PSEB 7th Class Social Science Solutions Chapter 11 मुग़ल साम्राज्य

Punjab State Board PSEB 7th Class Social Science Book Solutions History Chapter 11 मुग़ल साम्राज्य Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 7 Social Science History Chapter 11 मुग़ल साम्राज्य

SST Guide for Class 7 PSEB मुग़ल साम्राज्य Textbook Questions and Answers

(क) निम्न प्रश्नों के उत्तर लिखें

प्रश्न 1.
दौलत खां लोधी तथा राणा सांगा ने बाबर को भारत पर आक्रमण करने का निमन्त्रण क्यों दिया था ?
उत्तर-
दिल्ली के अंतिम सुल्तान इब्राहिम लोधी ने पंजाब के सूबेदार दौलत खां लोधी के साथ बुरा व्यवहार किया था और उसके पुत्र का अपमान किया था। इस कारण दौलत खां लोधी और मेवाड़ का शासक राणा सांगा मिलकर लोधी राज्य का अन्त करना चाहते थे। इसलिए उन्होंने काबुल के शासक बाबर को भारत पर आक्रमण करने के लिए आमन्त्रित किया।

प्रश्न 2.
बाबर की विजयों के विषय में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर-
बाबर मुग़ल साम्राज्य का प्रथम शासक था। वह दौलत खां लोधी और राणा सांगा के बुलाने पर मध्य एशिया से भारत आया था।
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बाबर की विजयें :

  1. 1526 ई० में बाबर ने इब्राहिम लोधी को पानीपत की प्रथम लड़ाई में पराजित करके दिल्ली और आगरा पर अधिकार कर लिया।
  2. बाबर द्वारा ऐसा करने पर राणा सांगा बाबर से नाराज़ हो गया। उसने बाबर के विरुद्ध एक विशाल सेना भेजी। बाबर ने राणा सांगा को 1527 ई० में कन्वाहा की लड़ाई में हरा दिया। इस प्रकार बाबर ने उत्तर भारत पर अधिकार कर लिया।
  3. उसने घाघरा की लड़ाई में अफ़गानों को भी बुरी तरह से हराया।
    इन विजयों के कारण बाबर की भारत में स्थिति काफ़ी मज़बूत हो गई।

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प्रश्न 3.
मनसबदारी प्रणाली से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
‘मनसब’ शब्द का अर्थ पद है। मनसबदारी प्रणाली के अनुसार मुग़ल कर्मचारियों का पद, आय और दरबार में स्थान निश्चित किये जाते थे। मनसबदार देश के सिविल और सैनिक विभागों से सम्बन्ध रखते थे।

मुग़ल बादशाह मीर बख्शी की सिफ़ारिश पर मनसबदारों की योग्यता अनुसार नियुक्ति करता था। मनसबदार निचले पद से उच्च पद तक तरक्की पाता था। परन्तु बादशाह ठीक काम न करने वाले मनसबदार का पद कम भी कर सकता था या उसे पद से हटा सकता था।

अकबर के राज्यकाल में मनसबदारों की 33 श्रेणियां थीं। सबसे छोटे मनसबदार के अधीन 10 सिपाही और सबसे बड़े मनसबदार के अधीन 10,000 सिपाही होते थे।

बादशाह मनसबदारों को किसी भी काम पर लगा सकता था। उनको शासन प्रबन्ध के किसी भी विभाग में या दरबार में उपस्थित रहने के लिए कहा जा सकता था।

मनसबदारों को वेतन उनकी श्रेणी के पद के अनुसार दिया जाता था। वेतन में वृद्धि या कटौती भी की जा सकती थी।

प्रश्न 4.
अकबर की विजयों का वर्णन करो।
उत्तर-
अकबर ने राजगद्दी पर बैठने के शीघ्र बाद दिल्ली और आगरा पर पुनः अधिकार करने का निर्णय लिया। बैरम खां के नेतृत्व में मुग़ल सेना ने दिल्ली की ओर कूच किया। 1556 ई० में उनका अफ़गान सेनापति हेमू के साथ – पानीपत के मैदान में मुकाबला हुआ। अकबर इस लड़ाई में जीत गया और हेमू की मौत हो गई। परिणामस्वरूप अकबर ने दिल्ली और आगरा पर पुनः अधिकार कर लिया।

