PSEB 12th Class Economics Solutions Chapter 34 1966 से पंजाब में औद्योगिक विकास

Punjab State Board PSEB 12th Class Economics Book Solutions Chapter 34 1966 से पंजाब में औद्योगिक विकास Textbook Exercise Questions, and Answers.

PSEB Solutions for Class 12 Economics Chapter 33 1966 से पंजाब में कृषि का विकास

PSEB 12th Class Economics 1966 से पंजाब में कृषि का विकास Textbook Questions, and Answers

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Type Questions)

प्रश्न 1.
पंजाब में औद्योगिक ढांचे के विकास का वर्णन करें।
उत्तर-
पंजाब में अधिक उद्योग घरेलू तथा छोटे पैमाने के उद्योग हैं। मध्यम तथा बड़े पैमाने के उद्योगों की कमी पाई जाती है।

प्रश्न 2.
पंजाब में छोटे पैमाने के उद्योगों की क्या स्थिति है ?
उत्तर-
पंजाब में छोटे पैमाने के उद्योग अधिक विकसित हुए हैं। 2018-19 में छोटे पैमाने के उद्योगों की कार्यशील इकाइयां 1:98 लाख थीं।

प्रश्न 3.
छोटे पैमाने के उद्योगों से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
छोटे उद्योग तथा सहायक उद्योग वे उद्योग हैं, जिनमें एक करोड़ रुपए की अचल पूंजी का निवेश होता है।

प्रश्न 4.
जिन उद्योगों में एक करोड़ रुपए तक की पूंजी लगी होती है उनको …………. उद्योग कहा जाता है।
(a) कुटीर
(b) छोटे पैमाने के
(c) मध्यम आकार के
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(b) छोटे पैमाने के।

प्रश्न 5.
पंजाब में औद्योगिक प्रगति सन्तोषजनक है।
उत्तर-
ग़लत।

PSEB 12th Class Economics Solutions Chapter 34 1966 से पंजाब में औद्योगिक विकास

प्रश्न 6.
पंजाब में अधिक मात्रा में …………….. उद्योग लगे हुए हैं।
(a) छोटे पैमाने के
(b) मध्यम आकार के
(c) बड़े पैमाने के
(d) उपरोक्त सभी प्रकार के।
उत्तर-
(a) छोटे पैमाने के।

प्रश्न 7.
पंजाब में औद्योगिक विकास की प्रगति ………….. है।
उत्तर-
धीमी।

प्रश्न 8.
पंजाब में बड़े पैमाने के उद्योगों की कमी का कारण ……………….. है।
(a) खनिज पदार्थों की कमी
(b) बिजली की कमी
(c) सीमावर्ती राज्य
(d) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(d) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 9.
पंजाब में वित्त की कमी के कारण औद्योगिक विकास नहीं हुआ।
उत्तर-
सही।

प्रश्न 10.
पंजाब में अल्प उद्योगों का कम विकास हुआ है।
उत्तर-
ग़लत।

प्रश्न 11.
पंजाब में औद्योगिक विकास की ज़रूरत नहीं।
उत्तर-
ग़लत।

II. अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
पंजाब में औद्योगीकरण की आवश्यकता पर टिप्पणी लिखें।
अथवा
पंजाब में औद्योगीकरण के महत्त्व को स्पष्ट करें।
उत्तर-
पंजाब में औद्योगीकरण की आवश्यकता निम्नलिखित तत्त्वों से स्पष्ट हो जाती है-
1. संतुलित विकास (Balanced Growth)-पंजाब की अर्थ-व्यवस्था का संतुलित विकास नहीं हुआ क्योंकि पंजाब के अधिकतम लोग कृषि में लगे हुए हैं। इसलिए उद्योगों का विकास आवश्यक है तो जो पंजाब का संतुलित विकास हो सके।

2. रोज़गार में वृद्धि (Increase in Employment)-पंजाब में शहरों तथा गांवों में बेरोजगारी पाई जाती है। उद्योगों के विकास से पंजाब में शहरी बेरोज़गारी तथा गांवों में छुपी बेरोज़गारी कम होगी। उद्योगों के विकास से पूर्ण रोज़गार की स्थिति प्राप्त की जा सकती है।

प्रश्न 2.
पंजाब में छोटे पैमाने के उद्योगों के विकास का विवरण दें।
उत्तर-
पंजाब में छोटे पैमाने के उद्योगों का विकास-

वर्ष कार्यशील इकाइयां (लाखों में) अचल पूंजी  (करोड़ ₹) उत्पादन (करोड़ ) रोज़गार (लाखों में)
1978-79 0.42 271 751 2.50
2017-18 1.72 86324 201590 15.26

प्रश्न 3.
पंजाब के कोई दो छोटे पैमाने के उद्योगों पर टिप्पणी लिखें।
उत्तर-
पंजाब के मुख्य छोटे पैमाने के उद्योग अग्रलिखित हैं-
1. हौज़री उद्योग (Hosiery Industry)-पंजाब का हौज़री उद्योग लुधियाना में केन्द्रित है। यह उद्योग न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी मशहूर है। 2015-16 इस उद्योग द्वारा ₹ 3711 करोड़ वार्षिक मूल्य का माल उत्पादित किया जाता है। इसमें 78 हज़ार लोगों को रोज़गार प्राप्त होता है।

