PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 3 धातु एवं अधातु

Punjab State Board PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 3 धातु एवं अधातु Important Questions and Answers.

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 3 धातु एवं अधातु

दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
धातुओं के भौतिक एवं रासायनिक गुणधर्मों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
धातुओं के भौतिक गुणधर्म-

  • धात्विक चमक-शुद्ध धातुओं की सतहें चमकीली होती है। इस गुणधर्म को धात्विक चमक (metallic lustre) कहते हैं ; जैसे-सोने में पीले रंग की, ताँबे में लाल-भूरे रंग की, एल्यूमीनियम में सफेद रंग की चमक होती है।
  • कठोरता-धातुएँ सामान्यतः कठोर होती हैं। विभिन्न धातुओं की कठोरता भिन्न-भिन्न होती है। कॉपर (ताँबा), आयरन (लोहा), एल्यूमिनियम अत्यंत कठोर धातुएँ हैं, जबकि सोडियम, पोटैशियम मृदु धातुएँ हैं।
  • आघातवर्ध्यता- जो धातुएँ हथौड़े द्वारा पीट-पीट कर पतली चादरों में परिवर्तित हो जाती हैं आघातवर्धनीय कहलाती हैं। इस गुणधर्म को आघातवर्ध्यता (malleability) कहते हैं। सोना तथा चाँदी सर्वाधिक आघातवर्धनीय धातुएँ हैं।
  • तन्यता- वे धातुएँ जिनसे अत्यंत पतले तार खींचे जा सकते हैं, तन्य कहलाती हैं तथा इस गुणधर्म को तन्यता (ductility) कहते हैं। सोना तथा चाँदी सर्वाधिक तन्य धातुएँ हैं।
  • उष्मीय चालकता-धातुएँ सामान्यतः ऊष्मा की सुचालक होती हैं। चाँदी ऊष्मा की सर्वश्रेष्ठ सुचालक है। अन्य धातुएँ जो ऊष्मा की सुचालक हैं के उदाहरण कॉपर, एल्यूमीनियम आदि हैं।
  • वैद्युत् चालकता-धातुएँ विद्युत् की सुचालक होती हैं। सिल्वर, कॉपर आदि विद्युत् की सुचालक हैं।

धातुओं के रासायनिक गुणधर्म
1. धातुओं की ऑक्सीजन से अभिक्रिया-सभी धातुएँ ऑक्सीजन से संयोग करके धात्विक ऑक्साइड बनाती हैं। क्योंकि सभी धातुओं की अभिक्रियाशीलता भिन्न-भिन्न है। इसलिए वे अलग-अलग ताप पर ऑक्सीजन से संयोग करते हैं।
(i) सामान्य ताप पर Na तथा K ऑक्सीजन से संयोग करके ऑक्साइड बनाते हैं जो पानी में घुलने पर हाइड्रोक्साइड बनाते हैं।
4Na (s) + O2 (g) → 2Na2O (s)
Na2O (s) + H2O → 2NaOH (aq)

(ii) मैग्नीशियम रिबन वायु में जलकर मैग्नीशियम ऑक्साइड बनाता है।
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(iii) तांबा तथा लोहा शुष्क वायु में उच्च तापक्रम पर ऑक्सीजन से संयोग करते हैं।
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2. धातुओं की तनु अम्लों से अभिक्रिया-धातुएं तनु अम्लों से अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस मुक्त करती हैं। विभिन्न धातुओं अम्लों के साथ अभिक्रियाशीलता की दर भिन्न-भिन्न होती है।

(i) Na, K, Zn, Mg, Fe आदि अवरोही क्रम में अभिक्रियाशील हैं।
2Na + 2HCl → 2NaCl + H2
Mg + 2HCl → MgCl2+ H2
Zn + H2SO4 → ZnSO4 + H2

(ii) तनु नाइट्रिक अम्ल Cu, Ag, Pb, Hg धातुओं के साथ क्रिया करके NO (नाइट्रोजन ऑक्साइड) बनाता
3Cu + 8HNO3 → 3Cu (NO3)2 + 2NO + 4H2O
3Ag + 4HNO3 → 3AgNO3 + NO + 2H2O

(iii) Mg तथा Mn के साथ तनु नाइट्रिक अम्ल हाइड्रोजन गैस मुक्त करते हैं।
Mg + 2HNO3 → Mg(NO3)2 + H2

(iv) सोना तथा प्लाटीनम तनु अम्ल से अभिक्रिया नहीं करते।

3. धातुओं की क्लोरीन से अभिक्रिया-धातुएं, क्लोरीन से संयोग करके अपने क्लोराइड बनाती हैं।
Ca + Cl2 → CaCl2

4. धातुओं की हाइड्रोजन से अभिक्रिया-क्रियाशील धातुएं Na, K, Ca आदि हाइड्रोजन से संयोग करके अपने हाइड्राइड बनाती हैं।
2Na + H2 → 2NaH (सोडियम हाइड्राइड)
Ca + H2 → CaH2 (कैल्शियम हाइड्राइड)

5. धातुओं की पानी से अभिक्रिया –
(i) जब पानी सामान्य ताप पर हो तो Na, K, Ca आदि क्रिया करके हाइड्रोजन गैस मुक्त करती है।
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(ii) जब पानी उबलता हो तो Mg, Zn, Fe अभिक्रिया करके ऑक्साइड बनाते हैं।
Mg + H2O → MgO + H2
3Fe + 4H2O → Fe3O4 + 4H2

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प्रश्न 2.
अधातुओं के भौतिक तथा रासायनिक गुण लिखो।
उत्तर-
अधातुओं के भौतिक गुण-
(i) भौतिक अवस्था-अधातुएं सामान्य तापमान पर प्राय: गैसीय अवस्था में या फिर ऐसे द्रव या ठोस रूप में होती हैं, जो निम्न तापमान पर ही वाष्पों में परिवर्तित हो जाते हैं।
(ii) धात्वीय चमक-अधातुओं की कोई चमक नहीं होती, किंतु आयोडीन थोड़ी सी धात्वीय चमक रखता है।
(ii) अधातुएं न ही आघातवीय हैं, न ही तन्य।
(iv) चालकता-धातुएं बिजली एवं ताप की कुचालक होती हैं। ग्रेफाइट ही एक ऐसी अधातु है, जो बिजली एवं ताप की सुचालक है।
(v) कठोरता-अधातुएं प्राय: नर्म होती हैं, किंतु हीरा अधातु होते हुए भी कठोरतम पदार्थ है।

अधातुओं के रासायनिक गुण –
(i) कार्बन की ऑक्सीजन से क्रिया-अधातुएं ऑक्सीजन के साथ क्रिया करके अम्लीय ऑक्साइड बनाती हैं।
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कार्बन डाइऑक्साइड कार्बन डाइऑक्साइड का स्वभाव अम्लीय है। कार्बन डाइऑक्साइड पानी के साथ क्रिया करके कार्बोनिक अम्ल बनाती है।
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(ii) नाइट्रोजन और सल्फर की हाइड्रोजन के साथ क्रिया-हाइड्रोजन अनुकूल परिस्थितियों में नाइट्रोजन के साथ क्रिया करके अमोनिया बनाती है, जबकि सल्फर के साथ क्रिया करके हाइड्रोजन सल्फाइड बनाती है।
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(iii) सल्फर और हाइड्रोजन की ऑक्सीजन के साथ क्रिया-सल्फर ऑक्सीजन की उपस्थिति में जलकर क्रिया करके सल्फर डाइऑक्साइड बनाता है। हाइड्रोजन, ऑक्सीजन के साथ क्रिया करके पानी बनाता है।
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(iv) फॉस्फोरस के साथ क्लोरीन की क्रिया-फॉस्फोरस क्लोरीन के साथ क्रिया करके फॉस्फोरस ट्राइक्लोराइड बनाती है।
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प्रश्न 3.
धात्विकी क्या है ? इस प्रक्रम में प्रयुक्त पदों का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।
अथवा
अयस्क से धातु-निष्कर्षण में प्रयुक्त चरणों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर-
धात्विकी- अयस्कों से धातुओं के निष्कर्षण और बाद में उनको परिष्कृत करके उपयोग में लाए जाने योग्य बनाने के प्रक्रम को धात्विकी (metallurgy) कहते हैं।
धात्विकी प्रक्रम में प्रयुक्त पद-धात्विकी प्रक्रम में मुख्यतः तीन पद होते हैं-
(I) अयस्क की समृद्धि,
(II) अपचयन तथा
(III) धातुओं का शुद्धिकरण।

I. अयस्क की समृद्धि
भू-खनन से प्राप्त अयस्कों में मिट्टी, बालू, चट्टानी पदार्थ आदि अशुद्धियाँ होती हैं जिन्हें गैंग कहते हैं। अयस्क से धातु के निष्कर्षण से पहले इन अशुद्धियों को हटाना आवश्यक होता है। अयस्क से गैंग हटाने की प्रक्रिया सांद्रण कहलाती है जो उनके भौतिक रासायनिक गुणधर्मों से भिन्नता पर आधारित होती है।

इसके लिए कई विधियाँ प्रयुक्त की जाती हैं जो निम्नलिखित हैं-
1. चंबकीय विधि-यह विधि चुंबकीय कणों (आयरन, कोबाल्ट, निक्कल) की अशुदधियों को अलग करने के लिए अपनाई जाती है। जो खनिज चुंबकीय प्रकृति के होते हैं वे चुंबकीय क्षेत्र की ओर आकर्षित होते हैं जबकि गैंग आदि आकर्षित नहीं होते। क्रोमाइट तथा पाइरोल्युसाइट अयस्क इसी विधि द्वारा सांद्रित किए जाते हैं। इस विधि में पीसे हुए अयस्क को एक कन्वेयर बैल्ट के ऊपर रखते हैं। कन्वेयर बैल्ट दो रोलरों के ऊपर से गुज़रती है जिनमें से एक चुंबकीय होता है। जब अयस्क चुंबकीय किनारे पर से नीचे आता है तो चुंबकीय और अचुंबकीय पदार्थ दो अलग अलग ढेरों में एकत्रित हो जाते हैं। लोहे के अयस्क मैग्नेटाइट का सांद्रण इसी विधि द्वारा किया जाता है।
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2. द्रवचालित धुलाई-इस विधि में बारीक पिसे हुए अयस्क को पानी की तेज़ धारा में धोया जाता है। इस तेज़ धारा में गैंग हल्के कण बह जाते हैं जबकि भारी खनिज कण तली में बैठ जाते हैं। टिन और लैड के अयस्क इसी विधि द्वारा सांद्रित किये जाते हैं।

(iii) फैन प्लवन विधि-इस विधि में बारीक पिसे हुए अयस्क को जल एवं किसी उपयुक्त तेल के साथ एक बड़े टैंक में मिलाया जाता है। खनिज कण पहले से तेल से भीग जाते हैं जबकि गैंग के कण पानी से भीग जाते हैं। अब इस मिश्रण में से दबाव अधीन वायु प्रवाहित की जाती है जिससे खनिज कण युक्त तेल के झाग या फैन बन जाते हैं जो जल की सतह पर तैरने लगते हैं जिन्हें बड़ी सरलता से जल के ऊपर से निकाला जा सकता है। तांबा, सीसा तथा जिंक के सल्फाइडों के सांद्रण के लिए इस विधि का प्रयोग किया जाता है।
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II. अपचयन
1. रासायनिक पृथक्करण (Chemical Separation)रासायनिक पृथक्करण में खनिज तथा गैंग के मध्य रासायनिक गुणों के अंतर का उपयोग किया जाता है। इसकी एक मुख्य विधि है-बेयर की विधि जिस द्वारा बॉक्साइट से एल्यूमीनियम ऑक्साइड प्राप्त किया जाता है। बेयर विधि द्वारा एल्यूमीनियम अयस्क का सांद्रण-इस विधि में बॉक्साइट को गर्म सोडियम हाइड्रोक्साइड के साथ अपचयित किया जाता है जो जल में घुलनशील है। गैंग को छान कर अलग कर दिया जाता है। एल्यूमीनियम का अवक्षेपण एल्यूमीनियम हाइड्रोक्साइड के रूप में प्राप्त होता है जिसके बाद एल्यूमीनियम हाइड्रोक्साइड को गर्म करके शुद्ध एल्यूमीनियम ऑक्साइड प्राप्त लिया जाता है। विभिन्न अभिक्रिया निम्नलिखित प्रकार से है-
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2. सांद्रित अयस्क का धातु ऑक्साइड में बदलना भर्जन- इस क्रिया में अयस्क को वायु की उपस्थिति में गर्म करके धातु ऑक्साइड प्राप्त करते हैं, जो आसानी से अपचयित होकर धातु को अलग कर देता है। जिंक ब्लेंडी में जिंक सल्फाइड होता है। जब सांद्रित जिंक ब्लैंड अयस्क (जिंक सल्फाइड) को वायु में भर्जित किया जाता है तो वह ऑक्सीकृत होकर जिंक ऑक्साइड बना देता है।
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निस्तापन- इस क्रिया में अयस्क को वायु की अनुपस्थिति में गर्म करके नमी तथा वाष्पशील अशुद्धियों को . अलग कर देते हैं। जब किसी कार्बोनेट अयस्क को गर्म किया जाता है, तो वह विघटित होकर धातु ऑक्साइड बना देता है।
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3. धातु ऑक्साइड से धातु प्राप्त करना-धातु ऑक्साइडों से धातु प्राप्त करने के लिए उन्हें किसी अपचायक के साथ गर्म करते हैं। ज़िंक, लोहा, टिन तथा निकल जैसी धातुओं के ऑक्साइडों का अपचयन करके धातुएँ प्राप्त करने के लिए कार्बन का अपचायक के रूप में उपयोग किया जाता है।
ZnO(s) + C(s) → Zn(s) + CO(g)
मध्यम अभिक्रियाशीलता वाली धातुओं के ऑक्साइडों का अपचयन करने के लिए सोडियम, कैल्शियम तथा एल्यूमीनियम जैसी अभिक्रियाशील धातुएँ भी अपचायक के रूप में उपयोग की जा सकती हैं।
3MnO2(s) + 4Al(s) → 3Mn (1) + 2Al2O3(s) + ऊष्मा

III. धातुओं का शुद्धिकरण धात्वीय ऑक्साइडों के अपचयन के बाद प्राप्त हुई धातुओं में कई प्रकार की अशुद्धियाँ होती हैं। इसलिए शुद्ध धातु प्राप्त करने के लिए इन अशुद्धियों को अलग करना बहुत ज़रूरी होता है। शुद्धिकरण के लिए अपनाई जाने वाली विधि अशुद्धियों और धातु के गुणों पर निर्भर करती है।

कुछ विधियों का विवरण नीचे दिया गया है –
1. आसवन विधि-कम उबाल दर्जे वाली धातुओं को इस विधि द्वारा शुद्ध किया जाता है। जिंक, कैल्शियम और मरकरी जैसी धातुएं शीघ्र वाष्प के रूप में बन जाती हैं इसलिए उन्हें आसवन विधि द्वारा शुद्ध किया जाता है।

2. गलनिक पृथक्करण-इस प्रक्रिया में ढलान युक्त भट्ठी का उपयोग किया जाता है। भट्ठी का ताप धातु के गलनांक से कुछ अधिक रखा जाता है। अशुद्ध धातु को भट्ठी के सबसे ऊपरी सिरे पर रखा जाता है। गर्म करने पर धातु तो पिघल कर नीचे की ओर बह जाती है जबकि ठोस अशुद्धियां वहीं रह जाती हैं। इस विधि द्वारा टिन, सीसा तथा बिस्मथ का परिष्करण किया जाता है।’

3. विद्युतीय शुद्धिकरण-धातुओं का परिष्करण धातुओं का शुद्धिकरण कहलाता है। तांबा, टिन, सीसा, सोना, जिंक, क्रोमियम तथा निक्कल जैसी शुद्ध धातु एनोड कैथोड की पट्टी को कैथोड तथा अशुद्ध धातु की पट्टी को एनोड के रूप में लिया जाता है। वैद्युत् अपघटय के अशुद्ध तांबे रूप में धातु का कोई लवण लिया जाता है।

‘जब  की छड़ विदयुत् अपघटन सेल में से धारा प्रवाहित करते हैं तो धातु कैथोड पर जमा हो जाता है तथा एनोड पर स्थित अन्य अभिक्रियाशील धातुएं अपघट्य के घोल में पहुंच शुद्ध तांबे की छड़ कॉपर सल्फेट जाती हैं। कम अभिक्रियाशील धातुएं जैसे सोना तथा चांदी विद्युत् अपघटनी सेल की तली में गिर जाती हैं, चित्र-धातुओं के शदधिकरण के लिए विदयुत अपघटन जिन्हें प्राप्त कर लिया जाता है।
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यदि तांबे को परिष्कृत करना हो तो विद्युत्-अपघटय के रूप में कॉपर सल्फेट का अम्लीकृत घोल किया जाता है तथा सैल में होने वाली अभिक्रियाएं निम्नलिखित होती हैं।
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प्रश्न 4.
धातुओं एवं अधातुओं के बीच कैसे विभेद करेंगे ?
उत्तर-
धातुओं और अधातुओं के गुणों में विभेद
भौतिक गुणों में विभेद

धातुएं (Metals) अधातुएं (Non-Metals)
(1) धातुएं सामान्य ताप पर ठोस होती हैं परंतु केवल पारा सामान्य ताप पर तरल अवस्था में होता है। (1) अधातुएं सामान्य ताप पर तीनों अवस्थाओं में पाई जाती हैं। फॉस्फोरस और सल्फर ठोस रूप में, H2, O2, N2
गैसीय रूप में तथा ब्रोमीन तरल रूप में होती हैं।
(2) धातुएं तन्य तथा आघातवर्ध्य तथा लगिष्णु होती हैं। (2) वे प्रायः भंगुर होती हैं।
(3) धातुएं प्राय: चमकदार होती हैं अर्थात् उनमें धात्विक चमक होती है। (3) अधातुओं में धात्विक चमक नहीं होती परंतु हीरा, ग्रेफाइट तथा आयोडीन इसके अपवाद हैं।
(4) धातुएं ऊष्मा तथा विद्युत् की सुचालक होती हैं परंतु बिस्मथ इसका अपवाद है। (4) ग्रेफाइट और गैस कार्बन को छोड़कर सभी अधातुएं कुचालक हैं।
(5) धातुओं के गलनांक तर्थो क्वथनांक अत्यधिक होते (5) अधातुओं के गलनांक तथा क्वथनांक कम होते हैं।
(6)  धातुएं अधिकांशतः कठोर होती हैं परंतु सोडियम तथा पोटाशियम चाकू से काटी जा सकती हैं। (6) इनकी कठोरता भिन्न-भिन्न होती हैं। हीरा सब पदार्थों से कठोरतम है।
(7) धातुओं का आपेक्षिक घनत्व अधिक होता है परंतु Na, K इसके अपवाद हैं। (7) अधातुओं का आपेक्षिक ताप प्रायः कम होता है।
(8) धातुएं अपारदर्शक होती हैं। (8) गैसीय अधातुएं पारदर्शक हैं।

रासायनिक गुणों में विभेद

धातुएं (Metals) अधातुएं (Non-Metals)
(1) धातुएं क्षारीय ऑक्साइड बनाती हैं जिसमें से हैं। (1) अधातुएं अम्लीय तथा उदासीन ऑक्साइड बनाती कुछ क्षार बनाती हैं।
(2) धातुएं अम्लों से अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस पुनः स्थापित करती हैं तथा अनुरूप लवण बनाती हैं। (2) अधातुएं अम्लों में से हाइड्रोजन गैस को पुनः स्थापित नहीं करती हैं।
(3) धातुएं धनात्मक आवेश की प्रकृति की होती हैं। (3) अधातुएं ऋणात्मक आवेश की प्रकृति की होती हैं।
(4) धातुएं क्लोरीन से संयोग करके क्लोराइड बनाती हैं जो वैद्युत् संयोजक होते हैं। (4) अधातुएं क्लोरीन से संयोग कर क्लोराइड बनाती हैं परंतु वे सहसंयोजक होते हैं।
(5) कुछ धातुएं हाइड्रोजन से संयोग करके हाइड्रोक्साइड बनाती हैं जो विद्युत् संयोजक होते हैं। (5) अधातुएं हाइड्रोजन के साथ अनेक स्थाई हाइड्राइड बनाती हैं जो सहसंयोजक होते हैं।
(6) धातुएं अपचायक हैं। (6) अधातुएं ऑक्सीकारक हैं।
(7) धातुएं जलीय विलयन में धनायन बनाती हैं। (7) अधातुएं जलीय विलयन में ऋणायन बनाती हैं।

प्रश्न 5.
संक्षरण से क्या भाव है ? धातुओं के संक्षारण से बचाने के लिए आप क्या करोगे ? (मॉडल पेपर)
उत्तर-
संक्षरण-अयस्क से प्राप्त धातु काफ़ी शुद्ध होती है तथा देखने में सुंदर दिखती है। प्रकृति इसे पुनः उसी रूप में परिवर्तित करने का यत्न करती है। जिस रूप में उसे प्राप्त किया जाता है।

धात्वीय सतह पर वातावरण की गैसें आदि की क्रिया से धात्वीय ऑक्साइड, सल्फाइड, कार्बोनेट और सल्फेट बनते हैं। इस तरह धातु धीरे-धीरे क्षरित होती रहती है। धातुओं के इस प्राकृतिक क्षरण को संक्षरण कहते हैं। आयरन के संक्षरण को जंग लगना भी कहते हैं। जंग लगना एक गंभीर आर्थिक समस्या है। जंग लाल भूरे रंग का एक पाऊडर होता है जो जलीय आयरन ऑक्साइड (Fe2O. xH2O) के रूप में होता है। लोहे को जंग लगने के लिए जल और ऑक्सीजन की उपस्थिति आवश्यकता होती है।
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संक्षरण की रोकथाम के उपाय

  • धातुओं को नमी (आर्द्रता) से बचा कर रखना चाहिए।
  • धातुओं की ऊपरी सतह पर पेंट कर देना चाहिए ताकि इसकी सतह का ऑक्सीजन तथा नमी से संपर्क टूट जाए।
  • धातु की सतह पर ग्रीस या तेल लगाना चाहिए।
  • धातु पर किसी अन्य संक्षारण-रोधी धातु की परत चढ़ा देनी चाहिए।
  • धातु को पिघले हुए ज़िंक में डुबो कर बाहर निकाल लेना चाहिए जिससे इस पर जिंक की परत जम जाए अर्थात् गैल्वनीकरण कर देना चाहिए।

प्रश्न 6.
लोहे का जंग लगने की क्रिया का विवरण दो और इससे बचाव के कोई दो ढंग बताओ।
अथवा
लोहे को जंग से बचाने (rusting of iron) के लिए किन्हीं पांच ढंगों का संक्षिप्त में वर्णन कीजिए।
अथवा
जंग लगना क्या है ? लोहे को जंग लगने से रोकने के लिए दो उपाय बताओ।
उत्तर-
लोहे का जंग लगना (Rusting of Iron)- यह क्रिया निम्नलिखित चरणों में पूरी होती है –
(i) आयरन इलैक्ट्रॉन खो देने पर फैरस आयन बनाता है।
Fe + 2e → Fe2+
(ii) ये फैरस आयन ऑक्सीजन और जल के साथ क्रिया करके फैरिक ऑक्साइड की परत बनाते हैं तथा 8 हाइड्रोजन आयन मुक्त होते हैं।
4Fe2+ + O2 + 4H2O → 2Fe2O3 + 8H+ फैरिक ऑक्साइड

(iii) फैरिक ऑक्साइड जलयोजित (hydrate) होकर जंग बनाता है।
Fe2O3 + x H2O → Fe2O3. x H2Oजलयोजित फैरिक ऑक्साइड

(iv) हाइड्रोजन के आयन इलैक्ट्रॉन प्राप्त करके हाइड्रोजन गैस बनाते हैं।
8H+ + 8e → 4H2

जंग न चिपकने वाला एक यौगिक है। यह परत के बाद दूसरी परत बनकर उड़ता रहता है। इस तरह जंग की एक परत उड़ने के बाद लोहे की मुक्त हुई परत पर फिर जंग लगने लगता है। इस तरह पूरा लोहा जंग से प्रभावित होकर नष्ट हो जाता है। जंग लगने की रोकथाम-संक्षरण एक आर्थिक समस्या है। मानवीय जीवन के लिए जंग लगना बहुत हानिकारक है।

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इसकी रोकथाम के लिए निम्नलिखित विधियाँ हैं-

  • पेंट करना-लोहे की वस्तुओं को पेंट करके या ग्रीस लगाकर जंग लगने से बचाया जा सकता है। ऐसा करने से लोहे की सतह का वातावरण की ऑक्सीजन से संपर्क टूट जाता है।
  • धात्वीय परत चढ़ाना-लोहे की अपेक्षा अधिक सरलता से इलेक्ट्रॉन प्रदान करने वाली धातु की परत चढ़ाकर जंग लगने से रोका जा सकता है। उदाहरणस्वरूप जिंक धातु लोहे की अपेक्षा सरलता से इलेक्ट्रॉन मुक्त करती है। अतः लोहे की वस्तुओं पर जिंक की परत का लेप करके उन्हें जंग लगने से बचाया जा सकता है। इस क्रिया को जिस्तीकरण या गैल्वनीकरण (Galvanisation) कहते हैं।
  • विदयतीय धारा दवारा बचाव-जंग लगते समय बनने वाले फैरस आयनों (Fe2+) को विदयुतीय धारा की सहायता से उदासीन किया जाता है। ऐसा करने के लिए जिस वस्तु को जंग से बचाना हो, उसे कैथोड से जोड़ कर विद्युतीय धारा गुज़ारी जाती है।
  • जंगरोधी घोलों का उपयोग करके-फॉस्फेट और क्रोमेट के क्षारकीय विलयन जंग रोधी होते हैं। क्षारक की उपस्थिति के कारण आयन बनते हैं और ये आयन वस्तु का ऑक्सीकरण नहीं होने देते और इस तरह वस्तु ऑक्सीजन के संपर्क में नहीं आती। यह विलयन रेडीएटरों तथा इंजन के पुों को जंग लगने से बचाने के लिए प्रयुक्त होते हैं।
  • निक्कल तथा क्रोमियम के साथ मिश्रण बनाकर-जब लोहे को निक्कल तथा क्रोमियम के साथ मिलाकर मिश्रित धातु तैयार की जाती है तो (Fe = 73%, Cr= 18%, Ni = 8%) स्टेनलेस स्टील बन जाता है। स्टेनलेस स्टील जंगरोधी होता है। इस प्रकार लोहे को जंग लगने से बचाया जा सकता है।

प्रश्न 7.
आयनिक यौगिकों के सामान्य गुणधर्मों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
आयनिक यौगिकों के सामान्य गुणधर्म ये निम्नलिखित हैं-

  • भौतिक प्रकृति-धनात्मक एवं ऋणात्मक आयनों के बीच दृढ़ आकर्षण बल के कारण आयनिक यौगिक ठोस होते हैं। ये यौगिक प्रायः भंगुर होते हैं तथा दबाव देने पर टूट जाते हैं।
  • द्रवनांक और क्वथनांक-आयनिक यौगिकों का द्रवनांक और क्वथनांक बहुत अधिक होता है क्योंकि इसके मज़बूत अंतर आयनिक आकर्षण को तोड़ने के लिए ऊर्जा की बहुत बड़ी मात्रा की ज़रूरत होती है।
  • विलयशीलता-संयोजक यौगिक प्रायः जल में विलयशील तथा केरोसीन, पेट्रोल आदि जैसे विलायक में अविलयशील होते हैं।
  • विद्युत् चालकता-किसी विलयन से विद्युत् के चालन के लिए आवेशित कणों की गतिशीलता ज़रूरी होती है। आयनिक यौगिकों के जलीय विलयन में आयन विद्यमान होते हैं।

जब विलयन में से विद्युत् गुज़ारी जाती है तो ये आयन विपरीत इलेक्ट्रोड की ओर गति करने लगते हैं। ठोस अवस्था में आयनिक यौगिक विद्युत् का चालन नहीं करते हैं क्योंकि ठोस अवस्था के दृढ़ संरचना के कारण आयनों की गति संभव नहीं होती है परंतु आयनिक यौगिक द्रवित अवस्था में विद्युत् का चालन करते हैं क्योंकि द्रवित अवस्था में विपरीत आवेश वाले आयनों के मध्य विद्युत् स्थैतिक आकर्षण बल, ऊष्मा के कारण काफ़ी शिथिल हो जाता है। इसलिए आयन स्वतंत्र रूप से गमन करते हैं एवं विद्युत् का संवहन करते हैं।

प्रश्न 8.
मिश्र धातु किसे कहते हैं ? इनके बनाने के उद्देश्यों का वर्णन करो।
उत्तर-
मिश्र धातु (Alloys)- किसी धातु का किसी अन्य धातु या अधातु के साथ मिलाकर बनाया गया समांगी मिश्रण मिश्र धातु कहलाता है। जैसे टांका में कलई तथा सीसा (लैड) सामान मात्रा में मिलाया जाता है। उदाहरण के लिए स्टेनलेस स्टील, टांका, पीतल, कांसा, बैलमैटल आदि सभी मिश्र धातु हैं।

मिश्र धातुओं के उपयोग-

  • कठोरता बढ़ाने के लिए-लोहे में कार्बन की मात्रा मिला कर स्टेनलेस स्टील बनाया जाता है जो लोहे से अधिक कठोर होता है। सोने में तांबा तथा चांदी में सीसा मिलाने से उसकी कठोरता अधिक हो जाती है। ड्यूरेलियम, एल्यूमीनियम से बना एक मिश्र धातु है जो अत्याधिक कठोर होता है।
  • शक्ति बढ़ाने के लिए-इस्पात, ड्यूरेलियम आदि मिश्रधातु कठोर होने के कारण शक्तिशाली भी होते हैं।
  • संक्षारण रोकने के लिए-जैसे स्टनलैस स्टील, लोहे तथा जिंक से बनी मिश्र धातु पर जंग नहीं लगता।
  • ध्वनि उत्पन्न करने के लिए-तांबे तथा कलई से बनाई गई मिश्र धातु बैलमैटल होती है जिससे अधिक ध्वनि उत्पन्न की जाती है।
  • गलनांक कम करने के लिए-जैसे रोज-मैटल मिश्र धातु है। इसका गलनांक कम होता है। यह बिस्मथ, कलई और सीसे से बनती है।
  • उचित सांचे में ढालने के लिए-कांसा तथा टाइप मैटल।
  • रंग परिवर्तन के लिए-तांबे तथा एल्यूमीनियम से बनी एल्यूमीनियम ब्रांज मिश्रधातु का रंग सुनहरी होता है।
  • घरेलू उपयोग–घरों, कारखानों, दफ्तरों में सभी जगह मिश्रधातुओं का उपयोग होता है जैसे घर के बर्तन, अलमारी, पंखे, फ्रिज, आभूषण आदि में मिश्रधातुओं का उपयोग होता है।

प्रश्न 9.
धातुओं की अभिक्रियाशीलता क्रम का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
धातुओं की अभिक्रियाशीलता क्रम-सभी धातुओं की अभिक्रियाशीलता की दर भिन्न-भिन्न होती है। कुछ धातुएं जैसे सोडियम, पोटाशियम तथा कैल्शियम आदि अत्यधिक क्रियाशील हैं। ये धातुएं ऑक्सीजन से संयोग करके ऑक्साइड तथा हाइड्रोजन से अभिक्रिया करके हाइड्राइड बनाती हैं। कुछ धातुएं अपेक्षाकृत कम अभिक्रियाशील होती हैं जैसे-लोहा, जिंक आदि परंतु कुछ धातुएं बिलकुल कम क्रियाशील होती हैं जैसे सोना, चांदी। धातुओं की अभिक्रियाशीलता उनके इलेक्ट्रॉन देने की प्रवृत्ति पर निर्भर करती है। धातुओं को अभिक्रियाशीलता के आधार पर उनकी क्रियाशीलता के घटते क्रम के अनुसार लिखा जाता है जिसे धातुओं की अभिक्रियाशीलता क्रम कहते हैं।

अभिक्रियाशीलता क्रम में धातुएं-
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 3 धातु एवं अधातु 18

प्रश्न 10.
धातुओं के तीन भौतिक तथा दो रासायनिक गुण लिखो। उत्तर-

धातुओं के भौतिक गुणधर्म-

  • धात्विक चमक-शुद्ध धातुओं की सतहें चमकीली होती है। इस गुणधर्म को धात्विक चमक (metallic lustre) कहते हैं ; जैसे-सोने में पीले रंग की, ताँबे में लाल-भूरे रंग की, एल्यूमीनियम में सफेद रंग की चमक होती है।
  • कठोरता-धातुएँ सामान्यतः कठोर होती हैं। विभिन्न धातुओं की कठोरता भिन्न-भिन्न होती है। कॉपर (ताँबा), आयरन (लोहा), एल्यूमिनियम अत्यंत कठोर धातुएँ हैं, जबकि सोडियम, पोटैशियम मृदु धातुएँ हैं।
  • आघातवर्ध्यता- जो धातुएँ हथौड़े द्वारा पीट-पीट कर पतली चादरों में परिवर्तित हो जाती हैं आघातवर्धनीय कहलाती हैं। इस गुणधर्म को आघातवर्ध्यता (malleability) कहते हैं। सोना तथा चाँदी सर्वाधिक आघातवर्धनीय धातुएँ हैं।
  • तन्यता- वे धातुएँ जिनसे अत्यंत पतले तार खींचे जा सकते हैं, तन्य कहलाती हैं तथा इस गुणधर्म को तन्यता (ductility) कहते हैं। सोना तथा चाँदी सर्वाधिक तन्य धातुएँ हैं।
  • उष्मीय चालकता-धातुएँ सामान्यतः ऊष्मा की सुचालक होती हैं। चाँदी ऊष्मा की सर्वश्रेष्ठ सुचालक है। अन्य धातुएँ जो ऊष्मा की सुचालक हैं के उदाहरण कॉपर, एल्यूमीनियम आदि हैं।
  • वैद्युत् चालकता-धातुएँ विद्युत् की सुचालक होती हैं। सिल्वर, कॉपर आदि विद्युत् की सुचालक हैं।

धातुओं के रासायनिक गुणधर्म
1. धातुओं की ऑक्सीजन से अभिक्रिया-सभी धातुएँ ऑक्सीजन से संयोग करके धात्विक ऑक्साइड बनाती हैं। क्योंकि सभी धातुओं की अभिक्रियाशीलता भिन्न-भिन्न है। इसलिए वे अलग-अलग ताप पर ऑक्सीजन से संयोग करते हैं।
(i) सामान्य ताप पर Na तथा K ऑक्सीजन से संयोग करके ऑक्साइड बनाते हैं जो पानी में घुलने पर हाइड्रोक्साइड बनाते हैं।
4Na (s) + O2 (g) → 2Na2O (s)
Na2O (s) + H2O → 2NaOH (aq)

(ii) मैग्नीशियम रिबन वायु में जलकर मैग्नीशियम ऑक्साइड बनाता है।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 3 धातु एवं अधातु 1

(iii) तांबा तथा लोहा शुष्क वायु में उच्च तापक्रम पर ऑक्सीजन से संयोग करते हैं।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 3 धातु एवं अधातु 2
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 3 धातु एवं अधातु 3

2. धातुओं की तनु अम्लों से अभिक्रिया-धातुएं तनु अम्लों से अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस मुक्त करती हैं। विभिन्न धातुओं अम्लों के साथ अभिक्रियाशीलता की दर भिन्न-भिन्न होती है।

(i) Na, K, Zn, Mg, Fe आदि अवरोही क्रम में अभिक्रियाशील हैं।
2Na + 2HCl → 2NaCl + H2
Mg + 2HCl → MgCl2+ H2
Zn + H2SO4 → ZnSO4 + H2

(ii) तनु नाइट्रिक अम्ल Cu, Ag, Pb, Hg धातुओं के साथ क्रिया करके NO (नाइट्रोजन ऑक्साइड) बनाता
3Cu + 8HNO3 → 3Cu (NO3)2 + 2NO + 4H2O
3Ag + 4HNO3 → 3AgNO3 + NO + 2H2O

(iii) Mg तथा Mn के साथ तनु नाइट्रिक अम्ल हाइड्रोजन गैस मुक्त करते हैं।
Mg + 2HNO3 → Mg(NO3)2 + H2

(iv) सोना तथा प्लाटीनम तनु अम्ल से अभिक्रिया नहीं करते।

3. धातुओं की क्लोरीन से अभिक्रिया-धातुएं, क्लोरीन से संयोग करके अपने क्लोराइड बनाती हैं।
Ca + Cl2 → CaCl2

4. धातुओं की हाइड्रोजन से अभिक्रिया-क्रियाशील धातुएं Na, K, Ca आदि हाइड्रोजन से संयोग करके अपने हाइड्राइड बनाती हैं।
2Na + H2 → 2NaH (सोडियम हाइड्राइड)
Ca + H2 → CaH2 (कैल्शियम हाइड्राइड)

5. धातुओं की पानी से अभिक्रिया –
(i) जब पानी सामान्य ताप पर हो तो Na, K, Ca आदि क्रिया करके हाइड्रोजन गैस मुक्त करती है।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 3 धातु एवं अधातु 4
(ii) जब पानी उबलता हो तो Mg, Zn, Fe अभिक्रिया करके ऑक्साइड बनाते हैं।
Mg + H2O → MgO + H2
3Fe + 4H2O → Fe3O4 + 4H2

लघु उत्तरात्मक प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
दो धातुओं के नाम बताओ जो ऊष्मा तथा विद्युत् की सुचालक हों। ऊष्मा की सबसे अधिक तथा सबसे कम चालक धातुओं के नाम लिखो।
उत्तर-
कॉपर और एल्यूमीनियम दोनों धातुएं ऊष्मा और विद्युत् की सुचालक हैं। चांदी ऊष्मा की सर्वोत्तम चालक है जबकि सीसा धातुओं में सबसे कम चालक है।

प्रश्न 2.
धातुओं की तन्यता गुण को उदाहरण सहित परिभाषित करें।
उत्तर-
तन्यता- धातु के पतले तार के रूप में खींचने की क्षमता को तन्यता कहा जाता है। सोना सबसे अधिक तन्य धातु है।

प्रश्न 3.
धातुओं का कौन-सा गुण उनको लाक्षणिक रासायनिक गुण प्रदान करता है ?
उत्तर-
धातुएं अपने इलेक्ट्रॉन को खोकर धनात्मक आयन बनाती हैं, इसलिए ये विद्युत् धनात्मक तत्व हैं। धातुओं का यह आयनीकरण गुण उनको रासायनिक गुण प्रदान करता है। जैसे-Mg धातु को इलेक्ट्रॉन खोकर Mg का धनात्मक आयन बनाता है।
Mg →Mg2+ + 2e

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 3 धातु एवं अधातु

प्रश्न 4.
आयनिक यौगिक किस अवस्था में पाए जाते हैं ? आयनिक यौगिकों के क्वथनांक एवं द्रवनांक पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर-
धातु से अधातु में इलेक्ट्रॉन के स्थानांतरण द्वारा बने यौगिकों को आयनिक यौगिक या वैद्युत् संयोजक यौगिक कहते हैं। उदाहरण-NaCl, CaCl2, CaO, MgCl2, | आयनिक यौगिकों का क्वथनांक एवं द्रवनांक बहुत अधिक होता है क्योंकि इसके मज़बूत अंतर आयनिक आकर्षण को तोड़ने के लिए ऊर्जा की अत्याधिक मात्रा की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 5.
खनिज और अयस्क में अंतर लिखिए।
उत्तर-
खनिज और अयस्क में अंतर –

खनिज (Minerals) अयस्क (Ores)
(1) जिन प्राकृतिक पदार्थों में धातुओं के यौगिक पाए जाते हैं वह खनिज कहलाते हैं। (1) जिन खनिजों से लाभदायक तथा सुविधापूर्वक ढंग से धातुएँ प्राप्त की जा सकती हैं उन खनिजों को अयस्क कहते हैं।
(2) अनेक खनिजों में धातु की प्रतिशत मात्रा काफ़ी बड़ी मात्रा होती है जबकि अन्य में धातु की प्रतिशत मात्रा बहुत कम होती है। (2) धातुओं की प्रतिशत मात्रा सभी अयस्कों में पर्याप्त होती है।
(3) कुछ खनिजों में बहुत अधिक अशुद्धियाँ होती हैं जो धातु के निष्कर्षण में रुकावट डालती हैं। (3) अयस्कों में कोई भी आपत्तिजनक अशुद्धियाँ नहीं होती।
(4) सभी खनिजों को धातु निष्कर्षण के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता। सभी खनिज अयस्क नहीं होते। (4) सभी अयस्कों को धातु निष्कर्षण के लिए उपयोग किया जा सकता है।

प्रश्न 6.
विभिन्न धातुओं की जल के साथ अभिक्रिया का वर्णन करें।
उत्तर-
धातुओं की जल के साथ अभिक्रिया-जल के साथ अभिक्रिया करके धातु, हाइड्रोजन गैस तथा धातु ऑक्साइड बनाते हैं। ये जल में घुलकर धातु हाइड्रोक्साइड बनाते हैं परंतु सभी धातु जल के साथ अभिक्रिया नहीं करते हैं। पोटैशियम एवं सोडियम जैसे धातु ठंडे जल के साथ तेज़ अभिक्रिया करते हैं। सोडियम तथा पोटैशियम की अभिक्रिया इतनी तेज़ तथा ऊष्माक्षेपी होती है कि इससे उत्सर्जित हाइड्रोजन तत्काल आग पकड़ लेती है।
2K (s) + 2H2O (l) → 2KOH (aq) + H2 (g) + ऊष्मीय ऊर्जा
2Na (s) + 2H2O (l) → 2NaOH (aq) + H2 (g) + ऊष्मीय ऊर्जा
जल के साथ कैल्सियम की अभिक्रिया थोड़ी मंद होती है। इसमें उत्सर्जित ऊष्मा हाइड्रोजन के प्रज्वलित होने के लिए पर्याप्त नहीं होती है। .
Ca (s) + 2H2O (l) → Ca (OH)2(aq) + H2 (g)
एल्यूमीनियम, लोहा तथा जिंक जैसे धातु न तो ठंडे जल के साथ और न ही गर्म जल के साथ अभिक्रिया करते हैं। लेकिन भाप के साथ अभिक्रिया करके यह धातु ऑक्साइड तथा हाइड्रोजन प्रदान करते हैं।
2Al (s) + 3H2O (g) → Al2O3 (s) + 3H2(g)
3Fe (s) + 4H2 O (g)→ Fe3O4 (s) + 4H2 (g)
सीसा, कॉपर, चांदी तथा सोना आदि जैसे धातु जल के साथ अभिक्रिया नहीं करते हैं।

