-कृषि में आधुनिक मशीनों का प्रयोग किया जाता है जैसे कि ट्रैक्टर, कंबाइन, हारवैस्टर, डीज़ल इंजन इत्यादि यन्त्रों का प्रयोग होने के कारण उत्पादन शक्ति में बहुत वृद्धि हुई है 1966-67 में पंजाब में 10,000 ट्रैक्टर थे जिनकी संख्या 2019-20 में बढ़कर 5.15 लाख हो गई है।

4. उन्नत बीज (High yielding varieties of seeds)-पंजाब में हरित क्रान्ति का एक और कारण उन्नत बीजों का अधिक प्रयोग किया जाना है। गेहूँ, चावल, बाजरा, मक्की तथा ज्वार की फसलों के लिए बीजों की उन्नत किस्में बनाई गई हैं। गेहूं तथा चावल के लिए 100%, मक्की के लिए 90% तथा बाजरे के लिए 60% अधिक पैदावार देने वाले बीजों का प्रयोग 1999-2000 में किया गया।

5. रासायनिक उर्वरक (Fertilizers)-पंजाब में रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग के कारण अनाज के उत्पादन में काफ़ी वृद्धि हुई है। हरित क्रान्ति आने का एक कारण उर्वरकों का अधिक प्रयोग करना है। 1966-67 में 51 हजार टन रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग किया गया था। 2019-20 में 1750 हजार टन रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग किया गया है।

6. सिंचाई (Irrigation)-पंजाब में सिंचाई की अधिक सहूलतों के कारण हरित क्रान्ति पर बहुत प्रभाव पड़ा है। पंजाब में सारा वर्ष .चलने वाले तीन दरिया सतलुज, ब्यास तथा रावी हैं जिनसे विद्युत् पैदा की जाती है तथा सिंचाई के लिए नहरें निकाली गई है। ट्यूबवैल, कुएं तथा तालाब की सिंचाई के साधन हैं। 1965-66 में 59% क्षेत्र पर सिंचाई की जाती थी। 2019-20 में 78.3 लाख हैक्टर क्षेत्र पर सिंचाई की जाती है।

7. साख सहूलतें (Credit Facilities) हरित क्रान्ति के लिए साख सहूलतों का योगदान बहुत अधिक है। 1967-68 में सहकारी समितियों द्वारा ₹75 करोड़ की साख सहूलतें प्रदान की गई थीं जो कि 2019-20 में बढ़ कर ₹ 6515 करोड़ हो गई हैं।

8. खोज (Research)-पंजाब में कृषि यूनिवर्सिटी लुधियाना में खोज का कार्य किया जाता है। कृषि यूनिवर्सिटी में नए बीज, भूमि की परख, उर्वरकों का प्रयोग, कीट नाशक दवाइयों के प्रयोग सम्बन्धी अल्प अवधि के कोर्स आरम्भ किए जाते हैं। इससे किसानों को फसलों की देख रेख करने सम्बन्धी जानकारी प्राप्त होती है। परिणामस्वरूप कृषि के उत्पादन पर अच्छा प्रभाव पड़ता है।

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हरित क्रान्ति की प्राप्तियां (Achievements of Green Revolution)
अथवा
हरित क्रान्ति के प्रभाव (Effects of Green Revolution) –
हरित क्रान्ति की मुख्य प्राप्तियां इस प्रकार हैं-
1. उत्पादन में वृद्धि (Increase in Production)-हरित क्रान्ति के परिणामस्वरूप कृषि के उत्पादन में काफ़ी वृद्धि हुई है। 1965-66 में 33 लाख टन अनाज पैदा किया गया था। हरित क्रान्ति के परिणामस्वरूप वर्ष 2019-20 में कृषि का उत्पादन 315.33 लाख मीट्रिक टन हो गया है।

2. रोज़गार में वृद्धि (Increase in Employment) हरित क्रान्ति के कारण मशीनों का प्रयोग बढ़ गया है। परन्तु फिर भी वर्ष में कई फसलें पैदा होने लगी हैं इसलिए रोजगार में वृद्धि हुई है।

3. उद्योगों में वृद्धि (Increase in Industries) हरित क्रान्ति का प्रभाव उद्योगों के विकास पर अच्छा पड़ा है। पंजाब में कृषि यन्त्र हारवैस्टर, थ्रेशर इत्यादि की मांग बढ़ने के कारण बहुत से उद्योग स्थापित किए गए हैं।

4. उत्पादकता में वृद्धि (Increase in Productivity) हरित क्रान्ति के पश्चात् गेहूँ तथा चावल की उत्पादन शक्ति बहुत बढ़ गई है। यद्यपि गेहूँ, मक्की, ज्वार, कपास की प्रति हेक्टेयर उत्पादकता में काफ़ी वृद्धि हुई है जिसका मुख्य कारण अच्छे बीजों, रासायनिक उर्वरकों का अधिक प्रयोग है।

5. ग्रामीण विकास (Rural Development)-हरित क्रान्ति के परिणामस्वरूप ग्रामीण लोगों की आय में वृद्धि हो गई है इसलिए ग्रामीण लोगों में उच्च जीवन स्तर व्यतीत करने की इच्छा पैदा हो गई है।

प्रश्न 3.
पंजाब की प्रमुख फसलों का वर्णन करें। पंजाब में पुनर्गठन के पश्चात् फसलों के ढांचे में कौन-से परिवर्तन हुए हैं ? .
उत्तर-
पंजाब में कई प्रकार की फसलों का उत्पादन किया जाता है। इन फसलों को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है
A. खाद्य फसलें (Food Crops)-ये वह फसलें हैं जोकि भोजन के रूप में खाने के लिए प्रयोग की जाती हैं जैसे कि गेहूँ, चावल, ज्वार, बाजरा, मक्की, दालें तथा चने इत्यादि।
B. व्यापारिक फसलें (Commercial Crops)-व्यापारिक फसलें वे हैं जिनका प्रयोग उद्योगों में कच्चे माल के रूप में किया जाता है। जैसे कि गन्ना, कपास, तिलहन इत्यादि।

A. खाद्य फसलें (Food Crops)-पंजाब की खाद्य फसलों की व्याख्या इस प्रकार की जा सकती है –
1. गेहूँ (Wheat)-पंजाब में गेहूँ भोजन के लिए मुख्य फसल है। गेहूँ की बिजाई नवम्बर-दिसम्बर के महीने में की जाती है जोकि अप्रैल-मई के महीने में काटी जाती है। पंजाब के सब ज़िलों में गेहूँ की बिजाई की जाती है परन्तु संगरूर, फिरोज़पुर तथा लुधियाना जिले में अन्य जिलों से गेहूँ अधिक होती है। 2019-20 में गेहूँ की उत्पादन शक्ति पंजाब में 5188 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी। जबकि भारत में गेहूँ की औसत उत्पादकता 3600 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी। स्पष्ट है कि पंजाब में गेहूँ का उत्पादन 17613 हज़ार मीट्रिक टन है जो अन्य राज्यों से अधिक है।

2. चावल (Rice)-पंजाब में चावल की खाद्य फसलों में से प्रमुख फसल है। इसकी बिजाई मई-जून में की जाती है तथा यह अक्तूबर-नवम्बर तक तैयार हो जाती है। चावल का उत्पादन पंजाब के सब जिलों में होता है परन्तु सबसे अधिक उत्पादन अमृतसर, पटियाला, लुधियाना तथा संगरूर जिलों में होता है। 2019-20 में पंजाब में चावल की प्रति हेक्टेयर उपज 4132 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी जबकि समूचे भारत में औसत उत्पादकता 2708 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी। पंजाब में चावल का उत्पादन 13311 हज़ार मीट्रिक टन था।

3. जौ (Barley)-पंजाब में जौ रबी की फसल है। इसको पंजाब में सितम्बर-अक्तूबर के महीने में बोआ जाता है तथा यह अप्रैल में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। इसका उत्पादन भटिंडा, होशियारपुर इत्यादि जिलों में होता है। 1965-66 में जौ की प्रति हेक्टेयर उत्पादकता 1030 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर था। 2019-20 में इसकी उत्पादन शक्ति बढ़कर 3017 किलोग्राम हो गई है। जौ का उत्पादन 117 हज़ार मीट्रिक टन हुआ था।

4. मक्की (Maize)-पंजाब में मक्की खरीफ की फसल है। मक्की जून-जुलाई के महीने में बोई जाती है तथा मक्की की फसल सितम्बर, अक्तूबर तक तैयार हो जाती है। पंजाब में अधिकतर मक्की लुधियाना, जालन्धर, होशियारपुर ज़िलों में पैदा होती है। 1970-71 में प्रति हेक्टेयर उत्पादन शक्ति 1555 किलोग्राम थी। 2019-20 में इसकी उत्पादन शक्ति बढ़कर 3515 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो गई है। मक्की का उत्पादन 396 लाख मीट्रिक टन हुआ था।

5. ज्वार तथा बाजरा (Jowar and Bazra)-ज्वार तथा बाजरा खरीफ की फसलें हैं। ज्वार मुख्यतः रूपनगर तथा मुक्तसर जिलों में पैदा की जाती है। बाजरे की फसल, गुरदासपुर, फिरोजपुर, फरीदकोट तथा संगरूर में होती है। बाजरे की उत्पादन शक्ति 1965-66 में 548 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी जोकि 2019-20 में बढ़कर 987 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो गई है। ज्वार का उत्पादन 800 मीट्रिक टन तथा बाजरे का उत्पादन 800 मीट्रिक टन हुआ था।

6. चने (Gram)-यह रबी की फसल है जोकि अक्तूबर-नवम्बर में बोई जाती है। यह फसल अप्रैल-मई तक तैयार हो जाती है। यह फसल भटिंडा तथा मुक्तसर जिलों में होती है क्योंकि रेतीली भूमि इसके लिए अधिक उपयुक्त होती है। इसकी उत्पादकता 1245 kg प्रति हैक्टेयर और उत्पादन 3 हज़ार मीट्रिक टन था।

7. दालें (Pulses)-पंजाब में लोगों के भोजन का मुख्य अंग दालें हैं। पंजाब में मांह, मोठ, मूंगी, मसर इत्यादि दालों का प्रयोग किया जाता है। दालों की उत्पादकता में भी वृद्धि हुई है। 2019-20 में दालों की पैदावार 25 हज़ार मीट्रिक टन थी।

B. व्यापारिक फसलें अथवा नकदी फसलें (Commercial Crops or Cash Crops)-पंजाब में व्यापारिक फसलें मुख्यतः निम्नलिखित हैं
1. गन्ना (Sugarcane)-पंजाब में गन्ना व्यापारिक खाद्य फसल है। इसका प्रयोग गुड़, शक्कर तथा चीनी तैयार करने के लिए किया जाता है। इसका बिजाई मार्च-अप्रैल तथा कटाई दिसम्बर-मार्च में की जाती है। गन्ना मुख्यतः जालन्धर, गुरदासपुर तथा रूपनगर जिलों में बोआ जाता है। पंजाब में चीनी बनाने के उद्योग के लिए कच्चा माल पंजाब में ही तैयार किया जाता है। 2019-20 में गन्ने का उत्पादन 7744 लाख मीट्रिक टन हुआ था।

2. कपास (Cotton)-कपास खरीफ की फसल है। यह अप्रैल से जून तक बोई जाती है जोकि सितम्बर से दिसम्बर तक तैयार हो जाती है। पंजाब में भटिंडा, फरीदकोट, फिरोज़पुर में कपास की अमेरिकन किस्म बोई जाती है जबकि अन्य जिलों में देशी कपास बोई जाती है। 2019-20 में कपास का उत्पादन 1283 हज़ार गांठें हुआ।

3. तेलों के बीज (Oil Seeds)-पंजाब में तेलों के बीज मुख्य नकदी फसल है। इसमें सरसों, तारामीरा, अलसी, तिल इत्यादि का उत्पादन होता है। इनमें से कुछ फसलें रबी की हैं तथा कुछ खरीफ की हैं। भटिंडा, फिरोज़पुर तथा पटियाला में सरसों तथा तारामीरा, संगरूर में मुख्यतः तारामीरा, लुधियाना में मूंगफली का उत्पादन किया जाता है। 2019-20 में 59.6 हज़ार मीट्रिक टन तेलों के बीज का उत्पादन हुआ।

प्रश्न 4.
पंजाब में कृषि उपज बिक्री के दोष बताएं और इन दोषों को दूर करने के लिये सुझाव दें। (Discuss the defects of Agricultural Marketing on Punjab. Suggest measures to remove the defects.)
उत्तर-
पंजाब में कृषि उपज बिक्री के मुख्य दोष इस प्रकार हैं-
1. ग्रेडिंग का अभाव (Lack of Grading)-पंजाब में किसान अपनी फसल की ग्रेडिंग नहीं करते। जो फसल बाज़ार में बिक्री के लिए भेजी जाती है उसमें मिलावट होने के कारण उपज का ठीक मूल्य प्राप्त नहीं होता।

2. उपज के भण्डार का अभाव (Lack of Storage Facilities)- किसान को अपनी उपज कटाई के बाद शीघ्र बेचनी पड़ती है क्योंकि फसलों के संग्रह करने के लिये उचित भण्डार साधन नहीं होते। इसलिए घर पर फसल रखने से उसके नष्ट होने का डर रहता है।

3. संगठन का अभाव (Lack of Organisation)-पंजाब में किसानों का कोई संगठन नहीं है जो कि उपज का उचित मूल्य दिला सके। किसान अपनी-अपनी फसल मण्डियों में बेचते हैं जिस कारण उनको उपज की कम कीमत प्राप्त होती है।

4. मण्डियों में अधिक मध्यस्थ (Many Intermediaries in Mandies)-मण्डी में मध्यस्थों की अधिकता के कारण भी किसान को उपज का ठीक मूल्य प्राप्त नहीं होता। किसान और उपभोक्ता के बीच कच्चा आढ़तिया, पक्का आढ़तिया, दलाल आदि बहुत-से मध्यस्थ होते हैं। मध्यस्थों के कारण किसान को उपज की पूरी कीमत प्राप्त नहीं होती।

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5. मण्डियों में अनुचित ढंग (Malpractices in Mandies) मण्डियों में किसान को कम कीमत देने के लिये कई प्रकार के अनुचित ढंगों का प्रयोग किया जाता है। किसान की उपज को तुरन्त खरीदा नहीं जाता और किसान को कई दिन उपज की सम्भाल करनी पड़ती है। उसको उपज की उचित कीमत का ज्ञान भी नहीं दिया जाता।

6. मण्डियों के बारे में सूचना (Knowledge about Mandies) किसानों को बाज़ार की विभिन्न मण्डियों के बारे में पूरी जानकारी नहीं होती। इसलिये किसान अपनी उपज गांव के पास ही मण्डियों में कम कीमत पर बेच देता है।

7. वित्त का अभाव (Lack of Finance)-किसानों को फसल बीजने से लेकर, इस की कटाई होने तक बहुतसे वित्त की ज़रूरत होती है। पंजाब में बहुत-से किसान वित्त के लिये महाजनों तथा आढ़तियों पर निर्भर होते हैं। इसलिए किसान को अपनी उपज महाजनों तथा आढ़तियों को ही बेचनी पढ़ती है। इसलिए उपज की ठीक कीमत प्राप्त नहीं होती।

8. यातायात सुविधाओं का अभाव (Lack of Transport Facilities)—पंजाब में गांव में यातायात की असुविधाएं होने के कारण किसान को अपनी उपज गांव में या नज़दीक मण्डियों में ही बेचनी पड़ती है। इसलिये किसान को अपने उत्पादन को बहुत ही प्रतिकूल समय, प्रतिकूल दरों पर, प्रतिकूल बाज़ार में बेचना पड़ता है।

9. स्वेच्छा बिक्री का अभाव (Lack of Freedom of Sale)-पंजाब में किसान अपनी उपज स्वेच्छा से बिक्री नहीं कर सकता। उसको बैंक का कर्ज, साहूकार और आढ़तियों का कर्ज देना होता है। इसलिए फसल काटने के तुरन्त बाद उसको अपनी उपज बेचनी पड़ती है।

कृषि उपज की बिक्री के दोषों को दूर करने के लिए सुझाव (Suggestions to Remove the Defects of Agricultural Marketing) कृषि उपज की बिक्री में बहुत से दोष हैं। इन दोषों को दूर करने के लिए निम्नलिखित सुझाव दिये जाते हैं-
1. वित्त की सुविधा (Facilities of Finance)-पंजाब के किसानों को वित्त की सुविधा प्रदान करनी चाहिए। भारत सरकार ने इस वित्त की सुविधा को ध्यान में रखते हुए किसानों पर से 2019-20 में ₹ 2000 करोड़ का कर्ज़ माफ़ कर दिया है और बैंकों में किसानों को अधिक साख देने के लिये कहा है।

2. यातायात की सुविधा (Facilities of Transport)-पंजाब में किसान की उपज को बेचने के लिये सस्ती, कुशल तथा पर्याप्त सुविधाएं होनी चाहिएं। इस प्रकार किसान अपनी उपज को उचित बाजार, उचित समय तथा उचित कीमत पर बेच सकता है।

3. संग्रह की सुविधा (Facilities of Storage) संग्रह की सुविधा भी कृषि उपज की बिक्री के लिए बहुत ज़रूरी है। किसान के पास गांव में फसलों को संग्रह करने के लिये गड्ढ़े या कोठियां मिट्टी के बने होते हैं। इस कारण बहुत-सी फसल नष्ट हो जाती है। इसलिए संग्रह की सुविधा सरकार द्वारा प्रदान करनी चाहिए।

4. मध्यस्थों पर नियन्त्रण (Control over Middleman) कृषि उपज की उचित बिक्री के लिये मध्यस्थों पर नियन्त्रण आवश्यक है। मध्यस्थों पर नियन्त्रण करके किसान को उसकी उपज की ठीक कीमत दिलाई जा सकती है।

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5. उचित कीमत (Suitable Price)-किसान द्वारा उपज की कीमत दूसरे खरीदार लगाते हैं जबकि उत्पादक अपनी वस्तु की कीमत स्वेच्छा से निर्धारित करते हैं। इसलिए किसान को अपनी उपज की कीमत स्वेच्छा से निर्धारित करने का अधिकार होना चाहिए।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 26 पंजाब की मानवीय शक्ति और भौतिक साधन

Punjab State Board PSEB 11th Class Economics Book Solutions Chapter 26 पंजाब की मानवीय शक्ति और भौतिक साधन Textbook Exercise Questions, and Answers.

PSEB Solutions for Class 11 Economics Chapter 26 पंजाब की मानवीय शक्ति और भौतिक साधन

PSEB 11th Class Economics पंजाब की मानवीय शक्ति और भौतिक साधन Textbook Questions and Answers

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Type Questions)

प्रश्न 1.
पंजाब में जनसंख्या के आकार में परिवर्तन का वर्णन करें।
उत्तर-
पंजाब की जनसंख्या 2011 की जनगणना के अनुसार 2 करोड़ 77 लाख थी।

प्रश्न 2.
पंजाब में साक्षरता अनुपात पर टिप्पणी लिखें।
उत्तर-
2011 में साक्षरता अनुपात बढ़ कर 75.8% हो गई है। साक्षर लोगों में पुरुषों का अनुपात 75.63% है, जबकि स्त्रियों में साक्षरता अनपात 71.3% है।

प्रश्न 3.
पंजाब की जनसंख्या के लिंग अनुपात का वर्णन करें।
उत्तर-
2011 में पंजाब में स्त्री-पुरुष अनुपात 897 था।

प्रश्न 4.
पंजाब की वन सम्पत्ति के सम्बन्ध में क्या स्थिति है?
उत्तर-
पंजाब में वन सम्पत्ति संतोषजनक नहीं है।

प्रश्न 5.
पंजाब में शहरों, तहसीलों तथा गांवों की संख्या बताएं।
उत्तर-
पंजाब में 5 डिवीज़न, 22 जिले, 91 तहसीलें, 81 सब तहसीलें, 150 विकास खण्ड, 74 शहर, 143 कस्बे तथा 12581 गांव हैं।

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प्रश्न 6.
पंजाब में ऊर्जा के जल साधनों की व्याख्या करें।
उत्तर-
जल विद्युत्-पंजाब में सतलुज, ब्यास तथा रावी तीन दरिया बहते हैं। इनके जल से विद्युत् उत्पन्न की जाती है।

प्रश्न 7.
पंजाब का क्षेत्रफल 50362 वर्ग किलोमीटर है।
उत्तर-
सही।

प्रश्न 8.
पंजाब में स्त्री पुरुष लिंग अनुपात ……………. है।
उत्तर-
895.

