PSEB 11th Class Hindi Solutions Chapter 24 उसकी माँ

Punjab State Board PSEB 11th Class Hindi Book Solutions Chapter 24 उसकी माँ Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 11 Hindi Chapter 24 उसकी माँ

Hindi Guide for Class 11 PSEB उसकी माँ Textbook Questions and Answers

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें-

प्रश्न 1.
‘उसकी माँ’ कहानी का सार लिखें।
उत्तर:
‘उसकी मां’ कहानी पाण्डेय बेचन शर्मा उग्र की महत्त्वपूर्ण कहानियों में से एक है। यह कहानी राष्ट्रीय भावना से पूर्ण है। कुछ क्रान्तिकारियों ने देश की आजादी के लिए अपना बलिदान दे दिया। लेखक ने कहानी में लाल की माँ के बलिदान और ममता का वर्णन किया है।

लेखक दोपहर के समय अपनी पुस्तकालय से किसी महान् लेखक की कृति देखने की बात सोच रहा था कि उसके घर पुलिस सुपरिटेंडेंट पधारे। उन्होंने एक तस्वीर दिखाकर उसके विषय में जानकारी चाही। लेखक ने बताया कि वह उनका पड़ोसी लाल है जो कॉलेज में पढ़ रहा है। जाते-जाते पुलिस सुपरिटेंडेंट ने लेखक को सलाह दी कि वह लाल के परिवार से जरा सावधान और दूर रहे। – लेखक ने लाल की माँ से भी उसके विषय में जानने की कोशिश की कि उसका बेटा आजकल क्या करता है। कहीं वह सरकार के विरुद्ध षड्यन्त्र करने वालों का साथी तो नहीं बन गया है। उसने लाल से भी यही बात पूछी। लाल ने बताया कि वह किसी षड्यन्त्र में शामिल नहीं पर उसके विचार अवश्य स्वतन्त्र हैं। वह देश की दुर्दशा पर दु:खी है। लेखक ने लाल को समझाया कि उसे केवल पढ़ना चाहिए। पहले घर का उद्धार कर लो तब सरकार के उद्धार का काम करना।

एक दिन लेखक ने लाल की माँ से लाल के मित्रों के बारे में जानना चाहा तो लाल की माँ ने बताया कि लाल और उसके मित्र पुलिस के अत्याचारों की बातें करते हैं। लेखक कुछ दिनों के लिए बाहर गया। लौटने पर उसे मालूम हुआ कि पुलिस लाल और उसके बारह-पन्द्रह साथियों को पकड़कर ले गई है। तलाशी में लाल के घर से दो पिस्तौल, बहुत से कारतूस और पत्र बरामद हुए थे। उन पर हत्या, षड्यन्त्र और सरकार उल्टने की चेष्टा आदि के अपराध लगाए गए।

लाल और उसके साथियों पर कोई एक वर्ष तक मुकद्दमा चला कि कोई भी वकील उनका केस लड़ने को तैयार न हुआ। मुकद्दमे के दौरान लाल की माँ सबको नियमपूर्वक भोजन पहुँचाती रही। फिर एक दिन अदालत का फैसला आया, जिसके अनुसार लाल और उसके तीन साथियों को फाँसी और उसके शेष साथियों को सात से दस वर्ष की कड़ी सजा सुनाई गई। फांसी पाने से पहले लाल ने अपनी माँ को लिखा कि वह भी वहीं आ जाए। वह जन्म-जन्मांतर तक उसकी माँ रहेगी।

अगले दिन लेखक ने देखा कि लाल की माँ दरवाज़े पर मरी पड़ी है।

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प्रश्न 2.
सरलता, ममता, त्याग और तपस्या की सजीव मूर्ति के आधार पर लाल की माँ का चरित्र-चित्रण कीजिए।
उत्तर:
लाल की माँ प्रस्तुत कहानी की नायिका है। वह इतनी सरल हृदया है कि उसे अपने बेटे और उसके मित्रों की बातों से किसी षड्यन्त्र की बू नहीं आती। उसका तो बस अपने पुत्र लाल से और उसके मित्रों से स्नेहमयी, ममतामयी माँ का रिश्ता है। लाल के मित्र भी उसे लाल जैसे प्यारे दिखते हैं। जब वे सभी उसे माँ कहकर पुकारते हैं, तब उसकी छाती फूल उठती है-मानों वे उसके बच्चे हों। उसकी यह कामना है कि सारे बच्चे हँसते रहें।

लाल और उसके साथियों के पकड़े जाने पर वह बड़े प्यार से उनके लिए परांठे, हलवा और तरकारी बनाती है। मुकद्दमा लड़ने के लिए, बच्चों को भोजन पहुँचाने के लिए वह घर का सारा सामान बेच देती है। स्वयं सूखकर काँटा हो जाती है पर जेल में बन्द बच्चों को हृष्ट-पुष्ट रखती है। अन्त में बच्चों की इच्छा के अनुरूप ही वह परलोक भी सिधार जाती है। कहानीकार ने लाल की माँ जानकी को ममता, त्याग और तपस्या की सजीव मूर्ति के रूप में प्रस्तुत किया है। कहानी का शीर्षक भी उसी के अनुरूप दिया गया है जो अत्यन्त सार्थक एवं सटीक बन पड़ा है।