प्रश्न 7.
अधातुओं की निम्नलिखित के साथ अभिक्रियाएं लिखिए(a) ऑक्सीजन (b) अम्ल (c) क्लोरीन (d) हाइड्रोजन।
उत्तर-
अधातुएं वैद्युत् ऋणात्मक होती हैं। वे इलेक्ट्रॉनों को आसानी से ग्रहण कर लेती हैं तथा ऋणात्मक रूप से आवेशयुक्त आयन बनाती हैं।
(a) अधातुओं की ऑक्सीजन से अभिक्रिया-अधातुएँ ऑक्सीजन से संयोग करके सहसंयोजक ऑक्साइड बनाती हैं, जो पानी में घुलने पर अम्ल बनाती है।
C+ O2 → CO2
CO2 + H2O → H2CO3 (कार्बोनिक अम्ल)

(ii) S+ O2 → SO2
SO2 + H2O → H2SO (सल्फ्यू रस अम्ल)

(iii)
2H2 + O2 → 2H2O (उदासीन ऑक्साइड)
2C + O2 → 2CO  (उदासीन ऑक्साइड)

(b) अम्लों से अभिक्रिया-अधातुएं अम्लों में हाइड्रोजन को पुनः स्थापित नहीं करती हैं। इस प्रक्रिया को पूर्ण करने के लिए अम्ल H+ आयन के लिए इलेक्ट्रॉन उपलब्ध होने चाहिएं परंतु अधातु स्वयं इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण करती हैं। अतः वे H+ आयन को इलेक्ट्रॉन उपलब्ध नहीं करा सकती हैं। इसलिए अधातुओं की तनु अम्ल के साथ कोई अभिक्रिया नहीं होती है।

(c) क्लोरीन के साथ अभिक्रिया-क्लोरीन के साथ अधातुएं सहसंयोजक आबंध वाले क्लोराइड बनाती हैं।
2P2 + 6Cl2 → 4PCl3 (फॉस्फोरस ट्राइक्लोराइड)
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 3 धातु एवं अधातु 19
C + 2Cl2 → CCl4 (कार्बन टेट्राक्लोराइड)

(d) हाइड्रोजन के साथ अभिक्रिया-अधातुएं, हाइड्रोजन के साथ क्रिया करके हाइड्राइड बनाती हैं।
H2 + S → HS (हाइड्रोजन सल्फाइड)
H+ Cl2 → 2HCl (हाइड्रोजन क्लोराइड)
C + 2H2 → CH4 (मीथेन)
ये हाइड्राइड इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी (सहसंयोजन आबंध) से बनते हैं।

प्रश्न 8.
भर्जन क्रिया क्या है ? इसका उपयोग कब किया जाता है ? इसमें होने वाले परिवर्तनों के लिए रासायनिक क्रियाएं लिखो।
उत्तर-
भर्जन प्रक्रिया (Roasting)-सांद्रण के पश्चात् अयस्क को वायु की उपस्थिति में गर्म करना भर्जन प्रक्रिया कहलाता है। जिंक तथा सीसा के सल्फाइडों को उनके ऑक्साइड में बदलने के लिए भर्जन प्रक्रिया प्रयुक्त की जाती है।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 3 धातु एवं अधातु 20

प्रश्न 9.
यदि सिल्वर नाइट्रेट के घोल में कॉपर की पत्ती को कुछ देर के लिए डुबो कर रखा जाए तो क्या होता है ? हो रही क्रिया का आयनी समीकरण भी लिखो।
उत्तर-
कॉपर, सिल्वर से अधिक क्रियाशील है। जब कॉपर की पत्ती को कुछ देर के लिए सिल्वर नाइट्रेट के घोल में डुबो कर रखा जाता है तो सिल्वर निम्नलिखित क्रिया द्वारा जमा (deposit) हो जाती है और घोल का रंग नीला हो जाता है।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 3 धातु एवं अधातु 21

प्रश्न 10.
कॉपर सल्फेट के घोल को लोहे के बर्तन में रखने से कुछ दिनों पश्चात् बर्तन में कुछ छिद्र हो गए। इस अभिक्रिया को लिखिए। इस अभिक्रिया को अभिक्रियाशीलता के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
अभिक्रियाशीलता के क्रम में लोहा पहले आता है अर्थात् लोहा, कॉपर की अपेक्षा अधिक क्रियाशील है। इसलिए CuSO, के घोल में से लोहा, कॉपर को विस्थापित कर देता है, जिसके कारण लोहे के बर्तन में छिद्र हो जाते हैं। रासायनिक अभिक्रिया
CuSO4 + Fe → FeSO4 + Cu
Cu2+ (aq) + Fe (s) →Fe+2(aq) + Cu (s)

प्रश्न 11.
कॉपर को वायु में खुला छोड़ने पर वह हरे रंग का हो जाता है। क्यों ?
उत्तर-
कॉपर, वायु में उपस्थित आर्द्र कार्बन डाइऑक्साइड के साथ अभिक्रिया करता है, जिससे इसकी सतह से भूरे रंग की चमक धीरे-धीरे खत्म हो जाती है तथा इस पर हरे रंग की परत चढ़ जाती है। यह हरा पदार्थ कॉपर कार्बोनेट होता है।
Cu + CO2 + H2O + O2 → CuCO3.Cu(OH)2

प्रश्न 12.
24 कैरेट सोना क्या है ?
उत्तर-
24 कैरेट सोना-शुद्ध सोने को 24 कैरेट कहते हैं तथा ये काफ़ी नर्म होता है। इसलिए आभूषण बनाने के लिए ये उपयुक्त नहीं होता है। इसे कठोर बनाने के लिए चाँदी या कॉपर के साथ मिलाया जाता है। हमारे देश में प्रायः आभूषण बनाने के लिए 22 कैरेट सोने का उपयोग होता है। इसका मतलब है कि 22 भाग शुद्ध सोने में 2 भाग कॉपर या चाँदी मिश्रित की जाती है।

प्रश्न 13.
सल्फाइड अयस्क को सांद्रण करने में उपयोग होने वाले प्रक्रम का नाम बताइए। सांद्रित सल्फाइड अयस्क को धातु में बदलने में उपयोग होने वाले दो चरणों का संक्षिप्त वर्णन करो।
उत्तर-
सल्फाइड अयस्क के बड़े टुकड़ों को बारीक पीसकर, चूर्ण बना लिया जाता है। अब इसको ‘झाग प्लावन विधि’ द्वारा सांद्रित कर लिया जाता है। सांद्रित सल्फाइड अयस्क को धातु में बदलने के लिए निम्नलिखित दो चरण इस प्रकार हैं-
1. भर्जन- सांद्रित अयस्कों को वायु की उपस्थिति में गर्म करके ऑक्साइडों में परिवर्तित कर लिया जाता है। इस विधि को भर्जन कहते हैं।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 3 धातु एवं अधातु 22
2. अपचयन-सांद्रित अयस्क के ऑक्साइड को अपचायक के साथ गर्म करने से धातु ऑक्सीजन से मुक्त हो जाती है।
ZnO + C → Zn + CO

प्रश्न 14.
कोई अयस्क गर्म करने पर सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) गैस देता है। ऐसे अयस्क से धातु निकालने में सम्मिलित नियम को संक्षेप में लिखो।
उत्तर-
कॉपर धातु के अयस्क कॉपर पाइराइट को गर्म करने पर SO2 गैस बनती है। इस अयस्क से धातु प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित चरण अपनाए जाते हैं
(i) अयस्क को बारीक चूर्ण करके इसमें पानी तथा पाइन आयल मिला दिया जाता है। अब इसमें से वायु को उच्च दाब अधीन प्रवाहित किया जाता है ताकि अशुद्धियां अलग हो जाएं। इस प्रकार अयस्क सांद्रित हो जाती है। यह विधि झाग प्लावन विधि कहलाती है।
(ii) अब सांद्रित अयस्क को भर्जित किया जाता है जबकि CuS का कुछ भाग CuO में बदल जाता है।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 3 धातु एवं अधातु 23
कुछ समय पश्चात् वायु की आपूर्ति रोक दी जाती है।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 3 धातु एवं अधातु 24
इस प्रकार प्राप्त तांबा तरल अवस्था में है और इसे वैद्युत् परिष्करण विधि द्वारा शुद्ध किया जाता है।
(iii) वैद्युत् परिष्करण-इस प्रक्रिया में अशुद्ध कॉपर की छड़ एनोड पर तथा शुद्ध कॉपर की प्लेट कैथोड बनाकर अम्ल की उपस्थिति में कॉपर सल्फेट में से विद्युत् गुजारी जाती है।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 3 धातु एवं अधातु 25

प्रश्न 15.
थर्मिट अभिक्रिया से क्या तात्पर्य है ? लिखिए।
उत्तर-
कुछ विस्थापन अभिक्रियाएं बहुत अधिक ऊष्माक्षेपी होती हैं। इन अभिक्रियाओं में उत्सर्जित ऊष्मा की मात्रा इतनी अधिक होती है कि धातुएँ गलित अवस्था में प्राप्त होती हैं। जब आयरन (III) ऑक्साइड (Fe2O3) के साथ एल्यूमीनियम की अभिक्रिया की जाती है तो अत्याधिक ऊष्मा उत्पन्न होती है।
Fe2O3(s) + 2Al (s) → 2Fe(I) + Al2O3 (s) + ऊष्मा
इसे थर्मिट अभिक्रिया कहते हैं। इसके उपयोग से रेलवे पटरियों और मशीनी दरारों को जोड़ा जाता है।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 3 धातु एवं अधातु

प्रश्न 16.
अधातुओं के पाँच प्रमुख उपयोग लिखिए।
उत्तर-
अधातुओं के उपयोग-

  • हाइड्रोजन को वनस्पति तेलों से वनस्पति घी बनाने में प्रयुक्त किया जाता है।
  • कार्बन प्रमुख अधातु है जो हमें विटामिन, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट्स, एंजाइम आदि प्रदान करती है। ग्रेफाइट विभिन्न प्रकार के सैलों में इलेक्ट्रोड के रूप में प्रयुक्त होता है।
  • नाइट्रोजन का उपयोग अमोनिया, नाइट्रिक अम्ल और उर्वरक बनाने में होता है। वायु में नाइट्रोजन की उपस्थिति दहन की दर को नियंत्रित करती है।
  • ऑक्सीजन की उपस्थिति हमारे जीवन का आधार है। दहन क्रिया भी इसी की उपस्थिति के कारण संभव होती है।
  • गंधक अनेक प्रकार की दवाइयां तथा बारूद बनाने में काम आती है।

प्रश्न 17.
भर्जन और निस्तापन में अंतर लिखिए।
उत्तर-
भर्जन और निस्तापन में अंतर –

भर्जन (Roasting) निस्तापन  (Calcination)
(1) भर्जन का प्रयोग सल्फाइड अयस्कों के लिए अयस्कों के लिए किया जाता है। (1) निस्तापन का प्रयोग कार्बोनेट और हाइड्रेटिड किया जाता है।
(2) भर्जन में अयस्क को वायु की उपस्थिति में गर्म किया जाता है। (2) निस्तापन में अयस्क को वायु की अनुपस्थिति में गर्म किया जाता है।
(3) इसमें SO2 गैस उत्पन्न होती है। (3) इसमें CO2 गैस उत्पन्न होती है।
(4) उदाहरण सांद्रित जिंक के अयस्क को वाय की उपस्थिति में गर्म करके जिंक ऑक्साइड में परिवर्तित किया जाता है। (4) उदाहरण-जिंक कार्बोनेट अयस्क को वाय की अनुपस्थिति में गर्म करके जिंक ऑक्साइड में परिवर्तित किया जाता है।

प्रश्न 18.
आयनिक यौगिक सोडियम क्लोराइड, सोडियम और क्लोरीन से कैसे बनता है ?
उत्तर-
सोडियम आयन और क्लोराइड आयन विपरीत आवेशित होने के कारण एक-दूसरे की ओर आकृष्ट होते हैं और मज़बूत. स्थिर वैद्युत् बल से बंध कर सोडियम क्लोराइड (NaCl) के रूप में उपस्थित रहते हैं। सोडियम क्लोराइड अणु के रूप में नहीं पाया जाता बल्कि यह विपरीत आयनों का समुच्चय होता है।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 3 धातु एवं अधातु 26

प्रश्न 19.
विद्युत् अपघटनी शोधन से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर-
विद्युत् अपघटनी शोधन-कॉपर, जिंक, टिन, निक्कल, चाँदी, सोना आदि जैसी अनेक धातुओं का शोधन विद्युत् अपघटन द्वारा किया जाता है। इस प्रक्रिया में अशुद्ध धातु को ऐनोड तथा शुद्ध धातु की पतली परत को कैथोड बनाया जाता है। धातु के लवण विलयन का उपयोग विद्युत्-अपघट्य के रूप में होता है। विद्युत्अपघट्य में से जब विद्युत् धारा प्रवाहित होती है तब एनोड पर स्थित शुद्ध धातु विद्युत् अपघट्य में घुल जाती है तथा इतनी ही मात्रा में शुद्ध धातु विद्युत्-अपघट्य से कैथोड पर निक्षेपित हो जाती है। विलयशील अशुद्धियाँ विलयन में चली जाती हैं तथा अविलयशील अशुद्धियाँ ऐनोड के नीचे निक्षेपित हो जाती हैं जिसे ऐनोड अवपंक कहते हैं।

प्रश्न 20.
अपचयन प्रक्रिया से क्या तात्पर्य है ? धातुओं के निष्कर्षण में इस प्रक्रिया की कौन-कौन सी विधियां अपनाई जाती हैं ?
उत्तर-
अपचयन (Reduction)-धातुओं के यौगिकों से धातु प्राप्त करने की प्रक्रिया अपचयन कहलाती है। धातुओं की अभिक्रियाशीलता श्रेणी के अनुसार ही विभिन्न धातुओं के लिए निम्नलिखित विधियां अपनाई जाती हैं-
(1) अभिक्रियाशीलता क्रम में नीचे आने वाली धातुओं को केवल वायु में गर्म करने पर ही धातु प्राप्त हो जाती है। जैसे–पारे का अयस्क सिनाबार वायु में गर्म करने पर भर्जित होकर पारा मुक्त कर देता है।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 3 धातु एवं अधातु 27
(2) अभिक्रियाशीलता के मध्य में आने वाली धातुओं के यौगिकों को मुख्यतः कोक से गर्म करके अपचयित किया जाता है। जैसे-लोहा, जिंक, निकिल, टिन धातुएं आदि।।
2ZnO2 + C → 2Zn + CO2

(3) कुछ धातुओं का अपचयन अधिक क्रियाशील धातु द्वारा किया जाता है। जैसे-मैंगनीज़ ऑक्साइड को एल्यूमीनियम द्वारा अपचयित करके मैंगनीज़ प्राप्त किया जाता है।
3MnO2 + 4Al → 3Mn + 2Al2O3

प्रश्न 21.
सोडियम हाइड्रोक्साइड के भंडारण के लिए एल्यूमीनियम के बर्तनों का उपयोग क्यों नहीं किया जाता ?
उत्तर-
सोडियम हाइड्रोक्साइड के भंडारण के लिए एल्यूमीनियम के बर्तनों का उपयोग नहीं किया जाता क्योंकि एल्यूमीनियम सोडियम हाइड्रॉक्साइड के साथ क्रिया करके घुलनशील लवण बनाता है।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 3 धातु एवं अधातु 28

प्रश्न 22.
एल्यूमीनियम के उपयोग बताओ।
उत्तर-
एल्यूमीनियम के उपयोग –

  • एल्यूमीनियम हल्की धातु होने के कारण, हवाई जहाज़ों की बॉडी और मोटर इंजन बनाने के काम आती है।
  • एल्यूमीनियम बर्तन, फोटोफ्रेम तथा घरेलू उपयोग की अनेक वस्तुएं बनाने के काम आती हैं।
  • एल्यूमीनियम बिजली का सुचालक है इसलिए आजकल बिजली के संचारण के लिए प्रयुक्त बिजली की तारें बनाने के काम आता है।
  • एल्यूमीनियम की पत्तियां खाने का सामान, दवाइयां, दूध की बोतलें आदि पैक करने में प्रयुक्त की जाती हैं।
  • एल्यूमीनियम पाउडर सिल्वर पेंट बनाने के काम आता है।
  • एल्यूमीनियम पाउडर एलुमिनो-थरैमी में प्रयुक्त होता है। यह प्रक्रम लोहे की पटरियों तथा मशीनों के टूटे भागों को जोड़ने के काम आता है।

प्रश्न 23.
क्या होता है, जब :
(i) लोहे के ऑक्साइड को कोक से मिलाकर गर्म किया जाता है।
(ii) मैग्नीशियम को तनु लवण के अम्ल से मिलाया जाता है ?
(iii) नीले थोथे के घोल में ज़िंक मिलाया जाता है ?
उत्तर-
(i) लोहे के ऑक्साइड को कोक से मिलाकर जब गर्म किया जाता है तो लोहे का ऑक्साइड अपचयित होकर लोहे में परिवर्तित हो जाता है।
C+O2 → CO2
CO2 + C → 2CO
Fe2O3 + 3CO → 2Fe + 3CO2

(ii) जब मैग्नीशियम को तनु लवण अम्ल से मिलाया जाता है तब हाइड्रोजन गैस उत्पन्न होती है।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 3 धातु एवं अधातु 29
(iii) जब नीले थोथे के विलयन में ज़िंक मिलाया जाता है तब विलयन का नीला रंग समाप्त हो जाता है।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 3 धातु एवं अधातु 30

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 3 धातु एवं अधातु

प्रश्न 24.
एक क्रिया-कलाप द्वारा दर्शाओ कि लोहे को जंग लगने के लिए पानी और ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है ?
अथवा
प्रयोग द्वारा सिद्ध करो कि लोहे को जंग लगने के लिए हवा/ऑक्सीजन तथा नमी का होना आवश्यक है। चित्र भी बनाएं।
उत्तर-
क्रिया-कलाप–तीन परखनलियां ‘A’, ‘B’ और ‘C’ लें। ‘क’ परखनली में लोहे की कुछ कीलें डालें। ‘क’ में पानी डालें। ‘C’ परखनली में कुछ कीलें डालो तथा उसमें कैल्शियम क्लोराइड डालो।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 3 धातु एवं अधातु 31
हवा कैल्शियम क्लोराइड एक जल अवशोषक पदार्थ है। जंग ‘B’ परखनली में कुछ कीलें डालकर, इसमें पानी लगी कीलें डालो। साथ में कुछ तेल भी डालो। कुछ दिन बाद पानी आप देखोगे कि परखनली ‘A’ में पड़ी कीलों को जंग लगना शुरू हो गया। परंतु ‘B’ तथा ‘C’ में रखी कीलों
आसावित पर जंग नहीं लगता क्योंकि ‘B’ में रखी कीलों को क्लोराइड आक्सीजन तथा ‘C’ में पड़ी कीलों को नमी प्राप्त नहीं होती। ‘A’ परखनली में पड़ी कीलों को ऑक्सीजन चित्र-लोहे को जंग लगने की क्रिया तथा पानी (नमी) दोनों प्राप्त होते हैं।

प्रश्न 25.
मिश्रधातु क्या होती है ? यह क्यों बनाई जाती हैं ?
उत्तर-

मिश्र धातु (Alloys)- किसी धातु का किसी अन्य धातु या अधातु के साथ मिलाकर बनाया गया समांगी मिश्रण मिश्र धातु कहलाता है। जैसे टांका में कलई तथा सीसा (लैड) सामान मात्रा में मिलाया जाता है। उदाहरण के लिए स्टेनलेस स्टील, टांका, पीतल, कांसा, बैलमैटल आदि सभी मिश्र धातु हैं।

मिश्र धातुओं के उपयोग-

  • कठोरता बढ़ाने के लिए-लोहे में कार्बन की मात्रा मिला कर स्टेनलेस स्टील बनाया जाता है जो लोहे से अधिक कठोर होता है। सोने में तांबा तथा चांदी में सीसा मिलाने से उसकी कठोरता अधिक हो जाती है। ड्यूरेलियम, एल्यूमीनियम से बना एक मिश्र धातु है जो अत्याधिक कठोर होता है।
  • शक्ति बढ़ाने के लिए-इस्पात, ड्यूरेलियम आदि मिश्रधातु कठोर होने के कारण शक्तिशाली भी होते हैं।
  • संक्षारण रोकने के लिए-जैसे स्टनलैस स्टील, लोहे तथा जिंक से बनी मिश्र धातु पर जंग नहीं लगता।
  • ध्वनि उत्पन्न करने के लिए-तांबे तथा कलई से बनाई गई मिश्र धातु बैलमैटल होती है जिससे अधिक ध्वनि उत्पन्न की जाती है।
  • गलनांक कम करने के लिए-जैसे रोज-मैटल मिश्र धातु है। इसका गलनांक कम होता है। यह बिस्मथ, कलई और सीसे से बनती है।
  • उचित सांचे में ढालने के लिए-कांसा तथा टाइप मैटल।
  • रंग परिवर्तन के लिए-तांबे तथा एल्यूमीनियम से बनी एल्यूमीनियम ब्रांज मिश्रधातु का रंग सुनहरी होता है।
  • घरेलू उपयोग–घरों, कारखानों, दफ्तरों में सभी जगह मिश्रधातुओं का उपयोग होता है जैसे घर के बर्तन, अलमारी, पंखे, फ्रिज, आभूषण आदि में मिश्रधातुओं का उपयोग होता है।

प्रश्न 26.
प्रमुख मिश्र धातुओं के नाम, उनके घटक तथा उपयोग लिखिए।
उत्तर–
प्रमुख मिश्रधातु –
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 3 धातु एवं अधातु 32

प्रश्न 27.
निम्नलिखित मिश्र धातुओं की रचना तथा गुण लिखो
(i) पीतल
(ii) एलनिको
(iii) ड्यूरेलुमिन।
उत्तर-
मिश्र धातु की संरचना और गुण नीचे दिए गए हैं।
(i) पीतल (Brass)-इसमें 70% कॉपर (Cu) तथा 30% जिंक (Zn) होता है। यह बर्तन बनाने के काम आता है।

(ii) एलनिको (Alnico)-इसमें 63% आयरन (Fe), 20% निकल (Ni), 12% एल्यूमीनियम (AI) और 5% कोबाल्ट (Co) होता है। यह स्थायी चुंबक बनाने के काम आता है।

(iii) ड्यूरेलुमिन- इसमें ताँबा (Cu) 4%, एल्यूमीनियम (Al) 95.5% और मैंगनीज़ (Mn) 5% होता है। इसे हवाई जहाज़ों के पुर्जे बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 28.
लोहे को जंग लगने से बचाने के लिए तीन ढंग लिखो।
उत्तर-

लोहे का जंग लगना (Rusting of Iron)- यह क्रिया निम्नलिखित चरणों में पूरी होती है –
(i) आयरन इलैक्ट्रॉन खो देने पर फैरस आयन बनाता है।
Fe + 2e → Fe2+
(ii) ये फैरस आयन ऑक्सीजन और जल के साथ क्रिया करके फैरिक ऑक्साइड की परत बनाते हैं तथा 8 हाइड्रोजन आयन मुक्त होते हैं।
4Fe2+ + O2 + 4H2O → 2Fe2O3 + 8H+ फैरिक ऑक्साइड

(iii) फैरिक ऑक्साइड जलयोजित (hydrate) होकर जंग बनाता है।
Fe2O3 + x H2O → Fe2O3. x H2Oजलयोजित फैरिक ऑक्साइड

(iv) हाइड्रोजन के आयन इलैक्ट्रॉन प्राप्त करके हाइड्रोजन गैस बनाते हैं।
8H+ + 8e → 4H2

जंग न चिपकने वाला एक यौगिक है। यह परत के बाद दूसरी परत बनकर उड़ता रहता है। इस तरह जंग की एक परत उड़ने के बाद लोहे की मुक्त हुई परत पर फिर जंग लगने लगता है। इस तरह पूरा लोहा जंग से प्रभावित होकर नष्ट हो जाता है। जंग लगने की रोकथाम-संक्षरण एक आर्थिक समस्या है। मानवीय जीवन के लिए जंग लगना बहुत हानिकारक है।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 3 धातु एवं अधातु

इसकी रोकथाम के लिए निम्नलिखित विधियाँ हैं-

  • पेंट करना-लोहे की वस्तुओं को पेंट करके या ग्रीस लगाकर जंग लगने से बचाया जा सकता है। ऐसा करने से लोहे की सतह का वातावरण की ऑक्सीजन से संपर्क टूट जाता है।
  • धात्वीय परत चढ़ाना-लोहे की अपेक्षा अधिक सरलता से इलेक्ट्रॉन प्रदान करने वाली धातु की परत चढ़ाकर जंग लगने से रोका जा सकता है। उदाहरणस्वरूप जिंक धातु लोहे की अपेक्षा सरलता से इलेक्ट्रॉन मुक्त करती है। अतः लोहे की वस्तुओं पर जिंक की परत का लेप करके उन्हें जंग लगने से बचाया जा सकता है। इस क्रिया को जिस्तीकरण या गैल्वनीकरण (Galvanisation) कहते हैं।
  • विदयतीय धारा दवारा बचाव-जंग लगते समय बनने वाले फैरस आयनों (Fe2+) को विदयुतीय धारा की सहायता से उदासीन किया जाता है। ऐसा करने के लिए जिस वस्तु को जंग से बचाना हो, उसे कैथोड से जोड़ कर विद्युतीय धारा गुज़ारी जाती है।
  • जंगरोधी घोलों का उपयोग करके-फॉस्फेट और क्रोमेट के क्षारकीय विलयन जंग रोधी होते हैं। क्षारक की उपस्थिति के कारण आयन बनते हैं और ये आयन वस्तु का ऑक्सीकरण नहीं होने देते और इस तरह वस्तु ऑक्सीजन के संपर्क में नहीं आती। यह विलयन रेडीएटरों तथा इंजन के पुों को जंग लगने से बचाने के लिए प्रयुक्त होते हैं।
  • निक्कल तथा क्रोमियम के साथ मिश्रण बनाकर-जब लोहे को निक्कल तथा क्रोमियम के साथ मिलाकर मिश्रित धातु तैयार की जाती है तो (Fe = 73%, Cr= 18%, Ni = 8%) स्टेनलेस स्टील बन जाता है। स्टेनलेस स्टील जंगरोधी होता है। इस प्रकार लोहे को जंग लगने से बचाया जा सकता है।

अति लघु उत्तरात्मक प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
किसी धातु का उदाहरण दीजिए जो कमरे के तापमान पर द्रव होती है ?
उत्तर-
मरकरी (पारा)।

प्रश्न 2.
एक धातु और एक अधातु का नाम लिखिए जो सामान्य तापमान पर द्रव अवस्था में पायी जाती है ?
उत्तर-
धातु : मरकरी (पारा)
अधातु : ब्रोमीन।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित में से कौन-सी धातुएं शरीर के ताप (37°C)पर पिघल जाती है ? गैलियम, मैग्नीशियम, सीज़ियम, एल्यूमीनियम।
उत्तर-
गैलियम तथा सीज़ियम।

प्रश्न 4.
एक ऐसी अधातु का नाम बताइए जो विद्युत् की सुचालक है।
उत्तर-
ग्रेफाइट (कार्बन का अपरूप)।

प्रश्न 5.
एक अधातु X दो विभिन्न रूपों Y तथा Z में उपलब्ध है। Y कठोरतम पदार्थ है जबकिZ विद्युत् का सुचालक है। Y और Z की पहचान बतायें।
उत्तर-
Y-हीरा (डॉयमंड)
Z-ग्रेफाइट
हीरा और ग्रेफाइट, कार्बन के अपरूप हैं
∴ X कार्बन है।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 3 धातु एवं अधातु

प्रश्न 6.
एक तत्व X ऑक्सीजन से क्रिया करके X2O बनाता है। यह ऑक्साइड जल में विलेय है तथा नीले लिटमस को लाल कर देता है। तत्त्व की प्रकृति बताइए अर्थात् क्या यह तत्व धातु है या अधातु ? ।
उत्तर-
क्योंकि तत्व X का ऑक्साइड नीले लिटमस को लाल बना देता है। इसकी प्रकृति अम्लीय है। अतः तत्व X अधातु है।

प्रश्न 7.
धातुओं के ऑक्साइड की प्रकृति क्या होती है ?
उत्तर-
धातुओं के ऑक्साइड की प्रकृति क्षारीय होती है।

प्रश्न 8.
दो उच्च आघातवर्ध्य धातुओं के नाम बताइए।
उत्तर-
चांदी (सिल्वर) तथा सोना (गोल्ड)।

प्रश्न 9.
दो मेटालॉयड्स (उपधातुओं) का नाम बताओ।
उत्तर-

  • सिलिकॉन,
  • आर्सेनिक।

प्रश्न 10.
धातुओं को वायु में खुला छोड़ने पर उनका रंग फीका क्यों पड़ जाता है ?
उत्तर-
उनकी सतह पर ऑक्साइड, कार्बोनेट तथा सल्फाइड की परत के निर्माण के कारण होता है।

प्रश्न 11.
ऐसी धातुओं के नाम बताओ जिन्हें चाकू से आसानी से काटा जा सकता है ?
उत्तर-
सोडियम, पोटाशियम तथा मैग्नीशियम।

प्रश्न 12.
धातुओं को विभिन्न आकार देना क्यों संभव है ?
उत्तर-
धातुओं के आघातवर्ध्यता तथा तन्यता गुणों के कारण।

प्रश्न 13.
सबसे कम एक ऊष्मा चालक धातु का नाम बताओ।
उत्तर-
सीसा (लैड)।

प्रश्न 14.
कौन-सी धातु विद्युत् प्रवाह का अधिक प्रतिरोध करती है ?
उत्तर-
पारा (मरकरी)।

प्रश्न 15.
किन्हीं चार धातुओं के नाम बताओ, जिनकी तारें खींची जा सकती हैं ?
उत्तर-
कॉपर, एल्यूमीनियम, एल्यूमीनियम, आयरन।

प्रश्न 16.
क्षार क्या है ? क्षार की एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर-क्षार-
धात्विक हाइड्रोक्साइड जो जल में विलयशील हैं, क्षार कहलाते हैं। उदाहरण-सोडियम हाइड्रोक्साइड (NaOH)।

प्रश्न 17.
दो उभयधर्मी (Amphoteric Oxides) ऑक्साइडों के नाम बताओ।
उत्तर-

  • एल्यूमिनियम ऑक्साइड
  • ज़िंक ऑक्साइड।

प्रश्न 18.
क्या होता है जब मैग्नीशियम को इसके ज्वलन ताप तक गर्म किया जाता है ?
उत्तर-
मैग्नीशियम सफ़ेद प्रकाश के साथ जलने लगता है और मैग्नीशियम ऑक्साइड बनाता है।

प्रश्न 19.
कौन-सी धातु तनु अम्ल के साथ अभिक्रिया नहीं करती है ?
उत्तर-
कॉपर।

प्रश्न 20.
उन धातुओं के नाम बताओ जो हाइड्रोजन के साथ अभिक्रिया करती हैं ?
उत्तर-
सोडियम, पोटाशियम और कैल्शियम।

प्रश्न 21.
जब कैल्सियम धातु के किसी टुकड़े को पानी में डाला जाता है तो संपन्न होने वाली अभिक्रिया के लिए समीकरण लिखिए।
उत्तर-
Ca + 2H2O → Ca (OH)2 + 4H2

प्रश्न 22.
लाल गर्म लोहे के ऊपर से भाप गुजारने से होने वाली रासायनिक अभिक्रिया के लिए समीकरण लिखिए।
उत्तर-
3Fe + 4H2O → Fe3O4 + H2

प्रश्न 23.
जब कॉपर धातु की पत्ती के जिंक का सल्फेट के विलयन में डाला जाता है तो घटित होने वाली रासायनिक अभिक्रिया की समीकरण लिखिए।
उत्तर-
Zn + CuSO4 → ZnSO4 + Cu.

प्रश्न 24.
दो धातुओं के नाम बताइए जो प्रकृति में मुक्त अवस्था में मिलती हैं ?
उत्तर-

  1. सोना
  2. प्लैटिनम।

प्रश्न 25.
धातुओं के संक्षारण से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर-
संक्षारण- वायु तथा नमी (आर्द्रता) का उपस्थिति में धातुओं की ऊपरी परत का क्षीण होना धातु का संक्षारण कहलाता है।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 3 धातु एवं अधातु

प्रश्न 26.
आघातवर्ध्यता की परिभाषा लिखो।
उत्तर-
आघातवर्ध्यता (Mallbeability)-यह धातुओं का वह गुण है जिसके कारण धातुओं को हथौड़े से पीटकर बिना इसके टूटे धातुओं को पतली चादर के रूप में बदला जाता है।

प्रश्न 27.
तन्यता की परिभाषा लिखो।
उत्तर-
तन्यता (Ductility)-यह धातुओं का वह गुण है जिसके कारण धातुओं को पतली तारों के रूप में बदला जा सकता है।

प्रश्न 28.
हम लोहे से बनी वस्तुओं पर पेंट क्यों करते हैं ?
उत्तर-
लोहे से बनी वस्तुओं पर पेंट किया जाता है ताकि लोहे से बनी वस्तुओं को संक्षारण से बचाया जा सके।

प्रश्न 29.
ऐसी अधातु का उदाहरण दो जो :
(i) विद्युत की सुचालक हो
(ii) चमकीली हो।
उत्तर-
विद्युत की सुचालक अधातु-ग्रेफाइट। चमकीली अधातु-आयोडीन।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Type Questions)
बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
सामान्य अवस्था में द्रव अवस्था में पाई जाने वाली अधातु है
(a) क्लोरीन
(b) ब्रोमीन
(c) फ्लू ओरीन
(d) आयोडीन।
उत्तर-
(b) ब्रोमीन।

प्रश्न 2.
उभयधर्मी ऑक्साइड है
(a) Na2O
(b) BaO
(c) ZnO
(d) K2O.
उत्तर-
(c) ZnO.

प्रश्न 3.
धातुओं को पीट कर पतली चादर बनाया जा सकता है ? इस गुणधर्म को क्या कहते हैं ?
(a) आघातवर्ध्यता
(b) तन्यता
(c) धात्विक चमक
(d) कठोरता।
उत्तर-
(a) आघातवर्ध्यता।

प्रश्न 4.
सक्रियता श्रेणी में सबसे अधिक अभिक्रियाशील धातु कौन-सी है ?
(a) Na
(b) Mg
(c) Au
(d) K.
उत्तर-
(d) K.

प्रश्न 5.
Fe2O3 + 2Al → 2Fe + Al2O3+ ऊष्मा, इस अभिक्रिया का नाम है
(a) एनोडीकरण
(b) थर्माइट
(c) यशदलेपन
(d) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(b) थर्माइट।

प्रश्न 6.
यशदलेपन में किस धातु की परत चढ़ाई जाती है ?
(a) गेलियम
(b) ऐलुमिनियम
(c) जिस्त
(d) चाँदी।
उत्तर-
(c) जिस्त।

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-

(i) अधिक सक्रिय धातु द्वारा कम सक्रिय धातु को उसके लवण के विलयन से विस्थापित करने की क्रिया …………………………. कहलाती है।
उत्तर-
विस्थापन

(ii) मिश्रधातु दो या दो से अधिक धातु अथवा धातु एवं अधातु का ……………. मिश्रण होता है।
उत्तर-
समाँगी

(iii) लोहे के पैन को जंग से बचाने के लिए ……………………. की परत चढ़ाई जाती है।
उत्तर-
जिंक

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 3 धातु एवं अधातु

(iv) सल्फाइड अयस्क को वायु की उपस्थिति में अधिक ताप पर गर्म करने पर यह ऑक्साइड में परिवर्तित हो जाती है। इस प्रक्रिया को …………… कहते हैं।
उत्तर-
भर्जन

(v) धातु के पतले तार के रूप में खींचने की क्षमता को …………………… कहते हैं।
उत्तर-
तन्यता।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 2 अम्ल, क्षारक एवं लवण

Punjab State Board PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 2 अम्ल, क्षारक एवं लवण Important Questions, and Answers.

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 2 अम्ल, क्षारक एवं लवण

दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
उदासीनीकरण क्रिया से क्या अभिप्राय है? इसे प्रयोग द्वारा समझाइए।
उत्तर-
उदासीनीकरण-ऐसी रासायनिक क्रिया जिसमें अम्ल, क्षारकों के साथ मिलकर उन्हें उदासीन कर दें तथा लवण और पानी बना दें, उसे उदासीनीकरण क्रिया कहते हैं। – प्रयोग-एक बीकर में थोड़ा-सा तनु सोडियम हाइड्रोक्साइड का घोल लीजिए। उसमें कुछ बूंदें फिनालफ्थेलीन घोल की डालो।

इसका रंग गुलाबी हो जाएगा। अब एक ब्यूरेट में तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) भरकर उसे चित्र अनुसार ऊर्ध्वाकर स्टैंड में फिट करो तथा बीकर को उसके नीचे रखो। अब ब्यूरेट की सहायता से धीरे-धीरे हाइड्रोक्लोरिक अम्ल बीकर में डालते जाओ और बीकर को हिलाते जाओ। जब घोल का रंग समाप्त हो जाए तो उसमें अम्ल डालना बंद कर दो। अब इस घोल पर नीले और लाल लिटमस का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। अतः अब बीकर में केवल लवण व पानी है जो लिटमस के प्रति उदासीन है। इस क्रिया को उदासीनीकरण क्रिया कहते हैं।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 2 अम्ल, क्षारक एवं लवण 1

प्रश्न 2.
अम्लों के रासायनिक गुण संक्षेप में लिखिए।
उत्तर-
अम्लों के अनेक रासायनिक गुण हैं-
(i) धातुओं से क्रिया-अम्ल सक्रिय धातुओं से क्रिया करते हैं। जिंक मैग्नीशियम लोहा, मैंगनीज़ आदि इनसे क्रिया करके हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करते हैं-
Zn (s) + तनु H2SO4 (aq) → ZnSO4 (aq) + H2 (g)
Mg (s) + तनु 2HCl (aq) → MgCl2 (aq) + H2 (g)

(ii) धातु कार्बोनेट और धातु बाइकार्बोनेट से क्रिया-अम्ल धातु कार्बोनेट और धातु बाइकार्बोनेट से क्रिया कर CO2 उत्पन्न करते हैं।
Na2CO3 + H2SO4 → Na2SO4 + H2O + CO2
NaHCO3 + HCl → NaCl + H2O + CO2

(iii) क्षारकों से क्रिया-अम्ल क्षारकों से क्रिया कर उदासीनीकरण को प्रकट करते हैं। वे लवण तैयार करते हैं।
HCl + NaOH → NaCl + H2O
HCl + KOH → KCl + H2O

(iv) धातु सल्फाइट और बाइसल्फाइट से क्रिया-अम्ल धातु सल्फाइट और धातु बाइसल्फाइट से क्रिया करके SO2 गैस उत्पन्न करते हैं।
CaSO3 + H2SO4 → CasO4 + H2O + SO2 (g)
Na HSO3 + HCl → NaCl + H2O + SO2 (g)

(v) धातु सल्फाइड और हाइड्रोजन सल्फाइड से क्रिया-अम्ल विभिन्न धातु सल्फाइडों तथा हाइड्रोजन सल्फाइड से क्रिया कर H2S गैस उत्पन्न करते हैं।
FeS + H2SO4 → FeSO4 + H2S (g)
KHS + 2HCI — KCl + H2S (g)
(पोटाशियम हाइड्रोजन सल्फाइड)

(vi) धातु क्लोराइडों से क्रिया-जब धातु क्लोराइड को अम्लों के साथ गर्म किया जाता है तो क्रिया होती है।
NaCl + H2SO4 → NaHSO4 + HCl (g)
NaCl + NaHSO4 → Na2SO4 + HCl (g)

(vii) धातु नाइट्रेट से क्रिया-धातु नाइट्रेट से सांद्र अम्ल क्रिया करता है।
NaNO3 + H2SO4 → NaHSO4 + HNO3
NaNO3 + NaHSO4 → Na2SO3 + HNO3

(vii) धातु ऑक्साइड से अम्लों की क्रिया-धातु, ऑक्साइड तनु अम्लों से क्रिया कर धातु के लवण तैयार करते हैं।
Na2O + 2HNO3 → 2NaNO3 + H2O
CuO + 2HCl → CuCl2 + H2O

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 2 अम्ल, क्षारक एवं लवण

प्रश्न 3.
क्षारकों/क्षारों के रासायनिक गुण संक्षेप में लिखिए।
उत्तर-
क्षारकों/क्षारों के महत्त्वपूर्ण रासायनिक गुण निम्नलिखित हैं –
(i) धातुओं से क्रिया-क्षार कुछ धातुओं से क्रिया कर H2 गैस उत्पन्न करते हैं।
Zn + 2NaOH → Na2 ZnO2 + H2 (g) सोडियम जिंकेट
2Al + 2NaOH + 2H2O → 2NaAlO2+ 3H2 सोडियम एलुमिनेट

(ii) वायु से क्रिया-कुछ क्षार वायु में उपस्थित CO2 से क्रिया करते हैं।
2NaOH + CO2 → Na2CO3
2KOH + CO2 → K2CO3

(iii) अम्लों से क्रिया-क्षारक/क्षार अम्लों से क्रिया कर लवण तैयार करते हैं।
NaOH + HCl → NaCl + H2O
Fe(OH)2 + 2HCl → FeCl2+ 2H2O
Ca(OH)2 + 2HCl → CaCl2 + 2H2O

(iv) लवणों से क्रिया-तांबा, लोहा, जिंक आदि के लवण क्षारों/क्षारकों से क्रिया करते हैं और अघुलनशील धात्विक हाइड्रॉक्साइड तैयार करते हैं।
ZnSO4 + 2NaOH → Na2SO4 + Zn(OH)2↓
CuSO4 + 2NH4OH → (NH4)2SO4 + Cu(OH)2
FeCl3 + 3NaOH → 3NaCl + Fe(OH)3↓

प्रश्न 4.
दैनिक जीवन में pH का महत्त्व स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
pH का हमारे दैनिक जीवन में बहुत अधिक महत्त्व है।
(i) मानव और जंतु जगत् में हमारे शरीर की अधिकांश क्रियाएं 7.0 से 7.8 pH परास के बीच काम करती हैं। हम इसी संकीर्ण परास में ही जीवित रह सकते हैं। हमारे रक्त, आँसुओं, लार आदि का pH लगभग 7.4 होता है। यदि यह 7.0 से कम हो जाता है या 7.8 से बढ़ जाता है तो जीवन असंभव-सा हो जाता है। वर्षा के जल से pH का मान जब 7 से कम होकर 5.6 हो जाता है तो उसे अम्लीय वर्षा कहते हैं। अम्लीय वर्षा का जल जब नदियों में बहता है तो नदी के जल का pH का मान कम हो जाता है जिस कारण जलीय जीवधारियों का जीवन कठिन हो जाता है।

(ii) पेड़-पौधों के लिए-पेड़-पौधों की अच्छी वृद्धि और अच्छी उपज के लिए मिट्टी के pH परास की विशेषता बनी रहनी चाहिए। यदि यह अधिक अम्लीय या क्षारीय हो जाए तो उपज पर कुप्रभाव पड़ता है।