1560 ई० में अकबर ने बैरम खां को हटाकर शासन की बागडोर स्वयं सम्भाल ली। इसके बाद अकबर की मुख्य विजयों का वर्णन इस प्रकार है :–
(क) उत्तरी भारत की विजय-अकबर ने आरम्भ में अफ़गानिस्तान में स्थित काबुल, कन्धार के क्षेत्र तथा पंजाब से दिल्ली तक का मैदानी प्रदेश जीता। ये विजयें उसने बैरम खां के अधीन प्राप्त की थीं। उसने 1560 ई० में शासन प्रबन्ध अपने हाथों में ले लिया और निम्नलिखित विजयें प्राप्त की –
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  1. राजपूताना की विजय-1562 ई० में अकबर ने राजपूताना पर आक्रमण कर दिया। अम्बर के राजा बिहारी मल ने शीघ्र ही अकबर की अधीनता स्वीकार कर ली तथा अपनी बेटी का विवाह भी अकबर से कर दिया। इसके अतिरिक्त कई अन्य राजपूत शासकों ने भी अकबर की अधीनता स्वीकार कर ली, जैसे-कालिंजर, मारवाड़, जैसलमेर, बीकानेर आदि।
  2. मेवाड़ का संघर्ष- मेवाड़ का शासक महाराणा प्रताप अकबर की अधीनता स्वीकार नहीं करना चाहता था। 1569 ई० में अकबर ने मेवाड़ की राजधानी चित्तौड़ पर अधिकार कर लिया। फिर भी महाराणा प्रताप ने उसकी अधीनता स्वीकार नहीं की। वह अन्त तक मुग़लों से संघर्ष करता रहा।
  3. गुजरात पर विजय-1572-73 ई० में अकबर ने गुजरात पर विजय प्राप्त कर ली।
  4. बिहार-बंगाल की विजय-1574-76 ई० में अकबर ने अफ़गानों को पराजित करके बिहार तथा बंगाल पर भी विजय प्राप्त कर ली।
  5. अन्य विजयें-अकबर ने धीरे-धीरे कश्मीर, सिन्ध, उड़ीसा, बलोचिस्तान तथा कन्धार को भी विजय कर लिया।

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(ख) दक्षिणी भारत की विजयें-उत्तरी भारत में अपनी शक्ति संगठित करके अकबर ने दक्षिणी भारत की ओर ध्यान दिया। फिर दक्षिण में उसने निम्नलिखित विजयें प्राप्त की –

  1. बीजापुर तथा गोलकुण्डा की विजय-1591 ई० में अकबर ने बीजापुर तथा गोलकुण्डा पर विजय प्राप्त कर ली।
  2. खानदेश पर विजय-1601 ई० में खानदेश के सुल्तान अली खाँ ने अकबर की अधीनता स्वीकार कर ली।
  3. अहमद नगर पर अधिकार-1601 ई० में अकबर की सेनाओं ने अहमद नगर की संरक्षिका चाँद बीबी को पराजित कर दिया तथा अहमद नगर पर अधिकार कर लिया।
  4.  बरार पर अधिकार-अकबर ने दक्षिणी भारत के बरार प्रदेश पर भी अधिकार कर लिया।

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प्रश्न 5.
मुग़लों की भूमि लगान प्रणाली से क्या भाव है?
उत्तर-
भूमि का लगान मुग़ल साम्राज्य की आय का मुख्य स्रोत था। अकबर ने लगान मंत्री राजा टोडर मल की सहायता से लगान विभाग में बहुत सुधार किये। इन सुधारों के मुख्य पक्ष निम्नलिखित थे : –
1. भूमि का माप- भूमि का बीघों में माप किया गया।
2. भूमि की दर्जा बन्दी-अकबर ने सारी भूमि को आगे लिखे चार भागों में बांटा :–
(क) पोलज़ भूमि-यह बहुत ही उपजाऊ भूमि थी। इसमें किसी भी समय कोई भी फसल बोई जा सकती थी।
(ख) परौती भूमि-इस भूमि में एक या दो सालों बाद फसल बोई जाती थी।
(ग) छच्छर भूमि-इस भूमि में तीन या चार साल बाद फसल बोई जाती थी।
(घ) बंजर भूमि-इस भूमि में पांच या छः सालों बाद फसल बोई जाती थी।

3. भूमि-कर-पोलज़ और परौती प्रकार की भूमि से सरकार उपज का 1/3 भाग लगान के रूप में लेती थी। छच्छर और बंजर भूमि से उपज का बहुत कम भाग लगान के रूप में लिया जाता था। भूमि कर की मुख्य प्रणालियां निम्नलिखित थीं –

(क) कनकूत प्रणाली-कनकूत प्रणाली के अनुसार सरकार खड़ी फसल का अनुमान लगाकर लगान निश्चित कर देती थी।

(ख) बटाई प्रणाली-इस प्रणाली के अनुसार जब फसल काट ली जाती थी, तो उसे तीन भागों में बांट दिया जाता था। एक भाग सरकार लगान के रूप में ले लेती थी और शेष दो भाग किसानों को मिल जाते थे।

(ग) नसक प्रणाली-इस प्रणाली के अनुसार सारे गांव की फसल का इकट्ठा अनुमान लगाकर लगान निश्चित किया जाता था।
मुग़ल सरकार ने किसानों को अधिक-से-अधिक भूमि को कृषि-योग्य बनाने के लिए कर्जे दिये। सूखा पड़ने पर या उपज नष्ट हो जाने की स्थिति में उनका लगान माफ कर दिया जाता था।

(ख) निम्नलिखित रिक्त स्थान की पूर्ति करो

  1. तुज़क-ए-बाबरी …………………….. की आत्म जीवनी है।
  2. कन्वाहा की लड़ाई बाबर तथा ……………………… के बीच लड़ी गई थी।
  3. अकबर ने हेमू को …. …… में पराजित किया था।
  4. बाबर ने ……………………. लिखा था।
  5. 5. अबुल फ़ज़ल ने ………… …. लिखा था।