2. साइकिल उद्योग (Cycle Industry)-पंजाब में साइकिल उद्योग छोटे स्तर तथा बड़े स्तर दोनों पर ही कार्य कर रहा है। साइकिल तथा साइकिल के पुर्जे बनाने का उद्योग लुधियाना, जालन्धर, राजपुरा तथा मालेरकोटला में स्थित है। 2015-16 में ₹ 12966 करोड़ मूल्य के साइकिल तथा साइकिल के पुों का उत्पादन किया गया। इसमें 78.4 हज़ार लोगों को रोजगार प्राप्त होता है।

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प्रश्न 4.
पंजाब में मध्यम तथा बड़े पैमाने के उद्योगों की मंद प्रगति के दो कारण लिखें।
उत्तर-
पंजाब में मध्यम तथा बड़े पैमाने के उद्योगों की मंद प्रगति के कारण (Causes of Slow Progress of Medium & Large Scale Industries in Punjab) –
1. खनिज पदार्थों की कमी (Lack of Mineral Resources)-पंजाब में खनिज पदार्थ बिलकुल नहीं मिलते। मध्यम तथा बड़े पैमाने के उद्योगों को काफ़ी मात्रा में कच्चे माल की आवश्यकता होती है। पंजाब में खनिज पदार्थों की कमी के कारण इनको अन्य राज्यों से मंगवाना पड़ता है। इस कारण बड़े तथा मध्यम पैमाने के उद्योगों का विकास नहीं हुआ।

2. सीमावर्ती राज्य (Border State)-पंजाब में मध्यम तथा बड़े आकार के उद्योगों की मंद प्रगति का सबसे बड़ा कारण पंजाब का सीमावर्ती राज्य होना है। पंजाब की सीमाएं पाकिस्तान से मिलती हैं। पाकिस्तान का भारत से हमेशा झगड़ा रहता है। अब तक दो युद्ध हो चुके हैं। ऐसी स्थिति में उद्यमी इस क्षेत्र में उद्योग स्थापित नहीं करना चाहते।

प्रश्न 5.
पंजाब सरकार द्वारा उद्योगों के विकास के लिए उठाए गए कोई दो कदम बताएं।
उत्तर-
1. करों में छूट (Exemption From Taxes)-नई औद्योगिक नीति में औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करने के लिए करों में छूट देने का कार्यक्रम बनाया गया है। वर्ग A के क्षेत्रों में जो नए उद्योग स्थापित किए जाते हैं उनको बिक्री कर (Sales Tax) से 10 वर्ष के लिए तथा वर्ग B के क्षेत्रों में नए स्थापित उद्योगों के लिए बिक्री कर से 7 वर्ष के लिए छूट दी जाएगी।

2. भूमि के लिए आर्थिक सहायता (Land Subsidy)-नई औद्योगिक नीति में भूमि के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की गई है। कोई भी उद्यमी किसी फोकल प्वाइंट पर भूमि की खरीद उद्योग स्थापित करने के लिए करता है तो भूमि की कीमत का 33% भाग आर्थिक सहायता के रूप में दिया जाएगा। जालन्धर के स्पोर्टस काम्पलैक्स में भूमि के लिए आर्थिक सहायता 25% दी जाएगी।

III. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
पंजाब में औद्योगीकरण की आवश्यकता पर टिप्पणी लिखें।
अथवा
पंजाब में औद्योगीकरण के महत्त्व को स्पष्ट करें।
उत्तर-
पंजाब में औद्योगीकरण की आवश्यकता निम्नलिखित तत्त्वों से स्पष्ट हो जाती है-
1. संतुलित विकास (Balanced Growth)-पंजाब की अर्थ-व्यवस्था का संतुलित विकास नहीं हुआ क्योंकि पंजाब के अधिकतम लोग कृषि में लगे हुए हैं। इसलिए उद्योगों का विकास आवश्यक है तो जो पंजाब का संतुलित विकास हो सके।

2. रोज़गार में वृद्धि (Increase in Employment)-पंजाब में शहरों तथा गांवों में बेरोज़गारी पाई जाती है। उद्योगों के विकास से पंजाब में शहरी बेरोज़गारी तथा गांवों में छुपी बेरोज़गारी कम होगी। उद्योगों के विकास से पूर्ण रोज़गार की स्थिति प्राप्त की जा सकती है।

3. सरकार की आय में वृद्धि (Increase in Income of Government)-औद्योगीकरण द्वारा भिन्न-भिन्न उद्योगों का विकास होगा। सरकार को करों द्वारा अधिक आय प्राप्त होगी इसको लोगों के कल्याण पर व्यय किया जा सकता है।

4. कृषि पर जनसंख्या के दबाव में कमी (Less Pressure of Population on Agriculture)-पंजाब में 759% जनसंख्या कृषि पर निर्भर करती है। इसलिए प्रति व्यक्ति भूमि निरंतर कम हो रही है। उद्योगों के विकास से कृषि से जनसंख्या के दबाव को कम किया जा सकता है।