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें-

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प्रश्न 1.
पुलिस सुपरिटेंडेंट के पूछने पर लेखक ने लाल के परिवार के बारे में उन्हें क्या बताया ?
उत्तर:
पुलिस सुपरिटेंडेंट के पूछने पर लेखक ने बताया कि लाल नाम के इस लड़के का घर उसके बंगले के ठीक सामने है। घर में वह और उसकी बूढ़ी माँ रहती है। सात वर्ष हुए लाल के पिता का देहान्त हो गया। उसका पिता जब तक जीवित रहा लेखक की ज़िमींदारी का मुख्य मैनेजर था। उसका नाम रामनाथ था। वही लेखक के पास कुछ हज़ार रुपए जमा कर गया था, जिससे अब तक उनका खर्च चल रहा है। लड़का कॉलेज में पढ़ रहा है।

प्रश्न 2.
पुलिस सुपरिटेंडेंट ने लेखक को लाल से सावधान और दूर रहने का सुझाव क्यों दिया ?
उत्तर:
पुलिस सुपरिटेंडेंट ने लेखक को लाल से सावधान और दूर रहने का सुझाव इसलिए दिया था क्योंकि उसे शक था कि लाल राजविरोधी गतिविधियों में संलिप्त है और राज उलटने के षड्यन्त्र में शामिल है। पुलिस सुपरिटेंडेंट ने लेखक से यह बात अत्यन्त गोल-मोल ढंग से कही। उसने इतना ही कहा कि फिलहाल इससे अधिक मुझे कुछ कहना नहीं!

प्रश्न 3.
लाल और उसके साथियों को पैरवी करने के लिए कोई भी वकील क्यों नहीं मिला ?
उत्तर:
लाल और उसके साथियों को पैरवी करने के लिए कोई भी वकील इसलिए नहीं मिल रहा था कि तत्कालीन शासन तन्त्र के अत्याचारों से आम लोग ही नहीं वकील भी भयभीत थे। इसलिए कोई भी एक विद्रोही की माँ से सम्बन्ध रखकर या विद्रोहियों के मुकद्दमे की पैरवी करके कोई भी मुसीबत मोल लेना नहीं चाहता था। उस समय की समाज व्यवस्था भी ऐसी ही थी।

प्रश्न 4.
लाल की माँ सभी युवकों को लाल की तरह ही क्यों मानती थी ?
उत्तर:
लाल की माँ सभी युवकों को लाल की तरह ही इसलिए मानती थी कि सभी लापरवाह, हँसते-गाते और हल्ला मचाते थे। उनकी इन हरकतों को देखकर लाल की माँ मुग्ध हो जाती थी। वे सभी बड़े प्रेम से उसे ‘माँ’ कहते थे। इस सम्बोधन शब्द को सुनकर लाल की माँ को लगता था कि वे सब उसी के बच्चे हैं। एक दिन तो लाल के एक हँसोड़ मित्र ने उसे भारत माँ ही बना दिया।

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प्रश्न 5.
लड़कों ने माँ से अपनी फाँसी की सजा की बात क्यों छिपाई ?
उत्तर:
लड़कों ने माँ से अपनी फाँसी की सजा की बात इसलिए छिपाई कि उनकी माँ को उनके मरने का दुःख न हो। उन्होंने परोक्ष रूप में माँ को भी वहां आने के लिए कहा। जहाँ वे लोग जा रहे थे। लड़कों ने यह भी कहा कि वहाँ हम स्वतन्त्रता से मिलेंगे, तेरी गोद में खेलेंगे। तुझे कन्धे पर उठाकर तुझे इधर-से उधर दौड़ते रहेंगे। लड़कों की बातें सुनकर भोली जानकी के मुँह से इतना ही निकला, तुम वहां जाओगे पगलो ?

प्रश्न 6.
प्रस्तुत कहानी से लाल और उसके साथियों से आज के नवयुवकों को क्या प्रेरणा मिलती है ?
उत्तर:
प्रस्तुत कहानी में लाल और उसके साथियों से आज के नवयुवकों को राष्ट्र भक्ति की प्रेरणा मिलती है। देश पर कुर्बान होने की प्रेरणा मिलती है। देश के लिए हँसते-हँसते कष्ट सहने की प्रेरणा मिलती है। साथ ही यह भी प्रेरणा मिलती है कि राष्ट्र या समाज का अहित करने वाले के विरुद्ध डटकर खड़ा हो जाना चाहिए।