(iii) पाचन-तंत्र-हमारे पेट में HCl उत्पन्न होता रहता है जो हमें बिना हानि पहुँचाए भोजन के पाचन में सहायक होता है। अपच की स्थिति में इसमें अम्ल की मात्रा अधिक बनने लगती है। जिस कारण पेट में दर्द और जलन अनुभव होता है। इस दर्द से छुटकारा पाने के लिए ऐंटैसिड जैसे क्षारकों का प्रयोग करना पड़ता है। इसके लिए प्रायः मिल्क ऑफ़ मैग्नीशियम जैसे दुर्बल क्षारक का प्रयोग करना आवश्यक हो जाता है।

(iv) दंत-क्षय-हमारे मुँह के pH का मान 5.5 से कम होने पर दांतों का क्षय शुरू हो जाता है। हमारे दांत कैल्सियम फॉस्फेट से बने होते हैं जो शरीर का सबसे कठोर पदार्थ है। यह जल में नहीं घुलता पर मुँह की pH का 5.5 से कम होने पर यह नष्ट होने लगता है। मुँह में उपस्थित जीवाणु, अवशिष्ट शर्करा और खाद्य पदार्थों के निम्नीकरण से अम्ल उत्पन्न होते हैं। इनसे छुटकारा पाने के लिए क्षारकीय दंत-मंजन का प्रयोग किया जाना चाहिए। इससे अम्ल की अधिकता उदासीन हो जाती है और दांत क्षय से रोके जा सकते हैं।

(v) जीव-जंतुओं के डंक से रक्षा-जब जीव जंतु कभी डंक मार देते हैं तो वे हमारे शरीर में विशेष प्रकार के अम्ल छोड़ देते हैं। मधुमक्खी भिरंड, चींटी आदि मेथैनॉइक अम्ल हमारे शरीर में डंक के माध्यम से पहुंचा देते हैं। इससे उत्पन्न पीड़ा से मुक्ति के लिए डंक मारे गए अंग पर बेकिंग सोडा जैसे दुर्बल क्षारक का प्रयोग करना चाहिए।

(vi) विशेष पौधों से रक्षा-नेटल (Nettle) पौधे के पत्तों पर डंकनुमा बाल होते हैं। उन्हें छू जाने से डंक जैसा दर्द होता है। इन बालों से मेथैनॉइक अम्ल का स्राव होता है जो दर्द का कारण बनता है। पारंपरिक तौर पर इस पीड़ा से मुक्ति डॉक पौधे की पत्तियों को डंक वाले स्थान पर रगड़ कर पाई जाती है।

लघु उत्तरात्मक प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
सूचक किसे कहते हैं ? सूचकों के किस आधार पर भेद किए जाते हैं ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
सूचक-वे पदार्थ जो अम्लीय और क्षारकीय विलयनों में निश्चित रंग परिवर्तन करते हैं उन्हें सूचक कहते हैं।
सूचकों की विशेषताओं और गुणों के आधार पर इनके दो भाग किए जाते हैं –

  1. अम्लीय और क्षारकीय माध्यमों को रंग देने वाले सूचक
  2. अम्लीय और क्षारकीय माध्यमों को गंध देने वाले सूचक।

1. रंग देने वाले सूचक-
(क) लिटमस विलयन-लिचेन पौधों से प्राप्त किया जाने वाला लिटमस बैंगनी रंग का होता है। यह नीले और लाल रंग में विलयन या पत्र के रूप में मिलता है। नीला लिटमस अम्ल की उपस्थिति को लाल रंग में बदल कर प्रदर्शित करता है और लाल लिटमस क्षारक को नीले रंग में बदलता है। लिटमस स्वयं न तो अम्लीय होता है और न क्षारीय।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 2 अम्ल, क्षारक एवं लवण 2
(ख) टरमैरिक (हल्दी)-हल्दी का घोल क्षारकों को लाल-भूरे रंग में बदल देता है। इसी के कारण कपड़े पर लगा सब्जी का निशान क्षारकीय साबुन से धोने पर लाल-भूरा हो जाता है।

(ग) फिनॉलफ्थेलिन-यह संश्लिष्ट सूचक है। यह क्षारकों के साथ गुलाबी रंग बनाता है।

(घ) मिथाइल आरेंज-यह भी संश्लिष्ट सूचक है। यह अम्लीय विलयन को गुलाबी रंग में बदलता है और क्षारक को पीले रंग में परिवर्तित करता है।

2. गंधीय सूचक-प्याज़ के कटे हुए छोटे-छोटे टुकड़े वे नीला गंध और लौंग का तेल अम्लों और क्षारकों के साथ भिन्न गंध उत्पन्न कर इनके परीक्षण में सहायक सिद्ध होते हैं।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 2 अम्ल, क्षारक एवं लवण

प्रश्न 2.
हमारे दैनिक जीवन में अम्लों के चार उपयोग लिखिए।
उत्तर-

  • सिरका हमारे भोजन को पकाने और उसकी सुरक्षा तथा आचार बनाने के काम आता है।
  • हमारे पेट में HCl हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट कर देता है जो भोजन के साथ वहाँ पहुँच जाते हैं।
  • टारटेरिक अम्ल बेकिंग पाउडर बनाने में काम आता है।
  • कार्बोनिक अम्ल पेय पदार्थों में प्रयुक्त किया जाता है।

प्रश्न 3.
प्रबल अम्ल और दुर्बल अम्ल में अन्तर लिखिए।
उत्तर-
प्रबल अम्ल तथा दुर्बल अम्ल में अन्तर –

प्रबल अम्ल दुर्बल अम्ल
(i) ये पानी में मिलने से पूरी तरह H+ आयनों और ऋणात्मक आयनों में बदल जाते हैं। (i) ये पानी में मिलने से पूरी तरह H+ आयनों और ऋणात्मक आयनों में नहीं बदलते।
(ii) इनमें साम्य स्थापना नहीं होती। (ii) इनमें आयनों तथा अवियोजित अणुओं के बीच साम्य स्थापित हो जाता है।
(iii) उदाहरण-H2SO4, HNO3 (iii) उदाहरण-H2CO3, CH3COOH

प्रश्न 4.
प्रबल क्षारक (Strong base) और दुर्बल क्षारक (Weak base) में अन्तर लिखिए।
उत्तर-
प्रबल क्षारक तथा दुर्बल क्षारक में अन्तर-

प्रबल क्षारक दुर्बल क्षारक
ये पानी में पूरी तरह से घुल कर OH आयन बनाते हैं। उदाहरण-NaOH, KOH ये पानी में आंशिक रूप से घुलते हैं। उदाहरण-Ca(OH)2, Mg(OH)2.

प्रश्न 5.
निम्न यौगिकों को दुर्बल एवं प्रबल अम्ल तथा क्षारक में वर्गीकृत कीजिए
(i) HCI
(ii) H2SO4
(iii) CH3COOH
(iv) HCN
(v) HClO4
(vi) H3PO4
(vii) NaOH
(viii) Ca(OH)2
(ix) NH4OH.
उत्तर-
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प्रश्न 6.
क्षारकों/क्षारों के उपयोग लिखिए।
उत्तर-

  • इनका उपयोग साबुन बनाने में किया जाता है।
  • इन्हें क्षारीय बैटरियों में प्रयुक्त किया जाता है।
  • ऐंटैसिड बनाने में प्रयोग में लाए जाते हैं।
  • पेट्रोल रिफाइनिंग और कागज़ उद्योग में प्रयुक्त होते हैं।
  • कपड़ों से ग्रीज़ के निशान हटाने में प्रयोग किया जाता है।
  • कठोर जल को मृदु बनाने में प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 7.
क्षार और क्षारक में अंतर लिखिए।
उत्तर-
क्षार तथा क्षारक में अंतर-वे क्षारक जो जल में घुलनशील होते हैं उन्हें क्षार कहते हैं। इसका अर्थ है कि सभी क्षार क्षारक होते हैं पर सभी क्षारक क्षार नहीं होते। उदाहरण के लिए फैरिक हाइड्रॉक्साइड [Fe(OH)3] और क्यूपरिक हाइड्रॉक्साइड [Cu(OH)2] क्षारक हैं पर उन्हें क्षार नहीं कह सकते क्योंकि ये जल में घुलनशील नहीं है।

प्रश्न 8.
साधारण नमक के उपयोग लिखिए।
उत्तर-

  • नमक हमारे भोजन का अनिवार्य भाग है।
  • यह अनेक भोज्य पदार्थों को सुरक्षित रखने में काम आता है।
  • यह साबुन उद्योग, पॉटरी आदि में प्रयुक्त होता है।
  • यह हिमकारी मिश्रण बनाने में प्रयुक्त होता है।
  • इस का उपयोग धावन सोडा, विरंजक चूर्ण, कास्टिक सोडा, हाइड्रोक्लोरिक अम्ल, मीठा सोडा आदि बनाने में किया जाता है।

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प्रश्न 9.
विरंजक चूर्ण किस प्रकार तैयार किया जाता है ? इसके सामान्य गुण और उपयोग लिखिए।
उत्तर-
विरंजक चूर्ण का निर्माण शुष्क बुझे हुए चूने पर क्लोरीन की क्रिया से होता है।
Ca(OH)2 (s) + Cl2 (g) → CaOCl2 (s) + H2O (l)
बड़ी मात्रा में इसके निर्माण के लिए एक विशेष टावर लेते हैं जिसमें ऊपर से होपर (Hopper) से शुष्क बुझा हुआ चूना डाला जाता है और नीचे से क्लोरीन गैस तथा गर्म वायु प्रवाहित करते हैं। क्लोरीन ऊपर तक पहुँचतेपहुँचते पूर्णतया अवशोषित हो जाती है और बुझा हुआ चूना विरंजक चूर्ण में बदल जाता है।

गुण-
(i) विरंजक चूर्ण पीले रंग का चूर्ण है, जिसमें क्लोरीन की तीखी गंध होती है।
(ii) यह जल में घुलनशील है, परंतु पूरी तरह विलेय नहीं।
(iii) यह वायु की CO2 के साथ क्रिया करके क्लोरीन खो देता है।
CaoCl2 + CO2 → CaCO3 + Cl2
(iv) यह अम्लों से क्रिया करता है।
CaOCl2+ 2HCl → CaCl +H2O + Cl2
CaOCl2 + H2SO4 → CaSO4 + H2O + Cl2

उपयोग-

  • कागज़ तथा कपड़ा उद्योग में विरंजक के रूप में।
  • पेय जल को रोगाणुरहित करने में।
  • बिना सिकुड़ने वाली ऊन बनाने में।
  • यह क्लोरोफॉर्म बनाने में प्रयुक्त होता है।
  • प्रयोगशाला में यह ऑक्सीकारक का कार्य करता है।

प्रश्न 10.

विरंजक चूर्ण की तैयारी के लिए समीकरण लिखें और इसके लाभ भी लिखें।
उत्तर-
रासायनिक समीकरण –
Ca(OH)2 (s) + Cl2 (g) → CaOCl2 (s) + H2O (l) विरंजक चूर्ण के लाभ-देखें

प्रश्न 11.
धोने का सोडा का रासायनिक सूत्र लिखिए। जब इसके क्रिस्टलों को वायु में खुला छोड़ देते हैं, तो क्या होता है?
उत्तर-
धोने का सोडा अर्थात् धावन सोडा (Washing Soda) का सूत्र Na2CO3 . 10H2O है जब इसके क्रिस्टलों को हवा में उद्भासित किया जाता है तब उत्फुल्लन प्रक्रिया से पानी के नौ अणु बाहर निकल जाते हैं।
Na2CO3 . 10H2O → Na2CO3 . H2O + 9 H2O

प्रश्न 12.
सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट विलयन को गर्म करने पर क्या होता है? इसमें प्रयुक्त रासायनिक अभिक्रिया की समीकरण दीजिए।
उत्तर-
जब सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट के घोल को गर्म किया जाता है तब वह कार्बन डाइऑक्साइड को उत्पन्न करता है और सोडियम कार्बोनेट को बनाता है।
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प्रश्न 13.
CaOCl2 यौगिक का सामान्य नाम क्या है? उस पदार्थ का नाम बताइए जो क्लोरीन के साथ अभिक्रिया करके विरंजक चूर्ण प्रदान करता है।
उत्तर-
यौगिक CaOCl2 का सामान्य नाम विरंजक चूर्ण है। जिस पदार्थ के साथ क्रिया करके क्लोरीन विरंजक चूर्ण बनाता है उसका नाम बुझा हुआ चूना [Ca (OH)2] है।

प्रश्न 14.
बेकिंग सोडे के उपयोग लिखें।
उत्तर-
बेकिंग सोडे के उपयोग-

  • इसका उपयोग बेकिंग पाऊडरों के बनाने में होता है।
  • पेट की खराबी की अवस्था में यह औषधि का कार्य करता है।
  • इसे अग्नि निवारक यंत्र में भी भरा जाता है।

प्रश्न 15.
क्या होता है जब ताज़े चूने के पानी में से कार्बन डाइऑक्साइड गैस गुज़ारी जाती है?
उत्तर-
जब ताज़े चूने के पानी में से थोड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड गैस गुज़ारी जाए तो अघुलनशील कैल्सियम कार्बोनेट के कारण उसका रंग दूधिया हो जाएगा –
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इस घोल में यदि और कार्बन डाइऑक्साइड गैस गुज़ारी जाए तो यह कैल्सियम कार्बोनेट घुलनशील बाइकार्बोनेट ‘ में बदल जाएंगे जिससे चूने के पानी का दूधियापन समाप्त हो जाएगा-
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प्रश्न 16.
pH स्केल क्या है ? यह किसी विलयन की अम्लता और क्षारकता कैसे दर्शाता है ? एक चित्र की सहायता से pH तथा [H3O]+ के पूरे परिसर को प्रकट कीजिए।
उत्तर-
किसी विलयन में उपस्थित हाइड्रोजन आयन की सांद्रता ज्ञात करने के लिए जिस स्केल का प्रयोग किया जाता है इसे pH स्केल कहते हैं। इसमें ‘p’ ‘पुसांस’ (potenz) को प्रकट करता है जो एक जर्मन शब्द है और इसका अर्थ ‘शक्ति’ होता है। इस स्केल से शून्य से 14 तक pH को ज्ञात किया जा सकता है। शून्य अधिक अम्लता को तो 14 अधिक क्षारीयता को प्रकट करता है। pH को एक ऐसी संख्या के रूप में देखा जाता है जो किसी विलयन की अम्लता और क्षारीयता को दर्शाता है। हाइड्रोनियम आयन की सांद्रता जितनी अधिक होगी उसका pH उतना ही कम होगा। किसी उदासीन विलयन के pH का मान 7 होता है। 7 से कम मान अम्लीय विलयन और 7 से अधिक क्षारीय शक्ति को प्रकट करते हैं। सामान्य रूप से pH सार्वजिक सूचक अंतर्भारित पेपर द्वारा ज्ञात किया जाता है।
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कुछ सामान्य पदार्थों को pH पत्र पर दिखाया गया है।

प्रश्न 17.
चित्र में दर्शाए pH पेपर पर नींबू के रस का pH = 2.2 तथा मिल्क आफ मैग्नीशिया का pH = 10 है। इससे क्या तात्पर्य है ?
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उत्तर-
नींबू के रस का pH = 2.2 है जोकि 7 से कम है। अम्लीय प्रकृति तथा 7 से अधिक pH वाला मिल्क ऑफ मैग्नीशियम (pH = 10) क्षारीय प्रकृति का है।

प्रश्न 18.
धावन सोडा किस प्रकार तैयार किया जाता है ? इसके उपयोग लिखिए।
उत्तर-
धावन सोडा (Na2CO3.10H2O) एक रसायन जिसे सोडियम क्लोराइड से प्राप्त किया जा सकता है। बेकिंग सोडा को गर्म करके सोडियम कार्बोनेट प्राप्त किया जा सकता है। सोडियम कार्बोनेट के पुनः क्रिस्टलीकरण से धोने का सोडा प्राप्त होता है। यह भी एक क्षारकीय लवण है।
Na2CO3+ 10H2O → Na2CO3.10H2O (सोडियम कार्बोनेट)
सोडियम कार्बोनेट एवं सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट, कई औद्योगिक प्रक्रियाओं के लिए उपयोगी रसायन है।

धावन सोडे के उपयोग

  • सोडियम कार्बोनेट का उपयोग काँच, साबुन एवं कागज़ उद्योगों में होता है।
  • इसका उपयोग बोरेक्स जैसे सोडियम यौगिक के उत्पादन में होता है।
  • सोडियम कार्बोनेट का उपयोग घरों में साफ-सफाई के लिए होता है।
  • जल की स्थाई कठोरता को हटाने के लिए इसका उपयोग होता है।

प्रश्न 19.
उत्फुल्लन क्या होता है? एक ऐसे यौगिक का नाम दीजिए जो उत्फुल्लन प्रदर्शित करता हो। अपने उत्तर को एक अभिक्रिया द्वारा समझाइए।
उत्तर-
उत्फुल्लन-उत्फुल्लन उस क्रिया को कहते हैं जिसमें किसी यौगिक क्रिस्टल जल के वायु में मुक्त होने की प्रक्रिया होती है। यह क्रिया गर्म करने या अपने आप ही हो जाती है। धावन सोडा में क्रिस्टलीय जल मिला होता है इसीलिए उसका सूत्र Na2CO3 . 10H2O है। जब इसे वायु में रखा जाता है तो यह पानी के 9 अणु खो देता है और एकल हाइड्रेट के रूप में रह जाता है।
Na2CO3 . 10H2O → Na2CO3.H2O + 9H2O
गर्म करने पर यह अपने सारे क्रिस्टलीय जल को खो देता है, Na2CO3 . 10H2O → Na2CO3 + 10H2O

प्रश्न 20.
एक बेकर ने पाया कि उसके द्वारा बनाया केक सख्त और आकार में छोटा है। वह कौन-सा संघटक डालना भूल गया है जिससे केक फूला हुआ बन सकता था? कारण बताइए।
उत्तर-
केक तैयार करते समय बेकरी वाला बेकिंग पाऊडर डालना भूल गया था। जब बेकिंग पाऊडर (सोडियम बाइकार्बोनेट और टारटारिक अम्ल का मिश्रण) डाल कर गर्म किया जाता है तब टारटारिक अम्ल की क्रिया से सोडियम बाइकार्बोनेट, कार्बन डाइऑक्साइड उत्पन्न करता है। इस कार्बन डाइऑक्साइड से केक फूलता है और हल्का होता है। बेकरी वाले का केक सख्त और आकार में छोटा है इसलिए निश्चित है कि वह बेकिंग पाऊडर डालना भूल गया है।

प्रश्न 21.
विरंजक चूर्ण को वायु में खुला छोड़ देने पर क्या होता है?
उत्तर-
जब विरंजक चूर्ण को वायु में उद्भासित किया जाता है तो वह अपने गुणों में विकृति पाता है। वायु में उपस्थित CO2 इससे क्रिया करता है जिस कारण कैल्सियम कार्बोनेट और क्लोरीन गैस उत्पन्न होते हैं। विरंजक चूर्ण के गुण नष्ट हो जाते हैं।
CaOCl2 + CO2 → CaCO3 + Cl2

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प्रश्न 22.
अस्पतालों (Hospitals) में टूटी हुई अस्थियों को जोड़कर बैठाने के लिए उपयोग में लाए जाने वाले यौगिक का नामोल्लेख कीजिए। इसको कैसे निर्मित करते हैं?
उत्तर-
अस्पतालों में टूटी हुई हड्डियों को जोड़ने के लिए जिस यौगिक का प्रयोग किया जाता है उसे प्लास्टर ऑफ़ पेरिस कहते हैं। इसे रासायनिक दृष्टि से कैल्सियम सल्फेट हेमी हाइड्रेट (CaSO4 \(\frac{1}{2}\) H2O) कहते हैं। इसे भट्ठी में जिप्सम को 373 K ताप पर गर्म करके बनाया जाता है।
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प्रश्न 23.
प्लास्टर ऑफ पेरिस का रासायनिक सूत्र और लाभ लिखो।
उत्तर-
प्लास्टर ऑफ पेरिस का रासायनिक सूत्र-
CaSO4 \(\frac{1}{2}\) H2O प्लास्टर ऑफ पेरिस के लाभ-

  • इसे साँचे, खिलौने, सिरेमिक, बर्तन आदि बनाने में प्रयुक्त किया जाता है।
  • सजावटी समान, मूर्तियां आदि इससे बनाए जाते हैं।
  • अस्पतालों में अस्थि विभाग और दंत विभाग के द्वारा इसका पर्याप्त प्रयोग किया जाता है। यह टूटी हुई हड्डियों को जोड़ने के लिए प्रयुक्त किया जाता है और टूटे हुए दाँतों के स्थान पर नकली दाँत लगाने के सांचे इससे बनाए जाते हैं।
  • भवनों की दीवारों और छतों को समतल करने और उन पर डिज़ाइन बनाने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है।
  • अग्निशमन संबंधी सामग्री इससे तैयार की जाती है।
  • प्रयोगशालाओं में गैसों का रिसाव इससे रोका जाता है।

प्रश्न 24.
अनेक लोग पेट में गैस की शिकायत करते हैं। इसका मुख्य कारण क्या है ? इससे आराम पाने के लिए लोग ‘मिल्क ऑफ़ मैग्नीशियम’ का उपयोग क्यों करते हैं?
अथवा
ऐंटएसिड किसे कहते हैं ?
उत्तर-
आमाशय में जठर रस स्रावित होता है जिसमें एंजाइम पेप्सिन और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल होता है। एंजाइम पेप्सिन अम्लीय माध्यम में ही सक्रिय होता है। जब हाइड्रोक्लोरिक अम्ल अधिक मात्रा में स्रावित होता है तब यह आमाशय में जलन उत्पन्न करता है जिसे गैस (Acidity) कहते हैं।

अम्ल की अधिकता को उदासीन करने के लिए जिन पदार्थों का प्रयोग किया जाता है उन्हें ऐंटएसिड (Antacids) कहते हैं। प्रायः लोग ‘मिल्क मैग्नीशियम’ प्रयोग करते हैं जो एक दुर्बल क्षारक है। यह अधिक अम्ल को उदासीन करके आराम पहँचाता है।

प्रश्न 25.
दाँतों की रक्षा के लिए दाँत किस प्रकार की टूथपेस्ट से साफ़ करने चाहिए? क्यों?
अथवा
pH परिवर्तन कैसे दंत-क्षय का कारण है ?
उत्तर-
खाना खाने के पश्चात् मुँह में शर्करा आदि की अधिकता के कारण भोजन के कण आदि जीवाणुओं द्वारा अम्लों में बदल दिए जाते हैं जिससे मुँह का pH कम हो जाता है जो दंत क्षय को उत्पन्न करता है। भोजन के बाद दाँतों की रक्षा के लिए क्षारीय टूथपेस्ट या टूथमंजन का प्रयोग करना चाहिए। इसमें उपस्थित दुर्बल क्षार अतिरिक्त अम्ल को उदासीन कर देते हैं। इससे दंत क्षय की संभावना कम हो जाती है।

प्रश्न 26.
अम्लीय वर्षा क्या है ? मिट्टी की pH को कैसे ज्ञात किया जाता है ?
उत्तर-
अम्लीय वर्षा-वातावरण में उपस्थित SO2, SO3, NO2, आदि गैसों का वर्षा के जल में घुल कर धरती पर वापिस गिरना अम्लीय वर्षा कहलाता है। मिट्टी का pH सार्वत्रिक सूचक अंतर्भारित पेपर द्वारा ज्ञात किया जाता है। इससे मिट्टी की अम्लीय या क्षारीय प्रकृति का पता लग जाता है। वर्षा के जल की pH मान जब 5.6 से कम हो जाती है तो वह अम्लीय वर्षा कहलाती है। मिट्टी का pH ज्ञात करने के लिए परखनली में मिट्टी को घोल कर निस्यंद एकत्रित कर लिया जाता है और सार्वत्रिक सूचक पत्र से pH की जाँच कर ली जाती है।

प्रश्न 27.
दन्त क्षरण क्या होता है ? यह कैसे होता है ?
उत्तर-
दन्त क्षरण-खाना खाने के पश्चात् मुँह में शर्करा की अधिकता होने पर जीवाणुओं द्वारा भोजन के कण अम्लों में बदल दिये जाते हैं जिससे pH का मान 5.5 से कम हो जाता है जो दन्त क्षरण का कारण बन जाता है।

प्रश्न 28.
धावन सोडे का रासायनिक नाम और सूत्र लिखो। इसके दो लाभ भी लिखो।
उत्तर-
धावन सोडे का रासायनिक नाम : सोडियम कार्बोनेट धावन सोडे का रासायनिक सूत्र : -Na2CO3.10H2O धावन सोडे के लाभ-

  • इसका उपयोग कांच, साबुन और कागज़ उद्योगों में होता है।
  • जल की स्थाई कठोरता को दूर करने के लिए इसका उपयोग होता है।

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प्रश्न 29.
धावन सोडा (Washing Soda) के दो उपयोग लिखें।
उत्तर-
जब ताज़े चूने के पानी में से थोड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड गैस गुज़ारी जाए तो अघुलनशील कैल्सियम कार्बोनेट के कारण उसका रंग दूधिया हो जाएगा –
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इस घोल में यदि और कार्बन डाइऑक्साइड गैस गुज़ारी जाए तो यह कैल्सियम कार्बोनेट घुलनशील बाइकार्बोनेट ‘ में बदल जाएंगे जिससे चूने के पानी का दूधियापन समाप्त हो जाएगा-
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प्रश्न 30.
नीचे दिए चित्र में 1 और 2 को अंकित करें।
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उत्तर-

  • बैटरी (ऊर्जा स्रोत)
  • एनोड।

प्रश्न 31.
आयोडीन युक्त नमक के उपयोग की सलाह क्यों दी जाती है ?
उत्तर-
भोजन में आयोडीन की कमी से घंघा रोग (Goitre) हो जाता है। इस रोग से बचने के लिए भोजन में आयोडीन युक्त नमक की सलाह दी जाती है।

अति लघु उत्तरात्मक प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
भोजन का खट्टा स्वाद किस कारण होता है ?
उत्तर-
अम्लों की उपस्थिति के कारण।

प्रश्न 2.
कड़वे स्वाद का कारण कौन होता है ?
उत्तर-
क्षारकों की उपस्थिति।

प्रश्न 3.
जिंक की सोडियम हाइड्रोक्साइड से क्रिया करने पर कौन-सी गैस उत्पन्न होती है?
उत्तर-
हाइड्रोजन गैस।

प्रश्न 4.
धातु कार्बोनेट और धातु हाइड्रोजन कार्बोनेट अम्लों से क्रिया करके कौन-सी गैस उत्पन्न करते हैं?
उत्तर-
कार्बन डाइऑक्साइड।

प्रश्न 5.
चूने के पानी से CO2 को प्रवाहित करने से क्या होता है?
उत्तर-
चूने का पानी दूधिया हो जाता है।

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प्रश्न 6.
चूने के पानी से अधिक CO2 गुज़ारने से चूने के पानी का दूधियापन किस कारण समाप्त हो जाता है?
उत्तर-
जल में विलयशील Ca (HCO3)2 के कारण।

प्रश्न 7.
अधात्विक ऑक्साइड किस प्रकृति के होते हैं ?
उत्तर-
अम्लीय प्रकृति के।

प्रश्न 8.
अम्लों में से विद्युत्-प्रवाह किस कारण होता है ?
उत्तर-
आयनों के कारण।

प्रश्न 9.
अम्लीय विलयन किस आयन को उत्पन्न करता है?
उत्तर-
हाइड्रोजन आयन (H+) को उत्पन्न करता है।

प्रश्न 10.
क्षारक जल में कौन-सा आयन उत्पन्न करते हैं?
उत्तर-
हाइड्रॉक्साइड (OH) आयन।

प्रश्न 11.
क्षार क्या है?
उत्तर-
जल में घुलनशील क्षारक को क्षार कहते हैं।

प्रश्न 12.
अम्लों को तनु करने के लिए क्या करना चाहिए?
उत्तर-
जल में सांद्र अम्ल धीरे-धीरे मिलाना चाहिए न कि सांद्र अम्ल में जल।

प्रश्न 13.
pH स्केल क्या है?
उत्तर-
किसी विलयन में उपस्थित हाइड्रोजन आयन की सांद्रता ज्ञात करने की स्केल को pH स्केल कहते हैं।

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प्रश्न 14.
pH स्केल से कहाँ से कहाँ तक pH ज्ञात कर सकते हैं ?
उत्तर-
0 से 14 तक।

प्रश्न 15.
किसी उदासीन विलयन के pH का मान क्या होगा?
उत्तर-
pH का मान 7 होगा।

प्रश्न 16.
pH स्केल में विलयन का मान 7 से कम हो तो वह क्या दर्शाता है?
उत्तर-
अम्लीय विलयन।

प्रश्न 17.
pH स्केल में विलयन का मान 7 से अधिक हो तो वह क्या दर्शाता है?
उत्तर-
विलयन में OH की सांद्रता अर्थात् क्षार की बढ़ती शक्ति।

प्रश्न 18.
नींबू का रस pH स्केल पर क्या मान दिखाता है?
उत्तर-
लगभग 2.2.

प्रश्न 19.
मिल्क ऑफ मैग्नीशियम pH स्केल पर क्या मान दिखाता है?
उत्तर-
10.

प्रश्न 20.
सोडियम हाइड्रोक्साइड pH स्केल पर क्या मान दिखाता है?
उत्तर-
लगभग 14.

प्रश्न 21.
शुक्र ग्रह का वायुमंडल किससे घिरा है?
उत्तर-
सल्फ्यूरिक अम्ल के मोटे श्वेत और पीले बादलों से।

प्रश्न 22.
हमारा उदर कौन-सा अम्ल उत्पन्न करता है?
उत्तर-
हाइड्रोक्लोरिक अम्ल।

प्रश्न 23.
पेट में अधिक अम्ल का उपचार कैसे किया जाता है?
उत्तर-
ऐटैसिड जैसे क्षारकों द्वारा।

प्रश्न 24.
मुँह में दाँतों का क्षय कब आरंभ होता है?
उत्तर-
pH का मान 5.5 से कम होने पर।

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प्रश्न 25.
डंक मारे गए अंग पर किसके उपयोग से आराम मिलता है ?
उत्तर-
बेकिंग सोडा जैसे दुर्बल क्षारक से।

प्रश्न 26.
सिरके में कौन-सा अम्ल उपस्थित होता है?
उत्तर-
ऐसीटिक अम्ल।

प्रश्न 27.
दही और खट्टे दूध में कौन-सा अम्ल होता है ?
उत्तर-
लैक्टिक अम्ल।

प्रश्न 28.
ऊष्मा उन्मोची क्रियाएँ (Exothermic Reactions) किसे कहते हैं?
उत्तर-
ऊष्मा उन्मोची क्रियाएं-जिन रासायनिक क्रियाओं में ऊष्मा ऊर्जा की उत्पत्ति होती है उन्हें ऊष्मा उन्मोची क्रियाएँ कहते हैं।

प्रश्न 29.
ऊष्मा अवशोषी (Endothermic Reaction) क्रिया किसे कहते हैं ?
उत्तर-
ऊष्मा अवशोषी क्रियाएं-जिन रासायनिक क्रियाओं में ऊष्मा का अवशोषण होता है उन्हें ऊष्मा अवशोषी क्रिया कहते हैं।

प्रश्न 30.
ठोस रूप में सोडियम क्लोराइड (NaCl) विद्युत् का चालक क्यों नहीं होता?
उत्तर-
ठोस सोडियम क्लोराइड में Na+ और Cl तीव्र कूलॉम बलों से आपस में जुड़े रहते हैं और इसमें कोई भी स्वतंत्र आयन नहीं होता, जिस कारण वह विद्युत् का चालक नहीं होता।

प्रश्न 31.
विलेय किसे कहते हैं ?
उत्तर-
विलेय वह यौगिक है, जो जलीय अवस्था में आकर धनात्मक या ऋणात्मक आवेशित आयनों में परिवर्तित हो जाता है।

प्रश्न 32.
शक्तिशाली विलायक (Strong Electrolyte) किसे कहते हैं ?
उत्तर-
वह यौगिक जिसके जलीय घोल की विच्छेदन मात्रा 30% हो उसे शक्तिशाली विलायक कहते हैं।

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प्रश्न 33.
कमज़ोर विलायक (Weak Electrolytes) किसे कहते हैं ?
उत्तर-
वह यौगिक जिसके जलीय घोल की विच्छेदन मात्रा 30% से कम हो उसे कमज़ोर विलायक कहते हैं।

प्रश्न 34.
बेकिंग पाऊडर किसे कहते हैं ?
उत्तर-
बेकिंग पाऊडर मीठा सोडा और टारटैरिक अम्ल के मिश्रण को कहते हैं।

प्रश्न 35.
केक बनाने के लिए बेकिंग पाऊडर में यदि टारटैरिक अम्ल का प्रयोग न किया जाए तो केक का स्वाद कैसा होगा?
उत्तर-
सोडियम कार्बोनेट की उपस्थिति के कारण वह कड़वा होगा।

प्रश्न 36.
अग्निशमन के लिए यंत्रों में किन रसायनों का प्रयोग किया जाता है?
उत्तर-
सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट और सल्फ्यूरिक अम्ल का।

प्रश्न 37.
सोडा-एसिड अग्निशमन यंत्रों से कौन-सी गैस उत्पन्न होती है?
उत्तर-
कार्बन डाइऑक्साइड गैस।

प्रश्न 38.
जल को संक्रमण रहित बनाने में किस यौगिक का सामान्यतः प्रयोग किया जाता है?
उत्तर-
विरंजक चूर्ण (CaOCl2) का।

प्रश्न 39.
विरंजक चूर्ण से किस गैस की गंध आती है?
उत्तर-
क्लोरीन गैस की गंध।

प्रश्न 40.
कई बार तरण-तालों में तैरने से आँखें लाल हो जाती हैं। क्यों ?
उत्तर-
पानी में विरंजक चूर्ण की अधिकता के कारण आँखें लाल हो जाती है।

प्रश्न 41.
इमली तथा चींटी के डंक में कौन-कौन से अम्ल होते हैं ?
उत्तर-
इमली में उपस्थित अम्ल : टारट्रिक अम्ल चींटी के डंक में उपस्थित अम्ल : मेथेनॉइक अम्ल।

प्रश्न 42.
सभी अम्लों एवं क्षारकों में क्या समानताएं होती हैं ?
उत्तर-
(i) अम्ल तथा क्षारक कुछ एक धातुओं के साथ क्रिया करके हाइड्रोजन बनाते हैं।
(ii) अम्ल तथा क्षारक पानी में घुलकर हाइड्रोनियम H3O+ /OH आयन बनाते हैं। ये विलयन की प्रक्रिया ऊष्माक्षेपी है।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Type Questions)

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
अम्लीय विलयन का pH मान होता है
(a) pH >7
(b) pH <7
(c) pH = 7
(d) pH = 14.
उत्तर-
(b) pH <7.

प्रश्न 2.
उदासीन विलयन की pH है
(a) 7
(b) >7
(c) <7
(d) 14.
उत्तर-
(a) 7.

प्रश्न 3.
Na2CO3 का प्रचलित नाम है –
(a) ब्लीचिंग पाउडर
(b) बेकिंग पाउडर
(c) प्लास्टर ऑफ पेरिस
(d) वाशिंग सोडा।
उत्तर-
(d) वाशिंग सोडा।

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प्रश्न 4.
अम्ल तथा क्षारक की अभिक्रिया के फलस्वरूप लवण तथा जल प्राप्त होते हैं। इस अभिक्रिया को कहते हैं
(a) उदासीनीकरण
(b) तनुकरण
(c) क्लोर क्षार
(d) कोई भी नहीं।
उत्तर-
(a) उदासीनीकरण।

प्रश्न 5.
डाक्टर टूटी हुई हड्डियों को सही जगह पर स्थिर रखने के लिए किसका उपयोग करते हैं ?
(a) सीमेंट
(b) जिप्सम
(c) प्लास्टर ऑफ पैरिस
(d) सोडा।
उत्तर-
(c) प्लास्टर ऑफ पैरिस।

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-

(i) जल में घुलनशील क्षारक को ………………. कहते हैं।
उत्तर-
क्षार

(ii) सल्फर को वायु में जलाने पर प्राप्त गैस की प्रकृति ……………………. होगी।
उत्तर-
अम्लीय

(iii) अम्लीय विलयन का pH मान 7 से …………………………… होता है।
उत्तर-
कम

(iv) धातुएँ अम्ल के साथ अभिक्रिया करके …………………………. गैस बनाती हैं।
उत्तर-
हाइड्रोजन

(v) क्षार का जलीय विलयन ………… को नीला करता है।
उत्तर-
लाल लिटमस।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

Punjab State Board PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण Important Questions and Answers.