प्रश्न 9.
पंजाब में जंगल सन्तोषजनक हैं।
उत्तर-
ग़लत।

प्रश्न 10.
पंजाब की जनसंख्या 2011 की जनगणना अनुसार ……………. थी
(a) 267 लाख
(b) 277 लाख
(c) 287 लाख
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(b) 277 लाख।

प्रश्न 11.
पंजाब के खनिज पदार्थों का वर्णन करो।
उत्तर-
पंजाब में कोई खनिज पदार्थ नहीं मिलता।

प्रश्न 12.
पंजाब में जल बिजली और ताप बिजली ऊर्जा के मुख्य स्रोत हैं।
उत्तर-
सही।

प्रश्न 13.
पंजाब में शक्ति के साधन ………………. हैं।
(a) भाखड़ा नंगल प्रोजैक्ट
(b) ब्यास प्रोजैक्ट
(c) आनंदपुर साहिब प्रोजैक्ट
(d) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(d) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 14.
पंजाब की मुख्य फसलें गेहूँ और चावल हैं।
उत्तर
सही।

प्रश्न 15.
पंजाब में अधिक कृषि उत्पादन का कारण बताएँ।
उत्तर-
पंजाब में कृषि के लिए उचित और उपयुक्त वातावरण।

प्रश्न 16.
पंजाब में वर्ष 2019-20 में प्रति व्यक्ति आय ₹ 166830 थी।
उत्तर-
सही।

II. अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
पंजाब में जनसंख्या की वृद्धि के दो कारण बताएं।
उत्तर-
पंजाब में जनसंख्या वृद्धि के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं

  1. ऊंची जन्म दर-पंजाब में जन्म दर ऊंची है जो कि 19.9 प्रति हज़ार है। इस कारण पंजाब की जनसंख्या में निरन्तर वृद्धि हो रही है।
  2. कम मृत्यु दर-एक हजार व्यक्तियों के पीछे जितने व्यक्तियों की मृत्यु हो जाती है उसको मृत्यु दर कहा जाता है। पंजाब में मृत्यु दर निरन्तर कम हो रही है। इसके मुख्य कारण डॉक्टरी सुविधाओं में वृद्धि, अच्छी खुराक, विवाह की अधिक आयु इत्यादि है। 1971 में मृत्यु दर 11.4 प्रति हज़ार थी। 2018-19 में मृत्यु दर कम होकर 6 प्रति हज़ार है। इस कारण जनसंख्या की वृद्धि हो रही है।

प्रश्न 2.
पंजाब में जनसंख्या के व्यवसाय का विवरण दें।
उत्तर-
पंजाब में जनसंख्या के व्यवसाय का विवरण इस प्रकार है –

व्यवसाय उत्पदान प्रतिशत
(1) सुविधाएं कृषि (प्राथमिक क्षेत्र) 26.16
(2) उद्योग तथा निर्माण (सैकण्डरी क्षेत्र) 24.70
(3) टर्शरी क्षेत्र 35.14
14.00
कुल कार्यशील जनसंख्या 100%

प्रश्न 3.
पंजाब में वन सम्पत्ति की विशेषताएं बताएं।
उत्तर-
वन मनुष्यों के लिए महत्त्वपूर्ण प्राकृतिक साधन हैं। एक राज्य की जलवायु, रोज़गार, वर्षा, बाढ़ नियन्त्रण इत्यादि पर वनों का बहुत प्रभाव पड़ता है। एच० कालबर्ट के अनुसार, “पंजाब की खुशहाली बहुत हद तक वनों पर निर्भर करती है क्योंकि यह भूमि कटाव को रोकते हैं।” पंजाब में वन साधन बहुत कम हैं। 1966 में पंजाब के पुनर्गठन के कारण वन वाला क्षेत्र हिमाचल प्रदेश का भाग बन गया इसलिए पंजाब में वनों के अधीन क्षेत्र बहुत कम है। पंजाब में 3054 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र वनों के अधीन है जो कि कुल क्षेत्रफल का 5.7% भाग है।

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प्रश्न 4.
पंजाब में स्त्री-पुरुष अनुपात पर रोशनी डालें।
उत्तर-
स्त्री-पुरुष अनुपात निरन्तर कम हो रहा है। इसका विवरण निम्नलिखित सूची पत्र द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है-
स्त्री-पुरुष अनुपात

वर्ष 1951 1961 1971 1981 1991 2011
भारत 946 942 930 934 929 940
पंजाब 844 854 865 879 888 895

प्रश्न 5.
पंजाब में वनों के दो प्रत्यक्ष लाभ बताएं।
उत्तर-
प्रत्यक्ष लाभ (Direct Advantages)-

  1. इमारती लकड़ी-पंजाब के वनों से कई प्रकार की इमारती लकड़ी प्राप्त होती है जैसे कि शीशम, टाहली, आम, सफ़ेदा इत्यादि जो फर्नीचर तथा इमारतें बनाने के लिए प्रयोग की जाती है।
  2. कच्चे माल की प्राप्ति-पंजाब के वनों से कच्चे माल की प्राप्ति भी होती हैं। इससे खेलों का सामान बनाने वाले उद्योग, काग़ज़ उद्योग इत्यादि का प्रयोग किया जाता है। इसके अतिरिक्त रंग-रोगन बनाने के लिए कच्चा माल भी वनों से प्राप्त किया जाता है।

प्रश्न 6.
पंजाब में वनों के दो अप्रत्यक्ष लाभ बताएं।
उत्तर-
अप्रत्यक्ष लाभ (Indirect Advantages)—वनों में अप्रत्यक्ष लाभ इस प्रकार हैं –

  1. वनों द्वारा बाढ़ की रोकथाम होती है। वन जल की रफ़्तार काफ़ी कम कर देते हैं।
  2. वनों द्वारा भूमि के कटाव (Soil Erosion) की समस्या का हल होता है। पेड़ों की जड़ों में मिट्टी फंस जाती है इसलिए भूमि के कटाव की समस्या उत्पन्न नहीं होती।

III. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
पंजाब में जनसंख्या की वृद्धि के क्या कारण हैं ?
उत्तर-
पंजाब में जनसंख्या वृद्धि के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं-

  1. ऊंची जन्म दर-पंजाब में जन्म दर ऊंची है जो कि 29.8 प्रति हज़ार है। इस कारण पंजाब की जनसंख्या में निरन्तर वृद्धि हो रही है।
  2. कम मृत्यु दर-एक हज़ार व्यक्तियों के पीछे जितने व्यक्तियों की मृत्यु हो जाती है उसको मृत्यु दर कहा जाता है। पंजाब में मृत्यु दर निरन्तर कम हो रही है। इसके मुख्य कारण डॉक्टरी सुविधाओं में वृद्धि, अच्छी खुराक, विवाह की अधिक आयु इत्यादि है। 1971 में मृत्यु दर 11.4 प्रति हज़ार थी। 2011 में मृत्यु दर कम होकर 7.4 प्रति हज़ार है। इस कारण जनसंख्या की वृद्धि हो रही है।
  3. अशिक्षा-पंजाब में 75.8% लोग गांवों में रहते हैं। इनमें से अधिक लोग अशिक्षित तथा अज्ञानी हैं। वे छोटे परिवार के महत्त्व को नहीं समझते इसलिए परिवार नियोजन की तरफ कम ध्यान देते हैं। पुत्र प्राप्ति के लिए परिवार में लोग वृद्धि करते हैं।
  4. सर्वव्यापी विवाह-पंजाब में विवाह करना सामाजिक, आर्थिक तथा धार्मिक दृष्टि से आवश्यक माना जाता है। यद्यपि कोई बच्चों का पालन-पोषण न कर सके, परन्तु विवाह करना पसन्द करता है।
  5. गर्म जलवायु-पंजाब की जलवायु गर्म है। इसलिए लड़के-लड़कियां छोटी आयु में ही विवाह योग्य हो जाते हैं। इस कारण बच्चे अधिक होते हैं।

प्रश्न 2.
पंजाब में जनसंख्या की सघनता पर टिप्पणी लिखें।
उत्तर-
जनसंख्या की सघनता का अर्थ है कि राज्य में प्रति वर्ग किलोमीटर में कितनी जनसंख्या निवास करती है-
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 26 पंजाब की मानवीय शक्ति और भौतिक साधन 1
पंजाब में जनसंख्या की सघनता बढ़ रही है 1961 में पंजाब की सघनता 221 थी, जोकि 2011 में बढ़कर 551 हो गई है। पंजाब में जनसंख्या की सघनता भारत में जनसंख्या की सघनता से अधिक है।

इसके मुख्य कारण इस प्रकार हैं-

  1. भूमि की उपजाऊ शक्ति-जिस राज्य में भूमि की उपजाऊ शक्ति अधिक होती है। वर्षा उचित मात्रा में ठीक समय पर होती है तथा सिंचाई की सुविधाएं प्राप्त होती हैं, उन क्षेत्रों में जनसंख्या की सघनता अधिक होगी।
  2. उद्योगों का विकास-औद्योगिक विकास तथा व्यापारिक केन्द्रों में जनसंख्या की सघनता अधिक होती है। उद्योग विकसित होने के कारण रोज़गार के अधिक अवसर प्राप्त होते हैं, इसलिए जनसंख्या की सघनता बढ़ जाती है।
  3. सुरक्षा का वातावरण-जिन क्षेत्रों में सुख-शान्ति का वातावरण पाया जाता है तथा जान-माल की सुरक्षा होती है, उन क्षेत्रों में जनसंख्या की सघनता अधिक पाई जाती है।
  4. राजधानियां तथा धार्मिक स्थान-साधारणतया राजधानियों तथा धार्मिक स्थानों पर जनसंख्या की सघनता अधिक होती है, क्योंकि श्रद्धालु लोग धार्मिक स्थानों पर बस जाते हैं। राजधानियों में शिक्षा तथा स्वास्थ्य सुविधाएं होने के कारण ऐसे स्थानों पर लोग निवास करना पसन्द करते हैं।

प्रश्न 3.
पंजाब में जनसंख्या के व्यावसायिक विभाजन को स्पष्ट करें।
उत्तर-
जनसंख्या के व्यावसायिक विभाजन से अभिप्राय : एक राज्य के लोग अपनी आजीविका कमाने के लिए कौन-से कार्य करते हैं। 2011 की जनसंख्या के अनुसार पंजाब की जनसंख्या 277 लाख है जिसमें से 30% जनसंख्या कार्यशील है। जनसंख्या के व्यावसायिक विभाजन को तीन भागों में विभाजित करके स्पष्ट किया जा सकता है-

  1. प्राथमिक क्षेत्र (Primary Sector)-इस क्षेत्र में कृषि तथा कृषि कार्यों से सम्बन्धित सब कार्य शामिल किए जाते हैं।
  2. गौण क्षेत्र (Secondary Sector)-इस क्षेत्र में उद्योग, निर्माण इत्यादि कार्यों को शामिल किया जाता है।
  3. तृतीय क्षेत्र (Tertiary Sector)-इस क्षेत्र में व्यापार, यातायात, बैंकिंग इत्यादि सेवाओं को शामिल किया जाता है|

वर्ष 2019-20 पंजाब में जनसंख्या के व्यवसाय का विवरण इस प्रकार है –

व्यवसाय कार्यशील जनसंख्या का प्रतिशत उत्पादन प्रतिशत
(1) सुविधाएं कृषि (प्राथमिक क्षेत्र) 56.0 25%
(2) उद्योग तथा निर्माण (गौण क्षेत्र) 16.0 25%
(3) सेवाएं (तृतीय क्षेत्र) 28.0% 50%
कुल कार्यशील जनसंख्या 100% 100.00

इस सूची-पत्र से स्पष्ट होता है कि –

  1. कृषि-पंजाब में कार्यशील जनसंख्या का 56% भाग कृषि में कार्य करता है। इसमें 26.16% उत्पादन होता है।
  2. उद्योग तथा निर्माण-पंजाब में औद्योगिक विकास बहुत कम हुआ है जो कि पंजाब की कम उन्नति का सूचक है। उद्योगों में पंजाब की कार्यशील जनसंख्या का 18% भाग कार्य करता है। इसमें 24.70% उत्पादन होता है।
  3. सेवाएं-पंजाब की जनसंख्या का 28% भाग व्यापार तथा यातायात में लगा हुआ है। इसमें 49.14% उत्पादन होता है।

प्रश्न 4.
पंजाब में जनसंख्या को रोकने के लिए उठाए गए पग बताएं।
उत्तर-
पंजाब सरकार ने जनसंख्या को नियन्त्रित करने के लिए निम्नलिखित पग उठाए हैं-
स्वास्थ्य तथा डॉक्टरी सुविधाओं में वृद्धि-जनसंख्या को कम करने के लिए पंजाब सरकार ने शिक्षा के प्रसार का कार्य आरम्भ किया है। पंजाब सरकार की तरफ से परिवार नियोजन को सफल बनाने के लिए डॉक्टरी सुविधाओं का विस्तार किया है। गांवों में डिस्पैंसरियां तथा छोटे अस्पताल स्थापित किए हैं। इस प्रकार परिवार सीमित रखने के लिए लोगों को उत्साहित किया जाता है।

प्रश्न 5.
पंजाब की भौगोलिक स्थिति का वर्णन करें।
उत्तर-
पंजाब भारत का एक कृषि प्रधान राज्य है। इसका पुनर्गठन 1 नवम्बर, 1966 को किया गया। यह प्रान्त उत्तर में जम्मू-कश्मीर, दक्षिण में हरियाणा तथा राजस्थान से लगता है। इसके पूर्व में हिमाचल है तथा पश्चिम में पाकिस्तान का क्षेत्र है। यह प्रान्त उत्तर में 29° से 32° तथा पूर्व में 75° से 77° तक फैला हुआ है। इसको कृषि तथा जलवायु के आधार पर तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है-

  • पहाड़ी क्षेत्र
  • मैदानी क्षेत्र
  • रेतीला क्षेत्र।

पंजाब के पुनर्गठन के पश्चात् इसका क्षेत्रफल 50362 वर्ग किलोमीटर अथवा 5036 हजार हेक्टेयर है। पंजाब भारत के कुल क्षेत्रफल का 1.5% भाग है। पंजाब की जनसंख्या 2001 की जनगणना के अनुसार 243.6 लाख है। इसमें 5 डिवीजन, 22 जिले, 90 तहसीलें, 81 सब-तहसीलें, 150 विकास खण्ड, 74 शहर, 143 कस्बे तथा 12581 गांव हैं। पंजाब में मुख्य तीन दरिया

  • सतलुज
  • ब्यास
  • रावी बहते हैं।

इनके अतिरिक्त घग्गर नदी भी जल साधन का स्रोत है।

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प्रश्न 6.
पंजाब में वन सम्पत्ति की विशेषताएं बताएं।
उत्तर-
वन मनुष्यों के लिए महत्त्वपूर्ण प्राकृतिक साधन हैं। एक राज्य की जलवायु, रोज़गार, वर्षा, बाढ़ नियन्त्रण इत्यादि पर वनों का बहुत प्रभाव पड़ता है। एच० कालबर्ट के अनुसार, “पंजाब की खुशहाली बहुत हद तक वनों पर निर्भर करती है क्योंकि यह भूमि कटाव को रोकते हैं।” पंजाब में वन साधन बहुत कम हैं। 1966 में पंजाब के पुनर्गठन के कारण वन वाला क्षेत्र हिमाचल प्रदेश का भाग बन गया इसलिए पंजाब में वनों के अधीन क्षेत्र बहुत कम है। पंजाब में 3050 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र वनों के अधीन है जो कि कुल क्षेत्रफल का 5.7% भाग है।

पंजाब में वन सम्पत्ति की विशेषताएं (Features of Forest Wealth of Punjab)-

  1. वनों के अधीन कम क्षेत्र-पंजाब में वनों के अधीन बहुत कम क्षेत्र है। पंजाब के कुल क्षेत्रफल का केवल 5.7% भाग वनों के अधीन है। प्रत्येक क्षेत्र की जलवायु को सन्तुलित रखने के लिए 33% क्षेत्रफल वनों के अधीन होना चाहिए किन्तु पंजाब में वनों के अधीन कम क्षेत्र होने के कारण इसकी जलवायु नीम शुष्क है।
  2. क्षेत्रीय असमानता-पंजाब के वनों की एक विशेषता यह है कि इसमें क्षेत्रीय असमानता पाई जाती है अर्थात् पंजाब के वनों का क्षेत्रीय विभाजन असमान है। पंजाब में अधिकतर वन होशियारपुर जिले में पाए जाते हैं जो कि कुल वनों का 33% भाग है। रोपड़ में 23% क्षेत्र वनों के अधीन है, शेष जिलों में वन बहुत कम हैं।

प्रश्न 7.
पंजाब सरकार की वन नीति पर नोट लिखें।
उत्तर-
पंजाब में भारत की स्वतन्त्रता से पूर्व वनों सम्बन्धी कोई नीति नहीं बनाई गई थी। परन्तु स्वतन्त्रता के पश्चात् वन नीति की तरफ विशेष ध्यान दिया गया। इसकी मुख्य विशेषताएं अनलिखित हैं-

  1. वन क्षेत्र विकास (Increase in Forest Area)-पंजाब का पुनर्गठन 1 नवम्बर, 1966 को किया गया। उस समय वनों के अधीन क्षेत्र 1872 वर्ग किलोमीटर था। इस समय लगभग 3054 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में वन हैं जो कि कुल क्षेत्रफल का 5.7% भाग हैं।
  2. नर्सरियों की स्थापना (Establishment of Nursaries)-पंजाब सरकार ने नर्सरियों की स्थापना की है। इस समय लगभग 150 नर्सरियां हैं जिनमें पेड़ों के बीज लगा कर छोटे पेड़ तैयार किए जाते हैं।
  3. नए पेड़ लगाना (New Plantation)-पंजाब सरकार ने अधिक पेड़ लगाओ (Grow More Trees) की नीति अपनाई है जिसके अधीन लोगों को बहुत कम कीमत पर सरकारी नर्सरियों से पौधे दिए जाते हैं।
  4. घास लगाना (Grass Plantation)-पंजाब के नीम पहाड़ी क्षेत्रों में घास लगाया जाता है। इस प्रकार भूमि के कटाव को रोकने का प्रयत्न किया जाता है। वन सम्बन्धी खोज का कार्य पंजाब कृषि विद्यालय लुधियाना में किया जाता है। भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में वन लगाने के लिए सुझाव तथा प्रशिक्षण दिया जाता है। बारहवीं पंचवर्षीय योजना में वनों के विकास पर 5400 लाख रुपए व्यय किए गए थे। पंजाब में 3011 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र वनों के अधीन हैं।

प्रश्न 8.
पंजाब सरकार की वन नीति पर नोट लिखें।
उत्तर-
पंजाब में भारत की स्वतन्त्रता से पूर्व वनों सम्बन्धी कोई नीति नहीं बनाई गई थी। परन्तु स्वतन्त्रता के पश्चात् वन नीति की तरफ विशेष ध्यान दिया गया। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं-

  1. वन क्षेत्र विकास (Increase in Forest Area)-पंजाब का पुनर्गठन 1 नवम्बर, 1966 को किया गया। उस समय वनों के अधीन क्षेत्र 1872 वर्ग किलोमीटर था। इस समय लगभग 3054 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में वन हैं जो कि कुल क्षेत्रफल का 5.7% भाग हैं।
  2. नर्सरियों की स्थापना (Establishment of Nursaries)-पंजाब सरकार ने नर्सरियों की स्थापना की है। इस समय लगभग 150 नर्सरियां हैं जिनमें पेड़ों के बीज लगा कर छोटे पेड़ तैयार किए जाते हैं।
  3. नए पेड़ लगाना (New Plantation)-पंजाब सरकार ने अधिक पेड़ लगाओ (Grow More Trees) की नीति अपनाई है जिसके अधीन लोगों को बहुत कम कीमत पर सरकारी नर्सरियों से पौधे दिए जाते हैं।
  4. घास लगाना (Grass Plantation)-पंजाब के नीम पहाड़ी क्षेत्रों में घास लगाया जाता है। इस प्रकार भूमि के कटाव को रोकने का प्रयत्न किया जाता है। वन सम्बन्धी खोज का कार्य पंजाब कृषि विद्यालय लुधियाना में किया जाता है। भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में वन लगाने के लिए सुझाव तथा प्रशिक्षण दिया जाता है। बारहवीं पंचवर्षीय योजना में वनों के विकास पर 5400 लाख रुपए व्यय किए गए थे। पंजाब में 3011 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र वनों के अधीन हैं।

प्रश्न 9.
पंजाब में शक्ति साधनों के महत्त्व पर नोट लिखें।
उत्तर-

  • कृषि के लिए महत्त्व-पंजाब कृषि प्रधान प्रान्त है। कृषि उत्पादन अधिक होने के कारण इसको भारत का अन्न भण्डार कहा जाता है। कृषि के विकास के लिए बिजली का विकास बहुत महत्त्वूपर्ण है।
  • बहु-उद्देशीय योजनाएं-पंजाब में बहु-उद्देशीय योजनाएं स्थापित की गई हैं। इन योजनाओं द्वारा बाढ़ को रोकना, भूमि की सुरक्षा, जल बिजली पैदा करना इत्यादि बहुत से उद्देश्यों की प्राप्ति होती है।
  • यातायात तथा संचार के लिए महत्त्व-बिजली का विकास यातायात तथा संचार के लिए भी महत्त्वपूर्ण होता है। पंजाब में टेलीविज़न, फ्रिज, डाक तथा तार विभाग में बिजली का प्रयोग किया जाता है।
  • उद्योगों के लिए महत्त्व-पंजाब में उद्योगीकरण की बहुत आवश्यकता है। विशेषतया घरेलू तथा छोटे पैमाने के कृषि आधरित उद्योगों का विकास करना चाहिए। इस लक्ष्य के लिए बिजली का योगदान महत्त्वपूर्ण है।

IV. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
पंजाब की जनसंख्या की विशेषताएं बताएं। (Explain the features of Population (Demographic features) of Punjab.)
अथवा
पंजाब की जनसंख्या पर विस्तारपूर्वक नोट लिखें। (Write a detailed note as the Population of Punjab.)
उत्तर-
पंजाब प्रान्त की जनसंख्या की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं –
1. जनसंख्या का आकार तथा वृद्धि (Size and Growth of Population)-पंजाब राज्य का पुनर्गठन भाषा के आधार पर 1 नवम्बर, 1966 में किया गया। पंजाब का क्षेत्रफल सारे भारत का 1.5% भाग है।
2011 में पंजाब की जनसंख्या बढ़कर 277 लाख हो गई है। जनसंख्या में वृद्धि के कारण निम्नलिखित हैं –

  • पंजाब में जन्म दर बहुत अधिक है जो कि इस समय 24.2 प्रति हज़ार है।
  • पंजाब में मृत्यु दर तीव्रता से कम हो रही है।
  • पंजाब की प्रति व्यक्ति आय अधिक होने से जनसंख्या में वृद्धि हुई है।
  • पंजाब के 62.5% लोग ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं।
  • गांव के लोग अशिक्षित तथा अज्ञानी होने के कारण जनसंख्या वृद्धि की दर अधिक है।

2. जन्म दर तथा मृत्यु दर (Birth Rate and Death Rate)-जनसंख्या में वृद्धि जन्म दर तथा मृत्यु दर पर निर्भर करती है। एक वर्ष में एक हज़ार मनुष्यों के पीछे जितने बच्चे जन्म लेते हैं उसको जन्म दर कहा जाता है तथा जितने व्यक्ति मर जाते हैं, उसको मृत्यु दर कहते हैं। 1970 में पंजाब की जन्म दर 33.8 प्रति हज़ार थी जो कि 2011 में कम होकर 24.2 प्रति हज़ार रह गई है। मृत्यु दर 1970 में 11.4 प्रति हजार थी। 2020-21 में मृत्यु दर कम होकर 7.1 प्रति हज़ार रह गई है। इस कारण जनसंख्या में वृद्धि तीव्र गति से हुई है।