उत्तर-

  1. बाबर
  2. राणा सांगा
  3. 1556 ई० में पानीपत के मैदान
  4. बाबरनामा (तुज़क-ए-बाबरी)
  5. अकबरनामा।

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(ग) निम्नलिखित प्रत्येक कथन के आगे ठीक (✓) अथवा गलत (✗) का चिह्न लगाएं

  1. मुग़ल भारत में 1525 ई० में आये।
  2. दौलत खां लोधी तथा राणा सांगा ने बाबर को भारत पर आक्रमण करने के लिए निमन्त्रण दिया।
  3. शेरशाह सूरी एक मुग़ल शासक था।
  4. औरंगजेब के शासनकाल में राजपूतों से अच्छा व्यवहार किया गया।
  5. औरंगज़ेब की दक्षिण नीति ने मुग़ल साम्राज्य को मज़बूत किया।
    उत्तर-1. (✓), 2. (✓), 3. (✗), 4. (✗), 5. (✗)

PSEB 7th Class Social Science Guide मुग़ल साम्राज्य Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
पानीपत की पहली लड़ाई कब और किस-किस के बीच हुई ? इसमें किसकी पराजय हुई ?
उत्तर-
पानीपत की पहली लड़ाई 1526 ई० में बाबर तथा इब्राहिम लोधी के बीच हुई। इसमें इब्राहिम लोधी की पराजय हुई।

प्रश्न 2.
बाबर के आक्रमण के समय भारत की राजनीतिक स्थिति का वर्णन करो।
उत्तर-
बाबर के आक्रमण के समय भारत की राजनीतिक दशा बड़ी शोचनीय थी। देश छोटे-छोटे राज्यों में बंटा हुआ था। ये राज्य सदा एक-दूसरे से ही लड़ते-झगड़ते रहते थे। देश में कोई केन्द्रीय सत्ता नहीं थी।

  1. दिल्ली सल्तनत का वैभव समाप्त हो चुका था। इसका विस्तार अब दिल्ली के आस-पास के प्रदेशों तक ही सीमित था।
  2. मेवाड़ में राणा सांगा काफ़ी शक्तिशाली हो रहा था।
  3. पंजाब में दौलत खां लोधी दिल्ली के सुल्तान से बदला लेने की सोच रहा था।
  4. बंगाल तथा बिहार के शासक भी कम शक्तिशाली नहीं थे।
  5. दक्षिण भारत में भी कई राज्य थे। इनमें से विजय नगर राज्य प्रमुख था। बहमनी राज्य कई भागों में बंट चुका था।

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प्रश्न 3.
हुमायूं को कब और किसने भारत से बाहर निकाला ? उसने पुनः अपना राज्य कब प्राप्त किया ?
उत्तर-
हुमायूं को 1540 ई० में शेरशाह सूरी ने भारत से निकाला। परन्तु 1555 ई० में हुमायूं ने शेरशाह सूरी के उत्तराधिकारी सिकन्दर सूरी को हराकर पुनः दिल्ली पर अधिकार कर लिया। 1556 ई० में हुमायूं की मृत्यु हो गई।

प्रश्न 4.
शेरशाह सूरी ( 1540-1545 ई०) कौन था ? उसने भारत का शासन किस प्रकार प्राप्त किया ?
उत्तर-
शेरशाह सूरी बिहार के जागीरदार हुसैन खां का पुत्र था। उसका असली नाम फरीद खां था। परन्तु एक शेर को मार देने पर उसे शेर खां की उपाधि दी गई। वह बिहार में अफ़गान सरदारों का नेता बन गया और जल्दी ही बिहार का शासक बन गया। उसने मुग़ल सम्राट् हुमायूं को चौसा और कन्नौज में हराया। 1540 ई० में उसने दिल्ली पर अधिकार कर लिया। उसने 1540 ई० से 1545 ई० तक शासन किया। 1545 ई० में उसकी मृत्यु हो गई।

प्रश्न 5.
शेरशाह सूरी के शासन-प्रबन्ध की मुख्य विशेषताएं बताओ।
उत्तर-

  1. शेरशाह सूरी ने अपने राज्य को 66 सरकारों में बांटा हुआ था। सरकारों को आगे परगनों में बांटा गया था। सरकारों के समान परगनों के भी दो प्रमुख अधिकारी होते थे।
  2. शेरशाह सूरी ने वाणिज्य-व्यापार के विकास के लिए हर ढंग अपनाया। उसने रूपा (रुपया) नाम के चांदी के सिक्के चलाए।
  3. शेरशाह सूरी ने देश में बहुत-सी महत्त्वपूर्ण सड़कें बनवाईं। उनमें से शेरशाह सूरी मार्ग (जी० टी० रोड) अति महत्त्वपूर्ण थी। सड़कों के दोनों ओर छायादार वृक्ष लगाए गए। यात्रियों के लिए आराम घर बनाए गये।
  4. वह निर्धनों, विधवाओं, शिक्षण संस्थाओं और विद्वानों को दान देता था।

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प्रश्न 6.
अकबर को राजगद्दी पर कब और किसने बिठाया ?
उत्तर-
अकबर को 1556 ई० में बैरम खां ने राजगद्दी पर बिठाया।