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
संतुलित रासायनिक समीकरण को किस प्रकार लिखा जाता है ? इसके विभिन्न चरणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
संतुलित रासायनिक समीकरण को लिखने के तरीके के बारे में जानने के लिए एक उदाहरण लेते हैं।
जिंक + सल्फ्यूरिक अम्ल → जिंक सल्फेट + हाइड्रोजन इस समीकरण को निम्नलिखित रासायनिक समीकरण से प्रकट किया जा सकता है।
Zn + H2 SO4 → ZnSO4 + H2
तीर के निशान के दोनों ओर के तत्वों के परमाणुओं की संख्या की जांच कर लें।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 1
समीकरण में, तीर के चिह्न के दोनों तरफ के प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या बराबर है इसलिए यह एक संतुलित रासायनिक समीकरण है। अब निम्नलिखित रासायनिक समीकरण को संतुलित करने का प्रयत्न करते हैं
Fe + H2O → Fe3O4 + H2
चरण 1. रासायनिक समीकरण को संतुलित करने के लिए सबसे पहले प्रत्येक सूत्र के चारों ओर एक बॉक्स बना लें। समीकरण को संतुलित करते समय बॉक्स के अंदर कुछ भी बदलाव न करें।
Fe + H2O → Fe3O4 + H2

चरण 2.
असंतुलित समीकरण में उपस्थित विभिन्न तत्वों के परमाणुओं की संख्या की सूची बनाइए-
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 2
चरण 3. सबसे अधिक परमाणु वाले यौगिक को पहले संतुलित करें चाहे वह अभिकारक हो या उत्पाद। उस यौगिक में सबसे अधिक परमाणु वाले तत्व को चुन लें। इस आधार पर हम Fe3O4, और उसके ऑक्सीजन तत्व को चुन लेते हैं। दायीं ओर ऑक्सीजन के चार परमाणु हैं और बायीं ओर केवल एक।

ऑक्सीजन परमाणु को संतुलित करने के लिए-
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 3
परमाणुओं की संख्या को बराबर करने के लिए हम अभिक्रिया में शामिल तत्वों तथा यौगिकों के सूत्रों को नहीं बदल सकते हैं। जैसे-ऑक्सीजन परमाणु को संतुलित करने के लिए हम ‘4’ गुणांक लगाकर 4H2O लिख सकते हैं लेकिन H2O4 या (H2O4) या (H2O)4 नहीं। आंशिक रूप से संतुलित समीकरण अब इस प्रकार होगा
Fe + 4 H2O → Fe3O4 + H2 (आंशिक रूप से संतुलित समीकरण)
चरण 4. Fe तथा H परमाणु अब भी असंतुलित हैं। इनमें किसी एक तत्व को चुनकर आगे बढ़ते हैं। हाइड्रोजन परमाणु को बराबर करने के लिए दायीं ओर हाइड्रोजन अणु की संख्या को ‘4’ कर देते हैं।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 4
अब समीकरण इस प्रकार होगा
Fe + 4 H2O → Fe3O4 + 4H2

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

चरण 5. ऊपर दिए समीकरण की जांच करें तथा तीसरा तत्व चुन लें जो अब तक असंतुलित है। आप पाएंगे कि केवल लोहा ही एक तत्व है, जिसे संतुलित करना शेष है।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 5
Fe को संतुलित करने के लिए बायीं ओर हम Fe के 3 परमाणु लेते हैं।
3 Fe + 4 H2O → Fe3O4 + 4H2

चरण 6. अंत में, इस संतुलित समीकरण की जाँच के लिए समीकरण में दोनों ओर के तत्वों के परमाणुओं की संख्या की गिनती करते हैं।
3 Fe + 4H2O → Fe3O4+4 H2
(संतुलित समीकरण) समीकरण में दोनों ओर के तत्वों के परमाणुओं की संख्या बराबर है। अतः यह समीकरण अब संतुलित है। रासायनिक समीकरणों को संतुलित करने की इस विधि को हिट एंड ट्रायल विधि कहते हैं क्योंकि सबसे छोटी पूर्णांक संख्या के गुणांक का उपयोग करके समीकरण को सुंतलित करने का प्रयत्न करते हैं।

चरण 7.
भौतिक अवस्थाओं के संकेत लिखना-ऊपर लिखे संतुलित समीकरण में भौतिक अवस्था की कोई जानकारी नहीं है।
रासायनिक समीकरण को अधिक सूचनापूर्ण बनाने के लिए अभिकारकों तथा उत्पादों के रासायनिक सूत्र के साथ उनकी भौतिक अवस्था को भी दर्शाया जाता है। अभिकारकों तथा उत्पादों के ठोस, गैस, द्रव तथा जलीय अवस्थाओं को क्रमशः (s), (g), (l) तथा (aq) से दर्शाया जाता है। अभिकारक या उत्पादों जब जल में घोल के रूप में उपस्थित रहता है तब (aq) लिखते हैं। अतः संतुलित समीकरण इस प्रकार होगा
3Fe(s) + 4H2O (g) → Fe3O4 (S) + 4H2(g)

प्रश्न 2.
रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रकार उदाहरण सहित लिखो।
उत्तर-
रासायनिक अभिक्रिया के दौरान किसी एक तत्व का परमाणु दूसरे तत्व के परमाणु में नहीं बदलता है। न ही कोई परमाणु मिश्रण से बाहर जाता है या बाहर से मिश्रण में आता है। वास्तव में, किसी रासायनिक अभिक्रिया में परमाणुओं के आपसी आबंध के टूटने और जुड़ने से नए पदार्थों का निर्माण होता है।
1. संयुक्त अभिक्रिया-ऐसी अभिक्रिया जिसमें दो या दो से अधिक अभिकारक मिलकर एकल उत्पाद का निर्माण करते हैं उसे संयुक्त अभिक्रिया कहते हैं। जैसे-कैल्सियम ऑक्साइड जल के साथ तीव्रता से अभिक्रिया करके बुझे हुए चूने (कैल्सियम हाइड्रोक्साइड) का निर्माण करके अत्यधिक मात्रा में ऊष्मा उत्पन्न करता है।
उदाहरण –
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इस अभिक्रिया में कैल्सियम ऑक्साइड तथा जल मिलकर एकल उत्पाद, कैल्सियम हाइड्रोक्साइड बनाते हैं।

2. वियोजन अभिक्रिया-वह अभिक्रिया जिसमें कोई यौगिक दो या दो से अधिक सरल पदार्थों में टूटता है उसे वियोजन अभिक्रिया कहते हैं।
उदाहरण –
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 7
3. विस्थापन अभिक्रिया-जब कोई तत्व दूसरे तत्व को उसके यौगिक से विस्थापित कर देता है तो वह विस्थापन अभिक्रिया होती है।
उदाहरण
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4. द्विविस्थापन अभिक्रिया-द्विविस्थापन अभिक्रिया में दो अलग-अलग परमाणु या परमाणुओं के समूह का आपस में आदान-प्रदान होता है।
उदाहरण –
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प्रश्न 3.
उपचयन एवं अपचयन की उदाहरण सहित संक्षेप में व्याख्या कीजिए
उत्तर-
उपचयन तथा अपचयन-किसी अभिक्रिया में पदार्थ का उपचयन तब होता है जब उसमें ऑक्सीजन की वृद्धि या हाइड्रोजन का ह्रास होता है इसके विपरीत पदार्थ का अपचयन तब होता है जब उसमें ऑक्सीजन का ह्रास या हाइड्रोजन की वृद्धि होती है।
उदाहरण-
कॉपर चूर्ण के सतह पर कॉपर ऑक्साइड (II) की काली परत चढ़ जाती है। यह काला पदार्थ क्यों बना? यह कॉपर ऑक्साइड कॉपर में ऑक्सीजन के योग से बना है।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 10
यदि इस गर्म पदार्थ के ऊपर हाइड्रोजन गैस प्रवाहित की जाए तो सतह की काली परत भूरे रंग की हो जाती है क्योंकि इस स्थिति में विपरीत अभिक्रिया होती है तथा कॉपर प्राप्त होता है।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 11
अभिक्रिया के दौरान जब किसी पदार्थ में ऑक्सीजन की वृद्धि होती है तो कहते हैं कि उसका उपचयन हुआ है और जब अभिक्रिया में किसी पदार्थ में ऑक्सीजन का ह्रास होता है तो कहते हैं कि उसका अपचयन हुआ है।
अभिक्रिया में कॉपर (II) ऑक्साइड में ऑक्सीजन का ह्रास हो रहा है, इसलिए यह अपचयित हुआ है। हाइड्रोजन में ऑक्सीजन की वृद्धि हो रही है, इसलिए यह उपचयित हुआ है। अर्थात्, किसी अभिक्रिया में एक अभिकारक उपचयित तथा दूसरा अभिकारक अपचयित होता है। इन अभिक्रियाओं को उपचयन-अपचयन अथवा रेडॉक्स अभिक्रिया कहते हैं।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 12
रेडॉक्स अभिक्रिया के कुछ अन्य उदाहरण हैं
ZnO+C → Zn + CO
MnO2 + 4HCl→ MnCl2 + 2H2O + Cl2
अभिक्रिया में कार्बन उपचयित होकर CO तथा ZnO अपचयित होकर Zn बनता है। अभिक्रिया में HCl, Cl2 में उपचयित तथा MnO2, MnCl2 में अपचयित हुआ है।

प्रश्न 4.
अम्ल क्या होता है ? अम्लों के चार गुणों की व्याख्या उदाहरण देकर करो।
उत्तर-
अम्ल-ऐसे यौगिक जिनमें एक अथवा एक से अधिक हाइड्रोजन परमाणु उपस्थित होते हैं तथा वह जल में घुलकर आवेशित हाइड्रोनियम आयन (H3O+) बनाते हैं, अम्ल कहलाते हैं। अम्लों का स्वाद खट्टा होता है।

अम्लों के गुण-
1. धातुओं के साथ क्रिया-अम्ल क्रियाशील धातुएं जैसे जिंक, मैग्नीशियम,लोहा तथा मैंग्नीज़ के साथ क्रिया करके हाइड्रोजन गैस पैदा करती हैं।
Zn(s) + तनु H2SO4(aq) → ZnSO4(aq) + H2(g) ↑
Mg(s) + तनु 2HCl (aq) → MgCl(aq) + H2(g) ↑

2. धात्विक कार्बोनेट तथा धात्विक बाइकार्बोनेट के साथ क्रिया-अम्ल, धात्विक कार्बोनेट तथा धात्विक बाइकार्बोनेट से क्रिया करके कार्बनडाइऑक्साइड गैस उत्सर्जित करते हैं।
Na2CO3 + H2SO4 → Na2SO4 + H2O + CO2
NaHCO3 +HCl → NaCl + H2O + CO2

3. शारों के साथ क्रिया-अम्ल, क्षारों के साथ क्रिया करके उदासीनीकरण प्रक्रिया दर्शाते हैं तथा लवण और जल पैदा करते हैं।
HCl + NaOH → NaCl + H2O
HCl + KOH → KCl + H2O

4. धात्विक सल्फाइड तथा हाइड्रोजन सल्फाइड के साथ क्रिया-अम्ल विभिन्न धातु सल्फाइडों तथा हाइड्रोदन सल्फाइडों के साथ क्रिया करके H2S गैस उत्पन्न करते हैं।
FeS + H2SO4→ FeSO4 + H2S(g)
2KHS + 2HCl → 2KCl + 2H2S(g)

प्रश्न 5.
चित्र में किस प्रकार की रासायनिक क्रिया दर्शायी गई है ? इस क्रिया की परिभाषा उदाहरण सहित लिखो।
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उत्तर-
चित्र में धातुओं की लवणों के विलयनों के साथ अभिक्रिया दर्शाई गई है। यह विस्थापन अभिक्रिया है। विस्थापन अभिकिया जब कोई तत्व दूसरे तत्व को उसके यौगिक से विस्थापित कर देता है तो वह विस्थापन अभिक्रिया होती है।
उदाहरण –
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PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

लघु उत्तरात्मक प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
रासायनिक समीकरणों को लिखते समय किन-किन बातों का ध्यान रखना आवश्यक होता है ?
उत्तर-

  • रासायनिक परिवर्तन को प्रदर्शित करना।
  • अभिकारकों और उत्पादों के सभी तत्वों को प्रतीकों से दर्शाना।
  • अभिकारकों और उत्पादों के प्रत्येक तत्व के कुल परिणामों की संख्या का दोनों ओर समान होना।
  • भौतिक अवस्था, ऊष्मा और परिस्थितियों को स्पष्ट करना।

प्रश्न 2.
संयुक्त अभिक्रिया की परिभाषा उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर-
संयुक्त अभिक्रिया- ऐसी अभिक्रिया जिसमें दो या दो से अधिक अभिकारक मिलकर एकल उत्पाद का निर्माण करते हैं उसे संयुक्त अभिक्रिया कहते हैं।
उदाहरण-
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प्रश्न 3.
बुझे हुए चूने का रासायनिक सूत्र और उसका एक उपयोग बताइए।
उत्तर-
रासायनिक सूत्र → Ca(OH)2
बुझे हुए चूने के विलयन का उपयोग दीवारों की सफ़ेदी करने के लिए होता है।

प्रश्न 4.
सफेदी करने के दो-तीन दिन बाद चमक क्यों आ जाती है?
उत्तर-
कैल्सियम हाइड्रोक्साइड वायु में उपस्थित कार्बन डाइऑक्साइड के साथ धीमी गति से अभिक्रिया करके दीवारों पर कैल्सियम कार्बोनेट की एक पतली परत बना देता है। सफ़ेदी करने के दो-तीन दिन बाद कैल्सियम कार्बोनेट का निर्माण होता है और इससे दीवारों पर चमक आ जाती है।

प्रश्न 5.
संगमरमर का रासायनिक सूत्र तथा उसके बनने की अभिक्रिया बताइए।
उत्तर-
संगमरमर को कैल्सियम कार्बोनेट भी कहते हैं। इसका रासायनिक सूत्र है-CaCO3
इसके बनने की अभिक्रिया –
Ca(OH2) (aq) + CO2(g) → CaCO3(s) + H2O कैल्सियम कार्बोनेट

प्रश्न 6.
ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया की परिभाषा तथा दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया (Exothermic Reaction)-जिन अभिक्रियाओं में उत्पाद के निर्माण के साथ-साथ ऊष्मा भी उत्पन्न होती है उन्हें ऊष्माक्षेपी रासायनिक अभिक्रिया कहते हैं। A + B→ C + D + ऊष्मा इन अभिक्रियाओं में अभिकारकों की कुल ऊर्जा उत्पादों की कुल ऊर्जा से अधिक होती है। अभिकारकों की ऊर्जा > उत्पादों की ऊर्जा ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाओं के कुछ अन्य उदाहरण हैं –

  • प्राकृतिक गैस का दहन –
    CH4 (g) + 2O2 (g) → CO2(g) + 2H2O (g) + ऊर्जा
  • साग-सब्जियों का विघटित होकर कंपोस्ट बनाना भी ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया का ही उदाहरण है।

प्रश्न 7.
ऊष्माशोषी अभिक्रियाओं की उदाहरण सहित परिभाषा दीजिए।
उत्तर-
ऊष्माशोषी अभिक्रिया (Endothermic Reaction)-जिन अभिक्रियाओं में ऊष्मा का अवशोषण होता है उन्हें ऊष्माशोषी अभिक्रियाएं कहते हैं।
A+ B + ऊष्मा →C+ D
इस अभिक्रिया में अभिकारकों की कुल ऊर्जा उत्पादों की कुल ऊर्जा से कम होती है। अभिकारकों की ऊर्जा < उत्पादों की ऊर्जा उदाहरण –

  • कोक की भाप के साथ अभिक्रिया
    C(s) + H2O (g) + ऊष्मा → CO(g) + H2 (g)
  • N2 और O2 की प्रक्रिया
    N2(g) + O2 (g) + ऊष्मा → 2 NO (g)

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प्रश्न 8.
वियोजन अभिक्रिया संयोजन अभिक्रिया से किस प्रकार अलग है?
उत्तर-
संयोजन अभिक्रिया में दो या दो से अधिक पदार्थ मिलकर एक नया पदार्थ बनाते हैं जबकि वियोजन अभिक्रिया इसके विपरीत है। वियोजन अभिक्रिया में एकल पदार्थ वियोजित होकर दो या दो से अधिक पदार्थ प्रदान करता है।

प्रश्न 9.
विस्थापन अभिक्रिया की परिभाषा तथा उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
विस्थापन अभिक्रिया-जब कोई तत्व किसी दूसरे तत्व को उसके यौगिक से विस्थापित कर देता है तो वह विस्थापन अभिक्रिया होती है।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 16
उपरोक्त उदाहरण में Zn कॉपर से ज्यादा क्रियाशील है इसलिए वह कॉपर सल्फेट से कॉपर का विस्थापन करके स्वयं सल्फेट के साथ जिंक सल्फेट बनाता है।

प्रश्न 10.
द्विविस्थापन अभिक्रिया की परिभाषा तथा उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
द्विविस्थापन अभिक्रिया-वैसी अभिक्रियाएं जिनमें अभिकारकों के बीच आयनों का आदान-प्रदान होता है उन्हें द्विविस्थापन अभिक्रिया कहते हैं।
उदाहरण
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 17
उपरोक्त अभिक्रिया में Cl- तथा SO42- आयनों का आदान-प्रदान हो रहा है इसलिए यह द्विविस्थापन अभिक्रिया का उदाहरण है।

प्रश्न 11.
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 18
उपरोक्त अभिक्रिया को पूरा करें तथा उत्पाद का रंग भी बताइए।
उत्तर-
उपरोक्त अभिक्रिया है-
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 19
यह उत्पाद Pbo पीले रंग का है।

प्रश्न 12.
जंग लगना किसे कहते हैं ? जंग का रासायनिक सूत्र लिखिए। इससे होने वाली हानि क्या है?
उत्तर-
लोहे की बनी नई वस्तुएँ चमकीली होती हैं लेकिन कुछ समय पश्चात् उन पर लालिमा युक्त भूरे रंग की परत चढ़ जाती है। आमतौर पर इस प्रक्रिया को लोहे पर जंग लगना कहते हैं। कॉपर जंग का रासायनिक सूत्र है : Fe2SO3. x H2O जंग हाइड्रेटेड आयरन (III) ऑक्साइड है। यह भंगुर है और समय के साथ धातु की सतह से पृथक् होता रहता है जिस कारण लोहे से बनी वस्तुएं क्षतिग्रस्त होती रहती हैं।

प्रश्न 13.
क्या होता है जब जिंक की छड़ कॉपर सल्फेट के विलयन में रखी जाती है? अभिक्रिया का रासायनिक समीकरण दीजिए।
उत्तर-
जिंक कॉपर से अधिक अभिक्रियाशील है। वह कॉपर सल्फेट विलयन से कॉपर को विस्थापित कर देता है, और जिंक सल्फेट बनता है। कॉपर सल्फेट का नीला विलयन धीरे-धीरे सफेद होता चला जाता है।
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प्रश्न 14.
‘चूना शमन’ का तात्पर्य क्या होता है? इस प्रक्रिया में सूं-सूं की ध्वनि क्यों होती है? संबंधित अभिक्रिया को प्रदर्शित करने वाली रासायनिक समीकरण लिखिए।
उत्तर-
चूना शमन-जब चूने में जल मिलाया जाता है, यह बुझे चूने में बदल जाता है। इसे चूना शमन कहते हैं। यह एक उष्मापेक्षी अभिक्रिया है जिसमें उष्मा बाहर निकलती है जिसके कारण सूं-सूं की ध्वनि उत्पन्न होती है।

प्रश्न 15.
निम्नलिखित रासायनिक समीकरणों को संतुलित कीजिए
(i) H2 + N2 → NH3
(ii) BaCl2 + Al2(SO4)3 → AlCl3 + 3BaSO4
(iii) H2S + O2 → SO2 + H2O
(iv) KBr + BaI2 → KI + BaBr2
(v) Al + CuCl2 → AICl3 + Cu
(vi) AgNO3 + Cu2 + → Cu(NO3)2 + Ag
(vii) AI (OH)3 → Al2O3+ H2O
(viii) NH3 + CuO → Cu + N2 + H2O
(ix) KClO3 → KCl+ O2
(x) KNO2 → KNO2 + O2
(xi) BaCl2 + K2SO4 → + BaSO4 + KCl.
उत्तर-
(i) 3H2 + N2 → 2NH3
(ii) 3BaCl2 + Al2(SO4)2 → 2Alcl3 + 3BaSO4
(iii) 2H2S + 3O2 → 2SO2 + 2H2O
(iv) 2KBr + Bal2 → 2KI + BaBr2
(v) 2Al + 3CuCl2 → 2AlCl3 + 3Cu
(vi) 2AgNO3 + Cu → Cu (NO3)2 + 2Ag
(vii) 2AI (OH)3 → AlO3 + 3H2O
(viii) 2NH2 + 3CuO →  Cu + N2 + 3H2O
(ix) 2KCIO3 → 2KCl + 3O2
(x) 2KNO3 → 2KNO2 + O2
(xi) BaCl2 + K2SO4 → BaSO4 + 2KCl.

प्रश्न 16.
निम्न समीकरणों में उपचयित और अपचयित पदार्थों के नाम लिखिए
(i) SO2 + 2H2S → 2H2O+ 3S
(ii) 2Al + 3HCl → 2AlCl3 + 3H2
(iii) 2H2S + SO2 → 3S + 2H2O
(iv) Zn + 2AgNO3 → Zn (NO3)2 + 2Ag
(v) H2 + CuO → Cu + H2O.
उत्तर-
(i) SO2 में S का अपचयन तथा H2S में S का उपचयन हुआ।
(ii) एलुमीनियम उपचयित तथा क्लोरीन अपचयित हुआ।
(iii) हाइड्रोजन का उपचयन हुआ और सल्फर का अपचयन हुआ।
(iv) जिंक का उपचयन हुआ और सिल्वर का अपचयन हुआ।
(v) हाइड्रोजन का उपचयन हुआ तथा तांबा का अपचयन हुआ।

प्रश्न 17.
निम्नलिखित क्रियाओं के लिए संकेतों और सूत्रों द्वारा संतुलित रासायनिक समीकरण लिखो :
(i) जिंक + सिल्वर नाइट्रेट → जिंक नाइट्रेट + सिल्वर
(ii) कॉपर ऑक्साइड + हाइड्रोजन → कॉपर + पानी
(ii) बेरियम क्लोराइड + एल्युमीनियम सल्फेट → बेरियम सल्फेट + एल्युमीनियम क्लोराइड।
उत्तर-
(i) Zn + 2AgNO3 → Zn(NO3)2 + 2Ag
(ii) CuO + H2 → Cu + H2O
(iii) 3BaCl2 + Al2(SO4)3 → 3BaSO4 + 2AlCl3

प्रश्न 18.
निम्नलिखित समीकरणों को पूरा करें :
(i) कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड + कार्बनडाइऑक्साइड → ………………….. +
(ii) सोडियम + पानी → …………………………….. + ………………………………
(iii) हाइड्रोजन + क्लोरीन → …………………………….
उत्तर –
(i) कैल्सियम + कार्बनडाइऑक्साइड → कैल्सियम कार्बोनेट + पानी हाइड्रॉक्साइड
(ii) सोडियम + पानी → सोडियम हाइड्रॉक्साइड + हाइड्रोजन
(iii) हाइड्रोजन + क्लोरीन → हाइड्रोजन क्लोराइड गैस

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प्रश्न 19.
निम्नलिखित कथनों को रासायनिक समीकरणों (सूत्रों सहित ) में लिखकर संतुलित करो :
(i) पोटाशियम धातु जल के साथ अभिक्रिया करके पोटाशियम हाइड्रॉक्साइड और हाइड्रोजन गैस देती है।
(ii) हाइड्रोजन सल्फाइड गैस का वायु/ऑक्सीजन में दहन होने पर जल एवं सल्फर डाइऑक्साइड गैस बनाती है।
(ii) हाइड्रोजन गैस नाइट्रोजन से संयोग करके अमोनिया बनाती है। (P.S.E.B. March 2017, Set-III)
उत्तर
(i) 2K + 2H2O → 2KOH + H2
(ii) 2H2S + 3O2 → 2H2O + 2SO2
(iii) 3H2 + N2 → 2NH3

प्रश्न 20.
नीचे दिए गए फ्लास्क में किस प्रकार की रासायनिक अभिक्रिया हो रही है ? इसके लिए रासायनिक समीकरण लिखें। उत्पन्न हो रही गैस का नाम एवं एक गुण भी लिखें।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 22
उत्तर-
रासायनिक समीकरण
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 23
इस अभिक्रिया में हाइड्रोजन गैस उत्पन्न हो रही है।
हाईड्रोजन गैस का गुण-हाईड्रोजन गैस एक ज्वलनशील गैस है जो नीली-पीली ज्वाला के साथ धमाके के साथ जलती है।

प्रश्न 21.
सामने चित्र में दिखाई गई परखनली में रासायनिक अभिक्रिया के दौरान कौन-सी गैस पैदा हो रही है ? यह गैस चूने के पानी/कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड से किस तरह क्रिया करती है ?
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 24
उत्तर-

  • सोडियम कार्बोनेट तथा तनु हाइड्रोक्लोरिक की क्रिया के दौरान कार्बनडाइऑक्साइड गैस पैदा होती है।
  • कार्बनडाइऑक्साड गैस चूने के पानी (कैल्शियम हाइड्राक्साइड) के साथ क्रिया करके सफेद रंग का कैल्शियम कार्बोनेट बनाती है जिससे चूने के पानी का रंग दुधिया हो जाता है।

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प्रश्न 22.
सामने दिए गये चित्र में दर्शाई परखनली में हो रही रासायनिक क्रिया को समीकरण के रूप में लिखो। घोल/विलयन के रंग में किस प्रकार परिवर्तन होता है ? लोहे की कीलों के रंग में क्या परिवर्तन होता है ?

उत्तर-
रासायनिक क्रिया का समीकरण :
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जब लोहे की कीलों को कॉपर सल्फेट के घोल मे डुबोया जाता है तो नीले रंग का घोल धीरे-धीरे फीका हो जाता है तथा कीलों का रंग भूरा हो जाता है।

अति लघु उत्तरात्मक प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
बुझे हुए चूने का एक उपयोग बताइए।
उत्तर-
दीवारों की सफ़ेदी करने के लिए।

प्रश्न 2.
संगमरमर का रासायनिक फार्मूला लिखिए।
उत्तर-
CaCO3.

प्रश्न 3.
प्राकृतिक गैस का दहन करने पर क्या प्राप्त होता है ?
उत्तर-
CO2 H2O और ऊर्जा ।

प्रश्न 4.
फ़ेरस सल्फेट का सूत्र लिखिए।
उत्तर-
FeSO4.7H2O

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प्रश्न 5.
तैलीय तथा वसायुक्त खाद्य सामग्री जब लंबे समय तक रखी रह जाती है तो उसमें स्वाद और गंध किस क्रिया के कारण बदल जाते हैं ?
उत्तर-
उपचयन के कारण।

प्रश्न 6.
चिप्स बनाने वाले चिप्स की थैली में क्या युक्त कर देते हैं ताकि उनमें उपचयन न हो सके?
उत्तर-
नाइट्रोजन गैस।

प्रश्न 7.
किसी अभिक्रिया में पदार्थ का उपचयन कब होता है?
उत्तर-
जब O2 की वृद्धि या H2 का ह्रास होता है।

प्रश्न 8.
ऊष्मा देने पर कैल्सियम कार्बोनेट किसमें नियोजित होता है ?
उत्तर-
कैल्सियम ऑक्साइड तथा कार्बन डाइऑक्साइड ।

प्रश्न 9.
बुझे हुए चूने का रासायनिक सूत्र लिखिए।
उत्तर-
CaO.

प्रश्न 10.
प्राकृतिक गैस का दहन होने पर होने वाली अभिक्रिया को लिखिए।
उत्तर-
CH4 (g) + 2O2 (g) → CO2 (g) + 2H2O (g) + ऊर्जा।

प्रश्न 11.
कोयले का दहन तथा H2 और O2, से जल का निर्माण कैसी अभिक्रिया को दर्शाते हैं?
उत्तर-
संयोजन अभिक्रिया।

प्रश्न 12.
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 28
उत्तर-
क्लोरोफ़िल।

प्रश्न 13.
अपचयन क्रिया क्या है ?
उत्तर-
अपचयन वह क्रिया है जिसमें 0, का ह्रास तथा H, की वृद्धि होती है।

प्रश्न 14.
उपचयन क्रिया क्या है ?
उत्तर-
उपचयन वह क्रिया है जिसमें H, का ह्रास तथा O2, की वृद्धि होती है।

प्रश्न 15.
मैग्नीशियम रिबन को वायु में जलाने से कौन-सा पदार्थ बनता है ? ( मॉडल पेपर)
उत्तर-
सफेद पाउडर मैग्नीशियम ऑक्साइड (MgO).

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

प्रश्न 16.
नीचे लिखी समीकरण में रिक्त स्थान भरो :
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 29
उत्तर-
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 30

प्रश्न 17.
जिंक की तनु सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ अभिक्रिया होने से कौन-सी गैस बनती है ?
उत्तर-
हाइड्रोजन गैस (H2)

प्रश्न 18.
निम्नलिखित रासायनिक समीकरण में रिक्त स्थान भरो : BaCl2 + Na2SO4 → …………. + …….
उत्तर-
BaCl2 + Na2SO4 → BaSO4 + 2NaCl

प्रश्न 19.
कार्बनडाइऑक्साइड गैस को चूने के पानी में से प्रवाहित करने पर चूने के पानी में क्या परिवर्तन होता है ?
उत्तर-
चूने का पानी दुधिया हो जाता है।

प्रश्न 20.
निम्नलिखित रासायनिक समीकरण को पूरा करें :
Fe(s) + CuSO4 (aq) → ………………. +
उत्तर-
Fe(s) + CuSO4 (aq) → FeSO4 (aq) + Cu(s)

प्रश्न 21.
निम्नलिखित समीकरण को पूरा करो :
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 31
उत्तर-
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 32

प्रश्न 22.
Zn(s) + CuSO4(aq) → ZnSO4(aq)+ Cu(s) इस रासायनिक समीकरण में किस प्रकार की अभिक्रिया दर्शायी गयी है ?
(क) संयोजन अभिक्रिया
(ख) वियोजन अभिक्रिया
(ग) विस्थापन अभिक्रिया
(घ) द्विविस्थापन अभिक्रिया।
उत्तर-
(ग) विस्थापन अभिक्रिया।

प्रश्न 23.
Na2SO4(aq) + BaCl2→ BaSO4(s) + NaCl(aq) उपरोक्त रासायनिक समीकरण किस प्रकार की रासायनिक अभिक्रिया का उदाहरण है ?
(क) संयोजन अभिक्रिया
(ख) वियोजन अभिक्रिया
(ग) विस्थापन अभिक्रिया
(घ) द्विविस्थापन अभिक्रिया।
उत्तर-
(घ) द्विविस्थापन अभिक्रिया।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Type Questions)

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
BaCl2 (aq) + Na2SO4 (aq) → BaSO4(s) + 2NaCl (aq) है
(a) विस्थापन अभिक्रिया
(b) द्विविस्थापन अभिक्रिया
(c) संयोजन अभिक्रिया
(d) वियोजन अभिक्रिया।
उत्तर-
(b) द्विविस्थापन अभिक्रिया।

प्रश्न 2.
वह अभिक्रिया जिसमें ऊष्मा उत्पन्न होती है, कहलाती है –
(a) बहुलीकरण अभिक्रिया
(b) ऊष्माशोषी अभिक्रिया
(c) ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर-
(c) ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

प्रश्न 3.
जल के विद्युत् अपघटन पर उत्पन्न हाइड्रोजन एवं ऑक्सीजन का मोल अनुपात है –
(a) 2:1
(b) 1:1
(c) 2:2
(d) 4:1.
उत्तर-
(a) 2:1.

प्रश्न 4.
जंग का रासायनिक सूत्र है –
(a) Fe2O3
(b) FeCO3
(c) Fe2O3.xH2O
(d) FeCO3.xH2O.
उत्तर-
(c) Fe2O3.xH2O.

प्रश्न 5.
वियोजन अभिक्रिया का उदाहरण है-
(a) CH4 + 2O2, → CO2 + 2H2O
(b) 2Pb (NO3)2 → 2PbO + 4NO2 + O2,
(c) NH3 + HCl → NH4Cl
(d) PB + CuCl2 → PbCl2 + CU.
उत्तर-
(b) 2Pb (NO3)2 → 2PbO + 4NO2 + O2.

प्रश्न 6.
लोहा किसे उसके विलयन से विस्थापित कर सकता है ?
(a) Al
(b) Zn
(c) Cu
(d) AU.
उत्तर-
(c) Cu.

प्रश्न 7.
निम्नलिखित में से कौन-सी अधातु है जो धातुओं की सक्रियता क्रम में उपस्थित रहती है –
(a) O2,
(b) Cl
(c) Br
(d) H2.
उत्तर-
(d) H2.

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

(i) अपघटन अभिक्रिया ………….. की विपरीत अभिक्रिया है।
उत्तर-
संयोजन अभिक्रिया

(ii) अम्ल व क्षारक की निश्चित मात्रा एवं आयतन मिलाने से ……….. तथा ……….. बनता है।
उत्तर-
लवण, जल

(iii) ऑक्सीजन का समावेश ……….. कहलाता है।
उत्तर-
ऑक्सीकरण

(iv) वह अभिक्रिया जिसमें ऊष्मा का उत्सर्जन होता है, ……… अभिक्रिया कहलाती है।
उत्तर-
ऊष्माक्षेपी

(v) ऑक्सीकरण तथा अपचयन एक-दूसरे की …………. हैं।
उत्तर-
पूरक।

PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 16 प्राकृतिक संसाधनों का संपोषित प्रबंधन

Punjab State Board PSEB 10th Class Science Book Solutions Chapter 16 प्राकृतिक संसाधनों का संपोषित प्रबंधन Textbook Exercise Questions, and Answers.

PSEB Solutions for Class 10 Science Chapter 16 प्राकृतिक संसाधनों का संपोषित प्रबंधन

PSEB 10th Class Science Guide प्राकृतिक संसाधनों का संपोषित प्रबंधन Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
अपने घर को पर्यावरण-मित्र बनाने के लिए आप उसमें कौन-कौन से परिवर्तन सुझा सकते हैं ?
उत्तर-
निम्नलिखित परिवर्तन लाकर हम अपने घर में पर्यावरण-मित्र वातावरण बना सकते हैं –

  • हम बिजली के पंखे तथा बल्ब के स्विच बंद करके विद्युत् का अपव्यय रोक सकते हैं।
  • टपकने वाले जल के पाइप या नल की मुरम्मत करवा कर हम जल की बचत कर सकते हैं।
  • हमें तीन Rs द्वारा बताए हुए मार्ग पर चलने की कोशिश करनी चाहिए।
  • हमें पुन: चक्रण योग्य वस्तुओं को कूड़े के साथ नहीं फेंकना चाहिए।
  • हमें चीज़ों (जैसे लिफ़ाफ़े) को फेंकने की अपेक्षा फिर से प्रयोग में लाना चाहिए।
  • हमें आहार को व्यर्थ नहीं करना चाहिए।
  • हमें अपने आवास के आस-पास कचरे और गंदे जल को इकट्ठा नहीं होने देना चाहिए।
  • जल के व्यर्थ रिसाव को रोकना चाहिए।
  • जल को मितव्ययिता से प्रयोग करना चाहिए।
  • आवासीय कूड़े-कचरे को कूड़ादान में इकट्ठा कर उसका निपटान करना चाहिए।

प्रश्न 2.
क्या आप अपने विद्यालय में कुछ परिवर्तन सुझा सकते हैं जिनसे इसे पर्यानुकूलित बनाया जा सके ?
उत्तर-
निम्नलिखित परिवर्तनों द्वारा हम अपने विद्यालय में पर्यानुकूलित वातावरण बना सकते हैं-

  • हमें विद्यालय में ज़्यादा से ज्यादा पेड़-पौधे लगाने चाहिएं।
  • बच्चों को शिक्षा देनी चाहिए कि फूल तथा पत्तियों को न तोड़ें।
  • हमें जल का अपव्यय रोकना चाहिए।
  • कमरों में ज़्यादा-से-ज्यादा खिड़कियाँ बनानी चाहिएं ताकि सूर्य की रोशनी अंदर आए और कम-से-कम बिजली खर्च हो।
  • हमें कूड़ा-कचरा इधर-उधर नहीं फेंकना चाहिए, बल्कि चीज़ों का पुन: उपयोग करना चाहिए।
  • शौचालय और मूत्रालयों की नियमित सफाई-धुलाई की जानी चाहिए।
  • विद्युत् अपव्यय को नियंत्रित करना चाहिए।
  • विद्यालय के आस-पास कचरे के ढेर और रुका हुआ गंदा जल नहीं होना चाहिए।
  • विद्यालय का भवन साफ-सुथरा रखना चाहिए।
  • जैव निम्नीकृत और जैव अनिम्नीकृत कूड़े-कचरे के एकत्रीकरण के लिए कूड़ादान अलग-अलग होने चाहिए। इससे कूड़े का निपटान सरलता से हो सकेगा।

प्रश्न 3.
इस अध्याय में हमने देखा कि जब हम वन एवं वन्य जंतुओं की बात करते हैं तो चार मुख्य दावेदार सामने आते हैं। इनमें से किसे वन उत्पाद प्रबंधन हेतु निर्णय लेने के अधिकार दिए जा सकते हैं ? आप ऐसा क्यों सोचते हैं ?
उत्तर-
वन एवं वन्य जंतुओं की बात करते समय सामने आने वाले चार मुख्य दावेदार हैं-

  1. वन के अंदर एवं इसके निकट रहने वाले लोग अपनी तरह-तरह की आवश्यकताओं के लिए वन पर निर्भर रहते हैं।
  2. सरकार का वन विभाग वनों से प्राप्त साधनों का नियंत्रण करता है।
  3. उद्योगपति तेंदुआ पत्ती का प्रयोग कर बीड़ी उत्पादकों से लेकर कागज़ मिल तक वन उत्पादों का उपयोग करते हैं।
  4. वन्य जीवन और प्रकृति प्रेमी प्रकृति का संरक्षण इसकी आद्य अवस्था में चाहते हैं।

वन उत्पाद प्रबंधन हेतु निर्णय लेने के अधिकार वन के अंदर तथा निकट रहने वाले उन लोगों को देने चाहिए जो सदियों से वनों पर निर्भर रहते हैं। परंतु कुछ अधिकार सरकार के पास भी होने चाहिएं ताकि लोग वनों का उपयोग ठीक से करें तथा इनका अपव्यय न करें। वन्य जीवन एवं प्रकृति प्रेमियों को भी कुछ अधिकार देने चाहिएं क्योंकि वे प्रकृति का संरक्षण इसका आद्य अवस्था में करना चाहते हैं।

प्रश्न 4.
अकेले व्यक्ति के रूप में आप निम्न के प्रबंधन में क्या योगदान दे सकते हैं।
(a) वन एवं वन्य जंतु
(b) जल संसाधन
(c) कोयला एवं पेट्रोलियम ?
उत्तर-
(a) वन एवं वन्य जंतु-दूसरे लोगों में वनों के संरक्षण के प्रति जागरूकता जगा सकते हैं, अपने क्षेत्र के उन क्रियाकलापों में भाग ले सकते हैं जो वन तथा वन्य जंतुओं के संरक्षण को महत्त्व देते हैं। संरक्षण के नियमों को अपनाकर तथा इन मसले पर काम कर रही कमेटियों की सहायता करके भी हम वन एवं वन्य जंतुओं के प्रबंधन में योगदान दे सकते हैं।

(b) जल संसाधन-अपने घर तथा कार्य स्थान पर जल का अपव्यय रोक कर तथा वर्षा के जल को अपने घरों में संग्रहण करके।

(c) कोयला एवं पेट्रोलियम-विद्युत् के अपव्यय को रोक कर तथा कम-से-कम बिजली उपयोग करके हम इनके प्रबंधन में योगदान दे सकते हैं। निजी वाहन की अपेक्षा सार्वजनिक वाहन का उपयोग कर पेट्रोल-डीजल की बचत कर सकते हैं।

प्रश्न 5.
अकेले व्यक्ति के रूप में आप विभिन्न प्राकृतिक उत्पादों की खपत कम करने के लिए क्या कर सकते हैं ?
उत्तर-

  • विद्युत् को कम-से-कम इस्तेमाल कर सकते हैं तथा इसके अपव्यय को रोक सकते हैं।
  • तीन (R’s) के नियमों का पालन करके हम प्राकृतिक उत्पादों की खपत कम कर सकते हैं।
  • हमें आहार को व्यर्थ नहीं करना चाहिए।
  • जल को व्यर्थ होने से रोकना चाहिए।
  • खाना पकाने के लिए भी लकड़ी की जगह गैस का इस्तेमाल करना चाहिए।

प्रश्न 6.
निम्न से संबंधित ऐसे पाँच कार्य लिखिए जो आपने पिछले एक सप्ताह में किए हैं
(a) अपने प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण।
(b) अपने प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव को और बढ़ाया है।
उत्तर-
(a)

  • विद्युत् उपकरणों का व्यर्थ उपयोग नहीं किया।
  • रोशनी के लिए CFL का प्रयोग करके।
  • स्कूल आने-जाने के लिए अपने वाहन की जगह सरकारी वाहनों का प्रयोग करके।
  • नहाने में कम-से-कम पानी का उपयोग किया।
  • पर्यावरण के संरक्षण से संबंधित जागरूकता अभियान में भाग लिया।

(b)

  • कंप्यूटर पर प्रिंटिंग के लिए अधिक कागज़ों का प्रयोग किया।
  • पंखा चलते छोड़कर कमरे से बाहर गया।
  • दीवाली पर पटाखे जलाकर।
  • मोटर साइकिल का अत्यधिक प्रयोग करके।
  • आहार को व्यर्थ किया।

प्रश्न 7.
इस अध्याय में उठाई गई समस्याओं के आधार पर आप अपनी जीवन-शैली में क्या परिवर्तन लाना चाहेंगे जिससे हमारे संसाधनों के संपोषण को प्रोत्साहन मिल सके ?
उत्तर

  1. हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि हम एक समाज में रहते हैं, अकेले नहीं।
  2. हमें अपने संसाधनों का कम-से-कम उपयोग करना चाहिए तथा किसी भी तरह उन्हें व्यर्थ नहीं करना चाहिए।
  3. हमें तीन (R’s) के नियमों का पालन करना चाहिए। (Reduce, Recycle, Reuse)
  4. हमें निजी वाहनों की अपेक्षा सरकारी वाहनों का उपयोग करना चाहिए।
  5. हमें अपने पर्यावरण को प्रदूषित नहीं करना चाहिए। इन सब बातों को अपने जीवन में महत्त्व देकर हम अपने संसाधनों के संपोषण को बढ़ावा दे सकते हैं।

Science Guide for Class 10 PSEB प्राकृतिक संसाधनों का संपोषित प्रबंधन InText Questions and Answers

प्रश्न 1.
पर्यावरण-मित्र बनने के लिए आप अपनी आदतों में कौन-से परिवर्तन ला सकते हैं ?
उत्तर-

  1. धुआँ रहित वाहनों का प्रयोग करके।
  2. पॉलीथीन का उपयोग न करना।
  3. जल संरक्षण को बढ़ावा देकर।
  4. वनों की कटाई पर रोक लगाकर ।
  5. वृक्षारोपण।
  6. तेल से चालित वाहनों का कम-से-कम उपयोग करके।
  7. व्यर्थ बहते जल की बर्बादी रोक कर।
  8. ठोस कचरे का कम-से-कम उत्पादन कर।
  9. सोच-समझ कर विद्युत् उपकरणों का उपयोग करके।
  10. पुनः चक्रण हो सकने वाली वस्तुओं का उपयोग करके।
  11. 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मना कर।
  12. नालियों में रसायन तथा उपयोग किया हुआ तेल न डाल कर।
  13. जैव निम्नीकरणीय और जैव अनिम्नीकरणीय कचरे को अलग-अलग फैंक कर।
  14. सीसा रहित पैट्रोल का प्रयोग करके। उपरोक्त विभिन्न विधियों को अपनाकर हम पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे सकते हैं।

प्रश्न 2.
संसाधनों के दोहन के लिए कम अवधि के उद्देश्य के परियोजना के क्या लाभ हो सकते हैं?
उत्तर-
इसका केवल एक ही लाभ है, मनुष्य की आत्म-केंद्रित (स्वार्थ) संतुष्टि। पेड़-पौधों को काट कर हम अपने स्वार्थ की पूर्ति कर लेते हैं लेकिन यह नहीं सोचते कि इससे पर्यावरण असंतुलित हो जाता है। संसाधनों के दोहन के लिए कम अवधि के उद्देश्य की परियोजनाओं को कुछ सोच-समझ कर ही बनाना चाहिए।

प्रश्न 3.
यह लाभ, लंबी अवधि को ध्यान में रखकर बनाए गए परियोजनाओं के लाभ से किस प्रकार भिन्न हैं?
उत्तर-
प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन करते समय लंबी अवधि को ध्यान में रखना होता है। जिससे कि वे अगली कई पीढ़ियों तक उपलब्ध हो सकें। अल्प अवधि के लाभ के लिए पेड़ काटे जाते हैं लेकिन लंबी अवधि को ध्यान में रख कर पुनः वृक्षारोपण किया जाना चाहिए। वनों की कटाई से कृषि, आवासीय और औद्योगिक कार्यों के लिए भूमि प्राप्त हो सकती है लेकिन इससे भूमि कटाव की समस्या और पर्यावरण की सुरक्षा नहीं रह सकती।

प्रश्न 4.
क्या आपके विचार में संसाधनों का समान वितरण होना चाहिए ? संसाधनों के समान वितरण के विरुद्ध कौन-कौन सी ताकतें कार्य कर सकती हैं ?
उत्तर-
आर्थिक विकास का पर्यावरण संरक्षण के साथ सीधा संबंध है। संसार में संसाधनों का असमान वितरण ग़रीबी का एक मुख्य कारण है। संसाधनों का समान वितरण एक शांतिपूर्ण संसार की स्थापना कर सकता है। सरकारी अभिकर्ता और कुछ स्वार्थी तत्त्व प्राकृतिक संसाधनों के समान वितरण के विरुद्ध कार्य करते हैं। चोरी छिपे वनों की कटाई इसी का एक उदाहरण है।

प्रश्न 5.
हमें वन एवं वन्य जीवन का संरक्षण क्यों करना चाहिए ?
उत्तर-
वन एवं वन्य जीवन को निम्नलिखित कारणों से सुरक्षित रखना चाहिए

  1. प्रकृति में पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए।
  2. जीन पूल की सुरक्षा के लिए।
  3. फल, मेवे, सब्ज़ियाँ तथा औषधियाँ प्राप्त करने के लिए।
  4. इमारती तथा जलाने वाली लकड़ी प्राप्त करने के लिए।
  5. पर्यावरण में गैसीय संतुलन बनाने के लिए।
  6. वृक्षों के वायवीय भागों से पर्याप्त मात्रा में जल का वाष्पन होता है जो वर्षा के स्रोत का कार्य करते हैं।
  7. मृदा अपरदन एवं बाढ़ पर नियंत्रण करने के लिए।
  8. वन्य जीवों को आश्रय प्रदान करने के लिए।
  9. धन प्राप्ति के अच्छे स्रोत के रूप में।
  10. स्थलीय खाद्य श्रृंखला की निरंतरता के लिए।
  11. प्राणियों की प्रजाति को बनाये रखने के लिए।
  12. वन्य प्राणियों से ऊन, अस्थियाँ, सींग, दाँत, तेल, वसा तथा त्वचा आदि प्राप्त करने के लिए।

वन्य जीवन का संरक्षण राष्ट्रीय पार्क तथा पशुओं और पक्षियों के लिए शरण स्थल बनाने से किया जा सकता है। यह पशुओं का शिकार करने की निषेध आज्ञा का कानून प्राप्त करके किया जा सकता है।

प्रश्न 6.
संरक्षण के लिए कुछ उपाय सुझाइए।
उत्तर-
संरक्षण के उपाय-पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए वन्य जीवन का संरक्षण आवश्यक है। इसके लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं-

  1. सरकार को ऐसे कानून बनाने चाहिएं जिससे शिकारियों को प्रतिबंधित वन्य पशु का शिकार करने पर दंड मिले।
  2. राष्ट्रीय पार्क और पशु-पक्षी विहार स्थापित किए जाने चाहिएं जहां पर वन्य पशु सुरक्षित रह सकें।
  3. वनों को काटने पर रोक लगानी चाहिए।
  4. पर्यावरण की सुरक्षा के लिए वृक्षारोपण करना चाहिए और रोपित पेड़-पौधों की सुरक्षा करनी चाहिए।
  5. वनों की आग से रक्षा करनी चाहिए। प्रति वर्ष विश्व में अनेक वन जल कर नष्ट हो जाते हैं।
  6. वनों को अधिक चराई से बचाना चाहिए।