5. श्रमिकों के जीवन स्तर में वृद्धि (Increase in Standard of Living of Labourers)-पंजाब में औद्योगिक विकास से श्रमिकों की मांग बढ़ेगी परिणामस्वरूप श्रमिकों के व्यय में वृद्धि होगी। इससे श्रमिक ऊँचा जीवन स्तर व्यतीत कर सकेंगे।

प्रश्न 2.
पंजाब में छोटे पैमाने के उद्योगों के विकास के कारण तथा महत्त्व का वर्णन करें।
उत्तर-
पंजाब में छोटे पैमाने के उद्योगों के विकास के कारण तथा महत्त्व को निम्नलिखित प्रकार से स्पष्ट किया जा सकता है –

  1. खनिज पदार्थों की कमी (Lack of Minerals)-पंजाब में खनिज पदार्थ नहीं पाए जाते परिणामस्वरूप बड़े पैमाने के उद्योग विकसित नहीं हो सके। इसलिए छोटे पैमाने के उद्योगों को विकसित किया गया है।
  2. बड़े उद्योगों की कमी (Lack of Large Scale Industries)-पंजाब में बड़े पैमाने के उद्योग बहुत कम हैं। उद्यमी पंजाब में उद्योग स्थापित नहीं करना चाहते क्योंकि यह सीमावर्ती राज्य है। इसलिए बड़े उद्योगों की कमी को छोटे उद्योगों द्वारा पूर्ण किया गया है।
  3. परिश्रमी लोग (Hardworking People)-पंजाब के श्रमिक मेहनती तथा कुशल हैं। इन्होंने छोटे-छोटे उद्योग स्थापित किए हैं जिससे श्रमिकों का जीवन स्तर ऊँचा हो रहा है।
  4. वित्त की कमी (Lack of Finance)-पंजाब में व्यापारिक बैंक तथा वित्तीय संस्थाओं द्वारा वित्त की सहूलतें कम प्रदान की गई हैं जबकि अन्य राज्यों में अधिक सहूलतें प्रदान की जाती हैं। वित्त की कमी के कारण बड़े पैमाने के उद्योग विकसित नहीं हो सके। इसलिए छोटे उद्योगों का महत्त्व बढ़ गया है।
  5. पंजाब सरकार की नीति (Policy of the Punjab Government)-पंजाब सरकार की औद्योगिक नीति में छोटे पैमाने के उद्योगों की तरफ विशेष ध्यान दिया गया है। इसलिए पंजाब में छोटे पैमाने के उद्योग अधिक विकसित हो गए हैं।

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प्रश्न 3.
पंजाब के छोटे उद्योगों की समस्याओं का वर्णन करें।
अथवा
पंजाब में छोटे उद्योगों के मंद विकास के क्या कारण हैं ?
उत्तर-
पंजाब में छोटे उद्योगों की मुख्य समस्याएं निम्नलिखित हैं-

  1. वित्त की समस्या (Problem of Finance)-पंजाब में छोटे पैमाने के उद्योगों को उचित मात्रा में वित्त प्राप्त नहीं होता। वित्त की कमी के कारण छोटे उद्योगों की विकास की गति मंद है।
  2. उत्पादन के पुराने ढंग (Old Methods of Production)-पंजाब के उद्योगों में पुराने ढंग से उत्पादन किया जाता है। इसलिए उत्पादन कम होता है तथा लागत अधिक आती है।
  3. कच्चे माल की समस्या (Problem of Raw Material)-पंजाब में उद्योगों के लिए कच्चा माल अन्य प्रान्तों से मंगवाना पड़ता है। इससे उत्पादन लागत बढ़ जाती है तथा उत्पादन कम होता है।
  4. बिक्री की समस्याएं (Problems of Marketing)-पंजाब के छोटे उद्योगों को अपना तैयार माल बेचने की समस्या का सामना करना पड़ता है। इन उद्योगों को बड़े उद्योगों द्वारा तैयार माल से मुकाबला करना पड़ता है क्योंकि बड़े पैमाने पर तैयार माल सस्ता तथा बढ़िया होता है। इसलिए छोटे उद्योगों की बिक्री के समय कठिनाई होती है।
  5. शक्ति की समस्या (Problem of Power)-पंजाब सरकार उद्योगों से कृषि को प्राथमिकता देती है। इसलिए समय-समय पर बिजली बंद (Power cut) का सामना करना पड़ता है।

प्रश्न 4.
पंजाब में प्रमुख छोटे पैमाने के उद्योगों का वर्णन करें।
उत्तर-
पंजाब के प्रमुख छोटे पैमाने के उद्योग निम्नलिखित हैं-
1. हौज़री उद्योग (Hosiery Industry)-पंजाब का हौजरी उद्योग लुधियाना में केन्द्रित है। यह उद्योग न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी मशहूर है। 2015-16 में इस उद्योग में 78 हज़ार लोग कार्य करते थे तथा ₹ 3711 करोड़ का माल बनाया जाता था।

2. साइकिल उद्योग (Cycle Industry)-पंजाब में साइकिल उद्योग छोटे तथा बड़े दोनों स्तरों पर कार्य करता है। इस उद्योग में साइकिल तथा इसके पुर्जे बनाए जाते हैं। यह उद्योग लुधियाना, जालन्धर तथा मलेरकोटला में स्थित है। वर्ष 2015-16 में, इसमें 78.4 हज़ार लोगों को रोजगार प्राप्त है। वार्षिक ₹ 12966 करोड़ का माल तैयार किया जाता है।