प्रश्न 7.
बैरम खां कौन था ? अकबर ने उसे पद से कब हटाया ?
उत्तर-
बैरम खां अकबर का संरक्षक था। अकबर ने उसे 1560 ई० में पद से हटाया।

प्रश्न 8.
व्याख्या करो कि अकबरनामा तथा आईने-अकबरी इतिहास रचने में किस प्रकार सहायक हैं ?
उत्तर-
अकबरनामा और आइन-ए-अकबरी अबुल फ़ज़ल द्वारा लिखी गई दो प्रसिद्ध रचनाएं हैं। इनसे हमें अकबर के दरबार, विजयों, शासन-प्रबन्ध, सामाजिक-आर्थिक-धार्मिक नीति, कला और भवन निर्माण के क्षेत्रों में हुए विकास के बारे में जानकारी मिलती है।

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प्रश्न 9.
अकबर की राजपूत नीति की मुख्य विशेषताएं बताइए।
उत्तर-
अकबर राजपूतों के साथ मित्रतापूर्ण सम्बन्ध बनाना चाहता था। अतः उसने राजपूत राजकुमारियों से विवाह किये। इन वैवाहिक सम्बन्धों ने उसकी स्थिति को मज़बूत बनाया। उसने अपने शासन में राजपूतों को उच्च पद दिये। कई राजपूत उसके महत्त्वपूर्ण और विश्वस्त अधिकारी थे, जैसे राजा मान सिंह। परन्तु वह उन राजपूतों के विरुद्ध लड़ा भी, जिन्होंने उसका विरोध किया, जैसे मेवाड़ के राणा प्रताप सिंह।

प्रश्न 10.
निम्न पर नोट लिखिए –
(i) हुमायूं
(ii) जहांगीर
(iii) शाहजहां।
उत्तर-
(i) हुमायूं-हुमायूं बाबर का सबसे बड़ा पुत्र था। वह अपने पिता की मृत्यु के बाद 1530 ई० में राजगद्दी पर बैठा। उसे अपने जीवन काल में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उसका सबसे कड़ा संघर्ष अफ़गान नेता शेरशाह सूरी से हुआ। वह 1540 ई० में चौसा तथा कन्नौज के युद्धों में शेरशाह के हाथों पराजित हुआ। फलस्वरूप उसे भारत छोड़ना पड़ा। उसने लगभग 15 साल फ़ारस में व्यतीत किये। 1555 ई० में वह अपनी राजगद्दी पुनः प्राप्त करने में सफल रहा। परन्तु अगले ही वर्ष उसकी मृत्यु हो गई।

(ii) जहांगीर-जहांगीर अकबर का पुत्र था। अकबर की मृत्यु के पश्चात् वह 1605 ई० में राजगद्दी पर बैठा। उसने महाराणा प्रताप के पुत्र राणा अमर सिंह के विरुद्ध एक सैनिक अभियान भेजा। परन्तु बाद में बहुत ही उदार शर्तों पर उसने उसके साथ सन्धि कर ली। इस प्रकार मुग़लों और मेवाड़ के बीच चले आ रहे लम्बे संघर्ष का अन्त हो गया।
उसके शासनकाल की अन्य मुख्य घटनाएं निम्नलिखित हैं –

  1. राजगद्दी पर बैठते ही जहांगीर को अपने पुत्र खुसरो के विद्रोह का सामना करना पड़ा। जहांगीर ने इस विद्रोह का दमन कर दिया।
  2. जहांगीर ने गुरु अर्जुन देव जी को एक झूठे आरोप में मृत्यु दण्ड दिया। उन्हें पांच दिन तक यातना देकर 1606 ई० में शहीद करवा दिया गया।
  3. जहांगीर के शासनकाल की एक अन्य महत्त्वपूर्ण घटना नूरजहां से उसका विवाह था, नूरजहां को उसने ‘नूर महल’ (महल का प्रकाश) की उपाधि दी। .
  4. जहांगीर के दरबार में इंग्लैण्ड के दो राजदूत कैप्टन हॉकिन्स तथा सर टॉमस रो आए। ये दूत भारत में व्यापारिक सुविधाएं प्राप्त करने के उद्देश्य से आये थे।

(iii) शाहजहां-शाहजहां मुग़ल सम्राट जहांगीर का पुत्र था। उसका वास्तविक नाम खुर्रम था। वह 1628 ई० में जहांगीर की मृत्यु के बाद राजगद्दी पर बैठा। उसने लगभग 31 वर्ष तक शासन किया। उसके शासन काल की कुछ मुख्य घटनाएं अग्रलिखित हैं –

  1. शाहजहां के गद्दी पर बैठते ही पहाड़ी प्रदेश के बुन्देलों ने विद्रोह कर दिया। इस विद्रोह को कुचलने के लिए शाहजहां ने एक विशाल सेना भेजी और जुझार सिंह को मुग़लों के साथ सन्धि करने पर विवश कर दिया।
  2. 1628 ई० में शाहजहां ने नौरोज का मेला मनाया। इस अवसर पर मुग़ल सम्राट ने एक विशाल भोज का आयोजन किया।
  3. अपनी पत्नी मुमताज महल से शाहजहां को बहुत प्रेम था। 7 जून, 1631 ई० को उसकी पत्नी की मृत्यु हो गई। शाहजहां को उसकी मृत्यु से भारी दुःख पहुंचा।
    शाहजहां का शासनकाल ताजमहल, मयूर सिंहासन तथा कोहिनूर हीरे के लिए याद किया जाता है।