प्रश्न 7.
अपने निवास क्षेत्र के आस-पास जल संग्रहण की परंपरागत पद्धति का पता लगाइए।
उत्तर-
हमारे निवास क्षेत्र के आस-पास वर्षा के जल को जोहड़ों और तालाबों में इकट्ठा करने का प्रचलन था। भूमिगत टैंकों में भी जल संग्रहण का प्रचलन था।

प्रश्न 8.
इस पद्धति की पेयजल व्यवस्था (पर्वतीय क्षेत्रों में, मैदानी क्षेत्र अथवा पठार क्षेत्र) से तुलना कीजिए।
उत्तर-
पर्वतीय क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था

  • लद्दाख के क्षेत्रों में जिंग द्वारा जल संरक्षण किया जाता है, जिसमें बर्फ के ग्लेशियर को रखा जाता है जो दिन के समय पिघल कर जल की कमी को पूरा करता है।
  • बाँस की नालियाँ-जल संरक्षण की यह प्रणाली मेघालय में सदियों पुरानी पद्धति है। इसमें जल को बाँस की नालियों द्वारा संरक्षित करके उन्हें पहाड़ों के निचले भागों में उन्हीं बाँस की नालियों द्वारा लाया जाता है।

मैदानी क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था

  • तमिलनाडु क्षेत्र में वर्षा जल को बड़े-बड़े टैंकों में संरक्षित किया जाता है तथा ज़रूरत के समय उपयोग करते हैं।
  • बावरियाँ-ये मुख्यतः राजस्थान में पाए जाते हैं। ये छोटे-छोटे तालाब हैं जो प्राचीन काल में बंजारों द्वारा पीने के पानी की पूर्ति के लिए बनाए गए थे।

पठारी क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था

  • भंडार-ये मुख्यत: महाराष्ट्र में पाए जाते हैं, जिसमें नदियों के किनारों पर ऊँची दीवारें बनाकर बड़ी मात्रा में जल को संरक्षित किया जाता है।
  • जोहड़-ये पठारी क्षेत्रों की जमीन पर पाए जाने वाले प्राकृतिक छोटे खड्डे होते हैं। जो वर्षा जल को संरक्षित करने में सहायक होते हैं।

प्रश्न 9.
अपने क्षेत्र में जल के स्रोत का पता लगाइए। क्या इस स्रोत से प्राप्त जल उस क्षेत्र के सभी निवासियों को उपलब्ध है ?
उत्तर-
हमारे क्षेत्र में मुख्य जल स्रोत भूमिगत जल तथा नगर निगम द्वारा जल आपूर्ति हैं। कभी-कभी विशेषकर गर्मी के दिनों में इन स्रोतों से प्राप्त होने वाले जल में कुछ कमी आ जाती है तथा इसकी पूर्ण या समान उपलब्धता भी संभव नहीं होती।

PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 15 हमारा पर्यावरण

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PSEB Solutions for Class 10 Science Chapter 15 हमारा पर्यावरण

PSEB 10th Class Science Guide हमारा पर्यावरण Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्न में से कौन-से समूहों में केवल जैव निम्नकरणीय पदार्थ हैं ?
(a) घास, पुष्प तथा चमड़ा
(b) घास, लकड़ी तथा प्लास्टिक
(c) फलों के छिलके, केक एवं नींबू का रस
(d) केक, लकड़ी एवं घास।
उत्तर-
(a), (c) तथा (d)।

प्रश्न 2.
निम्न से कौन आहार श्रृंखला का निर्माण करते हैं ?
(a) घास, गेहूँ तथा आम ।
(b) घास, बकरी तथा मानव
(c) बकरी, गाय तथा हाथी
(d) घास, मछली तथा बकरी।
उत्तर-
(b) घास, बकरी तथा मानव।

प्रश्न 3.
निम्न में से कौन पर्यावरण-मित्र व्यवहार कहलाते हैं ?
(a) बाज़ार जाते समय सामान के लिए कपड़े का थैला ले जाना।
(b) कार्य समाप्त हो जाने पर लाइट (बल्ब) तथा पंखे का स्विच बंद करना।
(c) मां द्वारा स्कूटर विद्यालय छोड़ने की बजाय तुम्हारा विद्यालय तक पैदल जाना
(d) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(d) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 4.
क्या होगा यदि हम एक पोषी स्तर के सभी जीवों को समाप्त कर दें ( मार डालें) ?
उत्तर-
यदि एक पोषी स्तर के सभी जीवों को समाप्त कर दें तो पारिस्थितिक संतुलन बुरी तरह प्रभावित हो जाएगा। प्रकृति की सभी खाद्य श्रृंखलाएं एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। जब किसी एक कड़ी को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाए तो उस आहार श्रृंखला का संबंध किसी दूसरी श्रृंखला से जुड़ जाता है। यदि घास → हिरण → शेर आहार श्रृंखला से शेरों को मार दिया जाए तो घास चरने वाले हिरणों की वृद्धि अनियंत्रित हो जाएगी। उनकी संख्या बहुत अधिक बढ़ जाएगी। उनकी बढ़ी हुई संख्या घास और वनस्पतियों को खत्म कर देगी जिससे वह क्षेत्र रेगिस्तान बन जाएगा। सहारा का रेगिस्तान इसी प्रकार के पारिस्थितिक परिवर्तन का उदाहरण है।

प्रश्न 5.
क्या किसी पोषी स्तर के सभी सदस्यों को हटाने का प्रभाव भिन्न-भिन्न पोषी स्तरों के लिए अलग-अलग होगा ? क्या किसी पोषी स्तर के जीवों को पारितंत्र को प्रभावित किए बिना हटाना संभव है ?
उत्तर-
किसी पोषी स्तर के सभी सदस्यों को हटाने का प्रभाव भिन्न-भिन्न पोषी स्तरों पर अलग-अलग होगा। –

  1. उत्पादकों को हटाने का प्रभाव-यदि उत्पादकों को पूर्ण रूप से नष्ट कर दिया तो सारा पारितंत्र ही नष्ट हो जाएगा। तब किसी प्रकार का जीवन नहीं रहेगा।
  2. शाकाहारियों को हटाने का प्रभाव-शाकाहारियों को नष्ट करने से उत्पादकों (पेड़-पौधों-वनस्पतियों) के जनन और वृद्धि पर रोक-टोक समाप्त हो जाएगी और मांसाहारी भूख से मर जाएंगे।
  3. मांसाहारियों को हटाने का प्रभाव-मांसाहारियों को हटा देने से शाकाहारियों की संख्या इतनी अधिक तेजी से बढ़ जाएगी कि क्षेत्र की सभी वनस्पतियाँ समाप्त हो जाएंगी।
  4. अपघटकों को हटाने का प्रभाव-अपघटकों को हटा देने से मृतक जीव-जंतुओं के ढेर लग जाएंगे।

उन के सड़े हुए शरीरों में तरह-तरह के जीवाणुओं के उत्पन्न हो जाने से बीमारियां फैलेंगी। मिट्टी में उत्पादकों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों की कमी हो जाएगी। किसी पोषी स्तर के जीवों को पारितंत्र को प्रभावित किए बिना हटाना संभव नहीं है। उत्पादकों को हटाने से शाकाहारी जीवित नहीं रह सकते हैं और शाकाहारियों के न रहने से मांसाहारी नहीं रह सकते। अपघटकों को हटा देने से उत्पादकों को अपनी वृद्धि के लिए पोषक तत्व प्राप्त नहीं हो पाएंगे।

प्रश्न 6.
जैविक आवर्धन (Biological magnification) क्या है ? क्या पारितंत्र के विभिन्न स्तरों पर जैविक आवर्धन का प्रभाव भी भिन्न-भिन्न होगा ?
उत्तर-
जैविक आवर्धन-विभिन्न साधनों द्वारा हानिप्रद रसायनों का हमारी आहार श्रृंखला में प्रवेश करना तथा उनका हमारे शरीर में सांद्रित होने की प्रक्रिया को जैव आवर्धन कहते हैं। इन रसायनों का हमारे शरीर में प्रवेश विभिन्न विधियों द्वारा हो सकता है।

हम फसलों को रोगों से बचाने के लिए कीटनाशक, पीड़कनाशक आदि रसायनों का छिड़काव करते हैं। इनका कुछ भाग मिट्टी द्वारा भूमि में रिस जाता है जिसे पौधे जड़ों द्वारा खनिजों के साथ ग्रहण कर लेते हैं। इन्हीं पौधों के उपयोग से वे रसायन हमारे शरीर में प्रवेश करते हैं तथा पौधों के लगातार सेवन से उनकी सांद्रता बढ़ती जाती है जिसके परिणामस्वरूप जैव आवर्धन का विस्तार होता है।

मनुष्य सर्वभक्षी है। वह पौधों तथा जंतुओं दोनों का उपयोग करता है तथा अनेक आहार श्रृंखलाओं में स्थान ग्रहण कर सकता है। इस कारण मानव में रसायन पदार्थों का प्रवेश तथा सांद्र शीघ्रता से होता है और जैव आवर्धन का विस्तार होता है।

उदाहरण-
उत्तरी अमेरिका में मिशीगन झील के आसपास मच्छरों को मारने के लिए बहुत अधिक डी० डी० टी० का छिड़काव किया गया जिससे पेलिकन नामक पक्षियों की संख्या बहुत कम हो गई। पर्यावरण विशेषज्ञों द्वारा यह पाया गया कि पानी में प्रति दस लाख कण में 0.2 कण डी० डी० टी० (1 ppm = \(\frac{1}{1000000} \)) है। डी० डी० टी० के उच्च स्तर के कारण पेलिकन पक्षियों के अंडों का आवरण पतला हो गया जिससे बच्चों के निकलने से पहले ही अंडे टूट जाते थे।

प्रश्न 7.
हमारे द्वारा उत्पादित अजैव निम्नीकरणीय कचरे से कौन-सी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं?
उत्तर-
हमारे द्वारा उत्पादित प्लास्टिक, डी० डी० टी० आदि से युक्त अजैव निम्नीकरणीय कचरे से अनेक समस्याएँ उत्पन्न होती हैं-

  1. नाले-नालियों में अवरोध।
  2. मृदा प्रदूषण।
  3. प्लास्टिक जैसे पदार्थों को निगल लेने से शाकाहारी जंतुओं की मृत्यु।
  4. मानव शरीर में जैव आवर्धन।
  5. पारिस्थितिक संतुलन में अवरोध।
  6. जल, वायु और मृदा प्रदूषण।
  7. सौंदर्य बोध की दृष्टि से हानिकारक और बुरा।

प्रश्न 8.
यदि हमारे द्वारा उत्पादित सारा कचरा जैव निम्नीकरणीय हो, तो क्या इनका हमारे पर्यावरण पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा ?
उत्तर-
यदि हमारे द्वारा उत्पादित सारा कचरा जैव निम्नीकरणीय हो और उसका निपटान ठीक प्रकार से कर दिया जाए तो हमारे पर्यावरण पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा।

प्रश्न 9.
ओज़ोन परत की क्षति हमारे लिए चिंता का विषय क्यों है ? इस क्षति को सीमित करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं ?
उत्तर-
विभिन्न रासायनिक कारणों से ओज़ोन परत को क्षति बहुत तेजी से हो रही है। क्लोरोफ्लोरो कार्बनों की वृद्धि के कारण ओज़ोन परत में छिद्र उत्पन्न हो गए हैं जिनसे सूर्य के प्रकाश में विद्यमान पराबैंगनी विकिरणें सीधे पृथ्वी पर आने लगी हैं जो कैंसर, मोतिया बिंद और त्वचा रोगों के कारण बन रहे हैं। ओजोन परत पराबैंगनी (UV) विकिरणों का अवशोषण कर लेती है।

इस क्षति को सीमित करने के लिए 1987 में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) में सर्वसम्मति यही बनी है कि क्लोरोफ्लोरो कार्बन (CFCs) के उत्पादन को 1986 के स्तर पर सीमित रखा जाए। मांट्रियल प्रोटोकोल में 1987 में सन् 1998 तक क्लोरोफ्लोरो कार्बन के प्रयोग में 50% की कमी करने की बीत कही गई। सन् 1992 में मांट्रियल प्रोटोकॉल की मीटिंग में 1996 तथा CFCs पर धीरे-धीरे रोक लगाने को स्वीकार किया गया। अब क्लोरोफ्लोरो कार्बन की जगह हाइड्रोफ्लोरो कार्बनों का प्रयोग आरंभ किया गया है जिसमें ओजोन परत को क्षति पहुँचाने वाले क्लोरीन या ब्रोमीन नहीं हैं। जनसामान्य में इसके प्रति भी सजगता लगभग नहीं है।

सजगता को बढ़ाये जाने की आवश्यकता है। विश्वभर की सरकारों को निम्नलिखित कार्य तत्परता से करने चाहिएं-

  1. सुपर सॉनिक विमानों का कम-से-कम प्रयोग।
  2. नाभिकीय विस्फोटों पर नियंत्रण रखना चाहिए।
  3. क्लोरोफ्लोरो कार्बन के प्रयोग को सीमित करना चाहिए।
  4. CFCs के विकल्प की तलाश करनी चाहिए।

Science Guide for Class 10 PSEB हमारा पर्यावरण InText Questions and Answers

प्रश्न 1.
क्या कारण है कि कुछ पदार्थ जैव निम्नीकरणीय होते हैं और कुछ अजैव निम्नीकरणीय ?
उत्तर-
जैव निम्नीकरणीय पदार्थ जैविक प्रक्रमों से अपघटित हो जाते हैं। वे जीवाणुओं तथा अन्य प्राणियों के द्वारा उत्पन्न एंजाइमों की सहायता से समय के साथ अपने आप अपघटित हो कर पर्यावरण का हिस्सा बन जाते हैं। लेकिन अजैव निम्नीकरण पदार्थ जैविक प्रक्रमों से अपघटित नहीं होते। अपनी संश्लिष्ट रचना के कारण उनके बंध दृढ़तापूर्वक आपस में जुड़े रहते हैं और एंजाइम उन पर अपना प्रभाव नहीं डाल पाते।

प्रश्न 2.
ऐसे दो तरीके सुझाइए जिनमें जैव निम्नीकरणीय पदार्थ पर्यावरण को प्रभावित करते हैं।
उत्तर-

  • जैव निम्नीकरणीय पदार्थ बड़ी मात्रा में पर्यावरण को प्रदूषित करते हैं। इनसे दुर्गंध और गंदगी फैलती है।
  • जैव निम्नीकरणीय पदार्थ तरह-तरह की बीमारियों को फैलाने के कारक बनते हैं। उनसे पर्यावरण में हानिकारक जीवाणु बढ़ते हैं।

प्रश्न 3.
ऐसे दो तरीके बताइए जिनमें अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ पर्यावरण को प्रभावित करते हैं।
उत्तर-

  1. अजैव निम्नीकरणीय पदार्थों का अपघटन नहीं हो पाता। वे उद्योगों में तरह-तरह के रासायनिक पदार्थों से तैयार हो कर बाद में मिट्टी में अति सूक्ष्म कणों के रूप में मिल कर पर्यावरण को क्षति पहुँचाते हैं।
  2. वे खाद्य श्रृंखला में मिलकर जैव आवर्धन करते हैं और मानवों को तरह-तरह की हानि पहुँचाते हैं।

प्रश्न 4.
पोषी स्तर क्या है ? एक आहार श्रृंखला का उदाहरण दीजिए तथा इसमें विभिन्न पोषी स्तर बनाइए।
उत्तर-
पोषी स्तर- आहार श्रृंखला में उत्पादक और उपभोक्ता का स्थान ग्रहण करने वाले जीव जीवमंडल को कोई निश्चित संरचना प्रदान करते हैं, जिसे पोषी स्तर कहते हैं। आहार श्रृंखला में उत्पादक का पहला स्थान होता है। यदि हम पौधों का सेवन करें तो श्रृंखला में केवल उत्पादक तथा उपभोक्ता स्तर होते हैं। मांसाहारियों की आहार श्रृंखला में अधिक उपभोक्ता होते हैं।
आहार श्रृंखला का उदाहरण-
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 15 हमारा पर्यावरण 1

प्रश्न 5.
पारितंत्र में अपमार्जकों की क्या भूमिका है ? ।
उत्तर-
पारितंत्र में अपमार्जक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जीवाणु मृतोपजीवी, कवक जैसे अति सूक्ष्म जीव मृत जैव अवशेषों का अपमार्जन करते हैं। ये मृत शरीरों का अपने भोजन के लिए उपयोग करते हैं। वे जटिल कार्बनिक पदार्थों को सरल पदार्थों में बदल देते हैं। फलों सब्जियों के छिलके, गले-सड़े फल, जैविक कचरा, गायभैसों का गोबर, पेड़-पौधों के गले सड़े भाग आदि अपमार्जकों के द्वारा विघटित कर दिए जाते हैं और वे आसानी से प्रकृति में पुनः मिल जाते हैं। अपमार्जक जटिल कार्बनिक पदार्थों को सरल अकार्बनिक पदार्थों में बदल देते हैं जो मिट्टी में मिलकर पौधों द्वारा पुन: उपयोग में लाए जाते हैं।

प्रश्न 6.
ओज़ोन क्या है तथा यह किसी पारितंत्र को किस प्रकार प्रभावित करती है ?
उत्तर-
ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं से बनी ओज़ोन का वायुमंडल के ऊपरी स्तर (स्ट्रैटोस्फीयर) में लगभग 16 किलोमीटर ऊपर एक आवरण है जो सूर्य से आने वाली पराबैंगनी विकिरणों से पृथ्वी की सुरक्षा करता है। पराबैंगनी विकिरण जीवों के लिए अत्यंत हानिकारक है। यह त्वचा कैंसर करती है। पृथ्वी के चारों ओर ओजोन परत समाप्त हो जाने से सूर्य के प्रकाश से आने वाली पराबैंगनी किरणें पृथ्वी पर बिना रोक-टोक पहुँचने लगेंगी और पारितंत्र को दुष्प्रभावित करने लगेंगी। सन् 1980 से वायुमंडल में ओज़ोन की मात्रा में तेज़ी से गिरावट आने लगी है।

ओज़ोन पारितंत्र को निम्नलिखित आधारों पर भी प्रभावित करती है –

  • तापमान में परिवर्तन के कारण धरती पर वर्षा में कमी।
  • चावल जैसी फ़सलों पर प्रभाव।
  • जलीय जीवों और पदार्थों पर प्रभाव।
  • मानवों में प्रतिरोध क्षमता की कमी तथा त्वचा कैंसर में वृद्धि ।
  • पारिस्थितिक असंतुलन उत्पन्न होने की संभावना
  • सूक्ष्मजीवों में उत्परिवर्तन और उनकी मृत्यु का कारण।

प्रश्न 7.
आप कचरा निपटान की समस्या कम करने में क्या योगदान कर सकते हैं ? किन्हीं दो तरीकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
कचरा व्यक्ति और समाज दोनों के लिए अति हानिकारक है क्योंकि इससे केवल गंदगी ही नहीं फैलती बल्कि यह अनेक प्रकार की बीमारियों का कारण भी बनता है। इसे निपटाने के लिए निम्नलिखित दो तरीकों को अपनाया जा सकता है-

  • पुन: चक्रण-कचरे में से कागज़, प्लास्टिक, धातुएँ, चीथड़े आदि चुन कर अलग करके उनका पुन: चक्रण किया जाना चाहिए। पुराने कागज़ और कपड़े के पुनः चक्रण से पेड़ों को कटने से बचाया जा सकता है। प्लास्टिक का बार-बार उपयोग किया जा सकता है।
  • मिट्टी में दबाना-जैव निम्नीकरण पदार्थों को मिट्टी में दबा कर कचरे का निपटान किया जा सकता है। उससे खाद प्राप्त कर खेतों में प्रयुक्त किया जा सकता है।

PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 14 ऊर्जा के स्रोत

Punjab State Board PSEB 10th Class Science Book Solutions Chapter 14 ऊर्जा के स्रोत Textbook Exercise Questions, and Answers.

PSEB Solutions for Class 10 Science Chapter 14 ऊर्जा के स्रोत

PSEB 10th Class Science Guide ऊर्जा के स्रोत Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
गर्म जल प्राप्त करने के लिए हम सौर ऊर्जा जल तापक का उपयोग किस दिन नहीं कर सकते
(a) धूप वाले दिन
(b) बादलों वाले दिन
(c) गरम दिन
(d) पवनों (वायु) वाले दिन।
उत्तर-
(b) बादलों वाले दिन ।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित में से कौन जैवमात्रा ऊर्जा स्रोत का उदाहरण नहीं है
(a) लकड़ी
(b) गोबर गैस
(c) नाभिकीय ऊर्जा
(d) कोयला।
उत्तर-
(c) नाभिकीय ऊर्जा ।

प्रश्न 3.
जितने ऊर्जा स्रोत हम उपयोग में लाते हैं उनमें से अधिकांश सौर ऊर्जा को निरूपित करते हैं। निम्नलिखित में से कौन-सा ऊर्जा स्रोत अंततः सौर ऊर्जा से व्युत्पन्न नहीं है। (a) भूतापीय ऊर्जा
(b) पवन ऊर्जा
(c) नाभिकीय ऊर्जा
(d) जैवमात्रा।
उत्तर-
(a) भूतापीय ऊर्जा।

प्रश्न 4.
ऊर्जा स्रोत के रूप में जीवाश्मी ईंधनों तथा सूर्य की तुलना कीजिए और उनमें अंतर लिखिए।
उत्तर-

जीवाश्मी ईंधन सूर्
(1) यह ऊर्जा का अनवीकरणीय स्रोत है। (1) यह ऊर्जा का विकरणीय स्रोत है।
(2) यह बहुत अधिक प्रदूषण फैलाता है। (2) यह प्रदूषण नहीं फैलाता है।
(3) रासायनिक क्रियाओं से ऊष्मा और प्रकाश उत्पन्न प्रकाश उत्पन्न करता है। (3) परमाणु संलयन से बहुत अधिक मात्रा में ऊष्मा और करता है।
(4) निरंतर ऊर्जा प्रदान नहीं कर सकता है। (4) निरंतर ऊर्जा प्रदान करता है।
(5) मानव मन चाहे ढंग से उस पर नियंत्रण कर भी अवस्था में नियंत्रण नहीं कर सकता। (5) मनचाहे ढंग से उसमें ऊर्जा उत्पत्ति पर मानव किसी सकता है।

प्रश्न 5.
जैवमात्रा तथा ऊर्जा स्रोत के रूप में जल वैद्युत् की तुलना कीजिए और उनमें अंतर लिखिए ।
उत्तर-
जैवमात्रा तथा जल विद्युत् की तुलना –

जैवमात्रा जल वैद्युत्
(1) जैव-मात्रा केवल सीमित मात्रा में ही ऊर्जा प्रदान कर सकती है। (1) जल वैद्युत् ऊर्जा का एक बड़ा स्रोत है।
(2) जैव-मात्रा से ऊर्जा प्राप्त करने के प्रक्रम में प्रदूषण फैलता है। (2) जल वैद्युत् ऊर्जा का स्वच्छ स्रोत है।
(3) जैव-मात्रा से प्राप्त ऊर्जा को सीमित स्थान में ही प्रयोग किया जा सकता है। (3) जल वैद्युत् ऊर्जा को पारेषण लाइन की सहायता से कहीं भी ले जाया जा सकता है।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित से ऊर्जा निष्कर्षित करने की सीमाएँ लिखिए
(a) पवनें
(b) तरंगें
(c) ज्वार-भाटा।
उत्तर-
(a) पवन ऊर्जा निष्कर्षण की सीमाएँ

  • पवन ऊर्जा निष्कर्षण के लिए पवन ऊर्जा फार्म की स्थापना हेतु बहुत अधिक बड़े स्थान की आवश्यकता होती है। एक MW के जनित्र के लिए 2 हेक्टेयर स्थान की आवश्यकता होती है।
  • पवन ऊर्जा तभी उत्पन्न हो सकती है जब पवन का न्यूनतम वेग 15 km/h हो।
  • हवा की तेज़ गति के कारण टूट-फूट और नुकसान की संभावनाएं अधिक होती हैं।
  • सारा वर्ष आवश्यक पवनें नहीं चलतीं।

(b) तरंगों से ऊर्जा निष्कर्षण की सीमाएँ-समुद्रीय जल तरंगों के वेग के कारण उनमें ऊर्जा समाहित होती है जिसके कारण निष्कर्षण के लिए निम्न सीमाएँ हैं

  • तरंग ऊर्जा तभी प्राप्त की जा सकती है जब तरंगें बहुत प्रबल हों।
  • इसके समय और स्थिति बहुत बड़ी परिसीमाएं हैं।

(c) ज्वार भाटा ऊर्जा निष्कर्षण की सीमाएँ-ज्वारभाटा के कारण सागर की लहरों का चढ़ना और गिरना घूर्णन गति करती पृथ्वी पर मुख्य रूप से चंद्रमा के गुरुत्वीय आर्कषण के कारण होता है। तरंगों की ऊंचाई और बांध बनाने की स्थिति इसकी प्रमुख परिसीमाएं हैं।

प्रश्न 7.
ऊर्जा स्रोतों का वर्गीकरण निम्नलिखित वर्गों में किस आधार पर करेंगे ?
(a) नवीकरणीय तथा अनवीकरणीय
(b) समाप्य तथा अक्षय क्या
(a) तथा (b) के विकल्प समान हैं ?
उत्तर-
(a) नवीकरणीय तथा अनवीकरणीय स्रोत

  • नवीकरणीय स्त्रोत-ये स्रोत ऊर्जा की उत्पत्ति तब तक करने की योग्यता रखते हैं जब तक हमारा सौर मंडल विद्यमान है। पवन ऊर्जा, जल ऊर्जा, सागर की तरंगें, परमाणु ऊर्जा आदि नवीकरणीय स्रोत हैं।
  • अनवीकरणीय स्रोत-ऊर्जा के ये स्रोत लाखों वर्ष पहले विशिष्ट स्थितियों में बने थे। एक बार उपयोग कर लिए जाने के बाद इन्हें बहुत लंबे समय तक पुन: उपयोग में नहीं लाया जा सकता। जीवाश्मी ईंधन जैसे कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैसें ऊर्जा के अनवीकरणीय स्रोत हैं।

(b) समाप्य तथा अक्षय (असमाप्य)-ऊर्जा के समाप्य स्रोत अनवीकरणीय हैं जबकि अक्षय (असमाप्य) स्रोत अनवीकरणीय हैं।

प्रश्न 8.
ऊर्जा के आदर्श स्रोत में क्या गुण होते हैं ?
उत्तर-

  • पर्याप्त मात्रा में ऊर्जा प्रदान करने की क्षमता होनी चाहिए।
  • सरलता से प्रयोग करने की सुविधा से संपन्न होनी चाहिए।
  • समान दर से ऊर्जा की उत्पत्ति होनी चाहिए।
  • सरल भंडारण के योग्य होनी चाहिए।
  • परिवहन की योग्यता से युक्त होनी चाहिए।
  • यह सस्ता और सुलभ होना चाहिए।

प्रश्न 9.
सौर कुक्कर का उपयोग करने के क्या लाभ तथा हानियां हैं? क्या ऐसे भी क्षेत्र हैं जहाँ सौर कुक्करों की सीमित उपयोगिता है ?
उत्तर-
सौर कुक्कर के लाभ-

  • ईंधन का कोई खर्च नहीं होता। ईंधन और विद्युत् की बचत है।
  • पूर्ण रूप से प्रदूषण रहित है। धीमी गति से खाना पकने के कारण भोजन के पोषक तत्व नष्ट नहीं होते।
  • किसी प्रकार की गंदगी नहीं फैलती।
  • खाना पकाते समय निरंतर देखभाल की आवश्यकता नहीं पड़ती।

सौर कुक्कर की हानियां (सीमाएँ)

  • बहुत अधिक तापमान उत्पन्न नहीं कर सकता।
  • रात के समय काम में नहीं लाया जा सकता।
  • बादलों वाले दिन काम नहीं कर सकता।
  • यह 100°C – 140°C तापमान प्राप्त करने के लिए 2-3 घंटे ले लेता है।

पृथ्वी पर कुछ ऐसे क्षेत्र भी हैं जहाँ सौर कुक्कर का उपयोग अत्यंत सीमित है। उदाहरण के लिए, चारों ओर पर्वतों से घिरी हुई घाटी जहां सूर्य की धूप दिन में बहुत कम समय के लिए मिलती है। पहाड़ी ढलानों पर प्रति एकांक क्षेत्रफल पर आपतित सौर ऊर्जा की मात्रा भी कम होती है। इसके अतिरिक्त भूमध्य रेखा से सुदूर क्षेत्रों में सूर्य की किरणें पृथ्वी की सतह पर लंबवत् आपतित नहीं होती। अतः ऐसे क्षेत्रों पर सौर कुक्कर का प्रयोग करने के लिए पर्याप्त सौर ऊर्जा नहीं मिल पाती है।

प्रश्न 10.
ऊर्जा की बढ़ती मांग के पर्यावरणीय परिणाम क्या हैं ? ऊर्जा की खपत को कम करने के उपाय लिखिए।
उत्तर-
ऊर्जा की मांग तो जनसंख्या वृद्धि के साथ निरंतर बढ़ती ही जाएगी। ऊर्जा किसी भी प्रकार की हो उसका पर्यावरण पर निश्चित रूप से कुप्रभाव पड़ेगा। ऊर्जा की खपत कम नहीं हो सकती। उद्योग-धंधे, वाहन, दैनिक आवश्यकताएं आदि सब के लिए ऊर्जा की आवश्यकता तो रहेगी। यह भिन्न बात है कि वह प्रदूषण फैलाएगा या पर्यावरण में परिवर्तन उत्पन्न करेगा।

ऊर्जा की बढ़ती मांग के कारण जीवाश्म ईंधन पृथ्वी की परतों के नीचे समाप्त होने के कगार पर पहुँच गया है। लगभग 200 वर्ष के बाद यह पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। जल विद्युत् ऊर्जा के लिए बड़े-बड़े बांध बनाए गए हैं जिस कारण पर्यावरण पर गहरा प्रभाव पड़ा है। इसलिए ऊर्जा के विभिन्न नए स्रोत खोजते समय ध्यान रखा जाना चाहिए कि उस ईंधन का कैलोरीमान अधिक हो, सरलता से प्राप्त हो, दाम भी बहुत अधिक न हो तथा स्रोत का पर्यावरण पर कुप्रभाव नहीं पड़ना चाहिए।

ऊर्जा की खपत को कम करने के लिए उपाय- इसके लिए निम्नलिखित उपाय उपयोग में लाए जा सकते हैं-

  1. घरों में विद्युत् उपकरणों का अनावश्यक प्रयोग में न किया जाए।
  2. पंखे, कूलर, ए० सी० आदि का प्रयोग करते समय परिवार के सभी सदस्य एक ही कमरे में रहने का प्रयास करें।
  3. बेहतर सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को विकसित किया जाए तथा निजी गाड़ियों के प्रयोग को हतोत्साहित किया जाए।
  4. स्ट्रीट लाइट को दिन में बंद किए जाने की समुचित व्यवस्था की जाएं।
  5. पारंपरिक उत्सवों (दीपावली, शादी समारोह आदि) पर ऊर्जा की बर्बादी पर रोक लगाई जाए।

Science Guide for Class 10 PSEB ऊर्जा के स्रोत InText Questions and Answers

प्रश्न 1.
ऊर्जा का उत्तम स्रोत किसे कहते हैं ?
उत्तर-
ऊर्जा का उत्तम स्रोत वह है जिसमें निम्नलिखित विशेषताएं हैं

  • जिसका प्रति एकांक द्रव्यमान अधिक कार्य करे।
  • जिसका भंडारण और परिवहन सुगम हो।
  • सुगमता से प्राप्त हो जाता हो।
  • सस्ता हो।

प्रश्न 2.
उत्तम ईंधन किसे कहते हैं ?
उत्तर-
उत्तम ईंधन-वह ईंधन जिसमें निम्नलिखित विशेषताएं हो, वह उत्तम ईंधन कहलाता है। उत्तम ईंधन की विशेषताएँ-

  • इसका ऊष्मीय मान (कैलोरीमान) अधिक होना चाहिए।
  • ईंधन का ज्वलन ताप उचित होना चाहिए।
  • ईंधन के दहन की दर संतुलित होनी चाहिए अर्थात् न अधिक हो और न कम।
  • ईंधन में अज्वलनशील पदार्थों की मात्रा जितनी कम हो उतना अच्छा होता है।
  • ईंधन के दहन के पश्चात् विषैले पदार्थों का उत्पादन कम-से-कम होना चाहिए।
  • ईंधन की उपलब्धता पर्याप्त तथा सुलभ होनी चाहिए।
  • ईंधन कम मूल्य पर प्राप्त हो सके।
  • ईंधन का आसानी से भंडारण तथा परिवहन सुरक्षित होना चाहिए।

प्रश्न 3.
यदि आप अपने भोजन को गर्म करने के लिए किसी भी ऊर्जा स्रोत का उपयोग कर सकते हैं तो आप किस का उपयोग करेंगे और क्यों ?
उत्तर-
हम अपना भोजन गर्म करने के लिए LPG (द्रवित पेट्रोलियम गैस) का उपयोग करना पसंद करेंगे, क्योंकि इस का ज्वलनांक अधिक नहीं है, कैलोरीमान अधिक है, दहन संतुलित दर से होता है तथा दहन के बाद विषैले पदार्थों को उत्पन्न नहीं करती।

प्रश्न 4.
जीवाश्मी ईंधन की क्या हानियाँ हैं ?
उत्तर-
जीवाश्मी ईंधन की हानियाँ-जीवाश्मी ईंधन से होने वाली प्रमुख हानियाँ निम्नलिखित हैं –

  • पृथ्वी पर जीवाश्मी ईंधन का सीमित भंडार मौजूद है जो कुछ ही समय में समाप्त हो जाएगा।
  • जीवाश्मी ईंधन, जलाने पर विषैली गैसें मुक्त कर वायु प्रदूषण फैलाते हैं।
  • जीवाश्मी ईंधन को जलाने पर उत्सर्जित गैसें कार्बन डाइऑक्साइड तथा कार्बन मोनोऑक्साइड आदि ग्रीन हाऊस प्रभाव उत्पन्न करती हैं जिसके फलस्वरूप पृथ्वी का तापमान बढ़ता चला जा रहा है।
  • जीवाश्मी ईंधन के दहन से उत्सर्जित गैसें अम्लीय वर्षा का भी कारण बनती हैं।

प्रश्न 5.
हम ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों की ओर क्यों ध्यान दे रहे हैं ?
उत्तर-
वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर ध्यान देने के कारण-हम अपनी दैनिक जीवन के विभिन्न कार्यों जैसे खाना पकाना, विद्युत् उत्पादन, औद्योगिक संयंत्रों तथा वाहन चलाने आदि के लिए जीवाश्मी ईंधनों (कोयला, पेट्रोलियम)पर निर्भर हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि जिस दर से हम जीवाश्म ईंधन का उपयोग कर रहे हैं अतिशीघ्र ही जीवाश्म ईंधन का भंडार समाप्त हो जाएगा। वैकल्पिक स्रोत जल से उत्पादित विद्युत् की भी अपनी सीमाएँ हैं। अत: जल से सभी ऊर्जा की आवश्यकताओं को पूरा करना असंभव है। इसलिए शीघ्र ही भयंकर ऊर्जा संकट होने की आशंका है। इस बात को ध्यान में रखते हुए ऊर्जा की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों की ओर ध्यान दिया जा रहा है।

प्रश्न 6.
हमारी सुविधा के लिए पवनों तथा जल ऊर्जा के पारंपरिक उपयोग में किस प्रकार के सुधार किए गए हैं ?
उत्तर-
पवनों तथा जल ऊर्जा का लंबे समय से प्रयोग मानव के द्वारा पारंपरिक रूप में किया जाता है। वर्तमान समय में इनमें कुछ सुधार किए गए हैं ताकि इनसे ऊर्जा की प्राप्ति सरलता, सहजता और सुगमता से हो।
1. पवन ऊर्जा-प्राचीन काल में पवन ऊर्जा से पवन चक्कियां चला कर कुओं से जल खींचने का काम होता था लेकिन अब पवन ऊर्जा का उपयोग विद्युत् उत्पन्न करने में किया जाने लगा है। विद्युत् उत्पन्न करने के लिए अनेक पवन चक्कियों को समुद्रीय तट के समीप विशाल क्षेत्र में लगाया जाता है। ऐसे क्षेत्र को पवन ऊर्जा फार्म कहते हैं।

2. जल ऊर्जा-प्राचीन काल में जल ऊर्जा का उपयोग जल परिवहन में किया जाता है। जल को विद्युत् ऊर्जा के रूप में प्रयोग करने के लिए पहाड़ों की ढलानों पर बांध बनाकर जल की स्थितिज ऊर्जा का उपयोग किया जाता है। आज जल विद्युत् संयंत्रों को बांधों से संबंधित किया गया है।

जल विद्युत् उत्पन्न करने के लिए नदियों के बहाव को रोक कर बड़ी-बड़ी कृत्रिम झीलों में जल इकट्ठा कर लिया गया है। इस प्रक्रिया में जल की गतिज ऊर्जा को स्थितिज ऊर्जा में रूपांतरित कर लिया जाता है। बांध के ऊपरी भाग से पाइपों द्वारा जल को बांध के आधार पर स्थापित टरबाइन के ब्लेडों पर गिराया जाता है जो विद्युत् ऊर्जा को उत्पन्न करता है।

प्रश्न 7.
सौर कुक्कर के लिए कौन-सा दर्पण-अवतल, उत्तल अथवा समतल-सर्वाधिक उपयुक्त होता है? क्यों ?
उत्तर-
सौर कुक्कर में अवतल दर्पण सर्वाधिक उपयुक्त होता है क्योंकि यह प्रकाश की सभी किरणों को वांछित स्थान की ओर परावर्तित कर केंद्रित करता है जिससे सौर कुक्कर का तापमान बढ़ जाता है।

प्रश्न 8.
महासागरों से प्राप्त हो सकने वाली ऊर्जाओं की क्या सीमाएँ हैं ?
उत्तर-
महासागरों से अपार ऊर्जा की प्राप्ति हो सकती है परंतु सदैव ऐसा संभव नहीं हो सकता क्योंकि महासागरों से ऊर्जा रूपांतरण की तीन विधियों-ज्वारीय ऊर्जा, तरंग ऊर्जा और सागरीय तापीय ऊर्जा की अपनीअपनी सीमाएं हैं।
1. ज्वारीय ऊर्जा-ज्वारीय ऊर्जा का दोहन, सागर के किसी संकीर्ण क्षेत्र पर बांध बना कर किया जाता है। बांध पर स्थापित टरबाइन ज्वारीय ऊर्जा को विद्युत् ऊर्जा में रूपांतरित कर देता है। सागर के संकीर्ण क्षेत्र पर बांध निर्मित करके ऊर्जा की उचित स्थितियां सरलता से उपलब्ध नहीं होती।

2. तरंग ऊर्जा-तरंग ऊर्जा का व्यावहारिक उपयोग केवल वहीं हो सकता है जहां तरंगें अति प्रबल हों। विश्वभर में ऐसे स्थान बहुत कम हैं जहां सागर के तटों पर तरंगें इतनी प्रबलता से टकराती हों कि उनकी ऊर्जा को विद्युत् ऊर्जा में रूपांतरित किया जा सके।

3. सागरीय तापीय ऊर्जा-सागरीय तापीय ऊर्जा की प्राप्ति के लिए संयंत्र (OTEC) तभी कार्य कर सकता है जब महासागर के पृष्ठ पर जल का ताप तथा 2 कि० मी० तक की गहराई पर जल के ताप में 20°C का अंतर हो। इस प्रकार विद्युत् ऊर्जा प्राप्त हो सकती है परंतु यह प्रणाली बहुत महंगी है।

प्रश्न 9.
भूतापीय ऊर्जा क्या होती है ?
उत्तर-
भूपर्पटी की गहराइयों में भौमिकीय परिवर्तनों के कारण तप्त क्षेत्रों में पिघलती हुई चट्टानें ऊपर की ओर धकेल दी जाती हैं। जब भूमिगत जल इन तप्त स्थलों के संपर्क में आता है तो भाप उत्पन्न होती है। कभी-कभी तप्त जल को पृथ्वी को पृष्ठ से बाहर निकलने का निकास मार्ग मिल जाता है जिसे गर्म-चश्मा या ऊष्ण स्रोत कहते हैं। कभी-कभी भाप चट्टानों के बीच रुक जाती हैं और इसका दाब बहुत अधिक हो जाता है। पाइप डालकर भाप को बाहर निकाल लिया जाता है और उसकी सहायता से विद्युत् जनित्रों के द्वारा विद्युत् उत्पन्न की जाती है। अतः भौमिकीय परिवर्तनों के कारण भूपपर्टी की गहराइयों से तप्त स्थल और भूमिगत जल से बनी भाप उत्पन्न ऊर्जा को भूतापीय ऊर्जा कहते हैं।

प्रश्न 10.
नाभिकीय ऊर्जा का क्या महत्त्व है ?
उत्तर-
नाभिकीय ऊर्जा- भारी नाभिकीय परमाणु (यूरोनियम, प्लूटोनियम, थोरियम) के नाभिक पर निम्न ऊर्जा न्यूट्रॉन से बमबारी करके हल्के नाभिकों में तोड़ा जा सकता है जिससे विशाल मात्रा में ऊर्जा मुक्त होती है। यूरोनियम के एक परमाणु के विखंडन से जो ऊर्जा मुक्त होता है वह कोयले के किसी कार्बन परमाणु के दहन से उत्पन्न ऊर्जा की तुलना में एक करोड़ गुना अधिक होती है। अतः परम्परागत ऊर्जा स्रोतों की अपेक्षा नाभिकीय विखंडन से अत्यधिक ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है। अतः विकसित और विकासशील देश नाभिकीय ऊर्जा से विद्युत् ऊर्जा का रूपांतरण कर रहे हैं।

इससे निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं-

  • अधिक ऊर्जा की प्राप्ति के लिए कम ईंधन की आवश्यकता पड़ती है।
  • यह ऊर्जा का विश्वसनीय स्रोत है और लंबे समय तक विद्युत् ऊर्जा प्रदान करने में सामर्थ्य है।
  • अन्य स्रोतों की अपेक्षा कम खर्च पर ऊर्जा प्रदान करता है।

प्रश्न 11.
क्या कोई ऊर्जा स्रोत प्रदूषण मुक्त हो सकता है ? क्यों अथवा क्यों नहीं?
उत्तर-
नहीं, कोई भी ऊर्जा स्रोत पूर्ण रूप से प्रदूषण मुक्त नहीं हो सकता। कुछ स्रोत ऊर्जा उत्पन्न करते समय प्रदूषण उत्पन्न करते हैं और कुछ ऊर्जा स्रोतों के निर्माण में प्रदूषण होता है। उदाहरण के लिए सौर-सैल को प्रदूषण मुक्त ऊर्जा स्रोत कहा जाता है, परंतु इस युक्ति के निर्माण समय प्रदूषण होता है जिससे पर्यावरण की क्षति होती है।

प्रश्न 12.
राकेट ईंधन के रूप में हाइड्रोजन का उपयोग किया जाता है। क्या आप इसे CNG की तुलना में अधिक स्वच्छ ईंधन मानते हैं? क्यों अथवा क्यों नहीं ?
उत्तर-
हाइड्रोजन निश्चित रूप से CNG की अपेक्षा स्वच्छ ईंधन है क्योंकि न तो इसका अपूर्ण दहन होता है और न ही हाइड्रोजन जल कर कोई हानिकारक गैस उत्पन्न करती है, जबकि CNG के द्वारा NO2 तथा SO2 जैसी ग्रीन हाऊस गैसें मुक्त होती हैं।

प्रश्न 13.
ऐसे दो ऊर्जा स्रोतों के नाम लिखिए जिन्हें आप नवीकरणीय मानते हैं। अपने चयन के लिए तर्क दीजिए।
उत्तर-
जैव-मात्रा तथा बहते हुए जल की ऊर्जा, ऊर्जा के दो नवीकरणीय स्रोत हैं चूँकि जैव-मात्रा (वनों से प्राप्त लकड़ी) को पुनः प्राप्त किया जा सकता है। अतः इसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत माना जा सकता है। बहते हुए जल की ऊर्जा भी वास्तव में सौर ऊर्जा का ही एक रूप है; अतः यह भी ऊर्जा का नवीकरणीय स्रोत है।

प्रश्न 14.
ऐसे दो ऊर्जा स्रोतों के नाम लिखिए जिन्हें आप समाप्य मानते हैं। अपने चयन के लिए तर्क दीजिए।
उत्तर-
कोयला तथा पेट्रोलियम, दोनों ऊर्जा के दो समाप्य स्रोत हैं। कोयला तथा पेट्रोलियम, दोनों के पृथ्वी पर उपलब्ध भंडार जल्दी ही समाप्त हो जाने वाले हैं तथा इन्हें कभी भी पुनः प्राप्त नहीं किया जा सकता; अतः ये दोनों ही ऊर्जा के समाप्य स्रोत हैं।

PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव

Punjab State Board PSEB 10th Class Science Book Solutions Chapter 13 विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव Textbook Exercise Questions, and Answers.