प्रश्न 7.
‘उसकी माँ’ कहानी के शीर्षक की सार्थकता को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
प्रस्तुत कहानी का शीर्षक अत्यन्त सार्थक और सटीक बन पड़ा है। पूरी कहानी में लाल की माँ जानकी को लेखक ने केन्द्र में ही रखा। उसे कहानी की नायिका के रूप में प्रस्तुत किया। न वह राजभक्त है और न राजद्रोही। राजनीति से उसका कोई लेना-देना नहीं। वह तो स्नेहमयी, ममतामयी माँ है। त्याग और तपस्या की सजीव मूर्ति है। अतः कहना न होगा कि प्रस्तुत कहानी का शीर्षक ‘उसकी माँ’ अत्यन्त सार्थक एवं सटीक बन पड़ा है।

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PSEB 11th Class Hindi Guide उसकी माँ Important Questions and Answers

अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
‘उसकी माँ’ कहानी के रचनाकार कौन हैं ?
उत्तर:
पाण्डेय बेचन शर्मा ‘उग्र’।

प्रश्न 2.
लेखक पाण्डेय बेचन शर्मा ‘उग्र’ दोपहर के समय अपने पुस्तकालय में क्या देखने की सोच रहा था ?
उत्तर:
किसी महान् लेखक की कृति देखने के बारे में।

प्रश्न 3.
लाल और उसके साथियों पर कितने समय तक मुकद्दमा चला ?
उत्तर:
लगभग एक वर्ष तक।

प्रश्न 4.
मुकद्दमे के दौरान लाल की माँ सबके लिए क्या भेजती रही ?
उत्तर:
भोजन।

प्रश्न 5.
अगले दिन लेखक ने क्या देखा ?
उत्तर:
अगले दिन लेखक ने देखा कि लाल की माँ दरवाजे पर मरी पड़ी है।

प्रश्न 6.
लेखक ने लाल के बारे में किससे जानना चाहा था ?
उत्तर:
लाल की माँ से।

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प्रश्न 7.
लेखक के घर कौन आया था ?
उत्तर:
पुलिस सुपरिटेंडेंट।

प्रश्न 8.
लाल किसके पड़ोस में रहता था ?
उत्तर:
लेखक के।

प्रश्न 9.
लाल कहाँ पढ़ रहा था ?
उत्तर:
कॉलेज में।

प्रश्न 10.
पुलिस सुपरिटेंडेंट ने लेखक को किस से सावधान रहने की सलाह दी ?
उत्तर:
लाल के परिवार से।

प्रश्न 11.
लाल के विचार कैसे थे ?
उत्तर:
स्वतंत्र तथा देश हित में।

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प्रश्न 12.
लाल दुःखी क्यों था ?
उत्तर:
देश की दुर्दशा पर।

प्रश्न 13.
लेखक ने लाला को पहले किसका उद्धार करने की बात कही ?
उत्तर:
अपने घर का।

प्रश्न 14.
तलाशी में लाल के घर से क्या मिला था ?
उत्तर:
दो पिस्तौल, बहुत से कारतूस तथा पत्र।

प्रश्न 15.
लाल तथा उसके साथियों पर कौन-से आरोप लगाए गए थे ?
उत्तर:
हत्या, षड्यंत्र तथा सरकार पलटने का।

प्रश्न 16.
फाँसी पाने से पहले लाल ने अपनी माँ को ………… लिखा।
उत्तर:
पत्र।

प्रश्न 17.
लाल और उसके साथियों का केस लड़ने को कौन तैयार नहीं था ?
उत्तर:
कोई भी वकील।

प्रश्न 18.
लाल के साथ उसके कितने साथियों को फाँसी की सजा हुई थी ?
उत्तर:
तीन।

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प्रश्न 19.
शेष साथियों को क्या सजा मिली थी ?
उत्तर:
सात से दस वर्ष की कड़ी सजा।

प्रश्न 20.
पत्र में लाल ने क्या लिखा था ?
उत्तर:
वह जन्म-जन्मांतर तक उसकी माँ रहेगी।

बहुविकल्पी प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
‘उसकी माँ’ किस विधा की रचना है ?
(क) कहानी
(ग) निबंध
(घ) नाटक।
उत्तर:
(क) कहानी

प्रश्न 2.
‘उसकी माँ’ कहानी किस भावना से पूर्ण है ?
(क) राष्ट्रीय भावना
(ख) विचारधारा
(ग) आशावादी
(घ) हास्यपूर्ण।
उत्तर:
(क) राष्ट्रीय भावना

प्रश्न 3.
लाल की माँ किसकी मूर्ति थी ?
(क) ममता
(ख) त्याग
(ग) तपस्या
(घ) सभी।
उत्तर:
(घ) सभी

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प्रश्न 4.
भारतमाता का सिर क्या है ?
(क) हिमालय
(ख) देवालय
(ग) गंगा
(घ) यमुना।
उत्तर:
(क) हिमालय

प्रश्न 5.
भारतमाता का नाम क्या है ?
(क) हिमालय
(ख) विन्धयांचल
(ग) पूर्वांचल
(घ) उत्तरोंचल।
उत्तर:
(ख) विन्धयांचल।

कठिन शब्दों के अर्थ :