3. सिलाई मशीन उद्योग (Sewing Machine Industry)-सिलाई मशीन उद्योग पंजाब में लुधियाना, सरहिन्द, बटाला तथा जालन्धर में है। 2015-16 में सिलाई मशीनों के लगभग 57 कारखाने थे। जिनमें 13464 मजदूरों को रोज़गार प्राप्त होता था। इस उद्योग में ₹ 1254 करोड़ का वार्षिक माल तैयार होता था।

4. खेलों का सामान बनाने का उद्योग (Sports Goods Industries)-पंजाब में खेलों का सामान बनाने का उद्योग जालन्धर में है। पंजाब में बनाया गया खेलों का सामान न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी भेजा जाता है। इस उद्योग में 4561 श्रमिकों को रोजगार प्राप्त है। इसमें वार्षिक ₹ 267.57 लाख करोड़ का सामान बनाया जाता है।

प्रश्न 5.
पंजाब में बड़े तथा मध्यम उद्योगों की मंद गति के क्या कारण हैं ?
उत्तर-
पंजाब में बड़े तथा मध्यम उद्योगों की धीमी गति के कारण निम्नलिखित हैं-
1. खनिज पदार्थों की कमी (Lack of Mineral Resources)-पंजाब में खनिज पदार्थ बिलकुल नहीं मिलते इसलिए मध्यम तथा बड़े पैमाने के उद्योगों ने काफ़ी मात्रा में कच्चे माल की आवश्यकता पड़ती है। पंजाब में खनिज पदार्थ न होने के कारण इनको अन्य राज्यों से मंगवाना पड़ता है। इस कारण बड़े तथा मध्यम पैमाने के उद्योगों का विकास नहीं हुआ।

2. सीमावर्ती राज्य (Border State)-पंजाब में मध्यम तथा बड़े पैमाने की मंद प्रगति का सबसे बड़ा कारण पंजाब का सीमावर्ती राज्य होना है। पंजाब की सीमाएं पाकिस्तान से मिलती हैं। पाकिस्तान से भारत का हमेशा झगड़ा रहता है। अब तक दो युद्ध हो चुके हैं। ऐसी स्थिति में उद्यमी इस क्षेत्र में उद्योग स्थापित नहीं करना चाहते।

3. विद्युत् की कमी (Lack of Power)-विद्युत् औद्योगिक विकास के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण है। पंजाब में विद्युत् का प्रयोग कृषि में अधिक होता है। किन्तु बड़े उद्योगों के लिए काफ़ी मात्रा में विद्युत् की आवश्यकता होती है। विद्युत् की कमी के कारण बड़े तथा मध्यम उद्योगों की गति मंद है।

4. केन्द्र सरकार का कम योगदान (Less Investment by Central Government)-पंजाब में केन्द्रीय सरकार द्वारा बहुत कम निवेश किया गया है। पंजाब में केन्द्र सरकार का कुल निवेश 2.5% है। परन्तु केन्द्र सरकार ने 75% बिहार में, 12% कर्नाटक में निवेश किया है। इस कारण भी उद्योगों का विकास नहीं हो सका।

IV. दीर्य उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
पंजाब के छोटे, मध्य तथा बड़े स्तर के उद्योगों की प्रकृति तथा ढांचे का वर्णन करें। (Explain the nature and structure and small, medium and large scale industries of Punjab.)
अथवा
पंजाब के प्रमुख छोटे आकार के उद्योगों की व्याख्या करें। (Explain the main Small Scale Industries of Punjab.)
उत्तर-
पंजाब का औद्योगिक ढांचा (Structure of Industries in Punjab)-
पंजाब में औद्योगिक ढांचे को दो भागों में विभाजित करके स्पष्ट किया जा सकता है –
A. छोटे पैमाने के उद्योग (Small Scale Industries)
B. मध्य तथा बड़े पैमाने के उद्योग (Medium & Large Scale Industries)

A. छोटे पैमाने के उद्योग (Small Scale Industries)-वर्ष 1997 के पश्चात् छोटे पैमाने के उद्योगों में उन उद्योगों को शामिल किया जाता है जिनमें ₹ 3 करोड़ तक का निवेश किया होता है। इससे पूर्व स्थिर पूंजी के निवेश की सीमा केवल ₹ 60 लाख थी। पंजाब में छोटे पैमाने के उद्योगों का विकास कार्यशील इकाइयां अचल पूंजी उत्पादन-
PSEB 12th Class Economics Solutions Chapter 34 1966 से पंजाब में औद्योगिक विकास 1
सूची पत्र से ज्ञात होता है कि 1978-79 में छोटे पैमाने के उद्योगों की संख्या 0.42 लाख थी जिनमें ₹ 271 करोड़ की अचल पूंजी लगी हुई थी। इन उद्योगों ₹ 751 करोड़ का उत्पादन किया जाता था तथा लगभग 2.50 लाख श्रमिक काम पर लगे हुए थे। वर्ष 2018-19 में छोटे पैमाने के उद्योगों की इकाइयों की संख्या बढ़कर 1.72 लाख हो गई है। इन उद्योगों में ₹ 86324 करोड़ की अचल पूंजी लगी हुई है जिनमें ₹ 201590 करोड़ का उत्पादन किया जाता है। यह उद्योग 16.21 लाख श्रमिकों को रोजगार प्रदान करते हैं।