PSEB Solutions for Class 10 Science Chapter 13 विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव

PSEB 10th Class Science Guide विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव Textbook Questions and Answers
प्रश्न 1.
निम्नलिखित में से कौन किसी लंबे विद्युत् धारावाही तार के निकट चुंबकीय क्षेत्र का सही वर्णन करता है ?
(a) चुंबकीय क्षेत्र की क्षेत्र रेखाएँ तार के लंबवत् होती हैं।
(b) चुंबकीय क्षेत्र की क्षेत्र रेखाएँ तार के समांतर होती हैं।
(c) चुंबकीय क्षेत्र की क्षेत्र रेखाएँ अरीय होती हैं जिनका उद्भव तार से होता है।
(d) चुंबकीय क्षेत्र की संकेंद्री क्षेत्र रेखाओं का केंद्र तार होता है।
उत्तर-
(d) चुंबकीय क्षेत्र की संकेंद्री क्षेत्र रेखाओं का केंद्र तार होता है।

प्रश्न 2.
वैद्युत् चुंबकीय प्रेरण की परिघटना –
(a) किसी वस्तु को आवेशित करने की प्रक्रिया है।
(b) किसी कुंडली में विद्युत् धारा प्रवाहित होने के कारण चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करने की प्रक्रिया है।
(c) कुंडली तथा चुंबक के बीच आपेक्षिक गति के कारण कुंडली में प्रेरित विद्युत् धारा उत्पन्न करना है।
(d) किसी विद्युत् मोटर की कुंडली को घूर्णन कराने की प्रक्रिया है।
उत्तर-
(c) कुंडली तथा चुंबक के बीच आपेक्षिक गति के कारण कुंडली में प्रेरित विद्युत् धारा उत्पन्न करना है।

प्रश्न 3.
विद्युत् धारा उत्पन्न करने की युक्ति को कहते हैं
(a) जनित्र
(b) गैल्वेनोमीटर
(c) ऐमीटर
(d) मोटर।
उत्तर-
(a) जनित्र।

प्रश्न 4.
किसी ac जनित्र तथा dc जनित्र में एक मूलभूत अंतर यह है कि
(a) ac जनित्र में विद्युत् चुंबक होता है जबकि dc मोटर में स्थायी चुंबक होता है।
(b) dc जनित्र उच्च वोल्टता का जनन करता है।
(c) ac जनित्र उच्च वोल्टता का जनन करता है।
(d) ac जनित्र में सी वलय होते हैं जबकि de जनित्र में दिक्परिवर्तक होता है।
उत्तर-
(d) ac जनित्र में सी वलय होते हैं जबकि dc जनित्र में दिक्परिवर्तक होता है।

प्रश्न 5.
लघुपथन के समय परिपथ में विद्युत्धारा का मान
(a) बहुत कम हो जाता है।
(b) परिवर्तित नहीं होता।
(c) बहुत अधिक बढ़ जाता है।
(d) निरंतर परिवर्तित होता है।
उत्तर-
(c) बहुत अधिक बढ़ जाता है।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित प्रकथनों में कौन-सा सही है तथा कौन-सा गलत है ? इसे प्रकथन के सामने अंकित कीजिए
(a) विद्युत् मोटर यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत् ऊर्जा में रूपांतरित करता है।
(b) विद्युत् जनित्र वैद्युत् चुंबकीय प्रेरण के सिद्धांत पर कार्य करता है।
(c) किसी लंबी वृत्ताकार विद्युत् धारावाही कुंडली के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र समांतर सीधी क्षेत्र रेखाएँ होता है।
(d) हरे विद्युत्रोधन वाला तार प्रायः विद्युन्मय तार होता है।
उत्तर-
(a) गलत।
(b) सही।
(c) सही।
(d) गलत।

प्रश्न 7.
चुंबकीय क्षेत्र के तीन स्रोतों की सूची बनाइए।
उत्तर-
चुंबकीय क्षेत्र के स्रोत-चुंबकीय क्षेत्र के निम्नलिखित स्रोत हैं
(i) स्थायी चुंबक
(ii) विद्युत् चुंबक
(iii) पृथ्वी चुंबक
(iv) गतिमान आवेश।

प्रश्न 8.
परिनालिका चुंबक की भांति कैसे व्यवहार करती है ? क्या आप किसी छड़ चुंबक की सहायता से किसी विद्युत् धारावाही परिनालिका के उत्तर ध्रुव तथा दक्षिण ध्रुव का निर्धारण कर सकते हैं ?
उत्तर-
धारावाही परिनालिका तथा छड़ चुंबक में समानताएँ-

  • छड़ चुंबक तथा धारावाही परिनालिका. दोनों को स्वतंत्रतापूर्वक लटकाने पर दोनों के अक्ष उत्तर-दक्षिण दिशा में ठहरते हैं।
  • छड़ चुंबक तथा धारावाही परिनालिका दोनों समान ध्रुवों को प्रतिकर्षित और असमान ध्रुवों को आकर्षित करते हैं।
  • छड़ चुंबक तथा धारावाही परिनालिका दोनों चुंबकीय पदार्थों (जैसे लोहा, कोबाल्ट, तथा निक्कल) को आकर्षित करते हैं।
  • छड़ चुंबक तथा धारावाही परिनालिका दोनों के निकट दिक्सूचक सूई लाने पर सूई विक्षेपित हो जाती है।
  • स्वतंत्रतापूर्वक लटक रहे चुंबक या धारावाही परिनालिका को धारावाही तार के समीप लाने पर दोनों विक्षेपित हो जाते हैं।

छड़ चुंबक द्वारा धारावाही परिनालिका के ध्रुव निर्धारण करना

  1. एक स्वतंत्रतापूर्वक क्षितिज अवस्था में लटक रही धारावाही परिनालिका के एक सिरे के निकट छड़ चुंबक का उत्तरी ध्रुव लाएँ। यदि धारावाही परिनालिका आकर्षित होती है तो यह सिरा परिनालिका का दक्षिणी ध्रुव होगा तथा विपरीत सिरा उत्तरी ध्रुव होगा।
  2. यदि छड़ चुंबक का उत्तरी ध्रुव परिनालिका के समीप लाने पर परिनालिका विक्षेपित हो जाती है तो छड़ चुंबक के उत्तरी ध्रुव के सामने वाला परिनालिका का सिरा उत्तरी ध्रुव और विपरीत सिरा दक्षिणी ध्रुव होगा।

प्रश्न 9.
किसी चुंबकीय क्षेत्र में स्थित विद्युत् धारावाही चालक पर आरोपित बल कब अधिकतम होता है?
उत्तर-
किसी चुंबकीय क्षेत्र में स्थित विद्युत् धारावाही चालक पर आरोपित बल तब अधिकतम होता है जब विद्युत् धारा की दिशा चुंबकीय क्षेत्र की दिशा के लंबवत् होती है।

प्रश्न 10.
मान लीजिए आप किसी चैंबर में अपनी पीठ को किसी दीवार से लगाकर बैठे हैं। कोई इलेक्ट्रॉन पुंज आपके पीछे की दीवार के सामने वाली दीवार की ओर क्षैतिजतः गमन करते हुए किसी प्रबल चुंबकीय क्षेत्र द्वारा आपके दाईं ओर विक्षेपित हो जाता है। चुंबकीय क्षेत्र की दिशा क्या है?
उत्तर-
फ्लेमिंग के वामहस्त नियम के अनुसार आरोपित बल की दिशा चुंबकीय क्षेत्र तथा विद्युत् धारा दोनों की दिशाओं के लंबवत् होती है। विद्युत् धारा की दिशा इलेक्ट्रॉनों की गति की दिशा के विपरीत होती है, इसलिए चुंबकीय क्षेत्र की दिशा नीचे की ओर होगी।

प्रश्न 11.
विद्युत् मोटर का नामांकित आरेख खींचिए। इसका सिद्धांत तथा कार्यविधि स्पष्ट कीजिए। विद्युत् मोटर में विभक्त वलय का क्या महत्त्व है ?
अथवा अंकित चित्र की सहायता से विद्युत् मोटर का सिद्धांत, रचना और कार्यविधि समझाओ।
अथवा
विद्युत् मोटर का सिद्धांत क्या है ? नामांकित चित्र बनाकर इसकी बनावट स्पष्ट करें। कार्यविधि का संक्षेप वर्णन करो। दैनिक जीवन में इसके दो उपयोग लिखो।
उत्तर-
विद्युत् मोटर– विद्युत् मोटर एक ऐसा यंत्र है जो विद्युत् ऊर्जा (विद्युत् धारा) को यांत्रिक ऊर्जा (गति) में परिवर्तित कर देता है। विद्युत् मोटर का दैनिक जीवन में प्रयोग बाल सुखाने वाला यंत्र (ड्रॉयर), पंखे, पानी का पंप आदि से लेकर कई प्रकार के वाहनों और उद्योगों में किया जाता है।
सिद्धांत- जब किसी धारा वाहक कुंडली को चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है तो इसकी कुंडली की भुजाओं पर वाहक बल क्रिया करता है जो कुंडली को घुमाने का प्रयत्न करता है।

बनावट-विद्युत् मोटर के निम्नलिखित भाग हैं –
1. आर्मेचर कुंडली-ABCD आर्मेचर कुंडली है। यह एक नर्म लोहे की छड़ के गिर्द लपेटी गई कुंडली है जो अपने अक्ष के गिर्द घूमने के लिए स्वतंत्र होती है।

2. दिक् परिवर्तक-दिक् परिवर्तक कुंडली, विभक्त वलयों S1 और S2 भागों में विभक्त होती है। कुंडली के सिरे इन विभक्त वलयों S1 और S2 से जुड़े होते हैं।

3. हॉर्स-शू चुंबक- कुंडली को हॉर्स-शू चुंबक के शक्तिशाली ध्रुवों के बीच रखा जाता है।

4. कार्बन ब्रुश-कार्बन ब्रुशों B1 तथा B2 का जोड़ा विभक्त वलयों को दबाकर रखता है । d.c. का एक स्रोत इन कार्बन ब्रुशों से जुड़ा होता है।
कार्य विधि-मान लो कुंडली ABCD का तल क्षैतिजीय है तथा विभक्त वलय S1 और S2 ब्रुश B1 और B,sub>2 को छू रहे हैं, जैसा कि चित्र में दर्शाया गया है। धारा अघड़ीवत् दिशा या (घड़ी की दिशा से उल्ट) में प्रवाहित की जाती है।

फ्लेमिंग के बाएं हाथ नियम के अनुसार भुजा AB बाहर की तरफ कागज़ के तल पर लंबात्मक दिशा में एक बल F महसूस करती है। भुजा DC अंदर की तरफ कागज के तल के समानांतर बल F महसूस करती है।CB और AD भुजाएं क्योंकि चुंबकीय क्षेत्र के समानांतर हैं, इसलिए कोई बल महसूस नहीं करतीं। भुजा AB और CD पर क्रिया कर रहे बल बराबर परंतु विलोम दिशायी हैं जो विभिन्न बिंदुओं पर क्रिया करके एक बल युग्म बनाते हैं जिससे कुंडली |

दिक् परिवर्तक घड़ीवत दिशा में घूमने लगती है। जब कुंडली कागज़ के तल के लंबात्मक ऊर्ध्वाधर दिशा में आ जाती है तथा भुजा AB ऊपर और CD नीचे हो जाती है तो बल युग्म शून्य हो जाता है परंतु जड़त्व के कारण कुंडली घूमती रहती है। विभक्त वलय S1 ब्रुश B2 के | तथा विभक्त वलय S2 ब्रुश B1 के संपर्क में आ जाता है।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव 1

विभक्त वलय अपनी स्थिति बदलते हैं न कि ब्रुश B1 और B2 फिर जब विद्युत् धारा कुंडली में दिशा ABCD में गुज़रती है तो कुंडली की भुजाओं पर क्रिया करके बल उस दिशा में बल युग्म बनाता है। इसके परिणामस्वरूप कुंडली उसी दिशा में निरंतर घूमती रहती है।
इस तरह मोटर की कुंडली के अक्ष पर यदि कोई पहिया लगा दिया जाये तो यह पहिया अनेक मशीनों को चला सकता है। विद्युत् धारा के उत्क्रमित होने पर दोनों भुजाओं पर आरोपित बलों की दिशाएं भी उत्क्रमित हो जाती हैं। कुंडली की जो भुजा पहले नीचे धकेली गई थी वह अब ऊपर की ओर धकेली जाती है और दूसरी ऊपर जाने वाली भुजा नीचे धकेल दी जाती है। प्रत्येक आधे घूर्णन के बाद यह क्रम दोहराया जाता है।

प्रश्न 12.
ऐसी कुछ युक्तियों के नाम लिखिए जिनमें विद्युत् मोटर उपयोग किए जाते हैं ?
उत्तर-
विद्युत् मोटर का उपयोग विद्युत् पंखों, रेफ्रिजरेटरों, विद्युत् मिश्रकों, वाशिंग मशीनों, कंप्यूटरों, MP 3 प्लेयरों, जल पंप, गेहूँ पीसने वाली मशीन आदि में किया जाता है।

प्रश्न 13.
कोई विद्युत्रोधी ताँबे की तार की कुंडली किसी गैल्वेनोमीटर से संयोजित है। क्या होगा यदि कोई छड़ चुंबक
(i) कुंडली में धकेला जाता है ?
(ii) कुंडली के भीतर से बाहर खींचा जाता है ?
(iii) कुंडली के भीतर स्थिर रखा जाता है ?
उत्तर-
(i) जैसे ही छड़ चुंबक, कुंडली के भीतर धकेला जाता है वैसे ही गैल्वनोमीटर की सूई में क्षणिक विक्षेप उत्पन्न होता है। यह कुंडली में विद्युत् धारा की उपस्थिति का संकेत देता है।
(ii) जब चुंबक को कुंडली के भीतर से बाहर की ओर खींचा जाता है तो सूई में क्षणिक विक्षेप होता है परंतु विपरीत दिशा में होता है।
(iii) यदि चुंबक को कुंडली के भीतर स्थिर रखा जाता है तो कुंडली में कोई विद्युत् धारा उत्पन्न नहीं होती। अर्थात् विक्षेप शून्य हो जाता है।

प्रश्न 14.
दो वृत्ताकार कुंडली A तथा B एक-दूसरे के निकट स्थित हैं। यदि कुंडली A में विद्युत् धारा में कोई परिवर्तन करें, तो क्या कुंडली B में कोई विद्युत् धारा प्रेरित होगी ? कारण लिखिए।
उत्तर-
हाँ। जब कुंडली A में से प्रवाहित विद्युत् धारा में परिवर्तन किया जाता है तो कुंडली B में विद्युत् धारा प्रेरित होगी। कुंडली A में विद्युत् धारा में परिवर्तन के कारण इसकी चुंबकीय बल रेखाएं जो कुंडली B के साथ संबंधित हैं बदल जाती हैं और यह कुंडली B में प्रेरित विद्युत् धारा को उत्पन्न कर देती हैं।

प्रश्न 15.
निम्नलिखित की दिशा को निर्धारित करने वाला नियम लिखिए-
(i) किसी विद्युत् धारावाही सीधे चालक के चारों ओर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र।
(ii) किसी चुंबकीय क्षेत्र में, क्षेत्र के लंबवत् स्थित विद्युत् धारावाही सीधे चालक पर आरोपित बल, तथा।
(iii) किसी चुंबकीय क्षेत्र में किसी कुंडली के घूर्णन करने पर उस कुंडली में उत्पन्न प्रेरित विद्युत् धारा।
उत्तर-
(i) धारावाही सीधे चालक के चारों ओर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र की दिशा दक्षिण हस्त अंगुष्ठ नियम निर्धारित करता है। दक्षिण हस्त अंगुष्ठ नियम-यदि आप अपने दाहिने चुंबकीय हाथ में विद्युत् धारावाही चालक को इस प्रकार पकड़े हुए हैं कि आपका अंगूठा विद्युत् धारा की दिशा की ओर संकेत करता है, तो आपकी अंगुलियाँ चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र की क्षेत्र रेखाओं की दिशा को प्रदर्शित करेंगी। इसे दक्षिण हस्त अंगुष्ठ नियम कहते हैं।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव 2
(ii) चुंबकीय क्षेत्र में रखे गए धारावाही चालक पर लगने वाले बल की दिशा फ्लेमिंग के वामहस्त नियम द्वारा निर्धारित होती है।
फ्लेमिंग का वामहस्त (बायां हाथ ) नियम-अपने वामहस्त के अंगूठे, तर्जनी के मध्यमा अंगुली को इस प्रकार फैलाओ कि वे परस्पर लंबवत् हो। तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र को निर्दिष्ट करें तथा मध्यमा अंगुली धारा के प्रवाह की दिशा को इंगित करे तो अंगूठा चालक की दिशा को प्रवाहित करेगी।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव 3

(iii) चुंबकीय क्षेत्र में किसी कुंडली की गति के चालक की गति कारण उसमें प्रेरित धारा की दिशा फ्लेमिंग के दक्षिण हस्त (दाहिने हाथ) नियम द्वारा ज्ञात होती है।

चुंबकीय क्षेत्र फ्लेमिंग का दक्षिण हस्त नियम-अपने दाहिने हाथ की तर्जनी, मध्यमा अंगुली तथा अंगूठे को इस प्रकार फैलाइए कि ये तीनों एक-दूसरे के परस्पर लंबवत् | चालक में प्रेरित हों। यदि तर्जनी अंगुली चुंबकीय क्षेत्र की दिशा की ओर | विद्युत् धारा संकेत करे तथा अंगूठा चालक की गति की दिशा में हो, प्रेरित विद्युत् धारा तो मध्यम अंगुली चालक में प्रेरित विद्युत् धारा की ।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव 4

प्रश्न 16.
नामांकित आरेख खींचकर किसी विद्युत् जनित्र का मूल सिद्धांत तथा कार्यविधि स्पष्ट कीजिए। इसमें ब्रुशों का क्या कार्य है?
अथवा
अंकित चित्र की सहायता से विद्युत् जनित्र का सिद्धांत, रचना एवं कार्यविधि समझाओ।
उत्तर-
प्रत्यावर्ती धारा डायनमो अथवा विद्युत् जनित्र-विद्युत् जनित्र एक ऐसा यंत्र है जो यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत् ऊर्जा में बदलता है। इसका कार्य फैराडे के विद्युत्-चुंबकीय प्रेरण के सिद्धांत पर निर्भर है।

सिद्धांत-जब किसी बंद कुंडली को किसी शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र में तेजी से घुमाया जाता है तो उसमें से होकर गुजरने वाले चुंबकीय-फ्लक्स में लगातार परिवर्तन होता रहता है, जिसके कारण कुंडली में एक विद्युत् धारा प्रेरित हो जाती है। कुंडली को घुमाने में किया गया कार्य ही कुंडली में विद्युत् ऊर्जा के रूप में परिणत हो जाता है।

फ्लेमिंग का दायें हाथ का नियम-अपने दायें हाथ के अंगूठे, तर्जनी और मध्यमा अंगुली को इस प्रकार फैलाओ कि प्रत्येक एक-दूसरे के साथ समकोण बनाए तो तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र की ओर संकेत करती है, अंगूठा चालक की गति की दिशा को प्रदर्शित करता है और मध्यमा अंगुली कुंडली में उत्पन्न विद्युत् धारा की दिशा को दिखाती है।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव 5
रचनाकिसी साधारण प्रत्यावर्ती जनित्र में निम्नलिखित प्रमुख भाग होते हैं
1. आर्मेचर (Armature)-इसमें नरम लोहे की क्रोड पर तांबे की अवरोधी तार की अधिक वलयों वाली आयातकार कुंडली ABCD होती है, जिसे आर्मेचर कहते हैं। इसे एक धुरी पर लगाया जाता है जो घूम सकती है।

2. क्षेत्र चुंबक (Field Magnet)-कुंडली को शक्तिशाली चुंबकों के बीच स्थापित किया जाता है। छोटे जनित्रों में स्थायी चुंबक लगाए जाते हैं, परंतु बड़े जनित्रों में विद्युत् चुंबकों का प्रयोग किया जाता है। ये क्षेत्र चुंबक चुंबकीय क्षेत्र को उत्पन्न करते हैं।

3. स्लिप रिंगज़ (Slip Rings)-धातु के दो खोखले रिंग R1 और R2 को कुंडली की धुरी पर लगाया जाता है। कुंडली की भुजाओं AB और CD को क्रमशः इनसे जोड़ दिया जाता है। आर्मेचर के घूमने के साथ R1 और R2 भी साथ-साथ घूमते हैं।

4. दो कार्बन ब्रुशों B1 और B2 से विद्युत् धारा को Load तक ले जाया जाता है। चित्र में इसे गैल्वनोमीटर से जोड़ा गया है जो विद्युत् धारा को मापता है।

कार्य विधि-जब कुंडली को चुंबक के ध्रुवों N और S के बीच घड़ी की सूई की विपरीत दिशा (anticlock wise) में घुमाया जाता है तब AB नीचे और CD ऊपर की दिशा में गति करती है। उत्तरी ध्रुव के निकट AB चुंबकीय रेखाओं को काटती है और CD ऊपर दक्षिणी ध्रुव के निकट रेखाओं को काटती है। इससे AB और DC में प्रेरित धारा उत्पन्न होती है। फ्लेमिंग के दायें हाथ के नियमानुसार विद्युत् धारा B से A और D से C की ओर बहती है। प्रभावी विद्युत् धारा DCBA की दिशा में प्रवाहित होती है। आधे चक्कर के बाद कुंडली के AB और DC अपनी स्थिति को बदल लेते हैं। AB दायीं तरफ और DC बायीं तरफ हो जाएंगे इससे AB ऊपर तथा DC नीचे की ओर जाएंगे। इस परिवर्तन के कारण कुंडली में धारा की दिशा आधे चक्र के बाद उलट जाएगी।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव 6
इस व्यवस्था में एक ब्रुश सदा उस भुजा के साथ संपर्क में रहता है जो चुंबकीय क्षेत्र में ऊपर की ओर गति करती है जबकि दूसरा ब्रुश सदा नीचे की ओर गति करने वाली भुजा के संपर्क में रहता है।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव 7

प्रश्न 17.
किसी विद्युत् परिपथ में लघुपथन (शॉर्ट सर्किट) कब होता है ?
उत्तर-
जब किसी घरेलू अथवा औद्योगिक परिपथ में जीवित तार (फेज तार) तथा उदासीन तार (न्यूट्रल तार) परस्पर सम्पर्कित हो जाते हैं तो परिपथ का लघुपथन हो जाता है। इस स्थिति में परिपथ का प्रतिरोध अचानक शून्य हो जाता है और धारा का मान एकाएक बहुत अधिक बढ़ जाता है।

प्रश्न 18.
भूसंपर्क तार का क्या कार्य है ? धातु के आवरण वाले विद्युत् साधित्रों को भू-संपर्कित करना क्यों आवश्यक है?
उत्तर-
भूसंपर्क तार-घरेलू विद्युत् परिपथ में विद्युत्मय तथा उदासीन तारों के साथ एक तीसरा तार भी लगा होता है। इस तार का संपर्क घर के निकट जमीन के नीचे गहराई में दबी धातु की प्लेट के साथ होता है। इस तार का रोधन हरे रंग का होता है। इस तार को भूसंपर्क तार कहते हैं। यह तार विद्युत् धारा को अल्प-प्रतिरोध चालन पथ प्रस्तुत करता है।

धातु के साधित्रों (उपकरणों) जैसे–बिजली की प्रेस, फ्रिज, टोस्टर आदि को भूसंपर्क तार से जोड़ दिया जाता है। इससे यह सुनिश्चित हो जाता है कि साधित्र की बॉडी में विद्युत् धारा का क्षरण होने पर बॉडी का विभव भूमि के विभव के बराबर बना रहे। इससे साधित्र का उपयोग करने वाले व्यक्ति को गंभीर विद्युत् झटका लगने का खतरा समाप्त हो जाता है।

Science Guide for Class 10 PSEB विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव InText Questions and Answers

प्रश्न 1.
चुंबक के निकट लाने पर दिक्सूचक की सूई विक्षेपित क्यों हो जाती है ?
उत्तर-
चुंबक के निकट लाने पर चुंबक का चुंबकीय क्षेत्र, दिक्सूचक की सूई जोकि एक प्रकार का छोटा चुंबक है, पर बलयुग्म लगाता है। इससे चुंबकीय सूई विक्षेपित हो जाती है।

प्रश्न 2.
किसी छड़ चुंबक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं खींचिए।
उत्तर-
छड़ चुंबक की चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं-
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव 8

प्रश्न 3.
चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के गुणों की सूची बनाइए।
उत्तर-
चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के गुण-

  1. चुंबक के बाहर चुंबकीय क्षेत्र की रेखाएं उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव की ओर तथा चुंबक के अंदर दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव की ओर जाती हैं।
  2. चुंबकीय क्षेत्र की बल रेखा के किसी बिंदु पर खींची गई स्पर्श रेखा (Tangent) उस बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा प्रदर्शित करती है।
  3. कोई दो चुंबकीय क्षेत्र बल रेखाएं परस्पर एक-दूसरे को नहीं काटती, क्योंकि एक बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की दो दिशाएं संभव नहीं हैं।
  4. किसी स्थान पर चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की संघनता उस स्थान पर चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता के अनुक्रमानुपाती होती है।
  5. एक समान (uniform) चुंबकीय क्षेत्र की चुंबकीय रेखाएं परस्पर समानांतर तथा बराबर दूरी पर होती हैं।

प्रश्न 4.
दो चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं एक-दूसरे को प्रतिच्छेद क्यों नहीं करती ?
उत्तर-
यदि चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं एक-दूसरे को प्रतिच्छेद (काटेंगी) करेंगी, तो उस बिंदु पर क्षेत्र की दो दिशाएं होंगी जो कि असंभव है। दिक्सूचक सूई को इस बिंदु पर रखने से चुंबकीय सूई दो दिशाओं की ओर संकेत करेगी जोकि संभव नहीं हो सकता।

प्रश्न 5.
मेज़ के तल में पड़े तार के वृत्ताकार पाश पर विचार कीजिए। मान लीजिए इस पाश में दक्षिणावर्त विद्युत्धारा प्रवाहित हो रही है। दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम को लागू करके पाश के भीतर तथा बाहर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा ज्ञात कीजिए।
उत्तर-
चित्र के अनुसार मेज़ के तल पर तार का वृत्ताकार पाश जिसमें दक्षिणावर्त विद्युत् धारा प्रवाहित हो रही है, में दक्षिणहस्त अंगुष्ठ (दाहिना हाथ अंगूठा) नियमानुसार अंगुलियों के मुड़ने की दिशा चुंबकीय क्षेत्र की दिशा को प्रदर्शित करेगी। चित्र से साफ़ है कि पाश के भीतर चुंबकीय क्षेत्र की पाश के तल के लंबवत् ऊपर से नीचे की ओर होंगी।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव 9

प्रश्न 6.
किसी दिए गए क्षेत्र में चुंबकीय क्षेत्र एक समान है। इसे निरूपित करने के लिए आरेख खींचिए।
उत्तर-
एक समान चुंबकीय क्षेत्र को परस्पर समानांतर बल रेखाओं द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। इसलिए इसका निरूपण निम्न चित्र अनुसार होगा-
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव 10

प्रश्न 7.
सही विकल्प चनिए : किसी विद्युत धारावाही सीधी लंबी परिनालिका के भीतर चुंबकीय क्षेत्र
(a) शून्य होता है
(b) इसके सिरे की ओर जाने पर घटता है
(c) इसके सिरे की ओर जाने पर बढ़ता है
(d) सभी बिंदुओं पर समान होता है।
उत्तर-
(b) इसके सिरे की ओर जाने पर घटता है।

प्रश्न 8.
किसी प्रोटॉन का निम्नलिखित में से कौन-सा गुण किसी चुंबकीय क्षेत्र में मुक्त गति करते समय परिवर्तित हो जाता है ? ( यहाँ एक से अधिक सही उत्तर हो सकते हैं।)
(a) द्रव्यमान
(b) चाल
(c) वेग
(d) संवेग।
उत्तर-
(c) वेग तथा (d) संवेग।

प्रश्न 9.
क्रियाकलाप 13.7 में, हमारे विचार से छड़ AB का विस्थापन किस प्रकार प्रभावित होगा, यदि
(i) छड़ AB में प्रवाहित विद्युत धारा में वृद्धि हो जाए
(ii) अधिक प्रबल नाल चुंबक प्रयोग किया जाए और
(iii) छड़ AB की लंबाई में वृद्धि कर दी जाए ?
उत्तर-
(i) छड़ का विस्थापन बढ़ जाएगा; क्योंकि छड़ पर लग रहा बल प्रवाहित विद्युत धारा के अनुक्रमानुपाती होता है।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव 11
(ii) छड़ का विस्थापन बढ़ जाएगा; क्योंकि छड़ पर लग रहा बल चुंबकीय क्षेत्र के अनुक्रमानुपाती होता है।
(iii) छड़ का विस्थापन बढ़ जाएगा; क्योंकि इस पर कार्यरत बल छड़ की लंबाई के अनुक्रमानुपाती होता है।

प्रश्न 10.
पश्चिम की ओर प्रक्षेपित कोई धनावेशित कण (अल्फा-कण) किसी चुंबकीय क्षेत्र द्वारा उत्तर की ओर विक्षेपित हो जाता है। चुंबकीय क्षेत्र की दिशा क्या है ?
(a) दक्षिण की ओर
(b) पूर्व की ओर
(c) अधोमुखी
(d) उपरिमुखी।
उत्तर-
(d) उपरिमुखी (ऐसा फ्लेमिंग के वामहस्त नियम के अनुसार होगा)।

प्रश्न 11.
फ्लेमिंग का वामहस्त नियम लिखिए।
अथवा
फ्लेमिंग का वामहस्त नियम चित्र की सहायता से वर्णन करो।
उत्तर-
फ्लेमिंग का वामहस्त का नियम (बायाँ हाथ नियम)-इस नियम के अनुसार, “अपने बाएँ हाथ की तर्जनी, मध्यमा तथा अँगूठे को इस प्रकार फैलाएँ कि ये तीनों एक-दूसरे को परस्पर लंबवत् हों (जैसा कि चित्र में दर्शाया गया है) यदि तर्जनी अंगुली चुंबकीय क्षेत्र की दिशा और मध्यमा अंगुली चालक में प्रवाहित विद्युत धारा की दिशा की ओर संकेत करती है तो अँगूठा चालक की गति की दिशा या चालक पर लग रहे बल की दिशा की ओर संकेत करेगा।”
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव 12

प्रश्न 12.
विद्युत् मोटर का क्या सिद्धांत है ?
उत्तर-
विद्युत मोटर का सिद्धांत- जब किसी कुंडली को चुंबकीय क्षेत्र में रखकर उसमें धारा प्रवाहित की जाती है तो कुंडली पर एक बल युग्म कार्य करने लगता है जो कुंडली को उसकी अक्ष पर घुमाने का प्रयास करता है। यदि कुंडली अपनी अक्ष पर घूमने के लिए स्वतंत्र हो तो वह घूमने लगती है।

प्रश्न 13.
विद्युत् मोटर में विभक्त वलय की क्या भूमिका है ?
उत्तर-
विद्युत् मोटर में विभक्त वलय (Split rings) की भूमिका-विद्युत मोटर में विभक्त वलय का कार्य कुंडली में प्रवाहित धारा की दिशा को बदलना है अर्थात् यह दिक् परिवर्तक का कार्य करता है। जब कुंडली आधा चक्कर पूर्ण कर लेती है तो विभक्त वलयों का एक ओर के ब्रुशों से संपर्क समाप्त हो जाता है और विपरीत ब्रुशों से संपर्क जुड़ जाता है जिसके फलस्वरूप कुंडली में धारा की दिशा सदैव इस प्रकार बनी रहती है कि कुंडली एक ही दिशा में घूमती रहती है। यदि विद्युत मोटर में विभक्त वलय न हों तो मोटर आधा चक्कर लगाकर रुक जाएगी।

प्रश्न 14.
किसी कुंडली में विद्युत् धारा प्रेरित करने के विभिन्न ढंग स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
कुंडली में विद्युत धारा प्रेरित करने के विभिन्न ढंग –

  • कुंडली को स्थिर रख कर, छड़ चुंबक को कुंडली की ओर लाने पर या फिर कुंडली से दूर ले जाकर कुंडली में विद्युत धारा प्रेरित की जा सकती है।
  • चुंबक को स्थिर रखे हुए कुंडली को चुंबक के निकट लाकर या फिर दूर ले जाकर कुंडली में विद्युत धारा प्रेरित की जा सकती है।
  • कुंडली को किसी चुंबकीय क्षेत्र में घुमाकर कुंडली में विद्युत धारा प्रेरित की जा सकती है।
  • कुंडली के समीप रखी हुई किसी दूसरी कुंडली में विद्युत् धारा की मात्रा में परिवर्तन करने से पहली कुंडली में विद्युत्धारा प्रेरित की जा सकती है।

प्रश्न 15.
विद्युत् जनित्र का सिद्धांत लिखिए। .
उत्तर-
विद्युत् जनित्र का सिद्धांत- जब किसी बंद कुंडली को किसी शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र में तेजी से घुमाया जाता है तो उसमें से होकर गुजरने वाले चुंबकीय-फ्लक्स में लगातार परिवर्तन होता रहता है, जिसके कारण कुंडली में विद्युत् धारा प्रेरित हो जाती है। कुंडली को घुमाने में किया गया कार्य ही कुंडली में विद्युत् ऊर्जा के रूप में परिणत हो जाता है।

प्रश्न 16.
दिष्ट धारा के कुछ स्रोतों के नाम लिखिए।
उत्तर-
दिष्ट धारा के स्रोत-

  1. विद्युत् सेल या बैटरी
  2. दिष्ट धारा जनित्र
  3. डायनमो
  4. बटन सेल।

प्रश्न 17.
प्रत्यावर्ती विद्युत् धारा उत्पन्न करने वाले स्रोतों के नाम लिखिए।
उत्तर-

  • जनित्र प्रत्यावर्ती विद्युत्धारा उत्पन्न करते हैं।
  • पन विद्युत् संयंत्र।

प्रश्न 18.
सही विकल्प का चयन कीजिए
तांबे की तार की एक आयताकार कुंडली किसी चुंबकीय क्षेत्र में घूर्णी गति कर रही है। इस कुंडली में प्रेरित विद्युत् धारा की दिशा में कितने परिभ्रमण के पश्चात् परिवर्तन होता है ?
(a) दो
(b) एक
(c) आधे
(d) चौथाई।
उत्तर-
(c) आधे।

प्रश्न 19.
विद्युत् परिपथों तथा साधित्रों में सामान्यत: उपयोग होने वाले दो सुरक्षा उपायों के नाम लिखिए।
उत्तर-

  • फ्यूज तार तथा
  • भू-संपर्क तार।

प्रश्न 20.
2 kW शक्ति अनुमतांक का एक विद्युत् तंदूर किसी घरेलू विद्युत् परिपथ (220V) में प्रचालित किया जाता है जिसका विद्युत् धारा अनुमतांक 5A है। इससे आप किस परिणाम की अपेक्षा करते हैं ? स्पष्ट कीजिए।
हल-घरेलू परिपथ की धारा अनुमतांक 5A है, इसका यह अर्थ हुआ कि घर की मुख्य लाइन में 5A का फ्यूज तार लगा है।
विद्युत् तंदूर की शक्ति P = 2kW = 2000 W जबकि V = 220 V माना विद्युत् तंदूर द्वारा ली जाने वाली धारा I है, तो
P = V x I से,
I= \(\frac{P}{V}\)
= \(\frac{2000 \mathrm{~W}}{220 \mathrm{~V}}\)
= 9.09 A
अर्थात् विद्युत् तंदूर मुख्य लाइन से 9.09A की धारा लेगी जो कि फ्यूज़ की क्षमता से अधिक है। अतः अतिभारण होगा जिसके फलस्वरूप फ्यूज़ की तार पिघल जाएगी और विद्युत् पथ अवरोधित हो जाएगा।

प्रश्न 21.
घरेलू विद्युत् परिपथों में अतिभारण से बचाव के लिए क्या सावधानी बरतनी चाहिए ?
उत्तर-
अतिभारण से बचाव के लिए सावधानियां

  1. विद्युत् प्रवाह के लिए प्रयुक्त की जाने वाली तारें अच्छे प्रतिरोधन पदार्थ से ढकी होनी चाहिए।
  2. विद्युत् परिपथ विभिन्न वर्गों में बंटे होने चाहिए और प्रत्येक साधित्र का अपना फ्यूज़ होना चाहिए।
  3. उच्च शक्ति प्राप्त करने वाले एयर कंडीशनर, फ्रिज, वाटर हीटर, हीटर, प्रैस आदि को एक साथ प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  4. एक ही सॉकेट से बहुत-से विद्युत् साधित्रों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत

Punjab State Board PSEB 10th Class Science Book Solutions Chapter 12 विद्युत Textbook Exercise Questions, and Answers.

PSEB Solutions for Class 10 Science Chapter 12 विद्युत

PSEB 10th Class Science Guide विद्युतTextbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
प्रतिरोध R के किसी तार के टुकड़े को पाँच बराबर भागों में काटा गया है। इन टुकड़ों को फिर पार्श्वक्रम में संयोजित कर देते हैं। यदि संयोजन का तुल्य प्रतिरोध R’ है तो R/R’ अनुपात का मान क्या है?
(a) 1/25
(b) 1/5
(c) 5
(d) 25.
हल-प्रत्येक कटे हुए भाग का प्रतिरोध R/5 होगा।
∴ R1 = R2 = R3 = R4 = R5 = \(\frac{\mathrm{R}}{5}\)
∴ पाँच कटे हुए टुकड़ों को पार्यक्रम में संयोजित करने पर
img
∴ R’ = \(\frac{\mathrm{R}}{25}\)
या \(\frac{\mathrm{R}}{\mathrm{R}^{\prime}}\) = 25
उत्तर : (d) 25

प्रश्न 2.
निम्नलिखित में से कौन-सा पद, विद्युत् परिपथ में विद्युत् शक्ति को निरूपित नहीं करता है –
(a) I2R
(b) IR2
(c) VI
(d) V2/R.
हल –
विद्युत् शक्ति P =V × I
= VxI
= (IR)xI
= I2R
= \(\frac{\mathrm{V}^{2}}{\mathrm{R}^{2}}\) x R
= \(\frac{\mathrm{V}^{2}}{\mathrm{R}^{2}} \times h\)
= \(\frac{\mathrm{V}^{2}}{\mathrm{R}}\)
अतः केवल IR2 विद्युत् परिपथ में विद्युत् शक्ति को निरूपित नहीं करता है।
उत्तर-
(b) IR2

प्रश्न 3.
किसी विद्युत् बल्ब का अनुमतांक 220V; 110W है। जब इसे 110V पर प्रचालित करते हैं तब इसके द्वारा उपभुक्त शक्ति कितनी होती है ?
(a) 100W
(b) 75W
(c) 50W
(d) 25W.
हल-सूत्र
P = \(\frac{\mathrm{V}^{2}}{\mathrm{R}}\)
बल्ब का प्रतिरोध R = \(\frac{\mathrm{v}^{2}}{\mathrm{P}}\)
= \(\frac{(220)^{2}}{100}\)
= \(\frac{220 \times 220}{100}\) = 484 Ω

∴ दूसरी दशा में 110V पर प्रचालित करने पर बल्ब द्वारा उपयुक्त शक्ति
P1 = \(\frac{\mathrm{V}_{1}^{2}}{\mathrm{R}}\)
= \(\frac{110 \times 110}{484}\)
= 25W
उत्तर-
(d) 25W.