3. जनसंख्या की सघनता (Density of Population)-एक वर्ग किलोमीटर में जितनी जनसंख्या रहती है, उसको जनसंख्या की सघनता कहते हैं।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 26 पंजाब की मानवीय शक्ति और भौतिक साधन 2
पंजाब में 2011 की जनगणना के अनुसार सघनता 551 प्रति वर्ग किलोमीटर है। यदि हम भिन्न-भिन्न जिलों में सघनता के आंकड़े देखते हैं तो लुधियाना जिले की सघनता 648 है जो कि सब जिलों से अधिक है तथा मुक्तसर जिले की सघनता 252 है जो कि सबसे कम है।

4. स्त्री-पुरुष अनुपात (Sex Ratio)-पंजाब में स्त्री-पुरुष अनुपात में निरन्तर वृद्धि हो रही है। स्त्री-पुरुष अनुपात से अभिप्राय है एक हजार पुरुषों के पीछे कितनी स्त्रियां हैं। पंजाब में पुरुषों की तुलना में स्त्रियों का अनुपात निरन्तर कम हो रहा है। इसका विवरण निम्नलिखित सूची पत्र द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है-

स्त्री-पुरुष अनुपात
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 26 पंजाब की मानवीय शक्ति और भौतिक साधन 3

सूची पत्र से ज्ञात होता है कि पंजाब में स्त्री पुरुष अनुपात में निरन्तर कमी हो रही है। इसलिए पंजाब सरकार ने गर्भावस्था के समय बच्चों के परीक्षण पर प्रतिबन्ध लगा दिया है। इसके सम्बन्ध में कड़े कानून बनाए गए हैं।

5. औसत आयु (Average Age)-पंजाब में औसत आयु में वृद्धि हो रही है। 1991 की जनगणना के अनुसार पंजाब में औसत आयु 66 वर्ष आंकी गई थी। 2011 में पंजाब में औसत आयु परुष 71 वर्ष तथा स्त्रियां 74 होने का अनुमान लगाया जा रहा है।

6. ग्रामीण तथा शहरी जनसंख्या (Rural and Urban Population)-पंजाब 2011 की जनगणना अनुसार 62.51% लोग गांवों में रहते हैं तथा 37.49% लोग शहरों में रहते हैं। नवम् पंचवर्षीय योजना के ड्रॉफ्ट के अनुसार, “राज्य के आर्थिक विकास के परिणामस्वरूप ग्रामीण तथा शहरी खुशहाली के कारण शहरीकरण का रुझान बढ़ा है। इसके मुख्य कारण यह हैं कि पंजाब में छोटे पैमाने के उद्योग विकसित हुए हैं, किसानों की आय में वृद्धि हुई है। इसलिए पंजाब में लोगों का रुझान शहरों की तरफ बढ़ रहा है। अगर हम विकसित देशों जैसे कि जापान, अमेरिका, इंग्लैण्ड, कैनेडा को देखते हैं तो इनमें अधिकतर लोग शहरों में रहते हैं। परन्तु पंजाब कृषि प्रधान राज्य है इसलिए गांवों में अधिक लोग रहते हैं।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 26 पंजाब की मानवीय शक्ति और भौतिक साधन

7. साक्षरता अनुपात (Literacy Ratio)-साक्षरता अनुपात से अभिप्राय है कि एक क्षेत्र में कितने प्रतिशत लोग शिक्षित हैं। किसी देश का आर्थिक विकास उस देश में साक्षरता अनुपात पर निर्भर करता है। 2011 की जनगणना के अनुसार पंजाब में 75.8% जनसंख्या शिक्षित है। इसमें पुरुषों का साक्षरता अनुपात अधिक है क्योंकि पंजाब के 81.5% पुरुष शिक्षित हैं तथा स्त्रियों में 71.3% स्त्रियां साक्षर हैं। अगर हम अन्य राज्यों से पंजाब की साक्षरता अनुपात की तुलना करते हैं तो अन्य राज्यों के मुकाबले पंजाब की साक्षरता अनुपात 10वें स्थान पर है। अर्थात् 10 राज्यों में साक्षरता अनुपात पंजाब से अधिक है। पंजाब में 72% शहरी जनसंख्या तथा 28% ग्रामीण जनसंख्या साक्षर है।

प्रश्न 2.
पंजाब में ऊर्जा के मुख्य स्रोत कौन-कौन से हैं ? पंजाब की मुख्य ऊर्जा परियोजनाओं पर प्रकाश डालें। (What are main two sources of Energy in Punjab ? Explain the energy Projects of Punjab.)
उत्तर-
पंजाब की आर्थिक उन्नति के लिए शक्ति की बहुत आवश्यकता है। पंजाब में शक्ति का प्रति व्यक्ति उपभोग 684 किलोवाट घंटे प्रति वर्ष है जो कि भारत में प्रति व्यक्ति उपभोग से लगभग दो गुणा है। पंजाब में शक्ति के मुख्य दो साधन हैं-
A. जल बिजली (Hydro Electricity)
B. ताप बिजली (Thermal Electricity)

पंजाब में बिजली के उत्पादन सामर्थ्य में बहुत वृद्धि हुई है। 1966-67 में बिजली का उत्पादन सामर्थ्य 2364 मैगावाट थी। वर्ष 2020-21 में उत्पादन सामर्थ्य बढ़ कर 45713 मिलियन किलोवाट घण्टे हो गई है। बिजली के शक्ति साधनों का मुख्य विवरण इस प्रकार है –

A. जल बिजली (Hydro Electricity)-पंजाब में स्वतन्त्रता के पश्चात् विद्युत् उत्पादन के लिए निम्नलिखित परियोजनाएं स्थापित की गईं। जल बिजली द्वारा 8415 kWh बिजली पैदा की जाती है।
1. भाखड़ा-नंगल प्रोजैक्ट (Bhakhra Nangal Project)-भाखड़ा-नंगल प्रोजैक्ट 1948 में आरम्भ किया गया था। यह भारत का सबसे बड़ा पन बिजली प्रोजैक्ट है जो कि पंजाब, राजस्थान, हरियाणा तथा दिल्ली प्रान्त के संयुक्त प्रयत्न से स्थापित किया गया। इस प्रोजैक्ट में बिजली घर बनाए गए हैं जो कि कोटला, गंगूवाल तथा भाखड़ा डैम पर स्थित हैं। इस डैम की उत्पादन शक्ति 1258 मैगावाट है। इसमें से पंजाब को 736 मैगावाट बिजली का भाग मिलता है।
2. ब्यास प्रोजैक्ट (Bias Project)-यह प्रोजैक्ट पंजाब, हरियाणा तथा राजस्थान का संयुक्त उपक्रम है। इस प्राजैक्ट के दो भाग हैं-

  • ब्यास यूनिट I
  • ब्यास यूनिट II ।

इन दोनों यूनिटों का अब विस्तार किया गया है। इस प्रोजैक्ट की उत्पादन सामर्थ्य में से पंजाब को 566 मैगावाट बिजली मिलती है।
3. शानन प्रोजैक्ट (Shanan Project)-यह प्रोजैक्ट पंजाब का सबसे पुराना बिजली घर है जो कि जोगिन्द्र नगर में स्थित है। इस प्रोजैक्ट की स्थापना 1932 में 10 करोड़ की लागत से की गई थी। शानन प्रोजैक्ट की बिजली उत्पादन सामर्थ्य 10 मैगावाट है।

4. मुकेरियां हाइडल प्रोजैक्ट (Mukerian Hydle Project)-यह प्रोजैक्ट तलवाड़ा के निकट मुकेरियां के स्थान पर स्थापित किया गया है। इस प्रोजैक्ट पर 357 करोड़ रुपए व्यय होने का अनुमान है। इस प्रोजैक्ट में चार पावर हाउस तथा पेट्रोल पावर हाऊस में तीन इकाइयां बनाने की योजना है। इस प्रोजैक्ट के द्वितीय चरण पर कार्य हो रहा है। पूर्ण होने पर इसकी उत्पादन शक्ति 207 मैगावाट होने का अनुमान है।

5. आनन्दपुर साहिब हाइडल प्रोजैक्ट (Anandpur Sahib Hydle.Project)-यह प्रोजैक्ट सतलुज नदी पर बनाया गया है। इसमें नंगल डैम से पानी लेकर बिजली बनाने का प्रयत्न किया गया है। इस प्रोजैक्ट द्वारा 134 मैगावाट बिजली का उत्पादन किया जाता है।

6. अपर-बारी दोआब बिजली घर (Uppar Bari Doab Power House)-यह बिजली घर मलिकपुर के स्थान पर बनाया गया है। बिजली घर के दो यूनिट हैं। प्रथम यूनिट 1973 में पूर्ण हो गया है जिसकी उत्पादन शक्ति 45 मैगावाट है। दूसरे यूनिट पर काम चल रहा है।

7. थीन डैम (Thein Dam)-इस डैम को महाराजा रणजीत सिंह के नाम पर रणजीत सिंह सागर डैम भी कहा जाता है। थीन डैम माधोपुर के स्थान पर रावी नदी पर स्थित है। इस प्रोजैक्ट के चार यूनिट स्थापित किए जाएंगे जिनकी कुल उत्पादन शक्ति 600 मैगावाट होगी। इस प्रोजैक्ट पर 1.132 करोड़ रुपए व्यय होने की सम्भावना है।

B. ताप बिजली (Thermal Electricity)-ताप बिजली घरों में कोयले अथवा डीज़ल का प्रयोग करके बिजली पैदा की जाती है। पंजाब में ताप बिजली द्वारा 5204 kWh मिलियन बिजली की पैदावार की जाती है। ताप बिजली की स्थिति इस प्रकार है-
1. भटिण्डा ताप बिजली घर (Bathinda Thermal Plant)-भटिण्डा में गुरु नानक देव ताप बिजली घर का निर्माण 1974 में आरम्भ हुआ था। इस प्लांट की चार इकाइयां लगाई गई थीं जिनकी कुल उत्पादन क्षमता 440 मैगावाट है। सातवीं योजना में इस बिजली घर की दो अन्य इकाइयां लगाने की आज्ञा दी गई थी जिनकी उत्पादन क्षमता 2748 मैगावाट होगी। यह यूनिट अब बंद हो गया है।

2. रोपड़ थर्मल प्रोजैक्ट (Ropar Thermal Project)-यह थर्मल प्लांट रोपड़ में स्थापित किया गया है। इसकी पांच इकाइयां लगाई गई हैं जिनकी उत्पादन क्षमता 9224 मैगावाट है।

प्रश्न 3.
पंजाब की वन सम्पत्ति का विवरण दें। इसके महत्त्व को स्पष्ट करें। (Discuss the forest wealth of Punjab and Explain its Importance.)
उत्तर-
वन प्रकृति की निःशुल्क तथा महान् देन माने जाते हैं। प्रत्येक देश के विकास के लिए वनों का विकास महत्त्वपूर्ण माना जाता है। वातावरण को ठीक रखने के लिए कुल भूमि का 33% भाग वनों के अधीन होना चाहिए। इससे जलवायु ठीक रहती है। पंजाब में वन साधनों की कमी पाई जाती है। पंजाब का कुल क्षेत्रफल 50,362 वर्ग किलोमीटर है जिसमें से 3050 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र वनों के अधीन है जो कि कुल क्षेत्रफल का 6% भाग है।

अगर हम पंजाब की वन सम्पत्ति को देखते हैं तो वन सम्पत्ति की स्थिति सन्तोषजनक नहीं है। पंजाब के वनों का 33% भाग होशियारपुर में पाया जाता है जबकि जालन्धर, मानसा, संगरूर, कपूरथला इत्यादि में वन बहुत कम पाए जाते

वनों का वर्गीकरण (Classification of Forests)-
पंजाब में वनों का वर्गीकरण दो प्रकार से किया जा सकता है-
1. कानूनी आधार के अनुसार (According to Legal Status)-पंजाब सरकार ने कानून के आधार पर वनों की तीन श्रेणियां बनाई हैं_

  • आरक्षित वन (Reserve Forest)-आरक्षित वन वे वन हैं जिनको सरकार की आज्ञा के बिना कोई मनुष्य काट नहीं सकता। पंजाब सरकार ने 44 वर्ग किलोमीटर भूमि में आरक्षित वन स्थापित किए हैं। ये वन जलवायु ठीक रखने, बाढ़ की रोकथाम के लिए आवश्यक हैं।
  • सुरक्षित वन (Protective Forest)-इन वनों से औद्योगिक लकड़ी पाई जाती है। यह वन विशेष शर्तों पर व्यक्तियों को ठेके पर दिए जाते हैं। 2020-21 में 2711 वर्ग किलोमीटर पर सुरक्षित वन थे।
  • अवर्गीकृत वन (Unclassified Forest)-यह वन सरकार द्वारा निजी प्रयोग के लिए प्रयोग होने वाली लकड़ी के रूप में आते हैं। इन वनों का सरकार ठेका देती है।

2. स्वामित्व के आधार अनुसार (According to Ownership)-इस आधार पर वनों को दो भागों में विभाजित किया जाता है-

  • सरकारी वन (State Forest)-यह वन सरकार के अधीन क्षेत्र में पाए जाते हैं। 1965-66 में 748 वर्ग किलोमीटर में सरकारी वन थे जोकि 2020-21 में 3315 वर्ग किलोमीटर में पाए जाते हैं।
  • निजी वन (Private Forest)-निजी स्वामित्व के अधीन 1965-66 में 1124 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र था जो 2020-21 में बढ़ कर 166 वर्ग किलोमीटर हो गया है।

वनों की किस्में (Types of Forests) वनों की मुख्य किस्में इस प्रकार हैं-

  1. पहाड़ी वन-यह वन पहाड़ी क्षेत्रों होशियारपुर में पाए जाते हैं। इन वनों में चील की लकड़ी प्राप्त होती है जो कि निर्माण के कार्य में प्रयोग की जाती है।
  2. बाँस के वन-ये वन भी होशियारपुर के क्षेत्र में स्थित हैं। इनसे बाँस की लकड़ी प्राप्त होती है।
  3. शुष्क वन-पंजाब में बबूल, टाहली, इत्यादि के पेड़ जो शिवालिक पर्वत श्रेणी में पाए जाते हैं। इनको कांटेदार वन भी कहा जाता है।
  4. फल वाले वन-ऐसे वनों की पंजाब में कमी है। इनमें आम, अंगूर, अमरूद के फल वाले पेड़ शामिल हैं। इसका कुछ भाग रोपड़ जिले में पाया जाता है।
  5. अन्य वन-इनमें सफेदा, शीशम, थोहर इत्यादि शामिल किए जाते हैं। ये वन पंजाब में भिन्न-भिन्न स्थानों पर पाए जाते हैं।

वनों का महत्त्व अथवा लाभ (Importance or Advantages of Forest) पंजाब में वनों से दो प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं –
A. प्रत्यक्ष लाभ (Direct Advantages)

  1. इमारती लकड़ी-पंजाब के वनों से कई प्रकार की इमारती लकड़ी प्राप्त होती है जैसे कि शीशम, टाहली, आम, .. सफ़ेदा इत्यादि जो फर्नीचर तथा इमारतें बनाने के लिए प्रयोग की जाती है।
  2. कच्चे माल की प्राप्ति-पंजाब के वनों से कच्चे माल की प्राप्ति भी होती है। इससे खेलों का सामान बनाने वाले उद्योग, काग़ज़ उद्योग इत्यादि का प्रयोग किया जाता है। इसके अतिरिक्त रंग-रोगन बनाने के लिए कच्चा माल भी वनों से प्राप्त किया जाता है।
  3. चारा-वनों से पशुओं के लिए चारा प्राप्त किया जाता है। यह चारा हरी तथा सूखी घास, पत्तेदार झाड़ियों द्वारा प्राप्त होता है।
  4. रोज़गार-वनों द्वारा लोगों को रोजगार भी प्राप्त होता है। 2020-21 में लगभग 13068 लोगों को रोजगार प्राप्त हुआ। यह लोग ठेकेदारों द्वारा वनों की कटाई इत्यादि कामों में लगे हुए हैं। 1966-67 की तुलना में वनों द्वारा रोजगार में दो-गुणा वृद्धि हो गई है।
  5. राज्य सरकार को आय-पंजाब सरकार को वनों द्वारा आय प्राप्त होती है। 2020-21 में वनों द्वारा 12 करोड़ 95 लाख की आय होने का अनुमान था।
  6. वस्तुओं का उत्पादन-पंजाब के वनों से कई प्रकार की वस्तुएं उत्पादित की जाती हैं जैसे कि गोंद, कत्था, बांस, गन्दा बिरोजा इत्यादि। 2020-21 में 4 करोड़ 95 लाख रुपए की वस्तुएं प्राप्त होने का अनुमान था।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 26 पंजाब की मानवीय शक्ति और भौतिक साधन

B. अप्रत्यक्ष लाभ (Indirect Advantages)वनों में अप्रत्यक्ष लाभ इस प्रकार हैं –

  1. वनों द्वारा बाढ़ की रोकथाम होती है। वन जल की रफ्तार काफ़ी कम कर देते हैं।
  2. वनों द्वारा भूमि के कटाव (Soil Erosion) की समस्या का हल होता है। पेड़ों की जड़ों में मिट्टी फंस जाती है इसलिए भूमि के कटाव की समस्या उत्पन्न नहीं होती।
  3. वन रेगिस्तान को बढ़ने से रोकते हैं। वन होने के कारण रेत के टीले आगे नहीं बढ़ सकते।
  4. वन जलवायु को अच्छा बनाने के लिए भी लाभदायक होते हैं, गर्मियों में मौसम ठंडा रखने में सहायक होते हैं क्योंकि वनों के कारण वर्षा होती है। सर्दियों में शीत लहर को भी वन रोकते हैं।
  5. तेज़ हवाएं, आंधी, तूफ़ान को रोकने के लिए भी वन सहायक होते हैं। जे० एस० कोलिन्स के शब्दों में “पेड़ पहाड़ों को रोकते हैं, वर्षा तथा तूफान को दबाते हैं, दरियाओं को सुचारु बनाते हैं, झरनों को बनाए रखते हैं, पक्षियों का पालन करते हैं।”

पंचवर्षीय योजनाओं में वनों का विकास-पांचवीं पंचवर्षीय योजना में वनों पर 608 लाख रुपये खर्च किए गए। ग्यारहवीं योजना में वनों के विकास पर 2000 लाख रुपए खर्च किये गए। 2020-21 में वनों के विकास पर 1200 लाख रुपए खर्च किए गए।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप

Punjab State Board PSEB 11th Class Economics Book Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप Textbook Exercise Questions, and Answers.