पंजाब के मुख्य छोटे उद्योग
(Main Small Scale Industries of Punjab)
पंजाब के मुख्य छोटे पैमाने के उद्योग निम्नलिखित हैं-
1. हौज़री उद्योग (Hosiery Industry)-पंजाब का हौज़री उद्योग लुधियाना में केन्द्रित है। यह उद्योग न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी मशहूर है। 2018-19 इस उद्योग द्वारा ₹ 3711 करोड़ वार्षिक मूल्य का माल उत्पादित किया जाता है। इसमें 82 हजार लोगों को रोजगार प्राप्त होता है।

2. साइकिल उद्योग (Cycle Industry)-पंजाब में साइकिल उद्योग छोटे स्तर तथा बड़े स्तर दोनों पर ही कार्य कर रहा है। साइकिल तथा साइकिल के पुर्जे बनाने का उद्योग लुधियाना, जालन्धर, राजपुरा तथा मलेरकोटला में स्थित है। 2018-19 में ₹ 13 हज़ार करोड़ मूल्य के साइकिल तथा साइकिल के पुजों का उत्पादन किया गया। इसमें 88.5 हज़ार लोगों को रोजगार प्राप्त होता है।

3. सिलाई मशीन उद्योग (Sewing Machine Industry)-सिलाई मशीन बनाने का उद्योग लुधियाना, सरहिन्द, बटाला तथा जालन्धर में स्थित है। 2015-16 पंजाब में सिलाई मशीनों के लगभग 57 कारखाने हैं। इस उद्योग में ₹ 1356 करोड़ का माल हर वर्ष तैयार होता है तथा लगभग 13464 मजदूरों को रोजगार प्राप्त होता है।

4. खेलों का सामान बनाने का उद्योग (Sports Goods Industry)-खेलों का सामान बनाने का उद्योग जालन्धर में केन्द्रित है। पंजाब में तैयार किया खेलों का सामान न केवल भारत बल्कि विदेशों में भी भेजा जाता है। 2018-19 में इस उद्योग की 529 इकाइयां लगी हुई हैं जिनमें 9561 मजदूरों को रोजगार प्राप्त है। वार्षिक ₹ 276.57 करोड़ का माल तैयार किया जाता है।

5. मोटर गाड़ियों के पुर्जे बनाने का उद्योग (Automobile Industry)-पंजाब में यह उद्योग लुधियाना, जालन्धर, पटियाला तथा कपूरथला में स्थित है। इस उद्योग में मोटर गाड़ियों के पुर्जे तैयार किए जाते हैं। 2019-20 इस उद्योग में ₹ 5022 लाख का माल प्रत्येक वर्ष तैयार किया जाता है। इसमें 52857 श्रमिक कार्य करते हैं।

PSEB 12th Class Economics Solutions Chapter 34 1966 से पंजाब में औद्योगिक विकास

पंजाब में मध्यम तथा बड़े स्तर के उद्योग (Medium & Large Scale Industries of Punjab)-
जिन उद्योगों में ₹ 10 करोड़ से कम पूँजी लगी होती है उसको मध्य आकार का उद्योग कहा जाता है और जिसमें ₹ 10 करोड़ से अधिक अचल पूंजी लगी होती है, उनको बड़े पैमाने के उद्योग कहा जाता है। पंजाब में मध्यम तथा बड़े पैमाने के उद्योग अधिक विकसित नहीं हो सके। इन उद्योगों की स्थिति का विवरण इस प्रकार है|
पंजाब में मध्यम तथा बड़े पैमाने के उद्योग
PSEB 12th Class Economics Solutions Chapter 34 1966 से पंजाब में औद्योगिक विकास 2
सूची-पत्र से स्पष्ट होता है कि 1978-79 में पंजाब में मध्यम तथा बड़े आकार के उद्योगों की 188 इकाइयां थीं जिनमें ₹ 379 करोड़ स्की अचल पूंजी लगी हुई थी। उस वर्ष ₹ 711 करोड़ का उत्पादन किया गया था तथा 91 हज़ार लोग रोज़गार पर लगे हुए थे। वर्ष 2017-18 में इन उद्योगों की संख्या बढ़ कर 898 हो गई है जिनमें ₹ 69591 करोड़ की अचल पूंजी लगी हुई है। इन उद्योगों में ₹ 104973 करोड़ का उत्पादन किया गया। इनमें 2.84 लाख श्रमिक कार्य पर लगे हुए थे।

पंजाब के मुख्य मध्यम आकार तथा बड़े पैमाने के उद्योग (Medium & Large Scale Industries of Punjab)
पंजाब के मुख्य मध्यम तथा बड़े पैमाने के उद्योग निम्नलिखित हैं-
1. चीनी के कारखाने (Sugar Industry)-पंजाब में चीनी के 17 बड़े कारखाने हैं। यह उद्योग जालन्धर, कपूरथला, संगरूर, फरीदकोट, गुरदासपुर तथा रोपड़ जिलों में स्थित हैं। इस उद्योग में 2018-19 में ₹ 19823 करोड़ चीनी का उत्पादन हुआ। इसमें 5487 व्यक्तियों को रोजगार प्राप्त था।