प्रश्न 4.
दो चालक तार जिनके पदार्थ, लंबाई तथा व्यास समान हैं किसी विद्युत् परिपथ में पहले श्रेणीक्रम में और फिर पार्यक्रम में संयोजित किए जाते हैं। श्रेणीक्रम तथा पार्श्वक्रम संयोजन में उत्पन्न ऊष्माओं का अनुपात क्या होगा?
(a) 1: 2
(b) 2 : 1
(c) 1:4
(d) 4 : 1.
हल–
क्योंकि सभी तार एक ही प्रकार के पदार्थ, लंबाई व व्यास के हैं, इसलिए सभी का प्रतिरोध समान होगा। मान लो यह R है। दोनों को पार्यक्रम में जोड़ने पर प्रतिरोध
Rs = R + R = 2R
दोनों को श्रेणी क्रम में जोड़ने पर प्रतिरोध \(\frac{1}{\mathrm{R}_{p}}=\frac{1}{\mathrm{R}}+\frac{1}{\mathrm{R}}\)
= \(\frac{2}{\mathrm{R}}\)
श्रेणी क्रम में उत्पन्न ऊष्मा H1 = Ps = \(\frac{\mathrm{V}^{2}}{\mathrm{R}_{s}}\)
पार्श्वक्रम में उत्पन्न ऊष्मा H2 = Pp = \(\frac{\mathrm{V}^{2}}{\mathrm{R}_{p}} \)
यदि विभवांतर V है तो ऊष्माओं का अनुपात
\(\frac{\mathrm{H}_{1}}{\mathrm{H}_{2}}=\frac{\mathrm{V}^{2} / \mathrm{R}_{s}}{\mathrm{~V}^{2} / \mathrm{R}_{p}}\)
= \(\frac{\mathrm{R}_{p}}{\mathrm{R}_{s}}=\frac{\mathrm{R} / 2}{2 \mathrm{R}}\)
= \(\frac{1}{4}\)
उत्तर-(C) 1:4

प्रश्न 5.
किसी विद्युत् परिपथ में दो बिंदुओं के बीच विभवांतर मापने के लिए वोल्टमीटर को किस प्रकार संयोजित किया जाता है ?
उत्तर-
दो बिंदुओं के बीच का विभवांतर मापने के लिए वोल्टमीटर को दोनों बिंदुओं के बीच पार्श्वक्रम में संयोजित किया जाता है।

प्रश्न 6.
किसी ताँबे की तार का व्यास 0.5 mm तथा प्रतिरोधकता 1.8 x 10-8 2m है। 10Ω प्रतिरोध का प्रतिरोधक बनाने के लिए कितने लंबे तार की आवश्यकता होगी? यदि इससे दोगुने व्यास का तार लें तो प्रतिरोध में क्या अंतर आएगा?
उत्तर-
दिया है, प्रतिरोधकता (p) = 1.6 x 10-8 Ωm,
प्रतिरोध (R) = 10Ω
व्यास (2r) = 0.5 mm = 5 x 10-4 m
∴ त्रिज्या (r) = 2.5 x 10-4 m
अब तार का अनुप्रस्थ क्षेत्रफल A = πr²
= 3.14 x (2.5 x 10-4)2 m2
= 19.625 x 10-8 m2
∴ सूत्र R = P\(\frac{l}{\mathrm{~A}}\) से,
तार को लंबाई (l) = \(\frac{\mathrm{R} \times \mathrm{A}}{\rho}\)
= \(\frac{10 \Omega \times 19.625 \times 10^{-8} \mathrm{~m}^{2}}{1.6 \times 10^{-8} \Omega \mathrm{m}}\)
= 12.26 × 103m
= 122.6 m उत्तर
व्यास दोगुना करने पर त्रिज्या दोगुनी तथा अनुप्रस्थ क्षेत्रफल (A = πr²) चार गुना हो जाएगा।
∵ R ∝ \(\frac{1}{\mathrm{~A}}\)
∴ क्षेत्रफल चार गुना होने पर प्रतिरोध एक-चौथाई रह जाएगा।
अर्थात् तथा प्रतिरोध R’ = \(\frac{1}{4}\) R
= \(\frac{1}{4}\) × R
= \(\frac{1}{4}\) × 10
= 2.5Ω उत्तर

प्रश्न 7.
किसी प्रतिरोधक के सिरों के बीच विभवांतर V के विभिन्न मानों के लिए उससे प्रवाहित विद्युत् धाराओं I के संगत मान आगे दिए गए हैं
I(ऐंपियर) : 0.5 1.0 2.0 3.0 4.0
v (वोल्ट) : 1.6 3.4 6.7 10.2 13.2
V और I के बीच ग्राफ खींचकर इस प्रतिरोधक का प्रतिरोध ज्ञात कीजिए।
हल- अभीष्ट ग्राफ के लिए देखिए संलग्न चित्र-
प्रतिरोधक का प्रतिरोध = ग्राफ की ढाल
अर्थात् R= \(\frac{\Delta \mathrm{V}}{\Delta \mathrm{I}}\)
दिए गए आँकड़ों से,
V1 = 3.4 V, V2 = 10.2V
तथा संगत विद्युत् धाराएँ I1 = 1.0A, I2 = 3.0A .
ΔV = V2 – V1
= 10.2 – 3.4 = 6.8V
ΔI = I2 – I1
= 3.0 – 1.0
= 2.0A
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत 2

∴ प्रतिरोध R= \(\frac{\Delta \mathrm{V}}{\Delta \mathrm{I}}\)
= \(\frac{6.8 \mathrm{~V}}{2.0 \mathrm{~A}}\)
R = 3.4Ω उत्तर

प्रश्न 8.
किसी अज्ञात प्रतिरोध के प्रतिरोधक के सिरों से 12V की बैटरी को संयोजित करने पर परिपथ में 2.5 mA विद्युत् धारा प्रवाहित होती है। प्रतिरोधक का प्रतिरोध परिकलित कीजिए।
हल-
दिया है, विभवांतर V= 12V प्रवाहित धारा I = 2.5 mA = 2.5 x 10-3 A
∴ प्रतिरोधक का प्रतिरोध R= \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{I}}\)
= \(\frac{12 \mathrm{~V}}{2.5 \times 10^{-3} \mathrm{~A}}\)
= 4.8 × 103 Ω
= 4.8 kΩ उत्तर

प्रश्न 9.
9V की किसी बैटरी को 0.2Ω, 0.3Ω, 0.4Ω, 0.5Ω तथा 12Ω के प्रतिरोधकों के साथ श्रेणीक्रम में संयोजित किया गया है। 12Ω के प्रतिरोधक से कितनी विद्युत् धारा प्रवाहित होगी?
हल-
दिया है R1 = 0. 2Ω, R2 = 0.3Ω, R3 = 0.4Ω, R4 = 0.5Ω, तथा R5 = 12Ω
श्रेणी संयोजन का कुल प्रतिरोध R = R1 + R2 + R3 + R4 + R5
= 0.2 + 0.3 + 0.4 + 0.5 + 12
= 13.4Ω
∴ परिपथ में प्रवाहित कुल धारा I = \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{R}}\)
= \(\frac{9 \mathrm{~V}}{13.4 \Omega}\)
= 0.67A
श्रेणी संयोजन में प्रत्येक प्रतिरोध से 0.67A की धारा प्रवाहित होगी।
श्रेणी क्रम में संयोजित सभी चालकों (प्रतिरोधकों) में से समान विद्युत धारा प्रवाहित होगी, इसलिए 120 के प्रतिरोधक में से प्रवाहित धारा = 0.67A उत्तर

प्रश्न 10.
176Ω प्रतिरोध के कितने प्रतिरोधकों को पार्यक्रम में संयोजित करें कि 220V के विद्युत् स्रोत से संयोजन से 5A विद्युत् धारा प्रवाहित हो?
हल-
दिया है,
V= 220V,
I = 5A
∴ संयोजन का तुल्य प्रतिरोध R = \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{I}}\)
= \(\frac{220 \mathrm{~V}}{5 \mathrm{~A}}\)
या R = 44Ω
R1 = R2 =……..= Rn = 176Ω
मान लो ऐसे n प्रतिरोधक पार्श्वक्रम में जोड़े गए हैं, तब
∴ \(\frac{1}{\mathrm{R}}=\frac{1}{\mathrm{R}_{1}}+\frac{1}{\mathrm{R}_{2}}+\ldots \ldots+\frac{1}{\mathrm{R}_{n}}\)
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत 3
अतः 4 प्रतिरोधक पार्श्वक्रम में जोड़ने होंगे। उत्तर

प्रश्न 11.
यह दर्शाइए कि आप 6Ω प्रतिरोध के तीन प्रतिरोधकों को किस प्रकार संयोजित करेंगे कि प्राप्त संयोजन का प्रतिरोध
(i) 9Ω,
(ii) 4Ω हो।
हल-
(i) 9Ω का प्रतिरोध पाने के लिए, पहले दो प्रतिरोधकों को समांतर क्रम में तथा तीसरे प्रतिरोध को श्रेणी क्रम में जोड़ना होगा।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत 4
मान लो पार्श्व संयोजन का प्रतिरोध R है।
∴ \(\frac{1}{R}=\frac{1}{6}+\frac{1}{6}\) = \(\frac{2}{6}\)
∴ R = \(\frac{6}{2}\) = 3Ω होगा।

यह 3Ω का तुल्य प्रतिरोध, 6Ω के तीसरे प्रतिरोध के साथ श्रेणी क्रम में जुड़कर प्रतिरोध 3Ω + 6Ω = 90 का होगा। उत्तर

(ii) 4Ω का प्रतिरोध पाने के लिए पहले 6Ω के दो प्रतिरोधकों को श्रेणीक्रम में जोड़ना होगा तत्पश्चात् तीसरा प्रतिरोधक इनके पार्श्वक्रम में जोड़ना होगा। 6Ω तथा 6Ω के दो प्रतिरोधों के श्रेणी संयोजन का तुल्य प्रतिरोध 6Ω + 6Ω = 12Ω होगा। यह 12Ω का प्रतिरोध 6Ω के साथ पार्श्वक्रम में जोड़ने से 4Ω का प्रतिरोध देगा।
∵ \(\frac{1}{R}=\frac{1}{6}+\frac{1}{12}\)
= \(\frac{2+1}{12}\)
= \(\frac{3}{12}\)
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत 5
∴ R = \(\frac{12}{3}\)
= 4 Ω उत्तर

प्रश्न 12.
220 V की विद्युत् लाइन पर उपयोग किए जाने वाले बहुत से बल्बों का अनुमतांक 10w है। यदि 220V लाइन से अनुमत अधिकतम विद्युत् धारा 5A है तो इस लाइन के दो तारों के बीच कितने बल्ब पार्श्वक्रम में संयोजित किए जा सकते हैं?
हल-
माना n बल्बों को पार्यक्रम में जोड़ा है। तब परिपथ में कुल शक्ति P= n x एक बल्ब की शक्ति
= n x 10 W
= 10n W
दिया है, V= 220V,
I = 5A
P = V × I से,
10Ω = 220V × 5A
n = 220V× 5A
∴ n = \(\frac{220 \mathrm{~V} \times 5 \mathrm{~A}}{10 \Omega}\)
= 110
अर्थात् 110 बल्बों को पार्श्वक्रम में जोड़ा जा सकता है।

वैकल्पिक विधि
प्रत्येक बल्ब का प्रतिरोध (r) = \(\frac{\mathrm{V}^{2}}{\mathrm{P}}\)
= \(\frac{(220)^{2}}{10}\)
= \(\frac{220 \times 220}{10}\)
= 4840Ω

परिपथ की कुल प्रतिरोधकता (R) = \(\frac{220 \mathrm{~V}}{5 \mathrm{~V}}\) = 44 Ω
मान लो बल्बों की कुल संख्या n है।
तो प्रतिरोधकता (R) = \(\frac{r}{n}\)
⇒ n= \(\frac{r}{n}=\frac{4840}{44}\) =110 उत्तर

प्रश्न 13.
किसी विद्युत् भट्टी की तप्त प्लेट दो प्रतिरोधक कुंडलियों A तथा B की बनी हैं जिनमें प्रत्येक का प्रतिरोध 242 है तथा इन्हें पृथक्-पृथक् श्रेणीक्रम में अथवा पार्श्वक्रम में संयोजित करके उपयोग किया जा सकता है। यदि यह भट्टी 220V विद्युत् स्रोत से संयोजित की जाती है तो तीनों प्रकरणों में प्रवाहित विद्युत् धाराएँ क्या हैं?
हल-
दिया है, V = 220V, कुंडलियों का प्रतिरोध R1 = R2 = 24Ω
प्रथम दशा में, जब किसी एक कुंडली को में प्रयोग किया जाता है तो कुल प्रतिरोध R = R1 = 24Ω
∴ प्रवाहित धारा I = \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{R}}=\frac{220 \mathrm{~V}}{24 \Omega}\) 9.17 A

दूसरी दशा में, जब दोनों कुंडलियों को श्रेणीक्रम में प्रयोग किया जाता है, तब
कुल प्रतिरोध R= R1 + R2
= 24Ω + 24Ω
श्रेणीकृत कुंडलियों में प्रवाहित धारा I = \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{R}}=\frac{220 \mathrm{~V}}{48 \Omega}\)
= 4.58 A

तीसरी दशा में, जब कुंडलियों को पार्श्वक्रम में प्रयोग किया जाता है, तब
\(\frac{1}{\mathrm{R}}=\frac{1}{\mathrm{R}_{1}}+\frac{1}{\mathrm{R}_{2}}\)
= \(\frac{1}{24}+\frac{1}{24}\)
= \(\frac{2}{24}\)
∴ R = \(\frac{24}{2}\)
= 12 Ω

प्रवाहित विद्युत् धारा I = \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{R}}\)
∴ I = \(\frac{220 \mathrm{~V}}{12 \Omega}\)
I = 18.3A उत्तर

प्रश्न 14.
निम्नलिखित परिपथों में प्रत्येक में 20 प्रतिरोधक द्वारा उपयुक्त शक्तियों की तुलना कीजिए :
(i) 6V की बैटरी से संयोजित 12 तथा 22 श्रेणीक्रम संयोजन,
(ii) 4V बैटरी से संयोजित 120 तथा 22 का पार्श्वक्रम संयोजन।
हल-
(i) दिया है, V = 6V
1Ω व 2Ω के श्रेणी-संयोजन का प्रतिरोध
R = 1Ω + 2Ω = 3Ω
∴ परिपथ में प्रवाहित विद्युत् धारा I = \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{R}}\)
= \(\frac{6 \mathrm{~V}}{3 \Omega}\)
= 2A
श्रेणीक्रम में प्रत्येक प्रतिरोध में से 2A की धारा प्रवाहित होगी।
∴ 2Ω के प्रतिरोधक द्वारा उपयुक्त शक्ति
P1 = I2R
= (2A)2 x 20
= 8w

(ii) ∵ दोनों प्रतिरोध पार्श्वक्रम में जुड़े हैं; इसलिए प्रत्येक प्रतिरोध के सिरों के बीच एक ही विभवांतर, 4V होगा।
∴ 2Ω के प्रतिरोध द्वारा उपयुक्त शक्ति
P2 = \(\frac{\mathrm{V}^{2}}{\mathrm{R}}\)
= \(\frac{(4 \mathrm{~V})^{2}}{2 \Omega}\)
∴ = \(\frac{16}{2}\)
∴ P2 = 8W
अतः दोनों दशाओं में 2Ω प्रतिरोधक में समान शक्ति व्यय होगी। उत्तर

प्रश्न 15.
दो विद्युत् लैंप, जिनमें से एक का अनुमतांक 100W; 220V तथा दूसरे का 60 W; 220V है, विद्युत् मेंस के साथ पार्श्वक्रम में संयोजित हैं। यदि विद्युत् आपूर्ति की वोल्टता 220V है तो मेंस से कितनी धारा ली जाती है?
हल-
प्रथम लैंप के लिए, विभवांतर V1 = 220V
लैंप की शक्ति P1 = 100W माना इसका प्रतिरोध R1 है तो
P= \(\frac{\mathrm{V}^{2}}{\mathrm{R}}\) से,
प्रथम लैंप का प्रतिरोध, R1 = \(\frac{v_{1}^{2}}{P_{1}}\) = \(\frac{(220 \mathrm{~V})^{2}}{100 \mathrm{~W}}\)
= 484Ω

दूसरे लैंप के लिए, विभवांतर V2 = 220 V,
लैंप की शक्ति P2 = 60W
∴ दूसरे लैंप का प्रतिरोध R2 = \(\frac{\mathrm{V}_{2}^{2}}{\mathrm{P}_{2}}\)
= \(\frac{(220 \mathrm{~V})^{2}}{60 \mathrm{~W}}\)
= \(\frac{2420}{3}\) Ω
दोनों लैंप को पार्यक्रम में जोड़ने पर संयोजन का प्रतिरोध R हो तो
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत 6
∵ लाइन वोल्टेज V = 220V
∴ लाइन से ली जाने वाली धारा I = \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{R}}\)
= \(\frac{220 \mathrm{~V}}{302.5 \Omega}\)
= 0.73 A उत्तर

प्रश्न 16.
किसमें अधिक विद्युत् ऊर्जा उपभुक्त होती है : 250w का टी० वी० सेट जो एक घंटे तक चलाया जाता है अथवा 120W का विद्युत् हीटर जो 10 मिनट के लिए चलाया जाता है ?
हल-
T.V. सेट के लिए, P1 = 250w
= 250 Js-1
t1 = 1h = 60 x 60s
∴ T.V. सेट द्वारा उपभुक्त विद्युत् ऊर्जा = P1 × t1,
= 250 Js-1 x (60 x 60s)
= 900000J
= 9x 105 J …………………….(i)

विद्युत् हीटर के लिए,
P2 = 120W
= 120 Js-1 तथा
t2 = 10 min.
= 10 x 60s
∴ विद्युत् हीटर द्वारा उपभुक्त विद्युत् ऊर्जा = P2 x t2
= 120 Js-1 x (10 x 60s)
= 72000J = 7.2 x 104J ………………………(ii)
समीकरण (i) तथा (ii) से स्पष्ट है कि T.V. सेट द्वारा उपभुक्त ऊर्जा अधिक है।

प्रश्न 17.
82 प्रतिरोध का कोई विद्युत् हीटर विद्युत् मेंस से 2 घंटे तक 15A विद्युत् धारा लेता है। हीटर में उत्पन्न ऊष्मा की दर परिकलित कीजिए।
हल-
दिया है, R = 8Ω,
I = 15A विद्युत् हीटर में ऊष्मा उत्पन्न होने की दर अर्थात् विद्युत् हीटर की शक्ति P = I2R
= (15A)2 x 8Ω
= 225×8
= 1800 W

प्रश्न 18.
निम्नलिखित को स्पष्ट कीजिए-
(a) विद्युत् लैम्पों के तंतुओं के निर्माण में प्रायः एकमात्र टंगस्टन का ही उपयोग क्यों किया जाता है?
(b) विद्युत् तापन युक्तियों जैसे ब्रेड-टोस्टर तथा विद्युत् इस्तरी के चालक शुद्ध धातुओं के स्थान पर मिश्रधातुओं के क्यों बनाए जाते हैं ?
(c) घरेलू विद्युत् परिपथों में श्रेणीक्रम संयोजन का उपयोग क्यों नहीं किया जाता है।
(d) किसी तार का प्रतिरोध उसकी अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल में परिवर्तन के साथ किस प्रकार परिवर्तित होता है?
(e) विद्युत् संचारण के लिए प्राय: कॉपर तथा ऐलुमिनियम के तारों का उपयोग क्यों किया जाता है ?
उत्तर-
(a) क्योंकि टंगस्टन की उच्च प्रतिरोधकता (5.2 x 10-8 ओम-मीटर) है तथा टंगस्टन का गलनांक भी अन्य धातुओं की तुलना में बहुत ऊंचा (3400°C) होता है, इसलिए विद्युत् लैंपों के तंतुओं के निर्माण में प्रायः एकमात्र टंगस्टन ही उपयोग किया जाता है।

(b) मिश्रधातुओं की प्रतिरोधकता, शुद्ध धातुओं की तुलना से अधिक होती है तथा ताप वृद्धि के साथ इनकी प्रतिरोधकता से नगण्य परिवर्तन होता है। इसके अतिरिक्त मिश्रधातुओं का ऑक्सीकरण भी कम होता है जिसके फलस्वरूप मिश्रधातुओं में बने चालकों की आयु शुद्ध धात्विक चालकों की तुलना में अधिक होती है। इसलिए ब्रेड-टोस्टर, विद्युत् इस्तरी आदि के चालक मिश्रधातुओं के बनाए जाते हैं।

(c) श्रेणीक्रम संयोजन में जैसे-जैसे नये प्रतिरोधक जुड़ते जाते हैं, परिपथ का कुल प्रतिरोध बढ़ता जाता है और अलग-अलग प्रतिरोधकों के सिरों के बीच उपलब्ध विभवांतर घटता जाता है। अतः परिपथ में धारा भी कम हो जाती है। यदि घरों में प्रकाश करने के लिए श्रेणीबद्ध व्यवस्था प्रयोग की जाए तो परिपथ में जितने अधिक लैंप जुड़े होंगे, उनका प्रकाश उतना ही कम हो जाएगा। इसके अतिरिक्त श्रेणीबद्ध व्यवस्था प्रयोग करने पर स्विच ऑन करने पर सभी लैम्प एक साथ प्रदीप्त होंगे तथा स्विच ऑफ करने पर सभी लैंप एक साथ बुझ जाएँगे, जबकि पार्श्वक्रम व्यवस्था करने पर इच्छानुसार स्वतंत्र रूप से किसी भी लैंप को प्रकाशित या अप्रकाशित किया जा सकता है।

(d) तार का प्रतिरोध उसकी अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है। अर्थात् मोटी तार का अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल अधिक होगा और उसका प्रतिरोध कम होगा। \(\left(R \propto \frac{1}{A}\right)\)

(e) विद्युत् के सर्वश्रेष्ठ चालकों में प्रथम स्थान पर चाँदी, दूसरे पर ताँबा तथा तीसरे स्थान पर एल्यूमिनियम है। चाँदी एक कीमती धातु है तथा अपेक्षाकृत कम मात्रा में उपलब्ध है। इसलिए विद्युत् संचारण व्यवस्था में चाँदी के स्थान पर सस्ती तथा पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध धातुएं ताँबा तथा एल्यूमिनियम प्रयोग की जाती है।

Science Guide for Class 10 PSEB विद्युत InText Questions and Answers

प्रश्न 1.
विद्युत् परिपथ का क्या अर्थ है ?
उत्तर-
विद्युत् परिपथ- विद्युत् स्रोत से विभिन्न घटकों में से होकर विद्युत् धारा बहने के सतत् तथा बंद पथ को विद्युत् परिपथ कहा जाता है। विद्युत्धारा के घटक-विद्युत्धारा के निम्नलिखित प्रमुख घटक हैं-

  • विद्युत् स्रोत (बैटरी अथवा सेल)
  • चालक
  • स्विच (कुंजी)
  • कोई अन्य उपकरण जो परिपथ में जोडा गया हो।

प्रश्न 2.
विद्युत्धारा के मात्रक की परिभाषा लिखिए।
अथवा
विद्युत्धारा की इकाई का नाम लिखें। इसकी परिभाषा भी लिखें।
उत्तर-
विद्युत्धारा का S.I. मात्रक ‘ऐंपियर’ है जिसे ‘A’ से व्यक्त किया जाता है।
ऐंपियर-जब किसी चालक में 1 सेकंड में 1 कूलॉम आवेश का प्रवाह होता है तो प्रयुक्त विद्युत्धारा की मात्रा को 1 ऐंपियर कहा जाता है।
∴ 1A = \(\frac{1 \mathrm{C}}{1 \mathrm{~s}}\)

प्रश्न 3.
एक कूलॉम आवेश की रचना करने वाले इलेक्ट्रानों की संख्या परिकलित कीजिए।
उत्तर-
हम जानते हैं कि 1 इलेक्ट्रॉन पर आवेश = 1.6 x 10-19C
माना 1 कूलॉम की रचना करने वाले इलेक्ट्रॉनों की संख्या = n
∴ n x 1.6 x 10-19C = 1C

या n = \(\frac{1}{1.6 \times 10^{-19}}\)
= \(\frac{1 \times 10^{19}}{1.6}\)
= \(\frac{10}{16} \times 10^{9}\)
= 0.625 x 1019
. = 6.25 x 1018
अतः 1 कूलॉम (c) = 6.25 x 1018 इलेक्ट्रॉन उत्तर

प्रश्न 4.
उस युक्ति का नाम लिखिए जो किसी चालक के सिरों पर विभवांतर बनाए रखने में सहायता करती है।
उत्तर-
सेल एक ऐसी युक्ति है जो किसी चालक के सिरों पर विभवांतर बनाए रखने में सहायता करती है।

प्रश्न 5.
यह कहने का क्या तात्पर्य है कि दो बिंदुओं के बीच विभवांतर 17 है?
उत्तर-
दो बिंदुओं के बीच विभवांतर 1V से तात्पर्य है कि दो बिंदुओं के बीच 1 कूलॉम आवेश ले जाने में 1 जूल कार्य होता है।

प्रश्न 6.
6V बैटरी से गुजरने वाले हर एक कूलॉम आवेश को कितनी ऊर्जा दी जाती है?
हल : यहाँ
विभवांतर (V) = 6V
आवेश की मात्रा (Q) = 1 कूलॉम
दी गई ऊर्जा (किया गया कार्य) (W) = ?
हम जानते हैं, विभवांतर = PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत 7

V= \(\frac{W}{Q}\)
∴ दी गई ऊर्जा W = V × Q
= 6V × 1C
= 6 जूल (J) उत्तर

प्रश्न 7.
किसी चालक का प्रतिरोध किन कारकों पर निर्भर करता है?
उत्तर-
चालक के प्रतिरोध की निर्भरता-किसी चालक का प्रतिरोध निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करता है –
(i) चालक की लंबाई (l)-किसी चालक का प्रतिरोध चालक की लंबाई (l) के अनुक्रमानुपाती होता है।
अर्थात् R ∝ l
(ii) चालक की अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल (A)-किसी चालक का प्रतिरोध उसकी अनुप्रस्थ काट (A) के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
अर्थात्
R ∝ \(\frac{1}{\mathrm{~A}}\)

(iii) चालक के पदार्थ की प्रकृति-किसी चालक का प्रतिरोध उस चालक के पदार्थ की प्रकृति पर निर्भर करता है।
R ∝ \(\frac{l}{\mathrm{~A}}\)
अथवा R = ρ × \(\frac{l}{\mathrm{~A}}\)
जहाँ ρ अनुपातिकता स्थिराँक है।

प्रश्न 8.
समान पदार्थ के दो तारों में यदि एक पतला तथा दूसरा मोटा हो तो इनमें से किसमें विद्युत् धारा आसानी से प्रवाहित होगी जबकि उन्हें समान विद्युत् स्रोत से संयोजित किया जाता है ? क्यों?
उत्तर-
हम जानते हैं कि चालक तार का प्रतिरोध तार के अनुप्रस्थ काट (Area of Cross-Section) के व्युत्क्रमानुपाती होता है। अर्थात् मोटी तार का प्रतिरोध कम और पतली तार का प्रतिरोध अधिक होगा।
अब R ∝ \(\frac{1}{A}\)
इसलिए मोटी तार का प्रतिरोध पतली तार की अपेक्षा कम होने के कारण उसमें से विद्युत्धारा का प्रवाह अधिक तथा सुगमता से होता है।

प्रश्न 9.
मान लीजिए किसी वैद्युत अवयव के दो सिरों के बीच विभवांतर को उसके पूर्व के विभवांतर की तुलना में घटाकर आधा कर देने पर भी उसका प्रतिरोध नियत रहता है। तब उस अवयव से प्रवाहित होने वाली विद्युत्धारा में क्या परिवर्तन होगा?
उत्तर-
मान लो पूर्व अवस्था में विद्युत् अवयव के दो सिरों के बीच विभवांतर V, प्रतिरोध R तथा प्रवाहित होने वाली विद्युत्धारा I है, तो ओम नियम के अनुसार, I = \( \frac{\mathrm{V}}{\mathrm{R}}\) …………………………….(1)
यदि वैद्युत् अवयव के दोनों सिरों के बीच विभवांतर पूर्व अवस्था का आधा करें (अर्थात \(\frac{\mathrm{V}}{2}\) करें) जबकि प्रतिरोध नियत रहे तो विद्युत्धारा की मात्रा बदलकर I’ हो जायेगी।
∴ I’ = \(\frac{\frac{\mathrm{V}}{2}}{\mathrm{R}}\)
⇒ I’ = \(\frac{V}{2 R}\) …………………………….(2)
(2) को (1) से भाग देने पर
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत 8
∴ I’ =\(\frac{1}{2}\) x I अर्थात् विद्युत्धारा पूर्व अवस्था की तुलना में आधी रह जायेगी।

प्रश्न 10.
विद्युत् टोस्टरों तथा विद्युत् इस्तरियों के तापन अवयव शुद्ध धातु के न बनाकर किसी मिश्रधातु के क्यों बनाए जाते हैं ?
उत्तर-
विद्युत् टोस्टरों तथा विद्युत् इस्तरियों के तापन अवयव शुद्ध धातु के न बनाकर किसी मिश्रधातु के बनाए जाते हैं। इसके निम्नलिखित कारण हैं:

  • मिश्र धातुओं की प्रतिरोधकता अवयवी धातुओं की अपेक्षा अधिक होती है।
  • मिश्र धातुओं का उच्चताप पर शीघ्र ही दहन (उपचयन) नहीं होता है।
  • मिश्रधातुओं का गलनाँक अधिक होता है।

प्रश्न 11.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर पाठ्य-पुस्तक की तालिका 12.2 में दिए गए आँकड़ों के आधार पर दीजिए:
(a) आयरन (Fe) तथा मर्करी (Hg) में कौन अच्छा विद्युत् चालक है?
(b) कौन-सा पदार्थ सर्वश्रेष्ठ चालक है।
उत्तर-
(a) आयरन (Fe) मर्करी (Hg) की अपेक्षा अच्छा चालक है क्योंकि आयरन की प्रतिरोधकता मर्करी की अपेक्षा अधिक होती है।
(b) चाँदी सर्वश्रेष्ठ चालक है क्योंकि इसका प्रतिरोध (1.60 x 10-8Ωm) न्यूनतम है।

प्रश्न 12.
किसी विद्युत् परिपथ का व्यवस्था आरेख खींचिए जिसमें 27 के तीन सेलों की बैटरी, एक 5Ω प्रतिरोधक, एक 8Ω प्रतिरोधक, एक 12Ω प्रतिरोधक तथा एक प्लग कुंजी सभी श्रेणीक्रम में संयोजित हों।
उत्तर-
विद्युत् परिपथ व्यवस्था आरेख
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत 9

प्रश्न 13.
प्रश्न 1 का परिपथ चित्र दोबारा खींचिए तथा इसमें प्रतिरोधकों से प्रवाहित विद्युत्धारा को मापने के लिए ऐमीटर तथा 12Ω के प्रतिरोधक के सिरों के बीच विभवांतर मापने के लिए वोल्टमीटर लगाइए। ऐमीटर तथा वोल्टमीटर के क्या पाठ्याँक होंगे?
हल-
यहाँ r1 = 5Ω
r2 = 8Ω
r3 = 12 Ω
परिपथ का कुल प्रतिरोध (R) = ?
हम जानते हैं प्रतिरोधकों को श्रेणी क्रम में संयोजित करने पर परिपथ का कुल प्रतिरोध R = r1 + r2+ r3
R = 5Ω + 8Ω + 120 Ω
R = 25Ω.
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत 10

बैटरी के टर्मीनलों के बीच कुल विभवांतर A = 2 V
अब, ओम के नियम अनुसार I = \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{R}}\)
I = \( \frac{2 \mathrm{~V}}{25 \Omega}\)
I = 0.08A

12Ω के प्रतिरोधक के सिरों के बीच विभवांतर = I x r3
= 0.08 x 12
= 0.96 वोल्ट (V)

∴ ऐमीटर तथा वोल्टमीटर के पाठ्याँक क्रमश: 0.08A तथा 0.96V होंगे।

प्रश्न 14.
जब (a) 12 तथा 106
(b) 1Ω तथा 103Ω तथा 106Ω के प्रतिरोध पार्श्वक्रम में संयोजित किए जाते हैं तो इनके तुल्य प्रतिरोध के संबंध में आप क्या निर्णय करेंगे?
हल-
(a) दिया है r1 = 1Ω
तथा r2 = 106
माना R तुल्य प्रतिरोध है, तो पार्श्वक्रम में संयोजित करने पर \(\frac{1}{\mathrm{R}}=\frac{1}{r_{1}}=\frac{1}{r_{2}}\)
= \(\frac{1}{1}+\frac{1}{10^{6}}\)
= \(\frac{10^{6}+1}{10^{6}}\)
= \(\frac{1000000+1}{1000000}\)
= \(\frac{1000001}{1000000}\)
R = \( \frac{1000000}{1000001}\) = 0.9Ω (लगभग) उत्तर

(b) यहाँ
r1 = 1Ω
r2 = 103
r = 106
माना R तुल्य प्रतिरोध है तो पार्यक्रम में संयोजित किए जाने पर
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत 11
∴ R = \(\frac{10^{6}}{10^{6}+10^{3}+1}\)
= \(\frac{1000000}{1001001} \)
= 0.9Ω (लगभग) उत्तर

प्रश्न 15.
100Ω का एक विद्युत् लैंप, 50Ω का एक विद्युत् टोस्टर तथा 5002 का एक जल फिल्टर 200V के विद्युत् स्रोत से पार्श्वक्रम में संयोजित है। उस विद्युत् इस्तरी का प्रतिरोध क्या है जिसे यदि समान स्त्रोत के साथ संयोजित कर दें तो वह उतनी ही विद्युत् धारा लेती है जितनी तीनों युक्तियाँ लेती हैं। यह भी ज्ञात कीजिए कि इस विद्युत् इस्तरी से कितनी विद्युत् धारा प्रवाहित होती है ?
हल-
100Ω का विद्युत् लैंप, 502 का विद्युत् टोस्टर तथा 500Ω का फिल्टर पार्श्वक्रम में संयोजित किया गया है और R इनका तुल्य प्रतिरोध है तो ओम नियमानुसार
\(\frac{1}{R}=\frac{1}{100}+\frac{1}{50}+\frac{1}{500}\)
= \(\frac{5+10+1}{500}\)
= \(\frac{16}{500}\)
∴ R = \(\frac{500}{16}\) = 31.25 Ω
अतः विद्युत् इस्तरी का तुल्य प्रतिरोध = R = 31.250Ω
विभवांतर V = 220V विद्युत्धारा की मात्रा
(I) = ?
हम जानते हैं I = \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{R}}\)
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत 12
∴ I = 7.04A उत्तर

प्रश्न 16.
श्रेणीक्रम में संयोजित करने के स्थान पर वैद्युत् युक्तियों को पार्यक्रम में संयोजित करने के क्या लाभ हैं?
उत्तर-
वैद्युत् युक्तियों को श्रेणीक्रम की अपेक्षा पार्श्वक्रम में संयोजित करने के लाभ-
1. किसी श्रेणी बद्ध विद्युत् परिपथ में शुरू से अंत तक विद्युत् धारा नियत रहती है जोकि व्यावहारिक नहीं है। यदि हम किसी विद्युत् परिपथ में विद्युत् बल्ब तथा विद्युत् हीटर को श्रेणीक्रम में संयोजित करें तो यह उचित प्रकार से कार्य नहीं कर पायेंगे क्योंकि इन्हें भिन्न मानों की विद्युत् धाराओं की आवश्यकता होगी। इसके विपरीत पार्श्वक्रम परिपथ में विद्युत् धारा विभिन्न वैद्युत् युक्तियों में विभाजित हो जाती है।

2. श्रेणीबद्ध परिपथ की यदि एक विद्युत् युक्ति कार्य करना बंद कर देती है तो परिपथ टूट जाता है तथा अन्य युक्तियाँ कार्य करना बंद कर देती हैं। इसके विपरीत पार्यक्रम परिपथ में विद्युत् धारा विभिन्न विद्युत् युक्तियों में विभाजित होने पर अन्य युक्तियाँ कार्य करती रहती हैं।

3. प्रतिरोधों को पार्श्वक्रम में जोड़ने से किसी भी चालक में स्विच की सहायता से विद्युत्धारा स्वतंत्रतापूर्वक प्रवाहित या रोकी जा सकती है जिससे विद्युत् यक्तियों को स्वतंत्रतापूर्वक प्रयोग में लाया जा सकता है।

प्रश्न 17.
2Ω, 3Ω तथा 6Ω के तीन प्रतिरोधकों को किस प्रकार संयोजित करेंगे कि संयोजन का कुल प्रतिरोध
(a) 4Ω
(b) 1Ω हो?
हल-
(a) कुल प्रतिरोध 4Ω प्राप्त करने के लिए-ऐसा करने के लिए 3Ω तथा 6Ω के प्रतिरोधकों को समानांतर क्रम करके 2Ω के प्रतिरोधक के साथ श्रेणीक्रम में संयोजित किया जाता है।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत 13
मान लो r2 = 3Ω और r3 = 6Ω को समानांतर क्रम में संयोजित करने पर कुल प्रतिरोध । है, तो
\(\frac{1}{r}=\frac{1}{r_{2}}+\frac{1}{r_{3}}\)
= \(\frac{1}{3}+\frac{1}{6}\)
या \(\frac{1}{r}=\frac{2+1}{6}\)
\( \frac{1}{r}=\frac{3}{6}\)
\(\frac{1}{r}=\frac{1}{2}\)
∴ r = 2Ω
अब r1 = 2Ω, तथा r = 2Ω को श्रेणी क्रम में संयोजित करने पर मान लो कुल प्रतिरोध है, तो R = r1 +r
= 2Ω + 2Ω = 4Ω.

(b) कुल प्रतिरोध 1Ω प्राप्त करने के लिए संयोजन-1Ω का कुल प्रतिरोध प्राप्त करने के लिए r1 = 2Ω, r2 = 3Ω तथा r3 = 6Ωको समानांतर क्रम में जोड़ना होगा।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत 14
मान लो कुल प्रतिरोध R है तो समानांतर क्रम के सूत्र से,
\(\frac{1}{R}=\frac{1}{r_{1}}+\frac{1}{r_{2}}+\frac{1}{r_{3}}\)
= \(\frac{1}{2}+\frac{1}{3}+\frac{1}{6}\)
= \(\frac{3+2+1}{6}\)
= \(\frac{6}{6}\)
R = 1Ω

प्रश्न 18.
4Ω, 8Ω, 12Ω तथा 24Ω प्रतिरोध की चार कुंडलियों को किस प्रकार संयोजित करें कि संयोजन से
(a) अधिकतम
(b) निम्नतम प्रतिरोध प्राप्त हो सके ?
हल-
(a) अधिकतम प्रतिरोध प्राप्त करने हेतु संयोजन-यदि इन चारों प्रतिरोधों को श्रेणीक्रम में रखा जाए तो अधिकतम प्रतिरोध प्राप्त होगा।
Rs = r1+r2+r3+r4
= 4Ω + 8Ω + 12Ω + 24Ω
= 480 उत्तर

(b) न्यूनतम प्रतिरोध प्राप्त करने हेतु–यदि दिए गए चारों प्रतिरोधों को पार्यक्रम में जोड़ा जाए तो न्यूनतम प्रतिरोध प्राप्त होगा।
∴ \(\frac{1}{\mathrm{R}_{p}}=\frac{1}{r_{1}}+\frac{1}{r_{2}}+\frac{1}{r_{3}}+\frac{1}{r_{4}}\)
= \(\frac{1}{4}+\frac{1}{8}+\frac{1}{12}+\frac{1}{24}\)
= \(\frac{6+3+2+1}{24}\)
= \(\frac{12}{24}\)
\(\frac{1}{\mathrm{R}_{p}}=\frac{1}{2}\)
∴RP = 2Ω. उत्तर

प्रश्न 19.
किसी विद्युत् हीटर की डोरी क्यों उत्तप्त नहीं होती जबकि उसका तापन अवयव उत्तप्त हो जाता है?
उत्तर-
हम जानते हैं
H = I2Rt
⇒ H ∝ R
तापन अवयव का उच्च प्रतिरोध होता है जिस कारण अधिक विद्युत् ऊर्जा, ताप ऊर्जा में परिवर्तित होती है जिससे तापन अवयव उत्तप्त हो जाता है। दूसरी तरफ विद्युत् हीटर की डोरी का प्रतिरोध बहुत कम होता है जिससे वह उत्तप्त नहीं होती है।

प्रश्न 20.
एक घंटे में 50V विभवांतर से 96000 कूलॉम आवेश को स्थानांतरित करने में उत्पन्न ऊष्मा परिकलित कीजिए?
हल-
दिया है, स्थानांतरित आवेश Q = 96000 कूलॉम, 1 = 1 घंटा समय = 60 x 60 सेकंड,
विभवांतर V = 50 वोल्ट
⇒ उत्पन्न उष्मा ऊर्जा, H = Q x V
= 96000 x 50
= 48250000
= 4.825 x 10 जूल
∴ H = 4.825 x 103 किलो जूल उत्तर

प्रश्न 21.
20Ω प्रतिरोध की कोई विद्युत् इस्तरी 5A विद्युत् धारा लेती है। 30s में उत्पन्न उष्मा परिकलित कीजिए।
हल –
दिया है
प्रतिरोध (R) = 20Ω
विद्युत्धारा (I) = 5A
समय (1) = 30s
उत्पन्न उष्मा (H) = ?
हम जानते हैं, उत्पन्न हुई उष्मा ऊर्जा (H) = I2Rt
= (5)2 x 20 x 30 J
= 25 x 20 x 30 J
= 15000 J (जूल)
= 1.5 x 104J उत्तर

प्रश्न 22.
विद्युत् धारा द्वारा प्रदत्त ऊर्जा की दर का निर्धारण कैसे किया जाता है ?
उत्तर-
विद्युत् धारा द्वारा प्रदत्त ऊर्जा की दर का निर्धारण विद्युत् शक्ति द्वारा किया जाता है।

प्रश्न 23.
कोई विद्युत् मोटर 220V के विद्युत् स्रोत से 5.0A विद्युत् धारा लेता है। मोटर की शक्ति निर्धारित कीजिए तथा 2 घंटे में मोटर द्वारा उपभुक्त ऊर्जा परिकलित कीजिए।
हल–
दिया है, विद्युत् धारा (I) = 5.0A
विद्युत् विभवांतर (V) = 220V
समय (t) = 2 घंटे ज्ञात करना है,
मोटर की शक्ति (P) = ?
1 घंटे में उपभुक्त ऊर्जा (E) = ?
हम जानते हैं, शक्ति (P) = Vx I
= 220×5
= 1100 W (वाट) उत्तर

मोटर द्वारा 2 घंटे में उपभुक्त ऊर्जा (E) = Pxt
= 1100 वाट x 2 घंटे
= 2200 वाट-घंटे (Wh)
= 2.2 किलोवाट-घंटा (KWh) उत्तर

PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार

Punjab State Board PSEB 10th Class Science Book Solutions Chapter 11 मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार Textbook Exercise Questions, and Answers.

PSEB Solutions for Class 10 Science Chapter 11 मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार

PSEB 10th Class Science Guide मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार Textbook Questions and Answers

1. मानव नेत्र अभिनेत्र लैंस की फोकस दूरी को समायोजित करके विभिन्न दूरियों पर रखी वस्तुओं को फोकसित कर सकता है। ऐसा हो पाने का कारण है –
(a) ज़रा-दूरदृष्टिता
(b) समंजन
(c) निकट-दृष्टि
(d) दीर्घ-दृष्टि।
उत्तर-
(b) समंजन।

2. मानव नेत्र जिस भाग पर किसी वस्तु का प्रतिबिंब बनाते हैं, वह है
(a) कार्निया
(b) परितारिका
(c) पुतली
(d) दृष्टिपटल।
उत्तर-
(d) दृष्टिपटल।

3. सामान्य दृष्टि के वयस्क के लिए सुस्पष्ट दर्शन की अल्पतम दूरी होती है लगभग
(a) 25 m
(b) 2.5 cm
(c) 25 cm
(d) 2.5 m.
उत्तर-
(c) 25 cm.

