PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 7 नवयुवकों के प्रति

Punjab State Board PSEB 8th Class Hindi Book Solutions Chapter 7 नवयुवकों के प्रति Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 8 Hindi Chapter 7 नवयुवकों के प्रति (2nd Language)

Hindi Guide for Class 8 PSEB नवयुवकों के प्रति Textbook Questions and Answers

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 7 नवयुवकों के प्रति

नवयुवकों के प्रति अभ्यास

1. नीचे गुरुमुखी और देवनागरी लिपि में दिये गये शब्दों को पढ़ें और हिंदी शब्दों को लिखने का अभ्यास करें:

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उत्तर :
विद्यार्थी स्वयं अभ्यास करें।

2. नीचे एक ही अर्थ के लिए पंजाबी और हिंदी भाषा में शब्द दिये गये हैं। इन्हें ध्यान से पढ़ें और हिंदी शब्दों को लिखें :

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उत्तर :
विद्यार्थी स्वयं अभ्यास करें।

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3. शब्दार्थ :

  • भक्तवर = भक्तों में श्रेष्ठ
  • देशोद्धार = देश का उद्धार करना
  • योग = सहयोग
  • कौमार = कुमार/यौवन की अवस्था
  • निम्नोक्ति = नीचे लिखी उक्ति या कथन
  • धर्माचरण = धर्म के अनुसार आचरण/व्यवहार करना
  • धरो = धारण करना

उत्तर :
सप्रसंग व्याख्या के साथ दे दिए गए हैं।

4. इन प्रश्नों के उत्तर एक या दो वाक्यों में लिखें :

(क) इस कविता के कवि का नाम लिखें।
उत्तर :
इस कविता के कवि का नाम मैथिलीशरण गुप्त है।

(ख) यह कविता किन्हें संबोधित की गई है?
उत्तर :
यह कविता नवयुवकों को सम्बोधित की गई है।

(ग) ‘जो कुछ पढ़ो तुम कार्य में भी साथ ही परिणत करो।’ इस काव्य-पंक्ति का अर्थ लिखें।
उत्तर :
इस काव्य पंक्ति का अर्थ है कि हे नवयुवको ! तुम अपने जीवन में जो कुछ भी शिक्षा एवं ज्ञान ग्रहण करो, उसे अपने कार्य में तथा जीवन में भी अपनाओ।।

(घ) नवयुवकों के सम्मुख कौन-से दो पथ हैं ? उन्हें किस पथ का चुनाव करना चाहिए?
उत्तर :
नवयुवकों के सम्मुख असंयम और संयम दो पथ हैं। उन्हें संयम पथ का चुनाव करना चाहिए।

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(ङ) इन काव्य-पंक्तियों की सप्रसंग व्याख्या करें : दो पथ असंयम ……………………. संभलोगे कभी।
उत्तर :
उत्तर के लिए सप्रसंग व्याख्या देखिए।

5. इन शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखें :

  1. मनुज = ______________, ______________
  2. ज्योति = ______________, ______________
  3. संसार = ______________, ______________
  4. पथ = ______________, ______________

उत्तर :

  1. मनुज = मनुष्य, मानव
  2. ज्योति = प्रकाश, उजाला
  3. संसार = जग, दुनिया
  4. पथ = रास्ता, मार्ग

6. विपरीत शब्द बनायें :

  1. अ + संयम = असंयम
  2. अ + शुभ =
  3. अ + धर्म =
  4. अ + विश्वास =

उत्तर :

  1. अ + संयम = असंयम
  2. अ + शुभ = अशुभ
  3. अ + धर्म = अधर्म
  4. अ + विश्वास = अविश्वास

7. रचनात्मक अभिव्यक्ति :

(क) मौखिक अभिव्यक्ति – भक्त प्रहलाद की जीवन गाथा अपने दादा/दादी से सुनें व कक्षा में भक्त प्रहलाद के गुणों को सुनायें।

(क) लिखित अभिव्यक्ति
(i) असंयम और संयम किसे कहते हैं ? एक दो उदाहरण देकर समझायें।
(ii) देश के विकास में आप क्या-क्या योगदान दे सकते हो?
उत्तर :
छात्र अध्यापक की सहायता से करें।