फरमादार = आदेश मानने वाले, सेवा करने वाले। दुर्दशा = बुरी स्थिति। हवाई किले उठाना = बड़े-बड़े सपने बुनना। वय = आयु। सहस्त्र = हजार। छाती फूल उठना = बहुत प्रसन्न हो जाना। गप हाँकना = जिन बातों का कोई अर्थ नहीं। त्रास = दु:ख। दाँत निपोरना = खुशामद करना। निस्तेज = तेज हीन। कमर टूटना = सब कुछ समाप्त होना, बहुत ज्यादा दु:खी होना। दूध का दूध और पानी का पानी होना = सभी बातों का साफ होना, गलत फहमी दूर होना, सच और झूठ का पता चलना। गाँव का सिवान = गाँव की सीमा। ब्यालू = रात का भोजन। दिवाकर = सूर्य।

प्रमुख अवतरणों की सप्रसंग व्याख्या

(1) “तुम्हारी ही बात सही, तुम षड्यन्त्र में नहीं, विद्रोह में नहीं, पर यह बक-बक क्यों ? इससे फायदा ? तुम्हारी इस बक-बक से न तो देश की दुर्दशा दूर होगी और न उसकी पराधीनता। तुम्हारा काम पढ़ना है, पढ़ो। इसके बाद कर्म करना होगा, परिवार और देश की मर्यादा बचानी होगी। तुम पहले अपने घर का उद्धार तो कर लो, तब सरकार के सुधार पर विचार करना।”

प्रसंग :
प्रस्तुत पंक्तियाँ पाण्डेय बेचन शर्मा ‘उग्र’ जी द्वारा लिखित कहानी ‘उसकी माँ’ में से ली गई हैं। लेखक से जब सुपरिटेंडेंट पुलिस ने लाल के बारे में जानकारी प्राप्त की तो जाते-जाते उस परिवार से सावधान और दूर रहने की सलाह दी तो लेखक को यह शक हुआ कि लाल सरकार के विरुद्ध किसी षड्यन्त्र में शामिल है। उसने लाल से यही बात पूछी। लाल के इन्कार करने पर लेखक ने उसे समझाते हुए प्रस्तुत पंक्तियाँ कही हैं।

व्याख्या :
लाल ने जब किसी षड्यन्त्र में शामिल न होने की बात कही तो लेखक ने उसे समझाते हुए कहा कि तुम्हारी ही बात सही है कि तुम किसी षडयन्त्र में या विद्रोह में शामिल नहीं हो। किन्तु तुम सरकार के विरुद्ध, सरकार की दुर्व्यवस्था के विरुद्ध क्यों बोलते हो। तुम्हारे इस काम का अथवा बोलने का कोई लाभ न होगा। तुम्हारी इन बातों से न तो देश की दुर्दशा सुधरेगी और न ही उसकी पराधीनता समाप्त होगी। तुम अभी विद्यार्थी हो। अतः तुम्हारा काम केवल पढ़ना है। पढ़ाई समाप्त होने पर तुम्हें कर्म करना होगा। परिवार और देश की मर्यादा बचानी होगी। तुम पहले अपने घर का उद्धार तो कर लो तब सरकार के सुधार का विचार करना अर्थात् उसे बदलने की बात सोचना।

विशेष :

  1. लाल के राष्ट्रभक्त और लेखक के राजभक्त होने की ओर संकेत किया गया है। कहना न होगा कि लेखक जैसे राजभक्तों के कारण ही देश कई सौ वर्षों तक गुलाम बना रहा।
  2. भाषा सरल, व्यावहारिक और सहज है। बक-बक करना मुहावरे का प्रयोग है।

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(2) “चाचा जी, नष्ट हो जाना यहाँ का नियम है। जो सँवारा गया है, वह बिगड़ेगा ही। हमें दुर्बलता के डर से अपना काम नहीं रोकना चाहिए। कर्म के समय हमारी भुजाएँ दुर्बल नहीं, भगवान् की सहस्त्र भुजाओं की सखियाँ हैं।”

प्रसंग :
यह गद्यावतरण पाण्डेय बेचन शर्मा ‘उग्र’ जी द्वारा लिखित कहानी ‘उसकी माँ’ से अवतरित है। लाल ने दुष्ट, व्यक्तिनाशक राज के सर्वनाश में अपना हाथ होने की बात कही तो लेखक ने उसे समझाते हुए अथवा यूँ कहें कि डराते हुए कहा कि तुम्हारे हाथ दुर्बल हैं जिस सरकार से तुम मुकाबला करने जा रहे हो, वह सरकार तुम्हारे हाथों को तोड़-मरोड़ देगी। लेखक का यह उत्तर सुनकर लाल ने प्रस्तुत पंक्तियाँ कही हैं।