PSEB Solutions for Class 11 Economics Chapter 25 अपकिरण के माप

PSEB 11th Class Economics अपकिरण के माप Textbook Questions and Answers

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Type Questions)

प्रश्न 1.
अपकिरण (Dispersion) किसे कहते हैं ?
उत्तर-
संख्यात्मक आंकड़े एक माध्य मूल्य के दोनों ओर फैलने की जिस सीमा तक प्रवृत्ति रखते हैं, उस सीमा को उन आंकड़ों का विचरण या अपकिरण कहते हैं।

प्रश्न 2.
प्रमाप विचलन (Standard Deviation) की एक विशेषता लिखिए।
उत्तर-
प्रमाप विचलन के अन्तर्गत मूल्यों से विचलन सदैव समान्तर माध्य से ही लिए जाते हैं क्योंकि यह माध्य केन्द्रीय प्रवृत्ति का सर्वश्रेष्ठ माप समझा जाता है। माध्यका एवं भूयिष्ठक का प्रयोग नहीं किया जाता है।

प्रश्न 3.
प्रमाप विचलन (Standard Deviation) किसे कहते हैं?
उत्तर-
प्रमाप विचलन किसी श्रेणी के विभिन्न पदों के समान्तर माध्य से लिए गए विचलन के वर्गों का समान्तर माध्य वर्गमूल होता है।

प्रश्न 4.
विचरण गुणांक का प्रयोग किस लिए किया जाता है?
उत्तर-
विचरण गुणांक का प्रयोग दो श्रेणियों की विचरणशीलता, स्थिरता, एकरूपता तथा संगति (Consistency) की तुलना करने के लिए किया जाता है।

प्रश्न 5.
माध्य विचलन से क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
एक श्रृंखला के किसी माध्य से निकाले गये विचलनों के जोड़ को समान्तर माध्य विचलन कहा जाता है।

प्रश्न 6.
विचरण गुणांक (Co-efficient of Variation) किसे कहते हैं?
उत्तर-
दो या दो से अधिक श्रृंखलाओं में अपकिरण (Dispersion) या विचरण (Variation) की तुलना करने के लिए विचरण गुणांक का प्रयोग किया जाता है। यह विचरण का सापेक्ष (Relative) माप है।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप

प्रश्न 7.
प्रमाप विचलन के दो लाभ लिखिए।
उत्तर-

  1. सभी मूल्यों पर आधारित प्रमाप विचलन श्रृंखला के सभी मूल्यों पर आधारित है। इसमें किसी मूल्य की अवहेलना नहीं की जाती।
  2. स्पष्ट व निश्चित माप-प्रमाप विचलन अपकिरण का एक स्पष्ट व निश्चित माप है जो प्रत्येक स्थिति में ज्ञात किया जा सकता है।

प्रश्न 8.
लारेन्ज़ वक्र क्या है?
उत्तर-
लारेन्ज़ वक्र, समान रेखा से वास्तविक वितरण के विचलन का बिन्दु रेखीय माप है। लारेन्ज़ वक्र एक संचयी प्रतिशत वक्र होता है।

प्रश्न 9.
किसी श्रेणी की भिन्न-भिन्न मदों में तथा उनका औसत से कितना अन्तर है इसको …………. कहते हैं।
(a) औसत विचलन
(b) प्रमाप विचलन
(c) अपकिरण
(d) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(c) अपकिरण।

प्रश्न 10.
अपकिरण को. ……………… श्रेणी का माप कहा जाता है।
(a) पहली
(b) दूसरी
(c) तीसरी
(d) चौथी।
उत्तर-
(b) दूसरी।

प्रश्न 11.
श्रेणी की समान्तर औसत, माध्यका तथा बहुलक से लिए गए भिन्न-भिन्न मूल्यों से विचलन की औसत को ……………….. कहते हैं।
उत्तर-
मध्य विचलन।

प्रश्न 12.
किसी श्रेणी के भिन्न-भिन्न मूल्यों की समान्तर औसत से लिए गए विचलनों की समान्तर औसत को ……………….. कहते हैं।
(a) माध्य विचलन
(b) प्रमाप विचलन
(c) विचलन गुणांक
(d) उपरोक्त कोई नहीं।
उत्तर-
(b) प्रमाप विचलन।

प्रश्न 13.
माध्य विचलन को समान्तर औसत, माध्यका अथवा बहुलक की सहायता से मापते हैं जबकि प्रमाप विचलन को ……………… की सहायता से मापते हैं।
(a) समान्तर औसत
(b) माध्यका
(c) बहुलक
(d) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(a) समान्तर औसत।

प्रश्न 14.
दो श्रेणियों के उपकिरण की तुलना के लिए सापेक्ष माप को …………… कहते हैं।
उत्तर-
विचलन गुणांक।

प्रश्न 15.
अपकिरण के माप की दो मुख्य किस्में बताएं।
उत्तर-

  1. निरपेक्ष माप
  2. सापेक्ष माप।

प्रश्न 16.
विस्तार से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
किसी श्रेणी के सबसे बड़े और सब से छोटे मूल्य के अन्तर को विस्तार कहते हैं।

प्रश्न 17.
चतुर्थक विचलन का माप सूत्र लिखें।
उत्तर-
चतुर्थक विचलन = \(\frac{\mathrm{Q}_{3}-\mathrm{Q}_{1}}{2}\)

प्रश्न 18.
चतुर्थक विचलन गुणांक का सूत्र लिखें।
उत्तर:-
चतुर्थक विचलन गुणाक = \(\frac{\mathrm{Q}_{3}-\mathrm{Q}_{1}}{\mathrm{Q}_{3}+\mathrm{Q}_{1}}\)

प्रश्न 19.
लारेन्ज़ वक्र से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
लारेन्ज़ वक्र वह वक्र है जो कि वास्तविक वितरण का विचलन सम्मान वितरण रेखा पर दिखाता है।

प्रश्न 20.
लारेन्ज़ वक्र का प्रयोग सबसे पहले किसने किया था ?
उत्तर-
डॉक्टर मैक्स लारेन्ज़।

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प्रश्न 21.
लारेन्ज़ वक्र डॉक्टर बाऊले की देन है।
उत्तर-
ग़लत।

प्रश्न 22.
विस्तार किसी श्रृंखला की सबसे बड़ी तथा सबसे छोटी मद का अन्तर होता है।
उत्तर-
सही।

प्रश्न 23.
मध्य विचलन तथा प्रमाप विचलन में कोई अन्तर नहीं होता।
उत्तर-
ग़लत।

प्रश्न 24.
विस्तार (Range) तका माप सूत्र लिखो।
उत्तर-
R = L- S.

प्रश्न 25.
विस्तार गुणांक (Co-efficient of Range) का माप सूत्र लिखो।
उत्तर-
Co-efficient of Range = \(\frac{L-S}{L+S}\)

प्रश्न 26.
चतुर्थक विचलन गुणांक का सूत्र लिखो।
उत्तर-
Co-efficient of Q.D. = \(\frac{\mathrm{Q}_{3}-\mathrm{Q}_{1}}{\mathrm{Q}_{3}+\mathrm{Q}_{1}}\)

प्रश्न 27.
मध्य विचलन गुणांक का सूत्र लिखो।
उत्तर-
M.D.\((\overline{\mathbf{X}})\) = \(\frac{\Sigma|D \bar{X}|}{N}\)

प्रश्न 28.
प्रमाप विचलन गुणांक का सूत्र लिखो।
उत्तर-
प्रमाप विचलन गुणांक = \(\frac{\sigma}{\overline{\mathbf{X}}}\)

प्रश्न 29.
लघु विधि द्वारा प्रमाप विचलन गुणांक का सूत्र लिखो।
उत्तर-
σ = \(\sqrt{\frac{\Sigma d x^{2}}{\mathrm{~N}}-\left(\frac{\Sigma d x}{\mathrm{~N}}\right)^{2}}\)

प्रश्न 30.
पद विचलन विधि द्वारा प्रमाप विचलन गुणांक का सूत्र लिखो।
उत्तर-
σ = \(\sqrt{\frac{\Sigma f d x^{2}}{\mathrm{~N}}-\left(\frac{\Sigma f d x}{\mathrm{~N}}\right)^{2}}\)

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप

प्रश्न 31.
विचलन गुणांक का सूत्र लिखें।
उत्तर-
विचलन गुणांक CV = \(\frac{\sigma}{\bar{X}} \times 100=\left(\frac{\text { Standard Deviation }}{\text { Mean }} \times 100\right)\)

प्रश्न 32.
चतुर्थक किसे कहते हैं ?
उत्तर-
यदि एक श्रेणी को चार समान भागों में विभाजित किया जाए तो प्रत्येक भाग को चतुर्थक कहा जाता है।

प्रश्न 33.
चतुर्थक कितने होते हैं ?
उत्तर-
(Q1) = प्रथम चतुर्थक को निचला चतुर्थक (Q1) कहा जाता है।
(Q2) = द्वितीय चतुर्थक मध्यका कहा जाता है।
(Q3) = ऊपरी चतुर्थक (Q3) होता है।

प्रश्न 34.
यदि किसी श्रेणी को सौ भागों में बराबर बांटा जाए तो प्रत्येक अन्तिम इकाई को ………. कहते
(a) दशमक
(b) शतमक
(c) चतुर्थक
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(b) शतमक।

प्रश्न 35.
चतुर्थक को स्थिति का औसत कहा जाता है।
उत्तर-
सही।

प्रश्न 36.
निचले चतुर्थक का अखण्डित श्रेणी के लिए माप सूत्र लिखें।
उत्तर-
(Q1) = \(\mathbf{L}_{1}+\frac{\frac{\mathrm{N}}{4}-c f p}{f} \times i\)

प्रश्न 37.
चतुर्थक का अखण्डित श्रेणी के लिए माप सूत्र लिखें।
उत्तर-
(Q3) = \(\mathrm{L}_{1}+\frac{\frac{3 \mathrm{~N}}{4}-c f p}{f} \times i\)

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II. अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
अपकिरण से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
एक श्रेणी की मदों में अन्तर को अपकिरण कहा जाता है। अपकिरण का माप इस बात को स्पष्ट करता है कि किसी श्रेणी वितरण की भिन्न-भिन्न मदें उस श्रेणी के मध्य से कितनी दूरी पर हैं अर्थात् उन मदों में फैलाव अथवा प्रसार कितना है। उस प्रकार अथवा फैलाव को अपकिरण कहा जाता है। सूर्य की किरणें धरती तक पहुंचते समय फैल जाती हैं, इस प्रकार मदों का आपस में कितना प्रसार है, उसको अपकिरण कहते हैं। अपकिरण को दो अर्थों में स्पष्ट किया जाता है।

प्रश्न 2.
मध्य विचलन से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
श्रेणी के किसी सांख्यिकी औसत (समान्तर मध्य, मध्यका, बहुलक) से निकाले गए भिन्न-भिन्न मूल्यों के विचलनों के समान्तर औसत को मध्य विचलन कहा जाता है। मूल्य के विचलन निकालते समय गणित चिह्नों (+) तथा (-) को छोड़ दिया जाता है। मध्य विचलन की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं- .

  • मध्य विचलन सभी मदों पर आधारित होता है।
  • सीमान्त मदों का प्रभाव मध्य विचलन पर बहुत कम होता है।

प्रश्न 3.
मध्य विचलन के कोई दो गुण बताएँ।
उत्तर-

  1. समझने में आसान-मध्य विचलन को आसानी से समझा जा सकता है।
  2. सीमान्त मूल्यों से कम प्रभावित-सीमान्त मूल्यों अर्थात् बहुत बड़ी अथवा बहुत छोटी मदों से मध्य विचलन अधिक प्रभावित नहीं होता।

प्रश्न 4.
मध्य विचलन के दोष बताएँ।
उत्तर-
मध्य विचलन के दोष-

  1. विश्वसनीय नहीं-मध्य विचलन की धारणा विश्वसनीय नहीं है। विशेष तौर पर बहुलक के अनिश्चित होने पर बहुलक द्वारा ज्ञात किया गया मध्य विचलन भी अनिश्चित होता है।
  2. गणितीय शुद्धि नहीं-मध्य विचलन का सबसे बड़ा दोष यह है कि इसमें गणितीय शुद्धि नहीं है। इसमें (+) तथा (-) चिह्नों को छोड़ दिया जाता है। इस प्रकार उचित परिणाम प्राप्त नहीं होते।
  3. बीज गणित का प्रयोग नहीं-मध्य विचलन में गणितीय अशद्धि होती है। इसीलिए इसका प्रयोग बीज गणित प्रयोगों के लिए नहीं किया जा सकता। परिणामस्वरूप इसको अन्य सूत्रों का आधार नहीं बनाया जा सकता।

प्रश्न 5.
प्रमाप विचलन से क्या अभिप्राय है ? इसकी विशेषताएं बताओ।
उत्तर-
प्रो० सपीगल अनुसार, “प्रमाप विचलन समान्तर औसत से किसी श्रेणी के भिन्न-भिन्न मूल्यों के विचलनों । के वर्ग का वर्गमूल होता है।” प्रमाप विचलन की विशेषताएं इस प्रकार हैं –

  1. प्रमाप विचलन में हमेशा समान्तर औसत द्वारा विचलन निकाला जाता है। समान्तर औसत दूसरी औसतों, मध्यकों तथा बहुलक से अधिक विश्वसनीय औसत है।
  2. प्रमाप विचलन में बीज गणित चिह्नों (+) तथा (-) को छोड़ा नहीं जाता बल्कि विचलनों के वर्ग लिए जाते हैं। इससे ऋणात्मक विचलन अपने आप धनात्मक बन जाते हैं।
  3. यह एक वैज्ञानिक विधि है, जिसकी बीज गणित प्रयोग की जा सकती है। सांख्यिकी के बहुत से सूत्र प्रमाप विचलन पर ही आधारित हैं।

प्रश्न 6.
प्रमाप विचलन के गुण लिखो।
उत्तर-
प्रमाप विचलन के गुण –

  1. सभी मूल्यों पर आधारित-प्रमाप विचलन श्रेणी के सभी मूल्यों पर आधारित होता है। इसलिए किसी मूल्य को भी आँखों से ओझल नहीं किया जा सकता।
  2. स्पष्ट धारणा-प्रमाप विचलन की धारणा स्पष्ट है इसीलिए इसका माप प्रत्येक स्थिति में किया जा सकता है।
  3. बीज गणित विवेचन-प्रमाप विचलन में गणित चिह्नों (+) तथा (-) को आँखों से ओझल नहीं किया जाता। इसीलिए इसका बीज गणित विवेचन सम्भव होता है। प्रमाप विचलन का प्रयोग अन्य रीतियों में भी किया जा सकता है।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप

प्रश्न 7.
प्रमाप विचलन के कोई दो दोष बताएँ।
उत्तर-
दोष (Demerits)

  1. सीमान्त मूल्यों का अधिक प्रभाव-किसी श्रेणी की बहुत बड़ी मदों अथवा बहुत लघु मदों का प्रभाव प्रमाप विचलन पर बहुत अधिक पड़ता है।
  2. जटिल विधि-प्रमाप विचलन का माप करना एक कठिन विधि है। इसलिए दूसरी विधियों की तुलना में इसको कठिन माना जाता है।

प्रश्न 8.
लॉरेंज़ वक्र से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
लॉरेंज़ वक्र-अमेरिका के अर्थशास्त्री डॉक्टर लॉरेंज़ ने अपकिरण का माप करने के लिए बिन्दु रेखीय विधि का निर्माण किया। इसलिए इस विधि को लॉरेंज़ वक्र कहा जाता है। लॉरेंज़ वक्र में श्रेणी के मूल्यों को रेखाचित्र द्वारा प्रकट किया जाता है। इसमें कहीं मूल्यों तथा आवृत्ति का संचीय प्रतिशत वक्र बनाया जाता है। यह वक्र समान वितरण रेखा से जितना दूर होता है, श्रेणी की मदों में असमानता उतनी ही अधिक होती है। इसलिए “लॉरेंज़ वक्र समान वितरण रेखा से असल विचलन के विचलन का बिन्दु रेखीय माप होता है।”

प्रश्न 9.
निम्नलिखित आंकड़ों से Q1 ज्ञात करें।
अंक : 5 8 10 15 16 18 20
हल (Solution) :
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप 1
q1 = \(\left(\frac{\mathrm{N}+1}{4}\right)\) th size of the item
= \(\frac{7+1}{4}=\frac{8}{4}\) = 2nd size of the item
q1 = 8 Ans.

प्रश्न 10.
निम्नलिखित आंकड़ों से Q3 ज्ञात करें।
अंक : 8 9 12 15 18 20 25
हल (Solution) :
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप 2
q3 = 3\(\left(\frac{N+1}{4}\right)\) th size of the item
q3 = \(\frac{3(7+1)}{4}=\frac{3(8)}{4}=\frac{24}{4}\) = 6th size of the item
Q3 = 20 Marks Ans.

III. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
अपकिरण से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
एक श्रेणी की मदों में अन्तर को अपकिरण कहा जाता है। अपकिरण का माप इस बात को स्पष्ट करता है कि किसी श्रेणी वितरण की भिन्न-भिन्न मदें उस श्रेणी के मध्य से कितनी दूरी पर हैं अर्थात् उन मदों में फैलाव अथवा प्रसार कितना है। उस प्रसार अथवा फैलाव को अपकिरण कहा जाता है। सूर्य की किरणें धरती तक पहुंचते समय फैल जाती हैं, इस प्रकार मदों का आपस में कितना प्रसार है, उसको अपकिरण कहते हैं। अपकिरण को दो अर्थों में स्पष्ट किया जाता है-

1. मदों में परस्पर अन्तर-प्रथम अर्थ अनुसार मदों के परस्पर अन्तर को अपकिरण कहा जाता है। यदि सभी मदें एक समान हैं तथा इनमें कोई अन्तर नहीं तो अपकिरण शून्य होगा। इसके विपरीत जब मदों में अन्तर अधिक होता है तो अपकिरण अधिक होता है।

2. मदों का औसत से अन्तर-द्वितीय अर्थ अनुसार मदों का औसतों से अन्तर होता है। केन्द्रीय प्रवृत्तियों की मुख्य औसतें समान्तर औसत (Mean), मध्यका (Median) तथा बहुलक (Mode) होती हैं। किसी श्रेणी की मदों का औसतों से कितना अन्तर है। जब मदों का अन्तर औसत से अधिक होता है तो अपकिरण अधिक कहा जाता है।

प्रश्न 2.
अपकिरण के माप की किस्में बताओ।
उत्तर-
अपकिरण के माप दो प्रकार के होते हैं –
(1) निरपेक्ष माप
(2) सापेक्ष माप।
1. निरपेक्ष माप-किसी श्रेणी के आंकड़ों का माप उस समय में ही किया जाए जिस रूप में आंकड़े दिए गए हैं तो अपकिरण के इस प्रकार के माप को निरपेक्ष माप कहा जाता है। उदाहरणस्वरूप मदें क्विटलों, रुपयों इत्यादि में दी हुई हैं तथा जवाब भी क्विटलों के रूप में प्रकट किया जाता है तो इस प्रकार के माप को अपकिरण का निरपेक्ष माप कहते हैं।

2. सापेक्ष माप-जब किसी श्रेणी के माप को अनुपात अथवा प्रतिशत के रूप में प्रकट किया जाता है, इसको सापेक्ष माप कहा जाता है। उदाहरणस्वरूप एक स्कूल में ग्यारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों में 50% विद्यार्थी प्रथम डिवीजन प्राप्त करते हैं। इस प्रकार आंकड़ों को प्रतिशत रूप में अंकित किया जाता है तो इसको सापेक्ष माप कहा जाता है।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप

प्रश्न 3.
अपकिरण के माप की विधियां बताओ।
उत्तर-
अपकिरण के माप की मुख्य विधियां निम्नलिखित अनुसार हैं
(A) निरपेक्ष माप (Absolute Measures)

  1. विस्तार (Range)
  2. चतुर्थक विचलन (Quartile Deviation)
  3. मध्य विचलन (Mean Deviation)
  4. प्रमाप विचलन (Standard Deviation)
  5. लारेंज वक्र (Lorenz Curve)

(B) सापेक्ष माप (Relative Measures)

  1. विस्तार गुणांक (Co-efficient of Range)
  2. चतुर्थक विचलन गुणांक (Co-efficient of Quartile Deviation)
  3. मध्य विचलन गुणांक (Co-efficient of Mean Deviation)
  4. प्रमाप विचलन गुणांक। (Co-efficient of Standard Deviation)

प्रश्न 4.
मध्य विचलन की विशेषताएं बताओ।
उत्तर-
श्रेणी के किसी सांख्यिकी औसत (समान्तर मध्य, मध्यका, बहुलक) से निकाले गए भिन्न-भिन्न मूल्यों के विचलनों के समान्तर औसत को मध्य विचलन कहा जाता है। मूल्य के विचलन निकालते समय गणित चिह्नों (+) तथा (-) को छोड़ दिया जाता है। मध्य विचलन की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं-

  1. मध्य विचलन सभी मदों पर आधारित होता है।
  2. सीमान्त मदों का प्रभाव मध्य विचलन पर बहुत कम होता है।
  3. मध्य विचलन का माप केन्द्रीय प्रवृत्तियों समान्तर औसत, मध्यका तथा बहुलक द्वारा किया जा सकता है।
  4. मध्य विचलन में विचलन निकालते समय गणित चिह्नों (+) तथा (-) को आंखों से ओझल किया जाता है।

प्रश्न 5.
मध्य विचलन के गुण तथा दोष बताओ।
उत्तर-
मध्य विचलन के मुख्य गुण निम्नलिखित हैं-

  1. सरल गणना-मध्य विचलन की गणना सरलता से की जा सकती है। इसका माप समान्तर औसत, मध्यका अथवा बहुलक द्वारा किया जा सकता है।
  2. सभी मूल्यों पर आधारित-मध्य विचलन श्रृंखला के सभी मूल्यों पर आधारित होता है। इसलिए इसका रूप विस्तृत होता है।
  3. समझने में आसान-मध्य विचलन को आसानी से समझा जा सकता है।
  4. सीमान्त मूल्यों से कम प्रभावित-सीमान्त मूल्यों अर्थात् बहुत बड़ी अथवा बहुत छोटी मदों से मध्य विचलन अधिक प्रभावित नहीं होता।

मध्य विचलन के दोष-

  • विश्वसनीय नहीं-मध्य विचलन की धारणा विश्वसनीय नहीं है। विशेष तौर पर बहुलक के अनिश्चित होने पर बहुलक द्वारा ज्ञात किया गया मध्य विचलन भी अनिश्चित होता है।
  • गणितीय शुद्धि नहीं-मध्य विचलन का सबसे बड़ा दोष यह है कि इसमें गणितीय शुद्धि नहीं है। इसमें (+) तथा (-) चिह्नों को छोड़ दिया जाता है। इस प्रकार उचित परिणाम प्राप्त नहीं होते।
  • बीज गणित का प्रयोग नहीं-मध्य विचलन में गणितीय अशुद्धि होती है। इसीलिए इसका प्रयोग बीज गणित प्रयोगों के लिए नहीं किया जा सकता। परिणामस्वरूप इसको अन्य सूत्रों का आधार नहीं बनाया जा सकता।

प्रश्न 6.
प्रमाप विचलन से क्या अभिप्राय है ? इसकी विशेषताएं बताओ।
उत्तर-
प्रो० सपीगल अनुसार, “प्रमाप विचलन समान्तर औसत से किसी श्रेणी के भिन्न-भिन्न मूल्यों के विचलनों के वर्ग का वर्गमूल होता है।” प्रमाप विचलन की विशेषताएं इस प्रकार हैं

  1. प्रमाप विचलन में हमेशा समान्तर औसत द्वारा विचलन निकाला जाता है। समान्तर औसत दूसरी औसतों, मध्यकों तथा बहुलक से अधिक विश्वसनीय औसत है।
  2. प्रमाप विचलन में बीज गणित चिह्नों (+) तथा (-) को छोड़ा नहीं जाता बल्कि विचलनों के वर्ग लिए जाते हैं। इससे ऋणात्मक विचलन अपने आप धनात्मक बन जाते हैं।
  3. यह एक वैज्ञानिक विधि है, जिसकी बीज गणित प्रयोग की जा सकती है। सांख्यिकी के बहुत से सूत्र प्रमाप विचलन पर ही आधारित हैं।”

प्रश्न 7.
प्रमाप विचलन के गुण तथा दोष लिखो।
उत्तर-
प्रमाप विचलन के गुण –

  1. सभी मूल्यों पर आधारित-प्रमाप विचलन श्रेणी के सभी मूल्यों पर आधारित होता है। इसलिए किसी मूल्य को भी आँखों से ओझल नहीं किया जा सकता।
  2. स्पष्ट धारणा-प्रमाप विचलन की धारणा स्पष्ट है इसीलिए इसका माप प्रत्येक स्थिति में किया जा सकता है।
  3. बीज गणित विवेचन-प्रमाप विचलन में गणित चिह्नों (+) तथा (-) को आँखों से ओझल नहीं किया जाता। इसीलिए इसका बीज गणित विवेचन सम्भव होता है। प्रमाप विचलन का प्रयोग अन्य रीतियों में भी किया जा सकता है।
  4. नमूना परिवर्तन का कम प्रभाव-नमूने में परिवर्तन हो जाता है तो प्रमाप विचलन के परिणाम पर इसका अधिक प्रभाव नहीं पड़ता।