2. सूती कपड़े के कारखाने (Cotton Textile Industry)-पंजाब में 2018-19 धागा बनाने के 140 कारखाने हैं। एक कारखाने में धागे से कपड़ा भी बनाया जाता है। यह कारखाने फगवाड़ा, अमृतसर, बरनाला, मलेरकोटला तथा अबोहर में स्थित हैं। इस उद्योग में 16849 श्रमिक कार्य करते हैं। 166.27 मिलियन मीटर कपड़ा वार्षिक तैयार किया जाता है।

3. स्वराज व्हीकलज लिमिटेड (Swaraj Vehicles Limited)-यह कारखाना जनतक क्षेत्र में वर्ष 1985 में ₹ 60 करोड़ की लागत से स्थापित किया गया था। इसमें माल की ढुलाई के लिए टैंपू बनाए जाते हैं। यह कारखाना 9 हज़ार मज़दूरों को रोजगार प्रदान करता है। इसकी स्थापना मोहाली में की गई है।

4. गर्म कपड़े के कारखाने (Wollen Cloth Industry)- पंजाब में गर्म कपड़ा बनाने के कारखाने धारीवाल, और छहरटा अमृतसर में हैं। इस उद्योग में 1 लाख 8 हज़ार श्रमिकों को रोजगार प्राप्त है। इसमें वार्षिक ₹ 354 करोड़ का माल तैयार किया जाता है।

प्रश्न 2.
पंजाब में मध्यम तथा बड़े पैमाने के उद्योगों के विकास को स्पष्ट करें। पंजाब में मध्यम तथा बड़े पैमाने के उद्योगों की मंद प्रगति के क्या कारण हैं ?
(Explain the development medium and Large Scale Industries in Punjab. What are the cause of slow progress of medium and Large Scale Industries ?)
उत्तर-
पंजाब में मध्यम तथा बड़े आकार के उद्योग अधिक विकसित नहीं हो सके। इन उद्योगों के विकास का अनुमान निम्नलिखित सूची-पत्र द्वारा लगाया जा सकता है|
पंजाब में मध्यम तथा बड़े पैमाने के उद्योग-

वर्ष कार्यशील इकाइयां(करोड़ ₹) अचल पूंजी (लाख ₹) उत्पादन रोज़गार (लाख में)
1978-79 188 379 711 0.91
2018-19 898 69591 104973 2.84

2.84 सूची-पत्र से ज्ञात होता है कि वर्ष 2018-19 में मध्यम तथा बड़े पैमाने के उद्योगों की संख्या 469 है। इन उद्योगों में ₹ 69591 करोड़ की अचल पूंजी लगी हुई है। इनमें उत्पादन ₹ 104973 लाख का किया गया। यह उद्योग 2.84 लाख लोगों को रोजगार प्रदान करता है परन्तु अन्य औद्योगिक राज्यों जैसे कि महाराष्ट्र, कर्नाटक इत्यादि की तरह पंजाब में इन उद्योगों की प्रगति बहुत कम रही है। मध्यम तथा बड़े उद्योगों की कम प्रगति के मुख्य कारण निम्नलिखित अनुसार हैं-

पंजाब में मध्यम तथा बडे पैमाने के उद्योगों की मंद प्रगति के कारण (Causes of Slow Progress of Medium & Large Scale Industries in Punjab)-
1. खनिज पदार्थों की कमी (Lack of Mineral Resources)-पंजाब में खनिज पदार्थ बिलकुल नहीं मिलते। मध्यम तथा बड़े पैमाने के उद्योगों को काफ़ी मात्रा में कच्चे माल की आवश्यकता होती है। पंजाब में खनिज पदार्थों की कमी के कारण इनको अन्य राज्यों से मंगवाना पड़ता है। इस कारण बड़े तथा मध्यम पैमाने के उद्योगों का विकास नहीं हुआ।

2. सीमावर्ती राज्य (Border State)-पंजाब में मध्यम तथा बड़े आकार के उद्योगों की मंद प्रगति का सबसे बड़ा कारण पंजाब का सीमावर्ती राज्य होना है। पंजाब की सीमाएं पाकिस्तान से मिलती हैं। पाकिस्तान का भारत से हमेशा झगड़ा रहता है। अब तक दो युद्ध हो चुके हैं। ऐसी स्थिति में उद्यमी इस क्षेत्र में उद्योग स्थापित नहीं करना चाहते।

3. विद्युत् की कमी (Lack of Power)-विद्युत् औद्योगिक विकास के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है। पंजाब में विद्युत् का प्रयोग कृषि क्षेत्र में अधिक होता है। बड़े उद्योगों के लिए अधिक मात्रा में विद्युत् की आवश्यकता होती है किन्तु विद्युत् की कमी के कारण मध्यम तथा बड़े स्तर के उद्योगों की प्रगति धीमी है।

PSEB 12th Class Economics Solutions Chapter 34 1966 से पंजाब में औद्योगिक विकास

4. केन्द्रीय सरकार का कम योगदान (Less Investment by Central Government)-पंजाब में केन्द्रीय सरकार द्वारा बहुत कम निवेश किया गया है। पंजाब में केन्द्र सरकार का कुल निवेश 2.5% है। परन्तु केन्द्र सरकार ने 15% निवेश बिहार में, 12% निवेश कर्नाटक में लगाया है। इस कारण भी पंजाब में उद्योगों का विकास नहीं हो सका।