व्याख्या :
जब लेखक ने लाल से शासन तन्त्र के ताकतवर होने की बात कही जो उसे नष्ट कर देगी तो लाल ने कहा, चाचा जी, नष्ट हो जाना तो प्रकृति का नियम है। जो बना है, वह बिगड़ेगा ही, किन्तु हमें अपनी कमजोरी के डर से अपना काम नहीं रोकना चाहिए। तात्पर्य यह है कि हमें हर हाल में कर्म करते रहना चाहिए। कर्म करते समय हमारी भुजाओं में कमज़ोरी नहीं आती कर्म करने पर बल्कि भगवान् की हज़ारों भुजाओं जैसी शक्ति आ जाती है।

विशेष :

  1. भारतवासियों की एक विशेषता कर्म में विश्वास रखना अथवा कर्मवीर होना पर प्रकाश डाला गया है।
  2. भाषा संस्कृतनिष्ठ है। शैली ओजपूर्ण है।

(3) “माँ त। त तो ठीक भारत माता-सी लगती है। तू बूढ़ी, वह बढ़ी। उसका उजला हिमालय है, तेरे केश। हाँ नक्शे से साबित करता हूँ, तू भारत माता है। सिर तेरा हिमालय माथे की दोनों गहरी बड़ी रेखाएँ गंगा और यमुना, यह नाक विन्धयाचल, ठोड़ी कन्याकुमारी तथा छोटी-बड़ी झुर्रियाँ-रेखाएँ भिन्न-भिन्न पहाड़ और नदियाँ हैं। ज़रा पास आ मेरे। तेरे केशों को पीछे से आगे बाएँ कन्धे पर लहरा ढूँ। वह बर्मा बन जाएगा। बिना उसके भारत माता का श्रृंगार शद्ध न होगा।”

प्रसंग :
यह गद्यांश पाण्डेय बेचन शर्मा ‘उग्र’जी के द्वारा लिखित कहानी ‘उसकी माँ’ से अवतरित है। प्रस्तुत पंक्तियों में लाल की माँ लेखक को लाल के एक हँसोड़ मित्र द्वारा उसे भारत माता कहकर पुकारे जाने का वर्णन कर रही है।

व्याख्या :
लाल की माँ जानकी लेखक को, लाल के एक मित्र को जब वह उसे हलवा परोस रही थी तो उसने मुँह की तरफ देखकर जो कहा उसका वर्णन करती हुई कहती है कि माँ तू तो ठीक भारत माता जैसी लगती है। तू भी बूढ़ी है और भारत माता भी। उसका उजला हिमालय है अर्थात् बर्फ से ढका है और तेरे केश भी बर्फ की तरह सफ़ेद हैं।

लाल की माँ कहती है कि इसके बाद उस लड़के ने नक्शा बनाकर समझाते हुए कहा कि तेरा सिर हिमालय है, माथे की दोनों गहरी रेखाएं गंगा और यमुना हैं, तुम्हारी नाक विन्धयाचल पर्वत जैसी है तो तेरी ठोडी कन्याकुमारी है। तेरे मुँह पर बनी यह छोटी-बड़ी झुर्रियां भिन्न-भिन्न पहाड़ और नदियां हैं। फिर उसने मुझे पास बुलाकर कहा तेरे केशों को पीछे से आगे बाएं कन्धे पर लहरा दूं तो वर्मा बन जाएगा। बिना उसके भारत माता का श्रृंगार शुद्ध न होगा।

विशेष :

  1. प्राचीन समय का बर्मा जो आज म्यांमार कहलाता है, पहले भारत का ही एक भाग हुआ करता था। लाल के मित्रों की देश-भक्ति का परिचय मिलता है। वे लाल की माँ में भारत माता को देखते हैं।
  2. भाषा अलंकृत है। शैली भावपूर्ण है।

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(4) “पुलिस वाले केवल सन्देह पर भले आदमियों के बच्चों को नाम देते हैं, मारते हैं, सताते हैं। यह अत्याचारी पुलिस की नीचता है। ऐसी नीच शासन-प्रणाली को स्वीकार करना अपने धर्म को, कर्म को, आत्मा को परमात्मा को भुलाना है। धीरे-धीरे घुलाना-मिटाना है।”

प्रसंग :
प्रस्तुत पंक्तियाँ पाण्डेय बेचन ‘उग्र’ जी द्वारा लिखित कहानी ‘उसकी माँ’ में से ली गई हैं। इन पंक्तियों में लाल की माँ लेखक से लाल के साथियों के उत्तेजित होकर पुलिसवालों के अत्याचारों का वर्णन करती हुई कह रही

व्याख्या :
लाल की माँ लेखक को बताती है कि महीना भर पहले लड़के बहुत उत्तेजित थे। सरकार न जाने कहां लड़कों को पकड़ रही थी। इस पर एक लड़के ने कहा कि पुलिस वाले केवल सन्देह के आधार पर ही भले घरों के बच्चों को पकड़ कर डराते धमकाते हैं, मारते हैं, सताते हैं। यह अत्याचारी पुलिस की नीचता है जो निर्दोष लड़कों को पकड़कर तंग करती है। ऐसी नीच शासन प्रणाली को स्वीकार करना, अपने धर्म,कर्म, आत्मा और परमात्मा को भूलने के समान है तथा ऐसी शासन प्रणाली को स्वीकार करना अपने आपको धीरे-धीरे धुलाना और मिटाना है।