4. अभिनेत्र लैंस की फोकस दूरी में परिवर्तन किया जाता है
(a) पुतली द्वारा
(b) दृष्टिपटल द्वारा
(c) पक्ष्माभी द्वारा
(d) परितारिका द्वारा।
उत्तर-
(c) पक्ष्माभी द्वारा।

प्रश्न 5.
किसी व्यक्ति को अपनी दूर की दृष्टि को संशोधित करने के लिए -5.5 डाइऑप्टर क्षमता के लैंस की आवश्यकता है। अपनी निकट की दृष्टि को संशोधित करने के लिए उसे +1.5 डाइऑप्टर क्षमता के लैंस की आवश्यकता है। संशोधित करने के लिए आवश्यक लैंस की फोकस दूरी क्या होगी
(i) दूर की दृष्टि के लिए
(ii) निकट की दृष्टि के लिए ?
हल :
(i) दिया है : दूर की वस्तुओं को स्पष्ट देखने के लिए दूर दृष्टि को संशोधित करने के लिए आवश्यक लैंस की क्षमता (P) = – 5.5 D .
लैंस की क्षमता सूत्र से P = \(\frac{1}{f(\text { in } m)}\)
या f = \(\frac{1}{\mathrm{P}}\)
∴ फोकस दूरी (f) = \(\frac{1}{-5.5}\)
= \(-\frac{100}{5.5}\) cm
= \(\frac{-200}{11}\) cm

(ii) दिया है : निकट पड़ी वस्तुओं को स्पष्ट देखने के लिए निकट दृष्टि संशोधित करने के लिए आवश्यक लैंस की क्षमता (P) = + 1.5 D
लैंस के क्षमता सूत्र से (P) = \(\frac{1}{F(\text { in } m)}\)
या फोकस दूरी (f) = \(\frac{1}{P}\) : (in m)
= \(\frac{1}{+1.5} \) cm
= \(\frac{10}{15}\) cm
= \(\frac{1000}{15}\) cm
= \(\frac{200}{3}\) cm

प्रश्न 6.
किसी निकट-दृष्टि दोष से पीड़ित व्यक्ति का दूर बिंदु नेत्र के सामने 80 cm दूरी पर है। इस दोष को संशोधित करने के लिए आवश्यक लैंस की प्रकृति तथा क्षमता क्या होगी ?
हल : क्योंकि निकट दृष्टि दोष से ग्रसित व्यक्ति का दूर बिंदु 80 cm की दूरी पर है, इसलिए उस व्यक्ति को एक ऐसे लैंस की आवश्यकता है जो अनंत पर पड़ी वस्तु का प्रतिबिंब आँख के सामने 80 cm की दूरी पर बना सके।
∴ वस्तु की दूरी (u) = – α
प्रतिबिंब की नेत्र लैंस से दूरी (v) = –80 cm .
लैंस की फोकस दूरी (f) = ?
लैंस सूत्र \(\frac{1}{v}-\frac{1}{u}=\frac{1}{f}\) से
\(\frac{1}{-80}-\frac{1}{-\infty}=\frac{1}{f}\)
\(-\frac{1}{80}+\frac{1}{\propto}=\frac{1}{f}\)
∵ \(\frac{1}{\alpha}\) = 0

या \(-\frac{1}{80}=\frac{1}{f}\)
∴ फोकस दूरी (1)
= –80 cm
= – 0.8 m
लैंस की क्षमता (P) = \(\frac{1}{f}\)
= \(\frac{1}{-0.8} \mathrm{D}\)
= \(-\frac{1}{0.8} \mathrm{D}\)
= -1.25 D चूँकि लैंस की क्षमता ऋणात्मक है, इसलिए अभीष्ट लैंस की प्रकृति अवतल (अपसारी) है जिसकी क्षमता -1.25 D है।

प्रश्न 7.
चित्र बनाकर दर्शाइए कि दीर्घ-दृष्टि दोष कैसे संशोधित किया जाता है। एक दीर्घ-दृष्टि दोषयुक्त नेत्र का निकट बिंदु 1 m है। इस दोष को संशोधित करने के लिए आवश्यक लैंस की क्षमता क्या होगी ? यह मान लीजिए कि सामान्य नेत्र का निकट बिंदु 25 cm है।
उत्तर-
दीर्घ दृष्टि (दूरदृष्टि) दोष से ग्रसित व्यक्ति का निकट बिंदु सामान्य दृष्टि वाली आँख की तुलना में थोडा दूर खिसक जाता है जिसके फलस्वरूप व्यक्ति समीप पड़ी वस्तुओं को स्पष्ट नहीं देख पाता है। इस दोष को दूर करने के लिए उत्तल लैंस (अभिसारी लैंस) प्रयोग किया जाता है जैसा कि निम्न चित्र में दर्शाया गया है :
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार 1
(c) दीर्घ-दृष्टि दोष का संशोधन प्रश्नानुसार, सामान्य नेत्र का निकट बिंदु 25 cm है जो नेत्र दोष के कारण खिसक कर 1 m (= 100 cm) दूर पहुँच गया है। इसलिए दृष्टि दोष से पीड़ित व्यक्ति को एक ऐसे लैंस की आवश्यकता है जो 25 cm पर रखी वस्तु का प्रतिबिंब 1 m अर्थात् 100 cm पर बनाए।
अतः u = – 25 cm
v = – 100 cm
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार 2
∴ f = \(\frac{100}{3}\) cm
या f = \(\frac{1}{3}\) m
∴ अभीष्ट लैंस की क्षमता P = \(\frac{1}{f}(\text { in m) }\)
= \(\frac{1}{1 / 3}\)
= + 3D
अतः दृष्टि दोष के निवारण हेतु +3D क्षमता के उत्तल लैंस की आवश्यकता होगी।

प्रश्न 8.
सामान्य नेत्र 25 cm से निकट रखी वस्तुओं को सुस्पष्ट क्यों नहीं देख पाते ?
उत्तर-
जब वस्तु सामान्य नेत्र से 25 cm की दूरी पर रखी होती है तो नेत्र अपनी संपूर्ण समंजन क्षमता का प्रयोग करके वस्तु का प्रतिबिंब रेटिना पर बना देती है जिससे वस्तु स्पष्ट दिखाई देती है। यदि उसी वस्तु को 25 cm से कम दूरी पर रखा जाता है तो नेत्र लैंस द्वारा उस वस्तु का प्रतिबिंब रेटिना पर नहीं बन पाता है जिससे वस्तु स्पष्ट दिखाई नहीं दे पाती है।

प्रश्न 9.
जब हम नेत्र से किसी वस्तु की दूरी को बढ़ा देते हैं तो नेत्र में प्रतिबिंब दूरी का क्या होता है ?
उत्तर-
सामान्य दृष्टि वाले मनुष्य के लिए वस्तु की नेत्र से दूरी बढ़ाने पर भी नेत्र दवारा बने प्रतिबिंब की दूरी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है, क्योंकि नेत्र लैंस वस्तु की प्रत्येक स्थिति तारे की के लिए समंजन क्षमता का उपयोग करके वस्तु का प्रतिबिंब रेटिना पर आभासी स्थिति ही बनाता है।

प्रश्न 10.
तारे क्यों टिमटिमाते हैं ?
उत्तर-
तारों का टिमटिमाना-तारों का टिमटिमाना प्रतीत होना तारों के प्रकाश का वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण होता है। वायुमंडल में प्रवेश करने के पश्चात् पृथ्वी के तल तक पहुँचने तक तारे का प्रकाश वायुमंडलीय माध्यम के क्रमिक बढ़ते हुए अपवर्तनांक द्वारा अपवर्तन होता है जिससे प्रकाश को अभिलंब की तरफ झुका देता है। क्षितिज के निकट देखने पर तारे की आभासी स्थिति उसकी वास्तविक ऊचाई पर प्रतात हाता हा वायुमडल का भातिक चित्र-वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण अवस्थाएँ स्थायी न होने के कारण यह आभासी स्थिति निरंतर थोड़ी तारे की आभासी स्थिति बदलती रहती है तथा आँखों में प्रवेश करने वाले तारों के प्रकाश की मात्रा बदलती रहती है जिस कारण कोई तारा कभी चमकीला और कभी धुंधला प्रतीत होता है जोकि टिमटिमाने का प्रभाव है।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार 3

प्रश्न 11.
व्याख्या कीजिए कि ग्रह क्यों नहीं टिमटिमाते।
उत्तर-
ग्रह तारों की अपेक्षा पृथ्वी के बहुत निकट होते हैं तथा इन्हें विस्तृत स्रोत माना जा सकता है। यदि ग्रहों को बिंदु आकार के अनेक प्रकाश स्रोतों का संग्रह मान लें तो प्रत्येक बिंदु स्रोत का प्रकाश हमारी आँखों में प्रवेश करने वाले प्रकाश की मात्रा में कुल परिवर्तन का औसत शून्य मान होगा जिससे ग्रहों की आभासी स्थिति स्थिर रहेगी और टिमटिमाने का प्रभाव भी समाप्त हो जाएगा।

प्रश्न 12.
सूर्योदय के समय सूर्य रक्ताभ क्यों प्रतीत होता है ?
उत्तर-
सूर्योदय के समय सूर्य रक्ताभ दिखाई देना-सूर्योदय (या सूर्यास्त) के समय सूर्य से आने वाले प्रकाश को हमारे नेत्रों में पहुंचने से पहले वायु मंडल की वायु
नीले प्रकाश का कम की मोटी परतों में से गुज़रता है। यहाँ धूलकणों प्रकीर्ण होने से सूर्य प्रकीर्णन तथा जलकणों की वायुमंडल में उपस्थिति के रक्ताभ प्रतीत होना कारण कम तरंगदैर्ध्य वाले रंग (जैसे नीला, बैंगनी आदि) का प्रकीर्णन हो जाता है तथा केवल लंबी तरंगदैर्ध्य वाली प्रकाश तरंगें जैसे | क्षितिज के कि लाल सीधी हमारे नेत्रों तक पहुँचती हैं। निकट सूर्य – इस प्रकार सूर्योदय (या सूर्यास्त) के समय चित्र-सूर्योदय तथा सूर्यास्त के समय सूर्य का रक्ताभ प्रतीत सूर्य रक्ताभ प्रतीत होता है।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार 4

प्रश्न 13.
किसी अंतरिक्षयात्री को आकाश नीले की अपेक्षा काला क्यों प्रतीत होता है ?
उत्तर-
अत्याधिक ऊँचाई पर उड़ते समय अंतरिक्ष यात्री के लिए कोई भी वायुमंडल नहीं होता है। इसलिए वायु के अणुओं या अन्य सूक्ष्म कणों की अनुपस्थिति के कारण प्रकाश का प्रकीर्णन नहीं होता है जिससे अंतरिक्ष यात्रियों को आकाश काला दिखाई देता है।

Science Guide for Class 10 PSEB मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार InText Questions and Answers

प्रश्न 1.
नेत्र की समंजन क्षमता से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
नेत्र की समंजन क्षमता-अभिनेत्र लेंस रेशेदार जेलीवत पदार्थ का बना होता है। इसकी वक्रता में कुछ सीमाओं तक पक्ष्माभी पेशियों (ciliary muscles) द्वारा रूपांतरण किया जा सकता है। अभिनेत्र लेंस की वक्रता में परिवर्तन होने पर इसकी फोकस दूरी भी परिवर्तित हो जाती है। जब पेशियाँ शिथिल हो जाती हैं तो अभिनेत्र लेंस पतला हो जाता है तथा इसकी फोकस दूरी बढ़ जाती है। इस स्थिति में हम दूर रखी वस्तुओं को स्पष्ट देख पाने में समर्थ होते हैं। जब आप निकट पड़ी वस्तुओं को देखते हैं तब पक्ष्माभी पेशियाँ सिकुड़ जाती हैं। इससे अभिनेत्र लेंस की वक्रता बढ़ जाती है और अभिनेत्र लेंस मोटा हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप अभिनेत्र लेंस की फोकस दूरी कम हो जाती है जिससे आप निकट पड़ी वस्तु को स्पष्ट देख सकते हैं। अभिनेत्र लेंस की वह क्षमता जिसके कारण लेंस अपनी फोकस दूरी को समयोजित कर लेता है समंजन कहलाती है।

प्रश्न 2.
निकट दृष्टि दोष का कोई व्यक्ति 1.2 m से अधिक दूरी पर रखी वस्तुओं को सुस्पष्ट नहीं देख सकता। इस दोष को दूर करने के लिए प्रयुक्त संशोधक लेंस किस प्रकार का होना चाहिए ?
उत्तर-निकट दृष्टि दोषयुक्त नेत्र 1.2 m से अधिक दूरी पर रखी वस्तुओं को नहीं देख सकता क्योंकि वस्तुओं का प्रतिबिंब दृष्टिपटल (रेटिना) पर न बनकर रेटिना के सामने बनता है। इस दोष को उपयुक्त क्षमता के अवतल लेंस (अपसारी लेंस) के उपयोग द्वारा संशोधित किया जा सकता है।

प्रश्न 3.
मानव नेत्र की सामान्य दृष्टि के लिए दूर बिंदु तथा निकट बिंदु नेत्र से कितनी दूरी पर होते हैं ?
उत्तर-
मानव नेत्र की सामान्य दृष्टि के लिए निकट बिंदु की नेत्र से दूरी 25 cm और दूर बिंदु की नेत्र से दूरी अनंत होती है अर्थात् नीरोग मानव आँख 25 cm और अनंत के बीच कहीं भी स्थित वस्तु को साफ़-साफ़ देख सकती है।

प्रश्न 4.
अंतिम पंक्ति में बैठे किसी विद्यार्थी को श्यामपट्ट पढ़ने में कठिनाई होती है। यह विद्यार्थी किस दृष्टि दोष से पीड़ित है ? इसे किस प्रकार संशोधित किया जा सकता है ?
उत्तर-
विद्यार्थी निकट दृष्टि दोष से पीड़ित है जिसे उपयुक्त क्षमता के अवतल लैंस द्वारा संशोधित किया जा सकता है।

PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन

Punjab State Board PSEB 10th Class Science Book Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन Textbook Exercise Questions, and Answers.

PSEB Solutions for Class 10 Science Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन

PSEB 10th Class Science Guide प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्न में से कौन-सा पदार्थ लेंस बनाने के लिए प्रयुक्त नहीं किया जा सकता ?
(a) जल
(b) काँच
(c) प्लास्टिक
(d) मिट्टी।
उत्तर-
(d) मिट्टी।

प्रश्न 2.
किसी बिंब का अवतल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिंब आभासी, सीधा तथा बिंब से बड़ा पाया गया। वस्तु की स्थिति कहाँ होनी चाहिए ?
(a) मुख्य फोकस तथा वक्रता केंद्र के बीच
(b) वक्रता केंद्र पर
(c) वक्रता केंद्र से परे
(d) दर्पण के ध्रुव तथा मुख्य फोकस के बीच।
उत्तर-
(d) दर्पण के ध्रुव तथा मुख्य फोकस के बीच।

प्रश्न 3.
किसी बिंब का वास्तविक तथा समान साइज़ का प्रतिबिंब प्राप्त करने के लिए बिंब को उत्तल लेंस के सामने कहाँ रखें ?
(a) लेंस के मुख्य फोकस पर
(b) फोकस दूरी की दोगुनी दूरी पर
(c) अनंत पर
(d) लेंस के प्रकाशिक केंद्र तथा मुख्य फोकस के बीच।
उत्तर-
(b) फोकस दूरी की दोगुनी दूरी पर।

प्रश्न 4.
किसी गोलीय दर्पण तथा किसी पतले गोलीय लेंस दोनों की फोकस दूरियाँ 15 cm हैं। दर्पण तथा लेंस संभवतः है
(a) दोनों अवतल
(b) दोनों उत्तल
(c) दर्पण अवतल तथा लेंस उत्तल
(d) दर्पण उत्तल तथा लेंस अवतल।
उत्तर-
(b) दोनों उत्तल।

प्रश्न 5.
किसी दर्पण से आप चाहे कितनी ही दूरी पर खड़े हों, आपका प्रतिबिंब सदैव सीधा प्रतीत होता है। संभवतः दर्पण है
(a) केवल समतल
(b) केवल अवतल
(c) केवल उत्तल
(d) या तो समतल अथवा उत्तल।
उत्तर-
(d) या तो समतल अथवा उत्तल।।

प्रश्न 6.
किसी शब्द कोष (dictionary) में पाए गए छोटे अक्षरों को पढ़ते समय आप निम्न में से कौन-सा लेंस पसंद करेंगे ?
(a) 50 cm फोकस दूरी का एक उत्तल लेंस
(b) 50 cm फोकस दूरी का एक अवतल लेंस
(c) 5 cm फोकस दूरी का एक उत्तल लेंस
(d) 5 cm फोकस दूरी का एक अवतल लेंस।
उत्तर-
(a) 50 cm फोकस दूरी का एक उत्तल लेंस।
.
प्रश्न 7.
15 cm फोकस दूरी के एक अवतल दर्पण का उपयोग करके हम किसी बिंब का सीधा प्रतिबिंब बनाना चाहते हैं। बिंब का दर्पण से दूरी का परिसर (Range) क्या होना चाहिए ? प्रतिबिंब की प्रकृति कैसी है ? प्रतिबिंब बिंब से बड़ा है अथवा छोटा। इस स्थिति में प्रतिबिंब बनने का एक किरण आरेख बनाइए।
उत्तर-
अवतल दर्पण से वस्तु का सीधा प्रतिबिंब प्राप्त करने के लिए वस्तु को अवतल दर्पण के ध्रुव तथा मुख्य फोकस के बीच रखना चाहिए। इसलिए वस्तु को ध्रुव से दूरी 0 cm से अधिक तथा 15 cm से कम होनी चाहिए। ऐसा करने से वस्तु का प्रतिबिंब काल्पनिक सीधा तथा आकार में वस्तु से बड़ा होगा।
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प्रश्न 8.
निम्न स्थितियों में प्रयुक्त दर्पण का प्रकार बताइए
(a) किसी कार का अग्र-दीप ( हैडलाइट)
(b) किस वाहन का पार्श्व/पश्च-दृश्य दर्पण
(c) सौर भट्टी अपने उत्तर की कारण सहित पुष्टि कीजिए।
उत्तर-
(a) कार के हैडलाइट (अग्रदीप) में अवतल दर्पण का प्रयोग किया जाता है। बल्ब को अवतल दर्पण के मुख्य फोकस पर रखा जाता है। बल्ब से निकलने वाली प्रकाश किरणें दर्पण से परावर्तन के पश्चात् समानांतर हो जाती हैं। इससे एक शक्तिशाली समानांतर प्रकाश किरण पंज प्राप्त होता है।

(b) वाहनों में पार्श्व दर्पण (या पश्च दृश्य दर्पण) के रूप में उत्तल दर्पण को वरीयता दी जाती है क्योंकि उत्तल दर्पण सदैव वस्तु का सीधा तथा वस्तु की अपेक्षा छोटे आकार क प्रतिबिंब बनाता है जिससे इसका दृष्टि-क्षेत्र बढ़ जाता है। ऐसा करने से वाहन चालक छोटे से दर्पण में ही संपूर्ण क्षेत्र को देख पाता है।

(c) सौर भट्टी में अवतल दर्पण का प्रयोग किया जाता है। गर्म किये जाने वाले बर्तन को दर्पण के मुख्य फोकस पर रखा जाता है। सूर्य से आ रही समांतर किरणें दर्पण से परावर्तन होने के पश्चात् फोकस पर रखे बर्तन पर संपूर्ण उष्मीय ऊर्जा को केंद्रित कर देती हैं।

प्रश्न 9.
किसी उत्तल लेंस का आधा भाग काले कागज़ से ढक दिया गया है। क्या यह लेंस किसी बिंब का पूरा प्रतिबिंब बन पाएगा ? अपने उत्तर की प्रयोग द्वारा जाँच कीजिए। अपने प्रेक्षणों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर-
हाँ, यह लेंस वस्तु (बिंब) का पूरा प्रतिबिंब बनाएगा। प्रायोगिक जाँचविधि-

  • एक प्रकाशिक बैंच पर एक स्टैंड में उत्तल लेंस लगाओ।
  • एक स्टैंड में जलती हुई मोमबत्ती लगाकर लेंस की फोकस दूरी से थोड़ा अधिक दूरी पर प्रकाशिक बैंच पर रखो।
  • अब लेंस के दूसरी तरफ प्रकाशिक बैंच पर स्टैंड में पर्दा लगाकर उस को आगे-पीछे सरका कर ऐसी स्थिति में रखें कि उस पर मोमबत्ती का तीखा तथा उल्टा प्रतिबिंब प्राप्त हो जाए।
  • अब लेंस के निचले आधे भाग को काला कागज़ चिपका कर ढक दें ताकि लेंस के ऊपरी आधे भाग से प्रकाश का अपवर्तन होने से प्रतिबिंब बनें। इस स्थिति में आप देखेंगे कि मोमबत्ती का पूर्ववत् पूरा प्रतिबिंब प्राप्त होगा परंतु इसकी तीव्रता पहले प्रतिबिंब की तुलना में कम हो जाती है।

व्याख्या-मोमबत्ती के किसे बिंदु से चलने वाली प्रकाश किरणें लेंस के विभिन्न भागों से अपवर्तित होकर एक बिंदु पर मिलेंगी। लेंस के निचले आधे भाग को काला कर देने पर भी उस बिंदु पर प्रकाश की किरणें आएँगी जिससे मोमबत्ती का प्रतिबिंब पूरा प्रतिबिंब प्राप्त होगा, परंतु किरणों की काला कागज़ संख्या कम होने के कारण प्रतिबिंब की तीव्रता कम हो जाएगी।
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प्रश्न 10.
5 cm लंबा कोई बिंब 10 cm फोकस दूरी के किसी अभिसारी लेंस से 25 cm दूरी पर रखा जाता है। प्रकाश किरण-आरेख खींचकर बनने वाले प्रतिबिंब की स्थिति, साइज़ तथा प्रकृति ज्ञात कीजिए।
हल : यहाँ वस्तु की अभिसारी लेंस से दूरी (u) = -25 cm
अभिसारी लेंस की फोकस दूरी (f) = + 10 cm
अभिसारी लेंस से प्रतिबिंब की दूरी (v) = ?
वस्तु (बिंब) की लंबाई (O) = + 5 cm
प्रतिबिंब की लंबाई (साइज़) (I) = ?
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लेंस सूत्र से,
\(\frac{1}{v}-\frac{1}{u}=\frac{1}{f}\)
या \(\frac{1}{v}=\frac{1}{f}+\frac{1}{u}\)
= \(\frac{1}{10}+\frac{1}{-25}\)
= \(\frac{1}{10}-\frac{1}{25}\)
= \(\frac{5-2}{50}\)
= \(\frac{3}{50}\)
∴ u = \(+\frac{50}{3}\) cm

अर्थात् प्रतिबिंब लेंस के दूसरी तरफ लेंस से \(\frac{50}{3}\) cm की दूरी पर बनेगा।
हम जानते हैं लेंस का आवर्धन (m) = \(\frac{v}{u}=\frac{\mathrm{I}}{\mathrm{O}}\) से
\(\frac{I}{5}=\frac{\frac{50}{3}}{-25}\)
\(\frac{I}{5}=\frac{50}{3 \times(-25)}\)
∴ I = \(\frac{5 \times 50}{3 \times 25}\)
= \(-\frac{10}{3}\) cm
अर्थात् प्रतिबिंब की लंबाई (साइज़) = \(\frac{10}{3}\) cm होगी। ऋण चिह्न दर्शाता है कि प्रतिबिंब मुख्य अक्ष के नीचे होगा जोकि वास्तविक तथा उल्टा होगा।

प्रश्न 11.
15 cm फोकस दूरी का कोई अवतल लेंस किसी बिंब का प्रतिबिंब लेंस से 10 cm दूरी पर बनाता है। बिंब लेंस से कितनी दूरी पर स्थित है ? किरण आरेख खींचिए।
हल : दिया है, अवतल लेंस की फोकस दूरी (f) = -15 cm
क्योंकि अवतल लेंस द्वारा बना प्रतिबिंब सदैव आभासी होता है, और लेंस के सामने उसी ओर बनता है जिस तरफ वस्तु होती है।
∴ υ = -10 cm
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 4
अब लेंस सूत्र से .
\(\frac{1}{v}-\frac{\mathrm{I}}{u}=\frac{1}{f}\)
.या \(\frac{\mathrm{I}}{u}=\frac{1}{v}-\frac{\mathrm{I}}{f}\)
= \(\frac{1}{-10}-\frac{1}{-15}\)
= \(-\frac{1}{10}+\frac{1}{15}\)
= \(\frac{-3+2}{30}=-\frac{1}{30}\)
u = – 30 cm
अर्थात् वस्तु (बिंब) लेंस के सम्मुख 30 cm की दूरी पर है।

प्रश्न 12.
15 cm फोकस दूरी के किसी उत्तल दर्पण से कोई बिंब 10 cm दूरी पर रखा है। प्रतिबिंब की स्थिति तथा प्रकृति ज्ञात कीजिए।
हल : दिया है, उत्तल दर्पण की फोकस दूरी (1) = + 15 cm
वस्तु की दर्पण से दूरी (u) = – 10 cm
दर्पण सूत्र \(\frac{1}{u}+\frac{1}{v}=\frac{1}{f}\) से
\(\frac{1}{v}=\frac{1}{f}-\frac{1}{u}\)
\(\frac{1}{15}-\frac{1}{-10}\)
= \(\frac{1}{15}+\frac{1}{10}\)
= \(\frac{2+3}{30}\)
= \(\frac{5}{30}\)
= \(\frac{1}{6}\)
∴ υ = + 6 cm उत्तर धनात्मक चिह्न यह दर्शाता है कि प्रतिबिंब दर्पण के पीछे 6 cm की दूरी पर बनेगा। धनात्मक चिह्न यह भी दर्शाता है कि यह प्रतिबिंब सीधा तथा आभासी है।

प्रश्न 13.
एक समतल दर्पण द्वारा उत्पन्न आवर्धन + 1 है। इसका क्या अर्थ है ?
उत्तर-
एक समतल दर्पण द्वारा उत्पन्न आवर्धन m = +1 यह दर्शाता है कि दर्पण द्वारा बनाए गए प्रतिबिंब का आकार वस्तु के आकार के बराबर है तथा धनात्मक चिह्न (+) यह प्रदर्शित करता है कि समतल दर्पण द्वारा बनाया गया प्रतिबिंब दर्पण के पीछे बन रहा है तथा यह आभासी और सीधा है।

प्रश्न 14.
5.0 cm लंबाई का कोई बिंब 30 cm वक्रता त्रिज्या के किसी उत्तल दर्पण के सामने 20 cm दूरी पर पर रखा गया है। प्रतिबिंब की स्थिति, प्रकृति तथा साइज़ ज्ञात कजिए।
हल- दिया है, वस्तु की उत्तल दर्पण से दूरी (u) = -20 cm
उत्तल दर्पण की वक्रता त्रिज्या (R) = + 30 cm
उत्तल दर्पण की फोकस दूरी (f) = \(\frac{+30}{2}\) cm
= 15 cm
वस्तु की लंबाई (O) = +5.0 cm
दर्पण सूत्र
\(\frac{1}{u}+\frac{1}{v}=\frac{1}{f}\) से
\(\frac{1}{v}=\frac{1}{f}-\frac{1}{u}\)
\(\frac{1}{15}-\frac{1}{-20}\)
= \(\frac{4+3}{60}=\frac{7}{60}\)
∴ υ = \(+\frac{60}{7}\) cm
∴ प्रतिबिंब की दर्पण से दूरी (v) = \(+\frac{60}{7}\) cm उत्तर

अर्थात् धनात्मक चिह्न यह दर्शाता है कि प्रतिबिंब दर्पण के दूसरी ओर \(\frac{60}{7}\) cm की दूरी पर बनेगा। यदि प्रतिबिंब की ऊँचाई (साइज़) I’ है तो आवर्धन सूत्र द्वारा
m = – \(\frac{v}{u}=\frac{\mathrm{I}}{\mathrm{O}} \) से
\(-\frac{60}{7}-20=\frac{1}{5}\)
\(\frac{60}{7 \times 20}=\frac{I}{5}\)
∴ I = \(+\frac{15}{7}\) cm उत्तर
धनात्मक चिह्न (+) यह स्पष्ट करता है कि प्रतिबिंब सीधा तथा आभासी होगा तथा दर्पण के पीछे \(\frac{15}{7}\) cm की दूरी पर बनेगा।

प्रश्न 15.
7.0 cm साइज़ का कोई बिंब 18 cm फोकस दूरी के किसी अवतल दर्पण के सामने 27 cm दूरी पर रखा गया है। दर्पण से कितनी दूरी पर किसी परदे को रखें कि उस पर वस्तु का स्पष्ट फोकसित प्रतिबिंब प्राप्त किया जा सके। प्रतिबिंब का साइज़ तथा प्रकृति ज्ञात कीजिए।
हल : दिया है, वस्तु (बिंब) का आकार (साइज़) (O) = + 7.0 cm
अवतल दर्पण की फोकस दूरी (f) = -18 cm
वस्तु की दर्पण से दूरी (u) = -27 cm
प्रतिबिंब की दर्पण से दूरी (v) = ?
प्रतिबिंब का साइज़ (I) = ?

दर्पण सूत्र \(\frac{1}{u}+\frac{1}{v}=\frac{1}{f}\) से
\(\frac{1}{v}=\frac{1}{f}-\frac{1}{u}\)
= \(\frac{1}{-18}-\frac{1}{-27}\)
= \(-\frac{1}{18}+\frac{1}{27}\)
= \(\frac{-3+2}{54}\)
= \(-\frac{1}{54} \)
v = -54 cm
ऋणात्मक चिह्न (-) यह दर्शाता है कि प्रतिबिंब दर्पण के सामने 54 cm की दूरी पर बनेगा। इसलिए पर्दे को दर्पण के सामने 54 cm की दूरी पर रखना चाहिए। उत्तर

अब दर्पण के आवर्धन सूत्र से,
m = \(-\frac{v}{u}=\frac{\mathrm{I}}{\mathrm{O}}\)
\(-\frac{(-54)}{(-27)}=\frac{I}{7}\)
\(-\frac{54}{27}=\frac{I}{7}\)
या I = \(-\frac{54 \times 7}{27}\)
I = -14 cm उत्तर
अर्थात् प्रतिबिंब का साइज़ (ऊँचाई) 14 cm होगा। ऋणात्मक चिह्न (-) यह दर्शाता है कि प्रतिबिंब वास्तविक तथा उल्टा होगा।

प्रश्न 16.
उस लेंस की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए जिसकी क्षमता -2.0 D है। यह किस प्रकार का लेंस
हल : दिया है,
लेंस की क्षमता (P) = -2.0 D
लेंस की फोकस दूरी (f) = ?
हम जानते हैं,
लस का क्षमता (P) = img
प्रतिबिंब की दर्पण से दूरी (v) = ?
प्रतिबिंब का साइज़ (I) = ?
दर्पण सूत्र \(\frac{1}{u}+\frac{1}{v}=\frac{1}{f}\) से
\(\frac{1}{v}=\frac{1}{f}-\frac{1}{u}\)
V = -54 cm ऋणात्मक चिह्न (-) यह दर्शाता है कि प्रतिबिंब दर्पण के सामने 54 cm की दूरी पर बनेगा। इसलिए पर्दे को दर्पण के सामने 54 cm की दूरी पर रखना चाहिए। उत्तर

अब दर्पण के आवर्धन सूत्र से,
m = \(-\frac{v}{u}=\frac{\mathrm{I}}{\mathrm{O}}\)
\(-\frac{(-54)}{(-27)}=\frac{I}{7}\)
\(-\frac{54}{27}=\frac{I}{7} \)
या I = \(\frac{54 \times 7}{27}\)
∴ I = -14 cm उत्तर
अर्थात् प्रतिबिंब का साइज़ (ऊँचाई) 14 cm होगा। ऋणात्मक चिह्न (-) यह दर्शाता है कि प्रतिबिंब वास्तविक तथा उल्टा होगा।

प्रश्न 16.
उस लेंस की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए जिसकी क्षमता -2.0 D है। यह किस प्रकार का लेंस है ?
हल : दिया है, लेंस की क्षमता (P) = -2.0 D
लेंस की फोकस दूरी (f) = ?
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-2 = \(\frac{100}{f}\)
∴ f = \(\frac{-100}{2}\)
= -50 cm उत्तर
ऋणात्मक चिह्न यह दर्शाता है कि लेंस अवतल लेंस है।

प्रश्न 17.
कोई डॉक्टर + 1.5 D क्षमता का संशोधक लेंस निर्धारित करता है। लेंस की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए। क्या निर्धारित लेंस अभिसारी है अथवा अपसारी ?
हल : दिया है, लेंस की क्षमता (P) = + 1.5 D
लेंस की फोकस दूरी (f) = ?
लेंस की क्षमता सूत्र से P = \(\frac{1}{f}\)
1.5 = \(\frac{1}{1.5}\)
∴ f = \(\frac{10}{15}\)
= \(\frac{2}{3}\)
f = + 67 cm
धनात्मक चिह्न (+) यह दर्शाता है कि लेंस अभिसारी लेंस उत्तल लेंस है। उत्तर

Science Guide for Class 10 PSEB प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन InText Questions and Answers

प्रश्न 1.
अवतल दर्पण के मुख्य फोकस की परिभाषा लिखिए।
उत्तर-
अवतल दर्पण का मुख्य फोकस- यह मुख्य अक्ष पर वह बिंदु है जहाँ अवतल दर्पण के मुख्य अक्ष के समानांतर आपतित किरणें दर्पण से परावर्तन होने के पश्चात् मिलती हैं।

प्रश्न 2.
एक गोलीय दर्पण की वक्रता त्रिज्या 20 cm है। इसकी फोकस दूरी क्या होगी ?
हल-दिया है-
गोलीय दर्पण की वक्रता त्रिज्या (R) = 20 cm
∴ गोलीय दर्पण की फोकस दूरी (f) = \(\frac{\mathrm{R}}{2}\)
= \(\frac{20}{2}\) cm
= 10 cm

प्रश्न 3.
उस दर्पण का नाम बताइए जो बिंब का सीधा तथा आवर्धित प्रतिबिंब बना सके।
उत्तर-
अवतल दर्पण बिंब (वस्तु) का सीधा तथा आवर्धित प्रतिबिंब बनाता है जब बिंब को दर्पण के फोकस तथा ध्रुव के मध्य रखा जाता है।

प्रश्न 4.
हम वाहनों में उत्तल दर्पण को पश्च-दृश्य दर्पण के रूप में वरीयता क्यों देते हैं ?
उत्तर-
वाहनों में उत्तल दर्पण को पश्च-दृश्य दर्पण के रूप में वरीयता-उत्तल दर्पण को पश्य-दृश्य के रूप में वरीयता देने के निम्नलिखित कारण हैं

  • उत्तल दर्पण सदैव वस्तु का सीधा प्रतिबिंब बनाता है।
  • उत्तल दर्पण वस्तु की अपेक्षा छोटा प्रतिबिंब बनाता है जिससे दृष्टि क्षेत्र बढ़ जाता है और वाहन चालक ट्रैफिक वाले लगभग संपूर्ण क्षेत्र को देख पाता है।

प्रश्न 5.
उस उत्तल दर्पण की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए जिसकी वक्रता त्रिज्या 32 cm है।
हल :
दिया है, उत्तल दर्पण की वक्रता त्रिज्या (R) = + 32 cm
उत्तल दर्पण की फोकस दूरी (1) = ?
हम जानते हैं f = \(\frac{\mathrm{R}}{2} \)
∴ उत्तल दर्पण की फोकस दूरी (f) = \(\frac{+32}{2}\)
= + 16 cm उत्तर

प्रश्न 6.
कोई अवतल दर्पण आपके सामने 10 cm दूरी पर रखे किसी बिंब का तीन गुणा आवर्धित (बड़ा) प्रतिबिंब बनाता है। प्रतिबिंब दर्पण से कितनी दूरी पर है ?
हल-
दिया है, बिंब (वस्तु) की अवतल दर्पण से दूरी (u) = –10 cm
प्रतिबिंब का आवर्धन (m) = \(\frac{-v}{u}\) = -3
या \(\frac{v}{u}\) =3
या υ =3×4 =
= 3x -10
∴ υ = -30 cm उत्तर अर्थात् प्रतिबिंब की दर्पण से दूरी 30 cm है। ऋणात्मक चिह्न यह दर्शाता है कि प्रतिबिंब दर्पण के सामने बिंब की ओर ही बनेगा।

प्रश्न 7.
वायु में गमन करती प्रकाश की एक किरण जल में तिरछी प्रवेश करती है। क्या प्रकाश किरण अभिलंब की ओर झुकेगी अथवा अभिलंब से दूर हटेगी ? बताइए क्यों ?
उत्तर-
वायु में गमन करती प्रकाश की एक किरण जब जल में तिरछी प्रवेश करेगी तो यह किरण अभिलंब की ओर झुकेगी क्योंकि जल, वायु की अपेक्षा सघन माध्यम है और जल में प्रकाश की चाल में कमी आ जाएगी।

प्रश्न 8.
प्रकाश वायु से 1.50 अपवर्तनाँक की काँच की पलेट में प्रवेश करता है। काँच में प्रकाश की चाल कितनी है ? निर्वात में प्रकाश की चाल 3 x 10 m/s है।
हल : दिया है, काँच का अपवर्तनाँक (aug) = 1.50
निर्वात (वायु) में प्रकाश की चाल (c) = 3 x 108 m/s
काँच में प्रकाश की चाल (Vg) = ?
वायु में प्रकाश की चाल
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 7

प्रश्न 9.
पाठ्य-पुस्तक की सारणी 10:3 से अधिकतम प्रकाशिक घनत्व के माध्यम को ज्ञात कीजिए। न्यूनतम प्रकाशिक घनत्व के माध्यम को भी ज्ञात कीजिए।
उत्तर-
सारणी 10-3 से स्पष्ट है कि हीरे का अपवर्तनांक 2.42 है जोकि सबसे अधिक है तथा वायु का अपवर्तनांक 1.0003 है जोकि सबसे कम है। अतः हीरे का प्रकाशिक घनत्व अधिकतम तथा वायु का घनत्व न्यूनतम है।

प्रश्न 10.
आपको किरोसिन, तारपीन का तेल तथा जल दिए गए हैं। इनमें से किसमें प्रकाश सबसे अधिक तीव्र गति से चलता है ? सारणी 10.3 में दिए गए आँकड़ों का उपयोग कीजिए।
उत्तर-
हम जानते हैं कि अधिक अपवर्तनांक वाला माध्यम प्रकाशिक सघन माध्यम होता है जिसमें प्रकाश की चाल कम होती है तथा कम अपवर्तनांक वाले माध्यम प्रकाशिक विरल माध्यम होता है जिसमें प्रकाश की चाल कम होती है। सारणी 10-3 से स्पष्ट है कि किरोसिन का अपवर्तनांक 1.44, तारपीन के तेल का अपवर्तनाँक 1-47 तथा जल का अपवर्तनांक 1.33 है। इन आँकड़ों से स्पष्ट है कि जल का अपवर्तनांक न्यूनतम है, इसलिए जल में प्रकाश सबसे तीव्र गति से चलता है।

प्रश्न 11.
हीरे का अपवर्तनांक 2-42 है। इस कथन का क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
हीरे का अपवर्तनांक 2.42 है। इस कथन का अभिप्राय यह है कि हीरे में प्रकाश की चाल, निर्वात में प्रकाश की चाल की अपेक्षा \(\frac{1}{2.42}\) गुना है।

प्रश्न 12.
किसी लेंस की 1 डाइऑप्टर क्षमता को परिभाषित कीजिए।
उत्तर-
1 डाइऑप्टर उस लेंस की क्षमता है जिसकी फोकस दूरी 1 मीटर (= 100 सेंटीमीटर) हो। उत्तल लेंस की क्षमता धनात्मक तथा अवतल लेंस की क्षमता ऋणात्मक मानी जाती है।

प्रश्न 13.
कोई उत्तल लेंस किसी सुई का वास्तविक तथा उलटा प्रतिबिंब उस लेंस से 50 cm दूर बनाता है। यह सुई, उत्तल लेंस के सामने कहाँ रखी है, यदि इसका प्रतिबिंब उसी साइज़ का बन रहा है जिस साइज़ का बिंब है ? लेंस की क्षमता ज्ञात कीजिए।
हल-दिया है, उत्तल लेंस से प्रतिबिंब की दूरी (ν) = + 50 cm
[ν का चिह्न + है क्योंकि प्रतिबिंब वास्तविक तथा उल्टा है।]
प्रतिबिंब का साइज़ अथवा ऊँचाई (I) = बिंब (वस्तु) का साइज़ (O)
∴ आवर्धन (m) = \(\frac{\mathrm{I}}{\mathrm{O}}\) =-1
[वास्तविक प्रतिबिंब के लिए आवर्धन ऋणात्मक होता है।]

परंतु लेंस के लिए m = \(\frac{v}{u}\)
∴ \(\frac{v}{u}\) = -1
या v = υ
या u = – υ
u = – υ
∴ u = (-50) cm
= 50 cm
अत: सूई (बिंब) उत्तल लेंस के सामने 50 cm की दूरी पर रखी है।
लेंस सूत्र \(\frac{1}{v}-\frac{1}{u}=\frac{1}{f}\) से
\(\frac{1}{50}-\frac{1}{-50}=\frac{1}{f}\)
\(\frac{1}{50}+\frac{1}{50}=\frac{1}{f}\)
\(\frac{1+1}{50}=\frac{1}{f}\)
\(\frac{2}{50}=\frac{1}{f}\)
\(\frac{1}{25}=\frac{1}{f}\)
∴ f = 25 cm = 0.25 cm
∴ लेंस की क्षमता (P) = \(\frac{1}{f(\text { in metres })}\)
= \(\frac{1}{0.25}\) D
लेंस की क्षमता (P) = + 4 D उत्तर

प्रश्न 14.
2 m फोकस दूरी वाले किसी अवतल लेंस की क्षमता ज्ञात कीजिए।
हल :
दिया है, अवतल लेंस की फोकस दूरी (f) = -2 m
[अवतल लेंस की फोकस दूरी ऋणात्मक मानी जाती है।] अवतल लेंस की क्षमता (P) = ?
हम जानते हैं,
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 9
= \(\frac{1}{-2}\) D
= \(\frac{1}{-2}\) D
अवतल लेंस की क्षमता (P) = -0.5 D उत्तर