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प्रश्न 11.
अकबर अथवा मुगलों के केन्द्रीय शासन-प्रबन्ध के बारे में लिखो।
उत्तर-
अकबर अथवा मुग़लों के केन्द्रीय शासन-प्रबन्ध का वर्णन इस प्रकार है :–

  1. राजा-राजा शासन प्रबन्ध का प्रमुख था। उसकी सहायता के लिए अनेक मन्त्री होते थे। उनमें प्रमुख मन्त्री वकील, दीवान-ए-आला, मीर बख्शी, सदर-उस-सदूर, काज़ी-उल-कज़ात और मीर समन थे।
  2. वकील-वह राज्य का प्रधानमन्त्री था। वह बादशाह को देश में होने वाली सभी घटनाओं की जानकारी देता था और बादशाह के आदेशों का पालन कराता था।
  3. दीवान-ए-आला-वह वित्त मन्त्री होता था। वह राज्य के आय-व्यय का हिसाब रखता था। वह कर संग्रह सम्बन्धी नियम भी बनाता था।
  4. मीर-बख्शी-मीर बख्शी मनसबदारों का रिकार्ड रखता था। वह उनको वेतन बांटता था और सैनिक संस्थाओं की देखभाल करता था।
  5. सदर-उस-सदूर-वह धार्मिक विभाग का प्रमुख था। वह पीरों-फकीरों, सन्तों-महात्माओं और. शिक्षणसंस्थाओं का हिसाब रखता था।
  6. काज़ी-उल-कज़ात-वह इस्लामी कानूनों के अनुसार न्याय बारे बादशाह को सलाह देता था।
  7. खान-ए-सामा-वह शाही परिवार और कारखानों की देखभाल करता था।

प्रश्न 12.
अकबर अथवा मुग़लों के प्रान्तीय शासन प्रबन्ध का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर-
अकबर ने अपने प्रशासन को ठीक ढंग से चलाने के लिए साम्राज्य को 15 प्रान्तों या सूबों में बांटा हुआ था। प्रान्तों के मुख्य अधिकारी निम्नलिखित थे :–

  1. सूबेदार-सूबेदार प्रान्त का सबसे बड़ा अधिकारी था। उसका प्रमुख कार्य प्रान्त में शान्ति स्थापित करना और कानून व्यवस्था बनाये रखना था।
  2. दीवान-वह प्रान्त के वित्त विभाग का प्रमुख था। वह प्रान्त के आय व्यय का हिसाब रखता था।
  3. बख्शी-वह प्रान्त के सैनिक प्रबन्ध की देखभाल करता था। वह घोड़ों को दागने का प्रबन्ध भी करता था।
  4. सदर-वह प्रान्त के सन्तों, महात्माओं और पीरों-फ़कीरों का ब्योरा तैयार करता था।
  5. वाक्या नवीस-वह जासूसी विभाग का प्रमुख था। वह प्रान्त में होने वाली घटनाओं का ब्योरा रखता था।
  6. कोतवाल-वह पुलिस अधिकारी था। उसका मुख्य कार्य शहर में शान्ति स्थापित करना और शहर की पहरेदारी करना था।

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प्रश्न 13.
अकबर अथवा मुग़लों के स्थानीय प्रबन्ध पर एक टिप्पणी लिखिए।
उत्तर-
अकबर ने मुग़ल साम्राज्य के स्थानीय प्रबन्ध को सुचारू रूप से चलाने के लिए प्रान्तों को सरकारों या ज़िलों, परगनों और ग्रामों में बांटा हुआ था –
(I) सरकार का प्रबन्ध –
1. फ़ौजदार-फ़ौजदार सरकार या ज़िलों का मुख्य प्रबन्धक था। उसका मुख्य कार्य सरकार या जिले में शान्ति स्थापित करना था। वह बादशाह के आदेशों का पालन भी करवाता था।
2. आमिल-गुजार-उसका मुख्य कार्य कर इकट्ठा करना था।
3. बितिक्ची और खजांची-ये दोनों अधिकारी आमिल गुज़ार की सहायता करते थे।

(II) परगने का प्रबन्ध –
1. शिकदार-उसका मुख्य कार्य परगने में शान्ति स्थापित करना था।
2. आमिल-वह भूमि का लगान इकट्ठा करता था।
3. पोतदार और कानूनगो-ये दोनों अधिकारी आमिल की सहायता करते थे।

(III) ग्रामों का प्रबन्ध-ग्रामों का प्रबन्ध पंचायतों द्वारा किया जाता था। वे ग्रामों का विकास करती थीं और गांव में आम झगड़ों का निपटारा करती थीं। उनकी सहायता के लिए चौधरी, मुकद्दम और पटवारी होते थे।