दोष (Demerits)

  • सीमान्त मूल्यों का अधिक प्रभाव-किसी श्रेणी की बहुत बड़ी मदों अथवा बहुत लघु मदों का प्रभाव प्रमाप विचलन पर बहुत अधिक पड़ता है।
  • जटिल विधि-प्रमाप विचलन का माप करना एक कठिन विधि है। इसलिए दूसरी विधियों की तुलना में इसको कठिन माना जाता है।
  • साधारण मनुष्य के लिए मुश्किल-प्रमाप विचलन का अध्ययन सांख्यिकी ज्ञान के बिना सम्भव नहीं होता। साधारण मनुष्य इस धारणा को आसानी से समझकर प्रयोग नहीं कर सकता।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप

प्रश्न 8.
लॉरेंज़ वक्र से क्या अभिप्राय है ? इसके गुण तथा दोष बताओ।
उत्तर-
लॉरेंज़ वक्र-अमेरिका के अर्थशास्त्री डॉक्टर लॉरेंज़ ने अपकिरण का माप करने के लिए बिन्दु रेखीय विधि का निर्माण किया। इसलिए इस विधि को लॉरेंज़ वक्र कहा जाता है। लॉरेंज़ वक्र में श्रेणी के मूल्यों को रेखाचित्र द्वारा प्रकट किया जाता है। इसमें कहीं मूल्यों तथा आवृत्ति का संचीय प्रतिशत वक्र बनाया जाता है। यह वक्र समान वितरण रेखा से जितना दूर होता है, श्रेणी की मदों में असमानता उतनी ही अधिक होती है। इसलिए, “लॉरेंज़ वक्र समान वितरण रेखा से असल विचलन के विचलन का बिन्दु रेखीय माप होता है।”

गुण (Merits)

  1. यह अपकिरण के माप के लिए सरल तथा आकर्षक विधि है।
  2. इस विधि द्वारा तुलना की जा सकती है। विशेष तौर पर आयु, मजदूरी, लाभ इत्यादि के वितरण की असमानताओं को एक नज़र में परखने के लिए यह अधिक उपयोगी है।

दोष (Demerits)

  • अपकिरण की इस विधि को बनाते समय संचित प्रतिशत का माप करना पड़ता है। इसलिए इसको समझना कठिन है।
  • अपकिरण का प्रकटीकरण ही किया जा सकता है। आंकड़ों के रूप में अपकिरण को स्पष्ट नहीं किया जा सकता।

प्रश्न 9.
चतुर्थक की गणना कैसे की जाती है ?
उत्तर-
चतुर्थक का माप विभिन्न शृंखलाओं में विभिन्न प्रकार से किया जाता है।
(i) व्यक्तिगत तथा खण्डित श्रृंखला (Individual and Discrete Series)—व्यक्तिगत तथा खण्डित श्रृंखला में चतुर्थक का माप करने के लिये निम्नलिखित सूत्रों का प्रयोग किया जाता है
Qı = Size of the \(\left(\frac{N+1}{4}\right)\) th item of the series
Q3 = Size of the \(\left(\frac{3(N+1)}{4}\right)\) th item of the series

(ii) आवृत्ति वितरण श्रृंखला (Frequency Distribution Series)-आवृत्ति वितरण शृंखला में चतुर्थक का माप निम्नलिखित सूत्र से लिया जाता है-
Q1 = Size of the \(\left(\frac{N}{4}\right)\) th item
Q3 = Size of the 3\(\left(\frac{N}{4}\right)\) th item
तथा निम्नलिखित सूत्र का प्रयोग किया जाता है-
Q1 = L1+\(\left[\frac{\frac{N}{4}-c f_{p}}{f}\right] \times i\)
Q3 = L1 + \(\left[\frac{\frac{3 \mathrm{~N}}{4}-c f_{p}}{f}\right] \times i\)

IV. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
अपकिरण से क्या अभिप्राय है ? अपकिरण के महत्त्व को स्पष्ट करें। (What is dispersion ? Why is the study of dispersion essential ?)
उत्तर-
अपकिरण का अर्थ (Meaning of Dispersion)-एक श्रेणी की मदों में अन्तर को अपकिरण कहा जाता है। अपकिरण का माप इस बात को स्पष्ट करता है कि किसी श्रेणी की भिन्न-भिन्न मदें उस मध्य से कितनी दूरी पर हैं। उन मदों में प्रसार अथवा फैलाव कितना है। उस प्रसार अथवा फैलाव को अपकिरण कहा जाता है। अपकिरण की तुलना सूर्य की किरणों अथवा बैटरी की रोशनी से की जा सकती है। सूर्य की किरणें धरती पर पहुंचने तक बहुत फैल जाती हैं। बैटरी को जगाने से इसकी रोशनी फैलती जाती है। इसी प्रकार मदों का फैलाव अथवा प्रसार कितना है, उसको अपकिरण कहते हैं।

अपकिरण का महत्त्व तथा उद्देश्य (Importance of Objectives of Dispersion)-अपकिरण का मुख्य उद्देश्य अथवा महत्त्व निम्नलिखित बातों से स्पष्ट होता है-
1. श्रेणी विभाजन की बनावट का ज्ञान-किसी श्रेणी विभाजन की बनावट का ज्ञान अपकिरण के माप से स्पष्ट होता है। उदाहरणस्वरूप तीन श्रेणियों की समान्तर औसत समान हो सकती है, परन्तु उनकी मदों में अन्तर भिन्न-भिन्न हो सकता है। इसलिए औसतें किसी श्रेणी की मदों की उचित प्रतिनिधिता नहीं करतीं। किसी श्रेणी की बनावट की उचित जानकारी अपकिरण के माप से की जा सकती है। इसलिए अपकिरण का माप महत्त्वपूर्ण है।

2. तुलना में सहायक-अपकिरण का माप तुलना के लिए भी लाभदायक होता है। जैसे कि देश A की राष्ट्रीय आय दोगुनी हो जाती है। जनसंख्या भी दोगुनी हो जाती है. तो प्रति व्यक्ति आय समान रहती है। देश B में राष्ट्रीय आय 4 गुणा बढ़ गई है, जबकि जनसंख्या में वृद्धि भी चार गुणा है। इसलिए प्रति व्यक्ति आय समान रहती है। औसत आय की तुलना से हम यह परिणाम निकालते हैं कि दोनों देशों ने कोई उन्नति नहीं की। परन्तु देश A से देश B में उन्नति की दर अधिक है। इसलिए अपकिरण का माप दो अथवा दो से अधिक श्रेणियों में तुलना के लिए सहायक होता है।

3. पदों के मूल्यों का विस्तार-किसी श्रेणी में दिए गए पदों के मूल्यों का विस्तार कितना है ? इसकी जानकारी अपकिरण के माप द्वारा की जा सकती है। पदों के मूल्यों का विस्तार इस बात की जानकारी प्रदान करता है कि सबसे ऊंचे तथा सबसे नीचे पद मूल्यों का अन्तर कितना है ? इस अन्तर का ज्ञान प्राप्त करके मदों सम्बन्धी ठीक जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

4. औसत की प्रतिनिधिता का ज्ञान-अपकिरण के माप का एक उद्देश्य इस बात की जानकारी प्रदान करना भी होता है कि औसत मूल्य, मदों की ठीक प्रतिनिधिता कर रहे हैं अथवा नहीं। अपकिरण का माप, औसत के सम्बन्ध में किसी श्रेणी की मदों में एक समानता की सीमा को स्पष्ट करती है। दी गई मदों तथा औसत में जितना अन्तर अधिक होता है, मदों में उतनी एक समानता कम होती है। एक औसत को प्रतिनिधि कहा जाएगा। यदि यह एक समान तथा विश्वसनीय परिणाम स्वीकार करती है।

5. सांख्यिकी विधियों का आधार-अपकिरण का माप अन्य सांख्यिकी विधियों के माप के लिए लाभदायक होता है। सह-सम्बन्ध, परिकल्पना की परख, प्रतीपगमन इत्यादि विधियां अपकिरण के माप पर आधारित हैं। इसलिए आंकड़ा शास्त्र में अपकिरण का माप महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है।

प्रश्न 2.
अपकिरण के माप की किस्में बताओ। अपकिरण के माप की विधियों को स्पष्ट करो।(Explain the types of the measures of dispersion. Describe the methods of Absolute Measures of Dispersion.)
उत्तर-
अपकिरण के माप दो प्रकार के होते हैं –
(1) निरपेक्ष माप
(2) सापेक्ष माप।

1. निरपेक्ष माप (Absolute Measure)-किसी श्रेणी के आंकड़ों का माप प्राथमिक इकाइयों में भी बताया जाए, जिस रूप में उस श्रेणी के मूल्य दिए होते हैं तो अपकिरण का निरपेक्ष माप कहा जाता है। उदाहरणस्वरूप मजदूरों की मज़दूरी रुपयों में दी हुई है तथा अपकिरण का माप रुपयों में किया जाता है। इस तरह वस्तुओं की कीमत रुपयों में, लम्बाई मीटरों में तथा भार किलोग्रामों में ही किया जाए तो इसको निरपेक्ष माप कहा जाता है।

2. सापेक्ष माप (Relative Measure)-जब किसी श्रेणी के अपकिरण के माप को अनुपात अथवा प्रतिशत के रूप में प्रकट किया जाता है तो इसको सापेक्ष माप कहा जाता है। जैसे कि ग्यारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों में से 70% विद्यार्थी प्रथम दर्जे में पास हुए हैं। इसको सापेक्ष माप कहा जाएगा। इसको अपकिरण गुणांक भी कहा जाता है।

अपकिरण के माप की विधियां (Methods of Measuring Disperrion)-अपकिरण के माप को दो भागों में विभाजित किया जाता है-

अपकिरण के निरपेक्ष माप (Absolute Measures of Dispersion) अपकिरण के सापेक्ष माप (Relative Measures of Dispersion)
A. स्थिति के माप- 1. विस्तार (Range) 1. विस्तार गुणांक (Co-efficient of Range)
2. चतुर्थक विचलन (Quartile Deviation) 2. चतुर्थक विचलन गुणांक (Co-efficient of Quartile Deviation)
B. गणित का माप-3. औसत विचलन (Mean Deviation) 3. औसत विचलन गुणांक  (Co-efficient of Mean Devaition)
4. प्रमाप विचलन (Standard Deviation) 4. प्रमाप विचलन गुणांक (Co-efficient of Standard Deviation)
C. ग्राफ द्वारा माप – 5. लॉरेंज़ वक्र (Lorenz Curve)

प्रश्न 3.
चतुर्थक से क्या अभिप्राय है ? इसकी माप विधि को स्पष्ट करें। (What do you mean by Quartile ? Explain its measure method.)
उत्तर-
हम देख चुके हैं कि मध्यका दिए गए आंकड़ों को दो समान भागों में विभाजित करती है, जब आंकड़ों को बढ़ते अथवा घटते क्रम अनुसार लिखा जाता है तो विभाजन के तीन बिन्दु प्राप्त होते हैं। केन्द्र वाले बिन्दु को मध्यका कहा जाता है। पहले चौथाई भाग को निम्न चतुर्थक (Q1) तथा तीसरे चौथाई भाग को ऊपरी चतुर्थक (Q3) कहा जाता है। चतुर्थक को समझने के लिए मध्यका को रेखाचित्र द्वारा स्पष्ट करते हैं-
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप 3
AB रेखा का मध्य M है जो कि रेखा को दो समान भागों में विभाजित करता है। M बिन्दु वाली मद को मध्यका कहा जाता है। अब चतुर्थक को समझना आसान होगा, जब आंकड़ों को बढ़ते अथवा घटते क्रमानुसार करके इसको चार बराबर भागों में विभाजित करते हैं। विभाजन के तीन बिन्दु प्राप्त होते हैं, इनको निम्न चतुर्थक, मध्य चतुर्थक तथा ऊपरी चतुर्थक कहा जाता है। मध्य चतुर्थक हमेशा बीच में स्थित होता है। इसको मध्यका कहते हैं। निम्न चतुर्थक Q1 से 25% मदें कम होती हैं तथा ऊपरी चतुर्थक Q3 से 25% मदें अधिक होती हैं।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप 4
रेखाचित्र में AB रेखा को तीन बिन्दु Q1, Q2, Q3, चार भागों में विभाजित करते हैं। इसलिए चतुर्थक तीन होते हैं।
Q1 = प्रथम चतुर्थक (Lower Quartile or First Quartile)
Q2= द्वितीय चतुर्यक (Second Quartile or Median)
Q3 = तीसरा चतुर्थक (Upper Quartile or Third Quartile)
क्योंकि दूसरा चतुर्थक मध्यका होती है इसलिए प्रथम चतुर्थक तथा निम्न चतुर्थक (Q1) तथा तीसरे चतुर्थक अथवा ऊपरी चतुर्थक का माप किया जाता है। .
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप 5
व्यक्तिगत श्रेणी में माप विधि-

  1. व्यक्तिगत श्रेणी के आंकड़ों को बढ़ते क्रमानुसार अथवा घटते क्रमानुसार लिखना अनिवार्य होता है। मदों की श्रृंखला नम्बर लिखकर कुल संख्या (N) का पता करो।
  2. प्रथम चतुर्थक के मूल्य का पता करने के लिए निम्नलिखित सूत्र का प्रयोग किया जाता है।
    q1 = \(\frac{N+1}{4}\) th size of the item
  3. तीसरे चतुर्थक के मूल्य का पता करने के लिए निम्नलिखित सूत्र का प्रयोग किया जाता है।
    q3 = \(\frac{3(\mathrm{~N}+1)}{4}\) th Size of the item
  4. हमारे पास जो मद का आकार प्राप्त होता है, उसके सामने वाली मद Q1 अथवा Q3 होती है।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप

प्रश्न 4.
निम्नलिखित तालिका में विद्यार्थियों के अंकों का विवरण दिया गया है –
अंक : 50 55 60 40 20 65 70 80 35 52 इस श्रेणी का प्रथम चतुर्थक (Q1) तथा तीसरा चतुर्थक (Q3) ज्ञात कीजिए।
हल (Solution) :
विद्यार्थियों के अंक बढ़ते क्रमानुसार नहीं दिए गए। इसलिए पहले इनको बढ़ते क्रमानुसार लिखते हैं तथा श्रृंखला नम्बर स्वयं देते हैं।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप 6
Q1 की गणना
q1 = size of the \(\left(\frac{\mathrm{N}+1}{4}\right)\) th item.
q1 = size of the \(\left(\frac{10+1}{4}\right)\) th item.
q1 = size of the \(\left(\frac{11}{4}\right)\) = 2.75 th item.
q1 = 2nd item + 0.75 (3rd item – 2nd item)
q1 = 35 + 0.75 (40 – 35)
q1 = 35 + 3.75 = 38.75 अंक

(इससे ज्ञात होता है कि प्रथम 25% विद्यार्थियों ने 38.75 अंक अथवा इससे कम अंक प्राप्त किए हैं।) Q3 की गणना
Q3 = size of the \(\left(\frac{3(\mathrm{~N}+1)}{4}\right)\) th item
Q3 = size of the \(\left[\frac{3(10+1)}{4}\right]\) th item
\(\frac{33}{4}\) =8.25th item
Q3 = 8th item + 0.25 (9th item – 8th item)
Q3 = 65 + 0.25 (70 – 65)
Q3 = 65 + 1.25 = 66.25 अंक ऊपरी चतुर्थक से ज्ञात होता है कि प्रथम 75% विद्यार्थियों के अंक 66.25 अथवा इससे कम हैं।

खण्डित श्रेणी में चतुर्थक का माप (Measurement of Quartiles in Discrete Series)
मापी विधि

  1. खण्डित श्रेणी में दी मदों की संचयी आवृत्ति निकालो।
  2. आवृत्ति का जोड़ करो इससे कुल संख्याओं की संख्या (N) प्राप्त हो जाती है।
  3. प्रथम चतुर्थक के लिए निम्न सूत्र का प्रयोग करो

Q1 = \(\frac{\mathrm{N}+1}{4}\) size of the item
तीसरे चतुर्थक के लिए इस सूत्र का प्रयोग करो
Q3 = \(\frac{3(N+1)}{4}\) size of the item
प्रथम तथा तीसरे चतुर्थक का आकार (size of the item) को संचयी आवृत्ति में देखो। जिस संचयी आवृत्ति में यह आकार प्राप्त होता है उसके सामने वाली मद को Q1 अथवा Q3 कहा जाता है।

प्रश्न 5.
ग्यारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों के भार (weight) का विवरण इस प्रकार दिया है। इनका Q1, Q3, ज्ञात कीजिए।

भार (किलोग्राम) : 40 42 45 46 48 50 51 53 55
विद्यार्थियों की संख्या : 5 11 14 8 10 12 6 4 2

हल (Solution) :
प्रथम चतुर्थक (Q1) तथा तीसरा चतुर्थक (Q3) की गणना कीजिए।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप 7
Q1 की गणना
q1 = size of the \(\left(\frac{\mathrm{N}+1}{4}\right)\)th item
q2 = size of the \(\left(\frac{72+1}{4}\right)=\frac{73}{4}\)
= 18.25th item
यह संचयी आवृत्ति 30 में शामिल है।
q1 = 45 kg Ans.
इससे यह ज्ञात होता है कि प्रथम 25% विद्यार्थियों का भार 45 किलोग्राम अथवा इससे कम है। Q3 की गणना
q3 = size of the \(\left(\frac{3(\mathrm{~N}+1)}{4}\right)\) in item
q3 = size of the \(\left(\frac{3(72+1)}{4}\right)\) th item
= 54.75th item यह संचयी आवृत्ति 60 में शामिल है। इसके सामने मद 50 है।
q3= 50 kg Ans.
कुल विद्यार्थियों में से प्रथम 75% विद्यार्थियों का भार 50 किलोग्राम अथवा इससे कम है।

अखण्डित श्रृंखला में चतुर्थक का माप (Measurement of Quartiles in Continuous Series)

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप

प्रश्न 6.
‘निम्नलिखित तालिका की प्रथम चतुर्थक तथा तीसरे चतुर्थक का माप करो।

मज़दूरी (₹): 100-110 110-120 120-130 130-140 140-150
मज़दूरों की संख्या : 8 12 15 20 10

हल (Solution) :
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप 8
Calculation of Q1
q1 = size of the\(\left(\frac{\mathrm{N}}{4}\right)\) th = \(\frac{70}{4}\) = 17.5 item
q1 = \(\mathrm{L}_{1}+\frac{\frac{\mathrm{N}}{4}-c f p}{f} \times i\)
q1 = 110+ \(\frac{17.5-8}{12} \times 10\) = 110+7.92
q1 = 117.92
इससे स्पष्ट होता है कि प्रथम 25% मज़दूरों की मज़दूरी ₹ 117.92 के समान अथवा इससे कम है। Q3 का माप
q3 = \(\mathrm{L}_{1}+\frac{\frac{3 \mathrm{~N}}{4}-c f p}{f} \times i \)
q3 = size of the \(\frac{3 \mathrm{~N}}{4}\) th item = \(\frac{3 \times 70}{4}\) = 52.5th item
q3 = 130+ \(\frac{52.5-35}{20} \times 10\)
= 130+ 8.75
= ₹ 138.75
इससे ज्ञात होता है कि प्रथम 75% मज़दूरों की मजदूरी ₹ 138.75 अथवा इससे कम है।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित आंकड़ों से चतुर्थकों का माप करें।

अंक : 20-30 30-40 40-50 50-60 60-70 70-80 80-90
विद्यार्थियों की संख्या : 7 13 24 20 16 12 8

हल (Solution) :
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप 9
Calculation of Q1
q1 = size of the \(\left(\frac{\mathrm{N}}{4}\right)\) th item
वर्गान्तर = \(\frac{100}{4}\) = 25th item.