विशेष :

  1. अंग्रेज़ी शासन के दौरान पुलिस के अत्याचारों की ओर संकेत किया गया है तथा ऐसे शासन तन्त्र के विरुद्ध आह्वान किया गया है। अत्याचारी शासन के स्वीकार करना परमात्मा तथा स्वयं के साथ धोखा करना है।
  2. भाषा सरल, सहज और स्वाभाविक है।
  3. शैली ओजगुण से युक्त है।

(5) “अजी, ये परदेसी कौन लगते हैं हमारे जो बरबस राजभक्त बनाए रखने के लिए हमारी छाती पर तोप का मुँह लगाए अड़े और खड़े हैं। उफ़! इस देश के लोगों के हिये की आँखें मुंद गई हैं। तभी तो इतने जुल्मों आत्मा की चिता संवारते फिरते हैं। नाश हो इस परतन्त्रवाद का।”

प्रसंग :
प्रस्तुत पंक्तियाँ पाण्डेय बेचन शर्मा उग्र’ जी द्वारा लिखित कहानी ‘उसकी माँ’ में से ली गई हैं। प्रस्तुत पंक्तियाँ लाल के एक मित्र ने उत्तेजित भाव से कही हैं जिन्हें लाल की माँ लेखक को बता रही हैं।

व्याख्या :
लाल की माँ कहती है कि पुलिस वालों के अत्याचार की बात सुनकर लाल के एक मित्र ने उत्तेजित भाव से कहा कि यह परदेसी अर्थात् अंग्रेज़ हमारे क्या लगते हैं जो ज़बरदस्ती हमें राजभक्त बनाएँ रखने के लिए हमारी छाती पर तोप का मुँह लगाए खड़े हैं। उफ! इस देश के लोगों के हृदय की आँखें भी मूंद गई हैं। तभी तो यह क्रान्ति की आवाज़ नहीं उठा पा रहे। अंग्रेजों के इतने अत्याचार सहकर भारतवासी इतना डरा हुआ है कि उसे एक-दूसरे से डर लगता है। भारतवासी आज अपने शरीर की रक्षा के लिए अपनी आत्मा को दबा रहे हैं। ऐसे परतन्त्रवाद का नाश हो। लाल के मित्र के कहने का भाव यह है कि अंग्रेजों के अत्याचारों से लोग इतने डरे हुए हैं कि उनके विरुद्ध आवाज़ नहीं उठा पा रहे। उन्हें अपने शरीर की रक्षा की अधिक चिन्ता है आत्मा की नहीं।

विशेष :

  1. लाल के मित्र के भावों में किसी क्रान्तिकारी के विचारों की झलक मिलती है। अंग्रेज़ी शासन के अत्याचारों और उनसे भयभीत आम लोगों का वर्णन किया गया है।
  2. तत्सम और तद्भव शब्दावली का प्रयोग है। ‘आँखें मूंदना’ मुहावरे का प्रयोग है। शैली भावपूर्ण है।

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(6) “लोग ज्ञान न पा सकें, इसलिए इस सरकार ने हमारे पढ़ने-लिखने के साधनों को अज्ञान से भर रखा लोग वीर और स्वाधीन न हो सकें, इसलिए अपमानजनक और मनुष्यता हीन नीति-मर्दक कानून गढ़े हैं। गरीबों को चूसकर, सेना के नाम पले हुए पशुओं को शराब से कबाब से, मोटा-ताज़ा रखती है। यह सरकार धीरे-धीरे जोंक की तरह हमारे देश का धर्म, प्राण और धन-चूसती चली जा रही है यह शासन-प्रणाली।”

प्रसंग :
प्रस्तुत पंक्तियाँ पाण्डेय बेचन शर्मा ‘उग्र’ द्वारा लिखित कहानी ‘उसकी माँ’ में से ली गई हैं। इनमें लाल के एक मित्र द्वारा अंग्रेज़ी शासन प्रणाली की आलोचना की गई है।

व्याख्या :
लाल के एक मित्र ने पुलिस के अत्याचारों का उल्लेख किया था तथा दूसरे मित्र ने परतन्त्रवाद का विरोध किया, यह सुन लाल के एक अन्य मित्र ने अंग्रेजी सरकार की शिक्षा नीति की आलोचना करते हुए कहा कि अंग्रेजी शासन ने ऐसी शिक्षा-प्रणाली लागू कर रखी है जिससे भारतवासी ज्ञान न प्राप्त कर सकें। इसलिए सरकार ने भारतीयों के पढ़ने-लिखने के साधनों को अज्ञान से भर रखा है। ताकि ज्ञान प्राप्त करके भारतीय वीर न बन सकें तथा न ही अंग्रेज़ों की गुलामी से मुक्त होकर स्वाधीन होने की बात सोच सकें।