प्रश्न 14.
शाहजहां तथा जहांगीर के राज्य का वर्णन करो।
उत्तर-
I. शाहजहां ( 1628-1657 ई०)
शाहजहां 1628 ई० में अपने पिता जहांगीर की मृत्यु के बाद राजसिंहासन पर बैठा।
1. उसे बुन्देलखण्ड में और दक्षिण में बहुत से विद्रोहों का सामना करना पड़ा। 1628 ई० में बुन्देलखण्ड के शासक राजा ार सिंह ने शाहजहां के विरुद्ध विद्रोह कर दिया। परन्तु वह हार गया। उसने 1635 ई० में पुनः विद्रोह कर दिया और मुग़लों के हाथों मारा गया।

2. 1633 ई० में शाहजहां ने दक्षिण पर आक्रमण कर दिया और अहमद नगर को मुग़ल साम्राज्य में मिला लिया। बीजापुर और गोलकुण्डा के स्वतन्त्र राज्यों ने भी मुग़लों की अधीनता स्वीकार कर ली।

3. शाहजहां ने अपने पुत्र औरंगज़ेब को दक्षिणी भारत का वायसराय नियुक्त किया परन्तु औरंगज़ेब बीजापुर और गोलकुण्डा राज्यों को अपने साम्राज्य में मिलाने में असफल रहा।

4. शाहजहां ने दक्षिण में अपनी स्थिति मज़बूत करने के बाद मध्य एशिया में बलख़ और बदख़शां पर अधिकार करने के लिए अपनी सेना भेजी, परन्तु वह सफल न हो सका।

5. वह ईरानियों से कन्धार छीनने में भी सफल न हो सका।

6. शाहजहां पुर्तगालियों से भी बहुत दुःखी था, क्योंकि उन्होंने हुगली में अपनी बस्ती स्थापित कर ली थी। वे इसका प्रयोग बंगाल की खाड़ी में समुद्री डकैती करने के लिए करते थे। अतः मुग़ल सेना ने उन्हें हुगली से बाहर निकाल दिया था। इसके बाद सेना उत्तर-पूर्व दिशा में बढ़ी और उसने कामरूप के क्षेत्रों पर अपना अधिकार कर लिया।

7. शाहजहां ने आगरा में ताजमहल बनवाया। उसने शाहजहांनाबाद नामक एक नया शहर भी स्थापित किया और उसे अपनी राजधानी बनाया। 1657 ई० में शाहजहां बीमार पड़ गया और उसके पुत्रों में राजगद्दी के लिए संघर्ष आरम्भ हो गया। औरंगज़ेब ने शाहजहां को आगरे के किले में कैद कर लिया और स्वयं बादशाह बन बैठा।

II. जहांगीर (1605-1627 ई०)
जहांगीर अकबर का पुत्र था। वह 1605 ई० में अकबर की मृत्यु के बाद मुग़ल सिंहासन पर बैठा।
1. जहांगीर ने मुग़ल साम्राज्य को शक्तिशाली बनाने के लिए सबसे पहले अपने पुत्र खुसरो के विद्रोह का दमन किया। इसके बाद उसने बंगाल और अवध को अपने अधिकार में लिया।

2. 1614 ई० में उसने मेवाड़ के शासक राणा अमर सिंह को हराया। परन्तु उसने राणा अमर सिंह को इस शर्त पर अपने क्षेत्रों पर राज्य करने का अधिकार दिया कि वह मुग़ल बादशाह के प्रति वफादार रहेगा।

3. 1620 ई० में जहांगीर ने कांगड़ा पर अधिकार कर लिया। .

4. जहांगीर ने दक्षिण भारत में मुग़लों के प्रभाव का विस्तार करने के लिए अहमदनगर के किले को जीत लिया। परन्तु अहमदनगर के सेनापति मलिक अम्बर ने मुग़लों का जबरदस्त विरोध किया। । ।

5. अफ़गानिस्तान में ईरानियों ने कन्धार का प्रदेश जहांगीर से छीन लिया। इससे मुग़ल साम्राज्य को बहुत क्षति पहंची, क्योंकि पश्चिमी एशिया से भारत के व्यापार के लिए कन्धार शहर बहुत महत्त्वपूर्ण था।

6. जहांगीर के शासनकाल में कई यूरोपीय भी भारत आये।

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प्रश्न 15.
नूरजहां पर एक संक्षिप्त नोट लिखो।
उत्तर-
नूरजहां मुग़ल सम्राट जहांगीर की पत्नी थी। जहांगीर ने 1611 ई० में उससे विवाह किया। वह बहुत ही सुन्दर और बुद्धिमती महिला थी। वह बड़ी महत्त्वाकांक्षी थी और राज्य के शासन-प्रबन्ध में बहुत रुचि लेती थी। जहांगीर महत्त्वपूर्ण राज्य कार्यों में उसकी सलाह लेता था। एक बार जहांगीर लम्बे समय के लिए बीमार हो गया, तो राज्य का शासन प्रबन्ध नूरजहां ने ही चलाया था। उसके नाम से शाही आदेश जारी किये गए। यहां तक कि जहांगीर और नूरजहां के नाम के साझे सिक्के भी चलाए गए।