5. कृषि प्रधान अर्थ-व्यवस्था (Agricultural Economy)-पंजाब कृषि प्रधान राज्य है। राज्य सरकार ने भी पंचवर्षीय योजनाओं में कृषि के विकास की तरफ विशेष ध्यान दिया है। उद्योगों के विकास को आंखों से ओझल किया गया है। कृषि का महत्त्व अधिक होने के कारण लघु पैमाने के उद्योगों को प्राथमिकता दी गई ताकि रोज़गार के अधिक अवसर उपलब्ध हो सकें।

6. पूंजी की कमी (Lack of Capital)-बड़े पैमाने के उद्योगों के लिए अधिक पूंजी की आवश्यकता होती है। पंजाब में पूंजी की कमी है क्योंकि सरकार की आंतरिक सुरक्षा पर बहुत व्यय करना पड़ता है। इसलिए निवेश करने के लिए पूंजी की कमी है। निजी क्षेत्र के उद्योग विकसित नहीं हुए क्योंकि ब्याज की दर बहुत अधिक है। इसलिए मध्यम तथा बड़े पैमाने के उद्योगों में निवेश कम हुआ है।

7. औद्योगिक लड़ाई-झगड़े (Industrial Disputes)-पंजाब में अगर स्वतन्त्रता के पश्चात् औद्योगिक विकास में वृद्धि हुई है तो इससे औद्योगिक लड़ाई-झगड़े भी बढ़ गए हैं। तालाबंदी, हड़ताल आम नज़र आती है। इस कारण उत्पादन लागत बढ़ जाती है।

प्रश्न 3.
पंजाब सरकार की आधुनिक उद्योग नीति का वर्णन करें। (Explain the new Industrial Policy of Government of Punjab.)
उत्तर-
पंजाब सरकार की नई औद्योगिक नीति (New Industrial Policy of Government of Punjab)-
पंजाब में औद्योगिक विकास के लिए औद्योगिक नीति की घोषणा 16 फरवरी, 1972 को की गई। इसके पश्चात् सरकार ने 1979, 1987, 1989, 1991 में औद्योगिक नीति में परिवर्तन किए। पंजाब सरकार की नई औद्योगिक नीति की घोषणा 14 मार्च, 1996 में की गई। नई औद्योगिक नीति की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं –
1. मुख्य उद्देश्य (Main Objectives)-

  • औद्योगिक विकास की दर में वृद्धि करके 12% की जाएगी।
  • राज्य के घरेलू उत्पादन में उद्योगों का भाग बढ़ाकर 25% किया जाएगा।
  • उद्योगों के विकास के लिए आवश्यक ढांचा अर्थात् सड़कें, विद्युत्, वित्त, श्रमिक, कच्चे माल की पूर्ति के लिए सहूलतें दी जाएंगी।
  • ग्रामीण बेरोज़गारों को उद्योगों तथा सम्बन्धित उद्यमों में रोजगार की सहूलतें दी जाएंगी।
  • पंजाब में पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया जाएगा।
  • पंजाब के छोटे, मध्यम तथा बड़े स्तर के उद्योगों के लिए फोकल प्वाइंट्स स्थापित किए जाएंगे।
  • निर्यात को उत्साहित करने के लिए नई मण्डियाँ ढूंढ़ी जाएंगी।
  • आर्थिक तौर पर पिछड़े वर्ग के लोगों की आर्थिक स्थिति में सुधार किया जाएगा।
  • नए उद्योग स्थापित किए जाएंगे तथा पुराने स्थापित उद्योगों का नवीनीकरण तथा आधुनिकीकरण किया जाएगा।
  • छोटे स्तर के उद्योगों को विकसित करके रोजगार के अधिक अवसर प्रदान किए जाएंगे।

2. विकास क्षेत्र (Growth Areas)-पंजाब के भिन्न-भिन्न जिलों को औद्योगिक विकास के पक्ष से चार वर्गों में विभाजित किया गया-

  1. वर्ग A (Category A)-इस वर्ग में शामिल किए गए क्षेत्रों को सबसे अधिक रियायतें देने की घोषणा की गई। इसमें अमृतसर, गुरदासपुर, फिरोजपुर, फरीदकोट तथा मानसा के ज़िले शामिल किए गए हैं।
  2. वर्ग B (Category B)-इस वर्ग में जिन क्षेत्रों में शामिल किया गया है उनको वर्ग A के क्षेत्रों से कम रियायतें दी जाएंगी। इस वर्ग में राज्य के अन्य जिलों को शामिल किया गया है।
  3. वर्ग C (Category C)-इस वर्ग में लुधियाना तथा जालन्धर के फोकल प्वाइंट्स छोड़ कर पंजाब के सब फोकल प्वाइंट्स को शामिल किया गया है। फोकल प्वाइंट्स पर अधिक-से-अधिक उद्योग स्थापित करने के प्रयत्न किए जाएंगे।
  4. वर्ग D (Category D) इस वर्ग में शामिल उद्योगों को कोई प्रोत्साहन तथा अनुदान नहीं दिया जाएगा। इस वर्ग में जालन्धर तथा लुधियाना की निगम सीमाओं के फोकल प्वाइंट्स तथा उनके ब्लाकों को शामिल किया गया है। वर्ग A तथा वर्ग B के क्षेत्रों को बहुत-सी रियायतों की घोषणा की गई है ताकि पिछड़े क्षेत्रों में उद्योगों का विकास हो सके।