इसके लिए अंग्रेज़ी शासन ने ऐसे अपमानजनक और मानवताहीन कानून बनाए हैं, जिनसे नीति का नाश हो सके। ग़रीबों का खून चूसकर सेना के नाम पर पल रहे पशुसमान मनुष्यों को शराब पिलाकर मांस खिलाकर मोटा-ताज़ा रखे हुए हैं। यह शासन प्रणाली जोंक की तरह धीरे-धीरे हमारे धर्म, प्राण और धन को चूसती जा रही है।

विशेष :

  1. अंग्रेजी सरकार की शोषक-नीति पर प्रकाश डाला गया है। अंग्रेजों ने भारतीयों से मनुष्य से मनुष्य होने का अधिकार भी छिन लिया।
  2. भाषा तत्सम प्रधान, भावपूर्ण तथा शैली ओजस्वी है।

(7) “सब झूठ है। न जाने कहाँ से पुलिस वालों ने ऐसी-ऐसी चीजें हमारे घरों से पैदा कर दी हैं। वे लड़के केवल बातूनी हैं। हाँ, मैं भगवान् का चरण छूकर कह सकती हूँ, तुम्हें जेल में जाकर देख आओ, वकील बाब! भला, फूल-से बच्चे हत्या कर सकते हैं ?”

प्रसंग :
प्रस्तुत पंक्तियाँ पाण्डेय बेचन शर्मा ‘उग्र’ जी द्वारा लिखित कहानी ‘उसकी माँ’ में से ली गई हैं। प्रस्तुत पंक्तियाँ लाल की माँ ने लाल और उसके साथियों का मुकदमा लड़ रहे वकील से कही हैं।

व्याख्या :
लाल की माँ ने गिड़गिड़ाते हुए वकील से कहा कि लाल और उसके साथियों पर जो आरोप लगाए गए हैं वे सब झूठ हैं। पुलिस वालों ने न जाने कहाँ से हमारे घर में हथियार रख दिए। यह लड़के तो केवल बातें ही बनाते हैं। हाँ मैं भगवान् का चरण छूकर कह सकती हूँ, तुम जेल में जाकर देख आओ कि भला ऐसे फूल से बच्चे हत्या कर सकते हैं।

विशेष :

  1. अंग्रेज़ी शासन में पुलिस द्वारा निर्दोष युवकों पर झूठे मुकद्दमे बनाकर उन्हें सज़ा दिलवाने की ओर संकेत किया गया है। लाल की माँ का ममतामयी और स्नेहमयी रूप हमारे सामने आता है। जिसने अपने बच्चों के लिए अपने गहने तथा अपने घर का लोटा थाली तक बेच दिया था।
  2. भाषा तत्सम और तद्भव प्रधान है। शैली भावात्मक है।

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(8) “माँ!” वह मुस्कराया, “अरे, हमें तो हलवा खिला-खिलाकर तूने गधे-सा तगड़ा कर दिया है, ऐसा कि फाँसी की रस्सी टूट जाए और हम अमर के अमर बने रहें। मगर तू स्वयं सूखकर काँटा हो गई है। क्यों पगली, तेरे लिए घर में खाना नहीं है क्या ?”

प्रसंग :
प्रस्तुत पंक्तियाँ पाण्डेय बेचन शर्मा ‘उग्र’ जी द्वारा लिखित कहानी ‘उसकी माँ’ में से ली गई हैं। प्रस्तुत पंक्तियाँ लाल के एक मित्र ने फाँसी की सजा पाने के बाद बेड़ियां बजाते हुए मस्ती से झूमते हुए अदालत से बाहर आते समय कही हैं।

व्याख्या :
लाल के एक मित्र ने लाल की माँ को कहकर पुकारा और कहा कि तुमने तो हमें हलवा खिला-खिलाकर गधे के समान ऐसा तगड़ा कर दिया है कि फांसी की रस्सी भी टूट जाए और हम अमर के अमर बने रहें। उसने लाल की माँ के कमज़ोर शरीर को देखकर कहा हमें मोटा-ताज़ा रखकर तुम क्यों सूखकर कांटा हो गई हो ? क्या घर में तुम्हारे लिए खाना नहीं है।

विशेष :

  1. लाल की माँ के चरित्र पर प्रकाश डाला गया है जिसने स्वयं भूखे रहकर लाल और उसके साथियों के लिए भोजन जुटाया। इस भोजन जुटाने में उसने अपने सब गहने और घर का सारा सामान तक बेच दिया।
  2. भाषा तत्सम, तद्भव और मुहावरेदार है। शैली भावपूर्ण है।

(9) “माँ!” उसके लाल ने कहा, “तू भी जल्द वहीं आना जहाँ हम लोग जा रहे हैं। यहां से थोड़ी ही देर का रास्ता है, माँ! एक साँस में पहुंचेगी। वहीं हम स्वतन्त्रता से मिलेंगे, तेरी गोद में खेलेंगे। तुझे कन्धे पर उठाकर इधर से उधर दौड़ते फिरेंगे। समझती है ? वहाँ बड़ा आनन्द है।”