प्रश्न 16.
औरंगजेब ( 1658-1707 ई०) का राज्यकाल संकटों से भरा था। उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
औरंगज़ेब मुग़ल साम्राज्य का अन्तिम प्रसिद्ध शासक था। उसने 1658 ई० से 1707 ई० तक शासन किया। उसके साम्राज्य में लगभग सारा भारत सम्मिलित था। परन्तु उसका राज्यकाल संकटों से भरा हुआ था।

  1. 1669 ई० में मथुरा के जाटों ने औरंगज़ेब के विरुद्ध विद्रोह कर दिया। उसने विद्रोह को तो कुचल दिया, परन्तु । जाटों ने मुग़लों के विरुद्ध लड़ाई जारी रखी।
  2. नारनौल और मेवाड़ में सतनामी हिन्दू साधुओं का एक सम्प्रदाय रहता था। मुग़ल अत्याचारों ने सतनामियों को मुग़लों के विरुद्ध विद्रोह करने के लिए विवश कर दिया। परन्तु मुग़लों ने उनके विद्रोह को कुचल दिया।
  3. औरंगजेब की कठोर भूमि-सुधार नीति के कारण बुन्देलों ने बुन्देलखण्ड में विद्रोह कर दिया। औरंगज़ेब ने इस विद्रोह को भी कुचल दिया।
  4. औरंगजेब के विरुद्ध राजपूतों, मराठों और सिखों ने शक्तिशाली विद्रोह किये, जिन्हें कुचलने में बहुत समय लगा।

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PSEB 7th Class Social Science Solutions Chapter 11 मुग़ल साम्राज्य

प्रश्न 17.
औरंगजेब के शासनकाल तथा बाद में मुग़लों के विरुद्ध सिखों के संघर्ष का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
गुरु तेग बहादुर जी का संघर्ष- श्री गुरु हरि कृष्ण जी के बाद श्री गुरु तेग बहादुर जी सिखों के नवम् गुरु बने। उन्होंने औरंगजेब की हिन्दू-विरोधी नीति का विरोध किया। इस कारण औरंगज़ेब गुरु जी के साथ नाराज़ हो गया। गुरु जी ने औरंगजेब द्वारा गुरुद्वारों के विनाश करने और उनके लिए दसवंध और भेटें एकत्रित करने वाले श्रद्धालुओं को शहरों से बाहर निकालने का विरोध किया। गुरु जी को दिल्ली लाया गया और मुसलमान बन जाने के लिए कहा गया। उन्होंने ऐसा करने से इन्कार कर दिया। इस कारण उन्हें बहुत कष्ट दिये गए और 1675 ई० में उन्हें दिल्ली के चांदनी चौक में शहीद करवा दिया गया।

श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी का संघर्ष- श्री गुरु तेग बहादुर जी के बाद उनके पुत्र गुरु गोबिन्द सिंह जी सिखों के दसवें गुरु बने। उन्होंने भी मुग़ल अत्याचारों के विरुद्ध अपना संघर्ष जारी रखा। 1699 ई० में श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी ने ‘खालसा’ की स्थापना की। इस कारण सिखों और मुग़लों में युद्ध आरम्भ हो गया। इस भयानक युद्ध में गुरु जी के दो पुत्र साहिबज़ादा अजीत सिंह और साहिबज़ादा जुझार सिंह जी शहीद हो गए। गुरु साहिब के अन्य दो पुत्र साहिबजादा जोरावर सिंह और साहिबजादा फतेह सिंह जी को अत्याचारियों ने जीवित ही सरहिन्द में दीवार में चिनवा दिया।

औरंगज़ेब की मृत्यु के बाद सिखों का संघर्ष-1707 ई० में औरंगज़ेब की मृत्यु के बाद उसके उत्तराधिकारी बहादुर शाह ने सिखों के साथ मित्रतापूर्ण सम्बन्ध स्थापित किये। परन्तु सरहिन्द के फ़ौजदार वज़ीर खां के कहने पर एक पठान ने गुरु जी के पेट में छुरा घोंप दिया, जिस कारण 1708 ई० में गुरु जी ज्योति जोत समा गए। गुरु साहिब के बाद बन्दा बहादुर ने मुग़लों के विरुद्ध संघर्ष जारी रखा।

प्रश्न 18.
औरंगजेब की दक्कन नीति पर एक टिप्पणी लिखिए।
उत्तर-
औरंगज़ेब ने अपने जीवन के लगभग 25 साल दक्षिण में व्यतीत किए। वह सुन्नी मुसलमान था। इस कारण वह दक्षिण के बीजापुर और गोलकुण्डा के स्वतन्त्र शिया राज्यों को कुचलना चाहता था। ये राज्य मुग़लों के विरुद्ध मराठों को सहयोग देते थे। वह दक्षिण में मराठों की शक्ति का भी दमन करना चाहता था।

1686 ई० में औरंगज़ेब ने बीजापुर और 1687 ई० में गोलकुण्डा पर अधिकार कर लिया। इस समय तक भले ही शिवा जी की मृत्यु हो चुकी थी, तो भी मराठों ने मुग़लों के विरोध में अपना संघर्ष जारी रखा। औरंगजेब मराठों का दमन करने में असफल रहा। 1707 ई० में उसकी मृत्यु हो गई।