3. कृषि आधारित उद्योगों का विकास (Incentives to Agro Based Industries)-पंजाब कृषि प्रधान राज्य है। इसलिए कृषि विकास को बनाए रखने के लिए उन उद्योगों को विकसित किया जाएगा जिनके लिए कच्चा माल कम कीमत पर राज्य में से ही प्राप्त किया जा सकता है। ऐसे उद्योगों को 10 वर्ष के लिए बिक्री कर से मुक्त किया गया है। ऋण पर ब्याज का 5% भाग सरकार द्वारा दिया जाएगा तथा स्थायी पूंजी का 30% भाग आर्थिक सहायता के रूप में दिया जाएगा जो कि अधिकतम 50 लाख रुपए तक हो सकती है।

4. करों में छूट (Exemption From Taxes)-नई औद्योगिक नीति में औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करने के लिए करों में छूट देने का कार्यक्रम बनाया गया है। वर्ग A के क्षेत्रों में जो नए उद्योग स्थापित किए जाते हैं उनको बिक्री कर (Sales Tax) से 10 वर्ष के लिए तथा वर्ग B के क्षेत्रों में नए स्थापित उद्योगों के लिए बिक्री कर से 7 वर्ष के लिए छूट दी जाएगी।

5. भूमि के लिए आर्थिक सहायता (Land Subsidy)-नई औद्योगिक नीति में भूमि के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की गई है। कोई भी उद्यमी किसी फोकल प्वाइंट पर भूमि की खरीद उद्योग स्थापित करने के लिए करता है तो भूमि की कीमत का 33% भाग आर्थिक सहायता के रूप में दिया जाएगा। जालन्धर के स्पोर्टस काम्पलैक्स में भूमि के लिए आर्थिक सहायता 25% दी जाएगी।

6. छोटे उद्योगों का आधुनिकीकरण (Modernisation of Small Scale Industries)-पंजाब में छोटे पैमाने के उद्योगों को विकसित करने के लिए एक विशेष फंड की स्थापना की गई है। जो उद्यमी पुराने स्थापित किए यूनिटों का आधुनिकीकरण करना चाहते हैं उनको विशेष आर्थिक सहायता दी जाएगी।

7. मध्यम तथा बड़े उद्योगों को प्रोत्साहन (Incentives to medium & Large Scale Industries)-नई औद्योगिक नीति में यह घोषणा भी की गई कि वर्ग A के क्षेत्रों में जो उद्यमी निवेश करते हैं उनके द्वारा किए गए बड़े स्तर के उद्योगों पर अचल पूंजी पर आर्थिक सहायता दी जाएगी जहां तक A तथा B वर्ग में स्थापित उद्योगों का सम्बन्ध है अगर वहां पुराने उद्योगों का विस्तार करना चाहते हैं तो मध्यम तथा बड़े उद्योगों के विस्तार पर आर्थिक सहायता दी जाएगी।

8. पर्यटन उद्योग को प्रोत्साहन (Incentive to Tourism)-नई औद्योगिक नीति के अनुसार पंजाब में पर्यटन उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए उद्योग का दर्जा दिया गया है। पर्यटन उद्योग को वह सब सहूलतें दी जाएंगी जो अन्य साधारण उद्योगों को दी जाती हैं।

9. इलेक्ट्रोनिक वस्तुओं की इकाइयों को विशेष छूट (Special Incentive to Electronics Units)-पंजाब में जो इलेक्ट्रोनिक वस्तुओं का उत्पादन करने वाली इकाइयों को लगाया जाएगा उन उद्योगों को पूंजी निवेश के सम्बन्ध में आर्थिक सहायता तथा बिक्री कर की छूट दी जाएगी। इन उद्योगों को चुंगी करों में भी 6 वर्ष के लिए छूट देने के लिए कहा गया है।

10. ऊर्जा सुविधाएं (Power Facilities)-पंजाब में जो ओद्योगिक इकाइयां लगाई जाएंगी उनको बिजली कनेक्शन में प्राथमिकता दी जाएगी। ऐसी इकाइयों को पांच साल के लिए बिजली कर से मुक्त रखा जाएगा तथा जेनरेटिंग सैंट लगाने पर 25% की आर्थिक सहायता दी जाएगी।

PSEB 12th Class Economics Solutions Chapter 34 1966 से पंजाब में औद्योगिक विकास

11. भूमि के लिए आर्थिक सहायता (Land Subsidy)-पंजाब में जो नई औद्योगिक इकाइयां लगाई जाएंगी उनको भूमि की खरीद में आर्थिक सहायता दी जाएगी। यदि यह इकाइयां फोकल प्वाइंट्स पर लगाई जाती हैं तो भूमि की खरीद में 33 प्रतिशत आर्थिक सहायता दी जाएगी।

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