Q1 वर्गान्तर 40-50 के वर्ग में है
∴ Q1 = \(\mathrm{L}_{1}+\frac{\frac{\mathrm{N}}{4}-c f p}{f} \times i\)
= 40+ \(\frac{25-20}{24} \times 10\)
= 40 + 2.08 = 42.08 उत्तर

q3 is the value \(\frac{3 \mathrm{~N}}{4}\) = \(\frac{300}{4}\) = 75th item
q3 वर्गान्तर 60-70 में है ..
Q3 = \(\mathrm{L}_{1}+\frac{\frac{3 \mathrm{~N}}{4}-c p f}{f} \times i\)
= 60 + \(\frac{75-64}{16} \times 10\)
= 60 + 6.875
∴ Q3 = 66.875 उत्तर

प्रश्न 8.
निम्नलिखित आंकड़ों के आधार पर चतुर्थकों का माप करें :

से कम प्राप्तांक : 80 70 60 50 40 30
छात्रों की संख्या : 100 90 80 60 32 20

हल (Solution) :
संचयी आवृत्ति को पहले साधारण आवृत्ति में बदला जाएगा।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप 10
Calculation of
Q1 is the value of \(\left(\frac{\mathrm{N}}{4}\right)\) th = \(\frac{100}{4}\) = 25th item
Q1 वर्गान्तर (30 – 40) में है।
∴ Q1 = \(\mathrm{L}_{1}+\frac{\frac{\mathrm{N}}{4}-c f p}{f} \times i\)
= 30+\(\frac{25-20}{12} \times 10\)
= 30 + \(\frac{5}{12} \times 10\)
= 30 + 4.17
Q1 = 34.17 उत्तर

Calculation of Q3
Q3 is the value of \(\left(\frac{3 \mathrm{~N}}{4}\right)\) th = \(\frac{100 \times 3}{4} \) = 75th item
Q3 वर्गान्तर (50 – 60) में है
Q3 = \(\mathrm{L}_{1}+\frac{\frac{3 \mathrm{~N}}{4}-c f p}{f} \times i\)
= 50+ \(\frac{75-60}{20} \times 10\)
= 50 + \(\frac{15}{2}\)
= 50 + 7.5
Q3 = 57.5 उत्तर

दशमक और प्रतीशतक (Deciles And Percentiles)

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप

प्रश्न 9.
दशमक और प्रतीशतक की माप विधि स्पष्ट करें।
उत्तर-
दशमक (Decile) और प्रतिशतक (Percentiles)-जब एक श्रेणी को 10 भागों में बांट कर D1 से D9 तक माप किया जाता है तो इस को दशमक कहा जाता है।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप 11
कुल 9 दशमक होते हैं D5 को माध्यका (Median) कहा जाता है।
व्यक्तिगत श्रेणी और खण्डित श्रेणी में दशमक का माप
D1 = Size of \(\left(\frac{\mathrm{N}+1}{10}\right)\) th item
D2 = Size of \(\left[\frac{2(N+1)}{10}\right]\) th item
D3 = Size of \(\left[\frac{3(N+1)}{10}\right]\) an item
D9 = Size of \(\left[\frac{9(N+1)}{10}\right]\) an item

अखण्डित श्रेणी में दशमक का माप अखण्डित श्रेणी (Continuous Series) में दशमक वर्ग अन्तर के माप का सूत्र इस प्रकार है
D1 = Size of \(\left(\frac{N}{10}\right)\) th item
D2 = Size of 2\(\left(\frac{\mathrm{N}}{10}\right)\) th item
D3 = Size of 3\(\left(\frac{N}{10}\right)\) th item
D9 = Size of 9(\left(\frac{N}{10}\right))th item

यदि दशमक का माप करना हो तो सूत्र इस प्रकार है-
D1 = \(\mathrm{L}_{1}+\frac{\frac{\mathrm{N}}{10}-C f p}{f} \times i\)
D2 = \(\mathrm{L}_{1}+\frac{\frac{2 \mathrm{~N}}{10}-C f p}{f} \times i\)
D3 = \(\mathrm{L}_{1}+\frac{\frac{3 \mathrm{~N}}{10}-C f p}{f} \times i\)
D9 = \(\mathrm{L}_{1}+\frac{\frac{9 \mathrm{~N}}{10}-C f p}{f} \times i\)

प्रतिशतक (Percentiles)
जब श्रृंखला को 100 बराबर हिस्सों में बांट कर P से P तक का माप किया जाता है तो इसको प्रतिशतक कहा जाता है। P50 = Median, P23 = Q1 और P75 = Q3 होता है।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप 12
व्यक्तिगत तथा खण्डित श्रेणी में प्रतिशतक का माप-व्यक्तिगत तथा खण्डित श्रेणी में माप का सूत्र
P1 = Size of the \(\left(\frac{\mathrm{N}+1}{100}\right)\) th item.
P2 = Size of the 2 \(\left(\frac{\mathrm{N}+1}{100}\right)\) th item.
P3 = Size of the 3 \(\left(\frac{\mathrm{N}+1}{100}\right)\) th item
P99 = Size of the 99 \(\left(\frac{\mathrm{N}+1}{100}\right)\) th item

अखण्डित श्रेणी में प्रतिशतक वर्ग के माप का सूत्र
P1 = Size of the \(\left(\frac{\mathrm{N}+1}{100}\right)\) th item
P2 = Size of the 2 \(\left(\frac{\mathrm{N}+1}{100}\right)\) th item.
P3 = Size of the 3 \(\left(\frac{\mathrm{N}+1}{100}\right)\)th item.
P99 = Size of the 99\(\left(\frac{\mathrm{N}+1}{100}\right)\) th item

प्रतिशतक के माप का सूत्र :
P1 = \(L_{1}+\left(\frac{\frac{N}{100}-C f p}{f}\right) \times i\)
P99 = \(\mathrm{L}_{1}+\left(\frac{\frac{99 N}{100}-\mathrm{C} f p}{f}\right) \times i\)

प्रश्न 10.
व्यक्तिगत श्रेणी में दशमक और प्रतिशतक का माप
उदाहरण : विद्यार्थियों द्वारा प्राप्त किये गए अंक इस प्रकार हैं
10, 18, 20, 25, 28, 40, 50, 60, 70, 88, D3 और P67 का माप करें :
हल (Solution) :
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप 13
D3 का माप
D3 = Size of the 3 \(\left(\frac{\mathrm{N}+1}{100}\right)\) th item.
= Size of the 3\(\left(\frac{10+1}{10}\right)\) th item.
= Size of the \(\frac{3(11)}{10}=\frac{33}{10}\) = 3.3 rd item.
D3 = Size of the 3(4th-3rd item)
= 20 + 3(25-20)
= 20+ 1.5
D3 = 21.5

P67 का माप
P67 = Size of the 67 \(\left(\frac{\mathrm{N}+1}{100}\right)\)th item
= Size of the 67\(\left(\frac{10+1}{10}\right)\) in item
= Size of the 67\(\left(\frac{11}{100}\right)=\frac{737}{100}\) = 7.371 item

P67= 7th item + .37(8th – 7th item) th item
= 50 + :37 (60 – 50)
= 50 + 3.7
P= 53.7

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप

खण्डित श्रेणी में माप

प्रश्न 11.
मज़दूरों की मजदूरी के आंकड़े दिए गए हैं :
D2, D7, P21, P84 का माप करें।

मज़दूरी 100 200 300 400 500 600 700 800 900
मजदूरों की संख्या 3 7 15 20 25 10 8 7 4

हल (Solution) : .
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप 14
D2 का माप
D2 = Size of the 2 \(\left(\frac{\mathrm{N}+1}{100}\right)\) th item
= Size of the 2 \(\left(\frac{99+1}{10}\right)\) th item
= Size of 20th item.

यह संचई आवृत्ति में 25 में स्थित है जोकि ₹ 300 मज़दूरी को प्रकट करती है।
D2= ₹ 300 उत्तर।

D7 का माप
D7 = Size of the 7\(\left(\frac{\mathrm{N}+1}{100}\right)\) th item.
= Size of the 7\(\left(\frac{99+1}{10}\right)\)th item.
= Size of the 70th item.
यह संचई आवृत्ति में 70 में स्थित है जो कि ₹ 500 मज़दूरी को प्रकट करती है।
D7 = ₹ 500 उत्तर।

P21 का माप
P21 = Size of the 21\(\left(\frac{\mathrm{N}+1}{100}\right)\)th item.
= Size of the 21 \(\left(\frac{99+1}{10}\right)\)
= Size of the 21st item.

Size of the 21st item यह (C.f.) में 25 में आती है।
∴ P21 = ₹ 300 उत्तर

P84 का माप
P84 = Size of the 84\(\left(\frac{\mathrm{N}+1}{100}\right)\) th item.
= Size of the 84\(\left(\frac{99+1}{10}\right)\) th item.
= Size of the 84th item.

यह संचई आवृत्ति में 88 में आती है इसलिए P84 = ₹ 700 उत्तर।

अखण्डित श्रेणी में वर्ग अन्तर का माप (Calculation of Modal Class in Continuous Series)

प्रश्न 12.
निम्नलिखित आंकड़ों से D4 और P70 का माप करें।

अंक : 0- 10 10-20 20 – 30 30 – 40 40 – 50
आवृत्ति : 5 15 25 20 5

हल (Solution):
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप 15
D4 के वर्ग अन्तर का माप
D4 = Size of the 4 \(\left(\frac{\mathrm{N}}{10}\right)\) in item
= Size of the 4\(\left(\frac{70}{10}\right)\) th item.
= Size of the 28th item.

यह संचई आवृत्ति में 45 में आएगी इसलिए D4 का वर्ग-अन्तराल = 20 – 30 उत्तर।

D4 का माप

यदि D4 का माप करना हो तो

D4 = \(\mathrm{L}_{1}+\left(\frac{\frac{4(N)}{10}-c f p}{f}\right) \times i\)
= 20 + \(\left(\frac{\frac{4(70)}{10}-20}{25}\right) \times 10\)
= 20 + \(\frac{28-20}{25} \times 10\)
= 20 + \(\frac{8 \times 10}{25}\)
= 20 + 3.2
= 23-2 अंक उत्तर।

P70 प्रतिशतक के वर्ग-अन्तर का माप
P70 = Size of the \(\left(\frac{70(N)}{100}\right)\) th item.
= Size of the \(\left(\frac{70(70)}{100}\right)\) th item.
= Size of the 49th item.

यह संचई आवृत्ति (cf) 65 में आती है।
∴ P70 का वर्ग अन्तराल = 30 – 40 उत्तर।
P70 का माप
P70 = \(\mathrm{L}_{1}+\left(\frac{\frac{70(\mathrm{~N})}{100}-c f p}{f}\right) \times i\)
= 30 + \(\left[\frac{\left(\frac{70 \times 70}{100}\right)-45}{20}\right] \times 10\)
= 30 + \(\frac{49-45}{20} \times 10\)
= 30 + \( \frac{4}{20} \times 10\)
= 30 + 2 = 32 अंक
P70 = 32 अंक उत्तर।
.
विस्तार (Range)

प्रश्न 13.
विस्तार का माप कैसे किया जाता है ?
उत्तर-
1. विस्तार का अर्थ-किसी श्रेणी में सबसे बड़े मूल्य तथा सबसे लघु मूल्य के अन्तर को विस्तार कहा जाता है। विस्तार के माप की यह सबसे सरल विधि है, जिसमें निम्नलिखित सूत्र का प्रयोग किया जाता है-
Range = L-S
यहां L = सबसे बड़ा मूल्य (Largest value)
S = सबसे लघु मूल्य (Smallest value)

2. विस्तार गुणांक-ऊपर दिए निरपेक्ष माप में दो अथवा दो से अधिक श्रेणियों की तुलना नहीं की जा सकती। इसलिए विस्तार के तुलनात्मक माप करने के लिए विस्तार गुणांक का प्रयोग किया जाता है। इसका माप करने के लिए निम्नलिखित सूत्र का प्रयोग किया जाता है
Co-efficient of Range = \(\frac{\mathrm{L}-\mathrm{S}}{\mathrm{L}+\mathrm{S}}\)
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप 16

विस्तार तथा विस्तार गुणांक की गणना (Calculation of Range and Co-efficient of Range)

विस्तार की गणना तीन प्रकार की श्रेणियों में निम्नलिखित अनुसार की जाती है
(A) व्यक्तिगत श्रेणी (Individual Series)
विधि-व्यक्तिगत श्रेणी में दी गई मदों में से सबसे बड़ी मद के मूल्य तथा सबसे लघु मद के मूल्य का अन्तर निकाल लिया जाता है। इस अन्तर को विस्तार कहते हैं।

प्रश्न 14.
निम्नलिखित दो खिलाडियों के स्कोर का विवरण दिया गया है, विस्तार तथा विस्तार गणांक ज्ञात करो। यह बताओ कि किस खिलाड़ी की बल्लेबाजी ज्यादा स्थिर है।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप 17
हल (Solution) :
I. युवराज सिंह
(i) विस्तार = अधिकतम मूल्य – न्यूनतम मूल्य
= 104 – 12 = 92 दौड़ें
(ii) PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप 18
= \(\frac{104-12}{104+12}=\frac{92}{116}\) = 0.793

II. महेन्द्र सिंह धोनी
(i) विस्तार = अधिकतम मूल्य – न्यूनतम मूल्य
= 82 – 45 = 37
(ii) विस्तार गुणांक = PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप 19
विस्तार गुणांक = \(\frac{82-45}{82+45}=\frac{37}{127}\)
तुलना करने के लिए विस्तार गुणांक का प्रयोग करते हैं। विस्तार गुणांक महेन्द्र सिंह धोनी का कम है। महेन्द्र सिंह धोनी की दौड़ों में विचरण कम है। इसलिए महेन्द्र सिंह धोनी की बल्लेबाजी अधिक स्थिर अथवा विश्वसनीय है।

(B) खण्डित श्रेणी (Discrete Series) विधि-खण्डित श्रेणी की मदों के साथ आवृत्ति दी होती है। गणना करते समय सबसे बड़ी मद तथा सबसे छोटी मद का अन्तर निकाला जाता है। इसमें आवृत्ति में कोई ध्यान नहीं दिया जाता। विस्तार तथा विस्तार गुणांक की गणना विधि व्यक्तिगत श्रेणी वाली ही है।

प्रश्न 15.
निम्नलिखित आंकड़ों का विस्तार तथा विस्तार गुणांक पता करो।

अंक (X) : 10 15 20 25 30 35 40
आवृत्ति (f) : 2 8 60 40 35 19 11

हल (Solution) :
(i) विस्तार (R) = L – S
L = 40, S = 10
R = 40 – 10 = 30 अंक उत्तर
विस्तार 30 अंक यह स्पष्ट करता है कि अधिक अंक तथा कम अंक प्राप्त करने वालों में अन्तर अधिक है।

(ii) विस्तार गुणांक = \(\frac{\mathrm{L}-\mathrm{S}}{\mathrm{L}+\mathrm{S}}\)
Co-efficient of Range = \(\frac{40-10}{40+10}=\frac{30}{50}\) = 0.6 उत्तर
विस्तार अधिक होने के कारण विस्तार गुणांक का मूल्य अधिक है।

(C) अखण्डित श्रेणी (Continuous Series)

प्रश्न 16.
निम्नलिखित आंकड़ों का विस्तार तथा विस्तार गुणांक पता करो

अंक: 10-19 20-29 30-39 40-49 50-59 60-69
विद्यार्थियों की संख्या: 8 15 20 53 31 16

हल (Solution) :
इस प्रश्न में वर्गान्तर समावेशी श्रेणी में दिए गए हैं। इनको प्रथम अपवर्जी श्रेणी में बदलो। नोट-प्रथम वर्ग की ऊपरी सीमा 19 है तथा द्वितीय वर्ग की निचली सीमा 20 का अन्तर 20-19 = 1 का अर्ध =\(\frac{1}{2}\) = 0.5 है। प्रत्येक वर्ग की निचली सीमा में से 0.5 घटाओ तथा प्रत्येक वर्ग की ऊपरी सीमा में 0.5 जोड़ो।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप 20
(i) विस्तार (Range) = L-S
R = 69:5 – 9.5 = 60 अंक उत्तर
सबसे अधिक अंकों तथा सबसे कम प्राप्त किए गए अंकों का अन्तर 60 है अर्थात् अंकों का विस्तार बहुत अधिक है |

(ii) विस्तार गुणांक (Co-efficient of Range) = \(\frac{\mathrm{L}-\mathrm{S}}{\mathrm{L}+\mathrm{S}}\)
C.R = \(\frac{69.5-9.5}{69.5+9.5}=\frac{60}{79}\) = 0.759 उत्तर
विस्तार अधिक होने के कारण विस्तार गुणांक अधिक है।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप

द्वितिय विधि (Second Method)
मध्य बिन्दुओं की विधि-इस विधि अनुसार अखण्डित श्रेणी में अपवर्जी वर्गान्तर दिए हों तो मध्य बिन्दु ज्ञात किए जाते हैं। सबसे बड़े अथवा सबसे लघु मध्य मूल्यों के अन्तर को विस्तार कहा जाता है।

प्रश्न 17.
एक स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के भार का विवरण दिया गया है। विस्तार तथा विस्तार गुणांक ज्ञात करो।

भार (किलोग्राम): 0-20 20-40 40-60 60-80 80-100
विद्यार्थियों की संख्या: 15 58 129 43 25

हल (Solution) :
विस्तार तथा विस्तार गुणांक की गणना ।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप 21
(i) विस्तार (Range) = LMV – SMV
R = 90 – 10 – 80 किलोग्राम उत्तर
विद्यार्थियों के मध्य मूल्य अधिकतम भार 90 किलोग्राम तथा मध्य मूल्य न्यूनतम भार 10 किलोग्राम का अन्तर 80 किलोग्राम है।

(ii) विस्तार गुणांक (Co-efficient of Range) = \(\frac{\mathrm{LMV}-\mathrm{SMV}}{\mathrm{LMV}+\mathrm{SMV}}\)
C.R. = \(\frac{90-10}{90+10}=\frac{80}{100}\) = 0.8 उत्तर
विस्तार अधिक होने के कारण विस्तार गुणांक अधिक है, जोकि एक के नज़दीक है।

3. चतुर्थक विचलन (Quartile Deviation)

प्रश्न 18.
चतुर्थक विचलन तथा चतुर्थक विचलन गुणांक का अर्थ बताओ।
उत्तर-
चतुर्थक विचलन-विस्तार की तरह चतुर्थक की स्थिति से सम्बन्धित अपकिरण का माप होता है। चतुर्थक विचलन किसी भी श्रेणी के तीसरे चतुर्थक (Q3) तथा प्रथम चतुर्थक (Q1) के अन्तर का अर्थ होता है। चतुर्थक विचलन को अर्ध चतुर्थक विचलन विस्तार भी कहते हैं। इसकी गणना के लिए निम्नलिखित सूत्र का प्रयोग किया जाता है-
चतुर्थक विचलन (Quartile Deviation) = \(\frac{\mathrm{Q}_{3}-\mathrm{Q}_{1}}{2}\)
यदि हम तीसरे चतुर्थक तथा प्रथम चतुर्थक का अन्तर निकाल लेते हैं तो इसको अन्तर चतुर्थक विचलन (InterQuartile Range) कहते हैं। यदि अन्तर चतुर्थक विचलन का अर्ध कर लिया जाए तो यह अर्ध चतुर्थक विचलन कहा जाता है, इसको चतुर्थक विचलन कहते हैं।

चतर्थक विचलन गुणांक (Co-efficient of Quartile Deviation)-चतुर्थक विचलन गुणांक अपकिरण का सापेक्ष माप (Relative Measure of Dispersion) होता है। इसका गुणांक ज्ञात करने के लिए तीसरे चतुर्थक तथा प्रथम चतुर्थक के अन्तर को तीसरे चतुर्थक तथा प्रथम चतुर्थक के जोड़ से विभाजित किया जाता है।
चतुर्थक विचलन गुणांक = \(\frac{\mathrm{Q}_{3}-\mathrm{Q}_{1}}{\mathrm{Q}_{3}+\mathrm{Q}_{1}}\)
इस प्रकार चतुर्थक विचलन गुणांक का पता चल जाता है।

चतर्थक विचलन की गणना (Calculation of Quartile Deviation),माप विधि
1. निम्नलिखित चतुर्थक का माप करो
Q1 = Size of the \(\frac{(\mathrm{N}+1)}{4}\) th item
2. ऊपरी चतुर्थक का माप करो
Q3 = Size of the \(\frac{3(\mathrm{~N}+1)}{4} \) item.
3. निम्नलिखित सूत्र द्वारा माप करो –
चतुर्थक विचलन (Q.D.) = \(\frac{\mathrm{Q}_{3}-\mathrm{Q}_{1}}{2}\)
चतुर्थक विचलन गुणांक = \(\frac{\mathrm{Q}_{3}-\mathrm{Q}_{1}}{\mathrm{Q}_{3}+\mathrm{Q}_{1}}\)

A. व्यक्तिगत श्रेणी (Individual Series)

प्रश्न 19.
निम्नलिखित सारणी का चतुर्थक विचलन तथा चतुर्थक विचलन गुणांक पता करो।
अंक : 8 10 20 15 3 0 40 25
हल (Solution) :
दिए आंकड़ों को बढ़ते क्रमानुसार लिखा जाता है। चतुर्थक विचलन तथा चतुर्थक विचलन गुणांक की गणना
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप 23
q1 = size of the \(\frac{(\mathrm{N}+1)}{4}\) th item
q1= size of the \(\frac{(7+1)}{4}\) th = \(\frac{8}{4}\) = 2nd item.
q1 = 10 अंक
q3 = size of the \(\frac{3(N+1)}{4}\) th item.
q3 = size of the \(\frac{3(7+1)}{4}=\frac{3 \times 8}{4}\) = 6th item.
= \(\frac{24}{4}\) = 6th item.
q3 = 30 अंक

(i) चतुर्थक विचलन (Q.D.) = \(\frac{\mathrm{Q}_{3}-\mathrm{Q}_{1}}{2}\)
Q.D. = \(\frac{30-10}{2}=\frac{20}{2}\) = 10 अंक उत्तर

चतुर्थक विचलन 10 अंक है। चतुर्थक विचलन जितना अधिक होता है, यह तीसरे चतुर्थक Q3 तथा प्रथम चतुर्थक Q1 में आंकड़ों के अधिक विस्तार को प्रकट करता है। चतुर्थक विचलन जितना कम होता है, यह आंकड़ों की कम भिन्नता को प्रकट करता है।

(ii) चतुर्थक विचलन गुणांक (Co-efficient of Q.D.)
= \(\frac{\mathrm{Q}_{3}-\mathrm{Q}_{1}}{\mathrm{Q}_{3}+\mathrm{Q}_{1}}\)
Co-efficient of Q.D. = \(\frac{30-10}{30+10}=\frac{20}{40}\) = 0.5 उत्तर
इससे ज्ञात होता है कि प्रथम चतुर्थक तथा तीसरा चतुर्थक विचलन गुणांक 0.5 है, जितना चतुर्थक गुणांक अधिक होता है, उतनी विषमता अधिक होती है।

B. खण्डित श्रेणी (Discrete Series)
निम्न चतुर्थक Q1 तथा ऊपरी चतुर्थक Q3 का माप संचीय आवृत्ति की सहायता से पता किया जाता है।

प्रश्न 20.
निम्नलिखित आंकड़ों का चतुर्थक विचलन तथा चतुर्थक विचलन गुणांक पता करो।

रोज़ाना मज़दूरी (रु०) : 80 90 100 110 120 130 140
मज़दूरों की संख्या : 8 12 20 30 25 15 10

हल (Solution):
चतुर्थक विचलन तथा चतुर्थक विचलन गुणांक की गणना
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप 23
q1 = size of the \(\left(\frac{N+1}{4}\right)\)th item
q1 = size of the \(\left(\frac{119+1}{4}\right)\)th item
= \(\frac{120}{4}\) = 30th item.
q1 = ₹ 100
q3 = size of the \(\frac{3(\mathrm{~N}+1)}{4}\) th item.
= \(\frac{3 \times 120}{4}\) = 90th item.
Q3 = ₹ 120

(i) चतुर्थक विचलन (Q.D.) = \(\frac{\mathrm{Q}_{3}-\mathrm{Q}_{1}}{2}=\frac{120-100}{2}=\frac{20}{2}\) = = ₹ 10 उत्तर
मज़दूरों की मजदूरी में भिन्नता कम है।