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परीक्षोपयोगी अन्य प्रश्नोतर

प्रश्न 1.
कवि ने नवयुवकों को क्या प्रेरणा दी है?
उत्तर :
कवि ने नवयुवकों को देश के उद्धार एवं विकास में योगदान देने तथा उन्हें शुभ कर्म करने की प्रेरणा दी है। उन्हें भागवत धर्म का आचरण करने को कहा है।

प्रश्न 2.
कवि ने नवयुवकों को क्या शिक्षा दी है?
उत्तर :
कवि का विचार है कि नवयुवकों को देश के उद्धार में योगदान देना चाहिए। ज्ञान और शिक्षा को कार्य में अपनाना चाहिए। भागवत धर्म का आचरण करना चाहिए। मनुष्य जन्म कठिनाई से मिलता है अत: इस जीवन में संयम पथ को अपनाना चाहिए।

प्रश्न 3.
कवि किन्हें सम्भलने को कह रहा है?
उत्तर :
कवि नवयुवकों को सम्भलने को कह रहा है।

प्रश्न 4.
नवयुवकों को किसका आचरण करना चाहिए?
उत्तर :
नवयुवकों को भागवत धर्म का आचरण करना चाहिए।

बहुविकल्पीय प्रश्न

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर सही विकल्प चुनकर लिखें :

प्रश्न 1.
कवि ने किसे संबोधित किया है?
(क) युवाओं को
(ख) नेताओं को
(ग) बालकों को
(घ) अधिकारियों को।
उत्तर :
(क) युवाओं को

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प्रश्न 2.
किनसे मानव जीवन की ज्योति जगमगाती है?
(क) युवाओं से
(ख) बालकों से
(ग) प्रौढ़ों से
(घ) वृद्धों से।
उत्तर :
(क) युवाओं से

प्रश्न 3.
कवि ने किस भक्तवर का कथन प्रस्तुत किया है?
(क) ध्रुव
(ख) प्रहलाद
(ग) नारद
(घ) नरसी।
उत्तर :
(ख) प्रहलाद

प्रश्न 4.
भागवत धर्माचरण किस अवस्था में करना चाहिए?
(क) बाल
(ख) किशोर
(ग) कौमार्य
(घ) वृद्धा।
उत्तर :
(ग) कौमार्य

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प्रश्न 5.
कौन – सा पथ अशुभ होता है?
(क) संयम का
(ख) धर्म का
(ग) असंयम का
(घ) सत्य का।
उत्तर :
(ग) असंयम का

प्रश्न 6.
मानव मन किस पथ की ओर आकर्षित होता है?
(क) धर्म के
(ख) सत्य के
(ग) संयम के
(घ) असंयम के।
उत्तर :
(घ) असंयम के।

नवयुवकों के प्रति Summary in Hindi

नवयुवकों के प्रति कविता का सार

प्रस्तुत कविता ‘मैथिलीशरण गुप्त’ द्वारा रचित है। इसमें कवि ने नवयुवकों को देश के उद्धार में योगदान देने की प्रेरणा दी है। कवि ने नवयुवकों का आह्वान करते हुए कहा है कि हे नवयुवको ! सारे देश की दृष्टि तुम्हारी तरफ लगी हुई है। तुम से ही मानव – जीवन की ज्योति प्रकाशित है। तुम्हारे अतिरिक्त कौन इस देश के उद्धार में योगदान देगा? तुम्ही देश के विकास में अपना योगदान दो।

संसार में जो हो रहा है उसे ध्यानपूर्वक देखो। अपनी पढ़ाई एवं ज्ञान को कार्य में बदलो। तुम भक्त प्रहलाद की इस उक्ति को मन में धारण करो कि संसार में युवावस्था में ही भागवत धर्म का आचरण करना चाहिए। मनुष्य – जीवन बहुत कठिन है। संयम और असंयम दो पथ हैं एक शुभ और दूसरा अशुभ है। किन्तु इस अवस्था में मन सदा अशुभ कर्म की ओर ही झुकता है। इसलिए तुम्हें अभी संभल जाना चाहिए।

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नवयुवकों के प्रति सप्रसंग व्याख्या

1. हे नवयुवाओ ! देश भर की दृष्टि तुम पर ही लगी,
है मनुज जीवन की तुम्हीं में ज्योति सब से जगमगी।
दोगे न तुम तो कौन देगा योग देशोद्धार में?
देखो, कहाँ क्या हो रहा है आजकल संसार में॥