प्रश्न 19.
औरंगज़ेब के उत्तराधिकारियों की संक्षिप्त जानकारी दीजिए।
अथवा
मुग़ल साम्राज्य का पतन किस प्रकार हुआ ?
उत्तर-
औरंगज़ेब के उत्तराधिकारी शासन प्रबन्ध चलाने के लिए अयोग्य और शक्तिहीन थे। परिणामस्वरूप 1739 ई० में ईरान के शासक नादिर शाह ने भारत पर आक्रमण कर दिया। यह आक्रमण मुग़लों के लिए बहुत घातक सिद्ध हुआ। इसके बाद अफ़गानिस्तान के अहमद शाह अब्दाली ने भी भारत पर आक्रमण किया। इन आक्रमणों से मुग़ल साम्राज्य का पतन हो गया।

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प्रश्न 20.
भारत में यूरोपीयों के आगमन के बारे में लिखो।
उत्तर-
जहांगीर के राज्यकाल में बहुत से यूरोपीय व्यापारी भारत में आए। उनमें से विलियम हॉकिन्ज़ और सर टॉमस रो प्रमुख थे। विलियम हॉकिन्ज़ भारत में तीन साल (1608-1611 ई०) तक रहा। 1612 ई० में ब्रिटिश सरकार ने भारत में सूरत में एक फैक्टरी लगाई।

सर टॉमस रो इंग्लैण्ड के राजा का राजदूत था। वह 1615 ई० में जहांगीर के दरबार में आया। वह ब्रिटिश व्यापारियों के लिए भारत से व्यापार करने सम्बन्धी सुविधाएं प्राप्त करने में सफल रहा।

(क) सही जोड़े बनाइए :

  1. सिक्खों के नौवें गुरु – श्री गुरु गोबिंद सिंह जी
  2. खालसा पंथ की स्थापना – बंदा बहादुर
  3. मुग़लों के विरुद्ध संघर्ष – श्री गुरु तेग़ बहादुर जी
  4. आगरा के किले में कैद – शाहजहां

उत्तर-

  1. सिक्खों के नौवें गुरु – श्री गुरु तेग़ बहादुर जी
  2. खालसा पंथ की स्थापना – श्री गुरु गोबिंद सिंह जी
  3. मुग़लों के विरुद्ध संघर्ष – बंदा बहादुर
  4. आगरा के किले में कैद – शाहजहां।

(ख) सही उत्तर चुनिए :

प्रश्न 1.
मुग़ल साम्राज्य के प्रथम शासक ने कनवाहा की लड़ाई में राणा सांगा को हराया था? यह लड़ाई कब हुई थी?
(i) 1527 ई०
(ii) 1529 ई०
(iii) 1556 ई।
उत्तर-
(i) 1527 ई०।

प्रश्न 2.
राजा मानसिंह किस मुग़ल शासक का वफ़ादार अधिकारी था?
(i) बाबर
(ii) हुमायूं
(iii) अकबर।
उत्तर-
(iii) अकबर।

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प्रश्न 3.
चित्र में दिखाए गए मुग़ल शासक को उसके पुत्र ने आगरे के किले में कैद कर दिया था। उसके पुत्र का क्या नाम था?
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(i) शाहजहां
(ii) औरंगजेब
(iii) जहांगीर।
उत्तर-
(ii) औरंगज़ेब।

मुग़ल साम्राज्य PSEB 7th Class Social Science Notes

  • मुग़ल साम्राज्य की स्थापना – 1526 ई० में पानीपत की पहली लड़ाई में बाबर ने इब्राहिम लोधी को हराया और भारत में मुग़ल साम्राज्य की नींव रखी।
  • हुमायूं – मुग़ल बादशाह हुमायूं शेरशाह द्वारा पराजित हुआ और उत्तर भारत का राज्य उसके हाथ से निकल गया। परन्तु शेरशाह की मृत्यु के पश्चात् 1555 ई० में हुमायूं ने अपने खोए हुए राज्य पर पुनः अधिकार कर लिया।
  • शेरशाह सूरी – शेरशाह सूरी एक योग्य सेनापति और शासन प्रबन्धक था। उसने प्रजा के कल्याण के लिए कई सड़कें एवं सरायें बनवाईं। उसे अकबर का अग्रगामी भी कहा जाता है।
  • अकबर – अकबर हुमायूं का पुत्र था। हुमायूं की मृत्यु के बाद 1556 ई० में बैरम खां ने उसकी ताजपोशी की। उसने बैरम खां की सहायता से विजय अभियान आरम्भ किया और एक शक्तिशाली मुग़ल साम्राज्य की नींव रखी।
  • जहांगीर – अकबर की मृत्यु के बाद जहांगीर मुग़ल राजगद्दी पर बैठा। परन्तु शासन की वास्तविक बागडोर उसकी पत्नी नूरजहां के हाथ में रही।
  • औरंगजेब – वह मुग़ल वंश का अन्तिम महान् सम्राट् था। उसकी मृत्यु के पश्चात् मुग़ल साम्राज्य का पतन हो गया।
  • ताजमहल – शाहजहां की वास्तुकला के क्षेत्र में अनूठी देन। यह इमारत आज भी विश्व विख्यात है।
  • अबुलफज़ल – अकबरनामा तथा आइन-ए-अकबरी के लेखक का नाम।

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