(ii) चतुर्थक विचलन गुणांक = \(\frac{\mathrm{Q}_{3}-\mathrm{Q}_{1}}{\mathrm{Q}_{3}+\mathrm{Q}_{1}}\)
(Co-efficient of Q.D.) = \(\frac{120-100}{120+100}=\frac{20}{220} \) = 0.09 उत्तर
जब चतुर्थक विचलन कम होता है तो चतुर्थक विचलन गुणांक का मूल्य कम होता है।

C. अखण्डित श्रेणी (Continuous Series)

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप

प्रश्न 21.
दो फैक्टरियों में मजदूरों की मजदूरी का विवरण दिया गया है। चतुर्थक विचलन द्वारा अपकिरण का माप करो।
फैक्टरी A मज़दूरी (₹) : 50-60 60-70 70-80 80-90 90-100
मज़दूरों की संख्या : 2 8 15 106
फैक्टरी B मज़दूरी (₹) : 80-90 . 90-100 100-110 110-120 120-130
मजदूरों की संख्या : 1 4 108
हल (Solution) :
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप 24

फैक्टरी A
Q1 का माप
q1 = \(\frac{n}{4}=\frac{41}{4}\) = 10.25th item
(70-80) के वर्ग अन्तराल में है)

∴ Q1 = \( \mathrm{L}_{1}+\frac{n / 4-\mathrm{C} f p}{f} \times i\)
= 70 + \(\frac{10.25-10}{15} \times 10\)
= 70 +\(\frac{.25}{3} \times 2\)
= 70 + \(\frac{.50}{3}\)
Q1 = 70 +0.167

Q3 का माप
q3 = \( \frac{3 n}{4}=\frac{3(41)}{4}=\frac{123}{4}\) = 30.75th Item
(80-90 वर्ग-अन्तराल में है)

∴ Q3 = \(L_{1}+\frac{\frac{3 n}{4}-C f p}{f} \times i\)
= 80 + \(\frac{30.75-25}{10} \times 10\)
= 80 + 5.75
Q3 = 85.75

चतुर्थक विचलन (Q.D.)
QD = \(\frac{\mathrm{Q}_{3}-\mathrm{Q}_{1}}{2}\)
= \(\frac{87.75-70.167}{2}=\frac{17.583}{2}\)
QD = 8.792 उत्तर

चतुर्थक विचलन गुणांक = \(\frac{\mathrm{Q}_{3}-\mathrm{Q}_{1}}{\mathrm{Q}_{3}+\mathrm{Q}_{1}}\)
= \(\frac{87.75-70.167}{87.75+70.167}=\frac{8.792}{157.917}\) = 0.055
Co-efficient of Q.D. = 0.055 उत्तर

फैक्टरी B
Q1 का माप
q1 = \(\frac{n}{4}=\frac{28}{4}\) = 7th Item
(100-110) के वर्ग अन्तराल में है)

Q1 = \(\mathrm{L}_{1}+\frac{n / 4-\mathrm{C} f p}{f} \times i\)
= 100 + \(\frac{7-5}{10} \times 10\)
= 100 + 2 = 102
Q1 = 102

Q3 का माप
q3 = \(\frac{3 n}{4}=\frac{3(28)}{4}=\frac{84}{4}\) = 21st Item
(110-120) वर्ग अन्तराल में है)
Q3 = \(\mathrm{L}_{1}+\frac{\frac{3 n}{4}-C f p}{f} \times i\)
= 110 + \(\frac{21-15}{8} \times 10\)
= 110 + \(\frac{21-15}{8} \times 10\)
= 110 + \(\frac{6}{8} \times 10\)
= 110 + 7.5 = 117.5
Q3 = 117.5

चतुर्थक विचलन (Q.D.) = \(\frac{\mathrm{Q}_{3}-\mathrm{Q}_{1}}{2}\)
= \(\frac{117.5-102}{2}=\frac{15.5}{2}\) = 7.75
Q.D. = 7.75 Ans.
चतुर्थक विचलन गुणांक = \(\frac{\mathrm{Q}_{3}-\mathrm{Q}_{1}}{\mathrm{Q}_{3}+\mathrm{Q}_{1}}\)
= \(\frac{117.5-102}{117.5+102}\)
= \(\frac{15.5}{219.5}\) = 0.071
Co-efficient of Q.D. = 0.071 Ans.

चतुर्थक विचलन गुणांक फैक्टरी A में फैक्टरी B से अधिक है। इसलिए फैक्टरी A में फैक्टरी B की तुलना में अधिक विषमता (Variability) पाई जाती है।

प्रश्न 22.
चतुर्थक विचलन के गुण तथा दोष बताओ।
उत्तर-
चतुर्थक विचलन के गुण (Merits of Quartile Deviation)
1. सरल-चतुर्थक का माप करना आसान है।
2. माप-इस का माप करना भी सरल है।
3. सीमान्त मूल्यों का कम प्रभात-चतुर्थक द्वारा अपकिरण का माप करते समय सीमान्त मूल्यों का बहुत कम प्रभाव पड़ता है।

चतर्थक विचलन के दोष (Demerits of Quartile Deviation)
1. अस्थिरता-चतुर्थक विचलन में अस्थिरता का दोष होता है क्योंकि साँपल में परिवर्तन होने से इसके मूल्य पर काफ़ी प्रभाव पड़ता है।
2. सभी मूल्यों पर आधारित नहीं-चतुर्थक में श्रेणी के सभी मूल्यों को ध्यान में रख कर इनका माप नहीं किया जाता। 3. श्रृंखला का ज्ञान-चतुर्थक द्वारा श्रृंखला की बनावट का पूरा ज्ञान प्राप्त नहीं होता।

3. मध्य विचलन (Mean Deviation)

प्रश्न 23.
मध्य विचलन का अर्थ बताओ। मध्य विचलन की गणना किस विधि द्वारा की जा सकती है ? (Explain the meaning of Mean Deviation. How is Mean Deviation calculated ?)
उत्तर-
मध्य विचलन का अर्थ (Meaning of Mean Deviation)-मध्य विचलन को औसत विचलन भी कहा जाता है। औसतें मुख्य तीन प्रकार की होती हैं-समान्तर औसत, मध्यका तथा बहुलक। किसी श्रेणी की औसत निकालकर मदों में से औसत का विचलन निकाला जाता है। विचलन निकालते समय बीज गणित चिह्न (+) तथा (-) को छोड़ दिया जाता है। इस प्रकार विचलनों के मध्य को मध्य विचलन कहा जाता है।

परिभाषा-
कलार्क तथा सकेड के अनुसार, “श्रेणी की किसी औसत समान्तर मध्य, मध्यका अथवा बहुलक से निकाले गए विचलनों का समान्तर मध्य उस श्रेणी का मध्य विचलन कहा जाता है, परन्तु विचलनों के चिह्नों (+), (-) को छोड़ दिया जाता है।”
(“Average Deviation is the average amount of scatter of items is a distribution from either mean, or median or the mode, ignoring signs of deviation.”-Clark and Schkade)

गणित चिह्नों (+) तथा (-) को छोड़ने का मुख्य कारण यह है कि समान्तर औसत से मदों का विचलन निकाला जाए तो जवाब शून्य (Zero) होता है।

माप विधि-

  1. सबसे पहले दी श्रेणी की औसत (समान्तर मध्य, मध्यका अथवा बहुलक) ज्ञात करो।
  2. प्राप्त की औसत से भिन्न-भिन्न मदों का विचलन ज्ञात करो। बीज गणित चिह्न (+), (-) को छोड़ दो।
  3. विचलनों को |D| इसको D मोडलस पढ़ा जाता है। चिह्न द्वारा प्रकट करो।
  4. विचलनों को मदों की संख्या से विभाजित करो। इससे मध्य विचलन प्राप्त हो जाता है।
  5. चाहे मध्य विचलन समान्तर औसत, मध्यका तथा बहुलक द्वारा निकाला जा सकता है।

साधारण तौर पर समान्तर औसत (X) तथा मध्यका (M) का ही प्रयोग किया जाता है। बहुलक (Z) का प्रयोग नहीं किया जाता। परन्तु प्रश्न में जिस औसत द्वारा मध्य विचलन पूछा जाए उस औसत का प्रयोग करो।

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माप सूत्र (Formula) –
माप विचलन के माप दो तरह के होते हैं-
I. निरपेक्ष माप (Absolute Measure)-निरपेक्ष माप द्वारा मध्य विचलन की गणना निम्नलिखित श्रेणियों में इस प्रकार की जाती है
1. व्यक्तिगत श्रेणी (Individual Series)-मध्य विचलन का माप समान्तर औसत, मध्यका अथवा बहुलक से पता किया जाता है। इसलिए जिस औसत से मध्य विचलन की गणना करनी हो उस औसत द्वारा माप का सूत्र निम्नलिखित अनुसार है –

  • यदि विचलन समान्तर औसत से लिया जाए तो
    M.D. \((\bar{X})=\frac{\Sigma|X-\bar{X}|}{N}\) OR = \(\frac{\Sigma\left|\mathrm{D}_{\overline{\mathrm{X}}}\right|}{\mathrm{N}}\)
  • यदि विचलन मध्यका से लिया जाए तो
    M.D (M) = \(\frac{\Sigma|\mathbf{X}-\mathrm{M}|}{\mathrm{N}} \mathrm{OR}=\frac{\Sigma\left|\mathrm{D}_{\mathrm{M}}\right|}{\mathrm{N}}\)
  • यदि विचलन बहुलक से लिया जाए तो
    M.D. (Z) = \(\frac{\Sigma|\mathbf{X}-\mathbf{Z}|}{\mathrm{N}} \mathrm{OR}=\frac{\Sigma\left|\mathrm{D}_{\mathrm{Z}}\right|}{\mathrm{N}} \)

यहां M.D. \((\bar{X})\) = समान्तर मध्य से मध्य विचलन
|D|x = इसको पढ़ा जाता जाता है D मोडलस समान्तर मध्य से मदों का विचलन (+), (-) चिह्नों को छोड़कर।
|D|M = मध्यक से मदों का विचलन (+1), (-) चिह्नों को छोड़कर
|D|Z = बहुलक से मदों का विचलन (+1), (-) चिह्नों को छोड़कर
N मदों की संख्या

2. खण्डित तथा अखण्डित श्रेणी (Discrete and Continuous Series)-खण्डित तथा अखण्डित श्रेणी में निम्नलिखित सूत्र का प्रयोग किया जाता है –
समान्तर मध्य, मध्यका तथा बहुलक द्वारा मध्य विचलन
(i) M.D. \(\bar{X}\) = \(\frac{\Sigma f|D \overline{\mathrm{X}}|}{\mathrm{N}}\)
(ii) M.D.M = \(\frac{\Sigma f\left|\mathrm{D}_{\mathrm{M}}\right|}{\mathrm{N}}\)
(iii) M.D.Z = \(\frac{\Sigma f\left|D_{Z}\right|}{N}\)
साधारण तौर पर मध्य विचलन का माप मध्यका द्वारा किया जाता है। कई बार समान्तर औसत (mean) का प्रयोग भी किया जाता है।

परन्तु बहुलक (mode) का प्रयोग कभी-कभी ही किया जाता है।

  1. सबसे पहले समान्तर मध्य, मध्यका तथा बहुलक की गणना करो।
  2. औसत से मदों का विचलन निकालो (+) तथा (-) चिह्नों को छोड़ दो। इसको (D) द्वारा लिखो।
  3. प्रत्येक मद के सामने वाली आवृत्ति (f) को |D| से गुणा करके गुणनफल को f|D| लिखो।
  4. प्राप्त हुए गुणनफल का जोड़ Σf |D| करके इनकी संख्या |N| पर विभाजित करो। इस प्रकार मध्य विचलन (M.D.) प्राप्त हो जाता है।

II. सापेक्ष माप (Relative Measure)-अपकिरण के सापेक्ष माप को मध्य विचलन का गुणांक कहा जाता है। मध्य विचलन के गुणांक की गणना करने के लिए मध्य विचलन को समान्तर औसत, मध्यका अथवा बहुलक द्वारा निकालने के पश्चात् जिस औसत से मध्य विचलन की गणना की गई है, उस औसत से भाग कर दिया जाता है। इस प्रकार मध्य विचलन प्राप्त हो जाता है। मध्य विचलन गुणांक का सूत्र निम्नलिखित अनुसार है-
(i) Co-efficient of MD\(\bar{X}\) = \(\frac{\mathrm{MD}_{\overline{\mathrm{X}}}}{\overline{\mathrm{X}}} \)
(ii) Co-efficient of M.D.M = \(\frac{\text { M.D.M }}{\text { Median }}\)
(iii) Co-efficient of M.D.Z = \(\frac{\text { M.D.Z }}{\text { Mode }}\)

व्यक्तिगत श्रेणी (Individual Series)

प्रश्न 24.
निम्नलिखित आंकड़ों की सहायता से मध्य विचलन तथा उसके गुणांक का पता करो।
अंक : 8 10 12 15 18 . 20 25 इसकी गणना मध्यका द्वारा करो।
हल (Solution):
मध्यक द्वारा मध्य विचलन तथा उसके गुणांक की गणना
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप 25
मध्यका द्वारा मध्य विचलन
m = size of the \(\frac{(\mathrm{N}+1)}{2}\) th item.
M = size of the \(\left(\frac{7+1}{2}\right) \mathrm{th}=\frac{8}{2}\) = 4th item.
Median = 15 marks
M.D.M= \(\frac{\Sigma\left|D_{M}\right|}{N}=\frac{33}{7}\) = 4.714 अंक उत्तर
Co-efficient of M.D. = \(\frac{\text { M.D.M. }}{\text { Median }}=\frac{4.714}{15} \) = 0.314 उत्तर
मध्य विचलन गुणांक 1 की अनुपात में जितना कम है वह समंकों के कम उत्तर को प्रकट करता है।

प्रश्न 25.
फैक्टरी A तथा फैक्टरी B में मजदूरी सम्बन्धी आंकड़े दिए गए हैं। मध्यका तथा मध्य विचलन ज्ञात करो तथा तुलना करो।
हल (Solution):
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप 26
m= \(\frac{\mathrm{N}+1}{2}=\frac{5+1}{2}=\frac{6}{2}\) = 3rd item.
M (Median)= 600
MDM = \(\frac{\Sigma|\mathrm{D}|}{\mathrm{N}}=\frac{740}{5}\) = ₹ 148
मध्य विचलन गुणांक = \(\frac{\mathrm{MD}_{\mathrm{M}}}{\text { Median }}\) = \(\frac{148}{600} \) = 0.247

m = \(\frac{N+1}{2}=\frac{5+1}{2}=\frac{6}{2}\) = 3rd item
M (मध्यका )= ₹300
MDM = \(\frac{\Sigma|\mathrm{D}|}{\mathrm{N}}=\frac{300}{5}\) = ₹60
मध्य विचलन गुणांक = \(\frac{\mathrm{MD}_{\mathrm{M}}}{\text { Median }}\)
= \(\frac{\mathrm{MD}_{\mathrm{M}}}{\text { Median }}\) = \(\frac{60}{300}\) = 0.200
फैक्टरी A का मध्य विचलन गुणांक फैक्टरी B के मध्य विचलन गुणांक से अधिक है। इसलिए फैक्टरी A की मज़दूरी में भिन्नता अधिक है।

प्रश्न 26.
आठवीं कक्षा में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की आयु का विवरण इस प्रकार है। औसत विचलन तथा औसत विचलन गुणांक ज्ञात करो।

आयु (वर्ष) : 11 12 13 14 15
विद्यार्थियों की संख्या : 2 8 15 3 2

हल (Solution) :
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप 27
(i) मध्यका (Median) का माप
m = \(\frac{\mathrm{N}+1}{2}=\frac{30+1}{2}=\frac{31}{2}\) = 15.5th item.
यह संचयी आवृत्ति 25 में पाई जाती है।
∴ मध्यका = 13 वर्ष ।

(ii) औसत विचलन (Mean Deviation) का माप –
मध्यका से माप विचलन = \(\frac{\Sigma f\left|\mathrm{D}_{\mathrm{M}}\right|}{\mathrm{N}}=\frac{19}{30}\) = 0.633
औसत विचलन से ज्ञात होता है कि मध्यका से दूरी कम है।

(iii) औसत विचलन गुणांक (Co-efficient of Mean Deviation)
Co-efficient of M.D. =\(\frac{\text { M.D. }}{\text { Median }}=\frac{0.63}{13}\) = 0.049
मध्य विचलन गुणांक काफ़ी कम है, इसलिए मध्यका से आयु की कम दूरी पाई जाती है।

अखण्डित श्रेणी में मध्य विचलन की गणना (Calculation of Mean Deviation in Continuous Series)
अखण्डित श्रेणी वर्गों के अन्तर के मध्य मूल्य निकाल लेते हैं। इससे अखण्डित श्रेणी, खण्डित श्रेणी का रूप धारण कर लेती है। इसके पश्चात् खण्डित श्रेणी जैसे ही मध्य विचलन की गणना की जाती है।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप

प्रश्न 27.
निम्नलिखित आंकड़ों का समान्तर मध्य द्वारा मध्य विचलन के गुणांक का माप करो।

अंक: 0-10 10-20 20-30 30-40 40-50
विद्यार्थियों की संख्या : 2 8 10 15 5

हल (Solution) :
मध्य विचलन तथा मध्य विचलन के गुणांक की गणना
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप 28
(i) समान्तर मध्य (Mean) \(\bar{X} \) = \(\frac{\Sigma f x}{\mathrm{~N}}=\frac{1130}{40}\) = 28.25
(ii) मध्य विचलन (Mean Deviation)
M.D. = \(\frac{\Sigma(f|\mathrm{D} \overline{\mathrm{x}}|)}{\mathrm{N}}=\frac{370}{40}\) = 9.25 अंक उत्तर
समान्तर औसत से भिन्नता 9.25 अंक है।

(iii) मध्य विचलन का गुणांक Coefficient of M.D.= \(\frac{\mathrm{MD} \overline{\mathrm{X}}}{\text { Mean }}=\frac{9.25}{28.25}\) = 0.327 उत्तर
मध्य विचलन गुणांक 0.327 है अथवा 32.7% है जोकि काफ़ी कम है इसलिए अंकों में अन्तर कम है।

4. प्रमाप विचलन (Standard Deviation)

प्रश्न 28.
प्रमाप विचलन से क्या अभिप्राय है? प्रमाप विचलन तथा मध्य विचलन में अन्तर बताओ। (What is meant by Standard Deviation ? Distinguish between Mean Deviation and Standard Deviation.)
उत्तर-
अपकिरण के माप के लिए इस विधि की सबसे पहले कार्ल पीयर्सन (Karl Pearson) ने 1893 में व्याख्या की थी। इसको अपकिरण के माप की सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण, उपयोगी तथा विश्वसनीय विधि माना जाता है। प्रमाप विचलन को विचलन वर्ग मध्य मूल्य भी कहा जाता है। इसको ग्रीक भाषा के अक्षर (0) सिगमा द्वारा प्रकट किया जाता है। जितनी आंकड़ों में अपकिरण अथवा भिन्नता अधिक होगी, उतना ही प्रमाप विचलन अधिक होगा अर्थात्-

  1. यदि प्रमाप विचलन छोटा है तो इसका अर्थ आंकड़ों में भिन्नता कम है अथवा एक समानता पाई जाती है।
  2. यदि प्रमाप विचलन बड़ा है तो इसका अर्थ है कि आंकड़ों में भिन्नता अधिक है अथवा एक समानता नहीं है।

प्रमाप विचलन का अर्थ (Meaning of Standard Deviation)-किसी श्रेणी के मध्यमान में से उसकी भिन्न-भिन्न मदों के निकाले गए विचलनों के वर्गों की औसत के वर्गमूल को प्रमाप विचलन कहा जाता है।
प्रमाप विचलन हमेशा समान्तर मध्य में से ही विचलनों द्वारा लिया जाता है क्योंकि समान्तर मध्य में से लिए गए विचलनों के वर्गों का जोड़ किसी अन्य औसत में से लिए गए विचलनों के वर्गों की आवश्यकता से न्यूनतम होता है।

प्रमाप विचलन की विशेषताएं (Characteristics of Standard Deviation)-

  1. प्रमाप विचलन में मदों से विचलन समान्तर मध्य से लिए जाते हैं।
  2. प्रमाप विचलन में गणित चिह्न जमा (+) तथा घटाओ ( – ) को छोड़ा नहीं जाता। हासिल किए गए विचलनों के वर्ग कर लिए जाते हैं, जिससे ऋणात्मक विचलन भी धनात्मक बन जाते हैं।
  3. प्रमाप विचलन की गणना करने के लिए उन वर्गों का जिनका वर्ग किया गया है इसका मध्य प्राप्त करके वर्गमूल निकाला जाता है। इसको प्रमाप विचलन कहते हैं।

प्रमाप विचलन तथा मध्य विचलन में अन्तर (Difference between Mean Deviation and Standard Deviation)-प्रमाप विचलन तथा मध्य विचलन में मुख्य अन्तर इस प्रकार हैं-

  1. प्रमाप विचलन (S.D.)-प्रमाप विचलन की गणना केवल समान्तर मध्य द्वारा ही की जाती है। मध्य विचलन (M.D.)-मध्य विचलन की गणना केन्द्रीय प्रवृत्तियां समान्तर मध्य (Mean), मध्यक (Median) अथवा बहुलक के आधार पर की जा सकती है।
  2. प्रमाप विचलन (S.D.)-प्रमाप विचलन में श्रेणी की मदों की समान्तर औसत (Mean) से मदों के विचलन निकाले जाते हैं। प्राप्त किए विचलनों के वर्ग करके (+) तथा (-) चिह्नों को धनात्मक (+) बना लिया जाता है। इस प्रकार विचलनों की औसत पता करके वर्गमूल निकाला जाता है। इस प्रकार (+) तथा (-) चिह्नों को ध्यान में रखा जाता हैं |

मध्य विचलन (M.D.)-मध्य विचलन में गणित चिह्नों (+) तथा (-) को छोड़ दिया जाता है। यह मध्य विचलन का सबसे बड़ा दोष है।

A.व्यक्तिगत श्रेणी (Individual Series)

प्रमाप विचलन गणना की विधियाँ (Method of Measuring Standard Deviation)

  1. प्रत्यक्ष विधि(1) किसी श्रेणी के मूल्यों की समान्तर औसत ज्ञात कीजिए।
  2. प्रत्येक मूल्य में से समान्तर औसत (X̄) को घटाओ तथा विचलन को छोटी X द्वारा अंकित करो।
    (x-X̄=x)
  3. प्राप्त किए विचलनों (x) का वर्ग पता करो तथा विचलनों के वर्गों (x2) का जोड़ (Σx2) कर लें।
  4. निम्नलिखित सूत्र का प्रयोग करो

(i) σ = \(\sqrt{\frac{\Sigma x^{2}}{N}}=\sqrt{\frac{(\mathrm{X}-\overline{\mathrm{X}})^{2}}{\mathrm{~N}}}\)
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप 29
σ (सिगमा) = प्रमाप विचलन
Σx2 = मदों से समान्तर औसत के विचलनों के वर्गों का जोड़
N = मदों की संख्या
√ = वर्गमूल
5. प्रमाप विचलन के वर्ग को वेरीअँस अथवा प्रसारण कहा जाता है अथवा प्रसारण कहा जाता
Variance or V = σ2 अथवा \(\frac{\Sigma x^{2}}{\mathrm{~N}}\) जहां x = x = x – X̄
6. सापेक्ष माप-प्रमाप विचलन के सापेक्ष माप को प्रमाप विचलन गुणांक कहा जाता है। इसकी गणना का सूत्र निम्नलिखित अनुसार है
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप 30

प्रश्न 29.
निम्नलिखित आंकड़ों का प्रमाप विचलन तथा प्रमाप विचलन का गुणांक ज्ञात करो –
अंक : 6, 9, 10, 13, 17, 19, 21, 25
हल (Solution) :
प्रमाप विचलन की गणना ( प्रत्यक्ष विधि)
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप 31
समान्तर औसत (Mean)
X̄ = \(\frac{\Sigma x}{N}=\frac{120}{8}\)
प्रमाप विचलन (Standard Deviation)
σ = \( \sqrt{\frac{(\mathrm{X}-\overline{\mathrm{X}})^{2}}{\mathrm{~N}}}=\sqrt{\frac{\Sigma x^{2}}{\mathrm{~N}}}=\sqrt{\frac{302}{8}}=\sqrt{37.75}\)
σ = 6.14 उत्तर
(Standard Deviation gives us the absolute value of variation. By this, we cannot measure the variability of two or more series. We have to study the relative measure of dispersion.)