शब्दार्थ –

  • मनुज = मनुष्य।
  • ज्योति = प्रकाश, उजाला।
  • जगमगी = जगी है।

प्रसंग – यह पद्यांश कवि मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित ‘नवयुवकों के प्रति’ शीर्षक कविता से लिया गया है। इसमें कवि ने नवयुवकों को देश के विकास में योगदान देने की प्रेरणा दी है।

व्याख्या – कवि कहता है कि हे नवयुवको ! आज सारे देश की नज़रें केवल तुम्हारी ओर लगी है। सबका ध्यान तुम्हारी ओर है। तुम से ही मानव जीवन की ज्योति प्रकाशित है। यदि आज तुम भी देश के उद्धार एवं विकास में अपना योगदान नहीं दोगे तो फिर इसमें कौन योगदान देगा अर्थात् हे नवयुवको! तुम इस देश के विकास एवं उद्धार में अपना योगदान दो। तुम यह ध्यानपूर्वक देखो कि आज संसार में क्या हो रहा है।

भावार्थ – नवयुवकों का देश के विकास के लिए प्रेरित किया गया है।

2. जो कुछ पढ़ो तुम कार्य में भी साथ ही परिणत करो,
सब भक्तवर प्रह्लाद की निम्नोक्ति को मन में धरो
“कौमार में ही भागवत धर्माचरण कर लो यहाँ
नर – जन्म दुर्लभ और वह भी अधिक रहता है कहाँ।”

शब्दार्थ

  • परिणत = बदल दो।
  • भक्तवर = श्रेष्ठ भक्त।
  • निम्नोक्ति = नीचे कही गई।
  • धरो = धारण करो।
  • कौमार = कौमार्य, युवावस्था।
  • धर्माचरण = धर्म का आचरण।
  • नर जन्म = मनुष्य जीवन।
  • दुर्लभ = कठिन।

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प्रसंग – प्रस्तुत पद्यांश हिन्दी की पाठ्य पुस्तक में संकलित ‘नवयुवकों के प्रति’ शीर्षक कविता से लिया गया है। इसमें मैथिलीशरण गुप्त ने भक्त श्रेष्ठ प्रह्लाद के सन्देश के द्वारा नवयुवकों को जगाने का प्रयास किया है।

व्याख्या – कवि कहता है कि हे नवयुवको ! तुम अपने जीवन में जो भी पढ़ो, ज्ञान प्राप्त करो उसे कार्य में भी साथ – साथ बदलो। तुम सब अपने मन में श्रेष्ठ भक्त प्रहलाद की उक्ति को धारण करो और अपनी युवावस्था में ही भागवत धर्म का पालन कर लो। मनुष्य जन्म बहुत कठिन है और वह भी बहुत छोटा है।

भावार्थ – मनुष्य जन्म बहुत कठिन है। आप सभी भागवत धर्म का आचरण करो।

3. दो पथ, असंयम और संयम हैं तुम्हें अब सब कहीं।।
पहला अशुभ है, दूसरा शुभ है इसे भूलो नहीं।”
पर मन प्रथम की ओर ही तुम को झुकावेगा अभी,
यदि तुम न सम्भलोगे अभी तो फिर न संभलोगे कभी।

प्रसंग – यह पद्यांश श्री मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित ‘नवयुवकों के प्रति’ नामक कविता से लिया गया है। इसमें कवि ने नवयुवकों को साहसपूर्वक शुभ कर्म करने की प्रेरणा दी है।

व्याख्या – कवि कहता है कि हे नवयुवको ! जीवन में असंयम और संयम दो रास्ते हैं। यह सच है कि इसमें पहला अशुभ है और दूसरा शुभ है। परन्तु मन तुम्हें अशुभ की ओर ही झुकाएगा अर्थात् तुम्हारा मन अशुभ पथ पर चलकर अशुभ कर्म करने की ओर वहीं दौड़ेगा। यदि अभी तुम नहीं संभलोगे तो जीवन में फिर कभी भी सम्भल नहीं पाओगे। अतः तुम्हें जाग जाना चाहिए।

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भावार्थ – नवयुवकों को शुभ कर्म करने की प्रेरणा दी है।

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