प्रसंग :
प्रस्तुत पंक्तियाँ पाण्डेय बेचन शर्मा ‘उग्र’ जी द्वारा लिखित कहानी ‘उसकी माँ’ में से ली गई हैं। जब अदालत ने उसे और उसके तीन साथियों को झूठे मुकद्दमे में फँसा कर फाँसी की सजा सुनाई थी। तब लाल ने यह पंक्तियाँ अपनी माँ से कहीं हैं।

व्याख्या :
फाँसी की सजा पाए हुए लाल ने अपनी माँ से कहा कि वह भी शीघ्र ही वहां आ जाए जहाँ हम लोग जा रहे हैं। यहां से थोड़ी ही देर का रास्ता है। एक सांस में पहुंचेगी। लाल का संकेत स्वर्ग सिधारने की ओर था। यहां पहुँचने के लिए एक ही सांस की ज़रूरत होती है। लाल ने अपनी माँ से कहा कि हे माँ, स्वर्ग में ही हम स्वतन्त्रता से मिलेंगे, तेरी गोद में खेलेंगे। तुझे कन्धे पर उठाकर इधर-उधर दौड़ते फिरेंगे। हे माँ, स्वर्ग में बड़ा आनन्द है।

विशेष :

  1. लाल की मातृ-भक्ति एवं मातृ स्नेह की ओर संकेत किया गया है। लाल अपनी शहीदी के बाद अपनी माँ को अकेली छोड़ना नहीं चाहता। इसलिए वह अपनी मां से उनके पास आने के लिए कहता है।
  2. भाषा सहज, सरल तथा शैली भावात्मक है।

PSEB 11th Class Hindi Solutions Chapter 24 उसकी माँ

उसकी माँ Summary

उसकी माँ कहानी का सार

‘उसकी मां’ कहानी पाण्डेय बेचन शर्मा उग्र की महत्त्वपूर्ण कहानियों में से एक है। यह कहानी राष्ट्रीय भावना से पूर्ण है। कुछ क्रान्तिकारियों ने देश की आजादी के लिए अपना बलिदान दे दिया। लेखक ने कहानी में लाल की माँ के बलिदान और ममता का वर्णन किया है।

लेखक दोपहर के समय अपनी पुस्तकालय से किसी महान् लेखक की कृति देखने की बात सोच रहा था कि उसके घर पुलिस सुपरिटेंडेंट पधारे। उन्होंने एक तस्वीर दिखाकर उसके विषय में जानकारी चाही। लेखक ने बताया कि वह उनका पड़ोसी लाल है जो कॉलेज में पढ़ रहा है। जाते-जाते पुलिस सुपरिटेंडेंट ने लेखक को सलाह दी कि वह लाल के परिवार से जरा सावधान और दूर रहे। – लेखक ने लाल की माँ से भी उसके विषय में जानने की कोशिश की कि उसका बेटा आजकल क्या करता है। कहीं वह सरकार के विरुद्ध षड्यन्त्र करने वालों का साथी तो नहीं बन गया है। उसने लाल से भी यही बात पूछी। लाल ने बताया कि वह किसी षड्यन्त्र में शामिल नहीं पर उसके विचार अवश्य स्वतन्त्र हैं। वह देश की दुर्दशा पर दु:खी है। लेखक ने लाल को समझाया कि उसे केवल पढ़ना चाहिए। पहले घर का उद्धार कर लो तब सरकार के उद्धार का काम करना।

एक दिन लेखक ने लाल की माँ से लाल के मित्रों के बारे में जानना चाहा तो लाल की माँ ने बताया कि लाल और उसके मित्र पुलिस के अत्याचारों की बातें करते हैं। लेखक कुछ दिनों के लिए बाहर गया। लौटने पर उसे मालूम हुआ कि पुलिस लाल और उसके बारह-पन्द्रह साथियों को पकड़कर ले गई है। तलाशी में लाल के घर से दो पिस्तौल, बहुत से कारतूस और पत्र बरामद हुए थे। उन पर हत्या, षड्यन्त्र और सरकार उल्टने की चेष्टा आदि के अपराध लगाए गए।

लाल और उसके साथियों पर कोई एक वर्ष तक मुकद्दमा चला कि कोई भी वकील उनका केस लड़ने को तैयार न हुआ। मुकद्दमे के दौरान लाल की माँ सबको नियमपूर्वक भोजन पहुँचाती रही। फिर एक दिन अदालत का फैसला आया, जिसके अनुसार लाल और उसके तीन साथियों को फाँसी और उसके शेष साथियों को सात से दस वर्ष की कड़ी सजा सुनाई गई। फांसी पाने से पहले लाल ने अपनी माँ को लिखा कि वह भी वहीं आ जाए। वह जन्म-जन्मांतर तक उसकी माँ रहेगी।

अगले दिन लेखक ने देखा कि लाल की माँ दरवाज़े पर मरी पड़ी है।

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