अपकिरण गुणांक (Co-efficient of Variation)

Co-efficient of Variation = \( \frac{\text { S.D. }}{\bar{X}} \times 100=\frac{6.14}{15} \times 100\)
or Co-efficient of variation = 40.9%
It shows that the variation of the items from Mean is 40.9%.

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप

प्रश्न 30.
निम्न सारणी का प्रमाप विचलन ज्ञात करो –

आकार : 5 10 15 20 25 30
आवृत्ति : 2 8 10 15 8 7

हल (Solution) :
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप 32
प्रमाप विचलन
S.D. or σ = \(\sqrt{\frac{\Sigma f d x^{2}}{N}-\left(\frac{\Sigma f d x}{N}\right)^{2}}\)
σ = \(\sqrt{\frac{2400}{50}-\left[\frac{(-50)}{50}\right]^{2}}\)
σ = \(\sqrt{48-1}=\sqrt{47}\) 6.85 उत्तर
निरपेक्ष प्रमाप विचलन 6.85 है।

प्रश्न 31.
निम्नलिखित सारणी का पद विचलन विधि द्वारा प्रमाप विचलन ज्ञात करो।

अंक : 20 30 40 50 60
विद्यार्थियों की संख्या 6 10 20 55 10

हल (Solution) :
प्रमाप विचलन की गणना (पद विचलन विधि)
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप 33
प्रमाप विचलन
S.D. or σ = \(\sqrt{\frac{\Sigma f d x^{\prime 2}}{N}-\left(\frac{\Sigma f d x^{\prime}}{N}\right)^{2}} \times C\)
σ = \(\sqrt{\frac{95}{50}-\left(\frac{(-) 19}{50}\right)^{2}} \times 10\)
σ = \(\sqrt{1.9-0.144} \times 10\)
σ = \(\sqrt{1.756} \times 10\)
σ = 1.325 x 10 = 13.25 उत्तर
निरपेक्ष प्रमाप विचलन 13.25 है।

प्रश्न 32.
निम्नलिखित सारणी का प्रमाप विचलन प्रत्यक्ष विधि द्वारा ज्ञात करो।

मज़दूरी (२) 0-10 10-20 20-30 30-40 40-50
मज़दूरों की संख्या 2 3 10 4 1

हल (Solution) :
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप 34
समान्तर औसत की गणना
X̄ = \(\frac{\sum f x}{\mathrm{~N}}=\frac{520}{20}\) = 26
प्रमाप विचलन
S.D. or σ = \(\sqrt{\frac{\Sigma f x^{2}}{\mathrm{~N}}}\)
σ = \(\sqrt{\frac{2180}{20}}=\sqrt{109}\) = ₹ 10.44 उत्तर
निरपेक्ष प्रमाप विचलन 10.44 है।

(B) लघु विधि (Short Cut Method)
अखण्डित श्रेणी में प्रमाप विचलन की गणना करते समय खण्डित श्रेणी में प्रयोग की जाने वाली विधि का प्रयोग किया जाता है। अखण्डित श्रेणी के मध्य मूल्य (Mid values) निकाले जाते हैं। इस प्रकार अखण्डित श्रेणी अपने-आप ही खण्डित श्रेणी का रूप धारण कर लेती है। इस विधि में निम्नलिखित सूत्र का प्रयोग किया जाता है –
σ = \(\sqrt{\frac{\Sigma f d x^{2}}{N}-\left(\frac{\Sigma f d x^{\prime}}{N}\right)^{2}}\)

प्रश्न 33.
निम्नलिखित आंकड़ों द्वारा प्रमाप विचलन ज्ञात करो –

आकार : 2-4 4-6 6-8 8-10 10-12 12-14
आवृत्ति : 1 2 3 4 6 3

हल (Solution) :
प्रमाप विचलन की गणना (लघु विधि)
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप 35
प्रमाप विचलन (Standard Deviation)
S.D. or σ = \(\sqrt{\frac{\Sigma f d x^{2}}{\mathrm{~N}}-\left(\frac{\Sigma f d x}{\mathrm{~N}}\right)^{2}}\)
σ = \(\sqrt{\frac{180}{20}-\left(\frac{(-) 18}{20}\right)^{2}}\)
σ = \(\sqrt{9-(0.9)^{2}}=\sqrt{8.19}\)
σ = 2.86 उत्तर

(C) पद विचलन विधि यदि पद विचलन लिए जाएं तो गणना का कार्य और आसान हो जाता है। इस विधि में निम्नलिखित सूत्र का प्रयोग किया जाता है
σ = \( \sqrt{\frac{\Sigma f d x^{2}}{\mathrm{~N}}-\left(\frac{\Sigma f d x}{\mathrm{~N}}\right)^{2}} \times \mathrm{C}\)

प्रश्न 34.
निम्नलिखित आंकड़ों से प्रमाप विचलन ज्ञात करो –

अंक : 0-5 5-10 10-15 15-20 20-25 25-30 30-35
विद्यार्थियों की संख्या: 8 12 20 25 22 10 3

हल (Solution):
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप 36
प्रमाप विचलन (Standard Deviation)
S.D. or σ = \( \sqrt{\frac{\Sigma f d x^{\prime 2}}{\mathrm{~N}}-\left(\frac{\Sigma f d x^{\prime}}{\mathrm{N}}\right)^{2}} \times \mathrm{C}\)
σ = \(\sqrt{\frac{229}{100}-\left(\frac{(-) 17}{100}\right)^{2}} \times 5\)
σ = \(\sqrt{2.29-0.0289} \times 5 \)
σ = \(\sqrt{2.2611} \times 5\)
σ = 1.504 × 5
σ = 7.52 उत्तर
निरपेक्ष प्रमाप विचलन 7.520 है।

प्रमाप विचलन गुणांक तथा विचरण गुणांक (Co-efficient of Standard Deviation and Co-efficient of Variation)

प्रश्न 35.
प्रमाप विचलन गुणांक, विचरण गुणांक तथा प्रसरण का अर्थ बताओ। (Explain the meaning of Co-efficient of Standard Deviation, Co-efficient of Valuable and Variance.)
उत्तर-
. प्रमाप विचलन गुणांक (Co-efficient of Standard Deviation)-प्रमाप विचलन अपकिरण का निरपेक्ष माप है। प्रमाप विचलन द्वारा दो अथवा दो से अधिक शृंखलाओं की तुलना नहीं की जा सकती है। इस उद्देश्य के लिए प्रमाप विचलन गुणांक की गणना की जाती है। इसको अपकिरण का सापेक्ष माप कहा जाता है तथा इसका सूत्र निम्नलिखित अनुसार है
प्रमाप विचलन गुणांक (Co-efficient of S.D.) = \(\frac{\text { Standard Dèviation }}{\text { Mean }} \)
= \(\frac{\sigma}{\overline{\mathrm{X}}}\)

2. विचरण गुणांक (Co-efficient of variation)-प्रमाप विचरण गुणांक साधारण तौर पर दशमलव भिन्न में आता है। इसलिए इसको समझना आसान नहीं, बल्कि कठिन होता है। इस मुश्किल को दूर करने के लिए विचरण गुणांक का प्रयोग किया जाता है। इसलिए सापेक्ष माप के लिए अपकिरण सम्बन्धी एक अन्य महत्त्वपूर्ण धारणा विचरण गुणांक दी गई है। इस धारणा का प्रयोग सबसे पहले कार्ल पियर्सन द्वारा किया गया था। इस कारण इस धारणा को कार्ल पियर्सन का विचरन गुणांक कहा जाता है। कार्ल पियर्सन अनुसार, “विचरण गुणांक समान्तर औसत में होने वाला प्रतिशत विचरण है जबकि प्रमाप विचलन समान्तर औसत में होने वाला कुल विचरण है।”
विचरण गुणांक or CV = \(\frac{\delta}{\bar{X}} \times 100\)

विचरण गुणांक प्रमाप विचलन का प्रतिशत रूप है। इसका प्रयोग भिन्न-भिन्न श्रृंखलाओं में तुलना के लिए किया जाता है, जिस समूह का विचरण गुणांक (C.V.) अधिक होगा, उस समूह में कम एक समानता पाई जाएगी। जिस समूह का विचरण गुणांक (C.V.) कम होगा, उस समूह में अधिक एक समानता पाई जाएगी।
अर्थात्
(i) C.V. अधिक है – कम समानता
(ii) C.V. कम है – अधिक समानता

3. प्रसरण (Variance)-प्रमाप विचलन के वर्ग को प्रसरण कहा जाता है। प्रसरण के माप के लिए निम्नलिखित सूत्र का प्रयोग किया जाता है
(Direct Method) व्यक्तिगत श्रेणी
प्रसरण (Variance) or V = \(\frac{\Sigma x^{2}}{\mathrm{~N}}\) or σ2
खण्डित तथा अखण्डित श्रेणी
प्रसरण (Variance) or V = \(\frac{\Sigma f x^{2}}{\mathrm{~N}}\)

लघु विधि (Short Cut Method)
प्रसरण (Variance)
V = \(\frac{\Sigma f d x}{\mathrm{~N}}-\left(\frac{\Sigma f d x}{\mathrm{~N}}\right)^{2}\)
– अथवा
V = σ2

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप

A. व्यक्तिगत श्रेणी (Individual Series) :

प्रश्न 36.
पंचवर्षीय योजना में दो नगरों की कीमतों में परिवर्तन का विवरण इस प्रकार है। बताओ कौन-से नगर में कीमतें स्थिर रहीं।
नगर A की कीमतें : 10 18 20 15 12
नगर B की कीमतें : 20 21 19 23 – 17
हल (Solution):
विचरण गुणांक की गणना
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप 37
नगर A
X̄ = \(\frac{\Sigma x}{N}=\frac{75}{5}\) = 15
σ = \(\sqrt{\frac{\Sigma d x^{2}}{\mathrm{~N}}}=\sqrt{\frac{68}{5}}=\sqrt{13.6}\) = 3.69
विचरण गुणांक
C.V. = \(\frac{\sigma}{\bar{X}} \times 100 \)
= \(\frac{3.69}{15} \times 100\) = 24.58 उत्तर

नगर B
Ȳ = \(\frac{\Sigma Y}{N}=\frac{100}{5}\) = 20
σ = \(\sqrt{\frac{\Sigma d y^{2}}{N}}=\sqrt{\frac{20}{5}}=\sqrt{4}\) = 2
(Co-efficient of variation)
C.V. = \(\frac{\sigma}{\overline{\mathrm{X}}} \times 100\)
= \(\frac{2}{20} \times 100\) = 10 उत्तर
विचरण गुणांक नगर A की तुलना में B नगर का कम है। इसलिए कीमतें B नगर में अधिक स्थिर रहती हैं।

प्रश्न 37.
दो बल्लेबाजों x तथा Y द्वारा भिन्न-भिन्न पारियों में रनों का विवरण इस प्रकार है?
x : 15 1200 75 10 140 Y : 60 76 30 42 5 0 42.
बताओ-
(i) दोनों में कौन-सा खिलाड़ी अधिक रन बनाने वाला है ?
(ii) कौन-सा खिलाड़ी अधिक स्थिर है?
हल (Solution) :
यह पता करने के लिए कि कौन-सा खिलाड़ी अधिक रन बनाने वाला है औसत रनों की तुलना करनी पड़ेगी तथा यह जानने के लिए कि कौन-सा खिलाड़ी अधिक स्थिर है विचरण गुणांक (C.V.) की तुलना करनी पड़ेगी।
समान्तर औसत तथा विचरण गुणांक का माप
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप 38
बल्लेबाज़ X
X̄ = \(\frac{\Sigma x}{N}=\frac{360}{60}\) = 60
σx = \( \sqrt{\frac{\Sigma d x^{2}}{\mathrm{~N}}}=\sqrt{\frac{18350}{6}}\)
= 66.05 दौड़ें
Co-efficient of variation
CVx = \(\frac{\sigma}{\bar{X}} \times 100\)
= \(\frac{66.05}{60} \times 100\)
= 101.08

बल्लेबाज़ Y
Ȳ = \(\frac{\Sigma Y}{N}=\frac{300}{6}\) = 50
σ = \(\sqrt{\frac{\Sigma d y^{2}}{N}}=\sqrt{\frac{1304}{6}}\)
= 14.74 दौड़ें
Co-efficient of variation Cvy = Fx 100
CVy = \(\frac{\sigma}{\overline{\mathbf{Y}}} \times 100\)
= \(\frac{14.74}{50} \times 100\)
= 29.48
(i) X बल्लेबाज़ की औसत दौड़ें 60, Y बल्लेबाज़ की औसत दौड़ें 50 की तुलना में अधिक हैं। इसलिए X बल्लेबाज़ अच्छा खिलाड़ी है।
(ii) विचरण गुणांक (C.V.) बल्लेबाज़ Y का 29.48, बल्लेबाज़ X के विचरण गुणांक 101.08 से कम है। इसलिए बल्लेबाज़ Y अधिक स्थिर है।

प्रश्न 38.
फैक्टरी A तथा फैक्टरी B में मजदूरों की औसत मज़दूरी तथा प्रमाप विचलन का विवरण निम्नलिखित अनुसार दिया हुआ है। विचरण गुणांक पता करो।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप 39
हल (Solution) :
फैक्टरी A का विचरण गुणांक
Co-efficient of variation of factory X = \(\frac{\sigma}{\overline{\mathrm{X}}}\) x 100
C.V.= \(\frac{6}{40}\) x 100 = 15
फैक्टरी B का विचरण गुणांक
Co-efficient of variation of factory Y = \( \frac{\sigma}{\overline{\mathrm{Y}}}\) x 100
C.V. = \(\frac{9}{30}\) x 100 = 30
फैक्टरी B का विचरण गुणांक 30 फैक्टरी A के विचरण गुणांक 15 से अधिक है। इसलिए फैक्टरी B में विचरण अधिक है।

प्रश्न 39.
प्रमाप विचलन के गुण एवं दोष बताएं।
उत्तर-
प्रमाप विचलन के गुण (Merits of Standard Deviation)

  1. सभी मूल्यों पर आधारित-प्रमाप विचलन श्रृंखला के सभी मूल्यों पर आधारित होता है।
  2. निश्चित परिभाषा-प्रमाप विचलन की परिभाषा निश्चित होती है।
  3. निश्चित माप-प्रमाप विचलन का माप स्पष्ट तथा निश्चित होता है। इसका प्रयोग हरेक स्थिति में किया जा सकता है।
  4. बीज गणित अध्ययन-प्रमाप विचलन का बीज गणित विधियों में काफी प्रयोग संभव होता है।
  5. तुलना-इस विधि के द्वारा दो या दो से अधिक श्रृंखलाओं की तुलना की जा सकती है।

प्रमाप विचलन के दोष (Demerits of Standard Deviation)

  1. कठिन माप-प्रमाप विचलन का माप करना कठिन होता है।
  2. सीमान्त मल्यों का प्रभाव-इस विधि में सीमान्त मूल्यों का अधिक प्रभाव पड़ता है।
  3. खुले वर्गान्तर-खुले वर्गान्तर में प्रमाप विचलन का माप नहीं किया जा सकता।

5. लॉरेंज़ वक्र (Lorenz Curve)

प्रश्न 40.
लॉरेंज़ वक्र से क्या अभिप्राय है? लॉरेंज़ वक्र की निर्माण विधि स्पष्ट करो। (What is Lorenz Curve ? Explain the method for the formulation of Lorenz Curve.)
अथवा
अपकिरण की ग्राफ विधि से क्या अभिप्राय है ? ग्राफ विधि द्वारा अपकिरण के माप का निर्माण कैसे किया जाता है?
(What is meant by Graphic Method of dispersion? How is dispersion measured with Graphic Method ?)
अथवा
अपकिरण के माप की बिन्दु रेखीय विधि से क्या अभिप्राय है? इस विधि द्वारा अपकिरण का माप कैसे किया जाता है?
(What is meant by outline Method of dispersion? How is dispersion measured with it ?)
उत्तर-
लॉरेंज वक्र का अर्थ (Meaning of Larenz Curve) अपकिरण के माप के लिए एक ढंग का निर्माण अमेरिका के अर्थशास्त्री डॉक्टर मैक्स लॉरेंज (Dr. Max Lorenz) ने किया। उन्होंने एक वक्र से आय तथा धन के वितरण में असमानताओं का अध्ययन किया। इस वक्र को लॉरेंज़ वक्र (Lorenz curve) कहा जाता है। आजकल के अर्थशास्त्री इस वक्र का प्रयोग आय, धन, लाभ, मजदूरी इत्यादि आर्थिक दरों के प्रकटावे के लिए करते हैं। लॉरेंज़ वक्र को संचयी प्रतिशत वक्र भी कहा जाता है। इसलिए लॉरेंज़ वक्र समान वितरण रेखा से जितना दूर होता है, उतनी ही असमानता अधिक होती है। लॉरेंज़ वक्र वितरण रेखा के नज़दीक होगा, उतना ही असमानता कम होती है।

लॉरेंज़ वक्र की निर्माण विधि(Method to draw Lorenz Curve) –
लॉरेंज़ वक्र की निर्माण विधि निम्नलिखित अनुसार हैं-

  1. दिए हुए मूल्यों तथा आवृत्ति को संचित रूप में बदलो। वर्ग अन्तराल की स्थिति में मध्य मूल्य निकालकर संचयी जोड़ करो।
  2. संचित किए हुए मूल्यों तथा आवृत्तियों को प्रतिशत में बदलो।
  3. ग्राफ पेपर पर OX तथा OY रेखाएं बनाओ। 10X अक्ष सभी प्रतिशत संचयी आवृत्तियां, 100 से 0 तक तथा OY अक्ष पर सभी प्रतिशत संचयी मदों 0 से 100 तक लिया जाता है।
  4. OX अक्ष के शून्य (0) मापदण्ड को OY अक्ष के 100 मापदण्ड से मिलाओ। इसको करने अथवा समान वितरण रेखा कहा जाता है।
  5. मूल्यों तथा आवृत्तियों की प्रतिशत संचयी आंकड़ों को ग्राफ पर बिन्दुओं द्वारा अंकित किया जाता है तथा इन बिन्दुओं को आपस में मिला देते हैं, जिससे लॉरेंज़ वक्र प्राप्त होता है। इसलिए लॉरेंज़ वक्र को बिन्दु विधि अथवा ग्राफ विधि भी कहा जाता है।
  6. लॉरेंज़ वक्र, समान वितरण रेखा से जितना नज़दीक होता है, अपकिरण की मात्रा उतनी कम होती है। लॉरेंज़ वक्र जितना अधिक दूर होगा, अपकिरण उतना अधिक होगा।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप

प्रश्न 41.
दो फैक्टरियों द्वारा मजदूरों को दी जाने वाली मजदूरी का विवरण इस प्रकार है

मज़दूरी (₹): 0-20 20-40 40-60 60-80 80-100
फैक्टरी A में मजदूरों की संख्या : 60 80 120 90 150
फैक्टरी B में मजदूरों की संख्या : 150 100 90 110 50

हल : मजदूरी वितरण से समानताओं की तुलना करने के लिए लॉरेंज़ वक्र का निर्माण करो।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 25 अपकिरण के माप 40
समान विभाजन वक्र (Line of Equal Distribution) से लॉरेंज़ वक्र जितना दूर होगा, उतनी ही आंकड़ों में असमानता ज्यादा होगी। इस उदाहरण में फैक्टरी A की तुलना में फैक्टरी B में लॉरेंज़ वक्र अधिक दूर है। इसलिए फैक्टरी B के मजदूरों की मजदूरी में असमानता अधिक है।